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State Consumer Disputes Redressal Commission

Arif Farooqui Director Aftek ... vs Arif Farooqui Director Aftek ... on 12 February, 2026

             STATE CONSUMER DISPUTES REDRESSAL COMMISSION
                                  UTTAR PRADESH
                        REVIEW APPLICATION NO. SC/9/RA/96/2025
                                         IN
                                   SC/9/A/791/2024
                                        WITH
                         SC/9/IA/676/2025 (CONDONATION OF DELAY)


Arpan Kumar
PRESENT ADDRESS - Arpan Kumar Sri Ram Gopal Srivastava 176 Hanuman Mandir Mahajani
Tola Deokali Faizabad,UTTAR PRADESH.
                                                                    .......Appellant(s)

                                            Versus


Arif Farooqui Director Aftek Developers Pvt. Ltd.
PRESENT ADDRESS - Arif Farooqui Director Aftek Developers Pvt. Ltd. Umrao Plaza B 3 Second
floor indira nagar Faizabad Road Lucknow,UTTAR PRADESH.
                                                                         .......Respondent(s)

BEFORE:
   HON'BLE MR. JUSTICE AJAI KUMAR SRIVASTAVA , PRESIDENT
   HON'BLE MRS. SUDHA UPADHYAY , MEMBER

FOR THE APPELLANT:
       Arpan Kumar

FOR THE RESPONDENT:
       Arif Farooqui Director Aftek Developers Pvt. Ltd.

DATED: 12/02/2026
                                           ORDER

(सुरक्षित) राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, उ0प्र0, लखनऊ पुनर्विलोकन संख्या-96/2025 मोहम्मद आरिफ फारूकी, डायरेक्टर, अफटेक डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड, कार्यालय, उमराव प्लाजा, बी-3, दूसरी मंजिल, इंदिरा नगर, बूथनाथ मार्केट के पास, फैजाबाद रोड, लखनऊ-226016 ..........पुनर्विलोकनकर्ता बनाम अर्पण कुमार उर्फ अर्पण कुमार श्रीवास्तव पुत्र श्री राम गोपाल श्रीवास्तव मकान नंबर 176, हनुमान मंदिर महाजनी टोला, देवकाली, फैजाबाद, जिला-अयोध्या, यू0पी व अन्य ..........विपक्षीगण समक्ष:-

1. माननीय न्यायमूर्ति श्री अजय कुमार श्रीवास्तव, अध्यक्ष।
2. माननीय श्रीमती सुधा उपाध्याय, सदस्य।

पुनर्विलोकनकर्ता के पक्ष से उपस्थित : श्री शादाब हुसैन विपक्षी सं0-1 के पक्ष से उपस्थित : श्री सुधीर शर्मा विपक्षी सं0-2 के पक्ष से उपस्थित : श्री अंसुल बर्नवाल दिनांक:- 12.02.2026 माननीय न्यायमूर्ति श्री अजय कुमार श्रीवास्तव, अध्यक्ष द्वारा उद्घोषित निर्णय

1. यह पुनर्विलोकन आवेदन, अपील संख्या-791/2024, अर्पण कुमार व अन्य बनाम मोहम्मद आरिफ फारूकी आदि में इस आयोग द्वारा पारित आलोच्य निर्णय/आदेश दिनांकित 02.5.2025 को पुनर्विलोकित करने के लिए प्रस्तुत किया गया है, जिसके द्वारा अपील को स्वीकार करते हुए अधोलिखित आदेश पारित किया गया है :-

"Appeal is allowed. The judgment and order dated 23.4.2024 passed by the Ld. District Commission, Faizabad/Ayodhya in complaint case no.169 of 2023 is hereby set aside. The complaint is allowed. The respondent no.1 is -2- directed to pay to the complainant/appellant his deposited amount Rs.21,60,000.00 with interest @12% from the date of deposit till the date of payment within 45 days from the date of this order. The respondent no.1 is also directed to pay Rs.1,00,000.00 as compensation to the appellant/complainant within the said period.
The stenographer is requested to upload this order on the Website of this Commission today itself.
Certified copy of this judgment be provided to the parties as per rules."

