Legal Document View

Unlock Advanced Research with PRISMAI

- Know your Kanoon - Doc Gen Hub - Counter Argument - Case Predict AI - Talk with IK Doc - ...
Upgrade to Premium
[Cites 0, Cited by 0]

Lok Sabha Debates

Combined Discussion On Resolution Regarding Approval Of Continuance In Force Of ... on 2 August, 2005

an> Title: Combined discussion on resolution regarding approval of continuance in force of the proclamation and motion regarding expressing deep concern over deteriorating law and order situation in the state of Bihar.

 

14.30 hrs.   MR. SPEAKER: Now, the House shall take up the Motion under Rule 184 to be moved by Shri Nitish Kumar.  The next item on the List of Business is Statutory Resolution for the extension of the President’s Rule in Bihar, by Shri Shivraj P. Patil, the hon. Minister  of Home Affairs.  I think, the House can take up the combined discussion on both these motions listed at Items No. 23 and 24 respectively.  However, there will be separate  voting on the two Motions at the end of the discussion.  I hope, the House agrees.

SEVERAL HON. MEMBERS:  Yes, Sir. We agree.

SHRI NITISH KUMAR (NALANDA): Sir, I beg to move the following motion:-

“That this House expresses its deep concern over the deteriorating law and order situation in the State of Bihar under President’s rule and also on the situation arising out of the Chief Secretary of the State proceeding on long leave. ”   MR. SPEAKER:  Now, the hon. Minister of Home Affairs may move his motion regarding Statutory Resolution relating to Item No. 24.
THE MINISTER OF HOME AFFAIRS (SHRI SHIVRAJ V. PATIL): Sir, I beg to move the following resolution:--
“That this House approves the continuance in force of the Proclamation, dated the 7th March, 2005 in respect of the State of Bihar, issued under article 356 of the Constitution by the President, for a further period of six months with effect from the 7th September, 2005. ”   MR. SPEAKER: We can fix the time till 6 o’ clock for the time being. But if necessary, we shall extend the time of the House.
            Now, Shri Nitish Kumarji.
श्री नीतीश कुमार : अध्यक्ष महोदय, सबसे पहले मैं आपको धन्यवाद देना चाहता हूं कि आपने इस मोशन को जो बिहार की स्थिति से संबंधित है, नियम १८४ के अंतर्गत स्वीकृत किया है और आज इस पर चर्चा होगी। इसके साथ ही माननीय गृह मंत्री जी द्वारा एक स्टेचुटरी रैजोल्यूशन वहां राष्ट्रपति शासन की अवधि को ६ महीने बढ़ाने के लिए आया है और इस पर भी साथ-साथ चर्चा होगी, ताकि पूरे विषय पर लोग एक साथ अपने विचार व्यक्त कर सकें।
अध्यक्ष महोदय, बिहार में कानून और व्यवस्था की स्थिति का जहां तक प्रश्न है उसके बारे में आंकड़ों में जाने की आवश्यकता नहीं है। मुझे मालूम है कि सरकार की तरफ से आंकड़ें प्रस्तुत किये जाएंगे। वहां पूरी रात आंकड़े प्रस्तुत करने की तैयारी हुई है। बिहार में और कुछ बने या न बने और कोई उद्योग चले या न चले, अपहरण उद्योग बिहार में चलता है। वहां और कुछ बने या न बने लेकिन आंकड़े जरूर मैन्युफैक्चरर् होते रहते हैं और वे भी रात में। रात के लिए तो ये एक्सपर्ट लोग हैं। रात में ये कैसे-कैसे निर्णय लिया करते हैं। रात में आंकड़ों को प्रस्तुत करने के लिए काम हुआ है और सुबह फैक्स आया होगा, उसको माननीय गृह मंत्री जी पढ़ेंगे और हम लोग अपना ज्ञान वर्धन करेंगे। प्रैसीडेंट रूल में वहां की टैक्नोलॉजी में जो इजाफा हुआ होगा, उसको भी सुनने का हम लोगों को अवसर मिलेगा। हम लोगों का आनंद उस समय और ज्यादा होगा, जब माननीय गृह मंत्री जी कहेंगे कि वहां की स्थिति में सुधार आया है और उससे यह इम्प्लीसिट होगा कि पहले वहां की स्थिति बहुत बुरी थी। सब जानते हैं कि पहले १५ सालों में लगातार इन्हीं के शागिर्द का शासन रहा cè[r23] ।
ये स्वयं पिछले पांच वर्षों से वहां आरजेडी के साथ शासन कर रहे थे, इसलिए मैं आंकड़ों में नहीं जाना चाहता हूं। मैं वहां की स्थिति के बारे में एक-दो उदाहरण देना चाहता हूं कि वहां पर कानून एवं व्यवस्था की क्या स्थिति है? अभी हाल ही में आरजेडी के एक प्रमुख नेता की पटना में दिन-दहाड़े हत्या हुई। आज ही के समाचारपत्र में छपा है कि सरकार में एक मंत्री हैं, उनके घर पर उनके भाई का कारोबार था, जो यहां के सांसद भी हैं, उनके ईंट-भट्टे पर हमला हुआ है। उन लोगों ने वहां पर एक घर बनाया हुआ था, जिसे अखबारों के हिसाब से गेस्टहाउस कहते हैं, जो कि अलौली प्रखंड के चातर गांव में पड़ता है, वहां पर हमला किया गया।घर को डायनामाइट लगाकर उड़ाया गया, ऐसी खबर समाचार-पत्रों में है।समाचार-पत्रों में जब खबर छपी, तो जिज्ञासावश और परिस्थिति को जानने के लिए मैंने श्री राम विलास पासवान जी जो कि केंद्र सरकार में मंत्री भी हैं, उनके भ्राता श्री पशुपति पारस जी, जो वहां विधायक रहे हैं और मंत्री भी रहे हैं तथा अपनी पार्टी में दूसरे नंबर के नेता भी है, उनसे मैंने फोन पर संपर्क किया और मैंने जानने की कोशिश की कि वस्तुस्थिति क्या है? पटना में यह भी खबर छपी थी कि वे राज्यपाल महोदय से मिले थे और राज्यपाल महोदय से मिलकर उन्होंने कहा था कि वहां उनको खतरा है। उनको इस बात की चेतावनी मिल रही है तथा उनको थ्रेट किया गया है। उन्होंने मांग की थी कि वहां जो पुलिस आउट पोस्ट पहले थी, उसे फिर से बहाल किया जाए। यह जो हमारी दूरभाष से बात हुई है, कितनी सुन्दर है? मैंने उनसे पूछा कि क्या वह बहाल हुई थी? तब उन्होंने जो समय बताया, उससे लगा कि महीने-दो महीने पहले वे राज्यपाल महोदय से इस संदंर्भ में मिले थे और राज्यपाल महोदय ने बकौल उनके भाई श्री पारस जी और होम सेक्रेटरी से भी कहा था कि वहां पर पुलिस आउट पोस्ट बननी चाहिए, लेकिन इसके बावजूद वहां पर पुलिस आउट पोस्ट नहीं बनी। वहां पर कितना बढि़या शासन चल रहा है? केंद्र सरकार के एक मंत्री के अनुरोध के बाद राज्यपाल महोदय आदेश देते हैं और उस आदेश का क्या हश्र होता है और अब यह घटना घट जाती है। मेरा पहला उदाहरण यह है कि उनके घर को डायनामाइट से उड़ाया गया। एक आरजेडी के नेता की दिनदहाड़े हत्या हुई, लोकजनशक्ति पार्टी के नेता का घर उड़ा दिया गया है। उनके घर पर हमला हुआ। उसके पहले एक और घटना मधुबन में घटी है।
मुझे नहीं पता कि माननीय मंत्री जी आपको क्या आंकड़े देंगे? वे बताएंगे कि उग्रवादी घटनाओं में कमी आयी है। आपके पास शायद बिहार के आंकड़े आए होंगे। वहां एक बहुत बड़ी घटना घटी। यह बिहार की ही शायद पहली घटना नहीं है, देश में भी इस प्रकार की एक-दो घटनाएं ही घटी हैं। पूरे मधुबन शहर को करीब सौ लोगों द्वारा घेरकर, घंटों तक कार्यवाई की गई।मैं उस कार्यवाई पर नहीं जाना चाहता हूं। वहां पर जो कुछ भी है, वहां पर उग्रवाद कैसे बढ़ रहा है, क्यों बढ़ रहा है, इस पर भी मैं नहीं जाना चाहता हूं। मैं तो सिर्फ इसका उल्लेख कर रहा हूं कि वहां पर आरजेडी के एक सांसद के घर पर हमला हुआ, थाने पर हमला हुआ, बैंक पर हमला हुआ, लेकिन माननीय मंत्री जी जरूर बताएंगे कि उक्त प्रदेश में ला एंड आर्डर की स्थिति में सुधार आ रहा है, यानी आपके आरजेडी और कांग्रेस शासन में जो बुरा हाल था, उसको आपने राष्ट्रपति शासन में सुधारा है। यह तो वहां पर नेताओं की स्थिति हुई।यहां पर जो आरजेडी और लोकजनशक्ति पार्टी के साथ हुआ, उसका मैं उदाहरण दे रहा हूं।
मैं एक उदाहरण यह देना चाहता हूं कि जो इन दिनों बिहार के डीजीपी हैं, यह उनका गृह जिला है। उस गृह जिले में लगातार अपहरण की घटनाएं घट रही हैं, पहले की तुलना में अपहरण की घटनाएं बढ़ी हैं। लेकिन माननीय मंत्री जी आंकड़े देंगे और बताएंगे कि अपहरण की घटनाएं कम हुईं। सभी प्रकार की जो हिंसा की वारदातें हैं, उनमें बहुत कमी आई है और मंत्री जी हर प्रकार के आंकड़े प्रस्तुत करेंगे, लेकिन यह किसी को कन्वेंस नहीं करेगा। आप तो कहेंगे कि घटनाओं में कमी हुई, लेकिन वहां के राज्यपाल महोदय क्या कहेंगे?उनसे जब अखबार के पत्रकारों ने पूछा था कि राज्य में लॉ एंड आर्डर खराब है और आरजेडी के नेता की दिनदहाड़े हत्या हुई, तो उन्होंने कहा "Blasts have taken place in London too. " जब लंदन में विस्फोट हो गया, तो यहां पर कुछ भी हो जाए, कोई दिक्कत नहीं है। तब फिर लॉ एंड आर्डर इन्फोर्स करने की जरूरत ही क्या है? लंदन में ब्लास्ट हो गया, उसके पहले अमेरिका में ९/११ हो गया, तो यहां पर कुछ करने की कोई जरूरत नहीं है। पार्लियामेंट पर भी पहले हमला हो गया, तो इस विषय पर सोचने की क्या जरूरत है? राज्य में कुछ भी होता रहे, कोई परवाह करने की बात नहीं है।इस राज्य के बड़े ओहद पर जो राज्यपाल महोदय हैं, वे थ्री इन वन हैं[c24] ।
अभी उनके हाथ में शासन व्यवस्था है। वह मुख्यमंत्री के चैम्बर में बैठते हैं। वह राजभवन से भी राजकाज कर सकते थे लेकिन बाजाप्ता मुख्यमंत्री सचिवालय, जिस में कभी लालू जी बैठते थे, वहां जाकर बैठते हैं।
श्री राम कृपाल यादव (पटना) : दुर्भाग्यवश आपको भी कुछ दिन के लिए वहां बैठने का मौका मिला था।…( व्यवधान)
श्री नीतीश कुमार : अध्यक्ष महोदय, मैं भी वहां बैठा था। …( व्यवधान) 
अध्यक्ष महोदय: राम कृपाल जी बैठ जाइए। आप लोग सुनिए। मैंने पहले भी सब से विनती की थी।
In the morning, I made a request. During the discussion on the Adjournment Motion, we have had a very good and  structured discussion. So, let us have that now also. Hon. Members may please wait for their own turns. Please do not go to the support of Shri Nitish Kumar. He is very competent and nobody need to go and support him.
… (Interruptions)
अध्यक्ष महोदय: अच्छा भाषण होने दें।
                                                            …( व्यवधान) 
MR. SPEAKER: He is very competent. Shri Nitish Kumar, I want to hear you; please go on.
… (Interruptions)
श्री नीतीश कुमार : अध्यक्ष महोदय, राम कृपाल जी ने एक तथ्य का उल्लेख किया कि कुछ दिन के लिए मुझे वहां बैठने का अवसर मिला। इस प्रकार का राजकाज चलता रहेगा और ऐसे राज्यपाल वहां बरकरार रहेंगे, शायद वह अवसर देंगे जिससे हमें ज्यादा दिन वहां बैठने का अवसर मिल सके, जो प्रसन्नता की बात है। राज्यपाल महोदय को थ्री इन वन इसलिए कहा …( व्यवधान) 
अध्यक्ष महोदय: थोड़ी टोका-टाकी अच्छी है, लेकिन ज्यादा नहीं। नीतीश जी, आप चेयर को देखिए। मैं चाहे अच्छा दिखायी नहीं देता हूं लेकिन मेरी तरफ देखना होगा।
श्री नीतीश कुमार : मैं चेयर की तरफ देखूंगा। …( व्यवधान)   लेकिन कभी-कभी राम कृपाल जी को भी देखने से मना न किया जाए।
अध्यक्ष महोदय: कभी-कभी ही देखें।
श्री नीतीश कुमार : गवर्नर साहब का बयान है कि लंदन में ब्लास्ट होते हैं, सो वॉट। अगर पटना में दिन-दहाड़े हत्या होती है तो होगी, इससे यह ध्वनि निकलती है। अगर इस पद पर बैठे व्यक्ति, जिन के बारे में मैंने थ्री इन वन कहा, आजकल उनके स्पीकर साहब ने भी इस्तीफा दे दिया है, उनको फिर से प्रदेश कांग्रेस का अध्यक्ष बना दिया है। शकील साहब पीछे से हंस रहे हैं, उनको शायद बहुत प्रसन्नता नहीं होगी लेकिन वह बन गए। उनको लालू जी अध्यक्ष बनवाना चाहते थे इसलिए बना दिया। अब वह तीन जगहों पर हैं। इसके बाद इतनी बड़ी जवाबदेही की बात कह रहे हैं, तो वह बात मजबूती के साथ करनी चाहिए थी। वह देश के गृह मंत्री रहे हैं, इतने मजबूत गृह मंत्री रहे हैं कि अयोध्या का ताला खुलवा दिया था। उनके रहने के बाद इस तरह के बयान आए और वह कहें कि लंदन में ब्लास्ट होता है - सो वॉट। उनका कोट, अनकोट यह है “I do not want to contradict media reports that crime is on the rise. It is unfortunate that these things are happening.”   श्री शिवराज वि. पाटील : इसे एक दफा और आगे पढि़ए।
श्री नीतीश कुमार : इससे ज्यादा आगे पढ़ने की जरूरत नहीं है। But we are taking up crime as a challenge and taking strategies and mobilising resources to tackle it. क्या रिपोर्ट ले रहे हो, कैसे टैकल कर रहे हो लेकिन घटनाएं बढ़ रही हैं। आप ७ मार्च से लेकर २५ जुलाई के आंकड़े पेश करेंगे और कहेंगे।मैंने पहले ही जान कर आपके गवर्नर साहब के बयान को उद्धृत किया कि उन्होंने स्वयं स्वीकार किया है कि क्राइम बढ़ रहे हैं। यह हालत है। …( व्यवधान) 
SHRI SHIVRAJ V. PATIL: I think he will yield for which I am very thankful. He should read that statement again and try to convince us that his statement that ‘the crime is increasing’ emanates from that.
श्री नीतीश कुमार : हम यह बात पहले कह चुके हैं कि यह जवाब कहेंगे तो उसका अर्थ यह निकलेगा कि पहले जो हालत थी, उसमें आपका भी योगदान था क्योंकि वहां कांग्रेस-आरजेडी का शासन था। उसके बाद के आंकड़े पेश करेंगे, तो उसे मैं पहले ही आपके गवर्नर साहब की स्टेटमैंट के बाद कॉन्ट्राडिक्ट कर रहा हूं। मैं उसके ऊपर भी एतराज कर रहा हूं। आप इसे चैलेंज के रूप में स्वीकार कर रहे हैं। आप यह कह कर अपने को छिपाइए मत कि घटनाएं दूसरी जगहें भी घटती हैं लेकिन हर जगह लोगों को टैकल करना पड़ेगा। यह कहने से काम नहीं चलेगा। आज कोई घटना घट जाए, जैसे संसद पर हमला हुआ था, तो वह सब के लिए चुनौती है। अपराध पूरे समाज के लिए चुनौती है लेकिन जो सत्ता में बैठता है, सरकार चलाता है, उसकी जवाबदेही होती है। विपक्ष को सहयोग करना चाहिए। आपने विपक्ष से जो सहयोग मांगा है, वह मिला है लेकिन अपराध को चुनौती के रूप में स्वीकार करना चाहते हैं तो उसके लिए आपके पास स्ट्रैटेजी होनी चाहिए[R25]  ,कोई प्लान होना चाहिए और देखना चाहिए कि आप क्या कर रहे हैं, लेकिन उसे देखा नहीं। इसके अलावा आप बोलते जा रहे हैं कि हमारी स्ट्रेटजी है, हम इसको चैलेंज के रूप में ले रहे हैं। कौन से चैलेंज के रूप में ले रहे हैं? वहां पुलिस की क्या हालत है? क्या पुलिस की वहां ट्रेनिंग हो रही है? क्या पुलिस फोर्स के लोगों को यह अवसर मिल रहा है कि वे फायरिंग करें? उनकी फायरिंग की एक्सरसाइज नहीं होती है। वहां पर यह परंपरा है कि खाली खोखे जमा कर दो और उसमें शामिल होने की जरूरत नहीं है। बिहार की यह स्थिति है। गृहमंत्री जी आपको पता है कि वहां फायरिंग की एक्सरसाइज नहीं होती है। वहां पुलिस फोर्स और आम्र्ड फोर्स को समय समय पर फायरिंग की एक्सरसाइज नहीं कराएंगे, उनको मॉडर्न आम्र्स देंगे लेकिन ट्रेनिंग नहीं कराएंगे। कहां हैं ट्रेनिंग इंस्टीटयूट? बिहार में कहां ट्रेनिंग हो रही है? वहां राष्ट्रपति का राज है, पांच महीने में आप कह रहे हैं कि आप इसे चैलेंज के रूप में स्वीकार कर रहे हैं। वहाँ कौन सी स्थिति है, इसे आप कैसे और किस प्रकार से टैकल करना चाहते हैं। सबसे बड़ी बात है अगर अपराध पर नियंत्रण करना है तो अपराधी में भेद नहीं करना चाहिए। जो अपराध करता है उसके खिलाफ कठोर कार्यवाही करनी होती है। उसके साथ-साथ समाज में एक वातावरण बनाना पड़ता है लेकिन ऐसा कुछ नहीं हो रहा है। घटनाएं स्वयं गवाह हैं कि वहां पर अपराध की घटनाएं बढ़ रही हैं, अपराध के खिलाफ कोई वातावरण बनाने की कोशिश नहीं हो रही है। हाँ, वहां लोग जाग रहे हैं। कई जगहों पर लोग संगठित हो रहे हैं और अपराध का मुकाबला करने की कोशिश कर रहे हैं। हाल के दिनों में ऐसी कुछ घटनाएं घटी हैं जिन्हें एक नजरिए के तौर अगर सब जगह लोग अनुकरण करेंगे तो यह दूसरी स्थिति हो सकती है।
जहां तक लॉ एंड आर्डर का सवाल है, ऐसी कोई चीज़ वहां नहीं है, कानून नाम की कोई चीज वहां नहीं है, सिर्फ कानून नाम की चीज होना, लॉ एंड आर्डर की स्थिति ठीक होना, इस बात पर निर्भर नहीं करता है कि पुलिस वहां क्या करती है। लॉ एंड आर्डर को आप ठीक करना चाहते हैं लॉ एंड आर्डर से संबंधित आपने किस प्रकार से आईपीएस पोस्ट किए हैं? आप क्राइम को कंट्रोल करना चाहते हैं लेकिन जो अधिकारी क्राइम कंट्रोल करने में अहम भूमिका निभा रहे थे, जिनकी जनता के बीच में छवी बनी थी और सब लोगों ने तथ्यों के तौर पर देखा कि सिवान और गोपालगंज में जिन अधिकारियों ने अच्छा काम किया, आपने किस प्रकार से अधिकारियों को हटाया। आप यहां कलक्टर कान्फ्रेंस करते हैं। कलक्टर कान्फ्रेंस में प्रधानमंत्री जी भाषण देते हैं कि कलक्टर को ऐसा काम करना चाहिए, अधिकारियों को ऐसा काम करना चाहिए जिसमें निष्पक्षता झलके और हर प्रकार से काम ठीक ढंग से हो, जो डेमोक्रेसी का रूट है उसे मजबूत करिए। इसके अलावा आपने यह कहा कि फ्रीक्वेंट ट्रांसफर नहीं होना चाहिए लेकिन वहां क्या हो रहा है? एक तरफ कलक्टर की कान्फ्रेंस चल रही थी और दूसरी तरफ सीवान और गोपालगंज में कलक्टर हटाए जा रहे थे। वहां की कलक्टर कान्फ्रेंस में वहां के अधिकारियों ने पूछा और अधिकारियों ने पूछ कर कहा कि आखिर यह क्या हो रहा है? कितने दिनों से वे वहां पोस्टिड थे, कोई छ:-सात महीने से वहां पोस्टिड थे, आपने उनको हटाया। अभी आप लॉ एंड आर्डर की बात कहेंगे और अभी आपने हटा दिया। जो अधिकारी अच्छा काम कर रहे थे, उन अधिकारियों को हटाया गया और नौबत यहां तक आ गई कि जिस प्रकार से १७ आईपीएस अधिकारियों के स्थानांतरण की अधिसूचना जारी की गई थी उस वक्त वहां के मुख्य सचिव छुट्टी पर चले गए। पूरे देश के अखबारों ने लिखा है। अखबार वालों ने घेरते-घेरते मुख्य सचिव के मुंह से कई बातें पूछी, उन्होंने अपनी व्यथा-कथा सुनाई और कहा कि उन्हें नोटफिकेशन जारी करने से पहले दिखलाया नहीं गया। बिहार के रूल ऑफ एक्जीक्यूटिव बिजनेस का उल्लंघन किया गया, स्थानांतरण कर दिया गया। आपने सदन के अंदर बताया या नहीं लेकिन सदन के बाहर आप बता रहे हैं कि तीन आदमियों की कमेटी बनी थी। राज्यपाल महोदय ने भी कहा कि मुख्य सचिव छुट्टी पर चले गए उसके बाद यह बात बाहर आई । आप लोगों ने कहा कि तीन आदमियों की कमेटी बनी थी जिसमें चीफ सैकेट्री थे जबकि चीफ सैकेट्री ने उसका खंडन किया है।
अध्यक्ष महोदय, तीन सदस्यों की कमेटी टॉप अधिकारियों, आईपीएस अधिकारियों के ट्रांसफर और पोस्िंटग को लेकर बनी थी तो कमेटी की अधिसूचना कहां है? आदेश कहां है? अध्यक्ष महोदय, मैं आपसे आग्रह करूंगा कि आप गृहमंत्री जी को निदेशित करें, चाहे अध्यक्ष जी आपको निदेश न भी दें तो भी यहप्रोप्राइटरी है कि आप बताएं। एक बात आप बाहर करें कि कमेटी बनी है लेकिन चीफ सैकेट्री कह रहे हैं कि कमेटी नहीं बनी है[p26] । पूरे मीडिया को इस बात की खबर थी कि इस संबंध मेंकोई कमेटी नहीं बनी। सारे लोग इस बात का उल्लेख कर रहे हैं कि ऐसी कोई कमेटी नहीं बनी है। मैं अधिकारियों के बारे में इस तरह की अखबार की कटिंग नहीं दिखाना चाह रहा हूं। मैं केवल उद्धत करना चाहूंगा। चूंकि बहस लम्बी चलेगी, इसलिये अन्य माननीय सदस्य दिखा सकते हैं। मैं चीफ सैक्रेटरी की एक बात आपकी जानकारी में लाना चाहूंगा। चीफ सैक्रेटरी का ऑन रिकॉर्ड इंटरव्यू है, जो टाइम्स ऑफ इंडिया द्वारा पूछा जा रहा है। मैं उसके दो-तीन वाक्य बताना चाहूंगा :
“What prompted you to react so drastically against the Governor… the transfer of Sanjay, who had made life miserable for Siwan strong man and Lalu-aide … by his no nonsense policing…”   I do not want to take name.
 
MR. SPEAKER: Do not take name.
SHRI NITISH KUMAR : He replied:
“That was only the immediate reason.  The Chief Secretary of the State was being bypassed on all issues of governance.”               Sir, Shri Sanjay Ratna is one IPS Officer who was posted at Siwan as Superintendent of Police.  He was a very brilliant and brave officer.
             अध्यक्ष महोदय, चीफ सैक्रेटरी की नियुक्ति राष्ट्रपति शासनकाल में हुई, उसकी नियुक्ति पहले से नहीं हुई थी। उनका स्टेटमेंट है कि ट्रांसफर होना तो तात्कालिक कारण है लेकिन उसके पहले भीराज-कार्य के जितने इश्यूज. थे, उन में चीफ सैक्रेटरी को बाईपास किया जाता रहा है। बिहार में कौन सा रूल ऑफ एग्जीक्यूटिव बिज़नैस चल रहा है, पहले कहा जाता है कि हम कानून का राज्य स्थापित करना चाह रहे हैं। उसके बाद राष्ट्रपति शासन में एकाध मित्र कहते हैं कि हम कचड़ा साफ कर रहे हैं। राष्ट्रपति शासन में श्री संजय रतन, आई.पी.एस. अधिकारी को हटाकर कचड़ा साफ किया जा रहा है? वह अधिकारी अपनी बात पर अड़ रहे थे। इसके अलावा पटना के एक एस.पी. के बारे में कहा गया कि जब उसने डी.एस.पी. के उसकी कर्तव्यहीनता के लिये प्रताड़ित किया, तो उसने कहा कि इसका ट्रांसफर करा देंगे और फिर पटना एस.पी. का भी ट्रांसफर हो गया। क्या ऐसी स्थिति में कानून का राज चला रहे हैं? माननीय गृह मंत्री जी, आप इस सदन में क्या क्या बोलेंगे? कल दूसरे सदन में आप के द्वारा जो कुछ कहा गया, उससे हमें हिंट मिल गया।
श्री शिवराज वि. पाटील :  वही मैं यहां कहने वाला हूं, आप रहियेगा।
श्री नीतीश कुमार : वही आप यहां कहेंगे, मैं यहां रहूंगा, कहीं नहीं जाऊंगा। जब मुझे मोशन मूव करने का अवसर दिया है, तो जवाब का मौका भी देंगे। इसलिये मैं उस बात को उद्धृत न करके दूसरी बातें उद्धृत कर रहा हूं। मैं कुछ बातें उद्धृत करने के लिये अन्य सदस्यों पर छोड़ रहा हूं।
        अध्यक्ष महोदय, प्रश्न उठता है कि चीफ सैक्रेटरी छुट्टी पर क्यों गये? जब वह छुट्टी पर जाते हैं तो यह बात सार्वजनिक हो जाती है। अब चीफ सैक्रेटरी का बयान आ गया कि इस राज के रहते वह आने वाले नहीं हैं। जब चीफ सैक्रेटरी छुट्टी पर चले गये तो कोई कह सकता है कि उन्हें पब्लिक में नहीं बोलना चाहिये। क्या सरकारी अधिकारियों के लिये कोई नियम बना हुआ है, जिसका उल्लंघन किया गया हो? अगर उसका उल्लंघन किया गया होता तो सरकार तुरंत उस पर कार्यवाही करती लेकिन जब गवर्नर साहब ने कह दिया कि वह छुट्टी पर चले गये हैं, अगर वापस नहीं आते हैं तो कोई वैकल्पिक व्यवस्था करेंगे। राज्यपाल महोहय ने यह बात तो कह दी कि वह छुट्टी पर चले गये हैं, फिर उसके बाद क्या आप कोई एक्शन ले सकते हैं, लेकिन क्या एक्शन लेंगे। राज्यपाल महोदय प्रोटोकोल के सारे नियम तोड़कर कल प्रात: चीफ सैक्रेटरी से मिलने पहुंच गये। यह कौन सा राज चल रहा है? जब राज चलता है, तो उसकी साख होती है और राज की एक धाक होती है …( व्यवधान) 
श्री राम कृपाल यादव : क्या आप वहीं थे?
श्री नीतीश कुमार : यह खबर तो अखबारों में आई है। इसमें कोई कंट्राडिक्शन नहीं है। राम कृपाल जी, आप बाहर भले ही इस बात को सही कहेंगे लेकिन यहां हमें छेड़ने के लिए कह रहे है ।
अध्यक्ष महोदय  : राम कृपाल जी, अगर आपको इंटरवीन करना है तो अपनी जगह पर जाकर करना चाहिये ।
श्री नीतीश कुमार : अध्यक्ष महोदय, उसके बाद भी चीफ सैक्रटरी का बयान आया है कि गवर्नर साहब उनके यहां आये थे . …( व्यवधान)   
श्री राम कृपाल यादव : क्या गवर्नर ने एक्सैप्ट किया है ?
श्री नीतीश कुमार : हां, गवर्नर ने एक्सैप्ट किया है। चीफ सैक्रेटरी ने बाद में बयान भी दिया कि वह आने वाले नहीं हैं।
रेल मंत्री (श्री लालू प्रसाद) : क्या वह बड़े आदमी हैं, महान् हैं ?
श्री नीतीश कुमार :माननीय राज्यपाल तो महान् आदमी हैं। ये सब बातें अखबारों में छपी ह।
अध्यक्ष महोदय  : नीतीश जी, आप चेयर को एड्रेस करिये…( व्यवधान) 
श्री नीतीश कुमार : अध्यक्ष महोदय, इनके द्वारा हमें मैनडेट देने की कोई आवश्यव्ता नहीं…( व्यवधान) 
अध्यक्ष महोदय :  नीतीश जी ने यील्ड करने से मना कर दिया है। आप लोग इनसे पूछिये कि वह यील्ड करना चाहते हैं या नहीं?
श्री नीतीश कुमार : अध्यक्ष महोदय, इन लोगों के होते इस प्रकार का शासन चल रहा है और विपक्ष के नाते इनके कुशासन की बखिया उधेड़ना मेरा दायित्व और मेरा फर्ज है, और वह मैं करूंगा[RB27] ।
उस दायित्व को निभाने में अगर चीफ सैक्रेटरी एवीडैन्स के रूप में हमें मिलेगा तो हम उसका इस्तेमाल करेंगे। यदि कोई चीफ सैक्रेटरी या आई.ए.एस. अधिकारी अच्छा काम करेगा तो हम उसकी तारीफ भी करेंगे और यदि गलत काम करेगा तो उसकी निंदा भी करेंगे। यहां पर चीफ सैक्रेटरी ने यह बात कही है। हम माननीय गृह मंत्री जी से इसका जवाब चाहते हैं। एक चीफ सैक्रेटरी ने आरोप लगाया है और कहा है -
I was being by-passed on all issues of governance.  यह कोई मामूली बात नही है।…( व्यवधान) कौन सा रूल आपने चीफ सैक्रेटरी के अगेन्स्ट लागू किया। 
श्री राम कृपाल यादव : मुझे एक मिनट आपसे निवेदन करना है। अभी माननीय नीतीश कुमार जी बड़ा ओजस्वी भाषण कर रहे हैं, वह बहुत अच्छे ढंग से अपनी बात को रख रहे हैं। …( व्यवधान) 
MR. SPEAKER: This is an accepted method of debate.
श्री राम कृपाल यादव : मैं इनके संज्ञान में लाना चाहता हूं कि माननीय सदस्य श्री प्रभुनाथ सिंह जी इनके पीछे बैठे हुए हैं…( व्यवधान) 
अध्यक्ष महोदय : आप यह छोड़िये, यह अलाउड नहीं है।
श्री राम कृपाल यादव : इन्होंने गोपालगंज और सीवान के जिलाधिकारियों के संबंध में जो कहा है, वही माननीय प्रभुनाथ सिंह जी ने इसी सदन में आपसे मांग की थी कि वहां के जिलाधिकारियों को हटाया जाए, क्योंकि वे बहुत गड़बड़ी पैदा कर रहे हैं।…( व्यवधान) 
अध्यक्ष महोदय : जब वह बोलेंगे, तब आप बोलिये।
...( व्यवधान)
श्री नीतीश कुमार :  मैं अपने विचार यहां रख रहा हूं।…( व्यवधान)  
MR. SPEAKER: Shri Nitish Kumar, I have not allowed it.
(Interruptions) … *     * Not Recorded.
श्री नीतीश कुमार : इसके बारे में श्री कंग, चीफ सैक्रेटरी ने कोट और अनकोट जो कहा है, वह मैं उद्धृत करना चाहता हूं -
“Someone called me up and told me to direct Siwan SP, Shri Ratn Sanjay to hold a Press Conference announcing that he has sought  transfer on his own.” यह चीफ सैक्रेटरी कह रहे हैं कि उन्हें किसी ने फोन करके कहा कि आप सीवान के एस.पी., श्री रत्न संजय को कहिये कि वह प्रैस कांफ्रैन्स करके यह बात कहे कि उसने अपना स्थानान्तरण खुद ही चाहा है। इसके बारे में हम होम मनिस्टर साहब से जरूर जवाब चाहेंगे। यह कोई मामूली बात नहीं है। आपके चीफ सैक्रेटरी बोल रहे हैं, आपके प्रशासन तंत्र का सर्वोच्च व्यक्ति बोल रहा है। वहां राष्ट्रपति शासन है, कोई लोकप्रिय सरकार नहीं है। आप वहां का पूरे का पूरा व्यवस्थापन, संचालन अधिकारियों के माध्यम से ही करते हैं। सिर्फ संवैधानिक व्यवस्था को पूरा करने के लिए आप वहां के किसी काम के लिए संसद के प्रति जवाबदेह होते हैं, चूंकि संसद काम करने के लिए आपको पैसा देती है। यह संवैधानिक व्यवस्था है। इसलिए वहां के प्रशासन तंत्र के सर्वोच्च पद पर जो व्यक्ति बैठा है, उसके द्वारा यह कहा गया है। आम दिनों में कोई बात हो, लोकप्रिय सरकार के समय में कोई बात हो तो उसे टैकल करने के लिए नियम और कानून में अनेक रास्ते हैं। लेकिन इसमें उनके द्वारा यह बात कही जा रही है तो इस बारे में हम आपसे जरूर सफाई चाहेंगे कि यह क्या हो रहा है और किसके दवाब में हो रहा है। उन्होंने खुद कहा है, जो मैं उद्धृत नहीं करना चाहता कि किसी को राज्यपाल ने कहा कि उनके ऊपर दवाब है, तो क्या राज्यपाल महोदय दबाव में काम कर रहे हैं। दबाव में काम न करने की शपथ लेते हैं। शपथ का जो मजमून है, यहां दिया है। संविधान की किताब को उठाकर पढ़ लीजिए, उसमें लिखा है कि किसी के दबाव में काम नहीं करेंगे, किसी के भय से काम नहीं करेंगे, पक्षपात नहीं करेंगे, यही शपथ लेकर संवैधानिक पद को आप ग्रहण करते हैं। अगर कोई कहे कि हमारे ऊपर दबाव है, अगर दबाव में काम हो रहा है तो इससे ज्यादा अनर्थ की बात और कोई नहीं हो सकती है। इसलिए इसके बारे में भी आप बतायें कि किस प्रकार का दबाव है, किनका दबाव है। आप दबाव में हैं, आप अपनी सरकार को चलाने के दबाव में है, आखिर किस प्रकार का दबाव है। आपके अंदर का दबाव है या बाहर का दबाव है, किसका दबाव है, इसका खुलासा होना चाहिए। आखिर कौन आपको दबाव में रख रहा है, जिसके दबाव में वहां इस प्रकार से काम चल रहा है। अब आप कहेंगे कि हम लोग उसके खिलाफ चल रहे हैं। यह दबाव की जो बात है, यह किसने कही है[R28] ।

15.00 [h29]  hrs. “The CPI, the Communist Party of India of Bihar, charged the Governor with acting under “pressure of a political party” and demanded his recall.”     यह मांग सिर्फ हम नहीं कर रहे हैं। सीपीआई भी यही मांग कर रही है।

“The administrative incompetence and arbitrariness of the President’s rule has been exposed,” the CPI Secretary, Mr. Badri Narayan Lal said.”   The CPI (M), to which Shri Badudeb Acharia belongs, accused the Governor of throwing all norms, guidelines and moralities to the wind.

श्री मोहन सिंह (देवरिया) : माले?

श्री नीतीश कुमार : अभी हम माले पर नहीं आ रहे हैं।

“The administrative incompetence and arbitrariness of the President’s rule has been exposed,” the CPI Secretary, Mr. Badri Narayan Lal said.”   The CPI (M), to which Shri Badudeb Acharia belongs, accused the Governor for throwing all norms, guidelines and moralities to the winds. सीपीआई कह रही है कि दबाव में काम कर रहे हैं। सीपीआईएम कह रही है और सीपीआईएम की तरफ से कौन कह रहा है?

“Transfers of honest, dedicated and competent officers are being effected in violation of all guidelines,” a CPI(M) State Secretariat statement said.” इससे ज्यादा फॉर्मल तो कुछ नहीं होता सीपीआईएम के सिस्टम में। यह उऩका फ़ॉर्मल प्रैस स्टेटमैंट है। एक पार्टी सीपीआई कह रही है कि दबाव में काम कर रहे हैं, दूसरी पार्टी सीपीआईएम कह रही है कि सारे नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं और इस प्रकार से काम हो रहा है। यह सीपीआईएम कह रही है। अब यह तो स्वाभाविक है कि सीपीआईएमएल की प्रतक्रिया और भी तीखी होगी। मैं सीपीआईएमएल की बात को यहां उद्धृत नहीं कर रहा हूं क्योंकि सीपीआईएमएल यूपीए की मदद नहीं कर रही है, लेकिन सीपीआई और सीपीआईएम यूपीए की मदद कर रहे हैं जिनकी बदौलत ये राज कर रहे हैं। उनकी अगर बदौलत नहीं होती तो ये राज नहीं कर सकते थे। इसलिए वे क्या करते हैं, यह बहुत महत्वपूर्ण है। सवाल इसका नहीं है कि हम लोग बोल रहे हैं। सवाल यह है कि बिहार में हर कोई बोल रहा है। एक-एक आदमी की ज़ुबान पर है कि वहां का शासन इस प्रकार का है कि जिसमें कानून का पालन नहीं हो रहा है। और भी बहुत सारी बातें हैं जिनके बारे में मैं मुनासिब नहीं समझता हूं कि उन बातों का उल्लेख करूं। लेकिन हो सकता है कि कल आप चीफ़ सैक्रेटरी को मना लें। यहां से आप लोगों ने निर्देश दिया होगा कि कुछ भी करो लेकिन चीफ सैक्रेटरी को मनाओ, काम पर वापस लौटो। हो सकता है कि आप एडवाइज़र हैं, जो उनसे होम डिपार्टमैंट ले लें। हो सकता है कि होम सैक्रेटरी को बलि का बकरा बना दें, कुछ भी करें लेकिन आप रास्ता निकाल सकते हैं, जैसे आपने गुड़गांव के मामले पर रास्ता निकाल लिया। ४०० लोगों की जिस बुरी तरह से पिटाई हुई, उसके बाद खबर आई कि समझौता हो गया और बात खत्म हो गई। आप लोगों की कृपा से कोई समझौता कर लीजिए, उससे कोई फर्क नहीं पड़ता है। सवाल यह है कि वहां के चीफ सैक्रेटरी ने जो मुद्दे उठाए हैं, जो वहां की स्थिति है, उसका जवाब आपको देना होगा और लोगों को कनविन्स करना होगा कि आप ठीक से काम कर रहे हैं। हालांकि आप जितना भी कनविन्स करने की कोशिश करें, यह पता चलेगा कि कोई काम ठीक ढंग से नहीं हुआ है। वही तो आज पता चल रहा है। हम लोग तो पहले से ही जानते हैं कि आप कोई काम ठीक से कर ही नहीं सकते हैं। मुझे तो कभी कभी आश्चर्य होता है कि पाटिल साहब, आप किसी चीज़ के बारे में जब इतना बोलते हैं, आपको हमने कई अवतारों में देखा है। आज हम आपका राज्य सभा में दिया हुआ भाषण पढ़ रहे थे, वही भाषण आज आप यहां देंगे और हम सुनेंगे, इसमें कोई शक नहीं है। लेकिन मुझे अफसोस होता है। आपको हम लोगों ने किस-किस रूप में देखा है - इस आसन पर उपाध्यक्ष के रूप में देखा, फिर इसी आसन पर अध्यक्ष के रूप में देखा, फिर आपको देखा कि कितना नियमों और मर्यादाओं का ख्याल आप रखते रहे। क्या हुआ आपको? गृह मंत्री बनकर आप उन पद-चिहनों को भूल गए? क्या हुआ? इतनी कमज़ोरी आ गई आपमें कि सिर्फ उस गद्दी को बचाने के लिए आप वह सब कुछ कह रहे हैं जो आप शायद कहना नहीं चाहते हों। मुझे तो शक है। मेरा अभी तक इतना ज्यादा आपसे मोहभंग नहीं हुआ है कि हम यह मान लें कि आप ऐसा चाहते हैं। क्योंकि जिस दिन हमें पता चलेगा कि आप मन से यह काम कर रहे हैं लालू जी वाला, तो हमारा मोहभंग हो जाएगा, लेकिन अभी हमें लग रहा है कि आप लोग दबाव में हैं। २४ की ताकत है, बंधन में हैं इसलिए सब कुछ बोल रहे हैं। कल जो कुछ आप बोले, उसकी दो-तीन बातों का उल्लेख मैं कर रहा हूं।

SHRI SHIVRAJ V. PATIL:   Are you speaking about law and order situation or about individuals? … (Interruptions)

श्री नीतीश कुमार : लॉ एंड आर्डर और चीफ सैक्रेटी की बात हुई। आपका जो उत्तर है, उसके आधार पर हम कह रहे हैं। हमने देखा है और आपने भी कह दिया कि वही भाषण आप यहां रिपीट करेंगे[h30] ।

[i31]  उसी भाषण को माननीय गृह मंत्री जी यहां दोहराने वाले हैं, इसलिए इन बिंदुओं को यहां पर कवर करना जरूरी है।

श्री शिवराज वि. पाटील : राज्य सभा में जो भाषण दिया है, यहां पर उसके विरुद्ध नहीं बोलूंगा।

श्री नीतीश कुमार : मैं इसलिए कह रहा हूं क्योंकि मैंने वह भाषण पढ़ा है। उसे पढ़ कर हमें बहुत निराशा हुई है इसलिए उसका उल्लेख कर रहा हूं। 

अध्यक्ष महोदय : माननीय मंत्री ने अपना आसन छोड़ कर हमें मुसीबत में डाल दिया है।

श्री नीतीश कुमार : माननीय पाटिल साहब की बात मैं कह रहा हूँ। जब पिछली बार बिहार में राष्ट्रपति शासन अनुच्छेद ३५६ के तहत मंजूरी के लिए यहां पर प्रस्तावित किया गया था तो उसका जवाब देते हुए माननीय मंत्री जी ने कहा था, मैं इनके १९ मार्च के भाषण को इन्हें याद कराना चाहता हूँ। इनका भाषण इस प्रकार था “उपाध्यक्ष महोदय, मुझे बहुत खुशी, चुने हुए सदस्य और सभी लोग वहां मिलें और जितनी जल्दी हो सके वहां सरकार बनाएं। जितनी जल्दी वहां सरकार बनेगी हमें उतनी ज्यादा खुशी होगी। हम यहां खड़े हो कर यानि संसद में खड़े हो कर, वहां के चुने हुए सारे सदस्यों से अनुरोध करते हैं, यह पाटिल साहब का गृहमंत्री के रूप में आहवान था। हम यहां खड़े होकर वहां के चुने हुए सभी सदस्यों से अनुरोध करेंगे कि चुनाव के बाद अगर उनके द्वारा सरकार बनाई जा सके, वे मिलकर सरकार बना सकें तो इससे अच्छी बात नहीं हो सकती है और ऐसा करने का उन्हें प्रयास करना चाहिए।” इसके बाद उन्होंने २१ मार्च को राज्यसभा में कहा - …( व्यवधान) 

 मैं माननीय गृहमंत्री जी की बात को कोट कर रहा हूँ। यहां हिन्दी में और राज्यसभा में अंग्रेजी में।

“Sir, elections took place and, unfortunately, no political party could get a majority.  It was also not possible to see that more parties could come together and form the Government.  I think, one or two hon. Members made a mention about a minority Government.  Yes, in some cases, minority Governments were formed in the past and were continued, too.  But when we think of minority Governments, one of the most important points which we have to bear in mind is that the difference between the requisite majority and the minority should not be too big; only then it becomes possible.  And unfortunately, this situation also did not prevail in Bihar and, that is why, a minority Government could also not be formed.

             

            So, we would like to submit that in this situation, it became necessary for the Governor to recommend to the President that President's Rule be imposed in Bihar and President's Rule has been imposed in Bihar. But, I would like to make one point very clear.  We are not very happy to impose President's Rule in Bihar.  Let there be no doubt in the minds of any of the Members of the House; we are not happy.  After the elections, we would have been happy if the Government would have been formed by the elected representatives.  That was not possible and, that is why, President's Rule was imposed.  But we cannot take pleasure in saying, 'look, we did this'.  We are not happy about it. ”   आगे माननीय मंत्री जी जो कहते हैं वह महत्वपूर्ण है।

“I wish to assure this House that we would not like to see that President's Rule is continued for a long time."

प्रस्ताव उसी के लिए ला रहे हैं, लेकिन उस समय का भाषण इस प्रकार है "The sooner it disappears, the better it would be, for Bihar, for democracy and for the system that we are following in our country.  But who is take the steps in this respect? ”   Mr. Speaker, Sir, your indulgence is required.

“It is the elected representatives -- पाटिल साहब का उत्तर इस प्रकार है -- who have to take the steps in this respect.  The Governor can ask them and request them[r32] .”   “…I would also like to request in this House that the elected representatives should talk to each other…” आपकी कॉल है।

 

“…and create a situation in which it becomes possible for them to form a Government. Even if it is a minority Government with a slight margin, there is no problem.…” यह मार्च में, राज्य सभा में, गृह मंत्री के रूप में, आदरणीय शिवराज पाटिल जी का दिया गया बयान है। वे कह रहे हैं कि जो निर्वाचित प्रतनधि हैं, उन्हें आपस में बातचीत करनी चाहिए, मैं उनसे कहूंगा कि वे आपस में बातचीत करें और कोई रास्ता निकालें। जब वे आपस में बातचीत करते हैं, तो उसको हॉर्स ट्रेडिंग कहते हैं। …( व्यवधान) 

अध्यक्ष महोदय, देश के गृह मंत्री महोदय कह रहे हैं कि रिप्रजेंटेटिव आपस में बातचीत करें और यह नहीं है कि प्रयास नहीं किया गया। हम लोगों ने प्रयत्न किया है। एक नेता ने कहा कि बी.जे.पी. छोड़कर प्रयत्न करो, वह भी हमने किया। उसके बाद हमने कहा कि पत्र लिखेंगे । उन्होने कहा कि उसे रद्दी की टोकरी में फेंक देंगे। उसके बाद २ अप्रेल को हमने पत्र लिखा। गृह मंत्री जी के आहवान के बाद हमने भी पहल की और तब इंडिपेंडेंट लोगों ने मीटिंग की और १७ विधायकों ने मीटिंग कर के सुओ-मोटो समर्थन का ऐलान किया और प्रैस के माध्यम से उसे जारी किया। उसकी एक कॉपी उन्होंने हमारे यहां भी भेज दी। …( व्यवधान) 

अध्यक्ष महोदय : कृपाल यादव जी, आपकी पार्टी से भी कोई न कोई सदस्य बोलेंगे, तब आप अपनी बात कहिए। इस प्रकार बीच में मत टोकिए।

श्री राम कृपाल यादव : अध्यक्ष जी, माननीय सदस्य से मैं निवेदन करना चाहता हूं कि वह सारी सच्चाई बताएं। …( व्यवधान) 

श्री नीतीश कुमार : अध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्य को मालूम होना चाहिए कि हम काउ-डाउन होने वाले नहीं हैं। …( व्यवधान) 

अध्यक्ष महोदय :  श्री राम कृपाल यादव जी,  आपको भी बोलने का समय मिलेगा। तब आप अपनी बात कहिए। यदि इस प्रकार से आप इन्हें इंटरप्ट करेंगे, तो ये आपके भाषण के बीच में आपको टोकेंगे। इसलिए आप कृपया चुपचाप बैठें। Do not respond to that.

