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Lok Sabha Debates

Further Discussion On The Demands For Grants Nos. 84 And 85 Under The Control Of The ... on 17 July, 2019

Seventeenth Loksabha an> Title: Further discussion on the Demands for Grants Nos. 84 and 85 under the control of the Ministry of Rural Development and Demands for Grants Nos. 1, 2 under the control of the Ministry of Agriculture and Farmers Welfare for 2019-2020 (Discussion concluded).

 

*SHRI KODIKUNNIL SURESH (MAVELIKKARA): Coming to the moot point, my constituency Mavelikkara is home to Kuttanad region which is renowned for its paddy fields and cultivation below mean sea level. The farmers due to this unique condition face added crisis of farming at constant risk and suffer crop losses regularly. The UPA-1 Government had instituted the National Commission on Farmers, under the chairmanship of Dr. M.S. Swaminathan, whose report, the Swaminathan Commission report recommended the Kuttanad package, and implemented during UPA-2 Government. In the first Kuttanad package, the outer bunds were strengthened for padashekharams (polder lands reclaimed) and Chittira, Marthandam and Rani among others in FMP. I recall that a detailed project report covering strengthening bunds of around 400 Padasekharams (farm clusters) was examined by the Central Water Commission involving an outlay of Rs. 1212 crores.  The projects were considered under FMP (flood Management Projects) and I demand allocations in the budget to ensure the implementation of FMP projects at the earliest. The Kuttanad package as of now is stopped by the Central Government. Since the irrigation and agriculture related supply of channelized water is a necessity for improved farming, I urge the Government to reimplement Kuttanad package. The failure of the authorities to deepen the A-C Canal ensure the free flow of water through the canal often leads to submerging of Alappuzha-Changanasseri Road in flood waters and damage to fields during monsoon every year. The renovation and reconstruction  of AC canal is necessary and urgent and I seek funds from the Government for the purpose. Thanneermukkom bund (Thannermukkom Salt Water Barrier) is important in preventing tidal action and intrusion of salt water in to the Kuttanad low lands.  This bund prevents seepage of salt water and helps the farming sector significantly. I seek necessary funds for redevelopment of Thanneermukkom bund as it requires timely renovation. Thottappally Spillway is Kuttanad’s drain-way out to the Arabian Sea.  The Spillway splits the Thottappally lake with the fresh water part to the east and saline Thottappally river mouth to the west merging with the Arabian Sea.

The importance of this spillway in farming especially for Kuttanad is known to the authorities and I demand funds for the redevelopment and re-strengthening of the spillway at the earliest. These three structures together form the backbone of water channeling and regulation and I demand that sufficient funds be allocated to renovate and reconstruct them at the earliest. Apart from this as a comprehensive package, I demand that the Government allocate funds for the strengthening of bunds in both upper Kuttanad and lower Kuttanad region that are 400 and 300 respectively as a special union Government package so that farming remains uninterrupted and farmers are able to engage in two cycles of farming, puncha and second season.  The appropriate flood management project and RKVY funds may be apportioned for the same.

The MSP for paddy as declared by the state Government is insufficient and I demand the union Government to increase the MSP component by means of extended support. I invite the attention of the house to the fact that Shri M.S. Swaminathan is a proud native of Kuttanad, mankombu, who founded the M.S. Swaminathan research foundation and is instrumental in formulating the swaminathan commission report during the UPA-1 Government. In honour of the proud son of Kuttanad, I urge the Government to establish a Kuttanad agricultural development authority that will function as an advanced research centre engaged in production of high yield rice varities, technologies in sustainable farming, and evolving new specialized methods for enhancing yield of sea level farming.  The centre will also function as a national institution propagating paddy farming and providing technical inputs. I would also urge the Government to allocate funds for upgrading following centres:

The rice research station Mankombu, Alappuzha District, Kerala to be upgraded to a national institute of rice research that will promote research on high yield rice varities and matters related to cultivation agronomy and soil science.
The upgradation of Krishi Vigyan Kendra under Kerala Agricultural University Kottarakkara to an ICAR campus.
The upgradation of Central hatchery Chengannur to national hatchery with advanced production and research capabilities.
To set up National Paddy.
To conclude, I would state that the farmers of Kuttanad are fighters.
They resist the onslaught of nature, be it floods or farming below sea level.  All they need is the support and kindness to help them renew their crumbling infrastructures.
                 
*डॉ. भारतीबेन डी.श्याल (भावनगर):भारत एक कृषि प्रधान देश है । पूर्व में गाँव की लगभग 95 प्रतिशत आबादी कृषि उत्पादन से जुड़ी रही है । पिछले कई वर्षों में हमने देखा है कि लोगों का कृषि के प्रति रूझान कम हो रहा था और कृषि उत्पादन में बेरोजगारी सी छा गई थी क्योंकि पूर्व की सरकारों ने किसानों के कल्याण के बारे में नहीं सोचा । लोग कृषि व्यवसाय को छोड़कर अन्य कार्य में ज्यादा रूचि दिखा रहे थे । वर्ष 2014 में जब हमारी सरकार बनी तो माननीय मोदी जी ने कृषि उत्पादन को बढ़ावा देने व किसानों का रूझान कृषि उत्पादन की ओर करने हेतु अनेकों कदम उठाए और उसमें हम आज सफल होते नजर आ रहे हैं । आज फिर किसान का रूझान कृषि की ओर जा रहा है । माननीय मोदी जी ने किसान सम्मान निधि व पेंशन योजना की शुरूआत करके सिद्ध कर दिया है कि हमारी सरकार गाँव, गरीब, किसान,तथा मजदूर की है ।
मुझे खुशी हो रही है कि हमारी सरकार ने किसानों की आय दोगुनी करने का जो सकंल्प लिया था आज हम उसमें सफल होते नजर आ रहे हैं । वर्ष2014 से पूर्व लोग कहने लग गए थे कि चलो शहर की ओर लेकिन आज कहते है चलो गाँव की ओर । हमारी सरकार ने बिचौलियों को समाप्त कर किसानों को सीधे बैंक से जोड़ दिया है ताकि किसान को शत-प्रतिशत सरकार का लाभ मिल सके । कुछ वर्ष पूर्व हमने वो भी दिन देखे है जब किसान यूरिया के लिए भटकता था आज खाद व अन्य सामग्रियाँ आसानी से उपलब्ध हो रही हैं ।
भारत गाँव में बसता है, यही सोच रखते हुए आदरणीय मोदी जी ने ग्रामीण विकास पर ध्यान दिया । शौचालय देकर महिलाओं का सम्मान बढ़ाया, मुफ्त गैस कनेक्शन देकर महिलाओं को स्वच्छ व सरल ईंधन दिया, गाँव में मुफ्त बिजली कनेक्शन दिए जा रहे हैं । गाँवों को प्रधानमंत्री सड़क योजना से जोड़ने का काम भी हमारी पूर्व की माननीय अटल बिहारी वाजपेयी जी की सरकार ने ही किया था और आज माननीय मोदी जी उसको आगे बढ़ाते हुए गाँवों की छोटीछोटी- आबादी को भी सड़क मार्गों से जोड़ रहे  हैं ।
मैं ग्रामीण विकास, कृषि तथा किसान कल्याण की अनुदान मांगों का समर्थन करती हूँ ।
*श्री बालूभाऊ उर्फ सुरेश नारायण धानोरकर (चन्द्रपुर)  : आपने मुझे वर्ष 2019-20के लिए ग्रामीण विकास मंत्रालय और कृषि तथा किसान कल्याण मंत्रालय के अधीन अनुदानों की मांगों पर अपने विचार रखने का मौका दिया । उसके लिए धन्यवाद ।
महाराष्ट्र में किसानों की स्थिति बहुत दयनीय है । परेशान किसान खुदकुशी करने को मजबूर है ।  एक अखबार में छपी खबर के मुताबिक इस साल शुरूआती4 महीनों में कुल 808 किसानों ने खुदकुशी की है । हालांकि यह पिछले साल के शुरूआती4 महीने के आंकड़ों से88 कम है । पिछले साल अप्रैल तक 896 किसानों ने खुदकुशी की थी ।
मैं महाराष्ट्र में विदर्भ रीजन से आता हूँ और बड़े दुख के साथ कहना पड़ रहा है कि इसी क्षेत्र में सबसे ज्यादा किसानों की खुदकुशी की घटनाएं होती है । विदर्भ में इस साल जनवरी से अप्रैल तक सबसे ज्यादा344 किसानों ने खुदकुशी की है । इसका मुख्य कारण है, किसानों पर भारी भरकम कर्जा होना, पर्याप्त सुविधा न मिलने के कारण उचित उपज न होना, जिसके कारण किसान कर्जा नहीं चुका पाता है ।  किसानों की आत्महत्या के और भी अन्य कारण हैं, उनमें से पहला है सूखा, सूखे के कारण पिछले वर्ष महाराष्ट्र में सोयाबीन जैसी फसलों को 60-70 फीसदी नुकसान हुआ है । कपास में, फसल का नुकसान 50 फीसदी तक हुआ । सूखा और कम वर्षा वाले प्रभावित क्षेत्रों में डीजल सब्सिडी देने के लिए साल2017-18 में21.34 करोड़ रूपये खर्च किये गए थे । इसके बाद से इस मद में कोई आबंटन नहीं किया गया । इस साल के लिए भी इसका बजट शून्य है । बजट में कहा गया है कि सब योजनाएं किसान और गांव के लिए है, फिर बजट में सूखे के लिए कुछ क्यों नहीं है । ये सबका साथ, सबका विकास की बात करते हैं । लेकिन हमें लगता है ये किसान के साथ विश्वासघात है । साल 2019-20 का कृषि बजट करीब एक लाख 30 हजार करोड़ रूपए है, जो कुल बजट का केवल 4.6 फासदी है । इसमें से 75,000 करोड रूपए पीएम – किसान योजना के लिए आबंटित किए गए है । इस तरह, अन्य कृषि योजनाओं के लिए सिर्फ 55,000 करोड़ रूपए ही बचते हैं ।
प्रधानमंत्री कृषि सिचाई योजना के तहत 'पर ड्राप-मोर क्रॉप' के बजट में 2018-19के मुकाबले 500 करोड़ रूपए की कटौती हुई है । पिछले साल इसके लिए 4000 करोड़ रूपये आबंटित किए गए थे, हालांकि इस बार 3,500 करोड़ रूपए ही आबंटित किए गए हैं । इसके अलावा, सरकार ने सूखे की समस्या से समाधान और जल संरक्षण के लिए बनाएं गए एकीकृत जलग्रहण प्रबंधन कार्यक्रम (इंटीग्रेटेड वाटरशेड मैनेजमेंट प्रोग्राम) के बजट में भी कटौती की है । साल 2018-19में इस योजना के लिए2,251 करोड़ रूपए की घोषणा हुई थी । लेकिन इस बार इसके तहत सिर्फ 2066 करोड़ रूपए आबंटित किए गए है । इसी तरह प्रधानमंत्री कृषि सिचाई योजना के एक अन्य भाग'हर खेत को पानी' के बजट में भी भारी कटौती की गई है । साल 2018-19 में इसके लिए 2600 करोड़ रूपए कर दिया गया । बाद में इसे संशोधित कर के 2181.19करोड़ रूपए कर दिया गया । वही, साल2019-20 में बजट में 'हर खेत को पानी' के तहत सिर्फ 1,069.55 करोड़ रूपए आबंटित किए गए हैं । अगर सरकार ऐसे ही बजट में कटौती करेगी तो किसान कल्याण कैसे हो पाएगा, हर खेत को पानी कैसे पहुंच पाएगा ।
सरकार ने किसानों के नुकसान की भरपाई करने के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना चलाई लेकिन, इस योजना में किसानों का कम, बीमा कंपनियों का ज्यादा फायदा हुआ । प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को लेकर किसानों की मुख्य शिकायत ये है कि दावा भुगतान में हमेशा देरी होती है । किसानों का तर्क है कि यदि उनकी फसल को बुवाई के किसी एक मौसम में नुकसान पहुंचा है, तो इसका मतलब है कि उन्हें उस साल खेती से कोई कमाई नहीं हुई । नतीजतन, अगले सीजन में बुवाई के लिए उनके पास पैसे नहीं होते हैं । बीमा कंपनियों ने महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा4,591 करोड़ रूपए का प्रीमियम इकट्ठा किया था । वर्ष 2018 खरीफ सीजन के लिए फसल बीमा के तहत 5,171 करोड़ रूपए के बकाया दावा राशि में से महाराष्ट्र राज्य में सबसे अधिक बकाया है, जो कि सूखे से सबसे ज्यादा प्रभावित राज्यों में से है । एक आर.टी.आई. के आंकड़ों के अनुसार, राज्य में 3,893करोड़ रूपये के अनुमानित दावों के मुकाबले36 फीसदी यानी कि 1,416 करोड़ रूपए का भुगतान अभी तक लंबित है ।
सरकार ने ठीक चुनाव से पहले किसानों के लिए एक और लुभावना वायदा किया, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना जिसके अंतर्गत6000 रूपए प्रतिवर्ष किसान के खाते में आएंगे । इस योजना के तहत महाराष्ट्र में पहली किश्त पाने वाले किसानों की संख्या 21.29 लाख थी लेकिन दूसरी किश्त के लाभार्थियों की संख्या घटकर15.02 लाख रह गई है ।
इस योजना के तहत किसानों के खाते में पहुंची धनराशि वापस होने लगी, कृषि मंत्री ने खुद एक सवाल के जवाब में कहा कि 1,19,743 लाभार्थियों के खाते में पीएम किसान योजना के तहत पैसे डालने के बाद उसे वापस कर लिया था । इसमें अकेले महाराष्ट्र में कुल 32,897 किसान थे । इस तरह प्रति खाते से वापस किए गए 2000रूपए के मुताबिक, कुल 23.95 करोड़ रूपए वापस हुए है । लेकिन मंत्री ने ये नहीं कहा कि जिनके खाते से वापस हुए है, उनके खाते में दोबारा पैसे डाले जाएंगे या नहीं ।
इस बार जीरो बजट खेती पर बहुत जोर दिया जा रहा है, खुद वित्तमंत्री जी ने भी अपने बजट भाषण में इसका जिक्र किया लेकिन दिया सिर्फ दो करोड़ रूपए है । परम्परागत कृषि विकास योजना का बजट 300से बढ़ाकर सिफ 325 करोड़ किया गया है । यानि मात्र 25 करोड रूपए जबकि केमिकल फर्टिलाइजर पर सब्सिडी आबंटन9900 करोड़ बढ़ाया गया है । अगर सरकार की सच में जीरो बजट खेती को बढ़ाने की मंशा है तो इसका बजट भी बढ़ाना चाहिए था । ऐसे तो सिर्फ किसानों को बेवकूफ बनाया जा रहा है । आप किसानों की आमदनी दोगुनी करने की बात करते हो लेकिन फसलों की कीमतों में अगर 3से5 फीसदी बढ़ोतरी होगी तो आमदनी कहां बढ़ेगी ।
अंत में, मैं यही कहना चाहता हूँ कि किसानों की आत्महत्याएं रोकनी है तो उनको मजबूत करना होगा, सिचाई के पर्याप्त साधन उपलब्ध कराने होंगे, उपज की उपयुक्त लागत देनी होगी, जीरो बजट खेती का नारा देकर किसानों को नहीं बहकाया जा सकता, किसानों के लिए चलाई जा रही सारी योजनाओं को सही तरीके से लागू करना होगा ।
मैं, यह घोषणा करता हूँ कि मैं अपनी सारी सैलरी को अपने क्षेत्र के किसानों के कल्याण के लिए खर्च करूंगा,पांच एकड़ तक की जमीन वाले किसानों के लिए मैं एक लाख तक के बीमे का प्रीमियम अपनी सैलरी से भरूंगा । मैं सरकार से अनुरोध करता हूँ कि ऐसा करने वाले सांसदों को अतिरिक्त अनुदान दिया जाए जिससे कि वो ज्यादा से ज्यादा किसानों की मदद कर सके ।
­­­ *DR. SUBHASH RAMRAO BHAMRE (DHULE): It is a matter of great pleasure and satisfaction that the budgetary estimate for the Agriculture Ministry for 2019-20 is 140 per cent higher than that for the year 2018-19 at Rs 57,600 crore. In this Budget, the government aims to invest widely in agriculture infrastructure and allied areas," and has also sought support from private entrepreneurship for value addition in farm sector especially in food processing industry. Against the Budget 2018-19 (revised) estimates of Rs 86,602 crore for agriculture and allied activities, the Budget 2019-20 proposed to invest 1,51,518 crare in this sector Due to sincere efforts of our Government, the agricultural and allied sectors in India have grown at an annual growth rate of nearly 2.9 per cent from 2014-15 to 2018-19. Women's participation in agriculture has also been increasing with 13.9 per cent 2015-16 from 11.7 per cent in 2005-06.
Our honourable PM has rightly said that one of the methods of boosting the economy is to see farmers as wealth creators of the nation and not merely as food producers. He further added, "We are now looking at farmers as exporters. There is tremendous potential for our farmers to grow exponentially." For fisherman Pradhan  Mantri Matsya Sampada Yojana has been announced in order to plug gaps in the fisheries value chain. The Government has carved out Ministry of Fisheries. Animal Husbandry and Dairying and an amount of Rs 805'crore has been allocated to Pradhan Mantri Matsya Sampada Yojana (PMMSY) to address critical gaps in the value chain, including infrastructure, modernisation, traceability, production. productivity, post- harvest management and quality control.
The finance minister pledged to "invest widely in agricultural infrastructure" and said the government will go back to the basics on one count: zero budget natural farming (ZBNF).ZBNF is a farming method which relies on a mix of cow dung. urine and jaggery as the primary soil nutrient instead of chemical fertilizers.
In the Budget it has been further pledged to create 10,000 new farmer producer organizations to ensure improved bargaining power for farmers while purchasing inputs and during selling their harvest. The Government will ensure that farmers benefit from the electronic national agricultural market, or e-NAM.
At present, the primary challenge before our government is to keep upto its target of doubling farmer incomes by 2022 and in this budget a number of important steps have been taken in this direction. In fact, the budget has tried to reduce financial stress and boost complementary income opportunities for farmers towards the goal of doubling farmers' income by 2022. The direct income support of Rs. 6,000 per year will also help it get closer to the goal. The government is also working to provide farmers  access to wider markets, cold chain and processing facilities so that they can earn better prices for their crop after harvesting season is over.
 
As far as the rural development is concerned, the total allocation for rural development has been increased from Rs 1,35.109 crore in 2018-19 to 1.40,762 crore this fiscal. The Government has allocated Rs 80,250 crore for road construction in rural areas in Budget 2019-20. To give a push to rural infrastructure, Budget 2019-20 proposes to make 1.25 lakh km of roads under Pradhan Gram Sadak Yojana under Phase III. This investment in rural areas will give necessary impetus to revive rural economy. The Budget also proposes to build 1.95 crore houses under Pradhan Mantari Awas Yojna in rural areas. Every single rural family will have electricity and LPG connection by 2022.
       Under SFURTI or the Scheme of Fund for Upgradation and Regeneration of Traditional Industries, 100 new clusters will be set up in 2019-20 to enable 50,000 rural artisans to come into economic value chain.
All rural households will be provided with piped water supply by 2024 under the Jal Jeevan Mission. The allocation to the National Rural Drinking Water Mission has been increased by 81.8% over the revised estimate of 2018-19. The allocation for this year is Rs 10,001 crore, as compared to Rs 5,500 crore in 2018-19 (revised estimate).   Swachh   Bharat    Mission    will    be  expanded     to    undertake    solid   waste management in every village. Allocation to National Livelihood Mission has also been increased by Rs 3,481 crore (55.3%) over the revised estimates of 2018-19.
As our Honourable PM Modi rightly said, this budget is for a 'New India', has a roadmap to transform the agriculture sector of the country. I once again congratulate our Finance Minister Smt. Nirmala Sitharam Ji for presenting the budget which has taken care of every aspect of Agriculture, Farmers' Welfare as well as rural economy. I am sure that this budget will transform the life of all the rural people and will help in evolution of a strong 'New India'. In fact, it is a citizen friendly, development friendly and future oriented budget.
With these words, I once again support the demands for grants for the Ministry  of Agriculture and Farmers' Welfare as well as Rural Development.
 
*श्री जनार्दन सिंह सिग्रीवाल (महाराजगंज):मैं ग्रामीणविकास तथा कृषिऔर कल्याण मंत्रालयके अनुदानोंकी मांगों कासमर्थन करतेहुए मंत्री जीका ध्यान अपनेलोक सभा क्षेत्रमहाराजगंज, बिहारकी समस्याओंकी तरफ दिलानाचाहता हूं ।
1.    प्रधान मंत्री ग्रामीण सड़क योजना के माध्यम से बन रहे सड़कों के निर्माण सही तरीके से किया जाए ताकि सड़क बनने के बाद निर्धारित समय तक ठीक-ठाक रह सके । ऐसा देखा जाता है कि समय से पहली सड़क में गड्ढे बन जाता है, जिससे आम जनता को चलने में काफी कठिनाई होती है ।
2.    मैं अपने लोक सभा क्षेत्र में पीएमजीएसवाई से बने सड़कों का उच्च स्तरीय गठित टीम से जांच कराने की मांग सरकार से करता हूं ।
3.    जो सड़कें तीन साल पहले बनी है और तीन साल के अंदर ही खराब हो गई । ऐसे संवेदकों एवं अभियंताओं के ऊपर जिनकी मिलीभगत के कारण घटिया निर्माण कार्य हुआ है, वैसे संबंधित लोगों पर जांच के उपरांत कठोर कार्रवाई की जाए ।
4.    जो सड़क अभी तक नहीं बन पाई है, उसे तुरंत पीएमजीएसवाई के माध्यम से बनवाया जाए ।
5.    मेरे क्षेत्र के सभी प्रखंडों में किसानों के द्वारा उत्पादित फलों एवं सब्जियों के भंडारण हेतु शीतागारों की स्थापना की जाए ।
6.    मनरेगा के माध्यम से कराए जा रहे कार्यों की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जाए, इसके साथ ही मेरे लोक सभा क्षेत्र के अंतर्गत जलालपुर प्रखंड में इस योजना से कराए गए कार्यों का उच्च स्तरीय जांच कराया जाए और जाचोपरांत घटिया कार्य कराने वाले संबंधित अधिकारियों पर कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए ।
   
7.    प्रधान मंत्री आवास योजना से बन रहे आवासों की गुणवत्ता पर भी विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है । आज भी बिचौलियों द्वारा लाभुकों का शोषण किया जा रहा है । उच्च स्तरीय जांच टीम बना कर जांच कराई जाए और दोषियों के ऊपर कानूनी कार्रवाई की जाए ।
8.    प्रधान मंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत किसानों को मिलने वाले लाभ में हो रही अनियमितता पर भी विशेष ध्यान देने की जरूरत है । इस योजना के तहत निर्धारित मानक के अनुसार किसानों को लाभ पहुंचाने के लिए चयन में काफी अनियमितता होती है जिस कारण असली लाभुकों का चयन कम हो पाता है । इस योजना में बैंक, ब्लॉक और ब्रोकर की उच्च स्तरीय कमटी बनाकर सांठगांठ की जांच की जाए एवं जांचोपरांत दोषियों के ऊपर कानूनी कार्रवाई की जाए ।
9.    मेरे संसदीय क्षेत्र के सभी प्रखंडों में एक-एक  स्थैतिक मृदा परीक्षण प्रयोगशालाओं की स्थपना की जाए ताकि किसानों को मिट्टी की जांच कराने के बाद उस अनुसार फसल लगाने की सुविधा मिले ।

आपसे  आग्रह  है  कि उपरोक्त  सभी कार्यों  पर  शीघ्र आवश्यक  कार्रवाई  करने का कष्ट करें । 

                                                                                       

*SHRI G.M. SIDDESHWAR (DAVANAGERE):  Mahatma Gandhiji said the soul of India is in the rural parts of the country.  To make the life better for our farmers, the Hon’ble Prime Minister Shri Narendra Modi Ji has implemented several programmes.  The Union Government has emphasized on private investment in infrastructure for agriculture to achieve the target of doubling the income of farmers by 2022.  This budget has given priority to zero budget farming and also to investment in agro-based industries.  Besides this, the Government has proposed to provide better marketing avenues, remunerative prices to agriculture produces, setting up of 10 thousand farmer organizations all over the country, all these are welcome steps.

