Lok Sabha Debates
Combined Discussion On The Repealing And Amending Bill, 2017 And Repealing And ... on 19 December, 2017
Sixteenth Loksabha an> Title: Combined discussion on the Repealing and Amending Bill, 2017 and Repealing and Amending (Second) Bill, 2017 (Discussion Concluded and Bill Passed).
HON. CHAIRPERSON : Now we will take up Item Nos. 24 and 25 together.
विधि और न्याय मंत्री तथा इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री (श्री रवि शंकर प्रसाद): मैं प्रस्ताव करता हूं कि -
“कतिपय अधिनियमितियों का निरसन करने और कतिपय अन्य अधिनियमितियों का संशोधन करने वाले विधेयक पर विचार किया जाए। ” और “कतिपय अधिनियमितियों का निरसन करने और कतिपय अन्य अधिनियमितियों का संशोधन करने वाले विधेयक पर विचार किया जाए। ” आदरणीय उपसभापति जी, हम यहां पर दो महत्वपूर्ण कानून एक साथ ले रहे हैं। इसके माध्यम से हम बड़ी संख्या में पुराने कानूनों को रिपील कर रहे हैं। आपकी जानकारी के लिए, आप तो बड़े अनुभवी रहे हैं, स्वयं भी आपका जीवन रहा है। भारतवऐाऩ में अभी भी ऐसे कानून हैं, जो अंग्रेजों के समय के हैं। कुछ कानूनों की सूची पर मैं चर्चा करूंगा। वऐाऩ 1950 में पुराने कानूनों में 1929 कानून को रिपील किया था। समय-समय पर यह काम होता है। वऐाऩ 2004 में श्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में अंतिम बार हुआ था। उसके बाद से यह काम नहीं हुआ। माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी की अगुवाई में इस सरकार के आने के बाद यह प्रयास शुरू हुआ कि हम पुराने कानूनों को समाप्त करेंगे। इसके लिए दो सदस्यों की एक कमेटी बनायी गई, जिसने सारे कानूनों का विशलेऐाण किया, परखा, जांचा और संबंधित विभाग, प्रदेश और केंद्र से बातचीत की। उसके बाद ऐसा पाया गया कि 1824 कानूनों को रिपील करने की आवश्यकता है। हमें इस सदन को बताते हुए बहुत हऐाऩ हो रहा है कि अब तक श्री नरेद्र मोदी की अगुवाई में हम लोग 1183 कानूनों को रिपील कर चुके हैं, पिछले तीन वऐााॉ में यह एक बहुत बड़ी उपलब्धि है, यह इस सदन को बताना बहुत ही आवश्यक है। तीन प्रकार के बिल हम रिपील करते हैं। एक सब्सटेंशियल एक्ट है, जो आजादी के पहले के और आजादी के बाद के हैं, जिनकी उपयोगिता अब नहीं है।
दूसरा अमेंडिंग एक्ट, जिसके अमेडमेंट के कारण जो संशोधन होता है, वह प्रिंसिपल एक्ट में इनक्लूड हो जाता है तो अमेंडिंग एक्ट की आवश्यकता नहीं रहती।
तीसरा जो अंग्रेजों के समय के बहुत से आार्डिनेंस हैं, उनकी समाप्ति के कारण है। आज के दिन ये दो बिल हैं, इनको हमें समय-समय पर इसलिए लाना पड़ा कि हमें संबंधित मंत्रालय से चर्चा करनी पड़ती है और जब उनकी अनुशंसा आ जाती है कि हमें अब इस बिल की आवश्यकता नहीं है तो फिर हमें यह कार्रवाई करनी पड़ती है। एक बिल हम जनवरी, 2017 में लाये थे और दूसरा अगस्त, 2017 में लाये थे। 105 कानून हम पहले बिल से रिपील कर रहे हैं और 140 कानून दूसरे बिल से रिपील कर रहे हैं। मैं इस सदन को बताना चाहूंगा कि कैसे-कैसे पुराने बिल अभी तक चल रहे थे। कास्ट डिसएबिलिटी रिमूवल एक्ट, 1850, मद्रास अनक्वारंटेड ऑफिसर्स एक्ट, 1857, कलकत्ता पायलट्स एक्ट, 1859, मैंने मालूम करने की कोशिश की कि कलकत्ता पायलट्स एक्ट क्या है तो बड़े-बड़े लोगों के आगे गाड़ी में जो पायलट बैठता था, उसके लिए अंग्रेजों ने कानून बनाया था। उसके बाद गवर्नमैन्ट सील्स एक्ट, 1862, ड्रामेटिक परफॉर्मेंस एक्ट, 1876, हैकने कैरिज एक्ट,1879, हमने जानने की कोशिश की कि हैकने कैरिज एक्ट क्या है। कल्याण बाबू को याद होगा कि कलकत्ता में पुराने समय में जब कैरिज चलते थे तो उन कैरिज को मैनेज करने के लिए हेकने कैरिज एक्ट बनाया गया था। अब इसकी आवश्यकता नहीं है, लेकिन ये कानून आज भी हैं।
सभापति जी, अंग्रेजों के समय का एक बहुत ही रोचक कानून है, माननीय अनंत कुमार जी उसे रुचि से सुनेंगे, प्रिवेंशन ऑफ सैडिशियस मीटिंग एक्ट, 1911, अंग्रेजों ने एक कानून बनाया था कि देशद्रोही जो मीटिंग्स करेंगे, उन्हें रोकने के लिए यह कानून बनाया गया था। यह एक पीड़ा की बात है कि ये सब कानून आज भी स्टेच्यूट बुक पर हैं, इनको समाप्त करने की आवश्यकता है।...(व्यवधान)
श्री तथागत सत्पथी (धेन्कानल) : इसे रखिये, काम आयेगा।...(व्यवधान)
श्री रवि शंकर प्रसाद : तथागत जी के अनुभव का मैं बड़ा सम्मान करता हूं, चूंकि यह बात उन्होंने सदन में कही है, उसमें व्यंग भी है, लेकिन मैं एक बात कहना चाहता हूं कि इस सरकार में प्रधान मंत्री जी, गृह मंत्री, श्री राजनाथ सिंह, विदेश मंत्री, श्रीमती सुऐामा स्वराज और वित्त मंत्री, श्री अरुण जेटली, माननीय मंत्री, श्री अनंत कुमार और रविशंकर प्रसाद तथा कई लोग ऐसे हैं, जिन्होंने इमरजेन्सी का विरोध किया था, जेल गये थे, लाठी खाई थी, लेकिन विरोध किया था। उसमें श्री थावर चंद जी तथा संतोऐा गंगवार जी भी हैं। इसमें तीन चीजें इनवोल्व थीं, प्रैस की आजादी, व्यक्तिगत आजादी और न्यायपालिका की आजादी। आप क्षमा करें, हमारी सरकार में वरिऐठ मंत्री बड़ी संख्या में हैं, जो आजादी के लिए संघऐाऩ कर चुके हैं, जेल जा चुके हैं और लाठी खा चुके हैं। इसलिए आपकी यह अपेक्षा कि यह कानून हमारे काम आयेगा, हम उस पर विश्वास नहीं करते हैं, लोकतंत्र में हमारी पूरी आस्था है, यह बहुत विनम्रता से हम आपको कहना चाहते हैं। इमरजेन्सी लगाने वाले कौन थे, यह हमें बताने की जरूरत नहीं है, हम अपने बाकी मित्रों के ऊपर छोड़ देते हैं। इमरजेन्सी की वह कहानी कौन लाये थे, कौन क्या कह रहे थे, यह अनुशासन पर्व है और क्या-क्या बातें हुई थीं,...(व्यवधान) हमारा केवल यह कहना है कि ये कानून इस प्रकार से हैं।
सभापति महोदय, बहुत से कानून ऐसे भी होते हैं, जो आज के संविधान के अनुसार राज्य की सूची में हैं। राज्य की सूची में जो कानून होते हैं, उसमें हम राज्य को आग्रह करते हैं कि आप इस कानून को रिपील करें क्योंकि हम सिर्फ भारत सरकार में ही सुधार का बदलाव नहीं कर रहे हैं, प्रदेशों में भी कर रहे हैं। हमें इस सदन को सूचना देते हुए बहुत ही संतोऐा हो रहा है कि हमने अपने विभाग की ओर से कई प्रदेशों को लिखा था। उसमें मिजोरम, मध्य प्रदेश, केरल, तमिलनाडु, गोवा, राजस्थान एवं आसाम ने अपने कई एप्रोप्रिएशन बिलों को भी रिपील किया है और आगे की कार्यवाही जारी है।
महोदय, मैं इस सदन को बहुत ही विनम्रता से बताना चाहूंगा कि this is a work in progress and this shows the commitment of Narendra Modi Government. If we are for reform, then we want to have reform in all the spheres of life and repealing old Acts which have become unnecessary burden on our Statute Books, which have outlived their utility and which have no relevance also need to go. Therefore, it is a progressive pro-reform commitment.
अंतिम आग्रह मैं सदन को बताना चाहूंगा कि हमारे माननीय प्रधान मंत्री जी ने चुनाव अभियान में कहा था कि प्रधान मंत्री बनने के बाद मैं एक पुराना कानून रोज समाप्त करूंगा। आज मुझे यह बताते हुए बहुत संतोऐा हो रहा है कि अभी तक हम लोगों ने 1183 कानूनों को रिपील कर दिया है। आज हम लोग 245 और करने आए हैं और आगे की प्रक्रिया लागू करेंगे। मैं उम्मीद करूंगा कि यह पूरा सदन बहुत ही उत्साह के भाव से इसका समर्थन करेगा।
सभापति जी, अपने इन्हीं आरंभिक शब्दों के साथ I commend the Bills for the consideration of the House.
HON. CHAIRPERSON: Motions moved:
“That the Bill to repeal certain enactments and to amend certain other enactments, be taken into consideration.” “That the Bill to repeal certain enactments and to amend certain other enactments, be taken into consideration.” SHRIMATI MEENAKASHI LEKHI (NEW DELHI): Hon. Chairman Sir, swachhta is a virtue which we all know and every house needs Swachh Abhiyan. Unfortunately, for this House, there had been no swachhta and Swachh Abhiyan for many years.
In 2014, when the present Government took over, it undertook the exercise which was long pending and every now and then, there are complaints of ‘U’ turn. The complaint of ‘U’ turn is virtually true in this case because then, back in 1998 and now after 2014, the Swachch Abhiyan of this House has been carried out. Otherwise, the political system was suffering from policy paralysis which was so evident that even the very basic and necessary clean-up acts were not getting done. Hence in 2014, the Government brought Amendment and Repealing Act, 2014. In 2015, the Government brought out two Acts. In 2016, again it brought out Acts and in 2017, our learned colleague and Minister, Shri Ravi Shankar Prasad brought this Act on 7th February, 2017.
The Act seeks to get rid of archaic laws which have stayed on the Table of the House and in the law books only to cause confusion to many legislators and other researchers. The Law Commission, in 2014, recommended repealing and amendment of certain Acts which were of such a nature. Actually, the Law Commission prepared four Reports in 2014, namely, 248th ,249th, 250th and 251st Reports, which sought to get rid of old statutes which were archaic in nature. The Ramanujam Committee which was set up by the present Government identified many Central Acts which had to be repealed and 2781 Central Acts had turned irrelevant which had existed on 15th October, 2014. Out of these, repeal of 1741 Central Acts was recommended and 340 of these Central Acts were on State subjects where respective State Legislatures had to pass their respective laws. About 1741 Acts could be repealed and in 2014, about 36 Acts in the first phase were repealed. Under the second Bill, the Government repealed about 90 such Acts and two Amending laws.
Then, the whole matter was sent to a Select Committee. It suggested that there should be an automatic repeal clause because there are many Bills which are of repeat nature, like the Appropriation Bills, and that all those Bills should actually carry a clause within that Act. When the consequent changes are incorporated in the Principal Act, these laws should automatically have a sunset clause. Based on that Report of the Select Committee a further amendment to Section 6 (a) of the General Clauses Act was also suggested. That Report said that there should be an automatic repeal clause in all the Bills which are going to be changed.
It further noted all the repeal actions should happen every five years. This has not happened because we are carrying out the Swachhta Abhiyan every year or may be twice or thrice in a year to get rid of all such Acts. Around 125 laws have been repealed. The 2015 Bill repealed about 295 laws; Appropriation (Repeal) Bill repealed about 758 laws. Once these two Bills are passed, the present ones, a close to 1178 Acts would be made redundant.
Ordinances are often treated as laws which have also been very predominantly described. These ordinances replace a statute in the absence of a law on a particular subject. For example, the Currency Ordinance of 1940 was finally replaced by Coinage Act of 2011. In the absence of a specific law, these ordinances remain laws. In the present circumstances, as ordinances do not have a permanent nature under the Constitution, it is also in violation of the Constitution when we keep repeating the ordinances and each ordinance finally needs to be replaced by an enactment. In the present Bill also, certain ordinances are being got rid of.
These colonial practices need to finally be removed from the present Parliament and all ordinances should be replaced soon by enactments. The fact is that the legal definition of an ordinance, as per the Constitution, mandates that it will last only for six weeks after the re-assembly of the Parliament or the Session. So, under those circumstances, since they do not possess permanent nature, we have to think aloud on how this needs to be worked out.
Our learned colleague and Minister, Shri Ravi Shankar Prasad, has already given a brief about the number of enactments. On the minus side, I will only say that this Bill seeks to repeal about 104 Acts. One law has a partial amendment and other three laws have minor amendments. They are all attached with the Schedule. Schedule I describes all the amending Acts and repealing Acts.
With these words, I support the Swachhta Abhiyan which is being carried out now. It was started by our hon. Prime Minister. It is swachhta in every sense of the term. It is a house keeping exercise for this House as well. Thank you very much.
SHRI KALYAN BANERJEE (SREERAMPUR): Hon. Chairman, Sir, today these two Bills, the Repealing and Amending Bills, 2017 have been brought forward. They seek to repeal the statutes given in the Schedule. Our hon. Minister of Law is a very erudite lawyer also.
If you repeal it or not, it is not significant because the doctrine of destitute applies. In a number of cases, the Supreme Court has declared a number of Acts as false within the category of the doctrine of destitute.
The doctrine of destitute means that if a Government does not take any action under the Act for decades together, then it is said that this Act is nothing but false under the doctrine of destitute. Therefore, I agree that all these Acts which have been referred to here have no relevanc today. So it is a good thing to take them away from the Statute Book so that nobody will remain under any confusion. It is correct that since 2014 a good number of statutes have been repealed by your Government.
But today’s problem lies somewhere else. Just simply repealing the Acts will help in providing speedy justice. Today we are talking about Digital India. But you could not provide WiFi facility even in the Supreme Court of India or in any single High Court, leave aside the District Courts and other courts. If a lawyer is having SCC app or any other journals online, in the absence of WiFi facility in the court, he cannot use it. The hon. Minister was a practising lawyer before he became the Law Minister. So he knows it very well that if a point comes to his mind while arguing a case and he knows that there is a judgement regarding the matter, facilities are available today to find out that particular judgement. But if there is no infrastructure in the court, then it does not help the lawyers in any way. If I have a private mobile connection like Vodafone etc., once I enter the court room, it does not work there because the signal is not available. But, if WiFi facility is provided in the courts, it would really help the lawyers. So, I request the hon. Minister to pay attention to this aspect.
Sir, later on, when the time comes I will speak about other things also. But the point is, still there are many vacancies in various courts in our country. The Minister may not like it, but I do not mind. He may give me an answer that कल्याण जी, हमने तो हाई कोर्ट में छः अप्वायंटमेंट्स दे दिए। You may be right. आठ जजों की रिटायरमेंट भी हो गयी। But at the same time, you have not taken into consideration that within three months some judges have retired also. एक स्टोरी थी कि पानी है, लेकिन, उसके नीचे ंहोल है। पानी डालते रहते हैं, पर होल से वह बाहर निकल जाता है। वह ही हो रहा है।
Fill up these vacancies. I will not talk much. Incidentally, you have raised this issue of Emergency. I have no interest in talking about Emergency. You had gone to jail. I had to leave my education too. … (Interruptions)
SHRI KALYAN BANERJEE : Please, have some patience.… (Interruptions) Even not at the age 18 years, I had to do some employment leaving aside my education. उसी वजह से मैं वकील बन गया; नहीं तो वकील नहीं बनता, हो सकता था कि मैं कुछ और होता। सभी लोग इमरजेंसी के इम्पैक्ट्स को जानते हैं, उसमें कोई नयी बात नहीं है, सिर्फ उसी साइड ही नहीं, बल्कि बहुत से आदमी अफैक्टेड हुए थे। That is an old story. Now, the question is this. Is there any internal Emergency existing today in India without declaring Emergency under Constitution? That is the question. The question is not about the effects of Emergency. The question is whether there is any internal Emergency going on or not. If you are an Opposition party, your space would be in jail. The whole of India is under threat and under pressure. That is the kind of Emergency which is going on in India without declaring Emergency under the Constitution. There was an Emergency declared under the Constitution. Now, there is an undeclared Emergency. This is the basic distinction between 1977 and post 2014 in this country. … (Interruptions) Please, have some patience. … (Interruptions) You are talking about corruption or no corruption or who is corrupt. Why are you not commencing the trial? If one politician has committed any corruption, why has the trial not yet been commenced for three long years? Can you give this answer? How can the CBI officers enter into the residence of an Odisha High Court judge in midnight? Can you give the answer? All Odisha lawyers have gone on strike. … (Interruptions) Therefore, do not say as to what you or your CBI is doing. … (Interruptions) Mr. Law Minister, with due respect, I am telling you this and you can take this information. It was just before five or seven days back, in the Court of Justice … * – I am not taking the names – one gentleman in a party, who is lending support to your party … (Interruptions)
THE MINISTER OF LAW AND JUSTICE AND MINISTER OF ELECTRONICS AND INFORMATION TECHNOLOGY (SHRI RAVI SHANKAR PRASAD): Sir, hon. Member is a very eminent lawyer himself apart from me. I hope, he knows very well that court proceedings, what happened in the Supreme Court or any other court, should not be referred here. … (Interruptions)
SHRI KALYAN BANERJEE: No, I have not referred it.… (Interruptions)
HON. CHAIRPERSON: No, leave it and continue.
… (Interruptions)
SHRI KALYAN BANERJEE : Sir, the person has been discharged by the Criminal Court where CBI initiated the proceedings. CBI did not prefer any appeal but the Supreme Court has asked the question as to why CBI has not preferred any appeal. They asked for the report. This is what the CBI is doing. … (Interruptions) You do not understand what I am talking. You will not understand it. … (Interruptions)
HON. CHAIRPERSON: It would not go on record. Please sit down, Madam.
… (Interruptions)…* SHRI KALYAN BANERJEE: Sir, I have not invited this discussion in respect of Emergency. The Law Minister has invited discussion in respect of emergency. I have to speak on that.
HON. CHAIRPERSON : Banerjee ji, please come to the point.
SHRI KALYAN BANERJEE : Sir, one after another, I am coming to the point. It is not that I am not coming; I am doing my job. … (Interruptions) Kindly allow me to speak.
HON. CHAIRPERSON: Madam, please sit down. What is this?
… (Interruptions)
HON. CHAIRPERSON: Madam, please sit down.
… (Interruptions)
SHRI KALYAN BANERJEE : I have, at least, crossed that stage to tolerate any passing comments hither and thither. That does not matter to me. Remaining for 35 years in a profession, I do not care about any passing comments whoever makes it, whether it is having sense or no sense at all. … (Interruptions)
So far as the Repealing and Amending Bill, 2017 is concerned, I have nothing to say. It is a good step. But the hon. Law Minister may kindly concentrate on the problems where I have said about this. At least, being a Law Minister, kindly introduce now the infrastructures. Earlier, you were there in the telecommunications. Now, kindly also make arrangement of WiFi in the Supreme Court and in all the High Courts and even in the District courts. … (Interruptions)
Thank you, Sir.
HON. CHAIRPERSON: His speech is already over. Please sit down.
… (Interruptions)
SHRIMATI MEENAKASHI LEKHI : Sir, this is the time allocated not for ‘Zero Hour’; this is the time allocated for discussion on a Bill. … (Interruptions)
HON. CHAIRPERSON: It is already over.
… (Interruptions)
SHRI PINAKI MISRA (PURI): Hon. Chairman, Sir, I am grateful to you for having given the Biju Janata Dal an opportunity to place its views on these two important Bills that have been brought to the House by the hon. Law Minister. The hon. Prime Minister in 2014 had given a clarion call for cooperative federalism which essentially means a partnership between the Centre and the various State Governments in this country in a federal polity. I think the Treasury Benches will be the first to concede that ours is the one Chief Minister in this country who has actually participated in the spirit of cooperative federalism wholeheartedly, despite a very bitterly adversarial State unit of the BJP, despite certain actions by the Central Government which have hurt and affected the interest of Odisha direly, and very very adversely, the hon. Chief Minister has always directed us in Parliament to support the Government when beneficial pieces of legislation are brought to the House. In that spirit, today, I rise on behalf of the Biju Janata Dal to support the Government in the passage of these two Bills which have been brought by the hon. Minister.
Every Government which does good work, according to my Chief Minister, ought to be praised for the good work. We find that 1301 obsolete laws could be abolished in 65 years before this Government came in. This Government, in a passage of three years, has already attempted or rather done away with 1824 obsolete laws. That is a heartening feature. We hope that this Government will accelerate the process even faster.
There are still far too many obsolete laws on the law books which unfortunately continue to clog and clutter our system.
Shri Kalyan Banerjee spoke about the Roman principle of "desituede". Now, that Roman principle of desituede unfortunately, I do not think will stricto sensu apply to India because we follow the UK system. We follow a system of enactment and repeal. That is a system where there is a legislature, then this system of desituede really ought not to be resorted to, except perhaps as a last resort which the hon. Supreme Court has said. But that is not an advisable thing because then that leaves it to the courts to decide which law enacted by the Parliament ought to be applied or not applied, and which law is in existence or not in existence. It is the right of Parliament to enact laws and to repeal them. So, therefore, we have already ceded far too much legislative territory to the courts. Now, to allow the courts to decide which laws must remain on the statute books and which laws apparently do not remain on the statute books ought not to be allowed. Therefore, I commend the Government for having taken a positive step of repealing. At the same time, I would request the Government that today there are thousands of laws which require active repealment. Perhaps, going forward the Government must follow the UK’s system which is the system of automatic repeal or the sunset clause in which case you will not have to come to Parliament everytime you wish to repeal these laws. There can be an automatic sunset clause. Once the law has served its purpose, it is repealed.
The other thing we find is that in 2014-15 and 2015-16, repealment that was brought to the House were really to do with the appropriations and the maximum number of laws in this country which continue to clog our system are appropriations which are easiest to be settled through the sunset route. The moment they have finished their purpose, they should automatically cease to be on the books. So, going forward perhaps this Government in its wisdom, this Law Minister who is a very eminent, erudite, senior advocate, a jurist in his own right, so, therefore, going forward one of the seminal things this hon. Law Minister could do is to advise the Law Ministry in future, that at least for appropriations, there should be an automatic sunset clause so that we do not have to keep coming back to Parliament for their replacement once they have served their purpose.
Of course, the Law Minister has to be reminded that there are still laws dating back to 1836 which are on the statute books which need to be repealed. I mean it is bizarre, today, almost 200 years later, there are laws which have not been in use for the last 200 years, that continue to be on the statute books which needs repealment. Therefore, this process has to be hastened. This process at the moment, according to me, is not proceeding at the pace at which I think a Law Minister like you would like it to go forward.
Now, I come to a very important issue. Mr. Banerjee has also mentioned this. It is about the digital era but I want to say it in a different context. Digital era means why does not the Law Minister consider putting everything online because the moment you have all your acts and rules online, which is not the case today, then we will be able to actually get a lot of feedback as to how many acts and rules today are so obsolete that they should actually be done away with. You will get very important, positive feedback from the public as well, from jurists as well, from lawyers as well rather than what is left to the Law Commission along today which is seriously handicapped because of lack of staff etc. You will then get a far more wide ranging feedback and be able to therefore, act far more faster and decisively.
Coming to my last point, hon. Law Minister, this is something I think that affects hundreds and thousands of people in this country, it is not just enactments, there are provisions in enactments which are very archaic and completely obsolete and totally out of tune with the times. One such provision clearly this House will agree with me is Section 377, for instance, in the IPC which criminalises sex between consenting adults of different orientation.
Now the Supreme Court has repeatedly said that it is really up to the Legislature to set things right. The 2012 judgement, by which the Delhi High Court in a very bold move struck down 377, was set aside by the Supreme Court in the 2013 judgement on the ground that it is the job of the Legislature to do away with it, and it is not the job of the courts to legislate. Whether you wish to read it down, whether you wish to do away with it, you must give succour to crores of people. Now the number is not in lakhs. The number is in crores. We are a country of 125 crore people. So, when you are looking to the fact that crores of people in the privacy of their bedroom feel they are criminals, I think a forward looking Government, I think an enlightened Government, ought to come to terms with the fact of 2017 and the facts that we are in the 21st century. The facts that obtain at the ground level now ought not to be wished away. At least you profess yourself to be a progressive Government of progressive people with progressive laws. According to me, a serious initiative should be taken and we should not leave it again to the courts. Everything should not be left to the Supreme Court. The Government should not put up its hands and say we leave it to the court; let the courts decide. No. It is the job of this Parliament. Let us debate it in this House. Let us do what is our duty. Let us do what is our job.
I seriously and sincerely wish that somebody of the eminence of Mr. Ravi Shankar Prasad, who is an eminent Senior Advocate, who is holding the charge of the Law Ministry today, it is during your tenure we hope that we will see an end to this absolutely pernicious and completely archaic provision of 377 in the IPC. It is the job of the Parliament to do something. The Parliament ought to do it.
I thank you once again hon. Chairperson for having given me this opportunity. I hope the Government takes my remarks in the right spirit. I wind up my speech by once again supporting and expressing my Party’s stand on your Bills. Thank you very much.
श्री विनायक भाऊराव राऊत (रत्नागिरी-सिंधुदुर्ग) : माननीय सभापति जी, आज माननीय विधि मंत्री जी निरसन और संशोधन विधेयक लाए हैं, मैं इस बिल का समर्थन करने के लिए खड़ा हुआ हूं। हमारे देश को आजादी मिले 70 साल हो चुके हैं, लेकिन आज भी 167 वऐाऩ पहले 1850 के कानून का लोकतांत्रिक देश में अमल हो रहा है, यह दुर्भाग्यपूर्ण बात है। इसमें सुधार करने की कोशिश माननीय विधि मंत्री जी ने की है। मैं इसके लिए उन्हें बधाई देता हूं। पुराने जमाने और ब्रिटिश के जमाने के ऐसे कई और कानूनों को स्क्रैप करने की जरूरत है क्योंकि जब प्रशासन कुछ न कुछ काम करने के वक्त पुराने कानूनों का आधार लेते हैं तो लोगों के हितों को बाजू में धकेला जाता है। मेरा मानना है कि लोगों के हितों को अच्छी तरह से देखने के लिए पुराने कानून को दूर करके और अच्छा कानून बनाने का प्रयास इस विधेयक के माध्यम से हो रहा है, यह अच्छी बात है।
सरकार ने इस विधेयक के माध्यम से करीब 245 पुराने कानून रद्द करने की कोशिश की है जो कि इससे पहले भी हो चुकी है। 1850 के कानून रद्द हो रहे हैं। मैं माननीय मंत्री का महोदय का अभिनंदन इसलिए कर रहा हूं क्योंकि 2002 के रिफ्यूजी रिलीफ टैक्सेस रिपील एक्ट को स्क्रैप करन का काम किया गया है। सिर्फ रिफ्यूजी की बात नहीं, उसके नाम पर टैक्स कलैक्ट करना, गरीबों की जेब में हाथ डालकर टैक्स लेना और लोगों को तकलीफ देने का काम इसके माध्यम से हो रहा है। नेशनल कमीशन ऑफ माइनोरिटी एजुकेशनल इंस्टीटय़ूशन एक्ट, 2010 में वास्तव में दखल देने की जरूरत थी, ध्यान देने की जरूरत थी। माइनोरिटी के नाम पर एजुकेशन सैक्टर में जो धंधा चल रहा था, बाजार चल रहा था और एजुकेशनल इंस्टीटय़ूट की जगह एजुकेशनल इंडस्ट्री शुरु हो गई थी। शिक्षा जगत में व्यापार का रूप आ गया था। इस पर पाबंदी लगाने का काम इस बिल के माध्यम से माननीय मंत्री जी ने किया है। माननीय मंत्री जी ने इस तरफ ध्यान दिया है।
मैं उसका समर्थन करता हूं। मैं इस बिल का समर्थन करते हुए माननीय मंत्री जी से विनती करना चाहता हूं कि आप वऐाऩ 1850 से चलते हुए सब कानून खत्म कर रहे हैं, यानी जो कानून आवश्यक नहीं हैं, उन्हें आप रद्द करने जा रहे हैं। इसके साथ-साथ धारा 370, जिसकी वजह से हिन्दुस्तान के दो भाग हो रहे हैं, उसे भी आप स्क्रैप करें और आपका जो अखंड हिन्दुस्तान का नया रास्ता है, उसका निर्माण करें। धन्यवाद।
DR. RAVINDRA BABU (AMALAPURAM): Thank you, Chairman, Sir, for giving me this opportunity. We fully support the Repealing and Amendment Bill, 2017 on behalf of the Telugu Desam Party. But, I have a small suggestion for the hon. Minister of Law. Instead of us doing the scrutiny of the redundant, infructuous and irrelevant Acts, can we not leave it to some judicial scrutiny? They will be in a better position to scrutinize these laws.
