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Lok Sabha Debates

Further Discussion On The Demand For Grant No. 82 Under The Control Of The Ministry ... on 12 July, 2019

Seventeenth Loksabha > Title: Further discussion on the Demand for Grant No. 82 under the control of the Ministry of Railway.

*श्री विनोदकुमार सोनकर (कौशाम्बी): रेलवे अनुदान वर्ष 2019-20 वर्तमान केसाथ साथ आने वाले 10 वर्षों कारोड मैप भीहै पूर्ववर्ती सरकारों कीअदूरदर्शिता केकारण रेलवे काजितना विकास औरआधुनिकीकरण होना चाहिए थाउतना होनहीं पाया है, इसके कारण भारतीय रेल दुनिया कीरेलों कीविकास गति सेपीछे छूट गयी हैऔर उसको पूरा करने केलिए वर्तमान में लगभग 50 लाख करोड़ रुपए कीआवश्यकता है । माननीय रेल मंत्री जीके द्वारा रेलवे केआधुनिकीकरण औरविकास केलिए पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल काजो प्रस्ताव दिया गया है । इससे निश्चित रूप सेरेलवे केआधुनिकीकरण, उच्चीकरण औरविकास में गति आएगी इसके साथ साथ इससे लाखों युवाओं केलिए रोजगार केअवसर उपलब्ध होंगे | सरकार नेएक अच्छा बजट पेश किया है,जिसका समाज केहर वर्ग नेस्वागत किया है। इसबार केबजट में भीयात्री किराये में कोई बढ़ोतरी नही करके रेल यात्रियों कोराहत देने काकाम किया गया है। हमारी सरकार नेसुरक्षा बढ़ाने केलिए कुछ महत्वपूर्ण कदम उठायें हैं,जो निम्रवत हैं: नैदानिक प्रणाली वाले स्मार्ट कोच,पहिया औरट्रैक कीस्थिति केबारे में अग्रिम जानकारी प्रदान करते हैं। इसके अलावा, कोच में व्हील स्लिप प्रोटेक्शन मॉनिटरिंग कीसुविधा दीगई है। आपातकालीन निकासी केलिए यात्री घोषणा औरसूचना प्रणाली केसाथ एकीकृत आगऔर धुआं पहचान इकाई केमाध्यम सेअग्नि सुरक्षा प्रदान करने केलिए औरसुधार किए जारहे हैं। रक्षा औरसुरक्षा कोबढ़ाने केलिए वीडियो एनालिटिक्स केसाथ चरणबद्ध पहचान औरअसामान्य घटना कीसुविधाएं दीजा रही हैं। भारतीय रेलवे ने 2018-19 से मुख्य लाइन कोचों केनिर्माण कोपूरी तरह सेएलएचबी डिजाइन वाली कोचों में रूपांतरित करने काफैसला किया है। पिछले कुछ वर्षों सेउत्पादन इकाइयों में एलएचबी कोचों काउत्पादन लगातार बढ़ा है। 2004-05 से 2013-14 के बीच एलएचबी कोच कानिर्माण 2327 था,जबकि 2014-15 से 2017-18 के बीच 5548 कोचों कानिर्माण किया गया। 2018-19 के दौरान 4016 कोच बनाने कीयोजना प्रस्तावित है।

रेलवे द्वारा किए गएअथक प्रयासों केकारण, पिछले वर्ष कीइस अवधि कीतुलना में 2017-18 के दौरान रेल दुर्घटनाएँ 104 सेघटकर 73 रहगई हैं। वर्ष 2018-19 (1 अप्रैल, 2018 से 30 नवंबर, 2018 तक)ट्रेन दुर्घटनाओं में पिछले वर्ष कीइस अवधि कीतुलना में 51 से लेकर 44 तककी कमी आई।

निम्नलिखित तालिका में दुर्घटनाओं काश्रेणी-वार विवरण दिया गया है: -      

दुर्घटना के प्रकार (अप्रैल से मार्च)    2016-17    (अप्रैल से मार्च)  2017-18      2017-18      (1अप्रैल से 30 नवम्बर )      2018-19 (1अप्रैल से 30 नवम्बर)      टक्कर 5 3 3 0 पटरी से उतरना 78 54 39 35           मानवयुक्त लेवल क्रॉसिंग दर्घटनाएँ 0 3 1 3 मानव रहित लेवल क्रॉसिंग दुर्घटनाएँ 20 10 8 3 ट्रेन में आगजनी 1 3 0 2 विविध प्रकार का 0 0 0 1 कुल 104 73 51 44   चालू वर्ष केदौरान अबतक 3478 मानवरहित लेवल क्रॉसिंग फाटकों कोसमाप्त करदिया गया है। प्रभावी रूप से,भारतीय रैलवे केब्रॉड गेज परसभी मानव रहित लेवल क्रॉसिंग कोसमाप्त करदिया गया है,एक कोछोड़कर। चालू वित्त वर्ष में इसे भीसमाप्त करदिया जाएगा। 16 में सेकुल 15 जोनल रेलवे अबब्रॉड गेज परमानवरहित लेवल क्रॉसिंग सेमुक्त हैं । चालू वर्ष में दिसंबर, 2018 तक,मानवरहित लेवल क्रॉसिंग दुर्घटनाएं 2017-18 में 20 केमुकाबले घटकर 3 रहगई है। 2017-18  में अबतक कासर्वाधिक 4405 किमी कारेल नवीनीकरण किया गया हैऔर वर्तमान वर्ष केदौरान 11,450 करोड़ केपरिव्यय केसाथ 5,000 किमी रेल नवीनीकरण कीयोजना बनाई गईहै। चालू वर्ष केदौरान अबतक 2812 किलोमीटर का  काम पूरा होचुका है। ट्रैक  नवीनीकरण सहित सुरक्षा संबंधी कार्यों केलिए 1 लाख करोड़ रुपये कीविशेष आरआरएसके निधि कीव्यवस्था 5 वर्ष की  अवधि केलिए किया गया है,  2017 में 20,000 करोड़ रुपये कावार्षिक परिव्यय बजट बनाया गया है। रेल/वेल्ड केटूट फूट कापता लगाने केलिए अल्ट्रासोनिक ब्रोकन रेल डिटेक्शन सिस्टम कापरीक्षण एनआर औरएनसीआर  में प्रत्येक 25 किमी ट्रैक कीलंबाई परशुरू किया गया है। परीक्षण केसफल होने केबाद, रेल/वेल्ड फ्रैक्चर कीजानकारी  समय परप्राप्त करने केलिए भारतीय रेलवे में इसप्रणाली काउपयोग किया जाएगा। किसी भीअप्रिय घटना/ आपात स्थिति केवास्तविक समय कीजानकारी प्राप्त करने केलिए कीमैन औरपैट्रोलमैन कोजीपीएस आधारित ट्रैकर्स प्रदान किए गएहैं। चालूट्रैक परकाम कररहे ट्रैकमेन कोकिसी भीट्रेन केआने कीपूर्व-चेतावनी देने केलिए वीएचएफ परआधारित ट्रेन चेतावनी प्रणाली कापरीक्षण पांच क्षेत्रीय रेलवे में पूरा किया जाचुका हैऔर भारतीय रेलवे केस्वर्णिम चतर्भुज और उसके विकर्ण मार्गों परयह प्रणाली लागू करने केनिर्देश जारी किए गएहैं।  इससे ट्रैक परकाम करने केदौरान ट्रैक अनुरक्षकों कीव्यक्तिगत सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
   
2014-18के दौरान पूर्ण मशीनीकरण केलिए प्रति वर्ष मशीनों कीऔसत मंजूरी लगभग 1547 करोड़ रूपये कीलागत से 117 हो गईहै, जबकि 2014 में यहलगभग 560 करोड़ रूपये कीलागत 63 थी। मशीनीकरण कोप्रोत्साहन देने केलिए चालू वर्ष केबजट में 7268 करोड़ रूपये कीलागत सेअब तकका सर्वाधिक 538 मशीनों कीस्वीकृति प्रदान कीगई है।
 
विषय वर्ष मशीनों की औसत मंजूरी 2004-09 2009-14 2014-18 2018-19 निधि (करोड़ रू0 में) 433  563 1547 7268 मशीन (संख्या में) 63 52  117  538   भारतीय रेलवे केरखरखाव बेड़े में पहली बार 7 उच्च आउटपुट इंटीग्रेटेड ट्रैक मशीनों कोशामिल किया गया है,जो किप्रभावी ब्लॉक घंटों कीसमान अवधि में 60 प्रतिशत ज्यादा आउटपुट देने वाली है। इसप्रकार की 22 और मशीनों काऑर्डर दिया गया  हैऔर चालू वर्ष में सभी उच्च घनत्व वाले मार्गों कोकवर करने केलिए 24 अन्य मशीनों कोलगाया जाएगा। इसका उपयोग  व्यस्त मार्गों परयातायात ब्लॉक काबेहतर उपयोग केसाथ व्यस्त मार्गों परट्रैक रखरखाव केलिए काम करने वाली मशीनों में ' बेहतर सुरक्षा औरअल्पव्यय केलिए होसकेगा । भारतीय रेलवे में पहली बार मशीन केउत्पादन कीवर्तमान क्षमता कोदोगुना करने केलिए आउटपुट बीसीएम !(एचओबीसीएम) केसाथ स्टेबलाइजर औरगिट्टी विनियमन प्रणाली कोमार्च, 2019 सेशुरू करने कीयोजना है। यहट्रैक रखरखाव में,सुरक्षा औरअल्पव्यय में सुधार केसाथ-साथ व्यस्त मार्गों पररखरखाव स्लॉट काबेहतर उपयोग करसकेगा । एक नया 3 डी अत्याधुनिक टैंपिंग सिम्युलेटर, उन्नत ट्रैक रखरखाव मशीनों केसंचालन केलिए औरट्रैक मशीन ऑपरेटर केकौशल विकास औरव्यवहारिक हैन्ड-ऑनप्रशिक्षण केलिए भारतीय रेलवे ट्रैक मशीन ट्रेनिंग सेंटर इलाहाबाद (आईआरटीएमटीसी) में पहली बार स्थापित औरचालू किया गया है। इसप्रकार काउन्नत प्रौद्योगिकी सिम्युलेटर अबतक भारत सहित केवल पांच देशों में हीउपलब्ध है। इसके परिणामस्वरूप, अत्याधुनिक टैम्पिंग मशीन काबेहतर उपयोग औररखरखाव केलिए दिए जाने वाले प्रशिक्षण में सुधार होसकेगा । मानव इंटरफेस परनिर्भरता कोकम करने केलिए प्रौद्योगिकी काउपयोग- मानव इंटरफ़ेस औरसंसाधनों केकुशल आवंटन परनिर्भरता कोकम करने औरसुरक्षा में सुधार केलिए सर्वश्रेष्ठ उपलब्ध तकनीक काचयन किया। ट्रैकों काबेहतर निरीक्षण, रखरखाव औरनिगरानी केलिए निम्नलिखित नईतकनीकों केप्रवर्तन औरप्रसार करने कानिर्णय लिया गया है ।
ग्राउंड पेनिट्रेशन रडार (जीपीआर) ट्रैक गिट्टी सतह केस्थिति कीनिगरानी करने (बैलास्ट कुशन कीसफाई, बैलास्ट पिंडिका  तैयार करना औरनिर्माण में बैलास्ट कोडालना) और 500 जीएमटी या 10 साल कीअवधि कीजांच केवर्तमान अभ्यास के  स्थान परट्रैक कीगहराई सेजांच कोप्राथमिकता देने केलिए उच्चघनत्व ट्रंक मार्गों परतेज गति केट्रेन में पायलट आधार पर  40 रैकों में एक्सल बॉक्स माउंटेड एक्सेलेरोमीटर, ट्रैक कीआवश्यकता परतत्काल ध्यान देने औरव्यवस्था कोबनाए  रखने केलिए दैनिक आधार परअलर्ट जारी करने केलिए जोनल रेलवे द्वारा मध्यवर्ती निरीक्षण केलिए मशीन वीजन केसाथ ट्रैक कंपोनेंट कंडीशन मॉनिटरिंग सिस्टम को 16 एलएचबी  आधारित ओएमएस कोच में लगाने कीयोजना है,जिससे ट्रैक घटकों कीदोष सूची प्राप्त करके मानव निरीक्षण परनिर्भरता कोकम किया जासके। रोलिंग संपर्क श्रम केकारण होने वाले फ्रैक्चर कोनियंत्रित करने औररेल केरखरखाव केलिए पूरक स्विच ग्राइंडिंग मशीनों केसाथ रेल ग्राइंडिंग मशीनें औरआरआईवी सेपूरे भारतीय रेलवे ट्रैक कोकवर करने कीयोजना है। यहफ्रैक्चर में कमी लाकर परिसंपत्तियों कीविश्वसनीयता कोबढ़ावा देगा। भारतीय रेल में पहली बार 2 स्विच रेल ग्राइंडिंग मशीन (एसआरजीएम) और 2 रेल निरीक्षण वाहन (आरआईवी) काऑडर दिया गया है। लंबे रेल पैनल कासंचालन: - रेलवे सेवा केप्रदर्शन में सुधार केलिए, लंबे रेल पैनलों कीलोडिंग/ अनलोडिंग केलिए अत्याधुनिक मशीनीकृत प्रणाली कोमंजूरी दीगई हैजिससे किलंबी रेल कापरिचालन सुरक्षित किया जासके। रेल/ वेल्ड दोषों केप्रसार कीनिगरानी औरपहचान करके ट्रैक कीसुरक्षा में सुधार करसंपूर्ण भारतीय रेलवे नेटवर्क कोकवर करने केलिए यूएसएफडी वाहन (एसपीयूआरटीकार) कीमंजूरी दीगई है। संपूर्ण भारतीय रेलवे नेटवर्क कोकवर करने केलिए, कंपोनेन्ट मोनिटरिंग, एक्सल बॉक्स मेजरमेंट औरक्लीयरेंस मेजरमेंट सिस्टम कीसुविधा केसाथ लेजर आधारित इंटीग्रेटेड ट्रैक रिकॉर्डिंग कारों कीस्वीकृत दीगई हैं। 2009-2014 में, बजट में सिर्फ 5970 किमी कादोहिरीकरण/ तीसरी औरचौथी लाइन केकार्यों कोशामिल किया गया था। इसके अलावा, 2013-14 तक,निधियों कीसामान्य रूप सेसीमित उपलब्धता केकारण, अधिकांश परियोजनाएँ संतोषजनक रूप सेप्रगति नहीं करपा रही थीं। जिसके कारण यातायात अवरोध औरमौजूदा नेटवर्क परयातायात रखरखाव ब्लॉकों कीउपलब्धता में गंभीर रूप सेकमी औरसुरक्षा कीचिंता उत्पन्न हुई थी। 2014-15 से, 14,480 किमी दोहरीकरण/ तीसरी औरचौथी लाइन केकार्यों कोबजट में शामिल किया गया है। इनक्षमता संवर्धन परियोजनाओं में तेजी लाने केलिए, संस्थागत वित्तपोषण केमाध्यम सेधन कीव्यवस्था कीगई है। इसके अलावा, परियोजनाओं कीभौतिक प्रगति केआधार पर,अंतिम मील तककी कनेक्टिविटी परियोजनाएं औरमौजूदा मार्गों कोसमाप्त करने कीपरियोजनाओं केआधार पर,प्रत्येक परियोजना केलिए पर्याप्त धनका आवंटन किया जारहा है।
पिछले 4 वर्षों में उत्तर पूर्व क्षेत्र में 970 किमी लंबी गेज कारूपांतरण पूरा किया गया है। इसप्रकार, सभी एमजी अनुभाग बीजी में परिवर्तित होगए हैं औरसंपूर्ण उत्तर पूर्व क्षेत्र में अबकोई एमजी ऑपरेशन नहीं रहा। 2014-15 से 2017-18 की अवधि केदौरान प्रति वर्ष 353.15 किमी नईलाइन/ गेज रूपांतरण/ दोहरीकरण किया गया,जबकि 2009 से 2014 की अवधि में उत्तर पूर्व क्षेत्र में प्रति वर्ष 110 किमी काम प्रति वर्ष कीऔसत सेकिया जाता था। 1,397 किमी लंबाई वाली 15 नईलाइनों कीपरियोजनाएं, जिनका कुल लागत 47,695 करोड़ रूपये हैं,यह योजना/ मंजूरी/ निष्पादन केविभिन्न चरणों में हैं जोकि उत्तर पूर्व राज्यों के क्षेत्र में आंशिक यापूर्ण रूप सेआते हैं। 482 किमी लंबाई वाली 6 परियोजनाएँ दोहरीकरण केलिए, जिनकी कुल लागत 9,305 करोड़ रूपये है,यह योजना मंजूरी/ निष्पादन केविभिन्न चरणों में हैं जोकि उत्तर पूर्व क्षेत्र केराज्यों में आंशिक यापूर्ण रूप सेआते हैं।
उत्तर पूर्व  भारत कासेवन सिस्टर राज्य (असम,मेघालय, नागालैंड, त्रिपुरा, मिजोरम, मणिपुर औरअरुणाचल प्रदेश) रेल नेटवर्क केमाध्यम सेजुड़े हुए हैं। मेघालय कोरेल मानचित्र परमाननीय प्रधानमंत्री, श्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिनांक 29.11.2014 को लाया गया जबउन्होंने मेघालय केमेंदीपाथर सेगुवाहाटी केलिए पहली ट्रेन कोहरी झंडी दिखाकर रवाना किया। त्रिपुरा कोरेलवे केब्रॉड गेज मानचित्र परलाया गया,दिनांक 31 जुलाई, 2016 कोतत्कालीन रेल मंत्री श्री प्रभु नेअगरतला-नईदिल्ली केलिए 'त्रिपुरा सुंदरी एक्सप्रेस' कोहरी झंडी दिखाई। अगरतला-नईदिल्ली राजधानी एक्सप्रेस कीशुरूआत 28 अक्टूबर, 2017 सेकी गई। यहसेवा किसी भीराजधानी एक्सप्रेस केलिए सबसे लंबे मार्ग (2,422 किलोमीटर) परप्रदान कीजाने वाली सेवा है। मणिपुर कापहला रेलवे स्टेशन जिरीबाम, ब्रॉड गेज लाइन केसाथ जोड़ा गया। माननीय प्रधान मंत्री, श्री नरेंद्र मोदी ने 27 मई, 2016 कोजिरीबाम केलिए पहली यात्री ट्रेन सेवा कोहरी झंडी दिखाई। मिजोरम में भैरबी केलिए पैसेंजर ट्रेन सेवा कोभी उनके द्वारा हरी झंडी दिखाई गई। लुमडिंग- सिलचर ब्रॉड गेज खंड काउद्घाटन 20 नवंबर, 2015 कोगेज परिवर्तन केबाद किया गया,जिससे पश्चात, असम कीबराक घाटी कोनिर्बाध रूप सेब्रॉड गेज कनेक्टिविटी मिल गई।
भारतीय रेलवे काउत्तर पूर्व क्षेत्र केदृष्टिकोण केअनुसार, सभी आठउत्तर पूर्व राज्य कीराजधानियों को 2020-21 तक ब्रॉड गेज केरेल लिंक केसाथ जोड़ दिया जाएगा। पहले, केवल गुवाहाटी हीब्रॉड गेज रेल लिंक सेजुड़ा हुआ था। इसके बाद,अरुणाचल प्रदेश औरत्रिपुरा राज्य कीराजधानियों कोजोड़ा गया है। मणिपुर केतामेंगलोंग जिले केनोनी में ईरांग नदी पर 141 मीटर कीऊँचाई वाला भारत कासबसे ऊँचे पुल कानिर्माण जिरीबाम-तुपुल-इम्फाल नईलाइन परियोजना केहिस्से केरूप में किया जारहा है। इसकी ऊंचाई संयुक्त रूप सेदो कुतुबमीनार केबराबर होगी। भैरबी-सियारंग नईलाइन परियोजना (51.3 किमी) में 70 मीटर सेअधिक ऊंचाई वाले छहलम्बे पुल होंगे। यहभारत कासबसे लंबा रेल-सह-रोड ब्रिज (4.94 किमी लंबा) है। असम राज्य में डिब्रूगढ़ केनजदीक ब्रह्मपुत्र नदी केआर-पार,भारत केप्रधान मंत्री, माननीय श्री नरेंद्र मोदी जीद्वारा  25 दिसंबर, 2018 कोराष्ट्र केनाम समर्पित किया गया । इसपरियोजना को 1997-98 में 1000 करोड़ रुपये कीलागत केसाथ स्वीकृत किया गया थाऔर अप्रैल, 2002 में भारत केतत्कालीन प्रधान मंत्री, भारत रत्न श्री अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा इसके कार्य कीशुरूआत कीगई थी। परियोजना कीकुल लागत लगभग 5,820 करोड़ रूपये है।  2016-17 में, एनएफ रेलवे केतिनसुकिया डिवीजन में डीईएमयू सेवाएं कीशुरूआत कीगई। असम केबराक घाटी क्षेत्र केसिलचर में औरत्रिपुरा केअगरतला में नएकोचिंग डिपो क्रियाशील किए गएहैं। इनउपायों केमाध्यम सेअलग-थलग पड़े नॉर्थ ईस्ट क्षेत्र कोबेहतर कनेक्टिविटी प्रदान कीगई है। वर्ष 2017-18 में 90 करोड़ रुपये कीलागत सेन्यू बोंगाईगांव में एलएचबी कोचों केनवीनीकरण केलिए कार्यशाला कीमंजूरी प्रदान कीगई। निविदा प्रदान करदी गईहै, जल्द हीशुरू होने केलिए तैयार।  73.67 करोड़ रूपये कीलागत सेलुमडिंग में डीजल इलेक्ट्रिक मल्टीपल यूनिट/ मेनलाइन इलेक्ट्रिकल मल्टीपल यूनिट शेड काप्रावधान, पिंक बुक 2018-19 मेंशामिल। निविदा प्रदान करदी गईहै, जल्द हीशुरू होने केलिए तैयार है।
        भारतीय रेलवे नेस्थानीय कलाकारों, निजी समूहों औरस्वयंसेवकों कीभागीदारी केसाथ पेंट, भित्तिचित्रों औरस्थानीय दीवार कला केमाध्यम सेस्टेशन सौंदर्यीकरण केलिए एकनई पहल कीशुरूआत कीहै। अबतक स्थानीय कलाकारों केकौशल, चित्रकला शैली, स्थानीय विषयों औरसमकालीन कलाओं काउपयोग करके सभी जोनल रेलवे के 65 स्टेशनों कोइस पहल केअंतर्गत सौंदर्यीकरण किया जाचुका है। इसपहल नेउभरती क्षेत्रिय प्रतिभाओं कोअभिव्यक्ति औरयात्रियों कोस्थानीय कलाओं केरूपों कोदेखने केलिए एकमंच प्रदान किया है। बल्हारशाह औरचंद्रपुर रेलवे स्टेशन (मध्य रेलवे), मधुबनी रेलवे स्टेशन (पूर्व मध्य रेलवे), मदुरै रेलवे स्टेशन (दक्षिण रेलवे), गांधीधाम रेलवे स्टेशन (पश्चिम रेलवे), कोटा रेलवे स्टेशन (पश्चिम मध्य रेलवे) औरसिकंदराबाद रेलवे स्टेशन (दक्षिण मध्य रेलवे) आदि कासौंदर्यीकरण किया जाचुका है। भारतीय रेलवे ने 68 स्टेशनों में सॉफ्ट आधुनिकीकरण काकाम शुरू किया है। इसे 31 मार्च, 2019  तक पूरा करने कालक्ष्य रखा गया है। यहपहल विभिन्न यात्रियों कोआवश्यक सुविधाओं जैसे ट्रैफिक  सर्कुलेशन, इंटर प्लेटफॉर्म ट्रांसफर, वेटिंग हॉल,गृह-मुख सुधार, प्रकाश व्यवस्था औरदिव्यांगजनों केलिए सुलभ स्टेशनों  की प्राप्ति में समुचित सुधार लाने केलिए है।  मंत्रीमंडल ने  03.10.2018 को रेलवे स्टेशनों केपुनर्विकास केलिए मंजूरी प्रदान कीहै, जिसमें सरलीकृत प्रक्रियाओं केमाध्यमसे विभिन्न व्यावसायिक मॉडल, वाणिज्यिक औरसाथ हीरेलवे स्टेशनों परआवासीय विकास कोअपनाया जाएगा औरयह 99वर्षों केलिए पट्टे परदिया गया है।
भारतीय रेलवे स्टेशन विकास निगम (आईआरएसडीसी) कोसभी स्टेशनों केलिए तकनीकी-वित्तीय व्यवहार्यता अध्ययन करने औरव्यवसाय योजना कोतैयार करने काकाम सौंपा गया है। इस परचार स्टेशनों में काम चलरहा है,हबीबगंज (भोपाल), गांधीनगर, लखनऊ (चारबाग), लखनऊ (गोमतीनगर)।हबीबगंज औरगांधीनगर में फरवरी 2019 तककार्य पूरा करने कालक्ष्य निर्धारित है।
भारतीय रेलवे नेनिम्नलिखित नईआधुनिक ट्रेनें कोचों कीशुरूआत कीहैं: हमसफर ट्रेनों केकोचों में वातानुकूलित तृतीय श्रेणी कीआरामदायक यात्रा प्रदान करने केलिए हाल हीमें अतिरिक्त सुविधाओं कोडाला गया है। अबतक 29 हमसफर रैक (2016-17 में 9 रैक, 2017-18 में 10 रैक, 2018-19 में 10 रैक 30.11.18 तक)का निर्माण प्रोडक्शन यूनिट्स सेकिया गया है। निम्नलिखित प्रमुख विशेषताएं प्रस्तुत कीगई हैं:जीपीएस आधारित यात्री सूचना प्रणाली,यात्री घोषणा प्रणाली,सभी रास्तों परकूड़ादान, कॉफी वेंडिंग मशीन, मनभावन रंग योजना केलिए बेहतर सौंदर्यशास्त्र, क्लोज्ड-सर्किट टेलीविजन (सीसीटीवी) आधारित निगरानी प्रणाली, एकीकृत ब्रेल डिस्प्ले आदि। लंबी दूरी कीपूर्ण रूप सेअनारक्षित ट्रेन, गलियारे केसाथ एलएचबी सामान्य द्वितीय श्रेणी केकोच, गद्देदार सामानके रैक,खड़े यात्रियों केआराम केलिए डोरवे क्षेत्र में अतिरिक्त रेलिंग, कैरी बैग केलिए लँबवत सामान रैक केपास हुक, मोबाइल चार्जिंग पॉइंट कीसंख्या में वृद्धि, अंदर औरबाहर केलिए अधिक सुखदायक रंग योजना, प्रत्येक कोच में लोको के साथ ट्रेन सेवा चलाने केलिए दोनों सिरों परएमयू केबल। अबतक उत्पादन इकाइयों द्वारा 15 अंत्योदय रैक (2016-17 में 3 रैक, 2017-18 में 10 रैक और 2018-19 में 3 रैक) काउत्पादन किया जाचुका है। दीनदयालु कोचों कीअतिरिक्त मुख्य विशेषताएं हैं:गद्देदार सामान कारैक, डोरवे एरिया में अतिरिक्त रेलिंग,कैरी बैग केलिए लेंबवत सामान रैक केपास हुक,शौचालय केबारे में बतानेवाला संकेत बोर्ड, मोबाइल चार्ज करने की सुविधा में वृद्धि, आगबुझाने कीव्यवस्था केसाथ चोरी-रोधक व्यवस्था, जलस्तर सूचक यंत्र, मनभावन इन्टीरीअर,एंटी-भित्तिचित्र कोटिंग केसाथ बेहतर बाहरी रंग योजना, शौचालयों में पॉलीमराइज़्ड फर्श कोटिंग। अबतक उत्पादन इकाइयों द्वारा 1100 दीन दयालु कोचों कानिर्माण किया जाचुका है। मुंबई सीएसटीएम- करमाली/ गोवा केबीच मुंबई सीएसटी- करमाली तेजस ट्रेन कीशुरूआत 24. 05.2017 से करदी गईहै। चालू वर्ष में दोऔर तेजस रैकों कानिर्माण पीयू सेकिया गया है। 200 किमी प्रति घंटे केगति कीक्षमता वाली इन अति आधुनिक ट्रेनों कीप्रमुख विशिष्ट विशेषताएं हैं:स्वचालित प्रवेश द्वार; यात्री सूचना प्रदर्शन प्रणाली (इलेक्ट्रॉनिक आरक्षण चार्ट प्रणाली); जीपीएस आधारित यात्री सूचना प्रणाली; आगऔर धुआं पहचान प्रणाली; बेहतर शौचालय फिटिंग; बंद गलियारा; एलईडी रोशनी; सीसीटीवी; और सौंदर्यपरकता रूप सेमनभावन रंग योजना । इन कोचों केद्वारा बढ़े हुए दृश्यांत क्षेत्र, जिसमें छतभी शामिल है,प्रदान किया जाता हैजिससे किपर्यटकों' कोयात्रा केदौरान मनोरम दृश्य काआनंद लेने कोसुविधाजनक बनाया जासके। इनसुविधाओं कोअच्छी तरह सेप्रदान कियागया है। इसप्रकार केकुल चार कोच दर्शनीय क्षेत्रों में सेवारत हैं। मॉडल रैक में निम्नलिखित विशेषताएं शामिल हैं:मॉड्यूलर पैनल; पैनल केलिए बेहतर सामग्री; श्रम-दक्षता कीदृष्टि सेडिजाइन सीढ़ी; सौंदर्यपरकता केसाथ शौचालय मॉड्यूल; बड़े आकार केदर्पण; प्लेटफार्म वॉशबेसिन; पानी केनियंत्रित नल; गंध नियंत्रण प्रणाली; और शौचालय केअंदर कूड़ेदान । पहली मॉडल रैक कीशुरूआत जनवरी 2016 में नईदिल्ली-वाराणसी केबीच महामना एक्सप्रेस में शुरू कीगई थी। भोपाल एमएलआर वर्कशॉप ने 120 से अधिक मॉडल रैक कोच बनाए हैं । आईसीएप नेभी 24 मॉडल रैक कोच बनाए हैं। वर्तमान समय में इसप्रकार कीकुल चार रैक सेवारत हैं । स्वर्ण परियोजना कोराजधानी औरशताब्दी एक्सप्रेस ट्रेनों कीस्थिति में विकास करने केउद्देश्य सेशुरू किया गया,जिसका उद्देश्य अनुभव कोबेहतर बनाने केलिए 9 आयामों कोशामिल करना था,जिसमें कोच कीआंतरिक साज-सज्जा, शौचालय, ऑनबोर्ड सफाई, कर्मचारी व्यवहार, खानपान, लिनेन, समय कीपाबंदी, सुरक्षा शामिल हैं। सही समय परफीडबैक भीप्रोजेक्ट स्वर्ण काहिस्सा है। इसयोजना केअंतर्गत कुल 29 रेलगाड़ियों को 50 लाख रूपये प्रति रैक केहिसाब सेकवर दिया गया है। उत्कर्ष परियोजना को 66 पक र्ण मेलों/ एक्सप्रेस ट्रेनों में स्थिति कोसुधार करने केलिए शुरू कीगई है। प्रति रैंक 60 लाख रूपया, जिसमें 140 रैक शामिल हैं । इस परियोजना केअंतर्गत कोच आंतरिक भाग,कोच बहिर्भाग, टॉयलेट्स, लाइटिंग औरयात्री सुख-सुविधा जैसी चीजों में सुधार कियाजाएगा। इसे 2018-19 मेंकक कालक्ष्य रखा गया है। उत्कर्ष परियोजना केदर चरण कीभी मंजूरी दीगई है,जिसमें मेल एक्सप्रेस ट्रेनों के 500 रैकों को 2019-20 तक उन्नयन करने कालक्ष्य रखा गया है।
       सभी टीएल/ एसी औरस्व-चालित (ईएमयू / एमईएमयू / डेमू) कोचों में सीएफएल/एफएल लाइट कोएलईडी लाइटों सेबदल दिया गया है,जिससे प्रति एसी कोच 19764 रूपये प्रति वर्ष औरप्रति गैर एसी कोच 8424 रूपये प्रति वर्ष विद्युत ऊर्जा परखर्च केबचत होने कीसंभावना है।
2014-15 से 2016-17  तक कोचों की संख्या  2017-18 के दौरान कोचों की संख्या  2018-19 के दौरान कोचों की संख्या संख्या 820 कोच 4180 कोच 6465 कोच   कैशलेस औरडिजिटल लेनदेन कोबढ़ावा देने केलिए, रेल मंत्रालय नेनिम्नलिखित पहल कीहै:
क्रेडिट/ डेबिट कार्ड केमाध्यम सेभुगतान कीस्वीकृति केलिए विभिन्न यात्री आरक्षण प्रणाली (पीआरएस)/ अनारक्षित टिकटप्रणाली (यूटीएस), बुकिंग कार्यालयों औरपार्सल औरमाल स्थानों परप्वाइंट ऑफसेल (पीओएस) मशीनों की स्थापना; आरक्षित/ अनारक्षित टिकटों केभुगतान केविकल्प केरूप में यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (यूपीआई) / भारत इंटरफेस फॉर मनी (भीम)की स्वीकृति; ऑनलाइन  बुकिंग टिकट सेवा परशुल्क कीवापसी; पीआरएस/ यूटीएस काउंटरों परयात्रा टिकट खरीदने केलिए क्रेडिट/ डेबिट कार्ड परलेनदेन सेवा शुल्क कीवापसी लागू;  डिजिटल माध्यम सेखरीदे गएसीजन टिकटों पर 0.5 प्रतिशत कीछूट काप्रावधान; 100 रूपये याउससे अधिक केटिकटों पर यूपीआई/ भीम केमाध्यम सेकिए गएभुगतानों परटिकट कीकीमत पर 5 प्रतिशत कीरियायती छूट,अधिकतम 50 रुपए तक; रिचार्ज कराते समय बोनस केरूप में रिचार्ज मूल्य का 5 प्रतिशत कमीशन; मोबाइल फोन सेअनारक्षित टिकट बुकिंग कराने केमामले में आर-वॉलेट; और स्वचालित टिकट वेंडिंग मशीन (एटीवीएम) केमाध्यम सेटिकट बुकिंग कोप्रचारित करने केलिए प्रोत्साहन केरूप में स्वचालित टिकट वेंडिंग मशीन (एटीवीएम) केप्रत्येक रिचार्ज पर 3 प्रतिशत केबोनस काप्रावधान।
यात्रियों कोउच्च स्तर कीसुविधा औरअत्यधिक संतोषजनक अनुभव प्रदान करने केलिए, रेल मंत्रालय नेनिम्नलिखित कदम उठाए हैं:
मोबाइल फोन केमाध्यम सेटिकट बुकिंग कीशुरूआत - अनारक्षित टिकट बुकिंग केलिए यूटीएसऑनमोबाइलऐप और आरक्षित टिकट बुकिंग केलिए आईआरसीटीसी रेल कनेक्ट ऐप;
 सार्वजनिक निजी भागीदारी केआधार परटिकट जारी करने केलिए यात्री टिकट सुविधा केंद्र (वाईटीएसके) कीस्थापना;
 अगले पीढ़ी केई-टिकटिंग सिस्टम (एनजीईटी) काशुभारंभ, ई-टिकटिंग केसुगमता में सुधार;  रक्षा कर्मियों केलिए टिकटों कीऑनलाइन बुकिंग केलिए रक्षा यात्रा प्रणाली कीशुरूआत; विकलांग व्यक्तियों औरमान्यता प्राप्त प्रेस संवाददाताओं केलिए रियायती ऑनलाइन टिकट बुकिंग कीसुविधा का प्रावधान; और कम्प्यूटरीकृत यात्री आरक्षण प्रणाली कोयुक्तिसंगत बनाना, जिससे आरक्षण चार्ट कीसमयबद्ध तैयारी औरखाली बर्थ को अगले दूरस्थ स्थान तकस्थानांतरित करने कोअधिक सुविधाजनक बनाया जासके; प्रतीक्षारत यात्रियों कोसुनिश्चित सीट प्रदान करने केलिए सभी ट्रेनों में वैकल्पिक ट्रेन सामंजस्य योजना जिसे विकल्प योजना के रूप में भीजाना जाता है। ट्रेन केपरिचालन कीस्थिति में परिवर्तन केदौरान यात्रियों केलिए एसएमएस अलर्ट कीसुविधा काप्रावधान, जैसे ट्रेनों को एक घंटा सेअधिक समय केलिए रद्द होना/ विलंब होना आदि। किसी भीआरक्षित वर्ग में यात्रा करने केलिए पहचान प्रमाण केरूप में डाउनलोड किए गएई-आधार औरएम-आधार को मान्यता प्रदान की गई है । पूरी टीम कासमन्वय औरट्रेन कीपूरी यात्रा केदौरान सभी सेवाओं कोसुविधाजनक बनाने केलिए जिम्मेदार "एकल व्यक्ति/ नेता"के रूप में "ट्रेन कप्तान" कीअवधारणा कोप्रस्तुत किया गया है। पहली बार,यात्रियों सेकमाई केसाथ-साथ यात्रियों कीसंख्या केआधार परस्टेशनों परयात्रियों केलिए सुविधाएं प्रदान की गई है। स्टेशनों कावर्गीकरण करने केलिए, संशोधित मानदंडों को 22.11.2017 को जारी किया गया है। संशोधित मानदंड काउद्देश्य बड़े स्टेशनों परउच्च स्तर कीसुविधाएं प्रदान करना है,जो आमदनी/ यात्रियों केसाथ व्यवहार केसाथ मेल खाती है। विभिन्न श्रेणियों केस्टेशनों परयात्रियों कीसुविधाओं केकार्यानव्यन केलिए व्यापक संशोधित निर्देश जारी किए गएहैं। फुट ओवर ब्रिज औरउच्च स्तरीय प्लेटफार्म, सभी स्टेशनों केलिए न्यूनतम आवश्यक श्रेणी में शामिल किया गया हैऔर इसकेअनुसार भारतीय रेलवे केसभी स्टेशनों कोचरणबद्ध तरीके सेएफओबी औरउच्च स्तरीय प्लेटफार्म प्रदान किया जाएगा। साथ हीहॉल्ट स्टेशनों सहित ब्रॉड गेज केसभी स्टेशनों कानिर्माण, उच्च स्तरीय प्लेटफार्मों औरफुट ओवर ब्रिज के साथ किया जाएगा। पार्किंग केलिए आरक्षित मूल्य कानिर्धारण, पेएंड यूज टॉयलेट, रिटायरिंग रूम शुल्क/ शयनगृह. संवहन शुल्क आदि के लिए डीआरएम औरफील्ड ऑफिसर केशक्तियों कापूर्ण विकेंद्रीकरण किया गया है ।
मंडल रेल प्रबंधकों (डीआरएम) कोविकलांग पीसीओ बूथ धारकों केलाइसेंस कोसंतोषजनक प्रदर्शन केआधार परअनुबंध कीअवधि कोएक वर्ष तकबढ़ाने काअधिकार दिया गया है।
जोनल रेलवे कोप्रति प्लेटफॉर्म एकव्हीलचेयर प्रदान करने कीसलाह दीगई हैऔर आइलैंड प्लेटफॉर्म केमामले में सभी ए-1 औरए श्रेणी केस्टेशनों परदो प्लेटफार्मों केलिए एकव्हीलचेयर प्रदान कीगई है। महाप्रबंधकों कोस्टेशन परयात्री यातायात कीसंख्या केआधार परऔर स्टेशनों में व्हील चेयर कीआवश्यकता केआकलन केआधार पर,स्टेशनों में व्हीलचेयर कीसंख्या कोकम करने/बढ़ाने केलिए अधिकृत किया गया है। प्रतीक्षालयके अंदर, स्तनपानकराने वाली माताओं कोस्तनपानकराने केलिए एक कोनेके रूपमें एक अलगक्षेत्रका प्रावधान। प्रति घंटे कीबुकिंग के हिसाब सेप्रतिक्षाग़ह कीऑनलाइन बुकिंग। प्रचार मार्ग यासीएसआर केमाध्यम सेस्टेशनों परबैटरी संचालित वाहनों(बीओवी) केलिए "सारथी सेवा" काशुभारंभ। व्हील चेयर सेवा सहकुली सेवाओं कीबुकिंग केलिए प्रमुख स्टेशनों परः "यात्री मित्र सेवा" काशुभारंभ किया गया  है ।
मार्च 2018 तक 488 रेलवे स्टेशनों परएकीकृत यंत्रीकृत सफाई कीसुविधा प्रदान कीगई। जिसे अब 697 स्टेशनों परउपलब्ध करवाया गया है। 407 प्रमुख रेलवे स्टेशनों कीस्वच्छता मानकों परयात्री धारणाओं कीस्वतंत्र तृतीय पक्ष कासर्वेक्षण 2016 मेंपहली बार किया गया औरजिसे 2017 और 2018 में दोहराया गया ।2008-09 से बोर्ड हाउस कीपिंग सर्विस (ओबीएचएस) प्रदान किया जारहा है। 2008-09 से, मार्च, 2014 तकओबीएचएस सेवाको 416 जोड़ी ट्रेनों में प्रदान किया जारहा था। 2014-15 से 2016-17 तक 3 वर्षों में 448 जोड़े ट्रेनों कोइसमें जोड़ा गया। 2017-18 में 139 कोइसमें जोड़ा गया और 2018-19 में 65 को जोड़ा गया। वर्तमान समय में कुल 1068 ट्रेनों में इस प्रकार कीसेवाएं उपलब्ध है।
सभीराजधानी, शताब्दी, दुरंतोऔर अन्यमहत्वपूर्णलंबी दूरीके मेल।एक्सप्रेसट्रेनोंमें ट्रेनोंके संचालनके दौरानयात्री डिब्बोंके शौचालयोंकी सफाई, दरवाजों, गलियोंकी सफाईके लिएओबीएचएसको प्रदानकिया जाताहै । एसएमएस सेवा केआधार पर 1059 ट्रेनों में 'स्वच्छ-मेरे-कोच"की सेवा प्रदान कीगई है, 2017-18 से "कोच-मित्र" सेवा में वृद्धि करते हुए वर्तमान में 1020 ट्रेनों कोकवर किया गया है।एसी कोच केयात्रियों कोदी जाने वाली लिनन कीधुलाई कीगुणवत्ता में सुधार केलिए रेलवे, मशीनीकृत लॉन्ड्री कीस्थापना कर रहा है। 2009-10 से मार्च, 2014 तक 25 मशीनीकृत लॉन्ड्री कीस्थापना कीगईं। 2014-15 से 2018-19 तक 32 और मशीनीकृत लॉन्ड्री स्थापित किए गए। 81 टन प्रति दिन (टीपीडी) कीकुल क्षमता वाले 14 औरमशीनीकृत लॉन्ड्री केऑर्डर दिए जा चुके हैं। वर्तमान समय में लगभग 283 टीपीडी मशीनीकृत लॉन्ड्री कीआपूर्ति कीजा रही है। अगले वित्तीय वर्ष में मशीनीकृत लॉन्ड्री के माध्यम से 100 प्रतिशत लिनन कीसफाई कीआवश्यकताओं कोकवर करने कालक्ष्य रखा गया है।
ये केवल कोचों केबहिर्भाग कोअधिक प्रभावी औरकुशलता सेसाफ-सुथरा नहीं करते हैं बल्कि पानी कीआवश्यकता सेअधिक अपव्यय कोसीधे कमभी करते हैं। इसके अलावा, यहजल पुनर्चक्रण सुविधा आवश्यकता में कमी केसाथ आते हैं। स्थान व्यवहार्यता केआधार पर,एसीडब्लूपी कीशुरूआत केलिए 122 स्थानों की पहचान कीगई है। 10 संयंत्र स्थापित किए जाचुके हैं और 7 अन्य स्थानों केलिए एलओए जारी किए गएहैं। जोनल रेलवे 31जायके हैं।. निविदा काकाम कररहा है। 10 संयंत्र स्थापित किए जाचुके हैं और 7 अन्य स्थानों केलिए एलओए जारी किए जा चुके हैं ।"स्वच्छ भारत मिशन" केएक भाग केरूप में,भारतीय रेलवे नेअपने सभी कोचिंग स्टॉक परजैव-शौचालयों का प्रसार कररहा है,जिससे कोई भीमानव अपशिष्ट डिब्बों सेट्रैक परन आसके। 2017-18 के दौरान, 40000 के लक्ष्य के मुकाबले, 57429 जैव-शौचालय 15017 कोचों में प्रदान किए गएहैं, जबकि पिछले तीन वर्षों में 3374 जैव-शौचालय को 10159कोचों में, 3961 जैव-शौचालय को 15442 कोचों में और 87884 जैव-शौचालय को 34134 कोचों में लगाए गएथ ।
 
