Lok Sabha Debates
Regarding Announcement Of Cancellation Of Sitting Of The Lok Sabha And Re-Fixing ... on 17 August, 2005
Title : Regarding Announcement of Cancellation of Sitting of the Lok Sabha and Re-fixing of Private Members’ Business.
17.21 hrs MR. CHAIRMAN : Hon. Members, I have an announcement to make.
The Business Advisory Committee at its sitting held today has, inter alia, recommended that the sitting fixed for Friday, the 26th August, 2005 may be cancelled and the Private Members' Business, i.e. Bills fixed for that day be taken up on Thursday, the 25th August, 2005 at 4.30 p.m. It was also agreed that in order to enable the House to take up the National Rural Employment Guarantee Bill, Private Members' Business, i.e. Resolutions fixed for tomorrow, the 18th August, 2005 be transacted on 25th August, 2005 at 2 p.m. I hope, the House agrees.
SEVERAL HON. MEMBERS: Yes.
_________ 17.22 hrs PAYMENT OF WAGES (AMENDMENT) BILL, 2004 –Contd.
*m13 श्री गिरधारी लाल भार्गव (जयपुर) : सभापति महोदय, मैं उन वक्ताओं में से नहीं हूं, जो अक्सर बोलते हैं। मैं लोक सभा में बहुत कम बोलता हूं। मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी से प्रार्थना करना चाहता हूं कि जो बिल वह सदन में लाये हैं, मजबूरन हमें उसका समर्थन करना पड़ रहा है। भले ही वह इसे देरी से लाये हैं, लेकिन आखिरकार कुछ तो लाये हैं। वर्ष २००२ से, उस कमरे से इस कमरे तक इस बिल को आने में दो वर्ष का समय लग गया।
महोदय, मैं निवेदन करना चाहता हूं कि भारतवर्ष में संगठित मजदूरों की संख्या ४० करोड़ है और असंगठित मजदूरों की संख्या ३७ करोड़ है। मेरे से पूर्व कुछ वक्ता बड़ी लम्बी-चौड़ी बातें बोल रहे थे। मैं भी भारतीय मजदूर संघ का कार्यकर्ता हूं और जयपुर शहर में, चाहे रिक्शेवाले, तांगेवाले, आटो रिक्शावाले, ठेलेवाले, बैल ठेलेवाले, टैक्सी वाले, धोबी, मोची, फूलवाले, पटरी पर बैठने वाले या कच्ची बस्तियों में रहने वाले लोग हों, इन सब लोगों की मैं सेवा करता हूं, यद्यपि इन सब लोगों का नेतृत्व करना बहुत मुश्किल काम है। मेरी माननीय मंत्री जी से प्रार्थना है कि आप यह बिल लाये हैं, बहुत अच्छी बात है, लेकिन इस बिल में कहीं भी कारीगरों, किसानों, बीड़ी मजदूरों और फॉरेस्ट वर्कर्स का समावेश नहीं किया गया है। कृपया आप इस बिल के दायरे को बढ़ा करके इसमें इन सब मजदूरों का भी समावेश कर दें, तो बहुत अच्छा होगा। उन्हें वेतन ठीक समय पर नहीं मिलेगा, बोनस ठीक प्रकार से नहीं मिलेगा, ये बातें आपने इसमें कही हैं।
मैं आपको बताना चाहता हूं कि मेरे संसदीय क्षेत्र में एक जयपुर मैटल इंडस्ट्री है, जहां मीटर बनाने का काम होता था। वह फैक्टरी लगभग ६-७ वर्षों से बेकार पड़ी है। इस बीच में उसके कई मजदूर मारे गये, कई पैट्रोल पम्पों पर काम कर रहे हैं। जब भी मैं वहां जाता हूं कि तो वे लोग मुझसे पूछते हैं कि हमारे बारे में आपने क्या किया? आपने चुनाव में घोषणा की थी कि जयपुर मैटल इंडस्ट्री को चालू करवा देंगे। नेता जी आप तो एम.पी. बन गये और हमें भूल गये। मैं आपको बताना चाहता हूं कि जयपुर मैटल इंडस्ट्री के लोग आज बहुत दुखी हैं। फैक्टरी को बंद हुए कई वर्ष हो गये हैं। फैक्टरी के पास बहुत बड़ी भूमि है। उस भूमि को बेचकर वे लोग काम चला सकते हैं। यदि वह संभव न हो तो पड़ौस में रेलवे का कारखाना है, यदि रेलवे वालों को वह भूमि दे दी जाए तो मजदूरों का पेमेन्ट भी हो जायेगा और साथ ही कारखाना भी चालू हो जाए, जो बहुत अच्छी बात cÉäMÉÉÒ[R49] ।
उस जमीन को बेचकर भी उन गरीब मजदूरों के पैसे, जो पांच-दस वर्षों से बकाया है, वे निकलकर आ जाएंगे तो बहुत बड़ा काम होगा। रोज़ाना कोई न कोई घोषणाएं होती हैं। भारतीय मजदूर संघ आंदोलन करता है तो कहते हैं कि कल चालू हो जाएगी, परसों चालू हो जाएगी। वहां पर एक आई.ए.एस. अधिकारी बैठा दिया गया। वह अपना वेतन ले रहा है लेकिन काम नहीं कर रहा है। केन्द्र सरकार कह रही है कि मिल चालू हो जाएगी पर राज्य सरकार के पास पैसा नहीं है। मेरी मंत्री जी से प्रार्थना है कि वे दयालु बनें। जब वे गरीबों के मसीहा बने हैं तो भारत सरकार उस फैक्ट्री को चलाने के लिए धनराशि दे। भारतीय मजदूर संघ की मांग से हमारा काम भी हो जाएगा और जो मजदूर मर रहे हैं, वे भी नहीं मरेंगे।
