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State Consumer Disputes Redressal Commission

N I Co vs Sunil Kumar Pandey on 2 February, 2016

  	 Cause Title/Judgement-Entry 	    	       STATE CONSUMER DISPUTES REDRESSAL COMMISSION, UP  C-1 Vikrant Khand 1 (Near Shaheed Path), Gomti Nagar Lucknow-226010             First Appeal No. A/2011/2612  (Arisen out of Order Dated  in Case No.  of District State Commission)             1. N I Co   a ...........Appellant(s)   Versus      1. Sunil Kumar Pandey   a ...........Respondent(s)       	    BEFORE:      HON'BLE MR. Ram Charan Chaudhary PRESIDING MEMBER    HON'BLE MR. Raj Kamal Gupta MEMBER          For the Appellant:  For the Respondent:     	    ORDER   

राज्‍य उपभोक्‍ता विवाद प्रतितोष आयोग , उ0प्र0 , लखनऊ।

              अपील संख्‍या- 2612/2011              सुरक्षित (जिला उपभोक्‍ता फोरम, बस्‍ती द्वारा परिवाद सं0 158/2005-06 में पारित निर्णय/आदेश दिनांकित 19-10-2011 के विरूद्ध) 1-नेशनल इंश्‍योरेंस कम्‍पनी लिमिटेड द्वारा मैनेजर, 3 मिडिल्‍टन स्‍ट्रीज,पोस्‍ट बाक्‍स 9229, कोलकाता-700071 2-नेशनल इंश्‍योरेंस कम्‍पनी लिमिटेड, ब्रान्‍च आफिस द्वारा ब्रान्‍च मैनेजर, बस्‍ती।

3-नेशनल इंश्‍योरेंस कम्‍पनी लिमिटेड, डिवीजनल आफिस द्वारा डिवीजनल मैनेजर, 15-18, रविन्‍द्र सरणी ( पोद्दार कोर्ट) गैट नं0-04, छठी फ्लोर, कोलकाता-700001                                                  ...... अपीलार्थीगण/विपक्षीगण                                   बनाम 1-सुनील कुमार पाण्‍डेय, पुत्र स्‍व0 श्री हरी राम पाण्‍डेय, निवासी कोड़रा पाण्‍डेय, पोस्‍ट पुरानी बस्‍ती, जिला-बस्‍ती।                                       प्रत्‍यर्थी/परिवादी 2-मैग्‍मा लीजिंग लिमिटेड, द्वारा मैनेजर, मैग्‍मा हाऊस, 24-पार्क स्‍ट्रीट, कोलकाता-700016 3-मैग्‍मा लीजिंग लिमिटेड, द्वारा मैनेजर, वाई.एम.सी.ए. बिल्डिंग, वी.आर.पी.मार्ग, लखनऊ।

4-फेयर डील मोटर्स द्वारा प्रोपराइटर, नगर पालिका काम्‍पलेक्‍स, बस्‍ती।

                                                      ..प्रत्‍यर्थीगण/विपक्षीगण समक्ष:-                

माननीय श्री आर0सी0 चौधरी, पीठासीन सदस्‍य।
माननीय श्री राज कमल गुप्‍ता, सदस्‍य।
अपीलार्थी की ओर से उपस्थिति         : श्री नीरज पालीवाल, विद्वान अधिवक्‍ता।

 

प्रत्‍यर्थी सं0-1 की ओर से उपस्थिति     : श्री बी0के0 उपाध्‍याय विद्वान अधिवक्‍ता।

 