2004-2014 2014-2017 2017-2018 2018-19 (नवम्बर तक) जैव-शौचालय 9587 59735 57086 40937 कोच 3647 16123 15017 11107   वैक्यूम फ्लशिंग सिस्टम, शौचालयों में फ्लशिंग केलिए पानी कीआवश्यकताओं कोकाफी हदतक कम करदेता है,जबकि पैन सेमल केप्रभावी। उचित फ्लशिंग कोसुनिश्चित करता है। मुंबई औरगोवा केबीच चलने वाली ट्रेन,"तेजस" में जैव-वैक्यूम शौचालय कीव्यवस्था प्रदान कीगई है। 2018-19 से सभी नवनिर्मित तेजस औरहमसफर कोचों में वैक्यूम शौचालय कीव्यवस्था प्रदान कीजा रही है। अन्य 2000 जैव-रिक्त शौचालयों कोउपलब्ध कराने कीप्रक्रिया चलरही है। रेलवे कोयह निर्देश दिया गया हैकि सभी प्रीमियम ट्रेनों केकोचों में बायो-वैक्यूम टॉयलेट उपलब्ध कराने कीव्यवस्था की जाए, जिससे तेज गति सेवैक्यूम टॉयलेट काप्रसार सुनिश्चित किया जासके। 2019-20 से पीयू अपने सभी नएउत्पादन में इनसुविधाओं कोप्रदान करेगा। एमसीएफ नेसितंबर 2018 में एकस्मार्ट कोच तैयार किया है,जो किबेहतर यात्री सुरक्षा सुविधाएं प्रदान करता है और साथ हीभविष्यसूचक रखरखाव कोसक्षम बनाता है। डायग्रोस्टिक सिस्टम मॉनिटर बेयरिंग वाइब्रेशन, पहीया औरट्रैक के स्वास्थ्य केबारे में अग्रिम जानकारी प्रदान करता है। इसके अलावा, कोच में व्हील स्लिप प्रोटेक्शन मॉनीटरिंग, जलस्तर सूचक यंत्रवाई-फाई,आपातकालीन बातचीत कीसुविधा केसाथ इंफोटेनमेंट सिस्टम, औरयात्री घोषणा औरसूचना प्रणाली केसाथ/ डिजिटल गंतव्य बोर्ड भीउपलब्ध कराई गईहै। हवा अनुकूलन कोबेहतर बनाने औरउसकी निगरानी करने केलिए औरसुधार किए जारहे हैं जोकि ताजी हवा औरबिजली के खपत कीमात्रा केसाथ कोच केअंदर प्रदूषित कणों कीनिगरानी करेंगे। आपातकालीन निकासी केलिए यात्री घोषणा औरसूचना प्रणाली केसाथ एकीकृत अग्नि औरधुआं पहचान इकाई काप्रावधान क्या गया है,जिसके माध्यम सेअग्नि सुरक्षा, चरणबद्ध पहचान केसाथ वीडियो विश्लेषण औरअसामान्य घटना केलिए सुविधाएँ, सुरक्षा औरबचाव कोबढ़ाया जाएगा। राज्य सरकारों केसाथ लंबित मुद्दों कीऑनलाइन जानकारी प्राप्त करने केलिए समन्वय पोर्टल (www.railsamanvay.co.in) विकसित किया गया है,जो किविभिन्न रेलवेएजेंसियों द्वारा किए जारहे ढांचागत विकास परियोजनाओं सेसंबंधित हैं। संबंधित राज्य सरकारों सेअनुरोधकिया गया हैकि वेअपने राज्यों में रेलवे केलंबित मुद्दों कासमाधान करें जिन्हें समन्वय पोर्टल परअपलोड किया गया है औररेलवे कोउसके विकास/ विस्तार परियोजनाओं में तेजी लाने में आवश्यक प्रदान करें।
अंत में इसबजट कासमर्थन करते हुए अपनी निम्नलिखित मांगो कोआपके समक्ष रखते हुए इनकी स्वीकृति केलिए आग्रह करता हूँ। सन् 2018-19 के बजट में प्रयाग सेलेकर ऊंचाहार तकवाया कुंडा- हरनामगंज रेलवे लाइन केदोहरीकरण और विद्युतीकरण कासर्वे स्वीकृत हुआ थाइसे पूरा करके शीघ्र इसपर काम शुरू कराया जाए; ग्राम बिग़नपुर में एकअंडरब्रिज कानिर्माण शीघ्र करवाया जाए; कुंडा में एकओवर ब्रिज कानिर्माण शुरू कराया जाए; सिराथू रेलवे स्टेशन परकोलकाता जाने वाली ट्रेनों काठहराव किया जाये ; मनौरी सेअठसराय तकपढ़ने वाले छोटे-छोटे रेलवे स्टेशनों कीहालत बहुत खराब हैयहां परमूलभूत आवश्यकता के साधन भीजर्जर हालत में है|धूप औरबरसात तथा जाड़े सेबचने केलिए बने टीनशेड अत्यंत जीर्ण शीर्ण अवस्था में हैं। उनको तत्काल रिपेयर कराए जाने याफिर इनका पुनः निर्माण कराए जाने कीआवश्यकता है। मंत्री जीसे मेरा आग्रह है कि इसपर ध्यान अवश्य दिया जाए|यहां परपेयजल औरशौचालय केनिर्माण कीभी बहुत आवश्यकता है;सिराथू रेलवे स्टेशन परएक नएप्लेटफार्म कानिर्माण कराया जाए औरप्लेटफॉर्म नंबर 1 और 2 को जोड़ने केलिए 1 फुट रेस्ट कानिर्माण किया जाए;भरवारी रेलवे स्टेशन परप्लेटफार्म नंबर 1 और 2 को जोड़ने केलिए 1 फुट रेस्ट बनाया जाए; मनौरी रेलवे स्टेशन परअप-डाउन में संगम एक्सप्रेस काठहराव किया जाए; परियांवा रेलवे स्टेशन परकानपुर औरप्रयागराज केबीच चलने वाली इंटरसिटी एक्सप्रेस काठहराव किया जाए; औरकानपुर सेप्रयाग कोजाने वाली इंटरसिटी सुबह कानपुर सेचलकर शाम कोप्रयाग पहुंचती हैमंत्री जीसे आग्रह करताहूं किइसे सुबह प्रयाग सेकानपुर कीओर चलाया जाए | अंत में इसरेलवे अनुदान सन 2019-20 का समर्थन करता हूँ | ­­ ­*श्री कपिल मोरेश्वर पाटिल (भिवंडी):मैं सर्वप्रथम माननीय रेल मंत्री जीको धन्यवाद देना चाहता हूं जिन्होंने हमारे लोकप्रिय प्रिय प्रधान मंत्री जीके साथ औरसबका विकास औरविश्वास केमूल मंत्र कोध्यान में रखते हुए विकसित रेल सेवाएं जनता कोसमर्पित कीहैं ।
       विकास कामार्ग रेल द्वारा हीसबके पास पहुंच सकता है,वर्ष 2014 सेपहले जितने रेल मंत्री रहे हैं,उन्होंने 20,25 वर्षों में एकके बाद एकनई रेल परियोजनाएं शुरू किए जाने कीउद्‌घोषणाएं कीं जिनमें सेअधिकांश अभी तकसिर्फ कागजों तकही सीमित रही हैं । इनवर्षों में मेरे कईसाथियों नेअपने-अपने क्षेत्रों में रेल परियोजनाएं आदि शुरू किए जाने कीमांग उनसरकारों सेकी परंतु वेमांगें मंजूर नहीं होसकीं । ऐसी कईपरियोजनाएं धरातल परनहीं आसकी हैं ।
       माननीय रेल मंत्री जीने सभी वर्ग केयात्रियों कीसुविधा, उनके सामान कीसुरक्षा, यात्रा कीगुणवत्ता, रेल कीस्वच्छता, खान-पान कीक्वालिटी में सुधार, रेल केसमय परपरिचालन, उनकी मौजूदा स्पीड कोबढ़ाने कीदिशा में जिन कदमों कोउठाए जाने काउल्लेख इसबजट में किया है,वह असाधारण है । गरीब यात्रियों केलिए पहली बार अनारक्षित ट्रेन चलाया जाना एकअच्छा कदम है । इसप्रकार कहा जासकता हैकि रेल बजट रेल कोआधुनिक, स्वावलंबी, सक्षम, प्रत्येक यात्री कीसुविधानुसार बनाए जाने कीदिशा में परिपक्व है  ।
       रेल बजट में 65,837 करोड़ यात्री सुविधा परध्यान देकर यहआबंटन हुआ है । वित्त वर्ष 2019-20 के बजट में नईलाइनों केनिर्माण केलिए 7255 करोड़ रुपये कीधनराशि, गेज परिवर्तन केलिए 2200 करोड़ रुपये, रोलिंग स्टाफ केलिए 6,114.82 करोड़ रुपये देकर सरकार ने 130 करोड़ भारतीयों को (अमीर यागरीब) उद्यमियों, उद्योग, नएकाम औरअवसरों कोबढ़ावा देने वाला यहबजट है ।
       मेरा संसदीय क्षेत्र भिवंडी महाराष्ट्र है । मेरे क्षेत्र कोभारतीय रेल सेबहुत उम्मीदें   हैं । मैं उनका जिक्र करूंगा । मेरे क्षेत्र भिवंडी सहित सम्पूर्ण महाराष्ट्र में रेलवे नेटवर्क कोबढ़ावा देने कीजरूरत है ।
       मेरे क्षेत्र में मुरवाइड तहसील है,इस क्षेत्र कोनए रेल मार्ग सेशीघ्र जोड़ा जाए । पिछले बजट में यहपास होचुका है ।   टिटवाल-मुरवाड़ मंजूर रेल लाइन काफाइनल लोकेशन, सर्वे तथा डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट जल्द बनाकर इसनए मार्ग केनिर्माण काकार्य शुरू किया जाए । टिटवाला-खड़बली स्थानकों केदरमियान गुरबली स्थानक कानिर्माण किया जाए । डहानु-करसा-कर्जन औरडहानु-दिवा-पनवेल सेनई लोकल ट्रेनों कीशुरुआत शीघ्र कीजाए । पनवेल-दिवा-भिवंडी रोड-बसई रोड,रूट पररेल सेवा कोबढ़ाया जाए । वाग्णी-बदलापुर केदरमियान चामटोली स्थानक कानिर्माण शुरू किया जाए । दिवा सेबसई रूट परआने वाले पिंपलास स्थानक निर्माण हेतु मान्य दीजाए । मध्य रेल केआढ आंव औरतामशेत इनस्थानकों केबीच आरयूबी 98/2 कोयथाशीघ्र चौड़ा किया जाए ताकि सम्पूर्ण महाराष्ट्र में रेल गति कोयथा समय में पूरा किया जाए ।
 देश केविकास केलिए बुलेट ट्रेन चलाई जारही है । हमारे देश केसभी नागरिक इसबुलेट ट्रेन कीराह देख रहे हैं । बुलेट ट्रेन केप्रकल्प में सभी मार्गों परसर्विस रोड बनाना आवश्यक है । जहां नदी,खाड़ी परब्रिज बनाने वाले हैं,वहां दोनों तरफ एक्सीडेंट होते रहते हैं । अगर इनजगहों परसर्विस रोड बनाई जाए तोयात्रियों कोबड़ी राहत मिलेगी ।
रेल बजट की विशेषताओं में रेल पर्यटन बढ़ाने के लिए महाराष्ट्र के तीर्थ स्थलों और पर्यटन स्थलों को बढ़ावा दिया गया है । इसके लिए मैं माननीय रेल मंत्री जी को धन्यवाद देता हूं और रेल बजट की अनुदान मांगों का पूरी तरह से समर्थन करता हूं ।
*श्रीप्रभुभाईनागरभाईवसावा (बारदौली): मैं रेल बजट केअनुदान कीमांगो कासमर्थन करता हूँ औरअपने सुझाव सभा पटल पररखता हूँ।
आज हमारे देश में जोरेलवे काविकास कार्य पिछले पांच वर्षो में हुआ हैवह हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री आदरणीय श्री नरेन्द्र मोदी जीके कुशल नेतृत्व सेऔर वर्तमान रेल मंत्री केप्रयासों सेहो रहा है। यहएक सराहनीय कार्य हैजिसका वर्णन करने में बहुत समय लगेगा। आजहमारे गुजरात में अहमदाबाद सेमुम्बई बुलेट ट्रेन काजो सपना देशवासियों नेदेखा थाउसे माननीय श्री नरेन्द्र मोदी जीने पूरा कराया इसके लिए मेरा अभिनंदन औरवंदन हैं। यहां तककि नईरेलवेलाईन बिछाई जारही है,रेल काविद्यतीकरण होरहा है,प्लेटफार्म कीसाफ-सफाई अच्छी होरही है और ट्रेन केअंदर स्वच्छता काअभियान प्रतिदिन चलता रहता है। मेरे मतदार संघ बारडोली जो सरदार पटेल कीकर्मभूमि है। बारडोली रेलवे स्टेशन परएकत्रित बुकिंग काउंटर कीआवश्यकता है। सूरत सेबारडोली होते हुए गोरखपुर कोजाने केलिए एकभी ट्रेन नहीं है। इसतरह कीएक ट्रेन चलानेकी अति आवश्यकता है। सूरत-भागलपुर, बांद्रा-पटना, नवजीवन एक्सप्रैस इनमें सेकिन्हीं दो गाड़ियोंका स्टॉपेज बारडोली स्टेशन परअति आवश्यक है। इसके साथ-साथ हमारे हीमतदार संघ में व्यारा रेलवे स्टेशन हैजो तापी जिले केअर्न्तगत आता है। वहां केप्लेटफार्म कोबड़ा कर सौंदर्यीकरण करने कीआवश्यकता है। बांद्रा- भुसावल (खानदेश एक्सप्रेस, गाड़ी नं. 19003 /19004) को तत्काल व्यारा स्टेशन पररोका जाए औरउत्तर प्रदेश एवं बिहार में जाने वाली गाडियां, उघना-वाराणसी इसे दैनिक चलाया जाए,अहमदाबाद-प्रयागराज, बांद्रा-पटना, हमसफर एक्सप्रैस आदि कोगुजरने वाली गाड़ियों कोव्यारा रेलवे स्टेशन परस्टॉपेज दिया जाए। जनहित कीसमस्या को रखते हुए उघना-जलगांव रेलवे लाईन, एल.सी. गेट नं. 3 चलथान, तालुका, पलसाणा में अन्डरपास बनाया जाए क्योंकि रेलवे लाईन केदोनों तरफ सेशहर बसा हुआ है। वर्ष 2015-16 के रेलवे बजट (20 लाख रू0आबंटित हुए थे)कोशांबा सेउमरपाड़ा नेरो गेज रेलवे लाईन कोब्रॉडगेज में रूपांतर करनई रेलवे लाईन शीघ्र हीबनाई जाए। सूरत-धुलिया राष्ट्रीय राजमार्ग-53 परदस्तान रेलवेक्रासिंग केपास रेलवे ब्रिज कानिर्माण लंबे समय सेरूका हुआ हैउसे अति शीघ्र रेलवे ब्रिज का निर्माण कराया जाए। जनहित कीसमस्या केनिदान हेतु साउथ ईर्स्टन रेलवे जोन के (लिम्बायत) रेलवेलाईन परओवरब्रिज कानिर्माण अति आवश्यक है। सूरत सेव्यारा तालुका होते हुए नवापुर तक एकमेमो गाड़ी चलाई जाए। मैं माननीय मंत्री जीद्वारा लाए गएअनुदान कीमांगों कासर्मथन करता हूँ।
                       
