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Dushyant Nirmalkar vs State Of Chhattisgarh on 5 October, 2023

5. Considering the above submission made by counsel for the petitioner this writ petition is disposed of by directing respondents No.2, 3 and 4 to consider and decide the matter of the petitioner expeditiously preferably within 'two weeks' from today in accordance with rule, law and considering the judgment passed by this Hon'ble Court in Writ Petition (S) No.1532 of 2017 (Bharat Kumar Banjare Vs. State of Chhattisgarh & Others) and Writ Petition (S) No.5914 of 2014 (Manisha Agrawal Vs. State of Chhattisgarh & Others).
Chattisgarh High Court Cites 2 - Cited by 0 - Full Document

Aslam @ Ankush Madame vs State Of Chhattisgarh on 11 March, 2026

5. अपीलार्थीगण के विद्वान अधिवक्तागण का तर्क है कि घटना के दिन ही दर्ज कराई गई प्रथम सूचना पत्र में किसी भी अभियुक्त का नाम अंकित नहीं है । अपीलार्थीगण के विरुद्ध अभियोजन का मामला मुख्यतः उनके विरुद्ध कराई गई शिनाख़्त कार्यवाही पर आधारित है । इस संबंध में प्रदर्श पी-33 दिनांक 06/05/2023 को तथा प्रदर्श पी-4 दिनांक 20/05/2023 को आयोजित की गई, किं तु उक्त दोनों ही शिनाख़्त कार्यवाही के वल प्रार्थी रामस्वरूप देवांगन (अ.सा.-1) से ही कराई गई, शेष प्रार्थी या प्रत्यक्ष साक्षियों से नहीं करायी गयी । शिनाख़्त कार्यवाही में न तो पर्याप्त संख्या में समान प्रकृ ति के अन्य व्यक्तियों को सम्मिलित किया गया और न ही प्रत्येक अभियुक्त की शिनाख़्त पृथक-पृथक एवं विधि सम्मत ढंग से कराई गई । इसके अतिरिक्त यह तथ्य भी स्वयं शिनाख़्तकर्ता प्रार्थी रामस्वरूप देवांगन (अ.सा.-1) ने स्वीकार किया है कि अभियुक्तों को उसे, शिनाख़्त कार्यवाही से पूर्व ही दिखा दिया गया था । ऐसी परिस्थिति में उक्त शिनाख़्त कार्यवाही की निष्पक्षता एवं विश्वसनीयता संदेहास्पद हो गयी है । इस संदर्भ में इस न्यायालय द्वारा प्रतिपादित न्यायदृष्टांत Pramod v. State of Chhattisgarh with other connected matters, 2024 SCC OnLine Chh 3080 का हवाला दिया है जिसके अनुसार यदि 8 / 24 (Cr. A. No.-411 of 2024, 467 of 2024, 529 of 2024, 930 of 2024, 1795 of 2024 & 1809 of 2024) अभियुक्त, गवाह को पूर्व में दिखा दिया गया हो अथवा शिनाख़्त कार्यवाही विधिसम्मत ढंग से न कराई गई हो, तो ऐसी शिनाख़्त कार्यवाही अविश्वसनीय एवं अवैध मानी जाती है । अतः उक्त परिस्थितियों में अभियोजन का संपूर्ण मामला संदेहास्पद हो गया है ।
Chattisgarh High Court Cites 16 - Cited by 0 - Full Document

