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Lok Sabha Debates

Notices Of Adjournment Of The House Regarding Alleged Framing Of False Charges ... on 21 April, 2003

nt> Title: Notices of adjournment of the House regarding alleged framing of  false charges under POTA by Chief Minister of Uttar Pradesh against the leaders of Samajwadi Party. (Notices refused) (Interruptions)

KUMARI MAMATA BANERJEE (CALCUTTA SOUTH): Sir, 20,000 people could not file nominations for the Panchayat elections in West Bengal… (Interruptions)

प्रो. रासा सिंह रावत (अजमेर):अध्यक्ष महोदय, पश्चिम बंगाल में बहुत धांधली चल रही है। …( व्यवधान)

श्री रामजीलाल सुमन (फिरोजाबाद):अध्यक्ष महोदय, उत्तर प्रदेश का मामला बहुत गंभीर है। …( व्यवधान)

श्री श्रीप्रकाश जायसवाल (कानपुर) : अध्यक्ष महोदय, बहुत बड़ी समस्या है। करोड़ों बुनकर भुखमरी के शिकार हो रहे हैं। …( व्यवधान)

11.00- 1/2 hrs. (At this stage, Shri Sudip Bandopadhyay and some other hon. Members came and stood on the floor near the Table.) MR. SPEAKER: I am going to allow your leader to speak. Please go back to your seats.

11.01 hrs. (At this stage, Shri Sudip Bandopadhyay and some other hon. Members went back to their seats.) MR. SPEAKER: I have received a number of notices of Adjournment Motion regarding alleged framing of false charges by Chief Minister of Uttar Pradesh against the leader of the Samajwadi Party, Shri Mulayam Singh Yadav and others. These notices have been given by Shri Ramji Lal Suman, Shrimati Reena Choudhary, Shri Ram Murti Singh Verma, Shri Ram Vilas Paswan, Shri Chandra Nath Singh, Kunwar Akhilsesh Singh, Shri Saroj Tufani, Shri Raghuraj Singh Shakya and Shri Dharm Raj Singh Patel. These are the nine notices I have received on this very important subject.

… (Interruptions)

MR. SPEAKER: I have said that I would allow Kumari Mamata Banerjee to speak.

… (Interruptions)

MR. SPEAKER: Let me read first. Let me bring to the notice of the House the important subjects on which I have received notices.

श्री राम विलास पासवान (हाजीपुर) : अध्यक्ष महोदय, हमने क्वैश्चन ऑवर के सस्पेंशन का नोटिस दिया है। …( व्यवधान)

11.03 hrs. MR. SPEAKER: I have received a notice on truck owners’ strike in the country. I have received notices on this from Shri Malaisamy, Shri Radhakrishnan and Shri Suresh Kurup. Then, I have received another notice on the problems being faced by workers in the powerloom industry. The notice has been given by Shri H.D.Deve Gowda. Shri Jaiswal has requested me that he would also like to speak on this issue.

I have received notices from several Members for suspension of Question Hour. The issues are almost the same, so I am not going to repeat the names. The same Members who have given notices for Adjournment Motion have requested for suspension of Question Hour and for giving priority to this subject.

Apart from this, there are two Calling Attention notices and 23 Zero Hour notices. I would like to give an opportunity to the Members to speak on different issues. But before I do that, the leader of the Samajwadi Party, Shri Mulayam Singh Yadav has expressed a desire to make a few observations on an important issue of Uttar Pradesh and I have permitted him to do so.

श्री मुलायम सिंह यादव (सम्भल):अध्यक्ष महोदय, मैं केवल आपसे प्रार्थना करने के लिए खड़ा हुआ हूं। हम नहीं चाहते कि सदन स्थगित हो। यद्यपि हम सदन को स्थगित करा सकते हैं लेकिन हम श्री रामजी लाल सुमन और अपने अन्य साथियों से कहेंगे कि सदन स्थगित न हो। हम पूरे सदन से एक प्रार्थना करना चाहते हैं कि उत्तर प्रदेश में हमारे खिलाफ १३-१४ अप्रैल की रात को कई वरिष्ठ आई.ए.एस. अधिकारियों को कई मिलों में भेजकर, करीब १३५ से लेकर १४० मुकदमें लिखे गये जिनका ड्राफ्ट बनाकर मुख्यमंत्री कार्यालय से भेजा गया और ज्यों की त्यों रिपोर्ट दर्ज कराई गयी। आरोप यह है कि हमने विवेकाधीन नियमों का उल्लंघन किया है। हम इस बात में ज्यादा नहीं जाना चाहते इसीलिए आपके सामने हम अनुरोध कर रहे हैं कि विपक्ष की भूमिका लोकतंत्र में क्या हो, इसे अब पूरे सदन को तय करना पड़ेगा। आज अगर दिल्ली में कोई दल सत्ता में है तो वह कहीं विपक्ष में है। अगर यहां केन्द्रीय सरकार सत्ता में है तो उनके लोग कहीं विपक्ष में भी हैं। विपक्ष को हमेशा सरकार के गलत कामों की आलोचना करने का सर्वाधिक अधिकार है। अगर उसकी समझ में कोई काम गलत लगता है तो उसकी आलोचना करने का उन्हें अधिकार है। सरकार लोकतंत्र में उस आलोचना को बर्दाश्त करती है और अगर उसे सुधारती है तो उसकी छवि बनती है। अगर उसका बचाव करती है तो उसकी छवि खराब होती है। यही विपक्ष की भूमिका है। हमारे साथियों ने कुछ टेप दिखा दिया तो उसे लेकर उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री ने उसी दिन दिल्ली में १२ -१३ मार्च को कहा कि मैं दलित की बेटी हूं, श्री मुलायम सिंह यादव को सबक सिखा दूंगी और उनकी शेष जिंदगी जेल में बीत जायेगी। उन्हें जिंदगी भर जेल से बाहर निकलने नहीं दूंगी ।

हम जेल जाने से नहीं डरते। आज केवल उत्तर प्रदेश का सवाल नहीं है, अध्यक्ष महोदय, आप भी मुख्य मंत्री रह चुके हैं, यहां कई भूतपूर्व मुख्य मंत्री हैं, भूतपूर्व प्रधान मंत्री भी हैं, यदि बदले की भावना का यही परम्परा चल पडी तो लोकतंत्र ही समाप्त हो जायेगा। मैं उत्तर प्रदेश का उदाहरण दे रहा हूं। १९८० से लेकर अभी तक उत्तर प्रदेश में कोई मुख्य मंत्री ऐसा नहीं है या राज्यपाल का शासन रहा है, जिस पर सी.ए.जी. ने टिप्पणी न की हो। उसे पूरा पढ़ कर देखें। इस तरह की धमकी देकर प्रतिशोध की भावना से हमारे और हमारे हजारों साथियों के खिलाफ मुकदमे लिखे गए हैं। मैं आपको दिखा रहा हूं कि मुलायम सिंह यादव के सारे रपट के मामले में केवल इलाहाबाद के लोगों ने विरोध किया है। उनको कोई भी मुकदमा नहीं मिला तो १९३२ के विशेष अधनियम के अंतर्गत, जो हमारे बारह नेता हैं जिनमें श्री धर्मराज पटेल, सासंद भी हैं, दो लोग श्री जवाहर सिंह संबंधी जोखलाल ऐसे हैं जो दो बार एम.एल.ए. रह चुके हैं, दोनों पार्टी के शहर और देहात अध्यक्ष हैं और शेष ६० अज्ञात केसेस दायर किए गये हैं। हजारों फर्जी मुकदमे लिखे जा रहे हैं और गिरफ्तारियां कर जेल भेजा जा रहा है। । उनमें कई संस्थाओं तथा कार्यालय के मैनेजर भी हैं। इसी तरह श्री अमर सिंह के लिए कहा गया कि यदि वह दुनिया के किसी भी कोने में मिलेंगे, उनको पकड़ कर जेल में डाल कर दिखा दूंगी। इस तरह के आचरण के चलते, इसमें कोई भी मुख्य मंत्री, कोई भी राज्यपाल, कोई भी प्रधान मंत्री अपने पद से हटने के बाद नहीं बचेगा, जिसका मुकद्दमा न चले और जेल न जाए। इन परम्पराओं का अतिक्रमण हो रहा है। आज लोकतंत्र को खतरा है। आज लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका क्या हो, यह सदन को मिल कर तय करना है। हम इस पर ज्यादा नहीं बोलना चाहते। हम परम्पराओं को कायम रखने के लिए आपसे केवल अनुरोध करना चाहते हैं और आपको खुद भी अनुभव है, आप मुख्य मंत्री रह चुके हैं। अध्यक्ष महोदय, आप हस्तक्षेप करें आप स्वयं, प्रधान मंत्री, उप प्रधान मंत्री श्री चन्द्रशेखर, श्री सोमनाथ चटर्जी और माननीय नेता विरोधी दल सोनिया गांधी जी, श्री शरद पवार, श्री विजय कुमार मल्होत्रा मिल कर फैसला कर लें। अगर हम अपराधी हैं, वैसे हम जेल जाने से जीवन में नहीं डरे, आप मेरा रिकार्ड देखें तो मुझे कितनी बार जेल में भेजा गया है लेकिन हम राजनीति नहीं करना चाहते। हमारे लोग खुद सोच रहे हैं कि मुलायम सिंह यादव को जेल में डाला गया तो हमारा वोट बढ़ गया, लेकिन आज वोट का सवाल नहीं है, सवाल लोकतंत्र को बचाने का है, सवाल विपक्ष की भूमिका का है। इसलिए हम पूरे सदन से अनुरोध करते हैं। ये सभी नेतागण जो फैसला करेंगे, हम उसे मानने के लिए तैयार हैं।

