Lok Sabha Debates
Demand For Grants Of The Ministry Of Road Transport And Highways For The Year ... on 16 July, 2019
Seventeenth Loksabha > Title: Demand for grants of the Ministry of Road Transport and Highways for the year 2019-20.
माननीय अध्यक्ष : माननीय मंत्री जी ।
…(व्यवधान)
SHRI ADHIR RANJAN CHOWDHURY (BAHARAMPUR): Sir, please give me one minute.…(Interruptions)
माननीय अध्यक्ष : माननीय मंत्री जी बोलेंगे ।
…(व्यवधान)
श्री अधीर रंजन चौधरी : अध्यक्ष महोदय, आप एक मिनट मेरी बात सुन लीजिए । …(व्यवधान)
*SHRI S.C. UDASI (HAVERI): I would like to express my views on the demand for grants under the control of Ministry of Road Transport and Highways for the year 2019-20.
This is to bring to kind attention of the Government about long pending issues regarding approval of the following newly upgraded National Highways in Haveri Parliamentary Constituency in Karnataka along with status in chronological order.
The Union Minister Shri Nitin Gadkari Ji has laid Foundation Stone in the year 2018 for augmentation of NH-218 from Bijapur to Hubballi which is being grounded and also announced in Principle approval for New National Highways mentioned below.
While reviewing the progress during the meeting held with the Highway officials and the consultants, it is evaluated that, the approval for these newly upgraded National Highways is not yet accorded but still is in process and decisions and approvals are pending in the Ministry. Since already more than a year is elapsed after announcement by the Union Minister, the publics are repeatedly querying about the status and convincing reply cannot be given due to this delay. The present status of these projects, as submitted by the Consultants and the Highway officials is presented below for kind attention.
MORTH approved in principle the declaration of the Sankeshwar – Yaragatti – Munavalli – Nargund Road Junction of NH-48 (old NH 4) near Sankeshwar connecting Gokak, Yaragatti, Munavalli, Terminating at Junction with NH-52 (Old NH 218) near Nargund.
“Naragund – Belavanki- Gajendragad – Kushtaji – Tavargere – sindhanur on NH 150 ANH Division, Hubballi.
“Naragund-Gadag-Mundaragi-Itagi-Jagalur Road in the State of Karnataka “Karwar-Kaiga-Mundagod-Savanur-Gadag-Gajendraghad Road in the State of Karnataka.
As already the approval process stretched more than a year, it is time now for some action for actual implementation. It is therefore now to appeal your kind self to look in to the matter and take positive steps and to accord approval for these projects at the earliest.
Request the Government to reduce the length of approach embankment from Ranebennur side to under pass work going on at chainage 313+473 of NH-4(AH-47) near chatra village. In Haveri district, Karnataka state. As per the approved plan the length to approach embankment is now about 1000.00 mts.
Request the Government to construct one underpass of two bays of 12mts width on Hulihalli-Kunbev district road at change 305 Km in Haveri district. Further Ranebennur town APMC Mega Market is also coming up at this chainage. Everyday there will be movement of thousand of heavy vehicles, tractors, and bullock carts which will come to APMC Mega Market at this point of NH-4. Keeping in mind development within span of six to eight months and also to avoid traffic jam, accidents it is almost necessary to construct one underpass as explained above. It will give connectivity to village and also farmers to go to there fields and marketing centre.
Reconstruction of existing Vehicular Under Pass (VUP) at Chalageri Village, Haveri District (at Km.285+560) to new standards with minimum 5.5m vertical clearance and by raising the present invert level to match with the adjoining side & cross roads level for solving present water logging problem.
Construction of an Underpass at Ejarelkamapur, Devihosur Road, Haveri 335.00 km area (Near J.H. College, Haveri) of NH-4.
I earnestly request the Hon’ble Minister to include above mentioned all works on top priority at the earliest, during the current financial year 2019-20.
*श्रीमती गीताबेन वी. राठवा (छोटा उदयपुर): वर्ष 2014 से अब तक भारतीय जनता पार्टी की सरकार आने के बाद से पूरे भारत देश के सभी ग्रामीण, आदिवासी, पहाड़ी और रेगिस्तान जैसे कई विकट मार्गों को मुख्य सड़क मार्ग से जोड़ने का काम चल रहा है । आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र भाई मोदी जी और माननीया वित्त मंत्री जी के साथ गडकरी जी का भी विशेष रूप से योगदान है, देश में नेशनल हाइवे के साथ मुख्य सड़क मार्ग को प्रत्येक गांव से जोड़ने का कार्य प्रगति पर है । इसलिए मैं अपने संसदीय क्षेत्र की जनता की ओर से बहुत-बहुत आभार प्रकट करती हूं और हमारे आदिवासी क्षेत्र में भी सड़कों का कार्य चल रहा है और कहीं-कहीं पूरा भी हो चुका है । हमारे लोकसभा संसदीय आदिवासी क्षेत्र में नेशनल हाइवे नहीं है जिसकी कई वर्षों से मांग रही है । मेरा संसदीय क्षेत्र छोटा उदयपुर (वडोदरा) गुजरात राज्य का आदिवासी बहुल क्षेत्र है, पावागढ़ स्थित सिद्ध पीठ माता काली का प्रसिद्ध मंदिर और ‘स्टेचू ऑफ यूनिटी’ पर्यटन की दृष्टि से अत्यधिक महत्वपूर्ण है जिसमें देश-विदेश से टूरिस्ट यहां आ रहे हैं । वह दोनों प्रवासन स्थल है । अतः माननीय मंत्री जी से विनती है कि जनता की भारी मांग पर हमारे विस्तार को भी नेशनल हाइवे नंबर 8 से जोड़ दिया जाए ।
अंकलेश्वर नेशनल हाइवे नंबर 8 से राजपिपला तक सड़क बन रही है उसे स्टेचू ऑफ यूनिटी सरदार सरोवर होके तंखला कवाट और मध्य प्रदेश का कुक्षी नेशनल हाइवे में जोड़ दिया जाए जो कि 200 कि.मी. है । नेशनल हाइवे 8 हालोल से पावागढ़ शिवराजपुर बोडेली छोटा उदयपुर मध्य प्रदेश का अलीराजपर नेशनल हाइवे में परिवर्तन किया जाए जो कि 200 कि.मी. है । वडोदरा से पादरा सड़क बन गयी है उसमें पादरा से जम्मू तक 35 कि.मी. बाकी है उसके चौड़ीकरण का कार्य बाकी है, उसे शीघ्र पूरा किया जाए । इस रोड पर बहुत सारे बड़े उद्योगों का कार्य चल रहा है इसलिए स्थानीय लोगों और वाहनों का आवागमन ज्यादा है । ऐसी हमारी मांग के साथ-साथ सरकार का धन्यवाद करती हूं, आभार अभिनंदन करती हूं । वर्ष 2019-20 का बजट का समर्थन करती हूं । धन्यवाद ।
*श्री रतनसिंह मगनसिंह राठौड़ (पंचमहल): मैं केन्द्रीय बजट 2019-20 के लिए सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के नियंत्रणाधीन अनुदानों की मांगों पर चर्चा के अधीन विवरण सभा पटल पर रखता हूं । जब से माननीय नरेन्द्रभाई मोदी जी की सरकार बनी है, तब से राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण कार्यों में काफी तेजी आई है । इसके लिए मैं माननीय मोदी जी एवं माननीय सड़क परिवहन एवं राष्ट्रीय राजमार्ग मंत्री जी को बधाई देता हूं एवं सरकार से अपेक्षा करता हूं कि सरकार इस गति को निरंतर जारी रखेगी ।
मैं सरकार से मांग करता हूं कि राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 47 (अहमदाबाद-इंदौर हाइवे) जिस पर अहमदाबाद से गोधरा के बीच में दो टोल प्लाजा कठलाल एवं सेवालिया में होने के बावजूद भी यह राजमार्ग अहमदाबाद से गोधरा के बीच काफी जर्जर स्थिति में है । जिस पर दुर्घटना होने की काफी संभावना रहती है । मैं माननीय सड़क परिवहन एवं राष्ट्रीय राजमार्ग मंत्री जी से मांग करता हूं कि जनहित में मरम्मत करवाकर आये दिन होने वाली दुर्घटनाओं पर पूर्ण विराम लगाने का कष्ट करें । धन्यवाद ।
*श्री हेमन्त तुकाराम गोडसे (नासिक): मैं आज आदरणीय पंतप्रधान श्री नरेन्द्र मोदी जी और आदरणीय श्री नितिन गडकरी जी को धन्यवाद देना चाहता हूं कि इस साल के बजट में उन्होंने रस्तों से देश जोड़ने के लिए एक अच्छा प्रयास करने की कोशिश की है । पिछले 5 सालों मं श्री. नितिन गडकरी जी ने बहुत तेज रफ्तार से रास्ते बनाए हैं । किसी भी देश का इंफ्रास्ट्रक्चर उस देश के विकास की गति बढ़ाता है और हमें विश्वास है कि निश्चित रूप से हम नए और एक मजबूत भारत की और जा रहे हैं ।
मैं अपने क्षेत्र नासिक के बारे में कुछ बातें रखना चाहता हूं । नासिक शहर में के.के. वाघ. कॉलेज से लेकर जत्रा होटल क्रॉसिंग तक का फ्लाईओवर का काम तेज गति से हो रहा है । निश्चित रूप से इससे नासिक शहर में होने वाले अपघात कम होंगे । सिन्नर शिर्डी रस्ते को फोर लेन बनाने की भी मान्यता मिल चुकी है । उसके साथ 59 किमी. पालखी मार्ग पहली बार इतने लंबाई का होने वाला है । उसके लिए मैं माननीय गडकरी साहब को धन्यवाद देता हूं की पूरे विश्व से शिर्डी साईं बाबा के दर्शन के लिए भक्त आते हैं और उनको अधिक सुविधा मिल जाएगी ।
नासिक को लेकर जो काम धीमी गति से हो रहा है उसे गति देने का काम रस्ते एवं ट्रांसपोर्ट मंत्रालय करें यह अनुरोध करता हूं ।
- वडपे से गोंदे (99 किमी.) यह सिक्स लेन को तीन साल पहले मान्यता दी गयी है । उसका डी.पी.आर. भी बन चुका हैं सिक्स लेन की जगह भी NHAI के पास है । उस काम की शुरूआत जल्द से जल्द हो यह अपेक्षा है ।
- द्वारका से दत्त मंदिर तक राष्ट्रीय मार्ग 3 और पुराना राष्ट्रीय महामार्ग 50 इनके मिस्सिंग लेंथ है । श्री. गडकरी जी ने नासिक के एक कार्यक्रम में इस 5.9 किमी. की मिस्सिंग लेंथ को राष्ट्रीय महामार्ग का दर्जा देकर वह फ्लाईओवर बना देने की घोषणा भी की है । इस काम को भारत माला कार्यक्रम में प्रायोरिटी में समावेश करके इसे जल्द से जल्द मान्यता दे यह आशा करता हूं ।
- सिन्नर-घोटी-त्रम्बकेश्वर-जवहर-मोखाडा-पालघर इस राज्य मार्ग को वर्ग करके इसे राष्ट्रीय महामार्ग 160 की उपमा दी गयी है । इसका भी डी.पी.आर. बन चुका है । इस रास्ते पर राज्य भी काम ठीक से राष्ट्रीय महामार्ग घोषित होने की वजह से मेंटेन नहीं कर रहा है । इसलिए इसके डी.पी.आर. को मान्यता देकर इसका भी काम जल्द से जल्द शुरू होने की उम्मीद करता हूं ।
- राष्ट्रीय महामार्ग 848 नासिक-पेठ में बदलाव किया गया है । उसक धागुरगिर्नारे-महिरवनी से वार्डीवर्हे इस राज्यमार्ग 37 का वर्गीकरण राष्ट्रीय महामार्ग 848 में करने की तत्वताः मान्यता मिल गयी है । उसको भी जल्द से जल्द डी.पी.आर. बनाकर मान्यता दी जाए ।
- उसी तरह वाडीवर्हे से साकुर-शिंदे-सय्यद पिंपरी को इस राज्य मार्ग 37 को राष्ट्रीय महामार्ग में वर्ग करने का भी प्रस्ताव राजमार्ग और परिवहन मंत्रालय में आ चुका है । उसे भी राष्ट्रीय महामार्ग 848 के रूप में उन्नत किया जाए और मान्यता दी जाए । मांग क्र. 4 और 5 के माध्यम से नासिक शहर की बाहरी हिस्से में राष्ट्रीय महामार्ग 848 का रिंग रोड बन जाएगा । इसकी वजह से नासिक शहर में कोई भी भारी वाहन नहीं आने से ट्रैफिक सही होगा और नासिक शहर में प्रदूषण भी कम होगा ।
*DR. HEENA VIJAYKUMAR GAVIT (NANDURBAR): I support the Demand for Grants of the Ministry of Road, Transport and Highways, 2019-20.
The Modi 1.0 Government has been the first one amongst all the Governments since Independence which had its focus on road and infrastructure.
Roads are part of an integrated multi-model system of transport which provide crucial links to airports, railway stations, ports and other logistical hubs and act as catalyst for economic growth by playing a crucial role in supply chain management. It is the dominant mode of transportation in India.
For the development of a country, its road network must be strong and each region of the country must have road network.
Ministry of Road, Transport and Highways (MORTH) declared 2018-19 as ‘Year of Construction’ and has been making constant efforts to expand and upgrade the network of National Highway in the country as a result of which construction in kms grew @ 30 kms per day in 2018-19 as compared to 12 kms per day in 2014-15.
This was possible only because of the visionary leadership of PM Shri Modiji and the skilful leadership of Shri Nitin Gadkariji.
While Gadkariji was Minister of Road Transport in Maharashtra, he took the initiative to make roads and bridges in the state which will help in reducing the traffic jams and making road journey comfortable.
My constituency is a tribal area and this Government sanctioned of National Highways in my constituency.
Under Bharatmala project a National Highway is sanctioned which connects Dhule to Nandurbar. I request you to kindly extend this road to the region of Shahada - Dhadgaon - Molgi - Pimpalkhuta - Vadfali -Dediapada - Baroda.
The names and route mentioned hereabove are villages in Satpuda ranges and this area is inhabited by tribals. This road will increase the connectivity and will lead in development of this tribal district which is also an aspirational district.
I also like to request you to kindly sanction Ankaleshwar-Burhanpur road as National Highway since this is a long standing demand of my region. It passes through four blocks of my constituency and the only road which connects Gujrat and Madhya Pradesh with Maharashtra. It is most important road for my constituency and also for Raver, Burhanpur, Bharuch constituencies.
I also like to request you to kindly sanction a four-lane bypass road for Nandurbar city as the National Highway which passes through Nandurbar city is also very busy and has the traffic of more than 15,000/- vehicles.
The biggest problem that we are facing today is traffic of heavy vehicles from the city and daily accidents are taking place. Unfortunately, many people died on this road due to RTAs (Road Traffic Accidents) and those amongst deceased are mostly youngsters, women and college students who ride bike and two wheelers. Therefore, it is my humble request to kindly consider this demand.
The roads which are sanctioned as National Highways during the Modi 1.0 Government in my constituency are today waiting for the approval of SFC meeting so that the road construction can be started. These roads include –
1. Shevali - Nandurbar - Taloda - Ankaleshwar National Highway
2. Visarwadi - Kalamba
3. Kalamba - Kolde
4. Sakri - Pimpalner Satana All these above mentioned roads are already declared, sanctioned but due to non-inclusion of these roads in the earlier SFCs, the Highway work is still pending. I sincerely request the Government to kindly look into this matter and consider these roads during next SFC.
The Surat-Amravati National Highway work was started three years back and the work was allotted to IL&FS company. From last one year, the construction work is stopped since the IL&FS company has gone bankrupt. The condition of the road is very bad - half is constructed and half is left. In rainy season, there is water logging in the potholes because of which accidents are taking place. I request the Government to kindly solve this issue at the earliest and kindly ensure that potholes are repaired at least till the work is allotted to some other company.
I also request that kindly sanction roads under Central Road Funds (CRF) scheme in my constituency so that we have good connectivity in Nandurbar constituency.
With these words, I once again congratulate the Minister and Government and support this Budget.
*DR. SUBHASH RAMRAO BHAMRE (DHULE): Road transport is vital to India’s economy. Road transport has gained its importance over the year despite significant barriers and inefficiencies in inter-state freight and passenger movement compared to railways and air. Road network in India is critical to the country’s development, social integration and security needs of the country. Indian road network is administered by various government authorities. India has one of the largest road network of over 54.83 lakh km.comprising of National highways, Expressways, State Highways, Major District Roads, other District Roads and Village Roads. Road sector, mainly National Highways and Transport Sector are the responsibility of the Ministry of Road Transport and Highways. The following announcements were made in the budget in this regard:
· Comprehensive restructuring of National Highways Programme to ensure creation of National Highways Grid of desirable capacity. · The total expenditure on the Ministry of Road Transport and Highways for 2019-20 is estimated at Rs.83,016 crore. This is 6% higher than the revised estimates for 2018-19. In 2019-20, while revenue expenditure of the Ministry is estimated at Rs.10,957 crore, capital expenditure is estimated at Rs.72,059 crore. In 2014-15, the ratio between revenue and capital expenditure was 50:50. In 2015-16, this ratio changed, with the Ministry spending more funds on capital expenditure. Since then, the Ministry has increased its capital expenditure significantly. In 2019-20, 87% of the Ministry’s spending is estimated to be on capital expenditure. · Also, for resource mobilization for infrastructure sector, it has been proposed to increase special additional excise duty and road and infrastructure cess each by one rupee a litre on petrol and diesel. This will generate more funds for infrastructure investment. A calculation provided by ICRA Ratings suggest that with this, the total Road and Infrastructure Cess is estimated to increase to Rs.1.27 lakh crore in 2019-20 from Rs.1.13 lakh crore in 2018-19, an increase of 12.4%. · NHAI is also expected to raise equity by monetizing more assets through toll-operate-transfer and Infrastructure Investment Trust routes (by transferring mature assets to SPVs). · This financial year, allocation has been made to the NHAI for major works under the Bharatmala Pariyojana, entrusted to the organization for execution. The money will come from the Central Road Infrastructure Fund (CRIF), Permanent Bridges Fee Fund (PBFF), and Monetization of National Highways Fund (MNHF). · The ambitious programme of Bharatmala would help develop national road corridors and highways and these initiatives will improve logistics tremendously, reduce cost of transportation and increase the competitiveness of domestically produced goods. The Ministry has done following works:
· In FY 2017-18, the Government built 9,829 km; 8,231 km in FY 2016-17; 6,061 km in FY 2015-16; and 4,410 km in FY 2014-15.
· Government is actively addressing policy issues that hinder highway development. It has streamlined the exist policy which will enable developers to invest in new projects, land acquisition has been expedited, and one-time fund infusion scheme has been introduced which aids in resurrecting languishing projects.
· NDA Government did not lack ambition as was evident when the road construction target of 45 km per day was set for the current financial year, from 27 km achieved per day in 2017-18. The average rate of highway construction was also raised from 14 km per day, with the pace of land acquisition improving.
· In the process, the Government has revived the highway sector, which was reeling under stress and lack of private investment. The road ministry under Nitin Gadkari took a raft of measures including terminating projects, de-risking them and introducing the hybrid annuity model (HAM), wherein the government provided 40% of the project cost to the developer to start work, while the remaining investment has to be made by the developer.
· The government has also set ambitious plans, such as the Sagarmala (ports) and Bharatmala (roads), to improve its transport infrastructure. While the total investment for the Bharatmala project was pegged at Rs.10 trillion – the largest ever outlay for a government road construction scheme-the country has envisaged Rs.8 trillion of investment until 2035 under the Sagarmala Programme.