महोदय, जयपुर शहर की सबसे बड़ी कंपनी बाल बियरिंग कंपनी बंद होने के कगार पर है। वहां मजदूरों की छंटनी हो रही है। मैटल इंडस्ट्री और बाल बियरिंग कंपनी दो ही ऐसी कंपनियां थीं, जिनमें अधिकतर मजदूर लगे थे। आप बिल लाए हैं कि मजदूरों को पूरा वेतन मिलेगा, बोनस मिलेगा और जो नहीं देगा उसके लिए सज़ा का प्रावधान है, लेकिन इसको करने से लाभ नहीं होगा। जयपुर में हम जाएंगे तो लोग कहेंगे कि हमारे लिए आप क्या करके आए हैं? हम मर रहे हैं, हमारा क्या होगा? इसलिए मेरा निवेदन है कि आप इन दोनों कंपनियों की ओर विशेष ध्यान दें।
महोदय, गुड़गांव में सरकार ने जो कुछ किया, उसकी सज़ा ये अभी तो नहीं भोगेंगे, लेकिन निश्चित रूप से जिन मजदूरों पर लाठी पड़ी, जो मर गए हैं, उनकी हाय निश्चित रूप से सरकार पर पड़ेगी। कोई भी सरकार स्थायी नहीं होती। आज राजस्थान में हमारे दल की सरकार है, मैं नहीं मानता की हमारी सरकार वहां स्थायी है। सरकार तो आती जाती रहती है। अगर हम अच्छा काम करेंगे तो अगली बार फिर सत्ता में आएंगे और बुरा काम करेंगे तो भाग जाएंगे। पहले हम उधर बैठते थे लेकिन आजकल इधर बैठे हैं। अगर हम अच्छा काम करेंगे तो निश्चित रूप से राजस्थान में फिर से लौटकर आएंगे।…( व्यवधान) माननीय सदस्य क्या कह रहे हैं मुझे सुनाई नहीं पड़ रहा है। …( व्यवधान) माननीय सदस्य मथुरा के हैं। इनके उत्तर प्रदेश में तो कई मिलें बंद पड़ी हैं। कानपुर और लखनऊ की मिलें भी बंद पड़ी हैं और मज़दूर रो रहे हैं। उनके आँसू पोंछने वाला उत्तर प्रदेश में कोई नहीं है। मेरी मांग है कि इस बिल में जो सज़ा का प्रावधान किया गया है, इस सज़ा के प्रावधान को आप बढ़ाएं। …( व्यवधान)
MR. CHAIRMAN : No interruptions please. Already we have exhausted the time. Nobody should intervene.
श्री गिरधारी लाल भार्गव : भारतीय मजदूर संघ का नारा रहा है - ‘राष्ट्रहित में करेंगे काम, काम के लेंगे पूरे दाम’ - यह बिल्कुल सही बात कही है। जो मजदूर लोग इनके साथ हैं, वे कहते हैं क ‘चाहे जो मजबूरी हो, हमारी मांगें पूरी हों।’ चाहे कारखाने का मालिक मर जाए लेकिन उनकी मांगें पूरी होनी चाहिए। हमारी मांग है कि मजदूर यूनियनों को मान्यता मिलनी चाहिए और समय पर मजदूरी न देना भी एक अपराध माना जाए। निर्धारित वेतन समय पर मिलना चाहिए और उसमें कटौती न हो यह मेरी मांग है। इसके साथ जो बार-बार छंटनी का काम चलता है, वह खत्म होना चाहिए। गुड़गांव में जो झगड़ा हुआ, वह भी इसी कारण हुआ। इसलिए इस प्रकार छंटनी पर रोक लगनी चाहिए।
महोदय, जयपुर में छोटे मजदूरों के लिए एक ईएसआई अस्पताल चलता है। भारत सरकार ने उसको मॉडल अस्पताल के रूप में परिवर्तित कर दिया। यह बन जाने के बाद जो कुछ पैसा मिला, वह अस्पताल पर खर्च नहीं किया गया। वहां के जो नर्सेज़ और कर्मचारी हैं, उनको वेतन नहीं मिल रहा है, उनको बोनस नहीं मिल रहा है। जो ईएसआई अस्पताल जयपुर में मजदूरों के हित में बनाया गया था, माननीय मंत्री जी ने उसका उद्घाटन करते वक्त कहा था कि आप हमें चार रुपये दें को बीमा की सहूलियत आपको मिल जाएगी। आज वे लोग इससे दुखी हैं। आज वहां सारा का सारा पैसा अनाप-शनाप खर्च हो रहा है। मंत्री जी इस ओर विशेष ध्यान दें।
अंत में मैं माननीय मंत्री जी से कहना चाहता हूं कि यदि सरकार इन सब बातों को जोड़कर एक अच्छा बिल लेकर आए तो हम आपका समर्थन करेंगे। वर्तमान में मंत्री जी जो बिल लेकर आए हैं, उसमें हमारे पास समर्थन करने के अलावा और कोई चारा नहीं है, क्योंकि बाहर जाएंगे तो ये लोग कहेंगे कि मज़दूरों के हितार्थ हम बिल ला रहे थे और आपने उसका विरोध किया। इसलिए अभी तो हम आपका समर्थन कर रहे हैं लेकिन आशा करते हैं कि सभी सुझावों का समावेश करके एक विस्तृत बिल आप लाएंगे तो हम यहां भी आपका पुरज़ोर समर्थन करेंगे और बाहर भी आपका स्वागत करवा देंगे।
सभापति जी, इन्हीं शब्दों के साथ मैं आपका आभार व्यक्त करता हूं कि आपने मुझे इस बिल पर बोलने का अवसर दिया।
*m14 चौधरी लाल सिंह (उधमपु[i50] [i51] र) : महोदय, जो अमेंडमेंट बिल आया है, मैं उसका समर्थन करने के लिए खड़ा हुआ हूं। इसके साथ-ही-साथ मैं यह भी कहना चाहता हूं कि इसमें कुछ चेंजिज लाने की जरूरत है। आप देखें कि वर्ष १९४७ से आज तक, इस देश की जंगे आजादी के लिए, मजदूरों ने बहुत सी कुर्बानियां दी हैं। बहुत से मजदूर तबाह और बरबाद हुए हैं। मजदूरों की बहुत सी ख्वाहिशें थीं कि मुल्क आजाद होगा तो उन्हें उनका हक मिलेगा, कोई उनको हक से महरूम नहीं कर सकेगा और उनकी फरियादें सुनने के लिए लोग होंगे - लेकिन हुआ क्या? आप देखें कि कहां वर्ष १९३६ और कहां आज वर्ष २००५ चल रहक, अगर इस बीच के समय की तुलना करें तो मेरा खयाल है कि बहुत अंतर आ गया है। और अगर प्राइस राइज की बात करें।
MR. CHAIRMAN : Already, so many Members have spoken on this Bill from your side. It is half an hour more that we have taken.
