State Consumer Disputes Redressal Commission
Canara Bank vs Ajay Kumar Bhattacharya on 22 March, 2017
Cause Title/Judgement-Entry STATE CONSUMER DISPUTES REDRESSAL COMMISSION, UP C-1 Vikrant Khand 1 (Near Shaheed Path), Gomti Nagar Lucknow-226010 First Appeal No. A/2010/2014 (Arisen out of Order Dated in Case No. of District State Commission) 1. Canara Bank a ...........Appellant(s) Versus 1. Ajay Kumar Bhattacharya a ...........Respondent(s) BEFORE: HON'BLE MR. Raj Kamal Gupta PRESIDING MEMBER HON'BLE MR. Mahesh Chand MEMBER For the Appellant: For the Respondent: Dated : 22 Mar 2017 Final Order / Judgement
राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, उ0प्र0, लखनऊ।
सुरक्षित अपील सं0-2014/2010 (जिला उपभोक्ता फोरम, गाजियाबाद द्वारा परिवाद संख्या-२०९/२००७ में पारित निर्णय/आदेश दिनांक-२४-०९-२०१० के विरूद्ध) केनरा बैंक शाखा इण्डस्ट्री एरिया साहिबाबाद गाजियाबाद द्वारा शाखा प्रबन्धक ।
.............अपीलार्थी बनाम अजय कुमार भट्टाचार्य पुत्र स्व0 श्री जे0सी0 भट्टाचार्य निवासी १६ बी/४२१ बसुन्धरा गाजियाबाद।
..............प्रत्यर्थी ओरिएंटल बैंक आफ कामर्स ब्रांच मेवाड़ इण्डस्ट्री आफ मैनेजमेंट सेक्टर-४सी बसुन्धरा गाजियाबाद। उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद बसुन्धरा गाजियाबाद द्वारा सहायक आवास आयुक्त उत्तर प्रदेश आवास आयुक्त एवं विकास परिषद बसुन्धरा काम्प्लेक्स सेक्टर १६ए गाजियाबाद।
......२ एवं ३ प्रोर्फा प्रत्यर्थीगण समक्ष:-
माननीय श्री राज कमल गुप्ता, पीठा0सदस्य।
माननीय श्री महेश चन्द, सदस्य।
अपीलार्थी की ओर से उपस्थित : कोई नहीं।
प्रत्यर्थी की ओर से उपस्थित: श्री राजेश चड्ढा विद्वान अधिवक्ता।
दिनांक:26-04-2017 माननीय श्री महेश चन्द , सदस्य द्वारा उदघोषित निर्णय प्रस्तुत अपील जिला उपभोक्ता फोरम, गाजियाबाद द्वारा परिवाद संख्या-२०९/२००७ में पारित निर्णय/आदेश दिनांक-२४-०९-२०१० के विरूद्ध योजित की गयी है उक्त परिवाद में निम्न आदेश पारित किया गया है- ''विपक्षी सं0-1 को आदेश दिया जाता है कि वह रू0 ६२११४/- मय ०६ प्रतिशत ब्याज परिवादी को अदा करे। ब्याज की अदायगी परिवाद संस्थित होने की तिथि से वास्तविक अदायगी तक देय होगी। विपक्षी सं0-1 को यह भी आदेश दिया जाता है कि वह परिवादी को रू0 १००००/- की धनराशि मानसिक कष्ट की क्षतिपूर्ति के एवज में अदा करे तथा रू0 ५०००/- वाद व्यय के रूप में उसे अदा करे। समस्त अदायगी तीन माह के भीतर की जाए।'' -२- संक्षेप में विवाद के तथ्य इस प्रकार हैं कि परिवादी ने विपक्षी सं0-3 से भवन सं0-१६बी/४२१ सैक्टर-१६ वसुन्धरा गाजियाबाद में आवंटित कराया। परिवादी को रू0 1535000/- की धनराशि प्रत्यर्थी सं0-3/विपक्षी सं0-3 उ0प्र0 आवास एवं विकास परिषद द्वारा आवंटित