Lok Sabha Debates
Discussion On Hike In Administrated Prices Of Petroleum Products. on 26 October, 1999
Title: Discussion on hike in administrated prices of Petroleum Products.
14.02 hrs. MR. SPEAKER So, now we will take up the item no. 12, that is, discussion under Rule 193. Shri Shankersinh Laxmansinh Vaghela.
श्री शंकरसिंह वाघेला(कपडवंज) : अध्यक्ष महोदय, आपने मुझे बोलने का मौका दिया, उसके लिए धन्यवाद। एन.डी.ए. ने १३वीं लोक सभा में जो जनादेश प्राप्त किया, उसके लिए मैं माननीय प्रधान मंत्री जी और उनकी सरकार को बधाई देता हूं।... (व्यवधान) एक माननीय सदस्य : पुराना सम्बन्ध है। श्री शंकरसिंह वाघेला : हमारे नसीब में विरोध करना ही है। आप जब विरोधी दल में थे और उस समय जो भाषण दिया, मैं उसे यहां कोट करूंगा। प्रधानमंत्री जी ने उस समय इस बारे में कया कहा था, उसे भी कोट करूंगा। डीजल जैसी सामान्य चीजें फार्मर्स, कंज्यूमर्स इस्तेमाल करते हैं और यह इंडस्टि्रयल प्रोडकशन में भी इस्तेमाल की जाती हैं। बसें भी डीजल से चलती हैं जिन में सामान्य यात्री यात्रा करते हैं। जब यह सरकार बनी भी नहीं थी, उस समय इन्होंने आधी रात को डीजल के दाम ३५ परसैंट बढ़ा दिए। हिन्दुस्तान में इससे पहले ऐसी कोई भी सरकार नहीं थी जिस ने डीजल के दाम एकदम ३५ परसैंट बढ़ाए हों। इन्होंने जनता को वचन दिया था कि महंगाई और इनफलेशन रेट नहीं बढ़ेगा लेकिन सरकार बनने से पहले ही इन्होंने डीजल के दाम बढ़ा दिए। अभी संसद का सत्र होना था और बजट पेश होना था लेकिन उसके पहले ही एडमनिस्ट्रेटिव प्राइसेज बढ़ा दिए। आप इस बात के हमेशा विरोधी रहे। आपने आधी रात को इसके दाम कयों बढ़ाए? मैं माननीय प्रधानमंत्री जी के १० जुलाई, १९९६ के भाषण से उद्धृत करूंगा।This is regarding the question of propriety of pre-Budget-hike in administered prices of petroleum products. आधी रात को एक जर्नलिस्ट का फोन आपके पास आया था । मेरे पास भी आज रात को पत्रकार मित्र का फोन आया था । आपने कहा :"Mr. Speaker, Sir, with your permission, I would like to raise an important matter which is related to the dignity of the House and glory of democracy. The Eleventh Lok Sabha has been constituted recently."
Sir, now the 13th Lok Sabha has been constituted recently. Again I quote:
"Mr. Speaker, Sir, the 11th Lok Sabha has recently been constituted. It is the first day of the first session."
Today is the first day of the real business, Sir. रेलवे का इसमें जिक़ है।"The trains cannot run today." आगे माननीय प्रधानमंत्री जी ने कहा है:"It was around midnight when I received a phone call from a journalist that the prices of petrol have been hiked. The prices of LPG are being increased by 30 per cent, that of naphtha by 20 per cent..."
All details are given here. जो आपने कहा था उसमें इन्होंने सब एम.पीज़ का ज़िक़ किया था।"In all, a burden of nine thousand and seven hundred crore rupees has been imposed on the people of the country merely through a Government order." If the Government had waited till 10th If the Govt. had waited till today, if it had put up the proposal today, heavens would not have fallen. We were hoping that since this is the new Government, it would function in a different manner."
But this Government is not so new. This is a second-time Government, an experienced Government. You further said, and I quote:
"But only the faces have changed, the nature of the ruling party has not changed. Sir, People have changed but the style of functioning remains the same heree also. Who had advised them to impose such a burden even when the session had been summoned? To impose such a heavy burden, is a different issue altogether. I am raising a question of propriety and I fail to comprehend how the M.Ps such as Shri Indrajit Gupta, Somnath Chatterjee, Ramoowaliaji..."
All the details are given here. Again, he said, and I quote:
"However, today the ruling party has changed. Those who were sitting on the opposition benches have moved on to treasury benches."
Those who were sitting on the Opposition Benches at that time are now sitting on the Treasury Benches. Now they have every right to do so. ...(Interruptions). This is the reality. मैं उस समय नहीं था। मैं प्रार्थना करूंगा कि उस समय उनके जो लफज थे, माननीय प्रधानमंत्री जी का भाषण, श्री जसवंत सिंह का भाषण, डा. मुरली मनोहर जोशी का भाषण, आप उसे याद कीजिये डा. जोशी ने, श्री जसवंत सिंह से, जो उस समय फाइनेंस मनिस्टर थे, से कया कहा था। डा. जोशी ने घी के बारे में एक फर्सट कलास श्लोक सुनाया था: यावत: जीवेत् सुखम जीवेत् ऋणं कृत्वा घ्ृातं पिबेत् भस्मा भुतस्या देहस्या पुनर्गमम् कुता: डा. जोशी जी का भाषण डिस्कशन अंडर रूल १९३ और सेम सब्जैकट पैट्रोलियम डीजल प्राइस राइज पर था। श्री सोमनाथ चटर्जी (बोलपुर) : यह कब का है? श्री शंकरसिंह वाघेला: ११ जुलाई, १९९६. डा. जोशी ने उस समय के फाइनेंस मनिस्टर श्री जसवंत सिंह से कया कहा मैं सब डिटेल्ज में जाकर हाउस का समय खराब नहीं करना चाहता लेकिन यह जो मामला है, उसमें प्राइस राईज़ के बारे में इन्होंने जिक़ किया था। माननीय प्रधानमंत्री, फाइनेंस मनिस्टर और पैट्रोलियम मंत्री यहां बैठे हुये हैं। जब आप लोग विपक्ष में थे, तब आपके जितने भाषण थे, यदि आपकी कांशिएंस अलाउ करती है तो मेहरबानी करके वही भाषण अब... (व्यवधान) श्री सोमनाथ चटर्जी : कांशिएस रहती तो वहां कैसे जाते? श्री शंकरसिंह वाघेला : अध्यक्ष महोदय, इन्होंने जो अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में दामों के बारे में कहा है कि १२४ डॉलर से बढ़कर १६३ डॉलर प्राइस राइज़ हुई है, इसका मतलब यह है कि प्रति लीटर दो रुपये प्राइस राइज़ होती तब तो लोग बियर कर सकते थे लेकिन प्रति लीटर चार रुपये से ज्यादा बढ़ोतरी हुई है जो आम आदमी पर मार है। इसलिए मैं आपसे प्रार्थना करूंगा कि आप इसे और कम करिए, इस बढ़ोतरी को दो रुपये से कम कीजिए। चार रुपये बढ़ोतरी से सबको मत मारिये। अध्यक्ष महोदय, कारगिल पर आक़मण के समय माननीय वित्त मंत्री जी ने कहा था कि देश की जनता को आने वाले दिनों में भारी टैकसों के लिए तैयार रहना होगा। चुनाव उस समय तक नहीं आया था। फिर उन्होंने कहा कि मैंने ऐसा नहीं कहा । कया देश की जनता को बजट में आप मारने वाले हैं? कया आप बजट तक इंतज़ार नहीं कर सकते थे? किसलिए देश की जनता को तैयार रखना चाहते थे? कारगिल का इश्यू मैं नहीं लेना चाहता हूं - वह अलग इश्यू है, जब सदन में आएगा तो उस पर बातें होंगी। लेकिन उस समय आपने एडवांस में कहा था और लोगों पर जो मार पड़नी थी हैवी टैकसेज की, बजट आने से पहले आपने कैसे अलाऊ किया डीज़ल की प्राइस राइज़ को? फिर जो ओवरनाइट प्राइस राइज़ हुआ, आपके नोटस में है कि फरवरी, १९९९ में इसका मूल्य प्रति मीटि्रक टन ३२१० डालर से बढ़कर सितंबर १९९९ में ७०२० डालर प्रति मीटि्रक टन हो गया, मैं आपका ध्यान आकर्िषत करता हूं कि कया मार्च में भाव नहीं बढ़े थे, कया मई में भाव नहीं बढ़े थे? अगर भाव बढ़ने का प्रोसेस जारी था तो जब गवर्नमेंट केयरटेकर रह गई थी तो उसके बाद आपने कयों प्राइस राइज़ किया? आपने जुलाई, अगस्त या सितंबर में प्राइस राइज़ कयों नहीं किया? कयोंकि चुनाव आपके सामने थे और आपको चुनावों में वोट बटोरने थे। आपने वोट बटोरे और वोट का जो भी बदला जनता को देना था वह आपने डीज़ल की कीमतें बढ़ाकर दिया। प्रधान मंत्री जी को सुनने में भी... (व्यवधान)
SHRI JAGMEET SINGH BRAR (FARIDKOT) : Sir, this is a matter of such great national importance and the hon. Prime Minister is going out. ...(Interruptions)
SHRI RAJESH PILOT (DAUSA) : Sir, when we could listen to the debate on the Motion of Thanks to the President for his Address, the hon. Prime Minister should be present and listen to this. It is a question of the common man who is hurt and he is the right person to be here. ...(Interruptions)
MR. SPEAKER : The concerned Minister, Shri Ram Naik is here.
... (Interruptions)
SHRI RAJESH PILOT : Sir, I am not holding on that. My feeling is that the hon. Prime Minister should have been here. ...(Interruptions)
THE MINISTER OF FINANCE (SHRI YASHWANT SINHA): The Prime Minister can listen to the speeches made in this House while sitting in his room also.
SHRI RAJESH PILOT : That is right. But we cannot see his reaction. ...(Interruptions)
SHRI YASHWANT SINHA : If you want him to see your face, that can also be seen by him on the television. ...(Interruptions) श्री राजेश पायलट : कवि के दिल को देखते हैं मगर कवि की वेदना कया एक आम आदमी से जुड़ी है या नहीं, यह भी हम देखना चाहते हैं।... (व्यवधान) श्री प्रियरंजन दासमुंशी (रायगंज) : यह आपने सही बोला है। वाघेला जी उनके भाषण कवोट कर रहे हैं और उन्होंने सही बचाव का काम किया है।... (व्यवधान)
THE MINISTER OF PETROLEUM AND NATURAL GAS (SHRI RAM NAIK): आप अपने दाहिने हाथ पर देखिये, लीडर ऑफ अपोज़ीशन का भी कर्तव्य है कि वह भी उपस्िथत रहें।... (व्यवधान) श्री शंकरसिंह वाघेला : स्पीकर साहब, यह बात सही है कि जब प्राइस राइज़ हुआ होगा तो उसमें प्रधान मंत्री जी को कंसल्ट किया होगा या नहीं। ये जो कड़वी बातें हैं, मैंने तो अभी प्रधान मंत्री जी के भाषण के ही कुछ अंश पढ़े, अभी और भी बताऊंगा कि कैसे-कैसे भाषण थे। लेकिन प्रधान मंत्री जी को आश्वासन देना चाहिए था कि जो भी कहना है कहो, नियम १९३ के अन्तर्गत चर्चा पूरी होने के बाद मैं सदन को और देश की जनता को आश्वासन दूंगा कि आने वाले दिनों में एल.पी.जी. या केरोसीन या पेट्रोल के प्राइस नहीं बढ़ेंगे और इस मूल्यव्ृाद्धि को भी चार रुपये से घटाकर दो रुपये करने की बात वह सोचते तो अच्छी बात होती लेकिन सच्ची बातें कड़वी लगती हैं। जो भाव आपने ओवरनाइट, चुनाव के बाद जनता का वोट लेने के बाद, आधी रात को बढ़ाया और जनता को मार दी है, वह जनता को मालूम है और आने वाले इलेकशन में वह आपको देखेगी। अभी तो इलेकशन नहीं है। आपके लिए भले ही यह सोर्स ऑफ इंकम होगा। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में भाव बढ़े हैं, इसलिए आपके लिए यह फीगर्स को मिलाने की जगलरी होगी। पांच हजार करोड़ रूपये आपके फेवर में उधर चले गये - टू एंडस मिलाने के लिए आपने प्राइस राइज किया है। प्राइस राइज तो आपकी जगलरी का एक मजाक है। प्राइस राइज के लिए आपने कहा है कि यह एक सेविंग है, लेकिन इसकी मार कॉमन मैन पर कया होती है, इसकी मार उस किसान पर कया होती है जिसके पास आज बैल नहीं है, जो यांत्रिक खेती करते हैं, ट्रैकटर चलाते हैं - ट्रैकटर्स के लिए भी डीजल की जरूरत होती है। हिंदुस्तान का गरीब किसान, जिनके यहां यांत्रिक काश्तकारी हो रही है उनके बारे में भी आपको सोचना चाहिए। वहां बैल नहीं हैं, उसका बुलक कार्ट आज ट्रैकटर है, उसकी गाड़ी भी वही है, उसका जो कुछ भी है वह ट्रैकटर ही है और ट्रैकटर डीजल से चलता है। उस किसान को आपने चार रूपये के बोझ से मारा है। यह आपने दो एंडस मिलाने के लिए नहीं किया है। आज चार-पांच गरीब किसान पार्टनरशिप में लोन लेकर ट्रैकटर लेते हैं। आज वही गरीब गांव का किसान रो रहा है और उसे पछतावा होता है कि हमने बी.जे.पी. या एन.डी.ए. को कयों वोट दिया। सर, न सिर्फ किसान बल्िक कंजूमर्स, कॉमन मैन, पैसेन्जर्स बस पैसेन्जर्स भी परेशान हैं। दिल्ली से चुने गए बी.जे.पी. के सांसदों को शर्म आनी चाहिए। इन्हें मंत्री नहीं बनाया गया, वह मैं समझ सकता हूं लेकिन दिल्ली में गवर्नमैंट ने स्टेट ट्रांसपोर्ट की बसों का किराया बढ़ाया, कया श्रीमती शीला दीक्षित या कांग्रेस सरकार ने किराया बढ़ाया था या डीजल की प्राइस चार रूपये आपने बढ़ाईं हैं। इसका प्रभाव सब राज्यों में चाहे वहां किसी भी पार्टी की सरकार हो, जो स्टेट ट्रांसपोर्ट होती है उस राज्य के पैसेंजर के ऊपर प्राइस राइज का असर पड़ता है। अभी गुजरात गवर्नमैंट ने डीजल का प्राइस बढ़ाया। पूरे हिंदुस्तान में जितनी बसें डीजल से चलती हैं, इसकी मार कॉमन गरीब आदमी जो गांव से शहर में अपने तहसील या डिस्टि्रकट हैडकवार्टर पर आता है, जहां रेलवे नहीं हैं, वहां बसों का किराया आपने बढ़ाया है, इसकी सीधी जो मार पड़ती है, वह सीधे उसको नहीं मारते हैं, बल्िक डीजल के प्राइस बढ़ाकर आप उस गरीब पैसेंजर को मारते हैं... (व्यवधान) श्री मदन प्रसाद जायसवाल (बेतिया): दिल्ली में कांग्रेस ने सौ प्रतिशत बसों का भाड़ा बढ़ा दिया है, उसके बारे में भी बोलिये... (व्यवधान) श्री रघुवंश प्रसाद सिंह (वैशाली): आप डीजल के भाव वापस करिये। शर्म नहीं आती है, डीजल के भाव बढ़ाते हैं... (व्यवधान) श्री शंकर सिंह वघेला : यदि आप डीजल के प्राइस नहीं बढ़ाते तो कया कई स्टेट गवर्नमेंटस में यह नौबत आती, यानी कि आग आप लगाते हैं... (व्यवधान)
इससे न सिर्फ किसान के एग्रीकल्चरल प्रोडकशन का भाव बढ़ेगा, बल्िक महंगाई भी बढ़ेगी। इतना ही नहीं इस देश के करोड़ों लोग जो बसों से ट्रैवल करते हैं, गरीब आदमी जो बसों से आते-जाते हैं, मैं समझता हूं कि कोई मैम्बर ऑफ पार्िलयामेंट, विधायक या आई.ए.एस. या आई.पी.एस. अफसर या सुखी लोग बसों से ट्रैवल नहीं करते। आप कभी बस से जाइये, तब आपको मालूम होगा कि बसों में कितनी भीड़ होती है, वे उसी भीड़ में घुसकर जाते हैं, चूंकि उन्हें काम पर जाना है, यानी आपने बस पैसेंजर को, गांवों के गरीब आदमियों को डीजल की प्राइस चार रूपये बढ़ाकर मारा है। आपने उसे ऐसा मारा है कि वह आज रो रहा है। इतना ही नहीं, अब रेल मंत्री की बारी आयेगी। रेलवे इंजन डीजल से चलते हैं। इनकी रेल मंत्री, कु. ममता बनर्जी का आने वाले दिनों में कया होता है, आप नहीं बढ़ायेंगे तो फिर आपकी मार कहां जायेगी। अब रेलवे पैसेंजरों के ऊपर तलवार लटक रही है। आने वाले दिनों में उनको मंत्री रहना है या नहीं इसलिए आपको डीजल की मार को डिस्ट्रीब्यूट करके मारना होगा। मैं समझता हूं हमारी जो ट्रांसपोर्ट इंडस्ट्रीज है, जहां रेलवे सुविधा नहीं है, हिली एरियाज हैं, जहां रेलवे ट्रैकस नहीं हैं, वहां वे प्राइवेट ट्रांसपोर्ट ऑपरेटर्स के जरिए अपनी चीज, अपना सामान, अपना लगेज भेजते हैं। अध्यक्ष महोदय, वह इंडस्ट्री सिक बन गई। उसके ऊपर आपने डीजल के प्राइस बढ़ाए हैं। आप उसको कह सकते हैं कि आप प्राइस राइज कर दीजिए। इस भार को आप कंजूमर के ऊपर डायवर्ट कर दीजिए, लेकिन कंजूमर कहेगा कि उसको इतने महंगे किराए का ट्रक नहीं चाहिए। यानी जब ट्रक का किराया बढ़ेगा, तो वह ट्रक को छोड़ देगा और उससे ट्रक उद्योग को नुकसान पहुंचेगा। आपने राज्यों को कह दिया कि यदि वे नहीं मानें, तो उनके ऊपर "ऐस्मा" लगा दो। आप तो मानवतावादी हैं। हमारे प्रधान मंत्री जी तो मानवतावादी हैं फिर आप कैसे "ऐस्मा" लगाने की बात करते हैं। आप सबको गोली मार दीजिए। सबको बन्द कर दीजिए। यह कया हो रहा है। इस प्रकार से कहीं देश का शासन चलता है। आपने चीजों के दाम बढ़ाए हैं। आपने डीजल के दाम बढ़ाए हैं, तो उन्हें भी हड़ताल करने का मौलिक अधिकार है, प्राइस राइज करने का अधिकार है। इस प्रकार से कैसे काम चलेगा। आज हर चीज के दाम बढ़ रहे हैं। वेजीटेबल के दाम बढ़ रहे हैं। हर सामान के दाम बढ़ रहे हैं। दीपावली का त्यौहार आने वाला है। वे सारी चीजें ट्रकों से ढोई जानी हैं, लेकिन ट्रकों की हड़ताल के कारण वे ट्रकों में बन्द हैं। ट्रकों की हड़ताल में अब टैम्पो वाले भी जुड़ गए हैं। अध्यक्ष महोदय, मेरा मंत्री जी से आग्रह है कि वे ट्रक वालों से बात करने की कोशिश करें, कोई रास्ता निकालें। यहां आप बैठे हैं। आप सांसद हैं, मंत्री हैं। यहां इतने बड़े-बड़े लोग बैठे हैं। यहां बड़े सीनियर लोग हैं। मेरा आग्रह है कि आप ट्रक हड़ताल करने वालों को बुलाइए। यहां पर डी.एम.के., तेलुगू देशम, जनता दल आदि सभी दलों के लोग बैठे हैं। इन दलों के लोग तो डीजल की प्राइस बढ़ाने में सरकार के साथ नहीं होंगे। हमारे ओम प्रकाश चौटाला जी की लोकतांत्रिक पार्टी किसानों के नाम पर वोट लेकर आई है। कया इस सरकार ने डीजल के दाम बढ़ाकर किसान की कमर तोड़ने का काम नहीं किया है? यह बहुत महत्वपूर्ण विषय है। अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से सरकार से अपेक्षा रखता हूं कि जो हो गया सो हो गया। आप एडमनिस्टर्ड प्राइसेस के खिलाफ हैं। अगर आप एडमनिस्टर्ड प्राइसेस के खिलाफ हैं, तो मेहरबानी करके जो डीजल की प्राइस बढ़ाई गई है, उसको वापस ले लीजिए। यह इस हाउस का अपमान है, पार्िलयामेंट का अपमान है, डैमोक़ेसी का अपमान है। कॉमन मैन, जिन्होंने आपको वोट दिया है, उनका अपमान है। प्राइम मनिस्टर और पूरी टीम, जिन्होंने एडमनिस्टर्ड प्राइस का विरोध किया था, उनका अपमान है। बजट आने वाला है, पार्िलयामेंट फिर मिलने वाली है। आपने डीजल की कीमतें बढ़ाकर जो करोड़ों रुपए की मार गरीब आदमी को मारी है, उसे वापस ले लीजिए। नौ महीने का इंतजार मत कीजिए। अध्यक्ष महोदय, इसके बारे में सबको मालूम होता है कि डीजल के प्राइज बढ़ाने से आम जनता को कठिनाई होती है। इसके बजाय आप अपने देश में ही उत्पादन बढ़ाइए। ओ.एन.जी.सी.को ज्यादा एकिटव करिए, प्राइवेट एंटरप्रिन्योर्स को इन्कलूड करिए। सरकार को इसके लिए और सोर्स खोजने चाहिए और देश में ही तेल का उत्पाधन बढ़ाने के लिए ज्यादा से ज्यादा प्रयास करने चाहिए कयोंकि हमारे देश में तेल की कमी नहीं है। हमारे गुजरात में, बिहार में, असम में और राजस्थान में भी तेल प्रचुर मात्रा में है। वहां और ड़लिंग करिए। जहां हैवी इनवैस्टमेंट की जरूरत है वहां हैवी इनवैस्टमेंट कीजिए। वहां से से हैवी रिटर्नस भी लीजिए। राज्यों को भी उनका हिस्सा नकद या कवालिटी में न देकर कवांटिटी में दीजिए। जब राज्यों को ज्यादा हिस्सा मिलेगा, तो वे ज्यादा उत्पादन करेंगे और देश में तेल की कमी नहीं रहेगी।... (व्यवधान)
MR. SPEAKER: The time allotted for this discussion is two hours and you have taken 25 minutes. श्री शंकर सिंह वघेला : अध्यक्ष महोदय, मैं समाप्त करना चाहता हूं। मेरा आपके माध्यम से पुन: अनुरोध है कि डीजल के दाम बढ़ाने का मुद्दा बहुत महत्वपूर्ण है। मेरा आग्रह है कि आप बढ़े हुए डीजल के दामों को वापस लें। आप इस हाउस में आश्वासन देंगे। देश की जनता इस बात का इंतजार करती है कि आपने जो डीजल के दाम बढ़ाये हैं, कया आने वाले दिनों में आप उसकी सिस्टर कन्सर्न चीजों के भाव नहीं बढ़ायेंगे? इन्हीं शब्दों के साथ आपने मुझे बोलने का समय दिया तथा डीजल प्राइस के बारे में जो ध्यान आकर्िषत किया, उसके लिए मैं आपका आभारी हूं।
SHRI SOMNATH CHATTERJEE (BOLPUR): Mr. Speaker, Sir, it is quite important and significant as well that one of the major discussions, that this House is at the moment in, relate to an extraordinary decision which had been taken on the 3rd of October this year when this Government was not in existence in its new avtaar. It was taken by the earlier Government with the same Prime Minister and the same Finance Minister. The extraordinary situation of deciding to increase the price of diesel at such a rate has really not only created a serious problem but also today there is almost a near deadlock so far as the transport of goods in the country is concerned.
