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Lok Sabha Debates

Discussion On The Supplementary Demand For Grant No. 16 In Respect Of Budget ... on 15 December, 2009

Title: Discussion on the Supplementary Demand for Grant No. 16 in respect of Budget (Railways) for 2009-10. Cut Motions were moved and negatived. Demands voted in full. (Discussion concluded) 12.30 hrs The Lok Sabha re-assembled at Thirty Minutes past Twelve of the Clock.

 

(Madam Speaker in the Chair) DEMANDS FOR SUPPLEMENTARY GRANTS—(RAILWAYS), 2009-10   MADAM SPEAKER: The House will now take up discussion and voting on the Supplementary Demand for Grant (Railways) for the year 2009-2010.

            Only two Members, Shri Prasanta Kumar Majumdar and Dr. Rajan Sushant have tabled cut motions to the Supplementary Demand for Grant (Railways) for the year 2009-2010. If the hon. Members want to move their cut motions, they may send slips at the Table within 15 minutes indicating the serial numbers of the cut motions they would like to move. Only those cut motions will be treated as moved.

… (Interruptions)

12.31 hrs (At this stage, Shri M. Venugopala Reddy and some other hon. Members came and stood on the  near the Table.) … (Interruptions)

MADAM SPEAKER: A list showing the serial numbers of cut motions treated as moved will be put up on the Notice board shortly thereafter. In case any Member finds any discrepancy in the list, he may kindly bring it to the notice of the Officer at the Table immediately.

… (Interruptions)

अध्यक्ष महोदया : कृपया आप ऐसे मत कीजिए।You are not supposed to do this. Please go back to your seats. You have done this. You have done it once. Now you please sit down.

… (Interruptions)

MADAM SPEAKER: I gave you an opportunity to speak.

… (Interruptions)

अध्यक्ष महोदया : श्री लाल जी टण्डन, कृपया आप बोलिए। सिर्फ लाल जी टण्डन जी की बात रिकार्ड में जाएगी।

…( व्यवधान)

MADAM SPEAKER: Motion moved:

“That the supplementary sums not exceeding the amounts shown in the third column of the Order Paper be granted to the President of India, out of the Consolidated Fund of India, to defray the charges that will come in course of payment during the year ending the 31st day of March, 2010, in respect of the head of Demand entered in the second column thereof against Demand No.16.”   श्री लालजी टण्डन (लखनऊ): महोदया, सप्लीमेंट्री डिमांड्स किसी विभाग में कामकाज के ऊपर निर्भर करती है। अगर वहां विकास हो रहा है तो धन की जरूरत ज्यादा होगी और बजट में जो धन आबंटित है, उन्हें उससे ज्यादा धन चाहिए होता है या नयी योजनाएं शुरू करने के लिए धन की आवश्यकता होती है। जो रेलवे की डिमांड्स आयी हैं, इन्हें कम से कम उन बातों से देखना चाहिए कि जो माननीया रेल मंत्री जी ने यहां अपना पहला बजट पेश करते हुए जो वायदे किये थे। उनकी समीक्षा भी होनी चाहिए कि क्या हम लक्ष्य के करीब पहुंच रहे हैं? क्या कुछ काम हो रहा है? नया काम शुरू करने के पहले जो काम हमने लिये थे, उनमें से कुछ काम हो रहे हैं या नहीं। उनकी प्रोग्रेस क्या है, वे किस स्टेज पर हैं, वे नीतियां क्या हैं? इनके बारे में कोई चर्चा नहीं होती है।...( व्यवधान)
MADAM SPEAKER: Just listen to me. You said, you want to say something. Well, I will give you an opportunity. Let the debate go on on Railways. After this, in the Zero Hour… … (Interruptions)
THE MINISTER OF FINANCE (SHRI PRANAB MUKHERJEE): Do not make loose statements. This is not decency.… (Interruptions)
MADAM SPEAKER: Yes. Please do not talk like that. You cannot do that. How can you do it? What are you doing?
… (Interruptions)
अध्यक्ष महोदया : आप इस तरह बात मत कीजिए, आप बैठिए।
…( व्यवधान)
MADAM SPEAKER: I will give you a chance. Hon. Member, I will give you a chance. Let this go on. After this, I will give you a chance.
… (Interruptions)
MADAM SPEAKER : Please do not get so angry. Please do not lose your temper.
… (Interruptions)
MADAM SPEAKER : I know you have something to say. But, do not lose your temper. Do not also give up the decorum of the House. You must observe both the things. You should observe the decorum. Please take your seat. I will give you a chance.
… (Interruptions)
SHRI M. VENUGOPALA REDDY (NARASARAOPET): People are dying, Madam. … (Interruptions)
MADAM SPEAKER : I know what is happening.
… (Interruptions)
MADAM SPEAKER : I will give you a chance. You please go back to your seats.
… (Interruptions)
MADAM SPEAKER : Alright, you please go back.
… (Interruptions)
SHRI PRANAB MUKHERJEE : Do not make such a statement. This is not correct. … (Interruptions)
अध्यक्ष महोदया : लालजी टण्डन जी, आप बोलिए।
…( व्यवधान)
श्री लालजी टण्डन (लखनऊ): महोदया, रेल मंत्री जी ने रेल बजट पर प्रतिवेदन पेश किया था...( व्यवधान)
MADAM SPEAKER : You go back to your seats. Please, do not make an argument here. I am telling you, I will give you a chance to speak later on. Let this debate continue.
… (Interruptions)
MADAM SPEAKER : This is also very important.
… (Interruptions)
MADAM SPEAKER : What do you want? Tell me what do you want.
… (Interruptions)
DR. N. SIVAPRASAD (CHITTOOR): Madam, you give me an opportunity for explaining the matter. … (Interruptions)
MADAM SPEAKER : Yes, I am giving you an opportunity, but after this. After this I will give you an opportunity. Please take your seats.
… (Interruptions)
MADAM SPEAKER : Please go back. I will give you an opportunity. We will give you a chance. Kindly take your seats. I will give you an opportunity.
12.38 hrs At this stage, Shri M. Venugopala Reddy and some other hon. Members went back to their seats.

MADAM SPEAKER : Thank you so much. I will give you a chance to speak.

            Shri Lalji Tandon to continue his speech.

श्री लालजी टण्डन : महोदया, मैं कह रहा था कि सदन में सरकार की तरफ से जो आश्वासन दिए जाते हैं, बजट में बहुत सी बातें घोषित की जाती हैं, लेकिन उसका अंजाम क्या हो रहा है? हम इन मौकों पर उन पर विचार करना जरूरी समझते हैं। बहुत सी बातों की घोषणा की गयी, लेकिन मैं कुछ मूल बातों की तरफ सदन का ध्यान आकृष्ट करना चाहता हूं, जिनमें यात्रियों की सुविधाएं, साफ-सफाई, रेलवे खान-पान की गुणवत्ता, संरक्षा और सुरक्षा और समय का पालन। इन सबको यदि आप देखें तो इनकी उपलब्धियों के लिए सौ दिन का वायदा किया गया था, लेकिन कई सौ दिन हो गए हैं, लेकिन अभी तक उनमें से कुछ नहीं हुआ है। जितनी भी नयी बातों की घोषणा की गयी है, वह हकीकत में कहीं दिखाई नहीं देती हैं। दुरान्तो ट्रेन की घोषणा की गयी थी। दुरान्तो का अर्थ जनता ने यह लगाया था कि एक नयी ट्रेन कहीं से शुरू होगी और बिना रूके कहीं पर जाकर खत्म होगी, बीच में कहीं नहीं रूकेगी। लेकिन मैं उदाहरण देकर बताना चाहता हूं कि मजाक क्या हो रहा है? लखनऊ से एक डुप्लीकेट लखनऊ मेल चलती है। वह बहुत दिनों से डेली चल रही है और काफी सफल हो रही है, यात्री भरकर जा रहे हैं, उसमें जगह नहीं मिलती है। उसे हर हफ्ते बढ़ा दिया जाता है। पहले एक हफ्ते के लिए उसे बढ़ाया गया, फिर रोक दिया गया, फिर एक हफ्ते के लिए बढ़ाया गया, फिर रोक दिया गया। अब उसी को दुरान्तो घोषित कर दिया गया। इससे क्या मिला? यदि वह यूं ही चलती तो भी ठीक था, क्योंकि वह दुरान्तो ट्रेन के समान है।  उसको आप खत्म करके केवल नाम बदल रहे हैं। ऐसा सभी जगह हो रहा है।

          यह वायदा क्यों किया गया? जहां तक उपलब्धियों की बात है, बड़ी-बड़ी बातें की गई हैं, लेकिन हमारी जो सफलता है, मैं सन् 2008-09 की बात बता रहा हूं कि गेज़ परिवर्तन में 2150किलोमीटर लक्ष्य रखा गया था और 563 किलोमीटर लक्ष्य प्राप्त हुआ। ये जो सप्लीमेंट्री बजट होते हैं, इनका औचित्य क्या है? मूल बजट में जो लक्ष्य रखा गया और उसके बाद रिवाइज़्ड बजट में भी रखा गया, जो लक्ष्य प्राप्त हुआ, वह 2150 की जगह 563 है। इसी तरह जो डबल लाईन बनाने की बात थी, इसमें सन् 2008-09में एक हजार किलोमीटर रखा गया था, जिसका लक्ष्य 363 किलोमीटर प्राप्त हुआ। पुल निर्माण -1656नम्बर बनने थे, लेकिन केवल 1388 बने। वे अभी अधूरे पड़े हुए हैं। मैं जिस क्षेत्र से आता हूं, माननीय रेल मंत्री जी का ध्यान उधर आकर्षित करना चाहता हूं। लखनऊ का जो सबसे बड़ा ओवर ब्रिज बन रहा है, वह साल भर से रुका हुआ है, क्योंकि जो स्टेट गवर्नमेंट को बनाना था, वे पिलर्स बन गए, रेलवे को जो काम पूरा करना था, वह नहीं हो रहा है और वह काम इसलिए नहीं हो रहा है क्योंकि रास्ता बंद है, ट्रेफिक का जाम लग रहा है। जिसके लिए बनाया जा रहा है, वह लक्ष्य पूरा नहीं हो रहा है। वह काम कब होगा, कोई नहीं जानता। कोई उत्तर देने वाला अधिकारी नहीं है, जो यह बता सकता हो कि इसमें क्या प्रोबलम है। ये सारी चीजें समझने की बात होती है। सरकार की कंटीन्यूटी नहीं है। जब श्री नीतीश कुमार जी रेल मंत्री थे तो लखनऊ में मल्लोर में एक नया रेलवे टर्मिनल बनना था। उसके बाद वर्तमान रेल मंत्री जी उनके स्थान पर बनीं, इन्होंने भी लखनऊ में उसकी घोषणा की। उसमें काम शुरु हो गया। लखनऊ की सबसे कीमती जमीन, मैं उस समय मंत्री था, मैंने एक्वायर करके दे दी। वहां लाइन पड़ गई, मेटिरियल आ गया, काम होना शुरु हो रहा था, लेकिन उसके बाद पता नहीं क्या हुआ, वे सारी योजनाएं कहां चली गईं। उसका कोई पता नहीं है। मैंने माननीय मंत्री जी को एक पत्र भी लिखा था कि आप इसे देखें। आपने स्वयं घोषणा की थी, जब आप इसके पहले दूसरी सरकार में रेल मंत्री थीं। उसका शिलान्यास हो गया, आधा काम हो गया, फिर वह काम क्यों रुका हुआ है?इसका कोई उत्तर नहीं है।

12.44 hrs.                                    (Shri Arjun Charan Sethi in the Chair)           सभापति महोदय, 11वीं पंचवर्षीय योजना का प्रथम दो वर्षों का लक्ष्य, यानी ऩयी लाइन डालने का दो हजार का लक्ष्य रखा गया था। दो वर्ष में औसत आठ सौ आता, लेकिन लक्ष्य 527 प्राप्त हुआ। गेज़ परिवर्तन दस हजार किलोमीटर और 2189 किलोमीटर प्राप्त हुआ। दोहरीकरण का लक्ष्य छ: हजार था और 874 प्राप्त हुआ।        सभापति महोदय, मुझे खेद है कि जब मैं ये सारी बात बता रहा हूं तो रेल मंत्री जी वाकआउट कर रहे हैं। ...( व्यवधान)

MR. CHAIRMAN: The Minister of State for Railways is here. She is coming.

श्री लालजी टण्डन : इसी तरह इलैक्ट्रीफिकेशन का था, 35 सौ किलोमीटर होना था, लेकिन 1299 हुआ, जब कि इससे कहीं ज्यादा होना चाहिए था। छ: हजार में 874 किलोमीटर दोहरीकरण हुआ है, जब कि 24 सौ होना चाहिए। ये हमारी उपलब्धियां दर्शा रही हैं, जो सामने हैं।

          सभापति महोदय, बार-बार यह घोषणा हो रही है कि प्राइवेट पार्टीसिपेशन में हम नई-नई योजनाएं बना रहे हैं। यह भी हमारी नीति की कहीं न कहीं असफलता है कि वे सफल नहीं हो रही हैं। जो योजनाएं प्राइवेट पार्टीसिपेशन के अन्तर्गत चल रही हैं, वे कहीं भी पूरी नहीं हो रही हैं; न तो कहीं हास्पीटल बन रहे हैं और न कहीं कुछ और हो रहा है। वर्ल्ड क्लास के जो रेलवे स्टेशन बनने हैं, उनमें मॉल्स बनाने हैं, उनमें रेस्टॉरेंट्स बनाने हैं, उनमें होटल बनाने हैं और न जाने क्या-क्या बनाना है, लेकिन वे कहीं नहीं बन रहे हैं। मंत्री जी अपने उत्तर में बताएंगी कि वे कहां बन रहे हैं। पिछली तीन सरकारों ने जिन-जिन योजनाओं की बराबर घोषणा की, इस बार भी की गई, लेकिन आज तक उनकी शुरूआत नहीं हुई है।

          महोदय, अगर आप पिछले तीन साल के बजट के लक्ष्य देखें, तो जो एक्चुअल खर्च हुआ है, जो बजट में एलॉटमेंट था, उसके मुकाबले में कहीं कम खर्च हुआ है। इसका मतलब यह है कि विकास का काम नहीं हो रहा है और बजट में जो फिगर्स दी जा रही हैं, वे लोगों को प्रलोभन देने के लिए, सब्जबाग दिखाने के लिए दी जा रही हैं। सरकार दिखा रही है कि वह इतना कुछ करना चाहती है, लेकिन उसकी जो उपलब्धियां हैं, जब उन्हें हम देखते हैं, तो ऐसा लगता है कि इन सारी चीजों के बारे में सरकार गलत दिशा में जा रही है।

          महोदय, सदन में रेलवे की जो अनुपूरक मांगें पारित करने के लिए प्रस्तुत की गई हैं, उनमें एक मांग यह भी है कि जहां पर मानव रहित रेल लाइनों के फाटक हैं, वहां बहुत रोड एक्सीडेंट हो रहे हैं। वहां आवश्यकता है मानव-सहित फाटक बनाने की, मैं उसका विरोध नहीं कर रहा हूं, लेकिन 19वीं शताब्दी की जो व्यवस्था है, वह 21वीं शताब्दी में भी वैसी ही चल रही है। हम उसमें पैबन्द लगा रहे हैं, हम उसमें पैचेज लगा रहे हैं। हमारे सामने आज तक कोई एक लक्ष्य नहीं है कि हमें 21वीं शताब्दी में क्या करना है, रेल का क्या होगा? कहीं लाइन पड़ जाएगी, कहीं पुल बन जाएगा, कहीं अधूरा पड़ा रहेगा, कहीं घोषणा हो जाएगी, तो काम शुरू नहीं होगा, कहीं शिलान्यास हो जाएगा, लेकिन वहां भी काम शुरू नहीं होगा।  

          महोदय, रेलवे की स्टेंडिंग कमेटी की जो रिपोर्ट है, वह सदन में पेश हो चुकी है कि कितनी योजनाएं ऐसी हैं, जो पिछले 10सालों में बार-बार इस सदन में घोषित की गईं, हर सरकार ने घोषित कीं, लेकिन वे वहीं की वहीं हैं। उनमें कितनी पूरी हुईं, कितनी खत्म हो गईं, कितनी नई जुड़ गईं, इससे कोई मतलब नहीं और कोई समीक्षा नहीं। कौन करेगा? यही अवसर होता है सरकार को यह बताने का कि जो आपके आंकड़े बता रहे हैं, वे ये हैं और जो जमीनी हकीकत है वह इससे भिन्न है।

          महोदय, रेलवे में खान-पान व्यवस्था को सुधारने के बारे में हमें बहुत स्वप्न दिखाए जाते हैं, लेकिन वे केवल स्वप्न ही रहते हैं, कोई सुधार नहीं होता। मैं एक उदाहरण देना चाहता हूं। मैं यहां से एक बार काशी विश्वनाथ एक्सप्रैस से लखनऊ जा रहा था। मैंने सोचा कि जरा मैं देखूं कि खान-पान में कुछ सुधार हुआ कि नहीं। एक वेटर से मैंने पूछा कि तुम्हारा मीनू क्या है, तो उसने 12 तरह की बिरयानी गिना दी। मैंने पूछा कि कहीं रोटी या दाल या कुछ और है? वह बोला कि साहब, यह टाइम लंच का जरूर है, लेकिन इस वक्त लंच बनता नहीं है। कहिए, तो आपको बिरयानी, जो भी आप चाहें, दे दें। उसने गिना दीं कि मटन बिरयानी, चिकन बिरयानी, वैजीटेबल बिरयानी, पनीर बिरयानी, जो कहेंगे, उस तरह की बिरयानी आपको दे देंगे। मैंने कहा अच्छा। फिर वह बोला कि शाम को 5 बजे आपको सूप मिलेगा। बाद में, जैसे स्टील के बड़े डिब्बे में लेकर चाय वाले चिल्लाते हुए घूमते हैं, वैसे ही वह घूमता हुआ, सूप-सूप की आवाज लगाता हुआ निकल गया। मैं एम.पी. हूं। मैं रेलवे की स्टेंडिंग कमेटी का मैम्बर भी हूं और उसे मालूम भी है। बाद में शाम को उसने चाय और सूप भेजा। उसके साथ नमक और काली मिर्च के छोटे-छोटे पाउच थे। जो सज्जन मेरे साथ बैठे थे, उन्होंने बहुत गौर से उन पैकेट को देखा, तो पाया कि जो काली मिर्च का पाउच था, उस पर दो साल पहले की एक्सपायरी डेट दर्ज थी।

क्या हमारे साथ खिलवाड़ हो रहा है, दो साल पहले जो मसाला एक्सपायर हो चुका, वह वी.आई.पीज़. को सर्व किया जा रहा है, फिर आम आदमी की क्या दशा होगी? इसमें कोई फर्क दिखाई नहीं दे रहा है।

          अब इसमें जो मांग की गई है कि मानव रहित जो रेलवे समपार हैं, उनके ऊपर 2710नियुक्तियां की जाएंगी। अगर हम लगभग 2700मान लें कि पद और मांगे गये हैं तो इसी सदन में माननीय राज्य मंत्री ने एक प्रश्न के उत्तर में दिया था कि पिछले वित्तीय वर्ष की समाप्ति पर सिर्फ उत्तर रेलवे में 19हजार, पूर्व मध्य रेलवे में 17 हजार, मध्य रेलवे में 11 हजार और दक्षिण मध्य रेलवे में 10 हजार, यानी इतने पद रिक्त हैं। इसमें ये और जुड़ जाएंगे। बैकलॉग इसके अलावा होगा और जितनी हम नई-नई बातें कह रहे हैं, उसके लिए और स्टाफ की जरूरत होगी। यह कहां जायेगा?

          एक तरफ मूल्य वृद्धि के कारण योजनाएं विलम्बित हो रही हैं, उनकी जो ओरिजनल लागत है, वह बढ़ती चली जा रही है। दूसरी तरफ छठा वेतन आयोग लागू होने के बाद एस्टैब्लिशमेंट का खर्चा और बढ़ा है। तीसरी तरफ रेवेन्यू कम हो रहा है। ट्रेनें ओवरफ्लो चल रही हैं, स्टेशन पर मेले लगे हुए हैं, लोगों को गाड़ियां नहीं मिल रही हैं, लेकिन रेवेन्यू कम हो रहा है, ये दोनों चीजें कैसे एक साथ हैं? अगर पैसेंजर्स कम हैं तो आमदनी कम होगी। रेलों की मांग कम है तो आमदनी कम होगी। जब पैसेंजर जरूरत से ज्यादा हैं, ट्रेनें ओवरलोड चल रही हैं, उसके बाद भी इनका रेवेन्यू कम क्यों हो रहा है?

          मुझे आश्चर्य हुआ कि जब यह पता है कि जो रेलवे की सम्पत्ति है, उसमें जो भूमि है, उस पर हमारा कोई काबू नहीं है, जो चाहे उस पर कब्जा कर ले...( व्यवधान)

सभापति महोदय : प्लीज़ कन्क्लूड।

श्री लालजी टण्डन : इस विषय पर तो मुझे कुछ कहना होगा न?...( व्यवधान)

सभापति महोदय : बहुत से मैम्बर्स बोलने के लिए हैं। आपने तो 15 मिनट ले लिए। Now please conclude. ठीक है।

श्री लालजी टण्डन : मैं तो सिर्फ आपको पाइंट्स बता रहा हूं, अगर डिटेल्स बताना शुरू करूंगा तो मुझे दो घंटे चाहिए। मैं तो सिर्फ आपको पाइंट्स बता रहा हूं, ताकि रेल मंत्री जी उसे नोट करें और उसे दूर करने की कोशिश करें। ...( व्यवधान)

MR. CHAIRMAN: I understand that there are 16 Members from your Party who want to speak on the Supplementary Demands for Grants (Railways). So, we have to ration the time accordingly.

श्री लालजी टण्डन : लखनऊ और आगरा के बीच में एक इंटरसिटी ट्रेन चलाने के लिए तीन मंत्रियों ने इस सदन में घोषणा की। अब की बार भी घोषणा की गई, लेकिन वह कहां है? उसमें क्या प्रगति हो रही है? अगर हम बजट के वक्त में, जो बजट हमने इस सदन में पास किया है, उस बजट की निगरानी करना भी इस सदन का काम है। अगर हमारे सामने यह वायदा किया गया है तो वायदा अगर पूरा करने में कोई कठिनाई है तो वह भी सदन के सामने आना चाहिए। वह क्यों नहीं हो रहा है? अगर इसमें किसी की शिथिलता है तो वह दंडित होना चाहिए। सदन का अर्थ यह है कि मैं यहां आपकी अनुकम्पा से बोल रहा हूं, मैं यहां इस सदन का सदस्य हूं, मैं जनता के बीच से आता हूं। मैं वह भी देख रहा हूं, जो स्टेशंस पर हो रहा है। मैं वह भी देख रहा हूं कि जो इस सदन में घोषणाएं हो रही हैं और मैं ये सरकार के ही आंकड़े बता रहा हूं, ये उपलब्धियां हैं। इसका औचित्य क्या है? क्या नीति कब बनती है, उसका एग्जीक्यूशन नहीं होता और दूसरी आ जाती है। यह भी पता नहीं लगता कि पहले वाली खत्म कर दी गई हो। जैसे एक आदेश रेल बोर्ड से दिया गया कि जो गार्ड्स हैं, उनको पहले एक बड़ा बक्सा लेकर जाना होता था, उनको जाने के लिए एक छोटा किट दे दिया गया कि वे इसे लेकर जाएंगे।

          उसके लिए एक सौ पचास रूपए उन्हें एक्स्ट्रा एलाउंसेज की घोषणा भी हो गयी। अब मैं यह देख रहा हूं कि कुछ जगह यह चल रहा है और कई जगह ठेकेदारी की प्रथा शुरू कर दी गयी है। जिनको एक सौ पचास रूपए की घोषणा की गयी, वह उन्हें मिलेगा या नहीं? जो ठेका दिया जा रहा है, उसका कोई लाभ होने वाला है या नहीं? ऐसी एक मजबूर स्थिति दिखायी दे रही है कि रेलवे के सारे संसाधनों के ऊपर माफिया कब्जा किए हुए हैं।  रेल अथारिटी कहती है कि हम हेल्पलेस हैं।  हमारे पास कानून में कोई ऐसी व्यवस्था नहीं है कि कोई माफिया ठेका नहीं ले सकता है, कोई माफिया स्क्रैप नहीं खरीद सकता, हमारे पास ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है। ये कहते हैं कि हम हेल्पलेस हैं।  अगर वह 100रूपए की चीज 10रूपए में लेना चाहते हैं तो रेलवे उन्हें वह चीज दस रूपए में देने के लिए मजबूर है। आखिर यह मजबूरी क्यों है?

          महोदय, आज सिक्योरिटी बहुत बड़ा प्रश्न बना हुआ है।  यह बात कई बार आयी है कि हमारी कई तरह की फोर्सेज हैं।  रेलवे की एक सुरक्षा एजेंसी बननी चाहिए, जिसके ऊपर सीधे रेलवे का नियंत्रण हो। स्टेट गवर्नमेंट से जो सुरक्षा मिलती है, उसका नियंत्रण स्टेट गवर्नमेंट पर है।  कोई आदमी ठीक काम कर रहा है, तो स्टेट गवर्नमेंट उसे तीन महीने में ट्रंसफर कर देती है। यहां पर कोई ऐसा सिस्टम बने कि जीआरपी, आरपीएफ आदि सभी को मिलाकर एक रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स बनायी जाए, जिसका पूरा नियंत्रण रेलवे के बोर्ड के अधीन हो, रेल मंत्री के अधीन हो। सुरक्षा केवल यही नहीं है कि जो डिब्बे में यात्री यात्रा कर रहे हैं, उनके जानमाल की सुरक्षा हो।   आज सुरक्षा की जरूरत कई तरह से पड़ रही है।  ट्रेनें जलायी जा रही हैं, किडनैप हो रही हैं और कहीं पर कोई हेल्प करने वाला नहीं है।कहां से फोर्स आएगी, तब तक क्या हो जाएगा? रेल का इंजन खोलकर कोई लिए जा रहा है, डिब्बे बाहर खड़े हुए हैं, उन्हें कोई बचाने वाला नहीं है। ऐसी विषम स्थितियों में कुछ जगह कठोर फैसलों की जरूरत है। जो नीतियां घोषित की गयी हैं, उन्हें लागू करने की जरूरत है।

          महोदय, मैं यह कोट कर रहा हूं। इस सदन में कमेटी की जो रिपोर्ट पेश हो चुकी है, उसका यह पैरा है द्भ ‘When asked about the reasons for the non-realization of earnings from commercial exploitation of Railway land due to which the target was revised downwards’. यह अधिकार किसके लिए दे दिया कि बजट में जो रखा गया, रिसोर्सेज हुए नहीं, तो अपने आप कम कर दिया, रेडय़ूस कर दिया, इसे रेडय़ूस करने का अधिकार किसे है? जिसने बजट पास किया है, उस संस्था को है या मंत्रालय को है या बोर्ड को है या किसी एक अधिकारी को है? यह कैसे हो रहा है? यह एक अराजकता की स्थिति है।

The Ministry of Railways informed the Committee that the target was revised downward from Rs.2300 crore to Rs.500 crore due to economic slow-down and slump in commercial and real estate sector. All efforts are being made for better realisation of earnings from commercial exploitation of Railway land, 12 sites have been identified for finalisation of contract for commercial development during 2009-2010.

          यह उस कमेटी की रिपोर्ट का एक पैरा है, जिसे मैंने पढ़कर सुनाया है। मैं एक बार फिर दोहराना चाहता हूं कि सरकार की कंटीन्यूटी होती है, जो घोषणायें की गयी है, कमेटी की रिपोर्ट में यह भी है कि दस साल से इस सदन में लगातार बहुत सी योजनाओं की घोषणायें की जा रही हैं और आज भी घोषित की गयी हैं, लेकिन उनका कोई पता नहीं है।  इस ओर ध्यान देना चाहिए। अगर वे नहीं हो सकतीं हैं तो उन्हें खत्म करें या उन्हें पूरा करने का कोई टाइम फ्रेम तय करें। इस बारे में कुछ तो होना चाहिए।

MR. CHAIRMAN :  Please conclude; otherwise, Members from your Party would not get the time.

श्री लालजी टण्डन : महोदय, अगर मैं इस सदन के उपयोग के लायक कोई बात नहीं बोल रहा हूं तो मैं आपकी आज्ञा से बैठ जाऊंगा।

 

सभापति महोदय : आप अच्छा बोल रहे हैं, लेकिन आपकी पार्टी की तरफ से बहुत से मेंबर बोलने वाले हैं।

     

CUT MOTIONS   SHRI PRASANTA KUMAR MAJUMDAR :

 

13.00 hrs. श्री भक्त चरण दास (कालाहांडी):  सभापति महोदय, माननीय मंत्री महोदया द्वारा रेलवे की जो सप्लीमैंट्री डिमांड्स रखी गई हैं, मैं उसका समर्थन करने के लिए खड़ा हुआ हूं। रेलवे एक ऐसा विषय है जिसे पूरा देश जागरुक ढंग से देखता है कि यह हमारे गांव, शहर में कब पहुंचे और कब हमारे यहां विकास हो। जब तक गांवों और जिलों में रेल नहीं पहुंचती, तब तक वहां विकास नहीं पहुंच पाता, ऐसा लोगों का सोचना है। …( व्यवधान)

MR. CHAIRMAN :  Hon. Members, there will no lunch hour today. Shri Das, please continue. 

श्री भक्त चरण दास :  रेलवे अपने लम्बे समय के संघर्षमय जीवन में आज 63,140किलोमीटर पर फैली हुई है। रेलवे रोज दो मिलियन टन फ्रेट मूव करती है, अर्निंग करती है और 18 मिलियन जनता उसमें ट्रैवल करती है। रेलवे एक संवेदनशील विभाग है। रेलवे हर जिले, हर संसद सदस्य की मांगों की पूर्ति करने की कोशिश करती है। जब से माननीय ममता जी रेलवे मंत्री बनी हैं, उन्होंने कई क्रान्तिकारी कदम उठाए हैं। उन्होंने अपने संघर्षशील जीवन के अनुभव के आधार पर जनता को जितना दिया जा सकता है, उतना देने का प्रयास किया है। यूपीए सरकार की जनता को साथ लेकर चलने की जो मानसिकता है, इनक्लूसिव ग्रोथ की जो मानसिकता है, हर जगह इफ्रास्ट्रक्चर प्रोवाइड करने का जो एटीटय़ूड है, उसे सामने रखते हुए रेल मंत्री महोदया ने कई व्यापक कार्य किए हैं। इसके बावजूद इंसान से हर समस्या का हल नहीं हो पाता। अकेले रेल मंत्री महोदया इतने बड़े विभाग में जनता की हर समय की मांग की पूर्ति नहीं कर सकतीं। लोग ट्रेन में सफर करते हैं, कई लोग हमसे मिलते रहते हैं और बताते रहते हैं। हम भी जब ट्रेन में ट्रैवल करते हैं तो देखते हैं कि ट्रेन में जो सफाई होनी चाहिए, वह नहीं होती। सफाई पर बहुत ध्यान देने की आवश्यकता है। मैं रेल मंत्री महोदया से अनुरोध करूंगा कि रेलों में सफाई के प्रति ज्यादा ध्यान दिया जाए।

          रेलों में जो बैड रौल सप्लाई किया जाता है, वह उतना अच्छा नहीं होता, जनता के अनुरूप नहीं होता। सैंकड़ों ट्रेनों में बैड रोल साफ नहीं होता। उसे धोने के लिए जो माडर्न मकैनिज़्म है, उसे मैक्सिमम जगह पर इस्तेमाल किया जाना चाहिए। रेलवे मंत्री महोदया युवा वर्ग को रिप्रैजैंट करती हैं। मैं उनसे अनुरोध करूंगा कि लिनन का काम देश के अनइम्प्लॉयड यूथ को दिया जाए। यदि यह कार्य उन्हें ट्रेनिंग देकर दिया जाता है, तो करीब पांच हजार से दस हजार युवा इसमें काम पा सकेंगे जिससे देश की युवा शक्ति को लाभ होगा।

          रेलवे जिस इलाके में पहुंच पाई है, वह ठीक है, लेकिन जहां नहीं पहुंच पाई, वहां उसके लिए ज्यादा मांग होती है। मैं मंत्री महोदया से जानना चाहूंगा कि किन राज्यों में कितने किलोमीटर रेल लाइन है और किन राज्यों में रेलवे लाइन बहुत कम हैं। जिन राज्यों में रेल लाइन नहीं है, उनमें आज तक क्यों नहीं हो पाई। हमारे देश में छत्तीसगढ़, उड़ीसा. मध्य प्रदेश, झारखंड जैसे पिछड़े राज्य हैं जिनमें आज भी रेलवे का नेटवर्क ज्यादा नहीं हो पाया है।  वहां लोग विकास की उम्मीद में बैठे हैं। वहां भरपूर खनिज सम्पदा होने के बावजूद भी कोई विकास नहीं हो पाया है क्योंकि रेलवे का विकास नहीं होने के कारण वहां उद्योग धंधे नहीं बढ़ पाये हैं, इफ्रास्ट्रक्चर का विकास नहीं हो पाया है। इसलिए वह इलाका आज भी गरीब है। आज भी वह इलाका बिना किसी दिशा-निर्देश के चल रहा है।

          सभापति महोदय, आप जानते हैं कि उस एरिया में नक्सलाइट एक्टिविटीज क्यों ज्यादा हो रही हैं?अगर हम वहां विकास पहुंचा दें, तो वहां के नौजवानों को रचनात्मक ढंग से जीने के लिए एक दिशा मिल जायेगी। उनके दिशाहीन होने में रेलवे भी एक महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती है। अगर हम वहां रेलवे पहुंचा देते हैं, तो वहां पर विकास होने लगेगा और नौजवानों को एक रास्ता मिलने लगेगा और दिशाहीन नौजवानों को मुख्यधारा में लाने में आगे बढ़ सकेंगे ।

          सभापति महोदय, आप हमारे राज्य से आते हैं। आप जानते हैं कि हमारे राज्य में भरपूर खनिज सम्पदा होने के बावजूद वहां रेलवे का जितना नेटवर्क होना चाहिए, उतना नहीं हुआ है। हम हर साल रेलवे को ढाई हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की आमदनी भी देते हैं, लेकिन उसके बावजूद भी हमारे यहां रेलवे लाइन का विकास बहुत मंथर गति से चल रही है। हमारे यहां टीटलागढ़ से रायपुर तक डबलिंग होना चाहिए। इसी तरह टीटलागढ़ से सम्बलपुर और सम्बलपुर से तालचेर के लिए डबलिंग में कोई प्रौग्रेस नहीं हो पा रही है। हमारे यहां जो रेलवे लाइन होनी चाहिए, वह भी नहीं हो पायी है।  20 साल पहले खुर्दारोड से बोलांगीर रेलवे लाइन को तत्कालीन रेल मंत्री द्वारा उपस्थापित किया गया था, लेकिन वह लाइन आज तक कहीं दिखाई नहीं दे रही है। इस बीच में आवाज उठ रही है कि खुर्दारोड-बोलांगीररेलवे लाइन को बंद कर दिया जाये। खुर्दारोड-बोलांगीर रेल लाइन गोपालपुर को कनैक्ट करती है। अगर बोलांगीर तक यह रेलवे लाइन हो जाती है, तो यह भिलाई को कनैक्ट करेगी। भिलाई और गोपालपुर पोर्ट में एक कम्युनिकेशन रहेगा। इससे वहां उद्योग बढ़ेगा, व्यापार बढ़ेगा और अर्निंग भी बढ़ेगी। इसलिए इस एरिया को पिछड़ा एरिया कहकर रेल लाइन बंद कर देना और 20 साल तक उसे इम्पोर्टैंट्स नहीं देना, बहुत दुख की बात है। इसी तरह हरिदासपुर पाराद्वीप के बारे में भी है। उड़ीसा में जो ऑनगोइंग रेलवे लाइन का प्रौजेक्ट है, उस पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। इसी तरह 20साल से मेरी कांस्टीट्सीं पर भी ध्यान नहीं दिया जा रहा है। वहां लांजीगढ़ रोड से जूनागढ़ तक54किलोमीटर की रेलवे लाइन बननी थी, लेकिन आज 20 साल हो गये, वह लाइन30किलोमीटर भी पूरी नहीं हो पायी है। क्या यह नजरिया रेलवे विभाग का होना चाहिए?इस तरह से पिछड़े इलाके का जो सवाल है, जिस एरिया में लोगों को विकास चाहिए, जहां आदिवासी, दलित, पिछड़े वर्ग के लोग रहते हैं और जहां जंगल का इलाका है, जिस जगह में खनिज सम्पदा और कृषि सम्पदा होते हुए भी विकास के सारे प्रावधान की व्यवस्था प्रकृति ने की है, उस जगह रेलवे की सुविधा न पहुंचाकर क्या हम उनके प्रति गुनाह नहीं कर रहे हैं? इस बात की तरफ हमें ध्यान देना चाहिए।

          रेलवे मंत्री महोदया इस बात को अच्छी तरह से जानती हैं क्योंकि पश्चिम बंगाल और उड़ीसा में कोई ज्यादा दूरी नहीं है। जो आंचलिक विषमता दिखाई दे रही है, जिस तरह से देश में शहर बढ़ रहे हैं और गांव घट रहे हैं, उस तरह से पश्चिम उड़ीसा का भी विकास नहीं हो पा रहा है। लोग बार-बार मांग कर रहे हैं कि कौशलराज, पश्चिम उड़ीसा को अलग राज्य बनाया जाये। उसके बावजूद हम राष्ट्रीय धारा से जुड़े हुए हैं कि इसका विकास आज नहीं तो कल होगा।

          मैं माननीय मंत्री महोदया से निवेदन करना चाहूंगा कि देश में जो भी इलाका है जैसे हमारा पश्चिम उड़ीसा है, उस तरह से जो संवेदनशील इलाके हैं, जिस जगह में विकास का पहुंचना अनिवार्य है, अगर आप जैसे लोग उसे नहीं पहुंचा पायेंगे, तो किससे जनता उम्मीद करेगी?अगर हम और आप जनता की मांग पूरी नहीं कर पायेंगे, तो जनता का सपना, सपना ही रह जायेगा और रेलवे की सुविधा लोगों तक पहुंच नहीं पायेगी। उड़ीसा को जिस तरह से रेलवे विभाग ने नेग्लेक्ट किया गया है, मैं आग्रह करूंगा कि मंत्री महोदया इस बात पर ध्यान दें और आने वाले दिनों में पिछड़ा एरिया कम से कम रेलवे में पिछड़ा न रहे।

          महोदय, एक साल पहले मेरी कांस्टीटय़ूंसी के लिए कांटावांजी-खरियार-जूनागढ़-नवरंगपुर रेलवे लाइन का सर्वे करने के लिए बजट में स्थान मिला, लेकिन अभी तक उस सर्वे का टेंडर ही नहीं हुआ है । वहां अभी तक काम ही शुरू नहीं हुआ यानी कोई कार्यवाही इस क्षेत्र में अभी तक नहीं की गयी।

          महोदय,20साल पहले वहां एक ट्रेन चलाई गयी थी। मैंने पिछले रेलवे बजट के समय भी यह बात कही थी। वह ट्रेन आध्र प्रदेश से शुरू होकर, उड़ीसा होते हुए, छत्तीसगढ़ होते हुए, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के पिछड़े इलाकों से होते हुए वह दिल्ली तक पहुंचती है। उस समय राष्ट्रीय एकता की बात चल रही थी, तो इस ट्रेन का नाम रखा गया था समता एक्सप्रेस। पूरे देश के पिछड़े इलाकों, साउथ और नार्थ को यह ट्रेन जोड़ती है। हमने एक अनुरोध पिछले बजट सत्र के समय किया था कि यह ट्रेन जो अभी तीन दिन चलती है, उसे सात दिन किया जाए। उस इलाके के लोग इलाहाबाद आते हैं, जब लोगों को श्राद्ध क्रिया करनी होती है तो हजारों लोग इलाहाबाद आते हैं। इसलिए मेरा अनुरोध है कि उस ट्रेन को चार दिन इलाहाबाद होते हुए दिल्ली तक चलाया जाए। यह बात मैंने पिछले रेलवे बजट के समय रखी थी, लेकिन बड़े दुख के साथ कहना पड़ रहा है कि उस पर जितना ध्यान देना चाहिए, वह नहीं दिया गया। रेलवे मंत्री महोदया से मैं आग्रह करूंगा कि इस ट्रेन की जरूरत को समझा जाए, उसमें सारी टेक्नीकल्टीज और इकोनॉमिक स्टडी है, यह ट्रेन हमेशा भरी हुई चलती है, उसमें लोगों को जगह नहीं मिलती है। यह एकमात्र ट्रेन उस लाइन पर दिल्ली तक चलती है, फिर भी उस पर ध्यान नहीं दिया जाता है। मैं आपसे आग्रह करूंगा कि इस ट्रेन के प्रति ध्यान दिया जाए।

          महोदय, कालाहांडी देश का बहुत पिछड़ो इलाका है। नवरंगपुर जिला भी बहुत पिछड़ा इलाका है। नवरंगपुर जिला, मलकानगिरी क्षेत्र से होते हुए पहाड़ से जब नीचे आते हैं तो कालाहांडी पहुंचते हैं, तो वहां पर ट्रेन का कम्यूनिकेशन नहीं हो पाता है।  इसलिए अगर कांटावांजी से जूनागढ़ और नवरंगपुर लाइन का सर्वे हो जाएगा, यह लाइन बन जाएगी तो लोग नवरंगपुर से सीधा भुवनेश्वर तक जा पाएंगे, प्रदेश की राजधानी और अन्य राज्यों में जा पाएंगे। उस क्षेत्र में काफी खनिज संपदा है, आयरन ओर है, ग्रेनाइट है, बाक्साइट है, बहुत से मिनरल डिपॉजिट्स हैं जिनसे सफिशिएन्ट अर्निंग हो सकेगी। पता नहीं क्यों अब तक इसका ठीक से अध्ययन नहीं किया गया है?

