Lok Sabha Debates
Combined Discussion On Statutory Resolution On Article 370 (3) Of The ... on 6 August, 2019
Seventeenth Loksabha an> Title: Combined discussion on Statutory Resolution on Article 370 (3) of the Constitution of India and the Jammu and Kashmir Reorganisation Bill, 2019, as passed by Rajya Sabha and the Jammu and Kashmir Reservation (Second Amendment) Bill, 2019, as passed by Rajya Sabha (Motion Adopted and Bill Passed).
माननीय अध्यक्ष : मदसं. 12 से14 पर एक साथचर्चा की जाएगी ।
माननीय गृहमंत्री जी ।
गृह मंत्री (श्री अमित शाह):मैं प्रस्तावकरता हूं :
“कि यह सदन अनुच्छेद 370 (3) के अंतर्गत,भारत के राष्ट्रपति द्वारा जारी की जाने वाली निम्नलिखित अधिसूचना की सिफारिश करता है:
भारत के संविधान के अनुच्छेद 370 के खंड (1) के साथ पठित,अनुच्छेद 370 के खंड (3) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, राष्ट्रपति,संसद की सिफारिश पर यह घोषणा करते हैं कि, वह दिनांक जिस दिन भारत के राष्ट्रपति द्वारा,इस घोषणा पर हस्ताक्षर किए जाएंगे, और इसे सरकारी गजट में प्रकाशित किया जाएगा, उस दिन से उक्त अनुच्छेद 370 के सभी खंड लागू नहीं रहेंगे,सिवाय खंड (1) के, जिसे नामत् निम्नानुसार पढ़ा जाएगा:-
“संविधान के समय-समय पर संशोधित,सभी उपबंध,बिना किसी संशोधन और अपवाद के, जम्मू और कश्मीर राज्य पर लागू होंगे; इस बात के सिवाय, कि अनुच्छेद 152 अथवा अनुच्छेद 308 में निहित,किसी अपवाद,अथवा इस संविधान के किसी अन्य अनुच्छेद अथवा जम्मू और कश्मीर संविधान के किसी अन्य उपबंध अथवा कोई कानून,दस्तावेज, निर्णय, अध्यादेश,आदेश, उप-नियम, नियम,विनियम, अधिसूचना,रीति-रिवाज,अथवा भारत के भू-भाग में कानून के प्रवर्तन,अथवा कोई अन्य लिखित संधि, अथवा समझौता,जैसा अनुच्छेद-363के अंतर्गत परिकल्पित हो अथवा अन्यथा न हो । ” “कि वर्तमान जम्मू और कश्मीर राज्य का पुनर्गठन करने तथा उससे संबंधित या उसके आनुषंगिक विषयों का उपबंध करने वाले विधेयक,राज्य सभा द्वारा यथापारित, पर विचार किया जाए ।” अध्यक्ष महोदय, मैं एक बात का उल्लेख करना चाहता हूं कि कल इस सभागृह ने राष्ट्रपति महोदय के इस मंशा को संकल्प के रूप में पारित किया था । बाद में मैंने राज्य सभा के सामने यह विधेयक रखा था । राज्य सभा का अनुमोदन हो गया है और मैं इस विधेयक को लेकर यहां आया हूं ।
“कि जम्मू और कश्मीर आरक्षण अधिनियम, 2004 का और संशोधन करने वाले विधयेक,राज्य सभा द्वारा यथापारित, पर विचार किया जाए ।” माननीय अध्यक्ष: प्रस्ताव प्रस्तुत हुए:
“कि यह सदन अनुच्छेद 370 (3) के अंतर्गत,भारत के राष्ट्रपति द्वारा जारी की जाने वाली निम्नलिखित अधिसूचना की सिफारिश करता है:
भारत के संविधान के अनुच्छेद 370 के खंड (1) के साथ पठित,अनुच्छेद 370 के खंड (3) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, राष्ट्रपति,संसद की सिफारिश पर यह घोषणा करते हैं कि, वह दिनांक जिस दिन भारत के राष्ट्रपति द्वारा,इस घोषणा पर हस्ताक्षर किए जाएंगे, और इसे सरकारी गजट में प्रकाशित किया जाएगा, उस दिन से उक्त अनुच्छेद 370 के सभी खंड लागू नहीं रहेंगे,सिवाय खंड (1) के, जिसे नामत् निम्नानुसार पढ़ा जाएगा:-
“संविधान के समय-समय पर संशोधित,सभी उपबंध,बिना किसी संशोधन और अपवाद के, जम्मू और कश्मीर राज्य पर लागू होंगे; इस बात के सिवाय, कि अनुच्छेद 152 अथवा अनुच्छेद 308 में निहित,किसी अपवाद,अथवा इस संविधान के किसी अन्य अनुच्छेद अथवा जम्मू और कश्मीर संविधान के किसी अन्य उपबंध अथवा कोई कानून,दस्तावेज, निर्णय, अध्यादेश,आदेश, उप-नियम, नियम,विनियम, अधिसूचना,रीति-रिवाज,अथवा भारत के भू-भाग में कानून के प्रवर्तन,अथवा कोई अन्य लिखित संधि, अथवा समझौता,जैसा अनुच्छेद-363के अंतर्गत परिकल्पित हो अथवा अन्यथा न हो । ” “ कि वर्तमान जम्मू और कश्मीर राज्य का पुनर्गठन करने तथा उससे संबंधित या उसके आनुषंगिक विषयों का उपबंध करने वाले विधेयक,राज्य सभा द्वारा यथापारित, पर विचार किया जाए ।” “कि जम्मू और कश्मीर आरक्षण अधिनियम, 2004 का और संशोधन करने वाले विधयेक,राज्य सभा द्वारा यथापारित, पर विचार किया जाए ।” श्री अधीर रंजन चौधरी (बहरामपुर): माननीयगृह मंत्री जी, अभी-अभीएक रिजोल्यूशनका पाठ कियाहै । मैं एकदूसरे रिजोल्यूशनके बारे मेंकहना चाहता हूं । 22 फरवरी,1994 को इस सदनमें एक संकल्पलिया गया था-
“That Jammu and Kashmir was an integral part of India and that Pakistan must vacate areas of the State under its occupation.” The text of the Resolution follows.
यह बहुत बड़ारिजोल्यूशन है । लेकिन मैंआपको कह सकताहूं कि आप पीओकेके बारे मेंसोच रहे हैं । आपने रातों-रात सारे नियम,कायदे-कानून का उल्लंघनकरके एक स्टेटके दो टुकड़ेकरके यूनियनटेरिटरी बनादिया । …(व्यवधान)
श्री अमित शाह: माननीयअध्यक्ष जी, जनरलबात नहीं होनीचाहिए । यह देशकी सबसे बड़ीपंचायत है ।मैंने कौन-सानियम तोड़ा है, येबता दें, मैंउसका उत्तर दूंगा । इस तरह सेजनरल बात नहींहोनी चाहिए ।यह देश की सबसेबड़ी पंचायत है । …(व्यवधान)
श्री अधीर रंजन चौधरी: गृह मंत्री जी आज सारे दिन चर्चा होगी, आज सारे दिन चर्चा है, आप बोलें…(व्यवधान)
श्री अमित शाह: सर, अभी नियम नहीं है तो वे चर्चा पर बोलें…(व्यवधान)
श्री अधीर रंजन चौधरी: अच्छा ठीक है । सर, आप कहते हैं कि यह कश्मीर का अंदरूनी मामला है, लेकिन अब भी यूनाइटेड नेशन्स के लोग वहां की मॉनिटरिंग करते हैं । युनाइटेड नेशन्स सन् 1948 से मानिटरिंग करता है…(व्यवधान)मुझे बोलने दीजिए । I am not yielding.…(व्यवधान)
श्री अमित शाह: आप मुझे एक मिनट सुनिए । आप इतना स्पष्ट कर दें कि यह कांग्रेस पार्टी का स्टैण्ड है कि कश्मीर को यूनाइटेड नेशन्स मॉनिटर कर सकता है । एक बार इतना स्पष्ट कर दें…(व्यवधान) इतना स्पष्ट कर दें कि कश्मीर को यूनाइटेड नेशन्स मॉनिटर कर सकता है, आपने अभी कहा…(व्यवधान)
श्री अधीर रंजन चौधरी: हम सिर्फ क्लेरीफिकेशन चाहते हैं…(व्यवधान)
श्री अमित शाह: आप गलतफहमी मत फैलाइए…(व्यवधान) एक मिनट, एक मिनट साहब, चलिए पहले आप बोल लीजिए…(व्यवधान)
श्री अधीर रंजन चौधरी: मुझे बोलने दीजिए, आप पूरी बात कीजिए । मैं सिर्फ क्लेरीफिकेशन मांग रहा हूं,गृह मंत्री जी मैं सिर्फ क्लेरीफिकेशन मांग रहा हूं और कुछ नहीं । हमें जानकारी चाहिए और कुछ नहीं चाहिए । सारी चीजों का स्पष्टीकरण नहीं होता है, इसलिए मैं पूछना चाहता हूं । आप देखिए कि हमारे हिन्दुस्तान के एक प्राइम मिनिस्टर ने शिमला एग्रीमेंट किया, दूसरे प्राइम मिनिस्टर अटल बिहारी वाजपेयी जी ने लाहौर डिक्लेयरेशन किया तो ये सारी चीजें होते हुए भी यह कैसे इन्टरनल मैटर माना जाएगा,यह हमारा प्रश्न है…(व्यवधान)कुछ दिन पहले फॉरेन मिनिस्टर जयशंकर जी ने पोंपियो जी से बात की, उस समय भी यह कहा गया कि यह बायलेटरल इश्यू है तो हमें यह सुलझाना चाहिए । यह आपको बताना पड़ेगा कि यह इन्टरनल है या बायलेटरल है और क्या यह आप खुद कर सकते हैं?आने वाले दिनों में क्या लाहौर समझौता नहीं रहेगा यह जानकारी हमें चाहिए । आप कुछ भी कर सकते हैं,कभी भी कर सकते हैं लेकिन यह हमें जानना चाहिए । सारे जम्मू घाटी को कैदखाना बना दिया । जम्मू कश्मीर के बारे में हमें कोई जानकारी नहीं मिल रही है । वहां के फॉर्मर चीफ मिनिस्टर सभी हाउस अरेस्ट हो चुके हैं । यहां लाखों की तादाद में फोर्सेस हैं, लेकिन आपने अमरनाथ यात्रा बंद कर दी…(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष: अधीर रंजन जी, आपको अगर बोलना है तो पूरी बात बोलिए ।
…( व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष: माननीय गृह मंत्री जी, बिल के बारे में प्रस्ताव कीजिए ।
…( व्यवधान)
श्री अमित शाह: नहीं,बिल के बारे में बाद में, साहब इन्होंने बहुत महत्वपूर्ण बात की है । आपको मुझे अनुमति देनी चाहिए ऐसा मेरा आपसे अनुरोध है । इन्होंने क्लेरीफिकेशन पूछा है, मैं क्लेरीफिकेशन में एक क्लेरीफिकेशन पूछता हूं । उन्होंने कहा है कि जम्मू कश्मीर का मामला यू.एन. में पेंडिग है और युनाइटेड नेशन्स की परमिशन के बिना मैं यह बिल कैसे लेकर आ गया…(व्यवधान)एक मिनट आप बैठ जाइए…(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : आप में से कोई एक सदस्य बोल लीजिए ।
…( व्यवधान)
श्री अधीर रंजन चौधरी: हम सिर्फ क्लेरीफिकेशन चाहते हैं…(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : कोई डिस्टर्बेंस नहीं होगा ।
…( व्यवधान)
श्री अमित शाह: यह बहुत महत्वपूर्ण विषय है और मैं संसद के पटल पर बोलूंगा तो यह रिकॉर्ड में जाएगा । मेरा इनसे निवेदन है कि वो फिर से रिपीट कर दें कि वे क्या कहना चाहते हैं । भले ही सदन में दो मिनट का समय व्यय हो, लेकिन यह बहुत जरूरी है, वे रिपीट कर दें…(व्यवधान)
श्री अधीर रंजन चौधरी: सर, बड़ी खुशी है,अमित शाह जी मुझे बहुत खुशी है । मैं शंका में हूं, क्योंकि आप कहते हैं कि यह इन्टरनल मैटर है । आपने एक स्टेट का बायफर्केशन कर दिया वह भी हो गया, लेकिन मेरा कहना है कि सन् 1948 से जहां यूनाइटेड नेशन्स की मॉनिटरिंग हो रही है वह क्या इन्टरनल मामला है? जो हम लोगों ने शिमला समझौता और लाहौर समझौता किया था वह इन्टरनल मामला था या बायलेटरल था? कुछ दिन पहले जयशंकर जी ने पोंपियो जी को कहा कि यह हमारा बायलेटरल मामला है इसमें आप दखलअंदाजी मत कीजिए तो उसके बाद भी क्या जम्मू कश्मीर इन्टरनल मामला हो सकता है? ये तरह-तरह की बातें हैं, इनको हमें समझाना चाहिए । हम जानना चाहते हैं । …(व्यवधान)
महिला और बाल विकास मंत्री तथा वस्त्र मंत्री (श्रीमती स्मृति जूबिन ईरानी):यह हिन्दुस्तानका इंटरनल मैटरहै । आप हिन्दुस्तानके पक्ष मेंबोलिए, आपएक हिन्दुस्तानीहैं । …(व्यवधान)
श्री अधीर रंजन चौधरी: आपगलत कर रहेहैं । आप लोगमुझे गलत समझरहे हैं । …(व्यवधान) आपको गलतफहमी हो रही है ।…(व्यवधान) I want to be enlightened by you. Congress Party want to be enlightened by you. It is a fundamental question. I want to be enlightened…(Interruptions)
विधि और न्याय मंत्री, संचार मंत्री तथा इलेक्ट्रोनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री (श्री रवि शंकर प्रसाद):अधीर जी, आपक्या बोल रहेहो?…(व्यवधान)
श्री अधीर रंजन चौधरी : आप गलतफहमी मत कीजिए । आप ऐसा माहौल मत बनाइए कि कांग्रेस पार्टी देश का हित नहीं चाहती है ।…(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष: माननीय सदस्य, आप बैठ जाइए ।
…( व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष: माननीय सदस्यगण, माननीय गृह मंत्री जी बोल रहे हैं, उनकी पूरी बात सुनिए । जब मैंने आपको बोलने का पूरा मौका दिया है तो आप गृह मंत्री जी की पूरी बात भी सुनें । मैं सत्ता पक्ष के माननीय सदस्यों से कहना चाहता हूं कि आप लोगों को गृह मंत्री नहीं बनाया गया है, आप लोग जवाब मत दीजिए ।
…( व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष: माननीय सदस्यगण, आप लोग भी माननीय गृह मंत्री जी की पूरी बात सुनिए । जब मैंने आपको बोलने का मौका दिया है तो जवाब भी पूरा सुनना पड़ेगा ।
…( व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष: माननीय गृह मंत्री जी, आप बोलिए ।
…( व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष: माननीय सदस्य, आप बैठ जाइए, मैं आपको दूंगा । बीच में नहीं बोलना है । आप बैठ जाइए ।
…( व्यवधान)
श्री अमित शाह: अध्यक्षमहोदय, सदनमें कांग्रेसपार्टी के नेताने एक मामलाउठाया कि मैंजो बिल और संकल्पलेकर आया हूं, इसकेलिए क्या सदनअधिकृत है यानहीं । यह मामला1948में यू.एन. में पहुंचायागया था - कश्मीरका विलय - और इसके बादभूतपूर्व प्रधानमंत्री इंदिराजी ने पाकिस्तानके साथ जो शिमलाकरार किया,उसका भी जिक्रकिया और उन्होंनेएक तरीके सेइस गृह की कम्पिटेंसीपर सवाल उठायाहै कि यह गृहइस विधेयक कोचर्चा के लिएहाथ में लेसकता है यानहीं । मैं इसकाजवाब देना इसलिएचाहता हूं कियह सिर्फ पोलिटिकलचीज नहीं है । यह कानूनीविषय है औरइसके रिपरकशन्सआने वाले दिनोंमें संवैधानिकरूप से और कानूनीरूप से भी पड़सकते हैं, इसलिए मैं इसकोबहुत स्पष्टकरना चाहता हूं । सबसे पहलेमैं यह स्पष्टकरना चाहता हूंकि जम्मू औरकश्मीर भारतका अंग है,अभिन्न अंगहै, इसकेबारे में कोईकानूनी या संवैधानिकविवाद नहीं है । इसकी स्पष्टताहै । अध्यक्षमहोदय, भारतके संविधान औरउस वक्त जम्मू-कश्मीर का जोसंविधान बनाथा, इन दोनोंसंविधानों मेंबहुत क्लैरिटीके साथ कहागया है, जम्मू-कश्मीर ने भीइसे स्वीकारकिया है किवह भारत काअभिन्न अंग है । According to the Article 370(1)(c), in the Constitution of India, the provisions of Article 1 and of this article shall apply in relation to that State. इसका मतलब है कि जम्मू-कश्मीर को आर्टिकल-1के सारे प्रॉविजन्स एप्लाई होते हें । अनुच्छेद-1 में क्या है? Article 1 says that India, that is Bharat, shall be a Union of States. भारत सभी राज्यों का एक संघ है और इसके अंदर भारत की सीमाओं की व्याख्या करते हुए राज्यों की लिस्ट दी हुई है । उसमें 15वें नम्बर पर जम्मू एंड कश्मीर स्टेट का उल्लेख है । इससे यह प्रस्थापित होता है कि जम्मू और कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और उसके लिए कानून बनाने के लिए यह संसद, हमारी सबसे बड़ी पंचायत पूर्णतया कम्पिटेंट है ।
अध्यक्ष महोदय,जम्मू-कश्मीर के संविधान में भी इसकी स्पष्टता है । उसमें लिखा गया है कि the State of Jammu & Kashmir is and shall be an integral part of the Union of India. इस बात को जम्मू-कश्मीर के संविधान ने भी स्पष्टता के साथ स्वीकार किया है ।
इसलिए जहां तक जम्मू एंड कश्मीर का सवाल है, हमें कोई भी कानून बनाने के लिए या कोई भी संकल्प लेकर आने के लिए कोई नहीं रोक सकता है । इस देश की संसद को संपूर्ण अधिकार है । यह अधिकार के तहत कैबिनेट की अनुशंसा पर राष्ट्रपति महोदय की मंजूरी से,मैं दोनों चीजें लेकर यहां पर उपस्थित हुआ हूं । बालू साहब को कुछ कहना है ।…(व्यवधान)
श्री अधीर रंजन चौधरी: पीओकेके बारे मेंकुछ कहिए ।…(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : अधीररंजन जी आपलास्ट में सबजवाब सुन लीजिएगा ।
…(व्यवधान)
श्री अमित शाह : जबमैं जम्मू औरकश्मीर बोलताहूं तो पीओकेइसके अंदर हीआता है।…(व्यवधान) आप मेरी बात सुनिए ।…(व्यवधान)क्या आप मुझे बोलने नहीं देंगे?…(व्यवधान) मैं स्पष्ट करता हूं । मैं जब जम्मू और कश्मीर बोलता हूं । …(व्यवधान)मैं इसलिए एग्रेसिव हूं कि जम्मू और कश्मीर के पीओके को क्या आप भारत का हिस्सा नहीं मानते हैं?…(व्यवधान) इसके लिए जान दे देंगे ।…(व्यवधान) आप एग्रेसिव होने की क्या बात कर रहे हैं? …(व्यवधान) हम इसके लिए जान दे देंगे ।…(व्यवधान)
श्री अधीर रंजन चौधरी:कांग्रेस, सीपीएम, बीजेपी, सभी ने मिल कर नया डिसीजन लिए थे ।..…(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : अधीररंजन जी, कृपयाबैठ जाइए ।
…( व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : माननीयसदस्य, मैंनेआपको इजाजत नहींदी है, आपबैठ जाइए ।
…( व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : माननीयगृह मंत्री जीके अलावा कोईमाननीय सदस्यनहीं बोलेंगे ।
श्री अमित शाह : अध्यक्षमहोदय, मैंयह बात रिकॉर्डपर रखना चाहताहूं कि मैंसदन में जब-जबजम्मू एंड कश्मीरराज्य बोला हूं, तब-तबपाक अक्युपाइडकश्मीर और अक्साईचीन दोनों इसकाहिस्सा हैं ।…(व्यवधान) हमारे संविधानने जम्मू-कश्मीर की जोसीमाएं तय कीहै और जम्मू-कश्मीर के संविधानने जम्मू-कश्मीर की जोसीमाएं तय कीहै, उसकेअंदर पाक अक्युपाइडकश्मीर और अक्साईचीन दोनों समाहितहैं ।
माननीय अध्यक्ष : बालूजी ।
SHRI T. R. BAALU (SRIPERUMBUDUR): Hon. Speaker, Sir, I think we are in a state of undeclared emergency. …(Interruptions) The Government should not be in a hurry. The Government is in a hurry. The hon. Home Minister is trying to put the cart before the horse. That is not correct. …(Interruptions) I do not know where or how my colleague Dr. Farooq Abdullah is. I do not know whether he is under house arrest or arrested. I do not know where former Chief Minister Ms. Mahbooba Mufti is. …(Interruptions) I am on a five-Member judgement. …(Interruptions) Please hear me.
माननीय अध्यक्ष : माननीयसदस्य आप विराजें ।
…( व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : माननीय सदस्य,please sit down.
…( व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : No.माननीय सदस्य,मैं आपको चर्चाके समय बोलनेका पूरा मौकादूंगा । आप डिबेटपर जो बोलनाचाहते हैं,बोलिएगा ।
…( व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : आपडिबेट पर बोलिएगा ।
…( व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : डिबेट शुरूहो चुकी है ।
…( व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : अबमाननीय मंत्रीजी बिल पर प्रस्तावनाकरेंगे ।
…( व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : कृपया, आपचर्चा के समयबोलिएगा ।
…( व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : आपजितना बोलनाचाहते हैं, मैंआपको डिबेट केसमय बोलने केलिए अनुमति दूंगा ।
…( व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : कृपयाआप बैठ जाइए । आपके माननीयसदस्य डिबेटपर बोलेंगे, आपभी बोलिएगा ।जिन माननीय सदस्योंको बोलना हैं, वेडिबेट में बोलेंगे । आप अपने दलके नेताओं सेबात कर लीजिए ।
…( व्यवधान)
श्री टी.आर. बालू : सर, …(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : मैंआपको डिबेट केसमय बोलने कामौका दूंगा ।
…( व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : अभीबिल पर ऑब्जेक्शननहीं । आप जनरलबात बोल रहेहैं ।
…( व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : माननीयगृह मंत्री जीने कहा तो आपकोबोलने का मौकादे दिया गया । अब माननीयगृह मंत्री जीबोलेंगे ।
…( व्यवधान)
श्री अमित शाह : अध्यक्षमहोदय, इससदन ने बहुतसारे ऐतिहासिकक्षण देखे हैं । इस सदन केसमय-समयके सभासदों केनिर्णयों द्वारादेश के इतिहासमें बहुत नए-नएअध्याय कई बारजुड़े हैं । मैंआज बड़े गर्वके साथ कहनाचाहता हूं किये दोनों, प्रस्तावऔर बिल भारतके इतिहास मेंस्वर्णिम अक्षरोंके साथ अंकितहोंगे । यह महानसदन जो अपनीप्रतिबद्धताभारत की एकता, अखंडताऔर सार्वभौमिकताके लिए कई बारव्यक्त कर चुकाहै, यह महानसदन एक बारफिर एक ऐसेप्रस्ताव औरबिल पर विचारकरने जा रहाहै, जो आनेवाली सदियोंतक जम्मू औरकश्मीर को भारतके साथ जोड़कररखेगा ।
अध्यक्ष जी,पूरी चर्चाका जवाब मैंबाद में दूंगा । काफी सदस्योंके मन में येचीजें हैं किये जो प्रस्ताव,संकल्प औरबिल मैं लेकरआया हूं, इन सबकी कानूनीवैधता क्या हैऔर संवैधानिकपोजिशन क्याहै? इससेपहले कि सभीसभासद इसकी पूरीजानकारी के साथचर्चा में हिस्साले सकें, मैं इसकी कानूनीऔर संवैधानिकस्थिति को स्पष्टकरना चाहता हूं । राष्ट्रपतिमहोदय ने कलएक कांस्टीट्यूशनलआर्डर, 2019 साइन किया है । इसके तहत 370 (1) (डी) काउपयोग करते हुएएक संवैधानिकआर्डर उन्होंनेपास किया, जिसमें भारतके संविधान केसारे के सारेअनुबंध जम्मूऔर कश्मीर केसंविधान मेंलागू होंगे ।इसका मतलब हैकि 35(ए) खत्म हो गया । अनुच्छेद 367और 370 (1) (डी)को एक साथजो अधिकार प्राप्तहोता है, उस अधिकार केतहत राष्ट्रपतिमहोदय ने जहां-जहां भारत केसंविधान मेंकांस्टीट्यूएंटअसेम्बली ऑफजम्मू एंड कश्मीरलिखा गया है,वहां इसे जम्मूऔर कश्मीर लेजिस्लेटिवअसेम्बली पढ़ाजाए, इस प्रकारका भी इस कांस्टीट्यूशनलआर्डर में उल्लेखकिया है । एकरेजोल्यूशन है,जिसे मैंनेअभी पढ़ा है ।इसके तहत धारा370 (3) का उपयोगकरते हुए कश्मीरके बारे मेंजो धारा 370 का उपयोग होरहा है, उसेसीज करने केप्रस्ताव कोयदि सदन अनुमतिदेता है, तो राष्ट्रपतिमहोदय कल यापरसों, अपनीअनुकूलता सेइसे साइन करकेगजट में प्रोसीडकरेंगे ।
अध्यक्ष जी,तीसरा मैंबायफरकेशन एक्टलेकर आया हूं,इस पर मैंबाद में बताऊंगा । एक सवाल कलभी अपर हाउसमें उठा थाऔर आज भी काफीसदस्यों के मनमें यह बातहै कि यह अधिकारकहां से प्राप्तहोता है । मैंसारे सदन केउपयोग के लिएआर्टिकल 370 की धारा (3) को पढ़ना चाहताहूं । सभी सदस्यइसे ध्यान सेसुनें ।
“Notwithstanding anything in the foregoing provisions of this article, the President may, by public notification, declare that this article shall cease to be operative or shall be operative only with such exceptions and modifications and from such date as he may specify.” राष्ट्रपति जी को अधिकार है कि वे एक नोटिफिकेशन निकालकर…(व्यवधान)
SHRI T. R. BAALU: The Parliament has got all powers, not the hon. Rashtrapati.
श्री अमित शाह : आप बैठजाओ । आप पहलेपूरी बात सुनिए । बालू जी, आपजो पूछेंगे, सभीबातों का मैंजवाब दूंगा ।मन में सोचना, इसतरह से दुनियानहीं चलती है, संविधानके हिसाब सेचलती है । आपपहले मुझे सुनिए ।
अध्यक्षजी, इसकामतलब यह होताहै कि धारा370 (3) का उपयोग करकेराष्ट्रपति महोदयधारा 370 कोसम्पूर्ण तरीकेसे सीज कर सकतेहैं । यह राष्ट्रपतिजी का अधिकारहै, लेकिनउसमें राइडरडाला हुआ है ।
“Provided that the recommendation of the Constituent Assembly of the State referred to in clause 2 shall be necessary before the President issues such a notification.” राष्ट्रपतिमहोदय तभी यहनोटिफिकेशन निकालसकते हैं, जब जम्मू औरकश्मीर की कांस्टीट्यूएंटअसेम्बली कीअनुशंसा हो,तो राष्ट्रपतिमहोदय के जोअधिकार हैं,उन पर जम्मूऔर कश्मीर कीकांस्टीट्यूएंटअसेम्बली कीअनुशंसा को बाधितकरने का एकराइडर संविधानने लगाया है ।
अब मैं कांस्टीट्यूएंटअसेम्बली परआता हूँ । मैंनेजैसा पहले उल्लेखकिया कि कांस्टीट्यूशनआर्डर, 2019 निकालाहै । इसमें राष्ट्रपतिमहोदय ने धारा 367 read with 370 (1) (डी) के अधिकार काउपयोग करके कांस्टीट्यूएंटअसेम्बली मीन्स ‘लेजिस्लेटिवअसेम्बली जम्मूऔर कश्मीर’शब्द का प्रयोगकिया है । अबयह अधिकार जम्मूऔर कश्मीर लेजिस्लेटिवअसेम्बली केअंडर आता हैकि वह राष्ट्रपतिमहोदय को अनुशंसाकरें कि आपइस अधिकार काउपयोग कर सकतेहैं । अब काफीसारे सभासद यहकहेंगे कि ऐसानहीं कर सकतेहैं । मैं उन्हेंइतिहास बतानाचाहता हूँ ।इस प्रोविजनका उपयोग कांग्रेसने इसी रास्तेसे दो बार कियाहै । पहली बारवर्ष 1952 में,दूसरी बारवर्ष 1965 मेंकिया है । वर्ष1952 में धारा370 (1) (डी) का उपयोग करतेहुए उन्होंने ‘महाराजा’की जगह ‘सदरे रियासत’किया और वर्ष1965 में ‘सदरे रियासत’की जगह ‘गवर्नर’ किया । मेराइतना ही कहनाहै कि जब कांग्रेसपार्टी इतनाहो-हल्लाकर रही है,उनके शासनमें दो बारराष्ट्रपति महोदय…(व्यवधान) यह बात ठीक नहीं है । कांग्रेस के शासनकाल में राष्ट्रपति महोदय ने दो बार इस अधिकार का उपयोग कैबिनेट की अनुशंसा से ही किया है । कैबिनेट मतलब सरकार ।
महोदय, पूरा देश जानता है कि जम्मू और कश्मीर में राष्ट्रपति शासन चल रहा है । राष्ट्रपति शासन धारा 356 के अंतर्गत लगता है । धारा 356 (1) (बी) केहिसाब से असेम्बलीकी पूरी सत्ताइन दोनों सदनोंमें निहित है । दोनों सदनोंका जो भी अभिप्रायहै, वही असेम्बलीका भी अभिप्रायहोता है । महोदय,मैं कल राज्यसभा से अनुमतिलेकर आपके सामनेउपस्थित हुआहूँ और मुझेभरोसा है कियह सदन धारा370 हटाने केलिए अनुमोदनदेगा । मैंनेजो दोनों चीजेंरखी हैं, किस अधिकारके तहत राष्ट्रपतिजी ने अनुमतिदी है और दूसरायह संकल्प तथाबिल मैं क्योंसदन के सामनेलाया हूँ, इसे समझानेकी बात मैंनेसदन में रखीहै । इस पर आपका विवाद हो सकताहै, जो भीतकलीफ हो सकतीहै, उसकाजवाब मैं जरूरदूंगा और तसल्लीसे दूंगा । हमवाद-विवादकरें, वितंडावादन करें । वाद-विवाद से मुझेकोई तकलीफ नहींहै । मैं एकबात कहता हूंऔर उसके सामनेआप दो चीजेंखड़ी कर सकतेहैं । मेरा दायित्वहै, मेरासंवैधानिक दायित्वहै कि मैं सदनको इसका जवाबदूँ, परन्तुहो-हल्लाकरेंगे तो किसीकी बात सुनाईनहीं पड़ेगी ।
अध्यक्षजी, जहाँतक बाइफरकेशनका सवाल है, बहुतसमय से लद्दाखक्षेत्र की माँगथी कि उसे एकयूटी बनाया जाए, इसलिएइस मांग केतहत हम जम्मू-कश्मीरमें दो यूटीजलेकर आए हैं । एक यूटी लद्दाखक्षेत्र की होगी, जिसमेंअक्साई चीन भीसमाहित होगाऔर वहाँ दोनोंहिल काउंसिल्स, जोबनी हैं, वेचालू रहेंगीऔर हिल काउंसिल्सके अध्यक्ष मिनिस्टरके दर्जे केसाथ अपना कार्यभारसंभालेंगे, एडमिनिस्ट्रेशनकरते रहेंगे, जिसेस्थानीय नुमाइंदोंकी पूरी आवाजपूरे हिल काउंसिल्सके अंदर सुनाईदेगी । किसीके लोकतांत्रिकअधिकारों केहनन होने कासवाल ही नहींहै । जम्मू-कश्मीरयूटी बनेगी, वहविद असेम्बलीबनेगी । वहांएमएलए भी होंगे, वहांमुख्य मंत्रीभी होंगे औरवे लोगों केद्वारा चुनेहुए ही होंगे । वे जम्मू-कश्मीरके प्रशासन काडे-टू-डेकाम करेंगे ।
मैंएक दूसरा बिलभी लेकर आयाहूँ कि दो यूटीजबनाई जाएं औरजैसा मैंने पहलेकहा कि जम्मू-कश्मीरभारत का अभिन्नअंग है, आर्टिकल-1और जम्मू-कश्मीर के आर्टिकल-3,दोनों को साथमें पढ़ते हैं,तो इसका भीपूर्ण अधिकारइस संसद कोहै । मैं आपकेसामने ये दोनोंबिल लेकर प्रस्तुतहुआ हूँ ।
आपसभी सदस्योंको अपने-अपनेविचार रखने काअधिकार है ।पार्टियों नेजो लिस्ट दीहैं, माननीयसांसद उसके हिसाबसे अपने विचारसदन में रखें । मैं तसल्लीसे एक-एकसैकेंड यहांबैठने वाला हूंऔर पूरा नोटकरूंगा । आपकेसभी प्रश्नोंके उत्तर देनेकी मेरी तैयारीभी है, परन्तुशांत वातावरणमें चर्चा हो । घाटी के लोगहमें देख रहेहैं, देशभी देख रहाहै और दुनियाभी देख रहीहै ।
माननीय अध्यक्ष: श्रीमनीष तिवारीजी ।
श्री मनीष तिवारी (आनंदपुर साहिब): माननीय अध्यक्षमहोदय, आजहम एक बहुतही संवेदनशीलविधेयक पर चर्चाकरने के लिएइस सदन मेंएकत्रित हुएहैं । जम्मू-कश्मीर का जोसूबा है, उसे खारिज करकेवहाँ दो केन्द्रशासित प्रदेश-एक, जम्मूऔर कश्मीर तथादूसरा, लद्दाखबनाने की बातहै, जिसकामसौदा लेकर सरकारइस सदन के समक्षआई है । यह बहुतजरूरी हो जाताहै कि आज हमइतिहास को संज्ञानमें लें । मैंआधुनिक जम्मूऔर कश्मीर कीबात से शुरूकरना चाहता हूँकि इस आधुनिकजम्मू और कश्मीरका निर्माण कैसेहुआ ।
सन् 1846में अंग्रेजोंऔर महाराजा दिलीपसिंह के बीचपहली लड़ाई खत्महुई और 9 मार्च,1846 को लाहौरकी संधि हुई । उस लाहौर कीसंधि में अंग्रेजोंने माँग रखीकि ब्यास औरसिंधु दरियाके बीच जितनीजमीनें हैं,वे अंग्रेजोंके हवाले करदी जाएं । उससंधि पर हस्ताक्षरहुए और उसकेएक हफ्ते केबाद 16 मार्च,1846 को एक औरसंधि हुई, जिसे अमृतसरकी संधि कहतेहैं । उस अमृतसरकी संधि केतहत ब्यास औरसिंधु दरियाके बीच के इलाकेको 75 लाखरुपये की एवजमें महाराजागुलाब सिंह कोअंग्रेजों नेट्रांसफर करदिया । वे जोजमीनें थीं,उनमें कश्मीरघाटी भी मौजूदथी । उससे पहलेसन् 1835 और1840 के बीचमहाराजा गुलाबसिंह की फौजोंने लद्दाख परफतेह पाई, बाल्टिस्तानपर फतेह पाई,गिलगित कोअपनी रियासतका हिस्सा बनाया । जो जम्मू-कश्मीर रियासतहै, जिसमेंजम्मू, कश्मीरऔर लद्दाख केहिस्से शामिलहैं, की संरचनाइस तरह से हुई । सन् 1846 से27 अक्तूबर,1947 तक जम्मू-कश्मीर की रियासतचली । उसके बीचके समय मेंघटनाक्रम बदलाऔर 15 अगस्त,1947 को भारतआजाद हुआ । जबभारत की आजादीहुई, तो दोमुल्क बने,एक भारत,दूसरा पाकिस्तानऔर तीसरा, 562रियासतें,जिनको यह ऑप्शनदिया गया किवे या तो भारतके साथ अपनाविलय कर सकतेहैं या पाकिस्तानके साथ अपनाविलय कर सकतेहैं । उनमेंसे कई रियासतोंने भारत केसाथ विलय कियाऔर कई रियासतेंपाकिस्तान मेंशामिल हुईं ।लेकिन तीन रियासतोंको लेकर एकसंवेदनशील परिस्थितिउत्पन्न हुई ।
वे तीन रियासतें थीं – जम्मू कश्मीर, हैदराबाद और जूनागढ़ । मैं इस बात पर बाद में आऊंगा कि क्यों जूनागढ़ और हैदराबाद की परिस्थिति जम्मू कश्मीर से भिन्न है । 15 अगस्त, 1947 को जम्मू कश्मीर की जो रियासत थी,वह आजाद रियासत थी, महाराज हरि सिंह उसके राजा थे । उन्होंने पाकिस्तान के साथ एक स्टैंड-स्टिल एग्रीमेंट साइन किया । उन्होंने वही पेशकश भारत को भी की थी, पर भारत ने वह स्टैंड-स्टिल एग्रीमेंट साइन करने से इनकार कर दिया । उसके बाद अगस्त, 1947 में खुद महात्मा गांधी जम्मू कश्मीर गए और उन्होंने महाराजा हरि सिंह से यह वेदना की कि आज जम्मू कश्मीर का विलय भारत में कर दीजिए । महाराज हरि सिंह कुछ इनडियाइवर्सिस थे, वे असमंजस में थे, जिस कारण परिस्थतियां लटकती रहीं ।
22 अक्टूबर, 1947को पाकिस्तानी कबाइलियों ने जम्मू कश्मीर के ऊपर हमला किया । जैसे-जैसे पाकिस्तान की फौजें और वे कबाइलिए श्रीनगर की ओर बढ़ने लगे तो महाराजा हरि सिंह के सामने दो विकल्प थे । पहला विकल्प यह था कि वे पाकिस्तान के सामने आत्मसमर्पण कर के जम्मू कश्मीर का पाकिस्तान के साथ विलय कर देते,लेकिन उन्होंने इस विकल्प को स्वीकार नहीं किया । उन्होंने जम्मू कश्मीर की स्टेट फोर्सेज़ को पाकिस्तान से आए कबाइलिए और पाकिस्तानी फौज के रेग्युलर्स से मुकाबला करने की हिदायत दी । इसके साथ-साथ उन्होंने भारत सरकार से भी बात की । उन्होंने भारत सरकार से यह कहा कि आप हमारी मदद करो । 27 अक्टूबर, 1947 को महाराजा हरि सिंह ने जो इन्स्ट्रूमेंट ऑफ एक्सेशन साइन किया था, उसको भारत सरकार ने स्वीकार किया और पंडित नेहरू ने भारत की फौज को यह हिदायत दी कि आप जम्मू कश्मीर में जाकर पाकिस्तान के कबाइलियों से लड़िए और पाकिस्तान की फौज को नेस्तानाबूद कर के जम्मू कश्मीर को भारत में जोड़िए ।
जब फर्स्ट सिख रेजीमेंट की पहली टुकड़ी सफदरजंग एयरपोर्ट से उड़ी,तब उसका नेतृत्व लेफ्टिनेंट कर्नल रंजीत राय कर रहे थे । जब जहाज कश्मीर,श्रीनगर के ऊपर मंडरा रहे थे तो उनको यह नहीं मालूम था कि श्रीनगर का हवाई-अड्डा कबाइलियों के कब्ज़े में है या भारत के कब्ज़े में है । वे जहाज वहां पर उतरे, उन्होंने मोर्चाबंदी की और भीषण लड़ाई के बाद जो कबाइलिए थे और जो पाकिस्तानी फौज थी, उसे खदेड़ा और दो वर्षों तक वह लड़ाई चलती रही ।
इस तरह अगर जम्मू कश्मीर का विलय किसी ने भारत में किया था, जम्मू कश्मीर में अगर किसी ने फौज भेजकर वहां के लोगों की रक्षा की थी तो वह सरकार पंडित जवाहरलाल नेहरू की थी, जिसने उस समय यह कदम उठाकर जम्मू कश्मीर को भारत का अटूट अंग बनाया था । इस परिस्थति में जम्मू कश्मीर के साथ भारत ने कुछ वादे किए थे । वे वादे इन्स्ट्रूमेंट ऑफ एक्सेशन में थे । उस इन्स्ट्रूमेंट ऑफ एक्सेशन के बाद जब भारत और जम्मू कश्मीर के बीच बातचीत शुरू हुई तो जुलाई, 1952 में दिल्ली का करार हुआ, दिल्ली डेक्लेरेशन हुई ।
उसके तहत 17 नवंबर 1952 को धारा 370 को भारत के संविधान में शामिल किया गया था । उसी बीच जम्मू कश्मीर ने अपना अलग संविधान बनाने की संरचना शुरू की । जम्मू कश्मीर की एक कॉन्स्टीट्वेंट असेंबली चुनी गई । 31 अक्टूबर 1951 और 17 नवंबर 1956 के बीच जम्मू कश्मीर को वह संवैधानिक असेंबली मिली और उसने जम्मू कश्मीर के लिए अलग संविधान की रचना की । यह भारत के संविधान के साथ मेल खाता था और साथ ही साथ समानांतर भी था । उसके बाद कई घटनाक्रम हुए ।
आखिर में, 24 फरवरी, 1975 में स्वर्गीय प्रधान मंत्री इन्दिरा गांधी जी और शेख अब्दुल्ला के बीच एक करार हुआ । यह सारा इतिहास बताने की जरूरत इसलिए समझी, क्योंकि विशेष परिस्थितियों में जब जम्मू कश्मीर के ऊपर आक्रमण हुआ था तो जम्मू कश्मीर के महाराजा ने घुटने टेकने की जगह, पाकिस्तान को चुनने की जगह यह फैसला किया कि उनका भविष्य एक धर्म निरपेक्ष भारत में है । उस विलय के संदर्भ में कुछ वायदे किए गए थे, वे धारा 370, जम्मू कश्मीर का संविधान और बाकी जो कॉन्स्टीट्यूशनल एडाप्टेशंस हैं,वे उनमें शामिल हैं । सरकार यह जो विधेयक लेकर आई है, इस विधेयक में यह कहा गया है कि हम जम्मू कश्मीर राज्य को तोड़कर दो केन्द्र शासित प्रदेश बनाएंगे । भारत के संविधान की धारा 3 कहती है कि किसी भी प्रदेश को तोड़ने से पहले,उनकी बाउण्ड्रीज को चेंज करने से पहले यह अनिवार्य है कि आप उस प्रदेश की जो विधान सभा है, उस प्रदेश की जो विधान परिषद है, उनके साथ आप राय-मशविरा करेंगे । यह कोई औपचारिक आर्टिकल नहीं है । संविधान में इसका प्रावधान इसलिए किया गया था कि उस प्रदेश के लोगों को अपनी राय व्यक्त करने का अवसर प्रदान किया जाए । आज एक बहुत ही विचित्र स्थिति उत्पन्न हुई है कि जम्मू कश्मीर में विधान सभा है नहीं, जम्मू कश्मीर में विधान सभा को भंग किया गया है और इस संसद से यह कहा जा रहा है कि आप अपने आप से राय-मशविरा करके, after consulting yourself, you decide the future of Jammu and Kashmir.
अध्यक्ष महोदय, मैं बहुत अदब और सत्कार के साथ कहना चाहता हूं, बहुत विनम्रता के साथ कहना चाहता हूं कि यह संवैधानिक त्रासदी है, जो इस सदन में आज हो रही है । क्योंकि धारा 3 की जो स्पिरिट है, वह यह नहीं है कि संसद किसी भी विधान सभा या विधान परिषद के अधिकारों को लेकर अपने आप से राय-मशविरा करके, उस सूबे की जो सरहदें हैं,उनको बदल दे या उस सूबे को दो हिस्सों में तोड़ दे । भारत के संविधान की धारा 3 यह नहीं कहती है । अगली धारा, जिसका जिक्र माननीय गृह मंत्री जी ने किया है । …(व्यवधान)
SHRIMATI VANGA GEETHA VISWANATH (KAKINADA): Sir, Andhra Pradesh was divided unilaterally.…(Interruptions)
माननीय अध्यक्ष: माननीय सदस्य, आपको भी मौका दिया जाएगा । आप विराजिए ।
…(व्यवधान)
श्री मनीष तिवारी: अध्यक्षजी, माननीयसदस्य ने एकबहुत महत्वपूर्णसवाल उठाया है, मैंउस सवाल काजवाब दे रहाहूं । मैं यहसाफ-साफकहना चाहता हूंकि आंध्र प्रदेशऔर तेलंगानाबनने से पहले, जोआंध्र प्रदेशकी विधान सभाथी, उसकेसाथ राय-मशविराकिया गया था । यह चीज इससदन के रिकॉर्डमें है, आपइसको सुनिश्चितकर सकते हैं । यू.पी.ए. कीसरकार ने कोईअसंवैधानिक कार्यनहीं किया था । …(व्यवधान) संविधान कीधारा 3 केजो प्रावधानथे, उन प्रावधानोंके अनुसार आंध्रप्रदेश की विधानसभा और विधानपरिषद से राय-मशविरा करकेआंध्र प्रदेशऔर तेलंगानाबनाया गया था । मैं एक बातऔर कहना चाहताहूं कि 1952 से लेकर जब-जब नए राज्यबनाए गए हैंया नए राज्योंया किसी राज्यकी बाउंड्रीजको बदला गयाहै, यह बगैरविधान सभा केविचार-विमर्शसे नहीं हुआहै । …(व्यवधान)आज यह संवैधानिक त्रासदी है कि जम्मू कश्मीर विधान सभा को भंग करके वहां राष्ट्रपति शासन लगाकर, उस जम्मू कश्मीर विधान सभा के अख्तियार खुद लेकर यह संसद अपने आप से राय-मशविरा करके,जम्मू कश्मीर को दो हिस्सों में विभाजित करने जा रही है । यह संवैधानिक त्रासदी है । …(व्यवधान)
अब मैं धारा 370 पर आता हूं । I am not yielding. Please sit down. माननीय गृह मंत्री जी ने धारा 370 (3) का जो प्रोवाइज़ो है,उसको पढ़ा । मैं आपकी आज्ञा से उस धारा 370 के प्रावधान को,उसके प्रोवाइज़ो को दोबारा पढ़ना चाहता हूं । “provided that the recommendation of the Constituent Assembly of the State referred to in clause (2) shall be necessary before the President issues such a notification.” यह प्रावधान इसलिए किया गया था कि धारा 370 को एक परमानेंस दी जा सके । जैसा मैंने पहले कहा कि 25 जनवरी 1957 को जो जम्मू कश्मीर की कॉन्स्टीट्वेंट असेंबली थी, वह अपना काम खत्म करके डिजोल्व हो गई । आज अगर आप यह पढ़ना चाहें कि जम्मू कश्मीर की कॉन्स्टीट्वेंट असेंबली मतलब विधान सभा है, विधान परिषद है तथा विधान सभा और विधान परिषद का मतलब यह संसद है, क्योंकि वहां पर तो राष्ट्रपति शासन लगा हुआ है,यह एक संवैधानिक त्रासदी है । मैं बहुत ही अदब और सत्कार के साथ कहना चाहता हूं कि बगैर कॉन्स्टीट्वेंट असेंबली की अनुमति के, जो कॉन्स्टीट्वेंट असेंबली एक्जिस्ट नहीं करती है,आप धारा 370 को खारिज नहीं कर सकते । This is a wrong interpretation of the Constitution.
अध्यक्ष जी, अब मैं अगली बात पर आता हूं । भारत के संविधान में सिर्फ धारा 370 नहीं है । उसमें 371A से I तक है,जो नागालैण्ड,असम, मणिपुर,आंध्र को विशेष अधिकार देती है । आज जब आप धारा 370 समाप्त कर रहे हैं तो आप उन प्रदेशों को क्या संदेश भेज रहे हैं । आज आप धारा 370 को इस तरह से समाप्त कर सकते हैं, कल आप धारा 371 को भी समाप्त कर सकते हैं । जो भारत के उत्तर पूर्व के राज्य हैं, जो विशेष अधिकार उनको समय-समय पर अलग सरकारों ने दिए हैं, इसी तरह से वहां राष्ट्रपति शासन लगाकर, उनकी विधान सभाओं का हक संसद में लेकर,यहां पर संसद अपने आप से बात करके कल को 371 को भी समाप्त कर सकते है ।
यह किस तरह का संवैधानिक प्रिसिडेंट आप इस देश में कायम करने जा रहे हैं? मैं यह उम्मीद करता हूं कि सरकार ने इसको ठीक तरह से सोचा होगा । मैं अगली बात पर आता हूं ।
माननीय अध्यक्ष जी, आपने जम्मू कश्मीर को तो दो केन्द्र शासित प्रदेशों में बांट दिया,किन्तु जम्मू कश्मीर के संविधान का क्या होगा?जम्मू कश्मीर का एक अलग संविधान है, जो 26 जनवरी, 1957 को …(व्यवधान) । जरा ध्यान से सुनिए । कृपया बैठ जाइए । …(व्यवधान) ।
माननीय अध्यक्ष: माननीय सदस्य,कृपया बैठे-बैठे न बोलिए । वह बोल रहे हैं,मैं उनसे भी यही कह रहा हूं,जैसा कि आपसे बोल रहा हूं । श्री मनीष तिवारी जी के अलावा किसी की बात नोट नहीं होगी ।
(व्यवधान) … * श्री मनीष तिवारी : माननीय अध्यक्ष जी, मैं बहुत अदब और सत्कार के साथ यह बात कहना चाहता हूं ।
माननीय अध्यक्ष: माननीय सदस्य,प्लीज, मैं आपसे अंतिम बार बोल रहा हूं । आप बैठे-बैठे मत बोलिए ।
श्री मनीष तिवारी : माननीय अध्यक्ष जी, जम्मू कश्मीर का एक अलग संविधान है, जो 26 जनवरी, 1957 को लागू हुआ था । आपने प्रदेश को दो हिस्सों में बांट दिया,लेकिन संविधान का क्या होगा?क्या सरकार यहां पर उस संविधान को खारिज करने के लिए भी विधेयक लेकर आएगी? मैं बहुत जिम्मेवारी के साथ यह कहना चाहता हूं कि इस विभाजन के जो अलग-अलग संवैधानिक पहलू हैं, उन पर इस सरकार ने इस विधेयक को लाने से पहले विचार ही नहीं किया ।
अध्यक्ष महोदय, मैं आखिरी दो बातें कहना चाहता हूं कि पिछले 70 सालों में तो हमने यह कई बार देखा है कि केन्द्र शासित राज्य को प्रदेश में बदल दिया जाए,पर शायद यह पहली बार हुआ है कि किसी प्रदेश को केन्द्र शासित प्रदेश में बदल दिया जाए । संघीय ढांचे पर इससे बड़ा आघात नहीं हो सकता । …(व्यवधान) । अन्त में, मैं कहना चाहता हूं कि माननीय गृह मंत्री जी जरूर अपने भाषण में जूनागढ़ और हैदराबाद का जिक्र करेंगे । कल उन्होंने राज्य सभा में भी इस बात का जिक्र किया था । मैं यह बताना चाहता हूं कि जूनागढ़ ने पाकिस्तान से विलय करने का फैसला 15 अगस्त, 1947 को कर लिया था । 15 सितम्बर, 1947 को पाकिस्तान ने उस विलय को स्वीकार कर लिया था, लेकिन जूनागढ़ की जनता में आक्रोश था । वहां एक जनाक्रोश उभरा और फिर 25 फरवरी 1948 को एक जनशुमारी हुई,जिसमें 99 प्रतिशत लोगों ने भारत के हक में मतदान किया, जिससे जूनागढ़ भारत का अंग बना । पाकिस्तान इस मुद्दे को यूनाइटेड नैशंस सिक्योरिटी काउंसिल में लेकर गया, किन्तु चूंकि जूनागढ़ के लोगों ने इतने भारी मत से भारत में विलय होने का फैसला किया था, इसलिए पाकिस्तान का वह मत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् में खारिज कर दिया गया । आखिरी बात मैं यह कहना चाहता हूं कि ऐसी कुछ परिस्थिति हैदराबाद की भी थी । हैदराबाद में पंडित जवाहर लाल नेहरू की सरकार थी । उन्होंने भारत की फौज को भेजा, जब हैदराबाद के निजाम ने वहां पर हथियार इकट्ठे करने शुरू किए थे । …(व्यवधान) ।
श्री अमित शाह: अध्यक्षमहोदय, सरदारपटेल के योगदानको कैसे नकाराजा सकता है? आजअगर हैदराबादभारत का अभिन्नअंग है, तोवह केवल औरकेवल सरदार पटेलजी के कारणहै और किसीके कारण नहीं ।
श्री मनीष तिवारी: माननीय गृह मंत्री जी, सुनने की क्षमता रखिए । आपको जवाब देने का मौका मिलेगा । अन्त में, मैं यह कहना चाहता हूं कि आज अगर हैदराबाद,जूनागढ़ और जम्मू-कश्मीर भारत का अटूट और अभिन्न अंग हैं, तो वह पंडित जवाहर लाल नेहरू जी की सरकार की वजह से है ।
12.00 hrs माननीय अध्यक्ष: माननीय सदस्यगण, कृपया शांत रहें । आपको भी बोलने का मौका दिया जाएगा । श्री जुगल किशोर शर्मा जी, आपको बाद में मौका दे दूंगा,पहले माननीय गृह मंत्री जी को बोलने दें ।
…( व्यवधान)
श्री अमित शाह: माननीयअध्यक्ष जी, अगरआप अनुमति देंतो एक छोटासा स्पष्टीकरणमनीष जी सेमांगना चाहताहूं । …(व्यवधान) । कांग्रेस पार्टी की ओर से चर्चा की शुरुआत हुई,किन्तु उन्होंने यह तो स्पष्ट ही नहीं किया कि धारा-370हटाने के पक्ष में कांग्रेस पार्टी है या नहीं? यह बात तो जरा स्पष्ट कर दीजिए ।
माननीय अध्यक्ष: मनीष जी, क्या आप बोलना चाहते हैं?
श्री मनीष तिवारी: माननीयअध्यक्ष जी, हां, मैंबोलना चाहताहूं ।
माननीय अध्यक्ष: मनीष जी, आप पक्ष में हैं या खिलाफ में हैं, सिर्फ दो लाइनों में यह बता दें ।
…( व्यवधान)
श्री मनीष तिवारी: माननीयअध्यक्ष जी, अंग्रेजीकी एक किताबहै, जिसकेअनुसार हर चीजकाली या सफेदनहीं होती । There are 50 shades of grey in between. मैं बहुत अदब और सत्कार से यह कहना चाहता हूं कि शायद गृह मंत्री जी कुछ और सोच रहे थे । उन्होंने मेरी बात को ध्यान से नहीं सुना । मैंने साफ तौर पर यह कहा कि बगैर जम्मू और कश्मीर काँस्टीट्यूएंट असेंबली की अनुमति के आप धारा-370 को खारिज नहीं कर सकते । …(व्यवधान) ।
THE MINISTER OF PARLIAMENTARY AFFAIRS, MINISTER OF COAL AND MINISTER OF MINES (SHRI PRALHAD JOSHI): Sir, let the Congress party clarify whether they want existence of Article 370 …(Interruptions)
श्री मनीष तिवारी : माननीयकोयला मंत्रीजी, आप क्योंव्यवधान उत्पन्नकर रहे हैं? मैंगृह मंत्री जीकी बात का जवाबदे रहा हूं ।कृपया बैठ जाइए । …(व्यवधान) । मुझे जवाब देने दीजिए । अगर आप काँस्टीट्यूएंट असेंबली को एक विधेयक के प्रावधान से विधान सभा और विधान परिषद् पढ़ना चाहते हैं और वहां राष्ट्रपति शासन लगाकर विधान सभा और विधान परिषद् को भारत की संसद पढ़ना चाहते हैं तो माननीय गृह मंत्री जी, यह एक संवैधानिक त्रासदी है । मैं उम्मीद करता हूं कि आपको जवाब मिल गया होगा ।
माननीय अध्यक्ष: श्री दयानिधि मारन जी । दादा, आज आपका जन्म दिन है । आप कृपया बैठ जाइए । आपको जन्म दिन की बधाई । सारा सदन आपको जन्म दिन की बधाई दे रहा है ।
…( व्यवधान)
SHRI DAYANIDHI MARAN (CHENNAI CENTRAL): Hon. Speaker, Sir, I am on a point of order.
HON. SPEAKER: What is your point of order?
SHRI DAYANIDHI MARAN: My point of order is under Rule 229, 230 and 231 of the Rules of Procedure and Conduct of Business in Lok Sabha’ Rule 229 says:
“When a member is arrested on a criminal charge or for a criminal offence or is sentenced to imprisonment by a court or is detained under an executive order, the committing judge, magistrate or executive authority, as the case may be, shall immediately intimate such fact to the Speaker indicating the reasons for the arrest, detention or conviction, as the case may be, as also the place of detention or imprisonment of the member in the appropriate form set out in the Third Schedule ” माननीय अध्यक्ष: आप कृपया नीचे की लाइन और पढ़ लीजिए ।
SHRI DAYANIDHI MARAN: Just a minute, Sir, Now, I am reading. I am not reading Rule 230. I am reading Rule 231, which says:
“As soon as may be, the Speaker shall, after he has received a communication referred to in rule 229 or rule 230, read it out in the House if in session.” Sir, the House is in Session. Dr. Farooq Abdulla, who is a Member of this House, is missing. He is arrested. We have no intimation. The House is in Session, and you as the Speaker, should protect the Member …(Interruptions)
माननीय अध्यक्ष: मैंने नियम पढ़ लिया है । मैंने व्यवस्था दे दी है । श्री जुगल किशोर शर्मा जी । कृपया आप बोलिए ।
…( व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष: माननीय सदस्य, बिना किताब के प्वाइंट ऑफ आर्डर हो गया है क्या? प्वाइंट ऑफ ऑर्डर का जवाब मुझे देना है । माननीय गृह मंत्री जी बोल रहे थे कि यह व्यवस्था आपने मुझे दी है । दादा,बोलिए । कोई रूल नहीं है । बिना रूल के है ।
प्रो. सौगत राय (दमदम): मुझे कोई भाषण नहीं देना है । जो बोलना था वह मनीष तिवारी जी ने बोल दिया है । मैं केवल इस बात से खुश हूं कि माननीय गृह मंत्री जी ने बोला है कि अगर कोई स्पष्टीकरण चाहिए तो वह स्पष्टीकरण देंगे ।
माननीय अध्यक्ष: बिल्कुल देंगे ।
प्रो. सौगत राय: मेरा एक सीधा सा सवाल है । …(व्यवधान) ।
माननीय अध्यक्ष: अभी नहीं, गृह मंत्री जी के जवाब के बाद ।
प्रो. सौगत राय: सर, वह चार बार उठकर बोले ।
माननीय अध्यक्ष : आप छ:बार उठकर बोल लीजिएगा । मैंआपको मौका दूंगा । अगर आपकी पार्टीआपको मौका नहींदेगी, तोमैं आपको मौकादूंगा । यह मेराआपसे वादा है ।
…( व्यवधान)
श्री जुगल किशोर शर्मा (जम्मू) : आदरणीय अध्यक्ष जी, मैं आपका आभार प्रकट करना चाहता हूं कि आज आपने मुझे एक ऐतिहासिक विधेयक पर बोलने का मौका दिया है । मैं जम्मू-कश्मीर राज्य स्थित जम्मू लोक सभा का जनप्रतिनिधि हूं । मैं माननीय प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी और आदरणीय गृह मंत्री श्री अमित शाह जी का आभार प्रकट करना चाहता हूं, जो जम्मू-कश्मीर के पुनर्गठन का विधेयक और प्रस्ताव लेकर आए हैं ।…(व्यवधान)
अध्यक्ष जी,मैं यह कहना चाहता हूं कि यह लाखों-करोड़ों देशभक्त लोगों का सपना था, जो आज पूरा होने जा रहा है । चाहे 370 हो या चाहे 35ए हो, यह एक कलंक था, जिसे हम जम्मू-कश्मीर के लोगों पर नेहरू जी ने थोपा था ।…(व्यवधान) मैं यह बताना चाहता हूं कि जम्मू-कश्मीर के महाराजा हरि सिंह जी ने 27 अक्टूबर, 1947को जम्मू-कश्मीर का पूर्ण विलय भारत के साथ किया था । तब राजा ने कोई शर्त नहीं रखी थी, पूर्ण विलय हो चुका था,तो उसके बाद यह 370 कहां से आई? यह कौन लाया,यह किसके कहने पर लाई गई थी? यह कांग्रेस पार्टी बताए कि यह क्यों लाई गई और क्यों इसको जम्मू-कश्मीर के लोगों पर थोपा गया था? अध्यक्ष महोदय, जवाहरलाल नेहरू जी ने शेख अब्दुल्ला जी के कहने पर 370…(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : माननीयसदस्य, जिनकोजाना है, वहबाहर जाएं औरजिनको बैठनाहै, वे बैठजाएं । सदन में जुगल किशोर शर्मा जी बोल रहे हैं, उनको बोलने दीजिए ।
…( व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : माननीयसदस्य, बैठजाइए ।
…( व्यवधान)
श्री जुगल किशोर शर्मा : अध्यक्ष महोदय, अभी मुझसे पहले कांग्रेस के एक वक्ता मनीष तिवारी जी बोल रहे थे । वह जवाहरलाल नेहरू जी का बड़ा गुणगान कर रहे थे और कह रहे थे कि जम्मू-कश्मीर को जोड़ने का काम जवाहरलाल नेहरू जी ने किया है । उनका यह कहना था कि उन्होंने जम्मू-कश्मीर को जोड़ा है । मैं यह कहता हूं कि जवाहरलाल नेहरू जी ने जम्मू-कश्मीर को तोड़ा है ।…(व्यवधान)आज जो पाक अधिकृत कश्मीर है, वह जवाहरलाल नेहरू जी की देन है । यह कलंक जो हमारे माथे पर लगा हुआ है, वह जवाहरलाल नेहरू जी की देन है । आज यहां सदन के अपोज़ीशन के लीडर कह रहे थे कि पीओके का क्या होगा? हमें पीओके लेना है,यह हमारा दृढ़-निश्चय है । लेकिन पीओके को किसने दिया था? आप कभी इसकी भी जांच करिएगा । तब आप जवाहरलाल नेहरू जी और कांग्रेस को याद करिएगा ।…(व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय, जवाहरलाल नेहरू जी ने शेख अब्दुल्ला जी कहने पर 370 को जम्मू-कश्मीर पर थोपा था । उसके बाद 35ए को भी थोपा था । जब 370 को संविधान में जोड़ा गया था,तब भी सरदार वल्लभ भाई पटेल,भीमराव अंबेडकर और श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी ने इसका विरोध किया था । लेकिन स्वार्थ की राजनीति को मद्देनजर रखते हुए जवाहरलाल नेहरू जी ने फिर भी इसको जुड़वाया था । आखिर 370 ने जम्मू-कश्मीर को क्या दिया है? आज तक जम्मू-कश्मीर को 370 ने क्या दिया है? 370 ने भारत के साथ दूरियां बढ़ाने का काम किया है । न ही बिजनेस को बढ़ने दिया,बेरोजगारी बढ़ी,भ्रष्टाचार बढ़ा और आतंकवाद बढ़ा है । 370 ने यह सब कुछ दिया है । इसके अलावा 370 ने जम्मू-कश्मीर के लोगों को कुछ भी नहीं दिया है ।
अध्यक्ष महोदय,अगर बेराजगारी की बात करें, तो आज जम्मू-कश्मीर एक ऐसा राज्य है, जहां पर कोई भी कारखाना लगाने को तैयार नहीं है । जम्मू-कश्मीर का युवा रोजगार के लिए दूसरे प्रदेशों में जाता है । माताओं और बहनों को भी कोई रोजगार नहीं मिलता है । इसका कारण एक ही है कि कोई भी जम्मू-कश्मीर में बड़ा कारखाना लगाने के लिए तैयार नहीं है, क्योंकि वहां पर कोई जमीन ही नहीं खरीद सकता है । कब तक कोई किराये की जमीन पर कारखाना चलाएगा और क्यों चलाएगा? यह विचार करने योग्य बात है । मैं आपको यह बताना चाहता हूं कि ‘आयुष्मान भारत स्कीम’ आदरणीय नरेन्द्र भाई मोदी जी की देन है । इसका बहुत बड़ा लाभ गरीबों को मिलता है । लेकिन जम्मू-कश्मीर के लोग इस ‘आयुष्मान भारत स्कीम’ से भी वंचित रह जाते हैं । उन्हें दूसरे प्रदेशों के अस्पतालों में जाना पड़ता है । इसका यह कारण है कि वहां पर कोई भी बड़ा अस्पताल नहीं है और कोई बड़ा अस्पताल खोलने के लिए भी तैयार नहीं है । वहां पर जो भी छोटे-मोटे अस्तपताल हैं, वहां पर कोई भी डॉक्टर जाने के लिए तैयार नहीं है ।
न कोई कारखाना लगाने के लिए तैयार है, न अस्पताल खोलने के लिए तैयार है । लगाएगा भी क्यों?क्योंकि उनके बच्चे कॉलेजों में पढ़ नहीं सकते हैं । उनको वहां पर पढ़ने की इजाजत नहीं है । वे अपना घर वहां पर नहीं बना सकते हैं । वहां पर कोई कारोबार नहीं कर सकते हैं । इसलिए कोई जम्मू कश्मीर में जाने के लिए तैयार नहीं है । यह है दफा-370,दफा 370 ने जम्मू कश्मीर को आज तक यह दिया है । भ्रष्टाचार चरम सीमा पर है । भ्रष्टाचार को भी लगाम लगाने के लिए कोई खास कानून नहीं हैं । अध्यक्ष महोदय,विडंबना तो तब हो गई, जब पिछले दिनों बहुत ही ऐतिहासिक और साहसिक एक जो बिल था – जो नरेंद्र भाई मोदी जी की सरकार लाई, यह था कि सामान्य वर्ग के गरीबों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण का बिल, जब वह बिल पार्लियामेंट में पास हुआ तो पूरे देश भर में दिवाली मनाई गई और खुशियां मनाई गईं कि सामान्य वर्ग के लोगों को भी इंसाफ मिला है । लेकिन जम्मू के लोग मायूस थे । जम्मू के लोगों में निराशा थी । क्योंकि जम्मू कश्मीर में यह कानून लागू नहीं हो पाया । इसका कारण 370 था । क्योंकि वहां का अलग संविधान और जब तक वहां की असेंबली इस कानून को पास नहीं करती है, तब तक यह आरक्षण बिल वहां पर लागू नहीं होता है । इसलिए लोग चाहते हैं कि जम्मू कश्मीर से दफा 370 और 35ए हटे । जब कोई अच्छा कानून लगे तब उसे ले लेना । जब कोई अच्छा न लगे तब उसे नहीं देना । मनमर्जी के लिए और कोई नियम वहां पर नहीं था ।
महोदय, मैं यह बताना चाहता हॅूं कि आतंकवाद भी 370 की ही देन है । आतंकवाद ने हजारों लोगों को मौत के घाट उतारा है । निर्दोष लोगों को मारा है । देश के कोने-कोने के जवान सैनिकों की शहादतें हुईं । मैं उन नेताओं से पूछना चाहता हॅूं, जो 370 की वकालत करते हैं कि जब धारा 370 थी, तब आतंकवाद क्यों आया? आतंकवादियों की भी वकालत करते हो, 370 की भी वकालत करते हो, क्या यही आप लोगों का चरित्र है? पोटा जैसे कानून को भी आप लोगों ने टिकने नहीं दिया तो आतंकवाद कैसे खत्म होगा?मैं कहना चाहता कि यह जो दफा 370 की वजह से जम्मू कश्मीर पिछड़े प्रदेशों में ले आया गया,हम नेताओं से पूछते हैं कि आपने दफा 370 को क्यों पकड़ कर रखा है,तो वे कहते हैं कि जम्मू कश्मीर की एक अलग पहचान है । महोदय, ऐसी अलग पहचान का क्या करेंगे?