Sir, I could not have imagined -- having had the opportunity of being a Member of this House and seeing the functioning of many Governments in the past -- that on the last date of polling in this country when a new Government was to come within a week or ten days, a decision of this nature is being taken by a caretaker Government. If Shri Atal Bihari Vajpayee was so sure that he was coming back to power, then propriety and morality demanded that he should have waited for the next House to be constituted, the next Government to be formed and then he should have discussed it with the Opposition leaders and taken them into confidence. All the tall promises about the poor and the vulnerable sections of the community were thrown to the winds. They arrogated unto themselves a power which no caretaker Government, I believe, in the past would have done. If they were not sure about coming back to power, then they should have waited for the next Government to come in. They should have done either of these two things.
Now, the whole explanation has been given by my good friend, Shri Ram Naik. In fact, he has to support something indefensible. He has given certain figures and I am only depending on them for the purpose of my submission here. We have been told of hard decisions being taken. I think, they have recommended his name to be the Finance Minister -- has been saying on the television, even before the new Government was constituted, even before this House assembled, पुनर्िववेचना का कोई सिद्धांत नहीं है। पुनर्िववेचना नहीं होगी।This is the attitude. The Prime Minister, of course, has to go by the CII.
SHRI PRIYA RANJAN DASMUNSHI : Is it the CIA or the CII?
SHRI SOMNATH CHATTERJEE: No. It is the CII. Therefore, their mind was adamant that there will be no consideration. The Government takes a politically immoral decision, apart from it being economically unjustified for the country, and then it takes an attitude that at no point they would re-consider this matter. What sort of a Government is this? It is so insensitive to public misery and public opinion and they seem to be totally unconcerned.
Truck operators are on strike and prices of essential commodities are rising. Obviously, it is now spreading all over the country. The West Bengal truck operators who kept their decision in abeyance till the Pujas were over have also joined the strike. Now the entire country is facing problems. Truck operators"""" strike is going to have its effect on everything including the public sector organisations like the Railways, as rightly pointed out by Shri Vaghela. And this Government says, `Nothing doing"""".
Sir, the Minister has been good enough, objective enough, to mention certain decisions which were taken on 1st September, 1997 which say that the basic selling price of diesel would be fixed on the principle of import parity and shall be revised at intervals of every 30 to 60 days. I would like to know from the Government whether there was any such exercise done. Sir, we have got certain publications, and I believe you have also got them, which say that the price rise was Rs.3210 in February, 1999 when the earlier Government -- under the same Prime Minister, with the same Finance Minister but not the same Petroleum Minister though, was in power. Then there was a revision. In March-April there was another revision. Then, Sir, price became Rs.4800 in April. In April there was no revision done. Why not? Why was it not revised when it went up to Rs.4940? It was because they knew that they would have to face the election that were yet to come. In June, there was an increase but no revision was done. There should have been a gradual increase so that the Government had the opportunity to look into its effect on the market and on the people.
Sir, if you kindly go through the chart they have given, you will find that from September, 1997, till April 1999, the price really increased by a few paise and there have been six or seven continuous revisions. In Mumbai from Rs.11.53, it went up to Rs.12.23. That means an increase of seventy paise over a period of two and a half years. Now they wait, they wait in April, they wait in May, they wait in June, and they wait in July. In July it went up to Rs.5730 from Rs.3210. Why did they not do it then, if they were so much concerned with the decision of September, 1997? When the parity method was already in operation, why did they not implement it? Why did they do it in August when it went up to Rs.6250?
Sir, everybody knows the importance of the 3rd of October. That was the last day of polling. This is a Government which deliberately kept things back from the people of this country. They kept back from them this decision that they were going to take. What else is it but political chicanery playing with the people of this country and misusing the authority of the Government? There is no explanation given anywhere by anybody as to why they had not revised the price between February and August during which prices had doubled.
Sir, if the matter of governance is a matter of ipse dixit, if the matter of governance is left only for the purpose of electoral politics, today the country is facing the serious problem of an increase of Rs.4 per litre of diesel which is of vital necessity for the country""""s economy. Sir, they say that hard decisions will have to be taken. These decisions are hard on the common people of this country. How many rich people, affluent people, wealthy people are concerned with this increase of Rs.4? None. It is the kisan who is concerned; it is the ordinary commuter who is concerned. These are the common people. I was listening to all the tall talk about `for the poor"""" and all that made in the Address of hon. Rashtrapatiji which was prepared by the Government.
Not one word is mentioned about it. No apology is tendered to the people of this country that on the day the polling ended, we did that and we are forced to do this for these reasons. Now it is very easy to say that "Well, what can we do?" A decision was taken in September, 1997 which they did not implement. As an item of excise duty, the railway freight and other things are in their control. If they are really concerned about the people, they could have taken away excise duty. What about the railway freight? You are totally unconcerned for the common people of this country. If saying something and doing something else is the hallmark of the Governmental functioning, then let us know that. Shri Shankarsinh Vaghela has read out. We are not surprised because sitting on the Right makes all the difference as power goes to the head. That is why, Shri Atal Bihari Vajpayee is put up as the embodiment of all the political sagacity in this country, all the political morality of this country. What sort of sagacity and what sort of morality was exhibited? When he was there, he strongly opposed it. He accused the Government of immorality, of impropriety. Is there no impropriety on the Government side?
According to us, it is a misfortune of this country that they have come to power. But we are accepting the people""""s verdict and we have wished them well. This is the mandate. I am accepting the mandate. There is no question of it. But you must govern and govern for the people about whom you are shedding at the moment crocodile tears. Therefore, diesel is not a matter which can be ignored or that. People can do with or without it. It is not such an item. It is not an item of luxury. Therefore, our very serious demand is, the country is agitated and the common people are agitated. There is a deadlock in the country which has to be resolved that it should be withdrawn. Let them hold consultations. Let there be proper discussion and debate. Let us know what can be done. The Prime Minister talks of consensus politics. Is this the way consensus politics is developed in this country? I told Shri Madan Lal Khurana that day "You have not got the Ministry. You have my regrets and you have my sympathies. I cannot help you." At least, you are now on the street. Shri Vijay Kumar Malhotra and Shri Madan Lal Khurana were holding their hands together in opposing bus fare. Now they are on the street opposing the bus fare increase. The diesel price has increased and it has a cascading effect, immediate effect, on the transport. Which Government wants that the bus fare should be raised? I know we are facing the problem in West Bengal and in the States where we are in power. People get annoyed because they find the State Government near them. They get annoyed with the State Government as the State Government are forced to increase the fare because the taxiwallas will not run and the buswallas will not run and nobody will run their vehicles unless they are allowed higher fare. Now they are instigating the people to go to the street to protest against the bus fare hike although it is all entirely caused by the diesel price hike here.
Sir, the threat is big. I have not heard it from any Minister up till now but I find the bureaucrats saying that ESMA may be utilised; or, misutilised, for that matter. I would like to know from the Government whether they are going to apply ESMA here and what is going to happen and whether they are at all thinking of any subsidy just to somehow minimize the rigours of it.
Never in the past has there been such a steep hike in one stroke. In Delhi from Rs.10.37, it has gone up to Rs.13.91; in Calcutta, from Rs.10.52 to Rs.14.20; in Mumbai, from Rs.12.23 to Rs.16.54. Shri Ram Naik is here. Now, he will not be using it for his Railways but he is now responsible. Shri Ram Naik, do not be a ciphor there, you assert yourself. ... (Interruptions)
I appreciate it. Have I not appreciated it at the beginning? Then, in Chennai, it has gone up from Rs.11.27 to Rs.15.24. There has been never in the past such a steep increase. This shows the political immorality. This is anti-people, anti-kisan, anti-everybody and anti-development of this country and we strongly demand that this should be immediately withdrawn. Let the Government take up a responsible attitude discussing with the Opposition, lay the cards on the table and let us find out what can be done in this respect.
Nobody is irresponsible enough to say that the country""""s economy should be ruined. But what is the country if the people""""s economies are ruined? We are told that we have a surplus of $ 33 billion as our foreign exchange reserves. It is very good but how much is the fleeting money? For what purpose do we have all this foreign exchange?
There is an obsession for privatisation and an obsession for passing on to the consumer all the liabilities. This is why, this Government, by the very first action of supporting the previous Government""""s decision, has discredited itself. This is nothing but a declaration of war on the common people of this country. Shri Ram Naik, you have to shoulder this, you have to explain this. I think, the people of this country will take their decision. We wish them to govern well but not misgovern and if they do that we will have to oppose and we shall oppose to the best of our ability. I want to tell the Government that the people of this country will never accept such decisions.
श्री राजीव प्रताप रूढ़ी (छपरा): अध्यक्ष महोदय, सरकार की तरफ से डीजल के दाम में जो व्ृाद्धि की गई है, उसके संदर्भ में मैं बोलने के लिए खड़ा हुआ हूं। यह विषय सरकार के लिए नश्िचत रूप से कठिन है। लेकिन एक तरफ पिछले ५० वर्ष के घटनाचक़ को देखना होगा, कि किस प्रकार से इस देश को हम लोग चला रहे थे। हमारी सरकार पिछले सवा साल तक सत्ता में रही, फिर हमारी सरकार गिर गई, गिराने का श्रेय किन लोगों को जाता है, इस बात की चर्चा करना यहां आवश्यक नहीं है। अध्यक्ष महोदय, डीजल के दाम में इतनी बड़ी व्ृाद्धि से सबको कष्ट है। हम लोग भी इस बात को महसूस करते हैं। ऐसा नहीं है कि सत्ता पक्ष में बैठने वाले लोग इस बात को महसूस नहीं करते। लेकिन जो इस देश का हिसाब-किताब पिछले ५० वर्ष में तैयार किया गया, उसको कहीं न कहीं सुधारने की आवश्यकता है। आज किसी भी तरफ आप नजर उठाकर देखेंगे तो पाएंगे कि भारत का अर्थतंत्र जिस बदहाल अवस्था में हमारी सरकार के पास आया, शायद वैसी स्िथति की कल्पना पहले नहीं की जा सकती थी। एक साल में हम लोगों ने अपने अर्थतन्त्र को सुधारने का प्रयास किया है। माननीय सोमनाथ जी ने कहा कि यह सरकार इम्मोरल सरकार है। इम्मोरैलिटी की बात इन्होंने बार-बार दोहराई है। यह निर्णय इम्मोरल है और इस तरह के निर्णय से देश के लोगों को, खासकर कमजोर वर्ग के लोगों को और सामान्य लोगों को आघात पहुंचता है। इस विषय में चिन्ता का विषय यह है कि जब इम्मोरैलिटी की बात कहते हैं, तो उन्होंने कहा कि चुनाव के पहले डीजल के दामों में व्ृाद्धि नहीं की और चुनाव के समय इन लोगों ने बड़े ध्यान से देखा और ३० से ६० दिनों के भीतर जो रिवीजन किया जाना था, उस अवधि में इन लोगों ने रिवीजन नहीं किया। महोदय, सरकार तत्परता से इन सब चीजों को करने के लिए तैयार थी, बशर्ते आप हम लोगों को चुनाव के मैदान में नहीं ढकेलते, तो इस तरह के काम हम लोग लगातार करते रहते और लोगों के बीच में अच्छा संवाद पहुंचा देते।... (व्यवधान)
लेकिन उस सुधार के पहले ही आप लोगों ने इस देश को चुनाव के कगार पर खड़ा कर दिया। डैमोक़ेसी को इस्टैबलिश करना था और जिस तथ्य को आप बार-बार दोहराते हैं कि इम्मोरैलीटी के आधार पर यह सरकार चल रही है, तो पहले उस तथ्य को खत्म करना आवश्यक था। महोदय, हम लोग सरकार में आए। वित्त मंत्री जी यहां पर बैठे हैं और राम नाईक जी भी बैठे हैं। जब एक तरफ यह खास विषय है तो नश्िचत रूप से अगले पांच वषर्ों में इन कामों की भरपाई हम लोग करेंगे। सरकार की तरफ से हमारे जैसे लोग इस बात को महसूस करते हैं। जो बड़े-बड़े उपक़म हैं, इस देश के हालात में, हम राजनीतिज्ञों ने, जिस तरीके से इस राजनीति को लेकर, लोगों की बात उठाकर इस देश में लोगों को गुमराह करते रहे हैं, तो अब समय आ गया है कि देश को पूरी वर्तमान स्िथति से अवगत कराया जाए। पिछले छ: महीनों में जिस प्रकार से अन्तरराष्ट्रीय मूल्यों में व्ृाद्धि हुई है, मैं नहीं समझता हूं कि सदन में बैठे लोग इसका विरोध कयों कर रहे हैं। जब किसान के ऊपर साधारण सा कर्ज होता है, तो किसान चाहे राजस्थान का हो, चाहे गन्ने की खेती करने वाला गुजरात का किसान हो, जब वह कर्ज में डूब जाता है, तो आत्महत्या करता है। मैं पूछता हूं, कया भारत में आत्महत्या कराना चाहते हैं? आप इतने बड़े लोकतन्त्र को इतने घाटे में रखकर चलाना चाहते हैं? भारत के पास जो संसाधन हैं, वह विश्व में किसी के पास नहीं है, लेकिन संसाधनों का उपयोग नहीं किया गया है, जिसके कारण पिछले पचास वषर्ों में देश को बदहाली का सामना करना प्रड़ रहा है। हमें भारत के संसाधनों पर गर्व है। जो बचा-कुचा हिसाब-किताब आप लोगों नें पिछले पचास वषर्ों में खड़ा किया है, इसको ठीक करके इस देश को विश्व का सबसे बड़ा देश और प्रथम चोटी पर पहुंचाने का निर्णय इस सरकार ने लिया है। इस विषय को उठाते हुए, एक सामान्य पीड़ा सुनने में आ रही है। मैं कहना चाहता हूं कि देश के कई राज्यों में इनकी सरकारें हैं, लेकिन डीजल की कीमतों में ब्ृाद्धि की गई है। एकसाइज डयुटी का काम राज्य सरकारों का भी है, आकट्राय का काम और सैल्स-टैकस का काम - अगर आपको इतनी पीड़ा है... (व्यवधान)
मैं समझ रहा हूं, मैं बिना कागज पलटे कह रहा हूं ... (व्यवधान)
राज्य सरकारों द्वारा सैल्सटैकस लगाया जाता है, पश्िचम बंगाल में आपके पास इतना बड़े संसाधन हैं, तो कयों नहीं आप अतरिकत संसाधन निकाल कर डीजल के दाम रोक लें और जो स्ट्राइक की बात कहते हैं, उसको खत्म कर लें।
SHRI SOMNATH CHATTERJEE : Thank you for your confession! श्री राजीव प्रताप रूढ़ी : राजस्थान में आप लोगों की सरकार है, पश्िचम बंगाल में आप लोगों की सरकार है और दिल्ली में आपकी सरकार है। मैं पूछता हूं, यह देश कैसे चलेगा ? अगर डीजल की कीमत बढ़ाई है, तो इन लोगों ने कोई सामान्य स्िथति नहीं बनाई। दिल्ली में सातों सीटें जनता ने इनके कुशासन के चलते भारतीय जनता पार्टी को जीता कर भेजी हैं। इसलिए यहां के लोगों के साथ दुशमनागत रोल करके डीजल की कीमतों व्ृाद्धि होते हुएDTC के भाड़े में व्ृाद्धि कर दी। सोचना पड़ेगा, इस देश को चलाने के लिए हम किस प्रकार से निर्णय करते रहेंगे। समय आ गया है, इस देश को सही दिशा में ले चलकर विश्व में भारत अग्रणी रहे। हमारी नेत्ृात्व में आस्था है और जो चोट भारत के लोगों को पहुंची है, उस चोट को नश्िचत रूप से आने वाले दिनो में कम करने में सफल होंगे। हमारा विश्वास है और हमारे मंत्रिमंडल के जो सदस्यगण हैं,वे आने वाले दिनो में इस व्ृाद्धि पर विचार करेंगे। ... (व्यवधान) कम नहीं करेंगे।... (व्यवधान)
उसको सामंजस्य करने का प्रयास इस सरकार के दिमाग में जरूर होगा, मैं नश्िचत रूप से यह विश्वास रखता हूं। महोदय, इन्होंने कहा कि सरकार के पास यह सोच नहीं है। मैं आपको बताना चाहता हूं कि पिछले वर्ष दो-दो बार डीजल की कीमत को कम भी किया गया है। अगर हमारी सोच इस दिशा में है जब आवश्यकता पड़ती है, हमारी आर्िथक स्िथति वैसी हुई है तो हमने डीजल की कीमत को पहले भी दो बार रोल बैक किया है। इसलिए मैं कहना चाहता हूं कि राजनीति से प्रेरित होकर पूरे विश्व के हालात को देखते हुए इंटरनेशनल प्राइसेस में जो आज बढ़ोत्तरी हुई है उसके मद्देनजर यह निर्णय लिया गया है। मैं समझता हूं कि पूरे देश के लोग इस बात को समझते हैं और हमारे नेत्ृात्व में आने वाले दिनों में इस प्रकार से जो निर्णय लिया गया है इसका रास्ता ढूंढ निकालने और इस देश को खुशहाल बनाने में हमारी पहल मुख्य रूप से होगी। श्री राजेश पायलट (दौसा) : अध्यक्ष महोदय, सभी साथियों ने अपनी बात कही। सच्चाई यह है कि आज कोई आंकड़े की लड़ाई नहीं है और यह लड़ाई नहीं है कि हम सही हैं या आप सही हैं। प्रजातंत्र में परस्िथतियां, हालात और उसके बाद सरकार की नीतियां, यही चुनी हुई सरकार का हक और फर्ज होता है। अगर परस्िथतियों और हालात को देख कर नीतियां बनाना इतना आसान होता तो फिर यहां संसद में बहस की बात ही नहीं थी, तेल भवन में नीति बन जाती। यह नीतियां तो फिर वहीं बन जातीं, पार्िलयामेंट में डिस्कशन की जरूरत ही नहीं पड़ती। आज सबकी भावनाएं आपने देखी होंगी। आज हम भावना की बात कर रहे हैं, दोष देने के लिए खड़े नहीं हुए हैं। मुझे खुशी है कि हमारे भाई ने बड़े रुक-रुक कर कहा। हमारे मन में जो बात थी वही हम बोल रहे हैं, बी.जे.पी. और हमारी दूसरी पार्िटयों के साथी भी यहां बैठे हैं उनके मन में भी यही है कि यह बोझ बहुत बढ़ गया है। अभी सोमनाथ जी और वाघेला जी ने भी कहा कि अगर आहिस्ते-आहिस्ते भी ये दाम बढ़ते तो उसको सहन कर लेते, लेकिन एक साथ ४ रुपए का बोझ बढ़ गया। आज आप गांव में किसान से जाकर बात करिए वहां डीजल से सारा काम चल रहा है। बिजली की हालत हर प्रदेश में खराब है। यहां मेरे यू.पी. के भाई बैठे हैं उनसे पूछो कि वहां कितनी बिजली आ रही है। राजस्थान में हमारी सरकार है हम वहां भी पूरी बिजली नहीं दे पा रहे। आज हर किसान पर इतनी आफत है, उसने डीजल से अपनी फसल उगाई, वह डीजल से सारा काम कर रहा है और उसी डीजल पर आपने ४ रुपए कुछ पैसे या ३.९० रुपए किसी-किसी प्रदेश में बढ़ा दिए। महोदय, मैं इस सदन में बहुत दिनों से आ रहा हूं, इतनी बड़ी हाइक कभी नहीं हुई। हमारी सरकार ने भी कीमत बढ़ा दी थी तब हम सब ने सरकार पर जोर दिया था और सरकार से प्राइस वापस करा दिए थे, कयोंकि यह आम आदमी की बात थी। मंत्रिमंडल में होते हुए हमने आवाज उठाई थी। यहां अपनी भावना की बात आती है और मैं आज आपसे दिल से प्रार्थना करता हूं कि आज जो गांव में आवाज चल रही है, आप इसको चुनाव से पहले बढ़ा लेते तो हमें कोई ऐतराज नहीं था। तब हम आपकी हिम्मत देखते, आप कितने जीत कर आते। प्याज ने आपकी तीन स्टेट खो दी थी, अगर आप डीजल के दाम बढ़ा देते तो यह आपका पूरे का पूरा हिन्दुस्तान खो देता। आप भावना के साथ चलो। आपने कहा कि स्टेटस के भी टैकस बढ़े हैं, यह बात ठीक है। इसमें इम्पोर्ट डयूटी ३० प्रतिशत बढ़ी है, मुझे जो खबर मिली है, सेंट्रल एकसाइज़ डयूटी १६ प्रतिशत और सैल्स टैकस १४ प्रतिशत तथा टर्न अराउंड और कुछ दूसरे खर्चे हैं। हम भी अपनी सरकारों से कोशिश करेंगे, आप सेंटर से शुरुआत कराएं हम भी अपनी सरकारों पर जोर देंगे, लेकिन जब आप ऊपर बैठ जाएंगे और भाषण देंगे कि हम बदलेंगे नहीं तो स्टेट गवर्नमेंट कैसे इसका इनशियेटिव ले सकती है। आज जो आम आदमी पर बोझ बड़ रहा है वह हम सब के लिए कठिन है। हम आंकड़े देकर साबित नहीं करना चाहते, हम भी महसूस करते हैं यह इंटरनेशनल प्राइसेस की बात है लेकिन इसे सहन करने के लिए आहिस्ते-आहिस्ते दबाव डाला जाता है। यह जनतंत्र की सरकार का काम है और यही जनतंत्र की भावना नीतियों में जोड़ी जाती है और तभी जनतंत्र मजबूत होता है तथा वहीं प्रजातंत्र का राज होता है, जो इन भावनओं से हटा है, चाहे आप हों या हम हों जब-जब जन भावनाओं से सरकार हटी है, जो पार्टी जन भावनाओं से दूर गई है उसे उसका नुकसान उठाना पड़ा है। मुझे खुशी होती अगर प्रधानमंत्री जी यहां होते, हम अपनी वेदना उनसे कह पाते। उन्होंने चुनाव में अपने भाषण में कहा कि हम आम आदमी की वेदना से जुड़ेंगे और आज प्रधानमंत्री जी ने भाषण दिया कि हम बिलकुल रोल बैक नहीं करेंगे। अरे, पार्िलयामेंट कांस्टीच्यूट हो गई है, आप यहां बात करो। यहां बहस होती, हो सकता है दो, ढाई या तीन रुपए बढ़ते। सबकी भावना इसमें जोड़ी जाती, तब भाव बढ़ता तो बात कुछ और थी। आपने तो सीधा बढ़ा दिया। हमारे वित्त मंत्री ने भी कहा और हमारे प्रधान मंत्री जी ने भी कहा था कि हम दाम नहीं बढ़ाएंगे। डैमोक़ेसी में पार्िलयामेंट सुप्रीम है। पार्िलयामेंट में बहस हो उससे पहले ही आपने कह दिया कि वापस नहीं लेंगे। हमारे भाइयों ने सही बात कही है। इस बात के लिए तो आप हमें जिम्मेदार ठहराते थे कि हम नॉन-डैमोक़ेटिक हैं। जब आप अपोजिशन में थे तो आपने हमें भाषण सुनाए। राम नाईक जी, आप यहां से बोलते थे, हमारी खिंचाई किया करते थे, आज आप चुप बैठे हैं। हम लोग आपकी बात सुनकर उस पर गौर किया करते थे। यहां नहीं बोल पाते थे तो बाहर जाकर कहा करते थे कि इस पर सरकार को कुछ करना चाहिए। आप इस बोझ को कुछ कम करो। हम जानते हैं कि नयी-नयी सरकार बनी है,आपकी मजबूरी है, इंटरनेशनल प्रैशर है, लेकिन इस बोझ को सलाह करके कम करो। हम आपको सहयोग देंगे। हम भी लोगों से कहेंगे कि इतना आप सहन करो, इतना सरकार सहन करेगी। मैं आपसे इस बोझ को कम करने की अपील करने के लिए खड़ा हुआ हूं। हम सबकी यही भावना है और यह सच्ची बात है। चाहे आपकी पार्टी के एम.पीज हों या दूसरी पार्टी के एम.पीज हों, सबकी यही भावना है। माननीय प्रधान मंत्री जहां भी सुन रहे हों, उनका तो कवि का हृदय है, वेदना होते ही कलम चल जाती है। आज कलम कयों रुकी बैठी है। कलम को चला कर जनता की वेदना को कम करो, बोझ को कम करो। मैं माननीय यशवंत सिन्हा जी की बात करूंगा। पैडी की सपोर्ट प्राइस आपने एनाउंस किया। उसकी जो कलेकशन होनी थी वह नहीं हुई है। मैं अभी दो राज्यों का दौरा करके आया हूं, वहां कोई भी पैडी नहीं खरीद रहा है। हजारों किवंटल पैडी बाजारों में पड़ी है, मंडियों में पड़ी है। उसे सरकार की कोई एजेंसी नहीं खरीद रही है। वे आढ़तियों को देते हैं। आपने अपनी पी.आर. में ५२० रुपया और ४९० रुपया अनाउंस कर रखा है लेकिन बिक रही है ३०० रुपये किवंटल पर। हर आदमी के मन में है कि यह गलत हो रहा है। जहां-जहां पैडीज के डिपो हें उनको खरीद करनी चाहिए। आपसे अपील है कि आप इसमें सुधार करें जिससे उसकी खरीद हो सके। डीजल की बात पर मुझे उम्मीद है कि सरकार हाउस की भावना को देखते हुए, सारे सदस्यों की भावना को देखते हुए, इस पर जल्दी फैसला लेगी और इस बारे में ज्यादा जिद्द न करे। हम आपसे प्रार्थना करेंगे कि इस पर जितनी जल्दी फैसला हो जाए उतना ठीक है। श्री यशवंत सिन्हा: आपने पैडी की बात कही। इस साल जो पैडी की सपोर्ट प्राइस फिकस की गयी है, उसके कारण सितम्बर के अंत तक ५ मलियन टन पैडी को प्रिकयोरमेंट हो गया था जो इतने कम समय में हाइयेस्ट है। श्री राजेश पायलट : सारे देश में हो गया होगा। बुलंदशहर में एक भी कांटा नहीं लगा हुआ है। मैं आपको जिले का नाम बता रहा हूं। पानीपत में नहीं लगा है, करनाल में नहीं लगा है, समालखा में, कैथल में नहीं लगा है, बाबरपुरा में नहीं लगा है। ये जो खबरें हैं इनकी आप जांच करवा लें। इससे लोगों की तकलीफें बढ़ी हैं। आपको लोगों की तकलीफों को भी ध्यान में रखना चाहिए।_______ SHRI M.V.V.S. MURTHY (VISAKHAPATNAM): Mr. Speaker Sir, in the beginning of the Session itself it is a very unpleasant task to discuss about price rise particularly of petroleum products like diesel. The tendency is to increase the prices of all commodities because of transportation. How best we could see that the price rise will not be there by the increase of the diesel price is to be worked out.
