State Consumer Disputes Redressal Commission
O.I.C Ltd vs Smt. Renu Agarwal on 19 September, 2023
Cause Title/Judgement-Entry STATE CONSUMER DISPUTES REDRESSAL COMMISSION, UP C-1 Vikrant Khand 1 (Near Shaheed Path), Gomti Nagar Lucknow-226010 First Appeal No. A/1586/2018 ( Date of Filing : 04 Sep 2018 ) (Arisen out of Order Dated 17/07/2018 in Case No. C/37/2017 of District Bareilly-II) 1. O.I.C Ltd Bareilly ...........Appellant(s) Versus 1. Smt. Renu Agarwal Bareilly ...........Respondent(s) BEFORE: HON'BLE MR. JUSTICE ASHOK KUMAR PRESIDENT HON'BLE MR. Vikas Saxena JUDICIAL MEMBER PRESENT: Dated : 19 Sep 2023 Final Order / Judgement (सुरक्षित) राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग , उ0प्र0, लखनऊ अपील सं0- 1586/2018 (जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग द्वितीय, बरेली द्वारा परिवाद सं0- 37/2017 में पारित निर्णय व आदेश दिनांक 17.07.2018 के विरुद्ध) दि ओरियण्टल इंश्योरेंस कम्पनी लि0, 85-ए, प्रथम तल रघुवंशी काम्प्लेक्स, सिविल लाइंस, पुलिस स्टेशन-कोतवाली, जिला बरेली द्वारा डिवीजनल मैनेजर। ........अपीलार्थी बनाम 1.
श्रीमती रेनू अग्रवाल पत्नी श्री जय शंकर अग्रवाल, निवासी 305-ए, पुरानी घी की मंडी, आलमगिरी गंज, बरेली।
2. मेडी असिस्ट इंडिया, प्रा0लि0 (टी0पी0ए0), टावर ''डी'' चतुर्थ तल, आईबीसी, नॉलेज पार्क, 4/1 बेनरघाटा रोड, बैंगलोर-560029.
.........प्रत्यर्थीगण समक्ष:-
मा0 न्यायमूर्ति श्री अशोक कुमार, अध्यक्ष।
मा0 श्री विकास सक्सेना, सदस्य।
अपीलार्थी की ओर से उपस्थित : श्री वासुदेव मिश्रा, विद्वान अधिवक्ता। प्रत्यर्थी सं0- 1 की ओर से उपस्थित : श्री सुशील कुमार शर्मा, विद्वान अधिवक्ता। प्रत्यर्थी सं0- 2 की ओर से उपस्थित : कोई नहीं। दिनांक:- 06.10.2023 मा0 श्री विकास सक्सेना , सदस्य द्वारा उद्घोषित निर्णय
परिवाद सं0- 37/2017 रेनू अग्रवाल बनाम दि ओरियण्टल इं0कं0लि0 व एक अन्य में जिला उपभोक्ता आयोग द्वितीय, बरेली द्वारा पारित निर्णय एवं आदेश दि0 17.07.2018 के विरुद्ध यह अपील योजित की गई है।
विद्वान जिला उपभोक्ता आयोग ने परिवाद स्वीकार करते हुए निम्नलिखित आदेश पारित किया है:-
''परिवाद इस प्रकार स्वीकार किया जाता है कि प्रतिपक्षीगण को यह निर्देश दिया जाता है कि परिवादिनी से उसके चिकित्सा व्यय का बीमा दावा प्राप्त होने के दो माह के अन्तर्गत उसका निस्तारण कर बीमा पालिसी के अनुसार भुगतान करना सुनिश्चित करे।
मानसिक एवं शारीरिक कष्ट हेतु परिवादिनी प्रतिपक्षीगण से रू0 10,000/- प्राप्त करने की अधिकारिणी है। एक माह के अन्तर्गत उक्त धनराशि का भुगतान न होने पर परिवादिनी उक्त धनराशि पर परिवाद संस्थित होने की तिथि से उक्त धनराशि का भुगतान होने तक उस पर 7 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज प्राप्त करने की अधिकारिणी होगी। वाद व्यय हेतु परिवादिनी प्रतिपक्षीगण से रू0 10000/- प्राप्त करने की अधिकारिणी है।'' प्रत्यर्थी सं0- 1/परिवादिनी का परिवाद पत्र में संक्षेप में कथन इस प्रकार है कि प्रत्यर्थी सं0- 