Lok Sabha Debates
Request To Provide Free Injection Of Muscular Dystrophy Diseases To Child Of Poor ... on 14 December, 2021
Seventeenth Loksabha > Title: Request to provide free injection of muscular dystrophy diseases to child of poor family.
श्री हनुमान बेनीवाल (नागौर): महोदय, मैं आपके माध्यम से माननीय प्रधान मंत्री जी और हमारे स्वास्थ्य मंत्री जी का ध्यान एक गंभीर विषय और एक गंभीर बीमारी, जो इस देश के अंदर छोटे बच्चों में बहुत तेजी के साथ फैल रही है, की तरफ आकर्षित करना चाहता हूँ ।
आज हमारे देश में स्पाइन मस्कुलर एट्रोफी टाइप वन और टाइप टू तथा मस्कुलर डिस्ट्रॉफी, जो गंभीर लाइलाज बीमारी है, तेजी से छोटे बच्चों के अंदर फैल रही है, इसके इलाज के लिए दवाई और इंजेक्शन विदेश से आते हैं ।
स्पाइन मस्कुलर एट्रोफी टाइप वन से पीड़ित बच्चों की मांसपेशियाँ कमजोर होती हैं, इनके शरीर में पानी की कमी होने लगती है और छोटे बच्चों को स्तनपान करने में और सांस लेने में दिक्कत होती है । इस बीमारी से पीड़ित बच्चों की मांसपेशियाँ इतनी कमजोर हो जाती हैं कि वे हिलने-डुलने लायक तक भी नहीं रहते हैं ।
महोदय, लाइलाज बीमारी मस्कुलर डिस्ट्रॉफी के कई प्रकार हैं, यह एक प्रगतिशील बीमारी है, जिसमें धीरे-धीरे इंसान के शरीर के अंग काम करना बंद कर देते हैं ।
माननीय अध्यक्ष : आप सरकार से माँग कीजिए ।
श्री हनुमान बेनीवाल: महोदय, थोड़ा समय दीजिए । एक समय ऐसा आता है कि इंसान खुद से पानी भी नहीं पी पाता है ।
अपने संसदीय क्षेत्र के एक छोटे बच्चे के इलाज को लेकर मैं मंत्री जी से मिला भी था और उन्होंने उस बच्चे की बीमारी के इलाज के लिए 16 करोड़ रुपये से अधिक कीमत का इंजेक्शन, जिसे विदेश से आयात करते हैं, उसमें सरकारी मदद का आश्वासन भी दिया ।
मंत्री जी, विदेशी कंपनी की मोनोपोली से इस इंजेक्शन की भारत में कीमत बहुत ज्यादा है । इस तरह की दवाओं के अनुसंधान को भारत में बढ़ावा दिया जाए ।
महोदय, मैं एक निवेदन करूँगा कि इस संबंध में दिल्ली उच्च न्यायालय में दाखिल एक याचिका में सरकार ने कहा कि देश में ऐसे 5 लाख पीड़ित बच्चे हैं और प्रत्येक बच्चे के इलाज के लिए 6 करोड़ रुपये व्यय करने पडेंगे, जबकि लोक सभा में 23-09-2020 को एक सवाल के जवाब में कहा गया कि हमारे पास मस्कुलर डिस्ट्रॉफी मरीजों के आंकड़े नहीं हैं । फिर उच्च न्यायालय में 5 लाख की संख्या किस आधार पर बताई गई, इस तरह की विसंगति पर आप ध्यान दें ।
महोदय, मेरा निवेदन यह है कि इस बीमारी से जितने भी पीड़ित बच्चे देश के अंदर हैं, जो कंपनियाँ मनमर्जी से 16 करोड़ रुपये का इंजेक्शन देती हैं, उसमें हम कोई मदद नहीं कर पाते हैं । मेरा कहना है कि इसकी कीमत घटायी जाए या इसे मुफ्त किया जाए । प्रधान मंत्री जी का बड़ा मन है, इन बीमारियों से ग्रसित बच्चों का इलाज बिल्कुल मुफ्त होना चाहिए ताकि देश के अंदर एक मैसेज जाए, विदेशों में मैसेज जाए । गरीब आदमी भी अपना इलाज करा सके । हम इस मामले में कुछ करना भी चाहें, लेकिन हम लोग मिलकर भी 16 करोड़ रुपये एकत्रित नहीं कर पाते हैं और देखते ही देखते फिर बच्चा मौत के आगोश में चला जाता है । इस पर सरकार विशेष रूप से ध्यान दे ।
महोदय, आप इस संबंध में सरकार को निर्देशित करें । धन्यवाद ।
SHRI T. R. BAALU (SRIPERUMBUDUR): Sir, this is a very serious matter.
माननीय अध्यक्ष : उसी गंभीरता से संज्ञान लिया है ।