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Lok Sabha Debates

Discussion On The Motion For Consideration Of The National Capital Territory Of ... on 19 February, 2009

> Title: Discussion on the motion for consideration of the National Capital Territory of Delhi Laws (Special Provisions) Bill, 2009. (Bill Passed).     MR. DEPUTY-SPEAKER: Now, we will take up Item No.31.  Mr. Jaipal Reddy, the House was adjourned till 2.00 p.m. and 2.00 p.m. means 2.00 p.m.  But you were late.  It should not happen again. THE MINISTER OF URBAN DEVELOPMENT (SHRI S. JAIPAL REDDY): Sir, at the outset, I offer unqualified apology for my unintended absence.  It was partly because of confusion.  Sir, may I now proceed? MR. DEPUTY-SPEAKER: Yes.[R42]  SHRI S. JAIPAL REDDY: Sir, I beg to move:

“That the Bill to make special provisions for the National Capital of Delhi for a further period up to the 31st day of December, 2009 and for matters connected therewith or incidental thereto, be taken into consideration. ”             Sir, I would not take much time of the House. Delhi has witnessed an extraordinary phase of series of storms during the last three years in the forms of court orders, ceilings and demolitions. We, in the UPA Government and Urban Development Ministry, have risen to the occasion time and again and I must thank the Parliament for its unstinted and undivided support to every legislative initiative I placed before Parliament.
16.06 hrs.                       (Shri Balasaheb Vikhe Patil in the Chair)           While rising to the occasion we did not fall a prey to populism. On the contrary, we seized it as a constructive opportunity to see that Delhi is allowed and enabled to develop on proper lines. The results are the initiatives on this issue by UPA Government and are all there for everyone to see. Our Congress Government in Delhi has won for the third time in a row. I look upon the results not only with great gratification but also with joy and pride. We have in the meantime not only provided protection to all the affected people, but also adopted the Master Plan Delhi 2021 which enable proper planned development of Delhi. Even so, certain processes need to be cleared and the present Bill would like to provide protection to six categories of development: First category is slum dwellers and Jhuggi Jhopri clusters; second category is existing farm houses involving construction beyond permissible building limits; third category is schools, dispensaries, religious institutions and cultural institutions; fourth category is storages, warehouses, godowns used for agricultural inputs or produces including dairy and poultry in rural areas built on agricultural land; fifth category relates to unauthorized colonies including village Abadi and its extension; and the sixth category is urban villages in addition to village Abadi and its extension.

          Sir, with these few words I commend this Bill for consideration. 

MR. CHAIRMAN : Motion moved:

“That the Bill to make special provisions for the National Capital of Delhi for a further period up to the 31st day of December, 2009 and for matters connected therewith or incidental thereto, be taken into consideration.” श्री सैयद शाहनवाज़ हुसैन (भागलपुर): महोदय, श्री जयपाल रेड्डी जी हमारे मित्र हैं और इनके साथ हमारा बहुत पुराना साथ रहा है। इनके देर से आने पर मैं इसे इनकी मजबूरी नहीं बल्कि सरकार की मजबूरी मानता हूँ। महोदय, दिक्कत यह है कि कांग्रेस ने दिल्ली की जनता को टेकन ग्रान्टिड लिया हुआ है। सरकार कितनी गंभीर है, आप इस बात को इससे समझ सकते हैं कि विधेयक पेश करते वक्त भी सरकार गायब रही है, लेकिन चलिये ठीक है देर आये दुरूस्त आये। श्री जयपाल रेड्डी जी की बात से ही  मैं अपनी बात की शुरूआत करता हूँ कि मैं बिहार का हूँ, लेकिन मेरी शिक्षा-दीक्षा दिल्ली में हुयी है। टाइटलर साहब ने सही कहा है कि मेरी शादी भी दिल्ली में हुयी है। [r43]            कई सालों से मुझे दिल्ली में रहने का अवसर मिला है। जितने सांसद हैं, अपने संसदीय क्षेत्र के बाद अगर सबसे ज्यादा किसी शहर में उनका समय बीतता है, तो वह दिल्ली है। दिल्ली में जब अखबार पढ़ने का मौका मिलता है, तो दिल्ली के ऊपर संकट का बादल छाया रहता है और उसमें जो लोग अपनी पूरी जिंदगी की कमाई से तिनका-तिनका जोड़ कर घर बनाते हैं, उनके ऊपर तलवार लटकी रहती है कि उनका आशियाना कब उजड़ जाए। मकान बनाना आसान काम नहीं है। जो लोग नौकरीपेशा है, गरीब लोग हैं, उनकी पूरी जिंदगी की उम्मीद उनका मकान होता है। उनकी जिंदगी की कमाई बाल-बच्चे के बाद अगर कुछ होती है, तो वह उनका मकान है। दिल्लीवासियों के सिर पर पिछले तीन साल से भय और आतंक की तलवार लटकी हुई है। यह डर उनको लगा रहता है कि कब आदेश आएगा, कब बुलडोजर आएंगे और कब हमारे मकान को तोड़ डालेंगे। इस समस्या का हल निकालने के लिए, क्योंकि दिल्ली में भी कांग्रेस की सरकार है और सौभाग्य से कुछ दिनों के लिए केंद्र में भी इनकी सरकार है, मैं आपकी याददाश्त को ताजा करूंगा, चुनाव होने वाले हैं। फीलगुड फैक्टर में आप आने वाले हैं। देश की जनता नतीजा बताएगी कि किसकी सरकार होगी।...( व्यवधान) आज मैं भड़काने पर भी भड़कने वाला नहीं हूं। दिल्ली में केंद्र की सरकार है और मैं आपको बधाई देता हूं कि फिर से आप चुन कर आए हैं। जनतंत्र में जो चुन कर आता है, उसे सलाम करना चाहिए। लोकतंत्र में हम इस बात की कद्र करते हैं। दिल्ली में जब म्यूनिसिपल कारपोरेशन का चुनाव हुआ था, तब पूरी तरह से दिल्ली की जनता ने आपको दो तिहाई बहुमत से हराने का काम किया था। केंद्र में आपकी सरकार है, राज्य में आपकी सरकार है, लेकिन नगर निगम के चुनाव आप बुरी तरह से हारे थे, वह आपको याद नहीं है। पहले लोक सभा का चुनाव हुआ और आप जीत गए। नगर निगम का चुनाव हुआ हम जीते। फिर दिल्ली राज्य का चुनाव हुआ और आप जीते और अब दिल्ली में लोक सभा के चुनावों में भारतीय जनता पार्टी तथा एनडीए की बारी है। इस बार हम जीतेंगे। जिस तरह से एमसीडी की जीत पर हम गुमान में रह गए, दिल्ली में हमारी सरकार बनेगी ही, लेकिन आपने मेहनत की और आप चुनाव जीत गए। इसलिए राजनीति में स्पोर्ट्समैन प्रिट होनी चाहिए, आप बढ़िया दौड़े, आप जीते। आप एमसीडी का चुनाव कैसे हारे, इसका आकलन करना चाहिए। हम आपके मित्र हैं, इसलिए विपक्ष में होने के नाते आप हमारे मित्र हैं और अच्छी सलाह देना हमारा अधिकार भी है। लोकतत्र में आपको जगाते रहने का हमें अधिकार है। जब आप इधर थे और हम उधर थे, तब आप हमें सुझाव देते रहते थे, हम उस पर कभी नाराज नहीं होते थे। आप सुझाव नहीं देंगे तो कौन देगा क्योंकि आप लोकतत्र में चुनकर आए हैं। एमसीडी के चुनाव हारने पर आपने चिन्तन किया होगा। मैं कोई राजनीतिक बात नहीं कहना चाहता था, लेकिन जयपाल रेड्डी जी ने दिल्ली की जीत के बारे में अपने भाषण में जिस प्रकार से जश्न मनाया, उस पर मुझे आपको एमसीडी की करारी हार की याद दिलानी पड़ी।
          महोदय, दिल्ली में गांव भी हैं। वहां रहने वाले भी दिल्ली वाले कहलाते हैं। दिल्ली में ज्यादातर लोग बाहरी हैं या बिहारी हैं। बाहरी और बिहारी दो लोग यहां ज्यादा रहते हैं[r44] ।   मुझे पता है कि बिहार का नाम लेते ही कांग्रेस के लोग कुछ न कुछ बोलेंगे, क्योंकि आपने बिहार के बारे में बहुत बयान दिए, फिर भी आप जीत गए।...( व्यवधान)
श्रीमती कृष्णा तीरथ (करोलबाग)   : बुलडोजर चल रहे थे, उसे आप भूल गए।...( व्यवधान)
श्री सैयद शाहनवाज़ हुसैन : आप तो चेयर पर भी बैठती हैं, इसलिए हम आपके सवाल का जवाब देना नहीं चाहते हैं। दिल्ली में पूरे देश के लोग आकर रहते हैं, क्योंकि यह राजधानी है। देश की आर्थिक राजधानी दिल्ली, मुंबई, हमारे गीते साहब यहां बैठे हैं, हम लोग भी मुंबई में जाते हैं। ...( व्यवधान)
श्री अनंत गंगाराम गीते (रत्नागिरि): हम आपका स्वागत करते हैं।