*श्री संजय सेठ (राँची): देश के सामाजिक-आर्थिक विकास में राष्ट्रीय राजमार्ग की महत्वपूर्ण भूमिका है । माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में एनडीए सरकार ने पहले दिन से ही बुनियादी ढांचे को बढ़ावा दिया है । पिछले पांच साल में चाहे रेलवे हो, सड़क हो या शिपिंग, सरकार संपर्क बढ़ाने के लिए बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने में लगी है । अपने 5 साल के कार्यकाल में एनडीए सरकार ने लगभग 33,361 किमी. के राजमार्ग बनाए हैं । पिछले दिसम्बर के दौरान 31.87 किमी. प्रतिदिन दर से राजमार्ग बनाने का रिकॉर्ड बनाया गया है । 2014-2019 के कार्यकाल मंप माननीय मंत्री जी द्वारा किए गए कार्य सड़क परिवहन राजमार्ग मंत्रालय के लिए निश्चित ही मील का पत्थर साबित होंगे ।
चूंकि 2019 में भी सरकार द्वारा निर्देशित व प्रस्तावित भिन्न-भिन्न योजनाओं को मूर्त रूप दिया जाना है । इस हेतु मैं सरकार का ध्यान मेरे संसदीय क्षेत्र रांची से जुड़े निम्नलिखित राजमार्ग की ओर आकृष्ट करना चाहता हूं जिससे क्षेत्र के औद्योगिक एवं व्यवसायिक विकास को बढ़ावा मिल सके ।
- भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचआई) के द्वारा एनएच 75 पर रांची से कुडू तक का फोर लेनिंग का कार्य 70 प्रतिशत पूरा हो गया है । अधूरे कार्य को भी जल्द से जल्द पूरा किया जाए । कुडू से लातेहार, लातेहार से पद्वामोड़, मद्वामोड़ से गढ़वा एवं गढ़वा से विढंमगंज तक फोर लेनिंग बनाने की कृपा की जाए ।
- एनएच 75 झारखण्ड को बिहार, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, ओडिशा एवं पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश एवं ओडिशा को सड़क मार्ग से जोड़ती है । अतः आग्रह है कि राष्ट्रीय राजमार्ग-75 के महत्व को देखते हुए जनहित में इसे चारपथीय सड़क (फोर लेन) बनाने की महती कृपा की जाये ।
- रांची शहर में हेहल से जाकिर हुसैन पार्क तक एलिवेटेड रोड का निर्माण किया जाए । - झारखण्ड में राष्ट्रीय राजमार्ग-33 को चार लेन मार्ग बनाने की प्रक्रिया के कार्य में तेजी लाई जाए ।
अतः आशा है कि झारखण्ड के सर्वांगीण विकास को गति प्रदान करने हेतु उपरोक्त प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान करेंगे ।
*श्रीमती शारदा अनिल पटेल (महेसाणा): मुझे बोलने का समय नहीं मिला इसलिए मैं निम्नलिखित विचार आपकी इजाजत ले कर रख रही हूं ।
माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने देश की बागडोर थामते ही इंफ्रांस्ट्रक्चर को सशक्त बनाने का बीड़ा उठा लिया था । सड़क, राजमार्ग, जलमार्ग, वायुमार्ग से जुड़ी परियोजनाओं से लेकर आवास योजना तक में सरकार ने जा तेजी दिखायी है वह एक सक्षम एवं समर्थ भारत का भरोसा देती है । इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास का सबसे ताजा उदाहरण 2 किलोमीटर लंबा जोजिला टनल है जिसका प्रधानमंत्री जी ने शिलान्यास किया था ।
3100 मीटर की ऊंचाई पर बनने वाली सुरंग से श्रीनगर-कारगिल एवं लेह-लद्दाख के बीच हर मौसम में संपर्क बना रहेगा जो अच्छी सड़कें, अच्छे इंफ्रास्ट्रक्चर का उदाहरण होती हैं । मोदी जी और उनकी सरकार का हाइवे के निर्माण पर शुरू से ही जोर रहा है । यह इससे पता चलता है कि 2013-14 में यूपीए सरकार के सड़कों के निर्माण का बजट जहां 32,483 करोड़ रुपए था वो मोदी सरकार में 2017-18 में बढ़कर 1,16,324 करोड़ रुपए हो गया ।
2013-14 के दौरान राजमार्गों के निर्माण की गति 12 किलोमीटर प्रतिदिन थी जबकि 2017-18 में 27 किलोमीटर प्रतिदिन हो गयी ।
नक्सल प्रभावित ऐसी जगहों पर सड़कें बनायीं जा रही हैं जहां अभी तक किसी की भी जाने की हिम्मत नहीं होती थी । भारतमाला 2 के तहत राज्यों के राजमार्गों के विकास पर फोकस किया जा रहा है । प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत अगले 5 सालों में 1,25,000 किलोमीटर सड़कों के विस्तार एवं विकास का लक्ष्य तय किया जाना विकास के प्रति मोदी जी की दृढ़ता को दिखाता है ।
मैं अपनी तरफ से सरकार से दो बातों पर ध्यान देने तथा विचार करने का अनुरोध करती हूं ।
1. निर्माण की टेक्नोलॉजी ऐसी हो जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर सृजित हों ।
2. राजमार्गों पर वाहन चालकों के लिए सस्ते, सुव्यवस्थित विश्रामगृह बनाए जाए इससे सड़क दुर्घटनाओं में उल्लेखनीय कमी हो सकती है ।
*श्री जनार्दन सिंह सिग्रीवाल (महाराजगंज): मैं सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के अनुदानों की मांगों का समर्थन करते हुए अपने संसदीय क्षेत्र महाराजगंज बिहार से संबंधित कुछ सड़कों को राष्ट्रीय राजमार्ग में जोड़ते हुए, उनके शीघ्र निर्माण कराने हेतु आवश्यक कार्रवाई करने का आग्रह करता हूं:-
1. पथ-सीवान से पैगम्बरपुर तक के सड़क को राष्ट्रीय राजमार्ग करते हुए, इसका निर्माण शीघ्र कराने का कष्ट करेंगे ।
2. मांझी से बरौली पथ को राष्ट्रीय राजमार्ग करते हुए, इसका निर्माण जनहित में शीघ्र कराने का कष्ट करेंगे ।
3. ताजपुर से एकमा होते हुए मशरक तक के सड़क को राष्ट्रीय राजमार्ग करते हुए, उसका निर्माण शीघ्र कराने का कष्ट करेंगे ।
4. तरैया से पानापुर होते हुए सतजोड़ा तक के सड़क को राष्ट्रीय राजमार्ग का दर्जा देते हुए, शीघ्र निर्माण कराने का कष्ट करेंगे ।
5. राष्ट्रीय राजमार्ग सं. 101 (पुराना नं.) के घटिया कार्य को उच्च स्तरीय टीम द्वारा जांच कराकर संबंधित संवेदक + अभियंताओं के ऊपर कठोर कार्रवाई करने का कष्ट करेंगे ।
*श्री विष्णु दयाल राम (पलामू): मैं वर्ष 2019-20 के लिए सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय संबंधी अनुदान मांगों पर अपने विचार व्यक्त करना चाहता हूं ।
भारत में विश्व का सबसे बड़ा सड़क नेटवर्क है । राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच), एक्सप्रेसवे, राज्य राजमार्ग (एसएच), जिला सड़कें, पीडब्ल्यूडी सड़कें और प्रोजेक्ट सड़कें शामिल हैं । भारत में 60 प्रतिशत से अधिक वस्तुओं को लाने-जाने के लिए सड़कों का इस्तेमाल किया जाता है, जबकि 85 प्रतिशत यात्री परिवहन के लिए भी सड़कों का इस्तेमाल किया जाता है । सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय सड़क परिवहन और परिवहन अनुसंधान संबंधी नीतियों को बनाती और प्रबंधित करती है । मंत्रालय राष्ट्रीय राजमार्गों (एनएच) के निर्माण और रखरखाव में भी शामिल है । वह सड़क परिवहन से जुड़े मामलों जैसे प्रमुख केन्द्रीय कानून, मोटरवाहन एक्ट, 1988 का कार्यान्वयन के संबंध में भी कार्य करता है । तेज और समावेशी विकास वाली मेरी सरकार ने पहले बजट में देश के आधारभूत ढांचे को मजबूत करने के लिए 100 ट्रिलियन रुपए निवेश करने का ऐलान किया । इसके तहत केन्द्र सरकार का सबसे ज्यादा जोर सड़कों और मेट्रो का जाल बिछाने और रेल नेटवर्क को दुरूस्त करने पर है ।
लोकसभा में वर्ष 2019 के लिए बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण जी ने कहा कि भारतमाला के दूसरे चरण में राज्यों को राज्यस्तरीय सड़कों के विकास के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा । राष्ट्रीय गैस ग्रिड, जल ग्रिड, सूचना-मार्ग और हवाई अड्डों के विकास के लिए खाका तैयार किया जाएगा । उन्होंने कहा की चार सालों में गंगा में माल परिवहन में चार गुने वृद्धि होगी । भारतमाला, सागरमाला और उड़ान जैसी योजनाएं ग्रामीण-शहरी क्षेत्र के बीच के अंतर को पाटने का काम कर रही हैं और परिवहन बुनियादी ढांचे में सुधार कर रही हैं । भारतमाला परियोजना से राज्यों को रोडवेज विकसित करने में मदद मिलेगी । देश में 657 किलोमीटर मेट्रो रेल नेटवर्क परिचालन में आ गया है और 300 किलोमीटर नई मेट्रो लाइन को मंजूरी दी गई है और इलैक्ट्रिक वाहनों में विशेष छूट भी दी गई है । प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना को 80,250 करोड़ प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना चरण तीन के तहत 80,250 करोड़ रूपये की लागत से 1.25 लाख किलोमीटर सड़क को उन्नत बनाया जाएगा । सरकार नेशनल हाइवे प्रोग्राम को पुर्नगठित करेगी ताकि नेशनल हाइवे ग्रीड को उसकी क्षमता के मुताबिक बनाया जा सके । सरकार ने पहले ही एक अप्रैल को 10,000 करोड़ रूपये की फेम-दो योजना को मंजूरी दे दी है । इसके तहत उचित प्रोत्साहनों और चार्जिंग ढांचा उपलब्ध कराकर बिजली चालित वाहनों (ईवी) का चलन तेजी से बढ़ाया जा सकेगा । भारत वर्तमान वित्तीय वर्ष में 3 ट्रिलयन अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बन जाएगा । यही नहीं आने वाले कुछ वर्षों में यह 5 ट्रालियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बन जाएगा । बजट में पूरा जोर भारत आधारभूत ढांचे के विकास और जॉब पैदा करने पर रहा । राष्ट्रीय राजमार्ग कार्यक्रम का वृहद पुनर्गठन किया जाएगा । इससे एक वांछित क्षमता के राष्ट्रीय राजमार्ग ग्रिड का सृजन सुनिश्चित हो सकेगा । प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, औद्योगिक गलियारे, समर्पित भाड़ा गलियारे और भारतमाला परियोजना के तहत सड़कों को दुरूस्त किया गया है । सरकार राष्ट्रीय राजमार्गों के विकास और रखरखाव के लिए जिम्मेदार है और एनएचआई के जरिए इन कार्यों को करती है । राष्ट्रीय राजमार्ग कुछ सड़क नेटवर्क का 2 प्रतिशत हैं, लेकिन कुल सड़क यातायात का 40 प्रतिशत भार उठाते हैं । एनएचएआई के व्यय में राष्ट्रीय राजमार्ग विकास प्रोजेक्ट (एनएचडीपी) के अंतर्गत आने वाले प्रॉजेक्ट्स का वित्त पोषण शामिल है । एनएचडीपी के अंतर्गत आने वाले प्रॉजेक्ट्स में निम्नलिखित शामिल हैं : 1. स्वर्ण चतुर्भुज (गोल्डन क्वाड्रिलेटरल), 2. उत्तर-दक्षिण और पूर्व-पश्चिम कॉरिडोर, और 3. चरण -III के अंतर्गत आने वाले 12109 किलोमीटर राजमार्ग की फोर-लेनिंग ।
मैं अपने संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत पड़ने वाली सड़कों की स्थिति का जिक्र करना चाहूंगा । एन.एच.75 जो मेरे क्षेत्र में पडवा मोड़ से लेकर विढ़मगंज तक जाती है कि स्थिति अत्यंत जर्जर है हालांकि इसे बने हुए मात्र दो वर्ष हुए हैं । उपरोक्त परिस्थिति में मेरा अनुरोध है कि इसकी मरम्मती की अतिशीघ्र व्यवस्था की जाए ।
इसी तरह गढ़वा बाईपास का भी उल्लेख करना चाहूंगा । इस सड़क की स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है । टेंडर भी निकल चुका है परन्तु पैसे के अभाव में कार्य प्रारंभ नहीं हो पा रहा है, अतः अनुरोध है कि इसका शीघ्र निर्माण प्रारंभ कराया जाए ।
एन.एच.98 में सिलदाग से हरिहरगंज तक फोर लेन सड़क निर्माण प्रक्रिया के अंतर्गत अधिगृहित की गई जमीन एवं मकानों के मुआवजा का भुगतान किया जाए । विदित है कि उक्त प्रोजेक्ट को भारत माला प्रोजेक्ट/योजना से अलग कर दिया गया है जिसके चलते उपरोक्त परेशानियों ग्रामीणों को झेलनी पड़ रही है और एन.एच.98 के फोन लेन निर्माण की कार्यवाई बंद पड़ गई है । उक्त परिस्थिति में ग्रामीणों की परेशानियों को एवं प्रोजेक्ट की महत्ता को समझते हुए इसे भारत माला प्रोजेक्ट से अलग नहीं किया जाए एवं इसका शीघ्र निर्माण कार्य शुरू कराया जाए ।
उल्लेखनीय है कि यह अकेली वैकल्पिक सड़क है जो बिहार, यूपी एवं अन्य प्रांतों को झारखंड की राजधानी रांची तथा अन्य जिलों यथा लातेहार, एवं पलामू को जोड़ती है ।
अंत में, मैं सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय संबंधी मांग का अनुमोदन करते हुए अपनी बात को समाप्त करता हूं । धन्यवाद, जयहिन्द ।
*डॉ. भारतीबेन डी. श्याल (भावनगर): सड़क निर्माण देश के विकास में अहम भूमिका निभाता है, यदि मार्ग अच्छा है तो व्यापार और रोजगार के साधन बढ़ेगे, आज देश में हाईवे का जाल चारों तरफ फैल गया है । जहां भी जाओ राजमार्गों पर निर्माण कार्य लगा हुआ है, इस देश के नागरिकों ने इतनी अच्छी सड़कों की कल्पना कभी नहीं की होगी । वर्ष 2014 से देश के राजमार्ग निर्माण में जिस तरह की ऐतिहासिक गति आई है, इसके लिए मैं माननीय प्रधानमंत्री जी और माननीय नितिन गडकरी जी को बधाई देती हूं ।
आज से पांच वर्ष पूर्व सड़क परिवहन मंत्रालय का नाम सुना था लेकिन राजमार्ग निर्माण का कार्य बहुत ही कम देखने को मिलता था । मुझे खुशी है कि आज हमारा सड़क मार्ग दुनिया के बड़े राजमार्ग नेटवर्क में शामिल है, जिस गति से हमारी सरकार ने सड़क निर्माण करवाए हैं वह अभूतपूर्व है, इससे देश विकास की ओर बढ़ रहा है । मैं माननीय मंत्री जी की आभारी हूं कि उन्होंने मेरे संसदीय क्षेत्र भावनगर में 6 राजमार्ग स्वीकृत किए जिसमें से 1. भावनगर-वेरावल-सोमनाथ, 2. भावनगर-राजकोट, 3. भावनगर- अहमदाबाद तथा 4. तलाजा-पालीताना मार्ग निर्माणाधीन है एवं 5. भावनगर-कोलियाक, 6. अहमदाबाद-बोटाद-ढेसा अभी टेण्डरिंग व्यवस्था में हैं ।
मैं केन्द्र के साथ-साथ हमारी गुजरात सरकार को भी धन्यवाद देती हूं जिन्होंने भावनगर के घोघा बन्दर से दहेज रो-रो फेरी (जलमार्ग) का निर्माण करवाया है, भावनगर से सूरत या मुम्बई जाने के लिए लगभग क्रमशः 450-600 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता है, यदि सरकार भावनगर के घोघा पोर्ट से समुद्री मार्ग (वाटरवे) का निर्माण सूरत और मुम्बई के लिए करवा दे तो यह दूरी मात्र 35 किलोमीटर हो जाएगी, इस क्षेत्र में व्यापार और रोजगार के अवसर बढ़ जाएंगे, समय और धन की बचत होगी इसके साथ ही वाटरवे से देश की सीमा की ओर के पानी का सदुपयोग भी हो सकेगा ।
मेरा माननीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री जी से अनुरोध है कि पूरे देश में राजमार्ग निर्माण का कार्य काफी तीव्र गति से हो रहा है लेकिन मेरे संसदीय क्षेत्र अंतर्गत भावनगर से सोमनाथ के लिए राजमार्ग निर्माण का कार्य काफी धीमी चल रहा है, इसके लिए मेरा अनुरोध है कि इस राजमार्ग के जल्द निर्माण के लिए संबंधित कंपनी को आवश्यक निर्देश दिया जाए ।
धन्यवाद ।
*श्री सुनील कुमार सिंह (चतरा): मैं सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के 2019-2020 अनुदानों की मांग का समर्थन करते हुये अपनी बात रखना चाहता हूं । हमारी सरकार ने बजट में सड़कों के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग कार्यक्रम का बड़े स्तर पर पुनर्गठन करने की कार्ययोजना पेश की है । इससे एक राष्ट्रीय राजमार्ग ग्रिड का निर्माण होगा, जो देश के अलग-अलग हिस्सों को जोड़ेगा । सरकार ने बजट में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत 80,250 करोड़ की लागत से 1.25 लाख किलोमीटर सड़कें बनाने का लक्ष्य रखा है । भारतमाला परियोजना से राज्यों को रोडवेज विकसित करने में मदद मिलेगी । सरकार ने बजट में इलेक्ट्रिक वाहनों को लोगों के लिए किफायती बनाने के लिए जीएसटी 12 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत कर दी है । इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने पर लिए गए लोन पर चुकाए जाने वाले ब्याज पर 1.5 लाख की अतिरिक्त इनकम टैक्स छूट भी दी जाएगी । सड़क क्षेत्र में निजी निवेश को बढ़ाया जायेगा । सड़क के निर्माण की गति का लक्ष्य 40 किलोमीटर प्रतिदिन रखा गया है, जो वर्तमान में 32 किलोमीटर प्रतिदिन है । इस लक्ष्य को सरकार माननीय श्री नितिन गडकरी जी के प्रयासों से अवश्य पूरा करेगी ।
मेरा लोक सभा क्षेत्र चतरा भौगोलिक दृष्टि से अत्यन्त विस्तृत एवं दुर्गम क्षेत्र है । यह क्षेत्रफल की दृष्टि से सिर्फ झारखंड राज्य ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी महत्वपूर्ण स्थान रखता है । इस लोकसभा क्षेत्र में चतरा और लातेहार जिला के साथ पलामू जिला का पांकी विधान सभा क्षेत्र भी आता है । इस क्षेत्र के विकास की दृष्टि से पथों की संरचना, उनका उन्नयन, संवर्द्धन, सुदृढ़ीकरण और राज्य स्तरीय और अंतर्राज्यीय जुड़ाव अत्यंत आवश्यक है । भारत सरकार ने पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्रों को जोड़ने वाले पथों को प्राथमिकता देने के साथ ही वामपंथी उग्रवाद (एलडब्लयूई) प्रभावित क्षेत्रों में भी सड़क नेटवर्क के उन्नयन को प्रमुखता दी है ।
श्री नितिन गडकरी जी, माननीय केन्द्रीय मंत्री, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा लोक सभा क्षेत्र चतरा में सड़कों के निर्माण के लिए बहुत सराहनीय कार्य किया गया है । मेरे लोकसभा क्षेत्र में राष्ट्रीय उच्च पथों की घोषणा, पुलों का निर्माण, नए राष्ट्रीय उच्च पथों की सैद्धांतिक मंजूरी आदि कार्य हुए हैं जिनमें • दुबियाखांड (एन.एच.75) से बेतला, गारू, महुआडांड, कुसुमी, राजपुर, अंबिकापुर (छत्तीसगढ़) नए एनएच को मंजूरी ।
• घाघरा-बिसनपुर-नेतरहाट-महुआडांड, नए एनएच को मंजूरी । • जसपुर-गोविंदपुर-डुमरी-महुआडांड़ नए एनएच को मंजूरी । • डाल्टेनगंज (एन.एच.75) - सगालिम-तरहसी-मनातु - चक - रानीगंज - इमामगंज - शेरघाटी (एन.एच.2 बिहार) नए एनएच घोषित । • बगरा (एन.एच.22) - लावालौंग-रामपुर रिमी द्वारिका पांकी - सगालिम - लेस्लीगंज नए एनएच घोषित । • चतरा (एन.एच.99) - ईटखोरी-चौपारन (एन.एच.2) नए एनएच घोषित । • जीहू (एन.एच.22) - ईटखोरी नए एनएच घोषित । • पांकी - हेरहंज - बालूमाथ तक विस्तार नए एनएच घोषित । • डाल्टेनगंज (एन.एच.75) - पांडेपुरा - रानीगंज- इमामगंज- डुमरिया- बेला- सुल्तान घाटी एनएच 39 नए एनएच घोषित । • एनएच22 पर 4 पुलों का निर्माण (जबड़ा ओर गोनिया) तथा एनएच 522 पीरी में पुल का निर्माण • एनएच 22 पर 2 पुलों का निर्माण (संघरी घाटी) तथा एनएच 22 पर 3 पुलों का निर्माण (हंटरगंज में) तथा एनएच 39 पर 3 पुलों का निर्माण (उदयपुरा एवं लातेहार में) तथा एनएच39 पर 2 पुलों का निर्माण (दोमुहान एवं लातेहार में) तथा एनएच22 पर 3 पुलों का निर्माण तथा एनएच 22 पर जोरी से लमटा वाया चतरा तक सड़क का पुर्ननिर्माण एवं पुलिया का निर्माण तथा एनएच 39 में दुरंगी नाला पर नए पुल का निर्माण आदि प्रमुख है ।
उपरोक्त वर्णित परियोजनाओं पर कार्य बहुत धीमी गति से हो रहा है । निर्धारित समय सीमा पर काम पूर्ण नहीं हो रहा है । इसलिए आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी से आग्रह है कि मेरे लोक सभा क्षेत्र में घोषित एन.एच. सड़क परियोजनाओं को ससमय पूर्ण करने की दिशा में ठोस कार्यवाही की जाये ।
साथ ही मेरे लोक सभा क्षेत्र के लातेहार जिला में एन.एच.75 पर भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एन.एच.ए.आई.) द्वारा बाईपास प्रस्तावित है । प्रस्तावित बाइपास रोड औरंगा नदी, खीखीर नदी और माला नदी पड़ती है । उपायुक्त लातेहार द्वारा दिनांक 09.02.2015 तथा मेरे द्वारा भी दिनांक 2.04.2016 को परियोजना निदेशक, एन.एच.ए.आई. रांची को पत्र लिखा गया था । वैकल्पिक प्रस्ताव के अनुसार एन.एच.75 पर कीनामाड से होटबाग तक बाईपास का निर्माण कराया जा सकता है । इसमें कोई बड़ी नदी और रेलवे लाईन नहीं पड़ रही है । अतः मेरा आपके माध्यम से केन्द्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री जी से आग्रह है कि लातेहार में बाईपास निर्माण के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान कर निर्माण कार्य प्रारंभ किया जाये ।
इसके साथ-साथ चतरा जिला मुख्यालय पर भी एक बाईपास के निर्माण की आवश्यकता है जिसकी स्वीकृति भी प्रदान की जाये ।
