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Lok Sabha Debates

Further Discussion Regarding Atrocities On Dalits In Various Parts Of The ... on 22 August, 2003

12.29 hrs. DISCUSSION UNDER RULE 193 RE: Atrocities on Dalits in various parts of the Country -- contd.

Title: Further discussion regarding atrocities on dalits in various parts of the country moved by Shri Ram Vilas Paswan on 21 August, 2003. (Discussion concluded).

उप प्रधान मंत्री तथा गृह मंत्रालय तथा कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय के प्रभारी (श्री लालकृष्ण आडवाणी) :अध्यक्ष जी, मैं सबसे पहले सदन से क्षमा याचना करना चाहूंगा कि कल रात्रि को शाम के कार्यक्रम के बाद मैं यहां पर उपस्थित नहीं था। मेरे सहयोगी उपस्थित थे, जिन्होंने मुझे पूरी जानकारी दी कि बहुत देर तक इस महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा चलती रही।

श्री राम विलास पासवान (हाजीपुर) : रात के एक बजे तक चर्चा चली।

श्री लाल कृष्ण आडवाणी: मैं जानता हूं। मैं इसके लिए राम विलास पासवान जी को, बसुदेव आचार्य जी को धन्यवाद देना चाहूंगा, जिन्होंने इस अति महत्वपूर्ण गम्भीर विषय पर आग्रहपूर्वक यहां चर्चा कराई। चाहे एक-दो बार यह चर्चा स्थगित हो चुकी थी, आरम्भ में ही हो जाती तो ज्यादा लोग इसको सुन सकते और भाग ले सकते। मुझे इस बात की खुशी है कि मेरे सहयोगी जो प्रमुख रूप से सामाजिक न्याय के विषयों को देखते हैं, वे यहां पर उपस्थित थे। उन्होंने इस पर अपना योगदान भी दिया। उनको स्वयं को जो जानकारी थी, वह सदन को बताई। क्योंकि चर्चा का विषय है, वह है दलितों पर अत्याचार। इसलिए यह काम स्वाभाविक रूप से गृह मंत्रालय के सुपुर्द किया गया, क्योंकि सब प्रकार के अत्याचार, सब प्रकार के अपराध गृह मंत्रालय की परधि में आते हैं। अन्यथा समाज में खासकर दलितों के साथ अन्याय न हो, उनको न्याय मिलता रहे, इस बात की प्रमुख जवाबदारी जिस विभाग की है, उन्होंने कुछ अपने विचार इसमें रखे भी हैं।

मैं समझता हूं कि प्रवीण राष्ट्रपाल जी, जो यहां बैठे हैं, उनका मैंने भाषण सुना था। उनका क्षोभ मेरी समझ में आता था। उन्होंने मन का गुस्सा अगर किसी बात पर प्रकट किया, वह भी मेरी समझ में आता था। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि इसमें किसी सरकार का या किसी पार्टी का दोष देने का प्रश्न नहीं है। उन्होंने कहा कि यहां पर इस बात को स्वीकार करना होगा कि यह समस्या बहुत पुरानी है। शताब्दियों से चली आ रही है। लेकिन उस समस्या का जितनी मात्रा में हम हल निकाल पाए हैं, वह महात्मा गांधी जैसे, डा. अम्बेडकर जैसे उन्होंने एक-दो नाम और लिए, जैसे ज्योति बा फुले और विवेकानंद जी। मैं समझता हूं अनेक नाम लिए जा सकते हैं। मैं मानता हूं आज इतने सालों के बाद, स्वतंत्रता की प्राप्ति के बाद, संविधान बन जाने के बाद और कानून बन जाने के बाद भी हम इस समस्या का पूरी तरह से हल नहीं निकाल पाए हैं। मुझे लगता है कि एक कारण है, यह जो समानता का, समरसता का अभियान सामाजिक स्तर पर जितना पहले चलता था, वह कुछ क्षीण हो गया है। अब सामाजिक स्तर पर आंदोलन के रूप में पहले चलता था, जिसके कारण उन्होंने अस्पृश्यता का उदाहरण दिया, जिन्होंने एक प्रकार से अस्पृश्यता को जस्टिफाई किया। उन्होंने जो वाक्य कहे, मैं उनको दोहराना नहीं चाहता। पता नहीं वह किसका उल्लेख कर रहे थे। लेकिन मेरा स्वयं का अनुभव है धार्मिक क्षेत्र में काम करने वाले लोग कभी-कभी ऐसी बात कर जाते हैं। हमारे यहां बहुत समय से ऐसे लोग रहे हैं, जो धर्म को श्रेष्ठ स्थान देते थे। जैसे बाल गंगाधर तिलक हैं। लेकिन उन्होंने एक बार कहा कि भगवान यदि अस्पृश्यता को सहते हो तो मैं उसको भगवान मानने के लिए तैयार नहीं हूं। गांधी जी के तो ऐसे बहुत से उदाहरण दिए जा सकते हैं। उत्तर भारत में इसी तरह से एक बहुत प्रभावी व्यक्ति हुए, स्वामी दयानन्द जी। उन्होंने न केवल प्रवचन दिए, आग्रहपूर्वक कहा और लाखों लोगों के जीवन को बदला। लाखों लोगों के जीवन को प्रभावित किया इस बात से कि वह अस्पृश्यता के बारे में कभी सोच नहीं सकते। वह इतना बड़ा अपराध है कि वह उसको स्वीकार करें। एक समय था, हमने भी देखा कि सामने से कोई आ जाए तो स्नान करना जरूरी माना जाता था कि स्नान करो। मुझे स्वयं को याद है कि मैंने राजनैतिक क्षेत्र में सबसे ज्यादा प्रेरणा और शिक्षा पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी से ली। उन्होंने मुझे बताया कि जब वे केरल में गये और केरल में जो शौचालय साफ करने के लिए आता था उसको कहा गया कि बाहर एक क्रॉस कील पर लटका हुआ है, वह क्रॉस तुम गले में डाल लो, फिर मेरे घर में प्रवेश करो और शौचालय साफ करो। उन्होंने कहा कि इस प्रकार का विचार जिस हिंदू समाज में होगा, वहां पर वह शौचालय साफ करने वाला व्यक्ति अपने मन में सोचता है कि मैं एक दिन में पांच मिनट के लिए इस क्रॉस को गले में डालूं, इसके बजाए जीवन भर ही क्यों न इसे गले में डाल लूं। यह सोचना अस्वाभाविक नहीं होगा। यह बात मैंने पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी से सुनी।

जिस प्रांत में मेरा बचपन बीता, उसमें सिखों का या स्वामी दयानंद सरस्वती के आर्य समाज का या फिर आरएसएस का प्रभाव था। …( व्यवधान)