श्री सैयद शाहनवाज़ हुसैन : दिल्ली देश की राजनीतिक राजधानी है और जब यह राजधानी बनी तो पूरे देश को ध्यान में रख कर इसका निर्माण हुआ था। यहां बहुत बड़ी तादाद में लोग आते हैं। दिल्ली में जो प्लानिंग होती है, अगर आप दो साल की प्लानिंग करेंगे तो हमें पता है कि यहां इतने लोग आ जाते हैं कि वह प्लानिंग पूरी तरह फेल हो जाती है। दिल्ली में सीवर, बिजली, मकान आदि सब चीजों की जरूरत है। बड़ी तादाद में गरीब लोग, खासकर हमारे बिहार से पिछले 15-20 सालों में बहुत बड़ी तादाद में लोग यहां आए। रोजगार की तलाश में भी बहुत से लोग आए। लोग झुग्गी-झोंपड़ी में रहे और आपने उन्हें 20-25 गज का प्लाट दिया। पहले सरकार ने एनाउंस किया था कि हम एक लाख से ज्यादा मकान बनाएंगे, लेकिन जो मुझे सूचना है, मंत्री जी उसे बाद में करेक्ट कर सकते हैं, उसमें आप पांच हजार से ज्यादा मकान बना कर लोगों को नहीं दे रहे। दिल्ली की जो समस्या मुंह-बांऐ खड़ी है, उसका आप निदान नहीं कर रहे। दिल्ली के अंदर जो 1632 अनआथोराइज़्ड कालोनियां हैं, उन्हें आपने चुनाव से पहले तो राहत दे दी, लेकिन वहां राहत दिखाई नहीं दे रही।
          महोदय, दिल्ली के अंदर जो 120 शहरी गांव हैं, जिनके ऊपर व्यापार पर सीलिंग के वक्त में रोक हो गई थी, उन पर भी आप ध्यान नहीं दे रहे हैं। आप सिर्फ चुनाव से पहले एक रेजोल्यूशन पास करते हैं,  फिर अनआथोराइज़्ड कालोनियों को आथोराइज़ कर दिया, उसका सर्टिफिकेट दे दिया। आप कागज के टुकड़े पकड़ा कर लोगों को यह बता रहे हैं कि आपने बहुत बड़ा काम कर दिया। लेकिन आज भी दिल्ली के गांवों में काम नहीं हुआ है। आज दिल्ली की अनआथोराइज़्ड कालोनियों में काम नहीं हुआ है। आज भी दिल्ली के अंदर जो गरीब लोग हैं, उन्हें झुग्गी-झोंपड़ी मुहैया नहीं हुई है।
          महोदय, मेरा आपके जरिए मंत्री जी से अनुरोध है कि अगर आप दरियादिली दिखा ही रहे हैं तो कंजूस क्यों बनते हैं। आप क्यों हर चुनाव से पहले उन्हें थोड़े दिन की रिलीफ देते हैं। अभी आप दस महीने का उन्हें रिलीफ देने की तैयारी करके आए हैं। अगर आपके हृदय में दिल्ली वालों के लिए इतनी जगह है तो आप एक बार दिल्ली वालों को, अगर अनआथोराइज़्ड कंस्ट्रक्शन हुआ हो तो सरकार संसद में आए, भारतीय जनता पार्टी इस बात का वचन देती है कि हम पूरे एनडीए की तरफ से आपको सपोर्ट करने को तैयार हैं, आप आम माफी दें। आप आम माफी नहीं दे रहे हैं। श्री जयपाल रेड्डी साहब ने कहा कि हम संसद में आए और संसद ने हमारी मदद की। उनके ऊपर आपने जो सीलिंग और बुलडोजर की तलवार लटका रखी है, यह तलवार आप उनके सिर से कब हटाएंगे, यह हम आपसे पूछना चाहते हैं?
          महोदय, हम आपके जरिए यह भी कहना चाहते हैं कि जो मल्होत्रा कमेटी की सिफारिश थी, जिसमें दिल्ली में फर्स्ट फ्लोर और ग्राउंड फ्लोर तथा सैकिंड फ्लोर के बाद कोई फ्लोर नहीं बना सकता। उस कमेटी की सिफारिश के बाद एक फ्लोर और बढ़ाने के लिए आपने एक बार ऐलान किया था, लेकिन शायद कोर्ट में उसमें दिक्कत आई। क्या आप मल्होत्रा कमेटी की सिफारिश पर विचार करेंगे? जिस तरह की स्थिति बनी है, आज जो अनआथोराइज़्ड कालोनियां हैं, सीलिंग में वे सब स्थान आ रहे हैं - चाहे स्कूल हों या धार्मिक स्थल हो। हर जगह लोग चिन्तित हैं।
          महोदय, मैं आपके माध्यम से इस पर कोई सियासत करना नहीं चाहता, मैं दिल्ली के लोगों का दर्द रखने आया हूं। हमारे दिल्ली के एक सांसद हैं, वे अब विपक्ष के नेता हैं। बिहार की अच्छी-खासी आबादी दिल्ली में रहती है।...( व्यवधान)[S45]              सभापति जी, मैं आप[r46] से दिल्ली के बारे में अनुरोध करना चाहता हूं। श्री अजय माकन जी हमारे बहुत पुराने मित्र हैं। उनकी हमारी 15-20 साल पुरानी दोस्ती है। उन्हें सामने देखकर मैं ज्यादा कठोर भाषा में बोलना भी नहीं चाहता हूं, लेकिन दिल्ली की जो समस्या है, उसे आप लोगों के सामने रखना चाहता हूं। मैं दिल्ली के लोगों का दर्द आपके सामने रख रहा हूं। मैं आपसे गुजारिश करना चाहता हूं कि दिल्ली के लोगों के ऊपर सीलिंग और बुलडोजर की जो तलवार लटक रही है, उसे हटाने का काम आप करें और अपनी जिम्मेदारी से आप भागिए मत।
          महोदय, आजकल दिल्ली में कांग्रेस के नेताओं का एक अलग फैशन है। कुछ भी होता है, तो वे उसकी जिम्मेदारी एम.सी.डी. को दे देते हैं और कह देते हैं कि यह काम म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन कर रही है। हम आपसे अनुरोध करना चाहते हैं कि आप अगर इस बिल में अभी कोई अमेंडमेंट लाना चाहें, आप दिल्ली के लोगों को अनऑथोराइज कंस्ट्रक्शन पर एक बार आम माफी देकर, तोड़-फोड़ और सीलिंग के मुद्दे से सदा के लिए निजात दिलाना चाहते हैं, तो तत्काल इस दिशा में काम करें और इस बात की घोषणा करें कि दिल्ली में जिन लोगों ने अनधिकृत निर्माण कर लिया है, उन्हें एक बार आम माफी दे दी जाए। दिल्ली में गांवों के अंदर जो लोग रहते हैं, जिनकी जमीनों पर पूरी दिल्ली बसी हुई है, उन किसानों की जमीन डी.डी.ए. ने 5 रुपए गज में ले ली और अब आप उसे 5 लाख रुपए गज में बेच रहे हैं। आप द्वारिका में देख लीजिए, साउथ दिल्ली में देख लीजिए और सरिता विहार से आगे जाकर देख लीजिए। किसान से उस समय आपने कौड़ियों के भाव जमीन ले ली और आज आप उसी जमीन को अखबार में विज्ञापन देकर आसमान छूते दामों पर डी.डी.ए. के माध्यम से बेच रहे हैं। उसमें बाकायदा प्लॉट नंबर दिया जाता है कि इतना प्लॉट नंबर और 5 लाख रुपए गज बेच रहे हैं। जिस किसान से आपने 100 रुपए गज जमीन ली और उसी जमीन को आप 5 लाख रुपए गज बेच रहे हैं। सोचिए आप उस किसान के दिल पर क्या बीत रही होगी। आप सरकार हैं, आप कोई कॉरपोरेट नहीं है जो बिजनैस करें। आपको यह चाहिए कि अगर आप किसी की जमीन पर कोई फायदा कमा रहे हैं, तो उसका कुछ हिस्सा उस गरीब किसान को भी पहुंचाने की व्यवस्था करें, जिसकी जमीन ली गई है। इस प्रकार का इंतजाम आपको करना चाहिए।
          महोदय, मेरा आपके माध्यम से सरकार से अनुरोध है कि दिल्ली में जो बाहर के लोग आते हैं। दिल्ली में रोजगार की तलाश में जो लोग आते हैं, उन पर किसी को ऐतराज करने की जरूरत नहीं है। जब तक इस देश में आप लोगों को बराबरी नहीं देंगे, जब तक आप रोजी-रोटी कमाने का हक बराबर नहीं देंगे, जब तक लोगों को नौकरी और रोजगार नहीं देंगे, जब तक आप फैक्ट्रियां और इंडस्ट्रीज एक ही खास राज्य में बनाते रहेंगे, तब तक लोग यहां आते रहेंगे। इस देश में लोक तंत्र में इतनी ताकत है कि उसकी हिम्मत पर लोग आपके शहर में आएंगे। इसमें कोई परमिट सिस्टम नहीं हो सकता। हम यह चाहते हैं कि लोग अपने राज्य में रहें। बिहार में हमारी सरकार है। बड़ी-बड़ी रोड्स बनाने का काम हो रहा है। पूरे साउथ से और महाराष्ट्र से कई कंपनियां वहां इन निर्माण कार्यों में लगी हुई हैं। वे वहां सड़क बना रही हैं। बिहार के लोग उनका दिल से स्वागत कर रहे हैं। हिन्दुस्तान में जिस दिन रोजगार के साधनों में बराबरी हो जाएगी, जिस दिन इफ्रास्ट्रक्चर की फेसिलिटी सब शहरों में बराबर दे देंगे, उस दिन आपके शहर में लोगों का आना बन्द हो जाएगा। यदि आप एक शहर में मैट्रो का जाल बिछा देंगे और बगल के शहर में टूटी बस भी नहीं मिलेगी, तो जहां अच्छा साधन होगा, लोग वहां पहुंचेंगे। इस बात को ध्यान में रखते हुए आपको चाहिए कि पूरे देश के अंदर इस प्रकार की स्थिति बनाएं और दिल्ली जैसे विचित्र शहर, देश के सभी बड़े-बड़े शहर बनें।
          महोदय, जिन लोगों के बारे में सरकार ने घोषणा की है कि आप गरीबों को 24 मंजिले मल्टी स्टोरी बिल्डिंगों में एक-एक कमरे की सुविधा प्रदान करेंगे, इस बारे में मेरा निवेदन है कि आपने जिन्हें 25 गज का प्लॉट दिया है, क्या आप उनसे वह अधिकार छीनने वाले हैं और यदि वह 25 गज के प्लॉट में कहीं पर, ऊपरी मंजिल पर, एक कमरा बना लेता है, तो उस पर भी आप ऑब्जैक्शन लगाते हैं। आज वे पति-पत्नी हैं, अगर बच्चा बड़ा हो जाता है, उसके रहने के लिए वह ऊपर एक रूम बना लेता है और अपनी जिंदगी बसर करता है, तो उससे यह अधिकार आपको नहीं छीनना चाहिए। मल्टी स्टोरी बिल्डिंग बनाएं, लेकिन उसमें भी उन्हें कुछ सुविधा बढ़ाएं। एक रूम की जगह, 25 गज के प्लॉट में जितनी सुविधा होती है, उतनी सुविधा तो आपको देनी चाहिए और 25 गज प्लॉट में अगर वह एक रूम ऊपर बना लेता है, तो उस पर आपको कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए। जब आप उन्हें मल्टी स्टोरी बिल्डिंग दें, तो उन्हें यह ऑप्शन होनी चाहिए कि 25 गज के प्लॉट के बराबर उन्हें सुविधा मिले। 25 गज का प्लॉट देना क्या कोई ब्रह्म वाक्य है कि इससे ज्यादा गज का प्लॉट नहीं दिया जा सकता है। क्यों केवल 25 गज का प्लॉट ही मिलेगा? अगर आपके पास जगह है, तो उसे इतनी जगह देनी चाहिए, जिससे आम आदमी अच्छी तरह से अपना जीवन बसर करे। इसके लिए सरकार को काम करना चाहिए। मेरा फिर से अनुरोध है कि सीलिंग में सालभर की छूट देकर दिल्ली की जनता को ललचाइए मत, लटकाइए मत। आप उन्हें आम माफी दीजिए और उनके सिर से सीलिंग की तलवार हटाइए। यही मेरा अनुरोध है।
                                                                                               