          The Union Government has also taken steps to encourage fodder production, preservation and conservation of milk, establishment of  e-market, eNAM in the country.  Our Hon’ble Prime Minister is taking all these pro-farmer initiatives to strengthen the hands of our Annadata, the food provider.  As far as social security is concerned our NDA Government under the able leadership of Shri Narendra Modi ji has given a significant priority to farmers by taking measures such as Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana, etc.  I appreciate the Government for its commitment to extend the social security cover to farmers also.

 

          I would like to mention that our Hon’ble Prime Minister Shri Narendra Modiji introduced various pro-farmer schemes during the last five years.  Achieving self sufficiency in the production of Neem -coated urea is one of them.  It has helped to double the yield of agricultural crops.

          Our Government has issued crores of soil health cards to farmers to enable them to maintain the fertility of their land at the desired level.  Pradhan Mantri Krishi Sinchai Yojana has been successfully implemented and more areas have been covered under the irrigation scheme.  About  dozens of such programs brought  new hope in the life of our farmers.  I wholeheartedly congratulate our Hon’ble Prime Minister for all these achievements.

The Government may introduce as many schemes as it can be, but the responsibility of implementation of schemes is lying on the officials of the Departments.

          I would like to point out that PMFBY is not effectively implemented in my District, due to negligence on the part of the officials of the Government and also the authorities of insurance companies, which are selected by the State Government.  Farmers are deprived of the benefits of the PMFBY in my Davanagere Lok Sabha Constituency.  There were 31176 farmers registered under the said Bima Yojana in the year 2016-17.  They paid Rs.17.80 crores as premium for their crop insurance policy.  The insurance companies were to distribute about Rs.52 crores to the farmers.  However, only Rs.48 crores, were distributed to 27557 farmers. 1140 farmers are yet to receive Rs.4.15 crores from the insurance companies.

          Similarly during the year 2017-18, about 79711 farmers were registered for Insurance cover and paid Rs.70.72 crores as premium.  However, the insurance companies have paid about Rs.12.20 crores  insured money to 11185 farmers.  However, remaining 68526 farmers were not paid their due amount by the insurance companies. These many farmers were disqualified to receive the insurance amount due to negligence on the part of insurance companies.

          For the year 2018-19 about 12285 farmers were registered for insurance cover and paid Rs.10.70 cores as premium.  However, till date the insurance money is not sanctioned.

          In the current year 2019-20 only 4850 farmers have been registered under PMFBY.  The decline in the number shows that the scheme is not implemented successfully due to negligence of the officials of the department and also of the insurance companies.

         For the last one and half year farmers have not been paid their due amount.  Under these circumstances, how can farmers come forward to continue with the insurance scheme by paying the premium?  For the last two years there is severe drought in Davanagere.  The Government of Karnataka has officially declared it as a drought-hit district for the two consecutive years.  Even though the insurance companies are not paying the beneficiary farmers their legitimate amount covered under the insurance schemes.

          Another point I would like to mention that while preparing the list of crop loss at the Gram Panchayat level, the officials concerned are not conducting the survey in an appropriate manner.  The wrong entries are made by them.  For example in their report the name of ‘Paddy’ is entered in place ‘Jowar’.  It is due to such irregularities and wrong entries made by the officials of the department, the poor farmers are deprived of their due benefits under the insurance scheme.

          So, I would like to suggest that the Government should consider to entrust the responsibility of crop insurances schemes to Government sponsored insurance companies instead of involving the private insurance companies into it.

         I would like to request the Union Government to issue necessary directions to the State Governments to ensure proper implementation of the Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana and also to release all the arrears of the farmers under the insurance scheme to protect the interest of the farmers.

           I would like to make a few observations that the Ministry of Rural Development covers wide range of areas such as rural drinking water, expansion of irrigation, power supply, mechanization of agriculture, academic facilities, health care, development of roads and transportation, housing for all, Swachh Bharat Abhiyan etc..  So, I am of the opion that it is essential to take appropriate measures to develope all these sectors as they are very important to build a strong nation.           It is the dream of our Hon. Prime Minister to fulfill  the demands of the people of the country by achieving the sustainable development in rural India. It would be possible by effective implementation of welfare schemes with the support of state-of-the art technology.

          I would like to mention that our NDA Government  has given  top priority for the  construction of roads in rural areas, supply of 24x7 power, drinking water, ensuring availability of internet facilities  through optical fiber. Our Hon. Prime Minister believes that doctors, engineers and officers would prefer to stay in villages if the rural areas are provided with better infrastructure. So, It is very much essestial to ensure the development of  rural areas by speedy implementation of the welfare programs to develop the villages.  In the last five years of NDA regime the Government has focused on the development of all the rural areas. Our Hon. Prime Minister has made a firm commitment to successful implementation of Uiwala Yojana, which has significantly changed the life of rural women of the country.  About 7 crore people were benefited under the scheme.  The Hon. Finance Minister Smt. Nirmala Sitharaman ji in her budget mentioned that the Government is committed to provide basic facilities such as power, safe drinking water, roads, cooking gas, information technology etc. by the year 2022 to all the rural areas of the country.  The year 2022 is very significant as our country is going to complete its 75th anniversary of independence in that year.  So, it is the intention of our Hon. Prime Minister that at the time of celebrating 75thanniversary of independence, no household should be deprived off cooking gas and power supply.  I would like to mention that the Union Budget has taken care of all the aspects of development of rural India.

 I would like to point out that Gram Sadak Yojana is playing a vital role in changing the socio-economic scenario of rural India.  During the last three years, an average of 130 to 135 km. roads are constructed under the scheme.  About 30 thousand kilometer roads are constructed using waste plastic and green technology along with cold mix technology under the scheme.  The Union Budget of this year proposes to introduce phase-3 with a length of 1,25,000 km at the cost of Rs. 80,000 crore.  I congratulate our Hon. Prime Minister, Hon. Finance Minister and Rural Development Minister for taking such a good decision with regard to rural India.

         I am representing Davanagere Lok Sabha constituency, which has 8 Assembly constituencies.  I would like to request that there is a need for effective implementation of Pradhan Mantri Gram Sadak Yojana.  In the last 4 years no fund was allocated to my constituency under the scheme.  I would like to mention that in the year 2016-17.  I requested the union Government for construction of 354 km rural roads under the Pradhan Mantri Gram Sadak Yojana – phase-2.  However, the said proposal was not approved.  Now, the Union Government has announced to introduce phase-3 of the Pradhan Mantri Gram Sadak Yojana.  So, I would like to request the Union Government through you to consider my request for approval of  Pradhan Mantri Gram Sadak Yojana roads for my constituency.

          My Parliamentary Constituency Davanagere has been facing severe drought for the last two years.  There is acute shortage of drinking water.  There is no water in the lakes and ponds.   The ground water level is depleted and it is not available even at the depth of 1000 feet.  In some areas water is available but it has very high fluoride content. And it is unfit to consume as it leads to various diseases.

          In this connection, I would like to point out the UPA Government during its regime identified the villages having water with high fluoride content to supply safe drinking water under the Multi village drinking water scheme. Even though the scheme was introduced in the year 2010-11, it has not been implemented till date due to carelessness on the part of the State Government and its officials.  So, it has made my people deprived off safe drinking water.

I would like to draw the attention of the Union Government to some of the important drinking water porjects, which needs special attention for early  implementation. They are:-

1.     Harapanahalli Assembly Constituency:  
-      Drinking Water Project to supply water to Telagi and 56 other villages at the cost of Rs.30 crore. 
-      Drinking Water Project to Harakanal and other 29 villages at the cost of Rs.27 crores.
-      Drinking Water Project to Chigaters, Nichchavanahalli and other 105 villages at the cost of Rs. 140 crores. 
All these projects were approved in the year 2011-12. But the drinking water is not supplied to the people till date.

2.      Jagaluru Assembly Constituency:

-      Drinking Water Project to supply water to Sante muddapura and 174 other villages at the const of Rs. 275 crores.   Though the project was approved in the year 2012, it is not implemented till date.
          I would like to bring to the notice of the Union Government that these projects are still on paper taking rounds within the cabinet, finance department and state level selection committee.

3.      Honnali Assemble Constituency:

-      Drinking Water Project was proposed to supply water to Hosadavarahalli and 14 other villages at the cost of Rs. 9 crores.
-      Another Drinking Water Project to supply drinking water to Phalavanahalli Hosakoppa and 41 villages at the cost of Rs.72 crores.
-      A Drinking Water Project was proposed to supply drinking water to Guddada Behakanahalli and other 7 villages at the cost of Rs.6 crores. 

4.     Mayakonda Assembly Constituency:

-      Drinking Water Project for Kurki and other 6 villages at the cost of Rs. 17 crores. 

5.     Harihara Assembly Constituency:

-      Drinking Water Project to supply Kondajji and 11 other villages at the cost of Rs. 20 crores.
          All these Drinking Water Projects were approved by the Government. However they are not implemented due to negligence on the part of the Government and its officers.
I would like to mention that water scarcity is so high in my Parliamentary Constituency; drinking water is being supplied using Tankers to people in the villages. In view of this, it is the duty of the State Government to implement the Drinking Water Projects at the earliest.     Therefore, I would like to request the Union Government to intervene in this matter and take necessary steps to implement the long pending Multi Village Drinking Water Projects at the earliest. Thank you.
 
*श्री सुनील कुमार सिंह(चतरा): मैं ग्रामीण विकास एवं कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय के 2019-20 अनुदानों की मांग को समर्थन करते हुए अपनी बात रखना चाहता हूँ । माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में एनडीए की सरकार किसानों की आय को 2022 तक दोगुना करने के लिए प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही हैं । हमारी सरकार बनने के बाद किसानों के कल्याण की कई योजनाएं लागू की गई हैं । इन योजनाओं का लाभ देश के किसानों को प्राप्त हो रहा है ।
वर्ष2018-19 में कृषि और उससे जुड़ी गतिविधियों के लिए संशोधित अनुमान बजट 86602करोड़ था, जिसे वर्ष 2019में बढ़ाकर 151518 करोड़ रूपये कर दिया गया है । साथ ही ग्रामीण विकास मंत्रालय के लिए2018-19 में138097 करोड़ था जिसे वर्ष 2019-20 में बढ़ाकर 140762 करोड़ रूपये कर दिया गया है ।
प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना में 9682करोड़ रूपये की राशि इस बजट में दी गई है । प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत 14000 करोड़ रूपयों की राशि बजट में दी गई है । इस योजना के तहत28 प्रतिशत क्षेत्र और 27 प्रतिशत किसान आते हैं । प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत देशभर के सभी किसान परिवारों को सहयोग प्रदान करने के लिए 6000/- रूपये वार्षिक सहायता प्रदान की जाएगी । पीएम-किसान योजना में 75,000 करोड़ रूपये का आवंटन किया गया है । इस योजना से देश के लगभग 14.5करोड़ किसानों को इस योजना का लाभ मिलने की संभावना है ।
झारखण्ड सरकार द्वारा मुख्यमंत्री कृषि आशीर्वाद योजना के तहत किसानों को हर वर्ष 5,000 रूपये प्रति एकड़ की सहायता राशि दी जा रही है । झारखंड राज्य में 5 एकड़ तक के जोत वाले किसानों को अधिकतम उपरोक्त योजना के अतर्गत 25 हजार रूपये का प्रावधान है । इस प्रकार राज्य और केन्द्र दोनों की राशि मिलाकर किसानों को न्यूनतम 11 हजार रुपये और अधिकतम31 हजार रूपये प्राप्त होगा । इस योजना की प्रथम किश्त किसानों को प्राप्त होने से उनमें हर्ष व्याप्त है । इस प्रकार हम कह सकते है कि डबल इंजन सरकार का लाभ झारखंड के किसानों को प्राप्त हो रहा है । प्रधानमंत्री किसान पेंशन योजना के तहत 60 वर्ष की आयु प्राप्त करने पर लघु और कम जोत वाले किसानों को 3000रूपये की न्यूनतम पेंशन प्रदान की जाएगी । इस योजना में मार्च तक के लिए10774.50 करोड़ रूपये का बजटीय प्रावधान का अनुमोदन किया गया । सरकार ने बजट स्फूर्ति योजना के तहत वर्ष2019-20 में कुल 100क्लस्टर बनाने की योजना है, जिसमें50 हजार ग्रामीण शिल्पकारों को समर्थ बनाया जाएगा । कृषि उद्योग क्षेत्रों में75 हजार कुशल उद्यमियों के विकास के लिए चालू वित्त वर्ष2019-20 में ही 80आजीविका बिजनेस इंक्यूबेटर और 20बिजनेस इंक्यूबेटर स्थापित करने का प्रस्ताव किया गया है ।
किसानों को फसलों का उचित मूल्य प्रदान करने के लिए स्वामीनाथन आयोग बनाया गया था जिसने अपनी सिफारिशें सरकार को दी थी, लेकिन आज तक किसी सरकार ने आयोग की सिफारिशें लागू नहीं की हैं । पूर्व की सरकारों ने किसानों की दशा सुधारने की बड़ी-बड़ी बातें की हैं,लेकिन  धरातल  पर कोई काम नहीं किया । हमारी सरकार ने फसलों के समर्थन मूल्य में वृद्धि की है । सरकार को राज्य सरकारों के साथ मिलकर उचित मूल्य पर फसलों की खरीद की पर्याप्त व्यवस्था करनी चाहिए ।
प्राकृतिक संसाधनों के रूप में झारखंड जहां सबसे अमीर राज्य है वहीं कृषि की वृद्धि दर अत्यंत कम है । झारखंड अत्याधिक कुपोषण वाले राज्यों में से एक है । चतरा, पलामू और गढ़वा लगातार सूखे से ग्रसित क्षेत्र रहे है । इन क्षेत्रों में दलहन एवं धान की खेती बहुत होती है । तिलहन एवं दलहन की खेती को बढ़ावा देने के लिए यहां संस्थागत ढांचा विकसित किया जाना चाहिए । साथ ही इस क्षेत्र में कई तरह के फल और सब्जियां भी उगाई जाती हैं । फलों और सब्जियों के भण्डारण की व्यवस्था नहीं होने के कारण खराब हो जाती हैं । किसानों को पर्याप्त राशि नहीं मिल पाती है । इसके लिए कोल्ड स्टोरेज स्थापित किये जाएं । इनके लिए विशेष पैकेज की व्यवस्था करनी चाहिए ।
इसके साथ-साथ ग्रामीण विकास मंत्रालय की अनुदान मांगों पर भी चर्चा हो रही है । सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों की दशा बदलने के लिए बड़ी धनराशि खर्च करने का बजट का प्रावधान किया है । मंत्रालय  के लिए कुल 1.17 लाख करोड़ रूपये आवंटित किये हैं,जो4 प्रतिशत ज्यादा है । प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के लिए 19 हजार करोड़ रूपये बजट में प्रदान किए गये हैं । इससे ग्रामीण बुनियादी ढांचा मजबूत होगा । इसी योजना में वामपंथी उग्रवाद (एलडब्ल्यूई) से प्रभावित क्षेत्रों के लिए2583 करोड़ रूपये का प्रावधान किया गया है । मेरे लोक सभा क्षेत्र के चतरा, लातेहार एवं पलामू जिले वामपंथी उग्रवाद(एलडब्ल्यूई) प्रभावित जिलों की श्रेणी में आते हैं । इसलिए, इन जिलों में उक्त राशि से सड़कों का निर्माण करवाया जाए । सरकार का लक्ष्य आगामी पांच साल में 1.25 लाख किमी लंबी सड़कों का निर्माण करने का है । हमारी सरकार ने 2022 तक प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना के तहत 1.95 करोड़ नए घरों के निर्माण का लक्ष्य रखा है । सरकार ने बजट में राष्ट्रीय आजीविका मिशन के तहत 9024करोड़ रूपये आवंटित किये हैं । बजट में मनरेगा योजना के लिए 60 हजार करोड़ रूपये का आवंटन किया गया है । मेरा सुझाव है कि मनरेगा योजना का उपयोग कृषि एवं सिंचाई के लिए किया जाना चाहिए । कृषि एवं सिंचाई के लिए मजदूरों की जरूरत होती है । मनरेगा के माध्यम से मजदूर उपलब्ध कराये जायें जिससे किसान की मजदूरी में कमी आएगी और मनरेगा कर्मियों की आय में बढ़ोतरी होगी । साथ ही मेरा यह भी आग्रह है कि पंचायती राज व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दृष्टि से पंचायत समिति, पंचायत समिति सदस्य एवं जिला परिषद् को झारखण्ड में वित्तीय अधिकार देना चाहिए ।
         मैं कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्रालय की अनुदानों की मांगों का समर्थन करता हूँ । धन्यवाद ।
   
 * SHRI S.C. UDASI (HAVERI) :  With reference to the above subject, suitable place for setting up a centre of Excellence are Haveri and Gadag districts in Karnataka.  Haveri is my Parliamentary Constituency.   Both Haveri and Gadag district headquarters. 
The Agriculture Centre of Excellence's main aim is to encourage innovation in agriculture education, technology and research.  The Centre facilitates knowledge transfer by acting as a coordinating hub to bring together expertise from established institutions and organisations in areas of plant and animal production, food safety, agri-business, policy, and technology development.  Research and training activities are conducted. 
Haveri and Gadag Districts is having suitable climatic and soil condition to grow various Horticulture corps like Mango, Sapota(Chiku), Banana, Lime; Vegetables like Chilli, Tomato, Brinjal etc. and Plantation crops like Coconut, Betelwine and cash flowers like Rose, Jasmine and Chrysanthemum.  Ranebennur, Byadgi and Hirekerur Taluks are known for vegetable seed production.  Haveri District is known for Chilli area and National level chilli marketing at Byadgi Taluk.  The important cash crops grown in the District are Groundnut, Pulses, Chillies and Cotton.  Cereals mainly Jowar Maize, Paddy, Sugar cane, and Ragi are grown in the District. 
In view of the reasons explained above, I shall grateful, if you could kindly direct the concerned to begin setting up centre of Excellence in Haveri and Gadag as early as possible.
With respect to the above subject, the Agricultural Produce Market Committee (APMC), Haveri is the one of the biggest markets for cotton & maize in Karnataka. Market having an annual turnover of average 4.2 Lakh quintals of Cotton & 10.20 Lakhs quintals of maize valued at more than Rs.75.57 & 524.95 Crores per annunm respectively is traded to the market.  The space in the main market yard is not enough, the financial position of the committee is not strong enough, seeking financial assistance under RKVY, RIDF and W.I.F. Government scheme.  The detailed project report is enclosed herewith for your kind perusal.  I feel this is an important project of this region and helps thousands of farmers and hundreds of Market Functionaries.  Haveri is my Parliamentary Constituency.  Therefore, I request you to extend seeking financial assistance under RKVY, RIDF and WIF government scheme, project cost is Rs.29.81 crores for the above said project and oblige.
The PM-KISAN Scheme was launched in February 2019 to provide income support of Rs.6,000 per year to farmer families with the aim of supplementing their financial needs in procuring inputs for appropriate crop health and yields.
Initially, the scheme was expected to cover 12.5 crore beneficiaries.  With the increase in coverage, the revised number of beneficiaries  are estimated to be 14.5 crore.  As on June 25, 2019 the number of beneficiaries who have received the first and second instalments are 3.3 crore (December 2018 - March 2019) and 2.9 crore (April - July 2019) respectively.  A total of Rs.12,455 crore has been disbursed so far under the scheme through these two instalments.
MSP is the price at which the government agencies purchase farmers' produce of certain notified crops. While MSPs are announced for 23 crops every year, public procurement is limited to a few such as paddy, wheat, and, to a limited extent, pulses.
Agriculture credit at a subsidised cost is provided to farmers through the Interest Subsidy scheme.  Under the scheme, interest subsidy of two per cent is provided to farmers on their short-term crop loans of up to three lakh rupees.  An additional interest subsidy of three per cent is provided to farmers repaying their loan on time (within a year).  In 2019-20, the scheme has been allocated Rs.18,000 crore, a 20% increase over the 2018-19 revised estimates.
Crop insurance is provided to farmers under the Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana (PMFBY). The scheme covers all farmers, including tenant farmers and sharecroppers, who are growing notified crops in notified areas.  In 2019-20, the scheme has been allocated Rs.14,000 crore, an 8 % increase over the 2018-19 revised estimates. Issues related to crop insurance raised over the years .
The Economic Survey 2017-18 noted that the share of agricultural households insuring their crops was low.  Less than 5 % of the agricultural households cultivating major crops, such as rice and wheat, insured crops.  Lack of awareness about crop insurance among farmers was the major factor for not insuring their crops.  Further, lack of awareness about availability of crop insurance programmes was another reason.
Agriculture marketing in most states is regulated by the Agriculture Produce Marketing Committees (APMCs) established by State governments.  The Standing Committee on Agriculture (2018) observed that small and marginal farmers face various issues in selling their produce in APMC markets such as inadequate marketable surplus, long distance to nearest APMC markets, and lack of transportation facilities.  Most farmers lack access to government procurement facilities including APMC markets.
The Indian Council of Agricultural Research (ICAR) has been allocated Rs.4,869 crore for the year 2019-20.  This is 3.7% lower than the revised estimate of 2018-19.
In Hon'ble Finance Minister’s Budget speech, the Finance Minister made the following proposals regarding agriculture:
- The Government will work with states to allow farmers to benefit from e-NAM, irrespective of the provisions of the APMC Acts of states.
- 10,000 new Farmer Producer Organisations are aimed to be formed in the next five years to ensure economies of scale for farmers.
- The Government has proposed replication of the Zero Budget farming model, which is already being practiced in a few states. 
The Ministry needs to ensure that the funds are prudently and effectively utilised.
 