          महोदय, कोरापुट जिले से जो ट्रेन चलती है, उस ट्रेन में भुवनेश्वर तक जाने के लिए जो व्यवस्था होनी चाहिए, वह नहीं है। उसमें एक भी एसी कोच नहीं है। हटिया से पुरी तक तपस्विनी एक्सप्रेस चलती है। कोरापुट से संबलपुर तक एक ट्रेन आती है, जिसमें कोई थर्ड एसी या सेकण्ड ऐसी कोच नहीं होता है, उसमें मात्र एक ही स्लीपर कोच है। मैं आपसे अनुरोध करना चाहूंगा कि उसमें दो स्लीपर कोच और एक एसी कोच जोड़ा जाए। कालाहांडी देश का अत्यधिक पिछड़ा जिला है, लेकिन वहां से कोई भी ट्रेन का कम्यूनिकेशन नहीं होने के कारण भुवनेश्वर जाने में लोगों को बहुत असुविधा होती है। मुझे स्वयं पूर्व रेल राज्यमंत्री होते हुए भी, 50किलोमीटर दूर टीटलागढ़ तक जाकर ट्रेन पकड़ना पड़ता है। इसलिए काफी समय से वहां के लोग डिमाण्ड कर रहे हैं कि रायपुर से भुवनेश्वर ,तक जो इंटरसिटी ट्रेन चलती हैउससे जोड़ने के लिए रायगढ़ से टीटलागढ़ तक एक डीएमयू टाइप ट्रेन चलाई जाए जिससे लोग वहां से उस इंटरसिटी ट्रेन में भुवनेश्वर, जो स्टेट कैपिटल है, तक  जो सकें। मेरे साथ ही हर संसद सदस्य चाहते हैं कि उनके क्षेत्र में रेलवे की व्यवस्था हो, वे उसके लिए मांग करेंगे, मांग रखेंगे, लेकिन कालाहांडी, रायगढ़ और पश्चिमी उड़ीसा के अन्य जिलें बहुत पिछड़े इलाके हैं, इस बात को ध्यान में रखना चाहिए। ऐसा नहीं हो कि वहां के लोग आगे आंदोलन के लिए उतर आएं। मैं कोई धमकी नहीं दे रहा हूं। लेकिन आंदोलन करते हुए ही रेलमंत्री महोदया ने इतनी बड़ी जनता का विश्वास जीत सकी हैं। पूरे बंगाल के लोगों का विश्वास उनसे जुड़ा हुआ है, लेकिन पूरे देश के जो पिछड़े खण्ड हैं, उनको भी ध्यान में रखकर आने वाले दिनों में काम करें। इन्हीं बातों के साथ मैं आपको धन्यवाद देते हुए अपनी बात समाप्त करता हूं।

श्री मुलायम सिंह यादव (मैनपुरी): सभापति जी, आपको बहुत-बहुत धन्यवाद।

          मैं माननीय रेलमंत्री जी के सामने कुछ ही बातें रखूंगा और मेरे साथीगण विस्तार से बात रखेंगे। वर्ष 1996 में जब श्री राम विलास पासवान जी रेल मंत्री थे, उन्होंने घोषणा की थी कि ग्वालियर, भिंड, इटावा, मैनपुरी, एटा होते हुए गैजरोला तक रेलवे लाइन बनाई जाएगी। ऐसा नहीं है कि कोई काम नहीं हुआ, उस पर कुछ काम भी हुआ है, जब से वह स्वीकृत हुई है। मैनपुरी तक काम भी हुआ है और एटा तक स्वीकृत हुई है। इसके बाद जब माननीय नीतीश कुमार रेल मंत्री बने, उस समय वह महामहिम राष्ट्रपति जी की अध्यक्षता में उनके साथ हमारे गांव सैफई गए थे और वहां पर यह कार्यक्रम हुआ था। उस समय माननीय नीतीश कुमार ने घोषणा की थी और उस घोषणा को कुछ हद तक पूरा भी किया गया। रेलवे लाइन इटावा से मैनपुरी तक, थोड़ी बहुत रह गई है, बिछ चुकी है। आगे उसे एटा तक जाना था, अब पता नहीं कि वह कैंसिल कर दी गई है या आगे ले जाना है, नहीं ले जाना है। मेरा कहना है कि सन् 1996, 1997 और 1998 में काम होने के बाद वह काम आज तक रुका हुआ है। वह रेलवे लाइन इटावा से जाती है, संयोग से उसमें हमारा गांव भी पड़ता है। यह कितना सच है, कितना नहीं, यह तो रेल मंत्री जी ही बताएंगी कि हमारे गांव सैफई उस रेल लाइन पर पड़ता है इसलिए उस रेल लाइन का काम पूरा नहीं किया जा रहा है। इस बात की वहां चर्चा है और मुझे भी लगता है कि यही बात है। पिछली सरकार के समय भी ऐसा हुआ। उसके बाद यूपीए की पिछली सरकार जो थी, तब भी ऐसा हुआ। रेल मंत्री जो भी बने, सबको मैं यह बात कह चुका हूं। आखिर वहां के किसानों की इतनी जमीन चली गई। रेल विभाग ने वह जमीन एक्वायर कर ली। उसके कारण पैदावार भी घटी, सरकार के खजाने से पैसा भी गया और काम भी अधूरा पड़ा है। रेल विभाग का काम इतना अनिश्चित और दुर्भाग्यपूर्ण रहे, यह मैंने पहले कभी नहीं देखा, जितना इस रेल लाइन का है। यह रेल लाइन सन् 1996 से स्वीकृत है, दो साल में इस काम को पूरा हो जाना चाहिए था। नीतीश कुमार जी ने हमारे गांव सैफई गए थे, वहां कहा था कि आज माननीय राष्ट्रपति जी ने शिलान्यास किया है, यही राष्ट्रपति जी उद्घाटन करेंगे। अब सोचिए, राष्ट्रपति जी शिलान्यास कर रहे हैं और वही राष्ट्रपति जी उद्घाटन करें, लेकिन उद्घाटन करने के लिए आगे रेल लाइन नहीं बिछी।

          सभापति जी, मैं ज्यादा नहीं कहना चाहता हूं। वह हमारा इलाका है, मैं इटावा का रहने वाला हूं। मैं तीन बार मैनपुरी से चुनाव जीत चुका हूं। इटावा और मैनपुरी आपस में जुड़े हुए जिले हैं। एटा से आगे बदायूं है, वहां सम्भल से भी हम सांसद रहे हैं। ऐसा लगता है कि हमारा इलाका है इसलिए यह रेल लाइन स्वीकृत तो हो गई, लेकिन आगे नहीं बढ़ रही है। इसमें सच्चाई है। अभी माननीय रेल मंत्री जो हैं, उनके मन में ऐसी कोई भावना नहीं है कि मुलायम सिंह के गावं से या उनके क्षेत्र से रेल लाइन जाती है इसलिए हम इसे आगे नहीं बढ़ने देंगे। लेकिन सच्चाई यह है कि अन्य सरकारों ने यह किया है। कुछ लोगों के मन में यह बात आई कि यह रेल लाइन इनके क्षेत्र से होकर जा रही है इसलिए अधूरी पड़ी है।

          मैं रेल मंत्री जी से कहना चाहता हूं कि आपने वहां जमीन एक्वायर कर ली। इस कारण वहां के किसानों के खेत तो चले गए, सुविधा नहीं मिली। आपका इस पर पैसा भी खर्च हो चुका है। मैं कहना चाहता हूं कि रेल विभाग के पास पैसे की कमी नहीं थी और न ही आज है, फिर क्या वजह है। यह रेल लाइन ग्वालियर से भिंड और भिंड से आगे बिछ चुकी है। यह रेल लाइन मुम्बई लाइन को जोड़ती है। वहां क्वारी, चम्बल और यमुना, ये तीन नदियां पड़ती हैं। इन नदियों पर पुल बनना है। इस पुल के लिए सरकार के पास पैसा नहीं है, यह बहाना सरकार का है। मैं पूछना चाहता हूं कि इस पुल पर कितना पैसा लगेगा? अगर कहीं बस या मोटर के लिए पुल बनता, तो उसके लिए पैसा चाहिए, वह बात हमारी समझ में आती। इसमें तो रेल लाइन बिछानी है, कुछ पिलर्स लगेंगे तीनों नदियों में, यह हम मानते हैं। अगर आपके पास वाकई में पैसे की कमी है तो इसे छोड़ दो। लेकिन जब मैं रेल मंत्रालय का बजट पढ़ता हूं तो दिखाई देता है कि रेल विभाग के पास पैसे की कोई कमी नहीं है, बल्कि और भी पैसा है। क्या स्टाफ की कमी है या इच्छाशक्ति नहीं है? लेकिन हमें वर्तमान रेल मंत्री जी के बारे में जरूर मालूम है कि इतनी पुरानी रेल लाइन स्वीकृत हो चुकी है, कुछ काम अधूरा पड़ा है, तो वह इस पर ध्यान देंगी। ग्वालियर से भिंड, भिंड से इटावा-मैनपुरी से गजरौला जोड़ने की यह योजना स्वीकृत है। इसलिए हमारी प्रार्थना है कि इस रेल लाइन पर सौभाग्यवश हमारा गांव भी पड़ता है। हमारे गांव तक तो रेल लाइन बिछ गई है, और आगे भी बिछ गई है, लेकिन सन् 1996 से अभी तक काम अधूरा पड़ा है, नौ साल पूरे हो गए हैं।

          माननीय मंत्री जी, मैं आज बोलने के लिए खड़ा हुआ हूं, क्योंकि जनता के हित का सवाल है, मेरा भी क्षेत्र पड़ता है।

रेल मंत्री (कुमारी ममता बनर्जी): मैंने शुरू किया था, जब आपने नौ साल पहले एक बार कहा था।

श्री मुलायम सिंह यादव : आपने कहा था कि लिख कर दे दो। लिख कर देने की क्या जरूरत है?वह स्वीकृत है, आप फाइल मंगा लीजिए और अधिकारियों से बात कर लीजिए। हमें भी बुला लीजिए। अगर हो जाता है, तो बहुत ठीक है।

 

श्री गोरखनाथ पाण्डेय (भदोही): सभापति महोदय, मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री का ध्यान अपने क्षेत्र के रेल के विकास से संबंधित दो-तीन बातों की तरफ आकर्षित करना चाहता हूं। पिछले बजट में माननीय मंत्री जी ने बहुत सी घोषणाएं की हैं। हमने भी कुछ मांगें मंत्री जी के सामने रखी थीं। मैं काशी और प्रयाग के मध्य भदोही जनपद से आता हूं और यह कालीन नगरी के रूप में जानी जाती है। यहां से करोड़ों रुपयों का व्यवसाय विदेशों से होता रहा है। मैंने मंत्री जी से मांग की थी और पत्र भी लिखा था कि उस नगर के बीच में रेलवे ट्रैक है और एलडी रोड भी वहीं से हो कर गुजरती है। वहां ओवर ब्रिज के लिए प्रस्ताव राज्य सरकार से आया है। प्रतिदिन वहां जाम रहता है। जो विदेशी नागरिक व्यवसाय की दृष्टि से आते हैं, वे दोबारा भदोही आने का नाम नहीं लेते हैं। अगली बार वे बनारस रुकते हैं या इलाहाबाद रुकते हैं। मैंने मांग की थी और आज भी उसी बात को दोहरा रहा हूं कि वहां ओवर ब्रिज की जरूरत है। मंत्री जी इस विषय पर अवश्य ध्यान दें।

          हमने एक मांग और की थी, वह सिर्फ हमारी मांग ही नहीं है, बल्कि पूरे क्षेत्र की जनता की मांग है। भदोही जनपद का मुख्यालय ज्ञानपुर है। ज्ञानपुर इलाहाबाद और बनारस, प्रयाग और काशी के मध्य में ही है। उस जनपद के मध्य एक स्टेशन ज्ञानपुर रोड है। वहां दोहरीकरण की मांग चल रही है। उसका भी प्रस्ताव है और जिस ज्ञानपुर स्टेशन का मैं नाम ले रहा हूं, वहां सीता समाहित स्थल है, जो देश का पौराणिक स्थल है। वहां विदेशी भी आते हैं और देश के हर राज्य से प्रतिदिन लोग ज्ञानपुर रोड से आते हैं। वाराणसी से नई दिल्ली के लिए एक ट्रेन शिवगंगा चलती है, जनता की मांग है कि जनहित की दृष्टि से शिवगंगा ट्रेन के ठहराव, जो गोपीगंज ज्ञानपुर रोड है, किया जाए।

          महोदय, एक बहुत बड़ी समस्या है, जिस पर मैं माननीय मंत्री जी का ध्यान आकृष्ट करना चाहूंगा। मैं संसद सदस्य हूं। मैं आपसे और माननीय मंत्री जी से भी न्याय चाहूंगा। एक खबर अमर उजाला अखबार में दिनांक 6/8/2009को छपी थी कि प्रयागराज ट्रेन में बुरे फंसे बसपा सांसद। मैं उस ट्रेन में था और मेरे सहयात्री का भी टिकट सैकेंड एसी का था। मैं फर्स्ट एसी में यात्रा कर रहा था। मेरे साथ कोई मित्र बैठे थे और जब टीटी आया, तब उन्होंने टिकट बनवा लिया, एक साजिश के तहत। उस टीटी का नाम....... * है, उसकी ससुराल मेरे क्षेत्र में है।

सभापति महोदय :  आप नाम मत लीजिए।

श्री गोरखनाथ पाण्डेय : मैं माननीय मंत्री जी का ध्यान आकृष्ट कराना चाहता हूं। राजनीतिक विद्वेष के कारण।

* Not recorded.

सभापति महोदय : आप मिनिस्टर को लिख सकते हैं।

श्री गोरखनाथ पाण्डेय : मेरे द्वारा लिखित तीन-तीन नोटिस दिए गए, पहला - 8.8.2009को, दूसरा -1.10.2009, फिर तीसरा -11.11.2009को, फिर मैंने विशेषाधिकार के लिए नोटिस दिया और उसका आज तक हमें लम-सम उत्तर मिला, जिसमें बहुत भ्रामक और घुमा-फिरा कर, जबकि इस तरह की खबर, जो प्रेस मीडिया में आई, मेरी छवि को धूमिल किया गया। उस टीटी ने जानबूझ कर मेरी छवि धूमिल की और मुझे बदनाम करने का प्रयत्न किया है। मैंने माननीय मंत्री जी से मांग की थी कि या तो उसे सस्पेंड करके जांच कराई जाए, इस तथ्य की जांच कराएं और दूध का दूध तथा पानी का पानी हो, मुझे न्याय मिले। अगर रेलवे विभाग द्वारा एक संसद सदस्य को न्याय नहीं मिलता, तो सामान्य व्यक्ति, जो रोज यात्रा करता है, जिसे तरह-तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, जिसे यातनाएं झेलनी पड़ रही हैं, उन यात्रियों को कैसे न्याय मिलेगा।

          सभापति महोदय, मैं आपके द्वारा माननीय मंत्री जी से निवेदन करना चाहूंगा कि इस प्रकरण की जांच हो और उस व्यक्ति पर तत्काल कार्यवाही की जाए।

 

श्री दिनेश चन्द्र यादव (खगड़िया): सभापति महोदय, मैं रेल की अनुपूरक मांगों पर बोलने के लिए खड़ा हुआ हूं। अनुपूरक मांग के लिए जो पिंक बुक छपी है, उसे देखने का मुझे मौका मिला और पहले भी जो रेल बजट आया था, उस समय भी जो स्थिति थी, उसे भी देखा था हम बिहार से सांसद हैं, हमने देखा बिहार के लिए कुछ नहीं दिया गया था,  निराशा हुई थी। हम लोग इस उम्मीद में थे कि हम लोगों की जो निराशा है, उसमें जरूर कुछ कमी आएगी लेकिन सप्लीमेंट्री बजट जो आया, वह 731 करोड़30 लाख60 था, हजार रुपये का50 आइटम में से आइटम संख्या 40 पर मात्र पूर्व मध्य रेलवे में केवल एक योजना का ही उसमें उल्लेख है, वह भी बिना चौकीदार वाले गेट पर चौकीदार तैनात करने की योजना है। पिछले रेल बजट पर जब चर्चा हो रही थी और उसमें जो स्थिति थी, उस स्थिति का उल्लेख करने का मौका मुझे कम मिला था क्योंकि समय की कमी थी । 8 जुलाई,2009 को2009-2010 का जो रेल बजट आया था, उसमें माननीय रेल मंत्री जी जो नये प्रस्ताव लेकर आए थे, नयी रेल लाइन निर्माण के लिए 53 रेल लाइन जो बननी थीं, जिन पर 2921 करोड़ रुपया खर्च होना था लेकिन बिहार से एक भी रेल लाइन नहीं ली गई। उसके बाद आमान परिवर्तन की तीन योजना का इन्होंने लक्ष्य 1750 करोड़ रुपये का रखा था लेकिन उसमें भी बिहार की कोई योजना नहीं थी । दोहरीकरण की तो कोई चर्चा ही नहीं थी। इन्होंने टार्गेट भी तय किया था कि हम इस वर्ष में क्या-क्या करेंगे। उसमें नयी रेल लाइन 7 का निर्माण 250 कि.मी. का होना था और बिहार में बहुत सारी योजना चल रही थी लेकिन उसमें से बिहार से एक भी योजना को टार्गेट में नहीं रखा गया। आमान परिवर्तन के 17 रेल खंड 1300 कि.मी. के थे, आमान परिवर्तन के लिए कोई प्राथमिकता बिहार के लिए तय नहीं की गई थी।

          सभापति जी, दोहरीकरण की जो 13 रेल खंडों में 700 कि.मी. की योजना थी, उसमें भी बिहार अछूता रहा। हम यह बात इसलिए मंत्री जी के सामने रखना चाहते हैं कि हम लोग बिहार से सांसद होकर आए हैं और बिहार में कई योजना पहले से भी चल रही थीं और उन योजनाओं के पूरा होने की बात तो दूर बल्कि उन योजनाओं में बिल्कुल कम राशि देकर उसकी गति को धीमी कर दिया गया है। हम मंत्री जी पर कोई आरोप नहीं लगाना चाहते हैं। लेकिन हम लोग जहां से चुनकर आते हैं, हमारे जो मतदाता हैं और जो हमारे अन्य सांसद साथी हैं, उनसे भी लोग चर्चा करते हैं कि क्या आप लोग बिहार के लिए अपनी बातें रख पाते हैं कि नहीं और क्या आप लोग रेल मंत्री जी से आग्रह करते हैं कि नही, अन्य जगहों पर बहुत कुछ हो रहा है बिहार में क्यों नहीं हमें कोई आपत्ति नहीं है कि बंगाल में क्या-क्या हो रहा है, और न कोई दुख है। यह स्वाभाविक है कि जहां के रेल मंत्री होते हैं, वहां कुछकरते हैं, उसमें कोई दुख की बात नहीं है लेकिन लगता है कि बिहार, रेल के मामले में इस देश का हिस्सा ही नहीं है। हम छोटा सा उदाहरण देना चाहते हैं, हम माननीय मंत्री जी से मिले भी थे। एक इंटरसिटी गाड़ी दानापुर से सहरसा चलती है जो हमारे लोक सभा क्षेत्र के साथ-साथ हमारे जो राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव जी हैं, उनके लोक सभा क्षेत्र तक जाती है। इंटरसिटी गाड़ी सहरसा से दानापुर 3225 A और फिर दानापुर से सहरसा 3226 A चलती थी, उसमें ए.सी. चेयरकार लगी हुई थी। पटना जंक्शन के बगल में खुसरुपुर में कोई बात हुई थी और लोगों ने ट्रेन जलाई थी जिससे एसी कोच जल गया। एक एसी कोच एक ट्रेन का जला था लेकिन दोनों इंटरसिटी ट्रेन का एसी कोच हटा दिया गया। वहां के लोगों की क्या गलती थी? यह गाड़ी सहरसा के लिए महत्पूर्ण है। सहरसा तक अमान परिवर्तन के कार्य हुए हैं तो कई गाड़ियां चलनी है इसलिए हमने आग्रह किया था कि इन्हें चलाइए। लेकिन आज तक एसी चेयर कार नहीं दिया गया । हम पुनः मंत्री जी से  आग्रह करते हैं कि एसी कार जिस तरह से था इसी तरह से चलाना चाहिए।

         सभापति महोदय, टोरंटो गाड़ी चलाई गयी  देश में नया कन्सेप्ट आया, लोगों को खुशी भी हुई लेकिन बिहार इससे अछूता रह गया। बिहार से न तो कोई टोरंटो गाड़ी चली और जो गाड़ी कोलकाता, हावड़ा से चली उसका भी ठहराव बिहार में नहीं हुआ। हम लोगों से जनता पूछती है कि आप लोग क्यों नहीं गाड़ी का ठहराव बिहार में  करवाते हैं? बिहार इस तरह से नेगलेक्ट क्यों किया जा रहा है? रेल खंड के विद्युतीकरण के कार्य बहुत जगह किए जा रहे हैं, लेकिन बिहार के लिए एक भी योजना नहीं ली गई है। बरौनी से कटिहार, महत्वपूर्ण रेल खंड है और मानसी से सहरसा, भी बड़ी रेल लाइन बनी हुई है, हम मांग करते हैं कि इन दोनों रेल लाइनों का विद्युतीकरण कराया जाए। मंत्री जी आपने पिछले रेल बजट में 375स्टेशनों को आदर्श स्टेशन बनाने की घोषणा की थी और आपने स्टेशनों का भी चयन किया था। हमने उस बजट में भी मांग की थी कि कटिहार- बरौनी रेल खंड पर मानसी स्टेशन बहुत महत्वपूर्ण स्टेशन है, उसे भी आदर्श स्टेशन बनाया जाए लेकिन यह अब तक नहीं बना है। हम आग्रह करते हैं कि इसे आदर्श स्टेशन बनाया जाए।

          महोदय, मैं बिहार की कुछ रेल समस्याओं की तरफ रेल मंत्री जी का ध्यान आकृष्ट करना चाहते हैं। वर्ष 1996 में खगरिया से कुशेश्वर-स्थान 44 किलोमीटर नई रेल लाइन निर्माण की स्वीकृति हुई थी। इसके निर्माण के लिए 162.87 करोड़ रुपया खर्च होना था, 13 वर्ष हो गए हैं लेकिन आज तक निर्माण पूर्ण नहीं हो सका है। पिछले रेल बजट में पांच करोड़ रुपया जरूर दिया गया था बड़े काम के लिए पांच करोड़ रुपया देने का मतलब है कि कुछ देकर योजना को जिंदा रखा जाए। योजना तो किसी तरह से पूर्ण नहीं हो सकती इसलिए खगरिया से कुशेश्वर-स्थान को अधिक राशि देकर निर्माण पूरा कराया जाए। सकरी से हसनपुर 76.5किलोमीटर नई रेल लाइन निर्माण की स्वीकृति 1996में हुई थी। इसके निर्माण के लिए 175 करोड़68लाख रुपया खर्च होना था लेकिन वर्ष 2009-10 के लिए मात्र पांच करोड़ रुपया ही दिया गया। ...( व्यवधान) पर्याप्त राशि देकर इसे पूरा कराया जाए । इसी तरह से मानसी से सहरसा, दौरम, मधेपुरा, पुर्णिया 143 किलोमीटर रेल लाइन अमान परिवर्तन की स्वीकृति हुई थी। मानसी से सहरसा तक बड़ी रेल लाइन बन गई और सहरसा से मधेपुरा 18 किलोमीटर रेल लाइन निर्माण की स्वीकृति वर्ष2002-03 में हुई थी, उसका निर्माण आज तक पूरा नहीं हुआ। पिछले साल कोसी तटबंध टूटने से रेल लाइन क्षतिग्रस्त हो गई, जहां अमान परिवर्तन का कार्य होना था। बाढ़ से क्षतिग्रस्त हुई सहरसा से मधेपुरा, सुपौल से फारबिसगंज और मधेपुरा से बनमनखी, रेल लाइन को आज तक पुनर्जीवित नहीं किया गया। आश्चर्य है पहले यदि बाढ़ से कोई रेल लाइन क्षतिग्रस्त होती थी तो चंद ही दिनों में उसकी मरम्मत करके चालू करवाया जाता था लेकिन इसकी मरम्मत नहीं की गई। सहरसा से मधेपुरा 18 किलोमीटर अमान परिवर्तन होना है, यह वर्ष 2002-03 से बन रही है, इसमें मेगा ब्लॉक एक साल से लगा हुआ है, मेगा ब्लॉक अंतिम समय में लगता है, जब अंतिम चरण में दो-तीन महीने में कम काम बचा होता है तो मेगा ब्लॉक लगाकर उसे द्रुतगति से पूरा किया जाता है। उसे पूरा नहीं किया गया। यह उस क्षेत्र के प्रति उपेक्षा नहीं तो क्या है ?

          सभापति महोदय, एक महत्वपूर्ण रेल लाइन जो नेपाल की अंतर्राष्ट्रीय सीमा से सटी हुई है, वह सकरी-लौकहा बाजार-निर्मली व सहरसा फारबिसगंज 206कि.मी. है। उसके निर्माण के लिए रक्षा मंत्रालय ने भी अंतर्राष्ट्रीय सीमा होने के कारण राशि दी थी। जिसके निर्माण पर 355.81करोड़ रू0खर्च होना है । लेकिन उसका निर्माण आज तक शुरू नहीं हुआ। पिछले बजट में उसमें केवल 20 करोड़ रुपया दिया गया, जो बिल्कुल अपर्याप्त है।

          इसके अलावा सरायगढ़-निर्मली के बीच कोसी रेल महासेतु का निर्माण होना है। उसके निर्माण पर 341करोड़ 41 लाख रुपये खर्च होने थे। लेकिन पिछले बजट में मात्र20करोड़ रुपया दिया गया, इस तरह के आबंटन से वह काम कभी भी पूरा नहीं हो सकता।

          महोदय, हम 1996 में भी सांसद थे और एक  सहरसा-पंचगछिया रेल खंड के बीच समपार संख्या31विशेष के बदले उपरिपुल निर्माण की स्वीकृति वर्ष 1997 के रेल बजट में हुई थी। लेकिन उस पर 13 वर्ष बीतने के बाद आज तक काम शुरू नहीं किया गया। इसके अलावा चुकती समपार संख्या 28विशेष पर जो ओवरब्रिज बनना है। उस पर माननीय मंत्री जी ने इसी सदन में आश्वासन दिया था कि उसे हम इस वित्तीय वर्ष में पूरा करा देंगे। लेकिन उस पर काम धीमी गति से हो रहा है। निश्चित वर्ष खत्म होने में मात्र तीन महीने बचे हैं। हमें लगता है कि उसका काम पूरा नहीं होगा। उसमें गति लायी जाये।

          सहरसा में वासिंग पीट का निर्माण भी इसी वित्तीय वर्ष में पूरा करने का आश्वासन मंत्री जी ने एक प्रश्न के जवाब में इसी सदन में दिया था। लेकिन उसकी गति भी बहुत धीमी है उसे भी इसी वित्तीय वर्ष में पूरा कराया जाये ।

          सभापति महोदय, हम आपके माध्यम से एक बात माननीय मंत्री जी के संज्ञान में लाना चाहते हैं। पूर्व की सरकार में लालू जी द्वारा एक महत्वकांक्षी योजना मधेपुरा में विद्युत रेल इंजन कारखाने की स्वीकृति दी गयी थी। जिसके निर्माण पर 1960करोड़ रुपये खर्च होना था, परंतु उस पर पिछले रेल बजट में मात्र दस करोड़ रुपया दिया गया। उससे क्या होगा। इसलिए हम आग्रह करते हैं   कि जो योजना उस पिछड़े हुए इलाके के लिए है, उस इलाके के पिछड़ेपन को दूर करने के लिए विद्युत रेल इंजन कारखाने के निर्माण के लिए  जिन्हें यह सुविधा मिलनी चाहिए, उसमें पर्याप्त राशि देकर उसे शुरू कराना चाहिए। खगड़िया में कंक्रीट स्लीपर फैक्टरी को भी चालू किया जाना चाहिए।

          सभापति महोदय, हम आपके माध्यम से अपने क्षेत्र की समस्याओं की तरफ माननीय मंत्री जी का ध्यान आकृष्ट करना चाहते हैं कि जो रेल लाइनें बाढ़ से क्षतिग्रस्त हो गई हैं, उन्हें तुंत चालू कराया जाए। किसानों के हित में महेशखुट एवं धमराहा स्टेशन पर मकई में बुकिंग की अस्थाई व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए।

          सहरसा-पटना के बीच आने जाने के लिए रात में एक्सप्रैस गाड़ी चलायी जाए ।

          महेशखुट एवं कोपड़िया स्टेशन पर कंप्यूटर से आरक्षण की सुविधा उपलब्ध कराई जाए।

          खगड़िया जंक्शन पर वासिंग पीट की सुविधा उपलब्ध कराई जाए।

          307अप एवं 308 डाउन पैसेंजर गाड़ी को फिर से हाजीपुर-सहरसा के बीच में चलाया जाए।

          समस्तीपुर से दिन में जो पैसेंजर गाड़ी खगड़िया आकर अनावश्यक रुप से पांच घंटे रुकी रहती थी, उसे सहरसा तक चलाया जाए।

          सहरसा से मद्रास के बीच में गाड़ी चलाई जाए।

          दिल्ली-गुवाहाटी राजधानी एक्सप्रैस का ठहराव खगड़िया जंक्शन पर किया जाए।

          सिमरी बख्तियारपुर-बिहारीगंज एवं सहरसा-कुशेश्वर स्थान तक रेल लाइन का निर्माण किया जाए।

          अंत में सभापति महोदय मैं कहना चाहता हूं कि माननीय मुख्य मंत्री बिहार, श्री नीतीश कुमार जी जब रेल मंत्री थे तो बहुत सारे काम हुए और उन्हीं के क्षेत्र की दो-तीन योजनाएं हैं, जो उन्होंने शुरू कराई थीं, लेकिन वे योजनाएं आज तक पूर्ण नहीं हो पा रही हैं। जैसे कोच कारखाना हरनौत का कार्य धीमी गति से चल रहा है। नालंदा जिला के इस्लामपुर से नटेशर नई रेल लाइन की गति बहुत धीमी है। पटना जिले के दनियावां से नूरसराय होते हुए शेखपुरा तक मिट्टी का कार्य हो गया, लेकिन वह काम बहुत धीमी गति से चल रहा है। इसके अलावा नालंदा जिले में राजगीर से नटेशर तक सभी कार्य पूरा हो चुका है। इसलिए इसे शीघ्र ही चालू कराया जाए।

          महोदय, हमने यहां जो सवाल उठाये हैं, हम समझते हैं कि माननीय मंत्री जी उन पर ध्यान देंगे और उपरोक्त समस्याओं का निदान करेंगे।                            

MR. CHAIRMAN:  Hon. Members, who want to lay their written speeches on the Table can lay them. However, it will not be permissible to lay part speeches on the Table.  Part speeches cannot be allowed to be laid on the Table.  Members may either speak or lay their written speeches on the Table. 

            Now, Dr. Kakoli Ghosh Dastidar.

DR. KAKOLI GHOSH DASTIDAR (BARASAT): Thank you, Mr. Chairman, Sir, I rise to support the Supplementary Demand for Grant (Railways) for 2009-10.

            Sir, at the outset, I want to congratulate the present hon. Minister of Railways for taking into consideration the most important issue bothering the world at the moment about the climate.  The Railways are the most climate-friendly transport system and keeping this in mind, the Ministry has also distributed and given instructions to the 14 lakh employees to use climate-friendly bulbs.  I would like to congratulate the hon. Minister of Railways for this.

            Invention of the wheel changed the history of mankind. Similarly, one hundred and fifty years ago, India entered into a phase of development when the first train chugged along from Bori Bunder in Mumbai towards Thane.  We have come quite far from there where every rural child looks with awe at the train that chugs along the tracks.  They run towards it as filmed by the noted film maker, late Shri Satyajit Ray, in his film.  These trains that are running today connect different villages, towns and cities of our nation, but still a lot has to be done. 

            Sir, a bond between steel and concrete is made when India goes towards infrastructural development.  Rail is not only carrying human beings as passengers, but it is the primary carriage form of all the materials that are used for building India. Rail carries cement, finished steel, iron ore, fertilizers and chemicals that is going to build a better, stronger and a much more developed India.

            Now, as per records, 5,319.87 million people travelled by the Indian Railways last year.  As per projection by 2012, 8,400 million people and 1,100 million tonnes of freight are going to be carried.  For this we require, as certain hon. Members have requested in this august House to the hon. Minister, more tracks, more new lines and conversion of lines to broad gauge. The Railway family consists of so many Corporations like the Railway Engineers Regiment, the Container Corporation of India, the Centre for Railway Information System, the Dedicated Freight Corridor Corporation of India, the Ircon International Limited, The Indian Railway Catering and Tourism Corporation Limited, the Indian Railways Finance Corporation Limited and the Railtel Corporation of India.  Every member of these Corporations, along with our hon. Minister, is trying for the safety of the passengers, for their comfort; but very sadly we notice that railways have become the softest target for the people who want to create problems in different parts of the country, for the separatist movements, for terrorist attacks and for any petty reason.  It is the softest target which is doing so much for the country, passing from one part to another and it is stopped. Stones are pelted at the drivers, windows are shattered, women and children are hurt and trains set to fire.  

We have also to our dismay noticed only a couple of months back when Maoists surrounded a Rajdhani Express which was coming towards Delhi from another part of India. The train was delayed due to these tactics last week.  The passengers were so happy to find out, as it was three-hour late that they were all served with lunch.  When they received hot meal, all of them thanked the hon. Minister of Railways for her thoughtfulness.  So, 14 lakh members of the Railway family, headed by the hon. Minister of Railways, is looking after the safety of the passengers. Who looks after the safety of the Railways? I, therefore, urge upon the august House and the Government of India to take necessary measures by which this soft target can be protected because it is doing so much for our country.

            We have small incidents occuring along the railways in which the Railway Administration is not concerned at all. Only last week, a lorry ran over a child in a place called Bira. For no reason at all, the particular local Communist Party Branch members blocked the rail tracks and the trains could not ply for more than three hours. Is it the fault of the Railways that a truck run over a child? We condemned the death and rash driving but the Railways did not have anything to do with it. But the trains are attacked by the people all over the country for no reason. We want that the Central Government should take some measures to protect the passengers of the railways and also the rail lines. These tracks have been laid so many years ago. They need looking after. New tracks have to be laid. The tracks are those which bear the brunt of these millions of people, freight trains travelling every day. They have to be replaced. Our hon. Railway Minister has given suggestions for making hospitals   en route. Sick passengers while travelling will benefit from the agenda that our hon. Minster has taken by which they can contact the local hospital, through the railway members. The family members can travel by coaches and cars provided by the Railway Ministry’s family of 14 lakh people. So, we appreciate these laudable efforts being taken by the Railways. On the route also, she has announced for more hospitals.