[r47]  श्री सज्जन कुमार (बाहरी दिल्ली): सभापति जी, आज जो बिल दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी राज्यक्षेत्र (स्पेशल) विधेयक, 2009 माननीय श्री जयपाल रेड्डी जी लेकर आये हैं, मैं उसका समर्थन करने के लिए खड़ा हुआ हूं।
          मुझे खुशी है कि दिल्ली की जरूरतों को देखते हुए और दिल्ली के लोगों की तकलीफ को समझते हुए केन्द्र सरकार ने फिर एक बार पहल की है कि दिल्ली के लाखों लोगों को रिलीफ देने का काम करे। आज भी जब हम याद करते हैं, दो साल पहले के उन सारे हालात, जो दिल्ली में हुए थे, जब सीलिंग का और डैमोलीशन का कहर दिल्ली पर बरस रहा था, आज भी शायद हम लोग जब उसे महसूस भी करते हैं तो शरीर कांपने लगता है। लेकिन मैं केन्द्र सरकार का इस बात के लिए धन्यवाद देना चाहता हूं कि उसका रास्ता निकालने के लिए 2021 का नया मास्टर प्लान लेकर आये, जिससे दिल्ली के लोगों को राहत मिली।
          मेरे दोस्त शाहनवाज़ जी जिक्र कर रहे थे कि देर से आये, दुरुस्त आये, यदि उन्होंने उस वक्त, जब ये सरकार में मंत्री थे और एन.डी.ए. की सरकार को उस वक्त इन्होंने यह सुझाव दिया होता तो शायद दिल्ली में आज जो भाजपा का हश्र हुआ है, वह नहीं होता। 2021 का नया मास्टर प्लान 10 वर्ष पूर्व आना चाहिए था। पांच वर्ष तक, 6 वर्ष तक, सात वर्ष तक इनकी सरकार यहां लगातार रही, लेकिन इन्होंने दिल्ली वालों की चिन्ता नहीं की, किसी नये मास्टर प्लान पर चर्चा शुरू नहीं की गई। यही कारण रहा कि 2021 का नया मास्टर प्लान न आने की वजह से दिल्ली को दुख भरी कहानी सहनी पड़ी। अदालतों का आदेश, अदालतों के समक्ष उस वक्त जो नया मास्टर प्लान नहीं आया था, उसकी वजह से लगातार कई ऑर्डर पास हुए, जिसमें हजारों लोगों के मकान गिराये गये, सीलिंग की गई और उसी दुख को समझते हुए 2021 का नया मास्टर प्लान बहुत तेजी के साथ आदरणीय जयपाल रेड्डी जी ने, अजय माकन जी ने, दोनों ने मिलकर और अधिकारियों ने मिलकर डॉ. मनमोहन सिंह जी के दिशा-निर्देश पर इस नये मास्टर प्लान को लेकर आये और दिल्ली को व्यापक तौर पर रिलीफ दी गई।
          शाहनवाज़ साहब किसानों का जिक्र कर रहे थे। उनको किसानों का दर्द यदि महसूस होता तो अपनी सरकार के समय में किसानों की बात की सोचते, उनकी जमीनों का उचित मूल्य मिले, उस पर वे कुछ करते, लेकिन दुर्भाग्य से वे नहीं कर पाये। हमारी सरकार ने दिल्ली के अन्दर जो उस वक्त 13 लाख रुपये प्रति एकड़ जमीन का मुआवजा मिला करता था, उसे बढ़ाकर 75 लाख रुपये प्रति एकड़ किया गया और इतना ही नहीं, बल्कि आज ऩई जो कालोनियां डैवेलप की जा रही हैं, उसमें प्राइवेट बिल्डर्स को प्राइवेट पार्टनरशिप के आधार पर कालोनियां विकसित करने का काम, जो भी प्राइवेट बिल्डर करना चाहता है, उसकी भी उसमें व्यवस्था की गई। उस वजह से वह जमीन, जो 13 लाख, 15 लाख और 12 लाख रुपये प्रति एकड़ उस वक्त बिका करती थी, उसका आज हम 75 लाख रुपये प्रति एकड़ की दर से मुआवजा दे रहे हैं। [R48]  [p49]           आज दो-दो, तीन-तीन करोड़ रूपए प्रति एकड़ जमीन किसानों की बिकी है।   मैं समझता हूं कि किसानों के लिए जब यह शहर इतनी तेजी के साथ बसता जा रहा है, तेजी के साथ शहर का विकास हो रहा है, किसान की यदि किसी ने चिंता की तो हमारी यूपीए की सरकार ने की, कांग्रेस की सरकार ने की और उसी वजह से दिल्ली के चुनावों में ग्रामीण क्षेत्र के मतदाताओं ने, किसानों ने, मजदूरों ने, वहां के दलितों ने, सभी वर्ग के लोगों ने आज फिर एक बार कांग्रेस की सरकार को तीसरी बार चुनकर दिल्ली में भेजा। झुग्गी-झोपड़ी वालों की बात कही गयी, पच्चीस वर्ग गज के प्लाट की बात कही गयी।
          शाहनवाज साहब, आप हमारे दोस्त हैं, पुरानी दिल्ली से ताल्लुकात रखने वाले लोग हैं।  श्रीमती इंदिरा गांधी जी जब देश की प्रधानमंत्री थीं, तो आठ लाख लोगों को हमने 25-25 गज के प्लाट्स देकर दिल्ली में बसाया था।  फिर आपकी सरकार आयी, आपकी सरकार की वह कारगुजारियां आज तक दिल्ली के लोग नहीं भूले।  हजारों झोपड़ियों को तोड़ दिया गया और किसी एक आदमी को भी पच्चीस गज का प्लाट नहीं दिया गया।  आप बिहार के नेता हैं, हम तो आपको दिल्ली में भी तसलीम करते हैं।  आप बिहार की बात करते हैं।  जरा याद करिए, जब आपकी दिल्ली में सरकार थी, केंद्र में आपकी सरकार थी, दिल्ली में हजारों फैक्ट्रियों को बंद कर दिया गया था, लाखों मजदूर जो बिहार और उत्तर प्रदेश से काम करने के लिए दिल्ली आते थे, आज जो दिल्ली में हैं, हमने हमेशा उनका स्वागत किया है। उनको जो सुविधाएं दे सकते हैं, हमने उन्हें दी हैं। फैक्ट्रियों को बंद करने के नाम पर हजारों मजदूर उस वक्त बेकार हुए और वे ट्रेन में बैठकर वापस बिहार चले गए, यह रिकार्ड की बात है। इसीलिए, इसी कारण से आज जो बिहार के लोग यहां दिल्ली में रहते हैं, वे हमारे साथ हैं। उन्होंने हमारा साथ दिया और उनके साथ की वजह से ही आज हमें यह सौभाग्य प्राप्त हुआ है कि हम दिल्ली में तीसरी बार सरकार बना सके। इसलिए आपको कोई हक नहीं है कि आप बिहार के लोगों की बात दिल्ली में उठायें, दिल्ली में उनकी बात करें। बिहार वालों की बात करनी थी, तो आप उस वक्त मंत्री थे जब दिल्ली में बिहार के लोगों को दिल्ली से बाहर भेजा जा रहा था। झोपड़ियों में अधिकतर लोग बिहार के रहते थे, उत्तर प्रदेश के रहते थे, अन्य प्रांतों के लोग रह रहे थे, जब झोपड़ियां तोड़ी जा रही थीं। शाहनवाज साहब, यदि आप पार्लियामेंट में खड़े होकर इस सवाल को उठाते तो मैं बाहर ही था, लेकिन बाहर से भी आपका स्वागत करता। उस वक्त आप बोलने की हिम्मत नहीं जुटा पाए।  आप कह रहे हैं नगर निगम के चुनाव की बात.......( व्यवधान)
श्री सैयद शाहनवाज़ हुसैन : यह रिकार्ड में नहीं है। ...( व्यवधान)
श्री सज्जन कुमार : यह रिकार्ड की बात है, जो मैं कह रहा हूं, इतिहास को निकालकर पढ़ लीजिए। ...( व्यवधान)
श्री सैयद शाहनवाज़ हुसैन : वर्तमान है, इतिहास में कहां चले गए? ...( व्यवधान)
श्री सज्जन कुमार  : हमने दिल्ली के लोगों के लिए काम किया, इसलिए दिल्ली के लोगों ने हमें अपनाया।  दिल्ली नगर निगम का चुनाव हम हारे।  लोकतंत्र में चुनाव हारना और जीतना लगा रहता है।  लेकिन किस कारण से हम चुनाव हारे?  अदालतों के आदेश, लगातार डिमोलीशन, लगातार सीलिंग हो रही थी और उसका प्रचार आपके दल के लोगों ने यह किया कि यह सब कांग्रेस पार्टी करा रही है। उसमें लोग बह गए और हम चुनाव हार गए। चुनाव हारने के बाद जब लोगों को सही स्थिति पता लगी कि वर्ष 2021 के नए मास्टर प्लान में अजय माकन जी ने और जयपाल रेड्डी जी ने क्या दिल्ली के लोगों को दिया है, किस तरह से दिल्ली के लोगों को राहत मिली है।  जो चुनाव हम जीते हैं, उसका एक बड़ा कारण वर्ष 2021 का नया मास्टर प्लान है, जिसकी वजह से हम चुनाव जीतकर आए हैं। 
          आदरणीय विजय कुमार मल्होत्रा जी इस हाउस के मेंबर थे, आपने उनके नाम का जिक्र किया, इसलिए मैं उनका नाम ले रहा हूं।  वह मेरे साथी हैं, हमारे साथ वह संसद में थे।  क्या हुआ, दिल्ली के चुनाव में गए थे, चौबे जी और छब्बे जी की बात तो शाहनवाज जी सुनी होगी, वह चौबे जी से छब्बे जी बनने गए थे और दुबे जी बन गए। [p50]  लोक सभा के सदस्य भी नहीं रहे, जाकर विधान सभा में बैठे हैं। दिल्ली के लोगों ने स्वीकार नहीं किया।...( व्यवधान)
श्री सैयद शाहनवाज़ हुसैन : हर सदन महत्वपूर्ण होता है।...( व्यवधान)
श्री सज्जन कुमार  : सभी सदनों का सम्मान और इज्जत होती है। चौबे जी की भी इज्जत है, दूबे जी की भी इज्जत है और जो छब्बे जी बनता है, उसकी भी इज्जत है। मैं इज्जत और सम्मान में कोई कमी नहीं कह रहा हूं, लेकिन आने वाले लोक सभा के चुनाव में दूबे जी का क्या होगा, वह पता लगेगा।
          आपने अनाधिकृत कालोनियों का जिक्र किया कि हमने अनाधिकृत कालोनियों को प्रोवीजनल सैर्टीफिकेट दिए। आपकी सरकार थी। हम रोज झंडा उठाकर आते थे, लोगों को याद दिलाते थे। आपकी पार्टी के लोग भी आपकी सरकार के समक्ष कहते थे कि अनाधिकृत कालोनियों को पास कर दें, सड़क नाली बना दें, लेकिन आपकी सरकार नहीं कर पाई। मैं यूपीए की चेयरपर्सन श्रीमति सोनिया गांधी जी को धन्यवाद देना चाहता हूं। उनके दिशा-निर्देश से 1600 से अधिक कालोनियों को पास करने का फैसला किया गया। श्रीमती इंदिरा गांधी जी के समय में 612 कालोनियों को पास किया गया था। मैं 1980 में भी हाउस का मैम्बर बना था और मुझे उनके चरणों में बैठकर अनाधिकृत कालोनियों पर काम करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ था। लेकिन उसके बाद लगातार इतने वर्षों के अंदर अब फिर वही हुआ है और आप कहते हैं कि वहां कुछ हुआ ही नहीं है। शाहनवाज़ साहब, आप उत्तम नगर गए नहीं हैं।...( व्यवधान)
श्री सैयद शाहनवाज़ हुसैन : आप बुलाते नहीं हैं।...( व्यवधान)
श्री सज्जन कुमार  : मैं तो बुलाऊं, लेकिन आप आते नहीं हैं। आप डरते हैं कि कहीं बीजेपी वाले यह समझें कि सज्जन कुमार की दावत में जा रहा है तो कल कहीं आपको दिक्कत हो जाए। ज़रा अनऑथोराइज़्ड कालोनियों को देखें। उत्तम नगर से नजफगढ़ जाने वाली मेन सड़क टूटी हुई है, लेकिन जब आप उत्तम नगर की अनऑथोराइज़्ड कालोनी में जाएंगे, वहां आर एंड सी की सड़कें, सीमेंट, कंक्रीट की मिक्स अप करके बनाई हुई सड़कें हैं। उसके विकास के लिए 2800 करोड़ रुपये रखे गए हैं। इतनी तेजी के साथ खूबसूरत सड़कें और नालियां बनाई गई हैं कि अगर आप और हम देखेंगे तो प्रसन्न होंगे। सिर्फ सड़कें और नालियां ही नहीं बनाई गई हैं, दूसरे चरण के अंदर पीने के पानी की लाइनें डाली गई हैं और तीसरे चरण में जनकपुरी और द्वारका में लोगों को सीवर्स की सुविधाओं का काम भी शुरू कर दिया गया है। उन्हें पानी दे रहे हैं, बिजली दे रहे हैं, सड़कें, नालियां दे रहे हैं, सीवर की सुविधाएं दे रहे हैं। आप जानते हैं कि आज वहां मकान की कीमत क्या है? सभापति जी, जो मकान एक लाख रुपये का हुआ करता था, आज उसकी कीमत 20 लाख रुपये हो गई है। सारी अनाधिकृत कालोनियों में रहने वाले, वे चाहे किसी भी प्रांत के रहने वाले थे, हमने उन सबको लखपति बना दिया है और अगली बार हमारी सरकार आएगी तो शाहनवाज़ साहब, उन्हें करोड़पति बनाएंगे। यह बिल वही है जिससे हम उन्हें राहत दिला रहे हैं।...( व्यवधान)
श्री सैयद शाहनवाज़ हुसैन : आपने महंगा कर दिया है।...( व्यवधान)
श्री सज्जन कुमार  : महंगा इसलिए नहीं कर रहे हैं कि हम उन्हें बेचें, लेकिन हम बता रहे हैं कि हमने उन कालोनियों की प्रतिष्ठा किस तरह बढ़ाई है।...( व्यवधान) सभापति जी, मैं ग्रामीण क्षेत्र की बात करना चाहता हूं। गांव की जमीनें लगातार बिकती जा रही हैं, शहर बसते जा रहे हैं। 2021 के नए मास्टर प्लान में कहा गया है कि सन् 2021 के बाद कोई गांव नहीं रहेगा, सब शहर हो जाएंगे। गांव विकसित होंगे, गांवों के अंदर सुविधाएं, गांवों के साथ-साथ शहरीकृत गांव, मैं आदरणीय जयपाल रेड्डी जी का धन्यवाद करना चाहता हूं, भाई अजय माकन जी का धन्वाद करना चाहता हूं कि डा. मनमोहन सिंह जी के दिशा-निर्देश पर आज वे ऐसा बिल लेकर आए हैं। पिछली बार अर्बनाइज़्ड विलेज रह गए थे। शहरीकृत गांवों को इनक्लूड नहीं किया गया था। उसका असर क्या हुआ? दिल्ली नगर निगम का सबसे ज्यादा डंडा शहरीकृत गांवों पर बजा है। मकान तोड़े गए, सील किए गए और हमें दिखा देते थे, हम कहते थे कि यह गांव का है, वे कहते थे कि नहीं, इसमें गांव लिखा है, शहरीकृत गांव नहीं लिखा है। अबकी बार हमने वह भी कर दिया है कि शहरीकृत गांव उसमें इनक्लूड कर दिए गए हैं। गांवों के लोगों को सुविधाएं दी हैं और गांवों के लोगों के साथ-साथ फेरी लगाने वाला आदमी, जो पटरी पर बैठकर काम करता है, दिल्ली नगर निगम क्या कर रहा है, हमने 2021 के नए मास्टर प्लान में कहा था कि तमाम रेहड़ी और पटरी वालों को तहबाजारी लगाकर हम उन्हें स्टॉल देंगे। [N51] यह काम दिल्ली नगर-निगम को सौंपा गया जिसके तहत लाखों आदमियों को बसाना था। कुल 500 आदमियों को दिल्ली नगर-निगम ने  पौने दो साल के अंदर बसाया है, लेकिन अगर हम यह बिल आज न लायें, तो पटरी, रेहड़ी और फेरी पर काम करने वाले लोगों के सिर पर जो तलवार  मंडरा रही थी, उसे बचाने का काम यह बिल कर रहा है। इसलिए मैं इस बिल का स्वागत कर रहा हूं। झुग्गी-झोंपड़ी वालों को मकान देने की बात, आप एक लाख मकान की बात कह रहे हैं, शाहनवाज साहब एक लाख मकान की बात नहीं है, हमारे प्रधान मंत्री जी का यह आदेश है कि एक लाख नहीं, यदि दिल्ली में चार लाख भी मकान बनाये जायेंगे, तो हम झोंपड़ी वालों को मकान देंगे। उसकी शुरुआत कर दी गयी है और उस जमीन पर की गयी है जहां जमीन के दाम एक लाख रुपये गज है। हम वहां पर फ्लैट बना रहे हैं। हम फ्लैट बनाने का काम यह नहीं कर रहे कि जाकर हरियाणा के बॉर्डर पर बना दें। अजय माकन जी कालका जी के उस झुग्गी-झोंपड़ी कैम्प में जा रहे हैं जहां वी.पी. सिंह साहब, जो आज इस दुनिया में नहीं हैं, गये थे। उनके चरण वहां उस समय पड़े थे, जब वहां बुलडोजर घूम रहा था। आज उन झुग्गी-झोंपड़ी वालों के लिए मकान बनाने का काम हम इस रविवार से शुरु कर रहे हैं, दिल्ली की पॉश कालोनी के अंदर कर रहे हैं। दिल्ली में जहां झुग्गी-झोंपड़ी कैम्प है, वहीं पर मकान बनाने का काम हमने शुरू किया है इसीलिए आज दिल्ली के लोग हमारा समर्थन कर रहे हैं।    
          सभापति महोदय, मैं इस बिल का स्वागत करता हूं और खास तौर से जयपाल रेड्डी जी का धन्यवाद  करना चाहता हूं कि वे किसानों की तकलीफ को समझते हैं। वे दिल्ली से नहीं हैं, लेकिन फिर भी दिल्ली  के लोगों की तकलीफ के लिए रात-रात जागे हैं। मैं अजय माकन जी का धन्यवाद  करना चाहता हूं, जो दिल्ली से सांसद हैं और दिल्ली की तकलीफ को उन्होंने समझा है, गली-मोहल्ले में जाकर समझा है और उसे पूरा किया है।   
          इन्हीं शब्दों के साथ मैं इस बिल का समर्थन करता हूं।
                                                                                                 
