Law Commission Report
Hindi
भारत सरकार
भारत का विधि आय ग
ररप ्ट सं0 257
भारत मं संरषकता और अभभरषा संबंिी
विधियं मं सि
ु ार
मई, 2015
अ्ध.शास.पर सं. 6(3)/268/2014-वि.आ.(एल.एस.) 22 मई, 2015
विय री सदान्द ौड ा ीी,
भारत क विध् आयोौ न, अभभरषा और संरषकता संबं्ी मामलं का
्यायणन्यधन करन म बालक क क्या् को सिोपरर विचार्ीय बात क प म
बल दन क भलए भारत म स्ममभलत प स पालन पोष् करन की प णत को
अपनान क मु का अ्ययन करन का विणनचय िकया
आयोौ न, निंबर, 2014 म, इस विषय पर एक परामशध पर ीारी िकया था
परामशध पर म वििभर म स्ममभलत प स पालन पोष् करन की प णतयं का
विलष् तथा भारत म विमयमान विध् का पुनविधलोकन िकया ौया था आयोौ
मिारा स्ममभलत पालन पोष् स संबंध्त एक िनािली भी ीारी की ौई तथा
ीनता स इस पर टि्पि्यां मांौी ौई थीं आयोौ न ीनता स अनकं ततर िा्त
होन पर, विकासशील और विकभसत दोनं दशं म स्ममभलत पालन-पोष् स संबंध्त
विध्क तपबं्ं का, विशषतया तन परर् ्ाणतयं पर, ्ीनम संयु्त अभभरषा दी ीा
सकती ह, पालन-पोष् की योीनाओं और म्य ्ता पर बल दत हुए अ्ययन करन
क भलए एक तपसभमणत का ौठन िकया इसक अणतरर्त, सभमणत न विध् विशषञं,
विध् ्यािसाणययं और अ्य संबं ्य््तयं क साथ अनक बठक करक भारत म
स्ममभलत पालन-पोष् की संक्पना की िकृणत और ्या््त की पर ा तयार की
तथा ितधमान विध् म क तन तपबं्ं की पहचान की, ्ीनका संशो्न िकए ीान की
आियकता ह
अनक दडर क विचार-विमशध तथा चचाध क पचात आ आयोौ क ््किको् इसी
क आस-पास क््ित रह िक (i) संरषक और िणतपा्य अध्णनयम,1890 म क्या्
क भस ा्त को सु् बनाया ीाए और संरषकता तथा अभभरषा संबं्ी विणनचय
करन म तसकी सुसंौतता पर बल टदया ीाए; (ii) संरषकता और अभभरषा क संबं्
म माता-वपता, दोनं, को समान िा् थणत िदान की ीाए; (iii) विणनचयकताधओं की
इस बात का णन्ाधर् करन म सहायता करन क भलए वि तत
ृ टदशा णनदो शं का
तपबं् िकया ीाए िक कडन सी संरषकता संबं्ी ्यि थाओं स बालक का, विणनटदध कि
ii
् थणतयं म, क्या् होौा; और (iv) ऐसी कणतपय परर् थणतयं म, ीो बालक क
क्या् म सहायक हो, माता-वपता, दोनं, को संयु्त अभभरषा िदान करन क भलए
विक्प का तपबं् करना
आयोौ की तपय्
ुध त भसााररश भारत म संरषकता और अभभरषा संबं्ी
विध्यं म सु्ार नामक इसकी ररपोिध संखयांक 257 क प म पश की ौई हं और
इस सरकार क विचाराथध इसक साथ संल्न िकया ीा रहा ह
सादर
आपका,
ह./-
[अजित रकाश शहा]
री डी.िी. सदानंद ग डा
माननीय विधि और ्याय मंरी
भारत सरकार
शातरी भिन
नई दद्ली
iii
ररप ्ट सं० 257
भारत मं संरषकता और अभभरषा संबंिी विधियं मं
सुिार
विषय-सच
ू ी
अियाय शीषटक प्ृ ठ
1. ररप ्ट की प्ृ ठभभू म 1-9
अ. ''बालक का क्याण'' : ऐततहाभसक रमविकास 2
आ. अ्तररा्रीय मानि अधिकार विधि मं ''बालक का सिो्तम 4
दहत''
इ. संय्
ु त अभभरषा 6
ई. आय ग ्िारा रा्त त्तरं का सारांश 7
त. ितटमान ररप ्ट 9
2. भारत मं अभभरषा और संरषकता क शाभसत करने 10-21
संबंिी विधिक ढांचा
अ. कानन
ू ी विधि
(i) संरषक और िणतपा्य अध्णनयम, 1890 10
(ii) टह्द ू अिा्तियता और संरषकता अध्णनयम, 1956 12
(iii) टह्द ू वििाह अध्णनयम, 1955 15
(iv) इ लाभमक विध् 15
(v) पारसी और िि्चयन विध् 16
आ. ्याणयक णनिधचन 16
(i) वपता की त्चतर ् थणत 17
(ii) क्या् संब्
ं ी मानक की अणन्चतता 19
3. संय्
ु त अभभरषा की संक्पना
22-30
अ. संय्
ु त अभभरषा के रतत अ्तररा्रीय िज््क ण 22
आ. भारत मं संय्
ु त अभभरषा 26
इ. भारत मं संय्
ु त अभभरषा क अंगीकार िक िाने के कारण 28
4. बाल अभभरषा के मामलं मं म्यतथता 31-36
क. भारत मं म्यतथता के भल ितटमान विधिक ढांचा 31
. बालक अभभरषा मं म्यतथता के संबि
ं मं अंतररा्रीय 33
िज््क ण
iv
5. बालक अभभरषा संबि
ं ी मामलं का वितन्चय करने 37-45
के भल विचारणीय बातं
क. सिो्तम दहत मानक के भल विचार करने िाले कारक 37
. बालक की अधिमानता का अििारण 38
ौ. बालक के अभभलेखं तक पहुंच 39
घ. वपतामह-वपतामही मातामह-मातामही ्िारा पालनप षण समय 40
ङ. म्यतथता 40
च. तथान-पररितटन 41
छ. वितन्चय करना 42
ी. पालनप षण य िना 43
झ. मल
ु ाकात 43
6. भसफाररशं का सार 46-58
क. दह्द ू अरा्तियता और संरषकता अधितनयम, 1956 मं संश िन 46
. संरषक और रततपा्य अधितनयम, 1890 मं संश िन 49
तपाब्ि-1 दह्द ू अरा्तियता और संरषकता ससंश िन 59-60
वििेयक, 2015
तपाब्ि-2 संरषक और रततपा्य ससंश िन वििेयक, 2015 61-77
v
अ्याय 1
ररप ्ट की प्ृ ठभूभम
1.1 भारत क विध् आयोौ की इस ररपोिध म, अभभरषा और संरषकता क मामलं
का ्यायणन्धयन करन म "बालक क क्या्" पर सिोपरर विचार् क प म बल
दन क भलए अनक वि्ायी संशो्न िकए ीान की भसााररश की ौई ह वििाह-
वि्छद और पररिारं क िूिन की कायधिाटहयं म सबस बुरा िभाि ब्चं पर प ता
ह अभभरषा की कायधिाटहयं म बालक क क्या् क क््ित महि को बनाए
र न स यह सुणन्चत करन म सहायता भमलौी िक बालक का भविकय, पाररिाररक
परर् थणतयं म बदलाि को विचार म भलए बबना, सुरषषत और संरषषत ह भारत म
्यायालयं का भी यही णनककषध ह तदाहर्ाथध, मुंबई त्च ्यायालय न यह
अभभणन्ाधररत िकया ह िक अंणतम डििी का आि्ार् करन क भलए बालक का
क्या्, माता-वपता मिारा ीो दलील दी ौई हं, तनको विचार म भलए बबना, सिोपरर
विचार् होती ह 1
त्चतम ्यायालय मिारा यह कथन िकया ौया ह िक िकसी
बालक क क्या् को मार ्न अथिा भडणतक आराम मिारा नहीं मापा ीाना चाटहए
ब््क 'क्या्' श्द को तसक इस ्यापक अथध क प म भलया ीाना चाटहए िक
नह क बं्न की अनद ी नहीं की ीा सकती ह 2
िषं स, अपरिामय का भस ा्त,
्ीसक आ्ार पर बालक की अभभरषा क मामलं का विणनचय िकया ीाता ह,
"बालक क सिोतम टहत और क्या्" का भस ा्त ह ्ीसक मिारा ियक बालक
या बाभलका को ीीत रहन और अपनी प्
ू ध अंतःश््त को पान म समथध बनान का
ियास िकया ौया ह 3
1.2 इसकी सस
ु ंौत विचार्ा क प म ्यापक मा्य होन क बािीद
ू इसकी रीणत
म, ्ीसम क्या् संबं्ी भस ा्त हमार विध्क और ्याणयक ंांच म ्या्त ह,
कुछ सम याएं हं ्ीनको वि्ायी आ्ार पर दरू िकए ीान की ी रत ह सिधिथम,
इस भस ा्त को अभभरषा और संरषकता को विणनयभमत करन संबं्ी भभ्न-भभ्न
वि्ानं मिारा ीो िासंधौकता दी ौई ह, तसम असमानता ह दस
ू र, इस विषय म
अणन्चतता और ्याणयक मत्य का अभाि ह िक बालक क क्या् स यथाथधतः
्या ौटठत होता ह, ्ीसक परर्ाम ि प अभभरषा संबं्ी ल ाइयां िूरतापूिक
ध ल ी
ीाती हं, इसम यह सुणन्चत करन क िक बालक क टहतं की ि तुतः संरषा हो,
1
कारला ौन्न बनाम शहबाी ाा अ्लाराि या, बमबई त्च ्यायालय, 2009 की दां डिक ररि
याधचका सं0 509
2
नील रतन कंु िु बनाम अभभीीत कंु िु एआईआर 2009 एससी (अनु0) 732
3
भस ा्त ,, णनयम 3, िकशोर ्याय (बालकं की द भाल और संरष्) णनयम, 2007
कोई माौध नहीं हं तीसर, विध्क ंांचा इस विषय पर मडन ह िक अभभरषा क मु ं
को िकस पर णनपिाया ीाना चाटहए, इसम विणनचय करन म कडन स कारक सुसंौत
होन चाटहए और अ्य वििादं क साथ-साथ माता-वपता तथा बालकं क बीच क
वििाद क समा्ान की िििया कडन सी होनी चाटहए चडथ, इसम यमयवप, अभभरषा
को शाभसत करन संबं्ी कोई संटहताब णनयम नहीं ह, तथावप, इस षर म विणनचय
करन की िििया इस अि्ार्ा पर आ्ाररत होती ह िक बालक का क्या्
आियक प स माता-वपता म स िकसी एक को तल
ु नामक प स णन्ाधररत प म
दी ीा रही अभभरषा म णनटहत ह
1.3 विध् आयोौ की इस ररपोिध म अभभरषा और संरषकता स संबंध्त ितधमान
विध्यं अथाधत आ संरषकता और िणतपा्य अध्णनयम, 1890 और टह्द ू अिा्त्यता
और संरषकता अध्णनयम, 1956 का पन
ु विधलोकन िकया ौया ह और णनमनभलि त
त यं की पणू तध क भलए वि्ायी संशो्नं की भसााररश की ौई ह :
संरषक और िणतपा्य अध्णनयम, 1890 म क क्या् संबं्ी भस ा्त को
सु् बनाना और संरषक तथा अभभरषा स संबंध्त विणनचय करन क
ियक पहलू म इसकी िासंधौकता पर बल दना
संरषकता और अभभरषा क संबं् म माता और वपता, दोनं, को समान
विध्क िा् थणत दना
विणनचय करन िालं की यह णन्ाधररत करन म सहायता करन क भलए
वि तत
ृ माौधदशधक भस ा्तं का तपबं् करना िक िकस अभभरषा और
संरषकता संबं्ी ्यि था स बालक की विणनटदध कि ् थणतयं म क्या्
होौा
माता और वपता, दोनं, को ऐसी कणतपय परर् थणतयं म संयु्त अभभरषा
टदए ीान क विक्प का, ीो बालक क क्या् म सहायक हो, तपबं्
करना
अ. "बालक का क्याण" : ऐततहाभसक रमविकास
1.,.1 कामन ला म पारं पररक प स, वपता को बालक का तथा तसकी संप्त का
एक मार संरषक माना ीाता था बालक क ीीिन क ियक पहलू म ्ीसक
अ्तौधत तसका आचर्, भशषा, ्मध और भर्-पोष् भी ह, वपता क िाध्कार को
आयंणतक माना ीाता था और यहां तक िक ्यायालय भी तसम ह तषप करन स
इनकार कर दत थ माता का बालकं पर कोई िाध्कार नहीं होता था ्यंिक
2
माताओं की अपनी ितंर विध्क िा् थणत नहीं होती थी, तनकी पहचान वििाह
तपरांत तनक पणतयं क पहचान क साथ ीो दी ीाती थी ीस ही वििाह-वि्छद
संभि हो ौया और माताओं न अपना ितंर विध्क अ् ति और आिास बनाना
आरं भ कर टदया, तनको बालकं की अभभरषा र न का, अध्कार न सही कम स कम
दािा तो ्यायालयं मिारा माना ीान लौा तथावप, अनक वि्ानं ीस िक आरं भ
म यू.क. म क ििी आा इ्ा्स ऐ्ि आरं भ हुए, ीो िक माता को अय क बालकं
की अभभरषा का दािा करन म समथध बनाता ह, क बािीद ू वपता क अध्कार
सिोपरर बन रह
1.,.2 इं््लश विध् क अ्ीन बालकं पर वपतृ ि क िाध्कार को म करन म दो
ौणतविध्यां सहायक हुं िथम, अनक ्याणयक विणनचयं म, ्यायालयं न वपता
की िाकृत संरषकता को अध्िांत करन तथा इस बात पर णनभधर करत हुए िक
बालक क क्या् की अभभिवृ िकसस ह, अभभरषा िदान करन क भलए माता और
वपता, दोनं, की अध्काररता यहां तक िक रा्य क त्चतर पतक
ृ िाध्कार पर ीोर
टदया 4
दस
ू र अनक वि्ानं क मा्यम स, बिटिश पाभलधयामि म वपतृ ि अध्कारं
स हिकर बालक क क्या् पर बल टदया ौया और संरषकता तथा अभभरषा का
अि्ार् िकए ीान म वपता और माता को समान विध्क िा् थणत िदान की ौई
क ििी आा इ्ा्स ऐ्ि (भशशु अभभरषा अध्णनयम), 1873 म माता को बालक
की अभभरषा, तसक सडलह िषध की आयु होन तक र ीान को अनुञात िकया ौया
और तन माताओं मिारा, ्ी्हंन ीारकमध िकया हो, की ौई याधचकाओं पर क
णनबं्न को हिा टदया ौया था ौाडिधयनभशप आा इ्ा्स ऐ्ि (भशशु संरषकता
अध्णनयम), 1886 म िसीयती संरषक की अभभरषा, पहुंच और णनयु््त पर माता
क समान अध्कार होन की बात िीकार की ौई और ्यायालय को कणतपय
परर् थणतयं म संरषक णनयु्त करन और त्ह हिान क भलए अनुञात िकया ौया
था ौाडिधयनभशप आा इ्ा्स ऐ्ि (भशशु संरषकता अध्णनयम), 1925 म,
अभभरषा संबं्ी वििाद म, माता और वपता क दािं को बराबर माना ौया और तसम
यह तपबं् िकया ौया िक भशशु का क्या् 'िथम और सिोपरर विचार्ीय बात'
होौी अ्ततः, ौाडिधयनभशप आा माइनसध ऐ्ि (अिय क संरषकता अध्णनयम),
1973 म माता को भी िही अध्कार िदान िकए ौए ीो िक कामन ला म वपता को
टदए ौए थ, माता को इन अध्कारं का ियोौ वपता की सहमणत क बबना करन क
भलए अनुञात िकया ौया था
यटद माता-वपता िकसी सहमणत पर पहुंचन म
असाल रहत हं तो इसम ्यायालय को बालक क क्या् क भस ा्त क आ्ार पर
मामल का विणनचय करन क भलए िाध्कृत िकया ौया ह
4
इनरर, ओ हारा, (1990) 2 आई.आर. 232.
3
1.,.3 भारत म, संरषक और िणतपा्य अध्णनयम औपणनिभशक रा्य मिारा
1890 म अध्णनयभमत िकया ौया था, ्ीसम कामन ला की बालकं की संरषकता
और अभभरषा म पतक
ृ अध्कार की सिो्चता की बपडती को बनाए र ा ौया ह
यमयवप, अध्णनयम की ्ारा 7 और ्ारा 17 म यह तपबंध्त ह िक ्यायालयं को
अिा्तिय क क्या् को अरसर करन म कायध करना चाटहए, तथावप, मूल
अध्णनयम की ्ारा 19 और ्ारा 25 म इसी को वपता की सिोचता क अ्ीन थ
िकया ौया ह किल टह्द ू अिा्तियता और संरषकता अध्णनयम, 1956 म, ीो
िक ितंर भारतीय रा्य मिारा अध्णनयभमत िकया ौया था, यह तपबंध्त ह िक
अिा्तिय का क्या् ही, अ्य सभी कारकं को अध्िांत करत हुए, सिोपरर
विचार्ीय बात होौी इस विध्क ंांच पर इस ररपोिध क अ्याय 2 म
वि तारपि
ू क
ध विचार-विमशध िकया ौया ह
आ. अ्तररा्रीय मानि अधिकार विधि मं "बालक का सिो्तम दहत"
1.5.1. यमयवप "बालक का क्या्" संबं्ी भस ा्त की घरलू विध्क ंांच म
ि्ानता ह, तथावप, अ्तरराकरीय मानि अध्कार विध् म इसक तुलनामक विध्क
मानकं का त्ल ह बालक अध्कार संबं्ी संयु्त राकर क्िशन (्ीस इसम
इसक पचात आ सीआरसी कहा ौया ह) क अनुसार, बालकं स संबंध्त सभी
कारध िाइयां, चाह ि लोौं मिारा या िाइिि सामा्ीक क्या् सं थाओं मिारा,
्यायालयं, िशासणनक िाध्काररयं या वि्ायी णनकायं मिारा की ौई हं, तनम
बालक क सिोतम टहत िाथभमक विचार्ीय बात रहौ 5
क्िशन म रा्य
पषकारं को यह सुणन्चत करन का णनदश टदया ौया ह िक "बालकं क पालन-
पोष् और विकास का समान ततरदाणयि माता-वपता दोनं का ह 6
सीआरसी म
यह तपबंध्त ह िक बालक को अपन माता-वपता स अलौ कर टदया ीाना चाटहए
यटद "माता-वपता मिारा बालक की तपषा की ौई हो या ीहां माता-वपता अलौ-
अलौ रह रह हं और विणनचय बालक क णनिास- थान क बार म िकया ीाना
चाटहए" 7
बालक का क्या्, विणनचय संबं्ी मापदं ि क प म, सा्ार्तया
लचीला, अनुकूलनीय और समाी क कुिुंब क बार म समयकाभलक मनः् थणत का
िणतबबंब होता ह "8
5
बालक क अध्कारं स संबंध्त क्िशन, अनु्छद 3 (1989) .
6
यथो्त, अनु्छद 18.
7
यथो्त, अनु्छद 9.
8
धौलमोर, िान, रि डिब्स : ामली ला, पालरि मकभमलन (201,) पकृ ठ 76-83.
4
1.5.2 बालक अध्कार सभमणत न अपनी सा्ार् िीका-टि्प् म सिोतम टहत
मानक क बार म अणतरर्त माौधदशधक भस ा्त टदए हं 9
सभमणत न यह कथन
िकया ह िक "तन तिं की, ीो ऐस िकसी विणनचयकताध मिारा, ्ीसन बालक क
सिोतम टहतं का अि्ार् करना हो, सिोतम टहत णन्ाधर् म स्ममभलत िकया
ीा सकता ह, असिांौी् और ौर सोपान-िभमक सूची तयार करना तपयोौी होता ह
"10 सभमणत न यह सुझाि टदया िक णनमनभलि त विचार्ाएं सुसंौत हो सकती हं :
बालक की पहचान (ीस िक भलंौ, लंधौक अनु थापन, राकरीय तभि, ्मध और
वििास, सां कृणतक पहचान और ्य््ति); पाररिाररक िातािर् का परररष् और
्मध को बनाए र ना (्ीसक अ्तौधत, ीहां कहीं समधु चत हो, वि ताररत कुिुंब
अथिा समुदाय भी ह) ; बालक की द र , संरषा और सरु षा ; दब
ु ल
ध ता (णनःश्तता,
अ्पसंखयक िा् थणत, णनरारयता, द्ु यधिहार का भशकार, आटद) की कोई ् थणत,);
और बालक का िा ्य का अध्कार और भशषा का अध्कार 11
िक्तु सिोतम
टहत मानक की, ीब तस अभभरषा संबं्ी, वििाघकं म लाौू िकया ीाता ह, दो मुखय
सीमाएं हं
1.5.3. सिधिथम, यह अियाभशत और सूचना बोघक ह ऐस माता-वपता, ीो
वििाह-वि्छद चाह रह हं, इस बात का अनुमान लौात रहत हं िक ्यायालय िकस
िकार अभभरषा संबं्ी विणनचय करौ इसस ्यायालय क पूिध की अनाियक सडद-
बाीी होती ह ीो िक बालक और माता-वपता, दोनं क भलए हाणनकार हो सकती ह 12
इस एक ऐस अणत ियाभशत णनयम-आ्ाररत मानक क आ्ार पर सुलझाया ीा
सकता ह ्ीसम सिोतम टहत मानक की अ्तिध तु का त्ल ह दस
ू री ओर,
णनयम आ्ाररत मानक संभितः कठोर होता ह और तस ियक मामल की
्य््तौत परर् थणतयं क अनुसार नहीं भलया ीाता ह 13
दस
ू र, बालक क सिोतम
टहत मानक म मुखयतया किल बालक की अि था पर ्यान क््ित िकया ीाता ह
और तसम माता-वपता की भािनाओं और टहतं पर विचार नहीं िकया ीाता ह
माता-वपता भी कुिं ब क भीतर कताध होत हं, तनक भी अध्कार होत हं और तनक
क्या् हतु भी एक विध्क ंांच पर ्यान टदया ीाना चाटहए 14
इस िकार, यह
9
बालक क अध्कारं पर बालक अध्कार सभमणत, सा्ार् िीका-टि्प् सं0 1,- बालक या बाभलका
क सिोतम टहतं को मुखय विचार्ीय बात क प म भलया ीाना (अनु0 3, परा 1), यूएन िाक.
सीआरसी/सी/ीीसी/1, (मई 29/2013)
10
सा्ार् िीका-टि्प् 14, परा 50
11
यथो्त, परा 52-79
12
यथो्त
13
यथो्त
14
सा्ार् िीका-टि्प् 14, परा 52-79.