...( व्यवधान)

श्री नीतीश कुमार : आप क्या थे और आप क्या करते थे और आप कब आए थे और किस रूप में आए थे और आपको लालू जी चाहते थे कि नहीं और आपके बारे में उनकी राय क्या है ? …( व्यवधान) 

MR. SPEAKER: No personal comments.

श्री नीतीश कुमार : एक बात हम कहेंगे कि हमारे आर.जे.डी. के मित्र हमसे न उलझें। हमसे उलझने मे कोई फायदा नहीं होगा। …( व्यवधान) 

मानव संसाधन विकास मंत्रालय में राज्य मंत्री (श्री मोहम्मद अली अशरफ़ फ़ातमी) : आप बताएं, हम कहां से आए थे। आप फालतू बातें करते हैं। …( व्यवधान) 

MR. SPEAKER: Nothing will be recorded.

(Interruptions) …* * Not Recorded.

MR. SPEAKER: Nitishji, please. Let it be done in a proper, serious atmosphere.

श्री नीतीश कुमार : आपको तो ऐसी बातें करने की आदत है।…( व्यवधान) 

अध्यक्ष महोदय : फालतू बातें रिकॉर्ड में नहीं जाएंगी। मुझे तो वैसी बात करने की आदत नहीं है। इसलिए आप उनकी बात छोड़िए और अपनी बात बोलिए।

श्री नीतीश कुमार : हम डिरेल्ड होने वाले नहीं हैं। Take it for granted, I am not going to be derailed by anybody. आप अपनी बात बोलिए। बहस की यही ब्यूटी है। कभी-कभी थोड़ा बीच में हंसी-मजाक हो जाए, तो कोई हर्ज नहीं है, लेकिन सब्सटेंश्यली मत कीजिए।…( व्यवधान) 

श्री राम कृपाल यादव : अध्यक्ष महोदय, सबसे ज्यादा कमेंट्री तो माननीय सदस्य ही कर रहे हैं।

अध्यक्ष महोदय : थोड़ी बीच में बात हो गई, ठीक है। अब राम कृपाल जी आप बैठिए। नीतीश कुमार जी आप अपना भाषण जारी रखिए।

श्री नीतीश कुमार : आपका आहवान था। १७ निर्दलीय विधायकों ने सुओ-मोटो ऐलान किया, लेकिन हमने अपनी तरफ से कहा कि हम इनीशियली बी.जे.पी. को छोड़कर अभी तक प्रयास कर रहे थे। इसलिए हम उसे ड्रॉप करते हैं। …( व्यवधान) 

MR. SPEAKER: Only Shri Nitish Kumarji’s bhasan will be recorded.

श्री नीतीश कुमार : चूंकि यह विचारधारा दूसरी तरफ से आई थी, इसलिए उस पर हमने काम किया। यदि विधायक स्वयं हमारे पास आकर नई परिस्थितियों का उल्लेख करेंगे, तो उसके मुताबिक हम काम करेंगे। यह बात हमने ९ अप्रेल, २००५ को कही कि १७ इंडिपेंडेंट, और ९२ एन.डी.ए. को मिलाकर कुल १०९ हो गए[rpm33] ।

इसके बाद जो आपका आहवान था, उस आहवान के बाद विधायकों की आपस में बातचीत शुरू हुई। लोक जनशक्ति पार्टी के विधायक भी आपस में बात करने लगे। आपस में बात करके वे किसी नतीजे पर पहुंच रहे हैं और कल कहा है कि हमने टेलीविजन पर देखा तो हम पाटिल साहब से जानना चाहते हैं, आपने दो बातें कही हैं। एक बात तो कही है कि टेलीविजन पर हमने देखा कि खरीद-फरोख्त हुई, होर्स ट्रेडिंग की बात कही, हिन्दी में उसे खरीद-फरोख्त ही कहते हैं, टेलीविजन पर ही देखा, कोई प्रमाण की बात नहीं है, सब ने, दुनिया ने टेलीविजन पर देख लिया कि होर्स ट्रेडिंग हो रही है, यह आपने कहा। दूसरी बात आपने कही कि एन.डी.ए. का दावा कहां था। ये दोनों बातें आपने कहीं। टेलीविजन पर आपको सिर्फ आपके मतलब की चीज दिखाई पड़ती है, दूसरे के मतलब की चीज दिखाई नहीं पड़ती है। उसी टेलीविजन पर आया कि कल एन.डी.ए. दावा करने वाला है तो अगर आप टेलीविजन की बात पर ही जाते हैं तो टेलीविजन की बात को ही अगर एवीडेंस मानते हैं और उसी को सच मानते हैं और उसी के आधार पर केबिनेट जैसी महत्वपूर्ण संस्था में निर्णय लेते हैं, अगर यह बात है तो फिर दूसरा आरोप आपको नहीं लगाना चाहिए कि उन्होंने दावा पेश नहीं किया, क्योंकि दावा पेश होने वाला था, यह टेलीविजन पर आ गया था। अब रही बात कि टेलीविजन पर आपने क्या-क्या देखा। टेलीविजन पर तो लोगों ने यह भी देखा कि जब वहां के लोगों को चार्टर्ड फ्लाइट से विधायकों को लाया गया, यह भी टेलीविजन पर लोगों ने देखा और जब यह टेलीविजन पर देखा और आप कहते हैं कि आपस में बातचीत झारखण्ड में क्यों हुई। झारखण्ड में हुई, झारखण्ड कल तक बिहार का हिस्सा था और आज तक भी इमोशनली बिहार और झारखण्ड के लोग उस प्रकार से अलग नहीं हुए हैं, लेकिन खैर झारखण्ड चले गये। आप कहते हैं, वे विधायक चले गये और वहां बातचीत कर रहे थे। आप कहां उठाकर लाये? पटना से उठाकर विधायकों को दिल्ली ला रहे थे और वह सब देखा और उन विधायकों में अध्यक्ष महोदय, जिनको ये उठाकर लाये, इससे ज्यादा उठाकर लाने का क्या प्रमाण है कि उनमें से दो विधायक बाद में राष्ट्रपति महोदय के यहां जो परेड हुई, उसमें शामिल हुए, जिनको ये उठाकर लाये थे तो वे कहां थे और पूरा का पूरा इनका लोजिक टेंथ शैडयूल पर है कि जितने मैम्बर्स थे, उसके हिसाब से वे इन्वाइट करते हैं। टेंथ शैडयूल में डिफरेंट प्रोवीजन को इन्वाइट करते और उसके चलते उनकी सदस्यता चली जाती। कहां-कहां एकदम जो Figment of imagination है यानि टेंथ शैडयूल के इम्प्लीमेंटेशन का भी अधिकार भारत सरकार ने, यानी राज्यपाल ने ले लिया? टेंथ शैडयूल का इम्प्लीमेंटेशन जब होगा तो उसके लिए उसमें व्यवस्था है। आप खुद अध्यक्ष रहे हैं, स्पीकर रहे हैं, आपने खुद मामले को डिसाइड किया हुआ है। आपने चाहे जितना समय लिया हो, लेकिन उस मामले को डिसाइड किया है तो मामले को डिसाइड करने का अधिकार स्पीकर को है। आपने यह अवसर किसी को कहां दिया?

आप झारखण्ड की बात करते हैं तो हम पूछना चाहते हैं कि जून, २००२ में महाराष्ट्र के विधायकों को उठाकर मैसूर और इन्दौर क्यों ले गये थे? आप कहां ले गये थे? उस समय की भी रिपोर्टें हैं।

आप जब कहेंगे, हम समाप्त कर देंगे, लेकिन कुछ तथ्य हैं। बार-बार इस बात को कहा जाता है कि झारखण्ड ले गये। “Maharashtra MLAs holidaying in Mysore” -   “The Hindu Tuesday dated June 11, 2002” ये महाराष्ट्र के एम.एल.एज़. थे, ये मैसूर कहां चले गये? उसके पहले कहां पहुंचे, भोपाल से न्यूज़ है, इन्दौर पहुंचे, कहां-कहां पहुंचे, जहां भी पहुंचे, लेकिन राज्य के बाहर पहुंचे। उसके बारे में आपकी क्या राय है, वह क्या था? वह क्या टाइगर ट्रेडिंग थी, अगर होर्स ट्रेडिंग नहीं थी? जब प्रधानमंत्री जी रणथम्भौर बाघ देखने के लिए गये थे तो वहां उन्होंने बयान दिया, “worst kind of horse-trading” मुझको हंसी आई कि वहां बाघ देखने गये थे और इनको घोड़ा दिखाई पड़ रहा है। सुबह उनको रणथम्भौर जाना था, रात में केबिनेट की मीटिंग हो रही है और बाहर कहा जा रहा है, सिनेमा हॉल में ब्लास्ट हुआ। अन्दर आप लोग बिहार की विधान सभा को उड़ा रहे थे और आप होर्स ट्रेडिंग कहते हैं।

गृह मंत्री जी, मैं पूछना चाहता हूं कि अगर आपके आहवान पर लोक जनशक्ति पार्टी के इतने ही विधायक एन.डी.ए. को छोड़कर आर.जे.डी. के सामने खड़े होते तो क्या आप इसको होर्स ट्रेडिंग कहते? उस समय कन्वीनिएंटली इसको कहते कि हमने जो बातचीत का आहवान किया था, इन्होंने लोगों से बातचीत की। चूंकि एन.डी.ए. के पक्ष में उनका फैसला जा रहा था, चूंकि वे एण्टी आर.जे.डी. मैनडेट पर जीतकर आये थे - ऐसा नहीं है। सारा देश जानता है, पूरा बिहार जानता है कि आप लोगों ने प्रयास किया और प्रयास करते-करते थक गए। सुओ मोटो उन्होंने निर्णय लिया। यह बात मत कीजिए और कोई भी बात कीजिए। अगर विधायक एनडीए का समर्थन करते हैं तो हार्स ट्रेडिंग होती है और आपके साथ आने की बात करते हैं तो रि-एलाइनमेंट हो रहा है, धर्मनिरपेक्षता की बात हो रही है। बोम्मई केस में सुप्रीम कोर्ट ने अपना निर्णय दिया हुआ है।अगर आपको लगा कि हार्स ट्रेडिंग हो रही थी, यह जरूरी नहीं है कि किसी को बहुमत मिलता, एक्सवाईजेड कोई भी नेता होता, आप उसको मौका देते। विधानसभा में उसे मौका देने के लिए राज्यपाल के पास पूरा अवसर होता है, वह एक-एक विधायक से पूछते कि क्या आपको प्रलोभन दिया गया है, क्या आपको खरीदा गया हैै?…( व्यवधान) 

श्री रघुनाथ झा (बेतिया) : आपने तो कभी क्लेम ही नहीं किया था। जिसने क्लेम किया, उसे आपने रोकने का प्रयास किया…( व्यवधान) 

श्री नीतीश कुमार : बात यह है कि पिछली बार ये हमारे साथ थे, इसलिए हमने क्लेम किया था, इस बार आरजेडी में चले गए हैं, इसलिए बताने वाला कोई नहीं रहा। पहले वह अध्यक्ष थे और अध्यक्ष ही क्लेम करता है। इस बार ये थे ही नहीं तो क्लेम कौन करता? …( व्यवधान) 

महोदय, राज्यपाल की क्या भावना ह? राज्यपाल के पास यदि कोई क्लेम करने आएगा क्या तभी सरकार बनेगी? सरकार बनाने के लिए चुनाव होते हैं। राज्यपाल ने क्या किसी पार्टी को बुला करके पूछा? उनके पास पर्याप्त अवसर था, जब कोई दावा करने आता तो वे कहते कि विधायकों से अलग से मिलूंगा। उन्हें कौन रोक सकता था? संविधान के मुताबिक यह उनका अधिकार बनता था। वह बुलाते और उनसे बात करते, अगर उन्हें लगता कि ऐसा हुआ है तो वह उसी समय मामला दायर करते और कहते कि खरीद-फरोख्त से हुआ है। हमें नहीं बुलाते किसी को अवसर देते, लेकिन यह अवसर नहीं दिया गया। किसी को दावा करने का भी अवसर नहीं दिया गया और बाद में कहते हैं कि दावा ही नहीं किया गया। क्या राज्यपाल का काम नहीं है बुला करके बात करना, बुला करके पूछना?आज खरीद-फरोख्त और एंटी डिफेक्शन लॉ की बात की जा रही है। मैं गृहमंत्री जी के गृहराज्य की बात करता हूँ। लेकिन उन्हें तो रेलमंत्री जी बातों में उलझाए हुए हैं।…( व्यवधान) 

अध्यक्ष महोदय : आप इसे इग्नोर कीजिए, यह रिकॉर्ड में नहीं जाएगा।

श्री नीतीश कुमार : हम किसी को भी इग्नोर कर सकते हैं लेकिन गृहमंत्री जी को कैसे इग्नोर कर सकते हैं, उन्हें ही तो जवाब देना है।यूपीए में लोग इग्नोर करते होंगे लेकिन हम इग्नोर नहीं कर सकते हैं। …( व्यवधान) 

अध्यक्ष महोदय : आप मेरे माध्यम से इग्नोर कीजिए।

श्री नीतीश कुमार : महोदय, मैं आपके माध्यम से इनसे पूछना चाहता हूँ कि कांग्रेस पार्टी यह लेक्चर दे रही है और श्री शिवराज पाटिल साहब बता रहे हैं कि हार्स ट्रेडिंग हुई। फिर महाराष्ट्र में क्या हुआ, शिवसेना के टूटे हुए नेता श्री नारायण राणे जी को किस बिना पर आपने सरकार में शामिल किया है?…( व्यवधान) 

श्री शिवराज वि. पाटील : वे अपनी पार्टी से रिजाइन करके आए हैं।

श्री नीतीश कुमार : जो भी हो, आपने तुरन्त किया। प्रलोभन और क्या होता है, आप इस्तीफा दे दीजिए।   महोदय, ये सब तकनीकी बातें हैं। नीयत की बात पर बहस होनी चाहिए। देश में जब तक नीयत नहीं सुधरेगी, ये तकनीकी बातें लोग अपनी मर्जी से बोलते रहेंगे। जरूरत है नीयत सुधारने की। हम सबको मालूम है कि सरकार की नीयत ठीक नहीं है…( व्यवधान) 

श्री शिवराज वि. पाटील :  नरेन्द्र देव जी ने भी ऐसा ही किया था…( व्यवधान) 

श्री नीतीश कुमार : आप विपक्ष के किसी गठबन्धन को मौका नही देना चाहते हैं, आप बर्दाश्त नहीं कर सकते हैं। आपको लोकतंत्र में यकीन नहीं है। रात के १२ बजे इस देश पर इमरजेंसी ठोकने वाले आप लोग हैं, इसलिए आपसे बर्दाश्त नहीं होता है कि कोई और दूसरा राज करे। कोई जरूरी नहीं था कि हम लोगों की सरकार बनती। राज्यपाल के हाथ में यह अख्तियार था, लेकिन यह अवसर किसी को नहीं दिया गया। लोकतंत्र का गला घोंटा गया और यह आपके गले की फांस बना और बनेगा। हमने कल राष्ट्रपति जी से बात की है और बाहर भी कहा है कि ऐसे राज्यपाल को हटाया जाए, लेकिन मुझे मालूम है कि आप उन्हें नहीं हटाएंगे। हम लोगों के लिए राजनीतिक तौर पर कोई नुकसानदेह नहीं है। ऐसे राज्यपाल के लिए वहां बने रहना, विधानसभा का विघटन किया जाना, सरकार बनाने का अवसर न दिया जान। ७९ दिनों के अंदर मुख्य सचिव को बाइपास करके काम करना, किस प्रकार का राज चल रहा है? अच्छे अधिकारियों को प्रताड़ित करना और जो बिना सहारे के चल नहीं सकते हैं, दौड़ नहीं सकते हैं, ऐसे लोगों को महत्वपूर्ण जगहों पर पदस्थापित करना, जिस प्रकार का राज आप चला रहे हैं, ऐसा राज आपको मुबारक हो। आप ऐसे राज्यपाल को रखिए, वह आपके ताबूत की आखिर कील साबित होगा। इस बहस के बाद फिर हम लोग मिलेंगे।[MSOffice34]  आप एक्सटैंशन करना चाहते हैं। इतनी जल्दी थी। रात में आप कैबिनेट मीटिंग बुलाकर भंग करते हैं तो तत्काल चुनाव क्यों नहीं करवाए। क्यों नहीं जुलाई में चुनाव करवाए? यह कहा गया कि जुलाई में बाढ़ आएगी। इलैक्शन कमीशन की टीम जाती है। हर जगह, हर जिले से एक ही रिपोर्ट आती है कि बाढ़ आ जाएगी, बाढ़ आ जाएगी। कहां बाढ़ आई। हमने इलैक्शन कमीशन से मुलाकात करके बार-बार कहा कि कोई बाढ़ नहीं आएगी। आपको डाक्टर्ड रिपोर्ट दी जा रही है। लेकिन यही डाक्टर्ड रिपोर्ट और आज २ अगस्त को हम चर्चा कर रहे हैं। कहां बाढ़ आई। जुलाई में चुनाव हो सकता था। इस बहस की कोई जरूरत नहीं पड़ती। वहां पौपुलर गवर्नमैंट इंस्टॉल होती। अगर आपका दावा है कि आपकी लोकप्रियता में कोई ह्रस नहीं होता तो आप सरकार बनाते, जबकि यह प्रतिकूल है, आप वहां सरकार नहीं बना सकते थे। जनता को अवसर मिलता, एक लोकप्रिय सरकार बनती और लोकप्रिय सरकार के लिए ही लोकतंत्र है। लोकतंत्र चलने के लिए आवश्यक है कि लोकप्रिय सरकारें हों और मिल-जुलकर, बात करके ही सरकार बनाते हैं। आपने यहां सरकार बनाई। चुनाव से पहले कोई यूपीए नहीं था। आपने यूपीए बनाया, लैफ्ट ने आपको बाहर से सपोर्ट किया, ४० मैम्बर रहते हुए समाजवादी पार्टी आपको टुकुर-टुकुर देख रही है, आप मलाई चाब रहे हैं और वह बाहर से समर्थन कर रही है। १७ मैम्बर्स की सुश्री मायावती आपको समर्थन दे रही हैं, इस परिस्थिति में। हम कहें आपको। यह किस खरीद-फरोख्त पर बनी। यह मिलते हैं तो बातचीत और अगर हम मिलते हैं तो खरीद-फरोख्त। वाह, क्या तरीका है। लोकतंत्र की नई-नई परिभाषाएं लिखी जा रही हैं, उसमें नए-नए आयाम जोड़े जा रहे हैं। इसलिए अध्यक्ष महोदय, मेरी दरख्वास्त है कि हमारे मोशन को सदन स्वीकार करे और चिन्ता प्रकट करे। माननीय गृह मंत्री जी ने जो प्रस्ताव रखा है, उसे रिजैक्ट कर दें।

अध्यक्ष महोदय : चेयर को तो सपोर्ट कीजिए, चेयर के बारे में कुछ अच्छा बोलिए।

श्री नीतीश कुमार : अध्यक्ष महोदय, आपने बोलने का मौका दिया। आपके बगैर तो संभव ही नहीं था। आपने ही इसे ऐडमिट किया, इसलिए चर्चा हुई।

MR. SPEAKER: Thank you.

            आपको ५७ मिनट दिए हैं। आपने बहुत अच्छा भाषण दिया।

Motions moved:

 
“That this House expresses its deep concern over the deteriorating law and order situation in the State of Bihar under President’s rule and also on the situation arising out of the Chief Secretary of the State proceeding on long leave. ”   “That this House approves the continuance in force of the Proclamation, dated the 7th March, 2005 in respect of the State of Bihar, issued under article 356 of the Constitution by the President, for a further period of six months with effect from the 7th September, 2005.  ”   श्री नखिल कुमार (औरंगाबाद, बिहार) : अध्यक्ष महोदय, गृह मंत्री जी ने जो मोशन दिया है, मैं उसके समर्थन में बोलने के लिए खड़ा हुआ हूं। इससे पहले कि मैं समर्थन में कुछ बोलूं, अभी बिहार के राज्यपाल जी के बारे में और वहां के मुख्य सचिव के छुट्टी पर चले जाने के बारे में जो चर्चा हुई, उसके बारे में मैं कुछ कहना चाहता हूं।…( व्यवधान)
MR. SPEAKER: Please listen to him.
श्री नखिल कुमार : आजकल बिहार में राष्ट्रपति शासन लगा हुआ है, यह सबको पता है। राष्ट्रपति शासन में दो सलाहकार हैं - एक मुख्य सचिव और एक भूतपूर्व (अवकाश प्राप्त) मुख्य सचिव। उन दोनों के बीच विभागों का बंटवारा हुआ है। भूतपूर्व मुख्य सचिव, जो आजकल अवकाश प्राप्त हैं, उनको गृह विभाग मिला है। यह गृह विभाग की जिम्मेदारी है कि जिला अधीक्षक पुलिस या दूसरे पुलिस अफसरों की अदला-बदली के बारे में प्रस्ताव बनाए और कम्पीटैंट अथॉरिटी की स्वीकृति के आडर्स ले। मैं यह बात जरा तफसील से इसलिए कह रहा हूं कि हम समझ लें कि क्या वे हालात थे जिनमें मुख्य सचिव को छुट्टी पर जाने के लिए बाध्य होना पड़ा। कुछ दिनों से चर्चा चल रही थी कि एसपी लोगों की बदली होनी हैं और यह अटकलें लग रही थीं कि कौन कहां से कहां जाएगा। जब यह बात तकरीबन खत्म होने पर आई यानी कोई निर्णय लिया गया, उसके बाद जैसी प्रक्रिया है, जो सम्बद्ध संचिका है, उसे राज्यपाल जी के पास जाना चाहिए था। संचिका राज्यपोल जी के पास किसकी तरफ से जानी चाहिए lÉÉÒ[R35] ।
वह उस विभाग की तरफ से जानी चाहिए थी जो संबद्ध है यानी गृह विभाग। जब सारी बातें पूरी हो गयीं और कौन कहां जायेगा, इसका फैसला हो गया तो उस फैसले को लेकर जो संचिका बनी, उसे गृह विभाग ने अपने सलाहकार के पास भेजा। सलाहकार साहब ने उसे मुख्य सचिव के जरिये राज्यपाल के पास भेजना था लेकिन वह उनके जरिये नहीं गयी। लेकिन यह जानना जरूरी है कि यह संचिका डायरेक्टली क्यों राज्यपाल के पास चली गयीऔर मुख्य सचिव को क्यों इस लूप से निकाल दिया गया?   क्या मुख्य सचिव यह जानते थे कि इस तरह की कोई चर्चा हो रही है और पोस्िंटग और ट्रांसफर के जो प्रपोजल्स हैं, उन पर उनकी कोई राय ली गयी या नहीं ? 
15.31 hrs. (Shri Arjun Sethi in the Chair) सभापति महोदय, अखबारों में जो खबरें आई हैं, उससे पता लगता है कि मुख्य सचिव जी एक चार सदस्यीय कमेटी के सदस्य थे। उस चार सदस्यीय कमेटी में एक मुख्य सचिव थे। दूसरे, एडवाइजर साहब थे। तीसरे डायरेक्टर जनरल पुलिस और चौथे होम सैक्रेट्री थे। अखबारों में यह खबर निकली है कि इस कमेटी ने उस पर चर्चा की और बहुत चर्चा के बाद उन्होंने एक तालिका बनाई कि कौन कहां जायेगा। उस तालिका का आगे क्या हश्र हुआ, उस बारे में हमारा जानना जरूरी है कि मुख्य सचिव जी ने उस संचिका को अपने पास मंगवाया या नहीं ?  खबरों से पता लगता है कि यह फाइल उनके पास नहीं गयी। अखबारों में यह खबरें भी आयीं कि गवर्नर साहब ने इस संचिका को देखा ही नहीं और उसके पहले ही ट्रांसफर के आर्डर्स इश्यू हो गये।

सबसे गंभीर बात यह है कि बगैर राज्यपाल जी की स्वीकृति के ये आर्डर्स कैसे इश्यू हो गये। उसके लिए जवाबदेही फिक्स करनी चाहिए। अगर यह जवाबदेही फिक्स करनी है तो ऐसा अऩुमान लगता है, अखबारों में जो खबरें आई हैं, उसके आधार पर मैं कह रहा हूं कि गृह सचिव को कह दिया कि आप छुट्टी पर चले जाओ यानी गृह सचिव ने वह काम किया ही नहीं जो उनको करना चाहिए था। उनको प्रक्रिया के मुताबिक संबंद्ध मनिस्टर की फाइलें गवर्नर साहब के पास मुख्य सचिव के थ्रू भेजना, जो उन्होंने नहीं भेजीं। मैं समझता हूं कि इसमें अगर किसी की जिम्मेदारी फिक्स करनी है, तो वह बिहार सरकार के होम सैक्रेट्री हैं। अगर मुख्य सचिव जी छुट्टी पर चले गये हैं, तो मैं समझता हूं कउनसे पूछना जाना चाहिए कि वे किस बात से नाराज हैं। अगर वे इस बात से नाराज हैं कि उनको कंसल्ट नहीं किया गया तो अखबारों में जो खबरें छप रही हैं कि चार सदस्यीय समति के वे सदस्य थे और उनकी बात उसमें ली जाती थी, उनसे मशविरा लिया जाता था तो फिर किस स्टेज पर उन्होंने समझा कि उनको कंसल्ट नहीं किया गया। यह बात तफसील से जानने की जरूरत है क्योंकि यह बहुत गंभीर मामला है। किसी भी प्रदेश के मुख्य सचिवऐसे ही छुट्टी पर नहीं चले जाते। उनके जाने का कोई कारण होता है और यह कारण क्या था ?  अगर वे यह कहते हैं कि उनको इस बारे में कोई सूचना नहीं थी, तो वह सूचना कैसे नहीं थी ?  वे उस चार सदस्यीय समति के सदस्य रहे हैं और उस समति ने एक दिन नहीं कई दिनों तक लगातार इस पर चर्चा की है। वैसे राज्यपाल जी के बारे में अगर हम इस सदन में चर्चा करें तो नियमों के अनुसार उसके लिए दस पहले नोटिस दिया जाता है। इसलिए मैं उनकी चर्चा नहीं करूंगा और न करना चाहूंगा। लेकिन अपने आप में यह बात अनूठी जरूर है कि चीफ सैक्रेट्री यह समझें कि उनके थ्रू यह फाइल नहीं गयी इसलिए वे छुट्टी पर चले जायें। यह उनका अपना व्यूह है।

मैं होम मनिस्टर साहब से अपील करूंगा कि वे जवाब के समय इस बात पर प्रकाश डालें कि मैंने जो कुछ कहा है, वह सही है या अखबारों में जो खबरें छप रही हैं, वे सही हैं और ऐसे ही कभी राज्यपाल, कभी एडवाइजर या कभी किसी और पर छींटाकशी होती रही हैं। अगर यह बात सही है तो इसकी जवाबदेही गृह सचिव पर होनी चाहिए। यह मेरा अपना मानना है कि इसमें राज्यपाल की इन्वाल्वमैंट नहीं लगती। …( व्यवधान) 

श्री खारबेल स्वाईं (बालासोर) : उस नोटीफिकेशन पर साइन किसने किये ? …( व्यवधान)   जब चीफ सैक्रट्री नहीं जानते थे तब नोटफिकेशन कैसे इश्यू हुआ ? …( व्यवधान)

MR. CHAIRMAN : Mr. Swain, please take your seat. Nothing will go on record except what Shri Nikhil Kumar Choudhary says.

(Interruptions) … * श्री नखिल कुमार : मैं यह कह रहा हूं कि यह बात जानी चाहिए कि नोटफिकेशन कैसे इश्यू हो गया ? जैसा कि अखबारों से खबर मिलती है कि संचिका वापस गृह मंत्रालय में नहीं आई थी और नोटफिकेशन इश्यू हो गया। यह क्यों हुआ और किसके कहने पर हुआ और उसके लिए जिम्मेदारी किस पर ठहरायी जानी चाहिए ? जब तक कि गवर्नर के सिगनेचर किसी संचिका पर नहीं हो जाते, उसकी स्वीकृति को नहीं माना जा सकता। जब तक वह फाइल वापस नहीं आती है और फिर भी अगर यह नोटफिकेशन इश्यू हो गया है, कैसे इश्यू हो गया, इस बात पर मैं माननीय गृह मंत्री जी से अनुरोध करूंगा कि इस बारे में वह जरूर कुछ प्रकाश डालें क्योंकि यह अजीब सी बात है कि जो प्रक्रिया है, जो रूल्स ऑफ बिजनैस है, उस का उल्लंघन हुआ है और हम लोग उसके लिए किसी पर जिम्मेवारी नहीं डाल रहे हैं। …( व्यवधान) 

MAJ. GEN. (RETD.) B. C. KHANDURI (GARHWAL): Can he yield for a moment? तब आपने यह भी पढ़ा होगा कि माननीय गवर्नर साहब ने अखबारों में कहा है, टी.वी. में कहा है कि यह मेरा निर्णय है और मैं इसे नहीं बदलूंगा। यह कहने की क्या आवश्यकता थी अगर यह उनका निर्णय नहीं था ? …( व्यवधान) 

श्री नखिल कुमार : देखिए,बात यह है कि गवर्नर साहब ने यह जो भी कहा, किस स्टेज पर कहा, यह आप भी जानते हैं और मैं भी जानता हूं।…( व्यवधान) 

MR. CHAIRMAN: Shri Khanduri, please take your seat.

… (Interruptions)

मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) भुवन चन्द्र खंडूडी : फिर आपने अखबारों का जिक्र क्यों किया ?…( व्यवधान) 

श्री नखिल कुमार : यह सही बात है। गवर्नर साहब का अखबारों में बयान आया, इसीलिए मै कह रहा हूं कि मुझे इस बात की अन्दरूनी खबर नहीं है। जो अखबारों से खबर पता लगी है, वह मैं बता रहा हूं और * Not Recorded.

हमारे माननीय गृह मंत्री जी को इस बात की पूरी जानकारी होनी चाहिए थी और होगी, मैं जानता हूं कि उन्हें जानकारी होगी। वह इस पर जरूर प्रकाश डालें कि क्या वाकई वह संचिका जो गवर्नर साहब के पास मुख्य सचिव के जरिए जानी चाहिए थी, वह गई कि नहीं गई ?  अगर नहीं गई तो क्यों नहीं गई और किसके कहने पर नहीं गई ? इसके लिए किसको जिम्मेवार ठहराया जाना चाहए ?

SHRI SHIVRAJ V. PATIL: Sir, is it necessary for us to discuss the transfers in a State? If the Parliament is going to discuss and decide how the transfers have taken place, well let it be in that shape then we will discuss.  We are discussing whether the President’s Rule should be continued or not and law and order.  While discussing law and order, we are discussing individuals, we are discussing transfers… (Interruptions)

MAJ. GEN. (RETD.) B. C. KHANDURI : He is talking about accountability… (Interruptions)

MR. CHAIRMAN: Please sit down. 

… (Interruptions)

श्री सुशील कुमार मोदी (भागलपुर) : मैं केवल यह कह रहा हूं कि जो मोशन मूव हुआ है,…( व्यवधान) 

MR. CHAIRMAN: After Shri Nikhil Kumar, you will speak.  When your turn comes, certainly you will speak, Shri Modi श्री सुशील कुमार मोदी : मैं केवल यह कह रहा हूं कि जो मोशन मूव हुआ है, उसमें ट्रांसफर भी है।…( व्यवधान) 

सभापति महोदय : ठीक है, आपका टर्न जब आएगा, तब आप बोल सकते हैं। लेकिन अभी नहीं। अभी आप बैठिए।

…( व्यवधान)

श्री खारबेल स्वाईं : चीफ सैक्रेटरी छुट्टी में क्यों गये हैं, वह भी मोशन में है।…( व्यवधान) 

सभापति महोदय : नखिल कुमार जी, आप रूल पर बोलिए। जो होम मनिस्टर साहब ने कहा है, ट्रांसफर और अपॉइंटमेंट के बारे में मत बोलिए।

…( व्यवधान)

श्री खारबेल स्वाईं : वह सब चिट्ठी में है कि चीफ सैक्रेटरी क्यों छुट्टी पर गये हैं। फिर कैसे माननीय मंत्री जी बोलते हैं कि इसके ऊपर डिसकशन नहीं हो पाएगा ? …( व्यवधान)   यही तो सबजेक्ट है। मोशन यही है।…( व्यवधान)  

सभापति महोदय :  ठीक है। आप बैठिए।

…( व्यवधान)

MR. CHAIRMAN: Nothing will go on record except the speech of Shri Nikhil Kumar.

(Interruptions) …* श्री नखिल कुमार : सभापति महोदय, मैं यह कह रहा था कि मुख्य सचिव का छुट्टी पर जाना इस प्रकार हुआ क…( व्यवधान) 

सभापति महोदय : राम कृपाल जी, आप बैठ जाइए। बीच में इंटरैप्ट मत कीजिए। Your hon. Member is speaking on your behalf.

… (Interruptions)

श्री नखिल कुमार : मुख्य सचिव छुट्टी पर चले गए, क्यों चले गए, इसके बारे में मै कह रहा था और जो कुछ कह रहा था, अखबारों में जो मैंने पढ़ा था, उसके आधार पर कह रहा था। इसके आगे …( व्यवधान) 

SHRI SHIVRAJ V. PATIL: Sir, I am sorry, I need to speak here when he is speaking.  But am I expected to comment on what appears in the newspapers? You cannot quote the newspapers. The rules provide that you cannot quote the newspapers here.  You have to see what has appeared in the newspapers, collect your own information, come to a conclusion and then say whatever you want to say on the floor of the House[r36] .

Now, the hon. Member from that side quoted the newspaper extensively.  He is quoting the statements made by those people who have not met me.  I have no opportunity to meet them.  I am expected to explain whether that statement is correct or not, and what is the correct position.  These are not the issues before us.  There are only two issues before us.  One is the extension of the President’s Rule, * Not recorded.

and second is the law and order situation in Bihar.  The statements made by the individuals are not before us. …(Interruptions)

MR. CHAIRMAN : Hon. Home Minister, your own Member is speaking.  Whatever he has spoken, he has spoken specially on the situation arising out of the Chief Secretary of the State proceeding on leave. On that point he is speaking. So, you can refute it or you can correct it. 

SHRI SHIVRAJ V. PATIL: I will not be able to reply to all these points within the time allotted to me.  At the end you will say: “For how much time you are going to speak?”  If the points which cannot be raised…(Interruptions)

MR. CHAIRMAN: The hon. Home Minister can speak for as much time as he likes.

…(Interruptions)

MR. CHAIRMAN: Nothing will go on record except the statement of Shri Nikhil Kumar.

(Interruptions) …* SHRI NIKHIL KUMAR : Now, I come to the question of extending the President’s Rule in Bihar.  It is a fact that the months of July and August are the months where rains are at their fiercest best.  The entire area of north Bihar is flooded.  I am not very sure whether the information given by the hon. Member is correct that there is no flood there this year.  Already, there are certain districts of north Bihar which have been cut off from the rest of the State, and it is entirely because of the flooding of this area.  In fact, I am unable to go to my village because of the fact that there are no roads there. The roads are all submerged in water.  That has come because of the rains and the water that has been brought to India from the Nepalese rivers.  There is a great deal of water problem in the northern districts of Bihar. To hold an election in these conditions would be * Not Recorded.

extremely inadvisable.  Let us say – even if it is accepted – that the elections had been announced and they were to be held now in July or August, and the rains had come.  Then, there would have been a great deal of criticism as to why elections were to be scheduled when everyone knows that these are the monsoon months and these are the months when the entire north Bihar is cut off because of floods. These are unexpected things.  But, we go by certain meteorological reasons and our past records.  Take for instance Mumbai.  The type of rains that have hit Mumbai just now is unprecedented.  Who knew about them?  If, let us say, a similar type of rains had hit north Bihar, would it have been advisable, would it have been proper or wise to organise elections in these months?  So, I do not think this is a very correct situation that because there is no flood, the elections should have been announced.  The basic thing is that the Election Commission has – not once but twice – sent its teams to Bihar to make an assessment of the situation there. One is not privy to the reports that these teams have given to the Election Commission, but one can presume from what has happened that obviously the teams that have gone there have not found the conditions conducive enough to hold elections.  That is why no elections have been proposed immediately. 

            The third thing is this.  We are very interested in seeing that in Bihar law and order situation is restored.  There have been enough comments in the House about the situation in Bihar.  The fact is that some time ago there was reluctance on the part of the central agencies to undertake works of development in Bihar.[r37]              Now, the same Central agencies are today going around the State, making a survey of the areas where they are supposed to start the construction work, and the necessary procedures that have to be adopted before any work order is issued are being followed now.  I think, very soon now, the work of construction such as of roads will begin.  This is an excellent example of how the law and order situation in the State is conducive to the work of development.  I cite you the instance of the Golden Quadrilateral project, 250 kilometres of the National Highway No. 2 runs through the State of Bihar.  The work on that has been going on without any hindrance and without any interruption.  Even though this stretch goes through areas which are plagued by Left Wing extremism, there has been no stopping of the work there.  These are the things which you should take into account as parameters to decide whether there are any improvement in the law and order situation or not.

            I think, there is not only the question of construction of roads but there are other things.  Certain thermal power projects have been given to the central agencies.  They have gone and inspected the site and they are now ready to begin work on the revitalization or the revival of these thermal power projects in different areas.  When they can do it, they are obviously finding the condition conducive to such work and it is a direct instance or reflection on the law and order situation.  I, therefore, think that neither on the point of view of the law and order situation nor on the point of view of the climatic condition or the case of obstruction due to certain weather conditions, there is enough ground today to think that the President’s Rule should be extended and the election should be held when due,  after the President’s Rule.

श्री सुशील कुमार मोदी: सभापति महोदय, अगर आपकी इजाजत हो, तो मैं आगे आकर बोल सकता हूं, क्योंकि मेरे पास काफी कागज हैं, जिन्हें यहां रखने में दिक्कत है।

सभापति महोदय : ठीक है, आप आगे आकर बोल सकते हैं।

श्री सुशील कुमार मोदी : धन्यवाद। सभापति महोदय, मैं मोशन के पक्ष में और राष्ट्रपति शासन के विस्तार अवधि के विरोध में बोलने के लिए खड़ा हुआ हूं। मैं अपनी बहस की शुरूआत संविधान सभा की एक कोटेशन से करना चाहूंगा, जब धारा ३५६ पर संविधान सभा में बहस चल रही थी। उस समय बी.आर. अम्बेडकर जी ने कहा था, “I express the firm belief that the emergency power inherent in the provision would be invoked in the rarest of cases.  As Indian democracy mature, the need to do so would become less compelling, reducing the article to a dead letter.” उन्होंने कहा था कि एक ऐसा समय आएगा कि धारा ३५६ एक डैड लैटर बनकर रह जाएगी। लेकिन एस.आर. बोम्मई के केस में श्री बी.पी. जीवन रेड्डी ने टिप्पणी करते हुए कहा है कि, “Instead of remaining a dead letter, it is proved to be a death letter of a score of State Governments and Legislative Assemblies. ” सभापति महोदय, धारा ३५६ डैड लैटर के बजाय राज्य सरकारों के लिए मौत की घंटी साबित हुई है। यही बिहार के अंदर हुआ है। वहां की विधान सभा को केवल ८० दिनों के भीतर भंग कर दिया गया। जो निर्वाचित विधायक थे, उन्होंने शपथ भी ग्रहण नहीं की थी। विधायक सदन के भीतर भी नहीं गए। विधायकों ने सदन का चेहरा भी नहीं देखा। उन्हें वेतन भी नहीं मिला। जब से देश आजाद हुआ, उसके संसदीय इतिहास में यह पहली ऐसी घटना है। इस देश में आजादी के बाद अब तक १२५ बार धारा ३५६ लागू की गई cè[R38] ।

 लेकिन यह पहली घटना है जब किसी विधान सभा को बिना विधायकों के शपथ ग्रहण किये, बिना विधान सभा के गठन हुए, उसको भंग कर दिया गया।

श्री इलियास आज़मी (शाहाबाद) : केरल में हुआ था।

श्री सुशील कुमार मोदी : केरल में १९६५ में, उड़ीसा में १९७१ में, राजस्थान में १९६७ में और उत्तर प्रदेश में १९९६ और २००२ में पांच ऐसे अवसर आये जब चुनाव हुए लेकिन कोई सरकार नहीं बन पाई। लेकिन कहीं पर भी विधान सभा को भंग नहीं किया गया। लेकिन यह संसदीय इतिहास की पहली घटना है कि एक विधान सभा को बिना सरकार बने, केवल ८० दिन के अंदर भंग कर दिया गया। माननीय रेल मंत्री जी ने भंग विधान सभा के सदस्यों के लिए जो शब्द प्रयोग किये वे इस प्रकार हैं कि “वे भूतपूर्व विधायक नहीं, वे अभूतपूर्व विधायक हैं। वे ऐसे विधायक हैं जो किसी सदन के अंदर गये नहीं, बिना सदन में गये एक्स एमएलए हो गये”। सदन को भंग करने के लिए जो आरोप लगाया गया वह यह है कि खरीद-फरोख्त थी। हमारे बड़े भाई नीतीश जी ने जिसका जिक्र विस्तार से किया। खरीद-फरोख्त की भूमिका बहुत पहले से बनाई जा रही थी। अप्रैल २७ को यानी विधान सभा भंग होने से २० दिन पहले से बनाई जा रही थी और वहां के महामहिम राज्यपाल बयान देते हैं कि कुछ राजनीतिक दल विधायकों की खरीद-फरोख्त का सहारा ले रहे हैं और इसमें साम्प्रदायिक कार्ड भी खेला जा रहा है। इसमें क्या साम्प्रदायिकता की घटना हुई? महामहिम राज्यपाल कह रहे हैं कि खरीद-फरोख्त की सूचना मिली और उसमें साम्प्रदायिक कार्ड भी खेला जा रहा है।

सभापति महोदय, १७ मई को यानी चार दिन पहले “The Governor claims that he had information from various sources that some Parties were indulging in a horse trading to lure the Legislators into their fold.”  जब मैंने राज्यपाल महोदय को जवाब दिया तो महामहिम राज्यपाल महोदय,“Mr. Singh states that he had made the statement on the on-going horse trading as a documentary evidence to support it. Am I supposed to make public those documents merely to prove that my allegations are true? Do I need to release the report of the Intelligence Agencies?”   सभापति महोदय, मैं इस बात का जिक्र इसलिए कर रहा हूं कि महामहिम राज्यपाल कहते हैं कि उनके पास डाक्युमेंटरी एवीडेंस हैं कि बिहार में हॉर्स-ट्रेडिंग हो रही है। सभापति महोदय, जिस दिन विधान सभा को भंग कर दिया गया, उसके दो दिन बाद महामहिम राज्यपाल ने कहा कि खरीद-फरोख्त से संबंधित मामलों की छानबीन की जा रही है और इससे जुड़े लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जाएगी। “An FIR will be lodged against those persons who are indulging in horse trading.”   उन्होंने कहा कि लोजपा के विधायकों की खरीद-फरोख्त की शिकायतें मिली थीं, विधायकों को बंदूक के बल पर अज्ञात स्थान पर ले जाकर रखा गया था और प्रलोभन देकर उनको खरीदने का प्रयास हो रहा था। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र को कलंकित होने से बचाने के लिए विधान सभा के विघटन के अलावा और कोई चारा नहीं था।

सभापति महोदय, इतना ही नहीं, १८ तारीख को आगे वे कहते हैं कि उनके पास पक्के सबूत हैं। …( व्यवधान) 

श्री राम कृपाल यादव : मेरा पाइंट ऑफ आर्डर है।…( व्यवधान) 

MR. CHAIRMAN : Order please.

श्री राम कृपाल यादव : मेरा पाइंट ऑफ आर्डर है।

MR. CHAIRMAN: Under which rules[m39] ?

सभापति महोदय : आप कौन से रूल की बात कह रहे हैं?

श्री राम कृपाल यादव : क्या सदन में अखबार से पढ़ने की परमिशन है? …( व्यवधान) 

सभापति महोदय: आप प्वाइंट ऑर्डर पर खड़े हुए हैं। आप पहले रूल बताइए।

श्री राम कृपाल यादव : कोई भी माननीय सदस्य कौन से नियम के तहत सदन में अखबार पढ़ेगा? …( व्यवधान)   आप इसे देखिए सभापति महोदय: आप बैठ जाइए।

                                                …( व्यवधान) 

MR. CHAIRMAN: I would request you Mr. Modiji, you try to restrict the quotes from the Press wherever possible.

… (Interruptions)

श्री सुशील कुमार मोदी : सभापति महोदय, मैं अखबार में से दो लाइनें कोट कर रहा हूं। यह एक प्रैक्टिस है। …( व्यवधान)

MR. CHAIRMAN: You please quote whatever important and possible.

… (Interruptions)

श्री सुशील कुमार मोदी :   महामहिम राज्यपाल ने कहा कि मेरे पास पक्के सबूत है कि राज्य् के एक-एक विधायक के लिए तीन से पांच करोड़ रुपए की बोली लग रही थी, यह महामहिम राज्यपाल का कहना था। श्री श्रीप्रकाश जायसवाल जो गृह राज्य मंत्री हैं, विधान सभा भंग होने के बाद बिहार गए और बिहार में जाकर बयान दिया कि उनके पास ठोस तथ्य हैं कि हॉर्स ट्रेडिंग हो रही थी। …* सारे आरोप लगाए गए हैं।

* Expunged as ordered by the Chair.

…( व्यवधान)   माननीय रेल मंत्री जी यहां बैठे हैं। उन्होंने इंडिय़ा टुडे को इंटरव्यू दिया और कहा कि …* सभापति महोदय, यह इन्होंने आरोप लगाया।…( व्यवधान)  ये आरोप लगाने वाले कौन लोग हैं? इसी देश में झारखंड मुक्ति मोर्चा कांड हुआ था। उस समय की नरसिंह राव जी की सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव आया तो उनके पास बहुमत नहीं था, उस समय कौन गृह मंत्री थे, वे कौन लोग थे जिन्होंने जेएमएम के सांसदों को खरीदने के लिए ३०-३० लाख रुपया दिया। सीबीआई की जांच हुई। …( व्यवधान)   उस समय के गृह मंत्री को तीन साल की सजा हुई थी। प्रधान मंत्री को झारखंड मुक्ति मोर्चा रिश्वत कांड में एमपीज की खरीद-फरोख्त के आरोप में तीन साल की सजा और चार लाख रुपए का जुर्माना हुआ। यह बात अलग है कि बाद में तकनीकी आधार पर वह हाई कोर्ट से छूट गए लेकिन आरोप वे लोग लगा रहे हैं जो लोग आकंठ खरीद-फरोख्त में डूबे रहे। बिहार में १५ साल से जो सरकार चल रही थी, रेल मंत्री की जो सरकार चल रही थी, वह सरकार किस के बलबूते पर चल रही थी? १९९० में राष्ट्रीय जनता दल को जब बहुमत नहीं मिला तो ९० विधायक मंत्री बनाए गए। दुनिया के इतिहास में सबसे ज्यादा मंत्री बिहार में बने। वहां ९० विधायक मंत्री बने। क्या वह खरीद-फरोख्त नहीं थी? क्या विधायकों को प्रलोभन देकर, मंत्री बना कर समर्थन नहीं जुटाया गया था? क्या उस समय खरीद-फरोख्त नहीं हुई?…( व्यवधान) 

श्री लालू प्रसाद : श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी ने कितने केन्द्र में मंत्री बनाए?

श्री सुशील कुमार मोदी : आप दागी मंत्री हैं। आपको बोलने नहीं देंगे।

श्री लालू प्रसाद : दागी आपका नेता हैं। …( व्यवधान) 

THE MINISTER OF WATER RESOURCES (SHRI PRIYA RANJAN DASMUNSI):  As Mr. Modi has cited the JMM case, I would only like to appeal to him that one of the accused in the JMM case has turned approver.  Is it not a fact that he was admitted in BJP, and his wife has been given the ticket? Please do not talk of moral values.… (Interruptions)

श्री सुशील कुमार मोदी : वह मेरी पार्टी में है लेकिन उनको सजा नहीं हुई। जिस को सजा हुई, वह बिहार के राज्यपाल हैं। जिन को हाई कोर्ट ने और सीबीआई की स्पैशल कोर्ट ने तीन साल की सजा सुनायी. वह गृह मंत्री श्री बूटा सिंह इस समय बिहार के राज्यपाल हैं[R40] ।  …** *          Expunged as ordered by the Chair.