श्री सैयद शाहनवाज़ हुसैन :  60 साल में आम नागरिकों के लिए कितने मकान बने, यह आपने नहीं बताया। ...( व्यवधान)
   
श्री राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव (मधेपुरा)  :  सभापति महोदय, मैं जयपाल रेड्डी साहब के द्वारा लाये गये नैशनल  कैपिटल टेरिटरी बिल के पक्ष में बोलने के लिए खड़ा हुआ हूं।  दिल्ली देश की राजधानी है और यहां पूरे देश में रहने वाले हर आदमी की राजनैतिक, सामाजिक, आर्थिक और सभी तरह की जरूरतें पूरी होती हैं। देश के लोगों का योगदान भी कहीं न कहीं इस दिल्ली के साथ रहता है।  हम सिर्फ दिल्ली पर केन्द्र बिन्दु नहीं होना चाहते। निश्चित रूप से सज्जन कुमार जी बहुत जुझारू साथी हैं। मैं जगदीश टाइटलर जी को तब सेजानता हूं, जब मैं कालेज में पढ़ता था। खासतौर पर जिस दिल्ली को केन्द्र बिन्दु बनाकर यह बिल लाया गया है, उसमें हमारे मित्र शाहनवाज जी ने कई तरफ की बातें कहीं हैं। उनका जवाब हमारे मित्र सज्जन कुमार जी ने दे दिया। लेकिन मैं एक बात कहना चाहता हूं कि निश्चित रूप से जो बात सामने आयी है, जिसे शाहनवाज जी ने कहा कि यह जो हाहाकार मचा, जो तलवारें लटकीं, यह कोई वर्तमान सरकार के कारण नहीं हुआ। बीस सालों में कई सरकारें  बनीं। केन्द्र में भी सात साल एनडीए की सरकार बनी। हम भी आपके साथ थे। आज सोनिया जी के नेतृत्व में यूपीए की सरकार है, जिसमें 90 प्रतिशत ऐसे लोग हैं, जो सिर्फ गरीबों, झोंपड़ी, रेहड़ी, फेरी और गांव मे रहने वाले लोगों के दर्द को समझकर इस सदन में आये हैं और उन्हीं लोगों का यह यूपीए का गठबंधन है। यह गठबंधन कोई दो या दस प्रतिशत कैपिटलिस्टों का गठबंधन नहीं है।  एनडीए का गठबंधन कैपिटलिस्टों का हो सकता है लेकिन यूपीए गठबंधन सिर्फ झुग्गी-झोंपड़ी, गांव में रहने वाले लोगों के लिए बना।[MSOffice52]    उनको मुख्यधारा में लाने का काम निश्चित रूप से यूपीए ने किया है। बीजेपी के पास एक प्रचार सामग्री है - आरएसएस।  वह सच को झूठ इस कदर बना देता है कि सच ही गायब हो जाए। एक बार इन लोगों ने ऐसा दूध पिलाया कि हाथ से दूध चू रहा है और कह दिया कि गणेश जी पी गए।  दिल्ली में जो घटना घटी, दिल्ली में बड़ी-बड़ी अनधिकृत कालोनियां बन गयीं, क्या ये केवल पांच या दस साल में बन गयीं? निश्चित रूप से पहले से खामियां थीं। इसके लिए दोषी कौन लोग थे? कोई नेता तो इसमें सम्मिलित नहीं था, किसी जनप्रतिनिधि ने तो अपना घर नहीं बना लिया है। इसके लिए दोषी कौन था? किसको केन्द्र बिन्दु बनाना पड़ेगा।  जिन लोगों ने दिल्ली के पूरे इंफ्रास्ट्रक्चर को आज इस कदर बर्बाद कर दिया है, इसके केन्द्र बिन्दु में नौकरशाह हो सकते हैं। इसके लिए गुनाहगार वह नहीं है जिसने अपना सब कुछ बेचकर घर बना लिया। इसके लिए गुनाहगार वह नहीं जिसने अपनी सारी कमाई, सारी पूंजी दो-तीन कमरे का घर बनाकर अपना परिवार रखने के लिए लगा दी।  जो दोषी है ही नहीं, उसे किस कानून के तहत दंडित किया जाएगा? उन्हें खाने के लिए मिल रहा था, चाहे वह जिस हालत में उन्हें मिल रहा हो, चाहे सरल रूप से मिल रहा हो या दुर्लभ रूप से उसे मकान बनाने की व्यवस्था दी गयी हो, यह दोष उनका तो नहीं है।  जब मिल रहा था तो उन्होंने लिया। उन्होंने कोई चोरी नहीं की, कोई डाका नहीं डाला।  शाहनवाज जी, आप सात साल यहां थे, आज आप जिस कानून और माफीनामे की बात कर रहे हैं, वह काम आप पहले करते तो आज यह दिन नहीं देखना पड़ता, आज यहां पर आपको नहीं बोलना पड़ता। निश्चित रूप से मैं यह कह सकता हूं कि सोनिया गांधी जी का इस देश में कितना बड़ा योगदान है, उस पर मैं नहीं जाउंगा, लेकिन निश्चित रूप से गरीबों की पीड़ा और दर्द को उन्होंने समझा है। वह एक संवेदनशील महिला हैं और दिल्ली की झोपड़ियों में रहने वाले लोगों की पीड़ा और दर्द को अगर सोनिया गांधी जी ने न समझा होता तो ये हालात नहीं बदलते। वह धन्यवाद की पात्र हैं। इसके लिए पूरी यूपीए सरकार धन्यवाद की पात्र है। आज अजय माकन जी यहां बैठे हुए हैं। सोनिया गांधी जी की ही वजह से वह यहां बैठे हुए हैं। इन्होंने जो निर्णय लिया होगा, वह उनकी संवेदनशीलता का ही एक हिस्सा होगा। जयपाल रेड्डी साहब को हम आज से नहीं, बहुत पहले से, जब हम श्री राम विलास पासवान जी के साथ यहां आया करते थे, जब वह जनता दल में थे, तब से मैं उन्हें जानता हूं।  मैं यह कहना चाहता हूं कि दिल्ली में बिहार और यूपी के लोग रहते हैं। अभी हमारे मित्र कह रहे थे कि किस तरह से फैक्टरी को तोड़ा गया, उसको तोड़ने वाले कौन लोग थे, किन्होंने उनको बेरोजगार करने की कोशिश की? किसने उनको खुदकुशी करने के लिए मजबूर किया? मैं राजनीतिक बातों में नहीं जाना चाहता हूं, लेकिन मैं यह कह सकता हूं कि घटनाक्रम जो भी हो, उसमें पीसे जाते हैं गरीब, पीसे जाते हैं झोपड़ियों में रहने वाले, पीसे जाते हैं मजबूर लोग, पीसे जाते हैं दो वक्त की रोटी के लिए मरने वाले लोग।[I53]            अभी हमारे बिहार के मित्र अपनी बात कह रहे थे। मैं अपने सभी कांग्रेस के सांसदों को धन्यवाद देता हूं कि वे बिहार और उत्तर प्रदेश के गरीबों के सम्मान के लिए बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं इसलिए वे बधाई के पात्र हैं और उन्हें साधुवाद है। यदि बिहार के लोगों को यहां थोड़ा सा भी सम्मान मिला है तो निश्चित रूप से उनकी भागीदारी के कारण मिला है। उसमें उनकी राजनैतिक और सामाजिक भागीदारी तो है ही, साथ ही वहां के नेतृत्व की भी भागीदारी है। मैंने पहले ही कहा कि यूपीए सरकार के गठबंधन वाले जो दल हैं, जो भी हमारे नेता हैं, वे भी गांव की झोंपड़ी से निकलकर आए हैं इसलिए वे गरीबों का दर्द अच्छी तरह समझते हैं।
          सभापति महोदय, मुझे इस बात का दुख होता है कि बिहार के बारे में यहां कई तरह की बातें कही जाती हैं। दिल्ली को इन लोगों ने गंदा कर दिया है, यह भी कहा जाता है। मैं देख रहा था, इसमें लिखा है 'गंदी बस्ती'। गरीब आर्थिक रूप से और शैक्षणिक रूप से इतना सम्पन्न या मजबूत नहीं है, लेकिन जहां वह रहता है उस जगह को गंदी बस्ती और मलिन बस्ती कहना सही नहीं है। ये शब्द उसके सम्मान को ठेस पहुंचाने वाले हैं। इसका मतलब यह है कि हम गरीबों का मजाक उड़ा रहे हैं। हमारा आग्रह है कि इसकी जगह आपको गरीब बस्ती कहना चाहिए।
शहरी विकास मंत्रालय में राज्य मंत्री (श्री अजय माकन): हमारे मंत्रालय से इसका कोई वास्ता नहीं है।
श्री राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव : आपके ही मंत्रालय से है और इस बिल में भी लिखा है। मैं कुछेक बातों की तरफ मंत्री जी का ध्यान केन्द्रित करना चाहूंगा। दिल्ली में सीलिंग के समय जो मकान तोड़े गए, खासकर मिडिल क्लास के लोगों के, तो उन्हें ऐसा महसूस हो रहा था कि जीते जी ही वे मर गए हैं। वे कह रहे थे कि उनका जी चाहता है कि आत्महत्या कर लें। उस वक्त यूपीए की सरकार और सोनिया गांधी जी ने अगर मोर्चा नहीं सम्भाला होता, तो पता नहीं दिल्ली में कितने ही लोगों ने आत्महत्या कर ली होती। दिल्ली के सांसद और मंत्री अजय माकन जी बधाई के पात्र हैं और बाकी साथी भी कि आपने दिल्ली के सैंकड़ों लोगों को आत्महत्या से बचाने का काम किया, जो शायद अपने बच्चों की परवरिश न कर पाते और बाद में विवश होकर आत्महत्या कर लेते। इसलिए जो मकान बन गए हैं, उन्हें तोड़ा नहीं जाना चाहिए।
सभापति महोदय : कृपया समाप्त करें।
श्री राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव : मैं कहना चाहता हूं कि जो काम राजनीतिज्ञों को और लोक सभा को करना चाहिए, क्या कारण है कि वह काम न्यायालय को करना पड़ता है। झोंपड़ी के दर्द को, गरीबों के दर्द को ए.सी. रूम में बैठकर नहीं समझा जा सकता। इसलिए सरकार को ऐसा बिल लाना चाहिए जिससे दिल्ली में रहने वाले, मुम्बई आदि बड़े शहरों  में रहने वाले जो गरीब लोग हैं, मिडिल क्लास लोग हैं, फिर कभी किसी कानून या नियम से परेशान न हो, उसकी वजह से उनका परिवार आत्महत्या करने को विवश न हो। इस देश में जो भी कानून बनता है, वह आम लोगों के लिए बनता है। कानून लोगों के लिए है, लोग कानून के लिए नहीं हैं। किसी भी तरह के कानून को लाने से पहले हमारी सरकार आम लोगों की जरूरतों को, उनकी भावनाओं को, उनकी खुशहाली को और उनकी एक अच्छी शुरूआत को ध्यान में रखने का काम करे।
          मैं अंत में मंत्री जी से यही कहना चाहता हूं कि दिल्ली में जो बस गए, उन्हें परेशान न किया जाए। आज लुधियाना में, मुम्बई में या अन्य कहीं जो सामान बनता है, वह दिल्ली में ट्रंजिट होता है। इसका मतलब यह है कि कहीं भी सामान बने, आता वह दिल्ली में है।[R54]  [r55]           यदि ऐसी दिल्ली को खत्म करने की मंशा होगी, तो पूरा देश ही खत्म हो जाएगा। इसलिए मैं आपसे आग्रह करुंगा माननीय अजय माकन साहब, कि आप ऐसा कानून लाएं जिससे कोई भी अनाधिकृत बस्ती, गांव न बने और आगे अगर कोई इस तरह की कॉलोनी या गांव बसता है तो दोषी पदाधिकारी और लोगों को सख्त से सख्त सजा दी जाए। लेकिन जो दिल्ली का ढांचा अब बन चुका है उसे न उजाड़ा जाए, उस दिल्ली को में आपने और यूपीए की सरकार ने 80 प्रतिशत अच्छी शुरुआत की। बिहार और यूपी से आने वाले लोगों के बारे में आप ज्यादा ख्याल रखते हैं और बिहार से आने वाले लोगों को बिहारी कहना, कभी मलिन कहना, कभी गंदी बस्ती कहना, इन सब बातों को खत्म कीजिए। बिहार और यूपी के लोग भी सम्मान के साथ जी सकें, वह आप चाहते हैं। उन्हें और सम्मान मिले, ऐसा मेरा आग्रह है तथा उन लोगों के लिए भी आप और सोचने का काम कीजिए - यही मैं आपसे कहना चाहता हूं। पुनः इस बिल का समर्थन करते हुए मैं आपनी बात को समाप्त करता हूं।
                                                                                               
