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State Consumer Disputes Redressal Commission

Executive Engineer Electricity ... vs Monika & Others on 19 November, 2024

  	 Cause Title/Judgement-Entry 	    	       STATE CONSUMER DISPUTES REDRESSAL COMMISSION, UP  C-1 Vikrant Khand 1 (Near Shaheed Path), Gomti Nagar Lucknow-226010             First Appeal No. A/1476/2023  ( Date of Filing : 04 Sep 2023 )  (Arisen out of Order Dated 24/04/2023 in Case No. Complaint Case No. CC/46/2021 of District Baghpat)             1. Executive Engineer Electricity Distribution Division  Baraut Tehsil,Baraut, Dist.-Baghpat ...........Appellant(s)   Versus      1. Monika & Others  R/O Silana, Tehsil, Baraut, Dist.-Baghpat ...........Respondent(s)       	    BEFORE:      HON'BLE MR. JUSTICE ASHOK KUMAR PRESIDENT            PRESENT:      Dated : 19 Nov 2024    	     Final Order / Judgement    

राज्‍य उपभोक्‍ता विवाद प्रतितोष आयोग, उ0प्र0, लखनऊ।

(मौखिक)                                                                                   अपील संख्‍या:-1476/2023 एक्‍जीक्‍यूटिव इंजीनियर, इलैक्ट्रिसिटी डिस्‍ट्रीब्‍यूशन डिवीजन, बडौत, तहसील बड़ौत, जिला बागपत।

बनाम मोनिका पत्‍नी स्‍व0 योगेन्‍द्र, निवासिनी ग्राम सिलाना तहसील बडौत जिला बागपत आदि।

