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Lok Sabha Debates

Regarding Loss Of Lives Due To Earthquake In Nepal, Some Parts Of India And Steps ... on 27 April, 2015

Sixteenth Loksabha an> title: Regarding loss of lives due to earthquake in Nepal, some parts of India and steps taken to prevent damages caused by earthquakes.

 

PROF. SAUGATA ROY (DUM DUM): Madam, I am drawing the attention of the House to the terrible human tragedy that happened in our neighbouring country of Nepal on the 25th April, 2015.

          I have given notices both on Adjournment Motion and Zero Hour and I thank you for allowing me to read the same. The earthquake with the epicenter near Pokhara in Nepal caused by shifting of tectonic plates in Himalayas has caused immense damage in that country with number of deaths crossing 2400 and thousands injured. A huge amount of property has been destroyed in that country. It is good that the Government of India has sent relief and rescue teams with relief materials to Nepal through the Indian Air Force as a humanitarian gesture.  The earthquake has affected India also with at least 63 people dead – 46 in Bihar, 13 in Uttar Pradesh and two each in West Bengal and Rajasthan – and 156 people injured in Bihar, 43 in Uttar Pradesh, 52 in West Bengal and also some in Sikkim.

The Government of India has been in touch with the States for relief.  More needs to be done in the form of disaster relief. The Chief Minister of West Bengal has gone to North Bengal where the earthquake happened near Siliguri, to o supervise relief and rescue operations.  I am told that the National Disaster Management Authority is supervising the relief work in Nepal and in India, but I would like to know how much money has been released from National Disaster Relief Fund for different States.

Madam, earthquakes cannot be prevented, but with modern developments in science and technology, they can be predicted. I am surprised that there was no previous warning about the earthquake in India which took us all by surprise. Also, in cities like Delhi and Kolkata, there are large numbers of high-rises as well as illegal constructions. So, the Government should examine whether these buildings are earthquake resistant and whether proper disaster management teams are in place in the big cities which will be affected more by the earthquakes. In Nepal, it is mainly in Kathmandu and other cities where most people have lost their lives rather than in villages.

I express deep sorrow at the deaths, including of those who died at the Everest Base Camp and the expeditionists. I would like the House to consider this.

माननीय अध्यक्ष : सर्वश्री पी.के. बिजू, डॉ. ए. सम्पत, शंकर प्रसाद दत्ता, एम.बी. राजेश और श्रीमती पी.के. श्रीमथि टीचर को प्रो. सौगत राय द्वारा उठाए मुद्दे से संबद्ध करने की अनुमति प्रदान की जाती है।

   

श्री मल्लिकार्जुन खड़गे (गुलबर्गा) : अध्यक्ष महोदया, एक बहुत ही गंभीर विषय को लेकर पूरा सदन चिंतित है और मैं उस विषय को आपके सामने रखना चाहता हूं। शनिवार को नेपाल में आए विनाशकारी भूकम्प, जिसकी तीव्रता 7.9 बताई जा रही है, इस भूकम्प के कारण मरने वाले लोगों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। अभी करीब 2600 से भी ज्यादा लोगों के मारे जाने की और 7000 से भी ज्यादा लोगों के घायल होने की आशंका है। यह आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है। नेपाल के 80 साल के इतिहास में यह सर्वाधिक भयानक प्राकृतिक आपदा बताई जा रही है। हिमालय में करीब पिछले पचास सालों में आठ ऐसे भूकम्प आए हैं, जिनकी तीव्रता 8 से भी ऊपर थी। यह भूकम्प शनिवार 11.56 बजे आया जिसका केंद्र काठमांडू से 80 किलोमीटर दूर उत्तर-पश्चिम में स्थित लामजुंगमें था। भूकम्प का प्रभाव बिहार, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश के कई शहरों में पड़ा तथा राजस्थान के भी कई शहरों में इसका प्रभाव हुआ है। पूर्वी तथा उत्तर भारत में भूकम्प के झटके महसूस किए गए हैं। रविवार सुबह भी भूकम्प के झटके महसूस किए गए। बिहार, यूपी, पश्चिम बंगाल में 70 से भी अधिक लोगों के मारे जाने की खबर है और इसमें नए आंकड़े सामने नहीं आए हैं, शायद गृह मंत्री जी या प्रधानमंत्री जी सदन में बताएंगे।

          नेपाल में तबाही की तस्वीरें दिल दहला देने वाली हैं, जान-माल को भारी नुकसान हुआ है। मैं कल्पना भी नहीं कर सकता हूं कि नेपाल और भारत में इस आपदा से प्रभावित लोगों पर क्या बीत रही होगी। हमें गर्व है कि हम इस विपदा की घड़ी में नेपाल के साथ खड़े हैं और सारा देश नेपाल के साथ खड़ा है क्योंकि वह हमारा पड़ोसी देश ही नहीं है, बल्कि हमारी रक्षा के लिए भी नेपाल बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। मैं आशा करता हूं कि गृह मंत्रालय बचाव कार्य में पूरी जी-जान से कोशिश करेगा। भारतीय सेना ने नेपाल में बचाव कार्य के लिए ओपरेशन मैत्री शुरू करने का वायदा किया है, मैं समझता हूं कि शायद वे इस दिशा में काम कर रहे हैं। नेशनल डिजास्टर्स रिस्पोंस फोर्स के हमारे वीर जवान राहत बचाव कार्य में जुटे हैं। मैं आशा करता हूं कि इस विपदा की घड़ी में हम सब अपने कर्तव्य का पालन करेंगे और पार्टियों से ऊपर उठकर एकसाथ अपने पड़ोसी देश की तथा भारत में जो लोग प्रभावित हुए हैं, उनकी मदद करेंगे। किसी एक व्यक्ति द्वारा ही प्रभावित लोगों की मदद नहीं हो सकती है, इसलिए सभी लोगों को अपना-अपना योगदान देना होगा। भारत के वीर जवानों को हौंसला देना होगा और हमें यह भी सोचना होगा कि क्या इस विकास की दौड़ में हमने प्रकृति को ठेस पहुंचाई है, जिसका जवाब हमें इस विनाश द्वारा मिला है। क्या टेक्नोलोजी की दौड़ में हम गलत दिशा में भाग रहे हैं? क्या हम भी मार्डन अर्ली वार्निंग सिस्टम की दिशा में जा रहे हैं। क्या हम पहले से वार्निंग जारी नहीं कर सकते हैं, क्या हम जान-माल की हानि को मिनिमाइज़ नहीं कर सकते हैं?

In case of India, the human and economic losses from disasters are high in comparison to many other developing nations. According to an estimate by the World Bank, direct losses from natural disasters are up to 2 per cent of India’s GDP. इनमें सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं, गरीब बच्चे, डिसेबल व्यक्ति और महिलाएँ। अक्सर यह कहा जाता है कि earthquakes do not kill, but buildings do. मतलब भूकम्प से इतना खतरा नहीं है, जितना हमारे इमारतों से है। इस विषय में सरकार को उचित कदम उठाने चाहिए। The National Policy on Disaster Management prepared by the National Disaster Management Authority, Government of India and approved by the Cabinet in 2009 was formulated with the vision to build a safe and disaster-resilient India.  इसमें हमारा विज़न था कि रिलीफ और रिहैबिलिटेशन से बढ़कर भविष्य में ऐसी घटनाएँ न हों, उस पर कार्य किया जाए। आज हमारे देश को डिजास्टर मैनेजमेंट प्रोफेशनल्स की सख्त जरूरत है। राज्य के स्तर पर अभी भी डिजास्टर्स मैनेजमेंट अथारिटीज का गठन नहीं हो पाया है। बहुत से राज्य अभी तक इस कमेटी को कंस्टिच्यूट नहीं किये हैं। इसकी वजह से इम्प्लीमेंट करना बड़ा मुश्किल होता है। कम से कम अब तो सभी राज्यों को ऐसा करना चाहिए  और केन्द्र सरकार भी उनको कहे कि इसका गठन जल्द से जल्द करके ऐसी आपदा या इंसीडेंट को रोकने के लिए काम करें।

          आखिर में, मैं बस इतना कहना चाहूँगा कि भारत नेपाल के साथ खड़ा है। हम सब को एक साथ मिलकर इस आपदा का सामना करना होगा। आपको यह भी मालूम है कि वर्ष 1993 में महाराष्ट्र के लातूर में एक बहुत बड़ा हादसा हुआ था।  उसमें कम से कम 30,000 लोग मारे गए थे, उसी प्रकार वर्ष 2001 में गुजरात में 30,000 लोग अर्थक्वेक में मारे गए थे और उत्तराखण्ड भी उसी का शिकार हुआ। ऐसे बड़े-बड़े हादसे हमारे यहां हुए हैं, उनका सामना हमने ताकत के साथ करने कोशिश की और भारत की जनता ने भी पूरी ताकत से इसको सुलझाने की कोशिश की है। इसलिए मैं आशा करता हूं कि गृह मंत्रालय इस बचाव कार्य में जुटा रहे, किसी भी प्रकार की बाधा का सामना न करना पड़े और इसमें पैसे की कमी भी महसूस न होने दी जाए। फाइनेंस डिपार्टमेंट भी इसके लिए आगे आए। मुझे सुनने को मिला कि मदद की बहुत सी सामग्री नेपाल को भेजी गयी है। उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान आदि राज्यों में क्या स्थिति है, उसके बारे में ज्यादा मालूमात नहीं है क्योंकि पेपर में और टीवी चैनल्स पर ज्यादा से ज्यादा न्यूज नेपाल के बारे में आ रही है। यह बहुत बड़ा हादसा हुआ है, इसलिए हम सभी लोग इस विषय पर और इस विषय को सुलझाने के लिए एक हैं, साथ में हैं। मैं आशा करता हूं कि सरकार इस पर रिस्पांड करे कि क्या कदम उठाए गए हैं, किस तरह से काम कर रहे हैं और राज्यों में कमेटीज अभी तक क्यों फॉर्म नहीं हुई हैं? इनके बारे में बताएं। मैं पूरी तरह से सदन के साथ हूं। हम सभी लोग इसमें शामिल हैं, जो लोग मर चुके हैं, उनको हम श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।

