State Consumer Disputes Redressal Commission
Ravi Krishan Swamkar vs Jeevan Jyoti Hospital on 7 February, 2024
Cause Title/Judgement-Entry STATE CONSUMER DISPUTES REDRESSAL COMMISSION, UP C-1 Vikrant Khand 1 (Near Shaheed Path), Gomti Nagar Lucknow-226010 Complaint Case No. C/2009/43 ( Date of Filing : 28 Jul 2009 ) 1. Ravi Krishan Swamkar a ...........Complainant(s) Versus 1. Jeevan Jyoti Hospital a ............Opp.Party(s) BEFORE: HON'BLE MR. SUSHIL KUMAR PRESIDING MEMBER HON'BLE MRS. SUDHA UPADHYAY MEMBER PRESENT: Dated : 07 Feb 2024 Final Order / Judgement (सुरक्षित) राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग , उ0प्र0 , लखनऊ परिवाद संख्या-43/2009 1.
राम कृष्ण स्वर्णकार पुत्र श्री फूल चंद स्वर्णकार।
2. मास्टर दिव्यांश (मायनर) पुत्र एवं संरक्षक श्री राम कृष्ण स्वर्णकार।
3. बेबी नन्दनी (मायनर) पुत्री एवं संरक्षक श्री राम कृष्ण स्वर्णकार।
समस्त निवासीगण मोहल्ला राजा बाजार, वार्ड गायनपुर 7, भदोही, जिला सन्त रवि दास नगर।
परिवादीगण बनाम
1. जीवन ज्योति हॉस्पिटल, द्वारा डायरेक्टर/प्रोपराइटर।
2. डा0 (श्रीमती) वन्दना बंसल पत्नी डा0 ए.के. बंसल, निवासी जीवन ज्योति हॉस्पिटल, 162-बाई का बाग (लोदर रोड) जिला इलाहाबाद।
विपक्षीगण समक्ष:-
1. माननीय श्री सुशील कुमार, सदस्य।
2. माननीय श्रीमती सुधा उपाध्याय, सदस्य।
परिवादीगण की ओर से उपस्थित : श्री अशोक शुक्ला। विपक्षीगण की ओर से उपस्थित : श्री मनीष मेहरोत्रा एवं सुश्री मांडवी मेहरोत्रा। दिनांक: 21.02.2024 माननीय श्री सुशील कुमार , सदस्य द्वारा उद्घोषित निर्णय
1. यह परिवाद, विपक्षीगण के विरूद्ध मृतक श्रीमती सुनीता स्वर्णकार के इलाज में लापवाही बरतने के कारण अंकन 20,00,000/-रू0 जीवन हानि की क्षतिपूर्ति के लिए, अंकन 40,00,000/-रू0 परिवादी संख्या-2 एवं 3 के पक्ष में माता के संरक्षण से वंचित होने के लिए तथा इस राशि पर 12 प्रतिशत ब्याज प्राप्त करने के लिए और अंकन 25,000/-रू0 परिवाद व्यय के लिए प्रस्तुत किया गया है।
2. परिवाद के तथ्य संक्षेप में इस प्रकार हैं कि परिवादी संख्या-1 की पत्नी एवं परिवादी संख्या-2 एवं 3 की माता, श्रीमती सुनीता स्वर्णकार गर्भवती होने पर दिनांक 9.7.2007 एवं दिनांक 21.7.2007 को परीक्षण कराने के लिए विपक्षी संख्या-2 के पास गयी थी, जिनके द्वारा दवाए लिखी गयी। अनेक्जर संख्या-1 एवं 2 उनके द्वारा जारी स्लिप है। दिनांक 9.8.2007 को अल्ट्रासोनोग्राफी करायी गयी, जिसकी रिपोर्ट अनेक्जर संख्या-3 है, इस रिपोर्ट के अनुसार प्रेगनेन्सी 36 सप्ताह की थी, परन्तु ग्रेड-1 की Placenta Previa नामक बीमारी पायी गयी। दिनांक 20.8.2007 को 2-3 बजे के बीच सांय अस्पताल में भर्ती कर लिया गया। तत्समय डा0 को ज्ञात था कि मरीज ग्रेड-1 की Placenta