SHRI SUDHANGSHU SEAL (CALCUTTA-NORTH WEST): Mr. Chairman, Sir, while I am accepting the Bill introduced by hon. Minister Shri Jaipal Reddy to make special provisions for the National Capital Territory of Delhi for a further period up to the 31st Day of December, 2009, I would like to draw the attention of the hon. Minister, Shri Ajay Maken to one thing. It is true that for any State, for any Capital, there should be some perspective plan and accordingly, for Delhi also, you have proposed to have one prospective plan which will be valid up to 2021.
While making it, you have given some proposals within this Bill where you have categorically mentioned that for taking decision on regularization of unauthorized buildings, you need to have some time. Secondly, you have correctly mentioned that the problem of hawkers should be looked into and there should be one positive decision for it. You wanted some time for that also.
As far as hawkers are concerned, you must be knowing that in this august House, we have very recently taken a decision and passed a Bill relating to unorganized sector workers. While 93 per cent of the people of our country are coming under unorganized sector, the Government had taken the correct step to give recognition to these unorganized sector people. I believe, hawkers are coming under the unorganized sector. So, social security should be given to them and whatever commitments we have made in that particular Bill, those facilities should be provided to hawkers also. 
Here, I would like to cite the example of Kolkata. You know that hawkers are compelled to sit on the footpath because they do not have any other way to earn their livelihood. So, in Kolkata, we have decided that hawkers should not be allowed in the carriageways and within 50 metres from the crossings, while wherever footpaths are encroached by them, one-third should be used by them and two-third should be kept free for pedestrians.
Moreover, there are certain areas where we have decided that some kiosks should be made and they should be presentable also. I got the opportunity to visit some other countries, where also I found that similar type of arrangements had been made. Some Hawkers’ Corners have been made there. We have made the same arrangement in Kolkata. For Delhi also, it is very much required. My point is that they should not be evicted and they should be given the opportunity to earn their livelihood.
On this issue, I have got full confidence in the hon. Minister because being a Member of the Standing Committee on Urban Development, I have seen that it was decided during NDA regime to close down the Kolkata unit of the All India Stationery and Printing Office. I am thankful to hon. Minister of State, Shri Ajay Maken and I must congratulate him and our senior Minister, Shri Jaipal Reddy who have taken the bold decision to keep this unit viable and assured that no retrenchment would be made.[S56]  I must congratulate you for it. All the workers throughout the nation -- wherever your units are there -- are very happy.
17.00 hrs.                                       (Mr. Speakerin the Chair) You have already taken the decision to absorb them as you are going for modernisation of these units, and you have also taken the very good decision that they should be trained and absorbed in their respective jobs.

          Clause 2 (1) (g) of this Bill states that :

““punitive action” means action taken by a local authority under the relevant law against unauthorised development and shall include demolition, sealing of premises and displacement of persons or their business established from their existing location, whether in pursuance of court orders or otherwise;”             My point is this. I got the opportunity to visit a number of places where the Urban Development Ministry is working. You have talked about jhopri basti wherever EWS flats have been constructed by your Department. It was our observation that allotment had been made through lottery for all these EWS flats, and LIG and MIG flats made for middle income groups, and as soon as allotment is given, it is being sold at a higher price to some other party. I mean to say that the jhopri-dwellers -- who have been allotted flats -- are selling all these flats to others, and they are going back to the jhopris. Therefore, when the jhopri-dwellers are being given EWS flats, then there should be certain condition that for at least 20 years they will not be in a position to sell it. They will have to use it, and their family members will have to use it and it should not be saleable. Further, there should be some vigilance procedure where the Department will find whether it is being sold to some other party or not.
          As far as demolition of unauthorized structures is concerned, it is our experience in Delhi that there are many houses that are constructed without caring about the law, that is, the existing building rules. My point is this. What the local administration is doing when these buildings are being constructed? There should be some direction to the local authorities that any unauthorized construction should be stopped in the beginning itself instead of waiting for it to get completed. But I definitely welcome your decision that there should be some law.
          The perspective plan for 2021 is definitely welcomed by me. The Central Government is spending a lot of money for the overall development in Delhi compared to any other place. Of course, we are getting funds under JNNURM, but it is our observation at least in West Bengal that the beneficiary contribution of 12 per cent for housing scheme for slum dwellers is very much painful to them. It is my earnest request that you should introduce some mechanism so that they can obtain this 12 per cent contribution from bank on long-term basis. A long-term loan should be given so that they can have accommodation in pukka buildings.
          With these few words, I support the National Capital Territory of Delhi Laws (Special Provisions) Bill.                                          
MR. SPEAKER: The next speaker is Shri Braja Kishore Tripathy. I would be able to give you only five minutes to speak on this issue.[r57]      SHRI BRAJA KISHORE TRIPATHY (PURI): Respected Speaker, Sir, we are discussing The National Capital Territory of Delhi Laws (Special Provisions) Bill, 2009. This enactment intends to regularize the unauthorized constructions, commercial use of residential premises, encroachment on public land by slum-dwellers and Jhuggi-Jjhompri clusters, problems relating to urban street vendors, which were affecting the lives of millions of people. By the provisions of this Bill, the Government requires a time period of another one year to take all possible steps to finalise norms, policy, guidelines and feasible strategies to deal with the problems of unauthorized development with regard to mixed land use not conforming to the Master Plan, construction beyond sanctioned plans, and encroachment by slum and Jhuggi-Jhompri dwellers, hawkers and urban street vendors.
          The Government has come forward with this legislation just to regularize the irregularities committed. This Ministry has contributed the maximum to the electoral success of Congress Party in the recent Delhi Assembly elections, as fear psychosis was created in the minds of the people on this account by lingering the process of regularization on. The hon. Minister has succeeded in his efforts.
          Sir, we are discussing Ordinances and Bills in this regard for the fourth time in the last two years. The Delhi Laws (Special Provisions) Act, 2006 which was passed in a hasty manner placed a one-year moratorium on demolition of unauthorized constructions and ceiling of commercial establishments in the residential areas in the capital. It was anticipated to be rejected by the Supreme Court. Personally I had expressed my apprehensions at that time that this Act would be rejected by the court.
          The Statement of Objects and Reasons of the present Bill states that Delhi Laws (Special Provisions) Act, 2006 was enacted to address the several orders and directions passed by the Supreme Court and the High Court of Delhi in cases pending before them. So, in effect it is just to negate the effect of the orders of Supreme Court and High Court that the Government has come forward with this Bill. The Government is trying to take this House for granted by bringing this Bill to regularize all the irregularities practised by the Government and to bail out the Government.
          The apex court had termed the Act of 2006 as fully void and illegal. The Bench had observed that it was a pure and simple legislation aimed at overruling the orders of the court. Now we are witnessing the same thing happening again here. The Minister expressed confidence last time about the legality of the 2006 Act. He assured the House then that that Act would not be rejected by the court. However, unfortunately this Act was rejected by the court immediately thereafter. Now, the manner in which the Centre has tried to subvert the ceiling drive reflects very poorly on itself.
          There is no doubt in the fact that the Parliament is the supreme law-making institution of the country. But the tendency of the Executive of circumventing the court orders by introducing legislations is an unholy feature of our democracy. The Government should not deal with things in this way. They should make legislation well in advance and must act with foresight. When the Government comes forward with a legislation, it should be ensured that the legislation would stand the test of law and it would not be rejected in the court.
          During the tenure of this Government we have witnessed many such instances where different Acts had been either rejected or dealt with very indifferently by the Supreme Court or the High Court.
MR. SPEAKER: Now conclude please. You agreed to one hour for this Bill. You are a party to this.
SHRI BRAJA KISHORE TRIPATHY : I will take just one more minute.
          Everybody wants Delhi to be a modern and model city. For this purpose a new Master Plan was notified.[KMR58]  [s59]            On 7th of February, 2007, Master Plan has been prepared. We are now in 2009.
MR. SPEAKER: Your Party was allowed one minute but I have given you six to seven minutes.
SHRI BRAJA KISHORE TRIPATHY :  What is the Government doing in the last two years? Master Plan was prepared for 2021. They lack vision.  They should have formulated the Plan much earlier. Anyway, they have come out with the Master Plan.  Why are they sitting on it for the last two years?  Again, why have they taken one year for this enactment?
MR. SPEAKER: Shrimati Krishna Tirath.
… (Interruptions)
MR. SPEAKER: Shri Braja Kishore, you have always been cooperative.
… (Interruptions)
SHRI BRAJA KISHORE TRIPATHY : I will take just two minutes, not more time.
          This has created an alarming situation in Delhi and in other places.  A lot of unemployed youth are rushing to these cities for employment.  The Government is not providing sufficient employment opportunities in the rural areas and that is the reason why… MR. SPEAKER: It applies to all Governments.
 SHRI BRAJA KISHORE TRIPATHY : Both the Central and the State Governments should plan taking future into consideration.  Unemployment youths are coming to cities for employment.  City is flushed with unemployed people. The Government have to provide for their dwellings, food, health and education. Naturally, the Government should take appropriate decision at the appropriate time.
MR. SPEAKER: This Bill has limited scope of extending by one year and the Bill has already been passed.
SHRI BRAJA KISHORE TRIPATHY :  Initially, in 2006, they have come out with the Bill. We have discussed this Bill four times. It is most unfortunate.  I can say that this is the only Bill where we have discussed four times.   This Government have no vision. The Government could not anticipate as to what would happen in future.  Mr. Minister,You do not have any planning.  The Government is doing on these things which create fear psychosis in the people.  If the Government intends to do something, let it do properly.  Do not take further time. 
MR. SPEAKER: No more.  You have made a lot of strong points.
SHRI BRAJA KISHORE TRIPATHY : Sir, last point.
MR. SPEAKER: This is your fourth last point! SHRI BRAJA KISHORE TRIPATHY:   At Delhi, how many houses have the Government constructed? They are assuring so many times, they would do it. But how many houses have the Government constructed?  How many roads have the Government constructed? How many slum dwellers have you settled in Delhi?  Tell us that you have settled so many slum dwellers. … (Interruptions)
MR. SPEAKER: No more recording except the speech of Shrimati Tirath. 
(Interruptions)* … MR. SPEAKER: Shri Tripathy, thank you very much for your cooperation.  
                   