माननीय अध्यक्ष:  कुमारी सुष्मिता देव,  एडवोकेट जोएस जॉर्ज, श्री निशिकान्त दुबे, श्री भैरों प्रसाद मिश्र, श्री रवीन्द्र कुमार जेना, श्री मोहम्मद बदरुद्दोज़ा खान, श्री अजय मिश्रा टेनी, श्री प्रहलाद सिंह पटेल, डॉ. किरिट पी. सोलंकी, श्री जगदम्बिका पाल, श्री वीरेन्द्र कश्यप, श्री शरद त्रिपाठी, श्री गणेश सिंह, कुमारी शोभा कारान्दलाजे, श्री भानु प्रताप सिंह वर्मा, श्री गजेन्द्र सिंह शेखावत, श्री रामचरण बोहरा, कुँवर पुष्पेन्द्र सिंह चन्देल, श्री राहुल कस्वां, श्री अरविंद सावंत, श्रीमती रीती पाठक, श्री राजेन्द्र अग्रवाल, श्री जनार्दन सिंह सीग्रीवाल, श्रीमती संतोष अहलावत एवं डॉ. वीरेन्द्र कुमार  को श्री मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा उठाए गए विषय के साथ संबद्ध करने की अनुमति प्रदान की जाती है।

   

श्री मुलायम सिंह यादव (आज़मगढ़) : अध्यक्ष जी, मुझे एक मिनट बोलने का समय दीजिए। एक मिनट से ज्यादा हो तो मुझे रोक दें।

          अध्यक्ष जी, हम सभी लोग दुखी हैं। जब ऐसी आपदा आई तो हम लोगों ने भी सहयोग किया। आज हम लोग भी तय करें, जो आप बताएं या सरकार बताए, हम जितने लोक सभा सदस्य हैं, वे अपनी तनख्वाह का एक हिस्सा दें, जिससे पूरे हिन्दुस्तान की जनता इस मामले में एक साथ खड़ी हो जाए। मेरा प्रस्ताव है, नेपाल की जनता के लिए मैं अपनी एक महीने की तनख्वाह भेज ही दूंगा।

 

श्री जय प्रकाश नारायण यादव (बाँका) : अध्यक्ष महोदया, देश  के विभिन्न भागों में खासकर, बिहार, उत्तर प्रदेश में एवं पड़ोसी देश नेपाल में भयानक त्रासदी आई है। विनाशकारी भूकम्प ने दुखदायी कहर ढाने का काम किया। माननीय गृह मंत्री जी ने बिहार के माननीय मुख्यमंत्री के साथ मौका का दौरा किया और स्थिति का स्वयं मूल्यांकन भी किया। सबसे पहले मैं बिहार, उत्तर प्रदेश एवं अन्य प्रदेशों और नेपाल के हमारे जो भाई भूकम्प में मारे गए हैं, उनके प्रति संवेदन व्यक्त करता हूं। वर्ष 1934 के बाद यह सबसे बड़ा भूकम्प आया और आंसुओं का सैलाब छोड़ गया।  बिहार का कोई भी इलाका नहीं छूटा, चाहे सीमांचल हो, पूर्वांचल हो, मिथिलांचल हो या कोसी का इलाका हो, चारों तरफ कई मौतें हुईं, जानें गईं, लोग घायल हुए। 25 और 26 तारीख को लोग रात-रात भर घरों से बाहर पड़े रहे। गांधी मैदान में हजारों लोग अपने बाल-बच्चे लेकर पड़े रहे, चारों तरफ दुखदायी स्थिति बनी रही।

          अध्यक्ष महोदया, इसके साथ-साथ, बंगाल, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, ओडिशा, एवं दिल्ली में भारी तबाही, बर्बादी एवं जान-माल की हानि हुई और सबके आशियाने उजड़ गए। प्रकृति का भयानक खेल हुआ। इस संकट की घड़ी में पूरा राष्ट्र एक है। हम सभी लोग दल और पार्टी से ऊपर उठकर ऐसे विनाशकारी भूकम्प से जो तबाही देश में हुई है, खासकर बिहार और नेपाल में हुई है, उसका सामना करने के लिए साथ हैं और पड़ोसी राज्य को मदद भी कर रहे हैं। हमारे कितने ही पर्वतारोही और विदेशी पर्यटक वहां फंसे हुए हैं। आज की तारीख में मानवता यही कहती है कि ऐसे मौके पर हमें एक होकर पूरी मदद करनी चाहिए। इसके साथ ही मैं यह भी कहना चाहता हूं कि हमें किसी भी प्रकार की कोई अफवाह पर ध्यान नहीं देना चाहिए, क्योंकि कल मोबाइल से लोगों को ऐसा संदेश मिला कि रात को 12 बजे या एक बजे फिर से भूकम्प आएगा। इसलिए ऐसी अफवाहों पर ध्यान नहीं देना चाहिए। भूकम्प से पीड़ित लोगों को राहत देने के लिए बिहार के मुख्य मंत्री ने राशि दी है और उत्तर प्रदेश के मुख्य मंत्री ने भी सात-सात लाख रुपए की राशि देने की घोषणा की है। हम गृह मंत्री जी से आग्रह करेंगे कि इसे राष्ट्रीय आपदा घोषित किया जाए। बिहार में इस त्रासदी से भयंकर संकट पैदा हुआ है, लोग परेशान हुए हैं इसलिए उसे विशेष पैकेज दिया जाए। कई हजार लोग बिहार के आज भी नेपाल में फंसे हुए हैं। हम मांग करेंगे कि पीड़ितों को 25-25 लाख रुपए की मदद दी जाए और जिनके घर तबाह हो गए हैं, उन्हें पुनर्निर्माण के लिए बिना ब्याज के ऋण की सुविधा मुहैया कराई जाए। ऐसे समय में सब मिलकर तत्परता से राहत कार्य चलाएं। इसके साथ ही वैज्ञानिकों को भी सलाह दें कि पहले से ही भूकम्प आने की जानकारी मिल सके, इसके लिए वे प्रयास करें। ऐसे वक्त में जहां हम पीड़ितों के प्रति अपनी संवेदना प्रकट करते हैं, वहीं इस विनाशकारी आपदा से नेपाल, बिहार और देश के अन्य भागों में जो बर्बादी हुई है, उससे लोगों को बचाने के लिए एक होकर राहत कार्य चलाएं।

श्री जगदम्बिका पाल (डुमरियागंज): अध्यक्ष महोदया, मुझे भी अपनी बात कहने का अवसर दिया जाए, क्योंकि मेरा संसदीय क्षेत्र नेपाल की सीमा से लगता है।

 

डॉ. भोला सिंह (बेगूसराय) :अध्यक्षा जी, मैं आसन के माध्यम से निवेदन करना चाहता हूं कि 25 तारीख को जो तबाही, बर्बादी और विनाश का मंजर नेपाल में तथा भारत के बिहार, उत्तर प्रदेश, बंगाल, राजस्थान, मध्य प्रदेश में भूकम्प से उपस्थित हुआ, वह काफी वेदना से, दहशत से और आतंक से भरा हुआ है। उस समय सर्वत्र अंधेरा छाया हुआ था, उस अंधेरे में प्रकृति की चुनौती ने इस क्षेत्र को दहशत और आतंक में डुबो दिया और मानव सम्पदा को भीषण नुकसान पहुंचाया। ऐसे समय में विश्वास का, आस्था का और सहायता का दीप जिसने जलाया, जिस व्यक्तित्व ने इस दहशत में खड़े होकर इस पीड़ा का शमन करने के लिए कदम उठाया, वह हमारे देश में ही नहीं, सम्पूर्ण विश्व में निश्चित रूप से प्रशंसा से भरा हुआ है। वह व्यक्ति कोई दूसरा नहीं, भारत के प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी हैं। मैं इस बात को इसलिए कहना चाहता हूं कि भारत की संस्कृति सीमा नहीं जानती, जाति नहीं जानती, रंगभेद नहीं जानती, मानव-मानव में कोई रागद्वेष नहीं करती। आज हमारे प्रधान मंत्री जी ने जिस ढंग से नेपाल में, यमन में, बिहार में और देश के दूसरे राज्यों में प्रभावित लोगों के आंसू पोंछने का कदम उठाया है, निश्चित रूप से यह एक नई संस्कृति पैदा हुई है, एक नया दर्शन पैदा हुआ है, एक नई राजनीति की रूपरेखा निर्धारित हुई है, मैं इस बात को कह सकता हूं। न जाने कितनी बार हमारी आलोचनाएं हुई हैं। न जाने कितनी बार हम पर अंगुलियां उठी हैं। हमने खुदा को नहीं देखा, लेकिन प्रकृति की तासीर में हमने खुदा को जरूर देखा है। अगर खुदा प्रकृति की लीला है, अगर खुदा प्रकृति की प्रतिभा है और प्रकृति अगर स्वयं तबाही करना चाहती है तो उस लीला में, उस तबाही में एक व्यक्ति उसका मुकाबला करने के लिए पूरे प्रशासनिक यंत्र और सम्पूर्ण जनमानस को उठा करके वह इस पीड़ा की घड़ी में उपस्थित है।