I feel it strongly that whenever an Act is legislated upon in the House of Legislature, there must have been a strong theory behind that Act; there must have been very compelling reasons to enact that Act. When that Act comes for repealment by us, maybe because of its losing relevance with the passage of time, the Parliament may not be in a position to analyze those factors correctly. If it is left to some special court or the High Court or the Supreme Court to see as to what the archived laws are, which are redundant and not useful in the present socio-economic scenario and on the recommendation of the Supreme Court, these laws are taken up for repealment and amendment, whatever may be required, by the Parliament.
Without going into the merits or demerits of the particular Acts, which have been enacted long back, maybe 100 years or so, repealing them under the sweeping provisions may not give the correct results. This is what my personal feeling is.
The hon. Minister is a well-known lawyer and is well-versed with all the legal procedures of jurisprudence. I expect that the scrutiny of these redundant and archived laws can be done by the Court, at least, to save the precious time of the Legislature.
There are many such Acts that have been made, for example, the Delhi Police Act from which the Central Bureau of Investigation (CBI) derives its powers to investigate. The CBI has become the most powerful investigating agency. But, unfortunately, it does not have the original Act to act upon any crime or issue. They will have to derive these powers from the Delhi Police Act. I do not know whether the Delhi Police Act needs to be amended to separate the CBI or it can be made as a separate Act. I have no idea about it. The hon. Law Minister must have been in a correct position to say that. Like this, there are many other Acts, which are precursor to the present Acts and those Acts need to be repealed or amended. It also needs to be probed as to what the circumstances were in which these precursor Acts were enacted. By doing so, we will at least be able to know the history so that we may not repeat those mistakes during the present time.
Therefore, my fervent appeal to the hon. Minister is, let us go into those factors which were responsible for enactment of these Acts and let us not repeat those things so that we will be safe in future and a lot of time of this Legislature is saved.
Again, on behalf of the Telugu Desam Party, I sincerely appreciate the efforts of the hon. Minister. There have been a lot of attempts during the 16th Lok Sabha to repeal many other irrelevant and redundant laws. This trend is continued. This is a good attempt. But let there be a judicial scrutiny before they are repealed by the Legislature. On behalf of the Telugu Desam Party we fully support this Bill. Thank you.
ADV. NARENDRA KESHAV SAWAIKAR (SOUTH GOA): Hon. Chairperson, Sir, I rise in support of the legislations which have been moved by the hon. Law Minister.
In fact, we are celebrating 70th year of our Independence. We have noticed that there are various archaic laws which are obsolete and redundant, but still they find a place in the Statute Book. Many a time, there arises a confusion in the minds of the jurists, academicians, researchers and even, to some extent, the courts while arguing the matters and while settling the law that there are various provisions, which they need to refer to, of the old laws, archaic laws. Therefore, the decision which this Government has taken is a welcome one.
After having taken over in 2014, hon. Prime Minister constituted a two-member committee in which it was decided that laws which are archaic, which are obsolete, which are redundant and which should not find a place in the Statute Book should be removed. As a result, for last two years, we find that there have been legislations which are being moved to repeal and amend the laws. Now, the hon. Minister has moved two Bills to repeal nearly 245 laws which still find a place in the Statute Book and which are otherwise redundant and archaic in that sense.
Hon. Chairperson, Sir, it is always said that the laws should change with times. It is also said that a law should be progressive. We say that 65 per cent of population in India is young and they look out for various avenues. They have challenges in their minds. They look out for growth and development. In such a situation, in fact, the laws, which are existing but are obsolete and redundant, should be replaced.
I would like to draw the attention of this House to some of the steps that this Government has taken with regard to the new legislations which have been introduced. They have brought amendments to the maritime law, Arbitration and Conciliation Act, the National Waterways Act and the Merchant Shipping Act. Since I come from a State like Goa, these laws may be relevant or more specific to my State, but these laws do matter. This Government, in two to three years of its existence, has taken initiatives to amend these laws which otherwise should have been amended in the past 70 years, which was not done.
Sir, we always say that laws should be changed, laws should be amended and there should be repeal of laws. At the same time, there is a need for simplification of the language which is being used in our laws. The poor person, the common person should understand the language which is being used in the law. Therefore, my humble submission is that as we repeal the law, as we amend the law and as we introduce the law, it is also the duty of the Legislature to see to it that the language of the law is simplified.
Secondly, I also join the issue which has been raised by Shri Kalyan Banerjee. So far as the issue of introduction of new technologies, like wi-fi, in the court system is concerned, it would be better if the hon. Law Minister could consider this aspect of the matter because this is an important issue.
Finally, since I come from the State of Goa, I would like to inform the House that today, we are celebrating 56th year of our liberation. I, on my personal behalf, extend greetings on Goa’s Liberation Day. I would also like to make a mention that Goa is the only State in India which practices a Uniform Civil Code, I think, without going into the debate on it.
With these few words, I support this legislation which has been moved by the hon. Law Minister.
Thank you.
HON. CHAIRPERSON: Hon. Law Minister.
विधि और न्याय मंत्री तथा इलेक्ट्रोनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री (श्री रवि शंकर प्रसाद): माननीय सभापति जी, मैं बहुत ही कृतज्ञ हूं कि इन दोनों विधेयकों पर बहुत ही सार्थक चर्चा हुई है। इस बहस की शुरूआत मीनाक्षी लेखी जी ने की, आदरणीय कल्याण बनर्जी जी, पिनाकी मिश्रा जी, विनायक जी, रविद्र जी एवं अंतिम वक्ता आदरणीय नरेद्र केशव सावईकर जी, इन सभी के प्रति मैं अपनी ओर से कृतज्ञता ज्ञापित करता हूं कि उन्होंने बहुत ही सार्थक तरीके से इस पूरी बहस को रुचिकर बनाया। विशेऐा रूप से कई मित्रों ने मेरे बारे में जो टिप्पणी की, उनके प्रति मैं हृदय की गहराई से कृतज्ञता ज्ञापित करता हूं।
Sir, I would make some general points. Questions were raised as to why you cannot have some Special Judicial Commission to examine these matters; why are you coming to the House; and some others said that the principle of destitute should be followed. Shri Kalyan is a very eminent lawyer and he is not present here today who mentioned it. Others have their own things to observe.
First of all, I would like to mention about Shrimati Meenakashi Lekhi, who is no more present here. She had raised a very valid point कि यह स्वच्छता अभियान है। जो पुराने कानून बने हुए हैं, उनको स्वच्छ करने की जरूरत है। इसके अलावा इसमें एक बहुत बड़ा सवाल जो देश के व्यक्तित्व का है, उसको भी मैं उठाना चाहता हूं। हमें आज़ाद हुए 70 साल हो गये हैं और अगर हमें आज़ाद हुए 70 साल हो गए हैं तो आज़ादी के 70 साल बाद यह कानून क्यों होना चाहिए Prevention of Seditious Meetings Act, 1911 आज़ादी के 70 साल बाद यह कानून क्यों होना चाहिए The Sheriff of Calcutta (Power of Custody) Act (1931) जो कानून देश की आज़ादी के आंदोलनों को दबाने के लिए बनाये गये थे, वह हमारे औपनिवेशिक विरासत का एक दुर्भाग्यपूर्ण अंग है। इसलिए इसको समाप्त करना जरूरी है। यह सिर्फ एक ऑर्डिनरी रिपील बिल नहीं है, यह समझना चाहिए। कहीं-कहीं यह हमारी विरासत की बात है। Therefore, I feel very strongly that as a proud Indian when I see these Acts cluttering our statute books, it also gives me a sense of revulsion that they need to go.
एक बात जो मुझे लगी कि बताना जरूरी है और दूसरी बात कही गई कि संसद के सामने आना क्यों जरूरी है? मैं अपने माननीय तेलगुदेशम के मित्र को बहुत विनम्रता से बताना चाहूंगा कि देश के कानून को बनाना संसद का काम है और कोई कानून चलेगा या नहीं चलेगा, यह भी संसद का काम होना चाहिए क्योंकि देश की जनता ने हमें इसीलिए चुनकर भेजा है।
We cannot outsource our power of law-making to even a Judicial Officer or to the courts. Sovereign law-making must be the prime responsibility of the Parliament. I thought that I need to tell you that, but even before that what have we done? We went through all the process, namely, we constituted a two-Member Committee. Mr. Ramanujam was a former Secretary of the Prime Minister; there was Mr. Bhasin, the former Secretary of Legislative Department; the Law Commission examined it and they identified these Bills. But I hope that it is very important to be noted that mere Bill identification is not enough and the concerned Administrative Ministry must also be consulted whether the Bill is required or not. If certain laws concern the State, then स्टेट से पूछना जरूरी है। वे हमें बताएंंगे कि यह हमारी जरुरत है या नहीं। इसलिए हमने यह पूरा काम किया है और पूरा काम करने के बाद हमने विस्तार से यह फैसला किया कि इन कानूनों को समाप्त करना जरूरी है। इसलिए यह एक बहुत ही औपचारिक प्रक्रिया है।...(व्यवधान) मैंने आपकी तारीफ भी की है। आप अपनी तारीफ सुने बिना बाहर चले गये। ...(व्यवधान) मैं आपका अभिनन्दन करता हूं। यही तो दिक्कत है कि जब आपकी तारीफ करते हैं तो आप सुनते नहीं हैं। ...(व्यवधान)
मैं यह बता रहा था, चूंकि आपने लॉ ऑफ डैस्टीटय़ूट की बात की तो मैं उसी को डिसकस कर रहा था। Sir, I need your indulgence because Shri Kalyan, my distinguished friend, has come. Therefore, I need to speak a little about the law of destitute, which he mentioned about me.
With your wide experience, you are very aware that the law of destitute is not conventionally practiced in India’s jurisprudence.
SHRI KALYAN BANERJEE : Yes, it is done. I will give you 10 cases tomorrow.
SHRI RAVI SHANKAR PRASAD: Okay. The law of destitute deals with law, which has become otiose, where the court takes a call. You are right there, but the law of destitute does not impinge upon the sovereign right of the Parliament to delete / repeal a law. I am only on that particular finding.
SHRI KALYAN BANERJEE: I have also made it clear in my speech during the discussion.
SHRI RAVI SHANKAR PRASAD: All right. Sir, what is important is that when a person of the eminence of Shri Kalyan, a senior lawyer, does not agree with an opposing lawyer even if he is the Law Minister, but today he has agreed, then it is also a very great thing.
SHRI KALYAN BANERJEE: I had also agreed with you on the Bill, which you had brought and for that reason I had been criticized in the Supreme Court also as I was supporting you. Please do not forget it.
SHRI RAVI SHANKAR PRASAD: All right. It is greatly appreciated! 15.00 hours Therefore, this issue is very important. All the procedural requirements for repeal, namely, a two Member Commission, Law Commission consultation and thirdly, consultation with administrative Ministry and the State Governments have been done. Therefore, all the procedural requirements have been done.
Two, three other issues have also been raised. Hon. Kalyan Babu raised a point about particular facilities in the Court. That point is fairly well taken.
सभापति महोदय, आप एक दिन चर्चा कराइए, हम ने ज्यूडिशियरी के इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास के लिए क्या-क्या काम किया है, हम बतायेंगे। हम चाहेंगे कि सदन में ज्यूडिशियरी के संबंध में एक दिन व्यापक चर्चा हो, हम आपका स्वागत करेंगे और बाकी सदस्यों का स्वागत करेंगे कि ज्यूडिशियरी के इंफ्रास्ट्रक्चर को इंप्रूव करने के लिए और क्या काम करना चाहिए। हम आपके सुझावों का भी स्वागत करेंगे, लेकिन जब एक बात कही गयी है तो सभापति महोदय मैं आपके माध्यम से बताना चाहूंगा कि हम लोगों ने लगभग 14,000 कोर्ट्स को ई-कोर्ट्स कर दिया है, सारे हाई कोर्ट्स को ई-कोर्ट्स कर दिया है और एक नेशनल ज्यूडिशियल डेटा ग्रिड बनाया है। You can access online more than six crore cases pending or decided. इसमें और भी काम करने की जरूरत है, हम बिल्कुल करेंगे, क्यों नहीं? Access to justice is an important part of digital India, लेकिन आपने जो बताया है तो आप भी माननीय सुप्रीम कोर्ट के बारे में जानते हैं कि, we have no executive control over the Supreme Court and we should not have. लेकिन आपने जो बात बतायी है कि वहां वाईफाई फैसिलिटी और ज्यादा होनी चाहिए, इस बारे में आपकी चिंता को औपचारिक रूप से माननीय सुप्रीम कोर्ट को बताऊंगा, वहां की एक कमेटी है कि उन्होंने एक बात कही है, इसलिए इस बात को देखने की जरूरत है।
One issue of automatic repeal came. Why should it not be there? Shri Pinaki Babu perhaps mentioned about automatic repeal. Automatic repeal is a question which can be considered. But, the plea of automatic repeal must be left to the collective judgment of the House. We must understand that in a democratic polity like India, the House is all supreme. When the collective wisdom of the House is pooled into passing of a law, even if there is an administrative view to have automatic repeal, the House can take a contrary view for legitimate reasons. Suppose, a particular legislation is referred to a House Committee, it can take a collective view, for good reasons that that Bill must continue. Therefore, I am willing to take his suggestion on record about automatic repeal in respect of appropriation. But, having a provision of automatic repeal in case of all the laws would be difficult.
SHRI PINAKI MISRA : I have only made it for appropriation.
SHRI RAVI SHANKAR PRASAD: Then your point is well taken.
Now, coming to the larger issue of other provisions, section 377 of the Penal Code is a debatable question. I do not deny that there are merits on one side and there are equally opponent views on the other. I am willing to take the suggestion of hon. Pinaki Babu on board that there is a deepening concern of decriminalizing it. There is a merit in that argument. But, other people have equally different views. I am afraid, I am not the Minister in-charge of the Indian Penal Code. It is handled by hon. the Home Minister. But, what is important is that we need to have a proper national consensus on that. We will debate it. That is what democracy is about. We need to debate, discuss and decide.
हमारे शिवसेना के मित्र ने आर्टिकल 370 की बात की है। पूरा जम्मू-कश्मीर भारत का अंग है और रहेगा और जो पाकिस्तान के अंतर्गत है, हम वह भी कहते हैं कि संसद का एक कानून है कि वह भारत का अंग है और रहना चाहिए। जहां तक 370 की बात है तो बिल्कुल सामने स्पऐटता से हम कहते हैं, लेकिन यह भी जरूरी है, कभी चर्चा होगी तो हम बतायेंगे कि किस तरह से आज हम पूरे कश्मीर में सख्त कार्रवाई कर रहे हैं, हमारी सख्त कार्रवाई से आज हुरियत के लोग शांत हो गये हैं। बाहर से आने वाले पैसे पर सख्ती लगायी गयी है और आप देख रहे हैं कि इतनी बड़ी संख्या में हमने आतंकवादियों के खिलाफ कार्रवाई की है और हम यह करते रहेंगे, क्योंकि कश्मीर भारत का अंग है, हम पूरे विश्वास से कहना चाहते हैं।
एक बात और आई है, जो बात पिनाकी बाबू ने कही है कि ऑनलाइन होना चाहिए। That suggestion is quite welcome. हम ऑनलाइन में इसको आगे बढ़ा रहे हैं। मुझे आपको बताते हुए खुशी हो रही है कि बहुत बड़ी संख्या में कानून ऑनलाइन पर चले आये हैं।More than 800 laws are online. Others are being worked out. At the click of a button, you can see the existence of those Acts which have come online.
Sir, there is one issue which I must clarify. In the Schedule section, the last Schedule is a mere grammatical and clerical correction. कहीं ऐक्ट की जगह बिल टाइप हो गया है, कहीं ईयर गलत हो गया है, उसे भी हम सही करेंगे। It is basically a clerical correction.
My concluding request to this hon. House is that this particular Repeal (Amendment) Bill is a great initiative in the quest for making our country reform-oriented. Secondly, it is a Swachata Abhiyaan in the case of repealing those laws which have become irrelevant. तीसरी सबसे बड़ी बात है, जिसे मैंने आरम्भ में कही कि ये अंग्रेजों के जमाने की विरासत के कानून हैं, जो देश की आजादी के आन्दोलनों को रोकने के लिए बनाये गये थे, उनको भी समाप्त करने का यह एक बहुत बड़ा प्रयास है।
जिन सम्मानित सदस्यों ने इस चर्चा में भाग लिया, उनके प्रति अपनी कृतज्ञता ज्ञापित करते हुए, मैं आग्रह करूँगा कि सर्वानुमति से इस बिल का समर्थन करें। इन्हीं शब्दों के साथ, मैं अपनी बात समाप्त करता हूँ।
(i) REPEALING AND AMENDING BILL, 2017 HON. CHAIRPERSON: The question is:
“That the Bill to repeal certain enactments and to amend certain other enactments be taken into consideration.” The motion was adopted.
HON. CHAIRPERSON: The House will now take up clause-by-clause consideration of the Bill.
The question is:
“That clauses 2 to 4 stand part of the Bill” The motion was adopted.
Clauses 2 to 4 were added to the Bill.
The First Schedule and the Second Schedule were added to the Bill.
Clause 1, the Enacting Formula and the Long Title were added to the Bill.
SHRI RAVI SHANKAR PRASAD: I beg to move:
“That the Bill be passed.” HON. CHAIRPERSON: The question is:
“That the Bill be passed.” The motion was adopted.
(ii) REPEALING AND AMENDING (SECOND) BILL, 2017 HON. CHAIRPERSON: The question is:
“That the Bill to repeal certain enactments and to amend certain other enactments, be taken into consideration.” The motion was adopted.
HON. CHAIRPERSON: Now, the House will take up clause-by-clause consideration of the Bill.
The question is:
“That Clauses 2 to 4 stand part of the Bill.” The motion was adopted.
Clauses 2 to 4 were added to the Bill.
The First Schedule and the Second Schedule were added to the Bill.
Clause 1, the Enacting Formula and the Long Title were added to the Bill.
HON. CHAIRPERSON: The Minister may now move that the Bill be passed.
SHRI RAVI SHANKAR PRASAD : I beg to move:
“That the Bill be passed.” HON. CHAIRPERSON: The question is:
“That the Bill be passed.” The motion was adopted.
*t68 Title: Discussion on the motion for consideration of the Central Road Fund (Amendment) Bill, 2017.
HON. CHAIRPERSON: The House shall now take up Item No.26 - The Central Road Fund (Amendment) Bill.
श्री कल्याण बनर्जी (श्रीरामपुर): सर, वहां पानी नहीं है। ...(व्यवधान)
HON. CHAIRPERSON: I will look into it. Hon. Minister, please go ahead.
THE MINISTER OF ROAD TRANSPORT AND HIGHWAYS, MINISTER OF SHIPPING AND MINISTER OF WATER RESOURCES, RIVER DEVELOPMENT AND GANGA REJUVENATION (SHRI NITIN GADKARI): I beg to move:
“That the Bill further to amend the Central Road Fund Act, 2000, be taken into consideration.” Hon. Chairman, Sir, I place the Central Road Fund (Amendment) Bill for consideration of this august House and request that it be passed unanimously.
सभापति महोदय, आपको पता ही होगा कि हमारी सरकार ने इनलैण्ड वॉटरवेज़ को प्राथमिकता दी है। इसी सदन ने 111 इनलैण्ड वॉटरवेज़ को जलमार्ग में रूपांतरित करने वाले बिल को पास किया है। यह काम करने के लिए जो पैसा चाहिए, उसके लिए स्वाभाविक रूप से हमारे डिपार्टमेंट का बजट बहुत कम है। सेंट्रल रोड फंड - केंद्रीय सड़क निधि सन् 1929 से अस्तित्व में है। यह सन् 1988 में संसद द्वारा पारित संकल्प के द्वारा शासित था।
माननीय सभापति महोदय, दिनांक 27.12.2000 को केंद्रीय सड़क निधि अधिनियम, 2000 प्रभाव में आया है। पहले इसमें पेट्रोल और डीजल पर सेस 2 रुपये प्रति लीटर था। इसके बाद जनवरी, 2015 में पेट्रोल और डीजल पर उप-कर बढ़कर 4 रुपये प्रति लीटर हुआ था। इसके उपरांत मार्च, 2015 से उसे 6 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया।
माननीय सभापति महोदय, यह जो पैसा आता है, इस पैसे में से रूरल रोड्स के लिए करीब 33.50 परसेंट 16,994 करोड़ रुपये जाते हैं। इसमें से 41.50 परसेंट करीब 38,824 करोड़ रुपये नेशनल हाइवेज़ के लिए जाते है। इसके साथ ही रेलवे को 7.2 परसेंट और 14 परसेंट यानि 10,668 करोड़ रुपये इसमें से जाते थे।
15.13 hours (Shri Hukmdeo Narayan Yadav in the Chair) माननीय सभापति महोदय, अब मैं स्टेट रोड्स अंडर सी.आर.एफ की बात करता हूं। हम राज्य सरकारों को सी.आर.एफ. में जो मंजूरी देते हैं, उसके लिए भी करीब 8 हजार 83 करोड़ रुपये दिए जाते हैं, जो कि 17.1 परसेंट है। मैं मिनिस्ट्री ऑफ रोड ट्रंसपोर्ट एण्ड हाइवेज़ मिनिस्ट्री का मंत्री हूं। हमने इसके 2.5 परसेंट कम किए हैं। इस 2.5 परसेंट को कम कर के यह करीब 2,339 करोड़ रुपये का अमाउंट आता है, जो कि 2,500 करोड़ रुपये से कम का अमाउंट है। हम यह अमाउंट अब हर साल इनलैण्ड वॉटरवेज़ के लिए देंगे।