प्रत्‍यर्थी सं0-2 एवं 4 की ओर से उपस्थिति: श्री राम गोपाल, विद्वान अधिवक्‍ता।
दिनांक- 26-05-2016 माननीय श्री आर0सी0 चौधरी , पीठासीन सदस्‍य, द्वारा उद्घोषित         निर्णय       प्रस्‍तुत अपील जिला उपभोक्‍ता फोरम बस्‍ती द्वारा परिवाद सं0 158/2005-06 में पारित निर्णय/आदेश दिनांकित 19-10-2011 के विरूद्ध प्रस्‍तुत की गई है, जिसमें जिला उपभोक्‍ता फोरम के द्वारा निम्‍न आदेश पारित किया गया:-
      "यह परिवाद परिवादी के पक्ष में तथा विपक्षी सं0-1,2 एवं 6 के विरूद्ध संयुक्‍त एवं पृथक-पृथक रूप से स्‍वीकार किया जाता है। विपक्षी सं0-1,2 एवं 6 को संयुक्‍त एवं पृथक-पृथक आदेश दिया जाता है कि परिवादी को तत्‍काल बीमित धनराशि रूपये 3,24,986-00 का भुगतान करें। उस धनराशि पर वाद के संस्‍थापन की तिथि से पूर्ण भुगतान की तिथि तक परिवादी विपक्षी सं0-1,2 एवं 6 से 09 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्‍याज भी पाने का अधिकारी होगा। इसके अतिरिक्‍त शारीरिक एवं मानसिक क्षति के लिये क्षतिपूति के रूप में विपक्षी सं0-1,2 एवं 6 द्वारा परिवादी को रूपये 10,000-00 अतिरिक्‍त देय होगा। इसके अतिरिक्‍त परिवाद व्‍यय के (2) रूप में विपक्षी सं0-1,2 एवं 6 द्वारा परिवादी को रूपये 5,000-00 देय होगी। समस्‍त धनराशि का भुगतान एक माह में कर दिया जाय अन्‍यथा परिवादी नियमित निष्‍पादन के माध्‍यम से समस्‍त धनराशि विपक्षी सं0-1,2 एवं 6 से वसूल पाने का अधिकारी होगा। अनुतोष ब निरस्‍त किया जाता है। यह परिवाद विपक्षी सं0-3,4 एवं 5 के विरूद्ध निरस्‍त किया जाता है।"

      संक्षेप में केस के तथ्‍य इस प्रकार से है कि परिवादी द्वारा मैग्‍मा लीजिंग लिमिटेड की सहायता से ऋण प्राप्‍त करके अपने पुत्र के रोजगार के लिये फेयर डील मोटर्स से एक जीप क्रय की गई, इस सम्‍बन्‍ध में उसे रूपये 2,44,000-00 की वित्‍तीय सहायता मिली थी। परिवादी ने मु0 1,06,500-00 का नकद भुगतान किया था। उक्‍त वाहन का बीमा मैग्‍मा लीजिंग लिमिटेड द्वारा नेशनल इंश्‍योरेंस कम्‍पनी से कराया गया और उसका प्रीमियम अदा किया गया तथा प्रीमियम की ऋण धनराशि की किश्‍तों में समायोजित कर दिया। वाहन दिनांक 08-09-2004 से दिनांक 07-09-2005 के मध्‍य रात्रि तक बीमित था। दिनांक 31-01-2005 को परिवादी के वाहन को कुछ अज्ञात व्‍यक्तियों ने बस्‍ती रेलवे स्‍टेशन से फैजाबाद के लिए बुक कराया और किसी स्‍थान पर जीप ड्राइवर व खलासी की हत्‍या करके जीप को लूट लिया। इस सम्‍बन्‍ध में लाश की बरामदगी के बाद चन्‍द्रभान नामक व्‍यक्ति के सूचना पर अपराध सं0-64/2005 धारा-302/201 भारतीय दण्‍ड स‍ंहिता के अर्न्‍तगत पंजीकृत हुआ। तद्नुसार समाचार पत्र से सूचना पाने पर परिवादी थाना पूरा कलन्‍दर फैजाबाद गया। वहॉ चालक व खालासी की फोटो पहचान किया और दिनांक 05-02-2005 को अपराध सं0 64/2005 में धारा 394 भारतीय दण्‍ड संहिता भी बढ़ाई गई। समस्‍त सूचनाएं आर0सी0, प्रथम सूचना रिपोर्ट, वाहन के अभिलेखों की प्रतियों के साथ नेशनल इंश्‍योरेंस कम्‍पनी लि0 को सूचित किया गया। परिवादी की सूचना पर नेशनल इंश्‍योरेंस कम्‍पनी के श्री आर0वी0एस0 श्रीवास्‍तव, विवेचक नियुक्‍त हुए,  जिन्‍होंने अपने पत्र दिनांक 26-02-2005 द्वारा कुछ अभिलेखों की मांग की और आज तक बीमा कम्‍पनी द्वारा बीमा क्‍लेम का निस्‍तारण नहीं किया गया और उधर मैग्‍मा लीजिंग लिमिटेड द्वारा जीप की बकाया किश्‍तों की मय ब्‍याज मांग की जा रही है। अत: नेशनल इंश्‍योरेंस कम्‍पनी को विधिक सूचना देने के पश्‍चात और कोई उत्‍तर न पाने के पश्‍चात यह परिवाद संस्थित किया गया।