अध्यक्ष महोदय, हम चाहते हैं कि आप हस्तक्षेप कीजिए। हम अपने साथियों से कहेंगे कि सदन में शोर न करें, न ही सदन को बंद करवाएं। सदन हम बंद करवा सकते हैं, यह काम सरल है लेकिन हम चाहते हैं कि इस पर गंभीरता से पूरे हिन्दुस्तान के राजनीतिज्ञों को सोचना पड़ेगा। इसलिए हम आपसे अनुरोध करते हैं कि आप हस्तक्षेप करें। मेरी पूरे सदन के नेताओं से अपील और प्रार्थना है कि यह मामूली खतरा नहीं है लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका का सवाल है। इसलिए हम आपसे चाहते हैं कि आप इस पर गंभीरता से विचार करें और इसमें हस्तक्षेप करें।

श्री चन्द्रशेखर (बलिया, उ.प्र.) : अध्यक्ष महोदय, पिछले दिनों में, मैं दो बार उत्तर प्रदेश गया हूं। आज लखनऊ से वापिस आ रहा हूं। उत्तर प्रदेश की स्थिति सामान्य नहीं है। वहां जो स्थिति है, मैंने कुछ दिन पहले देश के प्रधान मंत्री जी से मिल कर कहा था कि अगर इस स्थिति को नहीं रोका गया तो वहां गृह युद्ध की स्थिति पैदा हो जाएगी। मैं नहीं कहता कि दोष किसका है, किसका नहीं है लेकिन वहां जिस प्रकार शासन चल रहा है और जिस प्रकार की भाषा का प्रयोग हो रहा है, वह अत्यंत दुखद और लज्जाजनक है। मेरे पास कुछ लोगों ने एक कागज दिया है। मैं उस कागज को आपके सामने नहीं रखना चाहता। एक बड़े सीनियर पुलिस अधिकारी ने डेढ़ सौ लोगों का नाम लिख कर कहा है कि सारे एस.पी. इन लोगों के ऊपर मुकदमा बनाएं और जो मुकदमा नहीं बनाएगा, उसके खिलाफ कार्यवाही की जाएगी। क्या यह देश चलाने का रास्ता है? क्या यह देश को बनाने का रास्ता है? जिस तरह के वक्तव्य दिए जाते हैं, मैं उसकी चर्चा नहीं करूंगा। श्री अमर सिंह हों, श्री मुलायम सिंह हों चाहे श्री अखिलेश सिंह हों, न केवल इनके बारे में बल्कि इनके मां-बाप के बारे में, इनके परिवार के बारे में, इनके समर्थकों के बारे में जिस भाषा का प्रयोग वहां की मुख्य मंत्री कर रही हैं, मैं नहीं जानता कि सांस्कृतिक राष्ट्रवाद चलाने वाले हमारे मित्र खुराना साहब और मल्होत्रा जी को उनका समर्थन कब तक प्राप्त रहेगा।

मैंने उत्तर प्रदेश के भारतीय जनता पार्टी के नेताओं से बात की। कल भी की थी। उसके पहले केन्द्र के नेताओं से बात की थी और सभी ने स्वीकार किया कि उत्तर प्रदेश की स्थिति ऐसी है कि अगर तुरंत कोई कदम नहीं उठाया गया तो हालत बिगड़ जाएगी। मुझे आश्चर्य होता है कि मुलायम सिंह जी इस मामले में बहुत भले आदमी नहीं हैं और वह भी कर सकते हैं लेकिन इन्होंने और इनके साथियों ने इस समय जिस संयम का परिचय दिया है, उसके लिए मैं उनको बिना बधाई दिये नहीं रह सकता क्योंकि उन्होंने अत्यंत संयम दिखाया है।

एक दिन में १५० मुकदमे मुलायम सिंह पर चलाए जाएं और वह भी यह कहकर कि मैं इनको जेल में भेजूंगी। अमर सिंह पर चलाए जाएं। जब तक राजा भैया की बात थी, यहां पर चर्चा होती थी लेकिन राजा भैया के घर वालों पर और उनकी बीबी को जाकर पुलिस के लोग धमकाते हैं और उनके जानवरों को लोग मारते हैं। एक जसवंत सिंह जी हैं। बचपन से मैं उनको जानता हूं। वह इनकी पार्टी के नही हैं, किसी और पार्टी के हैं लेकिन इनके समर्थक हैं। उनके ऊपर एक मुकदमा चलाया गया। कोर्ट ने आर्डर किया कि यह मुकदमा नहीं चल सकता। दूसरे मुकदमे पर उनको फिर कहा गया कि जहां भी वह मिले, उनको पकड़कर ले आओ। ये बातें अगर होती रहीं तो कब तक चलेंगी? मैं मुलायम सिंह जी से और नेता, विरोधी दल से बहुत विनम्र शब्दों में कहना चाहूंगा कि आज सरकारी पार्टी के लोग न जाने क्यों अपने को समझते हैं कि वे इस मेलजोल से बहुत सुरक्षित रहेंगे लेकिन आप लोगों ने इन लोगों को बढ़ाने का अवसर दिया है और उसका फल हम लोग भुगत रहे हैं। बबूल बोओगे तो आम का फल नहीं खाओगे। जिस तरह से बहुजन समाज पार्टी और उनके नेताओं को बढ़ाया गया, वह कुछ अच्छा नहीं था। हमारे यहां कहा गया कि दलितों का इससे भला हो रहा है लेकिन दलितों का भला नहीं हो रहा है। मैं समझता हूं कि दलितों के लिए बुरे दिन का आहवान किया जा रहा है। वहां गृह-युद्ध होगा। उसमें कितने लोग मारे जाएंगे, कितने लोगों की हत्याएं होंगी, मैं नहीं जानता।