Sandeep @ Prashant Vaishnav vs State Of Chhattisgarh on 11 March, 2026

5. अपीलार्थीगण के विद्वान अधिवक्तागण का तर्क है कि घटना के दिन ही दर्ज कराई गई प्रथम सूचना पत्र में किसी भी अभियुक्त का नाम अंकित नहीं है । अपीलार्थीगण के विरुद्ध अभियोजन का मामला मुख्यतः उनके विरुद्ध कराई गई शिनाख़्त कार्यवाही पर आधारित है । इस संबंध में प्रदर्श पी-33 दिनांक 06/05/2023 को तथा प्रदर्श पी-4 दिनांक 20/05/2023 को आयोजित की गई, किं तु उक्त दोनों ही शिनाख़्त कार्यवाही के वल प्रार्थी रामस्वरूप देवांगन (अ.सा.-1) से ही कराई गई, शेष प्रार्थी या प्रत्यक्ष साक्षियों से नहीं करायी गयी । शिनाख़्त कार्यवाही में न तो पर्याप्त संख्या में समान प्रकृ ति के अन्य व्यक्तियों को सम्मिलित किया गया और न ही प्रत्येक अभियुक्त की शिनाख़्त पृथक-पृथक एवं विधि सम्मत ढंग से कराई गई । इसके अतिरिक्त यह तथ्य भी स्वयं शिनाख़्तकर्ता प्रार्थी रामस्वरूप देवांगन (अ.सा.-1) ने स्वीकार किया है कि अभियुक्तों को उसे, शिनाख़्त कार्यवाही से पूर्व ही दिखा दिया गया था । ऐसी परिस्थिति में उक्त शिनाख़्त कार्यवाही की निष्पक्षता एवं विश्वसनीयता संदेहास्पद हो गयी है । इस संदर्भ में इस न्यायालय द्वारा प्रतिपादित न्यायदृष्टांत Pramod v. State of Chhattisgarh with other connected matters, 2024 SCC OnLine Chh 3080 का हवाला दिया है जिसके अनुसार यदि 8 / 24 (Cr. A. No.-411 of 2024, 467 of 2024, 529 of 2024, 930 of 2024, 1795 of 2024 & 1809 of 2024) अभियुक्त, गवाह को पूर्व में दिखा दिया गया हो अथवा शिनाख़्त कार्यवाही विधिसम्मत ढंग से न कराई गई हो, तो ऐसी शिनाख़्त कार्यवाही अविश्वसनीय एवं अवैध मानी जाती है । अतः उक्त परिस्थितियों में अभियोजन का संपूर्ण मामला संदेहास्पद हो गया है ।
Chattisgarh High Court Cites 16 - Cited by 0 - Full Document

Vivek Dhruv vs State Of Chhattisgarh on 11 March, 2026

5. अपीलार्थीगण के विद्वान अधिवक्तागण का तर्क है कि घटना के दिन ही दर्ज कराई गई प्रथम सूचना पत्र में किसी भी अभियुक्त का नाम अंकित नहीं है । अपीलार्थीगण के विरुद्ध अभियोजन का मामला मुख्यतः उनके विरुद्ध कराई गई शिनाख़्त कार्यवाही पर आधारित है । इस संबंध में प्रदर्श पी-33 दिनांक 06/05/2023 को तथा प्रदर्श पी-4 दिनांक 20/05/2023 को आयोजित की गई, किं तु उक्त दोनों ही शिनाख़्त कार्यवाही के वल प्रार्थी रामस्वरूप देवांगन (अ.सा.-1) से ही कराई गई, शेष प्रार्थी या प्रत्यक्ष साक्षियों से नहीं करायी गयी । शिनाख़्त कार्यवाही में न तो पर्याप्त संख्या में समान प्रकृ ति के अन्य व्यक्तियों को सम्मिलित किया गया और न ही प्रत्येक अभियुक्त की शिनाख़्त पृथक-पृथक एवं विधि सम्मत ढंग से कराई गई । इसके अतिरिक्त यह तथ्य भी स्वयं शिनाख़्तकर्ता प्रार्थी रामस्वरूप देवांगन (अ.सा.-1) ने स्वीकार किया है कि अभियुक्तों को उसे, शिनाख़्त कार्यवाही से पूर्व ही दिखा दिया गया था । ऐसी परिस्थिति में उक्त शिनाख़्त कार्यवाही की निष्पक्षता एवं विश्वसनीयता संदेहास्पद हो गयी है । इस संदर्भ में इस न्यायालय द्वारा प्रतिपादित न्यायदृष्टांत Pramod v. State of Chhattisgarh with other connected matters, 2024 SCC OnLine Chh 3080 का हवाला दिया है जिसके अनुसार यदि 8 / 24 (Cr. A. No.-411 of 2024, 467 of 2024, 529 of 2024, 930 of 2024, 1795 of 2024 & 1809 of 2024) अभियुक्त, गवाह को पूर्व में दिखा दिया गया हो अथवा शिनाख़्त कार्यवाही विधिसम्मत ढंग से न कराई गई हो, तो ऐसी शिनाख़्त कार्यवाही अविश्वसनीय एवं अवैध मानी जाती है । अतः उक्त परिस्थितियों में अभियोजन का संपूर्ण मामला संदेहास्पद हो गया है ।
Chattisgarh High Court Cites 16 - Cited by 0 - Full Document

