Lok Sabha Debates
Regarding Reported Commutation Of Death Sentence Of A Prisoner To Life ... on 3 December, 2019
Seventeenth Loksabha > Title: Regarding reported commutation of death sentence of a prisoner to life imprisonment involved in the assassination of a Chief. Minister of Punjab श्री रवनीत सिंह (लुधियाना): सर, सबसे पहले तो मैं आपका बहुत आभारी हूं । हमारे आदरणीय होम मिनिस्टर श्री अमित शाह जी बैठै हुए हैं । इनकी मर्जी है,पर यह जवाब देने के लिए सक्षम हैं । मैं आज यह मुद्दा इसलिए उठा रहा हूं,क्योंकि कल ही दोनों सदनों ने रेप के लिए फांसी की बात की । अमित शाह जी, जवाब दीजिए कि आपने पंजाब के बलवंत सिंह राजोआना की फांसी की सजा क्यों माफ की? …(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष: अब, आप गृह मंत्री जी का जवाब सुनें ।
गृह मंत्री (श्री अमित शाह):आप प्लीज मीडिया की रिपोर्टों पर मत जाइए । कोई माफी नहीं दी गई है ।
11.25 hrs ORAL ANSWERS TO QUESTIONS… Contd.
HON. SPEAKER : Now, Question No.203, Dr. Rajdeep Roy.
(Q. 203) डॉ.राजदीप राय: अध्यक्ष महोदय, मेरा पॉम आयल के बारे में जो प्रश्न था,उसका मुझे विस्तार से उत्तर मिला है । मैं माननीय मंत्री जी को धन्यवाद देना चाहता हूं कि उन्होंने काफी विस्तार से उसका उत्तर दिया है । लेकिन उसमें दो-तीन चीजें अनुत्तरित हैं । मेरे ख्याल से उस पर भी उनका थोड़ा ध्यान जाना चाहिए । हमारे नार्थ-ईस्ट राज्य में,हालांकि मणिपुर को छोड़कर बाकी सभी राज्यों में जो एक्सेस लैंड एरिया है,जहां पर हम लोगों का टी गार्डन है, a part of West Bengal and North Bengal is also included. पूरे भारतवर्ष में 19.33लाख हेक्टेयर जमीन को पॉम आयल के कल्टिवेशन के लिए रखा गया था । अक्टूबर 2019तक हमारा 3.49 हेक्टेयर लैंड का कल्टिवेशन हुआ है । India is a edible oil deficient country and we are importing oil from smaller countries.
महोदय, मेरा आपके माध्यम से मंत्री महोदय से सप्लीमेन्ट्री प्रश्न यह है कि कोई रिव्यू in land utilisation of the tea grant area. अगर नहीं हुआ है, तो उसके बारे में सोचना चाहिए और अगर हुआ है, तो we can produce alternative crops like rubber, palm oil and areca nut. हमारे जो किसान हैं,उन लोगों की भी आय दोगुनी होगी । हमारे माननीय प्रधान मंत्री जी की जो नीति है और उनकी जो सोच है कि कैसे किसानों का कल्टिवेशन बढ़ाया जाए, it would be a revenue generating project.
माननीय अध्यक्ष : माननीय सदस्यगण, मैं फिर से यह आग्रह करना चाहता हूं और आप सबकी भी इसमें सहमति थी कि सदन में ज्यादा से ज्यादा प्रश्न आएं । जो माननीय सदस्य प्रश्न पूछना चाहते हैं, उनसे भी यह आग्रह है कि प्रश्न संक्षिप्त में पूछें । माननीय मंत्रिगण से भी यह आग्रह है कि वे भी संक्षिप्त में जवाब दें, ताकि हम लिस्टेड प्रश्नों को पूरा कर सकें ।
श्री परषोत्तम रूपाला : माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्य ने यह बताया है कि पाम की खेती में हमारा जो एरिया है,वह पूरा कवरेज में नहीं आया है । उन्होंने एक ईशू यह उठाया है कि क्या चाय बागानों के लिए व्यापक तौर पर जमीनें प्राप्त हो सकती हैं । क्या इसमें ऐसा प्रावधान करने की संभावना है? माननीय अध्यक्ष जी,मैं आपके माध्यम से सदन को यह बताना चाहता हूं और माननीय सदस्य के संज्ञान में यह लाना चाहता हूं कि वर्ष 2012 में जो रेथिनॉन समिति बनी थी, उस समय पूरे देश में 19.33 लाख हेक्टेयर लैंड की क्षमता है,ऐसा पाया गया था । अब वर्ष 2018 में एक नई समिति का भी गठन किया गया है । उनका व्यास अभी चालू है । उसकी रिपोर्ट आने के बाद यदि उनके परामर्श से किसी जमीन या उसके क्षेत्रफल में बढ़ोतरी करने का मामला सामने आता है, तो जरूर इसके बारे में सोचा जाएगा ।
DR. SHASHI THAROOR : Sir, we all know that India is the world’s largest importer of palm oil. Seventy per cent of our vegetable oil requirements are coming from imports. So I understand the interest in actually developing some self-sufficiency in palm oil.