          अध्यक्षा जी, वर्तमान बड़ा दहशत भरा है। हम आतंक में हैं। आज स्वयं प्राकृतिक संरचना ध्वस्त होने की स्थिति में है। वर्तमान जब दहशत से भरा है तो भविष्य भी कोई सुनहरा नहीं दिखता है। भविष्य भी हमें दुखदायी लगता है। इसलिए हम प्रधानमंत्री जी से और सम्पूर्ण सदन से आग्रह करना चाहते हैं कि दहशतभरे वर्तमान को मिलजुलकर समाप्त करें, लोगों में विश्वास लाएं कि सम्पूर्ण मानव जाति एक है, सम्पूर्ण मानव जाति एक सामाजिक संस्कृति का अंग है और हम उसमें विश्वास करते हुए वर्तमान की पीड़ा को सहलाएं।  भविष्य में यह दहशत न हो, भविष्य में यह आतंक न हो, भविष्य में यह वेदना न हो, इसके लिए जो भी तकनीक हैं, जो भी वैज्ञानिक उपादान हैं, जो भी विज्ञान है, उसे लाकर के हम भविष्य को सुरक्षित करें, भविष्य की सम्पदा को सुरक्षित करें और सम्पूर्ण मानव जाति की सुरक्षा के लिए प्रधानमंत्री जी ने जो कदम उठाया है, देश की सीमाओं को तोड़ा है, जाति को तोड़ा है, देश की सीमाओं को छोड़ा-तोड़ा है, हम ऐसी संस्कृति का समादर करें। उसके माध्यम से प्रधानमंत्री के कीर्तिमान को और उनके द्वारा उठाए गए कदम को और सम्पूर्ण सदन को एक स्वर से और एक साथ होकर उन्हें धन्यवाद देना चाहते हैं। इन्हीं शब्दों के साथ मैं अपनी बात को समाप्त करता हूं।

 

DR. P. VENUGOPAL (TIRUVALLUR): Hon. Speaker, Madam, on behalf of my Party the AIDMK and on my own behalf, I also join the House in expressing my deep condolence on the sad death and destruction caused by the massive earthquake that has shaken Nepal on Saturday. The tragedy is compounded by after shock and the heavy rain that is pouring in Nepal, which is hampering the rescue effort that is being undertaken there. This tragedy has already taken 3,200 lives in Nepal, 25 lakhs in the Everest Base Camp and more than 20 lives in Bihar and other States in India. We mourn the loss of live. It is a great havoc befell on peace loving country of Nepal. In this hour of crisis, all of us join hands in extending support to the stranded people of Nepal. I would request that the Government of India may extend full support to the nation.  The Indian Government should undertake relief and rescue efforts and should also send food and medicines to the people of Nepal.

          On its part, the Government of Tamil Nadu is also with the grief-striken people of Nepal and in India. It is ready to extend all possible help and assistance. In this regard, it has already set up a control room in New Delhi for this purpose. I once again convey my deepest condolence to the people of Nepal and mourn the loss of life due to this great disaster.

   

SHRI BHARTRUHARI MAHTAB (CUTTACK): Madam, we all know that an earthquake cannot be predicted nor can it be prevented. The tremor that occurred between Kathmandu and Pokhora is still being felt not only in Nepal but also in the Northern borders of our country. The tectonic plates that shift periodically have caused large scale destruction under the Himalayan Plateau. I would say that it is not only Nepal’s tragedy but it is India’s grief also. When the earthquake struck at noon last Saturday, severe as it was, the initial intensity was 7.5 and later it was revised to 7.9, which is very huge. More worrisomely, the earthquake had occurred at a shallow depth of 9.5 miles, tremors are still being felt in Nepal and in some northern border areas of our country. States in the North to East and Northeast also are witnessing it. People are in distress. They need support. Both food and medicines are required. Human support is essential.

I would congratulate the Government of India on its swift and wholehearted involvement in Nepal, and that is a very welcome step. Operation Maitri is in action. India is doing a creditable job no doubt and has to operate the with cooperation of Nepalese Army. Already 72 hours have passed.

The whole world is aware about the destruction that has occurred in Kathmandu and Pokhara. These places are approachable. Media is present there. However, large tracts are affected in rural Nepal especially in those areas which are bordering Tibet. My suggestion is that India should focus on the overall disaster management. Our expertise will help Nepal to reconstruct itself. First is rescue, then relief, and then the reconstruction will follow.

Odisha Chief Minister, President of Biju Janata Dal, on that day itself had expressed grief and offered to the Union Government that Odisha Disaster Rapid Action Force (ODRAF) is ready provided you allow it to go to Nepal and to those affected areas. ODRAF is a trained force. When the cyclone hit Andhra and also parts of Odisha, ODRAF did a commendable job and this was appreciated by the Chief Minister of Andhra Pradesh.

Nepal’s tragedy, as I said, is our grief. We are aware about the destruction of Nepal but very little is known about the situation in Tibet. Nothing is there in public domain. India should bring to light the damage that has occurred in Lhasa and other parts of that Himalayan plateau.

I would also express my thanks to the Government, especially the External Affairs Ministry, for bringing back home the under-14 girls football team which was in Kathmandu at the time of earthquake. Five of those girls are from Odisha. They stated themselves that they were saved because they were in the field and not inside the hotel where they were put up. They were in training. Their coach Shraddhanjali Samantray, who had been felicitated by the Union Government, hails from Odisha. Janaki Murmu, Iva Panna, Banya Kabiraj, Shanti Murmu were all from Odisha. All the girls who were there participating in that tournament were below the age of 14 years. A special provision was made by the Indian Government to bring them back. We got the information via Mumbai because telephonically the contact was not being made. I express my grief and I would say that here is a time when India has stood up to be with Nepal.  We should also stand up to be with those people who have been affected in Lhasa in Tibet.  Adequate steps should also be taken to provide shelter, medicine and food to the affected people including those who have been affected in Bihar, Rajasthan, in Siliguri area of West Bengal and Uttar Pradesh. I express my sorrow and grief to those who have been bereaved.

 

श्री विनायक भाऊराव राऊत (रत्नागिरी-सिंधुदुर्ग) : अध्यक्ष महोदया, नेपाल और भारत के कई अन्य प्रदेशों मे जिस तरह से भूकंप का संकट आया और उसमें हजारों लोगों की मृत्यु हुई हैं, ऐसे मृतकों के प्रति श्रंद्धांजलि अर्पित करने के लिए शिव सेना पार्टी की तरफ से मैं खड़ा हूँ और साथ-साथ जो गंभीर जख्मी हैं, उन्हें स्वास्थ्य प्रदान करने की प्रार्थना मैं भगवान से करता हूँ। महोदया, नेपाल में जैसी प्राकृतिक आपदा आई है, वही ही आपदा इसके पहले महाराष्ट्र के लातूर में आई थी, गुजरात के भुज में आई थी ऐसी भयंकर आपदा के परिणाम से कई हजार लोगों की जान इस प्राकृतिक आपदा में जाती है। महोदया, यह स्पष्ट हो चुका है कि निसर्ग ने अपना रूप बदल दिया है। कई संशोधनों के बावजूद आज ही वर्तमान पत्र में प्रसिद्ध हुआ है कि मानव जाति ने कई ऐसे संशोधन किए हैं, कई ऐसे प्रयोग किए हैं कि जिनका दुष्परिणाम निसर्ग के ऊपर हो चुका है। उसी वजह से प्राकृतिक तबाही दिन ब दिन आती रहती हैं। लातूर जैसे इलाके में भूकंप आने से कम से 35 हजार से भी ज्यादा लोग एक रात में जमीन में गढ़ चुके हैं, भुज में भी ऐसा ही हुआ था। ऐसी स्थिति में आज नेपाल के लिए आदरणीय पंथ प्रधान नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में नेपाल को आधार देने के लिए, उनको मदद करने के लिए जिस तरीके से उन्होंने एक प्रयत्न किया, कोशिश की और नेपाल को एक बड़ा आधार दिया है, उसके लिए मैं पंथ प्रधान नरेंद्र मोदी जी का आभार व्यक्त करता हूँ। इसके साथ-साथ भारत के कई पर्यटक वहां फंसे हुए हैं, उनको भी निकालने का काम तो हो रहा है, लेकिन आज भी ऐसे मालूम हो रहा है कि महाराष्ट्र के पुणे, यवतमाल, नासिक और अन्य जिलों के कई पर्यटक आज भी नेपाल में फंसे हुए हैं, उनको हिंदुस्तान में लाने की कोशिश सरकार को गंभीरता से करनी चाहिए और करेंगे। नेपाल और हिंदुस्तान का रिश्ता गहरा है। नेपाल हमारा पड़ोसी देश है और हमारी संस्कृति भी एक है, इसी वजह से हिंदुस्तान का परम कर्त्तव्य है कि नेपाल को आज ही नहीं लेकिन भविष्य के लिए भी, जब तक नेपाल अपने पैरों पर खड़ा नहीं हो सकता है, तब तक भारत का कर्त्तव्य हो सकता है कि भारत को मजबूती के साथ नेपाल के साथ रहना चाहिए। इसीलिए हमारी पार्टी के अध्यक्ष माननीय उद्धव ठाकरे जी ने तुरंत ही कहा कि भारत के पंथ प्रधान नरेंद्र भाई मोदी जी ने जिस तरीके से तत्परता दिखाई और नेपाल को एक संरक्षण और अधार देने का काम किया, वह बहुत ही अच्छी बात है। इसलिए पंथ प्रधान जी की सहायता के लिए शिवशेना के सांसदों ने अपने एक माह का वेतन तुरंत पंथ प्रधान रिलीफ फंड में जमा कर पंथ प्रदान जो काम कर रहे हैं, उसमें सहयोग करें।