1/परिवादिनी के पति जय शंकर अग्रवाल पंजाब नेशनल बैंक में खाताधारक था जिसने वर्ष 2015 से पी0एन0बी0 ओरियण्टल रॉयल मेडी क्लेम पालिसी सं0- 224600/48/2015/3547 वर्ष 2015 रू0 5,00,000/- की ली थी। प्रत्यर्थी सं0- 1/परिवादिनी उक्त पालिसी से आवृत थी। उक्त पालिसी दि0 13.02.2016 से दि0 12.02.2017 तक के लिये नवीकृत की थी। दि0 06.08.2016 को प्रत्यर्थी सं0- 1/परिवादिनी ने जीवन ज्योति अस्पताल, बरेली में गर्भाशय सम्बन्धी समस्या हेतु चिकित्सीय परामर्श लिया और उसे उसी दिन उक्त अस्पताल में भर्ती कर लिया गया तथा लैप्रोस्कोपिक शल्य चिकित्सा की सलाह दी गई एवं उसी दिन शल्य चिकित्सा कर दी गई व सात दिन की औषधियां देकर दो दिन बाद अस्पताल से छुट्टी कर दी गई। प्रत्यर्थी सं0- 1/परिवादिनी को मूत्र सम्बन्धी समस्या हुई जिसके लिये उसने डॉ0 शरद से दि0 19.09.2016 को परामर्श लिया, जिन्होंने रक्त एवं मूत्र के परीक्षण का सुझाव दिया। उक्त परीक्षण दि0 20.09.2016 को किये गये। तदोपरांत के0के0 हॉस्पिटल, बरेली में डॉ0 एस0जेड0 खान से परामर्श लिया। मूत्र त्याग की लगातार समस्या रहने पर दि0 02.12.2016 को सांई हॉस्पिटल में परामर्श लिया और वहां के परामर्श पर वह दि0 05.12.2016 को सर गंगाराम अस्पताल, नई दिल्ली गई जहां उसके बांये गुर्दे का ठीक से काम करना न पाया गया और उसकी लेफ्ट पी0सी0एन0 की गई, परन्तु उसे कोई आराम नहीं मिला तब वह बाम्बे हॉस्पिटल मुम्बई गई।
प्रथम बार दि0 01.01.2011 को डॉ0 एस0डब्लू0 थट्टा के प्रमाण पत्र से प्रत्यर्थी सं0- 1/परिवादिनी को यह ज्ञात हुआ कि दि0 06.08.2016 को जीवन ज्योति अस्पताल में हुई शल्य चिकित्सा से उक्त समस्या पैदा हुई थी। प्रत्यर्थी सं0- 1/परिवादिनी का उपरोक्त उपचार में कम से कम रू0 3,56,000/- व्यय हो गया। प्रत्यर्थी सं0- 1/परिवादिनी ने उपरोक्त पालिसी के आधार पर चिकित्सा व्यय हेतु दावा समस्त औपचारिकतायें पूर्ण करते हुये दि0 26.12.2016 को प्रस्तुत किया, परन्तु उसे बिना किसी आधार के अस्वीकार कर दिया गया।
अपीलार्थी/विपक्षी सं0- 1 द्वारा प्रतिवाद में परिवाद के प्रस्तर सं0- 1 व 2 के अभिकथनों को स्वीकार किया गया है तथा परिवाद के अन्य अभिकथनों का प्रतिवाद पत्र में लिये गये अभिवाकों के अनुसार खण्डन किया गया है। यह भी कथन किया गया है कि अपीलार्थी/विपक्षी सं0- 1 द्वारा पालिसी जिन शर्तों पर निर्गत की गई थी उनके अनुसार प्रत्यर्थी सं0- 1/परिवादिनी को उपरोक्त पालिसी क्रय करने के पूर्व स्वास्थ्य सम्बन्धी सभी तथ्यों को प्रकट करना चाहिये था, जब कि प्रत्यर्थी सं0- 1/परिवादिनी द्वारा पालिसी लेने के पूर्व के रोगों को प्रकट नहीं किया गया। बीमा पालिसी के अपवर्जन खण्ड (XIX) के अनुसार दो वर्ष के अन्तर्गत कैलकुलस के लिये कोई भी भुगतान नहीं किया जाना था। प्रत्यर्थी सं0- 1/परिवादिनी का दावा प्रतीक्षा अवधि के अन्तर्गत आता है। मेडीक्लेम प्रपत्रों से यह प्रतीत होता है कि प्रत्यर्थी सं0- 1/परिवादिनी 48 महीनों के पूर्व से रोगग्रस्त थी और वह मूत्र रोग से सम्बन्धित समस्या से पीडि़त थी। उपरोक्त समस्या बीमा पालिसी से आवृत नहीं थी, जिसके कारण प्रत्यर्थी सं0- 1/पारिवादिनी का बीमा दावा अस्वीकार कर दिया गया। प्रत्यर्थी सं0- 1/परिवादिनी के पति ने प्रत्यर्थी सं0- 1/परिवादिनी की बीमारी से सम्बन्धित तात्विक बिन्दुओं को छिपाया है, इस कारण बीमा पालिसी की शर्तों का उल्लंघन हुआ है। इस प्रकार अपीलार्थी/विपक्षी सं0- 1 प्रतिपूर्ति करने का उत्तरदायी नहीं है।
