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State Consumer Disputes Redressal Commission

Sudama Puri Cold Storage vs Sri Om Prakash Gandhi on 20 February, 2017

  	 Cause Title/Judgement-Entry 	    	       STATE CONSUMER DISPUTES REDRESSAL COMMISSION, UP  C-1 Vikrant Khand 1 (Near Shaheed Path), Gomti Nagar Lucknow-226010             First Appeal No. A/2000/2490  (Arisen out of Order Dated  in Case No.  of District State Commission)             1. Sudama Puri Cold Storage  A ...........Appellant(s)   Versus      1. Sri Om Prakash Gandhi  a ...........Respondent(s)       	    BEFORE:      HON'BLE MR. Ram Charan Chaudhary PRESIDING MEMBER    HON'BLE MR. Mahesh Chand MEMBER          For the Appellant:  For the Respondent:    Dated : 20 Feb 2017    	     Final Order / Judgement    

राज्‍य उपभोक्‍ता विवाद प्रतितोष आयोग, उ0प्र0, लखनऊ।

                                         (सुरक्षित) अपील सं0-2490/2000 (जिला उपभोक्‍ता फोरम फिरोजाबाद द्वारा परिवाद संख्‍या-३५८/१९९४ में पारित आदेश दिनांक ०७-०९-२००० के विरूद्ध) मै0 सुदामापुरी कोल्‍ड स्‍टोरेज द्वारा प्रोपराईटर संतोष कुमार उम्र लगभग ४७ वर्ष पुत्र श्री ओम प्रकाश शर्मा निवासी सुदामापुरी सिकोहाबाद जिला फिरोजाबाद एवं तीन अन्‍य।

                                  ............अपीलार्थी.                               

                                बनाम श्री ओमप्रकाश गांधी उम्र लगभग ६० वर्ष पुत्र श्री लक्ष्‍मण प्रसाद निवासी निजामपुर गढूमा पोस्‍ट रेलवे स्‍टेशन शिकोहाबाद जिला फिरोजाबाद। प्रत्‍यर्थी.

जिला उपभोक्‍ता संरक्षण फिरोजाबाद द्वारा चेयरमैन ।

                             .......प्रोफार्मा पार्टी.      

समक्ष:-

1 मा0 श्री राम चरन चौधरी, पीठासीन सदस्‍य।
2 मा0 श्री महेश चन्‍द, सदस्‍य।

अपीलकर्तागण की ओर से उपस्थित :-श्री आर0के0 गुप्‍ता विद्वान                                अधिवक्‍ता।

प्रत्‍यर्थीगण की ओर से उपस्थित    :-श्री सुशील कुमार मिश्रा विद्वान

 

                               अधिवक्‍ता।

 

दिनांक 24-03-2017

 

 मा0 श्री महेश चन्‍द सदस्‍य ,  द्वारा उद्घोषित।

 

                         निर्णय 

 

 अपीलार्थी ने यह अपील जिला उपभोक्‍ता फोरम फिरोजाबाद द्वारा परिवाद संख्‍या-३५८/१९९४ में पारित आदेश दिनांक ०७-०९-२००० के विरूद्ध प्रस्‍तुत की है, जिसका आदेश निम्‍नानुसार है:-