… (Interruptions)
चौधरी लाल सिंह : महोदय, इसके लिए मैं क्या कर सकता हूं। मैं बोलना चाहता हूं और आपको मेरी बात सुननी पड़ेगी। आप मजदूरों के नुमाइंदे रहे हैं और जब मजदूरों की बात आ रही है, तो आप ध्यान से सुनेंगे और माननीय मंत्री जी को भी आगाह करेंगे। इतने वर्षों में वर्ष १९३६ से लेकर वर्ष १९५७ तक, २१ वर्षों में उनके चार सौ रूपए बढाए गए, १९ वर्षों के बाद एक हजार रूपए और छ: वर्ष के बाद छ: सौ रूपए बढ़ाए गए। आज तेईस वर्षों के बाद ६५०० रूपए हुए। मैं अर्ज करना चाहता हूं कि इतने वर्षों के बाद आज मजदूर अपने लिए एक पक्का मकान बनाने की हैसियत नहीं रखते। मजदूर की झुग्गियां हर जगह आपको मिल जाएंगी।उनके पास पहनने के लिए कपड़े नहीं है। मजदूरों के पास बच्चों को देने के लिए शिक्षा और पैसा नहीं है।इसके साथ उनके खाने का जो राशन होता है, वह सबसे वस्र्ट खाना होता है। जो मजदूर ताकत से सारा दिन मेहनत करता है, वह सबसे बेकार खाना खाता है। आप जानते हैं कि उनकी जो एजिटेशन १९४५ में शुरू हुई थी, वह वर्ष १९५४ तक चली। तेलेंगाना एजिटेशन अभी चल रही है। एजिटेशन अंग्रेजों के खिलाफ भी चली थी। उसके बाद भी इन्होंने लड़ाई लड़ी। मैं कहना चाहता हूं कि अगर आज आप इंसाफ नहीं करेंगे, तो यह सही बात नहीं होगी। यह बहुत बड़ा मौका है, मजदूरों के साथ इंसाफ करने का।आज दुनिया को मंत्री जी से उम्मीदें हैं कि मजदूरों को रिप्रजेंट करने वाला कोई यहां बैठा है। मैं कहना चाहता हूं कि हमारा पीडीसी है, उसे चार सौ रुपया महीना मिलता है। यह कौन सी तनख्वाह है? आज जो पानी पिलाता है, डेली वेजर है उसे पांच सौ रुपया मिलता है और दो-दो साल तक उसे तनख्वाह नहीं मिलती है। इसके साथ फारेस्ट लेबर है, उनका तो कोई खाता ही नहीं है कि किस एक्ट में वे आते हैं। इसके साथ खेतिहर मजदूर हैं। उनकी हालत आप देखें, डेली वेजर्स की हालत आप देखें। मैं कहना चाहता हूं कि एक कम्प्रीहेंसिव बिल आपको लाना चाहिए, अमेंडमेंट करना चाहिए ताकि सारे मजदूरों को फायदा मिल सके, नहीं तो इस बिल का कोई फायदा नहीं है। यह ठीक है कि आपने तरक्की की है, लेकिन पूरी तरक्की नहीं की है। कृपा करके आप एक कम्प्रीहेंसिव प्लान बनाकर लाइए।
MR. CHAIRMAN: The hon. Minister can give the reply now.
SHRI RAM KRIPAL YADAV (PATNA): Sir, my name is there.… (Interruptions)
MR. CHAIRMAN: Due to shortage of time, there is no time for others to speak. The hon. Minister has to reply now[i52] .
SHRI RAM KRIPAL YADAV : It is not fair, Sir.
MR. CHAIRMAN : I am sorry. It is not my fault. The Business Advisory Committee has decided.
… (Interruptions)
SHRI RAM KRIPAL YADAV : This is my right.
MR. CHAIRMAN: Hon. Members, besides you, were the persons who had taken that decision. They have given me this right. What can I do?
*m15 श्री देवेन्द्र प्रसाद यादव (झंझारपुर) : सभापति जी, जिस पार्टी का कोई सदस्य विधेयक पर नहीं बोला हो, उसे विधेयक पर बोलने से नहीं रोका जा सकता, यह परम्परा है। आप चाहें, तो देख सकते हैं। वैसे हम आपकी बात मानने के लिए तैयार हैं, लेकिन संख्या के आधार पर हमारी पार्टी से किसी भी माननीय सदस्य को इस विधेयक पर बहस में हिस्सा लेने का अवसर प्रदान नहीं किया गया है। चूंकि यह विधेयक है, इस पर हमारी पार्टी के पार्टीसिपेशन के बिना, हमारी पार्टी की राय लिए बिना, विधेयक को सदन में पारित नहीं किया जा सकता है, इसलिए हमारा निवेदन है कि हमारी पार्टी के सदस्य को आप बोलने का अवसर प्रदान करें। There is no participation of the RJD Party. We have 24 Members. On the basis of the numerical strength, how can you stop my Member? The hon. Member can speak. We have the right, Sir. Our Party has the right to speak.
MR. CHAIRMAN: Mr. Yadav, it is not my fault. There is a chit before me that the Minister wants to speak.
SHRI DEVENDRA PRASAD YADAV : How can you stop the Member? There is no precedent in the Parliament. You cannot stop the Member.
MR. CHAIRMAN: Mr. Ram Kripal Yadav, you can speak.
श्री राम कृपाल यादव : माननीय सभापति जी, मैं सिर्फ दो-तीन मिनट में ही अपनी बात समाप्त कर दूंगा। …( व्यवधान)
MR. CHAIRMAN: Okay, I allow you to speak. I allow you to speak even though you are not on your seat. I allow you to speak. You need not go to your seat. I allow you to speak from there. All concessions are given but it must be finished within two-three minutes.
