State Consumer Disputes Redressal Commission
The Oriental Insurance Co.Ltd vs Manoj Kumar Jaiswal on 27 February, 2015
Daily Order Chhattisgarh State Consumer Disputes Redressal Commission Raipur Final Order First Appeal No. FA/14/395 (Arisen out of Order Dated in Case No. CC/12/46 of District State Commission) 1. The Oriental Insurance Co.Ltd Division Office Infront of Rama Trade Center Bus Stand Bilaspur Bilaspur Chhattisgarh ...........Appellant(s) Versus 1. Manoj Kumar Jaiswal Village & P.O. Jarahagaon Mungeli Mungeli Chhattisgarh ...........Respondent(s) BEFORE: HONABLE MR. JUSTICE R.S.Sharma PRESIDENT HONABLE MS. Heena Thakkar MEMBER HONABLE MR. Dharmendra Kumar Poddar MEMBER For the Appellant: Shri Raj Awasthi , Advocate For the Respondent: Shri B. Majumdar, Advocate ORDER
छत्तीसगढ़ राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग, पंडरी, रायपुर अपील क्रमांकः FA/14/395 संस्थित दिनांक : 06.06.2014 दि ओरियेंटल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड, द्वारा-मण्डल प्रबंधक, मण्डल कार्यालय, रामा टेªड सेंटर के सामने, बस स्टैण्ड, बिलासपुर, जिला-बिलासपुर (छ.ग.) ............अपीलार्थी/अनावेदक.
विरूद्ध मनोज कुमार जायसवाल पिता रामधन जायसवाल, उम्र-37 वर्ष, निवासी ग्राम व पोस्ट-जरहागांव, तहसील व जिला-मुंगेली (छ.ग.) .............उत्तरवादी/परिवादी. समक्षः माननीय न्यायमूर्ति श्री आर. एस.शर्मा, अध्यक्ष माननीया सुश्री हिना ठक्कर, सदस्या माननीय श्री डी. के. पोद्दार, सदस्य पक्षकारों के अधिवक्ता अपीलार्थी की ओर से श्री राज अवस्थी, अधिवक्ता। उत्तरवादी की ओर से श्री बी. मजूमदार, अधिवक्ता। आदेश दिनांकः /02/2015 द्वारा-माननीय न्यायमूर्ति श्री आर. एस. शर्मा, अध्यक्ष
अपीलार्थी/अनावेदक ने यह अपील धारा-15 उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 1986, के अंतर्गत जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण फोरम, बिलासपुर (छ0ग0) (जिसे आगे संक्षिप्त में ''जिला फोरम'' संबोधित किया जाएगा) के परिवाद प्रकरण क्रमांक &46/2012 मनोज कुमार जायसवाल विरूद्ध दि ओरिएण्टल इंश्यारेंस कंपनी लिमिटेड में पारित आदेश दिनांक-24.05.2014 जिसके द्वारा उत्तरवादी/परिवादी का परिवाद स्वीकार करते हुए यह आदेशित किया गया है किः-
''अ. अनावेदक बीमा कंपनी, आवेदक को आदेश दिनांक से 01 माह के भीतर बीमा दावा की राशि-1,28,560/-(एक लाख अट्ठाईस हजार पांच सौ साठ रूपये) भुगतान करेगा तथा इसमें चूक की दशा मे ताअदायगी 09 प्रतिशत वार्षिक की दर से ब्याज का भी भुगतान करेगा।
ब. अनावेदक बीमा कंपनी, आवेदक को क्षतिपूर्ति के रूप में 10,000/-(दस हजार रूपये) की राशि अदा करेगा।
स. अनावेदक बीमा कंपनी, आवेदक को वाद व्यय के रूप में 3,000/-(तीन हजार रूपये) की राशि अदा करेगा।'' से दुखित होकर प्रस्तुत किया है।