*श्रीमती शारदा अनिल पटेल (महेसाणा): माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी जी ने देश की बागडोर थामते ही इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर को सशक्‍त बनाने का बीड़ा उठा लिया है ।  सबसे ताजा उदाहरण 2 किमी लम्‍बा ‘’जोजिला टनल’’ है, जिसका प्रधानमंत्री ने शिलान्‍यास किया है ।  3100 मीटर ऊंचाई पर बनने वाले इस सुरंग से श्रीनगर, कारगिल और लेह लदाख के बीच हर मौसम में संपर्क बना रहेगा तथा 5 घंटे का सफर 15 मिनट का हो जाएगा । यह नए भारत के निर्माण की सुनहरी तस्‍वीर है । वर्ष 2019-20 का रेल बजट भारतीय रेल को और नए आयामों की तरफ ले जाएगा । यह बजट में रेल इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर को और तेजी से विकास की तरफ ले जाने का प्रयास माननीय प्रधानमंत्रीजी और रेलवे मंत्री जी ने किया है, उसके लिए भारत सरकार और मंत्री जी को अभिनंदन देती हूं ।
       मेरे महेसाणा लोक सभा मतक्षेत्र में एम.एन. कॉलेज और ए.पी.एम.सी. के पास रेलवे ट्रेक के ऊपर ओवर-ब्रिज की विशेष जरूरत है । यहॉं रेलवे क्रॉसिंग वाला रोड मेरे मतक्षेत्र का  बहुत बिजी रोड है ।  यह रोड ए.पी.एम.सी. प्रसिद्ध यात्राधाम अंबाजी और स्‍थानिक शिक्षा संस्‍थानों की ओर यातायात हेतु महत्‍तम उपयोगी है और ट्रेन यहॉं से गुजरती है तो उस समय भारी यातायात रहता है, जिसकी वजह से समय की भारी बर्बादी होती है । 
       अत: मेरी  रेल  मंत्रालय से बिनती है कि इस जगह  पर  जल्‍द  से जल्‍द यातायात सरल हो ,ऐसी कार्यवाही की जाए ।
*श्री राहुल कस्‍वां (चुरू):  मैं रेलवे की डिमांड ऑफ ग्रांट पर अपने विचार रखता हूं  । 
       मैं सबसे पहले माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र जी मोदी को व माननीया वित्‍त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमन जी को धन्‍यवाद देना चाहता हूं, जिन्‍होंने हर वर्ग को ध्‍यान में रखते हुए इतना शानदार बजट पेश किया ।  ये बजट निश्‍चित रूप से भारत को विकसित देशों की श्रेणी में ले जाने का कार्य करेगा तथा इससे आने वाले समय में भारत की अर्थव्‍यवस्‍था 5 ट्रीलियन डॉलर तक बढ़ने की संभावना हैं । 
       भारतीय रेल देश के नागरिकों के लिए यातायात का प्रमुख साधन हैं । भारतीय रेल देश के लिए लाईफ लाईन का काम करती है ।  विश्‍व का सबसे बड़ा रेलवे नेटवर्क भारत का ही है ।  लेकिन आज भी देश के कई मुख्‍य क्षेत्र रेल सेवा से वंचित हैं ।  रेलवे द्वारा नई रेल लाईन बिछाने के लिए पहले सर्वे किए जाते हैं, सर्वे में अधिकतर समय आरओआर निगेटिव आने पर उन क्षेत्रों में रेलवे सुविधा देने में अपनी असहमति कर उन क्षेत्रों को वंचित किया जाता है ।  इसीतीर मेरे लोक सभा क्षेत्र में सरदारशहर-सादुलपुर-तारानगर, सरदारशहर-हनुमानगढ़, आदमपुर (बेर)-भादरा व सीकर-नोखा मार्गों पर नई रेल लाईन डालने की आवश्‍यकता है, लेकिन कई बार सर्वे किए जाने के बाद नेगेटिव आरओआर की वजह से इन क्षेत्रों को अभी भी रेल सुविधा से वंचित रखा गया । ये मार्ग सामरिक एवं आर्थिक दृष्‍टि से भी अत्‍यंत महत्‍वपूर्ण है ।  अत: मेरा सरकार से  अनुरोध है कि आमजन की सुविधा को देखते हुए ऐसे क्षेत्रों को भी पोलिसी में बदलाव करते हुए जहां माल भाड़ा कम है और यात्री भार अधिक है उन्‍हें भी रेल सुविधा से जोड़ा जाए ।
       सरकार द्वारा राष्‍ट्रीय रेल सुरक्षा कोष की स्‍थापना की गई है, जिसके तहत रेलवे सुरक्षा संबंधी विभिन्‍न मदों पर खर्च किया जाना प्रस्‍तावित है । ग्रामीण क्षेत्रों में समपार नहीं होने की स्‍थिति में ग्रामीणों द्वारा अपने खेतों एवं गांवों में जाने हेतु रेलवे लाईन क्रॉस की जाती है जो कि रेलवे नियमों में अवैध माना जाता है ।  रेल लाईन पर अंडर ब्रीज बनाने का कार्य राज्‍य सरकार का होता है लेकिन राज्‍य सरकार इसमें उदासीनता दिखाती है ।  अत: मेरा सरकार से अनुरोध है कि किसानों व ग्रामीणों की उक्‍त समस्‍या को ध्‍यान में रखते हुए रेल अंडर पास व समपार को भी राष्‍ट्रीय रेल सुरक्षा कोष में शामिल किया जाए । 
       मेरे लोक सभा क्षेत्र में उ.प.रे. के अधीन सादुलपुर से हनुमानगढ़,सादुलपुर से बीकानेर, रतनगढ़ से सरदारशहर व रतनगढ़ से डेगाना का विद्युतीकरण का कार्य चल रहा है । चूरू लोक सभा क्षेत्र क्षेत्रफल की दृष्‍टि से काफी बढ़ा है ।  यह क्षेत्र दिल्‍ली, श्रीगंगानगर, बीकानेर व जयपुर के मध्‍य में स्‍थिति है । भविष्‍य में यहां काफी ट्रेनों का आवागमन रहेगा । यह क्षेत्र रोजगार की दृष्‍टि से भी काफी पिछड़ा हुआ है । यदि चूरू लोक सभा क्षेत्र में इन ट्रेनों के रखरखाव व मैटिनस हेतु ईएमयू (Electrical Multiple Unit)  शेड खोला जाता है तो क्षेत्र की जनता व रेलवे को अत्‍यधिक फायदा होगा व यहां के लोगों को इससे संबंधित रोजगार के अवसर भी मिलेंगे । उ.प.रे. के अधीन सादुलपुर रेलवे स्‍टेशन पर विद्युत ईंधन के रखरखाव  ईएमयू (Electrical Multiple Unit) शेड खोलने की स्‍वीकृति प्रदान करावें । नई ट्रेनों का संचालन करने के संबंध में:- आमान परिवर्तन के बाद श्रीगंगानगर से जयपुर तथा श्रीगंगानगर से दिल्‍ली सीधी एक्‍सप्रेस गाड़ी एक भी नहीं चल रही है, श्रीगंगानगर-जयपुर (वाया सादुलपुर,चूरू, सीकर) श्रीगंगानगर-दिल्‍ली (वाया सादुलपुर, रेवाड़ी) श्रीगंगानगर-जोधपुर (वाया सादुलपुर,चूरू,डगाना) बीकानेर-जयपुर(वाया रतनगढ़, चूरू) बीकानेर-डेगाना (वाया रतनगढ़) व जोधपुर-हरिद्वार (वाया रतनगढ-सादुलपुर) नई गाड़ियों का संचालन किया जावे ।  जिससे चूरू, सीकर, बीकानेर, श्रीगंगानगर व हनुमानगढ़ के लोगों को सीधा जयपुर व दिल्‍ली से जुड़ने की सुविधा मिलेगी । रेलवे एक्‍सटेंशन व ठहराव के संबंध में :- उ.प.रे. के अधीन संचालित चूरू-लुधियाना एक्‍सप्रेस गाड़ी को बढ़ाकर रतनगढ़ तक करने की मांग क्षेत्र की जनता द्वारा काफी समय से की जा रही है साथ ही तिलकब्रिज फास्‍ट पैसेंजर गाड़ी का नोहर के बाद सादुलपुर तक सभी स्‍टेशनों पर तथा अन्‍तोदय एक्‍सप्रेस गाड़ी का सिधमुख स्‍टेशन पर ठहराव किए जाने हेतु मेरे क्षेत्र की जनता द्वारा बार-बार मांग उठायी जा रही है । रेलवे के आमदनी के हिसाब से भी ये ठहराव  किए जाने उचित रहेंगे ।   आमजन की भावनाओं  को देखते हुए चूरू-लुधियाना  एक्‍सप्रेस  को रतनगढ़ तक बढ़ाया जाए,  अन्‍तोदय एक्‍सप्रेस का सिधमुख व तिलकब्रिज फास्‍ट पैसेंजर गाड़ी का नोहर के बाद सभी स्‍टेशनों पर ठहराव किया  जाए । 
प्‍लेटफार्म निर्माण एवं सुदृढ़ीकरण के संबंध में:- उत्‍तर पश्‍चिम रेलवे के सादुलपुर जं. पर दो अतिरिक्‍त प्‍लेटफार्म स्‍वीकृत हुए काफी समय हो चुका है, लेकिन उनका कार्य चालू नहीं किया गया है ।  प्‍लेटफार्म के अभाव में अधिकांश गाड़ियों  को काफी लम्‍बे समय तक आउटर सिग्नल पर ही खड़ा करना पड़  रहा है,  जिस कारण गाड़ियां विलम्‍ब से चलती हैं,  साथ ही यात्रियों  को भारी परेशानी होती है, आवश्‍यक धनराशि जारी कर उक्‍त कार्य शीघ्रताशीघ्र किया जावे साथ ही उ.प.रे.  के रतनगढ़-डेगाना खंड पर छापर,पड़िहारा  एवं सादुलपुर-श्रीगंगानगर  खंड पर भादरा व नोहर रेलवे स्‍टेशन के प्‍लेटफार्म काफी नीचे बने हुए हैं,  उनका सुदृढ़ीकरण एवं सुधार कर ऊपर उठाया  जावे ।  रतनगढ़, सुजानगढ़, चूरू, सादुलपुर, सरदारशहर, नोहर, भादरा,छापर, पड़िहारा, सिधमुख व अनूपशहर  रेलवे स्‍टेशनों पर यात्री सुविधाओं को देखते हुए दिन शैड व पीने के पानी की उचित सुविधा किया जाना अति आवश्‍यक है ।  अत: मेरा सरकार से अनुरोध है कि उक्‍त स्‍टेशनों पर टिन शैड व पीने के पानी की सुविधा हेतु अतिरिक्‍त बजट आवंटित किया जावे । और रेलवे द्वारा जो सुविधाएं ‘ए’ श्रेणी के स्‍टेशनों पर दी जाती है उन यात्री सुविधाओं का विस्‍तार‘बी’ व ‘सी’ श्रेणी के स्‍टेशनों पर करने के लिए अतिरिक्‍त बजट आवंटित किया जाए । अंडर ब्रिज निर्माण एवं सुदृढ़ीकरण  व सुधार करने के संबंध में :- उ.प.रे. के नोहर तहसील के भूकरका-खिनानियां रेलवे स्‍टेशन के मध्‍य लालखं की ढाणी से 79 आर.पी.एम. एवं अन्‍य गांवों में जाने के लिए रेल किलोमीटर 60/45 पर रेल अंडर ब्रिज निर्माण की मांग, रतनगढ़-बीकानेर खंड पर राजलदेसर रेलवे स्‍टेशन के पूर्व की ओर 340/7 व 340/8 किमी के मध्‍य एवं भरपालसर एवं भ्रावन्‍देसर के मध्‍य 337/6-7 किमी के बीच रेल अंडर ब्रिज निर्माण की मांग काफी समय से की जा रही है । रतनगढ़-सरदारशहर खंड पर रतनगढ़ केबिन स्‍टेशन के पास 10 नं. अंडर ब्रिज बना हुआ है जो बहुत छोटा है, जिसको बड़ा बनाया जावे । 
       इसके अलावा मेरे संसदीय क्षेत्र के अधीन सादुलपुर-रतनगढ़, सादुलपुर-श्रीगंगानगर, रतनगढ़-बीकानेर व रतनगढ़-डेगाना खंड पर काफी रेल अण्‍डर ब्रिज बने हुए हैं, जहां वर्षा के दौरान पानी भर जाता है, और गांवों के रास्‍ते अवरुद्ध हो जाते हैं, लोगों को जन-धन की हानि होती है, कई बार अप्रिय दुर्घटनाएं भी हो चुकी है ।  इस समस्‍या के समाधान के लिए ऐसे सभी अंडर ब्रिजों पर पानी भराव को डाइवर्ट किया जावे, बोरवेल जलग्रहण कूपों का निर्माण किया जावे, शैड निर्माण किया जावे तथा शैड के माध्‍यम के इक्‍ट्ठा होने वाले पानी को संग्रहण के लिए जलग्रहण हौजों का निर्माण किया जावे ।
       सादुलपुर-हनुमानगढ़ खंड पर सादुलपुर में सी-43 के पास रेल अंडर ब्रिज का निर्माण किया गया है, उक्‍त अंडर ब्रिज का डिजाईन सही नहीं होने एवं मोहल्‍ले वासियों के विरोध के चलते उक्‍त अंडर ब्रिज का संचालन नहीं किया जा सका ।  इस संबंध में  मेरा सुझाव है कि सी-43 को यथावत रखते हुए उक्‍त अंडर ब्रिज में 3 फुट का भराव कर उसका निर्माण पूर्ण करवाया जावे ताकि छोटे वाहनों  का इससे आवगमन हो सके । भादरा रेलवे स्‍टेशन के दक्षिण-पूर्व साइड में किमी 115/1-2 पर सी-66 रेल अंडर ब्रिज रहा है, जिसे बाद में बंद कर दिया गया है । उक्‍त किलोमीटर पर 4C5 मीटर का रेल अंडर ब्रिज बनाने का प्रस्‍ताव भेजा गया था जिसे डीएमआर बीकानेर द्वारा फिजिबल नहीं माना गया । मेरा सुझाव है कि उक्‍त  स्‍थान पर   4C3 मीटर  का अंडर ब्रिज (ऊंचाई  कम करते हुए) बनाया जा सकता है ताकि  राज्‍य  सरकार से मिलकर  इसके निर्माण की कार्यवाही की जा सके । यह अत्‍यंत महत्‍वपूर्ण हैं, भादरावासी इसकी काफी लम्‍ब समय मांग कर रहे हैं । सरदार शहर रेलवे स्‍टेशन के पूर्व साइड में रेल समपार सी-24  को बंद  कर दिया गया है इसके स्‍थान  पर स्‍टेशन  के पश्‍चिम साइड में किसी 42  पर रेल अंडर  ब्रिज का निर्माण किया जाए ।   यह मार्ग सरदार शहर बस स्‍टेंड व शहर को काफी गांवों से जोड़ने वाला मार्ग है ।  इसकी मांग काफी समय से की जा रही है । वर्तमान में रेलवे अधिकारियों  द्वारा रेल अंडर ब्रिज सी-24  के स्‍थान पर बनाया जा रहा है उसका आम नागरिक को कोई लाभ होने वाला नहीं है और न ही वहां कोई बस्‍ती  आबाद है, और ना ही बस्‍ती आबाद होने की संभावना है क्‍योंकि  वहां सिर्फ गौशाला  की भूमि है । प्रस्‍तावित रेल अंडर ब्रिज से मात्र 200 मीटर की दूरी पर ही सरदारशहर-बीकानेर सड़क मार्ग पर रेल समपार है ।  इस स्‍थान पर रेल अंडर ब्रिज की आवश्‍यकता नहीं है, अत: इस रेल अंडर ब्रिज का निर्माण रेलवे स्‍टेशन  के उत्‍तर पश्‍चिम में किमी 42 पर किया जाए जहां आम नागरिक की मांग है ।
       मैं पुन: माननीय प्रधानमंत्री जी और  वित्‍तमंत्री जी को इस बेहतरीन बजट के लिए धन्‍यवाद देता हूं ।
*श्री देवजी पटेल (जालौर): स्वतंत्र भारत के पहले संयुक्त बजट में रेलवे अनुदान मांगों से संबंधित इस चर्चा में, मैं अनुदान मांगों का सर्मथन करता हूं-
       जहाँ न पहुंचे बैलगाड़ी वहाँ पहुंचे मारवाड़ी        आज भी भारत में रेल छोटी व लम्बी यात्रा का सबसे सस्ता और सुगम माध्यम है ।  देश में एक कोने से दूसरे कोने की यात्रा का इससे सुविधयुक्त दूसरा कोई माध्यम नहीं है ।  भारतीय रेल देश की धड़कन है ।  इसका देश  की  तरक्की में अहम योगदान है ।  संस्कृति सभ्यता की पहचान है । भारत को एक सूत्र में जोड़ने का कार्य करती है ।  प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष लाखो रोजगार के अवसर उपलब्ध कराती है ।  सिनेमा कहानियों,यात्रा वृतांत से लेकर अर्थ जगत में रेलवे की भूमिका सराहनीय है ।  हम कह सकते हैं- भारतीय रेलवे देश की रीढ़ है ।  माननीय प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी जी की सरकार बनने के सा ही रेलवे के कायाकल्प के संकेत दिए थे ।  प्रधानमंत्री जी ने रेलवे को भारत की प्रगति और आर्थिक विकास की रीढ़ बनाने का लक्ष्य रखा है ।
मैं अपने क्षेत्र जालौर सिरोही से संबंधित समस्याओं की ओर आपका ध्यान चाहता हूं जिससे जालौर सिरोही के नागरिक भी कदम से कदम मिलाकर देश के साथ चल सकें ।  जालौर सिरोही उदयपुर और अंबाजी आबूरोड को रेलवे लाइन से जोड़ने की घोऐाणा की गई थी परन्तु इसका कार्य अभी तक प्रारम्भ नहीं किया गया है ।मेरे संसदीय क्षेत्र जालौर सिरोही स्थित जसवंतपुरा में सुंधा माताजी का भव्य मंदिर है ।  यह मंदिर लगभग 900 वऐाऩ के करीब पुराना है जो ऊंची पहाड़ी पर बसा है इसमें माँ सुंधाजी की मूर्ति स्थापित है ।  राजस्थान का पहला रोपवे यहां लगा हुआ है ।  सुंधा माता जी का मंदिर लगभग 850 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है ।  जहां पर देशभर से लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं ।  श्री सुंधा माताजी से लाखों श्रद्धालुओं की आस्था जुड़ी हुई है ।  अतः आपसे निवेदन है कि भगत की कोठी से साबरमती एक्सप्रेस 14819/20 प्रारम्भ होने वाली इस ट्रेन का नाम सुंधा माताजी एक्सप्रेस  रखा जाए । चेन्नई-जोधपुर एक्सप्रेस अप डाउन 16125/16126 तीन दिनों का सफर लम्बा सफर तय करती है इतनी लम्बी दूरी की ट्रेन में पैंट्रीकार नहीं होने से इसमें सफर कर रहे यात्रियों को काफी असुविधा होती है । इस ट्रेन में पैंट्रीकार लगाया जाए तथा इसके फेरे भी बढ़ाने की आवश्यकता है । आज आजादी के कई दशक बीत जाने के बाद भी जालौर जिला जयपुर प्रदेश मुख्यालय से नहीं जुड़ पाया है ।  यह ट्रेन (22478) प्रतिदिन सुबह जयपुर से 6:00 बजे चलकर जोधपुर 10:40 को पहुंच जाती है और यह ट्रेन दिन भर जोधपुर में रहती है ।  इस ट्रेन को 233 किमी आगे रानीवाडा तक बढ़ाया जा सकता है ।  इससे रेलवे के राजस्व में भारी वृद्धि होगी साथ ही साथ यहाँ के नागरिकों को जयपुर तक की यात्रा सुगम हो जाएगी । उत्तर पश्चिम रेलवे के अंतर्गत समदंडी-भीलडी रेल लाइन को ब्रोडगेज में तब्दील हुए करीब आर्ठ वऐाऩ हो गए हैं लेकिन यात्री सुविधाओं का नितांत अभाव है ।  नाम मात्र की यात्री गाड़िया इस रूट पर चल रही हैं ।  मेरे संसदीय क्षेत्र जालौर सिरोही के लगभग सात लाख लोग दक्षिण भारत के विभिन्न शहरों में रहते हैं ।  इसके अलावा बाड़मेर, जैसलमेर, पाली जोधपुर जिला के लाखों लोग निवास करते हैं तथा अपने व्यवसाय के सिलसिले में बंगलुरू चेन्नई दावनगिरि कोयम्बटूर हुबली ईरोड हैदराबाद आना जाना रहता है ।  परन्तु इन प्रवासियों के लिए सीधी रेल सेवा नहीं होने से अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है ।  अहमदाबाद से दक्षिण की ओर चलने वाली सभी ट्रेनों का टिकट काउंटर खुलते ही बुक हो जाता है ।  इस क्षेत्र को दक्षिण से जोड़ने से रेलवे के राजस्व में भारी वृद्धि होगी तथा नागरिकों को काफी सुविधा हो जाएगा ।  इसलिए वर्तमान में जालौर एवं पालनपुर को सीधी रेल सेवा से जोड़ा जाए । बेंगलोरु, हैदराबाद,कोयम्बटूर और चेन्नई  से जोधपुर वाया समदडी भीलडी रेल सेवा उपलब्ध कराई जाए; डीएमयू (79437/79438, 79431/79432) फास्ट ट्रेन आबूरोड से सुबह 5 बजे रवाना होकर 10 बजे अहमदाबाद पहुंचती है ।  अहमदाबाद से 3.3. पर रवाना होकर रात्रि 8.15 पर आबूरोड पहुंचती है ।  यह ट्रेन रातभर आबूरोड पड़ी रहती है,इस ट्रेन को फालना तक बढ़ाने से ग्रामीण किसान और व्यापारियों को पालनपुर, महेसाना एवं अहमदाबाद तक यात्रा करना अत्यंत सुविधाजनक हो जाएगा ।  साथ ही ट्रेन को फालना तक करने से रेलवे मंत्रालय को राजस्व में काफी वृद्धि होगी । जोधपुर-मेडता-बीकानेर जाने हेतु स्वरूपगंज रेलवे स्टेशन से कोई ट्रेन नहीं है ।  बीकानेर-ब्राद्रा-बीकानेर (14707/14708) ट्रेन हमेशा स्वरूपगंज से गुजरती है ।  स्वरूप गंज के आस-पास लगभग 100 गांवों की आबादी है ।  सड़क मार्ग बहुत महंगा एवं असुविधाजनक है ।  ग्रामीण जनता की सुविधा हेतु बीकानेर-ब्रांद्रा-बीकानेर का ठहराव स्वरूपगंज स्टेशन पर करावें ।  आश्रम एक्सप्रेस (12915/12916) और हरिद्वार मेल (19105/19106) का ठहराव स्वरूपगंज रेलवे स्टेशन पर होने से नागरिकों को काफी सुविधा होगी । आज से आठ दशक पहले यानि 15 मार्च 1929 को जालौर में पहली बार रेल दोड़ी थी आज जालौर जिले की जनसंख्या 20 लाख से ऊपर हो गई है ।  अबतक जिले में यात्री सुविधाओं का विस्तार नहीं हुआ है । सांचौर जिले का एक उपखंड हैं तथा यह अंतर्राष्ट्रीयसीमा क्षेत्र घोषित हैं और अत्यंत ही पिछड़ा क्षेत्र है ।  आठ साल पूर्व रेल बजट में सर्वे की घोषणा की गई थी ।  परन्तु अब तक साचोर रेल सेवा से नड़ी जुड़ पाया है ।  इस क्षेत्र में रेलवे लाइन के आने से यहां रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे ।  सांचौर रेलवे लाइन आने से स्थानीय नागरिकों को सस्ता और आरामदायक सफर का फायदा मिलेगा ।  इस रेलवे लाइन से बॉडर के मुख्य गांव और कस्बों को रेल सेवा से जुड़ जाएगा ।  जिससे हमारी सेना को भी आवागमन में सुविधा होगी ।
       
