Lok Sabha Debates
National Rural Employment Guarantee Bill on 23 August, 2005
Title : National Rural Employment Guarantee Bill NATIONAL RURAL EMPLOYMENT GUARANTEE BILL ,2004- contd.
MR. SPEAKER: Thank you very much. Now, the House will take up item No. 17 – further consideration of the motion moved by Dr. Raghuvansh Prasad Singh.
I wish to express my greatest appreciation to all the hon. Members who took part in this debate till almost midnight yesterday which shows their commitment to the functioning of this House and the sincerity and the great concern they have shown to this House and to the subject matter. It is so commendable. I am sure that it will be recognised by all concerned, particularly the people of this country, that this House does function for them.
Now the hon. Minister, Dr. Raghuvansh Prasad Singh, to reply.
ग्रामीण विकास मंत्री (डा. रघुवंश प्रसाद सिंह) : अध्यक्ष महोदय, आज एक ऐतिहासिक दिन है क्योंकि आपने इस तरह के विधेयक को पारित करवाने की कृपा की। आपने सही कहा कि विधेयक पर बहस १८ तारीख से शुरू हुई और कल रात साढ़े ग्यारह बजे तक चली, जिसमें ७० माननीय सदस्यों ने हिस्सा लिया। जो माननीय सदस्य बहस में हिस्सा नहीं ले सके, उन्होंने अपना लखित वक्तव्य टेबल पर रख दिया। इससे समझा जा सकता है कि माननीय सदस्यों ने इसमें कितनी रूचि ली है। सदन में माननीय सदस्यों ने इतना उत्साह, इतनी रूचि ली और इस पर गहराई से सोच-विचार कर ऐसा विश्लेषण किया जो पहले कभी नहीं देखा गया। यह विधेयक का महत्व बताता है। सभी पार्टी के माननीय सदस्यों ने बड़ी गहराई से इसमें रूचि ली। बड़ा संयोग है कि १८ तारीख को इस विधेयक की शुरुआत हुई, १९ तारीख को रक्षाबंधन था, २० तारीख को स्वर्गीय राजीव गांधी के जन्म दिन को देशभर के लोगों ने सद्भावना दिवस के रूप में मनाया और आज इसे पारित करने का मुहुर्त आ गया है। इसमें सभी पक्षों के माननीय सदस्यों का भारी उत्साह और समर्थन रहा। कुछ कतिपय सुझाव क्या हैं, उनके बारे में मैं बहस के उत्तर में बताऊंगा, लेकिन सभी माननीय सदस्यों ने इस विधेयक की बड़ी सराहना की है, भूरि-भूरि प्रशंसा की है। उन्होंने अपने कई बहुमूल्य सुझाव भी हमें दिये हैं। उन्होंने विश्लेषण करके हमें सावधान भी किया है कि इसमें क्या-क्या सावधानियां बरती जानी चाहिए। यह जानी हुई बात है कि अपने देश में गरीबी और बेकारी पहले से ही है। हमारे देश में शुरू से ही अकाल, सुखाड़, बाढ़ आदि प्राकृतिक आपदायें आती रहती हैं। हमारा इतिहास है कि जब कभी सूखा पड़ा तो राजा जनक को भी हल चलाना पड़ा। इसी तरह बाढ़, सुखाड, भूकम्प, साइक्लोन और सुनामी जैसी प्राकृतिक आपदाओं से हमारा देश बराबर प्रभावित होता रहा है, उनका कुप्रभाव हमारे देश पर पड़ता रहा है।
अध्यक्ष महोदय, पुराने जमाने में शासन में जो लोग रहे हैं, अपने देश की संस्कृति है कि " जासु राज प्रिय प्रजा दुखारी, ते नृप होई नरक अधिकारी।" जिसके राज्य में प्रजा दुखी हो, वह राज्य नरक होता है यानी सबसे खराब होता है। यह ऊंची संस्कृति है। …( व्यवधान) मैं कहां की बात कर रहा हूं। आप ऊंचा दर्शन समझने का प्रयत्न कीजिए। इसलिए जब पुराने जमाने में अकाल, सुखाड़, बाढ़ आदि प्राकृतिक आपदा आयी, तो उस हालत में अनाज देकर तला उगाही की व्यवस्था शुरू की गयी। जब कोई फसल नहीं होती, भूमिहीन लोगों, गरीब लोगों के पास जीने का कोई जरिया नहीं रहता तब अपने देश में अनाज देकर तला उगाही का काम होता था। हमारे देश में पुराने जमाने के लाखों-लाख तला हैं। मैं करीब ३०-४० बरसों से देखता रहा हूं कि रिलीफ के नाम पर, गरीबों को रोजगार देने के लिए हार्ड मैनुअल लैबर स्कीम चलाई गयी क्योंकि दूसरा कोई जरिया नहीं रहा।
अध्यक्ष महोदय, माननीय कल्याण सिंह जी यहां नहीं हैं। हमने कल्याण सिंह जी को धन्यवाद दिया था क्योंकि वे स्टैंडिंग कमेटी के चेयरमैन हैं। उन्होंने बड़ा विश्लेषण करके हमें एक सर्वसम्मत रिपोर्ट दी। हमसे बहुत लोगों ने कहा कि उन्होंने स्टैंडिंग कमेटी का अनादर किया है। कभी भी स्टैंडिंग कमेटी का अऩादर नहीं किया जा सकता क्योंकि सदन की जो गरिमा-महिमा है, उसकी समतियों की भी वही गरिमा-महिमा है। यही संसदीय प्रणाली से हमने सीखा है। स्टैंडिंग कमेटी की कुल २२ अनुशंसाएं थीं, जिनमें से हमने १६ अनुशंसाओं को मान्य किया है। नौ अनुशंसाओं को हमने सम्पूर्ण मान्य किया है और सात अनुशंसाओं को हमने आंशिक रूप से मान्य किया है। बाकी छ: अनुशंसाओं को मानने में हमें कठिनाई है। हमने उस कमेटी का आदर किया है। उस कमेटी के माननीय सदस्य श्री हन्नान मोल्लाह और श्री किशोर चन्द्र एस देव ने काफी रूचि लेकर इसका विश्लेषण किया और चाहा कि यह रिपोर्ट जल्द से जल्द जमा हो जाये, लेकिन बीच में एक बाधा उत्पन्न हो गयी। अध्यक्ष जी, आप साक्ष्य हैं। आपने भी लिखा-पढ़ी की थी। उस समय विपक्ष ने सदन और समतियों की बैठकों का बहिष्कार कर दिया, नहीं तो यह विधेयक पिछले सत्र में ही पारित हो जाता। लेकिन उसके चलते कुछ विलंब हुआ। मैं उसका उद्धरण नहीं देना चाहता। समति के सदस्यों ने इस पर बड़ी मेहनत की है। उन्होंने जो ठोस सुझाव दिये हैं, उनको हमने मान्य किया है।
श्री कल्याण सिंह ने अपने भाषण में कहा कि पुराने जमाने की जवाहर रोजगार योजना, सुनिश्चित रोजगार योजना आदि योजनाएं विफल हो गयीं--यह गलत है। कभी भी ये योजनाएं विफल नहीं हुईं। हां, इन योजनाओं में कम खर्च हुआ लेकिन १९८० से लेकर वर्ष २००४ तक ७९ हजार करोड़ रुपये वेज इम्प्लायमैंट में खर्च हुए, जवाहर रोजगार योजना पर ३० हजार करोड़ रुपये खर्च हुए और इस तरह कुल ७९ हजार करोड़ रुपये खर्च हुए। नैशनल रूरल इम्प्लायमैंट प्रोग्राम, रूरल लैंडलैस इम्प्लायमैंट प्रोग्राम यानी एनआरपी, आरएलईजीपी, जवाहर रोजगार योजना, जवाहर ग्रामीण समृद्धि योजना, इम्प्लायमैंट, इंश्योरेंस स्कीम, सुनिश्चित रोजगार योजना आदि वेज इम्प्लायमैंट योजनाएं अपने देश में लागू रही हैं। उसमें खर्च हुआ लेकिन पिछले २४-२५ वर्षों में करीब १८०० करोड़ मानव दिवस सृजित हुए। अगर ये नहीं होते तो गरीबों को कहां से काम मिलता, रोजगार मिलता? देश में भुखमरी हो सकती थी। इसीलिए यह सब काम हुआ। वर्षवार हमने आंकड़े इसीलिए जुटाए हैं, भले ही हमें तकलीफ हुई। स्टैंडिंग कमेटी के चेयरमैन, श्री कल्याण सिंह जी ने कह दिया कि तैयारी के साथ विधेयक नहीं आया। मैं उनके इस चार्ज को खारिज करता हूं। पूरी तैयारी के साथ यह विधेयक आया है, क्योंकि हमारे कॉमन मनिमम प्रोग्राम में यह हमारा कमिटमेंट था। इसीलिए हमारे विभाग में यह विधेयक तैयार करने के लिए सितम्बर, २००४ में आया और २१ दिसम्बर को हमने यहां बिल इंट्रोडयूस किया। एक से एक विद्वान एनजीओज, नेशनल एडवाइजरी काउंसिल, जिसकी अध्यक्षता श्रीमती सोनिया गांधी कर रही हैं, सभी से गहन विचार-विमर्श करके यह बिल लाया गया है। इसीलिए इस विधेयक की मूल भावना से किसी को एतराज नहीं है। इसमें गति को और बढ़ाया जाए, और तेज किया जाए, और जल्दी किया जाए, यही सब माननीय सदस्यों का सुझाव आया है जिसका अभी मैं विश्लेषण करके बताऊंगा।
नेशनल रूरल एम्पलॉयमेंट प्रोग्राम में ३२५ करोड़ मानव दिवस कार्य सृजित हुआ। रूरल लैंडलेस एम्पलॉयमेंट गारंटी प्रोग्राम में ११५ करोड़ दिवस, जवाहर रोजगार योजना में ७३७ करोड़ दिवस, एम्पलॉयमेंट एश्योरेंस स्कीम में २६४ करोड़ दिवस, जवाहर ग्राम समृद्धि योजना में ५ करोड़ ८६ लाख दिवस, सम्पूर्ण ग्रामीण रोजगार योजना में २९४ करोड़ मानव दिवस कार्य सृजित हुआ। नेशनल फूड फॉर वर्क योजना जो हाल ही में लागू हुई, इसमें १३ करोड़ ८६ लाख दिवस कार्य सृजित हुआ। इन सभी योजनाओं में काम भी हुआ है। काम नहीं हुआ है, ऐसा नहीं कहा जा सकता। इस योजना में एक पंथ दो काज हुआ है। एक काम और दो लाभ यानी पहला लाभ यह कि लोगों को रोजगार मिलेगा, रोजी मिलेगी और वह भुखमरी से बचेगा, फूड सिक्योरिटी का इसमें लक्ष्य है और दूसरे, इससे परमानेंट एसैट का सृजन होगा, इंफ्रास्ट्रक्चरल फैसलिटी सृजित होगी।
श्री लाल मुनी चौबे (बक्सर) : अध्यक्ष जी, माननीय मंत्री जी ने कहा है कि इसमें कुछ काम हुआ है, जरा वह बता दें कि कितना काम हुआ है, कितना नहीं हुआ है।…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : लाल मुनी चौबे जी, उन्होंने यील्ड नहीं किया है।
…( व्यवधान)
MR. SPEAKER: It is a very serious matter.