*श्री विष्‍णु दयाल राम (पलामू): आपने मुझे वर्ष 2019-20 के लिए ग्रामीण विकास विभाग एवं कृषि एवं किसान कल्‍याण मंत्रालय संबंधी अनुदान मांगों पर अपने विचार रखने का अवसर दिया । उसके लिए धन्‍यवाद ।
         भारत की आत्‍मा गांवों में बसती है । इसी के मद्देनजर हमारी सरकार की योजनाओं के केन्‍द्र में गांव, गरीब और किसान हमेशा रहते है॥ इस बजट में किसानों और कृषि क्षेत्र के लिए कई महत्‍वपूर्ण कदम उठाए गए हैं । वित्त मंत्री आदरणीया श्रीमती निर्मला सीतारमण जी ने बजट में कहा कि 10 हजार नये कृषि उत्‍पादक संगठन बनाए जाएंगे,इससे अगले पांच साल में किसानों को पैमाने की मितव्‍ययिता का लाभ मिलेगा । अन्‍नदाता को ऊर्जादाता बनाने के लिए कई योजनाएं चलाएंगे । इसी तरह कृषि से संबंधित ग्रामीण उद्योग में 75 हजार नये उद्यमी तैयार करने की योजना, मत्‍स्‍यन के क्षेत्र में मूल्‍य श्रृंखला में कमी को पूरा करने के लिए प्रधानमंत्री मत्‍स्‍य संपदा योजना के तहत मत्‍स्‍यन के क्षेत्र में मजबूत प्रबंधन व्‍यवस्‍था स्‍थापित करने का प्रस्‍ताव,सहकारिता के जरिए दूध और उसके उत्‍पादों के उत्‍पादन,भंडारण और वितरण के कारोबार को प्रोत्‍साहन,दूध खरीद, प्रसंस्‍करण और विपणन के लिए बुनियादी ढांचे के सृजन पर जोर तथा पायलट आधार पर चल रही 'जीरो बजट खेती को देश के अन्‍य भागों में लागू करने का प्रस्‍ताव ।
         कृषि और उससे जुड़ी गतिविधियों के लिए 2018-19 में बजट अनुमान 63836 करोड़ था, जबकि संशोधित अनुमान 86602 करोड़ था । 2019-20 में इसे बढ़ाकर 1,51,518 करोड़ रूपये कर दिया गया है । इसी तरह किसानों के जीवन को प्रभावित करने वाले ग्रामीण विकास के लिए 2018-19 में बजट अनुमान 138097 करोड़ था, जबकि संशोधित बजट अनुमान 135109 करोड़ था । 2019-20 में उसे बढ़ाकर140762 करोड़ रूपये कर दिया गया है । प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के लिए 2018-19 में संशोधित बजट अनुमान जहां 8251 करोड़ था वहीं वित्तीय वर्ष 2019-20 में इसे 9682 करोड़ रूपये कर दिया गया है । हालांकि इस मद में की गई बढ़ोतरी 2022 तक53 फीसदी फसलों को सिंचाई के दायरे में लाने और इस साल के अंत तक सभी बाकी सिंचाई परियोजनाओं को पूरा करने का लक्ष्‍य है । प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत 2018-19 में13,976 करोड़ (संशोधित अनुमान) रूपये का प्रावधान किया गया था । 2019-20 में इसमें बढ़ोतरी करते हुए 14,000 करोड़ रूपये कर दिया गया है । फसल बीमा योजना के दायरे में 28 फीसदी क्षेत्र और 27 फीसदी किसान आते हैं । पीएम किसान योजना के तहत 75,000 करोड़ रूपये का आवंटन एक स्‍वागत योग्‍य कदम है । ब्‍याज अदा करने में मदद के रूप में भी आवंटन को बढ़ाया गया है । 2018-19 में यह14987 करोड़ रूपये था, जबकि 2019-20 से इसे बढ़ाकर18,000 करोड़ रूपये कर दिया गया है बढ़ाई गई राशि का लाभ बटाई किसानों को भी दिया है,क्‍योंकि लिखित पट्टे के अभाव में उन्‍हें इसका लाभ नहीं मिल पाता है । बजट से इस बात का भी पता चलता है कि खाद्य प्रसंस्‍करण,फसल कटाई के बाद उसे बिक्री केन्‍द्र तक पहुंचाने के साधन और कृषि अनुसंधान की निवेश आवश्‍यकताओं को पूरा किया जाएगा । किसानों की आमदनी दोगुनी करने के लिए सरकार ने कई कदम उठाये हैं यथा प्रधानमंत्री किसान सम्‍मान योजना, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना,प्रधानमंत्री किसान पेंशन योजना,प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, Soil Health Card इत्‍यादि । प्रत्‍येक योजना के बारे में समय के अभाव में विस्‍तार पूर्वक बातें रखना संभव नहीं है ।
         हमारी सरकार का उद्देश्य महात्‍मा गांधी जी की 150वीं जयंती पर अंत्‍योदय हमारा लक्ष्‍य कार्यक्रम के तहत प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (पीएमएवाई-जी) के तहत 2022 तक सभी के लिए आवास के लक्ष्‍य को हासिल करना है । पिछले5 वर्षों में1.54 करोड़ ग्रामीण आवासों का निर्माण पूरा कर लिया गया है और 2019-22 तक पीएमएवाई-जी के दूसरे चरण में1.95 करोड़ आवास पात्र लाभान्‍वितों को प्रदान करने का प्रस्‍ताव रखा गया है । इन आवासों में शौचालय, बिजली और एलपीजी कनेक्‍शन जैसी सुविधाएं प्रदान की जाएंगी ।
         गांवों को बाजार से जोड़ने वाली सड़कों को अपग्रेड किया जाएगा । इसके लिए पीएम ग्राम सड़क योजना का तीसरा फेज शुरू होगा । प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना पीएमजीएसवाई- । । । में अगले 5 वर्ष में 80,250 करोड़ रूपए की अनुमानित लागत से 1,25,000 किलोमीटर सड़कों को अपग्रेड किया किया जाएगा । गांवों में चौतरफा कनेक्‍टिविटी हासिल करने की गति तेज करने के लिए इन्‍हें पूरा करने का लक्ष्‍य2022 से कम करके2019 कर दिया गया है और सभी को यह जानकर खुशी होगी कि ऐसे गांवों में 97 प्रतिशत से अधिक ऐसी कनेक्‍टिविटी प्रदान की गई है,जिस पर किसी भी मौसम का असर न हो । ऐसा पिछले1000 दिनों में तेज गति से प्रतिदिन130 से 133 किलोमीटर सड़क निर्माण के कारण संभव हुआ है । निरंतर विकास के एजेंडे के लिए प्रतिबद्ध रहते हुए पीएमजीएसवाई की 20,000 किलोमीटर सड़कों का हरित प्रौद्योगिकी,कचरे वाला प्‍लास्‍टिक और कोल्‍ड मिक्‍स टेक्‍नोलॉजी का इस्‍तेमाल करते हुए निर्माण किया गया है, जिससे कार्बन पदचिन्‍ह कम हुए हैं । महिला उद्यमियों को प्रोत्‍साहन । इसी क्रम में मैं मनरेगा की चर्चा करना चाहता हूँ कि मनरेगा के आवंटन को 55 हजार करोड़ रूपये से बढ़ाकर इस बजट में 60 हजार करोड़ रूपये कर दिया गया है ।
         अंत  में  मैं यह  बताना चाहता हूँ कि हमारी सरकार ने अपनी  सारी  योजनाओं  का  केन्‍द्र बिन्‍दु गांव, गरीब,और किसान ही रखा है और उसी उद्देश्‍य की प्राप्‍ति के लिए अग्रसर है । मैं इन अनुदान मांगों का समर्थन करते हुए अपनी बात को समाप्त करता हूँ ।
 
*श्रीमती शारदा अनिल पटेल (महेसाणा): समयाभाव के कारण सदन में न बोल पाने के कारण मैं अपने कुछ विचार माननीय कृषि मंत्री जी के ध्यान में लाना चाहती हूँ । माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने शुरू से ही अपना ध्यान गांव, गरीब और किसान के विकास एवं समृद्धि पर केंद्रित कर रखा है । बहुत सारी योजनाओं को सरकार द्वारा संचालित किया जा रहा है,किसान सम्मान निधि द्वारा किसानों को सीधे उनके खाते में पैसे मिल रहे हैं, लाखों मृदा कार्ड बने,किसानों के मार्गदर्शन हेतु किसान चैनल आदि बहुत सारी योजनाओं को संचालित किया जा रहा है ताकि 2022 तक किसानों की आमदनी दोगुनी करने का प्रधानमंत्री जी का सपना साकार हो सके । कृषि क्षेत्र में भी ऐसी सम्भावनाओं की कमी नहीं है जिनसे सम्मानजनक आय की प्राप्ति की जा सकती है । केन्द्र और राज्य सरकारों की ओर से भी ऐसी योजनाओं और कार्यक्रमों का आयोजन समय-समय पर किया जाता है जिनका उद्देश्य कृषक समुदाय को आधुनिक कृषि तकनीकें अपनाने के लिये प्रेरित करना है । सीमान्त, छोटे और मझोले किसानों के लिये कृषि को लाभदायी बनाने, कम लागत की खेतीबाड़ी की तकनीकों, समेकित कृषि प्रणाली,खेती के साथ पशुपालन, शूकर पालन, मात्स्यिकी,मधुमक्खी पालन,रेशम उत्पादन,खाद्य प्रसंस्करण,जैविक खेती,वैज्ञानिक खेती के विभिन्न आयामों आदि पर आधारित तमाम कृषि प्रणालियों और प्रौद्योगिकियों एवं तकनीकों का विकास किया गया है । मेरे कुछ विचार निम्न हैं जिन पर कृषि मंत्री जी का ध्यान आकर्षित करना चाहूंगी जो किसानों और खेती की दशा और दिशा बदलने में सहायक हो सकते हैं जैसे- खेती, पशुधन,गैर-कृषि व्यवसाय,मजदूरी और वेतन की विकास दर के अनुसार, जो क्रमश: 3.8%, 14.7%, 0.5% व्1.6 % है, पशुधन के क्षेत्र पर अधिक बल देना;कृषि एवं कृषि विकास में निवेश के बीच सकारात्मक सम्बन्ध स्थापित करना ताकि कृषि के लिए सार्वजनिक निवेश, विशेषकर कॉर्पोरेट सेक्टर के निवेश में बढ़ोतरी हो; बाज़ार हस्तक्षेप तथा फसल उत्पादन के बाद की प्रक्रियाओं को प्राथमिकता देना; किसानों की बची हुई उपज  (ज़रूरत से अधिक उपज) की 100% कीमत को उत्पादन पश्चात हस्तक्षेप से केप्चर करना; किसानों की उपज को रोकने (विद-होल्ड करने) की क्षमता को बढ़ाना;सूखे एवं गीले भंडारण की बुनियादी अवसंरचना को मज़बूत करना; उत्पादन में सतत प्रथाओं जैसे कि जल संरक्षण,एकीकृत खेती प्रणाली, वाटर शेड प्रबंधन,जैविक खेती आदि को लागू करना;खेत से जुड़ी गतिविधियों एवं सहायक कृषि क्षेत्रो जैसे मधुमक्खी पालन, मशरूम की खेती, खाद बनाना, लाख की खेती, कृषि वानिकी आदि को बढ़ावा देना;अन्य संरचनात्मक सुधारो पर ध्यान देना ।
   
*श्रीमती रक्षा निखिल खडसे (रावेर): आपने मुझे महत्वपूर्ण ग्रामीण विकास तथा कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के संबंध में अनुदानों की मांगों पर अपनी राय रखने की अनुमति प्रदान की इसके लिए मैं आपका धन्यवाद देना चाहती हूँ ।
मैं देश के लोकप्रिय एवं आदरणीय प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी का अभिनंदन करना चाहती हूँ कि उन्होंने पिछले पांच वर्ष में एक ऐसी सरकार दी जिसकी पहचान अंतिम व्यक्ति तक लाभ पहुँचाने की थी, जिनके द्वारा योजनाबद्ध और सहायता प्राप्त एक नए भारत के निर्माण की दिशा में कदम उठाये गए हैं । मैं हमारी देश की पहली पूर्णकालीन महिला अर्थ मंत्री माननीय श्रीमती निर्मला सीतारमण जी का भी अभिनंदन करती हूँ कि उन्होंने यह बजट 2019-20 जो कि गरीब, पिछड़े एवं सर्वसामान्य जनता, महिला और युवाओं, छोटे व बड़े उद्यमी इन सबको नज़र में रखते हुए किया है जो आने वाले वर्ष में भारत को 3 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ता हुआ और आनेवाले चंद वर्षों में देश को 5 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था बनाने की तरफ बढ़ रहा होगा । उनका यह दृढ़ संकल्प है कि वह इस लक्ष्य के साथ और जनता द्वारा दिए गए अधिदेश के साथ भारत को उस ऊंचाई तक ले जाएगा जिसका वह हक़दार है और हमारे माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदीजी के सुस्पष्ट शीर्ष नेतृत्व में यह लक्ष्य प्राप्त कराना और आसान होगा ।
इस वर्ष हम महात्मा गांधी जी की 150वीं वर्षगांठ मना रहे हैं । उन्होंने कहा था,  "भारत की आत्मा इसके गावों में बसती है ।" इसको केंद्र बिंदु मानते हुए हमारी सरकार ने अपने लक्ष्य में गांव, गरीब और किसान को सभी प्रयासों में इस लक्ष्य को प्राथमिकता दी गई है जिसका सीधा लाभ इस केंद्र बिंदु तक पहुंचे । ग्रामीण भारत के लिए 7 करोड़ परिवार के घर धुआँ मुक्त करने के लिए इन घरों तक उज्ज्वला योजना के तहत स्वच्छ रसोई गैस पहुँचाया गया । करीब-करीब देश के सभी गांव तक बिजली प्रदान की गई । मैं माननीय वित्त मंत्री जी का इसलिये भी अभिनन्दन करती हूँ कि उन्होंने यह आश्वस्त किया ही कि राष्ट्र का कोई भी परिवार जो बिजली कनेक्शन लेने के लिये इच्छुक है, ऐसे सभी परिवारों को बिजली एवं स्वच्छ रसोई सुविधा प्रदान करने का प्रावधान किया गया है । 'सबके लिए आवास'के उद्देश्य को हासिल करने हेतु प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना के तहत 2019 तक 1.54 करोड़ मकान का निर्माण पूरा हुआ है और आनेवाले दो वर्ष तक 1.95 अधिक घरों का निर्माण करने का सरकार का विचार सराहनीय कदम है,यह आवास शौचालय,बिजली एवं एलपीजी कनेक्शन सुविधा के साथ 2022 तक पूरा करने का सरकार का निश्चय है ।
ग्रामीण क्षेत्र पात्र बस्तियों को प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना का लक्ष्य, जो 2022 है, उसे 2019 में पूरा करने का सरकार का निश्चय है जिससे ऐसे 97% बस्तियों को सभी मौसम में संपर्कता प्रदान होगी । ग्राम सड़क योजना का काम पिछले1000 दिनों में130 से 135 किलोमिटर निर्माण की गति हासिल कर चुका है और इसलिये सरकार का सतत विकास का ध्येय, जिसके परिणामस्वरूप30,000 कि.मी. की ग्राम सड़क योजना बनाने में कामयाबी मिली है । सरकार के आने वाले पांच वर्ष में 1,25,000 कि.मी. सड़क बनाने का सरकार का प्रावधान है ।
मनरेगा के अंतर्गत सरकार ग्रामीण स्तर पर डेली वेजेज पास हमारे मजदूर भाईयों को रोज़गार उपलब्ध कराती है जिससे वह अपनी और परिवार की देखभाल करने में सक्षम बना है, किसी-कसिसी क्षेत्र में काम न मिलने से यह मजदुर काम से वंचित रहता है, मैं माननीय ग्रामीण मंत्री को इस सदन के माध्यम से यह अनुरोध करती हूँ कि इन मजदूरों को अगर किसी तरह से कृषि क्षेत्र एवं किसान से जोड़ दिया जाए, किसान को खेती कामों के लिए मजदूर नहीं मिलने से किसान की भी समस्या बढती है और दूसरी तरफ सरकारी काम न प्रस्तावित होने से वहां के मजदूरो की भी समस्या बढ़ती है । मनरेगा के अंतर्गत कुछ स्कीम बनाई जाएँ जिसका सीधा लाभ दोनों, किसान और मजदूर को मिल सकता है, मैं इसके लिए कुछ सुझाव दे सकती हूँ जिससे इस समस्या का हल आसानी से निकल सकता है । सरकार की भी बड़ी राशि मनरेगा स्कीम में आवंटित होती है इस राशि का भी उपयोग किसान और मेरे मजदूर भाई को हो सकता है । इसलिये मनरेगा के तहत कृषि क्षेत्र से जुड़ा कार्य जो हम इस स्कीम के साथ जोड़ सकते है जोड़ने का काम सरकार को करने का अनुरोध करती हूँ ।
देश की अधिकांश जनता अभी गाँवो में रहती है और कृषि एवं पारंपरिक उद्योग पर निर्भर है, ग्रामीण सडकों का यह विस्तृत नेटवर्क बनाने से हमारे गांव के किसानों को इसका लाभ मिलेगा जिससे वह अपने पारंपरिक उद्योगों के अधिकाधिक उत्पादन को इस सड़क नेटवर्क के माध्यम से शहरों तक पहुंचाने से उन्हें इसका उचित दाम मिलेगा और स्वयं रोजगार को बढ़ावा मिलेगा । इस वर्ष 2019-20 में नये बांस,मधु और खादी के 100 क्लस्टर बनाने का सरकार का प्रावधान है जिसके चलते 50,000 से भी ज्यादा शिल्पकार तथा काश्तकारों को इसका लाभ मिलेगा । मेरा लोकसभा क्षेत्र में भी बांस का अधिकतम उत्पादन होता है मैं SFURTI के अंतर्गत एक बांस/मधु का क्लस्टर मेरे चोपड़ा तथा यावल व रावेर क्षेत्र के लिए स्थापित करने की मांग माननीय कृषि मंत्रीजी को करती हूँ । इस उद्योग को टेक्नोलॉजी में सुधार लाने हेतु नये टेक्नोलॉजी इन्क्युबेटर बनाने का सरकार ने निश्चय किया है जिसमें देश भर से 75,000 ग्रामीण कृषि कुशल उद्यमी तैयार किये जाने के लिए 80 आजीविका बिज़नेस इन्क्युबेटर एवं20 टेक्नोलॉजी बिज़नेस इन्क्युबेटर स्थापित करने का सरकार का प्रावधान है, मैं बांस/मधु क्लस्टर के साथ ऐसा एक एक टेक्नोलॉजी इन्क्युबेटर मेरे लोकसभा क्षेत्र में बनाने का अनुरोध सरकार को करती हूँ ।
किसानों को अपनी फसल के उचित मूल्य प्राप्त करने के लिए ई-नाम से लाभ पहुचाने हेतु सरकार राज्य सरकार से मिलकर काम करेगी, APMC के अधिनियम सरल तथा किसानों को लाभ व उचित मूल्य प्राप्त होने में परेशानी नहीं हो इस दिशा में काम करेगी । किसानों को जीरो बजेट फार्मिंग के एक नये मॉडल को बढ़ावा देने हेतु पहले ही प्रशिक्षित किया जा रहा है कुछ राज्य जैसे मेरा महाराष्ट्र पहले से ही यह मॉडल अपना चुका है महाराष्ट्र के एक किसान श्री सुभाष जी पालेकर जो कि पद्मश्री सम्मान से सम्मानित हैं, यह सम्मान उन्हें जीरो बजट फार्मिंग या प्राकृतिक फार्मिंग से भी कहा जा सकता है,यह पद्धति विकसित करने के लिए उन्होंने15 वर्ष से ज्यादा वर्ष इस पद्धति पर अनुसंधान किया तभी उनको यह सफलता मिली है । आज देश के भिन्न-भिन्न राज्य पद्मश्री श्री सुभाष जी पालेकर को आमंत्रित कर रहें है और वे जीरो बजट फार्मिंग मॉडल से किसानों को प्रक्षिक्षित करने का काम कर रहे हैं ।
जल की समस्या न केवल अपने भारत में उग्र रूप ले रही है बल्कि सारे विश्व की यह समस्या बनी हुई है । इस जल संकट का सामना करने व इस बारे में सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने नये "जलशक्ति मंत्रालय" की स्थापना की है, यह मंत्रालय जल आपूर्ति के लिए राज्यों के साथ मिलकर प्रबंध करने का काम करा रही है । इसमें जलशक्ति मंत्रालय वर्षा जल संचय,भूमि जल रिचार्ज करने के साधनों को बनाये रखने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण/स्थापित करने का काम भी शामिल है । ग्राउंड वाटर रिचार्ज जैसे रेन हार्वेस्टिंग,जो हम जल आपूर्ति के लिए अपना रहे है, लेकिन मेगा ग्राउंड वाटर रिचार्ज करने की व्यवस्था इस मंत्रालय को करनी होगी । जिस तरह का एक मेगा ग्राउंड वाटर रिचार्ज का प्रोजेक्ट,जो अपने आप में पायलट प्रोजेक्ट होगा, जिसका ग्राउंड एवं एयर सर्वेक्षण पूरा हो चूका है और DPRबन रहा है करीब करीब पांच लाख हेक्टर जमीन की सिंचाई का काम करेगा । यह प्रोजेक्ट,तापी नदी का बरसात का बहने वाला पानी जो की सागर में मिल जाता है, इस बरसात के पानी को सातपुडा पर्वत फुटहील पर एक नहर बना कर,इस नहर से गुजरता हुआ साइड में बनाये हुए आर्टिफीसियल रिचार्ज शाफ़्ट से ग्राउंड में रिचार्ज करने की योजना रूप ले रही है । मैं माननीय मंत्री जी से इस मेगा रिचार्ज स्कीम को इस नये जलशक्ति मंत्रालय के माध्यम से जल्द से जल्दDPR पूरा कर के इस पायलट प्रोजेक्ट को शुरू करने की पहल करे का निवेदन सरकार से करती हूँ । अगर इस प्रोजेक्ट को सफलता मिली तो हम बड़ी मात्रा में ग्राउंड वाटर रिचार्ज कर सकते है जिससे बरसात का पानी, जिसका आज हम संचय कर नहीं सकते ग्राउंड रिचार्ज करने से इसका लाभ आनेवाले समय में हो सकता है और यह बहता हुआ बाढ़ का पानी जो सागर में मिलकर हमारी उपयोगिता में नहीं आ सकता है, इस माध्यम से यह आनेवाले भविष्य के लिए रिवोल्यूशनरी हो सकता है और हम और ऐसे प्रोजेक्ट निर्माण कर सकते है ।
मेरे निर्वाचन क्षेत्र में किसान 'बनाना' एवं कपास की मुख्य फसल लेते हैं । इस क्षेत्र की लंबे समय से यह मांग रही है कि यहाँ एक 'बनाना रिसर्च डेवलपमेंट सेंटर' और कॉटन रिसर्च डेवलपमेंट सेंटर का निर्माण किया जाए । मैं भी पिछले 16वीं लोकसभा सरकार से लगातार यह सेंटर बनाने का आग्रह कर रही हूँ जिस सेंटर के माध्यम से युवाओं को नई टेक्नोलॉजी से बनाना एवं कपास के फसल के लिए प्रशिक्षित करने का, जिससे यह युवा स्वयं रोजगार तथा कृषि उद्योग से जुड़ने का अनुरोध माननीय कृषि मंत्री जी से करती हूँ मेरे लोकसभा क्षेत्र में सेंट्रल फार्मिंग मशीनरी ट्रेनिंग एंड टेस्टिंग इंस्टिट्यूट बनाने का प्रस्ताव है । इस इंस्टिट्यूट के लिए पिछले सरकार में एक बार जमीन का सर्वेक्षण भी हुआ था लेकिन वह जमीन सूटेबल नहीं होने से अन्य जमीन देने का सुझाव दिया गया था । मैं माननीय कृषि मंत्री जी से अनुरोध करती हूँ कि यह ट्रेनिंग एंड टेस्टिंग इंस्टिट्यूट मेरे क्षेत्र में शीघ्र बनाने का आदेश निर्गमित करें जिसके चलते मेरे ग्रामीण कृषि क्षेत्र में उपयोग में आनेवाले मशीनरी का ट्रेनिंग यहाँ के युवाओं को मिलने से किसानों का अधिक लाभ होगा और युवाओं के लिए स्वयं-रोजगार का भी निर्माण होगा ।
मैं पुनश्च एक बार हमारे आदरणीय प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी का अभिनंदन करती हूँ और साथ ही हमारी देश की पहली पूर्णकालीन महिला अर्थमंत्री माननीय श्रीमती निर्मला सीतारमण जी का भी अभिनंदन करती हूँ । उन्होंने सर्व समाज को ध्यान में रखते हुए यह बजट 2019-20 देश के सामने रखा । मैं माननीय कृषि मंत्री श्री नरेंद्र सिंह तोमर जी और माननीय राज्य मंत्री श्री पुरषोत्तम भाई रुपाला जी का भी धन्यवाद करती हूँ । यह चर्चा जलशक्ति मंत्रालय की अनुदानों की मांगो पर नहीं है फिर भी यह मंत्रालय ग्रामीण और कृषि क्षेत्र से जुड़ा होने से मैं माननीय श्री गजेन्द्र शेखावत जी को भी धन्यवाद देती हूँ और इस ग्रामीण विकास एवं कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय के संबंध में अनुदानों की मांगों पर चर्चा में अपनी राय रखने की अनुमति प्रदान की इस लिए माननीय अध्यक्ष जी को भी धन्यवाद देना चाहती हूँ और समर्थन करती हूँ ।
 *कुँवर पुष्पेन्द्र सिंह चन्देल (हमीरपुर): आपने मुझे वर्ष2019-20 के लिए ग्रामीण विकास तथा कृषि और किसान कल्याण मंत्रालयों के नियंत्रणाधीन अनुदान की मांगों पर अपने विचार प्रस्तुत करने का मौका दिया इसके लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद ।
कृषि और किसान कल्याण के लिए सरकार द्वारा कल 27.86 लाख के बजट से लगभग 1.30 लाख करोड़ रूपये आवंटित किए गए और पिछले वर्ष की तुलना में यह वृद्धि उल्लेखनीय है । वर्ष 2018-19 में यह आवंटन67,800 करोड़ रुपए था । बजट आवंटन में यह वृद्धि सरकार की किसानों के कल्याण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को व्यक्त करती है । लगभग 146 मिलियन की जोतो वाले 14 करोड़ किसानों के लिए कृषि और उससे सम्बंधित गतिविधियों के ढ़ॉचागत विकास के लिए रोड मैप इस बजट के द्वारा प्रस्तुत किया गया है ।
पूर्व की कृषि नीतियों में उत्पादन और उत्पादकता पर जोर था और कृषि उत्पादों के बाजारीकरण जैसे प्रमुख बिन्दुओं पर ध्यान नहीं दिया गया था । परन्तु मोदी जी के नेतृत्व वाली अन्त्योदय सरकार ने न सिर्फ किसानों को बाज़ार उपलब्ध कराने की कोशिश की है अपितु कृषि से सम्बंधित अन्य सभी पहलुओं जैसे - फसल बीमा, कम ब्याज दर पर कर्ज, कृषि तकनीक इत्यादि पर भी विशेष ध्यान दिया है और इस बजट में किसानों की सामाजिक सुरक्षा पर तो विशेष जोर है ।
मेरा संसदीय क्षेत्र, जो कि आर्थिक रूप से पिछड़े बुंदेलखंड में आता है वहां रोजगार का प्रमुख साधन कृषि है । और विगत कई दशकों से यह क्षेत्र सूखे की मार झेल रहा है,कृषि अलाभकारी हो गई है तथा पिछले दशक में लाखों लोगों का पलायन हो चुका है । संकटों के दौर से जूझ रहे इस क्षेत्र की समस्याओं का निदान प्राप्त करना अति आवश्यक है - बुंदेलखंड की सबसे प्रमुख समस्या अन्ना प्रथा (छुट्टा गौवंश) है जिसके कारण आवारा पशु खेत में फसलों को बहुत अधिक नुकसान पहुंचाते हैं और किसानों को अत्यधिक आर्थिक हानि होती है । इस हेतु गौशालों का निर्माण वृहत स्तर पर आवश्यक है तथा देशी गायों के नस्ल सुधार भी जरूरी है । मेरे क्षेत्र में पान की खेती एक परंपरागत तरीके से सहकारिता के आधार पर की जाती है जोकि सघन श्रम पर आधारित है और काफी अधिक श्रमिक रोजगार प्राप्त करते हैं । परन्तु आज के समय में यह पान की खेती संकट के दौर से गुजर रही है । अत: पान के खेती के संरक्षण के लिए प्रयास किए जाएँ और पान अनुसन्धान केंद्र महोबा में स्थापित किया जाए । सरकार ने दलहन के बाद तिलहन के विकास पर इस बजट में जोर दिया है और खाद्य तेल के मामले में देश को आत्म निर्भर बनाए जाने के लिए किसानों से आह्वान किया है । मेरे संसदीय क्षेत्र में वृक्ष जनि तिलहनों (टीबीओ) मिनी मिशन योजना के अंतर्गत बेकार पड़ी भूमि पर तिलहन रोपड़ करके और तेल निकालने वाले उपकरणों का वितरण करके किसानों की आय में वृद्धि की जा सकती है । इस हेतु हमीरपुर,महोबा जिलों की बेकार पड़ी भूमि पर इस कार्यक्रम को प्राथमिकता के आधार पर चलाया जाए । इस बजट में गावों के परंपरागत उद्योगों को प्रोत्साहित करने पर बल दिया गया है । इस हेतु सरकार ने स्फूर्ति योजना की घोषणा की है जिसके माध्यम से बांस, शहद और खादी उद्योग के वर्ष 2019-20 में कुल 100 क्लस्टर बनाए जाएंगे । अत: मेरे संसदीय क्षेत्र हमीरपुर (उ.प्र.) में शहद की खेती को प्रोत्साहित कर इस हेतु क्लस्टर बनाए जाएँ ।
आपने मुझे ग्रामीण एवं कृषि और किसान कल्याण मंत्रालयों के नियंत्रणाधीन अनुदान की मांगों की चर्चा पर अपने विचार रखने का मौका दिया गया, इसके लिए आपका धन्यवाद ।
   