*श्री विष्णु दयाल राम (पलामू): रेलवे की कार्यप्रणाली को जानने समझने वाला कोई भी विशेषज्ञ आम बजट 2019-20 को देखने के बाद सबसे पहले यही कहेगा कि माननीया वित्त मंत्री जी ने आम बजट में रेलवे के लिए रखे प्रस्तावों में किसी नई रेल की घोषणा न करके एक सही फैसला लिया है ।  दरअसल बीते वर्ष की यह प्रवृत्ति रही थी कि राजनीतिक लाभ की दृष्टिसे कई रेल मंत्री लोकलुभावन तरीके अपनाकर नई रेलगाड़ियों की घोषणा कर देते थे जबकि Infrastructure अवसंरचना की स्थिति जस की तस बनी रहती थी ।  
       केद्र में माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेद्र मोदी जी की सरकार सत्तासीन होने के बाद नई रेलगाड़ियों को शुरू करने के लोकलुभावन तरीके पर रोक लगी है ।  अब सरकार का ध्यान नई पटरियों को बिछाने पर है ।  माननीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण जी ने बजट भाषण में कहा है कि रेलवे में पीपीपी मॉडल के आधार पर विकास की जाएगी ।  रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर के बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने के लिए साल 2019 से 2030 के बीच 50 लाख करोड़ रुपए के निवेश की आवश्यकता होगी । 2019 से 2030 के बीच रेल अवसंरचना के लिए 50 लाख करोड़ रुपए के निवेश की आवश्यकता होगी । इसे देखते हुए रेलवे का पूंजी परिव्यय प्रति वर्ष 1.5 से 1.6 लाख करोड़ रुपए है । सभी मंजूर परियोजनाएं पूरी करने में कई दशक लग जाएंगे ।  इसलिए रेलवे ने यह प्रस्ताव किया है कि तीव्र विकास और पटरियां बिछाने, रौलिंग स्टॉक विनिर्माण तथा यात्री मालभाड़ा सेवाओं की सुपुर्दगी के लिए सरकारी निजी भागीदारी (पीपीपी)का इस्तेमाल किया जाएगा ।  मुंबई और दिल्ली जैसे महानगरों में सब अर्बन बेहद सफल रहा है ।  रेल मंत्रालय सब अर्बन रेलवे का विस्तार स्पेशल परपज व्हीकल (एसपीव्ही)के जरिए किया जाएगा ।  इसके लिए भी पीपीपी मॉडल के जरिए निवेश किया जाएगा ।  भारतीय रेलवे की उपशहरी तथा लम्बी दूरी वाली सेवाएं मुंबई जैसे शहर तथा छोटे शहरों में चमत्कारी कार्य कर रही हैं ।   रेलवे को दिल्ली मेरठ मार्ग पर प्रस्तावित रैपिड रीजनल ट्रंसपोर्ट सिस्टम (आरआरटीएस)जैसी विशेषप्रयोजन साधन (एसपीवी)संस्थाओं के जरिए उपशहरी रेलवे में अधिक निवेश करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा ।  2022 तक डेडीकेटेड फ्रेंट कॉरीडोर पार्ट योजना पूरी कर लेंगे जो यात्री रेलगाड़ियों के लिए मौजूदा रेलवे नेटवर्क को मुक्त रखेगी ।  रेलवे स्टेशनों का मॉर्डनाइजेशन आम नागरिकों के लिए रेल यात्रा को आरामदायक और सुखद अनुभव बनाने के लिए इस वर्षबड़े पैमाने पर रेलवे स्टेशनों के आधुनिकीकरण के कार्यक्रम शुरू किए जाएंगे ।  देश मैं लगातार बढ़ते मेट्रो रेल नेटवर्क कुल 300 किमी की लम्बाई वाले मार्ग की नई मेट्रो रेल परियोजनाओं को 2018-19 के दौरान मंजूरी दी गई थी । साथ ही, 2019 के दौरान लगभग 210 किमी मेट्रो लाइनों पर प्रचालन शुरू हो गया है ।  इसके चलने के साथ देशभर में 657 किमी का मेट्रो रेल नेटवर्क प्रचालनरत है । 
रेल मंत्रालय के लिए मेरे कतिपय सुझाव निम्न प्रकार है- रेलवे की सर्वोच्च प्राथमिकता Safety, Security, Punctuality और Cleanliness  होनी चाहिए; Operational ratio को कम करने की आवश्यकता है ; Down Sizing of Staff होना चाहिए; रेलवे बोर्ड Top Heavy है इसको कम करना चाहिए;रेलवे को Accounting  का काम केवल  Indian Railway Account Services के पदाधिकारियों को नहीं देना चाहिए,बल्कि   India Audit & Account Services से भी पदाधिकारियों को   Deputation पर लेना चाहिए;और C.S.O. (Chief Safety Officer) GM से वरीय पदाधिकारी होना चाहिए, समकक्ष पंक्ति का नहीं ।
यह अच्छी बात है कि सरकार ने मानवरहित लेवल क्रासिंग को बंद करने का निर्णय लिया जो स्वागत योग्य कदम है ।  परन्तु मेरा अनुरोध है बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के (आरयूबी या आरओबी के निर्माण के)  एकाएक रेलवे क्रासिंग को बंद कर देने से ग्रामीण क्षेत्र के निवासियों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है ।  अगर मैं अपने संसदीय क्षेत्र पलामू (झारखंड) की ही बात करूं तो ऐसे कई रेलवे क्रासिंग हैं जिनको बंद कर दिए जाने के कारण गांव नदी के दो छोर बनकर रह गए हैं, ये रेलवे क्रासिंग जैसे डाली, पंजरीकला, लालगढ़ इत्यादि ऐसे क्रासिंग हैं जिनके बंद हो जाने से ग्रामीणों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है ।  मैं सिर्फ उससे उत्पन्न व्यावहारिक कठिनाइयों की ओर आपका ध्यान आकृष्टकराना चाहता हूं और जनता की कठिनाइयों को देखते हुए वैकल्पिक व्यवस्था के तहत जनता की समस्या का निदान चाहता हूं ।  इस संबंध में मेरा एक सुझाव है कि अनमैंड रेलवे क्रासिंग के स्थल पर या उसके अगल-बगल के स्थान पर जहाँ पर भी संभव हो एल.एच.एस. का निर्माण कराकर समस्या का समाधान बहुत हद तक किया जा सकता है ।  एल.एच.एस. के निर्माण कार्य में व्यय होने वाली राशि का कुछ हिस्सा आवश्यकता पड़ने पर मैं अपने सांसद निधि से भी देने को तैयार हूं ताकि जनता की यातायात में उत्पन्न समस्या का समाधान हो सके । जब तक वैकल्पिक व्यवस्था (आरयूबी या आरओबी का निर्माण)नहीं कर लिया जाता, तब तक पूर्व की भाँति रेलवे क्रासिंग से यातायात को चालू रखा जाए ।
साथ ही मेरे संसदीय क्षेत्र पलामू से संबंधित क्षेत्र पलामू से संबंधित कुछ अन्य मांगें भी हैं जिसे मैं संक्षेप में रखना चाहता हूं नई दिल्ली-रांची राजधानी एक्सप्रेस को प्रतिदिन चलाया जाए ।  रफीगंज से होते हुए डालटनगंज तक बड़ी लाइन बनाने की ओर शीघ्र ध्यान दिया जाए ।  12877/12878 रांची नई दिल्ली गरीब रथ वाया बरकाकाना-डालटनगंज होकर सप्ताह में तीन दिन चलती है, उसे प्रतिदिन चलायी जाए ।  18613/18614 रांची चोपन एक्सप्रेस जो सप्ताह में तीन दिन बरकाकाना चलती है उसे प्रतिदिन वाया टोरी लोहरदगा होकर चलायी जाए ।  11447/11448 हावड़ा जबलपुर शक्ति एक्सप्रेस प्रतिदिन का विस्तार मुम्बई तक किया जाए । 12453/12454 रांची नई दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस जो सप्ताह में दो दिन चलती है, उसमें डालटनगंज में रिजर्वेशन का कोटा बढ़ाया जाए । 13025/13026 हावड़ा भोपाल एक्सप्रेस साप्ताहिक जो कि धनबाद चद्रपुरा लाइन बंद होने के कारण बंद कर दिया गया था, उसे पुनः चालू करवायी जाए, क्योंकि धनबाद चन्द्रपुरा लाइन फिर से चालू हो गई है ।  18631/18632 रांची अजमेर गरीब नवाज साप्ताहिक एक्सप्रेस का ठहराव बनस्थली निवाई में किया जाए, क्योंकि इधर की बहुत बच्चियां वहां पढ़ाई करती हैं, जिनको जयपुर से वापस जाना पड़ता है ।  पलामू एक्सप्रेस का रजहरा,करकटा एवं कजरात नावाडीह स्टेशनों पर ठहराव दिया जाए ।  गढ़वा से रांची के बीच एमएमयू चलायी जाए। ट्रेन संख्या 14372/14371 (त्रिवेणी लिंक एक्सप्रेस)का रांची तक विस्तार किया जाए ।  ट्रेन संख्या 14372/14371 (त्रिवेणी लिंक एक्सप्रेस)बरवाडीह चोपन तक चलती है तथा चोपन में त्रिवेणी एक्सप्रेस से जुड़ कर लखनऊ, बरेली होते हुए टनकपुर तक जाती एवं आती ळै ।  विदित है कि यह ट्रेन सं.-14372 (त्रिवेणी लिंक एक्सप्रेस)चोपन से सुबह 05.57 बजे खुलती है तथा रेणुकूट,बिन्ढ़मगंज,नगर उटारी,रमुना, मेराल ग्राम, गढ़वा,रेहला (गढ़वा रोड), डालटनगंज होते हुए बरवाडीह सुबह 10.30 बजे पहुंचती है ।  यह ट्रेन बरवाडीह यार्ड में ही खड़ी रहती है तथा दूसरे दिन 13.00 बजे बरवाडीह से चोपन के लिए अप त्रिवेणी लिंक 14371 के रूप में खुलती है ।  यदि इस ट्रेन 14372 का विस्तार बरवाडीह से आगे लातेहार,टोरी (चंदवा)होते हुए लोहरदगा के रास्ते रांची तक कर दिया जाए,तो इस क्षेत्र पलामू, गढ़वा,लातेहार के लोगों को अपनी राजधानी रांची के लिए एक और ट्रेन सुविधा का लाभ मिल जाएगा ।  पुनः इस ट्रेन को 14371 त्रिवेणी लिंक एक्सप्रेस के रूप में रांची से सुबह खोला जाए, तो इस रैक का सबसे बेहतर सदुपयोग होगा । इसको चलाने के लिए रेलवे को भी चोपन से रांची वाया लोहरदगा एक्सट्रा मैन पावर की आवश्यकता नहीं होगी ।
अंत में, मैं रेलवे संबंधी मांग का अनुमोदन करता हूं ।
*श्री राजू बिष्ट (दार्जिलिंग): न्यू जलपाईगुड़ी जंक्शन के मॉडर्नीजेशन की आवश्यकता है । नॉर्थ-ईस्ट एवं नॉर्थ बंगाल का बड़ा जंक्शन है । सिलिगुड़ी टाऊन स्टेान एक ऐतिहासिक रेलवे स्टेशन है, जो 1878 में शुरू हुआ था, अब यह स्टेशन खाली रहता है ।  अगर इस स्टेशन पर भी बड़ी ट्रेनों का आवागमन शुरू होता है तो एनजेपी स्टेशन का लोड कम होगा । गुलमा रेलवे स्टेशन एनजेपी से 15 कि.मी. की दूरी पर स्थित है और सुकना रेलवे से 3 कि.मी. दूरी पर है ।  अगर दार्जिलिंग मेल ट्रेन को गुलमा से सियालदाह तक कर दिया जाए तो आम आदमी और दार्जिलिंग तथा सिक्किम में आने वाले टूरिस्ट के लिए आसानी होगी और साथ ही लोकल एम्प्लॉयमेंट बढ़ेगा । अन-मैन्ड रेलवे क्रॉसिंग की बात करें तो सिलीगड़ी टाऊन स्टेशन के पास वार्ड नं0 28 औरवार्ड नं0 20 के बीच थोड़ी दूर में जो बागराकोट स्टेशन पड़ता है वहां अन-मैन्ड रेलवे रेलवे क्रॉसिंग है यहां स्कूली बच्चों सहित हजारों लोग हर दिन अपनी जान जोखिम में डालते हैं ।  इस पर एक अंडरपास या फ्लायओवर बने । पूरा डूअर्स बायो-डायवर्सिटी के लिए मशहूर है और यहां हाथी, बाघ,भालू, चीता,बाईसन जैसे बड़े प्राणी भारी मात्रा में पाए जाते हैं । लेकिन खेद की बात है कि पिछले पांच सालों में यहां 500 से अधिक वन्य प्राणी,जिनमें अधिकतर हाथी हैं, उनकी मौत ट्रेन के टकराने से हुई है ।  इसीलिए दार्जिलिंग के सिलीगुड़ी से लेकर असम के कोकराझार तक वाइल्ड लाइफ कॉरीडोर बने । डीएचआर 1999 में यूनेस्को की वर्ल्ड हेरीटेज की पहचान पाने वाली दुनिया की पहली पर्वतीय ट्रेन बन गई । दार्जिलिंग रेलवे स्टेशन में डीएचआर इंजिन-शेड के ऊपर भूस्खलन से जो नुकसान हुआ था,उसे अभी तक ठीक नहीं किया गया । डीएचआर वर्कशॉप की लगातार उपेक्षा जारी है । 
 
*श्री जुगल किशोर शर्मा (जम्मू): हमारी भारतीय जनता पार्टी (एनडीए) की पूर्ण बहुमत की सरकार केंद्र में 2014 से नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में बनी तब से लेकर रेलवे में बड़े बदलाव हुए हैं एक समय था जब रेलवे की स्थिति अत्यंत दयनीय थी परन्तु आज वो समय है जब रेलवे मजबूत स्थिति में है वन्दे मातरम जैसी ट्रेन का परिचालन इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है देश भर के छोटे बड़े शहरों को रेलमार्ग से जोड़ने का काम हमारी सरकार द्वारा किया जा रहा है क्योंकि जो क्षेत्र रेल सेवा से वंचित हो अध्यक्ष महोद जी उस क्षेत्र का सर्वांगीण विकास संभव नहीं है । मेरे संसदीय क्षेत्र जम्मू में बहुत सी ऐसी जगह है जो आज भी रेल सुविधा से वंचित है ।
       किसी क्षेत्र के रेल विहीन होने का दर्द क्या होता है ये मुझे बखूबी पता है मेरे संसदीय क्षेत्र के कई जगह अति पिछड़ा मात्र इसीलिए है क्योंकि वहां रेल नहीं है अध्यक्ष महोदय जी यह साझा करते हुए बहुत ही गर्व हो रहा है कि जम्मू से पूछ तक रेल लाइन बिछाने का सर्वे पूरा हो चुका है । 2014 में केंद्र में नरेंद्र भाई मोदी जी के नेतृत्व वाली एनडीए की सरकार पूर्ण बहुमत की बनी मेरे संसदीय क्षेत्र जम्मू एक पर्यटक और धार्मिक स्थल है यहां रोजाना रेल द्वारा देश विदेश से लाखों लोग घूमने और दर्शन करने आते हैं । 
       मेरे संसदीय क्षेत्र जम्मू स्टेशन आदर्श रेलवे स्टेशन की सूची में शामिल सहित अनेकों ऐतिहासिक सौगातें प्राप्त हुई हैं इस हेतु भी मैं केंद्र सरकार व माननीय नरेन्द्र भाई मोदी जी का आभार प्रकट करना चाहता हूं । 
       भारतीय जनता पार्टी के आशीर्वाद व संसदीय क्षेत्र वासियों के विश्वास से पुन: 17वीं लोक सभा के लिए सदन का सदस्य निर्वाचित हुआ हूं और केंद्र में पुन: नरेंद्र भाई मोदी जी के नेतृत्व वाली भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनी है ।        
 
       मैं रेल मंत्रालय का ध्यान मेरे संसदीय क्षेत्र जम्मू की ओर दिलाना चाहता हूं कि जम्मू में कई ऐसी जगह है जहां रेलवे ओवर ब्रिज एवं रेलवे अंडर ब्रिज नहीं है जिसके कारण अक्सर रेल दुर्घटनाएं होती रहती हैं ।  जैसे - चक बजालता, विजयपुर,साम्बा, उक्त जगह पर रेलवे ओवर ब्रिज एवं रेलवे अंडर ब्रिज जल्द बने । जम्मू स्टेशन का काम पिछले 5 सालों में बहुत ही अच्छा हुआ है और करने की जरुरत है ।  दो और स्वचालित सीढ़िंया लगाने की जरुरत है साथ ही तीन नये प्लेटफार्म जल्द बनाये जायें । जम्मू रेलवे स्टेशन पर सुरक्षा की दृष्टि से कमियों को दूर करने की जरुरत है स्टेशन की दीवारें भी टूटी हुई हैं और सीसीटीवी कैमरे भी कम हैं, जो हैं वो भी काम नहीं करता है ।    
       रेल मंत्रालय ने पिछले पांच सालों में रेल से संबंधित कई सुधार किये हैं नए शहरों में रेल पहुंचाने का काम किया है । मैं आभार प्रकट करना चाहता हूं कि राजौरी, पूँछ के लोगों की मांग को मानते हुए जम्मू से पूँछ तक रेलवे लाईन बिछाने का सर्वे पूरा कर लिया है ।  अब मंत्री जी से प्रार्थना है कि जम्मू से पूँछ तक रेल लाईन बिछाने का काम जल्द शुरू करने के लिये बजट में धनराशि आवंटित करें ताकि रेल का लाभ अखनूर, नौशेरा, राजौरी और पूँछ के लोग भी ले सकें और इस क्षेत्र के लोग भी रेल द्वारा जम्मू और देश के दूसरे भागों में आ जा सकें ।
                  
*श्री पशुपति नाथ सिंह (धनबाद): मैं माननीय रेल मंत्री जी द्वारा  प्रस्तुत2019-20 के रेलवे बजट का समर्थन करता हूं । इस रेलवे बजट में आम आदमी की सुविधा का विशेष ध्यान रखा गया है और बढ़ती महंगाई में रेलवे के टिकट पर कोई बढ़ोतरी नहीं की है और न ही माल भाड़े में कोई वृद्धि नहीं की है ।  माननीय प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के विजन एवं कुशल नेतृत्व की छाप रेलवे बजट पर दिखाई दे रही है । इससे देश के विकास में तीव्र गति मिलेगी । माननीय प्रधान मंत्री जी के सुझाव पर रेलवे के राजस्व को बढ़ाने के लिए माल भाड़े एवं किराये पर बढ़ाने के स्थान पर रेलवे राजस्व के बढ़ाने के अन्य स्रोत की खोज करने के कार्यों पर किया जाएगा ।
       रेलवे को आधुनिक बनाने एवं उनके विकास के लिए रेलवे बजट में कई प्रावधान रखे गये  हैं ।
       रेलवे भूमि से अतिक्रमण रोकने के लिए 30 साल से काम हो रहा है फिर भी आज 2033 हेक्टेयर भूमि पर लोगों का अवैध कब्जा है और इस संबंध में न्यायालय में 159323 अवैध कब्जे के मामले गये और आज भी 39733 मामले कोट में अवैध कब्जे के संबंध में चल रहे हैं ।  यह अवैध कब्जे मुख्यत: शहरों में हैं और रेलवे सुरक्षा की दृष्टि से भी बहुत खतरनाक है और उत्तर रेलवे ज्यादा चपेट में है जहां पर 1145 अवैध कब्जे के मामले हैं ।  जो कब्जे हैं उसमें रेलवे अधिकारियों का हाथ भी है । 
       रेलवे में 3.2 प्रतिशत के हिसाब से रेलवे में ढुलाई कार्य बढ़ रहा है एवं माल ढुलाई से रेलवे की आय आठ फीसदी दर से बढ़ रही है । रेलवे के कुल राजस्व वस्तुओं की ढुलाई से 66 प्रतिशत आय प्राप्त होती है जिसमें कोयला का भाग 45 प्रतिशत के लगभग एवं उर्वरक का प्रतिशत 3.7 प्रतिशत है ।  देखा गया है कि जब किसानों की बुआई का समय होता है तो उन्हें यूरिया की आवश्यकता होती है परन्तु यूरिया रेलवे गोदामों में पड़ा रहता है और यह पड़े-पड़े पत्थर बन जाते हैं । उन्हें गंतव्य स्थान पर नहीं पहुंचाया जाता है उसी तरह से कई उद्योगों को कोयले की आवश्यकता पड़ती है उनको भी समय पर कोयला नहीं मिल पाता है जिनके कारण कई दिनों तक उनके कारखानों बंद रहते हैं ।  रेलवे वेगन एक तरफ से भरे जाते हैं दूसरी तरफ से खाली आते हैं । इस तरह से वेगनों का समुचित उपयोग नहीं किया जा रहा है । वेगनों की जो कमी है उसको भी पूरा नहीं किया जा रहा है इससे रेलवे लाईनों के समुचित उपयोग से रेलवे की आमदनी बढ़ेगी ।
       रेलवे के पास 10.65 लाख एकड़ भूमि है जिस पर 10 प्रतिशत यानि 1.13 लाख एकड़ भूमि बेकार में पड़ी है जिसमें से केवल 3760 एक भूमि का कमर्शियल प्रयोग किया है बाकी अभी तक बेकार में पड़ी हुई है सरकार कहती है कि इसका भविष्य में उपयोग रेलवे परियोजना के लिए होगा परन्तु वर्तमान समय में उसका उपयोग तो राष्ट्र के हित में होना चाहिए ।
       मेरे संसदीय क्षेत्र धनबाद के रेलवे विकास के संबंध में मैं मांग करता हूं कि धनबाद से नई दिल्ली ट्रेन चलाई जाये; हटिया यशवंतपुर एक्सप्रेस को धनबाद तक बढ़ाया जाये; धनबाद से अहमदाबाद के लिए नई रेल सेवा की शुरुआत की जाये; बंगाल के बॉर्डर स्टेशन में जो ट्रेन ठहरती है उन ट्रेनों का ठहराव झारखंड के बॉर्डर स्टेशन पर भी किया जाये; गोमो स्टेशन से आसनसोल तक प्रतिदिन 10 खेप पैसेन्जर ट्रेन चलाई जाये; बोकारो से भोजूडीह होते 10 फेरा पैसेन्जर ट्रेन चलायी जाये; भोजूडीह से चन्दनकियारी चास होते हुए बोकारो तक रेलवे लाईन बिछाने का कार्य पूरा किया जाये; चास स्टेशन पर एक्सप्रेस ट्रेन का ठहराव हो; धनबाद से गिरीडीह तक स्वीकृत योजना रेलवे लाईन बिछाने का कार्य पूरा किया जाये; बोकारो को रेल मंडल बनाया जाये अन्यथा इसे आद्रा छोड़ धनबाद या रांची मंडल से जोड़ा जाये; और झारखंड में धनबाद, चक्रधरपुर और झारखंड क्षेत्र में आद्रा रेल मंडल के क्षेत्र को छोड़कर एक जोन बनाया जाये ।
       सरकार द्वारा प्रस्तावित अनुदान मांग का समर्थन करता हूं ।
*DR. SUBHAS SARKAR (BANKURA) : I  would like to thank Shrimati Nirmala Sitharaman, Minister of Finance and Shri Piyush Goyal, Minister of Railway for such a citizen friendly visionary Budget.
       But any opposition leader and Member have not uttered a single sentence that this Budget has not given any burden on passenger fare.
       I would like to place the following demands for Jangal Mahal area of West Bengal, Chhatna – Mukutmanipur Railpath – 48 km; Year of sanction 2005-2006; Purulia – Jhargram – Railpath ; Bishnupur – Tarakeswar; Bowaichandi – Khana Jn. and Escalator at Bankura Jn.
                 
*श्री कृष्ण पाल सिंह यादव (गुना) : मेरा संसदीय क्षेत्र रेलवे के दृष्टिकोण से बहुत पिछड़ा हुआ है ।  मेरे संसदीय क्षेत्र के अशोकनगर से अगर दिल्ली आना हो तो कोई भी ट्रेन डायरेक्ट नहीं है ।  पहले हमें ग्वालियर या भोपाल जाना होता है फिर वहां से दिल्ली के लिए ट्रेन से आना पड़ता है ।  मेरे संसदीय क्षेत्र के लिए प्रमुख मांग है:- जबलपुर-इंदौर एक ट्रेन चलती थी लेकिन उसे भी अब बंद कर दिया गया है ।  मेरा अनुरोध है कि कृपया जबलपुर-इंदौर ट्रेन को शीघ्र शुरू कराया जाए; अशोकनगर जिला मुख्यालय में रेलवे अंडर ब्रिज बनाने हेतु पैसा का आवंटन हो चुका है लेकिन अभी तक इसका काम शुरू नहीं हुआ है; अशोकनगर रेलवे स्टेशन पर आज तक यात्री प्रतीक्षालय तक नहीं बना है तथा अशोकनगर रेलवे स्टेशन का आधुनिकीकरण कराना अति आवश्यक है; सवाई माधोपुर - शिवपुरी - झांसी रेलवे लाइन का सर्वे का काम पूरा हो चुका है लेकिन अभी तक वहां काम शुरू नहीं हुआ है ।  इसे कृपया जल्द शुरू करना अति आवश्यक है; गुना बमोरी रोड पर अण्डर ब्रिज या ओवर ब्रिज बनाया जाए; पिपरई - ललितपुर रेलवे लाइन का प्राइमरी सर्वे हो चुका है लेकिन यहां भी अभी तक कोई काम शुरू नहीं हो सका है ।  चंदेरी के रास्ते पिपरई और ललितपुर को जोड़ने वाली 80 कि.मी. रेल लाइन पर बजट राशि 395.52 करोड़ को शीघ्र आवंटित किया जाए; अशोकनगर से दिल्ली आने के लिए सुपर फास्ट ट्रेन शुरू कराई जाए;ग्राम शाढ़ौरा रेलवे फाटक पर अण्डर ब्रिज या ओवर ब्रिज बनाया जाए; गुना - इटावा वाया शिवपुरी - ग्वालिया - भिंड लगभग 348 किलोमीटर की नई रेल लाइन का काम अभी तक शुरू नहीं हो सका है; गुना - बीना रेल खण्ड से गुजरने वाली विभिन्न ट्रेनें रेल विभग द्वारा अस्थाई रूप से बन्द कर दी गई हैं, जिस कारण से क्षेत्र के लोगों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है ।  जो ट्रेनें इस खण्ड पर अस्थाई रूप से बन्द की गईं हैं, वो निम्नानुसार हैः-
क्र.
ट्रेन का नाम एवं नम्बर वर्तमान स्थिति
1.

ट्रेन- अप 59341 नागदा-बीना ट्रेन- डाउन 59342 बीना-नागदा गुना से बीना के बीच अस्थाई रूप से बन्द है ।

2. ट्रेन- अप 11701 जबलपुर-इंदौर इंटरसिटी ट्रेन- डाउन 11702 इंदौर-जबलपुर इंटरसिटी गुना से बीना अस्थाई रूप से डेढ़ वर्ष से बन्द है ।

3. ट्रेन- अप 19659 शालीमार-उदयपुर एक्सप्रेस ट्रेन- डाउन 19660 उदयपुर-शालीमार एक्सप्रेस अशोकनगर जिला मुख्यालय पर स्टॉपेज नहीं है ।

 

       अत: जनता की समस्याओं को दृष्टिगत रखते हुए, उपरोक्त ट्रेनों को यथाशीघ्र प्रारंभ करने एवं अशोकनगर जिला मुख्यालय पर स्टॉपेज करने का अति आवश्यक है । मेरे संसदीय क्षेत्र गुना से अभी तक वीवीआईपी जनप्रतिनिधि चुने जाते हैं । लेकिन दुर्भाग्य है कि मेरे संसदीय क्षेत्र में अन्य विकासकामों के साथ-साथ रेलवे का भी विकास नहीं हो सका है । मेरा आपसे आग्रह है कि कृपया मेरे इन सभी मांगों पर विशेष ध्यान दिया जाए ताकि मेरे संसदीय क्षेत्र के लोग भी इसका लाभ उठा सकें ।

                          

*प्रो. एस. पी. सिंह बघेल (आगरा) :मैं रेल बजट परडिमांड फार ग्रांट कासमर्थन करता हूँ ।

       मैं माननीय प्रधानमंत्री जीएवं रेल मंत्री माननीय पीयूष गोयल जीको इसलोक कल्याणकारी  बजट केलिए धन्यवाद देता हूं ।

       मेरी मांग हैकि- आगरा कैंट रेलवे स्टेशन केसर्कूलेटिंग एरिया काविस्तार किया जाए तथा द्वितीय प्रवेश वनिकास द्वारा सराय ख्वाजा कीतरफ शुरू किया जाए, आगरा में रेलवे केबहुयामी (मल्टीडिस्प्लनरी ट्रेनिंग सेंटर) गधापाडा, बेलनगंज में विभिन्न तकनीकी प्रशिक्षण एवं कोर्सेस जैसे सिग्नल, टेलिकम्यूनिकेशन, गैंगमैंन, ट्रॉलीमैन, प्वाइंटमैन आदि केप्रशिक्षण कोर्स प्रारंभ होसके, आगरा शाहगंज, अर्जुन नगर रेलवे ओवरब्रिज कानिर्माण कराया जाए, राजामंडी रेलवे स्टेशन परचामुण्डा देवी केसाईड पुल कीतरफ टिनशैड लगाया जाए, आगरा सिटी स्टेशन कासौन्दर्यीकरण एवं आरक्षण केंद्र निर्माण कराया जाए, फिरोजाबाद एवं टूण्डला रेलवे स्टेशनों परस्वचालित सीढ़ी (एक्सलेटर) लगाए जाएं, जिससे बुजुर्ग यात्रियों कोराहत मिल सके, टूण्डला रेलवे स्टेशन केलिए बनाई गईसौन्दर्यीकरण कीयोजना हेतु रेलवे बोर्ड में लम्बे समय सेपड़े बजट कोजारी किया जाए, गाड़ी सं. 04191/04192 एटा-आगरा फोर्ट पैसेंजर स्पेशल को,जिसको नवम्बर 2017 सेबंद करदिया गया है,उसे पुन:संचालित किया जाए, बरहन रेलवे जंक्शन परपेयजल हेतु समर्सीबल पम्प बोरिंग करलगाया जाए । इसके अतिरिक्त यात्री एवं वेटिंग रूम कीव्यवस्था कीजाए, बरहन जंक्शन रेलवे स्टेशन परपुरी तथा संगम एक्सप्रेस काठहराव किया जाए, निजामुद्दीन सेमुम्बई तकचलने वाली राजधानी एक्सप्रेस (गाड़ी सं. 222222/222221) का ठहराव आगरा कैंट स्टेशन परप्रतिदिन किया जाए , इलाहाबाद सेनई दिल्ली तकचलने वाली प्रयागराज एक्सप्रेस (गाड़ी सं. 12417/12418)  का  ठहराव  टूण्डला जंक्शन  पर  किया  जाए, मूरी  एक्सप्रेस  (गाड़ी सं.

 

 8101/8102) एवं (गाड़ी सं. 4114/4164 ) संगमएक्सप्रेस काठहराव बरहन जंक्शन परकिया जाए वन्दे भारत एक्सप्रेस ट्रेन काठहराव टूण्डला जंक्शन परकिया जाए  और   लखनऊ सेनई दिल्ली गोमती एक्सप्रेस (गाड़ी सं.12419/12420)ट्रेन काठहराव जलेसर रोड स्टेशन परकिया जाए ।

*DR. SUBHASH RAMRAO BHAMRE (DHULE) :  Indian Railways (IR) is one of the world's largest rail network with 67,368 route kilometres of route length.  It has 61,680 Route kms. of broad gauge, 3479 kms. of metre gauge and 2209 kms. of narrow gauge as on 31st March, 2017. With its more than 150 years old history, Indian Railways is a State owned public utility of the Government of India under the Ministry of Railways.  As a national common carrier transporting passenger and goods over its vast network, Indian Railways have always played a key role in India's social and economic development.  It is a cheap and affordable means of transportation for millions of passengers. As a carrier of bulk freight viz. ores and minerals, iron and steel, cement, mineral oils, food grains and fertilizers, containerized cargo etc., the importance of Indian Railways for agriculture, industry and the common man is well recognized.  On an average, Indian Railways carried 22.24 million passengers and 3.04 million tonnes of freight each day.

Rail infrastructure would need an estimated investment of Rs. 50 lakh crore between 2018-2030.  PPS will be used to help with faster development and completion of tracks, rolling stock manufacturing and delivery of passenger freight services. Indian Railways will be encouraged to invest more in suburban railways through Special Purpose Vehicle structures such as the Rapid Regional Transport System proposed on the Delhi- Meerut route. Transit Oriented Development will be encouraged to ensure commercial activity around transit hubs. To make railway travel a pleasant and satisfying experience for the common citizen, a massive railway station modernisation programme will be launched this year.  In 2019-20, the gross budgetary support from central government is proposed at Rs 66,105 crore.  This is a 25% increase from the revised estimates of 2018-19 (Rs 53,060 crore). Budget Estimates under Gross Traffic Receipts for the year 2019-20 have been placed at 2,16,675 crore involving an increase of Rs. 19,961 crore over the Revised Estimates 2018-19.  The targeted increase is 10.1%. While the passenger earnings at Rs 56,000 crore are based on a 2.9% growth in originating passengers, the goods earnings at Rs 1,43,000 crore are keeping in view an incremental loading of 58 million tonnes of revenue earnings freight and an average freight lead of 564 kilometres. Railways has got a budgetary allocation of Rs 65,837 crore and the highest ever outlay for capital expenditure amounting to Rs. 1.60 lakh crore from Union Finance Minister Smt. Nirmala Sitharaman in her Budget.  Last year, the outlay for the railways was Rs 1.48 lakh crore while the Budget allocation was Rs. 55,088 crore.