महोदय, जम्मू कश्मीर की बेटी अगर दूसरे राज्य में ब्याही जाती है तो उसकी पहचान ही चली जाती है । यह है अलग पहचान? उसका रिश्ता ही खत्म हो जाता है । माँ-बाप,भाई-बहन,उसके कोई रिश्तेदार नहीं रह सकते हैं । वह जम्मू-कश्मीर की नागरिक भी नहीं रह सकती है । वह संपत्ति का अधिकार नहीं रख पाती है । महोदय,पिछले दिनों मेरे पास 2-3 बहनें आईं, उन्हेांने कहा कि किसी की शादी पंजाब में और किसी शादी दिल्ली में हुई थी । अकस्मात कहीं दुर्घटना घटी, उनके पति की मृत्यु हो गई और ससुराल वालों का माहौल ऐसा बन गया कि उसे वापस जाना पड़ा ।
जब वह दो बच्चों को ले कर जम्मू में वापस गई तो वहां का अधिकार उसको नहीं मिला । आज न वहां वोट डाल सकती है, न वहां की नौकरी ले सकती है । न ही माँ-बाप और भाई-बहन उसको मकान दे सकते हैं । मतलब यह है अलग पहचान?
महोदय, अब मैं कहना चाहता हॅूं कि कश्मीरी पंडितों के साथ में क्या-क्या नहीं हुआ है । वे लोग दर-ब-दर हो गए । वे लोग आज तक बिखरे पड़े हैं । क्या दोष था कश्मीरी पंडितों का? यही कि वह भारत माता की जय कहते थे, क्या यही उनका कसूर था? आज तक उनके पांव अपनी जन्मभूमि पर नहीं लग पाए हैं । आज आप कितनी भी सुविधाएं कश्मीरी पंडितों को दे दें, लेकिन अपनी जन्मभूमि कोई नहीं छोड़ता है ।
महोदय, जब भगवान राम ने श्रीलंका पर विजय प्राप्त की तब सोने की लंका को देख कर लक्षमण ने कहा कि राम जी हम यहीं पर राज करते हैं, यहां के राजा बन जाते हैं और राजपाट चलाते हैं और अयोध्या भरत को दे देते हैं । महोदय, हम सब जानते हैं कि उस समय राम जी ने कहा कि नहीं,हमारी जो जन्म भूमि अयोध्या है,हम उसको नहीं छोड़ सकते हैं ।
क्योंकि -
“जननी जन्मभूमिश्च,स्वर्गादपि गरीयसी” मतलब हमें जन्मभूमि सबसे प्यारी है, इसलिए हमें सोने की लंका नहीं चाहिए । इसीलिए कश्मीरी पंडितों को आप कुछ भी दे दें,लेकिन जब तक उनका पुनर्वास नहीं होगा, उनको चैन नहीं आएगा । वे यही चाहते हैं ।
महोदय, 370 की आड़ में जम्मू कश्मीर को लूटा जा रहा था । विकास के नाम पर पैसा तो दिया जाता था, परंतु यह पैसा कुछ परिवारों तक ही पहुंचता था । यह पैसा लोगों तक, गरीबों तक नहीं पहुंचता था ।
महोदय, गरीब, गरीब ही रहा, वह उससे उठ नहीं सका । धारा 370 और 35ए की वजह से कश्मीर राज्य पिछड़े राज्यों की श्रेणी में आ गया ।
महोदय, मैं बताना चाहता हूं कि जिन प्रदेशों में धारा 370 लागू नहीं है, तो क्या वे प्रदेश डेवलप नहीं हुए हैं? आज जिन प्रदेशों में धारा 370 नहीं है, वहां कारखाने भी हैं, वहां रोजगार भी है,वहां लोग खुश हैं । वहां बड़े-बड़े अस्पताल हैं, मेडिकल कॉलेजेज हैं,इंडस्ट्रीज है, लेकिन जम्मू-कश्मीर में कुछ नहीं है, क्योंकि वहां कोई जाना नहीं चाहता ।
महोदय, मैं थोड़ी-सी बात और कह कर अपना स्थान ग्रहण करूंगा । वेस्ट पाकिस्तान के रिफ्यूजियों की दुर्दशा देखी नहीं जाती । उनके पास वोट डालने का हक नहीं है । वे 70 वर्षों से जम्मू-कश्मीर में रह रहे हैं,लेकिन वे वोट नहीं डाल सकते,अपना मकान नहीं बना सकते, जमीन नहीं खरीद सकते । उनका राशन कार्ड नहीं है । 70 वर्षों के बाद भी वे अपना राशन कार्ड्स नहीं बनवा पाए हैं । उनके बच्चे कॉलेज में नहीं पढ़ सकते और वे ऐसी जिन्दगी जीने को मजबूर हैं ।
अध्यक्ष जी,आज गृह मंत्री अमित शाह जो यह संकल्प और बिल लाए हैं, जम्मू-कश्मीर की 150 लाख जनता इससे खुश है ।
अध्यक्ष महोदय,श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने देश की एकता और अखण्डता के लिए अपने प्राणों की बाजी लगा दी । एक देश में दो प्रधान, दो निशान, दो संविधान नहीं चलेंगे । आज वह समय आया है कि अटल बिहारी वाजपेयी जी, श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी, दीनदयाल उपाध्याय जी के सपनों को साकार करने के लिए नरेन्द्र भाई मोदी जी की सरकार में अमित शाह जी ने यह हिम्मत दिखाई और आज यह बिल पास हो रहा है । मुझे लगता है कि उन महापुरुषों को भी शांति मिलेगी ।
अध्यक्ष महोदय,मैं ज्यादा बातें न करता हुआ, इतना ही कहूंगा कि आज यह एक इतिहास रचने वाला है । देश के करोड़ों लोग, जो देशभक्त लोग हैं, वे देख रहे थे कि कब वह दिन आएगा जब नरेन्द्र भाई मोदी देश के प्रधान मंत्री बनें और अमित शाह जी गृह मंत्री बनें और दफा 370 का पता न चले कि यह कहां गया और दफा 370 जम्मू-कश्मीर से हट जाएगा ।
इतना कहते हुए मैं आपका धन्यवाद करता हूं ।
SHRI T. R. BAALU (SRIPERUMBUDUR): Sir, my friend, hon. Home Minister has brought forward a Constitutional Amendment Bill. Of course, it is only a Constitutional Amendment Bill. It should have been brought by invoking Article 368. That is what I have said previously. But at the same time, whatever I speak, whatever I debate, he will rebut with great tone and energy because he can make a mountain out of mole hill.
Sir, I refer to the five Judge Bench Judgement of AIR 1971 SC 118 on 10.10.1968. The case was between Sampath Prakash versus State of Jammu and Kashmir. Sir, the proviso 3 of 370 should have been adopted by a resolution. In Rajya Sabha, what I heard from friends is this. The Bill was introduced. There was no Resolution at that time. Invariably the proviso should have been adopted by a Resolution. The State Assembly is not there.
श्री अमित शाह: महोदय, राज्यसभा में यहसंकल्प कल पारितकरवा दिया है । हम यहां परलेट नहीं हैं, एडवांसमें हैं । …(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : ठीकहै, मैंनेव्यवस्था देदी है ।
…( व्यवधान)
SHRI T. R. BAALU : It was a later thought. This particular Resolution should have been adopted by the President. Then, only this Bill should have been introduced there in Rajya Sabha or here. Is it not late? The President should have notified.
माननीय अध्यक्ष: माननीय सदस्य, कृपया आसन को संबोधित करें ।
SHRI T. R. BAALU: Sir, addressing my friend is not a sin. They are more comfortable with me because you have always stopped me by saying ‘do not speak’, ‘stop it’. They are more comfortable. They are only my friends. They are not inimical to me. We are working together. Do not worry about these things. We would not fight against each other.
They are very good friends. Of course, they are sweet enemies. …(Interruptions) No problem, Sir. …(Interruptions) The judgement says like this:-
“The first argument was that this article contained temporary provisions.” Yesterday, my friend was saying that the article contained temporary provisions.
“The temporary provisions ceased to be effective after the Constituent Assembly, convened for the purpose of framing the Constitution of the Jammu and Kashmir State, had completed its task by framing the Constitution for that State. Reliance was placed on the historical background in which this Article 370 was included in the Constitution to urge that the powers under this article were intended to be conferred only for the limited period until the Constitution of the State was framed, and the President could not resort to them after the Constituent Assembly had completed its work by framing the Constitution of the State. The background of the legislative history, to which reference was made, was brought to our notice by the learned Counsel by drawing attention to the speech of the Minister, the then Home Minister, Mr. N. Gopalaswami Ayyangar when he moved in the Constituent Assembly Clause 306-A of the Bill, which now corresponds with Article 370 of the Constitution. It was stated by him that the conditions in Kashmir were special and required special treatment. The special circumstances, to which reference was made by him were:-
1. That there had been a war going on within the limits of Jammu and Kashmir State;
2. That there was a cease-fire agreed to at the beginning of the year and that the cease-fire was still on;
3. That the conditions in the State were still unusual and abnormal and had not settled down;
4. That part of the State was still in the hands of rebels and enemies;
5. That our country was entangled with the United Nations in regard to Jammu and Kashmir and it was not possible to say when we would be free from the entanglement.” This is what I wanted to quote first.
The second is paragraph 5.
“We are not impressed by either of these two arguments advanced by Mr. Ramamurthy. So far as the historical background is concerned, the Attorney-General appearing on behalf of the Government also relied on it to urge that the provisions of Article 370 should be held to be continuing in force, because the situation that existed when this article was incorporated in the Constitution, had not materially altered, and the purpose of introducing this article was to empower the President to exercise his discretion in applying the Indian Constitution while that situation remained unchanged. There is considerable force in this submission.” That is what the judges have said. There is a considerable force in his submission.
My point is, you are bringing a legislation. You are bringing a Constitutional change. It is okay. As far as you are concerned, you are right. As far as we are concerned, that is not correct. You are not consulting the State Legislature. You may say the State Legislature is not in existence. Why have you not conducted the elections? This particular Government, the same Government was in power for the last five years and it should have conducted the elections. It should have conducted the Assembly elections also at the time of the Lok Sabha elections.
What I suggest is, the will of the people is not reflected here. The will of the people will be truly reflected when there is an Assembly. He may say that Constitutionally it is correct. In both the Rajya Sabha and Lok Sabha, they can pass the Resolution. They can send it to the President and get it back. The Bill can be passed because they have got a brute majority. Only by virtue of brute majority, these Bills are passed every day. My friend, the Minister of Parliamentary Affairs, is a very shrewd and a smart Minister.
He is producing two or three Bills every day. He is just like a production house of Bills. My friend, the hon. Speaker is also approving everything with a smile without any discussion with us. There is no problem. You are making use of the time. …(Interruptions)
माननीय अध्यक्ष : माननीयसदस्य, पूरेदेश में अच्छामाहौल बन रहाहै कि ज्यादाबिल पास होरहे हैं ।
SHRI T. R. BAALU: The hon. Minister, who is also a good friend of mine, is very shrewd. He is always in preparation. He is always ready to bring in a Bill. Every day he is bringing two or three Bills. I think he has passed about 35 Bills in this Session of Parliament. So, my friend, Mr. Joshi is very efficient, very capable of handling everything. I think he has been trained by my other friend, the hon. Home Minister. …(Interruptions)
I request my friend, the hon. Parliamentary Affairs Minister not to mind it. I am just sharing my views. I want to give a suggestion to the hon. Home Minister and I would straightaway ask him. …(Interruptions)
My dear friend, you are very smart. Why do you want to interfere? …(Interruptions)
SHRI RAVI SHANKAR PRASAD: I will just take half a minute. …(Interruptions) In Vajpayee’s Government, when we were Ministers together, you may recall that we used to pass many Bills, including your Bills through the same way. …(Interruptions)
SHRI T. R. BAALU : Yes, I concur with your views. At times, it was under ‘Vajpayee’s rule’. Please underline that. I cannot say anything over and above that.
The only thing I want to know is, what do you achieve? What is the end result of this? Yes, you are passing the Bills. This Bill too will be passed by evening. You have got majority. Definitely we will be losing. Either we will walk out or we will vote against it. But, at the same time, the net result is, by passing this Bill you are going to change a mighty State Government with a municipality. …(Interruptions) Two municipalities are being created. One municipality will be run by a Joint Secretary and another municipality will be run by another.
The Home Minister is going to appoint Joint Secretaries as Lieutenant-Governors in the States. Lieutenant-Governor of Andamans has been a Joint Secretary. …(Interruptions) Who will listen to all these people? Will there be a rule of law? My only requirement is rule of law, whoever may be the Home Minister to prepare and pass the Bill. But what is the end result? The end result is more important. The end result is that the States will be headed by Lieutenant-Governors, that is, by the Joint Secretaries. They cannot manage the day-to-day administration.
The work of Central Government cannot be managed by the Joint Secretaries. Only Ministers like Shri Ravi Shankar Prasad can do this. Ministers have some say with the Joint Secretaries. Even the new Ministers are not heard by these people. I know what is going on. They cannot do anything themselves. They cannot manage things and deliver services to the people. Even the senior Ministers would agree with it. This is what I am inferring from the Central Government administration.
My dear friend, the only thing that I want to know at the end of the discussion is, what are you going to do with this Bill? There have been a lot of problems like intrusion in the State of Jammu and Kashmir. Even seven intruders have been killed two days back. You are asking your counterpart in Pakistan to come and take these bodies. Otherwise, the bodies will be there and you cannot dispose of the bodies. Can you not hand over these bodies to Red Cross Society? Two days have gone. The mighty Indian Government is begging and requesting the Pakistan Government to come and take these bodies. All television news channels are putting it in their headlines. This is what is happening. It is a day-to-day administration. Security problems have not yet been solved. Our people in border areas are not safe. That is a more important thing. Have you brought any solace to the people who are living at the edge of the border? We are having porous borders. People are intruding every day. Terrorists come and just walk free.
Is there any way to stop terrorists from coming and intruding into our territory? I want to know. The Home Minister is capable of answering and he may answer. At the same time, the end-result will not be there; more complications will arise. That is what we expect. As a responsible opposition member, I can only warn my friends. A friend in need is a friend indeed. I am your friend. We all are your friends.
At the same time, you are capable of handling the situation. You are capable of handling the situation, to deal with the Opposition, by getting brute majority; and I appreciate you. I really appreciate you even though you are all sitting on the opposite side. I appreciate your might and coordination which saw that your party is in power even after five years. Nobody knows whether drawbacks are there. There are umpteen number of drawbacks politically and I can say them, but I do not want to say all these things. At the same time, you have got the majority and you are going to sail through this Bill successfully.
At the end of the day, what are we going to achieve? Why do you not wait for some time? The ‘true will’ will be reflected only by the State Legislature and not by this Parliament. Parliament is not for that purpose. When there is no Government, you can just administer, but at the same time, a clear-cut evidence is there, a judgement is there and it reflects that the particular Constituent Assembly is capable of handling such situations, but you have not given the opportunity to the Constituent Assembly. You should have done it well in advance. Your Bill is just to push your manifesto. In your manifesto, you have said that Article 370 will be abrogated. Since you want to abrogate Article 370, that is being done by you. That is all. This is just to see that the wishes of your party, and not the public, are fulfilled. If you could trust the public that it can vote for you to abrogate Article 370, you should have done it by holding State elections. You were not trusting them at that point of time. You are not trusting the people. That is why, you want to get it passed in the Lok Sabha. That is why, you are bringing it in the Lok Sabha. That is what the higher-ups would have told. You simply put your people there, whether they are defeated or elected. That is not a problem.
Your aim was to get brute majority here and there, but you cannot do it in the South. Why do you not get the things done in the South? You cannot do it in Kerala. You cannot do it in Tamil Nadu. What is the reason for that? You should come forward and say. You are smiling, laughing and heckling, but you cannot heckle me and you cannot heckle my Kerala friends. There is no such chance at all because elite people are not with you. The people who have got awareness …(Interruptions) ...* माननीय अध्यक्ष : माननीयसदस्य, येअकेले हैं ।आपके भी लगभग8माननीय सदस्यखड़े हो गए हैंऔर बोल रहेहैं ।
…( व्यवधान)
SHRI T. R. BAALU : Sir, you have allowed me to speak. I am concluding.
Sir, I am not scolding anybody, but the only thing is that you have allowed me because I have got backbone and not the people without backbones. Why? …(Interruptions) Sir, I am sorry. …(Interruptions) My very senior friends are there from whom I have learnt many things. I have to learn from Shri Ravi also.
Mr. Home Minister, you should have conducted the Assembly elections. Since you are very comfortable, probably you would not have thought of it. Whatever situation is there, corrective measures should be taken. We should see that border management, which is more important, is properly done. Since the border is porous, I would request that this porous condition should be arrested immediately. Our people should live in peace. Pakistan issues cannot be solved by this. Your aim should have been that Pakistan issues should be stopped forthwith. Had that been the cause for bringing this Bill, definitely, I would have supported, but unfortunately, I could not support because you have not done it right.
SHRI SUDIP BANDYOPADHYAY (KOLKATA UTTAR): Hon. Speaker, Sir, I rise to speak on the Jammu and Kashmir Reorganisation Bill, 2019 and the Jammu and Kashmir Reservation (Second Amendment) Bill, 2019.
As far as the second Bill is concerned, there is nothing to oppose because in genuine matters we are always very cooperative. After the abolition of article 370, a war-like situation has arisen, with people of Jammu and Kashmir on the one side and the people of rest of the country on the other side. This situation has been created by the Government. It should not be allowed to continue. Jammu and Kashmir is an integral part of India. We are brothers and sisters to each other. We have that feeling. We have separate sentiments towards Jammu and Kashmir.
Kashmir is known as the paradise of the world. It is called the Bhuswarg. Why should we create a situation as if there is a battle? I do not want to conduct any post mortem as to when article 370 was introduced, how it was introduced, etc. But the fact is when article 370 was introduced or incorporated, maybe at that time it was the most important or an effective step. We cannot say whether it was appropriate or not because we were not alive at that time. At that time, leaders like Pandit Jawaharlal Nehru, Dr. Rajendra Prasad, Maharaja Hari Singh and Sardar Patel had come together and incorporated article 370. Even after Independence, Maharaja Hari Singh could not decide whether Jammu and Kashmir would merge with India or Pakistan. So, ultimately Maharaja Hari Singh, as King of Jammu and Kashmir, had decided to merge Jammu and Kashmir with India. At that time some concessions were given to them. So, it should not always be criticised saying that at that time article 370 was incorporated in a wrong way, in a wrong manner or in a very bad way.
We still believe in the principles of secularism, communal harmony and unity of the country. We believe in the principle of unity in diversity. We believe in the principles of nana bhasha, Nana mat, Nana paridhan, bividher majhe dekho milan mahan. We are the believers of principles of ek jati, ek pran ekota, ei desh amader vidhata.
So, we should always project a situation of harmony. If the Government takes any decision, it can certainly come to Parliament to give effect to that decision by passing a Bill or Resolution with the majority that it has on its own in the Parliament.
But I feel that it could have been better if the matter had been discussed with the leaders of all the political parties of the country before taking such a very crucial step which has shaken the country.
Now the decision has been taken. Jammu and Kashmir is no more a State. I will request the hon. Home Minister to clarify, why it has been shifted to Union Territory. What could have happened if it had continued as a State itself like other States of the country? I want to know from the hon. Minister.
Sir, my question is whether this step will throw Jammu and Kashmir in a direction of more uncertainty and whether law and order situation will remain intact. Already, more than 50,000 Central forces have been deployed there. I do not know whether the Government has made a very positive plan and if so, they should explain and clarify it to the House because there are apprehensions that the situation may become more aggressive, more agitative and it can spread throughout the country in a bad manner.
Sir, we love Jammu and Kashmir by our heart. But horror of terrorism and also activities of terrorists have made this State horrible to visit which is a paradise. We want to become attached and associated with Jammu and Kashmir in a very loving manner, in a very positive manner. But the present situation should not throw this State towards major uncertainty.
Sir, yesterday I was hearing the speeches of the leaders of the Opposition parties, the leaders on the Government side and also the speech of hon. Home Minister in Rajya Sabha. I think that somewhere it is being reflected as lack of constitutional morality and procedural lapses. It should be analysed and clarified to the House by the hon. Home Minister. We are apprehending that such thing has happened.
Sir, we consider that this Bill, as a whole, is not actually accepted by all and, therefore, many questions are being asked and many queries are being enquired not only by the political parties but also by different sections of the people. We feel that Dr. Farooq Abdullah, Shri Omar Abdullah, Madam Mehbooba Mufti, former Chief Minister should be released immediately. Why are they being kept arrested unnecessarily? Will it create or generate further tensions in the country? I want to know whether the Government is aware of the situation and keeping proper information about this.
We feel that this Bill is against the constitutional morality; and a procedural hara-kiri has been committed. If we take part in the voting of this Bill – whether we vote in favour or against the Bill – we will become the partner of this Bill.
This we do not want to become. Hence, as the ultimate conclusion, we have decided to walk out instead of opposing this Bill with a request that no atrocities should happen in Jammu and Kashmir; no torture should happen in Jammu and Kashmir to the residents of that area; they should remain peaceful; they will be allowed to remain in peace and harmony; and they are to be given the opportunity to live as Indian citizens with their full command and confidence.
After saying this, we do not want to be part of this Bill at all whether by support or by opposition. So, the Trinamool Congress is walking out from the House.
12.46 hrs At this stage, Shri Sudip Bandyopadhyay and some other hon. Members left the House.
माननीय अध्यक्ष : दादाआपका चांस गया ।
…( व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : डॉ. जितेन्द्रसिंह जी ।
उत्तर पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्रालय के राज्य मंत्री, प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री; कार्मिक,लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय में राज्य मंत्री,परमाणु ऊर्जा विभाग में राज्य मंत्री तथा अंतरिक्ष विभाग में राज्य मंत्री (डॉ.जितेन्द्र सिंह): अध्यक्ष महोदय,धन्यवाद । जबमैं यह चर्चासुन रहा था,तो मुझसे रहानहीं गया । यहध्यान में आयाकि आज से ठीक66 वर्ष पूर्व11 मई, 1953 को अमृतसर,पंजाब से होतेहुए, पठानकोटसे गुजरते हुए,कठुआ, लखनपुरमेरे क्षेत्रमें से श्यामाप्रसादमुखर्जी ने जम्मू-कश्मीर राज्यमें प्रवेश करतेहुए गिरफ्तारीदी थी । गिरफ्तारीके समय उन्होंनेअपने युवा सहयोगीअटल बिहारी वाजपेयीको कहा था, “Atal, go and tell the world that Shyama Prasad Mukherjee has entered Jammu and Kashmir without permit.”. यदि आज मुखर्जी जिंदा होते, तो अपने मखसूस अंदाज में, अपने अनोखे लबो-लहजे में जिस तरह से वे बात किया करते थे, वे यह कहते - “Go and tell the world, Modi has abrogated Article 370.”.
11 मई, 1953 को उनको बिना कोई कारण बताए हवालात में ले लिया गया । वे लोक सभा के एक माननीय सदस्य थे, बिल्कुल उसी तरह जिस तरह से हम हैं । वे साउथ कोलकाता कांस्टीट्यूएंसी से चुनकर आए थे । वे पूर्व केन्द्रीय मंत्री थे । एक राष्ट्रीय दल जनसंघ के वे राष्ट्रीय अध्यक्ष थे । उन्होंने पहुंचने से पहले अपनी सूचना भी दे रखी थी शेख अब्दुल्ला को, जो उस समय प्रधान मंत्री थे, क्योंकि उस समय नोमेनक्लेचर प्रधान मंत्री का हुआ करता था । इसके बावजूद उन्हें उठाकर 44 दिन हवालात में रखा गया । मुझे ताज्जुब हुआ उस संवेदनशीलता पर,जो अभी व्यक्त हुई । अभी 24 घंटे भी नहीं गुजरे कि साहब कहाँ हैं,कहाँ हैं, कहाँ हैं? अभी तो किसी ने कहा भी नहीं कि यहाँ का कोई माननीय सदस्य अरेस्ट हुआ है । इतनी संवेदनशीलता,यही राजनैतिक दल, यही राजनेता, 40 दिन नहीं 44 दिन, बिना किसी प्रोटोकॉल के, बिना किसी नियम के, यदि उनका यही आरोप था कि वे बिना अनुमति के प्रवेश कर रहे थे, तो कितने नाके क्रॉस करके लोग आते हैं, उनको धकेल दिया जाता है, उन्हें गाड़ी में डालकर वापस पंजाब भेज दिया जा सकता था । लेकिन पब्लिक सेफ्टी एक्ट लगाकर,मानो एक सोचे-समझे षड़यन्त्र के अंतर्गत उन्हें हवालात में रखा गया । 23 जून को जब संदिग्ध परिस्थितियों में उनकी मृत्यु होती है, तड़के,प्रात: ढाई-पौने तीन बजे,तो 5-6 घंटे तक किसी को सूचना नहीं दी जाती है । न उनके परिवारजनों को और न ही वहाँ के स्थानीय जनसंघ,प्रजा परिषद के नेताओं को,पंडित प्रेमनाथ डोगरा को, अन्य लोगों को और लगभग 2 बजे आकाशवाणी पर उनकी मृत्यु की सूचना आती है । अगले दिन जब उनका शव कलकत्ता पहुँचना था, पश्चिम बंगाल के मेरे साथी इस बात से परिचित हैं कि वहाँ उनके शव को रिसीव करने के लिए जनसमूह उमड़ा था । श्रीनगर से मात्र 7 हजार रुपये किराया देने के लिए सरकार ने पेशकश नहीं की थी ।
आज किस संवेदनशीलता की दुहाई दी जा रही है कि साहब पता नहीं कौन हवालात में चला गया, क्या हो गया?किसी ने कहा भी नहीं फिर भी । हम जम्मू-कश्मीर के कार्यकर्ता विशेषकर पिछले 60 वर्षों से संघर्ष करते रहे, गिरफ्तारियां देते रहे, आंदोलन करते रहे, प्रतिवर्ष उनका पखवाड़ा बनाते रहे । आज उनको सही में श्रद्धांजलि देने का समय आया है ।
जब इतिहास रच रहा होता है तो उसके पात्र होते हैं, उनको इस बात का एहसास नहीं होता, लेकिन भविष्य में जब कोई इतिहासकार इतिहास लिखेगा और इतिहास को पढ़ेगा,तो मुझे विश्वास है कि 303 के 303 सदस्य भाजपा के, जो यहां बैठे हुए हैं,क्षमा कीजिए एनडीए के भी सदस्य,गर्व से अपने बच्चों को, अपने नाते-नातियों को कह सकेंगे कि 17वीं लोक सभा में जब यह विधेयक पारित हुआ था तब हमने भी इसके पक्ष में वोट दिया था । माननीय सदस्यगण, जो भी समर्थन दे रहे हैं, मुझे विश्वास है कि आपको भी अपने बच्चों से यह कहते हुए गर्व महसूस होगा कि मैं उस समय 17वीं लोकसभा की सदस्य थी या था और मैंने भी इसके पक्ष में वोट दिया था जैसा मैंने कल भी राज्य सभा में कहा – Even before this debate concludes, and even before the Home Minister completes his reply, this day has already gone down in the history of India as a day of redemption, as a day of rejuvenation, and as a day of resurgence.
जहां तक अनुच्छेद 370 का संबंध है । मैं पहले भी बहुत बार कह चुका हूं – It was a miscarriage of history. Perhaps, the greatest and the gravest blunder in the post-Independence India. आज 70 वर्ष बाद प्रायश्चित्त की घड़ी आई है । हमें 70 वर्ष इंतजार करना पड़ा । शायद विधाता को यही मंजूर था कि नरेन्द्र मोदी जी प्रधान मंत्री बनें और अमित शाह जी गृह मंत्री बनें तो यह प्रायश्चित्त का पुण्य कार्य उनके हाथों से हो ।
माननीय मनीष तिवारी जी हमारे मित्र हैं । उन्होंने अपना संबोधन इस प्रकार प्रारंभ किया – यह सब कुछ जो हुआ है,जिस आकार में जम्मू-कश्मीर आज है, उसका श्रेय पूरी तरह तत्कालीन प्रधान मंत्री जवाहर लाल नेहरू जी को जाता है । हमारा कभी उद्देश्य नहीं रहा, that we find fault with our predecessors. स्वतंत्र भारत की यात्रा 70 वर्ष तक चली है,निश्चय ही सबका योगदान रहा । मैं नहीं कहता, इतिहासकार कहते हैं, Not only the history of Jammu and Kashmir but also the history of Indian subcontinent would have been different if Nehru had played a different role. यदि उन्होंने मात्र इतना किया होता कि गृह मंत्री को गृह मंत्री के रूप में जम्मू-कश्मीर के विषय को उसी तरह से हैंडल करने दिया होता जिस प्रकार से उन्होंने बाकी रजवाड़ों को किया,जिसका इशारा मनीष जी कह रहे थे, जूनागढ़ और हैदराबाद । लेकिन जम्मू-कश्मीर के मामले में सरदार पटेल जी को दखल नहीं देने दिया गया । Let me put the record straight. Let me add to what he did not say. He said, Junagarh was sorted out; Hyderabad was sorted out but it was Sardar Patel who was handling it, whereas Pandit ji believed that he knew Jammu and Kashmir better than Sardar, therefore, he was kept out of it. …(Interruptions)
SHRI MANISH TEWARI: I do not want to interrupt the Minister but if he yields for a moment, I would like to ask him this. …(Interruptions)
DR. JITENDRA SINGH: Okay. …(Interruptions)
SHRI MANISH TEWARI : There is the Prime Minister, the Home Minister and other Ministers; when they take the decision, they take it collectively, not individually. So, this kind of cherry-picking which you keep doing is completely anti-democracy. I would like to say that with great respect, Mr. Speaker, Sir.
DR. JITENDRA SINGH: Having yielded, I have listened to his query and I am pleased to respond to it because incidentally, in his query was his answer. That is precisely what I am saying. The propriety of collective responsibility was violated by the Prime Minister when he intruded into the domain of his Home Minister. क्या अधिकार था? गृह मंत्री को गृह मंत्री के रूप में जम्मू-कश्मीर के विषय में, …(व्यवधान) And that is exactly the violation of the collective responsibility …(Interruptions). I am not yielding now. I yielded and responded …(Interruptions).
माननीय अध्यक्ष: माननीय मंत्री,जितेन्द्र सिंह जी की बात अंकित होगी ।
… …(व्यवधान) * डॉ. जितेन्द्र सिंह:अगर नेहरूजी जम्मू-कश्मीरके विषय मेंदखल न देतेतो न यह बखेड़ाहोता अनुच्छेद370का और न हीआज यह बिल लानापड़ता और न हीपाक अधिकृत जम्मू-कश्मीर होता । जब भारत कीसेनाएं मीरपुरतक पहुंच चुकीथीं, पाकिस्तानकी सेनाओं कोखदेड़ा जा रहाथा, प्रधानमंत्री ने कलैक्टिवरिस्पांसिबिलिटीके नियम कावाएलेशन करतेहुए, बिनाअपने मंत्रिमंडलको कॉन्फिडेंसमें लिए हुए,सीधा मंडीहाउस जाकर आकाशवाणीमें कौम केनाम संदेश दियाऔर कहा कि मैंयुनिलैटरल सीज़फायर की घोषणाकरता हूं । अगरवह न होता तोआज पाक अधिकृतजम्मू-कश्मीरभारत का हिस्साहोता । …(व्यवधान)
SHRI MANISH TEWARI: What kind of constitutional propriety are you talking about? …(Interruptions).
DR. SHASHI THAROOR (THIRUVANANTHAPURAM): That is not historically accurate. …(Interruptions)
DR. JITENDRA SINGH: I am not yielding now. …(Interruptions).
यूएनओ की बात कही गई । जब माननीय गृह मंत्री अमित शाह जी उठे, इस बात का उत्तर देने के लिए, यह पूछने के लिए कि आप किस पक्ष में हैं? …(व्यवधान)
अब इन्होंने विषय बदल दिया,आप मुझे बताएं । आप तो इतिहास पढ़कर आए हैं, मैं समझ गया,आपने 1846 से इतिहास चलाया है,मैं सारा सुनाऊंगा,मैं 400 पीछे भी जाऊंगा और आज तक पर आऊंगा । …(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष जी, मैं आपके माध्यम से एक बात कहना चाहता हूं,यह सच है कि स्वतंत्रता के समय भारत के दो हिस्से थे,एक था ब्रिटिश इंडिया और दूसरा था प्रिंसली इंडिया । प्रिंसली इंडिया का यह हिस्सा था,उस समय जब इंस्ट्रुमेंट आफ एक्सेशन साइन हो चुका, जैसा कि माननीय मनीष तिवारी जी ने स्वयं कहा । वही इंस्ट्रुमेंट आफ एक्सेशन 500-550बाकी राजाओं ने किया था, तो क्या आवश्यकता थी प्रधान मंत्री जी को यूएनओ में जाने की? फिर तो बाकी रजवाड़ों के लिए भी यूएनओ जाते? …(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष: मैं फिर निवेदन करना चाहता हूं,माननीय मनीष जी का जवाब मंत्री जी तब तक न दें जब तक मेरी परमिशन न हो । ठीक है, माननीय मंत्री जी । आपको किसी माननीय सदस्य का कोई जवाब नहीं देना है, जब तक मैं आपको परमिट न करूं ।
…(व्यवधान)
श्री रमेश बिधूड़ी (दक्षिण दिल्ली):ये … * माननीय अध्यक्ष: आपकोबोलने की इजाजतनहीं दी गईहै ।
…(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष: आप बैठ जाएं ।
…(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष: माननीयसदस्य, आपदोनों एक हीव्यवहार के लोगहैं, एकही नेचर केहैं । यह भीइसी नेचर केहैं और आप भीइसी नेचर केहैं ।
…(व्यवधान)
13.00 hrs डॉ. जितेन्द्र सिंह:अध्यक्ष महोदय, बिनामाननीय सदस्यका नाम लेतेहुए, मुझेविश्वास है किआप इतनी अनुमतिजरूर देंगे किजो आरोप लगाएगए हैं, उनकाउत्तर दिया जासके ।
मुझे हैरतइस बात की हुईकि कांग्रेसको किस बातकी आपत्ति है । हम तो उनकाअधूरा एजेंडापूरा कर रहेहैं । पंडितजवाहर लाल नेहरूस्वयं यह कहगए थे कि यहअस्थायी है औरकई बार जब उन्हेंअपने आलोचकोंका सामना करनापड़ता था, तो वे कहतेथे कि आप धीरजरखिए ‘येघिसते-घिसतेघिस जाएगी’ । This is the exact phrase used by Pandit Jawaharlal Nehru.जब आप नहींघिसा सके तोमोदी जी औरअमित शाह जीघिसा रहे हैंतो आप लोगोंको उनका धन्यवादकरना चाहिए ।इतना ही नहींPlease go back and see the records of the Parliament. वर्ष1964 में जबशास्त्री जीप्रधान मंत्रीथे । इसी सदनमें एक व्यापकबहस हुई थी,उसका उत्तरदेते हुए तत्कालीनगृह मंत्री गुलजारीलाल नंदा नेकहा था कि सारेहाउस का यहमत है कि अनुच्छेद370 के जानेका समय आ गयाहै, लेकिनहमें कुछ समयदिया जाए । सरकारइस पर विचारकरके यह निर्णयलेगी कि कैसेआगे बढ़ना है । फिर परिस्थितियांबदल गईं, शास्त्री जीका स्वर्गवासहो गया, इंदिराजी आ गईं, फिर 1975 कीकहानी शुरू होगई, जब शेखअब्दुल्ला कोवापस लाया गया,मैं उसमेंनहीं जाना चाहता । उसके उपरांत वर्ष 1994 में कांग्रेसकी सरकार, कांग्रेस केप्रधान मंत्रीमाननीय नरसिम्हाराव जी, जिनकानाम कम लियाजाता है, वे प्रस्तावलाए और हमारेदल ने उसकासमर्थन किया । सर्वसम्मतिसे वह प्रस्तावपारित हुआ,जिसमें कहागया था- Kashmir is an integral part of India. If at all there is an issue, it is how to retrieve back the part of Pak-Occupied Jammu and Kashmir. जब यहबात आपके दलने ही मानी,आपकी सरकारने मानी तोफिर बहस कीबात क्या रहगई? कश्मीरका तो कोई मुद्दाही नहीं है,मुद्दा तोपीओके का है । आज बहस होनीही नहीं चाहिएथी । …(व्यवधान)आप कहते हैं कि कश्मीर की असेम्बली को कांफीडेंस में क्यों नहीं लिया गया, बहुत … * हुआ है, क्योंकि वहां राष्ट्रपति शासन लागू है । हालांकि संवैधानिक दृष्टि से इस पर कोई आरोप नहीं लगा सकता, आलोचना नहीं कर सकता ।
अब मैं एक गंभीर बात करने वाला हूं, जिसमें कुछ लोगों को आपत्ति भी हो सकती है । But you will have to bear with me, and you can check the record, because I am saying this with all the responsibility at my command. Go through the proceedings of Jammu & Kashmir State Assembly on 2nd March, 1981. The then Chief Minister Sheikh Abdullah himself says that Article 370 can be a stumbling block also for progress. ये शेख अब्दुल्ला ने कहा था, जो आपके समर्थन की सरकार थी । आज आपको बड़ी चिंता हो रही है कि कौन कहां है,अंदर है कि बाहर है? यह तो उनका भी मानना था । कहने का तात्पर्य यह है कि 60 के दशक तक, 70 के दशक तक लगभग यह राय बन चुकी थी कि अनुच्छेद 370 को जाना चाहिए । उसके बाद वेस्टर्न इंट्रेस्ट डेवलप हो गया । इन सभी दलों के राजनीतिज्ञों की अगली पीढ़ी आई,वे अनुच्छेद 370 को जकड़कर बैठ गए क्योंकि इसके नाम पर उनको 8-10 प्रतिशत वोट टर्न आउट करके सांसद तथा विधायक बनने का अवसर मिल जाता था तथा सरकारें भी बनाते थे और हमें कहा जा रहा है कि आप प्रजातांत्रिक उसूलों का हनन करके, उल्लंघन करके यह बिल लाए हैं तो आप मुझे बताइए कि आप लोगों ने क्या किया?वर्ष 1953 तक आप लोगों ने शेख अब्दुल्ला को चलाया, 1953 में उठाकर उनको कोडाइकनाल भेज दिया ।
13.04 hrs (Shri Rajendra Agrawal in the Chair) यह आपकी प्रजातंत्र के प्रति मान्यता है । वर्ष 1983 में फारूख अब्दुल्ला,जिनकी चिंता बालू जी कर रहे थे, ठीक कर रहे थे क्योंकि वे हमारे एक सीनियर सदस्य हैं, उनको मुख्य मंत्री बनाया । लेकिन,कुछ ही समय के बाद उनका तख्ता पलट कर उन्हीं की पार्टी के लोगों को बीच से डिफेक्ट करवाकर आपने उन्हीं के बहनोई को मुख्य मंत्री बनाया । वर्ष 1987 में जिस प्रकार की रीगिंग हुई है, जब दोनों दल मिलकर सरकार चला रहे थे, उसका खामियाजा यह भुगतना पड़ा रहा है कि आज तक आतंकवाद का लम्बा दौर वहां पर चलता आ रहा है ।
अब नेशनल कांफ्रेस की बात की गई । 1953 तक वे भारत के साथ थे । माननीय सदस्य बैठे हैं, he can correct me on record. सन् 1953 के बाद जब आप कोडैकानल पहुंचे तो वहां की ठंडी हवा में आपको नई ज्ञानवृद्धि हुई, आपने प्लेबिसाइट की बात शुरू की,आपने रेफरेंडम की बात की, जनमानस की राय जानी जाए । आपकी प्रतिबद्धता तो आपके आवाम के प्रति भी नहीं है, कश्मीर के लोगों के प्रति भी नहीं है । फिर 20-22 वर्ष का वनवास गुजरा । सन् 1975 में इंदिरा जी ने आपको पुन: मुख्य मंत्री की गद्दी पर बैठाया,आपने प्लेबिसाइट फ्रंट को डिसाल्व कर दिया । I am not yielding. …(Interruptions) You can respond later Shashi Ji. In order to justify the U-turn, a Committee was constituted, headed by the then Finance Minister of the State, called the Devidas Thakur Committee. This is all on record. उस कमेटी ने यह रिपोर्ट दी कि भारत के संविधान के जितने भी प्रावधान कश्मीर में लागू हुए हैं, बावजूद आर्टिकल 370 के,वह देश हित में और प्रदेश हित में हैं । This is what Sheikh Abdullah accepted. आर्टिकल 370 के बावजूद जहां आपको सुविधा लगी,वहां आप प्रावधान लाए, जहां नहीं लगी, वहां आप नहीं लाए । अब कहा जाता है कि आर्टिकल 35 ए का और 370 का क्या किया,आपने किसी को पूछा क्यों नहीं?मैं उस बात पर दो क्षण के बाद आऊंगा, पहले मुझे यह बताइए कि आपकी आर्टिकल 35 ए और 370 के प्रति क्या प्रतिबद्धता है? सन् 1975 में इंदिरा जी ने जब इमरजेंसी लगाई तो एक काला कानून आया, जिसको भरे मन से इतिहास अभी भी स्मरण करता है । कांस्टिट्यूशनल अमेंडमेंट 42 और 43 जिसके तहत विधान सभाओं का अवधि काल पांच वर्ष से छ: वर्ष किया गया, शायद इंदिरा जी को उस समय लगता था कि चुनाव कराने के लिए अभी अनुकूल वातावरण नहीं है । उस समय शेख अब्दुल्ला मुख्य मंत्री थे,उन्होंने तुरन्त उसको अपना लिया,तब उन्हें आर्टिकल 370 नहीं दिखा, 3 वर्ष के बाद श्री मोरारजी भाई ने उसे रिवर्स किया आर्टिकल 45 और 46 में सारे प्रदेशों की विधान सभाओं का कार्यकाल छ: वर्ष से घटाकर पांच वर्ष कर दिया गया । आपका वैसा का वैसा रहा, उस समय आपने 370 की आड़ ले ली । You have misused Article 370 for your own political benefits and you have been disloyal. You have been disloyal to Article 370. You have been disloyal to your own people. अब मैं आर्टिकल 35 ए के बारे में बताता हूं । बहुत पुरानी बात नहीं है, यह पिछले वर्ष की बात है । जो पंचायत का चुनाव होता है,उसका आपने बहिष्कार किया । It is on record. You said publicly that we are not contesting Panchayat election till the issue of Article 35A is resolved. चलिए मान लिया यह आपका दृष्टिकोण है, आपको मुबारक है । आपकी आस्था आपकी प्रतिबद्धता की हम इज्जत करते हैं, फिर ऐसा क्या हुआ कि आप तीन महीने बाद ही लोक सभा के चुनाव में आ गए, तब आप आर्टिकल 35 ए को भूल गए, क्योंकि आपको लगा कि 8 से 10 प्रतिशत वोट बैंक होगा और यहां हम आ जाएंगे । बालू जी के साथ बैठ जाएंगे और यह 8 से 10 प्रतिशत वोटर टर्न आउट की जो संस्कृति पिछले तीस-चालीस वर्ष से घाटी में पनपी है, इसी ने सबसे ज्यादा नुकसान किया और यही आज इस विधेयक का विरोध भी कर रहे हैं । वह पार्टी जो अटॉनमी की बात करती है वह पंचायत के लिए अटॉनमी में विश्वास नहीं रखती, इसलिए पंचायत के चुनाव का बहिष्कार किया । इसलिए 73 और 74 अमेंडमेंट,जो राजीव गांधी जी लाए थे, वह बहुत बढ़िया कानून था, उसको आपने एक्सेप्ट नहीं किया । Then, autonomy for whom? Is it for the family, for the dynasty? इसलिए एक बात अभी आई है,बालू जी हमारे सीनियर हैं, उन्होंने भी और हमारे मित्रों ने भी कहा कि स्टेक हॉल्डर्स से बातचीत ही नहीं हुई, तो मैं बड़ी हैरत में पड़ जाता हूं कि कौन है वे स्टेक हॉल्डर्स । Is this Parliament not a stakeholder? We are all stakeholders. As long as Kashmir is a part of India, each one of the 130 crore citizens of India is a stakeholder. And we, sitting in this House, represent 130 crore people of India. हमसे ज्यादा स्टेक हॉल्डर्स और कौन है । आपकी मानसिकता में तीन नाम घुसे हैं । वे तीन नाम है,वे तीन छवियां है, उनसे बात हो तो वे स्टेक हॉल्डर्स हैं । कश्मीर अगर हमारा है तो हम स्टेक हॉल्डर्स है ।
यही नहीं, कश्मीर में रहने वाला कश्मीरी पंडित,जिसको खदेड़कर निकाल दिया गया,जिसे रातों-रात अपना चूल्हा,अपनी रसोई छोड़कर भागना पड़ा, वे भी स्टेक होल्डर हैं, वहां के सिख भी स्टेक होल्डर हैं । पश्चिम पाकिस्तान से आए हुए शरणार्थी स्टेक होल्डर हैं । उन्हें आज तक नागरिकता नहीं दी गई । मुझे नहीं लगता है कि विश्व में इस प्रकार का कोई उदाहरण है । इसी देश में दो प्रधान मंत्री हुए, जो पश्चिम पाकिस्तान से शरणार्थी बनकर आए थे – माननीय डॉक्टर मनमोहन सिंह जी और माननीय इन्दर कुमार गुजराल जी,लेकिन जिन्होंने जम्मू-कश्मीर में शरण ली, उन्हें आज तक नागरिकता का अधिकार नहीं दिया गया । Are they not the stakeholders? फिर कहा गया कि this Bill has been brought in a hurry. यह आरोप कल भी लगाया गया और आज भी कि बहुत जल्दी-जल्दी लाया जा रहा है । ऐसा किया गया । …(व्यवधान)ठहरिए, मैं कानून का विद्वान नहीं हूं, लेकिन थोड़ा-बहुत पढ़ा है आपसे । हमने यह तो नहीं किया कि रात में राष्ट्रपति को जगाकर इमरजेंसी के दस्तावेज पर दस्तखत कराए हों । हमने यह तो नहीं किया कि जैसे प्रधान मंत्री के खिलाफ इलाहाबाद के एक जज ने निर्णय दे दिया तो हमने छुट्टी के दिन संसद का इमरजेंसी सेशन बुलाकर, छुट्टी के दिन इमरजेंसी को पास कराया । हमने ऐसा नहीं किया । हम इतने बेरहम तो नहीं हुए । वह शनिवार का दिन था । हमने किसी की छुट्टी कैंसिल नहीं की । हम पर आरोप लगाया जा रहा है । The pot is calling the kettle black? …(व्यवधान) हमने तो सोमवार को किया है । आपने 17 मुख्य मंत्रियों को हस्ताक्षर करने के लिए दिल्ली बुलवाया । हमने ऐसा घोर अन्याय और अत्याचार नहीं किया । फिर कहा गया कि इसे स्टेट असेम्बली से क्यों नहीं किया गया । मुझे लगता है कि माननीय गृह मंत्री जी ने इस बात का स्पष्टीकरण दे दिया है कि जहां पर भी राष्ट्रपति शासन होता है,वहां ऐसा ही होता है । इसका उत्तर आन्ध्र प्रदेश के हमारे मित्रों ने दे दिया है । मैं नहीं चाहता हूं कि फिर से आपके ऊपर वह नजला गिरे । वह बात हम पहले कर चुके हैं, क्योंकि आन्ध्र प्रदेश और तेलंगाना के विषय में वह बात आ गई है । वहां राष्ट्रपति शासन भी नहीं था । …(व्यवधान) सभापति महोदय,अब बात आती है – एलियनेशन की । …(व्यवधान)वह गलत था या सही, यह आपको आन्ध्र प्रदेश के मित्र बताएंगे । …(व्यवधान)आप बता दीजिए । …(व्यवधान)आपके पीछे ही उत्तर है ।
HON. CHAIRPERSON : Please sit down.
…(Interruptions)
HON. CHAIRPERSON: Nothing will go on record.
…(Interruptions)… * डॉ. जितेन्द्र सिंह:चूंकि आपकाउत्तर आपकी हीबेंचेज से आरहा है, इसलिएमुझे उसका उत्तरदेने की आवश्यकतानहीं है ।
अब बात यहआई कि अनुच्छेद370हटा दिया गयातो एलियनेशनहो जाएगी । हमेंअंग्रेजी केतीस-चालीसबड़े-बड़े लच्छेदारलफ्ज़ हमें सुनाएगए और हमेंठगा गया – एलियनेशन, एस्पिरेशन आदि,इतनी ज्यादाफिलॉसफी सुनाईगई । मैं जमीनका कार्यकर्ताहूं, पूरेदावे के साथकहता हूं किअगर एलियनेशनहुई है तो अनुच्छेद370 के कारणहुई है । आपनेवहां के युवाओंको बाकी भारतके युवाओं सेजुदा रखा । आपनेवहां के नागरिकोंको ऐसी मानसिकतामें डाल दियाकि आप अलग हैं । उन्हें न यहांके हित और लाभपहुंचे और नही उनकी मानसिकताउस प्रकार विकसितहो सकी, जिसप्रकार देश केबाकी नागरिकोंकी हुई । इसलिएआज जब से अनुच्छेद370 हटाने कीबात आई है,सारे भारतवर्षमें और जम्मू-कश्मीर मेंहर्षोल्लास कामाहौल है । अगरचिन्ता है तोदो-चार उनलोगों को है,जो अलगाववादीराजनीति करतेहैं । I would say that they are also not true to this ideology of separatism. They are separatists by convenience, not by conviction.अगरवे कन्विक्शनके साथ होतेतो अपने बच्चोंको विलायत पढ़नेन भेजते औरपड़ोसी के बच्चोंको पत्थरबाजन बनाते । कश्मीरकी आवाम कोउन्होंने ठगाहै । साथ हीसाथ, अगरचिन्ता है तोउन दो-तीनपरिवारों कोहै, जो 10प्रतिशत वोटबैंक के लाभार्थीहैं । …(व्यवधान)
जब वे सत्ता से बाहर होते हैं, तो रातो-रात कश्मीर भारत का हिसा है या नहीं है, उन्हें यह प्रश्न सताने लगता है, लेकिन उन्हें सत्ता पर बैठा दीजिए, तो दूसरे दिन वे कहेंगे कि कश्मीर अभिन्न अंग है । यह उनकी कन्विक्शन है । साथ ही साथ,उनके साथ वेस्टर्न इन्ट्रेस्ट जुड़ गया है और वे चाहते ही नहीं हैं कि कश्मीर के हालात सामान्य हों । यदि वह सामान्य हो जाएगा, because they have learnt to thrive, flourish and sustain their politics in an atmosphere of vacuum. अगर माहौल खुल जाए और उनके साथ हमारे कुछ बुद्धिजीवी जुड़ जाएं । इस देश में कुछ वर्षों से एक नया चलन शुरू हुआ है, कश्मीर घाटी दो-चार दिन हो आइए और वापस आकर किताब लिख डालिए तो आप कश्मीर एक्सपर्ट माने जाते हैं । अगर एलिनेशन का कोई समाधान है, तो इसी में है कि धारा 370 को हटाया जाए । अब कहा जाता है कि बेरोजगारी बढ़ जाएगी । वहां पर बेरोजगारी के कारण आतंक आया । क्या बेरोजगारी बिहार में नहीं है, क्या बेरोजगारी आंध्र प्रदेश में नहीं है? वहां क्यों नहीं आतंक आया? यहां इसलिए आया कि article 370 proved to be a facilitating factor for the promoters of terrorism. पाकिस्तान को मौका मिला,क्योंकि आपने उसको अलग-थलग रखा था, इसलिए उनको यह मौका मिला । अगर वे खुले माहौल में रहते, तो शायद पाकिस्तान के भी मनसूबे वहां पूरे नहीं हुए होते ।…(व्यवधान)मैं अपनी बात समाप्त करने से पहले मात्र इतना कहूंगा कि कश्मीर का आम युवा और I said this even yesterday, हम मानें या न मानें, हमें यह बात पसंद हो या पसंद न हो, the common man in the streets of Srinagar is rejoicing over abrogation of Article 370. …(Interruptions) लेकिन एक खौफ का पर्दा उन्हें रोके हुए है ।…(व्यवधान)आप गलतफहमी के शिकार हैं ।…(व्यवधान) आठ प्रतिशत वाले शिकार हैं ।…(व्यवधान) I hope someday this school of thought emerges in this country that we should have a minimum threshold to accept a Member as a Member of Lok Sabha. …(Interruptions) तब तक हमें आठ प्रतिशत और दस प्रतिशत वोटर्स टर्न आउट को बर्दाश्त करना पड़ेगा । I hope someday a school of thought emerges and suggest this that we have a minimum threshold voter turn-out to accept a Member as a Member of Lok Sabha. …(Interruptions) मैं विज्ञान का विद्यार्थी हूं ।…(व्यवधान)
माननीय सभापति : कृपयाआप बैठ जाइए ।
डॉ. जितेन्द्र सिंह : सभापति महोदय, मैं जो बात कहूंगा,वह प्रमाण सहित कहूंगा ।…(व्यवधान)कश्मीर का युवा आज इतना ऐस्पिरेशनल है कि sometimes one tends to believe that he is more aspirational compared to his peers and counterparts in other parts of the country and I am saying this with evidence. पिछले चार-पांच सालों से लगातार हर साल सिविल सर्विसेज और आईएएस की परीक्षा में, मैं डीओपीटी के साथ संबंधित हूं, एक न एक टॉपर कश्मीर के आतंक प्रभावित जिलों से होता है ।…(व्यवधान) We are not wrong, but you want it to be wrong so that your politics of perversion can thrive. …(व्यवधान)हर साल 35-40 बच्चे आईआईटी जेईई की परीक्षा में उत्तीर्ण हो कर, इंजीनियरिंग कॉलेज और एनआईटी में जा रहे हैं । हर वर्ष 40 और 50 बच्चे आतंक प्रभावित जिलों से ‘नीट’ की परीक्षा में उत्तीर्ण हो कर देश भर के मेडिकल कॉलेजेज में जा रहे हैं । इनको चिंता है कि सारा देश इसी झांसे में रहे कि हालात बहुत खराब है,हमारे बगैर गुजारा नहीं है । हमें वहां बैठा दीजिए । ये दो परिवार 40 सालों तक इस देश को …* रहे और आज भी … * का प्रयास कर रहे हैं । But their time is up now. Their time is up कि हमारे बगैर कोई गुजारा नहीं । I am giving you evidence, figures and statistics of the number of youth who have emerged from the most terror-affected districts of Kashmir and have done better for themselves compared with their peers in other parts of India.
Therefore, to conclude, I would just say that we are a part of a global world. मेघवाल जी का आदेश है कि इस बार शेर नहीं आया । मैं मात्र इतना कहूंगा कि we are a part of a global world and India has already become an intrinsic part of this global world.
We have absolutely no right to deprive the citizens of Jammu and Kashmir to be a beneficiary of this global culture which is developing. Enormous avenues are unfolding in contemporary India, particularly under the leadership of the Prime Minister, Mr. Modi. The youth of Kashmir has moved on in the development journey of new India. हमें कोई अधिकार नहीं है कि हम धारा 370 या दूसरी अड़चनें डालकर उन्हें वंचित रखें । जैसा मेघवाल जी ने कहा कि हमारी आकांक्षाएं एक जैसी, हमारी उम्मीदें एक जैसी,हमारी मजबूरियां,हमारी बेबसियां भी एक जैसी, हमारा इतिहास भी एक जैसा । मेघवाल जी ने शेर बोलने के लिए कहा, मैं कहता हूं – “मेरी जमीन भी तुम्हारी जमीन से मिलती है दिदा-ए पीर-ए हस्ती बेबसी भी एक सी है । ” हमारी कहानी पूर्वजों से अब तक एक जैसी, हमारी बेबसियां एक जैसी, हमारी उम्मीदें एक जैसी,हमारी जमीन एक जैसी, तो क्यों न आप वहां जाकर जमीन खरीद सकें?To conclude, I will just say that the common man of Kashmir has moved on. Some of the politician friends are still stuck in the past and they are still trying the tricks of the past. But this is the third generation – post 90 generation. They go by evidence. वे अपने माता-पिता पर भी तब तक यकीन नहीं करते, जब तक कि तर्क के साथ उनके आगे बात न रखें । let us not do injustice to them. I would conclude by saying that there is no such issue as Kashmir issue. यह बार-बार कह कर कि यह मुद्दा है, यह मुद्दा है हम उन लोगों को हथियार देते हैं नैरेटिव बनाने का, जो चाहते हैं कि मुद्दा बने रहे ताकि उनकी राजनीति चले और बुद्धिजीवियों की बुद्धिजीवी चले । If at all there is an issue – this is what was stated by the Congress Government and we supported it – it is POJK. How to retrieve back Pak Adhikrit Jammu and Kashmir. वही एक विषय है और मुझे विश्वास है जब मैं प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी का धन्यवाद करता हूं, जब मैं धन्यवाद करता हूं गृह मंत्री श्री अमित शाह जी का, उनकी क्षमता का कि जिस प्रकार से यह विधेयक लाया गया है, मुझे विश्वास है कि अब अगला काम हमारा यही बचा है कि पाक अधिकृत जम्मू-कश्मीर को किस प्रकार भारत का हिस्सा बनाया जाए ।
SHRI RAGHU RAMA KRISHNA RAJU (NARSAPURAM): Sir, I thank you for giving me an opportunity to speak on such an important Bill.
Today, my Parliamentary Party Leader, Mr. Midhun Reddy, has gone to receive our hon. Chief Minister, Shri Y.S. Jagan Mohan Reddy Ji. That is why, I am speaking on his behalf.
To start with, today is a wonderful day in the history of India where the unification of the country is going to happen and the dream of Sardar Patel Ji will be fulfilled through Shri Narendra Modi Ji. So, today it is going to be an historic day like August 15.
It is very clearly mentioned that article 370 is a temporary and a transitional provision. I do not know why people are making an issue out of this. When it is being abrogated, there is no need to make such an issue out of it.
