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Title: Regarding the detriorating condition of internal security in the country especially the recent killings in North East and Jammu and Kashmir and the steps taken by the government in regard thereto. 

Shri L.K. Advani">SHRI RAJESH PILOT (DAUSA): Sir, I call the attention of the Minister of Home Affairs to the following matter of urgent public importance and request that he may make a statement thereon:

"The deteriorating condition of internal security in the country especially the recent killings in North East and Jammu and Kashmir and the steps taken by the Government in regard thereto."

>THE MINISTER OF HOME AFFAIRS (SHRI L.K. ADVANI): Sir, the overall security situation in the country has not deteriorated. However, the areas of concern are Pak-guided insurgency in Jammu and Kashmir, the subversive activities of militant groups in the North East and the violence perpetrated by the Left Wing extremist groups...(Interruptions)

DR. T. SUBBARAMI REDDY (VISAKHAPATNAM): Sir, what about Andhra Pradesh?

SHRI L.K. ADVANI: I have included that. Some positive results are discernible in Jammu and Kashmir. The number of violent incidents in the State is on the decline. There have also been a large number of arrests and recovery of weapons and explosives. An Action Plan involving, inter alia, measures to curb infiltration, counter-militancy in the hinterland, protection of minorities, enhanced intelligence capabilities, greater functional integration and coordination amongst security forces, greater interaction with border population and technological upgradation of security forces has been launched to tackle militancy. These efforts are coordinated and overseen by the two Unified Headquarters at Jammu and Srinagar which are headed by the Chief Minister. Periodic reviews are also carried out at the State Government and Central Government levels. Support from Pakistan for the terrorists/foreign mercenaries, however, continues undiminished.

It is there. He says that the number of civilians killed in Tripura during 1998 is 200 as against 205 during 1997.

1312 hours (Mr. Deputy-Speaker in the Chair) The situation has so improved that the number of deaths has come down by 5. It is there in the statement of yours. It is your statement - the number of civilians killed in Tripura during 1998 is 200 as against 205 during 1997.

SHRI L.K. ADVANI: I have not called it improvement. ... (Interruptions)

SHRI RAJESH PILOT : I am just telling the perception. परसेप्शन देश में इन फिगर्स से नहीं होता कि २०० या २०५ मरे हैं। इस फिगर्स पर क़ेडबलिटी फाइल में तो ले सकते हैं लेकिन हम और आप नुमांइदे लेकर ... (व्यवधान)

SHRI L.K. ADVANI: Statement also says that though there has been an increase in incidents of violence in Assam and Tripura...

SHRI RAJESH PILOT : I agree. But this is also there in your statement. ... (Interruptions)

SHRI L.K. ADVANI: I have given the figures. But, I have not called it improvement.