      जिला मंच के समक्ष विपक्षी नेशनल इंश्‍योरेंस कम्‍पनी द्वारा स्‍वीकार किया गया कि वाहन का बीमा नेशनल इंश्‍योरेंस कम्‍पनी द्वारा किया गया था। बीमा दिनांक 08-09-2004 से दिनांक 07-09-2007 तक वैध था। यह भी कहा गया है कि परिवाद पत्र की धारा-6 के अनुसार (3) वाहन को बस्‍ती रेलवे स्‍टोशन से फैजाबाद के लिए बुक करके ले जाना बताया गया है। मोटर व्‍हीकिल एक्‍ट की धारा-149 तथा पॉलिसी की शर्तो का स्‍पष्‍ट उल्‍लंघन है तथा वाहन का प्रयोग किराया पाप्‍त करने के लिए किया गया है, जिससे विपक्षी क्षतिपूति की धनराशि देने के लिये उत्‍तरदायी नही है। परिवादी की सूचना पर विपक्षी के भारत सरकार के मान्‍यता पाप्‍त अन्‍वेषक की नियुक्ति की गई, परन्‍तु अन्‍वेषक के द्वारा मांगे गये अभिलेखों को परिवादी ने उपलब्‍ध नहीं कराया और अन्‍वेषक ने अपनी जॉच रिपोर्ट दिनांक 18-05-2005 को बीमा कम्‍पनी को उपलब्‍ध करायी। पुन: बीमा कम्‍पनी द्वारा परिवादी से अभिलेखों की मांग की गई, परन्‍तु परिवादी द्वारा अभिलेख नहीं दिये गये। अत: परिवादी का दावा नो- क्‍लेम करके पत्रावली बन्‍द कर दिया गया है। क्‍लेम निपटाने के लिए वाहन का पंजीकरण, टैक्‍स जमा करने की तिथि, ड्राइविंग लाईसेंस अन्तिम आख्‍या एवं अन्तिम आख्‍या को न्‍यायालय द्वारा स्‍वीकार किये जाने का आदेश ये सभी दावा  निस्‍तारण के लिये आवश्‍यक अभिलेख थे, जो न उपलब्‍ध कराने के कारण बीमा कम्‍पनी के मण्‍डलीय कार्यालय क्‍लेम को नो- क्‍लेम करके निस्‍तारित कर दिया। वाहन का बीमा न तो टैक्‍सी में था और न वाहन का टैक्‍स जमा किया गया और न फिटनेस था, जिससे विपक्षी क्षतिपूति की धनराशि देने के लिए उत्‍तरदायी नहीं है। वाहन चालक के पास घटना के समय वाहन चलाने के लिए वैध डा्ईविंग लाईसेंस नहीं था। परिवादी द्वारा किराया प्राप्‍त करके सवारी ढोने के लिये वाहन को प्रयोग में लाया गया उस समय पॉलिसी की संविदा भंग हो गयी और वाहन का बीमा स्‍वत: समाप्‍त हो गया, जिसके कारण विपक्षी किसी क्षतिपूति की धनराशि देने के लिए उत्‍तरदायी नहीं है।

