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Showing contexts for: L.K..ADVANI in Further Discussion On The Statement Made By The Prime Minister In The House On 27Th ... on 28 May, 1998Matching Fragments
THE MINISTER OF HOME AFFAIRS (SHRI L.K. ADVANI): If anyone from the Government Benches has described an hon. Member of this House as ........I apologise for it apart from the fact that you may expunge it. श्री मुलायम सिंह यादव : सभापति महोदय, मैं इसलिए कह रहा था कयोंकि जार्ज साहब ने कहा कि मैंने विस्फोट इसलिए किया कि अभी कुछ नहीं हुआ है। इसलिए हमने कुछ बातें कहीं कि या तो उनको ब्रीफ गलत किया गया है या उन्होंने पत्रावलियां नहीं पढ़ी हैं, इसलिए मैं गोपनीयता को भंग नहीं करना चाहता। हमने जो कुछ किया है, उनको जार्ज साहब से कहेंगे। उनको बतलायेंगे और अगर उनको गलत ब्रीफ किया है तो उनको स्वीकार कराएंगे कि हमने कुछ नहीं किया है। इसीलिए हमने इन बातों को कहना चाहा। इसके अलावा मेरी और कोई मंशा नहीं थी। यह कया साबित करता है। परमाणु टैस्ट की आड़ में देश के साथ एक और छल किया जा रहा है। कया कारण थे कि आपने परीक्षण के ३-४ दिन के अंदर अमरीका एवं जापानी कम्पनियों को बिजली योजनाओं के लिए सरकारी गांरटी मंजूर की। हम पूछना चाहते हैं कि इसके पीछे कया मंशा है। आपने तेल उत्पादन के लिए १८ ब्लॉक विदेशी कम्पनियों को मंजूर किए। इसी तरह २८ विदेशी कम्पनियों को देश के ५०,००० वर्ग किलोमीटर भाग पर खान का लाईसैंस दिया। जब विस्फोट करके जमीन का टैस्ट किया जाएगा तो विदेशी कम्पनियां हमारे देश की रक्षा की पूरी गोपनीयता लेंगी। यह देश के लिए बहुत बड़ा खतरा पैदा किया गया है। पता लगा लें कि कौन देशभकत है, कौन देशद्रोही है। विदेशी कम्पनियां विस्फोट के बहाने कया-कया करेंगी। इससे हमारे देश की रक्षा को सबसे ज्यादा खतरा पैदा हुआ है। यह कयों किया है, कया यही है स्वदेशी आंदोलन। ... (व्यवधान) ५०,००० वर्ग किलोमीटर हिन्दुस्तान की जमीन परीक्षण के चार दिन के अंदर दी है और नारा देते हैं स्वदेशी का, देश को बहकाते हैं स्वदेशी के नाम से। इसलिए हम कहना चाहते हैं कि यह स्वदेशी का नारा नहीं है। राष्ट्र हित के साथ इतना बड़ा खिलवाड़ करना, इससे हमारे देश की रक्षा सारी गोपनीयता भंग हो जाएगी। यह तो स्वीकार करना पड़ेगा कि वही शकितशाली है जो आर्िथक दृष्िट से मजबूत है। हम फिर दोहराना चाहते हैं कि रक्षा के मामले में हमें अपनी शकित को मजबूत करना चाहिए जिससे दुनिया का कोई भी देश हमारे देश की तरफ बुरी निगाह से न देख सके। हमने सी.टी.बी.टी. पर दस्तखत करने से साफ मना कर दिया। रूस ने भी कहा, प्रधानमंत्री जी ने कह दिया था कि हम हस्ताक्षर नही करेगें, तो इससे यह साफ था कि हमारे पास ऐटम बम है। उसके साथ हमने कई बार कहा कि हम किसी पर हमला नहीं करेंगे। यदि कोई हमला करेगा तो दुश्मन की जमीन पर लड़ाई होगी। लेकिन यह कैसा काम किया कि पाकिस्तान और चीन के विषय में अमेरिका को चिट्ठी लिखकर चीन व पाक एक साथ खड़ा कर दिया। हमारी नीति ऐसी होनी चाहिए कि पड़ोसी देशों से अच्छे रिश्ते हों। लेकिन आपने चीन और पाकिस्तान दोनों से अच्छे रिश्तो को खत्म कर दिया। आज पूरब से पश्िचम तक पूरी सीमा पर अशांति है। चीन और पाकिस्तान को इकट्ठा करके हमारे देश की सुरक्षा के लिए सबसे बड़ी चुनौती पैदा की है। जब चीन के बारे में कहते हैं कि बड़े प्रयासों के बाद चीन से संबंध अच्छे हो रहे थे, कांग्रेस की सरकार ने, राजीव गांधी से लेकर श्री गुजराल तक सबने उससे अच्छे संबंध बनाए जिसका नतीजा यह निकला कि १९६५ व १९७१ की जब पाकिस्तान से लड़ाई हुई थी तो चीन खामोश देखता रहा, उसने भारत का विरोध नहीं किया और न ही एक शब्द बोला । आपने पाकिस्तान, बंगलादेश के टुकड़े-टुकड़े करवा दिए। हमारे बहादुर लड़े, ठीक काम किया, हमारी सेना लड़ी, इंदिरा जी लड़ीं । लेकिन इस बार आपने चुनौती देकर चीन का विरोध किया। बिजली, पानी की समस्या हमसे हल नहीं होती। अंग्रेजी हुकुमत में हमारा देश गुलाम था। हिन्दुस्तान में कई बार अकाल पड़ा लेकिन उसके बाद भी हिन्दुस्तान के किसानों ने कभी आत्महत्या नहीं की। आज हमारे किसानों की यह दशा है। कि उन्हें आत्महत्या करनीं पड़ रही है। आज हिन्दुस्तान को किसी से खतरा है तो उन आंतरिक शकितयां से जो मंदिर के नाम पर, हिन्दू-मुसलमान के नाम पर बातें करती हैं। मुरादाबाद में मुस्िलम बच्चो को (८ से १० साल के ) ३०२ का मुलज़िम बनाकर दंगा कराकर आपने जो किया है, उ.