5
एक ल
ु ा िन ह िक ्या बालक की अभभरषा क विणनचयं क भलए बालक का
सिोतम टहत मानक का विध्क तपकर् पयाध्त ह या इसक साथ अणतरर्त
वि्ायी माौधदशधक भस ा्त भी विटहत िकए ीान की ी रत ह
इ. संयु्त अभभरषा
1.6.1 बालक अभभरषा ्यि थाओँ क प म पररितधन हो रहा ह विि क
अनकानक दशं न बालक क संबं् म, वििाह-वि्छद क पचात आ की ्यि थाओं क
प म, एकल अभभरषा की अपषा माता-वपता की स्ममभलत प णतयं को अध्मान
को अपनाया ह 15
प्चमी दशं म, यह ििणृ त मख
ु यतया कडिु्मबक भभू मकाओं म
पररितधन (पु ष द र कताध बालक की भर्-पोष् की अध्क ्ीममदाररयां ल रह हं)
स तथा मनोिञाणनक अ्ययनं स पदा हुई ह ्ीनस यह पता चलता ह िक बालक
क लालन-पालन म मता-वपता, दोनं, मिारा ्यान टदया ीाना एकल अभभरषा
्य्सथाओं की अपषा अध्क रय कर समझा ौया ह अ्ययनं स यह तपदभशधत
होता ह िक बालक सा्ार्तया, तब अध्क बहतर बसर करत हं, ीब माता-वपता
अभभरषा को आपस म बांि लत हं और कुछ दशं म कुछ अध्काररताओं म विध्क
प स संयु्त अभभरषा की तप्ार्ा को विटहत िकया ौया ह 16
तथावप,
विमितीनं और ्यायालयं न इस बात क भलए सचत िकया ह िक संयु्त अभभरषा
की तप्ार्ा "बालकं क सिोतम टहतं" क विपरीत ीा सकती ह, विशषकर घऱलू
टहंसा क मामलं म ीहां िक राभसत मटहलाएं और टहंसा क भय स संयु्त अभभरषा
क भलए सहमत हो सकती हं 17
1.6.2 निमबर, 201, म, भारत क विध् आयोौ न (्ीस इसम इसक पचात आ
आयोौ कहा ौया ह) भारत म पालन-पोष् की संयु्त प णत को अपनाए ीान
संबं्ी परामशध पर (्ीस इसम इसक पचात आ परामशध पर कहा ौया ह) ीारी िकया
15
्लोिर, आर एंि िील, सी., ्ीसम बालक पर वििाह-वि्छद क पचात आ क िबं्न का िभाि
समाविकि ह, ीरनल आा िाइिोसध, ्ी्द 12 सं0 2-3 (1989)
16
यूनाइिि िि क अनक रा्यं म यह तपबं् ह दि ए इदाहो कोि एन0 § 32-717बी (,) ("इस
्ारा की तप्ारा (5) म यथा तपबंध्त क भसिाय िणतकूल सा्य की अध्संभा्यता क अभाि म
यह तप्ार्ा की ीाएौी िक संयु्त अभभरषा अिय क बालक या बालकं क सिोतम टहत म
ह") मीन िि एन० 518.17(2)( ) ("इसक विपरीत ्यायालय की यह तप्ार्ा ह िक भभ्न
िकसी एक या दोनं पषकारं क अनुरो् पर संयु्त विध्क अभभरषा बालक क सिोतम टहत म
होौी ")
17
वि्ायी सिा विभाौ, बालक अभभरषा : संय्
ु त अभभरषा तप्ार्ा की पकृ ठभभू म और नीणत
वििषाएं 6(2011)("घरलू टहंसा क पीड तं क अध्ि्ताओं मिारा विध् म संयु्त अभभरषा की
तप्ार्ा का तीर विरो् िकया ौया ")
6
था 18
परामशध पर म पालन-पोष् की संयु्त प णत का अनक दशं म, ्ीसम
यूनाइिि ि्स, कनािा, आ रभलया, यूनाइिि िकंौिम, दषष् अरीका, नीदरलंि,
थाईलंि, भसंौापुर और क्या भी हं, सिोष् िकया ौया था परामशध पर क प णत
संबं्ी अ्ययनं स वििाह-वि्छद क बाद क अभभरषा संबं्ी ्यि थाओं क िणत
विभभ्न िकार क ््किको्ं का त्ल िकया ौया ह परामशध पर का बालक
अभभरषा क बार म भारत की विमयमान विध्, ्ीसक अ्तौधत संरषक और
िणतपा्य अध्णनयम, 1890 और टह्द ू अिा्तियता और संरषकता अध्णनयम,
1956 भी ह, का तथा त्चतम ्यायालय और त्च ्यायालयं क सस
ु ंौत
विणनचयं का पन
ु विधलोकन िकया ौया था और यह णनककषध णनकाला ौया िक भारत
म अभभरषा संबं्ी विध् म तस बब्द ु को अपनाया ौया ह ीहां िक माता-वपता को
स्ममभलत पालन-पोष् क विचार पर विचार-विमशध आरं भ करना तपय्
ु त ह तस
अनि
ु म म, परामशध पर म माता-वपता क स्ममभलत पालन-पोष् स संबंध्त िन
टदए ौए और तनस टि्पि्यां आंमबरत की ौई थीं
ई. आय ग ्िारा रा्त त्तरं का सारांश
1.7.1 िा्त 125 ततरं म स, अध्कांश ततर स्ममभलत अभभरषा क पष म थ
इस संबं् म ीो कुछ कार् टदए ौए थ ि इस िकार हं :
बालकं को अपनी माता और अपन वपता दोनं की ही ी रत होती ह--ि
भभ्न-भभ्न परर् थणतयं म मात-वपता म स हरक की सलाह चाहत हं
बालकं को माता-वपता म स हरक स ीु न क पयाध्त अिसरं की ी रत
होती ह
स्ममभलत विध्क अभभरषा क बबना स्ममभलत भडणतक अभभरषा स
बालक यह वििास करन लौौा िक माता-वपता का समान नणतक
िाध्कार नहीं ह स्ममभलत भडणतक अभभरषा क बबना स्ममभलत
विध्क अभभरषा स बालक माता-वपता, दोनं, क साथ संबं् बनान स
िंधचत हो ीाएौा
स्ममभलत अभभरषा स माता-वपता क बीच क मनमुिाि म कमी आएौी
त्त काौी-पर http://lawcommissionofindia.nic.in/Consultation%20Paper%20on%20Shared%20Parentage.pdf. पर
18
तपल्् ह
7
कुछ मटहलाएं, बालकं को तनक वपता स लन क भलए मटहला घऱलू टहंसा
सरं षा अध्णनयम, 2005 और भारतीय दं ि संटहता की ्ारा ,98क की
संरषाओं का द ु पयोौ करती हं िक्तु, स्ममभलत अभभरषा ्यि था
म, किल बालक स द्ु यधिहार, तसकी तपषा या मानभसक ््ता की दशा
म माता-वपता को तसस संपकध र न स रोका ीाएौा बालकं को, इस
बात को विचार म भलए बबना िक माता-वपता म सुलह या नहीं, माता-
वपता, दोनं, स संपकध बनाना चाटहए
भलंौ आ्ाररत ् थर ्ार्ा--तदाहर्ाथध यह िक बाभलका का पालन-पोष्
माता मिारा और बालक का पालन-पोष् वपता मिारा िकया ीाना चाटहए--
अब परु ानी हो ौई ह माता-वपता, दोनं, का ही ब्चं क, चाह ि
बाभलका हो या बालक, लालन-पालन म म्
ू यिान योौदान होता ह
1.7.2 स्ममभलत पालन-पोष् क वि भी कुछ कार् टदए ौए, ीो िक इस िकार
हं :
वििाह-वि्छद की कायधिाटहयं क दडरान, पणत अपनी प्नयं स भर्-
पोष् भता न लन अथिा दांडिक कायधिाटहयां िापस लन हतु दबाि
िालन क भलए बालक की अभभरषा का ियोौ करत हं
बालकं को दो घरं क बीच िुलाना अ्छा नहीं ह एक थायी,
सु्यि् थत घर एक सिोतम विक्प ह
वपतश
ृ ाभसत समाी म, ीहां िक मटहलाओं और ब्चं को िायः तंौ िकया
ीाता ह, बालक की सुरषा सुणन्चत करना एक सम या हो सकती ह
ीहां माता-वपता क बीच अनसुलझ िन हं, िहां ि बालक क भलए संयु्त
विणनचय भलए ीान पर सहमत नहीं हो पाएंौ
भारत म आियक समथधकारी तपाय नहीं ह ीस िक ििाटहक संप्त को
विभा्ीत करन, दापंय घर म रहन क अध्कार, द र करन िाल
पणत/पनी की भािी सुरषा क भलए वितीय योीना, और बालकं क भलए
आरय थलं संबं्ी विध्यां नहीं ह
इसका मटहलाओं को तंौ करन क भलए ियोौ िकया ीा सकता ह
1.7.3 अनक िणतिाटदयं न य सुझाि टदए िक भारत म पालन-पोष् की स्ममभलत
ि्ाली को िकस िकार ििया््ित िकया ीा सकता ह :
8
्यायालयं क पास अभभरषा संबं्ी वििादं का ्यायणन्धयन करन क
भलए तपयु्त ्यि था नहीं ह इसक बीाय, म्य थ क्ि थावपत
िकए ीान चाटहए ्ीनम बालकं और नातदारी स संबंध्त मु ं पर
पषकारं को सलाह दन क भलए िभशषषत लोौं को लौाया ीाना चाटहए
िकीलीन इस ् थणत को और राब कर दौ
माता-वपता को एक "पालन-पोष् की योीना" ि तुत करनी चाटहए ्ीसम
तनका ्य््तौत िोााइल, शषषक अहधता, णनिास- थान और दोनं
पषकारं की आय का त्ल हो
माता-वपता, दोनं, को एक संय्
ु त ाता ोलना चाटहए ्ीसस बालक क
चं क भलए ियोौ िकया ीा सक
त. ितटमान ररप ्ट :
1.8 परामशध पर क संबं् म अनक ततर िा्त करन क पचात आ, आयोौ मिारा
एक तपसभमणत बनाई ौई ीो णनमनभलि त स भमलकर बनी थी : ्यायमू आणतध अ्ीत
िकाश शहा, अ्यष; िो0 मूलच्द शमाध, सद य, भारत का विध् आयोौ ; िो0
योौश याौी और री आर. िकिरममानी, अंशकाभलक सद य, भारत का विध्
आयोौ ; सुरी टदवपका ीन, सह आचायध और री स्तऋवष मंिल, सह-आचायध,
्ीदं ल ्लोबल ला कूल सभमणत मिारा विकासशील और विकभसत, दोनं, दशं म
स्ममभलत अभभरषा स संबंध्त विध्क तपबं्ं का सिोष् िकया ौया ्ीसम,
विभशकितया, तन परर् थणतयं पर, ्ीनम संयु्त अभभरषा दी ीाती ह या तसका
िीधन िकया ीाता ह, पालन-पोष् योीनाओं; और म्य थता पर ्यान संक््ित
िकया ौया था इसक अणतरर्त, बालक अभभरषा क विषय म विध् विशषञं, विध्
्यिसाणययं और अ्य कताधओं क साथ अनक िठकं क मा्यम स, सभमणत न
भारत म माता-वपता की स्ममभलत अभभरषा की संक्पना की िकृणत और ्या््त
की पर ा ि तुत की और ितधमान विध् म तन तपबं्ं की पहचान की ्ीनका िक
संशो्न िकए ीान की ी रत ह इसम सभमणत को सुरी सुम्त च्िश रन आ,
परामशी भारत का विध् आयोौ ; री िायान राणनक, सुरी तपासना ौरनायक और
सुरी िकमबलो रोिन, सहायक आचायध, ्ीदं ल ्लोबल ला कूल ; और सर
ु ी म्ि
ु ंती
राीकुमार, सुरी मणृ त शमाध और री ि्य ल ी, अनुसं्ानकताध, भारत का विध्
आयोौ मिारा सहायता िदान की ौई सभमणत मिारा ्यायमूणतध (रीमती) मंीू
ौोयल, सिाणनिृ त ्याया्ीश, टद्ली त्च ्यायालय और सुरी लला ओलाप्ली,
सिर ाार एििा्सि मडिएशन ि््िस, बंौलडर मिारा टदए ौए मू्यिान आ सुझािं
और ीानकारी क िणत भी अपना आभार िकि करती ह
9
अ्याय 2
भारत मं अभभरषा और संरषकता क शाभसत करने संबंिी विधिक ढांचा
2.1 बालकं की अभभरषा को शाभसत करन संबं्ी विध् को करीब-करीब तसस
ीो ा ीाता ह ीो िक संरषकता को शाभसत करती ह संरषकता तन अध्कारं और
श््तयं क समूह क िणत णनदो श करती ह ीो िक एक िय क को एक अिय क क
शरीर और संप्त क संबं् म िा्त ह, ीबिक अभभरषा, अिा्तिय (अिय क) क
भर्-पोष् और टदन िणतटदन की द र और णनयंर् स संबंध्त एक संकुधचत
संक्पना ह 'अभभरषा' पद को िकसी भी भारतीय कुिुंब विध् म, चाह िह ्मध
णनरपष हो या ्ाभमधक, पररभावषत नहीं िकया ौया ह 'संरषक' पद को संरषक और
िणतपा्य अध्णनयम, 1890 म (्ीस इसम इसक पचात आ संरषक और िणतपा्य
अध्णनयम कहा ौया ह) "ऐस ्य््त क प म पररभावषत िकया ौया ह ीो
अिा्तिय क शरीर की या तसकी संप्त की, या तसक शरीर और संप्त दोनं की
द र करता ह "19 विध् मिारा ीो एक अ्य पद का ियोौ िकया ौया ह िह ह
"नसधौधक संरषक"; नसधौधक संरषक ऐसा ्य््त ह, ्ीस अिा्तिय का संरषक
होन की विध्क प स तप्ार्ा की ीाती ह और ्ीस अिा्तिय की ओर स सभी
विणनचय करन क भलए िाध्कृत होन की तप्ार्ा की ीाती ह अभभरषा और
संरषकता (अथिा नसधौधक संरषकता) क बीच क विध्क अ्तर का णनमनभलि त
तदाहर् क मिारा ्किांत टदया ीा सकता ह : कुछ ्ाभमधक िीय विध्यं क
अ्ीन, अणत युिा बालकं क भलए, माता को अभभरषक होन का अध्मान टदया ीाता
ह, िक्तु वपता सदि नसधौधक संरषक बना रहता ह
अ. कानूनी विधि
सi संरषक और रततपा्य अधितनयम, 1890
2.2.1 संरषक और िणतपा्य अध्णनयम, भारत क रा्यषर क भीतर सभी बालकं
क भलए, तनक ्मध को विचार म भलए बबना, सरं षकता और अभभरषा क िनं को
विणनयभमत करन संबं्ी एक ्मधणनरपष विध् ह इसम, ्ीला ्यायालयं को
िकसी अिा्तिय क शरीर या संप्त का संरषक णनयु्त करन क भलए िाध्कृत
िकया ौया ह, ीब अिा्तिय की िीय विध् क अनुसार नसधौधक संरषक या िकसी
विल क अ्ीन णनयु्त िकया ौया िसीयती संरषक अिा्तिय क िणत अपन
कतध्यं का णनिधहन करन म असाल रहता ह अध्णनयम एक ऐसी पू्ध संटहता ह
्ीसम संरषकं क अध्कारं और बा्यताओं, तनको हिान या िणत थावपत करन की
िििया और तनक मिारा, आचार की दशा म, तपचारं की अध्कधथत िकया ौया ह
19
§ ,(2), ीी ि््यू ए
10
यह एक आियक वि्ान ह ्ीसम ियक ्मध क अ्ीन संरषकता संबं्ी मु ं को
शाभसत करन िाली िीय विध्यां ीो ी ौई हं 20
यटद िकसी कणतपय मामल म
मूल विध् को पषकारं की िीय विध् म लाौू िकया ीाता ह तो भी ििियामक
विध् लाौू होती ह ीो िक संरषक और िणतपा्य विध् म अध्कधथत ह 21
2.2.2 संरषक और िणतपा्य अध्णनयम की ्ारा 7 म ्यायालय को अिा्तिय
क शरीर या संप्त या दोनं क भलए, यटद ्यायालय का यह समा्ान हो ीाता ह
िक "अिापतिय क क्या्" क भलए ऐसा करना आियक ह, संरषक णनय्
ु त करन
क भलए िाध्कृत िकया ौया ह 22
्ारा 17 म तन कारकं को अध्कधथत िकया
ौया ह ्ीन पर ्यायालय मिारा संरषकं की णनय्ु ्त करत समय विचार िकया
ीाएौा 23
्ारा 17(1) म यह कधथत ह िक ्यायालय तन बातं मिारा माौधदभशधत
होौा ीो अिा्तिय की िीय विध् म तपबंध्त ह और ीो मामल की परर् थणतयं
म "अिा्तिय क क्या्कर" ितीत हं 24
्ारा 17(2) म यह पकि िकया ौया ह
िक इस बात का अि्ार् करन म िक अिा्तिय क भलए ्या क्या्कर होौा,
्यायालय अिा्तिय की आयु, भलंौ और ्मध, ि थावपत संरषकशील और साम्यध
तथा अिा्तिय स ि तावित संरषक की र्त संबं् म तसकी णनकिता, मत
ृ ीनक
की इ्छाओं को, यटद कोई हं, और अिा्तिय स या तसकी संप्त स ि थावपत
संरषक क िकसी ितधमान या पूित
ध म संबं्ं पर ्यान दौ 25
्ारा 17(3) म यह
कधथत ह िक यटद अिा्तिय इतनी आयु का ह िक या बुव मतापू्ध अध्मान कर
सकता ह तो ्यायालय तसक अध्मान पर विचार "कर सकौा" 26
2.2.3 संरषक और िणतपा्य अध्णनयम की ्ारा 19 तन मामलं क संबं् म ह
ीहां िक ्यायालय संरषक की णनयु््त नहीं कर सकौा 27
्ारा 19( ) म यह
कथन ह िक ्यायालय िकसी अिा्तिय क शरीर का, ्ीसका वपता या ्ीसकी
20
तदाहर् क भलए, टह्द ू अिा्तियता और संरषकता अध्णनयम की ्ारा 2 म यह कथन िकया
ौया ह िक इसक तपबं् संरषक और िणतपा्य अध्णनयम क अनुपूरक हं न िक तसक
अ्पीकर् म
21
संरषक और िणतपा्य अध्णनयम, 1890 का 8, § 6 ("अिा्तिय की दशा म इस अध्णनयम की
िकसी बात का यह अथध न लौाया ीाएौा िक िह तसक शरीर या संप्त या दोनं का संरषक
णनयु्त करन की िकसी ऐसी श््त को लती ह, ्ीसक िह अिा्तिय अ्य्ीन ह ")
22
संरषक और िणतपा्य अध्णनयम, 1890 का 8, § 7
23
संरषक और िणतपा्य अध्णनयम, 1890 का 8, § 17
24
संरषक और िणतपा्य अध्णनयम, 1890 का 8, § 17(1)
25
संरषक और िणतपा्य अध्णनयम, 1890 का 8, § 17(2)
26
संरषक और िणतपा्य अध्णनयम, 1890 का 8, § 17(3)
27
संरषक और िणतपा्य अध्णनयम, 1890 का 8, § 19
11
माता ीीवित ह और ीो ्यायालय कीराय म संरषक होन क अयो्य नहीं ह,
संरषक णनयु्त करन क भलए िाध्कृत नहीं ह 28
पूिध म, ्यायालय को तस दशा
म यटद अिा्तिय का वपता ीीवित ह, संरषक णनयु्त करन स णनिाररत िकया ौया
था इस ि
ं को िीय विध् (संशो्न) अध्णनयम, 2010 मिारा संशोध्त िकया
ौया था और तस तन मामलं म भी लाौू िकया ौया था ीहां िक माता भी ीीवित
हो, इस िकार वपता की अध्मानी ् थणत को म कर टदया ौया 29
2.2., संरषक और िणतपा्य अध्णनयम की ्ारा 25 िणतपा्य की अभभरषा पर
संरषक क हक क बार म ह 30
्ारा 25(1) म यह कधथत ह िक यटद िणतपा्य
अपन शरीर क संरषक की अभभरषा को छो दता ह या तसस हिा टदया ीाता ह तो
यटद ्यायालय इस राय का ह िक िणतपा्य क भलए यह क्या्कर होौा िक िह
संरषक की अभभरषा म लडि आए तो िह तसक लडि आन क भलए अपषा कर
सकौा 31
2.2.5 पूिो्त तपबं्ं का एक साथ पररशीलन करन स यह णनककषध णनकाला ीा
सकता ह िक संरषक और िणतपा्य अध्णनयम क अ्ीन िकसी अिा्तिय क शरीर
या संप्त का संरषक णनयु्त करन म अिा्तिय/िणतपा्य क क्या् की बात स
माौधदभशधत होौा यह ्ारा 7 और ्ारा 17 की भाषा स पकि ह इसक साथ
ही, ्ारा 19( ) स यह वििषषत होता ह िक ीब तक ्यायालय वपता या माता को
विभशकितया संरषक होन क भलए अयो्य न पाए, िह िकसी को भी संरषक क प
म णनयु्त करन क अपन िाध्कार का ियोौ नहीं कर सकता ह इस िकार,
्यायालय की अिा्तिय क क्या् को अरसर करन म कायध करन की श््त म
माता-वपता क संरषक क प म कायध करन क िाध्कार का सममान िकया ीाना
चाटहए
सii दह्द ू अरा्तियता और संरषकता अधितनयम, 1956
2.2.6 िणत्कठत टह्द ू विध् म बालकं की संरषकता और अभभरषा स संबंध्त
भस ा्त नहीं ह संयु्त टह्द ू कुिुंब म, कताध सभी अधरतं और तनकी संप्त क
िबं्न क समर णनयंर् क भलए ततरदायी होता ह और इसभलए संरषकता और
28
संरषक और िणतपा्य अध्णनयम, 1890 का 8, § 19( )
29
िीय विध् (संशो्न) अध्णनयम, 2010 का 30 § 2
30
संरषक और िणतपा्य अध्णनयम, 1890 का 8, § 25
31
संरषक और िणतपा्य अध्णनयम, 1890 का 8, § 25(1)
12
अभभरषा स संबंध्त विणनटदध कि विध्क णनयम आियक नहीं समझ ौए थ 32
तथावप, आ्णु नक कानूनी टह्द ू विध्, टह्द ू अिा्तियता और संरषकता अध्णनयम,
1956 (्ीस इसम इसक पचात आ टह्द ू अिा्तियता और संरषकता अध्णनयम कहा
ौया ह) म "यह तपबंध्त ह िक वपता अिा्तिय का नसधौधक संरषक होता ह और
तसक पचात आ माता नसधौधक संरषक होती ह टह्द ू अिा्तियता और संरषकता
अध्णनयम की ्ारा 6(क) म यह तपबंध्त ह िक--
(1) िकसी अिा्तिय ल क या अवििाटहत ल की की दशा म वपता नसधौधक
संरषक होता ह और 'तसक पचात आ' माता नसधौधक संरषक होती ह ; और
(2) ऐस अिा्तिय की, ्ीसन पांच िषध की आयु परू ी नहीं कर ली हो,
अभभरषा 'मामल
ू ी तडर पर' माता क हाथ म होौी (कोि िकए ौए श्दं पर
बल टदया ौया ह)
2.2.7 गीता हररहरण बनाम भारतीय ररििट बंक33 िाल मामल म, ्ारा 6(क) की
सांवि्ाणनक विध्मा्यता को यह चन
ु डती दी ौई थी िक इसस भारत क संवि्ान क
अनु्छद 1, क अ्ीन भलंौ की समानता की ौारं िी का अणतिम् होता ह
त्चतम ्यायालय न 'तसक पचात आ' श्दं क अथध पर विचार िकया और इस बात
की परीषा की िक ्या 'कानून की कीम क अनुसार, माता-वपता क ीीिनकाल क
दडरान नसधौधक संरषक होन की हकदार नहीं ह ्यायालय न यह मत ्य्त िकया
िक 'तसक पचात आ' पद का णनिधचन इस भस ा्त को िक अिा्तिय का क्या्
सिोपरर विचार्ीय बात ह और पु ष और मटहला क बीच समता क सांवि्ाणनक
समादश को ्यान म र त हुए िकया ीाना चाटहए ्यायालय न यह अभभणन्ाधररत
िकया िक ्ारा 6(क) म 'तसक पचात आ' पद का णनिधचन इस प म नहीं िकया ीाना
चाटहए ्ीसका अथध 'वपता क ीीिनकाल क पचात आ' हो ब््क इसका अथध 'वपता की
अनुप् थणत' क प म लौाया ीाना चाटहए, ्यायालय न यह और विणनटदध कि िकया
िक 'अनुप् थणत' का अथध इस प म लौाया ीा सकता ह :
"वपता की बालक क िणत अ थायी या अ्यथा या पू्ध अनाश््त अथिा
वपता का ्याध् क कार् या अ्यथा असमथध होना "34
2.2.8 अतः, तपय्
ुध त विणनटदध कि ् थणतयं म माता, वपता क ीीिनकाल क दडरान
भी, नसधौधक संरषक हो सकती ह
32
पारस दीिान, ला आा अिो्शन, माइनोररिी, ौाडिधयनभशप एंि क ििी (2012), यूणनिसधल ला
प््लभशंौ क० : नई टद्ली, पकृ ठ xv.
33
(1999) 2 एससीसी 228.
34
ौीता हररहर् बनाम भारतीय ररीिध बंक (1999) 2 एससीसी 228, ¶ 25
13
2.2.9 टह्द ू अिा्तिय और संरषकता अध्णनयम की ्ारा 13 म यह घोवषत िकया
ौया ह िक िकसी टह्द ू अिा्तिय की संरषकता का विणनचय करन म, 'अिा्तिय
का क्या् सिोपरर विचार्ीय बात' होौी और िकसी भी ्य््त को टह्द ू
अिा्तिय का संरषक णनयु्त नहीं िकया ीा सकौा यटद ्यायालय की यह राय ह
िक यह "अिा्तिय क क्या्" म नहीं होौा 35
2.2.10 टह्द ू अिा्तियता और संरषकता अध्णनयम क अ्ीन संरषकता क संबं्
म णनमनभलि त णनककषध णनकाला ीा सकता ह िथम, ीब नसधौधक संरषकता की
बात आती ह तो वपता की अध्मानी ् थणत बनी रहौी और माता किल आपिाटदक
् थणत म ही नसधौधक संरषक बनती ह ीसा िक त्चतम ्यायालय मिारा गीता
हररहरण िाल मामल म पकि िकया ौया ह, इस िकार, यटद माता ी्य स ही
अिा्तिय की अभभरषा र ती ह और तसकी अिा्तिय की द र क भलए अन्य
अध्काररता रही ह तो भी वपता, िकसी भी समय अपन विभशकि संरषकता अध्कारं
क आ्ार पर अभभरषा का दािा कर सकता ह अतः गीता हररहरण िाल मामल म
टह्द ू अिा्तियता और संरषकता अध्णनयम की ्ारा 6(क) म की मूल सम या पर
पयाध्त विचार नहीं िकया ौया ह दस
ू र, सभी कानूनी संरषकता िबं् अ्ततोौिा
्ारा 13 म अ्तविधकि भस ा्त क अ्य्ीन हं अथाधत आ यह िक अिा्तिय का
क्या् 'सिोपरर विचार्ीय बात' ह वपता क सु् संरषकता अध्कारं क ततर
म किल यही तपबं् ह िक किल वििाद की दशा म माता अभभरषा/संरषकता क
भलए तकध-वितकध कर सकती ह
2.2.11 संरषक और िणतपा्य अध्णनयम और टह्द ू अिा्तियता और संरषकता
अध्णनयम क बीच विभद का बब्द ु क्या् क भस ा्त पर टदए ौए बल म णनटहत
ह संरषक और िणतपा्य अध्णनयम क अ्ीन, वपतृ ि का िाध्कार क्या् क
भस ा्त को अध्िांत करता ह ीब िक टह्द ू अिा्तियता और संरषकता
अध्णनयम क अ्ीन क्या् का भस ा्त संरषकता का अि्ार् करन म सिोपरर
विचार्ीय बात ह इस िकार, टह्द ू बालकं की संरषकता क िनं का विणनचय
करन क भलए तनका क्या् ही सिोपरर टहतकर ह ीो िक वपतृ ि िाध्कार को
ियाटदकि कर दौा ौर-टह्द ू बालकं क भलए, क्या् भस ा्त को अरसर्
करन म ह तषप करन का ्यायालय का िाध्कार वपता क नसधौधक संरषक क प
म क िाध्कार क अ्ीन थ बनाया ौया ह 36
35
टह्द ू अिा्तियता और संरषक अध्णनयम, 1956 का 32 § 13
36
संरषक और िणतपा्य अध्णनयम, 1890 का 8, § 17(1) ("अिा्तिय का संरषक णनयु्त या
घोवषत करन म .... ्यायालय तस विध् स संौत, ्ीसक अिा्तिय अ्य्ीन ह, तस बात स
14
सiii दह्द ू वििाह अधितनयम, 1955
2.2.12 टह्द ू वििाह अध्णनयम की ्ारा 26 म ्यायालयं को अिा्तिय बालकं
की अभभरषा, भर्-पोष् और भशषा क संब्
ं म तनकी इ्छाओं क अनु प
अध्णनयम क अ्ीन की िकसी कायधिाही म अ्तररम आदश पाररत करन क भलए
िाध्कृत िकया ौया ह इस ्ारा क अ्ीन ्यायालयं को, पूिध म पाररत ऐस
अंतररम आदशं का िणतसंहर्, णनलंबन या तनम पररितधन करन क भलए िाध्कृत
िकया ौया ह
सiv इतलाभमक विधि
2.2.13 इ लाभमक विध् म, वपता नसधौधक संरषक होता ह िक्तु अभभरषा पर
ु
की दशा म, तसक सात िषध क होन तक और पर
ु ी की दशा म तसक यडिनाौम क
आन तक माता म णनटहत होती ह इ लाभमक विध् ऐसी पि
ू ि
ध ती विध्क प णत ह
्ीसम संरषकता और अभभरषा क बीच पकि विभद का तथा माता क अभभरषा
संबं्ी अध्कार की पकि मा्यता का तपबं् ह 37
टही्नत की संक्पना म यह
तपबंध्त ह िक सभी ्य््तयं म स माता, वििाह क दडरान और वििाह क विघिन
क पचात आ, दोनं दशाओं म अपन ब्चं की, एक णन्चत आयु तक, अभभरषा र न
क भलए यो्य होती ह माता को इस अध्कार स तब तक िंधचत नहीं िकया ीा
सकता ीब तक िक ्मधविमुखता या अिचार क कार् िह णनरटहधत न हो और तसको
अभभरषा बालक क क्या् क विपरीत न पाया ीाए 38
संरषक और िणतपा्य
अध्णनयम क अ्ीन ्याणयक विणनचयं म, मु् लम बालकं को शाभमल करत हुए
्यायालयं मिारा कई बार इ लाभमक विध् क अ्ीन बालकं की अभभरषा क िणत
माता क अध्कार को मा्य ठहराया ौया ह और कई अ्य मामलं म बालक क
क्या् को बात पर ्यान टदए बबना अभभरषा माता को दी ौई ह इन मामलं पर
नीच विचार-विमशध िकया ौया ह
माौधदभशधत होौा, ीो तन परर् थणतयं म अिा्तिय क क्या् क भलए ितीत हो ") (बल दन
र ांिकत िकया ौया)
37
पारस दीिान ला आा अिो्शन, माइनोररिी, ौाडिधयनभशप एंि क ििी (2012), यणू निसधल ला
प््लभशंौ क० : नई टद्ली, पकृ ठ xv.
38
यथो्त, पकृ ठ xvii.
15
सv पारसी और िरज्चयन विधि
2.2.1, टह्द ू वििाह अध्णनयम, 1955 की ्ारा 26 क समान, पारसी वििाह और
वििाह-वि्छद अध्णनयम, 193639 की ्ारा ,9 और भारतीय वििाह-वि्छद
अध्णनयम, 189640 की ्ारा ,1 क अ्ीन ्यायालय, इन अध्णनयमं क अ्ीन
की िकसी कायधिाही म अिा्तिय बालकं की अभभरषा, भर्-पोष् और भशषा क
भलए अंतररम आदश ीारी करन क भलए िाध्कृत ह पारसी और िि्चयन बालकं
की संरषकता संरषक और िणतपा्य अध्कार मिारा शाभसत होती ह
आ. ्यातयक तनिटचन
2.3.1 भारत क त्चतम ्यायालय41 तथा लौभौ सभी त्च ्यायालयं न यह
अभभणन्ाधररत िकया ह िक अभभरषा संबं्ी वििादं म, बालक क सिोतम
टहत/क्या् की बात ऊपर र ांिकत विषय पर कानन
ू ी तपबं्ं को भी अध्िांत दती
ह संरषक और िणतपा्य अध्णनयम क अ्ीन परु ान मामलं म पकि प स यह
अभभणन्ाधररत िकया ौया ह िक वपता को नसधौधक संरषक क प म की तसकी
् थणत स किल तभी िंधचत िकया ीा सकता ह यटद तस संरषकता क भलए अयो्य
पाया ीाता ह, ऐस अनक मामल भी हं ीहां िक ्यायालयं मिारा इस ्ार्ा क
िणत अपिाद ि प विणनचय िकए ौए हं
2.3.2 कुछ ्किांत ि प तदाहर् इस िकार हं : संरषक और िणतपा्य
अध्णनयम क अ्ीन िषध 1950 क एक विणनचय म, मिास त्च ्यायालय मिारा
क्या् क भस ा्त क आ्ार पर, भल ही वपता को संरषक होन क अयो्य नहीं
भी पाया ौया था, माता को अभभरषा िदान की ौई थी 42
्यायालयं न यह
अभभणन्ाधररत िकया ह िक अभभरषा का विणनचय करन म बालकं को तनक
कडिु्मबक पररिश स, किल वपता क नसधौधक संरषकता क अध्कार को िभािी प
दन क भलए, दरू नहीं िकया ीाना चाटहए 43
ऐस एक मामल म, ीहां िक बालक का
पालन-पोष् माता की मृ यु क पचात आ मातामह मातामही मिारा िकया ौया था,
आंर िदश त्च ्यायालय मिारा यह अभभणन्ाधररत िकया ौया था िक संवि्ान क
अनु्छद 21 को ्यान म र त हुए, बालकं को ींौम ि तु नहीं माना ीा सकता
और वपता क बालकं और तनकी संप्त पर अभभरषा क अिणतबंध्त अध्कार को
39
पारसी वििाह और वििाह-वि्छद अध्णनयम, 1936 का 3, § ,9.