इसके अलावा माननीय मुख्यमंत्री, झारखंड सरकार, के पत्र दिनांक 06.08.2015 द्वारा राज्य की ओर से भेजे गये प्रस्तावों में रांची रिंग रोड रातू- ठाकुरगांव - पिपरवार-टण्डवा-सिमरिया पथ के निर्माण की अनुशंसा की गई थी । परन्तु इसके रूट में बदलाव कर बिजुपारा-खेलारी-टंडवा-सिमरिया मार्ग लम्बाई 101 कि.मी. स्वीकृति किया गया है । इस संबंध में आपको तथ्यों से अवगत करवाते हुये आग्रह होगा कि इस रूट में बदलाव नहीं किया जाये । नये प्रस्तावित पथ बिजुपारा-खेलारी-टंडवा-करेडारी पहले से ही एन.टी.पी.सी. के माध्यम से हजारीबाग तक बनाया जा रहा है । पूर्व में भेज गये रांची रिंग रोड रातू- ठाकुरगांव- पिपरवार- टण्डवा- सिमरिया पथ के निर्माण से दो लोकसभा क्षेत्रों रांची व चतरा को लाभ मिलेगा । केन्द्र सरकार की नीति के अनुसार ऐसे पथ जिनमें राज्यों की राजधानी व देश की राजधानी से नजदीक रूट तय होता है, उसे प्राथमिकता देना है । इसलिए इस पथ के निर्माण से रांची की दूरी दिल्ली व अन्य राज्यों की राजधानियों से कम हो जायेगी । आपको अवगत करवाना है चतरा में स्टील प्लांट का निर्माण प्रस्तावित हैं । चतरा एवं टण्डवा एक औद्योगिक शहर के रूप में विकसित होने वाला है । इस दृष्टि से भी इस रोड़ का निर्माण आवश्यक हैं । अतः मेरा आग्रह है कि रांची रिंग रोड़ रातू- ठाकुरगांव- पिपरवार- टण्डवा- सिमरिया पथ के रूट में कोई बदलाव नहीं किया जाये । अगर बदलाव किया गया है तो उसे वापस कर पूर्व में प्रस्तावित रूट को ही स्वीकृति प्रदान करें ।
एक अन्य महत्वपूर्ण विषय हैं । रेलवे ने जानकारी प्रदान की है कि दिनांक 10.11.2014 को रेल मंत्रालय और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के बीच समझौता ज्ञापन हस्ताक्षरित हुआ है । इसके अनुसार वर्ष 2019 तक सभी रेल फाटकों को रोड ओवर/रोड अंडर ब्रिज से बदलने का कार्य सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय/भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण करेगा । मेरे संसदीय क्षेत्र में पुलों के निर्माण के लिए स्वीकृति एवं राशि मिली हुई है । रेलवे द्वारा भी स्वीकृति हो चुकी है । इसमें विलम्ब के कारण जनता में बहुत आक्रोश है और कई बार उग्र प्रदर्शन हो चुका हैं । यह बहुत व्यस्त मार्ग है । इसके निर्माण को शीघ्र करवाने की आवश्यकता है । परन्तु यह भी ध्यान रखना होगा कि चंदवा बाजार को नुकसान नहीं हो । चंदवा के बाजार का बचाव करते हुये इसका विकल्प तलाश किया जाये । इसके लिए बाईपास का निर्माण, या रेलवे अण्डर पास का निर्माण भी किया जा सकता हैं । अतः लातेहार जिला में टोरी स्टेशन के निकट टोरी-चतरा, डोभी पथ पर रेल ओवरब्रिज (आरओबी) का निर्माण कार्य शीघ्र पूरा किया जाये ।
इसके साथ मैं सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के 2019-20 अनुदानों की मांग का समर्थन करते हुए अपनी बात समाप्त करता हूं । धन्यवाद ।
*श्री अजय भट्ट (नैनीताल-ऊधमसिंह नगर): जब से माननीय मोदी जी ने देश के प्रधान सेवक रूप में कार्यभार सम्भाला तब से लगातार देश नई ऊंचाइयां छू रहा है जो काम पूर्ववर्ती सरकारें आजादी के बाद से आज तक नहीं कर पाई मोदी जी की सरकार ने 5 वर्षों में करके सिद्ध कर दिया कि उनकी सरकार का एक मात्र लक्ष्य सिर्फ और सिर्फ भारत को दुनिया में नम्बर एक पर लाना है । मोदी जी के नेतृत्व में सड़क एवं परिवहन मंत्री श्री नितिन जयराम गडकरी जी ने जो कार्य किया वह अकल्पनीय है । श्री गडकरी जी देश में निर्धारित लक्ष्य के विपरीत कई गुना अधिक एन.एच.-एन.एच.ए.आई., स्टेट पी.डब्लयू.डी. एवं एन.एच.आई.डी.सी.एल. की सड़कों का निर्माण कर, कार्य करने की सर्वोच्च क्षमता का परिचय दिया है ।
श्री नितिन गडकरी जी की डिक्शनरी में असम्भव शब्द नहीं है, श्री गड़करी जी की कार्यशैली हम सब को कार्य के प्रति समर्पित भावना से कार्य करने के लिए प्रेरित करती है ।
माननीय प्रधानमंत्री जी जिस तरह से 18-20 घंटे तक प्रतिदिन कार्य कर हर क्षेत्र में देश को 2013-14 से काफी आगे ले आये हैं, तथा उनके कठिन कार्य-क्षमता को श्री नितिन गड़करी भी बखूबी आगे बढ़ा रहे हैं ।
गडकरी जी ने देश के सुदूरवर्ती क्षेत्रों, सीमान्त क्षेत्रों एवं सामरिक महत्व के क्षेत्रों में सड़क पहुंचाने का कार्य किया है, वह अविस्मरणीय है । परिवहन का सही उपयोग, गडकरी जी ने हर क्षेत्र में सफलतापूर्वक करके दिखाया है । कुछ समय बाद हम कैलाश मानसरोवर सड़क मार्ग से जा पायेंगे, जो लोग कैलाश मानसरोवर के पवित्र दर्शन करने की इच्छा मात्र रखते थे तथा कठिन मार्ग के कारण जा नहीं सकते थे, अब सड़क का निर्माण प्रारंभ होने से आशा जगी है कि कुछ समय बाद हम सड़क मार्ग से करोड़ों सनातन धर्मियों के पवित्र स्थल, कैलाश मानसरोवर के दर्शन एवं पवित्र जल से “आचमन” एवं स्नान कर पायेंगे । सड़कों, नदियों, पहाड़ों मैदानी क्षेत्रों में अकल्पनीय पुलों का निर्माण कर सरकार ने लोगों की बरसों की मांग को पूरा किया है ।
हमारे प्रदेश उत्तराखण्ड में माननीय प्रधानमंत्री जी ने ”आल वैदर” सड़क का कार्य ”चारधाम” की सुगम यात्रा के लिए जो नितिन गड़करी जी की देख-रेख में प्रारम्भ किया था, आज तेज गति से चल रहा है । माननीय गडकरी जी ने उत्तराखण्ड की जिन कई सड़कों को एन.एच. बनाने की घोषणा की थी, उनका निर्माण चल रहा है ।
आज शहरों में जाम की बड़ी समस्या है, मेरी लोक सभा नैनीताल-ऊधम सिंह नगर के अंदर हल्द्वानी, काशीपुर, रूद्रपुर, लालकुआं, भवाली, भीमताल, नैनीताल में जबरदस्त जाम लगता है । जिसके कारण, जन जीवन अस्त-व्यस्त हो जाता है । हल्द्वानी से नैनीताल जहां सामान्यतः 1 से लेकर डेढ़ घंटे तक का समय लगता है, पर्यटन सीजन में 7 से लेकर 8 घंटे तक का समय लगा और जनता पानी एवं लघुशंका के लिए तथा भोजन के लिए परेशान हो गई तथा छोटे-2 बच्चों को दूध एवं बिस्कुट तक नहीं मिले । इसलिए मेरा सरकार से अनुरोध है कि शहरों में जाम न लगे, ऐसी योजना बने और ऐसे शहरों में ”बाईपास” बनाने के लिए केन्द्र से सी.आर.एफ. अथवा किसी अन्य मद से धनराशि अवमुक्त की जानी चाहिये, क्योंकि राज्य सरकारों के पास धन की कमी होती है, यद्यपि एन.एच. पर बसे शहरों में ”बाईपास” के लिए धनराशि केन्द्र सरकार ही देती है ।
कई पर्यटक शहरों में आज पार्किंग की गंभीर समस्या है, इसका उदाहरण मैंने नैनीताल पर्यटक नगरी का ऊपर दिया है जहां पार्किंग न होने के कारण 7-8 घंटे तक जाम लगा रहा ।
मैं उत्तराखण्ड की कुछ सड़कों के संबंध में सरकार को अवगत कराना चाहता हूं । धर्मनगरी हरिद्वार के लिए लम्बे समय से बन रही सड़क का मार्ग आज तक पूर्ण नहीं हुआ । जिससे कई बार गंभीर दुर्घटना हो चुकी है, कई लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है । इस मार्ग के न बनने से सरकार की काफी बदनामी हो रही है । मेरा आग्रह है कि सरकार ऐसे ठेकेदारों को ”ब्लैक लिस्ट” कर दे, ताकि सरकारी धन की एवं समय की बर्बादी न होने पाये ।
मैं सरकार को बधाई देता हूं कि भारत में सबसे पहले ”ऑलवेदर” रोड़ उत्तराखण्ड को दी गई, आज चार धाम एवं टनकपुर से पिथौरागढ़ तक ”ऑलवेदर” रोड का निर्माण कार्य प्रारंभ हो चुका है, परन्तु कार्य की गति बहुत धीमी है, सरकार कार्य की गति बढ़ायेगी तो अगले वर्ष चार धाम यात्रा और अधिक सुगमता से हो जायेगी ।
उत्तराखण्ड के दो मण्डलों कुमाऊं एवं गढ़वाल को जोड़ने के लिए कार्बेट पार्क से एक कण्डी रोड की मांग लम्बे समय से चल रही है । इसका निर्माण होने के बाद उत्तर प्रदेश से नहीं आना पड़ेगा और रामनगर से सीधे कालागढ़ होते हुए कोटद्वार पहुंच जायेंगे । मेरा अनुरोध है कि सरकार इसकी स्वीकृति जारी करें ।
मेरी लोक सभा नैनीताल - ऊधम सिंह नगर के अंतर्गत खटीमा - पानीपत राष्ट्रीय राज मार्ग पर जनपद ऊधम सिंह नगर में स्थित (एन.एच. 74) का निर्माण कार्य गल्फार कम्पनी को मिला था । निर्माण कार्य नहीं किया गया । रूद्रपुर से काशीपुर की ओर स्थित रेलवे क्रासिंग के ऊपर निर्मित फ्लाईओवर के दोनों ओर गल्फार कम्पनी के द्वार कोई सर्विस लेन का निर्माण नहीं किया गय है । इस फ्लाईओवर के दोनों ओर आवासीय क्षेत्र, मॉडल कॉलोनी सूर्या इन्क्लेव, फ्रेड्रान सर्किल, सोढ़ी कॉलोनी एवं अनेक प्रतिष्ठानों के हजारों नागरिकों की आवाजाही मुख्य मार्ग से बन्द है, क्योंकि राष्ट्रीय मार्ग में सर्विस लेन नहीं है ।
एलायन्स आवासीय कॉलोनी द्वार से, ग्रीन पार्क सोब्ती कॉलोनी द्वार तक एन0एच0 पर सड़क, गल्फार कम्पनी के द्वारा न बनाये जाने के कारण आये दिन दुर्घटनायें हो रही हैं ।
श्यामा प्रसाद मुखर्जी चौक पर अत्यंत बड़ा व गहरा नाला होने से अनेक छोटे व बड़े वाहन व नागरिक इन नालों में गिर चुके हैं ।
उक्त कम्पनी द्वारा यहां पर नाले पर स्लैब निर्माण व सड़क न बनाने से अनेक वाहन क्षतिग्रस्त हो चुके हैं एवं कई नागरिक घायल हो चुके हैं ।
रूद्रपुर के शमशान घाट व दुधिया बाबा मन्दिर से किच्छा मार्ग पर स्थित श्री शुक्ला जी (विधायक किच्छा) आवास तक यानि तीन पानी तक लम्बा मार्ग उपरोक्त कम्पनी द्वारा न बनाये जाने के कारण, भदईपुरा, शान्ति कॉलोनी, विम स्वायर कालोनी, दूधिया नगर, उत्तरांचल कालोनी, पहाड़गंज, अग्रसेन अस्पताल क्षेत्र, रेशम वाड़ी व अन्य क्षेत्रों का जन-जीवन ठप्प हो चुका है । दिन भर धूल उड़ने से कई लोग फेफड़ों की बीमारी के शिकार हो चुके हैं । साथ ही बड़े-बड़े गड्ढों से दुर्घटनायें हो रही हैं ।
किच्छा मेडीसिटी अस्पताल के बाहर पुलिया अत्यंत सकीर्ण होने से हमेशा जाम लगा रहता है । उपरोक्त कम्पनी द्वारा पुलिया का निर्माण आज तक न करने के कारण लम्बे समय तक जाम में फंस कर, लोग मानसिक प्रताड़ना झेल रहे हैं ।
यह अत्यंत गंभीर बात है कि ऊधम सिंह नगर में जहां-जहां भी गल्फार कम्पनी द्वारा काम किया गया है कहीं भी पैदल चलने अथवा दुपहिया वाहनों तक के लिए सर्विस लाईनों का निर्माण नहीं कराया है । साथ ही कहीं भी योजनाबद्ध तरीके से नालों का निर्माण न होने से गड्ढों में पानी भरने के कारण कई बार छोटे वाहन उसमें डूब जाते हैं तथा दुर्घटना होती है । इसी राष्ट्रीय राजमार्ग पर बनाये जा रहे फ्लाईओवर का निर्माण कार्य कम्पनी ने रोक दिया है, जिसमें एक छोटा कच्चा मार्ग से ही वाहन आते - जाते रहते हैं । यह भी गम्भीर बात गल्फार कम्पनी द्वारा सर्विस लेन तो पूरी सड़क में कहीं भी नहीं बनाई है ।
अत्यंत कष्ट के साथ सरकार को अवगत कराना है कि गल्फार कम्पनी की घोर लापरवाही एवं अधिकारियों की अकर्मण्यता से एक दर्जन यात्रियों की जान जा चुकी है और कई घायल हो चुके हैं ।
यह और भी गम्भीर बात है कि गल्फार कम्पनी घड़ल्ले से इस राष्ट्रीय राजमार्ग किच्छा रोड पर टोल वसूली कर रही है जब 50 प्रतिशत भी काम पूरा नहीं हुआ तो फिर टोल लेने का कोई कारण नहीं होता है । यह अवैध वसूली है ।
यह और भी गंभीर बात है कि अधूरी सड़क, जो 50 प्रतिशत भी नहीं बनी है उसको अनापत्ति प्रमाण पत्र किसके द्वारा और क्यों दिया गया ।
मैं सरकार से मांग करता हूं कि इस पूरे प्रकरण की जांच की जाये एवं उन अधिकारियों व संबंधित सभी लोगों के खिलाफ दण्डात्मक कार्यवाही की जाये, जिनकी वजह से एक दर्जन से भी अधिक लोगों की जानें चली गई हैं ।
इस संबंध में स्थानीय जनता एवं स्थानीय माननीय विधायक जी द्वारा अपना रोष व्यक्त किया गया है और हर बार स्थानीय प्रशासन, गल्फार कम्पनी, जनता के बीच में एग्रीमेंट तो हुआ है किन्तु कार्य आज तक नहीं हुआ है इसलिए इस मामले को गम्भीरता से लेते हुए कठोर कार्यवाही सरकार करे ।
रूद्रपुर में ट्रांजिट कैम्प जो बंगाली बहुल इलाका है लगभग दो कि0मी0 सड़क में बड़े-बड़े गड्ढे बन गये हैं, यह क्षेत्र किसी भी निर्माण एजेंसी के पास न होकर महानगर निगम के अंदर आता है और महानगर निगम के पास धन की कमी के कारण निर्माण कार्य नहीं हो पा रहा है इसलिए मेरा सरकार से अनुरोध है कि ऐसे मामलों में सड़क परिवहन मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पैसा दिया जाना चाहिए ।
इस बजट का समर्थन करते हुए मैं अपनी बात को समाप्त करता हूं ।
*SHRI SUNIL BABURAO MENDHE (BHANDARA-GONDIYA):In this Budget of 2019-20 for Ministry of Road Transport and Highways, the following roads shall be added in my Constituency.
- Bhandaro – Tumsar is now a State Highway which shall be declared as a new National Highway as is very high traffic density road.
- Parni (Sindpur) to Lakhandare Road (MDK) shall be declared as State Highway and shall be constructed (dredged) as three lane road because it is a road connectivity of two new National Highways which are under construction. (Bhandaro-Parni Nilong Fata Road and Sakali – Lakhandare – Wadsee Road).
Please consider the above.
*श्री अजय टम्टा (अल्मोड़ा): मुझे वर्ष 2019-20 की सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय से संबंधित अनुदान की मांगों पर अपनी बात रखने का अवसर दिया है, इसके लिए बहुत-बहुत धन्यवाद ।
मोदी जी की सरकार के दूसरे बजट में सबसे ज्यादा जोर सड़कों का जाल बुनने के ऊपर है । इस क्षेत्र में सरकार टॉप गियर पर चल रही है । कभी सोचा करते थे कि विदेशों की तर्ज पर अपने देश में भी राजमार्ग बनेंगे या नहीं, यह सम्भव हुआ और अटल जी की सरकार के समय स्वर्णिम चतुर्भुज योजना के माध्यम से देखने को मिला । आज पुन: जब मोदी जी की सरकार बनी तो उस कैबिनेट में बहुत अनुभवी मंत्री श्रीमान् नितिन गडकरी जी ने सड़कों और राजमार्गों के प्रति अपनी सोच और दूरदर्शिता प्रकट की और राजमार्गों की स्थिति देखने लायक है, जहां एक्सप्रेसवे जैसे मोटर मार्ग बनें ।
जब हम अपने क्षेत्र उत्तराखण्ड से दिल्ली या लखनऊ आते थे तो आने के बाद एक दिन पूरा आराम करना होता था । आज इसके ठीक उलट उत्तराखण्ड से दिल्ली आते वक्त जो राजमार्गों में परिवर्तन देखने को मिला है, सब उसकी वाहवाही करते हैं । कार्य कागजों में नहीं, धरातल पर दिखता है ।
मैं अल्मोड़ा संसदीय क्षेत्र से दूसरी बार सांसद निर्वाचित हुआ हूं जिसमें बहुत बड़ी भूमिका सड़क परिवहन एवं राजमार्ग की भी है । मेरे क्षेत्र का बहुत-सा भू-भाग चीन और नेपाल की सीमा पर आता है । आज वहां भी भारतमाला परियोजना के तहत
(i) बैजनाथ-थराली-कर्णप्रयाग मोटर मार्ग - 94 किमी.,लागत - 2,000 करोड़ रुपये
(ii) बैजनाथ-बागेश्वर-कपकोट-मुनस्यारी मोटर मार्ग - 216 किमी.,लागत - 4,500 करोड़ रुपये
(iii) अस्कोट-धारचूला-पालपा-लिपुलेख मोटर मार्ग - 147 किमी.,लागत - 12 करोड़ रु.
लगभग 7700 करोड़ रुपये की घोषणा एवं कार्यों की स्वीकृति से क्षेत्र में काफी हर्ष व्याप्त हुआ और जनता ने मोदी जी और भूतल परिवहन मंत्री जी के प्रति आभार व्यक्त किया ।
राष्ट्रीय राजमार्गों की घोषणा के संबंध में पूर्व से काफी मांगें क्षेत्र से आती रहतीं थीं । मोदी जी की सरकार में माननीय भूतल परिवहन मंत्री जी द्वारा वर्ष 2016-17 में (1) एन.एच. 309 ए, धार-गंगोत्रीहाट-बेरीनाग-बागेश्वर-ताकुला, अल्मोड़ा को और, (2) एन.एच. 309 बी, अल्मोड़ा-पनार 77 किलोमीटर के दो मार्गों को राष्ट्रीय राजमार्ग घोषित किया गया ।
(1) रानीखेत, भतरौजखान, मोहान, (2) रानीखेत, खैरना, जिसमें सैद्धांतिक स्वीकृति एन.एच. घोषित करने हेतु हुई है । अत: विधिवत स्वीकृति की शीघ्र आवश्यकता क्षेत्र के लिए है । हम आपके आभारी होंगे ।
वर्ष 2016-17 में माननीय प्रधान मंत्री जी और भूतल परिवहन मंत्री जी श्रीमान् नितिन गडकरी जी द्वारा चार धाम प्रोजेक्ट में अपना संसदीय क्षेत्र टनकपुर से पिथौरागढ़ एन.एच.-09 पर 1200 करोड़ रुपये से अधिक लागत से सुन्दर ऑलवेदर रोड का निर्माण हो रहा है, जो मेरे संसदीय क्षेत्र के लिए केन्द्र का उपहार है । मैं कहना चाहूंगा कि उक्त ऑल वेदर रोड में तीन बाइपास निर्माण की भी तत्काल आवश्यकता है - चम्पावत बाइपास, लोहाघाट बाइपास और पिथौरागढ़ बाइपास । इसके लागत हेतु प्रस्ताव व डी.पी.आर. भारत सरकार में अभी लम्बित है । इसके लिए शीघ्र ही धनराशि मुक्त होनी चाहिए । उक्त मार्ग में बाइपास का निर्माण आवश्यक है ।
मेरे संसदीय क्षेत्र में राष्ट्रीय राजमार्ग 109 में चौंसली से कोसी बाइपास का निर्माण राज्य सरकार द्वारा किया जा चुका है । राष्ट्रीय राजमार्ग 109 में लोधिया से पाण्डेखोला, जहां घनी आबादी के कारण काफी जाम की स्थिति बनी रहती है, जिस कारण उक्त राजमार्ग के कुछ भाग को राज्य सरकार द्वारा निर्मित बाइपास को सम्मिलित करना भी अपरिहार्य होगा ।
एन.एच. 309 बी अल्मोड़ा से धार, एन.एच. 109 क्वाख से द्वारसों, एन.एच. 109 चौखुटिया से पाण्डुवाखाल - इन मार्गों के सुदृढ़ीकरण और चौड़ीकरण के प्रस्ताव व डी.पी.आर. भारत सरकार के स्तर पर लम्बित हैं । इसकी स्वीकृति प्रदान हो ।
एन.एच. 121 - रामनगर गर्सिया के पास धनगड़ी नाला और पनोर नाला के स्थान पर पुल की आवश्यकता है क्योंकि नालों में बरसात का पानी आने से हर वर्ष यहां जनहानि हो जाती है । इसका प्रस्ताव भी भारत सरकार को प्रेषित है । इसकी स्वीकृति प्रदान करें ।
बजट में हर्ष का विषय है कि अब राज्यमार्गों पर भी राष्ट्रीय राजमार्ग कार्य करेगा । अपने संसदीय क्षेत्र में अनेक ऐसे मार्ग हैं जो काफी जर्जर हो चुके हैं और उनकी क्षेत्र में काफी आवश्यकता है । इस पर केन्द्र द्वारा ध्यान दिया जाना बहुत प्रशंसनीय है । भूतल परिवहन और राष्ट्रीय राजमार्ग मंत्री जी का आभार कि आपके द्वारा देश में सड़कों के माध्यम से अंतिम छोर के व्यक्ति के विकास की सोच व्याप्त होगी ।
धन्यवाद ।
*SHRI MITESH PATEL (BAKABHAI) (ANAND): With reference to the notification Bhavnagar (on NH-51) Dholera-Vataman Junction-Fatehpura-Khamhat-Gambhira Bridge-Karjan (on NH-48) 200 Km. road length is declared National Highway for connecting South Gurjrat to Saurashtra Region.
But, for connecting to Saurashtra Region to South Gujrat is shortest link to connect Vtaman Junction-Fatehpura-Khambhat-Kavi-Jambusar by constructing 8.50 kms. length Heighted Bridge with 1.50 km. Approaches between khambat to kavi. The route distance reduce 46 km. Now a day traffic passing for Saurashtra region to South Gujarat and Mumbai are from Vataman junction – Tarapur Dharmaj – Borsad – Jambusar it is 115 km length.
Otherwise estimating bridge of Khambhat Khadi 8.100 km bridge + 1.50 km approaches the traffic will fly Vataman junction – Fatehpura – Galiyana – Golana – Khambhat – Kavi – Jambusar 69 km.
By the way it reduce the 46 km. travelling and it improve the economy of bhal region and industrial growth and reduce the pollution by constructing the same bridge and highway, it reduce 200 crore fuel consumption per year and reduce the road accident and will grow of the economy of the nation. So the Government is requested to change the route from Khambhat-Kavi-Jambusar instead of Khambhat-Gambhira Bridge-Karjan (on NH 48) and approve the same bridge with a joining coastal highway please.