            As far as disaster response is concerned, we have seen how the Railways take instant initiative and reach the spot of action  or  the disaster sites like tsunami or earthquake with medical relief. These laudable efforts must be appreciated. We also place the demand of the entire country for new lines, new coaches, extra coaches and for extra wagons. Like that, there are demands for extending the Metro Railway from Kolkata towards Barasat and Majerhat. This requires money.

            As far as the infrastructure is concerned,  63,273 kms. is the route length; the Broad Gauge length being 51,082 kms; the Metre Gauge being 9,442 kms and the Narrow Gauge being 2,749 kms. The running track length is 85,158 kms. The electrified route being 18,274 kms.; the rolling stock at the moment stands at 2,04,034 wagons units; the locomotives stand at 8,330 and the coaches at 47,375.… (Interruptions)

            We need to increase the number of these coaches and the number of tracks and the number of bridges standing at 1,27,768 today needs increment. We need more Road Over Bridges; more Road Under Bridges and more Foot Over Bridges for  passenger amenities. So, we wish to bring to the notice of the hon. Railway Minister and the Government of India  that more fund has to be allocated. Out of the  17,000 unmanned level crossings, only last week, 3000 level crossings were made manned but the 14,000 remaining unmanned level crossing have to be taken care of.  I say this because thousands of people are crossing the level crossing and a risk factor is involved. It has to be looked after. The Railways are taking special care for conservation of energy by afforestation. There is also on the anvil  a project of power plant coming up. So, I congratulate the hon. Minister for taking these measures. But if these new wagons, routes, new railway tracks have to come up and if the suggestions of the Sixth Central Pay Commission have to be met for the 14 lakh employees who are taking part in the day to day functioning of the Railways, there must be more allocation towards the Railways.

            With these words, I conclude.

                                                                                                           

DR. RAM CHANDRA DOME (BOLPUR): Mr. Chairman, Sir, I rise to participate in the discussion on the Supplementary Demands for Grants (Railways) for the year 2009-10. We had the full-fledged Railway Budget just six months back and again we are discussing the Supplementary Demands now. This has become the regular practice. This time, the demand is for Rs. 731.60 crore and I would like to say that this method of bringing Supplementary Demands before Parliament within a short span of time is not at all desirable.

            Sir, I have a few observations to make on the working of the Railways. As far as pending projects are concerned, this has become a regular practice with the Railways that they are not completing their projects in time and this has been happening with the Railways since inception. The number of pending projects in respect of new lines, doubling, gauge conversion, electrification etc. in different areas of the country is 338. The maximum projects are pending in the State of Bihar and the second State in this respect is West Bengal where 32 projects are pending. What is the reason for not completing the projects in time? The reply given by the Railway Ministry at different times is that this is mainly due to paucity of funds and the other factors that are responsible for this are failure of contractors, rise in the cost of materials, delay in getting forestry clearance and some law and order problems prevailing in different parts of the country. All these are creating obstacles in completion of all these projects. But recently, the Standing Committee on Railways has examined this issue and they have categorically stated as follows:

“The Committee are not convinced with these reasons as the same are repeated time and again by the Railways in each and every case of shortfall. The Committee, therefore, desire that, as assured before the Committee, the Railways should make sincere and conscious efforts to address these problems and achieve the target in the remaining period of the 11th Plan.”               What was the projection for the 11th Plan? As already stated by my esteemed colleague from the BJP Shri Lalji Tandon, the projection is 2,000 kms. of new lines, 10,000 kms. of gauge conversion, 6,000 kms. of doubling and 3,500 kms. of electrification during the 11th Plan period. But the Railways could achieve only 527 kms. of new lines and 2,189 kms. of gauge conversion during these two years of the 11th Plan period. We could achieve about 874 kms. of doubling and 1,299 kms. of electrification during the first two years of this Plan period.  The reasons have already been stated as to why these are delayed.
            Regarding the Annual Plan 2009-10, the allocation for the projects, that is, Railway capacity throughout enhancement on high-density networks, routes, traffic facility works, electrification projects, passenger amenities, road safety works, improvement in condition of works of acquisition of rolling stock, etc., has been fixed.  The total outlay for acquisition, construction and displacement for 2009-10 has been fixed at Rs. 40,745 crore.  Out of which Rs. 15,675 crore, that is, 38.5 per cent is to be met from international resources, whereas Rs. 9,270 crore, that is, 22.8 per cent is to be met from extra budgetary resources and Rs. 15,830 crore, that is, 38.8 per cent of the projections from gross budgetary support.
            Where are the resources?  What are the avenues from extra budgetary resources?  The only projection is PPP.  Here, in the Tenth Plan period, the same projection was there and on PPP the achievement is only one per cent.  Now, this project is 22.8 per cent.  So, we are against this sort of proposition.  The Railways are going to privatise the services and projects. This is gradually increasing… (Interruptions) This is against the basic tenets of the Railways.  The Railway are having adequate resources and even then this PPP is extended for utilization of surplus land.  The surplus land of the Railways is being doled to the private parties for just utilizing this for setting up of shopping malls, other than Railway projects. This is going on.
13.57 hrs                               (Mr. Deputy-Speaker in the Chair)             Sir, the Government policy is for PPP.  They are following these PPP projects in different Departments against the defiance of the people of this country… (Interruptions) This is going on.  This is part of their policy… (Interruptions) Recently, in the Budget proposals, the Railways have proposed to set up a project in Danpuni… (Interruptions) There is nothing wrong in it.  The project is welcome… (Interruptions) This project was to be set up by a private party on existing BOT basis.  Instead of setting up on BOT basis, it is going to be set up on BOO basis.  That means, build, operate and own.  That is a clear case of privatization of the project. 

            This project not only damages the prospects of the Railways, but the integrity of the Railways. The people are apprehensive that the works in the Chittaranjan Locomotive Factory, the existing factory, will be at peril out of this proposed project.  That is why we oppose this project under BOO… (Interruptions)

14.00 hrs. MR. DEPUTY-SPEAKER: Next speaker, Shri Nityananda Pradhan.

… (Interruptions)

उपाध्यक्ष महोदय   माननीय सदस्य, आपका भाषण रिकॉर्ड पर नहीं जा रहा है।

…( व्यवधान)

MR. DEPUTY-SPEAKER: Please sit down.  Nothing is going on record.

(Interruptions) … * उपाध्यक्ष महोदय : माननीय सदस्य, आपका भाषण रिकॉर्ड पर नहीं जा रहा है। इसलिए आप कृपया बैठ जाइए।

…( व्यवधान)

MR. DEPUTY-SPEAKER: Nothing is going on record.

(Interruptions) …*               * Not recorded.

उपाध्यक्ष महोदय  श्री नित्यानन्द प्रधान जी, आप अपना भाषण शुरू कीजिए।

…( व्यवधान)

SHRI NITYANANDA PRADHAN (ASKA): Mr. Deputy-Speaker, Sir, please give me protection so that I can speak.… (Interruptions)

MR. DEPUTY-SPEAKER: Dr. Dome, please sit down. Nothing will go on record.

(Interruptions) …*     * Not recorded.

SHRI NITYANANDA PRADHAN : Mr. Deputy-Speaker, Sir, thank you for giving me the opportunity to speak on the Supplementary Demand for Grant (Railways). I come from Orissa which is probably the most neglected State as far as Railways are concerned right from the very inception of Railways by the Britishers.  Orissa is very much rich in minerals and different types of minerals are there in Orissa.  The Britishers did not want to exploit that situation.  Simply, they were interested in their administration and collection of revenue and taxes.  So, instead of developing Orissa, they have laid a railway line only for the purpose of their administration because they were administering from Calcutta, and on the South from Madras.  So, only to connect these two cities, probably they had laid that line which incidentally passed through Orissa.  Had there been any other source to lay a line, they would not probably have laid the line through Orissa. 

            There is a significant reason for that.  Orissa surrendered to Britishers at the very last.  So, I think the Britishers had their axe to grind against the people of Orissa, so they did not develop the Railways in Orissa.  That attitude continued with the Railway department. I am happy that the hon. Minister, Madam Mamata Banerjee is trying to rectify it, still a lot of things are to be done.  So, I request the hon. Minister to take up the problem of Orissa.  We are culturally almost in the same line.  Bengal and Orissa are culturally having the common relationship. So I hope that, to develop Orissa, she will take more interest and help the Orissa State in respect of Railways. 

            For that, I would submit some of the proposals. 

            Sir, you know, the construction of a long pending Khurda Road-Bolangir new BG Rail Link line has already taken a lot of time, and money is being sanctioned in a very small manner.  The paltry sum that has been given has been utilised and subsequently it is not developing. 

Sir, for your information and for the information of the hon. Minister, I would humbly submit that two of the power plants are coming up.  Already, a MoU has been signed between the Government of Orissa and the party.  Two of the power plants are coming up on this line.  I would request that this line may be expeditiously taken up for completion.

The second rail line is Lanjigarh Road-Junagarh New Broad Gauge rail link of 56 kilo metres. This is also on the western side of Orissa, which is one of the poorest areas of India.  That is why, the Union Government has announced one special KBK package.  It is coming under that. I hope that this Lanjigarh-Junagarh rail link will be taken up for completion.

The third rail line is Bimlagarh-Talcher.  This is again coming up in the mineral and coal belts.  If this rail line is set up, the prospects of Orissa will be highly improved, and the raw materials which are available under the earth of Orissa can be utilised for the development of the area and the nation. 

Now, the hon. Railway Minister, Kumari Mamata Banerjee has suggested that she would set up certain factories for providing employment of the local people and all that.  So, I would request that a new coach or wheel manufacturing factory may be set up in Ganjam.  In Ganjam district of Orissa, which is near Gopalpur, SEZ zone has already been declared.  Within that SEZ, I think, if the hon. Railway Minister thinks, then she can put up a wheel manufacturing unit in that SEZ zone so that the people in that area will be benefited and they will get employment. 

Then, I come to sanction of new lines, which are very important.  Firstly, I would submit that Gopalpur-Rayagada line is the main line. Rayagada is based in the hinterland of Orissa, and it is full of minerals.  So, Rayagada and Gopalpur can be connected by rail link. Now, there is no port facility for these raw materials which can be produced in the western sector of Orissa.  It will be better if this rail link is connected.

MR. DEPUTY SPEAKER: Please conclude.

SHRI NITYANANDA PRADHAN : I will take two more minutes.

            I suggest that Gopalpur-Rayagada rail link may be established.

            Then, the next one is Sambalpur-Redhakhol-Bhanjanagar-Aska-Berhampur.  This is a new line which cuts across the entire Orissa from north to south.  It is passing through all mineral belts.  I learnt that the survey work is going on.  I would request the hon. Railway Minister to expedite the process of completion of this new line – Sambalpur-Redhakol-Bhanjanagar-Aska-Berhampur. Then, another new line is Jeypore-Malkanagiri.  Jeypore and Malkanagiri are two naxalite infected districts.  If this new railway line is constructed, then there will be a lot of development in these two districts, and the people will be getting employment.

            The other new lines are: Bargarh-Nuapara Road via Padampur and extension of Nuapara-Gunpur Broad Gauge Rail Link to Theruvali.

            Then, I come to electrification.  Almost electrification is over except in one or two places, where electrification should be done immediately. 

            Now, I come to the doubling of the following lines: Daitari-Banspani; Talcher-Sambalpur; Haridaspur-Paradeep; and Koraput-Rayagada.

            Now, I am coming to sanction of survey. Bhadrachalam Road (Andhra Pradesh-Malkanagiri-Jeypore-Junagarh-Lanjigarh Road-Talcher-Bimalagarh) can be taken up for survey. This Rail link will traverse through the most under-developed area. So, this will help.

I would request now introduction of certain new trains on the following routes:-

1.     Vishakhapatnam to Rourkela via Berhampur-Bhubaneswar.
2.     Keonjhar to Howrah.

MR. DEPUTY-SPEAKER: Please conclude.

SHRI NITYANANDA PRADHAN : Yes, I will take only one minute.

MR. DEPUTY-SPEAKER: No, next Shri Chandrakant Khaire.

SHRI NITYANANDA PRADHAN : 3. Bhubaneswar to Chandigarh via Kalka   4. Viswanathpuram to Tata via Bhubaneswar

5. Bhubaneswar/Puri to Pune via Jharsuguda MR. DEPUTY-SPEAKER: You are asking for one minute, two minutes and three minutes. How much time will you take?

SHRI NITYANANDA PRADHAN : I am sorry, Sir, I will take only two minutes’ time.

MR. DEPUTY-SPEAKER: Please sit down.

SHRI NITYANANDA PRADHAN : Then, 6. Berhampur-Bolangir.

             The last train which I would request is this. We have got some cultural affection for Orissa and West Bengal. Now, the people of Nabadwip have requested to put up a train on the occasion of 500 years of Chaitanya coming to Orissa. There will be a big function some time in December. So, that train may be introduced.

                                                                                                                                   

SHRI CHANDRAKANT* KHAIRE (AURANGABAD): Mr Chairman Sir, for the first time I am speaking in Marathi. I congratulate and thank Hon. Mamtaji for presenting these demands. Hon. Mamtaji knows Marathi. That is why I am speaking in Marathi.

During the NDA Government when Mamtaji was Minister she helped Marathwada. About Marathwada I want to mention that some part of it is in South Central and some part of it is under Central Railways. Eight districts of Marathwada are connected with Mumbai but being under South Central Zone, we have to visit Secunderabad. Hon. Minister is aware of this problem. So I request Hon. Minister to transfer Nanded division from South Central Zone to Central Railways. We had met you at that time. You had said that we should request Hon. Prime Minister when the proposal would come before Cabinet. That question is still pending. Later on Nitish Kumarji and Laluji did follow up this issue. However, still this issue is pending. This is the demand of Marathi speaking people of Nanded division that instead of Hyderabad of South Central Zone, their area should be brought under Central Zone. Through you, I would like to make this long-standing demand to the Minister and request that this demand may be fulfilled.

*English translation of the speech originally delivered in Marathi.

 

On becoming Railway Minister, Mamtaji helped Marathwada. There was not even single km of railway line in Marathwada. But the matter was taken up with the then Hon. Prime Minister and five projects namely Mudkhed Adilabad Secunderabad Akola Poorna were started during that time and three projects have been completed. Latur-Miraj project is still pending. But I am sure it will be completed. I am sorry that Ahmednagar-Beed-Parali project has not yet been completed.    This project  which is under South Central Zone   may    kindly   be completed at the earliest. This will ensure development of Western Maharashtra and Marathwada. I request Hon. Mamtaji to take up Latur-Miraj and Ahmednagar Beed Parali railway lines and complete them as early as possible. Rotegaon-Puntamba is a new railway line awaiting survey. Puntamba Shirdi railway line has been completed. If Rotegaon-Puntamba line is completed, it will help in connecting Tirupati with Shirdi. There will be direct line from Tirupati to Shirdi. Many MPs from Andhra and Tamil Nadu have told me that they have to visit Shirdi. They have to get down at Nagarsul which is inconvenient. Therefore, through you, I would like to request Hon. Minister to take up the survey of Rotegaon-Puntamba line which was included in last year’s survey but which could not be taken up at that time. This project may require 40 crores of rupees. But if this project is completed, there will be direct connectivity between Tirupati and Shirdi. This railway line will enable people from Andhra to go to Shirdi and people from Maharashtra to visit Tirupati. I request you to make a provision of Rs 40 crore in the coming Budget so that this railway line work could be completed.

Another point is about Solapur-Jalgaon via Beed Tuljapur, Dharashiv, Paithan, Sambhajinagar-Verul. If this railway line is completed Western Maharashtra and Khendesh would be connected with Marathwada. It will also include Ajantha and Verul. It will also include pilgrim center like Paithan. This survey was also sanctioned in the last year’s Budget. But the work has not yet started. The problem is that both Central, South Central Zones fall in this area and each zone wants the work to be done by other zone. That is why I request that if this division is brought under Central Railways, they could conduct the survey of this line. I request Hon. Minister to complete the survey of this line which is a long-standing demand for past 50 years. Leaders like Govindbhai Shah had made demand of survey of this railway line. I am sure Hon. Minister will fulfill the demand made for such a long time.

            I would also like to point out that Parbhani-Manmad railway line is not a double line. Parbhani-Mudkhed is going to be a double line. If Parbhani-Nannad is converted into a double line with electrification, it will be very convenient. That is why I would like to make a demand for doubling of Parbhani-Manmad railway line.

            In connection with new railway lines in the next Budget, I would like to meet Hon. Minister. Nanded-Sambhajinagar-Jodhpur – there should be at least one weekly train on this section. Krishna Express from Nizamabad should be extended in our area. Many people from Kerala in our area want to visit Kolam. So this train should be extended upto Kolam. Sachkand Express (2715-2716) should be extended upto Jammu. I request that a new bi-weekly train from Nanded to Chandigarh should be started as many people from Punjab visit gurudwara in Nanded. We started Devgiri Express by making agitation. It was only upto Sambhajinagar initially. Later on it was extended upto Nizamabad, Hyderabad. But it has few coaches. I request that for the benefit of people from Marathwada, the train should have 24 coaches. ‘Nandigram’ which was started by you and Nitish Kumarji should have 24 coaches. I request that in Okha to Rameshwar train, 10 more coaches should be added. In Secunderabad-Manmad train, 6 more coaches should be added.

            In my constituency, MIDC area is there. There an ROB needs to be constructed. This work may please be taken up. MIDC and Municipal Corporation are jointly going to contribute in this work. At Sangramnagar also permission for an ROB should be given. At Shivajinagar railway station, broadening work of siding should be taken up.

            Janshatabdi Express from Mumbai to Sambhajinagar is running well. But it has no stoppage at Rotegaon and Lasur. The stoppages of this train may please be provided at these places.

            I request that two meetings of MPs of this area should be held with GMs of these two zones as long as our division is not transferred to Central Zone. There is no one to protect our interest except you. Therefore, I request you to kindly see that these two meetings of MPs with GMs are held every year.

SHRI SAMEER BHUJBAL (NASHIK): Mr. Deputy-Speaker, Sir, I thank you very much for giving me this opportunity to take part in the discussion on the Supplementary Demands for Grants. I rise to support these Supplementary Demands for Grants submitted by our hon. Minister of Railways. May I also take this opportunity to congratulate our hon. Minister of Railways, Mamata Didi, and her efficient colleagues for making Indian Railways a truly people-friendly, socially committed and economically viable organization? Due to the visionary leadership of the hon. Minister of Railways, today Indian Railways continues to be a dynamically evolving public sector organization which is widely acclaimed as one of the largest employers, rather a model employer in the country, as a vibrant engine of the country’s all-round and balanced development, as a symbol of national integration and above all a lifeline for the country’s millions of people.

            The common man is happy with the performance of the UPA Government because fares and freights have not been increased and at the same time so many amenities are made available to the passengers. I am happy that despite several constraints, the Indian Railways has done a remarkable job. However, there is vast scope for improvement. We must endeavour to do our best so that Indian Railways enjoys a pride of place in the socio-economic life of the nation. 

            Hon. Minister for Railways is doing a commendable job. But, at the same time, I would like to bring some grievances and points for your kind consideration. I am sure, the hon. Minister of Railways, being sensitive to the needs of the common people, would certainly meet them.

            While presenting the Railway Budget for the year 2009-2010, Madam, you had outlined the concept of ‘Doctor on Train’. But, I feel that this concept needs slight elaboration and adequate number of ambulance services besides strengthening of medical facilities at all the stations. In this regard I would like to mention the details of the accident victims of Mumbai Suburban Railway. The total number of people affected in accidents in four years, that is from 2005 to 2008, is 30,256. Out of this, 15,983 people are injured and 14,273 are death cases which is almost 50 per cent of the total accident cases. There are High Court orders where they have directed the Railway authorities that they should provide medical assistance and ambulance services at every station.

            In one of the judgements of the hon. High Court, delivered on 6th October, 2004, in which some measures to be taken by the Railway authorities are indicated, the Court had directed that free parking place for an ambulance outside all the stations is to be provided by the Railways and sanction of funds for hamilis, porters, ambulance-taxi for transporting the victims, minimum light weight folding or collapsible stretchers in all the stations and many more were mentioned. But, after that, still the measures were not taken up.

            On 15th January, 2009 there is one more judgement of the hon. High Court which says that there was an NGO who wanted to provide 18 ambulances to the Railway authorities. But, there was a dispute raised by the railway officers with regard to the parking of the vehicles at the railway stations. The directions had been issued by the hon. High Court in one of its orders which indicated above that the ambulance should be parked outside the railway stations. However, for whatever reasons, the Railways conceded before the High Court that the NGOs had withdrawn all the 18 ambulances which had been provided for the said purpose without any reason. Therefore, I request the hon. Minister to please look into the matter of providing ambulance, medical facilities on priority basis at all the stations in Mumbai. Madam, I have copies of the orders with me and I will send them to you.

            In the Budget speech, the hon. Minister of Railways had identified a list of 49 identified stations as Multi-Functional Complexes and Nashik station was one of them. Today, Nashik is one of the most important pilgrimage centres of India which requires overall upgradation. At present, Nashik Road Railway Terminus has three platforms which should be increased to six and additional provision for 12-coach rake and workshops for cleaning and washing be constructed at Nashik Road station.

            The survey for Nashik-Pune rail route was completed in 2001 and the 2005 estimate of expenditure on the said project was Rs. 1,044 crore. The Maharashtra Government is ready to bear 50 per cent of the expenditure on this project and provision for the same has been made in the current financial Budget.

            In this regard, the hon. Railway Minister in her Budget Speech had consented for a new Nashik-Pune railway line, but yet no action has been taken so far. I request the hon. Minister to take this up on a priority basis.

            Presently, there are 60 trains plying via Nashik road to Mumbai with 48 regular, 12 weekly trains. In these trains, reservations can be made for stations beyond Bhusawal. If unconditional reservation is provided in such trains from Mumbai to Bhusawal, it will be very convenient for passengers and also it will increase the revenue for the Railways.

            Hon. Deputy-Speaker, Sir, I would request the hon. Railway Minister to consider upgradation of infrastructure to connect some of the satellite townships with fast track trains which can solve congestion and housing problems for the middle-class and poor families. For example, the distance between Pune and Saswad is around 40 kilometres. If you connect this, then people can work in Pune and live in Saswad where the cost of living is half that of Pune. A new railway line between Lonand-Phaltan-Baramati should be considered. The Daund-Baramati-Pune railway line should also be taken up for upgradation.

            I commend the Indian Railways for maintaining and preserving some of the important railway stations in our country under the ‘Heritage Status’, but it is very ironical that ‘Thane Station’ has been excluded till date from this list. I would, therefore, recommend that ‘Thane Station’ should be included as a ‘Heritage Station’.

            My constituency, Nashik, is a big industrial as well as an agricultural hub. Perishable items like onions, grapes, pomegranates as well as vegetables are shipped to the far-flung areas of the country. Therefore, it would be practicable to have a new Goods Shed/Terminal at Nashik-Odha railway station where large railway lands are easily available and the same terminals can be utilized during Maha Kumbh Mela where lakhs of pilgrims come to Nashik. I would, therefore, request the hon. Railway Minister to consider this on priority.

As you are aware, the Igatpuri Railway Yard covers a very large area and is well connected by road network. It is strategically located to serve the vast rail and coach network of Mumbai, Thane metropolitan regions. It has also a very active MIDC Industrial area to support any primary production and assembly facility.

            I am of the opinion that the location of “Wagon and Coach Factory” at Igatpuri would greatly boost the capacity of the Western Railway network as well as Mumbai suburban network, which account for almost one-third of the national rail network capacity. I, therefore, humbly request the Railway Minister to set up a Wagon and Coach Factory at Igatpuri.

            There are a large number of people from Nashik are working in Mumbai. There is a need to introduce a new super-fast train from Nashik to Mumbai, a Duranto Express, with at least two round-trips per day.

            I would also like to recommend a few more new railway lines in Maharashtra.

·       Ahmednagar-Beed-Parli Baijnath;   

·       Wardha-Nanded via Yavatmal-Pusad;   

·       Manmad-Indore via Malegaon-Dhule-Shirpur-Nardana, Sendhwa, Mhow;   

·       Wadsa, Desaiganj-Armori-Gadchiroli.   

There are a large number of passengers of different castes and creed who visit the Ajmer Sherif. At present, there is a Manmad-Ajmer train by which all the passengers from Nashik have to travel all the way to Manmad which is not convenient. I request the hon. Minister to start the railway service from Nashik to Ajmer via Manmad.

Lastly, I would like to thank and congratulate the Railway Minister Kumari Mamata Banerjee for reviewing the ‘Recruitment Policy’ in the Indian Railways and allowing the Railway Recruitment Board examinations to be held on the same day throughout the country wherein examinees could answer the questions in regional languages, including Marathi.

            Hon. Deputy-Speaker, Sir, some of the problems that I have highlighted are reasonable demands emerging from the people of Maharashtra region which impinge upon their everyday life. I shall be grateful to the Railway Minister if she could full these small yet significant demands of Maharashtra. Hence, I would request the hon. Railway Minister to bestow her attention on implementing these demands as early as possible on priority basis.

            With these words, I conclude my speech.

 श्री दारा सिंह चौहान (घोसी):  उपाध्यक्ष महोदय, मुझे आपने इस विषय पर बोलने का अवसर दिया है, इसके लिए मैं आपको धन्यवाद देता हूं। मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी के संज्ञान में एक बात लाना चाहता हूं कि तमाम सदस्यों ने अपने क्षेत्र की समस्याओं को सामने रखा है और अपनी-अपनी बात रखी है। मैं भी इस बात को संज्ञान में लाना चाहता हूं कि सबसे पहले जो मंत्री जी ने बजट  में कहा था कि इस देश में जो रेल में सुरक्षा की सुविधा है, मैं समझता हूं कि जितनी सुविधा और सुरक्षा होनी चाहिए, वह यात्रियों को नहीं मिल पा रही है। सुविधा को तो छोड़िए। सुरक्षा के नाम पर जो आपने बयान दिया था, संकल्प लिया था, आज रेलगाड़ियों में लोग जाते हैं, ट्रेन में अपना सामान रख देते हैं कि वे ट्रेन में सोएंगे लेकिन सोने में चार बार रात में जागकर वे देखते हैं कि हमारा सामान सुरक्षित है कि नहीं है। इसलिए मैं मंत्री जी के संज्ञान में इस बात को लाना चाहता हूं और मैं जानता हूं कि माननीय रेल मंत्री ममता दीदी कुछ करना चाहती हैं लेकिन जितना वक्त उन्हें इस मंत्रालय को देना चाहिए, वह समय की कमी के कारण सारी चीजें पूरी नहीं हो पा रही हैं। मैं आरोप नहीं लगा रहा हूं। इनके पास समय है लेकिन ज्यादा समय रेल मंत्री जी पश्चिम बंगाल में दे देती हैं, उसके नाते समय नहीं मिल पाता है। इसलिए मैं समझता हूं कि...( व्यवधान)

रेल मंत्री : आप जो कहना चाहते हैं, वह आप कह सकते हैं। लेकिन इस तरह से आपका बोलना ठीक नहीं है। you can politically say whatever you want to say. हम किधर रहेंगे, किधर नहीं रहेंगे, यह आपके बोलने की बात नहीं है।...( व्यवधान)

श्री दारा सिंह चौहान : मैं तो केवल बस इतना ही कहना चाहता हूं किज्यादा से ज्यादा समय आपको इस मंत्रालय को देना चाहिए।...( व्यवधान)

कुमारी ममता बनर्जी : मैंने अपनी पार्टी को तो देखा ही नहीं है। मैं रात दो बजे तक काम करती हूं, क्या  आपको पता है?...( व्यवधान)

उपाध्यक्ष महोदय :दारा सिंह जी, आप विषय पर बोलिए। वह बात आप छोड़ दीजिए। आप अपने विषय पर बोलिए।

…( व्यवधान)

श्री दारा सिंह चौहान : उपाध्यक्ष महोदय, यह मेरा आरोप नहीं है। मैं केवल मंत्री जी के संज्ञान में लाना चाहता हूं। ...( व्यवधान) मैं तो केवल इतना चाहता हूं कि कोलकाता जाने के बाद भी लोग आपको यहां याद रखें। हमारे क्षेत्र में इंदारा-दोहरी घाट...( व्यवधान)

उपाध्यक्ष महोदय :कृपया शांत रहें। माननीय सदस्य को बोलने दीजिए।

श्री दारा सिंह चौहान : मैं माननीय मंत्री जी के संज्ञान में लाना चाहता हूं कि इंदारा-मऊ 20 वर्ष पहले बहुत दिनों से जो छोटी ट्रेन चलती है, 20-25 साल पहले उसका सर्वे हो चुका है और उसका सर्वे केवल इंदारा-दोहरी ही नहीं बल्कि गोरखपुर तक हुआ। लेकिन आज तक उस पर बड़ी लाइन नहीं बन पाई है।...( व्यवधान) यह दुर्भाग्य रहा है कि उ.प्र. का आज तक कोई रेल मंत्री नहीं बन पाया है। लेकिन मैं चाहता हूं कि मंत्री जी उसका सर्वे कराएं और जो 20-25 साल पहले सर्वे हो चुका है ताकि वहां से 6-6 नगरपालिका टॉवर एरिया के जो लोग वहां बसते हैं, लेकिन आज तक बड़ी लाइन नहीं हो पाई है औऱ मऊ जो सबसे पहले वहां छोटी लाइन थी, वहां जो टर्मिनल था, लेकिन बड़ी लाइन होने के बाद वहां का टर्मिनल खत्म हो गया। इसलिए मैं चाहता हूं कि वहां मऊ जंक्शन जहां से गोरखपुर, बलिया, आजमगढ़-बनारस के लिए ट्रेन्स जाती हैं, कई बार मैं इस बात को सदन में रख चुका हूं कि वहां घंटों जाम रहता है लेकिन वहां फ्लाईओवर नहीं बन पाया, अंडरब्रिज नहीं बन पाया। एक डीआरएम पत्र मैं पढ़ रहा था जिसमें कहा गया था कि यहां तो अंडरब्रिज और ओवरब्रिज बन ही नहीं सकता है। इसलिए मैं मंत्री जी के संज्ञान में लाना चाहता हूं कि जब...( व्यवधान)

उपाध्यक्ष महोदय : आपका समय समाप्त हो गया। अब आप कृपया अपनी बात समाप्त करें।

श्री दारा सिंह चौहान : उपाध्यक्ष महोदय, बहुत जद्दोजहद के बाद एक कैफियात एक्सप्रैस दिल्ली से आजमगढ़ को चली। हम लोग नयी दिल्ली से मांग करते थे लेकिन वह दिल्ली से आजमगढ़ को चली लेकिन चलने के बाद जब से वह गाड़ी शुरु हुई, तब से आज तक भी काफी भारी संख्या में लोग प्रतीक्षा की सूची में रहते हैं चाहे स्लीपर क्लास हो या ए.सी.क्लास हो।पता नहीं क्यों, वहां से 216 स्लीपर बर्थ और 46 एसी, फर्स्ट, सैकिण्ड, थर्ड की बर्थ काटकर लखनऊ को दे दी गई हैं। मेरा माननीय मंत्री जी इसे संज्ञान में लें। यहां ऑलरेडी प्रतीक्षा सूची में ज्यादा लोग हैं तो काटने का सवाल ही पैदा नहीं होत है, इसे तत्काल बहाल किया जाए।

          महोदय, गरीब नवाज रथ, एक्सप्रेस ट्रेन किशनगंज से अजमेर दिल्ली होते हुए जाती है। मेरे संसदीय क्षेत्र में, मैं समझता हूं कि रसड़ा मोहम्माबाद बहुत महत्वपूर्ण स्थान है, जहां से तमाम श्रद्धालु अजमेर जाते हैं, यहां ट्रेन का ठहराव होना चाहिए। मऊ से दिल्ली, मुम्बई कैफियत और गोदान एक्सप्रेस से इतनी भारी संख्या में लोग जाते हैं, मैं चाहता हूं इसका डुप्लीकेट होना चाहिए। मंत्री जी, जिस तरह से और स्थानों पर चल रही है, कृपया आप कम से कम छः महीने प्रयोग के तौर पर चलाइए। अगर यहां ज्यादा से ज्यादा यात्री जाते हैं तो कन्टीन्यु कर दीजिए।

          मैं जानना चाहता हूं कि महाकुंभ हरिद्वार में जनवरी से मार्च के बीच होने जा रहा है, बलिया से लेकर मऊ, आजमगढ़ आदि तमाम क्षेत्रों से श्रद्धालु बड़ी संख्या में जाते हैं। लेकिन अभी तक कोई संकेत नहीं मिल पाया है कि क्या यहां से कोई स्पेशल ट्रेन चलाई जाएगी या नहीं? अगर कोई ट्रेन चलाई जाएगी तो कब तक चलाई जाएगी? इसका ठहराव कहां-कहां होगा? इसके आरक्षण की शुरूआत की जाएगी? मैं माननीय मंत्री जी के संज्ञान में लाना चाहता हूं कि हम कैफियात ट्रेन से जाते हैं, ट्रेन आजादी के बाद मिली है लेकिन इसमें जो सुविधाएं मिलनी चाहिए वे नहीं मिल पाई हैं। इसमें बर्थ काटी गई हैं, आजमगढ़, मऊ और मुबारकपुर औद्योगिक क्षेत्र है, जहां से लोग साड़ी का कारोबार करने जाते हैं उन्हें भी प्रतीक्षा सूची नहीं मिल पाती है। इसके बावजूद सीट काटकर लखनऊ को दे दी गई है जबकि लखनऊ से तमाम ट्रेनें बनकर जाती हैं। मैं माननीय मंत्री जी से कहना चाहता हूं कि तत्काल इसे बहाल किया जाए।

 

श्री राधा मोहन सिंह (पूर्वी चम्पारण): महोदय, मै माननीय मंत्री जी को बधाई देना चाहता हूं कि पिछली बार बजट में रेल यात्रियों को अच्छा संदेश गया और एलान किया गया था कि आप आर्थिक उपलब्धियों के साथ सामाजिक दायित्व को प्राथमिकता देंगी। आम आदमी की सुविधाओं के लिए कई एलान किए गए। रेलवे ने कहा -ग्राहकों की सेवा में मुस्कान के साथ, इस प्रकार की घोषणाओं से काफी उम्मीद जगी है। हम छः महीने बाद चर्चा कर रहे हैं तो स्वाभाविक है कि छः महीने के अंदर विसंगतियां ज्यों की त्यों दिखाई दे रही हैं, इसकी ओर मैं आपका ध्यान ले जाना चाहता हूं। आज रेलवे स्टेशन पर छोटे वैंडर्स और ट्रेनों में पैन्ट्री कारों में आइआरसीटीसी द्वारा खानपान दिया जा रहा है। इसकी चर्चा में प्रथम वक्ता बता रहे थे, वे सांसद हैं और रेलवे के ग्राहक हैं, वे रेल से यात्रा करते हैं। उनकी बातों से लग रहा था कि उनकी मुस्कान गायब है। लाल जी टंडन जी बोल रहे थे। ये विसंगतियां खानपान विभाग में दिखाई दे रही हैं, मैं मानता हूं कि यह इस सरकार के आने के बाद, माननीय मंत्री जी के आने के बाद से नहीं है बल्कि इसकी नींव वर्ष 2005 में रखी गई थी। मैं इस चर्चा के अवसर पर याद कराना चाहता हूं कि वर्ष 1999 में जिस नीति का आधार आपने स्वयं तैयार किया था,2000 की खानपान की नीति का एलान नीतीश कुमार जी ने किया था। 2005 में परिवर्तन कर दिया गया, मैं इसके बाद की बहुत सी विसंगतियों के विस्तार में नहीं जाना चाहता हूं सिर्फ निवेदन करना चाहता हूं कि 2005 खानपान की नीति में निश्चित रूप से बदलाव करना चाहिए। वर्ष 2000 या उससे पहले आपने जो सोचा था, उसके जो सकारात्मक पक्ष या पहलू को निश्चित रूप से इसमें शामिल करना चाहिए, इसमें परिवर्तन करना चाहिए।

          दूसरा विषय मैं आपके ध्यान में लाना चाहता हूं कि जो 550 ट्रेनों में पैन्ट्री कारें चल रही हैं, इनके रख-रखाव की जिम्मेवारी आईआरसीटीसी को दी गई है और आईआरसीटीसी यात्रियों को खानपान की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए पैन्ट्री कार ठेके पर देती है और उनसे जो पैसे प्राप्त होते हैं, उसमें से पांच प्रतिशत रेलवे को दिये जाते हैं, ताकि पैन्ट्री कार को ठीक रखा जा सके।

          लेकिन मैं आपका ध्यान दैनिक जागरण में 9दिसम्बर को छपी खबरों की ओर ले जाना चाहता हूं कि सैकड़ों ऐसी पैन्ट्री कारें हैं, जिनकी हालत बहुत खराब है। आप यदि आज भी जाकर देखें ते श्रमजीवी एक्सप्रैस की पैन्ट्री कार नम्बर 03801 और मगध एक्सप्रैस में चलाई जा रही पैन्ट्री कार नम्बर 96802है। इस प्रकार से बहुत सी ऐसी पैन्ट्री कारें हैं, जिनकी हालत बहुत खराब है। उनमें क्या-क्या खराबियां हैं, यह अखबार में पूरा वर्णित है। इसलिए मैं उसकी चर्चा नहीं कर रहा हूं, लेकिन निवेदन कर रहा हूं कि जब यहां पर पैन्ट्री कार वालों से पूछा जाता है तो वे बताते हैं कि आईआरसीटीसी से पूछा जाए और जब आईआरसीटीसी से जब पूछा जाता है तो वे कहते हैं कि हम रेलवे में पैसा भेजते हैं और रेलवे के जो दिल्ली डिवीजन के अधिकारी हैं, जब उनसे पूछा जाता है तो वे कहते हैं कि हम तो सैकेन्ड्री मेन्टिनेन्स करते हैं, इसका मूल मेन्टीनेन्स जोन को करना है। इस तरह से सहीं जबाव नहीं मिलता है। इसलिए कहीं न कहीं से इसकी ठीक व्यवस्था कराई जानी चाहिए और उन पैन्ट्री कारों की मरम्मत करके उन्हें ठीक से व्यवस्थित करना चाहिए।