02. जिला फोरम के समक्ष उत्तरवादी/परिवादी का परिवाद संक्षिप्त में इस प्रकार रहा है कि उत्तरवादी/परिवादी द्वारा अपने हल्का परिवहन यान क्रमांक-सी.जी.10सी/3184 मॉडल 2008 का बीमा अपीलार्थी/अनावेदक बीमा कंपनी से दिनांक-31.12.2010 से दिनांक-30.12.2011 तक की अवधि के लिए 3,50,000/-(तीन लाख पचास हजार रूपये) घोषित बीमा मूल्य पर कराया गया था जिसका बीमा पॉलिसी क्रमांक-193300/31/2011/12538 है। उक्त वाहन को दिनांक-11.06.2011 को वैध लायसेंस धारक संजय कश्यप चला रहा था तो सार्वजनिक स्थान पर उस समय दुर्घटनाग्रस्त हुआ जब बीमा पाॅलिसी प्रभाव में था। उक्त दुर्घटना की सूचना अपीलार्थी/अनावेदक बीमा कंपनी को दिया गया और पुलिस थाने में भी रिपोर्ट दर्ज करवाया गया तथा अपीलार्थी/अनावेदक बीमा कंपनी के निर्देशानुसार सभी औपचारिकताओं एवं आवश्यकताओं को पूरा करते हुए बीमा दावा पेश किया गया लेकिन अपीलार्थी/अनावेदक बीमा कंपनी द्वारा दिनांक-14.12.2011 को उत्तरवादी/परिवादी के दावे को बिना किसी कारण के दुर्घटना के समय वाहन चालक के पास हल्का परिवहन यान लायसेंस नहीं होना और वाहन में यात्रियों को वहन किया जाना कहकर निरस्त कर दिया जबकि वाहन चालक के पास घटना के समय परिवहन श्रेणी का लायसेंस था और वह बीमित वाहन को चलाने के लिए सक्षम था तथा वाहन में अनुमानित मात्रा में एक या दो यात्री सफर करने मात्र से पॉलिसी की शर्तों का उल्लंघन नहीं था और उत्तरवादी/परिवादी का संपूर्ण बीमा दावा निरस्त किये जाने योग्य नहीं था फिर भी अपीलार्थी/अनावेदक बीमा कंपनी द्वारा उचित सतर्कता एवं सावधानी के बिना उत्तरवादी/परिवादी के दावे को सामान्य प्रक्रिया में निरस्त कर सेवा में कमी किया है जिसके कारण उत्तरवादी/परिवादी को परिवाद लाने की आवश्यकता पड़ी है। अतः परिवाद-पत्र में वर्णित अनुसार अनुतोष दिलाई जावे।
03. अपीलार्थी/अनावेदक ने लिखित कथन प्रस्तुत करते हुए यह अभिवचन किया है कि उत्तरवादी/परिवादी के महिन्द्रा एंड महिन्द्रा मैक्सी पिकप क्रमांक-सी.जी.10सी/3184 का बीमा अपीलार्थी/अनावेदक द्वारा बीमा पॉलिसी क्रमांक-193300/31/2011/12538 के माध्यम से दिनांक-31.12.2010 से दिनांक-30.12.2011 की अवधि के लिए किया गया था। उक्त दुर्घटना के संबंध में वाहन स्वामी/परिवादी द्वारा अपीलार्थी/अनावेदक बीमा कंपनी को लिखित में दी गई सूचना के अनुसार दुर्घटना के समय वाहन का चालक प्रदीप कश्यप था। उत्तरवादी/परिवादी द्वारा प्रस्तुत वाहन क्षति संबंधी दावे पर समीचीन विचार करने के उपरांत उत्तरवादी/परिवादी का दावा दिनांक-14.12.2011 को निरस्त कर सूचना उत्तरवादी/परिवादी को दिया था। उक्त दुर्घटनाग्रस्त वाहन में पंजीयन प्रमाण-पत्र के अनुसार तीन व्यक्तियों के बैठने की अनुमति थी जबकि दुर्घटना के समय वाहन में 06 से अधिक व्यक्ति अनाधिकृत यात्री के रूप में यात्रा कर रहे थे जो कि आर्केस्ट्रा पार्टी के सदस्य/मजदूर थे जो कि एफ.आई.आर. एवं सर्वेयर ए.के. जायसवाल की सर्वे रिपोर्ट तथा सर्वेयर चितरंजन पात्रो के फाईनल असेसमेंट रिपोर्ट से प्रमाणित होता है। उत्तरवादी/परिवादी कोई अनुतोष पाने का अधिकारी नहीं है। अतः परिवाद सव्यय निरस्त किया जावे।
04. उभयपक्षों के अभिवचन एवं प्रस्तुत सामग्रियों के आधार पर जिला फोरम ने उत्तरवादी/परिवादी का परिवाद स्वीकार करते हुए ऊपर कंडिका-1 में वर्णित अनुसार अनुतोष प्रदान किया है जिसके विरूद्ध यह अपील है।