*m16 श्री राम कृपाल यादव : माननीय सभापति जी, मैं मंत्री जी के प्रति आभार व्यक्त करना चाहता हूं कि वे उत्तम विधेयक लाए हैं। यू.पी.ए. सरकार की जो कमिटमेंट है, प्रधान मंत्री जी की जो कमिटमेंट है, उसके अनुसार मंत्री जी सुनिश्चित करना चाहते हैं कि मजदूरों को उनका वेतन सही समय पर दिया जाए और उनका शोषण न हो, लेकिन मैं समझता हूं कि इस विधेयक में व्यापक द्ृष्टिकोण नहीं अपनाया गया है। अच्छा होता कि जो कल-कारखानों में काम करने वाले मजदूर हैं, उनके अलावा अन्य अनेक वर्गों के जो मजदूर हैं, जिनके लिए आपने इस विधेयक में कोई प्रावधान नहीं किया है, उनके लिए भी कोई प्रावधान किया जाता। ऐसे वर्गों में खेतिहर मजदूर और बाल मजदूर आते हैं। यदि असंगठित और संगठित दोनों क्षेत्रों के मजदूरों के लिए एक कॉम्प्रीहेंसिव विधेयक लाते, तो बहुत अच्छा होता। मेरा निवेदन है कि जो असंगठित क्षेत्र के मजदूर इस विधेयक की परधि से बाहर रह गए हैं, उनके कल्याण के लिए आप कब तक विधेयक लाएंगे, इस बारे में अपने उत्तर में अवश्य बताएं।
सभापति जी, आज बहुराष्ट्रीय कंपनियों का जमाना आ गया है। आपने इस विधेयक को लाकर अपनी द्ृढ़ इच्छा शक्ति और मजदूरों के प्रति अपनी कमिटमेंट का इजहार किया है। बहुराष्ट्रीय कंपनियां जिस तरह से मजदूरों का शोषण करने का काम कर रही हैं, जिस प्रकार से मजदूरों से १२ से १४ घंटे काम कराती हैं, उन्हें बहुत कम वेतन देती हैं और जब चाहे निकाल देती हैं, उस पर कुछ अंकुश आपके इस विधेयक से लगेगा, यह अच्छी बात है। मैं इसकी जितनी प्रशंसा करूं उतनी कम है। अब हमारे यहां बहुराष्ट्रीय कंपनियों का दौर चल रहा है। उनके लिए हमारे दरवाजे खोल दिए गए हैं। वे हमारे यहां के मजदूरों की आर्थिक बदहाली का लाभ उठाना चाहती हैं। उस पर आप इस विधेयक के माध्यम से रोक लगाने का काम कर रहे हैं, इसलिए मैं आपका आभार प्रकट करता हूं। आप इस विधेयक के माध्यम से सुनिश्चित कराना चाहते हैं कि मजदूरों को न्यूनतम वेतन समय पर मिले। मेरा निवेदन है कि आप इस बिल के माध्यम से ऐसी व्यवस्था करें कि इसका रिव्यू होता रहे। कानून तो बहुत बनते हैं, लेकिन जब तक कानून सरजमीं पर नहीं उतरेगा, तब तक सारे कानून बेकार हैं। मेरा निवेदन है कि आप तीन-चार महीने के बाद इसका रिव्यू करें[rpm53] । उन्हें जो वेतन मिल रहा है, वह सही मिल रहा है या नहीं मिल रहा है, क्या हमारे मजदूरों का शोषण हो रहा है कि नहीं हो रहा है, तो मैं समझता हूं कि इस कानून में अगर आप इस बात का प्रावधान करें तो बहुत उत्तम रहेगा। आज बेचारे मजदूर की हालत क्या है। हमारे यहां मजदूर की हालत यह है कि बेचारा मजदूर दिन भर कमाता है तो रात को जब घर जाता है तो वह अपने बच्चों को दो वक्त की रोटी भी उपलब्ध नहीं करा पा रहा है, शिक्षा, स्वास्थ्य और कपड़े की अलग बात है। आज इतना कम पैसा हमारे मजदूरों को मिल रहा है। आज उनमें बेरोजगारी है, गरीबी है, फटेहाली है और बेरोजगारी, गरीबी और फटेहाली जब तक रहेगी, जब तक भारतवर्ष गरीब है, तब तक मजदूरों का एक्सप्लायटेशन होता रहेगा। इसलिए मेरा आपसे निवेदन है कि आप इन सब चीजों पर भी ध्यान दें।
मजदूर हमारी ताकत है, श्रमशक्ति है। भारतवर्ष की अगर कोई ताकत है तो उसकी श्रमशक्ति है। आज विदेशी कम्पनियां हमारे यहां इसलिए आ रही हैं,क्योंकि यहां सस्ती दरों पर उन्हें श्रम मिल रहा है, कम पैसे पर उन्हें मजदूर मिल रहे हैं, इसलिए विदेशी कम्पनियां यहां आ रही हैं। हां, वे आयें, हम ऐसा कुछ नहीं करने जा रहे हैं कि हमारे यहां जिस द्ृष्टिकोण से कोई बाहर की कम्पनियां आ रही हैं, मगर हम अपने मजदूरों का एक्सप्लायटेशन नहीं होने देंगे, हम उनका शोषण नहीं होने देंगे। मैं समझता हूं कि सरकार की, माननीय प्रधानमंत्री जी की, माननीय मंत्री जी की और यू.पी.ए. सरकार की मंशा भी है और यह कमिटमेंट सिर्फ यू.पी.ए. सरकार ही कर सकती है, इसलिए मेरा आपसे निवेदन यह होगा कि आने वाले दिनों में अगर आपने इस बिल में प्रावधान नहीं रखा है, खेतिहर मजदूरों की क्या हालत है, आप तो जानते हैं, आप किसान हैं, आप भी उसी स्तर से ऊंचे उठकर आये हैं, जब पूरे सदन के सदस्य किसान मजदूरों की हालत को देखते हैं कि आज इतना बड़ा उग्रवाद क्यों बढ़ रहा है, क्योंकि वे जो मेहनत करते हैं, वे जो काम करते हैं, उसका मेहनताना नहीं मिल रहा है, इसलिए गरीबी भी है, फटेहाली भी है और जब तक इस देश का कल्याण नहीं होगा, इस देश में मजदूर ही तो सब कुछ हैं, खेती में काम करने वाले, खलिहान में काम करने वाले और वैसे तमाम वर्गों और तबकों पर आपको ध्यान देना होगा, जो बड़े पैमाने पर मजदूरों का शोषण कर रहे हैं, दोहन कर रहे हैं, उनको निश्चित तौर पर आप रोक लगाने का काम करें।…( व्यवधान)
MR. CHAIRMAN : You can address the Chair.