However, countries which are growing palm oil from which we import like Malaysia and Indonesia are discovering serious problems of environmental degradation. They have found that their forest coverage is reducing and wild life is affected. On top of that, the trees are not very remunerative because it takes six years to mature and to produce useable oil that can be exported.
Market trends are also showing that prices of palm oil have fluctuated up and down by as much as 50 per cent in the last 15 years. Is it not time for us to review our entire approach to this question of palm oil and look for substitutes rather than now going to the North-East or any other part of the country and continuing to expand acres on the cultivation which will only degrade the land of our country, the forests of our country, and the wildlife of our country?
श्री परषोत्तम रूपाला : माननीय अध्यक्ष महोदय, जैसा कि मैंने पहले ही उत्तर के जवाब में यह बताया है कि इनको मास स्केल पर ही प्रमोट करने के लिए वर्ष 2012 की समिति की अनुशंसा पर जो 19 लाख हेक्टेयर जमीन थी,अब नई समिति का गठन कर लिया गया है । पूर्वोत्तर के राज्यों को ही नहीं, बल्कि पूरे देश के राज्यों में इसकी जमीन की उपलब्धता का व्यास किया जा रहा है । इस समिति कि अनुशंसा पर इसकी बढ़ोतरी करने का पूरा प्रयास राज्य सरकारों के साथ मिलकर भारत सरकार करना चाहती है,क्योंकि एडिबल आयल में हमारी जो कमी है,उसको पूरा करने के लिए पूरा प्रयास किया जाएगा ।
अध्यक्ष महोदय: माननीय सदस्य, आप बैठे-बैठे प्रश्न न पूछें । मंत्री जी, यदि कोई बैठे-बैठे प्रश्न पूछें तो जवाब भी मत दिया करो । ये वरिष्ठ सदस्य हैं । माननीय सदस्य मैंने आपको प्रश्न पूछने की इजाजत दी है, लेकिन बैठे-बैठे नहीं पूछेंगे ।
श्री के.श्रीधर ।
SHRI SRIDHAR KOTAGIRI: Hon. Speaker, Sir, thank you for giving me this opportunity. As you would know majority of palm oil production comes from the State of Andhra Pradesh. Whatever palm oil is produced in the State of Andhra Pradesh almost 90 per cent of it is grown in Eluru which is my Parliamentary constituency. I may inform Dr. Shashi Tharoor ji that the farmers are benefiting from palm oil cultivation and it is grown only on agricultural land and not on forest land.
However, CACP, under the Ministry of Agriculture had recommended a Minimum Support Price of Rs. 10,000 almost a year ago. In fact, I raised this question in the last Session also. I would like to request the hon. Minister to kindly process that quickly and give effect to the recommendation of the CACP so that we can increase the production from 3 lakh MT to 20 lakh MT as suggested.
श्री परषोत्तम रूपाला : अध्यक्ष जी,यह बात सही है कि पाम ऑयल के सीएसीपी का अभी तक का मशविरा यह रहता था कि हम इंटरनेशनल मार्केट के आधार पर उसकी अनुशंसा करते थे । मगर अभी सीएसीपी ने लागत के आधार पर भारतीय किसानों को अपनी एमएसपी मुहैया कराने का प्रपोज़ल सरकार के सामने रख दिया है,जो विचाराधीन है,हम जल्द से जल्द इसका निर्णय करने की उम्मीद रखते हैं ।
कर्नाटक के सवाल के बारे में मुझे सदन को बताते हुए खुशी हो रही है कि कर्नाटक के किसानों ने 52.03टन का प्रोडक्शन कर के बहुत ही हाई प्रोडक्शन करने का काम किया है ।
(Q. 204) श्री मनोज कोटक : अध्यक्ष महोदय, मेरा जो प्रश्न है, मंत्री जी ने उसका उत्तर तो अच्छा दिया है । मैं सरकार का अभिनंदन करूंगा कार्डिएक स्टंट और दूसरे मैडिकल उपकरण सस्ते मुहैया करवाने के लिए । कार्डिएक स्टंट और घुटनों के प्रत्यारोपण के लिए जो सर्जिकल डिवाइस है, वह तो सस्ती की हैं । लेकिन कैंसर का जो रोग पिछले दस वर्षों में बहुत बढ़ा है, कैंसर के मरीजों की संख्या दुगनी से ज्यादा हो गई है । क्या सरकार की ऐसी कोई योजना है कि कैंसर के मरीजों को एंटी-कैंसर ड्रग्स, जो कैंसर की दवाई है, वह भी सस्ती मुहैया कराई जाए । क्या ऐसी कोई योजना है, सरकार बताए?