… (Interruptions)
डा. रघुवंश प्रसाद सिंह : कृपा करके सुनने का काम करें। आप उसमें काम पूछ रहे हैं। मानव दिवस तो हमने मुंहजबानी बता दिया है १८०० करोड़ दिवस।…( व्यवधान)
MR. SPEAKER: Do not record it. Nothing will be recorded.
(Interruptions)* … अध्यक्ष महोदय : यह ठीक बात नहीं है।
डा. रघुवंश प्रसाद सिंह : करीब पांच लाख विद्यालय भवनों का निर्माण हुआ।…( व्यवधान) आप काम पूछ रहे हैं,…( व्यवधान)
MR. SPEAKER: Shri Lal Muni Choubey, you are a senior Member.
… (Interruptions)
MR. SPEAKER: Do not record anything except the statement of hon. Minister or what is permitted by me.
(Interruptions)* … डा. रघुवंश प्रसाद सिंह : कुल १६ लाख कि.मी. लम्बाई की सड़कों में मिट्टीकरण, ईंटकरण, कहीं मिट्टी, कहीं ईंट, कहीं पत्थरीकरण का काम हुआ है। करीब ढ़ाई लाख तालाबों का निर्माण हुआ। एससी,एसटी के लिए दस लाख कुंओं का निर्माण हुआ।…( व्यवधान) डेढ़ लाख पंचायतघरों का निर्माण हुआ। इसमें आपके राज्य का काम भी शामिल है।…( व्यवधान) इसमें आपका भी साढ़े पांच वर्ष का राज रहा है, उसका आंकड़ा भी इसमें शामिल है। क्यों छटपट कर रहे हैं ? मैं सारी बातें ठीक बता रहा हूं। …( व्यवधान)
MR. SPEAKER: What are you doing here? This is not your seat. This is not the way to behave in the House.
… (Interruptions)
* Not Recorded.
डा. रघुवंश प्रसाद सिंह : डेढ़ लाख पंचायतघरों का निर्माण हुआ है। सामाजिक वानिकी में १६ हेक्टेअर, और ५,००० करोड़ पौधे, ये सब आंकड़े हमने यह साबित करने के लिए जुटाए हैं कि ये योजनाएं विफल नहीं हुई हैं। इनका नाम बदल दिया गया, इनमें जोड़-घटाव होता गया। कोई जवाहर के नाम से थी तो पंडित जवाहर लाल नेहरू के नाम से उनका नाम बदल दिया गया, कहीं जवाहर ग्राम समृद्धि है तो उसे बदलकर सम्पूर्ण ग्रामीण समृद्धि कर दिया गया है। यह सब फर्क पड़ा है लेकिन वेज एम्पलॉयमेंट का कार्यक्रम चलता रहा है और हमने जो शुरू में कहा था कि ‘जासु राज प्रिय प्रजा दुखारी’, उस हिसाब से रिलीफ का काम चलता है।
मशहूर इकोनोमिस्ट केन, जो ब्रिटेन के अर्थशास्त्री हैं, उन्होंने कहा है कि मुफ्त में कोई चीज बांटने से देश का पुरूषार्थ कमजोर होता है, लेकिन गरीब आदमियों को हम भूखों मरने नहीं दे सकते, इसलिए कोई न कोई काम कराकर ही, उनको रोजी देकर, मजदूरी देकर, उनकी फूड सिक्योरिटी सुनिश्चित करना जरूरी है। उनको मुफ्त में कोई चीज नहीं देनी चाहिए, इसी सिद्धान्त के आधार पर कई वेज एम्प्लायमेंट प्रोग्राम अपने देश में वर्षों से चल रहे हैं। नेशनल एम्प्लायमेंट गारन्टी कानून, जिसकी सभी लोगों ने प्रशंसा की है, उसकी अहमियत को इसी से समझा जा सकता है कि इतनी बड़ी संख्या में माननीय सदस्यों ने उत्साहपूर्वक इसमें रूचि ली है। सभी नेताओं ने और यूपीए की चेयरपर्सन, श्रीमती सोनिया गांधी जी ने इसे बनाने में, पास कराने में भागीदारी की है और समर्थन दिया है। उधर से श्री कल्याण सिंह जी और श्री मल्होत्रा जी ने तो इसमें अमेंडमेंट भी प्रस्तावित किया है लेकिन अभी तक उनका वक्तव्य नहीं हुआ है। श्री खारबेला स्वाईं और श्री संतोष गंगवार ने भी अमेंडमेंट के प्रस्ताव किए हैं। उधर से ही श्री सुभाष महरिया, श्री अन्नासाहेब पाटिल, श्री धमेन्द्र प्रधान आदि सदस्यों ने इसमें रूचि ली है और उनके वक्तव्य हुए हैं।
महोदय, वामपंथी दलों के सभी नेताओं ने, पोलित ब्युरो से लेकर संसद के अंदर तक, सभी माननीय नेताओं ने, कामरेड और दोस्तों ने इसमें रूचि ली है। माननीय नेता श्री वसुदेव आचार्य, श्री रूपचन्द पाल, श्री हन्नान मोल्लाह, श्री सुधाकर रेड्डी सहित सभी लोगों ने इसमें बड़ी रूचि दिखाते हुए उत्साहपूर्वक इसे समर्थन दिया है।
समाजवादी पार्टी के श्री मोहन सिंह जी कभी-कभी मान लेते हैं कि अलग पार्टी के हैं, लेकिन हम कभी समाजवादी पार्टी को अपने से अलग पार्टी नहीं मानते हैं। हम एक ही हाड-मांस के टुकड़े हैं, कभी एक हो जाते हैं और कभी अलग हो जाते हैं। माननीय श्री राम गोपाल यादव जी ने बड़ी रूचि से उत्साहपूर्वक सुझाव और समर्थन दिया है। श्री मोहन सिंह ने लिटमस पेपर की बात हमें याद दिलायी कि महात्मा गांधी जी ने पं. जवाहर लाल नेहरू से कहा था कि आप जब भी किसी पत्रावली पर दस्तखत कीजिए तो पहले यह देख लीजिए कि उसमें सबसे गरीब आदमी के लिए कुछ है या नहीं। उस लिटमस पेपर पर यह विधेयक खरा उतरता है और इसीलिए उन्होंने यह सुझाव भी दिया है इसे अच्छी तरह लागू किया जाना चाहिए।
महोदय, आज हमारे देश की क्या स्थिति है? महान कवि गोपाल सिंह नेपाली ने हमारे देश में गैर-बराबरी की स्थिति को इन शब्दों में व्यक्त किया है :
"चन्द्र किरण से महलों की दीवार चमकती रहती हैं, चांदनी झोपड़ी से लिपटकर हर रात सिसकती रहती है, हर रात सिसकती रहती है।"
महोदय, एक तरफ तो झोपड़ी है और दूसरी तरफ महल है। वह आगे लिखते हैं :
"लाख-लाख झोपड़ियों में छाई हुई उदासी है, सत्ता सम्पत्ति के बंगले में हंसती पूरनमासी है, यह सब अब न चलने देंगे, हमने कसमें खाई हैं, तिलक लगाने तुम्हें जवानी, क्रान्ति द्वार पर आई है।"
महोदय, यही नहीं, यह बिल राष्ट्रकवि दिनकर के शब्दों को चरितार्थ करता है :
"शांति नहीं तब तक जब तक सुखभाग न नर का सम हो।
नहीं किसी को बहुत अधिक हो, नहीं किसी को कम हो॥"
महोदय, जब इस तरह का सिद्धान्त होगा, तभी गांवों में बसने वाले गरीब आम आदमी, झोपड़ी वाले, बिना घर वाले जो १.५ करोड़ परिवार हमारे देश में रहते हैं, वे ऐसे परिवार है जो रोटी, कपड़ा ओर मकान के अभाव में रहते हैं। इसीलिए यह कानून आया है। इसमें हमने यह दावा नहीं किया है कि इससे गरीबी समूल नष्ट हो जाएगी, बेरोजगारी समाप्त हो जाएगी और स्वर्ग उतर आएगा, लेकिन हम यह दावा करते हैं कि गरीबी उन्मूलन की तरफ और बेकारी उन्मूलन की तरफ यह बिल सबसे ठोस ही नहीं, सबसे भारी और साहसिक कदम है।
अब सवाल उठता है, जैसे लोग कहते हैं कि आपने इस बिल में १०० दिन काम देने की बात ही क्यों कही है। कई माननीय सदस्यों ने यह बात यहां कही। यहां पर नीतीश जी, सुबोध मोहिते जी नहीं हैं, कल्याण सिंह जी और सुरेश प्रभु जी हैं। इन सब लोगों ने तथा दोनों तरफ के माननीय सदस्यों ने इस बात का उल्लेख किया।
श्री रामदास आठवले (पंढरपुर) : आरपीआई ने इसका समर्थन किया है।
डा. रघुवंश प्रसाद सिंह : यह ठीक बात है कि आठवले जी ने इसका समर्थन किया है। जो नेशनल एम्प्लायमेंट गारंटी कानून है, यह साल में १०० दिन काम देने की गारंटी वाला कानून है। कल्याण सिंह जी हिसाब लगाकर बता रहे थे कि साल में छ: हजार रुपए एक परिवार को मिलेंगे। आपको जब मौका मिला था, आपने छ: पैसे का भी इंतजाम नहीं किया, हमने तो छ: हजार रुपए का किया है। लेकिन मेरे कहने का यह मतलब नहीं है कि सिर्फ इसी से उनकी जिंदगी चलेगी। १०० दिन काम की गारंटी तो है ही, उससे भी अधिक उन्हें काम केन्द्र सरकार की वभिन्न योजनाओं में मिल सकता है। इस तरह की कई योजनाएं चल रही हैं। प्रधान मंत्री ग्रामीण सड़क योजना में हम इस साल ४२०० करोड़ रुपए खर्च करेंगे। आप तो कभी २२०० करोड़ रुपए और कभी २५०० करोड़ रुपए पर ही अटके हुए थे, जबकि हमने इस साल के बजट में ४२०० करोड़ रुपए का प्रावधान किया है।…( व्यवधान)
SHRI ANNASAHEB M.K. PATIL (ERANDOL): The figure is not correct. He should correct the figure. It was not Rs. 2,200 crore; it was not less than Rs. 6,000 crore. Please ask him to correct the figure.
