Lok Sabha Debates
The Speaker Made A Reference Regarding Loss Of Lives In Bus Accident. on 5 May, 2015
Sixteenth Loksabha an> Title: The Speaker made a reference regarding loss of lives in bus accident.
माननीय अध्यक्ष : माननीय सदस्यगण, 4 मई, 2015 को मध्य प्रदेश के पन्ना जिले में एक बस के नाले में गिरने और उसमें आग लगने के परिणामस्वरूप 21 व्यक्तियों की बुरी तरह से जल जाने के कारण मृत्यु होने और अन्य 12 व्यक्तियों के आग से जख्मी होने की सूचना मिली है।
यह सभा इस दुःखद घटना पर अपनी गहरी संवेदना प्रकट करती है, जिसने शोक-संतप्त परिवारों को अत्यंत दुःख और पीड़ा पहुंचायी है। यह सभा घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करती है।
सभा दिवंगत आत्माओं के सम्मान में अब थोड़ी देर मौन खड़ी रहेगी।
11.01 hrs. The Members then stood in silence for short while.
…( व्यवधान)
HON. SPEAKER: Hon. Members, I have received notices of Adjournment Motion from S/ Shri A.P. Jithender Reddy, Prem Singh Chandumajra, K.V. Thomas, N.K. Premachandran, K.C. Venugopal, M.B. Rajesh, P. Karunakaran, P.K. Shreemathi Teacher, Bhagwant Mann, Capt. Amarinder Singh, Ravneet Singh, Santokh Singh Chaudhary and Kodikunnil Suresh. The matters though important enough do not warrant interruption of business of the day. The matters can be raised through other opportunities. Therefore, I have disallowed the notices of Adjournment Motion.
… (Interruptions)
CAPT. AMARINDER SINGH (AMRITSAR): Madam, there is a law and order problem in Punjab… (Interruptions)
HON. SPEAKER: I will allow you to raise this issue in ‘Zero Hour’.
… (Interruptions)
SHRI A.P. JITHENDER REDDY (MAHABUBNAGAR): This issue is very important… (Interruptions)
HON. SPEAKER: This is not permissible. It will not be allowed. You cannot show these things like this. I warn you not to do that.
… (Interruptions)
11.04 hrs At this stage, Shrimati Kavitha Kalvakuntla and some other hon. Members came and stood on the floor near the Table.
HON. SPEAKER: I will allow you to raise your matter in ‘Zero Hour’.
… (Interruptions)
HON. SPEAKER: This is not allowed at all. Please do not show all these things here.
… (Interruptions)
HON. SPEAKER: Now, let us take up Question No.541 – Shri Laxmi Narayan Yadav.
… (Interruptions)
11.04 ½ hrs. ORAL ANSWERS TO QUESTIONS HON. SPEAKER : Shri Laxmi Narayan yadav.
(Q. 541) श्री लक्ष्मी नारायण यादव: माननीय अध्यक्ष महोदया, फूड प्रोसेसिंग का कृषि और हॉर्टिकल्चर से बहुत गहरा संबंध होता है। ...(व्यवधान)अध्यक्ष महोदया, माननीय मंत्री जी ने जो उत्तर दिया है, उसके खण्ड - ई में यह बताया है कि किस प्रकार से भारत सरकार विभिन्न प्रकार की सहूलियतें दे कर फूड प्रोसेसिंग को बढ़ाना चाहती है। प्रश्न के उत्तर के एनेक्श्चर - एक में बताया गया है कि किस प्रकार से मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में फूड प्रोसेसिंग के विस्तार के लिए कम राशि गई है। ...(व्यवधान) उन्होंने कभी इस बात पर विचार किया है कि क्या कारण हैं कि जो प्रदेश कृषि और हॉर्टिकल्चर में आगे बढ़ रहे हैं, उनमें फूड प्रोसेसिंग का काम बहुत कम हो रहा है?...(व्यवधान) उनके मंत्रालय और उनकी सोच के आधार पर, इसके क्या कारण हैं? ...(व्यवधान)
श्रीमती हरसिमरत कौर बादल : मैडम, मैं आपके माध्यम से माननीय सांसद को बताना चाहती हूँ कि उनकी बात बिल्कुल सही है।...(व्यवधान)
HON. SPEAKER: Please, these placards, etc. are not allowed in the House. I am always giving a warning.