श्री मनसुख एल. मांडविया: अध्यक्ष जी,बदलते समय में लाइफस्टाइल डिसीज़ और कैंसर डिसीज़ बढ़ रही है । जब कैंसर की बीमारी होती है,तब कैंसर का निदान करने में जो खर्च होता है,उससे ज्यादा खर्च उसके ट्रीटमेंट में होता है । इससे बहुत गरीब और मध्यम वर्ग के लोग प्रभावित होते हैं । जब सामान्य और गरीब वर्ग के लोगों के यहां कैंसर की बीमारी आ जाती है,और वे उसका खर्च एफॉर्ड नहीं कर सकते हैं,ऐसी स्थिति में उनको बहुत मुश्किल होती है । प्रधान मंत्री मोदी जी ने कहा था कि देश में किसी गरीब को दवाई नहीं मिलने से मृत्यु की नौबत नहीं आनी चाहिए । उसको चरितार्थ करने के लिए हमने देश में जो कैंसर पेशंट हैं,उनको राहत पहुंचाने के लिए कुल मिला कर 87 फॉर्म्युलेशन और 565 मैडिसिंस का प्राइस कैप कर दिया है । एक कैंसर की मैडिसिन, उसका प्राइस कैप हो जाने से आज देश में जो गरीब, कैंसर के पेशंट हैं,उनको कुल मिला कर 892 करोड़ रुपये का फायदा होगा । मुझे हाऊस को बताते हुए खुशी हो रही है कि कैसा बदल हो रहा है या तो कैसे कितना फायदा हो रहा है । एक कैंसर की मैडिसिन का नाम एर्लोटिडिन 150 एमजी है । पहले मार्केट में उसकी प्राइस 9999 मतलब दस हजार रुपये दस टैबलेट्स की कीमत थी । हमने उसको ट्रेड मार्जिन फिक्स कर के प्राइस कैप किया, आज वह मिलती है केवल 892 रुपये में । दूसरा, वैसा ही एक इंजैक्शन, जो कैंसर के उपचार में उपयोग किया जाता था,उसका नाम था परमेस्टार 500 एमएल, उसका प्राइस मार्केट में 25 हजार रुपये था । हमने इस पर ट्रेड मार्जिन फिक्स कर दिया तो आज उसका प्राइस केवल 25 सौ रुपये हो गया है । देश के गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों के हित में कैंसर की दवाई का प्राइस हमने कम किया है ।
माननीय अध्यक्ष: माननीय सदस्य, आप जवाब से संतुष्ट हैं?
श्री प्रतापराव जाधव (बुलढाणा) – उपस्थित नहीं ।
सुश्री महुआ मोइत्रा (कृष्णानगर):
जो माननीय सदस्य सप्लीमेंटरी के लिए अपना नाम लिखा कर जाते हैं और उपस्थित भी नहीं हैं, उन माननीय सदस्यों को अब कोई सप्लीमेंटरी नहीं दी जाएगी ।
SUSHRI MAHUA MOITRA: Hon. Speaker, Sir, I am thankful to you for giving me a chance to ask a Supplementary.
When it comes to medical devices, the two highly, the most used medical devices by the poor in this country are pacemakers and knee replacements. I would like to ask the hon. Minister what the Government is doing specifically to make available the use of affordable technologically advanced pacemakers. This is the technology that changes very rapidly. You would find that current age pacemakers are very small in size. So, this is something, the benefit of which should be given to the poor.
Specially, for pacemakers and for knee replacements, for the implants, what is the Government doing for these two medical implants because they are the most widely used implants? Thank you. …(Interruptions)
SHRI MANSUKH L. MANDAVIYA: Pacemaker is also one type of medical device I know मेडिकल डिवाइस के संदर्भ में कई मेडिकल डिवाइस की कीमत बहुत होती है, जैसे स्टैंट, नी-इंप्लांट्स । ऐसी स्थिति में सामान्य व मध्यम वर्ग इस खर्च को एफोर्ड नहीं कर सकते हैं । ऐसी स्थिति में हमने चार मेडिकल डिवाइस की प्राइस कैप की है । बीस मेडिकल डिवाइस ऐसी हैं जिसे हमने ड्रग्स की डेफिनेशन में लिया है, इसलिए उसका प्राइस कंट्रोल हुआ है । हमने आठ मेडिकल डिवाइस को आइडेंटिफाई किया है, उसे भी ड्रग्स की डेफिनेशन में लाएंगे । मुझे सदन को बताते हुए खुशी हो रही है कि पहले मार्केट में स्टैंट ढ़ाई लाख या तीन लाख रुपये में मिलता था । …(व्यवधान) लेकिन जब पेशेंट को एडमिट करते थे ।
प्रो. सौगत राय: अध्यक्ष महोदय, सवाल तो पेस मेकर के बारे में था ।
अध्यक्ष महोदय: दादा के सवाल का जवाब मत दिया करें ।
…(व्यवधान)
श्री मनसुख एल. मांडविया: अध्यक्ष महोदय, इस स्थिति में मेडिकल डिवाइस का भी प्राइस को कैप करना शुरू किया है । बीस मेडिकल डिवाइस को हमने उसमें शामिल किया है । उसके आधार पर आम जनता को फायदा होगा ।