समक्ष :-

मा0 न्‍यायमूर्ति श्री अशोक कुमार, अध्‍यक्ष            अपीलार्थी के अधिवक्‍ता         : श्री इसार हुसैन प्रत्‍यर्थीगण के अधिवक्‍ता        : श्री आलोक सिन्‍हा दिनांक :-19.11.2024 मा0 न्‍यायमूर्ति श्री अशोक कुमार , अध्‍यक्ष द्वारा उदघोषित निर्णय प्रस्‍तुत अपील, अपीलार्थी/ विद्युत विभाग की ओर से इस आयोग के सम्‍मुख धारा-41 उपभोक्‍ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के अन्‍तर्गत जिला उपभोक्‍ता विवाद प्रतितोष आयोग, बागपत द्वारा परिवाद सं0-46/2021 में पारित निर्णय/आदेश दिनांक 24.4.2023 के विरूद्ध योजित की गई है।
संक्षेप में वाद के तथ्‍य इस प्रकार है कि प्रत्‍यर्थी/परिवादिनी मोनिका के पति योगेन्द्र पुत्र रामचन्द्र निवासी ग्राम सिलाना तहसील बडौत जिला बागपत एक किसान थे। योगेन्द्र के पिता रामचन्दर के नाम टयूबवैल का विद्युत कनेक्शन है, जिसकी मृत्यु हो जाने के उपरान्त उक्त कनेक्शन को उसके पुत्र राजेन्द्र, जोगेन्द्र व योगेन्द्र चला रहे हैं। दिनांक 04.8.2020 को प्रत्‍यर्थी/परिवादिनी के पति योगेन्द्र खेत में चारा काटते समय बिजली का तार टूटने से तार की चपेट में आ गये जिस समय बिजली का तार टूटा उस समय बिजली आयी हुई थी, विद्युत विभाग की लापरवाही के कारण ही बिजली का तार टूटकर   -2- गिरा है। प्रत्‍यर्थी/परिवादिनी के पति के भाई राजेन्द्र व जोगेन्द्र खेत में पहुंचे तो उन्होने देखा कि योगेन्द्र बिजली के तार में लिपटा हुआ पडा है तथा योगेन्द्र को लेकर उसके भाई जब उसे अस्पताल ले जा रहे थे, तो रास्ते में ही योगेन्द्र ने दम तोड दिया और उसकी मृत्‍यु हो गई। प्रत्‍यर्थी/परिवादिनी के पति योगेन्द्र की मृत्यु विद्युत विभाग की लापरवाही के कारण हुई है, जिस कारण प्रत्‍यर्थी/परिवादिनी विद्युत विभाग से क्षतिपूर्ति पाने की अधिकारिणी है। प्रत्‍यर्थी/परिवादिनी के दो छोटे-छोटे बच्चे हैं तथा घर में प्रत्‍यर्थी/परिवादिनी का पति योगेन्द्र ही एक मात्र कमाने वाला था। उक्त घटना की सूचना प्रत्‍यर्थी/परिवादिनी द्वारा थाने में व विद्युत विभाग में भी दी गई थी, लेकिन प्रत्‍यर्थी/परिवादिनी को आज तक कोई क्षतिपूर्ति/मुआवजा विद्युत विभाग द्वारा नहीं दिया गया है। प्रत्‍यर्थी/परिवादिनी द्वारा अपीलार्थी/विपक्षी को पंजीकृत नोटिस दिनांक 11.9.2020 में क्षतिपूर्ति/मुआवजे के रुप में एक मुश्त अंकन 20 लाख रुपये की मांग का भेजा, परन्तु अपीलार्थी/विपक्षी विद्युत विभाग द्वारा न तो मुआवजे की धनराशि अदा की और न ही नोटिस का जवाब दिया अत्एव क्षुब्‍ध होकर परिवाद जिला उपभोक्‍ता आयोग के सम्‍मुख प्रस्‍तुत किया गया।
अपीलार्थी/विपक्षी विद्युत विभाग की ओर से जिला उपभोक्‍ता आयोग के सम्‍मुख नोटिस तामीला के बावजूद भी कोई उपस्थित नहीं हुआ और न ही कोई प्रतिवाद पत्र प्रस्‍तुत किया गया अत्एव जिला उपभोक्‍ता आयोग द्वारा अपीलार्थी/विपक्षी विद्युत विभाग के विरूद्ध परिवाद की कार्यवाही एकपक्षी रूप से अग्रसारित की गई।
विद्वान जिला उपभोक्‍ता आयोग द्वारा परिवादी के अभिकथन एवं उपलब्‍ध साक्ष्‍य पर विस्‍तार से विचार करने के उपरांत परिवाद को एकपक्षीय रूप से स्‍वीकार करते हुए निम्‍न आदेश पारित किया है:-
-3-
"परिवादिनी का परिवाद आंशिक रुप से विपक्षी के विरुद्ध एकपक्षीय रुप से क्षतिपूर्ति हेतु स्वीकार किया जाता है। विपक्षी को निर्देशित किया जाता है, कि परिवादीगण को अंकन 10,00,000/- (दस लाख रुपये) क्षतिपूर्ति की बाबत 60 दिन के अन्दर अदा करें तथा परिवादिनी को मानसिक कष्ट की बाबत अंकन 20,000/- (बीस हजार रुपये) तथा वाद व्यय के रुप में अंकन 5,000/- (पांच हजार रुपये) भी 60 दिन के अन्दर अदा करें। ऐसा न करने पर परिवादीगण विपक्षी से उक्त समस्त धनराशि पर छः प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज भी पाने का हकदार होगें।
प्रार्थना पत्र यदि कोई लम्बित हो तो वह सभी इस निर्णय के अनुसार निस्तारित किए जाते है।
इस आदेश की सत्यापित प्रति पक्षकारों को उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के प्रावधान के अनुसार निःशुल्क प्राप्त कराई जाए। इस आदेश की प्रति को कनफोनेट वेबसाईट पर पक्षकारों के अवलोकन के लिए अपलोड किया जाए।
पत्रावली निर्णय की प्रति के साथ अभिलेखागार दाखिल किया जाए।'' जिला उपभोक्‍ता आयोग के प्रश्‍नगत निर्णय/आदेश से क्षुब्‍ध होकर अपीलार्थी/विपक्षी विद्युत विभाग की ओर से प्रस्‍तुत अपील योजित की गई है।