श्री श्रीप्रकाश जायसवाल (कानपुर) : माननीय आडवाणी जी, आरएसएस की इसमें कोई भूमिका नहीं रही। यह मैसेज आप अपने कार्यकर्ताओं को भी दीजिए। धर्म-परिवर्तन के पीछे क्या-क्या कारण रहे हैं यह मैसेज आप अपने कार्यकर्ताओं को भी दीजिए।…( व्यवधान)

श्री लालकृष्ण आडवाणी : मैं इस पर कुछ नहीं कहूंगा। मैं सिर्फ इतना ही जानता हूं कि सन् १९३४ में महात्मा जी, वर्धा के पास, आरएसएस के शविर में गये थे। उन्होंने वहां पर जो कुछ देखा, उससे वह बहुत प्रभावित हुए। स्वयं मैं १७ सितम्बर १९४७ को सिंध से जब आया था तो गांधी जी ने एक हरिजन बस्ती में जाकर आरएसएस की एक शाखा को संबोधित किया और १९३४ के अपने अनुभव का उल्लेख किया और कहा कि मैं जिन बातों से स्वयंसेवकों से प्रभावित हुआ, उनमें एक उनका अनुशासन, दूसरा उनका छुआछूत से मुक्त होने का भाव है। यह बात हिंदुस्तान टाइम्स के १७ सितम्बर १९४७ के अखबार में है। मेरा सौभाग्य है कि ये प्रभाव मेरे मन पर भी रहे। मैं राजस्थान में जब राजनीति में था तो एक स्टेज पर भारतीय जनसंघ और रामराज्य परिषद के बीच में विलय की बात आई और वह इसलिए टूटी क्योंकि रामराज्य परिषद् ने कहा कि यह भारतीय जनसंघ के लोग, संघ के स्वयंसेवक होने के कारण कुत्ते की तरह एक थाली में भोजन करते हैं और वे अस्पृश्यता में विश्वास नहीं करते। हमने कहा कि नहीं करते। ठीक है, मर्जर नहीं होगा। आप संघ की और कोई आलोचना करें तो मैं सुन लूंगा लेकिन कम से सम छुआछूत के मामले में, जाति-भेद के मामले में…( व्यवधान)

श्री श्रीप्रकाश जायसवाल:आपने स्वामी दयानंद जी की बात जो कही है उससे मैं सहमत हूं लेकिन जहां तक भारतीय जनसंघ की बात है तो आप १९४७ के भारतीय जनसंघ के मैनिफैस्टो को देखिये। छुआछूत मिटाने में उनकी कोई भूमिका नहीं है।

श्री लालकृष्ण आडवाणी : मैं आपको दोष नहीं देता हूं। अपने अज्ञान के कारण आप सहमत नहीं हैं तो मुझे कोई आपत्ति नहीं है।

श्री श्रीप्रकाश जायसवाल: हो सकता है कि आरएसएस के पास ही सारा ज्ञान हो।

अध्यक्ष महोदय : विषयांतर मुझे नहीं चाहिए। मैं जानना चाहता हूं कि सरकार छुआछूत दूर करने के लिए क्या कर रही है?

श्री रामजीलाल सुमन (फिरोजाबाद): अध्यक्ष महोदय, यहां विषयांतर हो रहा है। ये लोग विषयांतर न करें तो अच्छा रहेगा।

महोदय, आपकी मारफत उपप्रधान मंत्री जी से निवेदन है कि वे विषयान्तर हो रहे हैं। विषयान्तर न हो, तो कृपा होगी। मैं पूछना चाहता हूं कि दलित उत्पीड़न पर सरकार क्या सार्थक कार्यवाही कर रही है, इस पर सीमित रहें, तो ज्यादा अच्छा रहेगा। …( व्यवधान)

अध्यक्ष महोदय : कृपया बैठिए। मंत्री जी उत्तर दे रहे हैं।

…( व्यवधान)

श्री बसुदेव आचार्य (बांकुरा): महोदय, कल जो सदन में चर्चा हुई है, जो सुझाव दिए गए हैं, उसके बारे में बतायें।…( व्यवधान)

अध्यक्ष महोदय : मंत्री जी आप उत्तर दीजिए।

…( व्यवधान)

अध्यक्ष महोदय : उत्तर सुनिए। रामदास जी, महत्वपूर्ण विषय पर सदन में चर्चा चल रही है। आप बैठिए। ...( व्यवधान)

श्री रामदास आठवले (पंढरपुर) : जब पाकिस्तान, कराची से आप भारत आए थे, उस समय यहां इन लोगों को पानी ऊपर से दिया जाता था। हमें इसका अनुभव है। इस अनटचेबलिटी को खत्म करने का संकल्प हम लोगों को लेने की आवश्यकता है। …( व्यवधान)

श्री शंकर प्रसाद जायसवाल (वाराणसी):महोदय, मेरा व्यवस्था का प्रश्न है। अनधिकृत रूप से आठवले जी क्यों खड़े हो जाते हैं…( व्यवधान)

श्री श्रीप्रकाश जायसवाल:जैसे आपकी तरफ से प्रभुनाथ सिंह जी खड़े हो जाते हैं। …( व्यवधान)

श्री लाल कृष्ण आडवाणी:महोदय, जहां तक अत्याचारों का सवाल है, प्रमुख रूप से, स्वाभाविक रूप से यह जवाबदेही प्रत्येक राज्य की है कि उस प्रदेश में अपराध न हों, उस प्रदेश में कमजोर वर्गों पर किसी प्रकार का अत्याचार न हो और कमजोर वर्गों में दलित सबसे प्रमुख है। इसीलिए केन्द्र सरकार की यह जवाबदेही बनती है कि समय-समय पर सभी राज्यों को इस मामले में सलाह देती रहे और निर्देश देती रहे तथा किसी बात की जानकारी मिले, तो उसके बारे में जानकारी और प्राप्त करे और उसको कहे कि क्या करना चाहिए या क्या नहीं करना चाहिए। हमारे यहां से लगातार प्रदेशों को इस मामले में सलाह दी जाती रही है कि जो एट्रोसीटीज-प्रोन-एरियाज हैं, उनको छांटे और उन क्षेत्रों की विशेष रूप से चिन्ता करें कि कहां-कहां दलितों पर अत्याचार की प्रवृत्ति अधिक है। उनके खिलाफ जो अपराध होते हैं, उन अपराधों का न्यायालयों द्वारा जल्दी निपटारा हो और इसके लिए स्पेशल कोट्र्स बनायें। स्पेशल कोट्र्स इस बात की चिन्ता करने के लिए बनायें कि शैडयुल्ड कास्ट्स और शैडयुल्ड ट्राइब्स पर क्या अत्याचार होते हैं। मैं सदन को इतनी जानकारी दे सकता हूं कि पिछले दिनों में इस प्रकार के स्पेशल सैल १७ राज्यों और एक यूनियन टैरेटरी में गठित हुए हैं। इस प्रकार १३७ स्पेशल कोट्र्स इस काम के लिए दस प्रदेशों ने बनाए हैं। कुछ स्टेट्स हैं, जहां पर अनुसूचित जनजाति की संख्या ज्यादा है और अगर वहां स्पेशल कोट्र्स बनाए भी गए हैं, तो भी उन राज्यों ने तय किया है कि जितने भी इस प्रकार के अपराध हैं, जो जनजातियों के खिलाफ होते हैं, वे सैशन कोट्र्स के अन्तर्गत काम करेंगी। इसी प्रकार से एट्रोसीटीज-प्रोन-एरियाज १२ राज्यों ने तय किए हैं और केन्द्र को सूचित किया है कि हमने इस-इस प्रकार के केन्द्रों और क्षेत्रों को चुना है, जिनको हम एट्रोसीटीज-प्रोन-एरियाज मानते हैं।

