Lok Sabha Debates
Motion Of Thanks On The President’S Address-Contd. on 3 February, 2022
Seventeenth Loksabha > Title: Motion of Thanks on the President’s Address-Contd.
श्री राजीव रंजन सिंह‘ललन’ (मुंगेर): अध्यक्ष महोदय, मैं आपका आभारी हूं कि आपने मुझे बोलने का अवसर दिया । महामहिम राष्ट्रपति जी के अभिभाषण पर जो धन्यवाद प्रस्ताव है, उस पर चर्चा हो रही है । मैं उस धन्यवाद प्रस्ताव के समर्थन में बोलने के लिए खड़ा हुआ हूं । महामहिम राष्ट्रपति जी का अभिभाषण सरकार द्वारा किए गए कार्य और भविष्य में किए जाने वाले कार्यों के साथ-साथ जो नीतियां बनाई जाती हैं और उसे कार्यान्वित करने की जो नीयत है, उसका दर्पण होता है । महामहिम राष्ट्रपति जी के अभिभाषण में कई बातों की चर्चा की गई है।…(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष: माननीय सदस्यगण, कृपया अपनी-अपनी सीट्स पर बैठें । मैडम, प्लीज आप भी अपनी सीट पर बैठिए । काफी वरिष्ठ सदस्य इस समय बोल रहे हैं । शून्य काल में बोलने हेतु जिन माननीय सदस्यों की लॉटरी खुली है, राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के बाद उनको बोलने का मौका दिया जाएगा, ताकि सभी लोग यहां पर रुके रहें । राजीव रंजन जी, अब आप कृपया बोलें ।
… ( व्यवधान)
श्री राजीव रंजन सिंह‘ललन’ :अध्यक्ष महोदय, मैं यह कह रहा था कि महामहिम राष्ट्रपति जी के अभिभाषण में सरकार ने जो किया है और सरकार जो आगे करने जा रही है, उन सभी महत्वपूर्ण बिंदुओं की चर्चा की गई है । सरकार की जो नीति है और उसे कार्यान्वित करने की जो सरकार की नीयत है,उसको स्पष्ट करने वाला यह एक दर्पण होता है । राष्ट्रपति जी के अभिभाषण में कई कार्यों की प्रशंसा की गई है और मैं अपने-आप को उससे संबद्ध करता हूं । राष्ट्रपति महोदय के अभिभाषण में कोरोना-काल में जो एक विश्वव्यापी महा संकट पैदा हुआ था, उस संदर्भ में चर्चा की गई है और वास्तव में मुझे इस सदन में बोलते हुए यह गर्व महसूस होता है कि पूरे विश्व में और विशेष रूप से जो देश अपने-आप को विकसित देश कहते हैं, उन देशों में जो भयावहता थी, वह हमारे देश में देखने को नहीं मिली ।
तीसरी लहर की तो कोई बात ही मत कीजिए, जो टीकाकरण अभियान चला, उस टीकाकरण अभियान ने उसमें रक्षा कवच का काम किया और आज मैंने अखबार में देखा कि हमारे यहाँ10प्रतिशत से भी क्रम संक्रमण दर आ गई है । यह हमारे प्रधानमंत्री जी के कारण हुआ है । जो टीकाकरण हुआ, कई देशों में, पूरी दुनिया में टीकाकरण के लिए हाहाकार मचा था, लेकिन आदरणीय प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में जो सरकार है, उसने स्वदेश में, इस देश में निर्मित टीकाकरण को अपने देशवासियों को लगवाने का काम किया, चाहे वह कोविशील्ड वैक्सीन हो या कोवैक्सीन हो । इसके अलावा ऑक्सीजन का प्रोडक्शन हो या वेंटिलेटर्स के प्रोडक्शन की बात हो, हम किसी भी तरह इस परिस्थिति के लिए तैयार नहीं थे और जब हम इस परिस्थिति के लिए तैयार नहीं थे और अचानक जब हमारे सामने महासंकट आया तो प्रधानमंत्री जी ने पूरे साहस के साथ सभी राज्यों को, चाहे वह राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन से जुड़ी हुई राज्य सरकार हो या उससे अलग विचारधारा की राज्य सरकार हो, सभी राज्य सरकारों को विश्वास में लेकर, सभी राज्य सरकारों के सहयोग से कोरोना के महासंकट पर काबू पाने का जो काम किया, उसके लिए महामहिम राष्ट्रपति जी के अभिभाषण में जो चर्चा है, मैं उसका पूर्णतया समर्थन करता हूँ और मैं उसके लिए आदरणीय प्रधानमंत्री जी को साधुवाद देता हूँ।
महोदय, महामहिम राष्ट्रपति जी के अभिभाषण में प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना की चर्चा है । जब महासंकट पूरे देश में फैला तो उस समय लोगों के लिए खाने के लाले पड़े हुए थे, लोग भूखे मरने की स्थिति में थे । उस स्थिति में 80 करोड़ परिवारों को मुफ्त अनाज प्रदान कराकर इस देश के आदरणीय प्रधानमंत्री जी ने जो साहसिक काम किया, मैं उसका समर्थन करता हूँ । प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना के माध्यम से रेहड़ी-पटरी पर रहने वाले लोगों के लिए 29 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च करके व्यवस्था की गई और आज वे सब लोग अपने-अपने घरों में रह रहे हैं, जो रेहड़ी और पटरी पर रहते थे।
महोदय, अभी हर घर नल के जल की चर्चा हुई । इस पर प्रश्नकाल में विस्तार से चर्चा हो चुकी है, हम उस पर कोई चर्चा नहीं करना चाहते हैं । मैं सिर्फ इतना ही दोहराना चाहता हूँ कि वर्ष2015के विधान सभा चुनाव में बिहार के मुख्यमंत्री आदरणीय नीतीश कुमार जी ने बिहार वासियों को कहा था कि अगर इस बार आपका विश्वास और भरोसा मिलेगा तो हम सात निश्चय की योजना लागू करेंगे । उस सात निश्चय में एक हर घर नल का जल पहुँचाने की भी योजना शामिल थी और उस पर 90 प्रतिशत सफलता बिहार सरकार ने प्राप्त कर ली है । आज पूरे देश में जो पीने के पानी का संकट है, वर्ष 2019में भारत सरकार ने, आदरणीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी की सरकार ने वर्ष 2019 के बजट भाषण में इसे शामिल किया । हर घर जल यह जल जीवन मिशन की योजना जो उन्होंने शामिल की, इससे आज पूरे देश में, जो गरीब लोग हैं, जिन्हें आज आजादी के इतने दिन बाद भी शुद्ध पीने का पानी नहीं मिल पाता है, उनको भी पीने के पानी की सुविधा प्राप्त हो रही है । हर घर बिजली पहुँचाना, यह भी सरकार की उपलब्धि है । यह काम भी हम लोगों ने, बिहार की सरकार ने वर्ष2015में शुरू किया और 28 अक्टूबर 2018को बिहार के हर घर में बिजली पहुँचा दी गई । वर्ष 2017 में इस योजना को भारत सरकार ने भी अडॉप्ट किया और आज उस पर बहुत तेजी से काम चल रहा है । हम इसकी प्रशंसा करते हैं । महिला सशक्तीकरण की चर्चा की गई । महिला सशक्तीकरण के बारे में हम आपको बताना चाहते हैं कि आदरणीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी की सरकार ने7वर्ष के अंदर, अपने 7 वर्ष के शासनकाल में तीन करोड़ गरीब परिवारों को पक्का मकान देकर साहसपूर्ण काम किया है और आज उनके पास अपना घर है, यह महिला सशक्तीकरण की दिशा में बहुत बड़ी उपलब्धि है ।
इस वर्ष का भी बजट भाषण, माननीय वित्त मंत्री जी ने जो बजट पेश किया है, उसमें भी 80 लाख परिवारों को पक्का घर देने की योजना है, जिसके लिए 48 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है । ये सारी योजनाएँ जनहित की योजनाएँ हैं । महिला सशक्तिकरण की दिशा में बिहार की भी मैं चर्चा करना चाहूँगा । बिहार में महिला सशिक्तकरण की दिशा में जो काम हुआ है, वर्ष 2006 में महिलाओं को पंचायती राज और नगर निकायों में 50 प्रतिशत आरक्षण दिया गया । आज वे लाखों की संख्या में वहां प्रमुख,जिला प्रमुख,मुखिया, सरपंच, मेयर, डिप्टी मेयर बनी हुई हैं । उसके अलावा बिहार एक ऐसा प्रदेश है, जहां महिलाओं को सभी राज्य सरकार की नौकरियों में35 प्रतिशत का आरक्षण दिया गया है ।
आज लाखों की संख्या में महिलाएँ वहां डीएसपी बन रही हैं, एसडीओ बन रही हैं । महिला सशक्तिकरण की दिशा में यह काम हुआ है और भारत सरकार ने भी जो काम किया है, हम उसके लिए कहना चाहते हैं । लेकिन इस सब के बावजूद मैं एक बात कहना चाहूंगा । महामहिम राष्ट्रपति जी के अभिभाषण में एक और बात की चर्चा है । महामहिम राष्ट्रपति जी ने कहा है कि सरकार के निरंतर प्रयासों से भारत एक बार फिर विश्व की सर्वाधिक तेजी से विकसित हो रही अर्थव्यवस्थाओं में से एक बन गया है । मैं उनकी इस बात का समर्थन करता हूं । लेकिन हम आपके माध्यम से सरकार से यह जानना चाहते हैं कि किसी भी व्यक्ति का स्वस्थ शरीर कब होगा?ऐसा कब होगा,जब उसके सभी अंग सही होंगे, उसके हाथ, पैर, सिर, सभी अंग सही होंगे? अगर एक अंग भी गड़बड़ होगा, तो वह स्वस्थ व्यक्ति तो हो नहीं सकता है।
इस देश के कई राज्य हैं, जो पिछड़े हैं । आप नीति आयोग की ताजा रिपोर्ट देखिए । अभी हाल में नीति आयोग की रिपोर्ट आई है । कई पिछड़े राज्य हैं, आप उन राज्यों को जब तक विकसित नहीं करेंगे, तब तक महामहिम राष्ट्रपति जी के अभिभाषण में जो तथ्य डाले गए हैं, जो सपना है, संकल्प है, उसको आप कैसे पूरा कर पाएंगे । बिहार तो काम कर रहा है । बिहार का बंटवारा हुआ था… (व्यवधान)
श्री अधीर रंजन चौधरी (बहरामपुर): रूडी जी नहीं समझते हैं।… (व्यवधान)
श्री राजीव रंजन सिंह‘ललन’ : रूडी जी नहीं समझेंगे । रूडी जी को सोनपुर में एक एयरपोर्ट बनवाना है, जब तक वह नहीं बनेगा, तब तक वह नहीं समझेंगे।… (व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय, मैं यह कहना चाहता हूं कि बिहार का बंटवारा हुआ । वर्ष 2000 में बिहार का बंटवारा हुआ । बिहार और झारखंड अलग-अलग हुए । सारे खनिज सम्पदा झारखंड में चले गए । बिहार में कुछ नहीं बचा । अधीर रंजन जी, मैं आपको एक बात बता देता हूं कि जब बिहार और झारखंड का बंटवारा हो गया था, तो बिहार में यह आम चर्चा थी कि अब बिहार में कुछ नहीं बचा है । आलू, लालू और बालू बचा है । बिहार में इतना ही बचा है बाकी सब झारखंड में चला गया है । लेकिन आज बिहार कहां पहुंचा है । आज बिहार की जो विकास दर है, वह पिछले कई वर्षों से दोहरे अंक में है । बिहार की विकास दर दोहरे अंक में है और अभी-अभी आर्थिक सर्वेक्षण वित्त मंत्री जी ने प्रस्तुत किया है, उस आर्थिक सर्वेक्षण में यह कहा गया है कि आज बिहार की सालाना प्रति व्यक्ति आय में बदलाव1221रुपये हो गई है, जो वर्ष 2019-20 में 45 हजाररुपये थी, वर्ष 2020-21में 46 हजाररुपये थी और आज उसमें बढ़ोतरी 1221रुपये हो गई है।
श्री अधीर रंजन चौधरी : यह सालाना है? … (व्यवधान)
श्री राजीव रंजन सिंह‘ललन’ : यह सालाना है, एनुअल है । अधीर रंजन जी, मैं वार्षिक कह रहा हूं।… (व्यवधान)
श्री अधीर रंजन चौधरी : 45 रुपये सालाना है? … (व्यवधान)
श्री राजीव रंजन सिंह‘ललन’ : पहले बहुत कम थी । मैं पर कैपिटा इनकम एनुअल कह रहा हूं । लेकिन आज अगर हम वहां पहुंचे हैं और हमारा ग्रोथ रेट दोहरे अंक में पिछले कई वर्षों से हैं, तो यह हमारे अपने संसाधन के बल पर है।
लेकिन जब बिहार और झारखंड का बंटवारा हुआ था उस एक्ट में एक प्रोविजन था कि बिहार को प्रतिवर्ष एक हजार करोड़ रुपये दिए जाएं । लेकिन वह बंद हो गया । जब योजना आयोग बंद हुआ तो उसके साथ-साथ नीति आयोग बना और नीति आयोग ने उसको बंद कर दिया । एक हज़ार करोड़ रुपये सालाना, जो एक्ट में प्रोविज़न है, उसको भी समाप्त कर दिया गया । उसके बाद भी हम आगे बढ़ रहे हैं । उसके बाद भी हम आगे काम कर रहे हैं । रघुराम राजन कमिटी बनी, उसने अपनी रिपोर्ट वर्ष 2013में दी । उस समय अधीर रंजन जी की सरकार थी । हम लोगों ने बहुत आग्रह किया कि रघुराम राजन कमिटी की रिपोर्ट को स्वीकार कर लीजिए । रघुराम राजन कमिटी ने अपनी रिपोर्ट में कई राज्यों के बारे में, जैसे बिहार, ओडिशा आदि कई राज्यों के बारे में चर्चा की कि ये पिछड़े राज्य हैं और इनको विकसित करना चाहिए । लेकिन इन्होंने उसको ठंडे बस्ते में डाल दिया । आज परिणाम यह है कि रघुराम राजन कमिटी की रिपोर्ट ठंडे बस्ते में पड़ी हुई है । नीति आयोग बना । नीति आयोग का मतलब होता है – नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रांस्फार्मिंग इंडिया । अभी नीति आयोग की जो ताज़ा रिपोर्ट आयी है, उसमें आप कह रहे हैं कि बिहार बहुत पिछड़ा है । अरे भई! अगर बिहार बहुत पिछड़ा है और उसको अगर आप आगे नहीं लाएंगे, उसको अगर आप विकसित नहीं करेंगे तो आप विकसित राष्ट्र की कल्पना कैसे कर सकते हैं? आपकी विकसित राष्ट्र की कल्पना अधूरी रहेगी । जो नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ ट्रांस्फॉर्मिंग इंडिया है, इंडिया का ट्रांस्फॉर्मेशन कैसे होगा? इसलिए हमारे राज्य से यह मांग है कि बिहार को विशेष राज्य का दर्जा मिलना चाहिए । अन्य जो पिछड़े राज्य हैं, उन सभी को भी विशेष दर्जा दीजिए । उसके साथ-साथ जो पिछड़े राज्य हैं, उनमें भी विकास कीजिए तब आगे बढ़िएगा । आप तभी विकसित राष्ट्र की कल्पना कर सकते हैं ।
महोदय, हम ये सब बातें ऐसे ही नहीं कर रहे हैं । अधीर बाबू ने रुडी जी के बारे में कहा । रुडी जी अभी कागज़ पर कुछ लिख भी रहे हैं । महोदय, बिहार विधान मंडल ने विशेष राज्य के दर्जे की मांग सर्वसम्मति से पारित की थी । उसमें रुडी जी की पार्टी के लोग भी सहमत थे । आज किसी कारण से आप नहीं कर सकते हैं, आप उसका समर्थन नहीं करते हों, वह अलग बात है । हम आपसे मांग भी नहीं रहे हैं । हम तो आदरणीय प्रधान मंत्री जी से मांग रहे हैं । हम तो इस देश की सरकार से मांग रहे हैं । बिहार को विशेष राज्य का दर्जा मिले, यह बिहार के हित में है, राज्य के हित में है । इसलिए हम इस मांग को आदरणीय प्रधान मंत्री जी के सामने रख रहे हैं । उसको मानना या नहीं मानना, स्वीकार करना या नहीं करना यह प्रधान मंत्री जी का विशेषाधिकार है, लेकिन हम मांग तो राज्य के हित में रख सकते हैं । मैंने चर्चा में आपको बताया कि डेढ़ दशक से हमारी जो विकास दर है, वह यह है । अब विशेष राज्य के दर्जे पर बहुत लोग चर्चा करते हैं । 15वें फाइनेंस कमीशन की चर्चा करते हैं कि 15वें फाइनेंस कमीशन में विशेष राज्य के दर्जा के बारे में कोई अनुशंसा नहीं है । 15वें फाइनेंस कमीशन ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि हमारा मेनडेट ही नहीं है । यह वित्त आयोग का क्षेत्राधिकार ही नहीं है कि हम पिछड़े राज्यों के बारे में कोई टिप्पणी करें ।
जब उसके मेनडेट में नहीं है, उसके क्षेत्राधिकार में नहीं है तो उसकी अनुशंसा की क्या आवश्यकता है । यह तो आदरणीय प्रधान मंत्री जी को फैसला करना है, केंद्र की सरकार को फैसला करना है कि जो पिछड़े राज्य हैं, हम उसको विकसित कर के आगे बढ़ाएं या नहीं । यह सवाल भी उठता है कि बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने से क्या लाभ हो जाएगा? मैं कहना चाहता हॅूं कि इसके बहुत सारे लाभ हैं । सबको मालूम है कि क्या लाभ होता है । इनकम टैक्स में छूट मिलती है । आज बिहार में उद्योग के नाम पर कुछ नहीं है, शून्य है । औद्योगीकरण नहीं हो पा रहा है । अभी एक प्रश्न के उत्तर में माननीय पेट्रोलियम मंत्री जी ने कहा कि बिहार का इथेनॉल का कोटा 17 हजार करोड़ का था और 34 हजार करोड़ का प्रस्ताव आ गया । जहां भी थोड़ा सा स्कोप अगर मिलता है तो बिहार आगे बढ़ने के लिए बेचैन हो जाता है । हम लोगों को थोड़ा सा स्कोप मिला, चूंकि हमारे यहां प्रचुर मात्रा में जो रॉ मटीरियल इथेनॉल के लिए है, मक्का मेरे यहां पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है । इसलिए आज हम आगे बढ़ रहे हैं । जैसे ही सरकार ने छूट दी कि शुगरकेन से अलग हटकर भी, चीनी के उत्पादन से अलग हट कर भी सीधे इथेनॉल का उत्पादन आप कर सकते हैं, वैसे ही बिहार में इसकी बढ़ोत्तरी हो गई ।
उसी तरह, अगर आप बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देंगे, बिहार ही नहीं, बिहार के साथ-साथ अन्य राज्यों को भी, जो पिछड़े हैं, ओडिशा के बारे में भी उसमें चर्चा है, तो उसे भी अगर विशेष राज्य का दर्जा देंगे तो इनकम टैक्स में छूट मिलेगी, जी.एस.टी. में लाभ होगा, प्लांट्स एण्ड मशीनरी लगाने में छूट मिलेगी । जब छूट मिलेगी तो वहां पर औद्योगिक विकास होगा । उस राज्य का औद्योगिकीकरण होगा । जब राज्य का औद्योगिकीकरण होगा तो राज्य विकसित होगा, प्रदेश विकसित होगा । अगर प्रदेश विकसित होगा तभी आप विकसित राष्ट्र की कल्पना कर सकते हैं, ट्रांसफॉर्म इंडिया की कल्पना कर सकते हैं और तभी इंडिया ट्रांसफॉर्म करेगा । हम यह आग्रह करना चाहते हैं । अगर औद्योगिक इकाइयां बढ़ेंगी तो नौकरी बढ़ेगी, रोजगार बढ़ेगा । नौजवानों को रोजगार मिलेगा । कई तरह की सुविधाएं हैं । ट्रांसपोर्टेशन पर छूट मिलती है । कई तरह की सुविधाएं हैं, जो विशेष राज्य का दर्जा होने के कारण लोगों को मिल सकता है । इसलिए हम देश के आदरणीय प्रधान मंत्री जी से यह मांग रखते हुए कि बिहार को विशेष राज्य का दर्जा दिया जाए, उनसे आग्रह करते हुए, उनसे अनुरोध करते हुए और महामहिम राष्ट्रपति जी के अभिभाषण पर जो धन्यवाद प्रस्ताव पेश हुआ है, उसका समर्थन करते हुए, मैं अपनी बात समाप्त करता हूं।
बहुत-बहुत धन्यवाद।
श्री पिनाकी मिश्रा(पुरी): आदरणीय अध्यक्ष जी, माननीय राष्ट्रपति जी के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर बोलने के लिए आपने मुझे समय दिया, मुझे बोलने के लिए बुलाया, उसके लिए मैं आपका बहुत आभारी हूं । मेरी पार्टी बीजू जनता दल की तरफ से, मेरी पार्टी के लीडर श्री नवीन पटनायक जी, मुख्य मंत्री जी की तरफ से, मैं आज कुछ शब्द बोलने के लिए यहां खड़ा हुआ हूं।
अध्यक्ष जी, यह तो हम सबको मालूम है कि राष्ट्रपति जी का जो अभिभाषण होता है, हमारी जो संवैधानिक प्रक्रिया है, उस प्रक्रिया में वे शब्द राष्ट्रपति जी के शब्द नहीं होते हैं । जो अभिभाषण होता है, उसे सरकार लिख कर राष्ट्रपति जी को देती है । राष्ट्रपति जी उसको सिर्फ पढ़ देते हैं । इसलिए राष्ट्रपति जी के सारे शब्द इस अभिभाषण में हैं, यह तो मैं मानने को तैयार नहीं हूं, और न ही मैं यह कहने को तैयार हूं, क्योंकि राष्ट्रपति जी हमारी ही बिरादरी के हैं । वे सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन में पिछले तीस सालों से मेम्बर रहे हैं । उनका दिल कैसे धड़कता है, यह हम जानते हैं । साधारण लोगों के लिए, गरीब, पिछड़ी जातियों के लिए जिस तरह से उनका दिल धड़कता है, तो इसमें कई चीजें हैं, जो राष्ट्रपति जी अगर अपने मन की कहना चाहते तो शायद न कहते । इसलिए मैं आज इस हाउस में आपके सामने चार-पाँच चीजें रखना चाहता हूं, जो मैं सोचता हूं कि अगर राष्ट्रपति जी अपने मन से कुछ कहना चाहते तो वे जो कहते, मैं वह कहना चाहता हूं । उन्होंने दोनों सदनों को जिस तरह से अपना अभिभाषण दिया, उसके लिए हम उनको धन्यवाद देंगे ।
अध्यक्ष जी, मेरे ख्याल से, राष्ट्रपति जी यह अवश्य जानते हैं कि देश की जो आज सबसे बड़ी विकट समस्या है।
Hon. Speaker, Sir, the worst possible malaise for this country -- many of my colleagues have already spoken about it -- is this terrible unemployment and jobless growth. That has absolutely no mention in the hon. President’s peroration to both the Houses. The other day we saw the sight of young men dying in job riots, and these are the first unemployment riots in this country, I think, in the last 75 years. 75 सालों में पहली बार इस देश में अन-इम्प्लॉयमेंट रायट्स देख रहे हैं, जो बिहार और यू.पी. में हुआ । मेरे ख्याल से, उससे हर एक को पीड़ा हुई होगी । इस हाउस में, चाहे आप सदन में किसी भी तरफ बैठे हों, आपको पीड़ा हुई होगी, इसमें कोई दो मत नहीं है । जहां 35,281 नॉन टेक्निकल पोजीशंस में, वे भी कोई ऊंचे पद नहीं हैं, बल्कि छोटे-छोटे 35,281पदों के लिए एक करोड़ 25 लाख लोगों ने एप्लाई किया है । उन्हें यह आशा नजर आती है कि अगर एक को मिलेगा तो 350 लोगों को नहीं मिलेगा । उनके मन में जो दु:ख है, उनके मन में जो पीड़ा है, उनकी आज जो मानसिक स्थिति है, मेरे ख्याल से, इस हाउस में हम सबको उसे समझना चाहिए, विशेष रूप से सरकार को यह समझना चाहिए।
I have no doubt that the Government should be mindful of it. The Government should not repeatedly in repeated Budget statements as well as outside make these promises. I can only call them vainglorious promises -- that there will be lakhs of jobs created. This kind of terminology is very loosely being used that we will give 60 lakh jobs or 70 lakh jobs or we will double farmers’ income. I remember, in 2017, it was said that they would double farmers’ income by 2022. None of this is happening. Let us wake up and smell the coffee.’ ऐसा अमेरिका में कहते हैं, लेकिन वास्तविक स्थिति क्या है, यह हमें समझना चाहिए । मेरे ख्याल से राष्ट्रपति जी निश्चित रूप से खुद चिंतित होते और इस देश को बताते।
दूसरी बात, जो उनको जरूर चुभ रही होगी, वह इस देश में इंफ्लेशन की स्थिति है । यह बहुत ही विकट स्थिति है । आज ऑयल प्राइसेस की वजह से कैस्कैडिंग इफेक्ट हो रहा है । मेरे ख्याल से विशेष रूप से महिलाओं की जो स्थिति है, जो अपना किचन संभालती हैं, आज की तारीख में उनका किचन आँसुओं के अलावा और किसी से संभल नहीं रहा है । आज की तारीख में महिलाएं सिर्फ आँसुओं से अपना किचन संभाल रही हैं ।
अध्यक्ष जी, हमारे जो युवक हैं, वे अपने काम से सुबह मोटरसाइकिल लेकर निकलते हैं । इसके अलावा उनके पास कोई चारा नहीं है । उनके पास मोटरसाइकिल-स्कूटर ही ऐसी चीज है, जिससे दिनभर काम करके वे शाम को रोटी के लिए पैसा लेकर आते हैं । जब वे सुबह डीजल-पेट्रोल भरवाने के लिए पंप पर जाते हैं तो उनकी जो हालत होती है, उनके चेहरे पर जो मायूसी होती है, वह मैंने खुद देखी है । उनके चेहरे पर काफी मायूसी होती है, जब वे देखते हैं कि आज फिर रिवीजन हो गया है, आज फिर प्राइस एक रुपया, डेढ़ रुपया, दो रुपये तक बढ़ गया है ।
अध्यक्ष जी, एक जमाना था, आपको याद होगा । आप जमीन से जुड़े हुए व्यक्ति हैं । आपको याद होगा कि सरकार पेट्रोल पर 50 पैसे बढ़ाने के लिए बार-बार सोचती थी । उस समय बार-बार मीटिंग की जाती थी कि 50 पैसे बढ़ाए या नहीं बढ़ाए । आज की तारीख में पिछले सात-आठ सालों में30रुपये से लेकर50रुपये तक फ्यूल का प्राइस बढ़ चुका है । इसका जो कैस्कैडिंग इफेक्ट है, वह हर वर्ग को हर चीज में अफेक्ट कर रहा है । मेरे ख्याल से इस बारे में सरकार को निश्चित रूप से सोचना चाहिए । इस तरह का इंफ्लेशन मार्क जो आज की तारीख में छह परसेंट के आसपास है, उसको किस तरह से कंट्रोल करें? Without this control, this runaway inflation is going to cause tremendous problems to the people of this country.
अध्यक्ष जी, राजीव रंजन सिंह ने बहुत बड़ी बात कही कि इस देश के जो पिछड़े इलाके हैं, उनके लिए राष्ट्रपति जी के मन में विशेष रूप से एक भावना रही है । इसमें बिहार और ओडिशा है।
अध्यक्ष जी, राष्ट्रपति जी ने टेली डेन्सिटी की बात कही, that the cost of internet connectivity and price of smartphones in India today are among the cheapest in the world.
हमें यह मानना पड़ेगा कि यू.पी.ए. ने उसके लिए बहुत हेवी प्राइस पे किया है । आज यहाँ राजा जी नहीं है । यह जो टेलीकॉम रेवल्यूशन आया था, यह उनके जमाने में ही आया था । यह जो टेली डेन्सिटी और चीपेस्ट प्राइसेस है, इसके लिए आज कोई वाहवाही लूटने की बात नहीं है । इसके लिए बहुत पहले वाहवाही लूटी जा चुकी है । इसके लिए उन्होंने बहुत हेवी पोलिटिकल प्राइस भी पे किया है । इस टेली डेन्सिटी के बारे में गवर्नमेंट को यूनिफॉर्म्ली सोचना चाहिए कि किस तरह से इस टेली डेन्सिटी को बढ़ाया जाए । जैसे ओडिशा राज्य है, वहाँ पर आज भी 6,278 गाँवों में कोई मोबाइल कनेक्टिविटी नहीं है । हमारे मुख्यमंत्री जी इसके लिए बार-बार प्रधानमंत्री जी को चिट्ठी लिख रहे हैं । मुझे मालूम है कि प्रधानमंत्री जी की मंशा है कि जो गरीब राज्य हैं, वे राज्य किसी तरह से विकसित हो । मेरे हिसाब से शायद उनकी मंशा ठीक तरह से उनके मंत्रियों के पास पहुँच नहीं पा रही है, ऐसा मेरा ख्याल है । मंत्री जी यहाँ बैठे हैं, मंत्री जी हँस रहे हैं । यह मंत्री जी, शायद मेरे ख्याल से प्रधानमंत्री जी जो चाहते हैं, हमेशा उसे करते हैं । हमने अपने ओडिशा में ऐसा देखा है ।
अध्यक्ष जी, एक और बहुत ही विशेष बात है । This is a very important issue which concerns all the States here. Yesterday, one of the hon. Members rightly said that India is a Union of States. The entire issue of the IAS cadre rules, which this Government now wants to revamp and bring about in such a way that the Central Government can pull out any IAS/ IPS/ Central Government officers from the States and decide as and when they want that these officers must serve the Central Government.
This is a very dangerous situation as far as Indian federal polity is concerned. I believe, all the States have together written about this. I think, the hon. Prime Minister, again, must be mindful of this that the States have uniformly written about it. I am sure that his own party Chief Ministers, his own party’s State Governments cannot be a party to this. This is a very damaging issue. This goes to the root of the federal structure of India and ought not to be seen through. The Government must revisit this immediately and heed the Chief Ministers who protested on this.
Pradhan Mantri Awas Yojana has been praised by the hon. President, and rightly so. यह बहुत अच्छी योजना है । इसमें स्टेप मदरली ट्रीटमेंट कुछ स्टेट्स को मिल रहा है, जो कि ठीक बात नहीं है । मेरे पास इसकी चिट्ठी है । कर्नाटक गवर्नमेंट जो चाहती थी, उसे सेंट्रल गवर्नमेंट ने एलाऊ कर दिया । Synchronisation of data with the MIS into Awas Plus is allowed. Odisha is not allowed. Odisha has been disallowed. यह तो सही बात नहीं है । गिरिराज सिंह जी के पास हम लोग गए थे, वे भी बहुत इफेक्टिव मंत्री हैं ।
अध्यक्ष जी, ब्यूरोक्रैट्स को इस देश में संभालना तो भगवान के हाथ में है । जहां तक हम सोचते हैं, प्रधान मंत्री जी खुद अगर अपने हाथ में थोड़ा लें, तो ब्यूरोक्रैसी को संभाल सकते हैं । यहां मंत्री जी जो बोलते हैं, उसे वे सुनने को तैयार नहीं हैं । वे कोई न कोई घुट्टी पिला देते हैं । आप भी अच्छी तरह से इस बारे में जानते हैं, क्योंकि आप सांसद रहे हैं, तो आपको इसकी अच्छी भिज्ञता है ।
The President has mentioned about farmers in several paragraphs of his Address. The Government must take note of a very disquieting feature again. Hon. Speaker, Sir, last year, by this time, the FCI had lifted four lakh metric tonnes of rice from Odisha. This year, only 12,000 metric tonnes have been lifted. कहाँ चार लाख और कहाँ 12 हजार? मुझे मालूम है कि तेलंगाना के मेरे मित्र, जो आज इस हाउस में बैठे हैं, उनकी भी यही पीड़ा है । This has to be totally looked at, again, by the hon. Prime Minister. Otherwise, there is going to be a very serious problem because how are you going to look into the farmers of this country to prosper, if the Government, the FCI refuses to do what is mandated by law? It is mandated by agreement. Therefore, I believe that the hon. Prime Minister must look into this personally that even the target of lifting of five lakh metric tonnes, which has been agreed to, is not being done by the FCI on one pretext or the other. This, again, is something I believe that the hon. Prime Minister must look at immediately.
Now, the other issue, of course, is of release of subsidy etc. I am not going to trouble you on this thing. राष्ट्रपति जी ने दिव्यांग लोगों की बात कही है, मैं आपको और इस हाउस को बताना चाहता हूँ । There is some note of cheer. यह एक खुशी की बात है । There is a boy from Puri in Odisha who has entered the Guinness Book of World Records for the longest distance covered on a manual wheelchair in 24 hours. उसका नाम कमलाकांत नायक है । वह मेरे हिसाब से अगले पेरिस ओलम्पिक्स में, जो पैराप्लेजिक मैराथन होता है, उसके एक मेडल के लिए दावेदार होगा । राष्ट्रपति जी ने दिव्यांगजनों की जो बात कही, उसके लिए ओडिशा की सरकार, विशेष रूप से नवीन पटनायक जी उसके लिए काम कर रहे हैं । राष्ट्रपति जी ने पैरा 38 में कहा कि इस देश ने ओलम्पिक्स में बहुत अच्छा प्रदर्शन किया और 19 मैडल्स लिए । आपको मालूम है कि ओडिशा पहला ऐसा राज्य है जिसने इंडियन हॉकी टीम को स्पांसरशिप दी है । Odisha is the first State in the country to sponsor a national team. Today, that team has gone and got a bronze medal. We are now genuine, world-class medal prospects.
मैं आखिर में एक बात बोलना चाहूँगा । प्रधानमंत्री जी विशेष रूप से अगर कहीं सुन रहे हों, राष्ट्रपति जी ने पहले पैराग्राफ की दूसरी लाइन में कहा कि “In these years, people of India have displayed profound faith in the democratic values, discipline and sense of responsibility.” These are very strong words.
महोदय, मैं आपको बताना चाहूँगा कि इसी हाउस के एक मेंबर, जो कि मंत्री हैं, उन्होंने 10 दिन पहले डिप्टी डायरेक्टर प्लानिंग की बहुत जोर से पिटाई की । एक डिप्टी डॉयरेक्टर के ऊपर चेयर फेंकी तो चेयर टूट गई, उसकी ऊंगली टूट गई, उसके बाद टूटी चेयर की लकड़ी पकड़ कर दूसरे को इतनी बुरी तरह से पीटा कि आज उसका ऑपरेशन होकर हाथ के फोरआर्म में प्लेट लगी हुई है । इसी हाऊस के एक सांसद और जो मंत्री भी हैं । जो मंत्री इस तरह से काम करते हैं, मैं उनका नाम नहीं लेना चाहता हूं । सभी जानते हैं कि यह मयूरभंज में डिप्टी डॉयरेक्टर प्लानिंग के ऑफिस में हुआ है । लेकिन इस तरह की बात हो, जब राष्ट्रपति जी कहते हैं कि एक सेंस ऑफ डिस्पिलिन है । प्रधानमंत्री जी के वर्स्ट क्रिटिक… (व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष: कौन सा रूल है?
श्री पिनाकी मिश्रा: मैं जानता हूं कि आप और निशिकान्त जी रूल्स के मास्टर्स हैं ।
माननीय अध्यक्ष: आप उनसे बड़े मास्टर हैं।
श्री एस. एस. अहलुवालिया (बर्धमान-दुर्गापुर): मैं सिर्फ इतना कहना चाहता हूं, मेरे साथी पिनाकी मिश्रा जी सुप्रीम कोर्ट के एक वरिष्ठ अधिवक्ता हैं और कानून के जानकार हैं । ये ऐसे परिवार से आते हैं जहां जजेज पैदा होते हैं, चीफ जस्टिस पैदा होते हैं । कभी भी किसी मंत्री या सदस्य के खिलाफ सदन में कुछ बोलना है तो एडवांस में उस सदस्य या मंत्री को एक नोटिस सर्व करना पड़ता है । क्या नोटिस दिया गया?
माननीय अध्यक्ष: इन्होंने नाम नहीं लिया है ।
श्री पिनाकी मिश्रा: अध्यक्ष जी, ये इतने रूल्स के पक्के हैं कि मैं इनके सामने ऐसी गलती कर ही नहीं सकता क्योंकि मुझे मालूम है कि ये इमिडिएटली टोक देंगे, जो प्रधानमंत्री के सबसे वर्स्ट क्रिटिक हो, who was critical of the Prime Minister and there are many reasons to criticise him. But nobody can criticise him as far as his personal conduct with people goes. He is unfailingly courteous; he is unfailingly polite with everybody who he meets with. चाहे वह पॉलिटीकल लीडर्स हो, चाहे अपोजिशन लीडर्स हो, चाहे ऑफिसर्स हो, इस तरह की बात अगर उनके काउन्सिल ऑफ मिनिस्टर्स के लोग करते हैं । इसके पहले भी हमें मालूम है यूपी में एक मंत्री जी के परिवार के द्वारा वारदात हुई है । इस तरह से राष्ट्रपति जी ने जो बात कही, sense of discipline, sense of democratic values. These go against the democratic norms and values. I think the Prime Minister must take a very serious view of these things. These things should not be easily countenanced. मैं इन्हीं शब्दों के साथ अपनी बात समाप्त करता हूं । आपने मुझे इस चर्चा में भाग लेने के लिए बुलाया, आपका बहुत-बहुत धन्यवाद ।
माननीय अध्यक्ष: प्रहलाद जी, आप कुछ बोलना चाहते हैं?
संसदीय कार्य मंत्री; कोयला मंत्री तथा खान मंत्री(श्री प्रहलाद जोशी): अध्यक्ष महोदय, पिनाकी जी बहुत सीनियर अधिवक्ता हैं, इन्होंने काउन्सिल ऑफ मिनिस्टर्स का भले ही नाम न लिया हो । मुझे लगता है कि ऐसे संदर्भ में नहीं बोलना चाहिए । मेरा भी 30-32सालों का संसदीय अनुभव है । मुझे लगता है कि वह भी अच्छी तरह से जानते हैं, इस अवसर पर रिकार्ड में यह बात न आए । अभी यह विवाद स्पष्ट नहीं है,वहां राज्य सरकार द्वारा कोई कानूनी कार्रवाई होनी है,उसे पहले कर लें, उसके बाद सदन में कोई बात कही जाए तो अच्छा होगा ।
माननीय अध्यक्ष: श्री नामा नागेश्वर राव SHRI NAMA NAGESWARA RAO (KHAMMAM): Thank you, hon. Speaker, for giving me this opportunity to speak on Motion of Thanks on the President’s Address.
17.49 hrs (Shrimati Rama Devi in the Chair) प्रेसिडेन्शियल एड्रेस सुनने के बाद, आज के दिन कंट्री कोविड और कई दूसरी वजहों से जिस तरह की प्रोबल्मस को फेस कर रही है, प्रेसिडेन्शियल एड्रेस द्वारा गवर्नमेंट देश को बताएगा, ऐसा मैंने सोचा था । अनइम्पलायमेंट के बारे में काफी लोगों ने बात की, अभी हमारे कलीग ने भी बात की, अनइम्पलायमेंट बहुत बड़ा मुद्दा है, उसको एड्रेस नहीं कर पाए हैं । प्राइस जिस तरह से रेज हुआ है, चाहे पेट्रोल हो या डीजल हो, उसके बारे में उल्लेख नहीं किया है । इसमें एमएसपी के बारे में उल्लेख नहीं किया गया है । किसान के प्रोडक्ट, चाहे पैडी हो या गेहूं हो, नेशनल प्रोक्योरमेंट पॉलिसी के बारे में भी नहीं बोला गया है । स्टेट्स एंड सैंटर रिलेशन के बारे में कुछ भी टच नहीं किया गया है । Our Country is a Union of States. जब सब स्टेट्स का डैवलपमेंट होगा तभी कंट्री का डैवलपमेंट होगा । स्टेट और सैंट्रल के रिलेशन को काफी अच्छी तरह से आगे लेकर जाना चाहिए, लेकिन राष्ट्रपति जी के अभिभाषण में इसे टच भी नहीं किया गया ।
इसमें पेज नंबर4में बाबा साहेब अम्बेडकर के शब्दों को मेंशन किया गया है । इसमें लिबर्टी, इक्वेलिटी और फ्रेटरनिटी की बात कही गई है । जो बात कही गई है, क्या हम उसके अनुसार चल रहे हैं? अम्बेडकर जी ने उस समय राज्यों के बारे में जो लिखा था, क्या आज के दिन उस तरह से चल रहा है? उस समय की और अब की परिस्थिति बहुत अलग है । अम्बेडकर जी की राज्यों की बात के अनुसार हमें तेलंगाना मिला है । हमारे नेता केसीआर साहब ने तेलंगाना के लिए 15 साल डे एंड नाइट फाइट की है । Finally, we got the Telangana in 2014. तेलंगाना बनने के बाद पहले क्या था और अब क्या है, मैं इसके बारे में हाउस से देश को बताना चाहता हूं ।
तेलंगाना बनने से पहले हमारे यहां ड्रिंकिंग वाटर की बहुत प्राब्लम्स थीं । किसानों को खेती करने में बहुत प्राब्लम्स थीं, उन्हें पावर नहीं मिलती थी । तेलंगाना के कम से कम 25 से 30 लाख मजदूरों को गल्फ कंट्रीज़ और दूसरी स्टेट्स में जाकर मजदूरी का काम करना पड़ता था । यह उस समय का तेलंगाना था, लेकिन अब तेलंगाना बदल गया है । इस बुक में पेज नंबर6में लिखा है और `हर घर में नल से जल` के बारे में एड्रेस किया गया है ।
आज `हर घर जल` के बारे में काफी डिसकशन हुआ है । `हर घर जल` एक इश्यू है, तेलंगाना बनने से पहले हमारे यहां पीने के लिए पानी नहीं था । हमारे नेता केसीआर साहब ने इसके बारे में सोचा । तेलंगान सी लैवल से काफी ऊपर है इसलिए 300-400फीट तक बोर करने से भी पानी नहीं मिलता था । पहले ऐसा तेलंगाना था । हमारे नेता ने हर घर में जल पहुंचाने का कार्यक्रम बनाया । इस कार्यक्रम में हमारे देश का यही पहला राज्य है ।
आज प्रश्न काल में इसका रिप्लाई दिया गया है । हमने पहले काफी सप्लीमेंटरी क्वैश्चन के लिए ट्राई किया था, लेकिन तब हमें मौका नहीं मिल पाया था । आज ऑनरेबल जलशक्ति मिनिस्टर ने रिप्लाई दिया गया है, उसमें तेलंगाना के बारे में लिखा है कि 100 परसेंट हर घर में जल पहुंचा दिया गया है । 17वीं लोकसभा में कम से कम 20 बार सरकार ने बताया कि तेलंगाना में हर घर में जल दिया है । वे प्रशंसा भी करते हैं और100परसेंट बोल भी देते हैं लेकिन एक रुपया भी नहीं देते हैं । आज तक एक रुपया भी नहीं दिया गया है । हमें एक रुपया भी नहीं मिला है ।
इसके बारे में नीति आयोग की रिकमेंडेशन है । नीति आयोग ने रिकमेंडेशन की है और रिकमेंडेशन में क्लियर कट लिखा है, तेलंगाना में जो स्कीम एडॉप्ट की है, उसे सपोर्ट करना चाहिए । सैंट्रल गवर्नमेंट ने 19205 करोड़ रुपये तेलंगाना को देने हैं, यह नीति आयोग की रिपोर्ट है । 5000करोड़ रुपये की योजना में टैंक्स डेवलप किए गए । काकतीय के समय में जो टैंक्स बनाए गए थे, डेवलप किए गए थे । नीति आयोग ने कहा है कि पानी के लिए यह बहुत महत्वपूर्ण प्रणाली है, इसे जरूर सपोर्ट करना चाहिए । नीति आयोग ने वर्ष 2016 में 24000 करोड़ रुपये के लिए लिखित रूप में दिया है । उस दिन से अभी तक हम लोग पीछे पड़े हैं । हमने माननीय प्रधान मंत्री जी को और कंसंर्ड मिनिस्टर को लेटर्स भी लिखे हैं, लेकिन हम लोगों को एक रुपया नहीं दिया गया है ।
उसी तरह से पेज नम्बर 6 एवं 7 में सरकार ने पैडी प्रोक्योरमेंट के बारे में प्रेसिडेंशियल एड्रेस में लिखा है । पैडी प्रोक्योरमेंट के लिए भी एक नेशनल पॉलिसी होनी चाहिए । अभी-अभी ओडिशा के हमारे मित्र ने बताया है कि पैडी प्रोक्योरमेंट में कितनी दिक्कत हो रही है । पूरे देश भर में किसान के पैडी प्रोक्योरमेंट में दिक्कत हो रही है । अभी पिछले सेशन में हम लोगों ने 9 दिनों तक तेलंगाना के पैडी प्रोक्योरमेंट के बारे में काफी कुछ बताया था । उसके बावजूद भी पैडी प्रोक्योरमेंट पूरा नहीं कर पाए हैं । कम से कम आने वाले दिनों में पैडी प्रोक्योरमेंट के लिए एक नेशनल पॉलिसी बननी चाहिए ।
उसी तरह से पेज नम्बर 8 में `किसान सम्मान निधि` के बारे में बताया गया है । केन्द्र सरकार किसानों को 2000 रुपये तीन बार दे रही है । उसके लिए भी देश को जानना चाहिए । रैयत बंधु बोलकर तेलंगाना के जो किसान सुसाइड कर रहे थे, जिनको अपना घर छोड़कर गल्फ में जाकर मजदूरी का काम करना पड़ रहा था, हमारे नेता ने उनके बारे में सोचा कि किसानों के लिए हमें हाथ बढ़ाना चाहिए और उन्हें प्रोटेक्ट करना चाहिए । इसलिए, हम लोगों ने उनको रैयत बंधु और किसान का बंधु बोलकर हरेक एकड़ के लिए दस हजार रुपये प्रत्येक साल देना शुरू किया । हम अभी तक50हजार करोड़ रुपये फॉर्मर के अकाउंट में डायरेक्ट भेज चुके हैं । इसमें कोई मीडिएटर नहीं है । उसी तरह से हम लोगों ने24घंटे फ्री पॉवर देना शुरू किया है । 24 घंटे में किसान कभी भी फ्री पॉवर ले सकता है । हमारे यहां 30 लाख बोरवेल्स हैं । हमने उन 30 लाख बोरवेल्स के लिए भी किसानों को फ्री पॉवर दिया है । उसी तरह से उनको इंश्योरेंस भी दिया है । ये सब देने की वजह से हमारे यहां के किसान पैडी प्रोक्योरमेंट में आगे बढ़ रहे हैं । लेकिन, अभी भी पैडी प्रोक्योरमेंट में काफी दिक्कतें हो रही हैं । इसी वजह से हमने इस विषय को हाउस की दृष्टि में लाया है । अभी स्थिति क्या है?
तेलंगाना बनने से पहले 25 से 30 लाख लोग बाहर जाकर काम करते थे । अभी तेलंगाना में 12 स्टेट्स से 15-20 लाख लोग काम कर रहे हैं । … (व्यवधान) मैडम, अभी हमने बोलना शुरू किया है । आपको हमें थोड़ा समय देना चाहिए ।
माननीय सभापति :दस मिनट हो गए हैं ।
… ( व्यवधान)
श्री अधीर रंजन चौधरी :सरकार ने हंड्रेड परसेंट घर के लिए नल का इंतजाम किया है । …(व्यवधान)
श्री नामा नागेश्वर राव : हां, हंड्रेड परसेंट किया है । मिनिस्टर साहब का रिप्लाई भी है । … (व्यवधान) यह भी देखने की बात है कि तेलंगाना बनने से पहले 25 से 30 लाख लोग बाहर जाकर काम करते थे । अभी 15 से 20 लाख लोग हमारे तेलंगाना राज्य में आकर काम कर रहे हैं । जब कोरोना आया था, तो अधीर रंजन जी और दुबे जी ने हमें अपने लोगों को कोरोना से बचाकर वापस भेजने के लिए फोन किया था । कोरोना के समय हम लोगों ने उनकी काफी देखभाल की थी । … (व्यवधान)
उसी तरह हमने पेज नम्बर 8 में पाम ऑयल के बारे में पढ़ा है । देश में पाम ऑयल का उत्पादन हमने पहली बार अपनी डिस्ट्रिक्ट से, जहां से मैं एमपी हूं, वहां से वर्ष1990में ही शुरू कर दी थी । अभी पाम ऑयल के उत्पादन में हम लोग नम्बर वन हैं । आने वाले समय में हमने 20 लाख एकड़ में पाम ऑयल के लिए प्रोग्राम बनाया है । अभी हमारे यहां पाम ऑयल के लिए दो फैक्ट्रीज हैं । हम लोग तेलंगाना में 12 और फैक्ट्रीज खोलने का प्रयास कर रहे हैं।
उसी तरह से, पेज नम्बर9में ‘बेटी बचाओ,बेटी पढ़ाओ’ के बारे में बताया गया है ।‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ के बाद बेटी की शादी भी करनी चाहिए । इसके लिए हमारे चीफ मिनिस्टर ने ‘कल्याण लक्ष्मी-शादी मुबारक’ नाम से एक प्रोग्राम बनाया है । हम हर शादी के समय1,01,016 रुपये देते हैं । अभी तक 10,00000लोगों को हम यह राशि दे चुके हैं । इस प्रोग्राम में हम लोगों ने 8 हजार करोड़ रुपये दिए हैं । इसलिए, यह प्रोग्राम पूरे देश भर में चलाना चाहिए ।
18.00 hrs बेटी को बचाने के लिए और बेटी की शादी करने के लिए यह प्रोग्राम पूरे देश भर में लागू किया जाना चाहिए । हम लोगों ने जिस तरीके से‘हर घर जल’योजना चालू की है, वह प्रोग्राम भी देश में लागू करना चाहिए । पेज नंबर 13 पर 7 मेगा इंटीग्रेटेड टेक्सटाइल रीजन और ऐपरल पार्क बनाए जाने की बात की गई है । तेलंगाना कॉटन प्रोडक्शन में दूसरे स्थान पर है । तेलंगाना को टेक्सटाइल पार्क देना चाहिए । हमें टेक्सटाइल पार्क नहीं मिला है।…(व्यवधान) उसी तरह से इस हाउस में एपी रिआर्गेनाइजेशन एक्ट, 2014 में एग्री किया गया था, लेकिन अभी तक उसमें से कुछ भी लागू नहीं हुआ है । स्टील प्लांट भी नहीं दिया गया है । काजीपेट में कोच फैक्टरी भी नहीं दी गई है । गिरिजन यूनिवर्सिटी के लिए भी फंड्स नहीं दिए गए हैं । अभी पूरे देश में 157 मेडिकल कॉलेजेज़ दिए गए हैं, लेकिन तेलंगाना को एक भी मेडिकल कॉलेज नहीं मिला है । 7 आईआईएम्स दिए गए हैं, लेकिन तेलंगाना को एक भी नहीं ।84नवोदय स्कूल्स दिए गए हैं, लेकिन तेलंगाना को एक भी नहीं ।7आईआईटीज़ दी गई हैं, लेकिन तेलंगाना को एक भी नहीं ।16आईआईआईटीज़ दी गई हैं, लेकिन तेलंगाना को एक भी नहीं ।4 NITs दिए गए हैं, लेकिन तेलंगाना को एक भी नहीं ।7मेगा टेक्सटाइल पार्क्स दिए गए हैं, लेकिन तेलंगाना को एक भी नहीं । क्या तेलंगाना राज्य भारत में नहीं है? क्या तेलंगाना के लोग भारतीय नहीं हैं?...(व्यवधान)
माननीय सभापति : श्री राजीव प्रताप रूडी जी।
श्री नामा नागेश्वर राव : महोदया, मैं बस एक मिनट में कनक्लूड कर रहा हूं । उसी तरह से हमें कुछ भी नहीं दिया गया है।…(व्यवधान) हमें जो-जो नहीं दिया गया है, वह तो ठीक है, लेकिन हमसे क्या-क्या लिया गया है, वर्ष2013 में हमारे लिए आईटीआईआर स्वीकृत हुआ था, लेकिन उसको रोक दिया गया है । उसी तरह से तेलंगाना बनने के बाद 7 मंडल्स ले लिए गए हैं । एकहाईडल पावर प्रोजेक्ट को ले लिया गया है । नीति आयोग की जो रेकमेंडेशन्स हैं, हमें उसमें से एक रुपयैा भी नहीं दिया गया है।…(व्यवधान)
माननीय सभापति : श्री राजीव प्रताप रूडी जी।
श्री नामा नागेश्वर राव : महोदया, एक मिनट और दे दीजिए।…(व्यवधान) यह तो एससी, एसटी और ओबीसी का विषय है।…(व्यवधान) आप चेयर पर बैठी हुई हैं, तो एसटी, एससी और ओबीसी के विषय पर एक मिनट और दे दीजिए।…(व्यवधान) मैं एक मिनट से ज्यादा समय नहीं लूंगा।…(व्यवधान)
माननीय सभापति :रूडी जी, आप बोलिए । मैंने एक-एक मिनट करके चार मिनट दिए हैं । आपके लिए 10 मिनट का समय अलॉट था, लेकिन मैंने14मिनट दिए हैं । अब आप बैठ जाइए।
… ( व्यवधान)
श्री नामा नागेश्वर राव : महोदया, वर्ष2014 में तेलंगाना ने ओबीसी के आरक्षण के लिए एक रिज्यूलेशन पास करके केन्द्र सरकार के पास भेजा था । हम लोगों ने वर्ष 2014 में शेड्यूल कास्ट के कैटेगराइजेशन के लिए भेजा था । उसी तरह से हम लोगों ने ओबीसी मिनिस्ट्री के लिए तेलंगाना से एक रिज्यूलेशन भेजा है, माइनोरिटी के रिजर्वेशन के लिए रिज्यूलेशन भेजा है । हम लोग फाइनली यही चाहते हैं । जब राज्यों का डेवलेपमेंट होगा, तब सैन्टर का डेवलेपमेंट होगा । केन्द्र और राज्यों को मिलकर काम करने की जरूरत है । हमें उस एंगल से आगे बढ़ना चाहिए । पूरे देश के लोग भारतवासी हैं । हम भी इंडियन हैं । तेलंगाना में पैदा हुए हैं, इसका मतलब यह नहीं है कि तेलंगाना से कुछ ले लिया जाए । मैं आपके माध्यम से सरकार की दृष्टि में इसको लाना चाहता हूं।
धन्यवाद ।
श्री राजीव प्रताप रूडी (सारण) :महोदया, आज मेरे लिए सचमुच एक बहुत ही सुखद दिन है । ऐसा इसलिए है, क्योंकि 7 साल पहले इस सदन में जब देश के माननीय प्रधानमंत्री जी पहली बार जीतकर आए थे, तो मुझे महामहिम राष्ट्रपति जी के अभिभाषण पर बोलने का मौका प्राप्त हुआ था । जब मैं 7 सालों के बाद इस पर बोल रहा हूं, तो 7 सालों के बाद भी मुझे गर्व महसूस हो रहा है । मैं एक और चीज के बारे में याद दिलाना चाहूंगा, क्योंकि यह बहुत ही महत्वपूर्ण है । देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉक्टर राजेन्द्र प्रसाद जी थे । जब देश के पहले महामहिम राष्ट्रपति जी का अभिभाषण हुआ होगा, चूंकि वह बिहार से बिलॉन्ग करते थे।…(व्यवधान) मैडम, मैं चाहता हूं कि आप हाउस को आर्डर में लाएं।…(व्यवधान)
मैडम, यह सच है कि जब दिनांक 16 मई, 1952 को राष्ट्रपति जी का पहला अभिभाषण हुआ होगा और उस समय डॉ. राजेन्द्र प्रसाद जी, जो कि छपरा की घरती, सारण की धरती से, बिहार की धरती से आते थे, वे देश के पहले राष्ट्रपति थे । उन्होंने एक नमन के साथ और उसी परंपरा को लेकर अपना अभिभाषण दिया था । मैं देश के प्रथम राष्ट्रपति जी का पहला वाक्य बोलना चाहूंगा । उन्होंने आजादी के बाद अपने पहले भाषण में कहा था कि ‘भाग्य हमें बुला रहा है और यह हमारा काम है कि हम उसके निमंत्रण को स्वीकार करें।’ मैं तो ऐसा ही समझता हूँ कि भाग्य ने देश को श्री नरेन्द्र मोदी जी जैसा प्रधान मंत्री दिया है और आज हम कामयाबी के बड़े रास्ते पर चल रहे हैं । भाग्य ने बुलाया और देश को श्री नरेन्द्र मोदी जी जैसा प्रधान मंत्री दिया । उनकी वाणी आज पूरी तरह से स्वस्थ दिख रही है ।
हम सब जब भी इस सदन में खड़े होते हैं तो यहां सवाल पूछते हैं । कांग्रेस के लोगों ने भी इस देश पर राज किया और बाकी थोड़े बहुत लोगों ने भी इस देश पर राज किया तो मैं यह बताना चाहता हूँ कि आखिर भारतीय जनता पार्टी का अर्थात हमारा लक्ष्य क्या है, हमारा सिद्धांत क्या है, हमार मूल क्या है और हम किस नींव पर चलते हैं । इसके मात्र दो धरातल हैं । यह कोई जटिल विषय नहीं है, जिस पर हम चर्चा कर रहे हैं । यह बड़ा ही सरल विषय है । जो दो पिलर्स हैं, वे क्या हैं? एक हमारे सोच विचारक दीन दयाल उपाध्याय जी हैं । उन्होंने एक आत्मा एवं मानवता दर्शन के बारे में चर्चा की है और वहां से उभरकर अंत्योद्य निकला । अब यह अंत्योद्य क्या है? भारतीय जनता पार्टी के लक्ष्य में और हर स्वयं सेवक संघ के कार्यकर्ता के लक्ष्य में क्या है? हमारे लक्ष्य में गरीबों की उन्नति, किसानों की समृद्धि और युवाओं की चिंता है । यह हमारा मूल रूप से देश को आगे लेकर चलने का और देश के बारे में इंक्लूसिव रास्ता अपनाने का तरीका है । अब दूसरा धरातल क्या था? वह था, श्यामा प्रसाद मुखर्जी, जो हमारे दल के सबसे पहले अध्यक्ष बने थे और वे पश्चिम बंगाल से आते थे । इन दो धाराओं पर हमारे सिद्धांत हैं, जिन पर देश के प्रधान मंत्री जी और पिछले60-70सालों से विश्वास करने वाले लोग हैं, जो इस रास्ते पर चलते हैं ।
मैं इस बार सदन में सुन रहा था कि सभी लोगों ने सभी विषय रखे और हमारे देश के प्रधान मंत्री जी ने इतने मानक स्थापित किए हैं कि अगर एक-एक मानक पर चर्चा की जाए।… (व्यवधान) मैडम, आप बताइए क्या इस तरह से हाउस चलेगा? इस कॉन्फ्रेंस में स्पीकर जी को बुलाइए।… (व्यवधान) यह डिसिप्लिन का मामला है।… (व्यवधान) आप स्पीकर साहब को बुलाइए, यहां पर बहुत इनडिसिप्लिन हो रहा है।… (व्यवधान) Is this the way you respect your colleagues, Mr. Raja? Mr. Maran, is this the way? … (Interruptions) You are a leader of the biggest party which is very small now. So, you must listen.