          महोदय, रेल मंत्रालय की तमाम कोशिशों के बावजूद यदि रेलों में दुर्घटनाएं हो रही हैं तो इनकी वजह क्या है, इस पर भी निश्चित रूप से विचार करना चाहिए। चर्चा यह होती है कि भारतीय रेलों में सफर करने वाले यात्रियों की भीड़ दो करोड़ है। हर बार बजट में राजनीतिक दबाव में कई ऐसी ट्रेनें चलती हैं, इनके कारण ये परेशानी हो रही है। ऐसी चर्चा समय-समय पर रेलवे के अधिकारियों के द्वारा होती है। किंतु दुर्घटना की वजह को जब हम देखते हैं तो बहुत साफ होता है कि रेलवे कर्मियों की लापरवाही आज भी दुर्घटनाओं को मुख्य आधार है। वर्ष 2008-2009में हुई कुल 177रेल दुर्घटनाओं में सबसे अधिक73दुर्घटनाएं लगभग 41 प्रतिशत रेलवे कर्मचारियों की वजह से हुई थी। 1 अप्रैल,2009से लेकर 12 अक्टूबर,2009तक 74 रेल दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें 49का कारण ट्रेनों का पटरी से उतर जाना, चार सीधी टक्कर के मामले, दो आग के मामले और 26मानव रहित रेलवे क्रासिंग के कारण हुई। अभी भी देश भर में 25हजार मानव रहित रेलवे क्रासिंग हैं और इसके बारे में चिंता अवश्य होनी चाहिए। अब राज्य सरकार की बात आती है कि राज्य सरकार भी इसकी चिंता करें, लेकिन यह राज्य सरकार के बूते से बाहर की बात है। इसकी चिंता यहां से होनी चाहिए, इसके कारण भी दुर्घटनाओं की संख्या बढ़ रही है।

          महोदय, वर्तमान में रेलवे में आरपीएफ और राज्यों का जीआरपी है, दोनों के जिम्मे रेलवे की सुरक्षा की व्यवस्था है। यानी सुरक्षा की दोहरी व्यवस्था है, यह पूरी सुरक्षा व्यवस्था को भ्रम में डाले हुए है। इस दोहरी सुरक्षा व्यवस्था को समाप्त करना चाहिए और दुनिया के दूसरे देशों में रेलवे की अपनी पुलिस है और अपने यहां दोहरी व्यवस्था है। फिर क्या अपने देश में इस दोहरी व्यवस्था को समाप्त कर देश में रेलवे की पूरी सुरक्षा की जिम्मेदारी आरपीएफ पर नहीं डाली जा सकती है? मैं समझता हूं कि इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। मेरा मानना है कि रेलवे में सुरक्षा की व्यवस्था ऐसे हो, जैसे राज्यों में दंगे होते थे तो राज्य सरकार ने कहा कि यदि कहीं दंगा होता है तो इसकी पहली जिम्मेदारी डीएम और एसपी पर जायेगी। इसका नतीजा हमने अपने राज्य में देखा कि जब कहीं ऐसी स्थिति बनती है तो पूरी जिम्मेवारी के साथ D  D.M, S.P  मुस्तैद रहते हैं क्योंकि उनकी जवाबदेही सुनिश्चित कर दी गई है। इसलिए मेरा मानना है कि रेलवे में सुरक्षा व्यवस्था तभी मुस्तैदी से हो सकती है, जब जिम्मेदारी के साथ ही अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित की जायेगी।

          उपाध्यक्ष जी, मैं आपके माध्यम से मा0मंत्री जी काध्यान चम्पारण की ओर ले जाना चाहता हूं। चम्पारण महात्मा गांधी की कर्मभूमि रही है। चप्पे-चप्पे पर महात्मा गांधी की स्मृति आज भी मौजूद है। गांधी जी अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष करने के लिये यहां आये थे जो मोतिहारी से शुरु किया था। वे मोतिहारी स्टेशन पर उतरे थे। 8-10 वर्षों तक रेलवे स्टेशन पर फोटोग्राफ्स लगे हुय़े थे लेकिन आज उनका पता नहीं है। वहां के लिये एक ट्रेन चलाई गई थी और उस स्टेशन का नाम बदलकर बापूधाम मोतिहारी किया गया। देश में गांधीधाम के बाद दूसरा नाम बापूधाम किया गया। पिछली बार रेलवे ने घोषणा की थी कि देश के 50 रेलवे स्टेशनों को विश्व स्तरीय सुविधायें दी जायेगीं लेकिन उनमें मोतिहारी का नाम नहीं है। आदर्श रेलवे स्टेशनों की संख्या 350 करने की बात की गई लेकिन उन में भी मोतिहारी का नाम नहीं है। फिर उसके बाद जिन 50 परिसरों का विकास किया जायेगा, उनमें भी मोतिहारी का नाम नहीं होना यह आश्चर्य करने वाला है लेकिन आपने बापूधाम जोड़ा,उसे महत्व दिया तोबापूधाम-मोतिहारी को भी किसी विकसित श्रेणी में लाना चाहिये था। । आज उस प्लेटफार्म की क्या हालत है? वहां पर 22 कोच की रेलगाड़ियां रुकती हैं लेकिन प्लेटफार्म नं. 1 पर जो शैड है, वह सिर्फ आधे प्लेटफार्म को ढक पाता है और प्लेटफार्म नं. 2 पर यह व्यवस्था नाममात्र की है। मोतिहारी स्टेशन के निकट एक हैल्थ यूनिट है जो 125किलोमीटर के जो रेलवे के आपके क्षेत्र हैं,. उनकी देखभाल वहां से होती है। इस यूनिट में एक डाक्टर, और दो सहायक रहते हैं। केवल दो बैड हैं जिन पर स्टाफ के लोग सोते हैं, मरीज नहीं आते हैं। यहां केवल  ब्लडप्रेशर नापने का उपकरण है लेकिन नर्स कोई नहीं है। मेरा निवेदन है कि इस हैल्थ यूनिट को पौलीक्लीनिक का दर्जा दिया जाये।

          मुजफ्फरपुर-मोतिहारी-बेतिया-गोरखपुर रेलवे ट्रेक बना है, यह बड़ी लाईन में परिवर्तित हुआ। इसका मतलब यह था कि इस ट्रेक पर पैसेंजर गाड़ियां भी चलें। मुजफ्फरपुर-दिल्ली के लिये जो ट्रेक जाता है, उस पर सिर्फ दस मालगाड़ियां प्रतिदिन चलती है। जितनी यात्री गाड़ियां हैं, वे सब मुजफ्फरपुर-सीवान छपरा होकर जाती हैं। मेरा निवेदन है कि इस ट्रेक पर सवारी गाड़ी को चलाया जाये। जब माननीय नीतीश कुमार जी रेल मंत्री थे,. तब सप्त क्रान्ति एक्सप्रैस चली, और मुजफ्फरपुर-बेतिया-मोतिहारी होकर जन सम्पर्क गाड़ी भी चलाने की घोषणा हुई थी । लेकिन जब माननीय लालू जी रेल मंत्री बने तो उस गाड़ी को अपने क्षेत्र छपरा की ओर कर दिया। मेरा निवेदन है कि मोतिहारी होकर सुपर फास्ट ट्रेन चलाई जाये। साथ ही दक्षिण भारत के लिये एक ट्रेन उधर से चले। यह बराबर मांग हो रही है कि 5228 मुजफ्फरपुर से यशवंतपुर के लिये चलती है, वह दो दिन खड़ी रहती है, उसे मोतिहारी से होकर रक्सौल के लिये चलाया जाये।

          उपाध्यक्ष महोदय, मोतिहारी बड़ा शहर है। वहां  एक भी रेलवे ओवरब्रिज नहीं है चकिया रेलवे स्टेशन जहां से लोग केसरिया जाते हैं। देश-विदेश के पर्यटक जाते हैं। वहां विश्व का बहुत बड़ा बौद्ध स्तूप है,वहां जो रेलवे क्रासिंग है, उसके कारण भी आवागमन में काफी कठिनाई होती है ।...( व्यवधान)

उपाध्यक्ष महोदय : अब की बात हो गई ह। कृपया समाप्त कीजिये।

श्री राधा मोहन सिंह : चकिया को बी ग्रेड का दर्जा मिला हुआ है। न वहां बिजली है, न पानी है। सुगौली-हाजीपुर-वैशाली रेल लाइन के बारे में बताना चाहूगा कि वैशाली जनतंत्र की जननी है। इस लाइन की मंजूरी श्री नीतिश कुमार के समय हुई थी लेकिन बाद में बने रेल मंत्री जी ने राजनैतिक कारणों से उसकी गति को धीमा कर दिया। मेरी आपसे विनती है कि सुगौली-वैशाली हाजीपुर रेल लाइन में गति लाई जाये। बिहार में कई ऐसी परियोजनायें हैं जिनकी भौगोलिक स्थिति इससे पहले .. (Interruptions) …*                                                                                                 उपाध्यक्ष महोदय : अब आप बैठिये। आपका भाषण रिकार्ड में नहीं जायेगा।

                             ...( व्यवधान) ....*         * Not recorded.    

डॉ. *किरीट प्रेमजीभाई सोलंकी (अहमदाबाद पश्चिम): आदरणीयाउपाध्यक्ष महोदय, मैं आपका आभारी हूं कि आपने मुझे इस विषय पर बोलने के लिए अनुमति दी है। 731,30.60 लाख रूपये की पूरक मांग, राष्ट्रीय परियोजनाओं के निर्माण कार्य को आगे बढ़ाने के लिए की गई है।

          रेलवे के विकास कार्यो के लिए अनुदान की पूरक मांगों को हम सिद्धांत के तौर पर समर्पित करते हैं लेकिन समग्र देश के सभी क्षेत्रों और प्रदेशों को पूरा न्याय मिलना चाहिये।

          पिछले कई वर्षो से, रेल मंत्री देश के पूर्ण विस्तार से आते हैं। पूर्वी भारत को रेलवे के विकास का हम समर्थन करते हैं, किंतु देश के अन्य प्रदेशों को अन्याय नहीं मिलना चाहिए। अन्य प्रदेश की रेलवे की मांगों की अनदेखी न करते हुए सभी प्रदेश का सर्वांगीण विकास होना चाहिए।

          जहां तक गुजरात का सवाल है, ये पूरक मांगों और एनुअल रेल बजट में भी गुजरात की बड़ी उपेक्षा होती रही है। चाहे गुजरात के लिए नई रेल लाईन बिछाना हो या फिर गेज कन्वर्जन हो या नई रेलगाड़ी चालू करना हो या पश्चिम रेलवे का मुख्य मथक अहमदाबाद को बनाना हो या फिर इलैक्ट्रीफिकेशन हो या रेल डिब्बे एवं अन्य पार्टस बनाने का कारखाना डालने का सवाल हो, हर वक्त गुजरात को अन्याय सहन करना पड़ता है। गुजरात के पास देश में सबसे बड़ा समुद्र तट है और कई बंदरगाहों से व्यापार चलता है। मेरी मांग है कि गुजरात के सभी बंदरगाहों को रेल सेवा जोड़ना चाहिए।

          इस पूरक अनुदान में मानव रहित रेल फाटक पर चौकीदार तैनात करने का प्रयास किया है। मगर मेरा सुझाव है कि शत-प्रतिशत मानव रहित रेल फाटकों पर चौकीदार तैनात करने चाहिये ताकि गंभीर हादसों को रोका जाये।

          हजारों की संख्या में रेल पुल जर्जरीव, बीस्मार और बुरी हालत में हैं। इसकी बजट में पिछले कई सालों में गंभीर रेल दुर्घटनाएं घटी हैं। हमें ऐसे जर्जरीव, बीस्मार और पुराने रेलवे पुलों को लम्बी दूरी की योजना के तहत नवीनीकरण करना चाहिए।

          रेलवे अक्तस्मात को रोकने के लिए नई टैक्नोलॉजी इस्तेमाल करना चाहिए।

         

श्री संजय निरुपम (मुम्बई उत्तर):  महोदय, आपने मुझे बोलने की अनुमति दी, इसके लिए आपको बहुत-बहुत धन्यवाद। मैं आदरणीय रेल मंत्री जी, जो भारतीय रेल के लिए सप्लीमेंट्री ग्रांट्स के लिए विधेयक लेकर आयी हैं, मैं उसका समर्थन करता हूं। रेलवे अपने आप में एक इतना व्यापक और विस्तृत विषय है कि अगर हम बोलना चाहें तो जितनी लंबी रेलवे ट्रैक है, 65 हजार किलोमीटर, उतना बोला जा सकता है। आज 52 वक्ता बोलने वाले हैं, लेकिन अगर बोलना चाहें तो इस सदन का प्रत्येक सदस्य बोल सकता है क्योंकि कहीं न कहीं हम और हमारे लोग रेलवे की समस्याओं से जुड़े हुए हैं। हम कम से कम शब्दों में, संक्षेप में अपनी बात रखना चाहेंगे। मैं ममता दीदी का बहुत-बहुत शुक्रिया अदा करना चाहूंगा कि वे पिछले दिनों मुम्बई आयीं और उन्होंने मुम्बई में तीन-चार बहुत ही महत्वपूर्ण घोषणाएं और परियाजनाएं शुरू कीं। मुम्बई की लोकल ट्रेनों के जो यात्री हैं, उनके लिए 15 कोचेज की जो ट्रेनें शुरू कीं, उसके लिए मैं उन्हें बधाई देना चाहता हूं। हालांकि 15 कोचेज की जो ट्रेनें हैं, वे सारी की सारी ट्रेनें पूरे सिस्टम को रिप्लेस नहीं कर पा रही हैं। इनकी और भी संख्या बढ़ाने की आवश्यकता है। बहुत ज्यादा ऐसे लोकल स्टेशंस हैं, जहां पर 15 कोच की ट्रेनों के रूकने के लिए प्लेटफार्म्स नही हैं। उन प्लेटफार्म्स को बनाने का भी इंतजाम करना पड़ेगा, तब कहीं जाकर एक बहुत ही सफल और कामयाब किस्म का यह कार्यक्रम हो सकता है। आपने तुरन्तो का उद्घाटन किया, इसके लिए आपको बहुत-बहुत बधाई देता हूं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह थी कि एक रिक्रूटमेंट पॉलिसी की इन्होंने घोषणा की। महाराष्ट्र पिछले कई वर्षों से इस समस्या से जूझ रहा था। बार-बार बाहर से आने वाले स्टूडेंट्स पर हमला हो रहा है और जो स्थानीय बच्चे हैं, उनकी अपनी अलग चिंता है। मराठी अखबारों में विज्ञापन नहीं आ रहे हैं, बाहर के लोगों को नौकरी, इसे लेकर एक राजनीतिक आन्दोलन चल रहा था। इसमें काफी हद तक गलत रास्ते भी अख्तियार किये जा रहे थे। ममता दीदी ने समस्या को समझते हुए बहुत अच्छे ढ़ंग से घोषण की कि एक ही बार पूरे देश में अलग-अलग सेन्टरों में रिक्रूटमेंट होगा यानी की परीक्षा होगी। निश्चित तौर पर यह एक बहुत ही सराहनीय कदम है और इसके लिए मैं ममता दीदी को बधाई देना चाहता हूं। आपने चर्च गेट और वीटी, दोनों को कनेक्ट करने के लिए एक योजना की घोषणा की है। मैं उसके बारे में जानना चाहूंगा कि उसकी क्या स्थिति है? आपने कहा है कि मैं स्टडी करवा रही हूं और मैं इसे बहुत जल्दी करूंगी। अगर चर्च गेट और वीटी, कनेक्ट हो जाते हैं तो लोकल ट्रेनों के बीच जो तीन मिनट का गैप होता है, वह गैप घटकर एक मिनट हो जाएगा। यानी कि लोकल ट्रेनों की क्षमता और बढ़ जाएगी। लगभग सात लाख लोग प्रतिदिन मुम्बई की लोकल ट्रेनों से सफर करते हैं। उन्हें जितनी सुविधाएं दी जाएं, वे कम होंगी। जितनी तेजी से ट्रेनें चलें और जितनी कम फ्रीक्वेंसी पर ट्रेनें चलें, उतनी ही अच्छी बात होगी। इसके लिए मैं जानना चाहूंगा कि आगे क्या कार्यक्रम चल रहा है? ममता दीदी के सामने पिछले कई वर्षों से एक प्रपोजल आ रहा है, एक प्रस्ताव उत्तर मुम्बई की तरफ से आया, मैंने भी बार-बार चिट्ठी लिखी है और खुद मिलकर बताता हूं कि बोरीवाली, दहिसर के क्षेत्र में जो कोंकण के लोग रहते हैं, उन्हें कोंकण जाने के लिए, ट्रेन लेने के लिए वीटी जाना पड़ता है, इसलिए उनके लिए बोरीवाली की तरफ से ट्रेन दीजिए। मैं ममता दीदी को बधाई दूंगा कि आपने गणपति के मौके पर एक एतिहासिक निर्णय लिया और बोरीवाली से पहली बार ट्रेन गयी और उस ट्रेन की घोषणा होने के 10, 15 या एक घंटे के अंदर ओवर बुकिंग हो चुकी थी। इससे समझ सकते हैं कि वह कितना बड़ा मार्केट है, वहां पर कितने यात्री हैं?

          महोदय, मैंने आदरणीय रेल मंत्री महोदया से निवेदन किया कि अब इस वक्त इसे डेली नहीं, सप्ताह में एक बार इसे कर दीजिए। इन्होंने कहा मेरे पास रेक नहीं है। मैं रेक भी नहीं मांग रहा हूं, मैं नया रूट भी नहीं मांग रहा हूं, मैं नया स्टेशन भी नहीं मांग रहा हूं। मैं आपको बताना चाहूंगा कि इस समय वीटी से कोंकण जाने के लिए कौन-कौन सी ट्रेनें प्रतिदिन जा रही हैं? मुम्बई-कारवार एक्सप्रेस रोज जाती है, जन शताब्दी एक्सप्रेस, दादर-कोचुवल्ली एक्सप्रेस स्पेशल जाती है। दादर-एरनाकुलम एक्सप्रेस जाती है, कोंकण-कन्या एक्सप्रेस जाती है, मालवीय एक्सप्रेस जाती है और मुम्बई-मढ़गांव स्पेशल जाती है। अनन्त गीते जी उसी कोंकण क्षेत्र के रहने वाले हैं और वे बहुत अच्छे ढ़ंग से इस विषय को जानते होंगे। मेरा निवेदन है कि जो वीटी से रोज ट्रेनें जा रही हैं, उनमें से एक ट्रेन को सप्ताह में एक या दो दिन आप बांद्रा से शुरू कर दीजिए। वह बांद्रा वाली ट्रेन बोरीवाली होती हुई जाएगी तो वह बोरीवाली, दहिसार, अंधेरी यहां जो कोंकण के लोग रहते हैं, वे अपने गांव से बहुत शिद्दत से जुड़े हुए लोग हैं, वे बड़े पैमाने पर आते-जाते रहते हैं, उन्हें एक बहुत बड़ी सुविधा मिल जाएगी। ममता दीदी यह मेरा आपसे निवेदन है। एक बहुत अच्छा प्रस्ताव है जो वर्षों से लंबित पड़ा हुआ है। मैं चाहूंगा कि उस पर प्रकाश डालूं और आपका ध्यान उस ओर आकर्षित करूं। मुम्बई को जो रेलवे ट्रैक है, चाहे सेंट्रल रूट हो या वेस्टर्न रूट हो, उस रेलवे ट्रैक के ऊपर लंबा फ्लाई ओवर बनाने का प्लान है। एक रेलवे ट्रैक के पैरलल एक रोड सिस्टम डेवलप करने का एक प्रस्ताव है और बहुत दिनों से इस विषय को मुम्बई के लगभग तमाम सांसदों ने समय-समय पर उठाया है। समझ में नहीं आता है कि वह पूरी योजना कहां है? मैं चाहूंगा कि ममता दीदी उस पर थोड़ा ध्यान दें। आप जनता की समस्याओं को बहुत गंभीरता से लेती हैं और उन समस्याओं के लिए लड़ाई भी लड़ती हैं और आप उसमें जीती भी हैं। आने वाले दिनों में मुम्बई के लोगों के लिए बहुत अच्छा ट्रंसपोर्ट सिस्टम तैयार हो सकता है, एक नया रास्ता निकलकर आ सकता है और जो भीड़ भरा वातावरण है, जो ट्रैफिक जाम का सिस्टम हमारे यहाँ है, मुम्बई में एक बार अगर आपको नॉर्थ मुम्बई से साउथ मुम्बई जाना हो, तो कुल मिलाकर 20-25किलोमीटर की दूरी है, लेकिन कभी कभी दो-तीन घंटे भी लग जाते हैं। उससे निजात पाने के लिए किसी बड़े जानकार ने आपको यह प्रस्ताव दिया था। मेरा निवेदन है कि आप उस पर थोड़ा ध्यान दें।

कुमारी ममता बनर्जी : क्या प्रस्ताव है, वह लिखकर भेज दें।

श्री संजय निरुपम : ठीक है, मैं लिखकर भेज दूँगा। एक और बात मैं याद दिलाना चाहूँगा कि मुम्बई में एक ओसीवारा स्टेशन बनाया जाना है। पता नहीं कितने वर्षों से वह स्टेशन बन रहा है। आज तक स्टेशन सिर्फ घोषणा के लैवल पर ही है। मैं चाहूंगा कि जितना जल्दी हो, ओसीवारा स्टेशन का काम शुरू किया जाए और वह बनकर तैयार हो।

उपाध्यक्ष महोदय : कृपया समाप्त करें।

श्री संजय निरुपम : इतनी जल्दी?

उपाध्यक्ष महोदय : समय हो गया है। यहाँ पर घड़ी है। एक मिनट और बोल लें।

श्री संजय निरुपम : उपाध्यक्ष महोदय, मैं दो-तीन विषय रखता हूँ फिर अपनी बात बंद करूँगा। महोदय, यह तो मुम्बई का विषय था। मुझे बताते हुए बड़ी खुशी हो रही है कि ममता दीदी के नेतृत्व में रेलवे का काम बहुत अच्छे ढंग से चल रहा है। नवंबर 2009की रिपोर्ट के हिसाब से सिर्फ फ्रेट ट्रैफिक में लगभग 8.2परसेंट के आसपास वृद्धि हुई है। यह सब आप जो बहुत ध्यान से, बहुत तन्मयता के साथ, बहुत शिद्दत के साथ रेलवे का काम कर रही हैं, उसकी वजह से संभव हुआ है। नॉर्दर्न रेलवे की रेवेन्यू ग्रोथ11परसेंट के आसपास बढ़ी है। यह धीरे धीरे बढ़ रही है लेकिन अभी बहुत कुछ बढ़ाना है, बहुत कुछ करना है। 11वीं योजना में जो सारे प्रस्ताव आए थे, उन प्रस्तावों के हिसाब से लगभग 2000 किलोमीटर नई रेलवे लाइन्स जोड़नी थी रेलवेज़ को। इस पंचवर्षीय योजना के दो-ढाई साल गुज़रने को हैं। हमने सिर्फ 527 किलोमीटर रेलवे लाइऩ जोड़ी है, यानी अभी बहुत आगे जाना है। इस पर ध्यान दिया जाना चाहिए रेलवे ट्रैक बढ़ाने के लिए। जो गेज कनवर्शन का विषय है, उसमें 10000 किलोमीटर गेज कनवर्शन का प्लान था 11वीं योजना में जबकि 2179 किलोमीटर के आसपास हम गेज गनवर्शन कर पाए हैं। डबलिंग के लिए हमारा 6000 का टार्गैट था और उसमें सिर्फ 874किलोमीटर के आसपास डबलिंग की है, जबकि दो-ढाई साल गुज़रने को हैं। इलैक्ट्रिफिकेशन का काम भी ठीक-ठाक है। जितनी अपेक्षा थी, उतना नहीं है। लगभग 3500 किलोमीटर इलैक्ट्रिफिकेशन का काम था, लेकिन सिर्फ 1299के आसपास हम कर पाए हैं। बार-बार एक विषय निकलकर आता है कि हमारे पास रेक्स नहीं हैं, वैगन्स नहीं हैं। हमने देखा 11वीं योजना में 1,55,000वैगन्स बनाने की योजना थी लेकिन हम सिर्फ 58000 बना पाए हैं। यह रोलिंग स्टाक के डैवलपैंट का जो प्रोग्राम है, उसमें भी रेलवे को और कंट्रीब्यूट करने तथा ध्यान देने की आवश्यकता है।

          एक बड़ा विषय जो महंगाई के ज़माने में निकलकर आता है, बार बार इस विषय पर चर्चा होती है कि महंगाई बढ़ रही है। उसमें हमारे जो पैरिशेबल आइटम्स हैं, जो सब्ज़ियाँ और फ्रूट्स जिस तरीके से बरबाद हो रहे हैं, सही ढंग से ट्रंसपोर्टेशन की व्यवस्था नहीं होने से, इसमें रेलवे को एक बहुत बड़ी भूमिका निभानी पड़ेगी। स्पेशल ट्रेन्स शुरू करने का प्रस्ताव लाना पड़ेगा। ...( व्यवधान)

उपाध्यक्ष महोदय : कृपया समाप्त करें।

श्री संजय निरुपम : उपाध्यक्ष जी, मैं खत्म कर रहा हूँ। पूरी दुनिया में 13 प्रतिशत सब्ज़ियों का उत्पादन हमारे यहाँ होता है और लगभग दस प्रतिशत फलों का उत्पादन हम करते हैं। प्रतिवर्ष 35000करोड़ रुपये से लेकर 40000 करोड़ रुपये की सब्ज़ियाँ और फल बरबाद हो जाती हैं क्योंकि हम उनको ट्रंसपोर्ट नहीं कर पाते हैं, खेतों से मार्केट तक नहीं पहुँचा पाते। यह काम कोई प्राइवेट सैक्टर नहीं कर सकता। कोई कर सकता है तो वह है रेलवे। इसमें बड़े बड़े रीटेल में  शामिल लोगों ने भी आपको सुझाव दिया है। मुझे लगता है कि महंगाई के दिनों में जब टमाटर महंगा हो रहा है, केला महंगा हो रहा है, ऐसे में इसको जितना जल्दी हो, खेत-खलिहान से मार्केट तक पहुँचाने की जो व्यवस्था है, वह रेलवे को अपने सिर पर लेनी चाहिए। जिस तरह से डैडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के बारे में आपने एक प्रश्न के उत्तर में बताया है, वह बहुत अच्छी योजना है।

उपाध्यक्ष महोदय : कृपया समाप्त करें।

श्री संजय निरुपम : मैं खत्म ही कर रहा हूँ।

उपाध्यक्ष महोदय : आप खत्म नहीं कर रहे हैं, बढ़ा रहे हैं।

श्री संजय निरुपम : उपाध्यक्ष जी, यह बहुत महत्वाकांक्षी योजना है, बल्कि पूरी दुनिया इस योजना को देख रही है कि हिन्दुस्तान में ईस्टर्न कॉरीडोर और वैस्टर्न कॉरीडोर बनाया जा रहा है। इस योजना को जितनी गति से आगे चलना चाहिए, नहीं चल पा रही है। एक प्रश्न के उत्तर में आपने बताया -

“The project is targeted to be completed by 2016-17 subject to land acquisition and availability of the funds.”   मुझे नहीं लगता कि फंड्ज़ की कमी है। लैन्ड एक्वीज़ीशन हमारे देश में एक बहुत जटिल विषय है।

         

15.00 hrs. लैण्ड एक्वीजीशन के विषय को सिम्पल करने के लिए एक कानून आने वाला है, शायद आपको उस विधेयक पर ऐतराज़ भी है। उस विधेयक पर ऐतराज़ को दूर करते हुए उस विधेयक को लाया जाए ताकि लैण्ड एक्वीजीशन का काम आसान हो सके। डैडीकेटिड फ्रेट कोरीडोर का काम तेजी से हो। इसी के साथ इस स्पलीमेंटरी बजट का समर्थन करते हुए अपनी बात समाप्त करता हूं।

*डॉ. शफ़ीकुर्रहमान बर्क (सम्भल):   महोदय, संभल जिला मुरादाबाद मेरा लोक सभा क्षेत्र है, जिसमें संभल तक ब्रांच लाइन है। यह एक तारीखी शहर है और तिजारती मरकज है। मैंने बजट के मौके पर संभल को वाया हसनपुर गजरौला मैन लाइन से जोड़ने की मांग की है, जिसका सर्वे माननीय श्री लालू यादव जी ने सन 2007 में कराया था, जिसका खर्चा 104 करोड़ बताया था। सन्2009 में भी मैंने रेलवे बजट के मौके पर भी यह मसला उठाया था लेकिन आज तक इस पर कोई कार्यवाही नहीं हुई, जिससे संभल की तरक्की रूकी हुई है। संभल की जनता बेहद परेशान और दुखी है। कई बार प्रदर्शन हो चुके हैं।

          सरकार से मेरी मांग है कि संभल को वाया तहसील हसनपुर, गजरौला मैन लाइन से जोड़ दिया जाये ताकि दिल्ली वगैरह जाने में जनता को आसानी हो जाये। मैनपुरी बदायूं से आने वाली ट्रेनें संभल होकर गुजर सकें। अफसोस है कि संभल गजरौला से आज तक नहीं जुड़ सका। मुझे उम्मीद है कि माननीया मंत्री जी इस पर खलूसी से तवज्जोह देकर इसी साल काम कराने की कृपा करेंगी।

15.01 hrs.                   (Shri Francisco Cosme Sardinha in the Chair) SHRI T.K.S. ELANGOVAN (CHENNAI NORTH): Mr. Chairman, Sir, thank you for giving me this opportunity to participate in the discussion on the Supplementary Demands for Grants (Railways). I rise to support the Demands of the Railway Minister. At the same time I also certain requests to make to the hon. Minister for Railways.

            Generally the Railway Ministers are good people when compared to Finance Ministers because whenever Members of Parliament request the Ministers of Railways for a project, they immediately accept it and in confirmation of that acceptance they also allocate a token amount for the project.

            At the outset I wish to congratulate the hon. Railway Minister for the two projects, namely, the Ijjat and Duranto, which she announced in her last Budget speech. Both these have become instant success. I once again congratulate the hon. Minister for this. But in regard to projects requested by the hon. Members of Parliament which are accepted, it has been the practice of the Railway Ministers, not only of Ms. Mamata Banerjee, but of Railway Ministers of the last, say, 10 to 12 years, that though the projects are accepted and token amounts are allocated in the Budget for the same, but the completion of those projects have always remained in question. In this regard, our hon. Chief Minister, and our Party leader, Dr. Kalaignar Karunanidhi had already written to the hon. Minister for Railways seeking to expedite some of the projects announced in the State of Tamil Nadu, particularly in respect of projects relating to gauge conversion. Against a Budget grant of Rs. 240 crore provided for the year 2009-10, an additional grant of Rs. 280 crore would be required to complete the works on time. Most importantly, the Myaladiturai—Thiruthuraipundi—Karaikudi is a very important line which cater to lakhs of people but the project for gauge conversion of this stretch has not been completed yet. Therefore, I would like to request the hon. Minister to speed up the project by allocating more funds to this.  Likewise, the gauge conversion of the route between Thiruvarur—Nagapattanam—Thirukuvagai is still pending completion because of inadequate funding.

            Sir, another problem is doubling projects. In respect of doubling of railway lines, eight projects had been taken up for execution at a Budget outlay of Rs. 112 crore during the year 2009-10 whereas additional grant of Rs. 77 crore would be required for completion of just one project. Out of the eight projects, for completion of the Changelpet--Vilipuram project alone a Budgetary allocation of Rs. 77 crore would be required during the year. The amount would be much more if all the seven projects were to be completed during the year. So, I would like to request the hon. Minister to see that sufficient funds are allocated in these areas.

            Sir, same is the case in respect of projects for laying of new railway lines. The laying of railway line between Karur and Salem is pending for a long time.

The distance is about 85 kilometres. As against the budget grant of Rs. 36 crore in 2009-10, an amount of Rs. 34 crore has been spent as on date.  But the estimated requirement of funds for the full year is Rs. 140 crores.  An additional grant of Rs. 104 crore will be required for this project.  This is also a very important project.  It saves travel time and distance.  So, the hon. Minister may consider allocating Rs. 104 crore for this project also.

            Likewise, new projects like Ariyalur-Thanjavur, Neelamangalam -Mannarkudi -Pattukottai should also be taken up by the hon. Minister. Allocating a meagre amount and leaving the project pending is a wasteful investment.  It is not a remunerative investment. So, the hon. Minister should see to it that sufficient funds are allocated so that the projects are completed within the specific period.

There is Golden Quadrilateral with respect to roads.  I would request the hon. Railway Minister to have another Golden Quadrilateral with respect to freight.  Chennai, Kolkata, Mumbai and Delhi should be connected with an exclusive freight corridor which will be of immense help to the people of India.  I think, if the Minister would take this as her dream project, she can complete it.  I would request her to consider the same.

Regarding accidents, as was mentioned by many of our colleagues, there should be bridges constructed, either road over-bridges or road under-bridges, so that railway lines become a dedicated route without roads crossing them.  Thereby, level crossings can be put to an end.

I request the hon. Minister to take up the projects which I have mentioned. With these words, I conclude.