Previa नामक बीमारी से ग्रसित है और अन्य कोई बीमारी नहीं है, इसलिए उनके द्वारा Foetus की Ultrasonography नहीं करायी गयी, केवल पैथोलॉजीकल रिपोर्ट दिनांक 20.8.2007 को प्राप्त की गयी, जिसमें HGB 8.9 नीचे दर्शाया गया था। दिनांक 21.8.2007 को सर्जरी करना तय किया गया। ग्रेड-1 की Placenta Previa नामक बीमारी होने के कारण विपक्षीगण को ज्ञात था कि आपरेशन करते समय ब्लड की आवश्यकता हो सकती है, क्योंकि शरीर से ब्लड की हानि हो सकती है। दिनांक 21.8.2007 की सुबह 7.00 बजे परिवादी संख्या-3 का जन्म हुआ तत्समय बच्ची की माता की स्थिति सामान्य थी और कुछ भी असामान्य नहीं था। सुबह 8.00 बजे दूसरे बेड पर शिफ्ट किया गया, इसी तिथि को 10.00 बजे सुबह पेट एवं छाती में दर्द हुआ, इसके बाद श्वांस लेने में परेशानी प्रारम्भ हुई। डा0 वन्दना बंसल सुबह 11.00 बजे उपस्िथत आयीं और मरीज को ICCU में भर्ती कराया। पारिवारिक सदस्यों का अन्दर जाना रोक दिया गया तथा केवल अनियमित ब्लड प्रेशर के बारे में सूचना दी गयी। मरीज को दिन भर वेन्टीलेटर पर रखा गया। ब्लड का भी प्रबन्ध किया गया, परन्तु 11.00 बजे शाम को उनकी मृत्यु हो गयी। दिनांक 22.8.2007 को मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किया गया और मृत्यु का कारण Amnoitic Fluid Embolism with A.R.D.S. + MODS + Cardio Respiratory Arrest बताया गया। मृत्यु प्रमाण पत्र की प्रति पत्रावली पर अनेक्जर संख्या-4 है। यह प्रमाण पत्र विपक्षीगण द्वारा अपनी सुरक्षा के लिए फर्जी बनवाया गया और मृत्यु का वास्तविक कारण छिपाया गया। मृत्यु के कारण का संदेह उत्पन्न होने पर मृत शरीर को पोस्ट मार्टम के लिए भेजा गया, जिसमें पाया गया कि पेट एवं छाती के खाली स्थान में दो लीटर खून इकट्ठा था, जो मृत्यु कारित करने के लिए पर्याप्त था। पोस्ट मार्टम रिपोर्ट में यह भी पाया गया कि Ribs No. II, III, IV and V टूटी हुई थीं तथा फेफड़े एवं लीवर में भी ब्लड जमा था। पोस्ट मार्टम की रिपोर्ट अनेक्जर संख्या-5 है। इसके बाद तीन सदस्यों का एक मेडिकल बोर्ड बनाया गया, जिनके समक्ष BHT प्रस्तुत की गयी तथा डा0 वन्दना बंसल का बयान भी लिखा गया, जिनके द्वारा निष्कर्ष दिया गया कि मेडिकल असावधानी बरती गयी है। मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट अनेक्जर संख्या-6 है। विपक्षीगण के विरूद्ध अपराध संख्या-131/07 धारा 304-ए दर्ज कराया गया, जिस पर जांच करने के पश्चात आरोप पत्र प्रस्तुत किया गया, जिसकी प्रति अनेक्जर संख्या-7 है। विपक्षीगण द्वारा फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र तैयार किया गया और मृत्यु का असत्य कारण दर्शित किया गया। पोस्ट मार्टम रिपोर्ट दिनांक 23.8.2007 से उनके इस कृत्य की पुष्टि होती है। यथार्थ में Amnoitic Fluid Embolism से मृत्यु कारित नहीं हुई है, क्योंकि पेट एवं छाती के खाली स्थान में भारी मात्रा में खून जमा था, जिससे जाहिर होता है कि Abdomen में आपरेशन के दौरान किसी प्रकार का Cut लगा, जिसके संबंध में सम्यक सावधानी नहीं बरती गयी, जिसके कारण सेप्टीसीमिया विकसित हो गया और श्वांस लेने में बाधा होने के कारण दिनांक 22.8.2007 को मृत्यु कारित हो गयी।