In this regard, the hon. Member who had spoken on behalf of Congress Party is, undoubtedly, very thorough with the history right from Shri Gulab Singh days, but he should also know what happened in this august House during the separation of Andhra Pradesh. The hon. Member mentioned that the then Assembly of the undivided Andhra Pradesh had supported the division which is factually and totally incorrect. It was rejected with two-thirds majority and sent to Parliament. The then Chief Minister, Mr. Kiran Kumar Reddy, had resigned in protest. At the time of elections, he was not the Chief Minister. So, this is the actual fact. How the Government has done is that under article 3 read with article 4 some consultations were done for 3-4 years under Justice Srikrishna Commission. But it was wrongly interpreted and the State was divided.
I am able to say this so authoritatively because I was the first person who filed a case in Supreme Court against the bifurcation of the State of Andhra Pradesh. We represented all these facts before the Supreme Court. Initially the Court said why there is a thinking on our part that the Parliament or the Government would violate the provisions of the Constitution. Subsequently, when the bifurcation finally took place the Court said that since it has now happened, they had nothing to do about it. The interesting part is that the case is still pending before the Supreme Court. This is a separate story which has no direct bearing on the provisions of the Bill. …(Interruptions)I am neither supporting the Congress, nor the BJP led Governments. I am only bringing the facts to the notice of this august House.
Sir, with regard to removal of article 370 I would like to submit that every day, during this Session, we have seen that the House is passing two to three Bills and in the passage of every Bill we find that the provisions of the Bills are applicable to the entire country except to the State of Jammu and Kashmir. After the passage of this Bill, we will not have this anomaly. We have one flag; we are one country and we have one Constitution. This has been possible only because of the efforts of the hon. Prime Minister, Shri Narendra Modi ji.
Sir, I would like to say that the strongest of all metals is Tungsten and then comes Titanium and Chromium. In this august House we have an alloy which is a combination of Shri Narendra Modi, Shri Amit Shah and Shri Rajnath Singh, the Defence Minister. With this combination we are going to have the best governance. We believe that we will have the best governance after the bifurcated status of the State of Jammu and Kashmir and Ladakh. The country is going to be very safe and the real dreams of people will come true in the coming days.
But here I would like to bring one fact to the notice of this august House that a lot of injustices have been done to the Pundits in Kashmir. Originally, a majority of the Kashmir population consisted of the Pundits. If one would get into the origin beyond whatever has been said by my learned friend, Adi Shankara visited Kashmir and it all started with Rishi Kashyap. The population of the State predominantly consisted of the Brahmins but later people pursued a different religion according to their faith. There is nothing wrong in it. But on a dark night, on January 20th in 1990, all the Pundits were thrown out of Kashmir. The Government now should take all initiatives to bring them back. This happened some 30 years back. All of them have to be brought back and they should be given priority in jobs.
Sir, with abolition of 35A, I am sure, wonderful developments are going to take place in the fields of tourism, IT and in every other sphere. Everybody can go to the State and all the anomalies that exist today would be erased out. A rule exists in the State that if a Kashmiri girl marries anyone outside the State, then she will be deprived of inheritance of ancestral property; if a Kashmiri girl marries someone from some other country, then she can inherit the property of the person she marries and also have the citizenship of that country. So, all these anomalies would be removed and corrected after the passage of this Bill and we are going to see a beautiful Kashmir hereafter. Kashmir so far was meant to be a `Paradise on Earth’ for tourists, but henceforth Kashmir would be a `paradise’ for the residents of Kashmir as well. The hon. Prime Minister gave a slogan -- `sabka saath, sabka vikas, sabka vishwas’. But since yesterday, for the majority of the people in the country the slogan is `Sabka sath Modi ji, sabka vishwas Modi ji pe’.
Sir, with these words, I support the Bill whole-heartedly.
भारी उद्योग और लोक उद्यम मंत्री (श्री अरविंद सावंत) : आदरणीयचेयरमैन सर, मेरेजीवन का आजएक सौभाग्यशालीदिन है । मेरेव्यक्तिगत जीवनके लिए और मेरीशिवसेना के लिएभी आज एक सौभाग्यशालीदिन है । व्यक्तिगतजीवन के लिएइसलिए है, क्योंकिकल 5 अगस्त,2019 को आदरणीयप्रधान मंत्रीजी ने कैबिनेटमीटिंग बुलाईथी, उस कैबिनेटमीटिंग में उन्होंनेकहा कि हम धारा370 और कलम35ए को रद्दकरने जा रहेहैं । मैं इतनारोमांचित हुआ,इतना रोमांचितहुआ कि मुझेलगा कि मैंइसीलिए तो आयाथा । …(व्यवधान)मैं और क्या चाहता था । …(व्यवधान) मैं इसीलिए तो आया था, यह क्षण इसलिए मेरे लिए सौभाग्यशाली है,क्योंकि उस कैबिनेट मीटिंग में शिवसेना का एक सदस्य, एक मंत्री, मैं था और इस ऐतिहासिक क्षण का मैं भी एक विटनेस हो गया । …(व्यवधान)इससे ज़्यादा मुझे जीवन में और क्या चाहिए । …(व्यवधान)
सभापति महोदय,वंदनीय हिंदू हृदय सम्राट बाला साहेब ठाकरे जी ने शिवसेना का निर्माण वर्ष 1966 में किया । इससे पहले वे एक व्यंग्यकार,एक कार्टूनिस्ट थे । रवि शंकर जी आपको अचरज होगा कि 6 सितंबर, 1949, जब जनसंघ की भी निर्मिति नहीं हुई थी, को बाला साहेब ठाकरे जी ने फ्री-प्रेस जनरल नाम के अंग्रेजी अखबार में एक कार्टून निकाला था, वह सीज़फायर के ऊपर था । उसमें बताया था कि कश्मीर को किस तरह से रगड़ा,दबोचा जा रहा है । वह कार्टून अगर मेरे पास आज होता तो मैं आपको बताता । वह मेरे मोबाइल में है,लेकिन मोबाइल यहां न चलने के कारण मैं नहीं बता सकता । उस वक्त से लेकर अभी तक कश्मीर के विषय से शिवसेना जुड़ी हुई है । अगर आज बाला साहेब यहां होते तो क्या बताऊं आदरणीय मोदी साहब,आदरणीय अमित शाह जी, आपके ऊपर फूलों की इतनी बौछारें होतीं कि आप उनमें समा न पाते, आप सोच भी नहीं सकते थे । शिवसेना कितनी दिलदार है, इसका अनुभव भी आपको आज हो जाता । वह क्षण ऐसा था,जिसमें बाला साहेब जी के हर भाषण में, हर व्यंग्य चित्र में, उनके पास एक अपूर्व संगम था । वाणी, लेखनी और कुंचला मतलब ब्रश, लेखनी मतलब लिखना और वाणी तो उनके पास थी । उनकी वाणी हिंदुत्व के लिए खड़ी रही । आपको याद है हाल ही में,मुझे लगता है कि उनके जाने के पहले, राजीव शुक्ला जी राज्य सभा में इनके ही सांसद थे । रवि शंकर जी उन्होंने बाला साहेब जी का एक इंटरव्यू लिया । इंटरव्यू में उन्होंने पूछा कि बाला साहेब,अगर आप देश के प्रधान मंत्री बने तो क्या करेंगे?इस पर उन्होंने कहा कि यार, मुझे सत्ता-वत्ता में नहीं जाना, लेकिन आपने सवाल पूछा है, इसलिए मैं जवाब देता हूं । अगर मैं देश का प्रधान मंत्री बना तो पहले दिन की कश्मीर की समस्या का निर्मूलन करूंगा । आज उस व्यक्ति को क्या लगा होगा । क्या उस देवता को लगा होगा कि उसके मन के इस सपने के लिए सपनों के सौदागर आए हैं,हमारे अमित शाह जी और हमारे प्रधान मंत्री जी, जिन्होंने यह सपना पूरा कर दिया है ।
सभापति महोदय,मैं आज सबका भाषण सुन रहा था । मुझे अचरज हो रहा था कि सब लोग तकनीकी मुद्दे बोल रहे थे, जिनका खंडन हमारे जितेन्द्र सिंहजी ने बहुतमज़बूती से कियाहै । मैं हालही की एक बातबताता हूं ।आदरणीय उद्धवठाकरे साहब नेकल प्रेस कांफ्रेंसमें कहा किभारतवर्ष कोएक फौलादी पुरुषमिला है, भारतवर्ष कोआदरणीय नरेन्द्रमोदी जी केरूप में एकफौलादी पुरुषमिला है, जिसने यह निर्णयलेने का साहसकिया, मैंउसका अभिनंदनकरता हूं । मैंआपको एक औरबात बता देताहूं । यह चुनावजब हम गठबंधनमें फिर दोबारालड़े तो शिवसेनाने अपना घोषणापत्र अलग सेनहीं निकाला ।
हमने कहा कि गंगा और यमुना का संगम है । इसमें आगे चलकर समझ में नहीं आता है कि गंगा का पानी है या यमुना का पानी है । जो घोषणा पत्र हमारी भारतीय जनता पार्टी ने निकाला है, वही हमारा घोषणा पत्र है । उसी घोषणा पत्र में धारा 370 का विषय था, उसी घोषणा पत्र में आर्टिकल 35A का भी विषय था । इसलिए मैं आपको भी अभिनंदन करता हूं कि आपने इतनी बड़ी बात की है । उद्धव ठाकरे साहब ने कहा था कि हमारा अलग घोषणा पत्र नहीं होगा । अगर धारा 370 खत्म करने का काम मेरी सरकार करती है तो हमारा अलग से कोई घोषणा पत्र नहीं होगा । जो भारतीय जनता पार्टी का घोषणा पत्र है, वही हमारा घोषणा पत्र है । इसलिए तो कहते हैं कि “मिले सुर मेरा तुम्हारा,तो सुर बने हमारा ।” मैं तो आपको भी कहता हूं कि मिले सुर मेरा तुम्हारा, तो सुर बने देश का और सबका सुर बनेगा । इसलिए आपको भी साथ में आना चाहिए । जब यह बात आती है तो एक बात और दर्द करती है कि कश्मीरी पण्डितों का जिक्र किया गया । यहां दिल्ली में दिलशाद गार्डन एक जगह है, वहां सारे कश्मीरी पण्डित हैं । बाला साहब उस वक्त भी कहते थे । एक अशोक पण्डित नाम का शिव सैनिक था । उसने बाद में पण्डित सरनेम लिया,लेकिन उसका सरनेम अलग था । कश्मीर के सारे लोगों ने कहा कि एक ही सरनेम ले लेंगे । मुझे इस बात का दर्द हुआ कि किसी के मन में उस बात को जिक्र करने की बात नहीं आई । यही धारा 370 है । इसी की वजह से वहां गलत लोग इकट्ठे होकर आए और कश्मीरी पण्डितों को हटाया । …(व्यवधान) आपको दर्द नहीं हुआ । आपको कभी लगा नहीं कि उन कश्मीरी पण्डितों को वापस लेकर आएं । पण्डित होकर भी आपको बुरा नहीं लगता है । आज भी जाओ कश्मीर में तो उनके घर खण्डहर दिखते हैं । वे सब खण्डहर हो गए । हमारे आदरणीय प्रधान मंत्री जी को दर्द हुआ,हमारे अमित शाह जी को दर्द हुआ और उन्होंने सोचा कि इसको दूर करने की आवश्यकता है । अगर यह सब दूर करना है तो हमारे लिए धारा 370 ही बीच में हर्डल है । इसकी वजह से ही तो सारा आतंकवाद बढ़ा है । क्या कभी दर्द नहीं हुआ कि छोटे बच्चे हमारे जवानों पर पथराव करते हैं?कभी आप लोगों में से किसी ने बोला कि छोटे बच्चे हमारे जवानों पर पत्थर मार रहे हैं । ये सब आप करवाते हैं । जगमोहन जी की एक किताब है, My Frozen Turbulence in Kashmir. उसमें उन्होंने नेहरू जी के बारे जो कोट किया है, उसको मैं जान-बूझकर पढ़ता हूं:
“As a matter of fact, much has been done in spite of the Article in the Constitution which is supposed to give a special status to Kashmir and gradually what little remains will also go. The question is more a sentimental one than anything else. Sentiment is sometimes important but we have to weigh both the sides and I think no change should be made in the matter for the present.” यह उनका कहना था कि जाना चाहिए । वे उस वक्त कहते थे कि घिसते-घिसते जाएंगे,लेकिन जा नहीं पाए । हम लोग कश्मीरीयत,जम्हूरियत आदि ऐसे बहुत बड़े शब्दों से इल्जाम करते हैं । कभी सोचा है कि कश्मीरीयत वहां पर सही है । सर, मैं विधायक था, तब से वहां जाता रहा हूं । हमारी कमेटी भी कश्मीर में गई थी । मैं लोगों से बात करता था तो मुझे बुरा लगता कि इस आर्टिकल का जिसका कॉन्स्टीट्यूशन में टेम्पेरेरी एण्ड ट्रांजिएंट प्रोविंशियल प्रोविजन करके रखा है, अगर उसका कोई सुधार कर रहा है तो विरोध करने का क्या मतलब है?यह मुझे समझ में नहीं आ रहा है । महोदय आप जानते हैं कि पिछले सत्र में16वीं लोक सभा में पांच साल से मैं हर साल और हर सत्र में बोलता रहा हूं । कभी रोहिंग्या का विषय आया, कभी जवाहर लाल नेहरू यूनिवसिर्टी का विषय आया, कभी कश्मीर का विषय आया, मैंने हर वक्त यही कहा कि सरकार कुछ कदम उठाना चाहती है तो धारा 370 के निर्मूलन की बात करे । आज गर्व होता है कि आदरणीय प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने कदम उठाया । मैं बार-बार पिछले साल में मांग करता रहता था ।
आप जो एनआरसी लाए, उसकी जितनी सराहना की जाए, कम है । इस विषय में मुझे सिर्फ इतना ही कहना है कि जब हम यह बात करते हैं कि कभी तो यह सोचिए कि धारा-370 की वजह से कितना नुकसान हमारी कश्मीरी जनता का हुआ है,हमारे परिवारों का हुआ है, हमारे भाई-बहनों का हुआ है, हमारे बच्चों का हुआ है । कश्मीर में दोहरी नागरिकता है । जब मैं वहां पहली बार गया था,तो मैंने देखा कि सरकारी गाड़ी में दो ध्वज थे । मैंने पूछा कि यह दूसरा वाला ध्वज कौन सा है,तो उन्होंने बताया कि यह हमारा अलग ध्वज है । प्रधान मंत्री, वजीर-ए-आजम कश्मीर का वजीर-ए-आजम था । यह सुनकर भी दर्द होता था । पाकिस्तान में वजीर ए आजम की बात होती है, लेकिन कश्मीर में भी वजीर-ए-आजम था । वहां तिरंगा जलाना गुनाह नहीं होता । आपको पता है कि कश्मीर में यदि तिरंगा जलाएंगे तो वह गुनाह नहीं होता है । कोई उसे गुनाह नहीं कहता है । उस पर कम्प्लेंट नहीं होती है । वहां पाकिस्तान का झण्डा लहराता है । आपको दर्द नहीं होता है?सरकार ने एक अच्छा कदम उठाया है, तो इसकी सराहना करनी चाहिए थी । कभी तो सारे देश में यह मैसेज जाने दीजिए कि सारा सदन एक होकर बोला कि मोदी जी,आगे बढ़िए, हम आपके साथ हैं । अगर सदन में ऐसा बोला जाता तो बहुत मजा आ जाता । जनता को एक अलग संदेश जाता ।
महोदय, लेजिसलेटिव असेंबली में हमारा कार्यकाल 5 वर्ष होता है । राज्य सभा और विधान परिषद् को छोड़ दीजिए । काँस्टीट्यूएंट लेजिसलेटिव असेंबली ऑफ कश्मीर का कार्यकाल 6 वर्ष का है । आप इसे एक अलग राज्य नहीं, बल्कि एक अलग देश समझ लीजिए । सुप्रीम कोर्ट के ऑर्डर भी वहां लागू नहीं होते हैं । जब श्री रवि शंकर जी कोई कानून लाते थे,तो उसमें भी आपको मेरा भाषण मिलेगा । उसमें ऊपर एक क्लॉज रहता था: This will not be applicable to Jammu and Kashmir. ऐसा उसमें लिखा है । कितने कानून ऐसे हैं जो जम्मू कश्मीर में लागू नहीं हुए । किसका हुआ? देश का नुकसान हुआ, देश की जनता का नुकसान हुआ? नुकसान हुआ तो कश्मीरी भाई-बहनों का नुकसान हुआ । हमारा जो कानून है वहां हम लागू नहीं कर सकते । आपको बुरा नहीं लगता? शिक्षा में,स्वास्थ्य में,हर जगह उनका नुकसान होता रहा ।
सभापति महोदय, मैं कितना सहन करता हूं, मुझे कितना बुरा लगता है । एक कश्मीरी युवती देश के किसी अन्य राज्य के नागरिक से शादी कर ले तो उसको उसकी नागरिकता नहीं मिलती, लेकिन पाकिस्तान के लड़के से शादी करे तो उसको नागरिकता मिलती है । धारा-370आपको बुरी नहीं लगती है? …(व्यवधान) । अपने यहां राइट टू इन्फार्मेशन है, जो वहां लागू नहीं है । राइट टू एजुकेशन लागू नहीं है । किसकी शिक्षा का नुकसान हम लोग कर रहे हैं? शरीयत लॉ महिलाओं के लिए लागू है । नो राइट टू पंचायत । वहां पंचायत को कोई राइट नहीं है । The minorities in Kashmir, Hindus and Sikhs do not get 16 percent reservation. यह धारा-370के कारण होता था । इंडियन ऑफ अदर स्टेट्स,जैसा कि अभी कई लोगों ने बताया है कि हम वहां की जमीन नहीं खरीद सकते हैं । अगर वहां उद्योग आ जाते. कारखाने आ जाते तो रोजगार निर्माण होता । कश्मीरी बच्चे हाथ में पत्थर नहीं लेते । कश्मीरी बच्चे अच्छे मार्ग पर जाते । हमें इनकी बातों पर ध्यान नहीं देना है । हाथी अपनी चाल चल रहा है, आगे बढ़ रहा है, चिन्ता न करिए । साथ आए तो आए नहीं तो उनको रगड़कर आगे चले जाएंगे । …(व्यवधान) ।
आखिर में मैं हमारे पूर्व प्रधान मंत्री जी, स्व. अटल बिहारी वाजपेयी जी ने कही थीं,वे बहुत याद आती हैं । अटल जी भी बहुत याद आते हैं । कश्मीर हमारा सिर है, आज वह सरताज बना । इसलिए उनकी पंक्तियां उनकी पढ़ता हूं:
जब तक गंगा की धार, सिंधु में ज्वार, अग्नि में जलन, सूर्य में तपन शेष, स्वातंत्र्य समर की वेदी पर अर्पित होंगे, अगणित जीवन, यौवन अशेष अमेरिका क्या संसार भले ही हो विरुद्ध, कश्मीर पर भारत का सिर नहीं झुकेगा, एक नहीं, दो नहीं,करो बीसों समझौते,एक स्वतंत्र भारत का निश्चय नहीं रुकेगा ।
मैं इतना ही कहकर अभिनंदन करता हूं, पूरे दिल से अभिनंदन करता हूं । आज शिव सेना आपके साथ इतनी मिल-घुल गई है, हमारे उद्धव साहेब और पूरे परिवार को बहुत आनंद मिला है, मेरे लिए उसका शब्दों में वर्णन करना बहुत कठिन है । मैं फिर से आप दोनों का अभिनंदन करते हुए अपनी वाणी को विराम देता हूं ।
श्री राजीव रंजन सिंह'ललन' (मुंगेर) : सभापति महोदय, इसदेश में एकदौर था, जोआतंकवादियोंका दौर था ।हम लोगों नेवर्ष 2004 सेवर्ष 2014 तकका समय देखाहै । मुझको भी14वीं और 15वीं दोनों लोकसभाओं में इससदन में रहनेका सौभाग्य प्राप्तहुआ है । बड़ी-बड़ी आतंकवादीघटनाएं हुई हैं,दिल्ली मेंहुईं, मुंबईमें हुईं, बंगलुरु मेंहुईं, पूनामें हुईं, कोलकाता मेंहुईं, रेलवेस्टेशनों परहुईं, हैदराबादमें हुईं, सरोजनी नगरमार्केट मेंहुई और हर बारजब आप आतंकवादपर प्रोसिडिंगनिकालकर देखेंगे,तो हर तीनमहीने और चारमहीने पर सदनमें चर्चा होतीथी । तीन-तीन घंटे, चार-चारघंटे, पांच-पांच घंटे तकचर्चा होती थी । संकल्प होताथा कि आतंकवादके खिलाफ कड़ीकार्रवाई कीजाएगी और फिरचार महीने केबाद हम लोगचर्चा करने केलिए ही बैठतेथे । लेकिन वर्ष2014 के बादइस सरकार नेआतंकवाद के खिलाफजो अभियान चलायाहै, वह चाहेसर्जिकल स्ट्राइकहो या चाहेएरियल स्ट्राइलहो, तो मैंनहीं समझता हूंकि वर्ष 2014 से आज तक इसदेश में कोईबड़ी आतंकवादीघटना हुई है ।…(व्यवधान)इस आतंकवादके खिलाफ सरकारकी लड़ाई काजो संकल्प है,वह इसको प्रदर्शितकरता है । लेकिनअगर सरकार नेइस आतंकवाद केखिलाफ और यहसब कोई जानताहै, यह ध्रुवसत्यहै कि आतंकवादकी जड़ें कहांपर हैं । आतंकवादकी जड़ें जम्मूऔर कश्मीर मेंहैं । अगर उसजड़ को खाद औरपानी मिल रहाहै, तो वहपाकिस्तान सेमिल रहा है,यह ध्रुवसत्यहै, यह हरकोई जानता है ।…(व्यवधान)असम में आपकितना कंट्रोलकर पाए हैं,यह हम लोगोंको मालूम है ।…(व्यवधान)समूचे असमको लेकर बैठ गए थे ।…..(व्यवधान) बैठ जाइए ।…(व्यवधान)
महोदय, मैंयह कहना चाहताहूं कि उसकेलिए खाद औरपानी कहां सेमिल रहा है, यहसबको मालूम है । लेकिन अगरसरकार ने आतंकवादसे लड़ने केलिए, इस17वीं लोक सभाके पहले हीसत्र से, मैं माननीयगृह मंत्री जीको इस बात केलिए बधाई देनाचाहता हूं किपहले सत्र सेही उन्होंनेआतंकवाद के खिलाफलड़ाई के मंसूबेको और मजबूतकरने का कामकिया है । उन्होंनेएनआईए एक्ट मेंसंशोधन कियाहै । उन्होंनेअनलॉफुल एक्टीविटीज़का जो कानूनथा, उसमेंसंशोधन कियाहै । मैं इसकास्वागत करताहूं । अगर आपइस सदन मेंआतंकवाद के खिलाफलड़ने के लिएकोई और सख्तसे सख्त सेकानून लेकर आते,तो हम उसकास्वागत करते । लेकिन आपकोमालूम है किमैं और मेरीपार्टी वर्ष1996 से राष्ट्रीयजनतांत्रिक गठबंधनके रूप मेंइसके साथ रहीहै । आदरणीयअटल बिहारी वाजपेयीजी प्रधान मंत्रीथे । हम लोगउस समय से एनडीएके साथ हैं ।आदरणीय जॉर्जफर्नान्डिस साहब,जो उस समयसमता पार्टीऔर बाद मेंजनता दल (यू) और हमारेअध्यक्ष हुआकरते थे, वह एनडीए केसाथ थे । वहएनडीए के कनवीनरथे ।
एनडीए के नेशनल एजेंडा ऑफ गवर्नेंस में इस बात को लिखा गया है कि धारा 370 के साथ हम लोग कोई छेड़छाड़ नहीं करेंगे । हमारी पार्टी की यह मान्यता रही है कि जो विशेष राज्य का दर्जा उसे प्राप्त था,उसके साथ छेड़छाड़ नहीं करेंगे । हाँ, एक माहौल अगर बनता और उस पर आप कार्रवाई करते तो वह अलग बात थी । आज की परिस्थिति में आपको लड़ाई आतंकवाद के खिलाफ लड़नी चाहिए थी,इस विवादास्पद विषय को नहीं छूना चाहिए था । इसलिए हमारी पार्टी का वर्ष 1996 से यह मानना है कि जब अटल जी थे और कई लोगों को मालूम है, जो राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन न में रवि शंकर जी को तो मालूम है, आदरणीय रक्षा मंत्री जी को मालूम है, उस समय थे । आदरणीय रक्षा मंत्री जी आ गए । नेशनल एजेंडा ऑफ गवर्नेंस में लिखा हुआ था तो ये सारी चीजें जब लिखी हुई थीं,सब को मालूम है कि हमारी पार्टी विवादास्पद चीजों को और धारा 370 का समर्थन नहीं करती है । आज भी हम इसका समर्थन नहीं करते हैं और इसके पास होने में भागीदार नहीं हो सकते हैं, इसलिए हम सदन का बहिष्कार करते हैं ।
13.51 hrs At this stage Shri Rajiv Ranjan Singh 'Lalan' and some other hon. Members left the House.
SHRI PINAKI MISRA (PURI): Thank you, hon. Chairperson, Sir, for giving a chance, on behalf of the Biju Janata Dal, to speak on this historic occasion. I unequivocally stand to support the Government’s measure by way of the Jammu and Kashmir Reorganisation Bill, 2019.
We were instrumental in supporting the Government in the Rajya Sabha and which is why, I think, the Government went through with this in the Rajya Sabha with flying numbers.
Hon. Chairperson, the Congress Member laboured at great length over what transpired in Kashmir on 27th October, 1947. The Pakistani invaders were marching in via Bandipur-Safapora Road, via Pattan-Baramulla Road. The Maharaja had left Srinagar. He mentioned that a plane flew from Delhi under the command of Lt. Gen. Deewan Ranjit Roy with 17 soldiers of the First Sikh Regiment, landed in Srinagar and saved Srinagar and Kashmir from falling into the hands of the Pakistani invaders. But what he did not mention, and what this House must know and what this nation must know, is the man who flew that plane, was none other than Biju Patnaik, the tallest leader of Odisha! Not one sortie, Biju Patnaik that day, flew several sorties and took several batches of soldiers into Srinagar airport. That is how, India managed to ensure that Kashmir and Srinagar did not fall into the hands of the Pakistani invaders.
In the past, we have urged the Government to recognise the tremendous qualities of Biju Babu by giving him Bharat Ratna. Unfortunately, it has not happened. The hon. Defence Minister is present here and many Members of the Government are also here. I hope, they rectify this historical error at some near future date.
Hon. Chairperson, I wish to categorically state that there are words be bandied about called ‘Breach of Article of Faith’ ‘Breach of the Trust Doctrine’ etc. Today’s newspapers are full of articles by people, who are, may be, well meaning. The only ‘Article of Faith’ is what has been expressed by this House and on both occasions, the Congress party was in power, and the House has unanimously acclaimed the same proposition. The BJP was part of it, and I am very grateful to the BJP that on bipartisan basis, they and all other parties including, of course, the predecessor of our party Janata Dal, etc., -- in 2013, we were the BJD -- were part of it. On 22nd February, 1994 and 15th March, 2013, on both occasions the only ‘Article of Faith’ that India proclaimed is that the entire State of J&K shall be an integral part of India and that any attempt to interfere in the internal affairs of India will be met resolutely.
This is the only article of faith. There is no other article of faith. It was always known that Article 370 is going to be temporary, transitional and special provision. That is in part XXI of the Constitution. Nehru ji was a very tall leader. He had certain romanticism towards Kashmir and, as the hon. Minister mentioned, he felt he knew more about Kashmir than others did, and tried to deal with Kashmir in his own way. But, I think, his romanticism with regard to Kashmir has created this historical problem. It is a legacy issue of Article 370.
Sawant ji mentioned about our Parliamentary Committees’ visits to Srinagar, Kashmir. I have been party to many of these Committees. It always pained me that when you go to a shop in Kashmir, the first question they ask is: कि आप इंडिया से कब आये? When you meet local Kashmiris in Delhi, they say: मैं इंडिया चार दिन पहले आया । This is a legacy of Article 370 without doubt. Generations upon generations have been taught that they are not an integral part of India. There is something unique about them that is over and above India. Therefore, the Constitution has mandated them in a special category. This is impermissible in the Constitution. I wish to point this out in this House because I should also speak on some of the legal aspects here that there will be a challenge. There is no doubt about it. This is bound to be challenged. The Supreme Court in the State Bank of India versus Santosh Gupta as well as the Jammu and Kashmir High Court in the Ashok Kumar and others versus State of Jammu and Kashmir have, in fact, gone to the extent of stating that Article 370 is a permanent feature of the Constitution.
Therefore, at some point in time, this will have to go to a Constitutional Bench of the Supreme Court. I have no doubt about it and this position will have to be reversed because there cannot be a position that Article 370 was ever intended to be permanent. It was always intended to be temporary and a transient phase.
The fact of the matter is that the manner in which the Government has gone about it is not the first time this has happened. Under Article 370(1)(d), 45 Presidential Orders from 1950 with regard to Jammu and Kashmir have been passed. So, the Order of 2019 is an Order of a similar nature that supersedes all previous Orders.
Mr. Manish Tewari mentioned what will happen to the Constitution of Jammu and Kashmir after this. I think, Sections 1 and 2 categorically takes care of it – that the provisions of this Act shall have effect notwithstanding anything inconsistent therewith contained in any other law. It is simply any other law which would be repealed in view of Section 102 is here. The fact of the matter is that many people, who are talking about the article of faith and doctrine of trust provision, must realise that privy purses was similarly thought to be an article of trust or article of faith or a doctrine of trust. It was done away with. So, these are legacy issues which this country has, from time to time, realised that these are creases which need to be ironed out. Therefore, these creases have, from time to time, been ironed out. This House has always been recognised as the supreme sovereign body under the Constitution. Therefore, this House always has the power to deal with these exigencies and these situations. I do not believe that there should be any talk about any breach of faith.
Having said that, I want to say that this is a human issue. Having been to Kashmir having interacted with our brothers and sisters from Kashmir, having treated them as members of our family in the Indian Union, I just wish to say to them today, there is just a small couplet:
यूँ तो कोई सबूत नहीं है कि कौन किसका क्या है, ये दिल के रिश्ते तो बस यकीन से चलते हैं ।
मेरे हिसाब से कश्मीर के भाइयों और बहनों को हमें आज इस हाउस की तरफ से सर्वसम्मति यह बोलना चाहिए कि यकीन कीजिए आप हिन्दुस्तान का एक इन्टेग्रल हिस्सा हैं । जैसे हिन्दुस्तान के अन्य सूबों में, अन्य राज्यों में हमारे मुस्लिम भाई-बहन integral to our family हैं, वैसे ही कश्मीर के हमारे भाई-बहन integral to our Indian family हैं ।
14.00 hrs वे कोई हमसे दूर नहीं हैं, हमसे कोई बाहर नहीं हैं । वे पराए नहीं हैं । वे यहां आएं । वे दिल्ली में पढ़ें, मुम्बई में पढ़ें, बंगलौर में पढ़ें, वहां काम करें और उसी तरह हमें भी वहां जाकर काम करने का मौका दें, देखने का मौका दें । मेरे हिसाब से यह जो इंटीग्रेशन है, यह बहुत जरूरी है ।
मेरे मुख्य मंत्री जी ने सिर्फ एक बार प्रधान मंत्री जी से, गृह मंत्री जी से रिक्वेस्ट किया है, क्योंकिhe is at heart a democrat, his feeling is that the earlier you hold elections, the better it will be. The easier it will be for the people to then give a reflection of their own self-opinion. These are temporary measures that are in place today. Let us not emphasise too much on these temporary measures. There will be enough criticism outside India which will be orchestrated by people who are inimical to India. Therefore, within India, there must be unanimity. Within India, there must be one voice. It is because if, within India, we appear divided, then we give a lot power to forces outside India to criticise us on this.
इन्हीं शब्दों के साथ, मैं एक बार और सरकार को बधाई देता हूं । हम सब आपके साथ हैं । इसमें कई हिस्टोरिकल इश्यूज और लीगेसीज़ हैं, which need to be ironed out. आपने हिम्मत करके इसे किया है । हम आपके साथ हैं । आपके हाथ मजबूत करने के लिए हमने अपने हाथ आगे बढ़ाए हैं । बस, इसे आगे आप देखें और इसे थोड़ा डेफ्ट टच दें ।
अटल जी ने जो ‘जम्हूरियत,कश्मीरियत,इंसानियत’ की बात की, उसी के नाते अगर आप आगे बढ़ेंगे तो मेरे हिसाब से यह समस्या बहुत जल्दी सुलझ जाएगी ।
महोदय, इन्हीं शब्दों के साथ,मैं अपनी आवाज को विराम देता हूं ।
THE MINISTER OF PARLIAMENTARY AFFAIRS, MINISTER OF COAL AND MINISTER OF MINES (SHRI PRALHAD JOSHI):Thank you very much, Sir. In fact, I had not planned to participate in the discussion. I was behind the bars when Murli Manohar Joshi ji took ‘Ekta Yatra’ to Kashmir to hoist the National Flag in Lal Chowk. Keeping in mind those memories, and after listening to Mr. Manish Tewari, I thought, I can say a few words. Regarding my Party Members also I would say, as of now, there are 100 Members who have given me their names to speak, to me being the Minister of Parliamentary Affairs, क्योंकि हमारे लिए यह भावना के साथ जुड़ा हुआ है । It is an emotional attachment to India, that is Bharat, Bharat mata, and to Kashmir which is an integral part of India. हमारे लिए कश्मीर हो या भारत, यह सिर्फ एक भूमि मात्र नहीं है । यह हमारे लिए मातृभूमि है,भूमि मात्र नहीं है । इसीलिए, मुझे लगा कि इस पर थोड़ा कुछ बोलना चाहिए ।
महोदय, सारे देश में लोग जश्न मना रहे हैं । दिवाली में जैसा वातावरण रहता है, वैसा वातावरण सारे देश में है । मेरा सौभाग्य है कि मैं इस समय पार्लियामेंटरी अफेयर्स मिनिस्टर हूं । इसीलिए,माननीय गृह मंत्री जी, जिन्होंने यह बिल पेश किया,उनके साथ सात-आठ दिनों में मेरा आना-जाना हुआ । मीडिया वाले ने उसे दिखाया और उसके दिखाने के बाद मेरी कंस्टीट्युन्सी से, कर्नाटक से मुझे लोगों के बहुत फोन कॉल्स आए और उसमें उन्होंने कहा कि साहब, आप तो गृह मंत्री जी के साथ इस बिल को प्रेजेंट करते समय मौजूद थे,यह आपके पूर्व जन्म का पुण्य है । ऐसे मुझे मैसेजेज़ आए ।
I do not want to go into the technical details because many Members have spoken about the situation prevailing in Kashmir after Article 370. Our most learned Cabinet Minister, senior colleague Ravi Shankar Prasad ji is going to speak. I am quite confident that very effectively he will be putting his arguments before the House. That is why, I do not want to go into the details of the technical things. But I would like to tell you, the entire country is speaking in one voice, सारे भारत में एक ही स्वर है - ‘भारत माता की जय’ और ‘Kashmir is an integral part of India’.
जब हम स्कूल में पढ़ते थे, तब हमें यह श्लोक याद करवाया जाता था-
“नमस्ते शारदे देवी काश्मीरपुरवासिनि त्वामहं प्रार्थये नित्यं विद्यादानं च देहि मे॥” विद्या देने वाली सरस्वती कहां हैं? वह कश्मीर में है । यह हमें सिखाया जाता था । This was taught to us. And what is the situation in Kashmir? जब हमने आर्टिकल 370 को निकालने के लिए सोचा, तो इसके लिए पूरा सदन और सारा देश हमको सपोर्ट कर रहा है । सर, हमने ऐसा सोचा था कि कांग्रेस वाले भी हमें सपोर्ट करेंगे । But it is the most unfortunate thing that divided voices are coming from the Congress Party. पहले आप हमारी बात सुनिए । …(व्यवधान) कितनी दुर्भाग्य की बात है कि कांग्रेस पार्टी के भुवनेश्वर कालिता जी, द्विवेदी जी और अभिषेक मनु सिंघवी, दीपेन्द्र हुड्डा, मिलिंद देवड़ा जी, …(व्यवधान)शशि थरूर जी …(व्यवधान)
DR. SHASHI THAROOR : Chairman Sir, the Minister is reading the names of the Members of the other House. How can the Parliamentary Affairs Minister violate the Rules? …(Interruptions)
SHRI PRALHAD JOSHI: Shashi Tharoor ji, I am not making any allegation against them. आप सभी बैठिए,मैं बोलता हूं ।…(व्यवधान)हमने उनके खिलाफ कुछ भी नहीं बोला है, बल्कि उनका जो ट्वीट है, उसे मैं आपको दिखाता हूं ।…(व्यवधान) It is on record.
SHRI KODIKUNNIL SURESH (MAVELIKKARA): You do not have internal freedom. …(Interruptions)
SHRI PRALHAD JOSHI: Mr. Suresh, you are my good friend, do not disturb me. …(Interruptions) We know what freedom the Congress Party has. After the resignation of the President of the Congress Party, you are not able to appoint the President till today because there is no democracy. It is a known fact. उधर …* है, यह सब को पता है ।…(व्यवधान) I do not want to talk anything about that. Yesterday I was in the other House. … * This is the situation in your Party. When the entire country is जश्न मना रहा है ।…(व्यवधान)कांग्रेस पार्टी पाकिस्तान की वॉइस में बोल रही है । इसके लिए मुझे बहुत दुख है ।…(व्यवधान) Pakistan is also telling that it is a dark day. …(Interruptions) Please listen to me. You do not have guts to listen. What can I do for that? …(Interruptions) What I am correlating is this. There is a statement from Pakistan’s side. The Pakistan Government’s official statement said that it is a dark day for the entire democratic world and what the Congress Party senior leaders have said. Even today also, they have said that it is a dark day. What does it mean? …(Interruptions) Pakistan is telling that it is a dark day and you are joining with them. …(Interruptions) Mr. Arvind Sawant was referring to Kashmir. I would also like to refer to Kashmir. …(Interruptions) गौरव जी,आज स्थिति क्या है, यह सब को पता है ।…(व्यवधान)आप यह सब मत बोलिए ।…(व्यवधान)आप थोड़ा सुनिए । आप सुनने की क्षमता रखिए । पाकिस्तान में जाकर सबसे लोकप्रिय नरेन्द्र मोदी जी को निकालने की बात किसने की?वह कांग्रेस के नेता थे । यह सभी जानते हैं ।…(व्यवधान)आप मुझे समझाने की कोशिश मत कीजिए । आपके लोगों ने पाकिस्तान में जा कर नरेन्द्र मोदी जी को निकालने के लिए सहायता मांगी थी ।…(व्यवधान) आप क्या बात करते हैं? कांग्रेस का इतिहास सभी जानते हैं ।…(व्यवधान) इसीलिए मैं नाता जोड़ रहा हूं ।…(व्यवधान)
Who met whom? …(Interruptions) मैं नाता इसीलिए कह रहा हूं ।…(व्यवधान) What is your relation? If a girl from Kashmir marries a boy from India, she will lose her citizenship in Kashmir. If a girl from Kashmir marries a boy from Pakistan, that boy will get the citizenship in Kashmir. यह क्या है? …(व्यवधान)इसलिए मैं बोल रहा हूं, कांग्रेस का नाता उधर है । जो पाकिस्तान का है, वही कांग्रेस से भी आ रहा है । …(व्यवधान) ये डार्क, डार्क बोले,क्या है यह डार्क? …(व्यवधान) ये बोल रहे हैं । …(व्यवधान) Shri Manish Tewari was telling something. Now, I am coming to one more point. Please listen to me. …(Interruptions) Shri Manish Tewari was telling here that since the Constituent Assembly was not in existence, इनका आर्ग्यूमेंट तो सुनो, कौन सिखाता है इन लोगों को? What is written in Article 370? ‘It is a temporary transition and special provisions.’ It is written as temporary and you are telling here that since there is no existence of the Constituent Assembly, it is permanent. यह कहां का आर्ग्यूमेंट है? …(Interruptions) अरे सुनिए । If that is so, then I would also like to remind them, through you, Sir, that there is no special provision. …(Interruptions) Sir, I am addressing you because they do not want to listen to me. They are talking of special provision. There is no special provision. You look at the Constitution. There is no special provision for Kashmir. It is a temporary provision. Even Dr. Babasaheb Bhimrao Ambedkar opposed it tooth and nail. This is on record. I will challenge it. In spite of his opposition, this Article 370 was inserted because of Pandit Nehru’s insistence. After that, there is a proviso in that, that is, 373 (3). It says “notwithstanding anything contained in these foregoing provisions...”.
श्री भर्तृहरि महताब (कटक): गोपालस्वामी अय्यंगरकौन थे?
संसदीय कार्य मंत्रालय में राज्य मंत्री तथा भारी उद्योग और लोक उद्यम मंत्रालय में राज्य मंत्री (श्री अर्जुन राम मेघवाल): ये देशी राज्योंके विलीनीकरणके मंत्री थे ।
श्री भर्तृहरि महताब: गोपाल स्वामीअय्यंगर कौनथे? इनकाधारा 370 मेंक्या रोल था?इस पर आपअगर प्रकाश डालें,तो अधिक सुविधाहोगी ।
श्री अर्जुन राम मेघवाल: भर्तृहरि महताब साहब, यह एक टेक्निकल इश्यू है । जब धारा 370, 306ए के रूप में कांस्टीट्यूएंट असेंबली में आई,तो बाबा साहब ने कहा कि ‘I will not be a party to this article.’ यह देश की अखंडता, एकता को तोड़ने वाली धारा होगी, इसलिए मैं इसकी पार्टी नहीं बनूंगा । मैं इसका प्रपोजर बनूंगा । पंडित नेहरू जी उस समय विदेश में थे । उन्होंने गोपाल स्वामी अय्यंगर को फोन किया । ये देशी राज्यों के विलीनीकरण के मंत्री थे । इनका कोई रोल ही नहीं था, फिर भी वे प्रपोजर बने । फिर भी बाबा साहब ने कहा कि यह क्या किया आपने?इतना बड़ा ब्लंडर कर दिया । उस समय एक मुस्लिम सदस्य जो यूपी से आते थे, उन्होंने भी विरोध किया । ये फिर भी नहीं माने । यह इतिहास की गलती है, जिसको हम आज सुधार रहे हैं ।…(व्यवधान)
SHRI PRALHAD JOSHI: Now, I am not yielding. …(Interruptions) Please listen to me. …(Interruptions) No, you will have your opportunity. Dr. Shashi Tharoor Ji, you are a learned Member. I am not yielding. …(Interruptions) I am sorry.
HON. CHAIRPERSON : The hon. Minister is not yielding. Please sit down. When your turn comes, you say whatever you want.
… (Interruptions)
SHRI PRALHAD JOSHI: Mr. Suresh, please understand. …(Interruptions)
Sir, I am not yielding. I will complete my speech within two minutes.
Shashi Tharoor ji, you will have your chance. You can reply to me. I will listen to your reply. …(Interruptions) Hon. Speaker will give you time to speak. On your behalf, I will request the Speaker to give you time.…(Interruptions)
श्री रवि शंकर प्रसाद: माननीयसभापति जी, यहपीड़ा की बातहै कि सदन मेंकश्मीर के मामलेमें एक ही तरहका इतिहास बतानेकी कोशिश कीजा रही है ।आज अगर माननीयसदस्य जोशी जीइतिहास का सहीपक्ष रख रहेहैं तो कांग्रेसके मित्रों कोसुनने का धीरजहोना चाहिए ।यह मैं कहनाचाहता हूं । …(व्यवधान)
माननीय सभापति : हमऐतिहासिक बहसमें हैं । सदनतय करेगा, जनतातय करेगी, क्यासही है? दोनोंपक्षों को सामनेआने देना चाहिए, इसमेंकिसी को क्याएतराज़ है? एकपक्ष यह हैतो दूसरा पक्षवह है । हम धैर्यसे सुनें । नि:संदेहहम लोग ऐतिहासिकचर्चा में शामिलहैं । We should be proud of it.जो परिणामहोगा, पताचल जाएगा, सदन तय करेगा ।
…(व्यवधान)
SHRI PRALHAD JOSHI: Sir, by putting the pressure on Gopalaswami Ayyangar, Pandit Nehru did it because he was the Minister in Pt. Nehru’s interim Government. This is the record of the history. I have not created anything. …(Interruptions) I request the hon. Members sitting across not to disturb me because it is a very important discussion. You will have your turn and at that time you can speak. …(Interruptions)
That is why it is not a special provision. It is a temporary provision. Pt. Nehru said in one of his speeches:
“This Article 370 is a temporary phenomenon. It will be corroded and eroded as the time comes.” ‘Corroded and eroded’ means it will get eroded. मुझे हिंदी का शब्द नहीं मिल रहा है । But these are the words ‘corroded and eroded’ that he used. …(Interruptions) Corroded means - घिस जाएगा । …(Interruptions) कांग्रेस घिस गई 70 साल में, 370 ऐसा ही है अभी तक ।
Shri Ravi Shankar Prasad ji said in the other House that after 1984 it is because of their stand, because of their appeasement policy and vote bank politics कि आप घटते जा रहे हैं, घटते जा रहे हैं and now they are not even able to become an Opposition Party. So, I request them to understand while opposing it. …(Interruptions)
Article 370, sub Clause (3) says:
“Notwithstanding anything in the foregoing provisions of this article, the President may, by public notification, declare that this article shall cease to be operative or shall be operative only with such exceptions and modifications and from such date as he may specify.” If it is permanent in the absence of the Constituent Assembly, then why should this Article 370(3) be in existence? Why it is there in the Constitution? Before going into any argument, the hon. Member should try to understand what the situation is, what the people of India want, and what the youth of India want. They should try to understand what the entire India needs today.
मनीष तिवारी जी ने कहा कि एक त्रासदी है । मेरी हिंदी इतनी अच्छी नहीं है इसलिए मैंने अर्जुन जी को पूछा कि त्रासदी क्या है, उन्होंने बताया त्रासदी मतलब ट्रेजडी । ट्रेजडी कब हुई? When in spite of Dr. Babasaheb Ambedkar’s opposition Article 370 entered the Indian Constitution, that was the tragedy. त्रासदी कब हुई?
Sir, I will quote. On December 5, 1961, a year before the Sino-Indian War, Mahavir Tyagi famously criticised Nehru’s statement in the Indian Parliament. Nehru had commented, and I will quote,:-
“But, nevertheless, the fact remains that this area is a most extraordinary area in the world so far as terrain is concerned. At that rate, no tree grows anywhere in this wide area -- there may be some shrubs.” Shri Tyagi retorted, pointing out to his own bald head,:-
“No hair grows on my head. Does it mean that my head has no value?” This was the question posed to Pandit Nehru. That is part of Parliament Debates. I am placing it before the House. If they want to challenge, let them challenge. त्रासदी तब हुई,जब नेहरू जी ने कहा After losing lakhs and lakhs of kilometres of land to China, जब नेहरू जी ने ये कहा था तब त्रासदी हुई । अभी त्रासदी नहीं हुई है । अभी कश्मीर और घाटी एरिया का डेवलपमेंट होगा । जो हिस्टोरिकल ब्लन्डर इन लोगों ने किया था, उसको हम ठीक कर रहे हैं । एक त्रासदी तब हुई जब इन्होंने आर्टिकल 370 को ऐड किया और 370 ऐड करने के बाद यूएनओ चले गए,वह त्रासदी थी । The Indian soldiers were ready to take back Kashmir. They were ready to go up to Lahore, but Nehruji announced it through AIR. That was trasadi, not this one when Shri Narendra Modiji has brought this historical change under the leadership of Shri Amit Shahji. This is not a trasadi; trasadi was when Pandit Nehru declared it. जब हमारे सैनिक जीत रहे थे तब सीजफायर हुआ, वह त्रासदी थी । Let us understand this historical fact. इसलिए मैं बताना चाहता हूं कि अभी भी टाइम है । मनीष तीवारी जी और अधीर रंजन जी ने जूनागढ़ का जिक्र करते हुए कहा, whatever was done as far as Hyderabad and Junagadh are concerned, it was Nehru who did it. Let me bring a historic thing on record today. When police action took place, initially Nehru was not even aware that police action was going to happen. That decision was taken solely by Sardar Patel. What are these people talking? If they are so much fond of Sardar Patel, I would state that in the entire Delhi and areas surrounding Delhi, more than 250 projects, grounds or squares have been named after Jawaharlal Nehru, Indira Gandhi and Rajiv Gandhi, but not a single place has been named after Sardar Patel. This is how they have treated Sardar Patel! …(Interruptions) अगर हैदराबाद को नेहरू जी के हाथ में दिया होता तो आज हैदराबाद की परिस्थिति विपरीत होती । It is only because of Sardar Patel that Junagadh and Hyderabad came to India. वहां घास भी पैदा नहीं होती बोलने वाले पंडित नेहरू ने हिस्टोरिक ब्लन्डर किया है । करोडेड एंड इरोडेड बोलने के 70 वर्ष के बाद इसको सुधारने के लिए श्री नरेन्द्रभाई दामोदर दास मोदी जी को आना पड़ा । You should understand this. That is why, people love him. People have elected us.
We have the mandate. We want to correct this historical blunder. I appeal to Shri Kodikunnil Suresh and Shri Gaurav Gogoi to ask their leader -- they do not have a President now – to support this Bill. आपके पूर्वज ने जो गलतियां की हैं, उन गलतियों को आप ठीक कीजिए और मैं अंत में यह कहना चाहता हूं कि:
“नमस्ते शारदे देवी काश्मीरपुरवासिनि त्वामहं प्रार्थये नित्यं विद्यादानं च देहि मे ।” वह देवी कश्मीर में पुनर्स्थापित हो ऐसा एक मौका आया है, इसे सपोर्ट कीजिए । With these words, I support the Resolution and the Bill brought by Shri Narendra Modi-led Government and piloted by the most dynamic Home Minister in recent years, Shri Amit Shah.
श्री गिरीश चन्द्र (नगीना): माननीय सभापति महोदय, मैं आपका तथा बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष बहन कुमारी मायावती जी का आभारी हूं कि मुझे बहुजन समाज पार्टी की तरफ से संविधान की धारा 370 से संबंधित इस ऐतिहासिक बिल पर बोलने की अनुमति दी है । मान्यवर, बहुजन समाज पार्टी द्वारा कल दिनांक 05 अगस्त, 2019 को राज्य सभा में केन्द्र द्वारा धारा 370 एवं 35 ए को हटाए जाने के प्रस्ताव तथा जम्मू कश्मीर के विभाजन के संबंधित बिल का समर्थन किया था, जिसके उपरान्त यह बिल राज्य सभा से पास हो गया और अब लोक सभा के समक्ष आया है । आज प्रात:हमारी पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष बहन कुमारी मायावती जी ने अपने ट्वीट के माध्यम से देशवासियों और उनमें भी खासतौर पर बाबा साहब के अनुयायियों तथा मुख्य रूप से लेह लद्दाख में रह रहे बौद्ध समुदाय के लोगों को बधाई देते हुए इस प्रस्ताव एवं बिल का स्वागत करते हुए कहा है कि संविधान की सामाजिक, आर्थिक व राजनैतिक न्याय की मंशा को देश भर में लागू करने हेतु जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा संबंधी धारा 370 व 35 ए को हटाने की मांग काफी लंबे समय से थी । अब बी.एस.पी. उम्मीद करती है कि इस संबंध में केन्द्र सरकार के फैसले का सही लाभ वहां के लोगों को आगे मिलेगा । इसी प्रकार जम्मू कश्मीर के लेह लद्दाख को अलग से केन्द्र शासित क्षेत्र घोषित किए जाने से खासकर वहां के बौद्ध समुदाय के लोगों की बहुत पुरानी मांग अब पूरी हुई है, जिसका भी बीएसपी स्वागत करती है । इससे पूरे देश में विशेषकर बाबा साहेब डॉ भीमराव अम्बेडकर के बौद्ध अनुयायी काफी खुश हैं । परमभुज बाबा साहब अम्बेड़कर जी की बात चल ही रही है तो संविधान सभा में धारा 370 में,जो ड्राफ्ट पेश किया गया था, उसे बाबा साहब अम्बेडकर जी ने सिरे से यह कहते हुए खारिज किया था कि कश्मीर एवं कश्मीर के नागरिकों को भारत में एवं भारत के उत्थान में बराबरी का हक है, किन्तु भारत सरकार को एवं भारत के नागरिकों को कश्मीर में न बसने का, न जमीन खरीदने का,न व्यापार करने का कोई अधिकार नहीं दिया है,जो हरगिज मंजूर नहीं है । इसलिए माननीय सभापति महोदय, बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष बहन कुमारी मायावती के निर्देश पर मैं इस बिल का समर्थन करता हूं,बहुत-बहुत धन्यवाद ।
SHRI NAMA NAGESWARA RAO (KHAMMAM): Mr. Chairman, Sir, thank you very much for giving me this opportunity to speak.
This is a historic Bill brought through a historic decision taken by the hon. Prime Minister and the hon. Home Minister. I rise to support this Bill on behalf of our Party, Telangana Rashtra Samiti. इस तरह की जो भी गलतियां होती हैं उसको इसी तरह से सही करने की भी जरूरत पड़ती है । उसको सही करने के लिए यह बिल लाया गया है । बहुत खुशी की बात है । अभी मॉर्निंग में ऑनरेबल होम मिनिस्टर साहब द्वारा लाए गए बिल के डिसकशन में दोनों तरफ से एक बात आई है,आदरणीय गृह मंत्री जी ने उसमें एक बात बताई है ।
पीओके के बारे में भी बात करते हुए, उन्होंने बताया है कि वह भी इंडिया का इंटीग्रल पार्ट है । मैं होम मिनिस्टर साहब से बोलना चाहता हूं कि आप पीओके को निकाल दीजिए, आईओके को करिए । इंडियन कश्मीर को करवा दीजिए, आपके लिए सेकेण्ड स्टेप रेडी है । इसके बाद सेकण्ड स्टेप के रूप में उसे लेना पड़ेगा । कुछ लोगों ने जम्मू-कश्मीर, हैदराबाद और जूनागढ़ के बारे में भी बताया । वह बात करने के टाइम में सरदार पटेल जी और नेहरू जी के बारे में भी दोनों तरफ की बातें सुनी हैं । वह हिस्ट्री है, वह खत्म हो गया है । अभी हम सब लोगों ने यह एग्री किया है कि उस मिसचीफ को करेक्ट करने के लिए यह बिल आया है । इसलिए बिल में जिस तरह होम मिनिस्टर साहब ने प्रॉमिसेस किए हैं, कल भी मैंने राज्य सभा की गैलरी में बैठकर उनकी हरेक बात को सुना है । वह सुनने के बाद हमने सोचा है कि अगर हम इस बिल को सपोर्ट नहीं करेंगे तो देशवासी और कश्मीर के लोग हमें नहीं छोड़ेंगे । वे सोचेंगे कि हम कश्मीर के विरोधी हैं, इसलिए इस बिल को मदद करने की जरूरत है । जम्मू-कश्मीर रिऑर्गनाइजेशन बिल के पार्ट-2में दो इश्यूज हैं, मैं उनकी डिटेल्स में नहीं जाऊंगा, मुझे अपनी पार्टी का टाइम मालूम है । पार्ट-2 में एक है – फार्मेशन ऑफ यूनियन टेरिटरी ऑफ लद्दाख विदआउट लेजिस्लेचर । दूसरा मुद्दा है- फार्मेशन ऑफ यूनियन टेरिटरी ऑफ जम्मू एंड कश्मीर विद लेजिस्लेचर । इन दोनों के बारे में डिटेल में इस बिल में बताया गया है । मगर कल होम मिनिस्टर साहब ने जिस तरह से राज्य सभा में बताया है, पूरी बात मीडिया में भी आई है कि आने वाले टाइम में, पांच साल के अंदर यह बिल फुल-फ्लेज्ड असेम्बली को लेकर आएगा । यह भी बहुत अच्छी बात है । यह बात सुनकर पूरे कश्मीर के लोग खुश हो जाएंगे । आने वाले टाइम में उसको राज्य बनाने के लिए,राज्य का पूरा अधिकार दिया जाएगा,यह भी बहुत अच्छी बात है । कल अनइम्प्लायमेंट के बारे में, इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट के बारे में, दलित-आदिवासी के लिए रिजर्वेशन के बारे में भी होम मिनिस्टर साहब ने बताया है । मैं 15वीं लोक सभा का भी सदस्य था । जब हाउस चल रहा था, उस टाइम कश्मीर में करीब 300 बच्चे मारे गए थे । उस समय हाउस में फारूख अब्दुल्ला साहब थे, हम सब लोगों ने डिसाइड ने किया था कि जब एक तरफ हाउस चल रहा है, दूसरी तरफ उधर बच्चे लोग मर रहे हैं,तब हाउस ने यह डिसाइड किया था और हम सभी लीडर्स को लेकर कश्मीर में गए थे । कश्मीर में जाने के बाद हरेक सेक्शन के लोगों के साथ हमने डिसकशन किया था । उसमें मैडम सुषमा स्वराज थीं, अरुण जेटली साहब थे, बालू साहब भी थे, राम विलास पासवान जी थे,सीताराम येचुरी साहब थे और हमारे मित्र ओवैसी साहब भी थे ।
14.33 hrs (Hon. Speaker in the Chair) हम लोगों ने कश्मीर में तीन दिन तक हरेक सेक्शन के लोगों से बातचीत की । स्टूडेंट्स के साथ, यूथ के साथ, ट्रेडर्स के साथ और कॉमन पीपुल्स के साथ डिसकशन किया था । इन सबसे डिसकशन करने के बाद, उन लोगों ने हमें बताया कि इधर कोई डेवलपमेंट नहीं है । पहले टूरिज्म था, अभी टूरिज्म भी ठप हो गया है,इधर अनइम्प्लायमेंट है, कोई भी इंडस्ट्री नहीं है । ये सभी बातें हम लोगों की टीम के सामने आई थीं । वहां हमने इसे छोड़ा नहीं है । हमने हुरियत कांफ्रेंस के लोगों के साथ भी बात की ।
उस समय एक-एक टीम एक-एक आदमी के पास भेजी गई थी । हमारे टीम में ओवैसी साहब और सीताराम येचुरी साहब भी थे । हम चार आदमियों ने धारा 144 रहते हुए, सभी से बात करके, किसी तरह से कश्मीर के इश्यू को खत्म करने के लिए प्रयास किए हैं । यह स्थिति वर्ष 2010 में थी । अभी नौ वर्ष हो गए हैं । नौ साल में कुछ नहीं हुआ । 15वीं लोक सभा में जिस तरह से सभी नेताओं को ले जा कर, बात करने के बाद भी कोई सॉल्यूशन नहीं निकला, आज जिस तरह से इस सदन में कश्मीर में धारा 370 को खत्म करने के लिए जो सॉल्यूशन लाया गया है, वह बहुत खुशी की बात है । कल 5 तारीख को राज्य स़भा में बिल पास हुआ और 6 तारीख को पास हुआ बिल इधर लाया गया है । कल बहुत लोग बोल रहे थे, अभी भी कुछ लोग बोल रहे थे कि यह काला दिन है, लेकिन हम बोलेंगे कि यह काला दिन नहीं है, बल्कि क्रांति दिन है, विकास का दिन है । यह काला दिन कैसे होगा?अगर कश्मीर में अपने भाई-बहनों,माइनॉरिटीज,मुस्लिम लोगों,सभी लोगों का विकास करेंगे तो कैसे काला दिन होगा, रोजगार देंगे, तो कैसे काला दिन होगा । वहां इंडस्ट्रीज लगाएंगे तो कैसे काला दिन होगा । इसलिए यह काला दिन नहीं है, यह क्रांति दिन है, विकास का दिन है । इसको ध्यान में रखने की जरूरत है । हमारे नेता के.सी.आर.साहब का व्यू था कि छोटा राज्य होगा तो ज्यादा विकास होगा । आप लोगों ने तेलंगाना राज्य बनने के बाद देखा है कि पांच सालों में तेलंगाना विकास के विषय में भारत में नम्बर वन पर है । हम लोगों ने इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट भी किया है । हम लोगों ने किसानों का भी डेवलपमेंट किया है । उनको 24 घंटे बिजली उपलब्ध है । इस तरह का विकास छोटा राज्य होने के कारण हुआ है । इसी तरह से अभी यूटीज डेवलपमेंट करने के लिए बनाए गए हैं ।
हम इस बिल को इसलिए मदद कर रहे हैं कि कल अमित शाह साहब ने बताया था कि हम पांच सालों में विकास के मामले में इसे देश में नम्बर वन बना कर दिखा देंगे । इसलिए हम लोग मदद कर रहे हैं । वहां के मुस्लिम, माइनॉरिटीज,हिन्दू, सिख,युवा सभी को नौकरी देंगे,इसलिए हम लोग मदद कर रहे हैं । अभी तक कश्मीर में डेवलपमेंट नहीं था । इसलिए आज हम उन वादों की वजह से लोग इसे सपोर्ट कर हैं ।
जब हम लोगों को कश्मीर की याद आती थी, तो हम लोग यह सोचते थे कि कश्मीर पैराडाइज ऑन अर्थ है । कश्मीर,वैलीज, रिवर्स,माउंटेन्स और सीनरीज के साथ बहुत सुंदर है । हम लोग इतने सुंदर कश्मीर को इतने दिन से बचा नहीं पाए, यह दु:ख की बात है । सभी को इसके बारे में सोचना चाहिए । हमें पूरी उम्मीद है कि गृह मंत्री जी ने जिस तरह से उधर हाउस में बात की है, उसी तरह से इधर भी बात करेंगे । उन्हीं के वादों के कारण, पूरे विश्वास के साथ,आने वाले समय में भी, हम सभी को कश्मीर के डेवलपमेंट में पार्ट बनना चाहिए । उन लोगों का विकास होना चाहिए । सभी को सोचना चाहिए कि हम भारत के आदमी हैं । कश्मीर के लोग बहुत प्यारे आदमी हैं । हम वहां दो बार गए थे । एक बार लीडर्स के साथ गए और दूसरी बार मीडिया को साथ लेकर गए । कश्मीर के लोग बहुत प्यारे आदमी हैं । वे लोग बहुत प्यार देते हैं । ऐसे लोगों के साथ इतने दिनों तक अन्याय हुआ है, उनके न्याय के लिए हम लोग इस बिल को सपोर्ट कर हैं । धन्यवाद ।
माननीय अध्यक्ष : माननीयसदस्यगण, इसविषय पर कई माननीय वक्ताअपनी बात रखना चाहते हैं ।मेरा सभी माननीयसदस्यों से आग्रहहै कि वे संक्षिप्तमें अपनी बातकह दें । माननीयगृह मंत्री जी4.30बजे तक जवाबदेंगे ।
…( व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : यहमहत्वपूर्ण बिलहै, तो आपकाजो समय है, उससेपांच मिनट ज्यादासमय दे देंगे ।
…( व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : आपभी राहों मेंपड़े हैं तोहम आपको भीबोलने का मौकादेंगे ।
माननीय सदस्य,मेरा आग्रहहै कि यह सदनआपका है, सभी को बोलनेका अधिकार है,लेकिन मुद्दोंकी बात संक्षिप्तमें कह दें ।यह मेरा आपसेआग्रह है औरकोई बात नहींहै ।
श्रीमती सुप्रियासुले जी ।
श्रीमती सुप्रिया सदानंद सुले (बारामती):अध्यक्ष महोदय, मैं अपनी पार्टी की तरफ से बोलने के लिए खड़ी हुई हूं । मैं सोच रही हूं कि इस बिल के बारे में क्या कहूं । It is not funny क्योंकि आप कितने असंवेदनशील हैं और कितनी जल्दी में हैं । यह पार्लियामेंट है, आप शांति रखिए । मेरी सीट नम्बर 462 है और मेरे साथ 461 में माननीय फारूख अब्दुल्ला जी बैठते हैं और वे जम्मू-कश्मीर से चुनकर आए हैं । उनकी आवाज आज सुनाई नहीं दे रही है । एक्चुअली आप मुझे पूछें तो यह हमेशा हिस्ट्री में एक अधूरा डिबेट रहेगा ।
श्री अमित शाह: मैंमाननीय सदस्याको अवगत करानाचाहता हूं किफारूख अब्दुल्लाजी को न डिटेनकिया गया है, नअरेस्ट कियागया है । वेअपनी मर्जी सेअपने घर परहैं ।
श्रीमती सुप्रिया सदानंद सुले: ठीक है । रिकार्ड के लिए बताना चाहती हूं कि उनकी तबीयत ठीक नहीं है ।
श्री अमित शाह : मैं तबीयत ठीक नहीं कर सकता, तबीयत डाक्टर ठीक कर सकता है ।
श्रीमती सुप्रिया सदानंद सुले: यह बात नहीं है । यह हमारे इमोशन्स हैं । मैंने डिटेन करने की बात नहीं कही है ।
माननीय अध्यक्ष : उनकी पार्टी के माननीय सदस्य बैठे हैं । फारूख जी तो बोलते भी कम हैं । उनकी पार्टी के माननीय सदस्य को जरूर बोलने का मौका देंगे ।
श्रीमती सुप्रिया सदानंद सुले: अध्यक्ष महोदय, यह डिबेट मेरे लिए तो अधूरी रहेगी,शायद इनके लिए नहीं हो । जो पुराने रिश्ते होते हैं,जिनसे आप सीखते हैं, मेरी जो सोच है और मेरे जो संस्कार हैं,उनके साथ हम जब जम्मू-कश्मीर जाते थे, वहां फारूख अब्दुल्ला जी बहुत सालों से मुख्य मंत्री थे । वहां के लोगों में उनके लिए जो इमोशन्स थे, उनकी जो लीडरशिप थी और उन्होंने जो डेवलपमेंट किया,चाहे आप मानें या न मानें, मैं बहुत सालों से वहां जाती रही हूं । मैंने बहुत अच्छी चीजें भी देखी हैं और मैंने वहां का टैररिज्म भी बहुत पास से देखा है । दो-तीन दिन पहले शुक्रवार को हम पेपर में पढ़ रहे थे, एक माहौल देश में बन रहा था कि जम्मू-कश्मीर में क्या हो रहा है । मैंने पहला फोन उमर अब्दुल्ला जी को लगाया, जिन्हें मैं बचपन से जानती हूं । उनका फोन लग नहीं पाया,तो उन्हें व्हाट्सएप्प किया । उनकी बहन भी मेरी बहन की तरह है, मैंने उन्हें फोन किया । उन्होंने कहा कि मेरी पूरी फैमिली,मेरे पिता और मेरे भाई दोनों जम्मू-कश्मीर में रैली में हैं और उनके फोन नहीं लग रहे हैं । इसलिए मुझे लग रहा है कि जब हम इतना बड़ा डिस्कशन कर रहे हैं और जब ऐसा माहौल है, इसके बारे में होम मिनिस्टर ज्यादा बता पाएंगे । जो दो-तीन दिन से माहौल चल रहा है, वहां ट्रूप्स भी बहुत ज्यादा भेजे गए हैं । वहां न व्हाट्सएप्प चल रहा है न किसी को फोन लग रहे हैं । वहां हमारे काफी फैमिली फ्रैंड्स हैं । विजयधर जी हैं, जो वहां स्कूल चलाते हैं । हम सबसे पिछले तीन दिनों से फोन पर बात करने की कोशिश कर रहे हैं,लेकिन किसी से भी कांटेक्ट नहीं हो पा रहा है । मैंने काफी लोगों के भाषण सुने । उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का भाग हो रहा है । जब से मैं पैदा हुई हूं, मैं छुट्टियों में वहां जाया करती थी । मुझे हमेशा लगा कि भारत का सबसे सुंदर स्टेट अगर कोई होगा, तो वह जम्मू-कश्मीर ही रहा है । वह सिर्फ सुन्दर स्टेट ही नहीं, वहां के लोग, वहां के कारपेट्स…(व्यवधान) I am not yielding. वहां के स्कूल्स,सभी कुछ अच्छा है । आज वहां फूड सिक्योरिटी की बात हो रही है । तीन दिन पहले ही वहां की सरकार ने कहा था कि आप खाना वगैरह का स्टॉक रखिए । वहां के स्कूल बंद हैं । मेडिकल सुविधा का पता नहीं है । सेफ्टी, सिक्योरिटी,कांफिडेंस भी कहीं नजर नहीं आ रहा है । धारा 370 बहुत सालों से डायल्यूट होती जा रही है,यह आपके लोग भी मानते हैं । अभी प्रह्लाद जोशी जी बोल रहे थे । उन्होंने भी कबूल किया कि वर्ष 1986 में और उसके बाद जो खत, जिसका मैं रेफरेंस लेना चाहती हूं, जो शेख अब्दुल्ला जी ने शास्त्री जी को लिखा था । I am quoting something from his letter, “The statement of the responsible members of the Government declaring their intention to erode the content and the spirit of article 370, the applications of article 356 and article 357, and also of repeated characterisation of accession of the State is final and irrevocable.” तब उन्होंने यह खत लिखा था कि जो केन्द्र की सरकार है, वह ज्यूरिस्डिक्शन में काफी बदलाव करके धारा 370 को डायलूट करने जा रही है । एक तरफ श्री प्रह्लाद जोशी जी ने भी कहा कि Article 370 was intended to guarantee Kashmir’s autonomy. On July 30, 1986, the President made an order under Article 370 extending Article 249. काफी लोगों ने भी कहा कि जो कश्मीर में होता है, अरविन्द जी, आपने भी कहा कि काफी बिल्स ऐसे आते हैं, जिनमें लिखा जाता है कि ‘Not for Jammu and Kashmir’, that is very selectively used. I will give you the latest example of GST. आज वहाँ जीएसटी लागू होता है । 1986 के जो रूल्स हैं, all income tax and other rules are same there. So, these are all selectively used. I will give you one more example of what the hon. Home Minister said yesterday in his reply. कल आपने अपने जवाब में कहा कि एजुकेशन पॉलिसी अच्छी होगी । मैं एजुकेशन के क्षेत्र में बहुत साल से काम कर रही हूँ, इसलिए मुझे थोड़ी-बहुत इसके बारे में जानकारी है । मुझे आपसे एक ही सवाल पूछना है, अगर इनकम टैक्स और जीएसटी हम लागू कर सकते थे, आपकी सरकार थी, महबूबा जी वहाँ की मुख्य मंत्री थीं, यहाँ भी आपकी सरकार थी और वहाँ भी आपकी सरकार थी । जब आपने जीएसटी लागू किया, under the same Article 249, why did we all not in good sense use Right to Education in this? …(व्यवधान) वे आपके सरकारकी एलाई थीं ।…(व्यवधान)
श्री अमित शाह: वेहमारी बात नहींमानती थीं ।
SHRIMATI SUPRIYA SADANAND SULE: But it was just a suggestion. एजुकेशन मेंजो सरकारी डेटाहै, मैं वहीदेख रही थी ।I appreciate your honesty, Sir, about your ally. लेकिनअगर आप जम्मू-कश्मीर का डेटादेखें, तोवहाँ की लिट्रेसीरेट 76.75 पर्सेंटहै और वहाँकी महिलाओं कीलिट्रेसी रेटमात्र 56 पर्सेंटहै । बिहार मेंलिट्रेसी रेट 71 पर्सेंट हैऔर वहाँ कीमहिलाओं की लिट्रेसीरेट 51 पर्सेंटहै । राजस्थानमें पुरुषोंका लिट्रेसीरेट 79 पर्सेंटहै और महिलाओंका लिट्रेसीरेट 52 पर्सेंटहै । उत्तर प्रदेशमें लिट्रेसीरेट 77 पर्सेंटहै और वहाँकी महिलाओं कालिट्रेसी रेट 57 पर्सेंट है ।
इसलिए धारा 370 के हटने सेएजुकेशन मेंबहुत-से बदलावआने हैं, I am not yet convinced. If you could convince me and tell me how it is going to change, I am very open to a good discussion.