… (Interruptions)
HON. SPEAKER: All of you please go back to your seats, and do not show these placards.
… (Interruptions)
HON. SPEAKER: No, I am requesting all of you to go back to your seats. You can say whatever you want during the ‘Zero Hour’, but not now.
… (Interruptions)
HON. SPEAKER: Please go back to your seats. No placards, etc. should be shown.
… (Interruptions)
THE MINISTER OF URBAN DEVELOPMENT, MINISTER OF HOUSING AND URBAN POVERTY ALLEVIATION AND MINISTER OF PARLIAMENTARY AFFAIRS (SHRI M. VENKAIAH NAIDU): Madam, the matter is before the court. … (Interruptions) The Central Government has said that we are in favour of a separate court. … (Interruptions) The matter is pending before the High Court. … (Interruptions) There is a Public Interest Litigation (PIL) going on in the High Court. … (Interruptions) The Government is in favour of a separate High Court for Telangana and that has been made very clear. … (Interruptions) Showing placards is not a good practice. I appeal to you to please leave the placards. … (Interruptions) Please do not have these placards as it will become a practice. … (Interruptions)
श्रीमती हरसिमरत कौर बादल : मैडम, मैं आपके माध्यम से माननीय सांसद को बताना चाहती हूँ कि उनकी बात बिल्कुल सही है कि फूड प्रोसेसिंग सैक्टर का हरेक राज्य में और खास तौर से किसानों को ऊपर उठाने के लिए बहुत महत्वपूर्ण योगदान है। ...(व्यवधान) जहां तक मंत्रालय की स्कीम्स हैं, आपके माध्यम से मैं बताना चाहूंगी कि यह मंत्रालय अपने आप कोई स्कीम वहां पर नहीं लगाता है। ...(व्यवधान) लेकिन एक ऐसा एंवायरमेंट बनाने के लिए तीन खास स्कीम्स हैं, जिससे कि फूड प्रोसेसिंग को बढ़ावा मिलेगा। ...(व्यवधान) एक मेगा फूड पार्क की स्कीम है, दूसरी कोल्ड चेन की स्कीम है और तीसरी नैशनल मिशन ऑफ फूड प्रोसेसिंग की स्कीम है। ...(व्यवधान) राज्य अपने आप इनको आगे ले जाते हैं। ...(व्यवधान) पहली दो स्कीम्स मंत्रालय के द्वारा लगाई जाती हैं। ...(व्यवधान) इनको लगाने के लिए मंत्रालय के द्वारा कुछ ग्रांट एवं सब्सिडी आदि दी जाती है और एक्सप्रेशन ऑफ इंट्रेस्ट इंवाईट किया जाता है कि जो लोग लगाना चाहते हैं, वे अप्लाई करें। ...(व्यवधान) जो लोग अप्लाई करते हैं, उनमें से जो क्राइटेरिया मीट करते हैं, उनको यह लगाने का मौका मिलता है। ...(व्यवधान) माननीय सदस्य ने मध्य प्रदेश की बात की है, मैं बताना चाहूंगी कि हमारे मंत्रालय के द्वारा मध्य प्रदेश के लिए दो मेगा फूड पार्क ऑलरेडी अप्रूव हो चुके हैं। ...(व्यवधान) जिनका काम-काज चल रहा है। ...(व्यवधान) मुझे उम्मीद है कि इस साल उसकी इनॉग्रेशन बहुत जल्दी ही होगी। ...(व्यवधान) तीन कोल्ड चेन प्रोजेक्ट्स हमने मध्य प्रदेश में अप्रूव किए हैं, दो अन्य चालू भी हो चुके हैं। ...(व्यवधान) इसके अलावा नैशन मिश्न ऑफ फूड प्रोसेसिंग के द्वारा सरकार हरेक राज्य को ग्रांट देती है कि वह प्रोसेसिंग को बढ़ावा देने के लिए जिस मर्ज़ी तरीके से इस पैसे का यूटिलाइज़ेशन कर सकती हैं। ...