2. पुनर्विलोकनकर्ता के पक्ष से योग्य अधिवक्ता श्री शादाब हुसैन तथा विपक्षी संख्या-1 के पक्ष से योग्य अधिवक्ता श्री सुधीर शर्मा तथा विपक्षी संख्या-2 स्टेट बैंक आफ इण्डिया के पक्ष से योग्य अधिवक्ता श्री अंसुल बर्नवाल के तर्कों को विस्तार से सुना गया तथा आलोच्य निर्णय/आदेश एवं पत्रावली परिशीलन किया गया।

3. आलोच्य निर्णय/आदेश के परिशीलन से स्पष्ट होता है कि अपीलार्थी/परिवादी को विपक्षी संख्या- 01 द्वारा 22,35,200/- रुपये के मूल्य का एक फ्लैट आवंटित किया गया था। उक्त फ्लैट का कब्जा दिसम्बर 2021 तक अपीलार्थी/परिवादी को दिया जाना था एवं तब तक अपीलार्थी/परिवादी ने कुल 21,60,000/- रुपये जमा कर दिए थे। विपक्षी पक्ष ने पक्षों के मध्य हुई संविदा में तय समय सीमा के भीतर फ्लैट का कब्जा नहीं दिया है, इसलिए अपीलार्थी/परिवादी ने जमा रा शि अंकन 21,60,000/- रुपये की वापसी 24% ब्याज सहित, क्षतिपूर्ति के रूप में अंकन दो लाख रुपये तथा विपक्षी संख्या-02 के विरुद्ध अंकन एक लाख रुपये की मांग करते हुए परिवाद संस्थित किया है।

4. पुनर्विलोकनकर्ता ने वर्तमान पुनर्विलोकन इस आधार पर प्रस्तुत किया है कि अवसर की कमी के कारण पुनर्विलोकनकर्ता अपील में सही तथ्य राज्य आयोग के समक्ष प्रस्तुत नहीं कर सके हैं तथा अपीलार्थी/परिवादी ने आयोग के समक्ष सही तथ्य एवं लेन-देन का सही विवरण प्रस्तुत नहीं किया है, साथ ही प्रश्नगत निर्णय में प्रचलित ब्याज दर के अनुसार 12 प्रतिशत ब्याज की दर बहुत अधिक है।

-3-

5. यह भी कथन किया गया है कि पुनर्विलोकनकर्ता के विरूद्ध दिनांक 02.5.2025 को पारित निर्णय एवं आदेश एकपक्षीय है तथा विपक्षी संख्या-02 को वापस की गई धनराशि एवं किश्तों का समायोजन अंतिम भुगतान के समय नहीं किया गया। अपीलार्थी/परिवादी ने उक्त यूनिट पर विपक्षी संख्या-02 से ऋण लिया है तथा उक्त यूनिट विपक्षी संख्या-02 द्वारा गिरवी रखी गई है। तदनुसार प्रस्तुत अपील में पुनर्विलोकनकर्ता के विरूद्ध पारित आलोच्य निर्णय/आदेश को वापस लेकर अपील को गुणदोष के आधार पर निस्तारित करने की प्रार्थना की गई। पुनर्विलोकनकर्ता के योग्य अधिवक्ता का तर्क है कि पुनर्विलोकन आवेदन संधारणीय है।

6. इसके विपरीत विपक्षीगण के पक्ष से योग्य अधिवक्ता द्वारा उपरोक्त तर्क का विरोध करते हुए यह तर्क किया गया कि पुनर्विलोकन की अधिकारिता अत्यंत सीमित है। यह मामले के पुनर्विचार या पुन: सुनवाई का साधन नहीं हो सकता। आलोच्य निर्णय/आदेश में ऐसी कोई स्पष्ट त्रुटि नहीं है, जिसके कारण विवादित निर्णय/आदेश के पुनर्विलोकन की आवश्यकता हो, इसलिए पुनर्विलोकन प्रार्थना पत्र निरस्त किए जाने योग्य है।

