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MADAM SPEAKER: Please let us have order in the House.
श्री मनीष तिवारी : मैं माननीय आडवाणी जी की राय से बिल्कुल इत्तफाक रखता हूं कि जो सामान्तर अर्थव्यवस्था है। what we call as a shadow economy or a parallel economy, it saps the vitality of the nation.  It denies legitimate revenue which should go to the Government.  It corrupts the electoral system and most importantly, आडवाणी जी ने यह बात बिल्कुल सही कही कि टैक्स इवेजन ऑफ प्रोसिड्स और क्राइम में फर्क है। इसलिएI will endeavour to divide my presentation into three parts. First, I will try and apprise this august Assembly the nature, an extent and the magnitude of the problem. What is the nature of the beast that we are dealing with.
        दूसरा, सरकार ने इस काले धन को बाहर निकालने के लिए पहल की है और तीसरा, जो कुछ मुद्दे आडवाणी जी ने उठाये हैं और जो सार्वजनिक चर्चा में कई दिनों से आ रहे हैं, उनका जवाब देने की मैं चेष्टा करूंगा। यह जो काले धन का मामला है, इसके दो पहलू हैं। एक आंतरिक  पहलू है और बाहर  का पहलू है यानी एक्सटर्नल डायमैंशन है, जिसके ऊपर आज यह काम रोको प्रस्ताव लाया गया है। जो आंतरिक पहलू है, वह भी उतनी ही जरूरी है जितना कि एक्सटर्नल डायमैंशन। आज यह अनुमान लगाया जाता है कि भारत की जो अर्थव्यवस्था है, जीडीपी है, वह दो ट्रिलियन डालर है। सरकारी आंकड़े तो अभी मौजूद नहीं हैं, लेकिन विशेषज्ञों का यह मानना है कि भारत में जो सामान्तर अर्थव्यवस्था है, जो पैरलल इकोनॉमी है, वह शायद लगभग एक ट्रिलियन डालर है। आज भारत की जनसंख्या 121 करोड़ है। उसमें से 65 प्रतिशत लोग खेती-बाड़ी से संबंधित हैं। They are excluded from the tax net under Section 10 of the Income Tax Act. उसके बावजूद इस देश में 42 करोड़ ऐसे लोग हैं, जिनको कर देना चाहिए। अगर उसमें से हम 12 करोड़ ऐसे लोगों को निकाल दें, जो बुजुर्ग हैं या ऐसे व्यवसाय में लगे हैं कि उनमें कर देने की क्षमता नहीं है, तो 30 करोड़ ऐसे लोग हैं, जिनसे इस देश में कर वसलूना चाहिए। लेकिन इस मुल्क में कितने कर उपभोक्ता हैं? 64 साल बाद 3 करोड़ 35 लाख सिर्फ कर उपभोक्ता हैं। मैं ये आंकड़े सिर्फ इसलिए इस सदन के समक्ष रख रहा हूं कि हर साल 30 करोड़ ऐसे व्यक्ति हैं जिनकी इनकम टैक्स नेट से बाहर जाती है and this gives us an idea of the kind of internal parallel economy, the kind of internal black money which is generated annually in this country.