*श्री राकेश सिंह (जबलपुर): मैं सड़क परिवहन एवं राष्ट्रीय राजमार्ग मंत्रालय के बजट अनुदान पर अपनी बात व्यक्त करना चाहता हूं ।
आज यदि सड़क परिवहन एवं राष्ट्रीय राजमार्ग की बात करें तो हम सभी सांसद अपनी सरकार के प्रति गौरवान्वित महसूस करते हैं । इसका कारण है कि देश में माननीय प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में हमारे विजनरी लीडर और सड़क परिवहन एवं राष्ट्रीय राजमार्ग मंत्री श्री नितिन गडकरी जी के मंत्रीत्व काल में इस मंत्रालय द्वारा सड़क निर्माण और राष्ट्रीय राजमार्गों के उन्नयन के क्षेत्र में ऐतिहासिक कार्य किया है ।
पूर्ववर्ती सरकारों के कार्यकाल में देश के सभी राष्ट्रीय राजमार्गों की हालत दयनीय थी, यह पता ही नहीं चलता था कि गड्ढे में सड़क है या सड़क में गड्ढे । राष्ट्रीय राजमार्गों के उन्नयन हेतु सांसदों एवं अन्य जनप्रतिनिधियों द्वारा आंदोलन किया जाता रहा है, किंतु कांग्रेस की सरकार ने कभी उन आवाजों को तवज्जों नहीं दी ।
आज हमें बताते हुए गर्व होता हे कि माननीय श्री गडकरी जी के नेतृत्व में मात्र 5 वर्षों में राष्ट्रीय राजमार्गों का कार्य जिस तेज गति से किया जा रहा है , वो बेशक एक ऐतिहासिक और हमारी सरकार की अभूतपूर्व सफलताओं में से एक है ।
काम करने वालों के लिए इस देश में संभावनाओं की कमी नहीं है । किंतु उसके लिए एक मजबूत नेतृत्व और राजनैतिक इच्छा शक्ति जरूरी है, जो केवल और केवल इस देश को हमारे प्रधानमंत्री माननीय मोदी जी के नेतृत्व में देखने को मिला है ।
पूर्ववर्ती सरकारों में कार्य तो होते थे, किंतु पार्टी के आधार पर आज मुझे यह कहते हुए गर्व है कि आज देश कोई भी मेरे सांसद मित्र चाहे किसी भी दल से हो, आज निर्भीक होकर और दलगत राजनीति से उपर उठकर हक से अपने क्षेत्र संबंधित विकास कार्यों के लिए मदद मांग सकते हैं ।
हमारी सरकार द्वारा राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण की प्रक्रिया में अभूतपूर्व तेजी लाई गई है । पूर्ववर्ती सरकार में जो प्रतिदिन 10 से 12 कि0मी0 निर्माण कार्य होता था, आज हमारी सरकार के दौरान 28 से 30 कि0मी0 के आसपास प्रतिदिन राष्ट्रीय राजमार्गों का निर्माण किया जा रहा है । इसके बाद भी हमारी सरकार द्वारा इस लक्ष्य को बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है ।
मैं अपनी बात को बहुत विस्तार में न ले जाते हुए अपने संसदीय क्षेत्र जबलपुर से निकलने वाले तीनों राष्ट्रीय राजमार्गों के संबंध में मंत्री जी से आग्रह करूंगा कि जबलपुर से निकलने वाली एन.एच.-7, एन.एच.-12 एवं एन.एच.-12ए के फोर लेन निर्माण प्रगति पर है । आपसे आग्रह है कि समय सीमा के अंतर्गत तीनों सड़कों के निर्माण कार्य को पूरा किया जाये, इस हेतु संबंधित विभाग को निर्देशित किया जाये और साथ ही मेरे द्वारा संसदीय क्षेत्र जबलपुर की प्रमुख सड़कों के उन्नयन हेतु सी.आर.एफ. फण्ड हेतु आपसे पत्राचार भी किया गया है । अतः उक्त सड़कों के उन्नयन हेतु फण्ड उपलब्ध कराने हेतु आवश्यक कार्यवाही करने का कष्ट करें ।
माननीय मंत्री से यह भी मांग करता हूं कि उनके द्वारा मध्य प्रदेश की सबसे बड़ी रिंग रोड जो 112 कि0मी0 की प्रस्तावित है, को उनके द्वारा पूर्व में स्वीकृत कर दिया गया है । अतः प्रदेश सरकार को निर्देशित किया जाये कि उक्त रिंग रोड की आवश्यक औपचारिकता को पूरा किया जाये ताकि उसके निर्माण की प्रक्रिया को प्रारंभ किया जा सके ।
माननीय मंत्री जी से आग्रह करूंगा कि मेरी मांगों पर पुनः विचार कर यथाशीघ्र आवश्यक कार्यवाही करने का कष्ट करें । जयहिन्द ।
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री तथा सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्री (श्री नितिन जयराम गडकरी): माननीय अध्यक्ष जी, मेरे विभाग से संबंधित जो फाइनेंशियल डिमांड्स थीं, उनके ऊपर कल करीब 62 सदस्यों ने अपने विचार रखे । …(व्यवधान)
संसदीय कार्य मंत्रालय में राज्य मंत्री तथा भारी उद्योग और लोक उद्यम मंत्रालय में राज्य मंत्री (श्री अर्जुन राम मेघवाल): आप मंत्री जी का रिप्लाई सुनिए । …(व्यवधान)
श्री अधीर रंजन चौधरी : महोदय, आप एक मिनट मेरी बात सुनिए । …(व्यवधान)
श्री नितिन जयराम गडकरी : अनेक माननीय सदस्यों ने अपने सुझाव भी दिए ।…(व्यवधान) मैं उन सभी माननीय सदस्यों को बहुत-बहुत धन्यवाद देता हूं और उनका अभिनंदन भी करता हूं । …(व्यवधान) मैं सदन को विश्वास दिलाना चाहता हूं कि हमारे प्रधान मंत्री आदरणीय नरेन्द्र मोदी जी ने इंफ्रास्ट्रक्चरल डेवलपमेंट के लिए सबसे ज्यादा प्राइयोरिटी दी है । …(व्यवधान) मैं सदन को विश्वास दिलाना चाहता हूं कि हमारे पांच साल के कार्यकाल में प्रधान मंत्री जी ने इंफ्रास्ट्रक्चरल डेवलपमेंट को प्राइयोरिटी दी थी, उसके बहुत अच्छे परिणाम निकले हैं । …(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : माननीय सदस्य, मैंने आपसे कहा है कि बजट की प्रक्रिया होने के बाद आपने जो-जो विषय लगाए हैं, उन पर बोलने का मौका दूंगा । अभी माननीय मंत्री जी का रिप्लाई सुनिए ।
…(व्यवधान)
श्री अर्जुन राम मेघवाल : अधीर रंजन जी, आप जो मुद्दा उठाना चाहते हैं, वह बहुत सेंस्टिव मुद्दा है, लेकिन मंत्री जी का रिप्लाई शुरू हो गया है, आप इसे सुनिए । …(व्यवधान)
श्री नितिन जयराम गडकरी : महोदय, पिछले पांच साल में हमारे प्रधान मंत्री 21वीं सदी का भारत कैसा होगा और कैसा इंफ्रास्ट्रक्चर होगा, इसकी कल्पना भी इसमें की गई है । …(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : माननीय मंत्री जी गंभीर वक्तव्य दे रहे हैं । आप सभी ने जो भी सवाल उठाए हैं, माननीय मंत्री जी उनका जवाब देंगे ।
…(व्यवधान)
श्री अधीर रंजन चौधरी : हम सदन से वॉक आउट करते हैं । …(व्यवधान)
12.10 hrs At this stage Shri Adhir Ranjan Chawdhary and some other hon. Members left the House श्री नितिन जयराम गडकरी : महोदय, इसमें बहुत अच्छे-अच्छे निर्णय भी किए गए हैं । मुझे बताते हुए खुशी हो रही है कि कल सम्मानीय सदस्यों ने, जिनमें सभी सदस्य शामिल हैं, उन्होंने मेरे विभाग की और विशेष रूप से सरकार की इन सब बातों के लिए और सरकार के इनिशिएटिव का समर्थन भी किया है । इसके लिए मैं सभी को बहुत-बहुत धन्यवाद देना चाहता हूं ।
माननीय स्पीकर महोदय, माननीय प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में काम करने का जो मुझे अवसर मिला है, उसमें केवल मेरे विभाग में करीब 17 लाख करोड़ रुपये के काम पाँच वर्षों में अवार्ड हुए । उनमें से 11 लाख करोड़ रुपये के काम रोड सेक्टर में अवार्ड हुए, जिनमें से कुछ काम पूरे भी हुए । करीब पाँच लाख करोड़ रुपये के काम शिपिंग, पोर्ट्स और इनलैंड वाटरवेज़ में हुए और एक लाख करोड़ रुपये के काम वाटर रिसोर्स में हुए । उस समय मेरे विभाग ने देश की जीडीपी में पौने तीन-तीन पर्सेंट कंट्रीब्यूशन किया ।
I am happy to inform you that in the past five years, Ministry of Road Transport and Highways has built around 40,000 kilometres of roads and spent more than Rs. 4,31,000 crore to build a world-class highway network. This is about 60 per cent higher, as compared to the five years during 2009-14, which was 25,000 kilometres only. We have awarded work for 57,000 kilometres during 2014-19, costing approximately Rs. 6 lakh crore, which is almost double of what was awarded in 2009-14, that is 28,500 kilometres. The Ministry has shown exponential capacity to spend allocated funds in building NH, which are the backbone of the economy.
Today, we spend more than 80 per cent of the allocation on capital expenditure. We are contributing to the growth rate. It is the most important thing which is concerned with the Ministry that we are creating more employment potential. I am only giving you the example. The building construction and highway construction machinery industry’s turnover in five years is now double. It is a great achievement.
A lot of a Members were very much interested to ask me questions on Bharatmala. The ambitious programme of Bharatmala Pariyojana will see the development of roads of more than 65,000 kilometres on which my Ministry has already begun work. I want to make one thing very clear that there is no priority. Do not bother about anything. Every project is a priority project. At the time of the Code of Conduct, a circular was issued. When I took charge as the Minister, I immediately rectified that order and there is no priority. It is open for all and we will do it.
In the first phase, there is a plan to upgrade 24,800 kilometres under Bharatmala and in addition, 10,000 kilometres of balance NHDP will also form part of Bharatmala. The Bharatmala was approved at an estimated cost of Rs. 5,35,000 crore, which will be funded through cess, toll revenue, market borrowings, private sector participation, insurance fund, pension funds, masala bonds. Now, we are also thinking of going into the capital market and take the money from the common people like teachers, constables, poor people and give them good interest. Actually, it is not in my hand, but we will try to give them more than 7.5 per cent to 8 per cent interest and we will use that money for construction of roads. On the one hand, we will construct the roads and on the other hand, we will give good interest to the poor people of this country. With the help of them, we want to build the road infrastructure in the country.
SHRI SUDIP BANDYOPADHYAY (KOLKATA UTTAR): Have you started the project already?
SHRI NITIN JAIRAM GADKARI:Yes Sir. I am telling you. The cost has undergone a revision, mainly due to increase in land acquisition and increase in the civil cost in the intervening period. The revised cost of the project is about Rs. 8,41,000 crore. The cost has increased. When we started it, when we visualized it, the cost was Rs. 5,35,000 crore.
Now, it has increased up to 8,41,000 kilometres.
PROF. SOUGATA RAY (DUM DUM): But what about money? …(Interruptions)
श्री नितिन जयराम गडकरी : प्रोफेसर साहब, मैं आपको बता रहा हूं । …(व्यवधान) मैं आज फाइनेंशियल मॉडल पर ही चर्चा करूंगा । …(व्यवधान) मैं आपको विश्वास दिलाना चाहता हूं कि पैसे की कोई कमी नहीं है । …(व्यवधान) मैं यह पार्लियामेंट के रिकॉर्ड पर बोल रहा हूं । …(व्यवधान) एक भी काम नहीं हुआ तो आप मेरे ऊपर हक भंग लाइए, मैं आपको उसका जवाब दूंगा । …(व्यवधान) मैं हर काम कर के दिखाऊंगा । …(व्यवधान) In order to make optimal use of resources, multi-pronged strategies have been adopted. Optimisation of land acquisition and green alignment will reduce the cost.
माननीय स्पीकर महोदय, आप राजस्थान से हैं । हम 22 ग्रीन एक्सप्रेस हाइवेज़ बना रहे हैं । मैं इस सदन के सदस्यों को बड़े अभिमान के साथ बताना चाहूंगा कि मेरे विभाग के इंजीनियर्स ने मिलकर जो काम किया है, उसके लिए मैं उनको बधाई दूंगा और आपसे भी कहूंगा कि उन्होंने कितना अच्छा काम किया है । इन 22 ग्रीन एक्सप्रेस हाइवेज़ में से मुंबई-दिल्ली हाइवे उनमें एक एक है । मैं बहुत बार बता चुका हूं कि इन एक्सप्रेस हाइवेज़ के कारण डिस्टेंस कम होगा । यह एक्सप्रेस गुड़गांव से शुरू होगा और सवाई माधोपुर, अलवर से होकर रतलाम, झाबुआ से होते हुए वडोदरा से मुंबई जाएगा । इसकी कीमत अगर हम लोग दिल्ली से अहमदाबाद, वडोदरा और मुंबई के एग्ज़िस्टिंग हाइवे के नज़दीक करते तो इसकी लैण्ड एक्यूज़िशन कॉस्ट 6 करोड़ रुपये प्रति क्टेयर आती । हमारे डिपार्टमेंट के इंजीनियर्स और कंसलटेन्ट्स ने गूगल पर जाकर बहुत अच्छा मार्ग निकाला । उन्होंने बैकवर्ड एंड ट्राइबल एरियाज़ ऑफ राजस्थान, हरियाणा, महाराष्ट्र, गुजरात और मध्य प्रदेश के बारे में कहा । सर, यह पहला ग्रीन हाइवे है, जो पूरा ट्राइबल एरिया से जा रहा है ।
इसके कारण रतलाम हो, झाबुआ हो, हमारे यहां से अलवर हो, सवाई माधोपुर हो या ठाणे डिस्ट्रिक्ट हो, या वडोदरा का ट्राइबल एरिया हो, माननीय स्पीकर महोदय, मुझे इस बात की खुशी हो रही है कि केवल लैण्ड एक्यूज़िशन कॉस्ट में 16 हज़ार करोड़ रुपये की बचत की गई है । इससे दिल्ली से मुंबई डिस्टेंस 120 किलोमीटर कम हुआ है और 160 परसेंट कॉन्ट्रैक्ट्स अवॉर्ड किये गए हैं । ढाई-तीन साल के अंदर 12 घंटों के अंदर मुंबई से दिल्ली जाना मुमकिन हो जाएगा, यह विश्वास मैं सदन को देना चाहता हूं ।
मैंने कल ही हमारे हैवी-इंडस्ट्रीज़ मिनिस्टर सावंत साहब से बात की है । इसमें पहली बार हम एक दस किलोमीटर का पायलट प्रोजेक्ट उनके सहयोग से करने के लिए सोच रहे हैं । यह 80 टन का ट्रक होगा, जिसमें इलैक्ट्रिक केबिल होगी । मैंने वर्ल्ड में प्रेज़ेंटेशन ली हैं । अमेरिका, सैन-फ्रांसिस्को में यह हुआ है और जर्मनी में भी ऑलरेडी शुरू हो चुका है, स्वीडन में है, मैं देखकर आया हूं । रेलवे के इंजन की तरह उस केबल से ट्रक के ऊपर तक करंट पहुंचेगा । दो ट्रक्स में दो कंटेनर्स 100 किलोमीटर की स्पीड से हाइवे पर एक साइड से दौड़ेंगे । दिल्ली से मुंबई जाने की ट्रांसपोर्ट कॉस्ट, जो आज 85 रुपये का पैट्रोल और 65 रुपये का डीजल है, उसमें 12 से 15 रुपये की बिजली लगेगी और कॉस्ट कम हो जाएगी । उसके बाजू में लॉजिस्टिक्स पार्क बने रहे हैं । वह 20 किलोमीटर तक करंट से चलेगा और फिर बैटरी चार्ज करके फिर दौड़ेगा और करंट से दौड़ेगा । यह बहुत इनोवेटिव मॉडल है । प्रधान मंत्री जी की सोच है कि नए भारत के 21वीं सदी के इंफ्रास्ट्रक्चर में यह रोड होगी ।
एक और इंपॉर्टेंट बात है कि लैण्ड एक्यूज़िशन की थोड़ी समस्या है । मैं सम्माननीय सदसयों से एक अनुरोध करूंगा कि हमारे द्वारा कोई भी रोड शुरू करने से पहले आपकी कांस्टिट्यूएंसी में जो रोड हम मंजूर करते है, उसका 80 परसेंट लैण्ड एक्वॉयर किये बिना हम अपॉइंटमेंट डेट नहीं देते हैं । आप मेरे पास आते हैं, मैं भी पीछे पड़ता हूं, लेकिन काम नहीं हो पाता । यह कठोर नियम इसलिए बनाया है, क्योंकि पुरानी सरकार से जब मैंने चार्ज लिया तो करीब 3 लाख 85 हज़ार करोड़ रुपये के 403 प्रोजेक्ट्स बंद पड़े हुए थे । सारा काम बंद पड़ा हुआ था । बैंक्स ने अकाउंट्स सीज़ कर दिये थे, कुछ सदस्य कॉन्ट्रैक्टर्स भी हैं, उनको पता है । …(व्यवधान) इसमें हमारे सम्माननीय सदस्यों का दोष नहीं है, ये हज़ारों-करोड़ों रुपयों की प्रॉब्लम्स में फंसे हुए थे । …(व्यवधान)
स्पीकर महोदय, मुझे इस बात की खुशी है कि हमने 95 परसेंट प्रॉब्लम्स रिज़ॉल्व कीं और भारतीय बैंक्स को तीन लाख करोड़ रुपये के एनपीए से हमारे विभाग ने बचाया । …(व्यवधान) सर, अब ये प्रोजेक्ट्स चलने लगे हैं । …(व्यवधान) आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के बहुत से लोग कॉन्ट्रैक्टर्स हैं, उनको इस बात का पता है । …(व्यवधान) मैं हर्ष से एक बात और कहूंगा । इनके 17 लाख करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट्स के सब काम हुए, लेकिन इस सरकार की यह विशेषता रही कि सरकार पर कोई एक पैसे के करप्शन का आरोप नहीं लगा सकता, सरकार ने पूरी ट्रांसपेरेंसी के साथ काम किया है । …(व्यवधान) किसी कॉन्ट्रैक्टर को अपने वर्क-ऑर्डर के लिए ऑफिस में नहीं आना पड़ा, एक रुपये का करप्शन नहीं हुआ । एक बात ज़रूर है कि अगर उसने ठीक काम नहीं किया तो उसके ऊपर लाठी चली है और गालियां पड़ी हैं । …(व्यवधान)
These are the assets of our country. We are not going to tolerate any type of bad work. We are very much committed to that. मैं भारतमाला योजना के बारे में एक बात कहना चाहूंगा, जिसका उल्लेख माननीय प्रोफेसर साहब कर रहे हैं । यह थोड़ा सा फाइनेंशियल सब्जेक्ट है, इसलिए मैं अनुरोध करूंगा कि आप लोग भी मुझे सुझाव दीजिए । हमारी टोल से इनकम दस हज़ार करोड़ रुपये है । हम पहले बीओटी, बिल्ट, ऑपरेट एंड ट्रांसफर में प्रोजेक्ट बनाते थे, लेकिन मैं जब मंत्री बना तो बीओटी में काम करने वाले सब कांट्रैक्टर्स कोलैप्स हो गए, खत्म हो गए थे ।
प्रो. सौगत राय : वे भाग गए थे? …(व्यवधान)
श्री नितिन जयराम गडकरी : सर, वे भागे नहीं थे, उनका दिवाला पिट चुका था । …(व्यवधान) प्रोफेसर साहब आपने अपने कल के भाषण में जिस बात का उल्लेख किया, आप अन्यथा मत लीजिएगा, आपने बंगाल के हाइवे के बारे में कहा था, संजय मित्रा जी चीफ सेक्रेट्री थे, जो मेरे डिपार्टमेंट में सेक्रेट्री बने । वहां अतिक्रमण हटाना था, हाइवे का काम करना था । मैंने खुद कोलकाता में दो बार मीटिंग्स कीं । मैंने एक बार मुख्य मंत्री के साथ भी मीटिंग की, उनका भी दोष नहीं था, क्योंकि वहां पूरी तरह अतिक्रमण था । आखिर तंग आकर - आप जिस प्रोजेक्ट का उल्लेख कर रहे थे - हमने वह प्रोजेक्ट स्टेट पीडब्ल्यूडी को दे दिया कि वह अतिक्रमण हटाए । वह अभी तक नहीं हो पाया है । अगर रोड पर लैण्ड एक्वायर नहीं होगा, अतिक्रमण नहीं हटेगा तो हम क्या आसमान में रोड बनाएंगे?
मैं सभी सदस्यों से प्रार्थना करूंगा कि आप सब मेरे पास आने से पहले अपने डिस्ट्रिक्ट कलैक्टर और एनएचएआई के पीडी के साथ मीटिंग बुलाइए । मीटिंग में आप उनसे पूछिए कि रोड के काम के लिए कितना लैण्ड एक्यूज़िशन हुआ, यूटिलिटी शिफ्टिंग का क्या काम हुआ, फॉरेस्ट एनवायर्नमेंट क्लियरेंस हुआ या नहीं हुआ, ये सारे स्टेट के काम होते हैं । ये तीनों बातें आपके लेवल पर कर के जब 80 परसेंट लैण्ड एक्वायर होगी और क्लियरेंसेज़ मिलेंगे, तब आप मेरे पास आइए, मैं तुरंत उसको क्लियर कर दूंगा । मेरी प्रॉब्लम यह है कि स्टेट गवर्नमेंट्स सहयोग करती हैं, लेकिन इसमें देरी होती है । इसलिए हमारे सभी एमपीज़ अपनी-अपनी कांस्टिट्यूएंसीज़ में मीटिंग करें । मैं तुरंत ऑर्डर इश्यू कर देता हूं कि आपकी मीटिंग में हमारे पीडी आएंगे । आप अपने डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर को भी मीटिंग में बुलाइए, लैण्ड एक्यूज़िशन ऑफिसर को बुलाइए और यह जानिए कि क्या हुआ, काम क्यों नहीं हुआ । अगर आपने वह फेज़ पूरा कर दिया तो आप मेरे पास आइए । मैं तुरंत टेंडर निकालकर वर्क-ऑर्डर इश्यू करने का काम कर दूंगा । इसमें कई दिक्कतें और प्रॉबलम्स हैं ।
अब फाइनेंस की बात है । बीओटी - बिल्ट, ऑपरेट एंड ट्रांसफर में ऐसा होता है कि पूरा वर्क प्राइवेट कॉन्ट्रैक्टर करता है, पूरी रोड बनाता है और टेंडर में लिखता है कि वह पंद्रह साल आठ महीने तक टोल लेगा, फिर दूसरा बोलता है कि वह चौदह साल तीन महीने टोल लेगा । जिसकी ऑफर सबसे अट्रैक्टिव होती है, उसको अवॉर्ड मिलता है । यह जो टोल लगता है, आप चाहे मुझे अच्छा कहें या बुरा कहें, इस टोल का जन्मदाता मैं हूं । इसलिए मैं इसके लिए गाली भी खाता हूं । …(व्यवधान) आप मेरी बात को समझ लीजिए । …(व्यवधान) मैं जब मुंबई में मंत्री थी तो मैंने एनएचएआई का महाराष्ट्र का पहला प्रोजेक्ट ठाणे-भिवंडी बाईपास टोल रोड बनाया था । जो लोग मुंबई और ठाणे के बीच में रहते हैं, उनको पता होगा कि कितना ट्रैफिक जाम था । यह मुंबई-नासिक रोड का पार्ट है । उसके बाद मुंबई-पुणे एक्सप्रेस हाइवे, वर्ली-बांद्रा सी लिंक प्रोजेक्ट, 55 फ्लाईओवर्स, ये सब बने । ये सब प्राइवेट इनवेस्टमेंट से हुआ । यह खुशी से नहीं हुआ । हमारी सरकार के पास पैसे नहीं थे । मुंबई में 55 पुलों का काम करने के लिए पैसे कहां से लाएंगे । इस पर मैंने कहा मैं पहला काम महाराष्ट्र के 16 हज़ार गांवों के लिए रोड बनाने के लिए पूरा बजट दे दूंगा । मैं मुंबई शहर के लिए पैसे नहीं दूंगा । मुंबई शहर में जब हमने फ्लाईओवर्स बनाए तो उन पर टोल लगाया । मुंबई-पुणे एक्सप्रेस हाइवे बनाया तो टोल लगाया । आप मुझे बताइए कि मुंबई-पुणे के बीच जाने के लिए, आप सबको याद होगा कि 8, 9 से 11 घंटे तक लगते थे, अब आप दो घंटे में आते हैं । तटकरे जी यहां बैठे हैं, सुप्रिया जी भी बैठी हैं । आप कितने घंटे में आती हैं? दो घंटे में आती हैं । उस समय सुप्रिया जी छोटी होंगी, तब पवार साहब थे । उस समय मुंबई-पुणे असेंबली में हर समय डिस्कशन होता था कि यह रोड कब बनेगी । हमारे पास उसके लिए पैसे नहीं थे ।