7. उभय पक्षों के योग्य अधिवक्तागण की बहस सुनने एवं अभिलेखों का अवलोकन करने के पश्चात हम यह उल्लेख करना उचित समझते हैं कि उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 जिसे आगे '' अधिनियम 2019'' शब्द से सम्बोधित किया जाएगा, का उद्देश्य उपभोक्ता विवादों से संबधित मामलों का शीघ्र निस्तारण करना है। राज्य आयोग द्वारा अपील/परिवाद का निस्तारण किए जाने के बाद, इस संबंध में वैधानिक उपाय अधिनियम 2019 की धारा 58 (1) के तहत माननीय राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग में अपील करना है। सीमित आधारों पर ऐसे आदेश का पुनर्विलोकन अनुमेय है यदि यह उन आधारों पर की जाती है, जो अधिनियम 2019 की धारा 50 के अंतर्गत आते हैं, जिसका उल्लेख अधोलिखित रूप से किया जा रहा है :-

'' राज्य आयोग को या तो स्वप्रेरणा से या ऐसे आदेश के तीस दिन के भीतर किसी पक्षकार द्वारा किए गए आवेदन पर उसके द्वारा पारित किसी आदेश का पुनर्विलोकन करने की शक्ति होगी यदि अभिलेख के देखने से ही स्पष्ट त्रुटि दिखाई पड़ती है।''

8. धारा-50 उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 में उपबंधित प्राविधान -4- के आलोक में यह स्पष्ट है कि पुनर्विलोकन प्रार्थना पत्र का विस्तार अपील के समतुल्य नहीं है। आलोच्य निर्णय/आदेश से पुनर्विलोकनकर्ता की असहमति पुनर्विलोकन का आधार नहीं हो सकता है। इसका उद्देश्य आलोच्य निर्णय/आदेश में अभिव्यक्त मत की पुनर्विलोकन के माध्यम से पुनर्स्थापित करना भी नहीं हो सकता है। यह भी सुस्थापित विधि सिद्धान्त है कि प्रश्नगत विषय पर दो मत होने की सम्भावना भी पुनर्विलोकन का आधार नहीं हो सकता है। इस पीठ का उपरोक्त वर्णित मत माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा कमलेश वर्मा बनाम मायावती एवं अन्य 2013 (4) सी.टी.सी. 882 तथा लिली थॉमस बनाम यूनियन आफ इंडिया एवं अन्य ए.आई.आर. 2000 सुप्रीम कोर्ट 1650 में प्रतिपादित विधिक सिद्धान्त से समर्थित है।

9. उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 की धारा-50 के अंतर्गत पुनर्विलोकन की शक्ति अत्यधिक सीमित है। इसका प्रयोग मात्र तब किया जा सकता है, जब अभिलेख पर मौजूद कोई प्रत्यक्ष त्रुटि कारित की गई हो।

10. उपरोक्त वर्णित विधि सिद्धान्त एवं उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 की धारा 50 के अंतर्गत पुनर्विलोकन की सीमित अधिकारिता के आलोक में प्रश्नगत अपील संख्या-791/2024, आलोच्य निर्णय/आदेश दिनांकित 02.5.2025 के माध्यम से विद्वान पीठ ने इसमें उल्लिखित कारणों/आधारों पर तथा इसके गुण-अवगुण के आधार पर निर्णीत किया है, जिसमें ऐसी कोई प्रत्यक्ष त्रुटि विद्यमान होना दर्शित नहीं होती है, जिससे आलोच्य निर्णय/आदेश को पुनर्विलोकित किया जाए। परिणामस्वरूप प्रस्तुत पुनर्विलोकन प्रार्थना पत्र बलहीन होने के कारण निरस्त किए जाने योग्य है।

आदेश

11. प्रस्तुत पुनर्विलोकन प्रार्थना पत्र बलहीन होने के कारण निरस्त किया जाता है।

पत्रावली दाखिल दफ्तर की जाए।

उभय पक्ष अपना-अपना वाद व्यय स्वंय वहन करेंगे।

इस निर्णय/आदेश को आयोग की वेबसाइट पर नियमानुसार यथाशीघ्र अपलोड किया जाना सुनिश्चित किया जाए।





                      (सुधा उपाध्याय)          (न्यायमूर्ति अजय कुमार श्रीवास्तव)

                                   सदस्य                   अध्यक्ष
हरीश सिंह, पी0ए0-2
 कोर्ट नं0-1


                                         ..................J
                             AJAI KUMAR SRIVASTAVA
                                         PRESIDENT


                                            ..................
                                     SUDHA UPADHYAY
                                              MEMBER


HARISH SINGH /VM/Court-1/A