(व्यवधान) मंत्रालय की तरफ से मध्य प्रदेश को तकरीबन 25 करोड़ रूपये की ग्रांट दी गई है, जिसमें से अभी मध्य प्रदेश की सरकार ने केवल 18 करोड़ रूपये की यूटिलाइज़ेशन की है। ...(व्यवधान) मैं माननीय सदस्य को कहूंगी कि वे जो यूटिलाइज़ेशन कराना चाहते हैं, वह अपनी राज्य सरकार के द्वारा करा सकते हैं और अब 14वें वित्त आयोग की नई गाईडलाइंस के हिसाब से यह पूरी ग्रांट सीधे राज्यों को जाती है। ...(व्यवधान) मेरे मंत्रालय से भी पैसा जाने की जरूरत नहीं है, उनकी इंक्रीज्ड एलोकेशन से ही ये अपना काम फूड प्रोसेसिंग में आगे बढ़ा सकते हैं। ...(व्यवधान)
श्री लक्ष्मी नारायण यादव : महोदया, असल में इसके पूर्व भी इस प्रकार का एक प्रश्न उठा था, ...(व्यवधान)जिसके उत्तर में माननीय मंत्री जी ने यह बताया है कि किस प्रकार से देश में दो इंस्टिटय़ूट्स खास तौर से इस बात के लिए स्टैब्लिश किए गए हैं, ...(व्यवधान)जहां पर लोगों को एंटरप्रिन्योरशिप और दूसरे प्रकार की शिक्षा दी जाती है। ...(व्यवधान) मैं माननीया मंत्री जी से पूछना चाहता हूँ कि जो बैकवर्ड इलाके हैं, जहां संभावनाएं ज्यादा हैं, क्या वे वहाँ ऐसे एकाध इंस्टीटय़ूट शुरू करेंगी ताकि लोगों में एन्टरप्रिन्योरशिप डेवलप हो सके, वे इस प्रकार से सोच सकें और नई इंडस्ट्रीज स्टैब्लिश करने में सहायक हो सकें?...(व्यवधान)
श्रीमती हरसिमरत कौर बादल : महोदया, हमारे मंत्रालय में दो इंस्टीटय़ूट्स हैं, एक आईआईसीपीटी, तमिलनाड़ु में हैं और दूसरा निफ्टम, हरियाणा में है।...(व्यवधान) निफ्टम फूड एन्टरप्रिन्योर मैनेजर्स बनाने के लिए, एन्टरप्रिन्योरशिप को एम.टेक. और बी.टेक. के कोर्सेज कराते हैं।...(व्यवधान) इन कोर्सेज में ही एक आउटरीच प्रोग्राम है, जहाँ पर ये स्टूडेंट्स अपनी मर्जी के दस गाँव सिलेक्ट करके, एडॉप्ट करके, साल में वहाँ दस दिन लगाकर उन गाँव वाले लोगों को ट्रेनिंग और नॉलेज इम्पार्ट करते हैं।...(व्यवधान) जो आईआईसीपीटी, इंडियन इंस्टीटय़ूट ऑफ क्रॉप प्रोसेसिंग टेक्नॉलाजी, तमिलनाड़ु में है, उन्होंने अपने इंस्टीटय़ूट के अंदर एक और यह शुरू किया है कि अलग-अलग तरह के किसानों को स्किल इम्पार्ट करने के लिए, कि वह जो फसल उगाता है, इंस्टीटय़ूट में कुछ हफ्ता, तीन, चार या दस दिन लगाकर उसके बारे में सीख सकता है कि उसको प्रोसेस करके आगे उसकी मार्केटिंग कैसे कर सकता है। इसकी उनको इंस्टीटय़ूट में ही ट्रेनिंग दी जाती है। हमारा मंत्रालय कोई ऐसे इंस्टीटय़ूट्स और नहीं खोल सकता है। नेशनल मिशन ऑफ फूड प्रोसेसिंग के अंदर ये स्किल ट्रेनिंग प्रोग्राम करना चाहें, कोई कैंप लगाना चाहें, कोई प्रोसेसिंग के बारे में सिखाना चाहें तो इसका स्टेट्स को पूरा अधिकार है और फ्लेक्सिबिलिटी है।...(व्यवधान) जैसा मैंने इनको बताया कि नेशनल मिशन ऑफ फूड प्रोसेसिंग में 25 करोड़ रूपए इनके स्टेट को एलोकेटेड हैं।...(व्यवधान) किसी भी काम के लिए चाहे किसान को ट्रेंड करने के लिए या कोई इफ्रास्ट्रक्चर लगाने के लिए, किसी चीज के लिए भी उसका इस्तेमाल कर सकते हैं। ...(व्यवधान)
HON. SPEAKER: Please go back to your seats. Do not show these placards; otherwise, I will have to take action. Please go back to your seats.
