State Consumer Disputes Redressal Commission
U. P .S. E. B. vs Hari Shankar Sharma on 6 December, 2021
Cause Title/Judgement-Entry STATE CONSUMER DISPUTES REDRESSAL COMMISSION, UP C-1 Vikrant Khand 1 (Near Shaheed Path), Gomti Nagar Lucknow-226010 First Appeal No. A/2001/739 ( Date of Filing : 17 Apr 2001 ) (Arisen out of Order Dated in Case No. of District State Commission) 1. U. P .S. E. B. A ...........Appellant(s) Versus 1. Hari Shankar Sharma A ...........Respondent(s) BEFORE: HON'BLE MR. SUSHIL KUMAR PRESIDING MEMBER HON'BLE MR. Vikas Saxena JUDICIAL MEMBER PRESENT: Dated : 06 Dec 2021 Final Order / Judgement (मौखिक) राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग , उ0प्र0 , लखनऊ अपील संख्य ा-739/2001 (जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष फोरम, बुलन्दशहर द्वारा परिवाद संख्या-385/1997 में पारित निणय/आदेश दिनांक 21.03.2001 के विरूद्ध) यूपीएसईबी, (नाउ यू.पी. पावर कारपोरेशन लिमिटेड) द्वारा एक्जीक्यूटिव इंजीनियर, इलेक्ट्रिसिटी डिस्ट्रीब्यूशन डिवीजन-III, बुलन्दशहर। अपीलार्थी/विपक्षी बनाम हरि शंकर शर्मा पुत्र खचेड़ू मल, निवासी ग्राम इस्माइला, पोस्ट आफिस सराय छबीला, परगना बरन, जिला बुलन्दशहर। प्रत्यर्थी/परिवादी समक्ष:- 1.
माननीय श्री सुशील कुमार, सदस्य।
2. माननीय श्री विकास सक्सेना, सदस्य।
अपीलार्थी की ओर से उपस्थित : श्री इसार हुसैन, विद्वान अधिवक्ता। प्रत्यर्थी की ओर से उपस्थित : श्री सुशील कुमार शर्मा, विद्वान अधिवक्ता। दिनांक: 06.12.2021 माननीय श्री सुशील कुमार , सदस्य द्वारा उद्घोषित निर्णय
1. परिवाद संख्या-385/1997, हरि शंकर शर्मा बनाम उ0प्र0 राज्य विद्युत परिषद में विद्वान जिला उपभोक्ता आयोग, बुलन्दशहर द्वारा पारित प्रश्नगत निर्णय/आदेश दिनांक 21.03.2001 के विरूद्ध यह अपील योजित की गई है। इस निर्णय/आदेश द्वारा विद्वान जिला उपभोक्ता आयोग ने परिवाद स्वीकार करते हुए निम्नलिखित आदेश पारित किया गया :-
'' परिवादी का परिवाद स्वीकार किया जाता है तथा विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह 30 दिन के अन्दर परिवादी की विद्युत लाईन खींचकर परिवादी को विद्युत की आपूर्ति दिये जाना सुनिश्चित करे -2- तथा परिवादी को क्षतिपूर्ति हेतु 5000/-रू0 (पांच हजार रूपये) भी उक्त अवधि में भुगतान करे अन्यथा विपक्षी उक्त धनराशि पर दिनांक 22.04.2001 से तारीख भुगतान तक 15 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी परिवादी को भुगतान करने का जिम्मेदार होगा। ''