माननीय सभापति महोदय, यह देश में एक बड़ा रेवोल्यूशन होगा। लोगों को इस पर विश्वास नहीं होता है कि यह कैसे होगा। आपने सुना और देखा होगा कि कुछ समय पहले पानी पर हवाई जहाज उतरा था। मैं यह बहुत बार कहता था कि हम पानी के क्षेत्र में काफी विकसित करेंगे। हम गंगा में 5 हजार करोड़ रुपये का कार्य कर रहे हैं। इन कामों में 3 मल्टी मॉडल हब्स हैं, 40 वॉटर पोर्ट्स है, 9 फेरी सर्विसिज़ हैं, 8 रोड सर्विसिज़ हैं और 17,500 करोड़ रुपये की हम ड्रेजिंग कर रहे हैं। बंगाल की खाड़ी में ब्रह्मपुत्र का काम भी शुरू हो रहा है। हम बांग्लादेश में भी ढाई सौ करोड़ रुपये का ड्रेजिंग का काम कर रहे हैं। बराक में भी काम शुरू हो गया है, बंकिघम कैनाल का काम भी शुरू हो गया है। यह काम इतना बड़ा है कि अब से हमारा इम्पोर्ट-एक्सपोर्ट डायरेक्ट नदियों के द्वारा होगा। अगर रोड से ट्रंसपोर्ट करने पर डेढ़ रुपये का खर्च आता है और रेलवे से एक रुपये खर्च आता है तो पानी के रास्ते ट्रंसपोर्ट करने से 20 पैसे ही खर्च आएगा। मैं कुछ दिन बाद संसद के सामने एक नई नीति लेकर आ रहा हूं जिसमें यह सब बार्ज मिथेनॉल पर चलेंगे, जो कोयले से तैयार होगा। यह 20 पैसे कीमत फिर 10 पैसे ही आएगी। इससे हमारी लॉजिस्टिक कॉस्ट कम होगी, उद्योग धंधे बढ़ेंगे, हमारा एक्सपोर्ट बढ़ेगा। ग्रेप्स और ऑरेंजेस महाराऐट्र के मुम्बई से रेलवे से लाकर साहिबगंज मल्टीमॉडल हब बन रहा है, वाराणसी मल्टीमॉडल हब बन रहा है, वहां से डायरेक्ट बांग्लादेश को एक्सपोर्ट होगा। इससे किसानों का और देश का फायदा होगा। इसके अलावा गंगा में टूरिज्म को बढ़ावा दिया जा रहा है। क्रूज़ सेवन स्टार, फाइव स्टार आएंंगे, हवाई जहाज उतरेंगे, पानी पर चलने वाली बसें और रोड पर चलने वाली बसें चलेंगी और एक बड़ा रेवॉल्यूशन देश में होगा। इस काम के लिए मैं सभी सांसदों से प्रार्थना करूंगा कि पैसा नहीं था, लेकिन रोड मिनिस्ट्री का मंत्री होने के नाते मैंने अपनी मिनिस्ट्री का सीआरएफ का शेयर कम किया है। यह रोड को जाने वाला शेयर है, रेलवे का नहीं काटा है, स्टेट सीआरएफ का पैसा नहीं काटा है, बल्कि अपने विभाग के रोड के पैसे को कम किया है। मैं आपसे अनुमति मांगता हूं कि 2339 करोड़ रुपये हर साल इसके माध्यम से मिलेंगे, जिस प्रकार से हम सीआरएफ में काम करते हैं। मैं आपको विश्वास दिलाता हूं कि वऐाऩ 2018 समाप्त होने के पहले इन 111 में से दस जलमार्गों का काम पूरी तरह से चालू होगा, अच्छे तरीके से चालू होगा और आने वाले समय में देश में जैसे रोड का नेटवर्क बना है, वैसे ही जलमार्गों का नेटवर्क बनेगा। यदि आप पटना जाना चाहते हैं तो अगली बार ऐसी स्थिति आएगी कि आपको एयरपोर्ट जाने की आवश्यकता नहीं होगी, यमुना के फ्रंट से आपका हवाई जहाज उड़ेगा और पटना में गंगा नदी में उतरेगा। आपको कहीं जाने की जरूरत नहीं होगी, ऐसा रेवोल्यूशनरी चेंज इसके माध्यम से आएगा। आपको बताते हुए मुझे खुशी हो रही है कि पटना से वाराणसी, पटना से हल्दिया...(व्यवधान)
श्री मुलायम सिंह यादव (आज़मगढ़) : यमुना नदी इटावा से होकर भी जाती है।
श्री नितिन गडकरी : सर, इटावा भी उतरेगा। मैं मुलायम सिंह जी को आश्वासन देता हूं कि उनको देखने को मिलेगा कि अगले साल यहां के यमुना फ्रंट से लेकर आपको इटावा में प्लेन उतार देगा।
महोदय, इस बिल में एयर ट्रैफिक कंट्रोल की तरह से हल्दिया से पटना रिवर ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम शुरू हो चुका है। मेरा आप सबसे अनुरोध है कि देश में पुराने ज़माने में नदी के रास्ते व्यापार होता था, लेकिन धीरे-धीरे सब बंद हो गया। अब आप सभी के सहयोग से देश में एक नये युग की शुरूआत होने जा रही है। हमारे प्रधान मंत्री जी का इसमें बहुत योगदान है। 2339 करोड़ रुपये हमें मिलेंगे तो हम 111 पर और अधिक काम कर पाएंंगे और पोर्ट से उनको जोड़ देंगे। पोर्ट से जो प्रॉफिट होगा, वह भी इसमें डालेंगे तथा कुछ फॉरेन से लोन लेंगे। इससे देश की तस्वीर बदलेगी, इसलिए आप सभी इसका बहुमत से समर्थन कीजिए, यही मेरा आपसे निवेदन है। धन्यवाद।
HON. CHAIRPERSON: Motion moved:
“That the Bill further to amend the Central Road Fund Act, 2000, be taken into consideration.” श्री राजीव प्रताप रूडी (सारण) : सभापति महोदय, माननीय गडकरी जी ने वऐाऩ 2000 के सेंट्रल रोड फण्ड एक्ट में संशोधन करने के लिए सदन के सामने यह विधेयक प्रस्तुत किया है। इसमें करीब ढाई फीसदी सेस का पैसा इनलैंड वॉटर वैज़ में जाएगा और उसके बिल में जो परिवर्तन करना है, उसमें नेशनल हाइवेज़ के साथ इनलैण्ड वॉटर वैज़ को जोड़ना है।
महोदय, बहुत सी बातों को मंत्री जी ने रखा है और आगे भी रखेंगे, लेकिन नीतिगत तौर पर देखा जाए तो ऐसी सरकारें जो नीतिगत आधार पर फैसला करती हैं, उनका परिणाम देश को मिलता है। हमें यह याद करना होगा कि वऐाऩ 2000 के समय कौन मंत्री थे, जो इस बिल को लेकर आए थे और उस समय नेतृत्व कौन कर रहा था, जिन्होंने सेंट्रल रोड फण्ड का बिल बनवाया। वऐाऩ 2000 में जब यह बिल आया था तो उस समय देश के प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी थे, जिन्होंने इसकी शुरूआत की और सेंट्रल रोड फण्ड का आज पूरे देश में जाल बिछा हुआ है। वह एक ऐसी सोच का था। चाहे वह प्रधान मंत्री सड़क योजना का पैसा इससे निकलकर गया हो या राऐट्रीय उच्च पथ का पैसा निकलकर गया हो या आर.ओ.बीज़ बनाने के लिए रेलवे लाइन के फाटकों पर फाटकों का निर्माण करने के लिए या बॉर्डर पर रोड बनाने के लिए, एक सोच ने उस समय से लेकर आज तक पूरे भारतवऐाऩ में सड़कों का आंदोलन बना दिया। ये हमारी सरकारों के लिए है। उस समय जनरल खंडूरी ने यह बिल पेश किया और आज एक और बड़ा महत्वपूर्ण निर्णय हो रहा है। यह आज नितिन गडकरी जी देश के प्रधान मंत्री जी के नेतृत्व में एक ऐसा ऐतिहासिक फैसला ले रहे हैं, जिस तरह से हमारी सरकारें बनती हैं और चलती हैं, उसके बारे में इस नीतिगत फैसले पर परिणाम दिखे।
महोदय, यह एक पूरा विऐाय जिसके बारे में चर्चा की गई है। हम सिर्फ इतना कहना चाहेंगे कि इसमें आज हमें जो सेंट्रल रोड फण्ड में लगभग 82 हजार करोड़ रुपये आएंंगे, इसमें से एक छोटा अंश, और यह अंश बहुत छोटा है, क्योंकि आपका ही विभाग था और अपने ही विभाग से दूसरे विभाग में लाना था। वऐााॉ से आजादी के बाद जिस सेक्टर पर ध्यान नहीं दिया गया है, उसमें आपने एक अच्छी शुरूआत की है। इससे प्राइवेट सेक्टर को व वित्तीय संस्थाओं को ताकत मिलगी। इस पैसे के आधार पर इस पर निवेश करें। आपने इस काम को बड़ी खूबसूरती से किया है। सिर्फ हम ही नहीं, बल्कि हमारे प्रतिपक्ष के सांसद इस बात को कुबूल करेंगे कि एक ऐसा मंत्री भारत सरकार में है, जिसकी जुबान पर न नहीं है और अगर न नहीं है तो साथ-साथ काम करने की वह क्षमता भी है और काम कर के दिखा देना और उस सम्मान को हमारे पास रखने का अधिकार है। अब लगभग एन.एच.डी.पी. के जो प्राजेक्ट थे, जिस प्रकार से आपने सड़कों का काम किया है और पिछले 13-14 वऐााॉ में, पिछले 10 वऐााॉ में उस काम की गति बहुत ढीली हो गई थी, फिर भी उसको माननीय नितिन गडकरी जी ने देश के प्रधान मंत्री जी के नेतृत्व में आगे बढ़ाया है। उसमें सबसे बड़ी बात है कि अब एन.एच.डी.पी. फेज़ 6 लगभग समाप्ति की ओर है और हम लोगों ने भारतमाला सड़क निर्माण योजना की बात की थी। जो गैप्स हैं, क्योंकि जिस प्रकार से आज नेशनल हाईवेज़ पर कंजप्शन हो रहा है, जिस प्रकार से सड़कों पर दबाव है, चैनल रूट्स पर दबाव है। एक नई योजना के तहत पैसे खर्च करके उसका निर्माण करना है। लेकिन आज पहली यह योजना, उस समय का भी यह नीतिगत फैसला था जब देश में अटल बिहारी वाजपेयी जी ने गोल्डन क्वाड्रीलैट्रल शुरू किया, नॉर्थ-साउथ, ईस्ट-वेस्ट कॉरीडोर शुरू किया। आज उसी परिकल्पना के साथ हम देश में अगले कदम में इनलैण्ड वाटर वेज़ की तरफ बढ़ रहे हैं।
महोदय, जब हम इनलैण्ड वाटर वेज़ की बात कर रहे हैं, एक समय जिस तरह वाजपेयी जी ने कहा था कि नेशनल हाईवेज़ भाग्य रेखा की तरफ पूरे देश की तकदीर बदलेगी। उसी तरह से हमारी सरकार ने फिर से एक बार सागरमाला की चर्चा की। हम लोगों ने सागरमाला में चर्चा की कि किस प्रकार से पोर्ट्स की कनेक्टिविटी हो और पोर्ट्स के साथ-साथ यह निर्णय वऐाऩ 2015 में हो गया कि पोर्ट्स की कनेक्टिविटी हो और पूरे देश के चारों तरफ पोर्ट्स का निर्माण हो और इसकी कनेक्टिविटी हो। नेशनल हाईवेज़-रोड्स कनेक्टिविटी पोर्ट्स और उस श्रृंखला में एक चीज़ बची थी जिसे आज हम लोगों ने इस बिल के माध्यम से टेकअप कर लिया है। वह नदियों का लगाव और जुड़ाव है। मुझे लगता है कि इसके बाद सरकार के बड़े नीतिगत फैसलों में से यह अंतिम फैसला है, जो आने वाली पीड़ियों के लिए बहुत बड़ा परिवर्तन करके देगा। जब हम नदियों के बारे में कहते हैं, हमें आज भी याद है कि इसके साथ सिर्फ नदी का ही निर्माण नहीं, उसकी सफाई नहीं है। हम उसी प्रांत से आते हैं, जिसमें से 111 नए इनलैण्ड वाटरवेज़ लेक हैं। कुछ ऐसे प्रांत हैं, जिनमें बाढ़ नहीं आती है, लेकिन हमारी दायीं और बायीं तरफ कुछ ऐसे सांसद बैठे हैं, जिन्होंने बाढ़ को देखा है और पिछले 30 वऐाऩ के राजनीतिक जीवन में बाढ़ को देखा है। यह निर्णय अगर 30 वऐाऩ पहले हो गया होता तो शायद आज भारत की जो त्रासदी बाढ़ पीड़ितों की है, ऐसा न होता। अगर उस समय के निर्णायकों ने इस प्रकार का निर्णय ले लिया होता तो शायद ये चीज़ें आज न होतीं जो आज हम देखते हैं। कोसी की बाढ़, गंडक की बाढ़ और गंगा की बाढ़ है।
महोदय, आप भी उसी जगह से आते हैं, जहां से हम आते हैं और 10 बिलियन डॉलर का प्रत्येक वऐाऩ नुकसान होता है, इसमें प्रत्येक वऐाऩ 80 फीसदी बाढ़ का प्रकोप रहता है। यह पैसा तो बहुत छोटा है। अगर इसी तरह प्रत्येक वऐाऩ इस देश में 10 बिलियन डॉलर का नुकसान हो रहा है और यह काम अगर हमने 50 साल पहले कर लिया होता तो देश कहां से कहां पहुंच गया होता और हम कितने गरीबों के पेट की भूख की आग को बचा पाते।
महोदय, टूरिज्म की तरफ देखें। हमारे यहां बात हो रही है। यदि हम अंडमान-निकोबार आईलैण्ड्स को देखें और वहां के वाटरवेज़ को देखें तो हमें ध्यान आता है कि अगर हम आज नक्शे पर देखें, मंत्री जी जानते हैं और सब लोग जानते हैं कि अंडमान-निकोबार आईलैण्ड चेन्नई के पोर्ट से 1000 किलोमीटर दूर है। यानी जितना दिल्ली से पटना होगा और उसमें पहले आइलेंड से लेकर एक हजार किलोमीटर के बाद कार-निकोबार जो इंदिरा पाइंट है, वह 1200 किलोमीटर है। अगर कोई अमरीका गया होगा तो फ्लोरिडा के पास कीवैस्ट देखा होगा, यह अमरीका का सबसे बड़ा आइलेंड है। वहां एक हजार छोटे-छोटे आइलैंड हैं और उस पूरे इलाके का टूरिज्म जिस प्रकार से इन आइलैंड्स पर बना हुआ है, भारत में आज पहली बार देश के प्रधान मंत्री जी और माननीय मंत्री श्री गडकरी जी के नेतृत्व में आजादी के बाद से हम लोगों ने टूरिज्म की जो परिकल्पना नहीं की थी, इस बिल और इस धनराशि के बाद उस परिकल्पना को हम पूरा कर पायेंगे, जो कभी किसी ने नहीं सोची।
महोदय, इसमें लगभग 2400 किलोमीटर कोस्ट लाइन है और इनलेंड वाटरवेज हैं, जिसमें नदियां भी हैं और कोस्ट भी हैं, लेकिन एक चीज यह हुई और हम सब लोग इसी पार्लियामैंट में बैठकर नीतिगत फैसला करते हैं। अंग्रेजों के आने के पहले हजारों वऐााॉ से जो कुछ व्यापार होता था, जो कुछ मूवमैंट होता था, जो युद्ध होते थे, जो भी राजा-महाराजा होते थे, वे दस फीसदी सड़कों पर जंगलों से निकलते थे और 90 फीसदी इन्हीं नदियों का उपयोग अपने कारोबार और अपने अभियानों के लिए करते थे। लेकिन अंग्रेजों के आने के बाद उनके लिए बड़ा जरूरी था, नील की खेती करना, गन्ने की खेती करना और फलां-फलां काम करना। उन्होंने रेल रोड बनाना शुरू कर दिया, सड़कों का भी थोड़ा निर्माण होता गया, रेल रोड का निर्माण होता गया और परिणामस्वरूप अंग्रेजों के आने के बाद भारत में जितने इनलेंड वाटरवेज थे, उन्हें निग्लेक्ट किया गया। इतिहास के पन्नों को पलटकर देखें, दुनिया की जितनी बड़ी सभ्यताएंं आई हैं, जब से इस धरती का अवतरण हुआ होगा, जब से मानव जाति आई होगी, दुनिया भर में सबसे पहली जगह जहां मीठा पानी मिलता था, जहां नदियां बहती थीं, जहां जंगल किनारे पर होते थे, चाहे वे भारत के भीतर इलाहाबाद शहर, लखनऊ शहर, पटना शहर, कोलकाता शहर तथा आप दक्षिण के शहरों को भी देखें, आप पूर्वोत्तर के शहरों को देखें, अहमदाबाद को देखें, दुनिया भर में जहां नदियां हुई हैं, उन्हीं को देखते हुए, उन्हें अपने सामने रखते हुए सभ्याएंं आईं। लेकिन वऐााॉ से हम इस चीज को भूलते चले गये और परिणाम हुआ कि नदियों के प्रति जो नीति-निर्धारकों की सोच होनी चाहिए थी, वह नहीं रही। दुनिया के इतिहास में भी देख लें, 3500 बी.सी. में जो दुनिया की सबसे पहली सभ्यता मेसोपोटामिया की आई, वह टिगरिस और यूफ्रेट्स रिवर के बीच में आई, जिसे हम वैस्ट एशिया में देखते हैं। दूसरी 3000 बी.सी. के आसपास आई, वह इजिप्ट में नाइल वाली सिविलाइजेशन के पास आई। तीसरी 2600 बी.सी. के पास इंडस वैली सिविलाइजेशन है, जिसके पार्ट हम लोग हैं, वह हिंदुस्तान और पाकिस्तान के बीच में देखी गई और जो सिविलाइजेशन 1700 बी.सी. में आई, वह ह्वांग्हो रिवर जो चाइना में है, वहां आई। इस तरह से जो चार बड़ी सभ्यताएंं धरती पर आईं, वे सब नदियों के किनारे आई हैं। हम लोगों ने इतिहास के पन्नों को पलटा, लेकिन नदियों के महत्व को नहीं समझा।
देश में पिछली सरकारों ने इनलेंड वाटरवेज बनाए, उसे 29 साल हो गये। हम लोग भी स्टैंडिंग कमेटी में उनसे सवाल पूछते रहते थे, लेकिन आज तक नहीं हुआ। जैसा कि हमने कहा कि इनलेंड वाटरवेज अगर दुनिया से कम्पेयर किये जाएंं तो चीन में 8.7 प्रतिशत जो उनका ट्रैफिक है, वह वाटरवेज में हैं, यू.एस. में लगभग आठ फीसदी है, लेकिन भारत में मात्र 0.4 प्रतिशत है, यानी कि लगभग नगण्य है। जैसा कि माननीय मंत्री जी ने बताया, इसकी जो ताकत है, अगर एक हार्स पावर हम इस्तेमाल करते हैं तो पानी पर एक जगह से दूसरी जगह पर चार हजार किलोग्राम उठाकर डाल सकते हैं। रेल में एक हार्स पावर में मात्र पांच सौ किलोग्राम है और रोड में सिर्फ डेढ़ सौ किलोग्राम है। इस तरह से अगर पांच हार्स पावर की गाड़ी हो तो लगभग सात सौ किलो हम रोड पर चला सकते हैं, लेकिन लगभग बीस हजार के.जी. हम नदी में खींच सकते हैं। इनमें इतना ज्यादा फर्क है। इसी प्रकार से उसके बहुत सारे आंकड़े भी हैं। क्योंकि भारत में अभी लगभग 65 फ्रेट है, ये सामान रोड से जाता है, रेल से 27 प्रतिशत जाता है और पानी से मात्र 0.4 प्रतिशत जाता है।
महोदय, अगर हम विश्व युद्ध में देखें यानी वर्ल्ड वार -1 और वर्ल्ड वार-2 में देखें तो दोनों युद्धों में चाहे वह कोयला, तेल, आयरन, सल्फर हो या बारूद हो, ये सब उन दोनों युद्धों में मात्र नदियों के माध्यम से पहुंचाया गया था, इसका इतिहास साक्षी है। लेकिन दुनिया के इतिहास के साक्षी होते हुए भी शायद भारत में कभी किसी ने यह महसूस नहीं किया कि इसे हम लोग आगे लेकर चलें। आज पहली संस्था जिसने नदी का उपयोग कोयले के ट्रंसपोर्टेशन में किया और 560 किलोमीटर सागर आइलेंड से फरक्का वैस्ट बंगाल से एनटीपीसी की प्रोजैक्ट में कोयला पहुंचाया जा रहा है तथा आने वाले दिनों में कोयला पहुंचाने का काम माननीय मंत्री जी के विभाग के द्वारा किया जायेगा। उस काम को करने के लिए देश की सरकार ने एक बड़ी योजना बनाई है। लेकिन इसमें जो पहले से वॉटरवेज़ है, गंगा-हल्दिया-इलाहबाद से जो गंगा पर है, वह 1620 किलोमीटर है। 811 किलोमीटर ब्रह्मपुत्र-हुबली पर है। कोल्लम से कोटपुरा, यह दक्षिण का है। तमिलनाडु और पुद्दुचेरी में नैशनल वॉटर वेज़-4 है। उड़ीसा और पश्चिम बंगाल में नैशनल वॉटर वेज़-5 है। ये तमाम ऐसे वॉटरवेज़ हैं, जो वऐााॉ से, जब से धरती की संरचना हुई होगी, तब से हैं, लेकिन शायद किसी ने ध्यान नहीं दिया।
सभापति जी, आज सचमुच वॉटर फ्रंट पर क्या हो सकता है, इसको समझने के लिए हमें अहमदाबाद में साबरमती नदी पर हुआ काम देखना चाहिए। हम यूरोप जाते हैं, वैनिस जाते हैं, लंदन जाते हैं और दुनिया भर का 80औ टूरिज्म इन्हीं बैंक्स पर है, जो हम पूरी दुनिया में देखते हैं, लेकिन भारत में पहली बार इस सरकार ने इस पर ध्यान दिया है। माननीय नितिन गडकरी जी ने माननीय प्रधान मंत्री जी की सोच के तहत उसकी शुरूआत की है। ये सब अपने आप में ऐसी ही परिकल्पनाएंं हैं। हम में से कुछ लोगों को अपने जीवन में बड़े-बड़े क्रूज़ लाइनर्स पर जाने का मौका मिलता है। यूरोप में, रोम में, फ्रांस में, आइसलैण्ड में, अंटार्टिका में एक से एक बड़े -बड़े जहाज़ हैं। आज अगर हम भारत के भीतर क्रूज़ लाइनर्स को ही देखें तो मुश्किल से मुंबई के पोत पर या कोचीन के पोत पर ही मिलता है। दुनिया का सबसे बड़ा टूरिज्म सैक्टर है। क्रूज़ लाइनर और इंटरनल क्रूज़िस के माध्यम से टूरिज्म की संभावनाओं को बढ़ाया जा सकता है। जैसा कि आपने पहले कहा, शायद यह संदर्भित इसलिए होगा कि यह अपने आप में एक रैवल्युशन है और हम इसको रैवल्युशन इसलिए कहेंगे कि आपको याद होगा कि हमारी सरकार जो नीतिगत फैसले करती है, जब सन् 2003 में हम लोगों ने हवाई सेवाओं के बारे में इसी प्रकार की शुरूआत की थी, सौभाग्य से मैं उस दौरान उस सरकार में मंत्री था तो उस समय मात्र 70 लाख डोमैस्टिक पैसेंजर्स हवाई जहाज़ पर उड़ते थे और जब से इस देश में हम लोगों ने लो कॉस्ट एयरलाइंस चालू की हैं तो आज आठ करोड़ पैसेंजर्स हवाई यात्रा करते हैं। यह उस समय का निर्णय है। चाहे वह सड़क के क्षेत्र में है या हवाई यातायात के क्षेत्र में है, लेकिन विलंब से हुआ कुछ निर्णय क्योंकि हमारी सरकार सन् 2000 में चली गई थी। आज सौभाग्य है कि देश को ऐसा प्रधान मंत्री मिला है जो आगे सौ वऐााॉ के बारे में सोचता है और इस काम को पूरा करने के हमारा सौभाग्य है कि आज प्रथम बेंच पर माननीय गडकरी जी बैठे हुए हैं। हमारी आस्था इनकी कार्यशैली में है और देश भर में जिस प्रकार से सड़कों का निर्माण हो रहा है, वह सराहनीय है। अभी इन्होंने भारत माला में जिस प्रकार से सड़कों के निर्माण का काम शुरू किया है, हम लोगों ने देखा है, चाहे गुजरात में हो, चाहे महाराऐट्र में हो, चाहे बिहार में हो, अब 42औ जो ट्रैफिक है, वह नैशनल हाइवेज़ यात्रा करता है। जिस प्रकार से गडकरी जी ने पूरी सोच बना कर, पूरे भारतवऐाऩ का एक जो नक्शा बनाया है और जिस गति से काम कर रहे हैं, हमें विश्वास है कि उसी गति से इनलैण्ड वॉटरवेज़ का काम होगा।
महोदय, मैं माननीय गडकरी जी से एक बात कहना चाहूंगा कि इसके लिए दो हज़ार करोड़ रुपये कम हैं। गडकरी जी, आप कभी भी इसी प्रकार का बिल किसी हफ्ते हमारे पास ले कर आएंं, सभी लोग आपका समर्थन करेंगे। आप दो हज़ार करोड़ रुपये ले जाना चाहें या दो लाख करोड़ रुपये ले जाना चाहें, हम सभी का आप पर बड़ा भरोसा है। आप जो भी कदम उठाएंंगे, यह पूरा सदन आपके साथ रहेगा।
सभापति महोदय, इन्हीं चंद शब्दों के साथ मैं इस बिल का पुरज़ोर समर्थन करता हूँ।
प्रो. सौगत राय (दमदम): सभापति महोदय, हमारे मंत्री गडकरी जी सैंट्रल रोड फण्ड (अमेण्डमेंट) बिल, 2017 लाए हैं, मैं उसका समर्थन करता हूँ। गडकरी जी ने पहले ही बता दिया है कि इसके लिए अलग से कोई रूपया नहीं लेना है। पहले ऐसा था कि सैंट्रल रोड फण्ड एक बिल था सन् 2000 का, वह केवल रास्ता बनाने के लिए था और उसमें बता दिया गया कि कैसे रूपया दिया जाएगा। 41.5 per cent cess for development and maintenance of national highways. अभी गडकरी जी इनलैण्ड वॉटरवेज़ के लिए रूपये देने लगे तो वह नैशनल हाईवेज़ से ढाई पर्सेंट कम कर के उसको इनलैण्ड वॉटर वेज़ के लिए दिया है। जैसा उन्होंने बताया, उन्होंने अपने दफ्तर से अपने दफ्तर के अन्दर ही पैसा ट्रंसफर किया और इसमें 2,345 करोड़ रुपये हमारे इनलैंड वाटरवेज के डेवलपमेंट के लिए मिलेंगे, इसमें हमारी कोई आपत्ति नहीं है, हम इसका समर्थन करते हैं। दूसरी बात यह है कि इनलैंड वाटरवेज अथॉरिटी ऑफ इंडिया एक्ट एक कानून वऐाऩ 1985 का था। गडकरी जी वऐाऩ 2016 में एक नेशनल वाटरवेज बिल लाये, जिसमें 111 वाटरवेज को उन्होंने नेशनल वाटरवेज करके एक घोऐाणा की और वह कान्सिक्वेन्ट अमेंडमेंट जो होता है, वह इस बिल में लाया गया, इसमें भी हमें कोई आपत्ति नहीं है। गडकरी जी ने बताया है कि पहले रोड फंड के लिए कितने रुपये दिये जाते थे और अभी कितने रुपये आ रहे हैं। उसमें नेशनल हाइवेज के लिए था, रूरल रोड्स के लिए था, रेलवे ओवरब्रिजेज के लिए था और यह नेशनल वाटरवेज जो हो गया, उसमें कोई आपत्ति नहीं है। मैं दो चीज समझने की कोशिश कर रहा हूँ। मेरे से पहले रूडी जी ने यहाँ पर भाऐाण रखा और वे बहुत अच्छा EUPHRATES, TIGRIS, मेसोपोटेपियन रिवोल्यूशन, सिविलाइजेशन से लेकर वाजपेयी जी तक चले आये। जब वे वाजपेयी जी की सरकार में मंत्री थी, वहाँ तक वे आये। वे बहुत अच्छा बोलते हैं, इन्हें क्यों मिनिस्ट्री से बाहर किया जाता है, यह बात मेरी समझ में नहीं आती है। वे अच्छा बोलते हैं, अच्छा जानते हैं, वाजपेयी जी के जमाने में भी इन्होंने अच्छा काम किया और इन्होंने स्किल डेवलपमेंट में भी अच्छा काम किया। रूडी जी को बाहर क्यों निकाला गया, यह बात मुझे साफ नहीं होती है।...(व्यवधान) बड़े भाई को मैं कहना चाहता हूँ कि यह किसानों से सम्बन्धित बात नहीं है, वीरेद्र सिंह जी आप मेरी बात सुनिए।
महोदय, मेरा दूसरा सवाल यह है कि गडकरी जी का बहुत नाम है कि वे विकास पुरुऐा हैं। कई लोग तो ऐसे हैं, जो नरेद्र मोदी जी से उनकी तुलना करते हैं, क्योंकि ये भी बहुत डेवलपमेंट करते हैं।...(व्यवधान) गडकरी जी, अभी चले गये हैं, यह अच्छा ही है, उनको अपनी प्रशंसा नहीं सुननी चाहिए। वे थोड़ा खाकर आयें और उनकी तबियत भी थोड़ी ठीक नहीं है, कुछ दिन पहले उनकी बेरियाट्रिक सर्जरी हुई है। उन्हें अपनी तबियत की देखभाल करनी चाहिए।
महोदय, मैं एक सवाल पूछना चाहता हूँ कि गडकरी जी विकास पुरुऐा हैं। उनके बारे में बोला जाता है, जब वे महाराऐट्र में पीडब्ल्यूडी मिनिस्टर थे, वह जो बॉम्बे-पुणे हाइवे बना, वह हिन्दुस्तान का सबसे अच्छा हाइवे है, उसे बनाने के लिए वे जिम्मेदार थे। अभी तक उसको लेकर उनकी प्रशंसा होती है कि उन्होंने कितना अच्छा हाइवे बनाया है। उसे महाराऐट्र की लाइफलाइन कहा जा सकता है। यह अच्छी बात है। आजकल मुझे लगता है कि गडकरी जी विकास पुरुऐा न रहकर सपनों के सौदागर बन गए हैं। वे लोगों को सपना दिखाते हैं। वे कहीं भी जाते हैं, पूछते हैं कि इसमें कितना पैसा लगेगा, बताया जाता है कि पाँच हजार करोड़ रुपये, वे बोलते हैं कि हो जायेगा। यहाँ पोर्ट लगाना है, कितना पैसा लगेगा, दस हजार करोड़ रुपये, वे बोलते हैं कि हो जायेगा। उनसे पूछते हैं कि रुपया कहाँ से आयेगा, बजट में तो उतना पैसा नहीं है, तो वे बोलते हैं कि उसका इंतजाम मैं कर लूँगा, फॉरेन से मँगा लूँगा, वर्ल्ड बैंक से मँगा लूँगा, आई.एम.एफ. से मँगा लूँगा। मैं कहना चाहता हूँ कि वह सब रुपया नहीं आया है। मैं गडकरी जी से सीधा सवाल पूछना चाहता हूँ कि उन्हें मंत्री बने हुए साढ़े तीन साल हो गए हैं, वाजपेयी जी ने जो गोल्डन क्वाड्रीलैटरल किया था, जिसके बारे में रूडी जी ने जिक्र किया, उसे तो हमने आँखों से देखा कि रास्ता बना, इन्टरनेशनल टेंडर हुआ और वह रास्ता दिखाई देता है। आजकल वह कंजेशन हुआ, टोल को लेकर प्रॉब्लम हुआ, मेन्टिनेंस को लेकर प्रॉब्लम हुआ, वह दूसरी बात है। गडकरी जी ने कहां नया रास्ता बनाया, मुझे एक हाईवे वे दिखाएंं।...(व्यवधान) हाउस के सामने एक व्हाइट पेपर पेश किया जाए कि मैंने यहां पर एक नया रास्ता बनाया, मैंने एक नया पोर्ट यहां पर बनाया।...(व्यवधान) यह केवल सपना दिखाया जाता है। अभी तक ज़मीन पर हिन्दुस्तान के हाई वे की क्या हालत है, जो कोई भी हाईवे से होकर जाता है, उन्हें यह पता है।
सर, इसलिए मैं यह चाहता हूं कि वे यह बताएंं कि कहां पर नया नेशनल हाई-वे बना और कहां रास्ते का इप्रूवमेंट हुआ, कहां रास्ते का अच्छा मेनटेनेंस हुआ, कहां रास्ते पर डकैती होना बंद हुआ, यह सब बताएंं। हाउस को यह जानना चाहिए कि इस विकास पुरुऐा ने क्या किया है।
हाउस यह भी जानना चाहता है कि रोज़ यह बोला जाता है कि नया पोर्ट बनेगा, सागरमाला बनेगा, भारतमाला बनेगा, अच्छे-अच्छे नाम हैं ‘स्वच्छ भारत’ जैसे। भारतमाला कितना बना है और कितना सागरमाला बना है? पोर्ट में कितना इन्वेस्ट हुआ है, कितना रियलाइजेशन हुआ है, इसके आंकड़े हम देखना चाहते हैं।
महोदय, मैं जहां से आता हूं, मेरा क्षेत्र गंगा नदी के किनारे है। गंगा नदी उत्तर भारत की लाइफलाइन है। आज से बीस साल पहले, शायद पच्चीस साल पहले, जब राजीव गांधी जी प्रधान मंत्री थे, गंगा के ऊपर फरक्का में एक लॉक गेट बनाया गया, ताकि इलाहाबाद से हल्दिया तक जहाज जा सकें, बंगाल से कोयला उत्तर भारत में लिया जा सके। मैं जानना चाहता हूं कि कितने जहाज लॉक गेट का इस्तेमाल करते हैं और वे हल्दिया से या कोलकाता से उत्तर भारत तक जाते हैं? वाजपेयी जी ने साढ़े तीन सालों में क्या किया? यह मेन नेशनल वाटरवेज नम्बर-1 है। इसमें क्या डेवलपमेंट है, यह मैं देखना चाहता हूं।
गडकरी जी विकास पुरुऐा हैं, इसलिए उमा भारती जी से पोर्टफोलियो छीन कर उन्हें वाटर रिसोर्सेज मिनिस्टर भी बनाया गया।...(व्यवधान) उनके मिनिस्टर बनने के बाद मैंने उन्हें चिट्ठी लिखी कि मेरे इलाके में गंगा के किनारे घाट है, उसे थोड़ा मरम्मत किया जाए, वहां रोज इरोज़न हो रहा है, रोज गंगा का किनारा टूट रहा है। उसका जवाब एक बार आया था कि the matter is being looked into. पर, आज तक कोई रिजल्ट नहीं हुआ। मैं जब यह कहता हूं कि सपना देखा है सपना, तो ये सपना ही लगता है।
सर, आपको शायद पता होगा, आप तो पुराने सोशलिस्ट हैं।
श्री जितेद्र चौधरी (त्रिपुरा पूर्व) : अभी भी हैं।
प्रो. सौगत राय: नहीं, अभी तो संघ परिवार में शामिल हो गए हैं।
सर, आप जानते हैं कि कछाड़ है, त्रिपुरा है और हमारे नॉर्थ-ईस्ट से हमारे ये भाई लोग आते हैं। वहां रोड से कोयला ले जाना मुश्किल है। पहले यह था कि हमारे कलकत्ता बन्दरगाह से कोयला लेकर रॉयल इंडियन नैवीगेशन के स्टीमर्स गंगा से होते हुए फिर समुद्र में जाकर फिर असम से होकर कुशियारा रिवर में जाते थे। आप लोग जानते होंगे कि कछाड़ में करीमगंज को जाता था। यहां ये दोनों माननीय सदस्य त्रिपुरा के हैं। ये इसे जानते हैं। वह लाइन बंद हो गयी। बाद में सी.आई.डब्ल्यू.टी.सी. हुआ और अभी कोलकाता से कछाड़ तक कोयला नहीं जाता है। गडकरी जी इसके बारे में बताएंं। मांडविया जी उनके राइट हैंड हैं और मोदी जी के भी। वे बताएंं कि उसके बारे में क्या हुआ?
