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Title: Regarding pending Ayodhya case before Special Additional Sessions Judge.

17.02 hrs. MR. SPEAKER: Now, we take up the next issue. Shri Mulayam Singh. श्री मुलायम सिंह यादव (सम्भल) : अध्यक्ष महोदय... (व्यवधान) श्री प्रभुनाथ सिंह (महाराजगंज, बिहार) : अध्यक्ष महोदय, मुझे यह कहना है ... (व्यवधान) अध्यक्ष महोदय : आप कल बोल सकते हैं। श्री प्रभुनाथ सिंह : अध्यक्ष महोदय, हम इस पर कल ही बोलेंगे। लेकिन हम यह कहना चाहते थे कि कल जब राम जन्मभूमि का मामला चल रहा था, उस पर मुझे बोलने के लिए आपने मेंरा नाम बुलाया था। सर, हमारी भी कुछ भावनाएं हैं। हम सदन और देश के सामने अपनी भावनाएं रखना चाहते हैं। इसलिए मैं चाहता हूं कि आप मुझे भी इस पर बोलने की इजाजत दें। श्री मुलायम सिंह यादव : अध्यक्ष महोदय, मैं आपका बहुत आभारी हूं कि आपने मुझे देश के महत्वपूर्ण सवाल पर बोलने का मौका दिया। हम संक्षेप में दो ही बातें कहेंगे। वे दो बातें ऐसी है जिनके बारे में देश की जनता को जानकारी होनी चाहिए कि आखिर मस्िजद कयों ढहाई गई... (व्यवधान) श्री शंकर प्रसाद जायसवाल (वाराणसी) : वह मस्िजद कहां थी, वह ढांचा था। श्री मुलायम सिंह यादव : इन्हें समझाइये, मुझे सुन लीजिए... (व्यवधान)

"> ">कुंवर अखिलेश सिंह (महाराजगंज, उ.प्र.) : जब माननीय मुलायम सिंह यादव जी पहली बार उत्तर प्रदेश के मुख्य मंत्री बने थे तो आपकी कृपा से नहीं बने थे, जनता की भावना से बने थे।... (व्यवधान)
"> श्री प्रियरंजन दासमुंशी (रायगंज) : विषय सीमित है।... (व्यवधान) श्री मुलायम सिंह यादव : मैंने कभी समर्थन नहीं मांगा था। राष्ट्रपति जी को लिखकर दे आए थे कि बिना शर्त समर्थन दे रहे हैं, स्वीकार कीजिए।... (व्यवधान) श्री प्रियरंजन दासमुंशी : यह विषय बहुत सीमित है। बाबरी मस्िजद गिराने के लिए कौन जिम्मेदार है, कौन नहीं है, इसके ऊपर काफी बहस हो चुकी है, मैं इस मुद्दे पर नहीं जाना चाहता हूं। हर पार्टी की कया पोजीशन है, अन्दर कया हुआ था, बाहर कया हुआ था, इसके विषय में हम उसको नहीं दोहराना चाहते हैं। अदालत के विषय में मैं इसलिए टिप्पणी नहीं करना चाहता हूं कि सदन का कोई हक नहीं है, मेरा कोई हक नहीं है, अदालत का कया फैसला होगा, कैसे होगा, उसके ऊपर कोई भी टिप्पणी करने का। मेरा विषय बहुत सीमित है। जब मैं पहली बार १९७१ में यहां पहुंचा तो मैं आदरणीय प्रधान मंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी का भाषण, चाहे वे विरोध पक्ष में हों, चाहे सत्तारूढ़ पक्ष में हों, चाहे मैदान में हो, बहुत इज्जत के साथ, गौर के साथ सुनता था। इसलिए नहीं कि वे बी.जे.पी. में हैं या जनसंघ में हैं, इसलिए कि वे देश के एक बड़े नेता हैं, उनको सुनना चाहिए। आज वाजपेयी जी ने हर समय संसदीय परम्परा की प्रतिष्ठा की जो बात की, हर समय राजनैतिक नैतिकता की जो बात की, चाहे आम चुनाव सभा में हों, सदन के अन्दर हों, देश के लोकतंत्र में राजनैतिक नैतिकता के मसले पर प्रतष्िठत जो कुछ उदाहरण हैं, उनको मद्देनजर रखते हुए मैं इस विषय में कुछ बोलना चाहता हूं। मैं ऐसे इश्यू पर बोलना चाहता हूं, जिसके बारे में कल प्रश्न संख्या १०४ के आधार पर बनातवाला जी के सवाल के जवाब में आडवाणी जी ने कुछ बयान दिया और प्रश्न संख्या २०७ के आधार पर २९ नवम्बर को इस सदन में एक अलखित प्रश्न के जवाब में भारत सरकार के ग्ृाह मंत्रालय ने जवाब दिया। मैं अपना सारा विषय उस तक सीमित रखना चाहता हूं और प्रधान मंत्री जी की दृष्िट उसी की तरफ आकर्िषत करना चाहता हूं। मेरा कोई व्यकितगत गुस्सा, कोई अश्रद्धा न तो आडवाणी के ऊपर है, न मुरली मनोहर जोशी जी के ऊपर है और न बहन उमा जी के ऊपर है। ये लोग देश के सांसद हैं, देश के नेता हैं, देश के कारोबार में उनकी भी भागीदारी है। मैं उनके बारे में कोई व्यकितगत लांछन लगाने की बात नहीं करने आया हूं, मैं परम्परा की बात कर रहा हूं, जिसको आदरणीय वाजपेयी जी ने इस देश को, नई पीढ़ी को सिखाया, चाहे वे विरोधी पार्टी में बैठे हों, चाहे सत्तारूढ़ पक्ष में बैठे हों। प्रश्न संख्या २०७ का यह जवाब मिला। सवाल कया था -The question was about the present status of the Babri Masjid demolition case. The answer was : "Investigation in the Babri Masjid demolition cases by C.B.I. was completed on 5.10.1993 and a chargesheet was filed in the court of Special Magistrate, Ayodhya Prakaran, Lucknow on 5.10.1993 against 40 accused persons. After further investigation a supplementary chargesheet was filed against nine more accused persons in the said court on 11.1.1996." बहुत सुन्दर जवाब है। दूसरा सवाल कया था -The question was about the number of special courts set up in Lucknow for the trial of the accused. The answer was : "Special courts are constituted. One court of Special Magistrate; another special court of Ayodhya Prakaran at Lucknow for the trial of the cases."
THE PRIME MINISTER (SHRI ATAL BIHARI VAJPAYEE): Mr. Speaker, Sir, pending Ayodhya cases can be classified into two categories.
">The first category is of cases relating to the title dispute. There are five such cases, two of which have remained pending since over 49 years.
">The second category is of the case arising out of the happenings of December 6, 1992. In this case, charge-sheets have been filed by the CBI against over fifty persons. This case is pending before the Special Additional Sessions Judge (Ayodhya Prakaran) since 5th October, 1993.