40
भारतीय वििाह-वि्छद अध्णनयम, 1869 का , § ,1.
41
मडसमी ौांौल
ु ी बनाम ीयंत ौांौल
ु ी (2008) 7 एससीसी 673.
42
सूरा र्िी बनाम चीमा र्िी, एआईआर 1950 मिास 306.
43
िौभसना िंकि नरभसहा बनाम धच्तलपणत, एआईआर 1971, आंर िदश 13,.
16
ििणतधत नहीं िकया ीा सकता भल ही वपता संरषक क प म कायध करन क अयो्य
न हो 44
ऐस एक मामल म ीहां बालक क माता-वपता दोनं की मृ यु हो ौई थी
और पतक
ृ नातदारं तस बालक की, ीो मातृ ि नातदारं क साथ रह रहा था,
अभभरषा का दािा िकया था, कलकता त्च ्यायालय न यह अभभणन्ाधररत िकया था
िक अिा्तिय का क्या् सिोपरर विचार्ीय बात ह और पतक
ृ नातदारं की
अभभरषा क मामलं म अध्मानी ् थणत नहीं ह 45
त्च ्यायालयं मिारा भी इस
संबं् म ऐस ही विणनचय िकए ीान क तदाहर् ह
2.3.3 म्ु लम बालकं क संबं् म मामलं का विणनचय करन म त्च ्यायालयं
मिारा किल माता क पष म, ीब अभभरषा संबं्ी तसक अध्कार का म्ु लम
विध् मिारा समथधन होता था, विणनचय िकया था सह
ु ारबी बनाम डी. म ह्मद
46
िाल मामल म, ्ीसम िक वपता न ि िषीय पर
ु ी की माता को अभभरषा दन क
िणत इस आ्ार पर आषप िकया िक िह णन्धन ह, करल त्च ्यायालय न यह
अभभणन्ाधररत िकया िक माता इ लाभमक विध् क अ्ीन तस आयु की पुरी की
अभभरषा र न क भलए िाध्कृत ह ऐस ही एक मामल अथाधत आ म ह्मद िमील
अहमद अंसारी बनाम इशरथ सिीदा 47
िाल मामल म आंर िदश त्च ्यायालय
मिारा एक ्यारह िषीय पुर की अभभरषा इस आ्ार पर वपता क पष म
अध्णन्ीत की िक मु् लम विध् क अ्ीन माता को अन्य अभभरषा बालक की
दशा म सात िषध तक र न क भलए अनुञात िकया ौया ह और यह साबबत करन क
भलए कुछ भी नहीं ह िक वपता इस मामल म म्य िदश त्च ्यायालय न मु् लम
विध् का णनिधचन माता को अभभरषा अनुञात करन क प म टदया था 48
2.3., ऊपरिि्धत विध्क और ्याणयक ंांच म दो सम याएं द ी ीा सकती हं
पहली संरषकता क मामल म वपता की अध्मानी ् थणत, ीो िक अणनिायधतः
अभभरषा क मामल म नहीं ह दस
ू र बालक क क्या् क भस ा्त की, इसक
्यापकतः ियोौ िकए ीान क बािीूद, अणन्चतता का होना
सi वपता की त्चतर जतथतत :
2.3.5 हमार मिारा ऊपर यह त्ल िकया ौया ह िक संरषक और िणतपा्य
अध्णनयम क अ्ीन संरषकता क संदभध म माता और वपता क बीच क विभद को
44
एल. च्िन बनाम िकिाल्मी, एआईआर 1981, आंर िदश 1.
45
सय्ि नाथ बनाम बी. चििती, एआईआर, 1981, कलकता 701.
46
एआईआर, 1988 करल 36.
47
एआईआर 1981, आंर िदश 106.
48
मुमताी बौम बनाम मब
ु ारक हुसन, एआईआर 1986 म्य िदश 221.
17
्ारा 19( ) म 2010 क संशो्न मिारा दरू कर टदया ौया ह िक्तु टह्द ू
अिा्तियता और संरषकता अध्णनयम क अ्ीन माता-वपता क बीच यह विभद बना
हुआ ह िषध 1989 म, टह्द ू अिा्तियता और संरषकता अध्णनयम की ्ारा
6(क) क अ्ीन वपता को दी ौई अध्मानी ् थणत क बार म विध् अयोौ मिारा यह
कथन िकया ौया था िक--
"इस िकार इस आषप्ीय िणतपादना को कानूनी मा्यता दी ौई ह िक
माता की अपषा वपता अिा्तिय बालक की अभभरषा क भलए हकदार ह
इस त्य क अलािा िक माता और वपता क बीच अध्मानी िम म माता को
अिर ् थणत िदान करन का कोई य्ु ्तसंौत आ्ार नहीं ह, इस िणतपादना
को अनक आ्ारं पर चन
ु डती दी ीा सकती ह सिधिथम, इसस इसक
मटहला विरो्ी होन का आभास होता ह इसस मटहलाओँ क िणत अवििास
और पु षं की रकठता तथा मटहलाओं की अपकृकिता टद ाई दती ह पूिध म,
यह मानत हुए िक ऐसा कुछ था, इसक भलए चाह कोई औधचय रहा हो, इस
पुरातन पषरह् को, कम स कम भारत क संवि्ान म इस बात का तपबं्
िकए ीान क पचात आ ्ीसम िक मटहलाओँ क भलए समान अध्कार होन की
घोष्ा की ौई ह और अनु्छद 15 क अ्ीन िणतकठावपत इस त्च
भस ा्त क अ्ीन भलंौ क आ्ार पर विभद न िकए ीान की ौारं िी दी ौई
ह, बनाए र न की कोई औधचय नहीं ह ि तत
ु ः अनु्छद 15 क ि
ं (3)
म, अणनिायध वििषा मिारा, मटहलाओं क पष म और बालकं क पष म
झुकाि क साथ मटहलाओँ और बालकं की विशष ी रतं क अनुसार बनाए
ौए ाायदािद वि्ान का पूिोष् िकया ौया ह यह णन संदह आचयधीनक
ह िक त्त सांवि्ाणनक तपबं् क होत हुए भी लौभौ चार दशकं स
मटहलाओं क िणत विभद को सहन िकया ीाता रहा ह "49
2.3.6 आयोौ न "वपता और माता, दोनं, को 'संयु्त प स एऔर पथ
ृ कआ प स'
नसधौधक संरषक क प म, ्ीस अिा्तिय और तसकी संप्त क संबं् म समान
अध्कार हो, ि्ाणनक प दन क भलए ्ारा 6(क) का संशो्न करन की भसााररश
की थी "50
49
भारत का विध् आयोौ, 133िीं ररपोिध , अौ त (1989), ¶ ,.1, http://lawcommissionofindia.nic.
in/101-169/Report133.pdf पर तपल्् ह
50
भारतीय विध् आयोौ, 133िीं ररपोिध , अौ त (1989), ¶ ,.3, http://lawcommissionofindia.nic.
in/101-169/Report133.pdf पर तपल्् ह
18
2.3.7 इस सम या पर, कानूनी विध् और वपतृ ि की भूभमकाओं पर हाल ही की
्याणयक म वपता की रकठ ् थणत क बीच की असंौतता विचार्ाओं मिारा और
िकाश िाला ौया ह पदम शमाट बनाम र्तन लाल शमाट51 िाल मामल म त्चतम
्यायालय न यह अभभणन्ाधररत िकया था िक माता भी बालक क भर्-पोष् क
भलए समान प स ्न दन की ततरदायी ह यमयवप, माता और वपता क
ततरदाणयि म समानता क ल्य को अपनाना िशंसनीय ह, तथावप, इस विणनचय
का ्यंौयमक परर्ाम णनकला--माता को नसधौधक संरषक नहीं समझा ौया ह और
इसभलए बालक पर िभाि िालन िाल महिप्
ू ध विणनचयं म तसका कोई कथन नहीं
ह, िक्तु तसका बालक क िणत समान वितीय ततरदाणयि ह इसी िकार 200,
क एक णन्धय म, कनाधिक त्च ्यायालय क एक णन्धय पर ्ीसम कुिुंब
्यायालय क आदश को तलि टदया ौया था और माता को अिय क पर
ु ी की
अभभरषा र न की अनुञा दी ौई थी, टि्प्ी करत हुए त्चतम ्यायालय न यह
त्ल िकया िक--
"हम यह पकि कर द िक हम त्च ्यायालय मिारा माता क पष म की
ौई सा्ार् मताभभ्य््तयं और टि्पि्यं का समथधन नहीं करत हं
्यंिक बालक की अभभरषा र न क भलए अध्मान सदि वपता का होना
चाटहए हमारी सुविचाररत राय म, माता क पष म ऐसा ्यापीकर् नहीं
िकया ीाना चाटहए "52
2.3.8 माता-वपता क बीच समता ऐसा ल्य ह ्ीसका अनुशीलन िकया ीाना
चाटहए और णन संदह विध् म भलंौ संबं्ी ् थर ्ार्ाओं क आ्ार पर माता-वपता
क बीच अध्मान थावपत नहीं िकए ीान चाटहए तथावप, ऐसी समता न किल
भूभमकाओं और ततरदाणयिं क संदभध म हो सकती ह ब््क माता-वपता क
अध्कारं और विध्क ् थणत क संदभध म भी होनी चाटहए इस िकार, इस षर म
सु्ार की टदशा म पहला तपाय टह्द ू अिा्तियता और संरषकता अध्णनयम म
वपता की अध्मानी ् थणत को समा्त करन का और माता तथा वपता, दोनं, को
नसधौधक संरषक बनान का होना चाटहए
सii क्याण संबंिी मानक की अतनज्चतता
2.3.9 यमयवप, क्या् संबं्ी भस ा्त का ियोौ ्यापक प स अभभरषा संबं्ी
वििामयकं पर कारध िाई करन िाल अपील ्यायालयं मिारा िकया ीाता ह, तथावप,
51
एआरआई 2000 एससी 1398.
52
कुमार िी ीाौीरदार बनाम चथना रामतीरथा, एस.एल.पी. (भसविल) ,230-,231/2003, भारत का
त्चतम ्यायालय का तारी 29 ीनिरी, 200, का णन्धय
19
णनचल ्यायालयं मिारा इसक ियोौ क वि तार का कोई सा्य नहीं ह कुिुंब
्यायालय क आदशं क अ्ययन क आ्ार पर, विध्क भशषाविम आशा िाीपयी न
यह त्ल िकया िक--
"्यायालयं मिारा, हो सकता ह, बालक क सिोतम टहत पर विचार िकया
ौया हो, िक्तु आदशं म इस मानक का कोई त्ल नहीं होता ्यायालय
तन कारकं की कोई ीानकारी नहीं दत िक ्ीन पर त्हंन अभभरषा िदान
करन क संबं् विचार िकया था और न ही तसक कोई कार् बतात हं
आदशं म किल इस बात का त्ल िकया ीाता ह िक िकसी मामल विशष
म अभभरषा िकसको िदान की ौई ह "53
2.3.10 क्या् संबं्ी भस ा्त क संबं् म सम या यह ह िक ्यापक आ्िान क
बािीद
ू अपीली ्याणयक विणनचयं म इस भस ा्त की विध्क अ्तिध तु को घोवषत
नहीं िकया ौया ह कुिुंब विध् क विमितीनं न यह त्ल िकया ह िक यमयवप
ऐस ्किांत टद ाई दत हं, तथावप ऐस िकसी स ांणतक आ्ार का पता नहीं लौाया
ीा सकता िक िकस रीणत म ्यायालय बालक क क्या् क मानक का ियोौ करत
हं विध्िता अचधना पराशर न त्चतम ्यायालय क िषध 1959 स िषध 2000 तक
क तन णन्धयं का विलष् िकया ्ीनम िक अभभरषा संबं्ी वििादं म सिोतम
टहत क भस ा्त का ियोौ िकया ौया था सुरी पराशर न यह णनककषध णनकाला िक
इस बार म वि्ायी माौधदशधक भस ा्त न होन की दशा म िक अिा्तिय क
सिोतम टहत का णन्ाधर् करन क भलए कडन स कारकं का ियोौ िकया ीाना
चाटहए, ्यायालय मिारा इस बार म िक बालकं क भलए ्या सिोतम ह अपन
्य््तौत विचारं और आदशध वपतृ ि की विचार्ाओं क आ्ार पर भभ्न-भभ्न
णनिधचन करत हं 54
्किांत ि प, इस बार म िक ्या अभभरषा का विणनचय करन
म माता या वपता की वितीय हभसयत सुसंौत कारक होती ह, पर पर विरो्ी णन्धय
टदए ौए हं 55
णन संदह, अनकं णन्धयं म माता क पष म नीीर थावपत की ौई
53
आशा बाीपयी क ििी एंि ौा्ीधयनभशप आा धच्रन इन इंडिया, 39(2) ाभमली ला ्िािरली
,,1,,,7(2005).
54
अीधना पाराशर, िलायर आा चाइ्ि इन ाभमली लाी-इंडिया एंि आ रभलया, 1(1) नालसर ला
रर्यू ,9, ,9 (2003).
55
रोीी ीकब बनाम ए. चिमाकक (एआईआर 1973, एससी 2090) म त्चतम ्यायालय न बालक
की अभभरषा माता को िदान की ्यंिक िह आधथधक प स संप्न थी और इसभलए बालक की
द भाल करन क भलए सषम थी भा्य ल्मी बनाम नाराय् राि (एआईआर 1983 मिास 9)
म मिास त्च ्यायालय न बालक की अभभरषा वपता को िदान की ्यंिक तसक पास बालक क
सिोतम सु सुवि्ा और भशषा तपल्् करान क भलए पयाध्त सा्न थ अशोक सामीीभाई
्रो बनाम नीता अशोक ्रो [II (2001) िीएमसी ,8 बंबाई] म बंबाई त्च ्यायालय न यह
20
हं िक्तु ीसा िक सुरी पराशर मिारा तधचत प स यह त्ल िकया ौया ह िक
य विणनचय भी ्याया्ीशं की बो्षमता पर आ्ाररत होत हं िक कडन 'अ्छी'
माता ह परर्ामतः ऐसी मटहलाएं ीो इन मापदं िं को पूरा नहीं कर पाती त्ह
बालकं की अभभरषा का दािा करन म कटठनाई का सामना करना प ता ह
2.3.11 क्या् संबं्ी भस ा्त क अ्ीन ्याया्ीशं को ्यापक वििकाध्कार
िा्त हं इसका अथध यह हुआ िक ऐस कणतपय मु ्ीन पर िक विचार िकया ीाना
चाटहए, त्ह अभभरषा का अि्ार् करत समय ौंभीरतापि
ू क
ध नहीं भलया ीाता ह
वपता, वपतामह या अ्य पु
ु ष नातदारं मिारा बाभलका क यडन शडष् क अभभकथनं
पर बबना िकसी अ्िष् क ्यान नहीं56 टदया ीाता ह यटद ि ्याया्ीश को
अनध्संभा्य ितीत होत हं विध्िता और िियािादी ्लविया ए्नस इस बार म
यह त्ल िकया ह िक "्यायालयं को अपनी श््त का ियोौ दरू दभशधता और
सतकधतापि
ू क
ध करना चाटहए ्ीस िक इसस बालकं क मल
ू भत
ू मानि अध्कार, िा्
क अध्कार, ्ीसक अ्तौधत भय और संरास क बबना ीीिन का अध्कार भी ह,
का अणतिम् न हो "57 अतः क्या् क मानक क ीो अि्ारक ति हं त्ह
पकि प स अध्कधथत िकया ीाना चाटहए ्ीसस ्याया्ीशं को अभभरषा और
पहुंच का अि्ार् करत समय कणतपय मु ं की अनद ी करन स णनिाररत िकया
ीा सक
2.3.12 इस अ्याय म, भारत म संरषकता और अभभरषा को शाभसत करन संबं्ी
विध्क ंांच का पुनविधलोकन िकया ौया ह और तसम तन दो षरं की पहचान की
ौई हं ्ीनम वि्ायी सु्ार अपषषत ह अौल अ्याय म, अ्य अध्काररताओं क
तदाहर्ं क आ्ार पर स्ममभलत अभभरषा की संक्पना पर विचार-विमशध िकया
ौया ह
अभभणन्ाधररत िकया िक वपता और तसक संबंध्यं को ्नांय होना बालक की अभभरषा तनक पष
म दन क भलए एक कारक नहीं हो सकता
56
्लविया ए्नस, ामली ला II: मरी, िाइिोसध एंि मरीमोणनयल भलटिौशन (2011), आ्साोिध
यूणनिभसधिी िस : नई टद्ली, पकृ ठ 257-259.
57
यथो्त पकृ ठ 259.
21
अ्याय 3
संय्
ु त अभभरषा की संक्पना
अ. संयु्त अभभरषा के रतत अ्तररा्रीय िज््क ण
3.1.1 संपू्ध विि म संयु्त अभभरषा की प णतयां बहुत ही भभ्न-भभ्न हं
भभ्न-भभ्न दशं क तुलनामक पुनविधलोकन स ््किको्ं क बहुत ही भभ्न-भभ्न
होन का पता चलता ह "संयु्त अभभरषा" पद को भभ्न-भभ्न पं म णनटदध कि
िकया ीा सकता ह : संयु्त विध्क अभभरषा, संयु्त भडणतक अभभरषा या संय्
ु त
प स दोनं पं म वि्ीणनधया रा्य म इस पररभाषा म इस इस प म ीाना
ीाता ह :
"संयु्त अभभरषा" स अभभित ह, (i) संयु्त विध्क अभभरषा, ीहां माता
और वपता दोनं बालक की द र और णनयंर् का संय्
ु त ततरदाणयि और
बालक स संबंध्त विणनचय करन का संय्
ु त िाध्कार र त हं, भल ही
बालक का मख
ु य णनिास थान किल एक ही (माता या वपता) क साथ ही हो,
(ii) संय्
ु त भडणतक अभभरषा, ीहां माता और वपता दोनं बालक की
स्ममभलत भडणतक और अभभरषामक द र करत हं, या (iii) संय्
ु त
विध्क और संयु्त भडणतक अभभरषा का संयोीन, ्ीस ्यायालय बालक क
सिोतम टहत म समझता ह 58
3.1.2 इसी िकार, ीा्ीधया रा्य मिारा संय्
ु त अभभरषा को "संयु्त विध्क
अभभरषा, संयु्त भडणतक अभभरषा अथिा संयु्त विध्क अभभरषा और संयु्त
भडणतक अभभरषा" क प म पररभावषत िकया ौया ह 59
3.1.3 एकल विध्क अभभरषा और एकल भडणतक अभभरषा क बीच विभद ह,
यमयवप, कुछ रा्यं मिारा (्ीसम वि्ीधणनया भी ह) त्ह एक साथ ीो ा ौया ह 60
कभलाोणनधया रा्य मिारा णनमनभलि त पररभाषाएं दी ौई हं :
58
वि्ीधणनया कोि एन. § 20-12,.1.
59
ीा्ीधया कोि एन. § 19-9-6(4).
60
वि्ीधणनया कोि एन. § 20-12,.1 ("'एकल अभभरषा' स यह अभभित होता ह िक एक ्य््त
बालक की द र और णनयंर् का अध्कार र ता ह और तस बालक स संबंध्त विणन्चय
करन का मुखय िाध्कार होता ह ")
22
"एकल विध्क अभभरषा" स यह अभभित ह िक एक ीनक (माता अथिा
वपता) को बालक क िा ्य, भशषा और क्या् क संबं् म विणनचय
करन का अध्कार और ततरदाणयि होौा 61
"एकल भडणतक अभभरषा" स यह अभभित ह िक बालक ्यायालय की
अ्याौम का आदश क अ्ीन रहत हुए एक ीनक (माता अथिा वपता) क
साथ णनिास करौा और तसक ही पयधिष् क अ्ीन होौा 62
3.1., सभी भभ्न-भभ्न स्ममभलत भर्-पोष् की ि्ाभलयं म ीो एक एक प
विषयि तु ह िह यह ह िक सबम बालक क सिोतम टहत को महि टदया ौया
ह 63
तथावप, अध्काररतायं म भभ्नता ह िक ि िकस िकार इस मानक को लाौू
करत हं कुछ की तप्ार्ा यह िक माता-वपता मिारा संय्
ु त पालन-पोष् बालक
क सिोतम टहत म ह--आ रभलया क कुिुंब विध् अध्णनयम (ाभमली ला ऐ्ि) म
यह कधथत ह िक "ीब बालक क संबं् म माता-वपता मिारा पालन-पोष् का आदश
िकया ीाए तब ्यायालय को इस तप्ार्ा को लाौू करना चाटहए िक िह बालक क
सिोतम टहत म ह िक बालक माता-वपता का बालक का पालन-पोष् करन म
समान स्ममभलत ततरदाणयि होता ह "64 अ्य अध्षर स्ममभलत पालन-पोष्
को अनुञात तो करत हं िक्तु इस तप्ार्ा को स्ममभलत नहीं करत हं भमनसोिा
की विध् म यह पकि प स कधथत ह िक "संयु्त भडणतक अभभरषा क संबं् म
तसक पष म, कुछ अपिादं क साथ या तसक वि कोई तप्ार्ा नहीं होती ह "65
61
ि िस एन. कल. ाभमली कोि § 3006.
62
ि िस एन. कल. ाभमली कोि § 3007.
63
तदाहर्ाथध, दि ए कनािा िाइिोसध ऐ्ि, 1985, § 16(8) ("इस ्ारा क अ्ीन आदश करन म
्यायालय किल बालक क सिोतम टहतं पर ही विचार करौा ....."); आ रभलया ाभमली ला
ऐ्ि, 1975, § 65एए (2006 तक यथा संशोध्त) ("इस बात का विणनचय करन म बालक क
संबं् म पालन-पोष् संबं्ी विभशकि आदश करन क भलए ्यायालय को बालक क सिोतम टहतं
को सिोपरर विचार्ीय बात क प म ्यान दना चाटहए"); सातथ अरीका धच्र्स ऐ्ि, 2005
का ऐ्ि सं0 38; § 9; यू.क. धच्र्स ऐ्ि, 1989, § 1(1).
64
आ रभलया ाभमली ला ऐ्ि, 1975, § 61िीए (यथा संशोध्त) ; इदाहो कोि एन. § 32-
771बी(,) भी दि ए ("इस बात की तप्ार्ा की ीाएौी िक संय्
ु त अभभरषा िकसी अिा्तिय
बालक या बालकं क सिोतम टहत म ह ")
65
एम.एस.ए. 518.17(2)(क).
23
कनािा, दषष् अरीका, यूनािि िकंौिम और क्या म भी संयु्त अभभरषा क पष
म या तसक वि कोई तप्ार्ा नहीं ह 66
3.1.5 अनक दश, ीो स्ममभलत पालन-पोष् को अनुञात करत हं (अथिा इसक
भलए कानूनं अध्मान का तपबं् ह), कुछ मामलं म इस अनुञात नहीं भी करत
हं ीहां कोई घरलू टहंसा का अथिा िकसी िकार क द्ु यधिहार का मामला ह, अनक
अध्षर स्ममभलत पालन-पोष् क वि तप्ार्ा र त हं 67
तस दशा म भी
स्ममभलत पालन-पोष् का पष नहीं भलया ीाता ह ीहां िक माता-वपता क बीच
विभशकितया कलहप्
ू ध संबं् हं यए
ू स कोिध आा अपील न िाइमन बनाम िाइमन
िाल मामल म यह त्ल िकया था िक :
संय्
ु त अभभरषा को, मख
ु यतया सापष प स ् थरधचत, सडहािध पू्ध माता-
वपता क भलए, ीो पररप्ि स्य प म ्यिहार करत हं, िोसाटहत िकया
ीाता ह चिंू क ्यायालय क आदश मिारा ्यि था पहल स किु और
कलुवषत संबं्ं म रह रह माता-वपता पर अध्रोवपत की ीाती ह, अतः एक-
दस
ू र को घोर दौ
ु ्
ध ं और अिौु्ं क आ्ार पर आरोवपत करन स कुिुंब म
किल तनाि ब ता ही ह 68
3.1.6 ्यिहायध विचार्ीय बात भी सुसंौत होती हं कुछ अध्षर स्ममभलत
पालन-पोष् का अध्णन्धय करत समय भूौोलीय सा््न्यता पर विचार करत
हं 69
तदाहर्ाथध, दषष् अरीका कुिुंब ्यायालय बालकं की संयु्त भडणतक
अभभरषा सतत आ प स अध्णन्ीत नहीं करत िक ऐसी ्यि था बालक क भलए
66
कनािा िाइिोसध ऐ्ि, आर.एस.सी., 1985, अ्याय 3 (दस
ू रा अनुपूरक), §16(,),(8); सातथ
अरीका धच्र्स ऐ्ि, 2005 का 38 ; §§ 22,23,30; यू.क. धच्र्स ऐ्ि, 1989 §§ 8,
11(,); क्या धच्र्स ए्ि §§ 82(1); 83(1).
67
यथो्त एसिी. 32-717बी(5) ("यह तप्ारा्ा की ीाएौी िक संयु्त अभभरषा िकसी अिा्तिय
बालक क सिोतम टहतं म तस दशा म नहीं होौी यटद माता-वपता म स एक को ्यायालय मिारा
घरलू टहंसा का लौातार दोषी पाया ीाता ह ...........") (इदाहो); आ रभलया ाभमली ला ऐ्ि,
1975 (यथा संशोध्त), § 61िीए(2) (इस बात की तप्ार्ा िक समान पालन-पोष् का
ततरदाणयि बालक क सिोतम टहत म होता ह, तस दशा म लाौू नहीं होती ह यटद इस बात क
वििास करन का यु््तयु्त आ्ार ह िक माता अथिा वपता द्ु यधिहार या घरलू टहंसा म लौा
हुआ ह
68
िाइमन बनाम िाइमन, ,, एन.िाई. 2िी 58, (1978) (त र् का लोप िकया ौया); पिीन एंि
पिीन (1991) एा.एल.सी.-92-231 (आ रभलया) भी दि ए (्ीसम स्ममभलत अभभरषा, ्ीसक
अ्तौधत तपय्
ु त पालन-पोष्, पर पर वििास, सहयोौ और अ्छ संबं् (संिाद) क भलए पि
ू ध
शतध लौाई ौई ह )
69
पिीन एंि पिीन (1991) एा.एल.सी.-92-231 (आ रभलया)
24
वि्िंसक होौी, विभशकितया तन मामलं म ीहां माता-वपता म बहुत ही अध्क
ाासला ह 70 इसक साथ ही बालक की ि तुतः रहन-सहन की ् थणत भी सस
ु ौ
ं त हो
सकती ह--यूनाइिि िकंौिम म, स्ममभलत प स रहन क आदशं को "िहां तधचत
समझा ीा सकता ह ीहां बालक क ीीिन की िा तविक िकृत- ि प की विध्क
प स पु्कि होती ह "71
3.1.7 अनक अध्षरं म विध्क अभभरषा (बालक क भलए मुखय विणनचय, ीस
िक भशषा, धचिकसा, दं त-द र , ्मध और भाषा ्यि था संबं्ी विणनचय करन
का अध्कार)72 और भडणतक अभभरषा (बालक की णनयभमत दणनक द र और
णनयंर् का तपबं् करन का अध्कार) क बीच क विभद को िीकारा ौया ह 73
यह
विभद भारत म संरषकता और अभभरषा क बीच क विभद क समानांतर ह कुछ
अध्षरं म इस विभद क भलए अ्य पदं का ियोौ िकया ौया ह तदाहरा्ाथध
आ रभलया म, "माता-वपता क ततरदाणयि", ्ीस ऐस कतध्यं, श््तयं,
ततरदाणयिं और िाध्कार क प म पररभावषत िकया ौया ह ीो िक विध् मिारा
माता-वपता को बालक क संबं् म िा्त होता ह - तस समय सीमा स भभ्न ह ीो
70
ए बरि एंि एस बमधन, "डिसाइडिंौ टद ब ि इ्िर ्स आा टद चाइ्ि" 118 सातथ अरीका ला
ीनधल (2001).
