Lok Sabha Debates
Regarding Alleged Mob Lynching Across The Country. on 27 July, 2017
Sixteenth Loksabha an> Title: Regarding alleged mob lynching across the country.
श्री मल्लिकार्जुन खड़गे (गुलबर्गा) : मैडम स्पीकर, हमने आपको मॉब लिंचिंग कि विषय में नोटिस 5 जून को ही दे दिया था, कि इसे नियम 193 में लिया जाना चाहिए। उसके बाद जब वह नियम 193 में नहीं आया, तो हमने यह कोशिश की कि एडजर्नमेन्ट मोशन में रूल्स 56 और 57 के तहत इसे इस सदन में लिया जाना चाहिए। इस पर आप रेडी है, लेकिन सरकार रेडी नहीं है। यह मुझे समझ में नहीं आ रहा है।
माननीय अध्यक्ष:सरकार भी रेडी है, कोई मना नहीं है।
श्री मल्लिकार्जुन खड़गे : हमें आपसे मिलकर बड़ी खुशी हुई। हम जब आपसे मिले तब आपने कहा कि आपकी तरफ से इसमें कोई बाधा नहीं है, हम सिर्फ सरकार को समझाएं। अगर सरकार को समझ में आएगा, तो हम उसे समझाएंगे। हम सोए हुए लोगों को जगा नहीं सकते हैं।
माननीय अध्यक्ष : खड़गे जी मेरे शब्द ऐसे मत बनाकर बोलिए।
…( व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : आपने कहा था कि तुरंत कराइए।
…( व्यवधान)
श्री मल्लिकार्जुन खड़गे: ये मेरे शब्द उनके लिए हैं। सोये हुए लोगों को।
माननीय अध्यक्ष : आपने मेरे शब्द बोले कि मेरे शब्द हैं।
श्री मल्लिकार्जुन खड़गे: आपके शब्द ये कि ‘मैं डिसकसन के लिए तैयार हूं, सरकार को आप’।
माननीय अध्यक्ष : कब लगाना? सरकार भी तैयार है। कब लागाना है, यह आप तय करें।
…( व्यवधान)
श्री मल्लिकार्जुन खड़गे : सरकार नहीं मान रही है। इसीलिए मैं आपसे यही विनती करता हूं।
माननीय अध्यक्ष : मैंने केवल सरकार नहीं कहा, मैंने कहा कि सबको, और इसके लिए आज बी.ए.सी. मीटिंग भी रखी है। मैंने कहा सब लोग चर्चा के लिए जब तैयार हों, मेरी तरफ से कोई आपत्ति नहीं है।
…( व्यवधान)
श्री मल्लिकार्जुन खड़गे: इसीलिए हम विनती करते हैं।
माननीय अध्यक्ष : मेरे शब्दों का हेर-फेर मत कीजिए।
श्री मल्लिकार्जुन खड़गे: मैडम, आपके शब्दों को गोल-मोल करके कहां जाऊंगा। मुझे तो यहीं रहना है। मैं आपसे यही विनती करता हूं कि मॉब लिंचिंग का विषय एक बड़ा मुद्दा है। राज्य सभा में इस पर चर्चा हो गई है। हर पेपर में एडिटोरियल से लेकर डिबेट तक हो गया है।
माननीय अध्यक्ष : चर्चा कर लेंगे।
श्री मल्लिकार्जुन खड़गे: आप इजाजत दीजिए। आज इसको शुरू करना चाहिए। हम ससपेंशन के बारे में, मेंबर्स के रिवोकेशन के बारे में कुछ नहीं पूछने वाले हैं। आपने जो निर्णय लिया है, वह लिया है।
माननीय अध्यक्ष : ठीक है, आपको माफी भी नहीं मांगनी है। ठीक है।
श्री मल्लिकार्जुन खड़गे: हम उस बात को छोड़ देंगे।
माननीय अध्यक्ष : इसमें आप छोड़ क्या देंगे?
श्री मल्लिकार्जुन खड़गे : यह मुद्दा महत्व का है। यह जनता का मुद्दा है।
माननीय अध्यक्ष : इसमें छोड़ना क्या होता है, वह हो गया है।
…( व्यवधान)
श्री मल्लिकार्जुन खड़गे: मासूम लोगों को यहां पर मारा गया है। उनके लिए हम लड़ने के लिए तैयार थे। जिस वजह से वे ससपेंड हुए हैं। हम रिवोकेशन के बारे में आपसे कुछ नहीं पूछना चाहते है।
माननीय अध्यक्ष : इसमें पूछना क्या होता है। किसी ने न कोई माफी मांगी, न अपनी गलती स्वीकार की।
श्री मल्लिकार्जुन खड़गे: कृपया करके आप हमको चर्चा शुरू करने के लिए सहमति दीजिए।
SHRI SUDIP BANDYOPADHYAY (KOLKATA UTTAR): Madam, I think that as regards mob-lynching issue, the Government has also agreed to take part in this debate and discussion. I also agree that today at 1 pm the Business Advisory Committee (BAC) meeting has been called. It would be better that in the quickest possible time the House can run smoothly and the discussion can take place very soon.