एजुकेशन औरटूरिज्म के लिएआपने कहा, मुझे आपसे इनपर सिर्फ दो-तीन सवाल पूछनेहैं । आज जोमाहौल है, In the present situation, how and why will people trust you?
आजवहाँ भय कामाहौल है । अभीवहाँ न फोनचल रहे हैंऔर न ही कुछऔर चल रहा है । वहाँ कर्फ्यूचल रहा है ।अगर आप बदलावचाहते थे, तोआपने क्यों नहींडिबेट की, सबसे चर्चा की, सबलोगों से बातकरके, प्यारसे, डिबेटसे यह क्योंनहीं हो सकतीथी? I agree, every rule can be changed. …(व्यवधान) I am not yielding, Sir. It is a very serious discussion. The hon. Home Minister only told us that we should listen. So, I have listened to everybody quietly and appreciate if they also listen. This is what democracy is all about. And you all keep criticising about what happened in 1977. If you do not allow us to even speak, it is just too much I think. …(व्यवधान)मैं सीरियसली ही बोलती हूँ,आप मेरा डेटा चेक कर सकते हैं । Please watch my performance in Parliament. …(व्यवधान)मैं 13 वर्षों से सांसद हूँ । …(व्यवधान)
Sir, he has talked about jobs in tourism. As I said, Kashmir is one of the most beautiful States in the country. आप शिमला,मसूरी, महाबलेश्वर आदि देखें, do you have a plan to protect the beauty of Kashmir? There is a whole ecosystem there. कल आपने जवाब में कहा कि आप होटल्स निकालना चाहते हैं, It is a wonderful step. इससे जॉब्स मिलेंगे । The insurgency that is happening today is always related to economics. आज आप देख रहे हैं कि देश में सेंसेक्स का क्या हो रहा है । Unemployment is one of the biggest challenges. This Government is saying and even the data is saying so. So, how will you make this difference?
एक सवाल गोवा और आंध्र प्रदेश का है । मैं सोच रही थी कि आज देश में ऐसे 11 स्टेट्स ऐसे हैं, मेरे से पहले जो लोग बोले, उन्होंने कहा कि आज आप कश्मीर में जाकर जमीन ले सकते हैं, लेकिन this is not about only buying zameen. This is about giving a better life to the people in Jammu and Kashmir. I do not think the intent is only acquisition of land. इसलिए आप 370(1) का आप आगे क्या करेंगे, 11 स्टेट्स के लिए आगे आपकी क्या सोच है, अगर आप उसके संबंध में थोड़ा क्लैरिफाई करें, तो अच्छा होगा । What will be the status of all this?
One question which comes to my mind is about the Naga framework. The hon. Prime Minister two years ago worked out the framework with NSCN and they said that the State is unique and it has a different history. The same logic applies to Jammu and Kashmir. So, will there be a similar plan for both? Or what is the plan? The hon. Prime Minister two years ago said so. We do not know the details of what was finally negotiated.
So, you may kindly throw some light why there is a different rule or special provisions like, there are talks about separate flag. So, what is really the Government’s line? What would it be for Naga framework? Why is there a big change? This almost is like a contrast. So, you kindly clarify on these issues pertaining J&K. I have a question regarding the Supreme Court. Will this issue be challenged in the Supreme Court? बहुत से पेपर्स में आया है, कई वकीलों के स्टेटमेंट्स भी आए हैं that it will be challenged in the Supreme Court. Now, there is no Assembly there. Normally, the routine is the Governor will write to you and you will take a decision. The Governor is yours; the report is yours; and the action is yours. It is all one Government only. So, will this stand in the Supreme Court? That is my question. When will you hold elections? I think, the whole idea is to divide the State. I do not know why. A lot of us talked about Andhra Pradesh. I was here in this House, when it was debated. Two wrongs do not make a right. Just because something went wrong that time, does it mean you need to make the same mistake. Then, what is the difference between this Government and that Government? So, let us not defend it one way or the other. You are dividing the State. My only humble request to you is when will you have elections which are fair and transparent.
I have one last question. As far as Ladakh is concerned, you are looking at it as a UT now. Himachal Pradesh, Uttarakhand, Arunachal Pradesh and Nagaland, all have assemblies. So, why it is not so in the case of Ladakh? I have gone through your explanation. The whole idea was, we are looking at the terrain. Why do not they have an Assembly, is my question. The Governor, I constantly feel was misleading the nation. The Governor kept telling the nation that we are not going to revoke Article 370. He told Mr. Abdullah so. So, why is the Governor misleading this nation? I think, the idea that the whole of Jammu & Kashmir being very safe and to have an honourable and equitable solution is what we are all in favour of. But to use it without following rules and regulations is something we should look down upon. I am not against you dividing States. We have supported dividing States several times but there has to be a way. The Constitution is there to follow it.
I just urge this hon. Government to give reply to all these things and make sure that people in the Valley feel safe. And regarding all these people, whether it be Mehbooba, whether it be Omar Abdullah, we really need to know where they are. I hope, they are safe. I am sure they are safe. But we need to know where they are. Why are they detained? Under what law are they detained? This is not what democracy is. You talked about what Indira Ji did. How different is this? I was born at that time but I cannot remember the emergency. So, you may clarify it in the defence of Kashmir. It is one of the most beautiful States in this country. The people of Jammu & Kashmir need a voice. They have not got a voice this time. But I hope, whatever decisions you take, I know, me saying it means nothing because you have such a number, it is anyway going to happen. But I hope, you will be fair and just to them with the kind of power that you have.
श्री अखिलेश यादव (आजमगढ़) : स्पीकरसर, मैंसबसे पहले आपकोधन्यवाद देताहूं कि आपनेमुझे इस महत्वपूर्णविषय पर बोलनेका मौका दियाहै ।
मैं सदन कीमाननीय सदस्या, जोअभी मुझसे पूर्वमें बोली हैं, उनकेबारे में कहूंगाकि आप देखिएकि उनके पड़ोसीभी हमारे बगलमें नहीं हैंऔर मेरे पड़ोसीभी मेरे बगलमें नहीं हैं । …(व्यवधान)अभी सवाल शुरू नहीं हुआ है । …(व्यवधान) मैंने आपकी बात मान ली कि वे घर पर हैं । …(व्यवधान)
स्पीकर सर,देश के होम मिनिस्टर साहब ने यह कहा कि हमने इसे कांस्टिट्यूएंट असेंबली से पास कराया है । …(व्यवधान) मैंने मंत्री जी का भाषण सुना,जिसमें उन्होंने कहा कि उन्होंने असेंबली से पास करवाकर इस प्रस्ताव को इस सदन में लाने का काम किया है । …(व्यवधान)
श्री अमित शाह : अध्यक्षजी, मैंनेऐसा नहीं कहाहै, माननीयसदस्य को थोड़ासमझने में गड़बड़हुई है । …(व्यवधान) मैंने यह कहाहै कि अब कांस्टिट्यूएंट असेंबली का अस्तित्व नहीं है । राष्ट्रपति महोदय एक कांस्टिट्यूशनल ऑर्डर लेकर आए हैं कि कांस्टिट्यूएंट असेंबली मीन्स असेंबली ऑफ जम्मू एंड कश्मीर । …(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : मंत्रीजी, आपनेसही कहा था ।माननीय सदस्यउस समय यहांनहीं होंगे ।
…( व्यवधान)
श्री अखिलेश यादव: स्पीकरसर, मैंयही चाहता था । मैं यही चाहताथा कि एक बारऔर वह बात आजाए ।
माननीय अध्यक्ष : माननीयगृह मंत्री जीने वही कहाथा, जो वेअभी बोल रहेहैं । यह रिकॉर्ड में भी है ।आप चाहेंगे तोमैं आपको बतादूंगा ।
…( व्यवधान)
श्री अखिलेश यादव (आजमगढ़) : स्पीकरसर, मैंआपकी बात सेसहमत हूं, जोआपने कही, लेकिनमैं यह बातएक बार दोबारासुनना चाहताथा । …(व्यवधान)मैं यहां एक किस्सा सुनाना चाहता हूं । …(व्यवधान) चूंकि समय नहीं है, इसलिए आप मुझे वह किस्सा नहीं सुनाने देंगे ।
स्पीकर सर,दो दिन पहले उस प्रदेश के गवर्नर कहते हैं कि मुझे नहीं पता है कि क्या होने जा रहा है और 48 घण्टे के बाद क्या हुआ,यह पूरा देश जानता है । मैं उन बातों को दोबारा कहूं, जैसे मेरे से पहले पूर्व वक्ता ने कहा कि सड़कों पर क्या है? जिस प्रदेश के लिए फैसला लिया गया है, उस प्रदेश में खुशी है या नहीं है, उस हिस्से में खुशी है या नहीं है,वहां की जनता दुखी है या खुश है, कम से कम मैं यह जान लूं । मैं एक किस्सा बताता हूं । बादशाह एक बार बैठे थे,उनके यहां दावत हो रही थी । वहां बड़े-बड़े मंत्री,महामंत्री और सलाहकार सभी बैठे थे । यह किस्सा ऐसा है कि इसे आप भी सुनेंगे तो शायद आपको उसमें जवाब मिल जाएगा और देश यह समझ जाएगा कि हां यही हुआ होगा । जब दावत चल रही थी तो बादशाह ने केवल इतना कह दिया कि देखो बैंगन की सब्जी बहुत अच्छी है । सलाहकारों ने बहुत तारीफों के पुल बांधे कि देखिए बैंगन ऐसा कभी नहीं बन सकता था । उसके बाद और भी मंत्री कहने लगे कि क्या बैंगन बना है । बादशाह ने कहा कि हमारा सबसे अच्छा सलाहकार बीरबल है । बीरबल बताइए कि यह बैंगन कैसा बना है? उसने कहा कि इससे अच्छी तो सब्जी बन ही नहीं सकती थी, यह तो सबसे अच्छी बनी है । इस सब्जी के ऊपर ताज है तो यह सब्जियों का राजा है । अगले दिन हुआ क्या कि बादशाह बीमार हो गए तो उन्होंने बीरबल को तलब किया और कहा कि आकर समझाओ कि आपने सब्जी बताई थी कि सबसे अच्छी है । जब बीरबल आए तो देखा कि बादशाह बीमार हैं और उनके आस-पास चारों तरफ जितने हकीम हो सकते थे, सब थे । उन्होंने बीरबल से कहा कि कल तो कह रहे थे कि सब्जी अच्छी और आज आप आते ही बुराई करने लगे । आखिरकार अब बुराई क्यो कर रहे हो?बीरबल ने झुककर कहा कि मैं कोई बैंगन की नौकरी नहीं कर रहा हू,मैं बादशाह की नौकरी कर रहा हूं । अगर बादशाह को अच्छा लगेगा तो मैं अच्छा कहूंगा और अगर बादशाह को खराब लगेगा तो मैं खराब कहूंगा । …* ने वही फैसला लिया जो फैसला आप चाहते थे, वह कॉन्स्टीट्वेंट असेंबली का फैसला नहीं है । यह फैसला ऊपर से नीचे गया है ।
स्पीकर सर,कश्मीर में किसने क्या खोया है?हमने भी खोया है, हमारे लोगों ने खोया है । मिलिट्री स्कूल में जिसने मुझे कमान किया,वह दो बार राष्ट्रपति भवन में ए.डी.सी. थे, मेजर गोपेन्द्र सिंह राठौर । …(व्यवधान)
DR. NISHIKANT DUBEY (GODDA): Hon. Speaker, Sir, I want to raise a Point of Order. …(Interruptions)
SHRI AKHILESH YADAV : Sir, I am not yielding. …(Interruptions) मेजर गोपेन्द्र सिंह राठौर यहां से अपनी नौकरी छोड़कर गए और वह शहीद हो गए । मैं जिस मिलिट्री स्कूल से पढ़ा हूं,मेरे साथ के लोग न जाने कितने शहीद हुए हैं । अगर फौज के लोग बैठे हों और वे फौज के बारे में समझते हों तो वहां पर मेरे स्कूल के पढ़े हुए न जाने कितने नौजवान शहीद हुए हैं । जो दो बार राष्ट्रपति जी के साथ ए.डी.सी. रहा हो, वहां पर वह शहीद हो गया । क्या हम कश्मीर के लिए नहीं हैं?क्या कश्मीर को हम नहीं चाहते हैं? क्या हमारे देश का कश्मीर नहीं है । स्पीकर सर, ये बोलते हैं कि 70 साल में कुछ नहीं हुआ । मैं आपसे जानना चाहता हूं कि आप अपने 11 साल क्यों नहीं गिनते हो?आप 70 साल बदलो । …(व्यवधान)मुझे लगता है कि कौन-कौन कंफ्यूज हुआ है । आप पूरे देश को कंफ्यूज कर रहे हो । कंफ्यूज इसलिए कर रहे हो कि जब से यह लोक सभा सत्र हुआ है, आपने देश के 20 करोड़ लोगों के लिए काम किया है, अभी आपने 110 करोड़ लोगों के लिए काम नहीं लिया है । आप अपने 11 साल गिनिए ।
15.00 hrs स्पीकर महोदय, मेरा सरकार से सवाल है कि पाक ऑक्यूपाइड कश्मीर किसका हिस्सा है? यह सरकार बताए । …(व्यवधान) । आप बताइए कि काँस्टीट्यूएंट असेंबली में अभी भी 24 सीटें खाली हैं कि नहीं? आप क्यों नहीं अभी तक भर पाए?मैं आपसे यह नहीं सुनना चाहता कि कौन भर पाएगा । आप नहीं भर पाएंगे । अगर कोई भरने का भरोसा दिला सकता है, तो वह देश के गृह मंत्री जी हैं । आप हमें भरोसा दीजिए कि पाक ऑक्यूपाइड कश्मीर भारत का हिस्सा है और जो 24 सीटें खाली हैं, वे भी भारत की हैं । हम भी देश के साथ हैं । केवल कश्मीर पर कहना और खुशी मनाना अच्छी बात है,लेकिन हम जानना चाहते हैं कि हमें नागालैण्ड, सिक्किम और मिजोरम के लिए ऐसी खुशी कब मिलेगी? जिस तरह से आपने लोकतंत्र में … * आपने कहा कि भरोसा दिलाएंगे । अगर वह शब्द असंसदीय है तो आप उसे कार्यवाही से निकाल दीजिए । …(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष: माननीय सदस्यगण, इसे कार्यवाही से निकाल दिया जाए ।
श्री अखिलेश यादव: अध्यक्ष महोदय, अगर असंसदीय शब्द है,तो मैं वापस लेता हूं, लेकिन बल का उपयोग हुआ कि नहीं हुआ? कौन नहीं जानता कि क्या फोर्स भेजी है वहां । आप गलियों की तस्वीर क्यों नहीं दिखाते हैं? अगर कश्मीर स्वर्ग है तो हम भी जरा उस स्वर्ग को देख लें । जब उसके लिए इतना बड़ा फैसला हम सब बैठकर ले रहे हैं । …(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष: आप पक्ष में हैं या खिलाफ हैं, बस इतना बता दीजिए ।
श्री अखिलेश यादव: अध्यक्ष महोदय, मुझसे यह कहा गया कि कश्मीर में विकास होगा । मुझे इस बात की खुशी है । मैं यह जानना हूं कि उत्तर प्रदेश में एक ही काम के लिए राष्ट्रपति महोदय आए, एक ही काम के लिए प्रधान मंत्री जी आए,एक ही काम के लिए आपको भी बुलाया गया । बताइए कि वह काम किसका था,जो आप शिलान्यास करके आए थे? उत्तर प्रदेश में आप नहीं दे सकते, जबकि राष्ट्रपति, प्रधान मंत्री,गवर्नर सब आपने दिए हैं । जब उत्तर प्रदेश के साथ यह धोखा हो सकता है तो कश्मीर का विकास कैसे होगा?धन्यवाद ।
श्री हसनैन मसूदी (अनन्तनाग): स्पीकर महोदय, मैं इस बिल के विरोध में, इसकी मुखालफत में खड़ा हूं । आज जम्मू कश्मीर और यूनियन ऑफ इण्डिया के रिश्तों के लिए सियाहतरीन दिन है । आप सेलिब्रेट कर रहे हैं, लेकिन आप यह नहीं समझ रहे हैं कि आज आपने क्या खोया?आपने एक करोड़ 25 लाख लोगों का विश्वास खोया । …(व्यवधान) । आपने उनका भरोसा खोया है ।
माननीय अध्यक्ष: माननीय सदस्यगण, उनका विषय है, कृपया उनको बोलने दीजिए ।
श्री हसनैन मसूदी : आप लोग सुनने की हिम्मत रखिए । 15 अगस्त,सन् 1947 में जम्मू कश्मीर एक आजाद मुल्क था । हमारा रिश्ता न पाकिस्तान से और न ही हिन्दुस्तान से जुड़ा था । जब 27 अक्टूबर को वहां के महाराजा ने जोड़ा तो महाराजा ने ही शरायत पर एक्सेशन किया । गवर्नर जनरल ने एक्सेशन बा दिले नाख़ास्ता कबूल किया, इमरजेंसी की वजह से, लेकिन यह वादा किया कि वे वहां की अवाम से पूछेंगे । उनकी यह पॉलिसी थी कि वह जूनागढ़ और हैदराबाद के पसमंजर में ऐसे मामले जहां आपको अवाम की तरफ से, वहां हम लोगों से पूछेंगे,क्या रेफरेंडम करें? यह कोई प्रेम-पत्र नहीं था, बल्कि यह गवर्नर जनरल की चिट्ठी थी और उसके बाद जब आप सिक्योरिटी काउंसिल में गए पैरा-21 में अपनी कम्प्लेन में आपने लिखा कि हमने मन बनाया कि हम यहां पर रेफरेंडम करेंगे ।
यही नहीं जब गोपाल स्वामी अयंगर जी ने हसरत मोहानी के जवाब में कांस्टीट्यूट असेम्बली में ये छ:दलील दीं कि हम यह क्यों बना रहे हैं तो उन्होंने कहा कि यह हमारे पास है और यह 370 तब तक रहेगा जब तक यह सेट होता है । मुझे उस पर नहीं जाना है,विश्वासघात की बात अलग है । यह आने वाला समय फैसला करेगा कि यह कदम सेलिब्रेट करने वाला है या तकलीफ वाला है । अब आप आईन की तरफ आ जाइए । 370 मात्र एक आर्टिकल है जो अपने बलबूते पर जम्मू-कश्मीर पर अप्लाई होता है । आप कांस्टीट्यूशनल ऑर्डर से 370 में तरमीम नहीं कर सकते हैं । 370 आपको यह इजाजत देता है कि कौन-कौन से कांस्टीट्यूशनल प्रोविजन्स जम्मू-कश्मीर पर अप्लायी कर सकते हैं और वह भी वहां की कंकरेंस और कंसेंट से । वहां की इलेक्टेड गवर्नमेंट के कंसेंट से करेंगे । आपको 370 यह अख्तियार नहीं देता है कि आप कांस्टीट्यूशनल ऑर्डर से उसमें तरमीम करें । इसका जवाब मिलना चाहिए । आपने जो रूट लिया है, वह असॉल्ट ऑन कांस्टीट्यूशन है, कांस्टीट्यूशन से खिलवाड़ है,आप कांस्टीट्यूशन को रौंदते हुए यह ऑर्डर लेकर आए हैं । आप खुद ही 370 को तीन तरमीम कर रहे हैं । वहां की कांस्टीट्यूएंट असेम्बली ने वर्ष 1956 में यह फैसला किया था कि 370 नहीं हटना चाहिए । अगर वह यह फैसला करती कि 370 हटना चाहिए तो वह इसकी सिफारिश करती,जिसका 370(3) में जिक्र है ।
जहां तक रिऑर्गेनाइजेशन की बात है । पहली बात यह है कि आर्टिकल 370, 357 और 356 के तहत आपको जो अख्तियार है, वह केवल लेजिस्लेटिव पावर है, कांस्टीट्यूशनल पावर नहीं है । वह एमरजेंसीज़ को मीट करने के लिए है कि अगर छ: महीने में कोई एमरजेंसी होगी तो आपको कोई कानून बनाना पड़ेगा । इसी वजह से 357 के तहत आपको यह कानून वहां की असेम्बली के सामने रखना है, फिर असेम्बली उसको पास करे या न करे । आप 357 का सहारा लेकर कांस्टीट्यूशन में अमेंडमेंट नहीं कर सकते हैं । आपके यह अख्तियार प्योरली लेजिस्लेटिव हैं । यहां वजीरे कानून बैठे हैं,वह बताएंगे कि आपको कांस्टीट्यूएंट पावर नहीं है । आप इस एक्सरसाइज से कांस्टीट्यूट को तरमीम नहीं कर सकते हैं । आप क्या कर रहे हैं कि वहां असेम्बली नहीं है और 370 का 3 आपको यह लाजिम करता है कि इसको आप वहां की असेम्बली को भेज दीजिए, वह उस पर व्यूज़ देगी, उसको कंसीडर करेगी । यह एम्प्टी फोर्मेलिटी नहीं है, इसका एक मकसद है ताकि आप वहां के लोगों को रोप-इन करें,वहां के लोगों को ऑन-बोर्ड रखें । आपका विभाजन करने और बाउंड्रीज़ चैंज करने का जो भी प्रपोज़ल है,इसमें वहां के लोगों को भी एक मौका मिलना चाहिए ताकि वे भी अपनी राय आपके सामने रखें, उसके बाद ही पार्लियामेंट इस पर कोई फैसला ले सकती है । आप क्या कर रहे हैं?आप खुद ही मुद्दई भी बन रहे हैं,खुद ही मुदाला भी बन रहे हैं,खुद ही वकील बन रहे हैं और खुद ही जज बन रहे हैं । आपने वहां की असेम्बली के पास व्यू के लिए कहां भेजा है? क्या आप खुद से खुद ही मशविरा करेंगे?कहां है, वहां की राय?आप वहां से राय कहां ले रहे हैं?यह कांस्टीट्यूशन में जो भी लिखा है, यह ऐसे ही नहीं लिखा गया है, इसकी एक मंशा है, इसका एक पसमंजर है,इसका एक मकसद है । आप वह मकसद कहां पूरा कर रहे हैं? आप कैसे खुद ही करेंगे? 370 जिसको आपने अमेंड किया है,उसका अधिकार आपके पास है ही नहीं ।
दूसरा, आप वहां का विभाजन करने का, हिस्से-टुकड़े करने के लिए अमेंडमेंट ला रहे हैं, जो कांस्टीट्यूशन मकेनिज्म है,जो कांस्टीट्यूशनल रिक्वायरमेंट्स हैं, उनको फॉलो किए बगैर ला रहे हैं । आपको जो भी चैंजेस लानी थीं तो पूरे कांस्टीट्यूशन मकेनिज्म को फॉलो करते हुए लाते । आप कौन सा कदम आवाम के हित में उठा रहे हैं? वहां 72 घंटों से कर्फ्यू है । 1 करोड़ 25 लाख की आबादी कर्फ्यू में है,फोन्स बंद हैं और आज करगिल में बंद है । करगिल विरोध में है,लद्दाख यूनियन टैरिट्री के विरोध में है …(व्यवधान)आप अपनी बारी में कहिएगा । …(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : माननीय सदस्य, आपको भी बोलने का मौका मिलेगा ।
श्री हसनैन मसूदी: महोदय, हमहर तरह से बहुतखुश हुए थे, मैंवहां गया औरवहां कोई हड़तालनहीं हुई । हमनेबधाई दी । लेकिनआज आप कौन सीदोस्ती का कदमला रहे हैं, जिसमेंआपको 1 करोड़25 लाख लोगोंको कर्फ्यू मेंरखना पड़ता हैऔर मशहूर लोगोंको गिरफ्तारकरना पड़ता है । वहां मैन स्ट्रीमहोने का तानादिया जाता हैऔर यह पहलीबार है कि मैनस्ट्रीम को हीवर्ष 1990 केबाद से और 28साल में यहपहली बार हैकि मैन स्ट्रीमको ही कैद कररहे हैं ।
यह हम किस मोड़ पर आ गए हैं? यहां पर हमारे एक मेंबर ने कहा है कि 10 प्रतिशत का ताना दिया है । जब आपने पीडीपी को गले लगाया था, तो क्या उनके पास 10 प्रतिशत से ज्यादा था? उस वक्त आपने कहा कि आबादी का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं । जो कश्मीर का रेप्रजेन्टेशन कर रहे हैं, उस वक्त यह याद नहीं आया । उस वक्त उनको क्यों गले लगाया था? उनके साथ क्यों सरकार बनाई थी? उस वक्त भी पर्सेन्टेज की बात थी । अब देखिए कि जिस पर आप शाबाशी ले रहे हैं…(व्यवधान) आप पंचायत इलेक्शन और अर्बन लोकल बाडीज़ इलेक्शन पर शाबाशी ले रहे हैं । देश को गौरव से सुना रहे हैं । उस पर क्या हुआ?कई एक जगह एक मेंबर ने खुद ही अपना वोट अपने लिए डाला था, कोई और नहीं था । आज ज़रा उसका एनालिसिस पेश कीजिए कि कितने वोट पड़े हैं? आज यह कहा जा रहा है कि पर्सेन्टेज क्या है? अरे भाई हम इलेक्शन में खड़े हो गए,जब सब लोग कहते थे कि मत खड़े होइए । इस बार के पार्लियामेन्ट इलेक्शन में आपने खुद एनफोर्स किया,क्लस्टर किया, 10 किलोमीटर में एक पोलिंग स्टेशन रखा, ताकि लोग वहां तक न जा सकें । बात यह है कि आप जो रूल ले रहे हैं,उसके लिए आपको इतिहास कभी माफ नहीं करेगा । इस पर इतिहास फैसला सादिक करेगा कि…(व्यवधान) जैसा कि अखिलेश जी ने जो मिसाल दी है, आप इंतजार कीजिए ।…(व्यवधान)हमारा मकसद यह होना चाहिए कि लोगों को जोड़ा जाए । यह मकसद होना चाहिए कि लोगों को अपने साथ लाएं । वही एक प्रोसेस शुरू हो रहा था । लेकिन आज मालूम नहीं आपने कहां ढकेल दिया है?आप कल्पना भी नहीं कर सकते हैं । मेरा यह फर्ज है कि मैं हाउस में कहूं, आप यह कल्पना भी नहीं कर सकते हैं कि इस कदम से कहां तक मामले खराब हो जाएंगे ।…(व्यवधान) आप कहते हैं कि यह अस्थायी था । आप गोपाल स्वामी अय्यंगार की तकरीर को पढ़िए और आप कह रहे हैं कि हमने 370 को बादिले नाख़ास्ता किया है । मुखर्जीजी के आशीर्वाद से 370 बना था । किसी ने विरोध में कांन्सिटिट्यूएंट असेंबली में बोला हो तो, उसे यहां पर लाइए ।…(व्यवधान)उन्होंने क्या विरोध किया है ।…(व्यवधान)
श्री अमित शाह : माननीयअध्यक्ष जी, यहबिल्कुल सत्यसे दूर जानेवाली बात कररहे हैं किश्यामा प्रसादमुखर्जी जी केकारण 370 बनाहै । कहीं परभी रेफरेंस लाकरदिखा दें किश्यामा प्रसादमुखर्जी ने 370की बात कीहै ।…(व्यवधान)यह सदन सत्य से दूर बात नहीं सुन सकता है । आपको बोलने का अधिकार दिया गया है, इसका मतलब यह नहीं है कि आप यहां पर कोई असत्य बात रख देंगे ।…(व्यवधान) मैं मसूदी साहब से यह पूछना चाहता हूं कि कहां पर श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी ने 370 का स्वागत किया है? उन्होंने 370 को हटाने के लिए जान दे दी है । आप क्या बात कर रहे हैं ।…(व्यवधान)वह किस जगह है,उसका ज़रा जिक्र करें । मैं उनसे कहना चाहता हूं कि वह उसका जिक्र करें ।…(व्यवधान)
श्री हसनैन मसूदी: स्पीकर साहब, आप मेरी बात सुनिए ।…(व्यवधान) आप कांन्सिटिट्यूएंट असेंबली की डिबेट यहां पर लेकर आइए ।…(व्यवधान)आप देखिए कि क्या उसके विरोध में किसी ने वोट दिया है ।…(व्यवधान)
श्री अर्जुन राम मेघवाल : अध्यक्षमहोदय, मैंआपके माध्यमसे सिर्फ इतनाही कहना चाहताहूं कि वह जोबोल रहे हैं, उसकोऑथेन्टिकेट करदें । वह … *आरोपलगा रहे हैं । एकदम … * आरोपलगा रहे हैं ।…(व्यवधान)
श्री अमित शाह : माननीयअध्यक्ष जी, मसूदीजी को सब कुछबोलने का अधिकारहै, इस परहमें कोई आपत्तिनहीं है । वहबोल सकते हैं, अपनीबात को रख सकतेहैं ।…(व्यवधान) अगरवह कहते हैंकि श्यामा प्रसादमुखर्जी जी 370लाए थे, तो वह उसकारेफरेंस देंकि वे कहांसे ड्रॉ कररहे हैं, वे कहां सेबोल रहे हैं?श्यामा प्रसादमुखर्जी जी नेकब कांन्सिटिट्यूएंट असेंबली में यह कहा था? इस तरह की बेबुनियाद बातें यहां नहीं हो सकती हैं ।…(व्यवधान)
श्री हसनैन मसूदी : स्पीकर साहब, क्या वह कैबिनेट में नहीं शामिल थे?क्या 370 सर्वसहमति से पास नहीं हुआ था?…(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : माननीय सदस्य, प्लीज । माननीय गृह मंत्री जी ने बोल दिया । आप बैठिए ।
…( व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : हाँ बोलिए ।
श्री हसनैन मसूदी: स्पीकर साहब, आपको कॉन्स्टीट्यूएंट असेम्बली की डिबेट में मिलेगा ।…(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : माननीय सदस्य, एक मिनट । माननीय सदस्य, प्लीज । यह सदन है । आपको बोलने का पूरा अधिकार है, लेकिन इस संसद से जो बात हम कह रहे हैं, पूरा देश सुन रहा है । बोलते समय किस रेफरेंस में किसी पर आरोप-प्रत्यारोप जब तब नहीं हो,फिर नियम-कानून की किताब से चलेंगे तो सदन चलेगा नहीं । तथ्यों के आधार पर हो, कोई रेफरेंस हो, कोई बात हो, इस सदन में ऐसा नहीं बोले कि कोई तर्क नहीं,कोई तथ्य नहीं,कोई संदर्भ नहीं और हम किसी पर आरोप-प्रत्यारोप लगाएं । इसके लिए सदन का उपयोग नहीं होना चाहिए । मैं कार्यवाही से निकालूँ,लेकिन सदन में बोल कर जनता के बीच में चला जाए,यह मैं कभी उचित नहीं मानता । इसलिए बोलते समय माननीय सदस्य, जो भी तथ्य हो, प्रमाण हो तो निश्चित रूप से बोलें ।
माननीय रक्षा मंत्री जी ।
…( व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : उनको बोलने दीजिए ।
रक्षामंत्री (श्री राजनाथ सिंह): अध्यक्ष महोदय, मैं कुछ नहीं कहना चाहता, बस इतना ही आपके माध्यम से माननीय सदस्य से अपेक्षा करता हूँ, जिन्होंने अपने विचार व्यक्त करते यह कहा है कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ही 370 का प्रस्ताव लाए थे । मैं चाहता हूँ कि इसको वे ऑथेंटिकेट कर दें । इसका कोई न कोई रेफरेंस आपके पास होगा तो रेफरेंस की भी इस सदन में चर्चा करें तो ज्यादा उचित होगा । इतना ही कहना है । यदि इसका रेफरेंस नहीं है तो आपको सदन से क्षमा माँगनी चाहिए । यही मैं निवेदन करना चाहता हूँ ।
श्री हसनैन मसूदी: स्पीकर साहब,मैंने कभी यह नहीं कहा कि वे रेजॉल्यूशन लाए ।…(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : माननीय सदस्य, प्लीज ।
श्री हसनैन मसूदी: स्पीकर साहब,आप बिला शक इसे निकालिए, लेकिन मेरा यह नहीं कहना था कि उन्होंने इंट्रोड्यूस किया । मैंने नहीं कहा । बात यह है कि क्या सर्वसम्मति से 370 नहीं हुआ ।…(व्यवधान)
श्री अमित शाह : वे कहते हैं कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी कैबिनेट के सदस्य थे । मैं सदन के रिकॉर्ड के लिए स्पष्ट करना चाहता हूँ कि वह कैबिनेट किसी एक पार्टी की चुनी हुई कैबिनेट नहीं थी, सर्वदलीय कैबिनेट थी और कॉन्स्टीट्यूएंट असेम्बली में जो प्रस्ताव गए हैं, वे कैबिनेट के थ्रू नहीं गए हैं । कॉन्स्टीट्यूएंट असेम्बली ने स्वत: ही चर्चा करके संविधान को लिखने का काम किया है । संविधान बनने के बाद यह हुआ कि कोई भी प्रस्ताव जो कानून बनने के लिए जाएगा,वह कैबिनेट के थ्रू जाएगा । उस कैबिनेट को अधिकार संविधान सभा ने जो संविधान बनाया,उसने दिया है । इसलिए जब कैबिनेट के अंदर श्यामा प्रसाद मुखर्जी थे, it does not mean कि उन्होंने 370 का समर्थन किया है और रिकॉर्ड क्लीयर होना चाहिए । इस सदन में इस तरह की बातें रिकॉर्ड पर भी नहीं रहनी चाहिए ।
माननीय अध्यक्ष : माननीय सदस्य, बोल रहे हैं । डॉ. शशि थरूर जी, आपको इजाजत नहीं दी है । उनको बोलने दीजिए ।
…( व्यवधान)
श्री हसनैन मसूदी: माननीय गृह मंत्री साहब ने इन ए वे,मेरा सपोर्ट ही किया है ।…(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : माननीय सदस्य, इनको कनक्लूड करने दीजिए ।
श्री हसनैन मसूदी: इसलिए यह माना कि कैबिनेट से आया था । किसी का विरोध नहीं हुआ । सिर्फ महावीर त्यागी साहब ने एक अमेंडमेंट की थी…(व्यवधान)
श्री अमितशाह : अभी भी यह कह रहे हैं कि होम मिनिस्टर ने कहा कि कैबिनेट से आया । मैंने कभी नहीं कहा कि कैबिनेट से आया है । उस वक्त संविधान सभा में जो काननू बनने जाता था, वह कैबिनेट से होकर नहीं जाता था । कैबिनेट से होकर कानून बनने के लिए जाने का सिलसिला संविधान बनने के बाद देश की कैबिनेट को मिला । उस वक्त स्वत: ही संविधान सभा अपनी चर्चा करके संविधान को गढ़ रही थी, बना रही थी । इसलिए श्यामा प्रसाद मुखर्जी कैबिनेट के सदस्य थे, it does not mean कि उन्होंने 370 का समर्थन किया ।
श्री हसनैन मसूदी : हमने कहा कि सर्वसम्मति से महावीर त्यागी साहब ने अमेंडमेंटलिया, वह लिया,सिर्फ हसरत मोहानी ने ऑब्जेक्शन किया और स्वामी आयंगर साहब ने सब को कहा कि नहीं,यह हित में है । अगर आप उनका बयान देखेंगे तो यह टेम्प्रेरी है,यह ट्रांजिशनलहै ।…(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : श्री पी.के. कुनहलिकुट्टी ।
…( व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : माननीय सदस्यगण,कृपया बैठजाइए ।
…( व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : माननीयसदस्यगण, आपनेबिजनेस एडवाइजरीकमेटी बना रखीहै । उसमें टाइमका अलॉटमेंटहोता है । मैंनहीं कहता किमैं उस टाइमअलॉटमेंट सेज्यादा समय देताहूँ ।
…( व्यवधान)
श्री अधीर रंजन चौधरी: सर, उन्होंनेज्यादा समय नहींलिया है ।…(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : एक मिनट रूकिए । मैं ज्यादासमय नहीं देताहूँ, लेकिनमैंने अधिकतममाननीय सदस्योंको उनकी पार्टीके हिसाब सेमिलने वाले समयसे ज्यादा समयदिया है, क्योंकि लोकतंत्रमें सबको बोलनेका अधिकार हैऔर प्रतिपक्षको विशेष रूपसे ज्यादा अधिकारहै । माननीयसदस्य जम्मू-कश्मीर से आतेहैं, इसलिएमैंने उनको बोलनेके लिए ज्यादासमय दिया है ।
…( व्यवधान)
अनेक माननीय सदस्य : सर, इन्हें कनक्लूड कर लेने दीजिए ।…(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : आपने जो व्यवस्थाबनाई है, उसके हिसाबसे उनका समयतीन मिनट काहोता है, लेकिन मैंनेउन्हें 8 मिनट का समयबोलने के लिएदिया है ।
…( व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : उन्हें बोलतेहुए 15 मिनटहो चुके हैं । माननीय सदस्य,आप बोलिए औरअपनी बात कनक्लूडकीजिए ।
…( व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : माननीय सदस्य,आप उनका समयखराब क्यों कररहे हैं? आप उन्हें कनक्लूडकरने दीजिए ।कई माननीय सदस्यबीच में खड़ेहो जाते हैंऔर उन्हें डिस्टर्बकरते हैं ।
…( व्यवधान)
श्री हसनैन मसूदी: महोदय, सारे देश ने जो एक विश्वास दिया था, वह तोड़ा जा रहा है और वह भी एकतरफा । आप कह रहे हैं कि हम वहाँ के इलेक्टेड गवर्नर साहब के मशविरे पर, उनकी कनकरेंस लेकर, उनकी कन्सेन्ट लेकर कर रहे हैं ।
जनाब, वह हमारे संविधान की कल्पना ही नहीं है, क्योंकि हर एक जो कांस्टिट्यूशन प्रोविजन होता है, उसमें वहाँ की इलेक्टेड गवर्नमेंट शामिल होनी चाहिए । हमारे प्रेसीडेंट साहब खुद अपने रिप्रेजेंटेटिव से, अपने अपॉइंटी से कनकरेंस लेंगे । यह कैसी बात है?आप तो इतने विद्वान हैं । जो कल्पना है, जो कनकरेंस की बात है, वह इलेक्टेड गवर्नमेंट की है, and the Elected Government is not in place. So, whatever is being done, that is not in tune with, in consonance with the Constitution.
जनाब, कांस्टिट्यूशन का असॉल्ट किया जा रहा है । कांस्टिट्यूशन मैकेनिज्म फॉलो करके कोई चीज की जानी चाहिए । आप दूसरी बात कह रहे हैं कि डेवलपमेंट होगा । हमारे जम्मू-कश्मीर में एक भी फॉर्मर सुसाइड नहीं है । We are well-off. हमारी पर-कैपिटा देश में सबसे ज्यादा है । हमारी आठ यूनिवर्सिटीज हैं । एक जम्मू,एक श्रीनगर,एक माता वैष्णो देवी, एक बाबा गुलाम शाह, दो सेन्ट्रल यूनिवर्सिटी और इस्लामिक यूनिवर्सिटी,हमारी कुल आठ यूनिवर्सिटी हैं ।…(व्यवधान)एक लद्दाख की यूनिवर्सिटी भी है ।…(व्यवधान)वह तो इन्हीं का काम था ।…(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : माननीयसदस्य, आपबैठ जाइए । मैंआपको भी बोलनेका उतना हीमौका दूँगा ।वह आपका भीस्टेट है ।
…( व्यवधान)
श्री हसनैन मसूदी: जनाब, हमारी कोई स्टार्वेशन डेथ नहीं है ।…(व्यवधान) हमारा कोई फॉर्मर सुसाइड नहीं है ।…(व्यवधान)हम वेल-ऑफ हैं । हमारा टूरिज्म है ।…(व्यवधान)हमारा हार्टिकल्चर है । हमें धारा 370 उठाकर किसी भी डेवलपमेंट की जरूरत नहीं है । हमारी आइडेन्टिटी,हमारी पॉलिटिकल ऐस्परेशन, जो हमारी ऑटॉनमी है,वही हमें सबसे ज्यादा प्यारा है । मैं इसके विरोध में खड़ा हुआ हूँ ।…(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : श्रीपी.के. कुनहलिकुट्टी ।
कम से कममाननीय सदस्यहसनैन मसूदीने पक्ष औरविपक्ष की बाततो कही, नहींतो सदन मेंकोई यह नहींबता रहा हैकि वह इस बिलके पक्ष मेंहै या खिलाफमें है ।
श्री हसनैन मसूदी: महोदय, मैंने सबसे पहले ही कहा है कि मैं इस बिल के विरोध में बोलने के लिए खड़ा हुआ हूँ ।…(व्यवधान) मैं मुखालिफत में खड़ा हूँ ।…(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : श्रीपी.के. कुनहलिकुट्टी ।
SHRI P.K. KUNHALIKUTTY (MALAPPURAM): Sir, one minute ago, while the poor Member, Shri Hasnain Masoodi, a Member from Kashmir was speaking here, I am very sad to say that the hon. Home Minister got impatient, and all the other Members stood up to oppose him.
15.24 hrs (Shri Rajendra Agrawal in the Chair) There is a criticism that you have not followed any democratic process in bringing this Resolution before the Parliament. You have not called any meeting of political parties, you have not consulted anybody, and you have almost created a war-like situation in the country.
Yesterday, you came before the Rajya Sabha with this Resolution, almost bulldozing law, and got it passed. You are very jubilant and proud of all that. That is true. But there is also some other view in this country. You are not even patient to listen to that. This is what is called a very autocratic kind of a stand. That is what is the criticism against you.
You are bulldozing Bills here one after another. But you are not even patient enough to hear the Member from Kashmir. It is shame on you, I should say. This is a country which respects democratic approaches. Do you think that there is nothing in the historical decision of making the Constitution of India which prevailed in this country so far? You were ruling this country during the last Lok Sabha for five years. Why did you not change it at that time? Why did you not move anything to do this at that time? You are thinking that you have a comfortable majority and, so you are bulldozing one Bill after another. What are you achieving by this step? You are weakening the peace-loving people of the Kashmir Valley. You are weakening those people who stood with India. You are strengthening the hands of militants. Saying something in your Manifesto is very easy. But do not think that it is very easy to rule this country with your Manifesto. It is totally different. Coming back to power for second time is not a big thing. The Congress Party – Soniaji is sitting here – has come back to power for many times and ruled this country through consensus. So, it will not be very easy for you to rule this country with the Manifesto of your Party. Do not think this jubilant attitude will be there always. Today, you may be jubilant, but tomorrow you will feel sorry about this step and there is no doubt about that. You are thinking that you can implement your communal agenda and make the people forget everything else like starvation, unemployment, people’s welfare etc. You think that you will be able to jump over all that. But do not ignore or underestimate the people of this country. Your actions will not succeed always. You will feel sorry about your actions in future.
Now you are going ahead and passing legislation one after another and you are trying to divide the people on communal basis. It is the trick of the British people; the British people ruled this country by dividing people. You are trying to divide the people and you are following the policy of ‘divide and rule’. But do not think that you will succeed in your effort. It is a strike against our people. It is most undemocratic. This warlike situation in Kashmir is not appreciated by any peace-loving or secular people. You are ignoring the Parliament. You have kept the Parliament in dark. You have not consulted any political party on this measure.
Your Government was there in Jammu and Kashmir. Why did you not think about doing this at that time? Now you have made Jammu and Kashmir like a Municipal Corporation. But I do not think that you will be able to succeed with your measure. A day will come when you will feel sorry about this measure. You are misinterpreting the history. Do not think that everybody has believed you. This measure will have repercussions. Today you may have this jubilant attitude, but tomorrow you will feel sorry about this.
There are many problems in the Kashmir Valley. Peace-loving people like Farooq Abdullah is not here today. Why are you marginalising people like this? Why are you strengthening the hands of militants? That is what you are doing now. You have to say something about that. But you are keeping quiet. Supriyaji asked as to what is happening in the Valley and how things are going there. The people living there are Indian citizens. There is no water and there is not even information about them. There are reports that there are many tourists in the Valley. Why do you create a warlike situation within the country? They are all Indian citizens. You are declaring war on Indian citizens. Why are you dividing people like this? This is a big question. This question will be asked. Do not think that you will be able to do this always and definitely this will have serious repercussions. You will feel sorry for this. That is what I want to say. With these words, I oppose this Resolution.
श्री अमित शाह: मेरेस्पष्टीकरण केबाद भी बहुतसारे सदस्य कहरहे हैं किफारुख साहब नहींहै । इसके लिएउन्हें दुख हैं । फारुख साहबहैं, …(व्यवधान)वह अपने घर में हैं, स्वतंत्र हैं, लेकिन वह यहां आना नहीं चाहते । मैं उनको यहां जबरदस्ती नहीं ला सकता ।…(व्यवधान) वह न हिरासत में हैं, न नजरबंद हैं, …(व्यवधान)फारुख साहब अपने घर में हैं और अच्छी तरह से हैं ।…(व्यवधान)
श्री जामयांग त्सेरिंग नामग्याल (लद्दाख): सभापति महोदय, आपने मुझे इस महत्वपूर्ण बिल पर चर्चा करने के लिए जो मौका दिया है, उसके लिए मैं आपका आभार व्यक्त करता हूं ।…(व्यवधान)
महोदय, आज भारत के इतिहास में वह दिन है,जो गलतियां पंडित जवाहर लाल नेहरू जी के लीडरशिप में कांग्रेस ने की, उन गलतियों का आज रेक्टिफिकेशन होने जा रहा है । हम सभी इसका स्वागत करते हैं ।…(व्यवधान) आप लोग मुझे बोलने दीजिए । आप लोगों ने बहुत बोला है ।…(व्यवधान)आप लोग सुनने की क्षमता रखिए ।
माननीय सभापति : प्लीज, आपसभी बैठ जाइए । माननीय सदस्यको बोलने दीजिए ।
…( व्यवधान)
श्री जामयांग त्सेरिंग नामग्याल: सभापति महोदय, मैं पूरी चर्चा को बहुत अच्छी तरह से सुन रहा था । मुझे खुशी हुई कि बहुत से लोगों ने लद्दाख, लेह तथा कारगिल का जिक्र किया,लेकिन मैं जानना चाहता हूं कि क्या वाकई में वे लोग लद्दाख को जानते हैं? आज तक बीते 71 सालों में उन्होंने लद्दाख को बिल्कुल नहीं अपनाया, बिल्कुल उसे फेंक कर रखा ।…(व्यवधान)इसी सदन में यह वक्तव्य दिया गया था कि वह एक जमीन का टुकड़ा है, जहां पर घास का एक तिनका भी नहीं उगता है । ऐसा वक्तव्य देने वाले क्या लद्दाख को समझते हैं? क्या लद्दाख की विशेष संस्कृति को जानते हैं?क्या लद्दाख की भाषा को जानते हैं? लद्दाख के रहन-सहन,खान-पान,वहां की जियोग्रॉफिकल कंडीशन, क्लाइमेट की कंडीशन, जो दुर्गम क्षेत्र है, क्या वे इन सारी चीजों को जानते हैं? …(व्यवधान) वे केवल किताबें पढ़कर बोल रहे हैं ।
महोदय, लद्दाख ने पिछले 71 सालों तक यू.टी. के लिए संघर्ष किया । हम भारत देश का अटूट अंग बनना चाहते थे ।…(व्यवधान)वर्ष 1948 में लद्दाख बौद्धिस्ट एसोसिएशन के प्रेसिडेंट ने पंडित जवाहर लाल नेहरू जी को कहा था । उन्होंने कहा था कि लद्दाख को या तो आप सेन्ट्रल एडमिनिस्ट्रेशन के तहत रखिए या ईस्ट पंजाब के साथ रखिए, लेकिन किसी भी कंडीशन में हमें कश्मीर के साथ मत रखिए ।…(व्यवधान)यह हमने कहा था, लेकिन उस समय जिनकी सरकार थी, उन्होंने हमारी सुनवाई नहीं की और जानने की कोशिश तक नहीं की । कश्मीर के नीचे आज तक हमारा डेवलपमेंट नहीं हुआ । अगर हमारा पोलिटिकल एस्पिरेशन,हमारी पहचान,हमारी भाषा,लुप्त हुई है,तो इसके लिए आर्टिकल 370 और कांग्रेस पार्टी जिम्मेवार हैं ।…(व्यवधान)
महोदय, मैं डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जैसे वीरों तथा कुशोक बकुला रिनपोछे जैसे महान व्यक्तियों को याद करता हूं । थुपस्तान छेवांग जैसे लोगों ने लद्दाख को एक दिशा दी कि हमें भारत के साथ रहना है,भारत की जयकार करनी है और हमें अपने देश पर मर-मिटने के लिए तैयार रहना है ।…(व्यवधान)
आज बहुत सारे सदस्य यहां पर हिस्ट्री का रेफरेंस दे रहे थे । मैं याद दिलाना चाहूंगा कि चाहे वर्ष1965का वार हो, वर्ष 1971 का वार हो, वर्ष 1999 का हो या 1948 का कबाइली हमले का हो, इतिहास चेक करके देखिए,लद्दाखी ने हमेशा बलिदान दिया । हमेशा वह देश के लिए मर-मिटने के लिए तैयार रहा ।
आज यहां पर मेरे साथी, कश्मीर के ऑनरेबल मेंबर पूछ रहे थे कि धारा 370 हटने से क्या खोएंगे? मैं एक चीज जरूर कहना चाहूंगा, एक चीज वहां जरूर खोएंगे, दो परिवार रोजी-रोटी खोएंगे और कुछ नहीं खोएंगे । सिर्फ दो परिवार रोजी-रोटी खोएंगे और कश्मीर का भविष्य उज्ज्वल होने वाला है ।
महोदय, यहां पर कारगिल का जिक्र किया और सदन को मिसलीड करने की कोशिश की गई । मैं कारगिल से चुनकर आता हूं । मैं गर्व से कहता हूं कि कारगिल वालों ने यूटी के लिए वोट दिया है । मैं सदन को याद दिलाना चाहता हूं कि वर्ष 2014 के पार्लियामेंट्री इलेक्शन में यूटी हमारे लद्दाख के टॉप मैनिफेस्टो पर था । लद्दाख वालों ने, मेजोरिटी ने यूटी के लिए वोट दिया । वर्ष 2019 के इलेक्शन में फिर हम इलेक्शन मैनिफेस्टो में लेकर आए । हमने दोनों डिस्ट्रिक्ट्स में, चाहे बुद्धिस्ट का हो या मुस्लिम का हो, लेह का हो या कारगिल का हो, हर क्षेत्र में सभी लोगों के दरवाजे पर जाकर हमने लोगों को समझाया कि यूटी क्या है? लोगों ने बड़ी बहुमत के साथ, आज तक लद्दाख में जितने भी पार्लियामेंट्री इलेक्शन्स हुए हैं, रिकार्ड मार्जिन के साथ लोगों ने मुझे सदन में आने का अवसर दिया । लोगों ने नरेन्द्र मोदी जी की सरकार पर विश्वास किया । लोगों ने इस यूटी का स्वागत किया । आज ये कारगिल की बात कर रहे हैं । क्या वे कारगिल जानते हैं?
मुझे सदन में यह कहने में कोई संकोच नहीं है । तब के गृह मंत्री माननीय राजनाथ सिंह जी लेह पधारे थे । ऑल पार्टी पार्लियामेंट्री डेलीगेशन जम्मू गया था, कश्मीर गया था और आप तब के होम सेक्रेटरी के साथ लेह आए थे । पूरे लद्दाख की हर पॉलिटिकल पार्टीज़ के,बीजेपी, कांग्रेस,पीडीपी, एनसी से लेकर, मैं कश्मीर की बात नहीं कर रहा हूं,वहां अलग वातावरण है, मैं लेह की बात कर रहा हूं । साथ ही साथ हर रिलीजियस आर्गनाइजेशन के चाहे लद्दाख बुद्धिस्ट एसोसिएशन हो, अंजुमन इमामिया एसोसिएशन हो, मोइनुल इस्लाम हो, क्रिश्चियन एसोसिएशन हो, हिंदू महासभा हो, सबने एक ही आवाज में कहा कि हमें यूटी चाहिए । राजनाथ सिंह जी पूछ रहे थे कि और क्या चाहिए?हमने कहा कि और कुछ नहीं चाहिए,सिर्फ यूटी चाहिए । हमने यह कहा था । …(व्यवधान)सुनने की क्षमता रखिए । अभी तो ट्रेलर है । …(व्यवधान)
उस वक्त हमारे साथ एक दुर्घटना घटी । आज मैं उससे इस सदन को अवगत कराना चाहूंगा कि लेह में एनसी के डिस्ट्रिक्ट प्रेजीडेंट, पीडीपी के डिस्ट्रिक्ट प्रेजीडेंट, जिन्होंने यूटी के मेमोरेंडम को साइन किया, उन लोगों को कश्मीर के एनसी और पीडीपी ने वहां से प्रेस रिलीज जारी करके अपनी पार्टी से बाहर निकाल दिया । आज ये लोग डेमोक्रेसी की बात कर रहे हैं,लोकतंत्र की बात कर रहे हैं । क्या वह आपका लोकतंत्र था?लोगों की आवाज बंद करना, दबे-कुचले रखना,क्या यह आपका लोकतंत्र था?