माननीय सभापति : रूडी जी,आप यहां देखकर बोलिए ।
… ( व्यवधान)
श्री राजीव प्रताप रूडी : मैडम, ठीक है । मैं अपनी बात बोलता हूँ । हम कई सारे सोशल फैक्टर्स के बारे में कहते हैं । मैं आपको दूसरे क्षेत्र के रूप में देश के प्रधान मंत्री जी के सपने के बारे में बताता हूँ । हम फाइनेंशियल इंक्लूजन के बारे में कहते हैं । हमारे सभी मित्रों ने कहा है कि जन-धन के तहत 50 करोड़ नए खाते खोल दिए गए हैं तो यह सब ठीक है, लेकिन एक दूसरी योजना जो देश के लोगों को मिली है, चूँकि देश के प्रधान मंत्री जी कोई योजना बनाते हैं, चाहे वह सुरक्षा बीमा योजना, अटल पेंशन योजना या जीवन ज्योति बीमा हो तो आखिर ये योजनाएं गरीबों के लिए, छोटे किसानों के लिए होती हैं । आप अमेरिका जैसे देश को देखिए, वहां पर इंश्योरेंस कवरेज को देखिए । हमें तो आगे बढ़ना है । अमेरिका में इंश्योरेंस का जो कवर है, वह 34 ट्रिलियन यूएस डॉलर है । हम तो5ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी की बात करते हैं । युनाइटेड किंगडम में जो इंश्योरेंस का कवरेज है, वह 3.5 ट्रिलियन यूएस डॉलर है । जापान में 1.7 ट्रिलियन डॉलर है और भारत में0.007है।
कहीं न कहीं देश के प्रधानमंत्री जी ने इस विषय को समझा होगा कि आखिर अगर धरती पर हर पांचवां-छठा व्यक्ति, चीन और भारत के साथ, विश्व की आधी आबादी यहां है । इसीलिए कल्पना करके, हमारे देश के भीतर जो साधन हैं, उन्होंने गरीबों के लिए दुनिया की सबसे बड़ी योजना लागू की, उसकी शुरुआत की । पहले इस देश में जब हम इंश्योरेंस की बात करते थे, तब सिर्फ बड़े लोग ही सोचते थे कि इंश्योरेंस होगा । आज देश का गरीब, किसान और मजदूर भी इंश्योरेंस का लाभ उठा सकता है । यह कल्पना है और अमेरिका तक पहुंचाएंगे, सौ साल लगेंगे, लेकिन देश के प्रधानमंत्री जी ने इंश्योरेंस की परिभाषा को फिर से डिफाइन कर दिया है । मैं पिछली सरकार के बारे में कोई टिप्पणी नहीं करना चाहूंगा, लेकिन डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर की बात है । ये योजनाएं भारत सरकार की योजनाएं हैं और हमारी सरकार इनक्लूसिव काम करती है और इनक्लूसिव योजनाओं में 312 योजनाएं हैं । पिछले तीस वर्षों से हम लोग भी देश की राजनीति देख रहे हैं, लेकिन वर्ष 2014 से लेकर अब तक, इतनी बड़ी मात्रा में पैसा, बीच के बिचौलियों को हटाकर, दलालों को हटाकर, टाउट्स को हटाकर, एकाउण्ट में भेजने की जो व्यवस्था की गई है, आज उसका लाभ सभी को दिख रहा है । लगभग20 लाख लोगों के एकाउण्ट में पैसा गया है । कभी किसी ने इसकी कल्पना नहीं की थी ।
एकाउण्ट में पैसे भेजने का एक लाभ यह हुआ कि सरकार को भी उसका फायदा हो गया । सरकार ने देखा कि कितने फिक्टिशियस एकाउण्ट्स थे, बीच में कितने दलाल थे और इसमें सवा दो लाख करोड़ रुपये की बचत भी हो गई । इससे देश का लाभ हुआ और उसमें टेक्नोलॉजी का उपयोग हुआ । यह सोचने का तरीका है कि किस प्रकार से आज देश की सरकार सोचती है । मैं राष्ट्रपति जी के अभिभाषण के समर्थन में बोल रहा हूं, जिसमें उन्होंने देश का चित्र पूरे भारत के सामने रखा है । प्रधानमंत्री सड़क योजना की शायद कोई चर्चा न करे, लेकिन अटल बिहारी वाजपेयी जी की सरकार में वेंकैया नायडू जी उस समय ग्रामीण विकास मंत्री थे । वाजपेयी जी ने उनको बुलाकर कहा कि मैं देश की ग्रामीण सड़कों के बारे में चिन्तित हूं । उस समय एक योजना बनाई गई, यह वर्ष 2000 की योजना है । उस समय पीएमजीएसवाई योजना बनाई गई और आज 6 लाख80 हजार किलोमीटर सड़कों का निर्माण पूरे भारतवर्ष में हो गया है । क्या कभी कोई इसकी कल्पना कर सकता था? मैं आपको बताना चाहूंगा कि जब मैं छोटा था, पटना में एक हार्डिंग रोड है, जहां से एक बस चलती थी । मेरा गांव, जो मेरी कांस्टीट्वेंसी भी है, पटना से लगभग 80 किलोमीटर दूर है । वहां एक हार्डिंग पार्क बस स्टैंड था । वहां से एक बस चलती थी, जिस पर मेरी मां गांव जाती थी । उस बस का नाम था – वन डे सर्विस । ललन बाबू, पता नहीं आपको याद है या नहीं । सुबह पांच बजे वह बस चलती थी, लगभग एक या दो बजे दोपहर में गांव पहुंचती थी, फिर वहां से तीन बजे चलकर, लगभग70 किलोमीटर दूरी तय करते हुए वह बस रात आठ बजे तक पटना वापस आती थी । उसका नाम था – वन डे सर्विस । आज उस ‘वन डे सर्विस’ से मैं पटना से अपने गांव50 मिनट में पहुंच जाता हूं । यह है उस प्रगति का मार्ग, जो देश की सरकार ने और देश के प्रधानमंत्री जी ने दिखाया है ।
‘भारतमाला’ की भी कल्पना अटल बिहारी वाजपेयी जी ने की थी, वर्ष 1999 में गोल्डन क्वाड्रिलैटरल की चर्चा की थी, नॉर्थ-साउथ-ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर की चर्चा की थी । जो एक बड़ी रिसर्च है, उसके पूरे आंकड़े बताते हैं कि on every dollar spent, the return is more than 20 per cent. और Density of roads in India is more than that in Germany and France. यह बात कभी कोई बोलता नहीं होगा, लेकिन देश के प्रधानमंत्री जी जानते हैं कि हमारा लक्ष्य क्या है । आज डेंसिटी की बात होती है तो सड़कों का घनत्व पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा है । यही उपलब्धि है, देश यही चाहता था और देश का यही सपना था । आज दुनिया में भारत का रोड नेटवर्क सेकण्ड लार्जेस्ट है । सबसे पहले स्थान पर अमेरिका है और अमेरिका के बाद भारत है । इस श्रेणी में हम दूसरे स्थान पर खड़े हैं । भारत में सड़कों की लम्बाई चाइना से भी ज्यादा है । इस बात को मानने के लिए तैयार नहीं है, लेकिन आज चीन से ज्यादा भारत की सड़कों की लम्बाई है । अमेरिका में सड़कों की लम्बाई 67 लाख किलोमीटर है, भारत उससे सिर्फ पांच लाख किलोमीटर कम है । भारत में सड़कों की लम्बाई 62 लाख किलोमीटर है और चाइना की मात्र 51 लाख किलोमीटर है । यही उपलब्धि है, यही लोगों का सपना था, यही तो लोगों ने आजादी के बाद मांगा था । मैं एक उल्लेख करना चाहूंगा । अमेरिका के बारे में कहते हैं, वह सचमुच सबसे बड़ा देश है, रिचेस्ट देश है, सबसे अमीर देश है । वहां के राष्ट्रपति जॉन एफ. कैनेडी ने एक बार कहा था, इस बात को सभी लोग कहते हैं और हमें इसे बार-बार दोहराना चाहिए । उन्होंने कहा था कि America does not have good roads because it is rich, America is rich because it has good roads. यही तो बात है । कहीं न कहीं ऐसे स्टेट्समैन, ऐसे पॉलिटिशियन्स, ऐसे लोगों के स्टेटमेंट्स हमारे दिल में हैं और हमारी सरकार– चाहे अटल बिहारी वाजपेयी जी रहे हों या वर्तमान प्रधानमंत्री जी हों, उस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए काम करते हैं ।
महोदया, स्मार्ट सिटी की बात है । हम तो कहते हैं कि नाला बना दीजिए, यह कर दीजिए, वह कर दीजिए । इसमें बिहार सरकार लगी रहती है, ललन जी और हम सब लोग लगे रहते हैं । देश के प्रधान मंत्री जब स्मार्ट सिटीज़ की बात करते हैं तो वह लेख क्या है? स्मार्ट सिटीज़ का मतलब कोई कपड़े या पतलून पहनकर स्मार्ट थोड़े ही हो जाता है । स्मार्ट सिटीज़ में अन्य देशों के उन स्थानों से तुलना करते हैं, उनमें जैसे न्यूयार्क है । न्यूयार्क के लोगों के जो एसेट्स हैं, सरकार के नहीं, लोगों के जो एसेट्स हैं, उन एसेट्स में गाड़ी, घोड़ा, घर-मकान, दुकान वह तीन ट्रिलियन डॉलर्स है । उसके बाद लंदन शहर का 2.7 ट्रिलियन यूएस डॉलर्स और टोक्यो का 2.5 ट्रिलियन यूएस डॉलर्स है । भारत में अगर सबसे समृद्ध शहर माना जा रहा है तो वह मुंबई है । मुंबई में0.95ट्रिलियन है । हमारे बिहार के भी गरीब लोग मुंबई में मजदूरी करते हैं, चौकीदारी करते हैं ।
महोदया, आखिर ईज ऑफ लाइफ की किसी जगह पर व्यवस्था होती है । Mumbai accounts for six per cent of the Indian economy. अब आप बताइए, इसके लिए तो सोचना ही है । देश के प्रधान मंत्री जी ने जरूर सोचा होगा कि देश भर में स्मार्ट सिटीज बनाएं और कभी तो देश में शुरुआत करें । वहां सिटी स्मार्ट हो, वहां के लोगों की आय बढ़े, वहां की इनकम बढ़े । Thirty per cent of income tax is from Mumbai and 35 per cent of customs duty is from Mumbai. आखिर ऐसा क्यों हुआ? एक शहर में क्या होना चाहिए । वहां पब्लिक ट्रांसपोर्ट होना चाहिए, मेट्रो होनी चाहिए, पावर होनी चाहिए, कोर बैंकिंग होनी चाहिए, कॉमर्शियल हब होना चाहिए, शिक्षा होनी चाहिए, एंटरटेनमेंट होना चाहिए, हॉस्पिटैलिटी होनी चाहिए । … (व्यवधान) अधीर साहब आप सुनिए तो सही । आपने तो कुछ किया नहीं है । आपने30-35 सालों में कुछ किया नहीं है तो आप क्या सुनेंगे? वहां टूरिज्म और हेल्थ केयर होना चाहिए । शहर की एक रेसिपी होती है । इसी तरह से जब किसी शहर की संरचना बनेगी तो निश्चित रूप से आने वाले दिनों में उस शहर के लोगों का भी कल्याण होगा और उस राज्य का भी कल्याण होगा ।
महोदया, मैं इस विषय को आगे लेकर चलता हूं । भारत में फास्टेस्ट ग्रोइंग सिटीज़ की बात है । भारत में ये तैयार हो रही हैं । अब हमें छपरा को करना है, आरा को करना है,भोजपुर को करना है, औरंगाबाद को करना है और हमें पटना को भी बढ़ाना है । सौ साल के भीतर, यानी आजादी के अगले 25 वर्षों में इन सब शहरों की जीडीपी उस राज्य की जीडीपी से ज्यादा हो जाएगी । यह उसकी तैयारी हो रही है । देश के प्रधान मंत्री जी की कल्पना है कि ऐसे 200-250 शहर बनें ।
त्रिची, तिरुपुर, राजकोट, नागपुर, आगरा, विजयवाड़ा, बेंगलुरु, सूरत, हैदराबाद, चेन्नई की जो इकॉनोमी है, वह अगले25 वर्षों में 9 गुना बढ़ जाएगी । देश में कुछ नहीं छूटना चाहिए, उसमें योजना बनानी चाहिए । देश के जो अंग छूट हुए हैं, इसलिए स्मार्ट सिटीज़ का कॉन्सेप्ट लाया गया । इसमें श्रीनगर, कश्मीर और जम्मू क्यों छूटेगा?देश के प्रधान मंत्री जी ने शुरुआत कर दी है और उसका लाभ भी प्रत्यक्ष रूप से दूसरे स्थानों पर दिख रहा है । यह स्मार्ट सिटीज़ का कॉन्सेप्ट है । यह नहीं है कि हम लोग सोचते हैं कि स्मार्ट सिटी में नाला बना दें ।
मैडम, सोलर अलाइन्स की बात है । मैं एक कमेटी में था और उसमें डॉक्टर संजय जायसवाल भी हैं । मुझे भी यह बात समझ में आई । एक विषय है । जब हम बचपन में देखते थे कि कोई वायरलैस लेकर जाता था तो हम लोगों को लगता था कि यह सिपाही बड़ा ताकतवर आदमी है, क्योंकि उसके पास वायरलैस है । वायरलैस बड़ी गजब की चीज़ लगती थी । वह वायरलैस पर बात करेगा, खबर कर देगा और पुलिस चली आएगी । आज यह जमाना आ गया है कि हरेक के हाथ में वायरलैस है । वह ताकत है, लेकिन उस समय कोई कल्पना नहीं कर रहा होता है कि हम बिना तार के भी पूरी दुनिया में बात कर लेंगे । अभी न्यूयार्क, शिकागो, लैटिन अमेरिका,साओ पोलो कहीं भी बात कर सकते हैं ।
देश के प्रधान मंत्री जी ने एक बहुत बड़ा सपना देखा है । हम नहीं रहेंगे और हम लोगों में से शायद कोई नहीं रहेगा, जब यह सपना साकार होगा । उन्होंने सपना देखा और उसकी शुरुआत की । उन्होंने कहा कि - Solar Alliance: One Sun, One World, One Grid. यह क्या है । आने वाली पीढ़ी में100, 200 या 300साल बाद सदन में कभी कोई इस रिकॉर्ड को निकालकर देखेगा तो कहेगा कि देश के प्रधान मंत्री जी ने एक सपना सोलर अलाइन्स का देखा था । यह क्या है? जब जापान और साउथ कोरिया में अंधेरा होता है तो इण्डिया में उजाला होता है, यानी वहां पर रोशनी है, यहां पर नहीं है । जब भारत में उजाला होता है तो इजिप्ट, इथोपिया और सूडान में अंधेरा होता है । यह सर्कल है । वहां की रोशनी, ताप, धूप, एनर्जी तार से चलकर भारत आएगी और जब भारत में सूर्योदय होगा तो यहां की ताप, एनर्जी तथा यहां की बिजली यूरोप में जाएगी । यह सौ साल के भीतर होने वाला है ।
आज से 100 साल बाद यह होने वाला है । देश के प्रधान मंत्री जी इंटरनेशनल सोलर एलायंस के बारे में कहते हैं, तो सभी लोग कहते हैं कि यह क्या है? यह आज के लिए नहीं है । आप 25 साल में परेशान हो गए, आपने 25 सालों के बजट में क्या कहा? देश के प्रधान मंत्री जी अगले हजार साल के लिए सोच रहे हैं । आप भी इस तरह से सोचिए । अगर देश का कोई नेता बड़ा सोचता है, तो आपको भी थोड़ा साथ चल कर बड़ी योजनाओं के बारे में विचार करना चाहिए । हम और आप उस समय नहीं रहेंगे, लेकिन अगर100और हजार साल की योजना के बारे में देश के प्रधान मंत्री जी या देश का कोई नेता यहां खड़ा हो कर कहता हैं, तो हम सभी को थोड़े क्षण रुक कर, उनको सलाम करना चाहिए ।
महोदया, मैं इंटरनेट के बारे में बहुत ही पर्सनल एक्सपीरिएंस शेयर करना चाहता हूं । शायद उस बच्ची से आपका परिचय हो । भारतनेट के माध्यम से गांव-गांव में इंटरनेट की सुविधा पहुंचाई जा रही है, उसमें थोड़ी-बहुत कमी है । नेट में बहुत सारे इश्यूज हैं । वह वर्ष 2014के पहले कैसे शुरू हुआ? पहले यह तय हुआ कि उसके लिए तार बिछा देना है, लेकिन खरीदार कोई नहीं है । घर-घर में पाइप लगा देना है लेकिन पानी का नल नहीं लगाना, ऐसी योजनाएं थीं, उनमें सुधार करते-करते, आज देश के छ: लाख गांवों में इंटरनेट पहुंचाने का काम किया जा रहा है । अभी बहुत बड़ा काम नहीं हो पाया है, लेकिन देश ने यह भी तय किया है कि अब 5G की सुविधा उपलब्ध होगी । यह 5G क्या करेगा? इसमें ऐसा क्या है कि देश में 5G आने पर परिवर्तन आ जाएगा । मैं एक छोटा-सा उदाहरण देता हूं । मेरा पास कोई बिजनेस नहीं है । मैं माननीय सांसद हूं, जो मेरे दोस्त-मित्र हैं और खेती से मेरा काम चलता है । मैं एक पायलेट भी हूं । कभी पार्लियामेंट से बाहर चला गया, तो मुझे लाइसेंस भी जिंदा रखना है । अभी जब मैं प्लेन लेकर जा रहा था, तो फारूख़ साहब भी वरिष्ठ पैसेंजर थे।…(व्यवधान) अभी मैं असली बात कहना चाहता हूं।…(व्यवधान) क्या आपको मेरी बात ठीक नहीं लग रही है?…(व्यवधान) मेरी 20 साल की बेटी मेरे पास आई।…(व्यवधान) आप अन्य बातों को छोड़ दीजिए, आप इंटरनेट की ताकत को देखिए । उसने कहा कि बाबा यह मेरी इंस्टाग्राम की रीच है । पहले उसने आकर पांच लाख कहा, दस लाख कहा, फिर कहा कि बीस लाख, फिर कहा तीस लाख कहा । उसने दो दिनों के बाद40लाख कहा और आप अनुमान नहीं लगा सकते हैं, आठ दिनों के भीतर इंस्टाग्राम पर मेरी बेटी की रीच दो करोड़ हो गई । अब मुझे लगा कि मैं इतने दिनों से पॉलिटिक्स कर रहा हूं, भाषण दे रहा हूं, लेकिन उसका क्या लाभ हुआ? आप उसके रीच को छोड़ दीजिए, उसका क्या है? मेरा कहीं कुछ आस-पास नहीं है । मैं देश के तमाम बच्चों से कह रहा हूं । घर बैठे वह कुछ करती है, मुझे समझ में नहीं आता है । She has become a micro-influencer. वह घर बैठे महीने में ढ़ाई से तीन लाख रुपए कमा रही है, लेकिन हमारी सैलरी सवा लाख रुपए भी नहीं है । यह इसकी ताकत है । देश के प्रधान मंत्री जी ऐसे ही अवसर पर ध्यान देते हैं । अभी वे गेमिंग के बारे में कह रहे हैं।…(व्यवधान)
सभापति महोदय, आप मेरी बात को सुनिए । मैं ये बातें बहुत पढ़ कर बता रहा हूं । आज यूट्यूब में क्या हो रहा है? देश के प्रधान मंत्री जी ने कहा है कि हम लोगों की कमाई करवाएंगे, किसानों की आय को दोगुना करेंगे । वह देश के लिए किसी भी पैकेज को नहीं छोड़ रहे हैं । वे कह रहे हैं कि तुम बढ़ो, तुम बढ़ो । यूट्यूब पर कोई आदमी कुकींग की वीडियो डालता है, कोई मेक-अप की वीडियो डालता है, कोई इंस्ट्रूमेंट की क्लासेज चलाता है, कोई कमेडी करता है, कोई विज्ञापन का काम करता है । इस बार बजट में निर्मला जी ने गेमिंग के बारे में कहा है । गेमिंग का बिजनेस और उसका सॉफ्टवेयर बनाना है, तो अगर भारत उसमें हब हो गया, तो अकेले पूरे भारत की इकोनॉमी वही संभाल लेगा, that would be 1.4 billion US dollar. आप उनको इंटरनेट दे दीजिए, वह तार दे दीजिए, गांव-गांव तक वह सॉफ्टवेयर दे दीजिए और देखिए कि भारत की बुद्धिमता कैसे निखर कर सामने आती है ।
देश के प्रधान मंत्री जी नहीं रहने के बाद की स्थिति की भी तैयारी देश को करा रहे हैं । आप यह देख लीजिए । फेसबुक के इस र्क्वाटर का रेवेन्यू 34 बिलियन यूएस डॉलर है । अब अगर तार की यह ताकत है, इंटरनेट की यह ताकत है, तो देश के प्रधान मंत्री जी ठीक कह रहे हैं । आप छ:लाख गांवों तक इंटरनेट पहुंचाओ । देश की आमदनी वहां से आएगी । हमारे पावर मिनिस्टर साहब बैठे हुए हैं । ललन जी एक दम ठीक बात कह रहे थे कि एक समय था, जब वहां घर में कोई स्वीच ऑफ करके नहीं जाता था । उनको पता नहीं था कि बिहार में कब बिजली आ जाएगी । आज हमारे बिहार में गलती से कोई स्वीच ऑन करके नहीं छोड़ता है कि बिजली आ जाएगी और मीटर चलने लगेगा । आज मैं दावे के साथ कहता हूं कि सारण में पीक कंजम्पशन180मेगावाट है, जो यह बहुत सारे शहरों का है । जबकि हमारे यहां उद्योग नहीं है । ललन जी सही कह रहे थे । उसके कई कारण हैं ।
लेकिन हमने बिजली तो गांव-गांव तक पहुंचा दी है । हमारे यहाँ ग्रिड है । एक रसूलपुर ग्रिड है । अब हमको बिजली के लिए कांटी और बरौनी की चिन्ता नहीं करनी पड़ती है । हमारे यहाँ जो बिजली आती है, महाराष्ट्र से आती है, आपका राज्य है, मुझे गर्व है उस राज्य पर, वह आज 42 हजार मेगावाट बिजली बना रहा है, गुजरात41हजार मेगावाट बिजली बना रहा है, तमिलनाडु35हजार मेगावाट बिजली बना रहा है, उत्तर प्रदेश 30 हजार मेगावाट बना रहा है । मेरे घर में जो बिजली जल रही है, हो सकता है, वह महाराष्ट्र की हो, हो सकता है वह कर्नाटक की हो, हो सकता है वह उत्तर प्रदेश की हो, हो सकता है वह तमिलनाडु की हो । यह देश है । राजा साहब के प्रांत से बिजली निकली और अमनौर, छपरा, रसूलपुर के ग्रिड से होते हुए हमारे गांव तक पहुंची । यही तो नैशनल इंटिग्रेशन है । इसी प्रकार से बिजली पहुंच रही है । देश प्रगति कर रहा है । श्री आर.के. सिंह साहब, देश की सरकार ने ग्रिड पर कितना खर्च किया, वह दिखाई तो देगा नहीं, लेकिन आपके घरों में जो 24 घंटे बिजली जल रही है, वह एक बहुत बड़ी उपलब्धि है ।
अब मैं क्लाइमेट चेंज के विषय पर आना चाहता हूँ । प्रधानमंत्री जी ने क्या कहा? मेरा यह विषय है । मैं वर्षों से इस विषय पर चर्चा करता रहा हूँ । एक तरफ हम लोग बिजली के उत्पादन की बात कर रहे हैं, लेकिन जो पॉल्यूटर्स की बात है, जो सबसे ज्यादा कार्बन उत्सर्जन करेगा, आज अमेरिका सबसे ज्यादा उत्सर्जन कर रहा है । देश के प्रधानमंत्री ने उस पर रोक लगा दी है । कॉप-26में श्री भूपेन्द्र यादव जी गए, उस पर रोक लगा दी गई । कहा कि साहब आप कह रहे हैं कि देश को मिटिगेशन करना चाहिए यानी पेड़ लगाओ, कार्बन सिंक करो, ग्रीन हाउस अफेक्ट कम करो । देश के प्रधानमंत्री क्या कह रहे हैं, माननीय राष्ट्रपति जी क्या कह रहे हैं, हमें एडेप्टेशन करना है । हमें तो पावर की जरूरत है, आने वाले 40-50 सालों में हमें कोयले की जरूरत है, हम क्यों कम करेंगे? हम तो ग्रीन एनर्जी लाएंगे । लेकिन हमारी जो सस्टेनेबिलिटी की जरूरत है, आप उसको कैसे कम करना चाहते हैं।… (व्यवधान)
महोदया, अभी एक दो विषय छूट गए हैं । इसको समाप्त कर लेने दीजिए । अब मैं बहुत-से पन्नों को छोड़ रहा हूँ । मैं एक छोटे-से विषय पर आना चाहता हूँ ।
महोदया, * आप तो भोजपुरी कुछ-कुछ जानती होंगी ।कल मैं थोड़ा चिंतित हो गया ।अब आप पूछिये क्यों?* माननीय सभापति : आप बहुत ही अच्छा बोल रहे हैं । आपको हम दिनभर बोलने के लिए दे देंगे।
श्री राजीव प्रताप रूडी : हमारे एक वरिष्ठ नेता सदन के भीतर कल कुछ बोलकर गए । *(हमको समझ में नहीं आता है ।)* उन्होंने कहा, कौन इंडिया, अमीर-गरीब आदि बातें कही । हम लोग यह कहना चाह रहे हैं- इंडिया वर्सेज भारत ।Rich India and poor India. India and Bharat. अब हम लोगों को चिन्ता है । मैं डॉ. राजेन्द्र प्रसाद के वक्तव्य को पढ़ना चाहूंगा । यह उनका वर्ष1952 का एक वक्तव्य है । “हम लोगों में अनेक राजनीतिक और आर्थिक विषयों पर मतभेद होंगे और होने चाहिए, किन्तु यदि भारत और उसके लोगों के हित की हमारी प्रधान प्रेरणा हो और हम इस बात को समझें कि इस हित की प्राप्ति पारस्परिक सहयोग और प्रजातांत्रिक नीतियों से होगी।” इसे कुछ लोग नहीं समझना चाहते हैं ।
कल सदन में एक वरिष्ठ नेता ने कुछ टिप्पणियाँ कीं । हम लोग यह नहीं कहना चाहते हैं । उन्होंने कहा कि रिपब्लिक डे पर कोई गेस्ट ही नहीं आया । उनको पता नहीं कोविड का आभास है या नहीं? सेन्ट्रल एशियन रिपब्लिक्स के पाँच लोग आने वाले थे, उनके साथ अगले दिन ही देश के प्रधानमंत्री ने वर्चुअल कांफ्रेंस की । आपने कहा कि कोई नहीं आता है । देश की आजादी के बाद अमेरिका का राष्ट्रपति तो पहली बार आया । ओबामा जी कब आए? वे तब आए, जब देश के प्रधानमंत्री ने निमंत्रण दिया । 70साल में पहली बार, जो इतना मजबूत देश था, जिसके प्रति आप बहुत-से बातों को लेकर निर्भर भी रहते हैं, वह पहली बार भारत में क्यों आए? वे देश के प्रधानमंत्री जी के समय में आए ।
माननीय सभापति:श्री रूडी जी, अब कनक्लूड कीजिए।
श्री राजीव प्रताप रूडी : *अब मुझे यह कहना है कि उनको बहुत सी बातें समझ में नहीं आती हैं । * माननीय सभापति:आप बहुत अच्छा बोल रहे हैं । अब थोड़ा हमको बोलने दीजिए।
श्री राजीव प्रताप रूडी : *मैं तो यह कहना चाहता हूं कि जो नेता वह बहुत-सी बातों को समझ नहीं पाते हैं । हम लोगों को यह दिक्कत हो जाती है कि वे बिना सोचे समझे और असलियत का पता लगाए बिना कुछ-कुछ बोल जाते हैं, तब हम लोगों को जवाब देना पड़ता है । * माननीय सभापति: * सब समझते हैं । * श्री राजीव प्रताप रूडी : महोदया, हम राष्ट्रपति जी के अभिभाषण, *ललन जी कुछ बात कह रहे थे*, वे सब बातें ठीक हैं । बिहार के मुख्यमंत्री अच्छा काम कर रहे हैं । श्री ललन जी उस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं, वे भी बहुत अच्छा काम कर रहे हैं ।
बिहार में एक भी ऐसा हवाई-अड्डा नहीं है, ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट नहीं है । देखिए, योगी जी ने उत्तर प्रदेश में पांच बना दिए ।… (व्यवधान)
माननीय सभापति: आप बैठ जाइए । आपका समय पूरा हो गया है।
… ( व्यवधान)
माननीय सभापति :अब बहुत हो गया, आपको ओवरटाइम दिया गया है ।
… ( व्यवधान)
श्री राजीव प्रताप रूडी : महोदया, हमें बिहार के विकास के लिए चिंता हो जाती है । … (व्यवधान) मुझे थोड़ा बिहार के बारे में भी बोलने दीजिए न । … (व्यवधान) आप भी बिहार से ही हैं । …(व्यवधान)
माननीय सभापति :राजीव प्रताप रूडी जी, अब विदेश घूम लिए हैं ।
… ( व्यवधान)
श्री राजीव प्रताप रूडी : महोदया, बिहार के बारे में भी थोड़ी चिंता करना जरूरी है, जैसा कि तेलंगाना के हमारे मित्र कह रहे थे । … (व्यवधान)
माननीय सभापति :आप मुझे तो बोल लेने दीजिए ।
… ( व्यवधान)
माननीय सभापति : आप बैठ जाइए । अभी कई माननीय सदस्यों को बोलना है।
… ( व्यवधान)
* SHRI S. R. PARTHIBAN (SALEM): I support the Motion of Thanks to the hon. President for the Address he has delivered to both the Houses of Parliament on 31st January 2022. I hardly find anything to appreciate in his entire speech to the Members of Parliament except two things. One is the couplet from Thirukkural which the hon. President quoted and the other is from Dr. Baba Saheb Ambedkar.
Hon. President elaborated the achievements in the field of healthcare in this COVID period. But this Government was not even ready to provide vaccine on their own earlier. Only after protest against this by my beloved leader Chief Minister of Tamil Nadu, Thalapathi M.K. Stalin, this Union Government provided vaccine at free of cost.
In his speech, he even didn't touch the farmer's agitation which went on for more than one year, opposing three farm laws. More than 700 famers sacrificed their lives in their protest. All three farm law Bills were withdrawn only for considering upcoming States Elections in five States. At the time of withdrawal, this Government said that the MSP on agricultural product will be ensured. But in the President's Speech not even a single word was spoken on this.
This Government is proudly shouting about the economic development of the nation during the COVID. But according to the Oxfam Report, 143 billionaires collectively own the 60 per cent of the Indian wealth. So, in a true sense, it is not the real growth. The rich is getting richer and the poor is getting poorer.
This Government claims that the GST collection is Rs. 1,14,000 crore in one month. But who has paid that? It is the poor and the middle class people. For whatever they buy, however they live, they pay tax to the Government. But what has happened? The Government did not address the very core issues like the crumbling MSME sector, the impact of the Covid, the increase in the prices of essential commodities. Rather, there has been an enormous increase in the prices of petroleum products -- 69 times in one year. This Government has earned Rs. 4.91 lakh crore by way of this. From 2014, this Government has earned Rs. 25 lakh crores by way of hiking the prices of petroleum products. There was no mention of all these issue in the hon. President’s Address.
After having collected the GST amount, the Union Government is not paying back the share to the State Governments in a timely manner.
On the matter of NEET, my DMK party which I belong to, had opposed the Bill from the first day. So far, 30 students have committed suicide in Tamil Nadu. Our Tamil Nadu State Government had passed a Resolution in the Assembly against the NEET and sent the same to the Tamil Nadu Governor. Several reminders were sent. Even our Tamil Nadu CM, Dr. M.K.Stalin met him and requested him to send the Bill to the President. But nothing happened.
I would request the Government to intervene in this matter and withdraw the NEET Bill or give exemption to Tamil Nadu from NEET for the welfare of our students.
With these words, I conclude. Thanking You.
* SHRI C.N. ANNADURAI (TIRUVANNAMALAI): I wish to express my views on the Motion of Thanks on the President’s Address.
We are in the third year of the pandemic caused by Corona virus. At the time when India is celebrating the Amrit Mahotsav on the occasion of 75 years of its Independence, the will power of every Indian creates immense confidence for India’s bright future. But the unemployment problem in India is a huge problem at present. The MSME sectors are not properly implementing the schemes. Everywhere there is poverty. The Government should look into these matters seriously and take time-bound steps to resolve the crisis.
Thank you.
*श्री सुधाकर तुकाराम श्रंगारे (लातूर): मैं संसद के समक्ष दिनांक 31 जनवरी, 2022 को माननीय राष्ट्रपति जी द्वारा दिए गए अभिभाषण पर अपने सहयोगी श्री हरीश द्विवेदी द्वारा प्रस्तुत किए गए धन्यवाद् प्रस्ताव का समर्थन करता हूं ।
देश की आजादी के 75 सालों के अवसर पर आजादी का अमृत महोत्सव मनाते हुए, हमारी सरकार का लक्ष्य है 'सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास' । बिना किसी विशेष वर्ग अथवा समुदाय के तुष्टीकरण के हमारी सरकार समाज के सभी वर्गों के विकास एवं हित के लिए पिछले लगभग8सालों से काम कर रही है । किसी एक समुदाय का ही हित देखना तथा अन्य समुदायों की अवहेलना हमारी सरकार की नीति नहीं है । विगत2साल भारत सहित पूरे विश्व के लिए चुनौती भरा रहा है । जहां एक ओर कोरोना जैसी वैश्विक महामारी थी, वहीं दूसरी ओर बाढ़, भूकम्प, तूफान, सीमा पर चीन व पाकिस्तान के साथ अप्रत्याशित तनाव जैसी चुनौतियां देश के सामने मुंह बाए खड़ी थीं । परन्तु हमारी सरकार ने जिस तरह डट कर इन चुनौतियों का सामना किया वह निश्चय ही अविश्वसनीय है । कोरोना काल में लॉकडाउन के कारण पिछले साल दोबारा हमारे प्रवासी श्रमिकों, कामगारों तथा निर्धन समाज के सामने रोजी रोटी का संकट पैदा हो गया था । कोरोना संकट के कारण अनेकों देशों में खादयान्नों की कमी के कारण वहां की जनता को भुखमरी का शिकार होना पड़ रहा है । परन्तु हमारी सरकार ने प्रधान मंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत जिस तरह कोरोना काल की पूरी 19 महीनों अवधि के दौरान 80 करोड़ नागरिकों को आर्थिक सहायता पहुंचाई तथा निःशुल्क अनाज की व्यवस्था की वह निश्चय ही सराहनीय है । उल्लेखनीय बात यह है कि अब इस योजना को मात्र2022तक बढ़ा दिया गया है । हमारी सरकार ने इन चुनौतियों का सामना ही नहीं किया अपितु पूरे विश्व में अनेक देशों की इन चुनौतियों का सामना करने में आवश्यक दवाईयों की आपूर्ति कर सहायता भी की । उल्लेखनीय बात यह है कि हमारा देश पहला ऐसा देश है जहां 90 प्रतिशत वयस्क आबादी को कोरोना से बचने के लिए वेक्सीनेशन लगाया जा चुका है । देश की इतनी विशाल आबादी को मुफत कोरोना वेक्सीन लगाना कोई छोटा प्रयास नहीं है अपितु अत्यधिक विकट कार्य है! कोरोना बीमारी को रोकने के लिए हमारे देश ने जिस तरह कई वेक्सीनों को सबसे कम कीमत पर तैयार किया तथा इस समय उनका बड़े पैमाने पर उत्पादन कर रहा है इसकी सराहना पूरे विश्व में हो रही है । इससे न केवल कीमती विदेशी मुद्रा की बचत हुई है अपितु आज भारत को पूरे विश्व में जिस सम्मान की नजर से देखा जा रहा है वैसा कभी नहीं हुआ । मैं इस अवसर पर अपने देश के वैज्ञानिकों के प्रति अपना सम्मान प्रकट करता हूं । यही नहीं हमारे चिकित्सा कर्मियों, पुलिस कर्मियों सहित सभी फंटलाइन कर्मचारियों ने जिस तरह कोरोना बीमारी का डटकर सामना किया तथा यहां तक कि कई कर्मचारियों ने तो अपनी जान तक बलिदान कर दी, वह निश्चय ही सराहना तथा श्रद्धा के पात्र हैं । सरकार के ठोस प्रयासों के कारण ही आज पूरे देशभर में 80000चिकित्सा केन्द्र कार्यरत हैं जहां करोड़ो निर्धन भारतीय नागरिकों को मुफत स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान की जाती हैं । आयुष्मान भारत के अधीन कार्यरत8000जन औषधि केन्द्र का कार्य भी सराहनीय है जहां उचित दामों पर सभी बीमारियों की दवाईयां उपलब्ध हैं।
हमारी सरकार ने साथ ही साथ अर्थव्यवस्था को पुनः पटरी पर लाने के लिए ठोस कदम उठाए जिसके अच्छे परिणाम अब दिखाई देने लगे हैं । अब तक के सबसे बड़े आर्थिक पैकेज की घोषणा की गई जिसमें समाज के सभी वर्गों का ध्यान रखा गया । सरकार के ये प्रयास फलीभूत होने शुरू हो गए हैं और हमारा आत्मनिर्भर भारत अभियान सफल होकर शीघ्र ही सभी क्षेत्रों में हमारा देश आत्म निर्भर हो जाएगा।
हमारे आदरणीय प्रधान मंत्री जी द्वारा दरियादिली दिखाते हुए तीनो कृषि कानूनों को वापस लेने के बावजूद, कतिपय कथित किसान यूनियनों द्वारा हमारी सरकार को बदनाम करने तथा किए जा रहे झूठे प्रचारों के जारी रहने से कुझे काफी वेदना हो रही है । सचाई तो यह है कि हमारी सरकार ने किसानों के कल्याण के लिए विगत 8 सालों में जितने अधिक हितकारी कदम उठाए हैं शायद ही उतने कदम हमारी आजादी के बाद के75सालों के दौरान कभी शायद ही किसी सरकार द्वारा उठाए गए हों । इनमें कुछ का यहां उल्लेख कर रहा हूं । जैसे सॉयल हेल्थ कार्ड, प्रधान मंत्री फसल बीमा योजना, प्रधान मंत्री कृषि सिंचाई योजना, नेशनल एग्रीकल्चर मार्केट - ई नाम, नेशनल मिशन फॉर सस्टेनेबल एग्रीकल्चर, ग्रामीण भंडारण योजना, तथा विशेषकर प्रधान मंत्री किसान सम्मान योजना जिसके तहत हर किसान को प्रतिवर्ष 6000रूप्यों की नकद आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है । हमारी सरकार ने विगत8सालों में विभिन्न फसलों के एम एस पी में जितनी अधिक वृद्धि की है उतनी शायद ही कभी हुई हो । हमारी सरकार स्वामीनाथन आयोग की सभी सिफारिशों को लागू करने के लिए प्रतिबद्ध हैं तथा उन्हें लागू करने में पूरी ताकत से जुटी हुई है । परन्तु फिर भी कतिपय विदेशी ताकतों, राजनीतिक दलों के बहकाये में आकर हमारे किसान देश की अब तक की सबसे उत्तम सरकार के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं । समय आ गया है कि हमें आज इन ताकतों को पहचान कर उनसे डटकर मुकाबला करना होगा।
प्रधान मंत्री आवास योजना के तहत अब तक 1 करोड़ 17 लाख मकानों के निर्माण किए जाने का अनुमोदन किया जा चुका है । यह कोई छोटा कार्य नहीं है । इसी तरह सरकार जल जीवन मिशन के तहत आगामी 2024तक देश के सभी निवासियों को शत प्रतिशत पेयजल पहुंचाने में प्रयास रत है वह निश्चय ही प्रशंसनीय है! यहां मैं अपने लातूर क्षेत्र की कतिपय समस्याओं की ओर सरकार का ध्यान आकर्षित करना चाहता हूं । मेरा लातूर संसदीय क्षेत्र विगत कई दशकों से भयंकर सूखे का सामना कर रहा है । इसके कारण इस क्षेत्र में न केवल पेयजल संकट व्याप्त है अपितु सिंचाई के लिए भी पानी उपलब्ध नहीं है । पानी की संकट के कारण खेती ही नहीं अपितु सभी तरह के उद्योग भी यहां से पलायन कर चुके हैं । यहां कोई भी बड़ा उद्योग नहीं है तथा यह क्षेत्र औद्योगिक रूप से पूरी तरह पिछड़ा हुआ क्षेत्र है । यही नहीं विगत दो सालों के दौरान अति वृष्टि व बाढ़ के कारण पहले से ही परेशान किसानों पर दोहरी मार पड़ी है । उनके खेतों में खड़ी हजारों हेक्टेयर की फसलें बरबाद हो गई, हजारों मवेशी बाढ़ में बह गए, सैंकड़ो मकान अति-वृष्टि के कारण धाराशायी हो गए एवं सैंकड़ो लोग असमय मृत्यु की भेंट चढ़ गए । मेरा सरकार से अनुरोध है कि लातूर को एसपायरेशनल जिलों की सूची में शामिल कर इसके समेकित विकास हेतु एक योजना बनाकर उसे शीघ्रातिशीघ्र कार्यान्वित किया जाए ताकि यहां की अर्थव्यवस्था पुनः पटरी पर लौट सके तथा रोजगार के नए अवसर पैदा हों तथा बेरोजगारी की समस्या से निजात मिल सके।
इसे देखते हुए तथा इस क्षेत्र के आर्थिक विकास के लिए हमारी सरकार ने कुछ समय पहले यहां लातूर रेल कोच फैक्ट्री की स्थापना करने का निश्चय किया । सरकार के त्वरित प्रयासों स`अब यह कोच फैक्ट्री पूरी तरह काम शुरू करने के लिए तैयार है तथा शीघ्र ही यहां रेल कोचों का उत्पादन शुरू हो जाएगा ऐसी आशा है । इसके लिए मैं हमारी सरकार का तहेदिल से धन्यवाद करता हूं।
सरकार से मेरा अनुरोध है कि यथा संभव लातूर कोच फैक्ट्री में कच्चे माल की आपूर्ति स्थानीय स्रोतों से की जाए ताकि यहां अनुषंगिक उद्योग लगें और इस क्षेत्र का औद्योगिक विकास के साथ ही साथ रोजगार के अवसर भी बढ़ें । यही नहीं मेरा सरकार यह भी अनुरोध है कि रेल कोच फैक्ट्री में की जाने वाली भर्ती में इस क्षेत्र के लोगों का विशेष ध्यान रखा जाए तथा कम से कम 70 प्रतिशत कर्मचारियों/कामगारों की भरती स्थानीय युवाओं में से की जाए ताकि इस क्षेत्र के युवाओं को बेरोजगारी के संकट से मुक्ति मिल सके ।
जैसा कि मैंने पहले उल्लेख किया, लातूर क्षेत्र विगत कई दशकों से भयंकर सूखे का सामना कर रहा है । यहां न तो पीने के लिए और न ही सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध है । मेरा सरकार से अनुरोध है कि वह राष्ट्रीय जल जीवन मिशन के हर घर जल हर घर नल कार्यक्रम के तहत यहां के शहरी तथा ग्रामीण इलाकों में पेयजल आपूर्ति की व्यवस्था पर बहुत धीमी गती से कार्य हो रहा है । इस में तेजी लाकर यहां के हर नागरिक को पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम के तहत लातूर के ग्रामीण क्षेत्रों में उज्जनी बांध से पाईप द्वारा सिंचाई तथा पेयजल आपूर्ति हेतु एक योजना शीघ्रातिशीघ्र बनाकर कार्यान्वित करे ताकि यहां की आम जनता को पेयजल की समस्या से छुटकारा मिल सके तथा किसानों को अपने खेतों की सिंचाई करने के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध हो सके । जलशक्ति मंत्रालय द्वारा लागू की जाने वाली जल संरक्षण व प्रबंधन योजना के तहत यहां लाटूर शहर तथा इसके ग्रामीण इलाकां में सिंचाई तथा पेयजल व्यवस्था को पुनर्जीवित किया जाए।
यहां महत्वपूर्ण मंजरी नदी है परन्तु पर्यावरणीय दुर्दशा के कारण यह पूरी तरह सूख गई है । इसके संरक्षण एवं पुनर्जीवन की आवश्यकता है ताकि यहां की सिंचाई एवं पेयजल की समस्या से छुटकारा पाया जा सके । मेरा सरकार से अनुरोध है कि इसके संरक्षण एवं पुनर्जीवन हेतु तत्काल कदम उठाए जाएं।
हालांकि लातूर जिले को कई दलहनों, विशेषकर गुणवत्तापूर्ण तुअर की दल, तिलहनों के उत्पादन के लिए देशभर में जाना जाता है तथा इससे संबंधित प्रसंस्करण उद्योग भी यहां पर हैं । परन्तु1993के भूकंप की तबाही तथा विगत10सालों के भयंकर सूखे के कारण यहां की अर्थव्यवस्था पूरी तरह ठप्प हो गई है तथा अनेक उद्योग तथा परिवार यहां से पलायन कर रहे हैं । अतः मेरा सरकार से अनुरोध है कि यहां की अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने हेतु तत्काल कदम उठाए जाएं ताकि यहां रोजगार के अवसर पैदा हों तथा लोगों का पलायन रूक सके।
लातूर जिले में पर्यटन एवं धार्मिक दृष्टि से अनेक महत्वपूर्ण स्थल हैं जहां पूरे देशभर से लाखों लोग आते हैं परन्तु आवश्यक पर्यटक सुविधाओं के अभाव में इनकी दशा बहुत अच्छी नहीं है । मुख्य स्थल इस प्रकार हैं :
Ø लातूर में पंचगंगा नदी के तट पर देवी महालक्ष्मी का मंदिर है जो भारत के प्रमुख शक्तिपीठों में से एक है Ø लातूर शहर को छत्रपति साहू जी महाराज जी ने बसाया था Ø उद्गीर का किला इतिहास एवं संस्कृति की धरोहर है । यहां सदाशिवराव भाऊ के नेतृत्व में हैदराबाद के निजाम के साथ युद्ध हुआ था Ø लातूर से 20 किलोमीटर दूर औसा में एक प्राचीन किला है जो जर्जर अवस्था में है । वीरनाथ महाराज का मंदिर यहां का मुख्य आकर्षण है Ø अहमदपुर तालुके में अक्कलकोट के गुरू स्वामी समर्थ महाराज की समाधि है । यहां माहुर की रेणुका देवी, महादेव, दत्ता और बालाजी मंदिर हैं Ø हेमदशली, निलंगा में 800 साल पुराना प्राचीन शिव मंदिर है जो ज्यामितिय डिजाइन के लिए जाना जाता है Ø खरोसा में छठी शताब्दी की गुफाएं है जो प्राचीन मूर्ति एवं प्रस्तर कला की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।
Ø शिरूर अनंतपाल में 11वी शताब्दी में बना शिव मंदिर है जो शिवलिंग तथा महिषासुर मर्दिनी की बेहद खूबसूरत प्रतिमाओं एवं प्रस्तर कला के लिए जाना जाता है।
मेरा सरकार से अनुरोध है कि धार्मिक व पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण उपरोक्त सभी स्थलों के ढांचागत विकास एवं वहां अंतर्राष्ट्रीय स्तर की पर्यटन सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए लातूर शहर को केन्द्र सरकार की 'अमृत' योजना के तहत लाकर यहां का ढांचागत विकास किया जाए ताकि यहां का सर्वांगीण विकास होने के साथ साथ यहां के युवाओं को बेहतर रोजगार के अवसर भी मुहैया हो सकें।
लातूर स्टेशन पर कोच मेंटीनेंस सुविधा नहीं है । इसी कारण विगत75सालों में यहां सेकिसी नई रेल सेवा शुरू नहीं की जा सकी है । वर्ष 2019में सरकार ने बजट में यहां पिट लाईन बिछाने की घोषणा की थी । परन्तु दुर्भाग्यवश यहां अभी तक भी पिट लाईन का निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया है । रेल कोच फैक्ट्री तथा सी आर पी एफ का केन्द्र होने के कारण, लातूर से हाल के सालों में यात्री व माल यातायात कई गुना बढ़ गया है तथा यहां से नई रेल सेवाएं शुरू किए जाने की तत्काल आवश्यकता है । अतः मेरा सरकार से अनुरोध है कि वर्ष 2022 -23 के बजट में पिट लाईन के निर्माण हेतु आवश्यक फंड प्रावधान करके चालू साल में लातूर स्टेशन पर पिट लाईन का निर्माण किया जाना सुनिश्चित किया जाए।
लातूर रोड से गुलबर्गा तक नई रेल लाइन बिछाने हेतु सर्वेक्षण कार्य पूरा हो चुका है । यह लाईन मेरे लाटूर क्षेत्र ही नहीं अपितु पूरे महाराष्ट्र व कर्नाटक के लोगों के लिए महत्वपूर्ण है । मेरा सरकार से अनुरोध है कि अब इस नई लाइन के लिए भूमि अधिग्रहण तथा निर्माण के लिए आगे कार्यवाही की जाए तथा इसके लिए बजट में आवश्यक धनराशि का प्रावधान किया जाए ।
रेलवे ने कुछ समय पहले यह भी निर्णय किया था कि कुरखुवाडी - लातूर - लातूर रोड रेलवे लाइन का दोहरीकरण तथा विद्युतीकरण किया जाए । यही नहीं इस लाइन को बोधन तक बढ़ाने का भी निर्णय हुआ था ताकि विभिन्न महत्वपूर्ण शहरों तक लाटूर का रेल संपर्क हो सके । ऐसा प्रतीत होत है किइस दिशा में अभी तक कोई ठोस कार्य नहीं हुआ है । मेरा सरकार से अनुरोध है कि इस परियोजना पर भी शीघ्रातिशीघ्र कार्यान्वयन किया जाए ताकि यहां के निवासियों को रेल सुविधाओं में बढ़ोत्तरी की जा सके।
प्रस्तावित नई लातूर रोड-नांदेड रेल लाइन का सर्वेक्षण कार्य पूरा हो चुका है तथा इस सर्वेक्षण की रिपोर्ट रेल बोर्ड के पास विचाराधीन है । मेरा सुझाव है कि इस लातूर रोड-नांदेड नई रेल लाईन को बढ़ाकर100km.की जाय इससे वर्धा यवतमाळ नांदेड ये रूट जुड़ जाएगा । यह मार्ग होने से वर्धा- यवतमाल मार्ग विदर्भ, मराठवाडा, पशिम महाराष्ट्र, कोकण, कर्नाटक, केरल किनारपट्टी से जुड़ जाएगा । यही नहीं यह मार्ग होने से पश्चिम महाराष्ट्र, कोकण, कर्नाटक एवम उत्तर भारत का अंतर 175km तक कम होगा, नांदेड पूणे का अंतर |10km, नागपुर- कोल्हापूर का अंतर 175km तथा नागपुर पूणे का अंतर 70kmतक कम होगा । बीदर से नांदेड जाने के लिए भी लातूर रोड से यह मार्ग प्रशस्त होगा । इसके अलावा, इससे नांदेड-लातूर रोड एवं लातूर इस मार्ग पर आने वाले सभी स्टेशनों के यात्रीयो की सुविधा होगी और रेल्वे के राजस्व में भी बढ़ोतरी होगी । अत: मेरा सरकार से अनुरोध है कि उपरोक्त सुझावों पर प्राथमिकता के आधार पर विचार कर प्रस्तावित नई लातूर रोड-नांदेड रेल लाईन पर कार्य शीघ्रातिशीय शुरू करवाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं तथा इस हेतु आवश्यक वित्तीय प्रावधान इस वर्ष2022के बजट में करवाने का कष्ट करें।
इन शब्दों के साथ मैं राष्ट्रपति के अभिभाषण पर लाए गए धन्यवाद् प्रस्ताव का पुनः समर्थन करता हूं तथा मुझे इस महत्वपूर्ण प्रस्ताव पर अपने विचार रखने का अवसर देने के लिए धन्यवाद ।
*श्री चन्देश्वर प्रसाद (जहानाबाद): मैं राष्ट्रपति जी के अभिभाषण पर धन्यवाद-प्रस्ताव का समर्थनकरता हूँ । मुझे इस अवसर परअपने विचार रखने का मौकादेने के लिए धन्यवाद। इस चर्चा में मुझे अपनी पार्टी का विचार रखने का अवसर देने के लिए मैं अपने नेता माननीय ललन सिंह जी को बहुत-बहुत धन्यवाद देता हूँ।
माननीय राष्ट्रपति जी ने अपने अभिभाषण में भारत सरकार की बहुत सारी उपलब्धियों का उल्लेख किया है। मैं उन उपलब्धियों के लिए सरकार का अभिनंदन करता हूँ जिनका लाभ आज अंतिम पंक्ति में खड़े अंतिम व्यक्ति तक पहुंच रहा है। महामहिम राष्ट्रपति ने अपने अभिभाषण में भारत की सुरक्षा और प्रगति के लिए केंद्र सरकार के द्वारा जो कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, योजनाएं बनाई जा रही हैं, उन सब का विस्तृत विवरण किया है। मैं राष्ट्रपति जी का हृदय से धन्यवाद करना चाहता हूँ कि उन्होंने केंद्र सरकार के सारे अच्छे कामों का उल्लेख किया है। आज समाज का प्रत्येक वर्ग और प्रत्येक व्यक्ति केंद्र सरकार के किसी ने किसी कार्यक्रम से अपने आपको जुड़ा हुआ पता है। समाज के जो वंचित और पिछड़े हैं उनके उत्थान और विकास के लिए सरकार प्रयत्न कर रही है। हमारे देश को आज़ादी मिले75वर्ष हो गए हैं और देश की विकास यात्रा में हम सभी देशवासियों को अपना योगदान देने की सख्त जरूरत है। वंचित, दलित, अति पिछड़े समाज को ससमय आरक्षण का लाभ, कोरोना प्रभावित परिवारों के लिए राहत पैकेज, महंगाई, बेरोजगारी, किसानों को राहत, बिहार को विशेष राज्य का दर्जा, कर्पूरी ठाकुर जी को भारत रत्न एवं जातीय जनगणना जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों को हल करने की अविलंब आवश्यकता है। आज हम भारत के सुरक्षा की बात करें, चाहे वह सुरक्षा हो आंतरिक सुरक्षा हो, खाद्य सुरक्षा हो, सामाजिक सुरक्षा हो, आर्थिक सुरक्षा हो या अन्य किसी भी प्रकार की सुरक्षा हो, केंद्र सरकार सब को सुरक्षा प्रदान करने के लिए भरसक प्रयत्न कर रही है। देश आज सबसे तेजी से विकसित होती अर्थव्यवस्था बन चुका है। डिजिटल इंडिया और डिजिटल इकॉनमी तेज गति से बढ़ा रहा है। भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 630बिलियन डॉलर है. भारत में विदेशी निवेश तेजी से बढ़ रहा है. निर्यात भी तेजी से बढ़ रहा है। इस वित्त वर्ष के पहले 7 महीनों में48बिलियन डॉलर का विदेशी निवेश आना, इसका प्रमाण है कि अंतरराष्ट्रीय निवेशक भारत के विकास को लेकर आश्वस्त हैं।
भारत ने अभी हाल में कोरोना महामारी के संकट का जिस प्रकार सामना किया है वह काबिले तारीफ है। राज्य सरकारों एवं केंद्र सरकार के प्रयास एवं देशवासियों का जो मनोबल है उन्होंने हमें इस संकट से मुक्ति दिलाने में काफी सहायता की है। वैक्सीन डोज़ लगाने के कारण कोरोना पर काफी हद तक काबू किया गया है। अभी भी यह कोरोना संकट पूर्ण रूप से समाप्त नहीं हुआ है लेकिन मुझे विश्वास है कि हम जल्दी ही इस संकट पर विजय प्राप्त कर लेंगे। भारत में बन रही वैक्सीन पूरी दुनिया को महामारी से मुक्त कराने और करोड़ों लोगों का जीवन बचाने में अहम भूमिका निभा रही है। 64हजार करोड़ रुपये की लागत से आयुष्मान भारत हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर, 80 हजार से ज्यादा हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर और आयुष्मान भारत कार्ड से लोगों को बहुत मदद मिली है। 8 हजार से अधिक जन औषधि केंद्र हैं, जहां सस्ती दवाएं मिलती हैं। भारत में दुनिया के सबसे पहले WHO ग्लोबल सेंटर ऑफ ट्रेडिशनल मेडिसन की स्थापना होने जा रही है. योग, आयुर्वेद और पारंपरिक चिकित्सा पद्धति की लोकप्रियता बढ़ रही है। देश से 6,600 करोड़ रुपए के आयुष उत्पादों को निर्यात होता था जो अब 11,000 करोड़ रुपए से अधिक हो गया है. इंफ्रास्ट्रक्चर-विकास के कार्यों को और अधिक गति प्रदान करने के लिए अलग-अलग मंत्रालयों के कामकाज को प्रधानमंत्री गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के रूप में एक साथ जोड़ा गया है। मार्च 2014 में हमारे देश में राष्ट्रीय राजमार्गों की कुल लंबाई 90 हजार किलोमीटर थी, जबकि आज उनकी लंबाई बढ़कर एक लाख चालीस हजार किलोमीटर से अधिक हो गई है । ग्रीन कॉरिडोर बनाए जा रहे हैं और सैकड़ों एक्सप्रेसवे बनाए जा रहे है। रक्षा उत्पादन में देश की आत्म-निर्भरता लगातार बढ़ रही है। भारत की अमूल्य धरोहरों को देश में वापस लाया गया है। बाबा साहेब के आदर्शों के अनुरूप सरकार की नीतियों में गांव, गरीब, पिछड़े, अनुसूचिजाति और जनजातियों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। बिहार सरकार और केंद्र सरकार अंबेडकर जी के सपनों को आगे बढ़ाते हुए व्यापक जन-कल्याण के काम कर रही हैं। सरकार गरीब की गरिमा बढ़ाने का काम कर रही है ।2करोड़ से अधिक पक्के घर गरीबों को मिले हैं । आवास योजना के तहत 1 करोड़ से ज्यादा घर स्वीकृत किए गए।6 करोड़ ग्रामीण घरों को पेयजल से जोड़ा गया है। स्वामित्व योजना लागू किया गया है जिसमें 27 हजार गांवों में करीब 40 लाख से ज़्यादा प्रॉपर्टी कार्ड दिए जा चुके हैं । इस योजना से प्रॉपर्टी विवाद कम होंगे। कोरोना के बावजूद2020-21में हमारे किसानों ने 30 करोड़ टन से अधिक खाद्यान्न और 33 करोड़ टन से अधिक बागवानी उत्पादों की पैदावार की है। कृषि से जुड़े निर्यात में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है। अटल भू जल योजना से 64 लाख हेक्टेयर सिंचाई क्षमता विकसित की गई है। भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 630बिलियन डॉलर से ऊपर है। देश में जीएसटी कलेक्शन प्रति माह 1 लाख करोड़ रुपए से ऊपर है। मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर में 1 लाख 97 हजार करोड़ से ज्यादा के निवेश से 14 अहम पीएलआई स्कीम शुरू की हैं। इसमें60लाख से रोजगार के अवसर मिलेंगे। देश के विकास में एमएसएमई बेहद अहम रहे हैं । इन्हें संकट से बचाने के लिए 3 लाख करोड़ रुपए के कोलेटरल फ्री लोन की व्यवस्था शुरू की है। इस योजना की सहायता से 13.5 लाख एमएसएमई यूनिट्स को जीवनदान दिया गया और 1.5 करोड़ रोजगार सुरक्षित किए गए। महात्मा गांधी और राम मनोहर लोहिया जी के गरीब पिछड़े शोषित वर्ग के उत्थान एवं अंत्योदय की जो अवधारणा है व श्रमिकों के उत्थान के साथ भी जुड़ी हुई है और हमारे महापुरुषों की उन्ही अवधारणाओं को हमारी बिहार और केंद्र की सरकार अमली जामा पहना रही हैं।
श्रमिक जब आर्थिक सामाजिक और शैक्षणिक रूप से मजबूत होता है तो भारत भी मजबूत हो जाएगा और प्रगति के नए नए सोपानों को प्राप्त कर सकेगा । गरीबों के लिए ढाई करोड़ से अधिक बिजली कनेक्शन निशुल्क दिए गए हैं । गरीबों का बिजली बिल कम हो इसके लिए 36 करोड़ से अधिक एलईडी बल्ब बांटे गए हैं। 1 प्रति माह के प्रीमियम पर प्रधानमंत्री सुरक्षा योजना दी गई है। 90पैसा प्रतिदिन की प्रीमियम पर9.3करोड़ लोगों को प्रधानमंत्री जीवन ज्योति योजना से जोड़ा गया है। 10करोड़ से ज्यादा घरों में शौचालय बनाए गए हैं। डीबीटी के माध्यम से पिछले वर्षों में तेरह लाख करोड़ से अधिक की राशि लाभार्थियों को डायरेक्ट ट्रांसफर की गई है। 2014 के बाद से लगातार केंद्र सरकार बिचौलियों को भ्रष्टाचार की जड़ों को समाप्त करने का काम कर रही है। मैं सरकार को धन्यवाद देना चाहता हूँ कि किसानों को अधिक सशक्त करने एवं उनकी आय को दोगुना करने के लिए केंद्र सरकार संकल्पित है। इन 7 वर्षों में सरकार ने जिन लोगों के जीवन को छुआ है वह अभूतपूर्व है। आज सरकार अपने कल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा दे रही है। देश की महिला महिलाएं लाभान्वित एवं आत्म निर्भर बन रही है। महिला सशक्तिकरण सरकार की प्राथमिकताओं में से एक है। उज्जवला योजना और बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ योजनाएं से बहुत फायदा मिला है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत देश में7करोड़ से अधिक महिला उद्यमी लगभग चार लाख सेल्फ हेल्प ग्रुप से जुड़े हुए हैं। विभिन्न बैंकों के माध्यम से इन महिला समूहों को पिछले 7 वर्षों में3लाख चालीस हजार करोड़ का ऋण दिया गया है। सरकार के अच्छे प्रदर्शन के बाबजूद, हमारे देश के सामने अभी कुछ चुनौतियां हैं: जैसे- महंगाई, बेरोजगारी। आज देश में 3.18करोड़ युवाओं के पास काम नहीं है, बेरोजगारी की दर लॉकडाउन के दौर से भी ज्यादा हो गया है। कुछ साल से अर्थव्यवस्था संतुलित तरीके से नहीं बढ़ी, यही प्रमुख कारण है । कंस्ट्रक्शन, टूरिज्म, हॉस्पिटैलिटी जैसे सेक्टरों का बिजनेस अर्थव्यवस्था की रफ्तार के मुकाबले कम रफ्तार से बढ़ा है। सरकार को रोजगार बढ़ाने के लिए विशेष प्रयास करना चाहिए और मनरेगा को न सिर्फ जारी रखना चाहिए, बल्कि इसके लिए बजट बढ़ाना चाहिए। सरकार को शहरी गरीबों को काम देने और उनकी आय बढ़ने के तरीके अपनाने होंगे। बिहार में आदरणीय नितीश बाबू और केंद्र में मोदी जी के नेतृत्व में देश में कल्याणकारी एवं ऐतिहासिक कार्य हुए हैं और लोगों को फायदा पहुंचा है। माननीय वित्त मंत्री को मैं कहूंगा कि बिहार सरकार को जो जीएसटी की राशि प्रदान होना बाकी है उस पर अभिलंब विचार करें। मैं आदरणीय प्रधानमंत्री जी से निवेदन करता हूँ कि बिहार को विशेष राज्य का दर्जा, कर्पूरी ठाकुर जी को भारत रत्न एवं जातीय जनगणना कराना सुनिश्चित करें। अंत में मैं कहना चाहता हूँ कि भारत सरकार पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ भारत के निर्माण के लिए काम कर रही है और हम सब आज गौरव और राहत का अनुभव कर रहे हैं। मैं राष्ट्रपति जी के अभिभाषण पर आभार और धन्यवाद व्यक्त करते अपनी बात समाप्त करता हूँ।
*SHRI LAVU SRIKRISHNA DEVARAYALU (NARASARAOPET): I am thankful for the opportunity given to present my views on the Motion of Thanks on the hon. President's Speech.
There were several commendable points which were covered in the speech and numerous avenues in which India has made considerable strides. Yet, there are a few matters I would like to draw attention to.
The hon. President mentioned that there has been a record-breaking agricultural yield this year. This goes to show that the foundation and backbone of our nation are our farmers. To match this yield, there was a record Government procurement of food grains, amounting to 433 lakh metric tonnes of wheat during the Rabi season and 900 lakh metric tonnes of paddy procured during Kharif season.
A terrible combination of a cyclone, heavy rains and floods caused immense destruction to life and property in Andhra Pradesh in 2021. Farming cycles were completely disrupted. Combined with this, our chilli farmers had to face a devastating thrips infestation which has pushed farmers to the brink.
I appreciate the moves of the Government in sending a team to Andhra Pradesh and neighbouring states to study the infestation in detail. They noted that Guntur and Prakasam districts in AP were the worst affected with 85-90 per cent yield loss.
In such circumstances, the Centre must give assistance and compensation to distraught farmers from the National Disaster Relief Fund. The AP Government has supported the farmers in every way they can, but they need Central aid in order to secure the complete welfare of the farmers.
Unemployment, which was at 7.9 per cent in December 2021, has become a severe problem plaguing our nation. The Honourable President mentioned that our start up culture is thriving in India, and there are over 40 new unicorns.
This is truly a commendable feat. Yet focus needs to be placed on the unskilled labour in the country, which is in the majority. In order to reap the benefits of our demographic dividend, we need to focus on a simultaneous project of skilling programmes and provision of jobs requiring unskilled labour.
The budget has placed a lot of focus on infrastructure development, but at the same time funds for programmes like MNREGA, which are needed to secure jobs for the rural poor especially, remained the same as last year at Rs. 78,000 crore. This is despite the fact that supplementary DFG required Rs. 25,000 crore for the efficient implementation of the programme.
Similarly, while celebrating the expansion of our start-up culture, we need to realize that projects like Start-up India have not been as successful as envisioned because unskilled labour in India outstrips skilled labour. Clear action plans in this regard would provide more direction and increase employment.
I applaud the hon. President for mentioning e-shram cards which are important for beneficiaries. At the same time, there was no mention of the gig economy consisting of platform and gig workers.
Profit seeking companies are exploiting labour through loopholes, overworking them without proving adequate welfare and benefits. Social security must be expanded and strengthened so that no employee, whether in the formal or informal sector, is subject to unfair or exploitative conditions of work.
Additionally, the four Labour Codes are yet to be fully operationalized. Undue delay in the same is harmful for our workers and people.
The Ken-Betwa river linkage project is an ambitious and important one which is completely being funded by the Centre. I would like to point out that the Polavaram Irrigation Project found no mention in the President's Speech and this has been a long pending demand of the people of Andhra, legally enshrined in the AP Reorganization Act, 2014.
At present, there is a pending amount of Rs. 2100 crores due to the State and revised estimates of project costs are yet to be accepted and covered by the Centre. Considering the economic losses faced by the State during bifurcation as well as during the pandemic, the support of the Centre is vital to successfully complete the project without further delay.
Additionally, the Honourable Finance Minister mentioned river linkage projects including Godavari-Krishna rivers. Such a project would ensure irrigation water to 17 lakh acres of agricultural land in the Krishna belt throughout the year.
The DPR for this is ready and I request that the process of achieving consensus amongst beneficiary states be driven by the Government at the earliest and work be started on such projects.
Considering the dire economic conditions of AP, and the magnitude of people set to benefit from such a project, I request the Government to centrally fund the Godavari-Krishna linkage along the same lines as the Ken-Betwa project. Such a step would go a long way towards restoring the alienation amongst the people of Andhra with respect to the Centre's unfulfilled promises.
The Government has taken several strides towards empowerment of women, and the hon. President mentioned several of these. However, there are still several states/UTs which do not have an emergency response system- 112 calling number in place. Such a delay hampers the safety and security of women.
The Nirbhaya Fund is also grossly underutilized. There is no clear action plan on how to effectively utilize these funds because bottlenecks preventing efficient implementation have not yet been identified. This is a continuing problem which defies the very intent of having such a Fund in the first place.
I would also like to point out that a nation-wide law for the safety and security of women, along the lines of the DISHA Act in Andhra Pradesh has been endorsed by several feminists and eminent personalities. I request that this be considered as well.
There has been significant stress on the development of Jammu and Kashmir and the North East. But not one mention was made for providing special category status to Andhra Pradesh. This remains a long overdue demand of our people, a right denied as per the AP Reorganization Act.
Despite material from the Finance Commission and Standing Committee on Commerce and Industry among other respected institutions, there has been no mention of any financial assistance to Andhra Pradesh even this year. This is a grave injustice to our people and against the ethos of equality that our country is built on.
There has been special reference made to the improved production of khadi, which has increased by three times. Andhra Pradesh, as you know, is a cotton hub. Despite numerous demands that a special train be started between Palnadu-Delhi to ease the transport and development of cotton, there is no clarity or movement on the matter. When the Government is enthusiastically supporting Kisan Rails, why can it not also promote transport of textile raw materials which would benefit the nation as a whole?
National Edible Palm Oil Mission has been awarded a corpus of Rs. 11,000 crores to improve domestic production. Palm Oil is a water and nutrient intensive crop, which is extremely unfriendly to the environment. The Government has not considered promoting oils indigenous to India, such as coconut, and reducing consumer dependence on palm oil. Such a demand can not only be fulfilled domestically, but it is also much cleaner for the environment being less water and fertilizer intensive.
Instead, there were discussions on raising the GST of coconut oil is a bottle less than a litre to 18 per cent from 5 per cent, regardless of its end use. This was not only a vast increase in GST, but it was unfairly singling coconut oil and patently against the interests of the Southern States which are the largest coconut producers.
As per the Maritime Vision Document, 2030, the National Waterway 4 in Andhra Pradesh is a priority route. Andhra Pradesh has also been identified as a high potential cluster for the development of a Global Mega Port. Additionally, it was flagged that that the State has high potential for coastal shipping of food grain and fertilizers across State borders. This necessitates the development of adequate waterfront infrastructure.
The hon. President's Speech mentioned the Sagarmala Project and the strides it has made in maritime infrastructure. There was, however, no specific mention of Andhra Pradesh and the development of its substantial maritime potential. Such an oversight is not only an injustice to our people but also hampers the achievement of India's full economic potential.
Lastly, I would like to mention education and the impact of the lockdown on our students. The hon. President praised the low cost of internet and smart phones and the penetration of 5G mobile connectivity amongst citizens. This, however, does not detract from the digital divide in the country.
According to a National Statistical Organization Report in 2020, only one in ten households have a computer whether a desktop, laptop or tablet. In cities, 42 per cent are internet enabled homes, whereas only 15 per cent are internet enabled in rural areas.
Students from financially insecure backgrounds do not have access to smart phones and data regularly and so cannot access online education. Private schools have recorded high dropout rates as parents cannot afford to send their children there anymore. In Andhra Pradesh, for example two lakh students have moved from private to government schools and 60,000 have dropped out altogether.
To redress this, the hon. CM has been pushing programmes like Amma Vodi and Nadu Nedu to bring children back into schools. The Centre must take steps similar to these and redress the existing digital divide in order to help students return to normalcy.
Thank you.
* ADV. ADOOR PRAKASH (ATTINGAL): The President’s Address to the Joint Session of the Parliament on 31st January, 2022 has not mentioned the critical issues the nation is facing today.
The President address deliberately keeps silence on the most important issue of border security. The reports of Chinese infrastructure development across the Line of Actual Control (LAC) and increased Chinese military deployment is a matter of great concern. But there is no mention of the same in the speech.
As usual, the Government is not ready to admit the seriousness of price rise. At 14.23 per cent, country's wholesale inflation rate in November 2021 was the highest in three decades. The prices of edible oil, pulses and LPG are continuously rising. No positive measures have been taken by the Government to address this issue burdening the common people. The Government is not ready to clarify on restoring the direct subsidy on LPG.
Rising unemployment is a worrying issue. As per latest reports, India has 53 million unemployed people and majority of them are women. However very little attention has been paid by the Government to address the issue of unemployment. Many states are witnessing protest of students on recruitment issues and the youth unrest is evident for the situation. COVID-19 crisis resulted in job loss for lakhs of Indian workers abroad, and forced them to return to the country. Most of them are uncertain about their return to the destination countries. This is going to be a biggest challenge but the Address keeps ignorance on this issue.
Another serious issue the nation witnessing today is the threat of drug addiction among youths. Seizure of large quantity of drugs are being reported from many parts of the country every day. Narcotics Control Bureau data reveals manifold increase in drug abuse and trafficking recent years. It is a matter of great concern that even school students are being addicted to drug abuse.
The impact of COVID-19 crisis was disastrous to the traditional fishing sector in the country. The traditional fishermen are struggling for survival due to job loss and no income. The coastal areas in the country are the most vulnerable to the adverse effects of climate change. No effective measures have been taken by the Government to address their issues during this crisis period. The demand for compensation to the traditional fishermen towards job loss or to implement a scheme for ensuring minimum employment in a year for them is not considering by the Government.
The Government is always boasting that strong foundation has been laid in the last seven years, to make this decade India's decade and this century India's century. If so, what is the purpose of disinvesting the profit-making public sector undertakings? The reality is that today the country is facing recession and huge employment loss.
We are on the occasion of 75th year of our Independence. Our nation is known for its unity in diversity. This unity was our strength in our freedom movement. But today, while we are celebrating 'Azadi Ka Amrit Mahotsav', the nation is witnessing growing intolerance in society.
In short, the President’s Address ignored the real issues and is nothing but a list of schemes of the Government. Neither the farmer, nor worker, nor youth, nor women or deprived section is happy about the Government.
माननीय सभापति: डॉ. डीएनवी सेंथिलकुमार. एस जी।
… ( व्यवधान)
18.33 hrs At this stage, Shri B. Manickam Tagore, Shri Dayanidhi Maran and some other hon. Members came and stood on the floor near the Table.