श्री बसुदेव आचार्य : वे १२ राज्य कौन से हैं?

श्री लाल कृष्ण आडवाणी:वे १२ राज्य हैं - आन्ध्रा प्रदेश, बिहार, गुजरात, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, उड़ीसा, पंजाब, राजस्थान, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश।

श्री रघुनाथ झा (गोपालगंज): इसमें पश्चिम बंगाल नहीं है, क्योंकि वहां एक भी केस रजिस्टर नहीं होने देते हैं। …( व्यवधान)

श्री बसुदेव आचार्य :बंगाल में यह घटना नहीं घटती है। वहां हरिजनों को जमीनें दी जाती हैं। …( व्यवधान)

अध्यक्ष महोदय: कृपया उत्तर सुनिए।

..( व्यवधान)

अध्यक्ष महोदय: यदि आप ऐसे करेंगे तो जीरो आवर और कॉलिंग अटैंशन नहीं होगा। आप बीच में क्यों इंटरप्ट कर रहे हैं?

...( व्यवधान)

श्री लाल कृष्ण आडवाणी: अध्यक्ष महोदय, कल राम विलास जी ने मंदिरों की चर्चा की और कहा कि डीडीए ने राम कृष्ण पुरम में गुरु रविदास जी के मंदिर को तोड़ा। उन्होंने चंडीगढ़ और तुगलकाबाद के मंदिरों का भी जिक्र किया। मैंने सोचा कि डीडीए अनऑथोराइज्ड कनस्ट्रक्शन को तोड़ती रहती है, उस क्रम में यह कार्रवाई हुई होगी लेकिन जब उन्होंने यह कहा कि ऐसे अनऑथोराइज्ड मंदिर कई थे लेकिन उन्होंने चुन कर गुरु रविदास के मंदिर को तोड़ा, तब मुझे लगा कि यह बहुत गलत बात हुई है। मैंने इस बारे में पूछताछ की। हमारे जो मंत्री अरबन डैवलपमैंट विभाग को संभाल रहे ह,ैं उन्होंने ऐसी बात सुन कर स्वयं इस बारे में राम विलास जी से चर्चा की और जानकारी देने की कोशिश की। उनके पास चंडीगढ़ की जानकारी नहीं थी, इसलिए उन्होंने यह भी कहा कि मैं चंडीगढ़ की जानकारी लेकर दूंगा। मुझे अरबन डैवलपमैंट विभाग ने बताया कि कुल मिला कर पिछले साल ऐसे २९ रीलजियस प्लेसेज जो अनऑथोराइज्ड थे, उनके ऊपर एक्शन लिया गया। मैंने उनसे राम कृष्ण पुरम के गुरु रविदास मंदिर के बारे में भी बात की। उन्होंने मुझे कहा कि उस मंदिर को छुआ नहीं गया लेकिन मंदिर के साथ-साथ कुछ ऐसे इलाके और कनस्ट्रक्शन थी जो अनऑथोराइज्ड थी, जहां स्कवैटर्स थे, जिन्हें छुआ गया। मैं इसकी और जानकारी लूंगा लेकिन उन्होंने मुझे यह जरूर कहा कि गुरु रविदास के मंदिर को नहीं छुआ गया। उन्होंने मुझे यह भी जानकारी दी कि उसकी शिकायत वहीं की पुरानी कमेटी ने आग्रहपूर्वक की थी कि वहां इस प्रकार के एनक्रोचर्स और स्कवैटर्स के खिलाफ एक्शन क्यों नहीं लिया जाता? हो सकता है कि इसमें सच्चाई हो लेकिन यह बात सदन में उठायी गई है मैं इसके बारे में और जानकारी लूंगा। मैं ऐसा जरूर समझता हूं कि अनऑथोराइज्ड कनस्ट्रक्शन के बारे में डीडीए जैसी बॉडी स्वाभाविक रूप से चिंतित हो सकती है लेकिन छांट करके अगर बाकी किसी मंदिर या गुरुद्वारे को या किसी और को जो अनऑथोराइज्ड हैं, वे नहीं छूते हैं, केवल रविदास मंदिर को छूते हैं, यह बहुत बड़ा अपराध है।