सेन्ट्रल इनलैंड वाटर ट्रंसपोर्ट कॉरपोरेशन का क्या डेवलपमेंट हुआ, यह हम जानना चाहते हैं। नेशनल वाटरवेज बहुत अच्छा कॉन्सेप्ट है, लेकिन एक साल हुए, उसके कानून को हमने यहां पर पारित किया, उसकी क्या डेवलपमेंट है? उसकी क्या प्रोग्रेस हुई है? हमारे पोर्ट की क्या स्थिति है? मैं अपनी आँख के सामने देखता हूँ कि गंगा के ऊपर कलकत्ता पोर्ट मर रहा है। इसको बचाने के लिए केद्रीय सरकार क्या कर रही है? हमने हल्दिया में नया पोर्ट बनाया है, उसका एक ही चैनल है, वह ईडेन चैनल है। वह भी सिल्टेड होता जा रहा है। उसके ड्रेज़िंग के लिए क्या किया गया है? हमारी आँख के सामने कलकत्ता का बंदरगाह मर रहा है। यह हिन्दुस्तान का एक नंबर का बंदरगाह था। इसके बारे में क्या किया गया है? हम लोग इसके बारे में जानना चाहते हैं।...(व्यवधान)
श्री निशिकान्त दुबे (गोड्डा) : श्री गडकरी जी तो वहाँ नया पोर्ट बनाना चाहते हैं, लेकिन आपकी सरकार जमीन नहीं दे रही है।...(व्यवधान) इस संबंध में पाँच मीटिंग हो चुकी है।...(व्यवधान)
प्रो. सौगत राय: नहीं‑नहीं, आप सुनिए। मैं उसके बारे में भी बताना चाहता हूँ, आप मुझसे सुनिए। श्री निशिकान्त जी, आपका जरूरी सवाल है।...(व्यवधान)
माननीय सभापति : अब, आप अपनी बात समाप्त कीजिए।
…( व्यवधान)
प्रो. सौगत राय: अब मेरा यह अंतिम सवाल है।...(व्यवधान) सर, आप भी मधुबनी से हैं। गंगा नदी तो उधर से भी जाती है। गंगा आपकी, हमारी तथा पूर्वी भारत के सभी लोगों की नदी है। हमारे यहाँ थर्ड पोर्ट बनाने की बात चल रही है, वह डीप सी पोर्ट है। श्री गडकरी जी चाहते हैं कि वह सागर आईलैंड में बने। वहाँ पोर्ट बनाने के लिए एक रोड‑कम‑रेल ब्रिज़ बनाना है। हमारी सरकार ने प्रस्ताव दिया कि आप समुद्र पर ताज़पुर में एक पोर्ट बनाएंं। श्री गडकरी जी, उसकी स्वीकृति क्यों नहीं देते हैं? इसलिए, मैं कहता हूँ कि श्री गडकरी जी जमीन पर कुछ करके दिखाएंं, लोगों को बचाएंं, सपना मत दिखाइए।...(व्यवधान) सपना देखने के लिए हम सिनेमा जाएंंगे और यहाँ पर काम देखने के लिए हाउस में आएंंगे।...(व्यवधान) अब, मैं इन्हीं बातों के साथ इस बिल का समर्थन करता हूँ।
DR. RABINDRA KUMAR JENA (BALASORE): Mr. Chairman, Sir, thank you for permitting me to speak on the Central Road Fund (Amendment) Bill, 2017.
I stand here in support of this Bill. In the Bill it is said that 2.5 per cent of the cess on high speed diesel oil and petrol will be allotted for the development and maintenance of national waterways. On the face of it, it looks to be a simple Bill. But as we move along, we will find that there are much larger issues which are associated with this Bill. In the olden days we used to shape our boats to suit the river. But today the situation is just the reverse. We are shaping the rivers to suit the requirements of large vessels. So, there is a sea change in our approach towards our rivers and waterways. Having said that, I would like to say that in a country like ours the logistic cost accounts for about 14 per cent of our GDP which is nearly double of what it costs in many developing countries across the world. So, that is the level of seriousness being shown towards these river and national water issue.
Now, inland waterway could be the largest and the biggest intervention in water, post-Independence. That is how I describe it. We must congratulate the hon. Minister for bringing out this amendment which is the need of the hour. I will just elaborate on more what the hon. Minister has rightly said, ‘One litre of oil can move about 24 metric tonnes of cargo by road whereas it can move about 105 tonnes by waterway’. So, this is the kind of significance this waterway has got. While these are the positive points about this issue, there are several critical issues which we need to look into. There are several areas of concern which we like the hon. Minister to look into so that the issues can be handled in its entirety.
The RITES has come out with a Report which said that due to this inland waterways, 40 per cent of the cargo will move from railways to waterways, meaning thereby the road will not be much disturbed as road will lose cargo only to the extent of 16 per cent. So, the benefit is just marginal. We need to look into this. Most of the new national waterways included in this are fresh water rivers. Post-monsoon the fresh water rivers get dried up. So, when we move the water towards navigation, we need to look at what its consequential impact will be on irrigation and drinking water. That is another critical area which we must look into.
Sir, I will now come to the ecological aspect. I come from Odisha and it is a burning issue there. Unless we do a proper Environment Impact Assessment, the ecological aspect is going to be a big problem which is the case in Odisha in respect of National Waterway 5 and National Waterway 60 where the Bhitarkanika National Park is put in great danger.
Having said that, let me come to one or two important issues with regard to the Ministry of Road Transport and Highways. The Ministry has allocated just Rs. 3,100 crore for the maintenance of road infrastructure under National Highways which is just five per cent of the total expenditure whereas in developed countries it is about 40 to 48 per cent. What is the consequence of this poor allocation? The consequence is that we have bad, unsafe roads where innocent people are getting killed everyday. This is something which I would urge upon the hon. Minister to look into.
Then, as per Section 4 of the Central Road Fund Act, 2004, whatever cess that gets collected and deposited in the Consolidated Fund of India, it must be sent for the Central Road Fund after adjusting the collection expenses. The C&AG Report is very clear and it says that in the last five years, the amount that has been given to the Ministry is less by about Rs. 1,200 crore. The point is, when we are talking of Rs.2,500 crore, why is this amount of Rs. 1,200 crore lying in the Consolidated Fund of India which is a clear violation of the provision of the Central Road Fund Act of 2004? This needs to be looked into and this money should be given to the Ministry of Road Transport and Highways so that the requirement of money can be met.
Sir, since I come from Odisha, I would like to inform that we have always been the victim of neglect of the Central Government, whether it is the Mahanadi issue or the Polavaram issue or the issue of financial allocation. This is also becoming very transparent in the case of Central Road Fund. So, I would like to make a submission to the hon. Minister Nitin Gadkariji. In 2016-17, our State Odisha has been allocated only 12 projects under the Central Road Fund whereas another State has been allocated 562 projects. I do not want to name that State because I do not want to hurt the sentiments of hon. Members here. What is the logic of allocating 562 projects to a particular State? When some other State could get 562 projects under the Central Road Fund, why should Odisha get only 12 projects? What is the logic behind it? There is no logic that Odisha will get only 12 projects and some other State will get 562 projects. So, I would urge upon the Minister to do justice to Odisha because our State has been a victim of Central Government’s neglect for long. The hon. Minister Shri Nitin Gadkari has got a very good reputation and so I request him to do justice to Odisha as he is doing to other States.
Coming to my parliamentary constituency, NH 49, NH 60 and NH 80 are passing through my area. These three National Highways have become deathbed, if I may say so. Several accidents are happening on these three National Highways due to road fault and design fault. So, I would urge upon the hon. Minister to look into these three National Highways so that innocent people do not get killed day in, day out.
Lastly, Odisha Coast Canal is passing through my constituency. I have written to the hon. Minister in this regard and so I would request him to include this canal in the next phase of development of National Waterways so that the people of my constituency also get benefit from this revolutionary initiative which he is taking.
With these words, I thank the hon. Minister for this effort and urge upon him to take into consideration some of the concerns which I have enumerated during my speech. Thank you.
श्री अरविंद सावंत (मुम्बई दक्षिण) : सभापति महोदय, आदरणीय मंत्री नितिन गडकरी साहब जो बिल लाए हैं, मैं उसके समर्थन में बोलने के लिए खड़ा हुआ हूं। मुझे बहुत खुशी होती है, खास कर नितिन गडकरी साहब जब भी कोई बिल लेकर आते हैं तो वे एक कदम नहीं दस कदम आगे जाते हैं। लोग एक कदम की बात करते हैं, वे दस कदम आगे चलते रहते हैं। ...(व्यवधान) यह जो वाटरवेज की बात आई, इनकेदिमाग में वह बहुत दिनों से चल रहा था। जब भी मैं बात करता था कि क्या चल रहा है, तो बोलते थे कि अरविंद जी, मेरे दिमाग में वाटरवेज चल रहा है। कुछ लोग कुत्सित भावना से टीका-टिप्पणी करते थे। लेकिन मुझे उम्मीद थी कि आज नहीं तो कल इसके लिए एक बिल आएगा क्योंकि हाईवेज के साथ वाटरवेज शब्द नहीं था। आपने इसके ऊपर बिल लाकर कानूनी तौर पर एक शक्ति दे दी है। हमारे चुनाव क्षेत्र मंबई जैसा शहर है, जहां समुद्री तट है, सागरमाला की भी बात है, वहां एक बड़ा बंदरगाह भी है। उसे लेकर हमने बार-बार मांग की है, यहां मुंबई पोर्ट ट्रस्ट का ज्यादा एरिया है, उनके मन में भी एक सपना है। उसे साकार करने के लिए मैं भी अपने तौर पर बहुत प्रयास कर रहा हूं और मैं उसका समर्थन करता हूं।
हाल ही में ससून डॉक में मछुआरों को नया विजन दिया, जिसके बारे में जिन्दगी में उन्होंने कभी सोचा नहीं था कि हमारा ससून डॉक इस तरह से खुबसूरत बन सकता है। वहां इतनी गंदगी थी, उसको अच्छी तरह से साफ किया, बहुत सारे देशों जैसे मलेशिया, आस्ट्रेलिया और हालैंड से पेंटर आए, यंग जेनरेशन आई और खूबसूरत पेंटिंग की, रास्तों को साफ किया। अब मछुआरों के लिए एक नया सेंटर खोलने की बात है और आगे चलकर उसमें वाटरवेज की बात आती है।
मैं आपसे उम्मीद करता हूं। मैं बचपन में कोंकण के गांव में जाता था, मुंबई से गोवा नहीं मुंबई में देवगड़ में उतरते थे, मालवण में उतरते थे, वहां जेटी की जरूरत थी, आज वह वाटरवे बंद है। अभी एक महीने पहले इसे मुंबई-गोवा में किसी प्राइवेट पार्टनरशिप से शुरू किया गया है इससे न केवल टूरिज्म बल्कि लोगों को भी आने जाने में बहुत सहूलियत हो जाएगी। आप मुंबई-गोवा रोड बनाने जा रहे हैं लेकिन उसके ऊपर जो हादसे होते हैं, अगर आप उसे देखेंगे तो आपको लगेगा कि इससे बेटर है कि वाटरवेज से जाएंं। इससे डीजल सेविंग भी है जबकि पेट्रोल पर इतना खर्च आता है। एक हॉर्स पॉवर में अगर हम अगर 500 टन उठाते हैं तो यहां 4000 हजार टन उठाकर लेकर जाएंंगे।That is again an advantage in case of a country also. मुंबई पोर्ट ट्रस्ट के इलाके के लिए आपने जो सपना देखा है, उसे साकार करने में मैं प्रधान मंत्री जी से आपके माध्यम से खास मांग करता हूं। इन्होंने प्रोजेक्ट दिया हुआ है, उस प्रोजेक्ट में बीपीटी के लैंड पर बहुत बड़ी इन्क्रोचमेंट है, वाटरवेज के लिए जब जेट्टी बनेगी तो आने जाने के लिए बीच में झुग्गी-झोपड़ी हैं उनका अगर पुनर्वास नहीं हुआ तो फिर यह नहीं बन पाएगा, अगर वाटरवेज बनेगा तो ये लोग कहां जाएंंगे, इसे भी देखने की आवश्यकता है। मुंबई के नजदीकी अलीबाग, मांडवा, मरूड जंजीरा हैं, वे कोकण में भी जाएंंगे, इस वाटरवेज में उसका ज्यादा इस्तेमाल होना चाहिए।
मैं आपसे एक छोटी मांग करता हूं। इसे जब आप करने जाएंंगे तो इसमें बीपीटी में ज्यादा ध्यान देना पड़ेगा। मुंबई के दोनों किनारों के बारे में कीर्तिकर साहब भी बोलेंगे। आपको ड्रेजिंग पर ज्यादा ध्यान देना पड़ेगा। महाराऐट्र में हाल ही में नदियों में दो-तीन हादसे हुए, महाराऐट्र के बाहर भी हादसे हुए। नदियों में जो नौकाएंं चल रही हैं, क्या उनका रजिस्ट्रेशन है, क्या कानून प्रावधान करता है कि ये छोटी नौकाएंं लोकल लोगों को लेकर इस किनारे से उस किनारे पर लेकर जाएंं, नौकाएंं स्कूलों के लिए भी जाती हैं, उनके बारे में कोई रजिस्ट्रेशन है या नहीं। वह डूब जाती हैं, दो-चार हादसे ऐसे हुए हैं जिसमें लोगों की जानें गईं। यह मालूम नहीं कि वह जिस नौका से जा रहे हैं क्या वह नौका इतने लोगों को ले जाने के लिए शक्तिशाली है? उसके बारे में भी कानून में प्रावधान करना होगा, इसके ऊपर आपको ध्यान देना होगा। ऐसे कोई भी नौका बनाकर वहां चलाता रहेगा, यह नहीं होना चाहिए। मैं आपका सहेदिल से समर्थन करता हूं। मुंबई का किनारा जल्द से जल्द टूरिज्म का एक सेंटर बने जिसका इस्तेमाल वाटरवेज में हो। मैं इसका समर्थन करते हुए अपनी वाणी को विराम देता हूं। आपने मुझे अवसर दिया, आपको धन्यवाद। जय हिन्द।
सभापति महोदय : वक्ता समय सीमा का ध्यान रखें।
SHRI KESINENI SRINIVAS (VIJAYAWADA): Thank you, Sir. The transportation system of any country is like the nervous system of human body. For rapid growth of any economy or country, a robust network of roads, railways, ports and airways is needed. Hence, it is a crucial system which has to be given special attention. I laud the efforts of the Prime Minister, Shri Narendra Modi ji and especially the Minister of Road Transport and Highways, Shri Nitin Gadkari jitowards identifying its importance and giving utmost priority to the sector.
I appreciate the efforts of the Government to pass the National Waterways Act. The National Waterways Act envisages comprehensive policy to develop 111 waterway plans for pan India coverage. A project of this magnitude will require a matching amount of funds. Hence, I welcome the Government’s proposal to allocate two-and-a-half per cent of the road fund for development and maintenance of waterways.
The collections under the Central Road Fund have increased from about Rs. 26,000 crore in 2014-15 to about Rs. 81,000 crore in 2016-17. Increase in collections means that the Ministry has more resources to implement various projects, but it is also necessary to see that the amount is actually utilized.
The Central Road Fund Act provides specific percentage based allocation to five areas – National Highways, rural roads, State roads, border roads and railway bridges and safety works. This ensures availability of funds for building transport infrastructure. However, the distribution of funds has not been uniform. For example, my State of Andhra Pradesh has a National Highway density of 31.6 kms per 1000 sq. kms. When compared to the 36 States and the Union Territories, Andhra Pradesh occupies a dismal 26th position, whereas in terms of area we are the eighth largest State in the country. In terms of density of State highways, we are better placed than both the national parameters at 16th place in the country. We, as a State, despite a deficit budget, have performed admirably.
Hence I would request the Ministry to designate newer National Highways and increase the allocation of funds to Andhra Pradesh.
The scenario for rural roads is even worse than the National Highways. Under the Pradhan Mantri Gram Sadak Yojana (PMGSY), Andhra Pradesh is the sixth most efficient State in the usage of Central Road Fund. The cost per kilometre of road constructed is less than the national average of 25 per cent. A measly three per cent of the total expenditure till date has been in the State of Andhra Pradesh, whereas the first five States account for 50 per cent of the total expenditure.
As a newly reorganised State, Andhra Pradesh, with a deficit budget, requires a greater allocation of funds. I would request the Government for a more equitable distribution under the Pradhan Mantri Gram Sadak Yojana with greater allocation to Andhra Pradesh.
The key challenge in the deficiency of funds is the difference between allocation and actual disbursal under the Central Road Fund. Rural roads have been allocated 33.5 per cent under the Act. As per 2016-17 figures, 33.5 per cent allocation translates to Rs. 27,000 crore. Sadly, however, the Rural Development Ministry itself requested for only Rs. 14,000 crore.
Such a huge divergence will act as barriers to our dreams of an economically better India. These rural roads provide the ‘last mile connectivity’. To ensure that development actually reaches each and every one, it is absolutely imperative that we do not neglect development of rural roads and give them their due importance and their due funds.
I urge upon the Minister to scrutinise the utilisation of the Central Road Fund and ensure that the allocation is on par with what is mandated by the Act. I would request him to put into place a system to make sure that two-and-a-half percent which is earmarked for National Waterways is actually allocated and disbursed.
One of the National Highways, NW-4 is under construction in my State, Andhra Pradesh. A substantial portion of the project is in my constituency, that is Vijayawada. The first phase of the National Waterway-4, Muktyala to Vijayawada has been initiated with a completion target for 2019. I would like to bring to the notice of the hon. Minister that the National Waterway-4 project has suffered numerous delays. I thank the hon. Minister, Shri Nitin Gadkari ji for personally coming to Vijayawada to lay the foundation stone of the Muktyala-Vijayawada Waterway on 3rd October this year.
Our State, under the leadership of our beloved Chief Minister Shri Chandra Babu Naidu, was the first State to complete the inter-linking of rivers. Similarly, we would like to lead the country in the successful execution of the National Waterways Project. I would like to make two specific requests to the Minister.
One is about fast tracking the creation of the SPV proposed between the Inland Waterways Authority of India and the Government of Andhra Pradesh and increase in the allocation of funds for the early completion of the project.
SHRI KONDA VISHWESHWAR REDDY (CHEVELLA): Thank you Chairman Sir for giving me an opportunity to speak on the Central Road Fund (Amendment) Act, 2017.
Sir, the Objects and Reasons say that the National Waterways provide cost effective, logistically efficient and environmentally friendly mode of transportation. So, it is very important to develop this. In fact we have been talking about this in the Parliament for the last two years. This is one of the first few steps being taken and we do welcome this Bill on behalf of TRS Party, we do support this Bill.
However, this Bill is not sufficient to promote waterways. There are so many other things that the Transport Ministry has to look into.
Firstly Sir, the Britishers built the Buckhingam Canal connecting Chennai, the then Madras to Kolkata. No work has been done on this so far. It is a great opportunity because in inland waterways, although there is a sea route, for inland waterways, you do not require ports, you can transport short distances and long distances and you do not need big vessels.
Secondly, in the North East, even as we speak today, the power plants there, instead of using coal, they are using bamboos Sir and by burning bamboo, I think the bamboo farmers and the forest department is getting less than a thousand rupee a ton. If these waterways are provided, the value of bamboos will become five times higher if it is transported. Of course, this always requires talking with Bangladesh, the Brahmaputra Waterways and the access of North East to the Bay of Bengal. Once again, not much work has been done in this area.
Also Sir, across almost all our rivers, there are dams and barrages. Some of them are insurmountable dams and barrages. To transport goods across these rivers, we require sluices and gates. Once again, no work has been initiated or project work has been developed on transporting goods across the barrages. But, that is okay Sir. We inherited these dams and barrages but whatever the new dams being built, huge dams are being built where they are insurmountable, you cannot transport goods across these dams. So, while giving permissions to new dams, this has to be taken into cognisance. Our Government of Telangana has particularly taken this into cognisance and are building small barrages with low height so that waterways can be enabled across Godavari river. But more importantly, if I buy a new car, I know where to go and register it. If I am a new car manufacturer, I know where to get permissions. But if I am a boat builder, who gives me the permission? There is an organisation under the Directorate of Shipping who gives permission. But it is the same organisation which gives permission for Rs. 10,000 sea going ship as well as two seater boat or a tourism boat. We need appropriate authorities to give sea-worthiness and water-worthiness certificates for smaller crafts. We have nothing of that sort.
16.09 hours (Shri Ramen Deka in the Chair) How do you register these boats? If I do buy a new boat, I can go to an office in Hyderabad or whichever State and I can register this boat. But when we recently look for permissions, somebody said to go to the Tourism Department and get permissions. Somebody else said to go to the Fisheries Department and get permission. Is there any place in any State when we buy a boat, we can get it registered? That should also be made easier. But something even more important, recently, hon. Kesineni Garu, the former Speaker who talked about the Bill, I think it is in his Constituency, there took a big accident. More than 25 to 30 people died and all of them belonged to another constituency, I think they belonged to Shri Y.V.Subba Reddy constituency.
I cannot blame the State Government. I cannot blame anyone. But I think there is not a single safety standard in India for lifejackets. There is no ISI standard for lifejackets in the entire country. So, we need to look into this.
Then, we have the Make in India Programme. The boats, especially, smaller boats and mid-size boats, require outboard engines. The outboard engines are not manufactured in India. They are all made by Hondas and Yamahas outside the country and they are imported. So, we need to focus on local manufacturing of outboard engines for boats. But even more important is cars. We have Euro-II and Euro-III standards for cars, and there are two types of outboard engines. One is a two-stroke outboard engine which is a little more polluting, which is an older technology engine. Just like two-stroke motorcycles are banned--now all are four-stroke engines--for outboard engines also, they banned two-stroke engines and only four-stroke outboard engines are there….… (Interruptions)
Please give me two more minutes. But while two-stroke engines are banned, what we really, in fact, need is to get those standards up. Last time Ganpat Sawant Ji was talking about Murud Janjira. Last time I went on Murud Janjira. What they have is, old diesel engines running some propellers. So there is no standard for the outboard engines or the motors, and I think just like we have Euro-II and Euro-III, we need to get those standards up.
So, all these are extremely important issues. Merely bringing the issues will not make any difference. I think all these have to be taken into cognizance. Like Prof. Saugata Roy said, it is not selling dreams. Then, the waterways will become a reality. Thank you.
DR. P.K. BIJU (ALATHUR): Sir, this is one of the important Bills because the Government is now going to introduce inland waterways into the ambit of Central Road Fund. I congratulate the Ministry on having taken this decision. It is a timely intervention.
As we know, we are ahead in road penetration in our country. The road network in India is more than 5,472,144 kilometres. It is the second largest road network in the world. Also, we are ahead of Japan, USA and China in providing road connectivity with 1.66 kilometre road per square kilometre of land but in Japan, it is only 0.91 and in the USA, it is 0.67. China is very far behind with 0.46 road per square kilometre of land. But our main problem is that out of these roads, 61 per cent of the roads got damaged or not being used properly.
This Central Road Fund (Amendment) Bill, 2017 was introduced in the Lok Sabha on 24th July, 2017 by hon. Minister, Nitin Gadkari Ji. This Act regulates the CRF that is credited with the cess collected on high speed oil and petrol. This collected amount is then released to the National Highway Authority of India, to the State Governments and to the Union Territories for development of national and State highways. Also, we have used this money for improving roads. We have given it for constructing express highways and toll roads. We have collected cess from the people and constructed a road. Again we are collecting money through tolls and other means. What is this? I would like to ask the hon. Minister how much amount we have collected so far and how much we have distributed for the development of State roads, national and express highways in our country.
Sir, in the State of Kerala, we have been using these inland waterways for long. We have sufficient waterways. In 1498, as we know very well, Vasco Da Gama came to this great country and stepped in Kappad in the State of Kerala.
Sir, we have declared 111 waterways throughout the country under the National Waterways Act, 2016. In the list of 111 waterways, four national waterways of Kerala have been included. One is Kollam-Kozhikode stretch of West Coast Canal. It is 365 km long. The second is, the 28-km Alappuzha-Changanassery Canal, known as the National Waterway-8. Third is, the 38-km Alappuzha-Kottayam-Athirampuzha Canal as the National Waterway-9 and the fourth is, 28 km-long Kottayam-Vaikom Canal as the National Waterway-59.
Sir, the hon. Chief Minister of Kerala, Shri Pinarayi Vijayan has declared that we will complete these waterways by 2020. So, we have started working on it.
Sir, there is one more thing that we should keep in mind while discussing this Bill. As we know we are suffering with air pollution in Delhi. It is not only in Delhi but in all the metros we are facing this problem because we are using the fossil based fuels like petrol and diesel for transportation. Our hon. Minister has now declared that we are going to introduce electrical vehicles after 2030. It has also been mandated for the vehicle manufacturing companies to start producing electrical vehicles. All the European countries have already started it. They have decided that by 2040 they will reduce 50 per cent vehicles running on fossil based fuels. We are going on the same path.
Sir, we are going to heavily depend for our transportation and logistics on the rivers. So, the issue of water pollution is of very much importance. We have to take very strong measures, from the beginning itself, to have a check on it. Otherwise, we will go on the same path and face water pollution issues as we are facing the air and environment pollution.
With these words, I conclude my speech.
*m09 SHRI MEKAPATI RAJA MOHAN REDDY (NELLORE): Hon. Chairperson, Sir, I thank you for giving me an opportunity to speak on this Central Road Fund (Amendment) Bill, 2017.
Sir, I wholeheartedly congratulate the hon. Minister of Road Transport and Highways, and of Water Resources, for bringing this Bill before the House. It is going to provide sustainable fund availability for the development of waterways. Development of waterways is a very essential thing in this country because it provides alternative transport which is the cheapest also, as hon. Minister said in his opening remarks. While the rail traffic costs one rupee per kilometre and road traffic costs Rs. 1.50 per kilometre, waterways cost 20 paise per kilometre. Hence, it is a very advantageous mode of transport and has to be developed. So, I wholeheartedly congratulate the hon. Minister for taking up this subject in a big way. He is going to develop throughout the country 111 waterways.
One among them is the Waterway No. 4 from Kakinada in Andhra Pradesh to Puducherry which they are going to develop. That is going to be a very important subject in Andhra Pradesh. It is almost 800 kilometres. It is going to be the cheapest mode of transport in Andhra Pradesh as well as in Tamil Nadu up to Puducherry.
Sir, though it is out of way, I am mentioning one subject here. In order to provide the required water in the canal, you have to complete the Polavaram Project. In the Andhra Pradesh State Reorganisation Act, it has been mentioned that the Central Government will complete the Polavaram Project in all respects. This project is a multi-purpose project which is going to stabilize the Godavari anicut and the Krishna anicut. It is also going to provide irrigation to seven lakh acres of land. So, that is a very important project and is going to be the lifeline of Andhra Pradesh. It has to be developed by the Central Government. There is some confusion. That is why, people of Andhra Pradesh are very much agitated about this project.