71
ए िाल मामल म [2008] इि््यूसीए भसविल 867, ¶ 66
72
दि ए िी.ए.एम.एस., ,52.375(1)(2) ("संयु्त अभभरषा" स यह अभभित ह िक माता-वपता बालक
क िा ्य, भशषा और क्या् क संबं् म स्ममभलत विणनचय करन क अध्कार और
ततरदाणयि र त हं और ीब तक आबंटित, विणनयो्ीत अथिा डििीत न िकया ीाए, माता-
वपता विणनचय करन क अध्कारं, ततरदाणयिं और िाध्कार का ियोौ करन म एक-दस
ू र क
साथ परामशध करौ... "); 15 िी.एस.ए. § 66,(1)(ए) ("'विध्क ततरदाणयि' स बालक की
णनय की दणनक द र और णनयंर् स भभ्न बालक क अध्कारं और ततरदाणयिं पर िभाि
िालन िाल विभभ्न मामलं का अि्ार् और णनयंर् करन क अध्कार और ततरदाणयि
अभभित होत हं इन मामलं क अ्तौधत भशषा, धचिकसा और दं त -द र ; ्मध और यारा
संबं्ी ्यि थाएं हं िक्तु य इस तक सीभमत नहीं हं विध्क ततरदाणयि को एकल प स
र ा ीा सकता ह या तस बांिा ीा सकता ह या एक दस
ू र स साझा िकया ीा सकता ह ")
73
दि ए िी.ए. कोि एन. § 20-12,.1 ("'संयु्त अभभरषा' स अभभित ह .......; (ii) संयु्त भडणतक
अभभरषा, ीहां माता और वपता, दोनं, ही बालक की भडणतक और अभभरषामक द र क
सहभाौी होत हं........"); 15 िी.एस.ए. § 66,(1)(बी) ("'भडणतक ततरदाणयि' स दस
ू र ीनक
अथाधत आ माता की दशा म वपता और वपता की दशा म माता क बालक स संपकध करन क अध्कार
क अ्ीन रहत हुए बालक की णनय की दणनक द र और णनयंर् का तपबं् करन क अध्कार
और ततरदाणयि अभभित ह भडणतक ततरदाणयि एकल प स र ा ीा सकता ह या तस बांिा
ीा सकता ह या एक-दस
ू र क साथ साझा िकया ीा सकता ह " ीा्ीधया कोि एन., § 19-9-6(3)
("'संय्
ु त भडणतक अभभरषा' स यह अभभित होता ह िक भडणतक अभभरषा को माता-वपता मिारा इस
प म साझा िकया ीाता ह ्ीसस िक माता-वपता दोनं मिारा बालक क साथ समान प स
समय और संपकध सुणन्चत हो सक)"
25
बालक माता-वपता, म स ियक क साथ बबताता ह 74
इसी िकार, रांस म "माता-
वपता का िाध्कार" ्ीसम तन अध्कारं और कतध्यं को, ्ीनस िक अ्ततः
बालक का क्या् होता ह, िणत णनदो श करता ह,75 माता-वपता क तसस भमलन और
साथ रहन क अध्कार स भभ्न ह 76
क्या म "विध्क अभभरषा" और "भडणतक
अभभरषा" क बीच विभद िकया ौया ह 77
आ. भारत मं संय्
ु त अभभरषा
3.2.1 यमयवप, संयु्त अभभरषा का विणनटदध कि प स भारीतय विध् क भलए
तपबं् नहीं िकया ौया ह तो भी िकीलीनं मिारा यह िणतिदन िकया ौया ह िक
अभभरषा संबं्ी वििादं म विणनचय करत समय पर कुिुमब ्यायालय क ्याया्ीश
इस संक्पना का तपयोौ करत हं आ्णु नक समय म भारत म माता-वपता मिारा
संय्
ु त पालन-पोष् को सं थामक बनान संबं्ी ियासं स संबंध्त दो तदाहर्ं
की नीच अिषा की ौई ह बालक अध्कार िणतकठान मिारा "बाल समीपता और
बालक अभभरषा" संबं्ी माौधदशधक भस ा्तं का एक संिौध तयार िकया ौया ह,
मुमबई आ्ाररत एक ौर-सरकारी संौठन मिारा संयु्त अभभरषा का णनमनभलि त
रीणत स अथध लौाया ौया ह :
बालक बारी-बारी स, एक स्ताह अभभरषक माता-वपता क साथ और एक
स्ताह ौर अभभरषक माता-वपता क साथ रह सकता ह और इस िकार
अभभरषक माता-वपता और ौर अभभरषक माता-वपता बालक की दीघधकाभलक
74
आ रभलया ाभमली ला ऐ्ि 1975, § 61बी की ("इस भाौ म िकसी बालक क संब्
ं म माता-
वपता ततरदाणयि स ि सभी किधय, श््तयां, ततरदाणयि और िाध्कार अभभित हं, ीो िक
माता-वपता बालकं क संबं् म र त हं ") आ रभलया ाभमली ला ऐ्ि 1975, § 61िीए क साथ
तुलना की्ीए ("इस तप्ार्ा म िक माता-वपता का समान ततरदाणयि होता ह, माता-वपता म
स ियक क साथ बालक मिारा बबताए ौए समय की सीमा क बार म तप्ार्ा कोई तपबं् नहीं
ह")
75
रांस भसविल कोि, अनु्छद 372-1.
76
रांस भसविल कोि अनु्छद 373-2-1 ("ीहां बालक का क्या् इस िकार अपषषत ह िहां
्याया्ीश िकसी एक माता या वपता क भलए ीनकीय िाध्कार का तपयोौ कर सकौा किल
ौंभीर कार्ं स दस
ू र अ्य माता या वपता को बालक तक पहुंच और तसक आिास क भलए इंकार
कर सकौा ")
77
क्या धच्र्स ऐ्ि, § 81(सी)-(िी).
26
द भाल क्या् और विकास म अ्तिधभलत विणनचयं की संयु्त
्ीममदारी को बांि सकत हं 78
3.2.2 तथावप, माौधदशधक भस ा्तं म यह कथन िकया ौया ह िक संयु्त अभभरषा
संबं्ी यह समझडता सीआरसी क अनु प होौा, यह अिषा की ीानी चाटहए िक
इसक भलए ऐसा कोई कठोर णनयम नहीं ह ीो अभभरषा संबं्ी सभी मामलं म
सािधभडभमक प स लाौू िकया ीा सकता हो
3.2.3 संय्
ु त अभभरषा का दस
ू रा तदाहर्, 2011 क कनाधिक त्च ्यायालय क
णन्धय म िणतपाटदत िकया ौया था ्ीसम बारह िषीय बालक (ल क) क विषय म
अ्तिधभलत अभभरषा संबं्ी वििाद का समा्ान करन क इस संक्पना का तपयोौ
िकया ौया था क.एम. विनय बनाम बी. रीणनिास79 िाल मामल म दो ्याया्ीशं
िाली ्यायपीठ न यह अभभणन्ाधररत िकया िक माता-वपता दोनं "अिय क बालक क
सं्ायध विकास क भलए अभभरषा िा्त करन क हकदार हं संय्
ु त अभभरषा को
णनमनभलि त रीणत स िभािी िकया ौया था :
अिय क बालक को ियक िषध ीनिरी स 30 ीून तक वपता क साथ
और 1 ीुलाई स 31 टदसमबर तक माता क साथ रहन का णनदश टदया
ौया था
माता-वपता को बालक की भशषा और अ्य ्ययं को बराबर बांिन का
णनदश टदया ौया था
ियक माता-वपता को, ीब बालक अ्य माता या वपता क साथ रह रहा
होौा, शणनिार और रवििार को भमलन का अध्कार टदया ौया था
बालक को, ीब िह अ्य माता या वपता क साथ रह रहा होौा ियक
माता या वपता स िलीाोन या िीडियो का्रभसंौ मिारा बात करन क
भलए अनुञात िकया ौया था
3.2., तपरो्त तदाहर्ं क अणतरर्त, "वपता क अध्कारं" का पष लन िाल
समूहं की ओर स भारत म स्ममभलत अभभरषा को सं् थत करन की मांौ ब ती
ीा रही ह ्ी्हंन यह दलील दी ह िक भारतीय कुिुमब विध्, ्ीसम अभभरषा
विध् भी ह, माता क पष म ह परर्ाम ि प इन समूहं की यह मांौ ह िक
78
बालक अध्कार िणतकठान, बाल समीपता और बालक अभभरषा संबं्ी माौधदशधक भस ा्त (2011)
http://www.mphc.in/pdf/ChildAccess-040312.pdf, पकृ ठ 2, पर तपल्् ह
79
एमएाए सं0 1729/2011, कनाधिक त्च ्यायालय, तारी 13 भसतमबर, 2013 का णन्धय
27
बालकं क अध्कारं क संबं् म वपता क "समान अध्कार" होन चाटहए विध् क
बार म ऐसा िखयापन, ीो माताओं क पष म ह, न किल त्यामक प स ौलत
ह अवपतु त्त मांौ हमार संि्ाणनक और विध्क ाच म समानता की रटु िपू्ध
क्पना श््त पर भी आ्ाररत ह इसभलए हम यहां यह चचाध करौ िक वपता को ही
अभी भी दोनं, ्ाभमधक और पंथणनरपष कुिुमब विध्यं क अ्ीन नसधौधक संरषक
समझा ीाता ह, न िक माता को इसक अणतरर्त हमार समाी म अभी भी दांपय
और पाररिाररक ीीिन म समानता एक दरू थ िपन क समान ह अभी भी ब ी
संखया म मटहलाएं अनधु चत प स ौह
ृ थी और ब्चं की द भाल क कायं क बोझ
स दबी हुई हं ीब िक ि घर क बाहर ितणनक णनयोीन म लौ हुई हं अतः ीब
वििाह की अि् थणत क दडरान ीनक संबं्ी और द भाल करन संबं्ी ततरदाणयिं
की कोई समानता नहीं ह तो कोई िकस आ्ार पर वििाह क विघिन क पचात आ
बालकं क पालन पोष् संबं्ी अध्कारं म समानता का दािा कर सकता ह? हमारा
संवि्ान और विध्क ांचा रा्य को मडभलक समानता का पालन करन का णनदश
दता ह मडभलक समानता म घर क भीतर और तसक बाहर पु ष- री की सामा्ीक
आधथधक ् थणत म भभ्नता को िीकारा ौया ह और परर्ामं की समानता िा्त
करन की अभभलाषा की ौई ह अतः हम बालकं पर अयु््तपू्ध समान अध्कारं
पर आ्ाररत माता-वपता मिारा स्ममभलत पालन पोष् संबं्ी वपता क अध्कारं की
मांौ करन िाल समूहं की ् थणत को ाररी करत हं
3.2.5 तथावप, त्त ् थणत क होत हुए भी हम यह महसूस करत हं िक यह नीच
चचाध िकए ीान िाल अनक अ्य कार्ं स भारत म माता-वपता मिारा स्ममभलत
पालन-पोष् की मािल की संभा्यता पर विचार िकया ीाना महिपू्ध ह
इ. भारत मं संयु्त अभभरषा क अंगीकार िक िाने के कारण
3.3.1 िथमतः िररत सामा्ीक और आधथधक पररितधन क साथ दामपय और
पाररिाररक संबं् अध्क ीटिल हो ौए हं और यही परर् थणतयां तनक विघिन का
एक कार् हं चिूं क ऐस सामा्ीक पररितधन ्ीनका पाररिाररक ीीिनशली पर तीी
स िभाि प ता ह, इसभलए हम वििाह क दडरान और तसक पचात आ कडिु्मबक संबं्ं
को शाभसत करन िाली विध्यं को अमयतन करन की आियकता ह ितधमान समय
म अभभरषा क भलए हमारा विध्क ंांचा इस तप्ार्ा पर आ्ाररत ह िक अभभरषा,
विरो्ी पषकारं म स िकसी एक म णनटहत की ीा सकती ह और तपयु्तता का
तुलनामक रीणत म अि्ार् िकया ीाना चाटहए 80
िक्तु कााी समय बीत ीान क
80
िाणत दशपांि, िाइिो िध ि्स यूनाईि ाार क ििी राइ्स, िाइमस आा इंडिया (9 भसतमबर,
2009), http://timesofindia.indiatimes.com/india/Divorced-dads-unite-for-custody-
28
पचात आ दोष क आ्ार पर वििाह वि्छद मिारा वििाह भंौ का मूला्ार पार पररक
सहमणत स वििाह वि्छद म पररिणतधत हो ीाता ह इसभलए हम अभभरषा क बार म
भभ्न प विचार करन की आियकता ह और तसक भलए ऐस ्यापक तपबं् करन
की आियकता ह ्ीसक भीतर रहत हुए वििाह वि्छद करन िाल माता-वपता और
बालक यह विणनचय कर सकत हं िक तनक भलए अभभरषा की कडन सी ्यि था
सिोतम होौी
3.3.2 दस
ू र, अभभरषा संबं्ी मामलं क िणत ्याणयक मनोि्ृ त पयाध्त प स
विकभसत होनी चाटहए विध्िता और िियािादी ्लविया ए्नस न यह अिषा की
ह;
आ्णु नक समय म अभभरषा संबं्ी ल ाई म अिा्तिय बालक की द भाल
करन क भलए पारमपररक नसधौधक संरषक क प म न तो वपता और न ही
ीविक प स स््ीत माता को नणतक प स अभभरषा दी ीाती ह
भस ा्त यह ह िक बालक क सिोतम टहत को ्यान म र त हुए बालक क
मडीूदा रहन सहन की ्यि था और घर का िातािर् होना चाटहए............
ियक मामल का विणनचय बालक की संपू्ध सामा्ीक, शषष् और
भािामक आियकताओं को ्यान म र त हुए करना चाटहए 81
3.3.3 िक्तु ्याणयक म इस विकास क बािीूद भी हमन इस विचार की
अनद ी की ह िक कणतपय अनुकूल परर् थणतयं क अ्ीन बालक का सिोतम टहत
का परर्ाम माता वपता दोनं क एक साथ र ीान स भी णनकाला ीा सकता ह
चिूं क बालक क सिोतम टहत का अनुशीलन करन और स्ममभलत अभभरषा की
संक्पना क म्य कोई अ्तणनधटहत अ्तविधरो् नहीं ह इसभलए विध् म इस विक्प
का तपबं् करन की आियकता ह पर्तु कणतपय आ्ारभूत शतं पूरी होनी चाटहए
3.3., तीसरा ीसा पहल ही त्ल िकया ीा चक
ु ा ह िक अनक सं थाएं, ्ीनक
अ्तौधत ्यायपाभलका भी ह, स्ममभलत अभभरषा क विचार की ओर आकवषधत होन
लौी हं हमन ऊपर इनम स कुछ निीन विकासं को णनटदध कि िकया ह िक्तु
rights/articleshow/ 4988614.com ("तनका अनुभि यह ह िक अ्सर कुिुमब ्यायालयं का झुकाि
पू्त
ध ः एक ही ओर होता ह या इसक अणतरर्त आम तडर स बालक अभभरषा की ल ाई का त्त
अिय क क ऊपर पू्ध एक माता या वपता का पू्ध णनयंर् िा्त कर लन क साथ होता ह
अ्य माता या वपता को किल स्ताहं त या विमयालय की छुटियं क दडरान पहुंच अनुञात होती
ह)"
81
्लाविया एी्स, ामली ला II: मरी, िाइिोसध एंि मरीमोणनयल भलटिौशन (2011), आ्साोिध
यूणनिभसधिी िस : नई टद्ली, पकृ ठ 255.
29
आीकल इस ्ार्ा को अ्यि् थत रीणत म ्यिहार म लाया ीा रहा ह
स्ममभलत अभभरषा की ्ार्ा क भलए बालक क ीीिन तर क सिोतम टहत क
पकि णन्ाधरक, ्याया्ीशं और म्य थं की भूभमका, माता-वपता मिारा पालन
पोष् संबं्ी योीनाएं और िसी ही अ्य योीनाओं ीस अनक संघिक हं इ्ह
विध् म अध्कधथत िकया ीाना चाटहए स्ममभलत अभभरषा क भलए आदश को
ीीिनषम विक्प बनान क भलए तस विध् म अध्कधथत िकया ीाना चाटहए ्ीसस
तालाक दन िाल माता वपता, बालक क क्या् क समझडता िकए बौर अध्मानी
अभभरषक ्यि था पर पार पररक सहमणत बना सक
3.3.5 अनक प्चमी दशं की विध्क ि्ाली म, ्ीसका हमन इस अ्याय म
पन
ु विधलोकन िकया ह, तप्ार्ा संय्
ु त अभभरषा क पष म ह और एकल अभभरषा
का अध्णन्धय किल अपिाटदक परर् थणतयं म ही िकया ीाता ह हम पहल ही
ीनक संबं्ी भभू मकाओं, ्ीममदाररयं और ियाशाओं म, असमानताओं का, ीो
हमार दश म विमयमान ह, त्ल कर चक
ु हं अतः हम संयु्त अभभरषा क पष
म तप्ार्ा र न िाली विध् क पष म नहीं ह संरषकता क मामल क वि ,
्ीसम हमन माता और वपता दोनं क भलए स्ममभलत और समान संरषता की
भसााररश की ह, इस मामल म हमारा यह विचार ह िक संयु्त अभभरषा का एक
विक्प क प म तपबं् िकया ीाना चाटहए ्ीसका विणनचय करन िाला ्य््त
अध्णन्धय कर सकता ह यटद वििास हो ीाता ह िक इसम बालक का और अध्क
टहत होौा
30
अ्याय 4
बालक अभभरषा के मामलं मं म्यतथता
,.1 म्य थता, िकसी ऐस णनकपष पर-्य््त की सहायता स, ीो वििादी पषकारं
की बातचीत मिारा समझडत पर पहुंचन म सहायता करन का ियास करता ह,
अनाब कारी वििाद णनपिान की प णत क िणत णनदो श करती ह 82बालक अभभरषा क
संदभध म, म्य थता का क्ि-बब्द ू यह अि्ाररत करना नहीं होता ह िक कडन सही
या ौलत ह ब््क एक ऐसा समा्ान थावपत करना होता ह ीो िकसी कुिुमब की
आियकताओं को परू ा करता ह और ीो बालक क सिोतम टहत म ह 83
बालक
अभभरषा संबं्ी िकसी वििाद म म्य थता क ाायद य हं िक माता-वपता दोनं क
पास अपन ब्चं की अभभरषा और पहुंच संबं्ी ्यि थाओं को अि्ाररत करन की
ीानकारी हो; ब्च यह ीानकर अध्क सरु षषत महसस ू करत हं िक तनक माता-
वपता कडिु्मबक सम याओं का समा्ान करन क भलए एक-साथ काम करत रहन क
इ्छुक हं; माता-वपता यह विणनचय करन की बहतर ् थणत म होत हं िक तनक
ब्चं की आियकता ्या ह; इसस माता-वपता को एक-दस
ू र म कुछ वििास पदा
करन म सहायता भमलती ह, ीो तन मु ं पर, ीो तभत
ू होत हं, भािी बातचीत क
भलए अनुञात करता ह; ऐसी िकसी योीना क अनुसार कायध करना आसान होता ह
ीो माता-वपता न ियं तयार की हो बीाय ऐसी योीना क ीो ्यायालय मिारा
अध्रोवपत की ीाती ह; और यह ्यायालय की लंबी और चीली ल ाई स बचन म
सहायक हो सकती ह 84
ऐसी ्ार्ा ह िक म्य थता स वििाह-वि्छद क पचात आ
ब्चं क भलए बहतर परर्ाम णनकलत हं 85
क. भारत मं म्यतथता के भल ितटमान विधिक ढांचा
,.2.1 भसविल िििया संटहता, 1908 की ्ारा 89 म यह तपबंध्त ह िक ्यायालय
िकसी समझडत क णनबं्न विरधचत कर सकता ह और त्ह पषकारं को तनकी
मताभभ्य््त क भलए द सकता ह और पषकारं की मताभभ्य््त िा्त करन क
पचात आ तन णनबं्नं को पुनः विरधचत कर सकता ह और त्ह मा्य थम आ, सुलह,
्याणयक समझडता (्ीसक अंतौधत लोक अदालत क मा्यम स समझडता भी ह) या
82
ए्का्स इंरा. भल. ि. चररयन िकी कं र्शन, (2010) 8 एस. सी. सी. 24,¶ 8.
83
िरी ौानधर,बालक अभभरषा म्य थता: मुकदमबाीी का ि तावित अनुक्प, 1989 ी. डि प. रस. 139,139-
40.
84
कडिु्मबक सुलह सिाएं - बारं बार पूछ ीान िाल िन, मणनिोबा ाभमली सविधभस़,
http://www.gov.mb.ca/fs/childfam/family_conciliation_faq.html (अंणतम बार 23 माचध, 2015 को द ा
ौया)
85
िणनयल ौडिररयु मडिएशन बनाम भलिीौशन: वििाद-वि्छद स ब्चं क बीच प न िाल परर्ामं म अंतरं
की परीषा करना, ररिरिल मडिएशन, http://www.riverdalemediation.com/wp-content/uploads/2009/07-
Gaureau-Mediation-vs-litigation.pdf. (अंणतम बार 23 माचध, 2015 को द ा ौया .
31
म्य थता क भलए णनदो भशत कर सकता ह भसविल िििया संटहता, 1908 क आदश
32क क णनयम 3 म यह कहा ौया ह िक कुिुमब स संबंध्त मामलं क संबं् म
ऐस िादं या कायधिाटहयं म ीहां मामल की िकृणत और परर् थणतयं स संौत ऐसा
करना संभि ह िहां ्यायालय का यह कतध्य ह िक िह पषकारं की िकसी समझडत
पर पहुंचन म सहायता कर इसक अलािा, यटद िकसी ििम पर ्यायालय को यह
ितीत होता ह िक पषकारं क बीच कोई समझडता होन की यु््तसंौत संभािना ह
तो ्यायालय ऐसा समझडता करान क ियास करन म समथध बनान हतु कायधिाही को
ऐसी अिध् क भलए, ीो िह ठीक समझ, कायधिाही को थधौत कर सकौा
,.2.2 इसक अलािा, कुिुमब ्यायालय अध्णनयम, 198, की ्ारा 9 कुिुमब
्यायालयं का यह कतध्य अध्कधथत करती ह िक ि सिधिथम विषयि तु की बाबत
िकसी समझडत पर पहुंचन म पषकारं की सहायता कर और त्ह मनाए कुिुमब
्यायालयं को भी समझडता करान क ियास करन म समथध बनान हत,ु यटद इसकी
कोई यु््तयु्त संभािना हो, कायधिाटहयं को िकसी यु््तयु्त अिध् क भलए
थधौत करन की श््त िदत की ौई ह
,.2.3 भारत म वििाह-विषयक वििादं क भलए म्य थता की आियकता ब रही
ह के. रीतनिास राि बनाम डी. . दीपा िाल मामल म त्चतम ्यायालय न यह
86
कहा था िक,
िाय: वििाह-विषयक वििाद म ौलताहमी का कार् तु्छ होता ह और
तसस सुलझाया ीा सकता ह अब म्य थता को वििाद का समा्ान करन की
अनक
ु ्पी प णत क प म विध्क मा्यता िा्त हो ौई ह हमन अनक वििाह-
विषयक वििादं को म्य थता क्िं को णनदो भशत िकया ह हमार अनभ
ु ि स यह
दभशधत होता ह िक इस ्यायालय म लौभौ 10 स 15 िणतशत वििाह-विषयक
वििाद विभभ्न म्य थता क्िं क मा्यम स सल
ु झाए ीा चक
ु हं अतः, हम
यह महसस
ू करत हं िक सिधिथम ििम पर, अथाधत आ, ीब कुिुमब ्यायालय मिारा या
िथम ्यायालय मिारा मामल पर सन
ु िाई आरं भ की ीाती ह तब तस म्य थता
क्िं को अिय ही णनदो भशत िकया ीाना चाटहए वििाह-विषयक वििाद, विशष प
स बालक की अभभरषा, भर्पोष् आटद स संबंध्त वििाद म्य थता क भलए
िमु प स तपयु्त हं
,.2., इसक अणतरर्त, त्चतम ्यायालय की म्य थता और सुलह पररयोीना
86
ए. आई. आर. 2013 एस. सी. 2176.
32
सभमणत मिारा पररचाभलत म्य थता िभशष् मनुअल87 म यह कहा ौया ह िक
तनािपू्ध या किु संबं्ं स तभत
ू होनिाल सभी मामल - ्ीसक अंतौधत वििाह-
विषयक िाद, भर्पोष् और ब्चं की अभभरषा संबं्ी वििाद भी हं - सामा्यतया
अनुक्पी वििाद समा्ान ििियाओं क भलए तपयु्त होत हं 88
ख. बालक अभभरषा मं म्यतथता के संबंि मं अंतररा्रीय िज््क ण
,.3.1 वििभर म वििाह-वि्छद और बालक अभभरषा को विणनयभमत करन िाली
विध् म अनक भभ्नताएं होन क बािीद
ू , इस संबं् म ्यापक ीाौ कता ह िक
िकसी कुिुमब को पथ
ृ ्कर् क पचात आ पन
ु ः संौटठत करन क सिोतम माौध म ऐसा
सहमणती्य/्याणयकतर समा्ान अंतिधभलत होता ह, ीो झौ को कम करता ह
और सहयोौप्
ू ध पालनपोष् को ब ािा दता ह
89
,.3.2 ि्ीधणनया विध् म यह विणनटदध कि िकया ौया ह िक म्य थता का तपयोौ,
ीहां समुधचत हो, मुकदमबाीी क विक्प क प म िकया ीाएौा 90
म्य थता क
ल्यं क अंतौधत ऐसी ि थापना का विकास हो सकता ह ्ीसम बालक की
आिाभसक समय-सार्ी और द भाल संबं्ी ्यि थाओं पर और इस बात पर विचार
िकया ौया हो िक भविकय म माता-वपता क बीच वििादं का णनपिान िकस िकार
िकया ीाएौा 91
तथावप, ्यायालय, म्य थता क भलए णनदो श करन संबं्ी
समुधचतता का णन्ाधर् करत समय, एक पषकार क समािदन क आ्ार पर, यह
अभभणन्चत करौा िक ्या कुिुमब म द्ु यधिहार करन का पूिि
ध ृ त ह 92
म्य थ
को संदत की ीान िाली ाीस कानून मिारा तय की ीाती ह और तसका संदाय
सरकार मिारा िकया ीाता ह 93
यमयवप कानन
ू ी कीम म अभभ्य्त प स ऐसा
नहीं कहा ौया ह, तथावप ऐसा ितीत होता ह िक ्यायालयं की यह बा्यता ह िक
87
यह मनुअल
http:supremecourtofindia.nic.in/MEDIATION%20TRAINING%20MANUAL%20OF%20INDIA.pdf
पर तपल्् ह
88
म्य थता िभशष् मनुअल, प. 67 पर,
http:supremecourtofindia.nic.in/MEDIATION%20TRAINING%20MANUAL%20OF%20INDIA.pdf
पर तपल्् ह
89
ञानकारलो तमांीा एि अल, इिली म पथ
ृ ्कर् और वििाह-वि्छद: अभभभािकता, ब्चं की अभभरषा और
कडिु्मबक म्य थता, 51(4) कुिुमब ्यायालय रि. 557, 557(2013).
90
िी. ए. कोि एन.§20-124.2(ए).
91
िी. ए. कोि एन. §20-124.2(ए).
92
िी. ए. कोि एन. §20-124.4.
93
िी. ए. कोि एन. §20-124.4 ("िकसी अभभरषा, सहारा या मल
ु ाकात संबं्ी मामल म णनय्
ु त िकसी म्य थ
की ाीस िणत णनयु््त 100 िालर होौी और तसका संदाय कामनि्थ मिारा 16.1-267 की तप्ारा क
अनुसर् म णनयु््तयं क भलए िकए ीान िाल संदाय क भलए समायो्ीत णनध्यं म स िकया ीाएौा")
33
ि यह सुणन्चत कर िक म्य थता िाली सहमणत ही बालक क सिोतम टहत म ह
94
,.3.3 दषष्ी अरीका की विध् भी म्य थता को िोसाटहत करती ह तसम कहा
ौया ह िक, िकसी बालक स संबंध्त िकसी मामल म, ऐसी पहल का अनुसर्
िकया ीाना चाटहए, ीो िक सुलह और सम या-समा्ान क भलए सहायक ह और
वििादामक पहल स बचना चाटहए 95
बाल ्यायालय, विणनटदध कि प स िकसी मु
क संबं् म विणनचय करन स पूिध म्य थता करन का आदश कर सकौा, िक्तु
तस ऐसा करन स पूिध अनक कारकं पर विचार करना चाटहए: बालक की भमयता,
बालक की कायधिाटहयं म भाौ लन की यो्यता, कुिुमब क भीतर श््त-संबं्ी
नातदारी और पषकारं मिारा िकए ौए िक्हीं अभभकथनं की िकृणत 96
म्य थता
का ियोौ ऐस मामल म नहीं िकया ीा सकता ह, ्ीसम िकसी बालक का
अभभकधथत द ु पयोौ अंतिधभलत हो 97
ीहां माता-वपता म्य थता क मा्यम स
िकसी सहमणत पर पहुंचत हं िहां ्यायालय को इस बात की पु्कि अिय करनी
चाटहए िक िह सहमणत बालक क सिोतम टहत म ह 98 इसक साथ-साथ, ीब
वि््छ्न-वििाह माता-वपता, ीो पतक
ृ अध्कारं और ततरदाणयिं क सह्ारक हं,
अपन अध्कारं का ियोौ करन म कटठनाइयां अनुभि कर रह हं तब त्ह ्यायालय
की सहायता की ई्सा करन स पूिध पालनपोष् संबं्ी िकसी योीना पर सहमत होन
का ियन अिय करना चाटहए 99
माता-वपता को पालनपोष् संबं्ी योीना तयार
करत समय या तो कणतपय विणनटदध कि लोौं (तदाहर्ाथध, िकसी सामा्ीक कायधकताध)
की सहायता अिय लनी चाटहए या त्ह म्य थता स ौी
ु रना चाटहए
100
,.3., चीन म, वििाह-वि्छद क मामल म कायधिाही करन िाला ्यायालय
म्य थता करौा 101
तथावप, घरलू टहंसा क मामलं म आञापक म्य थता की
आलोचना तस सम यापू्ध मानकर की ौई ह - ऐस मामलं म म्य थता मिारा हुई
94
दि ए िा.िक. ाभमली ला 15:14(i)(2014 एिी.)(एक ऐस मामल म स त र् ि तुत करत हुए ीहां एक
विचार् ्याया्ीश न यह णनककषध णनकाला िक िकसी म्य थ क अध्णन्धय को यह अि्ाररत िकए बबना िक
िह अध्णन्धय बालक क सिोतम टहत म ह अथिा नहीं, पूरी तरह स ििणतधत करना लोक नीणत क िणतकूल
होौा और ीबिक म्य थ क विणनचय को महि टदया ीा सकता ह िक्तु इसका ियोौ ्यायालय को बालक
क सिोतम टहतं का अि्ार् करन संबं्ी तसकी अध्काररता स िंधचत करन क भलए नही िकया ीा सकौा
95
2005 का धच्रन ऐ्ि सं. 38,§6(4).