**        Not Recorded.  

   

 16.00 [p41]   hrs.   

SHRI MADHUSUDAN MISTRY (SABARKANTHA): Sir, why is he talking about the Governor of Bihar? We cannot discuss the Governor’s acts in this House. … (Interruptions)

श्री सुशील कुमार मोदी : इसलिए मैंने कहा कि पन्द्रह साल पहले…( व्यवधान) 

SHRI MADHUSUDAN MISTRY : They do not have any right to discuss about the acts of the Governor. … (Interruptions)

सभापति महोदय :  श्री मिस्त्री जी, प्लीज आप बैठ जाइए।

...( व्यवधान)

श्री सुशील कुमार मोदी : सभापति महोदय, रेल मंत्री जी यहां बैठे हैं। बिहार में ऐसी कौन सी पार्टी है जिनको इन्होंने बहुमत जुटाने के लिए तोड़ा नहीं है। भारतीय जनता पार्टी के १३ विधायकों को तोड़कर इन्होंने बहुमत जुटाया। मैं इनको याद कराना चाहूंगा कि झारखंड मुक्ति मोर्चा के आठ विधायकों को तोड़कर कृष्णा मरांडी का गुट बनाकर इन्होंने बहुमत हासिल किया। क्या उस समय हॉर्स ट्रेडिंग नहीं था? आज हॉर्स ट्रेडिंग है?

MR. CHAIRMAN : Hon. Members, order please.

… (Interruptions)

श्री सुशील कुमार मोदी : सभापति महोदय, बिहार में सीपीआईएमएल, कम्युनिस्ट पार्टी सरकार को समर्थन दे रही है, बहुजन समाज पार्टी, यूपीए सरकार को समर्थन दे रही है। आज कांग्रेस पार्टी सरकार में है, बिहार में ऐसी कोई पार्टी का नाम बता दीजिए जिसे पन्द्रह साल में, इनके लोगों को मंत्री बनाकर अपना बहुमत नहीं जुटाया हो। जब इनके पास टूटकर विधायक आए तो सिद्धांतों के आधार पर आए और जब हमारे पास लोक जनशक्ति पार्टी के विधायक टूटकर आए तो आप आरोप लगा रहे हैं। मैं जानना चाहता हूं कि अगर बिहार में खरीद-फरोख्त हुई है तो आज तक एफआईआर क्यों दर्ज नहीं किया गया? अब विधान सभा को भंग हुए दो महीने से ज्यादा हो गए हैं लेकिन आज तक राज्यपाल ने किसी भी विधायक को बुलाकर बातचीत क्यों नहीं की? आपने कहा कि इनको जबरदस्ती बंदूक के बल पर झारखंड ले जाया गया। क्या झारखंड पाकिस्तान में है? क्या झारखंड जाना कोई गुनाह है? कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई और एक भी जानकारी बता दीजिए कि किसी विधायक ने…( व्यवधान)  सभापति महोदय, या तो मैं बैठ जाऊं या आप इनको शांत कराएं। मैं कैसे बोलूंगा…( व्यवधान) 

MR. CHAIRMAN: Nothing would go on record except the speech of Shri Sushil Kumar Modi.

(Interruptions) …* श्री सुशील कुमार मोदी : सभापति महोदय, कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई, कोई प्रमाण नहीं है। एक भी विधायक को, जो रांची गए थे, वहां खुलेआम घूम रहे थे उनको गिरफ्तार करके राजभवन महामहिम बुला सकते थे, पूछ सकते थे कि तुम्हें कितने करोड़ मिले, कितना पैसा दिया और किसको खरीदा गया। इनके पास कोई प्रमाण नहीं है और प्रमाण इसलिए नहीं है कि केवल योजनाबद्ध तरीके से विधान सभा को भंग करा दिया गया।…( व्यवधान) 

श्री लालू प्रसाद : आप कसम खाकर सच बात बोलिए…( व्यवधान) 

MR. CHAIRMAN: Order please. Nothing would go on record except Shri Modi’s speech.

… (Interruptions)

श्री सुशील कुमार मोदी : सभापति महोदय, संविधान का दसवां अनुच्छेद बना। इस हॉर्स ट्रेडिंग को रोकने के लिए दसवां अनुच्छेद “ आया राम और गया राम” पैसा देकर, प्रलोभन देकर जो खरीद-फरोख्त होती थी, इसे रोकने के लिए बनाया गया है । दसवें अनुच्छेद में यह प्रावधान किया गया है कि अगर दो तिहाई विधायक टूटकर किसी दल में शामिल होते हैं तो वह हॉर्स ट्रेडिंग नहीं माना जाए वह विलय माना जाएगा। लोक जनशक्ति पार्टी के जो नेता थे उन्होंने एक द्ृष्टिकोण अपनाया, एक स्टैंड लिया, इसमें कोई सरकार नहीं बन रही थी, बिहार के विधायकों ने विद्रोह करके तय किया कि दो तिहाई सदस्य एकजुट होकर जद य दूसरी पार्टी के अंदर अपना विलय करेंगे । क्या यह कोई गुनाह है?…( व्यवधान) दसवां अनुच्छेद क्यों बनाया गया?

SHRI PRIYA RANJAN DASMUNSI :  Shri Nitish Kumar is an hon. Member of this House. … (Interruptions)

MR. CHAIRMAN (SHRI ARJUN SETHI) : Nothing will go on record except the speech of Shri Sushil Kumar Modi.

(Interruptions) … * * Not Recorded.

श्री सुशील कुमार मोदी : सभापति जी, घोड़ों के अस्तबल के मालिक  … * और वे घोड़ों की खरीद-फरोख्त कर रहे थे। हौर्स ट्रेडिंग के वे माहिर हैं और गुरु हैं।  …* और आरोप हम पर लगा रहे हैं। … सभापति महोदय : ऑर्डर प्लीज। श्री मोदी जी, आप सब्जैक्ट पर आइये। आपने हौर्स ट्रेडिंग कह दिया लेकिन ऐसा बार बार नहीं।

श्री सुशील कुमार मोदी : सभापति महोदय, यू.पी.ए. सरकार बनने के बाद पिछले १५ महीने में देर रात तक कैबिनेट की दो बार बैठकें हुई हैं। कैबिनेट की एक बैठक तब हुई, जब माननीय रेल मंत्री श्री लालू प्रसाद गोधरा गये। वह इतने मासूम है कि पानी के एक पाउच से उनके खरोंचे आ गई, वह घायल हो गये और तब रात में ११ बजे कैबिनेट की बैठक बुलाई गई। दूसरी बैठक रात के १२०० बजे तब बुलाई गई जब बिहार विधान सभा को भंग करना था। माननीय गृह मंत्री श्री शिवराज पाटील बैठे हुये हैं। मैं उन से जानना चाहता हूं कि पिछले १५ महीने में कितनी बार देर रात में कैबिनेट की बैठक बुलाई गई है…( व्यवधान)   सभापति जी, अगर मुझे नही बोलने दिया जायेगा तो मैं बैठ जाता हूं…( व्यवधान) 

सभापति महोदय : ऐसा कैसे चलेगा, आप सब बोल रहे हैं। श्री मोदी के भाषण के अलावा और किसी का भाषण रिकॉर्ड पर नहीं जायेगा।

श्री सुशील कुमार मोदी : मैं माननीय गृह मंत्री जी से जानना चाहता हूं कि पिछले १५ महीने में देर रात तक कैबिनेट की मीटिंग कितनी बार बुलाई गई? उन्होंने टी.वी. पर असत्य प्रचार किया कि दिल्ली के सिनेमाघर में बम विस्फोट हो गया और रात को १२ बजे कैबिनेट की बैठक बुलाई गई। ऐसी क्या जल्दबाजी थी कि रात में कैबिनेट की बैठक हुई, एक फैक्स मॉस्को किया गया जहां राष्ट्रपति महोदय गये हुये थे। उन्हें रात के ३ बजे तक जागने के लिये बाध्य किया गया और एक फैक्स मेसेज द्वारा बिहार विधान सभा का गला घोंट दिया गया। एक नव-निर्वाचित विधान सभा, जिसके सदस्यों ने अभी तक शपथ नहीं ली थी, को भंग कर दिया गया। मैं चाहूंगा कि माननीय गृह मंत्री जवाब दें कि रात के १२ बजे कैबिनेट की मीटिंग बुलाने में क्या जल्दबाजी थी? जब राष्ट्रपति राज्य ६ महीने के लिये लागू था, सरकार ६ महीने इन्तजार कर सकती थी लेकिन ८० दिनों के भीतर नव-निर्वाचित विधान सभा को भंग करने का क्या औचित्य था?

सभापति जी, श्री नीतीश कुमार जी ने माननीय गृह मंत्री जी द्वारा इस सदन में दिये गये एक बयान को कोट किया है जिसमें माननीय गृह मंत्री जी ने कहा था कि अगर विधायक चाहें तो आपस में बातचीत करके सरकार बनाने का प्रयास कर सकते हैं लेकिन कल राज्य सभा में उनके दिये गये भाषण को * Not Recorded.

अगर मार्किंग देनी हो तो माइनस-ज़ीरो भी नहीं चल सकता। माननीय गृह मंत्री जी ने इतना तर्कविहीन भाषण राज्य सभा में कल दिय्ाा[RB42] ।

            I quote:

“The Governor would have certainly allowed the Government to be formed, if the leaders of different parties …….. ”   सभापति महोदय, या तो आप मैम्बर्स को शांत करिये या फिर मैं बैठता हूं।
श्री अशोक प्रधान (खुर्जा) : सभापति महोदय, यह कोई तरीका है, ये क्या कर रहे हैं। आखिर यह कौन सा तरीका है, ये लोग वहां बैठे-बैठे चिल्ला रहे हैं और माननीय सदस्य को बोलने नहीं दे रहे हैं।…( व्यवधान) 
सभापति महोदय : जो इंटरप्शंस कर रहे हैं, वह रिकार्ड पर नहीं जायेंगी। आप बोलिये।
(Interruptions) … * श्री अशोक प्रधान : ये लोग कमाल कर रहे हैं, बैठे-बैठे इंटरप्ट कर रहे हैं।…( व्यवधान) 
सभापति महोदय :  गोयल साहब, आप बैठ जाइये। आपकी कोई बात रिकार्ड पर नहीं जायेगी। कृपया आप बैठ जाइये।
(Interruptions) …* MR. CHAIRMAN: Shri Ram Kripal Yadav, I request you to be silent please.   यह लोक सभा है, भारत की पार्लियामैन्ट है, इसलिए आप थोड़ा शांत होकर बैठ जाइये। ज्यादा बोलना अच्छा नहीं है।
… (Interruptions)
श्री सुशील कुमार मोदी : सभापति महोदय, मैं कह रहा था कि माननीय गृह मंत्री जी ने इसी सदन में कहा था कि अगर नवनिर्वाचित विधायक आपस में बातचीत करके सरकार बनाने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाते तो मैं इसका स्वागत करूंगा। कल उन्होंने राज्य सभा में जो बयान दिया है, वह मैं कोट कर रहा हूं। वह कहते हैं -
“……. if the leaders of different parties had come together and said that they would join hands and form a Government. It was not that the leaders were talking to each other. It was the Members who were talking to each other.  ”   * Not Recorded.
माननीय गृह मंत्री जी कह रहे हैं कि नेता आपस में बात नहीं कर रहे थे, माननीय सदस्य आपस में बात कर रहे थे, इसलिए मैंने विधान सभा को भंग कर दिया। भारत के गृह मंत्री देश की सर्वोच्च संस्था में अगर यह बयान देते हैं कि माननीय सदस्य आपस में बातचीत कर रहे थे, नेता बात नहीं कर रहे थे और नेता अगर सदस्यों के अनुसार नहीं चल रहे थे तो उन्होंने क्या गुनाह किया है, यह आपका राज्य सभा में दिया हुआ बयान है, जो मैं कोट कह रहा हूं।
श्री शिवराज वि. पाटील : अगर आप बैठ जाएं तो मैं आपको बता दूंगा, नहीं तो बाद में बता दूंगा। देखिये हमारे संविधान में दसवां शेडयूल है, जो कहता है कि दो-तिहाई सदस्य अगर एक पार्टी से दूसरी पार्टी में जा रहे हैं तो ही वे सदन के सदस्य रह सकते हैं, अन्यथा उनकी सदस्यता खत्म हो जाती है और यहां पर अगर दो-चार सदस्य जाकर मिलकर वहां पर बात कर रहे हैं और वे पटना में नहीं रायपुर में बात कर रहे हैं, छिपकर बात कर रहे हैं, होटल में बात कर रहे हैं तो इसमें यह हो जाता है…( व्यवधान)   जो बात हो रही है…( व्यवधान) 
श्री उदय सिंह (पूर्णिया) : आपके पास खबर कहां से आई।
श्री शिवराज वि.पाटील : मेरे पास लैटर्स हैं।…( व्यवधान)   इसलिए अगर कोई सदस्य एक पार्टी से दूसरी पार्टी में इस प्रकार से जाता है तो उससे बनी हुई सरकार दो दिन भी नहीं चल सकती है, क्योंकि उनकी मैम्बरशिप खत्म हो जाती है और इसलिए गवर्नर जो सरकार बनाने की इजाजत देता है, उसको यह ध्यान में लेना जरूरी होता है।…( व्यवधान)  
सभापति महोदय :  जो आप बोल रहे हैं, वह यह भी बोल सकते हैं, आप बैठ जाइये।
श्री सुशील कुमार मोदी : सभापति महोदय, मैं दूसरी बात कह रहा था, मैं कह रहा था कि इन्होंने कहा कि 'if the leaders were talking'  अगर नेता बात कर रहे थे, आपने कहा है -
“…… if the leaders of different parties had come together and said that they would join hands and form a Government. It was not that the leaders were talking to each other. It was the Members who were talking to each other. ”     क्या मैम्बर्स का आपस में बात करना गुनाह है, क्या रायपुर या दिल्ली में जाकर मीटिंग करना कोई गुनाह है। संविधान के किस अनुच्छेद में लिखा है कि आप देश के किसी हिस्से में जाकर बैठक नहीं कर सकते।…( व्यवधान)   जिस विधान सभा को भंग किया गया, पहले तो यह कहते हैं कि हमारे पास डॉकूमैन्ट्री एविडैन्स है। हमारे पास दो करोड़, पांच करोड़ का प्रमाण है[R43] ।
जब सुप्रीम कोर्ट में एफिडैविट करने की बात आई, तब ये नहीं कहते कि हमारे पास डॉक्यूमैंट्री एविडैन्स है।तब ये कहते हैं कि “…It was arrived at on the basis of the reports of the Governor, which reports in turn are based upon validly formed assessment that unless the Assembly was dissolved, horse-trading and unethical practice will be at work...” यानी इस बात की आशंका है कि हॉर्स ट्रेडिंग हो सकती है। मैं पाटील साहब से कहना चाहता हूं कि अगर हिम्मत थी तो सुप्रीम कोर्ट में एविडैन्स प्रस्तुत करते। लेकिन आप सुप्रीम कोर्ट के सामने कह रहे हैं क बिहार में हॉर्स ट्रेडिंग होने की आशंका थी और इसी आधार पर बिहार की विधान सभा को भंग कर दिया गया। मैं आपके माध्यम से गृह मंत्री और केन्द्र सरकार से जानना चाहूंगा कि १७ अप्रैल और २१ मई की राज्यपाल की जिन दो रिपोट्र्स के आधार पर बिहार की विधान सभा को भंग किया गया, अगर हिम्मत होती तो सदन में उस रिपोर्ट को प्रस्तुत किया जाता। सदन से गुप्त कोई दस्तावेज़ नहीं हो सकता है। यह कोई भारत और चीन का समझौता नहीं है, गवर्नर की रिपोर्ट है, जिस रिपोर्ट के आधार पर बिहार की विधान सभा का गला घोंट दिया गया। मैं आपके माध्यम से चाहूंगा कि भारत की सरकार उन दोनों रिपोर्टों को सार्वजनिक करे, सदन के पटल पर रखे ताकि पूरा देश जान सके कि कहां खरीद-फरोख्त हो रही थी, कौन लोग थे खरीदने वाले और किस तरह से बिहार की विधान सभा को भंग किया गया।
सभापति महोदय, मुझे इस बात का दुख है कि यहां से जो फैक्स भेजा गया, महामहिम राष्ट्रपति जी अगर चाहते, मुझे पता नहीं उनको क्या रिपोर्ट भेजी गई, मुझे पता नहीं उन्होंने कोई लीगल एडवाइस ली या नहीं, लेकिन महामहिम राष्ट्रपति जी को लीगल एडवाइस देनी चाहिए थी। …( व्यवधान) 
SHRI PRIYA RANJAN DASMUNSI : Sir, I rise on a matter of decorum. Can we consider and discuss whether the President of India was advised properly or not? The office of the President can never be questioned in this manner. You can discuss the substantive motion. But the office of the President cannot be questioned, and it has never happened like this. Therefore, I need your guidance in this matter.
श्री सुशील कुमार मोदी : सभापति महोदय, मैं कह रहा हूं कि उनको गुमराह किया गया।
सभापति महोदय :   राष्ट्रपति महोदय के बारे में कुछ मत बोलिये।
श्री सुशील कुमार मोदी : मैं कह रहा हूं कि महामहिम राष्ट्रपति जी को गुमराह किया गया, उनको गलत रिपोर्ट भेजी गई। मैं उनके बारे में नहीं कह रहा हूं, लेकिन जो विधान सभा डिजॉल्व हो गई…( व्यवधान) 
सभापति महोदय :  राष्ट्रपति जी का नाम लेना ठीक नहीं है।
श्री सुशील कुमार मोदी : लेकिन हमारी अपेक्षा ज़रूर थी कि वे लीगल एडवाइस लेते। उस निर्णय को दोबारा कैबिनेट के विचारार्थ भेजा जा सकता था। वे कह सकते थे कि रशिया से लौटकर आने के बाद इस पर निर्णय करेंगे।
सभापति महोदय, केवल बिहार की विधान सभा को इसलिए भंग किया गया क्योंकि इनको मालूम था कि अगर आज की रात बीत गई तो कल १२ बजे दिन में नीतीश कुमार बहुमत का दावा पेश करेंगे और जब इनको यह जानकारी मिल गई तो रात को १२ बजे कैबिनेट की बैठक बुलाकर बिहार की विधान सभा को भंग कर दिया गया। सभापति जी, हम लोग जब बच्चे थे और गुल्ली डंडा खेलते थे और कोई बदमाश लड़का खेल में आने के बाद हारने लगता था तो गुल्ली डंडा लेकर भाग जाता था ताकि खेल में हार न सके।…( व्यवधान) 
श्री लालू प्रसादआप तो शहर में पैदा हुए और गुल्ली डंडा की बात करते हैं। …( व्यवधान) 
श्री नीतीश कुमार : पटना को कहां शहर कह रहे हैं, वह तो गांव की तरह ही है। …( व्यवधान) 
श्री सुशील कुमार मोदी : रेल मंत्री को लगा कि न रहेगा बाँस और न बजेगी बाँसुरी, विधान सभा को ही भंग कर दो। या तो राबड़ी देवी बनेगी मुख्य मंत्री, नहीं तो कोई मुख्य मंत्री नहीं बनेगा। इन लोगों ने समझा कि बिहार में राज करना इनका जन्मसिद्ध अधिकार है।
             बिहार में जब जब चुनाव होते हैं, राष्ट्रीय जनता दल १९९५ को छोड़कर एक बार भी बहुमत में नहीं आया है। जहां १९९५ में इनकी संख्या १६५ थी, वहीं २००० में घटकर ११५ पर आ गई और अब ७५ पर पहुंच गए[h44] ।

16.20 hrs.                           (Mr. Deputy Speaker in the Chair) लालू जी आपको गलतफहमी है। अब जब भी चुनाव होंगे आप ५० का आंकड़ा भी पार नहीं कर पाएंगे।…( व्यवधान) 

उपाध्यक्ष महोदय : श्री राम कृपाल जी, आपको क्या प्रोब्लम है? आप बैठ जाइए।

…( व्यवधान)

MR. DEPUTY-SPEAKER: Nothing will go on record except the speech of Shri Modi.

(Interruptions) …* श्री सुशील कुमार मोदी : महोदय, बिहार की कानून व्यवस्था के बारे में कुछ भी कहने की आवश्यकता नहीं है। हमारे सहयोगी नीतीश जी ने बताया है कि श्री साधु यादव को धरने पर बैठना पड़ा। पहली बार १५ साल के अंदर रेल मंत्री जी के साले साहब को धरने पर बैठना पड़ा, क्योंकि उनके एक सहयोगी की हत्या कर दी गई थी। श्री राम कृपाल यादव पर हमला हुआ। उनको अपनी जान बचा कर भागना पड़ा।…( व्यवधान) 

महोदय, आज जो यहां शेखी दिखा रहे हैं, इनके कपड़े फाड़ दिए गए और इन्हीं की पार्टी के लोगों ने इनको खदेड़ दिया और इन्हें जान बचा कर भागना पड़ा। बिहार की कानून व्यवस्था का दो-ढाई महीने में हाल बहुत खराब हो गया है। यह पटना नहीं है जो आप अपनी ताकत यहां दिखा रहे हैं।…( व्यवधान) 

MR. DEPUTY-SPEAKER: Please sit down.

श्री सुशील कुमार मोदी : महोदय, बिहार के अंदर सिवान के एसपी का ट्रांसफर कर दिया गया। सिवान में पिछले ५० साल में ऐसा चुनाव नहीं हुआ, जैसा इस बार हुआ है। ये लोग अपने आपको शेर बनते हैं, इनको वहां से गीदड़ के समान भागना पड़ा। सिवान में जाने की इनकी हिम्मत नहीं हुई और दबाव डाल कर वहां के एसपी का तबादला कर दिया गया। लालू जी इसका खामियाजा आपको इस चुनाव में भुगतना पड़ेगा। आप कान खोल कर सुन लीजिए, संजय किसी एसपी का नाम नहीं रह गया है, यह बिहार के अंदर हीरो हो गया है।…( व्यवधान) के.के. पाठक और संजय वे पुलिस अधिकारी हैं जिन्होंने सत्ता की चुनौती को स्वीकार किया और आपने सत्ता की ताकत पर ऐसे अधिकारियों का तबादला कर दिया…( व्यवधान) 

MR. DEPUTY-SPEAKER: Except the speech of Shri Modi, nothing will go on record.

(Interruptions) … * श्री सुशील कुमार मोदी : महोदय, यह कहा जा रहा है कि ये अधिकारी स्वयं अपना ट्रांसफर चाहते थे। ...** बिहार में दर्जनों लोग अपना ट्रांसफर चाहते हैं और उनकी पैटिशन पर गौर नहीं किया जाता है। क्या ये उन लोगों के आवेदनों पर ट्रांसफर के लिए विचार करेंगे? एक ५५ साल के बूढ़े प्रमोटी को सिवान का एसपी बना दिया है। उसे दिल का दौरा पड़ गया, उसका बीपी हाई हो गया। महामहिम ने कहा कि तुम *          Not Recorded.

**        Expunged as ordered by the Chair.

सिवान नहीं जाओगे तो तुम्हारी नौकरी जाएगी। यह बिहार के अंदर राज चल रहा है। चुनाव सैक्रेटरी छुट्टी पर चले गए और वहां के होम कमिशनर भी छुट्टी पर चले गए। राज्यपाल दिल्ली में हैं।. *…( व्यवधान) 

 MR. DEPUTY-SPEAKER: I will see it.

श्री लालू प्रसाद : जो हाउस के सदस्य नहीं हैं उनका नाम नहीं लेना चाहिए…( व्यवधान) 

श्री सुशील कुमार मोदी : मैंने किसी का नाम नहीं लिया है।..* …( व्यवधान) 

MR. DEPUTY-SPEAKER: I assure you hundred per cent that it will be expunged.

श्री सुशील कुमार मोदी : महोदय, बिहार के अंदर जो ट्रांसफर हो रहे हैं पता नहीं** कौन है…( व्यवधान) 

उपाध्यक्ष महोदय : आप फिर नाम ले रहे हैं। नाम रिकार्ड में नहीं जाएगा।

श्री सुशील कुमार मोदी : राज भवन के अंदर पुलिस के पद नीलाम किए जा रहे हैं।

MR. DEPUTY-SPEAKER: You should conclude now.

श्री सुशील कुमार मोदी : इसी का परिणाम है कि आज बिहार की लॉ एंड आर्डर की स्थिति बहुत खराब हो गई है।…( व्यव्ाधान[i45] )  SHRI PRIYA RANJAN DASMUNSI:  Sir, I am on a point of order. … (Interruptions) 

MR. DEPUTY-SPEAKER: What is your point of order?

SHRI PRIYA RANJAN DASMUNSI:  That any substantive motion under Rule 184 shall specify the subject and the subject has been specified clearly by Shri Nitish Kumar. … (Interruptions) The deteriorating law and order situation under President's rule and subsequent transfer of the Chief Secretary... … (Interruptions)  Under what substantive Motion the conduct of the Governor and the members of the family be discussed?  Where is that Motion?  Otherwise, it should be expunged. … (Interruptions)  You have to discuss the substantive Motion. … (Interruptions)

*Expunged as ordered by the Chair.

**Not Recorded MR. DEPUTY-SPEAKER: There is no point of order.

… (Interruptions)

MR. DEPUTY-SPEAKER: I understand.

श्री सुशील कुमार मोदी : महोदय, मैंने विषयान्तर नहीं किया है। …( व्यवधान) 

उपाध्यक्ष महोदय : कोई पाइंट ऑफ आर्डर नहीं है।

श्री इलियास आज़मी (शाहाबाद) : उपाध्यक्ष महोदय, इस समय बिहार के गवर्नर, गवर्नर के साथ-साथ बिहार सरकार के हैड हैं। इसलिए जो बात कही जा रही है, वह ठीक है। …( व्यवधान) 

श्री प्रभुनाथ सिंह (महाराजगंज, बिहार) : उपाध्यक्ष महोदय, अभी श्री प्रियरंजन दासमुंशी कह रहे थे कि किसी के परिवार की चर्चा नहीं होनी चाहिए। हमें यह मालूम नहीं कि वे किसके परिवार की जानकारी हमें देना चाहते हैं। …( व्यवधान) 

SHRI PRIYA RANJAN DASMUNSI:  Insinuation should be understood by the Chair, not by the Member. … (Interruptions)

 उपाध्यक्ष महोदय : पहले आप मुझे कुछ सुनने दें, तो मैं कुछ बोलूं।

...( व्यवधान)

श्री प्रभुनाथ सिंह : उपाध्यक्ष महोदय, बिहार के चीफ सैक्रेट्री ने बगावत की और जो विवाद उठा वह ट्रांसफर और पोस्िंटग का है और उसी की चर्चा यहां हो रही है।…( व्यवधान) 

(Interruptions) … * उपाध्यक्ष महोदय : मैंने कह दिया कि कोई पाइंट ऑफ आर्डर नहीं है।

SHRI UDAY SINGH (PURNEA): Sir, it is extremely sad that the Union Ministers sitting here are instigating their party members to behave in this fashion in this House. … (Interruptions) 

MR. DEPUTY-SPEAKER: Please sit down.

            Nothing will go on record except the remarks of Shri Shivraj Patil.

(Interruptions) … * श्री लालू प्रसाद: किसी को गाली देना ठीक नहीं है। …( व्यवधान) 

श्री सुशील कुमार मोदी : यह काम तो आप कर रहे हैं। यही कारण है कि आज आपकी यह हालत है। …( व्यवधान) 

* Not Recorded.

उपाध्यक्ष महोदय, इन्होंने सारी जिंदगी गाली देने का काम किया है। …( व्यवधान) 

16.27 hrs.                                    (At this stage Shri Rabinder Kumar Rana came and stood on the floor near the Table.)   श्री सुशील कुमार मोदी : यदि इन्हें घमंड है, तो इस चुनाव के अंदर इन्हें पता चल जाएगा कि जनता किस के साथ है। …( व्यवधान) 

16.28 hrs. (At this stage Shri Rabinder Kumar Rana and some other hon. Members went back to their seats.)   उपाध्यक्ष महोदय :  राम कृपाल जी, आप अपनी जगह पर जाइए। फातमी जी आप भी बैठिए।

...( व्यवधान)

प्रो. विजय कुमार मल्होत्रा (दक्षिण दिल्ली) : उपाध्यक्ष महोदय, यहां होम मनिस्टर बैठे हैं, क्या उनकी उपस्थिति में मंत्री जी इस प्रकार से धमकी देंगे ? …( व्यवधान) 

MR. DEPUTY-SPEAKER: Nothing will go on record.

(Interruptions) … * ...( व्यवधान)

श्री उदय सिंह : यह क्या बात हुई?क्या आप वैल में धमकी देंगे?…( व्यवधान) आप लालू जी का नाम रोशन कर रहे हैं।…( व्यवधान) मैं अपनी बात कहकर बैठ जाऊंगा। आप बैठ जाइये।…( व्यवधान) 

MR. DEPUTY-SPEAKER: Please sit down. कृपया बैठ जाइये।

प्रो. विजय कुमार मल्होत्रा : जब स्पीकर साहब के कमरे में फैसला हुआ कि यह मोशन नियम १८४ में लिया जायेगा, जो मुख्य सचिव के लम्बी छुट्टी पर चले जाने पर उत्पन्न स्थिति पर है। वे छुट्टी पर यह कहकर गये कि जो वहां के गवर्नर हैं, वे किसी बात पर मुझसे बातचीत नहीं कर रहे और उनके दबाव की वजह से, उनके इल्लीगल कामों की वजह से वे छुट्टी पर गये, यही यहां पर डिबेट है। …( व्यवधान)  गृह मंत्री जी कम से कम यह बतायें कि क्या उनके मंत्री यहां पर लोगों को धमकी देंगे? क्या मंत्री जी यहां पर खड़े होकर यहां पर धमकी देंगे। वे केबिनेट मंत्री नहीं, स्टेट मनिस्टर हैं।…( व्यवधान) 

* Not Recorded.

MR. DEPUTY-SPEAKER: The motion has already been accepted by the hon. Speaker.

… (Interruptions)

श्री शिवराज वि. पाटील : मल्होत्रा जी, ऐसा नहीं है। यह बात ठीक नहीं है।…( व्यवधान) 

प्रो. विजय कुमार मल्होत्रा : आपके कम से कम पांच मंत्रियों ने धमकी दी है।

SHRI SHIVRAJ V. PATIL: I have to make a submission. There are two motions before us – one moved by Shri Nitish Kumar and the other one, moved by myself. I have moved the Resolution. These are the two things on which we are discussing.… (Interruptions)

उपाध्यक्ष महोदय : आप अपने साथी को भी समझाइये।

SHRI SHIVRAJ V. PATIL : If we want to discuss the conduct of the Governor, the Constitution requires that a notice for moving a substantive motion with a notice of 14 days, has to be given to the Presiding Officer. Then only one can discuss the conduct of the Governor. Now, here, if once or twice some references are made to it, we have not objection to it. But, if some Member is getting up and making an allegation not only against the Governor but also against other members of his family, without giving a notice and using abusive language, it is not correct. My humble submission is that you please go through the record. You will find out the portion which cannot go on record and delete that from the record. Otherwise, we shall have to make an application to you saying that these things are not the things which can go on record. My submission to you is that they cannot make any allegation against the Governor. आप गालियां दे रहे हैं और यह रिकार्ड पर है। हम आपसे रिक्वैस्ट कर रहे हैं कि आप गालियां मत दीजिए।…( व्यवधान) 

श्री अशोक प्रधान (खुर्जा) : आप हमारी गालियां सुन रहे हैं, उनकी धमकियां नहीं सुन रहे।…( व्यवधान) 

PROF. VIJAY KUMAR MALHOTRA : It is on record.

उपाध्यक्ष महोदय : मोदी जी कन्क्लूड कर रहे हैं। मोदी जी, आप कन्क्लूड करें। Now, he is going to conclude his speech.

श्री सुशील कुमार मोदी : उपाध्यक्ष महोदय, अभी बिहार में जो कुछ हो रहा है, उससे नौकरशाही का मनोबल काफी गिर गया है और कोई आई.पी.एस., आई.ए.एस. बिहार में नौकरी करना नहीं चाहता है। पिछले दिनों दो लोग जो आई.ए.एस. का एग्जाम क्वालीफाई कर गये, उनमें से एक आन्ध्रा प्रदेश के … * हैं और एक बिहार के हैं, उनको जब बिहार कैडर एलाट हुआ तो उन्होंने बिहार में जाने से इन्कार कर दिया।…( व्यवधान) 

MR. DEPUTY-SPEAKER: Names will not go on record.

(Interruptions) …* श्री सुशील कुमार मोदी : मैं इसी पर बोल रहा हूं। …( व्यवधान) 

उपाध्यक्ष महोदय : मोदी जी, आप इतने समझदार हैं, इतने बड़े पार्लियामेंटेरियन हैं, फिर भी बार-बार नाम मेंशन कर रहे हैं।

...( व्यवधान)

श्री सुशील कुमार मोदी : ठीक है महोदय, नाम नहीं जाएगा। दो आईपीएस अधिकारियों ने बिहार जाने से इंकार कर दिया। इतनी भयावह और खराब आज बिहार की स्थिति हो गई है। आगामी चुनाव को ध्यान में रखकर यह सारे तबादले और पोस्िंटग किए जा रहे हैं, क्योंकि दो-तीन महीने के बाद चुनाव होने हैं। इसीलिए चुनाव को ध्यान में रखकर ये सारे स्थानांतरण किए जा रहे हैं। इसी कारण से बिहार के मुख्य सचिव को छुट्टी पर जाना पड़ा। सुप्रीम कोर्ट में भी विधान सभा भंग का मामला लंबित है। लेकिन जिन लोगों ने विधान सभा को भंग करवाया है, बिहार की जनता उनको कभी माफ नहीं करेगी। विधान सभा को भंग करवाने में राष्ट्रीय जनता दल के अलावा कांग्रेस, सीपीआई और सीपीआईएम के लोग भी कम जिम्मेदार नहीं हैं। ये लेफ्ट के लोग ही थे जिन्होंने कहा था कि बिहार की विधान सभा को भंग कर दिया जाए। …( व्यवधान) 

MR. DEPUTY-SPEAKER:  Hon. Members, please take your seats.

… (Interruptions)

MR. DEPUTY-SPEAKER:  Mr. Goyal, please sit down.

… (Interruptions)

 

* Not Recorded.

श्री सुशील कुमार मोदी : यूपीए गठबंधन का इस चुनाव में सफाया होगा और नीतीश कुमार जी बिहार के मुख्यमंत्री बनेंगे। लालू जी अब आपका समय चला गया है। अब यह स्थिति आ गई है कि लालू जी मिल्क बूथ का उद्घाटन कर रहे हैं। परसों पटना में एक मिल्क बूथ का उद्घाटन किया गया। एक लाख के मिल्क बूथ के उद्घाटन के लिए एक करोड़ विज्ञापन पर खर्च किए गए। चुनाव को देखकर लालू जी किस स्तर तक उतर आए हैं। रेल के हर एक कार्यक्रम को चुनाव रैली में तब्दील किया जा रहा है।…( व्यवधान) 

MR. DEPUTY-SPEAKER:  Mr. Modi, please conclude now.

श्री सुशील कुमार मोदी : उपाध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से चाहूंगा कि जो क्षेत्रीय दलों के लोग हैं, उनको राष्ट्रपति शासन के विस्तार के प्रस्ताव का विरोध करना चाहिए। सपा और बसपा के लोगों को भी इसका विरोध करना चाहिए क्योंकि आज नहीं तो कल आपके ऊपर भी धारा ३५६ की तलवार चलेगी। इसलिए मैं क्षेत्रीय दलों से यह आग्रह करूंगा कि धारा ३५६ के प्रयोग का विरोध करें और इस प्रस्ताव का समर्थन करें।

श्री बसुदेव आचार्य (बांकुरा) उपाध्यक्ष जी, भारतीय जनता पार्टी का कोई सदस्य नैतिकता, लोकतंत्र और लोकतंत्र की हत्या के बारे में बोलता है तो मुझे आश्चर्य होता है।शायद ये लोग भूल गए हैं कि बिहार में कानून एवं व्यवस्था की हालत किस वजह से खराब हुई थी। इनके शासन में धारा ३५६ का प्रयोग करके बिहार विधानसभा को भंग कर दिया गया था। वह लोकसभा में पारित हो गया था, लेकिन राज्यसभा में इनके पास बहुमत न होने की वजह से आरजेडी की सरकार को रिस्टोर करना पड़ा। क्या नीतीश कुमार जी भूल गए हैं कि वे १३ दिन के लिए मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठे थे?…( व्यवधान)

MR. DEPUTY-SPEAKER: No whispering. Please keep silence श्री बसुदेव आचार्य : शायद मैं गलती कर रहा हूँ। अटल बिहारी वाजपेयी जी १३ दिन के लिए प्रधानमंत्री बने थे और नीतीश कुमार जी सात दिन के लिए बिहार के मुख्यमंत्री बने थे। उनको बहुमत प्राप्त नहीं था, लेकिन फिर भी वे मुख्यमंत्री बन गए थे।…( व्यवधान) 

MR. DEPUTY-SPEAKER: No running commentary, please.

… (Interruptions)

श्री राम कृपाल यादव : अपराधियों के संरक्षण से बन गए थे। …( व्यवधान) 

श्री बसुदेव आचार्य : मैं नहीं जानता कि अपराधियों के संरक्षण से बने थे या किसी और कारण से बने थे। मैं उसमें नहीं जाना चाहता हूँ लेकिन मैं उम्मीद नहीं करता था कि नीतीश कुमार जी जैसा सज्जन आदमी ऐसे कैसे गद्दी पर बैठ गया, जबकि उन्हें बहुमत प्राप्त नहीं था। वे कैसे बहुमत जुटाएंगे? वे बहुमत नहीं जुटा सकते थे। उस समय झारखण्ड राज्य नहीं बना था*[MSOffice46]  एमएलएज़ को कहां ले जाएंगे, कहां क्या करेंगे। जब बहुमत नहीं जुटा तो छोड़कर, भागकर यहां मंत्री बनने के लिए चले आए। मुख्य मंत्री बनने का सपना उसी समय से देख रहे थे। जब बिहार विधान सभा का चुनाव हुआ और २७ फरवरी को उसका नतीजा निकला, तब देखा गया कि किसी का बहुमत नहीं था। लेकिन बिहार की जनता का जनादेश साम्प्रदायिक ताकतों के खिलाफ था।…( व्यवधान)   अगर हम देखें तो आरजेडी, कांग्रेस, वामपंथी दल, श्री राम विलास पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी, एनसीपी, सपा, बसपा और तमाम दल साम्प्रदायिक ताकतों के खिलाफ चुनाव लड़कर जीतकर आए। जब १९ तारीख को इस सदन में चर्चा हुई थी, राष्ट्रपति शासन का जो प्रस्ताव अनुमोदन के लिए आया था, उस समय भी हमने यह बात कही थी कि बिहार की जनता यही चाहती है कि तमाम धर्मनिरपेक्ष…( व्यवधान) 

श्री उदय सिंह : आपके कितने मैम्बर्स हैं?…( व्यवधान) 

श्री बसुदेव आचार्य : यह बात छोड़िए। सन् १९८४ के चुनाव में इस सदन में आपके कितने सदस्य थे। …( व्यवधान)  भूल गए।…( व्यवधान) 

MR. DEPUTY-SPEAKER: No running commentary please.

श्री बसुदेव आचार्य : दो सदस्य थे। दो से ८५ कैसे हुए, वह भी हमें मालूम है। फिर धीरे-धीरे दो में ही जाना है। आपके सदस्यों की संख्या घटती जा रही है।…( व्यवधान)   हर जगह आपकी हालत बुरी है।…( व्यवधान) 

MR. DEPUTY-SPEAKER: Silence please.

श्री बसुदेव आचार्य : हमारी पूंजी है।…( व्यवधान) 

मोहम्मद सलीम (कलकत्ता-उत्तर पूर्व) : अब फिर दो कैसे होंगे।…( व्यवधान) 

MR. DEPUTY-SPEAKER: Achariaji, you are a senior Member.  You should address to the Chair and not to the individuals.  You are addressing to the individuals.

श्री बसुदेव आचार्य : आप उनको टोका-टाकी करने से रोकिए।…( व्यवधान) 

उपाध्यक्ष महोदय : आपकी पार्टी के लोग ही बोल रहे हैं तो मैं उनको क्या कहूं। आपकी पार्टी के लोग ही आपको सुनने नहीं दे रहे हैं।

...( व्यवधान)

श्री बसुदेव आचार्य :वह भी बोल रहे हैं, वह भी बोल रहे हैं, हम तो बीच में हैं।…( व्यवधान) 

श्री प्रभुनाथ सिंह : यह घड़ी के पैंडुलम हैं।…( व्यवधान) 

श्री बसुदेव आचार्य : हम पैंडुलम नहीं हैं, हमारी कौन्सटीटूऐंसी है।…( व्यवधान) 

MR. DEPUTY-SPEAKER: Achariaji, you should address the Chair.

श्री बसुदेव आचार्य : उस समय हमने तमाम धर्मनिरपेक्ष दलों से यही अपील की थी कि एकजुट होकर बिहार में सरकार बनाएं। यही बिहार की जनता की इच्छा थी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ।…( व्यवधान) 

श्री हरिन पाठक (अहमदाबाद) : क्यों?

(Interruptions) …* * Not Recorded.

MR. DEPUTY-SPEAKER: Not to be recorded.

श्री बसुदेव आचार्य : अगर ऐसा नहीं हुआ तो क्या करें। वहां मजबूरी में राष्ट्रपति शासन लागू करना पड़ा। हमारी पार्टी राष्ट्रपति शासन के खिलाफ है। केरल में सन् १९५७ में हमने चुनाव जीतकर वहां सरकार बनाई। १९५९ में धारा ३५६ लगाकर, उस समय हमारी अनडिवाइडेड कम्युनिस्ट पार्टी थी, वहां से सरकार हटाई गई।…( व्यवधान)  उसके बाद बार-बार धारा ३५६ लगाई गई। वभिन्न राज्यों में १०७ बार राष्ट्रपति शासन लगाया गया था, जिनमें ज्यादातर धारा ३५६ लगाने की परिस्थिति उस राज्य में पैदा नहीं हुई थी। इसलिए सरकारिया कमीशन ने भी कुछ सिफारिश की थी जो अभी तक ठीक ढंग से लागू नहीं हुइर्[R47] ।

 लेकिन उस समय बिहार में कोई भी दल सरकार बनाने के लिए सक्षम नहीं था। आरजेडी सबसे बड़े दल के रूप में उभरकर सामने आया। कांग्रेस पार्टी ने उसे समर्थन दिया। बिहार में हमारी पार्टी का एक ही सदस्य था। हमने भी आरजेडी को समर्थन दिया। बीएसपी ने भी उन्हें समर्थन दिया। …( व्यवधान) एऩसीपी ने भी उन्हें समर्थन दिया। उस समय हमारी पार्टी ने श्री राम विलास पासवान से अपील की कि बिहार में चुनाव सरकार बनाने के लिए हुए हैं और अगर बिहार में सरकार नहीं बनी तो राष्ट्रपति शासन लग जायेगा। सरकार बनाने के लिए आरजेडी को जितने बहुमत की जरूरत थी, जब वह नहीं मिल सका तो वहां राष्ट्रपति शासन लागू करने के अलावा दूसरा कोई और चारा नहीं था। हमने उस समय कहा कि मजबूरी में राष्ट्रपति शासन लागू करना पड़ रहा है इसलिए हम समर्थन कर रहे हैं। समर्थन करते समय हमने यह भी कहा कि बिहार में जल्दी से जल्दी चुनाव होना चाहिए और जनता की राय लेनी चाहिए क्योंकि कोई भी दल सरकार बनाने में सक्षम नहीं है। वहां आरजेडी के अलावा किसी और दल ने सरकार बनाने का दावा भी नहीं किया। सुशील मोदी जी ने भी दावा नहीं किया कि हम सरकार बना सकते हैं। श्री नीतीश कुमार जी ने भी दावा नहीं किया। …( व्यवधान) 

श्री हरिन पाठक : हमने दावा किया था । … (Interruptions)

MR. DEPUTY-SPEAKER: Shri Acharia, please address the Chair.

श्री बसुदेव आचार्य : आपने कब किया ?  झारखंड में जाकर आपने दावा किया। …( व्यवधान)  दो महीने आपने इंतजार किया। …( व्यवधान)   गृह मंत्री जी ने भी जवाब देते समय कहा था कि वहां सरकार बने। अब चुनाव किसलिए होता है ?  चुनाव राष्ट्रपति शासन लागू न करके सरकार बनाने के लिये होता है। वहां सरकार नहीं बनी इसलिए राष्ट्रपति शासन लागू हो गया। वहां सिर्फ आरजेडी ने सरकार बनाने का दावा किया। उनके पास पूरा बहुमत नहीं था इसलिए वे वहां सरकार नहीं बना सके। …( व्यवधान) 

श्री प्रभुनाथ सिंह : सभापति महोदय, स्टेट यूनियन कुछ और बोल रहा है और ये यहां कुछ और बोल रहे हैं। अगर कोई गलत बोल रहा है तो उस पर कार्रवाई होनी चाहिए। …( व्यवधान) 

MR. DEPUTY-SPEAKER: Shri Prabhunath Singh, please do not make any running commentary. It is not to be recorded.

(Interruptions) …* श्री बसुदेव आचार्य : दो महीने आपने इंतजार किया। उसके बाद क्या घटना घटी, वह सबको मालूम है। सवाल यह है कि बिहार में क्यों विधान सभा भंग करनी पड़ी ? चुनाव होने के बाद सरकार नहीं बनी इसलिए वहां राष्ट्रपति शासन लागू हुआ। वहां सरकार बनाने की कोशिश हुई लेकिन सरकार नहीं बनी इसलिए विधान सभा भंगकरनी पड़ी। ऐसा नहीं है कि विधान सभा को भंग करने का कारण नहीं था। नीतीश जी ने अभी कहा कि हम लोगों को बातचीत करने के लिए गृह मंत्री ने कहा। अब इनको बातचीत करने के लिए बिहार में कोई जगह नहीं मिली इसलिए इन्हें झारखंड जाना पड़ा। …( व्यवधान) 

आप बंगाल भी आ सकते थे। …( व्यवधान)   बातचीत करने के लिए आप लोगों को जगह चाहिए। …( व्यवधान) 

MR. DEPUTY-SPEAKER: No running commentary please.

श्री बसुदेव आचार्य : बातचीत करने के लिए पटना में जगह नहीं है। बिहार में कहीं जगह नहीं है। तौलिये से मुंह ढककर, ताकि दिखाई न दे, ये लोग सबको लेकर झारखंड चले गये। अब सुशील मोदी जी झारखंड में सरकार बनाने को नैतिकता की बात कह रहे हैं। वहां जितने इंडीपेंडेंट सदस्य थे, वे सब मंत्री बन गये। जिन्होंने इनके खिलाफ लड़कर चुनाव जीता, वे भी मंत्री है[r48] ।

उन सबको लेकर बंगाल होकर, बंगाल में इतना नहीं था, इसलिए रातोंरात १२ बजे हमारे जिले होकर, पार, करके उड़ीसा और फिर वहां से कलकत्ता, भुवनेश्वर होकर दिल्ली चले गये औऱ दिल्ली से राजस्थान चले गये। कहीं और जगह नहीं मिली, इसलिए राजस्थान चले गये।…( व्यवधान)   कांग्रेस को बोल रहे हैं। अपने दल को, अपने एमएलएज को ले गये थे दूसरों से, शिव सेना से बचाने के लिए ले गये थे। क्या गलत काम किया था?  राम विलास पासवान जी अपने एमएलएज को दिल्ली ले आए थे जो बचे थे।…( व्यवधान)   आधे चले गये थे, आधे को लेकर दिल्ली आए। क्या गलत काम किया था ? उन्होंने क्या कसूर किया था ? २९ में से १० को ले आए। बाकी वे लोग झारखंड भगाकर ले गये।…( व्यवधान) 

* Not Recorded.