It is a fact that the price of the crude oil in the international market has shown an increasing tendency from February 1999 onwards till date. The increase in the crude oil price is more than a hundred per cent during these nine months. It is obvious that the price has to be increased. But the decision to increase the price has come maybe at a very wrong time, in the beginning of the session itself. But we have to bear this increase since there is a huge deficit in the Oil Pool Account. The country should not go to a difficult stage tomorrow by not increasing the price. It is obvious that we have to import large quantities of crude oil and the oil companies also cannot afford this increase in the price of crude oil. The Government has to take a decision to increase the price. But how to ensure that this will not have a tendency of inflation in the prices of essential commodities of day-to-day consumption? The increase in the diesel price is more than 30 per cent.
(Shri Somnath Chatterjee in the Chair) More than 30 per cent rise will also affect the transportation facilities. This is the cause of our worry. How best this matter has to be looked into has to be decided by the Government itself. It is true that there are customs duty and excise duty. There is also an element of sales tax and octroi. The last two are the subjects of the State Governments and the first two are the subjects of the Union Government. Once the price of one commodity is increased, the prices of all other items will also go up. This is a matter of concern. There is a report in the Press also that the prices of kerosene and cooking gas are likely to be increased because of the withdrawal of the subsidy. I earnestly request the Government not to resort to such things as they will affect the poor very badly.
The Chief Minister of Andhra Pradesh is also extending the cooking gas facility to the poorest of the poor, the white card holders and those who are living on subsidy. It is a matter of pride that we are extending this cooking gas facility to lakhs of poor families and kerosene is the major item consumed by the poor people. When price rise of these two items is taken into account, I am afraid that the poor people will be greatly burdened. I request the Government not to resort to such things in the near future.
There should be some rationalisation in the price of all petroleum products instead of increasing on diesel price alone. There are some administered goods like petrol, diesel and other products. It is only this time that the increase is occured in diesel price exclusively. It greatly affects the transportation of essential goods all over the country. This will also have an impact on rail and road transport. This also affects the common man""""s transport, namely, rail and road for which diesel is the major fuel. But very few options are left as to whether to increase the prices or do away with the petroleum products. We cannot do away with the petroleum products. So, we have to increase the prices but this increase has been done at one time instead of making it at frequent intervals. This has been mentioned earlier also. At least in future, if there would be any price increase of essential commodities - a majority of them are petroleum products - it should be done periodically. You should not do it at one time like 40 or 30 or 100 per cent. It will affect the pocket of the salaried people and the common man. This becomes a very heavy burden. If it is done at intervals, the life of the common man is adjusted by itself. It is a sad story this time that they have to bear the brunt of this increase. The Government should think on the lines of reducing the burden of the common man and see to it that the cost of rail and road transport will not increase. Tomorrow they should not come and ask for an increase in the cost of rail transport.
As regards road transport, some States are contemplating an increase. In Andhra Pradesh, the Government has not increased the road transport charges so far. These are some of the major factors which have to be taken into consideration. But unfortunately, this increase in diesel price has come at a time when we are going through very difficult situation. Some people believe that this is to cover up some of the losses incurred due to Kargil war and other things.
I am sure, it is not the reason for the increase in the price of diesel. The Government has not taxed us. We are happy that we have not been taxed for the Kargil expenses. We have been left out. The Government is graceful enough in that regard. But, at the same time, how best we can come to the rescue of the common man is to be looked into by our hon. Petroleum Minister. Shri Ram Naik is here. I am happy to note that at least some of the striking truckers have already resumed work. They have started moving the goods. I am sure, the others, who are on strike, will also realise that it is essential that we have to bear the expenses. I am sure, the Government will at the earliest start negotiations with them so that all of them will resume their duty and the essential commodities are lifted from one place to the other place.
The present prices of vegetables, edible oils and other things have already skyrocketed. Vegetables are not available to the common man because of the strike by the transport vehicle owners and operators. So, this has also to be taken care of at the earliest. I hope all the striking operators will resume duty realising the situation. The Government should spare no efforts in opening dialogue with them instead of telling that it will not reduce the price of diesel. The Government should explain to them the realities as to why it cannot do this and why we should bear the price increase. The Government should also explain them that they should resume normalcy in moving goods so that people will not have the burden of the high prices of vegetables etc. With these words, I conclude my speech. Sir, I thank you very much for having given this opportunity to me.
श्री अखिलेश सिंह (महाराजगंज - उत्तर प्रदेश) : माननीय सभापति जी, मैं आपका आभारी हूं कि डीज़ल मूल्यव्ृाद्धि की परिचर्चा में भाग लेने का मौका आपने मुझे दिया। मान्यवर, सरकार जनता की तकलीफ के प्रति जवाबदेह हुआ करती है। आज इस डीज़ल मूल्यव्ृाद्धि ने संपूर्ण देश में हाहाकार की स्िथति पैदा कर दी है और डीज़ल मूल्यव्ृाद्धि इस सरकार की पूर्ववर्ती सरकार ने उस समय की जब लोक सभा चुनाव के अंतिम दौर के चुनाव समाप्त हो चुके थे। शायद इन्हें इस बात का भरोसा नहीं था कि ये फिर दोबारा चुनकर जनता की अदालत में सत्तापक्ष में बैठने का काम करेंगे और इन्होंने ३ अकतूबर की मध्य रात्रि में डीज़ल मूल्य में चार रुपये की बढ़ोतरी करके देश की जनता के साथ विश्वासघात करने का काम किया, धोखाधड़ी करने का काम किया। यदि इनमें नैतिक साहस होता तो जब अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में मूल्यव्ृाद्धि हो रही थी, उस समय ही इन्होंने डीज़ल में मूल्यव्ृाद्धि की होती तो आज ये सत्तापक्ष में बैठे हुए नज़र नहीं आते, इधर बैठे हुए नज़र आते। सभापति जी, अभी जब महामहिम राष्ट्रपति जी के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा चल रही थी तो आदरणीय विजय कुमार मल्होत्रा जी ने डीज़ल मूल्यव्ृाद्धि से समाज पर पड़ने वाले प्रभाव का विश्लेषण किया। उसमें इन्होंने कहा है कि एक किलोमीटर की यात्रा पर दो पैसे प्रति किलोमीटर की व्ृाद्धि होगी। हम सदन के संज्ञान में लाना चाहते हैं कि चार रुपये प्रति लीटर मोटे तौर पर डीज़ल मूल्य में व्ृाद्धि की गई है और हमारे भारत में चलने वाली बसें तीन किलोमीटर से लेकर चार किलोमीटर प्रति लीटर की औसत दर से चला करती हैं। इस प्रकार एक रुपये से लेकर सवा रुपये प्रति किलोमीटर का अतरिकत बोझ इस डीज़ल मूल्यव्ृाद्धि से ट्रकों और बसों पर पड़ा है और इस मूल्यव्ृाद्धि ने केवल ट्रकों और बसों के यातायात को ही प्रभावित नहीं किया है, बल्िक संपूर्ण जनजीवन को प्रभावित करने का काम किया है। अभी हमारे भाई राजीव प्रताप रूडी जी ने बड़े मार्िमक तरीके से किसानों की आत्महत्या का वर्णन सदन के समक्ष किया। उन्हें इस बात पर ध्यान देना चाहिए था कि डीज़ल मूल्यव्ृाद्धि ने सबसे ज्यादा किसान की कमर को तोड़ने का काम किया है। आज जब समर्थन मूल्य की बात हम कर रहे हैं और अभी यशवंत सिन्हा जी ने समर्थन मूल्य के अंतर्गत धान की खरीदारी की बात की है, मैं सदन के माध्यम से उन्हें चुनौती देना चाहता हूं कि पूर्वी उत्तर प्रदेश के गोरखपुर, महाराजगंज, पडरौना, बस्ती जनपदों का यदि वह मूल्यांकन कराएं तो आज की तारीख तक एक किलो धान की खरीदारी भी समर्थन मूल्य पर सरकार द्वारा नहीं की गई है। पूर्व में भी यही लोग सरकार में थे। मैं चाहता हूं कि विगत वषर्ों के आंकड़ों को ये सदन के पटल पर मंगा लें। पूर्व के दिनों में भी समर्थन मूल्य पर धान की खरीददारी नहीं हुई। मैं जिस जनपद से चुनकर आता हूं वह धानबहुल महाराजगंज जनपद है और धान के किसानों को पिछले दिनों में जितनी जिल्लत झेलनी पड़ी है, मैं उसका वर्णन इस सदन के अंदर नहीं कर सकता। आज डीजल मूल्य व्ृाद्धि ने किसान और गरीब मजदूर की कमर को तोड़कर रख दिया है। यह कहते हैं कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में ४० प्रतिशत व्ृाद्धि हुई है, इसलिए हमने डीजल के मूल्यों में ४० प्रतिशत बढ़ौतरी करने का काम किया है। मान्यवर, अभी खरीफ की फसल की कटाई का दौर चल रहा है और रबी की फसल की बुआई का दौर चल रहा है। आज किसान को अपनी फसल को खेत से खलिहान तक ले जाने के लिए और धान को खलिहानों से बाजार तक ले जाने के लिए, रबी की बुआई के लिए पम्पसैट से लेकर ट्रैकटर तक हर जगह डीजल का इस्तेमाल करना पड़ रहा है और इस डीजल मूल्य व्ृाद्धि ने आज किसान की स्िथति को नश्िचत तौर पर चरमराकर रख दिया है। आज आवश्यक सेवा शतर्ों के नाम पर यह ट्रक ऑपरेटरों की हड़ताल को तोड़ने के लिए उन्हें जेलों में बंद करने की धमकी दे रहे हैं। हम इनसे यह कहना चाहते हैं कि आपकी जो जेलों में बंद करने की धमकी की भाषा है, यह धमकी की भाषा बंद होनी चाहिए। यदि सारे ट्रक ऑपरेटरो और बस ऑपरेटरों ने यह तय कर लिया कि हम जेलों के अंदर जाने का काम करेंगे तो मैं कहना चाहता हूं कि इनकी जेलों में जगह कम पड़ जायेगी और जब जनता जन-विद्रोह के रास्ते पर उतर जायेगी तो इनके लिए प्रशासन चलाना मुश्िकल हो जायेगा। इसलिए यह धमकी भरी भाषा का इस्तेमाल बंद होना चाहिए। ट्रक ऑपरेटरों की पीड़ा को इन्हें समझना चाहिए, किसानों के दर्द को इन्हें समझना चाहिए, आम अवाम के दर्द को इन्हें समझना चाहिए और सबके दर्द को समझकर फिर इन्हें अभी तात्कालिक तौर पर डीजल की मूल्यव्ृाद्धि को वापस लेना चाहिए और तत्काल इस मूल्य व्ृाद्धि को वापस लेकर फिर सदन के सारे दलों के नेताओं को बैठकर इस समस्या से निपटने के लिए एक स्पष्ट रणनीति तैयार करनी चाहिए। हम आपके माध्यम से यह कहना चाहते हैं कि आज डीजल की मूल्यव्ृाद्धि ने गांव की गरीब महिला से लेकर अमीर तक सभी को प्रभावित करने का कार्य किया है। मुझे यह कहने में तनिक भी संकोच नहीं है कि अमीरों के ऊपर इसका कम प्रभाव पड़ा है और गरीब के ऊपर इसका ज्यादा प्रभाव पड़ा है और चूंकि ये अमीरों के पक्षधर हैं, इसलिए इन्होंने अमीरों की पक्षधरता को प्रदर्िशत करते हुए डीजल के मूल्य में भारी व्ृाद्धि करने का कार्य किया है और उसके दुष्परिणाम आज पूरे देश के अंदर उभरकर सामने आने लगे हैं। सभापति महोदय, अभी रेल भाड़े में भी व्ृाद्धि होगी। अभी मैंने श्री राम नाइक जी के बयान को अखबारों में पढ़ा कि वह एल.पी.जी. और केरोसिन के दामों में भी व्ृाद्धि करने जा रहे हैं। नश्िचत तौर पर डीजल से हमारी दैनिक... (व्यवधान)
पैट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री (श्री राम नाईक): मैंने केरोसिन के लिए नहीं कहा ... (व्यवधान) श्री अखिलेश सिंह : केरोसिन और एल.पी.जी. के लिए अखबारों में मैंने पढ़ा है, हो सकता है कि अखबारों में गलत बात छप गई हो... (व्यवधान)
आपने सब्िसडी में कटौती की बात कही है। हम यह कहना चाहते हैं कि आज जो डीजल की मूल्य व्ृाद्धि से एक नई स्िथति उत्पन्न हुई है, उससे सारी चीजों के दामों में बढ़ौतरी के आसार स्पष्ट तौर पर दिखायी दे रहे हैं और यह बढ़ौतरी गरीब कर्मचारी से लेकर बड़े आदमी तक को प्रभावित करने का काम करेगी। डीजल मूल्य व्ृाद्धि ऐसा विषय नहीं है जिसको यहीं पर छोड़ दिया जाए। हम बड़ी विनम्रतापूर्वक कहना चाहते हैं कि यदि आपकी नीयत साफ थी, आपकी सोच साफ थी तो आपको जनादेश के आने की प्रतीक्षा करनी चाहिए थी। जब जनादेश स्पष्ट तौर पर और उभरकर आपके पक्ष में आ जाता और आप इस सदन में बैठ जाते तो फिर सबकी राय लेते और उसके बाद डीजल के संदर्भ में निर्णय लेते तो यह आपका लोकतांत्रिक कदम माना जाता। लेकिन आने वाली परस्िथतियों में तीन अकटूबर की रात को १२ बजे आपने डीजल के मूल्य में व्ृाद्धि करने का कार्य किया, नश्िचत तौर पर वे परस्िथतियां, वह वातावरण आपको संदेह के वातावरण में घेरने का काम करते हैं। हम आज आपके माध्यम से सरकार से मांग करते हैं कि वह डीजल के मूल्य मैं की गई बढ़ौतरी को तत्काल वापिस लेने का काम करे। आज डीजल के मूल्य की बढ़ौतरी ने सम्पूर्ण जन-जीवन को उद्वेलित करने का काम किया है। इन्हीं शब्दों के साथ मैं आपको धन्यवाद देता हूं।
श्री नवल किशोर राय (सीतामढ़ी): सभापति महोदय, अभी जो डीजल मूल्य व्ृाद्धि की गई है, सरकार के लिए वह कठिन फैसला था। किस परस्िथति में सरकार को यह फैसला लेना पड़ा, इसके ऊपर सदन में और सदन से बाहर चर्चा हो रही है। सभी माननीय सदस्यों को भी माननीय राम नाईक जी की तरफ से जो नोट भेजे गए हैं उनमें भी यह स्पष्ट किया गया है कि जो इंटरनैशनल ऑयल मार्केट है, उसमें जिस प्रकार से बढ़ोत्तरी हुई है और ऑयल पूल का घाटा बढ़कर असहय स्िथति में पहुंचने के बाद सरकार को यह दुरूह फैसला लेना पड़ा। नश्िचत रूप से इस प्रकार की स्िथति देश की सभी राज्य सरकारों और देश के सभी पक्ष के लोगों के लिए चिन्ता का विषय है, लेकिन इस स्िथति पर कुल मिलाकर देश में सामंजस्य स्थापित करके ऐसे समय में इस कठिन स्िथति का सामना करना चाहिए, यहां पर कमोबेश राजनीति को छोड़कर, चारों तरफ से, यही विचार उभर कर आए हैं। सभापति जी, अभी माननीय पायलट साहब ने निष्पक्ष भाव से कुछ कहने का प्रयत्न किया और उन्होंने पार्िलयामेंट में चर्चा करा के पार्िलयामेंट से तय कराने की बात कही है। मैं उनके इस निष्पक्ष भाव की सराहना करता हूं, लेकिन ५० साल की देश की आजादी के समय में से ४५ साल तो उनकी सरकार सत्ता में रही, लेकिन तब उन्होंने कभी ऐसा नहीं सोचा, लेकिन अब विपक्ष में हैं, तो निष्पक्ष भाव से सलाह देना चाहते हैं और कहते हैं कि पार्िलयामेंट से सब कुछ तय हो जाए, यह बहुत अच्छी बात है। इसका मैं समर्थन करता हूं। सभापति महोदय, अन्तर्राष्ट्रीय बाजार में १२४ डॉलर से १६३ डॉलर कच्चे तेल का दाम बढ़ा है। उसके अनुसार चार रुपए के लगभग यानी ३० फीसदी व्ृाद्धि हुई है। मुझे यह देखकर आश्चर्य होता है कि जब हम ३० प्रतिशत डीजल के दामों में व्ृाद्धि के सरकार के दुरूह और कठिन फैसले की आलोचना तो करते हैं, लेकिन राज्य सरकार ने, जहां अभी हम खड़े हैं वहां दिल्ली में ३० प्रतिशत के बजाय डी.टी.सी.के किराए में १०० प्रतिशत की व्ृाद्धि की है। होना तो यह चाहिए था कि डीजल के ३० प्रतिशत व्ृाद्धि के अनुपात में बस के किराए में भी ३० प्रतिशत की ही व्ृाद्धि की जाती, लेकिन वैसा नहीं किया गया और पांच रुपए किराए के स्थान पर दुगना करके १० रुपए कर दिया गया। हम आपके माध्यम से इस सदन के समक्ष सरकार से कहना चाहते हैं कि इस पर नियंत्रण होना चाहिए और इसके ऊपर ध्यान दिया जाना चाहिए कि ३० प्रतिशत के स्थान पर बसों का किराया १०० प्रतिशत कयों बढ़ा दिया गया। हम चाहते हैं कि ऐसा नहीं होना चाहिए। सभापति महोदय, इसमें इम्पोर्ट डयूटी, एकसाइज डयूटी, सेल्स टैकस, सभी को जमा करके यह जो डीजल की प्राइस बढ़ाई गई है और खासकर जिसकी मार किसानों पर पड़ने वाली है और यह जो दुरूह निर्णय हुआ है, इस पर पुनर्िवचार करने हेतु मैं आपके माध्यम से सरकार से अनुरोध करना चाहता हूं, ताकि किसानों पर जो यह बहुत बड़ी मार पड़ी है, इससे राहत देने हेतु कोई न कोई नीति बनाकर उसे राहत देने का प्रयास करना चाहिए, ऐसी मेरी मान्यता है, लेकिन मैं इस बात को साफ करना चाहता हूं कि राज्य सरकारें जिस प्रकार से राजनीति कर रही हैं, वह ठीक नहीं है। यदि राज्य सरकारें इसी प्रकार से राजनीति करेंगी और ऑयल पूल का घाटा इसी प्रकार से बढ़ता रहेगा, तो किसान और देश का आम आदमी बुरी तरह मारा जाता रहेगा। इसलिए मेरा निवेदन है कि राज्यों को राजनीति नहीं करनी चाहिए और राजनीति से ऊपर उठकर इसका हल निकालना चाहिए। सभापति महोदय, अभी नाग मणि जी ने कहा, मैं उनसे कहना चाहता हूं कि जो स्िथति दिल्ली की है, वही स्िथति बिहार की है। वहां भी डिस्टि्रकट मजिस्ट्रेट ने ३० प्रतिशत डीजल में बढ़ोत्तरी के आधार पर १०० प्रतिशत किराया बढ़ाने का काम किया है। जब हम सदन में आते हैं, सदन में चर्चा करते हैं, तो ऑयल पूल के व्यापक घाटे को पाटने के लिए सरकार ने जो दुरूह फैसला लिया है, इस पर हमें विचार करना चाहिए और हम सरकार से भी अपील करना चाहते हैं, गुजारिश करना चाहते हैं, आग्रह करना चाहते हैं कि एक बार वह अपने इस फैसले पर पुनर्िवचार करे और जो कॉमन मैन है, किसान है, मजदूर है उनके ऊपर जो मार पड़ी है, उससे उसे राहत देने के लिए चार रुपए से कुछ घटाने की कृपा करें। जहां हम केन्द्र सरकार से अपील करते हैं वहीं पर हमें यह भी देखना चाहिए कि राज्य सरकारों के जरिए जो राजनीति हो रही है और उन्होंने ३० प्रतिशत के स्थान पर जो १०० प्रतिशत किराया बढ़ाने का काम किया है, वह नहीं करना चाहिए। सभापति महोदय, गांव की जनता गिनती नहीं जानती है और न व इस गणित को समझती है कि ऑयल पूल के घाटे के कारण किराये को १०० प्रतिशत बढ़ाया गया है। हम आपके जरिए सरकार से यह अनुरोध करना चाहते हैं कि राज्य सरकारों से भी अनुरोध है, खासकर के दिल्ली और बिहार में जो १०० प्रतिशत किराया बढ़ाया है, उसका भी मुकम्मल इंतजाम होना चाहिए ताकि एक सम्यक नीति बन सके। हम आपके माध्यम से सरकार से गुजारिश करना चाहते हैं कि वह डीजल के बढ़े हुए दामों के बारे में पुनर्िवचार करे। साथ ही केरोसिन तेल, जो कि कॉमन मैन के लिए है, जैसा अभी माननीय सदस्यों ने चर्चा की कि गांवों में लोग दिये जलाते हैं, दीपक जलाते हैं, उसमें पड़ने वाले केरोसिन तेल के दाम में किसी भी प्रकार की व्ृाद्धि न हो, ऐसी भविष्य के लिए मांग करते हुए तथा आपके प्रति आभार व्यकत करते हुए, मैं अपनी बात समाप्त करता हूं। कुमारी मायावती : माननीय सभापति जी, मैं आपके माध्यम से एन.डी.