                                                                                                           

डॉ. रघुवंश प्रसाद सिंह (वैशाली): सभापति महोदय, हमने सप्लीमेंट्री बजट देखा है। हमने देखा कि हम लोगों के एरिया में जो काम होना है, वह सब इस बजट में हो जाएगा - चौकादार वाला, समपार वगैरह बनाने का जिक्र उसमें है। मैं सबसे पहला सवाल यह उठाना चाहता हूं कि पटना में दीघाघाट से पहलेजाघाट, रेल कम रोड ब्रिज, जो देश भर के लिए मशहूर गंगाजी को पटना से, उत्तर दक्षिण को जोड़ने वाला रेल कम रोड ब्रिज है, वहां पहले से महात्मा गांधी सेतू रोड ब्रिज है, लेकिन वह रोड ब्रिज बूढ़ा हो गया है। पता नहीं वह कब टूट जाएगा? उसकी बराबर मरम्मत होती रहती है। समझा जाए कि अगर पटना को, उत्तर दक्षिण को जोड़ने वाला ब्रिज टूट जाएगा तो फिर हाहाकार मचेगा। इसीलिए पटना में जो रेल कम रोड ब्रिज बन रहा है, उसका प्रधान मंत्री जी ने शिलान्यास किया था, वह जल्दी से बन जाए। उसकी क्या स्थिति है? राज्य सरकार ने भी इसमें पांच सौ करोड़ रेलवे को सहायता की है। इससे लगता है कि पैसे की कोई कमी नहीं है तो इसके बनने में क्यों विलम्ब हो रहा है? मैं इसलिए उसके जल्दी से बनाने की मांग करता हूं, क्योंकि जो पहले से महात्मा गांधी सेतू है, उसकी बूढ़ा होने के कारण मरम्मत हो रही है। विशेषज्ञ लोग इसे देख रहे हैं। पता नहीं वह कब टूट जाएगा और हाहाकार मच जाएगा? वह तुंत एवं जल्दी बने। वह कब बनना है, कब उसका उद्घाटन होगा? मैं माननीय मंत्री जी से अपेक्षा करता हूं कि ये उसकी डेट बताएं कि इस डेट को हम उसका उद्घाटन करेंगे।

          सभापति महोदय, मेरा दूसरा सवाल हाजीपुर, सुगौली का है, जिसके बारे में श्री राधा मोहन सिंह जी भी बोल रहे थे, जिसका प्रधान मंत्री जी ने 10 जनवरी,2004को शिलान्यास किया था। सभापति जी, पांच वर्ष हो गए, वर्ष 2004में प्रधान मंत्री जी ने घो­षणा की और अब वर्ष 2009 चल रहा है। उसमें एक्वीजीशन वगैरह का काम चल रहा है, लेकिन बहुत आहिस्ता गति से चल रहा है। लोगों को लगता है कि शायद मंत्री और सरकार के अदल-बदल होने से उसमें देरी हो रही है। इसके कारण उस इलाके के लोगों को बहुत चिन्ता है। इसलिए वे लोग साहिबगंज में एजीटेशन कर रहे हैं। साहिबगंज के हाईस्कूल मैदान में 13दिसंबर को बहुत संख्या में लोग जुटे और मांग की कि उस पुल की कार्रवाई को तेज किया जाए। नया पुल बनाने के लिए आन्दोलन हो, तो समझ में आता है, लेकिन वहां तो आन्दोलन यह हो रहा है कि प्रधान मंत्री जी की घो­ाणा के अनुसार पुल का निर्माण तेजी से किया जाए। महोदय, वह मार्ग हाजीपुर-सुगौली और वैशाली से होकर जाता है। वह बौद्ध सर्किट की रेल लाइन है। वह बहुत महत्वपूर्ण और अन्तर्रा­ट्रीय स्तर की रेल लाइन होगी क्योंकि आप जानते हैं कि वह बौद्ध सर्किट की रेल लाइन है। वैशाली और केसरिया तथा अन्य बहुत सारे महत्वपूर्ण ऐसे हैं, जिन्हें जोड़ने के लिए उस रेल लाइन को बनाने का विचार हुआ था।

          महोदय, उसी तरह से छपरा से मुजफ्फरपुर तक का निर्माण कार्य भी शुरू है, लेकिन बहुत धीमी गति से चल रहा है। उसका काम आधा मुजफ्फरपुर जिले में चल रहा है और आधा छपरा और सारण जिले में चल रहा है। उस काम की गति बहुत धीमी है। ऐसा लगता है कि वह काम रुक गया है। हम वहां लोगों में ऐसा भरोसा दिलाना चाहते हैं कि यदि उसमें थोड़ा-थोड़ा सा काम भी होता रहेगा, तो काम हो जाएगा। उसी प्रकार से मुजफ्फरपुर से सीतामढ़ी रेल लाइन में बहुत दिनों से हाथ नहीं लगा है। कुछ निर्माण हुआ है और कुछ बाकी है। उसमें मुजफ्फरपुर के पास बूढ़ी गंडक है। उसे यह रेल लाइन पार करती है। उसमें केवल रेल ब्रिज का प्रावधान है। उसमें रोड भी हो जाती, यानी रेल कम रोड ब्रिज हो जाता,  तो मुजफ्फरपुर शहर का भी विकास होता। वह पुल मुजफ्फरपुर में ही माना जाए। वह शहर है, टाउन है;कमिश्नरी टाउन है। पटना के बाद उसका दूसरा नंबर है। उस पुल पर से यदि केवल रेल आएगी और गाड़ियां नहीं आएंगी, तो फिर बड़ा भारी संकट हो जाएगा, क्योंकि फिर लोग कहेंगे कि बसों और गाड़ियों कै लिए अलग से पुल बनाया जाए। उससे बड़ा भारी विवाद खड़ा होगा। चूंकि रेल लाइन गुजरती है, इसलिए रेल ब्रिज तो बनना ही है, लेकिन यदि उसी में रोड ब्रिज भी बन जाए, तो इस प्रकार रोड कम रेल ब्रिज बनने से वहां जनता को बहुत सहूलियत होगी, क्योंकि बहुत समय से वहां की जनता की यह मांग है। ...( व्यवधान) बिहार के पिछड़ेपन का मूल कारण यही है। वहां रीजनलिज्म नहीं है। लोग पूछते हैं कि देश हमारा है। इसलिए अपनी तरफ कम काम हुआ है। अब तो हमारे लिए बोलने का ही सहारा है। हो सकता है कि हमारे बोलने से माननीय रेल मंत्री महोदया पिघल जाएं और उसे भी देखें, तो उनकी बहुत मेहरबानी होगी कि कैसे वह रेल कम रोड ब्रिज बन सकता है। ...( व्यवधान)

          महोदय, इसके बाद मैं नैशनल रीहैबिलिटेशन एंड रीसैटलमेंट पॉलिसी, 2007 की तरफ आऊंगा। इस पॉलिसी का वर्ल्ड वाइड एप्रीसिएशन हुआ है। रेल विभाग ने कहा है कि हम उसे स्वीकार करते हैं। इस बारे में हमने लिखा-पढ़ी में सवाल किया था। रेल विभाग ने जवाब दिया है कि हम रीहैबिलिटेशन एंड रीसैटलमेंट पॉलिसी, 2007 को मानते हैं। उसमें यह प्रावधान है कि जिनकी जमीन रेलवे के लिए सरकारी एक्वीजीशन में ली जाएगी, उन्हें मुआवजे के अतिरिक्त नौकरी भी दी जाएगी, हालांकि उसमें यह प्रावधान है कि इफ अवेलेबल इन रेलवे। यदि ऐसा हो जाए, तो सब झंझट ही खत्म हो जाएगा। यदि रेलवे को जमीन की जरूरत होगी, तो किसान स्वयं आकर अपनी जमीन दे देगा कि आप जल्दी से जल्दी बनाइए।

          महोदय, इस बारे में, मैं एक पिटीशन पढ़ रहा था। जब इस प्रकार का कानून बना हुआ है, पॉलिसी बनी हुई है, भारत के संविधान की धारा 73 के अधीन उसे स्टेटय़ूटरी कर दिया है, गवर्नमेंट ऑफ इंडिया ने उसे गजट में नोटीफाई किया हुआ है और रेल विभाग उसे मानता है, तो उसे लागू क्यों नहीं किया जा रहा है और जिनकी जमीन रेलवे के कामों के लिए एक्वायर की जा रही है, उन्हें रेलवे की परियोजनाओं में नौकरी क्यों नहीं दी जा रही है? जब नौकरी का प्रावधान है, तब रेलवे उन्हें क्यों नौकरी नहीं दे रहा है। क्या वह यह चाहता है कि वे लोग पहले कोर्ट में जाएं और जब कोर्ट इन्हें नोटिस देकर मजबूर करे, क्या तब मानेंगे और उन्हें नौकरी देंगे? इसलिए, उसे लागू करना चाहिए और देश में जहां कहीं भी उस कानून के तहत रेलवे के लिए जमीन एक्वायर की जा रही है, उन लोगों को मुआवजे के अतिरिक्त नौकरी भी दी जानी चाहिए। इसके लिए लोग लड़ाई लड़ रहे हैं और संघ­ाऩ कर रहे हैं।

          महोदय, हाजीपुर से मुजफ्फरपुर सड़क पर हम सप्ताह में शनिवार और रविवार को जाते हैं। वहां प्रथम दिग्धी गुमटी है। कई माननीय सदस्य गंगा जी के उस पार जाते होंगे, जयनारायण प्रसाद निषाद साहब हैं, डॉ. संजय जायसवाल हैं और जो भी जाते हैं, महोदय, वहां घंटों रुकना पड़ता है। जब जाइये, तब गुमटी बन्द, गाड़ियों का तांता, जाने में विलम्ब होता है। लेकिन उसमें रेलवे ओवरब्रिज मंजूर है, सुनते हैं, लेकिन रेल विभाग से पूछते हैं तो ये कहते हैं कि एन.एच.ए.आई. करेगा और एन.एच.ए.आई. से पूछते हैं तो उनकी कोई सुगबुगाहट नहीं है। बड़े भारी फेर में हम लोग हैं। हाजीपुर से मुजफ्फरपुर के बीच में 11गुमटी हैं और दिग्धी गुमटी मंजूर है, लेकिन आवाजाही में बहुत तकलीफ होती है।

          इसी तरह से हाजीपुर से छपरा के बीच में 3 गुमटी हैं, गोविन्दगंज में, दिघवारा में, नयागांव में, 5-5 किलोमीटर पर तीन गुमटी हैं। आप हाजीपुर से छपरा जाइये तो एक घंटा खाली गुमटी बन्द मिलेगी और उसी से आवाजाही नहीं हो सकती। वे भी कहते हैं कि एन.एच.ए.आई. रेल ने बंटवारा किया कि यह एन.एच.ए.आई. बनायेगा तो यह हम बनाएंगे, इसलिए काहे नहीं अपने हिस्से में लिया, एन.एच.ए.आई. पर छोड़ दिया। एन.एच.ए.आई. कहता है कि जब सड़क बनेगी, तब हम ओवरब्रिज बनाएंगे। उसके चलते भारी यातायात में कठिनाई है, इसलिए हम ध्यान आकर्षित करना चाहते हैं कि उसका सुधार जल्दी से जल्दी हो जाये।

          इसी तरह से मुजफ्फरपुर से समस्तीपुर के बीच आमगोला गुमटी, मोतीझील गुमटी में ओवरब्रिज बना रहे हैं, वहां बहुत भारी तकलीफ है और कितने दिनों से वह बन रहा है, कब बनेगा, पता नहीं। वह मुजफ्फरपुर टाऊन में है, इसलिए उसकी भी भारी मांग है कि जल्दी से हो, क्या पेच है कि उसके चलते दिक्कत हो रही है? मोतीपुर और महवल के बीच में मोहम्मदपुर बलवी स्थान है, वहां पर नये हॉल्ट, नये रेलवे स्टेशन की मांग लोग करते हैं। वहां पर मोतीपुर से साहेबगंज, मोतीपुर से सरैया, मोतीपुर से मुजफ्फरपुर, मोतीपुर से मोतिहारी पिपरा, यह ईस्ट वैस्ट कोरीडोर और 4-5भारी सड़कों का जंक्शन है, वहां रेलवे स्टेशन की मांग है, वाजिब मांग है। उस जगह पर घनी आबादी है और लोग जाते हैं। दूरी के हिसाब से भी उसका औचित्य है। वहां पर नये रेलवे स्टेशन मौहम्मदपुर बलबी में मोतीपुर और महवल स्टेशन के बीच में एक नये रेलवे हॉल्ट की लोग मांग कर रहे हैं। उसी तरह से उसी रेल लाइन में पिपरा और नरियार के बीच में सायन गांव है, इधर से भी सड़क बन गई, इधर से भी सड़क बन गई, बाकी रेल लाइन को पूरा करने के लिए कोई उपाय नहीं है, इसलिए वहां बिना चौकीदार वाला समपार बनाने का रेल केवल एलाऊ कर दे तो हम लोग ही सड़क बनवा देंगे।

          उसी तरह से पिपरा और नरियार के बाच सायन गांव में आर-पार करने के लिए आपसे सड़क गुजारने की स्वीकृति मिलनी चाहिए। सहदेई बुजुर्ग स्टेशन, महनार रोड स्टेशन, ढोली स्टेशन, मोतीपुर स्टेशन और गया में तो इधर की सड़क अच्छी है, लेकिन जब स्टेशन के करीब जाने लगे तो सड़क चौपट थी। हमने कहा, क्या कारण है, कहा कि यह रेलवे की सड़क है। रेल के परिसर में सड़क है, उसको कौन बनाएगा?यातायात के लिए रेल रोड विभाग को कहिये, इसे बनाने दीजिए, नो ऑब्जैक्शन दीजिए, नहीं तो आप बनाइये। स्वयं रेल विभाग कहता है कि हम उस सड़क के मालिक हैं तो सड़क बनाइये। पैसेंजर लोग जाते हैं, उनको बहुत तकलीफ होती है, इन सभी स्टेशनों पर मैं स्वयं गया हूं। उधर लिखा-पढ़ी के बारे में आफिसर लोग उनको बताएंगे। मैं आंखों देखी कहता हूं, कागज पर लिखी नहीं। ‘तू कहता कागद की लेखी, मैं कहता आंखिन की देखी।’ बहुत परेशानी है, बहुत झंझट है, बहुत तकलीफ है। रेल की जो सड़क है, इन सब स्टेशनों पर अधीन सड़क आवाजाही के, जाने के लायक नहीं है, कौन देखता है, कौन विभाग है, कौन इन्तजाम करेगा, मैं नहीं जानता हूं।

          इसी तरह से एन.एच. 102मुजफ्फरपुर में आती है। मुजफ्फरपुर के पास भगवानपुर में गुमटी है। वहां एक्सीडेंट हुआ, वहां लोग मर गये, वहां ओवरब्रिज कब बनेगा? ओवरब्रिज की वहां मांग है। भगवानपुर में जो मुजफ्फरपुर पूरा परपूड़ा के बीच पड़ेगा और मुजफ्फरपुर टाउन में आने में उसकी जरूरत है। इसी तरह से वहां एक इंटरसिटी गाड़ी चलती है, जो कांटी में रूकती ही नहीं है। कांटी में थर्मल पावर प्लांट मशहूर स्थान है, लेकिन ट्रेन वहां नहीं रूकती है।  ट्रेन का भाड़ा 2 रूपए लगता है, जबकि 10रूपए गरीबों के अन्य मार्ग से वहां जाने का भाड़ा लगता है।  इंटरसिटी के ठहराव के लिए वहां के गरीबों ने मांग की है। इसके लिए हमने माननीय मंत्री जी को पत्र भी लिखा है।  इंटरसिटी का कांटी में ठहराव हो जाने से बड़ा भारी यश होगा और गरीबों की बड़ी सहायता होगी। दो रूपए ही उसका टिकट है, वरना दस-बारह रूपए अन्य मार्ग से जाने में गरीब लोगों का खर्च होता है।

          इसी तरह से भारत वैगन फैक्ट्री रेल ने ले ली। उसको चालू करके दुरूस्त किया जाए।  यह भी मुजफ्फरपुर में है। गोराउल में लिच्छवी गाड़ी रूकती है, लेकिन वह इतनी देरी से आती है कि लोगों को फायदा ही नहीं हो रहा है। लोग तेजी से हाजीपुर और मुजफ्फरपुर जाना चाहते हैं, इसलिए अन्य फास्ट गाड़ी के वहां ठहराव के लिए लोगों ने मांग की है। बिहार के लिए जो परियोजनाएं स्वीकृत हैं, कारखाना वाली, पहिया वाली और दरियापुर में, छपरा में, मडहौड़ा में और कई जगहों में काम की गति धीमी हो गयी है। इससे गलत संदेश जा रहा है कि काम आहिस्ता होने लगा है। काम क्यों आहिस्ता हो रहा है? इसको तेज होना चाहिए और इस सप्लीमेंट्री बजट को पास होना चाहिए।

          इन्हीं शब्दों के साथ मैं अपनी बात समाप्त करता हूं।

                                                                                               

MR. CHAIRMAN :  Shri Adhir Chowdhury, if you want to lay your speech on the Table, you can do it.

… (Interruptions)

श्री अधीर चौधरी (बहरामपुर): महोदय, समय की काफी कमी होने के कारण मैं सप्लीमेंट्री डिमांड्स फार ग्रांड्स का बिना बहस स्वागत करता हूं।  माननीय मंत्री जी जो प्रयास कर रही हैं, उसकी मैं सराहना करता हूं।  उनके नेतृत्व में रेलवे की तरक्की की उम्मीद करते हुए मैं अपना भाषण ले करता हूं।      

* I support the Supplementary Demands for Grants, Railways and in the same vein I like to propose some of the long due demands.

 

            As we know that Railway is regarded as the largest Public Sector Undertaking of our country consists of 14 lakhs of employees.  But the aspirations of the common people of our country have been growing up in commensurate with the growth of our economy.  I must appreciate the Railway Ministry for their precious contribution in our economy in the form of dividend.  It is significant to note that in the vortex of economic meltdown we are witnessing through out the world and in our country also the railway is the single organisation which has registered revenue generation much to the comfort of our economy.  Railway is regarded as an organisation which discharges the social commitment in addition to commercial ventures.  Over the years by dint of the constant endeavour the railway always has been coming out with their achieving footprint.  It is a great concern to me that in recent times the Railways has become the soft target of insurgent, terrorists and secessionist activities as a result of which scores of innocent people are falling prey to.  Naturally we need to have an elaborate security mechanism to protect the lives of the common people and the assets as well. Our railways have been chronically lacking the adequate expansion programme including modern technological upgradation.  As the population of our country has been increasing exponentially the traffic in Railway has also been showing an ever increasing trend.  So naturally the capacity that is  available right now is being over-stretched. 

   

*...* This part of the Speech was laid on the Table.

 

So an overhauling programme is an imperative need to sustain the growth of Indian Railways.  I would like to draw the attention of the Hon’ble Railway Minister to the demands that are depicted hereunder :-

            Over the years people of my district Murshidabad, West Bengal have been persistently demanding the double line between Katwa and Farrakka.  In view of the backwardness of the same district which is adjacent to neighbouring country Bangladesh the double lining in the proposed area are an immediate necessity because it will help to thrive the trade and transport and furthermore it will enhance the logistical support as and when the situation warrants.
            The headquarter of this district is named after Berhampore which consists the population of more than 2 lakhs.  It becomes a daily incidental of congestion of the entire city because the railway line has been piercing through the heart of the city.  On a number of occasion even the patients who are supposed to be admitted to the hospital are facing inconvenience to reach the hospital due to the traffic snarl and succumbing to death.  To retrieve the situation I think immediate construction of Railway Over Bridge is the need of the hour to facilitate the smooth traffic of that Particular city.  I have been insisting upon you from the day you have assumed the chair of Railway Ministry to consider the construction of ROB in Berhampore and in the city of Beldanga. I hope you will be magnanimous enough to take care upon the long cherished dream of the people of those areas.
            More often than not I have been approached by the poor hawkers who used to earn their livelihood in and around Railway Stations in my district. Now they are a distressing lot.  Because the Railway has taken a stringent step to evict those hawkers from those areas without being properly rehabilitated.  As a consequence of which they are confronting an uncertain future.  I know that Railway Ministry under your leadership has taken a lot of innovative initiative to rehabilitate those poor hawkers in order to ensure their alternative livelihood.  In this regard I would implore you to take stock of the situation before asking them to vacate the land.  Those hawkers want to be a part of the development programme and ready to extend their cooperation to Railways. But their pleas are not being heeded by the officials.
            As I have observed that in number of Railway stations, computer reservation has been initiated but I got a little surprise that those reservation facilities are only available for half a day.  As an example I refer to the Berhampur court station. Naturally the commuters, the travellers are being deprived of having the reservation for the second half of the day.  I think these anomalies should be corrected.
            The double lining between Krishnanagar and Lalgula has been initiated but sorry to say that the progress is very sloth the tardy.  The double lining of that particular section may contribute a lot to the agriculturist community of the district.  As you know that 80% of the people of Murshidabad are dependent on agriculture for their sustenance.  So I would request you to expedite the progress which also may provide a new access to the untapped tourism potentialities of the district, Murshidabad.*   MR. CHAIRMAN:  Please lay it on the Table of the House. If any other hon. Member wants to lay his speech on the Table of the House, please do it.
            Shri Prabodh Panda to speak now.
SHRI PRABODH PANDA (MIDNAPORE):  Mr. Chairman, Sir,  I thank you for giving me this opportunity.
            At the very outset, I must say that this is the Supplementary Demands for Grants and this is not the full Budget. So, we have a very limited scope of discussion. I have many points to make with regard to my Parliamentary constituency but I am not going into that aspect. Since I happen to be the Member of the Consultative Committee on Railways, I have raised all the matters. The hon. Minister presided over the meeting and she knows what I have said.
            I have said more things. In the last Budget Speech, the hon. Railway Minister declared some important projects. She proposed a few new projects but till date nothing is visible. What happened to the declaration with regard to the take over of the Basumat Printings, the Burn Standard Company and Braithwaite? What is the status of the proposal of a new factory at Majerhat, Kolkata for manufacturing and supplying high capacity freight bogies? What happened to the new factory at Dalmia Nagar? What happened to  lay new railway lines to Nandigram, Lalgarh and Belpahari? So, I want to know from the hon. Minister what steps have been taken, what is the status of these declared projects.
It is correct that some ongoing projects are already functioning. I congratulate the hon. Minister that she is helping and her Ministry is also helping in this regard so that the ongoing projects can be completed within a stipulated time. But other matters are there. Only two or three points I want to make which are related to my Parliamentary constituency. In Kharagpur, there are huge lands.
            I am talking about the authorised stalls built by the Railways and stalls permitted by the Railways that are functioning at Kharagpur Railway Station. They are not being provided electricity. They applied several times to the Railway Administration for electricity. If the Railways are not in a position to provide electricity to the authorised stalls, then they will apply to the West Bengal Electricity Board. In that case, the Railways should issue a ‘No Objection Certificate. But neither are they issuing ‘No Objection Certificate’ to them nor are they giving electricity to these authorised stalls in Kharagpur. Not only that; the Minister declared in her Budget Speech and also another time, which has appeared in newspapers, that she is thinking of having a re-look at the Catering Policy. The existing Catering Policy of the Railways is not in favour of the poor people. A large number of unemployed youth used to sell food items not only in ordinary stations, but also in all categories of stations, including ‘A’ category and ‘B’ category stations. Now they have been driven out. They were doing their business with small trolleys. So, I would request the Minister to address their problems so that these poor unemployed youth are not deprived their livelihood. … (Interruptions)
SHRI KALYAN BANERJEE (SREERAMPUR): Shri Basu Deb Acharia was the Chairman of the Standing Committee on Railways. What has he done? … (Interruptions)
MR. CHAIRMAN : Nothing will go on record. Please take your seat.
(Interruptions) … * SHRI PRABODH PANDA : Shri Basu Deb Acharia was the Chairman of the Standing Committee on Railways. The Standing Committee is authorized to make only recommendations. The Standing Committee does not have the authority to do anything. The hon. Member should have this minimum sense. … (Interruptions)
            Sir, my point is that this is a genuine problem. I would like to mention about another genuine problem which I raised several times in this august House and also before the Minister and that is, more than 50,000 people are staying in railway land at Kharagpur. They are not staying there right now. They may be unauthorized, but they have come there for construction work in the railway junction. Sometimes they are threatened by the Railway authorities to vacate that area. This is a genuine social problem. The hon. Minister declared several times that the Railways have not only have administrative responsibility but also some social responsibility. So the hon. Minister should look into this problem.
            Now I would like to raise another very important point which has been raised by many other hon. Members in this House. Now-a-days, different aspects of functioning of the Railways have already been to private parties. This is not correct. The Railways is the largest public sector organization of our country. We are proud of the Indian Railways. So, it should not be privatized. This is a very important policy matter. This should be taken very seriously by the hon. Minister. I am not objecting to the Supplementary Demands sought by the Government, but all these points should be addressed. If you do not address all these problems, then all the declarations are useless. They are made only for gaining political mileage, nothing more than that. This is my point.
            With these words, I conclude my speech.
 *श्री दत्ता मेघे (वर्धा)ः महोदय, सबसे पहले मैं माननीय रेल मंत्री बहन ममता बनर्जी जी को इस बात के लिए हार्दिक धन्यवाद देना चाहता हूं कि उन्होंने वर्धा रेलेवे स्टेशन को एक आदर्श रेलवे स्टेशन बनाने की घो­ाणा की है। आप जानते हैं कि रा­ट्रपिता महात्मा गांधी जी ने 1935 में वर्धा में सेवा ग्राम नामक आश्रम की स्थापना की थी। इस आश्रम के दर्शन करने के लिए देश-विदेश के अनेक यात्री यहां आते रहते हैं। वर्धा के आदर्श रेलवे स्टेशन बन जाने के बाद रेलवे की छवि देश-विदेश के यात्रियों पर बहुत अच्छी पड़ेगी।
          महोदय, इस बीच मैं अपने क्षेत्र की रेलवे संबंधी समस्याओं के संबंध में माननीया मंत्री जी को और रेलवे के राज्य मंत्रियों को अनेक पत्र लिख चुका हूं। मैं संक्षेप में उन पत्रों में उठाई गई मांगों का जिक्र करना चाहता हूं और चाहता हूं कि माननीया मंत्री जी रेल संबंधी इन समस्याओं की तरफ ध्यान देंगी और उनको हल करने की कृपा करेंगी।
          वर्धा वाया यवतमाल, नांदेड तक के लिए ब्राडगेज मार्ग की मांग अनेक सालों से की जाती रही है। महारा­ट्र के पिछड़े विदर्भ एवं मराठवाड़ा को जोड़ने वाला यह मार्ग होगा।
          आर्वी-पुलगांव नेरोगेज लाइन को यवतमाल-मुर्तिजापुर नेरोगेज लाइन से जोड़ दिया जाए और इसको ब्राडगेज में परिवर्तित कर दिया जाय तो देश की चारों दिशाओं में विदर्भ के यात्रियों को आने-जाने की सुविधा होगी।
          नरखेड-बडनेरा मार्ग की मंजूरी पहले मिल चुकी है। इसका कार्य जल्दी से जल्दी पूरा किया जाना चाहिए।
          वर्धा शहर के बीचों बीच रेलवे स्टेशन है। यहां पर एक फ्लाई ओवर भी है। ट्रैफिक बढ़ जाने के कारण यहां पर अक्सर जाम लग जाता है। इसलिए इसको चौड़ा किया जाना चाहिए।
          सिंदी रेलवे शहर एवं धामणगांव रेलवे शंहर के बीच एक फ्लाई ओवर की जरूरत है। यह शीघ्र से शीघ्र बनाया जाना चाहिए।
          वर्धा और सेवाग्राम से गुजरने वाली हर गाड़ी का यहां पर स्टोपेज होना जरूरी है। उसी प्रकार से हिंगणघाट, पुलगाव, चांदूर रेलवे और घामणगाव रेलवे स्टेशनों पर भी हर गाड़ी का स्टोपेज होना चाहिए।
          वर्धा से देश के उत्तर और पश्चिम की ओर जाने वाली दो गाड़ियां अवश्य होनी चाहिए।
          इसके अलावा कर्मचारियों की सेवा संबंधी समस्याओं के बारे में भी मैंने पत्र लिखे है। उनको भी सुलझाया जाना चाहिए।
श्री राकेश सचान : सभापति महोदय, मैं आपका आभारी हूं कि आपने मुझे रेलवे की अनुदान मांगों पर बोलने का अवसर दिया। मैं ज्यादा कुछ न कहते हुए अपने क्षेत्र से संबंधित बातों की ओर माननीय रेल मंत्री जी का ध्यान आकर्षित करना चाहता हूं।...( व्यवधान) मैं जनपद फतेहपुर से लोक सभा का सदस्य चुना गया हूं।...( व्यवधान)
… (Interruptions)
MR. CHAIRMAN : Please sit down.
… (Interruptions)
MR. CHAIRMAN: Please maintain decorum.
… (Interruptions)
MR. CHAIRMAN: Hon. Members, stop this cross-talk, please.
… (Interruptions)
MR. CHAIRMAN: Nothing should go on record.
(Interruptions) … * MR. CHAIRMAN: Please sit down.
… (Interruptions)
MR. CHAIRMAN: Mr. Banerjee, I will name you.
… (Interruptions)
MR. CHAIRMAN: Please maintain decorum in the House.
… (Interruptions)
MR. CHIARMAN: You sit down please.
… (Interruptions)
MR. CHAIRMAN: If each one behaves well, everything goes well.
… (Interruptions)
MR. CHAIRMAN: You please sit down.
… (Interruptions)
श्री राकेश सचान : सभापति महोदय, मैं आपका आभारी हूं कि आपने हमें रेल की अनूपूरक मांगों पर बोलने का अवसर दिया। पिछली बार जब रेल बजट रखा गया था तब भी हमने अपने क्षेत्र से संबंधित कुछ मांगें और सुझाव सदन में रखे थे। जनपद फतेहपुर, इलाहाबाद और कानपुर के बीच मेरा क्षेत्र है। वहां लगभग200 किलोमीटर की दूरी में दिल्ली-हावड़ा की मेल लाइन जाती है। मेरे जनपद में 32 लाख की आबादी है। जनपद फतेहपुर, कानपुर और इलाहाबाद के मध्य में होने के कारण वहा लगभग 15 से 20 हजार यात्री ऐसे हैं जो रोज इलाहाबाद और कानपुर जाते हैं। स्थिति यह है कि वहां पर कोई भी लोकल ट्रेन नहीं है। हमने पिछली बार भी इस बारे में मांग की थी। माननीय रेल राज्य मंत्री यहां बैठी हैं, मैं चाहूंगा कि कोई ईएमयू या मेमो ट्रेन, जो कानपुर से इलाहाबाद और इलाहाबाद से कानपुर के बीच चला दी जाये, तो उससे बहुत सारे दैनिक यात्रियों को लाभ होगा और आपके राजस्व में भी बढोत्तरी होगी।
          दूसरी बात यह है कि जब मैं लोक सभा आता हूं, तो कानपुर आकर वहां से ट्रेन पकड़ता हूं। दिल्ली से एक नार्थ ईस्ट ट्रेन जाती है और उसके बाद एक प्रयागराज एक्सप्रेस है। केवल इन दो ट्रेनों का ठहराव हमारे जनपद फतेहपुर में है। इसके अलावा कोई गाड़ी वहां नहीं ठहरती है। मैंने मंत्री जी को इस बारे में पत्र लिखकर अवगत कराया। मैंने उनसे मिलकर भी कहा कि दिल्ली और हावड़ा के बीच अनेक ट्रेनें चल रही हैं, कम से कम30ट्रेनें इस बीच में निकलती होंगी जैसे लिक्ष्वी, रीवा, पुरुषोतम एक्सप्रेस, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आदि ट्रेनों का वहां अगर पांच मिनट ठहराव कर दिया जाये, तो रेल सुविधा का पूरा लाभ वहां के नागरिकों को मिल सकता है। फतेहपुर में टिकट के लिए एक ही खिड़की है। मैंने मंत्री जी को लिखकर भी दिया था कि जब हम स्टेशन पर जाते हैं, तो वहां देखते हैं कि खिड़की पर बहुत लंबी लाइन लगी होती है। वहां हमनेडीआरएम, इलाहाबाद को भी पत्र लिख कर कहा कि यहां पर कम से कम दो और टिकट खिड़की बढ़ा दी जाये, जिससे तमाम ऐसे यात्री जो जल्दबाजी में बिना टिकट लिये ट्रेन में चढ़ जाते हैं, उससे राजस्व की भी क्षति होती है। इसलिए मेरा सुझाव है कि वहांदो टिकट खिड़की और चालू कराने का आप काम करें।
            सभापति महोदय, फतेहपुर रेलवे स्टेशन की जर्जर स्थिति है। वहां प्लेटफार्म नः 4 का लेवल इतना नीचे है कि यात्रियों को उतरने में बहुत परेशानी होती है। इस संबंध में मैंने कई बार पत्र लिखे हैं। मैंने पिछली बार भी इस समस्या के बारे में कहा था। मैं मांग करता हूं कि फतेहपुर रेलवे स्टेशन का सौंदर्यकरण किया जाए और सरकार इस अनुपूरक बजट में से कुछ बजट दे, ताकि इस रेलवे स्टेशन का विकास संभव हो सके।
          महोदय, हमारे क्षेत्र में दो स्टेशन खागा और बिंदकी आते हैं। दोनों स्टेशनों की भी बहुत जर्जर स्थिति है, वहां भी बजट लगाया जाए, जिससे कि उनका भी विकास हो सके। हमारे यहां एक समस्या और है। जब जाड़े का समय आता है, तब चोरी-चौरा, तूफान, लालकिला जनता एक्सप्रेस गाड़ियां रद्द कर दी जाती हैं, तीन-चार महीने के लिए बंद कर दी जाती हैं, जिससे यात्रियों को बहुत दिक्कत का सामना करना पड़ता है। मैं आपके माध्यम से मांग करूंगा कि इन गाड़ियों को बंद न करके चालू रखा जाए।
          हमारे क्षेत्र में खागा ओवर ब्रिज के बारे में मैंने सवाल उठाया था, चूंकि उत्तर हमें नहीं मिल पाया, क्योंकि समय समाप्त होने से पहले सवाल नहीं आ पाया, मंत्री जी द्वारा लिखित उत्तर में है कि खागा में मानक के अनुसार रेलवे ब्रिज बनाया जाए। थरियाओ में रेलवे ब्रिज बनाया जाए। दोनों जगह रेलवे ब्रिज स्वीकार है, लेकिन इन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार अगर हमें प्रस्ताव भेजेगी, तो वे रेलवे ब्रिज बनाए जाएंगे। खागा की स्थिति यह है कि खागा में कई मौतें हो चुकी हैं। मेन लाइन होने की वजह से वहां से रेल गाड़ियां इतनी निकलती हैं कि घंटों ट्रेफिक जाम रहता है। तहसील हेडक्वार्टर में बहुत जरूरी है कि ओवर ब्रिज बने। थरियाओ में ओवर ब्रिज बनाया जाए। सरकार कह रही है कि यह मानक में है, लेकिन प्रदेश सरकार जब हमें प्रस्ताव भेजेगी, तभी इसे शुरू किया जाएगा। मैं कहना चाहता हूं कि प्रदेश सरकार बहुत पैसा पार्कों, पत्थरों पर खर्च करने का काम कर रही है, जिसका विकास से कोई मतलब नहीं है। मंत्री जी रेलवे के बजट से पूरी तरह से उसका निर्माण कार्य शुरू कराएं। मैं मांग करता हूं कि दोनों ओवर ब्रिज बनाने शुरू कराए जाएं। मंत्री जी इस समस्या को गंभीरता से लीजिए और समस्या का समाधान कीजिए। मैंने आपको जो भी समस्याएं बताई हैं, मुझे उम्मीद है कि आप अनुपूरक बजट द्वारा फतेहपुर जनपद में अवश्य उन समस्याओं के समाधान हेतु राशि मुहैया कराएंगी।
 
*श्री रमाशंकर राजभर (सलेमपुर):  सभापति महोदय, इसमें संदेह नहीं कि रेल भारत की शान है, इसको जितना प्रभावशाली बनाया जा सके, यह देश के लिए गौरव की बात होगी। हर वर्ष बजट पर चर्चा व स्वीकृति करते हैं, परंतु जितना प्रभावशाली बनाया जा सके नहीं बन पाई। प्रबंधन पर मैं कुछ कहना चाहता हूं। जब ममता जी आईं तो लगा कि 100 दिन में कुछ सुधार होगा, परंतु लगता है प्रबंधन अधिकारी इन्हें बदनाम या गुमराह कर रहे हैं। अब तक जनरल बोगियों की भीड़ को कोई सुविधा नहीं दी जा सकी। स्टेशनों पर लाइन लगाकर अपर्याप्त जनरल बोगियों में ठूस दिए जाते हैं। प्रतीक्षा सूची का इतना टिकट बनाया जाता है कि आरक्षित बोगी भी जनरल हो जाती। अब तक स्टेशनों पर गाड़ी संख्या और नाम का उद्घोष होता था अब केवल नम्बर का उद्घोष हो रहा है। क्या गांव का आदमी गाड़ी नम्बर जानता है? वह तो उसका नाम जानता है। यह तय हो चुका है भारत के नियंत्रक महालेखा परीक्षक ने रिपोर्ट दी है कि प्रबंधन के नाते भाड़ा, लागत वसूली, टोल सेतु समय से चालू न करने, निर्माण में विलम्ब आदि से जो हानि हो रही है वह विश्वास से परे है क्योंकि जिन कारणों से हानि दिखाई जा रही है वह तुंत सुधारी जाये अन्यथा उस दशा में जिम्मेदार पर कार्यवाही हो। सुरक्षा के मामले में यात्री ही नहीं, ट्रेन भी सुरक्षित नहीं है। डकैतियां, चोरी, जहर खुरानी रोज सुनाई पड़ते हैं। ट्रेन की काफी दुर्घटनाएं समपारों पर गेट व गेटमैन न होने से हुई। अभी देखें चौकाघाट में गरीब रथ रोलर से टकराई, बजट में पूर्वोत्तर रेलवे के 300 समपारों को बनाने का लक्ष्य रखा है। समपारो पर गेट - गेटमैन सभी की रेलवे में कितनी आवश्यकता है, क्या इसका कोई सर्वे इनके पास है? इसका तुंत सर्वे हो और इसके लिए आवश्यक है पूर्वोत्तर रेलवे के हमारे संसदीय क्षेत्र के छपरा- बलिया रेल मार्ग में क्रमशः छितौनी, गायघाट, त्रिकालपुर, भटनी - सिवान - वाराणसी रेल मार्ग में निगहुआ ढाला, अवराई, सतुहारी, सिसयन्ड कला, गोविंदपुर, विराजमाल, अनु आपार ढाला, चेरो-चकरा, खड़ेसर, नोनापार वनकटा इगुरी ढाला जहां प्रतिदिन सैंकड़ों वाहन का आवागमन होता है, वहां अवश्य गेट बनाए जाये। यह रेल के हित में है। जनपद-देवरिया का ओवर ब्रिज दस साल से बन रहा है, उसे अविलंब बनाया जाये। सलेमपुर ओवर ब्रिज तेजी से बनवाया जाये। इसी तरह से मामूली सुधार से बेहतर सुविधा दी जा सकती है। हमारे संसदीय क्षेत्र से गुजरने वाली गोरखधाम, दादर आदि लम्बी दूरी की गाड़ियों में पेंट्रीकार नहीं है। रेलवे बजट में आखिर क्या कारण है मीटरगेज का कार्य, विद्युत लाइन बनाने का कार्य, उपरिगामी पुल बनाने का कार्य, नई रेल लाइन व दोहरीकरण आदि का कार्य समय सीमा में क्यों नहीं कराया जाता। क्योंकि समय सीमा में कार्य न होने से बजट बढ़ जाता है। यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है।
 
हमारे संसदीय क्षेत्र की जनता की मांग है कि किंडीहरपुर स्टेशन पर इंटरसिटी रूके, प्लेटफार्म बने, रेवती स्टेशन पर सारनाथ एक्सप्रेस, सियालदाह एक्सप्रेस रूके, प्लेटफार्म का उच्चीकरण हो, भाटपार रेलवे स्टेशन पर गोदान व जनसेवा रूके। वनकटा स्टेशन पर रूकने वाली गाड़ियों में आरक्षण मिले। लिच्छवी एक्सप्रेस लार स्टेशन आते जाते रूके। पूर्वोत्तर रेलवे के साथ अन्याय क्यों हो रहा है। पनिहवां स्टेशन से हथुआ तक रेल लाइन का कार्य पूरा हुआ, पुल भी बन गये हैं। करोड़ों रूपया खर्च भी हुआ। करोड़ों आय रेलवे को प्रतिदिन कर सकने वाला यह रेल मार्ग इस समय बंद कर दिया गया है। यह रेलमार्ग नेपाल, यूपी व बिहार बार्डर को जोड़ने के साथ नारायनी नदी के तट पर बसे तराई के लोगों की एक आशा की किरण है। इसे जरूर यदि कोई व्यवधान है तो समाप्त कर शुरू कराया जाये।
     
*श्री वीरेन्द्र कश्यप (शिमला) : महोदय, मैं हिमाचल प्रदेश में रेलों की वर्तमान में जो स्थिति है उस पर रोशनी डालना चाहता हूँ ।
 
          महोदय, जैसा कि आपको विदित ही है, हिमाचल प्रदेश के ऊंची-ऊंची पर्वतीय श्रृंखलाओं में बसा होने एवं कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण इस प्रदेश में आर्थिक गतिविधियां बहुत कम हैं । हिमाचल प्रदेश का एक किन्नौर जिले का हिस्सा तिब्बत यानी चीन तथा चम्बा जिले का हिस्सा पाकिस्तान की सीमा से लगता है । इसलिए सामरिक दृष्टि से हिमाचल प्रदेश अत्यन्त महत्वपूर्ण है । वहां आवाजाही का एकमात्र सहारा रेल अथवा सड़कें हैं । सड़कें वहां की जीवन रेखाएं हैं । हिमाचल प्रदेश में आजादी के 60 वर्षों के बाद भी केवल 36 किलोमीटर ब्रॉडगेज रेल लाइन का निर्माण हुआ है । यह अत्यन्त शोचनीय स्थिति है । रेलों एवं एयरोड्रमों के अभाव में प्रदेश में जितनी तरक्की होनी चाहिए, वह नहीं हो पा रही है ।
 
          वहां अंग्रेजों के समय की चली आ रही कालका-शिमला रेल लाइन तथा जोगेन्द्र नगर-पठानकोट केवल मात्र दो छोटी रेल लाइनें हैं । शिमला-कालका रेल लाइन को वर्ष 2003 में 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में उसे हैरिटेज रेल लाइन का दर्जा दिया गया है । कालका से परवाणु बड़ी रेल लाइन, जो मात्र 2 किलोमीटर है, उसका कार्य भी अभी तक पूरा नहीं किया गया है ।
 