श्री राम कृपाल यादव : इसलिए मैं इस विधेयक का स्वागत करते हुए इस विश्वास के साथ कि कानून बनते हैं, मगर जब तक कानून को सरजमीं पर नहीं लाया जायेगा, तब तक सारे कानून बेकार हैं। एक अच्छी मंशा से आप यहां आये हैं, उस मंशा को सरजमीं पर उतारिये, उस ताकत के साथ, उस इच्छाशक्ति के साथ जो भावना है, वह भावना अगर सर्व नहीं होगी तो सारे कानून बेकार हैं। कानून तो बनते हैं, बहुत सारे कानून बनाये गये, मगर कानून जब तक जमीन पर नहीं उतरेगा, जिनकी सुरक्षा के लिए, जिनकी रक्षा के लिए, जिनके हितों के लिए आप यह कानून लाये हैं तो उसको निश्चित तौर पर सुनिश्चित करिये कि जब हम इस कानून को ला रहे हैं तो सरजमीं पर उतारेंगे। …( व्यवधान)
MR. CHAIRMAN: Please conclude.
श्री राम कृपाल यादव : इन्हीं चन्द शब्दों के साथ आपका, मंत्री जी का और तमाम सदन का हम धन्यवाद ज्ञापित करते हुए अपनी बात समाप्त करते हैं।
MR. CHAIRMAN: Thank you. Shri Joachim Baxla.
*m17 SHRI JOACHIM BAXLA (ALIPURDUAR): Hon. Chairman, Sir, I rise to support the Payment of Wages (Amendment) Bill, 2004.… (Interruptions)
MR. CHAIRMAN: Nothing will go on record.
(Interruptions)* MR. CHAIRMAN: Nothing will go on record. You cannot speak without my permission.
(Interruptions)* MR. CHAIRMAN: You are not allowed to speak. Nothing will go on record.
(Interruptions)* MR. CHAIRMAN: You can continue Mr. Baxla.
SHRI JOACHIM BAXLA : Thank you Chairman Sir. The hon. Minister has brought in an Amendment to the Payment of Wages (Amendment) Bill, 2004. Sir, I rise to support the Bill which has been brought forward by the hon. Minister. This is a welcome step, and I consider it a positive step. Sir, the ceiling has been raised from Rs. 1600 to Rs. 6500 and the time frame has been fixed as five years. In this connection, I would like to request to the hon. Minister that there should be a linkage with the Consumer Price Index[c54] .
So, this should be reviewed from time to time. This is my suggestion. I hope the hon. Minister will review this.
Then, there are blatant violations of rules in many places. I would request the Government that those who intentionally violate the rules must be punished. In the case of contractors, the principal employer must be punished. Otherwise, if they are left scot-free, then ultimately the workers will suffer.
*Not Recorded 17.46 hrs (Mr. Deputy-Speaker in the Chair) Sir, just now the hon. Member was mentioning that in Modi Nagar, the workers in Modi Tyre Company are starving because they are not getting proper wages. So, I demand, through you, that justice should be done to them. We have been observing that there is an intention on the part of the management not to pay minimum wages to the workers. As far as possible, they try to dilly-dally in making payment of wages to the workers and try to deprive them of their wages. So, I would request the hon. Minister, through you, that this should be looked into so that the honest workers are not deprived of their wages. They should get reasonable wages and their wages should be paid in time. Otherwise, in case they are not paid in time, then their families will suffer.
Sir, we have seen what is happening to workers in the tea gardens. The owners of the tea gardens delay the payment of wages even up to two to three years. At the time of signing the agreement, they bring in some terms and conditions which say that the wages agreement can be reached only on the condition that they should accept wages linked with productivity. The agreement is signed only when the workers accept to that condition. Now the workers are suffering there.
Sir, whatever step the hon. Labour Minister has been trying to take, it is a positive step. So, I welcome this step. But at the same time, I would request, through you, that the Minister should come forward with a comprehensive Bill so that all sections of workers can be taken care of.
*m18 श्रम और रोजगार मंत्री (श्री के.चन्द्रशेखर राव) : मजदूरी संदाय अधनियम में संशोधन करने वाले विधेयक पर हुई चर्चा में श्री थावरचंद गेहलोत, श्री मधुसूदन मिस्त्री, श्री सांताश्री चटर्जी, श्री सी. कुप्पुसामी, श्री शैलेन्द्र कुमार, श्री ब्रज किशोर त्रिपाठी, श्री के. सुब्बारायण, प्रो. रासा सिंह रावत,श्री एस.के. खारवेनथन, श्री सुरेश प्रभाकर प्रभु, श्री राजाराम पाल, श्री गिरधारी लाल भार्गव, चौधरी लाल सिंह, श्री राम कृपाल यादव, श्री जोवाकिम बखला आदि माननीय सदस्यों ने भाग लिया, इसके लिए मैं सभी माननीय सदस्यों को धन्यवाद ज्ञापित करता हूं। सबसे पहले भारत के मजदूरों की तरफ से …( व्यवधान)
श्री सुरेन्द्र प्रकाश गोयल (हापुड़) : महोदय, मंत्री जी ने मेरा नाम नहीं पुकारा।…( व्यवधान)
श्री के.चन्द्रशेखर राव : मैं आपका नाम विशेष रूप से लेने जा रहा था। इस चर्चा से एक बात उभरकर सामने आयी है और जितने भी माननीय सदस्यों ने इस चर्चा में हिस्सा लिया, उन्होंने इसका स्वागत किया है, सभी ने इस बिल का समर्थन किया है[MSOffice55] । इसलिए मैं अपनी ओर से और भारत के वर्कर्स की ओर से सभी सम्मानित सदस्यों को धन्यवाद देना चाहूंगा।