यहां हमारे मित्र अजीत सिंह बैठे हैं। वह जानते हैं कि उनके इलाके में शांति रखना संभव नहीं हो पाएगा। यह केवल एक इलाके का सवाल नहीं है। आज सारे उत्तर प्रदेश में एक ज्योति, एक आग जलने के समान स्थिति पैदा हो गई है। वहां का अधिकारी चाहे आईएएस हो या पुलिस का कोई अफसर हो, अगर थोड़ा भी ईमानदार है तो वह यू.पी. में नहीं रहना चाहता। यहां गृह मंत्री जी नहीं बैठे हैं, उनके पास कितनी दरख्वास्तें आती होंगी कि हम उत्तर प्रदेश छोड़कर दिल्ली में आना चाहते हैं। मेरे पास रोज एक न एक अधिकारी आकर कहता है कि किसी तरह से हमको यू.पी. से मुक्ति दिलाइए। आज वहां के शासन में यह बात कही जाती है कि किस अफसर को जांच दी जाए।

कहा गया है कि उत्तर प्रदेश में किसी क्षत्रीय, यादव और मुसलमान को जांच का कोई काम न दिया जाए, ये लोग मुलायम सिंह जी के पक्षधर हैं - इस तरह से देश कैसे चलेगा, कैसे राज चलेगा?क्यों उत्तर प्रदेश में आज वहां की सरकार मौन है? क्यों केन्द्र की सरकार मौन है और क्यों भारतीय जनता पार्टी के दिल्ली के नेता मौन हैं? उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी के नेता स्थिति से परचित हैं और रोज-रोज कह रहे हैं कि स्थिति गंभीर है। वे रोज कहते हैं कि कुछ फैसला कीजिए। वहां रोज मीटिंगें होती हैं और निर्णय सरकार की तरफ है लेकिन इस निर्णय से एक बड़ा भारी खतरा यू.पी. में जो पैदा होगा, उसका असर दूसरी जगह भी पड़ेगा। याद रखिए कि आपके यहां भी भाषण दिया गया है कि शिन्दे दलित नहीं हैं, सही दलित को वहां का मुख्य मंत्री बनाया जाएगा - इसका मतलब क्या है? यह संकेत क्या है? इसको आप समझ सकते हैं और इस तरह की भाषा का अगर प्रयोग किया गया तो इस देश में और कुछ हो सकता है लेकिन जनतंत्र नहीं चलेगा, शांति नहीं रहेगी और सभ्य समाज के लिए कोई स्थान नहीं रहेगा।

SHRI PRIYA RANJAN DASMUNSI (RAIGANJ): Mr. Speaker Sir, first of all, on behalf of our Party, I would like to share the concern and agony expressed by the honourable leader of the Samajwadi Party, Shri Mulayam Singh Yadav, and the former Prime Minister, Shri Chandra Shekhar.

We have been watching the developments of Uttar Pradesh for the last three to four weeks. It is not only causing concern to a particular leader or a particular party but also to the entire system of administration, standing in public life and responsibilities conferred, offered and referred to by the distinguished leaders from time to time in their constitutional office, be it the Chief Minister or the Governor. After having read the newspaper, it is more shocking to me that the institutional office of the Governor who relinquished his office and also the person are tried to be booked in such a manner.

Sir, what happened during the last few days to senior leaders like Mulayam Singh Yadav and others can happen to any one of us tomorrow. The reign of terror, threatening the Constitutional machinery, violating all sanity, cultural, political and moral understanding of our democratic functioning in the country, especially towards Opposition, is a shocking revelation. Therefore, Sir, I join with agony and anguish, and appeal to you that such kind of things should not only be discouraged, but should also be collectively condemned. We should not encourage this trend.

I recall, Sir, that in this House - with great humility I can say - when I entered in the 13th Lok Sabha, in the process of political persecution, we have landed ourselves to a peculiar situation. Even the name of the former Prime Minister, Shri Rajiv Gandhi, who is dead, was also brought in the charge-sheet in the second column. I was surprised why this kind of scoring game was going on.

Today, what has happened in Uttar Pradesh - I am sorry, the bell is ringing – is just to hit all those who raise the voice of dissent against the establishment. They misused all kinds of laws in the country. It may happen to him today, it may happen to you also tomorrow. Therefore, Sir, we totally disapprove this method. We condemn it and we hope, wisdom will prevail in Uttar Pradesh administration not to repeat and not to refer this matter any further.

SHRI SOMNATH CHATTERJEE (BOLPUR): Mr. Speaker Sir, I fully endorse with all humility and seriousness what is being placed before this august House on the functioning of the parliamentary democracy which our forefathers, who were the Constitution-makers, had chosen after a very in-depth study of the systems of governance in the country.

Mr. Speaker Sir, the only thing which strikes us is that the present Chief Minister - if I am not mistaken - is in position for nearly one year and this sudden spate of cases is very proximately instituted after disclosure of some threats. Therefore, there is a question of revenge, not a question of enforcement of any law or legal system or punishing a person for committing an offence.

Sir, this is a clear case of revenge by instituting false cases. Let us take it that the basis for the cases at this hour shows a scant respect for the system of democracy that our Constitution-makers have evolved for us.

Sir, Shri Mulayam Singh Yadav is highly respected; everyone in this House is highly respected. With your experience, not only in this august Chair but also as the hon. Chief Minister of Maharashtra, one of the foremost States in our country, I am sure, in your experience you will be able to guide us as to how we should resolve this, how a policy or politics of revenge should be given up. We should go on. There are so many problems in the country. There are problems of poverty, problems of illiteracy and problems of unemployment. Those should get priority over this question of revengeful attitude in politics.

Therefore, Sir, I leave it to all the leaders to find out a solution. We shall certainly cooperate in any manner that is possible for the purpose of evolving, if necessary, a code of conduct.

श्री राम विलास पासवान (हाजीपुर) : अध्यक्ष महोदय, आज पूरे देश में वभिन्न दलों की सरकारें हैं। हर राज्य में कोई-न-कोई पार्टी विरोध पक्ष में है या सत्ता पक्ष में है और यहां दिल्ली में भी यही हाल है। यह मामला केवल उत्तर प्रदेश तक ही सीमित नहीं है। अभी चन्द्रशेखर जी ने अपनी बात कही। श्री जसवन्त सिंह मेरी पार्टी के हैं, जो पहले मनिस्टर थे और पार्लियामेंट्री बोर्ड के चेयरमैन है, लेकिन उनको और उनके परिवार के लोगों को यातनायें दी जा रही हैं। हमारी पार्टी के एक अन्य सदस्य श्री धनन्जय सिंह हैं, उनको भी जेल में बन्द किया हुआ है। यह समझ में नहीं आ रहा है कि ये सारी की सारी चीजें देश को कहां ले जायेंगी।

यह सारा मामला विवेकाधीन कोटे से संबंधित है। विवेकाधीन कोटा प्रधान मंत्री जी के पास भी है। हम लोग पत्र लिखते हैं, तो वे लोगों की समस्याओं को देखते हैं और विवेकाधीन कोटे से समस्याओं को हल करते हैं। अगर कल कोई सरकार आ जाए और वह प्रधान मंत्री जी के खिलाफ केस खोलना शुरु कर दे, तो वह कहां तक उचित होगा। आज तक इस सदन की ऐसी परम्परा रही है। प्रधान मंत्री जी की बात छोड़ दीजिए, अगर कोई मंत्री भी अपने विवेकाधीन कोटे से अलग से कुछ देता है तो जब कोई दूसरा मंत्री आता है, तो वह अननैसेरिरीली ऐसे मामलों को नहीं देखता है, जब तक कि उसके खिलाफ संसद में कोई प्रश्न नहीं उठाया जाए। इस तरीके से मरे हुए मुर्दों को उखाड़ना, मैं समझता हूं कि यह लोकतन्त्र के लिए खतरा है। मैंने उस दिन भी कहा था कि हमें इराक से सबक लेना चाहिए, जो कुछ इराक में हो रहा है। मामला सिर्फ इतना ही नहीं है, हमारे बगल के देशों में जो कार्रवाई चल रही है, उसे भी देखना चाहिए।