*श्रीमती वीणा देवी (वैशाली): आपने मुझे वर्ष2019-20 के ग्रामीण विकास मंत्रालय एवं कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की अनुदान मांगों पर अपने विचार रखने  का अवसर दिया, इसके लिए मैं आपकी आभारी हूँ ।
हमारी एन.डी.ए. की सरकार आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी एवं हमारे नेता आदरणीय श्री राम विलास पासवान जी के नेतृत्व वाली सरकार के केन्द्र बिन्दु में गाँव, गरीब एवं किसान हैं ।
महात्मा गांधी जी की 150वीं जयंती के अवसर पर अन्त्योदय हमारा लक्ष्य के तहत प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण का उद्देश्य 2022 तक सभी के लिए आवास के लक्ष्य को हासिल करना है । इस बजट में पिछले पाँच वर्षों में 1.54 करोड़ ग्रामीण आवासों का निर्माण पूरा कर लिया गया है और 2019-22 तक प्रधानमंत्री आवास योजना के दूसरे चरण में1.95 करोड़ आवास लाभान्वितों को प्रदान करने का प्रस्ताव रखा गया है । इन आवासों में शौचालय, बिजली एवं पी.जी. कनेक्शन जैसी सुविधाएँ प्रदान की जायेगी ।
प्रधानमंत्री ग्राम्य सड़क योजना का तीसरा फेज शुरू होगा जिसमें अगले पाँच वर्ष में80.250 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत से 1,25,000 कि.मी. सड़कों को  अपग्रेड किया जायेगा । मेरी सरकार का गाँवों में चौतरफा कनेक्टिविटी हासिल करने की गति तेज करने के लिए इन्हें पूरा करने का लक्ष्य2022 से कम करके2019 कर दिया गया है । सभी को जानकर यह खुशी होगी कि ऐसे गाँवों में97 प्रतिशत से अधिक ऐसी कनेक्टिविटी प्रदान की गयी है जिस पर किसी भी मौसम का असर न हो । ऐसा पिछले एक हजार दिनों में तेज गति से प्रतिदिन 130 से 133 किलोमीटर सड़क निर्माण के कारण संभव हुआ है । हमारी सरकार निरन्तर गाँवों के विकास के लिए प्रतिबद्ध है ।
कृषि और उससे जुड़ी गतिविधियों के लिए 2018-19 में बजट अनुमान 63836 करोड़ था जबकि संशोधित अनुमान 86602 करोड़ था । 2019-20 में इसे बढ़ाकर 1,15,518 करोड़ रुपए कर दिया गया है । इसी तरह किसानों के जीवन को प्रभावित करने वाले ग्रामीण विकास के लिए 2018-19 में बजट 138097 करोड़ रूपए था जबकि संशोधित बजट अनुमान 1,35,109 करोड़ रूपए था । 2019-20 में इसे बढ़कार1,40,762 करोड़ रुपए कर दिया गया है । प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के लिए 2018-19 में संशोधित बजट अनुमान जहां 8,251 करोड़ था वही वित्तीय वर्ष 2019-20 में इसे 9,682 करोड़ रुपए कर दिया गया है । हालांकि इस मद में की गयी बढ़ोत्तरी से 2022 तक 53 फीसदी फसलों को सिंचाई के दायरे में लाने और इस साल के अंत तक सभी बाकी सिंचाई परियोजनाओं को पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है । प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत 2018-19 में13,976 करोड़ (संशोधित अनुमान) रुपये का प्रावधान किया गया था । 2019-20 में इसमें बढ़ोतरी करते हुए इसे 14,000 करोड़ रुपये कर दिया गया है । फसल बीमा योजना के दायरे में 20 फीसदी क्षेत्र और 27 फीसदी किसान आते है । प्रधानमंत्री किसान योजना के तहत 75,000 करोड़ रुपये का आवंटन एक स्वागत योग्य कदम है ।
   
*श्रीमती गीताबेन वी. राठवा (छोटा उदयपुर) : मुझे कृषि के बारे में संसद में बोलने का मौका नही मिला लेकिन वर्ष 2019-20 के कृषि बजट पर मैं लिखकर अपने विचार व्यक्त करना चाहती हूँ कि जबसे आदरणीय स्वर्गीय श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी की सरकार आयी तब से अब तक आदरणीय श्री नरेन्द्र भाई मोदी जी की सरकार में माननीय वित्त मंत्री जी और माननीय कृषि मंत्री जी के नेतृत्व मे बहुत ही बदलाव देखने में आ रहा है । भारत कृषि प्रधान देश किसानों की मेहनत के कारण है । भारत को सोने की चिड़िया भी कहा जाता था, इसलिए कृषि क्षेत्र में इनकी वृद्धि को आगे लाने की आवश्यकता है,सरकार के प्रयास से किसानों में वृद्धि हो रही है । इसलिए मैं आदरणीय प्रधानमंत्री जी, माननीय वित्त मंत्री जी और माननीय कृषि मंत्री जी का आभार प्रकट करती हूँ । किसान सन्मान निधि योजना से किसान बहुत ही खुश हैं । किसान पेंशन योजना,किसान मजदूर योजना, कृषि सिंचाई योजना,पशुपालन योजना,कृषि इंफ्रास्ट्रक्चर योजना, सागर खेती योजना एवं सिंगाड़ा मखाना खेती योजना में दस करोड़ रुपये ओर कई सारी योजना बनाकर हमारी मोदीजी की सरकार ने 2019-20 मे बहुत सारी योजनाओं के साथ बजट बनाया है ।  इसलिए मैं आदरणीय प्रधानमंत्री जी को अपने क्षेत्र की जनता की ओर से भी धन्यवाद देना चाहती हूँ । मेरा संसदीय क्षेत्र छोटा उदयपुर (वडोदरा) गुजरात राज्य का आदिवासी बहुल क्षेत्र है और मेरे क्षेत्र में छोटे-छोटे किसान खेती व मजदूरी करते है और यह क्षेत्र4 जिलों का समावेश है (1) छोटा उदयपुर (2) नर्मदा (3) पंचमहल (4) वडोदरा का ग्राम्य  विस्तार का समावेश है । हमारा पूरा क्षेत्र किसानों का है,उनके लिए जीवन-यापन करने में बड़ी चुनौतियाँ हैं क्योंकि चारों जिलों में आसपास जंगल होने के कारण हमारे खेतों में जंगली पशुओं का उपद्रव अधिक है । जंगली गायें व अन्य जानवर दिन-रात एक करके की गई खेती को पलभर में नुकसान करके चले जाते हैं । इस प्रकार से एक ही रात में पूरी खेती खत्म हो जाती है और किसान लाचार होता जाता है । इस प्रकार से हमारे ग्रामीण किसान बहुत उम्मीद से हमारी सरकार की ओर देख रहे हैं ।
अतः मैं अपने क्षेत्र की जनता की ओर से सरकार से निवेदन करना चाहती हूँ कि ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों की जान-माल की सुरक्षा, खेती और उनके भरण-पोषण को ध्यान रखते हुए चारों जिलों का एक जोन बनाकर उनके विकास के लिए अलग से बजट दिए जाने का प्रावधान किया जाये और खेती को बचाने के लिए उनके चारों ओर काँटों की तार की फेंसिंग लगवाने का बजट जिला स्तर पर किया जाये । इस प्रकार से उनकी खेती का नुकसान भी नहीं होगा ।
                         
­­­­­­­­­­­­ *DR. HEENA VIJAYKUMAR GAVIT (NANDURBAR): A truly agriculture and rural development-focused Budget, it has adequately met the twin objectives of growth and inclusiveness. When doubling of farmers' income agenda is being rigorously pursued by the government, a fresh slew of measures through this Budget will only firm up the prospects of the agriculture and rural development sectors.  The crux of the Budget is `sustainability' in every aspect, be it agriculture practices or economic viability.  An announcement of formation of 10,000 new FPOs over the next five years is a step towards the same.  With this, the economies of scale can be harnessed to achieve the goal of doubling farmer's income by reduction in input costs and assuring better price realisation by the farmers for their output. The incentives proposed for women SHGs will not only lead to livelihood generation and women empowerment, but also nurture first-generation entrepreneurs though the MUDRA loans of 1 lakh.  With the proposed interventions, not only farmers, but also rural entrepreneurship will get the necessary boost.
The Government's impetus is to promote non-farm activities to boost economic viability of farmers.  Owing to climate change challenges, it has become imperative to explore viable and sustainable non-farm means of income generation.  A new scheme - Pradhan Mantri Matsya Sampada Yojana will give enough confidence to those who are in fisheries sector, to enhance their income with better fisheries management, infrastructure creation, increasing production and productivity, improved post-harvest management bringing economic viability of the sector.  As the Government wants to extend the parameters of ease-of-doing business and ease-of-living to the rural areas too, the emphasis of ‘Gaon, Garib and Kisan’ will be the uplift of rural lives of   farmers and the poor, equally.  The Government has shown that every person having potential to bring economic revolution will be given an equal opportunity.  Another new scheme - SFURTI - is an attempt in this direction. 
Rural artisans have received a holding hand from the government in a cluster-based development approach that will upgrade regional and traditional industries, benefitting about 50,000 artisans. Now, under Pradhan Mantri Gram Sadak Yojana, a road network of 1.25 lakh km will bring more villages to rural markets.  Enhancing the prospects of agripreneurs,  the ASPIRE  scheme will create 50,000 skilled rural entrepreneurs, especially in the rural agriculture sector. 
To expand the income sources of our farmers, there is a proposal to enable them to take up power generation activities on their field to transform the Annadatato an Urjadata.  In the dairy sector, cooperatives will be encouraged to create infrastructure for cattle field management, milk production, processing and marketing. For relieving farmers from uncertain prospects, the States will be forced to implement e-NAM mechanism for better operations under the APMC Act.  Going back to the basics, as the Finance Minister rightly said, is a need of an hour, particularly when the issues of climate change and depleting natural resources are engulfing the sector. The concept of zero-budget farming, which some farmers have exemplarily proved to be viable, will boost the confidence of farmers.  With conventional means, the farmers will be able to enhance their income levels by keeping the input costs under control.
                         
*श्री प्रभुभाई नागरभाई वसावा (बारदौली): हमारे देश के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में आदरणीय श्री नरेन्द्र सिंह तोमर जी ने पूरे देश में कृषि और किसान कल्याण एवं ग्रामीण विकास मंत्रालय में जो कार्य किया है इससे देश के किसान और ग्रामीण जनता के मन में खुशहाली हो रही है । किसान देश की जीवनरेखा है और किसी भी देश का विकास उसके कृषि क्षेत्र के विकास के बिना अधूरा है । देश की खाद्य सुरक्षा को शत्-शत् आधार पर सुनिश्चित करने का श्रेय हमारे किसानों को जाता है । आज वस्तुस्थिति यह है कि भारत न केवल बहुत से कृषि उत्पादों में आत्मनिर्भर है व आत्मसंपन्न, वरन् बहुत से उत्पादो का निर्यातक है । कृषि क्षेत्र में इस तरह का चहुंमुखी विकास किया जाए कि अन्न एवं कृषि उत्पादों के भंडारों के साथ किसान की जेब भी भरे व उनकी आय भी बढ़े । बरेली में आयोजित किसान की एक रैली में माननीय प्रधानमंत्री जी ने कहा था कि मैं 2022 तक जब भारत अपनी आजादी की75 वीं वर्षगांठ बनाए, किसानों की आय दुगुनी करना चाहता हूँ । मैंने इसे एक चुनौती के रूप में लिया है यह केवल एक चुनौती ही नहीं बल्कि अच्छी रणनीति,सुनियोजित कार्यक्रम,पर्याप्त संसाधनों को क्रियान्वयन में सुशासन के माध्यम से इस लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है ।
प्रधानमंत्री किसान सम्मान योजना निधि शुरू होने से किसानों में एक नई आस जगी है । खाद, बीज खरीदने के लिए किसानों को सरकार मदद दे रही है । वहीं किसान अपने उत्पादन के लिए मूल्य स्वयं तय कर सके इसके लिए अनेक योजनाएं शुरू की गई । इसमें अन्नदाता के कष्ट कम होंगे । प्रधानमंत्री जी ने मत्स्य संपदा योजना की घोषणा की, जल किसी का होगा ढांचागत विकास, वैश्विक बाजार में जमेगी धाक, देश के करीब 1.50 करोड़ मछुआरों की बदल सकती है जिंदगी ।
ग्रामीण क्षेत्रों में बहुत से सामाजिक आर्थिक लाभ मिले । पात्र बस्तियों की व्यापक समग्रता तेजी से हासिल करने के लिए पात्र और व्यवहार बस्तियों को जोड़ने के लक्ष्य को 2022 से पहले 2019में पूरा करना निर्धारित किया गया है । बदले आर्थिक परिदृश्य के साथ गांव को ग्रामीण बाजारों से जोड़ने वाली सड़को का उन्नयन करना महत्वपूर्ण होगा । अधिकांश जनता अभी गांव में रहती है, और कृषि एवं पारंपरिक उद्योग पर निर्भर है । पारंपरिक उद्योगों का उन्नयन और पुर्नसर्जन निधि स्कीम का लक्ष्य पांरपरिक उद्योगों को अधिकाधिक उत्पादक, लाभदायक और रोजगार के अवसर सृजित करने के लिए सक्षम बनाने के लिए अधिकारिक सामान्य सुविधा केन्द्र स्थापित करना है । नवीकरण ऊर्जा का उत्पादन करने के लिए वाडे से बांस और टिम्बर जैसे संबद्ध क्रियाकलापो से खेत से किसानो की फसल हेतु मूल्यवर्धन के कार्यो में लगे निजी उघमशीलता को सरकार सहायता प्रदान करेगी ।
ग्रामीण डिजिटल साक्षरता अभियान के अंतर्गत अभी तक दो करोड़ से अधिक ग्रामीण भारतीयो को डिजिटल रूप में साक्षर बनाया गया है । ग्रामीण-शहरी डिजिटल अन्तर को पाटने के लिए भारत नेट देने के लिए प्रत्येक पंचायत में स्थानीय निकायों में इंटरनेट कनेक्टिविटी को लक्षित कर रहा है । इसे सार्वभौमिक सहायता निधि की सहायता से तथा सार्वजनिक निजी भागीदारी व्यवस्था के द्वारा तेजी से बढ़ाया जायेगा ।
मैं सरकार द्वारा लाए गए अनुदानों की मांगो का सर्मथन करता हूँ ।
*श्री अजय टम्‍टा (अल्‍मोड़ा):          मुझे वर्ष 2019-20 ग्रामीण विकास तथा कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की अनुदान मांगों पर अपने विचार रखने का मौका देने हेतु धन्‍यवाद ।
         मैं कहना चाहूँगा कि भारत एक कृषि प्रधान देश की श्रेणी में आता है । देश के अधिकतम भूभाग कृषि आधारित है । अपनी सरकार किसानों के कल्‍याण और उनकी मेहनत का पूर्ण लाभ उन्‍हें देने और किसान की आय को दोगुना करने की अपनी कही बात के प्रति प्रतिबद्ध भी है । जहां एक ओर किसानों में जागरूकता बढ़ाने एवं किसानों को फसल बीमा योजनाओं के लाभ के बारे में जानकारी देने के वास्‍ते सरकार व्‍यापक प्रचार और जागरूकता कार्यक्रम चलाती है वहीं दूसरी ओर विभिन्‍न कृषि विज्ञान केन्‍द्रों के माध्‍यम से भी किसान मेलो में किसानों के लिए नयी प्रौद्योगिकी और अन्‍य जनप्रतिनिधिगणों की भी उसमें सहभागिता होती है ताकि अन्‍य जगह भी वे किसानों के कल्‍याण के लिए चल रही केन्‍द्र की नीतियों और योजनाओं का प्रसार-प्रचार कर सकें ।
         केन्‍द्र द्वारा किसानों को सुनिश्‍चित आय समर्थन देने के लिए 2019-20 के अंतरिम बजट में प्रधानमंत्री किसान सम्‍मान निधि योजना के तहत 2 हैक्‍टेयर तक कृषि योग्‍य भूमि वाले भू-धारक किसान परिवारों को तीन किस्‍तों में 6000 रु. दर पर प्रत्‍यक्ष आय समर्थन दिये जाने से किसानों को उनकी तत्‍काल खेती में प्रयुक्‍त होने वाली आवश्‍यकता की पूर्ति होती है । मेरे राज्‍य उत्‍तराखण्‍ड के सीमांत एवं छोटी जोत वाले किसानों को इसका बड़ा लाभ पहुंचा है । प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, प्रधानमंत्री अन्‍नदाता आय संरक्षण अभियान, मृदा स्‍वास्‍थ्‍य कार्ड योजना, राष्‍ट्रीय सतत कृषि मिशन, जैसी योजनाएं धरातल पर कार्य कर रही है ।
         मेरे राज्‍य उत्‍तराखण्‍ड में पलायन एक बड़ी समस्‍या हो रही है । खेती पर आधारित भूभागों पर बन्‍दर और जंगली सुअरों के आंतक से लोगों का खेती से मोह भंग हो रहा है क्‍योंकि उनकी मेहनत से लगी फसल को बन्‍दर और सुअर (जंगली) नष्‍ट कर देते हैं ।
         मैं यह कहना चाहूँगा कि पर्वतीय क्षेत्रों में ऐसी योजनाएं बने जिसमें किसानों की आय भी हो और देश भर में उनकी मांग भी जैसे- बागवानी, के तहत आग्रेनिक जोन स्‍थापित किये जायें, उत्‍तराखण्‍ड राज्‍य को जड़ी बूटी के क्षेत्र में प्राथमिकता प्रदान कराई जाए । बागवानी और जड़ी-बूटी पर आधारित शोध संस्‍थान खोले जायें और पर्वतीय भू-भागों को एक मिशन मोड पर रखकर कार्य किये जायें किसानों को इसका लाभ मिलेगा और उनकी रुचि पुन:खेती की ओर बढ़ेगी ।
         अपनी सरकार द्वारा ग्रामीण विकास पर भी विशेष ध्‍यान दिया गया है ग्रामीण भारत देश का अमूल्‍य भाग है । उस क्षेत्र में अपनी सरकार द्वारा काफी प्रयास हुए हैं । स्‍वच्‍छ भारत अभियान, प्रधानमंत्री उज्‍जवला योजना, प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना, हर घर बिजली योजना, पंचायतों को उनका अधिकार और उनकी योजनाओं के अनुसार धन मुहैया करवाना, जैसी योजनाएं के जरिए गाँव, गरीब और किसानों के जीवन में सुधार लाकर केन्द्र की नरेन्द्र मोदी सरकार द्वारा न्‍यू इंडिया में गांवों की तस्‍वीर बदलने वाला स्‍वरूप है ।
         ग्रामीण क्षेत्रों में1 करोड़54 लाख मकान बनवाकर प्रधानमंत्री जी ने हर व्‍यक्‍ति को छत मुहैया करवाने और 2022 तक बाकी बचे 1.95 लाख बनवाने की तैयारी कर रखी है । 2022 तक हर ग्रामीण को जिनके पास अपना आवास नहीं है आवास देने की तैयारी पूर्ण की है ।
         मेरे राज्‍य उत्‍तराखण्‍ड में पर्वतीय भूभाग होने और गांवों की बसावट पहाड़ी क्षेत्रों में दूर-दूर होती है और पात्र व्‍यक्‍ति के चयन में थोड़ी परेशानियां भी आती हैं । पहाड़ में व्‍यक्‍ति झोपड़ी नहीं बनाता है वो पात्र स्‍थानीय क्षेत्रों से पत्‍थर जमा कर खुद परिवार के माध्‍यम से मकान का ढ़ांचा तैयार कर लेता है और पात्रता में कच्‍चा और झोपड़ी जैसा विषय आने पर कुछ पात्र छूट जा रहे हैं । मैं कहना चाहूंगा कि पर्वतीय क्षेत्र में गरीब और पात्र व्यक्ति को आवास मिल सके ।
         ग्रामीण क्षेत्रों के सामाजिक व आर्थिक उत्थान में अटल जी द्वारा शुरू की गयी योजना,जिसे मोदी जी ने प्राथमिकता से आगे बढ़ाया है, में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की भूमिका अहम है । इसके खास महत्व को देखते हुए इस योजना के तीसरे अवतार की घोषणा का स्वागत करता हूं । तीसरे चरण में 80 हजार करोड़ रू. से अधिक लागत से 1 लाख 25 हजार किमी लंबी सड़कें बनेगी और अपग्रेड होगी और आधुनिक प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल से सड़कों के खराब होने की शिकायत कम होगी प्रशंसनीय है । ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क निर्माण से किसानों को मंडियों मे अपनी उपज बेचने में सहायता मिलेगी और आवागमन में भी सुविधा होगी ।
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना मेरे राज्य उत्तराखंड एवं मेरे संसदीय क्षेत्र अलोड़ा के ग्रामीण क्षेत्र के लिए प्राणवायु बनी है उसका लाभ मुझे संसदीय क्षेत्र चुनाव के दौरान जनता ने दिया और रिकॉर्ड वोट मुझे प्राप्त हुए । मैं कहना चाहूंगा कि फेज-2 और फेज-3 के तहत गांव के प्रत्येक स्कूल और पंचायत घरों तक सड़क ले जाने की योजना के तहत जो कार्य योजना है उसमें पर्वतीय क्षेत्र के भू-भाग में गांवों की बसावट में एक घर की दूरी से दूसरे तोक तक की दूरी काफी दूर है और तोका दूर जाते हैं । अतः चयन के दौरान सम्पूर्ण ग्राम पंचायत का भू-भाग इसमें सम्मिलित होना चाहिए और कोर नेटर्वक में भी कुछ शिथिलता प्रदान हो ताकि सड़क मार्ग से वंचित सभी क्षेत्रों को सड़क मार्ग उपलब्ध हो सके।
         देश की अर्थव्यवस्था को बढ़ाने में ग्रामीण क्षेत्रों का भी योगदान हो, इस निमित्त मोदी सरकर द्वारा किसानों की आय दोगुनी करने,दलहन और तिलहन की खेती पर जोर, अन्नदाता का ऊर्जादाता बनने की पहल, ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की पहल, खेती की बेहतरीन तकनीक, ग्रामीण जन-जीवन में सबको शौचालय,सबको गैस चूल्हा,हर घर बिजली,हर गांव सड़क,मनरेगा को और प्रभावशाली करना,मछली पालन को उद्योग के रूप में स्थापित करना,खेती में अनुसंधान को बढ़ावा देने सहित अनेक प्रभावशाली कदम उठाये गये हैं जो अवश्य गांवों की तस्वीर बदलेगी और न्यू इंडिया की तस्वीर दिखायी देगी ।      
             