          यहां पर कई किस्म के आंकड़े रखे गए कि भारत का कितना धन विदेशी बैंकों में जमा है। भारतीय जनता पार्टी की जो टास्क फोर्स है, वह कहती है कि 25 लाख करोड़ रुपए से 70 लाख करोड़ रुपए तक है। ग्लोबल फाइनेंशियल इंटेग्रिटी संस्था का जिक्र किया गया। वह कहती है कि 213 बिलियन यूएस डालर्स है, जो आज की कीमत में 462 बिलियन यूएस डालर्स होगा। लेकिन अभी तक किसी को अनुमान नहीं है कि कितना धन भारत का विदेशी बैंकों में जमा है। इसलिए यूपीए सरकार ने पहल की और मार्च 2011 में इसकी जांच करने के लिए एक स्टडी कमीशंड किया, जो यह पता करे कि भारत के अंदर और बाहर कितना ऐसा कालाधन है, कितनी बड़ी यह समानांतर अर्थव्यवस्था है, जिससे पता लग सके। उसके बाद कदम उठाए जा सकें, उसे वापस लाया जाए। ऐसा नहीं है कि पहली बार इस तरह की स्टडी की गई हो। सन् 1985 में जब कांग्रेस पार्टी की सरकार थी, जिसने नेशनल इंस्टीटय़ूट आफ पब्लिक पालिसी फाइनेंस को कमीशन किया था स्टडी करने के लिए कि इस देश में कितना कालाधन है। उस समय उसकी रिपोर्ट थी कि 36,786 करोड़ रुपए and that 16.5 per cent of the Indian GDP is the extent of our parallel economy.   इसीलिए वर्ष 2009 के बाद जब एक अंतर्राष्ट्रीय आम सहमति बनी, when there was a consensus that we need to deal with these tax havens, we need to break the walls of secrecy, the UPA had put in place a five-pronged strategy to deal with the menace of black money. What did that strategy consist of? It consisted of a legislative framework and upgradation of implementation systems.   ऐसे लोगों को ट्रेंड करना जो काले धन का पता लगा सकें, ऐसी संस्थाएं बनाना, जो इनके खिलाफ लडाई लड़ सकें और सबसे जरूरी जो एक अंतर्राष्ट्रीय आम सहमति बन रही है, उसका नेतृत्व करना जिससे कि काला धन वापस आ सकता है। पिछले ढाई साल में ये जो सारे कदम उठाए गये हैं। The steps which have been taken by the UPA have yielded results. अपडेट किये गये हैं और जो नटोरिएस टैक्स हैवन्स हैं, भामास, बरमूडा, ब्रिटिश वर्जिन आईलैंड्स, आईल ऑफ मैन, कैमन आईलैंड्स, जर्जी, मॉनेको, सेंट-कीट्स, नवास, मार्शल आई लैंड्स, ऐसे जो टैक्स हैवन्स हैं, इनके साथ टैक्स इन्फोर्मेशन एक्सचेंज एग्रीमेंट के ऊपर हस्ताक्षर किये गये हैं। उसके तहत 333 दरख्वास्ते इन मुल्कों को भेजी गयी हैं कि हां, आपके देश में ऐसे भारतीय नागरिक हैं, जिनके खाते हैं, उनके बारे में आप जानकारी दीजिए।  कई देशों में से इंफोर्मेशन सोर्स की गयी है, ऐसे खातों के बारे में। इस सबका नतीजा क्या है Rs. 34,145 crore worth of mis-pricing has been detected. अब यह मिस-प्राइसिंग क्या चीज है, सभापति महोदय। एक समय था, आडवाणी जी ठीक कह रहे थे 9/11 से पहले जबकि अंतर्राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में ब्लैक-मनी थी जो हवाला के माध्यम से जाया करती थी। लेकिन जैसे-जैसे बैंकिंग-लॉ सख्त होते गये ट्रंसफर-प्राइसिंग के माध्यम से, ओवर-इन्वोएसिंग के माध्यम से, अंडर-इन्वोएसिंग के माध्यम से पैसा अंदर-बाहर लाया जाता है और इसीलिए सरकार ने कड़ाई करके 34,145 करोड़ रुपया जो इस तरह से मिस-प्राइस किया गया था उसे ट्रेस किया है।  18,750 करोड़ रुपये की जो कंसील्ड इन्कम है, उसे बाहर निकाला गया है और उसमें से 3 हजार करोड़ रुपया ऐसा है जो पिछले 6 महीने में सरकार ने सर्चिज करके, सीजर करके डिटेक्ट किया है। जहां तक विदेशी बैंकों से सूचना की बात है, फ्रांस ने 70 लोगों की सूचना दी और उन 70 लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गयी तथा 400 करोड़ रुपये से अधिक का कर वसूल किया गया और उनके ऊपर फौजदारी की कार्रवाई जारी है। ...( व्यवधान)

                                                                                                             

SHRI PRABODH PANDA (MIDNAPORE): Mr. Chairman, thank you. At the very outset I must thank the revered leader, Shri L.K. Advani for bringing this matter for discussion in this House through the Adjournment Motion.  I support the Motion.

          The menace of black money has now reached such a staggering proportion that it is causing havoc to the economy of our country and it poses a serious threat. This is not only the question of illegal and unaccounted money deposited or stashed away abroad or deposited in foreign banks or in any tax havens, but it is also the question of black money generated internally. It was told earlier that black money is a parallel economy. But the present situation is that it is not a parallel economy.  In fact, it is a dominating factor in our Indian economy.