… (Interruptions)
HON. SPEAKER: The House stands adjourned to meet again at 11.20 a.m. 11.12 hrs The Lok Sabha then adjourned till Twenty Minutes past Eleven of the Clock.
11.20 hrs The Lok Sabha re-assembled at Twenty Minutes past Eleven of the Clock.
(Hon. Speaker in the Chair) … (Interruptions)
At this stage, Shrimati Kavitha Kalvakuntla, Shri B. Vinod Kumar and some other hon. Members came and stood on the floor near the Table.
… (Interruptions)
HON. SPEAKER: Please go to your seats. I will allow you during ‘Zero Hour’. At that time, if the Government is ready to respond, I have no objection. Not now.
… (Interruptions)
HON. SPEAKER: You cannot speak from here.
… (Interruptions)
HON. SPEAKER: You raise the matter during ‘Zero Hour’. If the Government is ready to respond, I will allow.
… (Interruptions)
HON. SPEAKER: This would not do.
… (Interruptions)
HON. SPEAKER: Whatever it is, your Minister can respond.
… (Interruptions)
HON. SPEAKER: Q. No. 542.
… (Interruptions)
11.21 hrs. ORAL ANSWERS TO QUESTIONS...Contd.
HON. SPEAKER : Shri Rajesh Verma.
(Q. 542) श्री राजेश वर्मा : माननीय अध्यक्ष जी, मैंने माननीय मंत्री जी से यह जानना चाहा था कि क्या सरकार ने देश में इमारती और चंदन की लकड़ी की बढ़ती तस्करी और बहुमूल्य प्रजातियों के वृक्षों की अवैध कटाई पर ध्यान दिया है? यदि हाँ, तो तत्संबंधी राज्यवार ब्यौरा क्या है? माननीय मंत्री जी ने बड़े विस्तार से उत्तर देने का प्रयास किया है। लेकिन चार राज्यों का ही इन्होंने सदन को डीटेल दी है, जिसमें तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, केरल और असम शामिल हैं। जो जवाब आया है, उसमें भी केवल चंदन और लाल चंदन की तस्करी से रिलेटेड जवाब आया है।
माननीय अध्यक्ष जी, मैंने माननीय मंत्री जी से यह जानना था कि इमारती और चंदन की लकड़ी की तस्करी का राज्यवार ब्यौरा क्या है। मैं आपको बताना चाहता हूँ कि मैं जिस उत्तर प्रदेश राज्य से आता हूँ, उत्तर प्रदेश राज्य में जंगल का एक बहुत बड़ा इलाका है। पीलीभीत जनपद से लगा हुआ पीलीभीत, लखीमपुर, बहराइच और बाराबंकी होते हुए नेपाल बार्डर गोरखपुर तक पूरा जंगल का क्षेत्र है। इस जंगल के क्षेत्र में बड़ी बेशकीमती इमारती लकड़ी जैसे सागौन और साखू की इस इलाके से बड़े पैमाने पर तस्करी होती है। हमें उत्तर प्रदेश के संबंध में कोई भी जवाब नहीं मिला है। मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी से जानना चाहता हूँ कि उत्तर प्रदेश राज्य से तस्करी के कितने केसेज़ आपके पास आए हैं, कितना केन्द्र सरकार को नुकसान हुआ है और कितना पर्यावरण को नुकसान हुआ है?