महोदय, मैं कहना चाहता हूं कि सिर्फ बीएसपी या मायावती जी कोई दलितों की स्पोक्समैन नहीं है और न ही केवल दलितों की नेता हैं। उत्तर प्रदेश के बाहर उनको दो सीट भी मिलने वाली नहीं है। हिमाचल प्रदेश में २७ प्रतिशत शैडयुल्ड कास्ट्स पोपुलेशन है और किसी भी सीट पर ९०० या १००० से ज्यादा वोट नहीं मिले हैं। इसलिए यह बात ध्यान में रहनी चाहिए कि उनके द्वारा डंका बजाने से महाराष्ट्र में दलित नेता शिन्दे जी नहीं बनेंगे और वे वहां जायेंगी, तो वे दलित नेता बन जायेंगी। यह बकवास है। हमको इस बात की चिन्ता नहीं है और न ही दलित इतने मूर्ख हैं। वे सब जानते हैं। उत्तर प्रदेश के मामले में टीवी पर जो स्टेटमेंट आता है, वह सारे का सारा मामला विकास से संबंधित नहीं है। वहां प्रतिद्वद्वियों से रिवेंज लेने के लिए लोकतन्त्र को तहस-नहस करने का काम किया जा रहा है। यह मैं भारतीय जनता पार्टी के लोगों से कहना चाहता हूं कि हमने कल श्री कलराज मिश्र जी का बयान पढ़ा है, राजनाथ सिंह जी का भी बयान पढ़ा है और दिल्ली के तमाम नेताओं के बयान पढ़े हैं। उसके बावजूद भी सत्ता से चिपके रहने के लिए और यह सोचकर कि भविष्य में हमें वोट मिलेंगे या नहीं, इस तरीके से लोकतन्त्र के लिए खतरा पैदा कर रहे हैं, मल्होत्रा जी, यह बहुत खतरनाक खेल है। आग से खेलने का काम मत कीजिए। …( व्यवधान)

श्री अशोक कुमार सिंह चन्देल (हमीरपुर, उ.प्र.) : कल तक आप क्या करते रहे हैं? …( व्यवधान)

श्री राम विलास पासवान:इसीलिए मैंने छोड़ दिया।…( व्यवधान)

अध्यक्ष महोदय : मैं यहा बैठा हू। मैं विषय को देखूंगा। इसके बाद राशिद अलवी जी को इजाजत देने वाला हूं।

श्री राम विलास पासवान: मैं बीजेपी के लोगों से कह रहा हूं। श्री जसवन्त सिंह पहले बीएसपी में थे और मनिस्टर रहे हैं। कल अगर इनके साथ कोई दुर्गति हो जाए, तो कोई बचाने वाला नहीं रहेगा। ९० प्रतिशत एमएलए या एमपी जिस तरह का जीवन व्यतीत कर रहे हैं, यह हमको और आपके, सबको, मालूम है। इसलिए ऐसे तत्वों को ज्यादा प्रोटैक्शन देने का काम आज मत कीजिए।

अध्यक्ष जी, मैं कहना चाहता हूं कि यह कोई पार्टी का मामला नहीं है और न ही सरकार का मामला है। यह मामला सिद्धान्त का है और भारतीय जनता पार्टी वहां की सरकार को समर्थन दे रही है। कल आप इस बात से उऋण नहीं हो पायेंगे। इसलिए आपको सोचने की जरूरत है, उनको ज्यादा सोचने की जरूरत नहीं है।

डॉ. रघुवंश प्रसाद सिंह (वैशाली):अध्यक्ष जी, उत्तर प्रदेश की स्थिति के संबंध में माननीय सदस्यों ने चिन्ता जाहिर की है। सचमुच वहां लोकतन्त्र खतरे में है। बदले की भावना से कार्रवाइयां की जा रही हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने टिप्पणी की है कि वहां कानून राज नहीं है। बरसों पहले के मामलों पर फंसाने की कोशिश की जा रही है। अगर कोर्ट हस्तक्षेप नहीं करता, तो शायद मुलायम सिंह जी और अमरसिंह जी सदन में उपस्थिति भी नहीं होते। इसलिए जो सरकार केन्द्र में है, उसकी यह जिम्मेदारी बनती है कि वह देखे, देश में लोकतन्त्र बचेगा या नहीं। इस तरह से तालमेल करके विपक्ष को रौंदेवाने का काम चलने वाला नहीं है। यह सदन मौन नहीं रहेगा, मूक नहीं रहेगा। लाखों कुर्बानियां देकर देश में लोकतन्त्र लाने का काम हुआ है। कोई भी सत्ता जनता के बल पर विपक्ष को रौंद नहीं सकती है। हम इस चुनौती का स्वीकार करते हैं।

इस तरह की लड़ाई बढ़ेगी तो आपको मुंह की खानी पड़ेगी, जनता आपको उखाड़ कर फेंक देंगी। अभी एनडीए वाले उधर बैठ कर सारी बातें सुन रहे हैं। क्या आपकी जवाबदेही नहीं बनती है। धारा ३५५ किस लिए है? वहां संविधान का उल्लंघन हो रहा है और उसकी धज्जियां उड़ायी जा रही हैं। सवाल बार-बार उठ रहे हैं।

"केशव कहीं न जात क्या कहिए, देखत सृष्टि रचना वचित्र अति समझी, मन ही मन रहिए"

इसलिए महोदय, आपको इस पर विचार करना चाहिए। आप लोकतंत्र के प्रहरी और संरक्षक हैं तथा सदन के गार्जियन हैं। इस देश में लोकतंत्र मजबूत हो, विपक्ष को रौंदा न जा सके और संविधान तथा मर्यादा की रक्षा हो, इसके लिए सदन से सवाल उठना चाहिए, सरकार को कार्रवाई करनी चाहिए, नहीं तो इनकी विदाई की तैयारी होनी चाहिए जिसे हम लोगों ने शुरु कर दिया है।

श्री शीशराम सिंह रवि (बिजनौर): बिहार में क्या हो रहा है?

डॉ. रघुवंश प्रसाद सिंह : बिहार में लोकतत्र का जन्म हुआ था - "वैशाली जन का प्रतिपालक, गण का आदि विधाता, जिसे खोजता देश आज, उस प्रजातंत्र की माता। रुको पथिक, एक क्षण मिट्टी का शीश नवाओ, राजसद्धियों की समाधि पर फूल चढ़ाते जाओ।" …( व्यवधान)

अध्यक्ष महोदय: यहां बिहार के बारे में चर्चा नहीं हो रही है।

…( व्यवधान)

अध्यक्ष महोदय: जब ठीक तरीके से चर्चा चल रही है तो आप माहौल क्यों खराब कर रहे हैं?

