Lok Sabha Debates
The Speaker Made Reference To The Sad Demise Of His Majesty King Abdullah Bin Abdul ... on 23 February, 2015
Sixteenth Loksabha an> Title: The Speaker made reference to the sad demise of His Majesty King Abdullah Bin Abdul Aziz Al Saud, custodian of the Two Holy Mosques and the king of the kingdom of Saudi Arabia. She also made reference to the passing away of Shri G. Venkatswamy, member, 4th, 5th, 6th 9th, 10th, 11th and 14th Lok Sabhas; Major Ranjeet Singh, member, 4th Lok Sabha; Dr. Sarojini Mahishi, member, 3rd, 4th, 5th and 6th Lok Sabhas; and Dr. Ramanaidu Daggubati, member, 13th Lok Sabha. She further made reference to the loss of lives of 81 persons in series of attacks by militants in Chirong, Sonitpur and Kokrajhar districts of Assam on 23 and 24 December, 2014.
माननीय अध्यक्ष :माननीय सदस्यगण,मुझे दो पवित्र मस्जिदों के अभिरक्षक और सऊदी अरब साम्राज्य के सम्राट अबदुल्ला बिन अब्दुल अजीज अल सउद के दुखद निधन की सूचना देनी है। सम्राट अबदुल्ला के निधन से सऊदी अरब साम्राज्य ने अपने प्रिय राजा को खो दिया है।
उनके नेतृत्व में,सऊदी अरब साम्राज्य में उल्लेखनीय प्रगति हुई और समृद्धि आई। उन्होंने क्षेत्रीय और वैश्विक मामलों में महत्वपूर्ण योगदान दिया जिसे समस्त वैश्विक समुदाय द्वारा सराहा गया।
हम,भारत में उन्हें एक मित्र और शुभ चिंतक के रूप में स्मरण करते हैं जिनकी जनवरी 2006 में ऐतिहासिक भारत यात्रा के फलस्वरूप हमारे द्विपक्षीय संबंधो में एक अच्छे अध्याय का शुभारंभ हुआ।
सम्राट अब्दुल्ला के नेतृत्व में भारत के सऊदी अरब साम्राज्य के साथ गहन और मैत्रीपूर्ण संबंध रहे हैं। विशेष रूप से भारतीय समुदाय के लोगों के भारी संख्या में सऊदी अरब जाकर वहां बसने से इन संबंधों में और अधिक मजबूती आई है।
हम सम्राट अब्दुल्ला बिन अब्दुल अजीज अल सऊद के निधन पर गहरा शोक प्रकट करते हैं और मैं सभा की ओर से और अपनी ओर से शोक संतप्त परिवार और सउदी अरब साम्राज्य की जनता के प्रति संवेदना व्यक्त करती हूं।
माननीय सदस्यगण,मुझे सभा को चार पूर्व सदस्यों,श्री जी.वेंकटस्वामी,मेजर रंजीत सिंह,डा.सरोजनी महिषी और डा.रामानायडू दग्गुबटी के दुःखद निधन के बारे में सूचना देनी है।
श्री जी.वेकटस्वामी चौथी,पांचवीं,छठी,नौवीं,दसवीं,ग्यारहवी और चौदहवीं लोक सभा के सदस्य रहे थे। उन्होंने चौथी,पांचवी और छठी लोक सभा में आंध्र प्रदेश के सिद्धिपेट संसदीय़ निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया और नौवीं,दसवीं,ग्यारहवीं और चौदहवीं लोक सभा में आंध्र प्रदेश के पेड्डापल्ली संसदीय निर्वाचन क्षेत्र,जो अब तेलंगाना में है,का प्रतिनिधित्व किया।
एक कुशल प्रशासक,श्री वेंकटस्वामी ने केन्द्रीय मंत्रिपरिषद में विभिन्न विभागों को सफलतापूर्वक संभाला। उन्होंने श्रम और वस्त्र मंत्री ग्रामीण विकास मंत्रालय में राज्य मंत्री और श्रम और पुनर्वास तथा आपूर्ति और पुनर्वास मंत्रालय में उप मंत्री के रूप में कार्य किया।
इससे पूर्व श्री वेंकटस्वामी वर्ष 1957 से 1962 और 1978 से 1984 तक दो कार्यकाल के लिए आंध्र प्रदेश विधान सभा के सदस्य भी रहे थे। उन्होंने आंध्र प्रदेश सरकार में श्रम और नागरिक आपूर्ति मंत्री के रूप में भी कार्य किया।
एक प्रतिबद्ध संसदविद् के रूप में श्री वेंकटस्वामी ने विभिन्न संसदीय समितियों के सदस्य के रूप में कार्य किया।
श्री जी.वेंकटस्वामी का 85 वर्ष की आयु में 22 दिसम्बर, 2014 को हैदराबाद में निधन हो गया।