श्री प्रकाश जावड़ेकर : माननीय सदस्य जो कह रहे हैं, वह एक मात्रा में सही है क्योंकि उन्होंने एक जगह उत्तर प्रदेश का पूछा है लेकिन सबसे ज्यादा बड़ी स्मगलिंग क्योंकि टिंबर और सैंडलवुड की थी, तो सैंडलवुड और रैड सैंडर के बारे में डीटेल्स दी हैं। लेकिन जो आपने मांगा है कि दूसरी लकड़ी की भी कटाई होती है, वह सच है। जो कटाई होती है, उसकी स्मगलिंग होती है, लेकिन ज्यादा स्मगलिंग सैंडलवुड और रैड सैंडर की होती है। उसके बारे में विस्तार से दिया है और बाकी जो जानकारी उत्तर प्रदेश के संबंध में है, वह मैं आपको लिखित रूप से दूँगा।
श्री राजेश वर्मा : माननीय अध्यक्ष जी, माननीय मंत्री जी ने जवाब दिया है कि इसका विस्तार से जवाब हमें दे देंगे। इसी से संबंधित दूसरा प्रश्न मैं पूछना चाहता हूँ कि मैंने जिस इलाके का आपको ज़िक्र किया है, उस इलाके से नदी के माध्यम से, जलमार्ग से शारदा नदी, घाघरा नदी, सरयू नदी, इनके माध्यम से बड़े पैमाने पर सागौन और साखू की लकड़ी की तस्करी सीतापुर, लखनऊ और बाराबंकी की तरफ होती है।
मैं माननीय मंत्री जी से यह जानना चाहता हूं कि इस जलमार्ग से हो रही इस तस्करी को रोकने के लिए क्या कोई जरूरी उपाय करेंगे?
श्री प्रकाश जावड़ेकर: पीलीभीत से बहराइच तक सागवान की जिस तरह से तीन नदियों के माध्यम से लखनऊ तक भी स्मगलिंग होती है, वह इल्लीगल कटाई का परिणाम है और इसके लिए हम एक विशेष दल, एक इंस्पैक्शन टीम भेजेंगे और उससे दो महीने में उसकी रिपोर्ट मांगेंगे।
श्री राजेन्द्र अग्रवाल : अध्यक्षा जी, मेरा जो प्रश्न है, वह भी उत्तर प्रदेश से सम्बन्धित है। यह सम्भवतः कम जानकारी है कि उत्तर प्रदेश में हस्तिनापुर के पास जो अभयारण्य है, दक्षिण भारत के अलावा वहीं पर चन्दन के प्रचुर मात्रा में पेड़ पाये जाते हैं, जैसा कि हमारे प्रश्नकर्ता ने भी प्रश्न किया है, वहां से चन्दन के अलावा भी अन्य सब कीमती लकड़ी की स्मगलिंग होती रही है, खास तौर से चन्दन के विषय में जब आर.टी.आई. के माध्यम से जानकारी ली गई तो वहां पर कोई रिकार्ड नहीं है। पूछा गया कि कितने पेड़ हैं तो गिनती नहीं की गई है। जो वहां के विभाग ने तस्करी किए हुए पेड़ों की आमदनी दिखाई है, उसमें चन्दन के पेड़ों का जिक्र ही नहीं है। मैं माननीय मंत्री जी से पूछना चाहता हूं कि हस्तिनापुर की इस सैंक्चुरी का भी इसके अन्दर संज्ञान लेकर वहां कुछ कार्य करने की या स्मगलिंग रोकने की कुछ योजना है?
श्री प्रकाश जावड़ेकर: कोयम्बटूर की हमारी जंगल की इन्वेंटरी का अध्ययन करने वाली जो एक संस्था है, उसके माध्यम से हम उसकी गिनती कर रहे हैं। हर राज्य में सेंडल की और रैड सेंडल की इन्वेंटरी कितनी है, उसकी जल्दी ही रिपोर्ट आएगी, वह वर्क इन प्रोग्रैस है।
HON. SPEAKER: I would again request you, please go to your seats. I will allow you in Zero Hour. Please go to your seats. At that time if they want to respond, I have no objection. Not now. Please go to your seats.
… (Interruptions)
HON. SPEAKER: I will allow you in Zero Hour. You can raise the matter then, not now. This is not the way. You will not get an answer like this.