कल 11बजे से राज्य सभा की चर्चा शुरू हुई, इसे मैं अभी तक सुन रहा था । बहुत लोगों ने इक्वेलिटी की बात कही, धारा 370 नहीं होगी तो जम्मू-कश्मीर में इक्वेलिटी नहीं रहेगी, यह होगा, वह होगा । जो ऐसे वक्तव्य देते हैं, भारत सरकार से जम्मू-कश्मीर, लद्दाख का फंड लेकर जाते हैं, लद्दाख में विकास करने के लिए आते हैं,जो पूरे लद्दाख का फंड कश्मीर में खा जाते हैं,मैं सदन से पूछना चाहता हूं, मैं आपके माध्यम से सदन में उनको पूछना चाहता हूं क्या यह इक्वेलिटी है? जम्मू-कश्मीर में दो कैपिटल हैं, एक समर और एक विंटर कैपिटल है । मैं पर्टिकुलरली मेंशन कर रहा हूं, वहां दोनों जगह सिविल सैक्रेटेरिएट है । आप डाटा खोलकर देखिए कि दोनों सिविल सैक्रेटेरिएट में लद्दाख के कितने मुलाज़िम हैं? क्या यह आपकी इक्वेलिटी है? अगर आप 1000 जॉब क्रिएट करते हैं, जम्मू वाले तो लड़-झगड़कर कुछ ले लेते हैं लेकिन लद्दाख वालों को 10 नौकरियां भी नहीं देते हैं,क्या यह आपकी इक्वेलिटी है?हसनैन मसूदी जी यूनिवर्सिटी की बात कहते रहे थे । मैं उनके साथ कांग्रेस वालों को याद दिलाना चाहता हूं, आपने वर्ष 2011 में कश्मीर में सैंट्रल यूनिवर्सिटी दी, जम्मू में सैंट्रल यूनिवर्सिटी दी, जम्मू वालों ने लड़-झगड़ कर ली । मैं उस वक्त स्टुडेंट यूनियन का लीडर था, हमने जम्मू में पढ़ाई करने वाले स्टुडेंट्स को रोड पर लाकर इनके खिलाफ काली पट्टी बांधकर सैंट्रल यूनिवर्सिटी की मांग की थी । इन्होंने लद्दाख में एक भी हायर एजुकेशन का इंस्टीट्यूट नहीं दिया, क्या यह आपकी इक्वेलिटी है?हाल ही में यूनिवर्सिटी दी तो मोदी जी ने दी । मोदी है तो मुमकिन है, सही में है ।…(व्यवधान)
कल राज्य सभा में कांग्रेस के नेता गला फाड़-फाड़ कर कह रहे थे कि लद्दाख के साथ क्या होगा । मैं आपके माध्यम से कहना चाहता हूं, आप 2008 में जम्मू-कश्मीर के चीफ मिनिस्टर थे । आपने वहां आठ नए डिस्ट्रिक्ट बनाए,चार कश्मीर को दिए, जम्मू वालों ने लड़ाई की तो चार उनको देने पड़े, लेकिन लद्दाख को आपने एक भी डिस्ट्रिक्ट नहीं दिया, क्या यह आपकी इक्वेलिटी है?आज आप इक्वेलिटी की बात कहते हैं । हमारी भाषा भोटी है, कश्मीरी लिपि नहीं होने से भी इसे आठवीं अनुसूची में रिकोग्नाइज किया गया । जम्मू वालों ने आंदोलन किया तो डोगरी को भी दर्जा दे दिया, लेकिन आज तक लद्दाख की भाषा को रिकोग्नाइज नहीं किया, क्या यह आपकी इक्वेलिटी है? …(व्यवधान)
महोदय, यहां सैक्युलरिज्म और डेमोक्रेसी की बात की जा रही है । मैं पूछना चाहता हूं कि जिन कश्मीरी पंडितों को धारा 370 का मिसयूज़ करते हुए लात मारकर रातों रात निकाल दिया,क्या यह आपका सैक्युलरिज्म है? इसी धारा 370 का मिसयूज़ करते हुए कल गर्व से वक्तव्य दे रहे थे, लद्दाख में पहले बौद्ध संख्या ज्यादा थी और अब मुस्लिमों की संख्या ज्यादा है । मैं अफसोस के साथ कहना चाहता हूं कि आपने धारा 370 का मिसयूज़ करके जम्मू-कश्मीर में बौद्धिस्ट को खत्म करने की कोशिश की । यह है आपका डेमोग्रेफिक मैन्टेन? यह है आपका सैक्युलरिज्म?मैं नहीं कहता कि वहां शासन किया,मैं कहता हूं कि राज किया । इन्हीं परिवारों ने 1979 में लद्दाख का बंटवारा किया,बौद्धिस्ट मेजोरिटी के साथ लेह डिस्ट्रिक्ट और मुस्लिम मेजोरिटी के साथ कारगिल डिस्ट्रिक्ट बनाया और आज तक हम दोनों भाइयों को लड़वाया । क्या यह है आपका सैक्युलरिज्म?आप कारगिल का जिक्र कर रहे थे,कह रहे थे कि कारगिल बंद है । किसने आपको कहा कि कारगिल बंद है? …(व्यवधान)आप जानने की कोशिश कीजिए,लद्दाख से मैं चुनकर आया हूं आप नहीं आ रहे हैं लद्दाख से । …(व्यवधान) आप बैठिए । आप आराम से बैठिए । आज तक आप लोगों ने बोला, आज हमारे बोलने का मौका है ।
आज मोदी सरकार का सेशन चल रहा है । ये लोग सिर्फ एक रोड और छोटे से मार्केट को कारगिल समझ बैठे हैं । अगर आपको कारगिल देखना है तो जास्कर जाइए, वहां के मूलबेक-शारगोल जाइए,आर्यन वैली जाइए,दर्शिक-गरकोन देखिए । कारगिल के 70 परसेंट एरिया के लोग आज इस डिसीजन का वेलकम कर रहे हैं, इस बिल का समर्थन कर रहे हैं । …(व्यवधान) सुनिए, बोलने का मौका दीजिए और सुनने की क्षमता रखिए । …(व्यवधान)मैं आपकी तरह किताबें पढ़कर नहीं आता हूँ, लेकिन ग्राउंड की रियेलिटी महसूस करके आता हूँ ।
कारगिल में अभी जो कहा जा रहा है,वह इन्हें फोन करके कहलवाया जा रहा है । उनको भी नहीं पता है कि वे लोग क्या कर रहे हैं । उनको अपने भविष्य के लिए सोचना चाहिए । इनकी जुबान पर नहीं जाना चाहिए । ये अपने हित के लिए किसी को भी नचाएंगे । …(व्यवधान) बैठिए-बैठिए,आप सुनने की क्षमता रखिए ।…(व्यवधान)
सभापति जी, …* इसी संकल्प के साथ, मैं गर्व से कहता हूँ, इनको नहीं पता कि लद्दाख वालों ने आज तक क्या किया । आज ये कह रहे हैं कि हमारा झण्डा जा रहा है । भाई साहब, आपके झण्डे को तो लद्दाख वालों ने वर्ष 2011 में ही नकारा है । लद्दाख ऑटोनोमस हिल डेवलपमेंट काउंसिल ने रिजोल्यूशन पास किया, वर्ष 2011 में जम्मू-कश्मीर का झंडा लद्दाख ऑटोनोमस हिल डेवलपमेंट काउंसिल की चेयरमैन,एग्जिक्यूटिव काउंसलर, जो कैबिनेट और डिप्टी मिनिस्टर रैंक के होते हैं, उनकी गाड़ी में लगता था, हमने उस झंडे को नकारा । हमने वहां नेशनल एमब्लेम को लगाया क्योंकि हम भारत देश का अटूट अंग बनना चाहते हैं । क्येांकि हम मानते हैं कि-
“आन देश की, शान देश की देश की हम संतान हैं, तीन रंगों से रंग तिरंगा अपनी ये पहचान है । ” यह कितनी आइरोनिकल बात है कि पंचायत चुनाव में पार्टिसिपेट नहीं करेंगे,लेकिन जब अपनी कुर्सी की बात आएगी तो पार्टिसिपेट करेंगे । ग्रास रूट डेमोक्रसी नहीं आने देंगे,लेकिन अपने घर की रोटी चलनी चाहिए,ऐसी विचारधारा हम स्वीकार नहीं करेंगे । कुछ लोग,मैं बार-बार दो परिवार का जिक्र कर रहा हूं, ये परिवार कश्मीर के मुद्दे का ढिंढ़ोरा पिट रहे हैं, ये समाधान चाहने वालों में से नहीं हैं । ये इस समस्या का अंग बन चुके हैं, ये नशे में हैं । ये आज भी यह समझते हैं कि कश्मीर हमारे …* जागीर है, अब नहीं रहा । …(व्यवधान)
महोदय, अंत में कनक्लूड करने से पहले मैं भारत सरकार को धन्यवाद देना चाहता हूं । श्री नरेन्द्र मोदी जी को, गृह मंत्री माननीय अमित शाह जी को और पूरे सहयोगी दल को, जिनका कोई दल नहीं है,लेकिन इस बिल के फेवर में हैं,उन लोगों को भी मैं पूरे लद्दाख के निवासियों की ओर से धन्यवाद देना चाहता हूं ।
आज पहली बार इस भारत के इतिहास में लद्दाखियों के सेन्टीमेंट्सके एस्प्रिरेशन को सुना जा रहा है । जिस लद्दाख की चीन और पाकिस्तान के साथ सीमाएं लगती हैं, उस लद्दाख की महत्वता को समझ रहे हैं ।
15.50 hrs (Hon. Speaker in the Chair ) इस सरकार में हम इस बिल का वेलकम करते हैं और अंत में जो लोग कन्फ्यूजन में हैं, उनसे मैं एक छोटी सी रिक्वेस्ट करना चाहता हूं कि देश के लिए प्यार है तो जताया करो,किसी का इंतजार मत करो, गर्व से बोलो जय हिंद अभिमान से कहो भारतीय है हम,स्वाभिमान से कहो भारत माता की जय और वर्तमान में कीजिए इस बिल का समर्थन ।
माननीय अध्यक्ष : माननीय सदस्य बहुत लंबे लोक सभा क्षेत्र से आते हैं और मैं देखता हूं वे हमेशा सदन में सारगर्भित बात कहते हैं । मैं जानता हूं माननीय सदस्य का लोक सभा क्षेत्र बहुत लंबा है और नौजवान होते हुए भी जब सदन में बोलते हैं तो अच्छा बोलते हैं । ऐसे माननीय सदस्यों की सभी को प्रशंसा करनी चाहिए …(व्यवधान)
श्री प्रहलाद जोशी: आदरणीय अध्यक्ष जी, हसन मसूद जी ने जो तथ्य रखा है, वह पूरे इतिहास के खिलाफ है और सत्य के बहुत दूर है इसलिए मैं निवेदन करता हूं कि जो श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बारे में कहा गया है,वह बिल्कुल सत्य के खिलाफ है इसको तुरन्त एक्सपंज किया जाए, यह हमारा आपसे निवेदन है ।
माननीय अध्यक्ष : एक्सपंज कर दिया जाए ।
श्री चिराग कुमार पासवान (जमुई): अध्यक्ष जी, धन्यवाद । मैं अपनी लोकजन शक्ति पार्टी की तरफ से और हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष रामविलास पासवान जी की तरफ से सरकार के द्वारा लिए गए इस फैसले के समर्थन में अपनी बातों को रखने के लिए खड़ा हुआ हूं । सर, सर्वप्रथम मैं हमारे आदरणीय प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी जी, गृह मंत्री श्री अमित शाह जी और एन.डी.ए सरकार का धन्यवाद करता हूं । हमारी सरकार ने जो एतिहासिक फैसला लिया है,उसके लिए मैं अपनी पार्टी की तरफ से सरकार का,प्रधान मंत्री जी का और गृह मंत्री जी का धन्यवाद करता हूं । सर,आज तक हम लोग सिर्फ एक सपना देखते हुए आए थे और मेरे जैसा युवा 35 साल से कम से कम यही सपना देखता आया है निरंतर हम लोग अखंड देश,अखंड भारत की बात सुनते आए हैं,लेकिन अगर आज सही मायनों में देश को अखंड एकता में जोड़ा गया है,अखंड भारत को सही मायनों में अस्तित्व दिया है तो आज के प्रधान मंत्री आदरणीय नरेन्द्र मोदी जी ने दिया है । आज भारत को कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक एक डोर में बांधा है ।
सर, आज तक हमें यह कहने की जरूरत क्यों पड़ती थी कि कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है । मैंने आज तक कभी नहीं सुना कि हमने बोला हो कि महाराष्ट्र भारत का अभिन्न अंग है या राजस्थान,तमिलनाडु, केरल, उत्तरप्रदेश या बिहार भारत का अभिन्न अंग है । निरन्तर हमें इस बात को कहने की जरूरत पड़ी कि कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है,क्योंकि हमने कश्मीर को खुद एक धारा 370 देकर पूरे देश से अलग करके रखा । उनके अपने विशेषाधिकार रहें, उनके अपने तौर-तरीके रहे और आज सही मायनों में इस धारा को हटाने से कश्मीर भारत का अभिन्न अंग बना है, कश्मीर भारत का अटूट हिस्सा बना है । इसलिए आज मुझे खुशी होती है । आज तक हम लोगों के ऊपर यह आरोप लगाते रहे कि यह तो जुमलों की सरकार है और आज हमारे ऊपर यह आरोप लग रहे हैं कि आपने जो अपने मैनिफैस्टो में लिखा, उसे आपने पूरा कर दिया । आज पहली बार विपक्ष के लोग यह बात मानने को तैयार हुए कि हम लोगों ने चुनाव के वक्त जो जो वादे किए थे, जो-जो बातें की थी उनको हम पूरा कर रहे हैं ।
सर मुझे दुख होता था, जब मैं अपनी उम्र के लोगों को देखता था । मैं खुद जम्मू कश्मीर गया हूं, लद्दाख गया हूं । मेरे युवा साथी जो लद्दाख से आते हैं उन्होंने आज जिन बातों को कहा, उसे मैंने वहां पर रहकर महसूस किया है । जब मैं वहां जाता था तो मुझे दुख होता था । मैं अपनी उम्र के लड़कों के हाथ में पत्थर देखता था और जब उनको स्टोन पेल्टस कहकर अपमानित किया जाता था तो उस वक्त मेरे मन में ये विषय उठते थे कि क्यों आज इस युवा के हाथ में किताबों की जगह पत्थर पकड़ने की जरूरत पड़ी?लेकिन मुझे पूरी उम्मीद है और पूरा विश्वास है कि सरकार के द्वारा लिए गए इस फैसले से न सिर्फ जम्मू कश्मीर में निवेश बढ़ेगा बल्कि हमारे वहां के युवा जो कभी न कभी भ्रमित होते हैं, उनके लिए जब रोजगार के अवसर खुलेंगे,तो वे भी मुख्य धारा के साथ जुड़ने का काम करेंगे ।
जम्मू-कश्मीर, जो इतने वर्षों से विकास की राह से भटका हुआ था, इतनी खूबसूरत वह जगह है और इतने खूबसूरत वहां के लोग हैं, लेकिन आज भी जब पर्यटक वहां पर जाते हैं तो कहीं न कहीं उनके अंदर एक डर का भाव होता है । मुझे पूरी उम्मीद है और पूरा विश्वास है कि सरकार द्वारा लिए गए इस फैसले से जम्मू-कश्मीर,जो इतने लम्बे समय से विकास की राह से अछूता रहा है, वह विकास की राह से जुड़ेगा । लद्दाख, जो इतनी खूबसूरत जगह है, उसे अपनी एक अलग पहचान मिली है, अलग यू.टी. बनने के बाद लद्दाख की जो अपेक्षाएं और आकांक्षाएं हैं,उनको भी पूरा करने में हमारी सरकार के इस फैसले का एक बड़ा हाथ होगा । वह क्षेत्र आतंकवाद से लम्बे समय से ग्रसित रहा है,मुझे पूरी उम्मीद है कि हमारे गृह मंत्री जी जैसे सक्षम व्यक्ति जब उसकी डायरेक्ट मॉनीटरिंग करेंगे,तो हम उसके ऊपर भी अंकुश लगाने में कामयाब रहेंगे ।
अंत में, मैं पुन:, इस फैसले का,अपनी पार्टी – लोक जनशक्ति पार्टी की तरफ से पूरा समर्थन करता हूं । मैं प्रधान मंत्री आदरणीय नरेन्द्र मोदी जी और गृह मंत्री आदरणीय अमित शाह जी को ढेर सारी बधाई देता हूं । धन्यवाद ।
DR. SHASHI THAROOR (THIRUVANANTHAPURAM): Thank you very much, Mr. Speaker.
In fact, given the enthusiasm, we just heard from a couple of speakers, I am not surprised that the Parliamentary Affairs Minister said that he lamented that the Congress Party had called this a black day. Let me explain why we think it is indeed a dark day for India’s democracy. You have brought this Bill to this House without consultation with the local parties, with the State Legislature out of Session for more than six months, with democratically elected political leaders, including two former MPs and two former CMs of the State, Omar Abdullah and Mehbooba Mufti, under arrest and with the whereabouts of our own colleague, Dr. Farooq Abdullah unclear. We still need to know where he is.
श्री अमित शाह: अध्यक्ष जी,मैंने तीन बार इसे क्लियर किया है । मैं फिर से एक बार क्लियर करना चाहता हूं ।…(व्यवधान)
DR. SHASHI THAROOR : We take your words but would like some assurance for him.
श्री अमित शाह: मैंने तीन बार इसे क्लियर किया है, लेकिन बार-बार अपोजिशन इसे मुद्दा बना रहा है । फारूख अब्दुल्ला जी अपने घर में हैं, न हाउस अरेस्ट हैं, न डिटेंशन में हैं, उनकी तबीयत भी अच्छी है, मौज-मस्ती में हैं,आप जरा बात कर लीजिए ।
डॉ. शशि थरूर: सर, उसने टेलीविजन पर कहा है कि उसे बाहर जाने की इजाजत आप लोग नहीं दे रहे हैं । …(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : इस बारे में माननीय मंत्री जी ने सदन को एक बार अवगत करा दिया है ।
श्री अमित शाह: अध्यक्ष जी,मैं रिकॉर्ड पर स्पष्ट करना चाहता हूं कि वह हाउस अरेस्ट में नहीं हैं । अगर उनको यहां नहीं आना है तो कनपटी पर गन रखकर बाहर नहीं ला सकते हैं ।
DR. SHASHI THAROOR : Sir, I was continuing my list of concerns. With educational institutions closed, exams postponed, television networks suspended, communications out, landlines blocked, Internet down and the most important one is, with flagrant disregard for both the letter and the spirit of our Constitution, you have brought this Bill.
The claim that Jammu and Kashmir is an integral part of India is also our claim. There is no political divide on that proposition. It is the Congress Party’s belief, and we are not challenging that. But the way you have pursued that claim with this Bill is an affront to our very values as a democracy, as a nation and it has already done serious damage to our international standing and our credibility as a nation of laws, as a nation of democracy and, above all, of the culture of decency, which was our culture. The way this has been carried out, that has also been betrayed.
It is clear that the false pretence of terrorism to get people out from the Amarnath Yatra and elsewhere, the use of utter secrecy, the deployment of overwhelming force and arrests have revealed, frankly, a certain disdain, a certain contempt for liberty, for the rule of law and frankly, for the very conventions of our democracy that has sustained us for 70 years. That is why, we said it is a dark day. The truth is that if you look, I am sure you will get this Bill through this House very easily. You have a crushing brute majority but the tradition of consultation, of deliberation, of consensus will lie in shreds.
Others have already spoken about the legal issues, including my colleague, Mr. Manish Tewari. I know you will make counter-arguments on these legal points. I am not a lawyer. So, I will leave that debate to the courts. But let me confine myself, on the legal side, to saying simply that you have changed the basic Constitutional relationship of the people of Jammu and Kashmir to the Republic of India without consulting them or their elected representatives.
16.00 hrs This is a breath-taking betrayal of our democracy and nothing short of legislative authoritarianism. By claiming that the concurrence of the State of Jammu and Kashmir has been obtained, when it is under President’s Rule, and translating therefore ‘State’ to mean the Governor you yourselves have appointed, you have taken your own consent to amend the Constitution. That too, when President’s Rule is meant to be temporary, only meant to happen when the Constitutional machinery breaks down and no elections are possible. But decisions of a permanent character are now being taken. Even if you can convince us that you are upholding the letter of the law, this action betrays the spirit of the Constitution.
I want to talk much more about the law but let me just look at the consequences. I am very glad the Home Minister is listening so attentively. I think many of us would like to see the Prime Minister also explain this decision of the Government to this House of which he is a Member and to which he is accountable.
We all remember the last time the PM unleashed a shock decision on the nation, which was also initially applauded for his decisiveness, just like today. And that was the disaster of demonetization. The nation is still dealing with the devastating consequences of that action. I fear that you have inflicted upon us the political equivalent of demonetization, where the short and medium-term damage will greatly outweigh the long-term theoretical benefit.
Sir, let us look at the short-term damage which has already been done. Tourism, the lifeline of Kashmir, has been devastated. We know that we have spent decades – your Government, our Government, all Governments – to convey a message of normalcy to the world. We have had so many advisories by foreign Governments telling their citizens not to travel to Kashmir. All that, all those decades of efforts to show this is not a State in crisis have been undone by this action.
And, ironically, Prime Minister Modi has said to the youth of Kashmir, they must choose between tourism and terrorism. With all the unemployment in Kashmir that has been mentioned already, the truth is that tourism could have absorbed some of the young people. They have double the rate of unemployment to the rest of India – 24.6 per cent. We all know that when tourism goes up, unemployment goes down. What is going to happen today is that you have actually thrown out the tourists from Jammu and Kashmir. Sir, advisories are back in foreign countries; tourists are out; shikara operators are out of business; handicraft makers and carpet weavers are broke and the Amarnath Yatra has been rudely interrupted. Even so, Sir, what conditions are our fellow citizens living in? We are proud to say Kashmiris are our fellow citizens. But I ask you, Sir, look at a place where stores are closed, petrol pumps are closed, there is a shortage of fuel and essential supplies are beginning to run out. There is no communication available. People cannot even watch television unless they have a satellite link, which very few rich ones have. Nearly seven to eight million citizens of our country are living in a near total black out. Is not this a betrayal of Vajpayeeji’s famous formula of Insaniyat, Jamhooriyat and Kashmiriat? Let me ask you, Sir, when will achche din come for the people of Kashmir when they are locked up behind their own homes? …(Interruptions)
श्री प्रहलाद जोशी: अच्छे दिन लोगोंके आते हैं,कांग्रेस केनहीं आते है ।…(व्यवधान)
DR. SHASHI THAROOR : Let me talk Minister sahib.
A State that was gently prospering despite the troubles - Kashmir’s Gross State Domestic Product was better than 12 other States and Union Territories in our country - that State has been given an economic set back in the name of your reform and progress. In the name of unity, you are promoting division; and in the name of prosperity, you are promoting poverty in Kashmir. I feel this is a very sad situation.
Now, let us look at the medium-term consequences that are going to follow. Obviously, Sir, the Home Minister has to be concerned about security. By locking up the democratic parties and their leaders, you are opening up a space for undemocratic forces. You claim that we were winning the battle against terrorism and perhaps we were. But now we are giving a fresh lease of life to the terrorists. I must say, we are facing a situation in which they can cite a new injustice for them to fight. You have made the mainstream pro-India parties irrelevant and powerless to stop extremism. That is the legacy that this decision is going to give our country. You may drive more misguided young Kashmiris to join the militants than ever before and our brave jawans will be even more in harm’s way and in danger as a result of this action.
When the Americans complete their withdrawal from Afghanistan and the victory of Taliban, of course, is complete, there will be a lot of idle mujahideens, ISIS and Al-Qaeda people ready to join Pakistan’s efforts to attack our country. You have given them more excuses to seek help and money for their nefarious work.
Of course, we know what is happening to our federalism. Everyone has said this, and I will be brief on that, that the various States in the North-East as well as, for that matter, Himachal Pradesh have very similar restrictions under Article 371. If all it takes is for this Government to declare President’s Rule and use their majority in this Parliament to make decisions for the Legislatures of those States, is any of them safe? What has happened to our nation’s respect for federalism, for minority rights? Can any Indian anywhere take his constitutional protections for granted?
Sir, I need a couple of more minutes. The international implications are very serious for our country. With this action, we have thrown out 70 years of assurances to the international community and the UN. Pakistan has already taken the issue to the UN and is speaking to its foreign friends. The UN has issued a statement calling for restraint. Is this not embarrassing for our nation? In the process, we have also jeopardized, frankly, our claims to PoK because that rested on the question of the accession of the whole State and thanks to this decision, the whole State no longer exists. Our diplomats posted in Muslim countries have been given an impossible job because we know that Pakistan has already come knocking on the doors of these countries for support.
The Government is in the habit of portraying opposition to its initiatives as anti-national. There is no need to teach the Congress Party about nationalism. We are the original party of nationalism. We have fought for values that were forged in the crucible of the freedom struggle and the fact is that the inclusiveness of India came from the inclusiveness of the freedom struggle where Hindus, Muslims, Christians, Sikhs, Parsis and everyone came together, when Keralites and Kashmiris fought together for our freedom. This diversity has been an asset of ours. We must come together as a nation and stand up unitedly for these values that animated our freedom struggle. We are a great country. We are a large-hearted country. Let us not be petty in dishonouring the carefully crafted arrangements that enshrined the State's accession to India.
We used to be saying with pride that a Muslim majority State is part of India despite partition. We have lost that. We, in the Congress Party, stand in unequivocal solidarity with the people of Kashmir, with the Constitution of India and with the spirit of Indian democracy, which today is in tatters. The people of Kashmir are looking to us to prove that they really matter to us and to this Parliament.
Sir, I do want to say that you had promised me some extra time, and the Chairman who was sitting there, to respond to the historical inaccuracies that we heard from the other side. I do want to clarify one thing about that because already this Parliament is not being treated as a forum for discussion or as a source of advice that the Government will hear; it is being treated as a notice board, as one paper called it, in which, honestly, you can just post the decisions you have taken. …(Interruptions) Let me just ask you certain things. When will Kashmiri parents be able to take their children to school? When will they be able to watch TV? When will they be able to go out and buy food? Then, we will talk.
Let me come back. Nehruji has been demonised here. He has been criticised by very many speakers, particularly those from the ruling party. It is very interesting to know what he said on the subject. He said in the Lok Sabha in August, 1952, exactly 67 years ago,:
“We have fought in good fight about Kashmir on the field of battle... (and) ... in many a chancellery of the world and in the United Nations, but, above all, we have fought this fight in the hearts and minds of men and women of that State of Jammu and Kashmir."
Further he says:-
“Ultimately - I say this with all deference to this Parliament that decision will be made in the hearts and minds of the men and women of Kashmir; neither in this Parliament nor in the United Nations nor by anybody else.” This is the advice we must all remember today.
Sir, now I would like to respond specifically to the question of Article 370. The BJP has made two allegations that Nehruji came up with it on his own and that Sardar Patel had nothing to do with it. Let me clarify the actual fact. …(Interruptions) There is a misleading record in the House. The Home Minister is actually correct in saying that the Cabinet collectively did not decide. What happened was that on the 15th and 16th October, 1949, at Sardar Vallabhbhai Patel’s home, negotiations …(Interruptions) Let me finish, Sir. …(Interruptions) I have to finish. …(Interruptions)
माननीय अध्यक्ष : आप आप गृह मंत्री जी को सुनिए ।
…( व्यवधान)
श्री अमित शाह : थरूर जी, आप सुनिए ।…(व्यवधान)
थरूर जी, आप मेरी बात सुनिए ।…(व्यवधान) माननीय अध्यक्षमहोदय, ऐसाहै कि…(व्यवधान)थरूर जी, प्लीज सुनिए । …(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष: गृह मंत्री जी आपकी बात का जवाब दे रहे हैं ।
…( व्यवधान)
श्री अमित शाह : थरूर जी, मेरी बात सुनिए । आपको क्लैरिफिकेशन की जरूरत ही नहीं पड़ेगी ।…(व्यवधान)
थरूर जी जिस बात के लिए मुझे क्वोट कर रहे हैं,वह मैंने सरदार पटेल जी के लिए नहीं कहा है, बल्कि श्यामा प्रसाद मुखर्जी के लिए कहा है । …(व्यवधान)मैंने श्यामा प्रसाद मुखर्जी के लिए कहा है,वह मुझे गलत क्वोट कर रहे हैं । …(व्यवधान)जब मसूदी साहब ने कहा कि श्यामा प्रसाद मुखर्जी 370 लेकर आए, तब मैं खड़ा हुआ और मैंने स्पष्टीकरण किया । शायद उस वक्त वे हाउस में नहीं थे । इसलिए लगता है कि उनको किसी ने गलत चिट पकड़ा दी है ।
डॉ. शशि थरूर : आपने उस विषय पर ठीक कहा । मैंने मान लिया । मैं यहाँ था, मैंने आपकी बात सुनी ।
The larger issue is this. Unfortunately we have missed this. The claims that have been largely made in this House by your Party has also been that had Sardar Patel been here we would not have made this promise and that it is all Nehru’s individual fault. I have to clarify that. Nehru ji did not do anything on his own. There were three accessions as has been mentioned already, including by Dr. Jitendra Singh. They are Hyderabad, Junagadh and Kashmir. All three had to be treated by Nehru ji and Sardar Patel together without an exception. What is more, this question of plebiscite which somebody said is the bizarre thing that we have done, I am sorry that plebiscite was promised for all three places. It is there in the records. …(Interruptions) I have not finished. Please let me clarify. …(Interruptions)
माननीय अध्यक्ष: माननीय सदस्य, आप अपनी बात समाप्त करें । यहाँ पर बहुत-से राजनीतिक दलों के सदस्य हैं । यहाँ पर केवल आपका ही दल नहीं है, बहुत-से छोटे-छोटे राजनीतिक दल हैं ।
…( व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष: हमें सभी दलों को मौका देना है । इसलिए आप अपनी बात समाप्त कीजिए ।
…( व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष: ऐसा नहीं करें, सब खड़े न हों । यह कोई तरीका नहीं है ।
…( व्यवधान)
डॉ. जितेन्द्र सिंह:अध्यक्ष महोदय, इन्होंनेमेरा नाम लियाहै ।
माननीय अध्यक्ष: इनकोकनक्लूड करनेदीजिए, उसकेबाद मैं आपकोबोलने का मौकादूँगा ।
DR. SHASHI THAROOR: Let me just conclude. I have not yet given you the historical facts. All I want to say is this.
On the 15th and 16th of October, 1949 meetings took place among Sardar Vallabhbhai Patel, Jawaharlal Nehru and Sheikh Abdullah in the house of Sardar Patel. The Minister without portfolio who was looking after Kashmir, Shri N. Gopalswamy Ayyangar took detailed notes. He sent a summary of the notes of these conclusions to Sardar Patel with a following covering note:
“Will you kindly let Jawaharlal ji know your approval of it? He will issue the letter to Sheikh Abdullah only after receiving your approval.” That approval came on 17th October, 1949 from Sardar Patel. Only then was article 370 brought into the Constitution of India on 17th October, 1949.
The point is all these records have now been declassified. They are available. I just want to conclude with one last point. This is an assault on the Constitution, and on the inclusive idea of India. It is an assault on the spirit of cooperative federalism. It is an assault on our democratic practices and an assault on the individual liberties of each and everyone of our citizens from the State of Jammu and Kashmir and, therefore, it is an attack on our own country’s democracy and values. So, in the long-term interest of India, for Indian democracy and as proud nationalists, my Party rejects this Bill.
I would also request the Home Minister to say whether he would accept a request from my Party to lead or to conduct or to organise an all-party delegation to visit Kashmir and see for ourselves what the situation is on the ground. I will leave that question to the Home Minister. Thank you.
डॉ. जितेन्द्र सिंह : अध्यक्ष जी, मैंनेमाननीय सदस्यश्री शशि थरूरजी की बात ध्यानसे सुनी । प्लेबिसाइटका क्लॉज कहींनहीं रखा गयाथा । आजादी केसमय भारत केदो हिस्से थे- प्रिंसलीइंडिया और ब्रिटिशइंडिया । प्रिंसलीइंडिया में 550से अधिक रजवाड़ेथे । इंडियाइंडिपेंडेंसएक्ट, जिसेलार्ड माउंटबेटनने ड्राफ्ट कियाथा, के तहतइंस्ट्रूमेंटऑफ एक्सेशन लिखागया । It was to be signed by the ruler, the Raja in that case. उनको अपना ऑप्शन देना था कि उनको हिन्दुस्तान के साथ जाना है या पाकिस्तान के साथ जाना है । उसमें कहीं भी प्लेबिसाइट की बात नहीं थी ।
दूसरा, यदि यह मान भी लिया जाए, जैसा कि ये कह रहे हैं,कि नेहरू जी को इतनी ज़्यादा शेख अबदुल्ला की चिंता नहीं थी या कश्मीर की चिंता थी or may be he was not so much involved as was said by someone, according to him. वर्ष 1953 में शेख अबदुल्ला को हिरासत में लेकर कोडैकानल भेजा गया । If he can quote letters, I can also do that. But I did not know that he would come and he did not know that I would come with the letters. उन्होंने इंदिरा जी को एक लेटर लिखा है । Please go through the history of the Congress Party. इंदिरा जी उस समय स्विट्ज़रलैंड में थीं । नेहरू जी ने लिखा था and this has been quoted in the book on Indira Gandhi and PN Haksar written by Shri Jairam Ramesh …(Interruptions)आप ठहर जाइए । …(व्यवधान)मैं आपकी ही किताब आपको पढ़ा रहा हूं । …(व्यवधान)मैं आपकी किताब तो आपको पढ़ा सकता हूं? …(व्यवधान) The name of the book is ‘Intertwined Lives: PN Haksar & Indira Gandhi’, very recently written by Shri Jairam Ramesh. उन्होंने इंदिरा जी को लिखा कि मुझे दुख हुआ कि शेख को अरेस्ट करना पड़ा, जिस पर इंदिरा जी ने कहा “I know dad that you must be upset” …(Interruptions). I am glad that Madam Sonia Gandhi has acknowledged this …(Interruptions) that is what I am trying to say …(Interruptions) I am just endorsing what I am saying …(Interruptions) What I am trying to say is that Nehru Ji himself regretted for giving this kind of patronage to Sheikh Abdullah. Therefore, Sardar Patel stood vindicated.
SHRI JAYADEV GALLA (GUNTUR): Thank you, Sir. I am the only speaker from my party. I will try to make it fast but I do need to present our views.
Sir, I rise to support the Jammu and Kashmir Reorganisation Bill and our leader Shri Nara Chandrababu Naidu Garu and our Telugu Desam Party support the proposed reorganisation of the State of Jammu and Kashmir.
Sir, our Constitution has three kinds of provisions – special provisions, transitional provisions and temporary provisions. Temporary provisions are the weakest provisions among the three provisions and Article 370, being a temporary provision, is the weakest one. So, it has to go for the good of the people of Jammu and Kashmir.
Sir, we have no problem in giving special autonomous status or special category status to any State. All we want is that such a facility is optimally utilised by that State to become a growth engine of the country. But, when it comes to Jammu and Kashmir, it is proved to be the other way round and, therefore, paving the way for this Bill. I would be remiss, if I do not say that a historical mistake that took place about 70 years ago is now being corrected through this Bill.
Sir, let us take a look at the amount of resources – human, natural and financial that have been provided to the State of Jammu and Kashmir in the past. Sir, we have given separate Constitution to Jammu and Kashmir; we have given leeway to refuse Indian laws to be implemented in Jammu and Kashmir; we have debarred citizens of other parts of the country either to get admission or employment or buy land in Jammu and Kashmir; we have given special category status to Jammu and Kashmir; we have given dual citizenship to Jammu and Kashmir - both Indian and Kashmir; we have given lakhs and crores for Jammu and Kashmir which have gone in drain. In return, what we have got? We have had to deal with bloodshed and terrorism. The tricolour is burnt in Jammu and Kashmir and it is not a crime there. Political parties and separatist groups have used and misused Article 370. Our own Kashmiri pundits have been thrown out of Kashmir. Part 4 of the Directive Principles of State Policy and Part 4A of the Fundamental Duties are not applicable in Jammu and Kashmir.
So, instead of sticking to the same approach and breaking our heads against the wall, the innovative approach taken by the hon. Prime Minister and the hon. Home Minister is a laudable one and I hope the tables will turn now.
This is a new beginning for the region and its people. But we need to understand how this Bill is going to affect the common Kashmiris. I have a few thoughts which I would like to share as to how this Bill is going to affect Jammu and Kashmir and the country.
Sir, complete integration of Jammu and Kashmir into India will be one nation with one flag and one Constitution. All laws will be applicable to the citizens equally. Organisations/persons will be able to purchase land in the region for setting up of industry and help generating employment which will help to improve the standard of living. This will, in turn, lead to improve the infrastructural facilities across the region. The women would have greater freedom to choose to whom they wish to marry and not be restricted to marrying someone in the fear of losing their rights and property.
The security in the region would also increase. At the end of the day, the resources that are being spent would finally be used for the people of Jammu and Kashmir. I think that everyone will agree that this is what we want, namely, that peace and prosperity in the region is restored.
Sir, what you have done in Jammu and Kashmir is historic. However, how it will be remembered in history will depend on what happens from today onwards. Many States have got full Statehood, but instead of making it a State, you have split Jammu and Kashmir into two Union Territories. The hon. Home Minister is on record saying in the Rajya Sabha that as soon as the situation normalizes, Jammu and Kashmir would be made as a full-fledged State. But what is the definition of ‘normalization’? I would like to know this from the Home Minister please.
Secondly, what are the economic, security, law and order, infrastructural, human rights and other challenges that Jammu and Kashmir has been facing? How is the Government of India going to address them since it is now coming under the Centre’s fold? Sir, I will complete in two more minutes.
What roadmap the hon. Home Minister has prepared for it? This House may kindly be enlightened on this. Has he set any milestones that need to be achieved? What is the timeline in which they need to be achieved in order to address these challenges? There must be a roadmap to achieve Statehood. This is very important.
You have brought this Bill under Article 3 of the Constitution, but look at Article 4 of the Constitution. What does it say? It says that : “When any State is bifurcated under Article 3, then supplemental, incidental and consequential measures can be taken by the Parliament”. We even have the judgement of the Supreme Court on this issue. So, what I wanted to know is this. What supplemental, incidental and consequential measures that the hon. Home Minister is going to take for Jammu and Kashmir? This is one thing that we need to know.
My final appeal is to restore normalcy in Jammu and Kashmir at the earliest, and to make all efforts to bring confidence to the people of Jammu and Kashmir that they can live in peace and with progress, prosperity and dignity. Thank you, Sir.
श्री अधीर रंजन चौधरी: अध्यक्षमहोदय, हमलोगों को खबरमिली है किफारूख अब्दुल्लासाहब को डिटेनकिया गया था । उनकी तबियतखराब होने केबाद छोड़ा गयाहै ।
माननीय अध्यक्ष: आप गृह मंत्रीजी की भी बातसुन लें ।
श्री अमित शाह: सर, मैंतीन बार कहचुका हूं, चौथीबार कहता हूंऔर मेरे पासदस बार कहनेके लिए धैर्यहै कि फारूखअब्दुल्ला साहबको न तो डिटेनकिया गया हैऔर न ही अरेस्टकिया गया है । वह अपनी मर्जीसे अपने घरमें हैं । अगरतबियत खराब हैतो सिविल अस्पतालके डॉक्टर जाकरउनको अस्पतालभी ले जाएंगे । सदन चिंतान करे, मैंआश्वत करना चाहताहूं । …(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष: माननीयसदस्यगण, माननीयगृह मंत्री जीने ऑथेंटिक बयानदिया है, उसकेबाद डिबेट करनेकी आवश्यकतानहीं है ।
…(व्यवधान)
श्री अमित शाह: अध्यक्षजी, जब सुबहयह मुद्दा उठाथा, मुझेमालूम था, मगरमैं री-कनफर्मकरना चाहता था । मैंने ऑफिसमें जाकर चीफसेक्रेटरी औरडी.जी.पी. सेरी-कनफर्मकरने के बादइस सदन को जिम्मेदारीपूर्वकस्टेटमेंट दियाहै । मैं आपकोबताऊं अधीर रंजनजी, अगरतबियत ठीक नहींहोती तो उन्हेंऐसे नहीं छोड़ते, उन्हेंअस्पताल ले जाते । अगर उनकी तबियतठीक नहीं होतीतो वह बाहरनहीं आते ।
माननीय अध्यक्ष: माननीयगृह मंत्री जी, उनकाचैक अप करनेके लिए एक स्पेशलडॉक्टरों कीटीम और भिजवादीजिए ।
SHRI SUKHBIR SINGH BADAL (FIROZPUR): Hon. Speaker, Sir, on behalf of my Party, Shiromani Akali Dal, I stand in support of the Bill presented by the hon. Home Minister scrapping Article 370 and 35 (A).
Sir, before I say anything, I would like to go back in history. When Mughals invaded India, they started converting Hindus into their religion. …(Interruptions) Then Kashmiri Pandits came to our 9th Guru, Guru Tegh Bahadur Sahib, and requested him to save them. Our 9th Guru,Guru Tegh Bahadur Sahib Ji, sacrificed his life to save the Kashmiri Pandits and the Hindu community.
Sir, Punjab is a neighbour of Jammu & Kashmir. Punjab has faced terrorism from Pakistan. We have felt what has happened in Kashmir and what is happening here. For fifteen years, the economy of the State of Punjab went down, thousands of people were killed, a lot of people from our Party and our Party President was also killed.
Sir, during the British period and during the partition, the State which suffered the most was Punjab. During the partition, the British tried to come up with a Three-Nation Formula. One was Pakistan, then they wanted to create a Sikh State and the third was the rest of India. The Sikh leadership, at that time clearly told them that we were part of India and we would remain part of India.
Sir, during the Independence Struggle, the maximum contribution and maximum sacrifices were made by the people of Punjab and especially, the Sikh Community. I have the data. When the British were ruling India and the Independence Struggle was going on, 121 freedom fighters were hanged by the British, out of which, 93 were Sikhs; 2,626 people were awarded life imprisonment, out of which, 2,147 were Sikhs. We are 1.5 per cent of the whole population, but we gave 90 per cent sacrifice for this country.
Sir, Shiromani Akali Dal which I represent clearly stands for a strong federal setup. We believe in more powers to the State but, at the same time, we believe in a strong India and a united India. We stand for the protection of minorities. We represent a minority community, we know what problems minorities face and what the issues of the minorities are. We have always fought and we have always requested the Governments, wherever any community in any State is a minority, its interests should be protected.
Sir, by scrapping article 370 and 35 A, a lot of protection has been given to the minorities now. Minorities were suffering for the last few years. A lot of members of the Sikh minority community have been approaching us. We, Shiromani Akali Dal, even sent a delegation to meet the then Home Minister, Shri Rajnath Singh ji. We even went to meet the Home Secretary. We went to meet the current Home Minister also.
Sir, during partition, when a lot of minorities shifted from Pakistan to the rest of India and J&K, they were given equal amount of property, assets or some compensation but the people from Pak Occupied Kashmir or from Pakistan who migrated to Jammu & Kashmir till date have not got any property rights or any compensation for that. There are about thousands of families who have migrated. They have been meeting us regularly. We have been fighting the case but they have not got anything. Again, the delegation of our Party went to meet the hon. Prime Minister and the Home Minister and they immediately sanctioned Rs. 5.5 lakh for each of the families.
The Commission recommended Rs. 30 lakh for a family. This amount sanctioned is very little. So, my only request is that this could be raised to Rs. 30 lakhs. The minorities of Jammu & Kashmir are a little depressed and supressed. Why Sir? There was no Minority Commission in Jammu & Kashmir. Minorities did not have a say. Even, Sir, the Anand Marriage Act which is a Sikh Marriage Act has been passed by all the Governments but in Jammu & Kashmir, it has never been passed. We have been regularly requesting the Jammu & Kashmir Government but because of article 370, they did not accept it.
Sir, Punjab and Jammu & Kashmir share a border. A lot of residents of Jammu and Kashmir have settled down in Punjab; they have bought land in Punjab; and they are doing business in Punjab. But people of Punjab cannot go to Jammu & Kashmir; they cannot do any business there. Why should there be a discrimination? There are certain other States also where people from outside cannot buy land. I think that also should be changed. When we are always talking about ‘One India, One Nation’, I think every citizen of India should be able to travel anywhere, buy property anywhere, and do business where ever he wants.
Sir, I do not want to take too much of time. You are already conveying to me that I have to stop. But I just want to say one thing. I congratulate the Prime Minister and the Home Minister for taking this bold decision. I feel they are capable of taking such strong decisions. People of Punjab have also suffered. We have contributed maximum for this nation. We provide maximum food grains to the nation. But we are the only State in the country which does not have a capital of its own. We are the only State in the country which does not have a High Court of its own. We are the only State in the country from where 80 per cent of waters have been taken away.
Sir, we are the only religion where …* ordered attack on Golden Temple. Till date we have not got justice. Thousands of Sikhs were massacred on the instructions of … * and we did not get justice. …(Interruptions) Thousands of Sikhs were massacred, but we have not got justice. …(Interruptions)
माननीय अध्यक्ष : माननीय सदस्य, आप विधेयक पर बोलें ।
SHRI SUKHBIR SINGH BADAL: Sir, whatever justice we have got, the present Prime Minister has got us justice. Certain Congress leaders who were responsible for the massacre have been put behind bars. …(Interruptions) We are sure that the present Government will put all the leaders who were responsible for the massacre of Sikhs behind bars. Then only we will get justice. …(Interruptions)
Sir, we have full faith in the present Government and we are sure they will take bold decisions. If they can take such a major decision as this, they will take a decision to save the people of Punjab. …(Interruptions)
SHRI ADHIR RANJAN CHOWDHURY: Sir, I am on a point of order.
माननीय अध्यक्ष : माननीय सदस्य, अगर ऐसा कोई विषय होगा,मैं स्वयं उसे देखूंगा ।
…( व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : आप निश्चिंत रहें, मैं देखूंगा ।
…( व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : नियम 352 और 353 ही के लिए मैं भी कह रहा हूं ।
…( व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : माननीय सदस्य, मैंने रूल 352 पढ़ रखा है ।
…( व्यवधान)
SHRI ADHIR RANJAN CHOWDHURY : Sir, Rule 352 says:
“A member while speaking shall not make personal reference by way of making an allegation imputing a motive to or questioning the bona fides of any other member of the House unless it be imperatively necessary for the purpose of the debate being itself a matter in issue or relevant thereto.” माननीय अध्यक्ष : माननीय सदस्य, अगर नियम के तहत नहीं होगा तो मैं उसे हटा दूंगा ।
…( व्यवधान)
श्री अधीर रंजन चौधरी: एक स्वर्गीय प्रधान मंत्री के खिलाफ इस तरह की टिप्पणी क्यों की जा रही है? …(व्यवधान)एक शहीद प्रधान मंत्री के बारे में उलटी-सीधी बातें कही जा रही हैं ।…(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : माननीय सदस्य, मैंने आपसे आग्रह किया है कि अगर नियम के तहत नहीं होगा तो मैं उसे हटा दूंगा ।
श्रीमती अनुप्रिया पटेल ।
…( व्यवधान)
श्रीमती अनुप्रिया पटेल (मिर्जापुर):अध्यक्ष जी, हम छोटे दल हैं और हमारा नंबर बाद में आता है,लेकिन बड़ी पार्टियों को इस तरह से हमारा समय व्यर्थ करने का अधिकार नहीं है । मेरा आपसे आग्रह है कि आप मेरा समय व्यर्थ न करें ।…(व्यवधान)
श्री अधीर रंजन चौधरी: क्याहम समय व्यर्थ कर रहे हैं? …(व्यवधान) जिन्होंने देश के लिए जान दी है,उनके बारे में यहां आलतू-फालतू बातें बोली जा रही हैं । …(व्यवधान)
श्रीमती अनुप्रिया पटेल: माननीय अध्यक्ष जी, माननीय गृह मंत्री जी ने अनुच्छेद 370 को खत्म करने का जो संकल्प प्रस्तुत किया है और साथ में जो दो महत्वपूर्ण विधेयक लेकर आए हैं, जम्मू-कश्मीर राज्य पुनर्गठन विधेयक और जम्मू-कश्मीर आरक्षण विधेयक, 2019 के समर्थन में मैं अपनी बात रखने के लिए खड़ी हुई हूं । लेकिन संकल्प और विधेयक पर आने से पहले मैं यह कहना चाहती हूं कि आज सरदार वल्लभ भाई पटेल की आत्मा को इस सदन में बहुत दुख पहुंचाया गया है, क्योंकि कांग्रेस पार्टी के नेता श्री मनीष तिवारी जी ने जिस शर्मनाक तरीके से जूनागढ़ और हैदराबाद की रियासतों के भारत के विलय के श्रेय को सरदार वल्लभ भाई पटेल से छीनने का प्रयास किया है, मैं अपनी पार्टी अपना दल की ओर से उसकी घोर निंदा करती हूं और मैं यह देख रही हूं कि सरदार पटेल की शख्सियत को कमतर करने का,उनके योगदान को कम करके दिखाने का कोई भी अवसर आप छोड़ना नहीं चाहते हैं । मुझे समझ में आता है कि सरदार पटेल जी को मरने के बाद भी भारत रत्न मिलने में 40 साल क्यों लगे ।
हमें जिस व्यक्ति ने अखंड राष्ट्र की सौगात दी है, जिनकी वजह से हम इस अखंड देश के अंदर सांसें ले रहे हैं, उनके मरने के बाद उनकी समाधि के लिए और उनके स्मारक के लिए देश की राजधानी में एक इंच जमीन भी नहीं मिली है । वह क्यों नहीं मिली है, यह मैं आज समझ रही हूं । अध्यक्ष जी, मैं इतना ही कहना चाहती हूं कि सरदार वल्लभ भाई पटेल जी का इस देश के प्रति त्याग, समर्पण और उनके बलिदान को किसी के सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं है । अगर जूनागढ़ और हैदराबाद इस देश का हिस्सा बना है, तो वह सिर्फ और सिर्फ शुद्ध रूप से सरदार वल्लभ भाई पटेल जी की ही देन है । अगर कश्मीर को भी सरदार वल्लभ भाई पटेल जी ने अपने हाथों में लिया होता…(व्यवधान) I am not yielding to you. Please do not waste my time. I am not yielding. …(Interruptions)अगर कश्मीर को सरदार वल्लभ भाई पटेल जी ने अपने हाथों में लिया होता…(व्यवधान) I am not yielding to you. …(Interruptions) अगर कश्मीर को सरदार वल्लभ भाई पटेल जी ने अपने हाथों में लिया होता,तो 70 वर्षों से कश्मीर की अवाम जिस तबाही और जिस आतंकवाद का नंगा नाच देख रही है,ऐसी परिस्थितियां कश्मीर में विकसित नहीं हुई होती,यह सब आपकी देन है । इसलिए आपने जो कहा है, मैं उसके लिए आपकी फिर से घोर निंदा करती हूं ।…(व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय,मैं इतना कहना चाहती हूं कि कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है । यह बात दोहराते-दोहराते 70 साल हो गए हैं । लेकिन कोई तो कारण है कि आज भी कश्मीर की अवाम देश की तमाम अवाम से जुड़ नहीं पाई है । इसका कारण अनुच्छेद 370 है, जिसमें दो झंडे, दो निशान, दो संविधान की व्यवस्था और दोहरी नागरिकता के चलते कश्मीर को परोक्ष रूप से भारत से जुदा और अलग-थलग करके रखा हुआ है । हमारे गृह मंत्री जी ने कल इस बात को और आज भी इसके बारे में विस्तार से बताया है कि कैसे देश के तमाम महत्वपूर्ण कानून कश्मीर के अंदर लागू नहीं हो पाते हैं । हमारा एक कानून राइट टू इन्फार्मेशन भी है, जो लागू नहीं हो पाता है । माननीय गृह मंत्री जी ने राइट टू एजूकेशन के बारे में आज सदन में बताया है कि वहां के चुनिन्दा राजनैतिक परिवारों की ही इच्छा नहीं है कि कश्मीर के छोटे-छोटे बच्चों को शिक्षा मिले । इसलिए यह कानून वहां पर लागू नहीं हो पाते हैं । अनुसूचति जाति, जनजाति और पिछड़े वर्ग के जो लोग हैं,उनको भी राजनैतिक रूप से आरक्षण का लाभ नहीं मिल पा रहा है । यहां तक कि जो 73वां और 74वां संविधान का संशोधन था,उस व्यवस्था को भी लागू होने में बहुत लंबा समय लगा है । यह 35ए है, जिसके कारण भारत के किसी अन्य राज्य में रहने वाला नागरिक कश्मीर में संपत्ति बनाना चाहे, तो उसको कोई भी अधिकार नहीं है । अगर कश्मीर की बेटी भारत के किसी अन्य राज्य में रहने वाले व्यक्ति से विवाह कर लेती है, तो वह जिस मिट्टी में जन्मी है, पली है,बढ़ी है, उसे वहीं के लिए अछूत मान लिया जाता है । उसकी नागरिकता को खत्म कर दिया जाता है । आखिर ऐसी कौन-सी मजबूरी है कि भारत की आज़ादी के 70 वर्षों के बाद भी हमने जिस व्यवस्था को एक अस्थायी व्यवस्था के रूप में लागू किया था, हम उसको बर्दाश्त करते रहे हैं, हम उसको चलाते रहे हैं?….(व्यवधान) अध्यक्ष जी,अभी चार मिनट हुए हैं । आपने अकाली दल को साढ़े सात मिनट का समय दिया है । मैं भी टू मेंबर पार्टी हूं, इसलिए मुझे भी समय दीजिए ।….(व्यवधान)महोदय, आप भेदभाव नहीं कर सकते हैं ।….(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : यहआपको तय नहींकरना है ।
…( व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : माननीयसदस्य, आपएक बार बैठजाइए ।
…( व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : माननीयसदस्यगण, मैंसभी माननीय सदस्योंसे यह आग्रहकरता हूं किकभी-भीआसन को चुनौतीमत दिया कीजिए । मैंने जो फैसलाकर लिया है, वहअंतिम फैसलाहै । यह मुझेफैसला करना हैकि किसको कितनासमय देना है ।
…( व्यवधान)
श्रीमती अनुप्रिया पटेल: अध्यक्षजी, मुझेमाफ कीजिएगा, मैंआपको चुनौतीनहीं दे रहीहूं । मेरा सिर्फइतना ही कहनाहै कि अगर टूमेंबर पार्टीको साढ़े सातमिनट मिले हैं, तोमुझे भी कमसे कम 5-6 मिनट दे दीजिए । मैं सिर्फइतना ही कहनाचाहती हूं ।…(व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय, मैंसिर्फ इतना हीकहना चाहती हूंकि आज हमारीसरकार ने कश्मीरकी अवाम कोखुशहाली के रास्तेपर ले जानेका निर्णय कियाहै । जब हम राष्ट्रहितमें कोई बड़ानिर्णय करनाचाहते हैं, तोहमें दृढ़ इच्छाशक्तिकी आवश्यकताहोती है । वहीदृढ़ इच्छाशक्तिसरदार वल्लभभाई पटेल जीने दिखाई थी, जब565रियासतों काविलय करके भारतगणराज्य बनायाथा । आज उसीतरीके का कमिटमेंटऔर रिजॉल्व हमारेदेश के प्रधानमंत्री जी औरमाननीय गृह मंत्रीजी ने दिखायाहै । मैं इसकेलिए उनको बधाईदेती हूं । मैंइतना ही कहनाचाहती हूं किधारा 370 केकारण घाटी मेंलोकतंत्र कादमन हुआ है,भ्रष्टाचारबढ़ा है, अन्यराज्यों की अपेक्षाभारत की सरकारबहुत बड़े-बड़े पैकेजेज़इस राज्य कोदेती रही है,लेकिन इनकाविकास नहीं हुआहै ।
जम्मू और कश्मीर की अवाम विकास चाहती है, खुशहाली चाहती है, आगे बढ़ना चाहती है और कुछ चुनिंदा राजनैतिक परिवारों की बंधक बन कर रहना नहीं चाहती है । इसलिए आज का जो फैसला है, उसके लिए मैं पुन: सरकार को बधाई देती हूँ कि आपका यह फैसला सिर्फ भारत के भूगोल को नहीं,बल्कि भारत के इतिहास को भी बदलने जा रहा है । देश के प्रथम गृह मंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल जी ने जो सपना देखा था, उसको पूरा करने की दिशा में देश आगे बढ़ रहा है । इन्हीं शब्दों के साथ,बहुत-बहुत धन्यवाद ।
*SHRI M. SELVARAJ (NAGAPATTINAM): Hon’ble Speaker Sir, I thank you very much for giving me the opportunity to speak on “The Jammu and Kashmir Reorganisation Bill, 2019”. Now Bharatiya Janata Party (BJP) is in power. They are implementing their agenda now. They follow the policy of divide and rule by attacking the minorities. Recently, Triple Talaq bill was passed for targeting Muslims. Now, the special status given to Kashmir is denied. People belonging to Muslim minority community are subjected to marginalisation in this country. On that basis, the status of autonomy given to that state has been snatched away. Pandit Jawaharlal Nehru gave this special status to Jammu and Kashmir for certain specific reasons. Jammu and Kashmir is in a strategic location, surrounded by Pakistan and China. It is a very important location geopolitically. Special provisions are essential for that state. What is the necessity to snatch away their rights? A war like situation is created in that state. What is the necessity for creating such a situation? All educational institutions are closed. Hospitals are not functioning. Drinking water is not provided to people. It is like declaration of emergency. It is highly condemnable. The state legislative assembly is blocked. The state has been converted into a Union Territory. Article 370 is snatched away. On behalf of my party Communist Party of India (CPI), I strongly oppose it. I strongly condemn it. In Puducherry Union territory, … ** is obstructing the functioning of the elected Government. Similar situation may be created in Jammu and Kashmir also in future. The state’s autonomy is being scrapped. Sir, I strongly oppose this bill.
*SHRI P. RAVEENDRANATH KUMAR (THENI): Hon’ble Speaker Sir, I thank you for giving me the opportunity to speak on “The Jammu and Kashmir Reorganisation Bill, 2019”. I convey my special thanks to Hon’ble Minister of Home Affairs, Mr. Amit Shah. In 1984, our Puratchithalaivi Amma had raised the following demand in Rajya Sabha. She asked, “There is a situation in Jammu and Kashmir that people are oppressed and Governor’s rule is imposed. What are the steps taken by the Government to provide security to the people of Jammu and Kashmir? When will Jammu and Kashmir fully integrate with India? “. She had raised these questions in Rajya Sabha in the year 1984. And the reply to her question is given today by our Hon’ble Prime Minister of India and Hon’ble Minister of Home affairs. I specially thank Mr. Amit Shah, Union Minister of Home Affairs, for this decision. Hon’ble Prime Minister of India and Hon’ble Minister of Home affairs has opened the gates of liberation to the women, children and youth of Jammu and Kashmir today. They are being given equality today. They have ensured their rights. I strongly believe that they can breathe the air of freedom here afterwards. In 1974, due to personal reasons, the then Congress Government separated Katchatheevu from Tamil Nadu and gave it to Sri Lanka. As they snatched away the rights of Kashmiris, they denied the rights of Tamil Nadu. I request the Hon’ble Minister that Katchatheevu has to be retrieved from Sri Lanka. For the sake of Tamil Nadu, I request you to retrieve Katchatheevu from Sri Lanka. This bill is a milestone. It is of historic importance. With these words, I conclude my speech. Thank you.
ADV. A.M. ARIFF (ALAPPUZHA): Thank you Hon. Speaker, Sir.
If I raise my grave concern about the division of Kashmir and repeal of Article 370, anybody from the Ruling Party will call me Pakistani or anti-national. I do not mind it. I will be an Indian till my last breath. Hon. Minister of Parliamentary Affairs said that those who oppose this Bill or calling it a ‘Black Day’ are Pakistanis or anti-nationals. That is why, I am saying this. Please do not call those who are expressing different views against the Ruling Party, as Pakistanis or anti-nationals.
I say it loudly and without any hesitation that yesterday would be regarded as the ‘Black Day’ in the coming Indian history. Our democracy was replaced with the ‘jungle raj’. So, I am vehemently opposing this Bill. I am not wondered or surprised by the repeal of Article 370 in Kashmir. I am of a strong opinion that the same ideology, which demolished the Babri Masjid, is behind this. It is not a division of land. It is a division of minds. There are many technical issues and violations involved in this political encroachment and I am not going into those matters that are going to be under judicial scrutiny.
We know that this Government is allergenic to the historical facts because it backfires on them. Due to paucity of time, I am not going into the details.
What is the truth about Kashmir? Kashmir is the product of complex historical agreements and India has ensured its special status even to the international community. It is universally acknowledged that the unity of India lies in its diversity. This is the biggest attack on national unity and the concept of India as a Union of States.
The country is passing through an undeclared emergency. Fear is everywhere. Just look at the Bills that have been passed in this Session of Parliament, that is, UAPA, NIA, etc. I am sure that it is not a coincidence. It is a well-planned move to silence any minor dissent of the citizens. Your police and agencies detain anyone in the name of national security. They are hunting even politicians. The media persons are saying that Shri Farooq Abdullah and my leader, Shri Yousuf Tarigami are put under house arrest. I have only one thing to say to those who are happy and supporting this undemocratic decision, that the soul of the democracy is hanging over your head and the issue is not going to be confided to Kashmir.
HON. SPEAKER: Shri Sanjay Jaiswal Ji.
ADV. A.M. ARIFF: Hon. Speaker, Sir, kindly give me two minutes.
Article 371 confers special provisions to several North Eastern States. I am not going into details. Article 371 (A) is with respect to Nagaland; Article 371(B) is with respect to Assam; Article 371 (C) is with respect to Manipur, then Sikkim and so on.
Hon. Home Minister, your brute majority is not a licence for doing anything of your choice. This country has not only its glorious history, but has also the history of throwing out all the dictators into waste basket.
So, I strongly oppose the Bill here.