माननीय सभापति :बालू जी, आप बैठिए।
… ( व्यवधान)
माननीय सभापति : आप बोल चुके हैं,प्लीज़ बैठ जाइए । हाउस को डिस्टर्ब मत कीजिए।
… ( व्यवधान)
माननीय सभापति :बालू जी, आप बैठिए।
… ( व्यवधान)
माननीय सभापति : सुश्री महुआ मोइत्रा जी।
… ( व्यवधान)
माननीय सभापति :आप बोल चुके हैं, डिस्टर्ब मत कीजिए । ऐसा नहीं करना चाहिए।
… ( व्यवधान)
माननीय सभापति : क्या बात है?
… ( व्यवधान)
माननीय सभापति : ज़ीरो आवर में बोलिएगा।
… ( व्यवधान)
माननीय सभापति : यह क्या तरीका है? ऐसा नहीं होता है।
… ( व्यवधान)
माननीय सभापति :आप सब अपनी सीट्स पर जाइए । यह ठीक बात नहीं है।
… ( व्यवधान)
माननीय सभापति :मैं खड़ी हूं । आप अपनी सीट्स पर जाइए।
… ( व्यवधान)
माननीय सभापति : क्या बात है?यह उद्दंडता की सीमा है । क्या तरीका है? चिल्लाते रहिए।
… ( व्यवधान)
माननीय सभापति :एडवोकेट ए.एम. आरिफ जी – आप अपनी बात रखिए ।
… ( व्यवधान)
माननीय सभापति: श्री एम.ए. आरिफ जी, आप कृपया अपनी बात रखिए ।
… ( व्यवधान)
__________ 18.36 hrs (Hon. Speaker in the Chair) At this stage, Shri Dayanidhi Maran and some other hon. Members went back to their seats.
18.41½ hrs MOTION OF THANKS ON THE PRESIDENT’S ADDRESS – Contd.
SUSHRI MAHUA MOITRA (KRISHNANAGAR): Hon. Speaker Sir and my esteemed colleagues, I stand today to respond to the hon. President’s Address on behalf of my Party, the All India Trinamool Congress.
The President’s Address is the Government’s assessment of the state of the Union today. I stand before you to vehemently disagree with that assessment and to ask the most important question that faces us all. What is the kind of Republic that we want? What is the India that we want today? What is our idea of India that we are willing to stand up for, fight for, be abused for and get jailed for?
Ours is a living Constitution. It breaths as long as we are willing to breath life into it. Otherwise, it is just a piece of paper, black and white, that can be smudged into shades of grey by any majoritarian Government. An elected Government bears the people’s trust to uphold the Constitution both in letter as well as in spirit. If the Government fails, we all fail. So, it is not enough for Indians to sit back and watch and wish each other ‘A Happy Republic Day’.
This Government wants to alter history. They are fearful of the future and they mistrust the present. Robert F. Kennedy in the 1960s had warned of such hateful forces.
18.42 hrs (Shrimati Rama Devi in the Chair) The hon. President, early on, in his Address speaks about freedom fighters who secured India’s rights. He speaks of Guru Teg Bahadur, V.O. Chidambaram Pillai and Netaji Subhas Chandra Bose. But this is just a lip service. In reality, recalling India’s past, a past of decency, a past of plurality, a past of secularism makes this Government very, very insecure. So, they disallowed Republic Day floats from West Bengal, Tamil Nadu and Kerala: floats on Netaji who taught us to say ‘Jai Hind’; floats on Subramaniam Bharatiyar who said that even if Indians are divided, they are still the child of one mother; floats on V.O. Chidambaram Pillai who even when he was threatened with being imprisoned on sedition refused to stop his political activity; and floats on Sree Narayana Guru who picked up a rock and consecrated it as Eezhava Shiva. The invocation of an imaginary past however goes on and on. This Government has reinvented Savarkar as a freedom fighter. The apology letter he wrote to the British begging for release is now being recast as some kind of strategic master stroke. What about the appropriation of Bhagat Singh who was staunchly anti-fascist and what about the appropriation of Sardar Vallabhbhai Patel who banned the RSS after becoming the Home Minister?
The President’s Address refers to Netaji on multiple occasions. I will remind this Republic that this is the same Netaji who said that the Government of India should have an absolutely neutral and impartial attitude towards all religions. Would Netaji have approved of a Haridwar Dharam Sansad that issues blood curdling calls for Muslim genocide? On 14th June, 1938, in Cumilla, now in Bangladesh, Netaji said: “Communalism has raised its ugly head in an all-out nakedness.” Netaji’s Indian National Army’s insignia was Tipu Sultan’s springing tiger -- the same Tipu Sultan that you erased from our textbooks after whom you cannot bear to name roads or sports stadiums. The INA’s motto was three Urdu words – इत्तेहाद, इतमद और कुर्बानी, namely, Unity, Trust and Sacrifice. It is the same Urdu language that this Government is so delighted to replace with Hindi as the first and official language of Jammu and Kashmir.
The President’s Address refers to Khadi being a symbol of consciousness under the leadership of Bapu. But the unholy Dharam Sansad issue calls to kill Bapu all over again. You have already succeeded in glorifying Gandhi’s assassins. But just for the sake of those children who will grow up watching Beating the Retreat without his favourite hymn, let me remind you of some of the lyrics.
“Come not in terror, as the King of kings, But kind and good, with healing in Thy wings;
Tears for all woes, a heart for every plea.
Come, Friend of sinners, thus abide with me” The President’s Speech lauds these great personalities for fighting for our rights. But in reality, the masters of our Republic fear their own irrelevance, if in future India and Indians are actually guaranteed the rights and liberties enshrined in our Constitution.
The Freedom House Report, 2021 changes India’s status from free to partly free. According to the World Press Freedom Index, India retains 142nd spot out of 180 and remains one of the most dangerous places globally for journalists today. The Human Freedom Index, 2020, measuring personal, civic and economic freedoms puts India at 111th spot out of 160.
You fear a future India which is comfortable in its own skin. What do I mean by this? You fear an India which is comfortable with embracing … (Interruptions)
माननीय सभापति: महुआ जी, थोड़ा सा प्रेम से बोलिए । इतना गुस्सा नहीं करिए । अच्छे से बोलिए ।
सुश्री महुआ मोइत्रा : गुस्सा आता है, लेकिन क्या करें । ठीक है।… (व्यवधान) आप प्रेम से बोलने के लिए कह रही है । मैं रामधारी सिंह दिनकर जी की एक कविता बोलना चाहती हूं-
सहनशीलता, क्षमा, दया को तभी पूजता जग है, बल का दर्प चमकता उसके पीछे जब जगमग है।
सहनशीलता, क्षमा, सब देंगे, लेकिन पीछे थोड़ा सा बल का दर्प भी होना चाहिए।
माननीय सभापति : थोड़ा होना चाहिए, ज्यादा नहीं ।
सुश्री महुआ मोइत्रा : ठीक है । डेफिनेटली, हम आपकी बात मानते हैं । थोड़ा ले आते हैं, लेकिन बल का दर्प पीछे है और जग यह आपसे पूछता है।… (व्यवधान)
माननीय सभापति : सहनशीलता सबसे पहले है।
SUSHRI MAHUA MOITRA : You fear a future India which is comfortable in its own skin, which is comfortable with conflicting realities. So, you fear an India where a Jain boy can hide from home and enjoy a Kathi kabab on a street cart in Ahmedabad. So, what do you do? You forbid non-vegetarian street foods in Gujarat’s municipalities.
You fear a future where on the eve of an election, you may not be able to arm twist Government agencies to raid the Opposition leaders. So, you need to extend the tenure of the CBI needy chiefs depending on how they do your bidding.
You fear a future in which bureaucrats in a State cannot be bullied by the Centre. So, you amend the IAS Cadre rules. This fear of irrelevance in the future makes you behave the way you do.
You are not content with just our vote. You want to get inside our heads, inside our homes to tell us what to eat, what to wear, who to love. But your fear alone cannot keep the future at bay.
जिस सुबह की खातिर जुग जुग से हम सब मर मर कर जीते हैं, वह सुबह कभी तो आएगी।
इन भूखी प्यासी रूहों पर इक दिन तो करम फरमाएगी।
वह सुबह कभी तो आएगी।
Kennedy tells us that people who want to stop history in its tracks, mistrust the present. This Government mistrusts the very soul of our Republic, when it brings in an Act to link Aadhaar Cards to the right to vote because you are creating enormous possibilities to disenfranchise genuine voters.
You mistrust our ann daatas, who repeatedly told you not to bring in the farm laws. Even when you rolled them back, I think it was more out of your fear of losing 70 seats in Western UP than any remorse you felt for the 700 plus farmers who passed away. You have still not guaranteed MSP in writing, one of the main demands.
You mistrust the Jats, the Sikhs, anyone who stands up to you. And yet, the minute elections are round the corner, you shamelessly put on a pagdi and put out offers of alliances. But this time, the Choudharys will not forget. The Choudharys will not forget that the son of a sitting Minister of this Government mowed down five farmers and it took three full days to arrest him and that too, after a horrified Supreme Court stepped in.
I stand here today and ask you to remove the Minister of State, the Member of Parliament from Kheri, from office. Every minute that he continues in his chair is an affront not only to democracy but to the very decency and self-respect of our polity. I should not be standing here and saying this. Your conscience should be telling you this. जब नाश मनुज पर छाता है तो पहले विवेक मर जाता है।.
The way the masters of our Republic mistrust the present is most acutely illustrated by the Pegasus mess. … (Interruptions) Yes, I am going to say it because the people who are now in the Treasury Benches brought down an entire Government on 2G issue when 2G was still sub judice. So, do not give me this argument that the matter is sub judice, I will bring it up.
The Government stands accused of having spent tax payers’ money to buy technology to spy on its own citizens. To paraphrase a leading journalist, The New York Times is lying, The Wire is lying, Amnesty International is lying, the French Government is lying, the German Government is lying, the US Government is lying, WhatsApp and Apple, who have sued NSO, are lying, only this Government is in splendid isolation with the truth on Pegasus. A Minister calls it the supari media and the other stands up in this House and …*to us blatantly. How does this Government justify introducing a Data Protection Bill which empowers the State to exempt itself from every privacy obligation that the law imposes?
You have little respect for the most fundamental aspect of India that it is a Union of States with a federal structure. How else can you explain your patently illegal extension of the BSF jurisdiction upto 50 kms. into a State territory? You mistrust the journalist Siddique Kappan to an extent that you arrest him even before he visited Hathras and even before he has written his report. You mistrust comedian Munawar Faruqui before a joke he is even yet to crack.
The President’s Address says this Government has made a beginning to liberate Muslim women by removing triple talaq and Haj restrictions and yet, on New Year’s Day 2022 Muslim women in India awoke to the reality of being auctioned through the Bulli Bai app. This was the version 2.0 of 2021 Sulli Deals. It was only after a huge backlash that the Government took action and a few arrests were made. Muslims today are denied houses on rent, they are accused of being spreaders of COVID in India, they are economically boycotted, and they are forbidden from praying in designated spaces. This battle of 80 per cent versus 20 per cent that this Government has started risks ruining 100 per cent of our sacred Republic.
माननीय सभापति :अब आप समाप्त कीजिए।
… ( व्यवधान)
सुश्री महुआ मोइत्रा: मैडम, मेरे 13 मिनट्स हैं । ठीक है, मैं दो मिनट में बात खत्म करती हॅूं । … (व्यवधान)
According to the United Christian Forum, there have been 460 attacks on Christians in 2021 alone. Violent mobs have attacked churches, Christian congregations and Christmas celebrations in 16 towns and cities. I am filled with horror and shame as I repeat to you what Monirul Sheikh, an old man in my home of Karimpur Nadia told me last year. This is as follows:
“Ma, eta tomader nitir lorai, kintu amader bachar lorai.” It means, ‘Ma, for you this is a battle of ideology; but for us it is a war for survival.’ माननीय सभापति:श्री ई. टी. मोहम्मद बशीर जी, आप बोलिए।
… ( व्यवधान)
माननीय सभापति:आप बैठ जाइए।
… ( व्यवधान)
SUSHRI MAHUA MOITRA: Madam, let me finish my speech. Kindly give me one minute more. Thank you, Madam.
But today we, as Indians, need to realise one thing. If we have to save this Republic, the onus lies on us. The lawyers, actors, journalists, businessmen who say this country needs a change; to all of you, I say, you cannot choose the time of battle, the bugle has sounded, the citizens of our Republic need to fight now. यह सुबह हमीं से आएगी । To the Judiciary, I use my parliamentary privilege and say, you are all this country has as the last recourse and remedy; do not fail us; step into action. यह सुबह हमीं से आएगी । … (Interruptions)
माननीय सभापति: मोहम्मद बशीर जी, आप बोलना शुरू करें।
… ( व्यवधान)
माननीय सभापति : आपकी बात हो गई है । अब आप बैठ जाइए।
… ( व्यवधान)
माननीय सभापति : आप बाकी सदस्यों का भी ध्यान रखिए ।
… ( व्यवधान)
माननीय सभापति:बशीर जी, आप बोलिए ।
… ( व्यवधान)
माननीय सभापति:मैंने आपको चार मिनट ज्यादा दिए हैं ।
… ( व्यवधान)
SUSHRI MAHUA MOITRA : Madam, please allow me to complete my speech with this last sentence.
*श्रीमती रीती पाठक (सीधी): सरकार के द्वारा किये गए कार्यों एवं आगे आने वाले योजनाओं के बारे में महामहिम राष्ट्रपति जी के माध्यम से अभिभाषित किया गया है । संक्रमण कार्य के दौरान आदरणीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के द्वारा की गई व्यवस्थाओं जो सभी राज्यों के सरकारों के लिए निष्पक्ष रूप से की गई है इसका उल्लेख महामहिम राष्ट्रपति जी के माध्यम से किया गया । प्रधानमंत्री अन्न योजना के माध्यम से देश के 80 करोड़ लोगों को कच्चा राशन उपलब्ध कराया गया ।
प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना के माध्यम से सड़कों पर काम करने वाले खुदरा व्यापारियों को लाभ दिया गया ।
प्रधानमंत्री जी ने 3 करोड़ गरीब परिवारों को पक्का मकान उपलब्ध कराया एवं आगे आने वाले समय में 2024 हेतु मकान हेतु राशि उपलब्ध करायी गई है ।
जल जीवन मिशन जैसी योजना जो घर-घर तक पानी पहुंचाने का उद्देश्य लेकर चल रहा है जिसमें महिलाओं के लिए जल समिति हेतु विशेष भागीदारी सुनिश्चित किया गया है । आज के समय में मध्य प्रदेश से लेकर देश की अर्थव्यवस्था का स्वरूप मजबूती से हम सबको दिखाई दे रहा है ।
आयुष्मान भारत के माध्यम से आज देश के उन गरीब परिवारों को लाभ मिल रहा है जिनके सदस्यों की मृत्यु, इलाज या आर्थिक अभाव में हो जाया करती है ।
उज्जवला योजना के माध्यम से हमारी सरकार ने देशों की बहनों का सपना लकड़ी और कंडे से खाना बनाते हुए, गैस चूल्हा तक आने का सपना पूरा किया ।
गांव-गांव तक सौभाग्य योजना के माध्यम से बिजली पहुंचाने का काम, देश के प्रधानमंत्री के माध्यम से किया गया ।
एम.ई.एस.एम.ई. के माध्यम से देश के हजारो लाखों युवाओं को प्रशिक्षित कर उनके परिवार हेतु सक्षम बनाया गया ।
वन-धन योजना के द्वारा सरकार ने यथा को जन जातियों के लिए उनके हित हेतु साथ दिया । जन धन योजना के माध्यम से महिलाओं के खातों में राशि पहुंचाकर उनके सम्मान की चिंता की । साथ ही किसान सम्मान निधि के माध्यम से देश किसानों का हित का ध्यान रखा ।
सर्व हितैषी सरकार के माध्यम ने देश का सर्वांगीण विकास तय है ।
| *श्री बिद्युत बरन महतो (जमशेदपुर): मैं महामहिम राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद जी का धन्यवाद देना चाहता हूँ की उन्होंने अपने अभिभाषण में मुख्य रूप से स्पष्ट किया की हमने कोरोना महामारी का डट कर मुकाबला किया और देश को आर्थिक और शारीरिक नुक्सान नहीं दिया, हमारे देश के आर्थिक विकास की गति किसी भी प्रकार से कम नहीं होने पायेगी चाही कितनी भी बाधाएं अथवा रुकावटें आयें देश रुकने वाला नहीं है | उन्होंने कहा की कोरोना के इस महासंकट में हमने बड़े-बड़े देशों में खाद्यान्न की कमी और भूख की परेशानी देखी है लेकिन हमारी संवेदनशील सरकार ने इस बात का पूरा प्रयास किया कि 100 साल के इस सबसे बड़े संकट में कोई गरीब भूखा न रहे । महामहिम ने कहा कि कोरोना वायरस से पैदा हुई वैश्विक महामारी का ये तीसरा साल है । इस दौरान हमने भारत के लोगों की लोकतांत्रिक मूल्यों में आस्था, अनुशासन और कर्तव्यपरायणता को और मजबूत होते देखा है । साथ ही उन्होंने अपने संबोधन में युवाओं और डिजिटल इंडिया का एक बार फिर जिक्र किया है, राष्ट्रपति जी ने कहा कि हमारा स्टार्ट-अप ईको-सिस्टम, हमारे युवाओं के नेतृत्व में तेजी से आकार ले रही अनंत नई संभावनाओं का उदाहरण है |अपने भाषण में उन्होंने डिजिटल इंडिया और डिजिटल इकॉनमी के बढ़ते प्रसार के संदर्भ में देश के UPIप्लेटफार्म की सफलता के लिए सरकार के विज़न की प्रशंसा की है । इसी को लेकर उन्होंने अभिभाषण के माध्यम से यह जानकारी दी की दिसंबर, 2021 में देश में आठ लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का लेन-देन UPI के माध्यम से हुआ है । राष्ट्रपति जी ने कहा कि सरकार के निरंतर प्रयासों से भारत एक बार फिर विश्व की सर्वाधिक तेजी से विकसित हो रही अर्थव्यवस्थाओं में से एक बन गया है । सरकार की नीतियों की वजह से आज भारत उन देशों में है जहां इंटरनेट की कीमत सबसे कम है । यहां स्मार्ट फोन की कीमत भी सबसे कम है । इसका बहुत बड़ा लाभ भारत की नौजवान पीढ़ी को मिल रहा है । आज भारत विश्व में दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन निर्माता बनकर उभरा है । राष्ट्रपति जी ने कहा कि कोविड-19के खिलाफ लड़ाई में भारत के सामर्थ्य का प्रमाण कोविड वैक्सीनेशन प्रोग्राम में नजर आया है । हमने एक साल से भी कम समय में 150करोड़ से भी ज्यादा वैक्सीन डोज़ लगाने का रिकॉर्ड पार किया । आज देश में 90 प्रतिशत से अधिक वयस्क नागरिकों को टीके की एक डोज़ मिल चुकी है, जबकि 70 प्रतिशत से अधिक लोग दोनों डोज़ ले चुके हैं । भारत में बन रही वैक्सीन पूरी दुनिया को महामारी से मुक्त कराने और करोड़ों लोगों का जीवन बचाने में अहम भूमिका निभा रही है।
महामहिम ने अपने अभिभाषण में यह स्पष्ट किया की हमारी सरकार देश की सुरक्षा के प्रति विशेष सजग है एवं रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता पर सरकार का खास ध्यान है | वर्ष 2020-21में 87 फीसदी उत्पादों में मेक इन इंडिया को प्राथमिकता दी गई और इसके लिए हमारे देश में ही रक्षा क्षेत्र से सम्बंधित 209ऐसे सामानों का निर्माण होगा, जिनको विदेश से नहीं खरीदा जाएगा । हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के साथ83एलसीए तेजस फाइटर एयरक्राफ्ट के निर्माण हेतु अनुबंध किए गए हैं तथा सरकार द्वारा ऑर्डिनेन्स फैक्ट्रियों को7डिफेंस PSUका रूप देने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं | देश का विकास तभी हो सकेगा जब हमारा देश अच्छी सड़कों के द्वारा देश के हर एक भाग को जोड़ पायेगा इसलिए हमारे देश में निरंतर सडकों का जाल बिछाया जा रहा है चाहे वह कितनी ही दूर दराज में क्यों न हो अब देश के हर एक कोने में सड़क के माध्यम से देशवासी पहुँच सकते है इसी का जिक्र महामहिम ने अपने भाषण में किया है की देश में नेशनल हाईवे की लंबाई बढ़कर अब 1 लाख 40 हजार किलोमीटर हो चुकी है साथ ही ग्रीन कॉरिडोर बनाए जा रहे हैं । दिल्ली-मुंबई के बीच की दूरी को पाटने के लिए एक्सप्रेसवे पूरा होने के करीब है जो देश का सबसे लंबा एवं सुगम एक्सप्रेसवे होगा| हम सभी ने यह देखा और पाया है की कोरोना काल में सभी देश वासियों की अर्थव्यवस्था चरमरा गयी थी परन्तु सरकार के प्रयासों से कोरोना काल के बाद सूक्ष्म एवं लघु उद्योग के लिए 3 लाख करोड़ के कोलेट्रल फ्री लोन की व्यवस्था की गई थी जिसको बाद में 4 लाख करोड़ किया जा चुका है इससे छोटे उद्योगों को आगे बढ़ने में मदद मिल रही है । खादी की सफलता और लोकप्रियता का जिक्र भी महामहिम ने किया उन्होंने कहा की सरकार के प्रयासों से 2014की तुलना में देश में खादी की बिक्री तीन गुना बढ़ी है ।
विदेशों के साथ व्यापारिक रिश्तों का भी जिक्र उन्होंने किया है उन्होंने देश को अवगत करवाया की भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 630बिलियन डॉलर है तथा भारत में विदेशी निवेश तेजी से बढ़ रहा है, निर्यात भी तेजी से बढ़ रहा है । राष्ट्रपति जी ने कहा कि सरकार के निरंतर प्रयासों से भारत एक बार फिर विश्व की सर्वाधिक तेजी से विकसित हो रही अर्थव्यवस्थाओं में से एक बन गया है । इस वित्त वर्ष के पहले 7 महीनों में48बिलियन डॉलर का विदेशी निवेश आना, इसका प्रमाण है कि अंतरराष्ट्रीय निवेशक भारत के विकास को लेकर आश्वस्त हैं ।
हमारी सरकार किसानों के प्रति कितनी सजग है इसीको लेकर उन्होंने कहा की किसानों से भी सरकार द्वारा रिकॉर्ड फसल खरीदी की गई है एवं किसानों की आय वृद्धि के नए जरिए तैयार किए जा रहे हैं साथ ही कृषि से जुड़े निर्यात में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है । किसान बंधू अपनी फसल को दूर दराज स्थानों पर पहुंचा सकें इसके लिए सरकार द्वारा किसान रेल चलायी गयी है, इस रेल से किसानों को अत्यधिक फायदा हुआ है कोरोना काल में 1900 से ज्यादा किसान रेल चली । महामहिम ने यह बताया की हमारी सरकार के बारे में यह दिखता है कि सोच नई हो तो पुराने संसाधन भी काम आ सकते हैं|छोटे किसानों(कुल के 80 फीसदी) के हितों को सरकार ने प्रमुख तौर पर रखा है | सरकार आर्गेनिक खेती जैसे प्रयास भी कर रही है जो काफी सफल है और किसानों को इस खेती का अत्यधिक लाभ भी मिल रहा है । हमारी सरकार बारिश के जल को बचाने के लिए भी कई आवश्यक कदम उठा रही है|अटल भू जल योजना से 64 लाख हेक्टेयर सिंचाई क्षमता विकसित की गई है, उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के माध्यम से 11 करोड़ से अधिक किसान परिवारों को एक लाख अस्सी हजार करोड़ रुपए दिए गए हैं । इस निवेश से कृषि क्षेत्र में आज बड़े बदलाव दिखाई दे रहे हैं ।
महामहिम ने यह स्पष्ट किया की सरकार गरीब की गरिमा बढ़ाने का काम कर रही है|गरीबों के पास अपना घर हो इसी को लेकर सरकार के माध्यम से 2 करोड़ से अधिक पक्के घर गरीबों को मिले हैं प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना के तहत 1 करोड़ से ज्यादा घर स्वीकृत किए गए, जिससे देश की महिलाओं को विशेषकर गृहणियों को राहत मिल सकेगी| महामहिम ने कहा की कोरोना ने अनेकों मुश्किलें बढ़ाईं लोगों का घर से निकलना भी मुश्किल हो रहा था लेकिन भारत के वेक्सीन कार्यक्रम के माध्यम से आज भारत सबसे ज्यादा वैक्सीनेशन वाले देशों में से एक है, उन्होंने स्पष्ट किया कि कोरोना की तीसरी डोज और युवाओं को टीका भी दिया जा रहा है । साथ ही सरकार भविष्य की तैयारियों में जुटी है, इसलिए 64 हजार करोड़ रुपये से आयुष्मान भारत हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया गया है । उन्होंने यह बताया गया कि हमारे देश में8हजार से ज्यादा जन औषधि केंद्र हैं जिनमे सस्ती दवाएं मिलती हैं एवं देश में आयुर्वेद का अधिक प्रयोग हो और जनमानस निरोगी रहे इसके लिए आयुर्वेद को सरकार के प्रयासों से बढ़ावा दिया जा रहा है ।
महामहिम ने सरकार द्वारा रोजगार के नए नए आयाम उपलब्ध करवाने के संबंध में जानकारी देते हुए कहा है कि 2016के बाद से 56 अलग-अलग सेक्टरों में देश में 60,000से ज्यादा स्टार्ट-अप स्थापित हुए हैं, जिससे 6 लाख नई नौकरियां पैदा हुई हैं । हमारी सरकार रेहड़ी-पटरी वालों को लाभ पहुंचाने के लिए प्रधानमंत्री स्वानिधि योजना भी चला रही है । अब तक 28 लाख रेहड़ी-पटरी वालों को 2900 करोड़ रुपये से अधिक की आर्थिक सहायता मिल चुकी है । सरकार अब इन वेंडरों को ऑनलाइन कंपनियों से जोड़ रही है जिनसे सभी गरीब व्याक्तियों को लाभ तो मिलेगा ही देश भी सशक्त हो पायेगा | उन्होंने यह स्पष्ट किया की सरकार 'अंत्योदय' के मूल मंत्र में विश्वास करती है, जिसमें सामाजिक न्याय, समानता, सम्मान और समान अवसर हैं । पीएम आवास योजना, पीएम स्वानिधि, हर घर जल और पीएम स्वामित्व जैसी योजनाओं से देश भर के नागरिकों को काफी फायदा हो रहा है।
सरकार किस प्रकार देश के प्रत्येक नागरिक को शुद्ध जल उपलब्ध करवाने के लिए निरंतर निष्ठापूर्ण तरीके के प्रयत्नशील है इसका जिक्र करते हुए उन्होंने कहा की सरकार द्वारा“हर घर जल" पहुंचाने के उद्देश्य से शुरू किए गए जल जीवन मिशन ने लोगों के जीवन में बड़ा बदलाव लाना शुरू कर दिया है । हमारी सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था और देश के किसानों को सशक्त बनाने के लिए निरंतर काम कर रही है ।
कुल मिलाकर महामहिम ने अपने अभिभाषण में देश के साथ साथ विश्व को यह साफ़ सन्देश दे दिया है की भारत अब विकास के पथ पर अग्रसर हो चला है और अब किसी भी बाधा के द्वारा हमारा देश न रुकने वाला है और न ही झुकने वाला है और गरीबों के कल्याण के कार्य निरंतर चलते रहेंगे । मैं महामहिम जी को कोटि कोटि धन्यवाद देता हूँ और उनके अभिभाषण का पूर्णतः समर्थन करता हूं क्योंकि उन्होंने सरकार द्वारा किये जा रहे विकास कार्यों को संसद के समक्ष रहा ।
*श्री श्रीरंग आप्पा बारणे (मावल): माननीय राष्ट्रपति महोदय जी का अभिभाषण हर नए वित्त वर्ष के तरह इस वर्ष भी संसद में प्रस्तुत किया गया| अगर हम इस भाषण के हर पहलू पर विचार करें तो सरकार ने ऐसा अभिभाषण प्रस्तुत किया है कि देश में सब खुशहाल हैं किसी भी नागरिक को कोई समस्या नहीं है, और सरकार दिन रात जनता के हितो के कार्यों के लिए तत्पर है| सरकार द्वारा देश के जनता के साथ सत्ता में आने के लिए जो वादे किए गए थे, उनको पूरा करने के संदर्भ में इस अभिभाषण में कुछ नहीं कहा गया है।
सरकार ने इस अभिभाषण में बहुत सी बातो का उल्लेख नहीं किया है, आज देश में महंगाई बहुत बढ़ी है आम जनता को रोज इस्तेमाल होने वाली चीजों को खरीदना मुश्किल हो गया है । सरकार का कहना है कि हम देश के गरीबों को महीने में एक बार मुफ्त राशन दे रहे हैं लेकिन सरकार देश के मध्यम वर्ग के लिए कोई कार्य नहीं कर रही है जरूरी वस्तुओं के दाम बढ़ने से मध्यम वर्ग का रोज इस्तेमाल होने वाले आवश्यक सामान को खरीदना कठिन हो गया है । जबकि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित रिटेल हंगाई नवंबर में49फीसदी के स्तर पर पहुंच चुकी थी वहीं, थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) आधारित थोक महंगाई पिछले 12 साल के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुकी है । अभी देश थोक महंगाई 14.23फीसदी के स्तर पर है । इससे पहले साल 1992 में थोक महंगाई का आंकड़ा 13.8फीसदी के रिकॉर्ड स्तर पर था आज उपभोक्ताओं से जुड़ी रोज इस्तेमाल होने की चीजों के दामों में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है|नौकरी-पेशा आदमी, कारोबारी और श्रमिकों की कमाई के मुकाबले खर्च काफी बढ़ गया है सरकार ने इन सब पर कोई बात नहीं कही है महंगाई पर काबू पाने के लिए सरकार कोई रणनीति नहीं बना रही है।
आज सरकार किसान के लिए कार्य और सुविधा सहायता देने की बात कर रही है, सरकार ने कहा था कि वह 2022 तक देश के किसानो की आमदनी को दोगुनी करेगी, लेकिन सरकार इस मोर्चे पर पूरी तरह से विफल रही है, यह नही, सरकार ने तीन काले कृषि कानून लाकर देश के किसानो को विरोध प्रदर्शन के लिए मजबूर कर दिया किसान विरोध प्रदर्शन पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, छतीसगढ़ और करीब पूरे देश के किसानों द्वारा किया गया । सरकार द्वारा पारित तीन कृषि अधिनियमों के विरुद्ध यह प्रदर्शन चल रहा था | यह बात सरकार को भी मालूम है कि इन कानूनों के तुरंत बाद देश भर के किसानों ने इसका विरोध किया, और इसमें देश के हर राज्य के किसान शामिल थे इस आन्दोलन में हजारों किसानों ने दिल्ली में भी प्रदर्शन किया जबकि सरकार ने किसानो को रोकने के लिए पुलिस के साथ ही साथ वाटर कैनन और आंसू गैस का इस्तेमाल किया था । 26 नवम्बर को जब राष्ट्रव्यापी आम हड़ताल हुई तो इसमें लगभग25करोड़ लोग शामिल हुए थे । इस किसान आन्दोलन में लगभग देश के700से अधिक किसान शहीद हुए थे । इतना बड़ा आन्दोलन होने के बाद भी सरकार ने किसानो से जुड़े कानून को वापस नहीं लिया और अब सरकार ने उत्तर प्रदेश और पंजाब की विधान सभा चुनाव में अपनी होने के डर से यह कानून वापस लिए हैं।
देश में बेरोजगारी की समस्या दिन प्रतिदिन बढ़ रही है जब सरकारी भर्तियां निकलती हैं तो लाखों की संख्या में युवा उनके लिए आवेदन करते हैं । जबकि अभी जब रेलवे भर्तियों को लेकर जो गुस्सा देश के बेरोजगार योवओं में उबला है वह मौजूदा केंद्र के प्रति युवाओं का गुस्सा है | यह सरकार सालाना दो करोड़ नौकरियों के वादे के साथ सत्ता में आई थी । लेकिन जब से यह सरकार बनी है तब से देश में बेरोजगारी दर लगातार बढ़ रही है | जबकि कोरोना वायरस महामारी के चलते मार्च2020में यह बेरोगजारी का स्तर 23.5 प्रतिशत पर था | जबकि सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकॉनमी (CMIE) के आंकड़ों के मुताबिक तब से देश में बेरोजगारी दर 7 प्रतिशत से ऊपर ही बनी हुई है । दिसंबर में 5.2करोड़ से ज्यादा लोग बेरोजगार थे।
रेलवे परीक्षा में गड़बड़ी के बाद यूपी और बिहार में नौजवान प्रदर्शन कर रहे हैं । उनका विरोध का तरीका रेलवे स्टेशन पर उपद्रव और ट्रेनें जलाने तक पहुंच गया । हमें यह सोचना होगा कि क्या सिर्फ एक परीक्षा में हुई गड़बड़ी से ही ये लोग इतने नाराज हैं? जबकि इस तरह युवाओं में गुस्से का एक बड़ा कारण बेरोजगारी है, बेरोजगारी इस वक्त रिकॉर्ड स्तर पर है । आज देश का नवजवान सरकार के खिलाफ है।
बेरोजगारी का डेटा जारी करने वाली संस्था सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी(CMIE)के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर-दिसंबर 2021के दौरान देश में बेरोजगारों की कुल संख्या3.18करोड़ रही । इनमें 3.03 करोड़ की उम्र29साल से कम है । यह संख्या 2020में देशभर में लगे लॉकडाउन के समय से भी ज्यादा है । तब देश में2.93करोड़ युवा बेरोजगार थे।
खास बात यह है कि 3.03 करोड़ युवा तो वे हैं, जो काम की तलाश में हैं । 1.24करोड़ युवा ऐसे भी हैं, लेकिन रोजगार की तलास में इधर उधर जा रहे हैं । यदि इन्हें भी शामिल कर लें तो युवा बेरोजगारों की संख्या 4.27करोड़ हो जाती है । CMIE बेरोजगारी का डेटा जारी करने वाली इकलौती संस्था है । इसके डेटा का इस्तेमाल रिजर्व बैंक समेत केंद्र सरकार के विभाग भी करते थे।
देश में कुल बेरोजगारों में95प्रतिशत 29 साल से कम उम्र के युवा हैं । इसमें इस समय 1.18 करोड़ से ज्यादा ग्रेजुएट बेरोजगार हैं जबकि 1.24करोड़ ने तो काम की तलाश ही बंद कर दी है और पिछले 4 साल में 1.26करोड़ युवा बेरोजगार हुए हैं । इस अभिभाषण में कुछ नया नहीं है । सरकार ने बेरोजगारी के मुद्दे पर कोई बात ही नहीं की, यह सरकार की विफलता का अभिभाषण है।
अभिभाषण में कहा गया है कि पिछले कई महीनों से देश में जी एस टी कलेक्शन1लाख करोड़ रुपये से ऊपर बना है लेकिन बड़े दुःख की बात है कि सरकार पिछले दो सालों से राज्यों के जी एस टी का का पूरा हिस्सा नहीं दे रही है इसमें अकेले महाराष्ट्र राज्य का जी एस टी 37 हजार करोड़ रुपये देना बकाया है सरकार को इस विषय पर गंभीरता से सोच कर राज्यों को उनका जी एस टी अतिशीघ्र देना चाहिए ।
पहले जो भी वादे किए गए थे, उनको पूरा नहीं किया गया । केंद्र सरकार में कई पद खाली हैं, रेलवे की नियुक्तियों में धांधली हो गई, उस विषय को इसमें नहीं लिया गया।
हमारी अर्थव्यवस्था में कृषि क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका है जबकि जनसंख्या का एक बड़ा हिस्सा अभी भी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से खेती का काम करता है । यह कृषि क्षेत्र भोजन, चारा और कच्चे माल की सप्लाई करता है । आज भी हमारे देश में खेती बाड़ी लाखों लोगों जीवन यापन का पहला स्रोत है और देश में 40 प्रतिशत से अधिक अभी भी अपनी आजीविका के लिए कृषि पर निर्भर करता है।
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने 2022 तक किसानो की आमदनी को दोगुना करने का वादा किया था जबकि आज वास्तव में सच्चाई ठीक इसके विपरीत है अब यह वादा सिर्फ वादा रह गया है, जो पूरा होने वाला नहीं है । जबकि 2014 और 2019 के बीच कृषि से जुड़ी मजदूरी की दर में गिरावट आई थी | साल 2016 और 2020 के बीच खेती से जुड़ी आय में बढ़ोत्तरी के बजाए गिरावट आई । लेकिन सरकार ने इसके लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाये, अभिभाषण में किसानो के लिए बड़ी बड़ी बाते कही गई हैं लेकिन वास्तविकता इसके बिलकुल अलग है।
अभिभाषण में फसल बीमा योजना के अंतर्गत 1 लाख करोड़ से अधिक का मुवावजा दिए जाने की बात कही है जबकि आज भी देश भर में बहुत से ऐसे किसान है जिनको उनके फसल की बीमा का पैसा नहीं मिला है, जब भी कोई प्राकृतिक आपदा आती है तो किसानो की फसल नष्ट होती है, और जब किसान इसके मुवावजे के लिए आवेदन करता है तो बीमा करने वाली कम्पनियों के द्वारा किसानो को परेशान किया जाता है और उन्हें समय पर बीमा मुवावजा नहीं मिल पता है, सरकार को इस बात को भी संज्ञान में लेना चाहिए।
इस सरकार ने2022तक चार करोड़ घर बनाने का वादा किया था, उसका इस अभिभाषण में उल्लेख नहीं है जबकि श्रम से जुड़े काले कानूनों के बारे में भी इस अभिभाषण में कुछ नहीं कहा गया । अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के बच्चों के लिए छात्रवृत्ति बढ़ाने को लेकर जो वादा किया गया था, वो भी इसमें शामिल नहीं है।
चीन, पाकिस्तान के साथ जो आज हालत है उस विषय में सरकार ने कुछ भी नहीं कहा । नगालैंड में नागरिकों की हत्या हुई और इसके बारे में सरकार ने कोई अफसोस नहीं जताया । जम्मू-कश्मीर के आज केंद्र शासित प्रदेश है जम्मू कश्मीर को पुनः पूर्ण राज्य का दर्जा दिए जाने कोई घोषणा नहीं इस अभिभाषण में नहीं हुई । कोविड की दूसरी लहर में देश भर में लाखो मौते हुई, केंद्र सरकार ने उस समय सारा का सारा बोझ राज्य सरकारों पर डाल दिया, और जबकि केंद्र ने राज्यों को इस समय सहायता दिए जाने की आवश्यकता थी लेकिन केंद्र सरकार उस समय मौन रही, अतः सरकार को इस हेतु देश से माफ़ी मांगनी चाहिए।
*श्री गोपाल शेट्टी (मुम्बई उत्तर): महामहिम राष्ट्रपति महोदय जी के अभिभाषण का मैं हृदय से समर्थन करता हूं । राष्ट्रपति जी के अभिभाषण से यह परिलक्षित होता है कि केन्द्र सरकार "सबका साथ - सबका विकास' के अपने वायदे के अनुरूप देश को तेजी से आर्थिक विकास की नई राह पर ले जा रही है ।
मैं महामहिम राष्ट्रपति जी के इस वक्तव्य का समर्थन करता हूं, जिसमें उन्होंने कहा है कि कोविड महामारी ने पूरी दुनिया को प्रभावित किया और भारत में भी हमारे कई अपनों को हमसे छीन लिया गया । इन परिस्थितियों में केंद्र सरकार, राज्य सरकारें, स्थानीय सरकारें और प्रशासन, हमारे डॉक्टर, नर्स और स्वास्थ्य कार्यकर्ता, हमारे वैज्ञानिकों और उद्यमियों ने एक टीम के रूप में काम किया है । सरकार और नागरिकों के बीच यह आपसी विश्वास, समन्वय और सहयोग हमारे लोकतंत्र की ताकत का एक अभूतपूर्व उदाहरण है।
महामहिम राष्ट्रपति महोदय का यह कथन स्वागत योग्य है कि हमने एक साल से भी कम समय में150करोड़ से अधिक वैक्सीन खुराक देने के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है । आज हम दुनिया के उन अग्रणी देशों में शामिल हैं, जहां वैक्सीन की सबसे ज्यादा खुराक दी जाती है । इस अभियान की सफलता ने देश को एक ढाल प्रदान की है और हमारे नागरिकों को सुरक्षा प्रदान करने के साथ-साथ उनका मनोबल भी बढ़ाया है । आज देश के 90 प्रतिशत से अधिक वयस्क नागरिकों को टीके की पहली खुराक मिल चुकी है, जबकि70प्रतिशत से अधिक को दोनों खुराकें दी जा चुकी हैं । सरकार'हर घर दस्तक' अभियान के जरिए बाकी आबादी तक भी पहुंच रही है. इस माह से टीकाकरण कार्यक्रम में15से 18 वर्ष आयु वर्ग के किशोरों को भी शामिल किया गया है । अब तक देश में आपातकालीन उपयोग के लिए आठ टीकों को मंजूरी दी जा चुकी है । भारत में बन रहे तीन टीकों को आपातकालीन उपयोग के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन से भी मंजूरी मिल गई है । भारत में निर्मित ये टीके पूरी दुनिया को महामारी से मुक्त करने और करोड़ों लोगों की जान बचाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
राष्ट्रपति महोदय का यह कथन सही है कि कोरोना संकट के दौरान कई प्रमुख देशों ने खाद्यान्न की कमी का अनुभव किया है और भुखमरी का सामना किया है । लेकिन 100 वर्षों की सबसे भीषण महामारी के दौरान कोई भी भूखा न रहे । सरकार प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत प्रत्येक गरीब परिवार को हर महीने मुफ्त राशन उपलब्ध करा रही है । यह दो लाख साठ हजार करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ दुनिया का सबसे बड़ा खाद्य वितरण कार्यक्रम है, जो19महीनों के लिए 80 करोड़ लाभार्थियों तक पहुंचा है । सरकार ने वर्तमान परिस्थितियों के प्रति पूरी तरह संवेदनशील होने के कारण इस योजना को मार्च2022तक बढ़ा दिया है।
राष्ट्रपति महोदय का यह कथन स्वागत योग्य है कि कोरोना काल में भी गरीबों के स्वाभिमान को बढ़ाने और उनकी आजीविका की सुरक्षा के लिए भी सरकार पीएम-स्व-निधि योजना चला रही है । रेहड़ी-पटरी वालों के लिए यह योजना काफी उपयोगी साबित हो रही है । इस योजना के तहत 28 लाख रेहड़ी-पटरी वालों को 2900 करोड़ रुपये से अधिक की राशि प्रदान की गई है । सरकार इन स्ट्रीट वेंडर्स को ऑनलाइन फूड डिलीवरी कंपनियों से भी जोड़ रही है । इसके अलावा, सरकार ने मजदूरों के हितों की रक्षा के लिए ई-श्रम पोर्टल शुरू किया है है और अब तक 23 करोड़ से अधिक श्रमिक इससे जुड़ चुके हैं।
इसमें कोई संदेह नहीं है कि हमने विश्वव्यापी इस महामारी से श्रद्धेय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के केन्द्रीय नेतृत्व में सतत प्रयासों से ही बचने में सफल हुए है।
महामहिम राष्ट्रपति जी ने अपने अभिभाषण में अन्य अनेक महत्वपूर्ण बिंदुओं पर प्रकाश डाला है तथा माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के मूल मंत्र "सबका साथ-सबका विकास, सबका प्रयास"को दृष्टिगत रखते हुए केन्द्र सरकार के विभिन्न जरूरी सुविधाओं को देश के दूरदराज गांवों, गरीब परिवारों तथा मजदूरों तक पहुंचाए जाने के बारे में अपना दृष्टिकोण रखा है ।
माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने विगत वर्षों में जो योजनाएं कार्यान्वित की हैं, राष्ट्रपति महोदय ने उन पर भी प्रकाश डाला है । यह हम सभी देशवासियों के लिए खुशी की बात है कि हमारा देश इस वर्ष स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगांठ मनाने जा रहा है तथा इस वर्ष अमृत महोत्सव के अवसर पर सरकार ने देश के महापुरूषों को सम्मान देने की दृष्टि से राष्ट्र के ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों को विकसित किए जाने हेतु अनेक कदम उठाए हैं । स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान जिन महापुरूषों ने अपना सबकुछ न्यौछावर कर दिया तथा देश की एकता और अखंडता के लिए अपना जीवन समर्पित किया, ऐसे महापुरूषों को सम्मान देने का कार्य हमारे ऋषितुल्य प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने किया है ।
माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के केन्द्रीय नेतृत्व में सरदार वल्लभ भाई पटेल के विशाल व्यक्तिव्य के अनुरूप विश्व का सबसे बड़ा स्मारक बनाने का कार्य केवड़िया में किया गया और नेताजी सुभाष चन्द्र बोस का एक भव्य स्मारक राजधानी दिल्ली में इंडिया गेट के पास बनाया जा रहा है । सरकार स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को सम्मानित करने का अभूतपूर्व कार्य कर रही है।
माननीय प्रधानमंत्री जी ने लक्ष्य निर्धारित किया हुआ है कि देश के प्रत्येक गरीब परिवार के घर में बिजली पहुंचाई जाएगी । इसके लिए पंडित दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना बनाकर हर गांव तक विद्युत पहुंचाने का कार्य सरकार ने किया है तथा करोड़ों गरीब परिवार के घर में "सौभाग्य योजना"संचालित करके मुफ्त विद्युत का कनेक्शन और मीटर देने का अभूतपूर्व कार्य किया गया है तथा गरीब परिवारों के लिए मुफ्त आवास योजना बनाकर उन्हें घर का आश्रय दिया है ।
राष्ट्रपति महोदय का यह कथन स्वागत योग्य है कि सरकार देश के किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के लिए लगातार काम कर रही है । महामारी के बावजूद, हमारे किसानों ने 2020-21 में 30 करोड़ टन से अधिक खाद्यान्न और 33 करोड़ टन बागवानी उत्पादन का उत्पादन किया । सरकार ने रिकॉर्ड उत्पादन की बराबरी करने के लिए रिकॉर्ड खरीद की । सरकार ने रबी सीजन के दौरान 433 लाख मीट्रिक टन गेहूं की खरीद की, जिससे लगभग 50 लाख किसानों को लाभ हुआ । खरीफ सीजन के दौरान रिकॉर्ड मात्रा में लगभग 900लाख मीट्रिक टन धान की खरीद की गई, जिससे 1 करोड़ 30 लाख किसानों को लाभ हुआ । सरकार के प्रयासों से हमारा कृषि इंडिया और डिजिटल इकॉनमी के बढ़ते प्रसार के संदर्भ में देश के UPI platform की सफलता के लिए भी मैं सरकार के विज़न की प्रशंसा करूंगा । दिसम्बर2021 में देश में 8 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का लेन-देन UPI के माध्यम से हुआ है।
राष्ट्रपति महोदय ने बताया कि सरकार द्वारा64 हजार करोड़ रुपये की लागत से शुरू किया गया । प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत हेल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर मिशन एक सराहनीय उदाहरण है । इससे न केवल वर्तमान की स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी, बल्कि आने वाले संकटों के लिए भी देश को तैयार किया जा सकेगा । सरकार की संवेदनशील नीतियों के कारण देश में अब स्वास्थ्य सेवाएं जन साधारण तक आसानी से पहुंच रही हैं । 80 हजार से अधिक हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर्स और करोड़ों की संख्या में जारी आयुष्मान भारत कार्ड से गरीबों को इलाज में मदद मिली है।
सरकार के निरंतर प्रयासों से भारत एक बार फिर विश्व की सर्वाधिक तेजी से विकसित हो रही अर्थव्यवस्थाओं में से एक बन गया है । इस वित्त वर्ष के पहले 7महीनों में 48 बिलियन डॉलर का विदेशी निवेश आना, इसका प्रमाण है कि अंतरराष्ट्रीय निवेशक भारत के विकास को लेकर आश्वस्त हैं । भारत उन देशों में से एक है जिसके पास सबसे सस्ते इंटरनेट और मोबाइल फोन हैं । हम 5G विकसित करने पर भी काम कर रहे हैं । सेमीकंडक्टर पर हमारी पीएलआई योजना हमारे स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र और बढ़ावा देगी । आज भारत विश्व में दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन निर्माता बनकर उभरा है।
सरकार के नीतिगत निर्णय और प्रोत्साहन से विभिन्न पुलिस बलों में महिला पुलिसकर्मियों की संख्या में, 2014 के मुकाबले दोगुनी से ज्यादा बढ़ोतरी हो चुकी है । महिला सशक्तिकरण मेरी सरकार की उच्च प्राथमिकताओं में से एक है । बेटे-बेटी को समानता का दर्जा देते हुए मेरी सरकार ने महिलाओं के विवाह के लिए न्यूनतम आयु को18 वर्ष से बढ़ाकर पुरुषों के समान 21 वर्ष करने का विधेयक भी संसद में प्रस्तुत किया है । सरकार ने तीन तलाक को कानूनन अपराध घोषित कर समाज को इस कुप्रथा से मुक्त करने की शुरुआत की है । मुस्लिम महिलाओं पर केवल मेहरम के साथ ही हज यात्रा करने जैसे प्रतिबंधों को भी हटाया गया है।
माननीय राष्ट्रपति के भाषण से परिलक्षित होता है कि वर्तमान सरकार का जो मुख्य लक्ष्य है अंत्योदय, किसान, गाँव, गरीब, वंचित,दलित, आदिवासी का जीवन स्तर उपर उठे इसके साथ ही विकास सर्वसमावेशी हो, जिसमें आधुनिकता और प्रद्योगिकी का भी मेल हो । तमाम कारणों से उत्पन्न होने वाले प्रदूषण कम हो और पर्यावरण बेहतर बने । अन्न की गुणवत्ता बढ़े, सामाजिक न्याय के लिए तमाम योजनाएँ सही व्यक्ति तक पहुंचे इसके लिए सरकार लगातार सफल प्रयास करते हुए भारत और भारतियों को लगातार सशक्त कर रही है । भारत आत्मनिर्भर बनने की ओर मजबूती से अग्रसर है और विश्व नेता मोदी जी के नेतृत्व में सरकार अपने सारे लक्ष्य निश्चित समय में पूरा करेगी इस विश्वास के साथ मैं पुनः माननीय राष्ट्रपति का आभार व्यक्त करता हूँ और समर्थन करता हूँ।
जय हिन्द, *श्री दुलाल चन्द्र गोस्वामी(कटिहार): सबसे पहले सभापति महोदय और सभा के सभी सदस्यों को सादर प्रणाम । महामहिम राष्ट्रपति जी के अभिभाषण के धन्यवाद प्रस्ताव पर मैं अपना समर्थन देता हूं ।
हम सब जानते हैं कि कोरोना वायरस से उत्पन्न वैश्विक महामारी का यह तीसरा वर्ष है । देश आज सबसे तेजी से विकसित होती अर्थव्यवस्था का स्तंभ बन चुका है । हमारी एनडीए की सरकार ने एक साल से भी कम समय में 150 करोड़ से भी ज्यादा वैक्सीन डोज लगाने का रिकॉर्ड पार किया है । आज देश में 90 प्रतिशत से अधिक नागरिकों को टीके की एक डोज मिल चुकी है जबकि 70 प्रतिशत से अधिक लोग दोनों डोज ले चुके हैं । हर घर दस्तक अभियान के माध्यम से बाकी लोगों तक भी पहुंच रही है । भारत में बन रही वैक्सीन पूरी दुनिया को महामारी से मुक्त कराने और करोड़ों लोगों का जीवन बचाने में अहम भूमिका निभाई है । कोरोना महामारी ने पूरी दुनिया को प्रभावित किया है और भारत में भी हमारे बहुत से अपने को छीना भी है । इन परिस्थितियों में केन्द्र सरकार से लेकर राज्य सरकार तक की स्थानीय शासन और प्रशासन हमारे डॉक्टर, नर्स और हेल्थ वर्कर्स तथा हमारे वैज्ञानिकों और उद्यमियों सभी ने एक टीम के रूप में कार्य किया है।
कोरोना महामारी के इस संकट से कोई गरीब भूखा न रहे,इसके लिए प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के अंतर्गत सभी गराबों को हर महीने मुफ्त राशन उपलब्ध करा रही है । देश में 80 करोड़ लाभार्थियों को 19 महीनों से खाद्यान्न वितरित करने के लिए दो लाख 60 हजार करोड़ खर्च के साथ आज दुनिया का सबसे बड़ा फूड डिस्ट्रीब्यूशन प्रोग्राम चलाया जा रहा है । साथ ही साथ गरीब के स्वाभिमान और उसके रोजगार की रक्षा करने के लिए प्रधानमंत्री स्व निधि योजना के तहत लगभग अब तक 28 लाख रेहड़ी-पटरी वाले भाई बहनों के लिए2900 करोड़ से ज्यादा धनराशि सरकार द्वारा मुहैया कराई गई, यह भी प्रशंसा का विषय है । इसी तरह प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के तहत गत तीन वर्षों में करीब 1.30लाख करोड़ की लागत से 17लाख घर गरीबों को सरकार द्वारा बनवाया गया ।
भारत विश्व में दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन निर्माता डिजिटल इंडिया और डिजिटल इकोनामी के बढ़ते प्रसार के संबंध में देश के यूपीआई प्लेटफार्म की सफलता के लिए मैं सरकार के विजन की प्रशंसा करता हूं । दिसंबर 2021में देश में आठ लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का लेनदेन यूपीआई के माध्यम से हुआ है । आज भारत उन देशों में से है, जहां इंटरनेट की कीमत सबसे कम है और स्मार्टफोन की कीमत भी सबसे कम है इसका बहुत बड़ा लाभ भारत की नौजवान पीढ़ी को मिल रहा है।
शिक्षा व स्वास्थ्य क्षेत्र में नरेन्द्र भाई मोदी की सरकार में जितना सात वर्षों में कार्य किया गया है,यह भी एक ऐतिहासिक कार्य हुआ है और योग, आयुर्वेद और पारंपरिक चिकित्सा पद्वति की लोकप्रियता बढ़ रही है । वर्ष2014 में देश से 66,000 करोड़ रुपये के आयुष उत्पादो का निर्यात होता था, वह आज 11,000 करोड़ से अधिक हो गया है । साथ ही साथ राष्ट्रीय राजमार्ग मार्च2014 में हमारे देश में राष्ट्रीय राजमार्गों की कुल लंबाई 90हजार किलोमीटर थी जबकि आज उसकी लंबाई बढ़कर 1लाख 40 हजार किलोमीटर से अधिक हो गई है और भारतमाला परियोजना के अंतर्गत लगभग6 लाख करोड़ रुपए की लागत से 20 हजार किलोमीटर से अधिक लंबाई के राजमार्गों पर काम किया जा रहा है जिसमें23 ग्रीन एक्सप्रेस-वेज और ग्रीन फील्ड कॉरिडोर्स का भी विकास हो रहा है । यह हमारे पथ परिवहन मंत्री जी का सराहनीय कार्य है । साथ ही साथ भारतीय रेलवे का भी तेज गति से आधुनिकीकरण हो रहा है जिसमें नई वंदे भारत ट्रेन भी शामिल है और बीते सात वर्षों में 24000 किलोमीटर रेलवे रूट का विद्युतीकरण हुआ है । नई रेलवे लाइन बिछाने और दोहरीकरण का काम भी तेजी से जारी है।
आज जब भारत अपनी आजादी के75 वर्ष पर अमृत महोत्सव मना रहा है,तब एनडीए सरकार सबका साथ सबका विकास सबका विश्वास और सबका प्रयास के मंत्र पर अगले25 वर्षों के लिए मजबूत बुनियाद पर तेजी से काम कर रही है । एनडीए सरकार आज भी अपनी नीति पर कायम है । एक बार पुनः मैं राष्ट्रपति जी के अभिभाषण का समर्थन करता हूं।
*श्री जसवंतसिंह सुमनभाई भाभोर(दाहोद): मैं महामहिम राष्ट्रपति जी का धन्यवाद देता हूँ, जिन्होंने इनता उत्तम भाषण दिया । महामहिम राष्ट्रपति जी ने अपने अभिभाषण में कोरोना वायरस जैसी वैश्विक महामारी की फ़िक्र करते हुए कहा की तीसरे वर्ष के दौरान भी हम भारत के लोगों में लोकतांत्रिक मूल्यों में अगाध आस्था, अनुशासन और कर्तव्य-परायणता को और मजबूत हुई है।
भारत की आजादी के 75 वर्ष के अवसर पर प्रत्येक भारतवासी अमृत महोत्सव मना रहा है, और भारतियों की यह संकल्पशक्ति, भारत के उज्ज्वल भविष्य के लिए असीम विश्वास पैदा करती है । इसी विश्वास के साथ, उन्होंने संसद भवन के ऐतिहासिक सेंट्रल हॉल से प्रत्येक भारतवासी का अभिनंदन किया।
महामहिम ने देश के लाखों स्वाधीनता सेनानियों को भी नमन किया जिन्होंने कर्तव्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी और भारत को उसके अधिकार दिलाए । और आज़ादी के इन75वर्षों में देश की विकास यात्रा में अपना योगदान देने वाले सभी महानुभावों को श्रद्धा-पूर्वक स्मरण किया।
महामहिम ने सरकार द्वारा महान गुरु तेगबहादुर जी का 400वां प्रकाश पर्व. श्री अरबिन्दो की 150वीं जन्म-जयंती, वी.ओ. चिदम्बरम पिल्लई का 150वां जन्मवर्ष और गणतंत्र दिवस समारोह को, नेताजी सुभाषचंद्र बोस की 125वीं जन्म-जयंती 23 जनवरी से ही मानाने की शुरुआत को लेकर और ऐसे पुण्य अवसरों को पूरी भव्यता के साथ मनाने की सराहना की।
मा० प्रधानमंत्री द्वारा भगवान बिरसा मुंडा को श्रद्धांजलि स्वरूप, उनके जन्म-दिवस 15 नवंबर को 'जनजातीय गौरव दिवस' के रूप में मनाने का भी निर्णय के ऐतिहासिक फैसले की जिक्र भी किया।
महामहिम ने बताया आज़ादी का अमृत महोत्सव, सभी भारतीयों के लिए अगले 25 वर्षों के संकल्पों को आकार देने का पवित्र अवसर पर 'सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, और सबका प्रयास' के मंत्र पर विश्वाश जताया कि सरकार इस पर चलते हुए अगले25वर्षों के लिए मजबूत बुनियाद पर तेजी से काम कर रही है।
कोरोना के कठिन समय की चुनौतियों के बावजूद, एक सर्व-समावेशी, सर्वऔर -हितकारी, सशक्त भारत का निर्माण और देश की आत्म-निर्भरता जैसे बुनियादी महत्वपूर्ण संकल्प देशवासी अपने लक्ष्यों को जल्द से जल्द प्राप्त करने के लिए प्रेरित किया है महामहिम ने देश के प्रत्येक हेल्थ और फ्रंट लाइन वर्कर का, हर देशवासी का अभिनंदन किया और कहा कि कोरोना महामारी की परिस्थितियां जिसने हमारे बहुत से अपनों को हमसे छीना है।
ऐसे में केंद्र व सभी सरकार सभी स्थानीय शासन और प्रशासन, डॉक्टर्स, नर्सेज़ और हेल्थ वर्कर्स, वैज्ञानिकों और उद्यमियों - सभी ने, एक टीम के रूप में काम किया है । इससे सरकार और नागरिकों बीच परस्पर विश्वास, समन्वय और सहयोग बना रहा, जो लोकतन्त्र की ताकत का अभूतपूर्व उदाहरण है।
कोविड-19के खिलाफ कोविड वैक्सीनेशन प्रोग्राम में 150 करोड़ से भारत आज विश्व में सबसे ज्यादा वैक्सीन डोज़ देने वाले अग्रणी देशों में से एक हैं । इस अभियान ने नागरिकों को कोविड-19 से सुरक्षा हेतु एक ऐसा रक्षा-कवच दिया है जिससे उनका मनोबल भी बढ़ा है।
आज देश में90प्रतिशत से अधिक वयस्क नागरिकों को टीके की एक डोज़ और 70 प्रतिशत से अधिक लोग दोनों डोज़ ले चुके हैं । देश में कुल 8 वैक्सीन्स को आपात स्थिति के लिए स्वीकृति मिली है । भारत में बनी वैक्सीन्स को विश्व स्वास्थ्य संगठन की तरफ से में उपयोग की मंजूरी भी मिली है।
सरकार द्वारा64हजार करोड़ रुपए की लागत से शुरू किया गया प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत हेल्थ इनफ्रास्ट्रक्चर मिशन जो की एक महत्वपूर्ण मिशन है इससे वर्तमान की स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी, भविष्य में आने वाले संकटों के लिए भी देश को तैयार हो सकेगा।
80हजार से अधिक हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर्स और करोड़ों की संख्या में जारी आयुष्मान भारत कार्ड से गरीबों को दिए गए सरकार ने 8000से अधिक जन-औषधि केंद्रों के माध्यम से कम कीमत पर दवाइयां उपलब्ध कराकर, इलाज पर होने वाले खर्च को कम किया है । 'आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन' भी एक बड़ा कदम बताया है।
मा० प्रधानमंत्री द्वारा किए गए प्रयासों के परिणामस्वरूप योग, आयुर्वेद एवं पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है । वर्ष 2014में देश से6600करोड़ रुपए के आयुष उत्पादों का निर्यात आज बढ़कर 11 हजार करोड़ रुपए से अधिक हो गया है । और दुनिया के सबसे पहले 'WHO Global Centre of Traditional Medicine' की स्थापना भी भारत में होने जा रही है।
कोरोना के इस महासंकट में बड़े-बड़े देशों में खाद्यान्न की कमी और भूख की परेशानी देखी गई परन्तु भारत सरकार ने इस बात का पूरा प्रयास किया कि100साल के इस सबसे बड़े संकट में कोई गरीब भूखा न रहे । प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के अंतर्गत सरकार सभी गरीबों को हर महीने मुफ्त राशन दे रही है । 80करोड़ लाभार्थियों को 19 महीनों से खाद्यान्न वितरित करने हेतु2लाख 60 हजार करोड़ रुपए के खर्च के साथ भारत में आज दुनिया का सबसे बड़ा फूड डिस्ट्रिब्यूशन प्रोग्राम चलाया जा रहा है।
वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए पूरी संवेदनशीलता के साथ मेरी सरकार ने इस योजना को मार्च 2022 तक बढ़ा दिया है । कोरोना काल में गरीब के स्वाभिमान और उसके रोजगार की रक्षा करने के लिए सरकार प्रधानमंत्री- स्वनिधि योजना भी चला रही है । यह योजना रेहड़ी-पटरी वाले भाइयों- बहनों के लिए बहुत सहायक सिद्ध हो रही है । इस योजना के तहत अब तक 28 लाख रेहड़ी-पटरी वालों को 29 सौ करोड़ रुपए से ज्यादा की धनराशि जारी की गई है । सरकार अब इन स्ट्रीट वेंडर्स को ऑनलाइन फूड डिलिवरी करने वाली कंपनियों के साथ भी जोड़ रही है । श्रमिकों के हितों की रक्षा के लिए सरकार ने ई-श्रम पोर्टल भी शुरू किया है जिससे अब तक 23 करोड़ से अधिक श्रमिक जुड़ चुके हैं।
महामहिम ने संविधान के मुख्य शिल्पकार बाबा साहब डॉक्टर भीमराव आंबेडकर विचारो का उल्लेख किया उन्होंने बताया कि बाबा साहेब ने कहा था "मेरा आदर्श एक ऐसा समाज होगा जो स्वाधीनता, समानता और भाई- चारे पर आधारित हो ।... प्रजातन्त्र, सरकार का एक स्वरूप मात्र नहीं है।... प्रजातन्त्र का मूल है, अपने साथियों के प्रति आदर और सम्मान की भावना।"
सरकार बाबा साहब के इन आदर्शों को अपने लिए ध्येय वाक्य मानती है और सरकार की आस्था, अंत्योदय के मूल मंत्र में है, जिसमें सामाजिक न्याय भी हो, समानता भी हो, सम्मान भी हो और समान अवसर भी हों।
महामहिम ने बताया कि सरकार की नीतियों में गाँव, गरीब, पिछड़े, अनुसूचित जाति एवं जनजातियों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है । हाल के वर्षों में पद्म पुरस्कारों के चयन में भारत की यह भावना भलीभाँति झलकती है । विविधता से भरे भारत में, देश के कोने-कोने में समर्पित जीवन जीने वाले लोग राष्ट्र-सेवा में जुटे हुए हैं । उनमें भारत की शक्ति के दर्शन होते हैं।
महामहिम ने कहा कि सरकार के निरंतर प्रयासों से भारत एक बार फिर विश्व की सर्वाधिक तेजी से विकसित हो रही अर्थव्यवस्थाओं में से एक बन गया है । सरकार की नीतियों की वजह से आज भारत उन देशों में है जहां इंटरनेट की कीमत सबसे कम है । यहां स्मार्ट फोन की कीमत भी सबसे कम है । इसका बहुत बड़ा लाभ भारत की नौजवान पीढ़ी को मिल रहा है । आज भारत विश्व में दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन निर्माता बनकर उभरा है।
महामहिम का संबोधन युवाओं और डिजिटल इंडिया पर केंद्रित रहा । महामहिम राष्ट्रपति जी ने कहा कि हमारा स्टार्ट-अप ईको-सिस्टम, हमारे युवाओं के नेतृत्व में तेजी से आकार ले रही अनंत नई संभावनाओं का उदाहरण है । डिजिटल इंडिया और डिजिटल इकॉनमी के बढ़ते प्रसार के संदर्भ में देश के UPI प्लेटफार्म की सफलता के लिए मैं सरकार के विज़न की प्रशंसा करूंगा । दिसंबर, 2021 में देश में आठ लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का लेन-देन UPI के माध्यम से हुआ है।
महामहिम राष्ट्रपति जी ने अपने अभिभाषण में कहा कि लोकसभा चुनाव के लिए 61 करोड़ से अधिक लोगों ने मतदान कर रिकॉर्ड बनाया और पहले की तुलना में महिलाओं की मतदान में सर्वाधिक हिस्सेदारी रही । महामहिम ने संसद में अपने अभिभाषण में लोकसभा चुनाव के सफल आयोजन के लिए चुनाव आयोग, सुरक्षाकर्मियों को बधाई देते हुए कहा कि लोकसभा चुनाव के लिए 61 करोड़ से अधिक लोगों ने मतदान कर रिकॉर्ड बनाया, पहले की तुलना में महिलाओं की मतदान में सर्वाधिक हिस्सेदारी रही । लोगों ने2014में शुरू हुई भारत की विकास यात्रा को जारी रखने के लिए जनादेश दिया है ।
महामहिम ने आधी आबादी की चर्चा करते हुए कहा कि महिला सशक्तिकरण सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इस संबंध में राज्यों के सहयोग से कई कदम उठाए गए हैं. महामहिम ने कहा कि सरकार एक मजबूत, सुरक्षित और समावेशी भारत बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है कृषि क्षेत्र में संरचनात्मक सुधारों के लिए उच्च अधिकार प्राप्त समिति गठित करने का निर्णय किया गया है, उत्पादकता बढ़ाने के लिये25लाख करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा ।
नेशनल डिफेंस फंड से वीर जवानों के बच्चों को मिलने वाली स्कॉलरशिप की राशि बढ़ा दी गई है । इसमें पहली बार राज्य पुलिस के जवानों के बेटे-बेटियों को भी शामिल किया गया है । महिला सशक्तिकरण सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इस संबंध में राज्यों के सहयोग से कई कदम उठाए गए हैं । सरकार गरीबों को आवास और स्वास्थ्य संबंधी सुविधाएं दे रही है क्योंकि उन्हें सशक्त बना कर ही गरीबी दूर की जा सकती है ।
देश में हर बहन-बेटी के लिए समान अधिकार सुनिश्चित करने हेतु तीन तलाक और निकाह-हलाला जैसी कुप्रथाओं का उन्मूलन जरूरी. महिलाओं के विरुद्ध अपराधों के लिए दंड अधिक सख्त बनाए गए हैं और नए दंड प्रावधानों को सख्ती से लागू किया जा रहा है।
महामहिम ने कहा कि सरकार ने तीन तलाक को कानूनन अपराध घोषित कर समाज को इस कुप्रथा से मुक्त करने की शुरुआत की है । उन्होंने कहा कि महिला सशक्तीकरण सरकार की उच्च प्राथमिकताओं में से एक है । बेटे-बेटी को समानता का दर्जा देते हुए सरकार ने महिलाओं के विवाह के लिए न्यूनतम आयु को18वर्ष से बढ़ाकर पुरूषों के समान21वर्ष करने का विधेयक भी संसद में प्रस्तुत किया है।
महामहिम ने अभिभाषण के दौरान सरकार की सराहना करते हुए कहा कि इंफ्रास्ट्रक्चर-विकास के कार्यों को और अधिक गति प्रदान करने के लिए अलग-अलग मंत्रालयों के कामकाज को प्रधानमंत्री गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के रूप में एक साथ जोड़ा गया है । ग्रामीण क्षेत्रों में सड़कों, संसाधनों और इनफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण से देश की उन संभावनाओं को उड़ान मिल रही है जो दशकों से उपेक्षित पड़ी थीं । प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की उपलब्धियां गर्व करने योग्य हैं । मार्च 2014में हमारे देश में राष्ट्रीय राजमार्गों की कुल लंबाई 90 हजार किलोमीटर थी, जबकि आज उनकी लंबाई बढ़कर एक लाख चालीस हजार किलोमीटर से अधिक हो गई है ।
महामहिम ने कहा कि सरकार देश की सुरक्षा के लिए दृढ़ संकल्पित होकर काम कर रही है । सरकार की नीतियों की वजह से डिफेंस सेक्टर में विशेषकर रक्षा उत्पादन में देश की आत्म-निर्भरता लगातार बढ़ रही है । हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के साथ 83 एलसीए तेजस फाइटर एयरक्राफ्ट के निर्माण हेतु अनुबंध किए गए हैं । सरकार ने ऑर्डिनेन्स फैक्ट्रियों को सात डिफेंसPSUsका रूप देने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं । हमारा लक्ष्य है कि हमारी सेनाओं की जरूरत का सामान भारत में ही विकसित हो तथा भारत में ही निर्मित हो।
सरकार भारत की प्राचीन विरासत को संरक्षित, समृद्ध और सशक्त करना अपना दायित्व समझती है । सरकार की यह भी प्राथमिकता रही है कि भारत की अमूल्य धरोहरों को देश में वापस लाया जाए । सौ वर्ष पूर्व भारत से चोरी हुई मां अन्नपूर्णा देवी की मूर्ति को वापस लाकर काशी विश्वनाथ मंदिर में स्थापित किया गया है।
महामहिम राष्ट्रपति जी ने सन्देश दिया कि जब वर्ष 2047में देश अपनी आज़ादी की शताब्दी पूरी करेगा तब भव्य, आधुनिक और विकसित भारत के लिए हमें आज कड़ी मेहनत करनी होगी । हमें अपने परिश्रम को पराकाष्ठा तक लेकर जाना है और यह सुनिश्चित करना है कि अंततः इसके लाभकारी परिणाम निकलें । इसमें हम सबकी भागीदारी है और समान भागीदारी है । आज देश की उपलब्धियां और सफलताएँ देश के सामर्थ्य और संभावनाओं के समान ही असीम हैं । उन्होंने कहा कि ये उपलब्धियां किसी एक संस्था या प्रतिष्ठान की नहीं हैं, बल्कि देश के कोटि-कोटि नागरिकों की हैं । इनमें करोड़ों देशवासियों का श्रम और पसीना लगा है।
मैं पुन: एक बार महामहिम राष्ट्रपति जी का धन्यवाद करते हुए, उनके अभिभाषण का समर्थन करता हूं और साथ ही मैं माननीय प्रधान मंत्री जी का, राष्ट्रीय अध्यक्ष जी का, माननीय गृह मंत्री जी का और माननीय अध्यक्ष जी का आभार व्यक्त करता हूं कि उन्होंने मुझे अपनी बात रखने का अवसर दिया, इसके लिए बहुत बहुत आभार।
*SHRI DHANUSH M. KUMAR (TENKASI): I am thankful for giving me a chance to express my views.