05. उत्तरवादी/परिवादी ने अपने पक्ष समर्थन में जिला फोरम के समक्ष बीमा कंपनी का पत्र दिनांक-14.12.2011 (Annexure P-1)] बीमा पॉलिसी दिनांक-29.12.2010 (Annexure P-2)] आर. सी. बुक दिनांक-29.01.2009 (Annexure P-3)] यान ठीक हालत में होने का प्रमाण-पत्र दिनांक-02.05.2011 (Annexure P-4)] ड्राईविंग लायसेंस दिनांक-03.10.2006 (Annexure P-5)] प्रथम सूचना प्रतिवेदन दिनांक-11.06.2011 (Annexure P-6)] राजेश मेकेनिकल वक्र्स का बिल दिनांक-05.11.2011 (Annexure P-7)] महिन्द्रा केयर का रिटेल इनवॉयस दिनांक-04.11.2011 (Annexure P-8)] तथा महिन्द्रा केयर का रिटेल इनवॉयस दिनांक-05.11.2011 (Annexure P-9 to 11)] की फोटो कापी प्रस्तुत किया है।
06. अपीलार्थी/अनावेदक ने अपने पक्ष समर्थन में जिला फोरम के समक्ष मोटर इंश्यारेंस सर्टिफिकेट कम पॉलिसी शेड्यूल (Annexure NA-1)] उत्तरवादी/परिवादी द्वारा अपीलार्थी/अनावेदक को प्रेषित पत्र (Annexure NA-2)] अजीत कुमार जायसवाल का सर्वे रिपोर्ट दिनांक-17.06.2011 (Annexure NA-3)] ए. चितरंजन पात्रो का अंतिम सर्वे रिपोर्ट दिनांक-05.12.2011 (Annexure NA-4)] अपीलार्थी/अनावेदक द्वारा उत्तरवादी/परिवादी को प्रेषित पत्र दिनांक-14.12.2011 (Annexure NA-5)] आर. सी. बुक दिनांक-28.01.2009 (Annexure NA-6)] तथा प्रथम सूचना प्रतिवेदन दिनांक-11.06.2011, मनोज कुमार जायसवाल का बयान, संजय कश्यप का बयान, मोटर दावा प्रपत्र, क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय बिलासपुर द्वारा दिया गया विवरण दिनांक-03.08.2011 तथा संजय कुमार कश्यप का ड्राईविंग लायसेंस की फोटो कापी प्रस्तुत किया है।
07. अपीलार्थी/अनावेदक की ओर से उपसंजात होने वाले विद्वान अधिवक्ता श्री राज अवस्थी का यह तर्क है कि दुर्घटना के समय ड्राईव्हर के पास वैध ड्राईव्हिंग लाईसेंस नहीं था। ड्राईव्हर संजय कुमार कश्यप के पास केवल मोटर साईकिल, एल.एम.व्ही. एवं एच.जी.व्ही. का ड्राईव्हिंग लाईसेंस था परन्तु हल्का वाहन चलाने हेतु उसके पास कोई वैध अनुज्ञा-पत्र नहीं था और इस प्रकार वाहन वैध एवं प्रभावी ड्राईव्हिंग लाईसेंस के बिना चलाया जा रहा था। श्री राज अवस्थी का यह भी तर्क है कि दुर्घटना के समय वाहन में छः यात्री यात्रा कर रहे थे जो कि बीमा शर्तों का उल्लंघन है और ऐसी स्थिति में उत्तरवादी/परिवादी द्वारा बीमा शर्तों का उल्लंघन किया गया है। फलस्वरूप जिला फोरम ने जो क्षतिपूर्ति राशि दिलाई है वह पूर्णतः अनुचित एवं त्रुटिपूर्ण है और जिला फोरम का आदेश स्थिर रखे जाने योग्य नहीं है। अतः अपीलार्थी/अनावेदक की अपील स्वीकार किया जावे और जिला फोरम द्वारा पारित आलोच्य आदेश निरस्त किया जावे।