डॉ. संजय जायसवाल (पश्चिम चम्पारण):अध्यक्ष महोदय, बहुत-बहुत धन्यवाद । आज मैं माननीय प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में माननीय गृह मंत्री श्री अमित शाह जी द्वारा प्रस्तुत जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन विधेयक, 2019 और जम्मू और कश्मीर आरक्षण (दूसरा संशोधन) विधेयक, 2019 के समर्थन में बोलने के लिए खड़ा हुआ हूं ।
अध्यक्ष महोदय,मैं चम्पारण से आता हूं । अपने काँग्रेस के मित्रों को सुनने के बाद एक बात मुझे समझ में आ गई कि क्यों महात्मा गांधी चाहते थे कि वर्ष 1947 के बाद काँग्रेस पूरी तरह से खत्म हो जाए, क्योंकि इनकी जो सोच है,वह पूरी की पूरी बदल चुकी है । आधुनिक भारत का इतिहास 90 वर्षों का है । वर्ष 1929 में काँग्रेस का राष्ट्रीय अधिवेशन लाहौर में रावी नदी के तट पर हुआ था । वहीं से आजादी की लड़ाई की सही मायने में शुरुआत होती है । 31 दिसम्बर, 1929 को जब हम लोगों ने यह माँग की थी कि भारत को पूर्ण स्वराज दिया जाए और उन्होंने स्वतंत्रता का झंडा फहराया था, 26 जनवरी, 1930 को हम लोगों ने आज़ादी की शपथ ली थी । लेकिन,आज जो काँग्रेस कर रही है, यह उससे बिल्कुल अलग है । इस लोक सभा में पिछले 11 वर्षों से आज तक मैं एक और बात सुनता रहा हूं । ये कहते हैं कि आज़ादी में हमने केवल कुर्बानियां दीं और ये आज़ादी में दूसरे किसी ने जो कुर्बानियां दीं, उसे यह मानने को तैयार नहीं होते हैं । आज इस ऐतिहासिक विधेयक को मैं अपनी तीन पीढ़ियों को, जो मेरी सबसे पहली पीढ़ी थी, उन्हें श्रद्धांजलि के रूप में रखता हूं । हमारे अखिल भारतीय हिन्दू महासभा के जितने भी कार्यकर्ता थे, चाहे वह लाला लाजपत राय की कुर्बानी हो,चाहे वह वीर सावरकर के द्वारा किया गया स्वतंत्रता आंदोलन हो, अखिल भारतीय हिन्दू महासभा के जितने भी स्वतंत्रता सेनानी थे, उन्होंने जेल जाना पसन्द किया और उन्होंने पूरी तरह से लड़ाई लड़ी । उसमें मेरे दादा जी को भी आजीवन कारावास की सजा दी गई थी, लेकिन हम लोगों ने कभी भी काँग्रेसी टैग वाला ‘स्वतंत्रता सेनानी’ का तमगा लेना पसन्द नहीं किया । आज मैं उन सभी को श्रद्धांजलि देने के लिए यहां खड़ा हुआ हूं ।
अध्यक्ष महोदय, 15 अगस्त, 1947 की पूर्व संध्या पर माननीय पूर्व प्रधान मंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी ने एक कविता लिखी थी । उन्होंने कहा था – “पन्द्रह अगस्त का दिन कहता,आजादी अभी अधूरी है, सपने सच होने बाकी हैं, रावी की शपथ न पूरी है, जिनकी लाशों पर पग धरकर, आजादी भारत में आई, वे अब तक हैं खानाबदोश, गम की काली बदली छाई ।” जो लोग जम्मू-कश्मीर में गए, 70 सालों के बाद आज भी वे खानाबदोश हैं । उन्हें इंसाफ दिलाने का यह बिल आया है और इसके लिए मैं माननीय प्रधान मंत्री और गृह मंत्री जी को हार्दिक बधाई देता हूं ।
महोदय, किसी काँग्रेसी ने एक बार भी आरक्षण विधेयक के बारे में एक शब्द भी नहीं कहा क्योंकि ये बाबा साहब अम्बेडकर के नाम से चिढ़ते हैं । इन्होंने उनके लिए न ही कुछ किया और न ही उनके आरक्षण के समर्थन में एक शब्द बोला । आरक्षण इनके स्वभाव में ही नहीं है, आरक्षण इनके स्वभाव से बाहर है । इसलिए,इन्होंने एक शब्द भी आरक्षण के समर्थन में नहीं बोला ।
इसके बाद हम दूसरी पीढ़ी के लोगों पर आते हैं । वर्ष 1951 में जब भारतीय जनसंघ की स्थापना हुई और वर्ष 1953 में स्वर्गीय श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी, जो हमारे श्रद्धा पुरुष हैं, उन्होंने कहा कि एक देश में ‘दो विधान, दो प्रधान, दो निशान’ नहीं चलेगा । फिर वही रावी नदी,जो हमारी स्वतंत्रता की पहचान थी, जब उन्होंने रावी नदी को पार करने का प्रयास किया तो वहां उनकी गिरफ्तारी हुई,उनको कुर्बानी देनी पड़ी । दो प्रधान और दो निशान तो खत्म हो गए, पर दो विधान की जो आखिरी कील है,वह आज उस ताबूत में गड़ रही है । हम सबको फख़्र है कि हम तीसरी पीढ़ी के रूप में उसका हिस्सा हैं जिसने आखिरी कील उस ताबूत पर मारी है ।…(व्यवधान) आपने जो कश्मीर के खिलाफ विधान बनाया था, उस पर आखिरी कील मारी है ।…(व्यवधान)आज से पूरा भारत सही मायने में एक हो चुका है ।…(व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय,आज मैं उन सभी को वर्ष 1992 की कश्मीर यात्रा की याद दिलाना चाहूंगा ।…(व्यवधान)
आप यह याद रखिए कि आपके ऊपर यह आखिरी कील होगी । आपने जो आज इसका विरोध किया है,आपको पूरे हिन्दुस्तान में कहीं एक वोट भी नहीं मिलेगा,इस बात को याद रखिएगा ।
अध्यक्ष जी,वर्ष 1992 में माननीय मुरली मनोहर जोशी जी के नेतृत्व में जो यात्रा निकली थी, उसके भी सभी कार्यकर्ताओं को धन्यवाद देना चाहूंगा, जिसके आयोजन का पूरा का पूरा बीड़ा आज के प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने उठाया था ।
जब हमारे चंपारण के कार्यकर्ता रघुनाथ मंदिर गए थे, तो उनसे कहा गया था कि केवल 35 लोग वहां जाएंगे । चंपारण के कार्यकर्ताओं के सामने माननीय अटल बिहारी वाजपेयी जी थे और विजया राजे जी उस रघुनाथ मंदिर में बैठी हुई थीं । हम लोगों ने प्रमोद शंकर सिंह जी से कहा कि हमें भी कश्मीर भेजिए । वह हमारे तत्कालीन अध्यक्ष थे । उन्होंने कहा कि आप लोग कैसे बिहारी हो कि अटल बिहारी वाजपेयी जी को एक बार श्यामा प्रसाद जी ने जाने नहीं दिया और आज जोशी जी नहीं जाने दे रहे हैं, इसलिए आप सब मेरी पैरवी करो । उस दिन से हम इस लड़ाई को लड़ रहे हैं ।
महोदय, आज मैं खुश हूं कि हमारी पीढ़ी ने यह समय देखा कि धारा 370 खत्म हो रही है । हमारे संविधान में लिखा हुआ है कि यह टेम्परेरी,ट्रांजिटरी और स्पेशल प्रोविजन के लिए है । इस धारा की समाप्ति के लिए हम लोगों को इतने वर्षों तक इंतजार करना पड़ा । यह हमारे दिल में है । अगर यह हमारी आत्मा में नहीं होता, तो हम पिछली बार ही बिल ला सकते थे । जब हमने राज्य सभा में सारी चीजों को ठीक कर लिया,अपना बहुमत बना लिया, तब हम यह बिल लाए हैं । यह हमारी आत्मा का बिल है और आज यह पास हो रहा है ।
मैं हरिओम पंवार जी की चार लाइनों से अपनी बात खत्म करना चाहता हूं । उन्होंने दो साल पहले कहा था-
“दुनिया को एहसास कराओ, हम निर्णय ले सकते हैं, हम भी ईंटों का उत्तर, अब पत्थर से दे सकते हैं, अब तो वक्त बदलना सीखो, डरते-डरते जीने का, दुनिया को एहसास कराओ, 56 इंची सीने का ।” अध्यक्ष महोदय, आज 56 इंच सीने का एहसास हुआ है । आपका बहुत-बहुत धन्यवाद ।
SHRI ASADUDDIN OWAISI (HYDERABAD): Hon. Speaker Sir, I stand to oppose the Bill. I feel that this is the third historic mistake which our country is committing. The first mistake was committed in 1953 by Sheikh saab; in 1987 by rigging the elections and again in 2019. Definitely, BJP has lived up to its electoral promise in their manifesto, but they have not lived up to their constitutional duties and have indulged in breach of a constitutional promise.
Sir, I must congratulate the hon. Home Minister for the pyrrhic victory in eviscerating article 370. I am aware that many hon. Members from the Ruling party believe in alchemy and not in science, but transmuting a State into a Union Territory would make Gogia Pasha and Mandrake go green with envy. This Bill is a violation of article 3. What does this do to the federal polity in India? In one stroke the Ruling party has effaced the Sarkaria Commission, the Administrative Reforms Commission and the Raj Mannar Commission. I congratulate the hon. Home Minister because he has definitely taken a dishonourable step in a unitary authoritarian State. Had this been done by a Governor who did not belong to the BJP, the party would have raised the issue of how a Governor is partial to the ruling party. But now when the Governor is working on the diktats of the Government, the BJP is quiet. The Government has ruled on article 35A when it has been challenged and is presently pending before the Supreme Court. I trust that the Constitutional Bench of the Supreme Court will take up this gauntlet thrown by this Government.
I would like to know from the Government – are you planning to implant people as the Israelis? Are you trying to imitate the Chinese? Or, are trying to create a Bantustan as in apartheid South Africa? The hon. Minister says that it was a temporary provision. I cannot use the flowery language of Shri Manish Tewari and talk about an erotic thriller but I will definitely say that I hope that the hon. Home Minister will read the erudite judgement of Justice Nariman in the State Bank of India versus Santosh Gupta case and also the judgement of the Supreme Court in the case of Zafarullah. These two Supreme Court judgements have more wisdom than the hon. Home Minister and, in that judgement, the Supreme Court said, Mr. Minister, that article 370 is not `temporary’, it is a special status.
Sir, the BJP has picked up this tactic from the Nazi manual. What is it called in Nazi? It is called the Tactic of Legality to subvert constitutional principles and values. The people of Jammu and Kashmir, for the last 90 years, have been fighting for their democratic rights. I would like tell the hon. Home Minister that we have used military in the North-East. Why? It is because the people of North-East said that they were fighting for their dignity. We have used military force. But despite that, despite the Nagas not laying down arms, the Government is still talking with them? Why? The Nagas are demanding that they be given oil and gas and the Government is ready for this. This would have a great implication on solving the Naga problem. I would like to tell the hon. Home Minister that he assumes to be a man with an `Iron Fist’. But I must remind him that the first Iron Man in the whole democratic and undemocratic world was Bismarck, the Iron Chancellor. Even Bismarck said that the iron fist must be used by a velvet and in this case the velvet was article 370 and this Government has made it hollow. That is why I have to say that this Government has proved that they are neophytes when it comes to statecraft. You have refused to understand where myth ends and history begins. I am forced to quote this English proverb which reads `They that sow the wind, shall reap the whirlwind’.
Sir, I want to know when Asaduddin Owaisi can go and buy agricultural property in Himachal Pradesh; I want to know when Asaduddin Owaisi can go to Arunachal Pradesh and Lakshadweep without a permit. This is my position with respect to all these constitutional arrangements because I believe more in plurality and diversity. You are going to handover all these States of the North-East to the corporate world because of all these issues.
Sir, I want to end by talking about how demography changed. What is there in NRC and CAB? Why does the Government not release all those Kashmiris? Your MPs are saying that this is Diwali. Why do you leave the Kashmiri people? Let them also come out and let them also celebrate. They cannot even use a cell phone! They cannot even go out! What are you talking about? You have turned Srinagar into West Bank. That is unfortunate. That is why I demand that the Government release all prisoners and remove curfew and ensure that communication in the State begins.
17.00 hrs What will happen on Id? Id is to be celebrated on Monday. Are you assuming that the Kashmiris should, instead of sacrificing lamb, should sacrifice themselves? If you want that, I am sure, they will do that and they have been doing that.
I will conclude by what an erudite scholar wrote in his article. He said that the BJP thinks that it is going to Indianise Kashmir but instead, what we will see is potential Kashmirisation of India. You are doing a great disservice. Sir, there will be issues between Dogras and Punjabis in Jammu. There will be issues with Dalits also. You mark my words, Sir. There will be demands from the Hindus of Jammu. They will ask, “Why should we live in Pir Panjal and Chenab Valley with Muslims?” There will be migration – you mark my words –of Muslims from Kargil. You are underestimating them.
I oppose this Bill because this Government is doing disservice to Sardar Patel and Nehru.
श्री हनुमान बेनीवाल (नागौर): सर, आज बहुत ऐतिहासिक दिन है और आपका मूड भी अच्छा है,तो मुझे एक-दो मिनट एक्सट्रा दे दीजिएगा । पिछले छ: दशक से भी ज्यादा समय से हिंदुस्तान का प्रत्येक तबका धारा 370 और 35 ए को समाप्त करने की डिमांड कर रहा था । 50-60 सालों तक कांग्रेस की सरकारें बनीं और नेहरू जी ने जो भूल की थी, उस भूल को सुधारने का इनको मौका भी दिया । मैं गृह मंत्री जी और माननीय प्रधान मंत्री जी को बधाई देता हूं । हमें तो खुद को इतनी उम्मीद नहीं थी कि इतनी जल्दी धारा 370 हटेगी । मैंने सोचा था कि धारा 370 हटने तक दिवाली आ जाएगी, लेकिन आपने पहले ही सत्र के अंदर इसे कर दिया ।
अध्यक्ष जी, आपको भी बधाई कि आपने इतना लंबा सत्र चलाया । पक्ष-विपक्ष कई बार आमने-सामने भी हुए,लेकिन आपने सबको साथ लेकर यह लंबा सत्र चलाया । मैं सरकार को बधाई दूंगा कि बड़े-बड़े बिल इसके अंदर आए । कल राज्य सभा के अंदर ऐतिहासिक दिन था और आज लोक सभा के अंदर ऐतिहासिक दिन है । कश्मीर जिसकी खूबसूरती के बारे में पूरा देश जिक्र करता है, वह कश्मीर जहां माता वैष्णों देवी का मंदिर भी है, वह कश्मीर जहां डल झील भी है, वह लद्दाख क्षेत्र, जहां से आने वाले माननीय सदस्य ने अपनी पीड़ा व्यक्त की थी, वह कश्मीर हमारा है ।
अध्यक्ष जी, आज गृह मंत्री जी ने साफ-साफ कह दिया कि जो पाक अधिकृत कश्मीर है, वह भी जल्दी भारत के खाते के अंदर आने वाला है । यह सही है कि अमित शाह जी जो कहते हैं,वह करते हैं ।
यह हिंदुस्तान ने देख लिया, हिंदुस्तान के नौजवानों ने देख लिया । कश्मीर में पर्यटन की दृष्टि से सबसे ज्यादा लोग जाते हैं,लेकिन खौफ में रहते हैं कि वापस आएंगे या नहीं आएंगे, जिंदा आएंगे या नहीं आएंगे । अमरनाथ की यात्रा मशीनगन के साये में होती है । यह भारत देश का अभिन्न अंग है ।
मैं गृह मंत्री जी को बधाई दूंगा और हिंदुस्तान की जनता को भी बधाई दूंगा कि जनता ने दोनों हाथ उठाकर धारा 370 और 35ए को हटाने का समर्थन किया । कांग्रेस और दूसरे लोग बात कर रहे हैं कि फारुख अब्दुल्ला जी को गिरफ्तार कर लिया, वह बीमार हो गए । अब कोई अपने आप बीमार पड़े तो उसका इलाज नहीं है, वह डॉक्टर बुलाकर इलाज करवाए । हिंदुस्तान भी तो कश्मीर की वजह से 60 साल से बीमार पड़ा है । इस बीमारी का कोई इलाज लेकर आया तो अमित शाह जी लेकर आए हैं,नरेन्द्र मोदी जी लेकर आए हैं ।
जम्मू-कश्मीर में घूमने गए पर्यटकों और नौजवानों को मारा गया । मैं अटल बिहारी वाजपेयी जी की सरकार को धन्यवाद देना चाहता हूं,जब कारगिल का युद्ध हुआ था तब किस तरह कश्मीर की सत्ता के माध्यम से आतंककारी कैम्प उस घाटी में खोल दिए गए थे । तब वहां की सरकारें पाकिस्तान की सरकार से मिलकर किस तरह आतंकी घटनाओं को पनाह दे रही थी आतंकवादियों को पनाह दे रही थी । मैं गृह मंत्री जी को धन्यवाद देना चाहता हूं कि उन आतंकियों की सुरक्षा हटाई गई और उन्हें जनता के सामने नंगा किया गया ।
माननीय गृह मंत्री जी, आपको सोचने की आवश्यकता नहीं है, ये कितनी ही फड़फड़ाहट कर लें, इनकी फड़फड़ाहट इस देश की जनता मिटा देगी । कांग्रेस,जो इस कोने के अंदर बैठी है,अगली बार पांच की संख्या में नहीं आएगी । आपने धारा 370 और 35ए को हटाने और जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को अलग केंद्र शासित प्रदेश बनाने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है । मैं इसके लिए सोशल मीडिया को भी धन्यवाद दूंगा कि इससे हमारे बच्चों में राष्ट्रवाद की भावना पहली बार जगी है । मैं तिरुपति गया था, वहां ऊपर बैठे लोग कह रहे थे कि वास्तव में महसूस हो रहा है कि हम भारत के अंदर हैं । कांग्रेस ने पहले हिंदी और नॉन हिंदी का इश्यू चलाया,यह हिंदी बोलेगा,तेलुगू-हिंदी को लड़वाया । अब नक्सलवाद, आतंकवाद,पंजाब के आतंकवाद की बात आती है । मैं बेअंत सिंह जी की शहादत को इस मौके पर याद करूंगा कि उन्होंने पंजाब का आतंकवाद खत्म करने के लिए अपने प्राण न्यौछावर किए । हमारे कई भाइयों, किसानों के बेटों ने बार्डर पर सामना किया । नक्सलवाद, आतंकवाद, माओवाद, जो कांग्रेस और अन्य पार्टियां लेकर आई थीं, देश में यह खत्म हुआ,भारतीय जनता पार्टी, एनडीए सरकार ने इनका मुंह बंद कर दिया और उन तमाम आतंकियों को सोचने पर मजबूर कर दिया कि भारत की सरजमीं पर अब सिर छुपाने के लिए जगह नहीं है ।
माननीय अध्यक्ष जी, मैं गृह मंत्री जी को बार-बार धन्यवाद देता हूं, कल और आज के दिन का पूरा देश जश्न मना रहा है । मैं कल नागौर में था,वहां एक घटना घट गई थी । मुझे गांव से टेलीफोन आया कि आप आओ, मैंने कहा कि एक घटना घट गई है,मैं बॉडी लेकर बैठा था । उन्होंने कहा कि यहां जश्न मना रहे हैं, डीजे बज रहा है,बच्चे नाच रहे हैं क्योंकि हिंदुस्तान को दूसरी आजादी मिली है, धारा 370 हट गई है । यह गांव के अंतिम छोर पर बैठा व्यक्ति भी अमित शाह जी और मोदी जी को धन्यवाद दे रहा है । इस देश में कांग्रेस ने 70 सालों से जो गंदगी पैदा की,अब देश को पूरा भरोसा है कि जिन मुद्दों को लेकर एनडीए और भारतीय जनता पार्टी सत्ता में आई है, एक-डेढ़ साल में ही सारे मुद्दे खत्म कर देगी ।
आपने मुझे बोलने का मौका दिया,इसके लिए बहुत धन्यवाद । जय हिन्द ।
श्रीमती नवनीत रवि राणा (अमरावती): माननीय अध्यक्ष जी, आपका बहुत धन्यवाद कि इस सीरियस इश्यू पर मुझे बोलने का मौका दिया । इस सदन में, जिन्होंने 70 सालों से इस प्रश्न के लिए लड़ाई की, जितने सैनिकों ने अपनी जान गंवाई, मुझे लगता है कि हमारा योगदान इसे समर्थन देने के लिए काफी नहीं है । मुझे लगता है कि अगर सबसे ज्यादा योगदान किसी का है, तो 70 सालों से इस प्रश्न के लिए जितने सैनिक और जवान, जो बार्डर पर शहीद हुए, उनका क्रेडिट है, उनका अधिकार है । यह किसी पार्टी या पक्ष के हक में नहीं जाता है,यह इंसानियत के हक में जाता है । मैं एक युवा होने के नाते और देश का नागरिक होने के नाते आपको अपनी फीलिंग्स बताना चाहती हूं,जब से यह राज्य सभा में निर्णय हुआ तो मेरे लिए सोना मुश्किल था कि कब जाकर इस बिल का समर्थन करें,हमारा इस बिल में कैसा योगदान रहेगा ।
महोदय, 15 अगस्त आने में अभी आठ-दस दिन बाकी है,मुझे लगता है कि सही में आजादी आज होगी जब यह बिल पास होगा । जब हम कश्मीर घूमने जाते हैं तो कश्मीर के लोग हमें पूछते हैं कि क्या आप भारत से हो?
अगर वह भारत का अंग होता, अगर वहां के लोग भारत को अपना अंग मानते,तो वे कभी हमसे यह प्रश्न नहीं पूछते कि आप भारत से हैं या कहीं और से हैं । …(व्यवधान) जब हम जम्मू-कश्मीर में जाते हैं तो वहां की परिस्थिति, वहां के रेस्टोरेंट,वहां के ढ़ाबे,वहां का रहन-सहन और जब वहां की गरीबी को देखते हैं तो कभी ऐसा महसूस नहीं हुआ कि वह हमारे देश का अंग है । जिस तरीके से वे रहते हैं, जिस तरह के उनके नार्म्स हैं, एजुकेशन्स हैं, हॉस्पिटलिटी है, जिस तरह से वहां के लोग सरवाइव कर रहे हैं, मैं अमित शाह जी का अभिनन्दन करना चाहूंगी ।
17.11 hrs (Shri N.K. Premchandran in the Chair) मोदी जी जब भाषण में बोलते थे कि मेरी 56इंच की छाती है, आज उन्होंने रियल मायने में दिखा दिया कि 56 इंच किसे कहते हैं । पहले सत्र में ही सभी लोगों के सामने इस बिल को लेकर आए हैं । एक सुन्दर सा कथन है “जब तक सूरज चांद रहेगा,कश्मीर हिन्दुस्तान का अंग रहेगा,अमित शाह जी और मोदी जी आपका नाम हर दिल में,हर जुबान पर रहेगा । ” इसे कोई खत्म नहीं कर सकता है । मैं इस बिल का समर्थन करने के लिए यहां खड़ी हूं और सभी सदस्यों को भी,जिन्होंने इस बिल का समर्थन किया है । लेह-लद्दाख के एमपी ने बहुत अच्छा बोला है कि लेह-लद्दाख और कारगिल में लड़ाई कैसे होती है । मुझे लगता है कि युवाओं के लिए यह सबसे बड़ा बिल है, इसलिए हम इस बिल को सपोर्ट करते हैं ।
श्री रमेश बिधूड़ी (दक्षिण दिल्ली): सभापति महोदय,आपका बहुत-बहुत धन्यवाद । आपने एक ऐसेमुद्दे पर बोलनेका मौका दिया,जिसके बारेमें बचपन सेलेकर आज तकहम यह सोच रहेथे कि परमपितापरमेश्वर हमेंवह समय दिखएगा । धन्य हैं देशके प्रधान मंत्रीमोदी साहब औरगृह मंत्री अमितशाह जी, जिन्होंनेमेनिफेस्टो मेंसबसे पहले यहकहा था । सुबहहमारे कांग्रेसके मनीष जीबोल रहे थेऔर संविधान कीदुहाई दे रहेथे । संविधानके प्रिएंबलके मायने क्याहैं? संविधानमें बहुत क्लीयरलिखा हुआ है,सभी भारतवासियोंका प्रण रहाहै कि भाईचारेको बढ़ावा दें,प्रत्येक नागरिकका सम्मान करेंऔर सभी लोगोंको एक समानअधिकार दियाजाए । लेकिन,कांग्रेस औरदो परिवार जम्मू-कश्मीर के अंदरबैठे हुए थे,अपने सम्मानके लिए जम्मू-कश्मीर के लोगोंके साथ खेलखेलते रहे ।ये बीज अगरसही मायने मेंदेखा जाए तो…* काबोया हुआ है । इसको कोई नकारनहीं सकता ।जब सभी रियासतोंको इकट्ठा करनेका काम देशके महान सपूतसरदार पटेल नेकिया था तोजम्मू-कश्मीरका क्रेडिट एकपरिवार के साथविशेष लगाव औरअपनी व्यक्तिगतइच्छा पूरी करनेके लिए, एकपरिवार को खुशरखने के लिएजम्मू-कश्मीरको बर्बाद करनेका काम उस समयके देश के प्रधानमंत्री ने लियाथा । नेहरू जीकहते थे कि ‘धीरे-धीरेसमाप्त हो जाएगा ।’ । वेअगर धीरे-धीरेसमाप्त होनेकी बात कर रहेथे तो जब कबाइलियोंकी बात कहीगई थी, मनीषजी बोल रहेथे कि जब कबाइलीआए थे और हरिसिंह जी नेभारत से सहयोगमांगा था तोहरि सिंह जीके सहयोग मांगनेपर, नेहरूसाहब आप क्योंऐसे कश्मीर केउन लोगों कीतरफ मुखातिबहोकर उनसे प्यारजताने लगे औरयूएनओ में जाकरसीजफायर का आदेशकरवाया? अगरसीजफायर न होतातो भारत केजांबाज सैनिकउन पाकिस्तानियोंऔर आतंकवादीकबाइलियों कोलाहौर तक जाकरमारते और लाहौरभी आज भारतका हिस्सा होता । ये बीज नेहरूजी ने बोयाथा, यूएनओमें जाकर सीजफायर का आदेशकराकर उनको भगानेका काम किया ।
मैं आपकेमाध्यम से कहनाचाहता हूं किकश्मीर के आमनागरिकों केलिए जो चिंताकी है, जोउनको राइट टूइन्फार्मेशनएक्ट के तहतउनके अधिकारोंकी चिंता कीकि उनके लिएक्या किया जारहा है, उनकेलिए कितना फंडआता है, सीएंडएजीकी रिपोर्ट मांगकरभ्रष्टाचार कोरोकने का कामकिया गया, आयुष्मानभारत योजना सेगरीबों को दवाईदेने और राइटटू एजुकेशन एक्टके बारे मेंभी मुझसे पहलेसबने बोला है, मैंउसके विस्तारमें नहीं जानाचाहता । भारतके विकास मेंलगने वाला पैसा, कश्मीरमें पकिस्तानद्वारा पालेहुए आतंकवादीकुछ परिवार अपनेहित के लिएपाला करते थेऔर वे धमकीदेते थे किवहां पर भारतका झंडा उठानेवाला नहीं होगा ।
भारत का झंडा उठाने वाले तो करोड़ों होंगे, लेकिन तुम्हें भारत को छोड़कर जाना पड़ेगा,इस प्रकार की धमकियां देनी बंद कर दें । वहां पर आर्टिकल 370 समाप्त करने का प्रयास किया गया तो कश्मीर के अंदर किस प्रकार की धमकियां वे परिवार के लोग देते हैं । सर,मैं आपके माध्यम से लोकतंत्र की बात करने वालों से यह पूछना चाहता हूं कि श्री श्यामा प्रसाद मुखर्जी का नाम लिया जा रहा था । सन् 1953 के अन्दर श्री श्यामा प्रसाद मुखर्जी उस परमिट को समाप्त करने और विशेष रूप से 370 के विरोध के लिए कश्मीर में गए तो उनकी रात को हत्या करवा दी गई । उनकी हत्या करने के बाद उनकी मां ने पत्र लिखा कि वी.आई.पी. घराने का कुत्ता भी मरता है तो उसकी जांच होती है । मेरा बेटा तो एम.पी. था, मुझे बताया जाए कि उसकी हत्या कैसे हुई । इन कांग्रेस के लोगों को इस बात की इनक्वायरी करनी चाहिए थी,जो नहीं की गई । मैं तीस सैकण्ड में इस बिल का समर्थन करते हुए अपनी वाणी पर विराम देना चाहूंगा । जम्मू कश्मीर के अन्दर वहां के नौजवानों को रोजगार मिले और विकास हो और जैसा अभी बोला गया था कि वहां पर लोग सोचते थे कि हम इंडियन है और कश्मीर के लोग है तो इससे यह खाई समाप्त होगी । आपने मुझे बोलने का मौका दिया, उसके लिए बहुत-बहुत धन्यवाद ।
डॉ. निशिकांत दुबे (गोड्डा): सभापति महोदय, धन्यवाद । आज हमारे जैसे सभी भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता,उनके पूर्वज और बड़े बुजुर्ग,सभी के लिए होली दिवाली मनाने का एक ही दिन है । 70 साल से जो तपस्या हमारी पार्टी कर रही थी, जिसके लिए लगातार आन्दोलन हो रहे थे, जिसके कारण हमारे प्रथम अध्यक्ष श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी की मृत्यु हुई,जिसके कारण कश्मीर से कन्याकुमारी तक यात्रा निकाली,उस यात्रा के संयोजक आज के वर्तमान प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी थे, जिसके लिए लाल चौक पर, श्रीनगर में तिरंगा झंडा फहराने के लिए युवा मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनुराग सिंह ठाकुर जी ने एक यात्रा निकाली । आज उसके कल्मिनेशन का दिन है । इसके लिए मैं माननीय प्रधान मंत्री जी को माननीय गृह मंत्री जी को विशेष तौर पर सारे कार्यकर्ता और सारी जनता की तरफ से धन्यवाद देना चाहता हूं कि वे इस तरह का बिल लेकर आए और हमारे जीते जी सांसद रहते यह बिल इस पार्लियामेंट में पास हो रहा है । कश्मीर है क्या? इतिहास के पन्नों में अगर देखें तो देने वाले ने दिया सब कुछ अजब ढ़ंग से । सामने दुनिया पड़ी है उसे उठा नहीं सकते । यहां सब कुछ है, जितने लोग यहां बैठे हैं मैं उनकी जानकारी का आंकलन घुमने से नहीं करता,लेकिन जितना कश्मीर मैंने देखा है उतना शायद कम लोगों ने देखा होगा । आदि शंकराचार्य ने वहां मंदिर की स्थापना की । कितने लोगों ने देखा होगा । माता वैष्णों देवी के दर्शन के लिए लोग जाते हैं,उनकी बहन खीर भवानी घाटी में है, यह कितने लोगों ने देखा होगा । मोहम्मद साहब का बाल हजरतमल दरगाह में रखा हुआ है, मैं पूरे देश के मुसलमानों से पूछना चाहता हूं कि कितने लोगों ने हजरतमल दरगाह में मोहम्मद साहब के बाल को देखा है, मैंने देखा है । जामा मस्जिद में 150-200 फीट ऊंचे देवदार के पेड़ हैं तो कितने लोगों ने जामा मस्जिद देखी है, मैंने देखी है । गोकरना,बैरीनाग, दाचीगाम कितने लोगों ने देखा है । आज अगर कश्मीर को कम लोगों ने देखा है, 2, 5 या 10 परसेंट लोगों ने देखा है तो इसमें किसकी नीति दोषी है । यहां पर इतिहास की बहुत चर्चा हुई । मेरे दोस्त उदासी जी बैठे हुए हैं, कल उन्होंने मुझसे एक प्रश्न पूछा । प्रेमचन्द्रन साहब, आप हमेशा कांस्टिट्यूशन,रूल बुक की बात करते हैं । उन्होंने मुझसे पूछा कि इस संविधान में 232 नम्बर का आर्टिकल नहीं है और फिर मेरा ध्यान गया कि 232 आर्टिकल क्यों नहीं है?इन लोगों ने बाउण्ड्री की बात की, इन लोगों ने 370 की बात की,आर्टिकल 3 की बात की, आर्टिकल 1 की बात की तो यह 232 आर्टिकल किसने हटा दिया । स्टेट की बाउण्ड्री क्या होगी, इसके लिए स्टेट रीऑर्गेनाइजेशन कमेटी बनी, जिसके कारण तेलंगाना और आध्र प्रदेश एक दूसरे से हमेशा लड़ता रहा और बिना किसी से बात किए हुए केवल अपनी ब्रुटल मेजोरिटी के कारण इन लोगों ने 232 आर्टिकल खत्म कर दिया तो उस वक्त संविधान कहां था, उस वक्त यह देश कहां था, उस वक्त यह डेमोक्रेसी कहां थी ।
आज आप हमसे इन सारी चीजों का हिसाब पूछते हैं । मैं आपको बताऊं कि कश्मीर की प्राब्लम डेवलप कैसे हुई । मैंने इसकी तह में जाने की कोशिश की । वर्ष 1946 में ‘क्विट कश्मीर मूवमेंट’हुआ, उसको शेख अब्दुल्ला साहब रिप्रजेंट कर रहे थे, उसकी लीडरशिप कर रहे थे । शेख अब्दुल्ला साहब ऐसा इसलिए कर रहे थे कि उनका और मुस्लिम लीग का डिस्प्यूट था । डिस्प्यूट यह था कि कश्मीर के मुसलमानों के नेता शेख अब्दुल्ला हैं या जिन्ना साहब हैं । आपको इतिहास को थोड़ा सुनना पड़ेगा । वह मूवमेंट क्या था? वह मूवमेंट वहां के सदरे-रियासत, वहां के राजा के खिलाफ था । उस मूवमेंट का साथ किसने दिया?उस मूवमेंट को नेहरू जी ने साथ दिया । नेहरू जी वहां साथ गए । जब 15 अगस्त, 1947 को यह देश आज़ाद हुआ तो शेख अब्दुल्ला का सदरे-रियासत के ऊपर विश्वास नहीं था, सदरे-रियासत का नेहरू के ऊपर विश्वास नहीं था । सदरे-रियासत जिन्ना के प्रति इसलिए ज्यादा एक्टिव नजर आ रहे थे कि इस ‘क्विट कश्मीर मूवमेंट’ में जिन्ना ने सदरे-रियासत का साथ दिया था और यही कारण था कि एक्सेशन की ट्रीटी 15 अगस्त, 1947 को साइन नहीं हुई । मैं नेशनल आर्काइव से इसकी कॉपी लेकर आया हूं । इसमें 562 राजाओं ने एक ही एग्रीमेंट साइन किया, सबका एग्रीमेंट एक ही था, केवल उसमें नाम भर दिया जाता था कि किसका क्या साइन होगा और किसका क्या साइन होगा । मैं यह कह रहा हूं कि उन 562 राजाओं को आपने धारा 370 नहीं दी । ऐसा क्या कारण था?कारण यह था कि …(व्यवधान) मैं थोड़ा इतिहास में जाना चाहता हूं, ‘क्विट कश्मीर मूवमेंट’के बारे में बोलना चाहता हूं । मैं सरदार पटेल की एक चिट्ठी लेकर आया हूं, जो उन्होंने 6 फरवरी, 1948 को लिखी थी, जिसमें उन्होंने लिखा था कि नेहरू, आप यह जो कर रहे हैं, आप जो यू.एन. ओ. में जाने की कोशिश कर रहे हैं, यह देश के लिए खतरनाक है और गृह मंत्री के नाते आप मुझे इस बारे में बताइए ।
सभापति महोदय,यदि आप चाहेंगे तो मैं इसे सदन के पटल पर प्लेस कर दूंगा । नेहरू ने कहा कि कश्मीर के बारे में आप मुझे छोड़ दो, जो मुझे करना है, मैं कर लूंगा । इसके बाद अनुच्छेद 370 बन गया, लागू हो गया और वर्ष 1952 में दिल्ली एग्रीमेंट हो गया । मैं एक बहुत अच्छा भाषण लेकर आया हूं । यहां नेहरू जी की बात चल रही थी, यह लोक सभा की 7 अगस्त, 1952 की डिबेट है और इसमें डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी साहब का भाषण है । इस डिबेट में नेहरू कह रहे हैं कि भारत का जो भूभाग पाकिस्तान ऑक्यूपाइड कश्मीर है, जिसके बारे में आप वर्तमान माननीय गृह मंत्री जी से जवाब मांग रहे थे कि पाकिस्तान ने जो भूभाग कब्जा कर लिया है, वह उस भूभाग का केवल एक-तिहाई है, छोटा हिस्सा है । इस बिल में हम वहां के लिए केवल 24 सीट्स लेकर नहीं आए हैं,भारतीय जनता पार्टी के जो कार्यकर्ता हैं और जैसा गृह मंत्री जी ने कहा,हम उसके लिए बलिदान देने को तैयार हैं । पाकिस्तान ऑक्यूपाइड कश्मीर के लिए विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ता हमेशा एक नारा लगाते रहे हैं -
‘कश्मीर है पुकारती,पुकारती है भारती,खून से तिलक करो, गोलियों से आरती ।’ हम अपना खून देने को तैयार हैं, गोली खाने को तैयार हैं,लेकिन पाकिस्तान ऑक्यूपाइड कश्मीर को हम वापस लेकर रहेंगे । यह डॉ.श्यामा प्रसाद मुखर्जी साहब का भाषण है । इसलिए मैं आपसे कह रहा हूं, …(व्यवधान)मैं आपका बहुत ज्यादा वक्त नहीं लेना चाहता हूं,मैं भारतीय जनता पार्टी का कार्यकर्ता होने के नाते,इस देश का नागरिक होने के नाते इस पूरी सरकार को,यहां माननीय गृह मंत्री जी बैठे हैं, पूरी कैबिनेट बैठी हुई है, खासकर माननीय प्रधान मंत्री जी, माननीय वित्त मंत्री जी और माननीय गृह मंत्री के प्रति आभारी होना चाहता हूं कि उन्होंने ऐसा दिन हम लोगों को दिखाया, हमारे जीते जी यह हो गया । इसके लिए मैं विधि मंत्री जी के प्रति भी आभारी हूं । मैं अधीर रंजन चौधरी साहब को भी धन्यवाद देना चाहता हूं कि आपने जो गलती की थी, कांग्रेस पार्टी ने जो गलती की थी, नेहरू जी ने जो गलती की थी, जिसके कारण हमने इतना कष्ट भोगा है, आज वह दिन फिर से वापस आ गया । इन्हीं शब्दों के साथ,मैं अपनी बात समाप्त करता हूं । जय हिन्द, जय भारत ।
श्री विनायक भाउराव राऊत (रत्नागिरी-सिंधुदुर्ग): सभापति महोदय,जम्मू-कश्मीर के लिए अनुच्छेद 370 को हटाकर केन्द्र शासित क्षेत्र निर्माण करने का जो संशोधन विधेयक लाया गया है, मैं शिवसेना की तरफ से उसका समर्थन करने के लिए खड़ा हुआ हूं ।
मैं सर्वप्रथम आज़ादी के रण-संग्राम में जो स्वातंत्र्य सेनानी शामिल हुए थे और आज़ादी के बाद जम्मू-कश्मीर के संरक्षण के लिए जो जवान शहीद हुए, उनके प्रति श्रद्धांजलि व्यक्त करता हूं ।
17.25 hrs (Shri Rajendra Agrawal in the Chair) मैं उन्हें कहना चाहता हूं कि आपके बलिदान का फल आज माननीय पंतप्रधान नरेन्द्र मोदी जी और माननीय अमित शाह जी के माध्यम से आपको मिला है । साथ-साथ,मैं हिन्दू हृदय सम्राट बाला साहेब ठाकरे जी, स्वतंत्रता सेनानी सावरकर,डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी,श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी और जिन्होंने जिंदगी का हर पल अखंड हिन्दुस्तान का सपना देखते हुए गुजारा है,उनसे प्रार्थना करता हूं कि इस भारत माता के सुपुत्र पंतप्रधान नरेन्द्र मोदी जी और गृह मंत्री अमित शाह को आप आशीर्वाद दें, इस अखंड हिन्दुस्तान का रक्षण करने के लिए, अखंड हिन्दुस्तान को सुजलाम् सुफलाम् बनाने के लिए इस सरकार को ताकत दें और भविष्य में हिन्दुस्तान बलशाली बने, यह हमारी प्रार्थना है, इसे आप कामयाब करें ।
सभापति महोदय,आज कश्मीर से कन्याकुमारी तक फैले देश के सारे भारतवासी एक त्यौहार मना रहे हैं, वे आनंद मना रहे हैं । हम चाहते थे कि हमें भविष्य में एक अखंड हिन्दुस्तान देखना है । कश्मीर से कन्याकुमारी तक हिन्दुस्तान फैला हुआ है ।…(व्यवधान)
सभापति महोदय,मंत्री महोदय ने बात की थी, उनको मंत्री कोटे से वक्त दिया गया था और अभी शिवसेना का वक्त पूरा का पूरा बाकी है । इसलिए मंत्री जी ने जो भाषण दिया है, वह शिवसेना के कोटे से बाजू में रख कर दिया हैं ।…(व्यवधान)
माननीय सभापति: समयकी सीमा है, आपबोलिए ।
श्री विनायक भाउराव राऊत: आज कश्मीर हिन्दुस्तान का नंदन वन है, लेकिन दुर्भाग्य से इस नंदन वन को पिछले 72 वर्षों से कांग्रेस की सरकार ने सत्यानाश करने का काम किया है, ताकि खुद का मतलब निकाला जाए । आज यह पहला दिन है कि आज कश्मीर के लोगों को सही तरीके से आजादी प्राप्त हुई है और इसी दिन का वे राह देख रहे थे और यह दिन दिखाने का काम आज की सरकार ने किया है । आज पूरे भारत देश में सभी भारतवासी,चाहे वह गांव,शहर, मीडिया,प्रिंट मीडिया,इलेक्ट्रॉनिक मीडिया हो या सोशल मीडिया हो, सभी दूसरी आजादी का जश्न मना रहे हैं । इसके असली हकदार आज के प्रधान मंत्री जी और गृह मंत्री जी हैं ।
सभापति महोदय,यह नामुमकिन नहीं था, लेकिन दुर्भाग्य से ऐसा हुआ है कि आज जो बोल रहे हैं कि धारा 370 और आर्टिकल 35(ए) को हटाने के समय वहां की असेम्बली की सहमति नहीं ली गई है,मैं आपको एक जानकारी देना चाहता हूं कि जब जम्मू-कश्मीर के बारे में वर्ष 1954 में धारा 370 पर अमल करना निश्चित हुआ,तब संसद थी,लेकिन दुर्भाग्य से संसद में इस पर चर्चा या बहस नहीं हुई थी । जम्मू-कश्मीर,लोक सेवा आयोग के एक जिम्मेदार अधिकारी, श्री के. बी. जंदियाल ने कहा है कि राष्ट्रपति जी को भी आर्टिकल 35(ए) पर अमल करने का अधिकार नहीं था, लेकिन जिस तरह इमरजेंसी के वक्त जबर्दस्ती से राष्ट्रपति जी का सिग्नेचर लिया, वैसे ही इस राष्ट्रपति जी के माध्यम से उनको गैर-कानूनी सिग्नेचर करना पड़ा ।
ऐसा गैरकानूनी काम वर्ष 1954 में हुआ था, अभी वैसा नहीं हुआ है । अभी वहां राष्ट्रपति शासन चल रहा था और संसद सार्वभौम है । मैं एक ही विनती करता हूं और कहता हूं कि माननीय नरेन्द्र मोदी जी, देश के 130 करोड़ लोग आपके साथ खड़े हैं, आप हिंदुस्तान के हित के लिए निर्णय ले रहे हैं, इसके लिए कोई चिंता करने की बात नहीं है । जिस धारा 370 की वजह से कश्मीर के पंडित विस्थापित हुए,उनके लिए भी कुछ करने की जरूरत है ।
SHRI N. K. PREMACHANDRAN (KOLLAM): Sir, I stand here to oppose the Statutory Resolution and the Jammu and Kashmir Reorganisation Bill, 2019 on the following four grounds.
The first ground is this. The Statutory Resolution as well as the Bill are totally unconstitutional, illegal, void and are ultra vires the powers of the President.
Secondly, it violates the basic, federal character of the Constitution of India.
Thirdly, it abrogates all the Parliamentary Procedures, Rules and conventions of this House.
Fourthly, it is having an ulterior political motive. This is being introduced to achieve political gains. Further, instead of integrating the country by bringing the people of Kashmir to the mainstream of the country, the Government is disintegrating the Jammu and Kashmir State into two Union Territories by which the will of the people has not been taken into consideration.
I would like to say that the consequential ramifications of this decision to divide the State of Jammu and Kashmir into two Union Territories is fatal. It is a fatal legal error as well as a monumental historical mistake done by the Government. The future will prove this fact.
I would like to confine myself to the Constitutional position. Article 370 of the Constitution is the original provision in the Constitution. Most of the learned Members have already given their opinion regarding Article 370 (1). I do appreciate and accept the fact that under Article 370 (1), the President is having ample authority to issue a Notification which he has issued yesterday, that is, on 5th August, 2019. If you kindly examine it, Clauses 1 and 2 of the Notification are absolutely correct. I do appreciate that His Excellency, the President of India is having the right to modify, to make alterations or even to revoke Article 370 by invoking Article 370 (1) (d). But, in the same Notification, the hon. President is amending Article 367 of the Constitution of India. I would like to know whether the President is having the power to amend Article 367 of the Constitution? As per Article 370 (1) (d), the President is empowered to amend or make any changes in Article 370 …(Interruptions)
HON. CHAIRPERSON: Please conclude.
SHRI N. K. PREMACHANDRAN: Sir, I am confining to the provisions of the Constitution and to the Bill. I am not going to any political issues.
The hon. Home Minister may kindly enlighten us whether the President of India is having the power to amend Article 367 of the Constitution? In the Notification, four clauses have been incorporated. Clause 4 (d), the last Clause of the Notification says that Constituent Assembly of Jammu and Kashmir means, or it shall be read as “Legislative Assembly of the State.” How could it be so?
My point is this. The President or only the Parliament is having the right to amend the Constitution through the procedure laid down in Article 368. Yes, the Government has the power, but only by virtue of Article 368, this provision can be applied. The President has no authority. That is why I am saying that the President is ultra vires his powers. …(Interruptions)
The Constituent Assembly has come into existence in the year 1951. It was there up to 1957. From 1957 to 2019, this provision has not been touched upon.
This means that provision has become redundant. In the redundant provisions, the doctrine of destitution will be applicable. Therefore, the entire process done by the Government in promulgating the notification dated 5th August, 2019 as well as introducing the Bill in the House is ultra vires of the Constitution and I strongly oppose this Bill. Also, it is violating the federal character of the Constitution.
The ramifications of this Constitutional Amendment over the Article 370 are very fatal. Once again, I would like to say that it is a monumental historic mistake committed by the Government for which in future the Government has to learn from the history. Otherwise, it will be very fatal.
With these words, I oppose this Bill. Thank you very much.
श्री रवि शंकर प्रसाद: माननीयसभापति जी, मैंबहुत देर सेइस बात को सुनरहा हूँ किआपके पास ब्रूटमेजॉरिटी है, तोजो भी बिल पासकरना है, करलीजिए । क्याब्रूट मेजॉरिटीउनकी कृपा सेआई है? देशकी जनता केसामने हम अपनेमुद्दे लेकरगये और देशकी जनता नेहमें जिताया । हमने उस समययह भी कहा थाकि हम धारा370को बदलेंगे । आप हमसे जम्मू-कश्मीर की सहमतिकी बात कर रहेहैं, हम इसेबदलने के लिएपूरे देश कीसहमति लेकर आएहैं । एक बातमुझे यह कहनीहै ।
हम अभी तकसुन रहे थेकि 51, 52, 53, 56 और 70साल में धारा 370 पर क्या खोयाऔर क्या पाया,इस पर हमकुछ नहीं सुनरहे हैं । सर,मैं एक कानूनदेख रहा था,बाकी कानूनोंकी बात तो अलगहै, यह प्रिवेंशनऑफ करप्शन एक्ट, 1988 है । यह मंत्री-नेता और पदाधिकारियोंके करप्शन कोरोकने से संबंधितहै । उसमें लिखाहुआ है- It shall extend to whole of India except the State of Jammu & Kashmir. आपयह बताएं किदो-तीन परिवारोंपर इस कानूनको लगाने मेंक्या दिक्कतथी? यह क्योंनहीं लगाया गया?
मैं अपने प्रधानमंत्री और गृहमंत्री जी काअभिनन्दन करूँगाकि जिस बिलके समर्थन मेंमैं बोलने केलिए खड़ा हुआहूँ, इसमें106 सेन्ट्रलएक्ट्स को जम्मू-कश्मीर मेंलगाया जा रहाहै, जिनमेंप्रिवेंशन ऑफकरप्शन एक्टभी शामिल है । आपसे हम यहकहना चाहते हैं ।
आपको किसनेमना किया था?कश्मीर केआईन आदि कीबात, इसमेंराइट टू एजुकेशन,राइट टू इंफॉर्मेशनभी है । प्रोहिबिशनऑफ चाइल्ड मैरेजएक्ट भी कश्मीरमें लागू नहींथा, जिसेआज लागू कियाजा रहा है ।
मुझे एक बातकी बहुत पीड़ाहै, जिसेमैं सदन केसामने रखना चाहताहूँ । कांग्रेसके लोगों नेवर्ष 1993 मेंएक बहुत अच्छाकानून पास कियाथा । उस कानूनका नाम क्याथा, जो लोगसिर पर मैलाढोते हैं, उसको प्रोहिबिटकरने का कानूनथा । The Employment of Manual Scavengers and Construction of Dry Latrines (Prohibition) Act, 1993 को भी आपने कश्मीर में नहीं लागू होने दिया । उसका क्या कारण था? The humane act prohibiting the most inhuman practice of carrying latrine on the head, उसको भीआपने कश्मीरमें नहीं लगनेदिया । आपकोइसका कभी-न-कभी जवाबदेना पड़ेगा ।…(व्यवधान)आप चिन्ता नहीं कीजिए, वहाँ ट्रिपल तलाक बिल भी लगेगा ।
एक बात याद आई है । एकता यात्रा संघ के अध्यक्ष डॉ. जोशी जी थे । उसमें हमें भी जाने का सौभाग्य मिला था । मैं उस समय भारतीय जनता युवा मोर्चा का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष था । माननीय गिरिराज जी भी मेरे साथ गये थे, बहुत-से लोग गये थे । वहाँ बनिहाल के पास हमारी बस रोक दी गई । हम लोग वहाँ किसलिए जा रहे थे? हम लोग लाल चौक पर तिरंगा फहराने के लिए जा रहे थे । हम लोगों ने धरना दिया,गिरिराज जी तो सड़क पर ही धरने पर बैठ गये । उस समय पानी पड़ रहा था । उनका गुस्सा उस समय भी वैसा ही था, जैसा आज है । लेकिन उन्होंने देश हित के लिए गुस्सा किया था,इसलिए मैं उनका अभिनन्दन करूँगा । हम लोग दो घंटे तक भागते रहे । अरे भई, हम तिरंगा लेकर जा रहे हैं,हमें जाने दो । 15 अगस्त पर देश का तिरंगा लेकर जा रहे थे । उस समय धारा 370 कहाँ थी? धारा 370 में अगर तिरंगा फहराने पर पाबंदी है,तो इस धारा 370 को नहीं रहना चाहिए । हम यह बात साफ-साफ कहना चाहते हैं ।
इसीलिए, आज मैं अपने प्रधान मंत्री जी के साहस का अभिनंदन करूंगा,मैं अमित शाह जी का अभिनंदन करूंगा । नितिन गडकरी जी यहां बैठे हैं, वे पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे । …(व्यवधान) उन्होंने राजनाथ जी की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई थी, कि जाइए आप लोग कश्मीर को स्टडी कीजिए और रिपोर्ट दीजिए । …(व्यवधान)हम दस बार कश्मीर गए थे । ये जो बार-बार कश्मीर के दर्द की बात की जा रही है, कश्मीर में आवाज़ अलग-अलग भी है । कश्मीरी पंडितों की पीड़ा की बात तो सही है कि 370 के कारण उन्हें निकाला गया ।
वहां हम पहाड़ी मुसलमानों से मिले, उन्होंने कहा क्षमा कीजिए,हम पहाड़ी मुसलमान हैं, हमारे खानदान ने भारत की सेना को रास्ता दिखाया था, वह रास्ता पाकिस्तान को रोकने के लिए था । …(व्यवधान) वहां हम शिया मुसलमानों से भी मिले, उसके बाद हम लद्दाख गए । वह लद्दाख का नौजवान कहां है? मैं तुम्हारा अभिनंदन करता हूं,बहुत बढ़िया बोले तुम! …(व्यवधान)हम लद्दाख भी गए थे, कारगिल भी गए थे, डोडा भी गए थे । मुझे याद आ रहा है कि हम राजौरी भी गए थे । …(व्यवधान)ये सब कहां है?बारामूला, अनंतनाग, सोपोर और डाउनटाउन श्रीनगर, आप उनकी आवाज़ सुन रहे हैं, नरेन्द्र मोदी की सरकार कश्मीर के एक-एक आवाम की आवाज़ सुन रही है, जो धारा 370 के खिलाफ है ।
अब आप यह बताएं कि क्या खोया, क्या पाया? यह एक सवाल है । आज मैं यहां कुछ बातें रखना चाहता हूं । आर्मी ऑफिसर उमर फयाज़ मारा गया, वह अपने भाई की शादी में गया था, प्राउड लेफ्टिनेंट –पांच महीने में उसने अपना खड़गवासला में नाम कमाया था । धारा 370 की वकालत करने वाले किसी भी नेता ने उमर के साथ खड़े होने की कोशिश की? बिलकुल नहीं की । औरंगज़ेब आतंकवादियों द्वारा मारा गया था, वह कश्मीर राइफल्स में जवान था, उसे हमारी सरकार ने शौर्य चक्र दिया । क्या उसके साथ धारा 370 की बात करने वाले खड़े हुए? मैं आज उसके फादर का अभिनंदन करूंगा,उन्होंने कहा कि मेरा एक बेटा गया है, मेरे बाकी दोनों बेटे भी सेना में जाएंगे । …(व्यवधान)आज वे दो बेटे भी सेना में गए हैं । …(व्यवधान)आज जब 370 खत्म हो रहा है, तो इन सभी के चेहरों पर चमक है । …(व्यवधान) हां, जो आतंकवाद की पैरवी करते हैं, उनको परेशानी है । …(व्यवधान)
17.42 hrs (Hon. Speaker in the Chair) परिवारों की बात की गई । …(व्यवधान) Dr. Shashi Tharoor, you talked eloquently on legislative despotism or something like that. All right, I cannot speak that English of that calibre. I know my limitations. But I remember a very famous cartoon when Emergency was imposed. As per that cartoon, the hon. President was having a bath in the bathtub and he said, “At least, spare me to take my bath.” अभी ऑर्डिनेंस मत लाओ, हमने वैसा काम नहीं किया । आपने इमरजेन्सी पहले कर दी, कैबिनेट को बाद में बताया । यह आप भी जानते हैं । आपके नेताओं ने क्या किया है,हमारी ज़ुबान न खुलवाइए । हम इमरजेन्सी में लड़ने वाले लोग हैं । आपने इस हाउस को बढ़ाया ही नहीं,इमरजेन्सी के खिलाफ बोलने वाली सारी आवाज़ को बंद किया, ताकि विरोध खामोश रहे । यह काम आपने किया था ।
डॉ. शशि थरूर : मैं उसमें नहीं था । …(व्यवधान)
श्री रवि शंकर प्रसाद : आपनहीं थे, लेकिनआप अपनी सच्चाईजानिए । …(व्यवधान)मुलायम सिंह जी आप भी इमरजेन्सी में अंदर थे । My DMK friends, you were also inside. I know for sure your Government was dismissed. अकाली दलके लोगों नेभी संघर्ष कियाथा, मुझेमालूम है । इसलिएकृपया कर केहमें जम्हूरियतकी नसीहत नदें । थरूर साहब,यह मैं आपसेबड़े अदब सेकहना चाहूंगा । हम लोग संघर्षकर के आए हैं ।
सर, आज मैंयहां एक बड़ासवाल खड़ा करनाचाहता हूं ।इसका कश्मीरके लिए क्याउपयोग होगा,कैसे होगा,हम उसका पूरारोडमैप देंगे । But can we deny this fundamental fact that the abuse of Article 370 had become a vested interest? फिफ्टीज़में इसके खिलाफआवाज़ उठती थी । हम लोगों नेअपनी उस यात्रामें काफी चीज़ोंको एग्ज़ामिनकिया था, जिससे कई कहानियांसामने आईं ।होटल की ज़मीननहीं मिल सकती,लेकिन कम पैसेपर, 30-40 लाख रुपयेमें बड़ी ज़मीनले ली और उसकोबाहर के आदमीको बिना किसीऑक्शन के करोड़ोंरुपये में देदी । अब आप उससे10-15 करोड़ रुपयेकिराया ले रहेहैं । आज धारा370 हटेगी तोवह ज़मीन ईमानदारीसे पब्लिक केलिए ऑक्शन होगी,किसी परिवारके नाम पर नहींचलेगी ।
सर, आज मैं देश का आई.टी.मिनिस्टर हूं । मैंने वहां बी.पी.ओ. खोला है । वह अनंतनाग में भी है, श्रीनगर में भी है और सोपोर में भी है । उधर हमारा कॉमन सर्विस सेंटर चलता है । देश में लगभग 3.5 लाख सेंटर्स हैं और वहां 12 लाख बच्चे-बच्चियां काम करते हैं । कश्मीर में भी 3 हजार सेंटर्स हैं । वहां के बच्चे यहां आए थे और मैं उनसे मिला था । उन्होंने कहा कि हमें वहां मत बुलाइए,वहां दहशतगर्दों से बहुत खतरा है । उन्होंने कहा कि हमें अवसर दीजिए । आज जो यह धारा 370 खत्म हो रही है, उससे कश्मीर के नौजवानों को अवसर मिल रहा है । …(व्यवधान)
श्री अमित शाह: अध्यक्षजी, अपोजीशनको आपत्ति हैकि प्रधान मंत्रीजी आए हैं औरनारे लगे हैं । संसद ही नहीं, देशभर में हर गांवमें नारे लगरहे हैं, आपसुनने के लिएतैयार हो जाइए ।
श्री रवि शंकर प्रसाद: सर, मैंबहुत संक्षेपमें अपनी बातखत्म करूंगा । आज जो उस तरफके लोग आर्टिकल 370 की बात कररहे थे, तोमैं एक सवालपूछूंगा कि आर्टिकल 370 की बात करनेवाले लोगों नेपाक ऑक्यूपाइडकश्मीर में जबह्यूमैन राइट्सका वायलेशन होरहा था, तोक्या वे कुछबोले? आजतक पाक ऑक्यूपाइडकश्मीर में कश्मीरियोंके ह्यूमैन राइट्सका वायलेशन होताहै, वे खामोशक्यों हैं?आज मैं एकसवाल पूछूंगाकि जब आतंकवादियोंके द्वारा कश्मीरीसेना में कामकरने वाले आफिसर्स,कांस्टेबल्समारे जाते हैंतो ये लोग खामोशरहते हैं । येखामोश क्योंरहते हैं? सर, ये बड़ेसवाल हैं । कश्मीरकी कहानी क्यागुलाब सिंह केसमय से शुरूहोती है? उनका सम्मानहै । कश्मीरकी कहानी शुरूहोती है, शंकराचार्यके समय से ।वहां पर वैष्णव,वहां पर शैव,वहां पर अमरनाथबर्फानी बाबा,क्या इन सबपरंपराओं कोहम भूल जाएं?आज कश्मीरभारत का सिरहै, हिमालयके ऊपर हमारीपरंपरा और सनातनविचार धारा है । मैं एक बातऔर कहूंगा किक्या यह सच्चाईनहीं है किकश्मीर की जोसूफी परंपराहै, उसकोसमाप्त करनेकी कोशिश कीजा रही है ।यह बहुत दुर्भाग्यपूर्णहै । आज जो यहपूरा निर्णयहुआ है, यहकिसी के खिलाफनहीं है । यहकश्मीर का विकास,कश्मीर केलोगों के विकासकी चिंता है ।
अध्यक्ष महोदय, मैंएक अंतिम बातकहकर अपनी बातसमाप्त करूंगा । सरदार पटेलके नाम से विपक्षको परेशानी क्योंहो जाती है? आजमैं साढ़े चारघण्टे से अपनेलायक दोस्तोंकी कहानी सुनरहा हूं । एकने भी सरदारपटेल का इज्जतसे नाम नहींलिया है । …(व्यवधान) सर, 562रियासतें थीं । उनका अंतरयही है कि 562 रियासतों मेंसे 561 को सरदारपटेल ने हैण्डलकिया था, कोई समस्यानहीं है । उनमेंसे एक को नेहरूजी ने किया,आज तक समस्याहै, जिसकोप्रधान मंत्रीमोदी जी हैण्डलकरके खत्म कररहे हैं ।…(व्यवधान) हमारी बहन ने एक बात कही थी कि आप ये बताएं, सरदार पटेल 1950 में मरे थे,आपने उनको भारत रत्न 1991 में दिया । आपने बीच में नेहरू जी को दिया,राजेन्द्र बाबू को दिया, शास्त्री जी को दिया, इन्दिरा जी को दिया, राजीव गांधी को दिया,वी.वी. गिरि को दिया,हमें कोई आपत्ति नहीं है । सरदार पटेल जैसे महान देशभक्त को आपकी सरकार ने भारत रत्न क्यों नहीं दिया? वर्ष 1991 में कौन प्रधान मंत्री थे? उस समय परिवार के बाहर के प्रधान मंत्री थे । यदि वर्ष 1991 में परिवार के प्रधान मंत्री होते तो ये काम भी स्व. अटल बिहारी वाजपेयी जी की सरकार को करना पड़ता, जो हमने किया है । …(व्यवधान) । कृपया करके सरदार पटेल जी का नाम मत लीजिए । उनका अपमान करने के लिए आपने बहुत काम किया है । मुझे गर्व है अपने प्रधान मंत्री जी पर कि आज सरदार पटेल जी की इतनी बड़ी मूर्ति लगी है,जो दुनिया में एक परचम है । हम उसका अभिनन्दन करते हैं । आपने तो डॉक्टर अम्बेडकर का भी अपमान किया है । …(व्यवधान) । आप लोग जरा बैठ जाइए । …(व्यवधान) । अत: मैं इस बिल का पूरा समर्थन करता हूं और यह कहा जा रहा है कि आपने कश्मीर की विधान सभा से सहमति नहीं ली । अनुच्छेद 356 में साफ लिखा हुआ है कि Parliament has got full power. जब पार्लियामेंट में कश्मीर के लोग बैठे हुए हैं,पूरी चर्चा हो रही है, तो इसका कोई आधार नहीं है । यह पूर्णत:वैधानिक है,देश हित में है और हम सब लोग समर्थन करें,यही मेरी अपील है ।
माननीय अध्यक्ष : श्री प्रहलाद जोशी जी ।
माननीय अध्यक्ष: माननीय गृह मंत्री जी ।
श्री अमित शाह: अध्यक्षमहोदय, …(व्यवधान) । मैं सदन के सभी सदस्यों के मन का भाव समझ रहा हूं । इस आनन्द की अभिव्यक्ति का कुछ औचित्य भी बनता होगा,लेकिन 70 साल से जो टीस दिल के अन्दर सब लोग दबाकर बैठे हैं, वह टीस जब समाप्त होने का समय आता है तो आनन्द की अभिव्यक्ति को औचित्य से नहीं जोड़ना चाहिए । इस देश का बच्चा-बच्चा यह बोलता है कि कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है, चाहे आप कहीं भी जाएं,बंगाल में जाएं,तमिलनाडु में जाएं, गुजरात में जाएं, महाराष्ट्र में जाएं या उत्तर प्रदेश में जाएं । मैं इतना पूछना चाहता हूं कि हम कभी यह क्यों नहीं बोलते हैं कि उत्तर प्रदेश भारत का अभिन्न अंग है?हम कभी यह क्यों नहीं बोलते हैं कि पंजाब भारत का अभिन्न अंग है? हम कभी यह क्यों नहीं बोलते हैं कि तमिलनाडु भारत का अंग है?
अध्यक्ष महोदय, कश्मीर के लिए यह इसलिए बोलना पड़ता है,क्योंकि धारा 370 ने इस देश और दुनिया के मन में एक शंका आरोपित की थी कि कश्मीर भारत का अंग है या नहीं है? संविधान में इसकी बड़ी क्लैरिटी है, मगर जन मानस के अंदर, दुनिया के अंदर एक संशय था और मैं आज प्रधान मंत्री जी को बधाई देना चाहता हूं कि उनके साहस के कारण आज यह कलंक हमारे माथे से मिटने जा रहा है ।
अध्यक्ष महोदय, कई भाषण हुए कि धारा 370 भारत को कश्मीर से जोड़ती है । वास्तव में धारा 370 भारत को कश्मीर से नहीं जोड़ती है, बल्कि धारा 370 भारत को कश्मीर से जोड़ने से रोकती है और अगर इस सदन का आदेश प्राप्त होता है तो आज वह रुकावट हमेशा के लिए दूर हो जाएगी । मैंने बहुत सारे लोगों को सुना । ओवैसी साहब और एक-दो लोगों के अलावा किसी ने धारा 370 हटाने का विरोध नहीं किया । स्पष्ट बोलूं तो वे भी चाहते हैं कि धारा 370 न हटे, मगर कहने का साहस नहीं है । वह भी चाहते हैं कि धारा 370 न हटे, मगर वोट बैंक बीच में आ जाता है कि हमारा वोट बैंक क्या सोचेगा?