          अध्यक्षमहोदया,इसी के साथ-साथ मैं यह भी बताना चाहता हूँ कि शिवसेना ने अपना कर्त्तव्य इसके पहले भी निभाया था, जब भुज में भूंकंप आया था, तब भी वहां के एक गांव को दत्तक ले कर उसका पूरा निर्माण करने का काम शिवेसेना ने किया था। लातूर में भी एक गांव का निर्माण करने काम शिवसेना ने किया है। ऐसे ही नेपाल में भी मुंबई से और महाराष्ट्र की सरकार ने भी अपनी रेसक्यु टीम तैयार रखी है। मैं इस ओर सदन का और शासन का ध्यान आकर्षित करना चाहता हूँ।  जैसे कि निसर्ग ने अपना रूप बदल किया है, मुझे डर यह है कि जैसे हमारे रत्नागिरी में जैतापुर में अणुऊर्जा प्रकल्प लाने की कोशिश हो रही है। जैतापुर और रत्नागिरी, ये भी भूकम्प का ग्रेड फोर का एक शहर माना जाता है। इसके पहले भी वहाँ कई भूकम्प आ चुके हैं। रिएक्टर स्केल पर 5.5 तीव्रता तक के भूकम्प वहाँ आए हैं। भविष्य में मुझे यह डर है कि अणुऊर्जा जैसा प्रकल्प अगर जैतापुर में आता है और वहाँ दुर्घटना हुई तो क्या हो सकता है, मैं उसके बारे में सोच भी नहीं सकता हूँ। मेरी प्रार्थना है कि भविष्य में इस भूमि का रक्षण करने के लिए, भूमि के ऊपर रहने वाले सारे लोगों का रक्षण करने के लिए शासन को उसकी रक्षा की भी गंभीरता से चिंता करनी चाहिए। मैं यह प्रार्थना करता हूँ। धन्यवाद।

HON. SPEAKER: Dr. Ravindra Babu. Please be brief; We must conclude within two minutes. हर एक केवल संवेदना प्रकट कीजिए।

   

DR. RAVINDRA BABU (AMALAPURAM): Thank you, Madam, for giving this opportunity.

          On behalf of the Telugu Desam Party, we express solidarity and grief over the sudden deaths. There is a strong message in this earthquake. We read in geography books that there are certain specific areas which are earthquake prone and tectonic plate movements cause earthquakes. These are the two things which uusually produce earthquakes but the recent phenomenon is a grim reminder of human limitations over nature’s might. It is happening everywhere; maybe, because of, reckless development of human activity, maybe reckless development of urban growth, maybe reckless growth of multi-storeyed buildings, or drilling operations or mining operations or building of reservoirs.  There are many activities which may be going against nature. So, we have to learn a lot of strong lessons from this earthquake.

          We have to be very careful while tinkering with Mother Earth. We have to deal with Mother Earth very gently, very scientifically, without going emotional about growth and the mad rush to imitate the Western countries. India cannot afford to have this type of artificially induced earthquakes and artificially induced global warming. We should strongly protest that sort of development. We must always live in harmony with Mother Earth so that Mother Earth will be kind enough and will not produce any further earthquakes. Our area where earthquakes are happening is never known to be earthquake prone or seismicity prone. Still it is happening in this unusual area. Therefore, this is my strong appeal to all hon. Members and my strong appeal to the Government.

          Of course, the Government is making disaster management very fast, very quick and very effective. We have been managing disasters very effectively. The way our Leader Shri Chandrababu Naidu managed recently the Hudhud Cyclone has been taken note of by the whole world. It was really wonderful. I think, the Nepal Government also must be doing it the same way with the help of our Government. I wish them all the best. At the same time, the Telugu Desam Party expresses solidarity and grief over the sudden deaths.

          Let us remind ourselves that we are very small before the mighty Mother Earth. Let us not tinker with this. Let us not tamper with that.

          Thank you.

 

*m4 श्री मोहम्मद सलीम (रायगंज) : मैडम, इस तरह की जो आपदा होती है, खासकर जिस तरह से भूचाल आए। आपने जब यहाँ से शोक व्यक्त किया, तो हम सब उससे सम्बद्ध हुए। भूचाल से दरो-दीवार में दरार पड़ती हैं, लेकिन दिलों को जोड़ने का एक मौका होता है। नेपाल परंपरागत रूप से सिर्फ हमारा पड़ोसी नहीं है, वह हमारा मैत्री देश है। इसके साथ-साथ हमारे भारत के भी, जैसे सबने कहा कि बिहार, उत्तर प्रदेश, हमारे उत्तर बंगाल, राजस्थान, मध्य प्रदेश सहित इसका असर कई और जगहों पर भी देखने को मिला। जो नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई मुआवजे से नहीं होती है। मैं समझता हूँ कि इस तरह के जो 8.1 या 7.9 मैग्नीटय़ूट का जो कहा जा रहा है कि भूचाल आए हैं, आप देखेंगे कि पिछले 48 घंटों में हर घंटे मौतों की संख्या बढ़ रही है। होम मिनिस्टर जी का ट्वीट भी एक घंटे के अंदर हुआ कि हमारे देश में ज्यादा नुकसान नहीं हुआ। उस समय मैंने भी ट्वीट किया कि थोड़ा वक्त देना चाहिए, यह प्री-मैच्योर हो जाएगा, क्योंकि खबर देर से आती है। अगर देखा जाए तो अभी भी जो अंदरूनी इलाका है, जो पिछड़ा हुआ इलाका है, हमारे दक्षिण एशिया में जैसी स्थिति है, संग-संग खबर नहीं आती है। हालाँकि शहरों में ज्यादा होता है। 

          अभी सौगत राय जी बोल रहे थे कि गाँवों में कम और शहरों में नुकसान ज्यादा होता है। इसलिए कि परंपरागत रूप से हमारी जो निर्माण शैली है, वह लोगों को बचा देती है, लेकिन आधुनिक नगरों का हम जो निर्माण कर रहे हैं, वे अर्थक्वेक प्रूफ भी नहीं होते हैं। हम अर्थक्वेक को प्रिवैन्ट भी नहीं कर सकते हैं, लेकिन मौत को हम प्रिवैंट कर सकते हैं। हमें इससे सीख लेनी चाहिए। खासकर पूरे हिमालय की गोद में जिस तरह के निर्माण हो रहे हैं, सरकार की तरफ से, राज्य सरकार हो या केन्द्र सरकार हो, हमें यह एहतियात करना चाहिए कि परंपरागत रूप से हमारी जो निर्माण शैली होती थी, उसमें जो इलाकाई सामग्री होती थी, उसके बजाय हम जो आरसीसी वगैरह लगा रहे हैं, उससे नुकसान ज्यादा हो रहा है। मैं समझता हूँ  कि भारत सरकार ने इस पर क्विक रिस्पान्स किया और पूरे अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी किया जा रहा है।  हमारे लिए मौका है कि हमारे एम.ई.ए. से इसको जोड़ा जाए। दक्षिण एशिया में इतनी बड़ी आपदा के राहत में भारत नेतृत्व दे और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सभी लोगों के साथ हम जो जुड़ रहे हैं, उसमें किस तरह से आधुनिक प्रौद्योगिकी और इनफॉर्मेशन टैक्नोलाजी का इस्तेमाल करके हम इसका रीहैबिलिटेशन कर सकें, यह देखना चाहिए। खासकर रेस्क्यू आपरेशन तो चल रहा है लेकिन रिलीफ और रीहैबिलटेशन में हम सहयोग दे सकें तो अच्छा होगा। सदन से भी अगर आप यह निर्देश दें तो हम एक महीने की तनख्वाह इस रिलीफ फंड में भेज सकते हैं। एक बड़ी आपदा नेपाल में होने की वजह से बिहार में, उत्तर प्रदेश में या उत्तरी बंगाल में जो हुआ, मौत के लिए मुआवज़ा दिया जा रहा है, लेकिन हमारे जो ब्रिज हैं और दूसरे निर्माण हैं, उसमें क्या नुकसान हुआ है और उनकी भरपाई करने के लिए भारत सरकार को भी आगे बढ़ना पड़ेगा, इतना कहते हुए मैं आप सबका धन्यवाद करता हूँ।

 

श्री चिराग पासवान (जमुई) : मैडम स्पीकर, मैं इस दुखद विषय पर अपनी चिन्ताओं को अपने दल की तरफ से रखना चाहता हूँ। जिस वक्त यह भूकंप आया था, उस वक्त मैं खुद अपने पैतृक गाँव शहरबन्नी, जो कि बिहार के खगड़िया ज़िले में आता है, मैं उस वक्त वहाँ पर मौजूद था। मैंने बहुत ही करीबी रूप से इसका जो प्रभाव है, इसके जो विनाशकारी इफैक्ट्स हैं, बहुत ही करीबी रूप से मैंने इसका अनुभव किया है। उसके बाद मैं खुद गया भी था। मैं पूर्णिया में जाकर जितने भी घायल हैं, उनसे मिला और जितने भी प्रभावित जिले हैं, वहाँ का मैंने दौरा किया। हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष राम विलास पासवान जी ने भी कटिहार, अररिया, सुपौल, दरभंगा, समस्तीपुर आदि विभिन्न इलाकों का दौरा किया।