अब हमने कर्जा निकालकर पैसे निकाले तो टोल लगाया । मैं पूछता हूं कि जब आप 11 घण्टे के बजाय 2 घण्टे में आएंगे तो आपका डीजल बचेगा और टाइम भी बचेगा । अगर इस सबकी सेविंग होगी तो आप टोल भी दीजिए । आप कुछ भी कहते रहिए, सरकार के पास पैसे नहीं है । If you want good services, you have to pay for them. मैं परसों ताज मानसिंह में एक कार्यक्रम में गया था और मुझे बोला गया कि आप टोल रद्द कीजिए । मैंने कहा आपने मानसिंह में कार्यक्रम क्यों रखा है? अगर आपने मानसिंह में कार्यक्रम रखा है तो आपको पैसा देना पड़ेगा । अगर फोकट में कार्यक्रम रखते तो रामलीला मैदान में बैठ जाते । आपको किसने मना किया है? एक पण्डाल डालो और वहां एक लाउड स्पीकर लगाकर वहां बैठ जाइए । जब आपको अच्छी जगह एयरकण्डीशन में बैठना है, अच्छी चेयर चाहिए तो पैसे देने पड़ेंगे । यह काम फोकट में कैसे होगा? सरकार के पास पैसे नहीं है, चाहे सरकार किसी भी पार्टी की हो । यहां सोशलिस्ट, कम्युनिस्ट और कैपिटलिस्ट तीनों थिंकिंग के आदरणीय मुलायम सिंह जी बैठे हैं । मैं जॉर्ज फर्नांडिस को अपने जीवन का आइकन मानता हूं । मैं डॉ. लोहिया जी के पैर पड़ चुका हूं । मैं यह मानता हूं कि यह सच्चाई भी है और चीन तथा रशिया ने भी कम्युनिज्म को छोड़ दिया है । वे लिबरल इकॉनोमी की तरफ चले गए, क्योंकि किसी को दोष नहीं देना है । वे सब बड़े लोग थे । This is the practical approach. जो दे सकता है, उससे लीजिए । जो गरीब लोग हैं और विलेज कनेक्टिविटी प्रधान मंत्री ग्राम सड़क योजना आदि पर टोल नहीं लगता है तो वहां ज्यादा खर्च करके गरीबों को न्याय दीजिए । अगर बड़े शहर यानी दिल्ली के रिंग रोड़ को मैं 15,000 करोड़ रुपये से अपने बजट से बनाऊंगा तो हिमाचल प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, त्रिपुरा आदि में जहां टोल नहीं मिलता है, वहां रोड बनाने के लिए पैसा कहां से आएगा? अगर मैं नॉर्थ ईस्ट में 2 लाख करोड़ रुपये खर्च करना चाहता हूं तो मैं दिल्ली, मुम्बई, सूरत, अहमदाबाद, कोलकाता में टोल लगाऊंगा । सिक्किम में टोल नहीं लगता है । वहां पर वायेबिलिटी नहीं है । प्रोफेसर साहब, इसको इण्टरनल रेट ऑफ रिटर्न कहते हैं । कॉस्ट ऑफ प्रोजेक्ट प्लस इण्ट्रेस्ट कॉस्ट प्लस उसके रिटर्न में आई.आर.आर. निकाला जाता है । आई.आर.आर. तमिलनाडु में अच्छा है, जहां ट्रैफिक डेंसिटी ज्यादा है । आई.आर.आर. गुजरात में अच्छा है, महाराष्ट्र में अच्छा है, तेलंगाना में अच्छा है, आन्ध्र प्रदेश में अच्छा है, पंजाब और हरियाणा में अच्छा, दिल्ली में अच्छा है, राजस्थान में अच्छा है, लेकिन उत्तर प्रदेश और बिहार में अच्छा नहीं है, क्योंकि वहां की प्रोग्रेस अच्छी नहीं है । मैंने पांच साल में सबसे ज्यादा पैसा उत्तर प्रदेश को दिया है ।
सर, हमारा काम है जो राज्य कमजोर हैं, उनको ज्यादा पैसा देना और जो राज्य धनवान हैं, वहां से पैसा इकट्ठा करना है । इसमें गलत क्या है? मुलायम सिंह जी कहेंगे कि समाजवादी थिंकिंग तो यही है । जो दे सकता है, उससे लीजिए और जो गरीब है, उसको दीजिए । आप एक बात बिल्कुल समझ लीजिए और मैं बहुत साफ बोलता हूं और कभी-कभी मुझे इससे तकलीफ भी होती है कि टोल जिन्दगी भर रद्द नहीं हो सकता है । उसमें कम-ज्यादा या कंसेशन हो सकता है । हम लोग 22 ग्रीन हाइवे बना रहे हैं । इससे डिस्टेंस कम हो रहा है । आप कटरा से दिल्ली साढ़े चार घण्टे या पांच घण्टे में जाएंगे, हम यह सपना देख रहे हैं । हैदराबाद से बंगलुरु, बंगलुरु से चेन्नई हाइवे का लैण्ड एक्विजिशन पूरा हो गया है । अमरावती से हैदराबाद हाइवे आदि ऐसे बड़े-बड़े रोड बनाए जा रहे हैं तो इनके लैण्ड एक्विजिशन के लिए पैसा कहां से आएगा? निर्मला जी ने हमें 83,000 करोड़ रुपये का बजट दिया है । इसमें उन्होंने 5,000 हजार करोड़ रुपये बढ़ाकर दिया है । लेकिन हम 8 लाख करोड़ या 10 लाख करोड़ का काम कर रहे हैं । ये पैसा हम लैण्ड एक्विजिशन में खर्च करते हैं । स्टेट में जो काम होते हैं, हम कुछ पैसा उनके लिए खर्च करते हैं ।
हमारा तीसरा मॉडल बी.ओ.टी. का था । आज देश में वह स्थिति नहीं है, फिर भी हम 3 हजार किलोमीटर बी.ओ.टी. मॉडल में निकालने की कोशिश कर रहे हैं । हमने हाइब्रिड एन्युटी मॉडल (HAM) निकाला । हैम का मतलब है कि हम लैण्ड एक्वीजिशन करेंगे, यूटिलिटी शिफ्टिंग करेंगे, उसके बाद 40 परसेंट ग्राण्ट इन एड देंगे । हम टोल भी कलेक्ट करेंगे और एन्युटी बेसिस पर जो कॉन्ट्रैक्टर, इन्वेस्टर, 60 परसेंट लाएगा, उसमें से 30 परसेंट उसका होगा तथा 70 परसेंट बैंक कर्ज देगी । वह पैसा एन्युटी बेसिस पर 10 साल,12 साल, 13 साल, 15 साल इण्ट्रैस्ट और उसके प्रॉफिट के साथ, उसमें 11-12 परसेंट इण्ट्रैस्ट प्लस 3 परसेंट प्रॉफिट करके हम 12 साल में बैंक को वापस कर देंगे ।
अध्यक्ष जी, मैं सदन में यह कहना चाहूंगा कि 2 लाख करोड़ के प्रोजेक्ट्स हैम के अंतर्गत मंजूर हो गए हैं । प्रोफेसर साहब, आश्चर्य की बात यह है कि जब मैं वाटर रिर्सोसेज़ मिनिस्टर था तो मुझे लगा कि मथुरा में हाइब्रिड एन्युटी लानी चाहिए । मुझे लगा नहीं था कि यह सक्सेसफुल रहेगा । वाटर रिर्सोसेज़ मिनिस्ट्री में हाइब्रिड एन्युटी में 17 प्रोजेक्ट्स हो रहे हैं । मथुरा का प्रोजेक्ट त्रिवेणी इंजीनियरिंग कंपनी ने लिया है । वह 80 एम.एल.डी. गन्दा पानी साफ करेगी और इण्डियन ऑयल की रिफायनरी को देगी । वह रिफायनरी इसके लिए 20 करोड़ रुपये साल की रॉयल्टी देगी, यानी गन्दा पानी बेचकर जो पैसा आएगा, वह मेन्टेनेंस में खर्च होगा । उसमें भी हाइब्रिड एन्युटी सक्सेसफुल हुई । हमने उसमें दो लाख करोड़ के प्रोजेक्ट्स किए । यह हाइब्रिड एन्युटी दूसरा मार्ग है ।
तीसरा मार्ग है, परसों एक बड़े बैंक के चेयरमैन मेरे पास आए और उन्होंने मुझे 25 हजार करोड़ रुपये का चैक दिया । उन्होंने मुझसे कहा कि सर आपको जितना पैसा चाहिए, मैं देता हूं, लेकिन आप कॉन्ट्रैक्टर को देने के लिए मत कहिए । अभी ऐसी पॉज़िशन नहीं है । परसों मेरे मन में एक आइडिया आया कि 50 प्रोजेक्ट्स को मोनिटाइज कर दीजिए । फोरेन कंट्रीज में टोल मोनिटाइज 30 साल के लिए होता है, लेकिन हमारे इण्डियन बैंकर्स कहते है कि हम 15 साल से ऊपर नहीं करेंगे । मैंने जो 50 प्रोजेक्ट्स पूरे हैं, उनकी यादी निकालकर भेज दी है । वे मुझे 50 हजार करोड़ रुपये 8-10 दिन में दे देंगे । मैंने यह प्रोजेक्ट मोनिटाइज किया है । हमने टी.ओ.टी. मॉडल निकाला । टी.ओ.टी. मॉडल में पहला मॉडल इतना अच्छा हुआ, जो आस्ट्रेलियन कंपनी ने लिया था । टी.ओ.टी. यानी एक बण्डल था । वह बण्डल अच्छा मिला, जिसमें हमें 6,400 करोड़ रुपये मिलने थे, उसमें हमें 9,400 करोड़ रुपये मिले । वह राशि ओवर मिली, यानी 150 परसेंट मिली । हमने उसको मोनिटाइज किया था । यह टी.ओ.टी. मॉडल था । टी.ओ.टी. मॉडल होता है, जैसे 7-8 प्रोजेक्ट्स का एक बण्डल बनाते हैं । उसमें पूरे बण्डल के रोड्स मेंटेनेंस करने की उसकी जिम्मेदारी है, टोल कलेक्ट करना उसकी जिम्मेदारी होती है । उसको 15 साल का अधिकार मिल जाता है । इसके बदले वह उसको पूरी तरह स्क्रूटिनाइज करके मोनिटाइज करता है और हमें एडवांस में एन.पी.ए. वैल्यू निकालकर देता है । That is TOT Model. इसमें एक गड़बड़ हो गई । जब दूसरा मॉडल निकाला गया तो उसमें बंगाल के 4 प्रोजेक्ट डाल दिए और बाहर के भी कुछ प्रोजेक्ट्स डाल दिए, इसे एक भी आदमी लेने नहीं आया । मैंने उनको कहा कि होशियार लड़कों की एक क्लास खोलिए, सेकण्ड क्लास वालों की अलग क्लास खेलिए और जो फेल हुए हैं, उनको अच्छी ट्रेनिंग देने के लिए अलग से क्लास लगाइए । सबको मिक्स मत कीजिए । हमने दूसरे टी.ओ.टी. मॉडल में कुछ चेंजेज किए । उसके बाद हम मसाला बॉण्ड्स में गए । मैं सिंगापुर और लंदन गया था । लंदन एक्सजेंच में हमें 5000 करोड़ रुपये मिले । हमें फाइनेंस मिनिस्ट्री ने 70,000 करोड़ रुपये के बॉण्ड्स खड़े करने की अनुमति दी है । इसके बाद एन.आई.एफ. है । आपको मालूम होगा कि वर्ष 2014 के बजट में जेटली जी ने इसका ऐलान किया था । कल हमने उनसे एम.ओ.यू. साइन किया है । वह हमको 40 हजार करोड़ रुपये और 60 हजार करोड़ रुपये दिल्ली तथा मुम्बई के लिए देने को तैयार हैं । हमने स्वाभाविक रूप से पैसा खड़ा करने का इनोवेटिव मैथड तैयार किया है । हम एसेट्स को मोनिटाइज कर रहे हैं । यह और सरकार का बजट दोनों जोड़कर काम करते हैं । जो प्रोजेक्ट पूरा होता है, उसको फिर से मोनिटाइज करते हैं और दूसरे प्रोजेक्ट में डालते हैं । उसको पूरा करने के बाद तीसरे प्रोजेक्ट में डालते हैं । ऐसा करते हुए हम बिहार, यू.पी., गुजरात, महाराष्ट्र और आन्ध्र प्रदेश में प्रोजेक्ट कर रहे हैं । आन्ध्र प्रदेश और गुजरात के प्रोजेक्ट्स ऐसे हैं, जब हम वहां जाते हैं तो उनको लेने वाला 300-400 करोड़ रुपये एडवांस देता है । जब हम यू.पी. और बिहार जाते हैं, तो वहां स्वाभाविक रूप से ट्रैफिक डेंसिटी और ग्रोथ रेट कम है । इसमें फॉरेन फण्ड भी आ रहा है । जो प्रोजेक्ट मोनिटाइज हुए, उनमें ऑस्ट्रेलियन कंपनी आ रही है, यू.के. के फण्ड्स आ रहे हैं, अमेरिकन फण्ड्स आ रहे हैं, पेंशन फण्ड्स आ रहे हैं, सिंगापुर की कंपनी आई, हांगकांग की कंपनी भी आई । मैं थोड़ा नेशनलिज्म फीलिंग्स का हूं । मैंने अपने विभाग को कहा कि फॉरेन वालों को क्यों लाते हो? हमारा गरीब पत्रकार होगा, गरीब टीचर होगा, गरीब कुली होगा, छोटा आदमी होगा वे बैंक में जाते है तो उनको 5.5-6 परसेंट इंट्रैस्ट मिलता है ।
आप उसको 8 परसेंट इंटरेस्ट दीजिए । उसको बोलिए कि मंथली चाहिए, तो मंथली इंटरेस्ट, वीकली चाहिए तो वीकली इंटरेस्ट, डेली चाहिए तो डेली इंटरेस्ट, ईयरली चाहिए तो ईयरली इंटरेस्ट मिलेगा । हम टोल का पैसे लेंगे तो उसको देंगे । गरीब आदमी के पैसे से टोल क्यों न बनाएं, काहे के लिए फॉरेन इन्वेस्टमेंट? उसे बाद में लाएंगे । पहले हम अपने लोगों को यह चांस देंगे, तो यह भी मॉडल आ गया । अगर आपको मैं एक बात बताऊं तो आपको आश्चर्य होगा । जब मैं शिपिंग मिनिस्टर था तो कोचीन शिप यार्ड के लिए मैं मुंबई स्टॉक एक्सचेंज गया था । जब साढ़े नौ बजे पहुंचा तो पूरा इंडेक्स 150 प्वाइंट्स से डाउन हो गया था । मेरे एडवाइज़र, इन्कम टैक्स कमिश्नर मेरे पी.एस. थे । उन्होंने बोला कि सर, आज का दिन खराब है, आज पोस्टपोन कर दीजिए । मेरे स्वभाव में एक खोट है, मैने कहा कि एक बार बोला, होगा तो होगा, जो होगा देखा जाएगा, हम जाएंगे । हम गए तो मुझे मुंबई स्टॉक एक्सचेंज के बुल के साथ मेरा फोटो निकालने के लिए बोला गया, तो मैं डर गया । मैंने बोला कि आज तो यह बुल अपने को लम्बा करेगा । मैं साढ़े नौ बजे ऊपर गया, 10:00 बजे मैंने बेल बजाई । प्रोफेसर साहब, यह भारत सरकार की रेपोटेशन है कि 1600 करोड़ रुपये कोचीन शिप यार्ड के लिए मुझे चाहिए थे और 10 बजकर 36 मिनट पर 1600 करोड़ रुपये की बजाय 1 लाख 26 हजार करोड़ मिले, मतलब ओवर सब्स्क्राइब्ड । फिर भी, कोचीन शिपयार्ड की तुलना में एनएचएआई को ट्रिपल ए रेटिंग वर्ल्ड कंपनीज़ से मिली है । इसकी पूरे वर्ल्ड में रिकगनिशन है ।
अध्यक्ष महोदय, हार्वर्ड यूनिवर्सिटी ने एनएचएआई पर भाषण देने के लिए मुझे निमंत्रित किया है । इसकी अमरीका में स्टडी हो रही है, इसका मतलब यह एक सक्सेसफुल मॉडल है । यह स्व. अटल बिहारी वाजपेयी जी की सरकार में शुरू हुआ था । हम धनवान देश नहीं हैं । जो गाड़ी खरीदता है, उससे टोल लेना चाहिए । हम स्कूटर वाले से, ट्रैक्टर वाले से टोल नहीं लेते हैं । मैं भी किसान हूं, मैंने बोला है कि गन्ना रखने वाले ट्रैक्टर से टोल नहीं लेना है, किसान की ट्रैक्टर में अनाज होगा, उससे टोल नहीं लेना है, ऑटो रिक्शा से टोल नहीं लेना है । हम फोर व्हीलर वाले से, ट्रेलर से, ट्रक वाले से टोल टैक्स लेते हैं । इस पर अभी भी विचार चल रहा है । बहुत सारे सुझाव आए हैं । यह निर्णय स्वाभाविक रूप से माननीय प्रधान मंत्री जी, वित्त मंत्री जी के मार्गदर्शन में होगा । जो स्कूल बसें हैं, उनको टोल देना पड़ता हैं, स्टेट ट्रांसपोर्ट की बसें हैं, उनको टोल देना पड़ता है और स्टेट ट्रांसपोर्ट की हालत कैसी है, आपको पता है । मैं आज भी भूल नहीं पाया हूं कि एक बार मैं अपनी गाड़ी के पास खड़ा था, जिसमें पेट्रोल भरवाया जा रहा था । वहां एक छोटा सा बच्चा था, तभी एक स्टेट ट्रांसपोर्ट वाली गाड़ी आई । उसने जोर से हाथ उठाकर कहा कि चलो जाओ यहां से । मुझे काफी आश्चर्य हुआ । मैंने उससे कहा कि तुम्हारे पास डीज़ल है, फिर उसको क्यों भगा रहे हो? उसने कहा कि साहब, इनकी गाड़ी में डीज़ल भरने के बाद ये पैसे ही नहीं देते हैं ।
अध्यक्ष महोदय, स्टेट ट्रांसपोर्ट की गाड़ियों की ऐसी स्थिति है, इसलिए क्या उनको कंसेशन दिया जा सकता है? भविष्य में इस पर विचार होगा । एम.पीज़ के लिए फासटैग की सुविधा है । एक अड़चन सही है, जो आपने इसमें कही है कि टोल नाके पर आपको रुकना पड़ता है । मैंने उनको बोला है कि अगर आप टोल लेते हैं तो रोड अच्छी बनाइए, नहीं तो काँट्रैक्टर पर पैनल्टी लगाइए । आप गड्ढे भी रखेंगे और टोल भी वसूलेंगे, तो यह नहीं चलेगा । जो टोल देने वाली बात है, जैसे कि जयपुर वाली एक रोड है, जहां बहुत लाइन लगती है, जो दिल्ली से नजदीक है और कठपुतली से आगे है । वहां बहुत तकलीफ होती है । आज आपके इस डिस्कशन के पहले ही मैंने अपने डिपार्टमेंट को कहा कि बहुत हो गया । 4महीनों के अंदर हमारे पूरे टोल फासटैग में कनवर्ट होंगे और एक भी व्यक्ति टोल नाके पर नहीं रुकेगा । अब यह समस्या खत्म हो जाएगी । अभी तक हमने 58 लाख फासटैग दिए हैं । मैं आपको भी कहूंगा कि आप अपनी गाड़ी में वह स्टिकर लगवा लें, आपको तो टोल देना नहीं है । इसीलिए अब 4 महीने के अंदर हर आदमी को फासटैग का स्टिकर खरीदना होगा । यह नई गाड़ियों में लगकर आता है और जो यह स्टिकर 4 महीने में नहीं लेगा, उसकी गाड़ी टोल पार करके नहीं जा सकेगी । यह मैनडेटरी हो जाएगा । अभी यह दिल्ली के हाईवे रिंग रोड पर है कि आप जहां से जाते हैं, और जहां से बाहर निकलते हैं, वहां पर नोटिंग होती है और मोबाइल फोन जैसा यह चार्ज होता है । एक और सिस्टम है कि आपके मोबाइल फोन से आप टोल नाका आने से पहले फोन करिए और बात करिए और टोल नाके का टोल ट्रांसफर कर दीजिए, आपकी गाड़ी का नंबर आएगा, बैरियर खड़ा हो जाएगा और आप आगे चले जाएंगे । यह भी सिस्टम है । जो भी सोफिस्टिकेटेड, बेस्ट सिस्टम्स या टेक्नोलॉजीज़ हैं, उनका उपयोग करके इसमें करेंगे ।
सम्माननीय सदस्यों को सबसे महत्वपूर्ण चीज मैं बताना चाहूंगा कि बहुत से लोगों ने सड़क सुरक्षा को लेकर बहुत सी बातें कही हैं ।
Hon. Members have also raised their concerns about road safety. They also suggested to construct safe roads. I would like to inform the hon. Members that we have adopted an approach of project preparation where efforts are made to eliminate possibilities of accidents. मैं इस बारे में एक बात साफ बताना चाहता हूं कि मैं अधिकारियों को चेता चुका हूं । ये लोग जो मर रहे हैं, उसके लिए हमारे रोड जिम्मेदार है, रोड इंजीनियरिंग जिम्मेदार है । इनकी डीपीआर डिफेक्टिव है । मैंने उनको कहा है कि इसके बाद अगर कोई मरेगा तो आाप पर क्रिमिनल केस होगा और आपको पीडीपी जाना पड़ेगा । पहली बार हमने 786 ब्लैक स्पॉट आइडेंटिफाई किए हैं, उसमें से लगभग 300 पूरे हो चुके हैं । आपकी कंसर्न थी कि बहुत कम पैसे हैं । आज 11 बजे वर्ल्ड बैंक के साथ दिल्ली में मीटिंग है । …(व्यवधान) सर, उसके लिए हमने दस टन के ट्रक को साढ़े 12 टन तक अलाऊ कर दिया है ताकि कोई पैसे न ले ।
हमने 15 हजार करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट बनाया है और उसे एडीबी और वर्ल्ड बैंक को दिया है । फाइनैंस मिनिस्ट्री ने प्रिंसीपली सपोर्ट किया है । केवल भारत सरकार के ही नहीं बल्कि राज्यों के रोड के ब्लैक स्पॉट को इम्प्रूव करने के लिए पैसा खर्च करेंगे । मैं कल कह चुका हूं कि तमिलनाडु ऐसा पहला स्टेट है, जिसने 15 परसेंट एक्सीडेंटल डेथ कम की हैं । उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा है । मैं आपसे अनुरोध करूंगा कि आपकी अध्यक्षता में, कुछ माननीय सदस्य नये आए हैं, आप मेरे डिपार्टमेंट से फॉलोअप कीजिए । आपकी अध्यक्षता में अपघात निवारण समिति आपके क्षेत्र में फोर्म की गई है जो एक्सीडेंट्स को रोकने के लिए है । आपको अधिकार दिया गया है और उसमें जिलाधिकारी भी है । आप एक्सीडेंट स्पॉट्स पर जाइए, विज़िट कीजिए कि कौन जिम्मेदार है, उसकी रिपोर्ट तैयार कीजिए । कार्पोरेशन जिम्मेदार होगा, स्टेट गवर्नमेंट या भारत सरकार होगी, एक रिपोर्ट भेजिए कि क्यों नहीं हुआ, उसके लिए आपको अधिकार दिए गए हैं । आप उसकी इनक्वायरी कर सकते हैं । आप इस कमेटी को आप फोर्म कर लीजिए ।
मुझे एक बात स्वीकारते हुए दर्द हो रहा है कि हमारे डिपार्टमेंट की हर चीज सक्सैसफुल हो रही है । मैंने कहा था कि पचास परसेंट एक्सीडेंट्स कम करेंगे और मैं 4-4.5 परसेंट कम कर चुका हूं । रोड सेफ्टी के बिल के बारे में मैंने कल भी कहा था कि मैं तैयार हूं । रोड सेफ्टी बिल को 18 राज्यों के ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर्स, जिसमें आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल, कांग्रेस राज्य कर्नाटक के उस समय के ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर थे । 18 ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर्स ने बिल तैयार करके मंजूरी दी थी । उसके बाद उसे राज्य सभा की सिलेक्ट कमेटी के पास भेजा गया, उसने क्लीयर किया । उसके बाद लोक सभा की स्टैंडिंग कमेटी ने क्लीयर किया । उस समय अनंत कुमार जी थे, मैंने उनसे कहा कि आप इसे देखिए, उन्होंने कहा कि लोग मानते नहीं हैं, फिर उसने भी क्लीयर किया । अब दोनों कमेटियों ने क्लीयर किया, 18 राज्यों के मंत्रियों ने क्लीयर किया तो क्या अब यह करप्शन कम नहीं होना चाहिए? फारुख साहब सही कह रहे हैं कि हमें बाकी बातों में भी सुधार करना है, जिसमें रोड इंजीनियरिंग, ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग, इंटेलिजेंट ट्रैफिक सिस्टम और हमारा एडमिनिस्ट्रेटिव रोल, जिसमें लाइसेंस इत्यादि आते हैं ।
महोदय, मैं सम्माननीय सदन को बताना चाहता हूं कि देश में 25 लाख ड्राइवर्स की कमी है । मैंने ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर की एक योजना बनायी है । मैं सभी सांसदों को कहता हूं कि आपके निर्वाचन क्षेत्र में एक ड्राइविंग सेंटर देने के लिए मैं तैयार हूं । खास तौर से आपका जो ट्राइबल एरिया और बैकवर्ड एरिया है, जहां पढ़े-लिखे लड़के कम हैं, वहां के लिए आप कीजिए । मुम्बई, कोलकता, चेन्नई और बैंगलुरू जैसे शहरों के लिए जरूरी नहीं है । लेकिन जो पिछड़ा हुआ क्षेत्र है, जहां रोजगार नहीं है वहां के लिए आप करेंगे तो बहुत अच्छा होगा और ड्राइवर्स की कमी दूर होगी ।
दूसरी बात, ड्राइविंग लाइसेंस की है । हमने वाहन सॉफ्टवेयर बनाया है और सारा डेटा हमारे पास आ गया है । नेम प्लेट्स का भी हो गया है अब सब पता चल जाता है । लेकिन समस्या यह है कि एक व्यक्ति तीन-तीन, चार-चार लाइसेंस लेता है । अमेरिका और यूके में आप जाएंगे तो ड्राइविंग लाइसेंस नहीं मिलता है । बहुत कठिन है । लेकिन हमारे यहां तो लोग आरटीओ ऑफिस नहीं जाते हैं, परीक्षा नहीं देते हैं और लाइसेंस लेकर आ जाते हैं ।
आप मुझे बताइए कि क्या इसी प्रकार से लाइसेंस मिलते रहेंगे? ट्रक का जो ड्राइवर होता है, वह पहले हेल्पर होता है और सामान इत्यादि उठाता है । जब ड्राइवर चलता है तो वह भी बैठ जाता है और ड्राइविंग करता है और ड्राइवर बन जाता है । रात को वह भी चलाता है । आपने सही कहा कि रात को ढाबे के बाजू में रोड पर गाड़ियां खड़ी कर देते हैं । मैं इसका भुक्तभोगी हूं । हमने तय किया है कि अगर आप नये बिल को मंजूरी देते हैं तो हमें अधिकार मिलेंगे । आज हमारे पास अधिकार ही नहीं हैं । अगर अधिकार मिलेंगे तो हम कुछ कार्रवाई कर पाएंगे और इससे लोग जागरुक होंगे ।
अब तो इनोवेशन यहां तक हो चुका है कि अगर कोई दारू पीकर गाड़ी में बैठता है तो उसकी स्मैल से गाड़ी चालू नहीं होती है । बेल्ट नहीं लगाता है तो पुलिस कमिश्नर के ऑफिस में बेल बजती है कि इस गाड़ी का यह नंबर है और इसने बेल्ट नहीं लगाया है । उसके पास तुरन्त चालान पहुंच जाता है । हमें कुछ बातें करनी पड़ेंगी । बहुत से नियमों के बारे में उदासीनता है, नॉन सीरियसनेस है, उसके लिए हमें कहीं न कहीं कठोर होना होगा । अगर हम नहीं होंगे तो लोग मरते रहेंगे । मुझे बताइए कि हमारे देश में डेढ़ लाख लोग साल में मर रहे हैं । क्या वे किसी लड़ाई में मरते हैं, क्या वे आतंकवादी हमलों में मरते हैं? …(व्यवधान)
डॉ. फारूख अब्दुल्ला (श्रीनगर): सर, पॉइंट ऑफ ऑर्डर है । मंत्री जी, आप जो बिल ला रहे हैं । I do not think anyone of us has any objection. आप बिल जल्दी लाइए, फिर देखते हैं कौन साथ है और कौन नहीं?