डा. रघुवंश प्रसाद सिंह : प्रधान मंत्री ग्रामीण सड़क योजना सन् २००० में शुरू हुई थी। तब आपने यह कहा था कि २५०० करोड़ रुपए देंगे, २३०० करोड़ रुपए देंगे। लेकिन जब हम लोगों का राज आया तो हमने ३५०० करोड़ रुपए, ४००० करोड़ रुपए देने की बात कही।…( व्यवधान)
MR. SPEAKER: Let him speak.
… (Interruptions)
MR. SPEAKER: It will not be recorded.
(Interruptions)* … MR. SPEAKER: You have made your point.
… (Interruptions)
MR. SPEAKER: Kindly listen to the Minister’s reply. After the hon. Minister’s reply, if you have any clarifications, I will allow a few to raise them.
डा. रघुवंश प्रसाद सिंह : आप क्या कहना चाहते हैं, एक-एक करके कहें। हमने २००५-२००६ के बजट में ४२०० करोड़ रुपए का प्रावधान किया है। भारत निर्माण की जो महत्वाकांक्षी योजना है, उसमें भी और बढ़ोत्तरी होगी। चार वर्षों में ४८,००० करोड़ रुपए खर्च होंगे। उसमें हमारे बजट उपबंध से २०,००० करोड़ रुपए दिए हैं, बाकी पैसे का प्रबंध इस गैप को भरने के लिए हो रहा है। इसीलिए मैंने कहा कि कहां २२०० करोड़ रुपए, २३०० करोड़ रुपए और २५०० करोड़ रुपए, और कहां ४२०० करोड़ रुपए। इसलिए लोग * Not Recorded.
इसमें काम करेंगे।
प्रधान मंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत भी लोगों को काम मिलेगा। इसी तरह से इरीगेशन की जो योजना है, जो एक करोड़ हैक्टेयर जमीन में भारत निर्माण की, पोटेंशियलिटी सृजन करने की योजना है, उसमें भी लोगों को काम मिलेगा।…( व्यवधान)
MR. SPEAKER: What are you trying to do? You are disturbing your own Minister.
डा. रघुवंश प्रसाद सिंह : हिन्दुस्तान की आर्थिक नीति की रीढ़ कृषि रही है, खेतीबाड़ी रही है। इसलिए कृषि में भी मजदूरों की जरूरत होती है, अत: वे साल में कृषि क्षेत्र में भी काम करेंगे। इसके अलावा राज्य सरकार की योजनाओं में भी काम करेंगे। केन्द्र सरकार की अन्य योजनाएं हैं, उनमें भी काम करेंगे। यह हमने एडीशनल १०० दिन काम की गारंटी की बात कही है। आप कहते हैं कि ३६५ दिन में १०० दिन काम करेंगे और बाकी के २६५ दिन बैठे रहेंगे - ऐसी बात नहीं है कि बैठे रहेंगे। कृषि में काम करेंगे, अनाज उत्पादन में काम करेंगे। राज्य सरकार और केन्द्र सरकार की अन्य योजनाओं में भी उन्हें काम मिलेगा, रोजगार मिलेगा। इसलिए १०० दिन के काम की गारंटी के अतरिक्त भी उन्हें काम मिलता रहेगा, काम होता रहेगा।
हमने इस बिल में कॉमन मनिमम प्रोग्राम के तहत पुअर हाउसहोल्ड की बात कही थी। लेकिन लोगों ने कहा कि यह बीपीएल, एपीएल सबके लिए होनी चाहिए। पुअर और गैरपुअर को कैसे परिभाषित करेंगे इसलिए हाउसहोल्ड के नाम पर झंझट पैदा हुआ, तो हमने एवरी हाउसहोल्ड कर दिया। इसीलिए इस सदन के साथ-साथ पूरे देश में जनता द्वारा इस बिल को व्यापक समर्थन मिल रहा है।
हमारे हिंदुस्तान के सपूत प्रो. अमत्र्यसेन, जिनका विश्व में बहुत नाम है और जो विश्व में जाने-माने अर्थशास्त्री हैं, नोबल पुरस्कार विजेता हैं, उन्होंने कहा है कि यह एम्प्लाएमेंट गारंटी स्कीम हिदुस्तान के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण योजना सिद्ध होने जा रही है।
हमारे कुछ साथियों ने कहा कि यह योजना केवल सौ दिन के लिए ही क्यों लागू हो रही है, ३६५ दिनों के लिए लागू क्यों नहीं हो रही है। हम हिंदुस्तान की कृषि को बर्बाद होने नहीं देना चाहते हैं। कृषि में भी मजदूर चाहिए। जब १०० दिन के बाद उन्हें काम नहीं होगा, तो उस समय किसान और मजदूर कृषि तथा अन्य योजनाओं में काम करेंगे, राज्य सरकार और केन्द्र सरकार की योजनाओं में काम करेंगे। इसीलिए हमने केवल १०० दिन काम देने की गारंटी की है जिससे बाकी बचे समय में वे और योजनाओं में काम कर सकें।
कुछ माननीय सदस्यों ने कहा कि परिवार में से केवल एक ही आदमी काम करेगा - ऐसा नहीं है, एक से दो, दो से तीन और तीन से चार आदमी, सब काम करेंगे लेकिन १०० दिन के काम की गारंटी परिवार को होगी। अगर एक परिवार में से दो आदमी काम करेंगे तो पचास-पचास दिन काम मिलेगा और अगर तीन आदमी एक परिवार के काम करेंगे तो ३३-३३ दिन के हिसाब से तीन आदमी काम करेंगे और उनके कार्ड बना दिये जाएंगे।
मान लीजिए कि हमने कोई १० लाख रुपये की एक स्कीम बनाई या ५ लाख रुपये की स्कीम बनाई, उसमें अगर १०० दिन से ज्यादा काम होगा तो उन्हें दिया जाएगा। अगर एक परिवार के लोग करेंगे तो उनमें बंटवारा हो जाएगा।
जहां तक महिलाओं के काम करने का सवाल है, फूड फॉर वर्क में ३४ प्रतिशत के करीब महिलाएं लाभान्वित हुई हैं। हमने तीन-चौथाई महिलाओं को उसमें रखा है और इस स्कीम में भी महिलाओं को प्रीओरिटी दी जाएगी।
कुछ सदस्य कहते हैं कि परिवार में काम पाने के लिए झगड़ा हो जाएगा लेकिन हम कहना चाहते हैं कि कोई झगड़ा नहीं होगा। हम गांव से आते हैं, हमें अनुभव है - "तू कहता कागज की लेखी, मैं कहता आंखन की देखी" - गांव में परिवार की क्या व्यवस्था है, उसे हम लोग ज्यादा जानते हैं, आप लोगों को गांव से क्या मतलब। इसलिए देश भर में लोग कहते हैं कि यह स्कीम बढि़या है, इसे एक बार में लागू कीजिए। उनकी इस मांग को भी हम अच्छा मानते हैं, लेकिन एक बार में इसे कैसे लागू किया जाए। कुछ लोग कहते हैं कि अनप्रोडक्टिव खर्चा हो रहा है, लेकिन हम सब लोगों की वंदना करते हैं " वंदौ संत असंतम चरणा।" जो इसके खिलाफ हैं उनकी भी हम वंदना करते हैं और जो इसके साथ हैं उनकी भी वंदना करते हैं क्योंकि हमें गरीब आदमी का विधेयक पास करवाना है, निकालना है और इसे पास करवाकर गरीब आदमी का भला करना है। हमारे माननीय प्रधान मंत्री जी ने जो वक्तव्य दिया है कि सन् २०२० तक हिंदुस्तान को हम ऐसे स्थिति में ले जाना चाहते हैं जहां एक भी आदमी गरीबी की रेखा के नीचे नहीं होगा।…( व्यवधान) हम १५ वर्षों का ऐसा ठोस कार्यक्रम बनाएंगे जिससे हिंदुस्तान गरीबी और बेरोजगारी से मुक्त हो सकेगा।
15.00 hrs. कल्याण सिंह जी कह रहे थे कि चार वर्ष में क्यों नहीं? आपने इसे पांच वर्ष कर दिया है। हमने लिखा है कि पांच वर्षों के अंदर, मतलब चार वर्ष में भी, तीन वर्ष में भी, दो वर्ष में भी, एक वर्ष में भी, यानी पांच वर्षों के अंदर हम इसे करेंगे। पहले १५० जिलों के लिए फूड फॉर वर्क प्रोग्राम था। यदि हम चाहते तो केवल १५० जिलों को रखते। यह सरकार की द्ृष्टि, सरकार की इच्छाशक्ति, सरकार का इरादा, ग्रामोन्मुखी, समतामुखी और गरीबोन्मुखी इरादों को देखकर आप समझ सकते हैं कि १५० जिले नहीं, हमने कहा पचास जिले और इसमें लिए जाएं। हम इसे दो सौ जिलों से शुरू करेंगे, हिन्दुस्तान के कुल जिलों के एक तिहाई से शुरू करेंगे और यह पांच वर्षों के अंदर होगा। इनको लगता है कि चार वर्ष के बाद १५वी लोकसभा होगी, तो मैं कहना चाहता हूं कि १५ वीं लोकसभा में जो हम लोगों ने गरीबोन्मुखी, ग्रामोन्मुखी कदम उठाया है, यह जो बहुमत है, इससे ज्यादा बहुमत से यूपीए गवर्नमेंट १५वीं लोकसभा में भी आएगी। क्यों आएगी, क्योंकि हमें गरीबी हटाना है, बेरोजगारी हटाना है। हमने इसके लिए पांच वर्ष रखे हैं।…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : आप बैठ जाइए।
...( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : ठीक है, आप बोलते रहिए।