डॉ. विजय कुमार मल्होत्रा (दक्षिण दिल्ली):अध्यक्ष महोदय, हम लोग एक गम्भीर विषय पर चर्चा कर रहे हैं। मैं आशा करता हूं कि जिस शांति से माननीय सदस्यों ने अपनी बात कही और हमने उन्हें सुना, कृपया वे हमारी बात को भी सुन लें। हमें इस बात को बहुत गम्भीरता से लेना चाहिए कि क्या राजनीतिक प्रतिद्वंदिता के कारण किसी व्यक्ति के खिलाफ कोई कार्रवाई हो? कोई सरकार बदल जाए और उसके बदलने के बाद पहले के लोगों के खिलाफ बिना कारण कोई कार्रवाई शुरु कर दी जाए यह चल नहीं सकता और ऐसा होना भी नहीं चाहिए। देश के १४ राज्यों में आज एक पार्टी की सरकार है और कुछ राज्यों में दूसरी पार्टियों की सरकार है। मैं इस बात से सहमत हूं कि अगर ऐसा होने लग जाए और जो भी नया मुख्यमंत्री आए, वह सब के खिलाफ कार्रवाई शुरु कर दे तो देश में ऐसा चलना कठिन है। यह ठीक बात है और इसमें कोई दो राय नहीं हो सकती कि सभी बड़े नेता बैठ कर इस बारे में एक कोड ऑफ कंडक्ट बनाएं और कोई चीज तय कर लें। जैसा सोनिया जी ने भी कहा था कि - we decide our stand according to the place we are sit. अगर हम ऑपोजिशन में बैठ कर एक बात करते हैं और सत्ता में रहते दूसरी बात करते हैं तो यह ठीक नहीं है। क्या पंजाब के मुख्यमंत्री ने यह काम शुरु नहीं किया था? जिस दिन वह पंजाब के मुख्यमंत्री बने, उसी दिन उन्होंने कहा कि जितने मेरे से पहले मंत्री और ऑपोजिशन के एमएलए हुए हैं, उनके खिलाफ इनक्वायरी शुरु कर दी जाए।…( व्यवधान)मैंने आपको बोलने से रोका नहीं है।…( व्यवधान)

श्री जे.एस.बराड़ (फरीदकोट) :पंजाब में अकाली दल के मंत्री जेलों के अन्दर हैं और उनके खिलाफ मुकदमे दर्ज हुए हैं। इस मामले की पंजाब से तुलना करना बेइंसाफी होगी।

डॉ.विजय कुमार मल्होत्रा: उन्होंने पहले दिन बयान दिया कि यदि पूर्व मुख्यमंत्री बादल साहब दुनिया में कहीं भी होंगे, मैं उनको गिरफ्तार कर लूंगा। वह उनकी गिरफ्तारी का बयान रोज दे रहे थे। उस समय कांग्रेस का कोई मैम्बर क्यों नहीं बोला? मैंने उस समय भी कहा था कि अगर यह प्रक्रिया शुरु की जाएगी…( व्यवधान)

श्री जे.एस.बराड़:मुल्क में संविधान है। यदि बादल साहब ने सारे प्रदेशों में जायदाद बढ़ायी तो इसकी वहां के मुख्यमंत्री तहकीकात करेंगे, इसमें क्या बुरी बात है। …( व्यवधान)

डॉ.विजय कुमार मल्होत्रा:उन्होंने ऐसे बीसियों बार बयान दिए और इसके बाद कहा कि मैं बीजेपी के सभी मनिस्टरों को पकडूंगा। यह बात सिद्धांतत: गलत है। यदि किसी व्यक्ति के खिलाफ कोई भ्रष्टाचार का मामला है तो उसे पकड़िए या दूसरी कोई चीज है तो स्पैसफिक केस लाइए। उसे जनरलाइज करना और यह कहना कि सब के खिलाफ इनक्वायरी और टोटल वजिलैंस की इनक्वायरी करायेंगे, this is not the way of doing it. यह कौन सा तरीका है? …( व्यवधान)

अध्यक्ष महोदय: आपको जब बोलने का मौका मिलेगा तब आप बोल सकते हैं।

डॉ.विजय कुमार मल्होत्रा : जब यह बात शुरु की गई थी, मैंने उस समय भी यह कहा था और मैं फिर उसे दोहराना चाहता हूं कि जिस तरह उन्होंने पंजाब में किया, वह ठीक बात नहीं है। उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए, वह सिद्धांतत: गलत बात है, लेकिन अगर केन्द्र सरकार सभी ऑपोजिशन के खिलाफ ऐसी कार्रवाई शुरु कर दें जैसे पंजाब में की जा रही है तो कैसे लगेगा?…( व्यवधान)

श्री जे.एस.बराड़:अगर सारे देश को लूट लिया जाए तो क्या उसकी इनक्वायरी नहीं होगी?…( व्यवधान)

अध्यक्ष महोदय : बराड़ जी, आप बैठिये।

…( व्यवधान)

SHRI S. JAIPAL REDDY (MIRYALGUDA): Mr. Speaker, Sir, he is trying to divert the attention of the House and dilute the gravity of the issue. You kindly ask him to focus on this issue. If he is talking of Punjab, then we can also talk of so many other things.

MR. SPEAKER: You are right.

डॉ. विजय कुमार मल्होत्रा:अध्यक्ष महोदय, क्या यह बात सारे देश में ऐसे ही होगी? माननीय चन्द्रशेखर जी ने बात बिलकुल ठीक कही कि अगर देश में ऐसा होगा और यदि देश कानून के मुताबिक नहीं चलेगा तो क्या देश के अंदर हमें सविल वार करनी है या क्या करना है - ऐसी स्थिति पर हमें गम्भीरतापूर्वक सोचना चाहिये। क्या यहां पर नौ-नौ मन तेल की लाठियां मांजी जायेंगी, लाठियां तैयार करके सब से कहा जायेगा कि लाठी लेकर मैदान में निकल आइये, लाठी लेकर बी.जे.पी. को भगाओ, उन्हें मार डालो, इस तरह के नारे लगाये जायेंगे। क्या ४०-४० मन की लाठियां एकत्र करके कहा जायेगा कि मैदान में निकल आओ। अध्यक्ष जी, यह बात सब पर एकजैसी लागू होनी चाहिये। ऐसा न हो कि एक तरफ हम तय कर दें और दूसरी तरफ ऐसा ही चले। यहां दिल्ली में लम्बी तलवारें निकाल कर बांटी जायें और दूसरी तरफ अगर कहीं कुछ इंच के त्रिशूल बांटे जायें तो उन्हें पकड़ कर जेल में डाल दिया जाये - ये दोनों बातें एक साथ कैसे चलेंगी?…( व्यवधान)

SHRI PRIYA RANJAN DASMUNSI : Mr. Speaker, Sir, we are not discussing about Shri Praveen Togadia. We are discussing about the situation in Uttar Pradesh. … (Interruptions)

डॉ.विजय कुमार मल्होत्रा:अध्यक्ष जी, श्री सोमनाथ जी ने जो बात कही, मैं उससे सहमत हूं परन्तु मैं उनसे पूछता हूं कि २० हजार आदमियों को पुलिस की मदद से नौमिनेशन न भरने दिया जाए, नौमिनेशन न भरकर, यह कह दें कि ठीक है -, क्या इस तरह से वहां जनतंत्र चलेगा?

श्री रूपचन्द पाल (हुगली): पार्लियामेंट को इस तरह से मिसलीड नहीं करना चाहिये…( व्यवधान)

MR. SPEAKER: Shri Rupchand Pal, please take your seat.

… (Interruptions)

MR. SPEAKER: Please keep silence in the House.

… (Interruptions)

डॉ. विजय कुमार मल्होत्रा: अध्यक्ष जी, इन्होंने जो सुझाव दिया है, मैं उससे सहमत हूं कि प्रधान मंत्री जी सभी प्रमुख नेताओं की बैठक बुलाकर इस बात पर चर्चा करें कि वभिन्न राज्यों में किस प्रकार से वहां मुख्य मंत्री काम करें। इस बारे में एक कोड ऑफ कंडक्ट बना दें तो ठीक होगा।

MR. SPEAKER: A number of Members have given their names to speak on this issue, but there is a time limit. I have to go to the Question Hour also. I have given half-an-hour for this subject. Shri Rashid Alvi will be the last speaker on this issue.

SHRI H.D. DEVE GOWDA (KANAKPURA): Mr. Speaker, Sir, I want to make a submission.

MR. SPEAKER: Do you want to speak on this issue?

SHRI H.D. DEVE GOWDA : Yes.

MR. SPEAKER: All right.

SHRI E. AHAMED (MANJERI): Mr. Speaker, Sir, two of my party colleagues have been arrested under the provisions of the National Security Act. … (Interruptions)

MR. SPEAKER: I am not going to take up any other issue except the issue of cases against Shri Mulayam Singh Yadav.