          महोदय, गत दिनों रेल मंत्री सुश्री ममता बैनर्जी ने भारत की रेलों का बजट पेश किया, लेकिन उसमें पहले की तरह ही पहाड़ी राज्यों की पूरी तरह से उपेक्षा की गई। खासतौर से हिमाचल प्रदेश, जो शिक्षा, स्थास्थ्य, इफ्रास्ट्रक्चर एवं महिला सशक्तीकरण आदि अनेक क्षेत्रों में देश की अग्रणी पंक्ति में खड़ा होता नजर आ रहा है, उसकी पूरी तरह से उपेक्षा की गई है । केन्द्र सरकार के इस उपेक्षापूर्ण रवैये से ऐसा लगता है कि वह पहाड़ी क्षेत्र के राज्यों के साथ अन्याय कर रही है ।
 
          महोदय, मंत्री महोदया ने बजट पेश करते समय हिमाचल प्रदेश के मनमोहक दृश्यों की तो बात कहीं, परन्तु उन नजारों का आनन्द भारत की रेल के माध्यम से देशी व अन्तर्राष्ट्रीय पर्यटक ले सकें, इस दिशा में कोई प्रयत्न नहीं किया है । देशी-विदेशी पर्यटक पहाड़ों के सौंदर्य का आनन्द लें और प्रदेश को भी उनके माध्यम से लाभ मिले, इस बारे में रेल मंत्रालय को सोचना चाहिए । हिमाचल प्रदेश में केन्द्र सरकार द्वारा वर्ष 2003 में दिए गए पैंकेज के बाद बद्दी-बरोटीवाला क्षेत्र एकमात्र इंडस्ट्रियल हब के रूप में विकसित हो रहा है, लेकिन रेल की सुविधा नहीं होने के कारण विकास की गति अत्यन्त धीमी है ।
 
            महोदय, मैं आपके ध्यान में लाना चाहता हूं कि आजादी के बाद से अब तक लगभग 60-61 वर्षों में हिमाचल प्रदेश में रेलों के विकास के नाम पर नगण्य काम हुआ है । हिमाचल प्रदेश की जनता आजादी के इतने वर्षों के बाद आज भी रेल के लिए तरस रही है । हिमाचल प्रदेश पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण आने-जाने का साधन मात्र सड़के हैं । यदि रेलों का विकास होता है, तो हिमाचल प्रदेश का आर्थिक एवं पर्यटन की दृष्टि से शीघ्र विकास होगा, जो प्रदेश के ही नहीं बल्कि देश-हित में भी है ।
 
          महोदय, नवम्बर, 2003 में कालका-शिमला रेल मार्ग के 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष में तत्कालीन रेल मंत्री श्री नीतीश कुमार ने शिमला एक भव्य समारोह में उक्त रेल लाइन को हैरिटेज का दर्जा दिया व समारोह में ऐलान किया था कि कालका-शिमला रेल लाइन पर बन्द रेलवे स्टेशन कोटी, जाबली व सोलन ब्रूरी पुनः खोल दिए जाएंगे, लेकिन मुझे खेद के साथ कहना पड़ रहा है कि अभी तक इस दिशा में कोई प्रगति नहीं हुई है ।
 
          महोदय, बंद स्टेशनों के बारे में जब उन्हें बताया गया कि इस मार्ग पर सनवारा जैसे कई स्टेशनों के लिए सड़क संपर्क मार्ग नहीं है, तो उन्होंने रेल विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि इस रेल मार्ग के ऐसे सभी स्टेशनों के लिए संपर्क मार्ग बनाए जाने पर रेल विभाग प्रदेश सरकार से विचार-विमर्श करेगा, लेकिन इस दिशा में भी अभी तक कोई प्रगति नहीं हुई ।
 
          इसी प्रकार तत्कालीन रेल मंत्री महोदय ने कहा था कालका व परवाणु ब्रॉडगेज रेल लाइन एक साल में बनकर तैयार हो जाएगी, लेकिन आज छः साल के बाद भी वह लाइन बनकर तैयार नहीं हुई है । मंत्री जी ने ऐलान किया था कि किन्नौर, लाहौल-स्पीति, कुल्लू, चम्बा, सिरमौर व कांगड़ा जिलों में रेल टिकट काउंटर खुलेंगे, लेकिन मात्र एक स्थान के अतिरिक्त अन्य स्थानों पर इस दिशा में प्रगति शून्य के बराबर है ।
 
          माननीय मंत्री जी ने कहा था कि रेल मंत्रालय रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉर्पोरेशन व हिमाचल सरकार के साथ मिलकर कालका-शिमला रेल मार्ग के लिए टूरिस्ट पैकेज तैयार करेगा, मुझे नहीं लगता कि इस प्रकार का कोई आकर्षक पैकेज तैयार किया गया है, जिससे इस मार्ग पर टूरिस्टों की आवाजाही बढ़े ।
 
          महोदय, उस समय कहा गया था कि बाबा भलखू के सम्मान में शिमला में एक संग्रहालय बनाया जाएगा । मैं बताना चाहता हूं कि कालका-शिमला रेल लाइन को आगे बढ़ाने में जब ब्रिटिश सर्वेयर असफल रहे, तब उन्होंने बाबा भलखू की सेवाएं लीं । हालांकि बाबा भलखू अनपढ़ थे, लेकिन उन्हें ऐसी दिव्य शक्तियां प्राप्त थीं, जिनके कारण उन्होंने अंग्रेज सर्वेयर और इंजीजियरों को शिमला तक रेलवे लाइन बिछाने का मार्ग प्रशस्त किया । उस समय इस रेलवे लाइन के निर्माण में कार्यरत अंग्रेज प्रशासन ने बाबा भलखू की भूरि-भूरि प्रशंसा की और इस बात को स्वीकार किया कि उनकी मदद के बिना उन्हें कालका से शिमला तक की रेल लाइन का निर्माण सम्भव नहीं था। उनकी अपरिहार्य सेवाओं को दृष्टिगत रखते हुए ही उनकी यादगार में एक संग्रहालय शिमला में स्थापित किया जाना था, किन्तु मुझे खेद के साथ कहना पड़ रहा है कि इस दिशा में अभी तक कोई प्रगति देखने को नहीं मिली ।
 
            महोदय, एक अनुमान के अनुसार शिमला में लगभग 50 लाख देशी व डेढ़ लाख विदेशी पर्यटक प्रति वर्ष आते हैं । यदि रेल मंत्रालय, प्रदेश सरकार के परिवहन एवं पर्यटन विभागों के साथ मिलकर पर्यटकों के लिए कुछ आकर्षक टूरिस्ट पैकेज तैयार करे, तो इससे जहां रेलवे की आमदनी बढ़ेगी वहीं प्रदेश में पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।
 
          महोदय, मई, 2006 में तत्कालीन रेल मंत्री माननीय लालू प्रसाद जी ने भी हिमाचल प्रदेश का तीन दिवसीय प्रवास किया । उन्होंने भी शिमला एवं सोलन में समारोह एवं विशेष बातचीत में कई वायदे एवं घोषणाएं कीं, लेकिन मुझे खेद के साथ बताना पड़ रहा है कि हिमाचल प्रदेश के साथ रेलों के विस्तार एवं सुधार के जितने भी वायदे तत्कालीन रेल मंत्रियों ने किए वे सभी अभी तक अपूर्ण आधे-अधूरे हैं ।
 
          महोदय, कालका-शिमला मार्ग पर बन्द किए गए जाबली रेलवे स्टेशन के नहीं खुलने से दुखी होकर सैकड़ों स्थानीय नागरिकों ने रेल रोको आंदोलन शुरू किया और तब जाबली रेलवे स्टेशन पर रेल रोकी, तो लगभग एक दर्जन ग्रामीणों के ऊपर रेल रोकने के आरोप में रेल प्रशासन ने मुकदमे दर्ज कर दिए गए । माननीय लालू प्रसाद जी ने अपने हिमाचल प्रवास के समय वायदा किया था ऐलान किया था कि इस प्रकार के सभी मुकदमे वापस लिए जाएंगे, लेकिन अभी तक मुकदमें वापस नहीं लिए गए हैं ।
         
          महोदय, मेरे लोक सभा क्षेत्र शिमला (सुरक्षित) के जिला सोलन एवं सिरमौर में बद्दी, कालाअम्ब में अनेक छोटी-बड़ी फैक्ट्रियां स्थापित हो चुकी हें । नालागढ़ से लेकर पांवटा साहब तक इंडस्ट्रियल कॉरीडोर बन चुका है । इसमें लाखों मजदूर काम करते हैं । अरबों रूपए की इंडस्ट्रीज लगी हुई हैं । उन्हें अपना कच्चा माल लाने एवं उत्पादित माल बाजार में भेजने में रेल लिंक के अभाव में काफी कठिनाईयों का सामना करना पड़ रहा है । इस कारण इस संपूर्ण क्षेत्र में सड़क पर बहुत प्रैशर है । सड़क द्वारा माल ढोए जाने में लागत , श्रम एवं समय अधिक लगता है एवं प्रदूषण बढ़ता है । पावंटा साहब देश के ही नहीं बल्कि संपूर्ण विश्व के सिखों का अत्यन्त प्राचीन एवं पवित्र धार्मिक स्थल है, जिसके दर्शनों हेतु लाखों श्रद्धालु प्रति वर्ष आते हैं । इसलिए मेरी प्रार्थना है कि पंजाब के घनौली से उत्तराखंड के देहरादून तक वाया हिमाचल प्रदेश के नालागढ़ -बद्दी-सूरजपुर(एच.एम.टी.) -कालाअम्ब एवं पावंटा साहब को लिंक करते हुए एक बड़ी रेलवे लाइन का निर्माण किया जाए ।
 
          महोदय, आप सीजंड, सीनियर एवं डायनैमिक लीडर हैं । आपसे हिमाचल प्रदेश के लोगों को बहुत आशाएं हैं । इस रेलवे लाइन से इस क्षेत्र में पर्यटन के विकास की जो अपार संभावनाएं हैं वे भी उभर कर आएंगी । स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर भी उपलब्ध होंगे । सबसे अच्छी बात यह है कि इस रेल लाइन के निर्माण से रेलवे को बहुत लाभ होगा । अतः मेरा आग्रह है कि इस दिशा में तत्काल सकारात्मक कदम उठाएं जाए ।
 
श्रीमती सुमित्रा महाजन (इन्दौर): महोदय, उधमपुर रेल लाइन के लिए इस अनुपूरक बजट में कुछ आवश्यकता बताई गई है। दीमापुर, कोहिमा के लिए भी आवश्यकता बताई गई है। यह ठीक है, इसमें कोई संदेह नहीं है। छोटी-मोटी मांगें सभी पूरी करनी हैं। ऐसा हो रहा है कि इस बजट स्पीच में हम स्पीचलेस हो रहे हैं। कम से कम मुझे तो आज यह महसूस हो रहा है। व्यक्ति स्पीचलेस तब होता है, जब बहुत भव्य, दिव्य काम देखता है। इसके उल्टे अगर कुछ नहीं होता है, जब बहुत ज्यादा निराशा की गर्त में व्यक्ति चला जाता है, तब भी वह स्पीचलेस हो जाता है। मैं दूसरे तरीके के कारण स्पीचलेस हूं। ममता जी से हमारी पूरी सहानुभूति है। मैं उनकी फाइटिंग की क्षमता जानती हूं। जिस कार्य के लिए वे पश्चिम बंगाल में फाइटिंग कर रही हैं, हम उनके साथ है। फाइटिंग प्रिट के साथ-साथ कहीं न कहीं प्रशासनिक ताकत भी दिखाना जरूरी होता है। वह प्रशासनिक ताकत लड़ाई लड़ने के बाद हम कुछ प्राप्त कर लेते हैं। प्राप्त कर लेना आसान हो जाता है, लेकिन प्राप्त करने के बाद उसे टिकाना और बढ़ाना कठिन होता है। वह स्थिति कहीं न कहीं ममता जी की हो रही है।
          एक बात और हो रही है कि जिस दिन इन्होंने बजट पेश किया, हमें तो बहुत अपेक्षा थी। मगर मेरी समझ में नहीं आता जब ममता जी पहली बार रेल मंत्री बनी थी तब मध्य प्रदेश की तरफ भी बहुत अच्छी तरह से ध्यान दिया था लेकिन अब ऐसा लगता है कि इनके मानस पटल पर मध्य प्रदेश तो कहीं है ही नहीं है और इंदौर का तो नामोनिशान नहीं है। मैं इसलिए यह कह रही हूं कि आज जब बात हुई थी और इन्होंने भी एक बात कही थी कि रेल लाइन बिछाने का काम जिस भी राज्य में कम हो रहा है, नहीं के बराबर है और विकास करना वहां आवश्यक है और ऐसे में अगर वहां पर आरओआर कम भी हो, तब भी वहां काम करना चाहिए। इसलिए हमें बहुत आशा बंध गई थी। लेकिन इस बजट में इंदौर-दाहौद रेल लाइन का माननीय प्रधान मंत्री जी ने उसका स्टोन रखा था। यह बहुत पुराना प्रोजेक्ट है और इसे दो टुकड़ों में किया गया। हमने कहा कि कोई बात नहीं है। प्रधान मंत्री जी आ गये हैं और कहीं न कहीं पूरे आदिवासी क्षेत्र से इस नयी रेल लाइन को जाना है। मुझे आश्चर्य होता है कि इस रेललाइन का काम शुरु ही नहीं हुआ और प्रधान मंत्री जी द्वारा इसका स्टोन रखने के बावजूद और 40करोड़ तो बजट में रखे हुए थे मगर आपको आश्चर्य होगा कि इस पर आज तक केवल 75000 रुपये खर्च हुए हैं। अभी मुझे कहा गया कि 18 कि.मी. टनल का नया प्रस्ताव 45करोड़ का दिया गया जिसकी कोई आवश्यकता नहीं है। मध्य प्रदेश में कोई बड़ी पहाड़ियां नहीं हैं। यह टनल बीच में क्यों आया, यह मेरी समझ में नहीं आता है। जो हमारा न्यू राजेन्द्रनगर एक रेलवे का स्टेशन है, जो इसका टर्मिनल बनना था क्योंकि इंदौर की एक तरह से संप्रभुता हो गई है, यह नया राजेन्द्रनगर बनना था, इसको ड्रॉप कर दिया। अधिकारी इतनी मनमानी कर रहे हैं। भूरिया जी वहां के मंत्री हैं, उनका भी मैंने स्टेटमेंट पढ़ा था, उनका कहना था कि ऐसा नहीं हो सकता लेकिन जब हमने कहा कि ऐसा हो रहा है, यानी उनको भी कुछ नहीं मालूम है। जो सांसद इंदौर के आसपास के यहां बैठे हुए हों तो मुझे बताएं अगर उनको कुछ मालूम हो। सांसदों से कोई सलाह नहीं ली जाती, सांसदों को कुछ नहीं बताया जाता है। अलाइनमेंट बदले जा रहे हैं, स्टेशंस जो तयशुदा हैं, वे तयशुदा स्टेशंस भी हटाये जा रहे हैं। यह क्या हो रहा है? इस प्रकार के कुछ इंस्ट्रक्शंस दिये गये हैं तो हमें बताएं लेकिन मैंने जो कहा कि एडमिनिस्ट्रेटिव पॉवर अगर नहीं दिखाई जाती तो अधिकारी भी दूसरे प्रकार से हो जाते हैं कि वे न सांसद को कुछ समझते हैं क्योंकि मैं भी 1989 से सांसद हूं और आज तक मेरा अनुभव वास्तव में टीक रहा लेकिन मालूम नहीं एक साल से क्या हो गया है कि इस तरह के अधिकारी मिल रहे हैं। एक बात और मैं कहूंगी। यह तो इंदौर-दाहौद की बात हो गई। इंदौर-उज्जैन के विद्युतीकरण के बारे में भी मैं कुछ कहना चाहूंगी। आपको मालूम होगा कि मार्च2009को इसे पूरा करना था मगर हमारे इंदौर के पास एक लक्ष्मीबाईनगर स्टेशन है। इंदौर से यह 3-4कि.मी. होगा, 5कि.मी. भी नहीं होगा, वहां तक हो गया और गत साल भर से उसके आगे 5 कि.मी. तक गाड़ी आगे नहीं बढ़ रही है। पैसा रखा हुआ है। मेरी समझ में नहीं आ रहा है। काम करने के कौन से तरीके आ गये हैं? विद्युतीकरण सालोंसाल से प्रोजेक्ट बना हुआ है, पैसा मिल रहा है लेकिन काम नहीं हो रहा है। मैं आपको बताऊं कि मैंने इंदौर-अजमेर जो गाड़ी मांगी थी, इसलिए नहीं मांगी थी कि मुझे कोई नयी गाड़ियां मांगने का शौक है। आप लोगों को याद होगा कि खड़वा-अजमेर रेल लाइन चलती थी और यह छोटी लाइन मीटर गेज पर चलती थी। बिल्कुल फुल पॉवर में चलती थी। पूरी की पूरी 4-4, 5-5 गाड़ियां भरकर जाती थीं। लेकिन रतलाम के आगे अजमेर तक ब्रॉडगेज हो गया और खड़वा से रतलाम जो कोला से आते हैं, इसके बीच में इंदौर है, यह पूरा जो सैक्शन है, यह आज भी मीटर गेज है। मैंने जो निवेदन किया था कि खंडवा-रतलाम मीटर गेज का भी गेज परिवर्तन स्वीकृत है मगर मैंने जैसा कहा कि बाकी सब प्रोजेक्ट की जो अवस्था है, वह काम आज भी शुरु नहीं हो रहा है और न शुरु होने के लक्षण हैं।
          मैंने रिक्वेस्ट की थी कि इंदौर-अजमेर तक गाड़ी दे दो, बड़ी लाइन पर गाड़ी दे दो, वहां मार्ग है। जब मैं कोई प्रस्ताव देती हूं तो पूरा अभ्यास करके एक-एक चीज लिखकर देती हूं कि यह किस तरह से होगा। यहां तक कि मैं टाइम टेबल भी लिखकर देती हूं कि यह गाड़ी इस तरह से जा सकती है। लेकिन वह गाड़ी नहीं मिली। हमने कहा था इंदौर -पुणे कम से कम रोज चलाइए। इसमें पूरे पैसेजर्स हैं लेकिन वह भी नहीं चलाई। यहां टोरंटो गाड़ी की बात हो रही है। मैं उसकी भी बात नहीं करूंगी क्योंकि जो डिक्लेयर की थी अभी तक वह ही नहीं चली है।
          इंदौर एक इंडस्ट्रियल सिटी है, इंदौर-मुम्बई गाड़ी भरकर जाती है, रोज 300की वेटिंग है, अगर हौली डे एक्सप्रेस चलाओ तो भी भरकर जाती है। मैंने कहा था एक ओवर नाइट गाड़ी जा सकती है और मैंने इसका पूरा खाका बनाकर दिया। लेकिन वह भी नहीं चली। आखिर में मैं इतना ही कहूंगी कि इनसे अपेक्षा क्या करूं?इन्होंने बजट में जबलपुर, भोपाल ट्रेन का इंदौर तक बढ़ाने की बात कही थी। गत नौ महीने में जबलपुर, भोपाल ट्रेन का विस्तार हुआ ही नहीं है जबकि इसके लिए कोई अलग रैक की आवश्यकता भी नहीं है और आपकी घोषणा है। मुझे कुछ समझ में नही आता है। अब मैं इंदौर मनमाड़ लाइन मांगने से ही रही। इन्होंने कहा था इसलिए बोल रही हूं। इसकी उपयोगिता 50परसेंट से ऊपर है और महाराष्ट्र सरकार तैयार है। हमने कहा था मध्य प्रदेश गरीब प्रदेश है, पैसे मत मांगो। ममता जी ने कहा - ठीक है, हम आरओआर नहीं देखेंगे, उपयोगिता देखेंगे। लेकिन कुछ नहीं हुआ। मेरी समझ में नहीं आता है कि हमारी तरफ से कौन सी भारी गलती हो गई कि ममता जी हमसे नाराज बैठी हैं। उनका ध्यान या तो मंत्रालय की तरफ नहीं है या वह करना नहीं चाहती हैं। अगर आप करना नहीं चाहती हैं तो यह पूरे देश पर भारी पड़ सकता है क्योंकि देश का विकास रेलवे पर आधारित है। आप इस बात पर थोड़ा ध्यान दें, यही निवेदन है।
 
श्रीमती संतोष चौधरी (होशियारपुर): सभापति जी, आपने मुझे सप्लीमेंटरी ग्रांट्स फार डिमांड्स के संबंध में बोलने की अनुमति दी है, इसके लिए मैं आपका बहुत धन्यवाद करती हूं। मैं आपके माध्यम से मंत्री जी को अपने चुनाव क्षेत्र होशियारपुर के बारे में कुछ बातें संक्षिप्त में कहना चाहती हूं, जहां से मैं चुनकर आई हूं। मंत्री जी ने रेलवे बजट भाषण में कुछ ऐसे बिंदु रखे थे जिससे हिन्दुस्तान के लोगों में खुशी जाहिर हुई थी। इससे होशियारपुर के लोगों में भी इस तरह के स्वप्न देखने की लालसा पैदा हो गई। होशियारपुर जिला जो पंजाब में है और हिमाचल प्रदेश का मुख्य द्वार है। यहां देश विदेश से पर्यटक जाते हैं परंतु यहां रेल कनैक्टिविटी बिल्कुल नहीं है। मैं सबसे बड़ी बात यह कहना चाहती हूं कि होशियारपुर स्वयं को गौरवशाली मानता है क्योंकि माननीय प्रधानमंत्री श्री मनमोहन सिंह जी ने होशियारपुर में शिष्य के तौर पर शिक्षा ली और शिक्षक के तौर पर बच्चों को पढ़ाया भी था। आज वे हिन्दुस्तान के प्रधानमंत्री हैं। लेकिन रेलवे की सुविधा से यहां के नागरिक आज भी वंचित हैं क्योंकि यहां रेल लाइन नहीं है। मैं पहले भी यह मुद्दा उठा चुकी हूं और आज भी उठाना चाहती हूं कि रेल मंत्री जी ने अपने भाषण में इकनॉमिक वाएबिलिटी न देखते हुए सोशल वाएबिलिटी की बात कही थी। आपने स्वयं यह बात बजट भाषण में कही थी कि बुनियादी ढांचे के विकास और समस्याओं से जो जगह वंचित है, उस पर खास ध्यान दिया जाएगा। इसी के संदर्भ में होशियारपुर जिला, जहां 9विधानसभा क्षेत्रों में 6 विधान सभा क्षेत्र आते हैं, आज भी वंचित है। 30-35किलोमीटर का सर्वे ऑलरेडी हो चुका है, मेरी मांग है कि टांडे से होशियारपुर को जोड़ा जाए क्योंकि दिल्ली से जो रेल जम्मू के लिए जाती है, कभी दो और कभी चार डिब्बे होशियारपुर में छोड़ देती है और अगले दिन यात्री बैठकर जलंधर आते हैं, लेकिन उनके पास कोई भी इधर-उधर जाने का साधन नहीं है।
 
          दूसरी बात यह है कि होशियारपुर का जो रेलवे स्टेशन है, उसके लिए मैंने मांग की थी कि उसे आदर्श रेलवे स्टेशन बनाया जाए। आज भी उस स्टेशन की हालत बहुत जर्जर है। ब्रिटिशर्स के समय में 1906में 16 डिब्बों की गाड़ी पेशावर तक जाती थी। लेकिन वह आज सिमटकर दो-चार डिब्बे तक रह गई है। मेरा निवेदन है कि तलवाड़ा, मुकेरियां, टांडा, दसुहा और होशियारपुर क्षेत्रों पर विशेष रुप से ध्यान दिया जाए। क्योंकि यह एक ऐसा स्थान है, जहां हिमाचल प्रदेश साथ लगता है, पहाड़ी क्षेत्र है और होशियारपुर इंडस्ट्रियल सिटी है। चूंकि यह हिमाचल प्रदेश का द्वार है और हिमाचल को इंडस्ट्रियल पैकेज मिलने से वहां बहुत बड़े-बड़े कारखाने लगा दिये गये हैं। वहां के लोग भी इसका इंतजार कर रहे हैं। इसलिए वहां पर35किलोमीटर की रेल लाइन की सुविधा दी जाए।
          महोदय, फगवाड़ा जो मेरे विधान सभा क्षेत्र में आता है, दूर-दूर से दुनिया भर के लोग हरिद्वार जाने के लिए आते हैं, लेकिन दुर्भाग्य है कि जनशताब्दी जो अमृतसर से हरिद्वार के लिए जाती है, उसका दो मिनट का ठहराव भी बार-बार मांग करने के बावजूद अभी तक नहीं मिल सका है। मेरा निवेदन है कि इस गाड़ी को फगवाड़ा में रोका जाए और होशियारपुर से अमृतसर के लिए कोई ट्रेन चलाई जाए। क्योंकि जब तक यह रेल लाइन बनेगी, उस समय यह ठीक है, मैं मानती हूं इसमें समय जरूर लगेगा। जबकि रेल मंत्री, ममता जी ने एक नारा दिया है कि सबको इज्जत योजना के तहत सब नागरिक सफर कर सकते हैं। लेकिन जब रेल लाइन ही नहीं है, जब होशियारपुर से अमृतसर ट्रेन ही नहीं जाती है। मेरे चुनाव क्षेत्र के लोगों ने गोल्डन टैम्पल के आज तक दर्शन नहीं किये हैं, जबकि बाहर से लोग आ-आकर उसके दर्शन कर रहे हैं, जो एक बहुत दुखदायी बात है। मैं आपके माध्यम से मंत्री जी को कहना चाहती हूं कि आज पूरे पंजाब को गर्व है कि हिन्दुस्तान के प्रधान मंत्री, डा.मनमोहन सिंह जी पंजाब से सम्बन्ध रखते  हैं। वह उसी क्षेत्र से हैं। उनका यह कहना है कि शिक्षा की बदौलत मैं आज यहां बैठा हूं। इसलिए मेरा निवेदन है कि वहां पर नई रेल लाइन दी जाए और जितनी भी समस्याएं हैं, वे दूर की जाएं।
 
          माननीय केन्द्रीय मंत्री, श्रीमती अम्बिका जी यहां बैठी हैं। मैं समझती हूं कि यह भी अनुमोदन करेंगी, क्योंकि होशियारपुर इनका भी ससुराल है और वहां पर अभी तक रेल लाइन नहीं है। मैं इनसे भी आशा करती हूं और रेलवे की अनुपूरक मांगों का समर्थन करते हुए अपनी बात समाप्त करती हूं।
 
*SHRI P. LINGAM (TENKASI): Mr. Chairman, Sir, I thank you for giving me an opportunity to put forth my views on the Supplementary Demands for Grants (Railways) for the year 2009-10.
            At the outset, I would like to impress upon the Railways that serving the public must be the ultimate motto which needs to be given utmost priority. Even today, we find certain areas in our country to which the benefits and services of the Railways have not been extended. With a long term perspective, new routes must be identified and railway lines must be laid.
            In my constituency, a new railway line between Madurai and Shencottah via Vathirayiruppu, Sethur, Sivagiri, Vasudevanallur, Puliangudi must be contemplated and laid to operate rail services.
            There is a long pending demand from the public to go in for a Road Over Bridge to replace Level Crossing No. 449 in PACR Road in Rajaplayam. I urge upon the Railways to take up this project without taking umbrage under rules and survey works that may further delay unduly the efforts to meet the needs of the public.
            The earlier announcement made by the hon. Railway Minister to operate a passenger train between Erode and Shencottah remains still on paper. Instead, an Express Train No. 6609 between Erode and Shencottah was sought to be operated as a Weekly Train and that too has been stopped. I urge upon the Railway Ministry to operate it as a Daily Train by re-introducing the same.
            The gauge conversion between Kollam and Punalur has to be speeded up as the work is pending for long which has virtually segregated several towns and villages on that route from the mainstream.
            All the Railway Stations must have increased amenities and added infrastructure facilities. Toilets, platforms and roof structures must be improved.
            As far as possible, the Divisional Railway Managers must be officers knowing the local language without which there will be disconnect between the service and the public. Hence, I urge upon the Railway Minister to look into this aspect of appointing people knowing the local language as DRMs in those respective areas.
            The schemes and projects pending for long must be speeded up by apportioning adequate funds. Railways must see that the tendency to privatize its services is put an end to. Impressing upon the need to improve the standard and quality of the food served in the trains, let me conclude.
*श्री गणेशराव नागोराव दूधगांवकर (परभणी): महोदय, रेल मंत्रालय की पूरक मांगों के संबंध अपने विचार व्यक्त करने का अवसर देने के लिए के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद । महोदय, मैं अपने संसदीय क्षेत्र परभनी एवं मराठवाड़ा विभाग और नांदेड़ रेलवे डिवीजन के विकास के बारे में कुछ महत्वपूर्ण समस्याओं की तरफ माननीया रेल मंत्री महोदया का ध्यान आकृष्ट करना चाहता हूं-
 
          मेरे संसदीय क्षेत्र में मनमाड से नांदेड़, काच्छीगुड़ा रेलें चलती हैं । इस विभाग में दो बड़े जंक्शन स्टेशन हैं । मनमाड के साथ पूर्णा एक बड़ा जंक्शन स्टेशन है जहां से उत्तर रेलवे (अजमेर-दिल्ली) पूर्व में (आदिलाबाद) और दक्षिण में (हैदराबाद) पश्चिम में (बाम्बे, परली वैद्यनाथ, पण्ढरपुर) होकर गोवा जाती है । इस तरह इस स्टेशन से सुविधापूर्ण आदर्श स्टेशनों में और साउथ सेन्ट्रल रेलवे नांदेड़ विभाग में पूर्णा रेलवे स्टेशन में 300 एकड़ रेल विभाग की जमीन है । उसी में 8 हजार कर्मचारियों के रहने का इन्तजाम है । सेन्ट्रल बोर्ड ऑफ स्कूल 12वीं तक जूनियर कालेज है एवं शहर की आबादी 50 हजार तक है । इस स्टेशन पर लोकोमोटिव रेल का चहल पहल मालवाहक मध्य प्रदेश से कोयला वाहक, थर्मल पावर स्टेशन परली वैद्यनाथ से यहां भेजते हैं । उसके साथ ही नासिक तक मालगाड़ी कोयले की भेजते हैं । रेल के वाणिज्य विभाग को अच्छे ढंग से आमदनी मिलती है ।
 
          आज के हालात में पूर्णा रेलवे स्टेशन के अस्पताल और बड़ा स्टाफ नांदेड़ में बदली हुआ है नांदेड़ और पूर्णा का अंतर सिर्फ 25 किलोमीटर है । परभनी नांदेड़ की दूरी पूर्णा से12 किलोमीटर है । इसीलिए नांदेड़ विभाग से जो पूर्णा में लोकोमोटिव था वो डीजल शेड बनाना बहुत जरूरी है । क्योंकि वहां पर सभी प्रकार का इफ्रास्ट्रक्चर बना हुआ है जो बेकार पड़ा है । इस स्टेशन को काम में लाया जाना अत्यन्त आवश्यक है ।
 
          परभणी रेलवे स्टेशन जिला स्तर का है । यहां से पश्चिम रेलवे की तरफ एक क्रासिंग है इसलिए इस जिले के नाते इसी स्टेशन को आदर्श स्टेशन में शामिल किया जाना चाहिए क्योंकि मेरे संसदीय क्षेत्र से एक यह ही स्टेशन हो सकता है । इसे आप कृपया मंजूरी दें ।
 
          मनमाड से मुदखेड़ तक रेलवे लाईन का दोहरीकरण किया जाना अत्यन्त आवश्यक है क्योंकि यातायात काफी बढ़ चुका है और इस मनमाड से काचीगुडा तक विद्युतीकरण करना अति आवश्यक है । जिससे रेल विभाग की आय बढ़ सकती है । इसी नाते से मेरे संसदीय क्षेत्र में रेलवे विभाग की अच्छी सेवा बनाने के लिए इसमें एक नेशनल हाईवे 222 जाता है, उस पर मानवत रोड तहसील है इसी पर ओवर ब्रिज बनाना आवश्यक है । उसके साथ-साथ इस जिले में परतूर रेलवे स्टेशन, सेलू रेलवे स्टेशन और पूर्णा रेलवे स्टेशन पर ओवर ब्रिज बनाना आवश्यक है । इसे भी मंजूर करना जनहित में है ।
 
          इसी प्रकार मराठवाडा विभाग में गाड़ियों का आवागमन आवश्यक है । उन गाड़ियों को शुरू करना इस क्षेत्र के विभाग के लोगों की मांग है-
 
मराठवाडा विभाग के विकास के लिए नगर बीड परली मार्ग को रेल बजट में मंजूरी देना आवश्यक है।
          जालना बुलढाणा नया मार्ग मंजूर करे ।
          नांदेड परभणी औरंगाबाद मनमाड मुंबई एक्सप्रेस शुरू करके उसी गाड़ी को माननीय डॉ0 शंकरराव चव्हाण एक्सप्रेस नाम देना हमारी मांग हैजो कि देश के गृह मंत्री, रक्षा मंत्री, प्लैनिंग मंत्री, शिक्षा मंत्री जैसे उच्च पदों पर रहे ।
          अकोला पूर्णा परली लातूर कुर्डुवाडी पूणे एक्सप्रेस शुरू करना है ।
          अकोला पूर्णा लातूर पंढरपुर इस गाड़ी को विट्ठल एक्सप्रेस नाम देना आवश्यक है ।
          नांदेड विभाग को सेंट्रल रेलवे में शामिल किया जाए । मराठवाडा विभाग के लिए रेल विभाग का आमदनी बढ़ने के लिए ट्रेन की संख्या और रेलवे स्टेशन की सुविधा अच्छे ढंग से करना आवश्यक है । इन सब मांगों के लिए मैं मंत्री जी से विनम्र विनती करता हूं । इसके लिए मैं माननीया मंत्री महोदया का आभार व्यक्त करता हूँ ।
 
*SHRI SHER SINGH GHUBAYA (FEROZEPUR) :  Thank you, Chairman Sir, for giving me the opportunity to speak on Supplementary Demand for Grants (Railways).  Sir, I will be brief and to the point. Speaking on the Railway Budget presented by the Hon. Minister, I had made certain demands pertaining to Punjab and my constituency.  I had pointed out that step-motherly treatment had been meted to Punjab.  At that time, Hon. Minister had assured that she would look after the interest of Punjab.  Various genuine demands of the people of Punjab had been ignored. These demands pertained to construction of railway overbridges, laying of new railway lines and developing certain railway stations into model railway stations.  However, six months have passed by.  Much water has flown down the Sutlej but the demands of Punjab remain unfulfilled.
            Hon. Chairman Sir, Punjab is called the granary of India.  It is known as the food-basket of India.  However, injustice has been meted to Punjab. Only one Shatabdi train caters to the needs of the people of Punjab – the Shatabdi train that plies between Amritsar and Delhi.    People of other districts of Punjab are bereft of the services of Shatabdi train. Hon. Members of Parliament from Punjab have to avail the services of other trains where facilities are nil, whenever they want to visit Delhi.  Hon. MPs from Punjab have to attend Parliament sessions and other parliamentary meetings.  Hence, I appeal to the Hon. Minister to start more Shatabdi trains between Punjab and Delhi. Especially, a Ferozepur – Delhi Shatabdi train would go a long way in providing relief to the harried passengers of the area.  Ferozepur is a land of martyrs like Shaheed Bhagat Singh.  It has a hallowed history.  Lakhs of people come here to pay homage to the martyrs.  Hence,  the need for a Shatabdi train between Ferozepur and Delhi  has acquired urgency.  Also, sir, the Punjab Mail should be extended to Fazilka to cater to the needs of the people of the border areas.
 
            Sir, an inter-city train plies between Abohar and Ferozepur.  But, it is bereft of any amenities or facilities. An Abohar-Ganganagar  Shatabdi Express should be started as it is the long-standing demand of the people of the area.  The Government should accede to the genuine and just demand of the people of Punjab.
            Chairman, Sir, Punjab is a densely populated area.  Agriculture is the mainstay of the people of Punjab. However, there are a lot of unmanned railway-crossings throughout Punjab  where tragic accidents take place every now and then.  Innocent lives are lost in the process.  About four months ago, a school-van full of innocent children was passing through such an unmanned railway-crossing when a speeding-train rammed into it.  Eight children died on the spot.  Twenty-five other children were seriously injured. Some children were maimed forever. Hence, I appeal to the Hon. Railway Minister to convert all such unmanned railway-crossings into manned railway-crossings in the entire country at the earliest.
            Chairman Sir, work at various railway over-bridges in Punjab is hanging fire.  Since 2002, work at some of these ROBs has been suspended.  I demand that work at these railway over-bridges should be re-started and expedited.    
            Sir, during the tenure of the NDA Government, a decision had been taken to link various places of historical and religious significance for the Sikhs.  A ‘Parikrama’ train was to be started linking Shri Amritsar Sahib and Shri Anandpur Sahib etc.  Money had been sanctioned for this purpose.  But the project has not yet seen the light of the day.  Sir, these are our holy places.  So, I appeal to the Government to complete this project at the earliest.
            Sir, there are various other projects that are being completed at a snail’s pace. Work should be expedited on these projects so that the people of Punjab can avail the services provided by the Railways at the earliest.  These projects include the Ludhiana – Chandigarh rail – line, Rama-mor - Talwandi rail – line etc.  At Fazilka railway station, cleanliness is a casualty.  The railways should look into this aspect as well.  As mentioned earlier, Punjab Mail that plies between Delhi and Ferozepur should be extended to Fazilka to cater to the needs of the people of the area.
MR. CHAIRMAN : Kindly conclude.
 