3. परिवाद पत्र के समर्थन में शपथ पत्र तथा अनेक्जर 1 लगायत 7 प्रस्तुत किये गये। सुसंगत दस्तावेजों का विश्लेषण आगे चलकर किया जाएगा।
4. विपक्षी संख्या-1 एवं 2 की ओर से प्रस्तुत लिखित कथन में परिवादी संख्या-1 की पत्नी का अस्पताल में भर्ती होना, दिनांक 9.8.2007 को अल्ट्रासोनोग्राफी की रिपोर्ट के अनुसार Placenta Previa ग्रेड-1 की बीमारी का पाया जाना तथा HGB 8.9 पाया जाना स्वीकार किया है, परन्तु विपक्षीगण के विरूद्ध इलाज के दौरान लापरवाही के तथ्य से इंकार किया गया है। विपक्षी संख्या-2, उच्च शिक्षित विशेषज्ञ सर्जन (Obstetrics & Gynaecology) हैं तथा 15 वर्षों का अनुभव है। अब तक हजारों गर्भवती महिलाओं का परीक्षण किया है तथा आपरेशन किया है। दिनांक 9.8.2007 को अल्ट्रासोनोग्राफी करायी जा चुकी थी, इसलिए पुन: दिनांक 20.8.2007 को अल्ट्रासोनोग्राफी की आवश्यकता नहीं थी। BHT में सम्पूर्ण इलाज प्रक्रिया का उल्लेख किया गया है। मरीज का जीवन बचाने का हर सम्भव प्रयास किया गया। मरीज को ICU में भर्ती किया गया तथा डा0 विवेक गुप्ता तथा डा0 पी.सी. सक्सेना Cardiologist तथा डा0 आशीष टण्डन, (MD Chest) को भी बुलवाया गया तथा DIG श्री पी.के. तिवारी के अनुरोध पर सर गंगा राम हॉस्पिटल, दिल्ली के वरिष्ठ सलाहकार से दूरभाष पर वार्ता की गयी, जिनके द्वारा मरीज को दिये जा रहे इलाज को सही दिशा में दिया गया इलाज बताया गया। मृत्यु कारण में कोई तथ्य नहीं छिपाया गया। Amnoitic Fluid Embolism किसी भी मरीज में विकसित हो सकता है। यह मरीज की शारीरिक दशा पर निर्भर करता है, इसी बीमारी के कारण मरीज अचेत हो गयी तथा श्वासन प्रक्रिया बाधित हुई। दिल एवं दिमाग में समस्या उत्पन्न हुई। इस समस्या से निजात पाने के लिए कार्डियक मसाज दिया गया था। किसी भी ह्दय घात को नियंत्रित करने के लिए कार्डियक मसाज मेडिकल सांइस के अनुसार स्वीकार्य तरीका है। मरीज पूर्व से ही Amnoitic Fluid Embolism से ग्रसित थी, जिसमें जीवन का खतरा रहता है। मरीज की मृत्यु कार्डियक अरेस्ट के कारण हुई है, जिसमें डा0 का किसी प्रकार का कोई दोष नहीं है। यह भी उल्लेख किया गया कि डा0 का दायित्व केवल मेडिकल साइंस के अनुसार पूर्ण सावधानी से मरीज को इलाज प्रदत्त कराना है। डा0 कभी भी यह दायित्व नहीं लेता और न ले सकता है कि मरीज को हर हाल में स्वस्थ कर दिया जाएगा, इसलिए परिवाद खारिज होने योग्य है।
5. लिखित कथन के समर्थन में शपथ पत्र तथा अनेक्जर 1 लगायत 4 दस्तवोज प्रस्तुत किये गये।