… (Interruptions)

MR. SPEAKER: Nothing should go on record except what Shri Rashid Alvi says.

(Interruptions)* अध्यक्ष महोदय : मैं पूरे देश के किसी दूसरे विषय पर चर्चा करने की इजाजत नहीं दूंगा। That subject is coming up separately before the House.

… (Interruptions)

श्री राशिद अलवी (अमरोहा):अध्यक्ष जी, जिस तरह खामोशी के साथ …( व्यवधान)

SHRI E. AHAMED : Mr. Speaker, Sir, my party colleagues were participating in an anti-war demonstration, but they have been arrested under the provisions of NSA. … (Interruptions)

MR. SPEAKER: You can raise that issue under some other provision.

* Not Recorded.

   

श्री राशिद अलवी :अध्यक्ष जी, मैं बोलने से पहले दरखवास्त करूंगा कि जिस खामोशी के साथ हमने सब की बात सुनी है, उसी तरह मेरी बात भी सुनी जाये। अगर किसी को कुछ कहना है, वह मेरे बाद कह सकता है।

अध्यक्ष महोदय : अगरमैं इजाजत दूंगा तो वह कह सकेगा।

श्री राशिद अलवी : हां, अगर आप इजाजत देंगे।

अध्यक्ष महोदय : अगर आप कोई निर्णय देंगे तो मेरे लिये कठिन होगा।

श्री राशिद अलवी : अध्यक्ष जी, मैं यह पहली बार देख रहा हूं कि किसी पब्लिक मीटिंग में किसी ने क्या बोला है, उसका डिसकशन भी इस हाउस में हो रहा है। महाराष्ट्र के अंदर मायावती जी ने कहा कि दलित चीफ मनिस्टर होना चाहिये, क्या उन्हें यह कहना चाहिये कि फलां-फलां चीफ मनिस्टर होना चाहिये।

पासवान जी ने अभी कहा कि क्या रैली का डिस्कशन हाउस में हुआ करेगा। आप अपनी पार्टी में जो बोलना चाहते हैं, बोलिये, हमने लोक सभा में आकर कभी नहीं कहा कि पासवान जी ने अपनी रैली में यह बोला। क्या आपको कुछ भी बोलने की इजाजत है।

श्री राम विलास पासवान: हमने रैली की चर्चा नहीं की।

श्री राशिद अलवी : बगैर नाम लिये आपने वही कहा। रहा सवाल यू.पी. में बदले की भावना का, कहा जा रहा है कि वहां अनकांस्टीटयूशनल काम हो रहे हैं। खुद मुलायम सिंह जी ने अभी कहा कि कोई मुख्य मंत्री, कोई प्रधान मंत्री ऐसा नहीं है जो रुल को पढ़कर फैसला करता हो। इसका मतलब रूल को तोड़ा गया है, अनकांस्टीटयूशनल काम कहां से हो गया। जिस्म पर लगे हुए जख्मों को अगर छुआ जाए तो तकलीफ होती है। इस हाउस में आप देखिये, सिर्फ यू.पी. की बात आप कर रहे हैं, यहां कोई वैस्ट बंगाल की बात करता है तो उधर से लोग खड़े होकर कहते हैं कि नहीं, ऐसा नहीं हो रहा है। पंजाब की बात हो रही है तो पंजाब के लोग कहते हैं कि नहीं, वहां ऐसा हो रहा है। उत्तर प्रदेश अकेला राज्य नहीं है कि जिसके बारे में आप इस तरीके की बात करें। मेरे पास पूरी फाइल है जो यू.पी. की मुख्य मंत्री ने मुझे भेजी है। मैं डिटेल में कहना नहीं चाहता और इसलिए नहीं कहना चाहता कि जब श्री मुलायम सिंह जी ने खुद यह बात हाउस में मान ली कि रूल्स को देखकर फैसले नहीं होते, अगर आप यह उम्मीद करते हैं कि मुख्य मंत्री मायावती जी भी आंखों को बंद करके, बगैर रूल्स को देखे, बगैर नियमों को देखे, इसी तरह काम करें तो कम से कम उत्तर प्रदेश की मुख्य मंत्री ऐसा करने वाली नहीं हैं। पिछले मुख्य मंत्रियों ने क्या किया, यह वे जाने, लेकिन मैं इस हाउस को अपनी पार्टी तथा अपनी मुख्य मंत्री की तरफ से यकीन दिलाता हूं कि उत्तर प्रदेश के अंदर कोई गैरकानूनी काम नहीं होगा। शासन कोई फैसला नहीं करने वाला कि मुलायम सिंह जी को गिरफ्तार कर लिया जाए, चाहें वह तालकटोरा हाल में बड़ी-बड़ी तलवारें दिखाकर बदले की भावना का इजहार करें। जो कुछ तालकटोरा स्टेडियम में हुआ, तलवारें हाथ में लेकर क्या कुछ नहीं कहा गया। लेकिन हमें उससे कोई वास्ता नहीं है। मैं इस हाउस को यकीन दिलाता हूं कि उत्तर प्रदेश में बदले की भावना से कुछ नहीं होगा। जो अदालत फैसला करेगी, उसके फैसले के मुताबिक होगा। अदालत कहेगी कि गिरफ्तारी होनी है तो गिरफ्तारी होगी और अदालत कहेगी कि गिरफ्तारी नहीं होनी है तो गिरफ्तारी नहीं होगी। मेरे ख्याल से इससे ज्यादा डेमोक्रेटिक सिस्टम हिन्दुस्तान में कुछ नहीं हो सकता है।

इस हिन्दुस्तान में कितने पोलिटीकल लोग गिरफ्तार हुए। श्रीमती इन्दिरा गांधी से लेकर वाइको तक, क्या किसी ने जुबान निकाली। आज भी श्री वाइको बंद हैं। वहां क्या अनकांस्टीटयूशनल काम नहीं हुआ। उत्तर प्रदेश के अंदर कोई अनकांस्टीटयूशनल काम नहीं हुआ है। सिर्फ एक काम उत्तर प्रदेश में हुआ है कि ५४ सालों में पहली बार दलित की एक बेटी मजबूती के साथ राज कर रही है।…( व्यवधान)

अध्यक्ष महोदय : यह बात तो सच है कि वह दलित की बेटी है।…( व्यवधान)

श्री राशिद अलवी : मैं यह बात जरूर मानता हूं कि जब चोट लगती है, जख्म लगता है तो तकलीफ होती है। मैं इस हाउस में जख्मों पर लगे हुए खुरंट को उखाड़ना नहीं चाहता हूं, क्योंकि मैं जानता हूं कि खुरंट उखड़ेगा तो उसमें खून भी बहेगा और पीप भी बहेगी तब उस बहते हुए खून को न आप देख पायेंगे और न मैं देख पाऊंगा। बहती हुई पीप को न आप देख पायेंगे और न मैं देख पाऊंगा। लेकिन मेरे पास पूरी फाइल मौजूद है। मैं इस खुरंट को हाउस में उखाड़ना नहीं चाहता।

आखिर में मैं सिर्फ इतना कहना चाहता हूं और समाजवादी पार्टी को इस बात का यकीन दिलाना चाहता हूं कि वहां कोई अनकांस्टीटयूशनल काम नहीं होगा। कानून के विरुद्ध काम नहीं होगा। आप खौफजदा न हो, आप डरें नहीं। बेखौफी के साथ उत्तर प्रदेश के अंदर आराम से रहें। हां, जो लोग कानून तोड़ रहे हैं या जिन्होंने कानून तोड़ा है, उन्हें खौफ हो सकता है। उत्तर प्रदेश में कानून अपना काम करेगा और जो भी कोई फैसला होगा वह अदालत की मर्जी से होगा, बगैर अदालत की मर्जी के नहीं होगा।…( व्यवधान)