श्री गौरव गोगोई: अध्यक्ष महोदय, प्राइस के साथ क्वालिटी भी बहुत महत्वपूर्ण है । मैं सरकार से पूछना चाहता हूं कि जो कार्डिअक स्टैंट और नी-इप्लांट कम दाम में आ रहे हैं, कार्डिअक स्टैंट और नी-इप्लांट का जिन देशों में उत्पादन हो रहा है और किस देश से आयात हो रहा है, क्या इसकी क्वालिटी के बारे में सरकार ने कोई अध्ययन किया है? पूर्व पॉलिसी के अंतर्गत कार्डिअक स्टैंट और नी-इप्लांट थे और वर्तमान पॉलिसी के अंतर्गत कार्डिअक स्टैंट और नी-इप्लांट में क्वालिटी में कोई फर्क आया है या नहीं? कार्डिअक स्टैंट और नी-इप्लांट बहुत ही इम्पॉर्टेंट प्रोडक्ट्स है और हमें क्वालिटी पर बहुत ज्यादा ध्यान देना चाहिए ।
श्री मनसुख एल. मांडविया: अध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्य जी का प्रश्न उचित है । कोई भी मेडिकल डिवाइस या मेडिसिन हो, उसकी क्वालिटी अच्छी ही होनी चाहिए इसलिए गुड मैन्यूफ्रैक्चरिंग स्थिति को हर मैन्यूफ्रैक्चरिंग यूनिट में इम्पिलिमेंटेशन करवाते हैं । उसका फायदा यह होता है चाहे वह इम्पोर्ट हो या डोमेस्टिक इंडस्ट्रीज से बनता हो, गुड क्वालिटी का ही लोगों को मिले, उसके लिए हम उसे सुनिश्चित करते हैं और उसका फायदा देश को हुआ है । आज हम कॉरोनोरी स्टैंट और नी-इप्लांट का प्राइस कैप किया । सामान्य जनता को उसका क्या फायदा होता है, कॉरोनोरी स्टैंट की प्राइस 85 परसेंट कम हो गई । जो दो – ढाई लाख मिलता था अभी तीस हजार में मिलना शुरू हो गया है और वह बेस्ट क्वालिटी का है । आज तक सस्ते रेट में मिलने वाले स्टैंट के बारे में कोई भी हॉस्पिटल से ऐसी शिकायत नहीं आई है कि उसकी क्वालिटी ठीक नहीं है इसलिए हम क्वालिटी को एनश्योर करते हैं । आज नी-इम्पलांट के लिए लोग हॉस्पिटल जाते हैं, एकदम सस्ते रेट पर नी-इप्लांट हो जाता है । 69 परसेंट प्राइस कम हुआ है । 1,500 करोड़ रुपये का देश की जनता को फायदा हुआ है । यह गरीबों के प्रति मोदी सरकार का कमिटमेंट दिखाता है ।
(Q. 205) SUSHRI DIYA KUMARI: Thank you so much, hon. Speaker, Sir. Many farmers were not able to take the first instalment of this scheme since the local authorities did not upload their details and data correctly, or they did not upload it. Through you, I would like to ask the hon. Minister whether there is any provision to compensate these innocent farmers so that they should not suffer due to the irregularities and the carelessness of the local authorities or the State Government.
श्री कैलाश चौधरी: माननीय अध्यक्ष जी,मैं आपके माध्यम से माननीय सदस्य को बताना चाहता हूं कि पीएम किसान योजना के अंतर्गत किसान सम्मान निधि के तौर पर 6,000रुपये प्रत्येक किसान को देना तय किया गया है । माननीय सदस्य ने इस योजना के अंदर पूछा है कि किसानों की जो पहली किश्त रह गई थी और जो नहीं मिली थी,क्या किसान को वापस मिलेगी? हमारे पास राज्य सरकार का डाटा आता है, उसके आधार पर हम देते हैं । अभी राजस्थान के विषय में कहा गया है, राजस्थान सरकार को उस समय जो डाटा भेजना चाहिए था,पूरा नहीं भेजा गया । किसानों को 6,000रुपये यानी तीन किश्तों में 2,000रुपये मिलने चाहिए थे,लेकिन इस वजह से पहली किश्त में कई किसान वंचित रह गए । इसी तरह से वैस्ट बंगाल सरकार से किसानों के डाटा नहीं मिले हैं । मैं इस मौके पर कहना चाहता हूं,किसानों को 6,000रुपये मिलने चाहिए, लेकिन जब तक डाटा नहीं आएंगे, तब तक किसानों को नहीं मिलेंगे । मेरा अनुरोध है कि राज्य सरकारों से डाटा हमारे पास पहुंचे ।
माननीय सदस्य ने जो प्रश्न पूछा है,अगर इसमें किसान की किश्त चूक जाती है तो किसान को बाद में दोबारा किश्त नहीं मिलती क्योंकि उसका डाटा रजिस्टर ही नहीं हुआ है । उन्हें इसका लाभ नहीं मिलेगा । वैस्ट बंगाल और राजस्थान राज्य की तरफ से डाटा लेट हुए हैं,इसलिए किसानों को इसका लाभ नहीं मिला ।
माननीय अध्यक्ष: प्रो. सौगत राय । आप खड़े होकर पूछिए ।
प्रो. सौगत राय: महोदय, मुझे यही कहना था कि उत्तर संक्षेप में होना चाहिए ।
माननीय अध्यक्ष: श्री रितेश पाण्डेय ।
श्री रितेश पाण्डेय : माननीय अध्यक्ष जी,पीएम किसान योजना में 6,000रुपये मिलते हैं । हम लोगों ने सदन में वायु प्रदूषण पर चर्चा की थी ।
मेरा माननीय मंत्री जी से कहना है कि जब पराली इकट्ठा की जाती है,उसे इकट्ठा करने पर 6,000रुपये का भुगतान किया जाए तो शायद उसे जलाया नहीं जाएगा । क्या मंत्री जी इस पर विचार कर रहे हैं? माननीय मंत्री जी का इस पर क्या कहना है?