*  Not recorded श्रीमती कृष्णा तीरथ (करोलबाग)  : अध्यक्ष महोदय, मैं आपकी परमीशन से नेशनल कैपिटल टैरिटरी ऑफ दिल्ली लॉज  (स्पेशल प्रोविजन) बिल, 2009 के पक्ष में बोलने के लिए खड़ी हुई हूं। श्री एस.जयपाल रेड्डी और श्री अजय माकन जी जिस बिल को लेकर आये हैं, वे दिल्लीवालों को जिस तरह से राहत देने की हमारी यूपीए की सरकार ने श्रीमती सोनिया गांधीजी के दिशा-निर्देश पर और हमारे देश के प्रधान मंत्री, डा.मनमोहन सिंह जी के आदेशानुसार इस बिल को लाये है। इसका दर्द यूपीए की सरकार अच्छी तरह जानती है। जब यह बिल पर बहस शुरू हुई तो सामने की बैंच से श्री शाहनवाज जी बोल रहे थे। वह शायद इस बात को भूल गये थे कि जिस समय वह सरकार में थे, उस समय उनके एक मंत्री, जिन्हें बुलडोजर के नाम से जाना जाने लगा था, उनके द्वारा तमाम दिल्ली को बुलडोज किया जा रहा था और ये लोग केवल दिल्ली शाइन करने और सरकारी सम्पत्तियों को बेचने में लगे थे। चाहे उदयपुर का किला हो, चाहे होटल्स हों, चाहे दूसरी तरह की इमारतें हो, ये उन्हें बेचने में लगे थे। ये भूल गये थे कि दिल्ली  के लोगों के लिए जिस बिल को हम आज लेकर आ रहे हैं, उसके द्वारा दिल्लीवासियों को किस तरह से राहत देनी है। मुझे याद है वह समय जब स्व.श्रीमती इंदिरा गांधी जी ने लघु और कुटीर उद्योगों को बढ़ावा दिया था और बेरोजगारी की समस्या का समाधान करने के लिए उन्होंने कहा था कि हर महिला, हर बच्चा, हर पुरुष जो बेरोजगार है, लेकिन हाथ का दस्तकार है, उसके हाथ में कला है। चाहे वह कढ़ाई, बुनाई का काम करता हो, चाहे वह छोटे जूते बनाने का काम करता हो, जिनको बच्चों के लिए बुलबुल कहा करते थे, उस तरह के जूते हमारी दिल्ली के बहुत सारे क्षेत्रों में आज भी बनाये जाते हैं[BS60] ।
          इन्दिरा जी ने भी इस बात को सोचकर लघु और कुटीर उद्योगों को बढ़ावा दिया था। लेकिन जब एन.डी.ए. की सरकार केन्द्र में आयी, इन्होंने तमाम लोगों को धराशायी कर दिया और जब आज यह सरकार बिल लेकर आय़ी है तो इस समय इनको डर लगता है कि कहीं जिस प्रकार से दिल्ली का बढ़ावा हुआ है , दिल्ली के प्रति आकर्षण बढ़ा है, उसको देखते हुये दिल्ली जो भारत की राजधानी है, एक मिनी भारत है जहां विभिन्न प्रान्तों के लोग दिल्ली में आकर बसे हुये हैं, क्योकि उन लोगों को जिन चीजों ने लुभाया है कि जब वे लोग दिल्ली जायेंगे तो उन्हें रहने के लिये घर मिलेगा, उन्हें रोजगार मिलेगा, छोटी सी रेहड़ी पर काम कर लेंगे, पटरी पर बैठकर रोजगार कमा लेंगे, छोटी सी दुकान खोल लेंगे या छोटा मोटा उद्योग लगाकर अपनी रोजी रोटी कमा सकेंगे। इसलिये डी.डी.ए उन्हें बहुत सारे थड़े बनाकर दिया करती थी। लेकिन हमारे सामने बैठने वाले विपक्ष की जब यहां सरकार आयी तो उन्हें लगने लगा कि दिल्ली में  हम लोगों की कहीं तीसरी बार सरकार में आने के बाद केन्द्र में न आ जाये,इसलिये विभिन्न तरह की बातें ये लोग कर रहे हैं और इस बिल के पक्ष में नहीं बोलना चाहते हैं।
          अध्यक्ष जी, जिस तरह से स्लम कॉलोनियो में स्लम डवैलर्स हैं, झुग्गी-झोंपड़ी में रहने वाले लोग हैं, उनकी बस्तियो में सीवरेज का प्रावधान नहीं है, उनके यहां सड़क-बिजली-पानी नहीं है, बच्चों के लिये स्कूल नहीं हैं, अस्पताल नहीं हैं या पार्क नहीं हैं, इन सब चीजों का इन्तजाम करने के लिये हमारी यू.पी.ए. की सरकार यह बिल लाई है। मैं माननीय मंत्री जी को मुबारकवाद देना चाहती हूं कि उन्होंने सोच-विचार करके यह कहा है कि दिल्ली में जो हमारे डेवलेपमेंट्स हुये हैं, चाहे वह किसानों के लिये हो, मजदूरों के लिये हो, चाहे असंगठित क्षेत्र में रहने वाले मजदूरों के लिये हो, चाहे झुग्गी-झोंपड़ियों में रहने वाले लोग हो, अगर उसका अपना मकान बना है और वह रोज़गार करता है तो उसे पक्का किया जायेगा । उन लोगों को राहत देने के लिये यह बिल लाया गया है। दिल्लीवासी इस बात से बेहद प्रसन्न हैं क्योंकि जिस चीज के लिये आज तक किसी ने नहीं सोचा था, उसे श्रीमती सोनिया गांधी के चेयरपर्सन के नेतृत्व में यू.पी.ए. की सरकार द्वारा हर व्यक्ति और नीचे के हर तबके के रहने वाले लोगों के लिये सोचा गया है कि उनके रहने के लिये इंतजाम कैसे किया जाये, कैसे वे आराम से रह सके। आज दिल्ली के लोग इस बात को सोचकर प्रसन्न हैं।
          अध्यक्ष जी,  उस समय की सरकार को मास्टर प्लान 2001 में लाना चाहिये था लेकिन मास्टर प्लान नहीं लाया गया। किसी कारण से पिछले समय में जो बातें कही गई, कारपोरेशन के इलैक्शन में हम हार गये, उसका कारण इन लोगों की खामियां रहीं। उस समय कॉरपोरेशन पर यह गाज गिरी। जब समय था, उस समय मास्टर प्लान नहीं बनाया। अगर 5 वर्ष पहले ही सोच लिया जाता कि आने वाले समय में मास्टर  प्लान कब बनेगा या अगर उस समय लाया जाता तो दिल्लीवासियों को यह तकलीफ नहीं होती। लेकिन मेरा विश्वास है कि  जिस तरह आज यह बिल लाया गया है, उससे हर व्यक्ति को, हर तबके को पूरा ताकत मिलेगी। किसानों के लिये जो मुआवजा बढ़ाया गया है, उससे उनकी समस्या का हल हुआ है लेकिन किसानों की अन्य समस्याओं का समाधान करने के लिये हमारी सरकार पूरी तरह तत्पर है।
          इन्हीं शब्दों के साथ मैं इस बिल का समर्थन करती हूं।
                                                                                               
MR. SPEAKER: Thank you very much for your cooperation.
          Now, Shri P. C. Thomas – only for four minutes.
SHRI P.C. THOMAS (MUVATTUPUZHA): I am sure that after the Bill is passed, policies will be framed so that further encroachments can be avoided, and properly it will be given to those in difficulties. I am sure that lakhs of poor people will be helped by stern steps taken in the Ministry. 
          I would like to suggest only one or two things. First is that some cheaper accommodation must be made available to people from all over India who are living in Delhi, especially the job-seekers and others who are coming in large numbers. I would submit that because of the huge cost, this has to be taken up very urgently. Secondly, I would like to suggest that there are very big farm houses which are better than very high five star hotels; I do not know whether we are going to save them also because many of them have encroached and they have taken up the properties of farmers. So, a different look will have to be given to this aspect and I hope that it will be looked into. Lastly, Delhi is the national capital. I am sure big leaders of the society must be honoured by giving proper place for setting up their memorials. [p61]  For example, Shri Narayan Guru.  I think you know him personally.  Millions of people have been requesting for it.  Even in the Parliament such a request has been made.  I think the people concerned have come forward to make all arrangements for the statue to be built in a very befitting way.  The only thing is that the land has to be given. The land has to be given urgently. I think that should not be delayed. I am sure that some steps were taken in this regard and some assurances were also given but they are not being fulfilled yet.  Shri Narayan Guru is a person whose message is very relevant on the day.  I am sure his messages will enthuse the coming generations not only in India but also abroad.
         
SHRI JAGDISH TYTLER (DELHI SADAR): Thank you very much, Sir, for giving me this opportunity.  I rise to support the Bill to make special provisions for the National Capital Territory of Delhi.
          Sir, I have been hearing a number of Members speaking on this subject.  I would like to put it on record and especially I would like my friends from Bihar to listen me.  Paswan Sahib, I would like my friends from Bihar to listen.  Many-many years ago people from Bihar, Rajasthan and UP came to Delhi and they lived in very poor colonies.  S/Shri Sajjan Kumar, H.K.L. Bhagat and the youth leader late Shri Sanjay Gandhi went to Shrimati Indira Gandhi and said that these poor people must be given a proper place to live.  I remember the Jan Sangh or the Janata Party at that time said that these people are outsiders but then Shrimati Indira Gandhi said that Delhi belongs to whole of India and everybody has a right to come and stay wherever he wants.  In the first 20 Point-Programme 7 lakh people, who had come Bihar, UP and Rajasthan, were given 25 yards of land in Delhi.  That was a beginning made by the leader of Congress Party, Shrimati Indira Gandhi and today that 7 lakh people have become 72 lakh now.
MR. SPEAKER: In how many years this has happened?
SHRI JAGDISH TYTLER : By this I just wanted to tell you that we have such a big heart.  दिल्ली का दिल बहुत बड़ा है।   We planned for them and that is how this Master Plan came.  The first priority in the Master Plan was, of course, improving Delhi, improving sanitation, improving water availability and also giving houses to the poor people. That is how it was planned.  Shri Shahnawaz Hussain is not here.  It was that Master Plan on which you sat for six years.   It was Shri Ghulam Nabi Azad who came, took action and initiated the Master Plan.  Later on Shri Jaipal Reddy and our young Minister Shri Ajay Maken brought this into reality.  When this Master Plan was brought into reality, we lost the Municipal Corporation. Nobody knows as to why we lost the Corporation.  It is a part of the record.  In the last section of my speech I said that there were documents given in the Court by Shri Jagmohan that this should be demolished.  It was said that demolition should be carried out and reported every day to the Ministry.  It is a part of the record and I think the young Minister will verify this decision. It had created a commotion in Delhi. It made a mess of the Master Plan as the demolition started taking place.  When we started improving one thing, the other thing came and we lost. It was only because of Shri Jaipal Reddy and Shri Ajay Maken, who came and really looked at Delhi the way it should have been looked, we started giving concessions, improving things and brought Delhi to a proper sphere.  Because of all these the Congress Party has won Delhi elections third time.  People started realising that these are the people who are giving us a beautiful Delhi.  These are the people who are looking after the poor people and also the urban villages.[R62]  That is why, suddenly, it all came out that Delhi needs improvements. I am glad that this Bill has been brought.  It is not that the Bill has been brought in 2009.  The Bill has already been brought.   It has been approved and all these concessions have been given.  But it just needed technical feasibility.  It has been cleared from the Centre and it has to go to the State.  If they take pre-caution, I think by the end of 2009 all this would be finished and Delhi would have a proper Master Plan.  Delhi would have a proper planning done.  It is not that something more has to be done, like one of my friends has said.  Delhi has got a beautiful Master Plan.  This Master Plan will be implemented and future generations will remember this Master Plan because on the basis of this, we will have beautiful and clean Delhi.   Delhi will be a modern city in the world.  The Commonwealth Games are coming up and I hope one day we may have Olympics in Delhi.  This is what we have given as a vision today.  Universities have come up and IITs have come up.  What more does this Master Plan can give us?  I want to congratulate Shri Ajay Maken and Shri Jaipal Reddy for giving us this thing.
          I just want to say one thing more.  Of course, we must not forget the sufferings which were caused because of Mr. Jagmohan’s orders.  People lost their homes and businesses.  It is not because of Congress Party or not because a Minister from the Congress ordered this.  This is what was there in the Supreme Court affidavit which was given by the previous Government.  Nobody has gone through this. You must go through this.  Who is responsible for that?  People have lost their hard earning.  People who had come from Pakistan as refugees suffered. People had come from Bihar, Rajasthan, Uttar Pradesh, etc.  They all wanted to make Delhi as their home.  They enhanced Delhi’s prestige.  They brought wealth also to Delhi.  It is not that they were a burden on us.  They were not a burden on us.  Delhi became a very vibrant city.  But we must give them a proper place to live.  That is why, with the help of Mrs. Sonia Gandhi and the with the help of Members of Parliament from Delhi, we have given you this Master Plan. I want to congratulate and thank the young Minister and Shri Jaipal Reddy for making Delhi a beautiful city.
          With these words, I support this Bill.
                                                                                               