मेजर रंजीत सिंह उत्तर प्रदेश के खलीलाबाद संसदीय निर्वाचन क्षेत्र से चौथी लोक सभा के सदस्य थे।
एक वयोवृद्ध स्वंतंत्रता सेनानी,मेजर रंजीत सिंह ने 1942 के स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय रूप से भाग लिया और तत्पश्चात् वे सन् 1965 के भारत-पाक युद्ध में राष्ट्र के लिए वीरतापूर्वक लड़े।
विद्वान पुरुष,मेजर रंजीत सिंह ने “अवेक,अराइज और पेरिश” तथा “इन टाइगर्स ट्रैक्स” नामक दो पुस्तकें और 1857 के स्वतंत्रता संग्राम से संबंधित हिन्दी महाकाव्य की रचना की।
वे एक समर्पित खिलाड़ी भी थे। वे सन् 1944 में अखिल भारतीय कम वजन की कुश्ती के चैम्पियन थे।
मेजर रंजीत सिंह का 90 वर्ष की आयु में उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर में 4 जनवरी, 2015 को निधन हो गया।
डा.सरोजनी महिषी कर्नाटक के धारवाड़ उत्तर संसदीय निर्वाचन क्षेत्र से तीसरी से छठी लोक सभा तक सदस्य थीं।
एक सुयोग्य संसदविद्,डा.महिषी ने वर्ष 1969 से 1971 तक संघ सरकार में पर्यटन और नागर विमानन उप मंत्री के रूप में,वर्ष 1971 से 1974 तक पर्यटन और नागर विमानन राज्य मंत्री के रूप में और वर्ष 1974 से 1976 तक विधि,न्याय और कंपनी कार्य राज्य मंत्री के रूप में कार्य किया। वे लोक सभा की सभापति तालिका की सदस्य भी रहीं और उन्होंने छठी लोक सभा के दौरान ग्रंथालय समिति के सदस्य के रूप में कार्य किया ।
डॉ. महिषी वर्ष 1983 से 1990 तक दो कार्यकाल के लिए राज्य सभा सदस्य भी रहीं और उहोंने वर्ष 1984 से 1985 तक राज्य सभा के उप-सभापिति के रूप में कार्य किया।
डॉ. महिषी महिलाओं,बच्चों और युवाओं से संबंधित कई एसोसिएशनों से भी संबंद्ध रही थीं और उन्होंने महिलाओं और बच्चों में शिक्षा के प्रसार के लिए गंभीर प्रयास किया।
डॉ. महिषी एक लब्धप्रतिष्ठ लेखिका थीं और उन्होंने कन्नड़ और हिंदी में 18 पुस्तकें लिखीं।
डॉ. सरोजनी महिषी का 25 जनवरी, 2015 को 88 वर्ष की आयु में गाजियाबाद में निधन हो गया।
डॉ. रामानायडू दग्गुबटी आंध्र प्रदेश के बापाटला संसदीय निर्वाचन क्षेत्र से तेरहवीं लोक सभा के सदस्य थे।
तेरहवीं लोक सभा के दौरान वे विदेशी मामलों संबंधी समिति के सदस्य रहे।
विख्यात बहुभाषीय फिल्म निर्माता के रूप में डॉ. रामानायडू ने हिंदी,तेलगु,तमिल,कन्नड़ और बंगाली भाषा में सौ से अधिक फिल्मों का निर्माण किया। भारतीय सिनेमा में अपने जीवनकाल के दौरान सर्वाधिक फिल्मों का निर्माण करने के लिए उनका नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स और लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज है।
डॉ. रामानायडू को वर्ष 2012 में तेलगु सिनेमा के लिए उनके योगदान को देखते हुए पद्मभूषण से सम्मानित किया गया। उन्हें वर्ष 2009 में फिल्म उद्योग के लिए उनके उत्कृष्ट योगदान को देखते हुए लाइफ टाईम अचीवमैंट के लिए दादासाहब फाल्के अवार्ड से भी नवाजा गया था।
डॉ. रामानायडू का 79 वर्ष की आयु में 18 फरवरी, 2015 को हैदराबाद में निधन हो गया।
हम अपने पूर्व साथियों के निधन पर गहरा शोक प्रकट करते हैं और मैं सभा की ओर से और अपनी ओर से शोक-संतप्त परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करती हूँ।
माननीय सदस्यगण,असम के चिरंग,सोणितपुर और कोकराझार जिलों में 23 और 24 दिसम्बर, 2014 को हुए आतंकवादी हमलों में 81 लोग मारे गए हैं।
सभा इन कायरतापूर्ण आक्रमणों पर अपना गहरा दुःख व्यक्त करती है जिनके कारण शोक-संतप्त परिवारों को दुःख और पीड़ा पहुंची है।
अब सभा दिवंगत आत्माओं के सम्मान में थोड़ी देर मौन खड़ी रहेगी।
12.45 hrs. The Members then stood in silence for short while.