I would request the hon. Minister that while developing these waterways, he has to complete the Polavaram Project also. He is the Waterways Minister also. So, I would request him to complete the Polavaram Project. There is some confusion about who is to bear the escalated cost and the cost of other things. It is the duty of the Central Government to provide the required funds. We do not know through which agency the Central Government is going to complete that project, but it is the duty of the Central Government to complete this project. They have to complete the waterways and they have to complete the Polavaram Project as well. That is why, I request the hon. Minister to complete the Polavaram Project and these waterways also at the earliest.
Thank you.
*m10 श्री ओम बिरला (कोटा) : माननीय सभापति महोदय, आज सदन में केद्रीय सड़क निधि (संशोधन) विधेयक, 2017 पेश किया गया है। जब केद्रीय सड़क निधि अधिनियम, 2000 पारित किया गया था, तब देश में अटल बिहारी वाजपेयी जी की सरकार थी। आजादी के इतने वऐााॉ के बाद भी देश के गांव सड़कों से महरूम थे। गांव में सड़कें नहीं थीं। हिन्दुस्तान में विकास हो रहा था, लेकिन गांव विकास के नाम पर अधूरे थे। उस समय महाराऐट्र में माननीय नितिन गडकरी जी पीडब्ल्यूडी मंत्री थे, जिन्होंने मुंबई-पुणे हाइवे बनाया और प्रधान मंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी ने ’प्रधान मंत्री सड़क योजना’ का जो ढ़ांचा तैयार किया था, उस कमेटी में भी माननीय नितिन गडकरी जी थे। वऐाऩ 2000 में इस बिल के माध्यम से देश के अंदर सड़कों का जाल फैला और वऐाऩ 2017 में आज हम एक नया अधिनियम ला रहे हैं। यह अधिनियम इस देश में एक नये युग की शुरुआत करेगा। हमारे माननीय सदस्य राजीव प्रताप रूड़ी जी ने जिस तरह से बताया है कि हमारी सभ्यता, संस्कृति, हमारे आवागमन के साधन, हमारी उत्पत्ति, सभी जल मार्गों से हुई है, जल के आस-पास हुई है। इतने वऐााॉ के बाद एक विजन के आधार पर वऐाऩ 2017 में जब इस देश के अंदर हम देखते हैं कि हाइवेज और रेल, आवागमन के साधनों के कारण, रोड कनेक्टिविटी बेटर होने के कारण भी, आज मैं कह सकता हूं कि रोड कनेक्टिविटी के बारे में भी हमारी सरकार ने, जहां पर तीन किलोमीटर रोड हर रोज बनती थी, हमारी सरकार आने के बाद 14 किलोमीटर रोड रोज बनती है। रोड कनेक्टिविटी इतनी बेहतर होने के कारण आज मैं कह सकता हूँ कि जहाँ तीन किलोमीटर प्रति दिन सड़क बनती थी, हमारी सरकार के आने के बाद प्रति दिन 14 किलोमीटर सड़क बन रही है। ‘भारतमाला’ प्रोजेक्ट के माध्यम से सात लाख करोड़ रुपये की लागत से 25 हजार किलोमीटर सड़कें बनाने की योजना है। इतना ही नहीं, इस सरकार ने तीन वऐाऩ के अंदर पाँच लाख करोड़ रुपये की लागत से एनएचएआइ के माध्यम से सड़क निर्माण का काम शुरू किया है। सीआरएफ में राज्य की सड़कों के लिए 25 हजार करोड़ रुपये दिये गये हैं। इस देश में पहली बार 550 जिलों को एनएचएआइ से जोड़ने का काम हुआ है। माननीय श्री नितिन गडकरी जी ने देश के सभी जिलों को एनएचएआइ से कनेक्टिविटी देने के लिए कहा है। जो एनएचएआइ टू-लेन की थी, उसे ‘भारतमाला’ प्रोजेक्ट के माध्यम से फोर-लेन करने का काम किया है। इन सबके बावजूद इस देश में जिस तरह से हाइवे, एक्सप्रेस हाइवेज और रेलों पर बोझ बढ़ रहा है, जब हम विश्व की चर्चा करते हैं, तो हमें लगता है कि चीन और यूएसए के बाद भारत में बड़े जलमार्ग होने के बावजूद हम जलमार्ग से परिवहन का काम मात्र 0.5 प्रतिशत ही कर पा रहे हैं। जबकि चीन और यूएसए हमसे कहीं ज्यादा जलमार्गों से परिवहन का काम कर रहे हैं। इसीलिए इस बिल में एक छोटा-सा संशोधन किया गया है। सेक्शन 9(ए) के तहत हमने एक्सप्रेस-वे, राऐट्रीय जलमार्ग को डालने का काम किया है। सेक्शन 9(बी) के तहत राऐट्रीय राजमार्ग की जगह राऐट्रीय जलमार्ग डाला। हमने कोई नया फेज नहीं लगाया है, नया टैक्स भी नहीं लगाया है, उसी टैक्स और उसी रेवेन्यू से देश के अंदर एक नये जलमार्ग को डवलप करने का काम किया गया है, जो देश के लिए अपने आप में महत्त्वपूर्ण है।
यह बात सही है कि जिस तरीके से इस देश के अंदर दुर्घटनाएँ बढ रही हैं, सड़कों के मनटेनेंस में करोड़ों रुपये खर्च हो रहे हैं, हमें नये विकल्प की तलाश करनी होगी। ऐसा विकल्प तलाशना होगा, हम जिस नये भारत के निर्माण की बात करते हैं, उसके माध्यम से उस नये भारत के उदय का रास्ता आज के इस बिल के पास होने से बनेगा। इस बिल के पास होने के बाद हम इस देश में 14500 किलोमीटर, जिसमें 5200 किलोमीटर नदी और 4000 किलोमीटर नहरों को डवलप करने का काम करेंगे। वऐाऩ 2016 में राऐट्रीय जलमार्ग अधिनियम में हमने 111 जलमार्ग बनाये हैं, जबकि आजादी से लेकर वऐाऩ 2015 तक केवल पाँच जलमार्ग थे।
प्रो. सौगत राय (दमदम) : वह अभी नहीं बना है।
श्री ओम बिरला: नोटिफिकेशन हो चुका है। अब उसके बनाने का काम होगा। माननीय सदस्य कह रहे थे कि गडकरी साहब बहुत सपने दिखाते हैं। आज मैं कह सकता हूँ कि माननीय गडकरी साहब ने इसी सदन में कहा था कि हम इस देश में पानी में हवाई जहाज उतारेंगे। माननीय सदस्य महोदय, वे सपना नहीं दिखाते हैं। वे देश के ऐसे मंत्री हैं कि जो भी सदन में और सदन के बाहर कहते हैं, उसे पूरा करते हैं। वे जिस तरह से शिलान्यास करते हैं, उसी तरह से लोकार्पण भी करते हैं। उसी तरह उन्होंने कहा था कि हिन्दुस्तान में हवाई जहाज पानी में उतरेंगे और आप सबने देखा होगा कि हमारे प्रधान मंत्री जी उस जहाज में बैठकर पानी में उतरे थे। ऐसा कोई सपना नहीं है, जिसके बारे में माननीय गडकरी साहब ने बताया हो और वह पूरा न हुआ हो। मैं एक सपना और एक बात यहां सदन के समक्ष दावे के साथ कह सकता हूं कि जिस कमिटमेंट के आधार पर माननीय गडकरी साहब फैसले लेते हैं और निर्णय करते हैं, उसके बारे में भारत की संसद और 125 करोड़ जनता जानती है। माननीय गडकरी साहब के निर्णयों और फैसलों के बारे में आज सारा देश जानता है।
माननीय सभापति महोदय, हमने बहुत कम पैसा डेवलप किया है। हमने केवल 2,000 करोड़ रुपए एवं 2.5 प्रतिशत पैसा इस निधि के लिए उपलब्ध किया है। हमारी कोशिश है कि हम इन जलमार्गों को और बेहतर तरीके से डेवलप कर सकें।
माननीय सभापति महोदय, जलमार्ग डेवलप होने से बहुत लाभ होंगे। हम जहां न्यूनतम ईंधन से काम कर पाएंंगे, वहीं अन्य अपेक्षित भूमि की भी कम आवश्यकता पड़ेगी। हमारे माननीय सदस्यों के समक्ष मेरा इतना ही कहना है। हमारी पार्टी के पास टाइम बहुत है, इसलिए मैं आपसे निवेदन करना चाहता हूं कि इन जलमार्गों के डेवलप होने से भारत में जहां आर्थिक रुप से परिवर्तन होगा, वहीं गांव-खलिहानों और नदियों के किनारे बसे वे लोग जिनको रोजगार नहीं मिलता है, उनके लिए वहां पर्यटन डेवलप होने के कारण रोजगार के नए अवसर भी डेवलप होंगे। इससे दुर्घटनाएंं भी कम होंगी। हमें मार्गों के डेवलपमेंट और मेंटिनेंस के लिए कम खर्चा करना पड़ेगा और हम यातायात को भी बेहतर और सुगम बना पाएंंगे।
माननीय सभापति महोदय, हमने इसी संसद में यह कहा था कि हम गंगा में बेहतर तरीके से जलमार्ग डेवलप करने का काम करेंगे। आज हमने वाराणसी, हल्दिया और साहिबगंज में 5,000 करोड़ रुपयों की लागत से मल्टी मॉडल हब बनाने का काम किया है, जिससे वहां रोड कनेक्टिविटी, रेल कनेक्टिविटी और जलमार्गों की कनेक्टिविटी पहुंच सकेगी।
माननीय सभापति महोदय, यह बिल अपने आप में इस देश में एक नए उदय का मार्ग डेवलप करेगा और उस नए उदय के मार्ग के साथ ही हम यह चाहते हैं कि जैसे हमने रोड कनेक्टिविटी और रेल कनेक्टिविटी को बेहतर किया है, वैसे ही जलमार्ग कनेक्टिविटी को भी बेहतर करेंगे।
माननीय सभापति महोदय, मेरा माननीय मंत्री महोदय से इतना ही आग्रह है कि कोटा में चंबल नदी है, जो कि बारहों-मासी नदी है। उसके लिए भी अनुच्छेद-111 के तहत नोटिफिकेशन जारी करने की कृपा करें, ताकि कोटा की चंबल नदी में भी हवाई जहाज उतारे जा सकें। मैं इस बिल का समर्थन करता हूं और कहता हूं कि आर्थिक युग में यह बिल एक नए परिवर्तन की शुरुआत करेगा। आपने मुझे बोलने का अवसर दिया, उसके लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।
*m11 श्री जय प्रकाश नारायण यादव (बाँका) : सभापति महोदय, आपने मुझे बोलने का मौका दिया, उसके लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।
सभापति महोदय, केंद्रीय सड़क निधि संशोधन विधेयक, 2017 इस सदन में आया है। मैं आदरणीय गडकरी जी का आदर करता हूं। वे एक अच्छा बिल लेकर सदन के सामने आए हैं, जिसके लिए मैं उन्हें बधाई देता हूं। इसके साथ ही साथ प्रकृति ने इस देश को अपार उपहार दिया है। यह उपहार प्रकृति ने जलमार्गों और कई बड़ी नदियों के रूप में दिया है। प्रकृति ने हमें बड़े-बड़े संसाधन दिए हैं। हम इन संसाधनों का कैसे उपयोग करते हैं और प्रकृति की गोद में हंसते हुए हिन्दुस्तान को आगे बढ़ाने का काम कैसे करते हैं, इसके लिए तरीके बनाना हम सभी का फर्ज़ और कर्तव्य है।
सभापति महोदय, हम देश की आबादी को वायु मार्ग, सड़क मार्ग और रेल मार्ग से कवर करते हैं। इस माध्यम से हम यात्रा भी करते हैं और अपने माल की ढ़ुलाई भी करते हैं।
लेकिन धीरे-धीरे देश की आबादी बढ़ती जा रही है। हम सड़क मार्ग से जितनी माल ढुलाई करना चाहते हैं, नहीं कर पाते हैं। जितनी आबादी को हम एक जगह से दूसरी जगह यातायात की सुविधा देना चाहते हैं, नहीं दे पाते हैं। रेल से भी नहीं दे पाते हैं और अब तो हवाई जहाज में भी बहुत भीड़ होने लगी है, जिससे परेशानी बढ़ रही है। जलमार्ग बहुत ही सुविधाजनक है और इन सुविधाओं का उपयोग करने के लिए जो बिल आया है, वह बहुत अच्छा है। जलमार्ग के माध्यम से व्यापार भी बढ़ेगा, यातायात की सुविधा भी बढ़ेगी, पर्यावरण की रक्षा होगी और पर्यटन भी विकसित होगा। हम बांका संसदीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। सुल्तानगंज में गंगा उत्तरायण है, वहां से प्रति वऐाऩ लाखों कांवड़िये गंगा जल लेकर हर-हर महादेव करते हुए देवघर बाबा के धाम जाते हैं। मेरी मांग है कि सुल्तानगंज को बंदरगाह का दर्जा दिया जाए। मुंगेर, भागलपुर, साहबगंज से हल्दिया तक के मार्ग को विशेऐा रूप से आगे बढ़ाने का हम माननीय मंत्री जी से आग्रह करेंगे। इससे वहां के लोगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा होंगे। सुल्तानगंज में पुल भी बन रहा है, जिसका काम जल्द से जल्द पूरा करने की आवश्यकता है। मेरा माननीय मंत्री जी से आग्रह है कि विद्यापीठ किउल, चांदन-लक्ष्मीपुर से लेकर बेलहर-बांका तक जोड़ने का काम हो और जमुई-समुलताला-कटोरिया और ढाका मोड़ तक बनाने का काम हो। इसी के साथ मैं इस बिल का सपोर्ट करता हूं। धन्यवाद *m12 श्री प्रेम सिंह चन्दूमाजरा (आनंदपुर साहिब) : महोदय, मैं सेंट्रल रोड फण्ड (अमेंडमेंट) बिल, 2017 के समर्थन में बोलने के लिए खड़ा हुआ हूं। मैं माननीय मंत्री जी को इसके लिए बधाई देना चाहता हूं।
यह सच है कि देश में श्री नितिन गडकरी जी को एक विकास पुरुऐा और विज़नरी पुरुऐा के तौर पर जाना जाता है। यह भी सच है कि सड़क की आवाजाही में, रेलवे की आवाजाही में और हवाई जहाज से आवाजाही में बहुत रश हो चुका है। दुर्घटनाएंं भी बहुत ज्यादा हो रही हैं। गडकरी साहब ने वॉटरवेज़ के बारे में जो सोचा है, इससे देश में बहुत अच्छा मैसेज गया है। आज यह जो बिल लेकर आए हैं, उसमें इनके विभाग का ही पैसा है, जो 2.5 परसेंट वॉटरवेज़ के इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए, नेवीगेशन, टर्मिनल और जेटी के लिए मांगा गया है। मैं समझता हूं कि यह बहुत कम है। अगर और भी मांगें तो उसके लिए भी इनको ना नहीं करना चाहिए क्योंकि यह भी किसी को ना नहीं कहते हैं। मैं बड़े विश्वास और जिम्मेदारी से कहता हूं कि जिस भी सांसद ने अपने क्षेत्र के लिए कोई भी मांग की है, उसमें सबसे ज्यादा पैसा इनके विभाग का खर्च हुआ है। पिछली कांग्रेस सरकार ने तो पंजाब के साथ बहुत विक्टमाइजेशन किया। लेकिन इन्होंने पिछले चार वऐाऩ में पंजाब के लिए जितना किया है, उसके लिए हम इनके आभारी हैं। मैं दो-तीन सुझाव देना चाहता हूं कि बॉर्डर स्टेट्स के लिए एक परसेंट का टैक्स रखा है। जब टैंक्स चलते हैं, हेवी व्हिकल्स चलते हैं तो सड़कें टूट जाती हैं। अगर इसे एक परसेंट से बढ़ाया जाए तो अच्छी बात होगी। इसी तरह से हिल स्टेट्स हैं या सेमी हिल स्टेट्स हैं, मेरे निर्वाचन क्षेत्र श्री आनंदपुर साहब में भी कम पैसा जाता है। इसकी एलोकेशन की जानकारी प्रत्येक सांसद को दी जानी चाहिए क्योंकि कई बार राज्य सरकार उस पैसे को डायवर्ट कर देती है। मेरा अपना तजुर्बा है कि मंत्री जी ने सेंट्रल रोड फण्ड से पैसा दिया।
नई सरकार आ गई, चलता-चलता काम रोक कर पैसा कहीं और ले गए। ऐसे ही मेरे बेटे की कॉन्स्टीटय़ूंसी सनौर थी। मैंने सेंट्रल रोड फण्ड से पैसे लिए, काम कर रहा था। सरकार बदल गई तो काम रुकवा दिया। कम से कम जो हमारी डिस्ट्रिक्ट रोड्स कमेटी बनी है, उसमें रोड्स सेफ्टी के लिए और सेंट्रल रोड फण्ड के लिए जो ऐलोकेशन आया है, उसको बढ़ाना चाहिए। जो प्रदेश ज्यादा डीजल कंज्यूम करते हैं, उनको उसमें ज्यादा शेयर देना चाहिए। मैं समझता हूं कि वाटरवेज़ का स्कोप पंजाब में कम है। इनको पैसा लेना चाहिए पर कम से कम जिन प्रदेशों में वाटरवेज़ नहीं हैं, उनके फण्ड के ऐलोकेशन पर असर न पड़े। ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए।
*m13 श्री धर्मेद्र यादव (बदायूँ) : सभापति महोदय, मैं अपनी ओर से व अपनी पार्टी की ओर से केंद्रीय सड़क निधि संशोधन अधिनियम का पूरी तरह से समर्थन करता हूं और मंत्री जी को शुभकामनाएंं देना चाहता हूं कि आपने बेहतर प्रयास किया है। माननीय मंत्री जी पिछले साढ़े तीन साल से और उससे पहले आपके चुनाव घोऐाणापत्र से हम लोग सुनते रहे हैं, क्योंकि हमारे नेता डॉ. राम मनोहर लोहिया जी ने आज नहीं, 50-60 के दशक में कहा था कि जब तक देश की नदियों को नहीं जोड़ेंगे तब तक देश के अंदर बहुत सारे जो तमाम संकट हैं, बाढ़, सूखा, यातायात और जल यातायात का भी सवाल है। इन तमाम समस्याओं के समाधान के लिए एक व्यापक योजना की चर्चा आपने अपने चुनाव घोऐाणपत्र में भी की थी। लेकिन मंत्री जी मुझे अफसोस है कि साढ़े तीन साल के बाद भी उस योजना पर अभी तक कोई गंभीर प्रयास आपकी और आपकी सरकार की ओर से नहीं हुआ है। यद्यपि यह सच है कि माननीय मंत्री जी ने जिन विभागों में काम किया है, उन पर लोगों को भरोसा है। लेकिन मंत्री जी आपको यह विभाग बहुत पहले ही संभालना था। देर हुई तो हुई, लेकिन कम से कम अब जो बातें आपने चुनाव घोऐाणापत्र में उस समय कहीं, उन घोऐाणपत्रों को जरूर पूरा कर दें। मैं माननीय मंत्री जी से अनुरोध करना चाहता हूं। जहां जल यातायात का केंद्रीय सड़क निधि के माध्यम से आपने फण्ड लेने की बात की, मैं समझता हूं कि इस पर पूरा सदन सहमत है। इसके साथ-साथ मैं कहना चाहता हूं कि बहुत सारी समस्याएंं आज भी जल यातायात की हैं, नदियों की हैं, सूखा की हैं और बाढ़ की भी हैं। जब तक डॉ. राम मनोहर लोहिया जी की विचारधारा पर चलते हुए नदियों को नहीं जोड़ेंगे, तब तक इसका स्थायी समाधान नहीं हो सकता है। माननीय मंत्री जी, आपने बहुत सारे काम करने का प्रयास किया है। मैं इस बात से इनकार नहीं करता हूं, लेकिन आप ही के मंत्रालय में बहुत सारे ऐसे काम पड़े हैं, जो पेंडिंग हैं। मैं दूर नहीं जाना चाहता। मैं खुद अपने लोक सभा क्षेत्र बदायुं के लिए बताता हूं कि हमने एक बदायुं लिफ्ट कैनाल योजना बनाकर भारत सरकार में तीन साल से भेज रखी है। आज तक सेंट्रल वाटर कमीशन के तमाम डायरेक्ट्रेट ने साढ़े तीन साल से आज तक क्लीयरेंस नहीं दिया है। जब साढ़े तीन-तीन साल तक एक-एक योजना रुकी रहेगी तो माननीय मंत्री जी जो सपना आपने देश को दिखाया है, मैं समझता हूं कि वह सपना, सपना ही रह जाएगा। वह सपना कभी भी हकीकत में परिवर्तित नहीं हो पाएगा। इसलिए इस तरह की योजनाएंं चाहे मेरे क्षेत्र की हों या अन्य तमाम क्षेत्रों की हों, हमारे बहुत सारे साथियों ने, बंगाल के साथियों ने और बिहार के साथियों ने चर्चाएंं की हैं। मैं इस बात से अपनी सहमती जताते हुए आपसे अपील करूंगा कि ये चर्चाएंं और ये आश्वासन केवल आश्वासन तक न रह जाएंं। कम से कम आपके कार्यकाल पूरे होने तक, वऐाऩ 2019 तक ये योजनाएंं जमीन तक उतरें। मैं समझता हूं कि आप की भी विश्वसनीयता...(व्यवधान) फिर की बात नहीं, वऐाऩ 2019 तक के जो वादे हैं उनको पूरा कीजिए। ...(व्यवधान) फिर की बाद बात में करेंगे। वऐाऩ 2019 में जनता तय करेगी। फिर के सपने दिखाना बंद कीजिए। पहले जो वऐाऩ 2019 तक की बातें चुनाव घोऐाणापत्र में की हैं, पहले उन घोऐाणपत्र की बातों को पूरा करके दिखाइए। मैं अपनी व अपनी पार्टी की ओर से अनुरोध करता हूं। धन्यवाद।
*m14 SHRI SIRAJUDDIN AJMAL (BARPETA): Respected Sir, thank you very much for giving me the opportunity to speak on the Central Road Fund (Amendment) Bill. I appreciate the Government’s initiative in introducing this Bill and I support it.
One of the major amendments in this Bill is the inclusion of inland waterways in the Central Road Fund. The Bill provides that in addition to National Highways, State and rural roads, the Fund will also be used for the development and maintenance of National Waterways, which is a commendable job.
The Bill seeks to decrease the allocation of cess towards the development and maintenance of national highways from 41.5 per cent to 39 per cent and allocating 2.5 per cent to the development and maintenance of waterways.
Sir, I would like to give my comments on this Bill very briefly. I am happy to note that the new Bill will open avenues to address most of the infrastructural facilities required for navigation and also address the problems of night navigation, ship building and warehousing facilities, which, at present, are major lapses of country’s inland waterways.
While supporting the Bill, at this juncture, I would like to bring to the notice of the Government about scope, advantages and problems of Inland Waterways in the State of Assam. Sir, Assam is endowed with a large number of navigable rivers. Out of 111 number of national waterways, Assam alone contributes 14 waterways. All the major rivers including Brahmaputra, Barak, Aai, Beki, Dehing, Dhansiri, Dhikou, Doyang, Gangadhar, Kopili, Lohit, Puthimari and Subansiri have inland waterways in the State. These waterways can be extensively used for ferry and commercial services. Starting from Sadia to Dhubri, the Brahmaputra River alone has thousands of cross river par ghats along the banks. Several thousands of country boats are in service for carrying ferries. This implies that there is an enormous scope of employment as well as investment in organized inland waterways.
Now, I will come to the problems of waterways in Assam. The basic problem that threatened the navigability in Assam is the neglect of maintenance and conservancy of waterways. The waterways in Assam suffer from seasonal fluctuations of water.
Sir, I am speaking about Assam. Lack of training facilities for navigation, ship repairing facilities and absence of modern ships are other major problems. Another drawback of waterways is that it cannot provide door-to-door services and that the speed of service is very slow. Sir, my very personal suggestion is this. The most important measures necessary are to intensify the conservancy, conduct regular survey, construct dry port and improve the workshop.
HON. CHAIRPERSON: Now, Shri Dushyant Chautala Ji.
SHRI SIRAJUDDIN AJMAL: You gave me three minutes. It is just two minutes. One minute is left. It is suggested that the water transport should obtain modern speedy ships and modern lighting facilities for night navigation so as to enhance its competitive capacity with rail and road transport.
HON. CHAIRPERSON: Please conclude.
SHRI SIRAJUDDIN AJMAL: Yes, Sir. Inland water transport should be regarded as complementary to rail and road transport.
*m15 श्री दुऐयंत चौटाला (हिसार) : सभापति महोदय, आपने मुझे इस अहम् मुद्दे पर बोलने का मौका दिया, इसके लिए मैं आपको धन्यवाद देता हूं। क्योंकि सड़क, वायु, रेल और जल इस देश के ट्रंसपोर्ट के तंत्रिका तंत्र हैं, अर्थात नर्वस सिस्टम हैं। आज हम वाटरवेज की बात कर रहे हैं, सरकार कंसोलिडेटिड रोड फंड का 2.5 प्रतिशत वाटरवेज के लिए डाइवर्ट करना चाह रही है, यह एक बहुत अच्छी शुरूआत है, क्योंकि इसकी बहुत जरूरत है। आज हम यदि यूरोप को देखते हैं तो नीदरलैंड जैसे कंट्री के अंदर भी ज्यादा से ज्यादा ट्रंसपोर्टेशन रिवर और कैनाल्स के माध्यम से होता है। अगर सरकार ऐसा निर्णय ले रही है तो हम उम्मीद रखते हैं कि आने वाले समय में भारत में भी जो ट्रंसपोर्ट होगा, वह ट्रक और सड़कों से ज्यादा रिवर के माध्यम से होगा।
इसमें दो प्रमुख सवाल हैं, पहला सवाल यह है कि क्या आने वाले समय में हमारे देश के अंदर पानी की उपलब्धता इतनी रहेगी? आज हम ब्रह्मपुत्र नदी की बात कर रहे हैं, परंतु चाइना ने उस पर डैम बनाकर कहीं न कहीं पानी रोकने का काम किया है। यह आपके प्रदेश में देखने को मिला, बंगाल में भी देखने को मिला कि वहां पानी की कमी हुई। आज यमुना दिन-प्रतिदिन सूखती जा रही है। क्या सरकार इस फंड से वाटर रिसोर्स डैवलपमैन्ट की ओर तथा इंटरलिंकेज ऑफ रिवर की ओर भी ध्यान देने का काम करेगी?