अध्यक्ष महोदय,मैं बताना चाहता हूं कि अनुच्छेद 370 आज इस सदन के आशीर्वाद से समाप्त हो जाएगा । यह क्षण देश के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों से लिखा जाएगा । मैं आज फिर से एक बार मेरे नेता और देश के प्रधान मंत्री की दृढ़ राजनैतिक इच्छाशक्ति को शत्-शत् नमन करना चाहता हूं कि जिस दृढ़ राजनैतिक इच्छाशक्ति के साथ उन्होंने साहस का परिचय दिया और अनुच्छेद 370 को हमेशा के लिए खत्म कर दिया ।
अध्यक्ष महोदय,मैं अनुच्छेद 370 की बात बाद में करूंगा, सबसे पहले मैं इस चर्चा में काफी सारे सदस्यों ने भाग लेते हुए कुछ चीजों के बारे में जानना चाहा है, कुछ मुद्दे भी उपस्थित किए हैं, जिनका मैं सबसे पहले जवाब देना चाहूंगा । काफी सारे विपक्ष के सदस्यों ने कहा है । सम्माननीय सदस्यों ने कहा है कि यूटी क्या हमेशा के लिए है,यूटी क्यों बनायी गयी है, यूटी कब तक रहेगी? मनीष तिवारी जी ने कहा, बहन सुप्रिया सुले जी ने कहा, अधीर रंजन जी ने भी कहा । मैं इस सदन के माध्यम से पूरे देश के सामने और विशेषकर घाटी और जम्मू के लोगों के सामने स्पष्ट करना चाहता हूं कि जहां तक यूटी का सवाल है, परिस्थिति सामान्य होते ही उचित समय पर पूर्ण राज्य का दर्जा देने में इस सरकार को कोई आपत्ति नहीं है ।
मान्यवर, एक मुद्दा उठाया गया कि पाक ऑक्यूपाई कश्मीर दे दिया । पाक ऑक्यूपाई कश्मीर भारतीय जनता पार्टी की सरकार और देश के प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी जी कभी दे ही नहीं सकते हैं । आज भी पाक ऑक्यूपाई कश्मीर की 24 सीटें हमारा हिस्सा रहने वाली हैं और पाक ऑक्यूपाई कश्मीर पर हमारा दावा उतना ही मजबूत है, जितना पहले था ।
अध्यक्ष जी,अधीर रंजन चौधरी जी ने एक और सवाल उठाया था कि यह मामला यूएन में है, आप कैसे कर सकते हैं । मैंने उनसे स्पष्टता मांगी ।
श्री अधीर रंजन चौधरी: सर, आप रिकॉर्ड उठाकर देख लीजिए । मैंने यह कहा कि जम्मू-कश्मीर वर्ष 1948 से यूनाइटेड नेशन्स की मॉनीटरिंग में है या नहीं …(व्यवधान) आप तो गृह मंत्री हैं, आपको सारी जानकारी है । मैंने यह कहा कि जम्मू-कश्मीर को अभी बाइफरकेट कर दिया गया है और यूनियन टेरेटरी बना दिया गया है तो अब क्या स्थिति होगी और इसके ऊपर आपका क्या विचार है?मैंने यह भी कहा कि I want to be enlightened by you. दूसरा, मैंने यह बात उठायी कि पीओके का स्टेटस क्या होगा? ये दो बातें मैंने कही थीं, क्योंकि पीओके के बारे में इस में कोई जिक्र नहीं है ।
श्री अमित शाह : अध्यक्ष महोदय, सदन के सामने जो बिल लेकर मैं उपस्थित हुआ हूं, इसमें पीओके और अक्साई चिन का उल्लेख है और एक-एक इंच जमीन का उल्लेख है । जहां तक यूएन का सवाल है, मैं इसके इतिहास में जाना चाहता हूं । 1 जनवरी, 1948 में संयुक्त राष्ट्र के चार्टर के अनुच्छेद 35 में रेफरेंस दिया गया है । 20 जनवरी, 1948 को संयुक्त राष्ट्र ने यूएन कमीशन फॉर इंडिया एंड पाकिस्तान UNCIP सेटअप किया और 13 अगस्त, 1948 को यूएनसीआईपी के प्रस्ताव को भारत और पाकिस्तान ने स्वीकार कर लिया । जब प्रस्ताव स्वीकार हुआ तो उसमें पहली और दूसरी, दो धाराएं थीं और तीसरी धारा भी थी । दूसरी धारा और पहली धारा में यह था कि कभी भी किसी भी देश की सेना किसी देश की सीमाओं का उल्लंघन नहीं करेगी ।
18.00 hrs वर्ष 1965 के अंदर जिस दिन पाकिस्तान की सेनाओं ने हमारी सीमाओं का अतिक्रमण किया था, उसी दिन यह प्रस्ताव खारिज हो गया था,क्योंकि एक और दो नहीं होता है,तो तीन का सवाल ही नहीं आता है । इसलिए इसका कोई सवाल पैदा नहीं होता है, न ही कोई बाधक है । यह सदन जम्मू और कश्मीर राज्य के डिविजन के लिए संपूर्ण अख्तियार रखता है ।
माननीय अध्यक्ष महोदय, दूसरा यह है कि जब शिमला समझौता हुआ था, इसको भी तत्कालीन प्रधान मंत्री जी रिकार्ड पर लाए थे । उस वक्त श्रीमती इंदिरा गांधी जी प्रधान मंत्री थीं और शिमला समझौते ने इस बात को दोहराया है । इसलिए, जहां तक यूएन का मामला है, भारत की सीमाओं के अंदर कोई भी निर्णय लेने के लिए भारत की संसद के दोनों सदनों को पूरा संवैधानिक अख्तियार है,यह स्पष्ट हो गया है ।
अध्यक्ष महोदय, मनीष जी ने यहां पर इतिहास का एक लंबा आरूपण उसकी पृष्ठभूमि समझाने के लिए किया था । इसमें कोई डिस्प्यूट भी नहीं है । मगर इतिहास की एक सीमा तक आकर वह रुक गए । मैं उनसे यह पूछना चाहता हूं कि आपने इतिहास के बारे में कहा है कि भारत ने अपनी सेनाएं भेजी थीं । सेनाओं ने घुसपैठियों को खदेड़ा था और घुसपैठियों की शक्ल में जो पाकिस्तान की सेना के जवान और अधिकारी थे,उनको भी खदेड़ा था । मगर मैं उनसे एक छोटी-सी बात पूछना चाहता हूं कि जब हमारी सेना विजयी हो रही थी, उन्होंने यह सारा यश जवाहर लाल नेहरू जी को दिया है कि उनके नेतृत्व में यह सब कुछ हुआ था,जवाहरलाल नेहरू जी के कारण हुआ था, इसी कारण से आज कश्मीर भारत का हिस्सा है ।
अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से उनसे यह कहना चाहता हूं कि सेना विजयी हो रही थी । सेना पाकिस्तानी कबाइलियों के अधिकार क्षेत्र में आए हुआ हमारा हिस्सा जीतकर आई थी, तब अचानक एक तरफा शस्त्र विराम किसने कर दिया था? मनीष जी, मैं यह बताना चाहता हूं कि वह भी जवाहरलाल नेहरू जी ने किया था और उसी के कारण आज पाक अधिकृत कश्मीर है । अगर सेनाओं को हमारा पूरा हिस्सा जीतने की छूट दे दी जाती,तो आज पाक अधिकृत कश्मीर पूरा का पूरा भारत अधिकृत होता । उन्होंने कहा कि यह किया,वह किया । मैं उनसे पूछना चाहता हूं कि…(व्यवधान)
श्री भर्तृहरि महताब: महोदय, गिलगितऔर बल्तिस्तान पहले से चला गया था ।…(व्यवधान)पाक अधिकृत कश्मीर बाद में गया था ।…(व्यवधान)वर्ष 1947 में गिलगित और बल्तिस्तान को मेजर ब्राउन ने दे दिया था ।…(व्यवधान)
श्री अमित शाह : महोदय, मैंअभी पाक अधिकृतकश्मीर की हीबात कर रहाहूं, क्योंकिइन्होंने पाकअधिकृत कश्मीरका रेफरेंस दियाथा । उसके बादमें अधीर रंजनजी ने यूएनका रेफरेंस दिया, यूएनमें लेकर कौनगया था? ढेरसारे दस्तावेजहैं, देशके उप प्रधानमंत्री और गृहमंत्री को विश्वासमें लिए बगैरआकाशवाणी केकमरे में वायुप्रवचन कर दियाकि भारत इसमसले को 35सैक्शन केअंदर लें, सैक्शन भी ठीकपसंद कर लिया । शशि थरूर जीको मालूम है ।…(व्यवधान)आप बोल चुकेहैं, अब आपमत बोलिए ।…(व्यवधान) आप बैठ जाइए,मैं जवाब देताहूं ।…(व्यवधान)आप बैठ जाइए,मैं बताताहूं । आज अंतर्राष्ट्रीयपरिस्थितियोंकी दुहाई आपनेभी दी है कियह मत करिएकि अंतर्राष्ट्रीयपरिस्थितियांक्या होंगी?लेकिन जब देशहित का मामलाहोता है, तो हमने यहनिर्णय हमारेदेश की स्थितिको समझने केलिए लिया है ।…(व्यवधान)
माननीय अध्यक्षजी, यूएनमें कौन लेकरगया था? जवाहरलालनेहरू जी हीयूएन में लेकरगए थे, यहभी इतिहास कामानना है । इन्होंनेकहा है कि कश्मीरके ऊपर उनकेबारे में ठीकतरह से नहींसोचा जा रहाहै । इतिहासमें जो घटनाएंघटित हुई हैं,उसी के आधारपर ही सोचाजाएगा । इस घटनाके बारे मेंभी इतिहास कभीन कभी तय करेगाकि यह सच्चीहै और यह देशके लिए ठीकहै या नहींहै । मगर मुझेभरोसा है किजब भी इस घटनाका जिक्र होगा,यह देश माननीयनरेन्द्र मोदीजी को सालोंसालतक याद रखेगा । उन्होंने कहाकि आप 371 का क्या करेंगे?
वे बड़े वकील हैं, मैंने तो लॉ पढ़ी नहीं है, 370 और 371 के बीच का अंतर मैं आपके माध्यम से सदन को बताना चाहता हूँ । 370 जम्मू कश्मीर राज्य के संबंध में अस्थायी उपबंध । अस्थायी शब्द बड़ा महत्वपूर्ण है । यह पहले से कहा गया है कि यह अस्थायी उपबंध है और 370 हटाने की जरूरत इसलिए है कि वह देश की संसद का अख्तियार वहाँ पर कम करता है । मैं आगे बताऊँगा,ढेर सारे कानून जो जनता की अच्छाई के लिए हम बनाते हैं, वे जम्मू कश्मीर की जनता तक पहुँचते नहीं हैं । जम्मू कश्मीर के लोगों के मन में अलगाववाद की भावना को पाकिस्तान पेट्रोल डाल कर भड़का रहा है, यह 370 के कारण । मैं आगे इस विषय पर आऊँगा ।
मान्यवर, मैं 371 पढ़ना चाहता हूँ- महाराष्ट्र और गुजरात राज्य के संबंध में विशेष उपबंध, स्पेशल प्रोविजन । यह टेम्परेरी प्रोविजन है । दोनों के बीच का अंतर आप समझ लीजिए । दोनों के बीच में और अंतर क्या हैं? मैं समझाता हूँ, मैंने कहा कि 370 से क्या हो रहा है? 370 से इस देश के कानून की रीच वहाँ नहीं पहुँचती । वहाँ के लोगों में अलगाववाद होता है, वहाँ की असेम्बली की मंजूरी के अलावा कोई कानून देश की संसद का वहाँ नहीं पहुँचता है और 371 क्या है? 371 का मूल जो है, महाराष्ट्र और गुजरात, विदर्भ, मराठवाड़ा,सौराष्ट्र और कच्छ के लिए बोर्डों की रचना करना,इसमें क्या आपत्ति है? हम क्यों भला उसको निकाल देंगे? 371ए- नागालैंड के नागाओं की धार्मिक और सामाजिक प्रथाएँ,भूमि और संसाधनों आदि के स्वामित्व के लिए असेम्बली निर्णय करती है । 371बी- असम । राष्ट्रपति उत्तरी कछार, कारबी आंगलोंग और बोडोलैंड टेरिटोरियल जिलों जैसी जनजातीय क्षेत्रों के विधान सभाओं की अन्य समिति के गठन में बाहुल्य देंगे । हम यह क्यों निकालेंगे? यह कहीं पर भी देश की एकता और अखंडता के लिए बाधक नहीं है । 370 का और 371 का कम्पेरिजन करके आप देश की जनता को गुमराह करना चाहते हो, ऐसा नहीं हो पाएगा । देश की जनता सब समझती है 370 और 371 के बीच में अंतर क्या है?
मान्यवर, इसी तरह से मणिपुर,आंध्र प्रदेश,आंध्र प्रदेश का विश्वविद्यालय,सिक्किम, मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश और कर्नाटक,इन सारे राज्यों की कुछ-कुछ बेसिक समस्याओं को सुलझाने के लिए 371 से 371जे तक अलग-अलग अनुच्छेद लाए गए हैं । मैं इतना ही कहना चाहता हूँ कि 370 और 371 का कम्पेरिजन हो नहीं सकता और मैं स्पष्ट करना चाहता हूँ, क्योंकि रिकॉर्ड पर कहा गया है कि 371 भी यह सरकार हटा लेगी तो नॉर्थ ईस्ट के राज्यों का क्या होगा?सिर्फ नॉर्थ ईस्ट नहीं, महाराष्ट्र,कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और नॉर्थ ईस्ट के सारे राज्यों को मैं आश्वस्त करना चाहता हूँ कि नरेन्द्र मोदी सरकार की कोई मंशा 371 को हटाने की नहीं है । वे आश्वस्त रहें, किसी से गुमराह होने की जरूरत नहीं है ।
माननीय अध्यक्ष महोदय, उन्होंने यह कहा कि हमने जो रास्ता लिया है,वह ठीक नहीं है । मैं इतना ही कहना चाहता हूँ कि इसी रास्ते पर आपने दो बार 370 के अंदर यह संशोधन जवाहर लाल जी के समय में और बाद में इंदिरा जी के समय में लिया है, उस वक्त वह रास्ता ठीक था । हम जब समस्या को निर्मूल करने के लिए जा रहे हैं,तब रास्ता ठीक नहीं लगता है । रास्ता तो ठीक है, रास्ता आपके वोट बैंक के आड़े आता है,इसलिए आपको ठीक नहीं लगता है ।
माननीय अध्यक्ष महोदय, बहन सुप्रिया सुले ने काफी सारे सवाल उठाए हैं कि अभी फोन नहीं लग रहे हैं । इतने सारे सुरक्षा बलों को वहाँ पर भेज दिया गया है, इंटरनेट नहीं चल रहा है । मैं उनको याद दिलाना चाहता हूँ कि 1989 से 1995 तक,यह तो कुछ नहीं है, मसूदी साहब यहाँ पर उपस्थित हैं, क्या हुआ था, घाटी के लोग जानते हैं,जम्मू के लोग जानते हैं कि आतंकवाद इतना बढ़ा कि सालों तक कर्फ्यू लगाना पड़ा था । फोन छोड़िए,खाना-पीना,ब्रेड-बटर नहीं मिलता था ।
यह तो हम इसलिए रखे हैं कि कोई अगर गुमराह करके वहाँ की कानून और व्यवस्था की परिस्थिति को बिगाड़ना चाहता है, तो उसे मौका न मिले । बाकी कोई कारण नहीं है,कोई वहाँ ऐसी परिस्थिति नहीं है । प्रीकॉशंस लेने से आप सरकार को कैसे रोक सकते हो? भाषण के टोन तो ऐसे थे कि आपके दबाव में आकर हम सुरक्षा बलों को हटा लें और वहाँ पर कुछ घटनाएं हों । कुछ नहीं होगा, न हम आपके दबाव में आएंगे, न सुरक्षा बल हटेंगे, न वहाँ पर कुछ होगा ।…(व्यवधान) इन्होंने कहा कि इनसे चर्चा नहीं होती है,ऐसा सुप्रिया बहन ने कहा । अध्यक्ष जी की चर्चा नहीं होती । 70 साल तक चर्चा करते-करते थक गए, तीन पीढ़ियाँ आ गईं, मगर चर्चा का अंत नहीं आया,तब जाकर यह करना पड़ा है । कितनी चर्चा करें, किससे चर्चा करें? जो पाकिस्तान से प्रेरणा लेते हैं, उनसे चर्चा करें ।…(व्यवधान) क्या चर्चा करें? …(व्यवधान) हम हुर्रियत के साथ चर्चा नहीं करना चाहते हैं । अब अगर घाटी के लोगों के मन में अगर कोई शंका है,घाटी के लोग हमारे हैं, हम उनको सीने से लगाएंगे, प्यार से रखेंगे,पूरा हिन्दुस्तान उनको प्यार से रखेगा ।
महोदय, अगर उनके मन में कोई आशंका है,तो जरूर चर्चा करेंगे, हमें कोई आपत्ति नहीं है । हमारा चर्चा से कोई इन्कार नहीं है, मगर कुछ फैसले करने पड़ते हैं । जब बहुत सारे ऐसे लोग अंदर आते हैं, जो किसी के कंट्रोल में ही नहीं हैं,एक वेस्टेड इंटरेस्ट लेकर चर्चा के अंदर कूद पड़े होते हैं, तब चर्चा करने का माहौल भी बदलना पड़ता है, वक्त भी बदलना पड़ता है और तरीका भी बदलना पड़ता है । जहाँ तक घाटी के लोगों के लिए चर्चा करने का सवाल है, मैं आप सभी को आश्वस्त करना चाहता हूँ कि घाटी की जनता से जितनी जरूरत पड़ेगी हम उतनी चर्चा उनके हर शक-शुबहा को दूर करने के लिए करेंगे । हम अपने कामों, निर्णयों से भी उनको आश्वस्त करा देंगे कि जम्मू-कश्मीर बाकी सारे राज्यों से हमारे लिए महत्वपूर्ण इसलिए है कि जम्मू-कश्मीर ने दर्द को सहा है । वर्ष 1989 से लेकर वर्ष 2019 तक 41,500 से ज्यादा लोग मारे गए हैं । इसलिए उन्हें सरकार को कोई विशेष कुछ देना भी पड़ा तो हमें कोई आपत्ति नहीं है । प्यार से बात करके उनके विकास के लिए जो करना है, वे 100 कहेंगे तो हम 110 तक जाने के लिए तैयार हैं । मोदी जी का दिल बड़ा है । मोदी जी ने पहली सरकार में भी सवा लाख करोड़ रुपये का पैकेज दिया था, जिसमें से 80 हजार करोड़ रुपया खर्च हो चुका है । मैं आगे बताऊँगा कि क्या-क्या हुआ है?आपने कहा कि आप एक ओर नागा अकॉर्ड करने जा रहे हो और दूसरी ओर धारा 370 हटा रहे हो । मैं स्पष्ट कर दूँ कि नागा अकॉर्ड और धारा 370 के बीच में दूर-दूर तक कोई रिलेशन नहीं है । कोई ऐसा ब्लंडर जो पास्ट में हुआ था, वह हम नहीं करेंगे और इसमें हमें कोई आपत्ति नहीं है । इसमें कोई रिलेशन नहीं है । आप मन में आश्वस्त रहिए ।
दूसरा, आपका एक स्टेटमेंट है कि बेकारी के कारण आतंकवाद बढ़ा । मैं इससे सहमत नहीं हूँ । बेकारी,इकोनॉमी हर राज्य की समस्या है । वहाँ आतंकवाद क्यों नहीं बढ़ा? सिर्फ जम्मू और कश्मीर में ही आतंकवाद क्यों बढ़ा, क्योंकि वहाँ धारा 370 का उपयोग करके पाकिस्तान ने एक अलगाववाद की भावना को खड़ा किया । अलगाववाद की भावना में पाकिस्तान को पेट्रोल डालने का मौका मिला और हमारे युवाओं ने गुमराह होकर हथियार उठा लिए ।
मान्यवर, इसका कोई लेन-देन नहीं है और अगर इकोनॉमी का भी लेन-देन है, तो मैं बाद में बताता हूँ कि धारा 370 इकोनॉमी के लिए भी कैसे बाधक है? यह मैं बाद में बताता हूँ । उन्होंने राइट टू एजुकेशन के बारे में कहा,मैं बाद में इस पर आऊँगा । आंध्र असेंबली के बारे में कहा गया कि हमने इनसे चर्चा की थी, हमने इनसे चर्चा की थी, हमने इनसे चर्चा की थी । मनीष तिवारी जी बार-बार इस बारे में बोले ।
महोदय, मैं इस सदन के माध्यम से आंध्र और तेलंगाना दोनों राज्यों की जनता और अन्य देश की जनता को भी कहना चाहता हूँ कि इन्होंने क्या चर्चा की,एक प्रस्ताव भेजा, जिसे दो तिहाई बहुमत से आंध्र की सरकार ने रिजेक्ट कर दिया, आंध्र की असेंबली ने रिजेक्ट कर दिया । असेंबली और ऊपरी सदन दोनों ने रिजेक्ट कर दिया, मुख्य मंत्री ने इस्तीफा दे दिया, फिर भी आपने आंध्र का विभाजन किया । आपने चर्चा क्या की?…(व्यवधान)क्या चर्चा की?…(व्यवधान)
श्री अधीर रंजन चौधरी: आपकीपार्टी ने क्याकिया था?…(व्यवधान)
श्री अमित शाह: सवाल मेरी पार्टीकी सहमति याअसहमति का नहींहै ।…(व्यवधान)मैं उस विभाजनपर जा ही नहींरहा हूं किवह उचित थाया नहीं था ।मनीष जी नेप्रक्रिया कासवाल उठाया है । आप पहले तथ्योंको पकड़िए । उन्होंनेप्रक्रिया कासवाल उठाया किस्थानीय लोगोंसे चर्चा की । स्थानीय असेम्बलीऔर स्थानीय अपरहाउस की तोमंशा थी किडिवीजन न हो,फिर आपने क्योंकिया, औरआपने किया तोहमें क्यों टोकरहे हैं? आप बताएं जरा,और आपने कैसेकिया था? हम तो बैठ करआमने-सामनेठंडे दिमाग सेआपसे चर्चा कररहे थे । सदनके दरवाजे बंदकर दिए गए ।टिंगाटोली करके,मार्शलों नेसांसदों को उठाकरबाहर फेंक दिया । काला दिन आजनहीं है, बल्कि कालादिन वह था,जिस दिन संसदकी पवित्रताको आपने भंगकिया । मैं अभीभी यह कहताहूं कि आंध्रप्रदेश का डिवीजनकरना चाहिए यानहीं करना चाहिए,मैं उसके पक्षमें नहीं हूं,मैं इस मुद्देपर नहीं हूं,बल्कि मैंइसकी प्रक्रियाका वर्णन कररहा हूं । मनीषजी ने सवालउठाया था, इसलिए मैं इसकोकहता हूं । उन्होंनेकहा कि आपनेरातों-रातएक राज्य कोदो यू.टीज़.में बांट दिया । अब से ये दोयू.टीज़.होंगे । वर्ष1975 में आपनेपूरे देश परइमरजेंसी डालकर आपने यू.टी. बना दियाथा । हमें मतसमझाइए । वर्ष1975 में पूरेदेश को यू.टी. बना दियाथा ।
मान्यवर, मैंयह कहना चाहताहूं कि जहांतक यू.टी. कासवाल है, लद्दाखको यू.टी. बनानालद्दाख वालोंकी डिमांड है, जिसेआपने आज तकपूरा नहीं किया । जहां तक जम्मूऔर कश्मीर कासवाल है, तोवहां की परिस्थितिके नॉर्मल होतेही, उचितसमय पर हम तुरन्तउस पर पुनर्विचारकरेंगे और निर्णयलेंगे ।…(व्यवधान)
श्री अधीर रंजन चौधरी: यह ‘उचितसमय’ कामतलब क्या है?…(व्यवधान)
श्री अमित शाह: मैं बताता हूं । नेहरू जी नेकहा था कि यहटेम्पोरैरी है,उचित समय आएगा,तब हटाएंगे । उसमें 70 साल लगे । हमें70 साल नहींलगेंगे, इतनामैं जरूर कहनाचाहता हूं ।…(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष महोदय, सदन के सीनियर सदस्य श्रीमान् बालू जी ने एक सवाल उठाया कि सम्पत प्रकाश वर्सेज स्टेट ऑफ जम्मू-कश्मीर के जजमेंट के तहत,मैं जो यह बिल और संकल्प लेकर आया हूं, यह अनकांस्टीट्युशनल है । सम्पत प्रकाश वर्सेज स्टेट ऑफ जम्मू-कश्मीर के केस में दलील क्या है? उसके अन्दर दलील यह थी कि आर्टिकल 373 अस्तित्व में ही नहीं रहता है क्योंकि जैसे ही जम्मू और कश्मीर की कंस्टीट्युएन्ट असेम्बली का अस्तित्व समाप्त हो जाता है, आर्टिकल 373 का अस्तित्व समाप्त हो जाता है ।
बालू साहब, यह जजमेंट मेरे पक्ष में है । आप आर्ग्यू कर रहे हैं कि कंस्टीट्युएन्ट असेम्बली है ही नहीं तो कैसे किया? …(व्यवधान)
SHRI T. R. BAALU: I do not want to interfere. You have not understood it properly.
श्री अमित शाह: बालू साहब, मैं बताता हूं । आप कमेन्ट्री पढ़ रहे थे । मेरे पास जजमेंट भी है । मैं ज्यादा समय नहीं लेना चाहता, नहीं तो रिकॉर्ड पर रख दूंगा । उसके पैरा 5 और 6 में सुप्रीम कोर्ट की संविधान खंड पीठ ने कहा कि आर्टिकल 373 समाप्त नहीं हुआ है, आर्टिकल 373 पूर्णतया आज भी हमारे संविधान का हिस्सा है ।
महोदय, मैं आपके माध्यम से सभी माननीय सदस्यों से यह कहना चाहता हूं कि एक दलील यह आई कि आर्टिकल 371B का व्याप इतना नहीं है, एक लिमिटेड उपयोग है । ए.आई.आर., 1961, एस.सी. 1519, यह भी संविधान खंड पीठ है । उसने यह कहा - “There is no reason to limit the word ‘modification’ as used in Article 370(1) only to such modifications as do not make any ‘radical transformation’. Legislature can make any radical transformation.” आप कुछ भी कर सकते हैं,यह भी सुप्रीम कोर्ट ने तय किया है । इसके साथ उन्होंने कहा कि अब वहां का शासन उप राज्यपाल चलाएंगे, उनके सलाहकार चलाएंगे । इसका रिकॉर्ड ठीक रहे, इसलिए मैं सिर्फ आपसे यह कहना चाहता हूं कि वहां हमने असेम्बली का प्रोविजन किया है ।
जम्मू-कश्मीर यू.टी. विद असेम्बली है, वहां विधायक भी होंगे, मुख्य मंत्री भी होंगे,जन-प्रतिनिधि भी होंगे और उनका मंत्रिमंडल भी होगा, जो जम्मू और कश्मीर का शासन करेगा । किसी एडवाइजर के आधार पर इतना बड़ा राज्य चलेगा,इस प्रकार की आपकी दलील के साथ मैं सहमत नहीं हूं । मसूदी साहब ने रेफरेंडम का मुद्दा उठाया । मसूदी साहब, रेफरेंडम तो तभी खत्म हो गया,जब पाकिस्तान ने वर्ष 1965 में भारत की सीमाओं का अतिक्रमण किया । अब यू.एन.के अंदर रेफरेंडम नहीं है और यू.एन. ने भी इस बात को स्वीकार किया है । अभी कहा जा रहा है कि 72 घंटे से कर्फ्यू है । मैं मसूदी साहब से पूछना चाहता हूं कि जब एन.सी. की सरकार थी, कांग्रेस के समय जब टेररिज्म ऊपर की तरफ जा रहा था, तब कितने घंटों का कर्फ्यू होता था? अभी वहां पर कानून और व्यवस्था की स्थिति नहीं बिगड़ी है । यह प्रिकॉशनरी है । यह परिस्थितिजन्य नहीं है । वहां स्थिति बिगड़ी है,इसलिए कर्फ्यू नहीं लगाया गया है, बल्कि स्थिति न बिगड़े, इसके लिए कर्फ्यू लगाया गया है । मसूदी साहब, इन दोनों में बड़ा अंतर होता है । आप हाई कोर्ट में जज रहे हैं । मुझे लगता था कि आप अपना जजमेंट क्वोट करेंगे,मगर आपने नहीं किया, क्योंकि आपको भी मालूम है कि यह जजमेंट खोखला है । मुझे लगता था कि आप क्वोट करेंगे, इसलिए मैं थोड़ा पढ़ाई-लिखाई करके आज आया था । मगर अच्छा ही हुआ कि आपने क्वोट नहीं किया ।
कुट्टी जी ने कहा कि आपका एजेंडा सांप्रदायिक है । मैं इस बात को सिरे से खारिज करना चाहता हूं । धारा 370 कैसे एक सांप्रदायिक एजेंडा हो सकता है! क्या जम्मू-कश्मीर में हिन्दू नहीं रहते हैं,क्या वहां जैन नहीं रहते हैं,बौद्ध नहीं रहते है, सिख नहीं रहते हैं । कैसे यह सांप्रदायिक एजेंडा हो सकता है? कुट्टी साहब, आप किसको एड्रेस कर रहे हैं? आप मुझे जरा समझाइए । जम्मू-कश्मीर के लिए बनाया गया कानून कैसे सांप्रदायिक दिखेगा? क्या वहां पर सिर्फ मुसलमान रहते है?ऐसा कहा जा रहा है कि आप माइनॉरिटी को दबा रहे हैं । वहां माइनॉरिटी जैन भी है और सिख भी हैं । वहां माइनॉरिटी कमीशन को स्वीकार नहीं करके, धारा 370 ने माइनॉरिटीज के साथ अन्याय किया है । आज वहां माइनॉरिटी कमीशन नहीं है और यह धारा 370 के कारण नहीं है । कुट्टी साहब,आप भाषण यहां दे रहे थे, भाषण जम्मू-कश्मीर के लिए दे रहे थे और एड्रेस कहीं और कर रहे थे ।
उन्होनें कहा कि जमीन को बांटना कंसेन्ट के अलावा ठीक नहीं है । मैंने सुबह ही बहुत विस्तार से कहा कि संविधान की किस धारा के तहत हमने यह किया है और यह अधिकार कहां से प्राप्त होता है, उसको सदन के सामने रखा है, इसलिए मैं उसको रिपीट नहीं करना चाहता हूं । शशि थरूर जी ने कहा कि सिक्योरिटी की चिंता हो रही है । थरूर साहब,वर्ष 1989 से लेकर आज तक 41,500 लोग मारे गए हैं । इसी रास्ते पर मारे गए हैं । मैं आप सब को हृदय से पूछना चाहता हूं कि क्या अभी भी उसी रास्ते पर चलना है? 41,500 लोग मारे गए । क्या हम कोई दूसरा रास्ता नहीं सोचेंगे?दूसरे रास्ते से शांति आए, क्या इसका भी प्रयास नहीं करेंगे?क्या घाटी के लोगों की खुशहाली के लिए काम नहीं करेंगे? 70 साल से इसी रास्ते पर चले, जिसका आप आग्रह कर रहे हैं, इसका क्या परिणाम आया? मैं पूछना चाहता हूं । 41,500 से ज्यादा लोग मारे गए, इसके लिए कौन जिम्मेदार है?मैं किसी व्यक्ति का नाम नहीं लेना चाहता हूं । यह रास्ता जिम्मेदार नहीं है । कभी तो हमें अलग हटकर सोचना पड़ेगा । कब तक हम वोट बैंक की राजनीति करते रहेंगे? जिस आइडियोलॉजी को हम स्वीकारते हैं,उसके आधार पर ही हर चीज के बारे में सोचेंगे,हमें देश हित की सोच करनी पड़ेगी,घाटी के युवाओं की सोच करनी पड़ेगी ।
आज लद्दाख क्षेत्र के हमारे एक युवा साथी ने बहुत जोश के साथ सदन में भाषण दिया, मैं उनको भी बधाई देना चाहता हूं । लद्दाख की जनता के सारे ऐतिहासिक तथ्य सदन और देश के सामने रखे हैं । क्या हम इनकी भावनाओं को नहीं सुनेंगे, कब तक अनसुना करेंगे?बहुत लंबे समय तक अनसुना नहीं कर पाएंगे । ओवैसी साहब ने कहा कि सदन ऐतिहासिक भूल करने जा रहा है ।
ओवैसी साहब ने कहा कि सदन ऐतिहासिक भूल करने जा रहा है । ओवैसी साहब, हम ऐतिहासिक भूल करने नहीं जा रहे, ऐतिहासिक भूल को सुधारने जा रहे हैं । इतिहास बताएगा कि भूल धारा 370 को डालना था या भूल धारा 370 को हटाना था । मुझे विश्वास है कि पांच साल के बाद जम्मू-कश्मीर के अंदर प्रधान मंत्री जी के नेतृत्व में जो विकास होने वाला है, उसे देखकर घाटी की जनता भी कहेगी कि धारा 370 का झुनझुना हमें जो पकड़ा दिया, उसने हमारा बहुत अहित किया ।
उन्होंने भी नागा समझौते का रेफरेंस किया । उन्होंने कहा कि मैं आयरन फेस को बनाने के लिए सब एक्सरसाइज कर रहा हूं । मैं लौह पुरुष बनना नहीं चाहता हूं । मेरा अस्तित्व एक छोटे से कार्यकर्ता का है और विनतम्रता के साथ भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता का है । वह मुझे बहुत पसंद है । मेरी पार्टी की परम्परा है, ऐसे फैसले व्यक्तित्व को बढ़ाने के लिए,पार्टी के वोट बैंक के लिए या पार्टी को चुनाव के अंदर फायदा हो, इसलिए नहीं लेते हैं । ऐसे फैसले, देश का भला किसमें है, वह देख कर लिए जाते हैं । ऐसे फैसले, देश की सुरक्षा किसमें है, वह देखकर लिए जाते हैं । ऐसे फैसले, घाटी की जनता की भलाई किसमें है, वह देखकर लिए जाते हैं । मैं सदन को आश्वस्त करना चाहता हूं कि ये सारे फैसले जो आज मैं सदन के सामने लेकर आया हूं, वे घाटी की जनता की भलाई के लिए हैं ।
मान्यवर, आज पूरे दिन धारा 370 और 35 ए पर चर्चा चलती रही,मगर किसी ने यह नहीं बताया कि धारा 370 से फायदा क्या होगा?अगर धारा 370 चालू रखनी है,तो क्यों रखनी है, यह तो बताते!घाटी को भी मालूम पड़ता कि धारा 370 से हमें प्राप्त क्या होगा । मैंने धैर्यपूर्वक एक-एक शब्द सुना है, सबके भाषण सुने हैं । किसी की भी आर्ग्यूमेंट में यह नहीं आया कि धारा 370 कैसे कश्मीर का कल्याण कर सकती है, कैसे घाटी के लोगों का कल्याण कर सकती है, कैसे लद्दाख और जम्मू का कल्याण कर सकती है, क्योंकि कर ही नहीं सकती, तो आर्ग्यूमेंट कैसे आएंगे? मैं इसे हटाने का प्रस्ताव लेकर आया हूं, तो मैं बताता हूं कि धारा 370 जम्मू और कश्मीर के विकास के लिए कैसे बाधक है ।
मान्यवर, धारा 370 जम्मू के लोकतंत्र के लिए बाधक है । जम्मू की गरीबी को बढ़ाने वाली, जम्मू और कश्मीर के पर्यटन को रोकने वाली,जम्मू, कश्मीर और लद्दाख के विकास को रोकने वाली,जम्मू, कश्मीर और लद्दाख के लोगों को आरोग्य की सुविधाओं से दूर रखने वाली,जम्मू, कश्मीर और लद्दाख के लोगों को शिक्षा से दूर रखने वाली है । यह धारा 370 महिला विरोधी है, यह धारा 370 दलित विरोधी है, यह धारा 370 आदिवासी विरोधी है और यह धारा 370 आतंकवाद का खाद और पानी दोनों है, जिससे कश्मीर की भूमि पर आतंकवाद केग्रुप्स बने ।
मान्यवर, धारा 370 से क्या होता है? इस देश के कानून को जम्मू-कश्मीर में जाते हुए धारा 370 रोकती है । सब कानून जो देश की जनता ने पारित किए हैं और देश की भलाई के लिए किए, चाहे वह कांग्रेस की सरकार ने किए हों, बीजेपी की सरकार ने किए हों या कोई अन्य सरकार ने किए हों, संसद जो कानून का प्रसार करती है, वह देश की रिक्वायरमेंट को समझकर, देश की जनता की भलाई को समझकर करती है । क्यों धारा 370 का उपयोग करके जम्मू-कश्मीर के सियासतदानों ने, तीन परिवार के लोगों ने इतने सारे कानून स्वीकार नहीं किए?
यह कोई छोटी सूची नहीं है । 9 संविधान सुधारों के साथ, 106 कानूनों को आज हम जम्मू-कश्मीर के अंदर लागू नहीं कर पाए हैं । वहां उन कानूनों का अख्तियार नहीं है । कानून कैसे हैं? बाल विवाह का कानून है । छोटी बच्ची के साथ कोई शादी नहीं कर सकता,भला यह कैसे जम्मू-कश्मीर का विरोधी कानून है? देश भर के अंदर शादी की उम्र तय हो गई, लेकिन जम्मू-कश्मीर के अंदर नहीं है । कितनी भी छोटी बच्ची हो, उससे आप शादी कर सकते हो । किस जमाने में जम्मू-कश्मीर को डाल रहे हैं?धारा 370 को जो रखना चाहते हैं, उन्हें देश की जनता को आपको जवाब देना पड़ेगा कि बाल विवाह का आप समर्थन कर रहे हैं ।…(व्यवधान)मान्यवर, मेरी बात लंबी है । अभी मुझे बोलने का मौका दिया जाए ।…(व्यवधान)
आप उसे छोड़ो, मैं बाल विवाह की बात कर रहा हूं । …(व्यवधान)मुझे बोलने का मौका चाहिए, मैंने सबकी बात धैर्य से सुनी है ।
महोदय, नेशनल कमीशन फॉर माइनोरिटी,वहां क्यों नहीं पहुंचाना है?वहां सिख रहते हैं, जैन भाई रहते हैं, लद्दाख बौद्ध धर्म मतावल्म्बियों से भरा हुआ है । क्यों माइनोरिटी कमीशन नहीं बनाना? …(व्यवधान) बाल विवाह, नेशनल कमीशन फॉर माइनोरिटी …(व्यवधान) आप जितना टोकोगे,मैं हर बार लिस्ट पढ़ूंगा और देश की जनता सुनेगी । आप मुझे बोलने दें, फास्ट में कुछ निकल जाएगा । …(व्यवधान)मगर अब हम सब ले रहे हैं ।
महोदय, राइट टु एजुकेशन एक्ट में छ: से 14 साल के बच्चों को पढ़ने का अधिकार देश की संसद ने दिया है । देश भर में बच्चों को अधिकार है कि वह राज्य से मांग करे कि 14 साल तक मेरी शिक्षा-दीक्षा की व्यवस्था की जाए । मसूदी साहब बता रहे थे,वहां स्कूल हैं,अच्छा काम कर रहे हैं । मैं बताना चाहता हूं कि पढ़ाई लिखाई हो रही है और मेरा अधिकार पढ़ाई-लिखाई का है, दोनों चीजों में मूलभूत अंतर है । देश के छ: से 14 साल के सभी बच्चों को अधिकार है जबकि जम्मू-कश्मीर के बच्चों को नहीं है । यह धारा 370 ने दिया है । …(व्यवधान) मसूदी साहब,आप बैठ जाएं,कुछ बचाव नहीं कर पाएंगे, कुछ नहीं है,सब खोखला है ।…(व्यवधान)
महोदय, नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन, अब मैं पूछना चाहता हूं, जो धारा 370 को बचाना चाहते हैं, टीचरों को ढंग से बच्चों को कैसे पढ़ाना चाहिए, यह करना चाहिए या नहीं करना चाहिए? इसमें क्या आपत्ति थी? क्यों नहीं स्वीकार किया? धारा 370 के द्वारा रोककर बैठे हैं ।…(व्यवधान)
लैंड एक्विजिशन स्वीकार नहीं किया । मल्टीपल डिसएबिलिटी एक्ट,दिव्यांगों के लिए और बाकी सारी व्यवस्थाओं के लिए कानून बना,लेकिन वहां के लिए स्वीकार नहीं किया । वरिष्ठ नागरिकों के लिए कानून बना, मैन्टेनेंस एंड वैलफेयर ऑफ पेरेंट्स एक्ट बनाया, उसको भी स्वीकार नहीं किया । इसमें क्या बुराई थी?धारा 370 ने क्या किया? क्या कभी डैप्थ में गए हो? जो लोग कटाक्ष लिखते हैं, मैं उनको भी सदन के माध्यम से कहना चाहता हूं कि क्या कभी इसके परिणामों के बारे में विचार किया है कि हमने घाटी और जम्मू-कश्मीर के नागरिकों की क्या गत कर दी है? उनको कितने अधिकारों से वंचित रखा है?
महोदय, मैंने सीनियर सिटिजन एक्ट के बारे में बता दिया । देश भर में डिलिमिटेशन हुआ, जम्मू-कश्मीर में डिलिमिटेशन नहीं होगा चाहे कांस्टीटुएंसी में कितनी भी आबादी बढ़ जाए, एक ही जन प्रतिनिधि मिलेगा,क्यों? देश भर में बढ़ती आबादी के अनुपात में जन प्रतिनिधि मिले,क्षेत्रों का बंटवारा हुआ,जम्मू-कश्मीर में क्यों नहीं हो रहा है क्योंकि मेरा वोट बैंक घट रहा है, लेकिन अब ऐसे नहीं चलेगा । यह कॉलम हटते ही वहां सब धाराएं लागू हो जाएंगी ।
व्हिसल ब्लोअर प्रोटेक्शन एक्ट आया । अगर कहीं भी भ्रष्टाचार होता है और कोई व्यक्ति उसकी सूचना तंत्र को देता है तो उसे प्रोटेक्शन देना चाहिए । कांग्रेस पार्टी बहुत जोर-जोर से इसकी प्रशंसा करती थी ।
मगर वहां नहीं चाहिए, क्योंकि वहां तीन परिवारों का शासन है । भ्रष्टाचार पनपता रहे, हमें कोई आंच नहीं चाहिए । मैं आपके माध्यम से देश की जनता को बताना चाहता हूं कि चिंता 370 की नहीं है, वहां पर एंटी करप्शन ब्यूरो राष्ट्रपति शासन के अंदर शुरू हुआ और कुछ फाइलें खुली हैं, इसकी चिंता है । इसी कारण से 370 के लिए हो-हल्ला हो रहा है । जम्मू-कश्मीर बैंक में जैसे ही एडमिनिस्ट्रेटर आया, चेहरे पर पसीने आने लगे,ठंड में पसीने आने लगे, क्यों भला? हमें कोई चिंता नहीं है । इस देश में हम पक्ष में रहते हैं, विपक्ष में भी रहते हैं । नेशनल कमीशन फॉर सफाई कर्मचारी देशc में सभी जगह है । वहां के वाल्मीकि भाइयों के लिए, सफाई कर्मचारियों के लिए इस कमीशन को स्वीकार नहीं किया,कारण क्या है?कारण एक ही है कि जो चलता है उसे चलने दो, हम धारा 370 के प्रोटेक्शन में है, मगर आज यह प्रोटेक्शन जाने वाला है । सभी सफाई कर्मचारियों को देश के समान न्याय मिलेगा । ट्राइबल्स के लिए रिजर्वेशन, दलितों के लिए रिजर्वेशन, मैं पोलिटिकल रिजर्वेशन की भी बात कर रहा हूं,वहां नहीं मिला । मैं पूछना चाहता हूं कि कांग्रेस पार्टी जो 370 को बचाना चाहती है तो क्या आप दलित और ट्राइबल्स के रिजर्वेशन का विरोध कर रहे हैं? पूरे देश के अंदर दलित और ट्राइबल भाइयों को रिजर्वेशन मिल रहा है, जम्मू-कश्मीर के अंदर क्यों नहीं मिल रहा है?मिलना चाहिए कि नहीं मिलना चाहिए? जो 370 की एडवोकेसी करते हैं, मैं उनसे कहना चाहता हूं कि आप किसके पक्ष में खड़े हैं?
इसी प्रकार अनुसूचति जाति और अनुसूचित जनजाति प्रिवेंशन एक्ट की तरह द शेड्यूल ट्राइब्स एंड अदर ट्रेडिशनल फॉरेस्टर्स एक्ट बना है । जो वन में काम करते हैं, उनके प्रोटेक्शन के लिए भारत सरकार ने एक्ट बनाया है, उनके आरोग्य के लिए, उन्हें उनके श्रम का उचित पारितोषिक मिले,मगर यह एक्ट भी वहां लागू नहीं है । मेरे गुर्जर भाई पहाड़ियों पर घूमते रहते हैं,उनको कोई फायदा नहीं मिलता है । धारा 370 बचाने वाले ये भी कर रहे हैं, इसको याद रखिए, जनता को हिसाब देना पड़ेगा । यहां पर आप मैंडेट के आधार पर बोलते हैं,जब आप जनता के बीच जाएंगे तो जनता आपसे सब हिसाब मांगेगी ।
बहुत सारे सेन्ट्रल एक्ट्स हैं, जिनके माध्यम से जम्मू-कश्मीर के विकास को रोका गया है । जम्मू-कश्मीर के लोगों की भलाई को रोका गया है । सबसे बड़ी बात यह है कि धारा 370 का उपयोग करके जम्मू-कश्मीर के लोकतंत्र का गला घोंटा गया है । 70 सालों तक तीन परिवारों ने जम्मू-कश्मीर पर अपनी पकड़ बनाई । 73 वां और 74 वां संशोधन जम्मू-कश्मीर में क्यों नहीं आया, इसको स्वर्गीय राजीव गांधी जी लेकर आए थे, मगर फिर भी हम नहीं करेंगे क्योंकि वहां हमारी वोट बैंक हर्ट हो रही है ।
आज मैं नरेन्द्र मोदी जी की इच्छाशक्ति को धन्यवाद देना चाहता हूं । राष्ट्रपति शासन आते ही हमने वहां पंचायत चुनाव कराए । कुछ विधायक या सांसद क्या, सिर्फ तीन परिवारों के साथ पावर थी । आज जम्मू-कश्मीर के अंदर 40 हजार पंच, सरपंच अपने गांव के विकास का खाका खुद खींच रहे हैं । आज उनके पास अधिकार हैं और 3500 करोड़ रुपये इन पंच,सरपंचों को आरटीजीएस के माध्यम से डायरेक्ट भेजने का काम नरेंद्र मोदी सरकार ने किया है ।
अध्यक्ष महोदय,बहुत सारी चीजें हैं । मैं बताना चाहता हूं कि किस प्रकार से इनको रोका गया है । गरीबी की बात ले लीजिए इन्होंने अपने-आप को धारा 370 से प्रोटेक्ट कर दिया, जनता को 370 से गुमराह करते रहे, तीन परिवार ही चुनकर आते रहे । …(व्यवधान)
श्री अधीर रंजन चौधरी: वेकौन-सेपरिवार हैं? …(व्यवधान)
श्री अमित शाह: सबसुनना है तोमैं बता देताहूं, बादमें आप मुझेरोकना मत । …(व्यवधान)छोड़िए मैं औचित्य बंद करना नहीं चाहता और बताऊंगा तो आपको तिलमिलाहट हो जाएगी ।…(व्यवधान)
पूरा देश जानता है कि कौन से तीन परिवार हैं, आप नहीं जानते तो कोई बात नहीं । यह सभी जानते हैं या नहीं जानते । सभी जानते हैं कि कौन से तीन परिवार हैं । मान्यवर,जम्मू कश्मीर के अन्दर भ्रष्टाचार हुआ । वहां पूरा पैसा जो जनता के कल्याण के लिए गया, लेकिन वहां पर इतना विकास नहीं हुआ, जितना विकास होना चाहिए था । अभी 370 की एडवोकेसी करने वाले कहेंगे कि डेवलपमेंट हुआ है । मान्यवर,मैं आँकड़े देना चाहता हूं ।
मान्यवर, वर्ष 2004 से 2019 तक दो लाख सत्तर हजार करोड़ रुपये भारत सरकार ने जम्मू कश्मीर को दिए हैं, लेकिन आप जम्मू के गावों में जाकर देखिए कि वहां स्थिति क्या है । गांवों में जाकर देखिए कि कितनी गरीबी है, वह पैसा कहां गया । आर्टिकल 370 का उपयोग करके एक शेल्टर बनाकर अथाह भ्रष्टाचार करने का काम वहां के सियासतदानों ने किया है । मान्यवर,वर्ष 2011-12 में भारत में प्रति व्यक्ति 3,683 रुपये एवरेज भेजा, जिसमें जम्मू कश्मीर भी आ जाता है । अगर एवरेज निकालें तो 3,683 रुपये आते हैं । जम्मू कश्मीर में प्रति व्यक्ति 14,255 करोड़ रुपया भेजे, लेकिन वहां विकास नहीं हुआ । वर्ष 2017-18 में 8,227 करोड़ रुपये भेजे और अब जम्मू कश्मीर में वर्ष 2017-18 में 27,358 करोड़ रुपये भेजे हैं । अब जाकर जब वहां राष्ट्रपति शासन आया है तो उनके नसीब में गैस,बिजली, शौचालय भी आया है । गांव में रोड़ भी बन रही हैं और सरपंच और पंच बैठकर गांवों के विकास का खाका तैयार कर रहे हैं । इसके लिए उनको आर्टिकल 370 नहीं हटाना है, तो मैं इसके साथ सहमत नहीं हो सकता । वे बेटियों की बात करते थे, महिलाओं की बात करते थे । अगर जम्मू कश्मीर की बेटी किसी भारतीय से शादी करती है तो उसके बच्चों को जम्मू कश्मीर का नागरिक बनने का अधिकार नहीं है । क्यों वहां सम्पत्ति लेने का अधिकार नहीं है? उनका क्या गुनाह है?एक ही देश के अन्दर आर्टिकल 370 का उपयोग करके बेटियों की शादी कहां करनी है,क्या आप इसके लिए भी बाध्य करेंगे?यह आप कैसे कर सकते हैं? देश आगे बढ़ चुका है अब ऐसा नहीं चलेगा । अब जम्मू कश्मीर की बेटी कहीं पर भी शादी करे उसके बेटे बेटियों को अधिकार नरेन्द्र मोदी सरकार दे रही है ।
मान्यवर, आतंकवाद को एक अलग फिलोसफी से देखने वाले लोगों ने आतंकवाद की बढ़ोतरी की । सुप्रिया बहन मेरी बात से सहमत नहीं होंगी,उन्होंने एक अलग थ्योरी रखी कि आतंकवाद का मूल गरीबी में है । सुप्रिया जी गरीब देश का वफादार होता है । मान्यवर, मैं आपके माध्यम से यह बताना चाहता हूं कि आतंकवाद जम्मू कश्मीर में क्यों बढ़ा है । जम्मू कश्मीर में धारा 370 का अपप्रचार करके वहां पर अलगाववाद और बाकी सारी चीजों की स्वायत्ता की मांग का जहर हर रोज घोला गया,लोगों को इससे लगा कि हमें इससे बहुत कुछ मिल जाएगा,लेकिन क्या मिला,कोई हिसाब देगा कि जम्मू कश्मीर की जनता को क्या मिला? सिर्फ गरीबी के अलावा कुछ नहीं मिला । किस का भला हुआ?सिर्फ इन तीन परिवारों का भला हुआ और किसी का भला नहीं हुआ इन तीन परिवारों का ही भला हुआ ।
मान्यवर जम्मू कश्मीर की जनता को क्या मिला? परिणाम यह हुआ कि सन् 1988 में जनरल जिया उल हक ने ऑपरेशन टोपेक की शुरुआत की । जरा सुनिए जनता को जवाब देने के काम में आएगा । सन् 1998 में जिया उल हक ने ऑपरेशन टोपेक की शुरूआत की । मान्यवर तीन युद्ध हारने के बाद पाकिस्तान ने सीधे युद्ध न करके परोक्ष रूप से युद्ध लड़ने की शुरुआत की । उन दस्तावेजों के अन्दर धारा 370 और 35 ए का जिक्र है और उनमें जिक्र क्या है कि धारा 370 और 35 ए ऐसी हैं, जिसके कारण अलगाववाद खड़ा हो तो जम्मू कश्मीर का युवा हमारे देश को और जम्मू कश्मीर को अस्थिर कर सकता है । इसका उदाहरण यह है कि पाकिस्तान पूरे देश में पाक प्रेरित आतंकवादी संगठन तो चाहता है, वह चाहता है कि आतंकवाद बढ़े, पनपे,फले-फूले,लेकिन बाकी राज्यों में क्यों नहीं पला बढ़ा ।
वहां अलगाववाद क्यों बढा? इसलिए बढ़ा क्योंकि वहां अलगाववाद का मूल अनुच्छेद 370 के अंदर जनता के बीच आरोपित करने का काम पाकिस्तान ने किया, इसको खाद और पानी देने का काम किया और वर्ष 1988 से आतंकवाद का एक बहुत बडा ताण्डव वहां शुरू हुआ । वर्ष 1989 से लेकर आज तक41 हजार लोग मारे गए हैं । आज भी लड़ाई का अंत नहीं हुआ है । हम स्पष्ट संदेश देना चाहते हैं कि अनुच्छेद370 से जम्मू-कश्मीर का और विशेषकर घाटी के युवाओं का भला नहीं हुआ । आतंकवाद के रास्ते पर जो युवा गए हैं,जिनके मन में अलगाववाद की भावना है, जो लोग अनुच्छेद370 के लिए सोचते हैं कि हमारा कुछ छिन गया है, इस सदन का उपयोग करके, मैं उन सबको विनम्र भाव से कहना चाहता हूं कि आप हिसाब-किताब तो करिए कि आपको अनुच्छेद 370 से क्या मिला?क्या आपको रोटी मिली, शिक्षा मिली, सुख-सुविधा, रोजगार मिला, आरोग्य मिला? क्या मिला आपको अनुच्छेद370 से? क्यों झुनझुना पकड़े हुए हो? अनुच्छेद370 ने हमेशा जम्मू-कश्मीर को भारत के खिलाफ उकसाने का मौका पाकिस्तान को दिया । इसी के कारण आतंकवाद इतना बढ़ा और 41 हजार से ज्यादा लोग मारे गए । इसके लिए कौन जिम्मेदार है? आज हम इसके मूल में जाना चाहते हैं । हमें इसकी चिन्ता नहीं है कि इतिहास कैसे लिखा जाएगा । मुझे मालूम नहीं कि इतिहास कैसे लिखा जाएगा, मैं कोई भविष्यवेत्ता नहीं हूं, कोई ज्योतिषी नहीं हूं, मगर मुझे इतना मालूम है कि अनुच्छेद 370का इतिहास लिखा गया है कि अनुच्छेद370 के कारण जम्मू-कश्मीर के अंदर इतना आतंकवाद फैला है, अनुच्छेद 35ए के कारण इतना आतंकवाद फैला है और 41 हजार से ज्यादा लोग मारे गए हैं । मैं मानता हूं कि अनुच्छेद370 के जाने से हम धीरे-धीरे घाटी के सभी लोगों को अपने नजदीक ला पाएंगे । उनके मन में एक नई आशा,नई उमंग ला पाएंगे और वहां पर विकास होगा ।
मान्यवर, वहां गरीबी कैसे बढ़ी? देश भर में आज़ादी के समय भूमि की जो कीमत थी, उसमें कई गुना, सैकड़ों गुना बढ़ोतरी हुई,लेकिन जम्मू-कश्मीर में ऐसा नहीं हुआ, क्योंकि खरीददारों को आपने लिमिटेड कर दिया । खरीदने वाला भी गरीब, बेचने वाला भी गरीब है,कैसे करेंगे?देश भर में जमीन की कीमत में वृद्धि हुई, लेकिन जम्मू-कश्मीर के अंदर नहीं हुई । जब अनुच्छेद 370 हटेगा,वहां पर इंडस्ट्री जाएगी, वहां पर शिक्षा संस्थाएं जाएंगी, वहां आरोग्य की संस्थाएं जाएंगी, इंडस्ट्री जाएगी तो लोगों को रोजगार मिलेगा । रोजगार मिलेगा तो गरीबी हटेगी और उनकी भूमि की वैल्यू बढ़ेगी । ये कह रहे हैं कि जम्मू-कश्मीर का क्या होगा?सुप्रिया बहन वहां के पर्यावरण और वहां की खूबसूरती की चिन्ता कर रही थी । सुप्रिया बहन, पर्यावरण और खूबसूरती के लिए देश भर में कानून बने हैं और अनुच्छेद 370हटते ही वे सारे कानून वहां इम्पलीमेंट होंगे । उन्हीं कानूनों के तहत वहां का पर्यावरण भी अच्छा रहेगा और खूबसूरती भी अच्छी रहेगी । मैं बताना चाहता हूं कि जम्मू-कश्मीर पृथ्वी का स्वर्ग था, है और रहेगा । हम इसको जरा भी डिस्टर्ब नहीं करेंगे ।
मान्यवर, अनुच्छेद 370 पर कई बार चर्चा हुई, इस सदन में भी हुई । माननीय मंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह जी ने इंटरवीन करते वक्त इसका उल्लेख भी किया है । अनुच्छेद370 पर जब चर्चा हुई, तब मधु लिमये, राम मनोहर लोहिया,इन्दर मल्होत्रा,श्री समनानी,अब्दुल गनी,जो कांग्रेस के संसद सदस्य थे, गोपाल दत्त मैंगी, श्याम लाल सर्राफ, अटल बिहारी वाजपेयी जी ने अपने विचार रखे । वे अटल जी का उल्लेख कर रहे थे, अटल जी पूरा जीवन अनुच्छेद370 के खिलाफ लड़े हैं और अपने जीवन में अनुच्छेद 370 की खिलाफत करते हुए, सत्याग्रह करते हुए, साढ़े चार महीने जेल में भी रहे हैं । जब अटल जी की सरकार बनी, तब भी उन्होंने कहा था कि मेरे पास फ्रैक्चर्ड मैनडेट है, इसलिए मैं अनुच्छेद370 को नहीं हटाऊंगा । आज विधाता की विधि का कमाल देखिए कि अटल जी की ही पार्टी के नरेन्द्र मोदी जी को पूर्ण बहुमत मिला और आज अनुच्छेद 370खत्म हो गया ।
मान्यवर, जो सेकुलरिज्म की बात करते हैं,मैं उनसे पूछना चाहता हूं कि क्या मधु लिमये सेक्युलर नहीं थे? मैं अखिलेश जी से पूछना चाहता हूं कि क्या लोहिया जी सेक्युलर नहीं थे? क्या कहेंगे आप लोहिया जी के लिए, लोहिया जी ने ढाई घण्टे के लम्बे भाषण में इसी सदन में खड़े होकर कहा है कि अनुच्छेद 370भारत और कश्मीर को अलग करने वाला अनुच्छेद है,उसे तत्काल निकाल देना चाहिए, एक क्षण की भी देरी नहीं हो । नेताजी भी बैठै हैं ।…(व्यवधान)
मान्यवर, अब्दुल गनी जी सेक्युलर नहीं थे, इसका धर्मनिरपेक्षता के साथ कोई लेना-देना नहीं था । जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के अंदर सभी धर्मों के बाशिंदे बसते हैं और सभी पर यह लागू होने वाला है,यह किसी एक धर्म विशेष के लिए नहीं है ।
मान्यवर, मैं दूसरा उदाहरण देना चाहता हूं कि पार्टिशन हुआ । पार्टिशन होने के बाद पाकिस्तान से ढेर सारे शरणार्थी यहां आए । वे कच्छ में भी आए, हमारे यहां गुजरात में भी आए, पंजाब में आए, दिल्ली में भी ढेर सारे शरणार्थी बसे,जो पाकिस्तान से आए । मैं दो शरणार्थियों का नाम बोलना चाहता हूं - डॉ. मनमोहन सिंह और इंद्र कुमार गुजराल । दो जम्मू-कश्मीर नहीं गए, पंजाब गए,तो आज वे देश के प्रधान मंत्री बन पाए । जो जम्मू-कश्मीर गए हैं,उनको वोटिंग राइट भी नहीं है ।…(व्यवधान)आडवाणी जी पहले आ गए थे । वे भी आए होते और जम्मू-कश्मीर न गए होते,तो उनको चुनाव लड़ने का अधिकार मिलता ही मिलता । आज ये दो हमारे देश के बड़े नेता,पूर्व प्रधान मंत्री, प्रधान मंत्री बने, क्योंकि वे जम्मू-कश्मीर नहीं गए थे, वे पंजाब गए थे । जम्मू-कश्मीर में जो गए, वे काउंसलर भी नहीं बन पाए,क्योंकि उनको वोट का अधिकार नहीं ।
ह्यूमन राइट्स की बात करने वालों से मैं पूछना चाहता हूं कि इतने साल से, 20 लाख से ज्यादा लोगों को वोट का अधिकार नहीं मिला है, क्या उनके ह्यूमन राइट्स नहीं हैं? ह्यूमन राइट्स की बात करने वालों से मैं पूछना चाहता हूं कि सारा सूफी संप्रदाय जम्मू-कश्मीर से उखाड़ कर फेंक दिया । क्या इस सूफी संप्रदाय के कोई ह्यूमन राइट्स नहीं थे?लाखों-लाख कश्मीरी पंडित अपना घर छोड़ कर निकल गए, क्या उनके ह्यूमन राइट्स नहीं थे? धारा 370 कौन-सी ह्यूमन राइट्स की खैरख्वाह है?