96
2005 का धच्रन ऐ्ि सं. 38,§49.
97
2005 का धच्रन ऐ्ि सं. 38,§71(2).
98
2005 का धच्रन ऐ्ि सं. 38,§72.
99
2005 का धच्रन ऐ्ि सं. 38,§33(2).
100
2005 का धच्रन ऐ्ि सं. 38,§33(5).
101
मररी लॉ ऑा टद पीप्स ररप््लक ऑा चाइना (1980), अनु्छद 32.
34
सहमणतयां ऐस पषकारं क बीच हुई बातचीत क परर्ाम ि प नहीं हुई हंौी ्ीनकी
सडदबाीी करन की श््त समान हो 102
,.3.5 कनािा म, कडिु्मबक म्य थता को ्यापक प स, मुकदमबाीी क अनुक्प
क प म ब ािा टदया ीाता ह 103
िायिोसध ऐ्ि (वििाह-वि्छद अध्णनयम), 1985
म वििाह-वि्छद करन िाल पणत या पनी की ओर स कायधिाही करन िाल ियक
िकील या अध्ि्ता स यह अपषा की ौई ह िक िह पणत या पनी स तन मामलं
पर बातचीत करन क औधचय क संबं् म चचाध कर ीो पालनपोष् संबं्ी िकसी
आदश या िकसी अभभरषा आदश का विषय हो सकत हं और पणत या पनी को ऐसी
म्य थता सुवि्ाओं की ीानकारी द ीो इसम सहायक हो सकती हं 104
िकील को
्यायालय क समष यह िमा्पर अिय ि तुत करना चाटहए िक तसन अपन
मुि््कल क साथ इसकी चचाध की ह 105
इसक अणतरर्त, कनािा की कडिु्मबक
विध् म यह तपबं् ह िक ऐस माता-वपता को, ीो सहमत नहीं हो सकत हं, िकसी
्याया्ीश क समष तप् थत होन स पूिध म्य थता ीानकारी सर म अिय भाौ
लना चाटहए 106
ऐस सर म म्य थता की िििया क संबं् म ीानकारी दी ीाती
ह, ्ीसक अंतौधत म्य थता की िकृणत और तसक त य, इस िििया म अंतिधभलत
कदम, म्य थ की भूभमका और पणत और पनी मिारा णनभाई ौई भूभमकाएं भी
आती हं 107
पणत-पनी, इस सर म भाौ लन क पचात, म्य थता की कायधिाही
कर सकत हं या विध्क कायधिाटहयां ीारी र सकत हं िा्तीय विध्यं म भी
म्य थता क भलए तपबं् िकए ौए हं 108
तदाहर्ाथध, ्यूबक िांत म, वििाह-
वि्छद करन िाल ऐस दं प्त, ्ीनक बालक हं, पथ
ृ ्कर्, वििाह-वि्छद, भसविल
यणू नयन (वििाह) क विघिन, बालक अभभरषा, पणत-पनी संबं्ी या बालक संभाल या
िकसी विमयमान विणनचय क पन
ु विधलोकन संबं्ी अपन आिदन म बातचीत या
102
चालोि ीमधन एि अल, मंििरी क ििी मडिएशन एंि ्िाइंि क ििी आिधसध इन कभलाोणनधया: टद िीर ाार
वि््िमस ऑा िोम् िक िायलस, 1(1) बाकधल ्या. ीिर एल. एंि ी ि. 175, 176(2013);सा्ार्तया
दि ए िणनस पी. सकूीो एि एल, मंििरी क ििी मडिएशन: इमपीररकल एिीिस ऑा इनिी ि रर क ाार
िोम् िक िायलस वि््िमस एंि दयर धच्रन (2003), ीो
http://www.ncjrs.gov/pdffiles/nij/grants/195422.pdf. पर तपल्् ह
103
रसाइन सायर इि एल, ाभमली लाइा, परिल सपरशन एंि चाइ्ि क ििी इन कनािा: ए ाोकस ऑन
्यूबक, 51(4) ाभमली कोिध रि. 522, 528(2013).
104
िायिोसध ऐ्ि, 1985 §9(2).
105
िायिोसध ऐ्ि, 1985 §9(3).
106
रसाइन सायर इि एल, ाभमली लाइा, परिल सपरशन एंि चाइ्ि क ििी इन कनािा: ए ाोकस ऑन
्यब
ू क, 51(4) ाभमली कोिध रि. 522, 528(2013).
107
यथो्त
108
यथो्त
35
समझडत क दडरान िकसी ि्ृ तक म्य थ की सिाएं िा्त कर सकत हं 109
कडिु्मबक म्य थता सिा मिारा पांच घंि टदए ीात हं और ीब ्यायालय क िकसी
विमयमान णन्धय का पुनरीष् करन की आियकता हो, तब 2.5 घंि और ीो ीा
सकत हं 110
कुछ िांतीय विध्यं म वििाद का समा्ान करन िाल ि्ृ तकं क
कतध्य111 और कडिु्मबक म्य थं क भलए अपषषत अहध ताएं भी विणनटदध कि की ौई
हं 112
,.3.6 यह अ्याय कडिु्मबक मामलं म म्य थता क संबं् म भारत म विमयमान
विध् और ऐसी म्य थता को अ्य दशं म ििया््ित करन की रीणत स अिौत
कराता ह आौामी अ्याय म बालक अभभरषा संबं्ी मामलं को विणन्चत करन
क भलए अ्य महिपू्ध विचार्ीय बातं पर चचाध की ीाएौी
109
रसाइन सायर इि एल, ाभमली लाइा, परिल सपरशन एंि चाइ्ि क ििी इन कनािा: ए ाोकस ऑन
्यूबक, 51(4) ाभमली कोिध रि. 522, 528(2013).
110
यथो्त
111
दि ए, तदाहर्ाथध, बिटिश कोल्मबया ाभमली लॉ ऐ्ि §8 ीो
http://www.bclaws.ca/EPLibraries/bclaws_new/document/ID/freeside/00_11025_01 पर तपल्् ह
112
दि ए, तदाहर्ाथध, बिटिश कोल्मबया ाभमली लॉ ऐ्ि र्युलश्स, बी. सी. र्ी.347/2012,§§4-5, ीो
http://www.bclaws.ca/civix/document/id/complete/statreg/331105891. पर तपल्् ह
36
अ्याय 5
बालक अभभरषा संबंिी मामलं का वितन्चय करने के भल विचारणीय बातं
5.1 ीसािक पूिध म चचाध की ौई ह, बालक अभभरषा संबं्ी मामलं म माौधदशी
भस ांत बालक क क्या् का होता ह तथावप, िकसी विभशकि मामल म यह
अि्ाररत करना कटठन हो सकता ह िक कडनसी विणनटदध कि अभभरषा या मुलाकात
्यि था बालक क भलए क्या्कर होौी- इस मानक स कुछ ्यािहाररक माौधदशधन
िा्त होता ह 113
इसी कार्, ्याया्ीशं और अ्य विणनचयकताधओं क भलए इस
संबं् म टदशाणनदो श होना आियक ह िक इस मानक को िकस िकार ििया््ित
िकया ीाए अनक संौठनं न बालक अभभरषा मू्यांकन करन क भलए मानक और
टदशाणनदो श िकाभशत िकए हं 114
णनमनभलि त विलष् िमु तः संयु्त रा्य
अमररका क रा्यं पर आ्ाररत ह ्यंिक तनक बार म यह पाया ौया था िक तसम
अयंत पू्त
ध ः विकभसत टदशाणनदो श हं 115
क. सिो्तम दहत मानक के भल विचारणीय कारक
5.2 अनक अध्षरं म ऐस कानून हं ्ीनम ्यायालयं को, ीब ि िकसी बालक
क सिोतम टहतं पर विचार करत हं, माौधदभशधत करन क भलए विणनटदध कि कारक
तपिि्धत िकए ौए हं सा्ार्तया, इन कारकं का संबं् इन बातं स होता ह:
बालक की शारीररक और मानभसक दशा; माता और वपता म स ियक की शारीररक
और मानभसक दशा; माता और वपता दोनं स बालक का संबं्; अ्य महिपू्ध लोौं
(भाई-बहनं, वि ताररत कडिु्मबक सद यं, समकषं, आटद) क संबं् म बालक की
आियकताएं; बालक की द र म माता और वपता दोनं म स ियक मिारा णनभाई
ौई भभू मका ह और ्या भभू मका णनभाएंौ; माता-वपता म स ियक की बालक क
दस
ू र माता या वपता स संपकध और नातदारी म सहारा दन की समथधता; बालक स
संबंध्त वििादं को सल
ु झान म माता-वपता म स ियक की समथधता; बालक की
अध्मानता; द्ु यधिहार का कोई इणतिृ त; और बालक का िा ्य, तसकी सरु षा और
113
लडरा िुिििध िोल इि अल, इमिूविंौ टद ्िाभलिी ऑा चाइ्ि क ििी इि्युएश्स: ए भस िमटिक मॉिल,
2(् िंौर 2012)(टि्प्- "इन (मामलं) म अंतणनधटहत िमु मानकं की पकिता और ्याखया की कमी -
बालक क सिोतम टहत")
114
लडरा िुिििध िोल इि अल, इमिूविंौ टद ्िाभलिी ऑा चाइ्ि क ििी इि्युएश्स: ए भस िमटिक मॉिल,
15 (् िंौर 2012)
115
अनक अ्य दशं म भलि त टदशाणनदो श बब्कुल भी नहीं हं (कम स कम सही सुलभ प म नहीं हं) संयु्त
रा्य अमररका क रा्यं क टदशाणनदो श आसानी स तपल्् थ और तनक बार म या पाया ौया िक तनम ऐस
सभी मुखय मु ं और चुनडणतयं का त्ल िकया ौया ह, ीो बालक अभभरषा संबं्ी वििादं क दडरान तभत
ू हो
सकत हं
37
तसका क्या् 116
तथावप य कारक आयांणतक नहीं हं और कुछ कानूनं म
पकितः यह तपदभशधत िकया ौया ह िक ्यायालयं को ऐस अ्य कारकं पर भी
विचार करना चाटहए ीो ्यायालय, णन्ाधर् क भलए आियक और तधचत
समझ 117
ख. बालक की अधिमानता का अििारण
5.3.1 अभभरषा क मामलं म बालक की अध्मानता पर सा्ार्तया तब विचार
िकया ीाता ह यटद बालक पयाध्त प स बवु मान और पररप्ि ह 118
अध्मानता
भी य्ु ्तसंौत होनी चाटहए - ्यायालय मिारा बालक की इ्छाओं पर तब विचार
नहीं िकया ीाएौा यटद, तदाहर्ाथध, िह इस बात पर आ्ाररत ह िक माता-वपता म
स िकस क घर म बहतर ि लडन हं 119
बालक की अध्मानता का अि्ार् करत
समय, कुछ ्यायालय बालक का साषाकार ्यायालय चमबरं म करौ(माता-वपता म
स ियक स तनकी तप् थणत क बबना ऐसा करन की अनञ
ु ा लन क पचात आ)
120
िहां अिनी तप् थत हो सकत हं िक्तु साषाकार क दडरान त्ह िन पूछन क
116
दि ए िीए. कोि एन. §20-124.3; कोलो. रि. िि. एन. §14-10-124(1.5)(ए);ि ्स एन. कल. ाम. कोि
§3011.
117
िीए. कोि एन. §20-124.3(10); 15 िी.एस.ए.§665 भी दि ए ("्यायालय बालक क सिोतम टहतं स
माौधदभशधत होौा और िह कम स कम णनमनभलि त कारकं पर विचार करौा")(ीोर दन क भलए र ांिकत); कोलो.
रि. िि. एन. §14-10-124(1.5)(ए) ("्यायालय, पालनपोष् क समय क ियोीनं क भलए बालक क सिोतम
टहतं का अि्ार् करत समय सभी सुसंौत कारकं पर विचार करौा, ्ीसक अंतौधत............ हं")
118
िीए. कोि एन. §20-124.3(8)(्यायालयं को तब "बालक की यु््तसंौत अध्मानता पर विचार करना
चाटहए यटद ्यायालय यह समझता ह िक बालक ऐसी अध्मानता अभभ्य्त करन क भलए यु््तयु्त प स
बुव मान, सूझबूझ, आयु और अनुभि िाला ह"); कोलो.रि. िि.एन.§14-10-124(1.5)(ए)(II)(्यायालयं को
"बालक की इ्छाओं पर विचार करना चाटहए यटद िह पालनपोष् की समय-सार्ी क बार म तकधसंौत और
ितंर अध्मानताएं अभभ्य्त करन क भलए पयाध्त प स पररप्ि ह"); सातथ अरीका धच्रन ऐ्ि सं.
2005(2005 का 38),§10 ("ियक ऐस बालक को, ्ीसकी आय,ु पररप्िता और विकास का चर् ऐसा ह िक
िह तस बालक स संबंध्त िकसी मामल म भाौ लन म समथध बनाता ह, िकसी समुधचत तरीक स तसम भाौ
लन का अध्कार िा्त ह और बालक मिारा अभभ्य्त विचारं पर समयकआ प स विचार िकया ीाना चाटहए ")
119
आरं थॉमस, ए चाइ्ि िरस इन एरऱोना क ििी िोसीडिं्स, िायिोसधनि,
http://www.divorcenet.com/resources/a-childs-preference-arizone-custody-proceedings.html(अंणतम बार
5 मई, 2015 को द ा ौया)
120
आरं थॉमस, ए चाइ्ि िरस इन मरीलंि क ििी िोसीडिं्स, िायिोसधनि,
http://www.divorcenet.com/resources/a-childs-preference-maryland-custody-proceedings.html(अंणतम
बार 5 मई, 2015 को द ा ौया); लपको, लपको एंि एसोभसए्स, इंक., चाइ्ि िरस एंि अिाडिंौ क ििी
इन रोि आइसलि, एचीी.ओआरीी. लीौल ररसोभसधस, http://www.hg.org/article.asp?id=18641(अंणतम बार
5 मई, 2015 को द ा ौया)
38
भलए अनुञात िकया ीा सकता ह अथिा नहीं भी िकया ीा सकता ह 121
्याया्ीश, िायः साषाकार का अभभल तयार करौा(तदाहर्ाथध, ्यायालय ररपोिध र
का ियोौ करक)122 िक्तु ्याया्ीश यह आदश भी कर सकता ह िक तस
साषाकार को ौोपनीय र ा ीाए, यटद ऐसा करना बालक क सिोतम टहत म होौा
123
5.3.2 अनुक्पतः ्यायालय साषाकार की बीाय बालक क टहतं का िणतणनध्ि
करन क भलए िादाथध संरषक णनयु्त कर सकता ह 124
िादाथध संरषक इस संबं् म
एक ररपोिध ि तुत कर सकता ह िक बालक क सिोतम टहत म ्या ह, ्ीसक
अंतौधत अभभरषा क भलए बालक की इ्छाएं भी आती हं 125
िादाथध संरषक बालक
की अध्मानताओं क बार म सा्य भी द सकता ह 126
्यायालय बालक की राय
क बार म सा्य दन क भलए कोई सामा्ीक कायधकताध या अ्य मानभसक िा ्य
ि्ृ तक र सकता ह 127
ग. बालक के अभभलेखं तक पहुंच
5., सा्ार्तया, माता-वपता दोनं को बालक क अभभल (धचिकसीय, शषि्क,
121
आरं थॉमस, ए चाइ्ि िरस इन मरीलंि क ििी िोसीडिं्स, िायिोसधनि,
http://www.divorcenet.com/resources/a-childs-preference-maryland-custody-proceedings.html(अंणतम
बार 5 मई, 2015 को द ा ौया); लपको, लपको एंि एसोभसए्स, इंक., चाइ्ि िरस एंि अिाडिंौ क ििी
इन रोि आइसलि, एचीी.ओआरीी. लीौल ररसोभसधस, http://www.hg.org/article.asp?id=18641(अंणतम बार
5 मई, 2015 को द ा ौया)
122
लपको, लपको एंि एसोभसए्स, इंक., चाइ्ि िरस एंि अिाडिंौ क ििी इन रोि आइसलि, एचीी.
ओआरीी. लीौल ररसोभसधस, http://www.hg.org/article.asp?id=18641(अंणतम बार 5 मई, 2015 को द ा
ौया)
123
आरं थॉमस, ए चाइ्ि िरस इन एरऱोना क ििी िोसीडिं्स, िायिोसधनि,
http://www.divorcenet.com/resources/a-childs-preference-arizona-custody-proceedings.html(अंणतम बार
5 मई, 2015 को द ा ौया)
124
आरं थॉमस, ए चाइ्ि िरस इन मरीलंि क ििी िोसीडिं्स, िायिोसधनि,
http://www.divorcenet.com/resources/a-childs-preference-maryland-custody-proceedings.html(अंणतम
बार 5 मई, 2015 को द ा ौया); लपको, लपको एंि एसोभसए्स, इंक., चाइ्ि िरस एंि अिाडिंौ क ििी
इन रोि आइसलि, एचीी.ओआरीी. लीौल ररसोभसधस, http://www.hg.org/article.asp?id=18641(अंणतम बार
5 मई, 2015 को द ा ौया)
125
यथो्त
126
आरं थॉमस, ए चाइ्ि िरस इन मरीलंि क ििी िोसीडिं्स, िायिोसधनि,
http://www.divorcenet.com/resources/a-childs-preference-maryland-custody-proceedings.html(अंणतम
बार 5 मई, 2015 को द ा ौया)
127
यथो्त
39
आटद) तक पहुंच अनुञात की ीाती ह 128 तथावप, ीहां सूचना क िकिन
(तदाहर्ाथध, माता-वपता म स िकसी एक का या बालक का ितधमान पता) अपहाणन
का ीोि म पदा कर सकता ह, िहां ्यायालय सूचना क िकिन को णनिाररत कर
सकौा 129
घ. वपतामह-वपतामही और मातामह-मातामही पालनप षण समय
5.5 अभभरषा संबं्ी आदश क भलए िकसी बालक क सिोतम टहत का मू्यांकन
करत समय ्यायालय सा्ार्तया बालक क भमरं, वि ताररत कडिु्मबक सद यं
(्ीसक अंतौधत वपतामह-वपतामही और मातामह-मातामही आत हं) और अ्य
महिप्
ू ध ्य््तयं स संबं् पर विचार करन क भलए सश्त होत हं अनक
अध्षरं म, ऐस संबं् बालक क तर क सिोतम टहत क भलए कानन
ू ी कारकं म
पकि प स सूचीब िकए ीात हं तदाहर्ाथध, ि्ीधणनया रा्य की विध् म
्यायालय स यह अपषा की ौई ह िक िह बालक क अ्य महिप्
ू ध संबं्ं पर
समयकआ प स विचार करत हुए बालक की आियकताओं पर विचार कर, ्ीसम
तसक भाई-बहन, समकष और वि ताररत कडिु्मबक सद य भी आत हं 130 इस
िकार, ्यायालय वपतामह-वपतामही और मातामह-मातामही को, ीहां भी समुधचत हो,
मुलाकात क अध्कार िदान कर सकत हं
ङ म्यतथता
5.6 ीसा िक इस ररपोिध म इसस पूिध चचाध की ौई ह, अभभरषा और पालनपोष्
संबं्ी अ्य वििादं का समा्ान करन क भलए म्य थता की प णत को ्यापक
128
दि ए, तदाहर्ाथध, एन.सी.ीी.एस.ए.§50-13.2(बी) ("्यायालय क इसक िणतकूल िकसी आदश क न होन
पर, ियक माता-वपता को अिा्तिय बालक क ऐस अभभल ं तक समान पहुंच होौी, ्ीनम बालक क िा ्य,
तसकी भशषा और तसका क्या् अंतिधभलत हो ") ि््यू. िीए. कोि, §48-9-601;एम.ीी.एल.ए. 208§31
("अिा्तिय बालकं की अभभरषा स संबंध्त िकसी आदश या णन्धय की िवि्कि ौर-अभभरषी माता-वपता की
बालक क शषि्क, धचिकसीय, अ पताल या अ्य िा ्य संब्
ं ी अभभल ं तक पहुंच र न को नकारौी नहीं
या तनकी समथधता म अ चन पदा नहीं करौी.....")
129
एम.ीी.एल.ए. 208 §31 ("यटद बालक या िकसी पषकार क ितधमान या पि
ू ध पत का अिकिन ऐस बालक या
पषकार का िा ्य, सरु षा या क्या् सणु न्चत करन क भलए आियक ह तो ्यायालय यह आदश कर
सकौा िक ऐस पत स संबध्त ऐस अभभल का कोई भाौ ऐस ौर-अभभरषी माता-वपता को िकि नहीं िकया
ीाएौा")
130
िी ए.कोि एन. §20-124(3);कोलो. रि. िि. एन. §14-10-124(1.5)(ए)(III)(्यायालय को "बालक क अपन
माता-वपता, अपन भाई-बहनं, और ऐस अ्य ्य््त क साथ, ीो बालक क सिोतम टहतं को महपू्ध प स
िभावित कर सकता ह, पर पर-ििया और अंतसंबं् पर अिय विचार करना चाटहए"); 15 िी.एस.ए.§
665(बी)(7) (्यायालय को "ऐस िकसी अ्य ्य््त क साथ, ीो बालक पर महिपू्ध प स िणतकूल िभाि
िाल सकता ह, बालक क संबं् पर अिय विचार करना चाटहए")
40
प स अध्मानता दी ीाती ह131 और अनक अध्षर इस बार म टदशाणनदो श िदान
करत हं िक ऐस वििादं म म्य थता का कब और िकस िकार तपयोौ िकया ीाना
चाटहए तदाहर्ाथध, ऐस मामलं म, ्ीनम ौाली-ौलडी और द्ु यधिहार अंतिधभलत
होता ह, म्य थता को समुधचत नहीं माना ीाता ह 132
कुछ अध्षर वििाह-
वि्छद करन िाल दं प्तयं क भलए (कम स कम एक सीमा तक) णनःशु्क
म्य थता िदान करत हं ीो िक आौ ( चीली मुकदमबाीी क एक अनुक्प क प
म) सहयोौी समा्ान को ब ािा द सकती ह 133
च. तथान-पररितटन
5.7 ीब माता-वपता दोनं क पास बालक क संबं् म विध्क अध्कार हं तब
थान-पररितधन संबं्ी वििाद चन
ु डती पदा कर सकत हं एक ओर, आी क अयंत
ौणतशील समाी म माता-वपता को काम क अिसरं या अ्य महिप्
ू ध कार्ं स
थान-पररितधन क भलए अनञ
ु ात िकया ीाना चाटहए दस
ू री ओर, ऐस थान-
पररितधन स माता या वपता क बालक स मुलाकात करन की समय-सार्ी म वि्न
प सकता ह ्यायालय, सा्ार्तया ऐस वििादं का समा्ान अनक भस ांतं का
आरय लकर करत हं िथमतः, कुछ अध्षरं म, माता या वपता को थान-
पररितधन क भलए(या तो ्यायालय स या दस
ू र माता या वपता स) अनुञा लन की
आियकता नहीं होती ह यटद िह किल थानीय थान-पररितधन ह या तसस दस
ू र
माता या वपता की मुलाकात संबं्ी समय-सार्ी िभावित नहीं होौी 134
मवितीयतः,
ऐस माता या वपता को, ीो थान-पररितधन करना चाहता ह, माता या वपता म स
दस
ू र को अधरम भलि त सूचना दनी चाटहए तदाहर्ाथध, ि्ीधणनया म तीस टदन की
अधरम भलि त सूचना दना अपषषत ह 135
इसस माता या वपता को इस
िििया का ्यायालय म विरो् करन का समय भमल ीाता ह अ्य िमु
विचार्ीय बात यह ह िक ्या ि तावित थान-पररितधन बालक क सिोतम टहत म
131
दि ए तपय्
ुध त अ्याय 4.
132
यथो्त
133
यथो्त
134
तिाह कोि एन. §30-3-37(1) ("इस ्ारा क ियोीनं क भलए, थान-पररितधन स दस
ू र माता या वपता क
णनिास- थान स 150 मील या तसस अध्क संचलन अभभित ह "); कोलो. रि. िि. एन. §14-10-
129(1)(ए)(II) (ऐस थान-पररितधनं क भलए ्यायालय क अनुमोदन की अपषा ह, "्ीसस बालक और दस
ू र
पषकार क बीच भडौोभलक संबं्ं म सारिान आ पररितधन होता ह")
135
िी ए.कोि एन.§ 20-124.5; कोलो. रि. िि. एन. § 14-10-129(1)(ए)(II) भी दि ए ("िह पषकार ्ीसका
बालक क साथ ऐस णनिास म थान-पररितधन करन का आशय ह ्ीसस बालक और दस
ू र पषकार क बीच
भडौोभलक बं्न म सारिान पररितधन होता ह, दस
ू र पषकार को यथासा्य शीरता स, भलि त म अपन थान-
पररितधन करन क आशय की सूचना दौा ...."); तिाह कोि एन. § 30-3-37(2)(" थान-पररितधन करन िाला वपता
या माता दस
ू र वपता या माता को आशणयत थान-पररितधन की 60 टदन की अधरम सच
ू ना दौा ")
41
ह 136
्यायालय इस बात पर भी विचार कर सकौा: ्या थान-पररितधन िकसी
विध्सममत ियोीन क भलए ह; थान-पररितधन की ई्सा करन या तसका विरो्
करन क भलए माता और वपता क कार्;माता और वपता तथा बालक क बीच संबं्ं
की ्िाभलिी; थान-पररितधन का बालक क थान-पररितधन न करन िाल माता या
वपता क साथ भािी संपकध की मारा और ्िाभलिी पर िभाि; िह मारा, ्ीस तक
थान-पररितधन करन िाल माता या वपता और बालक क ीीिन म थान-पररितधन
मिारा आधथधक, भािनामक और शषि्क प स संि्धन होौा; और तपय्
ु त
मल
ु ाकात ्यि था क मा्यम स थान-पररितधन न करन िाल वपता या माता ऑर
बालक क बीच संबं् को परररषषत र न की सा्यता 137
छ. वितन्चय करना
5.8 ऐस अनक मख
ु य षर हं ्ीनका अभभरषा संबं्ी आदश या पालनपोष्
योीना म ्यान र ा ीाना चाटहए - य वििाद क सामा्य षर होत हं इसभलए यटद
माता-वपता म स ियक की भूभमका विणनटदध कि करन िाल पकि णनयम हं तो तधचत
होौा (अथाधत आ, कडनस विणनचय ्य््तौत प स िकए ीा सकौ और कडन स
विणनचय संयु्त प स िकए ीान चाटहएं):
1. धचिकसा: बालक को अ पताल म भती िकया ीाना ह अथिा नहीं और
बालक की कोई अनापातकालीन श्य िििया कराई ीानी ह अथिा नहीं
2. भशषा: विमयालय का चयन, संि्धन कषाएं, पा्यिम और विषय और
बालक को विमयालय क िकसी विशष टरप या िमोद-रम् या ्यूशन म ीाना ह
अथिा नहीं
3. ्मध: बालक की ्ाभमधक भशषा, तपासना थलं पर ीाना, ्ाभमधक समारोह
करना, आटद
,. पा्यतर ौणतविध्यां : बालक क टहत और झान पर विचार करत हुए,
पा्यतर ौणतविध्यं का चयन
5. माता और वपता म स एक क साथ यारा करना: बालक अपनी छुटियां
कहां ्यतीत करौा और िह ीानकारी ीो माता-वपता म एक न दस
ू र को दनी ह
(तदाहर्ाथध, वि तत
ृ यारा कायधिम)
136
िी ए. िकआ . ाभमली लॉ§ 15:11(2015) एिी.(्ीसम ि्ीधणनया म थान-पररितधन क मानकं पर चचाध की ौई
ह); तिाह कोि एन.§30-3-37(4)(" थान-पररितधन की सूचना का पुनविधलोकन करन संबं्ी सन
ु िाई म ्यायालय
यह अि्ाररत करत समय िक ्या िकसी अभभरष्ीय माता या वपता का थान-पररितधन बालक क सिोतम
टहत म ह, ऐस िकसी अ्य कारकं पर विचार करौा, ीो ्यायालय सुसंौत समझ..... ")
137
कोन. ीन. िि. एन. §46बी-56िी(बी).