महोदय, जब हम रोड फंड की बात करते हैं तो माननीय डिफैंस मिनिस्टर भी यहां मौजूद हैं, आज इस रोड फंड का एक परसैंट हिस्सा हम बॉर्डर रोड्स के डैवलपमैन्ट के लिए यूज करते हैं। चंदूमाजरा जी ने बड़ा अहम मुद्दा उठाया। हमें इसमें से कम से कम पांच परसैंट पैसे से बॉर्डर रोड्स को डैवलप करना चाहिए, क्योंकि आज अगर आप चाइना को देखें तो वह डोकलाम जैसे इम्पार्टेंट एरिया में मोटी-मोटी सड़कें लेकर आ रहा है। लोक सभा में मंत्रालय द्वारा जवाब दिया गया है, जहां यह क्लियर कट डिफाइन है कि आज भी पैसे और परमीशन की कमी के कारण इंडिया की मेज्योरिटी ऑफ रोड्स, जो बॉर्डर को लिंक करती हैं, उन्हें हम डैवलप नहीं कर पाते हैं।
मैं आपके माध्यम से एक बात कहना चाहता हूँ, क्योंकि मंत्री जी ने अपने शुरूआती भाऐाण में एक बात कही थी कि आज छह रूपये प्रति लीटर पैट्रोल और डीज़ल में से रोड फण्ड के लिए सैस के नाम पर डायवर्ट किया जाता है। मैं माननीय मंत्री जी से पूछना चाहूंगा कि अगर इस देश का नागरिक कश्मीर से कन्याकुमारी या कच्छ से कोलकाता जाना चाहे तो कोई एक सड़क ऐसी है, कोई एक ऐसा राऐट्रीय राजमार्ग है, जिस पर टोल न देना पड़े? आज जब मैं अपने लोक सभा क्षेत्र हिसार से निकालता हूँ तो जगह-जगह टोल टैक्स के बैरियर्स मिलते हैं। एनएचएआई एक्ट के अंदर लिखा गया है कि दस किलोमीटर पर कोई टोल टैक्स नहीं आता है, मगर चार किलोमीटर के अदंर रोड के ऊपर टोल टैक्स लगा दिए जाते हैं। आज शहर से निकालने के लिए टोल टैक्स लगाए जा रहे हैं तो मैं माननीय मंत्री जी से यह निवेदन जरूर करूंगा कि जब रोड फण्ड में इतना पैसा है तो कम से कम इस देश के नागरिकों को यह अधिकार दिया जाए कि वे नॉर्थ से साऊथ या ईस्ट टू वैस्ट अगर जाना चाहें तो उनके लिए नॉन टैक्सेबल रोड होनी चाहिए।
माननीय सभापति: अब आप समाप्त करें।
श्री दुऐयंत चौटाला: सभापति महोदय, मुझे तीन मिनट का समय मिला था। आप मुझे मेरी पूरी बात तो रखने दीजिए। पता है कि हम छोटे दल हैं, मगर आप इस तरीके से न करें। मैं कोई बाहर का मुद्दा रख रहा हूँ तो जरूर मेरी बात बंद कीजिए।
माननीय सभापति : आपका समय तीन मिनट था, वह समाप्त हो गया है। अब आप अपनी बात समाप्त कीजिए।
श्री दुऐयंत चौटाला: सभापति महोदय, मैं अंतिम बात कह कर अपनी स्पीच समाप्त करना चाहता हूँ। मंत्री जी, कम से कम हमें एक ऐसा हाईवे देश के नागरिकों को देना चाहिए जो नॉन टैक्सेबल हो, एट लीस्ट यह देश का अधिकार हो। मैं एक निवदेन और करना चाहता हूँ, क्योंकि मैंने सुबह भी यह बात रखी थी कि एक गैज़ेट नोटिफिकेशन लाया गया है, जहां पर सरकार द्वारा ट्रैक्टर को नॉन-एग्रीकल्चर ट्रंसपोर्ट व्हीकल से ट्रंसपोर्ट व्हीकल बनाया जा रहा है। मंत्री जी, अपने जवाब में जरूर इसका उत्तर देने की कोशिश करें कि क्या सरकार इस गैज़ेट को विदड्रॉ करेगी, क्योंकि आज अगर इसको हम लागू कर देते हैं तो सरकार द्वारा किसानों के ऊपर नई टैक्स प्रणाली रोड के माध्यम से लगाने का काम किया जाएगा।
*m16 श्री हरीशचद्र उर्फ हरीश द्विवेदी (बस्ती) : सभापति महोदय, मैं केंद्रीय सड़क निधि (संशोधन) बिल, 2017 के समर्थन के लिए खड़ा हूँ। मैं सर्वप्रथम माननीय केंद्रीय परिवहन मंत्री जी को धन्यवाद करूंगा कि जब दो साल पहले बस्ती जिले की एक सड़क के उद्घाटन में माननीय मंत्री जी गए थे और हैलिकॉप्टर से लखनऊ से वे जा रहे थे, तब एक नदी उनको दिखाई पड़ी और मंच पर जब मैंने उनका स्वागत किया और उनके बगल में बैठा तो उन्होंने पूछा कि हरीश ये कौन सी नदी है? मैंने कहा कि सर, यह घाघरा नदी है। जवाब में उन्होंने मुझसे कहा कि तुमने इसकी मांग तो नहीं की है, लेकिन मैं इसको राऐट्रीय जलमार्ग घोऐिात करने का निर्णय लेता हूँ। मैं माननीय मंत्री जी को बधाई देता हूँ कि जो 106 नदियाँ जोड़ी गई हैं, उनमें अयोध्या से ले कर कोलकाता तक जलमार्ग बनाने का निर्णय भारत सरकार ने लिया है, इसलिए माननीय मंत्री जी को मैं बधाई देता हूँ।
सभापति महोदय, पहले पूरे देश में पांच जलमार्ग थे, हमारी सरकार ने 106 जलमार्ग और बनाने का निर्णय लिया है। पहले 4342 किलोमीटर का जलमार्ग था। अब इस समय लगभग 20 हज़ार किलोमीटर से ज्यादा के जलमार्ग हमारी सरकार में पिछले तीन वऐााप में कुछ तो चालू हुए हैं और कुछ चालू होने वाले हैं। सन् 1986 से ले कर सन् 2014 तक टोटल जलमार्ग तक 1485 करोड़ रूपये खर्च हुए थे। लेकिन पिछले तीन सालों में, जब से हमारी सरकार आई है और माननीय गडकरी जी इस विभाग के मंत्री बने हैं, लगभग नौ सौ करोड़ रूपये जलमार्ग पर हमारी सरकार ने खर्च किए हैं। केवल गंगा नदी पर ही 5400 करोड़ रूपये खर्च करने की योजना है। इलाहबाद से हल्दिया तक जलमार्ग हमारी सरकार ने लगभग बनारस से चालू कर दिया है और इलाहबाद से भी चालू होने वाला है। 16 जलमार्गों की डीपीआर बन कर तैयार है। उस पर भी काम शुरू होने वाला है। बांग्लादेश से नदियों को जोड़ कर ब्रह्मपुत्र के माध्यम से पूर्वी उत्तर प्रदेश और पूर्वोत्तर भारत तक कैसे जलमार्ग की सुविधाएंं दी जाएंं, इस पर हमारी सरकार आगे काम कर रही है।
महोदय, इस समय लगभग 80 हज़ार 800 करोड़ रुपये सीआरएफ के माध्यम से भारत सरकार के पास आ रहा है। पहले की सरकारों में तमाम ऐसे सीआरएफ के पैसे पड़े रहते थे, जिससे वे खर्च नहीं हो पाते थे और कोई काम नहीं हो पाता था। लेकिन अकेले उत्तर प्रदेश में इस साल सीआरएफ का तीन हज़ार करोड़ रुपये का प्रस्ताव गया है और मेरे जिले में स्वयं माननीय मंत्री जी ने 54 करोड़ रुपये का प्रस्ताव दिया है, जिसका टेंडर होने वाला है। निश्चित रूप से सीआरएफ से 2.5 प्रतिश पैसा जलमार्ग में खर्च करने की बात हो रही है, वह पैसा जाएगा तो जलमार्ग का विकास होगा और जलमार्ग का विकास होगा तो हिंदुस्तान का विकास होगा। आज की तारीख में केवल छह प्रतिशत जल मार्ग के माध्यम से घरेलू ढुलाई होती है। ...(व्यवधान)
माननीय सभापति : अब आप अपनी बात समाप्त कीजिए, आपकास समय समाप्त हो गया है।
…( व्यवधान)
श्री हरीशचद्र उर्फ हरीश द्विवेदी:सभापति महोदय, मैं पार्टी से बोलने वाला अंतिम वक्ता हूँ, कृपया पांच मिनट का समय और दे दीजिए। मैं उत्तर प्रदेश से अकेला बोल रहा हूँ। उत्तर प्रदेश में इलाहाबाद से जलमार्ग बन जायेगा। अयोध्या से बस्ती होते हुए कोलकाता तक जलमार्ग बन जायेगा तो निश्चित रूप से यह बहुत लाभदायक होगा। मैं अपने जिले में भाऐाण करता हूँ। मैं बस्ती लोक सभा क्षेत्र से चुनकर आया हूँ, वहाँ पर मैं भाऐाण करता हूँ। नदियों के किनारे जो जमीनें हैं, उनकी कीमत मिट्टी के भाव के बराबर है यानी कह सकते हैं कि उन्हें कोई खरीदना नहीं चाहता है, वहाँ कोई नहीं जाना चाहता है। मैं लोगों के पास जाता हूँ और उनसे कहता हूँ कि माननीय गडकरी जी ने जिस प्रकार अयोध्या से लेकर कोलकाता तक जलमार्ग बनाया है, वह दिन दूर नहीं, जिस प्रकार शहरों में लोग जमीन खरीदने के लिए परेशान होते हैं, ज्यादा पैसा देते हैं, आने वाले समय में सरयू के किनारे की जमीन महंगी होगी, बिजनेस डेवलप होगा, नौजवानों को रोजगार मिलेगा। निश्चित रूप से मैं कह सकता हूँ कि यह जलमार्ग की जो योजना भारत सरकार ने बनाई है, आने वाले समय में इससे लगभग 1.5 से 2 लाख नौजवानों को अतिरिक्त रोजगार मिलेगा। मैं अपने जिले में लोगों से कहता हूँ कि गडकरी जी के पास जाइये तो ज्यादा सोचकर जाइये, क्योंकि आप माँगेंगे कम, मिलेगा ज्यादा। जैसे मैंने नदी का उदाहरण दिया, हमने सोचा भी नहीं था, लेकिन जलमार्ग हमें मिल गया। बस्ती जिले में माननीय गडकरी जी टांडा से लुम्बिनी की सड़क का शिलान्यास करने गए थे। उसका शिलान्यास हुआ, उसके बाद मैंने कहा कि सर, राम जानकी मार्ग ऐतिहासिक मार्ग है, आप उस मार्ग को राऐट्रीय महामार्ग घोऐिात कर दीजिए। उन्होंने घोऐिात कर दिया। उसकी डीपीआर बन गई, अभी टेंडर होने वाला है। मैं माननीय गडकरी जी से निवेदन करुँगा कि उसका भी शिलान्यास कीजिए। मैं आज यही आपके मंत्रालय में वैभव जी को पत्र देकर आया हूँ। यही निवेदन मैंने किया है। मैं अपनी अन्तिम बात कहकर, अपनी माँग करके अपनी बात समाप्त करता हूँ। हमारा शहर बहुत पिछड़ा हुआ शहर है और यह 150 वऐाऩ पुराना जिला है। यह ऐतिहासिक जिला है। स्वतंत्रता आन्दोलन में हमारे जिले के लोगों का बहुत बड़ा योगदान है, लेकिन बस्ती का विकास नहीं हो पाया है। मैंने माननीय गडकरी जी से निवेदन किया था कि बस्ती को रिंग रोड दे दीजिए, इन्होंने रिंग रोड दे दी है। उसका सर्वे हो गया है, डीपीआर बन गई है। मैं माननीय मंत्री जी से निवेदन करुँगा कि हमारे बस्ती की रिंग रोड का शिलान्यास आप कर देंगे तो निश्चित रूप से बस्ती की जनता आपका आभार व्यक्त करेगी। मैं पुनः इस बिल का समर्थन करते हुए आपका आभार व्यक्त करता हूँ, माननीय प्रधानमंत्री जी का आभार व्यक्त करता हूँ। बहुत-बहुत धन्यवाद।
*m17 श्री कौशलेद्र कुमार (नालंदा) : महोदय, आपने मुझे केद्रीय सड़क निधि (संशोधन) विधेयक, 2017 पर चर्चा में भाग लेने का मौका दिया, इसके लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।
इस विधेयक के माध्यम से केद्रीय सड़क निधि अधिनियम, 2000 में संशोधन कर इसमें प्राप्त उपकर 2.5 प्रतिशत राऐट्रीय जलमार्गों के विकास और रख-रखाव के लिए उपलब्ध होगा, यह बहुत अच्छा कदम है। मैं इसके लिए माननीय मंत्री जी को बधाई देता हूँ और इसका स्वागत भी करता हूँ। राऐट्रीय जलमार्गों की स्वीकृति संख्या अब 111 हो गई है। इसमें एक प्रमुख जलमार्ग बिहार में गंगा नदी में पटना से इलाहाबाद है। यहाँ कई वऐााॉ से कार्य चल रहा है, लेकिन अभी तक जलमार्ग चालू नहीं हुआ है। मैं माननीय मंत्री जी का ध्यान आकृऐट करना चाहता हूँ कि गंगा नदी में जो गाद है, उसकी सफाई होनी चाहिए। गंगा नदी के जल प्रवाह में जो अड़चन आ रही है, उसमें ऊँचाई का जो कटाव नहीं हो रहा है, यह उसका भी प्रभाव है। मैं माननीय मंत्री जी से आग्रह करुँगा कि गाद की भी सफाई होनी चाहिए।
मैं माननीय मंत्री जी से आग्रह करुँगा कि पाँच राऐट्रीय जलमार्ग में फरक्का-पटना और पटना-इलाहाबाद तकरीबन 1,629 किलोमीटर हैं, इसको जल्दी से जल्दी पूरा करवाने के लिए आग्रह करुँगा। इससे बिहार को काफी लाभ मिलेगा। इससे रोजगार के अवसर पैदा होंगे, वहीं माल के आवागमन के लिए भी यह काफी सस्ता रहेगा। गंगा की अविरलता को भी ध्यान रखने की जरुरत है। मैं माननीय मंत्री जी से विशेऐा रुप से एन.एच. 31, जो बिहार शरीफ टू अम्बेडकर चौक है, उस पर फ्लाई ओवर के लिए अनुरोध करुँगा। मैंने पहले भी इसके लिए माननीय मंत्री जी से आग्रह किया है। माननीय मंत्री जी भी यहाँ बैठे हैं, यह उनका भी क्षेत्र है, मैं एन.एच. 31 का सवाल रख रहा हूँ। बिहार शरीफ में जब तक फ्लाई ओवर नहीं बनेगा, तब तक बिहार और झारखंड एक नहीं होंगे। वहाँ गड्डे हैं। माननीय मंत्री जी को भी इसके लिए सुनना पड़ता है और मुझे भी सुनना पड़ता है। मैं समझता हूँ कि रांची से लेकर पटना तक इसे किया जाये। मेरा एक और अनुरोध है कि बिहार शरीफ रेलवे क्रासिंग, जो एन.एच. 82 है, उस पर आरओबी ब्रिज की जरुरत है। मैं माननीय मंत्री जी से यह माँग करके अपनी बात समाप्त करता हूँ। बहुत-बहुत धन्यवाद।
*m18 श्री राजेश रंजन (मधेपुरा) : महोदय, God is guided by nature and nature is guided by God. प्रकृति को बैलेंस किए बगैर कुछ नहीं हो सकता है, चाहे वह सभ्यता हो, संस्कृति हो, वह प्रकृति से ही बसती है।
महोदय, मेरा मंत्री महोदय से कहना है कि आप कर्मयोगी हैं। अब तो बी.जे.पी. के सांसद तय करेंगे मां और मौसी को। मां से बढ़ कर मौसी होती है। मेरे लिए आप मां और मौसी दोनों तरह से दिखते हैं और सब आपका सम्मान करते हैं। आपका सम्मान है, बाहर भी और भीतर भी। देश के 130 करोड़ लोगों के लिए आप सम्माननीय हैं। कर्मयोगी क्या होता है, यह आप ने दिखा दिया है।
मेरे तीन-चार प्वायंट्स हैं। मेडिकल सेफ्टी के लिए आपके इस बिल में कुछ नहीं है। नदी और रोड पर जो मेडिकल सेफ्टी है, यह बहुत आवश्यक है। यह मेरा पहला प्वायंट है। मेरा दूसरा प्वायंट है - नेशनल सिक्यूरिटी। मेरा तीसरा प्वायंट है - सेफ्टी। मेरा चौथा प्वायंट है - प्रदूऐाण। स्वच्छता के बारे में देश के प्रधान मंत्री जी बोलते हैं, लेकिन स्वच्छता के बारे में हिन्दुस्तान की स्थिति यह है कि जब तक आप शैक्षणिक और आर्थिक रूप से जीवन का स्तर नहीं बढ़ाएंंगे और सिविक सेंस डेवलप नहीं होगा, तब तक कुछ नहीं होगा।
आप बहुत मजबूत कानून लाते हैं। आप अभी भी सुरक्षा पर बहुत बेहतर कानून लाए हैं, लेकिन उसको इम्प्लीमेंट कौन करेगा? इसको इम्प्लीमेंट करने वाले लोग नहीं हैं। मेरा आपसे आग्रह है कि इसका इम्प्लीमेंटेशन आवश्यक है।
महोदय, आप नदी की मिट्टी को बहुत नीचे तक नहीं ले जा सकते हैं। यदि आप नदी के भीतरी तल को निकालेंगे तो नदी के भीतर जो जीव बचे हैं, वे भी समाप्त हो जाएंंगे। नदी के पानी को बैलेंस करने की आवश्यकता है।
एक तो हिन्दुस्तान में पूरा-का-पूरा पानी आर्सेनिकयुक्त, आयरनयुक्त और खारा है। पूरी दुनिया में पानी की स्थिति बहुत ज्यादा खतरनाक है। वाटर के लिए थर्ड वर्ल्ड वार की स्थिति हो सकती है। वाटर के लिए हिन्दुस्तान को आप जैसे कर्मयोगी मिले हैं।
मेरे यहां बिहार में सबसे ज्यादा आर्सेनिक और आयरनयुक्त पानी है। मेरे यहां कोसी नदी है। कोसी जलमार्ग बहुत महत्वपूर्ण है। इसके बारे में मैं आपसे कई बार मिला हूं। रंजीत रंजन जी भी आपसे मिलकर यह बात कह चुकी हैं। मेरे यहां महानंदा, भूतही बलान, गंडक, नारायणी, सोन नदी है। हिन्दुस्तान में सबसे ज्यादा, 11 नदियां मेरे क्षेत्र में हैं। उसके बाद भी उनका अभी तक कहीं से जुड़ाव नहीं है। गंगा नदी से भी लगाव नहीं रखा गया। महानंदा नदी की भी स्थिति अच्छी नहीं है। हम गंडक और सोन को कैसे जोड़ें?
दुनिया की सबसे बड़ी आर्थिक आज़ादी का साम्राज्य मगध साम्राज्य को कहा जाता था और आज वह मगध वाटर के चलते समाप्त हो रहा है। झारखण्ड और मगध के इतिहास को चेंज करने के लिए नदियों को आपस में जोड़ना और उन नदियों को हाई डैम से जोड़ना बहुत आवश्यक है। अन्य बातें तो मैं आपसे मिलकर भी कर लेता हूं।...(व्यवधान)
*m19 श्री कामाख्या प्रसाद तासा (जोरहाट) :ऑनरेबल चेयरमैन सर, मैं आपको बहुत-बहुत धन्यवाद देता हूं कि आपने मुझे बोलने का मौका दिया। मैं सेन्ट्रल रोड फण्ड्स (अमेंडमेंट) बिल, 2017 के समर्थन में बोलने के लिए खड़ा हुआ हूं। सभी माननीय सदस्यों ने इस विऐाय पर बोला है। मैं खुश हूं और मैं नितिन गडकरी जी को धन्यवाद देना चाहता हूं। हमारे प्राइम मिनिस्टर ऑनरेबल मोदी जी को भी धन्यवाद देना चाहता हूं, जिन्होंने ‘लुक ईस्ट’ पॉलिसी को ‘एक्ट ईस्ट’ पॉलिसी में बदलने का काम किया। हम लोगों ने देखा है कि जब सरकार ने फोर-लेन का काम किया था, तब असम में और नॉर्थ-ईस्ट में फोर-लेन का काम पूरा बंद हो गया था। जब नितिन जी मिनिस्टर बने और प्राइम मिनिस्टर ने ‘एक्ट ईस्ट’ की बात कही, तब से मेरी कंस्टीटय़ुन्सी से पूरे असम में फोर-लेन का रास्ता खुल गया। मैं खुश हूं कि आप इसे कर रहे हैं। अभी उस पर काम शुरू है।
दूसरी बात जलमार्ग की है। इतने दिनों से ब्रह्मपुत्र नदी में नेशनल वाटरवेज-2 की स्वीकृति थी, पर उसमें कुछ भी नहीं हुआ था। नितिन जी के आने के बाद उन्होंने पांडू पोर्ट में रो-रो स्कीम का उद्घाटन किया और वहां पर उन्होंने उसका काम भी किया।
ऑनरेबल चेयरमैन सर, जब ऑनरेबल प्राइम मिनिस्टर ने ‘एक्ट ईस्ट’ की बात कही तो हम लोगों ने देखा कि हमारे ऑनरेबल नितिन जी ने बारह नदियों को जोड़ा है। एक है ब्रह्मपुत्र और दूसरी है बराक नदी। सबसे लम्बी रिवर वैली बराक नदी में है। इसी तरह, बारह नदियों को उन्होंने जोड़ा है और वे नेशनल वाटरवेज में उन्हें बदलने के लिए बहुत काम करेंगे।
ऑनरेबल चेयरमैन सर, अभी हमारे ऑनरेबल एम.पीज़. ने इस विऐाय पर बोला है। किसी को पता नहीं है, लेकिन नॉर्थ-ईस्ट को बदलने के लिए ऑनरेबल नितिन जी ने जो भूमिका निभाई है, इसके लिए मैं उन्हें बधाई और धन्यवाद देता हूं।
मेरा धन्यवाद भी है कि हमारे निर्वाचन क्षेत्र में जो सबसे बड़ा रोड है, उसको नेशनल हाइवे में बदल दिया गया है, जिसको दोदोआरी बोला जाता है, वह अहोम किंगडम्स के समय का था। इसके लिए भी हम लोगों ने रिक्वेस्ट किया था और वह काम हो गया है। जो नेशनल हाइवे इंटर‑स्टेट लिंकिंग हाइवे हैं, उन सभी को नेशनल हाइवे बनाया है। मैं मंत्री महोदय से रिक्वेस्ट करता हूँ कि डी.पी.आर. जल्दी से जल्दी प्रस्तुत करके इसको बनाना चाहिए। वहाँ पहले पाँच ब्रिज़ेज़ थे, फिर भी उन्होंने वहाँ तीन अन्य ब्रिज़ को डिक्लेयर किया है।
माननीय सभापति महोदय, मैं केवल एक मिनट ही बोलूँगा। जो नेशनल वाटर हाइवेज़ बनाया गया है, उनको जल्दी से जल्दी ड्रेज़िंग करके उसमें शिप चलाया जाए और पोर्ट्स का भी निर्माण किया जाए। अब, मैं इन्हीं बातों का रिक्वेस्ट करते हुए माननीय श्री नितिन जी का धन्यवाद करता हूँ।
*m20 डॉ. श्रीकांत एकनाथ शिंदे (कल्याण) : धन्यवाद, चेयरमैन सर। सबसे पहले तो मैं श्री गडकरी जी का बहुत‑बहुत धन्यवाद व्यक्त करता हूँ कि इस सी.आर.एफ. के माध्यम से उन्होंने इस वॉटर वेज़ को फंड करने का जो निर्णय लिया है, वह बहुत ही काबिले तारीफ है। अभी 111 वॉटरवेज़ इस देश में हैं, उनमें से एक वॉटरवेज़ मेरे लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र में है।
श्री नितिन गडकरी : उसके लिए हमने पाँच सौ करोड़ रुपये की घोऐाणा कर दी है।
डॉ. श्रीकांत एकनाथ शिंदे: सर, मैं उसी बात को बता रहा हूँ कि जो मुम्बई से मेरे क्षेत्र को जोड़ता है, वह कल्याण‑थाणे(वसई), कल्याण‑थाणे(मुम्बई) और कल्याण‑ थाणे (नवी मुम्बई) वॉटरवेज़ है। यह जो वॉटरवेज़ है, उसके लिए हजार करोड़ रुपये का टोटल प्रोजेक्ट है, उसमें से पाँच सौ करोड़ रुपये केंद्र शासन व श्री गडकरी जी के माध्यम से हमें मिला है। इस पाँच सौ करोड़ रुपये की जो घोऐाणा आपने की है, उसको तो आपने अप्रूव्ल दी है, लेकिन काम जल्द से जल्द शुरू हो जाए, म्युनिसिपल कारपोरेशन के माध्यम से उसका सर्वे वगैरह शुरू है। अभी श्री गडकरी जी ने सब के सामने कहा है कि पाँच सौ करोड़ रुपये हमने दिए हैं, तो मैं चाहता हूँ कि इसका काम भी जल्दी शुरू हो जाए। मुझे लगता है कि अगले चुनाव के पहले उस वॉटरवेज़ में रो‑रो पैसेंज़र सर्विस शुरू हो जाएगी। मैं फिर से एक बार श्री गडकरी जी का बहुत‑बहुत धन्यवाद धन्यवाद व्यक्त करता हूँ।
इस माध्यम से मैं एक सुझाव श्री गडकरी जी को करना चाहूँगा कि जो महाराऐट्र गवर्नमेंट टोल पॉलिसी है, उसके आधार पर 35 किलोमीटर के बीच में दो टोल जंक्शंस होने चाहिए, लेकिन हमारा जो मुम्बई शहर है, उस मुम्बई शहर में इंट्री प्वाइंट है। वहाँ पर दो किलोमीटर के बीच में दो टोल प्लाजा हैं। मुझे यहाँ एक सुझाव करना है कि जब हम गाड़ी खरीदते हैं, प्रतिवऐाऩ 1.5 करोड़ नई गाड़ियों का रजिस्ट्रेशन होता है। जब हम गाड़ी खरीदते हैं, उस समय ही जो टोल की रकम है, उसको ले लें। पूरे भारत में 1.5 करोड़ नई कार रजिस्टर्ड हैं। जब लोग गाड़ी खरीदते हैं, अगर हम एक ही बार में उनसे टोल की रकम ले लेंगे और जो‑जो स्टेट गवर्नमेंट्स हैं, उनको दे देंगे, तो मुझे लगता है कि जो टोल प्लाजा की समस्या है जिसके कारण मनी, मैन पॉवर, ट्रैफिक, पलूशन आदि की जो समस्या हैं, इन सभी समस्याओं का समाधान हो सकता है।
मैं एक बार फिर से श्री गडकरी जी का तहे दिल से धन्यवाद व्यक्त करता हूँ और मेरी पार्टी शिव सेना की तरफ से इस बिल का पूरा समर्थन करता हूँ। धन्यवाद।
*m21 SHRI VARA PRASAD RAO VELAGAPALLI (TIRUPATI): Mr. Chairman, Sir, thank you.
I honestly congratulate the hon. Minister for his sustained efforts to develop the waterways. I chose to speak now because the Buckingham Canal coastal corridor that has been allotted to us is delayed by more than three and a half years. In the coastal area that the Tirupati constituency has, there is no other economic activity except this waterway. So, we request the hon. Minister to implement it as soon as possible.
We have got another very big lake called the Pulicat Lake. But for this Buckingham Canal there is no other way to develop that Pulicat Lake. So, we request that it should be done as soon as possible.
The third most important point is Andhra Pradesh has got a very prestigious organisation called the Dredging Corporation of India which is very close to the waterways. There is a strong rumour in Visakhapatnam that the Dredging Corporation is likely to be closed fast and they are holding a relay fast. Since we have got only one important public sector Corporation in Andhra Pradesh in Visakhapatnam, that should be saved and by that nearly 1,800 employees of that Corporation could also be saved.
*m22 श्री बिऐणु पद राय (अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह): माननीय सभापति जी, मैं बोलने वाला नहीं था, बंगाल के तृणमूल कांग्रेस के सदस्य अपनी बात बोलते हुए कहते हैं कि मोदी जी सपना दिखाते हैं। मैं बंगाल की तृणमूल कांग्रेस और सीपीएम कांग्रेस पार्टी से अनुरोध करता हूं कि सपना नहीं हकीकत देखनी है तो अंडमान निकोबार आ जाओ।...(व्यवधान) बॉम्बे मेरिन ड्राइव का नाम सुना होगा। अंडमान मेरिन ड्राइव का काम शुरु हो गया है। नितिन गडकरी जी गडकरी जी नहीं है, विश्वकर्मा जी हैं, यह ... * के कान में जरा भर दो। उनके कान में भर दो।...(व्यवधान)
श्री इदरिस अली: यह क्या बोल रहे हैं?