ए. की सरकार से रिकवैस्ट करना चाहूंगी कि डीजल की कीमतों में जो व्ृाद्धि की गई है, उसे तुरंत वापस लिया जाये कयोंकि इसका सीधा प्रभाव किसानों पर तो पड़ ही रहा है, उसके साथ-साथ देश की आम जनता के ऊपर भी पड़ रहा है। ऐसे परिवहन के साधन जो डीजल से चलते हैं, जब आपने डीजल की कीमतें बढ़ाई है तो स्वाभाविक है कि ट्रांसपोर्ट के मालिकों का भी किराया बढ़ाना पड़ेगा । जब किराया बढ़ेगा तो उससे सभी वस्तुओं की कीमतों में व्ृाद्धि होगी और उसका सबसे बुरा प्रभाव ऐसे लोगों पर पड़ेगा जो मेहनत-मजदूरी करके एक दिन में ४० या ५० रुपये कमाते हैं। आजीविका कमाने के लिए उनको बस के माध्यम से या दूसरे साधनों के माध्यम से दस या बीस किलोमीटर जाना पड़ता है। उस मजदूरी में से किराया देकर उनके पास जो बचेगा, वह खाद्य सामग्रियां खरीदने के लिए काफी नहीं होगा कयोंकि इसका सीधा प्रभाव खाद्य सामग्रियों की वस्तुओं के दामों पर पड़ेगा जिससे उनके लिए खाद्य सामग्रियां खरीदना मुश्िकल हो जायेगा। मैं आपके माध्यम से सरकार को बताना चाहती हूं कि इससे पहले भी आपकी १३ महीने सरकार चली और उस दौरान जब आपने वस्तुओं की कीमतें बढ़ाईं, उस समय जिन चार राज्यों में विधान सभा के इलैकशन हुए तो उसका इतना बुरा प्रभाव पड़ा कि कई राज्यों में सत्ता आपके हाथ से निकल गई। मैं आपको बताना चाहती हूं कि तीन तारीख की रात को आपने डीजल की कीमतों में व्ृाद्धि की है। यदि इलैकशन के दौरान आपने डीजल के दाम में व्ृाद्धि की होती तो मैं समझती हूं कि आज जो आप सत्ता पक्ष में बैठे हुए हैं, वहां न बैठे होते और आप विपक्ष में नजर आते। इसमें कोई शक-शुबहा नहीं है कि भारतीय जनता पार्टी के नेत्ृात्व में जो एन.डी.ए. की मिली-जुली सरकार चल रही है, ऐसी भारतीय जनता पार्टी के बारे में अकसर कहा जाता है कि यह बिजनेस कलास की पार्टी है। आपने डीज़ल की कीमतों में जिस तरह कई गुना व्ृाद्धि की है, उसके पीछे जरूर कुछ न कुछ हमें आपके षडयंत्र का हाथ नजर आता है। आम जनता अकसर यह कहती है कि इलैकशन के दौरान जिन बड़े-बड़े बिजनैस कलास के लोगों का आर्िथक सहयोग लेकर आपने इलैकशन लड़ा है, जैसे ही इलैकशन खत्म हुए, उन्हें फायदा पहुंचाने के लिए आपने ३ तारीख की रात को डीजल की कीमतों में व्ृाद्धि की है। मैं समझती हूं कि इससे आम नागरिक को नुकसान होगा, किसानों को नुकसान होगा लेकिन बड़े-बड़े बिजनैसमैनों को नुकसान नहीं होने वाला है। यदि आप आर्िथक तंत्र के बारे में कहते हैं कि हमें घाटे को रोकना है और देश की आर्िथक स्िथति की तरफ भी ध्यान देना है तो मेरी आपसे यही रिकवैस्ट है कि देश में विलासिता की बहुत सी ऐसी चीजें हैं जिनका आम नागरिक या किसानों से कुछ लेना-देना नहीं है। डीजल की कीमत में व्ृाद्धि करने के बजाए यदि आप विलासिता की वस्तुओं पर कई गुना टैकस लगा देते तो उस घाटे की भरपाई उधर से कर सकते थे। मेरा कहना है कि यदि आप अपनी जिद पर अड़े रहे, आप यह महसूस कर रहे हैं कि आज आपको इसका नुकसान नहीं होगा लेकिन यदि पांच साल से पहले फिर इलैकशन हो गए तो आपको बहुत भारी नुकसान होगा, फिर आप सत्ता में नजर नहीं आएंगे, विपक्ष में नजर आएंगे। इसलिए माननीय सभापति जी, मेरी आपके माध्यम से सत्ता पक्ष के लोगों से यही रिकवैस्ट है, हालांकि एन.डी.ए. में बहुत से घटक ऐसे हैं जो काफी दुखी हैं और जिस क्षेत्र से वे चुनकर आए हैं, वहां की जनता उनको घसीट रही है, उनको प्रवोक कर रही है कि आप चुप कयों बैठे हैं, आपको भी मुंह खोलना चाहिए। एन.डी.ए. में बहुत से घटक दल दबी जुबान से डीजल की बढ़ी हुई कीमतों के बारे में कहना तो चाहते हैं लेकिन दूसरी तरफ यह कहते हैं कि अंतर्राष्ट्रीय बाजार में डीजल के मूल्यों की व्ृाद्धि को ध्यान में रखकर सरकार को यह फैसला लेना पड़ा। सरकार को यह भी बताना चाहिए कि अंतर्राष्ट्रीय बाजार में डीजल के मूल्यों में कब व्ृाद्धि हुई। जैसे ही व्ृाद्धि हुई थी, उसी समय आपने यह व्ृाद्धि कयों नहीं की? जैसे ही इलैकशन समाप्त हो जाता है, उसी रात आप डीजल के मूल्यों में व्ृाद्धि करते हैं। मुझे ऐसा लगता है कि आपने यह फैसला राजनीतिक मकसद से लिया है और बिजनैस कलास को फायदा पहुंचाने के लिए लिया है, किसानों को नुकसान पहुंचाने के लिए लिया है, आम नागरिक को नुकसान पहुंचाने के लिए लिया है। सभापति जी, मेरी आपके माध्यम से पुन: एन.डी.ए. के लोगों से रिकवैस्ट है, भारतीय जनता पार्टी के नेत्ृात्व में एन.डी.ए. की जो मिली-जुली सरकार चल रही है, उनसे रिकवैस्ट है कि आप सरकार पर दबाव बनाएं, प्रधान मंत्री जी पर दबाव बनाएं ताकि डीजल के मूल्यों में जो व्ृाद्धि हुई है, उसे वापस लिया जाए अन्यथा भारतीय जनता पार्टी के साथ-साथ एन.डी.ए. में जो और घटक दल हैं, उनका दुबारा चुनकर आना बहुत मुश्िकल हो जाएगा। मुझे लगता है कि आप मेरी बात पर जरूर ध्यान देंगे। इन्हीं लफज़ों के साथ और ज्यादा समय न लेते हुए, आपने मुझे बोलने का समय दिया, इसके लिए मैं आपको धन्यवाद देती हूं।
SHRI P.H. PANDIAN (TIRUNELVELI): Mr. Chairman, Sir, on behalf of the All India Anna DMK, I would like to place a few facts and appeal to the House to direct the Government to withdraw the diesel hike raised on the 5th October.
At the outset I would like to state that on the 5th October, the care-taker Government headed by the Prime Minister was functioning.
Whether a caretaker Government can take such a major policy decision has to be viewed seriously by the House. The Minister who made the statement hiking the diesel price has been voted out of office. On 5th September, we faced the general elections. On 5th October, the diesel price hike was announced by the Minister, that is, on the eve of counting. Sixth was the counting day.
We all know that electoral promises are not enforceable in law. You can make any promise to the people to get votes with sugarcoated words. After the people have cast their votes or their votes are in the ballot boxes, the people have to abide by the decision of the Government. I would like to state at this juncture that when Shri Charan Singh was the Caretaker Prime Minister, it was challenged before the Calcutta High Court in the year 1980 whether the Caretaker Prime Minister can function as a full-fledged Prime Minister. I could see that after the fall of Shri Vajpayee""""s Government, he was functioning as a full-fledged Prime Minister. Prior to that, I think, he was functioning as the caretaker Prime Minister.
I quote a case. Mr. Chairman, you know it is the case of Calcutta High Court. It is AIR 1980 Calcutta High Court, page 85, Madan Murari Verma Vs. Charan Singh. Their Lordships have held:
"There is no Constitutional precedent as to how far the advice of the Prime Minister and his Cabinet is binding on the President in a situation where the Prime Minister and his Council of Ministers had never obtained and had never proven their majority in the House of People and after their resignations have been accepted and after the dissolution of the House they were asked to continue in office till alternative arrangements are made. There is no mention of any caretaker Government as such, in our Constitution or in the Constitutional law, but such an extraordinary situation calls for a caretaker Government and, therefore, the Prime Minister and his Council of Ministers can in such a situation only carry on day to day administration..."
The diesel price hike is not a day to day administration affair. It is a policy matter. The then Caretaker Government had no Constitutional power to hike the diesel price. It should have hiked it when it was in office with full-fledged majority. After having lost the majority, they should not have hiked the diesel price.
My friend has just now said that the operators have started operating their locomotives. Throughout India, all the locomotives, motors, vehicles, lorries and trucks went on strike. They are not operating. If they have been operating, why should there be a hike in the price of essential commodities? Today, it is published in all the newspapers that the prices of vegetables have gone up; the prices of eatables have gone up; and the prices of essential commodities have gone up. Why? It is because of the strike. What for? It is because of the hike in the diesel price. I appeal, Mr. Chairman, through you, to the Central Government to withdraw the hike in the diesel price with an observation that it has no popular mandate.
Had we, the present House, gone in for this hike, then the deliberation is just and proper. But the Caretaker Government without the Constitutional power, without any Constitutional exercise, has raised the diesel price all of a sudden, that too after the elections.
I do not like to use any tough language. If an individual cheats a person after promising, then he is liable for cheating. But here the whole country was cheated by the then caretaker Government. The people have cast their votes believing that BJP may reduce the price because the Minister has circulated a note to all the Members that this was hiked as early as in 1997. Why did they keep quiet? Is it not a political dishonesty? Is it not a constitutional dishonesty? Is it not a constitutional impropriety? It is the constitutional duty of the Government to withdraw the hike as they had no power at that particular point of time on 5th October. There were so many policy decisions taken by the Government. I have not gone into all those things. But this is an essential commodity which the people conserve daily. The bus fares and other fares have gone up after the 5th October. Particularly in Tamil Nadu, the bus fares have been hiked and they hav been doubled there. The Chief Minister had promised that he would hike the bus fares only after 2001. Now, the Central Government has hiked the diesel price with the result that the people of Tamil Nadu had been suffering for the last one month by paying extra money. So, this constitutional impropriety and constitutional dishonesty is committed on behalf of the Government by an erstwhile petroleum Minister, who has been voted out of office by my friend, Shri Selvaganapathy, who is sitting here. ...(Interruptions). We, the Members, did not contribute anything for hiking the price of diesel. We were not party to it. We have not been consulted. We we are yet to be consulted. Now, we are deliberating on somebody""""s mistake. We are deliberating on somebody""""s conduct. On 5th October why should the Minister, who knew well that he would be defeated, raise the cost of diesel?
So, I appeal to you to direct the Government to withdraw the hike in the interest of the country, in the interest of the poor people and in the interest of the farmers. The farmer is the largest consumer of diesel. He cannot bear the 35 per cent hike. The Supreme Court has also issued a notice to the Government of Delhi that no new diesel car will be registered hereafter in Delhi.
So, I appeal to you to withdraw the diesel price hike and save the people. श्री रघुवंश प्रसाद सिंह (वैशाली): सभापति महोदय, छ: तारीख को हम नहा-धोकर गिनती के हाल में जाने को तैयार थे, तो सूचना मिली कि अखबार में आया है कि डीजल का भाव बढ़ गया है। नवल किशोर जी कह रहे थे कि ३० प्रतिशत बढ़ा है, लेकिन ४० प्रतिशत बढ़ा है। इतना बड़ा जनविरोधी, किसान विरोधी और गरीब विरोधी कार्य अभी तक किसी सरकार ने नहीं किया है, जितना कि इस सरकार ने किया है। यह हम सवाल उठाना चाहते हैं। इसी सदन में विश्वास प्रस्ताव नहीं हो सकता था और सरकार गिर गई। महामहिम राष्ट्रपति जी के पास त्यागपत्र देने गए। राष्ट्रपति जी ने त्यागपत्र स्वीकार किया और कहा कि काम-चलाऊ सरकार के रूप में रूटीन वर्क करिए। यह परम्परा रही है, जब लोकसभा भंग हो जाती है, तो रूटीनवर्क करना होता है, लेकिन ये शुरू से ही दावा करते रहे कि हम लोग फुलफलैज्ड गवर्नमेंट हैं और जो चाहेंगे, वहीं करेंगे। बेलगाम सरकार, पार्िलयामेंट नहीं है, हम लोग सड़क पर हैं और इन लोगों को मनमाने ढंग से काम करने की आजादी और जनविरोधी काम करने का अधिकार मिल गया। सरकार जवाब दे, किस परस्िथति में पांच तारीख को इन्होंने डीजल के भाव बढ़ाने का काम किया, जबकि लोकसभा भंग हो गई और काम-चलाऊ सरकार है? इनको रूटीन वर्क करना था, लेकिन किस हाल में इन्होंने यह काम किया? मैं कहना चाहता हूं कि लोकसभा भंग नहीं भी रहती, बहुमत की भी इनकी सरकार रहती, त्यागपत्र नहीं भी दिया होता, लेकिन जिस समय देश भर में चुनाव हो चुका है, बकसों में बैलेटस बन्द हैं, गिनती नहीं हुई है, तो किस हैसियत से इन्होंने आने वाली सरकार की प्रतीक्षा नहीं की? एग्ज़िट-पोल में कहा गया, इन लोगों ने प्रचार कराया कि हमारा राज आ रहा है, उसी मनसूबे पर इनका मन बढ़ गया कि इन्होंने भाव बढ़ा लिया। इसकी इजाजत जनता ने हम लोगों को दे दी। मैं पूछता हूं, इन्होंने प्रतीक्षा कयों नहीं की? सरकार में कोई मंत्री है कि वह इसका जवाब दे कि इनको डीजल के भाव बढ़ाने का कया राइट था? चालीस प्रतीशत आज तक व्ृाद्धि नहीं हुई है। इन्होंने चालीस प्रतिशत कीमत बढ़ा दी। डीजल से किसान पम्प सैट चलाने का काम करता है। ट्रैकटर चलाने का काम करता है, लेकिन इन्होंने डयोढ़ी कीमत बढ़ा दी। इसी वजह से बसों के किराए भी बढ़ गए, साथ राष्ट्रविरोधी ट्रकों की स्ट्राइक हो गई। दिल्ली में फल-सब्जी की कीमत दो गुनी हो गई है। इस पर भी सरकार कहती है कि वाजिब किया है। इनके सदस्य कहते हैं कि ठीक किया है, कयोंकि लाचारी है। कहा गया कि अन्तरराष्ट्रीय कीमतों पर चलते हैं। असत्य बोल कर सदन को गुमराह करते रहे। छ: महीने के आंकड़े दिए हैं कि २५०० से आंकड़ा ३४०० हुआ और फिर ५००० हो गया। बैल्टस वकसों में बंद है। हमारे गांव में बोलते हैं - "भेल ब्याह मोर करब की।" इनको भाव बढ़ाने की, कीमत बढ़ाने की आजादी मिल गई। यह जनविरोधी कार्य है, कीमतें नहीं बढ़नी चाहिए। इसलिए मैं कहना चाहता हूं, तुरन्त सरकार डीजल की कीमतें वापिस करे। लोग कहते हैं कि पांच साल के बाद इनको अटल सिखाएगा। लोहिया ने कहा था - जिन्दा कौम पांच साल का इन्तजार नहीं करती। उस समय भी कह रहे थे कि पांच साल राज करेंगे और तेरह महीने में ही लौटा दिए गए। उसी तरह आप सावधान और सजग हो जाइए, पांच साल तो कया, आप पांच महीने में ही वापिस किए जायेंगे। इस प्रकार आपने किसानों के ऊपर आपने वज्रघात किया है। गरीबों के हितों पर घात करने का काम किया है। इससे गांवों में बेतहाशा चीजों की व्ृाद्धि होगी और मंहगाई को आप रोक नहीं पायेंगे। हम जानते हैं कि आप किस के हितों के रक्षक हैं। जमाखोर, कालाबाजारी, चोरबाजारी, मुनाफाखोरी करने वालों के ये संरक्षक हैं। इसलिए भाव बढ़ने से इन्हें मजा आता है। पिछले साल भी भाव बढ़े थे। सदन में बहस हुई थी, हम लोगों ने कहा था कि आप साबित करिए कि आप जमाखोरों और मुनाफाखोरों के संरक्षक नहीं हैं। उनकी मदद से आप आए हैं इसलिए आप उसके हित के संरक्षक हैं, यह सरकार किसान और आम जनता की दुश्मन है। यह सरकार इसे वापस लें अन्यथा जनता आंदोलन करेगी और तमाम विपक्ष के मेम्बर्स एकजुट होकर इनको बीच में ही यहां से निकाल देंगे। इन्हीं शब्दों के साथ मैं आपको धन्यवाद देता हूं।MR. CHAIRMAN : Shri Prabhunath Singh to speak.
... (Interruptions)
MR. CHAIRMAN : I have called Shri Prabhunath Singh. Nothing else should be recorded.
(Interruptions) ... (Not recorded) MR. CHAIRMAN : Silence please. Please do not interrupt. I have called Shri Prabhunath Singh. Shri Prabhunath Singh, you may begin.
श्री प्रभुनाथ सिंह (महाराजगंज) : सभापति महोदय, डीजल का दाम बढ़ा है और इसके लिए पूरा सदन चन्ितत है। डीजल का दाम बढ़ने से देश के गांव-गांव में भी काफी इस बढ़ोत्तरी पर चर्चा हुई है। हालांकि प्रधानमंत्री जी और सरकार ने बढ़ोत्तरी के कारणों को स्पष्ट किया है लेकिन कारणों से ऐसा लगता है कि सरकार दाम बढ़ाने के लिए विवश है। हर बात का सदन में राजनीतिकरण हो जाता है। राजेश पायलट जी बोल रहे थे, हम उनकी कुछ बातों को छोड़ कर लगभग सभी बातों से सहमत हैं। देश में जो गरीब लोग हैं, खास कर जो मझोले किसान और मजदूर कलास के लोग हैं उन्हें डीजल का दाम बढ़ने से काफी परेशानी हुई लेकिन इसका राजनीतिकरण इस ढंग से हो रहा है, जो ट्रांसपोर्टर हड़ताल कर रहे हैं कुछ राजनीतिक दल के लोग उनकी हड़ताल बढ़वा रहे हैं। वह इसलिए उनकी हड़ताल बढ़वा रहे हैं ताकि कुछ सामानों के मूल्य बढ़ें। महोदय, हम विपक्ष के लोगों से कहना चाहेंगे कि इस सरकार पर दबाव बनाएं कि डीजल के मूल्य कम हों लेकिन राजनीतिकरण इस ढंग से न हो कि आम लोगों को इससे परेशानी बढ़े। इसलिए हम विपक्ष के लोगों से यही निवेदन करेंगे, हम रघुवंश बाबू का भाषण सुन रहे थे वह कह रहे थे कि १३ महीनों में सरकार चली गई और अब पांच महीने में घसीट कर हटा देंगे। रघुवंश बाबू, आपने १३ महीने में सरकार हटाई तो आपकी संख्या सात पर आ गई और कांग्रेस के लोग १४० से ११२ पर आ गए। अगर आप पांच महीने में हटाएंगे तो आप शून्य पर आ जाएंगे तथा कांग्रेस के लोग सिर्फ १२ पर आ जाएंगे, इसलिए ऐसी भूल दोबारा मत कीजिए। जनता ने जिसे विश्वास दिया है, अगर सरकार से गलतियां होती हैं तो नश्िचत तौर पर दबाव डालने की जरूरत है, इस बात से हम भी सहमत हैं जो दाम बढ़ा है हम भी उससे चन्ितत हैं। वित्त मंत्री जी, आपके केबिनेट में एक बहुत ईमानदार मंत्री नीतीश कुमार जी हैं। जब वह रेल मंत्री थे तो उस समय एकसीडेंट बढ़ रहे थे उन्होंने इस्तीफा दे दिया और उसके बाद से एकसीडेंट रुक गए। संयोग से फिर दूसरे मंत्रिमंडल में आपने जो पद दिया तो आपने डीजल का दाम बढ़ाया, फिर ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल शुरु हो गई। उसी बेचारे के ऊपर गाज़ गिरती है। वह जब रेल मंत्री बने तो तब उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। जब वह सरफेस ट्रांसपोर्ट के मंत्री बने तो आपने डीजल के दाम बढ़ा दिए, हम तो कहेंगे कि आप कृपा करके थोड़ा सा डीजल का दाम घटा दीजिए। इस डीजल के दाम घटाने से जहां उनके विभाग का काम भी चलेगा वहीं गरीब जनता को भी राहत मिलेगी। हम आपके सदस्य हैं इसलिए गलत बिल भी लाओगे तो उसका समर्थन करने के लिए हम मजबूर हैं। लेकिन मैं यह जनहित में कह रहा हूं कि जितना मूल्य एक बार में बढ़ा है उससे लोगों को कष्ट हुआ है। इसलिए जनहित में आप दाम घटाइये। जो चार रुपया दाम बढ़ा है उसे कम कीजिए, तभी जनता इसे स्वीकार करेगी। आपको बिहार की तरफ भी ध्यान देना चाहिए। जो यहां संसद में एक मिनट में सरकार बनाने की बात कर चुटकी बजा रहे थे, अब बिहार में चुटकी बजा रहे हैं। हमारे देश की जनता गांवों में रहती है। किसानों और मजदूरों की भावनाओं को देखते हुए आप डीजल के दाम घटा दीजिए। नीतीश कुमार जी पर भी थोड़ी कृपा कीजिए। सभापति महोदय : श्री वी.एम.सुधीरन। (व्यवधान) श्री रघुवंश प्रसाद सिंह : अब आप डीजल के भाव घटाने के लिए बोलिये। ... (व्यवधान) मेरे पीछे से उठ गये डीजल पर सपोर्ट करने के लिए।MR. CHAIRMAN : I have called Shri Sudheeran.