6. उभय पक्ष के विद्वान अधिवक्तागण को सुना गया तथा पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन किया गया।
7. पक्षकारों द्वारा प्रस्तुत किये गये अभिवचनों, साक्ष्यों एवं प्रस्तुत किये गये तर्कों के आधार पर प्रस्तुत केस में निम्नलिखित परिणाम स्थापित हैं :-
(1.) अल्ट्रासोनोग्राफी रिपोर्ट के अनुसार मरीज Placenta Previa नामक बीमारी से ग्रसित थी। इसी बीमारी के कारण बच्चेदानी के मुँह के पास खून का रिसाव होता है।
(2.) मृत्यु प्रमाण पत्र के अनुसार मृत्यु का कारण निम्नलिखित दर्शाया गया है :-
(i) Amnoitic Fluid Embolism, जिसका तात्पर्य यह है कि गर्भ में स्थित बच्चे के आस-पास एक Fluid मौजूद था, जो रक्त में शामिल हो सकता है और जिसके कारण मृत्यु कारित हो सकती है। उपरोक्त के अलावा A.R.D.S. + MODS + Cardio Respiratory Arrest मृत्यु का कारण था।
(3.) मरीज के मृत शरीर का पोस्ट मार्टम कराया गया। पोस्ट मार्टम रिपोर्ट के अनुसार मरीज के शरीर में निम्न दो असामान्य तत्व पाये गये :-
(i) पेट एवं छाती के खाली स्थान में दो लीटर खून पाया गया। (ii) II, III, IV and V Ribs टूटी हुई पायी गयी। (4.) मेडिकल बोर्ड के अनुसार डा0 के स्तर से इलाज के दौरान असावधानीक स्थिति जाहिर हुई है, जैसा कि ऊपर उल्लेख किया गया है कि Placenta Previa के कारण बच्चेदानी के मुँह के आस-पास ब्लीडिंग हो सकती है तथा Amnoitic Fluid Embolism के कारण बच्चे के आस-पास Fluid रक्त में शामिल होकर मरीज के शेष शरीर में संचारित हो सकता है तथा पोस्ट मार्टम रिपोर्ट के अनुसार दो लीटर खून पेट एवं छाती के खाली स्थान में मौजूद होने के कारण तथा Amnoitic Fluid Embolism के मिश्रण से ARDS (Acute respiratory distress syndrome) उत्पन्न हो सकता है, जिसके कारण Cardio Respiratory Arrest कारित होता है। इस स्थिति में मरीज को कार्डियक मसाज दिया जाना मेडिकल साइंस में अनुज्ञेय है। कार्डियक मसाज देते समय मरीज की Ribs में क्षति कारित हो सकती है। अत: इन सब में डा0 के स्तर से लापरवाही कारित होना नहीं माना जा सकता, परन्तु पोस्ट मार्टम रिपोर्ट के अनुसार मरीज के पेट एवं छाती के खाली स्थान में दो लीटर खून का मौजूद होना तथा डा0 को इस तथ्य की जानकारी न होना इस स्थिति की ओर इशारा करता है कि आपरेशन के दौरान किसी नस में किसी प्रकार का Cut लगा है, इस Cut के कारण खून इकट्ठा हुआ है और दो लीटर खून निकलने के कारण मरीज की परेशानी अधिक जटिल हुई है, जो Cardio Respiratory Arrest की समस्या तक पहुँच गयी। चूंकि मरीज पूर्व से Placenta Previa नामक बीमारी से ग्रसित थी। Cardio Respiratory Arrest के बाद मरीज के जीवन को बचाने का विपक्षीगण की ओर से अथक प्रयास किया गया। अन्य विशेषज्ञ डाक्टरों को बुलवाया गया और सर गंगा राम हॉस्टिल, नई दिल्ली के विशेषज्ञ डा0 से भी दूरभाष पर सलाह ली गयी, इसलिए मरीज के जीवन को बचाने