डा. रघुवंश प्रसाद सिंह : महोदय, इसलिए कोई चिंता की बात नहीं है। आज हम इसे शुरू कर रहे हैं। यह पांच वर्ष के अंदर हो सकता है, चार वर्ष में भी हो सकता है। एक वर्ष में लोगों ने कहा कि सावधानी बरतिए कहीं गड़बड़ी न हो जाए। हमने पिछले अनुभवों से भी सीखा है। लोग महाराष्ट्र में गारंटी कानून की चर्चा करते हैं। मैं कहता हूं कि महाराष्ट्र में गारंटी कानून में पंचायत कहां हैं? यहां पर महाराष्ट्र से बहुत सारे लोग बैठे हुए हैं। महाराष्ट्र में यह कितने वर्षों से यह लागू है और लोग कहते हैं कि आप सीखिए। हमने सीखा है कि पंचायती राज वहां है ही नहीं, जबकि महाराष्ट्र में पंचायती राज सशक्त है, अन्य राज्यों से कम नहीं है। महोदय, हम लोगों ने पंचायती राज को संपूर्ण अधिकार दिए हैं, उनके चयन में पीपुल्स पार्टशिपेशन किया है। असल में श्री कल्याण सिंह जी जैसे ग्राम सभा का अधिकार, सोशियोलॉजी का पूर्ण अधिकार, सारी निगरानी करने का, उसको पारित करने का अधिकार उस दिन अमेंडमेंट देख नहीं सके,। प्रोग्रामिंग अफसर को असिस्ट करने के लिए रखा है, सहायता देने के लिए, चूंकि पंचायत में क्या है? ग्राम पंचायत में एक सचिव, एक ग्राम सेवक होते हैं, वे कितना करेंगे? लोग पंचायत-पंचायत कर रहे हैं। महोदय, इसलिए आज पंचायत को सक्षम बनाने की भी जरूरत है, इसलिए हमने पंचायत को प्रिंसिपल रोल दिया है, जो आप की अनुशंसा भी थी, आप के शब्द में फर्क है। आप की अनुशंसा सेंट्रल रोल की थी, जबकि हमने प्रिंसिपल रोल कहा है। इस सेंट्रल और प्रिंसिपल रोल में क्या फर्क् है? यह आप समझ सकते हैं, जान सकते हैं, इसलिए पूर्ण पंचायती राज का उसमें प्रावधान किया है।
कुछ माननीय सदस्य कहते हैं कि आपने दो सौ जिलों में किया, सभी जिलों में नहीं लागू किया। हम आप की इच्छा और उत्साह का समर्थन करते हैं। दो सौ जिलों में यह ठीक-ठीक चले और चार वर्षों से कम में ही यह हो जाए। इसका अनुभव कैसा आता है, इसीलिए थाह-थाह करके ठोस कदम उठाया जा रहा है। कुछ माननीय सदस्य कह रहे हैं कि आप इसे शहरों में भी करिए। मैं कहना चाहता हूं कि हमारी रूरल डेवलेपमेंट मनिस्ट्री है, यहां शहर वाले लोग भी बैठे हुए हैं। हम पीछे नहीं हटेंगे, शहरी लोगों के लिए भी हमारा कमिटमेंट है। रूरल एम्प्लायमेंट कानून को भी हम लागू करेंगे। गांवों में काम नहीं मिलता है तो लोग भागकर शहरों में आते हैं, हम गांवों से पलायन ही नहीं होने देंगे। शहरों में बेरोजगारी नहीं होगी। इसीलिए इसको लागू होने दिया जाए, फिर इसके बाद शहरों में देखेंगे कि बेरोजगारी की स्थिति देखेंगे और शहरी लोगों के लिए भी स्कीम लाएंगे। हम कोई भेदभाव करने वाले नहीं हैं। गावं का गरीब और शहर का गरीब हमारे लिए बराबर है, हम दोनों का ख्याल करेंगे। लोग कहते हैं कि अनस्किल्ड को काम देंगे तो स्किल्ड कहां जाएगा? महोदय, जो अनस्किल्ड हे, अकुशल है हम उसे काम देंगे, कुशल लोगों को तो काम करने के लिए लोग खोजते हैं, स्किल्ड आदमी मिलता नहीं है, इसलिए अनस्किल्ड बेरोजगार भटकता है। स्किल्ड की अभी भी पूछ है, आप स्किल्ड और अनस्किल्ड की चिन्ता मत कीजिए, दोनों को रोजगार मिलेगा।
एक माननीय सदस्य कह रहे थे कि पढ़े-लिखे लोगों का क्या होगा? आप तो केवल अनपढ़ का ख्याल कर रहे हैं। मैं कहना चाहता हूँ कि पढ़े-लिखे लोगों के लिए सैकड़ों काम होते हैं, उनके लिए बढि़या क्वालिटी वाले प्रशिक्षण का इंतजाम हमने किया है और डिमाण्ड के मुताबिक जिस एरिया में जिन चीजों की जरूरत है, उनको हम उसी तरह का प्रशिक्षण् देते हैं। उत्पादक स्वरोजगार योजना का प्रबन्ध किया गया है। २० लाख सेल्फ हेल्प ग्रुप बने हैं, सेल्फ हेल्प ग्रुप में महिलाएं अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़े लोग, गरीब आदमी, गांवों में बसने वाले बेरोजगार, सभी लोग आगे आएं। बैंक वालों का भी उसमें सहयोग मिला है। बेरोजगारी को केवल एक कानून से खत्म नहीं किया जा सकता है। बेरोजगारी खत्म करने के लिए हमारे पास दर्जनों योजनाएं हैं और हम सब तरह से इसमें लगेंगे, लेकिन इसमें सहयोग चाहिए। बेरोजगारी भत्ता देने की बात सदन में कही गयी है। उसके बारे में हम कहना चाहते हैं कि यदि एक साल तक उनको काम नहीं मिला तो उनको कितना बेकारी भत्ता मिलेगा, उसका हिसाब हमने कैलकुलेट किया है कि जितना उनका १०० दिन मजदूरी करने से मिलती है,उतनी राशि साल भर काम नहीं मिलने पर बेकारी भत्ता के रूप में, मतलब काम नहीं दिया, तो उसको जुर्माना हम देंगे। उनको बैठाकर उतनी राशि हम अनएम्प्लायमेंट एलाउंस के रूप में देंगे। बीच में यदि उन्हें काम मिल गया, तो एक महीने काम नहीं मिला, १५ दिन के बाद तो जो राशि का प्रबन्ध हुआ है, वह बेरोजगारी भत्ता के रूप में उन्हें दी जाएगी। एक माननीय सदस्य ने कहा कि आपने इसका एक हिस्सा राज्य सरकार पर डाल दिया है, मैं कहना चाहूंगा कि राज्य सरकार के बिना कैसे यह काम होगा? राज्य सरकार, केन्द्र सरकार, पंचायती राज, हम, आप, सदन - सभी के सहयोग से यह सब काम होना है। यदि राज्य सरकार यह कहे कि यह हमारी योजना नहीं है, केन्द्र की योजना है, तो मैं यह बताना चाहता हूँ कि जो ४० फीसदी उनका मैटेरियल कंपोनेंट है, उसका २५ प्रतिशत, अर्थात सम्पूर्ण योजना का केवल १० प्रतिशत हिस्सा राज्य सरकार का होगा और राज्य सरकार की भागीदारी से उनको भी इस योजना में अपनापन लगेगा। इसलिए राज्य सरकार की भागीदारी की व्यवस्था हमने इसमें की है।
कुछ माननीय सदस्यों ने कहा कि हमने राज्य सरकारों से विचार नहीं किया है। मैं उनको बताना चाहूँगी की सचिव स्तर की दो बैठकें हुई थीं। सभी राज्य सरकारों के पास बिल की कॉपी भेजी गयी है, उनके कमेन्ट्स और सुझाव भी आएं हैं, इसलिए मैं कहूंगा कि राज्यय सरकारों को विश्वास में लिया गया है लेकिन इसमें मत-विमत हो सकता है१ किसी राज्य सरकार ने कहा कि हमे भार मत दीजिए, जैसे एसजीआरवाई योजना है, हम तो इसमें उनको १० प्रतिशत की जिम्मेदारी दे रहे हैं, एसजीआरवाई में २५ प्रतिशत राज्य सरकारों का हिस्सा है और हम ७५ देते हैं। इन्दिरा आवास योजना में ७५ प्रतिशत हम देते हैं, २५ प्रतिशत राज्य सरकारों का हिस्सा है। इसमें तो केवल १० प्रतिशत दिया गया है, तो राज्य सरकारों को इसे उत्साहपूर्वक स्वीकृत करना चाहिए और अपनी भागीदारी करनी चाहिए। यदि हम कहें कि केवल केन्द्र सरकार बेकारी को दूर कर सकती है तो यह राज्य सरकारों के सहयोग के बिना संभव नहीं है। राज्य सरकारों के सहयोग के बिना हम इस योजना को सफल नहीं मानते हैं। राज्य सरकारों को सहयोग, पंचायती राज संस्थाओं का सहयोग, आप सभी माननीय सदस्यों का सहयोग, देश भर के चुने हुए बुद्धिजीवी, NGOs, समाजसेवी - सभी लोगों का इसमें सहयोग चाहिए।
माननीय श्रीमती सोनिया जी ने बीस तारीख को अपने कार्यकर्ताओं से कहा है, निर्देश दिया है, आहवान किया है कि सभी कार्यकर्ता ग्रामीण विकास की केंद्र सरकार की योजनाओं में लग जाओ। गांव में फैल जाएं और इस बारे में जानकारी प्राप्त करें। …( व्यवधान) सभी पार्टी के माननीय नेताओं से मैं आग्रह करता हूं कि ग्रामीण विकास की योजना अथवा केंद्र सरकार की जो योजनाएं हैं उन सभी के अच्छे कार्यान्वयन, निगरानी और पार्टीसिपेशन के लिए और उसे गरीबों तक ठीक ढंग से पहुंचाने के लिए अपने कार्यकर्ताओं को उत्प्रेरित करें। हम प्रार्थना करते हैं, सभी माननीय राजनीतितक दलों के सभी माननीय नेताओं से कि अपने कार्यकर्ताओं को उत्प्रेरित करें, उनको कार्य करने में, उनको जानकारी देने में, उनको प्रशक्षित करने में। हमने पंचायती राज के प्रतनधियों को कहा है कि सभी को प्रशिक्षण दिया जाए, २० लाख चुने हुए प्रतनधियों को प्रशिक्षण दिया जाए। एक-एक स्कीम पर ९-९ व्यक्तियों की लोकल वजिलैंस कमेटी होगी। हमने स्थानीय लाभार्थियों की कमेटी बनाने के लिए कहा है। उन सभी को ब्लॉक स्तर पर प्रशिक्षण दिया जाए। जनता की भागीदारी होगी, स्टेट वजिलैंस, एकाउंटेबिल्टी ऐंड ट्रांसपैरेंसी होगी जिससे सब लोग जानें, देखें, समझें। हमें पुराने समय का अनुभव हुआ है। लोग कहते हैं कि गांवों में पैसा पहुंचता नहीं है। एक लॉबी चलती है जो चाहती है कि गांव में पैसा न जाए। अनप्रोडक्टिव खर्चा हो रहा है। कहा गया है इतने हजार करोड़ रुपए खर्च् हो जाएगा। गरीब के नाम पर यह सारा हिसाब हो जाता है। अगर मैं हिसाब बताऊंगा तो भंडाफोड़ कर दूंगा। मैं भंडाफोड़ करने वाला हूं। ८ लाख करोड़ रुपए की ब्लैक मनी कहां है? गरीब का हिस्सा कहां गया? डेढ़ लाख नॉन परफॉरमिग ऐसेट्स कहां गए? गरीब का हिस्सा कहां है? गरीब नॉन परफॉरमिग ऐसेट्स नहीं बनाता है। ९८ फीसदी रिकवरी है। सैल्फ हैल्प ग्रुप में बैंकों की रिकवरी ९८ फीसदी है। गरीब आदमी का उसमें हिस्सा है।