माननीय अध्यक्ष जी, मैं इतना ही कहना चाहता हूं कि जो धारा 370 का समर्थन करते हैं, वे दलित विरोधी हैं, ट्राइबल विरोधी हैं, महिला विरोधी हैं, विकास विरोधी हैं, शिक्षा विरोधी हैं और जो 370 का समर्थन करते हैं, वे आतंकवाद, गरीबी,शोषण और अशिक्षा का समर्थन करते हैं । मैं और मेरे नेता नरेन्द्र मोदी की सरकार इसका समर्थन नहीं कर सकते हैं । मैं सदन को कहना चाहता हूं कि आइए फिर से एक बार सोचें । बहुत चल दिए उस रास्ते पर, वह रास्ता हमारे लिए मुबारक नहीं है । उस रास्ते पर 40 हजार लोग जान गंवा बैठे हैं, 41 हजार लोग जान गंवा बैठे हैं, वह रास्ता छोड़ें । मोदी जी और यह सरकार जो नया रास्ता लेकर आई है, इस रास्ते पर आगे बढ़ें और घाटी, लद्दाख और जम्मू, तीनों की जनता को आज आजादी के बाद जैसे सब प्रदेशों के अंदर विकास हुआ है,सब प्रदेशों के अंदर संपत्ति बढ़ी है, उनको भी वह अधिकार दें और सच्चे अर्थ में भारत के साथ जुड़ने का मौका दें ।
माननीय अध्यक्ष : माननीयश्री अधीर रंजनजी ।
श्री अधीर रंजन चौधरी: सर, यहहमारी पार्टीहै, जब इंस्ट्रूमेंटऑफ एक्सेशन हुआथा, उस समयडिफेंस, एक्सटर्नलअफेयर्स और टेलिकम्यूनिकेशंसछोड़ कर, सभीचीजों पर सूबेकी सरकार काअधिकार था, लेकिनकेन्द्र की सरकारने धीरे-धीरेमान लीजिए कि90फीसदी अधिकारअपने कब्जे मेंले लिया । अगरयह सरकार चाहतीथी, तो बाकीविषय पर कहतीहै कि हमारेलिए यह दिक्कतआती है तो वहअपने कब्जे मेंले सकते थे ।इसके लिए धारा370 का उन्मूलनकरना जरूरीनहीं था ।
दूसरी बात, प्रधानमंत्री जी यहांहैं ।…(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : आपगृह मंत्री जीसे पूछिए ।
…( व्यवधान)
श्री अधीर रंजन चौधरी: प्रधानमंत्री जी हैं, इसलिएमैं एक बातकहना चाहता हूं ।…(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : No. …( व्यवधान)
श्री अधीर रंजन चौधरी: प्रधानमंत्री जी, आपनेलाल किले सेकहा था कि मैंकश्मीरियों कोगोली से नहीं, बल्किगले से लगाऊंगा ।…(व्यवधान) आज कश्मीर में एक कॉन्सेन्ट्रेशन कैम्प हो गया,जहां कोई बाहर नहीं निकल सकता है ।…(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : वहांपर किसी कोगोली नहीं लगीहै । माननीयसदस्य बैठ जाइए ।
माननीय गृहमंत्री जी, आपजवाब देना चाहतेहैं ।
…( व्यवधान)
श्री अधीर रंजन चौधरी: हाउस अरैस्ट कर रहे हैं, यहप्रधान मंत्रीजी छवि को धूमिलकरते हैं । यहमैं जरूर कहूंगा । इसलिए प्रधानमंत्री आप खड़ेहोइए, कुछ बोलिए । हमआपसे सुननाचाहते हैं ।…(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : माननीयगृह मंत्री जीने सारगर्भितजवाब दे दियाहै ।
माननीय सदस्य, मैंनेआपको मौका दियाहै ।
…( व्यवधान)
श्री अधीर रंजन चौधरी: हमजम्मू-कश्मीरके लोगों केहित के लिएसोचते हैं, लेकिनजिस तरह सेधारा 370 काउन्मूलन कियाजा रहा है, हमउसी का विरोधकर रहे हैं ।…(व्यवधान)
श्री अमित शाह : माननीय अध्यक्ष जी, देश की जनता क्या चाहती है, लेह-लद्दाख और जम्मू-कश्मीर की जनता क्या चाहती है, इसकी नब्ज को समझकर ही प्रधान मंत्री जी ने यह फैसला लिया है । यह बिल हम मूव कर रहे हैं और मैं सभी से अपील करता हूं कि इस ऐतिहासिक काम के अंदर सभी आगे बढ़कर साथ दें ।
माननीय अध्यक्ष : प्रश्न यह है :
“कि यह सदन अनुच्छेद 370 (3) के अंतर्गत,भारत के राष्ट्रपति द्वारा जारी की जाने वाली निम्नलिखित अधिसूचना की सिफारिश करता है:
‘भारत के संविधान के अनुच्छेद 370 के खंड (1) के साथ पठित, अनुच्छेद 370 के खंड (3) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, राष्ट्रपति,संसद की सिफारिश पर यह घोषणा करते हैं कि, वह दिनांक जिस दिन भारत के राष्ट्रपति द्वारा,इस घोषणा पर हस्ताक्षर किए जाएंगे, और इसे सरकारी गजट के रूप में प्रकाशित किया जाएगा, उस दिन से उक्त अनुच्छेद 370 के सभी खंड लागू नहीं रहेंगे,सिवाय खंड (1) के, जिसे नामत् निम्नानुसार पढ़ा जाएगा:-
“संविधान के समय-समय पर संशोधित,सभी उपबंध,बिना किसी संशोधन और अपवाद के, जम्मू और कश्मीर राज्य पर लागू होंगे; इस बात के सिवाय, कि अनुच्छेद 152 अथवा अनुच्छेद 308 में निहित,किसी अपवाद,अथवा इस संविधान के किसी अन्य अनुच्छेद,अथवा जम्मू और कश्मीर संविधान के किसी अन्य उपबंध अथवा कोई कानून,दस्तावेज, निर्णय, अध्यादेश,आदेश, उप-नियम, नियम,विनियम, अधिसूचना,रीति-रिवाज अथवा भारत के भू-भाग में कानून के प्रवर्तन,अथवा कोई अन्य लिखित संधि, अथवा समझौता,जैसा अनुच्छेद-363के अंतर्गत परिकल्पित हो अथवा अन्यथा न हो । ” SHRI ASADUDDIN OWAISI: Sir, I want division.
माननीय अध्यक्ष : प्रवेश-कक्ष खाली कर दिए जाएं –
19.00 hrs माननीय अध्यक्ष: प्रवेश-कक्ष खाली हो चुके हैं । सभी माननीय सदस्य अपने-अपने स्थान पर विराजें ।
महासचिव ।
महासचिव: माननीय सदस्यगण, मैं आपका ध्यान ऑटोमैटिक वोट रिकॉर्डिंग सिस्टम के संचालन से संबंधित बिन्दुओं की ओर आकृष्ट करना चाहती हूँ ।
माननीय अध्यक्ष जब ‘अब मतदान’बोलेंगे, तो मैं मतदान बटन को एक्टिवेट करूँगी । उसके साथ-साथ एक गौंग की आवाज सुनाई देगी । मतदान के लिए माननीय सदस्य केवल गौंग की आवाज के पश्चात् ही दोनों बटन एक साथ दबाएँ । इस बात को पुन: दोहराया जाता है कि ‘दोनों बटन एक साथ दबाएँ ।’ माननीय सदस्यों के हेड फोन प्लेट पर एक रेड बटन लगा है और सीट की डेस्क के ऊपर लगे निम्नलिखित बटनों में से हरा बटन हाँ के लिए;लाल रंग नहीं के लिए और पीला रंग मतदान में भाग नहीं लेने के लिए है ।
पहले गौंग से दूसरे गौंग की ध्वनि के बीच में 10 सेंकेड का समय रहता है और जब आपको पहले से दूसरे गौंग की आवाज सुनाई दे, तो उन दोनों गौंग की साउंड के बीच में दोनों बटन दबाकर रखना अनिवार्य है,तभी आपका वोट दर्ज होगा । अगर गौंग की आवाज सुनने के पहले आपने बटन दबा दिया, तो आपका मत दर्ज नहीं होगा । कृपया इसका ध्यान रखें । यदि आपका मत गलत दर्ज हुआ है, तो आप स्लिप से भी वोटिंग कर सकते हैं ।
धन्यवाद ।
माननीय अध्यक्ष : अब मैं श्री अमित शाह द्वारा प्रस्तुत सांविधिक संकल्प को सभा के समक्ष मतदान के लिए रखता हूं ।
“कि यह सदन अनुच्छेद 370 (3) के अंतर्गत,भारत के राष्ट्रपति द्वारा जारी की जाने वाली निम्नलिखित अधिसूचना की सिफारिश करता है:
“भारत के संविधान के अनुच्छेद 370 के खंड (1) के साथ पठित,अनुच्छेद 370 के खंड (3) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, राष्ट्रपति,संसद की सिफारिश पर यह घोषणा करते हैं कि, वह दिनांक जिस दिन भारत के राष्ट्रपति द्वारा,इस घोषणा पर हस्ताक्षर किए जाएंगे, और इसे सरकारी गजट में प्रकाशित किया जाएगा, उस दिन से उक्त अनुच्छेद 370 के सभी खंड लागू नहीं होंगे, सिवाय खंड (1) के, जिसे नामत् निम्नानुसार पढ़ा जाएगा”:-
“संविधान के समय-समय पर संशोधित,सभी उपबंध,बिना किसी संशोधन और अपवाद के, जम्मू और कश्मीर राज्य पर लागू होंगे; इस बात के सिवाय, कि अनुच्छेद 152 अथवा अनुच्छेद 308 में निहित,किसी अपवाद,अथवा इस संविधान के किसी अन्य अनुच्छेद अथवा जम्मू और कश्मीर संविधान के किसी अन्य उपबंध अथवा कोई कानून,दस्तावेज, निर्णय, अध्यादेश,आदेश, उप-नियम, नियम,विनियम, अधिसूचना,रीति-रिवाज अथवा भारत के भू-भाग में कानून के प्रवर्तन,अथवा कोई अन्य लिखित संधि, अथवा समझौता,जैसा अनुच्छेद 363 के अंतर्गत परिकल्पित हो अथवा अन्यथा न हो । ” …( व्यवधान)
कुछ माननीय सदस्य: माननीय अध्यक्ष महोदय, इस पर मतदान कराया जाए ।
माननीय अध्यक्ष: अब मतदान :
DIVISION NO.1 AYES 19.00hrs Agrawal, Shri Rajendra Ahluwalia, Shri S.S Ajgalley, Shri Guharam Amarappa, Shri Karadi Sanganna Ambareesh, Shrimati Sumalatha *Angadi, Shri Suresh C. Ansari, Shri Afzal Anuradha, Shrimati Chinta Azad, Shrimati Sangeeta Bachegowda, Shri B.N. Badal, Shri Sukhbir Singh Badal, Shrimati Harsimrat Kaur Baghel, Prof. S.P. Singh Baghel, Shri Vijay Baheria, Shri Subhash Chandra Balyan, Dr. Sanjeev Bapat, Shri Girish Bhalchandra Barla, Shri John Barne, Shri Shrirang Appa Baruah, Shri Pradan Basavaraj, Shri G. S. Beniwal, Shri Hanuman Bey, Shri Horen Sing Bhabhor, Shri Jashvantsinh Sumanbhai Bhagat, Shri Sudarshan Bhamre, Dr. Subhash Ramrao Bharat, Shri Margani Bhargava, Shri Ramakant Bhatia, Shri Sanjay Bhatt, Adv. Ajay Bhatt, Shrimati Ranjanben *Bholanath ‘B.P. Saroj’, Shri 'Bhole', Shri Devendra Singh Bhoumik, Sushri Pratima Bidhuri, Shri Ramesh Bind, Shri Ramesh Bisen, Dr. Dhal Singh Bista, Shri Raju Bohra, Shri Ramcharan Chahar, Shri Rajkumar Chandel, Kunwar Pushpendra Singh *Chandra Sekhar , Shri Bellana *Chandra, Shri Girish *Chatterjee, Shrimati Locket Chaudhary, Shri P. P. Chaudhary, Shri Pankaj Chaudhary, Shri Pradeep Kumar Chaudhuri, Sushri Debasree Chauhan, Shri Devusinh Chauhan, Shri Nandkumar Singh Chavda, Shri Vinod Lakhamshi Choubey, Shri Ashwini Kumar Choudhary, Shri Bhagirath Choudhary, Shri Chandra Prakash Choudhary, Shri Kailash Chudasama, Shri Rajeshbhai Naranbhai Dabhi, Shri Bharatsinhji Shankarji Damor, Shri Guman Singh Dadarao , Shri Danve Raosaheb *Darbar, Shri Chattar Singh Das, Shri Pallab Lochan Deb, Shri Nitesh Ganga Delkar, Shri Mohanbhai Sanjibhai Deol, Shri Sunny Devarayalu, Shri Lavu Srikrishna *Devendrappa, Shri Y. Devi, Shrimati Annpurna Devi, Shrimati Rama *Devi, Shrimati Veena Dhaduk, Shri Rameshbhai L. Dharmapuri, Shri Arvind Dhotre, Shri Sanjay Shamrao Diler, Shri Rajveer Dubey, Dr. Nishikant *Dubey, Shri Vijay Kumar Duggal, Sushri Sunita Dwivedi, Shri Harish Firojiya, Shri Anil Gaddigoudar, Shri P. C. Gadkari, Shri Nitin Jairam Galla, Shri Jayadev Gambhir, Shri Gautam Gandhi, Shri Feroze Varun Gandhi, Shrimati Maneka Sanjay Gangwar, Shri Santosh Kumar Gao, Shri Tapir Gautam, Shri Satish Kumar Gavit, Dr. Heena Vijaykumar Gavit, Shri Rajendra Dhedya Geetha Viswanath, Shrimati Vanga Ghosh, Shri Dilip Godse, Shri Hemant Tukaram Gogoi, Shri Topon Kumar Gowda, Shri D.V. Sadananda Gupta, Shri Sangamlal Gupta, Shri Sudheer Hans, Shri Hans Raj Hegde, Shri Anantkumar Hemamalini, Shrimati *Hembram, Shri Kunar Irani, Shrimati Smriti Zubin Jadav, Dr. Umesh G Jadhav, Shri Sanjay Jadon, Dr. Chandra Sen Jaiswal, Dr. Sanjay Jardosh, Shrimati Darshana Vikram Jaunapuria, Shri Sukhbir Singh Jigajinagi, Shri Ramesh Chandappa Jolle, Shri Annasaheb Shankar Joshi, Prof. Rita Bahuguna Joshi, Shri C. P. Joshi, Shri Pralhad Jyoti, Sadhvi Niranjan Kachhadiya, Shri Naranbhai Kaiser, Choudhary Mehboob Ali Kapoor, Shri Kishan Karandlaje, Kumari Shobha Kashyap, Shri Dharmendra Kashyap, Shri Suresh Kaswan, Shri Rahul Katara, Shri Kanakmal Kataria, Shri Rattan Lal Kateel, Shri Nalin Kumar Katheria, Dr. Ram Shankar Kaushik, Shri Ramesh Chander Khadse, Shrimati Raksha Nikhil Khan, Shri Saumitra Kher, Shrimati Kirron Khuba, Shri Bhagwanth Kinjarapu, Shri Ram Mohan Naidu Kirtikar, Shri Gajanan Kishan, Shri Ravi Kishore, Shri Kaushal Kol, Shri Pakauri Lal Koli, Shrimati Ranjeeta Kotagiri, Shri Sridhar Kotak, Shri Manoj Kulaste, Shri Faggan Singh Kumar, Dr Virendra *Kumar, Shri Bandi Sanjay Kumar, Shri Narendra Kumar, Shri P. Raveendranath Kumari, Sushri Diya Kundariya, Shri Mohanbhai Kalyanjibhai Kushwaha, Shri Ravindra Lal, Shri Akshaibar Lalrosanga, Shri C. Lalwani, Shri Shankar Lekhi, Shrimati Meenakashi Lokhande, Shri Sadashiv Kisan Maadam, Shrimati Poonamben *Madhav, Shri Kuruva Gorantla Madhavi, Kumari Goddeti Mahajan, Shrimati Poonam Maharaj, Dr. Swami Sakshiji Mahato, Shri Bidyut Baran Mahato, Shri Jyotirmay Singh Mahtab, Shri Bhartruhari Majumdar, Dr. Sukanta Mallah, Shri Kripanath Mandal, Shrimati Manjulata Mandavi , Shri Mohan *Mandlik, Shri Sanjay Sadashivrao Mane, Shri Dhairyasheel Sambhajirao Maurya, Dr. Sanghamitra Meena, Shri Arjunlal Meena, Shrimati Jaskaur Meghwal, Shri Arjun Ram Mendhe, Shri Sunil Baburao Mishra, Shri Janardan Misra, Shri Pinaki Modi, Shri Narendra Mohan, Shri P. C. Mohanty, Shri Anubhav Munda, Shri Arjun Munde, Dr. Pritam Gopinathrao Muniswamy, Shri S. Munjapara , Dr. (Prof.)Mahendra Murmu, Shri Khagen Nagar, Shri Rodmal Naik, Shri Raja Amareshwara Naik, Shri Shripad Yesso Namgyal, Shri Jamyang Tsering Nath, Shri Balak Nete, Shri Ashok Mahadeorao Nimbalkar, Shri Ranjeetsinha Hindurao Naik- Nishad, Shri Ajay Nishad, Shri Praveen Kumar 'Nishank', Dr.Ramesh Pokhriyal Oja, Shrimati Queen Oram, Shri Jual *Pachauri, Shri Satyadev Pal, Shri Jagdambika Pal, Shri Krishan Panda, Shri Basanta Kumar Pandey, Dr. Mahendra Nath *Pandey, Shri Ritesh Pandey, Shri Santosh *Paras, Shri Pashupati Kumar Parkash, Shri Som Paswan, Shri Chhedi Paswan, Shri Chirag Kumar Paswan, Shri Kamlesh Patel(Bakabhai), Shri Mitesh Patel, Dr.K.C. Patel, Shri Devaji Patel, shri Gajendra Umrao Singh Patel, Shri Hasmukhbhai Somabhai Patel, Shri Lalubhai B. Patel, Shri Parbatbhai Savabhai Patel, Shri Prahalad Singh Patel, Shri R.K. Singh Patel, Shrimati Anupriya Patel, Shrimati Keshari Devi Patel, Shrimati Sharda Anil Pathak, Shri Subrat Pathak, Shrimati Riti Patil, Shri B.B. Patil, Shri C. R. Patil, Shri Hemant Patil, Shri Kapil Moreshwar Patil, Shri Sanjay Kaka Patil, Shri Unmesh Bhaiyyasaheb Pawar, Dr. Bharati Pravin Pfoze, Dr. Lorho Pothuganti, Shri Ramulu Prakash, Shri Jai Pramanik, Shri Nisith Prasad, Shri Ravi Shankar Pujari, Shri Suresh Raghavendra, Shri.B.Y. Rai, Shri Nityanand Rajenimbalkar, Shri Om Pavan Rajoria, Dr. Manoj Rajput, Shri Mukesh Raju, Shri Raghu Rama Krishna Ram, Shri Vishnu Dayal Rana, Shrimati Navneet Ravi *Rangaiah, Shri Talari Ranjan, Dr R. K. Rao , Shri Nama Nageswara Rao, Shri Balli Durga Prasad Rao, Shri Soyam Bapu Rathod, Shri Dipsinh Shankarsinh Rathod, Shri Ratansinh Magansinh Rathore, Col. Rajyavardhan Rathva, Shrimati Gitaben V. Raut, Shri Vinayak Bhaurao Rawat, Shri Ashok Kumar Rawat, Shri Tirath Singh Rawat, Shri Upendra Singh Ray, Shrimati Sandhya Reddeppa, Shri N. *Reddy , Shri Manne Srinivas Reddy, Dr. G. Ranjith Reddy, Shri G. Kishan Reddy, Shri Kotha Prabhakar Reddy, Shri Magunta Sreenivasulu Reddy, Shri P.V. Midhun Reddy, Shri Y. S. Avinash Rijiju, Shri Kiren Roy, Dr. Jayanta Kumar Roy, Dr. Rajdeep Rudy , Shri Rajiv Pratap Sagar, Shri Arun Kumar Sahu , Shri Chunni Lal Sahu, Shri Chandra Sekhar Sai, Shrimati Gomati Saikia, Shri Dilip Saini, Shri Nayab Singh Samanta, Prof. Achyutananda Sangma, Kumari Agatha K. Sao, Shri Arun Sarangi, Shri Pratap Chandra Sarangi, Shrimati Aparajita Saraswati, Shri Sumedhanand Sarkar, Dr. Subhas *Sarkar, Shri Jagannath Saruta, Shrimati Renuka Singh *Satyanarayana, Shri M. V. V. Satyavathi, Dr.Beesetti Venkata Sawant, Shri Arvind Seth, Shri Sanjay Shah, Shri Amit Shah, Shrimati Mala Rajya Laxmi Sharma, Dr. Arvind Kumar Sharma, Dr. Mahesh Sharma, Shri Anurag Sharma, Shri Jugal Kishore Sharma, Shri Ram Swaroop Sharma, Shri Vishnu Datt Shejwalkar, Shri Vivek Narayan Shekhawat, Shri Gajendra Singh Shetty, Shri Gopal Shewale, Shri Rahul Ramesh Shinde, Dr. Shrikant Eknath Shrangare, Shri Sudhakar Tukaram Shyal, Dr.Bharatiben D. Siddeshwar , Shri G M Sigriwal, Shri Janardan Singh Simha, Shri Prathap Singari, Dr. Sanjeev Kumar Singh (Raju Bhaiya), Shri Rajveer Singh Deo, Shrimati Sangeeta Kumari Singh (Retd.), Gen. Dr. V.K. Singh, Dr. Jitendra Singh, Dr. Satya Pal Singh, Rao Inderjit *Singh, Shri Arjun Singh, Shri Bhola Singh, Shri Brijbhushan Sharan Singh, Shri Brijendra Singh, Shri Chandan Singh, Shri Dharambir Singh, Shri Dushyant Singh, Shri Ganesh Singh, Shri Giriraj Singh, Shri Kirti Vardhan Singh, Shri Lallu Singh, Shri Pashupati Nath Singh, Shri Pradeep Kumar Singh, Shri R.K. Singh, Shri Radha Mohan Singh, Shri Raj Nath Singh, Shri Rajbahadur Singh, Shri Rakesh Singh, Shri Sunil Kumar Singh, Shri Sushil Kumar Singh, Shri Uday Pratap Singh, Shri Virendra Sinha, Shri Jayant Solanki, Dr. (Prof.) Kirit Premjibhai Solanky, Shri Mahendra Singh Soni, Shri Sunil Kumar Sonkar, Shri Vinod Kumar Soren, Shri Sunil Srinivas, Shri Kesineni Subba, Shri Indra Hang Supriyo, Shri Babul Suresh, Shri Nandigam Surya, Shri Tejasvi Swamiji, Dr. Jai Sidheshwar Shivacharya Swamy, Shri A Narayana Tadas, Shri Ramdas Tamta, Shri Ajay Teli, Shri Rameswar 'Teni', Shri Ajay Misra Thakur , Shri Gopal Jee Thakur, Sadhvi Pragya Singh Thakur, Shri Anurag Singh Thakur, Shri Shantanu Tiwari, Shri Manoj Tomar, Shri Narendra Singh Tripathi, Dr. Ramapati Ram Tripura, Shri Rebati Tudu, Er. Bishweswar Tumane, Shri Krupal Balaji Udasi, Shri S. C. Uikey, Shri Durga Das Vallabhaneni, Shri Balashowry Vardhan, Dr. Harsh Vasava , Shri Mansukhbhai Dhanjibhai Vasava, Shri Parbhubhai Nagarbhai Verma, Shri Bhanu Pratap Singh Verma, Shri Parvesh Sahib Singh Verma, Shri Rajesh *Verma, Shri Ram Shiromani Verma, Shrimati Rekha Arun Vichare, Shri Rajan Baburao Vikhe Patil, Dr. Sujay Yadav, Shri Ashok Kumar Yadav , Shri Krishna Pal Singh Yadav, Shri Ram Kripal *Yadav, Shri Shyam Singh NOES Antony, Shri Anto Ariff, Adv. A. M. Aujla, Shri Gurjeet Singh Baalu, Shri T.R. Baij, Shri Deepak Basheer, Shri E. T. Mohammed Behanan, Shri Benny Chaudhary, Shri Santokh Singh Chazhikadan, Shri Thomas Chellakumar, Dr.A. Chidambaram, Shri Karti P Chowdhury, Shri Abu Hasem Khan Chowdhury, Shri Adhir Ranjan Eden, Shri Hibi Gandhi, Shri Rahul Gandhi, Shrimati Sonia Ganeshamurthi, Shri A Gill, Shri Jasbir Singh Gnanathiraviam, Shri S. Gogoi, Shri Gaurav Haridas, Kumari Ramya Jagathrakshakan, Shri S. Jaleel, Shri Syed Imtiaz Jawed, Dr. Mohammad Jayakumar, Dr. K. Jothimani, Sushri S Kanimozhi, Shrimati Kaur, Shrimati Preneet Khaleque, Shri Abdul Kunhalikutty, Shri P.K. Kuriakose, Adv. Dean Lone, Shri Akbar Mahant, Shrimati Jyotsna Charandas Manickam Tagore, Shri B. Masoodi , Shri Hasnain Muraleedharan , Shri K. Natarajan, Shri P.R *Nath, Shri Nakul K. Navaskani , Shri K. Owaisi, Shri Asaduddin Pala, Shri Vincent H. Palanimanickam, Shri S.S. Parthiban, Shri S.R. Pon Shri Sautham Sigamani Prakash, Adv. Adoor Prathapan, Shri T. N. Premachandran, Shri N.K. Raghavan, Shri M.K. Raja, Shri A. Ramalingam, Shri S. Ravikumar, Dr. D. Reddy, Shri Anumula Revanth Reddy, Shri Komati Reddy Venkat Reddy, Shri Uttam Kumar Sardinha , Shri Francisco Selvam, Shri G. Selvaraj Shri M. Senthilkumar S. , Shri DNV. Shanmuga Sundaram, Shri K. Sharma, Shri Kuldeep Rai Singh, Dr. Amar Singh, Shri Ravneet Sreekandan, Shri V. K. Sudhakaran , Shri K. Suresh, Shri Kodikunnil Tewari, Shri Manish Thangapandian, Dr. T. Sumathy (A)Thamizhachi Tharoor, Dr. Shashi Thirumaavalavan, Dr. Thol Thirunavukkarasar. Shri Su. Ulaka, Shri Saptagiri Sankar Unnithan, Shri Rajmohan Vasanthakumar, Shri H. Veeraswamy, Dr. Kalanidhi Velusamy, Shri P. Venkatesan, Shri S. Vishnu Prasad, Dr. M. K. Yadav, Shri Mulayam Singh ABSTAIN Sarania, Shri Naba Kumar माननीय अध्यक्ष : शुद्धि के अध्यधीन,* मत-विभाजन का परिणाम यह है: हाँ : 351 नहीं : 72 अनुपस्थित: 01 प्रस्ताव स्वीकृत हुआ । माननीय अध्यक्ष : प्रश्नयह है :
“कि वर्तमान जम्मू और कश्मीर राज्य का पुनर्गठन करने तथा उससे संबंधित या उसके आनुषंगिक विषयों का उपबंध करने वाले विधेयक,राज्य सभा द्वारा यथापारित, पर विचार किया जाए ।” SHRI ASADUDDIN OWAISI: Sir, I want division.
लोक सभा में मत -विभाजन हुआ:
माननीय अध्यक्ष : माननीयसदस्यगण, प्लीज़, बैठजाइए ।
…( व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : माननीयसदस्यगण, मुझेलगता है किमशीन का उपयोगठीक तरीके सेनहीं हो पायाहै । अत: मैंपुन: मतदानका निर्णय देताहूं ।
…( व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : माननीय सदस्यगण, आप आपस में चर्चा न करें । मैं सभी को व्यवस्था दे रहा हूं कि आप सब अपने-अपने बटनों से हाथ हटा लें । मैं इस विधेयक को दोबारा पढ़ूंगा,उसके बाद सेक्रेट्री जनरल आपसे मतदान के लिए कहेंगी । तब, आप मतदान के लिए बटन को दबाइएगा ।
प्रश्न यहहै :
“कि वर्तमान जम्मू और कश्मीर राज्य का पुनर्गठन करने तथा उससे संबंधित या उसके आनुषंगिक विषयों का उपबंध करने वाले विधेयक,राज्य सभा द्वारा यथापारित, पर विचार किया जाए ।” SHRI ASADUDDIN OWAISI: Sir, I want division.
महासचिव : अब मैं मतदान की प्रक्रिया प्रारंभ करूंगी । आप सब ध्यान से गौंग की आवाज़ सुन लें, उसके बाद ही दोनों बटन दबाएं ।
लोक सभा में मत -विभाजन हुआ:
DIVISION NO.2 AYES 19.06hrs Agrawal, Shri Rajendra Ahluwalia, Shri S.S Ajgalley, Shri Guharam Ali, Kunwar Danish Amarappa, Shri Karadi Sanganna Ambareesh, Shrimati Sumalatha Angadi, Shri Suresh C. Ansari, Shri Afzal Anuradha, Shrimati Chinta Azad, Shrimati Sangeeta Bache Gowda, Shri B.N. Badal, Shri Sukhbir Singh Badal, Shrimati Harsimrat Kaur Baghel, Prof. S.P. Singh Baghel, Shri Vijay Baheria, Shri Subhash Chandra Balyan, Dr. Sanjeev Bapat, Shri Girish Bhalchandra Barla, Shri John Barne, Shri Shrirang Appa Baruah, Shri Pradan Basavaraj, Shri G. S. Beniwal, Shri Hanuman Bey, Shri Horen Sing Bhabhor, Shri Jaswantsinh Sumanbhai Bhagat, Shri Sudarshan Bhamre, Dr. Subhash Ramrao Bharat, Shri Margani Bhargava, Shri Ramakant Bhatia, Shri Sanjay Bhatt, Adv. Ajay Bhatt, Shrimati Ranjanben Bholanath ‘B.P. Saroj’, Shri ‘Bhole’, Shri Devendra Singh Bhoumik, Sushri Pratima Bidhuri, Shri Ramesh Bind, Shri Ramesh Bisen, Dr. Dhal Singh Bista, Shri Raju Bohra, Shri Ramcharan Chahar, Shri Rajkumar Chandel, Kunwar Pushpendra Singh *Chandra Sekhar , Shri Bellana *Chandra, Shri Girish Chatterjee, Shrimati Locket Chaudhary, Shri P. P. Chaudhary, Shri Pankaj Choudhary, Shri Pradeep Kumar Chaudhuri, Sushri Debasree Chauhan, Shri Devusinh Chauhan, Shri Nand Kumar Singh Chavda, Shri Vinod Lakhamshi Choubey, Shri Ashwini Kumar Choudhary, Shri Bhagirath Choudhary, Shri Chandra Prakash Choudhary, Shri Kailash Chudasama, Shri Rajesh Naranbhai Dabhi, Shri Bharatsinhji Shankarji Dadarao, Shri Danve Raosaheb *Damor, Shri Guman Singh Darbar, Shri Chattar Singh Das, Shri Pallab Lochan Deb, Shri Nitesh Ganga Delkar, Shri Mohanbhai Sanjibhai Deol, Shri Sunny Devarayalu, Shri Lavu Srikrishna Devendrappa, Shri Y. Devi, Shrimati Annpurna Devi, Shrimati Rama Devi, Shrimati Veena Dhaduk, Shri Rameshbhai L. Dharmapuri, Shri Arvind Dhotre, Shri Sanjay Shamrao Diler, Shri Rajveer Dubey, Dr. Nishikant Dubey, Shri Vijay Kumar Duggal, Sushri Sunita Dwivedi, Shri Harish Firojiya, Shri Anil Gaddigoudar, Shri P. C. Gadkari, Shri Nitin Jairam Galla, Shri Jayadev Gambhir, Shri Gautam Gandhi, Shri Feroze Varun Gandhi, Shrimati Maneka Sanjay Gangwar, Shri Santosh Kumar Gao, Shri Tapir Gautam, Shri Satish Kumar Gavit, Dr. Heena Vijaykumar Gavit, Shri Rajendra Dhedya ‘Geetha Viswanath’, Shrimati Vanga *Ghosh, Shri Dilip Godse, Shri Hemant Tukaram Gogoi, Shri Topon Kumar Gowda, Shri D.V. Sadananda Gupta, Shri Sangam Lal Gupta, Shri Sudheer Hans, Shri Hans Raj Hegde, Shri Anantkumar Hemamalini, Shrimati Hembram, Shri Kunar Irani, Shrimati Smriti Zubin *Jadav, Dr. Umesh G. Jadhav, Shri Sanjay Jadon, Dr. Chandra Sen Jaiswal, Dr. Sanjay Jardosh, Shrimati Darshana Vikram *Jaunapuria, Shri Sukhbir Singh Jigajinagi, Shri Ramesh Chandappa Jolle, Shri Annasaheb Shankar Joshi, Prof. Rita Bahuguna Joshi, Shri C.P. Joshi, Shri Pralhad Jyoti, Sadhvi Niranjan Kachhadiya, Shri Naranbhai Kaiser, Choudhary Mehboob Ali *Kapoor, Shri Kishan Karandlaje, Kumari Shobha Kashyap, Shri Dharmendra Kashyap, Shri Suresh Kaswan, Shri Rahul Katara, Shri Kanakmal Kataria, Shri Rattan Lal Kateel, Shri Nalin Kumar Katheria, Dr. Ram Shankar Kaushik, Shri Ramesh Chander Khadse, Shrimati Raksha Nikhil Khan, Shri Saumitra Kher, Shrimati Kirron Khuba, Shri Bhagwanth Kinjarapu, Shri Ram Mohan Naidu Kirtikar, Shri Gajanan Kishan, Shri Ravi Kishore, Shri Kaushal Kol, Shri Pakauri Lal Koli, Shrimati Ranjeeta Kotagiri, Shri Sridhar Kotak, Shri Manoj Kulaste, Shri Faggan Singh Kumar, Dr. Virendra Kumar, Shri Bandi Sanjay Kumar, Shri Narendra Kumar, Shri P. Raveendranath Kumari, Sushri Diya Kundariya, Shri Mohanbhai Kushwaha, Shri Ravindra Lal, Shri Akshaibar Lalrosanga, Shri C. Lalwani, Shri Shankar Lekhi, Shrimati Meenakashi Lokhande, Shri Sadashiv Kisan Maadam, Shrimati Poonamben Madhav, Shri Kuruva Gorantla Mahajan, Shrimati Poonam Maharaj, Dr. Swami Sakshi ji Mahato, Shri Bidyut Baran Mahato, Shri Jyotirmay Singh Mahtab, Shri Bhartruhari Majhi, Shri Ramesh Chandra Majumdar, Dr. Sukanta Mallah, Shri Kripanath Mandal, Shrimati Manjulata Mandavi , Shri Mohan Mandlik, Shri Sanjay Sadashivrao Mane, Shri Dhairyasheel Sambhajirao Maurya, Dr. Sanghamitra Meena, Shri Arjunlal Meena, Shrimati Jaskaur Meghwal, Shri Arjun Ram Mendhe, Shri Sunil Baburao Mishra, Shri Janardan Misra, Shri Pinaki Modi, Shri Narendra Mohan, Shri P. C. Mohanty, Shri Anubhav Munda, Shri Arjun Munde, Dr. Pritam Gopinathrao *Muniswamy, Shri S. Munjapara, Dr.(Prof.) Mahendra Murmu, Shri Khagen *Nagar, Shri Malook Nagar, Shri Rodmal Naik, Shri Raja Amareshwara Naik, Shri Shripad Yesso Namgyal, Shri Jamyang Tsering Nath, Shri Balak Nete, Shri Ashok Mahadeorao Nimbalkar, Shri Ranjeetsinha Hindurao Naik Nishad, Shri Ajay Nishad, Shri Praveen Kumar Nishank, Dr. Ramesh Pokhriyal Oja, Shrimati Queen Oram, Shri Jual Pachauri, Shri Satyadev Pal, Shri Jagdambika Pal, Shri Krishan *Panda, Shri Basanta Kumar Pandey, Dr. Mahendra Nath Pandey, Shri Ritesh Pandey, Shri Santosh Paras, Shri Pashupati Kumar Parkash, Shri Som Paswan, Shri Chhedi Paswan, Shri Chirag Kumar Paswan, Shri Kamlesh Patel (Bakabhai), Shri Mitesh Patel, Dr. K.C. Patel, Shri Devaji Mansingram Patel, Shri Gajendra Umrao Singh Patel, Shri Hasmukhbhai Somabhai Patel, Shri Lalubhai B. Patel, Shri Parbatbhai Savabhai Patel, Shri Prahalad Singh Patel, Shri R.K. Singh Patel, Shrimati Anupriya Patel, Shrimati Keshari Devi Patel, Shrimati Sharda Anil Pathak, Shri Subrata Pathak, Shrimati Riti Patil, Shri B.B. Patil, Shri C. R. Patil, Shri Hemant Patil, Shri Kapil Moreshwar Patil, Shri Sanjay Kaka Patil, Shri Unmesh Bhaiyyasaheb Pawar, Dr. Bharati Pravin Pfoze, Dr. Lorho Pothuganti, Shri Ramulu Prakash, Shri Jai Pramanik, Shri Nisith Prasad, Shri Ravi Shankar Pujari, Shri Suresh Raghavendra, Shri.B.Y. Rai, Shri Nityanand Rajenimbalkar, Shri Om Pavan Rajoria, Dr. Manoj Rajput, Shri Mukesh Raju, Shri Raghu Rama Krishna Ram, Shri Vishnu Dayal Rana, Shrimati Navneet Ravi *Rangaiah, Shri Talari Ranjan Dr. R.K. Rao , Shri Nama Nageswara Rao, Shri Balli Durga Prasad Rao, Shri Soyam Bapu Rathod , Shri Dipsinh Sankarsinh Rathod, Shri Ratansinh Magansinh Rathore, Col. Rajyavardhan Rathva, Shrimati Gitaben V. Raut, Shri Vinayak Bhaurao Rawat, Shri Ashok Kumar Rawat, Shri Tirath Singh Rawat, Shri Upendra Singh Ray, Shrimati Sandhya Reddeppa, Shri N. Reddy , Shri Manne Srinivas Reddy, Dr. G. Ranjith *Reddy, Shri Adala Prabhakara Reddy, Shri G. Kishan Reddy, Shri Kotha Prabhakar Reddy, Shri Magunta Sreenivasulu Reddy, Shri P.V. Midhun Reddy, Shri Y. S. Avinash Rijiju, Shri Kiren Roy, Dr. Jayanta Kumar Roy, Dr. Rajdeep Rudy , Shri Rajiv Pratap Sagar, Shri Arun Kumar Sahoo, Shri Mahesh Sahu , Shri Chunni Lal Sahu, Shri Chandra Sekhar Sai, Shrimati Gomati Saikia, Shri Dilip Saini, Shri Nayab Singh Samanta, Prof. Achyutananda Sangma, Kumari Agatha K. Sao, Shri Arun Sarangi, Shri Pratap Chandra Sarangi, Shrimati Aparajita Saraswati, Shri Sumedhanand Sarkar, Dr. Subhas Sarkar, Shri Jagannath Saruta, Shrimati Renuka Singh Satyanarayana, Shri M. V. V. Satyavathi, Dr.Beesetti Venkata Sawant, Shri Arvind Seth, Shri Sanjay Shah, Shri Amit Shah, Shrimati Mala Rajya Laxmi Sharma, Dr. Arvind Kumar Sharma, Dr. Mahesh Sharma, Shri Anurag Sharma, Shri Jugal Kishore Sharma, Shri Ram Swaroop Sharma, Shri Vishnu Dutt Shejwalkar, Shri Vivek Narayan Shekhawat, Shri Gajendra Singh Shetty, Shri Gopal Shewale, Shri Rahul Ramesh Shinde, Dr. Shrikant Eknath Shrangare, Shri Sudhakar Tukaram Shyal, Dr. Bharatiben Siddeshwar , Shri G. M. Sigriwal, Shri Janardan Singh Simha, Shri Prathap Singari, Dr. Sanjeev Kumar Singh (Raju Bhaiya), Shri Rajveer Singh Deo, Shrimati Sangeeta Kumari Singh (Retd.), Gen. Dr V. K . Singh, Dr. Jitendra Singh, Dr. Satya Pal Singh, Rao Inderjit Singh, Shri Arjun Singh, Shri Bhola Singh, Shri Brijbhushan Sharan Singh, Shri Brijendra Singh, Shri Chandan Singh, Shri Dharambir Singh, Shri Dushyant Singh, Shri Ganesh Singh, Shri Giriraj Singh, Shri Kirti Vardhan Singh, Shri Lallu Singh, Shri Pashupati Nath Singh, Shri Pradeep Kumar Singh, Shri R.K. Singh, Shri Radha Mohan Singh, Shri Raj Nath Singh, Shri Rajbahadur Singh, Shri Rakesh Singh, Shri Sunil Kumar Singh, Shri Sushil Kumar Singh, Shri Uday Pratap Singh, Shri Virendra Sinha, Shri Jayant Solanki, Dr. (Prof.) Kirit Premjibhai Solanky, Shri Mahendra Singh Soni, Shri Sunil Kumar Sonkar, Shri Vinod Kumar Soren, Shri Sunil Srinivas, Shri Kesineni Subba, Shri Indra Hang Supriyo, Shri Babul Suresh, Shri Nandigam Surya, Shri Tejasvi Swamiji, Dr. Jai Sidheshwar Shivacharya Swamy, Shri A. Narayana Tadas, Shri Ramdas Tamta, Shri Ajay Teli, Shri Rameswar Teni, Shri Ajay Misra Thakur , Shri Gopal Jee Thakur, Sadhvi Pragya Singh Thakur, Shri Anurag Singh Thakur, Shri Shantanu Tiwari, Shri Manoj Tomar, Shri Narendra Singh Tripathi, Dr. Ramapati Ram Tripura, Shri Rebati Tudu, Er. Bishweswar Tumane, Shri Krupal Balaji Udasi, Shri S.C. Uikey, Shri Durga Das Vallabhaneni, Shri Balashowry Vardhan, Dr. Harsh Vasava , Shri Mansukhbhai Dhanjibhai Vasava, Shri Parbhubhai Nagarbhai Verma, Shri Bhanu Pratap Singh Verma, Shri Parvesh Sahib Singh Verma, Shri Rajesh Verma, Shri Ram Shiromani Verma, Shrimati Rekha Arun Vichare, Shri Rajan Baburao Vikhe Patil, Dr. Sujay Yadav, Shri Ashok Kumar Yadav, Shri Krishna Pal Singh Yadav, Shri Ram Kripal *Yadav, Shri Shyam Singh NOES Antony, Shri Anto *Ariff, Adv. A. M. Aujla, Shri Gurjeet Singh Baalu, Shri T.R. Baij, Shri Deepak Basheer, Shri E. T. Mohammed *Behanan, Shri Benny Chaudhary, Shri Santokh Singh Chazhikadan, Shri Thomas Chellakumar, Dr. A. Chidambaram, Shri Karti P. Chowdhury, Shri Abu Hasem Khan Chowdhury, Shri Adhir Ranjan Eden, Shri Hibi Gandhi, Shri Rahul Gandhi, Shrimati Sonia Ganeshamurthi, Shri A. Gill, Shri Jasbir Singh Gnanathiraviam, Shri S. *Gogoi, Shri Gaurav Haridas, Kumari Ramya Jagathrakshakan, Shri S. Jaleel, Shri Syed Imtiaz Jawed, Dr. Mohammad Jayakumar, Dr. K. Jothimani, Sushri S. Kanimozhi, Shrimati Kaur, Shrimati Preneet Khaleque, Shri Abdul Kunhalikutty, Shri P.K. Kuriakose, Adv. Dean Lone, Shri Akbar Mahant, Shrimati Jyotsna Charandas *Manickam Tagore, Shri B. Masoodi , Shri Hasnain Muraleedharan, Shri K. Natarajan, Shri P.R. *Nath, Shri Nakul K. Navaskani , Shri K. Owaisi, Shri Asaduddin Pala, Shri Vincent H. Palanimanickam, Shri S.S Parthiban, Shri S.R. Pon, Shri Gautham Sigamani Prakash, Adv. Adoor Prathapan, Shri T. N. Premachandran, Shri N.K. Raghavan, Shri M.K. Raja, Shri A. *Ramalingam, Shri S. £Ravikumar, Dr. D. Reddy, Shri Anumula Revanth Reddy, Shri Komati Reddy Venkat Reddy, Shri Uttam Kumar Sardinha , Shri Francisco Selvam, Shri Ganesan Selvaraj, Shri M. Senthilkumar S. , Shri DNV Shanmuga Sundaram, Shri K. Sharma, Shri Kuldeep Rai *Singh, Dr. Amar Singh, Shri Ravneet Sreekandan, Shri V. K. Sudhakaran , Shri K. Suresh, Shri Kodikunnil Tewari, Shri Manish *Thangapandian, Dr. T. Sumathy (A)Thamizhachi Tharoor, Dr. Shashi Thirumaavalavan, Dr. Thol Thirunavukkarasar, Shri Su. Ulaka, Shri Saptagiri Sankar Unnithan, Shri Rajmohan Vasanthakumar, Shri H. Veeraswamy, Dr. Kalanidhi Velusamy, Shri P. *Venkatesan, Shri S. Vishnu Prasad, Dr. M. K. *Yadav, Shri Mulayam Singh ABSTAIN Nil माननीय अध्यक्ष : शुद्धिके अध्यधीन,* मत-विभाजनका परिणाम यहहै: हां : 366 नहीं : 66 अनुपस्थित : 01 प्रस्ताव स्वीकृत हुआ । माननीय अध्यक्ष : अब सभा विधेयक पर खंडवार विचार करेगी ।
माननीय सदस्यगण,चूंकि श्री सौगत राय जी ने इस विधेयक पर संशोधन की सूचना दी है, वह अपने संशोधनों को प्रस्तुत करने के लिए सदन में उपस्थित नहीं हैं, इसलिए मैं खण्ड 2 से 103 को एक साथ सभा के निर्णय के लिए रखूंगा ।
खंड 2 से 103 माननीय अध्यक्ष: प्रश्न यह है :
“कि खंड 2 से 103 विधेयक का अंग बनें ।” प्रस्ताव स्वीकृत हुआ ।
खंड 2 से 103 विधेयक में जोड़ दिए गए ।
पहली से पांचवीं अनुसूची विधेयक में जोड़ दी गईं ।
खण्ड 1, अधिनियमन सूत्र और नाम विधेयक में जोड़ दिए गए ।
माननीय अध्यक्ष: माननीय मंत्री जी अब प्रस्ताव करें कि राज्य सभा द्वारा यथापारित विधेयक को पारित किया जाए ।
श्री अमित शाह: मैं प्रस्ताव करता हूं:
“कि विधेयक, राज्य सभा द्वारा यथापारित,पारित किया जाए ।” माननीय अध्यक्ष: प्रश्न यह है:
“कि विधेयक, राज्य सभा द्वारा यथापारित,पारित किया जाए ।” …(व्यवधान)
SHRI K. MURALEEDHARAN (VADAKARA): Sir, I want division. …(Interruptions)
19.13 hrs At this stage, Shri T. R. Baalu and some other hon. Members left the House.
“कि विधेयक, राज्य सभा द्वारा यथापारित,पारित किया जाए ।” लोक सभा में मतविभाजन हुआ :
DIVISION NO.3 AYES 19.11hrs Agrawal, Shri Rajendra Ahluwalia, Shri S.S Ajgalley, Shri Guharam Ali, Kunwar Danish Amarappa, Shri Karadi Sanganna Ambareesh, Shrimati Sumalatha Angadi, Shri Suresh C. Ansari, Shri Afzal Anuradha, Shrimati Chinta Azad, Shrimati Sangeeta Bachegowda, Shri B.N. Badal, Shri Sukhbir Singh Badal, Shrimati Harsimrat Kaur Baghel, Prof. S.P. Singh Baghel, Shri Vijay Baheria, Shri Subhash Chandra Balyan, Dr. Sanjeev Bapat, Shri Girish Bhalchandra Barla, Shri John Barne, Shri Shrirang Appa Baruah, Shri Pradan Basavaraj, Shri G. S. Beniwal, Shri Hanuman Bey, Shri Horen Sing Bhabhor, Shri Jashvantsinh Sumanbhai Bhagat, Shri Sudarshan Bhamre, Dr. Subhash Ramrao Bharat, Shri Margani Bhargava, Shri Ramakant Bhatia, Shri Sanjay Bhatt, Adv. Ajay Bhatt, Shrimati Ranjanben Bholanath ‘B.P. Saroj’, Shri 'Bhole', Shri Devendra Singh Bhoumik, Sushri Pratima Bidhuri, Shri Ramesh Bind Shri Ramesh Bisen, Dr Dhal Singh Bista, Shri Raju Bohra, Shri Ramcharan Chahar, Shri Rajkumar Chandel, Kunwar Pushpendra Singh *Chandra Shekhar, Shri Bellana Chandra, Shri Girish Chatterjee, Shrimati Locket Chaudhary, Shri P. P. Chaudhary, Shri Pankaj Choudhary, Shri Pradeep Kumar Chaudhuri, Sushri Debasree Chauhan, Shri Devusinh Chauhan, Shri Nandkumar Singh Chavda, Shri Vinod Lakhamshi Choubey, Shri Ashwini Kumar Choudhary, Shri Bhagirath Choudhary, Shri Chandra Prakash Choudhary, Shri Kailash Chudasama, Shri Rajesh Naranbhai *Dabhi, Shri Bharatsinhji Shankarji Dadarao, Shri Danve Raosaheb Damor, Shri Guman Singh Darbar, Shri Chattar Singh Das, Shri Pallab Lochan Deb, Shri Nitesh Ganga Delkar, Shri Mohanbhai Sanjibhai Deol, Shri Sunny Devarayalu, Shri Lavu Srikrishna Devendrappa, Shri Y. Devi, Shrimati Annpurna Devi, Shrimati Rama Devi, Shrimati Veena Dhaduk, Shri Rameshbhai L. Dharmapuri, Shri Arvind Dhotre, Shri Sanjay Shamrao Diler, Shri Rajveer Dubey, Dr. Nishikant Dubey, Shri Vijay Kumar Duggal, Sushri Sunita Dwivedi, Shri Harish Firojiya, Shri Anil Gaddigoudar, Shri P. C. Gadkari, Shri Nitin Jairam Galla, Shri Jayadev Gambhir, Shri Gautam Gandhi, Shri Feroze Varun Gandhi, Shrimati Maneka Sanjay Gangwar, Shri Santosh Kumar Gao, Shri Tapir Gautam, Shri Satish Kumar Gavit, Dr. Heena Vijaykumar Gavit, Shri Rajendra Dhedya Geetha Viswanath, Shrimati Vanga Ghosh, Shri Dilip Godse, Shri Hemant Tukaram Gogoi, Shri Topon Kumar Gowda, Shri D.V. Sadananda Gupta, Shri Sangam Lal Gupta, Shri Sudheer Hans, Shri Hans Raj Hegde, Shri Anantkumar Hemamalini, Shrimati Hembram, Shri Kunar Irani, Shrimati Smriti Zubin Jadav, Dr. Umesh G Jadhav, Shri Sanjay Jadon, Dr. Chandra Sen Jaiswal, Dr. Sanjay Jardosh, Shrimati Darshana Vikram Jaunapuria, Shri Sukhbir Singh Jigajinagi, Shri Ramesh Chandappa Jolle, Shri Annasaheb Shankar Joshi, Prof. Rita Bahuguna Joshi, Shri C. P. Joshi, Shri Pralhad Jyoti, Sadhvi Niranjan Kachhadiya, Shri Naranbhai Kaiser, Choudhary Mehboob Ali Kapoor, Shri Kishan Karandlaje, Kumari Shobha Kashyap, Shri Dharmendra Kashyap, Shri Suresh Kaswan, Shri Rahul Katara, Shri Kanakmal Kataria, Shri Rattan Lal Kateel, Shri Nalin Kumar Katheria, Dr. Ram Shankar Kaushik, Shri Ramesh Chander Khadse, Shrimati Raksha Nikhil Khan, Shri Saumitra Kher, Shrimati Kirron Khuba, Shri Bhagwanth Kinjarapu, Shri Ram Mohan Naidu Kirtikar, Shri Gajanan Kishan, Shri Ravi Kishore, Shri Kaushal Kol, Shri Pakauri Lal Koli, Shrimati Ranjeeta Kotagiri, Shri Sridhar Kotak, Shri Manoj Kulaste, Shri Faggan Singh Kumar, Dr Virendra Kumar, Shri Bandi Sanjay *Kumar, Shri Narendra Kumar, Shri P. Raveendranath Kumari, Sushri Diya Kundariya, Shri Mohanbhai Kushwaha, Shri Ravindra Lal, Shri Akshaibar Lalrosanga, Shri C. Lalwani, Shri Shankar Lekhi, Shrimati Meenakashi Lokhande, Shri Sadashiv Kisan Maadam, Shrimati Poonamben Madhav, Shri Kuruva Gorantla Madhavi, Kumari Goddeti Mahajan, Shrimati Poonam Maharaj, Dr. Swami Sakshiji Mahato, Shri Bidyut Baran Mahato, Shri Jyotirmay Singh Mahtab, Shri Bhartruhari Majhi, Shri Ramesh Chandra Majumdar, Dr. Sukanta Mallah, Shri Kripanath Mandal, Shrimati Manjulata *Mandlik, Shri Sanjay Sadashivrao Mandavi , Shri Mohan *Mane, Shri Dhairyasheel Sambhajirao Maurya, Dr. Sanghamitra Meena, Shri Arjunlal Meena, Shrimati Jaskaur Meghwal, Shri Arjun Ram Mendhe, Shri Sunil Baburao Mishra, Shri Janardan Misra, Shri Pinaki Modi, Shri Narendra Mohan, Shri P. C. Mohanty, Shri Anubhav Munda, Shri Arjun Munde, Dr. Pritam Gopinathrao * Muniswamy, Shri S. Munjapara , Dr. (Prof.) Mahendra Murmu, Shri Khagen *Nagar, Shri Malook Nagar, Shri Rodmal Naik, Shri Raja Amareshwara Naik, Shri Shripad Yesso Namgyal, Shri Jamyang Tsering Nath, Shri Balak Nete, Shri Ashok Mahadeorao Nimbalkar, Shri Ranjeetsinha Hindurao Naik- Nishad, Shri Ajay Nishad, Shri Praveen Kumar Nishank, Dr.Ramesh Pokhriyal Oja, Shrimati Queen Oram, Shri Jual Pachauri, Shri Satyadev Pal, Shri Jagdambika Pal, Shri Krishan Panda, Shri Basanta Kumar Pandey, Dr. Mahendra Nath Pandey, Shri Ritesh Pandey, Shri Santosh Paras, Shri Pashupati Kumar *Parkash, Shri Som Paswan, Shri Chhedi Paswan, Shri Chirag Kumar Paswan, Shri Kamlesh Patel (Bakabhai) Shri Mitesh Patel, Dr. K.C. Patel, Shri Devaji Patel, Shri Gajendra Umrao Singh Patel, Shri Hasmukhbhai Somabhai Patel, Shri Lalubhai B. Patel, Shri Parbatbhai Savabhai Patel, Shri Prahalad Singh Patel, Shri R.K. Singh Patel, Shrimati Anupriya Patel, Shrimati Keshari Devi Patel, Shrimati Sharda Anil, Pathak, Shri Subrat Pathak, Shrimati Riti Patil, Shri B.B. Patil, Shri C. R. Patil, Shri Hemant Patil, Shri Kapil Moreshwar Patil, Shri Sanjay Kaka Patil, Shri Unmesh Bhaiyyasaheb Pawar, Dr. Bharati Pravin Pfoze, Dr. Lorho Pothuganti, Shri Ramulu Prakash, Shri Jai Pramanik, Shri Nisith *Pujari, Shri Suresh Prasad, Shri Ravi Shankar Raghavendra, Shri.B.Y. Rai, Shri Nityanand Rajenimbalkar, Shri Om Pavan Rajoria, Dr. Manoj Rajput, Shri Mukesh Raju, Shri Raghu Rama Krishna Ram, Shri Vishnu Dayal *Rana, Shrimati Navneet Ravi *Rangaiah, Shri Talari Ranjan, Dr R. K. Rao , Shri Nama Nageswara Rao, Shri Balli Durga Prasad Rao, Shri Soyam Bapu Rathod, Shri Dipsinh Sankarsinh Rathod, Shri Ratansinh Magansinh Rathore, Col. Rajyavardhan Rathva, Shrimati Gitaben V. Raut, Shri Vinayak Bhaurao Rawat, Shri Ashok Kumar Rawat, Shri Tirath Singh Rawat, Shri Upendra Singh Ray, Shrimati Sandhya Reddeppa, Shri N. Reddy, Dr. G. Ranjith Reddy, Shri Adala Prabhakara Reddy, Shri G. Kishan Reddy, Shri Kotha Prabhakar Reddy, Shri Magunta Sreenivasulu Reddy, Shri P.V. Midhun Reddy, Shri Y. S. Avinash Rijiju, Shri Kiren Roy, Dr. Jayanta Kumar Roy, Dr. Rajdeep Rudy , Shri Rajiv Pratap Sagar, Shri Arun Kumar Sahoo, Shri Mahesh Sahu , Shri Chunni Lal Sahu, Shri Chandra Sekhar Sai, Shrimati Gomati Saikia, Shri Dilip Saini, Shri Nayab Singh Samanta, Prof. Achyutananda Sangma, Kumari Agatha K. Sao, Shri Arun Sarangi, Shri Pratap Chandra Sarangi, Shrimati Aparajita Saraswati, Shri Sumedhanand Sarkar, Dr. Subhas Sarkar, Shri Jagannath Saruta, Shrimati Renuka Singh Satyanarayana, Shri M. V. V. Satyavathi, Dr.Beesetti Venkata Sawant, Shri Arvind Seth, Shri Sanjay Shah, Shri Amit Shah, Shrimati Mala Rajya Laxmi Sharma, Dr. Arvind Kumar Sharma, Dr. Mahesh Sharma, Shri Anurag Sharma, Shri Jugal Kishore Sharma, Shri Ram Swaroop Sharma, Shri Vishnu Datt Shejwalkar, Shri Vivek Narayan Shekhawat, Shri Gajendra Singh Shetty, Shri Gopal Shewale, Shri Rahul Ramesh Shinde, Dr. Shrikant Eknath Shrangare, Shri Sudhakar Tukaram Shyal, Dr. Bharatiben Siddeshwar , Shri G M Sigriwal, Shri Janardan Singh Simha, Shri Prathap Singari, Dr. Sanjeev Kumar Singh (Raju Bhaiya), Shri Rajveer Singh Deo, Shrimati Sangeeta Kumari Singh(Retd.) , Gen. Dr V. K . Singh, Dr. Jitendra Singh, Dr. Satya Pal Singh, Rao Inderjit Singh, Shri Arjun Singh, Shri Bhola Singh, Shri Brijbhushan Sharan Singh, Shri Brijendra Singh, Shri Chandan Singh, Shri Dharambir Singh, Shri Dushyant Singh, Shri Ganesh Singh, Shri Giriraj Singh, Shri Kirti Vardhan Singh, Shri Lallu Singh, Shri Pashupati Nath Singh, Shri Pradeep Kumar Singh, Shri R.K. Singh, Shri Radha Mohan Singh, Shri Raj Nath Singh, Shri Rajbahadur Singh, Shri Rakesh Singh, Shri Sunil Kumar Singh, Shri Sushil Kumar Singh, Shri Uday Pratap Singh, Shri Virendra Sinha, Shri Jayant Solanki, Dr. (Prof.) Kirit Premjibhai Solanky, Shri Mahendra Singh Soni, Shri Sunil Kumar Sonkar, Shri Vinod Kumar Soren, Shri Sunil Srinivas, Shri Kesineni Subba, Shri Indra Hang Supriyo, Shri Babul Suresh, Shri Nandigam Surya, Shri Tejasvi Swamiji, Dr. Jai Sidheshwar Shivacharya Swamy, Shri A. Narayana Tamta, Shri Ajay Teli, Shri Rameswar Teni, Shri Ajay Misra Thakur , Shri Gopal Jee Thakur, Sadhvi Pragya Singh Thakur, Shri Anurag Singh Thakur, Shri Shantanu Tiwari, Shri Manoj Tomar, Shri Narendra Singh Tripathi, Dr. Ramapati Ram Tripura, Shri Rebati Tudu, Er. Bishweswar Tumane, Shri Krupal Balaji Udasi, Shri S. C. Uikey, Shri Durga Das Vallabhaneni, Shri Balashowry Vardhan, Dr. Harsh Vasava , Shri Mansukhbhai Dhanjibhai Vasava, Shri Parbhubhai Nagarbhai Verma, Shri Bhanu Pratap Singh Verma, Shri Parvesh Sahib Singh Verma, Shri Rajesh Verma, Shri Ram Shiromani Verma, Shrimati Rekha Arun Vichare, Shri Rajan Baburao Vikhe Patil, Dr. Sujay Yadav, Shri Ashok Kumar Yadav , Shri Krishna Pal Singh Yadav, Shri Ram Kripal Yadav, Shri Shyam Singh Yadav, Shri Girdhari NOES Antony, Shri Anto *Ariff, Adv. A. M. Aujla, Shri Gurjeet Singh Baalu, Shri T.R. *Baij, Shri Deepak Basheer, Shri E. T. Mohammed Behanan, Shri Benny Chaudhary, Shri Santokh Singh Chazhikadan, Shri Thomas Chellakumar, Dr.A. Chidambaram, Shri Karti P Chowdhury, Shri Abu Hasem Khan Chowdhury, Shri Adhir Ranjan Eden, Shri Hibi Gandhi, Shri Rahul *Gandhi, Shrimati Sonia Ganeshamurthi, Shri A Gill, Shri Jasbir Singh Gnanathiraviam, Shri S. Gogoi, Shri Gaurav Haridas, Kumari Ramya Jagathrakshakan, Shri S. Jaleel, Shri Syed Imtiaz Jawed, Dr. Mohammad Jayakumar, Dr. K. Jothimani, Sushri S Kanimozhi, Shrimati Kaur, Shrimati Preneet Khaleque, Shri Abdul Kunhalikutty, Shri P.K. Kuriakose, Adv. Dean *Lone, Shri Akbar Mahant, Shrimati Jyotsna Charandas Manickam Tagore, Shri B. Masoodi , Shri Hasnain Muraleedharan , Shri K. *Natarajan, Shri P.R Nath, Shri Nakul K. Navaskani , Shri K. Owaisi, Shri Asaduddin Pala, Shri Vincent H. Palanimanickam, Shri S.S *Parthiban, Shri S. R. Pon, Shri Gautham Sigamani Prakash, Adv. Adoor Prathapan, Shri T. N. Premachandran, Shri N.K. Raghavan, Shri M.K. Raja, Shri A. Ramalingam, Shri S Ravikumar, Dr. D. Reddy, Shri Anumula Revanth Reddy, Shri Komati Reddy Venkat Reddy, Shri Uttam Kumar Sardinha , Shri Francisco *Selvam, Shri G. *Selvaraj, Shri M. Senthilkumar S., Shri DNV . Shanmuga Sundaram, Shri K. Sharma, Shri Kuldeep Rai *Singh, Dr. Amar Singh, Shri Ravneet Sreekandan, Shri V. K. Suresh, Shri Kodikunnil Tewari, Shri Manish Thangapandian, Dr. T. Sumathy (A) Thamizhachi Tharoor, Dr. Shashi Thirumaavalavan, Dr. Thol Thirunavukkarasar. Shri Su. Ulaka, Shri Saptagiri Sankar Unnithan, Shri Rajmohan Vasanthakumar, Shri H Veeraswamy, Dr. Kalanidhi Velusamy, Shri P. * Venkatesan, Shri S Vishnu Prasad, Dr. M. K. Yadav, Shri Mulayam Singh ABSTAIN Sarania, Shri Naba kumar माननीय अध्यक्ष : शुद्धि के अध्यधीन,* मत-विभाजन का परिणाम यह है : +हाँ : 370 नहीं : 70 अनुपस्थित : 01 प्रस्ताव स्वीकृत हुआ । माननीय अध्यक्ष : आइटम नंबर 14. माननीय मंत्री जी ।
गृह मंत्री (श्री अमित शाह): अध्यक्ष जी, मैं इस बिल को विद्ड्रा करना चाहता हूं, क्योंकि यह सदन जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन विधेयक 2019 को पारित कर चुका है । इसके बाद इस बिल को लाने की जरूरत नहीं होगी । …(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष जी, यह विधेयक राज्य सभा में पारित हुआ है तो मैं राज्य सभा से इस विधेयक को वापस लेने के लिए, जब राज्य सभा समवेत होगी, दरख्वास्त करूंगा ।
19.25 hrs