प्र. में टाडा में १४-१४ साल के सिख लड़कों को जेल में बंद किया था। है, जो हिन्दू, मुस्िलम, सिख, ईसाइयों की एकता को खंडित करने वाले हैं, उससे देश को सबसे बड़ा खतरा है। हमारी बहादुर सेना और हमारी बहादुर जनता एक होकर विदेशी शकित कितनी भी ताकतवर होगी, हमारा हिन्दुस्तान मुकाबला करेगा और दो टूक जवाब देगा और दुश्मन की धरती पर ही लड़ाई होगी और हम हिन्दुस्तान की धरती को लड़ाई का मैदान नहीं बनाना चाहते हैं, यह अमेरिका की साजिश है। आपकी नीतियों के कारण अगर लड़ाई का मैदान हिन्दुस्तान बनता है तो हमको तकलीफ होगी। अगर मजबूरी में लड़ाई का मैदान होता ही है तो लड़ाई का मैदान हिन्दुस्तान न बने, दुनिया का कोई और मुल्क बने, इस बात का हमें ध्यान रखने की जरूरत है। हम अपनी पारम्परिक शकित को बढ़ायें और उस शकित को मजबूत करें। इन्हीं शब्दों के साथ मैं आपको धन्यवाद देते हुए अपनी बात समाप्त करता हूं।
SHRI RAJESH PILOT : We still say and had been saying that we keep the options open. We have all along been saying that weaponisation would damage our foreign policy. ... (Interruptions)
SHRI NATWAR SINGH (BHARATPUR): Shri Advani, I am very glad that you have read this. What is wrong in it?
SHRI L.K. ADVANI: I do not see anything wrong in this.
I only say that there is a threat perception which you tried to deny to this Government. ... (Interruptions)
SHRI NATWAR SINGH : We expect you to do better. It is feeble.
SHRI L.K. ADVANI: You have done as badly as you can. I will try to do better.
Sir, this is in so far as the security environment is concerned. I said that I would have ordinarily not intervened in this debate and left it to the intervention by the Defence Minister and then the final reply by the Prime Minister.
In so far as the relations with other countries are concerned and in so far as external security is concerned, they are the concerns either of the External Affairs Minister or of the Defence Minister. But I do believe that in so far as relations with Pakistan are concerned, they impinge not only on our external security but also on our internal security; and as a person who has been entrusted with the responsibility of looking after internal security, I feel that I can contribute something to this debate.
SHRI P. CHIDAMBARAM (SIVAGANGA): As long as you were using the word `nuclear deterrent', I did not want to comment. But I want to read from Prime Minister's statement. I was surprised by this phrase. Paragraph 10 of the Prime Minister's statement says:
"We do not intend to use these weapons for aggression or for mounting threats against any country. These are weapons of self-defence."
I wanted to know what you meant by a nuclear weapon for self-defence. That is what I asked yesterday.
SHRI L.K. ADVANI : This is precisely what I would explain. Deterrence itself is defence. After all, when a country has a nuclear weapon, it uses that weapon even for diplomatic coercion. It has used it in the past. Countries have been doing it. We would not like to be subjected to that. It is in this context that the Prime Minister used the word `defence'. It is for us.