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State Consumer Disputes Redressal Commission

Sompal vs Branch Manager P.N.B on 19 December, 2023

  	 Cause Title/Judgement-Entry 	    	       STATE CONSUMER DISPUTES REDRESSAL COMMISSION, UP  C-1 Vikrant Khand 1 (Near Shaheed Path), Gomti Nagar Lucknow-226010             First Appeal No. A/1610/2018  ( Date of Filing : 06 Sep 2018 )  (Arisen out of Order Dated 24/07/2018 in Case No. C/06/2017 of District Baghpat)             1. Sompal  S/O Sri Vikram Singh R/O Vill. Kakor Kalan Tehsil Barot Distt. Baghpat ...........Appellant(s)   Versus      1.  Branch Manager P.N.B  Branch Chaprauli Distt. Baghpat ...........Respondent(s)       	    BEFORE:      HON'BLE MR. Rajendra Singh PRESIDING MEMBER    HON'BLE MR. Vikas Saxena JUDICIAL MEMBER            PRESENT:      Dated : 19 Dec 2023    	     Final Order / Judgement    

राज्‍य उपभोक्‍ता विवाद प्रतितोष आयोग उ0प्र0 , लखनऊ  (सुरक्षित) अपील सं0- 1610/2018 (जिला उपभोक्‍ता विवाद प्रतितोष आयोग, बागपत द्वारा परिवाद सं0- 06/2017 में पारित निर्णय एवं आदेश दिनांक 24.07.2018 के विरुद्ध) Sompal S/o Sri Vikram Singh R/o Village Kakor Kalan Tehsil Barot District Bagpat.

                                                                                                          .........Appellant                                                              Versus Branch Manager Punjab National Bank, Branch Chaprauli, District Bagpat.  

                                                                                                       .........Respondent   समक्ष:-

   माननीय श्री राजेन्‍द्र सिंह, सदस्‍य।
   माननीय श्री विकास सक्‍सेना, सदस्‍य।
 
अपीलार्थी की ओर से उपस्थित : श्री एस0के0 श्रीवास्‍तव,                            विद्वान अधिवक्‍ता।                             
प्रत्‍यर्थी की ओर से उपस्थित   : श्री साकेत श्रीवास्‍तव,                             विद्वान अधिवक्‍ता।  
 