कुंवर अखिलेश सिंह (महाराजगंज, उ.प्र.) : अध्यक्ष महोदय, मेरी जान को खतरा है, मैंने नोटिस दिया है।…( व्यवधान)

श्री श्रीप्रकाश जायसवाल (कानपुर) : अध्यक्ष महोदय, एक दूसरा इश्यु भी है। पूरे देश में आज करोड़ों बुनकर एक्साइज डयूटी इम्पोज करने के कारण बेरोजगार हो गये हैं, करोड़ों बुनकर भूखों मर रहे हैं। उनके लिए कोई व्यवस्था नहीं है। आप उस पर व्यवस्था दीजिए।

अध्यक्ष महोदय : मेरे सामने बहुत से एडजर्नमैन्ट मोशंस थे और मैं हर एडजर्नमैन्ट मोशन के ऊपर चर्चा नहीं दे सकता।

लेकिन मुलायम सिंह जी के बारे में जो एडजर्नमेंट मोशन यहां आया है, उसके बारे में इस सदन में बात चल रही है।

...( व्यवधान)

अध्यक्ष महोदय : अखिलेश जी, आप बैठिये।

श्री प्रभुनाथ सिंह (महाराजगंज, बिहार) : इसी सवाल पर हम लोगों ने भी शून्यकाल में नोटिस दिया है। अगर चर्चा कर रहे हैं तो हमें भी समय दीजिए।…( व्यवधान)

अध्यक्ष महोदय : मैंने आपको मना तो नहीं किया है। आप बैठिये। आप ऐसे ही गुस्सा करेंगे तो मैं क्या कर सकता हूँ? इसका कोई दूसरा कारण हो तो मुझे अंदर आकर बताइए। देखिये, बात ऐसी है कि एक विषय पर अच्छी चर्चा हुई। माननीय सदस्यों ने अपना- अपना मत रखा है। बहुजन समाज पार्टी की तरफ से भी राशिद अल्वी जी ने अपना मत यहां रखा। मैं नहीं समझता हूँ कि इसके बाद इस विषय पर और चर्चा करने की ज़रूरत है, लेकिन बार-बार खैरे जी और प्रभुनाथ सिंह जी हाथ ऊपर कर रहे हैं। एक एक मिनट मैं आपको देता हूँ और यह विषय समाप्त करके मैं दूसरा विषय लूंगा। देवेगौडा जी को मैं समय जरूर दूंगा। वह अंत में बोलेंगे।

श्री चन्द्रकांत खैरे (औरंगाबाद, महाराष्ट्र) : अध्यक्ष महोदय, राजनीति में बदले की भावना से अगर कोई राज करता है तो बहुत बुरी परिस्थिति का निर्माण होता है और उत्तर प्रदेश में यह सब हो रहा है। मैं उत्तर प्रदेश का शिव सेना प्रभारी होने के नाते से १७ तारीख को वहां गया था। मैंने वहां देखा, जैसा पहले से ही मालूम था कि १३७ केसेज़ मुलायम सिंह जी पर डाले गए हैं। मैंने याद दिलाया कि इंदिरा जी के समय में जब इमरजेन्सी लागू हुई थी, उसके बाद फिर जनता पार्टी आई, जनता पार्टी की सरकार बनी और जनता पार्टी ने इंदिरा गांधी की सारी बातें करने में अपना समय गंवाया। उसके ढाई साल बाद जनता पार्टी की सरकार भी चली गई। अपने देश में यह सब चलने वाला नहीं है।

आदरणीय मल्होत्रा जी ने कहा कि इसके लिए एक संहिता बननी चाहिए और सारी पार्टियों के नेताओं को बुलाकर एक संहिता बनानी चाहिए। हमारे कानपुर के शिवसैनिक को पुलिस कस्टडी में मारा गया और ऐसे कई शिव सैनिकों पर वहां हमले होते रहे हैं। जब मैं उत्तर प्रदेश के प्रभारी के नाते रामजी के दर्शन करने अयोध्या गया था तो क्या रामजी के नाम का उद्घोष करना गलत बात है? मुलायम सिंह जी से मैं कहूंगा कि मेरे ऊपर भी एफ.आई.आर. दाखिल किया गया। यह तो बहुत बुरी बात है। हम लोग तो निपट लेंगे, हम शिव सेना वाले हैं। …( व्यवधान)यह अभी परसों की बात है। राम मंदिर की बात हम नहीं कर रहे हैं। मेरे साथ जितने शिव सैनिक थे, राज्य प्रमुख थे, उनके ऊपर एफ.आई.आर. दाखिल किया। हम लोग डरने वाले नहीं हैं। हम लोग कई केसेज़ हिन्दुत्व के लिए लेने वाले हैं। जो हिन्दू देवी-देवताओं के बारे में कहा है, उसके लिए मैंने ज़ीरो आवर में एक नोटिस दिया है। हमारे मित्र पक्ष तो लेंगे ही, अगर नहीं बोलेंगे तो मैं बोलूंगा क्योंकि हम हिन्दुत्व के पक्ष में बोलने वाले हैं। …( व्यवधान)

श्री प्रभुनाथ सिंह : अध्यक्ष महोदय, उत्तर प्रदेश हमारा पड़ोसी राज्य है। वहां की एक एक घटना की जानकारी हमें होती रहती है चूंकि वहां हमारी रिश्तेदारी वगैरह है। आदरणीय मुलायम सिंह जी और चन्द्रशेखर जी ने जिन तथ्यों को हमारे सामने रखा है, मैं उनसे अपने को संबद्ध करते हुए सिर्फ दो मिनट में अपनी बात समाप्त करना चाहता हूँ। उत्तर प्रदेश में जो कुछ हो रहा है, पहले से ही हम राजनीतिज्ञों के प्रति देश की जनता के मन में एक संशय बना हुआ है लेकिन उत्तर प्रदेश के मुख्य मंत्री के कारनामों की बदौलत आज पूरे देश में एक एक राजनीतिज्ञ शंका की निगाह से देखा जा रहा है। इतना ही नहीं, उन्होंने देवी-देवताओं के संबंध में जिस ढंग की टिप्पणी की है, उससे एक वर्ग विशेष को ठेस लगी है। अध्यक्ष महोदय, जो पोटा का कानून बना हुआ है, वह इसीलिए बना है कि जो आतंकवादी होंगे, जिनके द्वारा आतंक मचाया जाएगा, उन पर यह कानून लागू किया जाएगा। हम यह मानकर चलते हैं कि आज देश में* इसलिए इस कानून का इस्तेमाल अगर होना चाहिए, तो उन्हीं पर होना चाहिए।

श्री राशिद अलवी : क्या इस तरह की बातें कहने की इजाज़त दी जाएगी?

MR. SPEAKER: I remove that sentence from the proceedings.

श्री राशिद अलवी : क्याकैसेट्स की चर्चा होगी?…( व्यवधान)निक्सन के खिलाफ इंपीचमेंट हुआ था। …( व्यवधान)

अध्यक्ष महोदय : प्लीज़ बैठिये।

* Expunged as ordered by the Chair.

SHRI H.D. DEVE GOWDA : Hon. Speaker, Sir, the issue which has been raised by our colleague, and the former Defence Minister, Shri Mulayam Singh Yadav is not an issue of any one political party, but it is an issue to be considered by the entire House.

Sir, he was the Chief Minister of Uttar Pradesh during 1993-94. Afterwards, several Chief Ministers came to power in Uttar Pradesh, including Kumari Mayawati. Subsequently, BJP ruled this State. After a lapse of ten years, the police machinery has been used to destroy her political opponents. Sir, if it is done, the whole system will collapse. I am sorry to say this. We can quote instances after instances of the past which have happened in various States. That is not the issue. After a lapse of 10 years, taking some pretext of the rules framed changes - I do not want to question the merits and demerits - now 140 cases have been filed against Shri Mulayam Singh Yadav, after four or five Chief Ministers have come to power and gone. This clearly shows that this is to destroy Shri Mulayam Singh Yadav, who is her political opponent. There is no iota of suspicion in my mind. I do not want to attribute motives. This matter has to be looked into by the entire House. Enough is enough. We can quote several instances in the past. I would request the Prime Minister that, at least, under his Prime Ministership, this should not be done. Shri Vinay Katiyar has condemned this. He expressed his concern about the whole event. I have read it in the newspapers about filing of 140 cases against Shri Mulayam Singh Yadav.