          अध्यक्ष महोदया, मैं आपके माध्यम से सिर्फ इतना कहना चाहता हूँ कि हमें पुनर्वास के कार्यों में थोड़ी और गति लाने की ज़रूरत है। जितने वहाँ पर पुनर्वास के कार्य हैं और जितना वहाँ इनफ्रास्ट्रक्चर डैमेज हुआ है, और जब हम पुनर्वास की बात करते हैं तो उसमें स्वास्थ्य सेवाएँ बहुत महत्वपूर्ण हैं। मैं जिन जिन अस्पतालों में गया, मैंने देखा कि वहाँ स्वास्थ्य सेवाओं का अभाव है। जितनी तत्परता से स्वास्थ्य सेवाओं में तत्परता दिखानी चाहिए, कहीं न कहीं उसका अभाव है। इसलिए आपके माध्यम से मैं सरकार से आग्रह करूँगा और धन्यवाद भी करना चाहूँगा कि प्रधान मंत्री जी ने तत्परता दिखाते हुए हमारे पड़ोसी राज्य नेपाल में राहत पहुँचाई। मैं विशेष तौर पर हमारे गृह मंत्री जी का धन्यवाद करना चाहूँगा कि वे हमारे राज्य बिहार में आए और उन्होंने खुद वहाँ प्रभावित क्षेत्रों का जायज़ा लिया। पर मैं दोबारा दोहराऊँगा कि हमारे प्रदेश में सीमांचल का जो इलाका है जहाँ विभिन्न जिले आते हैं, लगातार एक के बाद एक प्राकृतिक विपदा का ये प्रतीक रहे हैं। कुछ समय पहले वहाँ पर बाढ़ आई थी। उसके बाद जिस तरह से ओलावृष्टि हुई, उसके बाद जिस तरीके से हम लोग अभी तूफान से उबर ही रहे थे, उसके बाद जिस तरह से वहाँ पर भूकंप आया है, इस प्रकार नैचुरल कैलैमिटी से हमारे प्रदेश का यह हिस्सा बहुत ज्यादा प्रभावित रहा है।  मैं चाहूँगा कि अगर संभव हो तो हमारे प्रदेश को इसके लिए कोई विशेष पैकेज दिया जाए क्योंकि हमारे प्रदेश में एक के बाद एक ऐसी घटनाएँ घट रही हैं। इसको राष्ट्रीय आपदा भी घोषित किया जाए। इसी के साथ मैं चिराग पासवान मृतकों के परिवारों के प्रति अपनी तरफ से, अपने दल लोक जनशक्ति पार्टी की तरफ से संवेदना प्रकट करता हूँ और घायलों की शीघ्र रिकवरी की आशा करता हूँ।

 

श्री प्रेम सिंह चन्दूमाजरा (आनंदपुर साहिब) : माननीय मैडम स्पीकर, नेपाल, बिहार, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में जो भूकंप की स्थिति के कारण जान-माल का नुकसान हुआ है, मैं अपनी पार्टी शिरोमणि अकाली दल की ओर से उन दुखी परिवारों में शामिल होता हूँ और अपनी संवेदना जाहिर करता हूँ। मैं समझता हूँ कि हमारी संस्कृति में हमें हमारे ऋषियों, मुनियों, गुरुओं और पैगम्बरों ने शिक्षा दी है कि दुख के समय में, विपदा के समय में न कोई जात देखनी है, न रंग देखना है, न सरहदें देखनी हैं, सबको मानवता के तौर पर इकट्ठा होना चाहिए।

          मैं समझता हूं कि हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने हमारे देश की उस संस्कृति को पहचानते हुए इस दुखद घड़ी में दुनिया में सबसे पहले किसी देश के प्रधानमंत्री ने सहानुभूति अमली रूप में जतलाई, नेपाल के लिए तो वे माननीय नरेन्द्र मोदी जी हैं। मैं समझता हूं कि हमारी बहुत सारी ऐसी एन.जी.ओ. हैं, जो ऐसे दुखद समय में आकर काम करती हैं।

          अभी-अभी शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबन्धक कमेटी, जो हमारी सिखों की सबसे बड़ी संस्था अमृतसर में है, उसने 25000 लोगों के लिए रोजाना राशन देने के लिए ट्रक भिजवाये हैं। अभी सरदार प्रकाश सिंह बादल जी के डायरैक्शन पर हमारे प्रेसीडेंट शिरोमणि अकाली दल के मा. डिप्टी सी.एम. सरदार सुखबीर सिंह बादल यहां नजदीक में रकाबगंज साहेब से दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबन्धक कमेटी की ओर से 25000 लोगों का राशन रोजाना यहां दिल्ली से जाया करेगा और दो ट्रक दवाइयों के जाएंगे। ऐसे में मैं माननीय गृह मंत्री जी को एक निवेदन करना चाहता हूं, पहले जम्मू-कश्मीर में जब ऐसी विपदा आई तो वहां भी शिरोमणि कमेटी ने वहां भी मदद की और अब तक भी वहां दवाइयां भेजी जी रही हैं। वहां भी राशन भेजा गया। ऐसे ही उत्तरांचल में हुआ। जैसा माननीय श्री मुलायम सिंह जी ने कहा, ठीक है, मैं भी अपनी पार्टी की ओर से सहमत हूं कि एक-एक महीने की तनख्वाह सांसदों की ओर से दी जाये तो अच्छी बात है, किन्तु अकेली सरकार ऐसे समय में काम नहीं कर सकती, प्रशासन अकेला काम नहीं कर सकता, जितनी देर तक समाज इकट्ठा नहीं होता, सब लोग मानवता के तौर पर इकट्ठे नहीं होते तो इस समय जो एन.जी.ओज़. हैं, माननीय गृह मंत्री जी, कभी-कभी ऐसी संस्थाओं को इकट्ठा करके उनको प्रोत्साहन देने के लिए, उत्साहित करने के लिए जरूर कभी-कभी सम्मानित करें, ताकि हमारी ऐसी विपदा के समय जो हमारी संस्कृति है, उसमें हम देश के लोग इकट्ठे होकर उनके दुख को भुला सकें। धन्यवाद।

 

डॉ. अरुण कुमार (जहानाबाद) : माननीय अध्यक्ष महोदया, इस विपदा के मौके पर आपने मुझे अपनी पार्टी राष्ट्रीय समता पार्टी की ओर से दुख प्रकट करने का अवसर प्रदान किया है। निश्चित तौर से हमारी परम्परा रही है, हमारे पुरखों की परम्परा रही है, हमने वसुधैव कुटुम्बकम के विचार में आस्था व्यक्त की है और उसी के तहत आज देश और माननीय प्रधानमंत्री जी ने नेपाल की इस दुख की घड़ी में बिल्कुल एक क्षण बिताये बिना जिस तत्परता से अपना सहयोग प्रकट किया है, निश्चित तौर से वह हमारी परम्परा के अनुकूल है और हम उस परम्परा को आगे बढ़ा रहे हैं।

          आज हम अपनी पार्टी की ओर से सभी सांसदों की तरफ से मैं अपनी एक महीने की तनख्वाह देने की घोषणा करता हूं। बिहार में और उत्तर पूर्वी राज्यों में जो संकट है, इसे भी प्राथमिकता पर हमें लेना पड़ेंगा, चूंकि खास कर बिहार में तूफान के बाद, अभी ओलावृष्टि के बाद यह घटना हुई है और उत्तर बिहार में काफी क्षति हुई है, ऐसे तो पूरे उत्तर भारत में और पूर्व की दिशा में यह प्रकोप रहा है। एक बात कई माननीय सांसदों ने कही कि निश्चित तौर से हम प्रकृति का जो एक विकास की अंधी दौड़ में शामिल होकर के अंधाधुंध दोहन कर रहे हैं, यह भी हमारे इस दुख का कारण बन रहा है। इस पर सरकार को भी और सभी जनप्रतिनिधियों को भी चिन्ता व्यक्त करनी चाहिए।

          इसी के साथ मैं पुनः तमाम पीड़ित परिवारों के प्रति अपनी पार्टी की ओर से दुख प्रकट करता हूं और जल्दी जो घायल लोग हैं, वे स्वस्थ हों, इसकी कामना करता हूं।

 

श्री कौशलेन्द्र कुमार (नालंदा) : माननीय अध्यक्ष महोदया, आपने इस दुख की घड़ी में बोलने का मौका दिया, इसके लिए बहुत-बहुत धन्यवाद।

          खास कर मैं बिहार से आता हूं, बिहार की बगल में नेपाल देश में जो घटना घटी है और बिहार में, उत्तर प्रदेश में और राजस्थान में, इन तमाम जगहों पर जो घटना घटी है, उसके प्रति मैं दुख व्यक्त करता हूं और भारत की सरकार को मैं बधाई देता हूं कि उन्होंने नेपाल की सरकार को दुख की घड़ी में खड़ा रहने का मौका दिया और गृह मंत्री जी ने बिहार जाकर अपने साथियों के साथ जो दौरा किया और लोगों के प्रति जो सहानुभूति दी, उनके प्रति भी मैं आभार व्यक्त करना चाहता हूं।

   

13.00 hrs. बिहार में लगभग 51 लोगों की मौत हुई और करीब 180 लोग घायल हुए हैं। वहां काफी नुकसान हुआ है। वहां जो पिछली बार घटना घटी थी, उसके एक दिन बाद मैंने उसको उठाया था।