अपीलार्थी के विद्वान अधिवक्‍ता द्वारा कथन किया गया कि जिला उपभोक्‍ता आयोग द्वारा पारित निर्णय/आदेश पूर्णत: तथ्‍य और विधि के विरूद्ध है। यह भी कथन किया गया कि प्रत्‍यर्थी द्वारा अनुचित लाभ प्राप्‍त करने के उद्देश्‍य से गलत एवं असत्‍य कथनों के आधार पर परिवाद प्रस्‍तुत किया गया है।
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यह भी कथन किया गया कि जिला उपभोक्‍ता आयोग द्वारा पारित निर्णय/आदेश एकपक्षीय है एवं अपीलार्थी को परिवाद में कभी कोई नोटिस प्राप्‍त नहीं हुआ। यह भी कथन किया गया कि मृतक अपीलार्थी का उपभोक्‍ता नहीं है एवं दुर्घटना से पूर्व विद्युत आपूर्ति लाईन के संबंध में कोई शिकायत नहीं की गई थी, इसलिए अपीलार्थी द्वारा सेवा प्रदान करने में कोई कमी नहीं की गई।
यह‍ भी कथन किया गया कि मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना के अन्तर्गत प्रत्‍यर्थी/परिवादिनी द्वारा जिला मजिस्ट्रेट, बागपत के यहॉ से पॉच लाख रूपये की धनराशि का भुगतान दिनांक 25.3.2021 को प्राप्त कर लिया है। यह भी कथन किया गया कि जिला उपभोक्‍ता आयोग द्वारा बिना किसी गुणदोष पर विचार किए निर्णय/आदेश पारित किया गया है, जो कि अनुचित है   यह भी कथन किया गया कि मृतक पर कथित रूप से विद्युत तार टूटकर गिरने की बात को भी किसी विश्वसनीय साक्ष्य से साबित नहीं किया गया है। यह भी कथन किया गया कि चूंकि अपीलार्थी को नोटिस प्राप्‍त नहीं हुई अत्एव अपीलार्थी द्वारा अपना उत्‍तर/साक्ष्‍य प्रस्‍तुत नहीं किया जा सका है। अपीलार्थी के अधिवक्‍ता द्वारा अपील को स्‍वीकार कर प्रश्‍नगत निर्णय/आदेश को अपास्‍त किये जाने की प्रार्थना की गई।
प्रत्‍यर्थी के अधिवक्‍ता द्वारा कथन किया गया कि जिला उपभोक्‍ता आयोग द्वारा पारित निर्णय/आदेश पूर्णत: तथ्‍य और विधि के अनुकूल है। प्रत्‍यर्थी के विद्वान अधिवक्‍ता द्वारा यह भी कथन किया गया कि उपरोक्‍त तार टूटने की घटना अपीलार्थी विद्युत विभाग की लापरवाही के कारण हेतु हुई है। यह भी कथन किया गया कि जिला   -5- उपभोक्‍ता आयोग द्वारा पारित प्रश्‍नगत निर्णय/आदेश उचित है, जिसमें किसी प्रकार के हस्‍तक्षेप की आवश्‍यकता नहीं है।
अपीलार्थी के विद्वान अधिवक्‍ता श्री इसार हुसैन तथा प्रत्‍यर्थी की ओर से उपस्थित विद्वान अधिवक्‍ता श्री आलोक सिन्‍हा को विस्‍तार पूर्वक सुना गया तथा प्रश्‍नगत निर्णय/आदेश व पत्रावली पर उपलब्‍ध समस्‍त प्रपत्रों का अवलोकन किया गया।
मेरे द्वारा विद्वान जिला उपभोक्‍ता आयोग द्वारा पारित प्रश्‍नगत निर्णय/आदेश एवं पत्रावली पर उपलब्‍ध समस्‍त अभिलेखों के परिशीलनोंपरांत यह पाया गया कि अपीलार्थी/विद्युत विभाग की लापरवाही व सेवा में कमी के कारण विद्युत लाईन का रखरखाव ठीक न होने के कारण प्रत्‍यर्थी/परिवादिनी के पति के खेत में बिजली का तार लाईन से टूटकर गिर जाने एवं उसमे विद्युत प्रवाह जारी रहने के कारण करंट लगने से प्रत्‍यर्थी/परिवादिनी के पति योगेन्द्र की दुर्घटना में मृत्यु हो गयी, जिसके लिए अपीलार्थी/विद्युत विभाग उत्‍तरदायी है, जिसके संबंध में विद्युत विभाग द्वारा कोई क्षतिपूर्ति आज तक प्रत्‍यर्थी/परिवादिनी को प्रदान नहीं की गई, जो कि अपीलार्थी/विपक्षी की लापरवाही व सेवा में कमी को द्योतक है अत्एव इस सम्‍बन्‍ध में विद्वान जिला उपभोक्‍ता आयोग द्वारा पारित निर्णय/आदेश पूर्णत: उचित एवं विधि सम्‍मत है, जिसमें किसी प्रकार कोई अवैधानिकता अथवा विधिक त्रुटि अपीलीय स्‍तर पर नहीं पायी गई, तद्नुसार प्रस्‍तुत अपील निरस्‍त की जाती है।
अपीलार्थी को आदेशित किया जाता है कि वह उपरोक्‍त निर्णय/आदेश का अनुपालन 30 दिन की अवधि़ में किया जाना सुनिश्चित करें। अंतरिम आदेश यदि कोई पारित हो, तो उसे समाप्‍त किया जाता है।
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प्रस्‍तुत अपील को योजित करते समय यदि कोई धनराशि अपीलार्थी द्वारा जमा की गयी हो, तो उक्‍त जमा धनराशि मय अर्जित ब्‍याज सहित सम्‍बन्धित जिला उपभोक्‍ता आयोग को यथाशीघ्र विधि के अनुसार निस्‍तारण हेतु प्रेषित की जाए।
आशुलिपिक/वैयक्तिक सहायक से अपेक्षा की जाती है कि वह इस निर्णय/आदेश को आयोग की वेबसाइट पर नियमानुसार यथाशीघ्र अपलोड कर दें।
 
                                 (न्‍यायमूर्ति अशोक कुमार)                                                                 अध्‍यक्ष                                                                                                                                 हरीश सिंह वैयक्तिक सहायक ग्रेड-2., कोर्ट नं0-1       [HON'BLE MR. JUSTICE ASHOK KUMAR] PRESIDENT