HON. SPEAKER: Yes, as regards that I have no objection.
SHRI SUDIP BANDYOPADHYAY: So, I will approach to the Government also that in response to the appeal from the Opposition let this discussion start immediately, and if possible, it can start today itself also.
HON. SPEAKER: Sure! SHRI SUDIP BANDYOPADHYAY: We can discuss about it in the BAC meeting at 1 pm. Mob-lynching issue is the most important issue. Trinamool Congress has given their notice also, and we want to take part in the debate all out.
श्री मोहम्मद सलीम (रायगंज) : मैडम, कितनी संजीदगी से बात हो रही है। हम पिछले दो सप्ताह से एडजर्नमेंट मोशन दे रहे हैं। 50 लोगों की मॉब लिंचिंग हुई है और लोग एक दहशत के माहौल में जी रहे हैं। यदि हम सदन में चर्चा नहीं करेंगे तो कहां करेंगे। आपने बी.ए.सी. की बैठक बुलाई है। हम उसकी चर्चा यहां नहीं करेंगे। लेकिन 17 तारीख से, दो सप्ताह से हम कह रहे हैं कि लोग मर रहे हैं, मारे जा रहे हैं। हम चर्चा नहीं कर सकते, आखिर हमारे कॉन्स्टीटय़ुएंट्स हैं। इस जगह पर उलटा टप्रेचर बढ़ाया गया। इधर से कुछ बोलेते हैं, उधर से कुछ बोलते हैं। मंत्री जी को पहले दिन ही उठकर बोलना चाहिए था कि हम चर्चा के लिए तैयार हैं, किंतु मोशन कौन सा होगा।...(व्यवधान) लेकिन दो सप्ताह से हम एडजर्नमेंट मोशन दे रहे हैं आप उसे नकार रही हैं। क्या हम एडजर्नमेंट मोशन रूल बुक से निकाल देंगे। आखिर इस इश्यू पर चर्चा नहीं होंगी, जहां लोगों की जान खतरे में है। एक 16 साल का बच्चा मार दिया जा रहा है और लोग मारे जा रहे हैं।...(व्यवधान) वहां पर कोई सुनवाई नहीं होगी। ...(व्यवधान) तो हम यहां पर क्या करने आए हैं। क्या तमाशा करने आए हैं।
माननीय अध्यक्ष : प्लीज, चिल्लाइए मत।
…( व्यवधान)
श्री मोहम्मद सलीम: हमने दो सप्ताह से इंतिजार किया है। ...(व्यवधान) हमने दो सप्ताह से इंतिजार किया है।
माननीय अध्यक्ष : आप बैठिए।
…( व्यवधान)
श्री मोहम्मद सलीम : आप ... * करेंगे, क्या चाह रहे हैं?...(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : प्लीज़, आप सब बैठ जाइए।
…( व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : आप लोग बैठ जाइए। पहली बात तो यह है कि, No, you cannot challenge my ruling, and you cannot challenge the Speaker.
… (Interruptions)
HON. SPEAKER: How are you saying something like this?
… (Interruptions)
माननीय अध्यक्ष : प्लीज़आप लोग बैठ जाइए। मैं बोलने के लिए मौका दूंगी।
…( व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : मोहम्मद सलीम जी, आप भी एक बात समझिए कि मैंने एडजर्नमेंट मोशन हर बार नकारते समय चर्चा के लिए मना नहीं किया था। मोहम्मद सलीम जी, आप सीनियर हैं, समझदार है। अपनी लैंग्वेज को तैश में नहीं लाइए। मैंने एडजर्नमेंट मोशन नकारते समय, हर समय कहा था कि चर्चा के लिए मना नहीं है। आप नियम 193 में चर्चा मांगिये और जैसा सबसे पहले सप्ताह में सबका आग्रह था कि पहले किसानों पर चर्चा हो तो उस पर तुरंत एग्री किया गया था। क्योंकि उस पर आप बार-बार बोल रहे थे तो चर्चा के लिए मना नहीं है और यह भी तय हुआ कि सेशन में आप चर्चा दिया करो। मैंने कहा चर्चा दे देंगे, चर्चा नहीं देने की बात नहीं थी और इस पर भी मैंने कहा कि चर्चा होनी चाहिए। चर्चा के लिए मैंने कभी मना नहीं किया। एडजर्नमैन्ट मोशन नहीं होना चाहिए, यह भी नहीं बोला है। ऐसा बोला नहीं है कि यह नहीं होना चाहिए। मैंने सस्पेंशन ऑफ क्वैश्चन ऑवर के लिए कहा कि रहने दो। आप थोड़ी बात समझो। उसके बाद यह हो रहा है और आज मैंने इसीलिए कहा, जब कल बात आई थी कि आप इसे तुरंत लगाइये, मैंने कहा कि जिस तरीके का माहौल है, आप सब लोगों के साथ तय करो कि कब करना है। सरकार ने भी कहा था और मुझे लगता है कि आज भी वह कहेंगे, इसकी मना नहीं है, आज रखा है। मगर आप तैश में आकर इस तरीके से मत बोलो।...(व्यवधान) इसके लिए मना नहीं है। श्री अनंत कुमार जी, आप बोलिये।