          ऐसी परिस्थिति में मैं भारत सरकार से दो बातें जरूर कहूंगा। माननीय गृह मंत्री जी ने वहां का दौरा किया है। वे हर चीज़ से अवगत हैं। मैं उन्हें इसके लिए धन्यवाद भी देता हूं। इसके साथ-साथ मैं यह भी कहूंगा कि बिहार में जो घटना घटी है, उसे राष्ट्रीय आपदा घोषित किया जाए। इस दुःख की घड़ी में जो आप नेपाल सरकार की मदद कर रहे हैं, उसमें मैं भी आपके साथ खड़ा हूं। हमारी पार्टी भी आपके साथ खड़ी है। जो भी मदद हो, वह भारत सरकार करे। हम अपनी पार्टी की तरफ से यह घोषणा करते हैं कि हम सब लोग एक-एक महीने की तनख्वाह देंगे। सरकार इस पर निर्णय ले और अगर इस पर सदन निर्णय ले तो ऐसी परिस्थिति में सभी सांसदों को एक-एक महीने की तनख्वाह देकर इसमें मदद करने की जरूरत है।

श्री जय प्रकाश नारायण यादव: महोदय, हम माननीय सदस्य की बात का सपोर्ट करते हैं।

माननीय अध्यक्ष : जी, ठीक है।

   

SHRI MEKAPATI RAJA MOHAN REDDY (NELLORE):  Madam, a great tragedy has occurred and a very grim situation has arisen by a severe earthquake that has hit our neighbouring country, Nepal and our own States like Bihar, Uttar Pradesh, Bengal and Rajasthan.  The reported loss of human lives, property and other infrastructure is huge.  Nepal has been paralysed.

          Natural disasters are a universal reality.  The immediate challenge is providing affected persons with basic amenities before the actual enormous task of reconstruction starts.

          I praise the timely action taken by the Government of India by sending relief materials to Nepal.  Our Prime Minister has promised all possible help in its hour of grief.

          In our own country, natural calamities like earthquakes, Tsunami, floods and drought are a regular feature.  While nature’s fury picks no favourites, damages can be minimized and rehabilitation can be effectively met with an organized disaster management plan.

          On behalf of our Party, Y.S.R. Congress Party, I express and convey our condolences to the families of those who lost their kith and kin in the tragedy.

 

SHRI N.K. PREMACHANDRAN (KOLLAM): Madam Speaker, I also express my deep sorrow and condolences to the people of Nepal who have been affected by the earthquake which had an magnitude of 7.9 Richter scale.

          I also had the experience day before yesterday in Khan Market when I was sitting on a chair in a saloon.  I got the experience of shaking of my chair and the lights colliding with each other. So, feeling the fear psychosis which I had at the time of this tremor, we can very well imagine the pathetic conditions or the situation of the people of Nepal. 

I would like to take this opportunity to express our solidarity to the people of Nepal in rebuilding, reconstructing and rehabilitation the country of Nepal especially Kathmandu and other nearby places. 

I appreciate the stand taken by the Government in having an immediate intervention supporting the people of Nepal.  I urge upon the Government to render entire support for the rescue operations, relief operations, reconstruction and rehabilitation of Nepal in the original situation. 

I would like to endorse and express my views in respect of the hon. Member from the TDP who has cited that, ignoring the ecological and environmental protection, if we are concentrating on development in the way of GDP growth, definitely this will happen. From Koyna Dam disaster to Latur and Kutch disaster and now upto Nepal disaster, the lesson which we have to learn is that we have to be concerned about ecological and environmental protection when we try to reach our development goal.

With these words, I would once again express my solidarity in rebuilding the State of Nepal. 

   

योगी आदित्यनाथ (गोरखपुर): अध्यक्ष जी, 25 अप्रैल को नेपाल और उत्तर भारत में भूकम्प के साथ जो त्रासदी आई है, वह एक आधिदैविक त्रासदी है। हम मान सकते हैं कि आधिदैविक त्रासदियों पर मानव का कोई नियंत्रण नहीं है, लेकिन बचाव और राहत से उसको कम अवश्य किया जा सकता है। हम सब माननीय प्रधानमंत्री जी और माननीय गृह मंत्री जी के आभारी हैं कि उन्होंने तत्काल राहत और बचाव के कार्य प्रारम्भ करके दुनिया को एक बार फिर भारत की ताकत का अहसास कराया है। नेपाल के एकदम पड़ोस में हम लोग रहते हैं। भूकम्प के झटकों से पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार तो थर्राया ही था, लेकिन नेपाल के अन्दर की उन संवेदनाओं को हम लोगों ने महसूस किया, जो भारत सरकार ने तत्काल वहाँ पर राहत कार्यो को प्रारम्भ करके अपनी संवेदनाएं वहाँ के नागरिकों के प्रति व्यक्त की हैं। 

          महोदया, बहुत सारे प्रश्न हम सबके सामने उमड़ते हैं, जब इस प्रकार की त्रासदियाँ आती हैं। हिमालय के बारे में कहा जाता है कि भूकम्प जैसी त्रासदियों के बारे में यह काफी सेन्सेटिव है और उस जोन में पूरी बेल्ट आती है और बार-बार इस प्रकार की चेतावनी के बावजूद उस ओर जब ध्यान नहीं दिया जाता है और इस प्रकार की त्रासदियों को हम आमंत्रित करते हैं तो यह और भी दुर्भाग्यपूर्ण होता है। ल्हासा, तिब्बत जो पूरी दुनिया की छत है, उसको पूरी तरह जंगल विहीन कर दिया गया है और इस तरीके से खिलवाड़ करके उसको नष्ट किया जा रहा है। अब एक नई योजना चल रही है कि ऐवरेस्ट पर टनल बनाकर चीन को नेपाल के माध्यम से जोड़ने का यह सीधे-सीधे इस प्रकार की त्रासदियों को और भी आमंत्रित करने का प्रयास हो रहा है।

          मैं आपके माध्यम से अनुरोध करना चाहता हूँ कि एक बार पुनः इस पर अवश्य चर्चा होनी चाहिए कि हिमालय के साथ छेड़छाड़ जब भी होगी, यह सबसे आधुनिक पर्वत है, पहाड़ है तो पर्यावरण और प्रकृति के साथ जब इस प्रकार की छेड़छाड़ होगी तो इस प्रकार की दैवीय आपदाओं को हम आने से रोक नहीं पाएंगे। यह एक त्रासदी है। इसमें सबसे अच्छी बात भारत सरकार की पहल रही है। एनडीआरएफ के त्वरित कार्रवाई दल ने नेपाल के अंदर सहायता की। नेपाल के साथ हमारे भावनात्मक संबंध है। एक सहोदर भाई जैसे नेपाल और भारत के संबंध हैं। इन संबंधों पर बीच के कुछ कालखंड में धुंध छाई थी। माननीय प्रधानमंत्री जी की नेपाल की लगातार यात्राओं ने उन संबंधों को एक विश्वास में जोड़ा और इस बार जो प्रयास हुए हैं, वह वहां के लोगों को केवल दिल से ही नहीं, वहां के लोगों के दिमाग में यह बात आई है कि सचमुच भारत हमारा हितैषी है और भारत ही हमारा सच्चा मार्गदर्शन कर सकता है। काठमांडू वैली तक, पोखरा तक राहत कार्य हो रहे हैं। जो मुख्य केन्द्र लामचुंग था और उसके आसपास का गोरखा आदि, आधुनिक नेपाल की नींव जिस गोरखा में पड़ी थी, वह क्षेत्र पूरी तरह से नष्ट हो गया है। वहां कुछ भी नहीं बचा है। वहां तक अभी कोई पहुंच ही नहीं पा रहा है, क्योंकि वहां जाने के साधन नहीं हैं।

          जिस प्रकार से यहां पर सभी लोगों ने अपनी भावनाओं को व्यक्त किया है, नेपाल सांस्कृतिक रूप से, भावनात्मक रूप से, आध्यात्मिक रूप से हमारा एक सहोदर भाई के रूप में वहां पर जिस रूप में आज भी हिमालय में हम सबकी सुरक्षा की दृष्टि से अभेद्य, सुदृढ़ दुर्ग के रूप में खड़ा है। हम सबको दुख की इस घड़ी में उनका साथ और अधिक से अधिक मदद देनी चाहिए। उन्हें इस बात का आभास कराना चाहिए कि एक बड़े भाई के रूप में भारत अपने कर्तव्यों को निर्वहन कर रहा है। एक बार पुनः मैं अपने दल की ओर से उन सबके प्रति जो इस त्रासदी के शिकार हुए हैं, उनके प्रति श्रद्धांजलि व्यक्त करता हूं। जो भी सहयोग हम लोगों के स्तर पर होगा, हम लोग भरपूर मदद करेंगे। यह अच्छा होगा कि यहां का एक संसदीय दल भी उन क्षेत्रों में जाकर के राहत कार्यों में मदद करे।  हम लोग इसमें भरपूर सहयोग करेंगे।

 

श्री दद्दन मिश्रा (श्रावस्ती) : अध्यक्ष महोदया, आपने इस दुखद त्रासदी के ऊपर अपनी संवेदना व्यक्त करने का अवसर प्रदान किया, इसके लिए धन्यवाद। शनिवार 25 अप्रैल को जो विनाशकारी भूकंप आया। इसका केन्द्र बिंदु नेपाल था। हमारा संसदीय क्षेत्र चूंकि नेपाल सीमा से पूरी तरह से लगा हुआ है। हमारे क्षेत्र में उसका व्यापक असर देखने को मिला। हमारे क्षेत्र के अंतर्गत इकौना तहसील के मझौआ सुमाल गांव में निशा पुत्री ननके कश्यप उम्र 15 वर्ष जो कक्षा 9 की छात्रा थी, अपने कच्चे मकान के बगल में बैठकर बर्तन धुल रही थी। भूकंप के झटके में कच्चे मकान की दीवार भरभरा के गिर गई। उसी के बगल में उसका चचेरा भाई विनय कुमार सन आफ सोहन लाल उम्र 25 वर्ष भी खड़ा था। दोनों मिट्टी की ढेर के नीचे दब गए। दोनों को आनन-फानन निकालकर सीएचसी इकौना पहुंचाया गया, जहां पर निशा को मृत घोषित कर दिया गया और उसके भाई को भर्ती कर लिया गया।