* SHRI RAHUL RAMESH SHEWALE (MUMBAI SOUTH-CENTRAL) : Thank you for allowing me to express my views on the discussion on Demands for Grants under the control of Ministry of Rural Development and Agriculture and Farmers Welfare for 2019-20.
          Overall if we analyse the problems of farmers is due to the poor planning and allocation of funds for the welfare of farmers, marginal increase of minimum support price for different crops and also  loss of crops due to natural calamities, we find that ultimate sufferers are farmers since independence.  Due to all these problems, in the period between 1995 to 2014, over 3 lakh farmers have committed suicide, which adds up to their being a farmer suicide every half hour.  Additionally, according to the data published by the National Crimes Records Bureau (NCRB) in 2015, over 72%  of farmers taking their lives are own less than 2 hectares of land, where the small farmers and marginal farmers accounted for 45.2% and 27.4% of all victims.  The NCRB has not published similar data addressing farmer suicides, excluding the provisional data released in 2016, which reported 11,370 suicides of farmers and farm laborers.
          From 2014 onwards the NCRB revised its methodology affecting the data published.  The published by the bureau reported a decrease in the number of suicides from 11,772 in 2013 to 5,650 in 2014 and this fall has been accompanied with a rise in number of cases of suicide published under the “Others” category.  Additionally, the NCRB records the suicides of tenant farmers as those committed by “agricultural laborers”, such classifications leads to the dilution of the data, leading to an inaccurate estimate of the number of the total number of farmers committing suicide. Questions must also be raised regarding the need for such a classification, especially when the NCRB itself has defined farmers as : “Farmers include those who own and work on field namely, cultivators as well as those who employ/hire workers for field work/farming activities.  It excludes agricultural labourers.” Despite the new methodology devised by the NCRB, Maharashtra, Andhra Pradesh, Telangana, Karnataka, Chattishgarh  and Madhya Pradesh, still account  for more than 90% of all farmer suicides, with Maharashtra alone accounting for over 45% of the total number of farmer suicides.
          I request to Hon’ble Minister of Rural Development and Agriculture and Farmer Welfare to take concrete steps to issue directives to the State Government of Maharashtra to take a serious look towards regulating the kind of crops that must be grown in particular regions. In the Marathwada region of Maharashtra which is a drought prone zone, state policies encourage the farming of water intensive crops like sugarcane.  Though it is true that Marathwada also accounts for 61 sugar factories, it is also true that sugarcane cultivation requires 8 times the water capacity in comparison to that of a rabi jowar crop.  The mismanagement of scarce water resources leads to a depletion of the ground water capacity of the region, adversely affecting the farmers involved in cultivation in drought prone region.
          Tenant Farmers in India, rent the land which they cultivate and pay the rent to the owner either in the form of cash or as a portion of the produce.  The contracts of tenancy are more often than not informal, inhibiting their access to formal sector credit, causing for them to be indebted to moneylenders, increasing their financial burden and forcing them to commit suicide.  Additionally, they also get undercounted in the farmer suicide category. 
          According to the 2014 NCRB data, agricultural labourers accounted for over 1000 more suicides than farmers.  This fact is particularly stark for Andhra Pradesh where the number of suicides committed by agricultural labourers is 3 times that of farmer suicides.
          Small and Marginal Farmers are account for over 70% of total farm suicides, as they too lack access to proper credit institutions, hence are forced to be indebted to local money lenders, supplemented by their inability to sell their cattle following the law banning cow slaughter has significantly affected their ability to manage the economic burden, forcing them towards committing suicide.
          There needs to be significant focus placed on the windows of the farmers who have committed suicide and their families who still would have to face the distress.  In certain cases it has also been noted the Government compensation is also denied to the kin of the deceased farmer, thus adding to their misery.
          In a PIL filed by the Citizens Resource and Action Initiative, the Hon’ble Supreme Court noted for their to be an urgent mover towards finding a solution for the agrarian crisis plaguing the nation.  The absence of an accurate and updated NCRB data regarding the  number of farmer suicides is a major drawback which needs to be addressed in primacy.  As the absence of reliable data inhibits the formulation of any policy focused on countering the prevalence of farmer suicides.
          I suggest that there is to be an urgent need to set up crop insurance schemes, citing crop failure as the primary reason for suicide.  Studies also suggest, that for there to be a stronger price support operations, stating failing remunerative prices as amongst the reasons leading to suicides.  This should also be supplemented by, the setting up of psychiatric help centres, emergency financial assistance, welfare centres and regulation of the informal loan sectors, proper implementation of crop insurance all over the country. 
कृषि और किसान कल्याण मंत्री; ग्रामीण विकास मंत्री तथा पंचायती राज मंत्री (श्री नरेन्द्र सिंह तोमर): माननीय अध्यक्ष महोदय, आज ग्रामीण विकास विभाग और किसान कल्याण मंत्रालय की अनुदान मांग संख्या 1284/85 पर अपनी बात रखने के लिए खड़ा हुआ हूं । कृषि और ग्रामीण विकास दोनों विषय हम सभी के जीवन से जुड़े हुए हैं । मुझे इस बात की प्रसन्नता है कि दोनों विषयों पर सदन के सदस्यों ने बड़ी संख्या में चर्चा करने में रुचि दिखाई । यह चर्चा 9 घंटे से ऊपर चली और लगभग 131 सदस्यों ने इस चर्चा में भाग लिया ।
         अध्यक्ष महोदय,इतनी बड़ी संख्या में सदस्यों ने चर्चा में भाग लिया, सुझाव दिए और उनके मूल्यवान सुझाव से सरकार अवगत हुई । इसके लिए मैं सभी सदस्यों के प्रति आभार प्रकट करता हूं । आम तौर पर अनुदान की मांगों के विषय में सदन की समय सीमा को एक सीमा तक ही बढ़ाए जाने का ही रिकॉर्ड रहा है । आप अध्यक्ष हैं, आप कृषि और ग्रामीण जनजीवन को समझते हैं,नए सदस्यों की भावनाओं को भी समझते हैं, विषय की गंभीरता को भी समझते हैं । इन सबको ध्यान में रखते हुए आपने कल 12 बजे तक सदन को चलाने की सीमा बढ़ाई, आप स्वयं रात में 12 बजे तक उपस्थित रहे और सचिवालय के सभी कर्मचारी इसमें योगदान करते रहे,मैं आपका और सचिवालय के अधिकारियों और कर्मचारियों का हृदय से आभार व्यक्त करता हूं ।
         माननीय अध्यक्ष जी, चर्चा का प्रारंभ श्री उत्तम कुमार रेड्डी जी ने किया । श्री रमापति राम त्रिपाठी,एस.एस. पलानीमणिक्कम,श्रीमती प्रतिमा मंडल, श्री पोचा ब्रहमानंद रेड्डी, श्री देवेन्द्र सिंह जी भोले, श्रीमती दर्शना जरदोश जी,श्री नरेन्द्र कुमार जी, श्री भागीरथ चौधरी,श्रीमती रंजनबेन जी, श्री के.सुब्बारायण जी, श्री एस.ज्ञानतिरावियम,श्री प्रतापराव जाधव, श्री कौशलेन्द्र कुमार जी, श्रीमती पूनमबेन जी, डॉ. राम शंकर कठेरिया, श्री सुधाकर तुकाराम,श्री विवेक शेजवलकर,अनुराग शर्मा जी, रितेश पाण्डे जी, श्री जगदम्बिका पाल जी, श्री कोथा प्रभाकर रेड्डी,श्री बी.वाई.राघवेन्द्र जी, श्रीमती रेखा वर्मा, श्री तराली रंगैया जी, सप्तगिरी उलाका जी, डॉ.अमोल कोल्हे,श्री मितेश रमेशभाई जी, श्री राजु बिष्ट, डॉ.अमर सिंह, श्री उदय प्रताप सिंह, श्रीमती अपरूपा पोद्दार,श्री हसनैन मसूदी जी, श्री अशोक महादेवराव, डॉ. अरविंद शर्मा जी, श्रीमती शोभा जी, श्री जयदेव गल्ला जी,चंद्र प्रकाश जोशी जी, श्री राकेश सिंह जी,श्री महताब जी,श्री गणेश सिंह जी, श्री तीर्थ सिंह जी, श्री रमेश मांझी जी,संजय काका पाटिल,श्री टी.आर.परिवेन्धर,श्री ई.टी.मोहम्मद बशीर जी, श्री अजय मिश्रा, डॉ.वीरेन्द्र कुमार,श्री जसवंतसिंह जी, एडवोकेट आरिफ साहब, डॉ. संघमित्रा मौर्या, पी.पी. चौधरी साहब, डॉ. डी. रविकुमार,श्रीमती एस.जोतिमणि, श्रीमती कविता जी, श्रीमती सुप्रिया सूले जी, श्री सुनील कुमार मंडल, संतोख सिंह चौधरी जी, देवजी पटेल साहब, जी.एम. सिद्देश्वरा जी, इम्तियाज़ जलील सईद जी, डॉ. सुजय,विखेपाटिल जी,हनुमान बेनीवाल जी, निशिकान्त जी, श्री खगेन मुर्मु जी, एन.के. प्रेमचन्द्रन जी, नारन भाई काछड़िया, श्रीमती रीति पाठक जी,श्री कास्मे सर्दिन्हा जी,श्री नवनीत रवि राणा जी, श्री मुकेश राजपूत जी,दुष्यंत सिंह जी, श्रीमती चिंता अनुराधा जी, श्री सुखबीर जौनपुरिया, श्री बैन्नी बेहनन, श्री जुगल किशोर जी,श्री वी. वैथिलिंगम,श्रीमती गीता विश्वनाथ वांगा जी, श्री नलिन कुमार कटील जी,श्री सुनील कुमार सोनी जी, श्री बिद्‌युत बरण महतो जी, श्रीमती रमा देवी, श्री पी. रविन्द्रनाथ कुमार जी, श्रीमती अन्नपुर्णा देवी,श्री एंटो एन्टोनी,बदरुद्दीन अजमल जी, श्री जनार्दन मिश्रा जी, सुश्री अगाथा संगमा जी, राहुल कस्‍वां जी,श्री जसबीर गिल,कपिल पाटिल,श्री थोल तिरुमावलवन,देवुसिंह चौहान,रतन मगनसिंह राठौर जी, फजलुर रहमान जी, आर.के. सिंह पटेल साहब, टी.एन. प्रथापन,श्री कुरुवा गोरांतला माधव,श्री पल्लब जी,श्री राजकुमार चाहर जी, श्री अनुमल्ला रेड्डी जी, श्री किरीट सोलंकी जी, श्रीमती रंजीता कोली, डॉ. भारती पवार,सुनील तटकरे जी, भोला सिंह जी, रघु राम कृष्ण राजू, संतोष पाण्डे जी, वी.के.श्रीकंदन जी,सुरेश कश्यप जी, डॉ. ए.चैला कुमार,परबतभाई पटेल,संगीता आज़ाद,राजवीर सिंह राजू भैय्या,रोड़मल नागर जी,गुरजीत सिंह जी, सुकांत सिंह जी, धरमवीर सिंह जी, बसंत कुमार पांडा जी,गुहाराम अजगल्‍ले जी, श्री राजीव प्रताप रूडी जी, रीता बहुगुणा जोशी जी, एच.वसंतकुमार जी,राम कृपाल यादव जी, अजय भट्ट जी, सुशील कुमार जी, रवनीत सिंह बिट्टु, एस.मुनिस्वामी जी, उन्‍मेश भैय्यासाहेब पाटिल जी, उमेश जी जाधव और श्री राम शिरोमणि जी ।
       माननीय अध्यक्ष जी, इन सभी सदस्यों ने इस पर अपने विचार व्यक्त किए । चर्चा बहुत ही गरिमापूर्ण थी । सभी सदस्य यह जानते भी हैं और मानते भी हैं कि ग्रामीण विकास हो या कृषि हो,दोनों विषय हम सबके लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं और देश के लिए भी महत्वपूर्ण हैं । सबने अपने मूल्यवान सुझाव भी दिए । कुछ विषयों पर उनकी कठिनाइयां थीं, उन कठिनाइयों को भी रखा और क्षेत्रीय समस्याओं को भी रखा । जहां टिप्पणी करने की आवश्यकता थी, वहां सदस्यों ने गंभीर टिप्पणी भी की । माननीय अध्यक्ष जी, हमने सभी सदस्यों के विचारों को लिपिबद्ध किया है । सुझाव बड़ी संख्या में हैं,टिप्पणियां भी हैं, इसलिए मैं आपके माध्यम से सभी सदस्यों को आग्रह करना चाहूंगा कि जो उन्होंने अपनी बातें रखी हैं,मैं सभी सदस्यों को लिखित में उसका जवाब पहुंचाऊं,इस बात का मैं प्रयत्न करूंगा ।
         निश्चित रूप से कुछ विषय चर्चा में हैं, वे आएंगे । मैं सबसे पहले ग्रामीण विकास से चर्चा आरंभ करना चाहूंगा । कई बार चर्चा में यह बात आती है कि गांव में बजट अपर्याप्त है । कई बार यह बात भी आती है कि जितनी आवश्यकता है,उतना काम नहीं हो रहा है । मैं आपके माध्यम से माननीय सदस्यों को अवगत कराना चाहता हूं कि ग्रामीण विकास के मामले में हम लोगों की जितनी क्षमता करने की है, उस क्षमता के अनुसार और सरकार द्वारा अपने बजट की स्थिति के अनुसार सर्वाधिक बजट देने की कोशिश लगातार हो रही है । अगर हम वर्ष 2008-09 से वर्ष 2013-14 तक छ: वर्षों का ग्रामीण विकास विभाग का बजट देखें तो पाएंगे कि 3,58,524.13 करोड़ रुपया खर्च हुआ । इसी प्रकार से अगर हम वर्ष 2014-15 से लेकर वर्ष 2019-20 का बजट देखें तो 5,77,790.79 करोड़ रुपया खर्च हुआ । इसके अतिरिक्त गैर-बजटीय संसाधन,जो हम नाबार्ड या अन्य स्रोतों से लेते हैं, इसमें लगभग 44,008.37 करोड़ रुपया है । अगर इस प्रकार से हम देखें तो हमारे ध्यान में आएगा कि कुल मिलाकर पूर्व के छ: साल और इन सालों में 2,63,275.13 करोड़ रुपये की वृद्धि हुई है जो 74 परसेंट है । इस दृष्टि से ग्रामीण विकास के बजट में किसी भी प्रकार का सरकार को संकोच नहीं है, हर हैड में पर्याप्त पैसा मिल रहा है, हम पर्याप्त काम करने की कोशिश कर रहे हैं । ग्रामीण विकास मंत्रालय में निश्चित रूप से एक प्रमुख योजना है जिसने गांव के जनजीवन को बदला है । जब माननीय अटल बिहारी वाजपेयी जी इस देश के प्रधान मंत्री थे, उनके मन में यह बात आई कि देश के लाखों गांव संपर्क से छूटे हुए हैं,इसलिए इन्हें प्रधान मंत्री ग्राम सड़क योजना से जोड़ना चाहिए ।
उस समय प्रधान मंत्री ग्राम सड़क योजना बनाई गई थी, उस पर काम प्रारंभ हुआ । अटल जी के समय में जो रोडमैप बना था, उसके अनुसार यह काम वर्ष 2008 तक पूरा हो जाना चाहिए था, लेकिन बीच में कुछ शिथिलता रही, इसलिए आज भी यह काम चल रहा है । वाजेपयी जी के समय में जब पहले फेज की कल्पना की गयी थी तो उसमें 1,78000 बसावटें थीं,जिनको सड़क से जोड़ना था । मंत्रालय ने व्यावहारिक रूप से देखा कि उनमें कहां सड़कें बनाई जा सकती हैं तो 1,71000 बसावटें छांटी गयीं और मुझे यह कहते प्रसन्नता है कि वर्ष 2014 में जब प्रधान मंत्री मोदी जी ने काम संभाला था तो उन्होंने कहा था कि पहले फेज को हर हालत में हमें वर्ष 2019 तक पूरा करना चाहिए । हम 1,66000 बसावटों को पहले फेज में जोड़ चुके हैं और ये लगभग 97 परसेंट होता है । बाकी जो 3 परसेंट बची हैं,उनमें काम चल रहा है । कुछ क्षेत्र ऐसे भी हैं जहां सड़क बनाना मुमकिन नहीं हो पा रहा है ।
         माननीय अध्यक्ष महोदय, इसी तरह प्रधान मंत्री सड़क योजना का सेकेंड फेज था । इसमें 50,000 कि.मी.सड़कें बनाने का लक्ष्य था । 41000 कि.मी. सड़कों की स्वीकृति जारी हो गयी है और मुझे यह कहते हुए प्रसन्नता है कि 29000 कि.मी. सड़कें बना दी गयी हैं । काफी लंबे समय से बहुत सारे राज्य जो फर्स्ट फेज और सेकेंड फेज को पूरा कर चुके हैं, उन क्षेत्रों के सांसद महोदय मुझे मिलते थे और कहते थे कि हमारे क्षेत्र में ग्रामीण सड़क की दृष्टि से हमें कुछ नहीं मिल रहा है क्योंकि वे फर्स्ट फेज और सेकेंड फेज पूरा चुके थे,इसलिए दूसरा कोई हेड नहीं था,जिसमें से गांव की सड़क उन्हें दी जा सके ।
   
12.37 hrs                           (Shri N.K. Premachandran in the Chair) तब से लगतार इस बात पर विचार हो रहा था कि प्रधान मंत्री ग्राम सड़क योजना का थर्ड फेज लाया जाए और मुझे यह कहते हुए प्रसन्नता है कि इसी माह में प्रधान मंत्री ग्राम सड़क योजना का थर्ड फेज माननीय नरेन्द्र मोदी जी की अध्यक्षता में मंत्रिपरिषद की बैठक में स्वीकृत कर दिया गया है । इस थर्ड फेज में हम 1,25000 कि.मी. सड़कें बनाएंगे जिस पर 80,000 करोड़ रुपये का व्यय आएगा । इसके लिए सरकार पूरी तरह से तैयार है । इस काम को हम वर्ष 2024-25 तक पूरा करेंगे, इस लक्ष्य को लेकर हम सब लोग काम कर रहे हैं । सड़क की गुणवत्ता ठीक हो,सड़क के काम में गति आए और ग्रीन टेक्नोलॉजी का उपयोग इन सड़कों के निर्माण में हो, यह भी हम लोगों ने सुनिश्चित किया है । मुझे कहते हुए यह प्रसन्नता है कि प्लास्टिक के वेस्ट से जो सड़क बनाने की टेक्नोलॉजी है, उससे 27000 कि.मी. सड़कें बनाई हैं ।

दूसरा, जो काम की गति है वह हमारे आने से पहले 76 कि.मी. सड़क प्रतिदिन बनती थी आज सरकार ने अपनी गति को बढ़ाया, अमले को बढ़ाया, समय पर पैसा देना प्रारंभ किया और मुझे कहते हुए प्रसन्नता है कि आज 135 कि.मी. सड़क प्रतिदिन के हिसाब बन रही है और हम इस काम को जल्दी से पूरा करेंगे । प्रधान मंत्री ग्राम सड़क के मामले में कुछ मित्रों ने चर्चा की कि किन्हीं-किन्हीं क्षेत्रों में उसकी गुणवत्ता खराब है और कुछ टेंडर आदि प्रक्रिया में राज्य के अधीन कुछ कमियां दिखाई दी हैं । मैं आपको बताना चाहता हूं कि सरकार ने एक ‘मेरी सड़क’ ऐप बनाया है । इस ऐप के माध्यम से आप किसी भी प्रधान मंत्री ग्राम सड़क पर खड़े होकर, अगर उसकी गुणवत्ता खराब है तो उसकी शिकायत कर सकते हैं । इस ऐप का उपयोग लगभग एक लाख से अधिक लोगों ने किया है । हम लगातार शिकायतों को एन्टर्टेन भी करते हैं और उनका निराकरण भी करते हैं । जहां तक गुणवत्ता का सवाल है, तो उसके लिए तीन स्तरों पर मॉनिटरिंग की व्यवस्था है । वहां जिले में जी.एम. रहता है साथ ही पूरी टीम और एक लेबोरेट्री रहती है तो वहां इस तरह से मॉनिटरिंग होती है । राज्य सरकारें स्टेट क्वालिटी मॉनिटर भी रखते हैं । अगर कोई शिकायत आती है तो स्टेट क्वालिटी मॉनिटर वहां जाते हैं और उन शिकायतों का निराकरण करते हैं । अगर आवश्यकता होती है, तो उन पर कार्यवाही भी की जाती हैं । इसके ऊपर भी यदि कभी कोई शिकायत आती हैं या माननीय सांसदगण कोई शिकायत देते हैं तो नेशनल क्वालिटी मॉनिटर जो तीसरी व्यवस्था है, अगर सांसद कहते है कि हमारी उपस्थिति में जांच होनी चाहिए तो हम उनकी उपस्थिति में भी जांच कराने का काम करते हैं ।