Our President gave a long beautiful speech regarding achievements of the BJP Government. Here, I want to oppose these so-called achievements. If we see at the ground level, they are only on documents. The lower-class and middle-class people are still suffering everywhere as all these schemes are only in advertisements. Nowadays, in our country, it is being felt that it is an autocracy and not a democracy.
Farmers, middle class people, lower middle-class people, women, socialists, journalists, students, etc. are struggling to survive as their voice is being suppressed. Everywhere in the country there is protest against the Government. This Government has totally failed in providing employment. Instead of giving jobs, they are snatching their jobs. During elections, they had promised to give two crore jobs per year, but the people of India have lost 15 crore jobs after this Government assumed power.
This Government has totally failed in the economic front also. The debt of our country is increasing every year. If we compare with the previous data, we can see major difference in it. There is a huge gap between the rich people and the poor people, and it is felt that the middle-class people are there to suffer only.
With these words, I want to register strong opposition to the achievements mentioned by the Government. Thanks.
*श्री हँसमुखभाई एस. पटेल (अहमदाबाद पूर्व): महामहिम राष्ट्रपति जी के अभिभाषण पर पार्टी ने मुझेअपने विचार रखने का अवसर दिया है, इसके लिए मैं आदरणीय प्रधानमंत्री जी का, आदरणीय राष्ट्रीय अध्यक्ष जी का और आदरणीय गृह मंत्री जी का हृदय से आभार व्यक्त करता हूं । महामहिम राष्ट्रपति जी ने अपने अभिभाषण में कहीं महत्वपूर्ण बिंदुओं पर प्रकाश डाला है । राष्ट्रपति जी ने मोदी जी सरकार का जो मूल मंत्र है सबका साथ सबका विकास सबका प्रयास को ध्यान में रखते हुए मोदी सरकार के द्वारा विभिन्न बुनियादी सुविधाओं को कैसे गांव गरीब किसान और मजदूर तक पहुंचाया जाए, राष्ट्रीय शिक्षा नीति जो केंद्र सरकार के द्वारा लाई गई है, गरीबों के लिए मोदी सरकार के द्वारा जो विभिन्न प्रकार के कल्याणकारी योजनाएं बनाई गई है उन पर भी प्रकाश डाला है । अमृत महोत्सव में तमाम महापुरुष जिन्होंने इस देश की आजादी के लिए कुर्बानी दी इस देश की एकता और अखंडता के लिए अपना जीवन लगा दिया ऐसे महापुरुषों को सम्मान देने का काम अगर किसी ने किया तो मोदी सरकार ने किया है । सरदार वल्लभ भाई पटेल को याद करते हुए उनका एक सबसे बड़ा भव्य स्मारक गुजरात की किवड़िया में बनाने का काम मोदी सरकार ने किया । वहीं नेताजी सुभाष चंद्र बोस को याद करते हुए उनको सम्मान देने की दृष्टि से दिल्ली में इंडिया गेट के पास उनका भव्य स्मारक बनाने का काम मोदी सरकार कर रही है । पंडित दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना बनाकर और गांव में बिजली पहुंचाने का काम मोदी सरकार ने किया जो शायद बहुत साल पहले हो जाना चाहिए था । यह गरीबों का हक था । प्रधानमंत्रीजी का जो संकल्प है कि गांव गरीब किसान और मजदूर का विकास होना चाहिए उनको विभिन्न प्रकार की सुविधाएं मिलनी चाहिए जो सुविधाओं अमीरों को मिलती है वही सुविधा गरीबों को भी मिलनी चाहिए यह संकल्प माननीय प्रधानमंत्री जी का था उस दिशा में हमारी सरकार काम कर रही है । किसानों की आमदनी दोगुनी हो और गरीबों का कल्याण हो उस दिशा में हमारी सरकार ने काम किया हमारा प्रधानमंत्री जी ने खंभा तार और ट्रांसफार्मर सब जगह पहुंचाया और बिजली पहुंचाई । मैं यह कह सकता हूं कि आने वाले समय में हमारी सरकार मथुरा का भी विकास करेगी और वृंदावन का भी विकास करेगी । हमारी सरकार भगवान कृष्ण जी की नगरी को और सजाने का कार्य करेगी हम यह मानते हैं कि हमारे आराध्य देव उनकी जो जन्मभूमि है उसका विकास हमारी सरकार करेगी । चारों धामों जो कि केदारनाथ, बद्रीनाथ, यमुनोत्री और गंगोत्री है इन सभी स्थानों का विकास किया है तो मोदी सरकार और उत्तराखंड राज्य की पुष्कर सिंह धामी जी की सरकार ने किया है । वहां अच्छी सड़कें बनाई गई है ताकि किसी भी मौसम में वहां जा सके । हमारी सरकार ने इस दिशा में काम किया है अब जब विकास की दिशा में चर्चा होती है तो सड़कों की चर्चा है वर्ष2014से पहले पूरे देश में सिर्फ90,000किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्ग बना था आज की तारीख में मोदी सरकार और सड़क परिवहन मंत्री श्री नितिन गडकरी जी के नेतृत्व में हिंदुस्तान में पिछले साढे7वर्षों में1,40,000किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्ग का निर्माण करने का कार्य किया है उत्तर प्रदेश में जब पहले दिल्ली से मेरठ जाते थे तो3या 4 घंटे लगते थे अब दिल्ली से मेरठ तक मात्र40से 50 मिनट में पहुंच सकते हैं । वर्ष2020 21 में ग्रामीण इलाकों में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत 100 किलोमीटर प्रति दिन से अधिक रफ्तार से 36500 किलोमीटर सड़कें बनाई गई है और अचार ओरिया ऐसी क्षेत्रों को ऑल वेदर रोड कनेक्टिविटी से जोड़ा गया है । हमारी सरकार ने नौजवानों के लिए अधिक से अधिक रोजगार देने के लिए हमारी मोदी जी की सरकार ने प्रधानमंत्री मुद्रा योजना बनाई जिससे गरीब नौजवान को 50,000 से लेकर ₹10,00,000 तक का लोन आसानी से कम इंटरेस्ट पर उपलब्ध हो जाए । पूरे देश में16करोड गरीब नौजवानों को मुद्रा बैंक से लोन दिया गया है और अपना रोजगार चालू किया है । उन को निष्पक्षता और ईमानदारी के साथ रोजगार देने का काम हमारी सरकार ने किया प्रधानमंत्री मोदी जी की सरकार में महिला सशक्तिकरण को उच्च प्राथमिकतादी गई है । बेटी बचाओ बेटी पढाओ के अनेक सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं और स्कूलों में प्रवेश होने वाली बेटियों की संख्या में उत्साहजनक वृदधि हुई है । पिछले दिनों हमारे प्रधानमंत्री जी ने कहा कि लड़कियों को बराबर का अवसर मिलना चाहिए उनकी शादी की उम्र 18 साल थी । हमारी सरकार ने उसे 21 साल की, लड़कियों को बराबर पढ़ने का अवसर मिलना चाहिए, बराबर अधिकार मिलना चाहिए, इस दिशा में मोदी सरकार ने काम किया । गरीबो को कोविड काल में खाने पीने की किसी प्रकार की समस्या ना आए ऐसी व्यवस्था मोदी सरकार ने की है । पूरी दुनिया जब वैक्सिंग बना लेती थी और उसके 25 और 30 सालों के बाद हिंदुस्तान को वैक्सीन मिलती थी । जब पूरी दुनिया में कोविड की महामारी आई तब पूरी दुनिया चितित थी हमारे प्रधानमंत्री जी ने पूरी दुनिया का नेतृत्व किया प्रधानमंत्री जी ने हिंदुस्तान के वैज्ञानिक को और डॉक्टर से वैक्सिंग बनाने के कहा और35 हजार करोड़ रूपये दिए और 2 वैक्सीन अपने ही देश में बनाई गई । देश में कोविड वैक्सीनेशन प्रोग्राम में 1 साल से भी कम समय में150 करोड से भी ज्यादा व्यक्ति को डोज लगाने का रिकॉर्ड पार किया । आज हम पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा वैक्सीन डोज देने वाले अग्रणी देशों में से एक है इस अभियान की सफलता ने देश को ऐसा रक्षा कवच दिया है जिससे हमारे नागरिकों की सुरक्षा भी बढ़ी है उनका मनोबल भी बढ़ा है । आज देशों में 90 प्रतिशत से अधिक वयस्क नागरिकों को टीके की एक एक डोज मिल चुकी है जबकि 70% से अधिक लोग दोनों ले चुके हैं और वैक्सीनेशन प्रोग्राम में 15 से18 वर्ष तक के किशोर किशोरियों को भी शामिल किया गया है साथ ही फ्रंटलाइन वर्कर्स और बीमारियों से ग्रस्त वरिष्ठ नागरिकों के लिए प्रिकॉशन डोज की शुरुआत भी की गई है । अब तक देश में कुल आठ वैक्सिंग को इमरजेंसी उपयोग के लिए लिए स्वीकृति दी गई है । भारत में बन रही तीन वैक्सीन को विश्व स्वास्थ्य संगठन की तरफ से आपात स्थिति में उपयोग की मंजूरी भी मिली है भारत में बन रही यह वैक्सीन पूरी दुनिया को महामारी से मुक्त कराने और करोड़ों लोगों का जीवन बचाने में अहम भूमिका निभा रही है यह सब हमारी मोदी सरकार मैं हुआ है । इस समय और राज्य में एक एप्स बनाने की व्यवस्था हमारी सरकार कर रही है अभी तक हिंदुस्तान में लगभग 14 एम्स बनकर तैयार है और अट्ठारह बन रहे हैं । आज मैं गर्व के साथ कह सकता हूं कि गुजरात में राजकोट में एम्स बन रहा है यह सब मोदी सरकार में हुआ है ।
हमारे प्रधानमंत्री श्री मोदी जी ने कहा था कि गरीब आदमी भी हवाई जहाज की सफर करेगा । उड़ान योजना के अंतर्गत हिंदुस्तान के तमाम शहरों के एयरपोर्ट से जोड़ने का काम चल रहा है । हमारी सरकार खिलाड़ियों के लिए खेलो इंडिया योजना चला रही है ग्रामीण पृष्ठभूमि के खिलाड़ियों को खेलने का अवसर दिया जाए उनको सुविधा उपलब्ध कराई जाए हमारे प्रधानमंत्री जी ने सांसदों को निर्देशित किया है कि सभी सांसदों को खिलाड़ियों के लिए सांसद खेल महाकुंभ कार्यक्रम करना चाहिए । कि मैंने भी अपने जिले में सांसद खेल का महाकुंभ कार्यक्रम का आयोजन करवाया है । हमारे देश की लगभग 50,000से ज्यादा ग्रामीण पृष्ठभूमि के खिलाड़ियों को विभिन्न खेलों में अवसर देने का काम अगर किसी ने किया है तो हमारी सरकार ने किया । प्रधानमंत्री मोदी जी की सरकार अभिषेक के लिए प्रभावी और उपयोगी समाधान निकालने के लिए 64000 करोड रुपए की लागत से शुरू किया गया प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन इसका एक सराहनीय उदाहरण है । इससे आने वाले संकटोंके लिए देश को तैयार किया जाएगा । प्रधानमंत्री मोदी जी की सरकार में80हजार से अधिक हेल्थ एंड वैलनेस सेंटर और करोड़ों की संख्या में जारी आयुष्मान कार्ड से गरीबों को इलाज में मदद मिल रही है सरकार ने 8000 से अधिक जनौषधि केंद्रों के माध्यम से कम कीमत पर दवाइयां उपलब्ध कराई है । सुलभ और सुगम स्वास्थ्य सेवाओं के लिए उठाया गया आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन भी एक बड़ा कदम है जो मोदी जी की सरकार में हुआ है । वर्ष 2014 में देश में66 100 करोड़ रुपये के आयुष उत्पादों का निर्यात होता था आज मोदी जी की सरकार में बढ़कर 11000 करोड रुपए से अधिक हो रहा है।
यह कहना चाहता हूं कि मोदी जी की सरकार में प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के अंतर्गत 80 करोड़ लाभार्थियों को 19 महीनों से खाद्यान्न तक वितरित करने हेतु 2,60,000 करोड रुपए के खर्चे भारत में दुनिया का सबसे बड़ा फूड डिस्ट्रीब्यूशन प्रोग्राम चलाया जा रहा है । वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए पूरी संवेदनशीलता के साथ हमारी सरकार ने इस योजना को मार्च 2022तक बढ़ा दिया है । प्रधानमंत्री मोदी जी की सरकार में डिजिटल इंडिया वर्ल्ड डिजिटल इकोनामी की बढ़ती प्रसार के लिए यूपीआई प्लेटफार्म से दिसंबर 2021में देश में8,00,000करोड़ रुपए से ज्यादा का लेनदेन यूपीआई माध्यम से हुआ है । हमारे देश में जन सामान्य द्वारा बदलावों और तकनीक को बहुत तेजी से अपनाया जा रहा है । देश की बेटियों में सीखने को सरकार को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति में जेंडर इंक्लूजन फंड का भी प्रावधान किया गया । मौजूदा सभी 33 सैनिक स्कूलों में बालिकाओं को प्रवेश देना शुरू कर दिया गया है हमारी सरकार ने राष्ट्रीय रक्षा अकादमी में भी महिला कैडेट्स के प्रवेश को मंजूरी दी है । विभिन्न पुलिस बलों में महिला पुलिसकर्मियों की संख्या में2014के मुकाबले दोगुनी से ज्यादा बढ़ोतरी हो चुकी है यह हमारी मोदी सरकार में हुआ है । प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में स्किल इंडिया मिशन के तहत आईटीआई, जन शिक्षण संस्थान और प्रधान मंत्री कौशल केंद्र के जरिए पूरे देश में सवा दो करोड़ से अधिक युवाओंका कौशल विकास हुआ है स्किल को उच्च शिक्षा के साथ जोड़ने के लिए यूजीसी के नियमों में कई बदलाव किए गए हैं । दिव्यांग युवाओं के भविष्य के लिए 10000 शब्दों की इंडियन साइन लैंग्वेज डिक्शनरी भी बनाई गई है । प्रधानमंत्री मोदी जी की सरकार में इंटरनेट की और स्मार्टफोन की कीमत विश्व में सबसे कम है । भारत की नौजवान पीढ़ी को इसका लाभ मिल रहा है । 5Gमोबाइल कनेक्टिविटी पर भी तेजी से सरकार काम कर रही है जिससे अनेक नई संभावनाओं के द्वार खुलेंगे सेमीकंडक्टर को लेकर भारत के प्रयासों का बहुत बड़ा लाभ हमारे स्टार्टअप इकोसिस्टम को मिलेगा यह सब मोदी जी की सरकार में हो रहा है।
हमारा स्टार्टअप इकोसिस्टम हमारे युवा के नेतृत्व में तेजी से आकार ले रही है अनंत नहीं संभावना का । वर्ष 2016से हमारे देश में 56 अलग-अलग सेक्टर में 60,000स्टार्टअप बने हैं इन स्टार्टअप्स के जरिए छह लाख से अधिक को रोजगारी प्राप्त हुई है । वर्ष 2021में कोरोना काल में 40 से अधिक यूनिकॉर्न स्टार्टअप सिर्फ भारत में अस्तित्व में आए हैं जिनका प्रत्येक मूल्य100करोड डॉलर से अधिक है । प्रधानमंत्री मोदी जी की सरकार में हमारा देश इलेक्ट्रॉनिक्स और टेक्निक की हार्डवेयर क्षेत्र में ग्लोबल लीडर बने इसके लिए सिलिकॉन और कंपाउंड सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन डिस्प्लेFAB,चीप डिजाइन और इनके जुड़े वेंचर्स के लिए हाल ही में ₹6000 का पैकेज भी घोषित किया है । मैं यह कहना चाहता हूं कि सिर्फ मोदी जी की सरकार भविष्य के भारत में रेलवे, रोडवेज और एयरवेज अलग-अलग और अलग-थलग इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं बल्कि एक देश के एक जुट संसाधन के तौर पर काम करने के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास के कार्यों को और अधिक गति प्रदान करने के लिए अलग-अलग मंत्रालयों के कामकाज को प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के रूप में ऐसा जोड़ा है जिससे भारत में मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट के एक नए युग का प्रारंभ होने जा रहा है । मैं पुनः एक बार महामहिम राष्ट्रपति जी के अभिभाषण का समर्थन करता हूं कि मुझे अपनी बात रखने का अवसर पार्टी ने दिया । मैं माननीय प्रधानमंत्री जी का, राष्ट्रीय अध्यक्ष जी का, माननीय मंत्री जी का और माननीय अध्यक्ष जी काभी आभार व्यक्त करता हूं कि उन्होंने मुझे अपनी बात रखने का अवसर दिया इसके लिएबहुत-बहुत आभार और धन्यवाद।
*श्री रतनसिंह मगनसिंह राठौड़(पंचमहल): मुझे माहामहिम राष्ट्रपति जी के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर अपने विचार व्यक्त करनेका अवसर देने के लिए आभार । इस कोरोना काल के वैश्विक महामारी में जिस प्रकार से माननीय मोदी जी के सरकार द्वारा किए गए हैं उन कार्यों का उल्लेख महामहिम राष्ट्रपति जी द्वारा इस अभिभाषण में किया गया है इसका मैं समर्थन करता हूं।
माननीय मोदी जी की सरकार ने जिस प्रकार अमृत महोत्सव के इस काल खण्ड में देश की महान विभूतियों से जूडे विशेष अवसर भी सभी देश वारसियों को प्रेरणा दे रहे हैं । जिस प्रकार पिछली सरकारों द्वारा देश के महान क्रान्तिकारियों के बलिदानों की उपेक्षा होती रही है वही मोदी जी की सरकार ने उन तामाम क्रान्तिकारियों जैसे- गुरू तेग बहादुर जी का 400 वा प्रकास पर्व, श्री अरविन्दों की 150 वी जन्म जयंती, वी.ओ. चिदम्बरम पिल्लई का 150 वां जन्मवर्ष और नेजा जी सुभाष चन्द्र बोस की125वीं जन्म जयंती जैसे पुण्य अवसरों को भव्यता से मनाने का कार्य किया है।
आजादी का अमृत महोत्सव हम सभी भारतीयों के लिए अगले 25 वर्षों के संकल्पों को आकार देने का पवित्र अवसर है । माननीय मोदी जी की सरकार"सबका साथ, सबका विकास और सबका प्रयास"के मंत्र पर चलते हुए अगले25वर्षों के लिए मजबूत बुनियाद पर तेजी से काम कर रही है । इस बुनियाद का सबसे महत्वपूर्ण संकल्प एक सर्व समावेशी, सर्व-हितकारी, सशक्त भारत का निर्माण और देश की अत्म निर्भरता है । कोरोना के इस कठिन समय की चुनौतियों ने देशवासियों को अपने लक्ष्यों को जल्द से जल्दप्राप्त करने के लिए प्रेरित किया है।
जिस प्रकार कोरोना महामारी से निपटने के लिए हमारे देश के प्रयास केवल तत्कालिक चुनौतियों तक सीमित नही है । इसलिए माननीय मोदी जी के सरकार ने ऐसे दूरदर्शी समाधान तैयार कर रही है जो कि भविष्य के लिए भी प्रभावी एवं उपयागी रहेगा । सरकार द्वारा64हजार करोड़ रूपये की लगत से शुरू किया गया भारत हेल्थ इनफास्ट्रक्चर मिशन इसका एक सराहनीय उदाहरण है । इससे न केवल वर्तमान की स्वस्थ्य संबंधी जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी, बल्कि आने वाले संकटों के लिए भी देश को तैयार किया जा सकेगा । माननीय मोदी जी के सरकार की संवेदनशील नीतियों के कारण देश में अब स्वास्थ्य सेवाएं जन साधारण तक आसानी से पहुंच रही है । 80हजार से अधिक हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर्स और करोड़ों की संख्या में जारी आयुष्मान भारत कार्ड से गरीबों को इलाज में बहुत मदद मिली है । सरकार ने 8000से अधिक जन-औसधि केंद्रों के माध्यम से कम कीमत पर दवाइयां उपलब्ध कराकर इलाज पर होने वाले खर्च को कम किया है । सुलभ एवं सुगम स्वास्थ्य सेवाओं के लिए उठाया गया आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन भी एक बड़ा कदम है।
कोरोना के इस महासंकट में हमने बड़े-बड़े देशों में खाद्यान की कमी और भूख की परेशानी देखी है । लेकिन माननीय मोदी जी की संवेदनशील सरकार ने इस बात का पूरा प्रयास किया है कि 100 साल के इस सबसे बड़ी संकट में कोई गरीब भूखा न रहे । माननीय मोदी जी के सरकार ने प्रधान मंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के अंतर्गत सभी गरीबों को हर महिने मुफ्त राशन दे रही है । 80 करोड़ लाभर्थियों को 19 महिने से खाद्यान्न वितरित करने हेतु2लाख 60 हजार करोड़ रूपये के साथ भारत में आज दुनिया का सबसे बड़ो फूड डिस्ट्रीब्यूसन प्रोग्राम चलाया जा रहा है । वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए पूरी संवेदनशीलता के साथ माननीय मोदी जी के सरकार द्वारा इस योजना को मार्च2022तक बढ़ा दिया गया है । इस योजना से ग्रामीणों क्षेत्रों के गरीबों को काफी लाभ मिल रहा है।
जिस प्रकार इस कोरोना महामारी के संकट में गरीबों की रोजगार चली गई थी वही माननीय मोदी जी की सरकार ने गरीबों के स्वाभिमान और उनके रोजगार के रक्षा के लिए प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना भी चला रही है । यह योजना हमारे रेहड़ी-पटरी वाले भाइयों-यों बहनों के लिए बहुत सहायक सिद्ध हो रही है । इस योजना के तहत अब तक 28 लाख रेहड़ी-पटरी वालों को 29 सौ करोड़ रुपए से ज्यादा की धनराशि जारी की गई है । सरकार अब इन स्ट्रीट वेंडर्स को ऑनलाइन फूड डिलिवरी करने वाली कंपनियों के साथ भी जोड़ रही है । श्रमिकों के हितों की रक्षा के लिए सरकार ने ई-श्रम पोर्टल भी शुरू किया है जिससे अब तक 23 करोड़ से अधिक श्रमिक जुड़ चुके हैं।
जनधन-आधार-मोबाइल अर्थात जे.ए.एम. ट्रिनिटी को माननीय मोदी जी की सरकार ने जिस तरह नागरिक सशक्तीकरण से जोड़ा है, उसका प्रभाव भी हम लगातार देख रहे हैं । 44 करोड़ से अधिक गरीब देशवासियों के बैंकिंग सिस्टम से जुड़ने के कारण महामारी के दौरान करोड़ों लाभार्थियों को सीधे कैश ट्रान्सफर का लाभ मिला है।
डिजिटल इंडिया और डिजिटल इकॉनमी के बढ़ते प्रसार के संदर्भ में देश के यू.पी.आई प्लेटफॉर्म की सफलता के लिए भी, मैं, सरकार के विजन की प्रशंसा करूंगा । दिसम्बर 2021में, देश में 8 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का लेन-देन UPI के माध्यम से हुआ है । यह इस बात का उदाहरण है कि हमारे देश में जन-सामान्य द्वारा, बदलाव और तकनीक को बहुत तेजी से अपनाया जा रहा है।
माननीय मोदी जी की सरकार मूलभूत सुविधाओं को गरीब के सशक्तीकरण और गरीब की गरिमा बढ़ाने का माध्यम मानती है । पिछले वर्षों के अनवरत प्रयासों से प्रधानमंत्री आवास योजना में अब तक दो करोड़ से अधिक पक्के घर गरीबों को मिल चुके हैं । 'प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण' के तहत गत तीन वर्षों में करीब डेढ़ लाख करोड़ रुपए की लागत से एक करोड़ सत्रह लाख घर स्वीकृत किए गए हैं।
हर घर जल' पहुंचाने के उद्देश्य से शुरू किए गए जल जीवन मिशन ने लोगों के जीवन में बड़ा बदलाव लाना शुरू कर दिया है । महामारी की बाधाओं के बावजूद करीब 6 करोड़ ग्रामीण घरों को पेयजल के कनेक्शन से जोड़ा गया है । इसका बहुत बड़ा लाभ हमारे गांव की महिलाओं-बहनों एवं बेटियों को मिला है । ग्रामीण क्षेत्रों में, लोगों को उनकी संपत्ति के दस्तावेज देने के लिए शुरू की गई स्वामित्व योजना भी एक असाधारण प्रयास है । इस योजना के तहत अब तक 27 हजार गाँवों में40लाख से अधिक प्रॉपर्टी कार्ड दिए जा चुके हैं । ये प्रॉपर्टी कार्ड न केवल विवादों को रोकने में सहायक हैं बल्कि गांव के लोगों को बैंकों से मदद मिलना भी आसान हो रहा है।
किसानों को उनकी फसल के अधिक दाम मिलें, इसके लिए उनके उत्पादों का सही बाजार तक पहुँचना जरूरी होता है । इस दिशा में सरकार ने किसान रेल सेवा शुरू करते हुए किसानों के लिए खुशहाली के नए रास्ते खोलने का काम किया है । कोरोना काल में भारतीय रेल ने सब्जियों, फलों तथा दूध जैसी, जल्दी खराब होने वाली खाद्य सामग्री के परिवहन के लिए, 150 से अधिक मार्गों पर 1900 से ज्यादा किसान रेल चलाई और करीब6लाख मीट्रिक टन कृषि उत्पादों की ढुलाई की । यह इस बात का उदाहरण है कि अगर सोच नई हो तो पुराने संसाधनों से भी नए रास्ते बनाए जा सकते हैं।
कृषि क्षेत्र में देश की सतत सफलता और बढ़ते सामर्थ्य का सबसे बड़ा श्रेय, देश के छोटे किसानों को जाता है । देश के 80 प्रतिशत किसान छोटे किसान ही हैं, जिनके हितों को माननीय मोदी जी की सरकार ने हमेशा केंद्र में रखा है । प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के माध्यम से 11 करोड़ से अधिक किसान परिवारों को एक लाख अस्सी हजार करोड़ रुपए दिए गए हैं । इस निवेश से कृषि क्षेत्र में आज बड़े बदलाव दिखाई दे रहे हैं । फसल बीमा योजना में नए बदलावों का लाभ भी देश के छोटे किसानों को हुआ है । इन बदलावों के बाद से अब तक8करोड़ से अधिक किसानों को मुआवजे के तौर पर एक लाख करोड़ रुपए से ज्यादा की राशि दी जा चुकी है।
इस प्रकार सरकार द्वारा बहुत सारी कल्याणकारी योजनाए चलाई जा रही है जिससे समाज के हर वर्ग के लोगों को इसका लाभ मिल रहा है जिसमें गरीब,किसान, युवा, महिलाएं तथा दिव्यांगजनों को लाभन्वित किया जा रहा है । एवं रेल मार्ग तथा सड़क मार्ग का विस्तार कर देश के इन्फ्रास्ट्रक्चर को काफी मजबूत किया जा रहा है एवं सरकार द्वारा एक नई भारत की स्थापना की शुरूआत किया जा चुका है।
मैं एक बार पुनः महामहिम राष्ट्रपति जी के अभिभाषण का समर्थन करता हूं तथा मुझे अपनी बात रखने का अवसर पार्टी ने दिया जिसके लिए मैं माननीय प्रधानमंत्री जी, राष्ट्रीय अध्यक्ष जी, माननीय गृहमंत्री जी का आभार व्यक्त करता हूं ।
*श्री मितेष पटेल (बकाभाई) (आनंद): मैं माननीय राष्ट्रपति महोदय द्वारा बजट सत्र2022-23 के शुभारंभ के अवसर पर दिये अभिभाषण का समर्थन करता हूँ । माननीय राष्ट्रपति जी का अभिभाषण ये दिखाता है कि 2 सालों से कोरोना जैसी चुनौती से मुकाबला करते हुए सरकार ने विकास की गतिशीलता को थमने नहीं दिया । ऐसी बातें कही और सुनी जा रही थी कि अगर यह महामारी भारत में रौद्र रूप पकड़ेगी तो भारत के लिए अति विनाशकारी साबित होगी । लेकिन जब हम आज मूल्यांकन करते हैं तो पाते हैं कि विश्व नेता मोदी जी के नेतृत्व में सरकार ने इस बीमारी से डटकर मुकाबला किया जिससे इसकी मारक क्षमता कुंद हुई और इतनी बड़ी आबादी वाला देश आज वैक्सीनेशन में रिकार्ड कायम कर विश्व के अन्य देशों को प्रेरित कर रहा है,बल्कि उन्हें नया भारत की ताकत का एहसास भी करा रहा है । कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई में भारत के सामर्थ्य का प्रमाण वैक्सीनेशन प्रोग्राम में नजर आया है । हमने एक साल से भी कम समय में 150 करोड़ से भी ज्यादा वैक्सीन डोज लगाने का रिकार्ड पार किया । आज हम पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा वैक्सीन डोज देने वाले अग्रणी देशों में से एक हैं । राष्ट्रपति ने कहा कि कोरोना के इस महासंकट में हमने बड़े-बड़े देशों में खाद्यान्न की कमी और भूख की परेशानी देखी है, लेकिन मेरी संवेदनशील सरकार ने इस बात का पूरा प्रयास किया कि 100 साल के इस सबसे बड़े संकट में कोई गरीब भूखा न रहे।
महामहिम राष्ट्रपति के भाषण में दिखता है कि सरकार देश की सुरक्षा के लिए दृढ़ संकल्पित होकर काम कर रही है । हिंदुस्तान एयरोनाटिक्स लिमिटेड के साथ 83 एलसीए तेजस फाइटर एयरक्राफ्ट के निर्माण हेतु अनुबंध किए गए हैं । सरकार ने आर्डिनेन्स फैक्ट्रियों को 7 डिफेंसPSU का रूप देने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं । सरकार की नीतियों की वजह से डिफेंस सेक्टर में, विशेषकर रक्षा उत्पादन में, देश की आत्मनिर्भरता लगातार बढ़ रही है।
माननीय राष्ट्रपति महोदय के भाषण से पता चलता है कि सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था और देश के किसानों और गरीबों को सशक्त बनाने के लिए लगातार काम कर रही है । प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के माध्यम से 11 करोड़ से अधिक किसान परिवारों को एक लाख अस्सी हजार करोड़ रुपए दिए गए हैं । इस निवेश से कृषि क्षेत्र में आज बड़े बदलाव दिखाई दे रहे हैं । सरकार के प्रयासों से देश का कृषि निर्यात भी रिकार्ड स्तर पर बढ़ा है । वर्ष 2020-21 में कृषि निर्यात में 25 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई । यह निर्यात लगभग 3 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया है । अब तक दो करोड़ से अधिक पक्के घर गरीबों को मिल चुके हैं । 'प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण' के तहत गत तीन वर्षों में करीब डेढ़ लाख करोड़ रुपये की लागत से एक करोड़ सत्रह लाख घर स्वीकृत किए गए हैं । डिजिटल इंडिया और डिजिटल इकॉनामी के बढ़ते प्रसार के संदर्भ में देश के UPI platform की सफलता के लिए भी मैं सरकार के विज़न की प्रशंसा करूंगा । दिसम्बर2021 में देश में 8 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का लेन-देन UPI के माध्यम से हुआ है।
राष्ट्रपति महोदय ने बताया कि सरकार द्वारा 64हजार करोड़ रुपये की लागत से शुरू किया गया । प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत हेल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर मिशन एक सराहनीय उदाहरण है । इससे न केवल वर्तमान की स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी, बल्कि आने वाले संकटों के लिए भी देश को तैयार किया जा सकेगा । सरकार की संवेदनशील नीतियों के कारण देश में अब स्वास्थ्य सेवाएं जन साधारण तक आसानी से पहुंच रही हैं । 80 हजार से अधिक हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर्स और करोड़ों की संख्या में जारी आयुष्मान भारत कार्ड से गरीबों को इलाज में मदद मिली है।
सरकार के निरंतर प्रयासों से भारत एक बार फिर विश्व की सर्वाधिक तेजी से विकसित हो रही अर्थव्यवस्थाओं में से एक बन गया है । इस वित्त वर्ष के पहले 7महीनों में 48 बिलियन डॉलर का विदेशी निवेश आना, इसका प्रमाण है कि अंतरराष्ट्रीय निवेशक भारत के विकास को लेकर आश्वस्त हैं । भारत उन देशों में से एक है जिसके पास सबसे सस्ते इंटरनेट और मोबाइल फोन हैं । हम 5Gविकसित करने पर भी काम कर रहे हैं । सेमीकंडक्टर पर हमारी पीएलआई योजना हमारे स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र और बढ़ावा देगी । आज भारत विश्व में दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन निर्माता बनकर उभरा है।
सरकार के नीतिगत निर्णय और प्रोत्साहन से विभिन्न पुलिस बलों में महिला पुलिसकर्मियों की संख्या में, 2014 के मुकाबले दोगुनी से ज्यादा बढ़ोतरी हो चुकी है । महिला सशक्तिकरण मेरी सरकार की उच्च प्राथमिकताओं में से एक है । बेटे-बेटी को समानता का दर्जा देते हुए मेरी सरकार ने महिलाओं के विवाह के लिए न्यूनतम आयु को 18 वर्ष से बढ़ाकर पुरुषों के समान 21वर्ष करने का विधेयक भी संसद में प्रस्तुत किया है । सरकार ने तीन तलाक को कानूनन अपराध घोषित कर समाज को इस कुप्रथा से मुक्त करने की शुरुआत की है । मुस्लिम महिलाओं पर केवल मेहरम के साथ ही हज यात्रा करने जैसे प्रतिबंधों को भी हटाया गया है।
माननीय राष्ट्रपति के भाषण से परिलक्षित होता है कि वर्तमान सरकार का जो मुख्य लक्ष्य है अंत्योदय, किसान, गाँव, गरीब, वंचित,दलित, आदिवासी का जीवन स्तर उपर उठे इसके साथ ही विकास सर्वसमावेशी हो, जिसमें आधुनिकता और प्रद्योगिकी का भी मेल हो । तमाम कारणों से उत्पन्न होने वाले प्रदूषण कम हो और पर्यावरण बेहतर बने । अन्न की गुणवत्ता बढ़े, सामाजिक न्याय के लिए तमाम योजनाएँ सही व्यक्ति तक पहुंचे इसके लिए सरकार लगातार सफल प्रयास करते हुए भारत और भारतियों को लगातार सशक्त कर रही है । भारत आत्मनिर्भर बनने की ओर मजबूती से अग्रसर है और विश्व नेता मोदी जी के नेतृत्व में सरकार अपने सारे लक्ष्य निश्चित समय में पूरा करेगी इस विश्वास के साथ मैं पुनः माननीय राष्ट्रपति का आभार व्यक्त करता हूँ और समर्थन करता हूँ।
जय हिन्द माननीय सभापति:ऐसा मत कीजिए ।
… ( व्यवधान)
SHRI E.T. MOHAMMED BASHEER (PONNANI): Madam, I am at your disposal. How can I speak when they are speaking like this? … (Interruptions) Please call me after she concludes. Otherwise, my time will go.
माननीय सभापति:बशीर जी, आप बोलना शुरू कीजिए ।
… ( व्यवधान)
माननीय सभापति:ऐसा नहीं होता है ।
… ( व्यवधान)
माननीय सभापति:बशीर जी, आप बोलना शुरू कीजिए । आपका समय जा रहा है ।
… ( व्यवधान)
SHRI E.T. MOHAMMED BASHEER : Madam, Thank you very much. Our party is having only two minutes. … (Interruptions) Otherwise, I will lose my time. Where will I go?… (Interruptions)
Madam, create a situation where I can speak. There is no meaning in talking like this. People should hear it. … (Interruptions) In a noisy situation like this, how can I speak? … (Interruptions)
माननीय सभापति :यह कोई तरीका नहीं है ।
… ( व्यवधान)
माननीय सभापति :यह अच्छा नहीं लगा । आप अन्य लोगों का भी तो ख्याल रखिए ।
… ( व्यवधान)
माननीय सभापति : श्री ए. एम. आरिफ जी।
… ( व्यवधान)
ADV. A.M. ARIFF (ALAPPUZHA): Madam, how can I speak when the House is not in order? Please bring the House in order … (Interruptions)
माननीय सभापति : डॉ. सुजय विखे पाटील ।
… ( व्यवधान)
माननीय सभापति : आप ऐसा मत कीजिए।
… ( व्यवधान)
माननीय सभापति : मैं इन्हें टाइम देती गई । 15 मिनट दिया।
… ( व्यवधान)
माननीय सभापति : यह अनुशासन नहीं है।
… ( व्यवधान)
माननीय सभापति : श्री के. पी. सिंह यादव जी।
… ( व्यवधान)
श्री कृष्णपालसिंह यादव (गुना): सभापति महोदया, मैं आपका आभारी हूं कि आपने मुझे माननीय राष्ट्रपति जी के अभिभाषण के धन्यवाद प्रस्ताव के समर्थन में बोलने का अवसर दिया।… (व्यवधान) वर्ष 2022का यह अभिभाषण कई दृष्टिकोण से महत्वूर्ण है।… (व्यवधान)
माननीय सभापति : इन्हें बोलने दीजिए, उसके बाद आप बोलिएगा, अभी बैठ जाइए।
… ( व्यवधान)
श्री कृष्णपालसिंह यादव :सर्वप्रथम हम, हमारे इस महान देश की आज़ादी के 75 वर्ष पूरे करेंगे और हमारी सरकार जो वर्ष2014से प्रयासरत है कि वह महात्मा गाँधी जी, बाबासाहेब अम्बेडकर जी, सरदार पटेल जी, दीन दयाल उपाध्याय जी, मदन मोहन मालवीय जी जैसे महापुरुषों के सपनों का जो भारत है, उसका निर्माण करे और आत्मनिर्भरता का जो लक्ष्य हमारे प्रधान मंत्री जी ने दिया है उसकी पूर्ति के लिए कार्य करे।… (व्यवधान) अपने अभिभाषण के माध्यम से राष्ट्रपति जी सरकार की प्राथमिकता, योजनाएं और आगामी समय में देश के विकास के लिए किस प्रकार सरकार कार्य करेगी, उसका विवरण करते हैं।… (व्यवधान)
18.58 hrs At this stage, Sushri Mahua Moitra came and stood on the floor near the Table.
श्री कृष्णपालसिंह यादव :माननीय सभापति जी, मैंने कल से अभी तक हमारे कई विपक्षी दलों के सांसदों के भाषण को सुना।… (व्यवधान) मुझे यह प्रतीत होता है कि सरकार की और राष्ट्रपति जी के अभिभाषण की आलोचना के अलावा और कुछ भी इनके पास कहने लायक नहीं बचा है।… (व्यवधान) मुझे इनकी इन हरकतों को देखकर एक शेर याद आता है -
अपनी खूबियों को बयां करते तो शायद मैं गौर करता, मेरी खामियों को गिनाकर तो बहुत लोग मशहूर हुए हैं।
आज कांग्रेस हो या कोई और अन्य विपक्षी दल के वक्ता सिर्फ राष्ट्रपति जी के अभिभाषण की निंदा करने में अपना पूरा जोर लगा रहे हैं,लेकिन राष्ट्रपति के अभिभाषण में इस सरकार की हर एक उपलब्धि को तथ्यों और आंकड़ों के साथ प्रस्तुत किया गया है।… (व्यवधान)इस सरकार ने विभिन्न योजनाओं के द्वारा जनता को लाभ पहुंचाया है, जैसे जन धन योजना,जिसमें करोड़ों नए बैंक अकाउंट्स खोले गए, जिसने आर्थिक समग्रता को बढ़ावा दिया।… (व्यवधान)
माननीय सभापति : केवल यादव जी की ही बात रिकॉर्ड में जानी चाहिए।
… ( व्यवधान)…* श्री कृष्णपालसिंह यादव : आयुष्मान भारत योजना,जो स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक लाभकारी योजना है, इससे गरीब परिवारों को इलाज में आर्थिक सहायता मिली।… (व्यवधान)जन औषधि केन्द्र के माध्यम से सस्ती दवा पूरे देश में दी जा रही है।… (व्यवधान) `बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ` के माध्यम से देश की बेटियों की शिक्षा के महत्व और इस संवेदनशील मुद्दे पर जागरूकता बढ़ी है । . . . . (व्यवधान)
19.00 hrs उज्ज्वला योजना में करोड़ों महिलाओं को गैस सिलिंडर दिए गए, जिससे उनका सशक्तिकरण हुआ।… (व्यवधान)प्रधान मंत्री आवास योजना के अंतर्गत गरीबों के लिए मकान बनाए गए।… (व्यवधान)प्रधान मंत्री मुद्रा योजना ने स्वरोजगार के लिए अवसर बनाए।… (व्यवधान)जी.एस.टी. के कार्यान्वयन से एक देश एक टैक्स का सपना साकार हुआ है।… (व्यवधान)आज जब भारत देश अपनी आजादी के 75 वर्ष पर ‘अमृत महोत्सव’मना रहा है,तब प्रत्येक भारतवासी की यह संकल्पशक्ति,भारत के उज्ज्वल भविष्य के लिए असीम विश्वास पैदा करती है।… (व्यवधान)राष्ट्रपति जी ने अपना अभिभाषण `अमृत महोत्सव` का विवरण करते हुए किया और वित्त मंत्री जी ने भी बजट भाषण में कहा कि आज़ादी का अमृत काल है । . . . .(व्यवधान)
माननीय सभापति महोदया, इस शब्द का एक व्यापक अभिप्राय है कि मूलभूत सुविधाएं ही हमारे गरीब,किसान,युवा और महिलाओं के लिए अमृत है।… (व्यवधान)इसमें घर,बिजली,पानी, सड़क शौचालय, बैंक खाता, खाद्य सामग्री शामिल हैं।… (व्यवधान)आज़ादी के75 साल में, 60 साल तक शासन करने वाली कांग्रेस पार्टी के राज में ये गरीब किसानों को, दलितों को,युवाओं को और महिलाओं को न ही सुविधा दे पाए, बल्कि इन सभी ने सिर्फ विष का घूंट पिया और मूलभूत सुविधाओं से इनको वंचित रखा गया।… (व्यवधान)मोदी जी के नेतृत्व में विभिन्न योजनाओं के माध्यम से इस वर्ग को अमृत देने का काम किया गया है।… (व्यवधान)
19.01 hrs At this stage Sushri Mahua Moitra went back to her seat.
आज़ादी के इन 75 वर्षों में देश की विकास यात्रा में अपना योगदान देने वाले सभी महानुभावों का भी मैं श्रद्धा-पूर्वक स्मरण करता हूँ । राष्ट्रपति जी ने अपने अभिभाषण में उन सभी स्वतंत्रता सेनानियों और देश के महापुरुषों को श्रद्धांजलि दी । हमारी सरकार ने इतिहास के उन सभी महापुरुषों, जिनमें नेताजी सुभाष चन्द्र बोस, संविधान के निर्माता बाबासाहेब अम्बेडकर, सिख गुरू गुरु तेग बहादुर जी का 400वां प्रकाश पर्व, भगवान बिरसा मुंडा शामिल हैं, उन सभी को श्रद्धांजलि देने के लिए उनकी जयंती को उत्सव की तरह मनाने का काम किया है । सिख समुदाय के साहिबजादों के बलिदान की स्मृति में 26 दिसंबर को 'वीर बाल दिवस' की घोषणा एवं14अगस्त को ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस' इसी सोच का परिचायक है । हमारी सरकार ने अगले 25 वर्षों का भी विजन तैयार कर रखा है । आज हमारी सरकार ने अंत्योदय को हर योजना का केन्द्र बिन्दु बनाकर अंतिम पंक्ति में खड़े हर नागरिक की प्रगति के लिए `सबका साथ सबका विकास सबका विश्वास और सबका प्रयास` के मूलमंत्र को लेकर आगे चलने का काम किया है ।
माननीय सभापति महोदया, कोविड-19 के खिलाफ इस लड़ाई में भारत के सामर्थ्य का प्रमाण कोविड वैक्सीनेशन प्रोग्राम में नजर आया है । हमने एक साल से भी कम समय में 150 करोड़ से भी ज्यादा वैक्सीन डोज लगाने का रिकॉर्ड तैयार किया है । इस अभियान की सफलता ने देश को एक ऐसा रक्षा-कवच दिया है जिससे हमारे नागरिकों की सुरक्षा भी बढ़ी है और उनका मनोबल भी बढ़ा है । मैं प्रधान मंत्री जी का और स्वास्थ्य मंत्रालय का अभिनन्दन करता हूं, जिन्होंने इतनी बड़ी संख्या में 75प्रतिशत वयस्क जनसंख्या के लिए सुचारू ढंग से टीकाकरण अभियान चलाया । हमारे वैज्ञानिकों की हुनर एवं मेहनत का ही परिणाम है कि हम पूरी दुनिया में हर देश को वैक्सीन निर्यात कर रहे हैं और ग्लोबल वैक्सीनेशन, जो इस महामारी को खत्म करने का सबसे कारगर हथियार है, उसमें अपना योगदान दे रहे हैं।
हमारी सरकार की संवेदनशील नीतियों के कारण देश में अब स्वास्थ्य सेवाएं जन साधारण तक आसानी से पहुंच रही है । 80,000 से अधिक हेल्थ एण्ड वेलनेस सेन्टर्स और करोड़ों की संख्या में जारी आयुष्मान् भारत कार्ड से गरीबों के इलाज में बहुत मदद मिली है । सरकार ने आठ हजार से अधिक जन-औषधि केन्द्रों के माध्यम से कम कीमत पर दवाइयाँ उपलब्ध कराकर, इलाज पर होने वाले खर्च को कम किया है । सुलभ और सुगम स्वास्थ्य सेवाओं के लिए उठाया गया `आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन` भी एक बहुत बड़ा कदम है ।
सभापति महोदया, सरकार द्वारा किए गए प्रयासों के परिणामस्वरुप योग, आयुर्वेद एवं पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है । वर्ष 2014में देश में6,600करोड़ रुपये के आयुष उत्पादों का निर्यात होता था, जो आज बढ़कर 11,000 करोड़ रुपये से अधिक हो रहा है । दुनिया के सबसे पहले डब्ल्यू.एच.ओ. ग्लोबल सेन्टर ऑफ ट्रेडिशनल मेडिसन की स्थापना भी भारत में होने जा रही है।
सभापति महोदया, स्वास्थ्य की दृष्टि से हमारे देश में सिर्फ आयुष ही नहीं, बल्कि अन्य स्वास्थ्य संबंधी सेवाओं का सृजन करने का काम किया गया है । ‘आयुष्मान भारत योजना’के माध्यम से 80 हजार से अधिक हेल्थ एंड वेलनेस सेन्टर्स खोले गए हैं ।
देश की अनेक जगहों पर कई नए एम्स खोले गए हैं । संपूर्ण देश में कई जिला चिकित्सालयों को मेडिकल कॉलेज में अपग्रेड किया गया है, जिससे डॉक्टर्स की कमी को पूरा किया जा सके । सरकार ने मध्य प्रदेश में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ रिहैबिलिटेशन की स्थापना की है । आज हमारी सरकार की नीतियों में गाँव, गरीब, पिछड़े, अनुसूचित जाति एवं जनजाति को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है । हाल के वर्षों में पद्म पुरस्कारों के चयन में भारत की यह भावना भली-भाँति झलकती है।
मान्यवर, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत विभिन्न परियोजनाओं और अटल भू-जल योजना की मदद से देश में64लाख हेक्टेयर सिंचाई क्षमता विकसित की गई है । नदियों को आपस में जोड़ने का काम किया गया है, जिसमें प्रमुखत: 45 हजार करोड़ रुपये की लागत से पूरी होने वाली केन-बेतवा लिंक परियोजना है, जो कि बुंदेलखंड के लिए एक वरदान साबित हुई है।
मान्यवर, बुंदेलखंड में एक-एक बूंद पानी के लिए लोग तरसते थे । आजादी के 70 साल के बाद एक ऐसा ऐतिहासिक काम हुआ है । उस बुंदेलखंड क्षेत्र में एक कहावत मशहूर है कि `गगरी न फूटे, चाहे खसम मर जाए ।` जहां एक गगरी पानी की कीमत जान से भी बढ़कर होती थी, उस बुंदेलखंड के लिए यह एक वरदान साबित होगी ।
सभापति महोदया, अगर मैं स्पोर्ट्स की बात करूँ तो ओलंपिक्स और पैरा-ओलंपिक्स में रिकॉर्ड प्रदर्शन के बाद मध्य प्रदेश के ग्वालियर में आधुनिक सुविधाओं से युक्त सेन्टर फॉर डिसएबिलिटी स्पोर्ट्स की स्थापना की गई है । दिव्यांग युवाओं के भविष्य के लिए 10 हजार शब्दों की इंडियन साइन लैंग्वेज डिक्शनरी भी बनाई गई है । देश में एकलव्य मॉडल रेसिडेंशियल स्कूल भी बनाया गया है । यह हमारे आदिवासी युवाओं के सशक्तिकरण के लिए व्यापक निर्णय है।
मान्यवर, रेलवे स्टेशन के आधुनिकीकरण में भी मध्य प्रदेश अग्रणी रहा है । मेरे क्षेत्र में जितने भी रेलवे स्टेशंस हैं, उन सभी का जीर्णोद्धार किया गया । रेलवे स्टेशनों के आधुनिकीकरण के कार्य में आधुनिक सुविधाओं के साथ वर्ल्ड क्लास इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने के साथ ही भोपाल रेलवे स्टेशन का नाम रानी कमलापति के नाम पर रखा गया, जिससे हमारे वर्तमान और आने वाली पीड़ियों को रानी कमलापति जैसे गणमान्य व्यक्ति के योगदान का पता चलेगा । इसके साथ-साथ देश में अनेकों नेशनल हाइवेज़ बनाए गए । मेट्रो रेलवे स्टेशंस बनाए गए । स्मार्ट सिटीज़ को अपग्रेड किया गया । उड़ान योजना के तहत अनेक शहरों में एयरपोर्ट्स बनाए गए।
सभापति महोदया, प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के अंतर्गत मेरी सरकार सभी गरीबों को हर महीने मुफ्त राशन दे रही है । 80 करोड़ लाभार्थियों को 19 महीनों से खाद्यान्न वितरित करने हेतु2लाख 60 हजार करोड़ रुपये खर्च किए गए । भारत में आज दुनिया का सबसे बड़ा फूड डिस्ट्रिब्यूशन प्रोग्राम चलाया जा रहा है।
प्रधान मंत्री गरीब कल्याण योजना के माध्यम से 80 करोड़ लाभार्थियों को मुफ्त अन्न उपलब्ध कराया गया । मनरेगा के माध्यम से देश के हर जिले में अनेकानेक रोजगार उत्पन्न किए गए । हार्टिकल्चर और शहद उत्पादन भी किसानों के लिए आमदनी के नए स्रोत और बाजार तक उनकी बढ़ती पहुंच के महत्वपूर्ण माध्यम हैं । किसानों को उनकी फसल का अधिक दाम मिले, इसके लिए उनके उत्पादों को सही बाजार तक पहुंचाना जरूरी होता है । इस दिशा में सरकार ने किसान रेल की शुरुआत की।
महोदया, मेरी सरकार मूलभूत सुविधाओं को गरीब के सशक्तीकरण और उसकी गरिमा को बढ़ाने का माध्यम मानती है । मुझे गर्व है कि हमारी सरकार ने गांव में रहने वाले नागरिकों को होने वाली असुविधा के बारे में सोचा और ऐसी योजनाएं बनाईं, जिससे ग्रामीण क्षेत्र का विकास हो और उन्हें गति मिले । … (व्यवधान)
*SHRI GAUTHAM SIGAMANI PON (KALLAKURICHI): The Presidential address delivered was of immense importance and drew the attention of all sections of the community, especially the parliamentarians from Opposition benches. The speech delivered was, of course, statement of the Government in power. The speech made all efforts to cover up the failures of this Government on all fronts. Failure on all fronts is not a wild charge levelled against the ruling dispensation but a painful fact. How else can somebody respond to the kind of subversions done by this Government? Every wing of governance – Parliament, Executive and Judiciary are thoroughly demoralized and insulted at every opportune moment. All forms of constitutional authorities are silenced under threat. The nation is headed by a Prime Minister who has made it a tradition to disrespect and disregard parliamentary procedures. This Prime Minister will go on to become a record of sorts to have been a mark as the one who has never ever participated in any form of debates. For the present party in governance the Parliament is an unnecessary hindrance in the execution of their agenda.
Moving on to the speech, the insistence and reverence attributed to remembering the past and learning from it is absolutely welcomed. But what is remembered and to what purpose and what is learnt makes it all the more important. This Government is anxious to subvert the basic structure of this country of 140 crore citizens comprising several social, cultural, religious and linguistic identities into a singular identity. The remembrance is so designed to replace many historic personalities with new idols. All efforts are in full swing to make Savarkar as the Father of the Nation. This is not just a replacement of personality but a big shift away from the secular basics. Remembering is not an isolated act but on the other hand has an ignoring part or consciously forgetting act. This patriotic Government which remembers our Great Valorous Thamizhian V O Chidambaranar on his 150th anniversary but refuses or rather rejects the Tamil Nadu Government float with his life like figure. The worst part is the rejection of that float carrying the life like image of Veera Mangai Velu Natchiar proudly riding a horse. Veera Velu Natchiar was the first Queen/woman warrior who bravely fought the invading British Imperialist army and was a martyr. She was the first ever Queen/warrior who physically led the army and fought the battle and laid her life in the battle field. Remember Prime Minister Modi, Sir, this was full hundred years before the much-celebrated Queen of Jhansi was born. Yes, your remembering or your memory itself is a problem and has the potency to erase many a memories and ties that makes this country a Union of States. Remember the union is a bond that brings together this multi ethnic, multicultural diversified land space into a nation, but still the State remains the soul and the domain of sovereignty. The Citizenship Act may be handled by the Union but the citizens are with the State.
So much is talked about in the speech about the Corona pandemic management but the fact remains that the pandemic situation exposed the inability of this Government in many a ways. Whereas the real crisis was being handled by the States, the Union meddled with many of the decision making. When the pandemic condition was varying everywhere, what was the purpose of a centralized uniform directive? Modi’s Government gravest mistakes made the situation worse. A Prime Minister obsessed with unilateral decision making without consultation locked down the country without warning. The worst affected were migrant labourers and were seen walking several thousand miles to home and many died enroute and this Government coolly said nothing of the sort was reported. Regarding vaccination approval, the kind of hasty decisions like approving Bharath Biotech vaccine before the completion of trial will speak volumes. Most of the decisions are still mysterious and confusing. Even pricing and who (Union or State) is to pay for the vaccines was caught up in issues. This is the kind of management that is lauded now. Of course, this Government’s management is absolutely great when it came to blaming the States for the failures and claiming credit for the minimal success hard won by States. The pandemic situation is not over yet. Before claiming credits the Union should play proactive role in bringing about a peaceful end. The Government should come out with decisions after consultation with the States.
It is strange that a Government which made farmers’ fight an arduous battle against the hastily brought in three atrocious farm laws for a year, can proudly showcase the procurement data on rice and wheat. The highest point of strangeness is the declaration of year 2023 as Millet year. Declaration of years is fine. Is the Government armed with a working strategy on the procurement side? Eighty per cent of products of farming are from small and marginal farmers and sweated out through hard labour and meagre profit is the norm till date. Allowing it to the whimsicalities of free market is the cause for the situation. The Government should formulate a procurement strategy to save them.
The passage of speech on National Education Policy opens with a Thirukural couplet by our Thiruvalluvar is an irony. The couplet has a very strong message which can never be understood by this Hindutuva Government. In nutshell, it states or advices to read deeply understanding the essence of the subject and act as per the positive understanding aiming at the well-being of the community at large. National Education Policy and entrance examinations proposed are in favour of rich and upper castes. The aim of entrance examinations which require specialized, costly coachings are steeped discrimination. It disadvantages the already under-privileged and again operates to perpetuate the sanatanic caste inequality. Tamil Nadu Government’s Bill demanding exemption from NEET is based on deeper understanding of social inequality steeped in this society by the religious principles which justifies discrimination in the name of Karma. The modern-day Karma is just duty, duty to the poor and unempowered. Hence, we oppose all forms of entrance examinations, which is nothing but an injustice to the poor and needy and that exactly is what is implied in the end of the Thirukural couplet. There should be impeccable learning towards serving the humanity and one should live up to it. Overcoming the discriminations is the essence of service to the humanity. Abolishing all forms of entrance examinations in the education sector is a must.
SHRI E.T. MOHAMMED BASHEER (PONNANI): Madam, thank you for giving me this opportunity.
I was closely listening to all the speeches made yesterday and today on the Motion of Thanks. I am of the opinion that if we are giving a thanks message or adopting a Motion of Thanks, it should be given to Shri Rahul Gandhi. Yesterday, his speech was really the reflection of the pulse of the Indian citizens. With this, I would like to say a few things. I understand the time constraint.
The first sentence of paragraph-4 of the President’s Address reads as: “My government believes that remembering the past and learning from it are equally important for a secure future of the country.” The words are really beautiful. At the same time, what about your deeds? It has nothing to do with your words. On the other hand, it is contrary to the facts.
Analysing India’s past and present, there is a very authentic document. What is that? It is National Multi-Dimensional Poverty Index. The baseline of the Report is based on the National Family Health Survey, 2021 of NITI Aayog. It is a 218-page Report. It gives shocking figures. The Report says how far the deprivation level is there in different sectors. So, what I am saying is, there is no meaning in concealing the facts and pretending ourselves that everything is okay. This report will give you shocking figures of how far the deprivation level is there at the national and at the State level.
As far as poverty is concerned, this country is going from bad to worse. Most of the poverty eradication programmes are remaining in dead letters. There is no emphasis on MNREGA. Allotment for PMAY has not been increased. Addressing malnutrition is also a problem, and it is remaining as it is. Non-availability of clean drinking water, especially in the village side, is alarming. All these things are there.
Now coming to social justice, empowerment and the level of disabled persons, we have 2.68 crore disabled persons, that is, 2.21 per cent of the Indian population. What exactly is the situation? Their employment, their living and their welfare facilities – all are in a deplorable condition. Kindly go through the latest Report of the Standing Committee on Social Justice and Empowerment.
It shows that skill development programme planned for them is not implemented properly. There is an ADIP programme which gives assistance to disabled persons for purchase of fitting aids and appliances. That is also not implemented properly. This is what the Report says.
Similarly, on all other matters, this is the position. I do not want to go into all the details. Formation of district level District Disability Rehabilitation Centres is not properly administrated. These kinds of things are going on.
In the President’s Address also, you repeated this. My friend was also repeating that. They follow the mantra of Sabka Saath, Sabka Vikas, Sabka Vishwas and Sabka Prayas. What exactly is happening? Why I am telling you, with all the politeness, is that even if you repeat these words 1001 times, you will not improve. You cannot have any iota of kindness with this kind of kindness. I will tell you many examples.
Let me now come to the minorities and the atrocities committed on them. My learned friend was speaking about that but, unfortunately, she could not complete her speech. What is happening? All kinds of atrocities are inflicted on minorities. It is an endless story. They are putting innocent people in the jails. The people of SC and ST communities are in a very bad situation in the country. They are put in jails on sedition charges. In certain cases, even without any chargesheet, they are put in jails. Imposing this kind of a draconian law is a shame for the nation. They are fabricating stories against minorities. We all know what kind of stories these are. They are harassed on issues like mob-lynching, cow slaughter, love jihads, etc. They have taken birth in this country. They would live here, and they would die here also. You should not harass them.
The Government is doing many things, which I do not want to speak. They are muzzling the Press. You are silently supressing them. You are not tolerating criticism. That is not fair in democracy. In Kerela, my friends from Media One were saying that you have completely banned their telecast. What is the justification? You have done it without even giving them a notice. What is the stand of the Government in this matter? I would like to tell you that media is the fourth pillar of democracy. If you attack that, it is not a good sign in democracy.
Towards the end, I would like to add one more thing about the Calicut airport. The Government is crippling the wings of the Calicut airport. It is a very serious concern. Instead of increasing the length of runway on the airport, they are shortening it to forever stop the operation of wide-bodied aircrafts. I would like to tell you that it is injustice.
माननीय सभापति:एडवोकेट ए.एम. आरिफ जी।
… ( व्यवधान)
माननीय सभापति: आपको दो मिनट ज्यादा समय दिया है, सात मिनट का समय दिया है ।
SHRI E.T. MOHAMMED BASHEER : You should not do these things. ....(Interruptions)
Towards the end, I would like to say that you are following a trend, that is, governance by the Governor. That is injustice in democracy. As far as Government is concerned, you should not adopt these kinds of wrong methods. Democracy should be preserved. We stand for that. The country stands for that. I request the Government not to do such kinds of things with ulterior motives. This is injustice. This has to be stopped. With these few words, I conclude. Thank you.
ADV. A.M. ARIFF (ALAPPUZHA): Thank you, Madam, Chairperson, for giving me this opportunity. On behalf of CPI (M) party, I rise to oppose the Motion of Thanks on the President’s Address.
Madam, the people of the country feel utterly disappointed with the hon. President’s Address to the Houses as he was insincerely praising his clue-less Government instead of showing them the right path to move ahead in this troubling time.
A major part of his speech was focussed on the achievements of his Government in tackling the COVID-19 menace. But the entire world has seen how this Government has been a total failure in its response to COVID-19. I shall read international data on how different countries allotted fiscal stimulus and share of their GDP to tackle the COVID-19 challenge. Value of fiscal stimulus measures as a share of GDP in respect of other countries was like this: Argentina – 12 per cent; Australia – 19.97 per cent; Brazil – 12 per cent; Canada – 19.7 per cent; China – 4.7 per cent; European Union – 11.27 per cent; France – 12.06 per cent; Germany – 34.81 per cent; and India – 3.5 per cent. This is the international data. Due to time constraint, I am not going into the detail of all that.