I would request the Prime Minister to convene a meeting of the senior leaders of all political parties, and evolve a code of conduct. Political parties may come to power and go. Nobody is going to be permanent in that seat. But, at least, we must evolve a code of conduct to save our system, so that the democratic system could survive in this country.

कुमारी ममता बनर्जी:सर, मैं सभी पॉलीटिकल पार्टीज से अपील करती हूं और कहना चाहती हूं कि मैंने सब व्यूज बहुत अच्छी तरह से सुने हैं। मैं दो-चार बातें कहना चाहती हूं। मैं अपील करूंगी कि मेरी बात सभी लोग ध्यान से सुनें। यहां इस विषय पर जो आल पालीटिकल पार्टीज के लीडर्स ने डिसकस किया है, उसके अनुसार एक डिसीजन लेना जरूरी है कि हर पॉलीटिकल लीडर की भावना क्या है, हर स्टेट में लोकतंत्र को स्ट्रेंग्थन करने के लिए हमें क्या करना चाहिए। इस बारे में मल्होत्रा जी ने जो ओपीनियन दिया है, मैं उससे सहमत हूं।

यू.पी. में, राजस्थान में, पंजाब में या इस देश में जितने भी प्रदेश हैं, उन सभी में अगर किसी को कुछ कहना है, तो मैं जिस स्टेट से आती हूं, उसमें और हर स्टेट में भेद नहीं होना चाहिए। मुलायम सिंह जी के प्रति हम राजनीतिक लोगों के दिलों में बहुत इज्जत है। ऐसी इज्जत बहुत सारे लीडर्स के प्रति होती है। राजनीति में पॉलीटिकल डिफरेंसेस होते हैं, आयडियोलौजीकल डिफरेंसेस होते हैं, पॉलीटिकल आउटलुक का डिफरेंस हो सकता है, पॉलीटिकल एटीटयूड का डिफरेंस हो सकता है, लेकिन अगर कोई सोचे की मैं सत्ता में आ गई हूं इसलिए जो अपोजीशन है उसे स्टेट से निकाल दूं, जला दूं या डैमोक्रेसी को खत्म कर दूं, यह कभी नहीं चल सकता है।That is why I want Centre’s intervention in this regard, especially in my State also. What is happening there?

मैं ऑल पालिटीकल लीडर्स को अपील करती हूं कि अगर किसी स्टेट में हमारे ग्रास-रूट लेवल के चुनाव हैं, ४० प्रतिशत सीटों में कोई पार्टी पुलिस और कैडर लेकर नोमिनेशन नहीं देने देती है, फाइलिंग ऑफ नोमिनेशन नहीं करने देती है, जब कोई एस.टी. की महिला नोमिनेशन फाइल करने के लिए जाती है, मैं आपको बताना चाहती हूं कि जंगीपुर, हुगली डिस्टि्रक्ट में नेकेडली परेड किया।…( व्यवधान)नोमिनेशन नहीं देने दिया।…( व्यवधान)

SHRI RUPCHAND PAL (HOOGLY): These are false and baseless charges. She can go to any place and prove them. I challenge her. She is misleading the House. … (Interruptions)

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MR. SPEAKER: Only Kumari Mamata Banerjee’s statement is going on record.

(Interruptions)* कुमारी ममता बनर्जी:हम हाउस को मिसलीड नहीं कर रहे हैं।…( व्यवधान)हमारा यू.पी. के बारे में स्टैंड है। We will apply the same stand for West Bengal. We will apply the same stand for Maharashtra. We will apply the same stand for other States. Here they say something but wherever they are in power, they will do something else. That * Not Recorded.

double standard game should be stopped. That hypocrisy should be stopped. … (Interruptions)

SHRI RUPCHAND PAL : You have beaten the police. You should have been arrested but the West Bengal Government did not do it. … (Interruptions)

MR. SPEAKER: Please sit down.

… (Interruptions)

KUMARI MAMATA BANERJEE ): Sir, what is this? … (Interruptions)

SHRI SUDIP BANDYOPADHYAY (CALCUTTA NORTH WEST): Sir, how can he say that she should have been arrested? … (Interruptions)

MR. SPEAKER: Kumari Mamata Banerjee, please complete your statement.

KUMARI MAMATA BANERJEE : Sir, why did I raise this issue? They wanted to kill me. … (Interruptions) I was in the hospital. I was about to die. They should have realised this. … (Interruptions)अपोजिशन वाले हमेशा ही ऐसे ही करते हैं।…( व्यवधान) I was about to die. They have forgotten all these things. My full body had been choked because of them. So many times they have beaten me. They are raising the personal question. I can also raise so many personal questions. Sir, they are raising their fingers. They changed the name and father’s name. … (Interruptions) I can raise so many personal questions. … (Interruptions)

MR. SPEAKER: This is another issue. Please sit down. You can raise the issue again during the ‘Zero Hour’. I will permit you to speak during the ‘Zero Hour’.

… (Interruptions)

KUMARI MAMATA BANERJEE : Sir, I did not disturb anyone. … (Interruptions) Please allow me to speak.

MR. SPEAKER: Let her complete her statement.

… (Interruptions)

SHRI SOMNATH CHATTERJEE : Sir, I have been quietly listening to all these things. There must be some limit. We totally deny all these. … (Interruptions)

SHRI SUDIP BANDYOPADHYAY : Sir, he may deny. Let her be allowed to speak. … (Interruptions)

KUMARI MAMATA BANERJEE : Sir, I am giving you all the Press cuttings which appeared in my State’s and in the national media. The Press and the Media have written about it. All the documents are there. … (Interruptions) I am telling you that for more than 40 per cent seats, they did not allow us. … (Interruptions)

SHRI ANIL BASU (ARAMBAGH): They could not get any candidate. … (Interruptions)

MR. SPEAKER: Kumari Mamata Banerjee, you can raise the issue during the ‘Zero Hour’ again.

… (Interruptions)

KUMARI MAMATA BANERJEE : Sir, I request you to allow me to speak. … (Interruptions)

MR. SPEAKER: I have to go to the Questions now. After the Question Hour, I will permit you.

Q.No. 422. Prof. Ummareddy Venkateswarlu – Not present.

श्री श्रीप्रकाश जायसवाल:महोदय, हमें भी बोलने का मौका दिया जाए।…( व्यवधान)

अध्यक्ष महोदय : मैं आपको जीरो ऑवर में बोलने की इजाजत दूंगा।

…( व्यवधान)श्री श्रीप्रकाश जायसवाल:महोदय, पूरे देश में करोड़ों बुनकर बेरोजगार एवं भुखमरी के शिकार हो रहे हैं।…( व्यवधान)आपको हमें बोलने का मौका जरूर देना चाहिए।

अध्यक्ष महोदय : मैं आपको जीरो ऑवर में बोलने का मौका दूंगा।

श्री राम विलास पासवान: अध्यक्ष जी, इस पर व्यवस्था क्या हुई? What is your ruling on this? You heard every leader, but what is your ruling on this?

MR. SPEAKER: The Members have requested the Prime Minister to hold a meeting on the issue. It is for the Prime Minister to take a decision.

… (Interruptions)

MR. SPEAKER: All the notices have been refused.

… (Interruptions)

अध्यक्ष महोदय : आपको जरूर इजाजत दूंगा।

Dr. Baliram.