श्री अजय माकन : अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से माननीय सदस्यों को धन्यवाद करना चाहूंगा, जिन्होंने इस चर्चा के अंदर हिस्सा लिया और अपने सकारात्मक सुझाव दिए।
          दिल्ली एक ऐसा शहर है, जिसे हम ब्राडली दो हिस्सों में बांटना चाहें, तो एक हिस्सा सर्विस यूजर्स का है और दूसरा सर्विस प्रोवाइडर्स का है। अगर हमें दिल्ली को वर्ल्ड क्लास सिटी बनाना है, दिल्ली को दुनिया के सबसे अच्छे शहरों में से एक बनाना है, तो जहां हम सर्विस यूजर्स की बढ़ोतरी के लिए और उनके रहन-सहन के लिए और साथ-साथ सर्विस प्रोवाइडर्स तथा गरीब लोगों को हम भूल जाएं, तो दिल्ली कभी भी वर्ल्ड क्लास सिटी नहीं बन सकती है। यही हम लोगों का, यूपीए सरकार का काम करने का तरीका रहा है। इसी वजह से हम मास्टर प्लान ले कर आए और समय-समय पर हम बिल संसद में लाए हैं। अध्यक्ष महोदय, मैं आपको बताना चाहूंगा कि हमारे संसद सदस्य दिल्ली विधान सभा के अंदर लीडर आफ ओपोजिशन बने हैं। मुझे याद है जब सीलिंग और डिमोलिशन की चर्चा होती थी, आपको भी ध्यान होगा, उन्होंने संसद के अंदर बार-बार कहा है कि पूरी दिल्ली तबाह हो जाएगी। दिल्ली के अंदर पांच लाख मकान सील हो जाएंगे, दस लाख मकान सील हो जाएंगे और दिल्ली पूरी खत्म हो जाएगी। मैं आपको बताना चाहूंगा कि व­ाऩ 2001 की जनगणना के हिसाब से दिल्ली के अंदर 33.80 लाख सैंसेस हाउसिस हैं। सैंसेस की फिगर कहती है कि 33.80 लाख सैंसेस हाउसिस में से 10.64 लाख सैंसेस हाउसिस के अंदर नॉन रेजिडेंशियल एक्टिविटीज होती हैं। अगर हम सुप्रीम कोर्ट के 16 फरवरी, 2006 के आर्डर को सीधे-सीधे इम्प्लिमेंट करते, तो दिल्ली के अंदर 10,74,000 मकानों के ऊपर ताला लग जाता। ऐसी भयानक स्थिति दिल्ली के अंदर पैदा हो गई थी। आज मैं सदन को रिकार्ड्स के माध्यम से बताना चाहूंगा कि पूरी दिल्ली के अंदर 10,64,000 में से मात्र 5596 दुकानें सील हैं और उनमें एक भी छोटी दुकान नहीं है। सभी बड़े-बड़े शोरूम्स हैं, जिन लोगों ने वायलेशंस इस हद तक कर रखी थी कि कानून से उन्हें किसी भी हालत में राहत नहीं दी जा सकती थी। अगर हम टोटल परसेंटेज में देखें तो केवल 0.5 परसेंट ऐसे हैं और जिन्होंने बड़े वायलेशन किए हैं, केवल उन्हीं को पनिश किया गया है। हम लोगों ने 99.5 परसेंट दिल्ली के लोगों को परमानेंट राहत दी।[r63]   यह हम लोगों का काम करने का तरीका और मकसद था। अगर आज हम इन्हें केवल राहत देने की बात के साथ दूसरे रेवेन्यू आस्पेक्ट्स से भी सोचें, जब हमने इन्हें परमानेंट रिलीफ दिया तो इनसे कंवर्जन चार्जेज लिया और हमने इनसे पार्किंग चार्जेज भी लिए। हमने कहा कि आप कंवर्जन चार्जेज और पार्किंग चार्जेज भी दीजिए ताकि आपके ही पैसे से हम आपको रेगुलराइज़ करेंगे और हम आप ही के पैसे आपसे लेकर आपके लिए मल्टी लेवल पार्किंग बनाएंगे।
          अध्यक्ष महोदय, मुझे आज सदन को बताते हुए खुशी होती है कि केवल इन दो सालों के अंदर 528 करोड़ रुपए म्युनिसिपल कार्पोरेशन के पास इकट्ठा हुआ, जिसमें से 184 करोड़ रुपए पार्किंग के लिए, इन्हीं लोगों से लेकर, इन लोगों के लिए 184 करोड़ रुपए मल्टी लेवल पार्किंग, इन मार्केट्स के अंदर बनाने का काम शुरू हो रहा है। यह हम लोगों की प्लानिंग का नतीजा है। हर साल म्युनिसिपल कार्पोरेशन को 342 करोड़ रुपए मिलेंगे, जोकि इन सब व्यासायिक केन्द्रों के कमर्शियल स्ट्रीट्स की डेवलपमेंट के ऊपर कार्पोरेशन को खर्च करने के लिए जो रिसोर्सेस हैं, वे यहीं से मिलेंगे। हम लोगों ने एक ऐसा फार्मूला तैयार किया, कि न केवल हमने इन्हें रेगुलराइज़ किया बल्कि इन व्यासायिक केन्द्रों को आगे कैसे डेवलप कर सकें और कैसे यहां पर पार्किंग और दूसरी फैसिलिटीस दे सकें, उसका भी हमने साथ-साथ रास्ता तैयार किया।
          अध्यक्ष महोदय, मैं एक बात और कहना चाहूंगा, अभी बहुत सारे लोगों ने कहा। माननीय शाहनवाज़ साहब तो अभी यहां उपस्थित नहीं हैं, माननीय त्रिपाठी जी ने कहा कि आप बार-बार क्यों यह बिल लेकर आते हैं और कब तक लेकर आएंगे। आप परमानेंट रिलीफ क्यों नहीं देते, एक-एक साल का आप आक्सीजन क्यों देते हैं। मैं आपको बताना चाहूंगा कि जिन केटेगिरीज़ को हम लोगों ने रिलीफ दिया है, अगर आप स्टेटमेंट ऑफ ऑब्जैक्ट एंड रीजंस पढ़ें तो आपको स्वत: समझ में आ जाएगा कि हम लोगों ने परमानेंट रिलीफ दिया है।
          अध्यक्ष महोदय, दिल्ली के अंदर लगभग साढ़े पांच लाख झुग्गी, स्लम्स हैं। इन सारे स्लम्स को एक दिन के अंदर रिसेटल नहीं किया जा सकता तो हमें उस समय तक इन्विटी देनी पड़ेगी, जब तक कि हम लोग इन स्लम्स को वहीं के वहीं रिहेबिलिटेट न कर सकें। इसलिए हमने कहा है कि जब तक इन स्लम्स को रिहेबिलिटेट न किया जाए, जिसका प्रोविजन हमने मास्टर प्लान के अंदर दिया है। जिसके ऊपर ऑलरेडी हम लोगों का काम शुरु हो चुका है। मैं आपको बताऊंगा कि हम लोगों ने क्या किया है और कितना पैसा हमने खर्च किया है, कितने मकान बनाए हैं। जब तक हम इन सब लोगों को वहीं के वहीं सेटल करने का प्रावधान शुरू नहीं करते, तब तक इनके लिए छत की रक्षा करने का काम भी हमारा है। दूसरी केटेगिरी हॉकर्स की आती है। हमारी नेशनल वेंडर्स पॉलिसी यह कहती है कि दो से तीन प्रतिशत टोटल पापुलेशन का हॉकिंग जौन होना चाहिए। उनके स्कवार्टर्स के लिए स्कवाटिंग जौन बना कर, ताकि वे ट्रेफिक को कोई नुकसान न पहुंचा पाएं, पेडिस्ट्रियन मूवमेंट्स को रोक न पाएं। उस हिसाब से दिल्ली के अंदर भी तीन से चार लाख हॉकिंस पेसेज़, स्कवाटिंग पेसेज़ बनाने हैं और यह काम एमसीडी को करना है। जब तक यह काम एमसीडी नहीं करेगी, हॉकर्स को प्रोटेक्शन देना हमारा काम है। मास्टर प्लान के अंदर हम लोगों ने दो से तीन प्रतिशत एमसीडी को प्रोवाइड करने के लिए कहा है। लेकिन जब तक एमसीडी इसे प्रोवाइड नहीं करेगी, हम लोगों को तो उन्हें प्रोटेक्शन देना है। हम लोग गरीब आदमी हॉकर्स को आज डंडा लगा करके, पुलिस का आदमी या म्युनिसिपल कार्पोरेशन मार-मार कर अगर हटा दे, जो सुबह रोज कमाते हैं और शाम को उसी का खाते हैं। अगर हम लोग उनकी तरफ ध्यान न दें तो यह उनके ऊपर अन्याय होगा, जिसको हम लोगों ने इस बिल के तहत आगे किया। इसी तरीके से वेयरहाउसेस और गोडाउंस हैं। हम लोग जो जोनल प्लान लेकर आ रहे हैं, उसके अंदर हम लोग स्पॉट जोनिंग करके कोशिश कर रहे हैं कि उन्हें हम वहीं के वहीं रेगुलराइज़ करें। लेकिन जौनल प्लान आने में एक साल का समय लगेगा। इसलिए हम लोगों ने इसके लिए एक साल का समय लिया। इसके अलावा हमने अन्य जो अनआथोराइज़्ड कालोनियां हैं, जो रेगुलराइजेशन के प्रोसेस में हैं, जब तक वे रेगुलराइज़ नहीं होंगी, उनके ऊपर मास्टर प्लान लागू नहीं होगा और वह रेगुलराइजेशन इसी एक साल के अंदर होना है, इसलिए हमने उन लोगों के लिए एक साल का समय लिया है। ऐसा नहीं है कि हमने परमानेंट रिलीफ नहीं दिया है, हमने हरेक केटेगिरीज़ के लिए परमानेंट रिलीफ दिया है। सिर्फ उसके लिए समय रखा है ताकि जो स्टेचुटरी रिकवायरमेंट इन सब चीजों की है, वह एक साल के अंदर पूरी हो सकें और यह होते ही  सब को रिलीफ मिलता जाएगा। तब इन सब को परमानेंटली रिलीफ मिलेगा। ये ज्यादातर गरीब लोग हैं, जो सर्विस प्रोवाइडर्स हैं, जैसे मैंने कहा कि जिन्हें हमने रिलीफ देने की बात कही है।
          अध्यक्ष महोदय, मैं एक और चीज जरूर बोलना चाहूंगा, जो हमारी अमनेस्टीज स्कीम, आम माफी के बारे में है।[S64]            अध्यक्ष महोदय, हमारे बी.जे.पी. के साथी ने आम-माफी, जनरल एमनैस्टी स्कीम की बात कही। मैं इस बारे में बताना चाहता हूं कि हमने जो एलाऊ किया है, उसके अनुसार बेसमेंट के अंदर कोई भी आदमी, किसी भी जगह पर, प्रोफैशनल एक्टीविटीज शुरू कर सकता है। हमने एलाऊ किया है कि एक प्लॉट में 200 स्क्वेयर फीट तक की चार छोटी दुकान, पूरी दिल्ली में, कहीं भी खोली जा सकती हैं, जिनमें रोजमर्रा की चीजें बेची जाएं। इस प्रकार, कोई भी आदमी, एक प्लॉट में, चार दुकानें खोल सकता है। हमने 3000 के करीब सड़कों को चिन्हित किया है। उन सड़कों पर कोई भी, किसी भी प्रकार की, दुकानें खोल सकता है। अगर आम-माफी की योजना आ जाए, तो आप सोच लीजिए कि उस स्थिति के अंदर क्या होगा। हमने एक प्लॉट में चार दुकानें खोलने के लिए एलाऊ किया है और अगर आम-माफी की योजना लागू हो गई, तो जहां एक छोटी दुकान है, वहां और दुकानें नहीं खुल पाएंगी। वहीं पर फुल स्टॉप लग जाएगा। अगर जनरल एमनैस्टी की योजना लागू हो जाती है, तो जो प्रोफैशनल्स बेसमेंट में काम कर रहे हैं, केवल उन्हीं को लाभ मिलेगा। कल को हमारे बच्चे यदि वकील बनते हैं या चार्टर्ड एकाउंटेंट बनते हैं और यदि उन्हें प्रैक्टिस करने के लिए जगह चाहिए, तो उन्हें जगह इसलिए नहीं मिल पाएगी, क्योंकि वे लोग लॉ-एबाइडिंग हैं। अतः उन लोगों को नुकसान होगा और जो लॉ-ब्रेकर हैं, उन्हें इससे फायदा होगा। इसलिए हमारा मानना है कि आम-माफी की स्कीम से, जनरल एमनैस्टी की स्कीम से खराब स्कीम कोई नहीं हो सकती। यह हम नहीं कह रहे हैं। इनकी अपनी पार्टी के लोगों ने भी यही कहा है।