श्री लाल मुनी चौबे : आप भंडाफोड़ करिए।
डा. रघुवंश प्रसाद सिंह: मैं वही भंडाफोड़ कर रहा हूं। कहा गया कि परिवार की परिभाषा क्या होगी? न्यूक्लियर फैमिली, सबसे छोटी जितनी होगी, उतनी लाभदायक होगी। माननीय सदस्यों ने जो चिन्ता जाहिर की है और जो सुझाव दिए हैं, उसने मेरा उत्साहवर्द्धन किया है। माननीय सदस्यों ने मुझे मजबूती दी है। मैंने सभी के सुझाव दर्ज किए हैं। संशोधनों में जितने सुझाव आ सकते थे, वे लिए गए। हम गाइडलाइन्स बनाएंगे। जो रूल बनाएंगे, उनमें सभी महत्वपूर्ण सुझावों को शामिल करेंगे और कार्यान्वयन में आपका मार्गदर्शन चाहेंगे। परिवार की परिभाषा उस तरह से की जाएगी जिससे गरीबों को दिक्कत न हो।
देश में पानी का संकट है। अध्यक्ष महोदय, आप इसके बारे में जानते हैं। इसी को देखते हुए आपने एक कमेटी का गठन किया है। पानी के आने वाले संकट पर दूर द्ृष्टि से सोचना पड़ेगा। दुनिया में दो तिहाई पानी और एक तिहाई जमीन है। हिन्दुस्तान की जमीन २.४ परसैंट, आबादी १६ परसैंट है। ९७ परसैंट पानी पीने लायक नहीं, तीन फीसदी पानी में, दो फीसदी पानी सरफेज पर, एक फीसदी जमीन में, कुछ बर्फ जमा है। कहीं सूखा, हर साल सूखा और ज्यादातर सूखा पड़ता है जिससे पानी का ग्राउंड लैवल नीचे जा रहा है। इसलिए वाटर कजर्वेशन, रेन वाटर हारवैस्िंटग, वाटर शैड मैनेजमैंट, ड्राउट प्रूफिंग, फ्लड प्रूफिंग सोशल फॉरैस्ट्री और लैंड डैवलपमैंट को प्रॉयरिटी में रखा है। कहा गया है कि इन सभी को किया जाए।
कई माननीय सदस्यों ने कहा कि कई राज्यों में अलग-अलग ढंग से काम होता है। हमने कहा है कि राज्य सरकारों के परामर्श से दूसरी नई योजनाओं को और नए कामों को जोड़ा जा सकता है। हमने बहुत फ्लैक्सिबिल्टी रखी है जिससे केन्द्र राज्य मिल कर इन सभी परिस्थितियों का सामना कर सकें। मैंने पंचायती राज की भूमिका के बारे में बता दिया है। उससे सभी लोग सहमत और संतुष्ट हैं। पंचायती राज संस्थान, ग्राम पंचायत, ग्राम सभा से लेकर ग्राम पंचायत, ब्लॉक पंचायत, जिला पंचायत, सभी का पूरा इनवॉल्वमैंट, पार्टसिपेशन उनका प्रिंसिपल रोल है। कहते हैं कि भ्रष्टाचार हो सकता है, गड़बड़ी हो सकती है और उसके लिए पूरी सावधानी बरतने की जरूरत है। एक माननीय सदस्य अखबार पढ़ कर बता रहे थे कि इंडियन एक्सप्रेस में छपा कि महाराष्ट्र के कोल्हापुर में गड़बड़ हुई। इतना बड़ा देश है। कहीं भी हेरा-फेरी हो सकती है। मैं यह दावा नहीं करता कि कहीं कोई हेरा-फेरी की गुंजाइश नहीं है। जिले में कैसे लोग हैं, कैसे अधिकारी हैं, चुने हुए लोग कैसे हैं, योजना कैसे लागू हो रही है, यह देखने की जरूरत है। कहीं लूपहोल्स और कहीं त्रुटियों का शिकंजा कसा रहता है। यहां हर्षद मेहता और केतन पारीख जी, १०१ लोग हैं। इसलिए उसमें पूरी सावधानी बरती जायेगी और आगे भी बरती जाए, जिससे कि कोई गड़बड़ी न हो। माननीय सदस्यों के सहयोग का हम स्वागत करेंगे कि कैसे-कैसे हम सब कुछ ठीक करें। इसलिए निगरानी रखने की और सम्पत्ति सृजन, यह नीति है, ६० फीसदी लेबर कम्पोनैन्ट मजदूरी में देंगे और केवल मजदूरी में देने से ही काम नहीं चलेगा, स्थायी सम्पत्ति का सृजन इन्फ्रास्ट्रक्चरल फैसलिटीज का निर्माण भी उससे होगा, ४० फीसदी मैटीरियल कम्पोनैन्ट में इसलिए खर्चा दिया जा रहा है। महाराष्ट्र के अनुभव से हमने पूरा लाभ उठाया है और हम सब अध्ययन कर रहे हैं। इसलिए यह जो ऐतिहासिक विधेयक सदन के सामने आया है, सब लोगों ने इसे उत्साहपूर्वक समर्थन देकर हमें सुझाव दिये, सावधानी बरतने के लिए आग्रह किया और चेतावनी भी दीं, उन सभी के हम कायल हैं। हमने उन सभी के सुझावों को ग्रहण किया है और सभी सुझावों का रूल्स को अमल करने में हम स्वागत करेंगे। इसलिए इस महत्वपूर्ण विधेयक के बारे में जिन-जिन माननीय सदस्यों ने सवाल उठाये हैं, उन सभी सदस्यों का नाम लेकर जवाब देना कठिन है। लेकिन १७ सदस्यों द्वारा जो-जो सवाल उठाये गये हैं, उन सभी के नाम हमारे सामने हैं। उनमें सर्वश्री मोहन सिंह जी, देवेन्द्र प्रसाद यादव जी, सुबोध मोहिते जी, इलियास आजमी जी, तथागत सत्पथी, सुधाकर रेड््डी, बची सिंह रावत जी आदि के नाम हमने दर्ज किये हैं। बाकी सभी के नाम लेना कठिन है। लेकिन इन सभी को हम हार्दिक धन्यवाद देते हैं कि इन सभी लोगों ने पूरी तैयारी के साथ इसमें भाग लिया। श्री अर्जुन चरण सेठी जी, डा.चिंतामोहन, ड़ा.कृष्णन, श्री नखिलानन्द सर, श्री शैलेन्द्र कुमार, श्री वीर सिंह महतो, श्री जोवाकिम बखला, श्री एम.रामदास, जो अर्थशास्त्री हैं, उनका भी हम इसमें सहयोग लेंगे। हमने जो १५० जिलों में फूड फार वर्क परियोजना लागू की है, उसमें पर्सपैक्टिव प्लान पांच वर्षों का बनाना है। कृपा करके माननीय सदस्य देखें कि दस लाख रुपये एक्सपर्ट का इस्तेमाल करके पर्सपैक्टिव प्लान की तैयारी करने का उसमें प्रावधान है। हमने सभी गाइडलाइंस भेज दी हैं। इसलिए अर्थशास्त्रियों, विशेषज्ञों, तकनीशियनों आदि का इस्तेमाल करने का जो सुझाव है, हम उनका भी इस्तेमाल कर रहे हैं और आगे भी करेंगे और सभी सुझावों को मानेंगे। इसलिए सभी का आभार प्रकट करते हुए और सभी पार्टियों के नेताओं और सभी माननीय सदस्यों को जिंदाबाद बोलते हुए मैं इस कविता के साथ अपनी बात समाप्त करता हूं -
"यह देख रोजगार गारंटी कानून आया, बेकारी, गरीबी मिट जायेगी, मानवता की काली बिन्दी छार-छार हो जायेगी।"
रोजगार गारंटी कानून जिंदाबाद। आप सभी से प्रार्थना है कि सर्वसम्मति से इस ऐतिहासिक कानून को पारित किया जाए, जिससे गरीबों के मन में उत्साह बढ़े, उन्हें रोजगार मिले, गांवों से पलायन रुके और हिन्दुस्तान वर्ष २०२० में दुनिया की अगली पंक्ति के देशों में चला जाए, यही हमारा सपना है। इन्हीं शब्दों के साथ मैं अपनी बात समाप्त करता हूं।
MR. SPEAKER: Hon. Members, have a little patience. I have committed that I will allow three to four Members to seek some clarifications. Let us give some rest to the Minister.
SHRI VIJAYENDRA PAL SINGH (BHILWARA): Sir, there is no doubt that we all welcome the Employment Guarantee Scheme but I have a few questions. The Minister has said that most of the rural development schemes will converge into this Employment Guarantee Scheme. It has not been specified as to what will happen to the districts which are not selected for the Scheme. He has not been able to really clarify this. He has also said that there is no limitation of the funds availability. If that is the situation and if the schemes are not going to be stopped in those Districts which are taken up, then why do they not take up more districts? He has not been able to specify it.
Secondly, the criterion for selection of districts has also not been clarified. How are they going to be increased? In the sense that if the districts would have to be selected from all States, would the criterion for selection of districts be apolitical? It is because there is an apprehension that selection of districts would be a political decision. Would the hon. Minister be kind enough to clarify these two points?