08. उत्तरवादी/परिवादी की ओर से उपसंजात होने वाले विद्वान अधिवक्ता श्री बी. मजूमदार का यह तर्क है कि जिला फोरम का आदेश पूर्णतः विधि सम्मत आदेश है। ड्राईव्हर के पास प्रभावी ड्राईव्हिंग लाईसेंस था और यदि ड्राईव्हर द्वारा उत्तरवादी/परिवादी की अज्ञानता या अनुमति के बिना 1-2 व्यक्ति वाहन में बैठा लिया हो तो वह फण्डामेंटल ब्रीच नहीं है और यदि पॉलिसी का उल्लंघन माना जाये तो भी उत्तरवादी/परिवादी नॉन स्टैण्डर्ड बेसिस पर क्षतिपूर्ति पाने का अधिकारी है। इस संबंध में उत्तरवादी/परिवादी ने New India Assurance Co. Ltd. Vs. Malti BhikhaBhai Bhoya II (2013) CPJ 483 (NC), Bajaj Alliance General Insurance Company Ltd. Vs. Ashok Kumar Dhruv and others 2013 (3) M.P.H.T. 61 (CG), Oriental Insurance Co. Ltd. Vs. Vijay Kumar Dubbey & Anr. II (2012) CPJ 103 (MP) एवं इस आयोग के Appeal No. FA/13/678 Anil Shrivas Vs. Branch Manager, The Oriental Insurance Company Limited में पारित आदेश दिनांक-03.05.2014 का अवलंबन लिया है।
09. हमने उभयपक्ष के विद्वान अधिवक्ताओं का तर्क श्रवण किया तथा जिला फोरम के आलोच्य आदेश एवं अभिलेख का परिशीलन किया।
10. सर्वप्रथम ड्राईव्हिंग लाईसेंस के संबंध में विचार किया जा रहा है। उत्तरवादी/परिवादी द्वारा प्रथम सूचना-पत्र की छायाप्रति प्रस्तुत किया गया है जो कि एनेक्श्चर पी-6 है और यह प्रथम सूचना-पत्र किसी रामदुलारे द्वारा दर्ज कराया गया है और उक्त प्रथम सूचना-पत्र में यह स्पष्ट रूप से उल्लेखित है कि वाहन को ड्राईव्हर संजय कुमार कश्यप द्वारा चलाया जा रहा था। इस प्रकार यह स्पष्ट है कि दुर्घटना के समय वाहन का संजय कुमार कश्यप चालक था।
11. उत्तरवादी/परिवादी की ओर से ड्राईव्हर संजय कुमार कश्यप का ड्राईव्हिंग लाईसेंस प्रस्तुत किया गया है। इस ड्राईव्हिंग लाईसेंस में LMV, MCWG, TRANS का उल्लेख है।
12. Bajaj Alliance General Insurance Company Ltd. Vs. Ashok Kumar Dhruv and others (Supra), में यह निर्धारित किया गया है कि जब कोई ड्राईव्हर हल्का मोटर यान का ड्राईव्हिंग लाईसेंस धारित करने के अलावा भारी माल वाहन चलाने के लिए ड्राईव्हिंग लाईसेंस धारित करता करता है तब वह हल्का मोटर यान चलाने का हकदार है। उपरोक्त न्याय दृष्टांत के परिप्रेक्ष्य में इस प्रकरण का जो ड्राईव्हर है वह प्रश्नाधीन वाहन चलाने के लिए भी सक्षम था। अतः जिला फोरम ने अपने आदेश की कंडिका-7 में ड्राईव्हिंग लाईसेंस के संबंध में जो निष्कर्ष निकाला है वह पूर्णतः उचित है और उसमें किसी प्रकार के हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है।
13. जहां तक जिला फोरम ने अपने आदेश की कंडिका-8 में यह निर्धारित किया है कि ''अनावेदक बीमा कपंनी यह साबित नहीं कर सका है कि बीमा कंपनी कोई साक्ष्य या प्रमाण पेश नहीं किया जा सका है कि वाहन में उक्त सवारियों की जानकारी वाहन स्वामी अर्थात् बीमित को थी। फलस्वरूप यदि चालक द्वारा स्वामी को सूचित किए बिना वाहन में सामान को उतारने हेतु श्रमिकों की नियुक्ति कर ले और दुर्घटना के समय वह श्रमिक यात्रारत हो, तो इस आधार पर बीमा कपंनी अपने दायित्व से विमुक्त नहीं हो जाता।'' जिला फोरम का उक्त निष्कर्ष तथ्यों से परे है। इस प्रकरण में जो प्रथम सूचना-पत्र की प्रति प्रस्तुत किया गया है उसमें स्पष्ट रूप से उल्लेखित है कि वाहन में छः लोग सवार थे और उन्हें चोंटें भी आई थीं।