          महोदय, मैं बताना चाहूंगा कि मल्होत्रा कमेटी की जिस जनरल एमनैस्टी स्कीम की बात ये लोग कर रहे हैं; दिनांक 7 जून, 1999 को, मल्होत्रा साहब ने जनरल एमनैस्टी स्कीम डायरैक्ट गवर्नमेंट ऑफ इंडिया को सबमिट की। दिनांक 7 जून, 1999 को सबमिट करते ही, दिनांक 23-11-1999 को, जिनका नाम टाइटलर साहब ले रहे थे, जिन्हें लोक सभा के चुनाव में हराकर मुझे यहां आने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है, उन्होंने दिनांक 23-11-1999 को ही जनरल-एमनैस्टी स्कीम रिजैक्ट कर दी। केवल रिजैक्ट ही नहीं की, बल्कि दिनांक 4 दिसम्बर, 1999 को 15 दिन के अंदर-अंदर ही, उन्होंने डी.डी.ए. के तमाम ऑफीसर्स को तलब किया और कहा कि वी.सी., डी.डी.ए. ने, जो मल्होत्रा कमेटी के मैम्बर थे, कैसे हमसे पूछे बगैर अपनी हामी भरी, इसलिए उनकी एक्सप्लेनेशन कॉल हुई? आप जिस आम-माफी की बात करते हैं, वह दिल्ली की जनता के हित में नहीं है। सिर्फ उन्हीं मंत्री जी ने नहीं, बल्कि उसके बाद में, एम.सी.डी. के मेयर ने जब लिखकर भेजा, तो हमारे लोक सभा के एक और माननीय सदस्य ने, जो कर्नाटक से आते हैं, उस समय वे मंत्री थे, उन्होंने 6 फरवरी, 2002 को इस स्कीम को रिजैक्ट किया। इस प्रकार, बार-बार, इनकी अपनी पार्टी के सदस्य, इनकी अपनी पार्टी के मंत्री, वे भी कोलिशन गवर्नमेंट के, जो कोई दूसरी पार्टी नहीं है, बल्कि इनकी अपनी पार्टी के सदस्य थे। अपनी पार्टी के मंत्री बार-बार जिस जनरल एमनैस्टी स्कीम को रिजैक्ट करते चले गए, तो भा.ज.पा. को या इनके एम.पीज. को क्या मॉरल राइट है कि वे हमसे कहें कि आप इस एमनैस्टी स्कीम को मानें और जनरल एमनैस्टी स्कीम को लागू नहीं करेंगे, तो हम दिल्ली के अंदर हंगामा करेंगे। इसी वजह से दिल्ली की जनता, इन सब चीजों को जानती है और उसने पिछले चुनावों के अंदर, इन्हें सही रास्ता दिखा दिया।
          महोदय, आज कुछ माननीय सदस्यों ने पूछा कि हम कितने मकान बना रहे हैं और क्या कर रहे हैं। श्री शाहनवाज जी ने पूछा। काश, वे यहां होते, तो मैं उनके सामने जवाब देता, लेकिन शायद उन्हें पता था कि जवाब मेरे पास है। इसलिए वे यहां पर नहीं हैं। उन्होंने पूछा था कि श्री जयपाल रेड्डी जी ने 1 लाख मकान बनाने का वायदा किया था, क्या हुआ? श्री जयपाल रेड्डी जी के डायरैक्शन्स पर, श्रीमती सोनिया गांधी जी की डायरैक्शन्स पर, डॉ. मनमोहन सिंह् जी की डायरैक्शन्स पर और जयपाल रेड्डी जी की लीडरशिप में 1 लाख नहीं, बल्कि 1 लाख 13 हजार मकान गरीब लोगों के लिए बनाने की शुरूआत की है। मैं आपको बताना चाहूंगा कि 15 हजार के लगभग मकान बनकर तैयार हो चुके हैं। 6 हजार मकानों की शुरूआत, पिछले रविवार को मैंने कठपुतली कौलोनी के अंदर की है और वजीरपुर था वसंत विहार के अंदर हम लोग, आने वाले रविवार को शुरूआत करने जा रहे हैं। वहां भी हम लगभग 10 हजार मकान बना रहे हैं। इस प्रकार मैं बताना चाहता हूं कि हम लोगों ने 1 लाख 13 हजार मकान बनाने की शुरूआत की है, जिसमें आलरेडी काफी काम हो चुका है। केवल उन्हें बांटना बाकी है। जो मकान हम गरीब लोगों के लिए बना रहे हैं, उनमें सबसे अच्छी बात यह है कि हम लोग उन्हें वहीं की वहीं मकान बना रहे हैं, जहां वे वर्तमान में रहते हैं। इससे पहले का प्रावधान यह होता था कि उन्हें उठाकर के, उन्हें कान पकड़कर दिल्ली के एक कोने में ले जाया करते थे। एक जगह से उन्हें उठाकर के 50-60 किलोमीटर दूर जंगल में फेंक देते थे।[r65]                  हमने कहा कि झुग्गी-झोंपड़ी के लोग, जो हजारों किलोमीटर दूर अपना मकान छोड़कर, अपना गांव छोड़कर दिल्ली में काम के लिए आता है तो उसको अधिकार है कि अपने काम के स्थान के नजदीक ही मकान और फ्लैट बनाकर दिया जाये। सदन को बताते हुए मुझे खुशी हो रही है कि लगभग 40 गज का सुपर बिल्ट-अप एरिया वाले फ्लैट हर एक झुग्गी वाले को हम लोग यहां पर देने का प्रावधान कर रहे हैं। इससे पहले आज तक के इतिहास में कभी भी इस तरीके का काम दिल्ली में नहीं हुआ। आप लोगों को भी 6-7 साल काम करने का मौका मिला, लेकिन आप लोग नहीं कर पाये। आज साथ में गरीब लोगों को मकान दिल्ली में और देने की बात एक और माननीय सदस्य ने कही। मैं बताना चाहूंगा, जैसा मैंने कहा कि 52 हजार हम इन सीटू रिहैबिलिटेशन झुग्गी-झोंपड़ी को वहीं के वहीं बसाने का काम कर रहे हैं। साथ में हमने मास्टर प्लान में रखा है कि 15 per cent of the FAR or 35 per cent of the number of dwelling units, whichever is higher, दोनों में से जो ज्यादा होगा, कोई भी दिल्ली में कंस्ट्रक्शन है, वह इकोनोमिकली वीकर सैक्शन (ई.डब्लू.एस.) हाउसिंग के लिए रिजर्व होगा। दिल्ली के अन्दर मकानों की कमी केवल इकोनोमिकली वीकर सैक्शन के मकानों की ज्यादा है और पूरे हिन्दुस्तान में 99 परसेंट जो टोटल हाउसिंग की रिक्वायरमेंट है, उसका 99 परसेंट इकोनोमिकली वीकर सैक्शन का है। लेकिन दिल्ली के अन्दर हम लोगों ने कहा है कि कम से कम एक तिहाई मकान, जब कभी भी अमीर का बनेगा तो कम से कम एक तिहाई इनके लिए रिजर्व होगा। यह भी अपने आपमें पहली बार है, अब तक के मास्टर प्लान में यह प्रावधान नहीं है।
          मैं माननीय सदस्य का धन्यवाद करना चाहूंगा, जिन्होंने मलिन बस्ती और गंदी बस्ती की बात यहां पर रखी है। मैं माननीय सदस्य को यहां पर बताना चाहता हूं कि लॉ डिपार्टमेंट का हिन्दी डिवीज़न इसको ट्रंसलेट करता है। हम आपकी भावनाओं से उनको बाकायदा राइटिंग में अवगत कराएंगे और हम कोशिश करेंगे कि आगे से इन शब्दों का इस्तेमाल न किया जाये और इसके अन्दर आपकी भावनाओं से मैं खुद व्यक्तिगत तौर पर और एडमिनिस्टर्ड सहमत हूं और यह टर्म इन बस्तियों के लिए कम से कम इस्तेमाल नहीं होनी चाहिए।
          त्रिपाठी जी ने बार-बार एक बात कही कि हमारे बिल रिजैक्ट हुए हैं। त्रिपाठी जी, मैं आपको बताना चाहूंगा, शायद आपकी जानकारी में नहीं है कि बिल रिजैक्ट पुराने होने की बात तो छोड़ दीजिए, हम लोगों के जो बिल्स यहां पर इस मुताल्लिक सीलिंग और डिमोलीशन के मुताल्लिक पास किये हैं, यहां इस हाउस के अन्दर जो एक्ट हमने पास किये हैं, रिजैक्ट होने की बात तो दूर रही, हां, चेलैंज सुप्रीम कोर्ट में हर एक्ट को किया गया। रिजैक्ट होने की बात तो दूर रही, किसी भी एक्ट के ऊपर सुप्रीम कोर्ट ने स्टे तक नहीं दिया। मैं आपसे निवेदन करूंगा कि इस जानकारी को आप सही कर लें। ऐसी बात नहीं है।
SHRI BRAJA KISHORE TRIPATHY : आपने अपने ऑब्जैक्ट्स एंड रीजंस में दिया है, I have quoted from the Statement of Objects and Reasons.
SHRI AJAY MAKEN: इसमें रिजैक्ट किसी और चीज़ का होगा, it may be about something else. What I am saying is something on record.
SHRI BRAJA KISHORE TRIPATHY : It is there in the Statement of Objects and Reasons.  Let me just read it out. It says:
The Delhi Laws (Special Provisions) Act, 2006 was enacted to address the several orders and directions passed by the Supreme Court … ”   SHRI AJAY MAKEN:  Where has it been rejected? You used the word “rejected.”  Again and again you said that the Acts of Parliament were rejected.  … (Interruptions)  If your intention was not what you are saying now, then I stand corrected. Otherwise, I want to tell you that no Bill passed by the Parliament on these matters were ever rejected.  Leave aside being rejected, no stay was even being granted by the Supreme Court.  So, it is a matter of record.  I just want to clarify.
          मैं एक चीज़ और बोलना चाहूंगा, एक माननीय सदस्य ने कहा कि कितने मकान बनाये जा रहे हैं और कितने मकान बनाये हैं। मैं बताना चाहूंगा, जैसा मैंने कहा कि 1.13 लाख मकानों की जयपाल रेड्डी जी की स्कीम थी, 1.13 लाख मकान हम लोग गरीबों के लिए दिल्ली में बना रहे हैं। साथ-साथ मैं यह भी बताना चाहूंगा...( व्यवधान)
प्रो. रासा सिंह रावत : कितने बन गये हैं?
अध्यक्ष महोदय : रनिंग कमेंट्री नहीं करें।
श्री अजय माकन: साथ-साथ 15,660 ड्वैलिंग यूनिट्स के ऊपर काम चल रहा है और ये 1.13 लाख के अलावा हैं। इन 1.13 लाख में से, जैसा मैंने कहा, हमारे लगभग 15 हजार मकान जवाहर लाल नेहरू अर्बन रिन्युअल मिशन में बन चुके हैं, लगभग 6000 मकानों का पिछले हफ्ते हमने शिलान्यास किया है और इस हफ्ते दोबारा से हम लोग 5.7 हजार मकानों का करने जा रहे हैं।[R66]    सब की स्कीम बन गयी हैं। कुछ बन चुके हैं, कुछ बन रहे हैं और लोग उसके अंदर जाना शुरू हो गए हैं। यह काम हमने किया है।  आप लोगों को भी गत 6-7 सालों का मौका मिला था, लेकिन आप एक भी काम नहीं कर पाए थे। मेरा साथ में यह भी कहना है। इसके अंदर इस वर्ष अभी तक 15,660 ड्वेलिंग यूनिट्स पर काम चल रहा है और वर्ष 2009-2010 तक हम लोग 1,094 करोड़ रूपए डीडीए के माध्यम से हाउसिंग के बनाने के लिए, अकेले उसमें खर्च कर रहे हैं।  मैं माननीय सदस्य को यह भी बताना चाहता हूं।
          मैं अंत में आप तमाम सदस्यों का जिन्होंने यहां बहुत कांसेप्टिव सुझाव दिए हैं, उनका धन्यवाद करते हुए सदन से निवेदन करना चाहूंगा कि वह इस बिल को पास करे और हम लोगों की मदद करे कि हम दिल्ली के गरीब लोगों की और मदद कर सकें। 
 
MR. SPEAKER: The question is:
“That the Bill to make special provisions for the National Capital Territory of Delhi for a further period up to the 31st day of December, 2009 and for matters connected therewith or incidental thereto, be taken into consideration.”   The motion was adopted.
MR. SPEAKER: Now the House will take up clause-by-clause consideration of the Bill.
          The question is:
                   “That clauses 2 to 6 stand part of the Bill.”   The motion was adopted.
 
Clauses 2 to 6 were added to the Bill.
 
Clause 1, the Enacting Formula, the Preamble and the Long Title were added to the Bill.
 
SHRI AJAY MAKEN: I beg to move:
“That the Bill be passed.” MR. SPEAKER: The question is:
“That the Bill be passed.”   The motion was adopted.