श्री रतिलाल कालीदास वर्मा (धंधुका) : अध्यक्ष जी।
अध्यक्ष महोदय : एक एक करके ही सबको बुलाएंगे। एक साथ नहीं बुला सकते। रतिलाल जी आप बैठ जाइए।
श्री हरिन पाठक (अहमदाबाद) : माननीय अध्यक्ष जी, माननीय मंत्री रघुवंश जी ने आम सभा का भाषण बिल के नाते किया है। उन्होंने कहा है कि आने वाले समय में हम ज्यादा तादाद में यहां बढ़ेंगे, तो इसका सीधा संबंध वोट के साथ है। मैं उसकी चर्चा नहीं करना चाहता। अभी-अभी उन्होंने सीरियल नं. ७(४) संशोधन सदन में बांटा है। हमारे देश में कई जिले हैं जहां मनिमम वेजेज़ ६० रुपये से ज्यादा है। कहीं १०० रुपये है और कहीं १३४ रुपये भी है। उन्होंने जो संशोधन सर्कुलेट किया है, उसकी अंग्रेज़ी मैं समझना चाहता हूं। इसमें लिखा है:
"Provided further that the wage rates specified from time to time under any such notification shall not be at a rate less than Rs. 60 per day."
मैं मंत्री जी से स्पष्टीकरण चाहता हूं कि इससे ऊपर जिनको पैसा मिलता है, क्या वह उनको मिलता रहेगा? ६० रुपये से कम नहीं होगा, इसका मतलब यह है कि इसके ऊपर जिनको जो भी पैसे मिलते हैं, १०० रुपये या ११० रुपये मिलते हैं, वह उनको मिलने चाहिए।
दूसरी बात मैं कहना चाहता हूं कि इतना अच्छा भाषण किया है मगर ५८ सालों से अनेक योजनाएं आई हैं। मंत्री जी ने कबीर का दोहा कहा कि - ‘सब कहते कागद की लेखी, मैं कहता आँखिन की देखी,’ मैं उनको कहना चाहता हूं कि आपने जो पढ़ा, वह सरकारी अधिकारियों का बनाया हुआ बिल है मगर आँखों ने उल्टा देखा है। योजनाओं का जो इंप्लीमैंटेशन होता है, स्वर्गीय राजीव गांधी जी ने कहा था कि एक रुपया सरकार की तिजोरी में से निकलता है तो उसमें से सिर्फ १५ पैसे ही गरीबों के घर तक पहुंचते हैं। इसलिए आपको इसकी भी गारंटी देनी होगी कि जो रुपया सरकार की तिजोरी से निकले, वह गरीब आदमी तक पहुंचे, न कि ८५ पैसे बीच में से कोई ले जाए। इसलिए ये दो पॉइंट्स हैं कि सुपरवाइज़री अथॉरिटी कौन होगी और अकाउंटेबलिटी किस पर होगी। आपने मोटे तौर पर बता दिया कि पंचायत होगी, ब्लाक पंचायत होगी, मगर केन्द्र राज्य और पंचायत, इन तीनों का संकलन करने वाली अथॉरिटी किसकी होगी? Who will be held responsible if this scheme is not properly implemented?
अध्यक्ष महोदय : आप प्रश्न पूछिये। एक क्लैरफिकेशन पूछ सकते हैं। You cannot make a speech on this after having a debate for 12 to 13 hours on this subject.
श्री रतिलाल कालीदास वर्मा : अध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी ने अपने वक्तव्य में बहुत सारी पंक्तियों में अपनी बात रखी है। मैं चार पंक्तियों में अपनी बात रखना चाहता हूं :
"गरीबी हटेगी, गरीबी हटेगी, यह सुनकर कान थके, आपका भाषण सुनकर अब तो लोग थके।
करना हो तो कुछ काम करो, करना हो तो कुछ करके दिखाओ, लोक सभा में मगर के आँसू मत बहाओ, माननीय मंत्री जी अब तो गरीबों को मूर्ख न बनाओ।
गरीब समझ गया है कौन अपना और कौन पराया, पचास साल तक गरीबों का कभी न घर बसाया। "
क्या उनका घर आप बसाएंगे, यही मुझे पूछना है। …( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : यह सही नहीं है। आपको क्लैरफिकेशन के लिए बोला था। आप बहुत अच्छे कवि हैं, मगर यह कविता का समय नहीं है।
श्री तथागत सत्पथी।
...( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : आप लोग प्लीज़ बैठ जाइए। यह सही नहीं है। सब ठीक ढंग से चल रहा है। आप कोई एक क्लैरफिकेशन पूछ सकते हैं। दोबारा स्पीच नहीं देनी है। आप लोग बोल चुके हैं।
SHRI TATHAGATA SATPATHY (DHENKANAL): Sir, I have a specific question. Orissa is a less populated State. Out of 30 districts in the State, only 18 districts have been selected for the `Food for Work’ programme. I would like to know from the hon. Minister whether in order to uplift the State of Orissa he would consider it necessary to bring it at par with the rest of the country.
Will the Minister include the whole State, that is all 30 districts of the State of Orissa, in this programme?
श्री प्रभुनाथ सिंह (महाराजगंज, बिहार) : अध्यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री जी से दो बिंदुओं पर स्पष्टीकरण चाहता हूं। एक तो मंत्री जी का बयान बिहार के अखबारों में आया है कि पंचायती राज व्यवस्था में निचले स्तर पर गड़बड़ी हो रही है। मैं जानना चाहता हूं कि जब मंत्री जी के मन में यह शंका पहले से ही है कि निचले स्तर पर गड़बड़ी हो रही है, तो इसमें सुधार लाने के लिए क्या किया गया है?
श्री हरिन पाठक जी ने कहा कि हम लोगों के यहां मजदूरों को सौ रुपया या ११० रुपया मजदूरी मिलती है। कई जगहों पर अगर यह कानून बन जाएगा तो जिसको ११० रुपया मजदूरी मिल रही है, वहां काम कराने वाला उसे कम मजदूरी देने के लिए कहेगा। ऐसी स्थिति में आप क्या कार्यवाही करेंगे और कौन सा कानून लागू होगा? इस बात का प्रावधान होना चाहिए कि जो मिल रहा है उससे ज्यादा मजदूरी मिले, उससे कम मजदूरी न मिले। इन दो बिंदुओं पर कृपया माननीय मंत्री जी प्रकाश डालें।
डा. रघुवंश प्रसाद सिंह : श्री विजयेन्द्र पाल सिंह ने सवाल उठाया कि किस आधार पर १५० जिले फूड फार वर्क प्रोग्राम के लिए चुने गए हैं। इसके लिए तीन पैरामीटर निश्चित किए गए हैं - १. एससी और एसटी की आबादी। २. वहां पर वेजिज क्या हैं? ३. वहां पर प्रोडिक्टिविटी क्या है? इन तीन पैरामीटर्स के आधार पर राज्यवार जिलों को चुना गया है। माननीय सदस्य संबंधित सूची देख सकते हैं। इसमें ५० जिलों को और शामिल किया जाना है। इसमें कोई राजनीति नहीं हो रही है। उड़ीसा के सबसे ज्यादा १८ जिलों को शामिल किया गया है। इन जिलों का चयन एक सुनिश्चित क्राइटेरिया पर आधारित है। इसमें कोई राजनीति या भेदभाव नहीं हो रहा है। इसकी जिम्मेदारी योजना आयोग को दी गई है। योजना आयोग एक निश्चित क्राइटेरिया के आधार पर इन जिलों का चयन करेगा। अभी ५० एडिशनल जिले भी चुने जाएंगे।
श्री हरिन पाठक जी ने बहुत अच्छा प्रश्न पूछा है। न्यूनतम मजदूरी साठ रूपये कर दी गई है। बहुत गहन छानबीन, विचार-विमर्श और राय के बाद यह तय हुआ कि जो अंतिम संशोधन विधेयक आया है, उसमें देश के वभिन्न राज्यों में जो मिनीमम वेजिज़ वहां पर लागू है, उससे कम नहीं दिया जाएगा। वहां केन्द्र सरकार यदि जरूरत महसूस करती है तो वह भी वेजिज़ दे सकती है, जो कि साठ रूपये से कम नहीं होगा।…( व्यवधान)
MR. SPEAKER: It cannot be a running commentary.
… (Interruptions)
MR. SPEAKER: Sorry, this is not permitted. You do not reply to him.
… (Interruptions)
डा. रघुवंश प्रसाद सिंह : इसके लिए आप सब सदस्यों की भागीदारी की आवश्यकता है। श्री रघुनाथ झा ने सवाल उठाया था कि डिस्टि्रक्ट वजिलेंस और मॉनिटरिंग कमेटी को इसके इम्प्लीमेंटेशन, देखभाल और निगरानी करने का पूरा अधिकार दिया जाएगा। जो माननीय सदस्य की अध्यक्षता वाली समति है, उसे पूर्ण अधिकार प्रदत्त किए गए हैं।
श्री रतिलाल वर्मा ने कविता के जरिए सवाल उठाया था। मेरा जवाब इस प्रकार है - "अगर तुम साथ देने का वायदा करो तो मैं यूं ही मस्त नगमे लूटाता रहूं। "
श्री तथागत सत्पथी ने उड़ीसा के जिलों का सवाल उठाया है। जिन अतरिक्त पचास जिलों को इस स्कीम के तहत शामिल किया जाना है, उनमें उड़ीसा के एससी, एसटी जिलों को भी शामिल किया जाएगा। उड़ीसा के पहले ही १८ जिले इसमें शामिल किए गए हैं।
श्री प्रभुनाथ सिंह जी ने पंचायती राज के बारे में पूछा है। पंचायती राज की भागीदारी सरजमीं तक रहेगी। माननीय सदस्यों की देखरेख में, निगरानी में, सोशल ऑडिट और ग्राम सभा की भागीदारी से यह काम किया जाएगा। जब मामला ग्राम सभा में चला जाए और ग्राम सभा की बैठक होने लगे तो सभी सदस्यों की देखरेख में सारी गड़बड़ी न्यूनतम और कम बल्कि बिलकुल समाप्त हो जाएगी। सभी स्पष्टीकरण के बाद सभी सदस्यों से प्रार्थना है कि इस बिल का समर्थन करें।
MR. SPEAKER: The question is:
"That the Bill to provide for the enhancement of livelihood security of the poor households in rural areas of the country by providing at least one hundred days of guaranteed wage employment in every financial year to every household whose adult members volunteer to do unskilled manual work and for matters connected therewith or incidental thereto, be taken into consideration. "
The motion was adopted.
MR. SPEAKER: The House will now take up clause-by-clause consideration of the Bill. Dr. Raghuvansh Prasad Singh.