श्री लालू प्रसाद : सुनामी लहर आ गई थी।…( व्यवधान) 

श्री बसुदेव आचार्य : बोल रहे हैं कि यह कुछ नहीं था। जब दूसरा दल ले जा सकता है, राम विलास पासवान जी ले जा सकते हैं, हम भी बातचीत करने के लिए ले गये थे क्योंकि वहां पर माहौल अच्छा है। झारखंड में सत्ता में हैं, वहां पर आराम से बातचीत कर सकेंगे और सरकार पटना में बनाएंगे। घाटशिला बहुत अच्छी जगह है। वह हमारे जिले की बगल में है। अभी ब्रिज भी वहां पर बन गया है। हम जा सकते हैं।…( व्यवधान) 

MR. DEPUTY-SPEAKER: Nothing, except the speech of Shri Basu Deb Acharia, will go on record.

(Interruptions) …* श्री बसुदेव आचार्य : धाटशिला ले गये। इतना इमोशनल अटैचमेंट झारखंड के साथ है। घाटशिला में इसलिए क्योंकि वहां जल्दी कोई नहीं जा सकेगा। वहां जंगल है।…( व्यवधान)   जंगल में झारखंड के बॉर्डर में पीपुल्स वॉर ग्रुप्स के लोग बीच-बीच में घुस जाते हैं और इसलिए वहां चले गये।…( व्यवधान)   बोल रहे हैं कि कुछ नहीं है। क्या कसूर किया है ? अगर यह हॉर्स ट्रेडिंग नहीं है, अगर यह खरीद-फरोख्त नहीं है तो और क्या है ? …( व्यवधान) 

MR. DEPUTY-SPEAKER: Please do not make a running commentary.

श्री बसुदेव आचार्य : इतने दिन नहीं कर सके, राम विलास पासवान ने साफ-साफ कह दिया था कि हमारा कोई सम्पर्क भारतीय जनता पार्टी के साथ नहीं रहेगा। उनके मैनीफेस्टो में था और जिस मैनीफैस्टो को सामने रखकर २९ विधायक चुने गये, उनमें से १९ विधायकों को भगाकर चले गये और नैतिकता की बात सुशील मोदी जी कह रहे हैं। हमें सुना रहे हैं। शायद वह भूल गये हैं कि जिस व्यक्ति के नाम पर आज वह बोल रहे हैं, उनकी चर्चा करना उचित बात नहीं है। सब्सटेंटिव मोशन लेकर कितने दिन उनको मंत्री बनाया था ? …( व्यवधान)   ३-४ दिन के लिए मंत्री बनाया था।…( व्यवधान)   शायद महीना-भर मंत्री थे। आप तो चुप बैठे हैं। शायद सुशील मोदी जी को याद नहीं है। आज उनके बारे में बोल रहे हैं। उस समय आप कहां थे ? उस समय आपकी नैतिकता जो आज आप कह रहे हैं, कहां चली गई थी ?  यह सब कौन लाया था ? हम इसके खिलाफ हैं। बंगाल में ऐसा नहीं होता है।…( व्यवधान) 

 

*Not Recorded श्री सुशील कुमार मोदी : जब उन पर आरोप लगा था तो उनको अटल जी ने अपने मंत्रिमंडल से निकाल दिया था, जब उन पर चार्जशीट फाइल हुई थी।…( व्यवधान) 

श्री बसुदेव आचार्य : हम उस पर चर्चा नहीं करना चाहते हैं लेकिन आपने सवाल उठाया। यह व्यक्ति का सवाल नहीं है। …( व्यवधान) 

MR. DEPUTY-SPEAKER: Nothing, except the speech of Shri Basu Deb Acharia, will go on record.

(Interruptions) … * श्री बसुदेव आचार्य : हमारे लोकतंत्र की रक्षा करनी है, हमारे संविधान की रक्षा करनी है। हमने इसी सदन में टैंथ शैडयूल पारित करवाया। अगर खरीद-फरोख्त करके इन सब एमएलएज को लेकर अगर सरकार बनती है और बनने के बाद उनकी सदस्यता चली जाती तो क्या होता ?[R49]  इसीलिए मजबूरी में बिहार विधानसभा को भंग करना पड़ा। हम राष्ट्रपति शासन का समर्थन नहीं करते हैं लेकिन ऐसी परिस्थिति आ गयी थी कि इसके अतरिक्त दूसरा कोई चारा नहीं बचा था कि खरीद-फरोख्त को रोकने के लिए विधानसभा को भंग करना पड़े। इसीलिए हमारी पार्टी ने सबसे पहले मांग की थी कि राष्ट्रपति शासन वहां पर बहुत ज्यादा दिनों तक लागू नहीं रहना चाहिए और जितनी जल्दी हो सके वहां चुनाव हों। आज भी हम यही मांग कर रहे हैं कि चुनाव हों और हम यह भी अपील करेंगे कि बिहार के जो तमाम धर्मनिरपेक्ष दल हैं, हम सभी को एकजुट होकर लड़ना है और साम्प्रदायिक ताकतों को इस चुनाव में हराना है जो सत्ता में आने का सपना देख रहे हैं।

उपाध्यक्ष महोदय : कृपया आप अपनी बात कंक्लूड कीजिए।

श्री बसुदेव आचार्य : आज उत्तर प्रदेश में जो हालत है, वही हालत बिहार में भी होने वाली है। इसलिए बिहार के सभी धर्मनिरपेक्ष दलों को एकजुट होकर इस चुनाव में साम्प्रदायिक ताकत को अलग-थलग करना चाहिए और हम चाहते हैं कि बिहार में चुनाव हों और एक धर्मनिरपेक्ष सरकार का गठन हो।

* Not Recorded.

 

श्री मोहन सिंह (देवरिया) : उपाध्यक्ष महोदय, पिछली बार जब मार्च महीने में बिहार में राष्ट्रपति शासन लगाने का अनुमोदन करने का प्रस्ताव आया था, तब हमने अपनी पार्टी की ओर से उसका समर्थन किया था और माननीय गृहमंत्री जी से यह आग्रह किया गया था कि बिहार में यह स्थिति अनिश्चित काल तक नहीं रहनी चाहिए, जल्दी से जल्दी वहां एक सरकार गठित करानी चाहिए। यह केंद्र सरकार का दायित्व था कि एक सरकार के गठन में वह पहल करती। आज हम इसके विरोध में इसलिए खड़े हुए हैं क्योंकि भारत सरकार ने वहां एक चुनी हुई सरकार गठन से पहले ही वहां की विधानसभा को भंग कर दिया। यह वैसी ही स्थिति हुई कि जिस दिन बच्चा पैदा हो, उसके एक महीने के भीतर ही उसकी मां का कत्ल कर दिया जाए। इससे नृशंस और गन्दी बात और कुछ नहीं हो सकती। इससे भी आगे बढ़कर बात यह हुई कि जब मई महीने में भारतीय संसद की बैठक समाप्त हो गयी तो २३ मई को यह निर्णय लिया गया कि वहां की विधानसभा को भंग किया जाए। हमारे संविधान का जो अनुच्छेद ३५६ है, वह बिहार की परिस्थिति में जिस रूप में इस्तेमाल हुआ है, उसका इस्तेमाल न तो नैतिक रूप से सही है और न ही कानूनी रूप से क्योंकि अनुच्छेद ३५६ कहती है कि राष्ट्रपति को इस बात का समाधान होना चाहिए कि वधिसम्मत तरीके से, कानून और संविधान के प्रावधानों के तहत राज्य में शासन चलाना असंभव हो गया है, इसलिए वहां की सरकार को बर्खास्त कर वहां का शासन राष्ट्रपति जी स्वयं अपने हाथ में संभाल लें। इस अनुच्छेद में यह प्रावधान है। जब इस अनुच्छेद पर संविधान निर्मात्री परिषद में बहस हुई, तो डा.अम्बेडकर जी ने कहा एक बात खास तौर से कही थी, 17.00 [R50]    hrs. जिसका आधा हिस्सा मोदी साहब ने पढ़ा है और आधा मैं बताना चाहता हूं। उन्होंने कहा था कि किन्हीं खास परिस्थितियों का मुकाबला करने के लिए इस धारा का उपबंध किया जा रहा है। लेकिन भविष्य में प्रयोग के तौर पर यह धारा डैड लैटर की तरह रहेगी। यदि डैड लैटर की तरह नहीं रहेगी, कहीं उसका प्रयोग करना ही होगा, तो राष्ट्रपति जी को इस बात की एहतियात बरतनी होगी कि परिस्थितियां सही मानों में निर्माण हुई हैं या नहीं और उनके निर्माण के बारे में उनका पूर्ण रूप से संतुष्ट होना आवश्यक है। यह संविधान निर्मात्री सभा में बहस का जवाब देते हुए डा. अम्बेडकर जी ने ४ अगस्त, १९४९ को कहा था।

मुझे अफसोस है कि राष्ट्रपति जी इस देश से बाहर थे। ऐसी परिस्थिति सन् १९७० में उत्तर प्रदेश में आई थी। उस समय भी भारत के राष्ट्रपति श्री वी.वी. गरि देश से बाहर थे। ऐसी जगह पर थे जो स्थान पहले रूस का हिस्सा था, जो आज उक्रेन में चला गया है। भारत सरकार ने संस्तुति की थी कि उत्तर प्रदेश विधान सभा को भंग कर दिया जाए, लेकिन उन्होंने कहा कि सारे रेलिवेंट पेपर्स मेरे पास नहीं हैं इसलिए विधान सभा को स्थगित किया जाए, मैं भंग करने के पक्ष में नहीं हूं। उसके तीन महीने बाद जब राष्ट्रपति जी आए, तो एक नई सरकार १९७० में पदारूढ़ हुई थी, असेम्बली को भंग नहीं किया गया था। परिस्थिति हो सकती है कि किसी भी पार्टी का बहुमत न हो। अभी हमारे एक मित्र की ओर से कहा गया कि मजबूरी हो गई थी कि विधान सभा को भंग किया जाए।

भारत के संविधान की जो मंशा है, जब कोई भी सरकार उसकी हत्या करने लगती है तो मजबूरी एक बहाना हो जाती है, जब कोई बहाना नहीं होता। मुश्किल यह हो गई कि उत्तर प्रदेश में इस मामले में दो बार ऐसी परिस्थिति आई। एक बार १९९६ में आई, जब किसी पार्टी को बहुमत नहीं मिला। लेकिन पांच महीने के बाद, बातचीत के जरिए, एक नई सरकारी वहां आई और पांच महीने तक वहां राष्ट्रपति शासन रहा। उसके बाद २००२ में भी ऐसी परिस्थिति आई और दो महीने तक बातचीत होती रही। उसके बाद जब किसी पार्टी का वहां बहुमत नहीं हुआ, तो बातचीत के जरिए, २००२ में चुनाव हुए थे और मार्च २००३ में वहां एक सरकार आई। लेकिन यहां तो आपने समय ही नहीं दिया। २२ फरवरी को चुनाव हुए, ७ मार्च को विधान स्थगित कर दी गई और २३ मई को उसे हमेशा के लिए भंग कर दिया गया। यह कहा गया कि जो विधान सभा में चुने हुए लोग हैं, वे सरकार नहीं बना सके। उन्हें शपथ दिलाए बिना ही इस कार्यवाही को अंजाम दे दिया गया। मैं इसकी घोर निंदा करता हूं।

मुझे इस बात का अफसोस है कि गृह मंत्री के पद पर बैठे हुए एक प्रबुद्ध व्यक्ति द्वारा यह काम किया गया। मैं जानना चाहूंगा कि क्या राज्यपाल महोदय ने कोई रिपोर्ट दी थी? मेरी जानकारी के अनुसार रात को उन्हें बाध्य किया गया कि वह भारत सरकार को इस तरह की रिपोर्ट दें। जब सुप्रीम कोर्ट में यह मामला आया, तो उस पर बहस हो रही है। मैं विधायकों की खरीद-फरोख्त का पक्षधर नहीं हूं। लेकिन सीपीएम को छोड़ कर, किसी भी पार्टी कोअपवाद मानने को मैं अपने अनुभव के आधार पर तैयार नहीं हूं। अभी-अभी महाराष्ट्र में क्या हुआ हमारे गृह मंत्री जी ने कहा कि वहां श्री राणे को जब मंत्री बनाया गया, तो उन्होंने उसी समय नैतिकता के आधार पर विधान सभा की सदस्यता से त्यागपत्र दे दिया। लेकिन उनके साथ जो बाकी नौ विधायक हैं, उनके बारे में क्या कहेंगे, वे भी तो आएंगे। इसलिए कभी न कभी इस तरह से संविधान की प्रक्रियाओं का उल्लंघन किया जाता रहा है।

दल-बदल विरोधी कानून बनाते समय यह मंशा थी कि भारत की राजनीति में एक स्वच्छता और पारदर्शिता आएगी। लेकिन उस कानून का उल्लंघन करने का जिस किसी को भी अवसर मिलता है, उसे करने के बाद वह उसके पक्ष में तर्क देता है। मुझे अफसोस हुआ कि दल-बदल विरोधी कानून को सुनिश्चित करने का अधिकार गृह मंत्रालय ने अपने हाथ में ले लिया है। सुप्रीम कोर्ट के बोम्मई केस के निर्णय में कहा गया कि सदन के भीतर ही अल्पमत और बहुमत का फैसला होना चाहिए। मैं यह नहीं कहता कि आप बहुमत के किसी व्यक्ति को मुख्य मंत्री बनाते। आप लालू प्रसाद जी को, जिन्होंने क्लेम किया था बहुमत होने का, उन्हें बना देते। अगर वह सदन में बहुमत सिद्ध नहीं करते, तो दूसरी सरकार आती, जिसका बहुमत रहता। लेकिन किसी को अवसर दिए बिना विधान सभा को भंग करना, मैं समझता हूं कि लोकतंत्र का इससे बड़ा उपहास और हत्या पहले कभी नहीं हुई थी, जो अब हुई है[R51] ।

दूसरी बात मैं यह कहना चाहता हूं कि १९९९ में उत्तर प्रदेश में जब दो व्यक्तियों के बीच में यह प्रश्न आया कि कौन मुख्यमंत्री बनें, तो दो दिन के लिए हम लोगों की मदद से सभी लोग तैयार हो गये थे। एक व्यक्ति को मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठा दिया गया और वह मामला सुप्रीम-कोर्ट तक गया। सर्वोच्च न्यायालय नेनिर्देश दिया कि विधान सभा में बहुमत माननीय कल्याण सिंह जी का है या माननीय जगदम्बिका पाल जी का है, इसका निर्णय असेम्बली को बुलाकर माननीय स्पीकर महोदय विधान सभा के अंदर कर दें। विधान सभा में इस पर बहुत लम्बी-चौड़ी बहस हुई। कहा जाता है कि बहुमत का फैसला स्वयं राज्यपाल अपने आप कैसे कर ले। इसके बारे में उत्तर प्रदेश की एक नज़ीर है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश से जगदम्बिका पाल जी बहुमत में हैं या कल्याण सिंह जी बहुमत में हैं, इसका फैसला सदन के भीतर, बिना किसी मुख्यमंत्री के, उस जमाने के विधान सभा के स्पीकर ने किया था, जिससे माननीय कल्याण सिंह जी का बहुमत साबित हुआ और उन्हें मुख्यमंत्री की कुर्सी पर फिर से बैठने का अवसर मिला। माननीय राज्यपाल जी अगर चाहते तो इस तरह की संभावनाएं टटोल सकते थे। उत्तर प्रदेश के अंदर हम लोगों ने दावा पेश किया। वर्ष २००२ के जब चुनाव हुए, तो हमारा यह दावा था कि हमारा बहुमत है क्योंकि हमारे सबसे अधिक सदस्य जीतकर आये थे, लेकिन राज्यपाल महोदय ने सभी दलों से बातचीत की और बातचीत करने के बाद उन्होंने कहा कि आपके पास अधिक संख्या हो सकती है लेकिन आपका विरोध करने वालों की तादाद अधिक है, इसलिए हम आपको मुख्यमंत्री की शपथ दिलाने के लिए राजी नहीं हैं। राज्यपाल की एक परम्परा रही है कि वे सभी दलों से विचार-विमर्श करते हैं। यदि राज्यपाल महोदय को यह समाधान हो गया था कि किसी भी दल का बहुमत नहीं है और विधान सभा को भंग ही करना है, तो उनका यह नैतिक दायित्व था कि बिहार के सभी दलों के नेताओं को बुलाकर पूछते कि आज की परिस्थिति में क्या आप नयी सरकार बनाने के लिए तैयार हैं या नहीं। लेकिन दलों से परामर्श के बिना उन्होंने अपने मन से कह दिया कि यहां खरीद-फरोख्त होने वाली है। भारत सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय में जो अपनी तरफ से हल्फनामा दायर किया है, उस हल्फनामें में लिखा है कि विधायकों की खरीद-फरोख्त होने की संभावना थी और संभावना के ऊपर इतनी बड़ी कार्रवाई कर दी गयी, जोकि वहां की जन-भावनाओं का निषेध था। इस निषेध के हम विरोधी हैं। इसलिए हम गृह मंत्री जी से आग्रहपूर्वक कहना चाहते हैं कि ऐसी कार्यवाही करने से पूर्व, जिससे आपकी सरकार की नाक कटने वाली हो, आप क्या समझते हैं कि पूरा देश प्रबुद्ध नहीं है और इसका असर केवल बिहार के अंदर ही पड़ने वाला है।

हमें किसी से यह प्रमाण-पत्र लेने की आवश्यकता नहीं है कि हमारी पार्टी संप्रदायवादियों के विरोध में है या उनके समर्थन में है। हमारा रिकार्ड रहा है कि हमने संप्रदायवाद का जितना विरोध किया है, वह किसी से कम नहीं रहा है। इसलिए संप्रदायवाद के खिलाफ लड़ने के लिए हमें किसी से प्रमाण-पत्र लेने की आवश्यकता नहीं है। हमारे सीपीएम के नेता कह रहे थे कि हम चाहते हैं कि संप्रदायवादी शक्तियों का विनाश हो, लेकिन अगर हम इसी तरह का राजनैतिक आचरण रखेंगे तो विनम्रतापूर्वक पूछना चाहते हैं कि इससे साम्प्रदायिक शक्तियों का विनाश होगा या आप उनको प्रोत्साहित करेंगे, इसके बारे में हमारे मित्रों को सोचना चाहिए।

इसी सदन के अंदर बहुत अच्छी बात कही गयी। मैं भी उस समय लोक सभा का सदस्य था। जिस व्यक्ति के आचरण की आज चर्चा हो रही है, भारतीय जनता पार्टी ने उनको सादरपूर्वक अपनी कैबिनेट का मैम्बर बनाया था। माननीय जयपाल जी ने, जो यहां बगल में बैठते थे, उन्होंने कांग्रेस की बैंच से खड़े होकर कहा कि “यह केवल श्रीमान अटल बिहारी वाजपेयी जी की हिम्मत हो सकती है कि जिस व्यक्ति को चार्जशीट किया गया है, उस व्यक्ति को उन्होंने अपनी कैबिनेट का मैम्बर बनाया है”। ये उनके शब्द थे। जब उन्होंने यह कहा तो हम उनसे पूछते रहे कि यह आपने किसके बारे में कहा, तो उन्होंने कहा कि यह मेरे और वाजपेयी जी के बारे में है। जब हमने दूसरे दिन अखबार में पढ़ा कि वाजपेयी जी ने रात में बुलाकर उनका मंत्रि-परिषद् से त्यागपत्र ले लिया, तब देश को मालूम हुआ कि जयपाल जी ने उसी व्यक्ति के बारे में कहा था। वह व्यक्ति भी जब सदाचार और राजनैतिक नैतिकता की दुहाई देकर चुने हुए प्रतनधियों का गला काटे, तो मैं समझता हूं कि इससे अधिक दुर्भाग्यपूर्ण बात और कोई नहीं हो स्ाकती[r52] ।

इसलिए मैं राष्ट्पति शासन का विरोध करता हूं। चूंकि हम उक्त राज्य के बिलकुल बगल में हैं और वहां की कानून एवं व्यवस्था का हमारे प्रदेश पर भी प्रभाव पड़ता है।इसके लिए हमें कोई प्रमाण देने की आवश्यकता नहीं है। राष्ट्रपति शासन के खिलाफ राष्ट्रीय जनता दल के ही लोगों ने सत्याग्रह किया है, धरना दिया है और उन्होंने कहा कि बिहार में कानून एवं व्यवस्था की हालत जितनी पहले खराब थी, उससे भी अधिक खराब आज हो गई है। मैं और कोई बात नहीं कहना चाहता हूं।भारत सरकार के ही एक कैबिनेट मंत्री जो कि ग्राम विकास मंत्री हैं, उन्होंने खुद कहा कि बिहार की मशीनरी, बिहार को केंद्र सरकार के द्वारा दिए गए विकास कार्यों को ठीक तरह से नहीं कर सकती, इसलिए हम केंद्र सरकार की मशीनरी से इस विकास के कार्य को बिहार में कराने के लिए दिल्ली सरकार के इंजीनियर्स के लेकर बिहार गए। जिस दिन इंजीनियर्स ने उस राज्य में प्रवेश किया, उनका अपहरण हो गया।

उपाध्यक्ष महोदय, मैं इस बात को विनम्रतापूर्वक कहता हूं कि यदि उत्तर प्रदेश की पुलिस ने मुस्तैदी के साथ उन दोनों इंजीनियर्स को पकड़कर सामने नहीं लाया होता, तो उनकी लाश ही श्रीमान् रघुवंश प्रसाद जी के हवाले हुई होती। महोदय, बिहार में किस तरह से काम हो रहा है, हमें उसका प्रमाण-पत्र देने की जरूरत नहीं है, इसको श्री रघुवंश प्रसाद सिंह जी ने स्वयं ही प्रमाणित कर दिया है।

MR. DEPUTY-SPEAKER: Please sit down.  No running commentary please.

श्री मोहन सिंह : महोदय, यह एक अभूतपूर्व प्रशासनिक स्थिति है कि राज्य के गवर्नर के आदेश के खिलाफ वहां का मुख्य सचिव यह कहे कि वह उसके आदेश को मानने के लिए तैयार नहीं है और इसकी मातहती में मेरे लिए काम करना कठिन है, इसलिए वह लंबी छुट्टी पर चला जाता है। यह एक अभूतपूर्व स्थिति है। महोदय, हम कौन-कौन से द्ृष्टांत का उदाहरण इस देश के सामने रखना चाहते हैं? जिस तरह से भारत सरकार इस देश को मैनेज कर रही है उसका सबसे बड़ा प्रमाण उसकी प्रयोगशाला बिहार में बनकरउभरी है।

महोदय, इसलिए मैं कहना चाहता हूं कि जिस सूबे की अफसरशाही पर उस सूबे के राज्यपाल का पकड़ न हो, जो कि एक अभूतपूर्व घटना है, अपने मुख्य सचिव को समझाने के लिए राज्यपाल को सारे शिष्टाचार के तकाजे को तोड़कर भोर में उनके घर जाना पड़े और खाली हाथ लौटकर आना पड़े, इससे अधिक शर्मनाक बात नहीं हो सकती। इससे अधिक गवर्नर पद की गरिमा का अपमान नहीं हो सकता, जो वहां किया गया।उपाध्यक्ष महोदय, वहां विधायकों की संख्या का सवाल नहीं है। जब कभी भी चर्चा में व्यक्तियों के नाम आ जाएं, तो उस पर उत्तेजित या परेशान होने की जरूरत नहीं है।व्यक्तियों से ही जुड़ा हुआ कोई न कोई व्यक्ति वहां बैठा हुआ है। जब उसकी कलम से कोई अन्याय होता है, तो उस अन्याय की चर्चा होते समय उस व्यक्ति का नाम उद्धृत हो जाना कोई अस्वाभाविक बात नहीं। हम कांग्रेस पार्टी को, हमारे गृहमंत्री जी को, हमारे प्रधानमंत्री जी को यह जरूर कहना चाहते हैं, कि इस पर गंभीरतापूर्वक सोचना चाहिए। प्रधानमंत्री जी ने राज्य सरकारों को बिना सूचित किए देश भर के डिस्टि्रक्ट मजिस्ट्रेटों को विज्ञान भवन में बुलाया था और सब के सामने खड़े होकर कहा था कि प्रशासन में स्थिरता आनी चाहिए। यह कोशिश होनी चाहिए कि तीन साल के अंदर किसी भी जिले के मजिस्ट्रेट को न हटाया जाए, क्योंकि वह केवल प्रशासन का ही नहीं, विकास का भी दायित्व संभालने वाला व्यक्ति है।यदि प्रधानमंत्री जी के इस आदेश का, आग्रह का किसी राज्य की चुनी हुई सरकार के द्वारा उपेक्षा होती, तो वह बात समझ में आती है, लेकिन प्रधानमंत्री के आग्रह की उस राज्य में उपेक्षा हो, जिस राज्य की हुकूमत स्वयं उनके हाथ में हो, तो मैं ऐसा मानता हूं कि वह राज्य और उस राज्य के राज्यपाल प्रधानमंत्री की अवज्ञा कर रहे हैं और प्रधानमंत्री के प्रति अपना अविश्वास प्रकट कर रहा है, इस बात को समझा जाना चाहिए। अगर यह बात सही है तो प्रधानमंत्री जी इस बात पर गंभीरतापूर्वक विचार करें कि उनके आग्रह का, उनके आदेश का, जहां उनकी सरकार है, जहां उनका नियंत्रण है, वहां उनके आदेशों का पूरी तरह से पालन किया जा रहा है या नहीं।इस विषय पर उन्हें गंभीरतापूर्वक सोचना चाहिए।

उपाध्यक्ष महोदय, इन्हीं शब्दों के साथ मैं इस राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने का पुरजोर विरोध करता हूं। इस राज्य में जो कानून एवं व्यवस्था की जो हालत है, उस पर गहरी चिंता प्रकट करता हूं, क्योंकि हम इस राज्य के पड़ोस में हैं और हम भी इससे प्रभावित होते हैं।मैं आग्रह करना चाहता हूं कि बिहार की हालत को सुधारने के लिए कुछ त्वरित कार्यवाही करनी चाहिए, क्योंकि चुनाव नजदीक हैं।यदि यही उदाहरण लेकर हम वहां जाएंगे तो मैं ऐसा नहीं समझता कि जो जनाकांक्षा और इच्छा हमारे सीपीएम के नेता ने प्रकट की है, वह इच्छा पूरी होगी। इस संदर्भ में मुझे अनेक आशंकाएं हैं। अपनी इस आशंका को देखते हुए मैं आपको बहुत-बहुत धन्यवाद देता हूं[c53] ।

श्री देवेन्द्र प्रसाद यादव (झंझारपुर) : उपाध्यक्ष महोदय, अभी माननीय नीतीश जी यहां नहीं हैं। उन्होंने नियम १८४ के तहत कानून और व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति तथा साथ ही राज्य के मुख्य सचिव की लम्बी छुट्टी पर चले जाने से उत्पन्न स्थिति पर चिन्ता व्यक्त की है। वह इस पर सबस्टैंटिव मोशन लाए हैं। हम इस मोशन में कहीं से भी सबस्टैंस नहीं देख रहे हैं। मैं ऐसा इसलिए कहना चाहता हूं कि खोदा पहाड़ और निकली चुहिया। उनका पूरा भाषण सारर्भित था। मैंने एक घंटा माननीय नीतीश जी का भाषण सुना। माननीय नीतीश जी कानून का राज चाहते हैं। वह कैसा कानून का राज चाहते हैं? जैसा कि हमारे गांव में कहावत है  "छलनी दुश्लक सूप से, जिस का स्वयं सहरुा छेद"

             उन्हें सबसे पहले सात दिन मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठने का मौका मिला। प्रभुनाथ सिंह जी यहां बैठे हैं। सात दिन में इतने सज्जन लोगों की भीड़ हो गई जिन को याद करने की जरूरत नहीं है। इतने सज्जन लोग चीफ मनिस्टर के चैम्बर में, गांजा पीने वाले लोग बैठ गए। क्या हो रहा था? …( व्यवधान) जब नीतीश जी बोल रहे थे, तो मैंने कोई टोका-टाकी नहीं की। अगर अब टोका-टाकी की तो खराब हो जाएगा।
उपाध्यक्ष महोदय: हम चाहेंगे कि कोई भी बोले तो टोका-टाकी न हो।
श्री देवेन्द्र प्रसाद यादव : आप हमें संसद में अपनी बात रखने दीजिए। आप भी अपनी बात रखिए। नीतीश जी चाहते हैं कि कानून का राज चले। नीतीश जी कैसा कानून का राज चाहते हैं? उन्होंने यहां हमारे दल के संबंध में दर्द और पीड़ा व्यक्त की। लोक जनशक्ति पार्टी के जो केन्द्रीय मंत्री हैं, उनके भाई पर जो हमला हुआ, उसके लिए उनके मन में बहुत दर्द और पीड़ा है। राष्ट्रपति शासन काल में जो कानून और व्यवस्था की स्थिति है, उसके बारे में उन्होंने यहां तक कहा कि आरजेडी के नेता की दिन-दहाड़े हत्या हुई लेकिन उन्होंने एक बात की चर्चा नहीं की जिस का मुझे अफसोस है। वह यह थी कि इंजीनियर का अपहरण किस ने किया? बिहार में जब केन्द्रीय एजेंसीज लगायी गयी थींबिहार में बाहर से पीडब्ल्यूडी और एनएचपीसी विभाग लगाए गए थे, जिससे वहां राष्ट्रपति शासन काल में सड़क का निर्माण हो सके, सबसे पहले उनके अभियंता का अपहरण हो गया। अपहरण में कौन लोग थे, मैं यह जानना चाहता हूं। यक्ष के समान यह सवाल बिहार के सामने और पूरे देश के सामने खड़ा है। वे कौन लोग थे जो किडनैप में शामिल थे, बिहार का विकास नहीं करना चाहते थे, जो बिहार में अपराधियों का मनोबल बढ़ा रहे थे। यह तथ्यों से स्पष्ट हो गया है। जो जांच हुई, उनसे यह तथ्य सामने आया है कि किडनैप में कौन लोग शामिल थे? इन सब के पीछे अपराधी कौन हैं? नीतीश कुमार जी को उस पर अपनी बात रखनी चाहिए थी। उन्हें इशारा करना चाहिए कि वह कौन सी टीम है, कौन सी जमात है जिन्होंने इस तरह का काम किया? …( व्यवधान) 
उपाध्यक्ष महोदय: लालू जी. आपकी पार्टी के माननीय सदस्य बोल रहे हैं लेकिन आप रनिंग कमैंट्री कर रहे हैं।
श्री लालू प्रसाद : मैं उन्हें असिस्ट कर रहा हूं।
उपाध्यक्ष महोदय: आप असिस्ट लिख कर कर दीजिए।
श्री देवेन्द्र प्रसाद यादव : एक दल है, संयोग से बिहार के सैकुलर कम्पार्टमैंट का ही दल है, उनके जितने सज्जन एमएलएज थे, उन सब को उन्होंने ज्वाइन करा दिया। वे इतने सज्जन हैं कि पूरे इतिहास में उनका नाम है। बिहार की धरती पर वे काफी मशहूर हैं। उनको ज्वाइन करा दिया। यह सौभाग्य कहिए कि घाटशिला में पोल खुल गई। यदि पोल नहीं खुलती तो सात दिन नहीं, इस बार तीन दिन भी मुख्यमंत्री पद पर नहीं होते। वह ऐसे लोगों की जमात बना रहे थे। मैं समझता हूं कि नीतीश जी का सौभाग्य था कि वह इस बार इस तरह का प्रयोग नहीं कर पाए।
सात दिन वाले प्रयोग में भी कोशिश हुई, लेकिन वह फेल हो गया। इस बार यदि होता तो मैं कहना चाहता हूं कि क्योंकि पहली बार मोकामा में किसी का महिमामंडन किया गया, …* महान सज्जन आदमी, जो बिहार में है, बड़ी मूंछ रखता है…( व्यवधान) 
* Not Recorded.
उपाध्यक्ष महोदय : नाम रिकार्ड में नहीं आएगा।
...( व्यवधान)
श्री देवेन्द्र प्रसाद यादव : उपाध्यक्ष महोदय, मैं नाम नहीं कह रहा, मैं मूंछ वाले आदमी का नाम कह रहा हूं…( व्यवधान) 
उपाध्यक्ष महोदय : जब श्री मोदी जी ने नाम लिया था, तो उसी वक्त एक्सपंज कर दिया गया था।
...( व्यवधान)
श्री देवेन्द्र प्रसाद यादव : उपाध्यक्ष महोदय, ठीक है, मैं आपकी बात मान लेता हूं मैं नाम का जिक्र नहीं करूंगा लेकिन इतना जरूर कहना चाहता हूं कि मोकामा में मशहूर और कुख्यात है जिनका महिमामंडन हुआ है। यह इसलिए कहना चाहता हूं कि राजनीति का कोई मूल्य रहेगा या नहीं? एक तरफ कहने के लिए ठीक है कि आपको भी अधिकार है कि कुछ भी कह सकते हैं, तथ्यों से परे और असत्य बात को कहकर, मनगढंत बातों को कह कर आप जो इस कानून व्यवस्था की बात कहना चाहता हैं, हाय-तौबा मचा रहे हैं, जिस राष्ट्रपति शासन से उत्पन्न स्थिति, कानून और व्यवस्था और छुट्टी पर चले जाने की स्थिति पर बहस कर रहे हैं, इसके लिए जिम्मेदार कौन है? क्या यूपीए सरकार के गठन को रोकने का काम आप लोगों ने नहीं किया था? आप लोगों ने लिख-लिख कर पत्र दिए, अकेले आरजेडी सिंगल पार्टी थी, आरजेडी जो क्लीमेंट थी, वह राष्ट्रपति शासन नहीं चाहती थी वह लोकप्रिय सरकार चाहती थी। उसमें कांग्रेस का समर्थन था, एनसीपी का समर्थन था, बीएसपी का समर्थन था और उसमें वाम दलों का समर्थन था, अकेली क्लेमेंट थी, श्रीमती राबड़ी देवी ने सरकार का गठन का दावा पेश किया था। यह तथ्यों की बात है कोई क्लेमेंट नहीं था और कहते हैं कि राष्ट्रपति शासन का हम लोग विरोध करते हैं। राष्ट्रपति शासन को तो आप लोगों ने आमंत्रित किया है। आप ही बना लेते लोकप्रिय सरकार, आप लोगों ने लिख-लिख कर दिया क्योंकि सरकार का गठन नहीं होने देना है। इतिहास में ऐसी स्थिति कभी पैदा नहीं हुई थी। आप अपना दावा पेश करते, जो सरकार गठित होने वाली थी आप उस सरकार को रोकने के लिए गए। इसलिए राष्ट्रपति शासन की जननी आप एनडीए के लोग हैं। आप लोगों ने राष्ट्रपति शासन की स्थिति पैदा की, परिस्थिति का निर्माण किया कि राष्ट्रपति शासन बिहार में लगे। आप ही हाय-तौबा मचा रहे हैं। आप लोकप्रिय सरकार की कल्पना कर रहे हैं और उसमें कह रहे हैं कि लोकप्रिय सरकार और जैसा शासनहोना चाहिए था उसी तरह से शासन क्यों नहीं हो रहा है, बहुत चिंता हो रही है। यहां तक तक आप लोग जो स्तर बहस का रख रहे हैं, गृहमंत्री जी ने ठीक कहा है कि राज्यपाल का पद संवैधानिक है, कांस्टीटयूशनल ऑथोरिटी के बारे में जिस स्तर पर संसद में बहस हो रही है यह प्रसिडेंस के लिए यह परंपरा अच्छी नहीं है। आप व्यक्तिगत आलोचना पर कैसे बहस कर सकते हैं जब तक संविधान है। इसलिए मैंने इस बात का जिक्र किया है और मैं आपसे कहना चाहता हूं, खासकर उपाध्यक्ष महोदय ये लोग बहुत बहस कर रहे हैं। जो चर्चा की गई है उसमें कानून व्यवस्था की चर्चा कम की है और बहस का एंगल दूसरी तरफ मुड़ा हुआ है। एक एसपी की चर्चा कर रहे हैं। किस एसपी की, जो एसपी एक भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष, पूर्व सांसद का रिश्तेदार है। जो कट्टरपंथी है और आरएसएस से जुड़ा हुआ जिसका आचरण रहा है, ऐसे एसपी की चर्चा कर रहे हैं। मैं नाम नहीं कह रहा हूं, पूर्व सांसद, अगर वे संसद में होते तो प्रोटेस्ट कर सकते थे।…( व्यवधान) मैंने इसलिए कहा पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व सांसद, उनके रिश्तेदार हैं, उनकी चिंता बहुत ज्यादा है। एक एसपी जिन्होंने जनप्रतनधि के, जो इलैक्टेड प्रतनधि हैं उनका जिला बदलने का काम किया। कहां गया लोकतंत्र का मूल्य, कहां गई लोकतंत्र में आस्था? कुछ ऐसे अधिकारी, ब्यूरोक्रेट्स के पक्ष में लोग बोलने लगे हैं। श्री प्रभुनाथ सिंह जी उनके खिलाफ बोलते रहे हैं, पता नहीं आज क्या हो गया। ब्यूरोक्रेट्स और उनसे जो गलतियां थीं उस पर वे भाषण करते थे। ब्यूरोक्रेट्स का अंतिम क्षण में क्यों कड़वा स्वभाव बन जाता cè[p54] ।
यह बहस का विषय होना चाहिये कि जब ब्यूरोक्रेट्स सेवा में होते हैं, चाहे वह आई.ए.एस. अधिकारी हो या आई.पी.एस. अधिकारी हो, वे क्रान्ति की कोई बात क्यों नहीं करते लेकिन जब सेवानिवृत्त होने लगते हैं या रिटायरमेंट में कुछ समय रह जाता है तो क्रान्तिकारी हो जाते हैं। यह एक अजीब सा शौक पैदा हो गया है। इसी प्रकार बिहार में जब श्री डी.पी. ओझा थे, जब वह रिटायर होने वाले थे, उस समय भी ऐसा कुछ होने लगा था। शायद उनका दो महीने का सेवाकाल बचा था, मुझे ठीक से याद नहीं पड़ता। जब वह सेवा में थे तो कहते थे कलोकतांत्रिक पद्धति में कोई खराबी नही आई लेकिन जब अचानक चुनाव लड़ने का मन हो गया तो विचार बदलने लग जाते हैं। माननीय सदस्य श्री शाहाबुद्दीन जी इस सदन में मौजूद हैं जो एक आई.पी.एस. अधिकारी द्वारा बार बार नजर आने लगे, वह इसलिये कि अपनी सी.आर. ठीक से क्लिक हो सके और पब्लिक में जाने के लिये फस्र्ट नम्बर मिल सके। उपाध्यक्ष जी, मैं आपसे यही कहना चाहता हूं क जब श्री नीतीश जी बोल रहे थे, हमें उम्मीद थी कि वह लोकनायक जयप्रकाश नारायण के रास्ते पर चलने की बात करेंगे। मैं ही नहीं, कई हमारे सांसद साथी उनके रास्ते पर आन्दोलन में भाग लेते रहे हैं और १९७४ से साथ साथ रहे। लोक नायक जय प्रकाश जी ने मूल्यों की राजनीति करने के लिये हम लोगों का मार्गदर्शन किया था। आज वही लोग अपने लिये बैंगन बातर नहीं लेकिन दूसरों के लिये बैंगन बातर हैं।…( व्यवधान) 
MR. DEPUTY-SPEAKER:  No running commentary please.
श्री देवेन्द्र प्रसाद यादव : उपाध्यक्ष जी, आज नौकरशाहों का एक नया फैशन सा हो गया है। अपनी रिटायरमेंट के अंतिम समय में वे क्रान्तिकारी हो जाते हैं लेकिन सेवाकाल के दौरान क्रान्तिकारी नहीं बनते हैं। माननीय नीतीश जी एक सुलझे हुये और अनुभवी नेता हैं। मैंने दूरदर्शन पर देखा कि उन्होंने चीफ सैक्रेटरी के लिये कहा कि उनका क्रान्तिकारी स्टेटमेंट है। क्या वे मुख्य सचिव के नाम पर जनादेश मांग रहे हैं? मैं उन से इस स्तर की अपेक्षा नहीं करता था।…( व्यवधान) 
MR. DEPUTY-SPEAKER:  Mr. Yadav, please address to the Chair.  Please conclude.  
श्री देवेन्द्र प्रसाद यादव : उपाध्यक्ष महोदय, मैंने तो अभी शुरु ही किया है। मेरी पार्टी का स्टैंड है। दूसरे माननीय सदस्य घंटा घंटा बोले हैं। मेरे साथ न्याय कीजिये।
उपाध्यक्ष महोदय :  मेरे पास लिस्ट है, उसके मुताबिक आपकी पार्टी का समय पूरा हो गया है। आप कनक्लूड कीजिये।
श्री देवेन्द्र प्रसाद यादव : माननीय उपाध्यक्ष जी, नीतीश जी का यह निशाना नहीं है क राष्ट्रपति शासन और छुट्टी पर चले गये मुख्य सचिव के कारण उत्पन्न स्थिति का प्रस्ताव यहां लाना, बल्कि राष्ट्रपति शासन के बहाने सत्ता में आने का निशाना है। इसके अलावा कोई दूसरी बात नहीं है। वे स्कोर कर रहे हैं। सत्ता में आते आते वह ऐसी जमात में चले गये। डा. राम मनोहर लहिया ने इस देश में समाजवादी आन्दोलन की शुरुआत की थी। उनके अनुयायी श्री जॉर्ज फर्नान्डीज एन.डी.ए. सरकार में रक्षा मंत्री रह चुके हैं। उनके समय श्री विष्णु भागवत, जो नौसेना के बड़े अधिकारी रहे हैं, उनके साथ क्या सलूक किया गया, यह मैं जानना चाहता हूं[RB55] ।
उनके साथ क्या व्यवहार हुआ था। अभी तो बड़ा अच्छा लगता है कि चीफ सैक्रेटरी को बहाना बनाकर घूम रहे हैं। बी.जे.पी. के जो लोग बैठे हैं, उनमें से श्री सुशील मोदी को मैं सुन रहा था। वह बोल रहे थे उन्हें याद है गुजरात में जो निवर्तमान डी.जी.पी. हैं, उसने क्या कहा था। उसने कहा है कि गुजरात में दंगा रोकने के लिए फोर्स को रोका गया और मुख्य मंत्री के निर्देश से रोका गया। यह उन्होंने आयोग के सामने स्पष्ट कहा है। उसको उप-सचिव से धमकी दिलाई गई। ब्यूरोक्रेसी के विषय में बोलते हैं। गुजरात में आपने क्या किया था। आप अपने गिरेबान में देखिये कि गुजरात में आपने क्या किया था।…( व्यवधान)   इतना ही नहीं, उपाध्यक्ष महोदय यह चौंकाने वाला तथ्य है, महामहिम पूर्व राष्ट्रपति जी ने तत्कालीन प्रधान मंत्री जी को पत्र लिखा कि सही समय पर यदि कदम उठाते तो गुजरात में दंगा नहीं होता। प्रैस और पत्रिका को उन्होंने इंटरव्यू दिया। यह महामहिम पूर्व राष्ट्रपति कह रहे हैं…( व्यवधान)  हजारों इंसानों को गुजरात में कत्ल किया गया और उस कत्ल को जो अधिकारी रोकना चाहते थे, उन्हें आपने धमकी देने का काम किया। इसलिए नीतीश जी मैं आपसे कहना चाहता हूं कि उस जमात को छोड़ दीजिए। लालू जी आपको ही मुख्य मंत्री बना देंगे। आप उन गलत लोगों की जमात में क्यों फंसे हुए हैं। आप हमारी बात मानिये और उधर से जल्दी नाता तोड़िये। मैं समझता हूं कि श्री प्रभुनाथ सिंह जी भी हमारी बात से सहमत होंगे। नीतीश भाई आपकी पार्टी के लोगों ने बोला कि बड़ा दबाव था। सीवान के एस.पी. ने स्वयं कहा, तीन-तीन बार पत्र लिखा है। जो जानकारी हमें प्राप्त हुई है,उसकी जांच करा ली जाए, उन्होंने तीन-तीन बार बिहार सरकार को पत्र लिखा था कि सीवान के एस.पी. की पत्नी आयकर विभाग में उस समय पदस्थापित हैं, अब वह इलाहाबाद चली गई हैं। उस समय उनकी पोस्िंटग आयकर विभाग पटना में थी। इसलिए पटना के लिए उन्होंने बिहार सरकार को अनुरोध किया था। एक एस.पी. का ट्रांसफर हो गया तो हाय-तौबा मचा रहे हैं और इसी को एक इश्यु बना रहे हैं। माननीय राज्यपाल जी ने स्वयं कहा है कि मैंने स्वविवेक से निर्णय लिया है और मुझ पर कोई दबाव या किसी का हस्तक्षेप नहीं है।
इन्हें हर समय लालू जी नजर आ रहे हैं। देश में कुछ लोगों को लालू फोबिया हो गया है। मैं इस पर क्या कह सकता हूं। उपाध्यक्ष महोदय, यह एक बीमारी होती है - लालू फोबिया, हर आदमी को सोते, उठते, बैठते, जागते, हर समय लालू दर्शन हो रहे हैं। यह फोबिया हो रहा है। आप लोग बीमारी के शिकार हैं।
MR. DEPUTY-SPEAKER: Nothing will go on record.
(Interruptions) …* श्री देवेन्द्र प्रसाद यादव : हम चाहते हैं कि आप लोग बीमारी का शिकार न बनें।
उपाध्यक्ष महोदय : यादव जी, अब आप कंक्लूड करिये।
श्री देवेन्द्र प्रसाद यादव : मैं कहना चाहता हूं कि राज्यपाल महोदय को निर्णय लेने के लिए चाहे मुख्य सचिव हो या अन्य कोई बड़ा पदाधिकारी हो, जो उनके सलाहकार के रूप में काम करता हो, सलाहकार की सभी सलाह को मानने के लिए क्या कांस्टीटयूशनल बाध्यता है। हम यह सवाल उठाना चाहते हैं। इसलिए आप लोग एक गमिक कर रहे हैं। बिहार में एक वातावरण बना रहे हैं। एक बार इस पर सदन में बहस हो जाए। जब तक यह डेमोक्रेटिक सिस्टम रहेगा, डेमोक्रेटिक सिस्टम में वहा राष्ट्रपति शासन है, वहां कोई चुनी हुई सरकार नहीं है। वहां राज्यपाल को पूरा अधिकार प्राप्त है कि वह अपने सलाहकारों की सलाह को माने या न माने। यह कैसे कह सकते हैं कि उनके सलाहकारमुख्य सचिव ने कह दिया कि * Not Recorded.
उनकी राय नहीं मानी, वह रूस गये और छुट्टी पर चले गये। वह छुट्टी पर जाते हैं तो जाते रहें। लेकिन लोकतंत्र की जो व्यवस्था है, वह कमजोर नहीं हो सकती है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में लोकतंत्र मजबूत रहेगा और हमें इस सिस्टम को स्वीकार करना चाहिए। सलाहकार की राय नहीं मानी तो हाय-तौबा मचा रहे हैं। सलाहकार तो आते-जाते रहेंगे। लेकिन लोकतांत्रिक व्यवस्था शाश्वत रहेगी। जब तक भारतीय संविधान है, जब तक लोकतांत्रिक व्यवस्था है...( व्यवधान)
उपाध्यक्ष महोदय : आपकी पार्टी के मैम्बर बोल रहे हैं और आप ही डिस्टर्ब कर रहे हैं।
...( व्यवधान)
MR. DEPUTY-SPEAKER: No running commentary please.  Nothing will go on record.
(Interruptions) …* उपाध्यक्ष महोदय : यादव जी, अब आप कंक्लूड करिय्ो[R56] ।
श्री देवेन्द्र प्रसाद यादव : अभी तो ताजा उदाहरण है। राज्यपाल को यह अधिकार है कि वे अपने मुख्य सचिव की सलाह को नहीं मानें। माननीय आडवाणी जी तो आरएसएस की सलाह को भी नहीं मानते हैं और नागपुर में जो नागपुर डिसॉर्डर एकैडमी चल रही है, उस एकैडमी का आदेश आप नहीं मानते हैं। आप तो डैमोक्रैटिक सिस्टम को भी नहीं मानते हैं।…( व्यवधान) 
प्रो. राम गोपाल यादव : क्या नाम है एकैडमी का?
श्री देवेन्द्र प्रसाद यादव : नागपुर डिसॉर्डर एकैडमी यानी एनडीए। ये सभी उस एनडीए के सदस्य हैं। मैं नीतीश जी से आग्रह करता हूं कि उस एकैडमी से अपना नाम कटा लें। …( व्यवधान)  जार्ज साहब वहां नाम लिखाने नहीं गए थे, वे नागपुर एकैडमी को समझाने गए थे कि रफ्तार इतनी तेज मत करिये लेकिन नागपुर एकैडमी ने उनकी बात को रिजैक्ट कर दिया। …( व्यवधान)   वह तो फाइनल है, लेकिन उनको सिर्फ सैशन तक का टाइम मिला हुआ है। …( व्यवधान) 
श्री लालू प्रसाद : नीतीश जी ने अटल जी को फोन किया था …( व्यवधान) 
श्री देवेन्द्र प्रसाद यादव : जार्ज साहब ने स्वयं कहा है कि क्रमिनल्स को टिकट मिलेगा क्योंकि हमारी मजबूरी है। पता नहीं, प्रैस में गलत भी हो सकता है। यदि ऐसा है तो वे खंडन कर सकते हैं। वे यहां मौजूद हैं, इसलिए मैं बोल रहा हूं। मैंने किसी अखबार में देखा कि जार्ज साहब ने कहा कि क्रमिनल को भी * Not Recorded.
टिकट मिलेगा चूंकि हमारी मजबूरी है। अब इन लोगों की क्या क्या मजबूरियां हैं और कहते हैं कि बिहार में जीवन-मरण की लड़ाई है। जीवन-मरण की लड़ाई है तो जनता के जनादेश से ही फैसला होगा। समय आएगा तो जनादेश के द्वारा फैसला हो जाएगा। विधान सभा भंग होने की नीतीश जी ने बहुत कम चर्चा की। घाटशिला में चौकी पर जिन एमएलए लोगों को लौटाया गया, एक पत्रकार वहां बैरा बनकर गए तो उन्होंने देखा कि चौकी के तले में ब्रीफकेस भरे हुए थे और अंगूठियां लगी हुई थीं। कई लोगों ने हमें इस बारे में बताया। अगर यह गलत होगा तो वे खंडन करें लेकिन हमें पता लगा कि वहां भरी भरी अटैचियां रखी थीं। घाटशिला में एक फार्महाउस में क्या हुआ, और ये हॉर्स ट्रेडिंग की बात करते हैं। इससे बड़ी दुर्भाग्यपूर्ण बात और क्या हो सकती है? …( व्यवधान)   जब विधान सभा भंग हो गई तो कोई अंगूठी नोचने लगा, कोई अटैची छीनने लगा, और ये प्रलोभन की बात करते हैं। प्रलोभन के आधार पर खरीद-फरोख्त के सुबूत का रहस्योद्घाटन हो गया, और पोल खुल गई, जब विधान सभा भंग हो गई। …( व्यवधान) 
श्री लालू प्रसाद : लौटने का खर्चा भी नहीं दिया। …( व्यवधान) 
श्री नीतीश कुमार : उपाध्यक्ष महोदय, अच्छा होगा यदि लालू जी खुद ही भाषण दे दें। …( व्यवधान) 
श्री लालू प्रसाद : हम भाषण करेंगे तो पुरानी बात आपकी-अपनी सब बता देंगे। …( व्यवधान) 
MR. DEPUTY-SPEAKER: This is not to be recorded.
(Interruptions) … * उपाध्यक्ष महोदय :  लालू जी, यह अच्छा नहीं लगता कि आप रनिंग कमैन्ट्री करते रहें।
...( व्यवधान)
श्री देवेन्द्र प्रसाद यादव : उपाध्यक्ष महोदय, बड़े भारी अरमान लेकर घाटशिला में काम हुआ और नैतिकता की दुहाई ये लोग दे रहे हैं। …( व्यवधान)  बसुदेव आचार्य जी ने ठीक कहा था कि जिन मशहूर लोगों को वे बुला रहे थे, उऩको मंत्रिमंडल में लाते। इतनी बड़ी प्लानिंग थी, उनको खरीद फरोख्त का अलग ईनाम है, मंत्रिमंडल का ईनाम भी दिया जा रहा था। सरकारी विभागों का चार्ट भी बन गया था।
इन्हीं शब्दों के साथ मैं कहना चाहता हूं कि नीतीश जी नियम १८४ के तहत जो सब्सटैन्टिव मोशन लाए हैं, उसको तुरंत खारिज कर देना चाहिए क्योंकि उसमें कोई सब्स्टैन्स नहीं है, और गृह मंत्री जी जो संकल्प लाए हैं, उसका सदन को अनुमोदन करना चाहिए। इन्हीं शब्दों के साथ मैं अपनी बात समाप्त करता हूँ।
* Not Recorded.
MR. DEPUTY-SPEAKER: Hon. Members, I have with me a list of about 20 more speakers, who are yet to speak.  The voting will be at 7.30 p.m.  Hon. Members are requested to speak for only five minutes.  Now, I request Shri Ilyas Azmi to take the floor.
SHRI KINJARAPU YERRANNAIDU (SRIKAKULAM): Sir, we are ready to sit till 9 o’clock.  We would request you to allot more time on this debate because this is a very important issue and so many hon. Members from all the political parties would like to speak.  We will take enough time, otherwise, how can we speak in the last minute if we are given two minutes’ time only?  If that cannot be done then this debate be continued tomorrow.
 