मैं सदन को आश्वस्त करना चाहता हूं कि प्रधान मंत्री ग्राम सड़क योजना में मानदंड भी ठीक है और पैसा भी सही तरीके से दिया जा रहा है इसलिए इसमें किसी भी प्रकार की गुणवत्ता में कोई खराबी आएगी तो निश्चित रूप से उसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा । आप सभी लोग किसी भी शिकायत को मुझ तक पहुंचाने के लिए स्वतंत्र हैं और मैं निश्चित रूप से आपकी समस्या को सुलझाने का काम करूंगा ।

         माननीय सभापति महोदय, आम तौर पर मनरेगा बड़ी लोकप्रिय योजना है और आप सभी के ध्यान में होगा कि एक समय था, जब मनरेगा की चर्चा या मनरेगा का प्रश्न सदन में आता था तो मनरेगा की खामियां, मनरेगा में अमानत में खयानत और मनरेगा में भ्रष्टाचार की चर्चाएं आम होती थीं, लेकिन मुझे इस बात की प्रसन्नता है कि कल अधिकांश सदस्यों ने, जिन्होंने मनरेगा पर अपने विचार व्यक्त किए,सभी ने एक ही बात कही कि मनरेगा में पैसे को और बढाया जाना चाहिए । मनरेगा में और काम सम्मिलित किये जाने चाहिए । मनरेगा का जो सदुपयोग हो रहा है, उसकी महत्ता का सभी लोगों ने वर्णन किया । कटौती प्रस्ताव में भी इसका जिक्र किया है । मनरेगा में लगभग 12 करोड़ जॉब कार्ड हरे हैं, 12 करोड़ में से 11 करोड़ के आसपास जॉब कार्डधारियों को आधार से लिंक कर दिया गया है और 7 करोड़ लोग ऐसे हैं, जिनका बैंक अकाउंट भी आधार से लिंक हो गया है । पांच करोड़ के आस पास ऐसे श्रमिक हैं जो काम पर अदल-बदल कर आते रहते हैं और हमारी कोशिश रहती है कि मनरेगा के माध्यम से निशुद्ध रूप से जो संरचना बने, मनरेगा के माध्यम से जो मानव लेबर सृजित हो, वह जनोपयोगी हो और लंबे समय तक लोगों के उपयोग में आए । इस दिशा में निश्चित रूप से हमने काम किया है । एक तरफ मनरेगा के लिए आवंटन भी निरंतर बढ़ाया जा रहा है । …(व्यवधान)अगर मैं यह कहूं कि अधीर रंजन जी मुझे अच्छे लगते हैं तो आप क्या देने वाले हैं …(व्यवधान) मनरेगा को हम लोगों ने सुधार करके जनोपयोगी बनाया है और यह जनोपयोगी बना है । अगर इसमें पारदर्शिता आई है तो वह प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी जी के सशक्त नेतृत्व के कारण आई है ।

माननीय सभापति महोदय, मैं आपके माध्यम से सदन को बताना चाहता हूं कि आज मनरेगा के जो मजदूर हैं, उनके अकांउट में हम 99 परसेंट भुगतान करने का काम कर रहे हैं । उस भुगतान में किसी भी प्रकार का बिचौलिया नहीं है, किसी भी प्रकार का दलाल नहीं है । यह हम लोगों ने सुनिश्चित करने का काम किया है । जो संरचनाएं बन रही हैं, उन संरचनाओं को जियो-टैग करने का काम किया है और अभी तक हम 3 करोड़ 62 लाख संरचनाओं की जियो-टैगिंग कर चुके हैं । अगर माननीय सदस्यों को कभी देखना हो तो मेरे कार्यालय में आकर वे जियो टैगिंग का काम देख सकते हैं । मनरेगा में इस वर्ष लगभग 268.08 करोड़ मानव दिवस सृजित हुए हैं । काम करने में महिलाओं का प्रतिशत 57 है और जो लोग 100 दिन काम करने आते हैं, ऐसे लोगों का प्रतिशत 52 है । अभी मनरेगा के अंतर्गत लगभग 18 लाख से अधिक कामों को पूरा किया जा चुका है । ऐसी स्थिति है । ये सभी संरचनाएं निश्चित रूप से काम आ रही हैं ।

         मनरेगा में दो-तीन प्रश्न सभी मेंबर्स उठाते हैं । अगर मैं अपने क्षेत्र को देखता हूं तो मुझे लगता है कि आप सभी लोगों की भावना सही है और मैं उस भावना से सहमत भी हूं । कई बार यह बात आती है कि मनरेगा को कृषि से जोड़ा जाए । मैं आप सभी को यह बताना चाहता हूं कि मनरेगा कृषि कार्यकलापों से जुड़ा हुआ है,लेकिन उसकी अपनी एक सीमा है और उस सीमा के अंतर्गत हम निश्चित रूप से मनरेगा का उपयोग कृषि के क्षेत्र में करते ही हैं । जो मुख्य बात आती है कि सारे खेतों की तार बाउण्ड्री करा दी जाए, क्योंकि जानवरों से खेती को नुकसान हो रहा है ।

दूसरी बात आती है कि खेती में काम करने वाले श्रमिकों की पेमेंट मनरेगा से हो जाए । यह बहुत लोकप्रिय बात है और खेतों में काम करने वाले सभी लोगों के लिए अच्छी है, लेकिन मैं समझता हूं कि इसमें थोड़ी सी कठिनाई है,इसलिए मैं अभी इस बारे में कुछ कहने की स्थिति में अपने आपको नहीं पाता हूं । साथ ही साथ, मैं आपसे यह जरूर कहना चाहता हूं कि मनरेगा हमेशा चलता रहे, मैं इसका पक्षधर नहीं हूं, क्योंकि मनरेगा गरीब लोगों के लिए है और हमारा उद्देश्य यह होना चाहिए कि गरीबी मुक्त भारत का निर्माण हो । जो गरीब है, धीरे-धीरे वह अति गरीब की श्रेणी से निकलकर गरीब की श्रेणी में आए और गरीब की श्रेणी से निकलकर उसके जीवन का और उत्थान हो, इस दिशा में निश्चित रूप से सरकार काम कर रही है । इसलिए जो संरचनाएं बन रही हैं, वे जन उपयोगी बनें, वे भी लोगों की आय का साधन बनें । जो जल संरचनाएं बन रही हैं, वे सिंचाई का साधन बनें और उन जल संरचनाओं के माध्यम से खेती का रकबा बढ़े, गरीब लोगों की आय बढ़े । साथ ही साथ, हम लोगों ने यह भी कोशिश की है कि जो मनरेगा के मजदूर हैं,इसी एड में से उनकी ट्रेनिंग कराई जाए ।

12.47 hrs                        (Hon. Speaker in the Chair) हम उनको बेयर फुट टेक्निशियन के रूप में ट्रेनिंग कराएं, जिससे वे कुशलता प्राप्त कर सकें और कुशल बनकर वे निश्चित रूप से अपने जीवन को और उन्नत बना सकें । हमने ऐसे लगभग 7563  बेयर फुट टेक्निशियन भी इस योजना में बनाए हैं ।

         अध्यक्ष महोदय,मनरेगा का एक विषय और रह गया है । कुछ मित्रों ने कहा कि मनरेगा का आवंटन घटा दिया गया है । मैं आप सभी को आश्वस्त करना चाहता हूं कि आवंटन को बजट टू बजट देखना चाहिए । …(व्यवधान)पहले बजट आवंटन 55 हजार करोड़ रुपये था, इस बार इसे 60 हजार करोड़ रुपये किया गया है । स्वाभाविक रूप से जब मनरेगा का दायरा बढ़ता है और काम बढ़ता है तो आवश्यकता पड़ने पर हम पैसे लेते हैं । पिछली बार आवंटन 55 हजार करोड़ रुपये था, हमें आवश्यकता पड़ी तो हमने सप्लीमेंटरी आवंटन के रूप में 6,000 करोड़ रुपये और लिए । इस बार बजट में आवंटन 55 हजार करोड़ रुपये की जगह 60 हजार करोड़ रुपये किया गया है तो इसे कम करने का कोई सवाल नहीं उठता है ।

         प्रधान मंत्री आवास के बारे में मैं आप सभी को बताना चाहता हूं कि प्रधान मंत्री आवास योजना का ग्रामीण जनजीवन को बदलने में निश्चित रूप से बहुत लाभ हुआ है । इस दृष्टि से हम देखें तो पिछले दिनों हमने लक्ष्य तय किया था कि एक करोड़ आवास वर्ष 2018-19 तक बनाएंगे,लेकिन एक करोड़ 53 लाख आवास बनाने का काम हुआ । आवास के आकार को भी हमने बढ़ाया है, उसकी धनराशि को भी हमने बढ़ाया और आवास को सर्व-सुविधायुक्त बनाया है । अगर हम गरीबी मुक्त भारत बनाना चाहते हैं तो निश्चित रूप से हमें सारी चीजें गरीब को उपलब्ध करानी पड़ेगी । गरीब के घर में शौचालय होना चाहिए,प्रधान मंत्री आवास में शौचालय है । गरीब के घर में रसोई होनी चाहिए, प्रधान मंत्री आवास में रसोई है । गरीब के घर में गैस का सिलेंडर होना चाहिए,तो ‘उज्ज्वला योजना’ के अंतर्गत गैस का सिलेंडर है । गरीब के घर में बिजली होनी चाहिए, तो ‘सौभाग्य योजना’के अंतर्गत उनको बिजली देने का काम किया जा रहा है ।

माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से सदन को बताना चाहता हूं कि आने वाले समय में,वर्ष 2021-22 तक हम लोग 1 करोड़ 95 लाख मकान और बनाने वाले हैं,जिनके लिए पर्याप्त मात्रा में धन राशि का इंतजाम है । कई बार यह भी कहा गया कि बजट में कम पैसा दिया गया है, तो ये मकान का लक्ष्य कैसे पूरा होगा?मैं सदन को आश्वस्त करना चाहता हूं कि हम जब भी किसी योजना का सृजन करते हैं, पहले बजट को देखते हैं । जहां बजट की आवश्यकता होती है, वहां बजट से पैसा लेते हैं और जहां अतिरिक्त आवश्यकता होती है, वहां अतिरिक्त पैसा भी लेते हैं । पिछली बार भी जब हम ने एक करोड़ मकान बनाने का लक्ष्य रखा था,तब 60 हजार करोड़ रुपये बजट से लिये थे और 21 हजार करोड़ रुपये ‘नाबार्ड’से लिये थे । 81 हजार करोड़ रुपये की लागत से यह काम किया गया ।

इस समय हम लोगों ने ग्रामीण मिस्त्रियों का प्रशिक्षण किया, मूल्यांकन किया और प्रमाणीकरण भी किया । निश्चित रूप से जो कारीगर नीचे प्रशिक्षित हो गए थे, उनकी कुशलता बढ़ गई थी । प्रधान मंत्री आवास बनाने में भी उनकी कुशलता का उपयोग हुआ और एक प्रमाणित कोई भी हमारा कारीगर दूसरी जगह जाएगा और काम करेगा,तो निश्चित रूप से उसको ज्यादा मजदूरी मिलेगी । हम लोगों ने यह भी सुनिश्चित करने का काम किया है ।

आप सभी के ध्यान में है कि प्रधान मंत्री जी ने कहा था कि वर्ष 2022 तक हम हर गरीब आदमी को छत प्रदान कर देंगे । मैं समझता हूं कि अब वह लक्ष्य नजदीक है । हम 1 करोड़ 53 लाख घर बना चुके हैं और आने वाले समय में 1 करोड़ 95 लाख की जो सूची है, उसे हम वर्ष 2022 तक बना कर, प्रधान मंत्री मोदी जी के संकल्प को पूरा करने में कामयाबी हासिल करेंगे ।

माननीय अध्यक्ष महोदय, ग्रामीण विकास के अंतर्गत दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना है । इस योजना के अंतर्गत गांवों में जो बच्चे काम करते हैं, उन बच्चों को हम लोग शिक्षण देते हैं और उनकी नौकरी लग जाए,यह सुनिश्चित करने का काम करते हैं । इस योजना के अंतर्गत लगभग 643 जिले और 5,709 ब्लॉक्स आते हैं । इस योजना के माध्यम से हम लोगों ने लगभग 8 लाख लोगों को शिक्षण दिया । जिनमें से 5 लाख लोग अपने रोजगार में लग गए हैं । आप कई बड़े-बड़े होटलों में भी जा कर देखेंगे,तो आपको डीडीयू जीकेवाई का बैच लगे हुए बच्चे अपोलो जैसे अस्पताल में भी मिलेंगे,जो इसी योजना के अंतर्गत प्रशिक्षित होकर रोजगार प्राप्त किए हुए हैं ।

अध्यक्ष महोदय, गांवों में गरीबों को आजीविका मिलना बहुत आवश्यक है,क्योंकि एक तरफ अधोसंरचना हो,दूसरी तरफ मौलिक सुविधाओं का अभाव कम हो और तीसरी तरफ आजीविका भी हो । मुझे यह कहते हुए प्रसन्न्ता है कि ‘दीनदयाल अंत्योदय योजना,राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन’के माध्यम से देश भर में ग्रामीण विकास मंत्रालय काम कर रहा है और हम सभी के सामने बहुत अच्छे परिणाम आ रहे हैं । इस योजना के अंतर्गत आज 5 लाख से अधिक स्व-सहायता समूह हैं और 5 करोड़ से अधिक बहनें इस कार्यक्रम से जुड़ी हुई हैं । इस कार्यक्रम के अंतर्गत ही हम ‘महिला किसान सशक्तिकरण परियोजना’का भी संचालन करते हैं, उसका भी सद्परिणाम अच्छा आया है । इसमें सरकार का नियोजन भी ठीक है और सरकार द्वारा जो निवेश हो रहा है, निश्चित रूप से, वह भी स्व-सहायता समूहों की जिंदगी बदलने में उपयोगी सिद्ध हो रहा  है ।

साथ ही साथ बैंक से लीकेज की जो बात है, मुझे कहते हुए प्रसन्नता है कि बड़े-बडे उद्यमियों के एनपीए के चर्चे हाउस और हाउस के बाहर भी चलते हैं । आम तौर पर एक समय था,जब गरीब व्यक्ति को बैंक अपनी दहलीज पर इसलिए खड़ा नहीं होने देता था कि यदि इसे पैसा देंगे, तो पैसा डूब जाएगा । मुझे कहते हुए प्रसन्नता है कि विगत वर्षों में सैल्फ हेल्प ग्रुप्स को दो लाख करोड़ रुपये से अधिक पैसा बैंकों के माध्यम से दिया गया और उन्होंने अपना कामकाज प्रारम्भ किया । मैं वर्ष 2016-17 में इस विभाग में आया था, उस समय सैल्फ हेल्प ग्रुप्स का एनपीए 23 परसेंट था । हम लोगों ने ट्रेडिंग बढ़ाई,बातचीत की,राज्य सरकारों ने प्रयत्न किए और मुझे कहते हुए गर्व होता है कि बड़े लोगों के एनपीए का प्रतिशत सदन के लोग जानते हैं,लेकिन सैल्फ हेल्प ग्रुप्स का एनपीए 2.9 प्रतिशत है ।

श्री अधीर रंजन चौधरी (बहरामपुर): बड़ेलोगों का एनपीएराइट ऑफ कियाजाता है,लेकिन गरीबलोगों का एनपीएराइट ऑफ नहींकिया जाता है । वे अपनी मेहनतकी कमाई सेपैसा जमा करातेहैं ।…(व्यवधान)

श्री नरेन्द्र सिंह तोमर : अध्यक्षजी, अधीररंजन जी हमारेसदन के वरिष्ठसदस्य हैं औरहमेशा उनके मनमें रहता हैकि सारे कामउन्होंने हीप्रारम्भ किएहैं । मुझे यहमानने में संकोचभी नहीं है,लेकिन एक कार्यक्रमजिसमें सिर्फभ्रष्टाचार कीचर्चा होती थी,वह कार्यक्रमपूरी तरह सेट्रांसपेरेंटहो जाए, यहतो प्रधान मंत्रीनरेन्द्र मोदीजी के कार्यकालमें हुआ है,यह तो निश्चितरूप से आपकोमानना पड़ेगा ।

         महोदय, ग्रामीणविकास मंत्रालयके विषय कोपूरा करके मैंकृषि के विषयपर आता हूं ।निश्चित रूपसे कृषि केक्षेत्र मेंहमारी बहुत सारीउपलब्धियां हैं । कृषि का विषयबहुत महत्वपूर्णहै और हम कृषिप्रधान देश केनागरिक हैं ।हमारी मान्यताहै कि गांवआगे बढ़ेगा, तोदेश आगे बढ़ेगाऔर किसान यदिसमृद्ध होगा, तोही देश समृद्धहोगा । इस परिकल्पनाको साकार करनेके लिए प्रधानमंत्री जी आरम्भही से कोशिशमें लगे हैं । सारा देश इसबात का साक्षीहै कि जब उन्होंनेकाम संभाला, तोउन्होंने अपनेसबसे पहले उद्‌बोधनमें कहा थाकि उनकी सरकारगांव, गरीबऔर किसान केलिए पूरी समर्पितरहेगी । गांवके बारे मेंमैंने आपको बतायाऔर गरीब केबारे में भीअनेक योजनाएंहैं । उन सारीयोजनाओं का जिक्रसमय-समय परहोता ही रहताहै और किसानकी दृष्टि सेभी जितने नएआयाम को प्रधानमंत्री नरेन्द्रमोदी जी नेस्पिरिट प्रदानकी है, वहऐतिहासिक हैऔर इससे निश्चितरूप से पूरेक्षेत्र मेंआज बदलाव आरहा है । मुझेयह कहते हुएप्रसन्नता हैकि कृषि केक्षेत्र मेंअनेक योजनाएंसंचालित होतीहैं । कुल 13योजनाएं हैंऔर उनकी 18 उपयोजनाएं हैं । उनके माध्यमसे पूरा कृषिक्षेत्र संचालितहोता है । आईसीएआरमें हमारे वैज्ञानिकरिसर्च का कामकरते हैं । रिसर्चके लिए भी इसबार 8078 करोड़रुपये हम लोगोंने रखे हैं,जिसमें 3.57परसेंट कीवृद्धि है ।आज खाद्यान्नकी दृष्टि सेहम समृद्ध हैंऔर पूरी तरहआत्मनिर्भर हैं । बागवानी काउत्पाद भी 385मिलियन टनसे ऊपर हो गयाहै । दूध केउत्पादन मेंभी हम 187 मिलियन टन सेऊपर हैं । हमारेवैज्ञानिकोंने गत वर्षोंमें 5958 बीजोंकी किस्में उत्पन्नकी हैं । वर्ष2018-19 में देखें,तो 372 किस्मेंउन्नत की हैंऔर बायोफोर्टिफाइडदेखें, तो35 किस्मेंउन्नत हैं ।हमारे वैज्ञानिकोंने इस दिशामें बहुत अच्छाकाम किया हैऔर आईसीएआर 713कृषि विज्ञानकेंद्रों केमाध्यम से पूरेदेश में फैलाहुआ है ।

13.00 hrs          अगर आज हम खाद्यान्न के क्षेत्र में आत्मनिर्भर हैं,तो इसका श्रेय किसे दिया जा सकता है? मैं चाहूँगा कि जिन्होंने खेत में परिश्रम किया,पसीना बहाया,सर्वप्रथम इसका श्रेय उनको दिया जाना चाहिए । आज़ादी के बाद से आज तक की जो लम्बी यात्रा चली है, उसमें निश्चित रूप से हमारे कृषि वैज्ञानिकों ने नये-नये बीजों का उत्पादन किया है, उन्होंने नये-नये बीजों का प्रयोग बढ़ाया है, किसानों की ट्रेनिंग हुई है और नीचे तक इसकी अवेयरनेस हुई है,किसानों ने उनको अपनाना शुरू किया है, उसका ही यह परिणाम है कि हम खेती के क्षेत्र में आगे बढ़े हैं । इसलिए दूसरा श्रेय मैं देश के कृषि वैज्ञानिकों को देना चाहता हूँ, जिन्होंने इस क्षेत्र में अपना बड़ा योगदान किया है ।

         लेकिन गत पाँच वर्षों में खेती के क्षेत्र में सम्मान बढ़ा है,जागरूकता बढ़ी है । एक समय था,जब एक डॉक्टर यह मानता था कि उसके लड़के को डॉक्टर बनना चाहिए, एक इंजीनियर यह मानता था कि उसके लड़के को इंजीनियर बनना चाहिए । लेकिन,कोई किसान यह नहीं मानता था कि उसके लड़के को किसान बनना चाहिए । जब से प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने इस काम को अपने हाथों में लिया है और एक के बाद एक इनपुट किसानों के लिए बढ़ाने की कोशिश की है, तो इससे निश्चित रूप से किसानों का सम्मान भी बढ़ा है और किसान खेती की ओर आकर्षित हों, यह स्थिति भी आगे बढ़ी है । मुझे लगता है कि पढ़े-लिखे लोग भी अब खेती के क्षेत्र में आगे आ रहे हैं,टेक्नोलॉजी का उपयोग कर रहे हैं और आगे बढ़ने की निरंतर कोशिश कर रहे हैं । निश्चित रूप से इसका श्रेय प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी जी को दिया जाना चाहिए । इसके लिए मैं उनको बहुत-बहुत धन्यवाद देना चाहता हूँ ।

         सामान्य तौर पर हम कहते हैं कि किसानों की आमदनी दोगुनी होनी चाहिए । कई मेम्बर्स ने कहा कि यह दोगुनी कैसे हो जाएगी और इसके लिए क्या करना होगा, अभी तक तो कुछ हुआ ही नहीं । मैं समझता हूँ कि उनकी बात में वजन हो सकता है, लेकिन मैं आपसे अनुरोध करना चाहता हूँ कि किसानों की आमदनी को पाँच वर्षों में दोगुना करना, इस व्यापक फलक के लक्ष्य को लेना, इसे घोषित करना और उसका रोडमैप बनाकर उस पर काम करने का परिणाम एक दिन में तो नहीं आएगा । मान लीजिए कि मशीन से उत्पादन करने के लिए एक कारखाना लगाया जाता है, 24 घंटे में उत्पादन करने की उसकी सीमा हो सकती है । लेकिन खेत में उत्पादन बढ़ाना, फसलों का विविधीकरण करना,डायवर्सिफिकेशन करना आदि कामों में समय लगता है,लेकिन इस दृष्टि से एक के बाद कार्यक्रम हाथ में लिये गये हैं । जैसे सॉइल हेल्थ कार्ड का विषय है । सामान्य तौर पर यह नया विषय नहीं है । सॉइल हेल्थ कार्ड की टेक्नोलॉजी बहुत पुरानी है । लेकिन,आज नरेन्द्र मोदी जी की दृढ़ इच्छा शक्ति के कारण, चाहे वह समालोचना की दृष्टि से हो या आलोचना की दृष्टि से हो, सॉइल हेल्थ कार्ड की बात देश के हर किसान की ज़ुबान पर है ।