साध्वी साविज्ञा बाई फूले - उपस्थित नहीं।
श्री जगदम्बिका पाल।
(Q. 543) श्री जगदम्बिका पाल: अध्यक्षा जी, मैं आपका बहुत आभारी हूं कि आपने एक अत्यन्त महत्वपूर्ण प्रश्न पर मुझे प्रश्न पूछने की अनुमति दी है। मैं माननीय मंत्री जी को भी धन्यवाद दूंगा कि माननीय मंत्री जी ने बहुत विस्तार से देश के वन और सीमावर्ती क्षेत्र में जो सड़कें हैं, रास्ते हैं, पुल हैं, पुलिया हैं, उनके निर्माण हेतु जो स्वीकृतियां जारी की हैं, काफी विस्तार से इन्होंने उत्तर दिया है। मैं आपके माध्यम से जानना चाहता हूं कि माननीय मंत्री जी ने स्वीकार किया है कि जो अन्तर्राष्ट्रीय सीमा क्षेत्र से पांच किलोमीटर की हवाई दूरी है, उसमें जो सशस्त्र सीमा सुरक्षा बल और जो सैण्ट्रल बोर्डर रोड संगठन है, वह सड़कों का और पुलियों के निर्माण का काम करती है, ऐसे लाइन ऑफ एक्शन कंट्रोल से 100 किलोमीटर तक करती है। 03.02.2015 को आपने एक अधिसूचना जारी की है और उसमें आपने स्कोपिंग अपेक्षा के लिए जो जन सुनवाई का अधिकार दिया है, मैं आपके माध्यम से जानना चाहता हूं कि ऐसी वे सड़कें, जो फोरैस्ट प्रोटैक्शन एक्ट, 1980 के अन्तर्गत केन्द्र सरकार से अपेक्षित हैं, केन्द्र सरकार के वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने उसकी स्वीकृति दे दी और यहां तक कि वे नेशनल हाईवेज़ की सड़कें, चाहे वे उत्तर प्रदेश की हों, एन.एच. 230 हो, ककहरवा से वाराणसी, गोरखपुर से वाराणसी या पीलीभीत की हों, वे सड़के इसलिए रुक गईं कि आपकी स्वीकृति के बाद एक नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एन.जी.टी.) का गठन हो गया है तो क्या यह दोहरा मापदण्ड नहीं हो गया कि एक बार वन और पर्यावरण मंत्रालय की स्वीकृति प्राप्त हो गई तो अब नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की आपत्ति के बाद उन सड़कों पर काम रुक गया है। क्या माननीय मंत्री जी बताने की कृपा करेंगे कि यह जो नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल का नया फरमान दिल्ली की बसों पर रुकने के लिए, सड़कों के निर्माण के लिए, पुलों-पुलियों के लिए है, तो इससे देश का विकास अवरुद्ध हो जायेगा तो सरकार, नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के द्वारा उठाई गई इन आपत्तियों पर इस सम्बन्ध में क्या कार्रवाई कर रही है?
श्री प्रकाश जावड़ेकर : मैडम, आज जो प्रश्न उठाया गया है, वह बहुत महत्वपूर्ण है।...(व्यवधान) वह इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि सीमा पर हमारी सड़कें 6,000 किलोमीटर की हैं।...(व्यवधान) वहां बॉर्डर रोड्स ऑर्गेनाइजेशन काम करती है।...(व्यवधान) वहां सीमा सशस्त्र बल, बी.एस.एफ. और सबके लिए यह एक दुविधा थी।...(व्यवधान) मैंने एक अध्ययन किया और हमने जब पिछले साल यह निर्णय लिया, उसके पहले से चार सालों से इसके लगभग 176 प्रकरण लंबित थे।...(व्यवधान) उसे मंजूरी के लिए एक साल से चार साल लगते थे।...(व्यवधान) हमने यह बदल दिया और इस पर जनरल एप्रूवल दे दिया।...(व्यवधान) लेकिन जनरल एप्रूवल मतलब पर्यावरण की शर्तों से समझौता नहीं है।...(व्यवधान) इसलिए compensatory afforestation, net present value, relief and rehabilitation, FRA rights, demarcation or not for any other purpose ऐसे जो कंडीशंस हैं, वे सब रहेंगे।...(व्यवधान) लेकिन, राज्य सरकार ही उसे देगी और राज्य सरकारें भी इसमें देरी न लगाएं, यह हम देख रहे हैं।...(व्यवधान)
जहां तक उन्होंने प्रश्न पूछा है तो हम एन.जी.टी. को इन सारी स्थितियों से अवगत कराएंगे और मुझे विश्वास है कि इसमें कोई बाधा नहीं रहेगी।...(व्यवधान) सीमा सुरक्षित रहेगी।...(व्यवधान) देश की सुरक्षा महत्वपूर्ण है।...(व्यवधान) इसलिए ये सड़कें बनेंगी।...(व्यवधान)
SHRI V. ELUMALAI: Hon. Speaker Madam, the increasing forest area is a good thing. But forest area encroaching upon public utility area is causing inconvenience to the common man. It is not a welcome thing. There are many roads in the country. … (Interruptions) The vehicular movement has become a daunting task due to branches of trees falling on the road. But the Forest Department and the Administration are not able to remove this problem as they do not enjoy the power to cut the trees. … (Interruptions) In my constituency, the following five-metre roads such as Vettiyan Thozhuvam and Puthupalayam to Maligai nagar bungalow, Arani union, Thirunamalai district and Mangalapuram forest near Patchaiammal temple in Senji Union, Villuppuram District are covered with trees. … (Interruptions) Therefore, I would like to know whether the Government is considering to allow cutting of trees whenever required in public interest.