जो बातें यहां कही गई हैं, सब बातों से नहीं, लेकिन कुछ बातों से मैं भी सहमत हूं। एक बात पर खास तौर से सब माननीय सदस्यों ने जोर दिया है कि इसमें ६,५०० रुपये ही क्यों रखे गए हैं, इसे बढ़ा सकते हैं। इस विषय में सरकार की एक ही मंशा होती है कि जो हाई पेड इम्प्लाइज़ हैं, वे अपने आपको बचा सकते हैं, उनके पास उतनी ताकत है, लेकिन जो लो पेड ग्रुप्स हैं, वे अपने आपको बचा नहीं पाते, उन पर ध्यान देने के लिए इस प्रकार का प्रावधान रखा जाता है। यदि आप चाहें, तो इसे बढ़ा सकते हैं, सरकार को इसमें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन छोटे लैवल पर जो लोग अपने आपको डिफैंड करने की स्थिति में नहीं हैं, जो श्रमिक हैं, उनको ज्यादा से ज्यादा प्रोटैक्शन मिले, यही सरकार की मंशा है।
आज सुबह जब अधिकारिगणों से मेरी बात हो रही थी, तो मैंने खुद इस पर आशंका जतायी थी। सरकार प्राइस इंडैक्स को डिक्लेयर करने के प्रोसैस में है। कुछ ही दिनों में यह होने वाला है। अभी-अभी हमें संस्था से रिपोर्ट मिली है। मुझे ट्रेड यूनियन के नेताओं से मीटिंग करके पहले प्राइस इंडैक्स ऐनाउंस करना है। उसके साथ-साथ जिस प्रकार से आज सदन में डिमांड आई थी, मैं सदन और सभी माननीय सदस्यों को आश्वासन देना चाहूंगा कि यह राशि ६,५०० रुपये नहीं रहेगी, यह जरूर बढ़ेगी, लेकिन इसे किस हद तक बढ़ाना उचित होगा, उसके लिए सरकार प्रयास करेगी। यह जल्दी से जल्दी हो जाएगा।
सभी माननीय सदस्यों ने अनआर्गेनाइज़्ड सैक्टर की बात बहुत जोर से कही है। इस बारे में सरकार को भी काफी चिन्ता है। इसमें कोई संदेह नहीं कि यूपीए सरकार ने देश की जनता के सामने जो कामन मनिमम प्रोग्राम रखा है, उसमें साफ कह दिया है कि अनआर्गेनाइज़्ड सैक्टर बिल जरूर लाया जाएगा। सरकार ने एक कमीशन भी ऐप्वाइंट किया। कमीशन अपना काम खत्म कर रहा है। हाल ही में हमने मीटिंग भी की है, हमारे मंत्रालय में मीटिंग हुई है। हमारे वरिष्ठ अधिकारी कमीशन की मीटिंग में भी गए। नेशनल एडवाइजरी कमीशन में भी इसकी चर्चा हो रही है। मैं समझता हूं कि कुछ समय में अनआर्गेनाइज़्ड सैक्टर बिल कम्प्रीहैनसिव रूप में लाने का प्रयास सरकार करेगी। जितनी जल्दी हो सके, सरकार उतनी जल्दी बिल लाने का प्रयास करेगी, मैं सदन और सभी माननीय सदस्यों को यह आश्वासन देना चाहता हूं।
ज्यादातर सदस्यों की यह डिमांड भी रही है कि सरकारी इम्प्लाइज़, जैसे मंत्रालय में होते हैं, दूसरे डिपार्टमैंट्स में होते हैं, उनको एक या दो तारीख को तनख्वाह मिल जाती है, इसी तरह उन लोगों को भी पेमैंट दिलाने का प्रयास करना चाहिए। यह पार्ट ऑफ एक्ट है, लेकिन कहीं-कहीं इम्प्लीमेंटेशन में दिक्कतें होती हैं। दूसरी बात मैं सदन को अवगत कराना चाहूंगा कि इसी सम्मानित सदन ने राज्य सरकार को कुछ अधिकार संविधान की तरफ से दे रखे हैं। राज्य सरकारें संवैधानिक रूप से चलें, यह मामूली बात नहीं है। राज्य सरकारों के अपने अधिकार और जिम्मेदारियां हैं। कहीं भी, किसी भी समय, किसी राज्य से अगर हमें इत्तिला मिलती है कि वहां न्यूनतम वेजेज नहीं दिए जा रहे हैं या वेजेज एक्ट का वॉयलेशन हो रहा है, यह एक ही एक्ट नहीं है, श्रम मंत्रालय की तरफ से कम से कम ५०-५५ ऐसे एक्ट्स हैं, उनमें से एक एक्ट यह है, जो संशोधन के लिए सदन में लाया गया है[R56] ।
यदि किसी भी राज्य से हमें इत्तला मिलती है या किसी भी सम्मानित सदस्य से लैटर के रूप में या किसी और तरह से जानकारी मिलती है, तो हम इम्मीडिएटली स्टेप लेते हैं और उस राज्य सरकार से बात करते हैं। मैं खुद सभी राज्यों के मुख्य मंत्रियों और वहां के श्रम मंत्रियों को लैटर लिखता रहता हूं। कभी भी कोई मामला गंभीर होता है, तो यहां से सीनियर आफिसर्स की एक टीम वहां भेजी जाती है। वैस्ट बंगाल के बारे में जब सदन में चर्चा हुई, आप जानते हैं कि मैं खुद वैस्ट बंगाल गया था। हमने उस समस्या को हल करने का प्रयास किया था। चटर्जी साहब इस बारे मे जानते हैं। वह प्रयास अभी भी जारी है। …( व्यवधान) डेवलपमैंट के लिए हम गये थे। वहां जाकर हमने प्रयास किया था। अब कभी किसी में रिजल्ट आता है और कभी रिजल्ट आने में देर लग सकती है, लेकिन हम हर प्रकार से प्रयास जारी करते रहेंगे, ऐसी कोई बात नहीं है।
इस विधेयक पर अमल करने के लिए हम हर संभव प्रयास करेंगे ताकि जमीनी स्तर तक इस पर अमल हो सके। सदन में माननीय सदस्यों ने जो भावनाएं प्रकट की हैं, उनको कोट हुए मैं एक बार फिर सभी राज्यों के मुख्य मंत्रियों, श्रम मंत्रियों और चीफ सैक्रेट्रीज को लैटर लिखूंगा, यह मैं सदन को आश्वासन देता हूं।
उपाध्यक्ष महोदय, इस विधेयक पर सभी माननीय सदस्यों का समर्थन मिला है। कुछ सदस्यों की तरफ से जो सुझाव दिए गए हैं, मैं अब उनके बारे में कहना चाहूंगा। अभी भार्गव साहब ने जयपुर मैटल इंडस्ट्री के बारे में कहा। मैं उन्हें इस बारे में आश्वासन देता हूं। यहां पर माननीय शीश राम ओला जी भी बैठे हुए हैं। वे भी उस समस्या के बारे में जानते हैं। इस संबंध में हम जरूर प्रयास करेंगे और राज्य सरकार से भी बात करेंगे। मैं आफिसर्स की एक टीम भी वहां भिजवा दूंगा। वे वहां जाकर उसका जायजा लेंगे। इस संबंध में केन्द्र सरकार जो कुछ प्रयास कर सकती है, उसे हम जरूर करेंगे। …( व्यवधान)
श्री मधुसूदन मिस्त्री (साबरकंठा) : ऐसा एनडीए सरकार ने नहीं किया। …( व्यवधान)
MR. DEPUTY-SPEAKER: Please do not disturb. Your Minister is speaking.