अध्यक्ष महोदय, मैं मानता हूं कि हमारे यहां दो कारण इस समस्या के बने हैं। जैसा मैंने पहले कहा कि सामाजिक स्तर पर जिस प्रकार की समानता और समरसता का आन्दोलन पहले चलता था और जिस में केवल राजनीतिक लोग नहीं, सामाजिक और धार्मिक क्षेत्र के नेता भी इस काम में लगे होते थे, वह अब क्षीण हो गई है। दूसरा कारण यह है कि समाज के वभिन्न क्षेत्रों में जो लोग नेतृत्व करते हैं, वे नेतृत्व राजनीति में करते हों, वे नेतृत्व शिक्षा में करते हों और वे नेतृत्व ब्यूरोक्रेसी में करते हों, उनके मन में दलितों के लिए जो पूर्वाग्रह है, प्रेजुडिस है, वह बहुत बार प्रकट होता है, उनके कारण भी कई अन्याय, हत्याएं और ऐसी ज्यादतियां होती हैं। हम इनसे मुंह नहीं मोड़ सकते। इसके कारण हम सामाजिक समरसता भी तोड़ते हैं। मैं कहना चाहता हूं कि यह एक ऐसा विषय है जिस में अगर हम कानून और संविधान को ठीक से कार्यान्वित नहीं करेंगे, उस पर सफलता नहीं मिलेगी जिसके कारण देश की दुनिया में बदनामी होती है। मैंने जून महीने में नेशनल ज्यौग्राफिक मैगज़ीन देखी थी। यह एक बहुत ही औब्जैक्टिव मैगज़ीन मानी जाती है। इस मैगजीन के कई पृष्ठों में एक लेख लिखा था कि भारत में दलितों के साथ किस प्रकार का व्यवहार होता है। यह लम्बा-चौड़ा लेख था। इसी नेशनल ज्यौग्राफिक मैगजीन में एक और लेख था जिसमें इस बात का बखान किया गया था कि अमरीका में काले लोगों को पिछली शताब्दियों में कैसे न्याय दिया गया, उन्हें गोरे लोगों के समक्ष लाया गया है जबकि हम सब जानते हैं कि वहां समस्या कितनी विकट है। हमारे देश में यह समस्या है जिससे हम इनकार नहीं कर सकते और हम उसे स्वीकार करते हैं। इस सदन में रात के १२ बजे के बाद हम इस विषय पर चर्चा करते हैं और इस बात को स्वीकार करते हैं कि सरकार की तरफ से कानून होते हुये भी हम उस समस्या पर पूरी तरह काबू नहीं पा सके लेकिन दुनिया में इस कारण से हमारे देश की बदनामी हो, यह हमारे लिये चिन्ता का विषय है। इस समस्या को दूर करने के लिये हमें इस बात की पूरी चिन्ता करनी पड़ेगी कि हम पूर्वाग्रह-मुक्त ब्यूरोक्रेसी बनायें, अपने को बनायें, सारे समाज में शिक्षा का क्षेत्र है जिसका हम नेतृत्व करते हैं, उसे बनायें। धर्म के नाम पर अस्पृश्यता, छूआछूत या जाति-पाति को संरक्षण दिया जाता है, उसे हम सर्वथा पूरी तरह से स्वीकार करते हैं।

श्री राम विलास पासवान : अध्यक्ष जी, हम धन्यवाद करते हैं कि कल रात जिन माननीय सदस्यों ने चर्चा में भाग लिया, पार्टी-पौलटिक्स से ऊपर उठकर अपनी बात कही। मैं कहना चाहता हूं कि यदि पौलिसी रंदा के समान है तो उसमें कोई दिक्कत नहीं है लेकिन यह बरनी के समान नहीं होनी चाहिये। मेरे ख्याल से डिप्टी प्राइम मनिस्टर साहब को इस बात की कम जानकारी है। श्री खंडूड़ी साहब यहां बैठे हुये हैं जो मन्दिर मामला डील करते हैं। मैं कहना चाहता हूं कि कारण चाहे जो हों, कोई पैसा देकर मन्दिर नहीं बनाया, न जमीन खरीदकर बनाया। आज आर.के.पुरम में ३७ मन्दिर हैं। केवल एक ही मन्दिर को क्यों तोड़ा गया? हर मन्दिर के पास जमीन है, लंगर है। सारे मन्दिरों को छोड़कर एक मंदिर को ध्वस्त कर दिया। श्री बंसल जी चंडीगढ़ से हैं। उनके यहां ७ मन्दिर हैं। हरि मन्दिर, गुरुद्वारा,चर्च पास-पास हैं लेकिन किसी को नहीं छुआ गया। केवल रविदास मन्दिर को छुआ गया। यदि दूसरे मन्दिर को छुयेंगे तो साम्प्रदायिक दंगा हो सकता है। लेकिन गरीब का मन्दिर है। तुगलकाबाद के तीन किलोमीटर क्षेत्र में संत रविदास के नाम से एक मार्ग का नाम भी है। बाबू जगजीवन राम जी १९५९ में वहां गये थे। मैं यह नहीं कहता कि आपकी सरकार के समय का मामला है। सरकार तो सरकार ही है। इसलिए आप कानून की तकनीकियों में न जायें, अतिक्रमण के नाम पर न जायें। माननीय उप प्रधान मंत्री जी जानते हैं कि १२, तुगलक रोड पर चौधरी साहब रहते थे। श्री शरद यादव १९७७ में वहां गये थे। पहले वहां कुछ नहीं था। एक आदमी ने पत्थर डाल दिया और बाद में विशाल भवन बन गया। क्या कोई तोड़ सकता है, नहीं, कोई नहीं तोड़ सकता।

अध्यक्ष महोदय : पासवान जी, आप जानते हैं कि आज संसद का अंतिम दिन है। आप बैठिये।

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री तथा शहरी विकास और गरीबी उपशमन मंत्री (मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) भुवन चन्द्र खंडूड़ी) : अध्यक्ष जी, श्री पासवान जी ने जो कहा है …( व्यवधान)

श्री राम विलास पासवान:हमने मंत्री जी को धन्यवाद किया क्योंकि जिस तत्परता से इन्होंने हम सब को बुलाया और संबंधित आफिसर को बुलाकर मामले को गम्भीरता से लिया। मेरा खंडूड़ी जी से आग्रह है कि वे मानवीय स्तर पर इसे लेने का काम करें, इसकी टैक्नैक्लिटी या लीगैलटि में न जायें…( व्यवधान)

अध्यक्ष महोदय : पासवान जी, हमारे पास समय बहुत कम है। आप प्लीज बैठिये।

श्री पवन कुमार बंसल (चंडीगढ़) : अध्यक्ष महोदय, आज से १५ दिन पहले स्वास्थ्य और पार्लियामेंटरी मनिस्टर ने कहा था क्योंकि पी.जी.आई. उनके तहत है, उन्होंने कहा था कि जहां तक चंडीगढ़ का ताल्लुक है, वह इस बात की जांच करके संसद को बतायेंगे। आज सत्र का आखिरी दिन है। १५ दिन में भी नहीं बताया गया, जबकि यह मसला सीधे उनके अंडर आता है।…( व्यवधान)

श्री राम विलास पासवान:यह मांगते रह गये और इन्हें रिपोर्ट भी नहीं दी गई।…( व्यवधान)

(मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) भुवन चन्द्र खंडूड़ी) : मैं बताना चाहता हूं कि अभी हमने जानकारी हासिल की है। जो मंदिर वहां बन रहा था, वह नया मंदिर बन रहा था। रामविलास जी उसे तोड़ा नहीं गया है।…( व्यवधान)

श्री राम विलास पासवान:मैं चैलेंज के साथ कहता हूं कि वहां भवन बने हुए थे, मेरे पास फोटो है।…( व्यवधान)

अध्यक्ष महोदय : आप मंत्री जी को उत्तर पूरा नहीं करने देंगे तो कैसे चलेगा। मुझे मंत्री जी का उत्तर सुनने दीजिए।

मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) भुवन चन्द्र खंडूड़ी : वह अंडर कंस्ट्रक्शन था, हमें बताया गया था और उसके चारों तरफ जो और चीजें थी, उन्हें हटाया गया है। आपके जाने के बाद और हमारे पता करने के बाद कार्रवाई रोक दी गई। लेकिन मंदिर अंडर कंस्ट्रक्शन था।…( व्यवधान)

श्री पवन कुमार बंसल:कार्रवाई क्या रोकी, वह खत्म हो गया…( व्यवधान)आप मान रहे थे कि गिरा दिया फिर आज कैसे इनकार कर रहे हैं।

श्री रामजीलाल सुमन : अध्यक्ष महोदय, मैं आपकी मार्फत विनम्र प्रार्थना करना चाहता हूं कि आडवाणी जी और खंडूड़ी जी इस समस्या का व्यावहारिक हल निकालिये। ४५ सालों से वे रविदास मंदिर पर काबिज हैं। इससे क्या संदेश जाता है, इससे यही संदेश जाता है कि आर.के.पुरम में ३७ मंदिर हैं, इससे इस भावना को बल मिलता है कि जब लोग यह मानकर चलते हैं कि हमारा ही मंदिर उजाड़ा गया है, हमें ही यहां से हटाया गया है, क्योंकि हम कमजोर वर्ग के लोगों का मंदिर है। मैं इसके तकनीकी और कानून पक्ष में नहीं जाना चाहता। आडवाणी जी मेरी प्रार्थना है कि आप इसका व्यावहारिक हल निकालिये। जो तिकड़मबाज और असरदार लोग हैं, वे किसी की भी जमीन पर कब्जा कर लें और जो ४५ सालों से उस जगह पर रह रहे हैं, उनके मंदिर को आप हटा दें, यह किसी भी कीमत पर न्यायसंगत नहीं है। आप बहुत ज्यादा तकनीकी पक्ष में मत जाइये। जितना आप इसके तकनीकी पक्ष में जायेंगे उतनी ही उलझन बढ़ेगी। आप इसका व्यावहारिक हल निकालिये।

श्री लालकृष्ण आडवाणी : कानून में सब लोग बराबर होने चाहिए। कोई सशक्त है, कोई कमजोर है, इसके आधार पर भेदभाव होता है तो उसका मतलब है कि कानून का पालन ठीक से नहीं हो रहा है। इसलिए इम्पलीमैन्टेशन ठीक हो, मैं इससे पूरी तरह से सहमत हूं। एक सवाल पूछा गया…( व्यवधान)

श्री राम विलास पासवान:होम मनिस्टर अपने स्तर से देखें। यदि होम मनिस्टर ऑर्डर देकर तोड़ देंगे तो हमें कोई आपत्ति नहीं होगी। लेकिन तब तक के लिए रोक लगा दीजिए कि इस बीच में कोई अब डेस्ट्रक्शन का काम न करे। इसमें आपका आदेश हमें मान्य होगा और You will be held responsible for that.…( व्यवधान)

श्री रामजीलाल सुमन : सर, इसमें कानूनी शर्तें पूरी करें औंर आसान शर्तों पर उन्हें कब्जा दिलवायें। लाग-लपेट की बातों से कुछ नहीं होगा।

अध्यक्ष महोदय : मैंने आपको बार-बार प्रश्न पूछने का मौका दिया इसका यह मतलब नहीं है कि आप मंत्री जी का उत्तर नहीं सुनेंगे और काम को आगे नहीं बढ़ाने देंगे।

...( व्यवधान)

अध्यक्ष महोदय : पासवान जी, आपकी बात मंत्री जी ने सुनी है। मंत्री जी ने कहा है कि इस विषय में पूरी जांच करेंगे।

श्री लालकृष्ण आडवाणी : एक सवाल श्री शिवराज जी ने पूछा है कि लक्षद्वीप में जो ट्राइबल्स हैं।…( व्यवधान)

अध्यक्ष महोदय : वही प्रश्न है।

श्री शिवराज वि.पाटील (लातूर) : मैं आपका भाषण समाप्त होने के बाद उसका थोड़ा सा एक्सप्लेनेशन करके फिर आपसे इसमें मदद चाहूंगा।

श्री लालकृष्ण आडवाणी : मैं आपको बता दूंगा।

अध्यक्ष महोदय : आप अभी सवाल पूछिये। मंत्री जी कंक्लूड कर रहे हैं।

श्री राम विलास पासवान: अभी कंक्लूड कैसे करेंगे। अभी अत्याचार के विषय पर नहीं आये हैं। अभी झज्जर, बिहार और उत्तर प्रदेश पर नहीं आये हैं फिर खत्म कैसे करेंगे।

SHRI SHIVRAJ V. PATIL : The inhabitants of Lakshadweep, Minicoy and Amandivi islands are tribals. According to the original order issued by the Government of India, under the Constitution, a person who is born or who is living in the island is a tribal. One officer has interpreted this order of the Government of India and in his interpretation he has said that a person who is born in the mainland to the inhabitants of the island shall not be treated as a tribal.

So, if he is born in a hospital on the advice given by a medico, even that child will not be treated as a tribal. Therefore, the Government of India is coming out with a new order and according to the new order, the Government of India proposes to give the status of a tribal to a child born to the inhabitants of the Island in the hospital on the mainland. This is a good order. We appreciate it. And this is being done in order to remove the difficulty which is faced by the inhabitants of this Island.

But one more difficulty also arises out of this order. Now, if the inhabitants of the Island are living on the mainland and a child is born on the mainland, then he would not be treated as a tribal. In order to give him the status of a tribal, the lady would be required to go back to the Island, give birth to the child and only then the status of a tribal will be given to that child. It also creates difficulty.

Our hon. Deputy-Speaker also comes from those Islands and the Leader of Opposition had written a letter to the Prime Minister suggesting one point. Any person who is living on the mainland, who is originally from the Island, if his child is born on the mainland, if that child is born not only on the advice given by a Medical Officer, a doctor, but the one who is also serving on the mainland, one who is studying on the mainland and one who is doing something on the mainland, and any child born to the inhabitants of the Island should get the status of a tribal. If this is done, all the difficulties can be removed. So, I thought that we can suggest this point in the course of the debate to get an authentic reply from the hon. Home Minister. This issue is such that it should be looked into. Our brothers and sisters who are living on those Islands should not face any difficulty in getting the privileges and rights which are given to the tribals coming from that area.

SHIR L.K. ADVANI: Shri Shivraj Patil has raised an issue which directly relates to Lakshadweep. But you are aware that today, the classification of people, which includes Tribes or Scheduled Castes, varies from State to State and, very often, it happens that a community which is described as a Scheduled Caste in one State is not a Scheduled Caste in another State or a Scheduled Tribe in one State is an OBC in another State. These things happen.