दिनांक:- 13.02.2024 माननीय श्री विकास सक्‍सेना , सदस्‍य द्वारा उद्घोषित निर्णय            परिवाद सं0- 06/2017 सोमपाल बनाम ब्रांच मैनेजर, पंजाब  नेशनल बैंक में जिला उपभोक्‍ता आयोग, बागपत द्वारा पारित निर्णय एवं आदेश दि0 24.07.2018 के विरुद्ध यह अपील प्रस्‍तुत की गई है।
           विद्वान जिला उपभोक्‍ता आयोग ने प्रश्‍नगत निर्णय व आदेश के माध्‍यम से परिवाद आंशिक रूप से स्‍वीकार करते हुये निम्‍नलिखित आदेश पारित किया है:- 
           ''यह परिवाद आंशिक रूप से विपक्षी के विरुद्ध डिक्री किया जाता है विपक्षी शाखा प्रबंधक पंजाब नेशनल बैंक शाखा छपरौली जिला बागपत को निर्देशित किया जाता है कि वह निर्णय की तिथि से दो माह के अन्‍दर परिवादी को अंकन 50,000/-रूपये बतौर क्षतिपूर्ति देना सुनिश्चित करें। नियत समय तक क्षतिपूर्ति की धनराशि अदा न करने पर इस पर 6 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्‍याज देय होगा। वाद की परिस्थितियों को देखते हुए पक्षकार अपना-अपना वाद व्‍यय स्‍वयं वहन करेंगे।''            अपीलार्थी/परिवादी का परिवाद पत्र में संक्षेप में कथन इस प्रकार है कि अपीलार्थी/परिवादी का प्रत्‍यर्थी/विपक्षी के यहाँ एक खाता  सख्या 0578000100233210 है और वह प्रत्‍यर्थी/विपक्षी का उपभोक्ता है। अपीलार्थी/परिवादी द्वारा दिनांक 31.08.2016 को अंकन 16,40,000/-रूपये का एक चेक संख्या 688075 दिनांकित 31.07.2016 बाबत पंजाब एण्ड सिन्‍ध बैंक शाखा पल्लवपुरम मेरठ प्रत्‍यर्थी/विपक्षी के यहाँ अपने खाते में जमा करने के लिए प्रस्तुत किया था, लेकिन उक्त चेक का रूपया आज तक उसके खाते में जमा नहीं हो पाया है जिस कारण अपीलार्थी/परिवादी को अत्यन्त ही मानसिक एवं आर्थिक हानि हुई है। अपीलार्थी/परिवादी ने उक्त चेक के क्लीयरेन्स के सम्बन्ध में कई बार पंजाब नेशनल बैंक शाखा छपरौली से सम्पर्क किया और मौखिक रूप में प्रार्थना की, लेकिन प्रत्‍यर्थी/विपक्षी द्वारा कोई सतोषजनक उत्तर नहीं दिया गया तथा अपीलार्थी/परिवादी को एक पत्र दिनांकित 06.10.2016 प्राप्त हुआ जिसमें उसके चेक खोने के सम्बन्ध में सूचित किया गया था। इसके पश्चात अपीलार्थी/परिवादी ने प्रत्‍यर्थी/विपक्षी के आफिस में जाकर उक्‍त चेक बैंक से सम्बन्धित समस्त धन अपने खाते में ट्रांसफर करने के लिए प्रार्थना की, लेकिन प्रत्‍यर्थी/विपक्षी द्वारा कोई कार्यवाही नहीं की गयी। अपीलार्थी/परिवादी द्वारा चेक जारीकर्ता से कई बार दूसरा चेक जारी करने के लिए कहा गया लेकिन गैर फरीकवाद चेक जारीकर्ता ने अपीलार्थी/परिवादी को दूसरा बैंक या डुप्लीकेट चेक जारी करने से साफ इंकार कर दिया गया, जिस कारण अपीलार्थी/परिवादी का भुगतान रुकने के कारण अपीलार्थी/परिवादी बर्बाद होने की कगार पर है। अपीलार्थी/परिवादी को अपना घर चलाने के लिये एवं खेत सम्बन्धित फसल बोने तथा ट्रैक्टर आदि के सम्बन्ध में धन की सख्त आवश्यकता पड़ रही है. लेकिन बैंक द्वारा चेक की धनराशि