SHRI RAJIV PRATAP RUDY (CHHAPRA): When he calls my name, I have to respond.
... (Interruptions)
MR. CHAIRMAN: You have spoken very well. Why are you spoiling it?
... (Interruptions)
SHRI V.M. SUDHEERAN (ALLEPPEY): Sir, the decision of the Government to hike the prices of diesel has thrown the people into deep miseries and untold difficulties. Sir, as all of us remember and as the hon. Chairman and my esteemed friend Shri Pandian rightly put, this decision was taken by the Caretaker Government just before the counting of ballots. This reflects the Government""""s arrogant disregard for the propriety, the democratic practice and conventions. The Caretaker Government did not care even to wait for the sweeping decision till the new Government took over. I am sorry to hear from the Prime Minister that he ruled out any rolling back in the price of diesel. Sir, I am again sorry to say that it is thoughtless as well as shocking. I would like to join my friend Shri Pandian in saying that it is a clear case of cheating the people who voted him to power. No Government so far dared to burden the people with such an unprecedented hike. After doing this much, the official interpretation has come out that the direct impact of the hike would be only 0.86 percentage. I am grateful to Shri Ram Naik for having sent us the document containing the details. Shri Ram Naik, as a person, is a gentleman and a man of pucca sense. Shri Ram Naik has referred that the direct impact of the hike would be 0.86 percentage, but what would be the indirect impact?
16.00 hrs. You seem to be mum on that. I would say that this is the greatest joke of the year. Those with a normal sense know very well that the Government is going to be the first casualty of this decision. All of us know that the Government is the largest operator of vehicles. Therefore, the administrative expenditure of the Central and State Governments and other semi-Governmental agencies will be galloping into several fold. The more the Government falls in a financial crisis, the more will be the inclination to transfer the burden to people by additional taxation. The more the Government is in crisis of their own creation, the more will be their selfish attempt to tax the people for a bailing out.
Look at the case of the Railways. The Railways will have to bear an additional burden of around Rs. 700 crore which will lead to a hike in the passenger fare and freight charges. The present exercise for raising additional income is not only unproductive, but is also counter-productive, and it reverses all our attempts for development. Your short-sighted adhocism is eating up even the meagre earnings of our common people because the brunt of the burden will ultimately have to be borne by the people.
The hike in diesel prices is no solution at all because a substantial chunk of it would be swallowed up by the intermediary interests and agencies. The chain reaction has already shown the catastrophic effect in the daily life of the poor millions. The prices of essential commodities and vegetables have gone up to dizzy heights. My own State, Kerala, is the worst sufferer because it depends heavily on other States for almost all of its daily requirements. Being a consumer State, I know that the burdens of the people have been multiplied.
The Government""""s mishandling of the strike of the truck operators has compounded the agony of the people. In the President""""s Address, para 11 says:
"During the current year, the Indian economy is expected to grow over six per cent. Inflation, as measured by the Wholesale Price Index, is around two per cent".
It is an irony that the very same Government, which claims that the inflation is decelerating, is actually leading the country to an unprecedented chaos in our economy and the common man""""s family budget.
I would like to point out that the present system of hiking of prices of diesel or petroleum products has a basic flaw in it. It is basically unscientific because it leads to nothing but more complications in the economy and the life of the people. This system bypasses Parliament. Decisions are taken somewhere by somebody else without taking Parliament into confidence. I would like to suggest to the Government to resort to the system in which the oil pool account is made a part and parcel of the whole budget. As all of us are very well aware, in that system, the proposals are presented in Parliament and an opportunity is provided to examine the proposal and the pros and cons of it threadbare. I say so not just for asserting the right of Parliament, but to point out the unscientific and irrational nature of the exercise. Though you shift the burden from one limb to the other, the real problem remains unresolved. Whichever method you adopt, it has to be imaginative enough to leave the common man the least affected. The Government have to find an alternate and a rational method for generating more income.
I would suggest that the Government take recourse to practising stringent austerity and economic measures by cutting wasteful Governmental expenditure. I urge upon the Government to take steps against tax evaders and unearth blackmoney. Practical and imaginative methods to reduce consumption of petroleum products has to be evolved. Steps have to be taken to slash down the establishment expenditure of the oil companies by better financial management. Indigenous production of petroleum products has urgently to be increased.
Sir, the oil pool deficit has been chasing us as a result of our own negligence in tapping the vast resources. We are not masters. We are only servants. We have no right to penalise the people who vote us to power and positions. Therefore, I request the hon. Prime Minister, the hon. Finance Minister and the hon. Minister for Petroleum, Shri Ram Naik to open their eyes and see the miseries of the people and withdraw the decision to hike the price of diesel and leave the entire matter to a Parliamentary Committee.
Sir, the whole matter could be referred to the scrutiny and recommendation of a Parliamentary Committee constituted for the purpose with a timeframe. I strongly oppose the decision of the Government and I hope that without further delay the Government will gracefully withdraw this anti-people, anti-farmer and anti-democratic decision.
श्री सुरेश रामराव जाधव (परभनी): सभापति महोदय, डीज़ल की कीमतों में जो व्ृाद्धि हुई है, उस पर हो रही चर्चा पर सारे देश का ध्यान आज इस सदन की तरफ लगा हुआ है। हालांकि मैं सत्ता पक्ष की ओर से हूं, फिर भी डीजल की कीमतो में व्ृाद्धि का मुद्दा आम जनता से जुड़ा हुआ है। मैं मराठवाड़ा, महाराष्ट्र क्षेत्र से आता हूं जहां के काश्तकारों का मुख्य बिजनैस खेती है। इस प्रकार ग्रामीण अर्थ-व्यवस्था का सीधा ताल्लुक डीज़ल से जुड़ा हुआ है। हमारे जो छोटे काश्तकार, चाहे वे टैकट्रर चलाते हों, पम्प स्प्रे करते हों या ट्रक या जीप या टैम्पो चलाते हों, उन पर डीजल की कीमतों की व्ृाद्धि का असर पड़ सकता है। सभापति महोदय, मैं जानता हूं कि डीजल की कीमतें इंटरनैशनल लैवल पर बढ़ गई हैं और चार रुपये प्रति लीटर डीजल के मूल्यों में बढ़ोतरी हुई है, फिर भी गांव के छोटे काश्तकारों और आम जनता जिसका डीजल से सीधा ताल्लुक है, सरकार उन मूल्यों का बैलेंस रखकर आम जनता की तकलीफों को दूर करे। जो घाटा है और जो अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में डीज़ल की कीमतें बढ़ी हैं, इनका तालमेल रखकर देहातों में जो आदमी रहते हैं, जो टैम्पो, ट्रक चलाते हैं, जो स्प्रे पम्प यूज़ करते हैं, ट्रैकटर चलाते हैं, उन पर और किसानों पर इसका असर हो रहा है। इसलिए सत्ता पक्ष में होते हुए भी मैं आदरणीय मंत्री जी से अपील करूंगा कि बैलेन्स रखकर डीज़ल की कीमतें कम करने का प्रयास करें। धन्यवाद।
SHRI BASUDEB ACHARIA (BANKURA): Mr. Chairman, hike in the price of diesel to the extent of 35 per cent at the midnight of 5th of October by the caretaker Government is a fraud committed on the people of our country. I say so because the Government had waited for more than eight months to take that decision and to announce the steep hike in diesel price.
The papers circulated by the Petroleum Minister, Shri Ram Naik state that international price of diesel started increasing from February, 1999. It was Rs.3210 per metric tonne and it increased to Rs.7020 per metric tonne. When the price increased in the month of February, then again in the month of March, why was the domestic sale price of diesel not adjusted? In the month of April, the price was adjusted by a marginal reduction but in the same year the excise duty was increased in the Budget by one rupee per litre. So what was reduced was absorbed by the increase in the excise duty of one rupee per litre. So, in effect, there was no reduction in the domestic sale price of diesel when there was a reduction in the international price of diesel.
The argument being advanced by the Government is that if the domestic sale price of diesel is not increased following the increase in the international price of diesel, the deficit by the end of this year would be increased to Rs.10,000 crore and hence the steep hike is essential. The amount that is generated by the hike of about 40 per cent would be Rs.6000 crore. Even after this 40 per cent increase, there will still be a deficit which would amount to not less than Rs.4500 crore by the end of this year.
Why was this Oil Pool created? It was created in 1975 to ensure equal prices of petroleum products throughout the country.
This Oil Pool was created and it generated surplus up to 1993 and the Minister of Finance appropriated Rs.8,900 crore from the surplus which was generated in the Oil Pool Account upto 1993. (Interruptions) The Ministry is in a continuous process.
THE MINISTER OF FINANCE (SHRI YASHWANT SINHA): The blame is in you.
SHRI BASU DEB ACHARIA : Blame is also continuous because when United Front Government was there and when they also increased, we opposed it by sitting on that side. You could remember, Shri Ram Naik, we never supported the anti-people action taken by any Government, whichever Government. When there was deficit and there is deficit, why the Minister of Finance should not transfer that amount with interest? I have also worked out that amount and it is not less than Rs.20,000 crore, Shri Yashwant Sinha. If we add the amount which was surplus up to 1993, even 5 per cent interest which has been reduced, the amount would be not less than Rs.20,000 crore. If that amount is transferred to Oil Pool Account, then there should not be any deficit in the Oil Pool Account and Government need not increase the price of diesel and, as a result of increase of price of diesel, there has been cascading effect on all the commodities. All the vegetables in Delhi itself, in the Capital today, the prices are double of what was one month ago. Why I say that it has committed a fraud on the people of our country is because they chose that particular date to announce the decision which was taken much earlier, at least 15 days before the election was held. Then why the decision was taken 15 days before the election? Why was not that announced before the election? Why they waited for the election, before the counting, before the result? Why could they not wait for a week? Heavens would not have fallen if the Caretaker Government would have waited for the new Government to come to take such a vital decision by the new Government and when the Parliament was also being convened and summoned, why was this not brought before Parliament also? There should be some transparency in the action of the Government. What was the rationale behind it? Why was the result announced? Why such a decision was taken? Why the price of diesel was hiked? What is the impact of the increase in diesel prices? Not only the prices of the essential commodities -- I am not holding brief for the truck operators here -- they have gone on strike and because of that, what is the impact on the prices of essential commodities? What will happen to the railway freight? We have been clamouring for years together. Shri Ram Naik will be knowing because he was also in charge of railways that in 1951-52, railways used to carry 80 per cent of freight traffic. Now it has come down to 25 per cent only.
The bulk of the freight traffic is being carried by the road. The Railways have adopted a policy to increase its market share and if the market share of the Railways, particularly of freight traffic, is increased to ten per cent, there will be a reduction in the consumption of diesel. The share of Railways is only nine per cent. With nine per cent share, the Railways is carrying 425 million tonnes. As there is a low investment in the railway development, we must demand and suggest that there must be more investment for railway development, particularly for electrification.
I have a number of suggestions. These are suggestions on how this problem could be resolved. I will suggest both short-term and long-term measures. As regards short-term measures, Shri Ram Naik, what is required is rationalisation of our natural gas prices. There is no rationality in the natural gas prices. There should be tax on luxury cars of 1,000 cc and above, on private diesel vehicles and on captive diesel generators used by industry. Then, there should be a reduction of customs duty on crude by 15 per cent. Shri Yashwant Sinha, this is my suggestion to you. If you reduce the customs duty to some extent, there will be an impact on the prices of diesel and other petroleum products.
As regards long-term measures, as I have already said, the return of oil pool account, the surplus of Rs.8,900 crore, including the interest, will come up to Rs.20,000 crore on Inter-Departmental rates. There should be rationalisation of excise and customs duties so that a part of duties collected can go towards the oil pool account. Another problem is that our indigenous production is being reduced. In the earlier days, in 1979-80, it was 37 per cent. It went up to 70 per cent in 1984-85. It has now come down to 42 per cent. There has been a low investment for exploration. As a result, we are gradually depending on import of crude and our oil pool account deficit is increasing year after year. So, I will suggest that the Government should invest more for the development of oilfields, for more exploration. We should depend on our indigenous crude. Indigenous crude production should be increased. It was 70 per cent in the year 1984-85. We should reach that level so that we can reduce our dependence on import of crude.
Sir, as this decision is the most undemocratic decision taken by this Government when it was a caretaker Government, I demand - as almost all sections of this House demanded - that there should be a review of the decision. Gulf cess was imposed in the year 1990, but still it is continuing when the Gulf war was over eight or nine years back. So, that can be withdrawn. I also demand that the decision to increase the price of diesel to the extent of 35 per cent be withdrawn. The Government should also convene a meeting of leaders of all the political parties to discuss how this problem could be resolved. So, I demand that the decision to increase the price of diesel which was taken on the 5th October be withdrawn.
श्री मदन प्रसाद जायसवाल (बेंतिया): सभापति जी, आज एक बहुत ही अहम मुद्दे पर सदन विचार कर रही है। डीजल का प्राइस बढ़ा है और उसके संबंध में हमारे उधर के जो मित्र हैं, वे काफी चन्ितत हैं। जिस समय डीजल के प्राइस का स्ट्रकचर बना कि डीजल के दाम कैसे तय होंगे, हमारे मित्र श्री रघुवंश बाबू बड़े जोर-जोर से बोल रहे थे, मैं सोचता हूं कि यह फैसला १.९.९७ को हुआ और उस समय आप उस सरकार में राज्य मंत्री थे जिसने यह फैसला लिया था। उस समय श्री इन्द्र कुमार गुजराल की सरकार थी और आप उसके समर्थक थे। सभापति जी, आपका तो मैं नाम नहीं ले सकता लेकिन हमारे आचार्य जी और कम्युनिस्ट मित्र... (व्यवधान) श्री वाससुदेव आचार्य : हमने विरोध किया था। श्री मदन प्रसाद जायसवाल : आप उस समय उनके साथी और सहयोगी थे। श्री वासुदेव आचार्य : हमने विरोध किया था। श्री मदन प्रसाद जायसवाल : आपने विरोध किया होगा लेकिन आपकी बात नहीं चली। इस विषय को लेकर आपने एक फैसला लिया। उस समय जून के महीने में ऑयल पूल का घाटा करीब १८,२०० करोड़ रुपये था। उसको कम करने के लिए उस समय की सरकार ने, श्री इन्द्र कुमार गुजराल की सरकार ने यह फैसला किया कि क़ूड ऑयल के प्राइस के आधार पर डीजल के दाम तय किये जायें। जब माननीय अटल बिहारी वाजपेयी जी की सरकार थी, मैं सदन का ध्यान आकृष्ट करना चाहूंगा कि उस समय डीजल के प्राइस दो बार घटाये गये। आज तक कभी भी इस सदन के इतिहास में किसी भी सरकार ने डीजल के दाम नहीं घटाये लेकिन माननीय श्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने दो बार डीजल के दाम घटाये। मैं २.९.९७ की बात बता रहा हूं।... (व्यवधान) श्री प्रियरंजन दास मुंशी (रायगंज): आप उस समय के इंटरनैशनल प्राइस को कोट करिये। श्री मदन प्रसाद जायसवाल : मैं उसको भी कोट करूंगा। २.९.९७ को मुम्बई में डीजल का दाम ११.५३ रुपये था जबकि ९.१.९९ को डीजल का दाम १०.०४ रुपये था। यह डेढ़ रुपये की जो दो बार कटौती की गई, यदि वह नहीं की गई होती तो आज शायद एक या डेढ़ रुपये दाम बढ़ते। जो सरकारी व्यवस्था है, उसके आधार पर डीजल का दाम मात्र ... (व्यवधान) श्री प्रियरंजन दास मुंशी : उस समय जो अंतर्राष्ट्रीय प्राइस था, आप उसको भी कोट करिये। श्री मदन प्रसाद जायसवाल : यदि बेसिक प्राइस लिया जाये तो मात्र २ रुपये ७५ पैसे दाम बढ़े हैं कयोंकि २०.४.९९ को जिन रिफाइनरीज में डीजल बनता है, वहां पर डीजल के दाम ६.८८ रुपए था और आज ९.९३ रुपए हुआ है यानी २.७५ रुपए बढ़े हैं। राज्यों में बहुत से हमारे मित्र दलों की सरकारें हैं। कम्युनिस्ट पार्टी की सरकार है, बहुत सी जगह कांग्रेस पार्टी की सरकारें हैं। अलग-अलग जगहों पर अलग-अलग सेल्स टैकस लगे हुए हैं, अलग-अलग ऑकट्राय लगते हैं जिसकी वजह से हर जगह, कम से कम मैट्रोपोलीटन सिटीज़ में दामों में बड़ी भिन्नता आ जाती है। यदि आज दिल्ली के दाम १३.९१ रुपये है तो कलकत्ता में १४.२० रुपये हो गया, मुम्बई में १६.५४ रुपये हो गया, चेन्नई में १५.२४ रुपये हो गया। मैं केन्द्र सरकार से मांग करना चाहूंगा कि इस बारे में राज्य सरकारों को निर्देश दिया जाए कि डीजल के दामों में हर जगह एक तरह के टैकस लगाए जाएं जिससे हर जगह चाहे मुम्बई हो, दिल्ली हो, दाम एक बराबर रहे। आज मुम्बई वालों के लिए बढ़ोत्तरी चार रुपये लग रही है, भारत सरकार ने २.७५ रुपये बढ़ाए लेकिन मुम्बई के लोग चार रुपये अधिक पे कर रहे हैं। इस बात के स्ट्रकचर को लेकर केन्द्र सरकार को राज्य सरकारों पर दबाव डालना चाहिए। श्री प्रिय रंजन दासमुंशी बोल रहे हैं कि उस समय के दाम बताएं। फरवरी महीने में क़ूड ऑयल के दाम ३२१० रुपये थे। उसके बाद आज क़ूड ऑयल के दाम ७०७० रुपये हो गए। ११९ प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई है। सरकार ने मात्र ३५-३८ प्रतिशत डीजल के दाम बढ़ाए हैं। मैं प्रिय रंजन दासमुंशी जी से कहना चाहूंगा कि दिल्ली में आपकी सरकार है।... (व्यवधान) श्री प्रिय रंजन दासमुंशी : जब अटल जी ने प्राइस घटाए, उस समय अंतर्राष्ट्रीय प्राइस कितना था, यह जरा हमें समझाएं। श्री मदन प्रसाद जायसवाल : वह पूरी डिटेल तो आपके पास भी है।... (व्यवधान) सभापति महोदय : उसका जवाब मंत्री जी देंगे।... (व्यवधान) श्री मदन प्रसाद जायसवाल : मैं अपने कांग्रेस के मित्रों से जानना चाहता हूं, आज ये कटघरे में खड़े हैं, यदि डीजल के दाम ३८ प्रतिशत बढ़ाए गए तो इनकी सरकार ने दिल्ली में बसों का भाड़ा सौ प्रतिशत कैसे बढ़ा दिया। यदि इन्होंने बस का भाड़ा ४० प्रतिशत बढ़ाया होता तो मैं मानता कि ये गरीब जनता के पक्षधर हैं। कांग्रेस के हमारे मित्र तो गरीब जनता का सबसे अधिक शोषण करने के लिए बैठे हुए हैं और उसमें हमारे वघेला जी भी हैं। वघेला जी कभी हमारे साथ बैठा करते थे लेकिन आजकल धर्म परिवर्तन कर दिया है। आजकल लोग धर्म परिवर्तन करते हैं तो बहुत प्याज खाते हैं।... (व्यवधान) श्री प्रवीण राष्ट्रपाल (पाटण) : राम विलास जी एक जमाने में यहां बैठते थे, वहां कहां गए। कया आपने उनको खरीद लिया है?... (व्यवधान) श्री शंकर सिंह वघेला ( कपडवंज) : आप विदड़ा करवा लीजिए।... (व्यवधान) श्री मदन प्रसाद जायसवाल : वघेला जी का धर्म परिवर्तन हो गया और जब धर्म परिवर्तन होता है तो आदमी बहुत प्याज खाता है। आजकल वघेला जी भी बहुत प्याज खाने लगे हैं।... (व्यवधान)