में डा0 के स्तर से की गयी लापरवाही को अनियमित या मेडिकल साइंस के विपरीत नहीं माना जा सकता, परन्तु पुन: उल्लेख करना पड़ रहा है कि पेट एवं छाती के खाली स्थान में दो लीटर खून की मौजूदगी और इस खून की मौजूदगी का कोई एहसास डा0 को न होना लापरवाही स्वंय स्थापित है, के सिद्धान्त को स्थापित करती है। दो लीटर खून निकलने के कारण ही अग्रिम जटिलताएं विकसित हो सकती हैं। अत: विपक्षीगण को केवल इस सीमा तक लापरवाही के लिए दोषी माना जा सकता है कि Cardio Respiratory Arrest, कार्डियक मसाज देने के कारण Ribs टूटने के बिन्दु पर डा0 को लापरवाही का दोषी नहीं माना जा सकता, क्योंकि इस प्रक्रिया के दौरान Ribs में क्षति कारित हो सकती है, इस स्थिति में डा0 का मुख्य उद्देश्य श्वांसन क्रिया को सुचारू बनाने का होता है न कि शरीर के किसी अन्य भाग की सुरक्षा का। अत: इस बिन्दु को डा0 के स्तर से लापरवाही कारित होना नहीं माना जा सकता।
8. उपरोक्त विवेचना का निष्कर्ष यह है कि मरीज के पेट एवं छाती के खाली स्थान में दो लीटर खून का इकट्ठा होना और डा0 को इसका एहसास न होना लापरवाही का द्योतक है और विपक्षीगण एकल एवं संयुक्त रूप से इस सीमा तक परिवादीगण के प्रति क्षतिपूर्ति के लिए उत्तरदायी हैं।
9. यद्यपि परिवादी संख्या-1 द्वारा पत्नी के सानिध्य से विमुख होने पर अंकन 20,00,000/-रू0 क्षतिपूर्ति की मांग की गयी है तथा परिवादी संख्या-2 एवं 3 द्वारा माता के स्नेह से वंचित होने के आधार पर अंकन 40,00,000/-रू0 की मांग की गयी है, परन्तु इस केस के समस्त तथ्यों एवं परिस्थितियों, जिनका उल्लेख ऊपर किया गया है, को दृष्टिगत रखते हुए समस्त परिवादीगण के पक्ष में अंकन 15,00,000/-रू0 की क्षतिपूर्ति का आदेश देना विधिसम्मत है। इस प्रकार इस राशि पर परिवाद प्रस्तुत करने की तिथि से वास्तविक भुगतान की तिथि तक 9 प्रतिशत प्रतिवर्ष साधारण ब्याज तथा परिवाद व्यय के रूप में अंकन 15,000/-रू0 का आदेश भी देना उचित है।
आदेश
10. प्रस्तुत परिवाद इस सीमा तक स्वीकार किया जाता है कि विपक्षीगण को एकल एवं संयुक्त रूप से आदेशित किया जाता है कि वह समस्त परिवादीगण के पक्ष में अंकन 15,00,000/-रू0 (पन्द्रह लाख रूपये) इस निर्णय/आदेश की तिथि से 45 दिन के अन्दर मय 09 प्रतिशत प्रतिवर्ष साधारण ब्याज की दर से अदा किया जाय। ब्याज की गणना परिवाद प्रस्तुत करने की तिथि से वास्तविक भुगतान की तिथि तक की जाएगी।
विपक्षीगण को यह भी आदेशित किया जाता है कि वह परिवादीगण को अंकन 15,000/-रू0 (पन्द्रह हजार रूपये) भी उपरोक्त अवधि में भुगतान किया जाय।
आशुलिपिक से अपेक्षा की जाती है कि वह इस निर्णय को आयोग की वेबसाइट पर नियमानुसार यथाशीघ्र अपलोड कर दे।
(सुधा उपाध्याय) (सुशील कुमार) सदस्य सदस्य लक्ष्मन, आशु0, कोर्ट-3 [HON'BLE MR. SUSHIL KUMAR] PRESIDING MEMBER [HON'BLE MRS. SUDHA UPADHYAY] MEMBER