         सॉइल हेल्थ कार्ड के लिए जो अभियान चलाये गये, उनमें पहले चरण में 10 करोड़ 73 लाख लोगों को कार्ड वितरित किये गये और दूसरे चरण में 9 करोड़ 82 लाख कार्ड वितरण किये जाने का क्रम चल रहा है । सॉइल हेल्थ कार्ड एक ऐसी चीज है, जिस पर हम लोग और बारीकी से काम करें, क्योंकि इसका जो अंतिम लक्ष्य है, वह केवल सरकार के सॉइल हेल्थ कार्ड देने से ही पूरा नहीं होगा । किसानों को ही लगना चाहिए कि उसे उसके खेत के सॉइल की जाँच करानी है ।

         महोदय, अगर मुझको बुखार है,मैं ब्लड टेस्ट कराता हूँ, अगर उसमें मलेरिया होने की बात आती है, तो मैं कुनैन की गोली से ठीक हो जाऊँगा । अगर मैं बिना ब्लड-टेस्ट कराए छ:दिनों तक बुखार की गोलियां खाता रहूंगा तो शायद मेरा बुखार ठीक न हो । इसी दृष्टि से किसान के मन में भी यह ललक पैदा होनी चाहिए, इसीलिए प्रधान मंत्री जी ने इस काम पर फोकस किया । मुझे प्रसन्नता है कि यह काम नीचे तक चल रहा है । इसके लिए दस हज़ार प्रयोगशालाएं बनाई गई है, चलित प्रयोगशालाएं बनाई गई हैं । हम लोग लगातार केवीके के माध्यम से और आत्मा परियोजना के माध्यम से इस बात का प्रयत्न कर रहे हैं कि इसका काम बढ़े ।

         अध्यक्ष महोदय,सॉइल हैल्थ कार्ड सिर्फ फसल की उत्पादकता ही नहीं बढ़ाएगा,अगर किसान ने सॉइल हैल्थ कार्ड को गंभीरता से लेना प्रारंभ कर दिया तो रासायनिक खाद भी कम लगेगी,फसल में पानी भी कम लगेगा और उसकी उत्पादकता भी बढ़ेगी । स्वाभाविक रूप से आज जल संकट से हम सब गुज़र रहे हैं । इस पर कई बार चर्चा होती है । कल रवनीत सिंह जी चर्चा कर रहे थे कि पंजाब में ज़मीन भी खराब हो गई और पानी का भी अभाव हो गया । हमें पानी बचाना है । पंजाब जैसा प्रांत अगर संकट में फंसेगा तो निश्चित रूप से हम सब लोगों के लिए कठिनाई की स्थिति होगी । इसलिए अगर पानी बचाना है तो भी सॉइल हैल्थ कार्ड ज़रूरी है, उत्पादकता बढ़ानी है तो भी सॉइल हैल्थ कार्ड ज़रूरी है, उत्पादन बढ़ाना है तो भी सॉइल हैल्थ कार्ड ज़रूरी है और रासायनिक उर्वरकों, पेस्टिसाइड्स का कम और निश्चित मात्रा में उपयोग करना है तो इस दृष्टि से भी सॉइल हैल्थ कार्ड का बहुत उपयोग है । इस दिशा में सरकार बहुत तेज़ी के साथ काम कर रही है ।

         माननीय अध्यक्ष महोदय, पिछले दिनों जल संकट पर काफी बातचीत हुई । मुझे यह कहते हुए प्रसन्नता है कि प्रधान मंत्री जी ने भी इस संकट को बहुत गंभीरता से लिया है । इसके लिए उन्होंने अलग से जल शक्ति मंत्रालय बनाया है । प्रधान मंत्री कृषि सिंचाई योजना के माध्यम से कृषि विभाग काम करता है । प्रधान मंत्री जी ने पिछले दिनों ‘मन की बात’ में सारे देश को आवाहृन  किया । इसका एक व्यापक कार्यक्रम बन रहा है । पूरे देश में जल संरक्षण की दृष्टि से एक अभियान चलाया जा रहा है और मनरेगा की राशि का भी अधिकतम उपयोग हम जल संरक्षण के लिए आने वाले कल में करने वाले हैं, जिससे हम इस संकट से जूझ सकें ।

         मुझे यह कहते हुए प्रसन्नता है कि ‘प्रति बूंद अधिक फसल’की दृष्टि से,चाहे स्प्रिंक्लर का मामला हो या सूक्ष्म सिंचाई का मामला हो, वर्ष  2018-19 में लगभग 11 लाख 58 हज़ार हैक्टेयर क्षेत्र को कवर करने का काम किया गया है । रासायनिक उर्वरकों की बहुत बात की जाती है । रासायनिक उर्वरक निश्चित रूप से कम होने चाहिए,इसमें कहीं कोई मतभेद होने का सवाल ही नहीं है,लेकिन इसके साथ ही साथ हमको यह भी देखना पड़ेगा कि अभी तक का हमारा जो उत्पादन है,क्या वह रासायनिक उर्वरक के माध्यम से खड़ा हुआ है । इसलिए, हमें शनै:-शनै: यह कोशिश भी करनी चाहिए कि हम जैविक खेती की ओर जाएं या ज़ीरो बजट खेती की ओर जाएं । इस दिशा में भारत सरकार जैविक खेती की दृष्टि से बहुत तेजी के साथ काम कर रही है । हमारे पूर्वोत्तर के राज्यों को इसमें प्राथमिकता के साथ लिया गया है । उन राज्यों में ठीक प्रकार से उत्पादकता बढ़ रही है और वे लोग निर्यात की स्थिति में भी आ गए हैं और वे बड़ी मात्रा में फल और बाकी चीज़ों का निर्यात कर रहे हैं । परंपरागत कृषि विकास योजना के माध्यम से हम लोग इस योजना को आगे बढ़ा रहे हैं ।

         माननीय अध्यक्ष महोदय, एक समय था जब हर किसान के सामने यूरिया का संकट हुआ करता था । यूरिया के लिए लाइनें लगती थीं । मैं जिस क्षेत्र से आता हूं, उस क्षेत्र में तो पुलिस लगाकर ही यूरिया बांटा जा सकता था, नहीं तो किसान को यूरिया की उपलब्धता नहीं होती थी,लेकिन आज नरेन्द्र मोदी जी की सरकार है । नीम कोटेड यूरिया का निर्णय किया गया और नीम कोटेड यूरिया के निर्णय को लागू कर दिया । आज यूरिया की लाइनें पूरी तरह खत्म हो चुकी हैं । हर किसान को पर्याप्त मात्रा में यूरिया मिल रहा है । यूरिया में दलाली समाप्त हो गई है, कालाबाज़ारी समाप्त हो गई है और बिचौलिये समाप्त हो गए ।

         अध्यक्ष महोदय,कोई भी निर्णय करने के लिए दृढ़ इच्छाशक्ति की ज़रूरत होती है । जिस प्रोजेक्ट को आप हाथ में ले रहे हैं, वह प्रोजेक्ट आपकी आत्मा से जुड़ा हुआ होना चाहिए,तब निर्णय हो पाता है । नीम कोटेड यूरिया नई बात नहीं है, यूपीए सरकार के समय में भी यह बात आई थी,लेकिन बिचौलियों ने मनमोहन सिंह जी को इसको लागू नहीं करने दिया । नरेन्द्र मोदी जी का 56 इंच का सीना है, इसलिए इसे लागू करने में उन्होंने सफलता प्राप्त कर ली । माननीय अध्यक्ष महोदय, किसान को सुरक्षा का कवच मिले, यह भी जरूरी है । मुझे यह कहते हुए प्रसन्नता हो रही है कि प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी जी, जब प्रधान मंत्री बने तो उन्होंने प्रधान मंत्री फसल बीमा योजना को पुर्नगठित किया । इसमें यह कोशिश की गई कि किसानों को अधिक से अधिक फायदा मिले और किसान को कम से कम प्रीमियम जमा करना पड़े । फसल बीमा योजना पहले भी थी और पहले भी इसमें कमोबेश इंश्योरेंस कंपनियां भाग लेती थीं । लेकिन इसमें अंतर था, क्योंकि आज प्रधान मंत्री फसल बीमा योजना पर फोकस है । मैं और मेरे प्रधान मंत्री इस फसल बीमा योजना को पूर्ण योजना नहीं मानते हैं । कल कई सांसदों ने प्रधान मंत्री फसल बीमा योजना की पद्धति पर सवाल उठाए, उसके लाभ और हानि पर सवाल उठाए । निश्चित रूप से उनके सुझाव मूल्यवान हैं और मैं आपके माध्यम से सभी सदस्यों को यह कहना चाहता हूं कि प्रधान मंत्री फसल बीमा योजना की दृष्टि से यदि कोई उपयोगी सुझाव है तो वे मुझे 4-5 दिन में दे दें । हम लोग इस दिशा में विचार कर रहे हैं कि इस फसल बीमा योजना को कैसे और सरल बनाया जाए, कैसे अधिक उपयोगी बनाया जाए, कैसे इसे किसानों के लिए और लाभप्रद बनाया जाए?

माननीय अध्यक्ष महोदय, अगर हम आंकड़ों की दृष्टि से देखें तो फसल बीमा योजना के अंतर्गत पिछले 5 वर्षों में 8 लाख 954 करोड़ किसानों को 74,894 करोड़ रुपये की सहायता दी गई है । हम अगर वर्ष 2014 से पहले पांच वर्षों का फसल बीमा का आंकड़ा देखें तो 6 लाख 31 करोड़ किसानों को फसल बीमा का लाभ मिला था और वह राशि सिर्फ 26 हजार करोड़ थी । यह 26 हजार करोड़ से 74 हजार करोड़,इतनी राशि बढ़कर किसानों को प्राप्त हुई है । इसके बावजूद भी मैं यह मानता हूं कि यह‍ किसानों के हित का मामला है, इसलिए इसको परिमार्जित करने के द्वार हमेशा खुले रहने चाहिए । वे द्वार सरकार ने खोल रखे हैं । इस पर आप सबके सुझाव आमंत्रित हैं । उन सुझावों पर सरकार निश्चित रूप से विचार करेगी ।

         माननीय अध्यक्ष महोदय, किसान क्रेडिट कार्ड का ऐतिहासिक फैसला माननीय अटल बिहारी वाजपेयी जी जब प्रधान मंत्री थे और माननीय राजनाथ सिंह जी जब कृषि मंत्री हुआ करते थे, उस दौरान हुआ था । हम सब इस बात को जानते हैं कि गांव का किसान 5 हजार रुपये या 10 हजार रुपये का कर्ज लेने के लिए भी किसी साहूकार के पास जाता है । दो-चार बीघा जमीन का जो किसान है, उसकी जमीन तो ब्याज में ही चली जाती है । वाजपेयी जी के समय राजनाथ सिंह जी के मंत्रित्वकाल में यह निर्णय हुआ कि किसान क्रेडिट कार्ड बनाना चाहिए और तब से वह लगातार चल रहा है । आज भी अगर देखा जाए तो देश में 14.5 करोड़ भू जोत है । इसकी तुलना में अगर देखें तो 6.92 करोड़ लोगों को ही किसान क्रेडिट कार्ड प्राप्त हुआ है । माननीय प्रधान मंत्री जी ने निर्देश दिया है कि के.सी.सी. के लिए कृषि मंत्रालय को एक अभियान चलाना चाहिए और हर किसान के पास किसान क्रेडिट कार्ड हो, हमको यह सुनिश्चित करना है । इस लक्ष्य को लेकर हम लोग निश्चित रूप से काम कर रहे हैं । कल यह बात भी आई थी कि किसानों को कर्ज ही नहीं मिलता है । माननीय अध्यक्ष महोदय,मैं आपके माध्यम से बताना चाहता हूं कि किसान को कर्ज देने का जो लक्ष्य था, वह वर्ष 2015-16 में 8 लाख 50 हजार करोड़ रुपये का था । इसके विरुद्ध 9 लाख 15 हजार 509.92 करोड़ रुपये किसानों को ऋण उपलब्ध हुआ । वर्ष 2016-17 में लक्ष्य 9 लाख करोड़ था,उसके अगेंस्ट 10 लाख 65 हजार 755.67 करोड़ रुपये का ऋण प्राप्त हुआ । वर्ष 2017-18 में हमारा लक्ष्य था कि किसानों को कम से कम 10 लाख करोड़ रुपये का प्रवाह कृषि के क्षेत्र में होना चाहिए । अगर उसे हम उपलब्धि के रूप में देखें तो 11 करोड़ 68 लाख 502.84 करोड़ रुपये किसानों को मिले हैं ।

वर्ष 2018-19 में हमारा जो लक्ष्य था वह 11 लाख करोड़ रुपये का था और 11 लाख 14 हजार 180.51 करोड़ रुपये किसानों को निश्चित रूप से मिल गए हैं । हम सब इस बात को जानते हैं कि हमारा जो किसान है, वह उत्पादन करने में कहीं भी पीछे नहीं है, लेकिन हम सभी व्यावहारिक रूप से इस बात का अनुभव करते हैं कि किसान को उसके उत्पादन का जो पूरा मूल्य मिलना चाहिए, वह पूरा मूल्य नहीं मिल पाता । इसलिए आपको ध्यान होगा कि स्वामीनाथ साहब की एक कमेटी बनी थी । उस कमेटी ने भी अपनी रिपोर्ट दी । अब लम्बे समय तक स्वामीनाथन जी का नाम तो चलता रहता है, लेकिन स्वामीनाथन जी की जो रिपोर्ट थी, उसको लागू करने का क्रम कब प्रारम्भ हुआ?स्वामीनाथ साहब ने कहा था कि फसल की लागत का डेढ़ गुना समर्थन मूल्य होना चाहिए । अगर डेढ़ गुना समर्थन मूल्य हुआ तो वर्ष 2018-19 में प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी सरकार ने ही तो डेढ़ गुना दिया । आज डेढ़ गुना समर्थन मूल्य मिल रहा है, उस पर डेढ़ गुना एमएसपी घोषित करके दाम घोषित किए जा रहे हैं ।

         माननीय अध्यक्ष महोदय, इसी प्रकार से किसान के सामने जो बात आती है कि समर्थन मूल्य पर खरीद नहीं होती, मैं पूछना चाहता हूं कि वर्ष 2014 से पहले कितने राज्यों में खरीद हो रही थी? 2014 से 2019 तक अगर आप देखेंगे तो सर्वाधिक खरीद करने का काम नरेन्द्र मोदी जी की सरकार ने किया है और पहले गेहूं और चावल,दो ही फसलों की खरीद होती थी,किन्तु इस बार नरेन्द्र मोदी जी की सरकार ने दलहन और तिलहन की खरीद करने की पूरी कोशिश की है ।

         माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं अभी भी समझता हूं कि एमएसपी पर पूरी खरीद नहीं की जा सकती । एमएसपी का अपना एक सिद्धांत है । हम सब इस बात को जानते हैं कि जब यह सिद्धांत आया होगा तो निश्चित रूप से यह बात ध्यान में रही होगी कि जब फसल आती है तो फसल का अम्बार गांवों में लग जाता है । उस समय जब फसल की उपलब्धता ज्यादा है और खपत कम है तो दाम गिर जाते हैं, इसलिए सरकार को बीच में इंटरवीन करना चाहिए और सरकार समर्थन मूल्य घोषित करे,सरकार समर्थन मूल्य पर खरीदे,जिससे कि देश का अनाज सरकार के पास आ जाए और वह सार्वजनिक वितरण प्रणाली के भी काम आए और जब क्षेत्र में अनाज कम बचेगा तो निश्चित रूप से उसके दाम बढ़ जाएंगे । इस सिद्धांत के आधार पर एमएसपी किया गया था, लेकिन इसके बावजूद भी कई बार छोटे किसानों को परेशान होना पड़ता है । इसके लिए मार्केटिंग की व्यवस्था को और मजबूत करने की आवश्यकता है,इसलिए भारत सरकार ने इनाम परियोजना की शुरुआत की । मार्केटिंग का विषय भी स्वामीनाथ साहब ने ही कहा था और मुझे प्रसन्नता है कि मोदी सरकार बनने के बाद स्वामीनाथन साहब ने मोदी सरकार द्वारा कृषि के क्षेत्र में उनकी रिपोर्ट को लागू करने का जो प्रतिशत रहा है, उसकी प्रशंसा सार्वजनिक रूप से अखबार के माध्यम से की है ।

         माननीय अध्यक्ष महोदय, इनाम परियोजना को हम और मजबूत करना चाहते हैं । अभी तक 585 मंडियां उसमें जुड़ी हुई हैं और पूरे देश भर की मंडियां जुड़ जाएं और मामला ऑनलाइन हो और ऑनलाइन खरीद-फरोख्त अगर होगी तो निश्चित रूप से किसान को उसका लाभ अच्छे से मिल सकेगा । प्रधान मंत्री अन्नदाता आय संरक्षण स्कीम  भाव अंतर की तर्ज पर है और इस स्कीम का उपयोग हम किसानों को लाभ देने के लिए निश्चित रूप से करते हैं ।

         माननीय अध्यक्ष महोदय, पिछले दिनों जब प्रधान मंत्री जी ने पीएम किसान सम्मान योजना की घोषणा की तो सारे देश ने उसका स्वागत किया,क्योंकि अगर 6 हजार रुपये का स्वागत नहीं होता तो 72 हजार रुपये वाले जीतते । 6000 का स्वागत हुआ तो 6000 वाला ही जीतकर आया है । इसलिए सम्पूर्ण देश ने तो निश्चित रूप से इस योजना का स्वागत किया है । लेकिन उसके पीछे जो मंशा है,मैं प्रधान मंत्री जी की उस मंशा को सदन के सामने प्रकट करना चाहता हूं ।

         माननीय अध्यक्ष महोदय, 14­.5 करोड़ किसान हैं और इनमें से 12.5 करोड़ किसान ऐसे हैं जिनके पास भूमि का रकबा दो एकड़ अथवा दस बीघा से कम है । अब आप सोचिए कि जिसके पास दस बीघा धरती है, उस किसान की क्या हैसियत होगी?वह उत्पादन भी करेगा तो कितना कर लेगा? अगर उसका भरा-पूरा परिवार है और उसका पूरा परिवार खेती में काम करता है,अगर काम की मजदूरी को वह 365 दिन में बांटता है तो उसे क्या मिलेगा?पहली बार, ऐसा किसान जो अपने उत्पादन को मंडी तक भी नहीं ले जा पाता था,ऐसा किसान जिसको समर्थन मूल्य का भी फायदा नहीं मिलता था, ऐसा किसान जिनको भावांतर योजना का भी फायदा नहीं मिलता है,ऐसे 12.5 करोड़ किसानों की तरफ नरेन्द्र मोदी जी का ध्यान गया और तब उन्होंने पीएम किसान सम्मान योजना का आरम्भ किया । मुझे कहते हुए प्रसन्नता हो रही है कि पीएम किसान सम्मान योजना कोई नारा नहीं है । उत्तर प्रदेश और बिहार के लोग बैठे हुए हैं,अन्य प्रांतों के लोग भी बैठे हुए हैं । जिन प्रांतों ने आगे बढ़कर अपने किसानों की सूची केन्द्र सरकार को सब्मिट कर दी,बिना किसी दलाल और बिचौलिए के किसान के खाते में करोड़ों रुपये जमा कराने का काम नरेन्द्र मोदी जी की सरकार ने किया है । …(व्यवधान)

श्री गणेश सिंह (सतना): मध्यप्रदेश में यहस्कीम लागू नहींहुई है । …(व्यवधान)

श्री दुष्यंत सिंह (झालावाड़-बारां): राजस्थान में भी लागू नहीं हो रही है । …(व्यवधान)

श्री नरेन्द्र सिंह तोमर : माननीय अध्यक्ष महोदय, गणेश सिंह जी और दुष्यंत सिंह जी ने कहा है कि उनके राज्य में लागू नहीं हो रहा है । मैं आपके माध्यम से उन दोनों राज्यों और देश की सभी राज्य सरकारों से अनुरोध करना चाहुंगा कि भारत सरकार ने पर्याप्त प्रावधान कर रखे हैं, जल्दी से जल्दी किसानों की सूची वे हमें सब्मिट करें, जिससे हम उन किसानों के खाते में भी 6000 रुपये वार्षिक भेजने का काम कर सकें ।

         माननीय अध्यक्ष महोदय, इस रकम को कम कहा गया । किसी ने इसे ऊंट के मुंह में जीरा कहा । मैं दो चीजें ध्यान दिलाना चाहता हूं । हम मान लेते हैं कि यह 6000 रुपये ऊंट के मुंह में जीरा है तो इतिहास में इससे पहले इन गरीब किसानों के मुंह में जीरा डालने का प्रयास क्या किसी सरकार ने किया? अगर यह अपर्याप्त है तो मैं यह भी पूछना चाहता हूं कि आप से पहले क्या इस देश में कोई ऐसी योजना थी, जिस योजना के माध्यम से किसान को केन्द्र सरकार के बजट से निकालकर 87 हजार करोड़ रुपये एक साल में उसकी जेब में डालने का काम किया गया? यह पहली बार हुआ है और इसका सर्वत्र राजनीति से ऊपर उठकर स्वागत होना चाहिए ।

         दूसरा, किसान पेंशन योजना का भी ऐतिहासिक निर्णय हुआ । हम सब जानते हैं कि जो लोग किसानी करते हैं या बटाई से कराते हैं या बड़े किसान हैं और ठेके पर खेती कराते हैं, उनको तो वह दर्द महसूस नहीं होता है, लेकिन जो खेत में हल चलाता है और मेहनत करके किसानी करता है,उसकी क्षमता 60 साल के बाद कम हो जाती हैं । ऐसे किसानों को भी सम्मान मिल सके,सामाजिक सुरक्षा मिल सके, इस दिशा में निश्चित रूप से प्रधान मंत्री पेंशन योजना का बहुत बड़ा योगदान है । हम सब इस बात को भी जानते हैं कि वेयरहाउस और कोल्ड स्टोरेज का काफी काम पिछले दिनों में हुआ है और धीरे-धीरे यह और आगे बढ़ रहा है । लेकिन यह जो बड़े वेयरहाउस हैं, इनमें छोटे किसान का उत्पादन नहीं आ पाता है । इसलिए हम एक नई ग्रामीण भंडारण योजना बना रहे हैं । जिसमें गांव के क्षेत्र में ही गोदाम बनाया जाएगा, जिसमें किसान लोग अपनी फसल रख सकते हैं । जैसे ही मूल्य ठीक होगा, वे बेचने का काम कर सकते हैं ।

माननीय अध्यक्ष महोदय, वर्षा आधारित क्षेत्र पर काम करना बहुत आवश्यक है । सरकार इसके लिए बहुत गम्भीर है । पानी का संकट भी है, लेकिन वर्षा आधारित क्षेत्र में भी किसान अच्छा उत्पादन कर सके । अभी भी वर्षा आधारित क्षेत्र हमारे यहां 56 प्रतिशत है । लेकिन वहां के किसानों का उत्पादन में 44 प्रतिशत योगदान है । यह और बढ़े, इसके लिए सरकार पूरी तरह से गंभीर है । हमने एग्रीकल्चर मेकेनाइजेशन का भी काम किया है ।

माननीय अध्यक्ष महोदय, यहां पर हरियाणा,पंजाब, उत्तर प्रदेश और दिल्ली के सभी जन प्रतिनिधिगण बैठे हुए हैं । पराली जलाने का काम वर्षों से हो रहा है । जब पराली जलाई जाती थी,तो दिल्ली में धुंध छा जाती थी और सात-आठ दिनों तक वातावरण खराब रहता था । हमने इस योजना को हाथ में लिया है और 50 प्रतिशत किसानों को इक्विपटमेंट चेक कराके उनको देने का काम किया है । आपको इस बार पराली के मामले में निश्चित रूप से अंदर दिखाई दे रहा होगा ।