भवन सं0-१६बी/४२१ सेक्टर-१६ बसुन्धरा योजना गाजियाबाद की कीमत के रूप में भुगतान करनी थी। इस संबंध में मांगी गयी धनराशि रू0 १५३५०००/- का एक बैंक ड्राफ्ट विपक्षी सं0-1 केनरा बैंक की शाखा से निर्गत कराया। ड्राफ्ट बनवाने हेतु कमीशन के रूप में मु0 रू0 ३४५६/- परिवादी ने विपक्षी सं0-1 को अदा किए। परिवादी का उक्त बैंक में खाता सं0-६२८७ है। यह बैंक ड्राफ्ट प्रत्यर्थी सं0-3/विपक्षी सं0-3 उ0प्र0 आवास विकास परिषद के पक्ष में निर्गत किया गया। अत: उक्त बैंक ड्राफ्ट परिवादी द्वारा विपक्षी सं0-3 के कार्यालय में दिनांक ३१/१०/२००६ को जमा कर दिया गया। विपक्षी सं0-3 का खाता प्रत्यर्थी सं0-2/विपक्षी सं0-2 ओरिएंटल बैंक आफ कामर्स वसुन्धरा योजना गाजियाबाद में है। परिवादी ने दिनांक ०१/१२/२००६ को विपक्षी सं0-३ आवास एवं विकास परिषद कार्यालय से प्रश्नगत आवंटित संपत्ति के विक्रय अभिलेख के संबंध में जानकारी प्राप्त की तो उसे बताया गया कि जो बैंक ड्राफ्ट उसने विपक्षी सं0-3 के खाते में जमा कराया गया था उसकी धनराशि उनके खाते में जमा नहीं हुई है और इस संबंध में वह प्रत्यर्थी सं0-2/विपक्षी सं0-2 से संपर्क स्थापित करे। परिवादी ने जब विपक्षी सं0-२ से संपर्क स्थापित किया तो उसको बताया गया कि प्रश्नगत बैंक ड्राफ्ट अनादृत कर दिया गया था क्योंकि बैंक ड्राफ्ट में त्रुटि थी कि उस पर भुगतान किए जाने वाले बैंक का नाम अंकित नहीं था। परिवादी ने उक्त बैंक ड्राफ्ट की त्रुटि विपक्षी सं0-1 से ठीक कराकर पुन: विपक्षी सं0-3 के बैंक खाते में जमा किया किन्तु वह भी अनादृत हो गया। इस प्रकार ड्राफ्ट के अनादृत होने के कारण आवंटित भवन की धनराशि आवास विकास परिषद के खाते में जमा करने में विलंब हुआ और उसे अंकन रू0 ६२११४/- का ब्याज के रूप में दण्ड स्वरूप विपक्षी सं0-3 को भुगतान करना पड़ा। इससे परिवादी को बहुत ही मानसिक कष्ट हुआ। फलस्वरूप यह परिवाद जिला मंच के समक्ष योजित किया गया।
विपक्षी सं0-1 ने प्रतिवाद पत्र दाखिल किया। उभय पक्षों के द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों के परिशीलन के बाद विद्वान जिला मंच ने प्रश्नगत आक्षेपित आदेश पारित किया जिससे क्षुब्ध होकर यह अपील योजित की गयी है।
अपीलकर्ता द्वारा अपनी अपील में जो आधार लिए गए हैं उनमें कहा गया है कि विद्वान जिला मंच का आदेश पूर्णत: अवैधानिक है और मनमाना है। विद्वान जिला मंच ने अपीलकर्ता द्वारा उठाए गए बिन्दुओं को नजरअंदाज करके त्रुटि की है। अपील में यह भी कहा गया है कि प्रत्यर्थी सं0-1 अपीलकर्ता का उपभोक्ता नहीं था और इस तथ्य को भी नजरअंदाज करके विद्वान जिला मंच ने त्रुटि की है। अपीलकर्ता ने यह भी कहा है कि ड्राफ्ट बनाने के लिए प्रत्यर्थी सं0-1 ने जो वाउचर -३- बैंक में दिया था उस पर उस बैंक का नाम अंकित नहीं था जिस पर ड्राफ्ट का भुगतान होना था और जब प्रत्यर्थी ने उक्त बैंक का नाम सूचित किया तो उक्त त्रुटि को ठीक कर दिया गया। इस त्रुटि के लिए परिवादी स्वयं दोषी है न कि अपीलकर्ता। विद्वान जिला मंच ने इस तथ्य को नजरअंदाज करके प्रश्नगत आदेश पारित किया है जोकि निरस्त किए जाने योग्य है।