माननीय सभापति : आप बैठिए।
…( व्यवधान)
श्री बिऐणु पद राय : अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह को 10,000 करोड़ रुपए मिले। ...(व्यवधान) अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह में नेशनल हाईवे का एक हाईवे था, अब सात हाईवे बन गए हैं। सीआरएफ फंड का नाम सुना था, फंड में अंडमान आया नहीं था। बिल का सबसे बड़ा फायदा अंडमान निकोबार द्वीपसमूह में क्या होगा, बंगाल को भी होगा।...(व्यवधान) बंगाल में मेरिन इंजीनियरिंग कॉलेज है लेकिन नौकरी अंडमान-निकोबार में आकर करते हैं। ...(व्यवधान)
माननीय सभापति:आप बैठिए। यह रिकार्ड में नहीं जाएगा।
…( व्यवधान)* श्री बिऐणु पद राय : इससे सबसे बड़ी चीज यह होगी कि प्राइवेट सैक्टर, शिपिंग सैक्टर, वाटर सैक्टर में प्राइवेट इन्वेस्टमेंट आएगी।...(व्यवधान) हजारों-लाखों आदमियों को रोजगार मिलेगा, काम मिलेगा। यह बिल में है। ...(व्यवधान) अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह में टर्मिनल बिल्डिंग भी बनेगी। मैं आग्रह करता हूं कि पूरी कम्युनिस्ट पार्टी, बंगाल की सीपीएम पार्टी एक बार अंडमान में अपनी आंख खोलकर देखे। ...(व्यवधान)
I would request the hon. Minister to kindly call those employees for negotiation so that he can save the Dredging Corporation of India. Thank you.… (Interruptions)
माननीय सभापति : आप बैठिए। ऑब्जेक्शनल होगा तो निकाल देंगे।
…( व्यवधान)
*m23 श्री गजानन कीर्तिकर (मुम्बई उत्तर-पश्चिम):माननीय सभापति जी, आपने मुझ केद्रीय सड़क निधि (संशोधन) विधेयक, 2017 पर बोलने के लिए अनुमति प्रदान की, इसके लिए मैं आपका धन्यवाद करता हूं। मैं माननीय केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी जी का धन्यवाद व्यक्त करता हूं जिन्होंने संशोधन विधेयक के कारण संशोधनात्मक बातें सदन में कहने का मौका दिया।
इस बिल से बड़ी मात्रा में फंड उपलब्ध होने वाला है, जिसका विविध कार्यों के लिए उपयोग करने का प्रस्ताव है, जैसे प्रवासी जल वाहन हेतु, माल वाहन हेतु, नए बंदरगाहों का निर्माण आदि। ऐसा देखा गया है कि महाराऐट्र राज्य के 720 किलोमीटर सागर किनारे की तरफ पूर्व सरकार ने विशेऐा ध्यान नहीं दिया था।
17.13 hours (Dr. Ratna De (Nag) in the Chair) राज्य और केंद्र में यूपीए सरकार रहने के कारण और मंत्री जी महाराऐट्र से होने के कारण मैं आपसे अधिक अपेक्षा करता हूं। वरसोवा, जूहू खार डांडा आदि समुद्री किनारे मेरे संसदीय क्षेत्र से जुड़े हुए हैं। वरसोवा, अंधेरी पश्चिम मुम्बई में 25 वऐाऩ से करीब 200-250 मछली पकड़ने वाली नौकाएंं रुकती थीं। वरसोवा बंदरगाह में जल में मलबा इकट्ठा होने के कारण वर्तमान स्थिति में केवल 40-50 मछली पकड़ने वाली नौकाएंं रुक सकती हैं।
HON. CHAIRPERSON : Please conclude quickly.
SHRI GAJANAN KIRTIKAR: Madam, I seek your indulgence because I am from the constituency where theVersova Creek is situated. There is a lot of silt in the Creek and that has to be cleared. For this purpose,a large fund allocation is required. Nobody has paid attention to this for the last 10 years. So, I am requesting the Minister to allocate enough money for this work. I have already written to the Government on this matter. That is why I am taking this opportunity to raise this issue, with your permission.
HON. CHAIRPERSON : Please conclude quickly.
SHRI GAJANAN KIRTIKAR: I will conclude within a minute. 200 मछली मारने वाले आर्थिक नुकसान सह रहे हैं। मलबे की सफाई होने से 200-300 नौकाएंं ठहरने का स्थान बन सकता है। इसके लिए महाराऐट्र मेरिन ड्राइव बोर्ड ने करीब 38.61 करोड़ रुपये की मांग मंत्रालय से की है।
मेरी आपसे विनती है कि उपरोक्त निधि सागरमाला योजना के द्वारा तत्काल मंजूर करने की कृपा करें। वर्सोवा सागरी किनारे की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए यहां पर आधुनिक सुविधायुक्त बंदरगाह का निर्माण किया जाये। ...(व्यवधान) मैंने यह बात जब महाराऐट्र सरकार के ध्यान में लायी, तब उन्होंने इस पर गौर किया और करीब साढ़े तीन सौ करोड़ रुपये की निधि प्रस्तावित की गयी। ...(व्यवधान)
मेरी केद्र से एक मांग है कि यह फंड सागरमाला से उपलब्ध किया जाये। गोवा जल मार्ग, मुम्बई ...(व्यवधान)
सभापति महोदया, मैं अंतिम प्वाइंट बोलकर अपनी बात समाप्त कर रहा हूं। ...(व्यवधान) देश का सबसे बड़ा बंदरगाह है। ...(व्यवधान) गरीब किसानों की जमीन दी गयी, जिसके कारण उन लोगों को ...(व्यवधान)
*m24 SHRI IDRIS ALI (BASIRHAT): Madam, I am grateful to you. My first prayer is this. We should respect everyone. I have great respect for our hon. Minister, Nitin Gadkari ji. But my learned friend, who is from Malda, West Bengal, a BJP leader, should withdraw his statement. He said something against Mamata Banerjee, the hon. Chief Minister of West Bengal. Does he know that she is a symbol of development? जब तक सूरज-चांद रहेगा, तब तक ममता जी का नाम रहेगा। ...(व्यवधान) यह आप सुन लीजिए। ...(व्यवधान) आप खामोश रहिए। ...(व्यवधान) आपके ऊपर मर्डर केस है। ...(व्यवधान) मैं बाद में बोलूंगा। ...(व्यवधान)
HON. CHAIRPERSON: Mr. Idris Ali, please address the Chair. Please conclude as quickly as possible.
… (Interruptions)
SHRI IDRIS ALI : Madam, he is disturbing me. What is this? My request to the hon. Minister is this. मेरे एरिया में एक नैशनल हाईवे है, जिस पर काफी ट्रैफिक चलता है। वह नैशनल हाईवे इमीडिएट रिपेयर होना चाहिए। Its condition is very bad in some areas in West Bengal.
My second request to the hon. Minister is that in my area, the Basirhat Constituency, there is a Dulduli river. Hon. Minister, Sir, please note that most of the persons belong to the Scheduled Castes and the Scheduled Tribes. They are Adivasis. They are poor people.
मेरी आपसे विनती है कि डुलडुली नदी में ब्रिज होना चाहिए। This is my humble prayer.
दूसरा,पहले बजट में पास हुआ कि मेरे बसीरहाट एरिया में एक ब्रिज होना चाहिए, लेकिन आज तक वह नहीं हुआ।That has already been passed but till today nothing has been done. Therefore, I request the hon. Minister to do the needful about that bridge.
अंत में, मैं एक बात बोलकर अपनी बात समाप्त करूंगा। ...(व्यवधान)
HON. CHAIRPERSON: Please put your demand only.
SHRI IDRIS ALI: Madam, we are facing problems. Everybody is facing problem. जहां टोल टैक्स लिया जाता है, एमपीज़ से टोल टैक्स नहीं लिया जाता, लेकिन जब हम टोल बूथ पर जाकर अपना कार्ड दिखाते हैं, तो वे कभी इनसे पूछते हैं और कभी उनसे पूछते हैं। हमें वहां से जाने में पांच मिनट लग जाते हैं। What is this? हमें जल्दी जाना होता है। We will be grateful to you, Madam. I am deeply obliged to you. Thank you.
SHRIMATI P.K. SHREEMATHI TEACHER (KANNUR): Thank you, Madam Chairperson. First of all, I would humbly request the hon. Member to withdraw his comment against CPM.
Another request to the hon. Minister is this. While supporting the Bill, I would request him to give maximum help to Kerala for all these projects.
HON. CHAIRPERSON : Madam, please listen to me. The Chair has already announced that it will be expunged.
Hon. Minister.
*m25 सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री, पोत परिवहन मंत्री तथा जल संसाधन मंत्री, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्री (श्री नितिन गडकरी) : महोदया, मैं सभी सम्मानीय सदस्यों को धन्यवाद दूंगा कि उन्होंने यूनानिमसली इस बिल का समर्थन किया। मैं यह मानता हूं कि यह काम इतना आसान नहीं था, क्योंकि इस काम को करते समय अनेक प्रकार की अड़चनें सरकार के सामने आई हैं और स्वाभाविक रूप से इसे करने के लिए बहुत पैसे की भी आवश्यकता है। वैसे मेरे पास अनेक डिपार्टमेंट्स की जिम्मेदारी है, लेकिन मैं अभी केवल इनलैण्ड वाटरवेज के बारे में ही जवाब दूंगा। मैं यह बात जिम्मेदारी से इस सभागृह में बता देना चाहता हूं कि मैं कोई सपने नहीं दिखाना चाहता हूं। सपने दिखाते हुए नेता लोगों को अच्छे लगते हैं, लेकिन अगर दिखाए हुए सपने पूरे नहीं होते हैं तो उन नेताओं को जनता पूरी तरह से समाप्त कर देती है, यह इस देश का इतिहास है। जो लोग सपने दिखाते हैं और दिखाए हुए सपने को पूरा करके दिखाते हैं, उन्हीं को जनता याद करती है। मैं सौगत राय जी की बातों का जवाब देना चाहूंगा। सौगत राय जी, अच्छा हुआ आप आए।
प्रो. सौगत राय (दमदम): मैं आपकी बात सुनने के लिए आया हूं।
श्री नितिन गडकरी : महोदया, मैं बताना चाहता हूं कि जो बातें मैंने कहीं और जो बातें नहीं हुई होंगी, अगर एक भी ऐसी बात आप मुझे बता देंगे तो मैं आपसे हाथ जोड़कर क्षमा मांगूंगा, क्योंकि मैं गलत वायदे नहीं करूंगा। आपने बंगाल में हल्दिया पोर्ट की ड्रेजिंग की बात कही, उस पर 450 करोड़ रुपये खर्च होते थे। हमने आस्ट्रेलिया और आईआईटी, चेन्न्ई को इनवाल्व किया, उस चैनल को हमने अच्छा बनाया। उसमें पहले जहां साल में 450 करोड़ रुपये खर्च होते हैं, अब साल में 250 करोड़ रुपये बचने लगे और केवल 200 करोड़ रुपये में हल्दिया पोर्ट की ड्रेजिंग हो रही है। हमने उस चैनल को चालू कर दिया है।
मैं आज रोड के बारे में नहीं बोलूंगा, लेकिन मेरी आपसे प्रार्थना है कि एक बार रोड के बारे में चर्चा इस सभागृह में होने दीजिए और एक-एक रोडवाइज सवाल पूछिए। मैं आपको बताना चाहूंगा कि जब मैं इस विभाग का मंत्री बना तो लगभग दो किलोमीटर रोड प्रतिदिन बन रही थी और आज हमारा इस साल का औसत 28 किलोमीटर रोड प्रतिदिन है। मैं आपको विश्वास दिलाता हूं कि जब अगला साल पूरा होगा तो यह औसत 40 किलोमीटर प्रतिदिन होगा।
आपने पूछा कि सागरमाला प्रोजेक्ट कहां गया, सागरमाला का क्या हुआ? हमारे पास 12 मेजर पोर्ट्स हैं। सागरमाला पोर्ट-लेड डेवलपमेंट के साथ जुड़ा हुआ है। इसमें चार लाख करोड़ रुपये पोर्ट-रेल कनेक्टिविटी, पोर्ट -रोड कनेक्टिविटी, मॉडर्नाइजेशन एंंड मैकेनाइजेशन ऑफ पोर्ट्स के लिए है। सौगत राय जी को मैं बताना चाहता हूं कि आज इसमें एक लाख 80 हजार करोड़ रुपये के काम अवार्ड हो चुके हैं, यह बात मैं जिम्मेदारी के साथ सभागृह में बता रहा हूं। जो बाकी 12 लाख करोड़ रुपये हैं, मुंबई के माननीय सांसद यहां बैठे हुए हैं, उसमें 14 इंडस्ट्रियल क्लस्टर्स हैं और दो इकोनोमिक जोन्स हैं। यह आज का विऐाय नहीं है, लेकिन यहां मुंबई के माननीय सांसद बैठे हैं, मैं उनको बताना चाहता हूं कि जवाहर लाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट में जो स्पेशल इकोनोमिक जोन है, उसमें अभी कुछ दिन पहले ताईवान की एक कंपनी आई, मैंने उसे कहा कि एफिडेविट कराकर दो। उन्होंने कहा कि छः हजार करोड़ रुपये की इनवेस्टमेंट दो साल करेंगे और चालीस हजार युवाओं को रोजगार देंगे। मैं यह बात आपके सामने कह रहा हूं एक पोर्ट में साठ हजार करोड़ रुपये की इनवेस्टमेंट दो साल के अंदर होगी और महाराऐट्र के सवा लाख मराठी युवाओं को वहां रोजगार मिलेगा। ऐसा इंडस्ट्रियल क्लस्टर कांडला में बन रहा है, सब जगह हो रहा है। आप सीनियर मेंबर हैं। आप हमारे डिपार्टमेंट के बारे में एक चर्चा यहां कराइए, मैं पोर्ट और सागरमाला प्रोजेक्ट के बारे आपको बताउंगा।
आपने भारतमाला प्रोजेक्ट की बात कही। भारतमाला फर्स्ट फेज में साढ़े सात लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। अब साढ़े सात लाख करोड़ रुपये में से सोलह हजार करोड़ रुपये के डी.पी.आर. पूरे हुए हैं। हमारे अंडमान निकोबार के माननीय सदस्य बोल रहे थे, केवल इनके एक निर्वाचन क्षेत्र में मैंने 10000 करोड़ रुपये के काम मंजूर करके शुरू कर दिये हैं। केवल घोऐाणा नहीं की है। आपके मार्फत मैं माननीय सभा के सदस्यों को बताऊंगा क्योंकि कुछ काम ऐसे हैं जिनमें एनवॉयरनमेंट फॉरेस्ट की अड़चनें आती है। किसी में लैंड एक्वीजिशन की समस्या आती है, कोई पी.आई.एल. डालता है, कोई स्टे लगाता है, कोई डिस्प्यूट खड़ा हो जाता है। इस तरह से कुछ कामों में अड़चनें भी आती हैं। मेरा काम आपको और उनको बुलाकर उन समस्याओं का समाधान करना है। अड़चनें आती हैं और अड़चनें अभी भी हैं, लेकिन मैं हर समय अपने अधिकारियों को कहता हूं कि जब कोई एम.पी. हमारे पास आता है तो उसको फोकट में तकलीफ नहीं है और वह पांचवीं मंजिल पर फोकट में चढ़ने के लिए नहीं आता है। वह अपना पैट्रोल-डीजल फोकट में नहीं पूंक रहा है। 12-15 लाख लोगों द्वारा चुना हुआ वह लोक प्रतिनिधि मेरे यहां इसलिए आता है कि लोग उसके पास अपनी तकलीफें लेकर जाते हैं तो वह तकलीफें बताने के लिए मेरे पास आता है। इसलिए उसको टरकाने की कोशिश मत करो, उसके काम को समझो। उसका काम आपको करना होगा, मुझे भी करना होगा। यह मेरी जिम्मेदारी है और इसलिए आप मेहरबानी करके, चूंकि आप बहुत सीनियर हैं, सौगत राय जी, आपने गंगा की बात भी कही, मेरे पास सारे जवाब हैं। केवल गंगा में 5400 करोड़ रुपये के काम मंजूर हुए। इस विऐाय पर आप चर्चा कराइए।
वाराणसी, हल्दिया, साहिबगंज, तीनों जगह मल्टी मोडल का काम शुरू हुआ है। गंगा में 1700 करोड़ रुपये का 5 साल का ड्रेजिंग कांट्रैक्ट दिया है। हल्दिया से पटना तक जैसे एयर ट्रैफिक कंट्रोल होता है, वैसे ही रिवर ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम इलैक्ट्रॉनिक इनॉगरेट हो गया है। आपके कोलकाता का हल्दिया डॉक बंद पड़ा था। उस हल्दिया डॉक के लिए मैंने कोचिंग शिपयार्ड को लगाया है। वह काम शुरू हो गया है।
आपको पता होगा कि हमने मारुति की गाड़ियाँ वाराणसी से नॉर्थ-ईस्ट और बंगाल भेज दीं। अभी 15 दिन पहले 150 सीटों की दो बैचेज ट्रक की अशोक लीलैंड की गाड़ियां चेन्नई से निकलकर बंग्लादेश चली गईं। आपके बंगाल के सागर से आगे ब्रहमपुत्र तक और ब्रहमपुत्र से म्यांमार तक जाने का हमारा प्लान है। बराक नदी में ड्रेजिंग शुरू हुई। ब्रहमपुत्र में शुरू हुई और इतना ही नहीं, यह काम कठिन है। यह आसान काम नहीं है।
आपने बकिंघम केनाल की बात की है। पहले चरण का काम शुरू हो गया है, वह काम हमने अवार्ड कर दिया है। उसके बाद बाकी काम करने के लिए कहीं पर तो केनाल ही गायब हो गया। उसके ऊपर घर बन गये। हमें एनक्रोचमेंट हटाना पड़ेगा। पेड़ लग गये हैं। फिर फॉरेस्ट डिपार्टमेंट की परमिशन लेनी पड़ेगी। पहली बात यह सच है कि करीब दस ऐसे वॉटरवेज हैं जिनका हमने लगभग टेंडर निकाल दिया है। काम शुरू कर दिया है, जिसकी लिस्ट मैं आपको बता सकता हूं, पर मैं इसमें आपका समय नहीं लूंगा। लेकिन मैं आपको यह कहूंगा कि एक बार आप इस पर चर्चा करिए। इसमें लोगों का यह सोचना सही है कि पानी नहीं है तो कैसे वॉटरवेज चलेंगे?
मैं अभी रिवर कनैक्टिविटी का मंत्री बना। इस देश में पानी की कमी नहीं है। 3000 टी.एम.सी. गोदावरी का पानी समुद्र में जा रहा है। जो पोलावरम की बात आपने कही, मैं वह पूरा करूंगा। मैं आध्र प्रदेश की जनता को कहना चाहता हूं कि यह 60000 करोड़ का इरीगेशन प्रोजेक्ट 2022 समाप्त होने से पहले मैं पूरा कर दूंगा। मैं खुद 23 तारीख को पोलावरम आ रहा हूं। मैं खुद उसको चैक कर रहा हूं। भारत सरकार ने वादा किया है, पूरा होगा। 3000 टी.एम.सी. गोदावरी का पानी समुद्र में जा रहा है और उसका केवल 125 टी.एम.सी. पानी हमने बचाया। पोलावरम में वह पानी पंप से लेकर 210 कि.मी. केनाल में लाकर अमरावती में विजयवाड़ा में आय़ा तो हमारे मुख्य मंत्री जी ने पब्लिकली बताया कि 10000 करोड़ रुपये की किसानों की आमदनी इससे बढ़ी है। अब मैंने सोचा कि 3000 टी.एम.सी. पानी जो समुद्र में जा रहा है, इसका अगर 1500 टी.एम.सी. पानी मैं बचाऊंगा तो कर्नाटक, आध्र प्रदेश, तेलंगाना और तमिलनाडु की पानी की समस्या ही सुलझ जाएगी। आपकी पानी की समस्या ही नहीं रहेगी और अभी मैं जा रहा हूं, 5 बजे मेरे यहां मीटिंग है। मैं आपके विऐाय पर भी अभी आ रहा हूं, केरल की भी समस्या नहीं रहेगी। 5 बजे मेरे यहां मीटिंग थी। दोनों प्लान तैयार हो गये हैं जो तेलंगाना में कालेश्वर प्रोजेक्ट तेलंगाना सरकार बना रही है, उसके बाद इंद्रावती नदी आती है, इंद्रावती में पानी ही पानी है जो पूरा समुद्र में जा रहा है। आप सब लोग इस बात को सोचो, आप सब देश के मालिक हैं। मुझे इस बात का बड़ा ताज्जुब होता है कि इस देश का पानी समुद्र में जा रहा है। उस पर कोई बहस नहीं होती है, कोई चर्चा नहीं होती, कोई लेख नहीं लिखा जाता। मीडिया में एक वाक्य छपकर नहीं आता। बहुत पानी समुद्र में बह रहा है लेकिन एक राज्य दूसरे राज्य से पांच-दस एमएलडी पानी के लिए आपस में कोर्ट में झगड़ा कर रहे हैं, वे माननीय सुप्रीम कोर्ट तक लड़ रहे हैं। मैं अपने कार्यकाल में आधे से ज्यादा झगड़े समाप्त कर दूंगा। उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश का झगड़ा समाप्त हुआ, महाराऐट्र और गुजरात का झगड़ा समाप्त हुआ, कर्नाटक तमिलनाडु, आंध्रप्रदेश और तेलंगाना को, इद्रावती नदी के बाद यह पानी दो डैम में डाल कर, कावेरी के टेल-एंंड तक और पोलावरम का बैक वाटर निकाल कर, फिर से एक बार पाइप से लेकर दो धरणों में लेकर गोदावरी का पानी कृऐणा में आयेगा, कृऐणा का पानी पेन्नार नदी में आयेगा और पेन्नार नदी का पानी कावेरी में जायेगा और केवल पानी नहीं जायेगा, ये वाटरवेज बनेंगे। इससे लाखों हेक्टेयर जमीन पानी के नीचे आयेगी और पानी की समस्या समाप्त होगी। यह बहुत बड़ा सपना है, बहुत बड़ी ताकत है, लेकिन यह पूरा होने में समय लगेगा। यह कोई दो-तीन साल का काम नहीं है।
पहली बार हिमालय की नदियां गंगा को कावेरी से जोड़ने की बात हुई, यह अटल बिहारी वाजपेयी जी ने की। आज मेरे ध्यान में आया कि हिमालय की नदियों में पानी ही पानी है। हिमालय की वैली को छोड़ कर जो नदी आती है, उसका पानी समुद्र में जा रहा है, पहले उसे क्यों नहीं रोकना चाहिए, हमने सोच बदली और मैं आपको विश्वास दिलाता हूं कि इस देश में पानी की कमी नहीं है बल्कि पानी के नियोजन की कमी है। नदी में पानी कैसे आयेगा? पहले हम लोग गंगा में 45 मीटर चौड़ा ड्रेजिंग कर रहे हैं। ड्रेजिंग करने के बाद वह जल मार्ग बनेगा, तीन मीटर राफ्ट होगा। अभी कोई आता है तो कहता है कि तुम यह बैराज क्यों बना रहे हो? इस देश में एक अच्छी बात है कि कोई यह कहने के लिए नहीं आता कि आप काम करो। जो भी आता है, वह यही कहता है कि पहले तुम यह काम बंद करो। यह आपको और मुझे सोचना होगा। यह सवाल बी.जे.पी., कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस का नहीं है, सवाल देश की सवा सौ करोड़ जनता का है कि उनको पीने के लिए पानी मिलेगा या नहीं मिलेगा, नदी में पानी रहेगा या नहीं रहेगा। एक माइक्रोस्कॉपिक माइनॉरिटी उठ जाती है, अभी एक कमेटी में मुझे सभी सांसदों ने कहा कि बाढ़ के कारण नुकसान हो रहा है। मैंने कहा कि मैं ड्रेजिंग करूंगा और ड्रेजिंग से निकली हुई सैंड से मैं नई टेक्नोलॉजी का उपयोग करके उससे फ्लड प्रोटेक्शन वॉल बनाऊंगा। प्लास्टिक के नये मैटेरियल आये हैं, उसमें पत्थर डाल देंगे, उसकी दिवाल खड़ी कर देंगे, ताकि पानी गांव में रह जाएगा और बाढ़ से गांवों में नुकसान नहीं होगा। एक तरफ ड्रेजिंग का ड्रेजिंग होगा और दूसरी ओर बाढ़ से नुकसान नहीं होगा, यह इसमें किया है।
जैसे एयरपोर्ट है, वैसे ही रिवरपोर्ट बनाने की बात है। मैं आपको बताना चाहता हूं कि रोड़ का काफी काम हो गया, सात लाख करोड़, पार्लियामेंट के रिकॉर्ड पर, आप सभी लोग अपनी डायरी में लिख लें। मैं पब्लिकली कहता हूं कि जो काम नहीं करना होगा तो डंके की चोट पर चिल्ला कर बोलता हूं कि तुम्हारा काम मुझे नहीं पटता है, मुझे यह काम नहीं करना है, अगली बार मेरे पास आना नहीं और मेरा समय गंवाना नहीं। करना है - हां या नहीं, मैं दो ही शब्दों में बात करता हूं। मैं देखता हूं, मैं सोचता हूं, मैं अधिकारियों से नहीं पूछता हूं, उनसे कभी नहीं पूछता हूं कि यह काम होगा या नहीं होगा, मैं अपनी तरफ देखता हूं, अगर मुझे पटता है तो हां कहता हूं। आप किसी भी एमपी से पूछिए। आप भी हमारे पास आइए। इसलिए मैं आपको विश्वास दिलाता हूं कि हम सपने दिखाने का काम नहीं करेंगे, हमारी सरकार नहीं करेगी। ...(व्यवधान)
प्रो. सौगत राय: क्या सी-प्लेन 10 सालों में बनेगा? ...(व्यवधान) क्या यह सपना नहीं है?...(व्यवधान)
श्री नितिन गडकरी : मुझे भी इस बात का दर्द होता है कि यह क्यों करना चाहिए। मैंने 11 महीने पहले अमेरिका से एक बस खरीदी थी, जवाहरलाल नेहरू पोर्ट पर है, उसका नाम एमपीबीएस बस है, जो पानी पर और रोड पर चलती है। बस वहां सड़ रही है। समुद्र में बस को ले जाने के लिए समुद्र तक पानी का छोटा रास्ता बनाना पड़ेगा। मुझे मुंबई में ग्रीन ट्रिब्युनल ने कहा कि वह रास्ता नहीं बनाना तो मैं क्या बस को हाथ में लेकर पानी में फेकूं, समुद्र में बस कैसे जायेगी? ...(व्यवधान) बस वहां सड़ रही है।
मैं आपको बताता हूं कि आप सी-प्लेन की बात कर रहे हैं। मुझे आपका सहयोग चाहिए। जो हवा में चलती है, उसे एरोप्लेन कहते हैं और जो पानी में चलती है, उसे बोट कहते हैं। हमारे जो एविएशन मंत्री रहे हैं, उनसे कहा कि यह सी-प्लेन नहीं है यह फ्लाइंग बोट है। मैं इसको फ्लाइंग बोट कह रहा हूं, आप उसको सी-प्लेन कह रहे हैं, लेकिन दोनों का कहना एक ही है। मैंने कहा कि आप तीन महीने के अंदर कानून बनाइए, नहीं तो मैं नया फ्लाइंग बोट का कानून बना कर, ठप्पा लगा कर, अपना कानून बनाऊंगा। अब हवा और पानी में चलने के लिए हमने अमेरिका से कानून लाया, हमने कनाडा से कानून लाया। यह बात आपकी सही है कि वहां बहुत सालों से यह चल रहा है।
वह कानून लाकर एविएशन मिनिस्ट्री, एयरपोर्ट अथॉरिटी, डायरेक्टोरेट ऑफ शिपिंग को मिलकर एक एक्ट बनाकर पास कराना होगा। मुझे आपको बताते हुए खुशी हो रही है कि जब इसका ड्राफ्ट बनेगा, तो हम लोग नदी में बैरिजेज नहीं बनाएंंगे, लेकिन कुछ जगहों पर हमें बैरिजेज बनाने पड़ेंगे। ये बैरिजेज अमेरिका, जर्मनी, जापान आदि देशों में बने हैं। एक माइक्रोस्कोपिक माइनोरिटी आकर हमें कहता है कि यह मत करो। अभी ग्रीन ट्रिब्यूनल के एक जज ने निर्णय दिया कि यदि यमुना में ड्रेजिंग करनी है और पानी में बोट चलानी है, तो इलेक्ट्रिक से भी बोट चलेगी। आप बताइए कि इलेक्ट्रिक से चलने वाली बोट मैं कहाँ से लाऊँ। काम उन्होंने बंद कर दिया। एक टेंडर निकाला था, जो रुक गया। ऐसी अड़चनें आती हैं। मैं उनको दोऐा नहीं देता हूँ। मैं यह मानता हूँ कि इन सब समस्याओं पर बात करनी होगी। लोगों को विकास का मुद्दा समझाना होगा। एथिक्स, इकोनॉमी, इकोलॉजी और एनवायर्नमेंट को लेकर चलना होगा। इकोनॉमी को भी मजबूत करना है, एथिक्स के साथ भी चलना है और इकोलॉजी एवं पर्यावरण को भी संभालना है, पर्यावरण को भी प्रोटेक्ट करना है। हम तीनों बातों का समन्वय रखेंगे। इसलिए मैं आपको बताना चाहता हूँ कि 111 नदियाँ हैं, अभी एक सम्मानित सदस्य कह रहे थे कि इसमें चम्बल नदी नहीं आयी। अभी एक मुख्य मंत्री, मैं उनका नाम नहीं लूँगा, से मैंने कहा कि आप प्रस्ताव भेजें। उन्होंने कहा कि हमारी नदी आप ले लेंगे। मैं नदी को अपनी जेब में डालकर कैसे नागपुर जाऊँगा। ...(व्यवधान) मैं नदियों का क्या करूँगा? 111 नदियों में जितनी भी नदियाँ आयीं, उनसे संबंधित बिल पास हो गया। यदि किसी भी नदी में जलमार्ग बनाना है, तो मुझे फिर से नया बिल लाना पड़ेगा, फिर से कैबिनेट में जाना पड़ेगा, फिर से संसद में जाना पड़ेगा और एक-एक नदी को जोड़कर उसे जलमार्ग करना होगा।