Saurabh @ Somu Dhruv vs State Of Chhattisgarh on 11 March, 2026

5. अपीलार्थीगण के विद्वान अधिवक्तागण का तर्क है कि घटना के दिन ही दर्ज कराई गई प्रथम सूचना पत्र में किसी भी अभियुक्त का नाम अंकित नहीं है । अपीलार्थीगण के विरुद्ध अभियोजन का मामला मुख्यतः उनके विरुद्ध कराई गई शिनाख़्त कार्यवाही पर आधारित है । इस संबंध में प्रदर्श पी-33 दिनांक 06/05/2023 को तथा प्रदर्श पी-4 दिनांक 20/05/2023 को आयोजित की गई, किं तु उक्त दोनों ही शिनाख़्त कार्यवाही के वल प्रार्थी रामस्वरूप देवांगन (अ.सा.-1) से ही कराई गई, शेष प्रार्थी या प्रत्यक्ष साक्षियों से नहीं करायी गयी । शिनाख़्त कार्यवाही में न तो पर्याप्त संख्या में समान प्रकृ ति के अन्य व्यक्तियों को सम्मिलित किया गया और न ही प्रत्येक अभियुक्त की शिनाख़्त पृथक-पृथक एवं विधि सम्मत ढंग से कराई गई । इसके अतिरिक्त यह तथ्य भी स्वयं शिनाख़्तकर्ता प्रार्थी रामस्वरूप देवांगन (अ.सा.-1) ने स्वीकार किया है कि अभियुक्तों को उसे, शिनाख़्त कार्यवाही से पूर्व ही दिखा दिया गया था । ऐसी परिस्थिति में उक्त शिनाख़्त कार्यवाही की निष्पक्षता एवं विश्वसनीयता संदेहास्पद हो गयी है । इस संदर्भ में इस न्यायालय द्वारा प्रतिपादित न्यायदृष्टांत Pramod v. State of Chhattisgarh with other connected matters, 2024 SCC OnLine Chh 3080 का हवाला दिया है जिसके अनुसार यदि 8 / 24 (Cr. A. No.-411 of 2024, 467 of 2024, 529 of 2024, 930 of 2024, 1795 of 2024 & 1809 of 2024) अभियुक्त, गवाह को पूर्व में दिखा दिया गया हो अथवा शिनाख़्त कार्यवाही विधिसम्मत ढंग से न कराई गई हो, तो ऐसी शिनाख़्त कार्यवाही अविश्वसनीय एवं अवैध मानी जाती है । अतः उक्त परिस्थितियों में अभियोजन का संपूर्ण मामला संदेहास्पद हो गया है ।
Chattisgarh High Court Cites 16 - Cited by 0 - Full Document