माननीय अध्यक्ष: माननीय सदस्यगण, वैसे तो आप नए सदस्य हैं,लेकिन कई पुराने सदस्य जैसे रवनीत सिंह जी भी पूछ रहे हैं । जिस विषय का प्रश्न है,उस पर ही प्रश्न पूछा जाए । यह भारत की संसद है । माननीय मंत्री इसका कोई जवाब न दें ।
श्री उदय प्रताप सिंह ।
श्री उदय प्रताप सिंह: माननीय अध्यक्ष जी, मैं सबसे पहले भारत सरकार और माननीय प्रधान मंत्री जी का हृदय से आभार व्यक्त करता हूं कि किसानों के लिए बड़ी योजना के तहत प्रति वर्ष 6,000 रुपये प्रति का प्रावधान किया है । राज्यों में किसानों को तीन किश्तों में 2,000 रुपये मिलते हैं । मैं बड़े खेद के साथ यह बात आपके समक्ष रखना चाहता हूं कि मध्य प्रदेश जैसे राज्य में आज भी हजारों किसान ऐसे हैं जिन्हें प्रधान मंत्री किसान सम्मान निधि नहीं मिली है ।
मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी से जानना चाहता हूं क्या इसमें ऐसी कोई विसंगति है कि अगर भारत में और राज्यों में सरकारें अलग दलों की होंगी तो किसानों को प्रधान मंत्री सम्मान निधि नहीं पहुंचाई जाएगी?
श्री कैलाश चौधरी : अध्यक्ष जी,पीएम किसान योजना बहुत ही महत्वपूर्ण योजना है और किसानों को उस समय बहुत बड़ा सहयोग देने वाली योजना है,जब किसान को आवश्यकता होती है । किसान को तीन किस्त में छ: हजार रुपये मिलते हैं । जब यह योजना प्रारम्भ की थी, तब प्रधान मंत्री जी ने बहुत अच्छी सोच के साथ शुरू की थी, लेकिन कुछ ऐसी सरकारें जैसे मध्य प्रदेश की सरकार, राजस्थान की सरकार, पश्चिम बंगाल की सरकार है,जिनसे हम निरंतर सम्पर्क करते हैं और हम विडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से भी कहते हैं कि आप डेटा भेजें । यह राज्य के ऊपर है कि जब तक वह डेटा उपलब्ध नहीं कराती है,तब तक हम यहां से किसान को पैसा रिलीज नहीं कर सकते हैं । यह डेटा महत्वपूर्ण है । मुझे आज यह कहते हुए खुशी हो रही है कि पूरे हिंदुस्तान में किसानों को छ: हजार रुपये का जो लाभ मिला है,उसके तहत लगभग 7 करोड़ 62 लाख किसानों को इसका सीधा लाभ मिल चुका है । प्रधान मंत्री जी ने 75 हजार करोड़ रुपये एक साल में बजट के अंदर प्रावधान भी किया, उसमें से 40 हजार करोड़ रुपये किसानों तक पहुंच चुके हैं । इसके बावजूद भी यदि राजनीतिक द्वेष से कोई राज्य सरकार डेटा नहीं देती है,तो उससे किसानों को नुकसान होता है । मेरा निवेदन है कि सभी राज्य सरकारें डेटा उपलब्ध कराएं ।…(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : माननीय सदस्य, आपको बोलने की इजाजत नहीं दी है, आप बैठे-बैठे मत बोलिए ।
(Q.206) SHRI HEMANT TUKARAM GODSE : The Union Government’s contribution in transport subsidy scheme has gone up from Rs. 60.55 crore in 2015-16 to Rs. 411.23 crore in 2018-19. Similarly, the contribution in freight subsidy scheme has gone up from Rs. 1,00,000 in 2015-16 to Rs. 108.11 crore in 2018-19. So, through you, Speaker Sir, I want to ask hon. Minister the reasons for this huge increase of subsidy and whether the Government is planning to reduce the burden on subsidy by using other technologies such as gravity ropeway in hilly areas or any other measure.