प्रत्यर्थी सं0- 2/विपक्षी सं0- 2 पर्याप्त तामील होने पर भी प्रतिवाद हेतु उपस्थित नहीं हुआ। अत: विद्वान जिला उपभोक्ता आयोग द्वारा दि0 17.06.2017 को उसके विरुद्ध परिवाद एकपक्षीय रूप से अग्रसारित किये जाने का आदेश पारित किया गया।
इस मामले में प्रत्यर्थी सं0- 1/परिवादिनी की पालिसी का दावा इस आधार पर अस्वीकार किया गया है कि पालिसी जो दि0 13.02.2015 को आरम्भ हुई थी। इसके उपरांत प्रत्यर्थी सं0- 1/परिवादिनी दि0 27.12.2016 को किडनी की बीमारी के कारण अस्पताल में दाखिल हुई। पालिसी के अनुसार ''कैलकुलस की बीमारी'' पालिसी के अन्दर आवृत नहीं है। इस सम्बन्ध में अपील के साथ संलग्नक 3 ई-मेल की प्रतिलिपि है जो बीमा कम्पनी द्वारा प्रत्यर्थी सं0- 1/परिवादिनी को की गई, जिसमें यह अंकित है कि दि0 13.02.2015 को पालिसी लेने के उपरांत प्रत्यर्थी सं0- 1/परिवादिनी गुर्दे की अक्रिय होने के आधार पर अस्पताल में भर्ती हुई तथा उसका किडनी के कैलकुलस के सम्बन्ध में इलाज किया गया जो बीमा में देय नहीं है। तर्क के दौरान प्रत्यर्थी सं0- 1/परिवादिनी के सी0टी0 स्कैन दिनांकित 01.12.2016 पर आधारित किया गया, जिसमें यह दिया गया है कि प्रत्यर्थी सं0- 1/परिवादिनी के ब्योरे गुर्दे में कैल्सीफाइड पायी गई। इस रिपोर्ट में अंकित है Few Calcified Foci also seen at sight of stricture & at location of left UVJ. इस प्रकार उपरोक्त रिपोर्ट के आधार पर बीमे के क्लेम को अस्वीकार किया गया।
हमने अपीलार्थी के विद्वान अधिवक्ता श्री वासुदेव मिश्रा तथा प्रत्यर्थी सं0- 1 के विद्वान अधिवक्ता श्री सुशील कुमार शर्मा को सुना। प्रश्नगत निर्णय व आदेश तथा पत्रावली पर उपलब्ध समस्त अभिलेखों का सम्यक परीक्षण एवं परिशीलन किया। प्रत्यर्थी सं0- 2 की ओर से कोई उपस्थित नहीं है।
विद्वान जिला उपभोक्ता आयोग द्वारा यह निष्कर्ष दिया गया है कि बीमे के पालिसी में अपवर्जित बीमारी कैलकुलस डिजीज तथा रिपोर्ट में दी गई ''कैल्सीफाइड फोसी'' पृथक-पृथक बीमारियां हैं। बीमा पालिसी की शर्त सं0- 4.3 में बीमा पालिसी के अंतर्गत उन बीमारियों की तालिका दी गई है जो बीमा पालिसी के अंतर्गत आवृत नहीं हैं। इस तालिका में सं0- XII पर कैलकुलस डिजीज दी गई है। अर्थात कैलकुलस डिजीज बीमारी बीमे से आवृत नहीं है, किन्तु विद्वान जिला उपभोक्ता आयोग द्वारा यह निष्कर्ष दिया गया है कि प्रत्यर्थी सं0- 1/परिवादिनी की रिपोर्ट में दी गई ''कैल्सीफाइड फोसी'' और ''कैलकुलस'' भिन्न-भिन्न बीमारियां हैं। विद्वान जिला उपभोक्ता आयोग द्वारा के0के0 हॉस्पिटल की रेडियोलॉजी एण्ड इमेजिंग डिवीजन द्वारा तैयार रिपोर्ट दिनांकित 15.10.2016 का उल्लेख किया गया जो परिवाद में परिपत्र सं0- 89/5 के रूप में प्रस्तुत की गई है, जिसमें स्पष्ट रूप से अंकित है कि- No Echogenic Focus Suggestive of Renal Calculus seen.