श्री इलियास आज़मी (शाहाबाद) : माननीय उपाध्यक्ष जी, चूंकि मेरी पार्टी के लीडर आज बीमार हैं और उन्होंने मुझे इस विषय पर अपनी बात रखने के लिए कहा है।…( व्यवधान) 
उपाध्यक्ष महोदय : श्री आठवले जी आप बैठ जाइए।
श्री इलियास आज़मी :महोदय, इसलिए मैं आपसे इजाजत चाहता हूं कि मुझे इसी जगह से अपनी बात कहने का मौका दिया जाए। हमारे दोस्त माननीय नीतीश जी ने बिहार में राज्यपाल के शासन की नाकामी और लॉ एंड आर्डर का जो नक्शा खींचा है, मैं उसकी ताइद करते हुए जो उन्होंने राष्ट्रपति शासन लगाने को गलत कहा है, मैं उसका विरोध करने के लिए खड़ा हुआ हूं। सच्चाई तो यह है कि बिहार में राष्ट्रपति शासन लगाने की गलती नहीं हुई है। यूपीए सरकार ने राष्ट्रपति शासन लगाने से पहले ही गलती कर दी थी। यूपीए सरकार ने ...*…( व्यवधान) 
श्री पवन कुमार बंसल (चण्डीगढ़) : महोदय, यह बहुत गलत बात है।…( व्यवधान) 
उपाध्यक्ष महोदय : आप बैठ जाइए।
...( व्यवधान)
SHRI PAWAN KUMAR BANSAL : Sir, he is referring to a person of the Government… (Interruptions)
उपाध्यक्ष महोदय : पहले आप सुन लीजिए।
...( व्यवधान)
श्री इलियास आज़मी : उस आदमी को कोई तजुर्बा नहीं है।
MR. DEPUTY-SPEAKER: We are discussing President’s Rule.
… (Interruptions)
SHRI SHIVRAJ V. PATIL: Yes, we are discussing President’s Rule, we are not discussing the individual who is a Governor… (Interruptions)
MR. DEPUTY-SPEAKER: Yes, we are not discussing an individual.
… (Interruptions)
 
* Expunged as ordered by the Chair.
SHRI SHIVRAJ V. PATIL: He has made allegations against the Governor… (Interruptions) This will establish a very wrong precedent.  If you have to say anything against the Governor, a substantive motion has to be there and Constitution requires a 14-days motion for this… (Interruptions) Sir, if this House is not protecting the constitutional provisions then I am very sorry… (Interruptions)
श्री इलियास आज़मी : यूपी, मध्य प्रदेश और राजस्थान के राज्यपाल और बिहार के जो राज्यपाल हैं, उनमें बहुत फर्क है। बिहार के राज्यपाल का पद कांस्टीटयूशनल नहीं है। वे एग्जिक्यूटिव के प्रमुख हैं। उनके हर फैसले का असर लोगों पर पड़ता है, लेकिन इन लोगों ने यह नहीं देखा कि एक ऐसा आदमी को वहां भेज रहे हैं…( व्यवधान) 
MR. DEPUTY-SPEAKER: I will see that and if there is any allegation, it will be deleted.
SHRI SHIVRAJ V. PATIL: That is right Sir, you see it and if it cannot go on record, you please delete it… (Interruptions)
MR. DEPUTY-SPEAKER: You are repeating it.  This is not going to be recorded.
(Interruptions) …* श्री इलियास आज़मी : जो स्वर्गीय श्री राजीव गांधी जैसे मासूम आदमी को  … MR. DEPUTY-SPEAKER: This is not to be recorded.
(Interruptions) …* THE MINISTER OF PARLIAMENTARY AFFAIRS AND MINISTER OF URBAN DEVELOPMENT (SHRI GHULAM NABI AZAD): Sir, what is this?… (Interruptions)
श्री इलियास आज़मी : मैं बिलकुल सही कह रहा हूं।
SHRI PRIYA RANJAN DASMUNSI: Sir, twice I brought it to your notice and to the notice of the hon. Home Minister that without a substantive notice of 14 days no discussion can be held against a Governor… (Interruptions[r57] ) * Not Recorded.
SHRI PRIYA RANJAN DASMUNSI : You have to give the ruling. Until you give a ruling, it will continue. …(Interruptions)
SHRIMATI TEJASWINI SEERAMESH (KANAKPURA): He has no respect for the Chair.  He is aware of what he is saying.…(Interruptions)
MR. DEPUTY-SPEAKER: Please sit down.
…(Interruptions)
श्री इलियास आज़मी : उपाध्यक्ष महोदय, इसीलिए हम बिहार में राष्ट्रपति शासन लगाने का समर्थन कर रहे हैं। श्री पी.वी. नरसिंहराव जैसे सीनियर और…* आदमी को और श्री अटल बिहारी वाजपेयी जैसे तजुर्बेकार आदमी को …* बनाया, उसे डॉ. मनमोहन सिंह जैसे मासूम आदमी को …* बनाने में क्या कठिनाई होगी। …( व्यवधान) 
MR. DEPUTY-SEPAKER: When I am on my legs, you should sit down.
            I have already said that nothing will go on record which he has said about Shri Rajiv Gandhi.  He was an hon. Member.  I request the hon. Member that he should not repeat those words.
...( व्यवधान)
उपाध्यक्ष महोदय : आप पहले मुझे सुनें तो सही। जब मैं खड़ा हूं, तो माननीय सदस्यों को बैठना चाहिए।
माननीय सदस्य ने जो भी आपत्तिजनक शब्द स्व. राजीव गांधी जी अथवा अन्य नेताओं के बारे में कहे हैं, वे मैंने एक्पंज कर दिए हैं।
श्री इलियास आज़मी : उपाध्यक्ष महोदय, श्री नीतीश कुमार जी ने बिहार में राष्ट्रपति शासन लगाने के बारे में जो नुक्ताचीनी की है, मैं उससे बिलकुल सहमत नहीं हूं। मैं उनकी यह बात मान सकता हूं कि लोक शक्ति पार्टी के विधायकों को पैसा देकर नहीं खरीदा गया हो। हो सकता है कोई और चीज देकर राजी किया गया हो, लेकिन ऐसे विधायकों से जिन्हें राजी किया गया हो या खरीदा गया हो, उनसे जम्हूरी सरकार नहीं चल सकती। इसका तजुर्बा देश को हो गया है। इसलिए बिहार में राष्ट्रपति शासन लगाना, वक्त की जरूरत थी। यदि वक्त के अंदर चुनाव नहीं हो सकते हों, तो राष्ट्रपति शासन का समय बढ़ा दिया जाए। मैं उसकी ताईद करता हूं, लेकिन बिहार में यही लोग, जो लालू जी और आर.जे.डी. के जमाने में * Expunged as ordered by the Chair.
चिल्लाते थे कि बिहार में जंगल-राज है, राष्ट्रपति शासन लागू होने के बाद आज बिहार में पहले के मुकाबले तीन गुना ज्यादा जंगल-राज है। इसलिए मैं यू.पी.ए. के लोगों से कहूंगा कि वे इस पर संजीदगी से जरूर गौर करें कि वहां के राज्यपाल को राष्ट्रपति शासन चलने तक, रखना क्या लोकतंत्र के हित में है, क्या ला-एंड-आर्डर के हित में है ?
उपाध्यक्ष महोदय, चूंकि मैं यू.पी.ए. सरकार का समर्थन कर रहा हूं, इसलिए कहूंगा कि वहां जितनी जल्दी चुनाव हों, उतना बेहतर है। हालांकि मैं कोई टाइम-टेबल रखने की पोजीशन में नहीं हूं। वहां के हालात को सुधारने के लिए वहां जल्दी से जल्दी चुनाव कराए जाएं। यू.पी.ए. सरकार को चाहिए कि वह दूसरों पर हमले करने की बजाय अपना घर संभाले। उसके जो घटक हैं, वे एक-दूसरे से लड़ रहे हैं। उन्हें एक कर के साम्प्रदायिक ताकतों को बिहार में ऐसी शिकस्त दें कि वह सिर उठाने लायक नहीं रहे। मेरी पार्टी उसमें सहयोग देने के लिए तैयार है।
MR. DEPUTY SPEAKER: Shri Prabhunath Singh, only five minutes.
श्री प्रभुनाथ सिंह (महाराजगंज, बिहार) : उपाध्यक्ष महोदय, नीतीश कुमार जी द्वारा नियम १८४ में जो प्रस्ताव रखा गया है, मैं उसके समर्थन में और माननीय गृह मंत्री जी द्वारा राष्ट्रपति शासन के विस्तार के लिए जो प्रस्ताव लाया गया है, उसके विरोध में बोलने के लिए खड़ा हुआ हूं। …( व्यवधान) 
उपाध्यक्ष महोदय : आठवले जी, आपने अभी टाइम लेना है। कृपया सुनिये। आप बैठ जायें।…( व्यवधान) 
श्री प्रभुनाथ सिंह : उपाध्यक्ष महोदय, जो एक प्रस्ताव नियम १८४ में लाया गया है, उसमें बिहार में कानून व्यवस्था की स्थिति और १७ आई.पी.एस. स्तर के पदाधिकारियों के स्थानान्तरण से उठे विवाद पर जो मुख्य सचिव द्वारा लम्बी छुट्टी पर जाने की बात है, उसमेंचर्चा की गई। …( व्यवधान)  कानून और व्यवस्था पर बिहार की चर्चा मैं ज्यादा नहीं करना चाहता। कारण कि जो कानून और व्यवस्था की स्थिति है, इस सदन में ही नहीं, अखबार के माध्यम से, टी.वी. चैनलों के माध्यम से लगातार चर्चा होती रहती है और देश के लोग और प्रदेश के लोग १-१ बिन्दु से वाकिफ हैं, लेकिन जो कानून और व्यवस्था की बात होती है, यह बात ठीक ही एक साथी ने कही कि जब लालू जी का राज था, राबड़ी जी का राज था तो हम लोग सदन में चर्चा करते थे कि बिहार में राष्ट्रपति शासन लगाया जाये, यह बात सच है। लेकिन जो स्थिति लालू जी और राबड़ी जी के राज में थी, कानून और व्यवस्था की स्थिति उससे ज्यादा बदतर अभी राष्ट्रपति शासन में बिहार में बनी हुई है। …( व्यवधान) हम आपकी बात को ही सपोर्ट कर रहे हैं। हम तो उनकी ही बात का समर्थन कर रहे हैं।
श्री इलियास आज़मी : समर्थन करना चाहिए।…( व्यवधान) 
श्री प्रभुनाथ सिंह : समर्थन कर तो रहे हैं। इसके कुछ खास कारण बन गये हैं। बहुत सी ऐसी सच बातें होती हैं, जिनका प्रमाण नहीं होता है। लेकिन मैं इस सदन को विश्वास दिलाता हूं कि मैं जो भी बोलूंगा, अपनी जानकारी के अनुसार सच बोलूंगा। कानून व्यवस्था में गड़बड़ी का कुछ खास कारण बना हुआ है।…( व्यवधान) 
श्री लालू प्रसाद : (Interruptions) … * MR. DEPUTY SPEAKER: Shri Lalu Prasad’s remarks are not to be recorded. लालू जी के रिमार्क को रिकार्ड नहीं किया जाये। नो रनिंग कमेंट्री।
* Not Recorded.
श्री प्रभुनाथ सिंह : वधि व्यवस्था के बिगड़ने का एक कारण दिन-प्रतदिन बनता जा रहा है, यही कारण है कि दिन-प्रतदिन वधि व्यवस्था ज्यादा खराब हो रही है, कारण कि इस समय बिहार में, मैं नहीं कहता कि सारे आरक्षी अधीक्षक स्तर के पदाधिकारी ऐसे हैं, लेकिन कुछ ऐसे पदाधिकारियों का पदस्थापन होता है, जो थाने के दरोगा को थाना बेच देते हैं। वे तय करते हैं कि इतने लाख रुपये महीना और जब किसी थानेदारी से महीना आरक्षी अधीक्षक स्तर का पदाधिकारी तय करेगा तो आप सोचिएगा कि वहां के थानेदार अपराधियों से मिलकर अपराध को बढ़ावा नहीं देगा तो आखिर क्या करेगा, चूंकि पुलिस और अपराधियों की सांठ-गांठ है। कुछ आरक्षी अधीक्षक स्तर के पदाधिकारी खुले बोलते हैं कि आखिर मैं थाना नहीं बेचूं तो क्या करूं। कोई कहता हू कि मैं ८ लाख रुपये देकर जिले में आया हूं, कोई कहता है कि मैं १० लाख रुपये देकर आया हूं, कोई कहता है कि मैं १५ लाख रुपये देकर आया हूं। आरक्षी अधीक्षक स्तर के पदाधिकारियों का स्थानान्तरण और पदस्थापन रुपये के बल पर इस समय बिहार में चल रहा है और वहां दुकान खुली हुई है। यह सच्चाई है, आप इसका पता करवा लें। जिन लोगों को हमारी बात पर आपत्ति हो, वे इसको गम्भीरता से लेते हुए पता करा लें कि इसमें सच्चाई है या नहीं है। हो सकता है कि उस रुपये का बंटवारा दिल्ली में भी होता हो। मैं नहीं जानता कि उस रुपये का बंटवारा दिल्ली में कहां जाता है, किसके यहां जाता है, कौन उसका हिस्सेदार है। …( व्यवधान) 
उपाध्यक्ष महोदय : कृपया बैठ जाइये।
SHRI PAWAN KUMAR BANSAL : Sir, this is a serious allegation.  What is this? … (Interruptions) पहले यह कहना कि मैं जो कहूंगा, वह सच कहूंगा तो क्या ऐसा कहने से वह सत्य बन जाता है?…( व्यवधान) 
उपाध्यक्ष महोदय : आठवले जी, आप बैठ जायें।
श्री मोहम्मद अली अशरफ़ फ़ातमी : बिहार के सारे क्रमिनल्स किसके यहां आते हैं?…( व्यवधान) 
उपाध्यक्ष महोदय : आठवले जी, आप बैठ जायें।
श्री प्रभुनाथ सिंह : फातमी जी, क्या कह रहे थे, हमें कुछ बतायें?
उपाध्यक्ष महोदय, दिल्ली कहने पर भी इनको आपत्ति होती है। मैंने किसी का नाम नहीं लिया है। मैं तो कह रहा हूं कि यह दिल्ली में है और दिल्ली में जो उसके मालिक लोग हैं, उनकी भी हिस्सेदारी होगी। अब कौन मालिक है, यह मैं नहीं जानता हूं?…( व्यवधान) 
श्रीमती तेजस्विनी शीरमेश : दिल्ली में तो आप भी थे।…( व्यवधान) 
उपाध्यक्ष महोदय : आठवले जी, आप बैठ जाएं।
...( व्यवधान)
MR. DEPUTY-SPEAKER: Only the speech of Mr. Prabhunath Singh will be recorded.
(Interruptions) … * MR. DEPUTY-SPEAKER: Mr. Ramdas Athawale, please sit down.
श्री प्रभुनाथ सिंह : उपाध्यक्ष महोदय, बिहार में अपहरण उद्योग का रूप ले चुका है। बहुत से लोगों ने इस पर चर्चा की है। श्री सुशील कुमार मोदी जी और श्री नीतिश कुमार जी ने भी कहा है और मैं कही हुई बातों को फिर से दोहराना नहीं चाहता हूं। मैं मुख्य तथ्य की ओर आ रहा हूं। मुख्य सचिव के स्थानांतरण के विवाद की वजह से जो परस्थितियां बिहार में बनी हुई हैं, उस पर अखबारों में क्या लिखा जा रहा है, वह मैं बताना चाहता हूं। मैं पूरा अखबार तो मैं नहीं पढ़ पाऊंगा, लेकिन कुछ हेडिंग आपको पढ़कर सुनाना चाहता हूं। पटना से प्रकाशित हिन्दुस्तान दैनिक ने …( व्यवधान) 
MR. DEPUTY-SPEAKER: Please listen to him.
SHRI SHIVRAJ V. PATIL : Sir, I have been saying on the floor of the House not once but many times that we do not quote the newspaper here. Even if somebody quotes the Government paper, it has to be authenticated by the Member who is quoting the Government paper, and that paper has to be laid on the Table of the House. Everything that is being said here is based on the newspaper reporting. How do we know that it is correct or not? This is the procedure laid down.
उपाध्यक्ष महोदय : आपने अभी जवाब देना है। जब आप जवाब देंगे, तब आप सब कुछ कह सकते हैं।…( व्यवधान) 
SHRI SHIVRAJ V. PATIL: I will not reply to all these quotations. I am raising a point of order. I would like to know from you whether quoting the newspaper in this manner is allowed or not. … (Interruptions)
SHRI HARIN PATHAK : That is not proper.
SHRI SHIVRAJ V. PATIL: Sir, you give a ruling. We will follow it.
* Not Recorded.
उपाध्यक्ष महोदय : अगर पहले परम्परा रही है, तो फिर होगा।
...( व्यवधान)
SHRI SHIVRAJ V. PATIL: What is important is the rule. What is important is the Constitution. I can understand a small reference to the newspaper. … (Interruptions)
SHRI HARIN PATHAK : This is not the first time newspaper is quoted. … (Interruptions)
MR. DEPUTY-SPEAKER:  Please sit down.
SHRI HARIN PATHAK : I have been witnessing this for the last 16 years not only in ‘Zero Hour’ but also even during discussions.… (Interruptions)
SHRI SHIVRAJ V. PATIL: You may be knowing the wrong procedure. … (Interruptions) I want a ruling from the Chair. … (Interruptions)
MR. DEPUTY-SPEAKER: Please sit down.
SHRI HARIN PATHAK : I have been witnessing this for the last 20 years. Even during ‘Zero Hour’, the notice has been given according to the newspaper report. Not only that, but even during the debate also, the newspaper has been quoted. This is the practice. … (Interruptions)
MR. DEPUTY-SPEAKER: Please sit down. Nothing is being recorded.
(Interruptions) …* MR. DEPUTY-SPEAKER: Please sit down.
… (Interruptions)
SHRI SHIVRAJ V. PATIL: I have never quoted any newspaper in my tenure in the House for the last 25 years.
श्री प्रभुनाथ सिंह : उपाध्यक्ष महोदय, इसमें ऐसा कुछ नहीं लिखा हुआ है। गृह मंत्री जी आप पर कुछ नहीं लिखा हुआ है। आप परेशान न हों।…( व्यवधान) 
श्री शिवराज वि. पाटील : आपने जो बोलना है, आप बोलिए, लेकिन उसको पढ़ने की जरूरत नहीं है।…( व्यवधान) 
*Not Recorded श्री प्रभुनाथ सिंह : मैं केवल इसका हेडिंग पढ़ देता हूं। इस में लिखा हुआ है - ""अंधेरगर्दी के खिलाफ जंग और छुट्टी पर गए कंग।" नीचे लिखा हुआ है - "मुख्य सचिव को बिना फाइल दिखाए ही कर दिए गए तबादले। काबिल पुलिस आफिसरों को हटाया, दागियों को बैठाया। कंग को अखबारों से मिली खबर, कार और फोन लौटाया। " मैंने सिर्फ यह हेडिंग पढ़ा है। इसमें नीचे लिखा है - "बूटा ने पहले भी की थी कंग की अनदेखी, उनके जो सलाहकार हैं, वे कहते हैं, मुझे कुछ पता नहीं। " उपाध्यक्ष जी, इसी तरह अलग-अलग अखबारों ने अलग-अलग हेडिंग बनाकर उस घटना के विषय में लिखा cè[MSOffice58] ।

18.00 hrs. उससे संबंधित जो बात है, उसे हम छोड़ देते हैं, लेकिन एक महत्वपूर्ण अखबार में अंत में मुख्य सचिव ने कहा है - तमतमाए कंग बोले…( व्यवधान) 

MR. DEPUTY-SPEAKER: No, he can read. He can mention it.

… (Interruptions)

SHRI MADHUSUDAN MISTRY : It can never be in the House like this.… (Interruptions) 

श्री प्रभुनाथ सिंह : उपाध्यक्ष जी, अखबार में लिखा हुआ है …* नीचे लिखा है कि “तबादलों पर डा. बूटा सिंह बिफरे।” कंग ने शनिवार को कहा कि …* तबादलों के लिए किसी तरह की कोई कमेटी नहीं बनाई गई।…( व्यवधान) 

श्री पवन कुमार बंसल : उपाध्यक्ष महोदय, अगर अखबार ने लिख दिया कि वे … बोल रहे हैं तो क्या उसे यहां पढ़ दिया जाएगा?…( व्यवधान)   आप इशारा करके नहीं, रूलिंग देकर इस बात को खत्म कीजिए।…( व्यवधान)   I want a specific ruling from you on this.… (Interruptions)

श्री प्रभुनाथ सिंह : अखबार का नाम दैनिक जागरण, पटना है।…( व्यवधान) 

श्री पवन कुमार बंसल : उपाध्यक्ष जी, इन्होंने लास्ट में जो पढ़ा, अगर मैं उसे वैसे ही इनवर्टेड कौमा में बोलूं तो लिखा हुआ है -  … अखबार ने लिख दिया और वह उसे यहां पढ़ देंगे तो क्या यह पार्ट ऑफ दी प्रोसीडिंग्स बन जाएगा?…( व्यवधान)  What are we upto? … (Interruptions)

* Expunged as ordered by the Chair उपाध्यक्ष महोदय : प्रैक्टिस यही रही है कि वह अखबार को मैंशन कर सकते हैं।

...( व्यवधान)

SHRI PAWAN KUMAR  BANSAL : Will it be a part of the proceedings?.… (Interruptions) Please give a specific ruling on this.… (Interruptions)

SHRI MADHUSUDAN MISTRY : That will not go as part of the proceedings.… (Interruptions)

SHRI PRIYA RANJAN DASMUNSI:  I have been urging upon you from the beginning, as our senior colleagues, Shri Shivraj Patil has also been stated, that a substantive motion brought by Shri Nitish Kumarji is basically on the law and order situation folliwed by the Chief Secretary issue. But if we specifically discussed, there is no debar. It is said correctly.  … (Interruptions) If we specifically desire to discuss the conduct, character, performance of the Governor per se, we have every right to do so provided we give a Constitutionally procedure substantive motion of 14 days to you. Since that notice is not addressed, how can one after another go on discussing the conduct of the Governor and his family? And this House is deprived of a ruling of yours. … (Interruptions)

MR. DEPUTY-SPEAKER: We are discussing Item Nos. 23 and 24 together.

… (Interruptions)

MR. DEPUTY-SPEAKER: These two items are :

“That this House expresses its deep concern over the deteriorating law and order situation in the State of Bihar under President’s rule and also on the situation arising out of the Chief Secretary of the State proceeding on long leave.”   “That this House approves the continuance in force of the Proclamation, dated the 7th March, 2005 in respect of the State of Bihar, issued under article 356 of the Constitution by the President, for a further period of six months with effect from the 7th September, 2005.”               So, I cannot disallow any person who makes a  mention about the subject of these motion on the floor.
… (Interruptions)
SHRI PRIYA RANJAN DASMUNSI: If one discusses the conduct of the Governor and his family without any motion, it is dangerous precedent in the history of Parliament of India.… (Interruptions)  It cannot be beyond the scope of the Constitution.… (Interruptions)
उपाध्यक्ष महोदय : किसी का नाम मत लीजिए।
...( व्यव्ाधान[R59] ) SHRI DEVENDRA PRASAD YADAV : Sir, I am on a point of order under rule 349 (i), which says:
“… shall not read any book, newspaper or letter except in connection with the business of the House;”   वे सदन में केवल न्यूज पेपर का रेफरैंस दे सकते हैं। …( व्यवधान)  न्यूज पेपर पढ़ नहीं सकते। …( व्यवधान) 
MR. DEPUTY-SPEAKER: Shri Lalu Prasad, please listen to me. I shall now read rule 349:
“Whilst the House is sitting, a member--
 
  (i) shall not read any book, newspaper or letter except in                     connection with the business of the House;”               So, he is not reading the paper. He is only quoting.

… (Interruptions)

SHRI RAM KRIPAL YADAV : Sir, he is reading. How can you say that he is not reading? … (Interruptions) उपाध्यक्ष महोदय, क्या यह सदन बिना नियमों और कानून के चलेगा ? …( व्यवधान) 

मोहम्मद सलीम (कलकत्ता-उत्तर पूर्व) : उपाध्यक्ष महोदय, ये सुबह न्यूज पेपर पढ़कर नहीं आते इसलिए हाउस में पढ़ रहे हैं। अगर ये सुबह न्यूज पेपर पढ़कर आयें तो इनको यहां नहीं पढ़ना पड़े।…( व्यवधान) 

SHRI BASU DEB ACHARIA : How can he read? He should not be allowed to read. … (Interruptions)

MR. DEPUTY-SPEAKER: He can quote.

… (Interruptions)

SHRI N.N. KRISHNADAS (PALGHAT): What is the difference between quoting and reading? … (Interruptions)

श्री प्रभुनाथ सिंह : उपाध्यक्ष महोदय, पता नहीं, हमने कौन सी बात ऐसी कह दी जिससे हमें बोलने ही नहीं दिया जा रहा। …( व्यवधान) 

SHRI GURUDAS DASGUPTA : Sir, I am on a different point. You have given the direction that he could read or quote. I do not object to that. … (Interruptions)

श्री राजीव रंजन सिंह ‘ललन’  (बेगूसराय) : उपाध्यक्ष महोदय, इन्होंने यह शब्द नहीं कहा। इन्होंने तो केवल कोट किया है। …( व्यवधान) 

MR. DEPUTY-SPEAKER: He can quote.

SHRI GURUDAS DASGUPTA : But there is also some unparliamentary text. The word   …  or   …   is unparliamentary. … (Interruptions)

MR. DEPUTY-SPEAKER: That could be deleted.

… (Interruptions)

SHRI GURUDAS DASGUPTA : It should not be there on the record. … (Interruptions)

MR. DEPUTY-SPEAKER: It could be deleted.

SHRI GURUDAS DASGUPTA : Just like we cannot use unparliamentary words, unparliamentary words cannot be quoted. … (Interruptions)

MR. DEPUTY-SPEAKER: It would be deleted if it is there. That would be deleted.

… (Interruptions)

SHRI PAWAN KUMAR BANSAL : Sir, kindly permit me to make a submission. … (Interruptions)

उपाध्यक्ष महोदय :  बंसल जी, उसे डिलीट किया जा सकता है।

...( व्यवधान)

 

SHRI PAWAN KUMAR BANSAL : Sir, he is not quoting the relevant portions as such. The question is this. What is the scope of Motion before the House? Can he hit anybody left and right? … (Interruptions)

MR. DEPUTY-SPEAKER: I have given the ruling. Please sit down.

SHRI PAWAN KUMAR BANSAL : Your ruling is that one could do that. … (Interruptions)

उपाध्यक्ष महोदय :  ठीक है, आप बैठ जाइये।

...( व्यवधान)

SHRI PRIYA RANJAN DASMUNSI: Mr. Deputy-Speaker, Sir, I rise on a point of order under rule 353. I respectfully submit to your direction and observation. You are the custodian of this House. I do not question your observation but I need your protection under rule 353, which says:

“No allegation of a defamatory or incriminatory nature shall be made by a member against any person unless the member has given adequate advance notice to the Speaker and also to the Minister concerned so that the Minister may be able to make an investigation into the matter for the purpose of a reply:”               Here, the hon. Member has alleged that lakhs and lakhs of rupees are being collected for the transfers. All of us are sensible and knowledgeable. An allegation has been made that lakhs of rupees have been collected for transfers by the Head of the State and it has been shared in Delhi by the bosses. An allegation has been made and the hon. Minister has to reply. Did he give an advance notice of the specific allegation of this nature so that the hon. Minister could ascertain the facts? So, we need protection under this rule. … (Interruptions[e60] ) MR. DEPUTY-SPEAKER : I have read it. The hon. Minister of Home Affairs will give a reply on it.
… (Interruptions)
SHRI PRIYA RANJAN DASMUNSI : He is not quoting.… (Interruptions)
SHRI PAWAN KUMAR BANSAL : Sir, he is not quoting. It is his version. … (Interruptions)
MR. DEPUTY-SPEAKER : Bansalji, he is quoting. He is not making any allegation.
… (Interruptions)
SHRI PAWAN KUMAR BANSAL : It is a shameless allegation. … (Interruptions)
MR. DEPUTY-SPEAKER : Please listen to him.
… (Interruptions)
SHRI HARIN PATHAK : Sir, I have a point of order.
श्री प्रभुनाथ सिंह : आपका प्वाइंट ऑफ ऑर्डर है, इनका प्वाइंट ऑफ ऑर्डर है तो हमारे भाषण का क्या होगा ? …( व्यवधान) 
MR. DEPUTY-SPEAKER : Under what rule?
SHRI HARIN PATHAK : It is under the same rule, Rule 353 which says :
“No allegation of a defamatory or incriminatory nature shall be made by a Member any person ….. ”   Sir, every now and then, when not a single Member of RSS or not a single Member of VHP is present in the House, they make allegations. … (Interruptions)
MR. DEPUTY-SPEAKER : This is not relevant.
… (Interruptions)
उपाध्यक्ष महोदय :  रिकार्ड में नहीं जा रहा है।
...(व्यवधान)... * SHRI HARIN PATHAK : The allegation is against RSS or VHP.
MR. DEPUTY-SPEAKER : There is no relevance.
… (Interruptions)
SHRI PRIYA RANJAN DASMUNSI : Sir, he himself is insulting RSS. … (Interruptions)
* Not Recorded.
   
MR. DEPUTY-SPEAKER : Nothing is going to be recorded except the speech of Shri Prabhunath Singh.
(Interruptions) … * MR. DEPUTY-SPEAKER : Please sit down.
… (Interruptions)
SHRI HARIN PATHAK : He has no right to say like this. I am proud of being a RSS Swayamsevak. It has nothing to do with my being an MP. … (Interruptions)
MR. DEPUTY-SPEAKER : Please sit down. Nothing else will be recorded except the speech of Shri Prabhunath Singh.
(Interruptions) … * श्री प्रभुनाथ सिंह : उपाध्यक्ष महोदय, दोनों लोग मिल गये हैं और ये हमें बोलने नहीं देना चाहते हैं। इसमें इनका भी हाथ आ रहा है।…( व्यवधान)  हम यह बता रहे थे कि हमने जो अखबार पढ़कर सुनाया या दिखाया, वह मेरा प्लान नहीं है। वह जिस अखबार में था, उसकी हैडिंग हमने पढ़ दी और इस सवाल पर हम आपको यह बताना चाहते हैं कि जिस राज्य का मुख्य सचिव यह कहता हो कि गवर्नर गलत बोल रहे हैं और वहां का डीजीपी यह कहता हो कि स्थानान्तरण की जो सूची बनी, यह हमारी जानकारी में नहीं है। यह बात सत्य है कि जो राज्यपाल ने अखबारों के माध्यम से सूचना दी है कि तीन सदस्यीय समति बनी थी, वह बिल्कुल गलत है और जैसा कि नीतीश कुमार जी ने सवाल उठाया, गृह मंत्री जी अपने उत्तर में बता देंगे कि अगर समति बनी थी तो उसकी अधिसूचना कब हुई थी? …( व्यवधान) 
श्री लालू प्रसाद : बैठिए न। जवाब देंगे।…( व्यवधान) 
श्री प्रभुनाथ सिंह : लालू जी, अभी तो हमने शुरू भी नहीं किया है। हमें पहले आप लोग शुरू तो करने दीजिए।…( व्यवधान) 
उपाध्यक्ष महोदय :  लालू जी,  आप पहले सुन तो लें। पहले वह शुरू तो कर लें।
श्री प्रभुनाथ सिंह : उपाध्यक्ष महोदय, बिहार विधान सभा को जिस समय निलम्बित किया गया था और इस सदन में माननीय गृह मंत्री जी ने जिस समय प्रस्ताव रखा था, उस समय भी नीतीश कुमार जी ने अपने विचार व्यक्त किये थे और उन्होंने उस समय एक बात की शंका ज़ाहिर की थी[R61] ।
* Not Recorded.
नीतिश जी ने उस समय कहा था “अध्यक्ष महोदय, आप बजट के समय बोलने का समय देंगे और आपकी इजाजत होगी तो मैं उस समय बोलूंगा।इस समय मैं एक बात का उल्लेख करना चाहता हूँ कि राष्ट्रपति शासन लागू करने की मजबूरी में जो परिस्थितिवश या लाचारीवश जो कदम उठाए गए हैं और उनकी इतनी प्रशंसा करना इस बात की ओर इंगित करता है कि आप लंबे काल तक इसे चलाना चाहता हैं। ” उस समय ही सरकार की नीयत परे शंका बनी हुई थी कि राष्ट्रपति शासन को लंबे समय तक चलाकर आप बिहार में अपना राज-पाट स्थापित करना चाहते हैं। उस समय मजबूरी में हम लोगों ने आपकी हां में हां मिलायी थी, लेकिन जब राष्ट्रपति शासन चल रहा था, अचानक विधानसभा को भंग करने के लिए कौन सी ऐसी अनिवार्य परिस्थिति आ गयी थी? श्री शिवराज पाटिल जी, आप भी मानते हैं कि मैं आपको बड़े सम्मान की निगाह से देखता हूँ। …( व्यवधान) 
MR. DEPUTY-SPEAKER: It is not to be recorded.
(Interruptions) … श्री लालू प्रसाद :इन्होंने बड़ी मेहनत की थी।
श्री प्रभुनाथ सिंह : उपाध्यक्ष महोदय, लालू प्रसाद जी ठीक कह रहे हैं। मैंने इसके लिए मेहनत की थी। उस समय हमारी और लालू प्रसाद जी की बराबर बातचीत हुआ करती थी। लालू जी ने मुझसे अकेले में कहा था कि किसी तरह सरकार बनानी है और रामविलास पासवान जी की पार्टी को समाप्त करवाना है, यह बात सच है न? …( व्यवधान) 
MR. DEPUTY-SPEAKER: Anything except the speech of Shri Prabhunath Singh is not to be recorded.
(Interruptions) …* श्री प्रभुनाथ सिंह : उपाध्यक्ष जी, जिस ढंग से बिहार की विधानसभा को भंग किया गया, वह उचित नहीं था। हम लोग बड़े गर्व से दुनिया में भारत के प्रजातंत्र की चर्चा करते हैं, हम लोग अपने देश के प्रजातंत्र पर गर्व भी महसूस करते हैं और पूरी दुनिया में भारतीय प्रजातंत्र का लोग उदाहरण देते हैं। गृहमंत्री जी, लेकिन बिहार की विधानसभा को जिस ढंग से भंग किया गया और आपके कल के भाषण का मैं ज्यादा उल्लेख नहीं करूंगा। कल मैं यहीं बैठकर टेलीविजन पर आपका भाषण सुन रहा था। भाषण सुनते हुए मुझे नहीं लगा कि यह वही शिवराज पाटिल जी बोल रहे हैं जिनका मैं विशेष सम्मान करता हूँ।मुझे लगा * Not Recorded.
कि यह कोई दूसरा शिवराज पाटिल गृहमंत्री बनकर आ गया है क्योंकि मैं ही इस सदन के बहुमत सदस्य आपका सम्मान करते हैं और आपसे उम्मीद है कि आप किसी का सिखाया हुआ या लिखा हुआ भाषण नहीं पढ़ेंगे। हम लोगों को यह विश्वास है कि आप अपने दिल की बात हिम्मत के साथ कहते हैं।
उपाध्यक्ष महोदय : अपनी बात जल्दी खत्म कीजिए।
श्री प्रभुनाथ सिंह : उपाध्यक्ष महोदय, यह ठीक नहीं है, एक तो मुझे बोलने नहीं दिया जा रहा है और दूसरी ओर आप जल्दी खत्म करने की बात कह रहे हैं।
महोदय, मैं यह कहना चाहता हूँ कि सदन में मैं गृहमंत्री जी के भाषण का उल्लेख नहीं करना चाहता हूँ, नीतिश जी ने इसका उल्लेख किया है। गृहमंत्री जी ने कहा था कि वहां सरकार बननी चाहिए और यह ठीक है कि सरकार बनाने का प्रयास भी हुआ और हमने उसके लिए प्रयास किया, यह हम दावे के साथ कह रहे हैं और मुझे इस बात पर गर्व है कि मेरे प्रयास को सफलता भी मिली। लोजपा के प्रान्तीय अघ्यक्ष से मेरी बात हुई, मेरी बात लोजपा के विधायकों से भी हुई, लेकिन राज्यपाल महोदय का अखबार में बयान आया और कहा गया कि खरीद-फरोख्त हो रही है। दुबारा बयान दिया गया कि इसकी शंका है, फिर कहा गया कि इसके पक्के सबूत हैं, फिर कहा गया कि पक्के सबूत नहीं है, फिर कहा गया कि तीन से पांच करोड़ रूपए तक में खरीद-फरोख्त की गयी है।इसको आधार बनाकर विधानसभा भंग करने की सिफारिश की गयी।
MR. DEPUTY-SPEAKER: No. Please sit down. It is not to be recorded.
(Interruptions) …* MR. DEPUTY-SPEAKER: It is not to be recorded. Please sit down.
(Interruptions) …* MR. DEPUTY-SPEAKER: You are speaking without my permission. It is not to be recorded.
(Interruptions) … श्री प्रभुनाथ सिंह : उपाध्यक्ष महोदय, राजनीति में जब भी कोई खण्डित जनादेश मिलता है…( व्यवधान) 
श्री लालू प्रसाद : उपाध्यक्ष जी, मैं व्यवस्था के प्रश्न पर खड़ा हूँ।यहां सत्तापक्ष और विपक्ष, दोनों बैठे हैं। …( व्यवधान) 
* Not Recorded.
श्री सूरज सिंह : उपाध्यक्ष महोदय, …( व्यवधान) 
MR. DEPUTY-SPEAKER: It is not to be recorded. Please sit down.
(Interruptions) …* श्री लालू प्रसाद : आप बैठिए तो सही। उपाध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्य सूरज सिंह, लोक जनशक्ति पार्टी के सांसद हैं। हम सभी को मालूम है कि दस लोगों को लेकर आए थे, जो यह कह रहे हैं। इन्हें पूरी जानकारी है। इसलिए वह जो सूचना सदन को दे रहे हैं, मैं अपेक्षा करता हूं कि उनकी बात को सुना जाए और यह प्रूव हो जायगा। इस तरह दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।
MR. DEPUTY-SPEAKER: Mr. Lalu Prasad, this is not the issue. No, it is not allowed. Please sit down.
… (Interruptions) 
श्री प्रभुनाथ सिंह : उपाध्यक्ष महोदय, जो आरोप लगाए गए हैं, वे निराधार हैं। अगर कहीं से किसी ने रिश्वत देने का काम किया था…( व्यवधान) 
उपाध्यक्ष महोदय :  आप बैठ जाएं।
श्री प्रभुनाथ सिंह : कांग्रेस पार्टी के सांसदों को चाहिए कि वे पहले हमारी बात सुन लें और फिर उत्तर दें। लगता है कि ये हमारी बात सुनने के लिए तैयार नहीं है। हम जब भी बोलने के लिए खड़े होते हैं, ये अपनी ढफली बजाने लगते हैं और हमें बोलने से रोकने का काम करते हैं। जो आरोप लगाए गए हैं, वे निराधार हैं। अगर किसी ने रुपया दिया, अगर किसी ने रुपया लिया, राज्यपाल जी सिर्फ राज्यपाल ही नहीं हैं, पूरा प्रशासन उनके हाथ में है, वह रुपया रिकवर कराते। जिन लोगों ने रुपया दिया और लिया, उन पर मुकदमा चलाते, उनको गिरफ्तार कराते और जेल में बंद कराते। गृह मंत्री जी टेंथ शिडयूल की बात कर रहे हैं, लेकिन उन्होंने जो बात कही, वह उनके मुंह से शोभा नहीं देती। कारण यह है कि टेंथ शिडयूल में बिल्कुल स्पष्ट है कि दो तिहाई बहुमत जिसे होगा, वह कोई अगल दल नहीं बनाएगा, लेकिन किसी दल में शामिल हो सकता है। लोजपा के २९ में से २१ विधायक एफिडेविट देकर, दस्तखत करके किसी दल में शामिल होने का प्रस्ताव देते हैं, तब आप कहते हैं कि इससे उनकी सदस्यता समाप्त हो जाती है। तो क्या आपने उनकी सदस्यता बचाने के लिए ही विधान सभा को भंग किया था? २१ सदस्यों की सदस्यता बचाने के लिए आपने २४३ विधायकों की सदस्यता समाप्त कर दी। इससे लगता है कि आप बहुत इन्साफ करते हैं।…( व्यवधान) मामला सुप्रीम कोर्ट में है, सब साफ हो जाएगा।
* Not Recorded.
श्री लालू प्रसाद :   मामला साफ था इसीलिए विधान सभा भंग करनी पड़ी।
उपाध्यक्ष महोदय : होम मनिस्टर रिप्लाई देंगे, यह आपका काम नहीं है।
श्री लालू प्रसाद : हमें भी अधिकार है। मैं अपनी पार्टी का अध्यक्ष हूं।
उपाध्यक्ष महोदय : बिल्कुल अधिकार है। आप बोल सकते हैं। आपकी पार्टी के सदस्य बोल चुके हैं औरों को भी मैं समय दे दूंगा। प्रभुनाथ सिंह जी, अब आप समाप्त करें।
श्री प्रभुनाथ सिंह : हमें पांच मिनट तो बोलने का मौका दें। अभी सदन में बसुदेव आचार्य जी नहीं हैं. मैं उन्हें बताना चाहता हूं। पिछली बार जब राष्ट्रपति शासन लगाने का प्रस्ताव सदन में आया था, उस समय उन्होंने कुछ कहा था। मैं उनके सदन में दिए गए भाषण को कोट करना चाहता हूं। इसलिए कोट करना चाहता हूं कि उनका भाषण सुनने के बाद लगता है कि वह बराबर दो तरह की बात कहते हैं। सुबह जो बोलते हैं, शाम को उस पर अमल नहीं करते हैं। इसी तरह से जो यहां बोलते हैं, बाहर कुछ और बोलते हैं। जब बाहर कुछ बोलते हैं, तो यहां दूसरी बात बोलते हैं। उन्होंने सदन में कहा था -
“ बिहार में जो राष्ट्रपति शासन लगाया गया है, हमें बहुत मजबूरी में इसका समर्थन करना पड़ रहा है, क्योंकि हमारी पार्टी की हमेशा यही राय रही है कि राज्यों में संविधान के अनुच्छेद ३५६ के अंतर्गत राष्ट्रपति शासन नहीं लगाया जाना चाहिए। हम नहीं चाहते हैं कि किसी राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू किया जाए और कोई सरकार बर्खास्त हो। बिहार में चुनाव राष्ट्रपति शासन लगाने के लिए नहीं हुए थे, बल्कि एक लोकप्रिय सरकार बनाने के लिए चुनाव हुए थे। लेकिन चुनाव का जो नतीजे आया, वह खंडित आया। ”    बाद में उन्होंने अपील की कि वहां के सारे विधायक आपस में मिलकर एक लोकप्रिय सरकार बनाएं। एक तरफ वह लोगों से अपील करते हैं और दूसरी तरफ जब लोग एक-दूसरे से बात करते हैं, तो वह कहते हैं कि खरीद-फरोख्त हो रही थी। वह कहते हैं कि झारखंड क्यों गए। मैं कहना चाहता हूं कि बिहार झारखंड एक ही हैं।…( व्यवधान) 
श्री देवेन्द्र प्रसाद यादव (झंझारपुर) : हमने कब कहा कि हम राष्ट्रपति शासन के हक में हैं।
उपाध्यक्ष महोदय : यादव जी, आप स्वयं चेयरमैन हैं। आप खुद एड्रैस कर रहे हैं। प्रभुनाथ सिंह जी, अब समाप्त करें।
श्री प्रभुनाथ सिंह : आरजेडी के लोग बहुत गुस्से में हैं इसलिए हल्ला कर रहे हैं। लेकिन इन्हीं के सांसद विजय कृष्ण जी ने सदन में भाषण दिया था[R62] ।
उनके भाषण की दो लाइनें मैं पढ़कर सुना देता हूं। “ सभापति महोदय, बिहार में जिन परिस्थितियों में राष्ट्रपति शासन लगाया गया है, उससे पूरे बिहार की जनता हतप्रभ है। पूरे बिहार में जो गरीब, दलित या सोशल जस्टिस में विश्वास रखने वाले या अक्लियत के लोग हैं या उनकी राजनीति करने वाले हैं, उन सब पर, सभी की नजर है और पूरे बिहार में एक ऐसा वातावरण है जिसमें गरीब जनता बहुत दु:खी है क्योंकि बिहार में राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया है”। …( व्यवधान) 
             उपाध्यक्ष महोदय, हम आपको बताना चाहते हैं कि जिस ढंग से सदन के अंदर लोगों ने अपनी भावनाओं को व्यक्त किया है, माननीय विजयकृष्ण जी ने जिस भावना का परिचय दिया है, आज फिर हिम्मत का परिचय दें। पीछे बैठकर बहुत लम्बा-चौड़ा भाषण हमसे करते हैं, आज हिम्मत करें कि जो नियम १८४ के अंतर्गत प्रस्ताव आया है, नीतीश जी के पुराने मित्र भी हैं, वोट पक्ष में दें, तभी हम मानेंगे कि उनकी पीछे की और आगे की बातों में एकरूपता है। …( व्यवधान)  एक भाषण में से और दो लाइनें हम कोट करके छोड़ देते हैं। सीपीएम पार्टी का रुप इस मामले में बहुत अस्पष्ट है। जिस समय माननीय सोमनाथ चटर्जी यहां सीपीएम के नेता थे और जिस समय एनडीए की हुकूमत में राष्ट्रपति शासन बिहार में लगा था, उनके भाषण का अंश पढ़कर हम आपको सुना देते हैं। “ महोदय, घोषणा के नतीजों को देखते हुए हमें आशा थी कि सरकार समझदारी दिखाते हुए, अपनी गलती को मानते हुए घोषणा को वापस ले लेगी। चूंकि ऐसा नहीं हुआ, इसलिए मैं घोषणा का विरोध करता हूं। माननीय गृह मंत्री जी ने घोषणा के इस तथाकथित भारी समर्थन की बात कही है और उन्होंने कुछ समाचार-पत्रों का उल्लेख भी किया है। मैंने सोचा कि माननीय गृह मंत्री जी, जो संसदीय प्रजातंत्र के प्रबल समर्थक हैं, हालांकि सदन में और बाहर वे राष्ट्रपति शासन का विरोध करते रहे हैं। माननीय प्रधान मंत्री जी से यह बात कही थी कि हम आज तत्कालीन राष्ट्रपति जी से मिलने गये थे जब एनटीआर की सरकार बर्खास्त की गयी थी। उनकी नीयत बिल्कुल साफ है कि कहीं भी राष्ट्रपति शासन का समर्थन नहीं होना चाहिए, बल्कि वहां लोकप्रिय सरकार का गठन होना चाहिए। चुनाव का मकसद भी यही होता है कि वहां लोकप्रिय सरकार का गठन हो, लेकिन बिहार के महामहिम राज्यपाल ने कोई भी लोकप्रिय सरकार गठन करने में अपनी भूमिका का निर्वाह नहीं किया है”। उपाध्यक्ष महोदय, हम यह कहना चाहते थे कि जिस गलत तरीके से आधी रात में बिहार विधान सभा को भंग किया गया, इसके पीछे मात्र एक मकसद था कि जिस तरीके से ...( व्यवधान)... * हम अपनी बात समाप्त करते हैं।
* Not Recorded.
 