मैं अपने मित्रों से कहना चाहूंगा, आज ये अटल बिहारी वाजपेयी जी की सरकार के बारे में चर्चा कर रहे हैं कि यह काम चलाऊ सरकार है। मैं रघुवंश बाबू से पूछना चाहता हूं, जिस समय इंद्र कुमार गुजराल जी की सरकार थी ... (व्यवधान)
रघुवंश बाबू उस समय मंत्री थे। ४ दिसम्बर, १९९७ को लोक सभा भंग हो गई। उस समय भी श्री इंद्र कुमार गुजराल की सरकार काम चलाऊ सरकार थी। उन्होंने राजदूतों की बहाली की, राज्यपालों की बहाली की। जब अटल जी की सरकार एक मत से गिर गई तो चार आई.ए.एस. पदाधिकारियों का स्थानांतरण हुआ। हमारे मित्र हल्ला कर रहे हैं, काम चलाऊ सरकार है, कैसे बदली कर सकते हैं, कैसे फैसला कर सकते हैं। यें काम चलाऊ सरकार रहकर राजदूत और राज्यपाल की बहाली कर सकते हैं लेकिन हम चार पदाधिकारियों का स्थानांतरण नहीं कर सकते। आज जिस कटघरे में ये लोग खड़े हैं, इस विषय को लेकर विरोध करने का इनका कोई नैतिक अधिकार नहीं है कयोंकि इस फैसले में इनकी सहभागिता है और ये लोग उस समय की पार्टी के समर्थक थे।... (व्यवधान)
मैं मंत्री जी से आग्रह करना चाहूंगा किरोसीन का तेल जन वितरण प्रणाली की दुकान पर २.९३ रुपये प्रति लीटर मिलता है लेकिन किसी भी राज्य में किसी भी गरीब व्यकित को २.९३ रुपये में किरोसीन का तेल नहीं मिलता है। गरीब व्यकित को पांच रुपये से कम में किरोसीन का तेल नहीं मिल रहा है। आज किरोसीन के तेल के दाम इतने कम हैं कि उसके कारण मिलावट हो रही है। पैट्रोल में कैरोसीन तेल मिलाया जाता है, डीजल में कैरोसीन तेल मिलाया जाता है, इसलिए कैरोसीन तेल की भी इतनी बढ़ोतरी जरूर की जाये। मैं सरकार से मांग करूंगा, कि यह मिलावट बन्द हो। यह मिलावट होना गलत बात है।... (व्यवधान) सभापति महोदय, मैं सरकार से यह मांग करता हूं, आपने यह तय किया है कि २००१ से लेकर २००२ तक कैरोसीन की सब्िसडी ३३ परसेंट पर हम लाएंगे। इस विषय में निर्णय लेकर पैट्रोल और डीजल में जो यह मिलावट हो रही है, कयोंकि दाम का इतना वैरिएशन है कि उस विषय को लेकर कैरोसीन तेल का दाम बढ़ाया जाना चाहिए और प्रान्त की सरकारें जो जन वितरण प्रणाली चला रही हैं, इन राज्यों की सरकारों पर यह दबाव पड़ना चाहिए कि वे सही मूल्यों पर कैरोसीन उपलब्ध करा सकें। इसमें प्रान्तों की सरकारें सबसे अधिक गलत कार्य कर रही हैं। मैं सरकार के इस फैसले के पक्ष में बोल रहा हूं। ऑयल पूल घाटा ५००० करोड़ रुपये हो चुका था और सरकार ने यह सही माने में फैसला किया है। कभी-कभी बुखार हो जाता है तो बड़ी कड़वी दवा देनी पड़ती है। आज इस बारे में पूरे देश को चिन्ता करनी चाहिए कि हम केवल नोट छापकर सरकार नहीं चला सकते हैं। हमें टैकस के मुताबिक कुछ इस तरह की व्यवस्था करने के लिए सरकार के घाटे को कम करना चाहिए, ऑयल पूल के घाटे के कम किया जाना चाहिए और इसलिए जो बढ़ोतरी हुई है, मैं उसके पक्ष में बोल रहा हूं और यह बढ़ोतरी कायम रहनी चाहिए। श्री भान सिंह भौरा (भटिण्डा) : माननीय सभापति महोदय, डीजल प्राइस को बढ़ाने के ऊपर यहां बहस हो रही है। जब यह सरकार बनी थी, उसी वकत हमको पता था, जो इन्होंने कदम उठाने हैं, वे लोगों के पक्ष में नहीं होंगे, कयोंकि यह जखीरेबाजों की, मुनाफाखोरों की, सरमायेदारों की सरकार है। इनसे अगर हम कोई उम्मीद रखें तो यह गलत होगा। हमारे दोस्तों ने कई बातें की हैं कि यह किया है, यह किया है। इन्होंने अभी जब सरकार बनी ही नहीं थी, उसी वकत कीमतें बढ़ा दीं। अब आगे कया करेंगे, इसके बारे में कहते हैं: ठइब्तदा-ए-इश्क है, रोता है कया, आगे-आगे देखिये, होता है कया।"""" अभी तो आपको भुगतना पड़ेगा। यह जो सरकार है, ये जो सिन्हा साहब बैठे हैं, ये स्टील की कीमतें भी बढ़ा सकते हैं, टेलीफोन वगैरह के बारे में सब कर सकते हैं, यह तो कुछ भी बात नहीं है। आप तो करोड़पति बन रहे हैं, कया करेंगे। जो कीमतें बढ़ी हैं, इनका जस्टीफिकेशन कया है। अभी तो इन्होंने आप पर रहम किया है। आपने नोट पढ़ा होगा, इस नोट में लिखा है कि ९४ परसेंट कीमतें बढ़नी चाहिए थी, हमने तो ४० परसेंट बढ़ाई हैं, यह हम पर रहम किया है कि अभी तो ४० परसेंट बढ़ाई हैं, अब देखिये और बढ़ाएंगे। इसलिए मैं अपील करता हूं कि ये जो कीमतें बढ़ाते हैं, इनका पैटर्न कया है। कीमतें बढ़ गईं तो बढ़ी हुई कीमतें उसी रात लागू हो जाती हैं। जब कोई और फैसला किया जाता है तो १० दिन या २० दिन के बाद लागू होता है, लेकिन ये कीमतें उसी रात को बढ़ती हैं। जिसके पास एक लाख लीटर डीजल पड़ा है, उसके तीन-चार लाख रुपये वैसे ही बढ़ गये। इन्होंने कभी देखा है कि वह पैसा कयों बढ़ गया। एक रात में आप उनको लाखों रुपये दे देते हैं और उसमें से हिस्सा इनके पास भी आता है।16.39 hrs. ( अध्यक्ष महोदय पीठासीन हुए)... (व्यवधान)
आफिसरों के यहां ही आता होगा, लेकिन आता है। जो डीजल पैट्रोल बेचने वाले हैं, जो ये पैट्रोल पम्प लेते हैं, आपको पता है कि इसमें लाखों रुपया देकर लेते हैं। अगर उनको फायदा है, तभी लेते हैं, नहीं तो पैट्रोल पम्प लेने के लिए कौन १० लाख रुपये, बीस लाख रुपये देता है। इसमें इतनी बड़ी लूट है कि अगर इसको ही काबू कर लिया जाये तो कीमतें बढ़ाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। मगर यह सरकार ऐसा नहीं करेगी। मैं आज विनती करना चाहता हूं कि इसका असर तो बाहर सब जगहों पर पड़ेगा, पर पंजाब में सबसे ज्यादा असर पड़ता है। सिन्हा साहब, पंजाब खेती प्रधान प्रदेश है, वहां पर जो किसान हैं, वह हिन्दुस्तान के सैण्ट्रल पूल में ५० फीसदी चावल देता है, ७० फीसदी गेहूं देता है। पंजाब में ६ लाख १० हजार टयूबवैल हैं और हिन्दुस्तान के एक तिहाई, १० लाख ९० हजार ट्रैकटर हैं। इसलिए डीजल के दाम में बढ़ोत्तरी का सबसे ज्यादा असर वहां के किसानों और लोगों पर होगा। हमारे जागीरदार चीफ मनिस्टर हैं, उन्होंने सेल्स टैकस चार प्रतिशत से बढ़ाकर आठ प्रतिशत कर दिया और डीजल पर ५० पैसे अतरिकत बढ़ा दिए। केन्द्र सरकार ने उनसे नहीं पूछा कि यह बढ़ोत्तरी कयों की गई है। पंजाब के मुख्य मंत्री को लूटने की खुली छूट मिली हुई है। हाल में हुए चुनावों ने उनकी असलियत खोलकर रख दी है कि वे कितने पानी में हैं। केन्द्र सरकार ने तो जीतने की खुशी में डीजल के दाम बढ़ा दिए, लेकिन पंजाब के मुख्य मंत्री ने हारने के कारण बढ़ा दिए। डीजल के दामों में भारी बढ़ोत्तरी की सारे लोग निन्दा कर रे हैं, उधर के लोगों ने भी कहा है कि यह ठीक नहीं है। आखिर में उनके द्वारा भी यही कहा जाता है कि इस पर सोचना चाहिए कि कैसे इसका भार कम किया जा सकता है। सरकार के पास बहुमत है और उसके जरिए ये कुछ भी कर सकते हैं। डीजल में हुई मूल्यव्ृाद्धि के कारण ट्रक वालों ने हड़ताल कर दी है, औरतों द्वारा प्रदर्शन किया जा रहा है और देश के कई भागों में इसका प्रोटेस्ट किया जा रहा है। सरकार को लोगों के सेंटीमेंटस को ध्यान में रखते हुए इसको रिव्यू करना चाहिए। लेकिन हमारे प्रधान मंत्री जी ने कहा कि हम रिव्यू नहीं करेंगे। नाईक साहब ने कहा कि देखो हमने इतना ही बढ़ाकर आप पर रहम किया है। इससे हिन्दुस्तान के गरीब लोगों पर असर पड़ेगा, उनको बचाया जाए। पेट्रोल पम्प वाले डीजल में केरोसिन ऑयल मिलाकर बेचते हैं, आपका महकमा इसको नहीं रोक सकता, कयोंकि आपके मुलाजिम उनसे इसके लिए पैसा लेते हैं। इसलिए आपको इस पर ध्यान देना चाहिए। मेरा सुझाव है कि इसके लिए कोई समति बनाएं और जो लोग इसका विरोध कर रहे हैं, वह समति उसका अध्ययन करके कोई फैसला करे। वरना धीरे-धीरे यह विरोध बढ़ता जाएगा और आपकी सरकार की खुशी हवा में उड़ जाएगी। अंत में मेरा पुनः अनुरोध है कि इसको कम करना चाहिए और मैं उम्मीद करूंगा कि सरकार इस पर जरूर विचार करेगी। श्री अनंत गंगाराम गीते (रत्नागरि): अध्यक्ष महोदय, डीजल की मूल्यव्ृाद्धि पर सदन में चर्चा हो रही है। जब डीजल में मूल्यव्ृाद्धि होती है तो उसका सीधा असर आम जनता पर होता है। जो जनोपयोगी चीजें हैं, उनका ७० प्रतिशत यातायात सड़क द्वारा होता है। इस वजह से जब डीजल के दाम में व्ृाद्धि होती है तो जनोपयोगी चीजों के दाम बढ़ जाते हैं। इसको लेकर ट्रकों की हड़ताल हो रही है, उसका असर आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। आज या कल तक शायद यह हड़ताल खत्म भी हो जाएगी, लेकिन जो बढ़े हुए दाम हैं, वे कम नहीं होंगे। आज जब हम सब्जी मंडी में जाते हैं, तो सब्िजयों के दाम दुगुने से भी ज्यादा हो गए हैं। हर चीज के दाम दुगुने से ज्यादा हो गए हैं। हमारे पैट्रोलियम मंत्री, श्री राम नाईक जी, ने किस कारण से दाम बढ़ाए और हमारा देश किस हालत से गुजर रहा है, आयल पुल में कितना घाटा है और भविष्य में हमें किस परस्िथति से गुजरना पड़ेगा, इससे संबंधित विवरण, दस्तावेज उन्होंने सदस्यों को दिए हैं और स्पष्ट विवरण दिया है। सभी लोगों के दिलो में यह डर है कि डीजल के साथ-साथ कैरोसिन आयल के दाम भी बढ़ेगा। यह डर आज आम जनता के दिल में है। जब हम सत्ता पक्ष में हैं, हमें देश को चलाना है, तो देश के हित में सरकार को कुछ निर्णय लेने होते हैं। आप जरूर निर्णय लीजिए, लेकिन ये निर्णय लेते समय, जो आम जनता है, जो आम आदमी है, गरीब आदमी है, जिसकी चर्चा हम करते हैं, जिसको पिछड़ा वर्ग कहते हैं, वह पीसा नहीं जाएगा, यह ख्याल करना जरूरी है। जब हम विपक्ष में होते हैं, तो दिखाई देता है कि इसी मूल्य व्ृाद्धि पर किस ढंग से हम हल्ला करते हैं और सरकार में आने पर नहीं कर पाते। यह अनुभव हर एक सदस्य को हुआ है, कयोंकि पिछले दो-चार चुनावों में जिस प्रकार का राजनीतिक माहौल बना है, मिली-जुली सरकार के सिवाय और कोई चारा नहीं है, उससे हर एक दल को सत्ता में रहने का मौका मिला है। इसलिए हम सभी की जिम्मेदारी है कि सही तौर पर इस चर्चा को थोड़ा राजनीति से अलग रखें, कयोंकि आम आदमी का जीवन दुभर होता जा रहा है। मेरे विचार से इस विषय पर राजनीति से हटकर चर्चा होनी चाहिए। महोदय, आज आम आदमी जो सड़क पर चर्चा करता है, आज आम आदमी जो अपने घर में चर्चा करतर है, वह आज दुखी दिखाई दे रहा है। इसका असर उद्योगों पर कितना होगा, यह मुझे मालूम नहीं है। जो व्यावसायिक है, उन पर कितना होगा, यह मुझे मालूम नहीं है। लेकिन जो नौकरी करने वाला है, जो रोज़ाना काम करने वाला है, जो मेहनत-मजदूरी करने वाला है, उस पर इसका सबसे बुरा असर होने वाला है। हमने इस देश की बागडोर संभाली है, तो आम आदमी के सुख-दु:ख और उस पर पड़ने वाले बोझ के बारे में हमें सोचने की जरूरत है। इसलिए किसी निर्णय पर अड़े रहने की कोई आवश्यकता है, ऐसा मैं नहीं मानता हूं। मैं समझता हूं कि सरकार भी, जब सदन में आज यहां चर्चा हो रही है और उसका सीधा असर आम जनता पर हो रहा है, उस पर पुनर्िवचार करेगी। इसके लिए हम कोई अलग सुझाव दे सकते हैं, कोशिश कर सकते हैं, उन पर भी विचार करना आवश्यक है। यह मामला जनता से संबंधित है। हम अपने घर जाते हैं तो घर वालों को हमें जवाब देना पड़ता है, राम नाईक जी को भी अपने घर जाने पर जवाब देना पड़ेगा। चाहे हम सदन के सदस्य हों या आम आदमी हों, हर घर में जो समस्या है, जो दर्द है उसी की चर्चा और बहस इस सदन में हो रही है। आम आदमी के जीवन में ओर कठिनाइयां नहीं आएंगी और आम आदमी जो सामान्य जीवन जीना चाहता है उसका जीवन कैसे सुखी हो इस पर सरकार विचार करेगी, ऐसा मैं विश्वास करता हूं।
* SHRI RANEN BARMAN (BALURGHAT): Hon. Speaker Sir, I would like to speak in Bengali. I thank you for giving me an opportunity to participate in the important discussion under 193 on hike in diesel price. Diesel is an essential commodity and the hike in its price has an over all impact on the prices of other essential commodities. There is a steep rise in prices of all other essential commodities because of the price hike of diesel. There is discontentment among the people because they have to face the burden in their day to day life. Ours is an agricultural land. As it is the subsidy on fertilizer has been done away with. So there is an enormous rise in the prices of the fertilizer. So the farmers are at the receiving end and they are not able to profit.The people have been facing hardship because of the hike in diesel price. People feel that the sudden rise of diesel price is totally unfair considering the hardship faced by the people, by each and every section of the society. I earnestly appeal to the Minister to roll back the price of diesel.
* Translation of the speech originally delivered in Bengali.
______________________________________________________________________________ SHRI M.O.H. FAROOK (PONDICHERRY): Hon. Speaker, Sir, at the outset, I would like to say that I am pained to state that this Government has no moral or ethical right to govern having betrayed the aspirations of the poor people who voted them to power just now...(Interruptions) Even before they could constitute the Government and sit in the Chair, they raised the diesel price by nearly forty per cent which is unheard of in the annals of the history in our price range. The price hike has come like a bolt from the blue. This act of the Government could not be better described as betrayal of the confidence recently reposed by the people of India in the elections.
Sir, the Government could not even wait for a day after the election. Voting was completed with all promises of heaven to the people.
The Government returned the compliments of the people by stabbing at their back, on the very next day by hiking the price of diesel to dizzy heights. Just like a man who could not wait for a minute for bowel movement, this Government could not wait even for a day, after the election, the pressure to increase the price of diesel. The Government has given a wedding gift to the people, who voted them to power, with the increase of the price of diesel at one stroke. When the people kissed you at your bosom, you have given a stab at their back. How far is it correct? The day on which you have claimed to sit in the chair of power, you are witnessing the strike of the truck operators.
The Government""""s action of increasing the price of diesel has got an spiralling effect in the sphere of economic activities, affecting the poor man""""s stomach. The prices of vegetables and perishable commodities have skyrocketed to more than 30 per cent. If you go to the market, you can understand the situation. Now, potato is sold for Rs.12/- per kilogram, onion is sold at Rs.15/- per kilogram, tomato is sold at Rs.20/- per kilogram and so on and so forth. We heard escort being given to the VIPs. But in Tamil Nadu, eggs are being escorted to the market by the police. This is the present situation in our country. So, I pity the people who really relied on this Government which belied their hopes.
Sir, the farmers, as my other hon. friends have said, are the worst affected people with the steep increase of the price of diesel. The farmers are already driven out of their villages leaving their age-old profession seeking better pastures. I do not know how the so-called votaries for safeguarding the interests of farmers, are going to protect them from this increase of the price of diesel. I only look upon them for their benign reactions for this act of the Government of increasing the price of diesel which is affecting the farming community very much.
Sir, this Government was in power for 13 months and continued for six more months later, by grace. During the election process their hands were tied by the Code of Conduct of Election Commission. But now they plead innocence that they could not increase the price of diesel in spite of the international prices going up since February, 1999. I do not understand what is the rationale behind it. The hon. Minister, Shri Ram Naik will have to inform us as to what is the rationale behind for not increasing the price of diesel right from February, 1999 onwards and for increasing it now very steeply at one stroke after the election. This Government has not taken the House of the People into confidence and also the people outside about the increase of the price of diesel to such an extent. Is it not against all democratic principles and ethos of public life?
The Minister""""s argument is that the Government was bound by the Code of Conduct of the Election Commission and that they were not in a position to increase the price of diesel during the election process. I want to ask the Government and also the Minister as to whether they have increased or not the prices of other items and whether they have taken or not taken any other policy decision. Why do you try to take shelter with the argument that they were not able to increase it due to the Code of Conduct of the Election Commission?
17.00 hrs. SHRI M.O.H. FAROOK : You have said it. I have read it in the newspapers.
I have to ask you only one question. You said that the deficit is about Rs. 5,000 crore. If it had not been hiked, it could go up to Rs. 10,000 crore. That is what you have said in the Press. Why did you not taper it right from the beginning and take the people into confidence and then say, "Here is a price hike which has come with the international price. So, I will be increasing the price right from the beginning." So, you could prepare the people mentally and physically. Is it not hypocrisy on the part of this Government? The Government was there and if they did the price increase then,I am sure that they would not have been setting in the same place as they are now because the people could have realised the whole thing. What I would like to tell you is that now you are putting people in a very unrealistic situation. This Government has earlier been known as `rollback Government"""". Most of its decisions and policies, by nature of their association and coalition, in the past, were rolled back without whisper or murmur. I think, you will also roll back this idea and then try to reduce the diesal like.
MR. SPEAKER: Now, hon. Minister, Shri Ram Naik.
श्री लक्षमण सिंह (राजगढ़) :अध्यक्ष महोदय, मुझे भी इस विषय पर बोलने का मौका दिया जाए। एक माननीय सदस्य : राम से पहले लक्षमण तो बोलेंगे। अध्यक्ष महोदय : राम और लक्षमण। श्री लक्षमण सिंह : आदरणीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपका बहुत आभार प्रकट करता हूं कि आपने मुझे बोलने का समय दिया। मैं डीजल पर हुई मूल्य व्ृाद्धि का विरोध करने के लिए खड़ा हुआ हूं। १३ दिन, १३ महीने और न जाने कितने दिन और चलने वाली सरकार ने जो मूल्य व्ृाद्धि की है, वह देश के उन किसानों और मध्यम वर्ग के साथ छलावा है जिनके वोटों से आप यहां बैठे हैं। सरकार का कहना है कि डीजल के अन्तर्राष्ट्रीय दाम बढ़े, इसलिए डीजल के दामों में मूल्य व्ृाद्धि की गई। मैं ठहिन्दू"""" अखबार से कुछ लाइनें पढ़ कर सुनाना चाहता हूं। वह अखबार जिस ने हमेशा इनकी बात ज्यादा छापी और हमारी कम छापी, वह कहता है:"The Government""""s decision to hike the price of high speed diesel oil by as much as 40 per cent just on the eve of the outcome of the elections to the Lok Sabha is wholly indefensible."