In the budget, funds of Rs 7,255 crore have been allocated for construction of new lines, Rs 2,200 crore for gauge conversion, Rs 700 crore for doubling, Rs 6,114.82 crore for rolling stock and Rs 1,750 crore for signaling and telecom. Complete elimination of unmanned level crossings on Broad Gauge network has been achieved in 2018-19.  Now, the national transporter is aiming to eliminate all 2,568 manned level crossings, present on Golden quadrilateral and diagonal routes in mission mode by building ROBs/ RUBs. The electrification of  Indian Railways' broad gauge network will be done by 2021-22. In 2019-20, 7000 route kilometres has been targeted for electrification.  Also, for 2019-20, the target of new lines, doubling ‘tripling, gauge conversion, etc. is 3750 kilometres as against 3596 kms. in the last financial year. In a bid to enhance safety, create additional capacity and increase train efficiency, the Railway Budget 2019 also talked about introducing an Automatic Train Protection (ATP) system using a mix of European  Train  Control System as well as an indigenously developed system.

 Indian Railways has launched a massive programme for modernization of railway stations, making railway travel a pleasant and satisfying experience for passengers.  The railways has also introduced fully indigenous semi high-speed Train 18 under 'Make in India'. Indian Railways is providing free Wi-Fi at all railway stations (excluding halt stations) in a bid to improve rail travel experience and bridge the digital divide between urban and rural India.  So far, the facility has been provided at 1,603 stations and the remaining 4,882 stations are targeted for the provision by 31 August 2019.  Indian Railways to provide CCTV cameras at all stations (excluding halt stations) as well as in trains to enhance the safety of passengers.  So far, CCTV cameras have been provided at 455 railway stations and the balance stations are targeted by 2020-21.  Similarly, CCTV cameras have been provided at 1,203 coaches and the rest of the passenger carrying coaches are targeted by 2021-22. The Railway Budget 2019 said to launch a scheme of Integrated Skill Development, where all 13 lakh railway employees will be given a foundational training.  The programme will focus on 3Cs- Customer, Cost, and Work Culture.  The employees who demonstrate high learning agility, as well as greater skill mastery, shall be offered an Advanced Program.

The Indian Railways has witnessed tremendous growth in the first innings of the Modi government, registering the best ever performance in the areas of rail safety and modernisation.The Railways managed to go from a state-run operation, ignorant to the needs of the passengers and obstinate to change, to sleek, comfortable and consumer-friendly. Customer service has undergone a major change.  The Railways has built a robust customer-interface ecosystem across social media platforms.  Real-time complaint redressal is now just a message away.  Instances of people getting diapers or medical help delivered on moving trains with just a tweet are part of this success story.UPA government shied away from finalising the Ahmedabad-Mumbai Bullet Train project, the NDA government lost no time in approving it.  It advanced the deadline by a year to 2022 as Prime Minister Modi took his Japanese counterpart Shinzo Abe to Ahmedabad to lay the foundation stone for the project.  The land acquisition process has started, and the project is on course.The induction of modern, engine-less train sets, the first proper rolling stock upgrade since the LHB coaches in India, will happen later this year.The   NDA government spent the last five years on long-term infrastructure building in railways. Laying of second, third and fourth lines on the busy routes to enhance network capacity and bringing in Northeast connectivity through broad-gauge conversion have been top on the government's to-do list.


Railways Budget 2019-20 Summary   

■                   Table 3: Railways Revenue and Expenditure for 2019-20 (in Rs. Crore)               

             

             

2017-18   Actuals            

2018-19   Budget            

2018-19   Revised            

% Change (2018-19RE/ 2018-19BE)            

2019-20   Budget            

% Change (2019-20BE/   2018-19RE)                 

             

 Receipts            

             

             

             

             

             

                  

1            

Passenger            

48,643            

52,000            

52,000            

0%            

56,000            

8%                 

2            

Freight            

1,17,055            

1,21,950            

1,29,750            

6%            

1,43,000            

10%                 

3            

Other traffic sources            

13,027            

26,890            

14,964            

-44%            

17,675            

18%                 

4            

Gross   Traffic Receipts (1+2+3)            

1,78,725            

2,00,840            

1,97,214            

-2%            

2,16,675            

10%                 

5            

Miscellaneous            

204            

250            

500            

100%            

260            

-48%                 

6            

Total   Internal Revenue (4+5)            

1,78,930            

2,01,090            

1,97,214            

-2%            

2,16,935            

10%                 

             

             

             

             

             

             

             

                  

             

 Expenditure            

             

             

             

             

             

                  

7            

Ordinary Working Expenses            

1,28,947            

1,38,000            

1,41,000            

2%            

1,55,000            

10%                 

8            

Appropriation to Pension Fund            

45,798            

47,500            

47,300            

0%            

50,000            

6%        
  

                

9            

Appropriation to Depreciation Reserve Fund            

1,540            

500            

500            

0%            

500            

0%                 

10            

Total   Working Expenditure (7+8+9)            

1,75,834            

1,86,000            

1,88,800            

2%            

2,05,500            

9%                 

11            

Miscellaneous            

1,430            

2,100            

2,400            

14%            

2,400            

0%                 

12            

Total   Revenue Expenditure (10+11)            

1,77,264            

1,88,100            

1,91,200            

2%            

2,07,900            

9%                 

13            

Net   Surplus (6+12)            

1,666            

12,990            

6,014            

-54%            

9,035            

50%                 

14            

Appropriation to Development Fund            

1,506            

1,000            

1,000            

0%            

1,000            

0%                 

15            

Appropriation to Capital Fund            

-            

6,990            

14            

-100%            

3,035            

21579%                 

16            

Appropriation to Debt Service Fund            

             

             

             

-            

-            

-                 

17            

Appropriation to Railway Safety Fund            

160            

-            

-            

             

-            

                  

18            

Appropriation to Rashtriya Rail Sanraksha Kosh            

-            

5,000            

5,000            

0%            

5,000            

-                 

19            

Operating   Ratio            

98.4%            

92.8%            

96.2%            

             

95.0%            

         

    

    

    

    
  

    

   

*SHRIMATI SUMALATHA AMBAREESH (MANDYA) :The Indian Railway’s contribution to national integration has been unparalleled.  It has knit India together by connecting all the regions, and almost all the states, in a single transport network.  Railways is serving all the sections of the society.  It focuses on the underprivileged and the poor, and also it serves the more fortunate.  It has always played a unique role in meeting the transportation needs of the common man, while simultaneously serving as a critical infrastructure facilitator for the carriage of goods. The Budget Speech of the hon. Finance Minister Indicates that the railway is moving towards privatization.  We have proposed world-class railways stations.  A lot has been told about it but in reality, world-class railway stations are not progressing in a very fast mode.  The occupancy rate of the super quality trains like Palace on Wheels, Maharaja Express, Golden Chariot, Royal Rajasthan on Wheels and Deccan Odyssey has come down to less than 30 per cent. The NDA government has attached top priority for significance by emphasizing on “Swachh Bharat” initiative.  However, cleanliness in Indian Railways is still a distant dream. Even though Several initiatives have been taken by the government towards improvement of cleanliness in coaches it is not sufficient.

          I would like to point out that INDIAN RAILWAYS, is the premier transport organization of the country with the largest rail network in Asia and the world’s third largest under one management.

          But the ONE MANAGEMENT failed to notice the unhygienic condition of the compartments, worst toilets and food served to the public who pay quite a sum and suffers the lack of basic needs on long journeys in the train with tolerance.  India claims having considerable high technologies but no effort taken or couldn’t think of a way on the lavatory systems improved.

          There is an urgent need to create more awareness of hygiene, cleanliness and the usage of public toilets with concern. There are huge complaints regarding cleanliness in coaches and foul smell from toilets.  The compartments are very old.  Toilets basically are unhygienic and disgusting in all compartments.There is no sufficient water.  There is no health faucets in all new AC and non-AC coaches.  No provision made for dustbins in Sleeper coaches and ordinary coaches.  Foul smell in bio-toilets is unbearable.  ‘Coach Mitra’ facility is there but no end to the problems.  The railways has to improve cleaning standards further as there are huge complaints regarding cleanliness in coaches and foul smell from toilets.  So these issues must be addressed immediately. Though it is expected to be cleaned at every other station, but the cleaners just flush out water and fill the tanks.  It has not been brushed nor anti detergent applied for ages and it’s unbearable. The compartments are very old.  It has not been refurbished time to time. The window panels are dusty.  The cleaners just flip with a wiper just for the sake of cleaning at every few stations when the train stops.  Forget about the idea of sightseeing views.    

 

          I urge upon the Government to conduct a third party survey for assessment of cleanliness in all the railway stations and trains.  And also take necessary measures to upgrade the facilities in the trains and railway stations.  Regular inspections at various levels should be carried out and deficiencies are made good whenever noticed.  Suitable action is taken against the contractors who are found wanting in the performance of their duties.

          As far as transference is concerned Hon’ble Prime Minister, Shri Narendra Modi Ji’s Government has focused on people of India and has become a Government accountable to every farmer, youth, poor, middle class and all those who have relations of any kind with this government.  I welcome this as it is the responsibility of any Government to showcase its report card to public every year.  I appreciate the steps taken by the NDA government in this regard.          Rail Drishti Dashboard has been launched to make people of India aware of the projects going-on in Railways.  The customer or railway passenger will get an exposure through this dashboard to the multifaceted transformation underway in Indian Railways across the country.

The Indian Railways are the country’s largest employer with regard to employment opportunities are concerned.  I would like to point out that women are not recruited in adequate number in the Indian railways.  As far as employment of the women is concerned the number of women employees in the Indian Railways is very insignificant.  As per the available reports around 3,650 women candidates have been given employment in the Indian Railways in technical categories in the last three years.  It is very small in comparison to men.It is learnt from the available reports of the Government that against notifications issued for various technical posts, a total of 2,79,60,224 applications were received.  Out of these, only 46,76,928 (16.73%) applications were from women.

Therefore, I would like to suggest the government that wide publicity is given to railway recruitment notifications and every candidate, irrespective of gender, etc. fulfilling eligibility criteria is free to apply.Apart from this the government should scrap the application fee for women applicants. As of now the examination fee is collected from women candidates and it will be refunded to those who appear in the examination.  I would like to suggest that the fee for women candidates should be scrapped to encourage more women candidate to apply for the posts notified by the Government.I would like to point out that the provisions of separate rest rooms, cloak rooms for women are made in all the railway stations of two tiers and three tier cities and towns also.

As far as E-catering services to passengers is concerned E-catering was started by IRCTC of Indian Railways in 2015 for trains without pantry and allows customers to order food online to be delivered at their seat from the list of over 500 partner restaurants including Domino’s Pizza, Comesum, railrestr, and at some stations Haldiram and McDonald/s empanelled by the Government.

As per the information available, the revenue earned from the e-catering venture is less than the expenditure.  In fact, the highest expenditure of Rs 3.9 crore was made in the year 2017-18 on e-catering by the Indian Railways but earned only Rs 1.8 crore.  As per the reports the train passengers are not happy with the e-catering service as the quality and taste of the food is not good and also it is very expensive.

Therefore, I would like to request the Hon’ble Minister for Railways to kindly look into the e-catering service to ensure better quality food is served and also it should not incur loss to the exchequer of the Government.As far as the safety of train journey is concerned, since the last budget was announced, nearly 78 people have died in railway accidents across the country.While the railway ministry has repeatedly promised heavy investments into ensuring greater safety, continued accidents point to loopholes in the existing infrastructure plugging which could result in fewer tragedies.  The government is yet to come close to its target of eliminating 4,267 unmanned railway crossings by 2020.

Indian Railways is the fourth largest network in the world, despite that it is yet to expand to welcome more passengers aboard from the different regions of the country.  Several areas of the country still don’t have easy access to trains.  There are several existing railway lines which do not have adequate infrastructure to meet the growing demands for railways services of the people.Therefore, I would like to request the hon’ble minister to expedite the works pertaining to Conversion of entire railway network into broad gauge, Chalk out plan for doubling, third and fourth line woks of the railway lines as per increasing traffic of railways.

As far as redevelopment of railway stations is concerned still a large number of stations are not considered for the redevelopment.  And there is no significant progress made in the installation of escalators at railway stations. As far as women passengers are concerned I would like to urge upon the Government to introduce a separate train for women commuters between Bangalore and Mysore railway line.

I also request to add more coaches to the existing trains to accommodate more passengers on the railway line between Bangalore and Mysore.  It would be great help to people of my Parliamentary constituency Madya, which is situated between both the cities Bangalore and Mysore. Another railway line Kengeri (Hejjala) to Chamarajanagara via Kanakapura, Malavalli, Kollegala, was sanctioned in 1996.  However it is still crawling due to paucity of funds and other issues.  The project secured approval almost five years ago, but there is no budgetary support has been given to it.  Against the estimated cost of Rs. 1,382 crore, it has received only Rs.10 crore by way of funding.  There is no significant support for this new railway line.  Hence I urge upon the Government to allocate and release adequate fund to expedite the project, it will bring vast parts of the Cauvery basin in the state of Kanakapura including commercial centres like Kankapura,, Malavalli and Kollegal, on the railway map of India.

Apart from this, Suburban Rail project should be taken up on priority. Bangalore has an estimated population of 12.34 million in its urban area in 2017, up from 8.5 million in 2011. The fastest growing Bangalore urban district is crying out for an infrastructure of both rail and road. Bangalore city has added six times more people than neighboring Chennai in the last decade.  There is an urgent need to implement the Suburban rail project. I would also request to allocate sufficient funds for the suburban rail project to decongest the roads in Bangalore city.The Union Government has proposed for construction of New Metro Rail Projects for a total route length of 300 kilometers during 2018-19.  It is also a bold step taken by the Government for increasing the Metro Rail network in the country.  I urge upon the Union Government to look into these demands and take all necessary steps to address them at the earliest.

       

*DR. HEENA VIJAYKUMAR GAVIT (NANDURBAR): I  would like to first of all congratulate  the Hon’ble Minister of Railways for changing the face and pace of Indian Railways under the visionary leadership of Prime Minister Shri Narendra Modiji. After getting elected as an M.P. of Nandurbar, the major projects undertaken taken by me are of Railways.      I represent a tribal area and the work of Railways was a game changer for us.  When for the first time the Railway Budget was implemented in Modi 1.0 Government, the most important doubling work and electrification work of the Surat Bhusaval Line which was pending for ages, got funds of Rs. 550 crores.  I am happy to share that today this work is completed and functioning.  The inauguration of this double line was done by the Prime Minister Modiji. Today, I also wish to share that the long standing demand of Nandurbar was starting of train from Nandurbar to Mumbai. This was also fulfilled by the Government during its last tenure and Khandesh Express was started.  This train runs thrice a week.  I request the Hon’ble Railway Minister to make this train daily as there is demand from my constituents.  The train runs in full strength and it is also difficult to get tickets. This itself shows that this train is like a ‘life line’ for Nandurbar.

       Also there is a demand for starting of a new train to Pune from Nandurbar.  There are thousands of students from Nandurbar constituency who live and study in Pune.  So, if a ‘NEW TRAIN’ is started, it will facilitate the people of Nandurbar constituency who want to travel to Pune as Pune is an educational hub. I also would like to request the Hon’ble Railway Minister if the demand of the stoppages of Railways of my constituency is fulfilled, it will benefit passengers of my constituency. At Nandurbar Railway Station, if an elevator is made available, it will benefit the senior citizens and handicapped persons. I congratulate the Minister and Government for bringing in new modernised technologies in Railways.  

                                                                              

*श्री सुदर्शन भगत (लोहरदगा): मैं सर्वप्रथम माननीया वित्त मंत्री महोदया को धन्यवाद देना चाहूंगा, उन्होंने भारतीय रेल में सुधार और विस्तार को समर्पित बजट प्रस्तुत किया इसके लिए उनका अभिनंदन करता हूं ।

रेल सेवा देश में यात्रा/आवागमन का प्रमुख साधन है, इसे कैसे जनोपयोगी बनाया जाए, सुगम और सुरक्षित यात्रा बनाने हेतु,माल ढुलाई हेतु देश के दुर्गम क्षेत्रों तक कैसे पहुंच बढ़े इस ओर गत पांच वर्षोंमें विशेषप्रयास किए गए हैं, आदरणीय मोदी जी के नेतृत्व में “आदर्श रेलवे स्टेशन " चिन्हित कर देश के अनेकों रेलवे स्टेशनों को सौन्यदर्यकरण किया गया, जिसमें से एक मेरे संसदीय क्षेत्र लोहरदगा रेलवे स्टेशन को भी आदर्श रेलवे स्टेशन के रूप में विकसित करने हेतु लोहरदगा और पूरे झरखंड की जनता की ओर से आपका अभिनंदन करना चाहूंगा ।

मैं लोक सभा में झारखंड राज्य के जनजातीय बहुल लोहरदगा संसदीय क्षेत्र प्रतिनिधित्व करता हूं यह क्षेत्र कृषि उत्पाद तथा वनोत्पाद सहित प्राकृतिक संपदा से संपन्न है, कृषि पर आधारित जीवनशैली के लिए जाना जाता है । समृद्ध सांस्कृतिक विरासत यहां की पहचान है । मूल रूप से कृषि ही यहां के लोगों की आय का प्रमुख स्रोत होने के साथ-साथ यहां की जनता रोजगार एवं व्यवसाय के लिए अन्य प्रदेशों तथा महानगरों की आरे जाते हैं,छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए, रोगियों को इलाज के लिए तथा किसानों को मण्डियों तक जाने के लिए रेलवे एक प्रमुख साधन है,खनन कार्य होने के कारण, रेलवे के अभाव में ट्रकों से माल ढुलाई करने को विवश होना पड़ता है, जिससे क्षेत्रीय जनता को प्रदूषण तथा अन्य प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ता है ।

मैं विशेष रूप से उल्लेख करना चाहूंगा कि मेरे संसदीय क्षेत्र तथा आसपास के पूरे क्षेत्र में कृषिकार्य के माध्यम से सब्जियों की उपलब्धता, प्राकृतिक संपदा में कोयला तथा बॉक्साइट की उपलब्धता,अच्छी मेन पावर, युवाओं में खेलों के प्रति रूझान,लोगों का लघु व कुटीर उद्योगों की अपार संभावनाएं हैं । यदि इस क्षेत्र को रेल सेवा से जोड़ दिया जाए तो यह क्षेत्र भी विकास की ओर अग्रसर हो सकेगा,विशेषकर गुमला जिले को रेल सेवा से जोड़ना अत्यावश्यक हो गया है, यह झारखंड का एक बड़ा जिला है, दो अन्य प्रदेशों की सीमाओं (छत्तीसगढ़  और ओडिशा)से जुड़ा हुआ है ।

देश के बजट 2019-20 के लिए रेल मंत्रालय के नियंत्रणाधीन अनुदान की मांगों पर हो रही चर्चा के माध्यम से मेरे संसदीय क्षेत्र पर विशेष ध्यान देने हेतु निवेदन करता हूं । जनहित में मुझे लगता है कि इस क्षेत्र के विकास हेतु रेलवे के निम्नलिखित विषय अत्यावश्यक हैं, जैसे-रांची-नई दिल्ली-रांची राजधानी एक्सप्रेस का सप्ताह में कम से कम दो दिन लोहरदगा से परिचालन किया जाए;गुमला को रेलवे से जोड़ना अत्यंत आवश्यक है इसलिए रांची-लोहरदगा-गुमला-जशपुर-कोरबा रेलवे जोड़ा जा सकेगा अपितु इसके निर्माण से बॉक्साइट तथा अन्य खनन पदार्थों ढुलाई में भी इसका उपयोग हो सकेगा;रांची-लोहरदगा-टुरी रेलवे लाइन का विद्युतीकरण करने सहित का दोहरीकरण किया जाए; ट्रेन संख्या- 58659 हटिया राऊरकेला पैसेंजर का परिचालन लोहरदगा तक किया जाए; ट्रेन संख्या- 13320 रांची देवघर बैजनाथ धाम इंटरसिटी एक्सप्रेस का परिचालन लोहरदगा तक किया जाए ।

इस अवसर पर मैं यह भी बतना अपनी जिम्मेदारी समझता हूं कि गत पांच वर्षोंमें माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में सरकार द्वारा किए गए विकास कार्यों का जन जातीय बहुल क्षेत्रों में अच्छा प्रभाव पड़ा है, जन-धन योजना के तहत बैंकों से जोड़ने का काम किया गया है, वृहद स्तर पर प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत ग्रामीणों को घर मुहैया कराए गए, देश में स्वच्छ भारत अभियान के तहत शौचालय निर्माण का कीर्तिमान स्थापित किया गया,जनजाति समाज के कलयाण हेतु समर्पित जन जातीय कार्य मंत्रालय के बजट को बढ़ाया गया अपितु “ एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय “ जनजाति बहुल हर प्रखण्ड में खोले जा सकें इसका मार्ग प्रशस्त किया । किसान और कृषि कल्याण हेतु विशेष प्रयास किए गए,कौशल विकास कर, अन्य माध्यमों से युवाओं के लिए रोजगार के नवीन अवसरों का सृजन किया गया । इसलिए मैं इस रेलवे संबंधी विकासोन्मुखी बजट का समर्थन करता हूं, स्वागत करता हूं, यह बजट “ नए भारत “ के संकल्प को साकार करने में महती भूमिका निभाएगा ।

    मेरा सरकार से निवेदन है कि देश के उग्रवाद प्रभावित जन जातीय बहुल क्षेत्रों पर अधिक से अधिक ध्यान दिया जाए, जिससे कि यहां के लोगों का जीवन स्तर न केवल सुधर सके अपितु यह देश के विकास की मुख्य धारा में कंधे से कंधा मिलाकर राष्ट्र निर्माण में भागीदार बन सकें । इसलिए मैं देश के बजट- 2019-20 के लिए रेल मंत्रालय के नियंत्रणाधीन अनुदान की मांगों पर चर्चा के माध्यम से उपरोक्त मांगों को सम्मिलित करवाना चाहूंगा ।

*श्री राजेन्द्र  धेड्या गावित (पालघर): मैं महाराष्ट्रसे आता हूं । चूंकि मेरा क्षेत्र मुंबई के नजदीक होने के कारण और भी संवेदनशील है,खासकर रेलवे यात्रियों के लिए । लाखों यात्री रोजाना मुंबई आते हैं । आसपास के क्षेत्र में नौकरी,व्यवसाय, शिक्षा एवं तमाम तरह के कार्यों के लिए ट्रेनों में भीड़ को देखकर लगता है कि पूरे देश के लोग मुंबई की ट्रेन में ही सवार हैं । मुंबई से चलने वाली लोकल ट्रेनों की संख्या में  वृद्धि करने की आवश्यकता है,जिसमें विशेषकर महिला ट्रेनों की अधिक जरूरत है । लोकल ट्रेनों में भीड़ के कारण बहुत सारी समस्याएं खड़ी होती हैं । जिसमें सबसे प्रमुख हैं, महिलाओं की सुरक्षा,शौचालय की साफ-सफाई, बुजुर्ग यात्रियों एवं गर्भवती महिलाओं को बैठने के लिए आरक्षित सीट आदि इन सुविधाओं को लागू करना बेहद जरूरी है । विरार,पालघर, वोडसर के लिए कई ट्रेनें गुजरती हैं लेकिन कई महत्वपूर्ण ट्रेनों का ठहराव नहीं होने के कारण यात्रियों को काफी परेशानी होती है और इसका बोझा अन्य स्टेशनों पर पड़ता है और लोकल ट्रेनों में अनावश्यक भीड़ भी बढ़ती है । रेल यात्रियों में,विशेषकर महिलाओं एवं बच्चों की सुरक्षा अति संवेदनशील विषय है ।

       रेलवे में अनुसूचित जाति/जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग की नियुक्तियों को भरने के लिए विशेष भर्ती अभियान की आवश्यकता है । लोकल ट्रेनों में डिब्बों की संख्या में वृद्धि की भी नितांत आवश्यकता है । रेल आरक्षण में भारी संख्या में अनियमितता की खबरें आती रहती हैं, इस पर अंकुश लगाने की आवश्यकता है । रेल स्टेशनों एवं गाड़ी में चिकित्सा सुविधा देना भी अनिवार्य होना चाहिए । रेल स्टेशनों एवं रेलवे कॉलोनियों को भी आधुनिकीकरण करना आवश्यक है । बजट में यात्री सुविधा एवं पीपीपी मॉडल पर जोर दिया गया हे । माननीय मंत्री से मेरा निवेदन है कि इसे अमल में लाने की बेहद आवश्यकता है । रेल में हाऊस कीपिंग में भी ध्यान देना जरूरी है एवं खान-पान की शुद्धता के लिए मानदंड तय करना भी आवश्यक है । रेलवे स्टेशन पर मानसून के दिनों में खाद और अनाज के आवागमन होता है और बरसात के दिनों में शेड न होने के कारण खाद एवं अनाज का काफी नुकसान होता है । इसलिए रैक प्वांइट पर शेड और फ्लोरिंग की व्यवस्था होना नितांत आवश्यक है ।

       मैं पुनः माननीय रेल मंत्री जी को इस बजट पर हार्दिक धन्यवाद देता हूं और रेल बजट की अनुदानों की मांगों का वर्ष 2019-2020 का समर्थन करता हूं ।

*श्रीमती केशरी देवी पटेल (फूलपुर):  मैं जनपद प्रयागराज जो कि संपूर्ण उत्तर प्रदेश का सर्वाधिक आबादी वाला जनपद है, की फूलपुर लोक सभा सीट से भारतीय जनता पार्टी की सांसद निर्वाचित हुई हूं । मैं सरकार एवं माननीय रेल मंत्री जी का ध्यान जनपद प्रयागराज में रेलवे से जुड़ी हुई कुछ विसंगतियों की ओर आकृष्टकराते हुए निम्नलिखित सुझावों जो जनहित के हैं, जन भावनाओं के अनुकूल है को रेल मंत्रालय की बजट चर्चा में सम्मिलित कराकर इन सुझावों को अमल में लाने का निर्देश देने की कृपा करें ।

 जनपद प्रयागराज से अभी तक सप्ताह में तीन दिन इलाहाबाद-दूरान्तों का संचालन हो रहा है । इस ट्रेन को बंद किया जा रहा है, जो उचित नहीं है । कृपया इस ट्रेन को पूर्व की भांति अनवरत चलाई जाए; प्रयागराज से नई दिल्ली के लिए एक नई ट्रेन (हमसफर एक्सप्रेस)का प्रारंभ किया गया है । उक्त ट्रेन में सारे कोच एसी थ्री टियर के हैं तथा यह रेलवे विभाग के फ्लेक्सी फेयर नियम से संचालित होती है । उक्त ट्रेन में जनरल कोच लगाए जाएं तथा फ्लेक्सी फेयर नियम को समाप्त की जाए; प्रयागराज जंक्शन जो उत्तर प्रदेश ही नहीं,बल्कि संपूर्ण उत्तर प्रदेश भारत के महत्वपूर्ण जंक्शन में से एक है किंतु अभी तक बहुत सारी ट्रेन ऐसी हैं जिनका ठहराव इस जंक्शन से नहीं है । जिसमें सियालदाह राजधानी एक्सप्रेस, नई दिल्ली कोलकाता दूरान्तों एक्सप्रेस,भुवनेश्वर राजधानी एक्सप्रेस जैसी कई महत्वपूर्ण ट्रेने हैं, जिनका ठहराव अभी तक इलाहाबाद जंक्शन में नहीं है । इलाहाबाद जंक्शन से गुजरने वाली समस्त ट्रेन का ठहराव इलाहाबाद जंक्शन पर सुनिश्चित की जाए एवं यहां से सीटों का कोटा निर्धारित की जाए;प्रयागराज से इंदौर जाने वाले यात्रियों की बड़ी संख्या है, रेल विभाग ने भी इसको स्वीकार किया है तथा इस दृष्टि से इंदौर के लिए एक स्पेशल ट्रेन का संचालन रेलवे के द्वारा प्रयागराज से किया जा रहा है । उपरोक्त इंदौर स्पेशल ट्रेन को नियमित किया जाए;प्रयागराज से मुंबई के लिए जाने वाले यात्रियों की संख्या तादाद में है, इस दृष्टिसे इलाहाबाद से मुंबई के लिए इलाहाबाद मुंबई दूरान्तों एक्सप्रेस का संचालन हो रहा है, जो सप्ताह में मात्र दो दिवस है । इलाहाबाद मुंबई दूरान्तों एक्सप्रेस को पूरे सप्ताह भर नियमित चलाया जाए  ।  