उपभोक्ता मामले,खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय में राज्य मंत्री (श्री दानवे रावसाहेब दादाराव): अध्यक्ष जी,माननीय सदस्य कृपया एक बार फिर पूछें ।
माननीय अध्यक्ष : मंत्री जी,जब प्रश्न पूछा जाए,तो ध्यान से सुनें ।
माननीय सदस्य, आप दूसरा सप्लीमेंटरी प्रश्न पूछिए । आपको तीसरा प्रश्न पूछने की इजाजत दे देंगे ।
श्री हेमन्त तुकाराम गोडसे: अध्यक्ष जी, मैं यह प्रश्न दोबारा पूछ लेता हूं ।
माननीय अध्यक्ष : आप यह प्रश्न दोबारा मत पूछिए । आप दूसरा प्रश्न पूछिए, इसे आप तीसरी बार पूछ लीजिएगा । जैसा अरविंद जी कह रहे हैं, आप वैसे कर लीजिए । आपको एक और सप्लीमेंटरी प्रश्न पूछने देंगे ।
SHRI HEMANT TUKARAM GODSE: The Union Government’s contribution in transport subsidy scheme has gone up from Rs. 60.55 crore in 2015-16 to Rs. 411.23 crore in 2018-19. Similarly, the contribution in freight subsidy scheme has gone up from Rs. 1,00,000 in 2015-16 to Rs. 108.11 crore in 2018-19.
So, through you, Speaker Sir, I want to ask hon. Minister the reasons for this huge increase of subsidy and whether the Government is planning to reduce the burden on subsidy by using other technologies such as gravity ropeway in hilly areas or any other measure.
श्री रामविलास पासवान : अध्यक्ष जी,हमें इस बात की खुशी है कि जो पैदावार हम खरीदते हैं खासकर चावल और गेहूं, इनकी प्रोक्योरमेंट बढ़ती जा रही है । यह खरीद इतनी बढ़ गई है कि हमारे सामने मुश्किल आ गई है,खास कर हरियाणा और पंजाब में कि जितना अनाज गोदाम के भीतर है,उतना ही गोदाम के बाहर भी है । यदि हम पक्का गोदाम बनाते हैं और यदि एक महीने में वह खाली हो जाएगा, तो उसका क्या होगा? कैप्स भी बढ़ता जा रहा है और उसके लिए हम लोग अल्टरनेटिव व्यवस्था कर रहे हैं । हमने किसान से कहा है कि हम एक-एक दाना खरीदेंगे, तो यह स्वाभाविक है कि जब पैदावार होगी तो ट्रांसपोर्टेशन बढ़ेगा और सब्सिडी भी बढ़ेगी । जैसा मैंने आपसे कहा कि हम 20 रुपये किलो गेहूं और 30 रुपये किलो चावल खरीदते हैं और गरीब को देते हैं 2 रुपये किलो गेहूं और 3 रुपये किलो चावल । इन सभी कारणों से सब्सिडी बढ़नी स्वाभाविक है और ट्रांसपोर्टेशन कास्ट भी बढ़नी स्वाभाविक है ।
SHRI HEMANT TUKARAM GODSE: Initially, the Hilly Area Subsidy Scheme was restricted to States that are predominantly hilly. Thus, a State like Maharashtra, which is not predominantly hilly but has hill areas like Konkan, was not benefitted. Now the Hill Transport Subsidy Scheme is discontinued since March, 2017 and it is absorbed into the National Food Security Act. So, through you, Speaker Sir, I want to ask the hon. Minister whether under the National Food Security Act, hill areas, such as Konkan region in the State of Maharashtra, are getting any benefits.
