Lok Sabha Debates
Regarding Storage And Management Of Rain Water And Inter-Linking Of Rivers. on 31 July, 2018
Sixteenth Loksabha an> Title: Regarding storage and management of rain water and inter-linking of rivers.
कर्नल सोनाराम चौधरी (सेवानिवृत)(बाड़मेर): बढ़ती जनसंख्या, घटता पानी, देश ही नहीं बल्कि दुनिया के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। जो सही भी है। नास्त्रेदेमस की घोषणा के अनुसार तीसरा विश्वयुद्ध पानी पर होगा। जिस समय ये घोषणा की गई थी, तब लोगों का मानना था कि यह कैसे संभव है, लेकिन हालात तो यही बयां कर रहे हैं। हमारे देश के 91 जल भण्डारों में से सिर्फ 22प्रतिशत पानी रह गया है। देश में झारखण्ड,छत्तीसगढ़,राजस्थान, मध्य प्रदेश,गुजरात, तेलंगाना कई अन्य राज्यों में लगातार सूखा पड़ा है। पीने के पानी का संकट उत्पन्न हो गया है। उधर जम्मू-कश्मीर, उत्तराखण्ड,उत्तर प्रदेश एवं पूर्वांचल प्रदेशों में बाढ़ ने भीषण तबाही मचा रखी है। इधर सूखा, उधर बाढ़,यह हालात हैं। यदि देश एवं प्रदेशों की मुख्य नदियों को आपस में जोड़ दिया जाता है तो कुदरती पानी को विनाशकारी से विकास की दिशा में मोड़ा जा सकता है। भीषण तबाही मचाने वाली नदियों को इन पर बाँध बनाकर अन्य सूखी नदियों में पानी का डाला जाता है तो पीने ही नहीं बल्कि खेती के लिए भी उपयोग में लिया जा सकेगा। उससे उत्पादन एवं रोजगार दोनों मिलेंगे। बरसाती पानी के संरक्षण हेतु राजस्थान की यशस्वी मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे जी ने मुख्यमंत्री जनस्वावलम्बन योजना को एक अभियान के तहत चलाया है जिससे सुखद परिणाम मिल रहे हैं।
इतिहास गवाह है कि सृष्टि निर्माण से सभी सभ्यताएं नदियों के किनारे ही विकसित एवं फली-फूली हैं। यदि मिलिट्री हिस्ट्री देखें तो युद्ध में सबसे पहले वाटर प्वाइंट पर ही कब्जा किया जाता है। इस दिशा में देश की आजादी से पूर्व ही विचार प्रारम्भ किया गया था। ब्रिटिश इण्डिया सरकार में बाबा साहेब अम्बेडकर, लॉर्ड लिनलिथगो तथा लॉर्ड लेवल के समय श्रम सदस्य थे। उन्होंने नदियों को जोड़ने से सम्बन्धित कार्य के लिए विश्व की पुस्तकों का अध्ययन कर टेनिसी वेली अथॉरिटी की तरह नदी घाटी योजना बनाई और अमेरिका की नदियों के बांधों के विशेषज्ञ बुरूडीन की सेवाएं ली गई।8 जनवरी, 1945 को इसी दिशा में कृषि भूमि की सिंचाई एवं मरु प्रदेश के वासियों की प्यास बुझाने के लिए भाखड़ा नाँगल बाँध परियोजना बनाई एवं राजस्थान नहर जो मरूगंगा एवं इन्दिरा नहर के नाम से जानी जाती है, मूर्तरूप दिया गया। एक लम्बे अंतराज के बाद हमारे पूर्व राष्ट्रपति डॉ. अब्दुल कलाम जी एवं पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल जी ने नदियों को जोड़ने की योजना बनाई,लेकिन अभी तक योजना को मूर्तरूप देने के लिए कोई कारगर कदम नहीं उठाए गए हैं।
मेरा निवेदन है कि
1. जो पानी प्रबंधन के अभाव में बहकर समुद्र मे जा रहा है, उसको रोक कर नदियों या झीलों में संग्रहित किया जाए ।
2. जैसे यमुना में नरोड़ा के आस-पास का पानी बहकर समुद्र में जा रहा है, उसको रोक कर मरुप्रदेश के जिले अलवर/भरतपुर से होते हुए जोधपुर-बाडमेर तक एवं झुंझनू, सीकर,चुरू एवं नागौर को खुशहाल किया जा सकता है। राजस्थान की खुशहाली हेतु यमुना-राजस्थान,राजस्थान-साबरमती को जोड़ा जाना नितांत आवश्यक है ।
3. सरस्वती जैसी पौराणिक नदी जो राजस्थान से होकर अरब सागर आती है, उसको पुनर्जीवित किया जाये। यमुना,कुरुक्षेत्र,यमुनासागर के आस-पास से सिरसा,नोहर, भादरा,सरदार शहर,डुंगरगढ़, बीकानेर, जैसलमेर, बाडमेर, जालोर से बहुते कच्छ की खाड़ी में पहुँचने वाले हिमालय के शुद्ध पानी को त्रस्त लोगों तक पहुँचाने की योजना बनाई जाए ।
4. यदि सम्पूर्ण देश की नदियों को नदियों से जोड़ा जाता है, तो वो दिन दूर नहीं जब भारत पुनः सोने की चिड़िया कहलाएगा । जरूरत है महज दृढ़ इच्छाशक्ति की ।
5. अतः मेरा आदरणीय प्रधानमंत्री जी, वित्त मंत्री एवं जल संसाधन मंत्री से विशेष आग्रह है कि उक्त संबंध में रुचि लेकर कार्य को गति प्रदान करे,ताकि पेयजल एवं सिंचाई हेतु जल उपलब्ध हो सके ।