          अध्यक्ष महोदया, मैं माननीय प्रधानमंत्री जी और गृह मंत्री जी के प्रयासों की सराहना करते हुए कहना चाहूंगा कि जिस द्रुत गति से यह भूकंप आया था, उसी द्रुत गति से उन्होंने राहत पहुंचाने का काम किया है। मैं एक बात कहना चाहता हूं कि भारत सरकार और प्रदेश सरकारों द्वारा बहुत से आवास योजनायें चलयी जा रही हैं लेकिन आज़ादी के इतने वर्षों बाद भी गरीब पात्र लोगों को पक्का मकान हम मुहैया नहीं करा पाये हैं। आज भी लोग कच्चे मकानों में रहने के लिए विवश हैं। हमारे क्षेत्र में एक और त्रासदी शुरू हो गयी है जो मार्च-अप्रैल के महीने से लेकर जब तक मानसून नहीं आ जाता है, आगजनी की घटनायें, चूकिं वहां कच्चे मकान हैं।...(व्यवधान)

SHRIMATI MALA RAJYALAKSHMI SHAH (TEHRI GARHWAL): I would thank you, Madam, for allowing me to speak today.

          I would, first of all, like to thank the hon. Prime Minister and the hon. Home Minister for helping Nepal. It has been a great tragedy. Within these two years – a year back or so  after that it happened – we had   a big tragedy in Uttarakhand to which I belong. Just two days before, we had this teriffic tragedy in Kathmandu in Nepal as well as in India. I would like to convey my condolences to all the peoples of Nepal and India who have lost their kith and kin.  I am very glad – and I think - that India is the first one to help the people of Nepal.

          Madam, I was born in Nepal. I would like to tell you all. It has a very close connection with India. I am thankful and I am very happy that the hon. Prime Minister has helped. Even in the case of the Uttarakhand tragedy, he was the first one to help. When I called him up, he said he would come and he has helped Uttarakhand people. I would like to thank the Army and the Air Force people again. I am very much grateful to every one. As the rest have said, we will all give one month’s pay. What we did in the case of  the Uttarakhand tragedy, we would also like to do that now. I would like to thank everyone.  I would like to tell you that I have still not been able to find my brother who is in Kathmandu.

HON. SPEKAER: I know that. Because of that, I allowed you.

SHRIMATI MALA RAJYALAKSHMI SHAH : Even now, I have still not been able to find him. Thank you.

माननीय अध्यक्ष : बाकी सभी सदस्य अपना नाम लिखवा कर अपनी संवेदना प्रकट कर सकते हैं और यहां पर एसोसिएट भी कर सकते हैं।

 

शहरी विकास मंत्री, आवास और शहरी गरीबी उपशमन मंत्री तथा संसदीय कार्य मंत्री (श्री एम. वैंकैय्या नायडू) : इस संबंध में गृह मंत्री जी जवाब देने वाले हैं। पार्लियामेन्ट्री मिनिस्ट्री के नाते मेरा सभी सदस्यों से अनुरोध है, जैसा मुलायम सिंह जी और अन्य सदस्यों ने कहा है, पूरे पार्लियामेन्ट की ओर से हर एक सदस्य अपने एक महीने का वेतन, हम लोग ऑफिशियली इंडॉर्स करके, सभी पॉलिटिकल पार्टीज घोषणा करें तो अच्छा होगा। 

I appeal to all the sides of Parliament  that we all contribute one month’s salary from the MPLAD Fund. Subsequently, what is to be done with regard to MPLAD Fund and all,  we can discuss later. I hope the entire House agrees to this appeal.

SEVERAL HON. MEMBERS:  Yes.

श्री मल्लिकार्जुन खड़गे (गुलबर्गा) :  अभी संसदीय कार्य मंत्री जी ने जो कहा है, वही हमारे दिल में था। पहले ही जे.डी.यू. और आर.जे.डी. के नेताओं ने कहा है और हमारे पार्टी के नेताओं का भी यही कहना है कि सारे लोग अपने एक-एक महीने की तनख्वाह रिलीफ फंड में दी जाये, हम इससे सहमत हैं। 

 

गृह मंत्री (श्री राजनाथ सिंह) : अध्यक्ष महोदया, जो कुछ भी 25.04.2015 की दोपहर में भारत और नेपाल में घटित हुआ है उसे मैं एक साधारण संकट नहीं मानता हूं बल्कि मैं इसे एक बहुत बड़ा हादसा मानता हूं। इस सदन के कई सम्मानीत सदस्यों ने, जिनमें कांग्रेस लोक सभा के नेता श्री मल्लिकार्जुन खड़गे जी, श्री मुलायम सिंह यादव, श्री जयप्रकाश यादव, श्री विनायक राऊत, श्री रविन्द्र बाबू, मोहम्मद सलीम, श्री चिराग पासवान, श्री चन्दूमाजरा, श्री अरूण कुमार, श्री कौशलेन्द्र कुमार, श्री राजमोहन रेड्डी, श्री प्रेमचन्द्रन, श्री योगी आदित्यनाथ, श्री ददन मिश्र और श्रीमती माला राज्यलक्ष्मी जी ने अपने विचार व्यक्त किये हैं। सभी ने हताहत परिवार के सदस्यों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की है। मैं भी आप इस सदन में ऑन बिहाफ ऑफ प्राइम मिनिस्टर, सरकार की तरफ से और देश की ओर से भी हताहत परिवार के सभी सदस्यों के प्रति हार्दिक संवेदना व्यक्त करता हूं। इस घटना के संबंध में जानकारी देते हुये, मैं इसका उल्लेख करना आवश्यक समझता हूं कि जिस समय यह घटना घटित हुई उसके पांच मिनट पहले ही नैशनल इंटैलिजेन्स एकेडमी की एक नयी बिल्डिंग परिसर का उद्घाटन करने के लिए माननीय प्रधानमंत्री जी वहां पर मौजूद थे और मैं भी वहां पर मौजूद था।  कार्यक्रम समाप्त होने के बाद ज्यों ही प्रधान मंत्री जी गए, उसके बाद मैं निकला। ज्यों ही मैं घर पर पहुंचा, तुरंत प्रधान मंत्री जी का टेलीफोन आया। उन्होंने कहा कि राजनाथ जी, मैंने तीन बजे बैठक बुलाई है। एक बहुत बड़ा हादसा हुआ है जिसकी जानकारी आपको मिल गई होगी। मुझे इस हकीकत को सदन के सामने स्वीकार करने में रंच मात्र गुरेज नहीं है कि जब तक मैं घर पहुंचा था, मुझे इसकी जानकारी नहीं मिली थी। लेकिन प्रधान मंत्री जी को पहले ही इसकी जानकारी मिल गई थी। मैंने टेलीविजन खोलकर देखा तब विस्तृत जानकारी मिली। सचमुच जो तत्परता गृह मंत्री होने के नाते मुझे दिखानी चाहिए, जो जानकारी मेरे पास पहले होनी चाहिए, वह नहीं हो पाई। मैं इसका उल्लेख इसलिए करना चाहता हूं कि प्रधान मंत्री जी ने तत्परता दिखाई और तुरंत फैसला किया कि इस संकट की घड़ी में मदद करने के लिए हमें बैठक बुलानी चाहिए। उन्होंने बैठक बुलाई। मैं सरकार की तरफ से आश्वस्त करना चाहता हूं कि भारत में इस भूकम्प के हादसे के परिणामस्वरूप जो लोग हताहत हुए हैं और पड़ोसी देश नेपाल के लोगों को भी हम अपने परिवार का ही सदस्य मानते हैं। जो लोग भी हताहत हुए हैं, उनके प्रति यहां संवेदना व्यक्त करते हैं, वहीं यह आश्वस्त करना चाहते हैं कि संकट की घड़ी में भारत सरकार भारतवासियों के साथ खड़ी है और अपने नेपाल वासियों के साथ भी खड़ी है।

          आज मैं इस बात का भी उल्लेख करना चाहता हूं कि ज्यों ही यह घटना घटित हुई, 11 या 13 मुख्य मंत्रियों से तुरंत प्रधान मंत्री जी ने टेलीफोन से बातचीत की। दूसरे दिन मैंने भी तीन राज्यों के मुख्य मंत्रियों - उत्तर प्रदेश के मुख्य मंत्री श्री अखिलेश यादव, बिहार के मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार और उत्तराखंड के मुख्य मंत्री श्री हरीश रावत से बातचीत की। मैंने उनसे सहयोग की अपील की। मैंने कहा कि एरोप्लेन के माध्यम से सभी लोगों को रैसक्यू किया जाना मुझे संभव नहीं दिखाई देता। तीनों राज्य नेपाल बार्डर से लगे हुए हैं। यदि तीनों राज्य अपनी बस वहां भेज सकें तो ज्यादा बेहतर होगा। नेपाल से बहुत सारे लोग जो भारत आना चाहते हैं, भले ही वे विदेशी हों, वहां से निकाल कर उन्हें भारत लाया जा सकता है।  हमारे प्रधान मंत्री जी ने ग्रेटिस वीज़ा का प्रावधान भी कर दिया है। दूसरे देशों के लोग भी यदि भारत आना चाहते हैं तो तुरंत उन्हें ग्रेटिस वीज़ा दिया जाना चाहिए और भारत लाया जाना चाहिए। इमीग्रेशन सैंटर्स भी कुछ स्थानों पर स्थापित किए जा चुके हैं। यह सारा फैसला उस समय हुआ। इसलिए तीनों मुख्य मंत्रियों -  उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और बिहार ने जितनी त्वरित गति से वहां से बसें भेजीं और साथ ही नेपाल के लिए राहत की सामग्री भेजी, मैं सदन के माध्यम से उन तीनों राज्य सरकारों के प्रति भी आभार व्यक्त करना चाहता हूं। उनके इस सहयोग और प्रशंसनीय कार्य के लिए उन्हें बधाई भी देना चाहता हूं।