         माननीय अध्यक्ष महोदय, जब हमको न्यू इंडिया की ओर बढ़ना है और पांच ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी का हिन्दुस्तान बनाना है, तो उसमें निश्चित रूप से किसान का योगदान बहुत आवश्यक है । इसलिए, इसी लक्ष्य को लेकर हम लोग बहुत तेजी के साथ इस देश में काम कर रहे हैं । कृषि के क्षेत्रों में इनोवेशन हो,इन्वेस्टमेंट हो, इन्सिट्यूशनलाइजेशन हो, इन्फ्रास्ट्रक्चर हो, इन्ट्रीगेटेड एग्रीकल्चर और इन्सेंटिव फॉर एग्रीकल्चर, इन सब सूत्रों के साथ हम कृषि के क्षेत्र में आगे बढ़ रहे हैं । हम खेत को भी स्मार्ट बनाएंगे, हम किसान को भी स्मार्ट बनाएंगे, हम हिन्दुस्तान को भी स्मार्ट बनाएंगे । निश्चित रूप से आने वाले कल में नए भारत के योगदान में भारत के किसानों का महत्वपूर्ण योगदान होगा, मैं ऐसा विश्वासपूर्वक कह सकता हूं ।

माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपको बहुत-बहुत धन्यवाद देता हूं और इसी के साथ मैं अनुदान मांगों को पारित करने का आग्रह करता हूं ।…(व्यवधान)

 

माननीय अध्यक्ष : श्रीमुलायम सिंहयादव जी ।

…( व्यवधान)

श्री मुलायम सिंह यादव (मैनपुरी) : अध्यक्षमहोदय, आजभी 65 फीसदीकिसान गरीबीकी रेखा सेनीचे हैं । आपइसको तो भूलगए हैं और जोभी बच गए हैं,वे किसान भीकर्ज़दार हैं । आप आज कह रहेहैं कि किसानमालदार हो गयाहै । पूरे हाउसमें पता नहींक्या है, जिसेहम लोग सुनरहे  हैं । आजभी किसान सबसेज्यादा गरीबहै और वह सबसेज्यादा मेहनतकरता है । अगरउसकी मेहनत कोजोड़ दें, उसकी पत्नीकी मेहनत कोजोड़ दें, उसके लड़के औरबच्चे सब कामकरते हैं, अगर आप उनकीमेहनत को जोड़ेंगे,तो किसान जितनाघाटे में है,उतना और कोईघाटे में नहींहै । सारे धंधेमुनाफे के हैं,लेकिन किसान का काम घाटे का है । इसलिए, मंत्री जी के द्वारा कम से कम सदन के अंदर सच्चाई आनी चाहिए । आप बता दीजिए, उसकी पत्नी,लड़के और बच्चे सब काम करते हैं । उनकी मेहनत उसमें जोड़ दीजिए और बता दीजिए कि किसान को कितना लाभ हुआ है ।…(व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष : माननीयसदस्यगण,कल रात कोभी 12 बजेतक दोनों मंत्रालयोंके विषयों परबड़ी डिटेल मेंचर्चा हुई थीऔर आज भी माननीयमंत्री जी नेबड़े डिटेल मेंजवाब दिया है । अगर कोई स्पेशलस्पष्टीकरण मांगनाहो, तो आपमांग लीजिए,लेकिन इस चर्चाको दोबारा मतशुरू कीजिए ।

…( व्यवधान)

श्री अधीर रंजन चौधरी : तोमरसाहब ने तोसुमेरू से लेकरकुमेरू घूम लियाहै, नार्थपोल से साउथपोल घूम लियाहै, लेकिनइनको यह नहींदिखाई दिया हैकि हिन्दुस्तानमें रोजाना 36किसान खुदकुशीकर रहे हैं ।मैं एक और बातकहना चाहता हूंकि मंत्री जीने कृषि सिंचाईयोजना के बारेमें कहा था ।आप बजट मेंदेखिए कि कृषिसिंचाई योजनामें 2015-16, 2016-17, 2017-18 और 2018-19 मेंशार्टफॉल होतेजा रहे हैं ।वर्ष 2015-16 में14 प्रतिशतशार्टफॉल औरवर्ष 2018-19 में26 प्रतिशतशार्टफॉल आपकेहिसाब के मुताबिकहुआ है । आपबागवानी की बातकरते थे, बागवानी मेंभी वर्ष 2012-13से 2017-18 तकशार्टफॉल दिखाईदे रहे हैं ।आखिरी शार्टफॉल12.6 प्रतिशतहै । आपने एग्रीकल्चररिसर्च की बातकही है । एग्रीकल्चररिसर्च में आपकोयह कहना पड़ेगाकि जीडीपी केमुकाबले…(व्यवधान)

महोदय, मैंस्पष्टीकरण मांगरहा हूं । महोदय,एक मिनट औरदे दीजिए ।…(व्यवधान) यह क्या है,एक मिनट औरदे दीजिए ।…(व्यवधान) तोमर जी, नार्थ-ईस्टर्नस्टेट में एग्रीकल्चरमें जो क्रेडिटदेते हैं, it is less than one per cent in the entire North-Eastern States. यहडिस्क्रिमिनेशनकैसे होता है?किरेन रिजीजूसाहब आपके पीछेबैठे हैं । Less than one per cent of agricultural credit is being distributed to the entire North-Eastern Region. ईस्टर्नरीज़न में जबयूपीए की सरकारथी, तब दूसराग्रीन रेव्युलूशनयानी दूसरी क्रांतिकरने की बातकही गई थी,क्योंकि पंजाब,हरियाणा…(व्यवधान) हरित क्रांतिके लिए ईस्टर्नइंडिया को चुनागया था ।…(व्यवधान)मैं उसके बारेमें आपसे जानकारीलेना चाहता                हूं ।…(व्यवधान)

 

श्री वीरेन्द्र सिंह (बलिया): अध्यक्षजी, जिस सवालको अधीर रंजनजी, …(व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष : आपउनका जवाब मतदें । जवाब मंत्रीजी देंगे …( व्यवधान)

श्री वीरेन्द्र सिंह: अध्यक्षजी,  मैंआपसे ही कहरहा हॅूं । आपकेमाध्यम से हीमैं कह रहाहॅूं । कृषिऔर किसान क्षेत्रकी समस्या एकदिन में नहींखड़ी हुई हैऔर न ही एकही दिन मेंसमाधान होनेवाला है । मैंकिसान हॅूं इसलिएइस बात को जानताहॅूं । लेकिनमैं चुनौती केसाथ कहता हॅूं,चैलेंज करके कहता हॅूंकि हमारी सरकार,हम उस दलके सांसद हैं,इस कारण सेमैं यह नहींकह रहा  हॅूं ।

मुलायमसिंह जी, आप समाजवादीआंदोलन के कार्यकर्ताहैं । आप बताइएकि यूपीए कीसरकार कभी किसानोंके हित मेंफैसला लिया है? …(व्यवधान) अध्यक्ष जी,बजट देख लीजिए कभी भी इस सरकार की तुलना में कोई काम किया हो तो मैं कह सकता हॅूं । …(व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष : माननीयसदस्य, आपसुबह से ऐसेही कर रहे हैं,मैं कई बारआपको आग्रह करचुका हॅूं ।जब आपके नेताको मैंने स्पष्टीकरणके लिए कह दियातो मैं सदनमें माननीय नेताओंसे कहूंगा किअपने सदस्योंसे कहें किडिसीप्लेन बनाकर रखें ।

         बी. महताबजी बोलिए ।

…( व्यवधान)

 

SHRI BHARTRUHARI MAHTAB (CUTTACK): Hon. Speaker, Sir, yesterday the discussion continued till 11:59 in the night. It was a long discussion. There is one issue on which I need clarification from the Government and that is relating to farming being done by women. This has not been discussed in such a long discussion that we have had here.

          Oxfam had published a report a decade ago about women doing 80 per cent of India’s farm work though only 13 per cent of the land is owned by women. Even today the pronoun used for a farmer in our country is ‘he’. It is not gender neutral. It is the male who dominates farm sector policy-making mindset. That is why I put this question to the Union Government. Women account for 33 per cent of farm labour and 48 per cent are self-employed farmers. In Uttar Pradesh, women own under 18 per cent of the agricultural land. In Kerala, which is supposed to be one of the most literate States in the country, the percentage of women owning agricultural land is not more than 14 per cent, as per NSSO survey. What steps is the Government taking – because land reform and land title is also a part of the Union Government’s agenda of Rural Development Ministry – to move away from the entrenched patriarchy which has resulted in women being discriminated against? Is there any move in this regard?

कुंवर दानिश अली (अमरोहा): अध्यक्षमहोदय, मैंएक छोटा सास्पष्टीकरण आपकेमाध्यम से सरकारसे चाह रहाहॅूं । उत्तरप्रदेश के अंदरकिसान जो किसानक्रेडिट कार्डके माध्यम सेलोन लेते हैं, क्यामंत्री जी यहडायरेक्ट करेंगेकि जो किसानक्रेडिट कार्डके माध्यम सेलोन लिया जाताहै, उस सारीजमीन को जोमॉर्टगेज करके प्रधान मंत्रीफसल बीमा योजनाके तहत जो उनसेप्रीमियम वसूलकिया जाता है, उसकोवॉलेंट्रीलीबनाएंगे?दूसरा, कि यह जो प्रीमियमतो किसान सेइंडिविजूअलीवसूला जाता है,प्रधान मंत्रीफसल बीमा योजनाके तहत, लेकिनउनको कंपनसेशनइंडिविजूअलीनहीं दिया जाताहै । अभी भीकहा जाता हैकि यूनिट कोकंपनसेशन दियाजाएगा, ब्लॉकको, तहसीलको, या कुछगांव को मिलाकर दिया जाएगा । क्या ऐसी व्यवस्थाहोनी चाहिए किजब किसान इंडिविजूअलप्रीमियम देताहै तो उसकोमुआवजा भी इंडिविजुअलही मिलना चाहिए ।

माननीय अध्यक्ष : आपइतना समझानेकी कोशिश मतकरो । मंत्रीजी बहुत अनुभवीहैं । राज्यमें भी कृषि, ग्रामीणविकास के मंत्रीरहे हैं । आपसिर्फ स्प्ष्टीकरणपूछिए, जवाबमिल जाएगा ।

…( व्यवधान)

कुंवर दानिश अली : अध्यक्षजी, इसीलिएमैं चाहूंगाकि जवाब मिलजाए ।

…( व्यवधान)

SHRI KODIKUNNIL SURESH (MAVELIKKARA): Sir, yesterday also I was here till 12 o’clock. Please allow me.

माननीय अध्यक्ष : आपअपने नेता सेकहें कि आपकोचांस दे दें,आपको दिलादूंगा । एक पार्टीसे एक ही माननीयसदस्य बोलेगा ।

…( व्यवधान)

SHRI JAYADEV GALLA (GUNTUR): Sir, regarding PM-KISAN Scheme, I just want a clarification. Is the Scheme meant for farmers who are in distress? Is it meant for making agriculture viable? Is PM-KISAN Scheme a direct cash transfer scheme to improve rural consumption? In other words, is it for improving rural production or is it for improving rural consumption? That is what I would like to know.

माननीय अध्यक्ष : श्री नामा नागेश्वर राव । मैंने सदन में पहली बार परम्परा शुरू की है, इसलिए माननीय सदस्यगण एक लाइन का स्पष्टीकरण पूछिए ।

 

श्री नामा नागेश्वर राव (खम्माम): सर, मंत्रीसाहब ने काफीअच्छी तरह सेडिटेल्स के साथसब कुछ कवरकिया है । हमलोगों की क्लेरिफिकेशनयही है कि पीएमआवास योजना सेगरीब को घरमिले, यहबहुत ही अच्छीबात है । उसकेलिए वर्ष 2022तक सब गरीबको घर मिलनाहै । इसमें हमारीरिक्वेस्ट इतनीहै, कल भीहाउस में बातहुई थी कि एकलाख बीस हजाररुपये घर केलिए मिलते हैं । अभी यह एकरूम बनता है,उस एक रूममें माँ-बापऔर बाल-बच्चोंके साथ रहनेमें दिक्कत है । उसको डबल रूमदे दें । अभीहमारे तेलंगानामें डबल रूमका दे दियाहै, उसमेंपाँच लाख रुपयेका खर्च है ।

          दूसरा, किसानको जो छ: हजार रुपयेदे रहे हैं,उसको तीन दफाकी जगह दो दफामें दे  दें । इसके लिए हमलोग तेलंगानामें प्रति एकड़प्रति किसानके लिए 10,000 रुपये दे रहे          हैं ।…(व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष : श्री हसनैन मसूदी ।

 

श्री हसनैन मसूदी (अनन्तनाग): स्पीकर साहब,छोटा सा स्पष्टीकरणहै । जो सम्मानयोजना है, क्या यह लैंडके साथ लिंक्डहै? अगर लैंडके साथ लिंक्डहै तो 55 परसेंटएग्रीकल्चरिस्ट्सलैंडलैस हैंतो वे इससेबाहर हो जातेहैं । इसका मतलबहै कि 14 करोड़में से सातकरोड़ से ज़्यादाबाहर जाते हैं । अभी तक जोअनुभव है, वह यही है किलैंड के साथलिंक्ड है ।

         दूसरा यह हैकि हमारे यहांरूरल डेवलपमेंटकी सबसे बड़ीसमस्या है ।अंडर यूटिलाइजेशन,अनस्पैंट मनीको आप कैसेकॉम्बैट करेंगे । How will you address that problem which is being witnessed around the country? कम पैसाखर्च किया जारहा है । क्यास्कीम को इम्प्लिमेंटकरने के लिएपैसा दिया जारहा हैं?

माननीय अध्यक्ष : मंत्री जी, क्या आप जवाब देंगे?

 

श्री नरेन्द्र सिंह तोमर: माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय मुलायम सिंह जी सदन के बहुत ही वरिष्ठ सदस्य हैं । उन्होंने शायद ऐसा व्यक्त किया कि मैंने ऐसा कहा है कि पूरे किसान खुशहाल हो गए हैं । मैंने बिल्कुल भी ऐसा नहीं कहा है । मैं जब अपनी बात रख रहा था, तब मैंने यह बात कही थी कि जो छोटा किसान है, अगर उसके पाँच लोगों के परिवार का आकलन करें, वे पाँचों-पाँचों उस खेत में काम करते हैं । अगर उनकी मजदूरी को 365 दिन में बाँट दिया जाए तो उनकी मजदूरी थोड़ी सी होती है । लेकिन इसको शनै:शनै: बढ़ाने का प्रयास भारत सरकार कर रही है । जो प्रयत्न हो रहे हैं और ये प्रयत्न चौतरफा होने चाहिए । इसलिए चौतरफा प्रयत्न किए जा रहे हैं । सिंचाई की दृष्टि से भी प्रयत्न किया जा रहा है, योजनाओं की दृष्टि से भी प्रयत्न किया जा रहा है, सब्सिडी की दृष्टि से भी प्रयत्न किया जा रहा है, पेंशन की दृष्टि से भी प्रयत्न किया जा रहा है, पीएम किसान योजना के अंतर्गत भी प्रयत्न किया जा रहा है,एमएसपी बढ़ाने की दृष्टि से भी प्रयत्न किया जा रहा है । ऐसे चौतरफा प्रयत्न चल रहे हैं । फसलों का विविधीकरण हो और फसलों का डायवर्सिफिकेशन हो । एक व्यक्ति दस बीघा का किसान है, अगर वह गेहूँ के बजाय फलों पर चला जाए तो शायद उसकी उत्पादकता भी बढ़ जाएगी, उसकी आमदनी भी बढ़ जाएगी । ये प्रयत्न शनै: शनै: चलते हैं । मैंने यह नहीं कहा कि सारे किसान खुशहाल हो गए हैं । मैंने कहा कि किसान के चेहरे पर लाली आए और  देश में खुशहाली आए, इसके लिए भारत सरकार की प्रतिबद्धता है । मैं आपको यह बताना चाहता हूँ ।

         दूसरा, यह छ: हजार रुपया जब से दिया है,तब से निश्चित रूप से आप इतना तो मान ही सकते हैं कि किसान की आमदनी में वृद्धि हुई है । छ: हजार रुपये की वृद्धि तो हुई है । इसे तो हम जोड़ ही सकते हैं ।

दूसरा, जो कहा गया कि पीएम किसान योजना,यह भूमि जोत वाला किसान है,उसी से संबंधित है तो हाँ, यह उसी से संबंधित है और साढ़े 14 करोड़ किसान वे हैं, जिनके नाम पर ऑलरेडी जोत हैं । दूसरी आवास वाली बात भाई साहब ने कही । निश्चित रूप से किसी को बहुत अच्छा आवास मिले,इसमें किसी को क्या आपत्ति हो सकती है, लेकिन जब एक कमरे के आवास,रसोई, शौचालय की योजना शुरू हुई, तब ही लोगों के दिमाग में यह बात आई कि दो कमरे का मकान होना चाहिए । नहीं तो पहले एक कमरा ही नहीं था, तो लोगों के लिए दो और ढाई कमरे के मकान के बारे में सोचना ही मुश्किल था । अभी तो यह योजना उसी प्रकार की है, लेकिन आगे कभी अवसर आएगा,तो इसे देखेंगे ।

         दूसरा, खेती की जमीन का अधिकतम उपयोग हो, वह मैंने पहले ही कहा कि बहुत सारा क्षेत्र ऐसा है,जो वर्षा आधारित है और बंजर क्षेत्र है, उसका खेती की दृष्टि से उपयोग नहीं हो पाता । इसलिए वर्षा आधारित क्षेत्र में भी आईसीएआर ने जो काम किया है, उसका बड़ा उपयोग हो रहा   है । उनके क्षेत्रों में खेती बढ़ रही है और किसान खेती की तरफ उत्सुक हो रहा है ।

         दूसरा, जब फाइनेंस मिनिस्टर उस दिन अपनी बात रख रहे थे, तो उन्होंने कहा था कि अन्नदाता को ऊर्जादाता बनाना है । अन्नदाता को ऊर्जादाता बनाना,यह कोई नारा नहीं है, वह अन्नदाता किसान,जिसके पास ऐसी खेती है, जिसमें कोई भी फसल उगायी नहीं जा सकती,तो ऐसा किसान अपनी खेती में सोलर एनर्जी का उत्पादन कर सकता है । वह स्वयं करेगा,तो उससे भारत सरकार बिजली खरीदेगी,अगर किसी डेवलपर के साथ मिलकर करेगा,तो उससे भारत सरकार खरीदेगी । इस दृष्टि से किसान ऊर्जादाता के रूप में भी इस देश का बनेगा,यह हमारी भावी योजना है ।

माननीय अध्यक्ष : श्रीएन.के. प्रेमचन्द्रनजी, क्याआप ग्रामीण विकासमंत्रालय परप्रस्तुत अपनेकटौती प्रस्तावको वापस लेनाचाहते हैं?

SHRI N. K. PREMACHANDRAN (KOLLAM): Hon. Speaker, Sir, I have already moved 16 Cut Motions to Demands No. 84 and 85 and 17 Cut Motions to Demands No. 1 and 2. I raised the issue of discrimination under Pradhan Mantri Gram Sadak Yojana as far as the States of Southern India are concerned. The hon. Minister assured me yesterday that a meeting of the concerned Members of Parliament of Kerala will be convened in his chamber next Wednesday. So, I am not moving Cut Motions to Demands No. 84 and 85. I would like to have the attention and the assurance of the hon. Minister and let it be on record also that the hon. Minister has already agreed. It would be a good thing if the hon. Minister can make the assurance in this House also.

          I withdraw the Cut Motions to Demands No. 84 and 85.

माननीय अध्यक्ष : क्यासभा की यह इच्छाहै कि श्रीएन.के. प्रेमचन्द्रनद्वारा प्रस्तुतकिए गए कटौतीप्रस्ताव संख्या3 से 19 को वापस लियाजाए?

कटौती प्रस्ताव सभा की अनुमति से वापस लिए गए ।

माननीय अध्यक्ष : अबमैं डॉ. एम.के.विष्णुप्रसाद द्वाराप्रस्तुत कटौतीप्रस्ताव संख्या26से 29 को सभाके समक्ष मतदानके लिए रखताहूँ ।

कटौतीप्रस्ताव मतदानके लिए रखेगए तथा अस्वीकृतहुए ।

माननीय अध्यक्ष : कृषिऔर किसान कल्याणमंत्रालय सेसंबंधित अनुदानोंकी मांगों परश्री एन.के. प्रेमचन्द्रनतथा डॉ. एम.के.विष्णुप्रसाद द्वाराअनेक कटौती प्रस्तावप्रस्तुत किएगए हैं । मैंअब सभी कटौतीप्रस्ताव सभाके मतदान हेतुरखूँगा ।

कटौतीप्रस्ताव मतदानके लिए रखेगए तथा अस्वीकृतहुए ।

माननीय अध्यक्ष: अब मैं ग्रामीण विकास मंत्रालय से संबंधित अनुदानों की मांगें सभा के मतदान के लिए रखता हूं ।

         प्रश्न यहहै:

“कि अनुदानों की मांगों की सूची के स्तम्भ 2 में ग्रामीण विकास मंत्रालय से संबंधित मांग संख्या 84 और 85 के सामने दर्शाये गए मांग शीर्ष के संबंध में 31 मार्च, 2020 को समाप्त होने वाले वर्ष में संदाय के दौरान होने वाले खर्चों की अदायगी करने हेतु अनुदानों की मांगों की सूची के स्तम्भ 4 में दर्शायी गयी राजस्व लेखा तथा पूंजी लेखा संबंधी राशियों से अनधिक संबंधित राशियां भारत की संचित निधि में से राष्ट्रपति को दी जाएं ।” Demands for Grants (2019-20) in respect of the Ministry of Rural Development voted by Lok Sabha:
No. of Demands Name of Demand Amount of Demands for Grants on Account voted by the House on February 1, 2019 Amount of Demands for Grants voted by  the House 1 2 3 4     Revenue(Rs.) Capital(Rs.) Revenue(Rs.) Capital(Rs.) 84 Department of Rural Development 77256,78,00,000 33,33,00,000 114513,56,00,000 66,67,00,000 85 Department of Land Resources 742,41,00,000
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1484,83,00,000
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प्रस्ताव स्वीकृत हुआ ।
माननीय अध्यक्ष: ग्रामीण विकास मंत्रालय से संबंधित अनुदानों की मांगें पारित हुईं ।
 
माननीय अध्यक्ष: अब मैं कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय से संबंधित अनुदानों की मांगें सभा के मतदान के लिए रखता हूं ।
         प्रश्न यहहै:
“कि अनुदानों की मांगों की सूची के स्तम्भ 2 में कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय से संबंधित मांग संख्या 1 और 2 के सामने दर्शाये गए मांग शीर्ष के संबंध में 31 मार्च, 2020 को समाप्त होने वाले वर्ष में संदाय के दौरान होने वाले खर्चों की अदायगी करने हेतु अनुदानों की मांगों की सूची के स्तम्भ 4 में दर्शायी गयी राजस्व लेखा तथा पूंजी लेखा संबंधी राशियों से अनधिक संबंधित राशियां भारत की संचित निधि में से राष्ट्रपति को दी जाएं ।” Demands for Grants (2019-20) in respect of the Ministry of Agriculture and Farmers Welfare voted by Lok Sabha:
No. of Demands Name of Demand Amount of Demands for Grants on Account voted by the House on February 1, 2019 Amount of Demands for Grants voted by the House 1 2 3 4     Revenue(Rs.) Capital(Rs.) Revenue(Rs.) Capital(Rs.) 1 Department of Agriculture, Cooperation and Farmers Welfare 43183,50,00,000 11,57,00,000 87267,01,00,000 23,13,00,000 2 Department of Agricultural Research and Education 2692,92,00,000
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5385,84,00,000
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प्रस्ताव स्वीकृत हुआ ।
माननीय अध्यक्ष: कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय से संबंधित अनुदानों की मांगें पारित हुईं ।