'' प्रकरण इस आशय से विपक्षीगण के विरूद्ध स्‍वीकार किया जाता है कि प्रार्थी विपक्षीगण से रू0 १,४२,५८४/-वसूल करने का अधिकारी होगा तथा उक्‍त राशि पर अप्रैल १९९३ से वसूलयाबी की तारीख तक १० प्रतिशत सूद भी प्राप्‍त करने का अधिकारी होगा। प्रार्थी विपक्षीगण से मानसिक शारीरिक एवं वाद खर्चा की क्षतिपूर्ति की राशि के रूप में रू0 ५०००/-अलहदा से प्राप्‍त करने का अधिकारी होगा। यदि विपक्षीगण उक्‍त आदेश का अनुपालन ३० दिन के अन्‍दर करने में असफल रहते हैं तो उनके विरूद्ध उपभोक्‍ता संरक्षण अधिनियम की धारा २५/२७ के अन्‍तर्गत कार्यवाही का जावेगी।'' संक्षेप में विवाद के तथ्‍य इस प्रकार हैं कि परिवादी/प्रत्‍यर्थी द्वारा ४२७ बोरा आलू माह मार्च १९९३ व अप्रैल १९९३ की विभिन्‍न तिथियों में अपीलकर्तागण/विपक्षीगण की सुदामापुरी कोल्‍ड स्‍टोरेज प्रा0लि0 शिकोहाबाद में शीतलन हेतु भण्‍डारण किया था। उक्‍त आलू के भण्‍डारण हेतु परिवादी को कुल किराया रू0 १४४८४/- अदा करना था। परिवादी ने दिनांक २०/११/१९९३ को अंकन रू0 १४४८४/- किराये के रूप में अदा करने के बाद कोल्‍ड स्‍टोरे से आलू निकालकर बाहर ले जाने के लिए अपीलकर्तागण/विपक्षीगण से गेट पास प्राप्‍त किया था, किन्‍तु गेट पास प्राप्‍त करने के बाद जब वह कोल्‍ड स्‍टोरेज पर आलू लेने के लिए गया तो विपक्षीगण ने आलू देने से इनकार कर दिया। उक्‍त ४२७ बोरा आलू की तत्‍समय बाजारू कीमत रू0 १,२८,१००/- थी । परिवादी ने अपना आलू वापस प्राप्‍त करने के लिए विपक्षीगण से कई बार संपर्क किया। दिनांक १०/०१/१९९४ को उपरोक्‍त आलू देने से इनकार कर दिया।  अंतत: विवश होकर परिवादी ने परिवाद सं0-३५८/१९९४ जिला फोरम फिरोजाबाद के समक्ष दायर किया और उक्‍त परिवाद में विद्वान जिला फोरम के समक्ष यह प्रार्थना की कि विपक्षी परिवादी को रू0 १,४२,५८४/- की धनराशि १० प्रतिशत ब्‍याज सहित दिलाए।
इस परिवाद का प्रतिवादी ने विरोध करते हुए प्रतिवाद पत्र दाखिल किया और उसमें कहा गया कि परिवादी द्वारा दिनांक २५/११/१९९३ को ९३ बोरी आलू ट्रक सं0-९९०८ यूआरटी से बनारस स्थित फर्म मै0 ओमप्रकाश मिश्रा, आलू आढ़ती को बिक्री हेतु भेजा गया और उसके साथ उसका प्रतिनिधि वासुदेव शर्मा भी गया। उसके पश्‍चात दिनांक ०४/१२/१९९३ को पुन: ११० बोरा आलू इसी फर्म को विक्रय हेतु बनारस भेजा गया और उक्‍त आलू की बिक्री से रू0 ३०५७६.५१ पैसे परिवादी के प्रतिनिधि वासुदेव शर्मा द्वारा प्रतिवादीगण की फर्म में जमा किया गया । ८१ बोरा आलू परिवादी ने दिनांक ०६/१२/१९९३ को बिक्री हेतु ख्‍वाजा फ्रूट कम्‍पनी नई दिल्‍ली को भेजा। इस प्रकार परिवादी ने समय-समय पर अपना समस्‍त आलू प्रतिवादीगण से प्राप्‍त कर लिया, किन्‍तु आलू के भण्‍डारण का किराया उसने जमा नहीं किया।
पत्रावली पर उपलब्‍ध साक्ष्‍यों एवं उभय पक्षों के कथनों के आधार पर विद्वान जिला मंच द्वारा यह अवधारित किया गया कि विपक्षीगण द्वारा प्रार्थी का आलू वापस नहीं किया गया और प्रश्‍नगत आदेश पारित कर दिया गया।
इसी आदेश से क्षुब्‍ध होकर यह अपील दायर की गयी है।