Last year, when I went to Lakshadweep, it was then I discovered that they have this problem that if a child is born in a hospital in Cochin or Ernakulam, then he is not recognised as a tribal. I felt that this needs to be corrected. This has been going on for so many years. I thought that it must be corrected. Therefore, this was undertaken. Then, it has been pointed out again that there are other problems that arise from that, though this is a welcome step. When your slip came, I was asking whether the Law Minister is still here or not. If he were here, I would have certainly consulted him and given a final reply. Otherwise, on this point, I can only say that I will examine the problems that you have raised. But so far as we are concerned, we are committed to seeing that a child who is born on the mainland in Cochin, Ernakulam or Trivandrum, on that account, he does not lose his tribal character.

SHRI RAM VILAS PASWAN : There are service holders. लक्षद्वीप के लोग दिल्ली में भी नौकरी करते हैं और यदि यहां बच्चा पैदा हुआ तो ट्राइबल नहीं माना जाएगा, इसकी कोई तुक नहीं है। इसलिए मेरा आग्रह है कि एक कानून बनाइए कि शैडयूल्ड कास्ट्स और शैडयूल्ड ट्राइब्ज़ का आदमी जहां कहीं भी जाएगा, वह शैडयूल्ड कास्ट्स और ट्राइब्ज़ ही माना जाएगा। यदि आप इस प्रकार को संशोधन ले आते हैं तो सारी समस्या सुलझ जाएगी।

MR. SPEAKER: I think the attention of the hon. Minister is drawn.

श्री लालकृष्ण आडवाणी : मैंने इसीलिए अपना उत्तर देने से पहले कठिनाई का भी उल्लेख किया कि अब तक की प्रैक्टिस है कि अलग-अलग स्टेट्स में शैडयूल्ड कास्ट्स और ट्राइब्ज़ की लिस्टें अलग-अलग हैं।

13.00 hrs. अध्यक्ष महोदय, ऐसा नहीं है कि एक स्थान पर अगर कोई शेडयूल्ड ट्राइब है, तो वह सारे हिन्दुस्तान में शेडयूल्ड ट्राइब माना जाए। वह प्रैक्टिस नहीं है। उसकी अपनी कुछ कठिनाइयां होंगी, लेकिन आपने जो बात कही है, उसकी ओर ध्यान देकर, जो भी समुचित होगा, सरकार उसका समाधान करेगी।

श्री राम विलास पासवान: झज्जर के बारे में बताइए।

श्री लालकृष्ण आडवाणी : अध्यक्ष महोदय, मुझे बताया गया है कि उसका यहां काफी उल्लेख हुआ है।

श्री राम विलास पासवान:Not a single Minister has touched that point. यहां इस बारे में किसी ने कोई जवाब नहीं दिया है। डा. सत्यनारायण जटिया जी ने कहा कि मेरा वैलफेयर का काम है। मेरा यह काम नहीं है। हम इस प्रश्न को रोज उठा रहे हैं और कोई मंत्री जवाब नहीं दे रहा है। कल उन्होंने कह दिया कि That is the job of the Home Minister and he did not reply to it.

डॉ. सुशील कुमार इन्दौरा (सिरसा) : अध्यक्ष महोदय, रोजाना झज्जर के प्रकरण की चर्चा कर दी जाती है। ऐसा कुछ नहीं है, जैसा सदस्य कह रहे हैं। इस प्रकरण के बारे में महोदय आपके सामने सारी चर्चा सदन में हो चुकी है।

अध्यक्ष महोदय : मैंने किसी को इस बारे में बोलने की इजाजत नहीं दी है। मैं केवल मंत्री जी का जवाब सुनना चाहता हूं।

डॉ. सुशील कुमार इन्दौरा: महोदय, इसकी जांच एक डिवीजनल कमिश्नर के स्तर के अधिकारी द्वारा की जा चुकी है। वह अधिकारी भी दलित जाति के ही हैं जिन्होंने इसकी जांच की है। जांच प्रतिवेदन को ज्यों का त्यों सरकार ने स्वीकार कर लिया है। इसमें ऐसी कोई बात नहीं है जिसकी चर्चा यहां की जाए। …( व्यवधान)

श्री लालकृष्ण आडवाणी :राम विलास जी, आपको इस बात की जानकारी है कि अनेक ऐसे सवाल है, जिनमें केन्द्रीय सरकार, खासकर के जिनका सम्बन्ध अपराध से होता है, हम चाहते हुए भी सदन को जानकारी वही देंगे, जो हमें राज्य सरकार की ओर से दी गई होती है। उसके अलावा और कोई जानकारी नहीं दे सकते हैं।

श्री राम विलास पासवान: अध्यक्ष महोदय, मैं मंत्री जी के ध्यान में यही बात लाना चाहता हूं कि जो जानकारी वे सदन को दे रहे हैं, वह राज्य सरकार द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी के आधार पर नहीं है। कालिंग अटेंशन के जवाब में आपने राज्य सरकार की ओर से प्राप्त जानकारी के आधार पर सदन में कहा कि अपराधियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की गई है। इसमें मेरा सिर्फ इतना ही कहना है कि आप सदन को यह बतला दीजिए की पांच दलितों की हत्या हुई है, इस प्रकरण में कोई आदमी, कोई अफसर या कोई कलप्रिट आज की तारीख में जेल में है कि नहीं ?

श्री लालकृष्ण आडवाणी :हो सकता है, कोई बेल पर चला गया हो।

श्री अजय सिंह चौटाला (भिवानी): अध्यक्ष महोदय, इस प्रकरण में कई लोगों को जेल हुई है।

श्री राम विलास पासवान: अध्यक्ष महोदय, मैं श्री अजय सिंह चौटाला से यह बात नहीं सुनना चाहता हीं। इस बारे में होम मनिस्टर बताएं कि क्या कोई आज की तारीख में जेल में है, यदि है, तो कौन-कौन हैं ?

श्री लालकृष्ण आडवाणी :अध्यक्ष महोदय, दिनांक १८ अगस्त, २००३ को हमें हरियाणा सरकार की ओर से जो जानकारी दी गई है है उसके अनुसार मैं सदन को सूचित करना चाहता हूं-Departmental inquiry was ordered against one Nayab Tehsildar and 13 police officers including Shri Narendra Singh, the then DSP of Jajjhar. Major punishment of stoppage of two future increments with permanent effect has been given to each of them. The inquiry against the DSP, one Nayab Tehsildar and one Head Constable is under process.