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ है तथा राज्यस्तरीय कई विभागों का मुख्यालय जनपद प्रयागराज में है । प्रयागराज से लखनऊ तथा लखनऊ से प्रयागराज आने-जाने वाले लोगों की बहुत बड़ी संख्या   है । अतः प्रयागराज से लखनऊ के लिए शताब्दी एक्सप्रेस चलाई जाए एवं उक्त शताब्दी एक्सप्रेस को लखनऊ से बढ़ाकर बरेली तक कर दिया जाए, तो प्रयागराजवासियों की बहुत बड़ी समस्या का समाधान हो जाएगा; प्रयागराज से दक्षिण भारत को जोड़ने के लिए गंगा कावेरी एक्सप्रेस एक महत्वपूर्ण ट्रेन है, उक्त ट्रेन का संचालन कई वर्षों से हो रहा है । उक्त ट्रेन के संचालन के समय में सप्ताह में मत्र दो दिवस है तथा उक्त ट्रेन में प्रयागराज से सीटों का कोटा बहुत कम है । प्रयागराज से दक्षिण भारत को जोड़ने के लिए कोई सीधी एयर कनेक्टीविटी भी नहीं है । अतः गंगा कावेरी एक्सप्रेस का संचालन पूरे सप्ताह किए जाने का तथा प्रयागराज से बर्थ कोटा बढ़ाया जाए; काफी वर्षोंसे प्रयागराज से लखनऊ के लिए गंगा गोमती एक्सप्रेस का संचालन इलाहाबद जंक्शन से हो रहा था, किंतु कुछ माह पूर्व इस ट्रेन का संचालन इलाहाबद जंक्शन से हटाकर प्रयागघाट जंक्शन से कर दिया गया है । जिससे प्रयागवासियों को अत्यंत असुविधा हो रही है । मैं माननीय रेल मंत्री जी से अनरोध करती हूं कि गंगा गोमती एक्सप्रेस का संचालन अगर इलाहाबाद जंक्शन में जगह की असुविधा है तो इस ट्रेन को नवनिर्मित सूबेदारगंज स्टेशन से संचालित किया जाए ।  माननीय योगी जी की सरकार ने उत्तर प्रदेश में इलाहाबाद का मान बदलकर प्रयागराज कर दिया है जो हम सब प्रयागराजवासियों के लिए अत्यंत ही गौरव का विषय है व जनपद का नाम परिवर्तित हो चुका है, किंतु रेल विभाग में अभी भी जनपद इलाहाबाद के नाम से जाना जा रहा है । प्रयागराज में सुगम रेल यात्रा के संचालन के लिए सूबेदारगंज रेलवे स्टेशन का निर्माण किया गया है । सूबेदारगंज नाम से भ्रम की स्थिति पैदा होती है । अतः इलाहाबाद जंक्शन का नाम बदलकर प्रयागराज जंक्शन तथा सूबेदारगंज स्टेशन का नाम बदलकर प्रयागराज कैंट अथवा प्रयागराज से जुड़ा हुआ कोई अन्य नाम दिया जाए ।  

बक्शी बांध आर0ओ0 बी0 की स्वीकृति रेल मंत्रालय द्वारा प्रदान की जा चुकी हैं, किंतु इसका निर्माण कार्य अभी तक प्रारंभ नहीं हो पाया है । अतः उक्त निर्माण कार्य तुरंत प्रारंभ कराने का निर्देश दिया जाए  ।

*श्री मुकेश राजपूत (फर्रूखाबाद):  भारतीय रेल की स्थापना 16 अप्रैल, 1853 में हुई और पहली ट्रेन मुंबई से ठाणे के बीच चलाई गई थी । तब से लेकर अब तक उत्तरोत्तर विकास के पथ पर बढ़ती हुई भारतीय रेल दुनिया का सबसे बड़ा नेटवर्क बन गई है  । प्रतिदिन 3.5 करोड़ से अधिक यात्रियों को अपने गन्तव्य तक पहुंचाने वाली भारतीय रेल भारत वर्ष की जीवन रेखा कही जा सकती है ।

माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में जब से सरकार बनी है तब से सुरक्षा संरक्षा तथा नागरिक सुविधाओं पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया है । स्वच्छता की दिशा में अभूतपूर्व बदलाव देखने को मिले हैं । रेलगाड़ी तथा रेलवे स्टेशनों पर साफ-सफाई, स्वच्छ पेय जल स्टेशनों पर वाई-फाई की सुविधा तथा अन्य नागरिक सुविधाओं में सुधार हुआ है । चलती ट्रेन में यात्रियों द्वारा विभिन्न समस्याओं को लेकर किए गए ट्वीट को  तुरंत संज्ञान में लेकर त्वरित निस्तरण किया जा रहा है जो बहुत ही सराहनीय है । महिला सुरक्षा को लेकर भारतीय रेलवे ने एक मिसाल पेश की है ।

पूर्व रेल मंत्री माननीय सुरेश प्रभु जी व माननीय पीयूष गोयल जी के कुशल नेतृत्व में रेलवे के आधारभूत ढांचे के विकास की ओर महत्वपूर्ण कदम बढ़ाए गए । रेलगाड़ियों की गति बढ़ाने, रेलवे के विद्युतीकरण की दिशा में कार्य तेजी से हुआ है । जहां एक ओर तेजस,वन्दे भारत जैसी रेल गाड़ियां चलाई गईं, वहीं दूसरी ओर बुलेट ट्रेन चलाने की दिशा में कार्य तेजी से हा रहा है ।

हमारे संसदीय क्षेत्र में रेलवे में कुछ महत्वपूर्ण कार्य एवं नई रेलगाड़ियां चलाने की आवश्यकता है जो कि निम्नवत्हैं  -

फर्रुखाबाद में 4 रेलवे उपरगामी सेतु का निर्माण होना था जिनमें से दो पर निर्माण कार्य प्रारंभ हो गया है किंतु अन्य दो के निर्माण की दिशा में कोई प्रगति नहीं हुई है । अतः उनका अतिशीघ्र निर्माण कराया जाए; कासगंज से अलीगढ़ तक नई रेल लाइन का निर्माण कर दिया जाए जिसकी लम्बाई 63 किमी है इससे कानपुर से दिल्ली जाने के लिए एक नया रेल मार्ग मिल जाएगा जिससे हावड़ा दिल्ली मार्ग का ट्रैफिक कम हो जाएगा और दूरी घट जाने के कारण समय व धन की भी बचत होगी; कानपुर-फर्रुखाबाद-कासगंज-मथुरा रेल लाइन का दोहरीकरण कर दिया जाए । इस रेल खंड का विद्युतीकरण लगभग पूर्ण हो गया है और रेल गाड़ियों की संख्या में वृद्धि हुई है;रेलवे द्वारा संपूर्ण भारत में बनाए गए अंडरपास में पानी भर जाने की समस्या है । गत वर्ष फर्रुखाबाद में रेलवे अंडरपास में भरे पानी में डूब कर एक किशोर की जान भी जा चुकी है और बरसात के चार माह तक अंडरपास में भरे पानी से होकर निकलना पड़ता है । अतः अंडरपास में जल भराव के कारण करोड़ों रुपयों लागत से बनें अंडरपास शीघ्र ध्वस्त हो जाने की संभावना बनी रहेगी । अतः अंडरपास से जल निकासी की समुचित व्यवस्था की जाए; फर्रुखाबाद से बाबा निमकरोरी धाम-मैनपुरी-टूंडला-आगरा-मथुरा होते हुए हजरत निजामुद्दीन तक प्रतिदिन एक इण्टर सिटी एक्सप्रेस चलाई जाए; फर्रुखाबाद से प्रयागराज तक एक ट्रेन चलवाई जाए  । प्रयागराज में उच्च न्यायालय है उत्तर प्रदेश बोर्ड का मुख्यालय है एवं तीर्थ नगरी है और फर्रुखाबाद से कोई ट्रेन नहीं है; और फर्रुखाबाद से कासगंज के रास्तेबरेली तक के लिए एक ट्रेन चलवाई जाए  । पूर्व में जब छोटी लाईन थी तब कई गाड़ियां चलती थीं किन्तु अमान परिवर्तन के बाद कोई ट्रेन नहीं चलती है ।

अतः जनहित को दृष्टिटगत रखते हुए रेलवे की अनुदानों की मांगों में सम्मिलित किया  जाए ।

         

*श्रीमती गीताबेन वी. राठवा (छोटा उदयपुर): मैं रेल बजट के समर्थन में अपना वक्तव्य सभा पटल पर रखने की अनुमति चाहती हूं ।

       आज देश में कई वर्षों बाद पिछले पांच वर्षके अंदर रेल व्यवस्था और रेलवे लाइन का विस्तार पूर्व से पश्चिम और उत्तर से दक्षिण तक बहुत ही सुन्दर तरीके से हो रहा है । ट्रेनों में यात्रियों के लिए पहले के मुकाबले सुरक्षा से लेकर आवश्यक संसाधनों का उपयोग किया जा रहा है  । आज देश प्रत्येक क्षेत्र में प्रगति की और आगे बढ़ रहा है । आज बड़ोदरा से आलीराजपुर रेल लाइन का कार्य पूर्ण हो चुका है और इस कार्य के लिए हमारे क्षेत्र की जनता में बहुत खुशी का माहौल है और इसके लिए मैं माननीय रेल मंत्री जी को अपने संसदीय क्षेत्र छोटा उदयपुर,गुजरात के आदिवासी क्षेत्र की जनता की ओर से धन्यवाद और आभार प्रकट करती हूं । मेरा संसदीय क्षेत्र छोटा उदयपुर (वडोदरा) गुजरात राज्य का आदिवासी बहुल क्षेत्र है, पावागढ़ स्थित सिद्ध पीठ माता काली का प्रसिद्ध मन्दिर और ’स्टेचू ऑफ यूनिटी’पर्यटन स्थल और आय का भी स्रोत बन गया है । माननीय प्रधानमंत्री जी के अथक प्रयास से किए गए कार्य ’स्टेचू ऑफ यूनिटी’के कारण हमारे विस्तार में भी स्थानीय जनता में बहुत ही खुशी का माहौल है, उनके कारण ही हमारे देश के साथ-साथ गुजरात का भी गौरव बढ़ा है और नए भारत का युग शुरु हुआ है । इसलिए यहां इस क्षेत्र में रेलवे की सुविधा को पर्यटन की दृष्टि से और अधिक बेहतर बनाने के लिए जनता की मांग जो पिछले कई वर्षों से रही है , को पूरा करने के लिए अलग से नई रेलवे लाइन हेतु बजट दिए जाने की आवश्यकता है । विशेषतः- 43 किमी छोटा उदयपुर से उमराली रोड दशहरा मैदान सब स्टेशन तक; 48.5 किमी छोटा उदयपुर से सेजा में आलीराजपुर रेलवे स्टेशन तक;और 72.5 किमी छोटा उदयपुर से लेकर जोबट तक और 90 किमी छोटा उदयपुर से जोबट के आगे जिले की अंतिम सीमा तक की     गई है जिससे जनता में बहुत खुशी है;बडोदरा से हालोल पावागढ़ शिवराजपुर पानी माइन्स होकर जैतपुर लाइन में जोड़ा जाए, जो पिछले कई वर्षोंसे जनता की मांग रही है; दभोई पुरानी रेल लाइन छूछापुरा होकर तमखला होकर ’स्टेचू ऑफ यूनिटी’तक जोड़ने की आवश्यकता है;और अंकलेश्वर से राजयामला होकर ’स्टेचू ऑफ यूनिटी’ , मध्य प्रदेश का आलीराजपुर रेल लाइन में जोड़ने की आवश्यकता है ।

रेलमंत्री तथावाणिज्यऔर उद्योगमंत्री (श्रीपीयूष गोयल): अध्यक्ष महोदय, बहुत-बहुत धन्यवाद । कलआपने जिस प्रकार सेलगभग 12 घंटे तकपूरे सदन में सभी मैम्बर्स कोअपनी-अपनी बात रखने कामौका दिया । वास्तव में पूरे संसद केलिए यहगर्व कीबात हैकि आपने सभी सदस्यों कोबड़े विस्तार सेरेलवे केडिमाण्ड्स फॉर ग्रांट्स परचर्चा करने कामौका दिया । आपने अपने आपमें एकनया कीर्तिमान स्थापित किया । मैं आपका औरसभी मैम्बर्स काधन्यवाद करना चाहूंगा साथ हीहमारे कर्मठ कर्मचारी, जोरात को 12 बजे केबाद भीअपना रूटीन काम करने केलिए बैठे होंगे, और इसके पहले भीजिन्होंने इतना को-ऑपरेट करके इससदन कोचलाने में मदद की । मैंने कईमीडिया केमित्रों कोभी देखा जोरात तकबैठे थे,और मैं सभी काधन्यवाद करके शुरू करना चाहूंगा । आजबहुत हीशुभ अवसर है,हम सभी केलिए खुशी कीबात हैकि आषाढ़ी एकादशी केदिन हमइस चर्चा कोआगे लेकर जारहे हैं । यहएकादशी महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश औरसभी जगहों परहर्ष औरउल्लास सेमनाई जाती है ।

मैं महाराष्ट्र सेआता हूं वहां वर्कर्स लाखों कीसंख्या में आजके दिन भगवान विठ्ठल केदर्शन करने, उनके आर्शीवाद लेने पंढरपुर जाते हैं । मैं उनके आर्शीवाद सेअपनी बात रखना चाहूंगा । वास्तव में विठ्ठल भगवान नेपूरे वैश्विक भाईचारे, शांति और समरसता केलिए जोसीख हमसबको दीथी किबिना भेदभाव केदेश चले,बिना भेदभाव केहर एकव्यक्ति अपना काम करे,मैं समझता हूं किमाननीय प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जीने पिछले पांच वर्ष बिना भेदभाव केपूर्ण विकास काकाम किया है,समाज केहर वर्ग कीचिंता कीहै; हरवर्ग कोसाथ लेकर चले हैं । विकास प्रगति केमार्ग परतेज गति सेचले औरवैसे हीरेलवे नेगत पांच वर्षों में तेज गति लीहै, देश कोप्रगति देने काएक बड़ा योगदान दिया । इसकी मैं कुछ झलक दिखाने काप्रयत्न करूंगा । इसडिबेट परमेरे सेपूर्व लगभग 99 वक्ता बोले हैं । मेरा सौभाग्य हैकि मैं 100वें स्पीकर केरूप में बोल रहा हूं…(व्यवधान)

संसदीयकार्य मंत्रालयमें राज्यमंत्री तथाभारी उद्योगऔर लोकउद्यम मंत्रालयमें राज्यमंत्री (श्रीअर्जुन राममेघवाल):मंत्री जीको मिलाएंगे तोसेंचुरी होही जाएगी । सुरेश अंगड़ी साहब बोले है,तो अब 100 हो गए…(व्यवधान)

 श्रीपीयूष गोयल: मैं समझता हूं किमेरे सेपूर्व सदानंद गौडा जीऔर माननीय सुरेश प्रभु जीने रेलवे केसभी कार्यों को गति दीथी । जिस प्रकार सेउन्होंने रेलवे काएक बड़ा विजन बनाया, उसको आगे लेकर जाने की जिम्मेदारी मुझे मिली । सुरेश अगंडी जी ने कल 12 घंटे बिना ब्रेक लिए सबकी बातों को यहां बैठकर सुना । सभी केमार्गदर्शन और प्रभावी कदमों सेआज रेलवे बहुत उज्ज्वल भविष्य कीतरफ तेज गति सेबढ़ रहा है । 

कल 11 जुलाई एक और याद रखने वाला दिन थाजब मुंबई, की ट्रेन्स में लगभग सात बमब्लास्ट हुए थे,जिनमें करीब 209 लोगों कीमृत्यू हुई,उन्होंने वीरगति प्राप्त कीऔर 700 सेअधिक लोग घायल हुए । यहअलग बात हैकि वहवर्ष 2006 था,उस समय इतनी बड़ी घटना होने केबावजूद कोई जवाब नहीं दिया गया,कोई कदम नहीं उठाए गए । …(व्यवधान) अगर मोदी जीकी सरकार होती तोआप समझ सकते हैं किकिस प्रकार सेमुंहतोड़ जवाब दिया जाता । …(व्यवधान)

सर, यहबहुत अच्छी बात हैकि कलरेलवे कीअलग-अलग उपलब्धियों कीबहुत सारी बातें हुईं । रेलवे केबारे में बहुत सारे अच्छे सुझाव आए । बहुत सारे मेंबर्स नेडिटेल में रेलवे केबजट कोस्टडी किया औररेलवे केबजट में सेबहुत सारे नए-नए पहलू हमारे समक्ष रखे । माननीय अध्यक्ष जीपूरे समय अपने हंसमुख चेहरे सेहम सबको प्रोत्साहित भीकरते रहे,किसी कोरोका-टोका भीनहीं । इन सबचर्चाओं सेमैं समझता हूं ‍कि जब चारों दिशाओं सेनए-नएसुझाव आते हैं,नए-नएविचार आते हैं तोहमें भीप्रोत्साहन मिलता हैकि कैसे हमऔर अच्छे तरीके सेरेलवे काकाम आगे बढ़ा सकते हैं । वास्तव में,अगर हमभारत केइतिहास कोदेखें तोआज़ादी कीलड़ाई केसमय सेही भारतीय रेल का एक बहुत प्रमुख स्थान रहा है । हमइस वर्ष महात्मा गांधी जीकी 150वीं जयन्ती मनाने जारहे हैं । अगर उससमय साउथ अफ्रीका में महात्मा गांधी जीको ट्रेन सेबाहर नहीं निकाला गया होता तोशायद इतिहास कोई अलग हीमोड़ लेसकता था । इसलिए मैं आजइस अवसर परजरूर महात्मा गांधी जीको याद करना चाहूंगा और अपनी श्रद्धांजलि देना चाहूंगा । …(व्यवधान)

       महोदय, मेरे ख्याल सेरेलवे एकऐसी ऑर्गनाइजेशन है,जो 24 घण्टे काम करती हैऔर 365 दिन तत्पर रहती है । जो 13 लाख कर्मचारी दिन-रात रेलवे कीसेवा करते हैं,मैं उनके कर्मठ प्रयासों केलिए, आजइस अवसर परउनको जरूर धन्यवाद देना चाहूंगा । गतपांच वर्षोंमें जिस प्रकार सेउन्होंने हमारी सहायता कीहै और कामों में गति लाएं हैं, यह करना संभव नहीं होता, अगर इन सबलोगों नेअपना-अपना योगदान नहीं दिया होता । लगभग सभी मेंबर्स सेमेरा मिलना-जुलना होता है,सब नएमेंबर्स अभी तकनहीं मिले होंगे । लेकिन सभी मेंबर्स कीफीडबैक लेना, मेंबर्स केकामों कीचिन्ता करना औरमुझे विश्वास हैकि ऐसा कोई मेंबर नहीं होगा, जिसका कोई नकोई काम किसी नकिसी तरीके सेपिछले पांच वर्षों में करने कीहमने कोशिश नकी हो,परन्तु यहभी सच्चाई हैकि जिस प्रकार कीव्यवस्था वर्ष 2014 में हमें मिली थी,वह बहुत जर्जर थी । मैं एकही आंकड़ा शुरू में रखना चाहूंगा, जिससे सभी मेंबर्स कोएक प्रकार सेअनुभव होगा किक्या बदलाव गतपांच वर्षों में आया है । कलकाफी बातें हुई हैं स्टॉपेजेज की,नई रेल लाइन्स की,मैंने बीच में उठकर थोड़ा इंटरवीन भीकिया थाकि यहवास्तविकता भीहै किरेलवे ओवरबर्डन्ड भीहै, ट्रैफिक ज्यादा है । मैं उसकी थोड़ी डिटेल्स आपके समक्ष रखना चाहूंगा । वर्ष 1950 में पूरे देश में 77,609 ट्रैक किलोमीटर्स थे ।

वर्ष 2014 में जबप्रधान मंत्री मोदी जीके नेतृत्व में एनडीए कीसरकार नेकाम संभाला, तब 116,765 ट्रैक किलोमीटर थे और अगले पांच वर्षों में यह ट्रैक किलोमीटर वर्ष 2019 में बढ़कर 123,236  किलोमीटर हुआ ।…(व्यवधान)

       माननीय सदस्य कोचिंता हैकि इतना काम नहीं हुआ तोमैं बता दूं किजिस तेज गति सेहम नेअलग-अलग काम,चाहे वहगेज कन्वर्ज़न हो - नैरो गेज सेब्रॉड गेज,डबलिंग, ट्रिपलिंग, क्वाडरप्‍लिंग होया नईलाइन्स कमीशन करनी हो,इन सभी चीजों में हमने लगभग 59 प्रतिशत इन्क्रीज किया । [2009 and 2014 की तुलना में]कल वैसे अधीर रंजन जीने एकविचित्र बात कही किविद्युतीकरण में यूपीए केसमय में 3000 किलोमीटर काकाम होता था और हमारे समयमें सिर्फ 3300 किलोमीटर काकाम हुआ है । मैं बड़ी हैरानी में थाक्योंकि मुझे जानकारी थीकि केवल पिछले साल हमने 4000 किलोमीटर सेज्यादा काम किया है । मैंने जबडिटेल देखी तोवर्ष 2009 से 2014 के बीच में भारतीय रेल काविद्युतीकरण मात्र 3,038 किलोमीटर का हुआ था,लगभग 600 किलोमीटर हरसाल । हमने सिर्फ पांच वर्षों में 13,687 यानीसाढ़े चार गुना विद्युतीकरण, इनके बनिस्पत पांच वर्षों में करके दिखाया ।…(व्यवधान)

       माननीय अध्यक्ष जी,वर्ष 2013-14 में एकवर्ष में लगभग 650 किलोमीटर लाइन काविद्युतीकरण हुआ है । पिछले केवल एकही वर्ष में (2017-18), हमने 4,087 किलोमीटर काकाम किया ।…(व्यवधान) औरवर्ष 2018-19 में 5200 किलोमीटर काकाम करदिया ।

       मेरे ख्याल सेसच्चाई बड़ी कड़वी लगती है,बड़ा मुश्किल होता है । कईबार क्या होता हैकि हारने वालों औरजीतने वालों में बसएक फर्क रहता है । हारने वाले मुश्किलों कोदेखते हैं औरजितने वाले मंजिलों कीतरफ जाते हैं । मैं समझता हूं किहम सभी माननीय सांसद भली-भाँति जानते हैं किरेलवे एकअतिआवश्यक सुविधा है; सब चाहते हैं किहमारे क्षेत्र में बढ़े,हमारे गांवों तकपहुंचेक्योंकि रेलवे ज्यादा इकोनॉमिकल है ।

यह सच्चाई हमारे सामने आनी चाहिए औरहमें समझना भीचाहिए किक्यों रेल मंत्री नया स्टापेज नहीं देपाते हैं यानई रेलगाड़ी क्यों नहीं चला पाते हैं । मैंने बताया हैकि रेल ट्रैक किलोमीटर और इतना कमबढ़ा, रूट किलोमीटर इतना कमबढ़ा, लेकिन फ्रेट लोडिंग, पिछले 64 सालों में लगभग 1300 प्रतिशत बढ़ा है । उसी ट्रैक में इतना लोड बढ़ाना, आपसमझ सकते हैं किकैपेसिटी कितनी ओवरलोडेड है । अगर पैसेंजर्स कीबात करें, तोपैसेंजर्स किलोमीटर में लगभग 1642 परसेंट की वृद्धि हुई है । जबइतनी वृद्धि डिमांड कीहोगी औरसप्लाई परकभी निवेश नहीं किया जाएगा,जिस प्रकार सेनिवेश होना चाहिए, तोस्वाभाविक रूप सेतकलीफें आएंगी । मोदी जीकी सरकार आने केबाद कैपेक्स पर होने वाला निवेश पिछले पांच वर्षों में लगभग ढाई गुना हुआ है । उसी केकारण इतना सारा काम हमपूरे देश में करपाए । अटल जीने एकबात कही थीऔर वहआज केसंदर्भ में बहुत एप्रोप्रिएट है ।…(व्यवधान)

SHRI BENNY BEHANAN (CHALAKUDY): You should address the Chair. …(Interruptions)

SHRI PIYUSH GOYAL : Are you insulting the hon. Members? Sir, it seems that he is insulting the hon. Members and I think I have every right to look where I want. …(Interruptions) अटल जीने कहा थाकि ‘मैं हमेशा सेही वायदे लेकर नहीं आया,इरादे लेकर आया हूं ।’ मैं समझता हूं किमोदी जीने अटल जीके दिखाए हुए उनइरादों कोतेज गति दी । जिस प्रकार सेमोदी जीने रेलवे केपूरे काम परएक प्रकार सेनिगरानी भीरखी औरमार्गदर्शन भीदिया, वहबहुत प्रशंसनीय है । मोदी जीने काम केअलग-अलग पहलुओं में चिंता व्यक्तकी हैऔर विशेष रूप सेरेलवे में पांच वर्षों केअंदर मोदी जीके मार्गदर्शन औरसानिध्य में हमारा मंत्रालय आगे बढ़ता रहा । मैं इससदन कोबताना चाहता हूं किअपने आपमें शायद एकचाय वाला, जिसने रेलगाड़ियों केसामने चाय बेचकर छोटी आयु में देश को जाना है, वही समझ सकता थाकि रेलवे कितनी अहम भूमिका निभा सकता है ।

अध्यक्ष जी,रेलवे केविषय में माननीय सदस्यों द्वारा कईबातें कही गईं । रात भरबैठ करउन सभी बातों कोकम्पाइल किया गया औरये करीब-करीब 74 पेजेज हैं,जिनमें सभी एमपीज द्वारा उठाए मुद्‌देहैं । कईसदस्यों नेस्टापेज यानई ट्रेनों कीबात कही है । आपजानते हैं किवह सबकाम रात भरमें नहीं होसकता है,उसे विभाग स्टडी करेगा और सभी कोपत्र लिखकर आपसे संबंधित विषयों काजवाब मिलेगा । शुरूआत में विपक्ष कीसबसे बड़ी पार्टी केनेता नेकुछ इंटरेस्टिंग विषयउठाए थे जिन्हें में आज सदन में रखना चाहता हूं । उन्होंने कहा कि - The sheen and glamour which were visible in the Railway Budget have been lost after the Railway Budget and the General Budget were combined. मैं समझता हूं किआज पूरे देश नेऔर दुनिया नेएक बजट की सराहना कीहै जोपहले सिर्फ औरसिर्फ देश कोऔर माननीय सदस्यों कोगुमराह करने वाला बजट दिखाया जाता था,सैकड़ों ट्रेनें, नएट्रैक्स इलेक्शन जीतने केलिए औरअपने क्षेत्र केलोगों कोखुश करने केलिए एनाउंस होते थे । उन्हें ख्वाबी पुलाव दिखाने कीकोशिश पहले के रेल बजट्स में कीजाती थी,प्रधान मंत्री जीने उसविषय कोसमाप्त करके देशहित और जनता केहित काकाम किया है । जनता कोकोई गुमराह नकर सके औरजो काम किया जासकता है,वही देश केसमक्ष रखा जाए । …(व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष:माननीय मंत्री जीके अलावा कोई भीबात रिकॉर्ड में नहीं जाएगी ।

…( व्यवधान) … * श्री पीयूष गोयल: माननीय अध्यक्ष महोदय, डिबेट केसमय बड़ी हीइंट्रेस्टिंग बातें रखी गईं । हमहर बार सुनते हैं किजो विषय होता है,उसके बारे में कहा जाता हैकि यहहमारे समय में शुरू हुआ था, …(व्यवधान) ठीक है,देश में डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर लगने चाहिए । देश आपका धन्यवाद करता है,इसे आपने वर्ष 2007 में शुरू किया । लेकिन वर्ष 2007 केबाद आपने क्या किया? वर्ष 2007 से 2014 के दौरान सात वर्षों में मात्र नौहजार करोड़ रुपये उसप्रोजेक्ट परखर्च किए औरएक किलोमीटर भीट्रैक लिंकिंग नहीं करपाए ; टेंडर तक नहीं दिए गए थे सात वर्षों में …(व्यवधान) वर्ष 2014 केबाद हमने इसकाम कोतेज गति दी । इसकाम कोतेजी सेअपने हाथ में लिया औरमात्र पाँच वर्षों में इसप्रोजेक्ट पर 39 हजार करोड़ रुपये खर्च किए औरअब तकहम 1900 किलोमीटर काट्रैक लिंकिंग पूरा करचुके हैं । वर्ष 2021 तकये दोनों डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर हमपूरा करदेंगे । …(व्यवधान) हम एक  बार  नहीं, आपके  साथ दसबार डिबेट करलेंगे ।…(व्यवधान) सात साल में आपने जोकाम किया था,हमने पाँच साल में उसका चार गुना सेअधिक निवेश करके 1900 किलोमीटर ट्रैक लिंकिंग करदिया । …(व्यवधान)