42
ि. पालनप षण य िना
5.9 अनक अध्षरं म वििाह-वि्छद करन िाल माता-वपता स (या तो संयु्ततः
या ्य््तौत प स) ्यायालय क समष साझी पालनपोष् योीना ि तुत करना
अपषषत ह तस योीना म, विणनचय करन िाल मुखय षरं का त्ल होना
चाटहए, ्ीनक अंतौधत णनमनभलि त हं : बालक की भशषा; बालक क िा ्य की
द र ; ्ाभमधक भशषा; पषकारं क बीच बालक क पालनपोष् संबं्ी विणनचयं
और कतध्यं की बाबत वििादं क समा्ान क भलए ििियाएं; और िह कालािध्,
्ीसक दडरान ियक पष बालक को अपन पास र ौा या तसस मुलाकात करौा,
्ीसक अंतौधत छुटियां और दीघाधिकाश भी हं या िह िििया ्ीसक मिारा ऐसी
कालािध्यं का अि्ार् िकया ीाएौा 138
कुछ अध्षर (माता-वपता क बीच तथा
बालक और अनाभभरष्ीय माता या वपता क बीच) संपकध; दस
ू र माता या वपता क
णनिास स और णनिास तक पररिहन; यटद माता और वपता म स कोई एक थान-
पररितधन करना चाहता ह तो ्या िकया ीाना ह; णनयत पालनपोष् समयसार्ी म
पररितधन िकस िकार करना ह; और बालक क बार म ीानकारी क आदान-िदान क
संबं् म अणतरर्त माौधदशधन िदान करत हं 139
पालनपोष् योीना अपन
आप म कोई विध्क द ताि़ नहीं होता ह; इसका विध्क िभाि होन क भलए इस
िकसी ्यायालय मिारा अिय अनुमोटदत िकया ीाना चाटहए 140
झ. मुलाकात
5.10.1 अनक अध्षरं म मुलाकात क संबं् म वि तत
ृ समय-सारि्यां हं ्ीनका
ियोौ ्यायालय श्दशः कर सकता ह या त्ह आियकतानस
ु ार तपांतररत कर
सकता ह य सांच क प म कायध करती ह ्ीसस िक ्यायालय को नए भसर स
आरं भ न करना प यमयवप य नमन
ू ा समय-सारि्यां विभभ्न अध्षरं म भभ्न-
भभ्न हं तथावप कुछ सामा्य िकर् हं सा्ार्तया, समय-सार्ी बालक की
138
मास. ीन. लॉ़ अ्याय 208§31; िाश. रि. कोि§26.09.184.
139
दि ए िोम् िक ररलश्स कमिी, इंडियाना परटिंौ िाइम ौाइिलाइ्स (2013), §1,
http://www.in.gov/judiciary/rules/parenting/#_Toc348614670 पर तपल््
140
मास.ीन. ला़ अ्याय 208§31( "ौु्ाौु् क आ्ार पर िकए ीान िाल विचार् म, ्यायालय पषकारं
मिारा ि तुत की ौई साझी अभभरषा ििया्ियन योीनाओं पर विचार करौा ्यायालय साझी विध्क और
भडणतक अभभरषा आदश ीारी कर सकौा और इसक साथ-साथ िकसी एक पषकार मिारा या पषकारं मिारा
संयु्त प स ि तुत की ौई साझी अभभरषा ििया्ियन योीना को िीकार कर सकौा या पषकारं मिारा
ि तत
ु की ौई योीना या योीनाओं को तपांतररत करत हुए एक योीना ीारी कर सकौा ्यायालय योीना
को ाररी भी कर सकौा और माता और वपता म स िकसी क पष म एकमार विध्क और भडणतक अभभरषा
संबं्ी अध्णन्धय ीारी कर सकौा "); िाश. रि. कोि§26.09.187.
43
आयु और माता और वपता क घरं क बीच की दरू ी पर णनभधर करौी 141
छुटियं,
ी्म टदिसं और विमयालय क दीघाधिकाश का तधचत आबंिन होना चाटहए बालक
क पास अपन भाई-बहनं और बालक क ीीिन क अ्य महिपू्ध लोौं (दादा-दादी,
नाना-नानी इयाटद) क साथ बबतान क भलए समय भी होना चाटहए िकसी छोि
बालक (विशषकर भशशुओं) की द भाल करन संबं्ी माता या वपता की समथधता पर
विचार िकया ीा सकता ह पालनपोष् समय-सार्ी क भलए कुछ मूलभूत विक्प
य हं :
बालक का माता और वपता क बीच णनयभमत आ्ार पर (तदाहर्ाथध,
दणनक, सा्ताटहक या माभसक) आना-ीाना
ीब विमयालय सर म होता ह तब बालक माता-वपता म स एक क
पास रहता ह और विमयालय दीघाधिकाश क दडरान माता-वपता म स
दस
ू र क पास रहता ह
बालक िमु तः माता और वपता म स एक क पास रहता ह िक्तु हर
दस
ू र स्ताहांत और िणत स्ताह 1-2 शाम माता और वपता म स
दस
ू र क पास ीाता ह (संभितः ्ीसक अंतौधत रातभर कना भी ह)
5.10.2 इंडियाना और भमभशौन दोनं मिारा समय-सार्ी तयार करन क संब्
ं म
टदशाणनदो शं का तपबं् िकया ौया ह, ्ीनम यह भसााररश की ौई ह िक बालक को
ियक दस
ू र स्ताहांत और िणत स्ताह, स्ताह म एक टदन अनाभभरष्ीय माता
या वपता क पास ीाना ह 142
इंडियाना और भमचीौन टदशाणनदो शं म छुटियं को
बांिन की भी भसााररश की ौई ह(माता-वपता म स ियक को कुछ छुटियां बांि दी
ीाती हं) और इसक बाद ियक िषध त्ह अनुक्पी बना टदया ीाता ह 143
तथावप
कुछ छुटियां (ीस शीतकालीन विमयालय दीघाधिकाश) अनुक्पी नहीं होत ब््क
141
दि ए िोम् िक ररलश्स कमिी, इंडियाना परटिंौ िाइम ौाइिलाइ्स (2013), §§2-4,
www.in.gov/judiciary/rules/parenting/#_Toc348614670; पर तपल््; िि कोिध एिभमणन रटिि आिास,
भमभशौन परटिंौ िाइम
ौाइिलाइन,http://courts.mi.gov/administration/scao/resources/documents/publications/manuals/focb
/pt_gdlns.pdf पर तपल््; िािा इं िी्यूि ऑा सोशल साइंभसस, चाइ्ि ए्सस एंि क ििी ौाइिलाइ्स
(2011), http://mphc.in/pdf/ChildAccess-040312.pdf पर तपल््; कलरािो डिपािध मि ऑा लबर एंि
एमपलायमि, कन््िं ौ विद िक्स (2004),
http://www.courts.state.co.us/userfiles/file/self_help/co_parenting_time_book2004.pdf पर तपल््
(अंणतम बार 2 अिल, 2015 क द ा ौया)
142
इंडियाना परटिंौ िाइम ौाइिलाइ्स §2(िी)(1);भमभशौन परटिंौ िाइम ौाइंिलाइनप.ृ 7.
143
इंडियाना परटिंौ िाइम ौाइिलाइ्स §2(एा)(2);भमभशौन परटिंौ िाइम ौाइंिलाइन प.ृ 7-9.
44
माता-वपता मिारा ियक िषध समान-समान बांि ीात हं (अथाधत आ, बालक दीघाधिकाश
का पहला भाौ माता-वपता म स एक क साथ बबताता ह और दस
ू रा भाौ दस
ू र क
साथ बबताता ह) 144
दोनं रा्यं म ऐस माता-वपता क भलए, ीो एक दस
ू र स कााी
दरू रहत हं145 और अ्पिय बालकं क भलए अणतरर्त टदशाणनदो श भी हं 146
5.10.3 भारत म मुलाकात क अध्कार को त्चतम ्यायालय मिारा रो्सन शमाध
बनाम अ ् शमाध147 िाल मामल म पररभावषत िकया ौया ह ्यंिक ्यायालय न
अनाभभरष्ीय माता या वपता या वपतामह-वपतामही या मातामह-मातामही को ऐस
बालक या ऐस पडर-पडरी या दडटहर-दडटहरी क साथ समय बबतान क विशषाध्कार
का आदश िकया ह ीो िकसी अ्य ्य््त, िायः अभभरष्ीय माता या वपता क
साथ रह रहा ह त्चतम ्यायालय न, अनक मामलं म अनाभभरष्ीय माता या
वपता और दादी-नानी, दतकराही माता-वपता, मामा और मामी को मुलाकात करन क
अध्कार िदत िकए हं मुलाकात क अध्कारं क भलए िमु विचार्ीय बात
बालक का क्या् और संबंध्त नातदार क साथ बालक की सामी्यता होती ह
5.10., तदाहर्ाथध, िभात कुमार बनाम टहमाभलनी148 िाल मामल म ्यायालय न
यह अभभणन्ाधररत िकया ह िक बालक क क्या् का अि्ार् द भाल और नह
क तस ाायद मिारा, ीो विरो्ी कुिुमब क ऐस कडिु्मबक सद यं को मुलाकात क
अध्कार िदान करक अिा्तिय िा्त करौा, िकया ीाता ह ऐस ाायद को
साबबत करन का भार तस कडिु्मबक सद य पर होता ह ीो तस अध्कार का दािा
करता ह एक अ्य महिपू्ध विचार्ीय बात बालक की कडिु्मबक सद य क
साथ णनकिता ह इस मामल म, ्यायालय न संरषकता ्याया्ीश मिारा आदभशत
णनयभमत मुलाकात क कार् बालक और वपता क बीच िबभलत हुए संबं् क कार्
वपता और तसक नातदारं क भलए अंतररम मुलाकात संबं्ी आदश को कायम र ा
5.10.5 आयोौ का वििास ह िक मल
ु ाकात संबं्ी अध्कारं क संबं् म ऐस ्यापक
टदशाणनदो श अध्कधथत करना आियक और तपयोौी ह ीो बालक क क्या् क
भलए सहायक हं और यह सणु न्चत करत हं िक माता और वपता दोनं बालक क
साथ समय ्यतीत करन म समथध हं
144
इंडियाना परटिंौ िाइम ौाइिलाइ्स §2(एा)(2)(बी);भमभशौन परटिंौ िाइम ौाइंिलाइन प.ृ 8-9.
145
इंडियाना परटिंौ िाइम ौाइिलाइ्स §III;भमभशौन परटिंौ िाइम ौाइंिलाइन प.ृ 23-34.
146
इंडियाना परटिंौ िाइम ौाइिलाइ्स §II(सी)(्ीसम भशशुओं और चलन िाल भशशुओं क संबं् म चचाध की
ौई ह);भमभशौन परटिंौ िाइम ौाइंिलाइन प.ृ 2,-25.
147
रो्सन शमाध ब. अ ् शमाध मन/ु एस.सी./0165/2015.
148
िभात कुमार ब. टहमाभलनी मनु/िी.ई./0016/201.
45
अ्याय 6
भसफाररशं का सार
6.1 इस ररपोिध म विध् आयोौ की भसााररश टह्द ू अिा्तियता और संरषकता
(संशो्न) वि्यक, 2015 और संरषक और िणतपा्य (संशो्न) वि्यक, 2015 म
दी ौई हं ीो इस ररपोिध क साथ संल्न ह य वि्यक िमशः टह्द ू अिा्तियता
और संरषकता अध्णनयम, 1956 और संरषक और िणतपा्य अध्णनयम, 1890 का
संशो्न करत हं विध् आयोौ. इस संबं् म संरषक और िणतपा्य
अध्णनयम,1890 और टह्द ू अिा्तियता और संरषकता अध्णनयम, 1956 क
कणतपय तपबं् 149
शीषधक िाली विध् आयोौ की 83िीं ररपोिध (1980) और विध्
आयोौ की 133िीं ररपोिध (1989), ्ीसका शीषधक अिा्तिय बालकं की संरषकता
और अभभरषा स संबंध्त मामलं म मटहलाओं क साथ भदभाि को दरू करना और
क्या्कारी भस ांतं का वि तार् 150
था, की कुछ भसााररशं क िणत आनुषंधौक
प स णनदो श करता ह
6.2 आयोौ 'अभभरषा, बालक संभाल और मल
ु ाकात ्यि थाएं' स संबंध्त नया
अ्याय 2क अंतः थावपत करन की भसााररश करक वि तत
ृ वि्ायी पाठ िदान
करता ह आयोौ ऐस मामलं को विणन्चत करन म, ्ीसक अंतौधत यह
अि्ाररत करन की ििियाएं िक ्या बालक क क्या् की पूणतध हो ौई ह;
म्य थता क दडरान अनुसर् की ीान िाली ििियाएं; और संयु्त अभभरषा क
भलए मंीूरी का अि्ार् करत समय विचार म भलए ीान िाल कारक भी आत हं,
्यायालय को सहायता िदान करन क भलए विणनटदध कि टदशाणनदो श भी िदान करता
ह भसााररशं क संबं् म आौामी पकृ ठं म वि तार स चचाध की ौई ह
क. दह्द ू अरा्तियता और संरषकता अधितनयम. 1956 मं संश िन
6.3 विध् आयोौ इस अध्णनयम म णनमनभलि त संशो्नं की भसााररश करता
ह:
1. िारा 6सक : इस ्ारा म अिा्तिय क शरीर और संप्त की
बाबत (संय्
ु त कडिु्मबक संप्त म तसक अविभ्त टहत को अपि्ीधत करत
हुए) िकसी टह्द ू अिा्तिय क नसधौधक संरषकं की सच
ू ी दी ौई ह िकसी
ल क या अवििाटहता ल की की दशा म, इस ्ारा म पकि प स यह कहा
149
भारत का विध् आयोौ, 83िीं ररपोिध , अिल (1980), http://lawcommissionofindia.nic.in/51-
100/Report83.pdf पर तपल््
150
भारत का विध् आयोौ, 133िीं ररपोिध , अौ त (1989), http://lawcommissionofindia.nic.in/101-
169/Report133.pdf पर तपल््
46
ौया ह िक िकसी टह्द ू अिा्तिय का नसधौधक संरषक वपता ह और तसक
पचात आ माता ह गीता हरीहरन बनाम भारतीय ररििट बंक151 िाल मामल म
त्चतम ्यायालय क णन्धय क पचात आ भी माता किल आपिाटदक
परर् थणतयं म ही वपता क ीीिनकाल क दडरान नसधौधक संरष् बन सकती
ह संवि्ान क अनु्छद 1, म िणतकठावपत समानता क भस ातं की पूणतध
क भलए इसम पररितधन करना आियक ह
तदनुसार, विध् आयोौ यह भसााररश करता ह िक माता-वपता म स
एक की दस
ू र पर िररकठता को दरू िकया ीाना चाटहए और यह िक माता और
वपता दोनं को साथ-साथ िकसी अिा्तिय क नसधौधक संरष् क प म
समझा ीाना चाटहए आयोौ की भसााररश स यह भी परर्ाम णनकलता ह
िक ियक परर् थणत म अिा्तिय का क्या् सिोपरर होना चाटहए
क्या् क सिोपरर होन की संक्पना 1956 क अध्णनयम की ्ारा 13 म
पहल स दी ौई ह आयोौ ्ारा 6 म ऐस संशो्न की भसााररश करक
अपनी 133िीं ररपिध की इन भसााररशं की पुनः पु्कि करता ह िक िकसी
अिा्तिय और तसकी संप्त की बाबत माता और वपता दोनं को समान
अध्कार टदए ीाएं 152
तसन यह आशय बताकर िक दो तपबं्ं (्ारा 6
और ्ारा 13) को एक साथ प ा ीाए, विध् आयोौ की 83िीं ररपोिध की
भसााररशं को भी पुनः पुकि कर टदया ह 153
इस िकार पठन करन स
आियक प स यह वििषषत होौा िक िकसी अिा्तिय का न तो वपता और
न ही माता, ्यायालय मिारा, अध्कार क तडर पर, संरषक क प म
णनय्
ु त िकए ीान का दािा नहीं कर सकती ह ीब तक िक ऐसी णनय्ु ्त
अिा्तिय क क्या् क भलए न हो
संरषक और िणतपा्य अध्णनयम, 1890 म भी इसी िकार क वि्ायी
पररितधन हुए हं ्ीसम वपता क संरषक होन संबं्ी आयांणतक और नसधौधक
अध्कार म पररितधन आया ह 154 1890 की विध् तस समय अध्णनयभमत
की ौई थी ीब मटहलाओं को विध् क अनुसार सीभमत अध्कार िा्त थ और
इसम सु्ार की आियकता थी 1890 क अध्णनयम की ्ारा 19( ) क
151
(1999) 2 एस. सी. सी. 228.
152
भारतीय विध् आयोौ, 133िीं ररपोिध , अौ त, 1989, ¶4.3, http://lawcommissionofindia.nic.in/101-
169/Report133 पर तपल््
153
भारतीय विध् आयोौ, 83िीं ररपोिध , अिल, 1980, ¶6.44, प.ृ 30, http://lawcommissionofindia.nic.in/51-
100/Report83.pdf पर तपल््
िकि नरभसंह ब. प्िीराीू, 1970(1) ए.एल.िी.25; कुमार िामी मुदभलयार ब. राीामल ए.आई.आर.1957 मिास
154
563.
47
पुरान पाठ क अनुसार, ्यायालय िकसी अिा्तिय का संरषक णनयु्त नहीं
कर सकता था (िकसी वििाटहत नारी स भभ्न) यटद अिा्तिय का वपता
ीीवित था और संरषक बनन क भलए अयो्य नहीं था िीय विध्
(संशो्न) अध्णनयम, 2010 मिारा इस ि
ं म संशो्न िकया ौया ्ीसम
वपता की तरह माता को भी तसक समान णन वपत िकया ौया ह, ्ीसक
मिारा विध् को अध्क सामयापू्ध बना टदया ौया ह 155
अतः, 1890 क
अध्णनयम म िकए ीान िाल पररितधनं क संदभध म, आयोौ की भसााररश
मार एक विध् म तन विषमताओं को दरू करन क भलए हं ्ी्ह एक अ्य
विध् म पहल ही दरू िकया ीा चक
ु ा ह
्ारा 6(क) क पर्तुक म ितधमान म यह तपबंध्त ह िक ्ीस
अिा्तिय न पांच िषध की आयु पूरी न कर ली हो तसकी अभभरषा मामूली
तडर पर माता क हाथ म होौी आयोौ का यह वििास ह िक ऐस मामलं
म, ीहां ्यायालय संयु्त प स अभभरषा मंीूर करन का विणनचय करता
ह, इस ् थणत म नमयता अनुञात की ीानी चाटहए और तस तपबं् क पाठ
को तदनुसार संशोध्त िकया ीाना चाटहए
2. िारा 7: इस ्ारा म यह तपबं् ह िक ऐस दतक पुर की, ीो
अिा्तिय हो, नसधौधक संरषकता दतक रह् पर दतक वपता को और
तसक पचात आ दतक माता को संिा्त हो ीाती ह इस ्ारा की भाषा इस
अथध म बतुकी ह िक इसम किल िकसी दतक पुर की नसधौधक संरषकता क
िणत णनदो श िकया ौया ह और िकसी दतक पुरी क िणत णनदो श नहीं िकया
ौया ह टह्द ू अिा्तियता और संरषकता अध्णनयम, 1956 तस समय
िितधन म आया ीब ्यायालयं मिारा िशाभसत सा्ार् टह्द ू विध् म िकसी
पुरी क दतक-रह् को मा्यता नहीं थी इस िकार, अध्णनयम क पाररत
होन क समय पुबरयं का दतक-रह् किल ट क अ्ीन अनुञात था न
िक संटहताब विध् क अ्ीन इसस िह कार् पकि हो ीाता ह िक इस
अध्णनयम क णनमाधताओं न किल दतक पुरं की संरषकता को ही
स्ममभलत ्यं िकया और पुबरयं क दतक-रह् को अनद ा ्यं िकया
156
यह अध्णनयम, टह्द ू दतक और भर्पोष् अध्णनयम, 1956 स भी
पूिध अध्णनयभमत िकया ौया था, ्ीसक मिारा पुरी क दतक-रह् की
विध्क ् थणत म कानूनी प स सु्ार कर टदया ौया था 157
पचातिती
155
िीय विध् (संशो्न) अध्णनयम, 2010(2010 का 30), अ्याय 2..
156
पारस दीिान, लॉ ऑा अिो्श्स, माइनररिी, ौा्ीधयनभशप एंि क ििी, तीसरा सं कर्, 2000, प.ृ 226.
157
टह्द ू दतक और भर्पोष् अध्णनयम, 1956(1956 का 78) §10
48
विध् का िभाि यह हुआ ह िक दतक वपता और दतक माता को दतक
बालक क नसधौधक संरषक समझा ीाएौा 158 इसका परर्ाम यह णनकलता
ह िक टह्द ू अिा्तियता और संरषकता अध्णनयम, 1956 म भी दतक पुर
और दतक पुरी दोनं को नसधौधक संरषकता की पररध् क भीतर स्ममभलत
िकया ीाना चाटहए आयोौ टह्द ू अिा्तियता और संरषकता अध्णनयम,
1956 म संशो्न मिारा तस टह्द ू दतक और भर्पोष् अध्णनयम, 1956
क अनक
ु ू ल बनान क भलए मार इसम स्
ु ार करता ह इसक अणतरर्त,
आयोौ यह भसााररश करता ह िक ऊपर दी ौई ्ारा 6(क) की भसााररशं
और पि
ू ि
ध ती वि्ायी पररितधनं, ीस िीय विध् (संशो्न) अध्णनयम, 2010
क अनु प िकसी दतक बालक क नसधौधक संरषकं म दतक माता और
दतक वपता दोनं शाभमल होन चाटहएं तदनस
ु ार, आयोौ यह भसााररश
करता ह िक ्ारा 7 को इस िकार संशोध्त िकया ीाए िक ऐस दतक
बालक की, ीो िक अिा्तिय ह, नसधौधक संरषकता दतक रह् पर दतक
माता और दतक वपता को संिांत होौी
ख. संरषक और रततपा्य अधितनयम, 1890 मं संश िन
6., विध् आयोौ इस अध्णनयम म णनमनभलि त संशो्नं की भसााररश करता
ह :
1. िारा 17: इस ्ारा म ्यायालय मिारा संरषक णनयु्त करन म
विचार म ली ीान िाली बातं क भलए तपबं् िकया ौया ह और इसम यह
अपषा की ौई ह िक अिा्तिय का क्या् तस विध् स संौत होना चाटहए
्ीसक अ्य्ीन अिा्तिय ह पि
ू ध म, ्ारा 17 इस अध्णनयम की ्ारा
19 क साथ पटठत थी (ीो िक नसधौधक संरषकता क अध्मानी अध्कार क
संबं् म ह) 159
्ारा 19 म, िीय विध् (संशो्न) अध्णनयम, 2010
मिारा संशोध्त िकए ीान स पि
ू ,ध (अिा्तिय ल की क) पणत को या (अ्य
सभी मामलं म) वपता को अिा्तिय का संरषक बनन का अध्मानी
अध्कार ि थावपत िकया ौया था, यटद तन दोनं म कोई भी संरषक णनय्
ु त
िकए ीान क भलए यो्य नहीं था 2010 क अध्णनयम मिारा वपता क
साथ-साथ माता को भी बालक क नसधौधक संरषक क प म
स्ममभलत िकया ौया था और विध्क ् थणत म थो ा सा पररितधन कर टदया
158
म्
ु ला कृत टह्द ू लॉ, संपा. सयीीत ए. दसाई,21िां सं कर्, 2010, प.ृ 1258.70.
159
भारतीय विध् आयोौ, 83िीं ररपोिध , अिल (1980),¶6.40, http://lawcommissionofindia.nic.in/51-
100/Reports83.pdf पर तपल््
49
ौया था 160
तथावप, ऐस मामलं म बालक का क्या् अब भी विध् क
अ्ीन सही अथं म सिोपरर विचार्ीय बात नहीं थी
विध् आयोौ यह भसााररश करता ह िक कानून म िकसी अनुक्पी
पठन की संभा्यता को ठीक िकया ीाए और िह इस संदभध म विध् आयोौ
की 83िीं ररपोिध मिारा की ौई सा्ार् भसााररशं की पुनः पु्कि करता ह
अतः, संरषक की णनयु््त या घोष्ा करन म अिा्तिय का क्या्
सिोपरर होना चाटहए और ियक अ्य बात इस विचार्ा स ौड् होनी
चाटहए तथावप, क्या् का अि्ार् करत समय ्यायालय तन विध्यं
को समयकआ महि द सकौा ्ीनक अ्य्ीन अिा्तिय हो सकता ह ीसा
िक 83िीं ररपोिध म मतभभ्य््त की ौई ह, ऐस संशो्न स आन िाली सभी
समयं क भलए ् थणत तय हो ीाएौी,161 और इसस िथमतः क्या् का
णन्ाधर् िकए बबना कोई संरषक णनयु्त करन की संभािना समा्त हो
ीाएौी
2. िारा 19: इस ्ारा म कणतपय ्य््तयं क नसधौधक संरषक
समझ ीान संबं्ी अध्मानी अध्कार क भलए तपबं् िकया ौया ह इसम
यह तपबंध्त ह िक यटद तस अिा्तिय क, ीो वििाटहता नारी ह और
्ीसका पणत तसक शरीर का संरषक होन क आयो्य नहीं ह या यटद
वििाटहता नारी स भभ्न िकसी अिा्तिय का वपता या माता (ीो ीीवित हं)
इसी िकार संरषक होन क अयो्य नहीं ह तो ्यायालय संरषक णनयु्त न
कर आयोौ यहां भी, क्या् क भस ांत क महि क संबं् म अपनी
83िीं ररपोिध की पुनःपु्कि करता ह और यह भसााररश करता ह िक इस बात
का अि्ार् करत समय िक कोई ्य््त इन परर् थणतयं म संरषक होन
क अयो्य ह अथिा नहीं, ्ारा 17 क अ्ीन अिा्तिय का क्या् सिोपरर
विचार्ीय बात होौी
3. िारा 25: इस ्ारा म िणतपा्य की धौर्तारी क भलए तपबं्
िकया ौया ह यटद िणतपा्य अपन संरषक की अभभरषा को छो दता ह या
तसस हिा टदया ीाता ह, यटद ऐसी धौर्तारी िणतपा्य क भलए क्या्कर
ह विध् आयोौ अपनी तपय्
ुध त भसााररशं क बार म अपनी 83िीं ररपोिध स
विभभ्न पहलुओं स सहमत ह 162
सिधिथम, िकसी अिा्तिय की धौर्तारी
160
िीय विध्(संशो्न) अध्णनयम, 2010 (2010 का 30), अ्याय 2..
161
भारतीय विध् आयोौ, 83िीं ररपोिध , अिल (1980),¶6.40, http://lawcommissionofindia.nic.in/51-
100/Reports83.pdf पर तपल््
162
यथो्त ¶7.18.