...(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : बैठिये, अब क्या आप भी कुछ अलग बोलेंगे।
…( व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : ऐसा चलता है, यू डोंट वरी, वह मेरे खिलाफ कुछ नहीं कर रहे हैं।
रसायन और उर्वरक मंत्री तथा संसदीय कार्य मंत्री (श्री अनन्तकुमार):अध्यक्ष जी, जैसा माननीय खड़गे साहब ने कहा, पहले दिन से हर तरीके की चर्चा के लिए सरकार तैयार है। पिछली बार जब हम बैठे थे, सबका आग्रह था, सभी पार्टियों के सभी नेताओं का आग्रह था कि हम पहले कृषि संकट के बारे में, खेती के बारे में, किसानों के सामने जो चुनौतियां हैं, उनके बारे में चर्चा करेंगे। इसलिए आप सबकी सहमति से देर रात साढ़े दस बजे तक सारे सदन ने इसमें भाग लिया। बाद में एट्रोसिटीज के बारे में, किलिंग्स के बारे में, लिंचिंग के बारे में और जो पोलिटीकल किलिंग्स हो रही हैं, उन सारे विषयों के बारे में कई मैम्बर्स ने नियम 193 के अंदर नोटिसेज दिये हुए हैं। उसके बारे में भी मैंने बार-बार यहां खड़े होकर पूरे सदन को बताया और आपको भी निवेदन किया कि इसके बारे में भी हम पूरी चर्चा और बहस करने के लिए तैयार हैं। लेकिन जैसे एक घटना हुई, पेपर बॉल्स बनाकर आपके ऊपर फेंका गया, यह अनपार्लियामेन्ट्री है...(व्यवधान) मुझे क्षमा करो, यह अनपार्लियामेन्ट्री है। ...(व्यवधान) मैं अभी भी आपके द्वारा...(व्यवधान) पूरा सदन यानी बंदोपाध्याय जी,भर्तृहरि जी और अन्य सभी नेता यहां बैठे हुए हैं, सबकी तरफ से मैं कांग्रेस पार्टी से आग्रह करता हूं, कांग्रेस के नेताओं से आग्रह करता हूं कि इतनी गलत घटना होने के बाद इतना तो कांग्रेस पार्टी, कांग्रेस के नेताओं को सोचना और समझना चाहिए था...(व्यवधान) आप मैडम स्पीकर से क्षमा याचना करें...(व्यवधान) और मैडम स्पीकर को यह बतायें कि यह लोकतंत्र के खिलाफ था, यह सदन की परम्परा के खिलाफ था, यह घटना सर्वदा ठीक नहीं है, इसलिए हम क्षमाप्रार्थी हैं। ऐसा कहते हुए कांग्रेस के नेता आपके सामने खड़े होते केवल मात्र वह सस्पेंशन रिवोक करो, यह बात वापस लो, खड़गे साहब, यह कहने से कुछ नहीं होता...(व्यवधान)
मोहम्मद सलीम से भी मैं निवेदन करूंगा कि आप बाहर की लिंचिंग के बारे में, बाहर की वायलेंस के बारे में बात करते हो, परंतु हाउस में यह जो घटना घटी, इसके बारे में आपकी राय क्या है...(व्यवधान) क्या यह जायज है? ...(व्यवधान) यह प्रजातंत्र का मंदिर है, इस मंदिर की अध्यक्षता माननीय सभाध्यक्षा जी करती हैं, वह एक महिला हैं, क्या एक महिला के ऊपर आप पेपर फाड़कर, पेपर के गोले बनाकर फेंकोगे? अगर आप ऐसा बाहर करते तो आई.पी.सी. का सैक्शन लगता। कांग्रेस पार्टी को इतना तो समझ में आना चाहिए कि वह मैडम से क्षमा याचना करें। फिर भी मैडम ये जो चर्चा मांग रहे हैं, उस चर्चा के लिए हम तैयार हैं। बी.ए.सी. में आप समय तय करिये, हम चर्चा के लिए तैयार हैं। लेकिन ऐसे ... *हाउस में चलेगी तो वह हम बर्दाश्त नहीं करेंगे। ...(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : ... * शब्द रिकार्ड पर नहीं जायेगा, आप ... * क्यों बोलते हो।
…( व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : अब बात हो गई न तो बैठिए।
…( व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : वीरेंद्र कुमार जी, बैठिए, सब लोग बैठिए।
…( व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : चंदूमाजरा जी, बोलिए?
…( व्यवधान)