श्री नितिन जयराम गडकरी : फारूख साहब, आपने बिलकुल सही बात कही है । मैंने कल ही प्रज़ेंट किया है । आपकी बात से मैं सहमत हूं । मैं एक-डेढ़ साल नहीं कर सका, उस इतिहास को भूल जाता हूं । मुझे लगता है कि नई संसद में आप लोग सहयोग करेंगे, मैं आपको बहुत-बहुत धन्यवाद देता हूं । …(व्यवधान)
प्रो. सौगत राय: गडकरी जी, पिछले सात सालों में यमुना एक्सप्रेस वे पर सात सौ लोग एक्सीडेंट्स में मर चुके हैं …(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : माननीय मंत्री जी, माननीय सदस्य का अभी जवाब मत दीजिएगा, जब क्लैरिफिकेशन्स होंगी, तब जवाब दीजिएगा ।
श्री नितिन जयराम गडकरी : हमने टायर्स के लिए स्टैंर्ड्डस तय नहीं किए हैं । अमेरिका में टायर्स में सीलिका एड होती है । हम टायर में हवा भरते हैं, जबकि नाइट्रोजन भरनी चाहिए क्योंकि जब हवा गर्म हो जाती है तो टायर फट जाता है । छोटी-छोटी बातों को करने के लिए उपाय और टेक्नोलॉजी दोनों हैं । अगर लोग नहीं मानते हैं तो लोगों की जान बचाने के लिए इनफोर्समेंट करना होगा । आप बिलकुल सही कह रहे हैं । इसलिए आप जो भी बताएंगे, उसका हम जरूर उपयोग करेंगे ।
महोदय, मुरलीधरन जी को मैं बताना चाहूंगा कि सड़क दुर्घटना का मुआवजा मोटर व्हीकल एक्ट के अंतर्गत दिया जाता है । इसकी प्रक्रिया बहुत जटिल थी और मुआवजा भी बहुत कम था । इस कारण हर पीड़ित को अदालतों में जाकर इंतजार करना पड़ता था । नये बिल में यह प्रोविजन है कि सभी लोगों को कम से कम तीन महीने में पांच लाख रुपये मिलेंगे । यह उनके भलाई की बात है । अगर किसी व्यक्ति को अधिक मुआवजा चाहिए तो वह अदालत जा सकता है । इसी के साथ गोल्डन ऑवर में कैशलेस ट्रीटमेंट का भी प्रावधान किया गया है ।
सम्माननीय सदस्य डॉ. जी. रणजीत रेड्डी, पिनाकी मिश्रा जी और दानिश अली जी ने कहा कि सड़क सुरक्षा के लिए केवल दो सौ करोड़ रुपये दिए हैं । एनएचएआई अभी तक इस पर तीन हजार करोड़ रुपये खर्च कर चुका है और 15000 करोड़ रुपये का वर्ल्ड बैंक और एडीबी के साथ करार किया है । वर्ल्ड बैंक के साथ मेरी 11 बजे मीटिंग है । मेरा भाषण समाप्त होने से पहले ही शायद सूचना आ जाएगी कि वह क्लीयर होने की सम्भावना है । वह पैसा भी हम उसमें देंगे । पैसे की हमारे पास कमी नहीं है । नेशनल हाईवेज़ को सुरक्षा की दृष्टि से आईआरसी स्टैंर्ड्डस का पालन करके ही बनाया है । मल्टीलेटरल एजेंसीज के साथ राज्यों में सड़क सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए हमने प्रोग्राम की रूपरेखा बनाई है ।
सर, मुझे बताते हुए खुशी हो रही है कि एडीबी ने सात हजार करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट को इन-प्रिंसीपल आज अप्रूवल दे दिया है ।
अगले कुछ दिनों में वर्ल्ड बैंक का भी क्लीयरेंस मिल जाएगा । आपके राज्यों में भी इसका काम हो जाएगा । कुरियाकोस और दामोर जी ने ट्रॉमा सेंटर की बात कही है । मेरे पास ट्रॉमा सेंटर नहीं आता है । वह हेल्थ मिनिस्ट्री में आता है, लेकिन मैं आपकी बात को उन तक पहुंचाऊंगा । हमने एक बात एम्बुलेंस की कही है । अभी मेरे पास रिकार्ड हैं कि कितनी एम्बुलेंस हैं । हम 203 एम्बुलेंसेज़ पहली बार एक महीने के अंदर दे रहे हैं । इससे पहले 350 एम्बुलेंसेज़ चल रही हैं । उन एम्बुलेंसों में कटिंग्स टूल्स भी हैं । तीन लोग हैं, चार पेशेन्ट्स स्ट्रेचर पर जा सकते हैं और दो लोग बैठ सकते हैं । उसको और ड्राइवर को भी ट्रेनिंग दी गई है कि वह दोनों काम करेंगे । वह स्लाइन भी दे सकता है और बस की कटिंग भी कर सकता है । ऐसी 203 एम्बुलेंसेज़ हम लोग लगा रहे हैं ।
अभी हमने हिमाचल प्रदेश में रोड साइड में क्रैश बैरियर लगाया है । आपका संरक्षण चाहिए, उसको लोगों ने उखाड़कर फेंक दिया और उसके ऊपर अपनी दुकान और टपरी डाल दी है । अब, इसमें थोड़ा-सा सहयोग चाहिए कि कश्मीर, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, मैंने रेट कॉन्ट्रैक्ट करके कहा कि जितना लगता है, उतना लगाइए, लेकिन एक भी बस नीचे नहीं जानी चाहिए । अब समस्या यह है कि उसमें जनता का भी सहयोग चाहिए और इस अतिक्रमण को भी हटाना होगा । अगर उसको नहीं हटाएंगे, तो फिर बसें नीचे जाएंगी, फिर लोग मरेंगे । आज कितना बड़ा हादसा हुआ है, उसमें हमारे जवान-सैनिक और सात-आठ लोग मरे हैं, कई लोग जख्मी हुए हैं । मुझे लगता है कि यह बहुत सीरियस इशू है । इसलिए, मैं इसके बारे में आपकी भावना से बिल्कुल सहमत हूं ।
मैं किरण जी को बहुत-बहुत धन्यवाद दूंगा कि मोटर व्हीकल एक्ट बिल पर विलंब की वजह से उन्होंने जो कहा था कि मौतें हो रही हैं, आपने मेरी भावनाएं बताई हैं । मैं आपका बहुत आभारी हूं और मुझे लगता है कि अब सदन की जो भावना बनी है, यहां पर भी और राज्य सभा में भी, यह दोनों सदन में मंजूर हो जाएगा । मैंने कल आपसे यह भी कहा था कि अगर इसके बाद भी आपका कोई सुझाव होगा, तो आप मेरे पास आइए और मुझे बताइए । हम इतने लोगों के सुझावों को लेकर आए हैं, वह भी करेंगे । उसमें कोई अड़चन नहीं आएगी और वह आपके सहयोग से मंजूर हो जाएगा ।
हमारी सरकार की एक सबसे बड़ी अचीवमेंट यह है कि यूरो बीएस फोर के हमारे इमिशन के स्टैंडर्ड हैं । इस पर पांच मंत्रियों ने मीटिंग ली और सभी मैन्युफ्रैक्चर्स हमारे पास आए थे । मैंने कहा कि आप बीएस फोर से जंप मारिए और सिक्स में जाइए । Sir, this is not possible. सब मैन्युफ्रैक्चर्स नाराज हो गए, कहा कि ऐसे डंडा चलाएंगे, तो हम नहीं मानेंगे । मैंने कहा ठीक है । महोदय, हमने जबरदस्ती निर्णय किया । मैंने कहा कि करेंगे, तो तुम्हारे साथ, नहीं आओगो, तो तुम्हारे बिना, अगर नहीं आओगे, तो घिसटते हुए लेकर जाऊंगा, देश में प्रदूषण की स्थिति गंभीर है । अब हमने निर्णय ले लिया है कि किसी भी कीमत पर 1 अप्रैल, 2020 से यूरो सिक्स यानी बीएस सिक्स के इमिशन नार्म्स को अलाऊ करेंगे । मुझे खुशी है कि आज सब लोगों ने इसे अपनाया है और यह सक्सेसफुली हुआ है । आज देश का प्रदूषण कम हो रहा है । दिल्ली में 32 प्रतिशत प्रदूषण कम हुआ है । जब इलेक्ट्रिक बसे आएंगी और नए रोड बन जाएंगे । अभी दिल्ली से 60,000 ट्रक बाहर चले गए हैं । इसके बाद कोई नहीं आएगा । मैं यह भी मानता हूं कि आप सबके सहयोग से दिल्ली को प्रदूषण मुक्त करना है । मुझे लगता है कि यह एक अच्छी बात हुई है । यह हमारे लिए बहुत ही अच्छा है । हमने जो इनोवेटिव स्टैंडर्ड्स तैयार किए हैं, ग्लोबल एनसीएपी करके है । आप यूरोप में जाइए । फारूख साहब, आप लंदन में डबल डेकर बस में बैठे होंगे, कितनी सुंदर बसें हैं । मुझे समझ में नहीं आया, मैं टेक्निकली कम जानता था । मैं सोचता था कि लंदन की बस अच्छी है, स्वीडन की बस अच्छी है, यूके की अच्छी है, अमेरिका की अच्छी है और हमारे यहां की टीन वाली बसें, इस बस में हार्न छोड़कर सब कुछ बजता है । आप इसको किस स्टैंडर्ड में रखते हैं, मुझे बताइए । मैंने एक दिन कहा कि इसको छोड़ दीजिए, आप यूके का स्टैंडर्ड अलाउ कर दीजिए । क्या होता है कि पंजाब, हरियाणा और मध्य प्रदेश में हथौड़ा और कील लेकर कोई भी बैठ जाता है और बस की बॉडी बनाने लगता है । मैंने उनको कहा कि यह सुरक्षा के लिए ठीक नहीं है । वह लकड़ी काटता है, ट्रक की चेसिस लाता है, लाइट लगाता है और बॉडी बनाता है । आपके कश्मीर में भी बहुत है । वह सुरक्षित नहीं है । मैंने उनसे कहा कि मैं एमएसएमई का मंत्री हूं । फारूख साहब, मैं उनको लोन देने के लिए तैयार हूं । उनको कहिए कि अब वर्ल्ड स्टैंडर्ड की सुरक्षा के हिसाब से अच्छी बसें होनी चाहिए । आप इससे खिलवाड़ मत करिए । एक बस में कितने लोग मरते हैं । …(व्यवधान)
डॉ. फारूख अब्दुल्ला : 25-25 साल और 30-30 साल पुरानी बसें हैं । …(व्यवधान)
श्री नितिन जयराम गडकरी : इसीलिए, सबसे महत्वपूर्ण चीज यह हुई है कि हम डीज़ल को बॉयो सीएनजी में कन्वर्ड करने की योजना लाए हैं । मैं आप सबको आमंत्रित करूंगा कि मेरे संसदीय क्षेत्र में नागपुर म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन की 400 बसें हैं, जो गंदा पानी था, उससे मीथेन निकालकर सीओटू अलग करके उसको कन्वर्ड कर रहे हैं । उसका अगले महीने में उद्घाटन है । 400 बसें, 150 कारें और 150 ट्रक्स हैं । ये सब जो स्लज है, मटन-मछली मार्केट और वेजीटेबल्स मार्केट का जो वेस्ट है, उसको बॉयो डाइजेस्टर में डालकर उसे सीएनजी बनाकर प्रदूषण फ्री किया गया है ।
इंपोर्ट सब्सिट्यूट, कॉस्ट इफैक्टिव पॉल्यूशन फ्री है । आप अपनी जगहों पर यह सब कीजिए । फ़ारुख़ साहब, ये बसें इतनी सुंदर हैं कि उनमें स्मैल नहीं है, आवाज़ नहीं आती है, ऐसा लगता है कि आप इलैक्ट्रिक बस में बैठे हैं । 20-20 साल पुरानी बसों को हमने नई ग्रीन बसों में कन्वर्ट किया है । यह बहुत जरूरी है । डीज़ल बहुत हानिकारक है । डीज़ल का उपयोग कम करना चाहिए । इसलिए एलपीजी, एलएनजी, सीएनजी, बायो-सीएनजी, बायो-इथेनॉल, जो किसान तैयार करता है, मुझे बहुत खुशी हुई, क्योंकि मैं 12 साल से इसके लिए काम कर रहा हॅूं । दो दिन पहले टीवीएस कंपनी और बजाज कंपनी को मैंने कहा था कि जब तक तुम शत प्रतिशत बायो-इथैनॉल पर बाइक तैयार नहीं करोगे, तब तक मेरे यहां मत आना और न ही किसी काम के लिए बात करना । उस यंग लड़के ने, जो टीवीएस का एमडी है, उसने बाइक बनाई । सर, मैंने उसको लॉन्च किया है । शत् प्रतिशत किसानों के चलाए हुए बायो-इथैनॉल पर वह बाइक चल रही है । अब कोई इंपोर्ट डीजल-पैट्रोल की जरूरत नहीं है । अब इतना ही नहीं है, जो कनाडा, अमरीका और ब्राज़ील में फ्लैक्स-इंजन है, मैने धर्मेन्द्र प्रधान जी को कल ही पत्र लिखा है कि अब इथैनॉल की बाइक आ गयी है कि अब ऐसी वहां चाइस है कि आपकी गाड़ी अगर ले जाएंगे, वहां टोयोटा, फॉर्ड और ह्युंडई आदि सब का यही है । यह फैसिलिटी है कि आप 100 प्रतिशत पैट्रोल डालो या 100 प्रतिशत बायो-इथैनॉल डालो, It is the consumer’s choice. मैंने कहा कि इस पॉलिसी के लिए आप पंप खोलने के लिए हमें परमिशन दीजिए । इस देश का किसान भी खुश होगा । पॉल्युशन भी कम होगा । इंपोर्ट भी बचेगा । इकोनॉमी भी अच्छी होगी और रोज़गार का भी निर्माण हेागा । यह प्रयोग हम लोग कर रहे हैं, क्योंकि बहुत लोगों ने कहा कि यह भी काम इसके साथ हुआ है । कई माननीय सदस्यों ने वाहन प्रदूषण तथा इलैक्ट्रिक वाहनों के बारे में बताया है । एक बात सच है कि इलैक्ट्रिक हमारे लिए फ्यूचर है । अब इलैक्ट्रिक में काफी गाड़िया आ रही हैं, सभी बसें आ रही हैं । अभी पुणे कार्पोरेशन में डेढ़ सौ बसें इलैक्ट्रिक की खरीदी हैं । मुंबई में बेस्ट द्वारा डीजल की बसें चलती हैं, उसका खर्चा 115 रूपये प्रति किलोमीटर है । 100 प्रतिशत बायो-इथैनॉल पर हम बस चलाते हैं, उसका खर्चा 69 रुपये प्रति किलोमीटर है । यह जो इलैक्ट्रिक एयर कंडीशंड बस है, इसका खर्चा 50 रुपये प्रति किलोमीटर है । हम लोग 25 प्रतिशत टिकट कम कर के देश के सभी गरीबों को इलैक्ट्रिक एयर कंडीशंड बसों में घूमा सकते हैं । अब उसका मॉडल हम लाए हैं । जो लंदन का मॉडल है, जो वर्ल्ड बैंक ने दिया है, उसमें नौ ऑपरेटर्स हैं, वही बसें खरीदते हैं, ड्राइवर उसका होता है, कंडक्टर कॉर्पोरेशन का होता है । 225 किलोमीटर की गारंटी दी जाती है । बसें मॉडल से सभी देश में जाती हैं । इससे हमारा पब्लिक ट्रांसपोर्ट पॉल्युशन फ्री और कर्म्फटेबल होगा और गरीबों को राहत मिलेगी । यह लंदन ट्रांसपोर्ट के मॉडल को हम पूरे देश में लागू करना चाहते हैं । मैं देश के सभी ट्रांसपोर्ट मंत्री जी को, मैंने प्रधान मंत्री जी को उनकी अनुमति के लिए लिखा है, मैं लंदन ट्रांसपोर्ट का मॉडल उनको दिखाना चाहता हॅूं ताकि हमारे देश में सभी जगहों पर इसका उपयोग हो ।
सर, सड़क सुरक्षा के लिए जो इलैक्ट्रिक का डर महसूस किया गया है कि हम लोग गाड़िया बंद कर देंगे । हमारी ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री 2,45,000 करोड़ रुपये की है । एक समय हमारी पार्टी ने मारुति का विरोध किया था । आज मैं मानता हॅूं कि India is becoming a manufacturing hub of automobile sector. जब मैं मुंबई पोर्ट में जाता हॅूं, तूतीकोरिन जाता था, तो मुझे हजारों गाड़िया लाइन में शिप पर चढ़ती हुई दिखती थीं । अब हमारी गाड़ियां इंपोर्ट हो रही हैं । 45 हज़ार करोड़ रुपये का हमारा एक्सपोर्ट है । मैं आज सदन में विश्वास से बताना चाहता हॅूं कि आने वाले पांच सालों में हमारा हिंदुस्तान वर्ल्ड में ऑटोमोबाइल्स मैन्युफैक्चरिंग का नंबर वन तो बनेगा ही, परंतु उसके साथ-साथ इलैक्ट्रिक मैन्युफैक्चरिंग ऑटोमोबाइल का भी हब बनेगा । हम देश को लीड करेंगे । हमारे प्रधान मंत्री जी ने इसके लिए, विशेष तौर पर लीथियम-आयन बैट्री के लिए नीति आयोग के साथ एक स्पेशल स्कीम बनाई है । अब इलैक्ट्रिक ऑटो रिक्शा, इलैक्ट्रिक बस, इलैक्ट्रिक कार आदि सपना नहीं है । अब छह महीने के बाद वह गाड़ी आपके पास आएगी और इंपोर्ट सब्सिट्यूट, कॉस्ट इफैक्टिव, पॉल्युशन फ्री और इंडीजीनियस होगी । मुझे लगता है कि अनेक लोगों ने जो शंका व्यक्त की है कि हम एग्जिस्टिंग को बैन लगा कर खत्म कर देंगे, ऐसा हम कुछ नहीं करने वाले हैं । हम लोग अभी यह समझते हैं कि हमारे एक्सपोर्ट हैं, हमारे रोज़गार में उसका योगदान है । परंतु एक बात भी जरूरी है कि जल्दी से जल्दी वह स्विच ओवर हो, और इलैक्ट्रिक, बायोफ्यूल आदि पर जाए तो अच्छा होगा । अगर नहीं जाएंगे तो फिर एक समय ऐसा आएगा कि कंज्यूमर का ही प्रेशर इतना होगा कि उनकी सेल कम होगी ।
13.00 hrs इसलिए नेचुरल कोर्स में यह होगा । मैंने एक पत्रकार को प्रश्न पूछा कि आपके पास पेट्रोल की गाड़ी है, आप महीने भर में 6500-7000 रुपये खर्चा करते हो । कल अगर इलैक्ट्रिक गाड़ी पॉल्यूशन फ्री और आपका खर्चा 1200 से 1500 रुपये होगा तो मुझे आपके पास आकर यह कहने की ज़रूरत है कि आप इलैक्ट्रिक गाड़ी लें । जब 4000-4500 रुपये महीने की सेविंग है तो आप लेने ही वाले हो । इलैक्ट्रिक बाइक में भी यही है । इथेनॉल सस्ता है और इतना ही नहीं, अभी हमारे डॉ. सारस्वत नीति आयोग में हैं । वे कोल बेस्ड मिथेनॉल बनाने की बात कर रहे हैं । हमारे यहाँ असम पेट्रोलियम और आर.सी.एफ. मुम्बई, ये मिथेनॉल बनाते हैं । उनका मिथेनॉल 22 रुपये लीटर है । इजरायल में 12 रुपये लीटर, चाइना में 17 रुपये लीटर है और डीजल 65 रुपये लीटर है तो मिथेनॉल को भी फ्यूल के रूप में विकसित करने का काम कर रहे हैं । मुझे लगता है कि ट्रांसपोर्ट मंत्री के नाते एक तरफ इम्पोर्ट कम हो, दूसरी तरफ पॉल्यूशन कम हो, तीसरी तरफ लोगों की सेफ्टी का ध्यान हो और चौथी तरफ कम्फर्ट अच्छा मिले एवं कॉस्ट कम हो । उसके कारण देश के युवाओं को रोज़गार मिले, यही इसमें हमने किया है ।
एक बात जो बहुत से सदस्यों ने कही है, उनके यहाँ 62 लोगों ने प्रोजेक्ट्स रखे । मैं सभी प्रोजेक्ट्स की डिटेल्स नहीं बता रहा हूँ, क्योंकि समय जाएगा । अभी मैंने एक सिस्टम शुरू किया है, कुछ लोग आए भी हैं कि हर स्टेट के एम.पी. क्वेश्चन अवर के बाद मेरे चैम्बर में आते हैं और अधिकारी और वे बैठ कर चर्चा करते हैं । मैंने तीन-चार स्टेट्स पूरे किए हैं । आज मैंने सेक्रेटरी को कहा कि जिन-जिन सदस्यों ने प्रोजेक्ट्स के बारे में कहा है, उन सब के प्रोजेक्ट्स की लिस्ट लेकर 15 दिन के अंदर इस प्रॉब्लम को रिजॉल्व कीजिए और मुझे रिपोर्ट कीजिए । जो आपसे नहीं होता है, वह मुझे दीजिए और विशेष रूप से डिले हो रहे हैं, रूडी जी ने बताया, वे मेरे पास चार बार आए, वे बोले मंत्री जी चाहते हैं, पर …* में बैठे हुए लोग नहीं चाहते हैं । …(व्यवधान) मैंने सुन लिया । इस देश में माहौल ही ऐसा है, कोई तकरार करता है और सीरियस फ्रॉड इनवेस्टिगेशन में कोई कम्पनी जाती है तो हमारे लोग पैसे देने के लिए डरते हैं । कोई बैंक के पास जाता है तो बैंक दिया हुआ पैसा वापस लेकर, वह सब रुक जाता है । There are problems. समस्याएँ हैं, सब आसान नहीं हैं । इसमें फाइनेंशियल तकलीफें हैं, पर रूडी जी से मैं एक बात कहता हूँ कि पॉजिटिव एप्रोच, ट्रांसपेरेंट एप्रोच, टाइम बाउंड डिसिजन मेकिंग प्रोसेस, टीम वर्क, आप सब का सहयोग हम कर पाएँगे ।
मैं बहुत बार एक बात कहता हूँ, आप नाराज मत होइए कि there are some people who convert problems into opportunities, and there are some people who convert opportunities into problems. So, let us accept it as a challenge. इसलिए आप सब की समस्याएँ हैं, वे कठिन हैं ।
श्री राजीव प्रताप रूडी (सारण): आपको वीडियो भी बहुत दिखाया है ।