अपील में जो आधार लिए गए हैं, उसमें कहा गया है कि परिवादी उपभोक्‍ता संरक्षण अधिनियम १९८६ की धारा २डी के अन्‍तर्गत उपभोक्‍ता की श्रेणी में नहीं आता है। विद्वान जिला मंच द्वारा प्रश्‍नगत आदेश दिनांक ०७/०९/२००० क्षेत्राधिकार से बाहर जाकर पारित किया गया है। अपीलकर्ता ने यह भी कहा है कि परिवादी को यदि किसी अनुतोष की आवश्‍यकता थी तो वह उ0प्र0 कोल्‍ड स्‍टोरेज अधिनियम के अन्‍तर्गत कार्यवाही कर सकता था। विद्वान जिला मंच द्वारा प्रश्‍नगत आदेश कल्‍पनाओं के आधार पर पारित किया गया है।
अपीलकर्तागण द्वारा गेट पास, जिनके द्वारा उक्‍त आलू प्राप्‍त की गयी है, की छायाप्रति दाखिल की गयी है। इसके अतिरिक्‍त ट्रक सं0-९९०८ यूआरटी  से १६३ बोरी आलू शिकोहाबाद से बनारस भेजे जाने से संबंधित बिल्‍टी की छायाप्रति दाखिल की गयी है।
प्रत्‍यर्थी की ओर से एक शपथ पत्र दाखिल किया गया है और उसमें कहा गया है कि आलू के भण्‍डारण के लिए शीतगृह के किराए की धनराशि रू0 १४४८४/- उनके द्वारा जमा कर दी गयी थी और अपीलकर्तागण ने प्रत्‍यर्थी के ४२७ बोरे आलू वापस देने से इनकार कर दिया था।
अपीलार्थी के विद्वान अधिवक्‍ता श्री आर0के0 गुप्‍ता एवं प्रत्‍यर्थी के विद्वान अधिवक्‍ता श्री सर्वेश कुमार शर्मा के सहयोगी श्री सुशील कुमार मिश्रा के तर्क सुने गए एवं पत्रावली का अवलोकन किया गया।
अपीलकर्तागण द्वारा विद्वान जिला मंच के समक्ष जो प्रतिवाद पत्र दाखिल किया गया है उसकी प्रतिलिपि दाखिल की गयी है। उसके अवलोकन से यह स्‍पष्‍ट प्रतीत होता है कि परिवादी द्वारा अपीलकर्तागण/विपक्षीगण से आलू के भण्‍डारण हेतु रू0 ३००००/-की धनराशि ऋण स्‍वरूप ली थी और रू0 २०००/-, रू0 २०००/-की किस्‍त भुगतान करने का वायदा किया था । ऐसा प्रतीत होता है कि परिवादी आलू का व्‍यापारी है और उसने कोल्‍ड स्‍टोरेज में आलू रखकर उस पर वित्‍त पोषण कराया था और उनके प्रश्‍नगत प्रकरण वित्‍त पोषित धनराशि को लेकर कुछ अन्‍य विवाद भी है। यह प्रकरण साधारण उपभोक्‍ता प्रकरण प्रतीत नहीं होता और यह एक व्‍यापारिक लेने-देन का मामला प्रतीत होता है। यह मात्र उपभोक्‍ता संरक्षण अधिनियम के अन्‍तर्गत विवाद नहीं है, बल्कि एक सिविल विवाद प्रतीत होता है। इसके अतिरिक्‍त परिवादी उपभोक्‍ता संरक्षण अधिनियम की धारा २डी के अन्‍तर्गत उपभोक्‍ता नहीं है और प्रश्‍नगत मामला दीवानी न्यायालय में अथवा किसी अन्‍य सक्षम न्‍यायालय में चलना चाहिए। इस प्रकार के वाद को निर्णीत करने का क्षेत्राधिकार जिला मंच को नहीं है। परिवादी उपभोक्‍ता संरक्षण अधिनियम १९८६ की धारा २डी के अन्‍तर्गत उपभोक्‍ता नहीं है।  
उपरोक्‍त विवेचना के आधार पर अपीलकर्ता की अपील में बल प्रतीत होता है। तदनुसार अपील स्‍वीकार किए जाने योग्‍य है एवं प्रश्‍नगत निर्णय निरस्‍त किए जाने योग्‍य है।
आदेश      अपील स्‍वीकार की जाती है। जिला उपभोक्‍ता फोरम फिरोजाबाद द्वारा परिवाद संख्‍या-३५८/१९९४ में पारित आदेश दिनांक ०७-०९-२००० निरस्‍त किया जाता है।
उभयपक्ष अपना-अपना वाद व्‍यय स्‍वयं वहन करेंगे।
उभयपक्ष को इस आदेश की प्रमाणित प्रतिलिपि नियमानुसार निर्गत की जाए।
   
        (राम चरन चौधरी)                               (महेश चन्‍द)

 

   पीठासीन सदस्‍य                                सदस्‍य                                                                                      

 

सत्‍येन्‍द्र कुमार

 

कोर्ट नं0-2

 

 

 

              [HON'BLE MR. Ram Charan Chaudhary]  PRESIDING MEMBER 
     [HON'BLE MR. Mahesh Chand]  MEMBER