Clause 2 Definition Amendments made:
Page 2, line 16, for "Panchayat Samiti,", substitute "Panchayat at intermediate level,’’ (4) Page 2, omit lines 26 to 29 (5) Page 2, line 30, for "(l)", substitute "(k)" (6) Page 2, line 32, for "(m)", substitute "(l)" (7) Page 2, line 33, for "(n)", substitute "(m)" (8) Page 2, line 34, omit "in a Block" (9) Page 2, line 35, for "(o)", substitute "(n)" (10) Page 2, line 37, for "(p)", substitute "(o)" (11) Page 2, line 40, for "(q)", substitute "(p)" (12) Page 2, line 42, for "(r)", substitute "(q)" (13) Page 2, line 44, for "(s)", substitute "(r)" (14) Page 2, line 46, for "(t)", substitute "(s)" (15) (Dr. Raghuvansh Prasad Singh) MR. SPEAKER: Shri Swain, are you pressing the amendment no. 54?
SHRI KHARABELA SWAIN (BALASORE): As the hon. Member has agreed to that, I am not moving.
MR. SPEAKER: We should appreciate it that after hearing the hon. Minister he has not pressed his amendment.
"That clause 2, as amended, stand part of the Bill."
The motion was adopted.
Clause 2, as amended, was added to the Bill.
Clause 3 Guarantee of rural employment to poor households Amendments made:
Page 3, line 4, omit "and for such period" (16) Page 3, line 5, for "every poor household", substitute "every household"(17)
(Dr. Raghuvansh Prasad Singh) MR. SPEAKER: Mr. Swain, are you pressing your amendment nos. 55, 56 & 57? SHRI KHARABELA SWAIN : No, Sir.
MR. SPEAKER: Amendment No. 64, Prof. Malhotra, are you moving? Do you want to speak? PROF. VIJAY KUMAR MALHOTRA : Sir, I am moving my amendment. This is about the Central Government which shall extend the scheme to the whole of India within a period of two years. अध्यक्ष महोदय, मंत्री जी ने विधेयक में बताया है कि इस वर्ष इस योजना को १५० जिलों में शुरू करेंगे तथा ५० जिले इसमें और जोड़े जाएंगे और चार या पांच साल में इस योजना को ये पूरे देश में लागू किया जाएगा। मेरा मानना है कि इसे दो साल में पूरे देश में लागू होना चाहिए। Sir, I beg to move:
Page 3, line 11, --
Omit "or in any case not later than a fortnight" (64) MR. SPEAKER: I shall now put amendment no. 64 moved by Prof. Vijay Kumar Malhotra to the vote of the House. The amendment was put and negatived.
MR. SPEAKER: The question is:
"That clause 3, as amended, stand part of the Bill."
The motion was adopted.
Clause 3, as amended, was added to the Bill.
Clause 4 Employment Guarantee Schemes for rural areas MR. SPEAKER: Mr. Prabhu, are you pressing your amendment no. 70?
SHRI SURESH PRABHAKAR PRABHU (RAJAPUR): No, Sir. I just want a clarification from the hon. Minister. It is rather not a clarification but an amplification.
Sir, there are certain schemes … (Interruptions)
MR. SPEAKER: As you are not moving it, therefore I am allowing it.
SHRI SURESH PRABHAKAR PRABHU : Under Rule 86, I am doing it. There are sequences of events which are not mentioned. Only the scope of work is mentioned. The hon. Prime Minister has just mentioned only a few days ago that a huge pilferage is taking place in the delivery system. This is one scheme which is going to be of such a magnitude that is unprecedented. Therefore, my request is that if the hon. Minister can also specify the sequence of events leading to the allocation of work including the Detailed Project Report and things like that, which I have mentioned. If you feel that he will appropriately take it up, I do not move the amendments.
MR. SPEAKER: You keep in mind his suggestion.
"That clause 4 stand part of the Bill."
The motion was adopted.
Clause 4 was added to the Bill.
Clause 5 was added to the Bill.
Clause 6 – Wage Rate MR. SPEAKER: Prof. Malhotra, are you pressing for amendment no. 65?
PROF. VIJAY KUMAR MALHOTRA : I beg to move:
Page 3, -- for line 43 to 47, substitute --
" (2) The minimum wage rate is fixed at seventy-five rupees per day and the Central Government shall revise the minimum wage rate periodically considering the variations in the consumer price index. " (65)
अभी इन्होंने इसका जिक्र किया है। एक एमेंडमेंट इन्होंने अभी दी है, जिसमें यह कहा है कि ६० रुपये मनिमम होगा, पर उसमें हमने जो एमेंडमेंट दी थी कि जो वहां पर इस समय १३४ रुपये मिल रहा है, कहीं वह १३० रुपये है, उससे कम नहीं होगा।
MR. SPEAKER: That will come later.
I shall now put Amendment No.65 moved by Prof. Vijay Kumar Malhotra to the vote of the House.
The amendment was put and negatived.
MR. SPEAKER: Shri Suresh Prabhakar Prabhu, are you moving Amendment No.71?
SHRI SURESH PRABHAKAR PRABHU (RAJAPUR): No, Sir. I am not moving the amendment.
MR. SPEAKER: Hon. Minister, are you moving Amendment No.74? You have to move that.
DR. RAGHUVANSH PRASAD SINGH: I beg to move:
Page 3, after line 43, insert-
"Provided further that the wage rate specified from time to time under any such notification shall not be at a rate less than sixty rupees per day. " (74) MR. SPEAKER: Prof. Malhotra, are you moving this amendment? You have an amendment on this amendment. Ordinarily, it is not allowed. But I have allowed it. PROF. VIJAY KUMAR MALHOTRA : I beg to move:
Page 3,--
after line 43, insert--
"Provided further that the wage rate specified from time to time under any such notification shall not be at a rate less than the minimum wages prevalent in that State. "
हमने सिर्फ यह कहा है कि अगर वहां पर इस समय अगर १३४ रुपये मिल रहा है तो उससे कम नहीं होना चाहिए। Whatever be the minimum wage , उससे कम नहीं होगा।
MR. SPEAKER: It has already been covered by your earlier amendment.
PROF. VIJAY KUMAR MALHOTRA : That was about Rs.75. I said that whatever is being given to them at the moment, whatever be the minimum wages, it should not be less than that; it should be accepted.
SHRI L.K. ADVANI (GANDHINAGAR): In his speech, the hon. Minister has already said that that would be so. Why do you not accept this?
PROF. VIJAY KUMAR MALHOTRA : He says that it is only Rs.60/-
MR. SPEAKER: I shall now put the Amendment to Amendment No. 74 moved by Prof. Vijay Kumar Malhotra to the vote of the House.
The amendment was put and negatived.
MR. SPEAKER: The question is:
Page 3, after line 43, insert-
"Provided further that the wage rate specified from time to time under any such notification shall not be at a rate less than sixty rupees per day. " (74) The motion was adopted.
MR. SPEAKER: The question is:
"That clause 6, as amended, stand part of the Bill.
The motion was adopted.
Clause 6, as amended, was added to the Bill.
Clause 7 – Payment of Unemployment Allowance Amendment made:
"Page 4, line 28, after "local authority", insert "(including the Panchayats at the district, intermediate or village level) ". (18) (Dr. Raghuvansh Prasad Singh) MR. SPEAKER: Shri Kharabela Swain, are you moving the Amendment Nos. 58, 59, 60, 61 and 62? SHRI KHARABELA SWAIN (BALASORE): No, Sir. I am not moving my amendments. MR. SPEAKER: We should appreciate the cooperative attitude. I am appreciating it from the Chair. This is the way that we should cooperate with each other. I appreciate it. The question is:
"That clause 7, as amended, stand part of the Bill."
The motion was adopted.
Clause 7, as amended, was added to the Bill.
Clause 8 – Non-disbursement of unemployment allowance in certain circumstances MR. SPEAKER: Prof. Vijay Kumar Malhotra, are you moving the amendment number 66?
PROF. VIJAY KUMAR MALHOTRA : I beg to move:
Page 4, lines 43 and 44,--
for "as expeditiously as possible."
Substitute,--
"within a maximum period of ten days." (66) Sir, they have mentioned it "as expeditiously as possible." I have said "within a maximum period of ten days."
MR. SPEAKER: Mr. Minister, are you accepting his amendment?
DR. RAGHUVANSH PRASAD SINGH: No, Sir.
MR. SPEAKER: I shall now put Amendment No.66 moved by Prof. Vijay Kumar Malhotra to the vote of the House The amendment was put and negatived.
MR. SPEAKER: The question is:
"That clause 8 stand part of the Bill."
The motion was adopted.
Clause 8 was added to the Bill.
Clause 9 – Disentitlement to receive Unemployment allowance in certain circumstances MR. SPEAKER: Prof. Vijay Kumar Malhotra, are you moving the amendment number 67?
PROF. VIJAY KUMAR MALHOTRA : I beg to move:
Page 5, lines 6 and 7,--
for "for a period of three months"
Substitute,--
"for the period he/she does not report for work" (67) Sir, they have said "for a period of three months." I have mentioned that it should be substituted for the period he/she does not report for work. उतने दिन को छोड़कर, इन्होंने तीन महीने अगर काम नहीं होता है, तो किया है। MR. SPEAKER: I shall now put Amendment No. 67 moved by Prof. Vijay Kumar Malhotra to vote. The amendment was put and negatived.
PROF. VIJAY KUMAR MALHOTRA : Sir, the Standing Committee unanimously suggested all these amendments. Now, they have rejected and the Minister says that they have honoured the recommendations of the Standing Committee. MR. SPEAKER: The question is:
"That clause 9 stand part of the Bill."
The motion was adopted.
Clause 9 was added to the Bill.
Clause 10 – Central Employment Guarantee Council Amendment made:
Page 5, line 32, after "the Scheduled Tribes", insert", the Other Backward Classes" (19) (Dr. Raghuvansh Prasad Singh) MR. SPEAKER: The question is:
"That clause 10, as amended, stand part of the Bill."
The motion was adopted.
Clause 10, as amended, was added to the Bill.
Clause 11 – Functions and duties of Central Council MR. SPEAKER: Shri Suresh Prabhu, are you moving Amendment No. 72?
SHRI SURESH PRABHAKAR PRABHU : Sir, I am not moving Amendment No. 72.
MR. SPEAKER: The question is:
"That clause 11 stand part of the Bill."
The motion was adopted.
Clause 11 was added to the Bill.
Clause 12 – State Employment Guarantee Council Amendment made:
Page 6, line 23, after "the Scheduled Tribes", insert", the Other Backward Classes" (20) (Dr. Raghuvansh Prasad Singh) MR. SPEAKER: The question is:
"That clause 12, as amended, stand part of the Bill."
The motion was adopted.
Clause 12, as amended, was added to the Bill.
Clause 13 – Standing Committee at
district level
Amendment made:
Page 7, for lines 1 to 17, substitute –
Principal "13. (1) The Panchayats at district, intermediate and village authorities for levels shall be the principal authorities for planning and planning and implementation of the Schemes made under this Act.
implementation of Schemes.