16.00 hrs.   SHRI SHER SINGH GHUBAYA  :  Sir, kindly give me a minute.  There are 18 ROBs in Punjab where work is still going on.  There is a lot of traffic-jam in the area due to the on-going work.  The farmers find it difficult to take their produce to the market in time.  For instance, in Ludhiana, there is a Lakkad-bridge where work is going on at a tardy pace.  Punjab Government was asked to deposit Rs.4 crores by the Central Government.  We did that.  Then we were asked to deposit an additional sum of Rs. 10 crores, 50 lakh. We did so.  However, work at this bridge has not yet been completed.  The commuters are facing a lot of hardships due to the inordinate delay in completion of this bridge.  Hence, I appeal to the Hon. Minister to expedite the work at this bridge.  Similarly, there is another bridge named Moria bridge between Ludhiana and Jalandhar. I appeal to the Hon. Railway Minister to complete the work at this bridge too at the earliest.

*SHRI JAYARAM PANGI (KORAPUT): Sir, today in this discussion on Supplementary Demands for Grants for Expenditure of the Central Government on Railways for the year 2009-10, I would like to draw your kind attention that I have disappointed that in this demand our state Orissa has been ignored again.  The demands of people of Orissa as well as the demand of state Government of Orissa have not been included in this demand.  I would like to say that Hon’ble Union Minister for Railways is a member of Parliament from West Bengal which is neighbour state of Orissa so the people of Orissa having lots of expectation from the Hon’ble Minister.  So that I would like to give some proposals with a hope that these will be included in next Budget. The proposals are as follows :

            Jeypore is a big city and Municipality area of Koraput district as well as my Parliamentary constituency, but till date no direct train is running to this city from the state capital of Bhubaneswar due to lack of modernized station with required facilities so that the Hirakhand Express also cannot be extended for the same reason from Koraput station.  So that construction of a new modernize station with all required facilities is highly essential and necessary grants should be included in next Budget.
Extension of Naupada-Gunupur Rail Line upto Therubali via-Sana Sarthili P.H. (situated in between Bissam Cuttack and Muniguda Railway Station) by which 150 km will be reduced from the present route through Andhra Pradesh and survey also done for the same, so that allocation of grants is required in next budget.  Major Companies  like NALCO, Seva Paper mill, J.K. Paper Mill, Utkal Alumina, Aditya Alumina, Vedanta, IMFA also agreed to transport their goods in this new route after its completion.
            Malkangiri is a tribal district of Orissa with having lot of mineral resources but due to lack of Railway route private companies are reluctant to establish factories there.  So that grants for new Railway line connection from Viajaywada (Andhra Pradesh) to Jeypore (Orissa) via-Motu and Malkangiri may please be allocated in next Budget.
           Nawarangpur is another tribal district of Orissa and popular for its huge production of Maize and Paddy, but due to lack of Rail route facilities no one is interested to establish Maize processing unit or factory for which local farmers are not able to sale their Maize in right price.  So that the Railway route from Lanjigarh to Junagrah ( now under construction) may please be extended upto Jeypore via-Umarkote & Nawarangpur and grants may please be included in next budget for the same. Alongwith this I would like to give some proposals which are long pending demands of people of Orissa and earlier I also written to the Hon’ble Union Minister for Railways in this context.  The demands are as follows :
 
People of four tribal districts Koraput, Rayagada, Nawarangpur and Malakngiri are depending on Hirakahand Express for Rail journey for which its highly essential to add four new boggies (one 3A, two Sleeper Class & one General) to provide travel facilities to more passengers as per requirement.
 
As per your announcement during the presentation of Rail budget 2009, a new Passenger Reservation System (PRS) of Indian Railways may please be opened at Muniguda in the district of Rayagada under my Koraput Parliament of  Constituency in Orissa to provide better reservation facilities to the local people of Muniguda  block area.
 
The Hirakhand train running between Koraput-Bhubaneswar may please be renamed as Deomali Express (Deomali is the biggest mountain of Orissa situated in Koraput district).
 
N.B: Previously Hirakhand Express was running between Hirakud-Bhubaneswar that is why it was named as Hirakhand Express, but now it is plying between Koraput-Bhubaneswar.
 
The Kirandal (Chhatisgarh)-Vizag(Visakhapattanam) passenger train may please be converted as Express train and extended upto Howrah (West Bengal) or Bhubaneswar (Orissa) via- Visakhapattanam in Andhra Pradesh.
 
A new Railway Ticket Booking Counter may please be established inside the Jeypore Municipality area in Koraput district., Orissa.
 
The newly introduced train Koraput-Rourkela, via-Rayagada may please be linked with Hirakhand Express at Rayagada in return from Rourkela with few buggies to provide Bhubaneswar travel facilities to the people of Kesinga (Kalahandi district), Ambadala, Muniguda and Therubali (Rayagada district).
श्री नृपेन्द्र नाथ राय (कूच बिहार): महोदय, रेलवे सप्लीमेंट्री बजट पर आपने मुझे बोलने का मौका दिया, इसके लिए मैं आपको धन्यवाद देता हूं। मैं ज्यादा नहीं बोलूंगा। बहुत से माननीय सदस्य इस पर बोल चुके हैं और अन्य माननीय सदस्य है, जो अपने-अपने इलाके की बात करेंगे। माननीया मंत्री जी यहां बैठी हैं। हमारा निर्वाचन क्षेत्र कूच बिहार है। हमारा इलाका जनसाधारण का इलाका है। उस इलाके की पब्लिक की जो मांग हैं, मैं उसके बारे में मंत्री महोदया का ध्यान आकर्षित करता हूं।
16.03 hrs. (Dr. Girija Vyas in the Chair) महोदया, जहां सारी दुनिया एक साथ चल रही है, वहीं हमारे इलाके कूच बिहार के लोग, जलपाईगुड़ी के लोग जब कोलकाता या दिल्ली आते हैं, जब वे कूच बिहार से ट्रेन में चढ़कर कोलकाता आते हैं तो ज्यादा समय लगता है। कूच बिहार की तरफ से हमारी माननीया मंत्री जी से डिमांड है कि हमारे पड़ोस में बांग्ला देश है, जो हमारा मित्र देश है। दिनहटा हमारा इलाका है। उसके साथ बातचीत करके जो गितलदा रेल लाइन पिछले बहुत दिनों से पड़ी हुई है, बहुत दिन से वह रेल लाइन चालू नहीं है, उसे चालू किया जाए। गितलदा से बांग्लादेश होकर कोलकाता हम आठ-दस घंटे में आ सकते हैं। आज हम कोलकाता आते हैं तो हमें 20 से 26 घंटे का समय लगता है। इसलिए मैं चाहूंगा कि माननीया मंत्री जी बांग्ला देश से बात करके गितलदा, बांग्ला देश होकर कोलकाता से जो हमारी रेलवे लाइन है, जो आज बंद है, उसे शुरू करने के लिए कोशिश करें जिससे कूच बिहार और जलपाईगुड़ी से लोग 8-10 घंटे में कोलकाता आ सकें। महोदया, हमारी माननीया मंत्री जी से एक और मांग है कि जब हम एमपी लोग दिल्ली से कूच बिहार तक जाते हैं तो नई दिल्ली और कोलकाता से ट्रेन ठीक समय से न्यू जलपाईगुड़ी के लिए जाती है, लेकिन एक समस्या है। एनजीपी से कूच बिहार तक कोई डबल लाइन नहीं है। उसमें ज्यादा समय लगता है। हमारी माननीया मंत्री जी से डिमांड है कि कूच बिहार से एनजीपी तक डबल लाइन बनायें। इससे लोगों को आने-जाने में सुविधा होगी। हमारी एक और डिमांड है कि माननीया मंत्री जी पिछली बार अक्टूबर के महीने में कूच बिहार गयी थीं। उन्होंने उधर 29 अक्टूबर से एक नयी ट्रेन कूच बिहार से असम तक चालू की। दिन्हाटा के लोगों की मांग थी कि वहां कंप्यूटर काउंटर चालू किया जाए। यह नवंबर में चालू हुआ, लेकिन मंत्री जी से हमें कहना है, शायद उन्हें मालूम है या नहीं कि दिन्हाटा में पूरे दिन में एक पैसेंजर ट्रेन चलती है। वहां कंप्यूटर काउंटर चालू किया, यह पब्लिक के लिए ठीक है, जनता के लिए यह ठीक है और यह खुशी की बात है। कूच बिहार से दिन्हाटा की दूरी 25 किलोमीटर है। टिकट कटेगा दिन्हाटा में और ट्रेन में चढ़ना होगा न्यू कूच बिहार से। जब कोलकाता आएंगे तो हमें कूचबिहार से ट्रेन में चढ़ना होगा।  

इसलिए हमारी माननीय मंत्री जी से विनती है कि दिन्हाटा तक जो उत्तर बंगाल ट्रेन है, उसको आप चलाइए और अलीपुरद्वारस से एक ट्रेन चलती है जिसका नाम है तीस्ता तोरसा, वह भी दिन्हाटा तक चलाएँगे तो अच्छा होगा, यह हमारी माननीय मंत्री जी से विनती है।

 

          हमारे कई माननीय सदस्यों ने इस बात का ज़िक्र किया कि ट्रेन में कई तरह का सामान जाता है, किचन का, फर्टिलाइज़र आदि का। दिन्हाटा कृषि प्रधान इलाका है। हमारी मांग है कि पहले वहाँ किचन के और फर्टिलाइज़र के लिए रैक पॉइंट थे लेकिन वे बहुत दिनों से बंद हैं। 20-25 सालों से वे रैक बंद हो गए हैं। माननीय मंत्री जी किसानों और आम जनता की बात करते हैं, इसलिए माननीय मंत्री जी से हमारी मांग है कि ...( व्यवधान)

सभापति महोदया :  माननीय सदस्य, अब आप अपनी बात समाप्त करें।

श्री नृपेन्द्र नाथ राय : मैं समाप्त कर रहा हूँ। दिन्हाटा में रेलवे का रैक पॉइंट चलाया जाए। मैं ज्यादा नहीं बोलूँगा। मेरी एक विनती और है। मंत्री जी ने कई ट्रेन्स में नई पैन्ट्री चालू की है। न्यू कूच बिहार से उत्तर बंगाल जो ट्रेन चलती है, वह पाँच बजे जाती है लेकिन उसमें पैन्ट्री कार नहीं है। फिर अलीपुरद्वार से 3141-42 ट्रेन स्यालदाह-अलीपुरद्वार जाती है। दिन में 12 बजे वह चलती है, उसमें भी पैन्ट्री कार नहीं है। माननीय मंत्री जी से निवेदन है कि इन दोनों गाड़ियों में वे पैन्ट्री कार चालू करें। एक और विनती है। सितम्बर महीने में माननीय मंत्री जी उत्तर बंगाल के साथ दीघा जोड़ने के लिए एक पहाड़ी एक्सप्रैस चालू किया। माननीय मंत्री जी ने कहा था कि चुनावों के बाद हम उत्तर बंगाल को स्विट्ज़रलैंड बनाएँगे, कोलकाता को लंदन बनाएँगे, दीघा को गोवा बनाएँगे। यह ठीक है। इस आश्वासन पर मंत्री जी को काफी सीटें मिलीं। ...( व्यवधान) हमने मंत्री जी को चिट्ठी लिखकर मांग की थी कि पहाड़ी एक्सप्रैस जो सितम्बर महीने में शुरू की, हमारी विनती है कि कूच बिहार के लोगों को भी दीघा जाने की बहुत इच्छा रहती है। इसलिए कूचबिहार वासियों की ओर भी ध्यान देते हुए इसको न्यू कूचबिहार तक चालू करें। इसके लिए हम कूचबिहार वासियों की तरफ से माननीय मंत्री जी को बधाई और धन्यवाद देंगे। यही मांग करते हुए मैं यह नहीं बोलूँगा कि हम रेलवे की अनुपूरक मांगों का समर्थन करते हैं या नहीं, लेकिन यही कहते हुए मैं अपनी बात समाप्त करता हूँ।

                                                                                               

*SHRI SUBHASH BAPURAO WANKHEDE (HINGOLI):

 
आज रेल की पूरक मांगों पर मैं अपने विचार व्यक्त कर रहा हूँ।
 
          मा0 रेल मंत्री ममता जी से विनती करता हूँ कि मेरे जिले के रेल से संबंधित मुद्दों की ओर काफी दिनों से हम केन्द्र शासन का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं। अभिनक, नांदेड़, परभणी, ईण आदि जिलों के मुद्दे निम्नलिखित हैं।
 
          नांदेड़ से वर्धा जाने वाली नई रेल का काम शुरू नहीं हुआ। महारा­ष्ट्र शासन ने अपना हिस्सा खर्च करने का आश्वासन दिया है और केन्द्र को समर्पित किया है। मैं ममता जी से विनती करता हूँ कि नांदेड़-वर्धा-योतमाल जाने वाली नई रेल का काम जल्द से जल्द शुरू कराया जाए और उमरखेड तहसील, पूसद तहसील, महागांव, इआणी, ईण तालुका की जनता की समस्याओं का हल हो सके।
 
नांदेड़ से पुणे तक नई रेल गाड़ी चालू करने की मांग बहुत दिनों से हो रही । यह ध्यान में रखकर नांदेड़ पुणे नई रेल चालू किया जाए जिससे क्षेत्र की जनता को होने वाली कठिनाई से छुटकारा मिल सके।
 
          महोदय, मैं आपके माध्यम से मा0 रेल मंत्री ममता जी से विनती करता हूँ कि मुम्बई-सिकन्दराबाद एक ही रेलवे ट्रेक है, उसे डबल ट्रेक इलेक्ट्रिकेशन में परिवर्तित कर दिया जाए।
 
          नांदेड, हिंगोली और परभणी से प्रतिदिन 100 प्राईवेट एस.टी. बस पुणे जाती हैं, इतने पैंसेजर होने के बावजूद भी नांदेड़ पुणे ट्रेन प्रतिदिन नियमित नहीं होती, इसका कारण यह है कि रेल अधिकारी ट्रेवल मालिक के साथ हाथ मिलाकर उनसे हर महीने लगभग 5 लाख रूपये काला धन प्राप्त करते हैं। इसलिए यह अधिकारी रेल मंत्रालय को गलत रिपोर्ट देकर अपने पद का दुरूपयोग कर रहे हैं जिससे मंत्रालय को सही जानकारी नहीं मिल पाती।
         
अतः मेरा मा0 मंत्री जी से अनुरोध है कि कृपया आप इस पर उचित कार्यवाही करें और साथ ही दो­ााळ अधिकारियों को निलंबित किया जाये।
         
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"क"
   

ओ Speech was laid on the Table.

SHRI DUSHYANT SINGH (JHALAWAR):      Thank you, Madam Chairman. I would like to speak on a very important topic, which is related to the Supplementary Demand for Grant (Railways). The hon. Minister for Railways -- who is here in the House -- has asked for demands for the flagship commitments of the Government vis-à-vis the North East regions and Jammu & Kashmir. She has also asked for sanctions for demands for safety fund.

            I want to state and bring the Minister back to her Budget speech. In her Budget speech she has mentioned and said that : “I want to expand the Railways at every nook and corner of the country”. She has also mentioned that she will improve the passenger amenities; she will also help theaam aadmi and the farmer to get the perishable products from the farm to the markets; and improve stations and upgrade them. I want to ask this from her. States like my State of Rajasthan  आप वहां से आती हैं। इसके अलावा मध्य प्रदेश है, गुजरात है, हिमाचल प्रदेश है, बिहार है तथा और भी क्षेत्र हैं पूरे देश में, उनके लिए आपने कितनी गाड़ियाँ बढ़ाई हैं?मैं आपका ध्यान दिलाना चाहता हूँ कि हमारे यहाँ के25लोक सभा सदस्यों ने मांग की है कि हमारे क्षेत्रों में और राजस्थान में गाड़ियाँ पहुँचें। हमारे क्षेत्र में झालावाड़ में जो रामगंज मंडी भोपाल ट्रेन लाइन है, वह 2008 में आनी थी। वह प्रपोज़ल आपके फाइनैंशियल सैंक्शन के द्वारा नहीं आ पाया है। अब बोल रहे हैं कि वह 2011 में आएगी। आप हर साल इसके लिए 17 से20करोड़ रूपये देते हैं। मेरी मांग है कि आप इसे जल्दी करें और रामगंज मण्डी-भोपाल लाइन को शीघ्र पूरा करें। भवानी मण्डी और पचपाड़ की तरफ पीएमजीएसवाई का रोड़ है, जो कि रेलवे की लाइन पर पड़ता है वहां अंडरब्रिज के लिए हमने कहा है, जिसकी सैंक्शन अभी तक नहीं आयी है। कोटा-बीना इलैक्ट्रीफिकेशन की मांग को अभी तक आपने पूरा नहीं किया है। धौलपुर से शताब्दी चलती है जो मथुरा, आगरा, मुरैना, ग्वालियर और भोमा रूकती है, लेकिन धौलपुर में नहीं रूकती है। मेरी मांग है कि शताब्दी धौलपुर में रूके और दुर्ग एक्सप्रैस छावड़ा में रूके, जो कि जबलपुर से आती है। झालावाड़ और मेरे क्षेत्र की मांग है, इंदौर से एक गाड़ी आती है, जो कि जोधपुर जाती है, उसका ठहराव चौबला में करवाएं, इससे वहां के लोगों को लाभ होगा। इसके साथ मैमो ट्रेन हड़ौती क्षेत्र के लोगों के लिए चलायी जाए। आपका एक्सटेंशन का प्रोग्राम एकदम खोखला है। आपने सारी ट्रेनें दिल्ली से बंगाल के लिए ही चलायी हैं। राजस्थान के किसानों और आम आदमी के लिए आपने ट्रेन्स नहीं चलायी जा रही हैं। बड़ी साध्वी से नीमच तक का सर्वे हो चुका है। इसके लिए 130करोड़ रूपये हैं। फुलैरा-मेढ़ता के लिए 280 करोड़ रूपये हैं, हनुमानगढ़, उदयपुर सिटी, सीकर और झालावाड़ आदि क्षेत्रों के लिए आपने सर्वे करवाया है। लेकिन अभी तक कोई काम नहीं हुआ है। आपने पैसेन्जर एमैनीटिज़ की बात बोली थी, लेकिन इस दिशा में भी कुछ नहीं किया है। हमारे यहां कम्प्यूटराइजेशन भी नहीं हुआ है। पैरीशेबल आइटम्स को दिल्ली और मेट्रो शहर तक लाने की बात आपने कही थी, लेकिन उस बारे में भी कुछ नहीं हुआ है। I want to talk about the dedicated freight corridor. यह राजस्थान से भी निकलता है। इसमें 17700 करोड़ रूपये का सैंक्शन किया गया है। लालू जी जब रेल मंत्री थी, तब उन्होंने इसे शुरू किया था।

Due to world economy going through a bad time, the money for the rail project could not happen. Now we have got to think of soft loan coming in from Japan at .2 per cent per annum for 30 year period. In lieu of that the country has to provide one-third जापानी फर्म को देना होगा। आपने कहा था कि आप आम आदमी के लिए काम करेंगे। प्रधानमंत्री एवं रेल मंत्री जी ने अक्तूबर के महीने में यह तय किया गया था कि रेल टैरिफ रैगूलेटरी एथॉरिटी बनेगी।

          मुझे डिफिकल्टी यह है कि आपका जो केपिटल है, वह आपको नहीं मिल रहा। 109 क्षेत्र ऐसी जगहें हैं, जहां ट्रेन लाइनें जानी चाहिए, लेकिन वहां नहीं पहुंच रहीं। रेल टेरिफ रेगुलेटरी ऑथोरिटी की मांग की थी, जब एन.डी.ए. की गवर्नमेंट थी। उसे रद्द कर दिया गया है, इसके लिए लोग बोल रहे हैं। प्रधान मंत्री जी के यहां से प्लानिंग कमिशन में मांग आई है, उसके बारे में आप बताएं? ...( व्यवधान)

          सभापति महोदया, मुझे आपके माध्यम से मंत्री जी से यह भी कहना है, उन्होंने यह कहा था कि वह पांच साल में बहुत कुछ करेंगे। मेरे क्षेत्र में प्लान में आपने जो कंवर्जन की बात बोली थी कि 11वें प्लान में आपका टारगेट दो हजार किलोमीटर था, जिसे आपने खाली 527 किलोमीटर किया है। आपने गेज़ कंवर्जन दस हजार किलोमीटर का किया था, उसमें आपने 2189किलोमीटर किया है। आपने डबलिंग का छ:हजार का टारगेट रखा था, उसमें आपने 874 किलोमीटर किया है। ...( व्यवधान)

          सभापति महोदया, आपने मुझे बोलने का समय दिया, इसके लिए मैं आपको धन्यवाद देता हूं।    

                                                                                                                                                                                                                  

श्री रतन सिंह (भरतपुर): माननीय सभापति महोदया, आपने मुझे बोलने का समय दिया, इसके लिए मैं आपका बहुत आभारी हूं। भारतीय रेल भारत के अर्थशास्त्र की महत्वपूर्ण धुरी है। श्रद्धेय श्रीमती सोनिया गांधी जी, श्रद्धेय श्री राहुल गांधी जी और श्रद्धेय डॉ. मनमोहन सिंह जी, प्रधान मंत्री महोदय के नेतृत्व में माननीय रेल मंत्री जी ने जो बजट प्रस्तुत किया है, वह बहुत ही जन कल्याणकारी, किसान, गरीब मजदूर और दलित आदि सब का हितसाधक है। रेल बजट में विश्वस्तर के रेलवे स्टेशन, आदर्श रेलवे स्टेशन और मेडिकल सुविधाएं प्रदान करने का जो प्रावधान रखा है, वह आम जनता के लिए बहुत ही लाभकारी एवं सुखदायी है। रेल बजट में कोई किराया नहीं बढ़ाया गया है, यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण कदम है। गरीब किसान मजदूरों को लाभ हो, इसके लिए माननीय रेल मंत्री जी ने जो इज्जत योजना विशेष प्रकार से चलाई, उसका लाभ पूरे भारत के लोगों को मिल रहा है, जिसने नये आयाम तय किए हैं।

 

          सभापति महोदया, बजट में नई रेलवे लाइन, दोहरीकरण की भारत की आवश्यकता के हिसाब से बहुत प्रावधान किए हैं। मैं भरतपुर क्षेत्र से हूं, जहां भगवान श्रीकृष्ण की जीवनलीला, क्रीड़ास्थली और जन्मस्थली है। वहां बहुत ही महत्वपूर्ण विश्वस्तर का पर्यटन है, भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन करने लाखों व्यक्ति त्यौहारों पर आते हैं, परन्तु अभी तक यह क्षेत्र रेल परिवहन सुविधाओं से वंचित है। वहां  रेल परिवहन उपलब्ध नहीं हैं। वहां दर्शानार्थी पर्यटन की दृष्टि से आते हैं। डीग में विश्व प्रसिद्ध जलमहल हैं, वहां भी लगातार करोड़ों व्यक्ति प्रतिवर्ष आते हैं। परिवहन की बहुत कठिनाई है। क्षेत्र केवल बस परिवहन पर ही निर्भर है ।

 

          सभापति महोदया, मेरी आपके माध्यम से पुरजोर प्रार्थना है कि भरतपुर से डीग, डीग से कामा और कामा से कोसीकलां नयी रेलवे लाइन स्वीकृत की जाए, जो लगभग 91 किलोमीटर है।  इस क्षेत्र को यह सौगात दी जाए। वह क्षेत्र बहुत महत्वपूर्ण है, सरसों के उत्पादन में पूरे भारत में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। वहां नयी रेलवे लाइन होने से माल को लाने व ले जाने में सुविधा होगी, वहां के उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा और माननीय युवाओं को रोजगार भी मिलेगा। भरतपुर, मथुरा रेलवे लाइन है, जिस पर एक आर.ओ.बी. बन रहा है। वह पिछले डेढ़ वर्ष से उसी स्थिति में है। राजस्थान सरकार के हिस्से का जो काम था, वह लगभग पूरा हो चुका है, परन्तु रेलवे ब्रिज की अभी कोई शुरुआत नहीं हुई है। परिवहन में बहुत ही कठिनाई हो रही है, कृपया उसका जल्दी से निर्माण कराने के लिए संबंधित अधिकारियों को आदेश प्रदान करें।

          सभापति महोदय, मैं आपके माध्यम से रेल मंत्री महोदया से निवेदन करना चाहता हूं कि भरतपुर से जयपुर रेलवे लाइन पर, अखड्ड के पास तकरीबन डेढ़ वर्ष से जो पुल बन रहा है, वह उसी स्थिति में है। राजस्थान सरकार ने अपने हिस्से का निर्माण कार्य, जो एप्रोच पुल होता है, वह बनाकर तैयार कर दिया है, लेकिन रेलवे लाइन के ऊपर जो पुल बनना है और जिसे रेलवे को बनाना है, उसकी अभी तक कोई शुरूआत नहीं की गई है। वह काम रुका हुआ है। इसके कारण भरतपुर निवासियों को लगभग 18 किलोमीटर का चक्कर लगाकर भरतपुर में प्रवेश करना पड़ता है। यह बहुत महत्वपूर्ण है। इसके कारण रेलवे स्टेशन पर घंटों ट्रैफिक जाम रहता है। मेरा आपके माध्यम से माननीय रेलवे मंत्री महोदया से निवेदन और पुरजोर प्रार्थना है कि रेलवे ब्रिज, भरतपुर से जयपुर वाली लाइन पर और भरतपुर से मथुरा रेलवे लाइन पर शीघ्र बनाने के आदेश दें।

 

          माननीय सभापति महोदया, मैं आपके माध्यम से सदन के ध्यान में लाना चाहता हूं कि भरतपुर में सिमको एक बहुत बड़ी फैक्ट्री है, जो रेलवे वैगन्स बनाने का काम करती रही है। पहले वह रेलवे बोर्ड के वैगन्स ही बनाती थी। वह आर.डी.ओ. से स्वीकृत है और वहां सारी मशीनरी एवं अन्य साधन अपग्रेडेड हैं। यह 8-9 वर्ष से बन्द है। वह इसलिए बन्द है, क्योंकि उसके पास रेलवे की ओर से वैगन बनाने का कोई आदेश नहीं है। वे लगातार रेलवे की निविदाओं में भाग लेते रहे हैं और अभी भी उनकी निविदाएं विचाराधीन हैं। मेरा माननीय रेल मंत्री महोदया से निवेदन है कि उन निविदाओं का शीघ्र निस्तारण कर के ऐसी व्यवस्था की जाए कि जो रेलवे वैगन बनाने वाली सिमको फैक्ट्री भरतपुर में है, उसे पर्याप्त मात्रा में रेलवे वैगन बनाने के ऑर्डर मिलें और वह चालू हो सके।

          सभापति महोदया, मैं आपके माध्यम से सदन में इतना निवेदन जरूर करना चाहता हूं कि भरतपुर की सिमको फैक्ट्री, भरतपुर की जीवन रेखा है। उसमें लगभग 6हजार लोग काम करते हैं और अप्रत्यक्षरूप से उस फैक्ट्री के ऊपर लाखों लोग अपने रोजगार के लिए निर्भर हैं।

सभापति महोदया :   माननीय सदस्य, कृपया अब आप अपना भाषण समाप्त करें।

श्री रतन सिंह : महोदया, इससे युवाओं को रोजगार मिलेगा और चारों तरफ जो बेरोजगारी का हाहाकार मचा हुआ है कि भरतपुर में रोजगार नहीं है, वह कम होगा, क्योंकि इसमें बहुत लोगों को रोजगार मिलेगा। उन्हें रोजगार प्रदान करने में हमें सहायता मिलेगी और लोग प्रगति कर सकेंगे। इसलिए मेरा निवेदन है कि उक्त फैक्ट्री को जल्दी से जल्दी चालू किया जाए।

सभापति महोदया :   अब आप कृपया कन्क्लूड कीजिए।

श्री रतन सिंह : सभापति महोदया, मैं एक मिनट में अपनी बात समाप्त करूंगा। मेवाड़ एक्सप्रैस बयाना से होकर जाती है। उसका ठहराव बयाना में किया जाए। मथुरा-बांदीकुई, यात्री गाड़ी का जयपुर तक विस्तार किया जाए। इससे वहां के पैसेंजर्स को जयपुर जाने में सुविधा हो सके। अभी हम बांदीकुई तक ही रह जाते हैं और आगे कोई साधन नहीं मिल पाता है।

          सभापति महोदया, आगरा से अजमेर इंटरसिटी, तहसील मुख्यालय नदबई से होकर जाती है। नदबई शिक्षा के क्षेत्र में बहुत महत्वपूर्ण प्रगति कर रहा है।

सभापति महोदया :   माननीय सदस्य, कृपया अब आप अपना भाषण आधे मिनट में समाप्त कीजिए। आपने पहले भूमिका बहुत बांध ली थी। इसलिए अब आप जल्दी से जल्दी काम की बातें कहकर अपना भाषण समाप्त कीजिए।

श्री रतन सिंह : माननीय सभापति महोदया, आगरा से अजमेर चलने वाली इंटरसिटी एक्सप्रैस जो नदबई से होकर जाती है, लेकिन नदबई नहीं रुकती है, इसलिए मेरा निवेदन है कि उसका ठहराव नदबई में किया जाए।

          महोदया, मैं अन्त में, अपनी बात यह कहकर समाप्त करता हूं कि भरतपुर की सिमको रेलवे वैगन फैक्टी को शीघ्र चालू किया जाए, दोनों रेलवे ब्रिजेज को बनाया जाए। मैं रेल के प्रयोजनार्थ वित्तीय वर्ष 2009-10 की सेवाओं के लिए भारत की संचित निधि में से कतिपय और राशियों के संदाय और विनियोग को प्राधिकृत करने वाले विधेयक का समर्थन करता हूं।

                                                                                                 

*SHRI CHARLES DIAS (NOMINATED ) : Madam, I thank you for giving me an opportunity to participate in the discussion on Supplementary Demands for Grants for 2009-10.  In this connection  I would like to draw your kind attention towards  the following matter :-

The Ernakulam Railway Junction lacks the basic facilities for passengers.  the passengers lobby and waiting room are insufficient for the thousands of passengers who are using them.
In the last Railway Budget it was declared that the Ernakulam Railway Junction will be renovated to world standard with modern facilities and in tune with the commercial capital of Kerala i.e. Cochin.  I would like to know when the declared renovation works will start.
Please consider the above matter as urgent as this is pending for the last several years.
   
*  Speech was laid on the Table.
       
ओश्री सैयद शहनवाज हुसैन (भागलपुर)ः महोदया, मैं रेल के विषय पर आज हो रही चर्चा में देश तथा अपने लोकसभा क्षेत्र भागलपुर के विषय में कुछ बातें रेल मंत्री जी के ध्यान में लाना चाहता हःं-
 
          जब से रेल मंत्री के रूप में ममता जी ने अपना कार्यभार संभाला है तबसे बंगाल के साथ-साथ पूरे देश की भी इनसे उम्मीदें जगी हैं। हम उनके द्वारा रेलवे में वाइट पेपर लाये जाने का स्वागत करते हैं। परन्तु 4 महीना बीत जाने के बावजूद भी रेलवे में कोई वाइट पेपर की सुगबुगाहट नहीं मिल रही है। रेलवे में आज भी 1 लाख 70 हजार पद खाली हैं। रेल में आज असुरक्षा की भावना बढ़ी है। अगर हम पिछले वर्ष से तुलना करें तो इस व­र्ष 21 अक्तूबर को मथुरा में गोवा सम्पर्क क्रंति व मेवाड़ एक्सप्रेस की दुर्घटना, मसूर-अजमेर एक्सप्रेस में 11 नवंबर, 2009 को, मंडोर एक्सप्रेस को 14 नवंबर को, तथा राजधानी एक्सप्रेस को नक्सलियों ने रोके रखा। आज रेलवे क्रासिंग न होने के कारण 46 लोगों की जानें गई है। सीधी टक्कर को मिलाकर देखें तो 149 लोग मर चुके हैं जोकि पिछले वर्ष की तुलना में ज्यादा है। मुझे याद है कि वाजपेयी जी के नेतृत्व की एनडीए सरकार ने रेलवे मद में सुरक्षा के लिए17000 करोड़ की धनराशि का प्रावधान किया था। जिसमें रक्षा कवच एवं इंटरलॉकिंग सिस्टम के जरिये रेल दुर्घटनाओं को रोका जा सके।
 
          आपने दुरन्तो को लाने की बात कही थी जिसमें आपने 12 में से केवल चार को ही लांच किया है। मंत्री जी ने एक 18000 की महत्वाकांक्षी वैगन लाने की बात कही थी परन्तु अभी तक केवल 7000 ही ला पाये हैं। इस तरह से यह योजना भी काफी धीमी चल रही है।
 
          आपने विश्व स्तरीय रेलवे स्टेशन की जो घोषणा की थी उसके लिए आज तक वह कामयाब नहीं हो पाई है। इसी प्रकार डेडीकेटेड फ्रेोट कॉरिडोर मल्टी फंक्शनल कांपलेक्स आदर्श स्टेशन, मल्टी मॉडल लाजिस्टिक पार्क, आटे हब्स आदि लाने की बात कही थी परन्तु अभी तक केवल हावड़ा का ही उद्घाटन हो पाया है। आपने358 स्टेशन को आदर्श स्टेशन घोषित किया था जिसमें से 205 केवल पश्चिम बंगाल में है। बंगाल में तो आप कुछ काम कर रहीं हैं परन्तु अन्य राज्यों में उस पर कोई अमल नहीं हो पाया है। आपने हमारे कहने पर मेरे संसदीय क्षेत्र में नौगछिया स्टेशन को आदर्श स्टेशन बनवाने की बात कही थी परन्तु अभी तक वहां पर कार्य शुरू नहीं किया गया। डा0 अमित मित्रा के नेतृत्व में आपने एक कमेटी बनाई जिसकी रिपोर्ट भी आ गई जिसमें उन्होंने मल्टी फंक्शनल कांपलेक्सेस, विश्व स्तरीय रेलवे स्टेशन,   * Speech was laid on the Table.
 