      विपक्षी सं0-6 द्वारा भी प्रतिवाद पत्र प्रस्‍तुत किया गया है जो विपक्षी सं0-2 के प्रतिवाद पत्र की पुनरावृत्ति मात्र है।

      जिला मंच का आदेश दिनांक 19-10-2011 का है और अपील दिनांक 28-12-2011 को प्रस्‍तुत की गई है। इस प्रकार से अपील बिलम्‍ब से प्रस्‍तुत की गई है। अपीलार्थी द्वारा अपने प्रार्थना पत्र में अपील बिलम्‍ब से दायर करने के सम्‍बन्‍ध में पर्याप्‍त कारण दर्शाये है, जिसके दृष्टिगत बिलम्‍ब क्षमा किये जाने योग्‍य है। बिलम्‍ब क्षमा किया जाता है।

      अपीलार्थी के विद्वान अधिवक्‍ता श्री नीरज पालीवाल एवं प्रत्‍यर्थी सं0-1 के विद्वान अधिवक्‍ता श्री बी0के0 उपाध्‍याय, तथा प्रत्‍यर्थी सं0-2 एवं 4 के विद्वान अधिवक्‍ता श्री राम गोपाल, उपस्थित है। दोनों पक्षों के विद्वान अधिवक्‍तागण की बहस सुनी गई तथा अपील (4) आधार का अवलोकन किया गया तथा जिला उपभोक्‍ता फोरम के निर्णय/आदेश दिनांकित 19-10-2011 का भी अवलोकन किया गया।

      इस केस में बहस के समय अपीलकर्ता के विद्वान अधिवक्‍ता ने कहा वाहन टैक्‍सी में चल रही थी, जबकि बीमा प्राइवेट में कराया गया था, इसके बचाव में प्रत्‍यर्थी/परिवादी के अधिवक्‍ता द्वारा कहा गया कि जब वाहन टैक्‍सी में दर्ज था तो बीमा कम्‍पनी ने प्राइवेट कैसे लिख दिया और रजिस्‍ट्रेशन देख करके ही बीमा किया जाता है। इसमें जो चूक हुई, वह बीमा कम्‍पनी के तरफ से की गई है। इसका लाभ बीमा कम्‍पनी को नहीं दिया जा सकता।  अपीलार्थी के विद्वान अधिवक्‍ता द्वारा यह भी कहा गया है कि जिला उपभोक्‍ता फोरम ने समस्‍त बीमा रकम 3,24,286-00 रूपये देने का आदेश किया है, जबकि वाहन एक वर्ष से ज्‍यादा पुराना था और यह भी कहा गया कि ब्‍याज व हर्जाना दोनों का आदेश देकर जिला उपभोक्‍ता फोरम ने गलती किया है।  