50
की संक्पना िाचीन ह और आ्णु नक सामा्ीक विचार्ारा िदभशधत करन क
भलए इसम संशो्न करन की आियकता ह अतः, विध् आयोौ एक
िणत थावपत ्ारा की भसााररश करता ह ्ीसम 'धौर्तारी' क थान पर
िणतपा्य को तसक संरषक की अभभरषा म िापस करन की अपषा की ीा
सकती ह पुनः, आयोौ अिा्तिय क क्या् को सिोपरर विचार्ा क प
म र न की आियकता को दोहराता ह
दस
ू र, विध् का ितधमान पाठ इस बार म अ पकि ह िक कोई ऐसा
संरषक, ्ीसक पास अिा्तिय की अभभरषा कभी नहीं थी, इस ्ारा क
अ्ीन अनुतोष का हकदार ह अथिा नहीं इस पकि करन की आियकता
ह और तदनुसार, विध् आयोौ इस तपबं् की भाषा क संबं् म 83िीं
ररपोिध 163 की तन भसााररशं को दोहराता ह ्ीनम विणनटदध कि प स यह कहा
ौया ह िक यह तन मामलं म लाौू होता ह ीहां बालक संरषक की अभभरषा
म नहीं ह यमयवप पचािती ऐसी अभभरषा का हकदार ह
तीसर, यह भसााररश करता ह िक ्यायालय को चडदह िषध या तसस
अध्क आयु क बालक की बाबत इस ्ारा क अ्ीन कोई आदश बालक की
इ्छाओं को विचार म भलए बबना नहीं करना चाटहए 164
यह इस अध्णनयम
की ्ारा 17 क तपबं्ं क अनुकूल ह ्ीसम ्यायालय को अिा्तिय क
कधथत अध्मान पर विचार करन क भलए अनुञात िकया ौया ह यटद
अिा्तिय इतनी आयु का ह िक िह बुव मतापू्ध अध्मान कर सकता ह
ऐसी पकृ ठभूभम म ीहां चडदह िषध की आयु स अध्क क अिा्तिय न अपन
संरषक की अभभरषा को छो टदया ह या तसस हिा टदया ौया ह, आयोौ
यह भसााररश करता ह िक ्यायालय को बालक की अध्मानता पर विचार
करना चाटहए
4. न अ्याय 2 क का अंतःतथापन: यह अ्याय अभभरषा, बालक
संभाल और मल
ु ाकात संबं्ी मु ं क संबं् म ह, ्ीसक अंतौधत अनक विषय
आत हं ्ीनक संबं् म नीच चचाध की ौई ह
क. िारा 19क: अ्याय के तदे्य ।
इस ्ारा म ्यायालय क इस माौधदशधन क तडर पर इस अ्याय क
मूल त य अध्कधथत िकए ौए हं िक इस अ्याय म ्या िा्त करना
163
भारतीय विध् आयोौ, 83िीं ररपोिध , अिल (1980),¶6.40, http://lawcommissionofindia.nic.in/51-
100/Reports83.pdf पर तपल््
164
यथो्त¶7.20.
51
ई््सत ह िकसी वििाह-विषयक वििाद म बालक सबस अध्क भमय
्य््त होत हं और ऐस वििादं क विध्क अि्ार् क दडरान और तसक
पचात आ ीो आघात ि झलत हं िह बहुत कठोर होता ह ऐस मामलं म
बालक िायः ि्यम आ बन ीात हं और तनक माता-वपता तनका तपयोौ अपन
ियोीनं क भलए अपनी ऐसी सडदबाीी म करत हं ्ीसम ऐसी भािनामक,
सामा्ीक और मानभसक तथल-पुथल का विरल ही ्यान र ा ीाता ह ीो
बालकं को ियं झलनी प ती ह आयोौ का यह वििास ह िक ऐस
वि्ायी पररितधनं क मा्यम स, ीो ्यायालय पर यह कतध्य अध्रोवपत
करौ िक ि तसम अंतिधभलत पषकारं क ्य्किक टहतं का ्यान र बबना
ियक परर् थणत म बालक क क्या् को कायम र , इस असंतभु लत
् थणत स कुछ हद तक णनपिा ीा सकता ह
अतः, इन त यं म, विध् आयोौ की इस संबं् म मूलभूत और
अयंत महपू्ध भसााररश स््नविकि ह िक बालक का क्या् अयध्क
विचार्ीय बात ह ्यायालय इस अ्याय क अ्ीन कोई आदश करत
समय इन त यं को ्यान म र न क भलए बा्य ह और इसभलए तस इन
त यं क िकाश म ऐस िकसी आदश क, ीो िह करता ह, परर्ामं का
्यापक प स णन्ाधर् करना होौा
इन त यं म यह अपषषत ह िक विभभ्न अ्य पहलुओं को
सुणन्चत करक बालक क क्या् की पूणतध की ीाए, ीस, बालक क
पररितधनशील भािनामक, बडव क और शारीररक आियकताओं को मानना;
माता और वपता दोनं, समाी और भाई-बहनं क साथ अ्छ और णनर्तर
संबं् बनाए र ना; बालक क विकास म भाौ लन संबं्ी माता-वपता की
पूिि
ध ती और भािी यो्यता और िणतब ता को मानना; बालक को िकसी भी
िकार की टहंसा स संरषषत र ना, आटद
ख. िारा 19ख: इस अ्याय की तपय ्यता
अभभरषा संबं्ी मु ं पर तीन िीय विध्यं म कायधिाही की ीाती ह,
ीो य हं, भारतीय वििाह-वि्छद अध्णनयम, 1869(्ारा ,1 और ्ारा ,3),
पारसी वििाह और वििाह-वि्छद अध्णनयम, 1936(्ारा ,9) और टह्द ू
वििाह अध्णनयम, 1955 (्ारा 26) य ्ाराएं, सा्ार् प म ्यायालय
को ऐस अिा्तिय बालकं की, ्ीनक माता-वपता वििाह-वि्छद या
पथ
ृ ्कर् क िाद म पषकार हं, अभभरषा, भर्पोष् और भशषा क संबं्
म डििी/आदश पाररत करन की श््त िदान करती हं
विध् आयोौ मिारा भसााररश िकया ौया नया अ्याय 2क अभभरषा
52
संबं्ी मामलं म वि तत
ृ विचार्ा क भलए तपबं् करता ह और िह इस
संबं् म ्यायालय की तन श््तयं क अणतरर्त ह ीो तीन िीय विध्यं
म सूचीब हं इस नई ्ारा म यह पकि िकया ौया ह िक इस नए
अ्याय क तपबं् अभभरषा और बालक संभाल संबं्ी सभी कायधिाटहयं को
लाौू हंौ ्ीसक अंतौधत तीन विध्यं क अंतौधत आन िाली कायधिाटहयां भी
आती हं िीय विध्यं क इस िणत-णनदो श का यह पकि करन क भलए
कानन
ू म तपबं् िकया ौया ह िक आयोौ की भसााररशं का आशय लडिकक
ह और य सभी ्य््तयं को लाौू होती हं चाह ि िकसी भी िीय विध्
मिारा शाभसत होत हं
ग. िारा 19ग: पररभाषा ं ।
इस ्ारा म दो िमु पररभाषाएं दी ौई हं, अथाधत आ, संय्
ु त अभभरषा
और एकल अभभरषा संय्
ु त अभभरषा िह ह ीहां माता और वपता दोनं
बालक की शारीररक अभभरषा (ऐस अनुपात म, ीो ्यायालय बालक क
क्या् क भलए अि्ाररत कर) साझा करत हं और बालक की द र और
णनयंर् का ततरदाणयि और विणनचय करन संबं्ी अपन िाध्कार को भी
समान प स साझा करत हं एकल अभभरषा िह ् थणत होती ह ीहां
माता-वपता म स एक बालक की शारीररक द र और णनयंर् को अपन पास
र ता ह तथावप, य अध्कार ्यायालय मिारा दस
ू र माता या वपता को
मुलाकात क अध्कार िदान करन की श््त क अ्य्ीन हो सकत हं
संय्
ु त अभभरषा का एक णन्चत पद क प म परु ः थापन, विध् म,
्यायालय मिारा संय्
ु त अभभरषा का आदश ीारी करन की संभािना को
मा्यता दना ह यटद िह बालक क क्या् म हो तथावप, संय्
ु त अभभरषा
की पररभाषा और तन सारिान तपबं्ं का, ीो तसक परर्ाम ि प िकए ौए
हं, पठन तन त यं क िकाश म िकया ीाना चाटहए, ीो अ्याय क िारं भ
म टदए ौए हं, ीो यह सणु न्चत करन की ई्सा करत हं िक अंततोौिा
मंीरू की ौई अभभरषा संबं्ी ्यि था सदि बालक क क्या् की पणू तध क
अ्य्ीन ह
घ. िारा 19घ: अभभरषा रदान करना ।
इस ्ारा म ्यायालय को अभभरषा संबं्ी विभभ्न िक म क आदश
करन की श््तयां दी ौई हं तथावप, इसम ्यायालय स यह भी अपषा की
ौई ह िक िह इस संबं् म अनुसूची म अंतविधकि वि तत
ृ टदशाणनदो शं पर
विचार कर ्यायालय इस िकार िकए ौए आदशं को तपांतररत करन की
श््त िणत्ाररत करता ह बशतो ऐस तपांतर् बालक क क्या् म ही रह
53
और ऐस तपांतर् क कार् अभभभलि त िकए ीाएं
ङ. िारा 19ङ: अततरर्त आदे श पाररत करने की शज्त ।
यह ्यायालय को िदान की ौई एक अणतरर्त श््त ह ीो इस
अ्याय क अ्ीन बालक की अभभरषा स संबंध्त िकसा आदश को िभािी
बनान या ििृ त करन क भलए आियक ह
च. िारा 19च: म्यतथता ।
वििाह-वि्छद की कायधिाटहयं स तभत
ू होन िाल अनक वििादं
(बालक अभभरषा, बालक संभाल, आटद) का समा्ान म्य थता क मा्यम
स िकया ीा सकता ह इसस माता-वपता और ब्चं दोनं क भलए बहतर
परर्ामं का संि्धन होौा तथा अणतभारािांत ्यायालय ि्ाली क दबाि म
भी कमी आएौी आयोौ यह भसााररश करता ह िक अभभरषा संबं्ी मामल
क पषकारं को सी् ्यायालय ि्ाली म ीान स पि
ू ध सा्ार्तया
कायधिाटहयं को िा ति म आरं भ होन स पूिध या ीब भी ्यायालय ऐसा
आदश कर, म्य थता पर विचार करना चाटहए ्यायालय िायः माता-वपता
को ्यायालय स संब म्य थता क्ि को णनदो भशत करौा तथावप, यटद
ऐसा कोई क्ि नहीं ह तो ्यायालय िकसी ्य्किक म्य थ को णनयु्त
कर सकौा
ितधमान म, कुिुमब ्यायालय वििादं क णनपिान क भलए वििाह
परामभशधयं की सहायता लत हं परामशी अपन ््किको् की ््कि स
म्य थं स भभ्न होत हं परामशध म िायः ियक पषकार क ्यिहार
संबं्ी मु ं की पहचान करन की आियकता होती ह और इसम मानभसक
िा ्य, मनोविञान और समाीशा र ीस षरं म िभशषषत ि्ृ तकं को
अंतिधभलत करना होता ह इसक विपरीत म्य थता म झौ संबं्ी ्यिहार की
पहचान करन की आियकता होती ह और इसम ऐस ि्ृ तकं को अंतिधभलत
िकया ीाता ह ीो वििाद का समा्ान करन म िभशषषत हं 165
अतः, आयोौ
यह भसााररश करता ह िक पषकारं को िकसी िभशषषत म्य थ क साथ
म्य थता म भाौ लन का अिसर टदया ीाना चाटहए म्य थं की समुधचत
पकृ ठभूभम होनी चाटहए और तसक पास िभशष् होना चाटहए, ्ीसक अंतौधत
कडिु्मबक वििाद भी शाभमल हं इसक अणतरर्त, त्च ्यायालयं, ्ीला
165
मररिल मडिएशन िाा, वििाह-विषयक म्य थता और वििाह-विषयक परामशध क बीच ्या अंतर ह?, 22
ारिरी, 2013, http://www.maritalmedication.com/faqs/what-is-the-difference-between-marital-
mediation-and-marital-counseling-2 पर तपल्् ह ( अंणतम बार 22 अिल, 2015 को द ा ौया)
54
्यायालयं और कुिुमब ्यायालयं को ्यायालयं स संब म्य थ क्िं और
्य्किक म्य थं की सूची र नी चाटहए संबंध्त त्च ्यायलयं मिारा
संबंध्त रा्य सरकारं स परामशध करक तयार की ौई कीम क अनुसार
इनकी पहचान की ीाएौी और इ्ह पारररभमक का संदाय िकया ीाएौा
ीसा िक वि्ान म बारं बार ीोर टदया ौया ह, ्यायालय का यह
कतध्य ह िक िह यह सुणन्चत कर िक अभभरषा संबं्ी अंणतम आदश
बालक क क्या् क भलए ह इस ियोीन क भलए, आयोौ यह
भसााररश करता ह िक ्यायालय क पास विभभ्न संब मु ं का णन्ाधर्
करन क भलए (तदाहर्ाथध, बालक की अध्मानता, माता-वपता का िभाि और
तनस संबं्, आटद) बालक का ितंर मनोिञाणनक मू्यांकन िा्त करन की
श््त होनी चाटहए इसक अलािा, ीसा िक म्य थता क मामल म होता
ह, ि्ृ तक सहायता की आियकता हो सकती ह, ्यंिक न तो
्यायालय और न ही म्य थ बालक की मानभसकता को समझन क यो्य हो
सकता ह
यह सुणन्चत करन क अंणतम त य की िा््त क भलए िक बालक क
क्या् की पूणतध हो ौई ह, समयब समा्ान भी एक िमु कारक होता ह
त्चतम ्यायालय न यह माना ह िक कुिुमब ्यायालयं को यह सुणन्चत
करना चाटहए िक संपू्ध म्य थता िििया को पूरा करन क भलए यु््तयु्त
समय सीमा विटहत की ीाए ्ीसस िक कडिु्मबक वििादं क समा्ान म और
अध्क विलंब न हो सक 166
आयोौ यह भसााररश करता ह िक इस ्ारा क
अ्ीन की ीान िाली कोई भी म्य थता समयब होनी चाटहए और िह इस
िकार आदश िकए ीान क साठ टदनं क भीतर समा्त हो ीानी चाटहए ऐसी
अपषा क अभाि म, इस बात का ीोि म होता ह िक म्य थता
अणन्चतकाल तक चल सकती ह और िनौत बालक पर इसका िणतकूल
िभाि प सकता ह तथावप, ्यायालय, ीहां आियक हो, इस अिध् को
ब ा सकता ह
छ. िारा 19छ: बालक संभाल
भारत म िीय विध्यां, संटहताब टह्द ू विध्167 और पारसी विध्168
और भारतीय वििाह-वि्छद अध्णनयम169 म बालकं की अभभरषा की
166
बल्ी्दर कडर ब. हरदीप णतंह, ए.आई.आर. 1998 एस. सी. 764.
167
टह्द ू वििाह अध्णनयम, 1955 (1955 का 25) §26.
168
पारसी वििाह और वििाह-वि्छद अध्णनयम, 1936(1936 का 3) §49.
169
भारतीय वििाह-वि्छद अध्णनयम, 1869(1869 का 4) §41 और §43.
55
संक्पना क मा्यम स कुछ सीमा तक बालक संभाल की संक्पना और
विचार क संबं् म हं तथावप, इन तपबं्ं म ि कार् नहीं टदए ौए हं,
्ीनक भलए ऐसी बालक संभाल की आियकता ह टह्द ू दतक और
भर्पोष् अध्णनयम, 1956 म बालकं क भर्पोष् क भलए तपबं् ह170
िक्तु इसम मार भर्पोष् की बा्यता वपता171 तथा माता172 पर िाली ौई
ह यहां भर्पोष् स ान, कप , आिास, भशषा और धचिकसीय पररचयाध
और तपचार की ्यि था करना अभभित ह 173
भर्पोष् की यह पररभाषा
सा्ार् तडर पर श्दाभभ्य्त की ौई ह ्ीसस िक िह तन सभी ्य््तयं
को लाौू हो सक ीो 1956 क अध्णनयम क विभभ्न तपबं्ं क अ्ीन
भर्पोष् का दािा करन क हकदार हं 174
विध् आयोौ का यह वििास ह
िक अभभरषा क मामलं म बालक संभाल क अंतौधत 1956 क अध्णनयम
मिारा की ौई भर्पोष् की संक्पना स बहुत अध्क समाविकि ह
तदनुसार, यह ्यायालय को बालकं क भर्पोष् क भलए विणनटदध कि प स
आदश पाररत करन क भलए सश्त करता ह इसम यह पकि िकया ौया ह
िक ऐस आदश म ऐसी रकम णनयत करना अंतिधभलत होौा ीो बालक क
ीीिन-णनिाधह क ्ययं की पूणतध क भलए, ्ीसक अंतौधत ाना, कप ा,
आरय, िा ्य द र और भशषा भी ह, "यु््तयु्त या आियक" ह
तथावप, "यु््तयु्त" और "आियक" अभभ्य््तयं का अथाध्ियन
अ पकि प म िकया ीा सकता ह और ीब बालक संभाल क भलए रकम
णनयत की ीानी हो तब तसका द ु पयोौ िकया ीा सकता ह या तसका ौलत
णनिधचन िकया ीा सकता ह अतः, ्यायालय ऐस कणतपय कारकं की
भसााररश करक इन अभभ्य््तयं को विशवषत करता ह, ीो ्यायालयं को
तब ्यान म र नी चाटहए ीब बालक संभाल की ौ्ना की ीा रही हो
इनक अंतौधत माता-वपता क वितीय संसा्न, बालक क रहन-सहन का
तर,175 बालक की शारीररक और मानभसक ् थणत, तसकी शषि्क और
िा ्य द र संबं्ी आियकताएं या ऐसा कोई अ्य कारक, ीो
्यायालय, बालक क क्या् क भलए तधचत समझ
आयोौ, इस सा्ार् भस ांत का अनुसर् करत हुए िक 18 िषध की
170
टह्द ू दतक और भर्पोष् अध्णनयम, 1956 (1956 का 78) §20.
171
कृक्ाकुमारी ि. िरल्मी, ए. आई. आर. 1976 आ्र िदश 365.
172
मु्ला कृत टह्द ू लॉ, संपा. सयीीत दसाई, 21िां सं कर् 2010, प.ृ 1378.
173
टह्द ू दतक और भर्पोष् अध्णनयम, 1956 (1956 का 78) §3( ).
174
मु्ला कृत टह्द ू लॉ, संपा. सयीीत दसाई, 21िां सं कर् 2010, प.ृ 1294.
175
सयाली पाठक ब. िसंत पाठक 110(2004) िी. एल. िी. 637.
56
आयु पूरी कर लन पर िा्तियता आती ह, यह भसााररश करता ह िक बालक
संभाल िा्तियता की इस आयु तक ीारी रहनी चाटहए ऐस मामल हं, ीहां
्यायालय न भर्पोष् की आयु अठारह िषध स ब ाकर इ्कीस िषध करन
की सलाह दी ह और आयोौ स तसकी सलाह मांौी ह 176
्यायालय का यह
मत ह िक ्यायालय क पास बालक क 18 िषध की आयु पूरी करन क
पचात आ भी बालक संभाल को ीारी र न की श््त होनी चाटहए और ीहां
कहीं भी समधु चत हो, यह अिध् तब तक ब ाई ीा सक ीब तक बालक 25
िषध की आयु तक पहुंचता ह न िक तसक पचात आ
आयोौ यह भी मानता ह िक मानभसक या शारीररक णनःश्तता िाल
बालकं क साथ विशष ्यिहार िकया ीाए 177
टह्द ू दतक और भर्पोष्
अध्णनयम, 1956 णनशः्तता िाल ्य््तयं को लाौू होता ह िक्तु य
ाायद अठारह िषध की आयु पर समा्त हो ीात हं आयोौ यह भसााररश
करता ह िक विध् क तपबं् म सु्ार िकया ीाए और मानभसक या शारीररक
णनःश्तता िाल बालक की दशा म ऐस समय स पर, ीब भी बालक 25 िषध
की आयु तक पहुंचता ह, बालक संभाल क भलए तपबं् िकया ीाए
्यायालय यह भसााररश करता ह िक ्यायालय को यह सुणन्चत
करन क भलए माता-वपता क ीीिनकाल क पचात आ भी बालक का क्या्
िमु रह, ऐस माता या वपता की संपदा पर, ्ीसकी मृ यु बालक संभाल क
भलए आदश पाररत रहन क दडरान या तसक पचात आ हो ीाती ह, दाणयि
संबं्ी आदश करन की श््त होनी चाटहए
ि. अनस
ु च
ू ी: ददशातनदे श
आयोौ, वि्यक की अनुसूची म, विध् क मुखय भाौ क साथ र
ीान िाल विभभ्न टदशाणनदो शं की भी भसााररश करता ह इन टदशाणनदो शं
म णनमनभलि त मु ं पर चचाध की ौई ह: संयु्त अभभरषा मंीूर करत
समय, बालक की अध्मानता, बालक क अभभल ं तक पहुंच, पालन पोष्
योीना, वपतामह-वपतामही और मातामह-मातामही पालनपोष् समय,
176
िाइमस आा इंडिया, ऱ एी ाार चाइ्ि मिनस िू 21: ्यायालय अौ त 12(2011),
http://timesofindia.indiatimes.com/city/delhi/Raise-age-for-child-maintenance-to-21-
Court/articleshow/9573821.cms पर तपल्् (अंणतम बार तारी 23 िाल, 2015 को द ा ौया )
177
िकशोर ्याय (बालकं की द र और संरष्) अध्णनयम, 2000(2000 का 56), §2(घ).