श्री राजेश पायलट : उपाध्यक्ष महोदय, आज देश में जो परसेप्शन है, वह यह है कि एकटीविटीज बढ़ी हैं। आप इसको फिगर से माने या न माने लेकिन आम आदमी से पूछे तो आंतरिक सुरक्षा के बारे में हरेक के मन में एक शक खड़ा हो गया है कि आखिर हमारी आंतरिक सुरक्षा है या नहीं है। अगर ग्ृाह मंत्री जी को याद हो, तो सरकार में कोशिश की गई थी-हमारे दोनों बॉर्डर, मैं समझता हूं कि तकलीफ है। मैं नहीं समझता कि इतना आसान काम है कि सारी चीजें एक दिन में ठीक हो सकती हैं और सारी चीजें एक दिन में ठीक हों। जो भी सरकार आती हैं, उसके सामने तकलीफ होती हैं चाहे हम हों या आप हों लेकिन जो प्रयास सरकार की तरफ से दिखना चाहिए, वह नहीं दिख रहा है। इसलिए आज हम कालिंग अटैंशन आपके सामने लेकर आये हैं। दोनों बॉर्डर चाहे नेपाल का बॉर्डर हो चाहे बंगलादेश का बॉर्डर हो, एक ट्रीटी पर दस्तख्स्त किये गये थे कि ये बॉर्डर हमें सबसे ज्यादा नुकसान दे रहे हैं। नेपाल का बॉर्डर इतना खुला हुआ है कि अगर पाकिस्तान के किसी मलिटैंट को आना हो तो वह कश्मीर के रास्ते से न आकर नेपाल के थ्रू जाना पसंद करेगा। इस बारे में हमारी नेपाल गवर्नमैंट से भी कई बार बात हुई है। उन्होंने प्लान बनाया था लेकिन मुझे उसका पूरा ज्ञान नहीं है कि वह कहां तक सफल हुआ है। आज भी नेपाल का बॉर्डर काफी खुला है। वहां न तो मैनपावर है और जो तारबंदी की बात हुई थी, वह भी नहीं हो पाई है। जहां तक बंगलादेश का बॉर्डर है, इसके बारे में कई बार सरकार के लैवल पर बातचीत हुई है और हमारी जो पैरामलिट्री फोर्स की मीटिंग होती हैं, उसमें भी बातचीत चलती थी। बंगलादेश होकर जितनी भी एम्युनीशन आती है, चाहे आर.डी.एकस. हो, चाहे आई.डीज़. हों, ये सब उसी रूट से आती हैं, जो बंगलादेश के सी शोर से लेकर त्रिपुरा और मिजोरम होते हुए नागालौंड, मणिपुर तक पहुंचती हैं। इस ट्रैक पर आर्मी वालों ने दो बार बहुत अच्छा काम किया, जिसमें १००-१२५ मलिटेंटस पकड़े गये थे। उसके बाद हमने बंगलादेश सरकार से बहुत सख्ती से इस बात को कहा। वहां पर काकस बाजार एक सी पोर्ट है, जहां से इनकी सारी सप्लाई होती है। बंगलादेश सरकार से यह बातचीत चल रही थी कि काकस बाजार से जितनी सप्लाई मिजोरम और अगरतला ट्रैक पर जाती है, उस पर सरकार रोक लगाएगी। मुझे पता नहीं कि उस संधि के हिसाब से आज काम हो रहा है या नहीं हो रहा है, लेकिन यह सच्चाई है। आज एन.एस.सी.एऩ.आई. और गवर्नमेंट के बीच में सीज़ फायर है, नागालैंड मलिटेंटस आर्गेनाइजेशन में सीज़ फायर चल रहा है, लेकिन आज भी एम्युनीशन आ रहा है। बल्िक मुझे तो यह खबर है कि ज्यादा आ रहा है, सीज़ फायर से पहले जितने चैक मेट थे, कयोंकि आर्मी सोचती है कि उन्होंने सीज़ फायर कर ली है, The Army does not feel responsible for that and if the Army takes strong action, then the cease-fire gets violated. आज एम्युनीशन और ज्यादा मात्रा में इसी ट्रैक से आकर दोनों प्रदेशों में आ रहा है और मैं नहीं समझता, मुझे ज्ञान नहीं है कि उसमें कितनी प्रोग्रैस हुई है और कया सरकार की तरफ से उसमें प्रतिबन्ध लगे हैं कि हमारा वह ट्रैक आइसोलेट हो। जब तक वह ट्रैक आइसोलेट नहीं होगा, पूरे का पूरा नोर्थ ईस्ट का हमारा उसी तरीके से चलता रहेगा। माननीय मंत्री जी ने खुद माना है कि चाहे आन्ध्र प्रदेश की बात हो, चाहे बिहार की बात हो, उन्होंने कहा है कि नकसलाइट मूवमेंट और एकसट्रीमिस्टस ने यहां कुछ हरारतें की हैं और वहां पर हालात बिगड़े हैं। माननीय मंत्री जी ने इंटरनल सिकयोरिटी को एक साउंड पोजीशन में बताया है, मेरी दो ही बातें माननीय मंत्री जी से हैं, यह बात सच्ची है कि यह बहुत बड़ा काम है, बहुत कठिन काम है और इसके लिए सबसे बड़ी बात कया हो रही है कि हमारा जो सिस्टम है, इंस्टीटयूशंस हैं, उनमें कुछ कमजोरी आई। कमजोरी कयों आई, एक तो हमारे कोआर्डीनेशन में कमी रहती थी, हमारी इंस्टीटयूशंस में आपस में कोआर्डीनेशन नहीं होता था। हम लोगों ने एक प्रयास किया था कि इंटेलीजेंस ब्यूरो, एजेंसीज़ और स्टेट के जो चैनल्स हैं, ये ज्यादा से ज्यादा कोआर्डीनेट करें। इनके जो चैनल्स बनाये थे, उन चैनल्स से खबर आती थी, जिस पर तीनों आपस में बैठकर बात करते थे और आई.बी. से कोआर्डीनेशन की इतनी कोशिश की थी, मैं मानता हूं कि उस वकत पूरी न चली हो, लेकिन एक कोशिश की गई थी कि आई.बी. के चैनल्स इतने अप-टू-डेट रहें, सारे सोर्स से डिस्टि्रकट लेवल से लेकर स्टेट लेवल और नेशनल लेवल तक एक स्कीम बनाई थी, माननीय मंत्री जी को पता होगा, वह स्कीम अभी लागू है या नहीं है, कयोंकि हम यह महसूस करते थे कि कश्मीर से जोइनिंग जितने भी नोर्दर्न स्टेटस हैं, इनमें भी अन्दरूनी सिकयोरिटी पर इसका डायरैकट इम्पैकट पड़ता है, मलिटेंसी का डायरैकट इफैकट पड़ता है। जो एक जोनल कोआर्डीनेशन बनाया था, मुझे पता नहीं कि वह फंकशन कर रहे हैं या नहीं कर रहे हैं, लेकिन आई.बी. की तरफ से इसमें इतनी सपोर्ट मिली थी कि कश्मीर में जोनल मीटिंग्स की वजह से अच्छा कोआर्डीनेशन मीटिंग्स की वजह से एक इम्प्रूवमेंट आया था। मुझे आज पता नहीं कि वे सिस्टम्स काम कर रहे हैं या नहीं कर रहे हैं, वह माननीय मंत्री जी बता सकेंगे। जहां तक आई.बी. की और इन्फोर्मेशन की बात है, कल मैं एशियन एज में पढ़ रहा था, उसमें किसी ऐसे मलिटेंट का फोटो छपा है, जिसको ढूंढने के लिए डेढ़ दो साल से सारी एजेंसीज़ कोशिश कर रही हैं। उसका फोटो छप गया, लेकिन अब तक उसकी इन्फोर्मेशन नहीं ले पाये हैं कि वह मलिटेंट वाकई कहां है और किस जगह पर है।