… (Interruptions)
श्री के.चन्द्रशेखर राव : श्री कुप्पुसामी जी अपने भाषण में कह रहे थे कि as an elderly person, as a veteran trade-union leader - आप श्रमिकों के लिए काफी गंभीर तरीके से काम करते हैं। उन्होंने एक बात रखी है कि do not dilute the labour laws. Kuppusamiji, I once again reiterate the commitment of the UPA Government. It is a labour-friendly Government; it is not at all working against the labour, and it will continue with that philosophy. It is going to be a labour-friendly Government. We will work for the welfare and upliftment of the labour. We strongly believe that healthy workforce is the wealth of the nation. That is the commitment of this Government. The Government is not going beyond the Common Minimum Programme. … (Interruptions)
श्री राजाराम पाल (बिल्हौर) : मंत्री जी, आप कानपुर के बारे में भी कुछ कहिये। …( व्यवधान)
MR. DEPUTY-SPEAKER: Please do not disturb.
श्री के.चन्द्रशेखर राव : कानपुर इंडस्ट्री के बारे में हमारे राजाराम पाल जी ने कहा है। उनका कहना था कि वहां काफी मिलें बंद हो गयी हैं। मैं भी जानता हूं कि एक जमाने में कानपुर बहुत बड़ा इंडस्टि्रयल एरिया होता था। कानपुर में जो कुछ हो रहा है, उसकी जानकारी इन्होंने अभी दी है। मैं उनको आहवान करता हूं कि वे मेरे पास आयें और मुझे सारी डिटेल्स बता दें। मंत्रालय की तरफ से उसमें जो कुछ संभव हो सकता है, उसे हम करेंगे। इस संबंध में जो कदम उठाने हैं, वह हम सांसद साहब से मिलकर उठायेंगे।
अभी गोयल साहब मोदी नगर की बात कह रहे थे। मैं गोयल साहब का भी विनम्रता पूर्वक अपनी तरफ से आहवान करता हूं कि वे मेरे पास आयें और मुझे सारी डिटेल्स समझा दें। उसमें हमें जो कदम उठाने जरूरी होंगे, जो प्रयास हम कर सकेंगे, मैं उनको आश्वासन देता हूं कि हर संभव वे प्रयास करेंगे। मुझे इस बात की खुशी है कि सभी माननीय सदस्यों ने इस बिल का समर्थन किया है।…( व्यवधान)
प्रो. रासा सिंह रावत (अजमेर) : कम्प्रीहैन्सिव बिल लाने की जो बात थी, उसका क्या हुआ? …( व्यवधान)
श्री थावरचंद गेहलोत (शाजापुर) : मजदूर संदाय अधनियम की धारा पांच में लिखा है कि जहां एक हजार से कम श्रमिक हैं, वहां सात तारीख को और जहां उससे अधिक हैं, वहां दस तारीख को तनख्वाह देनी चाहिए। इस संबंध में मैं आपकी भावना का सम्मान करता हूं। आपने अभी कहा कि मैं राज्य सरकारों को लिखूंगा और प्रयास करूंगा परन्तु इस एक्ट में …( व्यवधान)
उपाध्यक्ष महोदय : गेहलोत जी, मंत्री जी से परमीशन न लेकर, चेयर से परमीशन लेनी होती है।
...( व्यव्ाधान[r57] ) 18.00 hrs श्री थावरचंद गेहलोत : जी सर, मैं आपसे ही परमिशन लूंगा। ऐसा रहता है कि वह बोल रहे हों, यदि हम उनसे निवेदन करें और वह यील्ड कर जाएं, तो आपकी परमिशन ऑटोमैटिक मिल जाती है। इसलिए मैंने सीधा उधर निवेदन कर दिया था। इस गलती को मैं सुधारकर आपसे निवेदन करता हूं। इसमें यह जो प्रावधान है कि आप जब पत्र लिखेंगे और राज्य सरकार के साथ चर्चा करेंगे तथा एक्ट में सात और दस तारीख लिखी है, उसके कारण बाधा पहुंचेगी। मेरा एक निवेदन है। मैंने पहले भी निवेदन किया था और अब फिर निवेदन करना चाहूंगा कि इस संबंध में आप आश्वासन दे दें कि आप इस एक्ट में संशोधन करके एक तारीख और दो तारीख तक पेमेंट करने का प्रावधान कर दें और फिर राज्य सरकारों के साथ बात करेंगे तो सफलता जल्दी मिलेगी। इसलिए मैं इस पर आपकी टिप्पणी चाहूंगा।
MR. DEPUTY-SPEAKER: Now, it is six o’ clock. After this Bill, I have a list of more than 25 hon. Members to speak on the Discussion under Rule 193, and thereafter we shall take up ‘Special Mentions’. I think, we should take up ‘Special Mentions’ after this Bill is passed. If the House agrees, we may take up the Discussion under Rule 193 later on, on some other day.
SEVERAL HON. MEMBERS: Yes.
MR. DEPUTY-SPEAKER: Now, the hon. Minister may continue his reply.
… (Interruptions)
SHRI SANTASRI CHATTERJEE (SERAMPORE): As the hon. Member suggests, there is a stipulation in the Payment of Wages Act that wages be paid within seventh or tenth or as the case may be. But that does not bar the management to make the payment either on first or second, and I think, there is no bar on that. The hon. Minister may enlighten us.