MR. DEPUTY-SPEAKER: That remark will not go on record.
श्री लालू प्रसाद : इसे रिकार्ड से निकलवा दीजिए।
उपाध्यक्ष महोदय :  मैंने एक्सपंज करने के लिए कह दिया है।
श्री जयप्रकाश जी, आप बोलिये।
श्री जय प्रकाश (हिसार) : उपाध्यक्ष जी, माननीय गृह मंत्री जी ने, बिहार में राज्यपाल का समय बढ़ाने के लिए, जो प्रस्ताव रखा है, मैं उसके समर्थन में खड़ा हुआ हूं और माननीय नीतीश जी,नियम १८४ के तहत जो चर्चा का विषय लाए हैं मैं उसके विरोध में बोलने के लिए खड़ा हुआ हूं।
उपाध्यक्ष महोदय, लम्बे अर्से से आज इस सदन में “ ब्यूरोक्रेट्स की भूमिका”  पर एक चर्चा चल रही है । मैं सबसे पहले इसी पर बोलना चाहूंगा। यह बात सही है जिसे माननीय देवेन्द्र प्रसाद जी कह रहे थे कि किसी प्रदेश का मुख्य सचिव छुट्टी पर चला जाए तो कौन सा पहाड़ टूट गया। ब्यूरोक्रेट्स आते हैं, जाते हैं, यह एक संवैधानिक प्रक्रिया है। जब राज्यपाल का शासन किसी प्रदेश में लागू होता है तो उसके सलाहकार भी नियुक्त होते हैं.। मैं इस बात को समझता हूं कि बिहार के लोगों ने ऐसे सांसद चुनकर भेज दिये, जिनको इस बात का ज्ञान नहीं है, जो अपराधिक दुनिया में घूमते रहते cé[r63] ।  
राज्यपाल के सलाहकार केवल राज्यपाल को सलाह दे सकते हैं लेकिन राज्यपाल सलाहकारों के लिए बाध्य नहीं है कि वह उनकी हर बात को मानें। सीवान के उस वक्त के पुलिस अधीक्षक ने जो कुछ किया, वह ठीक नहीं था। मैंने टेलीविजन और अखबारों में उनके बारे में पढ़ा। किसी जन प्रतनधि को उसके इलाके से निकाल दिया जाए, इससे बड़ा जुल्म और प्रजातंत्र की हत्या क्या हो सकती है। उस वक्त ये लोग नहीं बोले। राज्यपाल की भूमिका पर इस सदन में चर्चा करना आज के दिन कोई शोभनीय बात नहीं है। आज एनडीए की हालत घायल पक्षी की तरह है। जब पक्षी शिकारी के शिकार से घायल हो जाता है तो फड़फड़ाता है कि पता नहीं किस कोने में पड़ेगा और उसकी हत्या हो जाएगी। एनडीए के लोग आने वाले चुनावों से घबरा गए हैं। वे लालू जी के शिकारी हो चुके हैं। उनकी मालूम नहीं इनका क्या होगा? एनडीए के लोगों ने कहा कि यूपीए ने बहुत गलत काम किया। उन्हें बिहार में राष्ट्रपति शासन लागू नहीं करना चाहिए था। मैं असैम्बलीका सदस्य था। नीतीश जी हमारे सीनियर हैं। वह हमारे साथ एमपी भी रहे हैं। उस वक्त बहुमत राबड़ी देवी के पास था और नीतीश कुमार सत्यवादी बन रहे थे। उस वक्त नैतिकता, मूल्यों पर आधारित राजनीति कहां गई थी, उस वक्त वाजपेयी साहब का मन कहां गया था? प्रजातंत्र में एक महिला के साथ इस तरह का गलत काम किया गया। मैं आभारी हूं, यूपीए का और उस समय के राज्य सभा के सदस्यों का, उन्होंने लोक सभा में पास किए गए प्रस्ताव को निरस्त कर दिया था। इसकी वजह से नीतीश जी को अपमानित होकर एक बार फिर मुख्यमंत्री का पद छोड़ना पड़ा था। वह इस वक्त कहां हैं, मुझे दिखायी नहीं दे रहे हैं। मैं नीतीश जी से पूछना चाहता हूं कि वह जब बहुमत के अभाव से मुख्यमंत्री पद से हट गए तो यहां आकर दोबारा मंत्री कैसे बन गए और वह भी रेल मंत्री कैसे बन गए?
आज उन्होंने कहा कि राज्यपाल महोदय के गलत दबाव की वजह से वहां के मुख्य सचिव को लंबी छुट्टी पर जाना पड़ा। मैं उस वक्त के रेल मंत्री से पूछना चाहता हूं कि ...* वह १५ लोगों को सुपरसिड करके चेयरमैन बन गये। उस वक्त वाजपेयी साहब देश के प्रधान मंत्री थे और नीतीश जी देश के रेल मंत्री थे, यानी जब खुद का मौका आता है तो हरीश्चन्द्र बन जाते हैं। मैं तीन उदाहरण और देना चाहता हं। मैं नाम नहीं लेना चाहता हूं - एक व्यक्ति की वजह से हिमाचल प्रदेश में सरकार बनी। वह व्यक्ति जब कांग्रेस पार्टी में था तो वह अशुद्ध था। जब भारतीय जनता पार्टी का समर्थन कर दिया तो गंगा जल में नहाया गया और अच्छा हो गया। यह इन लोगों का आचरण है। ...* मैं एक और उदाहरण देना चाहता हूं। एक प्रदेश के मुख्यमंत्री जब श्रीमती सोनिया गांधी के साथ हों तो अशुद्ध हैं, वह एनडीए का साथ देते हैं तो शुद्ध हो जाते हैं। इनके नकली भाषणों पर क्या देश की जनता विश्वास करेगी? कल मुख्य सचिव का मामला आया। पुलिस अधीक्षक बदले, डिप्टी कमीश्नर बदले, यह कोई नई प्रक्रिया नहीं है। जिस प्रदेश में नया शासन आता है, वह उन अधिकारियों को बदल देता है। जिस व्यक्ति की आस्था पर विश्वास न हो या राज्यपाल महोदय को यह लगे कि वह व्यक्ति ठीक नहीं है क्योंकप्रशासनिक अधिकारी किसी विशेष दल के साथ जुड़ जाए तो उसका तबादला कर दिया जाए, इसे लेकर लोक सभा में बवाल खड़ा कर दिया जाए यह कौन सा प्रजातंत्र है? यह कौन सी मूल्यों पर आधारित राजनीति की बात करते हैं?
यहां इन्होंने गुड़गांव की बात कह दी। हरियाणा प्रदेश के मुख्यमंत्री ने उन अधिकारियों का तबादला नहीं किया बल्कि उन्हें लंबी छुट्टी पर भेज दिया जो सदन के लोगों ने चाहा, जो हरियाणा के लोगों ने चाहा। वह डिप्टी कमिश्नर नहीं हैं[R64] ।
लेकिन मैं नीतीश जी से कहना चाहता हूं कि आप ऐसे लोगों के साथ लगे हुये हैं जिनको मूल्यों पर आधारित राजनीति का ज्ञान नहीं है। जब देश में श्री मोरारजी भाई की सरकार थी और उनके खिलाफ अविश्वास का प्रस्ताव चल रहा था तो एक तरफ ये लोग मोरारजी भाई से कह रहे थे कि मूल्यों पर आधारित राजनीति पर सरकार कुरबान कर दो, पीछे नहीं हटना लेकिन गैलरी में जाकर उनके खिलाफ हस्ताक्षर कर दिया। ऐसे लोगों की बातों पर प्रजातांत्रिक प्रणाली में विश्वास रखने वाली जनता कैसे विश्वास कर सकती है।
* Expunged as ordered by the Chair.
उपाध्यक्ष जी, मैं माननीय गृह मंत्री जी से निवेदन करना चाहूंगा कि वह जो प्रस्ताव लाये हैं, उसका समर्थन किया जाये। एन.डी.ए. के लोगों को न किसानी ज्ञान है और न मौसम का ज्ञान है। यह एक सच्चाई है क्योंकि जुलाई का महीना बारिश का होता है। आज देश के अधिकांश हिस्सों में भंयकर बाढ़ आई हुई है। सब जगह बारिश का कहर है। देश की गरीब जनता का इन लोगों ने ६ साल तक खून चूसा है। किसान-मजदूरों ने जो देश में होटल और सरकारी इमारतें बनाई थीं, इन लोगों ने उसे कौड़ियों के भाव में बेचने का काम किया है। ये लोग गरीबों के बारे में क्या जानें? जुलाई में कभी कोई चुनाव नहीं होता है। हरियाणा में एक बार कालका विधान सभा के लिये उप चुनाव हो गया, लेकिन उन दिनों जबरदस्त बाढ़ आई और लोग अपना मताधिकार का सदुपयोग ही नहीं कर पाये। इसलिये एन.डी.ए. के लोगों को मौसम का ज्ञान नहीं है। देश के ऐसे लोगों ने इन्हें चुनकर भेज दिया। आप बतायें कि जुलाई में बारिश हो तो लोग वोट डालने कैसे जायेंगे?
उपाध्यक्ष जी, अभी सदन में एक माननीय सदस्य बोल रहे थे जिनका अपराध जगत से संबंध रहा है। वह व्यक्ति जब भी सदन में खड़ा होता है तो मूल्य पर आधारित राजनीति की बात करता है लेकिन जब बाहर चला जाये तो गोलियों से गरीब आदमियों की हत्या कर देता है। जॉर्ज साहब ऐसी पार्टी के नेता हैं जो गरीबों को मारने का काम करती है। इसलिये मेरा आपसे निवेदन है कि माननीय गृह मंत्री जी ने जो प्रस्ताव रखा है, उसका अनुमोदन किया जाये और बिहार विधान सभा का चुनाव नवम्बर से पहले न कराया जाये। इसका कारण यह है कि पहले बारिश है, बाद में धान की कटाई होगी। भारत कृषि प्रधान देश है और इस देश का किसान गांवों में बसता है। इसलिये नवम्बर से पहले चुनाव नहीं हो सकता। इन लोगों नेगुड़गांव में शान्ति भंग की। ये लोग वहां इसलिए गये क जनता का समर्थन इन लोगों को मिलेगा लेकिन लोगों ने जॉर्ज साहब से कहा कि वह गरीबों का नाम लेकर लम्बे अरसे तक राजनीति करते रहे हैं लेकिन हरियाणा के मजदूरों का शोषण नहीं कर सकेंगे और हम आपकी बात नहीं सुनेंगे। जब वहां से कुछ नहीं मिला तो ये लोग जेल में गये जहां मजदूर बंद थे। वे अच्छे लोग थे लेकिन जो असामाजिक तत्व जेल में बंद हैं, उन्हें जॉर्ज साहब और एन.डी.ए. जैसे लोगों का समर्थन प्राप्त है। (Interruptions) …* MR. DEPUTY-SPEAKER: Shri Chautala is not present in the House. His name should not go on record.
 
* Not Recorded.
श्री जय़ प्रकाश : मैं आपसे निवेदन करना चाहता हूं कि जब मैं १९८९ में सांसद था, यहीं पर (Interruptions) … * की सरकार तोड़ने के लिये इन लोगों ने (Interruptions) … * का नाम दिया था और कहते थे कि (Interruptions) …* सरकार हटाओ, (Interruptions) … आप प्रधान मंत्री बन जाओ। ये लोग मूल्यों पर आधारित राजनीति की बात करते हैं?
MR. DEPUTY-SPEAKER: Those who are not present in the House, their names should not go on record.
श्री जय प्रकाश : उपाध्यक्ष जी, बी.जे.पी. की दोहरी सदस्यता के प्रश्न पर जनता पार्टी टूटी थी। मैं जॉर्ज साहब और नीतीश जी से पूछना चाहता हूं कि जब जनता पार्टी टूटी थी, क्या उस समय दोहरी सदस्यता का मामला नहीं आया था[RB65] ?
जार्ज साहब ने यह मामला उठाया था, जिसकी वजह से भारतीय जनता पार्टी जनता पार्टी से अलग हुई थी। आज वही उनका दामन थामे बैठे हैं। मैं आपसे कहना चाहता हूं कि यदि मूल्यों पर आधारित राजनीति की चर्चा करनी है तो हमारे अंदर जो कमियां हैं, आप हमें बताओं और हम इनकी बतायेंगे।…( व्यवधान) यानी वहां चुनाव जुलाई में नहीं हो सकते हैं। ऐसा क्या तूफान खड़ा हो गया, अगर गृह मंत्री जी ने कह दिया कि समय बढ़ा दो तो समय बढ़ाना चाहिए।
मैं अंत में कहना चाहता हूं कि ब्यूरोक्रेसी बड़ी मौकापरस्त होती है। जब इनका रिटायरमैन्ट आता है, उस वक्त शहादत देते हैं। लेकिन उंगली कटाकर शहीद नहीं होना चाहिए। यदि बिहार सरकार में कोई कमी थी, तो राबड़ी देवी का विरोध करते, गवर्नर का विरोध करते। मुझे शंका है कि इन्होंने मुख्य सचिव को राज्य सभा का लालच न दे दिया हो। द्विवेदी जी को भी ऐसे ही दिया था और राज्य सभा में लाये थे। तब कांग्रेस की सरकार थी। ऑडीटर जनरल का इस्तीफा दिलवाया था और उन्हें राज्य सभा में लेकर आये थे और गवर्नर भी बनाया था। मुझे शंका है कि मुख्य सचिव को इन लोगों ने प्रलोभन दे दिया होगा। जैसा अभी माननीय सदस्य कह रहे थे कि यहां होटल में पैसे दिये जा रहे थे। एन.डी.ए. के लोग साम, दाम, दंड, भेद हर नीति को अपनाकर इस देश में सत्ता में आये और धर्म के नाम पर देश को तोड़ने की कोशिश की। इन्होंने इस देश के किसान को बर्बाद करने का संकल्प लिया, जबकि हरियाणा प्रदेश में सोनिया जी ने * Not Recorded.
किसान के बेटे श्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा की सरकार बनाई। लेकिन ऐसे लोगों पर देश की जनता विश्वास नहीं करेगी। मैं सारे सदन से कहना चाहता हूं कि वहां राज्यपाल का समय बढ़ाया जाए और नवम्बर से पहले चुनाव न हों। यह संवैधानिक बाध्यता है। ये लोग जनता को बता रहे हैं कि सारा देश देखेगा - क्या सारे देश ने इस बात को नहीं देखा जब आप लोगों ने इस देश को तोड़ने के लिए मोरारजी देसाई के साथ धोखा किया, जब आप लोगों ने अपने स्वार्थ की पूर्ति के लिए श्री विश्वनाथ प्रताप सिंह के साथ धोखा किया। इस तरह से एक बार नहीं, अनेकों बार धोखा किया गया है। मैं इनसे कहना चाहता हूं कि ऐसे लोग बचकर रहें, जिन्होंने इस देश को धर्म की आग में धकेलने का काम किया, जिन्होंने हजारों लोगों को गुजरात में मरवाने का काम किया और किसानों को राजस्थान और हरियाणा में मरवाने का काम किया। नौ किसान वर्ष २००० में मारे गये थे और एन.डी.ए. की सरकार ने आंसू तक नहीं बहाये, बल्कि इन लोगों ने किसानों की लाशों पर खुशियां मनाई थी।
उपाध्यक्ष महोदय, ये मूल्य पर आधारित राजनीति की बात करते हैं। ये कहते हैं कि लालू जी दागी हो गये। यदि लालू जी दागी हैं तो आडवाणी जी क्या हैं। आज देश के सामने ये लोग जवाब दें कि अगर लालू जी दागी हैं तो आडवाणी जी भी दागी हैं। अदालत ने उनके ऊपर चार्जशीट फ्रेम कर दी। इसके बाद आडवाणी जी को इस्तीफा देकर देश के सामने जाना चाहिए था। जार्ज साहब आप लोग किन लोगों का साथ दे रहे हो। आप कांग्रेस में आइये। यहां समाजवाद बहुत बड़ी ताकत है, क्योंकि शहीदे आजम भगत सिंह जी ने कहा था कि देश की आजादी के बाद इस देश में समाजवाद आयेगा और समाजवाद कांग्रेस लायेगी। आप आइये, हम आपको यहां समाजवाद का ....(व्यवधान) आप शर्म मत करिये। आपने एन.डी.ए. का साथ दिया, इससे जो आपके आदर्श थे, जो आपका रास्ता था, उससे आप भटक गये। अभी मना करके आप किसके साथ जाओगे। आप यहां गृह मंत्री जी की बात का समर्थन करिये तथा अपनी पार्टी से इसका समर्थन कराइये, धोखेबाजों से आप सावधान रहिये। इसी के साथ मैं अपना वक्तव्य समाप्त करता हूं।
 
MR. DEPUTY-SPEAKER:  Now, Mr. Uday Singh.  You have got only five minutes. Please conclude your speech within the time limit.
… (Interruptions)
MR. DEPUTY-SPEAKER:  No running commentary, please.
… (Interruptions)
प्रो. विजय कुमार मल्होत्रा : उपाध्यक्ष जी, अभी इनके नुमाइंदे यह बोले हैं कि जार्ज साहब कांग्रेस पार्टी में आयें।…( व्यवधान)   क्या कांग्रेस पार्टी जार्ज साहब को इन्वाइट कर रही है।…( व्यवधान) 
MR. DEPUTY-SPEAKER:  Nothing will go on record except the speech of Mr. Uday Singh.
(Interruptions) … * उपाध्यक्ष महोदय : जयप्रकाश जी, कुछ भी रिकार्ड पर नहीं जा रहा है।
(Interruptions) … *                       * Not Recorded.
SHRI UDAY SINGH (PURNEA): I seek the permission of the Chair to speak from here… (Interruptions)
Sir, I rise to support the motion moved by Shri Nitish Kumar, which is based on two brief points… (Interruptions)
श्री लालू प्रसाद : माननीय सदस्य बिहार से आते हैं। उन्होंने पूर्णिया में अंग्रेज़ी में भाषण करके वोट मांगे हैं क्या?
श्री उदय सिंह : आपका आदेश है तो मैं हिन्दी में बोलता हूं।
उपाध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्य नीतीश जी के मोशन में दो बातें हैं। पहली बात बिहार में राष्ट्रपति शासन के अंतर्गत बिगड़ती हुई कानून व्यवस्था है और दूसरी बात मुख्य सचिव का लंबे काल के लिए छुट्टी पर चले जाने का मुद्दा है। लेकिन इन बातों पर चर्चा करने से पहले मैं आदरणीय गृह मंत्री से पूछना चाहूंगा कि इस देश की जनता की राष्ट्रपति शासन के दौरान क्या उम्मीदें होती हैं? राष्ट्रपति शासन एक प्रकार से अंतिम उपाय माना जाता है कि जहां कांस्टीटयूशनल ब्रेक़डाउन हो जाए तो राष्ट्रपति शासन लगाया जाता है, लेकिन आम जनता किसी भी राज्य में, बिहार हो या कोई भी राज्य हो, जब वहां राष्ट्रपति शासन लगता है तो लोगों को ऐसा महसूस होता है कि वहां कम से कम और कुछ हो न हो, लेकिन कानून व्यवस्था में अवश्य सुधार होगा।
18.47 hrs.                           (Shri Varkala Radhakrishnan in the Chair) क्या गृह मंत्री कह सकते हैं कि आज बिहार में कानून व्यवस्था में सुधार हुआ है? लालू जी को शायद इससे राहत मिले कि इसके कंपैरिज़न में उनकी सरकार अच्छी थी। मैं उनको सर्टफिकेट नहीं दे रहा, लेकिन आज जैसा और वक्ताओं ने कहा है कि राष्ट्रपति शासन के दौरान बिहार में कानून व्यवस्था बहुत ज्यादा बिगड़ चुकी है और हत्याओं की कोई गिनती नहीं है। अभी तीन दिन पहले मैं अपने क्षेत्र में था। वहां दिन-दहाड़े एक मुखिया की उस स्कूल में बम मारकर हत्या कर दी गई, जहां फोटो पहचान पत्र बन रहे थे। वहां इलैक्शन कमीशन के लोग मौजूद थे और पुलिस वाले भी मौजूद थे। बिहार में कानून और व्यवस्था की हालत बहुत ही ज्यादा खराब है। मैं माननीय गृह मंत्री जी से कहना चाहूंगा कि कानून और व्यवस्था किसी इलैक्टि्रक स्विच की तरह नहीं होती कि उसको जब चाहे ऑन कर दें तो ठीक हो जाएगी और बंद कर दें तो खराब हो जाएगी। जैसा बहुत से माननीय सदस्यों ने आपका ध्यान आकर्षित करने की कोशिश की है कि कानून व्यवस्था बहुत चीजों से जुड़ी हुई है। वे कौन सी ऐसी चीजें हैं जो बिहार में पहले ही गड़बड़ थीं, लेकिन अब राष्ट्रपति शासन के दौरान और भी गड़बड़ हो गईं जिनके कारण कानून और व्यवस्था में गिरावट आ गई? उन चीजों को जांच करने और उनको देखने की हमें जरूरत है। मुझे इस बात का दुख है कि सदन में जब भी चर्चा होती है और खासकर ऐसे किसी मुद्दे पर चर्चा होती है तो हम सभी लोग, जिसमें हम लोग भी शामिल हैं, उत्तेजित हो जाते हैं। बात को समझने के बजाय एक दूसरे पर प्रहार करने लगते हैं। हम विपक्ष के लोग हैं, हमारा क्या काम है? आपसे हमने कहा कि पेटेन्ट बिल स्टैन्िंडग कमेटी में भेज दें, तो आपने कहा कि भेज देते हैं, लेकिन एनडीए ने क्यों कहा। आप कहते हैं कि आपने क्यों कहा। हम कह रहे हैं कि बिहार में राज्यपाल को बदल दीजिए, तो आप कहते हैं कि कर देते, लेकिन एनडीए की मांग है, तो हम क्या करें? बिहार के साथ बलात्कार होता रहे, अन्याय होता रहे और हम लोग देखकर खुश होते रहें?

If a rape is inevitable, do you really want us to lay back and enjoy?  यह कोई बात बनी? इस सदन के माध्यम से मैं सरकार से कहना चाहता हूं क the Congress Party and the UPA have an exhaustive list of deadwoods.   किसी और को चुनकर भेज nÉÒÉÊVÉA[h66] ।

आजकल सुना है कि बिहार में बंटी और बबली नाम के लोग घूमते हैं और जो सरकार वहां पर थी…( व्यवधान)  बंटी और बबली नाम से आपको क्या ऐतराज हो सकता है? …( व्यवधान) यह सिनेमा है और इसे सभी ने देखा है। इसमें क्या खराबी है? मैंने कोई आपत्तिजनक बात नहीं कही है। माननीय सभापति महोदय, मैं आपके माध्यम से सरकार से जानना चाहता हूं …( व्यवधान)

SHRI SHIVRAJ V. PATIL: Sir, I think, you should not allow the names to be mentioned of the persons who are not here to defend themselves.

MR. CHAIRMAN : You cannot mention any names. You can confine yourself to the facts on Bihar.

… (Interruptions)

श्री उदय सिंह : इसमें मेंरे ख्याल से कोई आपत्तिजनक बात नहीं है। जैसा मैंने कहा कि जो सरकार पहले आरजेडी की थी, उसे मैं बताना चाहूंगा कि एक अच्छी जगह डीएम की पोस्िंटग के लिए वहां कितनी कीमत चल रही है।सुना है कि इस कार्य के लिए पचास लाख रूपये जिलेवार पोस्िंटग के लिए लिया जाता है।

SHRI M.A.A. FATMI: Sir, this is very much objectionable. He is mentioning about the Governor and is talking about Rs.40-50 lakh. This is not proper.

MR. CHAIRMAN: Whatever objectionable references and other references which are found to be unparliamentary will not be there on the record.

SHRI LALU PRASAD: Sir, he is mentioning about the Governor and others. It should be expunged.

MR. CHAIRMAN: Shri Lalu, please do not bother about it. If he has said anything unparliamentary and which are not admissible under the rules, it will not be there on the record.

श्री उदय सिंह : मैं कोई ऐसी बात नहीं कहना चाहता, जिसमें किसी को कोई आपत्ति हो, लेकिन मुझे बोलने की इजाजत दी जानी चाहिए। यह सरकार का अधिकार है, राज्यपाल का भी अधिकार है कि वह जिस भी अफसर को जहां भी चाहे ट्रासंफर कर सकता है। हमें इसमें कोई आपत्ति नहीं है। अगर राज्यपाल चाहता है तो सत्तरह नहीं सत्ताइस एसपीज का ट्रांसफर करे। यह उनका अधिकार है। इस अधिकार के लिए हम मना नहीं कर रहे हैं। लेकिन कौन सी परिस्थिति में ये तबादले किए जाते हैं, यह अवश्य देखने की बात है। जब उस राज्य का मुख्य सचिव छुट्टी पर चला जाए, तब ये ट्रांसफर किए जाएं, यह सही नहीं है। यह मैं किसी को उत्तेजित करने के लिए नहीं कह रहा हूं। हमारे देश के माननीय प्रधानमंत्री जी हमारे डिस्टि्रक्ट मजिस्ट्रेट को यहां बुलाते हैं, उनसे अच्छी-अच्छी बातें करते हैं कि वहां पर प्रशासन कैसे अच्छी तरह से चलना चाहिए। …( व्यवधान)

MR. CHAIRMAN: Please do not interrupt. Let him conclude his speech.        

            You may please confine your remarks to the facts which are not told earlier. But you are speaking on a matter which has already been expressed by many hon. Members.

SHRI UDAY SINGH : Sir, then only one person need to speak; otherwise, somebody or the other would have spoken about it earlier.

इसलिए माननीय महोदय, जिस परिस्थिति में ये ट्रासंफर किए गए, जिस परिस्थिति में मुख्य सचिव छुट्टी पर गए, यह अनेक संदेहों को जन्म देता है। क्या वजह है कि मुख्य सचिव और वह मुख्य सचिव जिसके बारे में व्यापक रूप से जाना जाता है कि वह ऐसे अफसर हैं जिन पर किसी तरह का दबाव नहीं डाला जा सकता है, जो बिहार की सेवा निस्वार्थ भाव से करते रहे हैं। …( व्यवधान) माननीय रेल मंत्री जी मुझे बार-बार टोक रहे हैं, यह अच्छी बात नहीं है। वे मुझसे बड़े हैं, लेकिन उनको यह धैर्य होना चाहिए कि जो कुछ मैं बोल रहा हूं, उसे वे सुन लें[i67] ।

  सभापति जी, राष्ट्रपति शासन के बारे में, मैं दूसरी बात कहना चाहता हूं कि राष्ट्रपति शासन लगाने के लिए रात्रि में १.०० बजे कैबीनेट की बैठक हुई। उसमें निर्णय होता है कि बिहार विधान सभा को भंग कर दिया जाए। उसके बाद राज निवास की पुलिस ने चारों तरफ से घेराबन्दी कर ली। …( व्यवधान) 

श्री लालू प्रसाद : सभापति जी, बार-बार ये लोग कह रहे हैं कि रात को निर्णय लेने की क्या जरूरत थी। मैं उन्हें बताना चाहता हूं कि दिल्ली में रात में काम होता है। दिल्ली रात में जगती है और दिन में सोती है। …( व्यवधान) 

श्री उदय सिंह : राजभवन को पुलिस की घेराबन्दी में ले लिया गया। हमारे आदरणीय रक्षा मंत्री यहां इस समय नहीं हैं,। मैं उनसे पूछता, तो पता लगता कि दानापुर में केंटोनमेंट है, शायद उनको भी बता दिया गया होगा। मैं पूछना चाहता हूं कि किस चीज का खतरा महसूस किया गया, क्या १५० विधायक जबर्दस्ती राजभवन में घुस जाते और अपने आप मंत्री पद की शपथ ले लेते, या वे खुद विधान सभा में घुस कर स्थान ग्रहण कर लेते, किस चीज का डर इन्हें बैठ गया ? यही चीज यदि सुबह होती, तो शायद हमें इतना बोलने की जरूरत नहीं होती।

सभापति जी, सबको मालूम है कि उस समय हमारे महामहिम राष्ट्रपति जी देश में नहीं थे, विदेश गए हुए थे। फाइल विदेश भेजकर हस्ताक्षर कराने और उद्घोषणा जारी कराने की क्या जरूरत थी। वहां राष्ट्रपति शासन लागू था, कोई इमर्जेंसी लागू नहीं थी, कोई मलिट्री शासन लागू नहीं था। जो प्रेसीडेंट्स रूल लागू था, वह लागू था। उद्घोषणा रात में हो या दिन में, इससे क्या अन्तर पड़ता था, लेकिन चूंक खुफिया एजेंसियों ने बताया था, और लालू प्रसाद जी के पास खुफिया एजेंसियों की कोई कमी नहीं है कि यदि कल का सूरज निकल गया, तो नीतीश कुमार जी, वहां के मुख्य मंत्री बनेंगे। हालांकि वे बिहार के मुख्य मंत्री अब भी बनेंगे, लेकिन थोड़ा विलम्ब होगा।  

महोदय, मैंने बहुत सुन लिया कि बी.जे.पी. साम्प्रदायिक है और कांग्रेस को अधिक सीटें मिलीं। इत्तफाक से सात सीटें हमसे ज्यादा इन्हें मिली हैं। वे इस बारे में कुछ ख्याल करें कि कोई इतनी बड़ी मैजोरिटी में नहीं आ गए हैं कि वे जो चाहे कह सकें। …( व्यवधान) 

SHRIMATI TEJASWINI SEERAMESH : NDA Government fell because of one vote. सात वोट कोई कम नहीं होते।

श्री उदय सिंह : सभापति जी, मेरा इस सरकार से यह आग्रह है, हालांकि मुझे मालूम है कि मेरा आग्रह नहीं माना जाएगा, लेकिन विपक्ष में होने और बिहार से होने के नाते, मेरा उनसे निवेदन है कि बिना किसी विलम्ब के वे जिसको भी चाहें, मैं यह नहीं कह रहा हूं कि मुझे वहां का राज्यपाल बनाएं, मैं नहीं कह रहा हूं कि श्री नीतीश कुमार जी को वहां का मुख्य मंत्री बनाएं, चाहे जिसे राज्यपाल नियुक्त कीजिए, लेकिन उसे कृपा कर के जल्दी से जल्दी वहां भेजिए।…( व्यवधान) 

माननीय गृह मंत्री जी, इसमें आपकी दिलचस्पी होगी, मैं बताना चाहता हूं कि वहां लोगों का लोकतंत्र में विश्वास उठता जा रहा है। मैं अभी अपने क्षेत्र से आया हूं। मैं दलगत राजनीति से ऊपर उठकर यह कहना चाहता हूं कि वहां लोग कह रहे हैं, मैं बिहारी में ही कहना चाहता हूं- “ धाऊ अब की मलिट्री रूल में ठीक हते। प्रेसीडेंट रूल में ते वह चोरी छै। ” They are losing faith in democracy. Please take note before it is too late because you and me, all of us, at one time or the other will pass away but democracy must be strengthened here and this dispensation in Bihar should discontinue.  It is my good luck that the Chairperson of UPA is here.  It is my request to her, to please look into this matter and see that there is a change of dispensation.  We are asking for nothing.  You can hold elections whenever you like or whenever the Election Commission decides[R68] .

19.00 hrs. You can send anybody as the Governor.  You can send anybody as the Adviser.  You can transfer or post as many officers, any time, as you like.  It is none of our business.  But there must be a rule of law.  It must seem that things are being done according to the rule book and that Bihar has not become free for all to loot.

                                                                                               

SHRI SURAVARAM SUDHAKAR REDDY (NALGONDA): Sir, I am thankful for giving me an opportunity to speak.  I understand we are discussing two issues. On behalf of CPI Party, I support the Resolution proposed by the hon. Home Minister for extension of the Presidential Rule for six more months from September.  I would like to say that we oppose the Resolution moved by Shri Nitish Kumarji. I would like to say that as a matter of fact, these are two contradictory and opposing Resolutions. In the name of law and order, it is being discussed that the Presidential Rule should be put to an end immediately but I would like to ask what is the alternative in the present situation.  In the last elections, there was fractured verdict in Bihar.  Neither any political party nor any political friend could get the majority. But it was also a fact that in spite of contest by secular parties without an understanding among themselves and in spite of fighting against each other, the communal parties were defeated and the secular parties got a clear majority in the Bihar Assembly.  But unfortunately because there was no common understanding, a government could not be formed. 

I understand the BJP friends are very angry and unhappy that Presidential Rule was proclaimed after a mid-night meeting.  It was to prevent the most unfortunate horse trading.  This was carried out earlier very freely in Uttar Pradesh, Goa and Jharkhand.  Since it was prevented in Bihar, they are angry and disillusioned.  That is why, again and again it is being referred to as if a mid-night coup d’etat had taken place. I think it was a very proper decision because at one more place, i.e., Bihar there would have been a Government with defectors.  These political defections are bringing a bad name for the Indian democracy and unfortunately Bihar is becoming an important place for this type of defections.

Some of the speakers mentioned that earlier also defections did take place and they accused that Shri Laluji was a champion of such defections.  I do not say that he is a holy cow.  Our Party, CPI, is also a victim of such defection.  The split of the Communist Party did take place in Bihar… (Interruptions).  I am here to speak on behalf of my Party but I am not ready to say what you want me to speak.

19.04 hrs.                                          (Mr. Speaker in the Chair )   I would like to say here that by accusing Laluji, the BJP will not get the licence to arrange defections officially.  It is not correct.  You can say that it was not correct.  It was wrong.  There is a difference in the type of defections that had taken place[r69] .

            Here I would like to mention about what happened in the State of Manipur. There was defections effected by a Party which had only one MLA. With the help of defections, that Party formed the Government in the State and continued in office for more than two years. Thereafter, elections were held to the State Assembly and that party was completely swept away from the political map of Manipur. That is the Janata Party. At that time it was called the Samta Party. These type of defections never bring any good name to Indian democracy. Such kind of a thing should not be allowed to happen time and again.

            Sir, in regard to the question of extension of the President’s Rule, I would like to submit that while we support this Resolution for extension of President’s Rule in the State of Bihar, we really are not happy about it. It is because all it would mean is that the Assembly would remain suspended and Executive business would be carried on by the Governor, on behalf of a popular Government,  with the help of bureaucrats. Though it is very unfortunate, yet there is no other go. Our Party, the CPI, would like to make it clear that while supporting the Resolution for extension of the President’s Rule in the State, we are not happy about what is happening in Bihar. We are not happy about the developments that are taking place in the State. There are several accusations about the way the administration is being carried on in the State. The criticism made by our Party  and other parties in this regard was referred to by Shri Nitish Kumar in his speech. We do agree that we had made such criticisms and we stand by it. I would like to request the hon. Home Minister to take into consideration these types of accusations that have been made.

            Imposition of President’s Rule means that Executive business would be carried on by the Governor. The Governor should impartially discharge this function. Governor’s rule would not satisfy any Opposition party. It is not a question of satisfying the BJP or any other Opposition party, the State must be ruled in accordance with the law of the land. Unfortunately, that is not the situation in Bihar. The law and order situation in the State is bad. But this is not the first time that such a thing is happening in the State. The situation is bad for quite some time now. It should be set right. Now we should not politicise about what is happening in Bihar. Therefore, under the circumstances, I think, there is no other go but to extend the President’s Rule in the State for some more time. But elections to the State Assembly should be held at the earliest and a popular Government should be installed in Bihar as quickly as possible. However, I oppose the motion moved by Shri Nitish Kumar.

           

MR. SPEAKER: The next speaker is Shri Prasanna Acharya. You may speak for three minutes. Please co-operate with the Chair.

 

SHRI PRASANNA ACHARYA (SAMBALPUR): Sir, our names are being called at the fag end of the discussion.

MR. SPEAKER: That is why I am allowing three minutes, otherwise it would have been one minute. You may start your speech. You can stretch it up to five minutes if you can impress upon me.

SHRI PRASANNA ACHARYA : Sir, the motion moved by Shri Nitish Kumar is to express deep concern over the deteriorating law and order situation in the State of Bihar. In my opinion, the motion should have been worded a bit differently. In its present form it says that `deep concern over the deteriorating law and order situation in the State under President’s rule’. Does it mean that before the elections or before the imposition of the President’s rule, the law and order situation in the State was perfect? Since nearly a decade, there is no law and order in the State. The State is in a complete disorderly condition. A rule of the jungle was prevailing in the State of Bihar. So, when the Government of India imposed President’s rule in the State, the expectation was that with the imposition of the President’s rule, the law and order would be restored in the State. But the situation remains as it was before, during the rule of the erstwhile Government. So, there has been no change and the expectation of not only the people of Bihar but also of the country as a whole has been greatly belied. The expectation of the people of the country was that after the imposition of the President’s rule, at least, the law and order situation in the State would be improved. Alas! That has not happened[snb70] .

Sir, I [bru71] will not drag myself into the controversy as to who was good or who was bad and whether the Governor was right or whether the Chief Secretary was right.  I would not like to drag myself into that debate. But I would like to mention only two pertinent points here.  Shri Devendra Prasad Yadav is not present here now.  When he was delivering his speech, he was trying to reflect on this point.  While debating, we were dwelling more on politics and less on reality. 

I fail to understand one thing.   Supposing the Governor was not there and the Chief Minister was there in power.  Will the Chief Minister take the permission of the Chief Secretary to effect transfers?  Nobody should misunderstand me here.  Will the Chief Minister of the State take permission of the Chief Secretary to effect transfers?  And supposing there is a difference between the Chief Minister and the Chief Secretary, then whose opinion will prevail in a democratic set up? There is no doubt that there is no elected Government there now.  But the Governor is there.  In case there is a difference of opinion, should we conclude that the opinion of the Chief Secretary will prevail over the opinion of the Governor?  I do not know whether there was a Committee formed with three or four members in this regard.  We are in a political system.  For how long and how far will we allow bureaucracy to sit over our head? In a democratic set up, political will has to prevail upon the bureaucratic will.  Bureaucratic will cannot supercede the political will.  If that happens, then that is the end of democracy.  This is my considered opinion and this is our Party’s opinion also.  So, bureaucracy has to be kept in its place because in a political set up, political will ultimately has to prevail.  Nobody should misunderstand me as I am speaking from this side.   

As I said, while discussing such a subject, we must try to keep ourselves a bit above political consideration.  I am not concerned whether Sardar Buta Singh is there or whether the Congress Party is there or whether the NDA is there in power.  But this has very far-reaching impact and consequence on our very political system.   So, while we decide on such things, we have to be very broad-minded and have to see our future also.  Otherwise, we will be pushing democracy into doom.

The second point which I would like to point out is this.  The Governor, rightly or wrongly, took a decision. I do not agree with the decision of the Governor because, as has been pointed out by several Members, very competent and able officers have been shifted surely out of political considerations and keeping in view the ensuing elections in Bihar.  That cannot be supported.  If a Governor has taken a decision today and tomorrow with folded hands and bent knees, runs to the house of the Chief Secretary, then he has totally damaged the prestige of his post, forgotten the dignity and honour of the office of the Governor. 

So, my sincere appeal to the hon. Home Minister is to firstly withdraw the Governor because the Governor behaving in this way is an insult to democracy itself.  Occupying a very important post, he takes a decision today and tomorrow runs to the Chief Secretary who is an employee, a bureaucrat of his own Government.  This has totally diminished the very image of our democracy not only in this country but in the whole world as well.  My request to the Home Minister is to first withdraw such a Governor.  Sir, I am not deviating from the subject.  I am only confining myself to the motion under discussion.

Secondly, the Chief Secretary here is a straightforward bureaucrat.   There is no doubt about it. He is an honest and strict officer. There is no doubt about it. However honest, steadfast and dedicated officer one may be, he cannot throw the rule book to the dust bin.   I would like to know from the Home Minister the action which the Government is contemplating to take against a bureaucrat who has come publicly against the Governor or the Government[bru72] .

Should he openly lament and exhibit his defiance before the media? How do you plan to run this Government in such a system? I am not accusing the Chief Secretary. I am praising his straightforwardness, his honesty and his integrity.  But he has questioned the very system.  We cannot go on keeping silence on this.  This will have a very bad impact and ramification on the administrative and political system of our country.  I may again be excused.

MR. SPEAKER: You need not be apologetic.

SHRI PRASANNA ACHARYA : Today it has happened in Bihar.  Tomorrow, it may happen somewhere else.

MR. SPEAKER: It may happen anywhere.

SHRI PRASANNA ACHARYA : I am sorry to say that a few months back, integrity of a member of the Election Commission, who is now the Chief Election Commissioner, was questioned.  If the Government allows such a behaviour, the whole system will be put to jeopardy. 

            Regarding the extension of President's Rule in Bihar, myself and my Party are totally opposed to this. If the Government of India had sincerity and if it had no mala fide intentions in imposing the President's Rule, why did the Government not conduct the elections within six months? Why did the Government pressurise or persuade the Election Commission to defer the elections?  As was mentioned by Shri Nitish Kumar and some other hon. Members, there was no sign of flood in Bihar.  But on the pretext of flood, you deferred the elections. Now, you are coming to this House for renewal or extension of President's Rule in Bihar.  Enough is enough.  This speaks of the mala fide intentions of the Government.

            I was disheartened to listen to the speech of Shri Basu Deb Acharia, leader of the CPI(M) Party.  Have our Left friends forgotten the past?  They were the first victim of misuse of article 356 in this country after Independence? Are they forgetting the Great Dharmaveera who dismissed their Government decades before? They were the first victim of the brutal use of article 356.  Now, for political convenience, my Left friends, who were the first victim of this derogatory and dangerous provision, are supporting the imposition of President's Rule in Bihar.  I would like to remind them that it may so happen one day that this yoke will fall on their neck in West Bengal.  So, my Left friends, be ware of that.  Do not go on blindly supporting this imposition of article 356 because you were the sufferer yesterday and tomorrow you may be the sufferer again.

   

MR. SPEAKER: Thank you very much for your cooperation.

            Shri Yerrannaidu, you have lost your turn.  I called your name.  You were not here.

SHRI SUBRATA BOSE (BARASAT): Mr. Speaker, Sir, I rise to support the Statutory Resolution moved by the hon. Home Minister to extend the period of President's Rule in the State of Bihar for a further period of six months from 7th September, 2005.  At the outset, while supporting this Resolution I would like to just tell the House that I belong to a party which is a constituent of the Left Front and we in the Left Front, in principle never endorse or like imposition of the President's Rule in any State.  But in the present circumstances, I think, there is no other option but to support the extension of the President's Rule.  It is because once the President's Rule has been imposed and the State Assembly has been dissolved, it is up to the Election Commission which is a statutory and autonomous body to fix the date of election in that State. Until and unless the date of the election in the State is fixed by the Election Commission, there is no other alternative but to extend the President's Rule. 

            While supporting this Resolution, I would only express the hope that the Election Commission would arrange for holding the elections in the State of Bihar, for the Bihar Assembly, as soon as possible so that a democratically-elected Government can be formed in the State[r73] .

As regards the motion moved by the hon. Member, Shri Nitish Kumarji, which is being also discussed simultaneously, I would only mention that most of the time that he spent while moving his motion, he did not deliberate or explain why he thought that the law and order situation in the State was deteriorating under the President’s Rule. I think, he dwelt more on the second part or the latter part of his motion which dealt with the Chief Secretary proceeding on leave at this juncture.

            While we are not happy that the Chief Secretary has decided to proceed on leave, and particularly because, in the Media a lot of reports are coming about what he is saying, and making perhaps certain allegations or making known his grievances.  I would only request the hon. Minister of Home Affairs to inquire into this matter – this position – in whatever way we can and find out what led to his proceeding on leave.

            Sir, since the time allotted is short, I would only like to just quote from what, I think, is not a verbatim quotation but what the hon. Member, Shri Nitish Kumar, said during his speech :

“That there should not be any discrimination or bias in taking action for maintaining law and order ”               I think, for all of us there are no two opinions on this that all hon. Members of this House have the same opinion that while taking action for maintenance of law and order, there should neither be any discrimination nor any bias.  But a very positive action, very objective action should be taken in this regard.
MR. SPEAKER: Thank you for your cooperation.
SHRI SUBRATA BOSE : So, while saying this, I conclude. In conclusion, I support once again the Statutory Resolution brought forward by the Minister of Home Affairs. I thank you, Sir, for giving me an opportunity to speak.
     