SHRI RAM VILAS PASWAN (HAJIPUR): Nobody is in jail. सर, पांच आदमी मारे गए हैं। Not a single person is in jail. आप होम मनिस्टर हैं। आपकी जवाबदेही है।

श्री बसुदेव आचार्य : अध्यक्ष महोदय, पांच दलित मारे गए हैं और केवल दो इन्क्रीमेंट रोके गए हैं। क्या यह मेजर पनिश्मेंट है ?…( व्यवधान)

अध्यक्ष महोदय : आप बैठिए। मैं आपकी बात नहीं, बल्कि मंत्री जी को सुनना चाहता हूं। कृपया आप बैठिए।

डॉ. सुशील कुमार इन्दौरा: अध्यक्ष महोदय, जिस समय यह घटना हुई थी उस समय झज्जर में डी.सी. दलित था, एस.डी.एम. दलित वर्ग से था और एस.पी. भी दलित जाति का था। जो अफसर थे, उन्होंने कोई गोलियां नहीं चलाईं, लेकिन फिर भी जांच की गई और जो दोषी पाए गए, उन्हें सजा दी गई।

अध्यक्ष महोदय : इन्दौरा जी, आप बैठिए। रामदास आठवले जी, आप भी बैठिए।

श्री लालकृष्ण आडवाणी : बसुदेव आचार्य जी, आपको तो जानकारी है, पश्चिम बंगाल की सरकार पर अपराधों के संबंध में कितने आरोप लगते रहे थे, लेकिन कभी हमने अपनी जानकारी नहीं दी, मुझे जो जानकारी थी, वह मैंने कभी नहीं दी। मैंने सदन में आकर वही जवाब दिया जो पश्चिमी बंगाल सरकार ने दिया। मैं स्वयं मर्यादा का पालन करता हूं। इसलिए मुझे आई.बी. की रिपोर्ट क्या मिलती है, वह जानकारी भी मैंने कभी सदन में नहीं दी। सिर्फ वही जानकारी दी, जो पश्चिमी बंगाल सरकार ने हमें दी। And that applies to the Government of West Bengal and that applies to the Haryana Government also.… (Interruptions)

SHRI BASU DEB ACHARIA : Are you satisfied with the punishment given to the police officers ? पांच दलितों की हत्या हुई है और केवल दो इन्क्रीमेंट रोके गए हैं। क्या आप इस पनिश्मेंट से सैटिस्फाइड हैं ?

अध्यक्ष महोदय : बसुदेव आचार्य जी, आप बैठिए। मैं आपको बाद में बोलने का समय दूंगा।

MR. SPEAKER: Shri Basu Deb Acharia, I am disallowing your question. I am not allowing your question.

… (Interruptions)

अध्यक्ष महोदय : रामदास जी, कृपया आप बैठिए।

…( व्यवधान) अध्यक्ष महोदय : सदन में यह क्या चल रहा है?

SHRI PRAVIN RASHTRAPAL (PATAN): The question is that adequate punishment has not been given to those who have killed five dalits. Just stopping two increments is not sufficient for a Government officer. For killing a person, the punishment is capital punishment, that is, hanging. Here five dalits have been killed, but none has been arrested. The Central Government cannot run away from its responsibility of taking action against them under the Central Act, that is under the Prevention of Atrocities against the Scheduled Castes/Scheduled Tribes Act. … (Interruptions)

MR. SPEAKER: It seems the House does not want a reply from the Minister. This was a special arrangement made that the hon. Minister will give the reply to the House. If Members do not want to listen to the hon. Minister, he will conclude his speech. Let him speak. Why do you not allow him to speak?

SHRI L.K. ADVANI: These are the limitations of the Constitution and the parliamentary practice. This has been the general practice always that अगर किसी स्टेट के लॉ र्एेड आर्डर से संबंधित कोई सवाल है तो हम वहां से जानकारी प्राप्त करके, जो जानकारी स्टेट देता है उसे हम ज्यों की यों देते हैं द्भ चाहे बिहार की सरकार, पश्चिम बंगाल या हरियाणा की सरकार हो।…( व्यवधान)

SHRI RAM VILAS PASWAN : This is not the question of Haryana.

चाहे किसी भी पार्टी की सरकार हो, एससी, एसटी पर जुल्म एवं अत्याचार हो, चाहे कांग्रेस, बीजेपी, आरजेडी या चौटाला जी की सरकार हो, आपकी जवाबदेही है कि आप एससी, एसटी को प्रोटेक्शन दीजिए और उसकी रिपोर्ट मंगवाइए, यह मैं आपसे कहना चाहता हूं।It is not the question of Haryana only.

ाी लालकृष्ण आडवाणी :जवाबदेही हमारी है और केवल मात्र दलित केर् ौलए ही नहीं, अगर कहीं पर, किसी के साथ भी अत्याचार होता है तो उसके साथ हमारी जवाबदेही होती है। Internal security is our responsibility. It is the responsibility of the Central Government.

आज संविधान में हमारे ऊपर जो जवाबदारी है, उसके अनुरूप सेंट्रल गवर्नमेंट के अधिकार कहें, उन पर मर्यादा स्टेट गवर्नमेंट और सेंट्रल गवर्नमेंट के अधिकारों के बीच में जो सीमा, लक्ष्मण रेखा बांधी गई है, उसका हमें पालन करना है। महोदय, एक स्टेज ऐसी भी आई जब स्टेट गवर्नमेंट ने आपत्ति की कि आप अपने अधिकार यहां क्यों भेज रहे हैं, आप मत भेजिए, इस प्रकार आपत्ति करने वाले लोग भी थे। लेकिन इन सब बैंतों के बावजूद भी यही कोशिश रही है कि कहीं पर अगर मुझे लगता है,…( व्यवधान)

श्री राम विलास पासवान:महोदय, मैं पहली बार एससी के मामले में उप प्रधानमंत्री जी को सदन में इतना कमजोर देख रहा हूं। Do not be so helpless.ैल्पलैस मत होइए।

SHRI L.K. ADVANI: I am not pleading helplessness. In fact, in all the meetings of DGPs, Chief Secretaries and sometimes in the meetings of even the Home Ministers, this issue of limitation of the Central Government was raised. It is because of these limitations, though the Central Government would like to act on some issues, it does not have the authority to act under the present Constitution.