       उन्होंने थोड़ी-बहुत बातें रेलवे केप्राइवेटाइजेशन कीभी रखीं । उसके बारे में,मैं पहले भीप्रश्नकाल में जवाब देचुका हूँ । लेकिन, वही बात बार-बार बोलने सेकोई सच्चाई बदल नहीं सकती है । सच्चाई यहहै कियदि हमको रेलवे कीसुविधाओं कोबढ़ाना है,रेलवे कीसुविधाओं कोगाँव-गाँव और देश के चारों कोनों तकपहुँचाना है,तो स्वाभाविक हैकि इसमें बड़े पैमाने परनिवेश करना होगा । सभी यात्री अच्छी औरसुगम यात्रा चाहते हैं । हमचाहते हैं किदेश काजो फ्रेट है,माल है,उसे ढोने केलिए रेलवे कीक्षमता बढ़े । इसलिए सरकार नेनिर्णय लिया किआगे चलकर हमऔर ज्यादा पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप्स कोएनकरेज करेंगे औरहमारी जोक्षमता है,उसको बढ़ाने केलिए बाहर सेनिवेश लाने केलिए कुछ यूनिट्स कोकॉरपोरेटाइज़ करेंगे । यहकोई हमारी नहीं, यहभी आपके समय काही काम है । आपने जोकाम अधूरा छोड़ा था,हम उसको पूरा कररहे हैं । …(व्यवधान) यहतो हमारा काम हीरहा है,शायद जनता नेइसीलिए हमको चुनकर भेजा है…(व्यवधान) किआप जिन कामों कोकरने में विफल रहे थे,हम उनको पूरा कररहे हैं,आज आपसदन में क्यों क्रोकोडाइल टीयर्स बहा रहे हैं किकॉरपोरेटाइजेशन क्यों होरहा                   है । …(व्यवधान) हमें समझ नहीं आता हैकि उनके कहने काहेतु क्या है ।…(व्यवधान) मैं समझता हूँ किजब हमारे वित्त मंत्री जीने  बहुत हीविश्वास केसाथ इसबात कोरखा किहम रेल औररेल सेजुड़ी हुई सुविधाओं में लगभग 50 लाखकरोड़ रुपये अगले 10-12 सालों में निवेश करेंगे, तोमैं समझता हूँ कियह हिम्मत काकाम है । सभी मेम्बर्स यही तोचाहते हैं । इसीलिए तोहम चुनकर भेजे गएहैं । यही काम करने कीतो हमारी जिम्मेदारी है ।

       माननीय वित्त मंत्री जीने जोकहा किनई सोच औरनई दिशा केसाथ यहसरकार काम करेगी, मैं माननीय वित्त मंत्री जीका धन्यवाद करना चाहूँगा, हमारी बहन नेदेश केसामने जिस प्रकार काएक विस्तृत चित्र रखा हैकि आगे देश औररेलवे कैसे प्रगति करेगा, उसमें हमसभी प्रतिबद्ध हैं औरहम सबउसे पूरा करने केलिए दिन-रात काम करने वाले हैं ।

माननीय अध्यक्ष :  माननीय सदस्यगण, आपस में नईसंसद मतचलाएं । कल रात को 12 बजे तकसदन चला । कोई टेक्निकल कारण था,नहीं तोरात 2 बजे तकभी चलता । जिन माननीय सदस्यों कोबोलने कामौका देना था,मैंने दिया । फिर भीयदि आपके मनमें कोई बात होगी, तोमैं औरसवाल-जवाब करा लूंगा । लेकिन माननीय सदस्यगण, मेरा आपसे आग्रह है । मैं इधर केमाननीय सदस्यों सेविशेष रूप सेआग्रह करना चाहता हूं । मंत्री जीसक्षम हैं,आप बीच में टोका-टोकी मतकरें । आप बैठे-बैठे मतबोलिए । इसकी मैंने अनुमति नहीं दीहै । जबमाननीय मंत्री जीबोलेंगे तोकोई भीमाननीय सदस्य बैठे-बैठे टिप्पणी नहीं करेगा । माननीय मंत्री जीकृपया आपबोलें ।

श्रीपीयूष गोयल: धन्यवादअध्यक्षजी । …(व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष :  आप लोगों कोजो भीस्पष्टीकरण चाहिए वहमैं दिलाऊंगा ।

श्री पीयूष गोयल: हमने 50 लाख करोड़ रुपये कीजो आगे कीयोजना सोची है,उसमें जोहाई डेंसिटी नेटवर्क्स हैं,जहां-जहां परबहुत ज्यादा कैपेसिटी कंसट्रेंट है,बहुत ज्यादा गाड़ियों कीडिमांड है,वहां परअगर हमलगभग 6 लाख करोड़ रुपये खर्च करते हैं,तो उसकी कैपेसिटी बड़े रूप में बढ़सकती हैऔर अच्छी तरह सेलोगों कीसुविधाएं बढ़ाई जा सकतीहैं । मैं समझता हूं किइसमें कोई गलत बात नहीं है । आपलोगों कोतो स्वागत करना चाहिए । हमने कल्पना कीहै किडेडिकेटेड फ्रेट कॉरीडोर औरबनाए जाएं, जिससे जहां-जहां परमाल गाड़ियों कीडिमांड है,वह औरबढ़ सके । उसमें लगभग साढे 4 लाख करोड रुपए खर्च होंगे । इसमें भीकिसी कोकोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए । इसी प्रकार सेजो मेन गोल्डन क्वाड्रीलेटरल हैजिससे मुंबई सेदिल्ली जाते हैं,मुंबई सेकोलकाता जाते हैं,जो मेन लाइंस हैऔर उनके इंटरसेक्शन है,उसकी गति बढ़ाने के काम परअगर हमकरीब डेढ़ लाख करोड़ खर्च करते हैं तोमैं समझता हूं किवह स्वागत योग्य है । इसप्रकार सेहमने एक-एक विषय परगहराई से,समस्याओं कीजड़ तकजाकर, रूट कॉज एनालिसिस करके, बिना राजनीतिक हस्तक्षेप से,किन्तु देश कीभलाई केलिए, जनता कीसुविधा केलिए, किन-किन चीजों परनिवेश करने सेआगे रेलवे देश कीऔर अच्छी तरीके सेसेवा करसके, उसपर ज्यादा बलदिया है । आपसब भलीभांति जानते हैं किपहले आईसीएफ कोचेज़ हुआ करते थे । अभी भीबड़ी संख्या में आईसीएफ कोचेज़ इसदेश में चलरहे हैं ।

अध्यक्ष महोदय, 30 साल पहले एलएचबी कोच काएक डिजाइन स्विट्जरलैण्ड, जर्मनी सेआया था । उसका काम शुरू हुआ,लेकिन बहुत थोड़ी मात्रा में एलएचबी कोचेज़ बनते थे । आईसीएफ कोचेज़ हमारे आने तकबड़ी मात्रा में बनते हीजा रहे थे । हमने निर्णय लिया किजो पुराने आईसीएफ कोचेज़ हैं,जिनके कारण इतने बड़े एक्सीडेंट्स होते हैं,जिससे लोगों कीमृत्यु होती है,उनको क्यों नहम पूरी तरह सेफेज़ आउट करदें औरसिर्फ एलएचबी कोचेज़ बनाएं । आजदेश में एकभी नया आईसीएफ कोच नहीं बनरहा है । पुराने आईसीएफ कोचेज़, जोचल रहे हैं,जैसे-जैसे उसकी लाइफ खत्म होगी, उसको हमफेज़ आउट करदेंगे । उनको ओवरहॉल करके फिर सेआपके लिए नहीं भेजेंगे, उसको एलएचबी कोचेज़ सेरिप्लेस करेंगे । इससब में तोजरूर बड़े पैमाने परखर्चा होगा । अबयह खर्चा करना चाहिए किनहीं करना चाहिए? स्वाभाविक रूप सेजनता चाहेगी ही किकरना चाहिए ।

अध्यक्ष महोदय, सुरक्षा की दृष्टि से सिग्नलिंग सिस्टम बहुत इंपॉर्टेंट है। अगर ज्यादा गाड़ियां चलती हैं तोकैपेसिटी भीबढ़ जाती है,जैसे मुंबई लोकल में हर 3-4 मिनट में एकगाड़ी चलती है जिसके लिए ऑटोमेटिक सिग्नलिंग सिस्टम लगाया हुआ है ।

पूरे देश कोक्यों नउसका लाभ मिले औरपूरे देश में आटोमेटिक सिग्नलिंग हो । ऐसे काम करने केलिए सरकार पहल करती है और उसकेलिए बड़ा निवेश लाने कीचेष्टा भी करती हैतो मुझे लगता थाकि विपक्ष भीशायद हमारी सहायता करेगा औरहमारी सराहना करेगा किअच्छा काम होरहा है । कभी-कभार राजनीति सेऊपर उठकर भीदेखना चाहिए किकैसे अच्छा काम होसकता हैऔर हमकैसे उसमें योगदान देसकते हैं । परंतु, टीका-टिप्पणी करनी हैतो मैं इतना बताना चाहता हूं किकोई ऐसा विषय नहीं है,जिस परमैं अच्छे तरीके सेसमझा नहीं सकता हूं किकैसे पुराने जमाने में काम होता थाऔर कैसे आजहोता है । मैंने पिछले टर्म में जवाब देते हुए मॉडर्न कोच फैक्ट्री जोरायबरेली, उत्तर प्रदेश में स्थित है,उसका जिक्र किया था । यहप्रोजेक्ट वर्ष 2007-08 में मंजूर हुआ औरबनना शुरू हुआ था ।

माननीय अध्यक्ष महोदय, वर्ष 2014 में जबहम आएथे तोवहां एकभी कोच नहीं बनता था । वहां कपूरथला औरचैन्नई सेकुछ शैल लाए जाते थे,उन परपेंट करते थेया पेंच कसते थेऔर बोलते थेकि प्रोडक्शन होगया । यहसब छोड़िए, जनरल मैनेजर तकअपॉइंट नहीं हुआ था,एक आदमी भीअपॉइंट नहीं हुआ था,टेम्पर्रीज़ भेजे जाते थे । जबमाननीय प्रधान मंत्री जीने सत्ता संभाली औरउनके समक्ष यहगम्भीर विषय आया तोउन्होंने तुरन्त ऑर्डर किया किइसमें लोगों कीभर्ती तुरन्त कीजाए । अफसरों कोअपॉइंट किया जाए औरयहां प्रोडक्शन शुरू करवाया   जाए । अगस्त, 2014 में वहां सेपहला कोच बनकर निकला । उसके बाद हमारी कार्यशैली देखिए, हमहर वर्ष प्रोडक्शन कोबढ़ाते रहे औरआज हमवहां सौप्रतिशत एलएचबी कोचेज़ बना रहे हैं । अच्छे औरसुरक्षित कोचेज़ बना रहे हैं । आपको जानकर खुशी होगी किदिन-रात हमप्रोडक्शन कोबढ़ाते रहे औरलगभग 711 कोचिज़ वर्ष 2017-18 में बने । उसकी क्षमता 1000 कोचेज़ कीहै औरआप समझ सकते हैं किसरकारी फैक्ट्री में साधारणतया 70 परसेंट कैपेसिटी कायूटिलाइजेशन होता हैतो लोग छाती पीट-पीटकर अपना गुणगान सबजगह करते हैं,लेकिन हमारे प्रधान मंत्री किसी काम सेसंतुष्ट नहीं होते हैं । माननीय प्रधान मंत्री जीने मुझ सेपूछा कि 711 कोचेज़ बने हैं तोज्यादा क्यों नहीं बनसकते हैं । मैंने कहा किसाहब उसकी कैपेसिटी ही 1000 की है  और 711 बन रहे हैं । कोई भीफैक्ट्री इतना नहीं बनाती है । उन्होंने कहा किमैं खुद देखने आऊंगा । माननीय प्रधान मंत्री जीएमसीएफ गए । उन्होंने पूरी फैक्ट्री काराउंड लिया, कर्मचारियों सेमिले, हमारे नौजवान इंजीनियर्स सेबातचीत कीऔर उन्हें दिशा-निर्देश दिया किअगले वर्ष इसफैक्ट्री केप्रोडक्शन कोडबल किया जाए । हमने वर्ष 2018-19 में 1425 कोचिज़ वहां बनाए । 1000 कीक्षमता वाली फैक्ट्री में हमने 1425 कोचेज़ बनाए और प्रोडक्शन डबल किया । नामुमकिन कोमुमकिन करने केमैं ऐसे सैंकड़ों उदाहरण देसकता हूं । अगर हमइसमें निवेश करें, टेक्नोलॉजी लाएं औरइसको कोर्पोरेटाइज़ करें,  तो रायबरेली स्थित फैक्ट्री पांच हजार कीक्षमता वाली विश्व कीसबसे बड़ी फैक्ट्री बन सकती है । आप सोचिए इससे कितने लोगों कोनौकरी मिलेगी, कितनी छोटी एंसिलियरी यूनिट्स चारों तरफ लगेंगी, कैसे हमारे छोटे उद्योग औरव्यापार कोबल मिलेगा । यहसोच इससरकार कीहै । वहां सेपूरे विश्व में भारत में बनी ट्रेन, ट्रेन सेट औरकोचों का निर्यात होगा ।…(व्यवधान)

माननीयअध्यक्ष : माननीय सदस्य प्लीज़ ।

       माननीय सदस्य, मैं आपसे फिर आग्रह कररहा हूं औरयह मेरा इससदन में अंतिम आग्रह है ।

श्रीपीयूष गोयल : कई बार यहकहा जाता हैकि हमरेलवे कोप्राइवेटाइज़ करने जारहे हैं । मेरा तोवैसे भीगला जल्दी बैठ जाता है,पर गला फाड़-फाड़ केबार-बार बोल चुके हैं किकोई रेलवे कोप्राइवटाइज़ करही नहीं सकता है ।

रेलवे कोप्राइवेटाइज करने काकोई मतलब हीनहीं है,यह कोई सवाल हीनहीं है । लेकिन अगर कुछ नईसुविधाएं आती हैं,कोई नएप्रोजेक्ट्स लगते हैं,कोई नएरूप सेटेक्नोलॉजी लाते हैं,कोई नईक्षमता बढ़ाई जाती है,ट्रैक्स, रूट्स, लाइन्स, कुछ नएस्टेशन्स बनाना चाहते  हैं, किसी जगह परहाई स्पीड ट्रेन, सेमी हाई स्पीड ट्रेन चलाना चाहते हैं,तो मैं यहसमझता हूं कियह देश हित काकाम है । इसमें निवेश कोइन्वाइट करना चाहिए ।…(व्यवधान)

       माननीय अध्यक्ष जी,कई सारे विषय उठाए गएहैं । मैं आपके माध्यम सेएक विषय केबारे में माननीय सदस्यों कोजरूर बताना चाहूंगा किहमारी सरकार नेसंरक्षा औरसुरक्षा इनदोनों कोप्रमुख लक्ष्य मानकरकाम किया है । अगर मैं वर्ष 2009-10 को एकउदाहरण केलिए लूं,क्योंकि कईमाननीय सदस्य उसपार्टी सेआते हैं,जिनकी नेता तबरेल मंत्री थीं । रेलवे में वर्ष 2009-10 में 2,107 करोड़ रुपये महिलाओं, बच्चों औरयात्रियों कीसुरक्षा परखर्च होते थे । इसवर्ष हमलगभग 5,690 करोड़ रुपये सिर्फ यात्रियों कीसुरक्षा परखर्च करने वाले हैं,यह कितना बड़ा बदलाव है ।

माननीय अध्यक्ष जी,अगर हमवर्ष 2004 से 2009 के बीच में एक्सीडेंट्स कीसंख्या देखें, तोलगभग 206 एक्सीडेंट्स हरवर्ष होते थे । वर्ष 2009 से 2011 के बीच 153 एक्सीडेंट्स हुए । हमारे समय वहघटकर 100 सेभी नीचे आगए हैं, 95.6 एक्सीडेंट्स हरवर्ष होते हैं,यानी हमारे समय में एक्सीडेंट्स भीकम हुए औरउन एक्सीडेंट्स में जिन लोगों कीजान जाती थी,उसकी फिगर वर्ष 2009-11 में लगभग 300 तकपहुंच गईथी ।…(व्यवधान) आजहमने उसको घटाकर शायद 50 केआसपास किया है ।…(व्यवधान) ऐसा सुधार शायद रेलवे में पहले कभी नहीं देखा गया होगा ।…(व्यवधान)

एक विषय माननीय सदस्यों नेऑपरेटिंग रेशियो कापूछा है । स्वाभाविक हैकि ऑपरेटिंग रेशियो में जोमैन पावर कॉस्ट है,वह भीइन्क्लूडेड होती है । आजरेलवे में जो 12-13 लाख कर्मचारी काम करते हैं,उनको हमने सेवेन्थ पेकमीशन केबाद लगभग 22 हजार करोड़ रुपये ज्यादा दिए हैं । उसके बावजूद रेलवे कोप्रॉफिट में रखा हैऔर रेलवे सही तरीके सेअपना काम करपा रही है,निवेश करपा रही है । मेरा विश्वास हैकि जोये एफिशियंसी केपैरामीटर्स हैं,जिसमें हमइंप्रूवमेन्ट्स कररहे हैं,उससे आगे चलकर रेल सुविधाओं में बढ़ोतरी होगी और जनता कोउसका लाभ मिलेगा ।

एक विषय है,पता नहीं कहां-कहां सेकुछ-कुछ फिगर्स बताए जाते थे,एलआईसी बॉरोइंग दोहजार करोड़ रुपये कीहुई है । पांच हजार जोड़ लें,तो सात हजार, ऐसे कईसारे विषय हैं,जो एकदम बेबुनियाद हैं । जबहमें जरूरत होगी, तोहम एलआईसी सेपैसा लेलेंगे । अगर हमें नहीं होगी,तो क्या हमजबरदस्ती बॉरोइंग करके अपना ब्याज काखर्चा बढ़ाएं? क्या कोई अपने बहीखाते में ऐसा करता हैकि जबजरूरत नहीं है,तो ब्याज परपैसा लेलो । फिर भीसांसद महोदय कीजानकारी केलिए बता दूं किहम अबतक लगभग 18,000 करोड़ रुपये लेचुके हैं । जब-जब हमें जरूरत पड़ेगी, तबहम उसके हिसाब सेउनसे बात करके लेसकते हैं । वैसे बॉरोइंग केऔर भीबहुत-सेआप्शन्स हैं,हम तोउनसे बॉरो करते हैं,जहां सेसबसे सस्ता पैसा मिलता है ।

इसी प्रकार सेकई एमओयू काजिक्र किया गया है,मेरे पास डिटेल्स है । मैं उसे लिखित रूप सेभी भेज दूंगा किहमने कैसे एक-एक एमओयू केऊपर काम करके रेलवे में सुविधाएं बढ़ाने केलिए प्रयत्न किए हैं ।…(व्यवधान)     

इनको तोइतना भीनहीं मालूम हैकि मैं अमरीका सेपढ़ाई करने केलिए कभी लंबे अर्से  के लिए नहीं गया था । शॉर्ट कोर्सिज़ वगैरह जरूर मैंने बहुत सारे किए हैं । मैंने एकरूल बनाया हैकि रेलवे में हरकर्मचारी कीएक हफ्ते कीट्रेनिंग हर सालकम्पलसरी होनीचाहिए । जिससे रीलर्निंग होती है । माननीय अध्यक्ष महोदय नेनए सांसदों केलिए ट्रेनिंग प्रोग्राम आजकल चला रखा था । Training is something, which is necessary for everybody. बड़े सेबड़े व्यक्ति कोभी रीलर्न करना पड़ता है,नहीं तोवह इतिहास केपन्नों केहिसाब सेजीता है । दुर्भाग्य हैकि शायद कुछ लोगों कोयह बात ध्यान नहीं है,हमारी पार्टी में तोट्रेनिंग प्रोग्राम्स हरवर्ष किए जाते हैं । हमारी पार्टी केकार्यकर्ताओं केलिए, हमारी पार्टी केएमपीज़ केलिए किए जाते हैं,जिससे कंटीन्यूएस हमभी इवॉल्व हों औरदुनिया केसाथ-साथ हमभी आगे बढ़ें । परंतु आपकी जानकारी केलिए मैं बताना चाहूंगा किमैं शॉर्ट कोर्सेज़ केलिए जरूर अमरीका गया । मैं स्वदेशी पढ़ाई करके यहां तकपहुंचा हॅूं औरस्वदेशी पढ़ाई करके मैं यहां परमंत्री बना हॅूं । …(व्यवधान) आपने शब्द यहइस्तेमाल किया किअगर कांग्रेस नहीं होती तोआप पढ़ाई करने यू.एस. कैसे जाते? यहशब्द आपने इस्तेमाल किया था,वह भीलिखा हुआ है । आपकी वर्बेटिंग ट्रांस्क्रिप्ट लेकर हमने यहबनाया है । …(व्यवधान)

       महोदय, इन्होंने ट्रैक रिन्युअल कीभी बात कीथी । मुझे तोयह बात समझ  हीनहीं आईकि येक्या कहना चाह रहे थे । …(व्यवधान) जबहम सरकार में आए,तब टैक्स की जर्जर स्थिति थी,ट्रैक रिन्युअल कितने पुराने समय सेनहीं हुआ था,हमने उनसबको टेकअप किया, उसको बढ़ाया औरउसी केकारण आजयह सेफ्टी काफिगर इतना सुधरा है, ट्रेन एक्सिडेंट्स सन् 2013-14 मेंजो 118 होते थे,आज 2018-19 में घटकर 59 रहगए हैं,आधे होगए हैं ।

       महोदय, विद्युतीकरण कावैसे तोमैंने जवाब देही दिया है,परंतु हमें विश्वास हैऔर हमारा संकल्प हैकि आगे आने वाले कुछ वर्षों में पूरी भारतीय रेल काब्रॉडगेज नेटवर्क शतप्रतिशत विद्युतीकृत होजाएगा । …(व्यवधान) हजारों-करोड़ रुपयों काडीजल बचेगा । विदेश सेक्रूड ऑयल लाने में देश कीविदेशी मुद्रा बचेगी । साथ हीसाथ, पर्यावरण में इसका बहुत बड़ा प्रभाव होगा, दिल्ली में आने वाली गाड़ियां भीसभी इलैक्ट्रिसिटी सेचलेंगीं, दिल्ली काभी पर्यावरण सुधरेगा, मुंबई काभी पर्यावरण सुधरेगा औरजहां-जहां सेरेलवे जाएगी, उनगांवों काभी पर्यावरण सुधरेगा ।

       महोदय, वैसे मेरे मैनिफैस्टो कीभी चर्चा कीगई । मैं बताना चाहूंगा किप्रधान मंत्री मोदी जीइतनी चिंता करते हैं किदेश में एकभी ऐसा विषय हमारे मैनिफैस्टो में  नहीं हैजिस परलगातार मंत्रियों कोदेखना नहीं पड़ता हो, मॉनिटर नहीं करना पड़ता हो । मैं समझता हॅूं कि मैनिफैस्टो केऊपर इससरकार नेपिछले पांच सालों में जितने काम किए हैं, इसके पहले किसी सरकार नेमेनिफैस्टो कोइतना सीरियसली नहीं लिया होगा ।

       महोदय, सिर्फ जानकारी केलिए बता रहा हॅूं, क्योंकि पहले मैंने एकविषय – ट्रैक किलोमीटर काकहा था । उसको मैं सिर्फ संशोधित करदूं किवह रनिंग किलोमीटर था । रेलवे कीअलग-अलग भाषा होती है । जोमैंने 89 हज़ार 919 फिगर दीथी, वहरनिंग किलोमीटर था । कृपया स्टॉफ उसको ट्रैक किलोमीटर केबदले रनिंग किलोमीटर ठीक सेकर दे । …(व्यवधान) मुझे लगता हैकि करैक्शन करने कातो मुझे अधिकार है ।  मैं पूरा हीसंशोधित करदेता हॅूं ।    

 

13.00 hrs जो 64 साल में 30 हजार रनिंग किलोमीटर बढ़ाया था,वह हमारे समय में सिर्फ पाँच साल में पाँच हजार किलोमीटर बढ़ा । टोटल ट्रेक किलोमीटर, जो 64 साल में लगभग 39 हजार किलोमीटर बढ़ा था,वह हमारे समय में सिर्फ पाँच साल में सात हजार किलोमीटर बढ़ा । यहमैं संशोधित करदूँ किवह फिगर्स बोलने में मुझसे गलती हुई । उसको मैंने संशोधित करदिया ।

       एक बात यहबताई गईकि वन्दे भारत पूरी क्षमता सेनहीं चलती है । स्वाभाविक है,क्योंकि पहले तोकिसी नेहिम्मत हीनहीं कीथी किइतनी अच्छी और बढ़िया ट्रेन भारत में बनाई जाए । हमने हिम्मत औरसाहस किया तथा पहली बार हमारे इंजीनियर्स नेभारत कीशुद्ध डिजाइन वाली एकसेमी हाई स्पीड ट्रेन वन्दे भारत ट्रेन सैट केरूप में बनाई ।…(व्यवधान) आपतो पहले रेल मंत्री रहचुके हैं,आपको इतना भीनहीं पता किकोच कोजॉइन करना औरएक ट्रेन सैट केबीच में फर्क क्या होता है?पहली बार देश में ट्रेन सैट बनी,जो वन्दे भारत केनाम सेदिल्ली सेबनारस जाती  है । आपसब कोजानकर खुशी होगी किइसका लगभग शत-प्रतिशत ऑक्युपेंसी पहले दिन सेआज तकचल रहा है,अच्छे तरीके सेसेवा कररही है । एकलाख सेअधिक किलोमीटर कीजर्नी वन्दे भारत करपाई है । आपमें सेकुछ मित्रों कोयाद होगा किकैसे छोटी सीघटना परकुछ लोगों नेवन्दे भारत कोलेकर हमारे इंजीनियर्स, हमारे कर्मचारियों कामज़ाक उड़ाया था । आजउन सबके लिए मेरी एकदरख्वास्त हैकि जबहमारे भारत केइंजीनियर्स औरकर्मचारी कुछ काम करते हैं तोउनकी सराहना कीजाए, उनकी तारीफ कीजाए । उनका मनोबल, उनका प्रोत्साहन बढ़ाया जाए । उनको रिडिक्यूल करके अपनी नकारात्मक सोच को देश केसामने मतदर्शाइये ।

       मुझे कहा गया किएग्रीकल्चर प्रोडक्ट्स कीहमने बात कीथी औरउस परहमने काम नहीं किया । आपने मॉडल शेयर रेलवे का 89 परसेंट सेघटकर 30 परसेंट केआस-पास कुछ फिगर्स रेज़ कीथी । इसको कहते हैं-अपने पांव परकुल्हाड़ी मारना, क्योंकि मॉडल शेयर ज़रूर वर्षों पहले 89 परसेंट था ।…(व्यवधान) वर्ष 1950 केपहले 89 परसेंट मॉडल शेयर था,लेकिन घटते-घटते औरआज़ादी केबाद लगभग पूरे समय एकही सरकार चली है,उसमें भीज़्यादा समय एकही परिवार नेडायरेक्ट औरइनडायरेक्ट सरकार चलाई है । वर्ष 1950 सेपहले 89 परसेंट सेघट कर 2014 में 34 परसेंट होगया था । अबउसकी ज़िम्मेदारी किसकी है । आपबता दें किवह जिम्मेदारी लेने कोतैयार हैं किनहीं, वहक्यों घटा,क्यों इतना कमहो गया?