2. परिवाद पत्र के तथ्य संक्षेप में इस प्रकार हैं कि परिवादी ने ट्यूबवेल के लिए 5 हार्सपावर विद्युत कनेक्शन लेने के लिए वर्ष 1991 में आवेदन दिया था। वर्ष 1994 में लिखित अनुबंध हुआ था। दिनांक 31.03.1994 को लाईन एवं विद्युत आपूर्ति के आदेश जारी कर दिए गए थे, परन्तु लाईन नहीं खींची गई और न ही विद्युत की आपूर्ति की गई। दिनांक 26.03.1997 को लिखित नोटिस दिया गया, किंतु विद्युत आपूर्ति नहीं की गई, जिसके कारण अंकन 20,000/- रूपये प्रति वर्ष की हानि हुई, इसलिए परिवाद प्रस्तुत किया गया।
3. विपक्षी ने पैसा जमा करने के तथ्य को स्वीकार किया। विद्युति आपूर्ति जारी करने के आदेश को पारित करने के तथ्य को भी स्वीकार किया, परन्तु यह उल्लेख किया कि दिनांक 05.05.2014 को लईक अहमद, अवर अभियंता द्वारा बोरिंग स्थल का निरीक्षण किया गया तो यह पाया गया कि परिवादी लाईन बनाकर अपना ट्यूबवेल चला रहा था, इसलिए बिल बनाया गया और परिवादी बिलों का भुगतान नहीं कर रहा है।
4. विद्वान जिला उपभोक्ता आयोग ने श्री देवराज सिंह, एडवोकेट कमिश्नर को नियुक्त किया। एडवोकेट कमिश्नर द्वारा मौके पर किसी प्रकार की विद्युत आपूर्ति नहीं पाई गई। लाईन खींचे जाने का कोई संकेत नहीं पाया गया। इसी रिपोर्ट को आधार मानते हुए विद्वान जिला उपभोक्ता आयोग ने उपरोक्त वर्णित निर्णय/आदेश पारित किया गया।
5. इस निर्णय/आदेश को इन आधारों पर चुनौती दी गई है कि विद्वान जिला उपभोक्ता आयोग द्वारा पारित निर्णय/आदेश विधि विरूद्ध, -3- मनमाना, साक्ष्य के सही मूल्यांकन पर आधारित नहीं है, अपास्त होने योग्य है।
6. अपीलार्थी के विद्वान अधिवक्ता श्री इसार हुसैन तथा प्रत्यर्थी के विद्वान अधिवक्ता श्री सुशील कुमार शर्मा की बहस सुनी गई तथा प्रश्नगत निर्णय/आदेश एवं पत्रावली का अवलोकन किया गया।
7. अपीलार्थी/विपक्षी द्वारा इस तथ्य को स्वीकार किया गया है कि परिवादी/प्रत्यर्थी द्वारा दिनांक 23.03.1992 को पैसा जमा किया गया था। विद्युत आपूर्ति जारी करने का आदेश दिनांक 31.03.1994 को जारी किया गया था, परन्तु यथार्थ में विद्युत कनेक्शन जारी नहीं हुआ। विद्युत विभाग द्वारा केवल यह कथन किया गया कि दिनांक 05.05.1994 को स्थलीय निरीक्षण पर पाया गया कि परिवादी विद्युत का उपभोक्ता कर रहा है, परन्तु एडवोकेट कमिश्नर द्वारा पाया गया कि विद्युत का कोई उपभोग नहीं किया जा रहा है। लाईन खींचने का कोई सबूत नहीं है। अत: स्पष्ट है कि विद्वान जिला उपभोक्ता आयोग द्वारा पारित निर्णय/आदेश साक्ष्य पर आधारित है, इसमें कोई हस्तक्षेप अपेक्षित नहीं है। अपील तदनुसार निरस्त होने योग्य है।
आदेश
8. प्रस्तुत अपील निरस्त की जाती है।
पक्षकार अपना-अपना अपीलीय व्यय स्वंय वहन करेंगे।
आशुलिपिक से अपेक्षा की जाती है कि वह इस निर्णय/आदेश को आयोग की वेबसाइट पर नियमानुसार यथाशीघ्र अपलोड कर दे।
(विकास सक्सेना) (सुशील कुमार) सदस्य सदस्य लक्ष्मन, आशु0, कोर्ट-2 [HON'BLE MR. SUSHIL KUMAR] PRESIDING MEMBER [HON'BLE MR. Vikas Saxena] JUDICIAL MEMBER