SHRI PRAKASH JAVADEKAR: The issue is, when to start the work of building roads in forest area. Earlier, the practice was that the work could be started only after forest clearance phase-II was given. … (Interruptions) But now for public utility and roads, we have decided that after the Phase-I clearance there can be an activity. That matter was also taken to NGT by some applicant. … (Interruptions) So, we are also explaining it to the NGT and I hope that there will be no hindrance and the work can start early. … (Interruptions) We have also allowed roads in forest areas to be upgraded, which was earlier not allowed.
श्री पंकज चौधरी : महोदया, मैं मंत्री जी को धन्यवाद देना चाहता हूं कि वन क्षेत्र में जो निर्माण बाधित पड़ा था, इसकी तरफ उन्होंने ध्यान दिया है।...(व्यवधान) देश में वनटांगियां मज़दूरों की समस्या बहुत पुरानी थी।...(व्यवधान)आज देश से वनटांगियां मजदूरी समाप्त हो गई है।...(व्यवधान) मेरे पूर्वी उत्तर प्रदेश के गोरखपुर और महाराजगंज में क्रमशः 5 और 23 वनटांगियां हैं, जिसमें 4750 परिवार रहते हैं, लेकिन अभी तक उनको कोई भी इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं प्राप्त हुआ है।...(व्यवधान) उनकी सबसे बड़ी समस्या है कि उनको पट्टा तो मिल गया है, लेकिन अभी उन्हें गाँव सभा का दर्जा नहीं मिला है।...(व्यवधान) इसलिए जो भी सरकारी सहायता होती है, सरकारी विकास होता है, वह वहां नहीं हो पाता है।...(व्यवधान) मैं माननीय मंत्री जी से जानना चाहता हूँ वे इसे कब तक कराने का कार्य करेंगे?
श्री प्रकाश जावड़ेकर : महोदया, मुझे माफ करेंगे, क्योंकि यह सवाल हमारे इस सवाल से या हमारे मंत्रालय से सम्बन्धित नहीं है।...(व्यवधान) यह आदिवासियों का, फॉरेस्ट ट्राइबल राइट्स एक्ट और उसके बाद जो बसे हैं, वहाँ विकास करने की अनुमति से संबंधित है।...(व्यवधान) जहाँ पर फॉरेस्ट की परमीशन है, जो रिजर्व सैन्चुअरीज़ हैं, उसमें कौन-कौन सी एक्टीविटीज़ अलाउड है, उसके नियम स्पष्ट हैं।...(व्यवधान)
HON. SPEAKER: Hon. Member, I am again requesting you. I will allow you in ‘Zero Hour’, not in the Question Hour.
… (Interruptions)
HON. SPEAKER: Please go to your seats.
… (Interruptions)
HON. SPEAKER: The House stands adjourned up to twelve o’clock.
11.35 hrs The Lok Sabha then adjourned till Twelve of the Clock.
12.00 hrs. The Lok Sabha re-assembled at Twelve of the Clock.
(Hon. Speaker in the Chair) PAPERS LAID ON THE TABLE