डॉ. राजेश मिश्रा (वाराणसी) : अध्यक्ष महोदय, मैं आपका आभारी हूं कि आपने मुझे बोलने का अवसर दिया। मैं माननीय गृह मंत्री जी के संकल्प के पक्ष में बोलने के लिए खड़ा हुआ हूं और माननीय नीतीश कुमार जी ने जो संकल्प प्रस्तुत किया है, उसके विपक्ष में बोलने के लिए खड़ा हुआ हूं। माननीय नीतीश कुमार जी ने जो संकल्प प्रस्तुत किया, उसकी भाषा बिहार में राष्ट्रपति शासन के दरम्ियान कानून-व्यवस्था और मुख्य सचिव के लम्बी अवकाश पर जाने के सन्दर्भ में है। जब मैं इस संकल्प की भाषा को देख रहा था, मुझे यह महसूस हुआ कि कम से कम कानून-व्यवस्था के बारे में नीतीश कुमार जी को इस तरह का संकल्प प्रस्तुत करने का नैतिक अधिकार नहीं बनता। पूरे सदन को याद होगा कि जब माननीय नीतीश कुमार जी ने मात्र सात दिनों के लिए मुख्य मंत्री की शपथ ली थी, उस समय हम लोग लखनऊ विधान सभा में हुआ करते थे। शायद पूरे बिहार प्रदेश के किसी भी जनपद का जिला कारागार नही बचा होगा जहां कोई बाहुबली विधायक जेल के अंदर हो और माननीय नीतीश कुमार जी ने उसके दरवाजे पर जाकर समर्थन के लिए दस्तक न दी हो।…( व्यवधान) 
योगी आदित्यनाथ (गोरखपुर) : अब किसके साथ हैं ?…( व्यवधान) 
अध्यक्ष महोदय : अब चुप कीजिए न। उनको भी बोलने का हक है। आपको बोलने का हक है तो उनको भी हक है।
डॉ. राजेश मिश्रा : जो व्यक्ति मुख्य मंत्री बनने के लिए प्रदेश के सारे माफिया विधायकों के पास जेल में जाकर दस्तक दे सकता है, यदि वह व्यक्ति कानून-व्यवस्था की चर्चा करेगा तो यह बात अपने आप में समझ में आती है कि उनको कोई नैतिक अधिकार नहीं बनता कि वह कानून-व्यवस्था की चर्चा सदन में करें।
मान्यवर, इन्होंने तीन उदाहरण दिये हैं। एक सम्मानित पारस जी पर जो हमला हुआ, इन्होंने उसका उदाहरण दिया, दूसरा उदाहरण इन्होंने आरजेडी नेता की पटना में हत्या हुई, उसका उदाहरण दिया और तीसरा उदाहरण इन्होंने आरजेडी सांसद के ऊपर जो हमला हुआ, उसका उदाहरण दिया तथा इन्होंने उसे कानून-व्यवस्था के अंदर समेटने का प्रयास किया cè[R74] ।
हमारे एनडीए के लोग सामने बैठे हैं। मैं उनसे पूछना चाहता हूँ कि क्या आप केवल तीन उदाहरणों के आधार पर कानून-व्यवस्था की स्थिति पर इस सदन में चर्चा कराना चाहते हैं? आपके द्वारा शासित प्रदेश हैं गुजरात। शायद आजाद हिन्दुस्तान में यह पहली बार हुआ होगा कि लोकतंत्र में कोई चुनी हुई सरकार हो और उसने खुद ही दंगा कराया हो। आपको उस समय कानून-व्यवस्था की स्थिति समझ में नहीं आई थी? …( व्यवधान)   हिन्दुस्तान का सबसे शान्त, कानून-व्यवस्था से सबसे ज्यादा सुसज्जित प्रदेश गुजरात था, लेकिन उस गुजरात को इन लोगों ने अशान्त किया और यहां आज कानून-व्यवस्था की चर्चा करते हैं।
इनकी दूसरी चिन्ता यह है कि बिहार में राष्ट्रपति शासन क्यों लागू हुआ? इन्होंने कहा कि सम्मानित गृहमंत्री जी ने सदन में कहा था कि विधायक आपस में बैठकर बातचीत करके एक लोकप्रिय सरकार का गठन करें। मैं जानना चाहता हूँ कि क्या आपने महामहिम राज्यपाल को लिखकर दिया था कि आप सरकार बनाने के लिए तैयार हैं? राज्यपाल महोदय आपके पत्र का इन्तजार करते रहे लेकिन अन्त तक आप पत्र लिखकर नहीं दे पाए और आज कहते हैं कि आप खरीद-फरोख्त नहीं कर रहे थे। झारखण्ड में आपकी सरकार कैसे बनी? मैं यह नहीं कहता कि आपने नकद पैसा दिया या नहीं, लेकिन जितने भी विधायक बाहर से आकर आपको समर्थन देते हैं, सभी को आप मंत्रीपद पर बैठाते हैं, कैबिनेट मनिस्टर बनाते हैं, यह लोकतंत्र में प्रलोभन नहीं है तो क्या है? यहां सम्मानित कल्याण सिंह जी बैठे हुए हैं। उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के २२ विधायकों और बसपा के १४ विधायकों को तोड़ा गया और सारे के सारे लोगों को मंत्रीपद दिया गया। मैं पूरे सदन से यह जानना चाहता हूँ कि यह प्रलोभन है या नहीं? इसे क्या आप प्रलोभन नहीं कहते हैं? इन्होंने कांग्रेस के २२ विधायकों को तोड़ा गया। आज माननीय नीतीश कुमार जीश्री नारायण राणे का उदाहरण देते हैं कि उन्हें कैसे मंत्री बनाया गया। श्री राणे ने विधानसभा की सदस्यता से त्यागपत्र दिया, इसलिए उन्हें सरकार में लिया गया। लेकिन कांग्रेस के २२ विधायकों का दल-बदल कराया गया, सभी लोग बारी-बारी से दल छोड़कर गए, सारे लोग एक साथ नहीं गए, उसके बावजूद भी जो उस समय के  …* जो इनकी पार्टी से सम्बन्धित थे, इन्होंने सभी को मंत्री का पद दिया। क्या यह प्रलोभन नहीं है?
MR. SPEAKER: No. Do not say anything against the Speaker of Uttar Pradesh.
… (Interruptions)
MR. SPEAKER: Do not refer to the Speaker. If anything has been said about the  Speaker of Uttar Pradesh, it will not go on record.
 डॉ. राजेश मिश्रा : सभी जितने विधायक बाहर से आए, सभी को मंत्री बनाया गया। नकद पैसा दें या न दें लेकिन सभी को मंत्री पद दिया गया। लोकतंत्र में इससे बड़ा प्रलोभन देने, लालच देने और खरीदने का उदाहरण और कोई नहीं हो सकता है।
* Not Recorded.
महोदय, मुख्य सचिव के बारे में चर्चा हो रही है कि वह लम्बे समय की छुट्टी पर चले गए हैं। यह राज्यपाल महोदय का विवेकाधिकार है कि वे किसका ट्रांसफर करते हैं और किसकी पोस्िंटग करते हैं।इस पर सदन में चर्चा होनी ही नहीं चाहिए थी, लेकिन इन लोगों ने मुख्य सचिव के लम्बी छुट्टी पर जाने पर चर्चा की है। इसी सदन में पूर्व एनडीए सरकार के रक्षामंत्री जी बैठे हुए हैं। उस समय इनके विभाग के अधिकारी श्री विष्णु भागवत लम्बी छुट्टी पर नहीं गए थे, बल्कि उन्होंने अपने पद से त्यागपत्र दे दिया था, लेकिन उस समय उसकी चर्चा नहीं हो पायी थी और आज लम्बी छुट्टी पर जाने पर चर्चा हो रही है।किसी की रिटायरमेंट में एक साल बचा है, किसी को छ: महीने, क्या आप उस इश्यु पर चुनाव लड़ना चाहते हैं?
मान्यवर, ऐसे व्यक्ति के खिलाफ इन्क्वायरी होनी चाहिए कि कहीं ऐसा तो नहीं है कि वह मुख्य सचिव पद पर रहते हुए आरएसएस या बीजेपी के संगठन से जुड़ गए हों?  मेरी सरकार से मांग है कि ऐसे मुख्य सचिव के खिलाफ इन्क्वायरी बैठायी जानी चाहिए जो सरकार के आदेश की अवहेलना करता है।
मैं आपका आभारी हूं कि आपने मुझे बोलने का अवसर दिया। मैं माननीय गृहमंत्री जी के संकल्प का समर्थन करता हूँ और मुझे विश्वास है कि पूरा सदन श्री नीतिश कुमार जी के संकल्प के विरोध में खड़ा होगा क्योंकि लोकतंत्र की इससे ज्यादा हत्या नहीं हो सकती कि हर जगह खुले आम खरीद-फरोख्त करके सरकारें बनाई जाएं। झारखण्ड इसका उदाहरण है। झारखण्ड में जितने भी विधायकों ने बाहर से आकर समर्थन दिया, उन्हें राजस्थान और पता नहीं कहां-कहां ले जाया गया और उन सभी को मंत्री पद दिया गया।हह७५ट   चाहे एनसीपी का विधायक हो या इंडिपेंडेंट विधायक हो या किसी भी दूसरी पार्टी का विधायक हो, सबको मंत्री बनाया या नहीं? हम यह जानना चाहते हैं कि क्या आपने यही काम उत्तर प्रदेश में किया था या नहीं? इससे ज्यादा कोई जीता-जागता प्रमाण नहीं हो सकता, लोकतंत्र की इससे बड़ी हत्या नहीं हो सकती। मैं कहना चाहता हूं कि जब-जब इन लोगों ने मिलीजुली सरकार बनाई है, सदा ही लोकतंत्र की हत्या की है, खरीद-फरोख्त की है और अपनी सरकार का गठन किया है।
मैं पूरे सदन से कहना चाहता हूं कि नीतीश कुमार जी के प्रस्ताव का सर्वसम्मति से विरोध होना चाहिए और गृह मंत्री जी के प्रस्ताव का सर्वसम्मति से समर्थन होना चाहिए।
 
MR. SPEAKER: Shri K. Yerrannaidu, please be brief. Your Party has got two minutes. I will give you one minute more. 
SHRI KINJARAPU YERRANNAIDU (SRIKAKULAM):  Mr. Speaker, Sir, we are discussing about… (Interruptions)
MR. SPEAKER: Please sit down.  आप क्या कर रहे हैं, आप मंत्री हैं। Please keep quiet. 
SHRI KINJARAPU YERRANNAIDU : Mr. Speaker, Sir, we are discussing two motions together.  The first motion is moved by the hon. Home Minister which relates to ‘extension of the President’s Rule’.  The second motion is moved by the hon. Member Shri Nitish Kumar regarding ‘the law and order situation in Bihar’.  Since the inception of my Party, we are opposing invoking of article 356 on any State, not particularly in Bihar, but in any State in our country.  Since independence, before Bommai’s judgement, more than hundred times the article 356 was imposed in our country.  The Congress Government was in power at the Centre.  Some of the States were ruled by the Opposition Parties.  To destabilise those States, they were imposing this article 356.  Once it happened in Andhra Pradesh also.  In the year 1984, Shri N.T. Rama Rao was the Chief Minister.  Then, they imposed article 356 through Governor Shri Ram Lal.  At that time, except the Congress Party, all the political parties were united to fight against the misrule of the Congress.  Finally, after one month of the people’s agitation, Shri N.T. Rama Rao’s Government was again reinstated in Andhra Pradesh.  This is the achievement of the Opposition Parties in our country.… (Interruptions)
MR. SPEAKER: Please keep quiet.  I have called him to speak. 
… (Interruptions)
SHRI KINJARAPU YERRANNAIDU : Democratically we changed our leader. We did not impose article 356.… (Interruptions)
MR. SPEAKER: Mr. Yerrannaidu, you address me. Do not get upset by others. 
SHRI KINJARAPU YERRANNAIDU : Sir, what happened in Bihar is that on 7th March, the hon. President imposed the President’s Rule in Bihar.  We discussed on the motion for approval of the President’s Rule on the 19th March in the same House.  At that time, whether we have liked it or not, by compulsion, my Party had also supported the motion for imposition of the President’s Rule.  What is the necessity to extend this President’s Rule? If we have six months’ time, the Government should intervene to ask the Election Commission to hold elections.  The popular Government should be in the State of Bihar for the better administration. What was the necessity to dissolve the Assembly?  For the first time, everybody has appreciated the temporarily suspended animation of the Assembly.  However, on the midnight, the Cabinet was called and they decided to dissolve the Assembly.  They sent a fax to the President of India who was in Moscow.  What was the necessity? If they would have waited for two or three days, the heavens would not have fallen.  What was the necessity to dissolve it at midnight?  So, my Party is opposing this. 
MR. SPEAKER: Do not question anything.  If was for the hon. Rashtrapati Ji to decide whether to sign or not. 
… (Interruptions)
MR. SPEAKER: Do not bring in Rashtrapati Ji. 
… (Interruptions)
MR. SPEAKER:  Do not bring in Rashtrapati Ji.  It is not permitted.
SHRI KINJARAPU YERRANNAIDU : I was not bringing in the President of India.  
MR. SPEAKER: They may send it.  It is for the hon. Rashtrapati Ji to sign.  Do not do it.  Do not bring in Rashtrapati Ji. 
SHRI KINJARAPU YERRANNAIDU : I am blaming the Cabinet and not the President of India.  So, what was the necessity to dissolve the Assembly? 
MR. SPEAKER: That is all right.
SHRI KINJARAPU YERRANNAIDU : Now, what is the law and order situation in Bihar?  The power generation in Bihar is 30 Megawatts.  It is a shameful thing to everybody.  Even in the UF Government, even in the NDA Government, even in the present Government, more than ten Ministers are there in the Union Council of Ministers from the State of Bihar, the power generation in Bihar is 30 Megawatts. You can ask from anybody or any student in the country about the law and order situation in Bihar.  Everybody will tell about it[bts76] .        
We have unitedly to improve this situation.  That is why, my Party is wholeheartedly opposing this.  This is undemocratic, unconstitutional and murder of the democracy.… (Interruptions)
MR. SPEAKER: You do not look at him.
… (Interruptions)
SHRI KINJARAPU YERRANNAIDU : I am not naming.  We are helping you.  Everybody should unitedly work for the development of Bihar.… (Interruptions)
Sir, my Party is also opposing the imposition of article 356.  I am opposing the extension of President’s Rule.
MR. SPEAKER: Thank you very much for your kind cooperation.
SHRI PRIYA RANJAN DASMUNSI: Mr. Speaker, Sir, my distinguished friend, Shri Yerrannaidu, has spoken very nicely.  Many new hon. members have come to the House.  He always gives very positive information.  Will he also provide the information as to how actually they destabilised the then Government of N.T. Rama Rao when he was the Chief Minister and assaulted him?… (Interruptions)
The newcomers in the House will be highly appreciative of him if he gives this information.… (Interruptions)
SHRI KINJARAPU YERRANNAIDU : Since the hon. Minister has taken my name, I would like to respond.  In the year 1984, we were in the majority.  The Government of N.T. Rama Rao was dismissed through Mr. Ram Lal.  We came to see the President of India.  The majority of MLAs were in Delhi.  The minority Government was ruling in Andhra Pradesh at that time.  All the political parties agitated against the misrule of Smt. Indira Gandhi.  At that time, Smt. Indira Gandhi got dismissed the Government of N.T. Rama Rao. We changed the Leader of the Telegu Desam Party in a democratic way.  There is a difference between 1984 and now.
   
MR. SPEAKER: All right.
… (Interruptions)
MR. SPEAKER: You need not respond to them.
… (Interruptions)
MR. SPEAKER: You could have ignored him.
… (Interruptions)
MR. SPEAKER: He provoked you and you got provoked.
… (Interruptions)
MR. SPEAKER: Shri Joachim Baxla.
            I can give you only two minutes.  We have already exceeded the time.  There is a reply by the hon. Home Minister.
श्री जोवाकिम बखला (अलीपुरद्वार) : अध्यक्ष जी, यहां पर दो प्रस्ताव पेश किये गये हैं। माननीय गृह मंत्री जी ने जो रैजोल्यूशन हमारे सामने पेश किया है, उसका समर्थन करने के लिए मैं यहां खड़ा हुआ हूं। हमारी पार्टी आरएसपी कभी भी आर्टिकल ३५६ के पक्ष में नहीं रही है। किसी भी राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू किया जाए, हमारी पार्टी इसके पक्ष में नहीं है। लेकिन एक विशेष परिस्थिति में, बिहार में जो राष्ट्रपति शासन लागू किया गया है और इसकी अवधि खत्म हो चुकी है, उसको आगे बढ़ाने के लिए, जो प्रस्ताव माननीय गृह मंत्री जी यहां लाए हैं, उसका समर्थन करने के लिए, मैं यहां खड़ा हुआ हूं।
दूसरा प्रस्ताव माननीय नीतीश कुमार जी के द्वारा पेश किया गया है, उसका मैं विरोध करता हूं। बिहार की आज की परिस्थिति से माननीय सदस्य और बिहार की जनता भी खुश नहीं है। हम चाहते हैं कि बिहार में शांति का वातावरण हो। लेकिन दुर्भाग्यवश चुनाव के बाद सरकार के गठन की तमाम कोशिशें नाकामयाब रहीं और वहां सरकार का गठन नहीं हुआ, जिससे वहां राष्ट्रपति शासन लागू किया गया। उसके बाद, आज जो वहां की स्थिति है, उसपर माननीय नीतीश जी ने कहा कि मुख्य-सचिव लम्बी छुट्टी पर चले गये हैं। उनकी मिसअंडरस्टेंडिंग माननीय राज्यपाल जी से हुई और वे लम्बी छुट्टी पर चले गये हैं। यह हमारी चिंता का विषय नहीं है। हमारी चिंता का विषय बिहार में शांति के माहौल को स्थापित करना है और उस माहौल को लाने के लिए सभी को एक साथ कोशिश करने की आवश्यकता है। इसलिए मैं चाहता हूं कि वहां राष्ट्रपति शासन खत्म होने के बाद तुरंत ही चुनाव का प्रबंध किया जाए। चुनाव होने के बाद वहां सरकार का गठन होगा और सरकार के गठन के बाद वहां की आज की परिस्थिति में सुधार होगा, ऐसा मेरा विश्वास है। इसलिए जो प्रस्ताव माननीय नीतीश जी ने पेश किया है, उसका मैं विरोध करता हूं।
MR. SPEAKER: Please maintain silence in the House. I have called the hon. Member. He is entitled to speak.
            Mr. Ramdas Athawale, you do not have much time. You speak for just three minutes.
श्री रामदास आठवले (पंढरपुर) : अध्यक्ष महोदय, बिहार में जो राष्ट्रपति शासन लागू किया गया, उसके बारे में यहां पर चर्चा हो रही है और हमारे श्री नीतीश कुमार जी ने, जो मुख्य सचिव छुट्टी पर चले गए हैं, उस पर आपत्ति उठाने का प्रयत्न किया है। माननीय अध्यक्ष महोदय, छुट्टी पर किसको जाना है, यह डिसाइड करने का उस व्यक्ति को अधिकार है और मुख्य सचिव जी खुद छुट्टी पर जाना चाहते थे, तो वे छुट्टी पर चले गए हैं। जिस तरह से छ: सालों तक हम लोग छुट्टी पर थे और आप छुट्टी पर नहीं थे। अब आप पांच साल तक छुट्टी पर रहने वाले हैं। ठीक है, आपने इस सवाल को उठाया है -"शिवराज जी ने एनडीए वालों को हिला दिया, सत्ता पर आने का सपना उनका मिट्टी में मिला दिया। इन्होंने विधायकों को करोड़ों रूपया खिला दिया, इसलिए शिवराज पाटिल जी ने विधान सभा से बाहर जाने का इनको जूस पिला दिया। "
महोदय, यह जो बिहार का मामला है, वह अध्यक्ष महोदय का मामला नहीं था, लेकिन अगर लालू जी और पासवान जी अगर एक साथ रहते, जो कि हमारे बहुत नजदीकी दोस्त हैं। …( व्यवधान) 
अध्यक्ष महोदय :   आप चेयर की ओर देखकर बोलिए।
श्री रामदास आठवले : अध्यक्ष महोदय, मैं आपको इतना ही बताना चाहता हूं कि "राष्ट्रपति शासन को लागू करने का वक्त अभी नहीं आता था अगर हमारे लालू साहब और पासवान साहब दोनों साथ में आ जाता था, तो ये हमेशा बाहर होता था। " इसलिए मैं दोनों को भी बताना चाहता हूं कि "श्री लालूऔर श्री पासवान जी अगर आपस में नहीं लड़ते तो हम बहुत आगे बढ़ सकते थे। श्री लालू और श्री पासवान जी आपस में झगड़े को मिटाते थे तो हम तुम्हे हमेशा के लिए हटाते थे। " अभी छह महीने के अंदर चुनाव होने वाले हैं और मेरा भी खयाल यही है कि जल्दी से जल्दी चुनाव किए जाने की आवश्यकता है, क्योंकि मुख्य मंत्री तो हमारा ही बनेगा और यह जो नीतीश कुमार जी का सपना है, वह पूरा होने वाला नहीं है। मतलब यह नीतीश जी का जो सपना है वह पूरा नहीं होगा। अध्यक्ष महोदय, “ नीतीश कुमार जी का नहीं पूरा होगा सपना, क्योंकि बीजेपी वाले तुम्हें मानते नहीं अपना” ।…( व्यवधान)   इसलिए अध्यक्ष महोदय, बिहार में हमारे पासवान साहब को, लालू साहब को कांग्रेस पार्टी समर्थन करेगी और आपकी पार्टी का भी समर्थन रहेगा, सीपीआई का भी रहेगा और सभी पार्टियों का समर्थन अगर रहेगा तो "बिहार में लालू की बहुत तेज चलेगी रेल और सत्ता में आने में आने के लिए एनडीए वाले हो जाएंगे फेल।"

अध्यक्ष महोदय : अब आपका समय समाप्त हो गया है।

श्री रामदास आठवले :नीतीश जी आप मुख्य मंत्री पद की मत बजाओ बेल, राबड़ी देवी के हाथों में ही जाएगा मुख्य मंत्री का खेल। अगर पासवान जी इसके लिए समर्थन करेंगे। इसलिए महोदय, श्री शिवराज पाटिल जी जो प्रस्ताव लाये है, हम उसका पूरा समर्थन करते हैं। वहां राष्ट्रपति शासन को लागू किए जाने की बहुत ज्यादा आवश्यकता थी। सभी तरफ से आवाजें आ रही थीं, दो करोड़ रूपये- दो करोड़ रूपये पैसा आ रहा था और विधायक भी आपके पास आ रहे थे। यह सब हमने देखा और हमने श्री शिवराज पाटिल जी से कहा कि अब ज्यादा वक्त नहीं लगना चाहिए।[c77]  जल्दी-जल्दी बर्खास्त करो, वरना ये बरबादी का काम करेंगे। इस तरह राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया। वहां के राज्यपाल बहुत एक्टिव हैं, बहुत तेज हैं और गरीब समाज के हैं। इसलिए आप उन्हें हटाना चाहते हैं। वहां बूटा सिंह जी राज्यपाल रहेंगे, ६ महीने और रहेंगे। …( व्यवधान)  अगर वह ठीक काम नहीं करेंगे, हम और ६ महीने उनका कार्यकाल बढ़ाएंगे। …( व्यवधान)  वह अच्छा काम कर रहे हैं। ये कहते हैं कि वहां लॉ ऐंड ऑर्डर ठीक नहीं है लेकिन गुजरात में उसकी क्या स्थिति थी, उत्तर प्रदेश में क्या थी? कल्याण सिंह जी, आप वहां के मुख्यमंत्री बने थे। वह बाद में हमारे नजदीक आए। उन्हें अटल जी ने कहा कि इधर आ जाओ। वह चले गए। ठीक बात है, आप उधर चले गए लेकिन उत्तर प्रदेश में ६ दिसम्बर १९९२ को क्या हुआ? आप लोगों ने देश को पूरा बरबाद करने का काम किया और आप लोगों को बरबाद करने का काम हम लोगों ने कर दिया है। इसलिए इधर की ताकत बढ़ती जाएगी। मैं अपने लोगों को और पासवान साहब को बताना चाहता हूं कि अगर हम साथ नहीं रहेंगे तो दोबारा वही सब होने वाला है। बूटा सिंह जी राज्यपाल रहेंगे। हम सब लोगों को एक साथ रहने की आवश्यकता है। यदि हम एक साथ नहीं रहते हैं, तो उनके एक साथ रहने पर वे सत्ता में आ जाएंगे। हम जार्ज साहब का बहुत आदर करते हैं लेकिन वह उधर क्यों चले गए हैं, मुझे मालूम नहीं। उन्हे हमारे नजदीक आना चाहिए। …( व्यवधान) 

MR. SPEAKER: Nothing more will be recorded.

(Interruptions) … * MR. SPEAKER: In future, I will disconnect the microphone.  Anybody ignoring the Chair will find that his microphone is not working.

… (Interruptions)

                                                                                   

* Not Recorded.

श्री असादूद्दीन ओवेसी (हैदराबाद) : जो खरादात वजीरे दाखला ने पेश की है, मैं अपनी पार्टी की ओर से उसकी ताईद करता हूं और जो मोशन मोहतरम नीतीश कुमार जी ने पेश किया है, मैं उसकी मुखालफत करता हूं। यह बात हकीकत है कि १७ आईपीएस अफसरों में से १५ ऑफिसर्स का तबादला किया गया, उस पर तमाम इत्तफाक राय थी। सिर्फ दो ओहदेदारों पर तनाजा पैदा हुआ और उन दो का ताल्लुक पटना और सीवान से था। हुकूमत को यह बुनियादी हक हासिल है कि वह ओहदेदारों का तबादला करे। आज सिर्फ दो ओहदेदारों के तबादले को लेकर, चीफ सैक्रेटरी का लीव पर चले जाना, मैं हुमूमत से मुतालबा करता हूं कि फौरन उस चीफ सैक्रेटरी की जगह और एक को नामजद करें। हुकूमत को चलाना एक मकसद है। अगर ऑफिसर इस तरह की हरकत करता है और इस सतह पर उतर आता है कि वह लीव पर जाकर अखबार में बयान देता है कि मैं हुकूमत के फैसले से नाखुश हूं तो हुकूमत का फरीजा है कि वह उसके स्थान पर किसी और को नामजद करे।

दूसरी बात यह है कि आज यहां पर इस तरफ से तनकीद की गई है। मैं जानना चाहता हूं कि श्री आर.पी. शिवकुमार कौन थे जिन्होंने मरकजी टि्रब्यूनल के सामने जाकर न सिर्फ बयान दिया बल्कि पुकार-पुकार कर कहा कि गुजरात की सर जमीन पर मुसलमानों का जो कत्ले-आम हो रहा था। उस वक्त वहां की हुकूमत ने कुछ काम नहीं किया, उस समय आपको एतराज पैदा नहीं हुआ। …( व्यवधान)   उसी ओहदेदार ने कहा था। तीसरी बात यह है कि यहां बोम्मई मुकदमे के ताल्लुक बात कही गई। वजीरे दाखिला मेरी बात से मुत्तफीक होंगे कि बोम्मई मुकदमे में जो फैसला दिया गया, वह बिहार की सिचवेशन पर लागू नहीं होता, क्योंकि वहां हुकूमत बनी नहीं। दस्तयूर का शेडयूल १०/4  क्या कहता है? वह साफ कहता है कि मर्जर हो सकता है और उस वक्त हो सकता है जब एक पार्टी के टू थर्ड मैम्बर्स टूटें। यहां टू थर्ड मैम्बर्स नहीं टूटे।

मैं आखिर में एक बात कहना चाहूंगा। मुझे नीतीश कुमार जी की इस बात पर सख्त एतराज है जब वह तकरीर कर रहे थे तो मोहतरम फातमी साहब ने उठ कर कहा कि दौराब-ए-तकरीर आप कहां से आए? मैं फातमी साहब के ताल्लुक से पूछना चाहता हूं कि किस तरह का बयान दे सकते हैं? ये तौहीन फातमी साहब की नहीं है, बल्कि हिन्दुस्तान के १५ करोड़ अयूम मुसलमानों की तौहीन है। आपको कहां से क्या अख्तियार हासिल है? अगर आप हम से जानना चाहते हैं कि कहां से आए तो १८५७ की जंगे आजादी को पूछना पड़äMÉÉ[R78] ।

[RB79]  आप लोग कुरबानी की बात करते हैंे। बिहार में अशफाकुल्लाह की कुरबानी याद करिये। आज यह फैसला आवाम देगी।…( व्यवधान) 

MR SPEAKER: I will look into it. 

श्री असादूद्दीन ओवेसी : मैं यील्ड नहीं कर रहा हूं। मै अपनी बात कहना चाहता हूं। फातमी साहब के ताल्लुक से उन्होंने जो कहा कि वह कहां से आये…( व्यवधान) 

श्री नीतीश कुमार : वह एक मजाकिया बात थी…( व्यवधान) 

श्री असादूद्दीन ओवेसी : मैं अपनी बात रखना चाहता हूं कि यह बात बराबर कही गई है…( व्यवधान) 

श्री मोहम्मद अली अशरफ़ फ़ातमी : नीतीश जी ने यह बात मज़ाक में नहीं कही थी, उन्होने सीरियस बात कही थी और मैने आब्जैक्शन किया था। You do not have the right to say anything against me. …(Interruptions)

MR. SPEAKER: I will look into and if there is anything unparliamentary, I will delete it.

…(Interruptions)

श्री असादूद्दीन ओवेसी : यह बात हिन्दुस्तान के १५ करोड़ मुसलमानों के लिये तौहीनहै। इस बात की मजम्मत करनी चाहिये…( व्यवधान)   यहां कहा गया कि फातमी साहब कहां से आये…( व्यवधान) 

अध्यक्ष महोदय :  आप एक मिनट बैठिये।

श्री असादूद्दीन ओवेसी : स्पीकर साहब, मैं यील्ड नहीं कर रहा हूं। मुझे मौका दीजिये।

अध्यक्ष महोदय : ठीक है, आप खड़े रहिये।

MR. SPEAKER: I am sure he did not make any personal allegation.

…(Interruptions)

श्री असादूद्दीन ओवेसी : मैं अपनी बात को खत्म करना चाहता हूं।…( व्यवधान) 

MR. SPEAKER: We are trying to regulate this House.

SHRI ASADUDDIN OWAISI : Will it go on record?

MR. SPEAKER: You please keep quiet and sit down.  I am trying to regulate this House with the help of everybody.  There is some procedure that we have to follow. Naturally, we should not make personal allegations.  I shall look into it.  If there is any such allegation, certainly I will consider it.

            You have taken enough time.  Try to finish within two minutes.

श्री असादूद्दीन ओवेसी : स्पीकर साहब, यह बात कही गई। मैं फाजिल रुकन-ए-पार्लीमानी बिहार का नाम नहीं लेना चाहता। कहा गया कि सिवान के शेर भाग गये। अरे, शेर को कैद करने से दीवाना भी नखरे दिखा सकता है। शेर को कैद करके देखो तो आपको मालूम हो जायेगा। यह बात गलत है। मैं यहां यह भी कहना चाहता हूं कि सिवान के रुकन-ए-पार्लीमानी पर मुसलमान होने के नाते जुल्म हुआ है। क्या उन्हें इज्जत नहीं बख्शी जानी चाहिये…( व्यवधान)  

आखिर में, मैं यह कहना चाहता हूं कि हिन्दुस्तान की आजादी के वक्त मुसलमानों ने यह फैसला लिया था क आजादी के बाद वे यहां रहेंगे। हमने कभी मोहम्मद अली जिन्नाह की तारीफ नहीं की, हमने जिन्ना को कभी सैकुलर नहीं कहा, वह इन लोगों ने कहा और ये लोग फातमी साहब से पूछते हैं कि वह कहां से आये? आखिर में, मैं हुकूमत से मतालबा करता हूं कि बिहार में इलैक्शन नवम्बर में कराये जायें क्योंकि अक्तूबर महीने में रमज़ान है जिससे मुसलमान वोट नहीं डाल सकेंगे, कोई मुसलमान इलैक्शन कैम्पेन में नहीं जा पायेगा। मैं वजीरे-दाखिला से मतालबा करता हूं क जो शनाख्ती कार्ड दिये जा रहे हैं, वे हमें भी मिलने चाहिये। उसके बाद ही इलैक्शन होना चाहिये। वजीरे-दाखिला अपने जवाब में बतायें कि बिहार में लॉ एंड ऑर्डर की सिचुएशन क्या है, क्या इम्प्रूव हुई है या नहीं? आपकी मर्जी नहीं चलने वाली है, जिन्नाह को हीरो मानने वाले हमें सबक नहीं सिखा सकते और यह कभी नहीं हो सकता। यह एक अहम बात है कि इलैक्शन नवम्बर में कराये जायें, हम आपके साथ हैं। मैं सिवान के ताल्लुक से मीडिया के प्रोपैगैंडा की मज्जमत करता हूं और हमने यहां हलफ दिया है कि हमें मुकम्मल आजादी मिलनी चाहिये। इंशा अल्लाह तआला, जो ख्यालात और सोच इंडिया की है और वह आगे आ रहा है, उसका असर इलैक्शन के बाद देखेंगे।

MR. SPEAKER: Shri Raghunath Jha. You have only four minutes to speak.

श्री नीतीश कुमार : अध्यक्ष जी, मैं इस बात को सपने में भी नहीं सोच सकता कि टोका-टोकी के दौरान एक-दूसरे की बात को इतनी दूरी तक खींचा जायेगा। न मुसलमान होने के बारे में कोई बात थी और न कोई देश से बाहर रहने वाले हैं। वह दरभंगा के रहने वाले हैं। हम लोग तो एक ही दल में रहे हुये हैं। जब वह दरभंगा लौटकर राजनीति में आये, उस समय हम सब लोग जनता दल में थे[RB80] ।

मेरा कहने का मतलब यह था कि आपको शरद जी ने सहारा दिया, आपने उनको छोड़ दिया और आज आप लालू जी के साथ हैं। इसके अलावा हमारा कोई मतलब नहीं था। लेकिन इसे इस तरह से एक्सटैंड किया जायेगा, मैं समझता हूं कि अगर आप आवश्यक समझें तो मेरे उस कमैन्ट को…( व्यवधान)  प्रोसीडिंग्स से निकाल दें। …( व्यवधान) 

MR. SPEAKER: I have already said that.

… (Interruptions)

MR. SPEAKER:  Sometimes during the heat of the debate, some observations may be misunderstood.  Therefore, let us not go into that.  It will only end in incrimination.  I shall personally look into it. 

            Shri Nitish Kumar, what you have said now is also recorded. It is nearing    8 p.m. Please co-operate. 

            Now, Shri Raghunath Jha.

श्री नीतीश कुमार : यदि आप जरूरत समझें तो मेरे उस रिमार्क को प्रोसीडिंग से निकलवा दें।

अध्यक्ष महोदय : आप बैठिये। Shri Nitish Kumar, your statement is also recorded.  I have no manner of doubt.

श्री रघुनाथ झा (बेतिया) : माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय गृह मंत्री जी बिहार में राष्ट्रपति शासन के विस्तार से संबंधित जो प्रस्ताव सदन में लाये हैं, मैं उसके समर्थन में खड़ा हुआ हूं और माननीय नीतीश कुमार जी बिहार की वधि-व्यवस्था और वहां के मुख्य सचिव के लम्बी छुट्टी पर जाने से संबंधित जो प्रस्ताव लाये हैं, मैं उसके खिलाफ खड़ा हुआ हूं। सर्वप्रथम, माननीय गृह मंत्री जी जो प्रस्ताव लाये हैं, वह हमारी संवैधानिक बाध्यता है, चूंकि जो राष्ट्रपति शासन छ: महीने के लिए बिहार में लागू हुआ था, उसका समय पूरा हो रहा है और चुनाव बरसात के बाद होने जा रहा है। दूसरा कोई विकल्प नहीं है कि उस प्रस्ताव का हम विरोध करें। इसलिए इस संवैधानिक बाध्यता से संबंधित जो प्रस्ताव आया है, उसका समर्थन माननीय सदस्यों को करना चाहिए, हम ऐसी उम्मीद रखते हैं।

माननीय नीतीश कुमार जी बिहार की वधि-व्यवस्था से संबंधित जो प्रस्ताव सदन में लाये हैं, उस पर अगर हम कहें कि बिहार की वधि-व्यवस्था और बिहार में राष्ट्रपति शासन लगवाने के लिए अगर कोई जवाबदेह हैं तो उसमें एन.डी.ए. के लोग हो सकते हैं, माननीय नीतीश कुमार जी हो सकते हैं, श्री सुशील कुमार मोदी हो सकते हैं तथा जो इनके समर्थक हैं, वे हो सकते हैं। यह सर्ववदित हैं कि बिहार में चुनाव के बाद किसी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला और सिंगल लार्जेस्ट पार्टी के रूप में राष्ट्रीय जनता दल को बहुमत मिला था। उसके बाद हम लोगों ने बैठक करके अपने नेता का चुनाव किया था तथा श्रीमती राबड़ी देवी को विधान मंडल दल ने अपना नेता चुना था। हम लोगों ने फैसला किया था कि हम विपक्ष में बैठेंगे। लेकिन बिहार में किसी भी राजनीतिक दल में वह दमखम, वह ताकत नहीं रही कि वह राज्यपाल महोदय के सामने जाकर कहता कि हम बिहार में सरकार बनाने के लायक हैं, हमें बिहार में सरकार बनाने का निमंत्रण दिया जाना चाहिए। लेकिन एक आश्चर्यजनक घटना हुई कि सारे राजनीतिक दलों के नेता एक-एक करके राज्यपाल के यहां गये। राज्यपाल महोदय ने किसी को नहीं बुलाया, ऐसी बात नहीं थी। लेकिन सभी लोगों ने उनसे एक-एक करके यह जरूर कहा कि श्रीमती राबड़ी देवी की सरकार मत बनने दीजिए। वहां जो भी गये, चाहे उनमें श्री नीतीश कुमार जी गये, चाहे श्री सुशील मोदी गये, चाहे निर्दलीय गये और चाहे माले के लोग गये, लेकिन सबने कहा कि राबड़ी देवी की सरकार मत बनने दीजिए और उसके बाद यह परिस्थिति पैदा हुई। इसके बाद हमारे नेता ने फैसला किया कि बिहार में यह संदेश नहीं जाना चाहिए कि हम राष्ट्रपति शासन के पक्षधर हैं। इसलिए राबड़ी देवी की सरकार बनाने के लिए उन्होंने गवर्नर के यहां क्लेम किया। सिंगल लार्जेस्ट पार्टी की हैसियत से राज्यपाल महोदय से हमारा ग्रिवान्स होना चाहिए कि महामहिम राज्यपाल महोदय ने हम लोगों को वहां सरकार बनाने का मौका नहीं दिया, जबकि इस देश में दर्जनों उदाहरण हैं कि सिंगल लार्जेस्ट पार्टी को सरकार बनाने का मौका मिला है। इसी सदन में माननीय अटल बिहारी वाजपेयी जी को मौका मिला है, बिहार में नीतीश कुमार जी को मौका मिला है, झारखंड में श्री शिबू सोरेन जी को मौका मिला है, लेकिन हमारी पार्टी के नेता को सरकार बनाने का मौका नहीं मिला। यही लोग कहते थे कि बिहार में प्रेसीडैन्ट रूल लागू हो और बिहार से कूड़ा-करकट साफ हो। बिहार में प्रेसीडैन्ट रूल की मार्फत सारे लोगों को ठीक किया जाए, लेकिन जब प्रेसीडैन्ट रूल लागू हो गया तो आज इनकी छाती पर सांप लोट रहा है, क्योंकि इनके मनमुताबिक अधिकारियों के ट्रांसफर्स तथा पोस्िंटग नहीं हो रही हैं। यदि वहां इनके मुताबिक अधिकारियों के ट्रांसफर्स और पोस्िंटग हों तो सब ठीक हो रहा है। माननीय प्रभुनाथ सिंह जी यहां बोल रहे lÉä[R81] ।

20.00 [h82]  hrs. इनके बहुत से सांसदों और नेताओं को जिलाबदर किया गया था जिसमें यह भी थे। इसी सदन की प्रोसीडिंग्ज़ में है और आपके कार्यालय में प्रविलेज मोशन लंबित है श्री सी.के.अनि़ल के खिलाफ, जो सीवान के कलैक्टर थे। वहां के एस.पी. जिनके खिलाफ इनको शिकायत थी, लेकिन आज वही सबसे अच्छे हो गए? जिस समय चुनाव हो रहे थे, उस समय उनको बिना राज्य सरकार की कंसलटेशन के वहां पोस्ट किया गया। वे भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े हुए लोग हैं, यह सर्ववदित है। विनय कटियार जी रिलेशन हैं, जिनको वहां पर पद स्थापित किया गया और जान-बूझकर हमारे दल के सम्मानित सांसद शहाबुद्दीन को परेशान करने के लिए षडयंत्र रचा गया। प्रभुनाथ जी से मैं कहना चाहता हूं कि वे याद करें उस बात को जब यहां उनके ऊपर पड़ी थी तो आप इस फरियाद को लेकर चल रहे थे। मैं चुनौती भरे शब्दों में कहना चाहता हूं कि माननीय गृह मंत्री जी बिहार से रिकार्ड मंगावाएं, सिवान में संजय रत्न, एस पी के समय में जितनी घटनाएँ हुई हैं, जितनी हत्याएँ हुई हैं, जितनी किडनैपिंग हुई है, उतनी अगर १५ साल की हुकूमत में हुई हों, तो मैं अपनी सदस्यता से इस्तीफा दे सकता हूं। आप रिकार्ड मंगवाकर उसकी जांच करवाइए।

महोदय, आज बहुत चर्चा हो रही है कंग साहब की। अगर कंग साहब बहुत अच्छे होते तो पहले ही मुख्य सचिव बन जाते। लालू जी बिहार में एक एक अधिकारी को पहचानते थे। गवर्नर साहब ने उनको बना दिया कि अफसर छुट्टी पर चला गया है। उसको जल्दी से जल्द हटाइए और उसके स्थान पर नया मुख्य सचिव, जो योग्यता रखने वाला हो, उसे बिहार में रखने का काम कीजिए। मैं आपसे इतना ही निवेदन करना चाहता हूं कि सीवान में जिस तरह से हमारी पार्टी के कार्यकर्ताओं की हत्याएँ हुई हैं, जिस तरह से झूठे मुकदमों में उनको फँसाया गया है, जिस तरह से लोगों को तंग और तबाह किया गया है, इन सबकी जांच संसदीय समति से होनी चाहिए और उस पर कार्रवाई होनी चाहिए। ऐसे हालात में राष्ट्रपति शासन के विस्तार के अलावा दूसरा कोई विकल्प नहीं है।

अध्यक्ष महोदय, हम छ: वर्षों से इस लोक सभा के सदस्य हैं। हर साल इस मानसून सत्र में हम बिहार की बाढ़ पर चर्चा करते थे। यह पहला अवसर है जब ऐसा नहीं हुआ। क्या करें, प्रकृति की लीला है कि आज महाराष्ट्र में, गुजरात में, आंध्रा प्रदेश में हाहाकार मचा हुआ है और हम लोगों के खेतों में सूखा पड़ रहा है, हमारे यहां सुखाड़ हो गया है। लेकिन इऩ सारी परिस्थितियों में वह कौन सी परिस्थिति थी जो हम चुनाव चाहते थे। चुनाव हो जाएं, चुनावों से कौन भाग रहा है? आज क्या कोई परेशानी में है? आज लोग घूम-घूमकर रेलों से लालू यादव की मीटिंग में जाते हैं, २५-५० हजार लोग जमा होते हैं तो लोगों को तकलीफ होती है। लोग न्याय रथ निकालते हैं तो उसमें २००० लोग ही जुट पाते हैं। लालू यादव को सुनने के लिए लोग आते हैं तो क्या वे उनसे बात नहीं करें, चुपचाप चले जाएं? मैं सदन के सभी सदस्यों से आग्रह करता हूं कि सीवान की सभी घटनाओं की जांच करने के लिए एक संसदीय समति नियुक्त की जाए जो सारी बातों की जांच करे और तब तक सारी कार्रवाई को रोककर रखा जाए। यही निवेदन करते हुए हम बिहार में राष्ट्रपति शासन के विस्तार का समर्थन करते हैं और माननीय नीतीश जी के प्रस्ताव का विरोध करते हैं।

MR. SPEAKER: Now, Mr. Suraj Singh will speak. He is the last speaker.

… (Interruptions)

MR. SPEAKER: At least, he has identified himself.

श्री सूरज सिंह (बलिया, बिहार) : अध्यक्ष महोदय, बिहार के मुख्य सचिव के छुट्टी पर चले जाने और बिहार की विधान सभा भंग करने के संबंध में नीतीश जी ने जो प्रस्ताव रखा है, मैं उसका विरोध करता हूं। बिहार में कैसे दोबारा इलैक्शन (चुनाव) होने की नौबत आई है, इसे पूरे देश की जनता देख रही थी। हमने दूसरे दिन टीवी पर देखा और सभी माननीय सदस्यों ने टीवी पर देखा कि कौन ऐसा आदमी है जो स्वयं मुख्य मंत्री बनने के लिए खरीद-फरोख्त करवा रहा cè[h83]  -

वह भी अपने राज्य में नहीं, दूसरे राज्यों और जंगलों वाले इलाके में यह काम खुले आम किया जा रहा है। अगर तभी यह पुख्ता हो जाता, तो उसी समय कार्यवाही की जा सकती थी। झारखंड में तीन दिन कागज/विधायक रखने के बाद चौथे दिन राज्यपाल के पास सरकार बनाने संबंधी बातें की जाती हैं । जहां तक खरीद-फरोख्त की बात है, तो मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि २१ और २२ तारीख को होटल जनपथ में छह बजे से दस बजे रात तक बिहार और झारखंड से जो फोन कॉल आए, उनकी जांच होनी चाहिए ताकि पता चल सके कि कौन इसके पीछे हैं । मैं वहीं पर था। आप इस चीज को देख रहे होंगे और राज्यपाल महोदय को पहले ही इसकी रिपोर्ट पेश कर दी गई थी कि बिहार में विधायकों की खरीद-फरोख्त होने वाली है, लोकतंत्र का हनन होने वाला है अत: इस पर सीबीआई की जांच बैठा दी जानी चाहिए। विधायकों की खरीद-फरोख्त हो रही थी, उन्हें मंत्री पद का लोभ दिया जा रहा था कि नहीं । लोक जनशक्ति पार्टी ने जब-जब भी एक पैसा इधर-उधर हुआ, तो पार्टी अध्यक्ष श्री राम विलास पासवान जी ने महामहिम राज्यपाल जी के पास, श्रीमती सोनिया गांधी जी के पास, प्रधान मंत्री जी के पास, राष्ट्रपति जी के पास रिपोर्ट भेजी कि इस तरह का वातावरण उत्पन्न हो रहा है। हमारे माननीय सांसद प्रभुनाथ जी ने कहा कि लालू जी कह रहे हैं कि संख्या किस तरह से पूरी की जाए। मुझे इस चीज का अफसोस है कि दोनों को डर लग गया कि लोक जनशक्ति पार्टी बीच में कहां से आ गई और इसे किस प्रकार खत्म कर दिया जाए ताकि दोनों मिल-जुलकर शासन कर सकें । यहां के एक माननीय सांसद ने यह सारा काम किया, क्योंकि एनडीए का सारा वोट लोक जनशक्ति पार्टी की तरफ जा रहा था। इसलिए खरीद-फरोख्त हुई और बिहार में जो दोबारा चुनाव होने वाला है इसकी पूरी जबावदेही हमारे जार्ज साहब, जो एनडीए के संयोजक हैं, उनकी है। बिहार में दोबारा चुनाव होने वाले हैं, यह गलत काम होने जा रहा है। मैं चाहता हूं कि लोकतंत्र की हत्या न की जाए। इसके लिए सरकार आवश्यक उपाय करे ताकि इस तरह की घटना का नुकसान राज्य की गरीब जनता को न झेलना पड़े । इन्हीं शब्दों के साथ मैं अपनी बात समाप्त करता हूं।

मोहम्मद सलीम (कलकत्ता-उत्तर पूर्व) : अध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्य के भाषण में कई सांसदों के नाम आए हैं। करोड़ों रुपयों का लेन-देन हुआ है। एक जांच समति बना कर उसकी जांच की जानी चाहिए।

MR. SPEAKER: Let us wait for his reply. Only hon. Minister’s statement will be recorded. Nothing else will be recorded.