Madam, how can we forget the sights of thousands of our brothers and sisters who lost their lives without getting food and even water while fleeing from cities during the unplanned and sudden lockdown announced on March 24th of 2020 by the Prime Minister without any consultations?
Madam, has this Government ever bothered to enquire how many of our migrant labourers lost their lives on their way to their native places barefoot? Does the Government have any data regarding the pravasis, who contributed to the savings of our foreign exchange deposits, who lost their lives and livelihood due to the pandemic? No, there is nothing with this Government.
Even after death, we could not give many of them a decent burial and we found so many dead bodies floating in the Holy Ganga. These sins will not wash away even if our Prime Minister takes a thousand dips in the Ganga.
Madam, hon. President in his speech lauded his Government for administering 150 crore doses of COVID-19 vaccine. Actually, he should have praised the hon. Supreme Court for this achievement. When the Government had thrown the people of this country below 45 years, and the State Governments, at the mercy of the vaccine manufacturers, it was the hon. Supreme Court which intervened for the common people of this country. I would like to make a humble submission before the Government to please replace the picture of the Supreme Court with that of the hon. Prime Minister on the COVID-19 vaccine certificate. It is justified to the truth. If the judges of the Supreme Court had not shown the courage to ask the Government what they are going to do with Rs. 35,000 budget allocation for COVID-19 vaccination, we would have seen many more thousand dead bodies piling up before crematoriums in second and third waves of the pandemic.
Madam, then this Government made the rhetoric of Rs. 20 lakh crore assistance under Atmanirbhar Bharat Abhiyan claiming that it will help the people to come out of the chaos created by the pandemic. Even after one and a half years, no one knows how much of this actually reached the people and how it helped the common people.
Every time people face a crisis, the Prime Minister will appear before them with a new slogan and people will look forward that they would get something to cheer off. First, he came with the slogan that ache din aane wale hain and people would not have thought that they were going to face bure din that they had never faced before in their lives.
Then, he came with ‘Make in India’ campaign, but what people saw was ‘Selling India’ campaign in which our precious gems in the public sector are lost day-by-day. Then came the Amtanirbhar Bharat. Who became Atmanirbhar? It was not the ordinary people of this country but the corporates like Ambanis and Adanis.
Madam, even if a fraction of what has been revealed by the New York Times a few days ago is believable, it turns out that this Government was deliberately misleading this House by repeatedly denying that it has nothing to do with Pegasus.
Madam, the people of this country expected that the hon. President would announce some solace for the brave farmers for their year long fight against the pro-corporate policies of this country.
It is a … * that not even once the hon. President acknowledged the courage shown by the lakhs of farmers of our country to lead such a long and victorious struggle ever since we got our Independence.
Madam, this Government has not shown the courtesy even now to accept that at least a few hundred farmers lost their precious lives during their struggle and it is the responsibility of the country to help the families of those brave martyrs for sacrificing their lives for their rights.
Madam, Global Hunger Index 2021 and World Inequality Report 2022 have exposed the claims of this Government and its ground realities. While we stand at 101st position among 116 countries in terms of hunger, India is one of the most unequal countries in the world. The people of this country expected the hon. President to at least remind the Government of these realities so as to take affirmative actions to correct them. Instead, what they heard was the ‘Stuti Gita’ in praise of BJP Government. In fact, the hon. President was making an attempt to hide the failures of this Government.
माननीय सभापति :श्री हसनैन मसूदी जी अब आप बोलिए।
श्री हसनैन मसूदी (अनन्तनाग): सभापति महोदया, आपका बहुत-बहुत शुक्रिया । आपने मुझे राष्ट्रपति जी के एड्रेस पर शुक्रिया की तहरीक पर अपनी राय जाहिर करने का मौका दिया । मैं बड़ी माज़रत से यह कहता हूं कि मैं इस पोजिशन में नहीं हूं कि इस तहरीक की हिमायत करूं, इसकी ताईद करूं । राष्ट्रपति जी ने अपने एड्रेस के पैरा 71 में जम्मू-कश्मीर का जिक्र किया है । जम्मू-कश्मीर में काजीगुंड बनिहाल टनल और कुछ इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट की बात कही है । लेकिन, बड़े दु:ख की बात है कि इस बात का जिक्र नहीं हुआ कि चार साल से डेढ़ करोड़ लोग किसी रिप्रेजेंटेशन के बगैर हैं, किसी असेम्बली के बगैर हैं । उसके बारे में न कोई अपना तज़किरा है । न यह कहा गया कि कब उनके हुक़ूक़ वापस दिए जाएंगे, जो उनसे असंवैधानिक तरीके से 5 अगस्त, 2019 को या उसके बाद उनसे छीने लिए गए । न यह जिक्र किया गया कि कब वहां डेमोक्रेसी रिस्टोर की जाएगी, जो साढ़े चार सालों से नहीं है । हमारे मुल्क का गौरव क्या है? हम किस बात का बार-बार तज़किरा करते हैं? हम दावा करते हैं कि यह सबसे बड़ी जम्हूरियत है । जम्हूरियत में सबसे बड़ी चीज यह है कि जो एक स्टेट है, उस स्टेट के लोगों को, अवाम को अपनी हुकूमत चुनने का हक हो । जम्मू-कश्मीर में पिछले साढ़े चार सालों से वह हक डिनाइ किया जा रहा है । यह कौन-सी उपलब्धि है । क्या हम यह तवक्को नहीं करते थे कि राष्ट्रपति जी अपने भाषण में एक खाका खीचें । जो फॉर्म लॉज से, उनसे सबक लेकर सरकार ने जो बाकी असंवैधानिक कदम उठाए हैं, उनको नफी करके महसूस करें, इन्ट्रोस्पेक्शन करें, खुद एक्सरसाइज करें और उसको रिस्टोर करें, जो रूतबा, हैसियत और स्पेशल स्टेटस उसको आईन में दिया गया था । यह मायूसी की बात है । यदि सिर्फ एक टनल और इंडस्ट्रीज की अहमियत है, तो आप पांच स्टेट्स में इलेक्शन करने के लिए क्यों जा रहे हैं? उन पांच स्टेट्स में जम्मू-कश्मीर की तरह एक अफसरशाही लागू कीजिए । पांच अफसरों के हवाले हर स्टेट में सारा इंतजामिया लगाइए । उसके बाद आप फिगर्स पर जाइए कि हमने कितनी टनल्स बनाईं और हमने कितनी सड़कें बनाईं । एम्पलॉयमेंट के बारे में तज़किरा होना चाहिए था । सारे मुल्क में एम्पलॉयमेंट की समस्या है । जम्मू-कश्मीर में बिल खसुस है । इस वक्त किश्तवार में एक चुनी हुई नुमांइदा पिछले कई दिनों से भूख हड़ताल पर है । वहां लोकल रिप्रेजेंटेशन बनाया जा रहा है । वहां पर लोकल यूथ को कोई रिप्रेजेंटेशन नहीं दी जा रही है । जम्मू-कश्मीर में इस समय करीब 20 परसेंट के करीब अन-एम्पलायमेंट है, जिसके बारे में इस भाषण में कहीं तज़किरा नहीं है । एड्रेस में 61000 डेली वेजर्स, कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स, कैजुअल वर्कर्स और उनके रिजर्वेशन के लिए स्कीम के बारे में तज़किरा होना चाहिए था । उनके लिए क्या कल्पना है, क्या रोडमैप है, उसके बारे में तज़किरा नहीं है । हमारा मुतालबा होगा कि उस तरफ पूरी तवज्जो दी जाए । हमारे जो 3000 के करीब रहबर-ए-तालीम, 3000 के करीब सीजनल टीचर्स, हमारा आईवाईसी, जो यूथ कॉर्पस है, बाकी अन्य जो टीचर्स हैं, जिनके पास चांस नहीं है, जिनके पास कोई ऑप्शन नहीं है, उनको कोई अवसर नहीं दिया जा रहा है । उनके लिए रिक्रूटमेंट का कोई एवेन्यूज नहीं है । उसकी तरफ तवज्जो दिया जाना चाहिए । वह बिल्कुल खामोश है ।
आप पैकेजेज की बात करते हैं । हमारी जो रूलिंग पार्टी है, बात उठती है कि सारी चीज कोर्ट में है, सब सब ज्यूडिस है । यह सब सब ज्यूडिस है तो रिहैबिलिटेशन एक्ट सब ज्यूडिस नहीं है । आप वहां पर उस कानून पर अमल कर रहे हैं, जिसका कोई तज़किरा इस एड्रेस में नहीं है । जिस कानून को चुनौती दी गई है और सुप्रीम कोर्ट ने दस पेटिशनर्स को एडमिट किया है, जिसको इस वक्त कांस्टिट्यूशनल बेंच देख रहा है । क्या रूल ऑफ लॉ का यही तकाजा है? आईन का यही तकाजा है? क्या आप एक डिलिमिटेशन कमीशन पर काम कर रहे हैं? सुप्रीम कोर्ट के कांस्टिट्यूशनल बेंच ने समात करने पर अपनी रज़ामदी जाहिर की है । इस वक्त वह जूडिशियल सिक्योरिटी में वह कानून है । जो कांस्टिट्यूशनली सस्पेक्ट लॉ है, उसी पर अमल किया जा रहा है । इसका भी जिक्र नहीं है । ये सारा कांस्टिट्यूशन के विरुद्ध है । यह रूल ऑफ लॉ के विरुद्ध है, तो आप कैसे डिलिमिटेशन कर सकते हैं? आपने नौकरियां छीन ली हैं । आपने हमारा परचम छीन लिया है । आपने कांस्टिट्यूशन को डिसेबल किया है । हमारा जो हक है, वह मौजूद है, लेकिन आपने उसको डिसेबल किया है । आप इस पर कैसे कार्रवाई कर सकते हैं? हमारी नौकरियां, जमीनें और सारा डेमोग्राफिक चेंज कर रहे हैं । हम जानते हैं, जम्मू-कश्मीर के लोग वाकिफ़ हैं कि आपका लक्ष्य क्या है? आप उसका डेमोग्राफिक चेंज करना चाहते हैं । उसके बारे में कोई जिक्र नहीं है । वाज़ह तरीके पर हमारे एक लीडर ने वाज़ह तौर पर कहा कि आपने स्टेट्स के खिलाफ जंग छेड़ दी है । अभी तमिलनाडु वाले भी कह रहे थे । आपने जम्मू-कश्मीर के हिस्से किए । आइन का जो दफा है, वह कहता है कि भारत राज्यों का संघ है ।
यह सभी राज्यों का एक यूनियन है । आपकोएक राज्य का दर्जा कम करने की इजाज़त कौन-सा आईन देता है? हर राज्य की अपनी एक पहचान है, अपना एक तलफ़्फ़ुज़ है, अपनी एक पर्सनालिटी है । आप कैसे उसकी इंटेग्रिटी को खत्म कर सकते हैं और कैसे उसको फ्रेगमेंट कर सकते हैं? आपको परवाह ही नहीं है, सारा अहंकार है, सब घमंड की बात है । आप जम्मू-कश्मीर की हर एक चीज पर हमला कर रहे हैं । अब आप फ्रूट पर हमला कर रहे हैं । आप बाहर से कस्टम ड्यूटी फ्री फ्रूट्स ला रहे हैं, ताकि आप जम्मू-कश्मीर के फ्रूट्स को चुनौती दे सकें और आप उसका मार्केट खत्म कर सकें । हिमाचल प्रदेश भी उससे मुतासिर होगा । आप हर तरीके से जम्मू-कश्मीर की साहजात पर हमला कर रहे हैं, उसकी सियासत पर हमला मत करें, उसकी जो आइडेन्टिटी है, उस पर हमला मत करें । क्या आपका लक्ष्य यही है? मैडम, अभी तो शुरुआत हुई है।…(व्यवधान)
बात यह है कि जब तक आप वहां की एस्पिरेशसनल को एड्रेस नहीं करेंगे, वहां 61,000 डेली वेजर्स और कॉन्ट्रैक्चुअल वर्कर्स हैं । आपने कहा है कि हम दिलों की दूरी को खत्म करेंगे । हमारी सियासत और हमारी पहचान पर हमला करने का क्या यही तरीका है? आपका हर एक चीज में सिर्फ एक ही लक्ष्य है कि हम डेमोग्रॉफिक चेंज करें, ताकि आपके जो आने वाले मंसूबे हैं, वे पूरे हो सकें, लेकिन मैं आपसे कहना चाहता हूं कि आप कभी भी उसमें कामयाब नहीं हो पाएंगे । आप देखिए कि 500 से ज्यादा लोगों की मौतें हुई हैं, जिस पक्ष के लोग भी मरे हैं, इसमें उनका कोई जिक्र नहीं है।…(व्यवधान)
माननीय सभापति : श्री बी. मणिक्कम टैगोर जी ।
… ( व्यवधान)
श्री हसनैन मसूदी : आप कहते हैं कि कश्मीर हमारा ताज है।…(व्यवधान)
माननीय सभापति : माननीय सदस्य, आपको बोलते हुए 7मिनट हो गए हैं।
श्री हसनैन मसूदी : महोदया, आप मुझे बोलने तो दीजिए।…(व्यवधान) आप दिल्ली और दिलों की दूरियां खत्म करने की बात करते हैं, क्या उसके यही तरीके हैं? आप मुझे इसके कारण दे रहे हैं कि मैं इस रिजोल्यूशन की हिमायत करूं । आप खुद आत्मनिरीक्षण कीजिए और वह सब कुछ अन्डू कीजिए, जिसे आपने गैरआईन तरीके से किया है । हमारी जो समस्याएं हैं, आप उन समस्याओं की तरफ तवज्जो दीजिए । हमारी यहां बेरोज़गारी है, आप उसकी तरफ तवज्जो दीजिए । आप नेशनल हाइवे की बात कीजिए । आज भी वहां 15 दिनों से नेशनल हाइवे बंद है । आप पहले ही फ्रूट पर हमला कर चुके हैं । आप फ्रूट के कमर्शियल प्रोसेसिंग के लिए कुछ भी नहीं कर रहे हैं।…(व्यवधान) मेरा मुतालबा है कि आप उसकी एक स्कीम बनाइए, जिनके अनपेड वेजेज़ हैं, उनको वेजेज़ दीजिए।…(व्यवधान)
*श्री ओम पवन राजेनिंबालकर(उस्मानाबाद): महामहिम राष्ट्रपति जी के अभिभाषण पर मुझे अपने विचार व्यक्त करने का अवसर देने के लिए धन्यवाद ।
यह सरकार के द्वारा किये गये और आगे किये जाने वाले का का लेखा-जोखा होता है । महामहिम राष्ट्रपति महोदय जी, ने अपने अभिभाषण में पालखी मार्ग का जिक्र किया है, यह मार्ग महाराष्ट्र की आस्था से जुड़ा हुआ है इसके लिए मैं महामहिम राष्ट्रपति जी और केंद्रीय सड़क यातायात एवं परिवहन मंत्री माननीय नितीनजी गडकरी साहब को धन्यवाद देना चाहता हूं।
कोरोना महामारी के कारण देश में कृषी, रक्षा,शिक्षा,रेल और हवाई क्षेत्र तक सभी क्षतिग्रस्त चुके है, इन क्षेत्रों में सुधार लाने हेतू महत्वपुर्ण तथा महत्वाकांक्षी उपाय योजना करने की जरूरत थी लेकिन यह सरकार सामान्य नागरिकों से जमा हुई जीएसटी को दिखाकर अर्थिक स्थिती में सुधार दिखा रही है,इस सरकार ने अपनी छवि में सुधार दिखाने की कोशिश की है । कोरोना वायरस महामारी का यह तीसरा वर्ष है, कई परिवारों ने इसमें कई अपना सब कुछ खोया,कई बच्चे अनाथ हो गए । इन प्रभावित परिवारों और बच्चों भविष्य को उज्जवल और सुरक्षित करने के सरकार उचित पहल और प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता है । यह गौरव की बात है कि हम पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा वैक्सीन डोज़ देने वाले देशों में अग्रणी रहे हैं । यह सराहनीय है कि प्रधानमंत्री आयुष्मान हेल्थ इनफ्रास्ट्रक्चर मिशन से आने वाले संकटों के लिए भी देश को तैयार किया जा सकेगा।
सरकार ने कोविड महामारी के समय पेट्रोल, डीजल, गैस, किसानों के उपयोगी रासायनिक खादों की कीमतें बढाकर सामान्य एवं गरीब लोगों से कर लेकर अपनी आय बढ़ायी है,और कई राज्यों में विधान सभा चुनावों को देखते हुए सरकार ने अर्थसंकल्प प्रस्तुत से पहले गैस की दरों में कटौती की है यदि सरकार को सामान्य एवं गरीब लोगों से कोई लगाव और हमदर्दी होती तो सरकार को यह कदम बहुत पहले उठा लेने थे! सरकार ने कृषि कानून वापस लिए लेकिन इससे पहले कई किसानों की मौत हुई इसका दोषी कौन है? उनको सरकार ने कोई मुआवजा दिया है? कोविड महामारी के काल में कृषि,शिक्षा,रोजगार और क्षेत्र की भारी हानि हुई है,लोगों ने पलायन शुरू कर दिया कई कम्पनियां बंद हो गई कारण लोग बेरोजगार हो गये उनकी सुध सरकार ने नहीं ली है,इसके कारण प्रभावित आम-जन-मानस का ध्यान रखते हुए उनको रोजगार उपलब्ध करने हेतु सरकार को त्वरित कदम उठाने की जरूरत है । आज कई लोग बेरोजगार हो कर घर बैठे हैं उनको घर चलाने में मुश्किल हो रही है।
सरकार द्वारा प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के अंतर्गत गरीबों को हर महीने मुफ्त राशन दिया जा रहा है । क्या यह मुफ्त राशन जरूरतमंद लोगों तक पहुंच रहा है?इसकी भी समीक्षा की जानी चाहिए । कोरोना काल में गरीब के स्वाभिमान और उसके रोजगार की रक्षा करने के लिए सरकार प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना चलाई है क्या यह रेहड़ी-पटरी वाले कामगारों के लिए कहां तक सहायक सिद्ध हो रही है?
प्रधानमंत्री आवास योजना में ग्रामीण क्षेत्र में कहां तक सफल हुई है तथा 'हर घर जल'पहुंचाने के उद्देश्य से शुरू किए गए जल जीवन मिशन सेलोगों के जीवन में कितना बदलाव आया है? एक तरफ तो सरकार के प्रयासों से देश का कृषि निर्यात भी रिकॉर्ड स्तर पर बढ़ा है दूसरी तरफ स्टील,पाम ऑयल के आयात करने से लोगों,किसानों एवं कामगारों को आर्थिक नुकसान हो रहा है, इस पाम ऑयल के आयात को रोकने की आवश्यकता है । हॉर्टिकल्चर और शहद के साथ ही अन्य चीजों की उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए ग्रामीण लोगों को प्रोत्साहित करना होगा।
महाराष्ट्र में चल रही रमाई आवास योजना के तहत घरकुलों में दी गई ढील की तरह प्रधानमंत्री आवास योजना (पीएमएवाई)घरकुलों को ढील देने की आवश्यकता है ताकि जरूरतमंद लोगों एवं परिवारों को इसका लाभ मिल सके । मेरे संसदीय क्षेत्र उस्मानाबाद को सरकार ने आकांक्षी जिलों में शामिल किया गया है अत:इस जिले में विकास के स्वरूप कई सारी योजनाएं,जो यहां के नागरिकों को सीधा रोजगार एवं नौकरियां दे सके, ऐसा कोई प्रोजेक्ट केंद्र सरकार द्वारा इस जिले में लगाया जाए । केंद्र सरकार द्वारा नैसर्गिक आपातकाल में होने वाली हानि,क्षतिपुर्ती करने हेतू प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत तैनात की गई प्राइवेट बीमा कंपनीयों की मनमानी को रोकने के लिए आप के माध्यम से मैंने सरकार से इस सदन में कई बार अनुरोध किया है लेकिन सरकार ने बीमा कम्पनियों द्वारा की जा रही मनमानी और इनके द्वारा बनाये जा रहे नियमों को रोकने के लिए कोई भी जरुरी कदम नहीं उठाए । अतः सरकार इस पर त्वरित कारवाही कर दोषी कम्पनीयां बंद करे, इसकी जगह पर सरकारी कम्पनियां तैनात की जाएं।
मेरे संसदीय क्षेत्र उस्मानाबाद मे उचित स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए आवश्यक उपकरणों की कमी है तथा डाक्टरों,नरसों और कर्मचारियों के लिए आवास और मरीज के साथ परिचर और पारिवारिक सदस्यों की रहने की व्यवस्था नहीं है । इन सभी समस्याओं का निवारण करने के लिए सरकार को उपयुक्त कदम उठाने होंगे । देश के हजारों लाखों लोगों का आस्था और अराध्य तुलजाभवानी मंदीर ता. तुलजापूर जि.उस्मानाबाद(महाराष्ट्र),इस तीर्थ क्षेत्र को केंद्रीय पर्यटन स्थल में सम्मिलित करने की पहल समय-समय पर लोगों द्वारा की जा रही है, लेकिन इस पर आज तक केंद्र सरकार ने कोई संज्ञान नहीं लिया है । इस मांग को पूरा किया जाए ।
मुंबई-हैदराबाद बुलेट ट्रेन के प्रस्तावित रेलमार्ग से उस्मानाबाद जिले में स्थित तुलजापूर तथा रामलिंगतीर्थ क्षेत्र से जोड़ने के लिए किमाम-उस्मानाबाद-सोलापुर सहित इसके आस पास के गांव के लोगों द्वारा मांग की जा रही है लेकिन सरकार इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रही है! सरकार से अनुरोध है कि इस रेल मार्ग में उस्मानाबाद-तुलजापूर तथा रामलिंग तीर्थ को जोड़ा जाय।
उस्मानाबाद में सरकारी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल को शैक्षणिक वर्ष2021-22 में शुरू कर केंद्र सरकार से आवश्यक धनराशि की मांग की है जो अभी भी केंद्र सरकार सहमति के लिए प्रलबित पड़ा हुआ है सरकार सहमति प्रदान कर आवश्यक धनराशि जारी करे।
मेरा संसदीय क्षेत्र उस्मानाबाद आकांक्षी जिलों में शामिल होने के बावजूद यहाँ पर कोई वस्त्र उद्योग नहीं है अत: उस्मानाबाद के कौडगाव MIDCमें वस्त्र उद्योग (टेक्स्टाईल)हब बनाने के लिए सरकार तुरंत आदेशित करे । बार्शी टेक्स्टाईल मिल ता. बार्शी जि.सोलापूर (महाराष्ट्र)पुनः शुरु करने के लिए सरकार से मांग के लिए आज भी यहां पर लोगोंऔर कामगारों द्वारा धरना प्रदर्शन किए जा रहे हैं, उसका निराकरण अभी तक नहीं हुआ है । अंगूर,अनार और फूलों की खेती की प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत क्षतीपूर्ति करने के लिए क्षेत्रीय किसानों, फूल मालियों ने केंद्र सरकार से मांग की है । इस मांग को पूरा किया जाय । बार्शी-बीदर व्हाया उजनी, लामजाना,औराद शहानजी से भालकी बीदर फोर लेन महामार्ग बनाने के लिए सरकार से अनुरोध करता हूँ।
केंद्र सरकार उस्मानाबाद शहर हवाई अड्डे का उन्नयन हेतु तुरंत कदम उठाए जायें । ई.पी.एस. 95 पेंशनर्स की प्रलंबित मांगों को लेकर ये पेंशनर कई समय से धरना प्रदर्शन और सरकार से पत्राचार कर रहे हैंलेकिन सरकार ने इनका कोई संज्ञान नहीं लिया है,अतः इन पेंशनरों की मांगों को पूरा किया जाय, ऐसी मांग मैं सरकार से करता हूँ । क्षेत्रीय लोगों की जरुरत को ध्यान में रखते हुए उस्मानाबाद जिले के विविध ग्रामों में भारतीय स्टेट बँक और महाराष्ट्र ग्रामीण बैंक की शाखाएं खोलने की व्यवस्था सरकार को करनी चाहिए । सरकारी बैंकों के निजीकरण प्रक्रिया को बंद करने की आवश्यकता है । नांदेड जंक्शन से लातूर रोड जंक्शन तक नया रेल मार्ग बनाने की मैं मांग करता हूँ।
*KUMARI RAMYA HARIDAS (ALATHUR): I am thankful for giving me an opportunity to express my views on this discussion on the President’s Address.
Unfortunately, and regretfully, I disagree with the President’s Address as it did not address the real issues being faced by the poor people in India. I think this Government has tried to hide its mismanagement in different serin different serious issues related to country, simply aggrandizing mere announcements.
The Government has not addressed properly the problems of youth and unemployment. Even in the President’s Address, announcement has been made about creation of lakhs of job by the Government but the Government did not go into introspection about last year’s opportunities. This is a deceit towards the youth of this country.
On the one hand, the President’s Address upholds the words of Dr. B.R. Ambedkar, and on the other hand, there is no plan and programme to uplift the Scheduled communities. Then, what is the merit of quoting the words of Dr. Ambedkar. The Government has not yet made any plan with the focus of the Scheduled communities.
In the President’s Address, I have to disagree to the mention of women empowerment. It is pointed out in the Address that the Government is ready to protect women and children. I could not understand in what sense the Government. I would like to know what were the measures that would be implemented to protect women and children. Has the Government encouraged the entrepreneurship of women? Would the Government make announcement of the number of entrepreneurial units started in the last year? What were the measures the Government has undertaken to solve the post-Covid crisis among children and students?
The Government has announced digital learning but has not stated the condition of children, particularly those who have no livelihood and devices to access digital classes.
I could not agree with the President’s Address as it lacks the reality to unveil the post-Covid crisis of the people of the country. Health workers and Covid frontline warriors need positive intervention in health sector, including facilities. But unfortunately, the Government has no such plan to spend enough funds on this aspect.
The Government continues its policies to favour corporates and private sector, ignoring the common people, who are the backbone and heart of India. Being a representative of common people, who struggled to find livelihood, I could not support the President’s Address as it does not consider common man.
SHRI B. MANICKAM TAGORE (VIRUDHUNAGAR): Thank you hon. Chairperson. I thank hon. President of India for addressing the Joint Session of both the Houses. I am happy to be part of it and I share my views on the Motion of Thanks on the President’s Address.
We know that this Government is guided by … (Not recorded).. and headed by BJP and the vision for India starts with discrimination. They believe in discrimination in all respects. The discrimination towards the States is also a present thing in every State. You look at Tamil Nadu, Kerala, Telangana, Andhra Pradesh, West Bengal, Punjab, Rajasthan, Maharashtra, J&K, Jharkhand in one way. But you look at other States in another way. Take the example of Tamil Nadu. All political parties in the Tamil Nadu Assembly passed a resolution as well as a Bill in which DMK, Congress, even AIADMK, CPI, CPI(M) supported the Bill for exemption for Tamil Nadu from the NEET examinations. Out of 234 Members of Legislative Assembly, 230 Members voted for that resolution, and only four BJP Members were against it. But when hon. Chief Minister of Tamil Nadu went to meet the hon. Governor and requested him to speed up the process, the Governor kept that pending for five months. In Delhi, when the Opposition MPs wanted to meet the hon. Home Minister, they kept them waiting for ten days. They returned back. Again we were called after fifteen days to meet him for 20 minutes. The Home Minister of India kept MPs of Tamil Nadu waiting for 20 days.
Yesterday, when our Leader, Shri Rahul Gandhi ji, and DMK’s floor Leader, Shri T. R. Baalu ji, spoke about NEET Bill and asked the Government to act with sensitivity, what have they done today? They have shown that arrogant attitude again. Today, the Governor of Tamil Nadu has returned the Bill to the Government, which shows the arrogance and insensitivity of the BJP’s act from the beginning itself.
The main issue with BJP is its arrogance and its discrimination, and we have to understand that discrimination towards businesses is also happening. … (Interruptions)
डॉ. निशिकांत दुबे(गोड्डा): मैडम, यह भारत का संविधान है । … (व्यवधान)
SHRI B. MANICKAM TAGORE : Madam, I am not yielding to him. … (Interruptions)
डॉ. निशिकांत दुबे: भारत के संविधान का जो आर्टिकल200है, वह साफ कहता है कि गवर्नर के पास बिल को लौटाने का पूरा अधिकार है । पार्लियामेंट की रूल बुक का नियम352(5)(3)यह कहता है कि हम गवर्नर के किसी कंडक्ट के बारे में इस हाउस में चर्चा नहीं कर सकते हैं । दूसरा, भारत का संविधान कहता है, आर्टिकल 200कहता है कि गवर्नर किसी भी बिल को लौटा सकता है । डीएमके के लोग या कांग्रेस के लोग संविधान पर जो प्रहार कर रहे हैं, यह इनकी मानसिकता है।… (व्यवधान) ये बाबा साहब अम्बेडकर जी के संविधान को नहीं मानना चाहते हैं । ये देश के संविधान को नहीं मानना चाहते हैं और यहां पर इनकी इमरजेंसी की मानसिकता दिखाई देती है । इसलिए मेरा आपसे आग्रह है कि जो भी गवर्नर के बारे में बोला गया है, उसे आप एक्सपंज करवाइए।… (व्यवधान)
माननीय सभापति:गवर्नर के बारे में जो बाते हुई हैं, उन्हें रिकॉर्ड से निकाल दिया जाए ।
… ( व्यवधान)
माननीय सभापति: आप गवर्नर को बीच में क्यों ला रहे हैं? आप बैठ जाइए । आप इन्हें बोलने दीजिए ।
… ( व्यवधान)
SHRI B. MANICKAM TAGORE : Madam Chairperson, the discrimination towards businesses is also a very important thing. … (Interruptions) We know that this …* Government gives priority to only ‘A-A’ business people. … (Interruptions) Its closeness towards Adani Group and Ambani Group is well known. They have control over all the resources in India. This Government gives Adani and Ambani carpet welcome in their offices. We do not have any problem with business people getting businesses, but we are against giving priority to only two business groups. Why is there this discrimination towards other business groups which are honest and from South India? Their wealth has been taken over and handed over to Adani. The Mumbai airport has been handed to the Adani Group illegally by this Government. They have worked in the background to get that deal done.
Further, this discrimination towards the MSME sector is also well known. We all know that this Government … (Interruptions) Madam, kindly give me two more minutes to speak.
I will come to the story of another discrimination towards Telangana. The Telangana chilli farmers were protesting and the present Defence Minister went to Nizamabad and promised that a Chilli Board will be formed before elections.
Now, three years have passed and no Chilli Board has been formed and the Central Government is discriminating towards Telangana. This discrimination is the main issue.
Discrimination on the basis of belief is also happening. Everywhere in Tamil Nadu new kind of distrust and attack on Churches, schools, etc. are carried out by … *… (Interruptions)
माननीय सभापति: आप कंक्लूड कीजिए । अन्य माननीय सदस्यों को भी बोलने का मौका दीजिए।
SHRI B. MANICKAM TAGORE : Therefore, the Government that speaks about Sabka Saath Sabka Vikas has to understand that this discrimination has to stop. I hope that the hon. Prime Minister will intervene and reply to the debate.
I have a question for the hon. Prime Minister. Did he buy Pegasus from Israel or not? How much price was paid for Pegasus? Did he misuse it against the Opposition Leaders, Journalists and Judges? Hon. Prime Minister, kindly come and reply to these issues. We are also waiting. We will come on 7th or 8th whenever you are there, and we will be there to hear you. Kindly reply to us. You call this House the ‘Temple of Democracy’. So, kindly come and reply here. Thank you, Madam. … ( व्यवधान)
प्रो. सौगत राय(दमदम): मैडम, मैं अभी तृणमूल कांग्रेस के कुछ संसद सदस्यों के साथ इंडिया गेट गया था । मैं वहां देखने गया था कि23 जनवरी को नेताजी सुभाष चन्द्र बोस का जो होलोग्राम स्टैच्यू बना था, वह देखने में कैसा लगता है । मैंने जाकर देखा कि वहां कोई होलोग्राम स्टैच्यू नहीं है । Gone with the wind, इस सरकार ने केवल एक दिन के लिए वहां नेताजी का स्टैच्यू लगाया और अब वह होलोग्राम वैनिश हो गया ।… (व्यवधान)
माननीय सभापति : ठीक है, आपकी बात आ गई है।
डॉ. सुजय विखे पाटील ।
डॉ. सुजय विखे पाटील (अहमदनगर): धन्यवाद, सभापति महोदया । आपने मुझे इस चर्चा में भाग लेने का अवसर प्रदान किया, इसके लिए मैं आपको धन्यवाद देता हूं ।
सभापति महोदया, जैसे किसी भी संविधान को समझने के लिए उसका प्रिएम्बल समझना जरूरी है, उसी तरीके से किसी भी सरकार की नीति या नीयत समझने के लिए माननीय राष्ट्रपति जी के अभिभाषण में अधोरेखित किया हुआ, सरकार के द्वारा किया हुआ विकास समझना जरूरी है । हमारे देश के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी और इनके विकास कार्यों की जो गति है, अगर उसको बयां किया जाए, तो भारतीय जनता पार्टी के हमारे 303 सांसद हैं, अगर हर किसी को एक पूरा दिन दिया जाए तो भी हम उनकी विकास गाथा को बयान नहीं कर पाएंगे और आपने मुझे सिर्फ 15 मिनट का समय दिया है । मैं उस विकास गाथा को 15 मिनट में बयां करने की कोशिश करूंगा ।
हमारे प्रधानमंत्री जी द्वारा जो विकास हो रहा है, उनकी जो गति है, उस पर शुरुआत में मैं एक शेर अर्ज़ करना चाहूंगा:
“जिस दिन से चल रहा हूं, मेरी मंजिल पर नजर है, आंखों ने कभी मील का पत्थर नहीं देखा है।” इस तरीके से हमारे जो काम पिछले सात सालों में, एनडीए-1 और एनडीए-2 में आदरणीय प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में हो रहे हैं, मुझे यह कहते हुए दुख हो रहा है कि हमारे विपक्ष के जो साथी हैं, खासकर जो महाविकास अघाड़ी के नेतागण और सांसद हैं, या तो उनको वह विकास दिख नहीं रहा है या वे वह विकास देखना नहीं चाह रहे हैं या फिर उनके अन्दर की, उनके मन की बात बाहर नहीं निकल पा रही है । आदरणीय प्रधानमंत्री जी हर महीने मन की बात करते हैं, मैं विपक्ष के नेताओं से विनती करूंगा कि वे भी अपने मन की बात बाहर निकालें और वह कैसे निकलेगी, यह मैं आपको बताता हूं ।
प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री श्री नितिन जयराम गडकरी जी ने महाराष्ट्र में पिछले एक साल में विविध प्रकल्पों का भूमिपूजन और उद्घाटन किया । आप इस साल के भूमिपूजन और उद्घाटन का कोई भी विडियो निकालेंगे तो उसमें चेयर्स की पहली रो में जो लोग विराजमान हैं, वे सारे महाविकास अघाड़ी के मंत्रिगण और महाविकास अघाड़ी के संसद सदस्य बैठे हुए दिखेंगे । एक जगह पर आप उस कार्यक्रम में शामिल हो रहे हैं, जिसमें आदरणीय प्रधानमंत्री जी के विकास और उनकी निधि के द्वारा रास्तों का निर्माण हो रहा है, लेकिन इस सदन में एक भी सांसद ने उनके विकास कार्यों के बारे में नहीं बोला है । इतना ही नहीं, 50 फीसदी सेंट्रल रिजर्व फण्ड माननीय गडकरी जी के माध्यम से महाविकास अघाड़ी को दिया गया और उनके विधायक आज अपने-अपने विधान सभा क्षेत्रों में उनका नारियल फोड़ते हुए, आदरणीय प्रधानमंत्री जी का जिक्र भी नहीं करते हैं । एक कहावत है – ‘सेवा करे कोई, मेवा खाए कोई’, वह बात इससे जाहिर होती है ।
इसी दौरान मेरे लोक सभा क्षेत्र में आदरणीय गडकरी जी ने दस हजार किलोमीटर लम्बे रास्तों के लिए निधि दी । मेरा अहमदनगर लोक सभा क्षेत्र, जो पिछड़ा हुआ था, वहां पर इतनी बड़ी निधि देकर हम विकास को गति देने का प्रयास कर रहे हैं । इस विकास में शामिल जो महाविकास अघाड़ी के नेता थे, यह उनकी भी जिम्मेदारी थी । आप टिप्पणी कीजिए, आप विपक्ष में हैं, इसलिए आपका टिप्पणी करना जरूरी है, सरकार को सही दिशा दिखाना जरूरी है, लेकिन सिर्फ टीका-टिप्पणी कीजिए और उनके विकास में शामिल होकर भी, उसकी तारीफ न करें तो यह … * है । यह बात मैं बड़ी नम्रता से कहना चाहता हूं ।
मैं कोऑपरेटिव सेक्टर से बिलाँग करता हूं । आदरणीय प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में पिछले एक साल में जो सबसे बड़ा फैसला किया गया, वह यह है कि सेंटर में कोऑपरेटिव मिनिस्ट्री खोली गई, सहकारिता मंत्रालय खोला गया, जो आज़ादी के बाद कभी नहीं हुआ था । उस मंत्रालय की जिम्मेदारी एकदम सही आदमी माननीय गृह मंत्री श्री अमित शाह जी को दी गई । यूपीए-1 और यूपीए-2 ने क्या किया? कल उनके नेता बोल रहे थे कि स्टार्ट-अप इंडिया क्या है, आत्मनिर्भर भारत क्या है तो मैं उनको समझाना चाहता हूं कि स्टार्ट-अप इंडिया, आत्मनिर्भर भारत, आंट्रेप्रिन्योरशिप, फार्मर्स एम्पावरमेंट आदि चालू ही कोऑपरेटिव से हुए हैं । मुझे इस बात का सौभाग्य प्राप्त हुआ कि मैं एक ऐसे परिवार में पैदा हुआ । मेरे ग्रेट ग्रैंड फादर कैलाशवासी पद्मश्री विट्ठल राव विखे पाटिल जी ने एशिया की पहली कोऑपरेटिव शुगर फैक्टरी खोली और कोऑपरेटिव मूवमेंट शुरू किया ।
यह स्टार्ट अप इण्डिया उनको दिख नहीं पाया, क्योंकि यूपीए-1 और यूपीए-2 की सरकार ने महाराष्ट्र में कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज को किसानों की एफआरपी देने के लिए कर्जा लेने पर मजबूर किया । आप कर्जा लीजिए और एफआरपी दीजिए । इसके माध्यम से इनके दस सालों के कार्यकाल में जो महाराष्ट्र में शुगर फैक्ट्रीज थीं, उन सारी कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज को बंद किया गया । आज महाविकास आघाड़ी सरकार के70परसेंट मिनिस्टर्स ने इन्हीं बंद पड़ी शुगर फैक्ट्रीज को बहुत कम दामों में खरीदा और वे उनके मालिक बने बैठे हैं । इनका यह सेक्युलरिज्म है।
प्रो. सौगत राय : आपके पास कितनी शुगर फैक्ट्रीज हैं?
डॉ. सुजय विखे पाटील : तीन हैं और तीनों कोऑपरेटिव हैं । दादा, तीनों कोऑपरेटिव हैं, प्राइवेट नहीं हैं । मैं उस बात पर आता हूं । हमारी सरकार ने शुगर इंडस्ट्री रेवोल्यूशनाइज कीं । वर्ष 2020-21 में 3,580 करोड़ रुपये की एक्सपोर्ट सब्सिडी दी, एमएसपी को फिक्स किया । एमएसपी को 3,100 रुपये पर फिक्स किया गया । शुगर सेल में कोटा सिस्टम बनाया गया, जिससे शुगर पर स्टैब्लाइज हो ।
महोदया, इथेनॉल ब्लैंडिंग प्रोग्राम आदरणीय प्रधान मंत्री जी के नेतृत्व में एक अभूतपूर्व प्रोग्राम है । यह देश में पहली बार हुआ है कि इथेनॉल ब्लैंडिंग प्रोग्राम एनहांसमेंट में जो स्प्रिट तैयार हुई, जो इथेनॉल तैयार हुआ, उसके लिए गवर्नमेंट ने अलग रेट तैयार किया । इसमें सी हैवी के लिए अलग, बी हैवी मोलासेस के लिए अलग तथा सिरप के लिए अलग रेट तैयार किया ।
इतना ही नहीं इथेनॉल प्रोडक्शन कैपेसिटी एनहांसमेंट के लिए पिछले 6 महीने में 12,900करोड़ रुपये का कर्जा दिया गया और 2,790 करोड़ रुपये इंट्रेस्ट सबवैंशन दिया गया । मैं यह आपको इसलिए बता रहा हूं, क्योंकि इन सबका लाभ, एक्सपोर्ट सब्सिडी का लाभ, इंट्रैस्ट सबवैंशन का लाभ, इथेनॉल ब्लैंडिंग प्रोग्राम का लाभ महाविकास अघाड़ी के हर मंत्री ने लिया है, जिसकी शुगर फैक्ट्री है । उन्होंने उसकी मदद से किसानों को एफआरपी दी, लेकिन कभी भी आदरणीय प्रधान मंत्री जी का नाम,कभी भी उनकी तारीफ या उनकी योजनाओं की तारीफ नहीं की । हमें इस बात का खेद है।
मैडम, वर्ष 1985 से एक केस कोऑपरेटिव शुगर इंडस्ट्री में पेंडिंग था कि जिन-जिन शुगर फैक्ट्रीज ने एफआरपी के ऊपर किसानों को रकम अदा की है, जिसमें9,500 करोड़ रुपये की इनकम टैक्स पैनल्टी वर्ष 1985 से ड्यू थी । यूपीए-1 सरकार आई, यूपीए-2 सरकार आई और उसके पहले भी सरकारें आईं, लेकिन माननीय अमित भाई शाह जिस दिन मंत्री बने, उन्होंने एक ही मीटिंग में फाइनेंस मिनिस्ट्री को आदेश दिया, फिर जेआर निकला और 9,500 करोड़ रुपये की टैक्स पैनल्टी माफ कर दी गई । इसका मतलब यह है कि 35 साल पुराना इश्यू 35 मिनट की मीटिंग में पूरा कर दिया । हमें अभिमान है कि ऐसा सहकारिता मंत्रालय माननीय अमित भाई शाह का है ।
मैडम, पीएम किसान योजना के बारे में तो हर सांसद ने बोला है । यूपीए सरकार ने वर्ष2008 में कर्ज माफी की थी । उस कर्ज माफी की रकम60 हजार करोड़ रुपये थी । उस 60 हजार करोड़ रुपये की कर्ज माफी के बदले, आज हर भाषण में बोलते हैं कि हमने किसानों के लिए कुछ किया है, हमने किसानों के लिए कर्ज माफी की है । आदरणीय प्रधान मंत्री जी ने ‘किसान सम्मान निधि योजना’ के माध्यम से वर्ष 2019-20 में 48 हजार करोड़ रुपये, वर्ष 2020-21 में 75 हजार करोड़ रुपये, वर्ष 2021-22 में 65 हजार करोड़ रुपये और वर्ष2022-23 में बजट में प्रावधान किया और 68 हजार करोड़ रुपये किसान सम्मान निधि में किसानों को दिया । इसका मतलब यह है कि यूपीए सरकार ने वर्ष2008 में 60 हजार करोड़ रुपये की माफी की, उतना अनुदान हम हर साल किसानों को दे रहे हैं, यानी कि हम किसान को आत्मनिर्भर बनाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन यूपीए ने किसान को कर्ज निर्भर बनाया । सभापति महोदया,यही सच्चाई है।
मैडम, अभी योजना समझने में दिक्कत है और वह काफी सांसदों को है । आप आरोप लगा सकते हैं । एक योजना मेरे हृदय के बहुत करीब है, जिसके बारे में मैं जिक्र करना चाहूंगा ।वह `राष्ट्रीय वयोश्री योजना` है । इसके बारे में काफी कम सांसद जानते हैं । हमारे विपक्ष के सांसद शायद ट्विटर लाइब्रेरी या वाट्स एप यूनिवर्सिटी से पढ़कर आए हैं तो योजना समझने में दिक्कत हो सकती है । इस राष्ट्रीय वयोश्री योजना की शुरुआत आदरणीय प्रधान मंत्री जी ने वर्ष 2017 में की थी । यह ऐसी योजना है, जिसमें इस देश में 60 वर्ष से ऊपर के जितने भी नागरिक हैं, उनकी उम्र के हिसाब से जो जरूरतमंद चीजें हैं, जिनमें किसी को चलने के लिए लकड़ी चाहिए, चश्मा चाहिए, कान की मशीन चाहिए, दांत चाहिए, कमोड चेयर चाहिए, व्हील चेयर चाहिए । ये ऐसे घटक हैं, जिनको इनके परिवार नहीं देखते हैं ।
कोई नौकरी के लिए शहर गया है, तो घर में बूढ़े मां-बाप को देखने के लिए कोई नहीं है । प्रधान मंत्री जी ने यह निर्णय लिया है कि अगर उनके बच्चे इनको नहीं देखेंगे, तो मैं देश का सुपुत्र होने के नाते इनका ख्याल रखूंगा और राष्ट्रीय वयोश्री योजना का इम्प्लिमेंटेशन हुआ । मुझे यह बताने में खास अभिमान हो रहा है, शायद यह साथी माननीय सांसद नहीं बता पाए हैं । मेरे पास लिस्ट है, मैं किसी का नाम नहीं लेना चाहूंगा, लेकिन विपक्ष के हर माननीय सांसद ने राष्ट्रीय वयोश्री योजना का कैंप अपने लोक सभा में किया और उन नागरिकों को वहां पर उनको सुविधा देने का प्रावधान किया, लेकिन आज सदन में यह कोई मानने को तैयार नहीं है कि हम यह कर रहे हैं । मुझे इस बात का खेद है ।
वर्ष 2020में उत्तर प्रदेश के मुख्य मंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया था । वहां प्रधान मंत्री जी के हाथ से 28 हजार लाभार्थियों को 10 करोड़ रुपए का सामान वितरित हुआ था । यह मुझे बताते हुए अभिमान हो रहा है कि पिछले नवम्बर, 2021 में मैंने अपने अहमद नगर लोक सभा क्षेत्र में गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया । हम इस राष्ट्रीय वयोश्री योजना के तहत 40 हजार लाभार्थियों को 40 करोड़ रुपए का सामान अगले महीने पंत प्रधान मंत्री जी के हाथ से वितरित करने वाले हैं । यह कितनी बड़ी योजना है, लेकिन योजना के लिए पढ़ना पड़ता है, उसके लिए मेहनत करनी पड़ती है । सिर्फ टीका-टिप्पणी करने से काम नहीं होगा ।
महाविकास अघाड़ी, गवर्नमेंट बहुत अच्छा काम कर रही है । अगर मैं उसके बारे में न बोलूं तो मेरा भाषण पूरा नहीं हो सकता है । सभापति महोदया, मैं चार-पांच मुद्दे रखना चाहता हूं, उसके लिए मुझे थोड़ा समय दीजिएगा । महाविकास अघाड़ी सरकार ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर आंदोलन किया कि पेट्रोल और डीजल की कीमत बढ़ गई हैं, लेकिन जिस दिन सेंट्रल गवर्नमेंट ने सेंट्रल एक्साइज पेट्रोल पर पांच रुपए और डीजल पर10रुपए कम किया, उस दिन अपेक्षित था कि राज्य सरकार भी उस पर अपना कंट्रिब्यूशन दे, लेकिन राज्य सरकार ने एक रुपए भी वैट माफ नहीं किया । उसके बदले में वहां एक बहुत बढ़िया निर्णय हुआ, जो शायद देश के किसी भी राज्य ने नहीं किया, वह महाराष्ट्र में महाविकास अघाड़ी सरकार ने किया । उन्होंने पेट्रोल पर वैट कम नहीं किया, लेकिन दारू की एक्साइज ड्यूटी कम कर दी गई । आप जब ट्रैफिक में जाते हैं, ट्रैफिक में घूमते हैं, तो बस में एक स्लोगन दिखता है।…(व्यवधान) वाइन नहीं, अल्कोहल, वोडका, व्हिस्की, अभी जो पीते हैं, उनको ब्रांड के बारे में पता होगा, मैं दूध पीने वाला इंसान हूं, तो बाद में बाहर बता दीजिएगा कि क्या है? उसका रेट कम हो गया । आप ट्रैफिक हवलदार देखते हैं, तो वहां लिखा रहता है कि do not drink and drive, लेकिन हमारे महाविकास अघाड़ी सरकार ने स्लोगन ही बदल दिया, drink but do not drive. हम ने दारू सस्ती करी दी, लेकिन पेट्रोल महंगा रखा है, तो drink and do not drive. अभी नई शुरुआत हुई है । किसी माननीय सांसद ने यह कहा है कि wine is not liquor. यह नया संशोधन है । अब वह पीकर देखना पड़ेगा कि उसमें कुछ है या नहीं । मेरा यह मानना है कि महाविकास अघाड़ी सरकार ने किराने की दुकान पर वाइन बेचने का निर्णय लिया है ।
मैं इसकी वजह बताता हूं कि महाविकास अघाड़ी सरकार क्यों इस तरह का निर्णय करती है । वह दारू सस्ता कर रही है । वाइन को अल्कोहल नहीं कह रहे हैं, लेकिन वाइन के बॉटल के पीछे जो लेबल लगा है, उसमें अल्कोहल का परसेंटेज लिखा हुआ है । आप उस कंपनी पर केस कर दीजिए या फिर सरकार पर केस कीजिए । महाविकास अघाड़ी सरकार यह चाहती है कि महाराष्ट्र के सारे नागरिक नशे में रहें, जनता नशे में रहे और जनता इनके किए हुए पाप को न देखे । इनके द्वारा किए गए ट्रांसफर की धांधली नहीं देख सकती है । मैं विश्वास के साथ बताता हूं कि इनकी सत्ता के नशे को जनता आने वाले समय में उतारेगी । महाराष्ट्र में वापस भारतीय जनता पार्टी की सरकार आने वाली है।
Utilisation of funds in Gram Panchayats. यह बहुत खूबसूरत चीज है । मेरी हर बात झुठलाई जाएगी, लेकिन मैं एविडेंस के साथ बोल सकता हूं कि14thफाइनैंस कमीशन, सेंट्रल गवर्नमेंट की फाइनैंस मिनिस्ट्री से ग्राम पंचायतों और लोकल बॉडिज को गांवों के विकास के लिए फंड मिलता है । उस पर सरपंच और ग्राम पंचायत सदस्य का अधिकार है, लेकिन महाराष्ट्र की महाविकास अघाड़ी सरकार ने क्या किया, उन्होंने एक बहुत खूबसूरत चीज की है कि 14th फाइनैंस कमीशन के फंड से ग्राम पंचायत अपना विकास करती है, उसके ब्याज का पैसा अपने पास रख लिया, जिसको उनको कोई अथॉरिटी नहीं है । वह इल्लीगली लिया और उस ब्याज का पैसा जो सेंट्रल गवर्नमेंट के माध्यम से दिया गया था, उससे एम्बुलेंस खरीद कर बांट रहे हैं और फोटो खिंचवा रहे हैं ।
कल मेरे एक साथी सांसद ने कहा कि देश में फ्रीडम ऑफ स्पीच और एक्सप्रेशन नहीं रहा । लेकिन यह कमाल का फ्रीडम ऑफ स्पीच और एक्सप्रेशन है कि महाराष्ट्र के कांग्रेस के अध्यक्ष मोदी जी को गाली दें, उनको …* बोलें, उनका कोई गुनाह नहीं होता है । लेकिन महाराष्ट्र के केन्द्रीय मंत्री ने सीएम साहब को कुछ बोल दिया, तो उनको अरेस्ट भी कर लिया, उन पर केस भी चल रहा है । महाराष्ट्र में यह बहुत बढ़िया फ्रीडम ऑफ एक्सप्रेशन है । मैं तो जानता हूँ । किसी पर आरोप लगाने से पहले आप अपने गिरेबान में झांककर देखिए ।
प्रधानमंत्री आवास योजना-अर्बन तो भ्रष्टाचार की कुण्डली है । यह विद एविडेंस है । प्रधानमंत्री आवास योजना-अर्बन में डीबीटी नहीं होता है । उसमें डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर नहीं होता है । लेकिन मैं यह विद प्रूफ बोल सकता हूँ और रिकॉर्ड में, मैं हाउसिंग मिनिस्ट्री को भी लिख चुका हूँ कि अगर सेन्ट्रल गवर्नमेंट का हिस्सा50करोड़ रुपए किसी डिस्ट्रिक्ट के लिए निकलता है, तो वह महाराष्ट्र की ट्रेजरी में जाता है । ट्रेजरी से उस 50 करोड़ रुपए में से 30 करोड़ रुपए म्हाडा को जाता है और म्हाडा उस 30 करोड़ रुपए में से 15 करोड़ रुपए ही डिस्ट्रिक्ट को देता है । अफरा-तफरी में यह पैसा कहाँ यूटिलाइज हो रहा है? केन्द्र द्वारा हजार बार पूछने के बाद भी महाराष्ट्र सरकार इसका जवाब नहीं दे पाई है।
मैं कनक्लूड करना चाहूंगा । केवल दो मिनट का समय और चाहिए।
हमारे आदरणीय विज़नरी प्रधानमंत्री जी का जो स्लोगन है, जैसे हम लोग पहले कहते थे कि बटर यानी अमूल, पानी यानी बिसलेरी, ठण्डा यानी कोकाकोला । उसी तरीके से, उनकी दूरदृष्टि और जन-सामान्य से जो कांटैक्ट है, उनकी योजनाओं को स्लोगन के रूप में आज हर घर का आम नागरिक जानता है । हेल्थ इंश्योरेंस यानी आयुष्मान भारत, कनेक्टिविटी यानी डिजिटल इंडिया, क्लीनलिनेस यानी स्वच्छ भारत और एलपीजी यानी उज्ज्वला योजना । ऐसे बहुत-से स्लोगन्स हैं । आप उसको बयां कर सकते हैं ।
डिज्नी हॉटस्टार पर एक सीरियल है- Special Ops 1.5. उसमें आखिरी में एक खूबसूरत डायलॉग है- the less competent should not judge the more competent. यहाँ पर यही हो रहा है । इसलिए अंत में मैं एक शेर कहकर अपनी स्पीच को विराम दूंगा क्योंकि मैं आज इतना बोल चुका हूँ।
मुझको तमीज़ की सीख देने वाले, मैंने तेरे मुँह में कई जुबां देखे हैं, तू इतना दिखावा भी न कर अपनी झूठी ईमानदारी का, मैंने कुछ कहने से पहले अपने गिरेबां में झांककर देखा है।
धन्यवाद ।
*डॉ. आलोक कुमार सुमन (गोपालगंज): मुझे महामहिम राष्ट्रपति जी के संसद में दिए गए अभिभाषण पर अपनी बात रखने का मौका देने के लिए आभार । मैं अपनी बात मोशन ऑफ थैंक्स के समर्थन में रख रहा हूँ । आज देश एवं बिहार राज्य माननीय प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में आगे बढ़ रहा है । बिहार राज्य हमारे माननीय मुख्य मंत्री जी के अथक प्रयास एवं केन्द्र सरकार के सहयोग से आगे बढ़ रहा है एवं प्रगति कर रहा है ।
आज देश एवं बिहार राज्य कोरोना महामारी के बाद जिस तरह से उभरकर मजबूती से खड़ा है, वह एक कुशल नेतृत्व का ही प्रभाव है । बिहार में कोरोना के रोकथाम के लिए हमारे माननीय मुख्य मंत्री श्री नीतिश कुमार जी ने विशेष ध्यान दिया, जिसके कारण हर घर-घर तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचीं एवं लोगों का टीकाकरण भी हुआ । आज देश में 150 करोड़ से ज्यादा लोगों का टीकाकरण हो चुका है, जो कि पूरे विश्व में रिकॉर्ड है, क्योंकि यह एक साल के अंदर ही पूरा कर लिया गया है । बिहार में भी टीकाकरण की सुविधा को दूर-दराज से लेकर शहर तक पूरा किया गया है एवं बचे हुए लोगों को टीकाकरण दिया जा रहा है ।
भारत देश आज फॉर्मेसी के क्षेत्र में आत्मनिर्भर है । हम कई देशों को सेवा दे रहे हैं । एवं मानव का कल्याण कर रहे हैं । आज बिहार में भी हेल्थ सेक्टर में आधारभूत सुधार हुआ है, लेकिन अगर केन्द्र सरकार से फाइनेंशियल असिस्टेंस मिलेगा तो राज्य और भी प्रगति के पथ पर आगे बढ़ेगा । आज बिहार प्रगति कर रहा है, लेकिन अपना रिसोर्सेज़ यूज करके ।
हमारे माननीय मुख्य मंत्री जी ने ‘नल जल योजना’शुरू की है । जिससे गांव-गांव में शुद्ध पानी लोगों को मिल रहा है और यह भी सत्य है कि करीब-करीब हर गांव को नल जल की सुविधा मिल रही है । अगर इस योजना को केन्द्र सरकार से फाइनेंशियल असिस्टेंस मिलता है तो निश्चित ही इस योजना को मजबूती मिलेगी एवं गरीब से गरीब व्यक्ति को भी शुद्ध पानी मिलेगा ।
बिहार राज्य अपने बल पर प्रगति कर रहा है, लेकिन नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार 51.91फीसदी आबादी गरीबी रेखा से नीचे है । बिहार का औद्योगिक एवं आर्थिक विकास कई राज्यों की तुलना में पिछड़ा है । झारखंड़ से अलग होने के बाद प्राकृतिक संसाधन की मात्रा न्यून हो गई है । सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि बिहार एक लैंड-लॉक्ड स्टेट है, जिसके कारण यहां बड़े एवं भारी उद्योगों की स्थापना मुश्किल है । ऐसी स्थिति में सेन्ट्रल टैक्स में छूट से उद्योगपतियों को निवेश के लिए प्रोत्साहित किया जा सकता है । निवेश में कमी के कारण रोजगार में कमी आती है, जिससे यहां की प्रति व्यक्ति आय अन्य विशेष दर्जा वाले राज्यों से कम है । अत: मैं माननीय वित्त मंत्री जी से आग्रह करता हूँ कि बिहार राज्य को विशेष राज्य का दर्जा दिया जाए, क्योंकि विशेष राज्य के लिए जो मापदंड निर्धारित हैं, उसे बिहार राज्य पूरा करता है ।
कोविड-19 काल में अर्थव्यवस्था में सुधार के लिए सरकार ने अनेक कदम उठाए हैं । परिणाम स्वरूप आज देश मजबूती से प्रगति कर रहा है । देश में ट्रेक्टर्स हों, गाड़ियां हों या आम आवश्यकता का सामान हो, सबकी सेल हो रही है । भारत की अर्थव्यवस्था कोविड के बावजूद भी तेजी से उभर रही है और हमने अच्छे से कोविड महामारी का सामना किया है ।
बिहार राज्य आज माननीय मुख्य मंत्री श्री नितीश कुमार जी के कुशल नेतृत्व में आगे बढ़ रहा है । आज बिहार में निवेश की आवश्यकता है । बिहार में जन्में बड़े उद्योगपतियों भी सेन्ट्रल टैक्स की छूट का लाभ नहीं मिलने के कारण अपने गृह राज्य में निवेश नहीं करते हैं । अगर सेन्ट्रल टैक्स में छूट दी जाए तो बिहार में निवेश होगा तथा रोजगार भी बढ़ेगा । हर साल कोसी, कमला, गंड़क, महानंदा, पुनपुन, सोन, गंगा आदि नदियों में बाढ़ से आधारभूत संरचना के साथ-साथ फसलें एवं जान-माल का भी नुकसान होता है । इसके अलावा 726 किलोमीटर भारत-नेपाल अंतर्राष्ट्रीय सीमा भी बिहार के हिस्से में है, जिसकी सुरक्षा में बिहार का बड़ा आर्थिक संसाधन खर्च होता है इसलिए बिहार राज्य को फाइनेंशियल असिस्टेंस की आवश्यकता है ।
इसी के साथ मैं राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का समर्थन करते हुए अपनी बात समाप्त करता हूँ ।
*श्री बालूभाऊ उर्फ सुरेश नारायण धानोरकर (चन्द्रपुर): मुझे अपने विचार रखने का मौक़ादेने के लिए धन्यवाद । संसद में महामहिम राष्ट्रपति जी का अभिभाषण आधा - अधूरा था और देश के महत्वपूर्ण सवालों को addressनहीं किया गया । प्रधानमंत्री जो बातें रात- दिन कहते रहते हैं, उन्हीं बातों को यहां भी दोहराया गया है । इसमें कोई नयापन नहीं है।
पिछले दो साल के सबसे चुनौती भरे कोविड-19काल को लेकर सरकार की पीठ थपथपाई गयी है । लेकिन सरकारी अव्यवस्था के कारण जो 50लाख के करीब मौतें हुई,उनका कहीं पर जिक्र नहीं । मृतकों के परिवारजनों को क्या मदद दी गयी, यह भी नहीं बताया गया।
इसी तरह, कहा गया कि सरकार बहुत संवेदनशील है, लेकिन किसान आंदोलन में750 से ज्यादा मौतों का जिक्र तक नहीं किया गया । आप किसानों का तो कई बार जिक्र करते है, लेकिन मोदी सरकार के द्वारा लाए गए कृषि कानूनों की वजह से किसानों को एक साल तक सड़क पर बैठना पड़ा उसका भी कोई जिक्र नहीं था।
किसानों की आमदनी 2022 तक दोगुना करने की बात सरकार ने बार - बार की । हम जानना चाहते थे कि कहां तक प्रगति हुई ? लेकिन इस बारे में कुछ नहीं बताया गया । उसी तरह पीएम आवास योजना में भी लक्ष्य की आधी उपलब्धि ही हुई । चार करोड़ से ज्यादा घर बनने थे अब तक दो करोड़ ही बने।
सबका साथ, सबका विकास नारे के साथ बहुत सी बातें कहीं गई हैं, लेकिन एससी/एसटी/ओबीसी, महिलाओं और अल्पसंख्यकों पर बढ़ रहे हमलों का कोई जिक्र तक नहीं किया गया है । कहा गया कि ये सरकार डॉक्टर बाबा साहब की नीतियों पर चल रही है, लेकिन सच्चाई इसके उलट है।
इन्फ्रास्ट्रक्चर पर वही बातें दोहराई गई जो पिछले सात सालों से कही जा रही है । उन योजनाओं को बार-बार कहने से देश का कल्याण नहीं होगा । सच यह है कि ये पूरा सेक्टर सरकार ने बेचने के लिए खोला है । रेलवे से लेकर जहाज तक सब खतरे में है।
राष्ट्रपति जी का अभिभाषण एक पॉलिसी डॉक्यूमेंट होता है, भविष्य की योजनाएं बताता है, लेकिन इसने हमें निराश किया है । यह कुछ-कुछ चुनावी भाषण जैसे दिखता है । केवल कार्यक्रम बन रहे हैं, लेकिन जमीन पर क्या हो रहा है, वह खास नहीं दिख रहा है ।
मुझेअपनी बात रखने का मौका देने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद।
*SHRI RAJU BISTA (DARJEELING): I thank hon. President Ram Nath Kovind ji for his pre-Budget Address to the Joint Session of the Parliament. His speech underlines the fact that despite unprecedented challenges, our nation has made amazing progress this past year. Under the visionary leadership of hon. Prime Minister, Narendra Modi ji, our government has been able to save millions of lives. Not only that, it is a matter of great pride that today, over 75 per cent of the eligible population of our nation has received their free COVID vaccination. For making this remarkable feat possible, I thank our frontline COVID workers, hon. Prime Minister Modi ji, the Health Minister, Dr. Mansukh Mandaviya ji, both the Central and State Governments, and everyone who has worked hard to achieve this remarkable fete. It is to the credit of our scientists and entrepreneurs that today, India has emerged as the 'Hope for the World' in terms of vaccine production and supply.
Following our ancient philosophy of सर्वे सन्तु निरामयाः, our Government has not only vaccinated our citizens, but has gifted vaccines to our Neighbourers, like Bhutan, Bangladesh, Nepal, Sri Lanka and nations across the world. Sir, despite COVID caused global economic slowdown, our nation has grown at a remarkable pace, and our economy is expected to expand by 8.3 per cent in the fiscal year 2021-22 (ending March 2022).
The World Bank has further stated that India will grow fastest among the major economies in 2022-23 and 2023-24. This has happened due to the emphasis given by our government on developing self-reliance, and promoting domestic entrepreneurships through 'Make in India', 'Start-Up India', 'Vocal for Local', 'Atmanirbhar Bharat' and other pro-business policies and reforms. I applaud PM Modi ji's vision of financial inclusion and direct benefit transfer (DBT) for millions of our fellow citizens. Thanks to the Jandhan, Aadhar and Mobile (JAM Trinity), as envisioned by hon. PM Modi ji, today even the most marginalized people are getting the benefit of government schemes delivered directly to their accounts. Especially, during the COVID pandemic, our Government has been able to provide Rs. 2.6 lakh crores worth of food to over 80 crore citizens through the Pradhan Mantri Garib Kalyan Anna Yojana - this is truly worthy of appreciation.
The provisioning of Rs 64000 crore worth of Ayushman Bharat Health Infrastructure Mission is gradually transforming the healthcare sector across our country. Use of technology to assist our workers has seen e-Shram portal register over 23 core workers - this is the result of Digital India as envisioned by PM Modi ji. I applaud the Government for taking measures to ensure that all the sections of our people have benefited with zero corruption.
As our nation progresses to newer heights, I want to draw the attention of the Government to the deprivation and associated challenges faced by the people from Darjeeling hills, Terai and Dooars, and the steps that government needs to take to remedy them. Establishing AIIMS in North Bengal under the Pradhan Mantri Ayushman Bharat Health Infrastructure Mission, North Bengal is home to around 350 different tribal communities. The northern most districts of Bengal - Darjeeling, Kalimpong, Alipurduars, Jalpaiguri, Coach Behar, North Dinajpur and South Dinajpur has a population of around 2.5 crore, yet our region continues to suffer abysmal health care system due to the neglect of succeeding governments of West Bengal. The people here are dependent on working for the tea estates or are engaged in farming for their sustenance. Majority of the workers are women, and the average income for a family in our region is only around Rs 6000 per month. Due to low income, people here cannot afford treatment in private hospitals, and the Government-run facilities are inadequately staffed, and lack even the most basic equipment. The nearest city with better health facilities is Kolkata, which is around 650kms away, and most people from our region cannot afford to travel there. Additionally, the Government of West Bengal has refused to implement 'Ayushman Bharat' scheme in the state, because of which, those who are the poorest and most marginalized continue to suffer due to the lack of health care facilities. I therefore request the Government to establish an AIIMS in North Bengal under the Pradhan Mantri Ayushman Bharat Health Infrastructure Mission. I also request the Government to establish a Medical College in Kalimpong District. This will go a long way in provisioning better healthcare services for the people from our region.