57
म्य थता, मुलाकात, विणनचय करन और थान-पररितधन का अि्ार्
करत समय विचार म र ीान िाल कारक
ह ता/-
(्यायमूणतध ए. पी. शाह)
अ्यष
ह ता/- ह ता/- ह ता/-
(्यायमूणतध एस. एन. कपूर) [िोासर(िा.) मूल च्द शमाध] (्यायमूणतध ऊषा महरा)
सद य सद य सद य
ह ता/- ह ता/-
(पी. क. म्होरा) (िा. संीय भसंह)
पदन सद य पदन सद य
ह ता/-
(िा. ीी. नाराय् राीू)
सद य-सधचि
ह ता/- ह ता/-
(आर. िकिरम्ी) [िोासर(िा.) योौश याौी]
सद य(अंशकाभलक) सद य(अंशकाभलक)
58
तपाबंि-1
दह्द ू अरा्तियता और संरषकता
ससंश िन वििेयक, 2015
दह्द ू अरा्तियता और संरषकता अधितनयम, 1956
का और संश िन
करने के भल
वििेयक
भारत ौ्रा्य क णछयासठि िषध म णनमनभलि त प म
यह अध्णनयभमत हो :--
1. इस अध्णनयम का संषष्त नाम टह्द ू अिा्तियता और संषष्त नाम
संरषकता (संशो्न) अध्णनयम, 2015 ह
2. टह्द ू अिा्तियता और संरषकता अध्णनयम, 1956 ्ारा 6 का
संशो्न
(्ीस इसम इसक पचात आ मूल अध्णनयम कहा ौया ह) की ्ारा
6 म,--
(1) ि
ं (क) क थान पर, णनमनभलि त ि
ं र ा
ीाएौा, अथाधत आ :--
"(क) िकसी ल क या अवििाटहता ल की दशा म--
माता और वपता ;";
(2) पकिीकर् को पकिीकर् 1 क प म संखयांिकत
िकया ीाएौा और इस िकार संखयांिकत पकिीकर् क
पचात आ, णनमनभलि त पकिीकर् अंतः थावपत िकया ीाएौा,
अथाधत आ :--
" पकिीकर् 2 -- ि
ं (क) क ियोीनाथध, ीब तक ्यायालय
मिारा संरषक और िणतपा्य अध्णनयम, 1890 क अ्याय 2क
क अ्ीन संयु्त अभभरषा न दी ीाए, तब तक ऐस अिा्तिय
की, ्ीसन पांच िषध की आयु पूरी न कर ली हो, अभभरषा मामूली
59
तडर पर माता क हाथ म होौी "
्ारा 7 क 3. मूल अध्णनयम की ्ारा 7 क थान पर, णनमनभलि त
थान पर नई
्ारा र ी ीाएौी, अथाधत आ :--
्ारा का
िणत थापन
दतक पर
ु की "7. ऐस दतक पुर की, ीो अिा्तिय हो, नसधौधक
नसधौधक
संरषकता दतकरह् पर दतक पुर माता और वपता को
संरषकता
संिांत हो ीाती ह "
60
तपाबंि-2
संरषक और रततपा्य ससंश िन
वििेयक, 2015
संरषक और रततपा्य अधितनयम, 1890
का और संश िन
करने के भल
वििेयक
भारत ौ्रा्य क णछयासठि िषध म णनमनभलि त प म
यह अध्णनयभमत हो :--
1. इस अध्णनयम का संषष्त नाम संरषक और िणतपा्य संषष्त नाम
(संशो्न) अध्णनयम, 2015 ह
2. संरषक और िणतपा्य अध्णनयम, 1890 (्ीस इसम ्ारा 17 का
संशो्न
इसक पचात आ मूल अध्णनयम कहा ौया ह) की ्ारा 17 म,--
(i) तप्ारा (1) क थान पर, णनमनभलि त तप्ारा र ी
ीाएौी, अथाधत आ :--
"(1) िकसी अिा्तिय का संरषक णनयु्त या
घोवषत करन म अिा्तिय का क्या् सिोपरर
विचार्ीय बात होौी ";
(ii) तप्ारा (1) क पचात आ, णनमनभलि त तप्ारा
अंतः थावपत की ीाएौी, अथाधत आ :--
"(1क) तप्ारा (1) क तपबं्ं क अ्ीन रहत हुए,
्यायालय तस अिा्तिय का संरषक णनयु्त या घोवषत
करन म, तस विध् का, ्ीसक आिा्तिय अ्य्ीन ह,
समयकआ ्यान र ौा "
्ारा 19 का 3. मूल अध्णनयम की ्ारा 19 क थान पर, णनमनभलि त
61
संशो्न पर्तुक अंतः थावपत िकया ीाएौा, अथाधत आ :--
"पर्तु इस बात का अि्ार् करन म िक ्या कोई
्य््त ि
ं (क) या ि
ं ( ) क अ्ीन संरषक होन क
अयो्य ह, ्ारा 17 की तप्ारा (1) क अ्ीन यथा अपषषत
अिा्तिय क क्या् सिोपरर विचार्ीय बात होौी "
्ारा 25 क ,. मूल अध्णनयम की ्ारा 25 क थान पर, णनमनभलि त
थान पर नई
्ारा र ी ीाएौी, अथाधत आ :--
्ारा का
िणत थापन
िणतपा्य की "25(1). ्ारा 19 म अ्तविधकि िकसी बात क होत हुए
अभभरषा की
भी, यटद िणतपा्य अपन शरीर क संरषक की अभभरषा को
कायधिाटहयां
छो दता ह या तसस हिा टदया ीाता ह या तस अभभरषक
की ीो, ऐसी अभभरषा का हकदार ह, अभभरषा म नहीं ह, तो
यटद ्यायालय इस राय का ह िक िणतपा्य क भलए यह
क्या्कर होौा िक िह संरषक की अभभरषा म लडेि आए
या तसकी अभभरषा म र ा ीाए तो िह, यथा् थणत, तसक
संरषक की अभभरषा म लडि आन या र ीान का आदश
कर सकौा
(2) ्यायालय, आदश का िितधन करान क ियोीन क भलए, दं ि
िििया संटहता की ्ारा 97 मिारा िथम िौध" म्ी रि को िदत
श््त का ियोौ कर सकौा
(3) ऐस ्य््त क पास, ीो तसका संरषक नहीं ह, िणतपा्य का
अपन संरषक की इ्छा क वि णनिास, ित: संरषकता का
पयधिसान नहीं कर दता ह
(,) इस ्ारा क अ्ीन आदश करन म, ्यायालय िणतपा्य क
क्या् का सिोपरर विचार्ीय बात क प म ्यान र ौा
(5) ्यायालय, चडदह िषध या तसस अध्क आयु क बालक क
संबं् म, बालक क अध्मान पर विचार िकए बबना, इस ्ारा क
अ्ीन कोई आदश नहीं करौा ''
62
नए अ्याय 5. मूल अध्णनयम म, अ्याय 2 क पचात आ, णनमनभलि त
का अ्याय 2क अंत: थावपत िकया ीाएौा, अथाधत आ :--
अंत: थापन ''अ्याय 2क : अभभरषा, बालक संभाल और मुलाकात की
्यितथा
19क. इस अ्याय के तदे्य :
इस अ्याय क त य यह सुणन्चत करन क हं िक बालक का
क्या्--
(क) यह सणु न्चत करक िक बालक को माता-वपता, दोनं, का,
्ीनका िक तसक ीीिन म अथधपू्ध लौाि ह, तस
अध्कतम सीमा तक ाायदा भमल ीो बालक क क्या्
स संौत हो;
( ) यह सणु न्चत करना िक बालक को ऐसा पयाध्त
और तधचत पालन-पोष् भमल ्ीसस िक िह अपन प्
ू ध
साम्यध को िा्त कर सक;
(ौ) यह सुणन्चत करना िक माता-वपता बालक की द र ,
क्या् और विकास संबं्ी अपन कतध्यं को पूरा कर
और अपन ततरदाणयिं को णनभाएं;
(घ) बालक की पररितधनशील भािनामक, बडव क ओर भडणतक
ी रतं क िणत समयकआ ्यान दना;
(ङ) माता-वपता, दोनं, को बालक क साथ णनकि क और सतत आ
संबं् बनाए र न क भलए और बालक पर िभाि िालन
िाल मामलं म सहयोौ करन तथा तसस संबंध्त वििादं
का समा्ान करन क भलए िोसाटहत करना;
(च) इस बात को िीकार करना िक बालक को इस बात पर
्यान टदए बबना िक माता-वपता वििाटहत हं, अलौ हो ौए
हं या अवििाटहत हं, माता-वपता, दोनं क बार म ीानन का
तथा तनक मिारा द र िकए ीान का अध्कार ह; और
(छ) बालक को शारीररक या मनोिञाणनक अपहाणन स या िकसी
द्ु यधिहार, तपषा या कडिुंबबक टहंसा का भशकार होन स या
अरषषत छो टदए ीान स संरषा करना
19ख. इस अ्याय का लागू ह ना :
63
इस अ्याय क तपबं् तन सभी कायधिाटहयं को लाौू हंौ ्ीनम
अभभरषा और बालक संभाल क संबं् म माता-वपता शाभमल हं ,
इनम ि सब कायधिाटहयां हं ीो भारतीय वििाह-वि्छद अध्णनयम,
1869, पारसी वििाह और वििाह-वि्छद अध्णनयम, 1936 और
टह्द ू वििाह अध्णनयम, 1955 क अ्ीन तभत
ु होती हं
19ग. परभभाषा ं :
इस अ्याय क ियोीन क भलए--
(क) ''संय्
ु त अभभरषा'', ीहां िक माता-वपता दोनं, --
i. बालक की तस शारीररक अभभरषा को साझा करत
हं, ्ीसको िक समान प स या ऐस अनुपात म,
ीो ्यायालय मिारा बालक क क्या् क भलए
अि्ाररत िकया ीाए, साझा िकया ीा सकता ह;
और
ii. बालक की द र और णनयंर् क भलए संयु्त
ततरदाणयि और संयु्त िाध्कार बालक क संबं्
म विणन्चत करन क भलए समान प स साझा
करत हं; और
( ) ''एकल अभभरषा'' िह ह ीहां िक माता अथिा वपता
म स एक क पास बालक की शारीररक अभभरषा और
तसकी द र और णनयंर् का ततरदाणयि ह, िक्तु
यह ्यायालय की दस
ू र ीनक अथाधत आ माता की दशा म
वपता अथिा वपता की दशा म माता को बालक स
मल
ु ाकात करन क अध्कार दन की श््त क अ्य्ीन
होौा
19घ. अभभरषा का ददया िाना :
(1) ऐसी िकसी कायधिाही म, ्ीसको यह अ्याय लाौू होता ह,
्यायालय संयु्त अभभरषा अथिा एकल अभभरषा का, ीो
बालक क क्या् स संौत हो, आदश कर सकौा
(2) इस बात का अि्ार् करन म िक ्या इस ्ारा क
अ्ीन आदश बालक क भलए क्या्कर होौा, ्यायालय
अनुसूची म विणनटदध कि माौधदशधक भस ांतं का ्यान र ौा
64
(3) इस बात क अ्य्ीन िक बालक का क्या् सिोपरर
विचार्ीय बात ह, ्यायालय इस ्ारा क अ्ीन क
आदश को तपांतररत कर सकौा और िह ऐसा करन क
अपन कार् अभभभलि त करौा
19ङ. अततरर्त आदे श पाररत करने की शज्त :
्यायालय को बालक की अभभरषा स संबंध्त िकसी आदश को
िभािी करन और तस ििणतधत करान क भलए ऐस कोई अणतरर्त
और आनष
ु ंधौक आदश पाररत करन की श््त होौी
19च. म्यतथता :
(1) ्यायालय इस अ्याय क अ्ीन कायधिाटहयं क िारं भ पर या
तनक दडरान िकसी ििम पर सा्ार्तया माता-वपता को
्यायालय स ीु म्य थता क्ि म णनटदध कि करौा या तसक
न होन की दशा म ऐस ्य््त को णनटदध कि करौा ्ीस
्यायालय म्य थ क प म णनयु्त कर
(2) ऐस म्य थ क पास, ्ीसको तप्ारा (1) क अ्ीन माता-
वपता णनटदध कि िकए ीात हं, म्य थता म सुसंौत ि्ृ तक
अहध ताएं और िभशष् तथा कडिु्मबक वििादं स संबंध्त
मामलं म म्य थता करन म पयाध्त कडशल और अनुभि
होना चाटहए
(3) इस ्ारा क ियोीन क भलए, ियक त्च ्यायालय और
्ीला ्यायालय तथा कुिुंब ्यायालय ्यायालय स ीु
म्य थता क्िं और ्य्किक म्य थं की सूची बनाए
र ौा
(4) ्यायालय स ीु म्य थता क्िं अथिा ्य्किक म्य थं
की, संबंध्त त्च ्यायाल मिारा, संबंध्त रा्य सरकारं स
परामशध करक, इस ियोीन क भलए तयार की ौई कीम क
अनुसार पहचान की ीाएौी और पारररभमक संदत िकया
ीाएौा
(5) इस ्ारा क अ्ीन म्य थता का कोई आदश करन अथिा
तस करन क ियोीन क भलए, ्यायालय और णनय्
ु त िकया
65
ौया म्य थ अनुसूची म विणनटदध कि माौधदशधक भस ांतं का
्यान र ौा
(6) ्यायालय, ीहां िह तधचत या आियक समझ, बालक की
मनोदशा का ितंर म्
ू यांकन करन क भलए िभशषषत और
अनभ
ु िी ि्ृ तक स सहायता लौा
(7) ्यायालय मिारा इस ्ारा क अ्ीन ्ीस म्य थता का
आदश िकया ौया ह, तस म्य थता की कायधिाही
सा्ार्तया ऐस आदश की तारी स साठ टदन क अपचात आ
ीहां तक िक ्यायालय मिारा तस अिध् को, ीहां आियक
स, ब ाया न ीाए, पूिध की ीानी चाटहए
19छ. बालक संभाल :
(1) ्यायालय बालकं क भर्-पोष् क भलए समुधचत आदश
पाररत करौा और एक ऐसी रकम णनयत करौा ीो बालक क
ीीिन-णनिाधह क, ्ीनक अंतौधत भोीन, कप , आरय थल,
िा ्य द र और भशषा भी ह, चं को परू ा करन क भलए
यु््तयु्त या आिशयक
आ हो
(2) ्यायालय, यु््तयु्तता अथिा आियकता का अि्ार्
करन क ियोीन क भलए, णनमनभलि त कारकं का ्यान
र ौा, अथाधत आ :--
(क) माता-वपता म स ियक क वितीय सा्न;
( ) रहन-सहन का तर ीो िक ्यायालय का तस दशा
म होता ीब वििाह बना रहता;
(ौ) बालक की शारीररक और भािनामक ् थणत;
(घ) बालक की विभशकि शषषक और द र संबं्ी ी रत; और
(ङ) कोई अ्य ऐस कारक ीो ्यायालय ठीक समझ
(3) इस ्ारा क अ्ीन ्यायालय का आदश बालक क अठारह िषध
की आयु पूरी करन तक बना रहना चाटहए
(4) तप्ारा (1), तप्ारा (2) और तप्ारा (3) म अंतविधकि िकसी
बात क होत हुए भी, ्यायालय ऐस अणतरर्त आदश कर
सकौा ीो िह ठीक समझ, ्ीनम णनमनभलि त भी हं :--
66
(क) तप्ारा (1) क अ्ीन ीो राभश अि्ाररत की ौई ह,
तसस अध्क राभश का संदाय करन की अपषा करना;
( ) तप्ारा (3) क अ्ीन यथा तपबंध्त अिध् स
अध्क अिध् तक आदश क बन रहन की अपषा करना,
िक्तु ऐसा आदश िकसी भी दशा म बालक क प्चीस िषध
की आयु पूरी करन क बाद क िकसी समय तक नहीं बना
रहौा;
(ौ) तप्ारा (3) क अ्ीन िकसी आदश क, बालक क मानभसक
या शारीररक अषमता की दशा म, तसक प्चीस िषध की
आयु पूरी करन क बाद क समय तक बन रहन की अपषा
करना;
(घ) इस ्ारा क अ्ीन की कायधिाटहयं क दडरान या तनक पूरा
होन क पचात आ माता अथिा वपता म स िकसी की मृ यु
की दशा म तसकी समपदा को ्यायालय मिारा पाररत
आदशं क अ्ीन की बा्यताओं क भलए दायी बनाना ''
6. मूल अध्णनयम म, णनमनभलि त अनुसूची अंत म अंत: थावपत
की ीाएौी, अथाधत आ :--
''अनस
ु च
ू ी
अभभरषा, बालक संभाल और बालक से मल
ु ाकात करने
सभमलने संबंिी मागटदशटक भस्ांत
I. संयु्त अभभरषा मंीूर करन क भलए विचार्ीय कारक--
1. अ्याय 2क क अ्ीन संयु्त अभभरषा का आदश करन म
्यायालय णनमनभलि त बातं का ्यान र ौा, अथाधत आ :-
क. ्या माता-वपता सहयोौ करन म और सा्ार्तया बालक
क क्या् पर िभाि िालन संबं्ी महिपू्ध विणनचयं स
सहमत होन म समरआ हंौ;
. माता-वपता म स ियक, बालक तथा माता की दशा म
वपता अथिा वपता की दशा म माता क बीच णनकि क और सतत आ
संबं् सुकर बनान और तसक भलए िोसाटहत करन म इ्छुक
और समथध ह;
67
ौ. ्या माता-वपता संयु्त प स ऐसी टदन-िणतटदन की
द र योीना बनान और तस ििया््ित करन म, ीो थाणयि
को िोसाटहत करती ह, समथध हं;
घ. बालक और माता-वपता की पररप्िता, ीीिन शली और
पकृ ठभूभम (्ीसक अंतौधत सं कृणत और परमपराएं भी हं) और ऐसी
कोई अ्य विभशकिताएं ीो ्यायालय सुसंौत समझता ह;
ङ. िह सीमा, ्ीस तक माता-वपता म स ियक न माता
अथिा वपता क प म अपन ततरदाणयिं को परू ा िकया ह या
परू ा करन म असाल रहा ह या रही ह;
च. िह सीमा, ्ीस तक माता-वपता एक-साथ कायध करन क
य्ु ्तय्
ु त माौध ंूंंन म समथध हं अथिा असमथध ह;
छ. िह सीमा, ्ीस तक अध्क आय अ्ीधत करन िाला वपता
या माता ियक क पतक
ृ घर म ीो रहन-सहन ह, तस ीस रहन-
सहन को बनान म सहायता दन का/की इ्छुक ह;
ी. बालक क माता-वपता म स ियक क साथ, सहोदर भाई
या बहन क साथ और ऐस अ्य ्य््तयं क साथ, ीो बालक क
क्या् पर महिपू्ध िभाि िाल सकत हं, मडीूदा संबं्;
झ. बालक क दस
ू री महिपू्ध नातदाररयं पर, ्ीनक अंतौधत
सहोदर भाई या बहन, अभभीात और वि ताररत कुिुंब क सद य
भी हं िक्तु तन तक सीभमत नहीं ह, समयकआ ्यान दत हुए,
बालक की ी रत;
ञ. कोई कडिु्मबक टहंसा, ्ीसम बालक या बालक क कुिुंब क
िकसी सद य को शाभमल िकया ौया हो;
ि. ्या बालक समझदारीपू्ध अध्मान बनान म समथध ह; और
ठ. ऐसा कोई अ्य त्य या परर् थणत ्ीस ्यायालय
सुसंौत समझ
(2) ्यायालय बालक क क्या् तथा माता-वपता म स ियक
की आप का िावषधक पुनविधलोकन करान तथा तस ्यायालय क
समष ााइल करन क भलए माता-वपता को णनदो श दौा
II. बालक के अधिमान का अििारण
(1) इस अध्णनयम क अ्ीन िकसी ियोीन क भलए बालक क
अध्मान का अि्ार् करन म, ्यायालय णनमनभलि त
बातं को ्यान म र ौा, अथाधत आ :-
68
क. ्या बालक ऐसी पररप्ि आयु का ह ीो िक
समझदारीपू्ध अध्मान बना सक :
. िह सीमा ्ीस तक बालक ्यायालय की कायधिाटहयं
क आस-पास की परर् थणतयं को समझ सकता ह;
ौ. ्या बालक का कोई समझदारीप्
ू ध अध्मान
अभभ्य्त करन का कोई पूिि
ध ृ त ह;
घ. ्या बालक मिारा इस िकार अभभ्य्त कोई अध्मान
इस त्य पर आ्ाररत था िक बालक न हाल ही म
माता अथिा वपता म स िकसी क साथ णनयत स
अध्क समय बबताया ह; और
ङ. ्या बालक तस अध्मान क, ीो तसन अभभ्य्त
िकया ह, परर्ामं को समझता ह
(2) बालक स भििाताध करन म, ्यायालय, यटद िह
परर् थणतिश ठीक समझता ह :-
क. इस बात का विणनचय कर सकता ह िक तस समय,
ीब ्यायालय बालक स भििाताध करौा, कडन
तप् थत होौा और यटद माता-वपता की या तनक
विध्क िणतणनध्यं की अनुप् थणत म, आियक हो
तो अकल बालक स बात कर सकौा; या
. बालक मनोधचिकसक, म्य थ या ्यायालय मिारा
पहचान िकए ौए िकसी अ्य विणनटदध कि ्य््त की
तप् थणत क भलए अनुरो् कर सकौा
(3) ्यायालय बालक क साथ भििाताध का अभभल बनाएौा
और ऐस अभभल को, यटद ्यायालय यह अि्ाररत
करता ह िक तस ौोपनीय र ना बालक क भलए
क्या्कर ह, तो तस ौोपनीय बनाए र सकौा
(4) ्यायालय या कोई अ्य ्य््त, िकसी भी परर् थणत म,
बालक स िकसी विषय क संबं् म अपन विचार ्य्त
करन की अपषा नहीं करौा अथिा तस बा्य नहीं करौा
69
बालक के अभभलेखं तक पहुंच
III.
(1) ीब तक ्यायालय क आदश या विध् क िकसी अ्य
तपबं् मिारा िणतबंध्त न िकया ीाए, माता-वपता म स
िकसी को भी, इस बात पर ्यान टदए बबना िक ऐस वपता
अथिा माता क पास बालक की अभभरषा ह या नहीं, अपन
अिा्तिय बालक क बार म िकसी सच
ू ना तक, ्ीसक
अंतौधत धचिकसा, दं त और विमयालय संबं्ी अभभल भी
हं, पहुंच बनान स िंधचत नहीं िकया ीाएौा
(2) ्यायालय, आपिाटदक परर् थणतयं म, सुन ीान का
अिसर टदए ीान क पचात आ, यह आदश कर सकौा िक
माता अथिा वपता स ऐसी विणनटदध कि सच
ू ना वि्ाररत र ी
ीाए
(3) धचिकसीय अभभल ं की दशा म, यटद ्यायालय ठीक
समझता ह तो िह माता अथिा वपता की ऐसी पहुंच बनान
स इंकार कर सकौा, यटद बालक का तपचार करन िाला
धचिकसक या बाल मनोधचिकसक इस बात का भलि त
कथन करता ह िक ऐसी िकसी पहुंच स, ्ीसकी माता
अथिा वपता अनुरो् कर रही/रहा ह, बालक अथिा िकसी
अ्य ्य््त को अयध्क अपहाणन काररत होौी
IV. वपतामह-वपतामही, मातामह-मातामही ्िारा पालन प षण का
समय बालक के अभभलेखं तक पहुंच
(1) िकसी बालक का वपतामह या वपतामही या मातामह या
मातामही ्यायालय को णनमनभलि त म स एक या अध्क
परर् थणतयं म वपतामह-वपतामही, मातामह-मातामही मिारा
पालन पोष् क समय क बार म आदश क भलए आिदन
कर सकौा, अथाधत आ :-
क. बालक क माता-वपता का वििाह-वि्छद हो ौया ह या ि
अलौ हो ौए हं या ्यायालय क समष वििाह-वि्छद या
पथ
ृ ्कर् की कायधिाटहयां लंबबत हं; या
70
. बालक की माता अथिा वपता, ीो मातामह-मातामही या
वपतामह-वपतामही की पुरी का पुर ह, की मृ यु हो ौई ह; या
ौ. वपतामह या वपतामही या मातामह या मातामही न, पूिध म,
बालक क भलए अभभरषा संबं्ी थावपत िातािर् िदान िकया
था, चाह वपतामह या वपतामही या मातामह या मातामही को
्यायालय क आदश क अ्ीन अभभरषा दी ौई हो अथिा नहीं;
(2) वपतामह-वपतामही या मातामह-मातामही मिारा पालन-पोष् क
संबं् म आदश माता-वपता, दोनं, को समयकआ सच
ू ना दन और
सन
ु िाई का अिसर टदए ीान क पचात आ ही ीारी िकया ीा
सकौा
(3) वपतामह-वपतामही या मातामह-मातामही मिारा पालन-पोष्
करन क संबं् म आदश ीारी करन क पि
ू ध, ्यायालय मिारा इस
बात का अि्ार् करौा िक ्या ऐसा आदश बालक क क्या्
क भलए अपषषत ह
(,) इस भाौ क अ्ीन बालक क क्या् का अि्ार् करन म,
्यायालय णनमनभलि त पर विचार करौा, अथाधत आ :-
क. वपतामह-वपतामही या मातामह-मातामही और बालक क
बीच मडीूदा ्यार, नह ओर अ्य भािनामक संबं्;
. वपतामह-वपतामही या मातामह-मातामही का मानभसक
और शारीररक िा ्य;
ौ. बालक का समझदारीपू्ध अध्मान;
घ. बालक क वपतामह-वपतामही या मातामह-मातामही या
बालक क वपतामह-वपतामही, मातामह-मातामही क बीच णनकि की
नातदारी को िोसाटहत करन क भलए, द्ु यधिहार या तपषा की
दशा क भसिाय, वपतामह-वपतामही या मातामह या मातामही की
इ्छा;
ङ. बालक क क्या् स सुसंौत कोई अ्य कारक
V. म्यतथता
(1) अ्याय 2क क अ्ीन म्य थता का त य पषकारं को
बालक क क्या् क बार म िकसी सहमणत पर पहुंचन म तथा
बालक क क्या् को सुणन्चत करन क भलए पर ा बनान या
तस ििया््ित करन म सहायता िदान करना
(2) ीहां अ्याय 2क क अ्ीन की कायधिाटहयं म अविणन्चत
71
मु हं, िहां ्यायालय पषकारं को म्य थता म भाौ लन, मु ं
को सल
ु झान तथा तसक बाद ्यायालय म अनम
ु ोदन की ई्सा
करन का णनदश द सकौा
(3) म्य थ की भूभमका--
क. पषकारं को सहयोौ करन क भलए िोसाटहत करन की
ह;
. माता-वपता को बालक क क्या् क िणत तनक
ततरदाणयिं और कतध्यं को समझन म सहायता िदान करन
की ह; और
ौ. यटद संय्
ु त अभभरषा का आदश ीारी िकए ीान की
संभािना ह, तो पषकारं क साथ, पर पर िीकायध रीणत म
संबंध्त मु ं को, ्ीनक अंतौधत संय्
ु त पालन-पोष् समय और
विणन्चय करन संबं्ी स्ममभलत ततरदाणयि भी हं िक्तु तन
तक सीभमत नहीं ह, सुलझान क भलए कायध करन की ह
(,) यटद दोनं म स कोई पषकार ्यायालय को अ्याय 2क क
अ्ीन ीारी िकए ौए िकसी आदश को तपांतररत करन क भलए
आिदन करता ह, तो ्यायालय पषकारं को, ऐस िकसी ठहराि
पर पहुंचन क भलए ीो संबंध्त पषकारं क भलए कायधकर हो,
म्य थता म भाौ लन का णनदश द सकौा
VI. तथान-पररितटन
(1) वपता अथिा माता, ्ीसका थान-पररितधन का आशय ह,
दस
ू र ीनक अथाधत आ माता की दशा म वपता और वपता की
दशा म माता को तीस टदन की अधरम सूचना दौी/दौा
(2) यटद थान-पररितधन का विरो् िकया ीाता ह तो
्यायालय को इस बात का अि्ार् करना चाटहए िक
्या ि तावित थान-पररितधन बालक क भलए क्या्कर
ह
(3) थान-पररितधन क मामलं म, बालक क क्या् का
अि्ार् करन म, ्यायालय णनमनभलि त कारकं को
्यान म र ौा, अथाधत आ :-
क. ्या थान-पररितधन विध्सममत ियोीन क भलए ह;
72
. थान-पररितधन की ई्सा करन या तनका विरो् करन
क माता-वपता म स ियक क कार्;
ौ. बालक और माता-वपता म स ियक क बीच नातदारी
की ्िाभलिी;
घ. बालक क थान-पररितधन न करन िाल माता अथिा
वपता क साथ भािी संपकध की सीमा और ्िाभलिी पर
थान-पररितधन का िभाि:
ङ. िह डिरी, ्ीस तक थान-पररितधन करन िाल माता
अथिा वपता तथा बालक क ीीिन म थान- पररितधन
मिारा आधथधक प स, भािनामक प स और शषषक
प स िवृ हो सकती ह;
च. थान-पररितधन न करन िाल माता अथिा वपता और
बालक क बीच, मुलाकात क तपयु्त िबं्ं क मा्यम
स, नातदारी बनाए र न की संभा्यता
VII. वितन्चय करना
1- ्यायालय मिारा अ्याय 2क क अ्ीन ्यायालय
की अभभरषा क संबं् म िकए ौए आदश म अ्य मु ं क
साथ-साथ णनमनभलि त मु ं को पकि प स ्यान म र ा
ीाएौा :-
क. बालक की ्ाभमधक भशषा, तपासना थलं पर ीाना,
्ाभमधक समारोह करना और संबंध्त मामल
. विमयालय, विषय, कषा, पा्यिम और ्यश
ू न का चयन
और बालक को थानीय षर स बाहर िकसी विशष
विमयालय टरप पर ीाना ह अथिा नहीं;
ौ. ्या बालक को अ पताल म भती कराया ीाना ह और
्या बालक की कोई अनापातकालीन श्य िििया कराई
ीानी ह;
घ. बालक क टहतं और झान को ्यान म र त हुए
73
पा्यतर ौणतविध्यं का चयन; और
ङ. बालक अपनी छुटियां कहां ्यतीत करौा और ऐस मामलं
म, ीहां आियक हो, िह ीानकारी ीो माता-वपता म स
एक न दस
ू र को दनी ह
(2) ्यायालय या तो विणनटदध कि विणनचय कर सकता ह
(तदाहर्ाथध, बालक िकसी विशष विमयालय म ििश लौा) या
िकसी मु क बार म विणनचय करन का ततरदाणयि माता-वपता
म स िकसी एक को या संय्
ु त प स दोनं को आबंटित कर
सकता ह
VIII. पालनप षण य िना
(1) पालनपोष् योीना क त य णनमनभलि त हं -
(क) माता-वपता क हाणनकर झौ पर बालक क िभाि को
कम करना; और
( ) माता-वपता को, ्यायालय क ह तषप का अिलंब
भलए बबना, पालनपोष् योीना म सहमणत क मा्यम स बालक
क पालन पोष् क ततरदाणयि को बांिन क भलए पर पर प स
सहमत होन क भलए िोसाटहत करना
(2) पालनपोष् योीना तयार करत समय, माता-वपता को यह
सणु न्चत करना चाटहए िक यह बालक क क्या् क भलए ह
और यह िक -
क. बालक की टदन-िणतटदन की आियकताएं पूरी हो ीाएं;
. ऐसी कोई विशष आियकता, ीो बालक की हो सकती
ह, परू ी हो ीाए;
ौ. बालक क पास माता-वपता म स ियक क साथ पयाध्त
समय बबतान क भलए हो ्ीसस िक िह ीहां तक संभि हो, तनम
स ियक को ीान सक;
घ. बालक की भशषा, दणनक णनयकमध और कुिुमब और
भमरं क साथ संबं् म कम स कम वि्न प ; और
ङ. एक पतक
ृ ौह
ृ स दस
ू र पतक
ृ ौह
ृ म पारौमन सुरषषत
और िभािी प स िकया ीाए
74
(3) पालनपोष् योीना णनमनभलि त म स एक या अध्क
क संबं् म हो सकती ह, अथाधत आ:-
क. बालक को माता या वपता या माता-वपता िकसक साथ
रहना ह;
. िह समय ीो, बालक को माता-वपता म स दस
ू र क
साथ बबताना ह;
ौ. बालक क भलए पालनपोष् ततरदाणयि का आबंिन;
घ. माता-वपता न एक-दस
ू र क साथ पालनपोष् संबं्ी
ततरदाणयि स संबंध्त विणनचयं क बार म परामशध करन की
रीणत;
ङ. बालक मिारा अ्य ्य््तयं क साथ संिाद;
च. बालक का भर्पोष्;
छ. योीना की शतं और िितधन क बार म वििादं क
समा्ान क भलए ियोौ की ीान िाली िििया;
ी. बालक या योीना क पषकारं की पररितधनशील
आियकताओं या परर् थणतयं क ्यान म र त हुए योीना म
पररितधन करन क भलए ियोौ की ीान िाली िििया;
झ. बालक की द र , तसक क्या् या विकास का कोई
पहलू या बालक क पालनपोष् संबं्ी ततरदाणयि का कोई अ्य
पहलू
(,) पालनपोष् योीना ि््छक होनी चाटहए और माता-वपता म
स ियक मिारा सोचसमझ कर बनाई ौई होनी चाटहए
(5) ्यायालय पालनपोष् योीना म माता-वपता क बीच
िणतबबंबबत ततरदाणयिं क विभाीन म सा्ार्तया तब तक
ह तषप नहीं करौा ीब तक ि ियषतः असामयाप्
ू ध न हं
(6) यटद आरं भभक पालनपोष् योीना म कणतपय मु नहीं आत
हं तो माता-वपता विणनचय करन संबं्ी नए विषयं को शाभमल
करन क भलए योीना क णनबं्नं को तपांतररत करन हतु
्यायालय म ीा सकत हं
75
IX. मुलाकात
(1) ्यायालय मिारा मुलाकात क संबं् म िकए ौए
आदश स यह सणु न्चत होना चाटहए िक -
क. बालक का माता-वपता म स दोनं क साथ, ीब
समधु चत हो, और वि ताररत कुिुमब और भमरं क साथ भी
बारं बार और णनरं तर संपकध रह; और
. माता-वपता म स दोनं को बालक क साथ अ्छा समय
बबतान का समान अिसर भमल, ्ीसक अंतौधत छुटियं और
दीघाधिकाश भी शाभमल हं
(2) ्यायालय, मल
ु ाकात क अध्कारं और समय का
अि्ार् करन क ियोीन क भलए णनमनभलि त बातं को विचार
म र सकौा, अथाधत आ:-
क. बालक की आयु;
. पतक
ृ ौह
ृ ं क बीच की दरू ी;
ौ. कोई छुटियां, ्ीसक अंतौधत स्ताहांत, यडहार और
्ाभमधक अिसर तथा विमयालय क दीघाधिकाश भी आत हं; और
घ. माता-वपता की कोई अ्य िणतब ताएं, ्ीनस तनक
अपन बालक क साथ अ्छा समय बबतान संबं्ी तनक साम्यध
पर िणतकूल िभाि प सकता ह
(3) ्यायालय मुलाकात संबं्ी अध्कारं का ियोौ करन
का समय, तसकी रीणत और तसक थान को विणन्चत कर
सकता ह और ऐस िकसी मल
ु ाकात संबं्ी अध्कारं की योीना
को विचार म ल सकता ह ीो माता-वपता मिारा ्यायालय क
समष ि तुत की ौई हो
(,) ्यायालय माता या वपता को मंीरू िकए ौए मल
ु ाकात
संबं्ी अध्कारं को सीभमत, णनलंबबत या अ्यथा णनबंध्त कर
सकौा, यटद ्यायालय क पास यह वििास करन का यु््तयु्त
76
आ्ार ह िक परर् थणतयं क कार् ऐसा णनबं्न बालक क
क्या् क भलए आियक हो ौया ह या ्यायालय मिारा इस
संबं् म अध्रोवपत िकसी कतध्य का माता-वपता म स िकसी एक
मिारा ौंभीर या बार-बार त्लंघन िकया ौया ह
......................
77