उक्त रिपोर्ट के आधार पर विद्वान जिला उपभोक्ता आयोग द्वारा यह निष्कर्ष दिया गया है कि प्रत्यर्थी सं0- 1/परिवादिनी का जो इलाज हुआ है वह ''कैलकुलस'' सम्बन्धी बीमारी के लिये नहीं है। उक्त निष्कर्ष सही प्रतीत होता है, क्योंकि स्वयं बीमा कम्पनी द्वारा किये गये ई-मेल दिनांकित 16.11.2017 में प्रत्यर्थी सं0- 1/परिवादिनी का इलाज किडनी की अक्रियशीलता के आधार पर होना स्वीकार किया गया है, जिसमें कैलकुलस की बीमारी के कारण गुर्दे की अक्रियशीलता किसी भी प्रकार से स्पष्ट नहीं की गई है, बल्कि रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से यह अंकित किया गया है कि गुर्दे सम्बन्धी कैलकुलस नहीं पाया गया।
इसी प्रकार बाम्बे हॉस्पिटल, मुम्बई के प्रमाण पत्र दिनांकित 27.12.2016 एवं 01.01.2017 के सम्बन्ध में भी विद्वान जिला उपभोक्ता आयोग द्वारा केन्द्रित किया गया। इस रिपोर्ट में भी मूत्र नलिका में दर्द होने और कमी होने के आधार पर इलाज किया जाना अंकित है। इसी प्रकार चिकित्सालय द्वारा निर्गत प्रमाण पत्र दिनांकित 01.01.2017 का भी संदर्भ विद्वान जिला उपभोक्ता आयोग द्वारा लिया गया है, जिसमें मूत्र सम्बन्धी जटिलतायें होने के कारण प्रत्यर्थी सं0- 1/परिवादिनी की सर्जरी होने का प्रमाण पत्र है। इस प्रकार प्रत्यर्थी सं0- 1/परिवादिनी के समस्त इलाज में यद्यपि गुर्दे एवं मूत्र नलिका की कमी के कारण एवं जटिलता के कारण सर्जरी एवं इलाज होना अंकित किया गया है, किन्तु समस्त इलाजों में कैलकुलस सम्बन्धी बीमारी के कारण प्रत्यर्थी सं0- 1/परिवादिनी का इलाज होना साबित नहीं होता है, बल्कि रिपोर्ट में कैलकुलस सम्बन्धी जटिलता न पाये जाने का स्पष्ट अंकन है। अत: अपीलार्थी/विपक्षी सं0- 1 बीमा कम्पनी द्वारा बीमे का दावा अस्वीकार किया जाना समस्त साक्ष्य के आधार पर उचित नहीं पाया जाता है। विद्वान जिला उपभोक्ता आयोग ने उपरोक्त साक्ष्य के आधार पर उचित प्रकार से बीमे के क्लेम को स्वीकार किया जाना उचित पाया है तथा प्रत्यर्थी सं0- 1/परिवादिनी के परिवाद को स्वीकार किया है। अत: प्रश्नगत निर्णय व आदेश में हस्तक्षेप करने का कोई उचित आधार प्रतीत नहीं होता है। तदनुसार प्रश्नगत निर्णय व आदेश पुष्ट किये जाने योग्य एवं अपील निरस्त किये जाने योग्य है।
आदेश अपील निरस्त की जाती है। विद्वान जिला उपभोक्ता आयोग द्वारा पारित प्रश्नगत निर्णय व आदेश की पुष्टि की जाती है।
अपील में उभयपक्ष अपना-अपना वाद व्यय स्वयं वहन करेंगे।
प्रस्तुत अपील में अपीलार्थी द्वारा यदि कोई धनराशि जमा की गई हो तो उक्त जमा धनराशि अर्जित ब्याज सहित सम्बन्धित जिला उपभोक्ता आयोग को यथाशीघ्र विधि के अनुसार निस्तारण हेतु प्रेषित की जाये।
आशुलिपिक से अपेक्षा की जाती है कि वह इस निर्णय व आदेश को आयोग की वेबसाइट पर नियमानुसार यथाशीघ्र अपलोड कर दें।
(न्यायमूर्ति अशोक कुमार) (विकास सक्सेना) अध्यक्ष सदस्य शेर सिंह, आशु0, कोर्ट नं0- 1 [HON'BLE MR. JUSTICE ASHOK KUMAR] PRESIDENT [HON'BLE MR. Vikas Saxena] JUDICIAL MEMBER