Regarding expediting Implementation of New Labour Codes. In 2020, the Parliament approved four new Labour Codes - Code on Wages, Social Security Code, Industrial Relations Code, and the Occupational Safety, Health and Working Conditions Code. The formulation for the rules to implement the codes were supposed to be undertaken in 2021 itself. However, there has been inordinate delay in the same. This delay has caused widespread difficulties among the workers, especially those from the tea and cinchona gardens of Darjeeling hills, Terai and Dooars region. The West Bengal government has refused to implement the Minimum Wages Act in the tea and cinchona gardens till date. The workers are also deprived of proper facilities, health care, welfare and social security measures that they are entitled to citing non formulation of rules concerning these Labour Codes. Due to the delay in the implementation of the rules concerning the Labour Codes, the workers are being deprived for their rights as envisioned by the Parliament of our Nation, and our Government. I therefore, request the Government to expedite the implementation of these Labour Codes, so that our workers get proper wages, and facilities without any further delay.
Regarding expediting the establishment of Doordarshan Gorkha Language Channel Sir, there are over 1.5crore Indian citizens of Gorkha ethnicity whose mother tongue is Nepali and Gorkha language. Our constitution under the Eighth Schedule recognizes Gorkha language as one of the national languages of India. However, efforts towards the conservation and propagation of this glorious language are seriously lacking. While every major language recognized under the Eighth Schedule has a dedicated Doordarshan Channel broadcasting programs in their respective languages, the Nepali and Gorkha language has continued to be relegated to the side-lines. Till date we do not have a dedicated TV Channel broadcasting contents in Nepali and Gorkha language. In the absence of a National Platform, the Gorkha culture, diversity, society and language have suffered immense cultural loss. In Darjeeling, Kurseong, and Kalimpong, the infrastructure, artists and audience are already in place. All we need is for Prasar Bharati to initiate the efforts. I therefore request the Government to kindly expedite the establishment of a DD Nepali and Gorkha language Channel.
Regarding expediting AMRUT and Har Ghar Jal Projects in Darjeeling Lok Sabha Constituency, The Central Government under the visionary leadership of hon. PM Narendra Modi has envisioned provisioning of drinking water to every household by 2024. States like Telangana, Haryana, Goa and many UTs have achieved 100 per cent drinking water connection. States like Punjab, Bihar, Himachal Pradesh have ensured over 90 per cent connection. However, the state of West Bengal has severely lacked behind, with only around 18 per cent of households being connected to piped drinking water so far. Our region continues to reel under acute drinking water shortage. Many projects sanctioned under AMRUT in Siliguri Municipal Corporation and Darjeeling Municipality are yet to be completed. Because of this delay, people in Siliguri, Darjeeling and other places under Darjeeling Lok Sabha Constituency are suffering. I request the Government to kindly take cognizance and ensure early implementation and completion of all AMRUT and Har Ghar Jal Projects in West Bengal, particularly in Darjeeling Lok Sabha Constituency.
Regarding development of sports infrastructure and National Academy of Sports in Darjeeling-Siliguri-Kalimpong region, despite having immense talents in sports, our region continues to suffer utter apathy and neglect from the State Government when it comes to developing and promoting sports. The only national level stadium in our region -- Kanchenjung Stadium -- is today in shambles and no new sports infrastructure has been built in the past 20 years. I am therefore requesting the Government to kindly develop new sports infrastructure, including stadiums in Darjeeling, Kalimpong, Siliguri, Kurseong, Bijanbari, Mirik, Matigara, Naxalbari, Phansidewa and Chopra. I also request the Government to help establish Centre of Excellence in Sports in Kalimpong.
The Central University in Darjeeling hill Darjeeling has remained a hub of education not only in India, but also across South and South-East Asian countries. Darjeeling region is home to some of the best schools in India and students from all over Asia come to study in the hills. Yet in terms of higher education, this region severely lags behind as compared to the rest of India. Establishment of a Central University in the region, has been a long-standing aspiration and a pertinent demand of our people. Establishing a Central University in Darjeeling can help to turn it into one of the hubs for higher education in India and an important education centre in all of South and South East Asia. This will greatly complement Modi ji's Act East Policy. I, therefore, request the government to help establish a Central University in Darjeeling hills.
Regarding Parja Patta for Tea and Cinchona Garden Workers, despite 75 years since Independence, these tea and cinchona garden workers are denied the right to Parja Patta of their ancestral land. The British denied our workers Parja Patta rights, and succeeding West Bengal Governments have continued to do the same. Sir, the only way to ensure justice for them is through the direct intervention of the Union Government. I am, therefore, requesting the Union Government to enact a law which will guarantee Parja Patta rights for our tea and cinchona garden workers. Much like how the Forest Rights Act is finally enabling land rights for forest communities, only a national law can guarantee Parja Patta land rights for our sisters and brothers working in the tea and cinchona gardens.
Regarding development of Infrastructure in the region, Darjeeling Lok Sabha Constituency is situated in the heart of India's 'Chicken Neck' region. Despite being so critical to our national security, the West Bengal Government has neglected infrastructure development in our region. The Ministry of Road, Transport and Highways, Government of India, has multiple highway related projects lined up for our region. This includes the development of construction of highway 717A, alternative highway to Kalimpong, construction of four-lane elevated corridor connecting Balason to Sevoke, redevelopment and upgradation of national highway construction of alternative highway to Darjeeling, development of ring road around Siliguri City, and construction of alternative highway to Coronation Bridge. In addition, the Ministry of Rural Development has also initiated multiple road construction through PMGSY and MGNREGA.
I am humbly requesting the Government to kindly expedite these projects so that people from our region too can enjoy the benefits of easy access to roads and highway network from across the country.
SHRI THOMAS CHAZHIKADAN (KOTTAYAM): Thank you, Madam, for allowing me to speak on the Motion of Thanks on the Address of the hon. President of India to the Joint Sitting of the Parliament. But this Address is simply a narration of the activities or programmes of the Government of India. There are no concrete plans to correct the administrative failures of the Government.
COVID-19 pandemic has made millions of people jobless. The Government came to power promising two crore new jobs every year. More than five crore youngsters are jobless now. There is no mention about this in the Address.
The country is still reeling under COVID-19 pandemic. More than five lakh people laid their lives because of this pandemic. The Supreme Court has directed the Government that each family where a COVID-19 patient has died, should be provided with a minimum of Rs.50,000. This Address is not mentioning anything about that. I would like to say that the Government should remember that.
The Address is mentioning that the Government is upholding the ideals of Dr. Ambedkar: liberty, equality and fraternity. The Government has no right to use these words, at least. Regarding liberty, I would like the House to remember Father Stan Swamy’s fate. Earlier also, I mentioned it. He was a tribal reformer. He fought for his entire life for rehabilitation of the tribal people. But he was jailed. This octogenarian was seriously ill. That was not considered by the Government. He was not given bail. He laid his life in the jail. The term ‘equality’ also does not suit the Government. Dalit Christians are eligible for their reservation rights. But they are denied that.
20.00 hrs The Government should take steps in this regard. Just because they have opted for a particular faith, they should not be denied the right of reservation.
The minorities in the country are not safe now. They feel unsafe. The Government cannot use the word ‘fraternity’ also. The President’s Address mentions the achievements in the agricultural sector but it has failed to mention anything about a year-long protest by the farmers in Delhi. The Government had to withdraw three draconian laws. The demand of the farmers to implement MSP through legislation is still pending.
20.01 hours (Dr. (Prof.) Kirit Premjibhai Solanki in the Chair) The rubber growers in Kerala, as well as all over India, are not happy with the Government’s policy. There is a long-pending demand for declaration of MSP of Rs.250 per Kg. for natural rubber and also to declare natural rubber as an agricultural produce. The task force for the rubber sector has recommended treating natural rubber as an agricultural produce and also that it should be included in the Minimum Support Price Scheme. However, the Government has not taken any step in this regard. The Government is now coming up with a proposal to repeal the Rubber Act, 1947. The draft Bill is circulated in the official website of the Department of Commerce and the Rubber Board. The Bill is against the interests of the rubber growers. The new Bill should have declared natural rubber as an agricultural produce, and the MSP of Rs.250 per Kg. of rubber should have been legalised. The move to fix the minimum and maximum price for rubber has been included in the Bill. There is also a provision to punish those who are selling rubber below the minimum price or above the maximum price. That is also against the interests of the rubber growers.
The Government is not taking care of the beekeepers in Kerala. There are thousands of beekeepers, apiculturists. The Food Safety and Standards Authority of India has issued a guideline to keep the humidity level in honey to less than 20 per cent. This is not possible in Kerala because of the climatic condition. The honey being produced in Kerala always has more than 20 per cent humidity. Apiculturists in Kerala are facing this difficulty.
Under the PM-KISAN Scheme, the farmers in India are being provided Rs.6,000 per year. It is not sufficient. Every marginal and small farmer should be paid at least Rs.10,000 per month so that they can survive under the difficult circumstances. This should be seriously looked into.
The President’s Address mentions that the collection of GST is very high, and more than Rs.1,46,000 crore have been collected but the demand of the States to pay compensation is not being heard by the Centre. I would demand that the Centre should take steps to pay GST compensation to the States and also the compensation period should be extended for a further period of five years.
Thank you, Sir.
SHRIMATI SUPRIYA SADANAND SULE (BARAMATI): Sir, I stand here to speak on the Motion of Thanks on the President’s Address. I thank him for addressing the nation.
सर, एक्चुअली कहना तो नहीं चाहिए, लेकिन बीजेपी के जो सांसद बोले, वे नए हैं और बहुत अच्छा भी बोले । वे पहली बार चुनकर आए हैं, उन्होंने बहुत अच्छा बोला है । वे मेरे भतीजे की उम्र के हैं और अच्छा परफॉर्म कर रहे हैं । यह अच्छी बात है, लेकिन उन्होंने दो-चार चीज़ें कहीं, जिन्हें मैं सिर्फ रिकॉर्ड के लिए क्लियर करना चाहती हूं । उन्होंने यूपीए-1 और यूपीए-2 के खिलाफ काफी कुछ बोला । ठीक है, बोलना उनका अधिकार है । मैं सिर्फ उनको याद दिलाना चाहती हूं कि यूपीए-1 और यूपीए-2 में उनके पिताजी मंत्री थे । जब सारी पॉलिसीज़ हुई थीं, तब वे कांग्रेस में थे । उन्होंने जो सारी टीका टिप्पणी की है, वह खुद के फादर के खिलाफ ही की है । … (व्यवधान) यह हमारी संस्कृति में नहीं होता है । … (व्यवधान) आप महिला हैं, आप यह सब ज्यादा समझेंगी । मराठी में कहावत है - ‘खाल्ल्या मिठाला जागू नका’, अर्थात जिसका कभी थोड़ा भी नमक खाया है, जिंदगी भर उसे याद रखना । यह मेरी मां ने मुझे सिखाया और यह मेरी भारतीय संस्कृति है । कभी भी, किसी के भी साथ कुछ भी खाया होगा, दो रुपये का निवाला भी खाया होगा, उसको हमेशा याद रखना । यह मेरी संस्कृति है, यह मराठी में मेरी मां ने मुझे सिखाया है ।
आप दस सालों तक जिनके साथ मंत्री रहे, उनके साथ दिल्ली आना-जाना और गांधी फैमली के साथ उनके संबंध थे । वे इसे शायद भूल गए हैं, लेकिन यह उनका बैकग्राउंड है । जब वे इस पर टीका टिप्पणी कर रहे थे, तो काफी बेनिफिशरीज़ थे । बाकी जो बेनिफिशरीज़ हैं, मैं उनके बारे में बोलना नहीं चाहती हूं, क्योंकि वह मेरा स्टाइल नहीं है । वह किसी और दिन मैं प्राइवेट में सबको बता दूंगी । यह पार्लियामेंट में बताने की बात नहीं है । मेरे ख्याल से एक-दूसरे के बारे में जब सांसद बोलते हैं, तो थोड़ा सा ख्याल रखना चाहिए और इतना भी एमनीशिया नहीं होना चाहिए । आप मूमेंट में जरूर रहिए, लेकिन हिस्ट्री मत भूलिए । I was turning the clock to make sure the compass is in order.
उन्होंने दूसरी बात कही कि शायद सांसदों को वयोश्री स्कीम के बारे में नहीं पता है, वे पढ़ते नहीं हैं । शायद ऐसा ही होगा, हम लोग ज्यादा पढ़ते नहीं हैं । हम इतने विद्वान नहीं हैं, लेकिन थोड़ा बहुत हम पढ़ लेते हैं । मैं उनसे कहना चाहती हूं वयोश्री स्कीम का थोड़ा सा डेटा वे खुद चैक कर लें, वे देख लें कि इस देश का कौन सा निर्वाचन क्षेत्र है, जो पिछले दो-तीन सालों से लगातार एक या दो नंबर पर है । आप इसे खुद चैक कर लीजिए, मेरा बोलना थोड़ा अच्छा नहीं होगा । आप वह डेटा चैक कर लीजिए कि एक या दो नंबर पर कौन सा क्षेत्र आता है । बस इतना ही चैक कर लीजिए।
बाकी हिस्ट्री है, जिसका आप सबको एक्सेस होता है । आप सत्ता में हैं, आपको वह मिल जाएगा । मैं उन पर और टाइम देना नहीं चाहती हूं, लेकिन उन्होंने एक और बात कही थी कि हम थैंक-यू नहीं बोलते हैं । हम इतने अहसान फारामोश भी नहीं हैं । आप मेरा ट्विटर हैंडल चैक कर लीजिए और हमारे सभी मेंबर्स के चैक कर लीजिए । कोई भी हमारे लिए कुछ अच्छा करता है, तो हम सिर्फ प्राइवेट में जाकर नहीं बोलते हैं । हम उसे ट्विटर पर डालते हैं और हर मंत्री को थैंक-यू बोलते हैं । यह हमारी संस्कृति है । हम अच्छे को अच्छा बोलते हैं । आप सबका ट्विटर हैंडल देखिए, मैं सिर्फ अपना देखने को नहीं बोल रही हूं । हम सब सांसद, जो ओपोज़ीशन में हैं, सब ऐसा दिखाते हैं । अगर किसी रेल मंत्री से हमने ट्रेन की डिमांड की और हमें ट्रेन मिल गई, तो हम ऑफिशियली ट्विटर पर डालते हैं, जिसे पूरी दुनिया देखती है । सिर्फ पार्लियामेंट में थैंक-यू नहीं बोलते हैं । ये थोड़े इल-इन्फॉर्म्ड हैं । ये नए हैं, इसलिए यह इनका उत्साह है, लेकिन ये अच्छा बोले । I compliment him. इनका फ्यूचर भी बहुत लंबा है, लेकिन ये थोड़ा होमवर्क करके बोलें । इनके दादाजी की भी बहुत लंबी पॉलिटिक्स रही है, पिताजी का भी बहुत अच्छा करियर रहा है । यह मेरी इच्छा है कि इनका करियर भी बहुत अच्छा रहे और आने वाले50सालों तक वे सांसद रहें या जो भी उनकी पार्टी उनको जिम्मेदारी दे । … (व्यवधान)
मैं आज यह सब बोलना चाहती थी, क्योंकि शुरू में जो प्रेसिडेंशियल स्पीच हुई, उसमें जिस तरह डॉक्टर्स या सबके बारे में प्रेसिडेंट साहब ने जो कहा, वह बहुत अच्छा था । हम सब एक हैं । पिछले डेढ़-दो सालों में चाहे कोई भी स्टेट हो या सेंट्रल गवर्नमेंट हो, सब साथ में मिलकर कोविड के खिलाफ लड़े हैं । चाहे वैक्सीन हो या जो भी प्रोग्राम्स रहे, उनमें हम सब साथ रहे । केंद्र सरकार के पीडीएस सिस्टम से हमें बहुत बार मदद मिल चुकी है । हमारी सरकार, हमारे माननीय मुख्य मंत्री जी ने भी ऑफिशियली केंद्र सरकार का आभार माना कि पीडीएस ने हमको बहुत मदद दी ।
दो-चार चीज़ें हैं, जिनके बारे में मैं बोलना चाहूंगी । इस देश में अब feel-good factor नहीं है, क्योंकि हम पैनडेमिक में हैं । आज देश के सामने जो सबसे बड़ी प्रॉब्लम है, वह अनइंप्लॉयमेंट की है । Unemployment is one of the largest challenges the youth of India is facing today. You just see what had happened in UP and Bihar. It was not a pleasant experience. किसी की भी ट्रेन जली हो, किसी की भी सरकार हो, यह हमारे भारत की ट्रेन है । It is wrong that it had happened. But why did it happen? I think, it is a serious cause of concern.
The hon. President in his speech said that we will create sixty lakh jobs. I still remember the speech of the hon. Prime Minister and in every speech, he used to say दो करोड़ नौकरियां हम हर साल जनरेट करेंगे । दो करोड़ का नंबर60लाख पर कैसे आ गया, इस पर सरकार थोड़ी टिप्पणी करे । जो हुआ, वह अलग बात है । So, I think, we really need to be worried. The commitment of this Government keeps changing. What is the roadmap ahead? This unemployment challenge is a serious one. मैं आपको एक साधारण, छोटा सा उदाहरण देती हूं।
Indian Railways advertised 35,281 jobs for a technical position. It attracted 1.25 crore people for the job. So, after the selections, 353 applicants would not get a job for every single applicant selected. इसका मतलब एक ओर जहां एक लड़का या एक लड़की को नौकरी मिल रही है तो वहीं दूसरी ओर 353 लड़के या लड़कियों को नौकरी नहीं मिल रही है । It is really a big problem.
दूसरा, मेक इन इंडिया और स्टार्ट अप इंडिया एक अच्छा ऑप्शन है । मैं आपको एक अच्छी न्यूज देना चाहती हूं कि Start up India is a very good programme. स्टार्ट अप इंडिया में आपकी ही सरकार के इकोनॉमिक सर्वे ने लिखा है कि स्टार्ट अप इंडिया में सबसे अच्छा काम महाराष्ट्र ने किया है । यह मैं नहीं कह रही हूं, यह आपका इकोनॉमिक सर्वे कह रहा है । इस हिसाब से मेक इन इंडिया की एक फनी चीज मैं आपको बताती हूं । मैं जब दिल्ली आती हूं तो अपने फादर के साथ रहती हूं । उनके घर से जब मैं पार्लियामेंट आती हूं तो मैं उद्योग भवन से होते हुए आती हूं । वहां एक शेर का लोगो था, जो कि मेक इन इंडिया का सिंबल है । मैंने जब उसे देखा तो मैंने कहा कि यह मेक इन इंडिया है, तो I am also proud मैं जो भी पहनती हूं, वह सब मेक इन इंडिया ही है । मैंने सोचा कि यह अच्छी बात है कि यह लोगो यहां रखा हुआ है । दो महीने, चार महीने, छ: महीने बीत गए, मैं जब भी उधर से पार्लियामेंट जाती तो देखती कि उसे कवर करके रखा गया था । काफी समय बाद मैंने उनसे पूछा कि उद्योग भवन कितना अच्छा भवन है । आप मेक इन इंडिया की स्टोरी बनाते हैं तो फिर इस एम्बलम को आप क्यों नहीं खोल रहे हैं? उन्होंने बताया कि कुछ फिनिशिंग हो रही है, तो मैंने कहा कि ठीक है । उसके बाद अभी जब मैं उधर से आई तो उसको वहां से निकाल दिया गया । छ:-सात साल में मेक इन इंडिया के लोगो को जो आपका सिंबल है, उसे आप ठीक नहीं कर पा रहे हैं तो किस तरह से मेक इन इंडिया को सफल बनाएंगे? मेक इन इंडिया में आप क्या करेंगे? It is really a … * It is such a big project. बेचारा डीआरडीओ, जहां पर इतने बड़े साइंटिस्ट काम करते हैं, वहां के सैनिटाइजर्स और मास्क आप हमको बेचते हैं । This is not ‘Make in India’. We have to get serious. जो भी वैक्सीन बनी है, उस पर कल हमारे यूपी के भैया बोल रहे थे कि सरकार ने वैक्सीन बनाई है । मैं उनको बताना चाहती हूं कि सरकार ने वैक्सीन डिस्ट्रीब्यूट की है, बनाई नहीं है । उसे सीरम इंस्टीट्यूट ने बनाया है । वह साठ साल से वैक्सीन बना रही है ।
सर मैं अंत में अपने सारे पॉइंट्स छोड़कर मुख्य पॉइंट पर आती हूं । I have only one question to ask. देश में आज जो माहौल चल रहा है, चाहे हेट स्पीचेज हों, सेपरेशन ऑफ सिविल सोसायटी हो, मीडिया हो, इंकम टैक्स, सीबीआई, ईडी की जांच हो, जो अपोजीशन में सभी की जांच चल रही है, इससे कोई नहीं बचा है । मैं हाउस का ज्यादा समय नहीं लेना चाहती हूं । एक ओर रैशनल थिंकिंग है और दूसरी ओर आप बाबा साहब अम्बेडकर का नाम ले रहे हैं । बाबा साहब अम्बेडकर के बारे में कुछ शब्द मेरी स्पीच में हैं । उन्हें पढ़कर मैं अपनी स्पीच खत्म करती हूं ।
I am only reflecting what he has said. What does social democracy mean? It means the way of life which recognises liberty, equality, and fraternity as the principles of life. These principles of liberty, equality, and fraternity are not to be treated as separate items in a trinity. They form a union of trinity in the sense that to divorce one from the other is to defeat the very purpose of democracy. Liberty cannot be divorced from equality. Equality cannot be divorced from liberty; nor can equality be divorced from fraternity. Without equality, liberty would produce supremacy of a few over many. It is very important.
Without equality, liberty would produce supremacy of a few over many. Equality without liberty would kill individual initiatives. Without fraternity, liberty would produce a supremacy of few over the many. Without fraternity, liberty and equality, it could not become a natural process of things. I urge this Government, to not live in ‘La La land’, and to introspect what the economy is doing, what is happening in the country, and really put their hand on the heart and see, if they really believe in Dr. Baba Saheb Ambedkar, is this what the Government is all about.
*श्रीमती रमा देवी (शिवहर) : राष्ट्रपति जी के अभिभाषण पर जारी इस महत्वपूर्ण चर्चा में मुझेअपने विचार रखने का अवसर प्रदान करने के लिए धन्यवाद । राष्ट्रपति जी के अभिभाषण में माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में देश के विकास की दूरदृष्टि की रूपरेखा है । महामहिम राष्ट्रपति महोदय द्वारा दिये गये अभिभाषण से यह स्पष्ट है कि माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व वाली केन्द्र सरकार हर क्षेत्र में एक सशक्त भारत के निर्माण की ओर तेज गति चल रही है । यह भारत के पुनर्निर्माण की रूपरेखा है, जिसमें स्पष्ट है कि आजादी के अमृत महोत्सव काल में हम कैसा भारतवर्ष चाहते हैं।
"सबका साथ, सबका विकास और सबका प्रयास"के मंत्र पर चलते हुए 125करोड़ देशवासियों का जीवन सुधारने,कुशासन से पैदा हुई उनकी मुसीबतें दूर करने और समाज की आखिरी पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक को सभी जरूरी सुविधाओं को पहुंचाने के लक्ष्य के लिए यह सरकार पूरी तरह से संकल्पित है । इस बुनियाद का सबसे महत्वपूर्ण संकल्प एक सर्व-समावेशी,सर्व-हितकारी,सशक्त भारत का निर्माण और देश की आत्मनिर्भरता है।
कोरोना वायरस से उत्पन्न वैश्विक महामारी का यह तीसरा वर्ष है । हम सभी साक्षी हैं कि कैसे इस महामारी ने पूरी दुनिया को प्रभावित किया है । लेकिन कोरोना काल में भी मोदी सरकार ने अंत्योदय की भावना से कोविड प्रबंधन, तीव्र गति से टीकाकरण,गरीबों को मुफ्त राशन,किसानों के बेहतर भविष्य,महिला सशक्तिकरण एंव देश के हर वर्ग के उत्थान के लिए समर्पित भाव से काम किया है।
कोरोना के खिलाफ लड़ाई में भी भारत के सामर्थ्य को कोविड टीकाकरण कार्यक्रम में पूरी दुनिया ने देखा है । मोदी सरकार की प्रतिबद्धता एंव दृढ इच्छाशक्ति का ही नतीजा है कि देश ने एक साल से भी कम समय में कोरोनारोधी टीकों की 150 करोड़ से भी ज्यादा खुराक लगाने के रिकॉर्ड को पार किया । आज हम पूरी दुनिया में कोरोना टीकों की सबसे ज्यादा खुराक देने वाले अग्रणी देशों में से एक है । आज देश में90 प्रतिशत से अधिक वयस्क नागरिकों को टीके की एक खुराक मिल चुकी है, जबकि 70 प्रतिशत से अधिक लोग दोनों खुराक ले चुके हैं । "हर घर दस्तक अभियान के माध्यम से सरकार बाकी बचे हुए लोगों तक भी पहुंच रही है तथा मैं माननीय प्रधानमंत्री जी एवं स्वास्थ्य मंत्री जी को धन्यवाद देना चाहती हूं कि उनके लगातार प्रयास के कारण इसी माह से वैक्सीनेशन प्रोग्राम के तहत देश के 15 से 18 वर्ष तक के किशोर-किशोरियों को भी शामिल किया गया है।
कोरोना महामारी से निपटने के लिए सरकार के प्रयास केवल तात्कालिक चुनौतियों तक ही सीमित नहीं हैं । इसलिए माननीय नरेन्द्र भाई मोदी जी के नेतृत्व वाली केन्द्र सरकार ऐसे दूरदर्शी समाधान तैयार कर रही है,जो भविष्य के लिए भी प्रभावी और उपयोगी रहे । सरकार द्वारा64 हजार करोड़ रुपये की लागत से शुरू किया गया प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत हेल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर मिशन इसका बहुत ही सराहनीय कदम है । मोदी सरकार की संवेदनशील नीतियों की ही देन है कि देश में अब स्वास्थ्य सेवाएं जनसाधारण तक आसानी से पहुंच रही हैं । 80 हजार से अधिक हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर्स और करोड़ों की संख्या में जारी आयुष्मान भारत कार्ड से गरीबों को उपचार में काफी मदद मिली है । सरकार द्वारा8 हजार से अधिक जन औषधि केंद्रों के माध्यम से कम कीमत पर दवाइयां उपलब्ध कराकर इलाज में होने वाले खर्च को कम किया है।
मेरे संसदीय क्षेत्र का अधिकांश भाग ग्रामीण क्षेत्र में आता है । मुझे इस बात की खुशी है कि मेरे क्षेत्र के भी काफी लोग जन औषधि केन्द्र के माध्यम से सस्ती कीमत पर दवाइयां प्राप्त कर अपना उपचार करा रहे हैं । सुलभ और सगम स्वास्थ्य सेवाओं के लिए उठाया गया"आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन"भी जनहित में उठाया गया एक स्वागत योग्य कदम है । मैं इसके लिए सरकार को धन्यवाद देती हूं।
महामहिम राष्ट्रपति जी ने अपने अभिभाषण में सरकार द्वारा आदर्श समाज के निर्माण की प्रतिबद्धता को दोहराया है । सरकार की आस्था और अंत्योदय के मूल मंत्र में है, जिसमें समानता और सामाजिक न्याय भी हो । इसीलिए आज सरकार द्वारा हर नीतियों में गांव, गरीब, पिछड़ें,अनुसूचित जाति एवं जनजातियों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है । पिछले कुछ वर्षों में पद्म पुरस्कारों के चयन में भारत की यह भावना भलीभांति झलकती है।
कोरोना के इस महासंकट में हमने बड़े-बड़े देशों में खाद्यान्न की कमी और भुखमरी की स्थिति को देखा है । लेकिन मोदी सरकार की संवेदनशीलता की मिसाल है कि सरकार ने इस बात का पूरा प्रयास किया कि 100साल के इस सबसे बड़े संकट में कोई गरीब भूखा न रहे । “प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना" के अंतर्गत केन्द्र सरकार द्वारा 2 लाख 60 हजार करोड़ रुपये की लागत से देश के 80 करोड़ लोगों को पिछले 19 माह से हर महीने मुफ्त राशन का वितरण किया जा रहा है । मैं माननीय प्रधानमंत्री जी के प्रति अपने क्षेत्र के जनता की तरफ से आभार व्यक्त करती हूं कि उन्होंने गरीबों की तकलीफ को समझते हुए पूरी संवेदनशीलता के साथ इस योजना का मार्च, 2022 तक जारी रखने का निर्णय लिया है।
मोदी सरकार समाज के हर वर्ग के कल्याण एवं उनके हितों की रक्षा के लिए खड़ी है । कोरोना काल में उत्पन्न हुई परिस्थिति को देखते हुए गरीबों को स्वाभिमान के साथ रोजगार मुहैया कराने के लिए सरकार द्वारा चलाई जा रही "प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना"भी लोगों को आत्मनिर्भर बनने में सहायक सिद्ध हो रही है । इस योजना के तहत अब तक 28लाख रेहड़ी-पटरी वालों को 29 सौ करोड़ रुपये से ज्यादा की धनराशि प्रदान की गई है । श्रमिकों के हितों की रक्षा के लिए सरकार द्वारा शुरू किया गया ई-श्रम पोर्टल शुरू किया जाना एक और स्वागत योग्य कदम है । इससे अब तक 23करोड़ से अधिक श्रमिक जुड़ चुके हैं।
प्रधानमंत्री मोदी जी अपने सेवाकाल के प्रारम्भ से ही लोगों का मूलभूत सुविधाएं प्रदान करने एंव गरीब सशक्तिकरण के लिए प्रयत्नशील हैं । पिछले वर्षों के अनवरत प्रयासों का नतीजा है कि“प्रधानमंत्री आवास योजना”से अब तक दो करोड़ से अधिक पक्के मकान गरीबों को मिल चुके हैं । प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के तहत पिछले तीन वर्षों में लगभग डेढ़ लाख करोड़ रुपये की लागत से एक करोड़ 17लाख घर स्वीकृत किए गए हैं । "हर घर जल"पहुंचाने के उद्देश्य से शुरू की गई "जल जीवन मिशन"जैसी महत्वपूर्ण योजनाएं लोगों के जीवन स्तर में बदलाव लाने का बहुत बड़ा माध्यम सिद्ध हो रही हैं । इसी तरह ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को उनकी सम्पति का दस्तावेज देने के लिए शुरू की गई "स्वामित्व योजना" भी सरकार की एक असाधारण प्रयास है।
मैं सरकार को धन्यवाद देना चाहती हूं,जो किसानों को अत्यधिक सशक्त करने एवं उनकी आय को दोगुना करने के लिए संकल्पित है । देश के 80प्रतिशत किसान छोटे किसान हैं,जिनके हितों को मोदी सरकार ने हमेशा प्राथमिकता में रखा है । "प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि"के माध्यम से देश के 11 करोड़ से अधिक किसान परिवारों को 1 लाख 80 हजार करोड़ रुपये दिए गए हैं । फसल बीमा योजना में नए बदलावों का लाभ भी देश के छोटे-बड़े किसानों को आसानी से मिल रहा है । खेतों के नजदीक जरूरी सुविधा विकसित करने के लिए यह सरकार अभूतपूर्व निवेश कर रही है।
आज सरकार अपनी कई कल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा दे रही है, जिससे निश्चित रूप से देश की महिलाएं लाभान्वित एंव आत्मनिर्भर बन रही हैं । ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देने में महिलाओं की भूमिका अधिक विस्तृत हो रही है । वर्ष 2021-22में 28 लाख सेल्फ हेल्प ग्रुप्स को बैंकों की तरफ से 65 हजार करोड रुपये की मदद दी गई है । आत्मनिर्भर भारत में महिला उद्यमियों की भी विशेष भूमिका है । मुद्रा योजना के माध्यम से हमारे देश की बहनों की उद्यमिता और कौशल को बढ़ावा मिला है । ऐसी कई योजनाओं के माध्यम से महिलाओं को स्वरोजगार के नए अवसर प्रदान कर रही है । "बेटी बचाओ,बेटी पढ़ाओ"पहल के अनेकों सकारात्मक परिणाम हमारे समाज में आ रहे हैं।
माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में देश में कल्याणकारी एवं ऐतिहासिक कार्य हुए हैं और गरीब लोगों को फायदा पहुंचा है । आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में यह सरकार पूरी निष्ठा और ईमानदार नीयत के साथ समृद्ध भारत के निर्माण के लिए निरंतर काम कर रही है । मैं माननीय राष्ट्रपति जी के अभिभाषण पर जारी इस धन्यवाद प्रस्ताव का समर्थन करती हूं।
SHRIMATI VANGA GEETHA VISWANATH (KAKINADA): Mr. Chairman, Sir, thank you for giving me this opportunity to speak on the Motion of thanks on the President’s Address.
HON. CHAIRPERSON: Madam, I have a request to all the Speakers to kindly confine their speech to five minutes.
SHRIMATI VANGA GEETHA VISWANATH : Sir, I have nine minutes. We do not have the third speaker from our Party. … (Interruptions)
Sir, I would like to speak in Telugu.
*Sir, I thank my leader Shri Midhun Reddy for giving me this opportunity. After going through President’s address, I find that many issues were mentioned, but due to constraint of time I will confine to few points. Firstly, I will refer to COVID management in our Country, the way people participated in Freedom movement, in the same manner people collectively fought COVID pandemic with the support of State and Union Governments. All the COVID warriors who saved people were thanked by Honourable President, we all join him in thanking all frontline warriors.There is a need to look at various issues and as a citizen of this Country, I would like to raise few issues. We fought for independence and after 75 years of independence, if we are living peacefully and happily, we should thank our Armed Forces. I salute our soldiers who are constantly safeguarding our Country. There are many issues which I want to mention here especially, regarding Health. After we are struck by COVID pandemic, many people lost lives and jobs. They even migrated to different places. There is a need to provide employment to such persons. Poor and middle-class people should get General Insurance. I request union Government to ensure insurance for all.As far as issues pertaining to Andhra Pradesh are concerned, it got bifurcated in 2014, even now it is seeking help for development. In this context, Central Government should provide adequate support. There is an issue of privatisation of Vizag Steel Plant, all are opposing and protesting against this move. We also requested the Union Government to defer this decision. Also, there is a need for clarity regarding Railway Zone. Polavaram Project, which was conceived in 1981 with the cost of Rs. 400 crores which has now escalated to Rs. 55,000 crores. To complete this project, we are looking forward to Union Government’s support. This project will provide drinking water and irrigation facilities to thousands of acres of land across four districts and will benefit lakhs of farmers. It has a potential to generate 970 MW of electricity. It is painful to learn that such Multi Purpose Project is being neglected. This is not in the interest of farmers and people. Andhra Pradesh and it’s farmers are part of India. Projects are meant to be in Andhra Pradesh only.
Country is union of states and without states there cannot be a country. We thank Modi Ji for resolving J&K issue, for developing Kashi and Ayodhya. Similarly, we request him to develop Polavaram, gift Polavaram Project to farmers and extend all possible help to complete Polavaram Project on time.
When we talk about education, on one hand Government claims education for all, on the other hand Ministry of Education, states that 15 crore people are deprived of education. State of Jammu & Kashmir got IIM & IIT. Similarly, 7 years back Andhra Pradesh got Indian Institute of Foreign Trade (IIFT), but till now funds are not released. KVs were sanctioned, where we get quality education, but there are no benches and other infrastructure. These KVs do not have buildings. There is a need to look at these deficiencies.Announcements are there, but, what is done? What is being done? And what will be done? are different. To ensure benefits of these announcements for public, there is a need to do some pondering. These schemes are not yet beneficial for public. We need to discuss these problems. We completed 75 years of independence. We should not confine to issues pertaining to economy and welfare, but we should also discuss on many issues in this Parliament. We should discuss State-Centre relations. We should discuss Governance. We should discuss on Legislature, we should debate on Judiciary. We should discuss on Election Commission. Elections are becoming expensive and even after 75 years of independence common man is being misled while electing his representative. We need to bring electoral reforms so that common people can elect their representative freely. There are many issues referred to in the speech. When it comes to welfare, recently General Budget was introduced. Here there are many senior and experienced members. In our Country 50% of our population have only 13% of national income whereas rich 10% of our population have 57% of our national income. This is a sign of imbalance and disparity. The practice of collecting taxes from poor people and providing concessions to rich, should change. Give justice to poor, provide welfare schemes for poor.
I can proudly say that in my state Andhra Pradesh, poor people are getting benefits of welfare schemes without any recommendation, irrespective of caste and political affiliation. This is being implemented by the only state Andhra Pradesh under the leadership of our Chief Minister Shri YS Jagan Mohan Reddy garu. Even during COVID pandemic, our CM Shri YS Jagan Mohan Reddy ensured health security for all by following protocols set by State as well as Central Governments. Only few States could do such commendable job.
Central Government should support Shri YS Jagan Mohan Reddy to complete Polavaram Project and to take up other developmental activities in Andhra Pradesh. I request that all required funds should be released by the Central Government.
There is no single word about Women’s Reservation Bill in the President’s address, which pained me, disappointed me and discouraged me. We are still talking about Self Help Groups and Mudra loans. There are many women members in this House. We are proud to be in 17th Lok Sabha. I thank all political parties and it’s presidents for sending these many women to the Parliament. After independence this is the largest women representation in Lok Sabha.
I will conclude by mentioning one more point. Women’s Reservation Bill is the need of the hour. Sir, only one minute. Women are capable of doing anything. They not only can manage household but also are capable of doing many things. We are not talking about Rani Rudrama Devi or Rani Jhansi Lakshmibai. We talk about Supriya Sule, Kanimozhi and other women members here. My favourite woman leader is Smt Nirmala Sitharaman for this generation. Let it be Defence Ministry, Finance Ministry or Commerce Ministry, she handled all these ministries with efficiency.
माननीय सभापति :श्री प्रतापराव जाधव ।
मैडम, आपने अपनी बात पूरी बोल दी है।
… ( व्यवधान)
श्री प्रतापराव जाधव (बुलढाणा): सभापति महोदय, आपने मुझे यहां पर बोलने का अवसर दिया, इसके लिए आपका धन्यवाद । मैं राष्ट्रपति के अभिभाषण पर बोलने के लिए यहां खड़ा हुआ हूं।… (व्यवधान)
माननीय सभापति :आप कनक्लूड कर दीजिए । मैं आपसे कब से निवेदन कर रहा हूं।
SHRIMATI VANGA GEETHA VISWANATH: Recently, I heard about Malavika Hegde, she is a courageous lady.
HON. CHAIRPERSON: You have spoken for more than nine minutes.
SHRIMATI VANGA GEETHA VISWANATH : Her husband committed suicide with a debt of Rs. 7000 crores. Today she is supporting 25000 families and paid off Rs.6000 crores of loan. She is a brave lady.
माननीय सभापति :श्री प्रतापराव जाधव । मैडम आपकी बात रिकॉर्ड में नहीं जाएगी । मैं सभी सम्मानित सदस्यों से निवेदन करता हूं कि बहुत सारे स्पीकर्स हैं । आप अपनी-अपनी बात पाँच मिनट में कनक्लूड कीजिए।
श्री प्रतापराव जाधव : सभापति महोदय, अभी मेरा बोलने का समय शुरू हो रहा है । मेरी पार्टी के पहले सदस्य ने अपना भाषण 13 मिनट में बोला है । मैं जिस पार्टी से आता हॅूं, उस पार्टी के 19 सदस्य हैं । उस हिसाब से मुझे कम से कम 15 मिनट का टाइम मिलना चाहिए ।
सभापति महोदय, आप मुझे संरक्षण दीजिए, टाइम देखिए कि कौन सी पार्टी ने कितने मिनट का टाइम सभागृह का लिया है । … (व्यवधान)
माननीय सभापति :आप अपनी बात शुरू कीजिए । You please start.
… ( व्यवधान)
श्री प्रतापराव जाधव : हमारी पार्टी के सदस्यों की संख्या के हिसाब से हमें टाइम मिलना चाहए । हमारा अधिकार हमें मिलना चाहिए । …(व्यवधान)
माननीय सभापति :आप समय मत खराब कीजिए । अपनी बात शुरू कीजिए ।
… ( व्यवधान)
श्री प्रतापराव जाधव : सभापति महोदय, मैं अभी अपनी बात शुरू कर रहा हॅूं।
महोदय, हमारा देश एक कृषि प्रधान देश है । हमारे देश के किसानों को अन्नदाता कहा जाता है । महाराष्ट्र में हम उनको बलीराजा कहते हैं । लेकिन आज हमारे देश के हजारों नहीं लाखों किसान हर साल आत्महत्या करने के लिए मजबूर हैं । लेकिन मुझे खेद से कहना पड़ता है कि हमारे राष्ट्रपति जी के अभिभाषण में किसानों को आत्महत्या से बचाने के लिए, किसानों को अच्छा जीवन देने के लिए कोई भी वाक्य या किसी भी योजना के बारे में हमें सुनने को नहीं मिला ।
सभापति महोदय, एनडीए की सरकार और हमारे प्रधान मंत्री जी ने बताया था कि किसानों की आय दोगुनी करेंगे । महोदय, किसानों की आय दोगुनी तो नहीं हुई, लेकिन खाद, उर्वरक, कीटनाशक और बीजों के भाव जरूर दुगुने हो गए हैं । एमएसपी की कीमतें बढ़ाई नहीं जाती हैं । एमएसपी से कम रेट पर बाजार में किसानों को अपनी फसल बेचनी पड़ती है । टाइम पर फसलों के खरीदी केंद्र चालू नहीं होते हैं । किसानों का माल टाइम पर नहीं लिया जाता है और न ही किसानों को टाइम पर मुआवज़ा दिया जाता है ।
सभापति महोदय, मैं प्रधान मंत्री फसल बीमा योजना की बात करूंगा जिसके लिए हमारे प्रधान मंत्री जी ने कहा था कि किसानों के लिए एक अच्छी राहत साबित होगी, किसानों को मदद होगी, यह कह कर यह योजना लायी गई थी । मैं आपके माध्यम से माननीय सरकारी पक्ष से पूछना चाहता हॅूं कि हमारे प्रधान मंत्री का ही राज्य गुजरात प्रधान मंत्री फसल बीमा योजना से बाहर क्यों हुआ? मध्य प्रदेश में भी बीजेपी की सरकार है । मध्य प्रदेश भी प्रधान मंत्री फसल बीमा योजना से बाहर क्यों हुआ? महोदय, ऐसा इसलिए हुआ, क्योंकि यह जो फसल बीमा योजना है, हम पहले से कहते आ रहे हैं कि यह प्रधान मंत्री फसल बीमा योजना किसानों के हित की नहीं, यह बीमा कंपनियों के हित की योजना है । महोदय, इसमें सुधार करने के बारे में हमने बहुत सारे सुझाव दिए । लेकिन अभी तक उनमें से कोई भी सुझाव स्वीकार नहीं किया गया ।
महोदय, यहां पर बहुत जोर-शोर से कहा गया कि प्रधान मंत्री जी ने प्रधान मंत्री आवास योजना के माध्यम से सभी बेघरों या कच्चे मकान वालों को पक्के मकान देने का वादा किया है । महोदय, वह वादा था कि हम वर्ष 2022तक हर कच्चे मकान वाले गरीब लोगों को पक्का मकान देंगे । महोदय, वर्ष 2022खत्म होने को है, अभी तक 25-30प्रतिशत लोगों को भी पक्के मकान मिले नहीं हैं, इसलिए अब इसका कार्यकाल वर्ष2024तक बढ़ा दिया है ।
सभापति महोदय, इस सरकार में ऐसा कौन सा सिविल इंजिनियर है कि जो 1,20,000 रुपये में दो रूम और टॉयलेट सहित गरीबों को पक्का मकान बना कर दे सकता है ।1,20,000रुपये में नीचे का चबूतरा भी नहीं बन सकता है । 1,20,000 रुपये में तो क्लीन भी नहीं हो सकती है । लेकिन हम गरीबों को सपने दिखा रहे हैं कि हम सभी कच्चे मकान वालों को पक्के मकान दे देंगे।
सभापति महोदय, यहां पर कहा गया कि हमारी सरकार ने सेल्फ हेल्प ग्रुप्स के माध्यम से 62,000 करोड़ रुपये की राशि वहां पर जारी की है । सभापति महोदय, मैंने बहुत सारे राज्यों में और अपने महाराष्ट्र राज्य में भी देखा कि ये जो सेल्फ हैल्प ग्रुप हैं, ये सिर्फ गवर्नमेंट के अनुदान और बैंकों के कर्जों के लिए निर्भर हैं । ये जो योजना हमने बांग्लादेश से ली थी कि जो भी बीपीएल के नीचे की महिलाएं हैं, उनको अच्छा व्यवसाय दे कर, उनके हाथों को काम दे कर, वे जिस वस्तु का निर्माण करेंगे, उन वस्तुओं को अच्छी मार्केट दे कर हम उनको एपीएल में लाना चाहते हैं । मेरा दावा है कि सेल्फ हैल्प ग्रुप का कोई एक भी सदस्य अगर बीपीएल से एपीएल में कनवर्ट हुआ होगा, तो सभापति महोदय, मैं अपने शब्द वापस लेता हॅूं ।
मेरा दावा है कि अगर सेल्फ हेल्प ग्रुप का एक भी सदस्य बी.पी.एल. में से ए.पी.एल. में कन्वर्ट हुआ होगा, तो मैं अपने शब्द वापस लेता हूं । सेल्फ हेल्प ग्रुप के जो उत्पाद हैं, वे बहुत ही अच्छे हैं, लेकिन इनकी मार्केटिंग की व्यवस्था कहीं पर नहीं है । इन्हें बेचने के लिए कोई जगह नहीं है । किसी को देना है तो कहां देना है, यह समझने की बात है ।
सभापति महोदय, मैं ‘प्रधान मंत्री आयुष्मान् भारत योजना’के बारे में कहूंगा ।योजना तो बहुत अच्छी है, लेकिन मैं उत्तर में यही चाहूंगा कि आज तक आयुष्मान् भारत योजना के कितने कार्ड्स दिए गए और उनमें से कितने गरीब लोगों को आयुष्मान् भारत योजना के माध्यम से दवा के लिए या इलाज के लिए पाँच लाख रुपये तक की मदद मिली?
सभापति महोदय, यहां पर मैं बताना चाहूंगा कि यहां पर हमारे बहुत सारे सदस्यों ने राम मन्दिर का उल्लेख किया । उनके बोलने से ऐसा प्रतीत होता था कि जैसे ये अपनी खेती बेचकर या फसल बेचकर राम मन्दिर बनाने का काम कर रहे हैं । राम मन्दिर बनाने का श्रेय अगर किसी को जाता है तो वह सुप्रीम कोर्ट को जाता है । इसी सदन में हमने कहा था कि आपकी मेजॉरिटी है, आप सदन में कानून लाइए और राम मन्दिर बनाने के लिए, कोर्ट का फैसला सुनने के लिए, टाइम बर्बाद मत कीजिए, लेकिन यह सरकार कानून नहीं लायी।
जब सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया, तब वहां पर राम मन्दिर के भूमि पूजन करने के लिए हमारे प्रधान मंत्री जी गए । लोगों को यह मालूम ही होगा कि अगर बाबरी का ढाँचा नहीं गिरता, तो वहां राम मन्दिर का निर्माण नहीं हो पाता, लेकिन जब बाबरी का ढाँचा गिरा तो भारतीय जनता पार्टी, विश्व हिन्दू परिषद, आर.एस.एस., जो भी हिन्दू संगठन थे, वे सब मुकर गए कि यह ढाँचा हमने नहीं गिराया, यह ढाँचा शिव सेना वालों ने गिराया । जब बाला साहब ठाकरे से यह पूछा गया कि क्या यह ढाँचा तुम्हारे शिव सैनिकों ने गिराया, तब एक ही हिन्दू मर्द था पूरे देश में, जिसने कहा कि हाँ, अगर मेरे शिव सैनिकों ने बाबरी ढाँचा गिराया होगा तो उन सैनिकों के ऊपर मुझे गर्व है । अगर ये लोग यू-ट्यूब पर जाकर प्रमोद जी का भाषण सुनेंगे, जब बाला साहब ठाकरे की किताब के अनावरण का कार्यक्रम था, जिसमें अटल बिहारी वाजपेयी जी थे, अमिताभ बच्चन जी थे, लता मंगेशकर जी थीं । उस भाषण में प्रमोद महाजन जी ने बोला था कि अगर इस देश में हिन्दुओं का कोई नेता होगा और हिन्दू को हिन्दू बोलकर मतदान कराने वाला अगर कोई एकमेव नेता होगा तो वे बाला साहब ठाकरे हैं । आज ये हमारे ऊपर लांछन लगाते हैं, जब महाराष्ट्र में यू.पी.ए. के सहकार से शिव सेना का मुख्य मंत्री बना तो हमारे हिन्दुत्व के ऊपर ये लोग टीका करते हैं । मैं उनसे पूछना चाहता हूं कि जब कश्मीर में आप लोगों ने सरकार की स्थापना की थी तो आप किसके साथ गए थे? उत्तर प्रदेश में मायावती जी को जब आप समर्थन कर रहे थे तब आपकी पार्टी की सोच क्या थी? बिहार में नीतीश कुमार जी थे । पन्त प्रधान नेता के रूप में नरेन्द्र मोदी जी का नाम जब सामने आया तो एन.डी.ए. छोड़ कर जाने वालों में अगर कोई पहले नेता थे तो वे नीतीश कुमार जी थे । उनके विधायकों की सदस्य-संख्या कम होने के बावजूद भी आप उनके पीछे मुख्य मंत्री बनाने के लिए घूम रहे हैं । शिव सेना ने अंगुली पकड़कर पूरे हिन्दुस्तान का हिन्दुत्व सिखाया और वे शिव सेना के खिलाफ, हिन्दुत्व के बारे में और हम लोगों के बारे में बोलते हैं।
सभापति महोदय, यहां पर 370कलम का भी उल्लेख किया गया । 370कलम हटाने में हमने भी सहयोग किया, लेकिन 370हटाने के बाद क्या मिला? कश्मीर से जो हमारे हजारों, लाखों पंडित निर्वासित हुए थे, क्या दो सालों में आपने एक पंडित का भी घर कश्मीर में बसाया? उनकी जायदाद या प्रॉपर्टी को जिन लोगों ने छीना था, क्या एकाध पंडित को उनकी प्रॉपर्टी या घर वापस दिलाने का कोई काम आपने किया है? ये सिर्फ झूठे जुमले हैं । लोगों को फँसाने का काम चल रहा है, उन्हें खौफ दिखाने का काम चल रहा है।
अभी मुझसे पहले महाराष्ट्र के हमारे दोस्त सांसद सुजय विखे पाटील जी ने भी यहां पर भाषण दिया । मैं बहुत गौर से उनका भाषण सुन रहा था । वे बहुत अच्छी बातें बोल रहे थे । वे बार-बार यू.पी.ए. को कोस रहे थे, लेकिन मैं यह सोच रहा था कि सुजय जी जन्म से, बी.जे.पी. के सांसद बनने तक, यू.पी.ए. में ही थे, कांग्रेस में ही थे । उनके दादाजी कांग्रेसी थे, पिताजी कांग्रेसी थी । आप अभी सांसद बने हैं, यह अच्छी बात है । इन्होंने अभी यहाँ पर जितनी भी बातें कही, उन्होंने यू.पी.ए. को कोसा है । वह यू.पी.ए. के ऊपर हमला कर रहे थे, लेकिन मैं बताना चाहूँगा कि उस टाइम यू.पी.ए. की सरकार में उनके पिताजी मिनिस्टर थे।
माननीय सभापति:कृपया कंक्लूड कीजिए।
श्री प्रतापराव जाधव : महोदय, मैं एक मिनट में अपनी बात कंक्लूड कर दूंगा । अभी मैं ज्यादा टाइम नहीं लूँगा । मैं एक-दो मिनट में अपनी बात खत्म करूँगा।
सभापति महोदय, वह काफी बोल रहे थे । लेकिन, ऐसी एक कहावत है कि ‘नया मुल्ला थोड़ा ज्यादा ही अल्ला-अल्ला करता है’, क्योंकि उसको ऐसा करने की जरुरत होती है । आज इनको भी अपना विश्वास बताने के लिए कहना पड़ रहा है कि अभी हम बी.जे.पी. में ही रहेंगे । इन लोगों को कांग्रेस तथा महा विकास आघाड़ी के खिलाफ बोलना पड़ता है।
महोदय, हमने यहाँ पर राष्ट्रपति जी का अभिभाषण सुना । हम यहाँ पर सुनते थे कि सबका साथ, सबका विकास और सबके साथ न्याय होगा । मैं यहाँ पर उत्तर में यह भी सुनना चाहूँगा कि क्या हमारी केन्द्र की सरकार इस देश के सभी राज्यों में, जहाँ पर गैर बी.जे.पी. सरकारें हैं, उनके साथ भी सही ढंग से न्याय करती है? क्या उनका हक तथा अधिकार सही ढंग से उनको दिया जाता है? इस बारे में भी ये लोग जवाब दें।
हमारा महाराष्ट्र केन्द्र सरकार को सबसे ज्यादा रेवेन्यू देने वाला राज्य है । एक रुपये में से 38 पैसे रेवेन्यू महाराष्ट्र राज्य से आता है । आज हमारे तीस हजार करोड़ रुपये केन्द्र सरकार द्वारा देने बाकी हैं।
माननीय सभापति: कृपया समाप्त कीजिए ।
श्री प्रतापराव जाधव : महोदय, अगर केन्द्र सरकार यह पैसा हमें देती तो महा विकास आघाड़ी की सरकार और अच्छा काम करती । आपने भी सुना होगा कि इन दो सालों में जितने भी सर्वे हुए, इस भारत देश में सबसे अच्छा काम करने वाले पहले पाँच मुख्यमंत्री के नामों में हमारे महाराष्ट्र के नेता माननीय उद्धव जी ठाकरे का नाम कभी पहले और कभी दूसरे स्थान पर रहा है ।
माननीय सभापति: ऑनरेबल पार्लियामेंट्री अफेयर्स मिनिस्टर ।
विदेश मंत्रालय में राज्य मंत्री तथा संसदीय कार्य मंत्रालय में राज्य मंत्री(श्री वी. मुरलीधरन): सभापति महोदय, मैं यह बताना चाहता हूँ कि आदरणीय सभी सदस्यों के लिए भोजन की व्यवस्था की गई है । माननीय सदस्यों के लिए कमरा नंबर 70 और स्टाफ के लिए कमरा नंबर73 एवं 74 में भोजन का प्रबंध किया गया है।
*श्रीमती शारदा अनिल पटेल(महेसाणा): मैं माननीय राष्ट्रपति महोदय द्वारा बजट सत्र 2022-23 के शुभारंभ के अवसर पर दिये अभिभाषण का समर्थन करती हूँ । माननीय राष्ट्रपति जी का अभिभाषण ये दिखाता है कि दो सालों से करोना जैसी चुनौती से मुकाबला करते हुए सरकार, विकास की गतिशीलता को थमने नहीं दिया । ऐसी बातें कही और सुनी जा रही थी की अगर ये महामारी भारत में रौद्र रूप पकड़ेगी तो भारत के लिए अति विनाशकारी साबित होगी । लेकिन जब हम आज मूल्यांकन करते हैं तो पाते हैं कि विश्व नेता मोदी जी के नेतृत्व में सरकार ने इस बीमारी से डटकर मुकाबला किया जिससे इसकी मारक क्षमता कुंद हुई और इतनी बड़ी आबादी वाला देश आज वैक्सीनेशन में रिकार्ड कायम कर विश्व के अन्य देशों को प्रेरित कर रहा है बल्कि उन्हें नया भारत की ताक़त का एहसास भी करा रहा है । कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई में भारत के सामर्थ्य का प्रमाण वैक्सीनेशन प्रोग्राम में नजर आया है । हमने एक साल से भी कम समय में 150 करोड़ से भी ज्यादा वैक्सीन डोज लगाने का रिकार्ड पार किया । आज हम पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा वैक्सीन डोज देने वाले अग्रणी देशों में से एक हैं । राष्ट्रपति ने कहा कि कोरोना के इस महासंकट में हमने बड़े-बड़े देशों में खाद्यान्न की कमी और भूख की परेशानी देखी है, लेकिन मेरी संवेदनशील सरकार ने इस बात का पूरा प्रयास किया कि100 साल के इस सबसे बड़े संकट में कोई गरीब भूखा न रहे ।
महामहिम राष्ट्रपति के भाषण में दिखता है कि सरकार देश की सुरक्षा के लिए दृढ़ संकल्पित होकर काम कर रही है । हिंदुस्तान एयरोनाटिक्स लिमिटेड के साथ 83 एलसीए तेजस फाइटर एयरक्राफ्ट के निर्माण हेतु अनुबंध किए गए हैं । सरकार ने आर्डिनेन्स फैक्ट्रियों को 7 डिफेंस PSU का रूप देने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं । सरकार की नीतियों की वजह से डिफेंस सेक्टर में, विशेषकर रक्षा उत्पादन में, देश की आत्मनिर्भरता लगातार बढ़ रही है।
माननीय राष्ट्रपति महोदय, के भाषण से पता चलता है कि सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था और देश के किसानों और गरीबों को सशक्त बनाने के लिए लगातार काम कर रही है । प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के माध्यम से 11 करोड़ से अधिक किसान परिवारों को एक लाख अस्सी हजार करोड़ रुपये दिए गए हैं । इस निवेश से कृषि क्षेत्र में आज बड़े बदलाव दिखाई दे रहे हैं । सरकार के प्रयासों से देश का कृषि निर्यात भी रिकार्ड स्तर पर बढ़ा है । वर्ष2020-21 में कृषि निर्यात में 25 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई । यह निर्यात लगभग 3 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया है । अब तक दो करोड़ से अधिक पक्के घर गरीबों को मिल चुके हैं । 'प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण' के तहत गत तीन वर्षों में करीब डेढ़ लाख करोड़ रुपये की लागत से एक करोड़ सत्रह लाख घर स्वीकृत किए गए हैं । डिजिटल इंडिया और डिजिटल इकॉनमी के बढ़ते प्रसार के संदर्भ में देश के UPI platform की सफलता के लिए भी मैं सरकार के विज़न की प्रशंसा करूंगी । दिसम्बर, 2021 में देश में 8 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का लेन-देन UPI के माध्यम से हुआ है।
राष्ट्रपति महोदय ने बताया कि सरकार द्वारा64 हजार करोड़ रुपये की लागत से शुरू किया गया प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत हेल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर मिशन एक सराहनीय उदाहरण है । इससे न केवल वर्तमान की स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी, बल्कि आने वाले संकटों के लिए भी देश को तैयार किया जा सकेगा । सरकार की संवेदनशील नीतियों के कारण देश में अब स्वास्थ्य सेवाएं जन साधारण तक आसानी से पहुंच रही हैं । 80 हजार से अधिक हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर्स और करोड़ों की संख्या में जारी आयुष्मान भारत कार्ड से गरीबों को इलाज में मदद मिली है।
सरकार के निरंतर प्रयासों से भारत एक बार फिर विश्व की सर्वाधिक तेजी से विकसित हो रही अर्थव्यवस्थाओं में से एक बन गया है । इस वित्त वर्ष के पहले 7 महीनों में48 बिलियन डॉलर का विदेशी निवेश आना, इसका प्रमाण है कि अंतरराष्ट्रीय निवेशक भारत के विकास को लेकर आश्वस्त हैं । भारत उन देशों में से एक है जिसके पास सबसे सस्ते इंटरनेट और मोबाइल फोन हैं । हम 5G विकसित करने पर भी काम कर रहे हैं । सेमीकंडक्टर पर हमारी पीएलआई योजना हमारे स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र को और बढ़ावा देगी । आज भारत विश्व में दूसरा सबसेबड़ा मोबाइल फोन निर्माता बनकर उभरा है।
सरकार के नीतिगत निर्णय और प्रोत्साहन से विभिन्न पुलिस बलों में महिला पुलिसकर्मियों की संख्या में वर्ष 2014 के मुकाबले दोगुनी से ज्यादा बढ़ोत्तरी हो चुकी है । महिला सशक्तीकरण मेरी सरकार की उच्च प्राथमिकताओं में से एक है । बेटे-बेटी को समानता का दर्जा देते हुए मेरी सरकार ने महिलाओं के विवाह के लिए न्यूनतम आयु को18 वर्ष से बढ़ाकर पुरुषों के समान 21 वर्ष करने का विधेयक भी संसद में प्रस्तुत किया है । सरकार ने तीन तलाक को कानूनन अपराध घोषित कर समाज को इस कुप्रथा से मुक्त करने की शुरुआत की है । मुस्लिम महिलाओं पर केवल मेहरम के साथ ही हज़ यात्रा करने जैसे प्रतिबंधों को भी हटाया गया है ।
माननीय राष्ट्रपति के भाषण से परिलक्षित होता है कि वर्तमान सरकार का मुख्य लक्ष्य है कि अंत्योदय, किसान, गाव, गरीब, वंचित,दलित, आदिवासी का जीवन स्तर उपर उठे इसके साथ ही विकास सर्वसमावेशी हो, जिसमें आधुनिकता और प्रद्योगिकी का भी मेल हो । तमाम कारणों से उत्पन्न होने वाले प्रदूषण कम हो और पर्यावरण बेहतर बने । अन्न की गुणवत्ता बढ़े, सामाजिक न्याय के लिए तमाम योजनाएँ सही व्यक्ति तक पहुंचे इसके लिए सरकार लगातार सफल प्रयास करते हुए भारत और भारतीयों को लगातार सशक्त कर रही है । भारत आत्मनिर्भर बनने की ओर मजबूती से अग्रसर है और विश्व नेता मोदी जी के नेतृत्व में सरकार अपने सारे लक्ष्य निश्चित समय में पूरा करेगी । इस विश्वास के साथ, मैं पुनः माननीय राष्ट्रपति का आभार व्यक्त करती हूँ और समर्थन करती हूँ । जय हिन्द।
*श्रीमती गीताबेन वी. राठवा (छोटा उदयपुर) :महामहिम राष्ट्रपति जी ने भी अपने अभिभाषण में वर्ष 2022-23में भारत के पूर्ण रूप से आत्मनिर्भर बनने पर जोर दिया है । भारत ने आपदा में अवसर को तलाशते हुए आत्मनिर्भरता की ओर पूर्ण रूप से अग्रसर हो चला है । आज भारतीयों की एकजुटता, साधना, देश को अनेक आपदा से बाहर निकालकर लाई है । देशवासियों ने हर आपदा का डटकर सामना किया । महामहिम ने कहा की आज देश में स्वास्थ्य के क्षेत्र में कोविड-19 में भारत ने एक साल से भी कम समय में 150 करोड़ से ज्यादा वैक्सीन्स लगाई हैं । उसमें 90 प्रतिशत से अधिक वयस्कों को वैक्सीन की कम से कम एक डोज़ लग गई है और 70 प्रतिशत से ज्यादा लोग पूरी तरह से वैक्सीनेटेड हैं । इसके अतिरिक्त15से 18 वर्ष के किशोरों को वैक्सीनेशन अभियान में शामिल किया गया है । फ्रंटलाइन वर्कर्स और वरिष्ठ नागरिकों (को मॉरबिडिटी वाले) को ऐहतियाती डोज़ लगानी शुरू कर दी गई हैं ।
64हजार करोड़ रुपए के परिव्यय से `प्रधान मत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन` को शुरू किया गया था । इस योजना के अंतर्गत 80,000 से ज्यादा हेल्थ और वेलनेस केयर सेंटर्स बनाए गए हैं । `आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन` को आसान और पहुंच योग्य स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के लिए शुरू किया गया । महामहिम ने अपने अभिभाषण में कृषि के संदर्भ में बहुत कुछ कहा है । उन्होंने कहा कि महामारी के दौरान 19 महीनों के लिए 80 करोड़ लोगों को `प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना` के अंतर्गत मुफ्त राशन दिया गया ।इस योजना का परिव्यय 2.6 लाख करोड़ रुपए था । मौजूदा स्थिति के मद्देनजर योजना को मार्च, 2022 तक बढ़ा दिया गया है । वर्ष 2020-21 में किसानों ने 30 करोड़ टन से अधिक खाद्यान्न और 33 करोड़ टन से अधिक बागवानी उत्पादों का उत्पादन किया । सरकार ने रबी सीजन के दौरान 433 लाख मीट्रिक टन (एलएमटी) गेहूं की खरीद की है, जिससे लगभग 50 लाख किसान लाभान्वित हुए हैं ।खरीफ सीजन के दौरान 900 एलएमटी धान की खरीद की गई, जिससे लगभग 1.3 करोड़ किसान लाभान्वित हुए ।
प्रधान मंत्री किसान सम्मान निधि योजना (पीएम-किसान) के अंतर्गत11करोड़ से सरकार ने करीब 4,500 करोड़ रुपये के निवेश के साथ-साथ मेगा इंटिग्रेटेड टैक्सटाइल क्षेत्र और एपेरल पार्क्स को मंजूरी दी है । वर्ष 2016 से देश के 56 क्षेत्रों में 60 हजार स्टार्ट अप स्थापित किए गए हैं । वर्ष 2021में भारत में40से अधिक यूनिकार्न स्टार्ट अप्स उभरे हैं और उनमें से प्रत्येक का न्यूनतम मार्केट वैल्यूएशन7,400करोड़ रुपये है।
इसके अतिरिक्त श्रम और रोजगार की बात करें तो सरकार ने करीब4,500करोड़ रुपए के निवेश के साथ सात मेगा इंटिग्रेटेड टैक्सटाइल क्षेत्रों और एपेरल पार्क्स को मंजूरी दी है । मजदूरों के हितों की रक्षा के लिए ई-श्रम पोर्टल शुरू किया गया था । अब तक 23 करोड़ से ज्यादा कर्मचारी इस पोर्टल से जुड़ चुके हैं । ‘दक्षता विकास प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना’के अंतर्गत28 लाख फुटपाथी दुकानदारों को2,900करोड़ रुपए से अधिक की राशि प्रदान की गई है । ‘दक्ष भारत मिशन’ के अंतर्गत आईआईटी, जन शिक्षण संस्थानों और प्रधानमंत्री कौशल केंद्रों के माध्यम से 2.25करोड़ युवाओं को दक्ष बनाया गया है ।
हमारी सरकार ने इंफ्रास्ट्रक्चर विकास को गति देने के लिए प्रधानमंत्री गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान को शुरू किया गया है । भारत में 1.4 लाख किलोमीटर से अधिक राष्ट्रीय राजमार्ग हैं ।`भारतमाला परियोजना ` के अंतर्गत 23 ग्रीन एक्सप्रेस वे और ग्रीन फील्ड कॉरिडोर सहित लगभग छह लाख करोड़ रुपए के परिव्यय के साथ 20,000 किलोमीटर से अधिक राजमार्गों का निर्माण प्रगति पर है । दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस वे पूरा होने वाला है । वर्ष 2014-21के दौरान 24,000किलोमीटर रेलवे मार्ग को बिजलीकृत किया गया । अब 11 नए मेट्रो मार्ग शुरू किए गए और 21 ग्रीनफील्ड हवाई अड्डों के निर्माण को मंजूरी दी गई है । इसके अतिरिक्त हमारी सरकार ने महिलाओं के विवाह की न्यूनतम उम्र को 18 वर्ष से बढ़ाकर21वर्ष करने के लिए बाल विवाह निषेध ( संशोधन ) बिल, 2021 को पेश किया ।
वर्ष 2021-22में बैंकों ने 28 लाख से अधिक महिला स्वयं सहायता समूहों को 65,000 करोड़ रुपए की वित्तीय मदद की । सरकार ने महिला स्वयं सहायता के सदस्यों को प्रशिक्षण प्रदान किया और ग्रामीण परिवारों को बैंकिंग सेवाएं प्रदान करने के लिए उन्हें‘बैंकिंग सखी’के रूप में भागीदार बनाया ।
अतः मैं राष्ट्रपति जी का धन्यवाद करते हुए कहना चाहती हूं कि उन्होंने देश में चल रही योजनाओं तथा विकास कार्यों की व्याख्या करके देश को साफ सन्देश दिया है । भारत अब विश्व पटल पर अपनी छाप छोड़ने को पूर्ण रूप से तैयार है और भारत को आत्मनिर्भर भारत बनने से अब कोई नहीं रोक सकता । धन्यवाद ।
*श्री गजानन कीर्तिकर (मुम्बई उत्तर पश्चिम): महामहिम राष्ट्रपति जी के अभिभाषण के धन्यवाद प्रस्ताव पर अपने विचार रखने का अवसरदेने के लिए अत्यंत आभार ।
वर्तमान सरकार द्वारा चलाई जा रही कई कल्याणकारी योजनाओं का जिक महामहिम राष्ट्रपति जी ने अपने अभिभाषण में किया है । जैसे कि, 'प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत हेल्थ इन्फ्रास्टक्चर मिशन', 'आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन', 'प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना', 'प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना', 'स्वामित्व योजना', 'किसान रेल सेवा', 'प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि', 'स्किल इंडिया मिशन', 'स्वदेश दर्शन एवं प्रसाद योजना' आदि योजनाओं द्वारा भारत के हेल्थ वर्कर, श्रमिक, शिक्षित युवा, कर्मचारी, किसान, छोटे व्यापारी आदि को लाभ हो रहा है, मैंमहामहिम राष्ट्रपति जी का धन्यवाद व्यक्त करता हूं कि वर्तमान सरकार द्वारा कई कल्याकारी योजनाए बनाकर सुचारु रुप से चलाई जा रही है । परंतु महामहिम राष्टपति जी के अभिभाषण में कुछ मुद्दे रह गए है, जो संशोधन के लिए भी मैने सब्मिट किए है, जिसे लागू किया जाए. जैसे.