मैं समझता हूँ किहमारी सरकार नेजिस प्रकार सेएग्रीकल्चरल प्रोडक्ट्स कोट्रेन सेजोड़ने का प्रयास किया है औरआगे चलकर हमऔर बढ़ाने वाले हैं,यह अपने आपमें कृषि क्षेत्र कोऔर हमारे किसानों केआगे आने वाले काम में औरफूड प्रोसेसिंग केकाम में बलदेगा ।

कई सारी औरभ्रांतियाँ फैलाने कीकोशिश कीगईं । एकबड़ी हीआश्चर्यजनक फिगर्स आईथी किबायो-टॉयलेट्स काकाम धीरे चलरहा है । मैं परेशान हुआ । मैंने कहा कियह कहां सेहो गया,हमारा तोबहुत तेज गति सेकाम चलरहा है । अध्यक्ष महोदय, आपको जानकर खुशी होगी किलगभग 58400 कोचेज में बायो-टॉयलेट्स लगाने थे । जिसमें टोटल लगभग 2 लाख 40 हजार केआस-पास बायो-टॉयलेट्स लगने थे । हमने आजके दिन 2 लाख 10 हजार केकरीब बायो-टॉयलेट्स ऑलरेडी लगा दिए हैं । पहले टारगेट थाकि वर्ष 2021-22 तक सबट्रेन्स में बायो-टॉयलेट्स लगजाएं । मुझे आपको बताते हुए खुशी हो रही है और मुझे लगता हैकि अगले 12 महीने में हीहम यहसभी ट्रेन्स में बायो-टॉयलेट्स लगा देंगे ।

फिर बताया गया किएस्केलेटर्स, लिफ्ट औरदिव्यांगों कीचिंता करनी चाहिए । बड़े-बड़े अच्छे उपदेश दिए गए । मैं स्वागत करता हूँ,लेकिन सच्चाई भीसामने रखनी आवश्यक है ।

वर्ष 2004 सेवर्ष 2009 केबीच, अलग-अलग मंत्री थे,मेरे पास पूरी लिस्ट भीहै, बहुत सारे मंत्री आएऔर गए । वर्ष 2004 सेवर्ष 2009 केबीच रेलवे में मात्र 28 एस्केलेटर बने और 19 लिफ्ट लगीं । वर्ष 2009 सेवर्ष 2014 केबीच वहसंख्या बढ़ी और 115 एस्केलेटर और 78 लिफ्ट लगीं । हमने 5 साल में क्या किया, हमने 457 एस्केलेटर लगाए और 377 लिफ्ट बनाईं यानी 19 लिफ्ट सेबढ़कर 78 लिफ्ट लगीं औरहमने 377 लिफ्ट लगाईं । 28 एस्केलेटर सेबढ़कर 115 एस्केलेटर औरहमने 457 एस्केलेटर लगाए । यहकाम करने काढंग होता है ।…(व्यवधान) पंक्चुऐलिटी कीभी बड़ी-बड़ी बातें कीगईं । जबहमारी सरकार आई,हमने देखा किपंक्चुऐलिटी वास्तव में एकचिंताजनक विषय है । हमसबको याद हैकि पंक्चुऐलिटी केविषय परसब त्रस्त रहते थेऔर स्वाभाविक रूप सेलोग समय परपहुँचें, यहहमारी प्राथमिकता रहनी चाहिए । यहअलग बात हैकि ट्रैक्स पर्याप्त नहीं हैं,ट्रेन्स कीकमी है,इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ाने कीआवश्यकता है,इसलिए थोड़ी-बहुत समस्याएं तोनेचुरल हैं । सिग्नलिंग सिस्टम बाबा आदम केजमाने काहै औरइस सबको सुधारने में समय लगेगा । हमने देखा किपंक्चुऐलिटी कीवजह सेजनता त्रस्त है । सरकारी आंकड़े बताते हैं किपंक्चुऐलिटी इतनी खराब नहीं है ।

       महोदय, जबहम इसकी गहराई में गएतो हमें बहुत हीविचित्र बात मालूम पड़ी । आजादी केलगभग 67 वर्ष बाद भी,वर्ष 2014 तकपंक्चुऐलिटी काजो पुराना सिस्टम था,उसके अनुसार किस समय स्टेशन परट्रेन पहुँची, किस समय ट्रेन स्टेशन सेनिकली, स्टेशन मास्टर इससमय कोलिखता था । वहसत्य माना जाता थाऔर उसी हिसाब सेपंक्चुऐलिटी केफिगर्स बताए जाते थे,जिससे पूरे रूप में असलियत पता नहीं चलती थी । हमारी सरकार नेआकर उसे टेक्नोलॉजी केसाथ जोड़ा । हमने ऑटोमेटिक डेटा लोगर्स लगाए किट्रेन कासमय एकदम शत-प्रतिशत सचदेश केसमक्ष आए । जैसे हमडॉक्टर केपास इलाज केलिए जाते हैं,तो जबडॉक्टर कोबीमारी पता होतभी तोवह इलाज करसकता है,उसी तरह सेयह बीमारी सामने आईऔर इसका हलनिकला । ओवरनाइट जबये डेटा लोगर्स लगगए, पंक्चुऐलिटी फिगर 20 प्रतिशत घटा,क्योंकि अबसच्चाई, सामने आगई । इसके बाद पूरी रेलवे उसको सुधारने में लगगई । आजमुझे बताते हुए हर्ष हैकि मैंने पंक्चुऐलिटी केऊपर इसप्रकार कीशिकायतें औरइस प्रकार कीगहरी चिंता ऑफलेट नहीं सुनी हैं,जैसी कईवर्षों पहले तकहम सुनते थे । किसी ट्रेन केडिले होने परजो मिनिट्स लूज होते हैं,एक-एकट्रेन कितनी लेट होती है,अब हमउसे मिनटों में मॉनीटर करते हैं औरवह हमसबके पास तोरहता हीहै और साथ ही हमनेयह पूरी जानकारी “रेल दृष्टि” ऐपके माध्यम सेआज पूरे देश केसमक्ष रखदी है । “रेल दृष्टि” ऐपके माध्यम सेआपको सबजानकारियाँ प्राप्त होजाएंगी । हर स्टेशन कीफोटोज उसपर मिलेंगी किकैसे स्टेशन सुन्दर होते जारहे हैं,कैसे स्टेशंस परस्वच्छता होरही है,टॉयलेट कितने साफ हैं,हर समय-सीमा केहिसाब से,हर स्टेशन कीफोटो उसपर अपलोड होती है । अगर कहीं भीहमें लगता हैकि यहाँ सफाई कम-ज्यादा हैतो इसके लिए अधिकारियों कीजिम्मेदारी तयकी जाती है । आज “रेल दृष्टि” ऐपपर आपहर ट्रेन कीजानकारी प्राप्त करसकते हैं ।

 1 बजकर 09 मिनट परजब अबहम यहाँ परहैं, तोइस समय भारतीय रेल कीहर ट्रेन कहाँ-कहाँ, किस-किस स्टेशन सेगुजर रही है,यह सबआप सभी “रेलदृष्टि” ऐपपर देख सकते हैं । इतनी सारी जानकारी हमने पब्लिक करदी है । यहसब पारदर्शिता सेहो रहा है ।

       महोदय, मैं बहुत सारे विषयों परयहाँ कहसकता हूँ,लेकिन मुझे नोट आरहा हैकि हमये औरसब चीजें बाद में देते रहें, लेकिन मैं एक-दो चीजें जरूर सदन केसामने रखना अपना दायित्व समझूँगा ।

       अध्यक्ष महोदय, पश्चिम बंगाल केबारे में बहुत-सीबातें हुई हैं । पश्चिम बंगाल में 54 नए प्रोजेक्ट्स चलरहे हैं - 16 नई रेल लाइन, 4 गेज कन्वर्जन, 34 डबलिंग केकार्य । इनका अनुमानित खर्च 42,000 करोड़ रुपये है । आपको यहजानकर हैरानी होगी किपश्चिम बंगाल में जोसबसे पुराना प्रोजेक्ट चलरहा है,वह वर्ष 1974-75 से चलरहा है ।…(व्यवधान)

       अध्यक्ष महोदय, हावड़ा सेअम्टा औरबरगछिया सेचम्पादंगा प्रोजेक्ट्स में सेआज तकहम सिर्फ 43 किलोमीटर कमीशन करसके हैं क्योंकि वहां कीसरकार हमें जमीन हीनहीं देती है । हमकैसे काम करें? रेलवे केपास पैसे कीकोई कमी नहीं है । अगर हमें जमीन मिल जाए तोहम तुरन्त काम करने कोतैयार हैं । दूसरा प्रोजेक्ट भीबड़ा पुराना है । यहवर्ष 1983-84 का है । एकलाखी सेबालूरघाट केबीच लगभग 163 किलोमीटर काप्रोजेक्ट है । इसमें 76 किलोमीटर काकाम हेल्ड-अपहै, क्योंकि वहां कीसरकार जमीन नहीं देती है । इसी तरह से,एक वर्ष 1984-85 का प्रोजेक्ट है,जो तामलुक सेदीघा केबीच 168 किलोमीटर काप्रोजेक्ट है । इसमें 80 किलोमीटर काकाम अटका पड़ा हैक्योंकि पश्चिम बंगाल कीसरकार जमीन हीनहीं देती है ।

       अध्यक्ष महोदय, मैं ऐसे कई उदाहरण दे सकता हूं । मैं बार-बार पत्र लिखता रहता हूं । 15 जून कोभी मैंने प्रोजेक्ट-वाइज डिटेल देकर एकपत्र माननीय दीदी कोभेजा हैकि हमारे क्या-क्या काम अटके पड़े हैं । अगर आपलोग मेरी मदद करसकें तोमैं आपका ऋणी रहूंगा ।…(व्यवधान)

       महोदय, अबकेरल कीबात करते हैं । केरल केबारे में भीकई सारी चिंताएं व्यक्त कीगईं । केरल में आज 9 प्रोजेक्ट्स चलरहे हैं । इसमें एकबहुत महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट है,जिसके लिए हमसभी को,मैं समझता हूं किपूरे सदन कोचिंता होगी । यहतिरूनवया सेगुरुवायूर केबीच काप्रोजेक्ट है । गुरुवायूर मन्दिर जाने कीइच्छा सभी श्रद्धालु भक्तों कीहोती है । रेलवे नेइस प्रोजेक्ट कोलेने कानिर्णय लिया । आजसे 24 साल पहले सेयह प्रोजेक्ट चलरहा है,पर हमउसका फाइनल लोकेशन सर्वे भीजमीन परनहीं करपा रहे हैं क्योंकि वहां कीसरकार सहायता नहीं देती है । एकप्रोजेक्ट अंगामाली सेसबरीमाला केबीच काहै । हमसबकी इच्छा होती हैकि सबरीमाला जाकर दर्शन करें । सबरीमाला जाने सेकाम करने काहमारा मनोबल औरबढ़ता है । वहप्रोजेक्ट भीआज सेबीस साल पहले बजट में लिया गया था । बजट में तोसभी कुछ लेलेते हैं । उसमें केरल सरकार नेपहले नवम्बर, 2015 में कहा किहम 50 प्रतिशत कॉस्ट बियर करेंगे । अबवे बोलते हैं किहम इसे बियर नहीं करेंगे, हमपैसे नहीं देंगे । बाकी सारे राज्य इसके लिए पैसे देते हैं । चाहे झारखण्ड हो,महाराष्ट्र हो,गुजरात हो,उत्तर प्रदेश हो,सभी राज्य पैसा देते हैं,प्रोजेक्ट लगाने में सहायता करते हैं,पर केरल सरकार कहती हैकि हमनहीं देंगे । यहां फाइनल लोकेशन सर्वे करने में राज्य सरकार हमारी मदद नहीं करपा रही है ।

   

मैं ऐसे कई उदाहरण दे सकता हूं ।इस बारे में भीमैंने 15 जून कोमाननीय मुख्य मंत्री जीको चिट्ठी लिखकर अवगत कराया थाकि अगर आपमदद करदें तोहमें बहुत सारे फायदे होंगे ।

कर्नाटक में हमबहुत सारे प्रोजेक्ट्स करने केलिए प्रतिबद्ध हैं । प्रधान मंत्री मोदी जीके नेतृत्व में निर्णय लिया गया हैकि कर्नाटक केबेंगलुरु में सब-अर्बन रेलवे बनाई जाए । वहां लोगों कोघंटों तकजो तकलीफ़ होती है,उसको हमकैसे कमकर सकें, वहां लोगों कोसुविधा देसकें, मेरे पास कर्नाटक केभी बहुत सारे प्रोजेक्ट्स कीजानकारियां हैं । अबमैं औरसमय नलेते हुए बताना चाहता हूं किअलग-अलग मेम्बर्स केजो विषय सामने आएथे, उनको लिखित रूप सेसब काजवाब देने केलिए आपको विश्वास दिलाता हूं । मैं सभी माननीय सांसदों, माननीय अध्यक्ष जीऔर सभी स्टाफ कापुन: एकबार धन्यवाद करते हुए,आप सबसे अर्ज़ करता हूं किआप डिमांड फॉर ग्रांट, डिमांड नं. 82 रेलवेज़ कोअपना अनुमोदन, समर्थन औरआशीर्वाद देकर हमको अनुगृहीत करें । धन्यवाद ।

माननीय अध्यक्ष:माननीय सदस्यगण, आजसे अध्यक्ष कीनई व्यवस्था हैकि जोसदस्य माननीय मंत्री जीके भाषण केबीच में व्यवधान पैदा करेंगे, उनको आजके बाद क्लैरिफिकेशन कीअनुमति नहीं दीजाएगी औरजो सदस्य मंत्री जीका पूरा भाषण सुनेंगे एवं उसके बाद क्लैरिफिकेशन मांगेंगे, तोमैं सभी काक्लैरिफिकेशन कराऊंगा । क्या पूरा सदन यहव्यवस्था चाहता है?

अनेक माननीय सदस्य: हाँ,चाहते हैं ।

माननीय अध्यक्ष: यहसदन सर्वसम्मति सेचलना चाहिए । सर्वसम्मति सेसदन चले,सभी दलों कीसहमति सेचले, तोसदन ठीक सेचलता है ।

       अधीर रंजन जी,अब आपएक प्रश्न पूछ लें ।

श्रीअधीर रंजनचौधरी (बहरामपुर): अध्यक्षमहोदय, मैंदो-तीनमिनटबात करनाचाहताहूं, क्योंकिउन्होंनेबहुतसारीबातेंबोल दीहै । …(व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष: आपको नया भाषण नहीं देना है ।

…( व्यवधान)

श्रीअधीर रंजनचौधरी : सर, कोईझगड़ानहींहोगा । …(व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष: आपकेवल क्लैरिफिकेशन पूछ लें ।

…( व्यवधान)

श्रीअधीर रंजनचौधरी : सर, आजके बादवह चालूहोगा । गोयल साहब, आपदेखिए । …(व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष: अधीर रंजन जी,आप इधर देखिए ।

…( व्यवधान)

श्रीअधीर रंजनचौधरी: सर, हमारेबीच दोस्तीहै ।…(व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष: अगर माननीय मंत्री जीभी इसतरह सेबोलेंगे तोमैं उनको भीटोकूंगा । आप निश्चित रहें, माननीय मंत्री जीहों याकोई अन्य वरिष्ठ सदस्य हो,जो इधर कीजगह उधर सेपूछेंगे तोमैं उनको भीबोलूंगा ।

…( व्यवधान)

   

श्रीअधीर रंजनचौधरी: सर, बिल्कुलझगड़ानहींहोगा, मैंआपसेवादाकरताहूं ।…(व्यवधान) इसतरह सेबातें करना अच्छा लगता है । अगरकोई गोयलसाहबको पायल, डोयलया कोयलपुकारे, तोवह नहींहोगा, क्योंकिगोयलतो गोयलही रहेंगे । ऐसेही अगररेल कोहम किसीतरह सेदेखें, लेकिनरेल रेलही रहेगी । बातयह हैकि बचपनमें आपऔर हमसभी रेडियोसुनतेथे, उसकेबाद टीवीआ गयाऔर अभीहाथ मेंमोबाइलआ गया, यहसब राजीवगांधी जीकी देनहै । लेकिन, आपयह कहेंकि हमनेमोबाइलको तयकर दिया, आपनेकुछ नहींकिया, यहकहनाबिल्कुलगलत होगा । इसलिए, मैंकहनाचाहताहूं किरेलवेकी जोसारीतरक्कीहो रहीहै, यहऑन गोइंगप्रोसेसहै, जैसेकि डेडिकेटेडफ्रेटकॉरिडोरहमनेशुरूकिया, हाईस्पीड  रेलकॉरिडोरहमनेशुरूकिया, यानीबुलेटट्रेनतक हमनेसोचाथा, अभीयह ऑनगोइंगप्रोसेसहै । कलसे हमनेअपनीतरफ सेसुझावदेनेकी कोशिशकी, इसकेअलावाकुछ नहींकिया ।मैंनेसिर्फसुझावदेनेका कोशिशकी । जैसाकि वेसेफ्टीसिक्योरिटीकी बातकहनेलगे ।गोयलसाहब, आपसेफ्टीसिक्योरिटीकी बातकरतेहो, लेकिनसेफ्टीसिक्योरिटीमें ‘सी’ तथा ‘डी’ ग्रेडके जोकर्मचारीहैं, उनकाबड़ा योगदानरहताहै । आपदेखेंकि रेलवेके ‘सी’ तथा ‘डी’ ग्रेडमें दोलाख 64 हजारवैकेंसीफिल अपनहींकी जारही है । इसकाअसर क्याहोगा? इसकाअसर रेलवेकी सेफ्टीतथा सिक्योरिटीपर होगा । मैंइनकोसजेशनदेनाचाहताहूं, जैसेकि डीआरएफमें अंडरप्रोविज़निंगहोताहै, इसकोआप बजटकहतेहैं ।आप कहतेहैं किऑपरेटिंगरेश्यो9-10 परसेन्टइसके-उसकेया सेवेन्थपे कमीशनके लिएहै । यहठीक है, लेकिनआपकोकहनाचाहिएकि आपअपनेटारगेटको अचीवनहींकर पारहे हैं । आपयह मतसोचिएकि हमारीतरफ सेआपकोकोई सहयोगनहींहोगा ।हम तोकल सेआपकोसहयोगकरनेके लिएकह रहेहैं ।हम आपकोकुछ सलाहदेतेहैं, आपउसकोथोड़ाध्यानमें रखिए । A total of 49719 deaths were reported between 2015 and 2017.

 

and my clarification is regarding privatisation of the Railways. In the Budget of 2015-16, the then hon. Finance Minister had earmarked a five-year development programme for the Railways by which a sum of Rs. 8.5 lakh crore was supposed to be attracted from private investment by way of PPP and all those things. Now, the Government proposes to invest a sum of Rs. 50 lakh crore by 2030 for infrastructure development. I would like to know wherefrom this money would come …(Interruptions)

 

SHRI SUDIP BANDYOPADHYAY (KOLKATA UTTAR): Sir, first of all I would like to say that hon. Minister mentioned about the Eklakhi – Balurghat Railway line in his reply. I would like to invite him to board the Eklakhi – Balurghat express train and I can assure him that it would be a joy for him to have travelled in that train. This train is running in full command.

       Sir, I am raising a very crucial point. There are more than 1,74,000 railways bridges in this country. Of them, many are more than 100 years old and this is related to the question of safety and security of the Railways. What steps the Government proposes to take for these bridges which are more than 100 years old. I would like to know if any repair work of those bridges would be taken up or not. …(Interruptions)

   

डॉ. निशिकांत दुबे (गोड्डा): अध्यक्ष महोदय, कलमैंने एकस्पेसिफिक प्रश्न पूछा थाकि वर्ष 2008 में डोमेस्टिक ट्रैफिक औरएक्सपोर्ट ट्रैफिक केबीच में जोघपला कांग्रेस कीसरकार नेऔर उसके बाद …(व्यवधान) इसके मंत्रियों नेकिया । उस पर 30 हजार करोड़ कीजो सीएजी कीरिपोर्ट आईहै, उसके बारे में भारत सरकार क्या एक्शन लेरही है? …(व्यवधान)

 

श्री नामा नागेश्वर राव (खम्माम): मैं आपके माध्यम से मंत्री महोदय से एक बात कहना चाहता हूं । कल हमारे दो सदस्यों ने टीआरएस पार्टी की तरफ से अपनी बात रखी । उन्होंने यह कह दिया कि वे उन क्लेरिफिकेशंस का उत्तर देंगे । ए.पी. रिहैबिलिटेशन एक्ट में रेलवे के इश्यूज के बारे में उसको प्रायोरिटी देकर उसको कंप्लीट करें ।

       दूसरा, एक ही प्वाइंट है, उसमें भद्राचलम, सतुपल्ली और कोव्वुरु, जो दो स्टेट को कंबाइंड करता है । यह वर्ष 2012 में सैंक्शंड हुआ था । हमारी रिक्वैस्ट है कि हमारा नया स्टेट है, इसकी तरफ आप ध्यान दें । …(व्यवधान)

 

SHRI BHARTRUHARI MAHTAB (CUTTACK): Hon. Speaker, Sir, I would like to inform the House about one thing. It is today, I think, that the return journey of Lord Jagannath. The hon. Minister is very much aware of it. I would like to remind the hon. Minister that there are two long pending projects – one is the Haridaspur – Paradip line. Land acquisition was a problem which has already been sorted out. The other is the Khurda Road – Bolangir line. The problem now has been sorted out by the State Government and the State Government also is participating in it. How long will it take to fully operationalise these two lines?

 

SHRIMATI SUPRIYA SADANAND SULE (BARAMATI): Sir, I would like to put just two to three quick questions. The hon. Minister talked about land acquisition issues in the States of Kerala and West Bengal. The bullet train was a flagship programme of this Government and it has now been over five years. It is your Government at the Centre and also at Maharashtra. So, why has there been no land acquisition in Maharashtra and why is the work of the Bullet train not started?

       Sir, secondly, I would just like to elaborate on what Shri Premachandran ji said. You used words like `corporatisation’ `SPV’ `PPP’ etc. Can the hon. Minister please elaborate on these?

       Finally, my point is on the running kilometres and track kilometres. Can the hon. Minister please explain what exactly these mean? …(Interruptions)

 

SHRI JAYADEV GALLA (GUNTUR): Sir, this is regarding the Railway Zone for the State of Andhra Pradesh which the Government announced just before the elections. It was also mentioned in the AP Re-organisation Act also. You are saying now that it has been fulfilled. But I just wanted to know regarding the Waltier Division which has been split. The goods traffic has all been given to the State of Odisha and only the passenger traffic remains with the State of Andhra Pradesh now.

माननीयअध्यक्ष : माननीयमंत्रीजी, क्याआप स्पष्टीकरणदेनाचाहतेहैं? 

SHRI JAYADEV GALLA : So, all the incomes are with Odisha and all the expenditure are with Andhra Pradesh. Earlier the Railway Zone was considered unviable……(Interruptions)

माननीयअध्यक्ष: माननीय मंत्री जीआप स्पष्टीकरण देना चाहते हैं?

 

श्रीपीयूष गोयल: अध्यक्ष महोदय, मुझे अच्छा लगा किविपक्ष केकई सांसदों नेमेरे भाषण कोअच्छी तरह सुना इसलिए प्रश्न भीअच्छे आएहैं । अधीर रंजन जी,आपके समर्थन केलिए बहुत-बहुत धन्यवाद । आपने जरूर शब्दों काकुछ किया, कोयल गोयल वगैरह रेल रेल हीरहेगा, लेकिन पीयूष काएक मतलब अमृत भीहोता है । मैं आपको  अमृत हीदूंगा, आपचिंता मतकीजिए । प्रेमचन्द्रन जी,हमने बजट में कभी भीप्राइवेट इन्वेस्टमेंट साढ़े आठलाख करोड़ रुपये नहीं कहा था,आप बजट पुन:पढ़ लें । हमने उससमय कहा थाकि लगभग साढ़े आठलाख करोड़ रुपये कानिवेश रेलवे अलग-अलग माध्यम सेकरेगी । कुछ सरकारी खर्चे से,कुछ प्राइवेट इन्वेस्टमेंट आए,कुछ ईबीआर बॉरोइंग सेहो, उसदिशा में रेलवे ने बहुत से अलग-अलग माध्यम सेपैसा लिया है । उनसभी माध्यमों कोजोड़ करलगभग ढ़ाई गुना निवेश पहले कीतुलना में पिछले पांच सालों में हुआ है । सुदीप दादा, आपने बहुत हीअहम प्रश्न पूछा । वास्तव में ब्रिजेज हमसब कीचिंता कीबात है । आपने सही कहा किकई ब्रिज सौसालों सेभी  ज्यादा पुराने हैं । हमसबको चिंताहै, मैं समझता हूं किशायद हररेल मंत्री  रात को सोने केपहले भगवान सेजरूर प्रार्थना करता होगा किसभी ब्रिजेज सही सलामत रहें, लेकिन हमप्रार्थना केसाथ-साथ पूरे रेलवे कीव्यवस्था कारेग्युलर ऑडिट करवाते हैं । हरडिवीजन औरजोन में ब्रिजेज केऑडिट होते हैं औरहाल हीमें मैंने एकनया प्रोजेक्ट शुरू किया है जिसमें हरब्रिज और आगे चलकर हर आरओबी औरएफओबी परबोर्ड लगाने वाले हैं जिस पर हरब्रिज केबारे में कियह कबबना था,लास्ट इन्सपेक्शन कबहुआ था,इन्सपेक्शन में क्या पाया गया औरइसके लिए आगे कुछ कार्रवाई कीजरूरत हैऔर क्या-क्या कार्रवाई होरही है,इससे हमसभी कोथोड़ी सांत्वना होगी किब्रिजेज केऊपर भीकाम होरहा है और यह डेटा आपके मोबाइल फोन में `रेल दृष्टि` में भी डालेंगे ।

जितनी ट्रांसपरेंसी औरपारदर्शिता बढ़ेगी, लोग जिम्मेदार होते जाएंगे औरजिम्मेदार होंगे जनता औरमीडिया केद्वारा निगरानी रखी जाएगी, इससे काम भीअच्छा होगा । माननीय निशिकांत जी,कोई विषय कोर्ट में हैया इन्वेस्टिगेटिव एजेंसी केपास है,अगर भ्रष्टाचार केकुछ भीविषय कोर्ट केसमक्ष हैं तोहमारी सरकार उसमें दखलंदाजी नहीं करती है । उनका काम वहकरें, हमविकास औरप्रगति केकाम में अपने आपको लिमिटेड रखते हैं,बिजी रखते हैं ।  एजेंसी काजो भीदायित्व है,वह उसे पूरी ईमानदारी सेइंडिपेन्डेंटली निभाएं ।

राव जीने कुछ लाइनों काजिक्र किया है,उसका मैं लिखित जवाब नहीं देपाऊंगा, आजके आजनहीं होगा । महताब भाई नेयाद दिलाया, आपका बहुत-बहुत धन्यवाद । आजभगवान जगन्नाथ जीके यात्री अपनी रिटर्न जर्नी करेंगे । हमने उनश्रद्धालुओं कोस्पेशल ट्रेन सेयात्रा कीसुविधा दीहै । मैं उसका दोलाइन में लिखित जवाब दूंगा । माननीय सुप्रिया जीने महाराष्ट्र में बुलेट ट्रेन केलिए एक्विजिशन कीबात की,स्वाभाविक रूप सेयह बहुत महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट है । उसका  PERTH चार्ट केहिसाब सेकाम अलग-अलग चलरहा है । महाराष्ट्र में पालघर में थोड़ा लैंड एक्विजिशन में विलंब चलरहा है,लेकिन यहकोई चालीस यापचास साल पुराना विलंब नहीं है । इसविलंब परएक डेढ़ साल सेचर्चा चलरही है । हमसंवेदनशील सरकार हैं । आदिवासी भाई-बहनों केसाथ चर्चा कररहे हैं किहम उनके सुख-दुख में क्या करसकते हैं,कैसे हमउनकी मदद करसकते हैं,भाईचारे सेजमीन कोलेकर ट्रेन अपने निर्धारित समय परचलेगी । कॉरपोरेटाइजेशन, पीपीपी,  एसपीवी वगैरह अलग-अलग शब्द हैं,ये अलग-अलग तरीके होते हैं,जिनसे निवेश लाया जाता है,ये सबअच्छे तरीके होते हैं औरदेश हित केलिए हमसब इनतरीकों कोअपनाते हैं । आपने रनिंग किलोमीटर औरट्रैक किलोमीटर काफर्क पूछा । मुझसे गलती हुई थीऔर मैं उसे स्वीकार करता हूं क्योंकि दोनों फिगर्स इंटरप्ले होगए थे । जोरनिंग किलोमीटर होते हैं,वे यार्ड्स केअंदर लाइन होती हैं यासटिंग लाइन होती हैउसको नहीं गिनते हैं । उसको बाहर निकाल कररनिंग किलोमीटर बनाया जाता है ।

अब 1 लाख 23 हजार ट्रैक किलोमीटर है,रनिंग किलोमीटर 94,735 है, the difference is of shunting lines, yard linesl and all that.

       माननीय गाला जीने वाल्टिेयर डिवीजन केबारे में पूछा है । गाला जी,आप तोबड़े उद्योगपति हैं,अर्थव्यवस्था औरआर्थिक जगत कैसे चलता है,इसकी बहुत समझ रखते हैं । हमजोन्स कीप्रॉफिटेबिलिटी केहिसाब से,निवेश या सुविधाओं में कोई भेदभाव नहीं करते हैं । पूरे देश कीरेल कीचिंता रेलवे करती है । स्वाभाविक हैकि अलग एरियाज़ में अलग-अलग प्रॉफिट एंड लॉस होगा । इधर फ्रेट सेज्यादा है,ऐसे देखें तोभारत कीरेल कापूरा निवेश सिर्फ झारखंड याउसके आसपास करना पड़ेगा । झारखंड, छत्तीसगढ़ केइलाके सेबहुत बड़े रूप में मिनरल वैल्थ आती है । ऐसे नहीं होता है । रेलवे पूरे देश काचित्र देखकर आवश्यकता केहिसाब सेनिवेश करती है । आंध्र प्रदेश केभाई-बहनों कोकोई चिंता करने कीजरूरत नहीं है,कोई छोटी लाइन रहे,न रहे यादूसरे डिवीजन में जाए,पूरे रेल कीप्राफिटेबिलिटी केहिसाब सेनिवेश होता है । आंध्र प्रदेश केसाथ कोई भेदभाव कभी नहीं होगा । धन्यवाद ।

माननीय अध्यक्ष: रेल मंत्रालय सेसंबंधित अनुदानों कीमांगों परसदस्यों द्वारा अनेक कटौती प्रस्ताव प्रस्तुत किए गएहैं । मैं अबसभी कटौती प्रस्ताव सभा केमतदान हेतु रखूंगा जिन्हें पेश किया गया माना गया है ।

कटौती प्रस्ताव मतदान के लिए रखे गए तथा अस्वीकृत हुए ।

     

माननीय अध्यक्ष:प्रश्न यहहै – “ किअनुदान कीमांगों कीसूची केस्तम्भ 2 में रेल मंत्रालय सेसंबंधित  मांग सेख्या 82 केसामने दर्शाए गएमांग शीर्ष केसंबंध में 31 मार्च, 2020 कोसमाप्त होने  वाले वर्ष में संदाय केदौरान होने वाले खर्चों कीअदायगी करने हेतु अनुदानों कीमांगों कीसूची केस्तम्भ 4 में दर्शायी गईराजस्व लेखा तथा पूंजी लेखा संबंधी राशियों सेअनधिक संबंधित राशियां भारत कीसंचित निधि में सेराष्ट्रपति कोदी जाएं ।” प्रस्ताव स्वीकृत हुआ ।

माननीय अध्यक्ष: सभा कीकार्यवाही दोबजकर तीस मिनट तकके लिए स्थगित कीजाती है ।

13.32 hrs The Lok Sabha then adjourned for lunch till Thirty Minutes past Fourteen of the Clock.

   

14.33 hrs The Lok Sabha re-assembled after Lunch at Thirty Three Minutes past Fourteen of the Clock.

                     (Shri Bhartruhari  Mahtab  in  the  Chair)