"The increase in the international prices of HSD does not justify the present hike even if the Government could plead that it has taken this decision after waiting for six months. It has chosen to wait so long obviously because it had known that it would have been politically disastrous to have raised the price earlier instead of at a time when all the ballot-boxes had been safely removed for the counting of the votes." अध्यक्ष जी, पिछली बार आपकी जो १३ महीने की सरकार बनी थी, उसमें आपने एडमनिस्टर्ड प्राइसिंग मकैनिज्म को भंग करने का निर्णय लिया था। आपने नैफथा, बिटूमैन पैरासिल वैकस को डीकंट्रोल किया और एच.एस.डी को इंटरनेशनल प्राइसिंग के साथ जोड़ा। अच्छा होता यदि आप इससे पहले संयुकत मोर्चा सरकार जो कांग्रेस समर्िथत सरकार थी और उसके पहले जो कांग्रेस सरकार थी, उनके निर्णय पर कायम रहते। इससे आपको १३ महीने में पांच बार डीजल के दाम बढ़ाने की जरूरत नहीं पड़ती। आपने १३ महीने में एक बार नहीं, दो बार नहीं, तीन बार नहीं, पांच बार डीजल के दाम बढ़ाए। आप अगर उस निर्णय पर काबिज रहते तो डीजल के दाम नहीं बढ़ाने पड़ते। उन्होंने निर्णय लिया था कि एच.एस.डी. के दाम प्रति माह रिवाइज किए जाएंगे। अगर डीजल के अन्तर्राष्ट्रीय दाम घटते हैं तो घटाए जाएंगे और अगर वह बढ़ते हैं तो उसी अनुपात में बढ़ाए जाएंगे। यह निर्णय हो चुका था। संयुकत मोर्चा सरकार जो कांग्रेस समर्िथत सरकार थी, आपने उसके द्वारा लिए निर्णय पर ध्यान नहीं दिया। प्रो. रासा सिंह रावत (अजमेर) : अगर आप सत्ता में होते तो इसके दाम बढ़ाते या नहीं बढ़ाते? श्री लक्षमण सिंह : मैं समर्थन की बात कर रहा हूं। जब सत्ता में आएंगे तो बाद में बताएंगे।... (व्यवधान) आज डीजल के मूल्यों में व्ृाद्धि से रेलवे पर ६८० करोड़ रुपये का अधिभार बढ़ा है। रेलवे इस अधिभार को झेल सकता है कयोंकि वहां केवल ७-८ प्रतिशत डीजल खर्च होता है। जहां तक दूसरे क्षेत्रों का सवाल है, ट्रक ७०-८० प्रतिशत डीजल पर निर्भर हैं। मैं विस्तार में नहीं जाना चाहता कयोंकि मुझसे पूर्व वकताओं ने इस पर काफी विस्तार से बताया है। मैं यही कहना चाहता हूं कि आगे भी डीजल के मूल्य अप्रत्याशित ढंग से बढ़ेंगे लेकिन आप तेल के उत्पादन की बात नहीं कर रहे हैं। आप मूल्य व्ृाद्धि की बात कर रहे हैं, इम्पोर्ट की बात कर रहे हैं। यहां तेल उत्पादन की बात होनी चाहिये थी। मैं सरकार से जानना चाहता हूं कि यह कयों नहीं कर रहे है। अगर हम तेल का प्रोडकशन चार्ट देंखें तो मालूम होगा कि अगस्त, १९९८ में क़ूड आयल का उत्पादन २७.४४ लाख टन हुआ है जो सितम्बर, १९९९ में गिरकर २५.८४ लाख टन पर आ गया। यह उत्पादन गिरने का कया कारण है? कया इसकी गहराई में जाना आवश्यक नहीं है, कया मूल्य व्ृाद्धि इसके उत्पादन से संबंधित नहीं है? अगर अगस्त, १९९८ से देखा जाये तो आपका उत्पादन २७ लाख टन से बढ़ा ही नहीं। इसका कया कारण है? इस बारे में जानना आवश्यक है। अध्यक्ष महोदय, ओ.एन.जी.सी. ने निर्णय लिया कि बाम्बे हाई से प्रतिवर्ष १.५ मलियन मीटि्रक टन से ज्यादा उत्पादन नहीं होगा कयोंकि उन्होंने री-हैबलिटेशन का कार्य लिया है। पिछले दो साल से यह तेल का उत्पादन बंद है। दूसरी तरफ आपने कया निर्णय लिया? आपने एकसपलोरेशन पालिसी बनाई, ठीक है। लाइसैंसिंग पालिसी बनाई जिसमें आपका निर्णय है कि ३१.१२.१९९९ तक आप विदेशी कम्पनियों को लाकर तेल खनन का कार्य देंगे। इस बात पर गंभीरता से सोचने की आवश्यकता है कि कौन सा तेल क्षेत्र देंगे। बाम्बे हाई का सबसे अच्छा तेल कुंआ नीलम नये साल के तोहफे के तौर पर स्वदेशी की बात करने वाली सरकार विदेशी कम्पनी को देने जा रही है।This is going to happen. अगर आपको विदेशी कम्पनी को देना ही था तो फिर उस तेल कारखाने को बंद करके १६५.५ मीटि्रक टन का घाटा देश को कयों दिया। इस बात की जांच होनी चाहिये। यह बहुत ही गंभीर मामला है। अध्यक्ष महोदय, आयल पूल एकाउंट डेफसिट में ५००० करोडृ रुपये का घाटा है। ठीक है, इस बात को मान लेते हैं लेकिन आपने डीजल के मूल्यों में व्ृाद्धि की जिससे ६६०० करोड़ रुपये का रेवेन्यू मिलेगा। मैं माननीय पैट्रोलियम मंत्री जी से पूछना चाहता हूं कि आपने ६६०० करोड़ रुपये उन उद्योंगपतियों से वसूल किया होता जो देश का खाये बैठे हैं। इससे ६६०० करोड़ रुपये में से ६००० करोड़ रुपया मुम्बई से इकट्ठा हो जाता और इस देश कि किसान मूल्य व्ृाद्धि से बच सकते थे। श्री साहिब सिंह वर्म(बाहरी दिल्ली): मध्य प्रदेश में भी करेंगे? श्री लक्षमण सिंह : करायें लेकिन सारे देश में करायें। आपने बड़े बड़े उद्योगपतियो को नहीं पकड़ा जो देश का करोड़ों रुपया खाये बेठे हैं। यह बहुत गलत निर्णय है। अब ५००० करोड़ रुपये के घाटे को पूरा करने के लिये आपको ६६०० करोड़ रुपया मिल रहा है। इस प्रकार १६०० करोड़ रुपया का अंतर पड़ रहा है, इस से आप डीजल के दाम कम कर सकते हैं। देश के किसानों पर यह अधिभार कम हो सकता है। आपने चुनाव से पहले केन्द्रीय सरकारी कर्मचारियों के डी.ए. के लिये ५ प्रतिशत की किश्त जारी की। मैं उनके खिलाफ नहीं हूं लेकिन इससे राजस्व पर १३०० करोड़ रुपये का अतरिकत भार पड़ा। यह १३ सौ करोड़ रुपये का भार सब के लिये रोक सकते थे। जो ५००० करोड़ का भार पड़ रहा है उसमें से १३०० करोड़ कम किया जा सकता था, अगर इस निर्णय को आप थोड़ा समय रोक देते। पिछली बार जब आपकी सरकार थी, आपने किसानों के लिए क़ेडिट कार्ड देने की घोषणा की थी। अभी तक क़ेडिट कार्ड हमने नहीं देखे। कोई कह रहा है बन रहे हैं, जब आएगा तो देखेंगे। क़ेडिट कार्ड खाद, बीज के लिए दें, अच्छी बात है लेकिन एक क़ेडिट कार्ड और बनवा लीजिए ताकि किसान जाकर डीज़ल खरीद सके कयोंकि नकद डीज़ल खरीदने की क्षमता किसानों में नहीं रहेगी। उसके लिए भी एक क़ेडिट कार्ड बनवा दें तो पेट्रोल पंप पर जाकर वह डीज़ल खरीद लेगा। यह बहुत गंभीर बात है और आप इस पर ध्यान दें। इसके साथ ही दो बातें और कहकर मैं बैठ जाऊंगा। देश के जितने भी पिछड़े राज्य हैं चाहे वह मध्य प्रदेश हो, उड़ीसा हो या बिहार हो, उन पर कया प्रभाव पड़ेगा? उदाहरणस्वरूप मध्य प्रदेश है। मध्य प्रदेश क्षेत्रफल के हिसाब से देश का सबसे बड़ा राज्य है। हमारे जितने पावर प्लांटस ईस्टर्न मध्य प्रदेश में हैं वहां से पश्िचम मध्य प्रदेश तक बिजली जब आती है तो टी एंड डी लॉस इतना होता है कि पश्िचम मध्य प्रदेश का किसान ज्यादातर डीज़ल पर निर्भर रहता है कयोंकि उसको वोल्टेज नहीं मिलती है। उसका कया होगा अगर डीज़ल के दाम ४.३० रुपये बढ़ा देंगे? इसलिए मेरा आपसे अनुरोध है कि आप ज्यादा से ज्यादा बढ़ाएं तो दो रुपये प्रति लीटर डीज़ल के भाव बढ़ा दें और बाकी दाम आप कम करें ताकि देश के किसानों को राहत मिल सके और अगर आप ऐसा नहीं करेंगे तो हम इस संसद के अंदर विरोध करेंगे, संसद के बाहर विरोध करेंगे और गलियों और सड़कों पर भी प्रदर्शन करने से नहीं चूकेंगे और उस समय तक करेंगे जब तक आप डीज़ल के दाम दो रुपये प्रति लीटर तक कम नहीं कर देंगे। धन्यवाद। श्री राम सागर : अध्यक्ष महोदय, चुनाव खत्म होने के ठीक एक दिन बात हमारे कृषि प्रधान देश में डीज़ल के मूल्य में व्ृाद्धि हुई जिससे पूरे देश के किसानों पर बुरा प्रभाव पड़ा। जिनके खेत-खलिहान प्रभावित हुए हैं, उन्हीं की भावनाओं को सदन में रखने का काम माननीय सदस्यों ने किया है। अध्यक्ष महोदय, अगर यह मूल्यव्ृाद्धि धीरे-धीरे चरणों में होती तो और किसानों को इतना कष्ट न पहुंचता, लेकिन एकाएक जो मूल्यव्ृाद्धि हुई है, उस पर हमारे तमाम माननीय सदस्यों और नेताओं की जो भावना आई है और सबसे पहले इस पर जो डिसकशन हुआ है और सुझाव आए हैं, इस पर और विस्त्ृात चर्चा करके जो सदन की भावना है, उसके अनुरूप सरकार को फैसला लेना चाहिए और जो मूल्यव्ृाद्धि की गई है, उसे कृषि प्रधान देश में कृषकों की समस्या को और जो खेती पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है उसको देखते हुए भी वापस लिया जाना चाहिए। सदन की भावना का सरकार को आदर करना चाहिए। यह जो सुझाव है, हम आदरणीय अध्यक्ष जी के माध्यम से सरकार को दे रहे हैं और खासकर मैं आपके प्रति आभार व्यकत करता हूं कि आपने हमें इस मामले पर बोलने का मौका दिया। श्री रघुनाथ झा (गोपालगंज) : माननीय अध्यक्ष महोदय, अभी डीज़ल की मूल्यव्ृाद्धि पर इस सदन में महत्वपूर्ण चर्चा हो रही है। हम सत्ता पक्ष के सहयोगी दल हैं और हम लोगों को जनता में मध्यम वर्ग के लोगों ने, किसानों और मज़दूरों ने समर्थन दिया और सत्ता पक्षा में बैठाने का काम किया। हम माननीय मंत्री जी से विनतीपूर्वक निवेदन करना चाहेंगे कि आज जो परस्िथति है, उसका पूरा भार मध्यम वर्ग के लोगों, किसानों और मजदूरों पर पड़ने वाला है और वह पड़ भी रहा है। इसलिए इन्हें इस पर पुनर्िवचार करना चाहिए और डीजल के मूल्यों में कमी करनी चाहिए। सरकार को इसे प्रतिष्ठा का सवाल नहीं बनाना चाहिए, जनता की भावनाओं का आदर करना चाहिए और जनता की भावनाओं का आदर करते हुए हम माननीय मंत्री जी से निवेदन करना चाहेंगे कि वह इस पर पुनर्िवचार करें और इधर-उधर पैसा घटा दें, बोफोर्स और दूसरी जगहों में जो पैसा पड़ा हुआ है जो बड़े-बड़े लोगों का पैसा है, उसे निकालकर इस खर्च को पूरा करें। अध्यक्ष महोदय, हमारे बिहार में बिजली का कोई उत्पादन ही नहीं है, हमें दो सौ मेगावाट बिजली भी नहीं मिलती है। हम लोगों का सारा काम डीजल से चलता है। हम किसान तथा मजदूर सब डीजल से काम करते हैं और हम बुरी तरह से आक़ांत होने वाले हैं। इसलिए इसके दाम घटाने की कृपा करिये, यही मेरा आपसे निवेदन है। श्री सुबोध मोहिते (रामटेक): अध्यक्ष महोदय, सबसे पहले मैं इस सदन के सभी माननीय सदस्यों को प्रणाम करता हूं। मैं यहां कुछ सीखने के लिए आया हूं। फिर भी मेरे दिल में जो बात है, जो कॉमन कम्युनिटी से जुड़ी हुई है, वह मैं बोलना चाहता हूं। डीजल का दाम बढ़ना यह अपने आपमें एक बहुत दुख की बात है। लेकिन दाम कयों बढ़े हैं, दाम बढ़ने का कारण कया है, यह समझना भी बहुत जरूरी है, ऐसा मैं समझता हूं। यह मराठी, इंग्िलश या हिंदी नहीं है, यह अनालैटिकल इकयुएशन है। इकयुएशन की दो बाजियां हैं, एक तरफ जीरो होता है और एक तरफ पूरी फीगर्स होती हैं। अगर इधर की फीगर्स उधर डाल दें तो इम्बैलेंस हो जाता है। उसी तरह मै समझता हूं कि जो पैट्रोलियम प्रोडकटस हैं, उन्हें दो कैटेगरी में डिवाइड किया गया है - पहली कैटेगरी आम आदमियों के बैनफिट के लिए सरकार ने बनाई है जिसमें कैरोसिन और डोमेस्िटक गैस, जिसे हम एल.पी.जी. कहते हैं, आते हैं; दूसरी कैटेगरी में हाई स्पीड डीजल और पैट्रोल है। अगर कॉमन आदमी के काम आने वाला केरोसिन और रोजाना यूज करने वाली गैस की नॉर्मल कास्ट को अगर राइज किया जाए तो इसका बर्डन पैट्रोल और डीजल पर पड़ता है। इसमें कोई बजटरी प्रोविजन नहीं होता कि गवर्नमैंट की तरफ से सब्िसडी दी जाए। पैट्रोल और डीजल की जो कास्ट होती है उसके ऊपर परसैंटेज इनक़ीज करके ही एल.पी.जी. और कैरोसिन के दाम कॉमन आदमी के लिए बैनिफीशियल कॉमन रेट पर और मॉडरेट दिये जाते हैं। डीजल के दाम कयों बढ़ाये गये हैं, यह मेरा भी सवाल है, लेकिन इसे कैसे घटाया जाए यह मेरा दूसरा सवाल है। अगर सब लोग टीका-टिप्पणी करते जायेंगे और उसके लिए सुझाव नहीं देंगे तो डीजल के दाम कैसे घटेंगे। ... (व्यवधान) श्री राजेश पायलट (दौसा): इम्पोर्ट डयूटी कम कर दो। श्री सुबोध मोहिते : अध्यक्ष महोदय, मेरा दूसरा दिलचस्प सवाल है, मेरे पास जो इंफॉर्मेशन है, उसके अनुसारIn 1990, the oil pool account was showing profit. लेकिन मजे की बात यह है कि १९९० से लेकर १९९७ तक सात साल में १८,२०० करोड़ रूपये का लॉस ऑयल पूल अकाउन्ट को हुआ है। जब ऑयल पूल अकाउन्ट १९९० में प्रॉफिट में था, इसका मतलब यह है कि जो वैल्यू पैट्रोल और डीजल की डिसाइड की गई थीThat is on the basis of import value. जब १९९० में यह अकाउन्ट प्रॉफिट में था तब सात साल में १८,२०० करोड़ का लॉस कैसे हुआ, यह मेरा सवाल है। अध्यक्ष महोदय, मैं दूसरी बात यह कहना चाहता हूं कि १९९७ में जब गुजराल साहब प्रधान मंत्री थे, तो उन्होंने एक कमीशन प्लान किया था, जिसको इम्पोर्ट वैल्यू और राज्यों के अलग-अलग टैकसों के बारे में कुछ स्टैटिकस देने थे और उनके आधार पर पैट्रोलियम पदाथर्ों की वैल्यू डिसाइड की जानी थी, लेकिन सात साल में १८ हजार करोड़ रुपए से भी अधिक ऑयल पूल का घाटा हो गया। १९९७ में जब रेट रिवाइज हुए उस समय १८ हजार से भी अधिक घाटा था, तो उसको कंपैनसेट कयों नहीं किया गया, यह बात भी एक सोचने वाली बात है। अध्यक्ष महोदय, दूसरी बात यह है कि इंटर नैशनल मार्केट में तो पैट्रोलियम पदाथर्ों के रेट बढ़ते जाएंगे, घटने का कोई चांस नहीं है। इसीलिए सब लोगों ने कहा कि भाव घटने चाहिए। इसके लिए मेरा एक सुझाव है कि इस हेतु एक स्टडी ग्रुप बनाया जाए जो समय-समय पर पैट्रोलियम बदाथर्ों की बढ़ती कीमतों का अध्ययन करे और उसके अनुरूप बजट में उनके लिए कितनी सबसिडी देनी है, उसके आधार पर उनकी कीमतों को निर्थारित करने हेतु सुझाव दे सके। अगर इसी तरह से भाव बढ़ते चले जाएंगे, तो हम कया डीजल की कीमत १०० रुपए प्रति लीटर कर देंगे? जाहिर है कि ऐसा नहीं करेंगे। इसलिए डीजल और पैट्रोल की कीमतों को निर्धारित करने हेतु एक स्टडी ग्रुप बनाना चाहिए। इन्हीं शब्दों के साथ, अध्यक्ष महोदय, मैं आपका धन्यवाद करता हूं कि आपने मुझे बोलने का अवसर दिया। जय भारत। जय महाराष्ट्र। श्री तिलकधारी प्रसाद सिंह (कोडरमा): अध्यक्ष महोदय, डीजल के जो दाम बढ़े हैं उस पर सदन में चर्चा चल रही है। इसमें एक बात तो यह है कि जिस परस्िथति में सरकार ने दाम बढ़ाए हैं और इन्हें बढ़ाने के लिए जो प्रक़िया अपनाई है, यह ठीक नहीं है। यह संदेहास्पद है। चुनाव के परिणाम आने वाले थे, नयी सरकार बनने बाली थी और तीन तारीख की रात को किसान, मजदूर और मध्यम वर्ग के लोग, जो रेडियो पर समाचार सुन रहे थे और टी.वी.पर समाचार देख रहे थे और इस उत्सुकता में थे कि कोई नया समाचार आने वाला है, लेकिन उन्हें डीजल के दाम बढ़ने का नया समाचार सुनना पड़ा। मैं केवल सरकार से निवेदन करना चाहता हूं और कहना चाहता हूं कि डीजल के दाम बढ़ने का असर किसानों पर पड़ता है, इस बात को सभी लोग जानते हैं। इसलिए इनको कम किया जाए। रबी का मौसम आने वाला है और ट्रैकटर में, पम्प में सभी जगह डीजल की जरूरत किसान को पड़ेगी। मजदूर भी डीजल के दाम बढ़ने से परेशान हैं। उन्हें मजदूरी करने के लिए बस में यात्रा करनी पड़ती है। इसलिए मैं चाहता हूं कि किसानों और मजदूरों पर जो भार पड़ी है, उससे उनको उबारने के लिए डीजल के दामों में कमी की जाए। अध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्री श्री राम नाईक जी बहुत अच्छा जवाब देने की कोशिश करेंगे, लेकिन मैं चाहता हूं कि जनता की भावना, लोक सभा के सभी सदस्यों की भावना है, वे चाहे बोलें चाहे न बोलें कि डीजल के दाम कम करें। इन्हीं शब्दों के साथ मैं अपनी बात समाप्त करता हूं। श्री राम नाईक: माननीय अध्यक्ष जी, वैसे तो डीजल एक ज्वलनशील (इनफलेमेबल) वस्तु है और जब डीजल का मूल्य बढ़ाया जाता है, तो वह हाइली इनफलेमेबल बनता है। महोदय, डीजल की मूल्य व्ृाद्धि की चर्चा में २५ माननीय सदस्यों ने भाग लिया और अपने विचार व्यकत किए हैं। मैं उनको धन्यवाद देना चाहता हूं। जिन माननीय सदस्यों ने इस चर्चा को सुना, उनको भी मैं धन्यवाद देना चाहता हूं। मैं माननीय सदस्यों को विश्वास दिलाना चाहता हूं कि सदन में जो इतने महत्वपूर्ण और मौलिक सुझाव दिए गए हैं, उन पर हम नश्िचतरूप से गंभीरता से विचार करेंगे और उसके अनुसार योग्य कार्रवाई करने की भी कोशिश करेंगे। अब मैं यह भी चाहता हूं कि जैसे मैंने आपके विचार शांति से सुने हैं वैसे ही आप भी मेरे विचार शांति से सुनिये और शांति से सुनेंगे इसलिए मैं आपको अग्रिम धन्यवाद देना चाहता हूं।... (व्यवधान)
चर्चा सार्थक हो और जानकारी के आधार पर हो इसलिए मैंने एक टिप्पणी माननीय सदस्यों को दी थी। मुझे ऐसा लगता है कि उसका उपयोग सामान्यतः कई सदस्यों ने किया है और इसी प्रकार जानकारी के आदान-प्रदान के आधार पर आने वाले पांच साल काम करने की इच्छा है और कोशिश भी रहेगी। इसमें आप सबका सहयोग मिले कयोंकि यह पहली ही डिबेट मूल्य व्ृाद्धि पर है इसलिए आने वाले ... (व्यवधान) आप आखिर तक सुनेंगे तब मिलेगा। एक बात मैं जरूर कहना चाहता हूं कयोंकि जब माननीय शंकर सिंह वघेला ने चर्चा को प्रारंभ किया, उस समय उन्होंने १० जुलाई १९९६ की चर्चा का उल्लेख किया। वह मेरे पास भी है और मैंने भी सोचा था कि उस समय कया-कया हो गया, वह जरा हम देख लें। आपने जो बात कही, वह सामान्यतः ठीक है कयोंकि आपने तथ्यों के आधार पर कही है। श्री रघुवंश प्रसाद जी भी बोले हैं। मुझे इतना ही लगता है कि कभी-कभी चर्चा में हम दोहरे मापदंड कयों लायें। हमने किया तो खराब किया और आपने किया तो अच्छा किया, यह डबल स्कैंडर्ड वाली बात कभी-कभी होती है तो वह मन को थोड़ी पीड़ा देती है। इसलिए डबल स्कैंडर्ड, इस प्रकार के आदान-प्रदान, कुछ ठोका-ठाकी, मारा-मारी ऐसी बातें न चाहते हुए मुझे इस विषय के बारे में जो आपके सामने कहना है, वह मैं बताना चाहता हूं। एक बात हकीकत है कि जितना क़ूड ऑयल या डीजल हमारे देश में बनना चाहिए, उतना नहीं बनता है और उसका स्वाभाविक परिणाम यह है कि देश की आवश्यकता के अनुसार ७० प्रतिशत क़ूड ऑयल हम विदेशों से आयात करते हैं और क़ूड ऑयल आना ही चाहिए। देश की आवश्यकता पूरी होनी ही चाहिए और आप में से कई मान्यवर सदस्यों ने यह भी कहा और यह सच भी है कि वह व्हीकल नैसेसिटी है। व्हीकल नैसेसिटी सड़क पर ट्रक चलाने की हो, गाड़ियां चलाने की हो, रेल चलाने की हो, आकाश में हवाईजहाज चलाने की हो या पानी का स्टीमर चलाने की हो, सब जगह यह डीजल मोटिव पावर है। इसलिए देश की आर्िथक औद्योगिक विकास होना है तो देश में कभी भी किसी भी समय पर डीजल की कमी नहीं होनी चाहिए और डीजल की कमी न हो जाये इसके लिए दो ही बातों का उपाय किया जा सकता है कि एक लम्बी योजना बनाई जाये जिसके आधार पर अपने देश में जो ऐवेलेबेल रिसोर्िसस हैं, उसका अधिक से अधिक उपयोग करें। मैं पहली बात आपको यह कहना चाहता हूं कि आने वाले दिनों में जहां-जहां इस प्रकार की जानकारी मिली है, उसके एकसप्लोरेशन की गति हमें बढ़ाने की कोशिश करनी चाहिए ताकि देश में क़ूड ऑयल और डीजल का खुद का निर्माण हो सके, ऐसी कोशिश करनी चाहिए। लेकिन जब तक ऐसा नहीं होता है तब तक हमको विदेशों से क़ूड ऑयल इम्पोर्ट करना पड़ेगा और इस भूमिका में इस समस्या की ओर हमको देखना चाहिए, ऐसा मुझे लगता है। अब इम्पोर्ट करना है और इम्पोर्ट जागतिक अंतर्राष्ट्रीय बाजार में दामों की स्िथरता नहीं है और इस बात को लेकर पहले की सरकार ने इसके बारे में विचार किया और यह विचार बहुत गंभीरता से किया गया कयोंकि अंतर्राष्ट्रीय मूल्य और देश के ऑयल पूल एकाउंट में जून १९९७ में जिसका उल्लेख कई सदस्यों ने किया है, १८,२०० करोड़ रुपये का घाटा आया। अब १८,२०० करोड़ रुपये का जो घाटा आया है, वह कोई एक साल में नहीं आया था। इसलिए एक ऐसी बात कि जब १९९६ में कांग्रेस की सरकार थी, एक रिकंस्ट्रकशन ऑफ ऑयल इंडस्ट्री का अभ्यास करने के लिए एक अभ्यासदल गठित किया गया था। मैं ऐसा कह सकता हूं कि कांग्रेस ने इस प्रकार की समति बनाने का विचार किया, समति बनाई। फिर कांग्रेस की सत्ता गई, युनाइटेड फ्रंट की सरकार आई और युनाइटेड फ्रंट की सरकार ने सितम्बर १९९७ में इसके बारे में फैसला किया कि जो अंतर्राष्ट्रीय कीमतें हैं, देश में क़ूड ऑयल और डीजल है, उसमें एक पैरिटी रखनी चाहिए। एक समान पैरिटी रखने का निर्णय उस समय युनाइटेड फ्रंट की सरकार ने लिया। बात ऐसी हो गई कि उस निर्णय पर अमल करने का काम हमारे पास आ गया। उस समति के विचार के बाद युनाइटेड फ्रंट ने निर्णय किया और अभी हमारी सरकार आई है इसलिए उस निर्णय पर हम अमल करने की कोशिश करते हैं। मुझे ऐसा लगता है कि यह तीनों की मिली-जुली बात है कि ऐसी चर्चा में या ऐसे विषय पर एक कौन्सैन्सस बनना चाहिए और उस कौन्सैन्सस की नीति को हम आगे ले जाने की कोशिश करेंगे। इम्पोर्ट प्राइस के संबंध में बात है कि पैरिटी लानी चाहिए और समानता रहना ही इस समय सबसे बड़ा महत्व और गंभीर मुद्दा है। इसमें कितनी राजनीति करें, हरेक का अपना-अपना ढंग होता है। लेकिन कांग्रेस के एक महत्वपूर्ण प्रवकता का २४ अकटूबर के टाइम्स ऑफ इंडिया में एक स्टेटमैंट आया है। उन्होंने उसमें काफी अलग-अलग मान्यवरों के उद्धरण दिए हैं, उसमें कांग्रेस के आर्िथक विषय के जो स्पोकसमैन हैं, मैं आपको उनका उद्धरण पढ़ाना चाहता हूं।He says and I quote :
"There is no economic or social case for a diesel subsidy. The only social case for a subsidy is kerosene. Everytime international prices of diesel go down, they should be decreased here; everytime prices go up, our prices should be increased. It is essential to link diesel prices to the international market. The decision to do away with the subsidy was taken by the U.F. Government in late 1997 based on the report of the Committee constituted by the Congress". उसमें अंतिम वाकय अधिक महत्व का है।"It is height of intellectual hypocrisy to oppose the increase in prices". यह कांग्रेस का इस विषय का जानकार व्यकित कहता है।... (व्यवधान) श्री शंकर सिंह वघेला : फरवरी १९९९ से प्राइस राइज़ हुए, आपने तब तक कयों इंतजार किया? श्री राम नाईक :I am coming to that point. मैंने आपको सुना है, आप भी हमारी बात सुनिए। कुछ माननीय सदस्यों के चेहरों पर थोड़ा संदेह दिखाई दिया कि ये कौन हैं। ये श्री जयराम रमेश, सैक़ेटरी, इकोनौमिक अफेयर्स डिपार्टमैंट, कांग्रेस पार्टी हैं। ये आपके जानकार का दिया हुआ वकतव्य है। वे चाहें तो पुनर्िवचार कर सकते हैं, आप भी पुनर्िवचार कर सकते हैं लेकिन आज की जो स्िथति है, उसे मैंने आपके सामने रखने की कोशिश करी। अब सवाल यह आया कि सितम्बर १९९७ से अकटूबर १९९९ तक कया-कया हुआ, किस प्रकार हुआ, इसके बारे में भी माननीय सदस्यों ने जानकारी मांगी है। मैंने नोट में दी है लेकिन यदि उसका संक्षेप में विश्लेषण करना है तो मैं ऐसा कह सकता हूं कि सितम्बर १९९७ से अकटूबर १९९९ तक कुल मिलाकर नौ बार कीमतों में परिवर्तन हुआ। नौ बार कीमतों में जो परिवर्तन हुआ, उसमें से छ: बार कीमतें कम कर दी गईं। अभी पांच अकटूबर को कीमतें बढ़ाने का जो निर्णय लिया, उसे मिलाकर तीन बार कीमतें बढ़ाई गईं। छ: बार कीमतें कम की गईं और तीन बार बढ़ाई गईं... (व्यवधान) श्री बसुदेव आचार्य : कितनी कम की गईं और कितनी बढ़ाई गईं?... (व्यवधान) श्री राम नाईक : मैंने आपको स्टेटमैंट दी है।... (व्यवधान) श्री रघुवंश प्रसाद सिंह : जिस समय कीमतें कम की गईं, उस समय अंतर्राष्ट्रीय प्राइस बढ़ा, यह गड़बड़ी आपने की। श्री यशवंत सिन्हा : सब गड़बड़ी आप करके गए हैं, मंत्री थे।... (व्यवधान) श्री राम नाईक : आपने कहा गड़बड़ी की है, इससे गड़बड़ी नहीं होती। आपके विचारों में थोड़ी गड़बड़ हो रही है, ऐसा मुझे लग रहा है। लेकिन मैं यह कहना चाहता था कि जब अन्तर्राष्ट्रीय मार्केट में कीमतें कम हो गईं तो उस समय पर डीजल पूल एकाउंट में से कीमतें कम की गईं और जब बढ़ीं, तब बढ़ाई गईं। यह एक पैरिटी रखने का जो प्रयास किया है... (व्यवधान)
MR. SPEAKER: Please do not disturb him. He is not yielding.