      प्रत्‍यर्थी के तरफ से निम्‍न रूलिंग दाखिल किया गया है:-

1-(2010)सी0पी0जे0 167 (एन0सी0) नेशनल इंश्‍योरेंस कम्‍पनी लिमिटेड व अन्‍य बनाम बलवन्‍त सिंह में यह विधिक सिद्धान्‍त प्रतिपादित किया गया है कि:-
      Consumer Protection Act, 1986-Section 21 (b)-Insurance-Vehicle stolen - Claim repudiated-Violation of policy terms alleged - Contention private car being used as taxi-Theft of vehicle had no nexus regarding user/purpose for which vehicle actually plied- Insurance Company lible to Indemnify insured for loss suffered.
2-।।।(2000) सी0पी0जे0 438 राज्‍य उपभोक्‍ता आयोग उ0प्र0 लखनऊ, ओरियन्‍टल इंश्‍योरेंस कम्‍पनी लिमिटेड बनाम जयलाल एवं अन्‍य दाखिल किया गया है, जिसमें यह कहा गया है कि:-
      Consumer Protection Act, 1986--Section 15 Appral-Insurance-Driving Licence-Tractor insured- Looted while being Driven by driver-Claim-Repudiated on ground that driver not holding valid Licence- Complaint- Allowed-Appeal-No nexus between Licence and looting of tractor- Plea of Insurance Company liable to be rejected.
(5)
       Held: It is proved on record that the tractor was looted when it was being driven at the time of incident then it becomes immaterial whether the person driving the tractor had a valid licence or not. The Question of holding a licence has no nexus between the Looting of the tractor. The Insurance Company could not have been absolved of its liability of paying the damages even if the tractor was looted while it was being driven by a valid licence holder. Therefore the plea of the Insurance Company does not appeal and deserves to be rejected.
Iv (2011) CPJ 378 (NC) विनोद कुमार जैन बनाम यूनाइटेड इंडिया इंश्‍योरेंस कम्‍पनी लि0 दाखिल किया गया है, जिसमें कहा गया है कि:-
    Consumer Protection Act, 1986-Section 2(1)(g), 14(1)(d), 21(b)-Insurance-Theft -Surveyor appointed-Forum allowed complaint-State Commission partly allowed appeal - Hence revision-Contention at time of taking insurance value of car mentioned as Rs 95,000-00 on which premium was paid- Accepted-No Justification for reducing the value of car by 49% based on report of surveyor which itself was based on pure guesswork and hearsay-State Commission erred in modifying order of District Commission- Respondent to pay Rs. 99,000 along with interest @ 10% p.a.       मौजूदा केस के तथ्‍यों से स्‍पष्‍ट है कि वाहन को लूट लिया गया था और ड्राइवर तथा खलासी की हत्‍या कर दी गई थी, जिसके लिए प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराई गई और विस्‍तार में इस सम्‍बन्‍ध में बीमा कम्‍पनी विपक्षी सं0-2 को दिनांक 14-02-2005 को जीप सं0- यू0पी0 51टी/0171 के मत्‍यु ड्राइवर, खलासी की हत्‍या की सूचना समस्‍त आवश्‍यक कागजात की छाया प्रति विपक्षी सं0-2 बीमा कम्‍पनी को दिया गया था।
      पत्रावली पर उपलब्‍ध साक्ष्‍य से स्‍पष्‍ट है कि यह गलती बीमा कम्‍पनी की थी कि उसने वाहन का बीमा प्राइवेट वाहन के रूप में किया, जबकि आर0सी0 टैक्‍सी का था। बीमा कम्‍पनी ने जिन शर्तो का उल्‍लंघन परिवादी द्वारा किया जाना बताया है, उसका कोई सम्‍बन्‍ध वाहन लूटे जाने से नहीं है। हम जिला मंच के निष्‍कर्ष से सहमत है।
(6)
      केस के तथ्‍यों परिस्थितियों को देखते हुए एवं उपरोक्‍त रूलिंग को दृष्टिगत रखते हुए हम यह पाते हैं कि जिला उपभोक्‍ता फोरम के द्वारा समस्‍त बीमा धनराशि के लिए जो आदेश किया गया है, वह विधि सम्‍मत् है, उसमें हस्‍तक्षेप किये जाने की आवश्‍यकता नहीं है और अपीलकर्ता की अपील खारिज किये जाने योग्‍य है।
आदेश         अपीलकर्ता की अपील खारिज की जाती है।
      उभय पक्ष अपना-अपना व्‍यय भार स्‍वयं वहन करेंगे।
 
   (आर0सी0 चौधरी)                                    ( राज कमल गुप्‍ता )

 

    पीठासीन सदस्‍य                                          सदस्‍य

 

आर.सी. वर्मा, कोर्ट नं0-3

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

              [HON'BLE MR. Ram Charan Chaudhary]  PRESIDING MEMBER 
     [HON'BLE MR. Raj Kamal Gupta]  MEMBER