मैं सदन के माध्यम से आह्वान करता हूँ कि इसमें जो भी नदियाँ नहीं आयी हैं, मुम्बई की मीठी नदी इसमें नहीं आयी है, इसे उसमें डालें, जितनी भी नदियाँ इसमें नहीं आयी हैं, उतनी नदियों के बारे में आप मुझे बताएँ, मैं फिर से बिल बनाऊँगा और आपकी अनुमति लूँगा।
अभी आपने मुम्बई की बात की। 15 दिनों के अंदर, श्री सावंत जी, हम लोग 800 करोड़ रुपये की लागत से एक नया क्रूज़ टर्मिनल बना रहे हैं, उसका भूमि-पूजन करने जा रहे हैं। 80 क्रूज़ आए। एक क्रुज में चार हजार लोग आते हैं। एक क्रूज़ को तो मैं देखकर हैरान हो गया। वह संसद के हॉल से चार गुना बड़ा था। मैं और वहाँ के मुख्य मंत्री उसके अंदर गये। हम देखते रह गये, उसका स्टेज बहुत ही बड़ा था। उसमें चार हजार रूम्स और 28 रेस्टोरेंट्स थे। ऐसे 80 क्रूज़ इस साल मुम्बई आए। पाँच साल में साढ़े नौ सौ क्रूज़ आ रहे हैं। अंडमान-निकोबार के सम्माननीय सदस्य श्री बिऐणुपद राय जी यहाँ बैठे हैं। मैं बता रहा हूँ कि मुम्बई से अंडमान-निकोबार क्रूज़ शुरू होगा। उसके लिए हमने तय किया है। मुम्बई से गोवा के लिए एक 500 सीटर का लग्जरी क्रूज़ चलेगा। एक महीने के अंदर हम लोग वहाँ जाएंंगे और मुम्बई से गोवा क्रूज़ के लिए सर्वे शुरू करेंगे।
मैं सम्माननीय सदस्यों से कहना चाहूँगा कि गंगा में सेवन स्टार और फाइव स्टार क्रूज़ आज हैं, वाइज़ैग में भी आएंंगे। मैं देश के युवाओं से अपील करता हूँ, अभी मैं रशियन सरकार के साथ कैटामरीन बनाने के लिए एमओयू साइन करने जा रहा हूँ। कैटामरीन की स्पीड 45 किलोमीटर प्रति घंटा है। यह नदियों और समुद्र में चलेगा। 20 हजार किलोमीटर का सी-फ्रंट बनेगा और 111 नदियों का 20 हजार किलोमीटर का रीवर-लेंथ, पाँच लाख तालाब और उसके साथ छः हजार बड़े डैम होंगे। एक फीट पानी पर हवाई जहाज पानी में उतरता है। 300 मीटर में यह तो खेत में भी उतर सकता है। नौ सीटर हवाई जहाज के जेट इंजन की कीमत 150 करोड़ रुपये है। मैंने उसे कहा मेक इन इंडिया से करो। तो, उसने कहा मुझे कितनी लागत तक आना चाहिए, मैंने कहा कि आठ करोड़ रुपये में बनेगा? उसने कहा कि 12 करोड़ रुपये में बनेगा। यह 12 करोड़ रुपये में बनेगा, इसे कोई भी खरीद सकता है। यह दिन भर चल सकता है। मुम्बई चौपाटी से निकलकर शिर्डी साईं बाबा के दर्शन करके वापस आए। फिर मुम्बई से गोवा और वहाँ से अंडमान-निकोबार चले गये। इससे एक रिवोल्यूशन होगा।
यह बात सही है कि हम innovation, entrepreneurship, technology और research को नॉलेज कहते हैं। इस नॉलेज के वैल्थ में कंवर्जेंस से ही हमारा भविऐय है। आज हम इलैक्ट्रिक बस, इथिनॉल बस, मिथिनॉल बस और इलैक्ट्रिक बाइक्स आदि ला रहे हैं। हम यह बातें कर रहे हैं कि इनके लिए किसान फ्यूल तैयार करेगा। ये सब कठिन काम हैं। इन बातों को बताने के बाद इन्हें पूरा करने में काफी समय लगेगा।
यदि मैं यह सवाल पूछूं कि इस सब के ऊपर पिछले अनेक सालों में क्या हुआ? लेकिन मैं यह नहीं जानना चाहता हूं कि किसने क्या किया है और किसने क्या नहीं किया है। हमारे प्रधान मंत्री श्री मोदी जी ने देश को एक नई सोच दी है। उन्होंने एक नए भारत की कल्पना की है। आखिर आप कितने हाइवे बनाएंंगे? आज बहुत लोग गाड़ियां खरीद रहे हैं, जिसके कारण हाइवेज़ पर बहुत ट्रैफिक हो गया है। मैं कहता हूं कि आप गाड़ी मत खरीदिए। हम साइकिल ट्रैक्स के ऊपर भी विचार कर रहे हैं। हमारे राज्य मंत्री यहां बैठे हैं। हम दिल्ली में 14 लेन की एक रोड बना रहे हैं। दिसंबर एंंड तक उसका उद्घाटन किया जाएगा। इसके संबंध में मैंने उन्हें यह विचार दिया कि इसके उद्घाटन के दिन हम अपने सभी एम.पीज़. के साथ साइकिल पर आएंंगे और इसका उद्घाटन करेंगे।
आज देश में ऑटोमोबाइल्स का 22 परसेंट ग्रोथ रेट है। इसी स्पीड से यदि गाड़ियां बढ़ेंगी, तो मुझे हर 3 सालों में नेश्नल हाइवेज़ में एक लेन एड करनी पड़ेगी, जिसका खर्चा 80 हजार करोड़ रुपये है। देश में 52 लाख किलोमीटर्स की रोड-लैन्थ है, जिसमें से 96 हजार किलोमीटर का सिर्फ राऐट्रीय राजमार्ग था। हमारी सरकार के आने के बाद मैंने उसे 1,70,000 किलोमीटर, यानी दोगुना कर दिया। यहां उपस्थित लोगों ने जिन जगहों पर मांग की, वहां हमने नेशनल हाइवे बनाकर दिया है। अब 2,00,000 किलोमीटर का और काम करने में समय लगेगा। पिछले साल 16.50 हजार किलोमीटर के काम अवॉर्ड किए गए और इस साल हमें 20 हजार किलोमीटर के काम अवॉर्ड करने हैं।
मैं मानता हूं कि इन कामों को पूरा करने में अड़चनें और तकलीफें हैं, लेकिन हम धीरे-धीरे इस काम को पूरा कर रहे हैं। हमारी पहली प्रायॉरिटी वॉटर बेस्ड ट्रंसपोर्ट- sea transport है। वॉटर ट्रंसपोर्ट बहुत ही सस्ता है। उसमें और अन्य ट्रंसपोर्ट्स में बहुत ही अंतर है। वॉटर बेस्ड ट्रंसपोर्ट के बढ़ने से तेल एवं अन्य चीज़ें सस्ती हो जाएंंगी। इससे एक्सपोर्ट और इंडस्ट्री में भी बढ़ावा होगा।
हमारी सैकेण्ड प्रायॉरिटी रेलवे और थर्ड प्रायॉरिटी रोड्स हैं। मैं रोड ट्रंसपोर्ट एंंड हाइवेज़ का मंत्री हूं। कभी-कभी मुझे समझ में नहीं आता है कि मैं उल्टा बोल रहा हूं या सीधा बोल रहा हूं। मैं कहता हूं कि रोड्स कम होनी चाहिए, जिससे उनका ट्रैफिक कम हो सके। देश में 5 लाख एक्सीडेंट्स हो रहे हैं, जिनमें 1.5 लाख लोग मर रहे हैं। आज एक घर में 4 आदमी रहते हैं जिनके पास 6 गाड़ियां हैं। देश कैसे चलेगा? अतः इनोवेटिव ट्रंसपोर्ट के लिए वॉटर ट्रंसपोर्ट पयार्य है। वॉटर ट्रंसपोर्ट के जरिए आप एक ट्रक में 10 टन माल लेकर जा सकते हैं। कोलकाता के हुगली में कोचीन शिपयार्ड एक फैक्ट्री लगा रहा है, जिसमें वह जर्मन से डिज़ाइन लेकर आया है। जो बार्ज इंजन पर 2 हजार टन माल लेकर जा रहा था, उसी बार्ज का सिर्फ डिज़ाइन बदल देने से वह बार्ज अब 3.5-4 हजार टन माल लेकर जा रहा है। फरक्का के गेट पर एल एंंड टी काम कर रही है। वहां 400 करोड़ रुपये की रिपेयर का काम शुरू हो चुका है। फरक्का की फ्लश बांग्लादेश जा रही है।
मैं आप सब को बताता हूं कि आने वाले समय में आप सब के सहयोग से यह हिन्दुस्तान के इतिहास में एक नई क्रंति होगी। मैं मानता हूं कि यह बहुत कठिन काम है। अभी इसकी शुरुआत हुई है। इसको जो 2-4 हजार करोड़ रुपये दिए गए हैं, उनसे क्या होगा? 2-4 हजार करोड़ रुपयों से कुछ नहीं होता है। मैंने उसके लिए भी मार्ग निकाला है। मैं जब मंत्री बना, तब पहले साल 12 मेजर पोर्ट्स का प्रॉफिट 3 हजार करोड़ रुपये रहा, दूसरे साल 4 हजार करोड़ रुपये प्रॉफिट, तीसरे साल 5 हजार करोड़ रुपये प्रॉफिट और इस साल 7 हजार करोड़ रुपये का प्रॉफिट वहां हुआ है। मैंने प्रॉफिट वाले पोर्ट्स के चेयरमैन से कहा कि आप एक सब्सिडरी कंपनी खोलिए, तो उन्होंने मुझसे कहा कि इसमें उनका क्या काम है? मैंने उनसे कहा कि इसमें वे रिवर ट्रंसपोर्ट का काम करें। इस पर वे बोले कि यह तो घाटे का काम है। फिर मैंने उनसे कहा कि आप जो प्रॉफिट का काम करते हैं, वह प्रॉफिट आपका है या सरकार का है? मैंने उनसे कहा कि आपका जो प्रॉफिट है, वह हिन्दुस्तान की जनता का है और आप उसे इनलैण्ड वॉटरवेज़ में डालिए। महाराऐट्र के सारे जलमार्ग जे एंंड पी.टी. बनाएगा। वहां प्रॉफिट है। इस पैसे के माध्यम से हम फॉरेन इंवेस्टमेंट भी लाएंंगे। आप सब के सहयोग से कुछ इंवेस्टमेंट पी.पी.पी. में आएगा, कुछ प्राइवेटाइजेशन में आएगा और कुछ हाइब्रिड एन्युटी में आएगा। मैं मानता हूं कि दो सालों में हम कम से कम 12-15 जलमार्ग भी बना पाए, तो वह काफी होगा। इतना सब काम करने में काफी समय लगेगा और अनेक समस्याएंं और अड़चनें भी आएंंगी। आप सभी के सहयोग के बिना हम इस काम को नहीं कर पाएंंगे। मैं आप सब का बहुत-बहुत धन्यवाद देता हूं और कहता हूं कि आप सब अगली बार रोड, रिवरवेज़ और पोर्ट्स की अलग-अलग चर्चा कीजिए, ताकि मुझे सब की बातों का जवाब देने का अवसर मिले। मैं आप सब का आभार मानता हूं और धन्यवाद देता हूं कि आप सबने यूनैनिमसली इस बिल का सपोर्ट किया है। आप सबने इस बिल से जो अपेक्षा व्यक्त की है, हम उसे जरूर पूरा करेंगे और निश्चित रूप से आप सभी इस बिल को मंजूरी देने की कृपा कीजिए। आप सब से यही प्रार्थना करते हुए मैं अपनी बात को यहीं समाप्त करता हूं। धन्यवाद।
… (Interruptions)
HON. CHAIRPERSON: No questions please.
… (Interruptions)
HON. CHAIRPERSON: The question is:
“That the Bill further to amend the Central Road Fund Act, 2000, be taken into consideration.” The motion was adopted.
HON. CHAIRPERSON: The House shall now take up clause by clause consideration of the Bill.
The question is:
“That clauses 2 to 6 stand part of the Bill.” The motion was adopted.
Clauses 2 to 6 were added to the Bill.
Clause 1, the Enacting Formula and the Long Title were added to the Bill.
SHRI NITIN GADKARI : I beg to move :
“That the Bill be passed.” HON. CHAIRPERSON: The question is:
“That the Bill be passed.” The motion was adopted.
*t70 Title: Discussion on the motion for consideration of the Requisitioning And Acquisition of Immovable Property (Amendment) Bill, 2017 (Discussion not concluded).
HON. CHAIRPERSON: The House will now take up Item No. 27.
… (Interruptions)
HON. CHAIRPERSON: The hon. Minister will just move the Bill for consideration.
… (Interruptions)
HON. CHAIRPERSON: Item No. 27, the Requisitioning and Acquisition of Immovable Property (Amendment) Bill, 2017.
Now, the Hon. Minister.
THE MINISTER OF STATE OF THE MINISTRY OF HOUSING AND URBAN AFFAIRS (SHRI HARDEEP SINGH PURI): Madam, I beg to move:
“That the Bill further to amend the Requisitioning and Acquisition of Immovable Property Act, 1952, be taken into consideration.” HON. CHAIRPERSON: Hon. Minister, do you want to say something about this Bill?
SHRI MOHAMMAD SALIM (RAIGANJ): Madam, let it be taken up tomorrow. We have the House tomorrow also.
HON. CHAIRPERSON: The House is there up to 6 o’clock.
SHRI HARDEEP SINGH PURI : Madam, any sovereign State, which stands to reason must have the power to requisition and acquire property for defence and national security purposes. This power of the State is exercised with an equal obligation that the State must pay compensation on a fair and just basis. Even during war time, prior to 1947, the Defence of India Act, 1939 and rules made thereunder gave the State these powers. After 1947, the Requisition Land (Continuance of Powers) Act of 1947 gave the State these powers. This Act expired in March 1952.
The present Requisitioning and Acquisition of Immovable Property Act, 1952 was enacted on 14 March 1952. This Act has been amended on 11 occasions. The present is the 12th Amendment and it is being introduced specifically for defence and national security purposes.
Section 3 of this Act provides for requisition of property while Section 7 provides for acquisition within a period of 17 years of the initial requisition. The procedure, which is prescribed for acquiring the requisition property mandates that a show-cause notice and then an order of acquisition in a prescribed form ‘J’ be issued. The notice for acquisition provides an opportunity to concerned persons to be heard before the order of acquisition is passed.
Why are we coming with this Amendment? Very often, we find that an order of acquisition is challenged and challenged in a manner in order to delay the proceedings. After the litigation process is complied with and the Government intervention in the interim has already raised the value of the land many times, the question arises: From which date will you provide the compensation to the person or entity whose land has been acquired?
In many cases, the Government finds itself in a situation where the compensation that is being sought as a result of the challenges which are brought before the court on the limited plea that the party concerned has not been heard, results in unintended benefits accruing to the party whose land has been acquired.
The purpose of this amendment, in short, is to provide with the retrospective effect from 1952 that the acquisition notice under Section 7 will be deemed to have been issued with retrospective effect. In other words, if a person brings a challenge to the acquisition, that person will have to pay the cost of bringing that challenge. The State, meanwhile, has no intention of going back on its obligation to pay just and fair value. The compensation which will be paid for the acquisition for national security purposes will be calculated from the original date of the original notice and the State, meanwhile, will pay fixed deposit rate as paid by the State Bank of India. This is the crux of the amendment that we are seeking to bring. I have received notices from three hon. Members for specific amendments that they want to introduce. Maybe, because of the lateness of the hour, I do not know whether you would wish me, Madam, to take up those amendments now or we take them up tomorrow when we bring the Bill up for a detailed consideration.
श्री रमेश बिधूड़ी (दक्षिण दिल्ली) : मैडम, माननीय मंत्री जी ने अभी यह बिल इंट्रोडय़ूज़ किया है, ‘रिक्वीजीशन एण्ड एक्यूजीशन इम्मूवेबल प्रॉपर्टी (अमेंडमेंट बिल) 2017’। इस देश के अंदर प्रधान मंत्री जी ने लगभग सवा सौ बिलों में अमेंडमेंट और बदलाव किए हैं, जो अंग्रेजों के बनाए हुए कानून थे। पहले किसी ने न चिंता की या सोचा नहीं था, क्योंकि जो बिल में अमेंडमेंट होते थे, वह सलीम भाई कुछ लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए नहीं कर पाते थे। आप लोग जिनको समर्थन किया करते थे।...(व्यवधान)
श्री मोहम्मद सलीम :यह आपका बनाया हुआ कानून है।
श्री रमेश बिधूड़ी : यह अपना बनाया हुआ कानून है, जिनको आप जानते हैं। उस समय कौन सत्ता में थे। आप वहीं से निकल कर आए हैं। इस बिल को इसीलिए, For the interest of the nation and for the interest of the security of the nation. इस बात को लेकर इस बिल में अमेंडमेंट लाया गया है। मैं इसके समर्थन में इसलिए भी खड़ा हुआ हूं, क्योंकि अगर देश की तरक्की के लिए, डिफेंसेज़ के लिए कहीं जमीन एक्वायर करनी हैं, सैक्शन 3 का नोटिस देना है। मुझे पहले ये सारी बातें माननीय मंत्री जी ने बतायी हैं। मैं इस बात को दोहराना चाहता हूं। जिसकी जमीन एक्वायर होती है, वह कोई छोटा किसान नहीं होता, एक एकड, दो एकड़ या चार एकड़ का मालिक नहीं होता है। कुछ लोग ऐसे होते हैं जिनको बातें लीक हो जाया करती हैं और सभी छोटे किसानों की जमीनों को एक पैसे वाला व्यक्ति खरीद लेता है कि यह जमीन डिफेंस और नेशनल सिक्योरिटी के लिए एक्वायर होने वाली है। वह जमीन खरीद लेता है, जैसे ही गवर्नमेंट नोटीफिकेशन करेगी, क्योंकि हमारा प्रोवीजन है। फण्डामेंटल राइट्स के अनुसार आदमी कहता है कि आपने मुझे नोटिस तो दे दिया और सैक्शन 7 का नोटिस भी दे दिया। मैंने तो सुना ही नहीं था। इस बात को लेकर आदमी कोर्ट में चला जाता है। जब आदमी कोर्ट में पहुंच गया तो कोर्ट ने इसको स्टे कर दिया। वह कोर्ट में स्टे के बावजूद इसलिए लटकाया जा रहा है कि मेरी संपत्ति की जो कीमत है, वह बढ़ रही है। जमीनों की कीमत बढ़ेगी, मुझे कोई फर्क नहीं पड़ने वाला है। जो डेवलपमेंट है या डिफेंस या नेशनल सिक्योरिटी के लिए सरकार को कुछ करना है तो वह नहीं कर पाएगी और डिले होता चला जाएगा। 15-20 साल के बाद अगर कहीं न कहीं कोर्ट ने उसको डिसमिस कर दिया या उसके फेवर में दे दिया और जैसे अभी हालात हैं, 24/2 दिल्ली लैण्ड रिफॉर्म्स एक्ट के अंदर डी.डी.ए. में अभी माननीय सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के माध्यम से आदेश हुआ है। आज अरबों रुपये की संपत्ति डी.डी.ए. और कुछ लोगों के माध्यम से मिलकर, मैं उनका नाम नहीं लेना चाहता, ऊपर से लेकर नीचे तक लोग मिले हुए हैं। संपत्ति को हड़प कर लिया गया। जैसे 2जी स्पेक्ट्रम, कोल घोटाला आदि इस प्रकार के जो घोटाले होते थे, उन घोटालों से बचने के लिए कि अगर हम सैक्शन 7 इंप्लीमेंट करेंगे और कोर्ट ने उसके फेवर में ऑर्डर कर दिया तो सरकार उसको कंपनसेशन देगी लेकिन कम्पैनसेशन तभी देगी, जब सैक्शन-3 का नोटिस दिया था, उसी कीमत पर देगी। लेकिन उसके साथ-साथ ...(व्यवधान) लेकिन उसे तीन के बाद जो 15, 17 या 20 साल लगे हैं तो उस पर सरकार उसे जो स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया का फिक्स्ड डिपाजिट का इंटरैस्ट है, उस पर इंटरैस्ट देगी। हो सकता है कि कुछ लोग विरोध करने के लिए इसका विरोध करेंगे। इस कानून में केवल नेशनल सिक्युरिटी और डिफैंस के लिए अगर जमीन एक्वायर होगी, इस बिल के अंदर प्रोविजन है कि तभी यह व्यवस्था लागू होगी। अगर कोई केद्र सरकार से मॉल बनाने के लिए या कोई अन्य किसी स्पेसिफिक डैवलपमैन्ट के लिए इस्तेमाल करेगा तो वहां यह क्लाज लागू नहीं होगी। दिल्ली के अंदर अंग्रेजों के समय के सैक्शन 81 और 33 कानून चल रहे हैं। मैं माननीय मंत्री जी से निवेदन करूंगा कि इन्हें एबॉलिश करने के लिए यहां एक प्रस्ताव लाया जाना चाहिए। कोई जमींदार सात एकड़ या दस एकड़ जमीन का मालिक है, अंग्रेजों के जमाने का कानून है, तब उनकी मोनोपोली होती थी। अगर मुझे अपने बेटे की शादी करनी है, मुझे घर बनाना है या बच्चों में सम्पत्ति बांटनी है तो अगर मैं उसमें से एक-दो एकड़ जमीन बेचना चाहूं तो मैं देश की 70 साल की आजादी के बाद आज भी वह नहीं बेच सकता। मुझे सारी की सारी दस एकड़ जमीन की रजिस्ट्री करनी पड़ेगी। मैं उसमें से एक-डेढ़ एकड़ जमीन नहीं बेच सकता, कहां गये हमारे फंडामेंटल राइट्स। इस देश में सत्तर सालों तक सरकार में बैठे रहने वाले लोगों के लिए ही ये राइट्स थे। चूंकि वह अपनी एक या डेढ़ एकड़ जमीन नहीं बेच सकता, इसलिए बेचारे को मजबूरी में अपनी पूरी 12 एकड़ जमीन बेचनी पड़ेगी या किसी और बच्चे के नाम करनी पड़ेगी और सरकार को जबरदस्ती टैक्स देना पड़ेगा।
मैं गांव का व्यक्ति हूं, मेरा परिवार बढ़ गया, मेरे चार बेटे हो गये। मेरे गांव के बाहर रोड से लगी हुई मेरी एग्रीकल्चर लैंड है, अगर मैं उस पर अपनी निजी मकान बनाऊंगा तो सैक्शन 81 के अंदर उसे ग्राम सभा में वेस्ट कर देंगे। आज तक दिल्ली में एक इंच जमीन ग्राम सभा में वेस्ट नहीं हुई है। लेकिन ग्राम सभा में वेस्ट होने के नाम पर एक्जीक्यूटिव अथारिटीज आती हैं, उनको डराती हैं और उनसे पांच से दस लाख रूपये लेती हैं, जो व्यक्ति पैसा नहीं देता, उसके मकान को वे डिमालिश कर देती हैं कि आपने लैंड यूज चेंज कर दिया। आज तक सैक्शन 81 के कानून में बदलाव नहीं हुआ। इस प्रकार के जो कानून हैं, इन कानूनों से निजात पाने के लिए जो पैसा सरकार को देश के डैवलपमैन्ट के लिए, लोगों के डैवलपमैन्ट के लिए या देश की रक्षा के लिए देना चाहिए, वह चंद लोगों के हाथों में चला जाता है। अभी बातों-बातों में एक केस आया है। इसके अलावा एक और केस है। रोटरी कोऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी नाम की एक सोसाइटी 25 साल पहले बनी। उसकी जमीन डाइवर्सिटी पार्क के नाम पर एक्वायर कर ली, वहां न तो आज तक डाइवर्सिटी पार्क बना है और न उस सोसाइटी को घर बनाने के लिए जमीन दी गई है। कम से कम इस कानून के अंदर अगर सोसाइटी या डाइवर्सिटी पार्क बनाने के नाम पर जमीन एक्वायर की जायेगी तो उसके ऊपर यह कानून लागू नहीं होगा। कुछ लोग जमीन के नाम पर फील्ड में ग्राउंड के लोगों को गुमराह करने की बात भी करेंगे कि अगर आज मेरी जमीन एक्वायर हो गई, मुझे सुनने का मौका नहीं दिया और सरकार ने जबरदस्ती तानाशाही करके मेरी जमीन ले ली। इसलिए यह कानून उन लोगों के लिए है, जिन लोगों के लिए माननीय प्रधान मंत्री जी और माननीय फाइनेंस मिनिस्टर साहब नोटबंदी का कानून लेकर आए थे। लोग अब भी चिल्ला रहे हैं। जबकि नोटबंदी को देश की जनता ने एक्सैप्ट किया है कि अच्छा निर्णय हुआ है। लोग अभी भी पूछते हैं कि 15 लाख हजार करोड़ रुपया आपके पास था, अगर उतना ही पैसा है तो ब्लैक मनी कहां चला गया। जो सेठ धन्नामल की तिजोरियों में माल रखा हुआ था, वह बैंकों में आ गया, उनका हजारों करोड़ रुपया टैक्स के रुप में देश में आ गया। उस टैक्स के माध्यम से ही गडकरी साहब इतने लम्बे-चौड़े विकास करते चले जा रहे हैं, जो वह अभी बता रहे थे। जो टैक्स आया है, जो ब्लैक मनी लोगों के घरों में था, हमें यह शौक नहीं था कि किसी का ब्लैक मनी है तो उसे एबॉलिश कर दिया जाए, उसे खत्म कर दिया जाए या उसे मार दिया जाए। सरकार की मंशा यह थी कि अगर तुम्हारे घर में अवैध पैसा रखा हुआ है तो जो तुम्हारी कैपेसिटी है, उससे ऊपर जो पैसा है, आप उसका टैक्स इंकम टैक्स के रूप में जमा करिए। यह सरकार की मंशा थी। देश के जो 85 प्रतिशत गरीब लोग हैं, उनके किसी के भी घर में दो लाख, पांच लाख या दस लाख रुपये नहीं थे, यह पैसा था तो केवल … * की तिजोरियों में था, उन्हें दर्द हो रहा था क्योंकि उनका ब्लैक मनी का पैसा उनकी तिजोरियों में था। उसी पैटर्न पर यह कानून है कि जो बड़े धन्नासेठ लोग हैं, वे छोटे किसानों की जमीन को लिंकेज होने के बाद उन जमीनों को खरीद लेते हैं, खरीदने के बाद जब गवर्नमैन्ट उसे नोटिफाई करती है तो गवर्नमैन्ट को ब्लैकमेल करते हैं, नोटिफिकेशन नहीं होने देते हैं, इसके कारण देश की तरक्की और भारत की सुरक्षा में बाधा डलती है और सरकार जो आगे कदम उठाना चाहती है, वह कदम नहीं उठा पाती है।
मैडम, मैं एक बात और कहना चाहता हूं कि यहां ऑनरेबल मिनिस्टर साहब बैठे हुए हैं, वह डिप्लोमैट के रूप में चालीस सालों तक विदेश में रहे हैं। इस दिल्ली की समस्याओं के समाधान के लिए दिल्ली की गवर्नमैंट जो स्टैप उठाती है।
18.00 hours मुझे मालूम है उनकी सहमति इनको चाहिए, वे बिल पास कर के भेजेंगे, लेकिन दिल्ली एनसीआर है, इस एनसीआर को होते हुए, नैशनल कैपिटल को होते हुए, अगर यह दिल्ली की सरकार न करे, केजरीवाल सरकार न करे तो सैक्शन 81 के अंदर, 24(2) के अंदर, दिल्ली में विकास के लिए डीडीए की जो जमीन जानी थी और माननीय उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय ने उसको क्वैश कर दिया है, लोगों की पिटीशन के रूप में कह दिया है कि जमीनों को वापस दो, उस जमीन पर कोई अच्छा एडवोकेट बिठा कर उस जमीन को वापस लाया जाए, जो दिल्ली के विकास के लिए काम आएगी।
आज दिल्ली सिकुड़ती जा रही है। आज दिल्ली में जमीन है नहीं और वह जमीन दिल्ली के विकास के लिए काम आ सके, वह भी एक नैक्सस के माध्यम से ऐसी घटना घट रही है। इसी बात को कहते हुए मैं अपनी बात को समाप्त करता हूँ।
...(व्यवधान)
HON. CHAIRPERSON: Shri Ramesh Bidhuri, you can continue your speech tomorrow.
The House stands adjourned to meet again tomorrow at 1100 am.
18.01 hours The Lok Sabha then adjourned till Eleven of the Clock on Wednesday, December 20, 2017/Agrahayana 29, 1939 (Saka).
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