14. उत्तरवादी/परिवादी की ओर से New India Assurance Co. Ltd. Vs. Malti BhikhaBhai Bhoya (Supra) और Appeal No. FA/13/678 Anil Shrivas Vs. Branch Manager, The Oriental Insurance Company Limited (Supra) का अवलंबन लेते हुए यह बताने का प्रयास किया है कि फण्डामेंटल ब्रीच की श्रेणी में नहीं आता है और नॉन स्टैण्डर्ड बेसिस पर क्षतिपूर्ति दिया जाना चाहिए।
15. Appeal No. FA/13/678 Anil Shrivas Vs. Branch Manager, The Oriental Insurance Company Limited (Supra) की कंडिका-15 एवं 16 में यह निर्धारित किया गया है किः-
"15. In the case of S.G. Shivamurtheppa vs Reliance General Insurance Company Limited I (2012) CPJ 175 (NC), Hon'ble National Commission has observed that "Consumer Protection Act, 1986 - Sections 2(1)(g), 21(b) - Insurance - Carrying of - Excessive passengers - Breach of policy conditions - Vehicle met with accident - Claim repudiated - Complaint partly allowed - Appeal allowed and order of District Forum set aside - Hence, revision petition - Motor vehicle was registered for carriage of passengers not exceeding to 12 - At time of accident, vehicle was instead carrying 16 persons - There was explicit and admitted violation of condition of insurance policy and so, claim rightly repudiated by Insurance Company - Impugned order of State Commission valid."
16. It appears that the vehicle in question was used as taxi instead of private car and insurance policy was issued as Private Car Package Policy, but the appellant (complainant) gave the vehicle in question on hire and 11 persons were sitting in the vehicle instead of 7 + 1 (including driver). Prima facie, it appears that the terms and conditions of the policy were violated by the appellant (complainant), therefore, the respondent (O.P.) (Insurance Company) has rightly repudiated the claim of the appellant (complainant). The impugned order of the District Forum, does not suffer from any jurisdictional error, illegality or irregularity and does not call any interference by this Commission."
उपरोक्त न्याय दृष्टांतों के परिप्रेक्ष्य में उक्त प्रकरण में नॉन स्टैण्डर्ड बेसिस पर क्षतिपूर्ति दिलाई गई थी।
16. S.G. Shivamurtheppa vs Reliance General Insurance Company Limited I (2012) CPJ 175 (NC), में माननीय राष्ट्रीय आयोग द्वारा यह निर्धारित किया गया है किः-
"Consumer Protection Act, 1986 - Sections 2(1)(g), 21(b) - Insurance - Carrying of - Excessive passengers - Breach of policy conditions - Vehicle met with accident - Claim repudiated - Complaint partly allowed - Appeal allowed and order of District Forum set aside - Hence, revision petition - Motor vehicle was registered for carriage of passengers not exceeding to 12 - At time of accident, vehicle was instead carrying 16 persons - There was explicit and admitted violation of condition of insurance policy and so, claim rightly repudiated by Insurance Company - Impugned order of State Commission valid."