ाी राम विलास पासवान:आप पोटा लगाइए।…( व्यवधान)

श्री लालकृष्ण आडवाणी :हमें पोटा का भी अधिकार नहीं है।

संसदीय कार्य मंत्रालय में राज्य मंत्री तथा पर्यटन और संस्कृति मंत्रालय में राज्य मंत्री (श्रीमती भावनाबेन देवराजभाई चीखलीया) : अध्यक्ष महोदय, इस तरह ये बीच-बीच में खड़े होकर बोलेंगे तो कैसे जवाब पूरा होगा। ये बार-बार खड़े हो जाते हैं।…( व्यवधान)

अध्यक्ष महोदय : आप लोग बैठिए।

…( व्यवधान)MR. SPEAKER: Shri Ram Vilas Paswan, you want a reply from the Minister. Let the hon. Minister complete the reply. आप उत्तर सुनना नहीं चाहते हैं तो मंत्री जी उत्तर नहीं देंगे। यह कोई प्रश्न-काल नहीं है कि आप प्रश्न पूछेंगे। व्ैंृपया आप बैठिए।

…( व्यवधान)MR. SPEAKER: Mr. Minister, you can conclude now.

…( व्यवधान)अध्यक्ष महोदय : व्ैंृपया आप बैठिए। मंत्री जी, आप उत्तर दीजिए और आप जो चाहते हैं वह उत्तर दीजिए।

…( व्यवधान)MR. SPEAKER: Mr. Minister, you need not answer the questions which are raised here.

…( व्यवधान)अध्यक्ष महोदय : व्ैंृपया आप लोग बैठ जाइए।

…( व्यवधान)MR. SPEAKER: I have told the hon. Minister not to reply to the questions which are asked without my permission. He would reply only to questions which are asked with the permission of the Chair.

… (Interruptions)

SHRI L.K. ADVANI: I have just been informed that charge-sheets have been filed in the court against all the accused persons and trial is on. … (Interruptions)

इसमें जितने दलित लोग मारे गए हैं, उन सब के परिवारों को पांच-पांच लाख रुपएर् ौदए गए हैं और जो कमीशन ऑफ इंक्वायरी बनाई गई थी, उसकी जितनी रिकोमेंडेशंस हैं वह हरियाणा सरकार ने स्वीकार की हैं।…( व्यवधान)

डॉ. सुशील कुमार इन्दौरा:महोदय, यह बार-बार प्रश्न पूछेंगे?…( व्यवधान)

अध्यक्ष महोदय : इनका प्रश्न पूछने का अधिकार है, क्योंकि इन्होंने प्रश्न रेज़ किया है, लेकिन मैंने इन्हें वार्निंग दी है कि बार-बार प्रश्न नहीं पूछेंगे। मंत्री जी, आप बैंेलिए।

…( व्यवधान)MR. SPEAKER: Shri Ramdas Athawale, please sit down.

… (Interruptions)

अध्यक्ष महोदय : पासवान जी, आप बैठिए, मैंने आपको इजाजत नहीं दी है।

…( व्यवधान)अध्यक्ष महोदय : व्ैंृपया आप बैठिए। इन्दौरा जी, आप बैठिए, आप ऐसे क्यों कर रहे हैं, मैंने आपको इजाजत नहीं दी है।

…( व्यवधान)MR. SPEAKER: Only the hon. Minister’s speech will go on record. Nothing else will go on record.

(Interruptions) *श्री लालकृष्ण आडवाणी :अध्यक्ष जी, मैं समझता हूं कि मुझे और कुछ नहीं कहना है, सिवाए इसके कि कुल मिला कर कल जैसे बहस हुई, हम अगर इन दो बैंतों का इलाज करने में समर्थ हों कि समाज के अलग-अलग क्षेत्रों में जो नेतृत्व किए हुए हैं, उन्हें पूर्वाग्रह मुक्त होकर छुआछूत के खिलाफ अपने को कमिट करना चाहिए। जो दलित हैं, जिस प्रकार से गांधी जी ने कहा, मैं कोई बैंत सही या ग्ैंलत कह रहा हूं, इसका निर्णय इस आधार पर हो कि जो कमजोर से कमजोर व्यक्ति तुम्हारे सामने कल्पना में आ सकें, उनके ऊपर इसका क्या असर होगा। यह जो टचस्टोन उन्होंने दिया था, उसे जितनी मात्रा में हम लोग अपना सकें, उतनी मात्रा में हम इस समस्या का भी हल निकाल सकेंगे।…( व्यवधान)

   

*Not Recorded MR. SPEAKER: Hon. Members, there are two Calling Attention Notices.

…( व्यवधान)

अध्यक्ष महोदय : इसके ऊपर प्रश्न नहीं होते हैं।

…( व्यवधान)MR. SPEAKER: The hon. Finance Minister has requested that the IDBI Bill be considered today. If you all agree, we can skip lunch hour and take up the IDBI Bill and other business of the House. If you do not agree, then I feel I can keep the lunch on. After lunch, we can meet and start with the Calling Attention notices.

… (Interruptions)

DR. SUSHIL KUMAR INDORA : What about ‘Zero Hour’? … (Interruptions)

MR. SPEAKER: ‘Zero Hour’ will be taken up after Calling Attention notices, if time permits.

I adjourn the House to meet again at 2 p.m. as usual.

13.14 hrs. The Lok Sabha then adjourned for Lunch till Fourteen of the Clock.

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14.04 hrs. The Lok Sabha re-assembled after Lunch at four minutes past Fourteen of the Clock.

(Shri P.H. Pandian in the Chair) MR. CHAIRMAN: The House will now take up Calling Attention. Shri Ram Vilas Paswan.

… (Interruptions)

SHRI G.S. BASAVARAJ (TUMKUR): I have given notice. Kindly allow me at least one minute for raising some important problems.… (Interruptions)

MR. CHAIRMAN : It is not the ‘Zero Hour.’ SHRI RAMESH CHENNITHALA (MAVELIKARA): Sir, since it is the last day of this Session, please give him a chance to raise the issue.… (Interruptions)

SHRI G.S. BASAVARAJ : Sir, please give me at least half-a-minute.… (Interruptions)

MR. CHAIRMAN: Let it be any day. There is a procedure. Shri Ram Vilas Paswan to call the attention of the hon. Deputy Prime Minister.

… (Interruptions)

SHRI G.S. BASAVARAJ : Your discretion is there. As a special case, please give me at least half a minute.… (Interruptions) Everyday, farmers are dying in Karnataka. There is no fodder, no food and there is nothing.… (Interruptions) They are not giving rice. The State is being discriminated.

SHRI RAMESH CHENNITHALA : The farmers of Karnataka are suffering.… (Interruptions)

MR. CHAIRMAN: I cannot allow you. It should be in the List of Business. It is not in the List of Business. Please sit down.

… (Interruptions)

SHRI G.S. BASAVARAJ : Please give me two minutes time to raise it.… (Interruptions)

SHRI RAMESH CHENNITHALA : Sir, I would request you that after the Calling Attention, please allow him to raise it.

MR. CHAIRMAN: We cannot re-list the business. Already, the listed business is there.

SHRI G.S. BASAVARAJ : At least, give me one minute.… (Interruptions)