श्री नितिन जयराम गडकरी : हाँ, दिखाया है । अब आप जिस कम्पनी की बात कर रहे हैं, वह कम्पनी रांची से टाटानगर रोड बनाती थी । फिर एक ने पी.आई.एल. डाली, फिर हाई कोर्ट जज ने उसको बोला कि इनवेस्टिगेशन करो । पचास टके के ऊपर काम हुआ तो मैंने उसका पैसा मंजूर किया । फिर वह सीरियस फ्रॉड इनवेस्टिगेशन में गया । हमारे अधिकारियों ने कहा कि यह उधर गया, हाई कोर्ट ने भेजा, हम पैसा कैसे दें । दिया हुआ पैसा उसने वापस ले लिया । कम्पनी का पूरा बैंड-बाजा बज गया । अब उसके पास पैसे नहीं । आपको पता है कि मैं पी.डी. का एकाउंट खोल कर उससे धीरे-धीरे पैसा लेकर काम करवा रहा हूँ । अब प्रॉब्लम यह है कि किया तो अधिकारी के ऊपर कार्रवाई करो, बैंक ने नहीं दिया तो बैंक के ऊपर कार्रवाई होती है । अब लोग भी बोलते हैं कि दिया तो भी तकलीफ, नहीं दिया तो भी तकलीफ । अब ऐसी स्थिति में we have to find a way out with a positive approach and development-oriented approach to resolve the issues. I am confident that we will get a solution for it. इसलिए 3,85,000 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट्स सॉल्व हो गए तो ये भी निकल जाएँगे । यह आखिरी का है । हाथी निकल गया, दुम बची हुई है । मैं आपको इतना ही कहूँगा कि इन प्रोजेक्ट्स की पूरी डिटेल्स मैंने अपने पास ले ली हैं । आप मुझे 15 दिन का टाइम दीजिए, उसके बाद 15 दिन सेक्रेटरी के, 8 दिन मेरे और एक महीने के अन्दर आप जितने प्रोजेक्ट्स के लिए बोलें, आप मेरे पास आओ, मैं आपको उसका पूरा समाधान करके दूँगा । We will resolve all the issues. ये जो आपकी तकलीफें हैं, मैं ऐसा सेशन एक बार अपने सपने में देख रहा हूँ कि जिस सेशन में मेरे पास कोई एम.पी. अपनी प्रॉब्लम के लिए आए नहीं । पर एक बात ज़रूर है कि जैसा इकनॉमिक्स का सिद्धांत है कि जितने नए नोट छापे जाते हैं, उतने फटे नोट बाजार में दिखते हैं । आप जितना काम करो, उतनी लोगों की अपेक्षा बढ़ जाती है । लोग बोलते हैं कि यह भी कर दो । अभी प्रिंसिपल हाइवे, हमारे मैनिफेस्टो में लिखा है कि हम लोग डबल करेंगे । बीच में फाइनेंस वालों ने कहा कि यह हाइवे हम लोग शायद बढ़ाएँगे तो पैसा कहाँ से आएगा । जैसा आपने शंका व्यक्त की ।
मैंने कहा कि मैं फाइनेंस वाला हूँ, आप चिंता मत कीजिए, लेकिन शायद मैं कॉन्फिडेंस देने में कम पड़ा, तो थोड़ी सी दिक्कतें आई हैं । आप चिंता मत कीजिए, इनको हम डिजॉल्व करेंगे ।
एक बात सीआरएफ फंड की आई । …(व्यवधान) सीआरएफ के संबंध में आप लोग मेरे पास आते हैं । …(व्यवधान)
महोदय, पेट्रोल और डीजल पर जो सेस लगा, उसमें से कुछ पैसा एनएचएआई को जाता है, कुछ हमें सीआरएफ में मिलता है, आप हमारे पास आते हैं, आखिर वह पैसा राज्य सरकारों को ही जाता है, लेकिन उसे मंजूर करने का अधिकार हमें होता है । …(व्यवधान)
श्री अधीर रंजन चौधरी: सर, अभी तो सीआरएफ फंड खत्म हो गया है । अभी तो रोड एंड इंफ्रास्ट्रक्चर फंड हो गया है ।
श्री नितिन जयराम गडकरी : नहीं, वह जो फंड है, अभी वह पूरा फंड फाइनेंस मिनिस्टर ने अपने साथ लिया है, वह बजट में रखा गया था और उसमें एक प्रोविजन किया गया कि वह पूरा पैसा आप राज्य सरकार को देंगे । …(व्यवधान)
श्री जगदम्बिका पाल (डुमरियागंज): सर, आपने 10 हजार करोड़ रुपया उत्तर प्रदेश को दिया है । …(व्यवधान)
श्री नितिन जयराम गडकरी : महोदय, जो लोग जो कुछ बोल रहे हैं, एक मेंबर ऑफ पार्लियामेंट होने के नाते मैं उनकी भावना से शत-प्रतिशत सहमत हूँ । मैंने आप सबकी बात निर्मला सीतारमण जी के कान में डाली है । मैं उनसे फिर से बात करूँगा । मैंने स्पीकर से भी बात की है । मैं उनसे अनुरोध करूँगा कि हमारे एम.पी. के अधिकार का यह फंड है, उनके आधे काम इस फंड के कारण होते हैं । इस फंड को एलोकेट आप कीजिए । आपको किसको कितना देना है, उतना परसेंट उसको दीजिए, लेकिन एम.पी. की यह बहुत महत्वपूर्ण माँग है । मैं उनसे इसके लिए अनुरोध करूँगा कि वे इसे फिर से एक बार देखें और आपकी बात को महत्व मिले । मैं इसके लिए निश्चित रूप से उनसे बात करूँगा ।
महोदय, रोड साइड एमेनिटीज के बारे में भी कुछ देरी हुई, कुछ काम नहीं हो पाया । अभी हमने मॉडल बदल दिया है । पहले हम 7 एकड़ जगह लेते थे, अब 10 एकड़ जगह ली, बहुत सुन्दर मॉडल बना है और टू लेन पेव्ड शोल्डर पर किया है । रोड के दोनों तरफ 10-10 एकड़ जगह ली गई है और रोड के बीच में एक ग्लास की बिल्डिंग होगी, 30-40 हजार स्कवायर फीट का एरिया होगा । ऊपर रेस्टोरेंट में लोग खाएंगे, उधर लैंडस्केपिंग होगी, गार्डन होगा, पार्किंग होगी, हेलीपैड होगा, इधर फूड मॉल होगा और 40 परसेंट शॉप्स उस एरिया के फ्रूट्स, वेजिटेबल्स, हैंडलूम, हैंडीक्रॉफ्ट से जुड़ी हुई होंगी । अगर कश्मीर में जाएंगे, तो कश्मीर के अखरोट और शॉल उन हाइवेज की रोड साइड की दुकानों में मिलेंगे, वहाँ के लोगों को काम मिलेगा । हर जिले में हम ऐसा बना रहे हैं । टू लेन पेव्ड शोल्डर के डिजाइन तैयार हो गए हैं, फोर लेन के हो गए हैं, सिक्स लेन के हुए हैं, एक्सप्रेस हाइवे के भी हुए हैं । हम इसके टेंडर निकालेंगे, इससे रोजगार मिलेगा । इसमें बहुत अच्छी बात हुई है कि हमने हमारी पेट्रोल पम्प की जगह ले ली और मैंने विभाग को कहा कि हमें पैसे मिलने चाहिए । अब हमें मुम्बई-दिल्ली एक्सप्रेस हाइवे पर 300 पेट्रोल पम्प डालने हैं । मैंने कहा कि टेंडर निकालो, जगह हमारी और मशीन आपकी । प्रति लीटर पेट्रोल, प्रति लीटर डीजल आप कितना कमीशन लेते हो बोलिए । वहाँ टॉयलेट को भी मेनटेन करना पड़ेगा और पार्किंग को भी देखना होगा । अब टेंडर निकल रहा है ।
महोदय, हम लोगों को केवल मुम्बई-पुणे हाइवे पर ही 200 करोड़ रुपये पेट्रोल-डीजल बेचकर मिल जाएंगे । एक माननीय सदस्य बोलते हैं कि पैसा कहाँ से आएगा । लोग टॉयलेट में जाएंगे, तो टॉयलेट की साफ-सफाई रखने के लिए उनसे दो-पाँच रुपये लिए जाएंगे, उससे भी हमें दो-चार-दस करोड़ रुपये मिल जाएंगे । वह पैसा रोड के काम में आएगा और उस पैसे का उपयोग फिर से रोड के डेवलपमेंट के लिए होगा । जो दे सकता है, उससे लेना चाहिए और जो गरीब है, उसे फोकट में देना चाहिए । इसी तत्व के आधार पर यह डेवलपमेंट होगा, पैसे की कोई कमी नहीं है । मैंने मास्टर ऑफ बिजनेस मैनेजमेंट भी किया है, मैं फाइनेंस को भी जानता हूँ । जितना काम करोगे, उतना पैसा मिलेगा । आप मेरी सभी बातों को रिकॉर्ड के रूप में लिखकर रखना और अगर मेरी कही हुई एक भी बात नहीं हुई तो आप मेरे खिलाफ जरूर प्रस्ताव लाइए । मैं विश्वास देता हूँ, वचन देता हूँ कि जो बात कहेंगे, वह हम करके दिखाएंगे । मोदी जी के नेतृत्व में, आप रुक जाइए, अभी लगभग 40 हजार किलोमीटर का काम हुआ है, 96 हजार किलोमीटर नेशनल हाइवे था, अब 1 लाख 37 हजार किलोमीटर नेशनल हाइवे हुआ है और करीब 50-55 हजार किलोमीटर प्रिंसिपल में अटका हुआ है । मैं उसके लिए आपसे बात करूँगा । यह देश बदल जाएगा । देश बदल जाएगा, पर्यटन को महत्व मिलेगा, एम्प्लॉयमेंट पोटेंशियल बढ़ेगा, आप कल्पना नहीं कर सकते हैं जी, जैसे दिल्ली-मुम्बई 12 घंटे में हुआ । मेरठ-दिल्ली, यहाँ मेरठ के हमारे माननीय सदस्य हैं, मेरठ-दिल्ली 4.5 घंटे लगते थे, अग्रवाल जी 3 महीने के अंदर आप 45 मिनट में आएंगे । हम लोग डासना से कानपुर तक हाइवे बनाने वाले हैं और कानपुर से लखनऊ का अभी टेंडर हो जाएगा, तो पूरा दिल्ली से लखनऊ हाइवे बन जाएगा ।
माननीय स्पीकर महोदय, मैं आपको विश्वास देना चाहता हूँ कि मोदी जी के नेतृत्व में इनोवेशन, एंटरप्रेन्योरशिप, साइंस, टेक्नोलॉजी, रिसर्च के माध्यम से देश को विकास के पथ पर आगे बढ़ाएंगे ।
We name it as ‘knowledge’. Knowledge and technology are very important, and conversion of technology into wealth is the future of the country. इस देश के गांव, गरीब, मजदूर, किसान का कल्याण करते हुए और बेस्ट टेक्नोलॉजी का यूज करते हुए हम काम करेंगे, जैसे अमेरिका में रोड्स हैं ।
कल राजस्थान के हमारे सांसद दुष्यंत जी ने बात कही । मैंने अपने ऑफिस में भूतपूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति जॉन एफ. केनेडी का वाक्य लिख कर रखा है । उन्होंने कहा था - “American roads are not good because America is rich, but America is rich because American roads are good.” बिल्कुल उसी प्रकार से, प्रधान मंत्री जी की इक्कीसवीं सदी का ‘नया भारत’ होगा । नए रोड्स, नए एक्सप्रेस हाईवेज होंगे और हवा में चलने वाली डबल डेकर बसेज भी होंगी । इससे नए भारत का निर्माण होगा । रोप-वे केबल कार की टेक्नोलॉजी भी हम लाए हैं ।
मैं जब अभी वाटर रिसोर्सेज मिनिस्ट्री में था तो उस समय मैंने वैपकोस का ज्वायंट वेन्चर करके दिया । आप सभी लोग अपने-अपने शहरों में उसे बनाइए । वह बहुत सस्ता है । आने वाले समय में ट्रांसपोर्ट सेक्टर में इलेक्ट्रिक, इथेनॉल, मिथेनॉल, बायो-डीज़ल, बायो-सी.एन.जी. इत्यादि का इम्पोर्ट कम होगा । रोड्स बड़े बनेंगे । रोड्स से जाना एक बहुत अच्छा सुखद अनुभव होगा, ऐसे भविष्य के हिन्दुस्तान का निर्माण ट्रांसपोर्ट मिनिस्ट्री की ओर से लक्षित होगा ।
आप सभी लोगों ने बहुत अच्छी तरह से हमें, एक प्रकार से पॉज़ीटिव सपोर्ट दिया है । आप सबका सहयोग और आपका मार्गदर्शन लेते हुए और आपके जो भी सुझाव हैं, उन्हें सीरियसली स्वीकार करते हुए हम आगे जाएंगे, यही हमारा विश्वास है । आप 62 माननीय सदस्यों ने जो-जो कहा है, जो सुझाव दिए हैं, उनके ऊपर हम लोग अपने विभाग में सीरियसली विचार करेंगे । यह विश्वास देते हुए फिर से एक बार आप सबको बहुत-बहुत धन्यवाद देते हुए मैं अपनी बात को समाप्त करता हूं और आप इन मांगों को पूरा करें, ऐसी प्रार्थना करता हूं ।
माननीय अध्यक्ष: माननीय सदस्यगण, मैं माननीय सदस्यों को क्लैरिफिकेशन के लिए अनुमति दे रहा हूं, लेकिन दोबारा से चर्चा करने की अनुमति नहीं दे रहा हूं । इसलिए मुझे टोकना न पड़े । अगर आपके पास कोई विशेष विषय हो तो क्लैरिफिकेशन देने के लिए मंत्री जी सक्षम हैं । आप उनसे क्लैरिफिकेशन ले लें । अधीर रंजन चौधरी जी ।
श्री अधीर रंजन चौधरी: गडकरी जी, आप एक इन्नोवेटिव एण्ड इन्फॉर्मेटिव पर्सनैलिटी हैं । हम सब आपको मानते हैं । आप एक मंत्री हैं । हमारी तरफ से जो मांग आपसे की जाती है, उस मांग को पूरा करने में आप कोई कसर नहीं छोड़ते हैं । लेकिन, मैं अपनी जानकारी के लिए आपसे एक छोटी-सी बात पूछना चाहता हूं । आपने अभी इलेक्ट्रिक वेहिकल्स की बात की है । इलेक्ट्रिक वेहिकल्स की जो बैट्री है, वह बैट्री लीथियम और कोबाल्ट से बनती है । लीथियम और कोबाल्ट, बोलीविया और चिली में मिलते हैं । लीथियम और कोबाल्ट की सारी माइन्स को चीन ने खरीद लिया । अगर अभी हम यहां उसकी बैट्री बनाएंगे तो क्या हमें वह सस्ता मिलेगा या हमें इसके लिए चीन के ऊपर निर्भर करना पड़ेगा क्योंकि सारी इलेक्ट्रिक वेहिकल्स की जितनी बैट्रीज़ हैं, वे ही उसे बनाते हैं, तो क्या ये हमारे लिए एक्सपेन्सिव होंगे या इनएक्सपेन्सिव होंगे?
सर, मेरी दूसरी बात यह है कि इसके लिए जो स्किलिंग होनी चाहिए, वह स्किलिंग कैसे होगी?
सर, इकोनॉमिक सर्वे बता रहा है कि आपकी इंवेस्टमेंट तीन किस्म की हैं - Budgetary support, Internal and external budgetary resources, and Private investment. बजटरी सपोर्ट आपको 48 पर्सेंट मिलता है, इंटर्नल एण्ड एक्सटर्नल बजटरी रिसोर्सेज 39 पर्सेंट है और प्राइवेट इंवेस्टमेंट 14 पर्सेंट है । इस प्राइवेट इंवेस्टमेंट का टारगेट क्या है? आपने तो हमें सुनहरा सपना दिखा दिया । हम सब उड़ने लगे हैं, लेकिन आप इसके लिए पैसे कहां से लाएंगे? आप कहते हैं कि पैसे की कोई फिक्र मत कीजिए, लेकिन प्राइवेट इंवेस्टमेंट के आपके टारगेट्स क्या हैं? आप प्राइवेट इंवेस्टर्स को क्या इंसेंटिव्स दे रहे हैं, ताकि वे हमारे देश में आएं?
माननीय अध्यक्ष: माननीय मंत्री जी, आप एक साथ जवाब दे दीजिएगा ।
श्री नितिन जयराम गडकरी: स्पीकर महोदय, यह टेक्नीकल सब्जेक्ट है । मैं भूल जाऊंगा । इसलिए इसके साथ ही जवाब दे देता हूं ।
स्पीकर महोदय, माननीय चौधरी जी ने जो बात रखी, वह सच है । लीथियम आयन हमारे देश में नहीं हैं और इसकी मैन्यूफैक्चरिंग करने के लिए आज टेक्नोलॉजी भी नहीं है । अभी टोयोटा और मारुति ने एक एग्रीमेंट किया है और शायद वे इसे यहां बनाने की बात कर रहे हैं । हम लोग प्रिलिमिनरी स्टेज में हैं और लीथियम आयन हमारे देश में नहीं हैं । हमारा जो सैटेलाइट गया था, तो उस समय मैं हवाई जहाज में पढ़ रहा था तो मुझे मालूम हुआ कि सैटेलाइट में लीथियम आयन बैट्री यूज़ की गई । मैंने वापस आकर इसरो के चेयरमैन और साइंटिस्ट्स को बुलाया । डॉक्टर साहब को शायद इसके बारे में पता है । ये भी उस मीटिंग में आए थे । मैंने उनसे कहा कि जब आप सैटेलाइट के लिए लीथियम आयन बैट्री बनाते हैं तो आप हमारी कारों के लिए क्यों नहीं बनाते हैं? फिर उन्होंने भी रिसर्च करके कुछ मॉडल्स बनाए । फिर ए.आर.ए.आई. ने उसकी टेस्टिंग की और उसके बारे में कोशिश कर रहे हैं ।
स्पीकर सर, सम्माननीय सदस्य जो कह रहे हैं, वह सही है कि लीथियम आयन हमारे देश में नहीं हैं । इसमें बस के लिए उसकी कॉस्ट बहुत ज्यादा है, यह बात भी बिल्कुल सही है । अभी हमने उसके लिए एक नया काम किया है, इसका जो मैन्युफैक्चरिंग है, इसके लिए नीति आयोग ने एक प्रस्ताव दिया है । उस पर हम विशेष ध्यान दे रहे हैं । उसमें बहुत-सी बातें हैं । हमारे देश में इसकी मैन्युफैक्चरिंग शुरू होने वाली है । मैं आपको एक सिम्प्ल उदाहरण देता हूं । जब मोबाइल फोन आया, तो मैंने मुम्बई में पहली बार शायद एरिक्सन का मोबाइल लिया था । उस समय वह सवा लाख रुपये का मिलता था । अब मोबाइल फोन चार हजार रुपये में भी आता है । जब इसका भी प्रोडक्शन काफी बढ़ेगा, तो निश्चित रूप से मुझे लगता है कि इसकी कीमत कम होगी । इसमें इंडियन मैन्युफैक्चरर्स को एनकरेज करने के लिए सरकार पॉलिसी ला रही है । चार्जिंग स्टेशन में भी ऐसा ही है । कुल मिलाकर, बाद में बैट्री के बारे में ऐसा कहा गया कि यह बैट्री बहुत वजनी है । उससे बस का वजन भी बढ़ता है । अभी इंडिया में स्टार्ट अप है, धीरे-धीरे टेक्नोलॉजी की भी डेवलपमेंट हो रही है, नए-नए लोग आ रहे हैं और हमारे लड़के शोध कर रहे हैं । हमारे यहां प्रॉब्लम्स हैं और आप लोग जो कह रहे हैं, वह भी सही है, परंतु आने वाले तीन-चार साल के अंदर हम लिथियम ऑयन बैट्री की मैन्युफैक्चरिंग भी करेंगे । फिलहाल हमें कुछ क्रुशिअल पार्ट इम्पोर्ट करने पड़ेंगे और यह भी सही है कि चाइना से आने की संभावना ज्यादा है । चाइना ने क्या किया है, आपने जिन देशों का नाम लिया है, वहां की माइन को चाइना ने अक्वायर कर लिया है । अगर हम स्वाभाविक रूप से इसे नहीं कर पाए, तो हमने उसके लिए अवसर गंवाया है । मुझे लगता है कि धीरे-धीरे इसकी मैन्युफैक्चरिंग बढ़ेगी, फॉरेन इन्वेस्टमेंट भी आ रहा है । इससे बैट्री की कीमत धीरे-धीरे कम होती जाएगी ।
आज इतनी रिसर्च हो रही है, इतने पेटेन्ट रजिस्टर हो रहे हैं, मुझे उम्मीद है कि आने वाले साल-डेढ़ साल में लिथियम का भी कोई नया विकल्प हमारे भारतीय वैज्ञानिक ढूंढ कर लाएंगे और वह सस्ता हो जाएगा ।
सर, दूसरी बात ऐसी है, जिन्होंने इन्वेस्टमेंट के बारे में बात की, It varies from project to project. अभी भारतमाला प्रोजेक्ट 8.5 लाख करोड़ रुपये का है । अब 40 परसेंट हाईब्रिड प्रोजेक्ट है, उसमें 60 परसेंट बैंक लेकर आएंगे । अगर कोई प्रोजेक्ट बी.ओ.टी. में होगा, तो वह 100 परसेंट लगाएगा । अगर हम कोई प्रोजेक्ट ई.पी.सी. में करेंगे, तो पैसा रेज करके उसको देंगे । ओवरॉल सब मेथडॉलजी क्लियर हैं । हमने बैंकों के लिए नया मॉडल तैयार किया है । आठ-दस दिन में ही हमारे पास करीब 50,000 करोड़ रुपये आ जाएंगे । कल पांच बजे एल.आई.सी. के चेयरमैन के साथ मेरी मीटिंग है, उनका भी पैसा मिलेगा । लेबर मिनिस्ट्री के पास पैसा पड़ा हुआ है, वह पैसा हमको मिल सकता है । फिर पेंशन तथा इंश्योरेंस फंड का पैसा मिल सकता है । वर्ल्ड के बहुत से लोग मुझसे बार-बार मिलते हैं । सिंगापुर गवर्नमेंट का फंड मिलता है । फंड लेकर बैंक में रखना कोई उपयोगी काम नहीं है । जैसे-जैसे हमें जरूरत पड़ेगी, उस फंड का हम उपयोग करेंगे । भारतमाला प्रोजेक्ट 5.35 हजार करोड़ रुपये का था । अभी वह 8.20 हजार करोड़ रुपये का हो गया है । इसमें प्राइवेट इनवेस्टमेंट का जो प्लान है, वह 1,06000 करोड़ रुपये का है । बैंकों तथा फाइनैन्शियल संस्थाओं के साथ हमारा डिस्कशन चल रहा है । अभी भारत सरकार के एन.आई.एफ से जो फंड आया है, वह 60,000 करोड़ रुपये दे रहे हैं । बैंक्स भी पैसे दे रहे हैं । हमारे यहां पैसे की कोई अड़चन नहीं है, बल्कि काम करने की कमी है । If there is a will, there is a way. And if there is no will, there is only survey, discussion, seminar, committee, subcommittee, and research group. The strong political will of hon. Prime Minister and the strong political will of the country is definitely going to help us, and we will achieve our goal and we will be successful.
माननीय अध्यक्ष: माननीय मंत्री जी, आप एक साथ ही जवाब दे दीजिए । मैं माननीय सदस्यों से भी आग्रह करूंगा कि अभी हमें नए डिबेट पर चर्चा नहीं करनी है । मैं किसी भी माननीय सदस्य को टोकना नहीं चाहता हूं । अगर आपके पास क्लैरिफिकेशन का कोई विषय है, तो आप उसे दें ।
श्री सुदीप बन्दोपाध्याय (कोलकाता उत्तर): गडकरी जी, आप तो सपनों के सौदागर हैं । …(व्यवधान) आपने बहुत से एश्योरेंस भी दिए हैं । हम लोग अपोजिशन की तरफ से इस पर जरूर नज़र रखेंगे । संसद में जो एश्योरेंस दिया जाता है, उसके ऊपर हम लोग एक एश्योरेंस कमेटी के मार्फत नज़र भी रख सकते हैं । We living in the Eastern region of the country feel that the Eastern region has been the worst sufferer after Independence. आपने कहा कि हम किसी प्लेस को कोई प्राइऑरिटी नहीं देंगे, लेकिन जिस प्रकार से हम लोग रीजनल इम्बैलेन्स के विक्टिम होते हैं, उसमें बंगाल, बिहार, असम, ओडिशा तथा त्रिपुरा स्टेट हैं । ये सभी स्टेट्स डेवलपमेंट के मामले में एक तरफ हो जाते हैं और मुम्बई, पुणे, गुजरात, हैदराबाद दूसरी तरफ हो जाते हैं । यह विषय आपके भाषण में भी आया है ।
It is visible that we are far behind from these States. So, I would request you to take care of the eastern region in particular, on priority basis. All the projects you have mentioned here should also be implemented in eastern region, especially in West Bengal.