Priyanshu Sahu @ Swayam Raja Sahu vs State Of Chhattisgarh on 11 March, 2026

5. अपीलार्थीगण के विद्वान अधिवक्तागण का तर्क है कि घटना के दिन ही दर्ज कराई गई प्रथम सूचना पत्र में किसी भी अभियुक्त का नाम अंकित नहीं है । अपीलार्थीगण के विरुद्ध अभियोजन का मामला मुख्यतः उनके विरुद्ध कराई गई शिनाख़्त कार्यवाही पर आधारित है । इस संबंध में प्रदर्श पी-33 दिनांक 06/05/2023 को तथा प्रदर्श पी-4 दिनांक 20/05/2023 को आयोजित की गई, किं तु उक्त दोनों ही शिनाख़्त कार्यवाही के वल प्रार्थी रामस्वरूप देवांगन (अ.सा.-1) से ही कराई गई, शेष प्रार्थी या प्रत्यक्ष साक्षियों से नहीं करायी गयी । शिनाख़्त कार्यवाही में न तो पर्याप्त संख्या में समान प्रकृ ति के अन्य व्यक्तियों को सम्मिलित किया गया और न ही प्रत्येक अभियुक्त की शिनाख़्त पृथक-पृथक एवं विधि सम्मत ढंग से कराई गई । इसके अतिरिक्त यह तथ्य भी स्वयं शिनाख़्तकर्ता प्रार्थी रामस्वरूप देवांगन (अ.सा.-1) ने स्वीकार किया है कि अभियुक्तों को उसे, शिनाख़्त कार्यवाही से पूर्व ही दिखा दिया गया था । ऐसी परिस्थिति में उक्त शिनाख़्त कार्यवाही की निष्पक्षता एवं विश्वसनीयता संदेहास्पद हो गयी है । इस संदर्भ में इस न्यायालय द्वारा प्रतिपादित न्यायदृष्टांत Pramod v. State of Chhattisgarh with other connected matters, 2024 SCC OnLine Chh 3080 का हवाला दिया है जिसके अनुसार यदि 8 / 24 (Cr. A. No.-411 of 2024, 467 of 2024, 529 of 2024, 930 of 2024, 1795 of 2024 & 1809 of 2024) अभियुक्त, गवाह को पूर्व में दिखा दिया गया हो अथवा शिनाख़्त कार्यवाही विधिसम्मत ढंग से न कराई गई हो, तो ऐसी शिनाख़्त कार्यवाही अविश्वसनीय एवं अवैध मानी जाती है । अतः उक्त परिस्थितियों में अभियोजन का संपूर्ण मामला संदेहास्पद हो गया है ।
Chattisgarh High Court Cites 16 - Cited by 0 - Full Document

Kanha @ Vedprakash Nagarchi vs State Of Chhattisgarh on 11 March, 2026

5. अपीलार्थीगण के विद्वान अधिवक्तागण का तर्क है कि घटना के दिन ही दर्ज कराई गई प्रथम सूचना पत्र में किसी भी अभियुक्त का नाम अंकित नहीं है । अपीलार्थीगण के विरुद्ध अभियोजन का मामला मुख्यतः उनके विरुद्ध कराई गई शिनाख़्त कार्यवाही पर आधारित है । इस संबंध में प्रदर्श पी-33 दिनांक 06/05/2023 को तथा प्रदर्श पी-4 दिनांक 20/05/2023 को आयोजित की गई, किं तु उक्त दोनों ही शिनाख़्त कार्यवाही के वल प्रार्थी रामस्वरूप देवांगन (अ.सा.-1) से ही कराई गई, शेष प्रार्थी या प्रत्यक्ष साक्षियों से नहीं करायी गयी । शिनाख़्त कार्यवाही में न तो पर्याप्त संख्या में समान प्रकृ ति के अन्य व्यक्तियों को सम्मिलित किया गया और न ही प्रत्येक अभियुक्त की शिनाख़्त पृथक-पृथक एवं विधि सम्मत ढंग से कराई गई । इसके अतिरिक्त यह तथ्य भी स्वयं शिनाख़्तकर्ता प्रार्थी रामस्वरूप देवांगन (अ.सा.-1) ने स्वीकार किया है कि अभियुक्तों को उसे, शिनाख़्त कार्यवाही से पूर्व ही दिखा दिया गया था । ऐसी परिस्थिति में उक्त शिनाख़्त कार्यवाही की निष्पक्षता एवं विश्वसनीयता संदेहास्पद हो गयी है । इस संदर्भ में इस न्यायालय द्वारा प्रतिपादित न्यायदृष्टांत Pramod v. State of Chhattisgarh with other connected matters, 2024 SCC OnLine Chh 3080 का हवाला दिया है जिसके अनुसार यदि 8 / 24 (Cr. A. No.-411 of 2024, 467 of 2024, 529 of 2024, 930 of 2024, 1795 of 2024 & 1809 of 2024) अभियुक्त, गवाह को पूर्व में दिखा दिया गया हो अथवा शिनाख़्त कार्यवाही विधिसम्मत ढंग से न कराई गई हो, तो ऐसी शिनाख़्त कार्यवाही अविश्वसनीय एवं अवैध मानी जाती है । अतः उक्त परिस्थितियों में अभियोजन का संपूर्ण मामला संदेहास्पद हो गया है ।
Chattisgarh High Court Cites 16 - Cited by 0 - Full Document
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