उसके खाते में जमा न कर पाने के कारण अपीलार्थी/परिवादी को अपूर्णीय क्षति हो रही है। प्रत्‍यर्थी/विपक्षी का कृत्य उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के प्राविधानों के अनुपालन में पर्याप्त सेवा शर्तों का नियम समय में पालन न किये जाने से अपीलार्थी/परिवादी को जानबूझकर आर्थिक नुकसान पहुंचाने व लगातार मानसिक उत्पीड़न करने से अपूर्णीय क्षति हुई है जिसका धन के रूप में आंकलन किया जाना सम्भव नहीं है। अपीलार्थी/परिवादी को अब तक करीब दो लाख रूपये की क्षति हुई है, जिसके लिए प्रत्‍यर्थी/विपक्षी पूर्ण रूप से उत्तरदायी है। अपीलार्थी/परिवादी ने प्रत्‍यर्थी/विपक्षी को कई बार मौखिक रूप से अपने उक्त चेक को क्‍लीयर करते हुए अपीलार्थी/परिवादी के खाते में धनराशि अंकन 16,40,000/-रूपये जमा करने के लिए कहा लेकिन प्रत्‍यर्थी/विपक्षी जानबूझकर टालते चले आ रहे है, जिससे व्‍यथित होकर अपीलार्थी/परिवादी द्वारा यह परिवाद योजित किया गया है।
           प्रत्‍यर्थी/विपक्षी द्वारा आपत्ति पत्र/प्रतिवाद पत्र प्रपत्र संख्या 11ग प्रस्तुत करते हुये वाद में अंकित तथ्यों को अस्वीकार करते हुये विशेष कथन में यह तथ्य अंकित किया है कि अपीलार्थी/परिवादी का प्रत्‍यर्थी/विपक्षी के यहाँ खाता है जिसका खाता संख्या 0578000100233210 है। प्रत्‍यर्थी/विपक्षी के द्वारा अपीलार्थी/परिवादी के खाते का कभी कोई गलत उपयोग नहीं किया गया और कर्तव्य परायणता व कानून के दायरे में रहकर हमेशा कार्य किया गया है। अपीलार्थी/परिवादी द्वारा दिनांक 31.08.2016 को  प्रत्‍यर्थी/विपक्षी पंजाब नेशनल बैंक शाखा छपरौली में रूपये 16,40,000 चेक संख्या 688075 पंजाब एण्ड सिंध बैंक शाखा पल्लवपुरम मेरठ के यहाँ का अपने खाते में जमा कराने के लिए प्रस्तुत किया था। उत्तरदाता प्रतिवादी द्वारा नियमानुसार कार्यवाही करते हुए पंजाब नेशनल बैंक आर.सी.सी. संसद मार्ग नई दिल्ली को Flyking Courer Service Private Limited, Baraut के द्वारा दिनांक 16.09.2016 अग्रसारित किया गया था जिसे उक्त कम्पनी के कर्मचारी द्वारा दिनांक 16.09.2016 ई० को अपने एजेंट कोरियर कम्पनी मधुर कोरियर चुनानी पहाड़गंज, नई दिल्ली द्वारा अग्रसारित किया गया था लेकिन दुर्भाग्‍यवश मधुर कोरियर, चूना मण्‍डी पहाड़गंज, नई दिल्ली के कर्मचारी का बैग दिनांक 17.09.2016 को गुम हो गया, जिसकी सूचना कोरियर कम्‍पनी चूना मण्‍डी, नई दिल्ली के कर्मचारी पंकज कुमार पुत्र दिनेश कुमार द्वारा क्राइम ब्रांच दिल्‍ली में एल0आर0 नम्बर 886929/2016 दि0 17.09.2016 ई० को पंजीकृत करा दी थी, जिसकी सूचना आवश्यक कार्यवाही हेतु प्रत्‍यर्थी/प्रतिवादी के द्वारा बैंक प्रबन्धक पंजाब एण्ड सिंध बैंक पल्लवपुरम मेरठ व Incumbent In Charge Of RCC New Delhi को दे दी गयी तथा प्रत्‍यर्थी/प्रतिवादी द्वारा अपीलार्थी/परिवादी को यह सूचना रजिस्टर्ड डाक द्वारा प्रेषित की गयी कि आपका चेक ट्रांजिट के दौरान दि0 17.09.2016 