केन्द्र सरकार के देशभर के कार्यरत कार्यालय की मालकी की भूमि पर बसी झुग्गी-झोपडियों के पुनर्वास के लिए सन् 1956 में कलम 96 अनुसार कानून मे प्रावधान किया था । सन्2016 में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 'प्रत्येक नागरिकों के लिए मकान' योजना जाहिर की थी । उसमे मुद्दा क्रमांक 10.1 में स्पष्ट किया है कि, केन्द्र सरकार के कार्यालय की भूमि पर बसी झुग्गी बस्तियों का पुनर्वास करने के निर्देश का पालन संबंधित मंत्रालय/विभागों द्वारा नही किया गया, अतः केन्द्र सरकार झुग्गी-झोपडियों के पुनर्वास के लिए अपने ध्येयधारणानुसार आने वाले समय में इसपर अमल करना चाहिए । यह महत्वपूर्ण मुद्दा रह गया है।
रक्षा मंत्रालय द्वारा सिग्नल सिस्टम, पुरानी तकनीक के तहत चल रही है । इस सिग्नल सिस्टम के कारण और पाबंदियों के कारण परिक्षेत्र में बसे हुए मकानों की मरम्मत नही हो सकती । तकनीकी में परिवर्तन होकर सिग्नल सिस्टम आकाश द्वारा व्हर्टिकल तरीके चल रहा है । कई सिग्नल स्टेशन स्थानांतर होने के बावजूद भी परिसर की इमारतों व झुग्गी-बस्तियों के पुनर्वास के लिए लगाई पाबंदियां हटायी नही गयी । इस बाबत का विषय भी रह गया है ।
संकट या आपात स्थिति में किसानों को कृषि मंत्रालय सहायता पहुंचाता है, परंतु मच्छुआरे बांधवों के लिए यह आपात सहायता किसानो की तुलना मे अत्यधिक कम मात्रा मे की जाती है । आपात स्थिति में सहायता हेतुकिसानों के लिए जो नियम रखे है वही नियम व प्रावधानों मे बदलाव कर मछुआरों को भी आपात सहायता किसानों के समान मिलने का विषय का उल्लेख अभिभाषणमें नहीं था।
पन्द्रहवर्ष पुराने वाहनों को बंद कर उन्हें भंगार/ कबाड में देने का केन्द्र सरकार का जो निर्णय व नया कानून है, इससे15 वर्ष पुराने वाहन धारकों को नये वाहन खरीदना आवश्यक है । यह कायदा लागू होने के बाद से कम से कम पांच वर्ष नये वाहनों के लिए टैक्स में सेंटल एक्साईज डयूटी माफ की जाए, जिससे वाहन की कीमत कम होकर खरीद करने वालों को कुछ आर्थिक राहत मिलेगी।
पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफगानिस्तान आदि देशों में स्थित हिंदुस्तानी विविध धर्मों के स्थल/वस्तुओं को उन देशों में तोड दिया गया, जिससे भारतीयों की भावनाएं आहत हुई । ऐसी घटनाएं रोकने और उन खंडित कर चुकी वस्तुओं के पुर्नबांधणी के लिए संबंधित देशों में स्थित भारतीय एम्बेसी के द्वारा कार्रवाई करने का उल्लेख भी अभिभाषण में नही था।
भारतीय किसान और छोटे व्यापारी अपना उत्पाद अन्य देशों में निर्यात करते है, परंतु अन्य देशों के आयातदार भारतीय उत्पाद खराब होने का झूठा बहाना देकर उत्पाद का मोबदला भारतीय किसानों व व्यापारियों को नहीं देते । ऐसे धोखेबाज आयातदारों पर कार्रवाई हेतु उन देशों में स्थित भारतीय एम्बेसी द्वारासंबंधित देश के एम्बेसी को सूचित कर धोखाधड़ी करने वालों पर कठोर कार्रवाई करने का मुद्दाछूट गया है ।
हिंदुस्तान में मच्छुआरों व मच्छी व्यवसाय के लिए बनाए गए कई बंदरगाह 100 से200 वर्ष पुराने है । इनमें से कई बंदरगाह की हालत अत्यंत खराब है, कभी भी दुर्घटनाएं हो सकती है । इसलिए इन पुरानी बंदरगाहों का आधुनिकीकरण व पुर्नबांधणीकरण करने बाबत का मछुआरों के जीवनावश्यक विषय भी अभिभाषण मे नही था।
देश की अनेक प्राचीन वस्तुएं, किल्लों व गुफाओं की देखभाल की ओर भारतीय पुरातत्व विभाग का दुर्लक्ष हो रहा है । इसके परिणामस्वरुप अनेक प्राचीन वस्तुएं खंडित व खराब हो चुकी है । शहरीकरण के कारण इन वस्तुओं के आसपास के मकानों को भी दुरुस्ती के लिए अनुमति नही मिल रही है, यह अन्यायपूर्ण है । इसलिए इन पुरानी वस्तुओं की पुरातत्व विभागों द्वारा उचित देखभाल व दुरुस्ती का विषय भी अभिभाषणमें चाहिए था।
दुनियाभर के सभी क्रूड आयल भंडार समाप्ति की ओर है, इसलिए सभी देशों को पेट्रोल, डीजल की कमी हो रही है । इसका पर्याय सोलरऊर्जा का हो सकता है । केन्द्र व राज्य सरकार की इमारतें रेलवेस्थानक आदि स्थानों पर सोलर पैनल लगाना बंधनकारक किया जाने का नियम बनाना चाहिए।
अमेरिका, इंग्लैंड आदि प्रगतिशील देशों में अधिक संख्या में आईटी पार्क बनाये जा रहे है । इन आईटी पार्क में नौकरी करने वाले करिब 65 प्रतिशत भारतीय है । यदि हिंदुस्तान के हर बड़े शहरों मे आईटी पार्क बनाए जाते हैं तो, भारतीय शिक्षित आईटी युवक को अपने भारत देश मे अपने देशवासियों की सेवा करने का अवसर प्राप्त हो सकता है, लेकिन आईटी सेक्टर से संबंधित यह विषय भी महामहिम जी के अभिभाषण में नहींथा।
केन्द्र सरकार अनेक सरकारी कंपनियों का निजीकरण कर रही है, जिससे उन सरकारी कंपनियों में कार्य करनेवाले कर्मचारियों के मन मे डर का वातावरण निर्माण हुआ है । इन सरकारी कंपनियों का निजीकरण करते वक्त केन्द्र सरकार को इस बात की दखल लेनी आवश्यक है कि, निजीकरण के बाद भी कर्मचारियों का मंहगाई भत्ता, अन्य भत्ते. वेतन, केन्द्र सरकारी नियमों के अनुसार जातीनिहाय नौकर भरती में आरक्षण, पदोन्नति व बदली के नियमों में छेडछाड न हो, कर्मचारियों पर अन्याय नही न हो, यह मुद्दा रह गया है ।
केन्द्र सरकार ने देश के युवाओं को कुशल कारीगर बनाने के लिए कौशल प्रशिक्षण योजना जारी की है, किंतु यह तेजी से चलाकर कुशल कामगारों की संख्या बढाने की आवश्यकता है, इसलिए केन्द्र सरकार राज्यनिहाय समिति का गठन कर देशभर में चल रही कौशल प्रशिक्षण केन्द्रोंको आगे बढाने का विषय का उल्लेख महामहिम जी के अभिभाषण मे नही था ।
किसी भी रोगियों को अधिकतर सिटी स्कैन व M.R.I. करने हेतु डॉक्टर बताते है । परंतु कई जगहों पर यह आधुनिक मशीनें उपलब्ध नही है । मरीजों के सुविधा हेतुप्रत्येक जिलों व तालुका अस्पतालों में सिटी स्कैन, एम.आर.आई. व डायलेसिस मशीनें लगाना आवश्यक है, किंतु यह जरुरी मुद्दाछूट गया है । इसके बावजदू सरकारद्वारा कोरोना काल में उठायेगए सराहनीय कदम और सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयासके सरकार के मूल मंत्र के तहत योजनाओं का जिक्र महामहिम द्वारा किया है । मैं महामहिम जी के अभिभाषण पर पुनश्च धन्यवाद व्यक्त करता हूं।
*श्रीमती रंजनबेन भट्ट (वडोदरा):कोरोना महामारी से पिछले तीन वर्षों के दौरान भी हमारे देश की आर्थिक स्थिति अच्छी रही है । कोरोना महामारी जो अपने अनेक रूपों में तीव्र गति से देश को प्रभावित कर रही थी, उसकी गति को रोकने का काम हमारी सरकार ने किया है । इसलिए हम महामहिम राष्ट्रपति जी के अभिभाषण का समर्थन करने के साथ-साथ, जिनके अदम्य प्रयास से हमारे देश में कोरोना की गति में अवरोध उत्पन्न हुआ है,ऐसे जनप्रिय नेता और हमारे माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्रभाई मोदी जी को भी बधाई देती हूं।
हमारा देश आजादी के 75 वर्ष पूरा होने पर अमृत महोत्सव मनाने जा रहा है । यह महोत्सव 23 जनवरी से प्रारंभ होकर30 जनवरी तक चलने वाला है क्योंकि 23 जनवरी को गुरु तेगबहादुर जी का 400वां प्रकाश पर्व, श्री अरविंदो की 150वीं जन्म-जयंती, वी.ओ. चिदम्बरम पिल्लई का 150वां जन्मवर्ष, और नेताजी सुभाषचंद्र बोस की 125वीं जन्म जयंती आदि समारोह मनाए जाएंगे । अमृत महोत्सव अगले25 वर्षों के संकल्पों को आकार देने का अवसर है।
हमारी सरकार ने वैक्सीन लगाने का कार्य बड़ी तेजी से पूरा किया है । एक वर्ष के अन्दर ही 90 प्रतिशत वयस्कों को और70 प्रतिशत को दोनों वैक्सीन लगाई जा चुकी है । हमारे देश में हेल्थ मिशन लागू किया गया है, जो इसी वर्ष ही नहीं बल्कि भविष्य में भी काम आएगी।
हमारी सरकार ने देशवासियों को कम मूल्य पर दवाओं की आपूर्ति करने के लिए भी कदम उठाए हैं, जिससे काफी लोगों को इसका लाभ मिला है।
कोरोना काल के बावजूद हमारी सरकार ने निर्यात पर भी ध्यान दिया है । परिणामस्वरूप इस अवधि में निर्यात बढ़ा है । हमारी सरकार ने अंत्योदय योजना प्रारंभ की है, जिसके तहत गांव,गरीब को प्राथमिकता से योजना का लाभ मिल सके । हमारे देश में गरीबों को मुफ्त भोजन की व्यवस्था की गई है, जिससे80 प्रतिशत लोगों को मुफ्त भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है ताकि देश का कोई भी व्यक्ति भूखा न सोए । इस योजना को अभी मार्च, 2022 तक बढ़ा दिया गया है । इसके अतिरिक्त प्रधानमंत्री श्रम योजना, श्रमिकों की सहायता, जन-धन योजना आदि के द्वारा भी लोगों की सहयता की जा रही है।
हमारी सरकार ने जल जीवन मिशन को कार्यान्वित किया है,जिसके तहत देश के 600 गांवों को जोड़ा गया है ताकि उनको पीने के लिए स्वच्छ जल उपलब्ध कराया जा सके।
देश के किसानों को लाभ पहुंचाने के लिए भी अनेक कदम उठाए गए हैं । किसानों को उनकी जमीनों का प्रॉपर्टी कार्ड दिया जा रहा है, जिसके परिणाम स्वरूप उनकी जमीनों के जो झगड़े थे, उन सभी से उनको छुटकारा मिल गया है।
किसानों का उत्पाद बढ़ाने के लिए भी कदम उठाए गए हैं, जिससे उनके खेतों से अधिक उत्पाद पैदा किया जा सके और उनकी आमदनी बढ़ाई जा सके । इस लाभ में छोटे व मंझले किसानों को विशेष रूप से जोड़ा गया है । इसके अतिरिक्त किसान सम्मान निधि योजना लागू की गई है, जो सीधे किसानों के खाते में भेजी जा रही है ।
किसानों के उत्पाद का निर्यात बढ़ाने के लिए भी हमारी सरकार ने कदम उठाए हैं जिसके तहत कृषि उत्पाद का निर्यात 25 प्रतिशत बढ़ा है । इनके उत्पाद को देश के अन्दर बाजार उपलब्ध कराने के लिए किसान रेल चलाई जा रही है, जिसका लाभ किसान प्राप्त कर सकते हैं।
किसानों के खेतों की सिंचाई के लिए भी अनेक कदम उठाए जा रहे हैं, जैसे- नदियों को जोड़ना ताकि सभी क्षेत्रों के सिंचाई के लिए पानी सुलभ हो जाए । अभी तक 20नदियों को जोड़ा चुका है।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महिलाओं को भी प्रभावित किया जा रहा है । इसके अतिरिक्त महिलाओं के लिए उज्ज्वला योजना शुरू की गई है, जिसके तहत महिलाओं को मुफ्त गैस सिलेंडर उपलब्ध कराया गया है । लड़कियों के विवाह की उम्र21 साल करने के लिए विधेयक लाया गया है, लड़कियों को पढ़ने के लिए33 नेवी स्कूलों में प्रवेश दिया जा रहा है।
देश में भारतीय भाषाओं में इंजीनियरिंग की पढ़ाई प्रारंभ की गई है,जिसके तहत छ: भाषाओं में पढ़ाई प्रारंभ हो चुकी है।
आदिवासियों को भी हमारी सरकार सहायता प्रदान कर रही है ताकि उन्हें भी समाज की मुख्यधारा से जोड़ा जा सके । हमारी सरकार में खेलों का भी काफी विकास हुआ है । हमारी सरकार में दिव्यांगों की सहायता को वरीयता दी जा रही है, उनको 25 लाख के उपकरण दिए जा चुके हैं।
हमारी सरकार ने स्टार्टअप योजना प्रारंभ की है, जिससे युवकों को काफी रोजगार मिल रहा है । युवक टेक्नोलॉजी का लाभ भी उठा रहे हैं । कोरोना काल होने के बावजूद अर्थव्यवस्था में तेजी आई है । जीएसटी कलेक्शन अधिक हुआ है, विदेशी मुद्रा भंडार में इजाफा हुआ है।
हमारी सरकार ने वस्त्र उद्योग का विकास तेजी से किया है । सूक्ष्म और लघु उद्योग महत्वपूर्ण योगदान प्रदान कर रहे हैं । खादी उद्योग काफी बढ़ा है और खादी के उत्पादों की बिक्री में तीन गुना इजाफा हुआ है । इंफ्रास्ट्रक्चर से चहुमुखी विकास होता है और इससे रोजगार में भी वृद्धि होती है । इसलिए हमारी सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर पर काफी ध्यान दे रही है।
प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत गांवों को सड़कों से जोड़ा गया है ताकि गांवों का विकास तेजी से हो सके । अब तो हमारी सरकार देश की सीमा तक सड़क बनाने का काम कर रही है । पहले जिन दुर्गम स्थानों पर पहुंचना कठिन होता था आज वहां आसानी से पहुंचा जा सकता है।
हमारी सरकार लगातार रेलवे का विस्तार कर रही है, नई रेल लाइन, रेल लाइनों का चौड़ीकरण, ब्रिज आदि तेजी से बनाए जा रहे हैं । इसके अतिरिक्त शहरों में मेट्रो का काम तेजी से चल रहा है । हमारी सरकार सागरमाला परियोजना के माध्यम से देश के विभिन्न जल मार्गों को जोड़ने का काम कर रही है।
उक्त अनेक उपलब्धियों के कारण मैं एक बार पुन: महामहिम राष्ट्रपति जी के अभिभाषण का समर्थन करते हुए अपनी बात समाप्त करती हूँ।
*SHRI D.K. SURESH (BANGALORE RURAL): I oppose the Motion of Thanks on the President's Address. Unfortunately, the Presidential Address was a long list of things that the Government claims to have done but did not really contain the deeper strategic issues.
This Government claimed that it has honoured all such great men who sacrificed their lives for the independence of this country and laid down their lives for the unity and integrity of this country. But I say that this Government dishonoured all those great men by weakening the Constitutional institutions which were established by those great men. Every one of them have played a role in the establishment of institutions in the country in the past 70 years and it is the responsibility of all to maintain democracy. However, Modi government failed in honouring them in real sense.
The root cause of price rise, unemployment and agricultural crisis is the failure and mismanagement of the financial administration by Modi government.
The President's Address did not touch the real challenges of our country. The Union Government has completely failed in protecting the interest of poor labourer dependent on the unorganized sector and small and medium enterprises. The support required for the poor people during the Corona crisis was not given.
From employing 51 million people in 2016-17, employment in manufacturing, which accounts for 17 per cent of the country's Gross Domestic Product (GDP), declined by 46 per cent to reach 27.3 million in 2020-21, reflecting the severity of the employment crisis caused by the pandemic.
It is almost halving in the space of just four years. There is a 46 per cent drop in manufacturing jobs in India. It is because the Government has destroyed the unorganized sector. As a result, 84 per cent people of India saw their income declined. It is important to understand that traditionally Indian policymakers have been of the view that the manufacturing sector is our best hope to increase in the job opportunities. Manufacturing is well suited because it can make use of the millions of poorly educated Indian youth.
The real estate and construction sector, which employed 69 million people in 2016-17, employed just 53.7 million in 2020-21.
The ongoing Covid pandemic has driven a wedge between lives and livelihoods. The measures taken by the Government are completely failed in saving lives of the common people and proving to be terrible for livelihoods. We have seen several studies and surveys that pointed to the unfolding crisis in livelihoods.
The Covid pandemic had forced people out of their formal jobs into casual work, and led to a severe decline in incomes. Not surprisingly, there is a sudden increase in poverty over the past two years. The government has failed miserably in handling the situation and undertaking steps to compensate people for the loss of earnings.
Women and younger workers have been disproportionately affected. Households have coped by reducing food intake, borrowing, and selling assets. Government relief has helped avoid the most severe forms of distress, but the reach of support measures is incomplete, leaving out some of the most vulnerable workers and households.
Demonetisation is a big failure of the Modi government and leading to all evils of economic slowdown in the country. The widespread havoc that it inflicted on the economy. The Union Government failed on every objective of the demonetization, mainly on combatting terror funding, fake notes and black moneywhile having wiped out jobs.
Demonetisation benefited Modi's few 'crony capitalist friends", but common people are left in the lurch.
It is not stopped here the failure of the Union government is from the mismanagement of Covid in the second wave to the farm crisis and many more things.
While MSP is announced for 23 crops every year, public procurement is limited to a few crops such as paddy, wheat and, to a limited extent, pulses.
I am of the opinion that the Government should take necessary steps to procure more crops to help the farmers. The BJP on the demand of minimum support price plus 50 per cent, gave a version that satisfied no one. There are reports on shortcoming in the implementation of MSP. Mainly, procurement is largely from a few states. And lack of awareness among farmers before the sowing season. Increasing cost of transportation for farmers, and also there is an inadequate storage capacity.
Therefore, I would like to suggest that the Government should address these issues to ensure benefits for the farmers.
I would like to suggest that the agricultural pricing policy needs to be reviewed to ensure that farmers are receiving remunerative prices for their produce. Farmers are often fored to engage in distress sales that is selling below MSPs.
The Pradhan Mantri Bhartiya Janaushadhi Pariyojana, commonly used generic drugs are sold at affordable prices. However, the coverage of the scheme remains inadequate and concentrated in a few States. The government needs to focus on block level coverage instead of District level coverage.
India is one of the unique countries in the world that have the legacy of diversity of languages. Among these three languages Sanskrit, Tamil, and Kannada have been recognized as classical languages with special status and recognition by Government of India.
The Government is not funding adequately for the promotion of Kannada as a classical language. Classical language Kannada Rs.1 crore in 2017-18, Rs.0.99 crore in 2018-19 and Rs.1.07 crore in 2019-20.
Rs.643.84 crore on the promotion of Sanskrit in the last three years, which is 22 times the total amount of Rs.29 crore spent on the other five Indian languages - Tamil, Telugu, Kannada, Malayalam and Odia.
During the same period the funds given to Tamil was Rs.10.59, Rs. 4.65, and Rs. 9.80, Rs.11.73 crores allocated during 2020-21. Till date Tamil language received nearly Rs. 50 crores. However, it is only Rs.8 crore to Kannada language.Hence, I urge the Union Government to do justice to Kannada language and people of Karnataka by releasing adequate funds.
Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana has also benefitted small farmers of this country. The issues being faced in the implementation of the scheme is that due to lack of awareness, several farmers do not submit declaration forms to opt out of the scheme and face mandatory deduction of premium from their bank accounts and also there is inordinate delays in settlement of insurance claims.
The Prime Minister's Street Vendor's AatmaNirbhar Nidhi (PM SVANidhi) scheme is facing certain implementation issues such as registration of street vendors (non-issuance of certificate of vending) and slow pace of sanction and disbursal of loans.
With these words, I conclude my speech.
श्रीमती जसकौर मीना (दौसा): सभापति जी, माननीय राष्ट्रपति जी के द्वारा 31 जनवरी, 2022 को संसद के दोनों सदनों में जो अभिभाषण हुआ, उस पर बोलने के लिए आपने मुझे मौका दिया, उसके लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।
महोदय, मैं दो दिन से जिस तरह से राष्ट्रपति जी के अभिभाषण पर वार्ता सुन रही हूँ,पक्ष और विपक्ष जिस तरह से वार्ता कर रहे हैं, माननीय राष्ट्रपति जी का अभिभाषण एक विहंगम दृष्टिकोण को लेकर है । यदि उस विहंगम दृष्टिकोण को समझा जा सकेगा तो मुझे लगता है कि हम यह समझ पाएंगे कि भारत संसार को प्रेरणा देने वाला देश है । यह मुसीबतों की अंबारों में इस देश की अर्थव्यवस्था, मानवता, जनमानस और प्रकृति को बचाने में बहुत बड़ा योगदान देगा । माननीय राष्ट्रपति जी के अभिभाषण में जितने भी बिंदु हैं, उन सभी पर मैं अपना विचार नहीं रख सकती हूँ, क्योंकि समय कम है । मैं इतना जरूर कहूँगी कि आज जिनका भी भाषण सुन रही हूँ, जिनकी प्रतिक्रिया सुन रही हूँ,मुझे लगता है कि समुद्र के किनारे पड़ी हुई सीपियों को उठाने से संतुष्टि पाने वाले लोगों ने समुद्र के गर्भ में छुपे हुए मोती कोष को कभी देखा ही नहीं है ।
वर्तमान अभिभाषण में समुद्र में छिपे हुए मोती कोष को निकालने के लिए भारत की सरकार और इसका सक्षम नेतृत्व जिस तरह से डुबकियाँ लगाकर इस देश के सम्मान को खोज रहा है, इस देश की प्रगति को खोज रहा है । मुझे लगता है कि अभिभाषण के पृष्ठों या उनके संदर्भों में छाँकने की कोशिश नहीं की गई।
महोदय, अभी कुछ समय पहले एक वार्ता आई थी । उस वार्ता के अंत में माननीय सदस्या यह बोलकर गईं कि ‘जब नाश मनुज पर छाता है,पहले विवेक मर जाता है’ । मुझे यह समझ नहीं आया कि उन्होंने किस संदर्भ में यह बात कही । लेकिन,मैं एक बात जरूर कहूँगी, क्योंकि दो दिन से चल रहे वाद-संवाद को सुन रही हूँ:-
कुछ तो दूर देखता उड़कर, है कितना विस्तृत आकाश, रे कपोत कुछ ही दानों पर, करता क्यों जीवन का नाश।
राष्ट्रपति जी के नेतृत्व में जो अभिभाषण हुआ, उस सम्पूर्ण अभिभाषण में राष्ट्र की प्रगति, राष्ट्र की विचारधारा, राष्ट्र की दिशा और राष्ट्र की नीयत छिपी हुई है । इस नीयत को समझने के लिए कान, नाक और आँख सब दुरुस्त करने पड़ेंगे । केवल आलोचना करने से कुछ नहीं होता है, बल्कि समालोचना करने की आदत होनी चाहिए।
मुझे बहुत दु:ख हुआ, जब हमारे एक वरिष्ठ सांसद ने राष्ट्र के एक ऐसे सपूत के बारे में टिप्पणी की कि मैं उनके होलोग्राम को देखने गया और वह वहां नहीं दिखा । मैं अत्यन्त दु:ख के साथ यह कहना चाहती हूं कि उन्होंने टेक्नोलॉजी के हिसाब से इसे नहीं देखा । जब तेज हवायें चलती हैं, तो उन तेज हवाओं के चलते यह होलोग्राम सुरक्षित नहीं रह पाता है ।
ऐसी स्थिति में वह सुरक्षित नहीं रह सका, इसीलिए उनको यह लगा हुआ नहीं दिखाई दिया । जैसे-जैसे समय अनुकूल होगा, वातावरण अनुकूल होगा, प्रकृति अनुकूल होगी, नि:संदेह वह पुन: स्थापित होगा । इसके लिए ज्यादा चिंता नहीं करनी चाहिए । इतने वरिष्ठ सांसद होते हुए इस तरह की छोटी बातों में न आएं।
मैं माननीय राष्ट्रपति जी के अभिभाषण पर पैरावाइज आना चाहती हूं । हमारे देश के भाई-बहन इस कोरोना महामारी में150करोड़ वैक्सीन की डोजेज़ प्राप्त कर चुके हैं । मैं खुद भी इस सदन में बहुत पुराने समय से हूं । मेरा बीच का कुछ समय छूटा, लेकिन जब आज वार्ताओं को सुनती हूं तो केवल आलोचना है, समालोचना है ही नहीं । समालोचना की आवश्यकता इसलिए होती है कि सरकार किसी भी तरह से, किसी भी पॉइंट पर, किसी भी मुद्दे पर यदि थोड़ा पीछे भी रह जाए, तो उसे दिशा दें ।
माननीय राष्ट्रपति जी का अभिभाषण सरकार का एक आईना होता है । सरकार द्वारा किए हुए करणीय कार्यों को राष्ट्रपति जी अपने सम्भाषण में सम्मिलित करते हैं । उसके बाद ही हम बिन्दुवार इस चर्चा में आते हैं । कोरोना महामारी में हमारे डॉक्टर्स ने, हमारे सुरक्षा कर्मियों ने, हमारी पुलिस ने अपनी सेवायें दीं । हमारे बहुत सारे भाई-बहन इस दुनिया से ही चले गए । जिन्होंने सेवायें दीं, जो सेवायें दे रहे हैं, उनके प्रति संवेदना प्रकट करना राष्ट्रपति जी के अभिभाषण में बहुत अच्छे ढंग से हुआ है । भारतीय जनता पार्टी ने सेवा ही संकल्प समझकर और संगठन को ही सेवा समझकर आगे बढ़ने का प्रयास किया । आज पूरे देश के अंदर भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता जगह-जगह पर सेवा के लिए खड़े हुए हैं ।
मेरे संसदीय क्षेत्र में दौसा रसोई चलाते हुए हमने डेढ़ लाख मजदूरों, अपाहिजों और भूखों के भोजन की व्यवस्था की । यह दौसा रसोई आज भी हमने बंद नहीं की है । इसके माध्यम से जन-जन से कण एकत्रित करके हमने इस व्यवस्था को किया और सबने इसमें योगदान दिया । माननीय राष्ट्रपति जी के अभिभाषण में यदि इसकी तारीफ होती है, तो इसकी आलोचना नहीं होनी चाहिए।
मैं राजस्थान राज्य से आती हूं । आज भी राजस्थान राज्य में महिलाओं पर, बेटियों पर अत्याचार हो रहे हैं । अभी अलवर का कांड भूले ही नहीं थे कि कल एक कांड और हो गया । अलवर के कांड की लीपापोती की गई । मैं सोचती हूं कि बेटी और बहन हर पार्टी की एक जैसी होती है । महिलाओं के प्रति सम्मान और आदर हर पार्टी का, हर पार्टी के इंसान का होता है । कहीं-कहीं ऐसा होता है कि जघन्य अपराध होने के बाद भी उसको छिपा लिया जाता है । राष्ट्रपति के अभिभाषण में और हमारी सरकार की नीयत स्पष्ट है । महिलाओं की उन्नति, बेटियों की सुरक्षा, बेटियों की शिक्षा के प्रति जितना ध्यान है, मैं सोचती हूं कि सबको याद है, लेकिन वे कहना नहीं चाहते, बताना नहीं चाहते, बोलना नहीं चाहते।
कई माननीय सदस्यों ने इतना ज्यादा बोला कि उनके … * वक्तव्य को सुनते हुए कई बार शर्म भी आने लगी । ऐसे… * वक्तव्य कि देश को दो भागों में बांट दिया । गरीब और अमीर, दो इंडिया । हम यह कैसे मान लें कि गरीब और अमीर दो इंडिया हैं?
60वर्षों तक जिन्होंने राज किया, उनके राज के दौरान मैं पली-बढ़ी हूं । मैं अनुसूचित जनजाति की महिला हूं । मैं जानती हूं कि केवल उन्होंने हमारा वोट पाया, एससी और एसटी का वोट प्राप्त करने का काम किया । यदि हमारे लिए काम हुआ है तो वह छह-सात वर्षों में हुआ है ।
माननीय सभापति महोदय, मैं आपका ध्यान इस ओर इसलिए आकर्षित करना चाहती हूं, केवल वोट बैंक की राजनीति ही सबसे अच्छी राजनीति है, नहीं, राष्ट्रहित की राजनीति है । आज हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री जी और राष्ट्रपति जी के अभिभाषण में जो बातें आई हैं, शुद्ध नीयत से आई हैं, सबका साथ, सबका विकास, सबका प्रयास । प्रयास को और जोड़ा है, प्रयास इसीलिए जोड़ा है कि आप सभी लोग हमारे साथ, सरकार की नीतियों के साथ अपने-अपने प्रांतों, क्षेत्रों में मिलजुलकर काम करें तो नि:संदेह इस देश को पुन: सोने की चिड़िया बनने में देर नहीं लगेगी । लेकिन इनको सोने की चिड़िया नहीं चाहिए, इनको लूट की चिड़िया चाहिए । जिस तरह से लूट की चिड़िया के पीछे भागते हैं । कल मैं जब वाणी सुन रही थी, एक-एक योजना जब राष्ट्र को देता है, हमारा देश देता है, वित्त मंत्रालय देता है, हमारी सरकार देती है । प्रत्येक राज्य के अंदर समान रूप से हम विकास के लिए आगे बढ़े हैं । आज पक्के घर की बात करें, जहां तीन करोड़ पक्के घर मिल गए तो भी संतुष्टि नहीं । एक जमाना था जब 35000 रुपये इंदिरा आवास योजना के नाम से दिए जाते थे, उनमें भी लूट होती थी, बेचारे लाभार्थी के पास पांच हजार रुपये भी नहीं पहुंचते थे । आज पक्का घर हो, शौचालय हो, जन धन खाता हो, गैस का कनैक्शन हो, किसान कल्याण योजना हो, सबके खाते में सीधे पैसा पहुंचता है, क्या कभी खातों में पैसा पहुंचाने की बात सोची गई थी ।
60वर्ष के राज में कभी सीधे पैसा किसान, मजदूर, महिला और बेटियों में से किसी को नहीं मिला । लेकिन आज सभी के खाते हैं । जिस समय हमारे देश के यशस्वी प्रधानमंत्री ने कार्यभार ग्रहण किया, उस समय बैंकों में 3 करोड़ 75 लाख लोगों के खाते थे । आज बैंकों में 48 करोड़ खाते हैं, जिनमें सभी महिलाओं के खाते हैं । खाता खोलने का अभिप्राय एक ही है और इनके खुद के प्रधानमंत्री कहा करते थे कि एक रुपये भेजते हैं तो नीचे जाकर20पैसे पहुंचते हैं, बीच के 80 पैसे खाने वाले यही लोग थे, बीच का पैसा खाने वाले यही लोग थे, इनका नेटवर्क था । आज पूरा का पूरा पैसा लाभार्थी के खातों में जाता है । राजस्थान में 66 लाख किसानों को बारहवीं किश्त दो-दो हजार रुपये 1 जनवरी को उनके खाते में पहुंच गई । मैं जब उनसे पूछती थी तो एक ही बात कहती थी कि कभी आज तक खातों में पैसा आया? आज किसानों के ऊपर राजनीति करने वालों के लिए एक निवेदन करना चाहती हूं ।
मैं खुद किसान हूं । हमारे राष्ट्रपति जी और प्रधानमंत्री जी ने प्राकृतिक खेती के बारे में जो बात सोच रखी है । मैं खुद आर्गेनिक खेती करने वाली हूं । इसे मैंने14साल पहले शुरू किया था । आज मेरी खेती बीस गुना पैसा देती है । मैंने आसपास के लगभग 40 गांव के किसानों को हाईटेक एग्रीकल्चर, आर्गेनिक एग्रीकल्चर और हार्टीकल्चर से जोड़ा है ।
क्योंकि हमारे यहां पानी की बहुत कमी है और पानी की कमी के कारण कम पानी से लागत की फसलें कैसे हो सकती हैं, इसकी मैं खुद ट्रेनिंग देती हूं और खुद समझाती हूं । सवाई माधोपुर का अमरुद आजादपुर मंडी में इस नाम से बिकता है । हमारे देश के कृषि मंत्रालय ने जिस तरह से योजनाएं बनाईं ।
माननीय सभापति : कृपया आप अपनी बात समाप्त कीजिए ।
श्रीमती जसकौर मीना : सभापति महोदय, मैं बहुत देर से इंतजार कर रही थी,आप मुझे टाइम दें । मैं एक महिला हूं, एक किसान हूं और भारतीय जनता पार्टी की कार्यकर्ता हूं ।
माननीय सभापति:अनेक माननीय सदस्य बोलने वाले हैं,आप कनक्लूड कीजिए ।
श्रीमती जसकौर मीना :सभापति महोदय, मैंने पुन: भी यही बात कही,जब हम यह सोच लें और हमारी विचारधारा ऐसी हो जाए । आप देखिए 43.3 करोड़ किसानों के खातों में एमएसपी का लाभ होगा, वे एमएसपी पर जिद कर रहे हैं, चार गुना से ज्यादा एमएसपी पर खरीद इस वर्ष हुई है ।
मैं केवल अपने यहां की बात नहीं कहती हूं । मैं एक जगह नहीं रहती, मैं राजस्थान के कोने-कोने में जाती हूं । राजस्थान सरकार भारत सरकार की नीतियों का विरोध करने के अलावा कुछ नहीं करती है । जिन क्षेत्रों से हम दूर हैं, वहां के नेतृत्व में बौनापन है, छोटापन है । अगर किसी का दिल छोटा होगा तो किसी भी अच्छे काम को स्वीकार नहीं करेगा । अच्छे कामों की बुनियाद सात वर्ष पहले डली और आज वह बुनियाद एक इमारत के रूप में दिखाई देती है । यह महामहिम राष्ट्रपति जी के अभिभाषण में स्पष्ट झलकती है । मैं आपके माध्यम से कहना चाहती हूं और यह मेरे से पूर्व सांसद भाई ने भी कहा कि 15वें वित्त आयोग का पैसा 11 महीने तक राजस्थान सरकार ने अपने खाते में डालकर रखा था । सरपंचों को का कौड़ी भी नहीं दी । मैंने जब संसद में जीरो आवर में मुद्दा उठाया, 11 महीने बाद उनको पैसा मिला । राजस्थान की सरकार ही नहीं, पूरे देश के राज्यों की सरकारों को, भारत सरकार क्या दे रही है, मेरे पास आंकड़े हैं, लेकिन आप समय नहीं दे रहे हैं।
मैं इतना ही कहूंगी कि महिला सशक्तिकरण के नाम पर महिला कृषक को देखें तो 80 प्रतिशत श्रम महिलाएं करती हैं । ये महिलाएं इतनी सक्षम हैं कि सरकार की नीतियों का लाभ उठाकर नि:संदेह आगे बढ़ रही हैं।
माननीय सभापति :धन्यवाद, आप बैठ जाइए।
… ( व्यवधान)
* DR. D. RAVIKUMAR (VILUPPURAM): In his address, Honourable President has mentioned about the 125th birth anniversary of V.O. Chidambaram. But he forgot that it was his Government that refused to allow the vehicle which portrayed his statue to participate the Republic Day celebrations. Hon. President has quoted Babasaheb Dr Ambedkar's words: "My ideal would be a society based on Liberty, Equality, and Fraternity... Democracy is not merely a form of government... It is essentially an attitude of respect and reverence towards one's fellow men". He also mentioned that his Government considers these ideals of Baba Saheb as its motto'. But the truth is different. Violence against Dalits has been on the rise across the country since the formation of this regime; Thousands of Dalit women are raped; legal Protections such as reservation for the Dalits are being diluted; all this is being encouraged by supporters of the ruling party. It is shocking and painful that the President has concealed this fact and conveyed a message that is blatantly untrue.
The President has made it look like this Government is helping the farmers a lot. About 700 farmers were died in a year-long protest; At the end of the protest, the Government promised to provide financial assistance to the families of the victims and enact legislation to ensure a minimum support price for farmers. However, the Government did not take any action on the issue. Hon. President did not point this out in his speech.
The President praised the steps taken by his Government to control the COVID-19 pandemic. This Government has not complied with the Supreme Court order to pay compensation to the families of the persons who lost their lives in the pandemic. He made no mention of it.
Poverty and unemployment are on the rise across the country, with millions of people starving. The President has presented a rosy picture in his speech that contradicts this fact.
Hon. President's address not only does not reflect the true condition of the people, but also does not prescribe ways to change their lives. This is the biggest disappointment.
माननीय सभापति: डॉ. सेंथिलकुमार जी ।
DR. DNV SENTHILKUMAR S. (DHARMAPURI): Vanakkam Chairperson.
The President had quoted from Thirukkural: “Karka Kasadara Karpavai Katrapin Nirka Adarkku Taga.” It simply translates into, stand by what you learn. The question is: Does the Government stand by the ideals of the Constitution given by its founding fathers?
There was a mention of Dr. Ambedkar’s quote. “My ideal would be a society based on liberty, equality and fraternity.” Democracy is not merely a form of Government. It is essentially an attitude of respect and reverence towards one’s fellowmen. Reality does not substantiate the above ideals.
The Report on Freedom in the World by Freedom House has downgraded India’s status from a free country to a partly free country after judging it on various political rights and civil liberties.
Respect and reverence is something unknown to this Government, which was displayed brazenly during the peaceful protest against the farm laws. Regarding GST, the Government says that the GST collection has consistently remained above Rs.1 lakh crore during the last several months but the States are yet to receive their share, in particular, Tamil Nadu is yet to receive Rs.16,725 crore of GST, including compensation for the financial year.
There was a mention of cochlear implant surgery in the President’s Address. This finds a reference in the Address. In India, this idea was first established and implemented free of cost by Dr. Kalaignar, the visionary leader, in Tamil Nadu in the year 2010. This shows the socio-economic path that the DMK has given.
In the President’s Address, there was a reference to the freedom fighter, Va. Vu. Chidambaram. But there was no tableau or float displayed of the freedom fighters like Va. Vu. Chidambaram, Velu Nachiyar and Maha Kavi Bharathiyar. But, instead of floats of great freedom fighters, you had squirrels, the body of a cow with a human head and men clad in saffron clothes being paraded on the Republic Day parade. This hurts the sentiments of the Tamil pride and this pride was, in fact, restored by our Chief Minister, M.K. Stalin by having the Tamil freedom fighters’ tableau floats in Tamil Nadu. This event was supposed to be just a five-minute event. Now this has turned into a one-month event all along Tamil Nadu. This is how this has been showcased.
Regarding judiciary, Judiciary is the fourth pillar of Indian democracy along with the Legislature, the Executive and the Press. But, in recent times, the pillar of judiciary at some particular places has some particular judges who give political colour to it. A few years back, we had seen two judges of a particular caste going and attending a caste-based conference. They had been invited as chief guests because of their status as judges of the High Court. More recently, a particular judge is being approached by a particular political party for bails and for transfer of cases to the CBI whereas the basic prayer of the client himself was just to seek a CB-CID probe.
I am also of the opinion that judges pronounce their verdicts based upon the Constitution, the law and the amendments. But, recently, we have come to see that judges are quoting references from Hindi and Tamil films while giving verdicts. This sets a wrong precedent. Today, we see law college students going to libraries. Does this Government want them to go to video libraries and OTT platforms to search for judgements?
Now, let me come to the National Education Policy. The goal of the Government in the National Education Policy is to have a gross enrolment ratio of 50 per cent. I would like to state that this has already been achieved by the State of Tamil Nadu whereas India’s gross enrolment ratio is around 24.6 per cent. We are much ahead of the American gross enrolment ratio. Why does the Central Government want to thrust its National Education Policy upon us? We have set principles and we have set Dravidian models which are successful models. If the Central Government wants to implement them in India to make it a developed State, let them implement the Tamil Nadu model throughout the country. But why is it being thrust upon us? We totally reject it. If they want, they can go and implement it in gomutra promoting States which they are very keen upon.
Today itself, in Kundapura Government College in Karnataka, women students wearing hijabs were not allowed inside the college. Why has it happened? It happened because yesterday some saffron-clad people had gone there and threatened the people. The Government should at once take action against them.
HON. CHAIRPERSON : Pease conclude.
DR. DNV SENTHILKUMAR S.: Sir, I will finish it in just two minutes.
Sir, the Chief Minister, M.K. Stalin is a very amicable person. He is a man of few words and is also a man of action. He has brought in the all-India quota of 50 per cent reservation for OBCs. He has formed an all-India Federation of Dravidian Forum for Social Justice. He is against the transfer of IAS/ IPS officers, which is an infringement upon the rights of States by the Central Government. Our Chief Minister’s goal is not to compete with the States of India, our aim is to form a roadmap for the world. We are competing against the developed countries.
HON. CHAIRPERSON: Thank you very much. Please conclude.
DR. DNV SENTHILKUMAR S. : Sir, I am just concluding in a minute.
A Member from the BJP has said that Shri M.K. Stalin is more dangerous than Kalaignar Karunanidhi. ....(Interruptions)
HON. CHAIRPERSON: Please conclude.
Shri N.K. Premachandran ji.
DR. DNV SENTHILKUMAR S. : Sir, I would like to say that if the State’s rights are infringed upon, Stalin is more dangerous than any other Chief Minister. ....(Interruptions)
HON. CHAIRPERSON: The speech of Shri N.K. Premachandran will only go on record.
....(Interruptions)
SHRI N. K. PREMACHANDRAN (KOLLAM): Thank you very much, Sir, for affording me this opportunity to take part in the discussion on the Motion of Thanks on the President’s Address to the Joint Session of the Parliament.
Sir, the mention of the Presidential Speech is there under Article 87 of the Constitution. As per this Article, at the commencement of every Session of every calendar year, the President has to address the Joint Session of the Houses. In this regard, Kaul and Shakdher has stated that the President’s Address is the statement of policy of the Government.
The Presidential Speech, by virtue of Article 87 of the Constitution means that it is the statement of policies of the Government, and also the review of the performance of the Government during the last year and the previous year, and also the policies which are going to be presumed or implemented in the coming financial year or in the coming calendar year. This is the very sole purpose of the President’s Speech by virtue of Article 87 of the Constitution of India.
Sir, it is quite disappointing to say that in this Presidential Speech, which contains 82 paragraphs, there is no policy statement which the Government would pursue in the coming calendar year. There is no mention of new policies or programme initiatives on the part of the Government of India to be implemented in the next year. So, it is deeply disappointing.
If we go through all the 82 paragraphs, there are only the so-called achievements of the Government during the last eight years, and those so-called achievements are contrary to the facts and the ground realities.
21.00 hrs Sir, the Presidential Address is deeply disappointing because it is totally silent about the explosive issue of unemployment. I need not reiterate the seriousness and the grave concern regarding unemployment which is prevailing in our country. Even the Economic Survey of India is very specific that unemployment is one of the major concerns of Indian economy which we are facing, but unfortunately, there is no mention made in the Presidential Address regarding the explosive issue of unemployment.
Secondly, regarding the external aggression by the neighbouring countries affecting the territorial sovereignty of India, nothing is mentioned in the Presidential Address. There has been the invasion or attack on the borders by the Chinese military in Ladakh, Doklam and all these places, but nothing is mentioned regarding the attack on the part of the neighbouring States that is adversely affecting the sovereignty of our country.
Also, nothing is mentioned about the threat to the secular fabric of our country. There is no mention of the growing intolerance prevailing in our country. That is why, I am saying that it is a deeply disappointing Speech.
Further, the Speech does not address the marginalised sections of the society which were affected due to the COVID-19. Para 15 of the Speech says and I quote:
“Nobody remained hungry during the worst pandemic.” Sir, the hon. President spoke about free ration. The very next day Madam Nirmala Sitharamanji presented the Budget in this House by which the food subsidy has been taken away. For the years 2019-20 and 2020-21, Rs. 5,41,330 crore were earmarked for food subsidy which has been cut down to Rs. 2,06,831 crore. So, the speech of the hon. President and the Budget Speech of the Finance Minister are contradictory. It is not in consonance with the Presidential Address made to both Houses of Parliament. The NDA Government, under the leadership of hon. Prime Minister Shri Narendra Modiji, is completing eight years in office.
What is the constitutional as well as the social status of the country? Yesterday hon. Rahul Gandhiji spoke about the theories of Union of States, nationhood and kingdom. I fully support the observations made by Shri Rahul Gandhi yesterday regarding the theories of Union of States, nationhood and kingdom. He made a valid point regarding the centralisation of power. He was elucidating the centralisation of power. If you examine all these eight years, the democratic fabric and the secular fabric of the country are under threat. The beauty of Indian democracy is being destroyed. What is the beauty of Indian democracy? The beauty of Indian democracy is unity in diversity and that unity in diversity is being destroyed during all these seven and a half years. That is why, it is being said that India is not a kingdom; it is a Union of States. We have to respect the States and they should be taken into confidence in order to have the federal fabric of our Constitution.
Sir, in the name of narrow nationalism, you are branding all the people who oppose your programmes and policies as anti-national or disloyal. If you criticise the Government and if you criticise the Prime Minister, you will be branded as anti-national or disloyal. Mark Twain has rightly said and I would like to quote him: “Loyalty to the country always. Loyalty to the government, when it deserves it.” HON. CHAIRPERSON : Excuse me.
Hon. Members, it is 9 o’Clock. I have got a long list of Members to speak on the Motion of Thanks on the President’s Address. If the House agrees, the time for discussion may be extended by one hour.
SEVERAL HON. MEMBERS: Yes.
HON. CHAIRPERSON: Now, you may resume.
SHRI N. K. PREMACHANDRAN : Once again, I would like to quote Mark Twain: “Loyalty to the country always. Loyality to the Government, when it deserves it.” What does it mean? What does loyalty to the country imply? It means taking pride in one’s country, culture and its values, adherence and upholding the constitutional values such as liberty, fraternity, equality, secularism etc. and also helping our fellow people in times of external aggression, disasters like tsunami, earthquake and pandemic. That is the meaning of loyalty to the country. What is loyalty to the Government? Loyalty to the Government means the allegiance to the political and ideological values which are in power. It also means unconditional faith in the Government. It gives an unquestioned power and authority to the Government. That is what has happened in India during the last eight years.
In order to have good governance and development in the country, the Government has to be made accountable to the people of the country for which its decisions and actions should be transparent. That transparency is missing in the functioning of the Government to ensure the responsibility in lieu of the power it wields.
Here the power is being yielded. Instead of having the transparency in administration, power is being yielded. Therefore, in a democracy, we all must criticise our Government when it does not fulfil its promises and perform for the upliftment of the poor people. But this Government, unfortunately, has no tolerance to digest dissent and criticism. Dissent and criticism are considered as anti-national and disloyal to the country. This is quite unfortunate.
I would like to cite an example. A Malayalam TV channel by the name of Media One has been banned. The telecast is banned only because of national security. National security is the reason by which so many people are languishing in jail and the personal liberty and civil rights are being taken away in the name of national security. The ban has to be lifted or the security reason has to be listed. That is the point which I would like to make. ‘One Nation, One Tax’, ‘One Nation, One Language’, ‘One Nation, One Election’, ‘One Nation, One Registration’, how is this possible in a country having multi-diversity and also pluralistic society like India? How is it possible? How the ethnical, geographical, cultural relation between North Eastern India… (Interruptions) I will conclude in one minute.
Please understand the feelings of the people and the different, various cultures of our country. Languages have to be respected. All the States must be respected. Otherwise, the situation will be very dangerous. So, I would like to urge upon the Government on this matter. When we are speaking on Motion of Thanks on the President’s Address, I would like to caution the Government that the basic features of the foundation of our Constitution, that is, secular democracy and federal character are under threat. The Union of India shall not be allowed to become an Indian kingdom.
I conclude. Thank you, Sir.
*श्री राहुल रमेश शेवाले (दक्षिण-मध्य मुम्बई) : महामहिम राष्ट्रपति के दोनों सदनों की संयुक्त सभा में भाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर मुझेअपने विचार रखने अवसर देने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद। । माननीय राष्ट्रपति ने अपना भाषण कोरोना महामारी का जिक्र करते हुए शुरू किया और सरकार द्वारा उठाए गए कदमों का भी जिक्र किया, लेकिन महामारी के कारण हुए लॉकडाउन से आम जनता को हुए आर्थिक नुकसान का कोई जिक्र नहीं है । इसी कारण मंहगाई भी आसमान को छू रही है । अभिभाषण में जनता के बुनियादी मसलों जैसे बेरोजगारी, मंहगाई का कोई जिक्र नहीं है और न ही अनुसूचित जाति, जनजाति और ओबीसी के रिजर्वेशन का कोई जिक्र है।
मार्च 2020से केंद्र सरकार और संबंधित राज्य सरकार द्वारा लगाए गए कोरोना वायरस के प्रकोप पर दो बार संपूर्ण और आंशिक लॉकडाउन के कारण भारत की वर्तमान वित्तीय स्थिति दिन-ब-दिन खराब होती जा रही है । यह ध्यान देने योग्य है कि भारतीय रिजर्व बैंक ने राहत देने के लिए कुछ कदम उठाए हैं । एनपीए के वर्गीकरण के लिए ऐसी अवधि के दौरान बैंको/उधारकर्ताओं को राहत पैकेज दिया, ऐसे उपाय लघु उद्योगों, गृह ऋण उधारकर्ताओं और अन्य छोटे उधारकर्ताओं की स्थितियों में सुधार के लिए पर्याप्त नहीं हैं । इस प्रकार, वास्तविक और प्रभावी प्रयासों की आवश्यकता है । परंतु अभी भी जबकि महामारी चल रही है, सरकार द्वारा उठाए गए कदम नाकाफी रहे हैं।
कोविड-19 के प्रकोप के कारण पूरी दुनिया मुश्किलों का सामना कर रही है, लेकिन हमारे देश में, केंद्र सरकार और संबंधित राज्य सरकारों द्वारा लगाए गए लॉकडाउन ने चिकित्सा आपात स्थिति की तुलना में वित्तीय क्षेत्र में अधिक कठिनाइयां पैदा की । शुरुआत में मार्च 2020 में लॉकडाउन जरूरी था; केंद्र सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक की कोई ठोस योजना नहीं थी और सरकार ने बिना किसी समिति का गठन किए और नाजुक स्थिति की आवश्यकता पर विचार किए बिना मनमाने ढंग से निर्णय लिए और इसलिए सरकार और आरबीआई द्वारा लिए गए निर्णयों के पीछे कोई योजना नहीं थी।
कोविड महामारी में लॉकडॉन की वजह से लाखों कर्ज धारकों को फाइनेंशियल लॉस हुआ जिस वजह से बैंकों से उनका डिस्प्यूट बढ़ता गया और इन फाइनेंशियल कंपनियों ने ईएमआई समय पर न चुकाने के कारण उनको परेशान किया हुआ है । आरबीआई द्वारा मॉरिटोरियम की सुविधा का लाभ भी इन बैंकों ने कर्जधारकों को नहीं दिया । कर्जधारक फाइनेंशियल लॉस के कारण ईएमआई चुकाने के काबिल न रहे । मेरे विचार में ऑनलाइन विवाद समाधान की गाइडलाइंस में फाइनेंशियल विवादों को भी शामिल किए जाना चाहिए।
भारत के लोगों ने अपनी नौकरी, व्यवसाय और आय के स्रोतों को खो दिया है, सरकारों द्वारा लगाए गए लॉकडाउन के कारण RBI द्वारा दी गई मोहलत, और NPA के वर्गीकरण का स्थगन बिल्कुल भी मददगार नहीं है । तथाकथित स्थगन बैंक की अच्छी बैलेंस शीट बनाने के लिए दिया गया है और व्यावहारिक रूप से यह उन लोगों के लिए नहीं था, जिन्होंने कोविड -19 के प्रकोप के दौरान अपनी नौकरी और आय के स्रोत खो दिए हैं।
बैंक एआरसी को उधारकर्ताओं के पोर्टफोलियो सौंप रहे हैं । एआरसी ने अपने खेल खेलने के लिए खुला मैदान दिया है और इसलिए वे प्रतिभूतिकरण अधिनियम का दुरुपयोग कर रहे हैं और गिरवी संपत्तियों को औने-पौने दामों पर बेचने के साथ-साथ गलत तरीके से लाभ के लिए अवैध तरीकों का उपयोग कर रहे हैं । इसलिए, एआरसी को पोर्टफोलियो सौंपने के लिए मानदंड होने चाहिए और केवल "इरादतन चूककर्ताओं"को ही इन एआरसी को सौंपने की अनुमति दी जानी चाहिए।
मैं मुंबई से आता हूं । रेलवे विभाग ने रेलवे ट्रैक, कॉलोनियों और रेलवे स्टेशनों के पास रहने वाले लोगों को जमीन खाली करने के लिए तोड़फोड़ का नोटिस देना शुरू कर दिया है । यहां के निवासियों में ऐसे कई लोग हैं जो पिछले 25 वर्षों से यहां रह रहे हैं, कुछ मामलों में वहां 25 वर्ष (यानी 60 वर्ष) से भी अधिक अवधि से लोग रह रहे हैं । कोविड महामारी अपने चरम पर है और इस समय यदि उनके घर तोड़े गए तो वे सड़क पर होंगे । इस क्षेत्र में रहने वाले इन लोगों को मकान देने के लिए रेल विभाग के पास कोई नीति नहीं है । हमारे माननीय प्रधान मंत्री के अनुसार प्रधान मंत्री आवास योजना के तहत हर कोई घर का हकदार है । मेरा सुझाव है कि इन मकानों को गिराने से पहले रेल विभाग इन सभी घरों का सर्वे कराकर राज्य सरकार को रिपोर्ट सौंपे । राज्य सरकार उन्हें स्लम पुनर्वास योजना में मकान दे सकती है जिसके बाद मकान तोड़े जा सकते हैं । इस मामले में संबंधित अधिकारियों को घरों का सर्वेक्षण करने और राज्य सरकार को रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश देना चाहिए । मुंबई में झोपड़ियों के विध्वंस को स्थगित कर देना चाहिए और राज्य सरकार के माध्यम से सभी को अन्य उचित स्थान पर स्थानांतरण किया जाए।
सरकार ने माननीय प्रधान मंत्री के नाम से कई योजनाएं घोषित की हैं जिनके बारे में आम जनता को उनका प्रोसीजर भी पता नहीं है जिससे जनता उनका लाभ उठा सके । योजनाओं का कार्यान्वयन प्रभावी रूप से नही हो रहा है । देश के सबसे बड़े स्लम मुंबई के धारावी का विकास बहुत धीमी गति से चल रहा है । सरकार का धारावी मॉडल की तर्ज पर अन्य थिकली पॉपुलेटेड शहरी स्लम में भी लागू करना चाहिए।
मुंबई देश की आर्थिक राजधानी होने के बावजूद मुंबई में केंद्रीय सरकार द्वारा विकास की गति बहुत धीमी है । मुंबई में बैंकों की ब्रांच की बहुत कमी है । मुंबई के धारावी में जहां लाखों की आबादी है और देश की सबसे बड़ी लेदर इंडस्ट्री है वहां सिर्फ चार बैंक हैं और उनमें से एक बंद हो गई है । इन बैंकों से धारावी के व्यापारियों और निवासियों को प्रधान मंत्री आर्थिक योजनाओं का कोई लाभ नहीं मिल रहा है, मुद्रा लोन और किसी भी तरह का लोन नहीं मिल रहा है । देश के सभी नागरिकों को हर योजना का समान लाभ मिलना चाहिए । मुंबई के चीता कैंप में तो एक भी बैंक नहीं है । मुंबई के इन क्षेत्रों में बैंक की ब्रांच प्रोवाइड करके सभी सुविधा प्रदान करने हेतु प्रयत्न किए जाने चाहिए।
बीते छह वर्षों में मूल्य सूचकांक या उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में भारी बदलाव आया है और कोरोना महामारी के कारण देश की आर्थिक स्थिति काफी प्रभावित हुई है । पिछले दो वर्षों से महामारी और अप्रत्याशित बाढ़ ने पूरे देश में बहुत सारी भूमि, संपत्ति और मानव जीवन को भारी नुकसान पहुंचाया है । पिछले मानसून में भी बाढ़ की स्थिति विशेष रूप से महाराष्ट्र में सबसे खराब रही है । महाराष्ट्र राज्य में 'निसर्ग' और 'तौकता' साइक्लोन में सार्वजनिक संपत्ति और मानव जीवन का भारी नुकसान हुआ । प्राकृतिक आपदाओं के दौरान तत्काल राहत के सभी नॉर्म में संशोधन करने की आवश्यकता है । महाराष्ट्र के कोंकण तट पर हर वर्ष नाजुक समय की आवश्यकता के अनुसार एसडीआरएफ के मानदंडों में महाराष्ट्र सरकार ने हाल ही में संशोधन किए है तो इन मानदंडों की समीक्षा के लिए गठित केंद्रीय समिति को महाराष्ट्र सरकार द्वारा संशोधित मानदंडों को अपनी सिफारिशों में सम्मिलित करने की आवश्यकता है।
एनडीए सरकार द्वारा 1999 और 2004 के बीच अब तक12सार्वजनिक उपक्रमों का निजीकरण किया जा चुका है । वर्तमान सरकार द्वारा 2021 में एयर इंडिया को निजी कंपनी को बेच दिया गया । भविष्य में केंद्र सरकार लगभग 26 सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को बेचने की प्रक्रिया को पूरा करने पर काम कर रही है, जिनके विनिवेश को कैबिनेट ने पहले ही मंजूरी दे दी थी । बीईएमएल, शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एससीआई), पवन हंस, सेंट्रल इलेक्ट्रॉनिक्स, नीलांचल इस्पात निगम ऐसे पीएसयू हैं जिनका सरकार जल्दी ही निजीकरण करना चाहती है । निजीकरण से कर्मचारियों का हित दांव पर लगा है जिसमें संविधान के अनुसार अनुसूचित जाति/जनजाति, ओबीसी इत्यादि के कर्मचारियों के आरक्षण के प्रावधानों का सख्ती से पालन करने की आवश्यकता है । सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के नए मालिकों को सरकार द्वारा संविधान में बनाए गए मौजूदा आरक्षण के नियमों और सेवा शर्तों, पेंशन नियमों आदि को सख्ती से पालन करने को बाध्य किया जाना चाहिए । सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के निजीकरण के बाद इन उपक्रमों में नए मालिकों द्वारा संविधान के अनुसार कर्मचारियों के विभिन्न पदों पर आरक्षण के प्रावधानों को सख्ती से लागू करने के लिए सरकार एक सख्त पॉलिसी बनाए जिससे कर्मचारियों के आरक्षण हितों की रक्षा की जा सके।
मैं देश में आवश्यक खाद्य तेलों और वस्तुओं की बढ़ती मुद्रास्फीति की ओर सदन का ध्यान आकर्षित करना चाहता हूं । उपभोक्ता मामलों के विभाग द्वारा संकलित आंकड़ों के अनुसार, छह खाद्य तेलों-मूंगफली, सरसों, वनस्पति, सोया, सूरजमुखी और ताड़ - की कीमत पिछले एक साल में 13 से 52 प्रतिशत के बीच बढ़ी है और पिछले एक दशक के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है । गैस सिलेंडर भी महंगा हो गया है । उपभोक्ता वस्तुओं, इलेक्ट्रॉनिक सामानों और स्मार्टफोन की कीमतों में भी उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है।
तीव्र वित्तीय कठिनाई को ध्यान में रखते हुए चल रहे स्वास्थ्य संकट के कारण कई परिवार बहुत कठिनाई से गुजर-बसर कर रहे हैं । बुनियादी भरण-पोषण के लिए आवश्यक वस्तुओं को खरीदने के लिए आम आदमी को अधिक भुगतान करना पड़ता है । राष्ट्रपति जी के अभिभाषण में मंहगाई के कारण उच्च मुद्रा स्फीति का कोई जिक्र नहीं है । सरकार को मेडिकल रिसर्च के क्षेत्र में नोडल यूनिट सभी राज्यों में स्थापित करने की ओर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है।
माननीय राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर अपनेविचार रखने का अवसर देने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद।
SHRI RAM MOHAN NAIDU KINJARAPU (SRIKAKULAM): Hon. Chairman, Sir, thank you for giving me the opportunity to speak on the Motion of Thanks on the President’s Address.
We are in the 75th year of our Independence and it is a great opportunity for us to introspect and reflect on the state of the nation, state of the States, where are we standing today, where the nation stands today, and where we want it to be. And within that concern, I would like to talk about some of the issues regarding the State of Andhra Pradesh.
One of the most important issues, and we have time and again mentioned it in this House, is the privatisation of Vizag Steel Plant. The Government might have a certain idea of disinvestment, a certain idea of privatising most of the PSUs that are existing today, but they need to have a different policy for different kinds of PSUs. If it is a sick unit, if it is a unit which is going into losses, may be there can be a thought of privatisation. But Vizag Steel Plant has got a tremendous history, it is linked to the sentiments of the people of Andhra Pradesh, people have lost their lives to get the steel plant to Andhra Pradesh, and it is in profits for the last 18 years. From 2000 to 2018, there have been annual profits of Rs. 445 crore on average. For 13 consecutive years, it exceeded 100 per cent of its capacity utilization. Recently, RINL Vizag has also tweeted that it has achieved cumulative sales turnover of Rs. 22,000 crore approximately surpassing the previous best annual turnover. And this is during the times of Covid when such huge performance is being achieved.
When President’s Address speaks about the PIL scheme, speaks about Make in India, speaks about improving the domestic manufacturing, why are we trying to send our iron ore to China, why are we trying to import steel from other countries like China when we have the capacity, when we have such a strategic and beautiful unit in Vishakhapatnam with the Central Government itself? I request once again that the Central Government should not privatise Vishakhapatnam Steel Plant. It has the spirit of Telugu also, so it should be kept intact.
Other than this, we have also been making a constant demand regarding this issue for the last eight years since the bifurcation of Andhra Pradesh has happened. So many promises were made on the floor of the House by the Prime Minister himself. So many assurances were made through the AP Reorganization Act, which the people of Andhra Pradesh for a long time have been looking forward to as to when it will be done by the Central Government. Most importantly, out of these assurances, I want to mention some of them: special status for the State of Andhra Pradesh; backward districts funds; Polavaram and its R&R activity; Vishakhapatnam railway zone; Vizag-Chennai corridor; a lot of educational institutions; steel plant; ports; and such other activities such as building up of capital also. So much funds are supposed to come from the Central Government so that all these assurances, all these promises get fulfilled but nothing has happened till now.
Another shocking revelation that has happened in the last two days which I have observed is this. I was there as an MP during the Sixteenth Lok Sabha. From YSR Congress Party, there were eight MPs at that point of time. For special status, they resigned from this House saying that they are fighting for the special status. Now the people of Andha Pradesh have sent 22 MPs to this very House right now, so that they will fight for the special status. Yesterday there was a Member from YSR Congress Party speaking. Today one more Member from YSR Congress Party was speaking. There was not even a single mention about the special status. This is such a shocking revelation that we are finding today because they have promised to the people of Andhra Pradesh that they are going to fight for the special status. There is a pin-drop silence. The most docile MPs, I am seeing today from this Party, are not even fighting for the rights of the State. This is like backstabbing the people of Andhra Pradesh, especially the youth of Andhra Pradesh to whom they promised that they are going to get special status for the State.