          अध्यक्ष महोदया, मैं जानता हूं कि यह सदन चाहता होगा कि इस घटना के बारे में थोड़ी विस्तृत जानकारी अब तक प्राप्त हुई रिपोर्ट के आधार पर मिल जाए। इसलिए मैं यहां स्टेटमैंट प्रस्तुत करना चाहूंगा।

          नेपाल के पोखरा क्षेत्र में 25.04.15 को 11.45 पर भारतीय समयानुसार 7.9 रिक्टर स्केल का भयानक भूकम्प आया। इस भूकम्प ने न केवल बहुत बड़े पैमाने पर नेपाल में विनाश किया बल्कि भारत में भी कई राज्यों को प्रभावित किया। भारत में अब तक 72 मौतों की जानकारी है। बिहार में 56, उत्तर प्रदेश में 12, पश्चिम बंगाल में 3, राजस्थान में एक और 280 से अधिक लोगों के घायल होने की सूचना है। यह संख्या 300 से भी अधिक हो सकती है। भवनों और अन्य निर्माणों को सिक्किम, पश्चिम बंगाल, बिहार और उत्तर प्रदेश में भी क्षति पहुंची है। संबंधित राज्य सरकारें आवश्यक कदम उठा रही हैं। वैसे भारत सरकार द्वारा पांच एनडीआरएफ की टीमें भेजी गई हैं जिनमें से चार बिहार में और एक उत्तर प्रदेश में तैनात हैं। मैं यह भी जानकारी देना चाहता हूं कि उत्तर प्रदेश जहां टीम भेजी गई है, वह गोरखपुर और बिहार में गोपालगंज, दरभंगा, मुजफ्फरपुर और सुपौल में भेजी गई है। हम भी राज्य सरकारों से लगातार संपर्क में हैं और हमने हर संभव मदद का वायदा भी किया है। नैशनल डिजास्टर मैनेजमैंट अथॉरिटी, यानी राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन समिति इस पूरी परिस्थिति का निरंतर आकलन कर रही है। सभी भारतीय अपने नेपाली भाई और बहनों के साथ दुख और आपदा की घड़ी में साथ हैं। माननीय प्रधान मंत्री जी स्वयं इस परिस्थिति का निरीक्षण कर रहे हैं और उन्होंने आदेश दिया है कि हर संभव सहायता हम अपने नेपाली भाई-बहनों को देंगे।

          जहां तक हमारे बचाव और राहत प्रयासों का संबंध है, भारत के दस एनडीआरएफ के दल काठमांडू पहुंच चुके हैं। एनडीआरएफ टीमों ने अब तक दस व्यक्तियों को जिंदा निकाला है और 46 शव निकाले हैं। मैं समझता हूं कि यह संख्या और अधिक बढ़ गयी होगी। अन्य छः एनडीआरएफ की टीमें नेपाल के लिए भेजी जा रही हैं। भारतीय सेना ने एक इंजीनियरिंग टॉस्क फोर्स और 18 चिकित्सा दल काठमांडू में नियुक्त कर दिये हैं। 22 टन खाद्य सामग्री और राशन पैकेट, 50 टन मिनरल पानी, 02 टन दवाइयां और चिकित्सा उपकरण, 1400 कम्बल और 40 तंबू नेपाल भेजे जा चुके हैं। थल सेना, वायु सेना और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के कई दल भी चिकित्सीय सहायता के लिए नेपाल भेजे गये हैं। ये सभी दल दवाइयों, स्टेचर, बिस्तर आदि से लैस हैं। एक मानव रहित यान यूएवी, जिसे अनमैंड एयर व्हीकल बोलते हैं, वह भी बचाव के लिए नेपाल के रास्ते में है। एक उच्च स्तरीय इंटर मिनिस्ट्रियल टीम में एडिशनल सैक्रेट्री होम के नेतृत्व में, जिसमें विदेश मंत्रालय तथा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं और संचार विशेषज्ञों के साथ बचाव एवं राहत कार्य में समन्वय के लिए नेपाल भेज दिए गए हैं।  ये दल अपने साथ 250 वेरी हाई फ्रिक्वेंसी वायरलैस सैट और 15 हाई फ्रिक्वेंसी वायरलैस सैट लेकर गये हैं।

          जहां तक नेपाल में फंसे हुए भारतीयों को निकालने का सवाल है, हमने अब तक ढाई हजार से अधिक भारतीयों को निकालने में कामयाबी हासिल की है। अब तक यह संख्या काफी बढ़ गयी होगी। हम उन्हें हवाई एवं सड़क मार्ग से भी निकालने का प्रबंध कर रहे हैं। हमने उत्तर प्रदेश, बिहार और उत्तराखंड की सरकारों से बसों एवं एम्बुलैंसों द्वारा सड़क मार्ग से काठमांडू ...(व्यवधान)

श्री अधीर रंजन चौधरी (बहरामपुर) :  क्या आपने बंगाल सरकार से कोई कान्टैक्ट किया है? ...(व्यवधान)

श्री राजनाथ सिंह : पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री जी से प्रधान मंत्री जी की बात हुई थी, लेकिन हमारी  बात नहीं हो पायी। जो हकीकत है, उसे मुझे स्वीकार करने में कोई आपत्ति नहीं है। हमने उत्तर प्रदेश, बिहार एवं उत्तराखंड की सरकारों से बसों एवं एम्बुलैंसों द्वारा सड़क मार्ग से काठमांडू एवं अन्य क्षेत्रों से भारतीयों और अन्य विदेशी नागरिकों को, जो नेपाल में फंसे हुए हैं, को निकालने के लिए कहा है। हमने विदेशियों को नेपाल से भारत आने के लिए मुफ्त वीजा देने की भी व्यवस्था कर दी है। इसी तरह की अन्य सुविधाएं उन विदेशियों को, जो सड़क मार्ग से भारत नेपाल की सीमा के रास्ते आ रहे हैं, को भी प्रदान कर दी गयी हैं। उत्तर प्रदेश और बिहार की सरकारों को उत्तर प्रदेश और बिहार की सीमाओं पर सड़क से आने वाले लोगों के लिए राहत शिविर लगाने की सलाह दी गयी है और मुझे सदन को यह बतलाते हुए बेहद खुशी हो रही है कि इन राज्य सरकारों ने वहां पर राहत शिविरों की व्यवस्था कर दी है। सशस्त्र सीमा बल से लोगों के आने-जाने को आसान बनाने का कहा गया है और सीमावर्ती इलाकों में भूकम्प पीड़ितों के लिए चिकित्सीय राहत शिविर सीमा क्षेत्रों में प्राथमिक चिकित्सा एवं अन्य चिकित्सीय सहायता उपलब्ध कराने के लिए कहा गया है।

          अध्यक्ष महोदया, माननीय प्रधानमंत्री ने भूकम्प से मरने वाले हर व्यक्ति के निकट संबंधी को एनडीआरएफ के प्रावधानों के अनुसार चार लाख रुपये तथा अन्य को दो लाख रुपये प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से देने की घोषणा की है। मैं माननीय सदन को आश्वस्त करना चाहता हूं कि भारत सरकार मरने वालों के परिवारों को हर सम्भव सहायता प्रदान करेगी। मरने वाले परिवारों को ही नहीं, बल्कि जिनके मकानों को क्षति पहुंची है, उनको भी सहायता पहुंचाएगी। मैं हृदय से प्रभावित राज्यों के दुखी परिवारों को तथा अपने मित्र पड़ोसी देश नेपाल के दुखी परिवारों को दुख की इस घड़ी में अपनी सांत्वना देता हूं।

श्री मुलायम सिंह यादव (आज़मगढ़) : उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से तीन ट्रक पानी की बोतलें और बिस्किट्स नेपाल में पहुंच चुके हैं। उत्तर प्रदेश में जिन लोगों की भूकम्प से मौत हुई है, उनको सात-सात लाख रुपये दे दिए गए हैं।

माननीय अध्यक्ष : मंत्री जी ने सभी को धन्यवाद दिया है।

श्री मुलायम सिंह यादव : भारत सरकार का खजाना भरा हुआ है। आप पीड़ितों को दस-दस लाख रुपये दीजिए।

HON. SPEAKER: Hon. Members, there will be no lunch time today.

13.25 hrs   MATTERS UNDER RULE 377 *   HON. SPEAKER: Hon. Members, the Matters under Rule 377 shall be laid on the Table of the House. Members who have been permitted to raise matters under Rule 377 today and are desirous of laying them, may personally hand over text of the matters at the Table of the House within twenty minutes.

Only those matters shall be treated as laid for which text of the matters have been received at the Table within the stipulated time. The rest will be treated as lapsed.