को गुम हो गया है जिसकी सूचना रिपोर्ट नई दिल्ली थाने में एल0आर0 नम्बर 886929/2016 पर दर्ज है और अपीलार्थी/परिवादी से निवेदन किया गया कि सुरक्षा की दायरे में आपकी चेक प्रक्रिया रोक दी गयी है और अपीलार्थी/परिवादी अपना डुप्‍लीकेट चेक प्रस्तुत करे। इस प्रकार प्रत्‍यर्थी/विपक्षी द्वारा कोई उपेक्षा पूर्ण एवं लापरवाही का कार्य अपीलार्थी/परिवादी के साथ नहीं किया गया और नियमानुसार कार्यवाही की गयी। अपीलार्थी/परिवादी द्वारा प्रत्‍यर्थी/विपक्षी के ऊपर लगाये गये आरोप पूर्णतः मिथ्या है और लालच के वशीभूत होकर यह कार्यवाही की गयी है। अपीलार्थी/परिवादी का यह कार्य उपभोक्ता के दायरे में नहीं आता और परिवाद बिना किसी कारण के योजित किया गया है जो खण्डित होने योग्य है।
           यह भी कहा गया है कि परिवाद योजित करने से पहले अपीलार्थी/परिवादी द्वारा प्रत्‍यर्थी/विपक्षी को कोई सूचना किसी भी प्रकार की नहीं दी गयी और न ही अपीलार्थी/परिवादी द्वारा ऐसा कोई तथ्य प्रत्‍यर्थी/विपक्षी के समक्ष प्रस्तुत किया गया कि आपको गैर फरीक वाद के द्वारा कोई डुप्लीकेट चेक नहीं दिया गया है। अपीलार्थी/परिवादी द्वारा प्रत्‍यर्थी/विपक्षी के विरूद्ध जानबूझकर गलत तथ्यों पर उपरोक्त परिवाद प्रेषित किया गया है जिससे प्रत्‍यर्थी/विपक्षी की शाखा को 1,00,000/-रू0 की आर्थिक व मानसिक क्षति पहुंची है जिसकी पूर्ति नहीं की जा सकती है. अपीलार्थी/परिवादी से प्रत्‍यर्थी/विपक्षी को दिलायी जाये और समस्त कथनों को दृष्टिगत रखते हुए परिवाद को खण्डित फरमाया जाये। अपीलार्थी/परिवादी को आदेशित करें कि वह प्रत्‍यर्थी/विपक्षी को वाद व्यय एवं अधिवक्ता फीस के रूप में अंकन 10,000/-रूपये अदा करे तथा अन्य प्रतिकार जो योग्य न्यायालय की राय में, अपीलार्थी/परिवादी से प्रत्‍यर्थी/विपक्षी को दिलाया जाये। अपीलार्थी/परिवादी द्वारा परिवाद के साथ जो शपथ पत्र प्रस्तुत किया गया है वह कुलभूषण नाम के व्यक्ति का है जबकि शपथ सोमपाल पुत्र विक्रम के द्वारा ली गयी है इससे स्पष्ट होता है कि अपीलार्थी/परिवादी द्वारा कोई भी सत्य कथन परिवाद में प्रस्तुत नहीं किया गया है। इस कारण से भी परिवाद पत्र शपथ पत्र के अभाव में हर दशा में खण्डित किये जाने योग्य है।
           विद्वान जिला उपभोक्‍ता आयोग के निर्णय दिनांकित 24.07.2018 के विरुद्ध क्षतिपूर्ति की धनराशि बढ़ाये जाने हेतु अपीलार्थी/परिवादी की ओर से प्रस्‍तुत अपील में मुख्‍य रूप से यह आधार लिये गये हैं कि प्रश्‍नगत निर्णय पक्षपातपूर्ण है और अपीलार्थी/परिवादी को दी गई क्षतिपूर्ति अत्‍यंत कम है। विद्वान जिला उपभोक्‍ता आयोग द्वारा यह मानकर भी कि प्रश्‍नगत चेक की धनराशि अपीलार्थी/परिवादी को प्राप्‍त नहीं हुई थी एवं चेक बैंक की लापरवाही के कारण गुम हो गया था। चेक की धनराशि अपीलार्थी/परिवादी को नहीं दिलायी गई है। चेक डिजिटल था और बैंक इस तथ्‍य को आसानी से पा सकता था कि चेक की धनराशि कहॉं गई