(Interruptions) …*  MR. SPEAKER: Let us hear what he says; thereafter we shall decide. Let us listen to the Minister.

… (Interruptions)

श्री लालू प्रसाद : माननीय सदस्य जो कुछ कह रहे हैं, आप सदन की एक कमेटी बनाइए और उसकी जांच होनी चाहिए।

MR. SPEAKER: Except hon. Minister, nothing else will be recorded.

(Interruptions) …* श्री प्रभुनाथ सिंह : महोदय, मेरा नाम बार-बार लिया गया है।

अध्यक्ष महोदय : आपका दो बार नाम लिया है, लेकिन आपके खिलाफ नाम नहीं लिया है। नाम लेना गलत बात नहीं है। उन्होंने आपकी प्रशंसा की है। आप बैठ जाइए।

...( व्यवधान)

MR. SPEAKER: Nothing will be recorded except hon. Minister.

(Interruptions) … *                   * Not Recorded.

THE MINISTER OF HOME AFFAIRS (SHRI SHIVRAJ V. PATIL): Sir, the discussion has been very interesting and comprehensive. We appreciate the contributions made by all the Members. There are certain facts which we have to bear in mind while appreciating the issues which are before us. One of the most important facts is that after the election, it was only the RJD which staked the claim, and none else staked the claim[t84] .

            The [e85] second fact, which has to be remembered, is that the NDA did not stake the claim. The third fact, which we have to bear in mind is, for some months, the Governor waited for the parties to come together and stake the claim. When it was not done, we had to come before the two Houses of Parliament to pass a Resolution suspending the Assembly. The fourth fact, which we have to remember, is that under the Resolution passed by us in Parliament, the last date the suspension would remain in existence is the 6th of September. After the 6th of September, we shall have to decide what we should do with the situation in Bihar.

            We have dissolved the House and the matter was considered by the Election Commission. The Election Commission came to the conclusion that the elections could not take place in the months of June, July, August, and September. The Election Commission said that the elections could take place in the months of October or November. Now, that is the decision taken by the Election Commission. After the House is dissolved, we have to remember, the Executive has no power. It is the Election Commission which has to decide what to do with the situation over there and when to hold the elections. The Election Commission can fix the dates, not the Executive. The Union Government is not in a position to fix the dates. It is left to the Election Commission to fix the dates. That is why, when the Election Commission issued a Press Note and sent the Press Note to the Government of India stating that elections would not be organised in the months of May, June, July, August and September, we had to decide what to do with the situation over there after the 6th of September; and it was necessary that the President’s Rule should be extended because the elections could take place only in the months of October and November.

            There is one more aspect which we have to bear in mind. While considering the motion which has been moved by Shri Nitish Kumar on the law and order situation in Bihar and the Chief Secretary’s going on leave after something had happened, we shall have to bear in mind that in Bihar the people are the same, that the administration has been the same and only that the Governor has gone there from outside. The situation is the same and we should not expect miracles to happen over there. That is one fact which we have to bear in mind.

            I am going to give the facts and figures on the law and order situation in Bihar. Shri Nitish Kumar has said to me: “Do not give us facts and figures. You believe in what I am telling you. You believe in the stories.” He has referred to stories regarding the incidents that have taken place here and there and then formed the opinion about the law and order situation in Bihar. He has said: “We are not going to rely on the statistics you would be giving.” I am not going to burden hon. Members with the kind of statistics I had given in the Rajya Sabha. There, I have given the statistics a little more extensively. I am not going to do the same thing here but some statistics are required to come to the conclusion whether the law and order situation in Bihar has improved or it is the same or it has worsened[e86] .

            We do need statistics. If we do not rely on statistics, what do we rely upon? Do we rely upon stories, do we rely upon emotions or do we rely upon political inclination or what? In order to come to correct conclusion as to what is the situation in Bihar, we shall have to take into account what has been done by the Administration over there in the period in which they were administering there. … (Interruptions)

प्रो. विजय कुमार मल्होत्रा : लालू जी से कितना बेहतर हुआ, आप यही दिखाएंगे न?

SHRI SHIVRAJ V. PATIL : This is what you want and this is what we are not going to give you – neither Laluji nor I.             The fourth thing which we have to bear in mind is what should be the relation between the permanent administration and the political administration. There were two hon. Members who spoke on this issue. I think Shri Prasanna Acharya and Shri Asaduddin Owaisi spoke on this issue and very candidly and very correctly. They said – what should be the relation between the permanent administration and the political administration; what should be the relation between the administration which comes into existence after the election and the administration which comes into existence as per constitutional provisions, that is the Governor over there. Whose word is the last word? Who has to take the political decision? Who has to take the administrative decision? Then, we have to decide whether what was done by the officer over there was correct or it was wrong. We shall have to decide that. We shall have to decide what was done by the Governor or the Adviser or other Secretary was correct or wrong.

I am very happy that two hon. Members made this point very clear and probably they got the applause of the House when they made this point. These are the points which we have to bear in mind while assessing the situation over there and come to the correct conclusions.

One of the questions which was asked was why was not the Government allowed to be formed and it is a very legitimate question. This question was asked when we discussed the suspension of the Bihar House also. When this matter came up, they said – what are you going to do in future; and naturally for anybody who believes in democratic system, the answer was that the Parties and the Members should come together and form the Government. Now, that is exactly what we allowed to happen. But it did not happen.

Sir, the Government which was in existence before the election, staked the claim. The Governor said – ‘I do not think that you would be able to continue as a Government and that is why I am not inviting you to form the Government’. It was the Party which is working with us in the Central Government and yet this bitter decision was to be taken and this bitter decision was taken on the basis of the assessment of the situation by the Governor in Bihar. Now, he came to the conclusion, with the Members who were with them, with the situation which was prevailing over then and with the different Parties going to the Governor and saying that ‘whatever may happen, do not allow this thing to happen’. So, he said – ‘I think you will be able to form the Government, but probably you will have difficulties’ and the hon. former Chief Minister was not allowed to take oath as the Chief Minister of that State.

Now, this should not be forgotten. This has to be remembered by us. Then, what happened? Then he met them. They are saying what did you do. The Governor had given the dates on which he met the leaders of different Parties, leaders of the Congress, BJP, RJD and other Parties also and leaders who were leading the NDA over there. He met them. He discussed with them for hours together as to what should be done over there and he waited and waited and waited. But nothing could happen. Nobody came forth saying that ‘I would form the Government, you allow me to form the Government.’[krr87]              Probably, those who took the decision not to stake the claim were also not wrong. I should appreciate their judgement and their assessment. They were also of the same view that it will be difficult for them to form and continue in the Government for a long time and that is why, they were waiting, they were restrained and they were not jumping at this opportunity to form the Government, but they were waiting and waiting and trying to see what happens. Later on, the things happened here in the country at different places and then some movement was started. What was the kind of movement that started? The movement started was that the leaders of political parties were talking to individual members to wean them away from the parties on the tickets of which they had themselves got elected. Now, is anybody having any doubt in his mind that that was happening at that time? Now, if the members were going from Patna to the Capital of other State and hiding themselves in the hotels and if the leaders of the political parties in order to keep their party intact had to send a special aircraft to bring their members from Patna to Delhi to see that they were also not pressurised to leave their party and join other party - this was seen by us with open eyes - what kind of intelligence we require as to why this was happening? If this was happening and if the entire country was watching it, you and I were watching it, and if the Governor was also watching it, then, the Governor had come to the conclusion that this was happening and this should not be allowed.  That is why, the Governor was very clear and said 'form the Government, but I will not allow horse-trading'. He was very clear.

            The question before us today is whether we should allow a Government to be formed or whether we should allow the horse-trading to take place. Democratically, Government should be formed, but as per the rules. … (Interruptions)

MR. SPEAKER: Nothing will be recorded. Do not record it.

(Interruptions) …* MR. SPEAKER: Please be quiet.

… (Interruptions)

MR. SPEAKER: Nothing will be recorded. Do not consider it now.

… (Interruptions)

MR. SPEAKER: We need not follow others' examples.

… (Interruptions)

SHRI SHIVRAJ V. PATIL: So, the Governor waited and waited and then, he issued a statement. He was warning the members that do not leave the party, do not fall a prey to the allurements and that they will be the victim. Now, he was telling them that do not do this. So, Sir, when he found that instead of two parties coming together and forming a Government, only a few members were tried to be separated from their original party and it was being tried to collect the number which is required to form the Government, the Governor was right in writing to * Not Recorded.

the Government of India that the situation is going in the wrong direction and that is why, the House should be dissolved or the House should be suspended.

May I tell you one more thing now? He had written not one but two letters. When he wrote the first letter and when it was received by the Government of India, we had not taken action on that. We said 'let us wait for some more time'. We did wait for some more time. When we found that that time given was not utilised properly to talk to the leaders and join the parties, but to wean away the members by allurement or pressure, we came to the conclusion that the Governor was probably correct, and yet we waited for some time. I was asked in the other House " Why did you wait for so much time? We waited because we thought that some parties will come together and form the Government, and we would have certainly allowed that thing to happen. I had said it on the floor of the House here and there also and outside also that after the election, the right thing to happen is to allow a Government to be formed. You know yourselves that we have allowed the Government to be formed in the adjoining State itself, in Jharkhand itself[reporter88] .

How can you forget the situation in which the Government was formed there? … (Interruptions) All of you are aware about it. Therefore, you should not doubt the intentions of the Government of India or the Governor. … (Interruptions)

श्री सुशील कुमार मोदी : क्या आपके पास किसी ने कोई कम्प्लेंट की है?…( व्यवधान) 

अध्यक्ष महोदय :  आप बैठ जाइए।

...( व्यवधान)

MR. SPEAKER: It is not to be recorded.

(Interruptions) … * * Not Recorded.

MR. SPEAKER: The hon. Minister has not conceded. Yes, Mr. Minister, please continue with your reply.

… (Interruptions)

अध्यक्ष महोदय : कन्सीड करने से देंगे, कन्सीड नहीं करने से नहीं देंगे। यही परम्परा है, आप जानते हैं।

...( व्यवधान)

MR. SPEAKER: Now, he will reply. He has an opportunity to reply. Therefore, tell him all that he has to say at that time.

… (Interruptions)

MR. SPEAKER: No, I will not allow it. He has not conceded.

… (Interruptions)

MR. SPEAKER: Mr. Minister, are you yielding?

SHRI SHIVRAJ V. PATIL: Sir, I am not conceding.… (Interruptions)

MR. SPEAKER: Please continue giving your reply.

… (Interruptions)

SHRI SHIVRAJ V. PATIL: Sir, I will reply to his question. He has put a question to me. He should be satisfied with my reply, and sit down. … (Interruptions) The question asked to me was this. … (Interruptions)

MR. SPEAKER: Please do not disturb the hon. Minister when he is replying.

… (Interruptions)

MR. SPEAKER: Please give-up this bad habit of interrupting.

SHRI SHIVRAJ V. PATIL: The question asked to me was this. Was there any complaint made on this issue? It is a very good question. I have the applications given to the Governor complaining against horse-trading. … (Interruptions)

श्री सुशील कुमार मोदी : आप पढ़कर सुनाइए कि किसने कम्प्लेंट दी है।…( व्यवधान) 

श्री प्रभुनाथ सिंह : यह किसकी शिकायत है, पढ़कर सुनाइए।…( व्यवधान)

SHRI SHIVRAJ V. PATIL: I have the applications with me and I can produce these letters here. … (Interruptions) I have these letters with me as the copies of these letters were sent to me also. … (Interruptions) I am not making any reference to it. … (Interruptions)

MR. SPEAKER: Okay, you carry on in your own way.

… (Interruptions)

MR. SPEAKER: He has not mentioned it. He has made no reference to it.

… (Interruptions)

MR. SPEAKER: He has not read out from the letter, and you know it very well.

… (Interruptions)

MR. SPEAKER: No, this is not allowed. Mr. Minister, please carry on with your answer.

… (Interruptions)

MR. SPEAKER: He has not read out from the letter.

… (Interruptions)

MR. SPEAKER: No, sorry. It is not allowed, and you know it very well.

… (Interruptions)

MR. SPEAKER: This is not allowed, and you all know it very well.

… (Interruptions)

PROF. VIJAY KUMAR MALHOTRA : Sir, we have a right to know about it. He has to lay it on the Table of the House because he has shown it here. … (Interruptions)

MR. SPEAKER: No, it does not come under the rules.

… (Interruptions)

PROF. VIJAY KUMAR MALHOTRA : Sir, he has shown the letters. Therefore, he must place it on the Table of the House. … (Interruptions)

MR. SPEAKER: He has not read out from the letter. No, it is not allowed.

… (Interruptions)

   

PROF. VIJAY KUMAR MALHOTRA : Sir, it does not mean that he cannot lay it on the Table of the House. … (Interruptions)

MR. SPEAKER: If he had read from the letter, then I would have said something on this issue.

… (Interruptions)

प्रो. विजय कुमार मल्होत्रा : अध्यक्ष महोदय, इसे या विदड्रा करें या टेबल पर रखें।…( व्यवधान)  अध्यक्ष महोदय,  हम आपका प्रोटैक्शन चाहते हैं।…( व्यवधान)  We need your protection in this matter. … (Interruptions)

MR. SPEAKER: Please sit down. You are a very senior politician.

… (Interruptions)

MR. SPEAKER: You have been a Member of the other House, and you have also been here for such a long time.

… (Interruptions)

MR. SPEAKER: I do not understand it. Every time you have a tendency to get up, and do not bother for the rules and procedures.

… (Interruptions)

PROF. VIJAY KUMAR MALHOTRA : Sir, he should lay it on the Table of the House. … (Interruptions)

MR. SPEAKER: He is not obliged to do it. You cannot force him to do it.

… (Interruptions)

PROF. VIJAY KUMAR MALHOTRA : Why is he not doing it? He has said that he has got the letters mentioning about the complaints with him. … (Interruptions)

SHRI UDAY SINGH : Sir, he will mention the letter, but will not read out from the letter! … (Interruptions)

PROF. VIJAY KUMAR MALHOTRA : Sir, he has made a reference to the letters. Therefore, he must show it to all of us. … (Interruptions)

MR. SPEAKER: You are all very senior Members here and you all know about the rules regarding this issue.

… (Interruptions)

MR. SPEAKER: What are you doing?

… (Interruptions)

MR. SPEAKER: The rule states that :

“If a Minister quotes in the House a despatch or other State paper which has not been presented to the House, he shall lay the relevant paper on the Table:… ” … (Interruptions)
MR. SPEAKER: Please listen to me.
… (Interruptions)
SHRI ANANTH KUMAR (BANGALORE SOUTH): Sir, he should lay it on the Table of the House. … (Interruptions)
MR. SPEAKER: Has he got to lay it even if he does not read from it?
… (Interruptions)
PROF. VIJAY KUMAR MALHOTRA ): He has already shown it in the House, and we have all seen it. … (Interruptions)
श्री सुशील कुमार मोदी :  यह बताइए कि लैटर किसने लिखा है।…( व्यवधान)
MR. SPEAKER: Okay, I will give my ruling on this issue. Rule 368 of the Rules of Procedure and Conduct of Business in Lok Sabha provides that :
“Provided that this rules shall not apply to any documents which are stated by the Minister to be of such a nature that their production would be inconsistent with public interest:”   … (Interruptions)
MR. SPEAKER: Please listen to the Chair.
… (Interruptions)
PROF. VIJAY KUMAR MALHOTRA : Sir, let him say so. … (Interruptions)
MR. SPEAKER: Do you want to do a bonfire of this rulebook?
… (Interruptions)
MR. SPEAKER: The rule further provides that … … (Interruptions)
अध्यक्ष महोदय : आप सुनिए। कोई डिस्पिलिन होना चाहिए।
...( व्यवधान)
MR. SPEAKER: The rule further provides that :
“Provided further that where a Minister gives in his own words… ”   … (Interruptions)
MR. SPEAKER: Please listen to the Chair.
… (Interruptions)
MR. SPEAKER: This is very strange. You all should learn from the Leader of the Opposition. He never interrupts.
… (Interruptions)
MD. SALIM : Sir, they refuse to learn from Mr. Advani[ak89] .
PROF. VIJAY KUMAR MALHOTRA  : It has never happened in the history of Parliament. He has shown the letters.
MR. SPEAKER: Let me read out the proviso. It says:
“Provided further that where a Minister gives in his own words a summary or gist of such despatch or State paper it shall not be necessary to lay the relevant papers on the Table.”   Therefore, your point is rejected. Please sit down.
PROF. VIJAY KUMAR MALHOTRA : In that case he should withdraw it. He should say that he did not receive it.
श्री प्रभुनाथ सिंह : आप यह बताइये कि वह कम्पलेंट किसकी है ? आप उस कम्पलेंट को पढ़कर बताइये। …( व्यवधान) 
MR. SPEAKER: Shri Prabhunath Singh, you are not speaking from your seat.
प्रो. विजय कुमार मल्होत्रा : अध्यक्ष महोदय, इससे ज्यादा गलतबयानी और क्या हो सकती है ? …( व्यवधान) आपने जो पढ़ा है, वह बताइये। …( व्यवधान)  What is the objection in laying it on the Table?
SHRI SHIVRAJ V. PATIL: I will explain that.
MR. SPEAKER: That is a different matter. If the Minister wants to do that, I have no objection. However, under the Rules, you cannot compel him.
… (Interruptions)
श्री प्रभुनाथ सिंह : अध्यक्ष महोदय, वह कम्पलेंट किसकी है ? …( व्यवधान) 
श्री लालू प्रसाद :सारी दुनिया ने टी.वी. पर देखा कि क्या कम्पलेंट है ? …( व्यवधान) 
श्री प्रभुनाथ सिंह : क्या कम्पलेंट है, वह बताइये। केवल कागज दिखाकर ऐसे ही मत कह दीजिए। …( व्यवधान) 
MR. SPEAKER: Shri Prabhunath Singh, please do not get up when you are not speaking from your seat.
श्री प्रभुनाथ सिंह : अध्यक्ष महोदय, मैं फ्री सीट पर बैठा हूं। …( व्यवधान) आप इसी सीट पर बैठते थे। …( व्यवधान) 
SHRI SHIVRAJ V. PATIL: Sir, I know the hon. Members sitting on the Opposition benches understand everything. … (Interruptions) I have no doubt about their capacity to understand things. What is the problem with them today? I have myself not referred to it. … (Interruptions) When I was asked as to whether there was anything, I said I have letters. I have not read out anything from the letters. I have not quoted from the letters. … (Interruptions)
PROF. VIJAY KUMAR MALHOTRA : When he says he has letters, he must show them. … (Interruptions) Otherwise, how can anybody believe that he has letters?
MR. SPEAKER: Do not believe him. 
PROF. VIJAY KUMAR MALHOTRA : This is unprecedented. … (Interruptions)
MR. SPEAKER: You cannot question my ruling. I have given my ruling based on the Rule which I have read out.
PROF. VIJAY KUMAR MALHOTRA : He is making a mockery of the House. … (Interruptions)
SHRI SHIVRAJ V. PATIL: Now, when the reason does not help them, they will start abusing! ‘Mockery of the House’, ‘You do not understand anything’, what is this?
MR. SPEAKER: Hon. Minister, come to your next point.
PROF. VIJAY KUMAR MALHOTRA : If he does not show the letters, it means that he is not telling the truth. Where are the letters?… (Interruptions)
MR. SPEAKER: You are challenging my ruling.
PROF. VIJAY KUMAR MALHOTRA : Where is the letter? … (Interruptions)
MR. SPEAKER: Nobody knows what letter is it; nobody knows who is the author; and nobody knows the date of it. How can you say what you are saying?
PROF. VIJAY KUMAR MALHOTRA : How does one come to know whether it is a fake letter or an authentic letter? … (Interruptions)
SHRI SHIVRAJ V. PATIL: You can rest assured that it is not a fake. … (Interruptions) When you do not understand the reason, you should use logic. You should not use abusive language.… (Interruptions)
MR. SPEAKER: It is very unfortunate. I can only say that it is entirely for the hon. Minister to decide. I cannot compel him nor you can compel him. You can request him and it is entirely for him.
PROF. VIJAY KUMAR MALHOTRA ): If he cannot table the letter, he must withdraw his statement. … (Interruptions)
MR. SPEAKER: Mr. Minister, you come to your next point.
श्री प्रभुनाथ सिंह : आप उस कम्पलेंट को सदन के पटल पर रखिये या अपना स्टेटमैंट वापिस लीजिए। …( व्यवधान) 
MR. SPEAKER: Nothing further will be recorded except the hon. Minister. Please cooperate.
(Interruptions) … * * Not Recorded.
SHRI KHARABELA SWAIN : Sir, I am on a point of order.
MR. SPEAKER: You indicate the Rule along with your point. Which Rule?
SHRI KHARABELA SWAIN : Rule 368. It says:
“If a Minister quotes in the House a despatch or other State paper which has not been presented to the House, he shall lay the relevant paper on the Table:
 
            Provided that this rule shall not apply to any documents which are stated by the Minister to be of such a nature that their production would be inconsistent with public interest;”   Does he say that it is inconsistent with the public interest? … (Interruptions)
MR. SPEAKER: Just a minute. I can deal with it. I do not need your help. Have I asked for your help?
SHRI KHARABELA SWAIN : Is the hon. Minister saying that laying of these papers on the Table of the House would be inconsistent with the public interest? That is the point I want to make[KMR90] .
MR. SPEAKER: Shri Swain, is this your point?  Not only it is out of order but it is an affront to the Chair because on this I have already given a ruling on this rule itself.  You have deliberately insulted the Chair.
… (Interruptions)
PROF. VIJAY KUMAR MALHOTRA :  How can the Minister say that he will not place it? … (Interruptions)
SHRI BASU DEB ACHARIA :  How can you challenge the Chair? … (Interruptions)
MR. SPEAKER: Shri Athawale, you sit down.  You are inviting trouble for yourself.
… (Interruptions)
MR. SPEAKER: I havegiven my ruling. You may not like it.  But you have to accept it.
… (Interruptions)
MR. SPEAKER: I am requesting you that there will be another opportunity for the hon. Mover of the motion, Shri Nitish Kumar.  He is a very competent Member.
… (Interruptions)
MR. SPEAKER: Are you denying that? No! Shri Nitish Kumar will be able to deal with the point.
… (Interruptions)
MR. SPEAKER:  But I have given the ruling.  I am requesting the hon. Minister to continue his reply.  
… (Interruptions)
MR. SPEAKER: Otherwise, I will be forced to put the motion to vote.  Hon. Minister, please continue.
… (Interruptions)
MR. SPEAKER: Hon. Members, I will call him.
… (Interruptions)
MR. SPEAKER: Let us hear the hon. Leader of the Opposition.
… (Interruptions)
श्री लाल कृष्ण आडवाणी (गांधीनगर) : अध्यक्ष महोदय, जहां तक डिमाण्ड का सवाल है, आपसे निवेदन करने का सवाल है और प्वाइंट ऑफ ऑर्डर का सवाल है, आपने जो नियम बताया, वह सही है। मैं जानकारी रखता था लेकिन मैं जानता हूं और मैं आपके माध्यम से माननीय गृह मंत्री जी को सलाह देना चाहूंगा कि आपने एक प्रश्न का उत्तर देते हुए कहा कि पत्र है और आपने ऐसा करके दिखाया। आपने उसे कोट नहीं किया, आपने उसका सार भी नहीं बताया, लेकिन कुल मिलाकर यहां से जो संदेह प्रकट किया कि किसी ने आपत्ति नहीं की कि हॉर्स ट्रेडिंग हो रही है। आपने कह दिया कि हॉर्स ट्रेडिंग हो रही है, या गवर्नर ने कैसे कह दिया, उसका आपने उत्तर दिया। इसलिए मैं आपको सलाह दूंगा कि इसमें क्या आपत्ति हो सकती है कि आप बता दें। इसमें कोई आपत्ति नहीं हो सकती है। चूंकि सब लोगों की राय है कि आपको बताना चाहिए तो आपको बताना चाहिए।…( व्यवधान) 
श्री शिवराज वि. पाटील : आपकी सलाह बिल्कुल दुरुस्त है लेकिन यह पत्र मुझे लिखा हुआ नहीं है, यह पत्र गवर्नर को लिखा हुआ है और मुझे पूरी जानकारी लिये बगैर, उसे ऑथेंटिक किये बगैर,…( व्यवधान) 
प्रो. विजय कुमार मल्होत्रा : फिर आपको यहां बताना नहीं चाहिए था।…( व्यवधान) 
MR. SPEAKER: Then, I will take it . 
… (Interruptions)
MR. SPEAKER: You really want this debate to conclude in a manner which will give some justice to this House and to the subject.  You have raised a very important subject.  From the very first day, I have been saying that it is an important matter to be fully discussed[R91] .
As a matter of fact, ordinarily Motion under Rule 184 is not allowed. I have allowed it.
… (Interruptions)
PROF. VIJAY KUMAR MALHOTRA : Thank you for that.
अध्यक्ष महोदय :  इसमें थैंक्स की क्या जरूरत है। मैं थैंक्स नहीं चाहता हूँ। मैं क्या चाहता हूँ, वह मैंने सुबह भी बताया था। Let us have a structured discussion. Last week, we had a very structured discussion. Therefore, if you interrupt each other in this fashion… … (Interruptions)
MR. SPEAKER: I am requesting you.  You have a point, a very serious point, even the hon. Leader of the Opposition has intervened, and he has been very kind. He has clearly stated that it is not a question of violation of rule. But, he might decide to do that in the circumstances. In the circumstances, he should do that. Therefore, I am requesting, let Shri Nitish Kumar, when he gives a reply, give a fitting reply to that.
… (Interruptions)
MR. SPEAKER: If you repeatedly say that unless the letter is given, you will not allow this House to continue, then I will have to put the question to the vote of the House. If you do not want a full discussion, I will put the question to the vote.
श्री शिवराज वि. पाटील : आडवाणी जी, आपने मुझे जो राय दी, मैंने मान लिया, अब अपने लोगों को राय दीजिए। …( व्यवधान) 
MR. SPEAKER: Let the debate be over. I am appealing to the hon. Leader of the Opposition. Let the debate be over. You have made your submission.
श्री लाल कृष्ण आडवाणी : अध्यक्ष जी, कई बार ऐसा होता है कि नियम न होते हुए भी विपक्ष की या सदन की इच्छा का आदर करते हुए सरकार उत्तर देती है। इसीलिए मैंने कहा कि सब लोगों की इच्छा है कि आप बताइए कि उस पत्र में क्या है? …( व्यवधान)
श्री शिवराज वि. पाटील : यह पत्र गवर्नर को लिखा गया है। इसे मैं कैसे वेरीफाई कर सकता हूँ। …( व्यवधान) 
श्री लाल कृष्ण आडवाणी :   आपने उसका जिक्र सदन में किया है, अगर वह अनवेरिफाइड था तो उसका जिक्र ही नहीं करना चाहिए था।…( व्यवधान) 
MR. SPEAKER: You will appreciate that I cannot compel him. You appreciate that.
SHRI L.K. ADVANI : Let the matter be put to vote. It is all right.
MR. SPEAKER: Do you want that there should be no further discussion? You do not want any further discussion. Shall I put the Motion to the vote?
… (Interruptions)
MR. SPEAKER: As the hon. Leader of the Opposition has said, let it be put to vote, I am prepared to do that.
… (Interruptions)
MR. SPEAKER: The question is:
“That this House expresses its deep concern over the deteriorating law and order situation in the State of Bihar under President’s rule and also on the situation arising out of the Chief Secretary of the State proceeding on long leave.”   … (Interruptions)
 
प्रो. राम गोपाल यादव (सम्भल) : अध्यक्ष महोदय, हम समाजवादी पार्टी के लोग माननीय मंत्री जी के जवाब से संतुष्ट नहीं हैं, इसलिए सदन से बहिष्कार करते हैं।
20.43 hrs.               (Prof. Ram Gopal Yadav and some other hon. Members then left the House.)   SHRI KINJARAPU YERRANNAIDU : In protest, we are also walking out.
 
20.44 hrs. (At this stage, Shri Kinjarapu Yerrannaidu  and some other hon. Members left the House)   MR. SPEAKER: Let the Lobbies be cleared --[cmc92]  … (Interruptions)

MR. SPEAKER:  Hon. Members,  the lobbies are cleared now.  Please take your seats.  After all, this is the first division of the 14th Lok Sabha, and many new Members are there.

… (Interruptions)

MR. SPEAKER:  Hon. Members, please take your seats. The lobbies are cleared now[k93] `. 

Now, the Secretary-General will read out the procedure relating to the voting system. As many hon. Members are new, he will try to explain it to them so that they may cast their votes properly.

SECRETARY-GENERAL: Kind attention of the hon. Members is invited to the following points in the operation of the Automatic Vote Recording System:-

Before a division starts, every hon. Member should occupy his or her own seat and operate the system from that seat only.
As may kindly be seen, the “red bulbs above display boards” on either side of hon. Speaker’s Chair are already glowing.  This means the voting system has been activated.  
For voting please press the following two buttons simultaneously immediately after sounding of first gong, that is:
One “red” button in front of the hon. Member on the head phone plate and also any one of the following buttons fixed on the top of desk of seats:
                        Ayes                -                       Green colour   

                        Noes               -                       Red colour                    

                        Abstain           -                       Yellow colour   

It is essential to keep both the buttons pressed till the second gong sound is heard and the red bulbs are “off”.
              The hon. Members may please note that the vote will not be registered if both the buttons are not kept pressed simultaneously till the sounding of the second gong.
Please do not press the amber button (P) during division.
Hon. Members can actually “see” their vote on display boards and on their desk units.
In case vote is not registered, they may call for voting through slips.
 
MR. SPEAKER: Is it clear or you want it to be read out again?
SHRI HARIN PATHAK : Sir, if some Rajya Sabha Members are present, what will happen?…(Interruptions)
   
­­­­­­­­­­­­­­­­­­­­­­­­_ MR. SPEAKER: What are you talking about?  If they vote, you tell me. You are a senior Member by this time.
Now, the question is:
“That this House expresses its deep concern over the deteriorating law and order situation in the State of Bihar under President’s rule and also on the situation arising out of the Chief Secretary of the State proceeding on long leave.”   The Lok Sabha divided:
 
AYES                                      Time : 20.52 hrs.      

    

                

Acharya, Shri   Prasanna         

              

Aditya Nath, Yogi         

              

Adsul, Shri   Anandrao Vithoba         

              

Advani, Shri L.K.         

              

Ahir, Shri Hansraj   G.         

              

Ajgalle, Shri   Guharam         

              

Ananth Kumar, Shri           

              

Argal, Shri Ashok         

              

‘Bachda’, Shri   Bachi Singh Rawat         

              

Bais, Shri Ramesh         

              

Borkataky, Shri   Narayan Chandra         

              

Chandel, Shri   Suresh         

              

Choudhary, Shri   Nikhil Kumar         

              

Chouhan, Shri   Shivraj Singh         

              

Chowdhary, Shri   Pankaj        

              

Dangawas, Shri   Bhanwar Singh         

              

Deo, Shri Bikram   Keshari         

              

Dhotre, Shri   Sanjay         

              

Diler, Shri Kishan   Lal         

              

Fernandes, Shri   George          

              

Gadhavi, Shri P.S.           

              

Gandhi, Shri   Pradeep         

              

Gangwar, Shri   Santosh         

              

Gao, Shri Tapir        

              

Gawali, Shrimati   Bhavana Pundlikrao         

              

Gehlot, Shri   Thawar Chand        

              

Gudhe, Shri Anant        

              

Joshi, Shri   Pralhad        

              

Kanodia, Shri   Mahesh         

              

Kaswan, Shri Ram   Singh        

              

Kathiria, Dr.   Vallabhbhai         

              

Khaire, Shri   Chandrakant         

              

Khanduri, Maj.   Gen. (Retd.) B. C.         

              

Khanna, Shri   Avinash Rai         

              

Khanna, Shri Vinod           

              

      Koli, Shri Ramswaroop         

              

Kulaste, Shri   Faggan Singh         

              

Kunnur, Shri   Manjunath         

              

Kusmaria, Dr.   Ramkrishna         

              

‘Lalan’, Shri   Rajiv Ranjan Singh          

              

Laxman,   Shrimati  Susheela Bangaru                 

Mahajan, Shri Y.G.           

              

Mahajan, Shrimati   Sumitra         

              

Maharia, Shri   Subhash          

              

Mahtab, Shri B         

              

Majhi, Shri   Parsuram         

              

Malhotra, Prof.   Vijay Kumar                 

Mallikarjuniah,   Shri S.         

              

Meghwal, Shri   Kailash         

              

Modi, Shri   Sushil  Kumar          

              

Moghe, Shri   Krishna Murari         

              

Mohale, Shri Punnu   Lal         

              

Nayak, Shri Ananta           

              

Nitish Kumar, Shri        

              

Oram, Shri Jual         

              

Pandey, Dr.   Laxminarayan                

Parste, Shri   Dalpat Singh         

              

Paswan, Shri   Sukdeo         

              

Patasani, Dr.   Prasanna Kumar         

              

Patel, Shri   Harilal Madhavji Bhai         

              

Patil, Shri   Annasaheb M.K.         

              

Patil, Shri D.B.        

              

Patil, Shrimati   Rupatai D.         

              

Patle, Shri   Shishupal N.         

              

Potai, Shri Sohan         

              

Prabhu, Shri   Suresh Prabhakar         

              

Pradhan, Shri   Ashok        

              

Pradhan, Shri   Dharmendra        

              

Rana, Shri   Kashiram        

              

Rana, Shri Raju         

              

Rathod, Shri   Haribhau         

              

Rawale, Shri Mohan           

              

Reddy, Shri G.   Karunakara         

              

Sahu, Shri   Tarachand        

              

Sai, Shri Nand   Kumar         

              

Sai, Shri Vishnu   Deo         

              

Sangwan, Shri   Kishan Singh         

              

Shah, Lt. Col.   (Retd.) Manabendra         

              

Shukla, Shrimati   Karuna         

              

Singh, Kunwar Sarv   Raj        

              

Singh, Shri Ajit   Kumar        

              

Singh, Shri   Brijbhushan Sharan         

              

Singh, Shri   Chandra Pratap         

              

Singh, Shri   Chandrabhan         

              

Singh, Shri   Dushyant         

              

Singh, Shri Ganesh           

              

Singh, Shri Kalyan           

              

Singh, Shri   Manvendra         

              

Singh, Shri   Prabhunath         

              

Singh, Shri Rakesh                   

Singh, Shri Sartaj           

              

Singh, Shri Sugrib           

              

Singh, Shri Uday         

              

Srikantappa, Shri   D.C.         

              

Swain, Shri   Kharabela         

              

Tripathi, Shri   Chandra Mani         

              

Tripathy, Shri   Braja Kishore         

              

Varma, Shri   Ratilal Kalidas         

              

Verma, Shri Beni   Prasad         

              

Virendra Kumar,   Shri      

          

              

             

             

                                  

 NOES   

    

                

Acharia, Shri Basu   Beb                 

Agarwal, Dr.   Dhirendra                 

Ahamed, Shri E.         

              

Aiyar, Shri Mani   Shankar         

              

Appadurai, Shri M.           

              

Athawale, Shri   Ramdas          

              

Athithan  Dhanuskodi, Shri  R.         

              

Azmi, Shri Ilyas                 

Baalu, Shri T.R.         

              

'Baba', Shri   K.C.Singh        

              

Bansal, Shri Pawan   Kumar         

              

Barman, Shri Hiten            

              

Basu, Shri Anil         

              

Baxla, Shri   Joachim        

              

Bose, Shri Subrata         

              

Chakraborty, Dr.   Sujan         

              

Chakraborty, Shri   Ajoy          

              

Chakrabortty, Shri   Swadesh         

              

Chaliha, Shri   Kirip                 

Chander Kumar,   Prof.         

              

Chandrappan, Shri C.K.         

              

Chatterjee, Shri   Santasri          

              

Chaudhary, Dr.   Tushar A.         

              

Chaure, Shri   Bapu  Hari                 

Chavda, Shri   Harisinh         

              

Chidambaram, Shri   P.        

              

Chinta Mohan, Dr.         

              

Chowdhury, Shri   Adhir         

              

Chowdhury, Shrimati   Renuka        

              

Das, Shri Alakesh         

              

Dasmunsi, Shri   Priya Ranjan         

              

Deo, Shri V.   Kishore Chandra S.                 

Deora, Shri Milind                   

Dev, Shri Sontosh   Mohan         

              

Dhanaraju, Dr. K.         

              

Dharavath , Shri   Ravinder Naik         

              

Dikshit, Shri   Sandeep         

              

Dome, Dr. Ram   Chandra         

              

Dubey, Shri   Chandra Shekhar         

              

Engti, Shri Biren   Singh                 

Fatmi, Shri M A.A.           

              

Gandhi, Shri Rahul           

              

Gandhi, Shrimati   Sonia         

              

Gavit, Shri   Manikrao Hodlya         

              

Goyal, Shri   Surendra Prakash         

              

Handique, Shri   Bijoy                 

Hanumanthappa,   Shri N.Y.                 

Harsha Kumar, Shri   G.V.         

              

Hossain, Shri   Abdul Mannan                 

Jai  Prakash, Shri         

              

Jaiswal, Shri   Shriprakash                 

Jegadeesan,   Shrimati  Subbulakshmi         

              

Jha, Shri   Raghunath         

              

Jindal, Shri   Naveen         

              

Kader Mohideen,   Prof. K.M.        

              

Kamal Nath, Shri         

              

Karunakaran, Shri   P.         

              

Kerketta, Shrimati   Sushila        

              

Kharventhan, Shri   S.K.         

              

Krishna, Shri   Vijoy         

              

Krishnadas, Shri   N.N.         

              

Krishnan, Dr. C.         

              

Krishnaswamy, Shri   A.         

              

Kumar,   Shrimati  Meira         

              

Kumari Selja                 

Kuppusami, Shri C.           

              

Kyndiah, Shri P.R.           

              

Lalu Prasad, Shri         

              

Madam, Shri   Vikrambhai Arjanbhai          

              

Mahavir Prasad,   Shri         

              

Maken, Shri Ajay         

              

Mandal, Shri Sanat   Kumar         

              

Manjhi, Shri   Rajesh Kumar                 

Manoj Kumar,   Shri                  

Manoj, Dr. K.S.         

              

Maran, Shri   Dayanidhi         

              

Meena, Shri Namo   Narain                 

Mehta, Shri   Alok  Kumar         

              

Mehta, Shri   Bhuvaneshwar Prasad         

              

Meinya, Dr.   Thokchom                 

Mishra, Dr. Rajesh           

              

Mistry, Shri   Madhusudan         

              

Mollah, Shri   Hannan         

              

Moorthy, Shri A.K.           

              

Mufti, Ms.   Mehbooba         

              

Mukherjee, Shri   Pranab         

              

Muniyappa, Shri   K.H.         

              

Murmu, Shri   Rupchand        

              

Muttemwar, Shri   Vilas         

              

Naik, Shri A.   Venkatesh                 

Nambadan, Shri   Lonappan         

              

Narbula, Shri D.                 

Nikhil Kumar, Shri           

              

Nizamuddin, Shri   G.         

              

Ola, Shri Sish Ram           

              

Oraon, Dr.   Rameshwar         

              

Osmani, Shri A.F   G.     

Owaisi, Shri   Asaduddin         

              

Pal, Shri Rupchand           

              

Palanimanickam,   Shri S.S.         

              

Panda, Shri   Prabodh         

              

Paswan, Shri Ram   Vilas         

              

Paswan, Shri   Ramchandra                 

Paswan, Shri   Virchandra         

              

Patel, Shri Dinsha           

              

Patel, Shri   Jivabhai A.                 

Patel, Shri   Kishanbhai V.                 

Patil, Shri   Balasaheb Vikhe         

              

Patil, Shri   Laxmanrao         

              

Patil, Shrimati   Suryakanta         

              

Pilot, Shri Sachin           

              

Ponnuswamy, Shri   E.         

              

Purandeswari,   Shrimati  D.                 

Radhakrishnan,   Shri Varkala         

              

Rai, Shri Nakul   Das         

              

Raja, Shri A.         

              

Rajagopal, Shri L.        

              

Rajendran, Shri P.           

              

Rajenthiran,   Shrimati M.S.K. Bhavani         

              

Raju, Shri M.M.   Pallam                 

Ramakrishna, Shri   Badiga         

              

Rana, Shri Gurjeet   Singh                 

Rana, Shri   Rabinder Kumar         

              

Rani, Shrimati   K.          

              

Rao, Shri D.   Vittal         

              

Rao, Shri K.S.         

              

Rathwa, Shri   Naranbhai                 

Reddy, Shri M.   Sreenivasulu                 

Reddy, Shri N.   Janardhana         

              

Reddy, Shri S.   Jaipal         

              

Reddy, Shri   Suravaram Sudhakar         

              

Sahay, Shri Subodh   Kant         

              

Sai Prathap, Shri   A.                

Salim, Md.         

              

Saradgi, Shri   Iqbal Ahmed         

              

Satheedevi,   Shrimati  P         

              

Satyanarayana,   Shri Sarvey                 

Scindia, Shri   Jyotiraditya M.          

              

Seeramesh,   Shrimati Tejaswini         

              

Selvi, Shrimati V.   Radhika         

              

Sen, Shrimati   Minati         

              

Senthil, Dr. R.         

              

Shandil, Dr. Col.   (Retd.) Dhani Ram        

              

Sibal, Shri   Kapil          

              

Singh, Chaudhary   Bijendra        

              

Singh, Dr.   Akhilesh Prasad         

              

Singh, Dr.   Raghuvansh Prasad        

              

Singh, Rao   Inderjit          

              

Singh, Shri Ganesh   Prasad         

              

Singh, Shri Suraj         

              

Singh, Shrimati   Kanti         

              

Sippiparai, Shri   Ravichandran        

              

Subba, Shri M.K.         

              

Suklabaidya, Shri   Lalit Mohan        

              

Suryavanshi, Shri   Narsingrao        

              

Thangkabalu, Shri   K.V.                 

Thummar, Shri V.   K.         

              

Topdar, Shri Tarit   Baran         

              

Tytler, Shri   Jagdish         

              

Vaghela, Shri   Shankar Sinh         

              

Vallabhaneni, Shri   Balashowry         

              

Venkatswamy, Shri   G.         

              

Venugopal, Shri D.           

              

Vinod Kumar, Shri   B.          

              

Vundavalli, Shri   Aruna Kumar         

              

Yadav, Dr. Karan   Singh        

              

Yadav, Shri   Anirudh Prasad alias Sadhu        

              

Yadav, Shri   Devendra Prasad        

              

 Yadav, Shri Giridhari                                                                                                                                                                                                                                                                                               Yadav,   Shri Jay Prakash Narayan         

              

Yadav, Shri Ram   Kripal         

              

Yadav, Shri Sita   Ram         

              

             

             

         

    
  

    

MR. SPEAKER: Subject to correction, the result of the division is:   

 Ayes: 100    

 Noes: 172    

The motion was negatived.   

MR. SPEAKER: Now, I shall put the Statutory Resolution moved by Shri Shivraj Patil to the vote of the House.
SHRI L.K. ADVANI : Sir, Sarkaria Commission Report carries a long list where article 356 has been grossly abused in the past.  I am sure that this particular case of imposition of President’s Rule under article 356 in Bihar will add to this long list.  I would like to appeal to the friends there to think over it. Therefore, we would not like to be a party to this voting at all.
 
20.54 hrs. (At this stage, Shri L. K. Advani and some other hon. Members left the House[pkp94] .) … (Interruptions)

MR. SPEAKER: The lobbies may be opened, otherwise they cannot leave the House.

            The lobbies may be opened.

… (Interruptions)

   

* The following Members also recorded their votes through slip.

 

Ayes : 100 + Shri Kailash Joshi, Shri Vijay Kumar Khandelwal, Shrimati Neeta Pateriya, Shri Harin Pathak, Shri Lalmani Prasad, Shri Tukaram Ganpat Rao Renge Patil, Shrimati Sangeeta Kumari Singh Deo, Shri Lakshman Singh = 108.

 

Noes : 172 + Shri N.S.V.Chitthan, Shrimati Preneet Kaur, Ms. Ingrid Mcleod, Shrimati Lakshmi Panabaka,  Shri Anantha Venkatarami Reddy, Shri Baju Ban Riyan, Shri Chandra Sekhar Sahu, Shri Sudhangshu Seal, Dr. Md. Shahabuddin, Shri Madan Lal Sharma, Shri E.G.Sugavanam, Shri Taslimuddin, Shri R. Velu = 185.

                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                              

MR. SPEAKER: Shri Sudhangshu Seal, please go to your seat; please do not stand here.

… (Interruptions)

MR. SPEAKER: The question is:

“That this House approves the continuance in force of the Proclamation, dated the 7th March, 2005 in respect of the State of Bihar, issued under article 356 of the Constitution by the President, for a further period of six months with effect from the 7th September, 2005.”   The motion was adopted.
 
MR. SPEAKER: Now, we shall take up ‘matters of urgent importance’, if any of the hon. Members wishes to raise it today.
SOME HON. MEMBERS: No. MR. SPEAKER: Okay, let us have it from tomorrow.
 
20.56 hrs. The Lok Sabha then adjourned till Eleven of the Clock on Wednesday, August 3, 2005/Sravana 12, 1927 (Saka).

--------

 

 [e1]FOLLOWED BY B1  [snb2]Fld by o1.e Fld by p1  [r4]contd. by   Q    [mks5]Fd.

 [R6]Fld by s1  [bts7]followed by s1.e  [k8](Cd. by x1)  [r9]Dasgupta ctd  [r10]Ctd by y  [lh11]Cd. By a2  [m12]ctd. by b2  [t13]contd. by c2  [rpm14](Cd.by d2)  [i15]cd. by e2 Contd-Ramvillas Paswan  [krr17]Fld by f2  [krr18]Contd by f2  [reporter19]Contd by G2  [ak20]cd.. by h2  [R21]ctd by j2  [k22]Matters were laid on the Table of the House  [r23]Cd by M2  [c24]fd by n2.h    [R25]cd o2  [p26] cd by p2  [RB27]Cd. By q2  [R28](cd. by r2)  [h29]N kumar cd  [h30]Cd by s2  [i31]Nitish kr cont.

 [r32]contd. by  T2    [rpm33](Cd.by u2)  [MSOffice34] Cd.

 [R35]cd by y2  [r36]Ctd by a3  [r37]cd. by b3  [R38]cd. by c3  [m39]Fd. by d3  [R40]cd e3  [p41] Sh Sushil Modi cd  [RB42]Cd. By g3  [R43](cd. by h3)  [h44]cd by j3  [i45]followed    [MSOffice46] Cd.

 [R47]cd by o3  [r48] cd by p3  [R49]ctd by q3  [R50]sh. mohan singh cd.

 [R51]cd. by s3  [r52]cd by T3  [c53]fd by u3.h  [p54] cd by x3  [RB55]Cd. Byy3  [R56](fd. by z3)  [r57]Fld by b4 Contd by e4  [R59]fd by f4  [e60]FOLLOWED BY G4  [R61]cd by h4  [R62]cd.by k4  [r63]cd by L4  [R64]cd m4  [RB65]N4  [h66]Cd by p4  [i67]cont.

 [R68]cd. by 'r4'  [r69]cd. By s4  [snb70]Contd. By t4.e  [bru71]Prasanna-cd.

 [bru72]Cd. By u4  [r73]contd. by   W4    [R74]ctd by x4  [cmc75] cd.

 [bts76]contd. by z4  [c77]folld by b5.h    [R78]cd b6  [RB79]Shri Asaduddin Owaisi cd.

 [RB80]Cd. By d5  [R81](cd. by e5)  [h82]R jha cd  [h83]cd by f5  [t84]Contd. by g5  [e85]SHRI SHIVRAJ V. PATIL CONTINUED  [e86]CONTINUED BY H5  [krr87]contd by j5  [reporter88]contd by K5  [ak89]fld.. by l5  [KMR90]Fd by m5  [R91]Fd by n5  [cmc92] fld. By o5  [k93]Ctd by p5.e  [pkp94] fd. by q5