श्री के.चन्द्रशेखर राव : उपाध्यक्ष महोदय, कुछ सदस्यों ने कहा है कि इसमें सिर्फ पैनल्टी ही पैनल्टी है। इसमें कुछ पनिशमेंट की बात होनी चाहिए। एक्ट के सैक्शन ९ (एफ) के तहत-
“Proposed slab may be replaced by the slab of Rs. 3,750 to Rs. 22,500 along with the imprisonment up to six months. ” इसमें जहां जरूरत थी, जहां पनिशमेंट की जरूरत होती है, जहां सख्ती से लागू करने की जरूरत है, वहां एक्ट में प्रावधान है। उसमें वह बात भी लाई गई है, सारे सदस्यों ने समर्थन किया ही है लेकिन उस समय कुछ दुख होता है कि इसमें कुछ राजनीति की बात लाई गई है। प्रोफेसर साहब जी मेरे सम्मानित सदस्य हैं, उन्होंने कहा कि आठ महीने इसे राज्य सभा से लोक सभा लाने में लग गये। मैं मानता हूं कि कुछ देरी हुई है लेकिन एनडीए के जमाने में सन् २००२ में बनकर २००४ तक कोई बात लाई ही नहीं गई और it was sent to a cold storage. दूसरी बात…( व्यवधान)
श्री ब्रज किशोर त्रिपाठी (पुरी) : स्टैंडिंग कमेटी की रिपोर्ट का क्या हुआ ? …( व्यवधान)
SHRI K. CHANDRA SHEKHAR RAO: We have also accepted the Standing Committee’s Report. I have made it very clear. Another thing is that, he went on saying, “हमारे वामपंथी मित्रों ने, मगरमच्छ के आंसू बहाने वाले और वे हमारा समर्थन कर रहे हैं।” Sir, मगरमच्छ के आंसू कौन बहाते हैं ? …( व्यवधान) आज सदन के जरिए सारा देश भी जान गया है और मैं प्रोफेसर साहब को याद दिलाना चाहूंगा कि इस देश में केन्द्र सरकार में पहली बार डिसइंवेस्टमेंट मंत्रालय औरडिसइंवेस्टमेंट मंत्रालय के खास मंत्री को ही कायम करने वाली कौन सी सरकार थी ? जरा आप उसे नहीं भूलें और ‘बालको’ को बेचने वाली कौन सी सरकार थी ?…( व्यवधान) तीन राज्यों में जिसमें हमारे आन्ध्रा प्रदेश की भी सरकार थी। मैं वहां उस समय विधायक था[R58] । उन्हें यह परमीशन दी गयी क लेबर लॉ को जिस[r59] प्रकार से आप चाहें संशोधित कर लें। एफडीआई को देश में लाने के लिए केन्द्र सरकार ने उन राज्यों को पूरे अधिकार दे दिए थे। प्रोफेसर साहब, मैं यही बात आपसे कहना चाहता हूँ…( व्यवधान) मैं कोई आलोचना नहीं कर रहा हूँ।
… (Interruptions)
MR. DEPUTY-SPEAKER: Nothing is to be recorded.
(Interruptions)* SHRI K. CHANDRA SHEKHAR RAO: Sir, I am not yielding. Let me complete.
… (Interruptions)
MR. DEPUTY-SPEAKER: It is not to be recorded.
(Interruptions)* MR. DEPUTY-SPEAKER: Whosoever speaks without my permission, their remarks will not be recorded.
… (Interruptions)
MR. DEPUTY-SPEAKER: Please sit down.
… (Interruptions)
MR. DEPUTY-SPEAKER: Shri Kharabela Swain, please sit down.
श्री के.चन्द्रशेखर राव : महोदय, बात इतनी ही है…( व्यवधान)
उपाध्यक्ष महोदय : आजमी जी, आप बैठ जाइए।
श्री के.चन्द्रशेखर राव : महोदय, इतनी बात तो तय है कि मैंने बाल्को के बारे में, तीन राज्यों को परमीशन देने के बारे में और डिसइनवेस्टमेंट के बारे में जो बातें कही हैं, वे फैक्ट्स हैं, मैंने कोई कल्पना नहीं की है, लेकिन…( व्यवधान)
*Not Recorded MR. DEPUTY-SPEAKER: Please do not disturb.
… (Interruptions)
MR. DEPUTY-SPEAKER: Nothing should be recorded.
(Interruptions)* SHRI K. CHANDRA SHEKHAR RAO: Sir, I am concluding.
MR. DEPUTY-SPEAKER: Hon. Minister, you should also come to the Bill and not disinvestment.
… (Interruptions)
श्री के.चन्द्रशेखर राव : महोदय, जब मैंने इस बिल को इंट्रोडयुस किया, आपने मुझे अनुमति दी,सारे सदस्यों ने अपनी बातें रखी, राजनीति मैंने शुरू नहीं की है। लेकिन दूसरी तरफ से जब बात आई, जब उल्लेख हुआ तो उसके बारे में मुझे कम से कम जवाब देना ही पड़ेगा अन्यथा देश में एक ही वर्जन चला जाएगा। लेफ्ट के हमारे मित्र, अपनी नीतियों के बारे में हमें बार-बार कहते रहते हैं, गवर्नमेंट को एलर्ट और होशियार करते रहते हैं, इसमें छिपाने वाली कोई बात नहीं है। मैं यह मानकर चलता हूँ कि इसमें कोई रहस्य की बात नहीं है। इसलिए मैं इन बातों को प्रोफेसर साहब की विद्वत्ता के लिए छोड़ते हुए, यह कहूंगा कि यह बिल लेबरफ्रैण्डली है और जिस तरह से इसे राज्यसभा में बिना किसी विरोध के आम सहमति से पारित किया गया है, उसी तरह यह सदन इसे युनैनिमसली पास कर दे।
… (Interruptions)
*Not Recorded MR. DEPUTY-SPEAKER: No, I am not allowing.
“That the Bill further to amend the Payment of Wages Act, 1936, as passed by Rajya Sabha, be taken into consideration. ” The motion was adopted.
MR. DEPUTY-SPEAKER: The House will now take up clause-by-clause consideration of the Bill. The question is:
“That clauses 2 to 11 stand part of the Bill.” The motion was adopted.
Clauses 2 to 11 were added to the Bill.
Clause 1 Short title and Commencement Amendment made: Page 1, line 3,-- for “2004” substitute “2005” (2) (Shri K. Chandra Shekhar Rao[m60] ) MR. DEPUTY-SPEAKER: The question is : “That clause 1, as amended, stand part of the Bill. ” The motion was adopted. Clause 1, as amended, was added to the Bill. Enacting Formula Amendment made: Page 1, line 1, - for “Fifty-fifth” substitute“Fifty-sixth” (1) (Shri K. Chandra Shekhar Rao) MR. DEPUTY-SPEAKER: The question is: “That the Enacting Formula, as amended, stand part of the Bill.” The motion was adopted. The Enacting Formula, as amended, was added to the Bill. The long Title was added to the Bill. SHRI K. CHANDRA SHEKHAR RAO: Sir, I beg to move: “That the Bill, as amended, be passed. ” MR. DEPUTY-SPEAKER: The question is: “That the Bill, as amended, be passed. ” The motion was adopted. _________
MR. DEPUTY-SPEAKER: Now, we will take up Special Mentions. First of all, I will call Shri Shailendra Kumar.