है, किन्‍तु बैंक द्वारा इस तरह का कोई प्रयास नहीं किया गया। चेक की धनराशि 16,40,000/-रू0 अपीलार्थी/परिवादी को दिलवायी जानी थी, किन्‍तु यह धनराशि नहीं दिलवायी गई है और इस प्रकार मा0 राष्‍ट्रीय आयोग तथा मा0 सर्वोच्‍च न्‍यायालय के निर्णयों में यह दिया गया है कि उपभोक्‍ता को दी जाने वाली क्षतिपूर्ति समुचित होनी चाहिये, किन्‍तु अपीलार्थी/परिवादी को समुचित क्षतिपूर्ति नहीं दिलायी गई है। इस आधार पर धनराशि को बढ़ाये जाने हेतु यह अपील प्रस्‍तुत की गई है।
           हमने अपीलार्थी के विद्वान अधिवक्‍ता श्री एस0के0 श्रीवास्‍तव तथा प्रत्‍यर्थी के विद्वान अधिवक्‍ता श्री साकेत श्रीवास्‍तव को सुना। प्रश्‍नगत निर्णय एवं आदेश तथा पत्रावली पर उपलब्‍ध अभिलेखों का सम्‍यक परीक्षण व परिशीलन किया।
           प्रस्‍तुत मामले में स्‍वीकार रूप से अपीलार्थी/परिवादी द्वारा अपना चेक प्रत्‍यर्थी/विपक्षी पंजाब नेशनल बैंक की शाखा में जमा किया गया जहॉं पर अपीलार्थी/परिवादी का खाता है। यह चेक बैंक के एजेंट कोरियर द्वारा प्रेषित किया गया और इस दौरान चेक गुम हो गया। निश्‍चय ही यह बैंक के एजेंट की लापरवाही के कारण गुम हुआ है, जिसके लिये सेवा में कमी के कारण प्रत्‍यर्थी/विपक्षी बैंक क्षतिपूर्ति के लिये उत्‍तरदायित्‍व रखता है, किन्‍तु पीठ के समक्ष प्रश्‍न यह है कि यह क्षतिपूर्ति की धनराशि कितनी होनी चाहिये। सम्‍पूर्ण चेक की धनराशि की अथवा सेवा में त्रुटि के कारण जो अपीलार्थी/परिवादी को क्षति हुई है उसकी क्षतिपूर्ति हेतु एक सीमित धनराशि दी जा सकती है। प्रस्‍तुत मामले में चेक गुम हो गया, किन्‍तु इस कारण अपीलार्थी/परिवादी को डुप्‍लीकेट अथवा दूसरा चेक जारी नहीं हो सका अथवा अपीलार्थी/परिवादी ने डुप्‍लीकेट चेक लेकर किसी अन्‍य खाते में इसकी धनराशि प्राप्‍त नहीं की है। यह साक्ष्‍य से साबित नहीं हुआ है, चूँकि अपीलार्थी/परिवादी के पास यह विकल्‍प उपलब्‍ध है कि चेक जारीकर्ता से दूसरा डुप्‍लीकेट चेक लेकर इसे अपने पंजाब नेशनल बैंक स्थि‍त वर्तमान खाते अथवा अपने नाम से किसी अन्‍य खाते में इसकी धनराशि प्राप्‍त कर सकता है। इसके अतिरिक्‍त अपीलार्थी/परिवादी के पास यह विकल्‍प भी है कि वह पंजाब नेशनल बैंक से चेक के नॉनपेमेंट का सर्टिफिकेट लेकर जारीकर्ता से दूसरा चेक प्राप्‍त कर सकता है।
           मा0 सर्वोच्‍च न्‍यायालय के समक्ष प्रस्‍तुत मामले Federal Bank Ltd. Versus N.S. Sabastian III (2009)C.P.J. 3(S.C.) में इस मामले के सदृश्‍य तथ्‍य मा0 सर्वोच्‍च न्‍यायालय के समक्ष आये जिसमें बैंक को जमा करने हेतु दिया गया चेक बैंक द्वारा भेजा गया जो प्रेषित किये जाने के दौरान गुम हो गया। मा0 सर्वोच्‍च न्‍यायालय द्वारा यह निर्णीत किया गया कि परिवादी द्वारा डुप्‍लीकेट चेक प्राप्‍त करने के लिये आवश्‍यक पग नहीं लिये गये। चेक जारीकर्ता के विरुद्ध धनराशि प्राप्‍त करने के लिये कोई कार्यवाही परिवादी द्वारा नहीं की गई। ऐसी दशा में परिवादी चेक की धनराशि पर बैंक के दोष के कारण हुई क्षतिपूर्ति का उत्‍तरदायित्‍व रखते हैं जो ब्‍याज के रूप में परिवादी को हानि हो रही है। चेक की सम्‍पूर्ण धनराशि दिलाया जाना उचित नहीं है।