The functions of the Panchayats at the district level shall be – to finalize and approve blockwise shelf of projects to be taken up under a programme under the Scheme;
to supervise and monitor the projects taken up at the Block level and district level; and to carry out such other functions as may be assigned to it by the State Council, from time to time.
The functions of the Panchayat at intermediate level shall be – to approve the Block level Plan for forwarding it to the district Panchayat at the district level for final approval;
to supervise and monitor the projects taken up at the Gram Panchayat and Block level; and to carry out such other functions as my be assigned to it by the State Council, from time to time.
The District Programme Coordinator shall assist the Panchayat at the district level in discharging its functions under this Act and any Scheme made thereunder." (21) (Dr. Raghuvansh Prasad Singh) MR. SPEAKER: The question is:
"That clause 13, as amended, stand part of the Bill."
The motion was adopted.
Clause 13, as amended, was added to the Bill.
Clause 14 – District Programme Coordinator Amendments made:
Page 7, for lines 26 and 27, substitute – "(a) to assist the district Panchayat in discharging its functions under this Act and any scheme made thereunder. " (22) Page 7, line 30, for "Standing Committee", substitute "Panchayat at district level" (23) (Dr. Raghuvansh Prasad Singh) MR. SPEAKER: The question is:
"That clause 14, as amended, stand part of the Bill."
The motion was adopted.
Clause 14, as amended, was added to the Bill.
Clause 15 – Programme Officer Amendments made:
Page 8, for lines 4 to 6, substitute – Programme "15 (1) At every Panchayat at intermediate level, the State Officer. Government shall appoint a person who is not below the rank of Block Development Officer with such qualifications and experience as may be determined by the State Government as Programme Officer at the Panchayat at intermediate level.
(2) The Programme Officer shall assist the Panchayat at intermediate level in discharging its functions under this Act and any Scheme made thereunder." (24) Page 8, line 7, for "(2)", substitute "(3)" (25) Page 8, line 10, for "(3)", substitute "(4)" (26) Page 8, line 13, for "(4)", substitute "(5)" (27) Page 8, line 17, for "eligible poor households", substitute "eligible households" (28) Page 8, line 27, for "(5)", substitute "(6)" (29) Page 8, line 29, for "(6)", substitute "(7)" (30) (Dr. Raghuvansh Prasad Singh) MR. SPEAKER: The question is:
"That clause 15, as amended, stand part of the Bill."
The motion was adopted.
Clause 15, as amended, was added to the Bill.
Clause 16 – Responsibilities of the Gram Panchayats Amendment made:
Page 8, line 43, for "may allot", substitute "shall allot" (31) (Dr. Raghuvansh Prasad Singh) MR. SPEAKER: The question is:
"That clause 16, as amended, stand part of the Bill."
The motion was adopted.
Clause 16, as amended, was added to the Bill.
Clauses 17 to 26 were added to the Bill.
Clause 27 - –Power of Central Government to give directions Amendment made:
Page 11, line 5, for "27", substitute "27.(1)" (32) Page 11, after line 6, insert-
"(2) Without prejudice to the provisions of sub-section (1), the Central Government may, on receipt of any complaint regarding the issue or improper utilisation of funds granted under this Act in respect of any Scheme if prime facie satisfied that there is a case, cause an investigation into the complaint made by any agency designated by it and if necessary, order stoppage of release of funds to the Scheme and institute appropriate remedial measures for its proper implementation within a reasonable period of time." (33) (Dr. Raghuvansh Prasad Singh) MR. SPEAKER: The question is:
"That clause 27, as amended, stand part of the Bill."
The motion was adopted.
Clause 27, as amended, was added to the Bill.
Clauses 28 to 31 were added to the Bill.
Clause 32 – Power of State Government to make rules Amendments made: Page 12, omit lines 9 and 10 (34) Page 12, line 11, for "(e)", substitute "(d)" (35) Page 12, line 13, for "(f)", substitute "(e)" (36) Page 12, line 15, for "(g)", substitute "(f)" (37) Page 12, line 17, for "(h)", substitute "(g)" (38) Page 12, line 19, for "(i)", substitute "(h)" (39) Page 12, line 21, for "(j)", substitute "(i)" (40) Page 12, line 23, for "(k)", substitute "(j)" (41) (Dr. Raghuvansh Prasad Singh) MR. SPEAKER: The question is: "That clause 32, as amended, stand part of the Bill." The motion was adopted. Clause 32, as amended, was added to the Bill. Clauses 33 and 34 were added to the Bill. Schedule I Amendments made: Page 13, line 28, omit "diligently" (42) Page 13, line 9, after "and Scheduled Tribes", insert – "or to land of beneficiaries of land reforms or that of the beneficiaries under the Indira Awas Yojana of the Government of India." (49) Page 13, line 14, after "by the Central Government", insert – "in consultation with the State Government." (50) (Dr. Raghuvansh Prasad Singh) MR. SPEAKER: The question is: "That Schedule I, as amended, stand part of the Bill." The motion was adopted. Schedule I, as amended, was added to the Bill. Schedule II Amendments made:
Page 14, line 20, for "Gram Panchayat", substitute "Gram Panchayat at the village level (hereafter in this Schedule refereed to as the Gram Panchayat)"
(43)Page 15, line 3, for "Gram Panchayat Office", substitute "Panchayats at the district, intermediate or village level" (44) Page 16, line 7, for "ten thousand rupees", substitute "twenty-five thousand rupees"(45)
Page 16, for lines 13 to 15, substitute – "28. In case the number of children below the age of six years accompanying the women working at any site are five or more, provisions shall be made to depute one of such women worker to look after such children."
(46)Page 14, line 38, after "whichever is later", insert – "Provided that priority shall be given to women in such a way that at least one-third of the beneficiaries shall be women who have registered and requested for work under this Act."
(51)(Dr. Raghuvansh Prasad Singh) MR. SPEAKER: The question is:
"That Schedule II, as amended, stand part of the Bill."
The motion was adopted.
Schedule II, as amended, was added to the Bill.
PROF. VIJAY KUMAR MALHOTRA : Sir, there is an Amendment to the Second Schedule for which I have given a notice.
MR. SPEAKER: Your Amendment No. 69 is the same as 45.
PROF. VIJAY KUMAR MALHOTRA : No Sir. It is not the same. It should be Rs. 25,000 in place of Rs. 10,000. This is my Amendment.
MR. SPEAKER: It has been carried out in the Government Amendment. It will be on record that you had also given a notice for similar Amendment.
Clause 1 – Short title, extent and commencement Amendments made:
Page 1, line 4 for "2004", substitute "2005" (3) Page 1, after line 10, insert – "Provided that this Act shall be applicable to the whole of the territory to which it extends within a period of five years from the date of enactment of this Act." (47) (Dr. Raghuvansh Prasad Singh) MR. SPEAKER: The question is:
"That clause 1, as amended, stand part of the Bill."
The motion was adopted.
Clause 1, as amended, was added to the Bill.
MR. SPEAKER: Prof. Malhotra, you have an amendment to clause 1. Are you moving it?
PROF. VIJAY KUMAR MALHOTRA : Sir, it is the same.
MR. SPEAKER: So, you are not moving it.
"That clause 1, as amended, stand part of the Bill.’ The motion was adopted.
Clause 1, as amended, was added to the Bill.
Enacting Formula संशोधन किया गया:
"पृष्ठ १, पंक्ति १, "पचपनवें" के स्थान पर "छप्पनवें" प्रतिस्थापित किया जाए। " (२) (डा. रघुवंश प्रसाद सिंह) MR. SPEAKER: The question is :
"That the Enacting Formula, as amended, stand part of the Bill."
The motion was adopted.
The Enacting Formula, as amended, was added to the Bill.
Long Title of the Bill संशोधन किया गया:
"पृष्ठ १, विधेयक के पूरे नाम में, "निर्धन गृहस्थियों" के स्थान पर "गृहस्थियों" प्रतिस्थापित किया जाये। " (१) (डा. रघुवंश प्रसाद सिंह) MR. SPEAKER: Shri Kharabela Swain has an amendment to the Long Title. Mr. Swain, are you pressing your amendment?
SHRI KHARABELA SWAIN : Mr. Speaker, Sir, I just want a clarification from the hon. Minister on this. I have given notice of an amendment stating that the work should be offered not only to one person from a family, but anybody from the family should be allowed to work. If he is accepting it, then I will not be pressing my amendment.
PROF. VIJAY KUMAR MALHOTRA : Sir, earlier also they did not accept it. He said that out of 100 days of work, if there are five persons in a family, work can be given only for 20 days. But we say that anyone who offers himself to work should be allowed. It should be accepted.
MR. SPEAKER: Let him decide. Mr. Swain, are you pressing that amendment?
SHRI KHARABELA SWAIN : Sir, I just want to know from the hon. Minister whether he is agreeing that work should be given not to one person in a family, but it should be given to anybody from the family who wants to work and it should be for more than 100 days. Is the Minister willing to agree to this?
डा. रघुवंश प्रसाद सिंह : महोदय, एक हाउसहोल्ड को १०० दिन तक रोजगार देने की गारंटी है। अगर दो या तीन सदस्य मिलकर करें, तो भी १०० दिन तक उनको कार्य देने की गारंटी है।
अध्यक्ष महोदय : सब मिलकर होगा।
SHRI KHARABELA SWAIN : Then, I am pressing my amendment.
I beg to move:
Page 1, in the long title,--
for "household whose adult members volunteer"
substitute "adult member who volunteers" (73) MR. SPEAKER: I shall now put amendment no. 73 moved by Shri Kharabela Swain to the vote of the House.
The amendment was put and negatived.
MR. SPEAKER: The question is:
"That the Long Title, as amended, stand part of the Bill."
The motion was adopted.
The Long Title, as amended, was added to the Bill.
MR. SPEAKER: The hon. Minister may now move that the Bill, as amended, be passed.
डा.रघुवंश प्रसाद सिंह : अध्यक्ष महोदय, मैं प्रस्ताव करता हूं :
"कि विधेयक को संशोधित रूप में पारित किया जाए। "
प्रो. विजय कुमार मल्होत्रा : अध्यक्ष महोदय, मंत्री जी ने शुरू में कहा था कि अर्बन पुअर्स के लिए भी हमारा कमिटमैंट है। इऩके मैनिफेस्टो में लिखा है। क्या मंत्री जी उनके लिए भी बिल लाने के लिए एश्योर करते हैं ?
अध्यक्ष महोदय : उन्होंने बोला है।
"That the Bill, as amended, be passed."
The motion was adopted.
[Mr. Deputy-Speaker in the Chair] 15.55 hrs.