On top of that, I have seen many of the regional parties are talking about their Government, their Chief Ministers, all the important schemes, beautiful schemes that their Government is undertaking when the State is not doing well also; I have all the rights also to mention about all the schemes which are not performing well also.
Within that authority, I want to speak about some of the issues that the State of Andhra Pradesh is facing. The President’s Address speaks about the empowerment of women. How can we expect empowerment of women when the crimes against women are increasing at a high pace especially in the State of Andhra Pradesh? There is 25 per cent rise in atrocities against women. The NCRB has reported that 17,089 cases have been reported in the State of Andhra Pradesh in 2020. I can give some examples also. A 19-year-old degree student was killed in Narasaraopet. One 21-year-old Engineering student was stabbed to death on Independence Day near the CM’s residence in Guntur. There are many such incidents. In Vijayawada recently one incident happened. Incidents happened in West Godavari and Vishakhapatnam also. Time and again, every day we have to look at the newspaper and there is some incident happening regarding a woman. We are also in support to the State Government if they are ensuring speedy justice for the victims or the families of the victims. But the real issue right here is this. When Members from YSRCP were speaking yesterday, they mentioned that there is a Disha Act. The Central Government Minister in a reply stated that regarding the Disha Act, there is no assent from the hon. President of India. It has to be sent there and there has to be an assent and consideration from the hon. President. It has not yet received the assent and they are waiting for the remarks from the State Government. But the YSRCP State Government is saying that we already have a Disha Act. I cannot understand how without assent from the President of India regarding this Act, the police or how the State Government can book cases, FIRs under this Act when there is no Act. It is very, very confusing. It is with such insincerity that the YSR Congress Party people are behaving towards these incidents against women….(Interruptions) Please give me two minutes. I am just concluding. Through this Motion of Thanks on the President’s Address, I would like to request the hon. President to mention it whether Disha Act is functional or if there is a legal sanctity to it.
In the State of Andhra Pradesh there is a huge fear psychosis that has developed because of the State Government. No one can speak anything against the Chief Minister or against the State Government be it teachers, doctors, dalits, business persons, Government employees, police, industry, you name it, leave alone all the political parties.
No one can say anything. I am giving examples also. The YSR Congress Party people came to the TDP Party office in Vijayawada with lots of rods, stones, and everything. They have destroyed the office. They came inside. Party workers were also physically assaulted. … (Interruptions). I am concluding. This is a very important matter. We have also given CCTV footage to the Central Government, but nothing is happening. I have seen Muraleedharan Sir has also come recently. One BJP leader is sitting in jail today because of these kinds of activities. It is creating fear psychosis. Nobody can go against the State Government.
HON. CHAIRPERSON : Please conclude.
SHRI RAM MOHAN NAIDU KINJARAPU : I am concluding. I am making very relevant points regarding the State. Please give me two minutes. I am going to conclude.
HON. CHAIRPERSON: No, please conclude.
SHRI RAM MOHAN NAIDU KINJARAPU: Another important issue is regarding State finances of Andhra Pradesh. We are in such dire financial crisis. We do not have money to pay salaries. We do not have money to pay pensions today. On top of that, they are creating burden on the people of Andhra Pradesh. House Tax has been increased, property tax has been increased, water tax increased, sewerage tax increased, electrical charges increased, price of essential commodities increased. … (Interruptions). There are new taxes like garbage tax and green tax. If this is all not enough, they have licensed dogs and pigs also in the State of Andhra Pradesh to get money from the poor people. That is a sad state of affair.
HON. CHAIRPERSON: Now, you should conclude. I cannot give you more time to speak.
… (Interruptions)
SHRI RAM MOHAN NAIDU KINJARAPU : Sir, kindly give me 20 seconds more to conclude my speech.
HON. CHAIRPERSON: No, conclude just now.
SHRI RAM MOHAN NAIDU KINJARAPU : Sir, I will conclude. There is misuse of funds from the Central Government. आन्ध्र प्रदेश राज्य में जो मनरेगा का फण्ड आ रहा है, उसको अपने हिसाब से डायवर्ट किया जा रहा है । AP Disaster Relief Fund of Rs. 1,100 crore have been diverted.
HON. CHAIRPERSON: Thank you very much.
The next speaker is Shri Syed Imtiaz Jaleel.
… (Interruptions)
SHRI RAM MOHAN NAIDU KINJARAPU : Sir, I am mentioning my last sentence. … (Interruptions) Sir, I only say that in the President’s Address महामहिम राष्ट्रपति जी अमृत काल की बात करते हैं । जब तक एक देश में एक राज्य अंधकार में रहेगा, अमृत काल कभी नहीं पाएंगे । मैं इसलिए बोलता हूं कि केन्द्र सरकार को आन्ध्र प्रदेश की ओर देखना चाहिए और सारी समस्याओं का परिष्कार करना चाहिए । Sir, thank you very much.
श्री सय्यद ईमत्याज जलील(औरंगाबाद) : सभापति महोदय मैं अपना भाषण शुरू करने से पहले इस सदन को एक समाचार देना चाहता हूं और सदन से यह चाहता हूं कि इसकी कड़ी शब्दों में निंदा की जाए।
सभापति महोदय, मैं अपना भाषण शुरू करने से पहले इस सदन को इन्फॉर्म करना चाहता हूं कि मेरी पार्टी के अध्यक्ष, मेंबर ऑफ पार्लियामेंट बैरिस्टर असादुद्दीन ओवैसी साहब के ऊपर कुछ देर पहले जानलेवा हमला हुआ है । जब वह मेरठ से प्रचार करके वापस आ रहे थे तो दो बंदूकधारियों ने उनकी गाड़ी के ऊपर हमला किया, गोलियां चलाईं, लेकिन उनकी जान बच गई । अब वह वापस आ गए हैं । मैं सरकार से यह अनुरोध करूंगा कि हमारे वैचारिक मतभेद हो सकते हैं, हमारे राजनीतिक मतभेद हो सकते हैं, लेकिन इस तरह की हरकतें होना कि दो महीने पहले उनके घर के ऊपर हमला हुआ, जो पुलिस स्टेशन के सामने ही है और आज उनकी जान लेने की कोशिश की गई है । मैं चाहूंगा कि इस सदन के अंदर हम जितने भी राजनीतिक पार्टी के लोग हैं, यह मेरा या तेरा या तुम्हारा-हमारा मामला नहीं है, यह हम सब से जुड़ा हुआ मामला है । इसलिए जो भी दोषी हैं, उनके ऊपर सख्त से सख्त कार्रवाई होनी चाहिए । मैं यही सूचना देना चाह रहा था । सभापति महोदय, आप मेरे भाषण का टाइम अब शुरू करें तो मेहरबानी होगी।
सभापति महोदय महामहिम राष्ट्रपति जी का भाषण सुनने के बाद ऐसा लग रहा था कि इस देश के अंदर सब कुछ बहुत कुशल-मंगल है, सब कुछ बहुत अच्छा चल रहा है । सपनों का देश कैसा होगा, यह राष्ट्रपति जी के भाषण को सुनकर लग रहा था, लेकिन हकीकत क्या है, मैं आपको बताना चाहता हूं । मैं शुरुआत उन गरीबों से करता हूं, जिनकी आंखों में 6 साल पहले आपने एक सपना दिखाया था । वर्ष 2015के अंदर हमने देश भर में वे होर्डिंग्स देखे थे, जिनके ऊपर मोदी जी की तस्वीर थी और यह लिखा हुआ था कि वर्ष 2022तक हर बेघर को हम प्रधान मंत्री आवास योजना के तहत घर देंगे ।
महोदय, मैं देश के आंकड़ों के बारे में नहीं कहता हूं, लेकिन मैं अपने जिलों के आंकड़े बताता हूं, जो आपको चौंका देंगे । वहां 80 हजार लोगों ने आवेदन किया था । वे गरीब लोग थे, जिनको यह उम्मीद थी कि हमको एक घर मिलेगा, क्योंकि मोदी जी कह रहे हैं । उसमें 52 हजार लोग एलिजिबल हुए और वह 52 हजार लोग क्वालीफाई हुए हैं । मैं आपको बताता हूं कि जनवरी, 2022 में 8 दिन पहले तक का आंकड़ा यह है कि उसमें 22 हजार लोग एलिजिबल हुए हैं और उसमें से 355 लोगों को घर दिए गए हैं । मैं औरंगाबाद जिले की बात कर रहा हूं । इसकी क्या वजह है कि आप इतने बड़े-बड़े आंकड़े दिखा रहे हैं? आप यह कह रहे हैं कि करोड़ों की संख्या में दिए हैं । मैं पूरे दस्तावेज के साथ बताता हूं कि सात सालों से आपने उन गरीबों को सपना दिखाया कि घर मिलने वाला है । उनमें52हजार लोग इस इंतजार में है कि मोदी जी अब घर देंगे, लेकिन 355लोगों को घर दिया गया है । … (व्यवधान)
सभापति महोदय, बहुत सारे सांसदों ने किसानों के बारे में बात कही है । बहुत सारे भारतीय जनता पार्टी के सांसद, जो महाराष्ट्र से आते हैं, उन्होंने किसानों के बारे में बात की है और बताया है कि सरकार किसानों के ताल्लुक से क्या अच्छे कदम उठा रही है । मैं उस सरकार से पूछना चाहता हूं कि मेरे अकेले महाराष्ट्र राज्य के अंदर जनवरी, 2021 से लेकर नवंबर, 2021 तक 11 महीनों के अंदर 2,498 किसानों ने आत्महत्या की है । इन किसानों के आत्महत्या करने की क्या वजह है? अगर आप उनके बारे में इतना कह रहे हैं कि हमने किसानों के लिए यह किया है तो इन ढाई हजार किसानों ने आत्महत्या क्यों की है?
सभापति महोदय, ये स्मॉल माइक्रो फाइनेंस कंपनीज, प्राइवेट कंपनीज और बैंक लोन नहीं दे रही हैं । किसान प्राइवेट कंपनियों के पास जा रहे हैं, जिनका इंटरेस्ट रेट ज्यादा होता है । जब किसान की फसल बर्बाद हो जाती है तो पैसा नहीं होता है । जब वह वसूल करने के लिए किसानों के पास जाते हैं, तब उस किसान को पता चलता है कि मेरे पास तो कुछ भी नहीं है तो वह आत्महत्या कर लेता है । आज देश भर के अंदर डुप्लीकेट फर्टिलाइजर्स, पेस्टिसाइड्स का धड़ल्ले से कारोबार चल रहा है, उनके ऊपर रोक लगाने की जरूरत है।… (व्यवधान) आप सुनिए मैं हकीकत बता रहा हूं और मैं आपको आइना दिखा रहा हूं । … (व्यवधान) आप कड़वा सच सुनने की आदत डालिए । मैं हकीकत का आईना दिखा रहा हूं और आंकड़ों के साथ दिखा रहा हूं । आपने बेरोजगारी के बारे में कहा है कि 60 लाख लोगों को रोजगार देंगे।
सभापति महोदय, इस देश की Centre for Monitoring Indian Economy ने अभी दिसम्बर का आंकड़ा बताया है कि यहां पर 53 मिलियन लोग बेरोजगार हैं । आप 60 लाख लोगों को रोजगार कहां से देंगे? आप यह बताइएगा कि किस कंपनी में रोजगार देने वाले हैं।…(व्यवधान) कृपया आप मुझे बोलने के लिए दो मिनट का समय और दीजिए ।
सभापति महोदय, मैं महाराष्ट्र की महाविकास अघाड़ी की भी पोल खोलने वाला हूं कि हमारी संस्कृति को किस तरह से बर्बाद किया जा रहा है? अब छोटी-छोटी किराने की दुकानों पर वाइन बेची जाने वाली है । शिवसेना के एक नेता कहते हैं कि वाइन के अंदर नशा नहीं है, तो राष्ट्रवादी कांग्रेस, एनसीपी के एक वरिष्ठ नेता कहते हैं कि विदेशों में लोग पानी नहीं पीते हैं, वाइन पीते हैं । विदेशों और हमारे राज्य में यही फर्क है कि हमारे राज्य में छत्रपती शिवाजी महाराज ने जन्म लिया था । हमारा राज्य फुले, शाहू और अम्बेडकर की पैदावार है । आप वहां पर बच्चों के हाथ में वाइन की बॉटल दे रहे हैं । कल वाइन की बॉटल हटेगी, तो वे बियर की बॉटल पकड़ेंगे । वे बियर के बाद व्हिस्की पकडेंगे । चंद पैसे कमाने के लिए अगर महाराष्ट्र सरकार यह कर रही है, तो राष्ट्रपति जी और केन्द्र सरकार को उन्हें यह बताना चाहिए कि आप यह संस्कृति बर्बाद नहीं कर सकते हैं । . . . .(व्यवधान)
सभापति महोदय, हम रेलवे के संबंध में यह कहना चाहते हैं कि रेलवे बजट में हर वक्त मराठवाड़ा का जो एक पिछड़ा इलाका है, उसके साथ क्यों नाइंसाफी की जाती है । हर वक्त अधिकारी कहते हैं कि इस क्षेत्र के अंदर रेट ऑफ रिटर्न क्या मिलेगा? अगर इसी तरह से पिछड़े इलाके को देखने का नजरिया अधिकारियों का रहेगा, तो रेलवे आगे निकली जा रही है और हम बहुत पीछे रहते जा रहे हैं । हम 70 सालों से इंतजार कर रहे हैं।…(व्यवधान)
सभापति महोदय, मैं तीस सेकेंड में अपनी बात समाप्त करूंगा । राष्ट्रपति जी ने अपने भाषण के अंदर इस सदी के सबसे महान शख्स डॉ भीमराव अम्बेडकर जी को कोट किया है और उन्होंने बताया है, हमारी सरकार का मोटो है, जो बाबा साहेब अम्बेडकर ने बताया था कि हमारी सरकार किन मूल्यों पर चलती है, liberty equality और fraternity, दूर-दूर तक इन शब्दों से आपका कोई लेना-देना नहीं है।… (व्यवधान)
माननीय सभापति : अब आप अपनी बात समाप्त कीजिए।
श्री सय्यद ईमत्याज जलील: अगर उससे आपको कोई लेना-देना रहता, तो यकीन मानिए कर्नाटक की उन बच्चियों को आप बाहर नहीं निकालते, जो अपने सर के ऊपर हिजाब लगा कर…(व्यवधान)
माननीय सभापति : श्री महताब जी की बात ही रिकॉर्ड में जाएगी।
… ( व्यवधान)
श्री सय्यद ईमत्याज जलील: मैं यह पूछना चाहता हूं कि हमारी राजस्थान की जो बहनें बैठती हैं, वे भी अपने सर को ढंकती हैं । इसका यह मतलब नहीं है कि वह कोई जुर्म कर रही हैं।…(व्यवधान)
माननीय सभापति : श्री महताब जी ।
जलील जी, आप अपनी बात समाप्त कीजिए।
श्री सय्यद ईमत्याज जलील : मैं सरकार से यही अनुरोध करूंगा कि इस देश की fraternity, equality, brotherhood और भाईचारे को जिंदा रखिए । धन्यवाद।
श्री भर्तृहरि महताब(कटक): सभापति महोदय, राष्ट्रपति जी के भाषण में करीब 82 पैराग्राफ्स हैं । मैं केवल पहले तीन पैराग्राफ्स ही कोट करूंगा और तीन पॉइंट्स पर ही अपनी चर्चा को सीमित रखूंगा ।
पहला है –In the second line, in the hon. President’s Address, he congratulates the people of India who have displayed profound faith in the democratic values, discipline and sense of responsibility. In the second paragraph, the hon. President salutes lakhs of freedom fighters who gave highest priority to their duties and secured the rights of India. In the third paragraph, he eulogies five or more great sons of this country, commemorating the 400th Prakash Parv of Guru Tegh Bahadur, the 150th birth anniversary of Sri Aurobindo, the 150th birth anniversary of V.O. Chidambaram Pillai and the 125th birth anniversary of Netaji Subhas Chandra Bose, which are being observed in full grandeur. The installation of Netaji’s statue under the canopy near India Gate is a fitting tribute to Netaji who was hailed as Rituraj Basant by great poet, Tagore.
This coinage of words, ‘prince of patriots’, was done by no less than Mahatma Gandhi. That is the stature of Netaji Subhash Chandra Bose. His sacrifice was unparalleled.
I have been listening to a number of speeches since yesterday but very few, I think it is not any one, have mentioned about Netaji other than our great friend, Prof. Sougata Ray who barged in, in the evening telling us that the hologram has been shattered. That is a typical technical thing that happened because of the strong wind that we faced today in Delhi. A thin layer is there which can be restored. It will be restored definitely by the end of this evening or by tomorrow. But his sacrifice is unparalleled. He gave a call of ‘Dilli Chalo, Chalo Dilli’. ‘Jai Hind’ was his clarion call which reverberates even today after 76 years of his disappearance. He first addressedBapu as the ‘Father of the Nation’.
This great son was born in Cuttack, Oriya Bazaar, in his ancestral house named Janakinath Bhawan which has been converted into Netaji Birth Place Museum in 2002 when Atal ji was the Prime Minister.
The Chief Minister of Odisha, Naveen Patnaik ji, took all the steps to convert this house into a memorial. Now, it has become a tirtha place. A large number of people throughout the country, from Kerala, Tamil Nadu, till Himachal Pradesh and even Jammu, go there to pay homage to that place, especially to that room where he was born. The hon. Prime Minister Modi ji has done a tremendous job by bringing Netaji’s contribution to focus on his 125th Birth Anniversary. Modi ji has acted out of sheer patriotic fervour without any politics. This is how a leader should take decisions.
One is reminded that the King of England’s statue stood under the canopy till 1968 even though it was mutilated in 1965. No one thought of removing it till then. Though a resolution was passed in Parliament later on to place a statue of Mahatma Gandhi, nothing much happened after the removal of the statue till the hon. Prime Minister Modi ji took this bold decision to instal Netaji’s statue. I am personally indebted to him for this decision as I represent the place, Cuttack, where Netaji was born. He spent more than twenty years there and passed from an Oriya School called Ravenshaw Collegiate School which is seldom recognised by my Bengali friends here or by those Members who are from Bengal. I would request the Union Government to establish an international research centre in his birth place, Cuttack, to propagate the ideals of Netaji, especially relating to communal harmony, fraternity, self-reliance, which we call nowadays ‘Atmanirbharta’, and removal of social inequality. That will be a fitting tribute to Netaji on his 125th Birth Anniversary.
The second point that I would like to mention here is that five years ago when the budget was presented by Arun Jaitley ji, in his budget speech he had mentioned about Bakshi Jagabandhu Bidyadhara. He was the General or the Senapati of the Paika’s struggle that started against the British in 1817. To commemorate 200 years of that Paika struggle, the Union Government had provided funds and during that period, the then President of India, Pranab Mukherjee, had addressed a gathering in Delhi saying that this was the first war of independence, not 1857. In 1817, the first war of independence started from Odisha where a large number of tribals had initiated the struggle and it was the peasants who had also participated. Cutting across any class or creed, they had revolted and fought against the British.
There was a demand then that the 1817 war of independence against the East India Company should be termed as the First War of Independence and that it should find place in the textbooks across the country so that the whole country would get to know about that. That has not happened even though five years have passed.
The third point I would like to mention is related to our freedom struggle. Hon. President has mentioned in the second paragraph of his Address, “I salute lakhs of freedom fighters who gave highest priority to their duties and secured the rights of India”. What happened? Lakhs and lakhs of people went to jails. They were tortured to death. Their families were uprooted. What happened to their families who stayed back? In 1971, on the 25th anniversary of our Independence, the Ministry of Home Affairs of the Union Government provided them some Samman Pension. After that, nothing much has happened. Subsequently, the Central Government had provided succour to the unwed daughters or the widows of the freedom fighters. Some Samman Pension was being provided.
I would like to make a demand here. I have records with me to show that a number of State Governments have recognised the freedom fighters but there is no recognition given today to their families. Once a freedom fighter passes away, their family members are just like any other citizens in the country. In the United States, family members of those who fought for independence are recognised as the family of freedom fighters. Here in India, though we have lakhs and lakhs of people who fought for freedom, no such recognition is being provided to their family members. That recognition is needed to be given to them. ID cards have to be provided at least to the second and third generation of the freedom fighters. Sons and daughters and the grandchildren of the freedom fighters need to be provided ID cards. Some State Governments have started doing it. States like Bihar, Punjab, and Manipur have already provided this type of IDs to the children of freedom fighters. That is not being done throughout the country.
I have a request to make to the Government, through you, Sir. The Home Ministry which has the list of freedom fighters who were provided Samman Pension. At least families of those people can be provided ID cards. It will be one of the best cherished moments for them in this Amrut Kaal, the 75th year of our Independence.
Sir, these are the three points which I wanted to make. Thank you very much.
कुंवर दानिश अली (अमरोहा) : माननीय सभापति जी, आपने मुझे महामहिम राष्ट्रपति जी के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर बोलने का मौका दिया । हम अमृत महोत्सव के रूप में आजादी का 75वां वर्ष मना रहे हैं, लेकिन जहां हमारे देश में अमृत बहना चाहिए था,वहां आज नफरत बह रही है । … (व्यवधान) मंत्री अंदर बैठकर भी जहर उगलते हैं और बाहर भी जहर उगलते हैं । …(व्यवधान) … * हमेशा जहर उगलने का ही काम करते हैं, इसमें कोई नई बात नहीं है । …(व्यवधान)
हम यहां बात कर रहे हैं कि महामहिम राष्ट्रपति जी ने अपने अभिभाषण में बेटियों को पढ़ाने के बारे में कहा । इस पर सरकार अपनी पीठ थपथपा रही है कि उसने कितना मजबूत नारी सशक्तिकरण किया है, लेकिन वहीं आजादी के अमृत महोत्सव के अवसर पर इस सरकार की आंखों तले ‘बुल्ली बाई’ और ‘सुल्ली बाई’जैसी एप्स पर एक विशेष वर्ग,खास तौर से मुस्लिम वर्ग की महिलाओं को, जिन्होंने अपनी-अपनी फील्ड्स में बहुत कुछ हासिल किया है, उनका ऑक्शन किया जाता है, लेकिन यह सरकार कुछ नहीं करती । …(व्यवधान)
मैं कहना चाहता हूं कि मुझे यकीन है कि जब आदरणीय प्रधान मंत्री जी आएंगे और रिप्लाई देंगे, जब वे यहां जवाब देंगे, जो धर्म संसद के नाम पर अनहोली धर्म संसद, जो हरिद्वार के अंदर हुई और वहां एक विशेष वर्ग, खास तौर से माइनॉरिटी वर्ग के लोगों का, मुसलमानों का कत्ल-ए-आम करने की बात कही गई, उस पर सरकार की तरफ से आज तक कोई टिप्पणी नहीं आई । मैं इस सदन का सदस्य होने के नाते यह गुजारिश करूंगा कि प्रधान मंत्री जी जब आएं, तो इस बारे में जरूर जवाब दें । प्रधान मंत्री जी हर चीज पर ट्वीट कर देते हैं । संसद रोज चल रही है, लेकिन इतनी बड़ी घटनाएं हरिद्वार, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश में हुईं, पर आज तक प्रधान मंत्री जी को इसकी फुर्सत नहीं मिली कि वह इनको कन्डेम्न करें । मुझे विश्वास है कि वह जब आएंगे तो इस पर जरूर जवाब देंगे ।
महोदय, मैं जब बोलने के लिए खड़ा होता हूं तो इस सरकार के मंत्री मुझे डिस्टर्ब करने लगते हैं । मुझे इस बात का गर्व है कि आप मुझे डिस्टर्ब कर रहे हैं । … (व्यवधान) आप क्यों डरते हैं? आप यह एक बार जरूर सोच लीजिए कि जब प्रधान मंत्री जी बोलेंगे तो मैं भी डिस्टर्ब करूंगा । गिरिराज जी, सोच लीजिए, मैं डरने वाला नहीं हूं । … (व्यवधान)
HON. CHAIRPERSON : Please address the Chair.
कुंवर दानिश अली :सभापति महोदय, वह मिनिस्टर हैं, अत: उनको इस बात का लिहाज करना चाहिए । … (व्यवधान)
माननीय सभापति: आप कृपया आगे बोलिए ।
कुंवर दानिश अली :सभापति महोदय, एक शोषित, वंचित समाज को रिप्रेजेंट करने वाला, बहुजन समाज पार्टी को रिप्रेजेंट करने वाला एक व्यक्ति यहां बोल रहा है और वे उसे हमेशा डिस्टर्ब करते हैं । मैं कहना चाहता हूं कि यह सरकार हमेशा अपने गोल पोस्ट्स चेंज करती रहती है । जब ये सरकार में आए थे तो इन्होंने कहा था कि हर साल ये दो करोड़ रोजगार देंगे । राष्ट्रपति महोदय के अभिभाषण में कहा गया कि60 लाख रोजगार दिए गए हैं । आप यह एक्सेप्ट करें कि आप वाकई …* बोलते हैं और आपकी सरकार वाकई जुमले वाली सरकार है । इस बात से यह साबित भी हो जाता है । मुझे याद है कि जब मैं वर्ष 2019 में यहां चुनकर आया था तो प्रेसिडेंशियल एड्रेस की शुरुआत नारायण गुरु जी का नाम लेकर हुई थी, लेकिन इस वर्ष जब केरल की सरकार ने नारायण गुरु की प्रदर्शनी को रिपब्लिक डे पर लाने का फैसला किया तो उसे अलाउ नहीं किया गया ।
HON. CHAIRPERSON: Thank you, very much.
कुंवर दानिश अली :माननीय सभापति महोदय, मुझे थोड़ा सा समय और दीजिए ।
माननीय सभापति : बहुत सारे वक्ता हैं । आपका समय होने वाला है, इसलिए आपको वार्न किया है । कृपया कनक्लूड कीजिए ।
कुंवर दानिश अली :सर, यह सरकार सिर्फ अमीरों को कितना अमीर बनाया जाए तथा गरीबी और बढ़ाई जाए, इस पर काम कर रही है । अभी पिछले दिनों इसके आंकड़े आए हैं । इन्होंने वर्ष2017 में कहा था कि हम किसानों की आमदनी दो गुना करेंगे । दो गुना की बात छोड़िए, उनको लागत तक नहीं मिल रही है । जो आंकड़े आए हैं, उसमें यह पाया गया है कि इस देश में 142 लोग ऐसे हैं, जिनकी सम्पत्ति इस कोरोना-काल के दौरान 23 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर56 लाख करोड़ रुपये हो गई है । यह सरकार अडानी और अंबानी जैसे लोगों को फायदा पहुचाने का काम करती है ।
HON. CHAIRPERSON: Kindly conclude.
KUNWAR DANISH ALI : Sir, I am just concluding.
उज्ज्वला योजना का यहां जिक्र किया गया । उज्ज्वला योजना में गैस सिलेंडर तो दिए गए,लेकिन400 रुपये वाला गैस सिलेंडर आज 1,000 रुपये का हो गया है । आज गैस खरीदने का पैसा लोगों के पास नहीं है ।
अंत में, मैं एक और बात कहकर अपनी बात समाप्त करना चाहूंगा । कोरोना के नाम पर स्कूल्स, कॉलेजेज और यूनिवर्सिटीज बंद हैं । हमारे नौजवान बच्चों की जो जनरेशन है, उनका कितना नुकसान हो रहा है । डिजिटल डिवाइड की बात सरकार बहुत करती है और कहती है कि हर गांव में इंटरनेट कनेक्शन है, लेकिन गांवों और देहातों में 80 परसेंट लोगों के पास अभी भी स्मार्ट फोन नहीं हैं ।
माननीय सभापति: श्री नव कुमार सरनीया जी ।
कुंवर दानिश अली :सर मैं केवल एक मिनट में अपनी बात खत्म कर रहा हूं ।
माननीय सभापति: आप कृपया अपनी बात एक वाक्य में समाप्त करें ।
कुंवर दानिश अली :सभापति महोदय, मेरे जनपद में एक सांसद के ऊपर गोली चलती है । हो सकता है कि मेरे मतभेद आपसे हों,लेकिन…(व्यवधान)
کنور دانش علی (امروہہ):محترمچیرمین صاحب، آپ نے مجھے صدرِ جمہوریہ کے خطبہ پر بولنے کا موقع دیا۔ ہم امرت مہوتسو کی شکل میں آزادی کی 75 سالگرہ منا رہے ہیں، لیکن جہاں ہمارے ملک میں امرت بہنا چاہئیے تھا، وہاں آج نفرت بہہ رہی ہے (مداخلت)۔۔ منتری اندر بیٹھ کر بھی زہر اُگلتے ہیں اور باہر بھی زہر اُگلتے ہیں۔ (مداخلت)۔ (کاروائی میں شامل نہیں) ہمیشہ زہر اُگلنے کا ہی کام کرتے ہیں، اس میں کوئی نئی بات نہیں ہے۔ (مداخلت)۔۔ ہم یہاں بات کر رہے ہیں کہ صدرِ جمہوریہ نے اپنے خطبہ میں بیٹیوں کو پڑھانے کے بارے میں کہا۔ اس پر سرکار اپنی پیٹھ تھپ تھپا رہی ہےکہ اس نے کتنا مضبوط خواتین کو با اختیار بنانے کا کام کیا ہے۔ وہیں آزادی کے امرت مہوتسو کے موقع پر اس سرکار کی آنکھوں تلے بُلی بائی اور سُلّی بائی جیسے ایپس پر ایک خاص طبقہ، خاص کر مسلم طبقہ کی خواتین کو جنہوں نے اپنی اپنی فیلڈس میں بہت کچھ حاصل کیا ہے، ان کا آکشن کیا جاتا ہے، لیکن یہ سرکار کچھ نہیں کرتی (مداخلت)۔ میں کہنا چاہتا ہوں اور مجھے یقین ہے کہ جب عزت مآب وزیرِ اعظم آئیں گے اور یہاں جواب دیں گے، جو دھرم سنسد کے نام پر انہولی دھرم سنسد، جو ہری دوار کے اندر ہوئی اور وہاں ایک مخصوص طبقہ، خاص طور سے اقلیتی طبقہ کے لوگوں کا، مسلمانوں کا قتلِ عام کرنے کی بات کہی گئی، اس پر سرکار کی طرف سے آج تک کوئی کمینٹ نہیں آیا ہے۔ اس پر سرکار کی طرف سے آج تک کوئی کمینٹس نہیں آیا۔ میں اس ایوان کا ممبر ہونے کے ناطے یہ گزارش کروں گا کہ وزیرِ اعظم جب آئیں، تو اس بارے میں ضرور جواب دیں۔ وزیرِ اعظم ہر چیز پر ٹویٹ کرتے ہیں۔ پارلیمینٹ روز چل رہی ہے، لیکن اتنی بڑی گھٹنا ئیں ہری دوار، اتراکھنڈ اور اتر پردیش میں ہوئی، پر آج تک وزیرِ اعظم صاحب کو اتنی فرصت نہیں ملی کہ وہ ان کو کنڈیمن کریں۔ مجھے یقین ہے کہ جب وہ آئیں گے تو اس پر ضرور جواب دیں گے۔ جناب، میں جب بولنے کے لئے کھڑا ہوتا ہوں تو اس سرکار کے منتری مجھے ڈِسٹرب کرنے لگتے ہیں۔ مجھے اس بات کا فخر ہے کہ آپ مجھے ڈِسٹرب کر رہےہیں۔ (مداخلت)۔ آپ کیوں ڈرتے ہیں؟ آپ یہ ایک بار ضرور سوچ لیجیئے کہ جب وزیرِ اعظم بولیں گے تو میں بھی ڈِسٹرب کروں گا۔ گرِی راج جی سوچ لیجیئے، میں ڈرنے والا نہیں ہوں (مداخلت) جناب، وہ منتری ہیں اس لئے ان کو اس بات کا لحاظ رکھنا چاہیے (مداخلت)۔ جناب چیرمین صاحب، ایک شوشِت، محروم سماج کو ریپریزینٹ کرنے والا بہوجن سماج پارٹی کو ریپریزینٹ کرنے والا ایک انسان یہاں بول رہا ہے اور وہ اسے ہمیشہ ڈِسٹرب کرتے ہیں۔ میں کہنا چاہتا ہوں کہ یہ سرکار ہمیشہ اپنے گول پوسٹس بدلتی رہتے ہے۔ جب یہ سرکار میں آئے تھے تو انہوں نے کہا تھا کہ ہر سال یہ دو کروڑ روزگار دیں گے۔ صدرِ جمہوریہ کے خطبہ میں کہا گیا کہ 60 لاکھ روزگار دئے گئے۔ آپ یہ ایکسیپٹ کریں کہ آپ واقعی (کاروائی میں شامل نہیں) بولتے ہیں اور آپ کی سرکار واقعی جملوں والی سرکار ہے۔ اس بات سے یہ ثابت بھی ہو جاتا ہے۔ مجھے یاد ہے کہ جب میں 2019 میں یہاں چُن کر آیا تھا تو پریسیڈینشیل ایڈریس کی شروعات نارائن گرو جی کا نام لے کر شروع ہوئی تھی، لیکن اس سال جب کیرل کی سرکار نے نارائن گرو کی پردرشنی کو ریپبلِک ڈے پر لانے کا فیصلہ کیا تو اس الاو نہیں کیا گیا۔ جناب، یہ سرکار صرف امیروں کو اور کتنا امیر بنایا جائے اور غریبی بڑھائی جائے اس پر کام کر رہے ہے۔ ابھی پچھلے دنوں اس کے آنکڑے آئے ہیں۔ انہوں نے سال 2017 میں کہا تھا کہ ہم کسانوں کی آمدنی دوگُنا کر دیں گے۔ دو گُنا کی بات چھوڑئیے، ان کو لاگت نہیں مل رہے ہے۔ جو آنکڑے آئے ہیں اس میں یہ پایا گیا ہےکہ اس ملک میں 142 لوگ ایسے ہیں جنکی سمپتّی اس کورونا کال کے دوران 23لاکھ کروڑ سے بڑھ کر 56 لاکھ کروڑ روپئے ہو گئی ہے۔ یہ سرکار اڈانی اور امبانی جیسے لوگوں کو فائدہ پہنچانے کا کام کرتی ہے۔ جناب، اُجّولا یوجنا کا یہاں ذکر کیا گیا۔ اُجّولا یوجنا میں گیس سلینڈر تو دئیے گئے، لیکن 400 روپئیے والا سلینڈر آج 1000 روپئے کا ہو گیا ہے۔ آج گیس خریدنے کا پیسہ لوگوں کے پاس نہیں ہے۔ آخر میں میں ایک اور بات کہہ کر اپنی بات ختم کروں گا۔ کورونا کے نام پر اسکولز، کالجز اور یونیورسٹیز بند ہیں۔ ہمارے نو جوان بچوں کی جو جنریشن ہے، ان کا کتنا نقصان ہو رہا ہے۔ ڈیجیٹل ڈیوائڈ کی بات سرکار بہت کرتی ہے اور کہتی ہے کہ ہر گاوُں میں انٹر نیٹ کنیکشن ہے، لیکن گاوُں میں اور دیہاتوں میں 80 فیصد لوگوں کے پاس ابھی بھی اسمارٹ فون نہیں ہے۔ سر میں ایک منٹ میں اپنی بات ختم کر رہا ہوں۔ چیرمین صاحب، میرے ضلع میں ایک ممبر آف پارلیمنٹ کے اوپر گولی چلتی ہے۔ ہو سکتا ہے کہ میرے مت بھید آپ سے ہوں لیکن (مداخلت)۔ (ختم شد) HON. CHAIRPERSON: Thank you, very much. Sri Naba Kumar Sarania.
श्री नव कुमार सरनीया (कोकराझार): सभापति महोदय, आपने मुझे बोलने का मौका दिया, इसके लिए धन्यवाद।
महोदय, राष्ट्रपति महोदय के अभिभाषण में पॉइंट 76 में पूर्वोत्तर की शांति के बारे में लिखा है । कुछ महीने पहले कार्बी के साथ समाझौता हुआ था, जिसका हम सभी ने स्वागत किया, लेकिन अभी भी उल्फा, एनएसीएल और वहां के हमारे आदिवासी भाइयों का जो इश्यू है, वह भी सेटल होना है ।
मेरा आग्रह है कि असम और नॉर्थ ईस्ट की स्थायी शांति के लिए यह जरूर करना चाहिए । राष्ट्रपति जी ने अभिभाषण में बोला है कि शांति आयी है, लेकिन कुछ महीने पहले नागालैंड में 17 सिविलियन्स को मार दिया गया । उन लोगों का मानना है कि यह आर्म्स एक्ट का दुरूपयोग है । हमारी माँग है कि अभी पूर्वोत्तर में शांति स्थापित हुई है, इसलिए उसे वापस लेना चाहिए । अभी सभी लोगों को पता है कि एमपी की हालत क्या है? हमारे क्षेत्र में जो गवर्नमेंट का काम है, सेन्टर का पैसा गया हुआ है, वह काम अच्छी तरह से हुआ या नहीं, इसे जरूर देखना चाहिए । मेरे अपने गाँव में मेरे घर से बगल का पीएमजीएसवाई का जो रास्ता है, तीन साल पहले ठेकेदार उसका 70 परसेंट पैसा उठाकर ले गया, लेकिन वह रास्ता अभी तक पूरा नहीं हुआ है । मेरे क्षेत्र में जितने भी घर बने हैं, वे घर अभी भी आधे ही बने हुए हैं और अधिकारी लोग बोल रहे हैं कि सेन्ट्रल से पैसा नहीं आया है । अभी घर निर्माण सामग्री की कीमत इतनी बढ़ गई है, 1लाख 30 हजार रुपये में यह घर पूरा होने वाला नहीं है । अगर इस तरफ केन्द्र सरकार ध्यान नहीं देगी तो गरीब लोगों का जो पक्के घर का सपना है, वह सपना ही रह जाएगा । मेरी विनती है कि इसमें राशि बढ़ानी चाहिए ।
असम के लोगों का मानना है कि यह जो सिटिजन अमेंडमेंट एक्ट आया है, उसने मिसअंडरस्टैंडिंग और कंफ्यूजन ही बढ़ाया है । इसलिए जिस तरह से कृषि कानून वापस लिए गए हैं, उसी तरह से सीएए को भी वापस लेना चाहिए । एनआरसी में लगभग 19 लाख लोगों का नाम नहीं आया है, लेकिन वे लोग अभी स्टेटलेस पीपुल जैसे बन गए हैं । अभी नॉर्थ-ईस्ट में आधार का काम चल रहा है । उन लोगों का नाम आधार में नहीं आया है । हमें लगता है कि अगर एक्चुअली में वे फॉरनर हैं, तो उन्हें बांग्लादेश भेज देना चाहिए और नहीं तो उनको अपना जो नागरिक का अधिकार है, जब तक वह फॉरनर डिक्लेयर नहीं होता है, उसे वह अधिकार देना चाहिए ।
सरकार ने भगवान बिरसा मुंडा का जो गौरव दिवस मनाया है, वह हम सबको अच्छा लगा है, लेकिन अभी भी सेन्ट्रल का जो कोटा है, उसमें लगभग8लाख पद अभी भी खाली हैं । अगर उन पदों को भरेंगे तो एससी, एसटी लोगों को रोजगार मिलेगा ।
आज की डेट में इन पदों को जरूर भरना चाहिए, ऐसा मेरा आग्रह है । ट्राइबल स्पेशियली हमारे नॉर्थ-ईस्ट की जो काउंसिल है, जो छठी अनुसूची है, उसके हमारे ट्राइबल लोग कुछ हद तक खुश हैं । गुजरात, मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र आदि तरफ के जो ट्राइबल लोग हैं, वे नाखुश हैं । हमारे उधर ट्राइबल लोगों को अपने को सशक्त करने का, कानून बनाने का और अपना डेवलपमेंट करने का मौका मिलता है । हमें लगता है कि 5वीं अनुसूची में भी छठी अनुसूची जैसे कुछ मैकेनिज्म सेंट्रल को बनाने चाहिए ताकि ट्राइबल एक्चुअली खुश हों ।
एकलव्य मॉडल स्कूल, मेरे क्षेत्र के चार जिले बक्सा, कोकराझार, चिरांग, तमुलपुर आते हैं, उसमें हर ब्लॉक में एकलव्य मॉडल स्कूल बनना चाहिए, लेकिन मात्र एक ही स्कूल है और वह भी विवादित है । उसमें अभी तक सब कुछ ठीक-ठाक नहीं हुआ है । मेरी सरकार से विनती है, स्पेशियली हमारे एरिया में जितनी भी ट्राइबल बेल्ट है, उसमें जल्द से जल्द एकलव्य मॉडल स्कूल, रेजिडेंशियल स्कूल बनाने चाहिए । धन्यवाद ।
श्री संजय सेठ (राँची): महोदय, धन्यवाद । राष्ट्रपति जी के अभिभाषण के धन्यवाद प्रस्ताव के समर्थन में बोलने के लिए मैं खड़ा हुआ हूँ । सबसे पहले मैं आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी का अभिनन्दन करना चाहता हूँ कि आजादी के इस75वें साल में बिरसा मुंडा को याद करके और 15 नवम्बर को जनजातीय गौरव दिवस मनाने का जो काम किया है, उसके लिए सवा तीन करोड़ झारखंडवासी आपका अभिनन्दन कर रहे हैं ।
हम अभिनन्दन करना चाहते हैं कि गुरू तेग बहादुर जी का 400वाँ प्रकाश पर्व, महर्षि अरविन्द जी की 150वीं जयन्ती, नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयन्ती और उनकी आदमकद प्रतिमा, आजादी के 75 सालों में किसी सरकार ने यह काम नहीं किया । नेताजी को सबने भुला दिया, लेकिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने जो संकल्प लिया, वह यह संकल्प लिया कि नेताजी की आदमकद प्रतिमा दिल्ली के बोट क्लब में लग रही है । मैं अभिनन्दन करना चाहता हूँ कि सरदार पटेल को भुला दिया गया, सरदार पटेल को हमेशा पर्दे के पीछे रखा गया ।
दुनिया में सबसे बड़ी सरदार पटेल की प्रतिमा प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में बनी है । हम अभिनंदन करना चाहते हैं कि गुरू गोविंद सिंह जी के साहिबजादों, जिन्होंने बलिदान दिया । हम बाल दिवस मनाते हैं, लेकिन असली बाल दिवस वह है, जिसकी 26 दिसंबर को, वीर बाल दिवस, घोषणा हुई है । हम माननीय प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी जी का अभिनंदन करना चाहते हैं । मैं अपनी बात रखूं, उससे पहले हम सब के श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी थे, जिन्होंने कहा-
बाधाएँ आती हैं आएं घिरें प्रलय की घोर घटाएं।
पांवों के नीचे अंगारे, सिर पर बरसें यदि ज्वालाएं।
निज हाथों से हंसते-हंसते, आग लगाकर जलना होगा।
कदम मिलाकर चलना होगा।
प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी जी 135 करोड़ देशवासियों को एक साथ लेकर चलें । एक साल का कोरोना के रूप में जो कहर था, तालियां बजवाईं, दीया जलवाया, आलोचना हुई कि ताली बजाने से कहीं कोरोना भागता है? दीया जलाने से कोरोना भागता है? लेकिन देश को एकसूत्र में पिरोने के लिए प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने 135 करोड़ देशवासियों को एक साथ कोरोना की लड़ाई के खिलाफ खड़ा किया ।
महोदय, मैं कहना चाहता हूं कि आज हम जिस भवन में बैठे हैं, जहां हम चर्चा कर रहे हैं, यह अंग्रेजों का बनाया हुआ है । अगर आत्मनिर्भर भारत देखना है, तो इस आज़ादी के 75वें साल में जब हम भारतीय लोकतंत्र के मंदिर में जाने वाले हैं, यह आत्मनिर्भर भारत का सबसे बड़ा नमूना है ।
हम 75 सालों तक अंग्रेजों के बनाए हुए इस लोकतंत्र के मंदिर में रह रहे हैं । हम सब यह कहना चाहते हैं, अभिनंदन करना चाहते हैं, हम यह कहना चाहते हैं कि यह पुराना भारत नहीं है, यह नया भारत है।… (व्यवधान) यह कटोरा लेकर भीख मांगने वाला भारत नहीं है । यह 100 देशों को वैक्सीन देने वाला भारत है । यह मोदी का नया भारत है, यह दौड़ता हुआ भारत है । यह एक राष्ट्र है । पहले एक राष्ट्र था, एक राष्ट्र है और एक राष्ट्र रहेगा । विपक्ष के एक नेता जी ने आज कमेंट किया है कि भारत एक राष्ट्र नहीं है । संविधान में कहीं नहीं लिखा है । नेता जी को पता नहीं है कि भारत एक राष्ट्र था, एक राष्ट्र है और एक राष्ट्र रहेगा । हम राष्ट्रवाद की बात करने वाले लोग हैं । हमको गुमान है कि हम राष्ट्रवाद की बात करने वाले लोग हैं, हम राष्ट्रवादी लोग हैं, हम अखंड भारत की बात करते हैं, हम जोड़ने वाले लोग हैं।
कल एक नेता जी अजीबो-गरीब भाषण दे रहे थे । उनके भाषण पर पूरे देश भर में बहुत तालियां बजती हैं । बहुत लोग अपना टीवी भी स्विच ऑफ कर देते हैं । लेकिन उन्हें पता नहीं है कि भारत सदियों से एक राष्ट्र है, हमारा राष्ट्र सांस्कृतिक इकाई है, कोई राजनीतिक इकाई नहीं है । उनके पुरखों ने धर्म के आधार पर देश बांटा, भाषा के आधार पर राज्य बांटा । दशकों से विभाजन की नीति अपनाई और भला ऐसे लोगों को राष्ट्रवाद से क्या लेना-देना । वह राष्ट्रवाद को कुछ समझते नहीं हैं । हम कह सकते हैं कि विपक्षियों के लाख अवरोध खड़ा करने के बावजूद देश की जनता प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी जी के साथ खड़ी है । मुझे याद है कि मोदी जी के लिए निधि अग्रवाल जी एक कविता लिखी है । मेरी बहनें यहां बैठी हैं कि-
विश्व के इतिहास में, एक नया इतिहास बनाया है।
धूमिल हो रहे भारत के, सपनों को पुन: जगाया है।
स्वर्ण युग की कामना लेकर फिर से, इस जमीन पर एक शूर वीर आया है।
देश को एकता के सूत्र में पिरोकर, अखंडता का नूर लाया है।
विश्व के नव पटल पर फिर से, करने एक नए युग का आरंभ, नरेन्द्र मोदी के रूप में एक देवदूत आया है।
महोदय, मैं कह सकता हूं कि पूरी दुनिया जब कोरोना से टूट रही थी । हमने टीवी में देखा, अखबारों में पढ़ा कि दुनिया के सम्पन्न से सम्पन्न राष्ट्रों में रिटेल काउंटर लूटे जा रहे थे । ब्रेड एंड बटर की दुकानें लूटी जा रही थीं । भारत में एक पान की दुकान भी नहीं लूटी गई । एक आदमी भी भूख से नहीं मरा । यह ऐसा स्वर्णिम इतिहास रहा कि एकजुटता के रूप में भारत खड़ा रहा।
हमारा देश दुनिया का एकमात्र देश है, जिसने फ्रंटलाइन वर्कर्स को, पैरामैडिकल स्टाफ को, एंबुलेंस चालक को, जो अंत्येष्टी करते हैं, उनके ऊपर सेना के हैलिकॉप्टर से पुष्प वर्षा की गई । यह किसी देश ने नहीं किया । उसी के चलते आज कोरोना का युद्ध हम जीत रहे हैं । हम कह सकते हैं कि भारत एकजुट है । पूरा देश मोदी जी के साथ खड़ा है । यह हम कह सकते हैं । हमको मालूम है कि जब वैक्सीन का ईजाद हो रहा था, तब किस तरह की बातें की गई । सभापति महोदय, हमारे झारखंड में एक मंत्री जी हैं, उन्होंने कहा कि मैं चूहा थोड़े ही हॅूं, स्वास्थ्य मंत्री जी ने कहा था कि मैं चूहा थोड़े ही हॅूं जो हम पर वैक्सीन का एक्सपेरीमेंट करोगे । हम वैक्सीन नहीं लगाएंगे, यह तो मोदी की वैक्सीन है, आप नपुंसक हो जाओगे, मर जाओगे । आज हमें गुमान है कि 170 करोड़ लोगों को वैक्सीन दे कर दुनिया का सबसे बड़ा वैक्सीनेशन अभियान प्रधान मंत्री मोदी जी के नेतृत्व में भारत में चलाया गया । यह भी एक रिकॉर्ड है । मैं कह सकता हॅूं कि वैक्सीन का मजाक उड़ाने वाले, जानते होंगे कि उनके पिता, दादा-दादी, नाना, उनके पुरखों के शासन काल में विभिन्न प्रकार की बीमारियां आईं, कई दशकों तक, जैसे पोलियो का वैक्सीन, रोटा वायरस का वैक्सीन, हैपेटाइटिस-बी का वैक्सीन, टेटनस का वैक्सीन50-50साल बाद आया । दुनिया ने अपने को सुरक्षित कर लिया तो भारत को दिया । इस बार दुनिया ने जिस दिन वैक्सीन का ईजाद किया, प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में, उस दिन देश ने एक नहीं दो-दो वैक्सीन का ईजाद किया । एक सौ देशों को हम वैक्सीन दे रहे हैं । यह है नया भारत । यह दौड़ता हुआ भारत है । भाइयो, बहनों, इन्हें तो विदेशी रोटी खाने की आदत है । ये स्वदेशी की भावना क्या पचा पाएंगे?
सभापति महोदय, मैं कहना चाहता हॅूं कि मैं झारखण्ड से आता हॅूं । मैं प्रधान मंत्री जी का धन्यवाद देना चाहूंगा, झारखण्ड के लोग इस बात को जरूर सुनें कि 2 करोड़ 64 लाख 7858 लाभार्थियों को अनाज दिया गया है । हमारे संसदीय क्षेत्र रांची में 19 लाख मीट्रिक टन अनाज दिया गया । आप कैलकुलेटर में जोड़ लो कि 80 करोड़ लोगों को 19 महीने तक पांच-पांच किलो राशन दिया गया । आप कैलकुलेटर में भी नहीं जोड़ पाएंगे कि कितनी राशि हुई । ऐसी अन्न योजना हमने दुनिया में नहीं देखी और न ही दुनिया में कोई कर पाया । …(व्यवधान)
माननीय सभापति : कृपया अपनी बात समाप्त करें । दस बजे हाऊस की कार्यवाही समाप्त की जानी है।
… ( व्यवधान)
श्री संजय सेठ : सभापति महोदय, अमेरिका ने भी शुरू किया कि हम अपने नागरिकों को ब्रेड एंड बटर देंगे । लेकिन उनकी एक महीने बाद ही टांय-टांय फिस्स हो गई । यह प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी का भारत है । 19महीनों तक लगातार 5-5 किलो राशन कल्पना से परे नहीं हो सकता है और वह अभी भी चल रहा है । … (व्यवधान)
माननीय सभापति:कृपया समाप्त कीजिए।
… ( व्यवधान)
श्री संजय सेठ : सभापति महोदय, मैं पांच मिनट में अपनी बात समाप्त करूंगा । हम वेंडर्स के लिए जरूर बोलेंगे । जो रेहड़ी-पटरी वाले हैं, उनको दस-दस हजार रुपये की सहायता दी गई । मैं झारखंड से आता हॅूं । झारखंड में अभी रेहड़ी-पटरी वालों को दौड़ाया जा रहा है । उनको खदेड़ा जा रहा है । उनको बैठने नहीं दिया जा रहा है । हमारे अपर बाजार में100-100सालों से जो दुकानें हैं, उनको ताला लगा दिया जा रहा है । … (व्यवधान)
माननीय सभापति:कृपया समाप्त कीजिए।
… ( व्यवधान)
श्री संजय सेठ : सभापति महोदय, मैं एक मिनट और बोलूंगा ।
महोदय, बांग्लादेश युद्ध हुआ, उसके बाद बांग्लादेश टैक्स लिया गया, हम सबको याद है कि बांग्लादेश टैक्स लिया गया । इतनी बड़ी महामारी कोरोना आई, क्या कोरोना टैक्स देश में लगा? इकोनॉमी ट्रैक पर सबसे पहले ऊपर उठने वाला कोई देश है तो भारत है । भारत की इकोनॉमी ने देश और दुनिया को दिखा दिया कि प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हम कैसे आगे बढ़ रहे हैं । … (व्यवधान)
माननीय सभापति:आपका एक मिनट खत्म हुआ, अभी समाप्त कीजिए । दस बजेहाऊस की कार्यवाही समाप्त होगी । …( व्यवधान)
श्री संजय सेठ : सभापति महोदय, अभी समाप्त करता हॅूं ।
महोदय, कोरोना काल में जन-धन खाते में पांच-पांच सौ रुपये, तीन महीने तक गैस सिलेंडर मुफ्त में, ‘हर घर जल’ के तहत छह करोड़ ग्रामीणों को पानी उपलब्ध कराना ।… (व्यवधान)
माननीय सभापति:कृपया अब आप समाप्त कीजिए।
श्री उत्तम कुमार रेड्डी जी बोलिए ।
… ( व्यवधान)
श्री संजय सेठ : महोदय, मैं आपके माध्यम से, सदन के माध्यम से यह कहना चाहता हूं कि पिछले एक साल से जी.एस.टी. कलेक्शन एक लाख करोड़ रुपये है।… (व्यवधान)
SHRI UTTAM KUMAR REDDY (NALGONDA): Hon. Chairperson, Sir, thank you for giving me an opportunity to speak on the Motion of Thanks to the President’s Address. I wish to request you to kindly give me as much time as you gave him … (Interruptions)
माननीय सभापति : दस बजे हाउस की कार्यवाही समाप्त होगी । आप बोलिए, आपका रिकॉर्ड में जाएगा।
… ( व्यवधान)
SHRI UTTAM KUMAR REDDY (NALGONDA): Sir, I must tell you, as a former Air Force fighter pilot who flew at Indo-China borders, I am deeply disappointed with the Address of the hon. President of India about his not mentioning the national security scenario as prevailing now. Today, undoubtedly India is in a grim security scenario – from Pakistan, from China, from Nepal, from Bangladesh, from Sri Lanka, we are facing a hostile environment. It is very unfortunate and very painful. As an Ex-Serviceman I am disappointed at the way the hon. President of India did not even mention this issue.
Sir, on the security scenario front, in the Indo-China border, Colonel Santosh Babu who was martyred on 15th June, 2020 belongs to my parliamentary constituency. I went to attend his last rites. I looked after his family. Today, through you, I would like to request the Central Government that a National Martyrs Memorial and a National Martyrs Museum should be started in the native place of Colonel Santosh Babu, who was decorated with Mahavir Chakra and was martyred in a conflict with the Chinese soldiers in the Galwan Valley. The Modi Government has failed. I would like to tell my earlier speaker that the Chinese have entered the Indian territory. Unfortunately, the Government does not accept the truth. Colonel Santosh Babu was martyred along with soldiers of the Bihar Regiment in the Galwan Valley. Did he go into the Chinese territory? Or, the Chinese came into the Indian territory? How did this take place? The Modi Government has failed in defending the Indian borders.
Sir, the Chinese Government is building permanent cemented structures. The Chinese Government is building helipads and surface-to-air missile sites. The Chinese Government is building villages in disputed areas. The Chinese Government is naming places in Arunachal Pradesh in Chinese language in their maps. The Chinese troops have not gone back from the Indo-Tibetan border and they are building permanent structures. The Chinese are building bridges on the Pangong Lake. I think, the security scenario on the Indo-China border is grim. The hon. Prime Minister must address this issue when he replies to the debate on the Motion of Thanks on the President’s Address in the House.
Sir, the hon. President spoke about agriculture and farmers’ issue. Through you I would like to bring to the notice of the Government that what he mentioned in his Address is very surprising because in the Budget, in speech the hon. Finance Minister said that 1208 lakh MT have been procured this year and last year 1283 lakh MT were procured. That means the procurement is lesser this year.
I would like to bring one more thing to your notice. In Telangana, during the Kharif season, the farmers were crying and the farmers were committing suicide. Owing to the incompetence of the Central and the State Governments, a number of farmers lost their lives. The Central Government had declared an MSP of Rs. 1960 per quintal but neither the Centre nor the State ensured it. The farmers were compelled to sell their paddy at Rs. 1400 and Rs. 1500 in my parliamentary constituency also.
Sir, from 2016 to 2019, every year, the hon. President of India spoke about doubling of farmers’ income in his Address, except this year, a year in which the Government is supposed to have ensured the doubling of farmers’ income. From 2016 to 2021, the hon. President in his Address mentioned about doubling of farmers’ income, except this year which is a target year.
22.00 hrs Sir, please give me two minutes to complete my speech. You have given a lot of time to the Member who spoke earlier.
Regarding legal guarantee for MSP, today the farmers are not believing this Prime Minister or his Government. Why is the Government going back on giving a legal guarantee? On 9th December of last year, this Government assured that they would form a Committee for MSP. Two months have passed but no Committee has been formed.
Also, the President has mentioned about Agriculture Infrastructure Fund and Rs. 1 lakh crore have been allotted for it. After one and a half years of the formation of Agriculture Infrastructure Fund, only Rs. 2000 crore or only two per cent have been spent out of that Rs. 1 lakh crore. This is the sincerity of the Modi Government towards agriculture.
Regarding tenant farmers, there are five crore tenant farmers in this country. They are not getting benefits from the PM Kisan Yojana, they do not get crop loans and they have no crop insurance. The Government must address this issue.
Sir, through you, I wish to bring to the notice of the Government that there was a grand announcement of PM Garib Kalyan Yojana.
22.01 hrs (Hon. Speaker in the Chair) Sir, as a responsible Member of Parliament, I want to bring to the notice of the Central Government that the rice being supplied in Telangana under PM Garib Kalyan Yojana is not edible for consumption.
माननीय अध्यक्ष: समय समाप्त ।
अब सदन का समय शून्य काल में लिस्टेड सदस्यों तक बढ़ाया जाता है, जिनका नाम लिस्ट में है।
… ( व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष: वनली फाइव मिनट, थ्री मिनट, टू मिनट, इस प्रकार से समय बढ़ाने का आपका अधिकार नहीं है । हमने डिसाइड किया है कि आप एक मिनट में अपनी बात खत्म कर दें।
SHRI UTTAM KUMAR REDDY : The ration rice being supplied in Telangana is not edible for consumption. The Central Government must look into it.
Sir, through you, I wish to appeal to the Government on one point. The President spoke about the Constitution. The tribals are supposed to get reservation as per their population percentage. The Telangana Assembly has passed a unanimous resolution recommending to the Government of India to make a reservation of 12 per cent for tribals in Telangana. It is pending with the Government of India. Through you, I appeal to the Government to give 12 per cent reservation for tribals in Telangana.
Sir, the President spoke about health infrastructure. An All-India Institute of Medical Sciences was sanctioned for Telangana in 2018 and Rs. 1000 crore were sanctioned for it. The hon. Minister, in his reply, said that only Rs. 20 crore have been spent so far. I would request that the construction of AIIMS in Telangana may be completed quickly.
Sir, finally, the President spoke about Atma Nirbhar and Make In India for defence expenditure. I wish to question the Government on this issue. I have flown fighter aircraft in the Indian Air Force. Why has Rafale aircraft manufacturing not being given to HAL? The Prime Minister must reply to this question. Thank you, Sir.
*श्री शंकर लालवानी (इन्दौर): सशक्त भारत का निर्माण और देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए यशस्वी प्रधानमंत्री मोदी जी की सरकार काम कर रही है ।
करोना काल में एक साल से भी कम समय में 150 करोड़ से भी ज्यादा वैक्सीन डोज लगाने का रिकार्ड पार किया आज हम पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा वैक्सीन डोज देने वाले अग्रणी देशों में एक है ।
सरकार द्वारा64 हजार करोड़ रुपये से शुरू किया गया प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत हेल्थ मेडिकल सुविधा मिली है ।
80 हजार से अधिक हेल्थ सेंटरस और करोड़ों की संख्या आयुष्मान कार्ड से गरीबों को इलाज में बहुत मदद मिली है । सरकार ने 8000 से अधिक जन-औषधि केन्द्रों के माध्यम से कम कीमत पर दवाइयां उपलब्ध कराकर इलाज पर होने वाले खर्च को कम किया है ।
वर्तमान समय में भारतीय फार्मा कम्पनियों के उत्पाद180 से ज्यादा देशों में पहुंच रहे है । वर्ष 2014 तक देश से 6600 करोड़ रुपये का निर्यात होता था । जो आज बढ़कर11 हजार करोड़ रुपये से अधिक हो गया है ।
कोई गरीब भूखा ना रहे । प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के अंतर्गत सरकार सभी गरीबों को हर महीने मुफ्त अनाज दे रही है । 80 करोड़ लाभार्थियों को 19 महीनों से खाद्यान्न वितरित करने हेतु 2 लाख60 हजार करोड़ रुपये के खर्च के साथ भारत में आज दुनिया का सबसे बड़ा फूड डिस्ट्रीब्यूशन प्रोग्राम चलाया जा रहा हैं ।
गरीब के स्वाभिमान और उसके रोजगार की रक्षा के लिये सरकार प्रधानमंत्री- स्वनिधि योजना भी चला रही है । यह योजना हमारे रेहड़ी-पटरी वालों के लिये बहुत सहायक सिघ्द हो रही है । इस योजना के तहत रेहड़ी पटरी वालों को29 सौ करोड़ रूपये से ज्यादा की धनराशि जारी की गई है ।
जन धन योजना में 44 करोड़ से अधिक गरीब देश वासियों के बैंकिंग सिस्टम से जुड़ने के कारण महामारी के दौरान करोड़ों लाभार्थियों को सीधे केश ट्रांसफर का लाभ मिला है । 2021 में देश में8 लाख करोड़ रूपये से ज्यादा का लेनदेन डिजिटल माध्यम से हुआ है । प्रधान मंत्री आवास योजना में अब तक दो करोड़ से अधिक पक्के घर गरीबों को मिल चुके हैं ।
हर घर जल पहुंचाने के उदेश्य से जल जीवन मिशन -करीब6 करोड़ ग्रामीण घरों को पेयजल के कनेक्शन से जोड़ा गया है । इसका बहुत बड़ा लाभ हमारे गांव की महिलाओं बहन बेटियों को हुआ है ।
महामारी के बावजूद साल2020-21 में हमारे किसानों ने अधिक खाद्य उत्पादों की पैदावार की । वर्ष 2020-21 में कृषि निर्यात में25 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई ।
सरकार ने किसान रेल सेवा शुरू करते हुए किसानों के लिये खुशहाली के नये रास्ते खोलने का काम किया है । 1900 से ज्यादा किसान रेल चलाई ।
प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत विभिन्न परियोजनाओं की मदद से 64 लाख हेक्टेयर सिंचाई क्षमता विकसित की गई है । नदियों को आपस में जोड़ने की योजनाओं पर भी काम आगे बढ़ाया है । यह हर्ष की बात है कि मौजूदा सभी 33 सैनिक स्कूलों ने बालिकाओं को प्रवेश देना शुरू कर दिया हैं ।
स्टार्ट-अप ईका-सिस्टम, 60 हजार नए start up लगे है जिससे6 लाख से अधिक रोजगार पैदा हुए है । कोरोना काल में भारत मे 40 से अधिक यूनिकार्नstart up अस्तित्व में आए । जिनमें से प्रत्येक का मूल्य 7400 करोड़ रूपये से अधिक है ।
भारत में इंटरनेट की कीमत सबसे कम है तथा स्मार्ट फोन की कीमत भी सबसे कम है । भारत एक बार फिर विश्व की सर्वाधिक तेजी से विकसित हो रही अर्थव्यवस्थाओं में से एक बन गया है । देश में जी एस टी कनेक्शन पिछले कई महीनों से निरन्तर एक लाख करोड़ से ज्यादा बना हुआ है । इस वित वर्ष में 48 बिलियन डालर का विदेशी निवेश हुआ । भारत का विदेशी मुद्रा भण्डार भी इस समय630 बिलियन डालर से ऊपर है ।
हमारा निर्यात भी तेजी से बढ़ रहा है और पिछले रिर्काड टूट रहे है । 2021 में अप्रैल से दिसम्बर के दौरान भारत का गूडस निर्यात लगभग300 बिलियन डालर यानि 22 लाख करोड़ रूपये से अधिक रहा है जो कि 2020 की अवधि की तुलना में डेढ़ गुना ज्यादा है ।
आज भारत विश्व में दूसरा बड़ा मोबाईल फोन निर्माता बनकर उभरा है । इससे भारत के लाखों युवाओं को रोजगार भी मिला है । हमारा देश इलेक्ट्रानिक टेक्नालाजी हार्डवेयर के क्षेत्र में ग्लोबल लीडर बने इसके लिये सरकार ने हाल ही में 76,000 करोड़ रूपये का पैकेज घोषित किया है ।
करोना काल में MSME को संकट से बचाने कराने के लिये सरकार ने3 लाख करोड रूपये के लोन की व्यवस्था की । इस योजना की सहायता से साढ़े13 लाख एम एस एम ई यूनिटस को जीवन दान दिया गया । ढेड करोड रोजगार भी सुरक्षित हुए । जून 2021 में सरकार 3 लाख करोड़ रूपये की गारन्टी को बढ़ाकर साढ़े चार लाख करोड़ कर चुकी है ।
मल्टी मॉडल ट्रांसपोर्ट को प्रधानमंत्री गति योजना के रूप में एक साथ जोड़ा है । भविष्य के भारत में रेलवेज, हाईवेज और एयरवेज अलग अलग इन्फ्रस्ट्रक्चर नहीं होंगे बल्कि एकजुट होकर काम करेंगे ।
ग्राम सड़क योजना की उपलब्धता गर्व करने योग्य है । वर्ष 2020-21 में ग्रामीण इलाकों में 100 किलोमीटर प्रतिदिन की गति से 36 हजार 500 किलोमीटर सडके बनाई गई है और हजारों ग्रामीण क्षेत्रों को जोड़ा गया है ।
आज देश के नेशनल हाईवेज भी पूरब से पश्चिम और उत्तर से दक्षिण पूरे देश को एक साथ जोड़ रहे है । मार्च 2014 में हमारे देश में राष्ट्रीय राजमार्गों की कुल लम्बाई90 हजार किलोमीटर थी, जबकि आज उनकी लम्बाई बढ़कर एक लाख चालीस हजार से अधिक हो गई है । भारत माला परियोजना के अंतर्गतलगभग 6 लाख करोड़ की लागत से 20,000 किलोमीटर से अधिक लम्बाई के राजमार्गों का निर्माण किया जा रहा है ।
बीते सात वर्षों में 24 हजार किलोमीटर रेलवे रूट का विद्युतीकरण हुआ है । नई रेलवे लाईन बिछाने और दोहरीकरण का काम भी तेज गति से जारी है । सैन्य बलों के आधुनिकीकरण के लिये जो भी मंजूरी दी गई हैं उनमें 87 प्रतिशत उत्पादों में मेक इन इंडिया को प्राथमिकता दी गई है । सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास के मंत्र पर सरकार कार्य कर रही है ।