प्रत्यर्थी/परिवादी के द्वारा अपील के विरूद्ध आपत्ति दायर की गयी है और उसमें कहा गया है कि अपील विलंब से दायर की गयी है, इसलिए खण्डित होने योग्य है। आयोग की तत्कालीन पीठ द्वारा दिनांक २०/१२/२०१० को पक्षकारों को सुनने के उपरांत विलंब के दोष को विलुप्त करते हुए अपील सुनवाई हेतु स्वीकार की जा चुकी है अत: इस बिन्दु/आपत्ति का पूर्व में ही निस्तारण हो चुका है।
अपीलकर्ता के विद्वान अधिवक्ता उपस्थित नहीं हैं। प्रत्यर्थी के विद्वान अधिवक्ता श्री राजेश चड्ढा उपस्थित हैं उनके तर्क सुने गए एंव अभिलेखों का अवलोकन किया गया।
पत्रावली पर उपलब्ध अभिलेखों के अवलोकन से यह स्पष्ट है कि प्रत्यर्थी/परिवादी द्वारा रू0 १५,३५०००/-का बैंक ड्राफ्ट केनरा बैंक गाजियाबाद से बनवाया गया था और उसके लिए उसने रू0 ३६५४/-का बैंक कमीशन भी अदा किया था। अपीलकर्ता का यह कथन कि प्रत्यर्थी-१/परिवादी, अपीलकर्ता/विपक्षी का उपभोक्ता नहीं है, स्वीकार होने योग्य नहीं है। प्रत्यर्थी ने अपने भवन की कीमत का भुगतान करने के लिए उपरोक्त उल्लिखित धनराशि का भुगतान कर बैंक ड्राफ्ट बनवाया था और उसके लिए वांछित कमीशन का भी भुगतान किया था। अत: वह उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम १९८६ की धारा २डी के अन्तर्गत अपीलकर्ता का उपभोक्ता है। अपीलकर्ता का यह तर्क भी स्वीकार करने योग्य नहीं है कि प्रत्यर्थी ने बैंक ड्राफ्ट बनवाने के लिए बाउचर पर भुगतान की जाने वाली बैंक का नाम अंकित नहीं किया, इसलिए उन्होंने निर्गत किए गए बैंक ड्राफ्ट पर भुगतान किए जाने वाली बैंक का नाम न लिखकर कोई त्रुटि नहीं की है। बैंक का यह कर्तव्य था कि बैंक ड्राफ्ट बनाने के लिए दिए गए आवेदन पत्र में कोई त्रुटि थी तो वह बैंक ड्राफ्ट निर्गत करने से पूर्व उस त्रुटि को पूर्ण कराता और सही बैंक ड्राफ्ट निर्गत करता। इस चूक के लिए बैंक स्वयं उत्तरदायी है। ऐसा न करके उसने लापरवाही का परिचय दिया है जिसके कारण प्रत्यर्थी को रू0 ६२११४/-ब्याज के रूप में क्षति उठानी पड़ी। उसकी प्रतिपूर्ति की पूर्ण जिम्मेदारी अपीलकर्ता बैंक पर है।
उपरोक्त विवेचना के आधार पर हम इस निष्कर्ष पर पहु्ंचते हैं कि अपीलकर्ता के तर्कों में कोई बल नहीं है। तदनुसार अपील निरस्त किए जाने योग्य है।-४-
आदेश अपील निरस्त की जाती है।
उभयपक्ष अपना-अपना वाद व्यय स्वयं वहन करेंगे।
उभयपक्षों को इस निर्णय की प्रमाणित प्रतिलिपि नियमानुसार नि:शुल्क उपलब्ध कराई जाए।
(राज कमल गुप्ता) (महेश चन्द) पीठा0सदस्य सदस्य सत्येन्द्र, आशु0 कोर्ट नं0-४ [HON'BLE MR. Raj Kamal Gupta] PRESIDING MEMBER [HON'BLE MR. Mahesh Chand] MEMBER