श्री रामविलास पासवान : सर, हम ने पहले ही कहा है कि जो खाद्य सुरक्षा कानून बना,उसके तहत दो रुपये प्रति किलोग्राम गेहूं और तीन रुपये प्रति किलोग्राम चावल दिये जाते हैं,वह बहुत कम है । पीडीएस सिस्टम के अंतर्गत जो हमारे डीलर्स हैं,हम उनको वह दे रहे हैं, डोर स्टेप डिलीवरी दे रहे हैं,उसमें ये सारी चीजें जोड़ दी गई हैं । एनडीए सरकार ने वह एक्ट नहीं बनाया था,यह सभी लोगों ने मिल कर बनाया था । वह एक्ट के तहत ही है, जब यह बन जाएगा तो उसके बाद ये सभी चीजें खत्म हो जाएंगी ।
माननीय अध्यक्ष : माननीय मंत्री जी, आप चाहें तो बैठे-बैठे भी बोल सकते हैं । सदन आपको इजाजत देता है । क्योंकि आपके पैर में फ्रैक्चर है, बार-बार उठना आपके लिए ठीक नहीं है, आप बैठे-बैठे भी जवाब दे सकते हैं ।
SHRI SU. THIRUNAVUKKARASAR : Sir, the farmers are in distress. They are not getting proper price for their produce. They are not able to store their produce in proper places and because of that, they have to sell their produce in advance. Will the hon. Minister tell the House whether all the Taluks or Mandals are having godowns for the storage of the farmers’ produce? Is the Government planning to set up godowns for the storage of the farmers’ produce at all the Taluka and block levels throughout the country? Is there any scheme like that? Has any money been allotted for that? How many Taluks are there without proper godowns? Will the Minister inform the House about this?…(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : माननीय सदस्यगण, मैं फिर आपसे आग्रह कर रहा हूं । मैं नामजद बोलूंगा । कृपया आप शांत रहिए । आप एक मिनट में अशांति क्यों कर देते हैं? माननीय सदस्य प्रश्न पूछ रहे हैं ।
माननीय मंत्री जी, आप बैठे-बैठे भी जवाब दे सकते हैं । मैं आपके पैर के फ्रैक्चर की प्रॉब्लम समझता हूं । आप बार-बार उठेंगे तो और प्रॉब्लम हो जाएगी ।
श्री रामविलास पासवान : सर, कोई बात नहीं । हमारे पास 800 लाख टन से ज्यादा की क्षमता है । अभी उसमें 741 लाख टन का स्टाक है । माननीय सदस्य ने जो कहा है, हम बार-बार इस बात को देख रहे हैं कि यह एवरेज है । हम ने विभाग को कहा है,आप इसके जवाब में देखेंगे कि इसमें खास कर नॉर्थ-ईस्ट का विवरण है कि हर जिला में एक गोडाउन होना चाहिए । उसके अलावा भी जहां आवश्यकता हो,हम उसे करने के लिए तैयार हैं । हम सरकार से बार-बार मांग करते हैं,हम लोग जाकर उसकी इनक्वायरी करते हैं,लेकिन जैसा कि मैंने कहा है कि मेन भंडारण का मामला है,वह हरियाणा और पंजाब है,जहां काफी बड़ी मात्रा में माल पूरे देश में जाता है ।
(Q. 207) SHRIMATI SUPRIYA SADANAND SULE : Sir, in the reply, the hon. Minister has said we have a Central Emergency Response Support System with 112 number-based emergency response mechanism. I do appreciate that it is a State subject but all the airports and railway stations come under the CISF which is under the Home Ministry. We have seen what has happened in the last couple of days regarding women’s security. Is there a way you could strengthen the mobile application, especially for the security of women and children at the airports, metros or wherever such kind of public places are there or at the tollbooths which are controlled, not by the State, but by you? It is because several times अगर आप मुंबई के स्टेशन पर जाओ और अगर किसी को कोई दिक्कत होती है तो वे बोलते हैं कि यह स्टेट का सब्जेक्ट नहीं है,रेलवे का सब्जेक्ट है और रेलवे बोलती है कि आप स्टेट से बात करें । A lot of time people do not know who to turn to. So, could we have a clarity about the use of application and technology to make sure that women are more secure and children have more guarantee and a sense of comfort for them?
श्री जी. किशन रेड्डी: माननीय अध्यक्ष महोदय, 112 नम्बर है, जिसके बारे में मैं कल भी बता चुका हूँ । यह बंगाल को छोड़कर पूरे देश भर में लागू हो रहा है । एयरपोर्ट्स, मेट्रोज़ और यहाँ तक कि यह ऐप रेलवे स्टेशंस पर भी है । मैं सदन के माध्यम से पूरे देश की जनता से अपील करना चाहता हूँ कि इस ऐप को डाउनलोड कीजिए । जो लोग वालंटियर का काम करना चाहते हैं, वे लोग भी इस ऐप को डाउनलोड कर सकते हैं । अगर कोई भी डिसट्रेस्ड पर्सन 112 पर फोन करेंगे, तो यह नियरबाई वालंटियर्स को भी जाता है, उनके परिवार के सदस्यों- माताजी, पिताजी, हसबेंड, भाई आदि को भी जाता है । इससे केवल पुलिस स्टेशन में ही सूचना नहीं जाती है, बल्कि इससे एसीपी और डीसीपी को भी सूचना जाती है । इसके साथ-साथ, सैटेलाइट के द्वारा, ई-टैगिंग के द्वारा सभी लोगों के पास रूट का पता चलता है । किस रूट पर है, डिसट्रेस्ड पर्सन कितनी दूरी पर हैं, यह सभी लोगों को मालूम पड़ता है ।