17. इस आयोग द्वारा Appeal No.FA/14/61 Ibne Hasan Vs. The Oriental Insurance Company Limited, Order Dated 11/07/2014 की कंडिका-23 में यह निर्धारित किया गया है किः-
"23. It appears that the vehicle in question was used as taxi instead of Light Goods Vehicle and insurance policy was issued as Public Carriers other than Three Wheelers Package Policy - Zone C, but the appellant (complainant) gave the vehicle in question on hire and 40 persons were sitting in the vehicle instead of 2 + 1. Prima facie, it appears that the terms and conditions of the policy were violated by the appellant (complainant), therefore, the respondent (O.P.) (Insurance Company) has rightly repudiated the claim of the appellant (complainant). The impugned order of the District Forum, does not suffer from any jurisdictional error, illegality or irregularity and does not call any interference by this Commission.
18. उपरोक्त न्याय दृष्टांतों के परिप्रेक्ष्य में उत्तरवादी/परिवादी ने जिन न्याय दृष्टांतों का अवलंबन लिया है उनके तथ्य इस प्रकरण से बिल्कुल भिन्न हैं और उसका लाभ उत्तरवादी/परिवादी को इस प्रकरण में नहीं मिलता है।
19. इस प्रकरण में उत्तरवादी/परिवादी की ओर से जो पॉलिसी शेड्यूल प्रस्तुत किया गया है उसके अनुसार वाहन में बैठने की क्षमता 3+1 बताया गया है। उसी प्रकार सर्टिफिकेट ऑफ रजिस्ट्रेशन में भी सीटिंग केपेसिटी 3 बताया गया है। एनेक्श्चर पी-6 जो कि प्रथम सूचना-पत्र की प्रति है के अनुसार जिस समय वाहन दुर्घटनाग्रस्त हुआ उस समय वाहन को संजय कुमार कश्यप चला रहा था और उस समय वाहन में 06 लोग सवार थे जिनका उल्लेख प्रथम सूचना-पत्र में किया गया है और उस दुर्घटना के फलस्वरूप 02 व्यक्तियों की मृत्यु भी हुई थी। इस प्रकार स्पष्ट है कि वाहन में निर्धारित क्षमता से अधिक व्यक्ति बैठाया गया था और यह सिद्धि भार कि वाहन स्वामी की जानकारी के बिना ड्राईव्हर द्वारा यात्रियों को बैठाया गया था या श्रमिकों को बैठाया गया था, यह वाहन स्वामी की है ना कि अपीलार्थी/अनावेदक बीमा कंपनी की और उत्तरवादी/परिवादी द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों से स्पष्ट है कि जिस समय दुर्घटना हुई उस समय वाहन में 06 व्यक्ति बैठे हुए थे जो कि निश्चित ही बीमा पॉलिसी की शर्तों का उल्लंघन है और उत्तरवादी/परिवादी ने बीमा शर्तों का उल्लंघन कर वाहन को चलाया है। फलस्वरूप इंश्योरेंस कंपनी द्वारा उत्तरवादी/परिवादी के दावे को अस्वीकार किया है वह पूर्णतः उचित है। उत्तरवादी/परिवादी किसी प्रकार की क्षतिपूर्ति पाने का अधिकारी नहीं है। यहां तक कि अमानक आधार पर भी उत्तरवादी/परिवादी क्षतिपूर्ति पाने का अधिकारी नहीं है क्योंकि जो बीमा पॉलिसी की शर्तों का उल्लंघन है वह फण्डामेंटल उल्लंघन की श्रेणी में आता है। ऐसी स्थिति में जिला फोरम का आलोच्य आदेश त्रुटिपूर्ण है और वह स्थिर रखे जाने योग्य नहीं है।
20. अतः अपीलार्थी/अनावेदक की अपील स्वीकार किया जाता है। जिला फोरम द्वारा पारित आलोच्य आदेश दिनांक-24.05.2014 अपास्त किया जाता है। परिणाम स्वरूप परिवाद निरस्त किया जाता है। प्रकरण की परिस्थिति को देखते हुए उभयपक्ष इस अपील का व्यय अपना-अपना वहन करेंगे।
(न्यायमूर्ति आर.एस.शर्मा) ( सुश्री हिना ठक्कर) (डी. के. पोद्दार) अध्यक्ष सदस्या सदस्य /02/2015 /02/2015 /02/2015 [HONABLE MR. JUSTICE R.S.Sharma] PRESIDENT [HONABLE MS. Heena Thakkar] MEMBER [HONABLE MR. Dharmendra Kumar Poddar] MEMBER