... (Interruptions)
SHRI RAM NAIK: That is what I have circulated in the statement. I do not want to go much in the figures only because then, we go away from the feelings. आपकी भावना का विषय है, ऐसा कहा था, इसलिए मैं यह कहना चाहता हूं कि इस सम्बन्ध में फरवरी, १९९९ से सितम्बर, १९९९ तक जो बढ़ीं, उसका कया हुआ और बीच में कीमतें कयों नहीं बढ़ाई गईं, इस प्रकार का भी एक विषय रखा गया। श्री प्रभुनाथ सिंह : मर्सी अपील पर विचार कीजिए। श्री राम नाईक : वह अन्त में होगा। मर्सी तो अन्त में ही होती है। फरवरी, १९९९ में क़ूड ऑयल की प्राइस ३२१० थी और सितम्बर में बढ़कर ७०२० हो गई, मतलब ११९ प्रतिशत ज्यादा कीमतें बढ़ गईं। वैसे ही डीजल की भी प्राइसेज़ ९४ परसेंट बढ़ गईं। एक बात जो मानी गई है कि हमने बीच में फरवरी के बाद कुछ किया ही नहीं, तो अप्रैल में ये प्राइसेज़ रिवीजन हुई हैं और नहीं हुई हैं, ऐसा नहीं है, अप्रैल में प्राइस रिवीजन हो गया। तो फिर बात आती है कि मई से सितम्बर तक हमने कया किया। मई से सितम्बर तक हमने कया किया, यह सोचें तो बहुत से माननीय सदस्यों को लगता है कि केवल बस चुनाव थे। अब चुनाव में उस समय कीमतें बढ़ाएंगे तो कया होगा। फिर चुनाव हार जाएंगे, जीत जाएंगे वगैरह-वगैरह चर्चा करके आपमें से कई माननीय सदस्यों ने कहा और ऐसा मन में आना स्वाभाविक भी है। जब चुनाव हार गये तो कयों हारे और जीतते हैं तो जीतने के बारे में सोचते हैं। लेकिन मैं कहना चाहता हूं कि चुनाव का आपके मन पर जो बोझ है, चुनाव जो अपने विचारों पर हावी हुआ है, उसको थोड़ा बाजू में रखेंगे तो आपको ख्याल आयेगा कि मई जून जुलाई में अपना देश कारगिल पर पाकिस्तान के साथ लड़ रहा था और जब देश लड़ाई में होता है... (व्यवधान) श्री रघुवंश प्रसाद सिंह : उस समय इलैकशन हो सकता है। श्री राम नाईक : संविधान के कारण इलैकशन हो सकता है और आपको जल्दी नहीं होनी चाहिए, कांग्रेस ने ऐसा कहा, नहीं तो हम तो चुनाव के लिए तैयार थे... (व्यवधान)
हम तो तुरन्त चुनाव कराना चाहते थे, आप लोगों ने कहा कि चुनाव बाद में करें ... (व्यवधान) देश जब लड़ाई करता है तो देश की लड़ाई का एक प्रमुख अंग यह होता है कि कीमतें स्िथर रखनी हैं। कीमतें स्िथर रखना, यह उस समय बहुत आवश्यक होता है। आप पहले की अपने देश की बाकी की लड़ाइयां देखेंगे तो हर लड़ाई में कीमतें बढ़ी हैं। केवल कारगिल की लड़ाई अपने देश की पहली लड़ाई है, जब कीमतें बढ़ीं नहीं। व्यापारियों ने कीमतें नहीं बढ़ाईं, उद्योगपतियों ने नहीं बढ़ाईं और जो चोरी, जमाखोरी करने वाले हैं ... (व्यवधान) श्री मुलायम सिंह यादव (सम्भल) : अब जब कारगिल की बात आई है तो आप बताइये, करना कया चाहते हैं? कारगिल की बात तो फिर हो जायेगी। कारगिल की बहस कल हो जायेगी। अब बताइये कि इस बारे में आप कया करना चाहते हैं? आप कुछ कहना चाहते हैं या नहीं? श्री राम नाईक : हम तो आपको विश्लेषण देना चाहते हैं कि बीच के समय में कया हुआ।... (व्यवधान)
आप सुनो तो सही। श्री मुलायम सिंह यादव : हम इसके विरोध में सदन से बहिष्कार करते हैं। ( त्पश्चात श्री मुलायम सिंह यादव तथा कुछ अन्य माननीय सदस्यों ने सदन से बहिर्गमन किया।)MR. SPEAKER: Nothing will go on record except the speech of the Minister.
(Interruptions)* श्री राम नाईक: अध्यक्ष जी, मैं यह कह रहा था... (व्यवधान) अध्यक्ष महोदय: रघुवंश प्रसाद जी, मंत्री जी को जवाब देने दें। आप बैठ जाएं।... (Interruptions)
MR. SPEAKER: Shri Raghuvansh Prasad Singh, let him complete.
SHRI RAM NAIK: You can ask me the questions afterwards.
MR. SPEAKER: Shri Suresh, what is this? Please take your seat.
_____________________________________________________________________________ *Not recorded. श्री राम नाईक: देश में जब लड़ाई होती है तो देश की जनता का मनोबल मजबूत रखने के लिए कीमतें स्िथर रखना आवश्यक होता है। मैं सभी देशवासियों को धन्यवाद देना चाहता हूं कि उन्होंने लड़ाई के समय कीमतें स्िथर रखीं। कीमतों को स्िथर रखने में ऑयल पूल अकाउंट का उस समय न बढ़ाया जाना भी एक महत्वपूर्ण कारण था, ऐसा मैं मानता हूं। श्री बसुदेव आचार्य : उसके बाद कया हुआ? श्री राम नाईक: उसके बाद कया हुआ, यह ६ अकतूबर को आपको पता चला।SHRI RAJESH PILOT (DAUSA): This is not correct.
SHRI RAM NAIK: Is it the proper way of asking questions? श्री बसुदेव आचार्य : अगस्त में कया हुआ, यह हम जानना चाहते हैं? श्री राम नाईक: मैं वही बताना चाहता हूं। अध्यक्ष जी, युद्ध के बाद जैसा मैंने कहा विदेशों में जिस गति से तेल के दाम बढ़ रहे थे, उसमें मार्केट वोलाटाइल हो रहा था। इतनी तेज गति से इससे पहले कभी दाम नहीं बढ़े थे। इसलिए सोचा गया कि जब मार्केट वोलाटाइल हो रहा है तो उसका थोड़ा निरीक्षण करना चाहिए। निरीक्षण करने की दृष्िट से तब दाम नहीं बढ़ाए गए, यह एक बात है... (व्यवधान)
अब आपको मंजूर हो या न हो, लेकिन मैं स्िथति बता रहा हूं। श्री बसुदेव आचार्य : निरीक्षण करने में दो महीने लग गए? श्री राम नाईक: अभी बढ़ाए तब भी आप नाराज हैं, उस वकत बढ़ाते, तब भी आप नाराज होते। मैंने सितम्बर तक की बात बता दी है। अब आप ऑयल पूल अकाउंट की बात देखें। जब पहले जून १९९७ में फैसला लिया गया, उस समय १८२०० करोड़ रुपए का डेफसिट था। यह किसका था, इसकी चर्चा में मैं नहीं जाना चाहता। लेकिन जब वाजपेयी जी की सरकार मार्च १९९८ में आई, उस समय १४१५६ करोड़ रुपए का डेफसिट था। उसमें आगे के दिनों में कोशिश करते-करतेas on 31st March, 1999, after which the increase started, the deficit was just Rs. 3,408 crore. इसका मतलब है कि हमने एक साल में लगभग ११००० करोड़ रुपए का डेफसिट कम किया। मैं मानता हूं कि सदन को इसे एक उपलब्िध के रूप में देखना चाहिए। अकतूबर में जब इस बात का विचार किया, जब डेफसिट कीमतें बढ़ने के कारण ५२०० करोड़ रुपए हो गया तो और थोड़ा रुकते तो कया हो जाता, इतना ही हो जाता कि जिस गति से दाम बढ़ रहे हैं, अगले वर्ष मार्च के अंत तक यह घाटा १०००० करोड़ रुपए तक हो जाता। मेरा अनुमान है कि अकतूबर से आगामी मार्च तक कीमतें बढ़ती हैं तो ऑयल पूल अकाउंट डेफसिट ३९०० करोड़ रुपए तक रहेगा। हकीकत यह है कि कीमतें बढ़ाते समय न तो हमें खुशी है और न ही हम जनता को जानबूझ कर तकलीफ देना चाहते हैं। लेकिन हमारे पास दूसरा विकल्प नहीं था इसलिए दाम बढ़ाए गए। कोई अन्य विकल्प होता तो हम उस पर विचार कर सकते थे। इसलिए हमने एक कठोर कार्य मजबूरी में किया है। जिसे हम हार्ड डिसीजन कहते हैं तो मैं ऐसा मानता हूं कि नई सरकार आने के बाद हमने यह पहला हार्ड डिसीजन लिया है। श्री प्रियरंजन दासमुंशी (रायगंज): कया यह सच नही हैं कि अगस्त महीने में आप मंत्रणा लाए। उस समय यह सुझाव दिया गया था कि आयल-पूल का घाटा मिटाने के लिए डीजल की प्राइस बढ़ा दी जाएं, लेकिन चुनाव को मद्दे नजर रखते हुए...MR. SPEAKER: Shri Das Munshi, he has not completed his reply yet. श्री राम नाईक : यह सवाल ठीक है। मुझे उत्तर इतना ही देना है कि उस समय मैं मंत्रिमंडल में नहीं था, इसलिए मुझे मालूम नहीं है। जानकारी लेकर मैं बता दूंगा। श्री बसुदेव आचार्य : जानकारी नहीं है, तो यशवंत जी से पूछ लीजिए। श्री राम नाईक : अभी जो हड़ताल चल रही है, मैं सदन को उसके संदर्भ में जानकारी देना चाहता हूं। श्री राजेश पायलट : सदन में सारे सदस्यों ने आपसे अपील की है, सारी पार्िटयों ने अपील की है, उसके बारे में बतलाइए। हड़ताल के बारे में बाद में बताइए। श्री राम नाईक : हड़ताल के कारण लोगों को परेशानी हो रही है।... (व्यवधान) आल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस ने हड़ताल का आहवान किया है।... (व्यवधान)
कांग्रेस संगठन का नाम है। हो सकता है, इनमें से किसी का संबंध हो, लेकिन में राजनीति में नहीं जाना चाहता। उन्होंने कहा, २१ अकटूबर को हड़ताल पर जायेंगे, तो हमारी सैक़टेरी लैवल पर चर्चा हुई। हमारे परिवहन मंत्री, श्री नीतीश कुमार जी और मैं, हम दोनों ने ट्रांसपोर्ट कांग्रेस के पदाधिकारियों से दो-ढाई घन्टे चर्चा की। उनसे हमने कहा कि ये सारे तथ्य हैं और इन तथ्यों के आधार पर हम चर्चा कर सकते हैं। हम जानते हैं कि सैल्स टैकस, आकट्राय डयूटी, सैस आदि में कई प्रकार की कठिनाइयां ट्रांसपोर्टर्स को हो रही हैं। इन समस्याओं के बारे में हम स्वतन्त्र रूप से चर्चा करके उसमें से रास्ता निकालेंगे। ऐसा हमने उनको कहा। उस समय उनका एक पाइंट प्रोग्राम था - रोल बैक। हमने कहा - ऐसा नहीं कर सकते हैं। लेकिन उन्होंने हड़ताल शुरू की। उसके बाद फिर भी सचिव स्तर पर विचार-वनिमय और चर्चा कर रहे हैं। आज भी इस सदन से मैं आहवान करना चाहता हूं कि यह ऐसी समस्या है, जिसे हम चर्चा के माध्यम से सुलझा सकते हैं। एक अच्छा वातावरण निर्माण हो और अपनी हड़ताल वापिस लेते हैं, तो अच्छा रहेगा। श्री रघुवंश प्रसाद सिंह : मूल्य व्ृाद्धि आप अभी वापिस लीजिए।SHRI BASUDEV ACHARIA : You first reduce the prices. श्री राम नाईक : आप इनका इतना कयों समर्थन कर रहे हैं। मैं यह कह रहा हूं कि इस समय उनमें दो विचार चल रहे हैं। मोटे तौर पर खबर है कि छोटे-ट्रक वाले, टैम्पोज वाले, बड़ी हड़ताल में शामिल नहीं है। लेकिन इस प्रकार से हम अलग-अलग विभाजन करना उचित नहीं समझते हैं। इसलिए आहवान कर रहे हैं कि वे अपनी हड़ताल वापस लें। नैगोसिएशन टेबल पर हमने उनको पहले भी बुलाया है। चर्चा के लिए हम तैयार हैं। एक खात बात जानकारी के तौर पर मैं सदन को देना चाहता हूं। पिछली छ: दफा जब डीजल की प्राइस कम की गई, तो उस समय, जो बड़े ट्रांसपोर्टस हैं, किसी ने भी रेट कम करके उसका बेनफिट लोगों को पास-आन नहीं किया। जब एकसाइज डयूटी कम होती है, तो उद्योगपति भी एकसाइज डयुटी कम करके उसका लाभ लोगों को पास-आन नहीं करते हैं। इस पर यशवंत जी कहते हैं कि ऐसे लोगों पर हम डंडा चलायेंगे। छ: दफा प्राइस कम होने के बाद भी उसका फायदा लोगों को पास-आन नहीं किया गया। हमने उनको सुझाव दिया है कि जो बड़े कांट्रैकटर्स हैं, लांग-टर्म कांन्ट्रैकटस रखते हैं, उसमें एसकेलेशन कलाज होती है और एसकेलेशन कलाज के आधार पर जहां कान्ट्रैकटस हैं, वहां हम कर सकते हैं। हमने राज्य सरकारों को और सारेPSU""""s को निर्देश दिया है कि यदि कान्ट्रैकस में एस्केलेशन कलाज नहीं होगा, तब भी आपने जो बढ़ोतरी हुई है, उसके आधार पर... श्री राजेश पायलट : मंत्री जी, आखिरी पेज पढ़िए, कया लिखा है? श्री राम नाईक : आखिरी पेज में यह लिखा हुआ है - डीजल मूल्य व्ृाद्धि का बोझ आम आदमी पर जाएगा। यह हम नहीं करते तो फिर विदेशों से जितना चाहें उतना क़ूड हम ला नहीं सकते हैं और अगर उतना क़ूड नहीं लाएंगे तो फिर उद्योग पर असर होगा। इस बात को लेकर जो मैंने शुरु में कहा कि देश के अंदर उत्पादन व्ृाद्धि पर योजना बनानी पड़ेगी। वह करते-करते आखिर के पेज़ पर मैंने लिखा है, अगले सप्ताह दीपावली का त्यौहार है। किसानों को भी खाद की बहुत जरूरत है, उनकी समस्या बहुत महत्वपूर्ण है। जहां बिजली नहीं है वहां भी डीजल की आवश्यकता होती है और सारी असेंशियल सर्िवसेस चलनी चाहिए, इस भूमिका में आम आदमी को तकलीफ न हो, इस प्रकार से बात होनी चाहिए। इस सारी बात को लेकर आपने जितने सुझाव दिए हैं उन सारे सुझावों पर गंभीरता से विचार करेंगे।... (व्यवधान) श्री रघुवंश प्रसाद सिंह : डीजल मूल्यों में की गई व्ृाद्धि को वापस न लिए जाने के विरोध में मैं अपने दल के सदस्यों सहित सदन से बहिर्गनम करता हूं।17.51 hrs ( त्पश्चात श्री रघुवंश प्रसाद सिंह तथा कुछ अन्य माननीय सदस्यों ने सदन से बहिर्गमन किया।)SHRI BASUDEV ACHARIA (BANKURA): Sir, we are walking out in protest.
17.51 hrs (At this stage, Shri Basudeb Acharia and some other hon. Members left the House.) श्री राजेश पायलट : एक तरफ कह रहे हैं कि गंभीरता से विचार करेंगे, दूसरी तरफ प्रधान मंत्री जी और वित्त मंत्री जी का बयान है कि वापस नहीं हो सकता। आज सरकार की कया मंशा है, आप देश को साफ बताइए।... (व्यवधान)
हमारी मांग है मंत्री जी आश्वसन दें कि हम इस बोझ को कम करेंगे, इससे पहले हम नहीं मानेंगे। ... (व्यवधान) श्री राम नाईक : मान्यवर, आप भी मंत्री रह चुके हैं, ऐसे महत्वपूर्ण विषयों के बारे में मंत्री परिषद में विचार करना पड़ता है, सारे सुझाव गंभीरता से उनके पास रखेंगे और उन पर विचार करेंगे।... (व्यवधान) श्री प्रिय रंजन दासमुंशी : आप घटाने की व्यवस्था कीजिए।... (व्यवधान) आप आश्वासन दें कि घटाएंगे।... (व्यवधान) श्री राम नाईक : मैं विचार करने का आश्वासन दे रहा हूं।... (व्यवधान) श्री प्रिय रंजन दासमुंशी : सदन की सभी सदस्यों ने यह मांग की है कि आप इसे घटाएं।... (व्यवधान)
सदन की भावनाओं को मद्देनजर रखते हुए घटाने का थोड़ा आश्वसन दीजिए। आप कितना घटाएंगे इस पर विचार कीजिए।
... (व्यवधान) श्री राजेश पायलट : पेट्रोलियम मंत्री जी से पहले वित्त मंत्री जी पूरी तरह गर्दन हिला रहे हैं।... (व्यवधान)
महोदय, हमने बहुत सच्चाई से, साधारण ढंग से और राजनीति से ऊपर उठ कर बात की है तथा इनसे प्रार्थना की कि आप देश की भावना की कद्र करें और प्रजातंत्र के कायदे से सरकार को चलाएं लेकिन इन्होंने हमारी भावना को ठेस पहुंचाई है, किसानों के बोझ को कम करने के लिए यह सरासर मना कर रहे हैं कि हम कम नहीं करेंगे, विचार करेंगे। यह आम आदमी और किसान के साथ धोखा है। ६० प्रतिशत बजट किसान के लिए जाएगा।
... (व्यवधान) श्री प्रिय रंजन दासमुंशी : राम नाईक जी, आप इस बारे में सोचिए।... (व्यवधान)
आप कृपा करके यह कहिए कि हम इसे घटाएंगे।
... (व्यवधान) श्री राजेश पायलट : आप यह आश्वासन दीजिए कि हम इसे जरूर घटाएंगे, हम इस बात को मानने के लिए तैयार हैं।... (व्यवधान) श्री प्रिय रंजन दासमुंशी : आप हाउस को थोड़ी तो इज्जत दीजिए।... (व्यवधान) श्री राजेश पायलट : आप यह आश्वसन दें कि हम कम करेंगे।SHRI RAM NAIK: In all earnestness and with all sincerity at my command, I had assured what I can do on the spot here that these issues will be taken up seriously and that I will take them to the Cabinet seriously. That is what I can assure.
... (Interruptions) श्री राजेश पायलट: आप आश्वासन नहीं दे रहे हैं इसलिए हम सदन में भी और सदन के बाहर भी इसका विरोध करेंगे। इसके साथ हम भी सदन से वॉक-आउट करते हैं।17.56 hrs (त्पश्चात श्री राजेश पायलट तथा कुछ अन्य माननीय सदस्यों ने सदन से बहिर्गमन किया।)_______