           प्रस्‍तुत मामले में अपीलार्थी/परिवादी ने चेक की सम्‍पूर्ण धनराशि हेतु प्रार्थना की है जो बिना किसी साक्ष्‍य के चेक डुप्‍लीकेट प्राप्‍त नहीं हुआ है और अपीलार्थी/परिवादी को चेक की सम्‍पूर्ण धनराशि से बैंक की लापरवाही के कारण ही क्षति उठानी पड़ी है। यह उचित नहीं है कि चेक की सम्‍पूर्ण धनराशि बैंक से दिलवायी जाये। चेक डुप्‍लीकेट प्राप्‍त करने में होने वाले क्‍लेश एवं परेशानी तथा चेक की धनराशि पर ब्‍याज की हानि के सम्‍बन्‍ध में क्षतिपूर्ति दिलाया जाना उचित है। विद्वान जिला उपभोक्‍ता आयोग ने उचित प्रकार से 50,000/-रू0 बतौर क्षतिपूर्ति दिलाये जाने का आदेश दिया है जो उचित है, चूँकि प्रश्‍नगत निर्णय के अनुसार निर्णय के  02 माह उपरान्‍त तक यह धनराशि अपीलार्थी/परिवादी को प्रदान नहीं हुई है। अत: इस धनराशि पर प्रश्‍नगत निर्णय की तिथि से 02 माह के उपरांत से 06 प्रतिशत साधारण वार्षिक ब्‍याज भी दिलाया जाना उचित है। तदनुसार अपील आंशिक रूप से स्‍वीकार किये जाने योग्‍य है।    
आदेश            अपील आंशिक रूप से स्‍वीकार की जाती है। विद्वान जिला उपभोक्‍ता आयोग द्वारा पारित प्रश्‍नगत निर्णय व आदेश परिवर्तित करते हुये प्रत्‍यर्थी/विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह अपीलार्थी/परिवादी को अंकन 50,000/-रू0 (पचास हजार रू0) बतौर क्षतिपूर्ति के रूप में तथा इस धनराशि पर प्रश्‍नगत निर्णय व आदेश दिनांकित 24.07.2018 के 02 माह के उपरांत से 06 प्रतिशत साधारण वार्षिक ब्‍याज वास्‍तविक अदायगी तक प्रदान करे।  
           उभयपक्ष अपना-अपना व्‍यय स्‍वयं वहन करेंगे।  
प्रस्‍तुत अपील में अपीलार्थी द्वारा यदि कोई धनराशि जमा की गई हो तो उक्‍त जमा धनराशि अर्जित ब्‍याज सहित सम्‍बन्धित जिला उपभोक्‍ता आयोग को यथाशीघ्र विधि के अनुसार निस्‍तारण हेतु प्रेषित की जाये।
     आशुलिपि‍क से अपेक्षा की जाती है कि‍ वह इस निर्णय व आदेश को आयोग की वेबसाइट पर नियमानुसार यथाशीघ्र अपलोड कर दें।
             
     (विकास सक्‍सेना)                             (राजेन्‍द्र सिंह)

 

         सदस्‍य                                   सदस्‍य 

 

 

 

           निर्णय आज खुले न्‍यायालय में हस्‍ताक्षरित, दिनांकित होकर उद्घोषित किया गया।    
 
     (विकास सक्‍सेना)                              (राजेन्‍द्र सिंह)

 

         सदस्‍य                                     सदस्‍य

 

 

 

दिनांक:- 13.02.2024

 

 

 

 शेर सिंह, आशु0,

 

  कोर्ट नं0-2

 

                                          [HON'BLE MR. Rajendra Singh]  PRESIDING MEMBER 
        [HON'BLE MR. Vikas Saxena]  JUDICIAL MEMBER