आपने खास तौर से, एयरपोर्ट और रेलवे स्टेशंस का जिक्र किया है । एयरपोर्ट पर सीआईएसएफ के लोग अच्छी तरह से सिक्योरिटी का काम कर रहे हैं । रेलवे स्टेशंस पर सिविल पुलिस के साथ-साथ रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स भी है । यह 112 नम्बर सभी जगहों पर काम करता है ।
आप लोगों को मालूम है कि पश्चिम बंगाल सहित सभी राज्यों को 112 नम्बर को लागू करने के लिए पैसे दिए गए हैं । यह सभी राज्यों में शुरू हुआ है, लेकिन पश्चिम बंगाल में पैसे लेने के बाद भी यह 112 शुरू नहीं हुआ है । …(व्यवधान)
इसलिए मैं चाहता हूँ कि पार्टी, रीजन और रिलीजन को छोड़कर इस पुलिसिंग कम्युनिटी ऐप को शुरू करें । यह केवल पुलिस और स्टेट का ही नहीं है, केन्द्र सरकार द्वारा भी हेल्प करने के लिए इस ऐप को डेवलप किया गया है । इसके बारे में मैं कल भी बता चुका हूँ । इस संबंध में, लोक सभा और राज्य सभा के सदनों में गंभीरता से यह विषय उठा है । जितने कम समय में हो सके, इस समस्या को दूर करना चाहिए । जो भी डिसट्रेस्ड पर्सन पुलिस की हेल्प चाहते हैं, कुछ ही मिनटों में उनके पास हेल्प पहुँचनी चाहिए । यह अभी 27 स्टेट्स में शुरू हुआ है । हम इसे और इम्प्रूव करेंगे, इसकी टेक्नोलॉजी इम्प्रूव करेंगे और इसके लिए प्लान करेंगे ।
SHRIMATI SUPRIYA SADANAND SULE: Sir, the hon. Home Minister is here and I would like to make a humble request to him. A 16-year old child, whose name is Tarun, who is autistic, low visioned, and speech impaired, had got lost in a rally in Mumbai in October and was traced last in Goa. His father, Vinod Gupta has written to the hon. Home Minister and the hon. Prime Minister requesting if India could find a way of getting this autistic child home.
I request the hon. Minister if he could find a way to get him back. We are all happy to help you. We all have used the technology called Facebook. Is there a way that we can contribute in finding this autistic child who belongs to all of us?
श्री जी. किशन रेड्डी : माननीय अध्यक्ष महोदय, यह प्रश्न में नहीं है, लेकिन आदरणीय सांसद महोदया ने यह पूछा है, तो मैं कहना चाहता हूँ कि सरकार की ओर से जो भी हेल्प हो सकती है, वह हम जरूर करेंगे ।
माननीय अध्यक्ष: डॉ. अमोल रामसिंह कोल्हे – उपस्थित नहीं ।
क्वेश्चन नम्बर 219 इसी से संबंधित है, इसे हम साथ ही ले लेते हैं ।
(Q.219) SHRI SUNIL DATTATRAY TATKARE: Sir, I would like to know from the hon. Home Minister whether any suggestions were received by the Government for redressal of grievances and if so, the details thereof along with the other measures taken by the Government to help in real time updation of crime/ criminal data?
12.00 hrs श्री जी. किशन रेड्डी : अध्यक्ष जी, क्राइम डेटा के बारे में भारत में एक सिस्टम है । नैशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो के अंतर्गत ये क्राइम्स आते हैं । पूरे स्टेट गवर्नमेंट के सब्जेक्ट्स में जितने भी इंसिडेंट्स होते हैं, हम उसे स्टेट गवर्नमेंट पोर्टल पर रखते हैं । स्टेट गवर्नमेंट जो रिपोर्ट भेजती है, वही रिपोर्ट हमारे पास रहती है ।
SHRI KULDEEP RAI SHARMA : Respected Speaker, Sir, through you, I would like to know from the hon. Minister whether the Government is planning to make any website or mobile app for the people of Andaman and Nicobar Islands and for the security forces so that they can get some help at the time of crisis.
As you all know, Andaman and Nicobar Islands are in a very strategic location. It has many serious issues. First of all, it is a remote place. There takes place poaching of marine and forest resources. Arms smuggling also takes place. Drug smuggling also happens. There happens illegal migration as well. In addition, there is threat from nature in the form of tsunami, earthquake and floods due to heavy rains. There is lack of coordination between security forces. It also suffers from lack of proper infrastructure.
I want to know from the hon. Minister whether the Government is planning for Andaman and Nicobar Islands to have any website. Being a remote place, the issues in Andaman and Nicobar Islands are different from rest of the country.
Thank you.
श्री जी. किशन रेड्डी:अध्यक्ष जी,होम अफेयर्स के द्वारा हमने क्राइम एण्ड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एण्ड सिस्टम, सीसीटीएनएस को शुरू किया है । देश भर में जितने भी पुलिस स्टेशंस हैं,उनमें से लगभग 94 प्रतिशत पुलिस स्टेशनों को केंद्र सरकार द्वारा ऑनलाइन लिंक अप किया गया है और जितने भी एफआईआरस होते हैं,वे वेबसाइट में दिखते हैं । यह काम किया गया है । मैंने इसके पहले वाले प्रश्न में भी जवाब दिया था कि 112 अंडमान निकोबार में भी हैं । वहां भी अच्छी तरह से काम कर रहा है । कम्यूनिटी पुलिस स्कीम के लिए अंडमान निकोबार स्टेट की पुलिस की भी सेपरेट एैप है ।