SHRI P.V. MIDHUN REDDY (RAJAMPET): Sir, first of all, I would like to thank our hon. Minister for giving us a lot of hopes. I would like to ask the Minister about hybrid annuity model. It is one of the financial models he has discussed.
The banking system is itself under great stress because of all the NPAs. All the States are also under severe financial pressure. Most of the contractors’ rating is really bad. For them to raise this 60 per cent amount in the financial annuity model is very difficult these days. So, how is the Minister going to tackle the situation? The competition is going down for all these hybrid annuity models and compared to EPC, the Government is losing 10 to 15 per cent more.
डॉ. फारूख अब्दुल्ला (श्रीनगर): थैंक यू सर । मैं मंत्री जी से गुजारिश करता हूं कि वह और जनरल साहब जो इनके साथ स्टेट मिनिस्टर हैं, ये हमारे यहां कश्मीर आएं और हमारे साथ वहां बैठें । आजकल दिन भी अच्छे हैं । ये अमरनाथ जी की यात्रा भी कर लेंगे और हमारी मुश्किलात भी दूर करेंगे । मैं इन्हें निमंत्रण देता हूं कि हमारे यहां आएं । हम लोग कई मसले बैठकर वहां पर हल कर सकते हैं । इसके लिए मैं आपको दावत देता हूं ।
SHRI DAYANIDHI MARAN (CHENNAI CENTRAL): Sir, I should appreciate the hon. Minister for his excellent work. I would also like to mention that 2004-09 was a golden period for highways when Shri Baalu ji was there. Tamil Nadu received a lot of good projects but after that, there are no new projects even though, you are trying to bring Green Highways project.
Sir, there is a controversial problem in Tamil Nadu for Chennai-Salem Expressway. We do find that it takes two hours for getting out of Chennai. …(Interruptions) Let me finish, Sir. The reason why I am saying this is not because it is a political matter but there is a controversy because the bottlenecks to get out of Chennai are not being handled. Without handling the real issue, we are focusing on other issues.
So, we would like you to consider this and also to focus on Tamil Nadu. Tamil Nadu is being totally ignored. Kindly focus on Tamil Nadu and also to decongest it.
श्री नामा नागेश्वर राव (खम्माम):सर, कल से जिस तरह से हाउस में बातचीत हो रही है, अभी मंत्री जी ने उसी तरह हाउस और देश में एक कान्फिडेंस क्रिएट किया । स्पेशियली फाइनेंशियल मॉडल्स के बारे में, ब्लैक स्पॉट्स के बारे में, रोड सेफ्टी का बिल अभी नहीं आया है, लेकिन पूरा हाउस उसमें मदद करने के लिए रेडी है ।
अगर हम बिगेस्ट सिटीज में देखें,तो इंडिया में एक ही सिटी है । मुंबई में एक साइड सी है, कोलकाता में सी है,मद्रास में भी सी है, नदी है, उसी तरह से दिल्ली में और डिफरेंट स्टेट्स में स्थिति है । केवल हैदराबाद में चारों तरफ सिटी बढ़ने के चांसेज़ हैं । इसके लिए हमने एक रीज़नल रिंग प्रपोज की थी । यह रीज़नल रिंग रोड बहुत ही इंपोर्टेंट है । हर एक हाईवे आकर सिटी में टच कर रहा है । इसकी वजह से पोल्यूशन भी बढ़ता है । तेलंगाना जो नया स्टेट है, उसके लिए मंत्री जी ने काफी रोड्स दी हैं, लेकिन कुछ अभी पेंडिंग हैं । इसके साथ-साथ मैं मंत्री जी से रीजनल रिंग रोड्स के बारे में निवेदन करना चाहता हूं ।
माननीय अध्यक्ष : आप क्लेरिफिकेशन नहीं मांग रहे हैं । आप डिमांड करने लगे ।
कुंवर दानिश अली (अमरोहा): अध्यक्ष जी, धन्यवाद । सबसे पहले मैं कहना चाहूंगा कि डिपार्टमेंट के इतने ग्रेशिअस मंत्री यहां पर बैठे हैं, तो सभी माननीय सदस्यों की अपेक्षा रहती है कि उनसे मांगेंगे, तो उनको मिल जाएगा । मंत्री जी ने ट्रामा सेंटर की एक बात कही थी । अपनी बातचीत में मैंने वह इश्यू उठाया था । मेरी कांस्टीट्युएंसी में, गढ़मुक्तेश्वर, ब्रजघाट में ट्रामा सेंटर बन रहा था । ट्रामा सेंटर में करीब एक करोड़ रुपये का काम भी हो गया था । बाई दि टाइम नेशनल हाईवे अथॉरिटी ने उसको एक्वायर किया है । वहां पर कार्तिक मेला लगता है । दिल्ली से लखनऊ तक का एनएच 9 ही एक मेन रास्ता है ।
अभी इस वक्त जब हम चर्चा कर रहे हैं अभी भी वहां लंबा जाम लगा हुआ है । मेरी मंत्री जी से इतनी ही प्रार्थना है कि गंगा पर एनएच-9 पर एक नया पुल बनवाने का कष्ट करें । बहुत-बहुत धन्यवाद ।
माननीय अध्यक्ष: मांग नहीं करना है ।
श्री वीरेन्द्र सिंह (बलिया): अध्यक्ष महोदय, भारत सरकार के मंत्री जी ने एक बहुत ही महत्वपूर्ण बात कही है कि इलेक्ट्रिक मोटर या इलेक्ट्रिक गाड़ी चलेगी । मैं किसान हूं और देश कृषि प्रधान देश है । मेरा संसदीय क्षेत्र बलिया है । यह दुनिया की सबसे उपजाऊ जमीन है । मैं आपसे निवेदन करूंगा कि कृषि क्षेत्र में काम करने वाली छोटे-छोटी मशीन जैसे, ट्रैक्टर या पॉवर टिलर है । इसे इलेक्ट्रिक से चलाने की व्यवस्था कंपनी निर्माताओं से कर देंगे । मोटरसाइकिल या अन्य वाहन वालों से कह दें कि इलेक्ट्रिक मोटर बनाओ, इससे खेती की लागत कम हो जाएगी । वर्ष 2022 तक भारत सरकार की किसानों की आमदनी दोगुना करने का संकल्प भी पूरा हो जाएगा । मैं आपसे निवेदन करूंगा कि मेरे बलिया संसदीय क्षेत्र में आप शुरू करेंगे तो आपकी बड़ी कृपा होगी । दुनिया की सबसे उपजाऊ जमीन करइल से दोआबा मेरे संसदीय क्षेत्र में है । मैं आपसे निवेदन करूंगा कि इलेक्ट्रिक चालित खेती की छोटी-छोटी मशीनों को बना कर वहीं से शुरू करेंगे तो बड़ी कृपा होगी ।
SHRI N. K. PREMACHANDRAN (KOLLAM): Hon. Speaker, Sir, Shri Nitin Gadkari is the best performing Minister in the Government and we have no hesitation in accepting the exemplary performance of the hon. Minister and I wish him all the best.
I have already moved 21 Cut Motions. Considering the exemplary performance of the Ministry and the reply given by the hon. Minister, I am seeking the leave of the House to withdraw all the Cut Motions.
I have two clarifications. The first one is regarding the Central Road Fund which is now the Central Road and Infrastructure Fund. In selection of roads under Pradhan Mantri Gram Sadak Yojana, the local Member of Parliament has a specific role. Unfortunately, in the case of the Central Road and Infrastructure Fund, the local Member of Parliament has no role in selection of roads. I would request the hon. Minister to kindly issue the guidelines in this regard so that the local Member of Lok Sabha can be given a chance or have a role in the selection of roads. We are all seeking the protection of the hon. Speaker in this matter. The Ministers of the State Government are inaugurating the schemes and openly saying that the local Member of Parliament has no role in selection of the road. This is our bitter experience. That is why we are seeking the protection from the Chair also.
My second clarification is that considering the geographical condition and the density of population, land acquisition is a big problem in Kerala. I want to know whether the Government of India will consider sharing the expenditure on land acquisition or make such commitment, considering the situation in States like Kerala and Goa. With these words, I once again congratulate the hon. Minister.
माननीय अध्यक्ष: सभी माननीय सदस्यगण को माननीय मंत्री जी ने सदन के माध्यम से कहा है कि एक महीने में आपने जो भी मुद्दे सदन में उठाए हैं या अपने मुद्दों को लेकर आए हैं । उन सभी का जवाब देंगे और उसके बाद भी कोई भी माननीय सदस्य आना चाहेगा तो निश्चित रूप से चैम्बर में आए, सभी की समस्याओं का समाधान करेंगे । आप सुझाव चैम्बर में जाकर दीजिएगा ।
…(व्यवधान)
SHRI NITIN JAIRAM GADKARI: With regard to the suggestion given by Shri N.K. Premachandran …(Interruptions)
माननीय अध्यक्ष: कुछ भी रिकॉर्ड में नहीं जाएगा ।
…(व्यवधान) …* SHRI NITIN JAIRAM GADKARI: I will resolve your issue.…(Interruptions) मैं आदरणीय सदस्य प्रेमचन्द्रन जी को एश्योर करना चाहता हूं, मुझे पार्टियों का नाम मालूम नहीं, क्योंकि मैं सोचता नहीं । पिछली बार सीपीएम की एक महिला सदस्य थीं, टीचर जी थीं, उनका सीआरएफ मंजूर नहीं होता था, उस समय कांग्रेस सरकार थी । मैंने उनसे कहा कि अगर इनका मंजूर नहीं होगा तो मैं आपकी लिस्ट मंजूर नहीं करूंगा । मैंने, जितने यहां मैम्बर ऑफ पार्लियामेंट देते हैं, सबका मंजूर कर लिया । अब सीपीएम की सरकार है, जब कांग्रेस के मैम्बर्स को अड़चन आती है, वे मुझे कहते हैं तो मैं कहता हूं कि यह होगा । सीआरएफ में जो सदस्य हैं, उन्होंने कहा और हमने लगभग उनके काम मंजूर कर दिए । आप भी मेरे पास आए, मैंने सीआरएफ मंजूर कर दिया, वहां से बुला लिया ।
मैं इतना ही विश्वास दिलाना चाहता हूं क इसमें एमपी का रोल होना चाहिए, यह मैं मानता हूं । एमपी का यही तो अधिकार है, स्टेट की कांस्टीटुएंसी में सीआरएफ से चार काम हो जाते हैं । मैं यह बात माननीय वित्त मंत्री जी से करूंगा । गाइडलाइन अंडर फाइनेलाइजेशन, फाइनेंस मिनिस्ट्री के साथ है, उनके साथ जाऊंगा । एलए कास्ट बिग प्राब्लम है । केरल में सबसे ज्यादा है, इसलिए चीफ मिनिस्टर और चीफ सैक्रेट्री से मेरी मीटिंग हुई है । मैंने उनको बुलाया और कहा क आप थोड़ा शेयर कीजिए, स्टील, सीमेंट, एग्रीगेट पर जो खर्च होता है, रॉयल्टी ऑन एग्रीगेट सैंड, जीएसटी ऑन स्टील एंड सीमेंट एग्जम्प्ट कर दीजिए, नोशनल लॉस होगा, वह आप हमें दीजिए, ऐसे हम वे आउट निकालेंगे । ऐसा मैंने कहा है । उनके साथ मीटिंग करके केरल में निश्चित रूप से मार्ग निकालेंगे ।
नागेश्वर जी ने हैदराबाद रिंग रोड के बारे में कहा है, इसमें लैंड एक्विजिशन की बहुत प्राब्लम है । सरकार इसे निश्चित रूप से करना चाहती है । दानिश जी ने कहा है -“Trauma Centre is under construction by the State. Road is acquired by the NHAI for widening.” हमने पूरा बाजार भाव से कम्पेनसेशन दिया है । हमने कन्सट्रक्शन के लिए दिया है, अब स्टेट को उसे बनाना चाहिए, यही मैं उनसे कहूंगा । वीरेन्द्र सिंह जी ने कहा है क ट्रैक्टर इलैक्ट्रिक चले । इस पर रिसर्च चल रही है । योगी जी नागपुर आए थे, वहां बायो सीएनजी पर ट्रैक्टर लांच किया है । इसमें दो प्लास्टिक के सिलेंडर हैं, इस पर संशोधन चल रहा है । आपकी बात सही है, सरकार इसके लिए जरूर प्रयास करेगी ।
सुदीप जी ने कहा कि सपने दिखाए । मैं आपसे अभी भी नम्रतापूर्वक अनुरोध करता हूं, इसका अलग अर्थ न निकले । पिछले पांच साल में मैंने जितने सपने दिखाए और जितने वादे किए, उनमें से जो वादा पूरा नहीं हुआ, वह लाकर मुझे दीजिए, मैं पूरा कर दूंगा । मैं जानता हूं क केवल बातें करना ठीक नहीं होता, इसलिए मैं कुछ बातें साफ भी कह देता हूं क यह नहीं होगा । पूर्वी भारत की जो प्राब्लम है, Do not take it politically. सबसे कठिन काम करना बंगाल में है । I am not politically blaming you. अगर आपकी राज्य सरकार रोड के लैंड एक्विजिशन का 98 परसेंट कर देगी, एन्क्रोचमेंट हटाएगी, यूटिलिटी शिफ्टिंग में मदद करेगी, मैं इस सभागार में वचन देता हूं, आप जितने रोड लेकर आएंगे, उतने रोड मैं एनएचआई के पूरे कर दूंगा ।
श्री सुदीप बन्दोपाध्याय: महोदय, हमारी राज्य सरकार की किसानों के पेट पर लात मारकर जमीन लेने की नीति नहीं है । हम चाहते हैं किसान ज्यादा रुपये लें, इसके लिए केंद्र सरकार असिस्ट करे ।
श्री नितिन गडकरी: माननीय अध्यक्ष जी, मैं बात बताऊंगा तो आपको आश्चर्य होगा कि वर्ष 2014 लैंड एक्विजिशन एक्ट के बाद मेरे पास 150-200 डेलीगेशन आए हैं ।
ये इसके लिए नहीं आए हैं कि हमारी लैंड रोड में मत लीजिए, मेरे पास इसलिए आए हैं कि मेरी बाकी आधी लैंड भी ले लीजिए । क्योंकि आज सभी माननीय सदस्य जानते हैं कि जो लैंड एक्विजिशन की कॉस्ट हम दे रहे हैं, वह मार्केट से डेढ़ गुना ज्यादा है । मेरे डिपार्टमेंट ने इसके ऊपर ऑब्जेक्शन भी उठाए हैं, पर मैं भी किसान हूं, मैं सोचता हूं कि जो गरीब लोगों को मिलता है, उसे क्यों रोकते हो, जाने दो । …(व्यवधान)
AN HON. MEMBER: Kerala has a different experience.
श्री नितिन जयराम गडकरी: केरल के बारे में मैं आपको बताता चाहता हूं कि केरल की कॉस्ट ऐसी है कि हजारों करोड़ रुपये की रोड, 700 करोड़ रुपये का लैंड एक्विजिशन, 300 करोड़ का कंस्ट्रक्शन, यह कैसे होगा? इसमें इनकी गलती नहीं है । केरल की एक विशिष्ट स्थिति है । इन्होंने रोड के बाजू में बड़े-बड़े बंगले बना दिये । केरल और गोवा में रोड के साथ कोई मार्जिन छोड़ता ही नहीं है । इसके कारण उनके लैंड एक्वॉयर करने में बहुत खर्च आता है । फिर ये कहते हैं कि एलिवेटेड रोड बनाइए, एलिवेटेड रोड की कॉस्ट सवा सौ कि.मी. जाती है, फिर भी मैं आपको बताना चाहता हूं कि केरल की प्रॉब्लम लेजिटिमेट और जेन्यूइन है । इसमें आप कुछ नहीं कर सकते हैं क्योंकि यह परिस्थितिवश है । इसके लिए आप अपने मुख्य मंत्री जी को कहिए, आप तुरंत आइए, मैं उसमें कुछ सहयोग करके मार्ग निकालूंगा और आपकी प्रॉब्लम को रिजाल्व कर दूंगा ।
कश्मीर के बारे में मैं फारूख साहब को बताना चाहता हूं । आप बहुत सीनियर हैं । हमारा डिपार्टमेंट 60 हजार करोड़ रुपये का काम केवल कश्मीर में कर रहा है । जम्मू से श्रीनगर का जो रोड है, इसकी बड़ी-बड़ी टनल, स्टेट ऑफ द आर्ट बनी हैं । जोजिला पास का टेंडर अभी नहीं हो पाया है । 6500 करोड़ रुपये की एक टनल है, जो लद्दाख और लेह को जोड़ रही है, उसका काम हम शुरू करने जा रहे हैं, जहां केवल चार महीने ही काम हो सकता है । प्रधान मंत्री जी के पैकेज द्वारा हमने कश्मीर में इतना काम किया है कि अगर मैं जिम्मेदारी के साथ कहूं, आप इसका हिसाब लगा सकते हैं कि पिछले 25 साल में जितना काम नहीं हुआ उतना पांच साल में हुआ है ।
डॉ. फारूख अब्दुल्ला: आपने बहुत अच्छा कमा किया है, इसमें कोई शक नहीं है । अगर, आप जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाइवे को देखें । …(व्यवधान)
श्री नितिन जयराम गडकरी: यह जम्मू की लाइफ लाइन भी है ।
डॉ. फारूख अब्दुल्ला: इसमें जो बनिहाल से रामबन का सेक्शन है, अगर एक बारिश हो जाए तो सारा रोड ही गायब हो जाता है । मैंने आपसे इस बारे में पहले भी बात की थी । हिन्दुस्तान कंस्ट्रक्शन कार्पोरेशन इस काम को कर रही थी । उस समय उनको फाइनेंशियल डिफिक्लटीज आ गई थीं । उसमें 9 टनलें थीं, उनको रिड्यूस करके 4 कर दी गई हैं । जब तक ये सेक्शन ठीक नहीं होगा, तब तक हमारे लिए मुश्किल बनी रहेगी ।
श्री नितिन जयराम गडकरी: सर, हमने कंक्रीटिंग करना शुरू कर दिया है । अब इसको डेढ़-डेढ़ और दो-दो फीट का बनाएंगे ।
डॉ. फारूख अब्दुल्ला : इलेक्ट्रिक गाड़ियों का भी एक मसला है । हम लोग उनके साथ बैठकर आपसे बात करेंगे ।
श्री नितिन जयराम गडकरी: सर, मैं आऊंगा और आपके साथ बात भी करूंगा ।
मारन साहब ने तमिलनाडु के बारे में कहा है । हमारे पांच साल में, मैं साहब का सम्मान करता हूं, उन्होंने भी अच्छा काम किया है । हमने अपने राज में अन्याय नहीं किया । हमने तमिलनाडु में 2385 कि.मी. रोड कंस्ट्रक्शन पूरा किया है । अंडर इम्प्लीमेंटेशन अवार्ड, न्यू प्रोजेक्ट 2055कि.मी. का कार्य ऑलरेडी सिस्टम में है और प्रोजेक्ट अंडर टेंडरिंग 395 कि.मी. का है, डीपीआर अंडर प्रोग्रेस 2000 कि.मी. का है । हमने किसी स्टेट के साथ अन्याय नहीं किया है और न करेंगे ।
सुदीप जी को मैं बताना चाहूंगा कि भारतमाला योजना के कुल 9000 कि.मी. में से एक हजार कि.मी. केवल पश्चिम बंगाल में है । आपके साथ अन्याय नहीं होगा । …(व्यवधान) मैं सम्मानीय चौधरी जी को यह आश्वासन देना चाहता हूं कि मैं बंगाल के सांसदों को जैसे क्वेस्चन ऑवर होता तो प्रतिदिन मेरे यहां एक स्टेट की मीटिंग होती है, अभी केरल राज्य की हुई है । मैं आपकी मीटिंग बुलाकर, उस दिन अधिकारी भी वहां से आएंगे, मैं आपके प्रॉब्लम को रिजाल्व कर दूंगा ।
मैं प्रो.सौगत रॉय जी को भी बताना चाहूंगा कि 14000 कि.मी. और 21 हजार कि.मी. एनएच-34 It is under the control of PWD. आपके बंगला में जो एनएच-34 है It is under the control of PWD, Government of West Bengal and working on our behalf. अपनी सरकार को थोड़ा-सा गतिशील बनाइए ।
सर, एन.एच. 24 424 किलोमीटर का है । अभी 242.7 किलोमीटर पूरा हुआ है, बैलेंस 181.3 किलोमीटर है । यह अण्डर कंस्ट्रक्शन है, 98 किलोमीटर की टेन्डर अवार्ड हो चुका है और स्टेट गवर्नमेंट पी.डब्ल्यू.डी ऑन ऑवर बिहाफ कर रही है तो मैं उसे गति देने का काम करूंगा । मैं फिर से एक बार माननीय सदस्यों को धन्यवाद दूंगा । इसके बाद आपकी जो भी परेशानियां होगी, उसके लिए आप आइए, सर, आप हमारी मांग को पास करने की कृपा करें, मैं आपसे यही अनुरोध करना चाहता हूं, धन्यवाद ।
माननीय अध्यक्ष: श्री एन. के. प्रेमचन्द्रन, क्या आप कटौती प्रस्ताव प्रस्तुत करना चाहते हैं?
SHRI N.K. PREMACHANDRAN (KOLLAM): Sir, I withdraw the Cut Motions which are listed in my name against Demand No. 83.
माननीय अध्यक्ष: क्या सभा की यह इच्छा है कि श्री एन. के. प्रेमचन्द्रन द्वारा प्रस्तुत किए गए सभी कटौती प्रस्तावों को वापस लिया जाए?
कटौती प्रस्तावों को सभा की अनुमति से वापस लिया गया ।
माननीय अध्यक्ष: अब मैं सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय से संबंधित अनुदान की मांग सभा के मतदान के लिए रखता हूं ।
“कि अनुदानों की मांगों की सूची के स्तम्भ 2 में सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय से संबंधित मांग संख्या 83 के सामने दर्शाये गए मांग शीर्ष के संबंध में 31 मार्च, 2020 को समाप्त होने वाले वर्ष में संदाय के दौरान होने वाले खर्चों की अदायगी करने हेतु अनुदानों की मांगों की सूची के स्तम्भ 4 में दर्शायी गई राजस्व लेखा तथा पूंजी लेखा संबंधी राशियाँ से अनधिक संबंधित राशियों भारत की संचित निधि में से राष्ट्रपति को दी जाएं । ” Demands for Grants (2019-2020) in respect of the Ministry of Road Transport and Highways submitted to the Vote of Lok Sabha No. of Demand Name of Demand Amount of Demands for Grants on Account voted by the House on February 1, 2019 Amount of Demands for Grants submitted to the Vote of the House 1 2 3 4 Revenue(Rs.) Capital(Rs.) Revenue(Rs.) Capital(Rs.) 83 Ministry of Road Transport and Highways 8450,21,00,000 55585,67,00,000 13169,61,00,000 87233,4900,000 प्रस्ताव स्वीकृत हुआ ।
माननीय अध्यक्ष: सभा की कार्यवाही दो बजकर तैंतालिस मिनट तक के लिए स्थगित की जाती है ।
13.42 hrs The Lok Sabha then adjourned for lunch till Forty Three Minutes past Fourteen of the clock.
14.45 hrs The Lok Sabha re-assembled at Forty-Five Minutes past Fourteen of the Clock.
(Shri Bhartruhari Mahtab in the Chair) UNION BUDGET – (2019-20)...Contd.
DEMANDS FOR GRANTS