लोकोमोटिव और रेल कोच फैक्ट्रियां पब्लिक-प्राइवेट पार्टनर्शिप में स्थापित करने की बात कही थी परन्तु इस विषय पर जमीनी स्तर पर कोई कार्य नहीं हो पाया है।
          इसी प्रकार रेल यात्री सुविधाओं के विषय में जो पिछली कमेटियों के सुझाव आये थे उसमें खाने की क्वालिटी में सुधार करने के लिए कहा गया था परन्तु अभी तक उसमें सुधार नहीं हो पाया है।
 
          अब मैं आपका ध्यान ट्रेनों में प्रिटिंड कार्ड टिकट (पीसीटी) की ओर दिलाना चाहता हूं जिससे रोजाना करीब पौने दो करोड़ यात्री सफर करते हैं जिनमें अनारक्षित टिकट के जरिये सफर करने वाले यात्रियों की संख्या करीब सवा करोड़ से अधिक हैं। पीसीटी के कारण यात्रियों की जेब कट रही है। आठ हजार स्टेशनों में से बहुत से ऐसे स्टेशन है जहां पीसीटी के जरिये ही यात्री सफर पर निकलते हैं। यहां बिकने वाले टिकट छपे छपाये होते हैं। भले ही वह बहुत पहले का ही छपा हुआ हो और उस पर किराया पहले ही दर्ज क्यों न हो, लेकिन यात्री को उसे बुकिंग क्लर्क के हाथों लिखे किराये को ही देना पड़ता है। यह बढ़ा किराया रेलवे को नहीं बल्कि बुकिंग क्लर्क की जेब में जाता है।
 
          15 अगस्त,2002 से कम्प्यूटरीकृत अनारक्षित टिकट प्रणाली (यूटीएस) लायी गई थी। इसका प्रयोग सफल रहा। इसमें तेजी की आवश्यकता थी परन्तु यह काफी धीमी गति से चल रहा है।
 

          महोदया, मैं मंत्री जी का ध्यान बिहार के लिए घोषित योजनाओं की तरफ लाना चाहता हूं। यह सही है कि बिहार ने कई रेल मंत्री दिये हैं। 70 के दशक में जब स्व0 ललित नारायण मिश्रा जी रेल मंत्री थे तब बिहार को कुछ न्याय मिला था। उसके बाद श्री राम विलास पासवान, नीतीश कुमार तथा लालू प्रसाद बिहार के रेल मंत्री हुये। बिहार की 9 करोड़ जनता उनसे रेल परियोजनाओं की अपेक्षा इसलिए नहीं कर रही थी कि वे बिहार के थे, बल्कि वे देश के रेल मंत्री थे और उन्होंने जो योजनायें दी हैं उस पर हमारा अधिकार है और आप बंगाल से हैं लेकिन ईस्टर्न रीजन की आप नेता हैं और आप पर भी हमारा अधिकार है कि 50 साल से बिहार के साथ जो अन्याय हो रहा है उसको आप न्याय में बदलेंगी। बिहार के लोग आपकी ओर बड़ी उम्मीद के साथ देख रहे हैं। आपके पूर्ववर्ती रेल मंत्री लालू प्रसाद जी ने जो घोषणा की वह यूपीए सरकार के रेल मंत्री के तौर पर की। आप भी यूपीए सरकार की रेल मंत्री हैं। इसलिए आप जिम्मेदारी से बच नहीं सकतीं। आपको उन घोषणाओं को अमली जामा पहनाना होगा। यह सही है कि चुनावों को ध्यान में रख कर पूर्ववर्ती रेल मंत्री ने अंतरिम बजट में भी वोट की दृ­िष्ट से कुछ घोषणायें की लेकिन मेरा आपसे अनुरोध है कि उसको भी आप अमली जामा पहनाये। आज बिहार में जो पुरानी योजनाएं हैं उन सबका काम ढीला चल रहा है। आज रेल मंत्रालय के अधिकारी बिहार की योजनाओं के साथ सौतेलापन कर रहे हैं। जो-जो परियोजनायें हैं-महासेतु कोशी ब्रिज का शिलान्यास माननीय अटल जी ने किया था वह कार्य भी काफी धीमा चल रहा है। मुंगेर के पुल पर भी काम नहीं चल रहा है। सक्रिय हसनपुर लाइन का काम भी बहुत धीमा चल रहा है। सहरसा सुपौल फरबिसगंज परियोजना पर भी आमान परिवर्तन नहीं हो रहा है। भागलपुर कियुल मार्ग दोहरीकरण ठंडे बस्ते में है। तिनपहाड़-भागलपुर की रेल लाईन का दोहरीकरण भी ठंडे बस्ते में है।

 

          मैं आपका ध्यान अब भागलपुर की तरफ दिलाना चाहता हूं। यह बहुत बड़ा ऐतिहासिक एवं धार्मिक शहर है। यहां पर विक्रमशिला स्थित है। यहां छठी शताब्दी में दुनिया का सबसे प्राचीन विश्वविद्यालय था। इस विश्वविद्यालय में 108 शिक्षक तथा 14000 विद्यार्थी थे। यहां के प्रधानाचार्य श्री ज्ञान अतीस दीपांकर थे जिन्होंने तिब्बत में जाकर लामा धर्म की स्थापना की थी। और उसी पीढ़ी के दलाई लामा हैं । इन्हीं ज्ञानरदीपांकर जी ने तिब्बत में बौद्ध धर्म का प्रचार किया था और वहां से बौद्ध धर्म जापान, चीन, थाईलैंड, अफगानिस्तान में भी फैला। और यहीं पर श्रीचंपापुर दिगम्बर जैन सिद्ध क्षेत्र है जहां से पूरे देश के जैन समुदाय के लोग भागलपुर आते हैं। इसी भागलपुर जिले में श्री अज़गैबीनाथ का मंदिर है जहां से लाखों कांवड़िया जल उठाकर देवघर जाते हैं। इसी भागलपुर जिले में हज़रत शहबाज रहमततुल्लाह अलैह की मज़ार शरीफ है। भागलपुर सभी धर्मों का मिलाजुला केन्द्र है।

 

          पाल वंश के समय से अंगदेश की यह राजधानी रही है। यहां ऐतिहासिक धरोहर के रूप में विक्रमशिला मौजूद है। जहां से पूरी दुनिया में आठवीं शताब्दी में शिक्षा दी जाती थी। खुदाई के बाद विक्रमशिला देखने के लिए पूरे देश के लोग वहां आना चाहते हैं। हवाई जहाज का कोई लिंक वहां है नहीं और रेल लिंक होने के बावजूद अच्छी रेल सुविधा नहीं है। अतः इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए यहां पर रेलवे की सुविधा प्रदान की जानी चाहिए। आपको ज्ञात होना चाहिए कि भागलपुर गंगा के दो तटों पर बसा हुआ है। जिस तरह कलकत्ता में हावड़ा और सियालदाह। एक रेल मार्ग जमालपुर से हावड़ा रूट पर स्थित है। जिसका रखरखाव आधुनिकीकरण के अभाव में खत्म होने के कगार पर है। और इस रेल मार्ग पर कोई बड़ी दुर्घटना भी हो सकती है। ये रेल मार्ग जमालपुर के पास एक पहाड़ की सुंग से होकर गुजरता है और यह पहाड़ कभी भी रेल मार्ग पर गिर सकता है। जान माल की हानि भी हो सकती है। मेरी मांग है कि इस रेल मार्ग का उचित रखरखाव किया जाए। इसके आधुनिकीकरण पर समुचित धन दिया जाय।

 

          दूसरी रेल लाईन खगड़िया-कठियार रेल लाईन है। गंगा नदी पर विक्रमशिला पुल बन जाने के बाद नौगछिया स्टेशन, जो आवागमन के हिसाब से काफी व्यस्त स्टेशन है, की महता काफी बढ़ गई है। इस स्टेशन से 22 गाड़ियां गुजरती हैं परन्तु वे नौगछिया स्टेशन पर नहीं रूकती है। जिसके कारण नौगछिया की जनता को काफी क­ट उठाना पड़ता है। इसिलए मेरा अनुरोध है कि नौगछिया को भागलपुर का हिस्सा मानते हुए 22 जोड़ी ट्रेन जो वहां से गुजरती है-

 

          5651, 5652 लोहित एक्सप्रेस, गोहाटी जम्मू तवी, 5933, 5934-डिब्रूगढ़- अमृतसर एक्सप्रेस, 5715, 5716-गरीब नवाज एक्सप्रेस किशनगंज अजमेर एक्सप्रेस,2423, 2424-डिब्रूगढ़ राजधानी एक्सप्रेस, 2435, 2436-डिब्रूगढ़ राजधानी एक्सप्रेस, 2501, 2502, पूर्वोत्तर सम्पर्क क्रंति गोहाटी-दिल्ली, 5227, 5228-मुजफ्फरपुर-यशवंतपुर एक्सप्रेस, 5636, 3635-द्वारका एक्सप्रेस गोहाटी वोखा, 5668, 5667-कामाख्या गांधीधाम एक्सप्रेस, 5632, 5631 गोहाटी-बीकानेर,2487-2488-सीमांचल एक्सप्रेस। इसके अतिरिक्त मैं आपका ध्यान इस ओर दिलाना चाहूंगा कि गाड़ी संख्या 3415/3416 MLDT-PNBE Intercity  का ठहराव कहलगावं और पिरपैती स्टेशन पर किया जाए। साप्ताहिक चलने वाली दिल्ली-भागलपुर एक्सप्रेस का परिचलन रोजाना किया जाए।

 

            गुवाहटी- नई दिल्ली राजधानी वाया भागलपुर जो बजट में पूर्व रेल मंत्री द्वारा घोषित है, भागलपुर लखनऊ, भागलपुर से दिल्ली के बीच गरीब रथ, भागलपुर किऊल होकर दक्षिण भारत एवं पंजाब के लिए सीधे ट्रेनें घो­िषत की जाए। भागलपुर-यशवंतपुर एक्सप्रैस का नाम जो आपने मुझे व्यक्तिगत तौर पर बताया था कि उसका नाम मेरे सुझाव पर अंग एक्सप्रैस कर रही हैं, उसकी घोषणा जल्दी की जाए।

 

          पिछले बजट में भागलपुर से अजमेर शरीफ के बीच में ट्रेन की घोषणा की गई। क्योंकि भागलपुर में हजरत शहबाज रहमततुल्लाह की दरगाह है जो काफी मशहूर है और यहां से अजमेर शरीफ जाने में बड़ी तादाद में ज़ायरीन जाते हैं उनके लिये जो ट्रेन पहले से घोषित है उसे तुरन्त शुरू किया जाए।

 

          अब मंत्री जी का ध्यान, मैं एक महत्वपूर्ण विषय की ओर ध्यान दिलाना चाहता हूं और वह है पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद द्वारा ठीक लोक सभा चुनाव से पहले भागलपुर में डीआरएम कार्यालय का शिलान्यास भी किया गया और एक विशेष अधिकारी भी वहां पर कार्य कर रहा है। लेकिन अभी रेल मंत्री जी ने अपने पिछले रेल बजट में उस पर कुछ नहीं कहा है। मेरा आपसे विनम्र अनुरोध है कि डी.आर.एम. कार्यालय के काम को आप न रोके अगर भागलपुर डी.आर.एम. कार्यालय का काम रोका गया तो इसके गंभीर परिणाम होंगे। भागलपुर की जनता बहुत दिनों से डी.आर.एम. कार्यालय की मांग कर रही है इसलिए इस कार्य को अविलंब प्रगति दी जाए। ताकि हमें आन्दोलन का रास्ता न अपनाना पड़े। मैं फिर से अपनी बात कहते हुए आपसे अनुरोध करता हूं कि भागलपुर जो शरतचन्द्र की भूमि है जिन्होंने देवदास उपन्यास लिखा है। रवीन्द्रनाथ टैगोर ने अपना लंबा समय वहीं गुजारा है। बड़ी तादाद में बिहार-बंगाल की मिलीजुली संस्कृति का केन्द्र है भागलपुर । बंगाल की तरह रेल परियोजनाओं पर भागलपुर पर भी दिल खोलकर ध्यान दें। ताकि भागलपुर की जनता को न्याय मिल सके। मुझे पूरी उम्मीद है कि जब आप अगला रेल बजट पेश करेंगी तो उसमें भागलपुर के हितों की अवश्य रक्षा करेंगी।

SHRI PRASANTA KUMAR MAJUMDAR (BALURGHAT): After 50 years of continuous movement, we have the Balurghat to Eaklaxmi railway project.  In my parliamentary constituency, there are only eight stations. What is the condition of these stations?  There is no light, no water, no train shed,  no platform shed, no platform.  This is the condition of these stations.  Can the Railway Department and the Railway Board not provide above facilities to these eight stations?  We need only an air-conditioned coach from Balurghat to Sealdah for taking care of patient’s relief. Similarly, from the British period, Bihar people and the people from Dalkhola and Uttar Dinajpur have fought for a flyover in Dalkhola.  It will be of much benefit to the people. The then Union Minister Shri Priya Ranjan Dasmunsi had tried, but failed. I would request the hon. Minister to do it as early as possible. Otherwise, I have no demand.

The Railway Minister has announced in the Budget that a railway line will be constructed from Balurghat to Hili, from Buniadpur to Kaliaganj, but it has not yet started. There is also a need to have Gajol-Gunjuria line with new railway line for the poor people.

            I have no time to express my views on things such as PPP, security, safety, vacancies in railways, etc. The trains are also not running on time. So, I humbly request the hon. Minister to take care of these, though the then Railway Minister, late Barqat Khan Choudhury and the present Railway Minister, Kumari Mamata Banerjee have done much for our Railways.

            So, I again request her to do it only in 7-8 stations in a parliamentary constituency, as early as possible.

 

* श्री अर्जुन राम मेघवाल (बीकानेर): मैडम , मैं रेलवे की अनुदान मांगों पर हो रही चर्चा में भाग लेते हुए मांग / सुझाव ले करना चाहता हूं।

 

          दिल्ली-बीकानेर के गेज परिवर्तन का कार्य धीमी गति से संचालित हो रही है। स्लीपर की कमी बताकर ठेकेदार कार्य-सम्पादित नहीं कर रहे हैं। आजादी से पूर्व दिल्ली-बीकानेर के मध्य तीन रेलगाड़ियां चला करती थीं, आज एक भी डायरेक्ट ट्रेन नहीं होने से बीकानेर की जनता में एवं बीकानेर क्षेत्र के नागरिक, जो देश के अन्य प्रांतों में रहते हैं, उनमें भयंकर रोष एवं आक्रोश है। वर्तमान में जो साधन दिल्ली से हैं वह वाया पंजाब और मेड़ता रोड़ है जो अधिक समय का होने के कारण यात्रियों के लिए परेशानी का कारण बनता है। अतः वर्ष 2009-10 में ही दिल्ली-बीकानेर के गेज-परिवर्तन का कार्य पूर्ण होना चाहिए।

 

          मेरे संसदीय क्षेत्र बीकानेर में रेलवे का वर्कशॉप है। वर्कशॉप ने रेलवे के लिए बहुत अच्छा कार्य किया है, कारीगर राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित भी हुए हैं। गेज - परिवर्तन होने से इस कारखाने को भी नई जान मिलेगी। मेरा आपके माध्यम से रेल मंत्री जी से अनुरोध है कि बीकानेर स्थिति रेलवे वर्कशॉप के आधानिकीकरण का कार्य हाथ में लिया जावे एवं इस हेतु समुचित बजअ का प्रावधान रखा जाये।

 

          बीकानेर शहर में रेलवे के माध्यम से आरओबी का निर्माण हो रहा है। कार्य बहुत ही धीमी गति से चल रहा है। निर्माणाधीन आरओबी के कारण शहर की ट्रैफिक व्यवस्था चरमराई हुई है। शहर में ही चौखूंटी पर एक ओर आरओबी 30 करोड़ का स्वीकृत है लेकिन जब तक पूर्व में गजनेर रोड़ पर स्थित आरओबी पूर्ण नहीं होगा तब तक चौखूंटी पर निर्मित होने वाले आरओबी के लिए टेंडर फाइनल नहीं होंगे। अतः आपके माध्यम से मेरी मांग है कि बीकानेर शहर के गजनेर रोड़ पर निर्माणाधीन आरओबी को वर्ष2009-10 में ही पूरा करें तथा चौखूंटी पर बनने वाले आरओबी के टेंडर फाइनल कर वर्ष2009-10 में ही निर्माण प्रारंभ करें। कार्य समय पर नहीं होने से रेलवे को भी नुकसान होता है तथा जनता को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। अतः इस कार्य को रेलवे अपनी प्राथमिकता में सम्मिलित करे।

       

* Speech was laid on the Table           मेरे बीकानेर संसदीय क्षेत्र में गेज-परिवर्तन के कारण रेलवे क्रॉसिंग पर फाटक व वर्षों से जनता द्वारा की जा रही क्रॉसिंग पर रेलवे द्वारा फाटक नहीं बनाये जाने के कारण ग्रामीण जनता में भयंकर रोष है। नोखा एवं लूणकरणसर क्षेत्र में आरओबी की मांग वर्षों से वहां की जनता द्वारा की जा रही है। अन्य स्थानों पर सम-पार फाटकों की मांग स्थानीय जनता द्वारा की जा रही है। रेलवे की यह मांग है कि नगर पालिका/ग्राम पंचायत अपनी सहभागित निभावे। नगरपपालिका/ग्राम पंचायतों के पास बजट नहीं होता है। अतः रेलवे को अपनी नीति में संशोधन करके 100 प्रतिशत बजट उपलब्ध कराकर जहां भी आवश्यक हो वहां आरओबी / यूबी एवं समपार फाटक निर्मित किये जाने चाहिये तथा इस हेतु रेलवे को अपने बजट में भी प्रावधान करना चाहिए अन्यथा जनता आंदोलन कर सकती है और रेलवे के गेज परिवर्तन के कार्य को भी बाधा पहुंचा सकती है। रेलवे इस हेतु सर्वेक्षण करवा सकता है तथा प्रथम चरण में वे ही कार्य हाथ में लिये जा सकते हैं जिसकी मांग जायज है तथा वर्षों से जनता इस हेतु मांग करती आ रही है।

 

          मेरे बीकानेर संसदीय क्षेत्र के अनूपगढ़ व खाजूवाला विधान सभा क्षेत्र रेलवे लाइन की समुचित सुविधाओं से वंचित है। यह क्षेत्र अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर स्थित होने के साथ साथ सामरिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है। सेना ने भी इस क्षेत्र में रेलवे सुविधाओं की बात समय समय पर कही है। दिल्ली व बीकानेर से अनूपगढ़ व खाजूवाला सीधा रेलवे लाइन से जुड़ना चाहिये ताकि सामरिक जरूरत भी पूरी हो सके तथा अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर बसने वाली जनता को भी रेल सुविधा का लाभ प्राप्त हो सके। सर्वेक्षण आदि का कार्य पूर्व में हो चुका है अन्यथा नया सर्वेक्षण भी कराया जा सकता है। जो भी व्यवस्था हो कार्य शीघ्र होना चाहिए तथा रेलवे को बजट उपलब्ध कराना चाहिये ताकि वर्षों से लंबित मांग को पूरा किया जा सके।

   

ओश्री देवजी एम. पटेल (जालौर):मैडम , मैं रेलवे की अनुदान मांगों पर हो रही चर्चा में निम्नांकित मांग/सुझाव ले करना चाहता हूँ -

 

          ट्रेन संख्या 6112 जो कोचीवली से बीकानेर तक चलती है । इसी ट्रेन को बीकानेर से कन्याकुमारी तक बढ़ाया जावे ।  इससे यात्रियों को भी सुविधा होगी तथा अधिक यात्री मिलने से रेलवे को भी फायदा होगा ।

 

          मेरे सेसदीय क्षेत्र पिण्डवाड़ा और स्वरूपगंज में रेलवे फाटक बंद होता रहता है इससे नागरिकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है । कभी-2 गर्भवती महिलाओं के प्रसव भी फाटक बन्द होने के कारण अस्पताल पहुंचने से पहले हो जाते है इससे महिलाओं को भयंकर प्रसव पीड़ा का सामना करना पड़ता है । इसके अतिरिक्त बीमार आदमी की मृत्यु भी कभी-कभी फाटक बन्द रहने के कारण हो जाती है । अतः आपके माध्यम से रेल मंत्री जी से मेरी मांग है कि पिण्डवाड़ा और स्वरूपगंज दोनों ही स्थानों पर आरओबी (रेलवे ऑवर ब्रिज) वर्ष2009-10 में बजट उपलब्ध करवाकर निर्माण करवाया जावे जिससे सभी नागरिकों को सुविधा उपलब्ध हो सके, विशेषकर महिलाओं एवं बीमार व्यक्तियों को समय पर सुविधा मिल सके ।

 

          सांचोर में रेलवे आरक्षण भी कम्पयूटरीकृत सुविधा उपलब्ध करवाई जावे ।  साँचोर मेरे क्षेत्र का बड़ा कस्बा है तथा क्षेत्र के बहुत से निवासी देश के अन्य हिस्सों में रहते हैं तथा प्रायः यात्रा भी करते रहते हैं।रेलवे बजट में रेल मंत्री द्वारा घोषणा भी की गई थी कि सांसद के विवेकाधिकार के तहत एक कम्पयूटरीकृत केन्द्र स्वीकृत किया जायेगा । अतः इसी घोषणा की पूर्ति हेतु मेरे क्षेत्र के सांचोर में रेलवे आरक्षण का कंप्यूटरीकृत केन्द्र खोला जावे ।

 

          बीकानेर-बाड़मेर-कांडला पोर्ट वाया सांचोर नई रेल लाइन का सर्वेक्षण किया जावे । यह सर्वेक्षण व रेल लाइन सामरिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है । कांडल पोर्ट की व्यापारिक गतिविधियों तथा बाड़मेर में खुलने वाली रिफाइनरी के कारण इस रेल-लाइन की महता और भी बढ़ गई है । तथा सुरक्षा की दृष्टि से भी इस रेल-लाइन का होना आवश्यक है ।

* Speech was laid on the Table             समदड़ी-भीलड़ी के मध्य रेलवे लाइन डाली जा चुकी है अतः यथाशीघ्र इस रूट पर पैसेन्जर ट्रेन प्रारंभ की जावे ।

 

          आबू रोड़ में रेलवे का ऑवर ब्रिज निमाणाधीन है लेकिन कार्य बहुत ही धीमी गति से चल रहा है । निर्माणाधीन आरओबी को शीघ्रता से पूर्ण किया जावे जिससे नागरिकों को रेलवे सुविधा का लाभा प्राप्त हो सके ।

 

SHRI MOHAMMED E.T. BASHEER (PONNANI): I support with thanks the Supplementary Demands for Grants in respect of Railways. I am willfully using the words ‘support with thanks’.

            We are seeing that the deeds are getting converted from words; the ideas mooted in the Budget speech have been translated into action. Of course, I would like to say that the response on the part of the Ministers is laudable.

            There is a letter in my hand, written by the hon. Minister. In this letter, the Minister says this – she recalls the discussion that I had in the main Budget speech. She had taken very affirmative action on certain things. She had listed that and given to me. I would like to say that this is the best procedure that could be followed by everybody.   Hon. Minister’s active presence can be seen in various parts of the country.  I can tell you my experience of Kerala.  Hon. Minister of State, Shri E. Ahamed Sahib’s presence can always be experienced in Kerala.  All the Kerala MPs had meetings with him three times and we also had three meetings with the high Railway officers.

            I do not want to take much time of the House.  Coming to various achievements, I would like to say that modernisation of railway stations is going on in full swing. There is a move for revenue generation which is also going on nicely.  In a reply to the Parliament it has been mentioned by the hon. Minister that 3744 acres of railway land has already been entrusted to the Railway Land Development Authority for value addition process.  Similarly, the much awaited dedicated rail freight corridor has been started in the initial form.

            As far as Kerala is concerned, modernisation of railway stations is going on.  New trains announced in the Budget have started running and I congratulate the Minister for such a speedy action in this regard.  The Minister has been kind enough to give 27 new bogies for Palghat and 44 bogies for Trivandrum.  It is just a beginning and I appreciate it but at the same time I would say that more and more consideration should be given to replacing the old bogies with the new well-furnished bogies.

            There are a few very important things which I would like to bring to the notice of the hon. Minister.  Doubling of the Shoranur-Manglore line started in 1991 and 18 years have passed since then.  There has been a long delay.  I would request the hon. Minister to find out the persons responsible for this delay. Such a long delay should not be there. Ministers come and go.  They keep on updating the deadline and it is getting delayed like anything.  I would appeal to the hon. Minister to fix a cut–off date and implement it within that time frame.  The hon. Minister herself should monitor the things and get them implemented. 

There has been a demand for electrification of Shoranur-Manglore line.  We all have been pressing for it but so far nothing has been done.  I do not know whether I am correct in saying that there is a kind of diesel-lobby and electrification-lobby in the railways.  Some kind of a cold war is going on between the two.  I would request the Minister to take a speedy action with regard to the electrification of Shoranur-Mangalore line.

Kerala State was very happy to hear the announcement made in the Budget with regard to the coach factory but nothing has been done in this regard.  There was some problem with the availability of land.  I now understand that land is available.  So, I would request the Minister to take a speedy action in this regard.  The State Government also has to help in this regard and we have been pressing the State Government for it.

A promise made with regard to the coach factory in Palghat should be made real. 

More trains in Bangalore region are required and I would request the Minister to think about it very seriously.

I do not want to say much with regard to the railway zone.  We have been demanding it for long.  In the last Budget also, all the Kerala MPs were pressing for the railway zone in that region.

I would request development of Kochuvelly railway station in the suburb of Trivandrum. Some facility is available but the Government may give a little more emphasis in this regard.

With regard to the replacement of old coaches I would request the hon. Minister to take a sincere action in this respect.

MADAM CHAIRMAN : Please conclude.  The time limit is only five minutes for every Member.

SHRI MOHAMMED E.T. BASHEER : I am concluding.

            I would now request for a small thing that is about the extension of Amrita           Express running from Trivandrum to Palghat which can play a great role.  It reaches Palghat in the morning but up to 9.30 in the evening it is lying idle there.  If a short trip between Palghat and Calicut is started it can be a great link to Abra from Palghat.  It can be a great relief for the passengers to Malabar.   I would appeal to the Minister to take that into consideration.

            I would now talk about the financial health of the Indian Railways.  We have a lot of programmes but they are not being implemented because of the constraint of fund.  So, I would request that strengthening of Railway Finance Corporation may be given priority.  At the same time, financial sharing of projects by the State Government may also be considered seriously.

            Another important thing I would like to say is about the railway accidents. Railway accidents are increasing day-by-day.   From 2006 to this time, 655 accidents have taken place.  Serious steps may be taken to avoid such accidents.

            With regard to the cleanliness of the railway compartments, I would like to say that it is very poor.  We do not have objection with outsourcing.  We can give the work on contract basis.  I would request the Minister to ensure cleanliness and quality of food in railway compartments.

            These are a few observations which I would like to make. 

 

श्रीमती दर्शना जरदोश (सूरत): सभापति महोदया, मैं सूरत शहर का प्रतिनिधितिव करती हूं। सूरत सोने की मूरत की पहचान से सदियों से जाना जाता है। अभी-अभी केन्द्र सरकार ने माननीय प्रधान मंत्री जी द्वारा जेएनयूआरएम के माध्यम से पूरे देश में विकास कार्य करने के लिए 8अवार्ड का डिक्लेयरेशन किया है, जिनमें से 5सूरत को मिले हैं। केन्द्र सरकार ने ऐसा करके सूरत की जनता के विकास हेतु की जा रही मेहनत को सराहा है। इसके लिए मैं सूरत की सांसद होने के नाते आभार भी प्रकट करती हूं। इन अवार्ड्स के माध्यम से यह भी स्वीकार किया है कि सूरत देश का सबसे विकसित और विकास कार्य करने में सबसे अव्वल शहर है। लेकिन जब केन्द्र की योजना के फंड का आवंटन किया जाता है, तब सूरत को नजरअंदाज किया जाता है। यही बात रेलवे बजट में भी दोहराई जाती है। इसका सूरतवासियों को हमेशा मलाल रहेगा।

          महोदया, अगर आप किसी एक शहर में देश के सभी राज्यों के निवासियों को एक साथ मिलाना चाहें तो भारत के गिने-चुने शहरों में सूरत अग्रस्थान पर है। देश में सभी विस्तारों की करीब 45 लाख की जनसंख्या और 8 लाख से भी अधिक परिवार वहां निवास करते हैं। करीब 2से 3 लाख लोग देश के कई शहरों और गांवों से वहां रोजाना आते-जाते हैं। वहां से देश के सभी राज्यों से आती-जाती करीब डेढ़ सौ से अधिक ट्रेनों से रोजाना सवा लाख के करीब यात्री प्रवास करते हैं। सूरत के रेलवे के पार्सलों के माध्यम से 33लाख रुपये एवं यात्रियों के माध्यम से 50लाख रुपये मिलते हैं। इन दोनों को मिलाकर रोजाना करीब 83 लाख रुपये की आमदनी हो रही है। गौर करने की बात यह है कि रेलवे को रोजाना एक करोड़ रुपये की आमदनी देने वाला स्टेशन रेल मंत्री जी की ममता पाने में असफल रहा है। इस बजट में सूरत माननीय ममता जी की ममता से उपेक्षित रहा है। फिर भी कोई विकास वहां रेलवे के बुनियादी ढांचे में नहीं किया गया है। आज भी प्लेटफार्म गंदगी से भरे पड़े हैं। उनकी सफाई की व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए। सूरत रेलवे स्टेशन का नाम वर्ल्ड क्लास रेलवे स्टेशनों की लिस्ट बनाते वक्त ध्यान में न आना यही बताता है कि सूरत उपेक्षित है। सूरत स्टेशन को वर्ल्ड क्लास रेलवे स्टेशन की सूची में शामिल किया जाए, यह मांग करते हुए मैं अन्य समस्याओं के प्रति भी ध्यान आकर्षित करना चाहती हूं।

          सूरत शहर से जाने वाली रेल पटरियों के ब्रिज के नीचे से जाने वाले रास्तों से जाते हुए प्रत्येक व्यक्ति को यह सावधानी रखनी पड़ती है कि कहीं ऊपर जाती ट्रेन से गिरने वाला कूड़ा-करकट, मुसाफिरों की शौच की गंदगी से उन्हें फिर से न नहाना पड़े। सूरत शहर से रेलवे की कार्य परिसीमा में आने वाले ओवर ब्रिजों की गंदगी रास्ते से जाने वाले सूरतवासियों के ऊपर न गिरे, इस हेतु सूरतवासी सालों से मांग कर रहे हैं। रिपेयर कराने के लिए रेल रोको आंदोलन सूरतवासी कर चुके हैं। लेकिन इतनी आमदनी देने के बाद भी रेलवे तंत्र को उन ओवर ब्रिजों की रिपेयर कराने में कौन सी दिक्कत आ रही है, यह पता नहीं चल रहा है। सूरत की आम जनता से कार्पोरेशन के माध्यम से खर्च में जो हिस्सा है, वह रेलवे तंत्र वसूल चूकी है। सूरत कार्पोरेशन से खर्च का हिस्सा वसूलने के बाद भी रेलवे तंत्र यह कार्य शुरू करने में अक्षम रही है। आज भी रेलवे ओवर ब्रिज के नीचे से आते-जाते हुए कई सूरतवासियों को रोजाना रेलवे तंत्र की ओवर ब्रिज रिपेयर न करवाने की वजह से आधे रास्ते से पुन: अपने घर वापिस लौट कर कपड़े बदलने पड़ते हैं।

          मैं आपके माध्यम से माननीय ममता जी से मांग करती हूं कि सूरत के रेलवे ओवर ब्रिजों की तुंत मरम्मत करवाई जाए। यही हालत शहर के उत्राण रेलवे ब्रिज की है। उसकी भी रिपेयरिंग की जरूरत है। वह आवागमन के लिए बंद है। उस पर काम चल रहा है।

          महोदया, सूरत सोने की मूरत फिर से प्राप्त हो, उसमें रेलवे मंत्रालय अपना योगदान दे और ममता जी की ममता का थोड़ा हिस्सा सूरत की लघु भारती के रूप में बसने वाली जनता को भी मिले, यही अपेक्षा है।

                                                                                     

ओश्री प्रेमदास (इटावा): महोदया,रेलवे बजट पर चर्चा हो रही है । मैं आपके माध्यम से कहना चाहता हूं, जो रेलगाड़ी में सामान्य डिब्बे लगे होते हैं । उनकी संख्या बढ़ाई जाये जिससे गरीब व्यक्तियों को और अधिक सुविधा हो सके । जब मैं दिल्ली से इटावा जाता हूँ तो देखने को मिलता है सवारियां बहुत परेशान होती हैं। हमारे लोक सभा में इटावा स्टेशन पर जन साधारण गाड़ी रोकी जाये । इटावा स्टेशन केआस पास कई जिले लगते हैं जैसे भिन्ड, मैनपुरा, औरपा कन्नौज आदि इन जिलों के लोगों को आने जाने में अधिक से अधिक सुविधा मिले ।अप और डाउन की राजधानी रोकने का भी अनुरोध करता हूं इसके अलावा झींझक और कानपुर के बीच में एक स्टेशन पड़ता है । उस पर एक पसेंजर गाड़ी रोकी जावे । जो पैसिंजर गाड़ी इटावा से आगरा सुबह आती है । उसको दिवियापुर से आगरा तक चलायाजाये ।

         

·       Speech was laid on the Table श्री माणिकराव होडल्या गावित (नन्दुरबार): सभापति महोदया, मैं आपका बहुत आभारी हूं कि आपने मुझे वर्ष 2009-10 की रेलवे की अनुदान मांगों पर बोलने का अवसर दिया, इसके लिए मैं आपका धन्यवाद करता हूं और इसका समर्थन करता हूं। मैं सबसे पहले कुमारी ममता बनर्जी, जो रेल मंत्री हैं, उन्हें बहुत-बहुत बधाई देता हूं कि देश में जो लोग गरीबी रेखा के नीचे अपना गुजारा करते हैं, उन्हें सौ किलोमीटर की दूरी तक सिर्फ 25 रुपये में ‘इज्जत’पास दिया गया है। बजट में ऐसे और जो बहुत सारे प्रोवीजन किए गए हैं, मैं उसके लिए भी उन्हें धन्यवाद देता हूं। समय कम होने की वजह से मैं अपने क्षेत्र की ओर मंत्री महोदया का घ्यान आकर्षित कराना चाहता हूं।   वर्ष 2007-08में  उधना जलगांव रेल लाइन का दोहरीकरण करने की मंजूरी मिली थी, जिस पर करीबन 714 करोड़ रूपये की लागत आने वाली है। उसमें 70 करोड़ रुपये का बजट में प्रोविजन भी था, लेकिन वर्ष 2007-08 में खर्चा नहीं हुआ। अभी दोहरीकरण का काम शुरू हुआ है, लेकिन वह बहुत स्लो चल रहा है। यह रेल लाइन गुजरात और महाराष्ट्र दोनों राज्यों के आदिवासी इलाकों से गुजरती है। इस लाइन की लंबाई मात्र 306 किलोमीटर है। अगर 306 किलोमीटर लाइन का दोहरीकरण हो जायेगा, तो दोनों राज्यों के आदिवासी इलाकों का विकास हो सकेगा और जो उद्योगपति वहां रेलवे लाइन की सुविधा न होने के कारण आने को तैयार नहीं हैं, वे भी आयेंगे। इससे उस एरिया का विकास होगा।

 

          दूसरी बात यह है कि मनमाड-इंदौर वाया मालेगांव, धुले-शिरपुर-नरडाणा, शेंदवा लाइन की दूरी 350 कि.मी. है। यह लाइन भी महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश, इन दोनों राज्यों को जोड़ने वाली है। इस लाइन में 1501 करोड़ रुपये की लागत आने वाली है। महाराष्ट्र सरकार ने 50 परसेंट अपना शेयर देने के लिए बजट में प्रोविजन भी किया है। अगर यह रेल लाइन भी महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के आदिवासी इलाकों में से जाती है, इस ओर भी मैं माननीय मंत्री महोदया का ध्यान दिलाना चाहता हूं। इसके लिए महाराष्ट्र सरकार ने 50 परसेंट का अपना शेयर दिया है, रेलवे ने भी बजट में प्रावधान किया है, लेकिन उस पर अभी तक बजट प्रोविजन नहीं मिला है। इसलिए मैं उसके लिए बजट प्रोविजन की मांग करता हूं।

 

          मेरी तीसरी मांग पुणे-नासिक की है। पुणे-नासिक दोनों शहर विकसित हो रहे हैं, लेकिन पुणे से नासिक और नासिक से पुणे आने-जाने वाले लोगों को, जिसमें बिजनेसमैन आदि हैं, बहुत परेशानी होती है।  इस लाइन की मात्र 262 किलोमीटर की दूरी है, जिस पर एक हजार करोड़ रुपये की लागत आने वाली है। वर्ष2001में उसका सर्वे भी किया गया है। वर्ष 2009-10के बजट में प्रोविजन करने के लिए हमें आश्वासन मिला है। पुणे और नासिक रेल लाइन को ममता जी मंजूर करेंगी, ऐसी विनती मैं उनसे करता हूं।

         रेलवे हमारे देश का विकास करने वाली एक बहुत बड़ी इंडस्ट्री है, जो बहुत बढ़िया काम कर सकती है। इससे बहुत से गरीब लोगों, व्यापारियों को आने-जाने में फायदा हो सकता है। अभी हमारी सूरत-भुसावल लाइन, जो सिंगल लाइन है, वह बहुत पुरानी लाइन है। उस पर प्लेटफार्म बहुत नीचे लैवल पर है। इस पर बहुत खर्चा आने वाला नहीं है। मात्र दो-तीन लाख रुपये में एक प्लेटफार्म ऊंचा हो सकता है। बूढ़े लोगों और बाल-बच्चे वाली महिलाओं को उस प्लेटफार्म पर चढ़ने-उतरने में बहुत दिक्कत आती है। अगर यह कार्य हो गया, तो आपको उनसे बहुत दुआ मिलेगी। सूरत-भुसावल लाइन पर जितने भी लो लैवल के प्लेटफार्म हैं, उनकी ऊंचाई बढ़ाने के लिए मैं आपसे मांग करता हूं। जो बूढ़े लोग हैं, बाल-बच्चे वाली महिलाएं हैं, उनको उतरने-चढ़ने में तकलीफ हो रही है। इस कारण बहुत से छोटे-मोटे एक्सीडैंट भी होते हैं।...( व्यवधान)

कुमारी ममता बनर्जी :   ठीक है, हम कर देंगे।

श्री माणिकराव होडल्या गावित : उन प्लेटफार्म्स को ऊंचा करने से उन लोगों को आसानी होगी।

          सभापति महोदया, समय की कमी होने की वजह से मैं ज्यादा नहीं बोलना चाहता। लेकिन मैंने अपने क्षेत्र की थोड़ी बहुत बातें यहां रखी हैं। बाकी जो भी बातें हैं, उन्हें मैं ममता दीदी को लिखकर भेज दूंगा।

                                                                                               

श्रीमती मीना सिंह (आरा): महोदया, आपने मुझे रेलवे की अनुदान की अनुपूरक मांग पर बोलने का मौका दिया, इसके लिए आभार प्रकट करती हूं। मेरे दल के साथी श्री दिनेश चन्द्र यादव ने विस्तार से सभी बातें कह दी हैं, मैं उनकी बातों से स्वयं को संबद्ध करते हुए कुछ बातें अपने क्षेत्र के बारे में कहना चाहती हूं।

 

          मेरा क्षेत्र आरा पूर्व मध्य रेलवे के अंतर्गत आता है। आरा से सासाराम रेल खंड की लम्बाई105 किलोमीटर है। इस दूरी को तय करने में चार से छह घंटे का समय लगता है। रेल खंड पर करीब छह रेलवे स्टेशनों पर अनगिनत हाल्ट हैं। ट्रेनों के ठहराव स्थल को देखते हुए ऐसा प्रतीत होता है कि रेलवे द्वारा तय मानदंडों के अनुसार हाल्टों का निर्माण नहीं किया गया है, बल्कि पूर्व के रेल मंत्री के राजनीतिक फायदों के अनुसार किया गया है। मेरे क्षेत्र में कई स्थानों पर ट्रेन के ठहराव को लेकर आंदोलन चल रहा है।

 

          मेरा आपके माध्यम से मंत्री जी से आग्रह है कि अपने स्तर से इस रेल खंड की जांच करा कर जनहित एवं रेल हित में रेलों का ठहराव स्थल चयनित कराने की कृपा करें। मेरी एक मांग माननीय मंत्री जी से है कि आरा में पटना राजधानी या सम्पूर्ण क्रंति ट्रेन में से किसी एक ट्रेन का ठहराव कराने की कृपा करें तथा मेरे क्षेत्र में अनेकों फाटक हैं, जिन पर चौकीदार नहीं हैं। उन पर चौकीदारों का प्रबंध कराने की कृपा करें। मैं अंत में माननीय रेल मंत्री जी से आग्रह करूंगी कि बाबू कुंवर सिंह जी महान स्वतंत्रता सेनानी थे। उनकी याद में उनके जन्म स्थल आरा के रेलवे स्टेशन को आदर्श स्टेशन बनाया जाए।

 

          इन्हीं शब्दों के साथ मैं आपका आभार व्यक्त करते हुए अपनी बात समाप्त करती हूं।

 

SHRI KABINDRA PURKAYASTHA (SILCHAR): Madam Chairman, I would confine myself to the Supplementary Demands for Grants (Railways) and also the problems of my area.  It is found from the papers that the expenditure is mainly for execution of new projects and the projects which are named as national projects covering the whole country.

            Besides this, it is also found that the hon. Railway Minister is spending this amount for improvement of mainly diesel sheds, doubling of lines and several other measures which are given more importance. She has given a proposal to man the unmanned stations also.  Those things were actually neglected earlier. So, I am very happy that the Minister has taken up these issues for development.

            The hon. Railway Minister has also taken up all the projects of the North-East for consideration.  We shall be very happy if these funds are properly spent and the difficulties faced by the people of the North-East are solved.

            My constituency is Silchar which is just on the border of Bangladesh.  This area is geographically a segregated area. This area is covering Barak Valley which is part of Assam. The communication system there is totally disrupted.  Communication by rail, road and air is very bad there.

            In this area, we are in difficulty because there is only one railway line and that is also not running well.  Most part of the year, it remains closed. Now the line conversion is going on from Lumding to Silchar.  For this conversion, the foundation stone was laid in 1996 and was to be completed in 2007.  But now it is targeted to be completed in 2012.  The persons who are responsible for its construction say that there are terrorist activities, for obstruction of NC hills, they are not getting land, and that there is no road to carry the materials required for constructing the road. These are the reasons for which they are not able to do the work.  But I want to mention here that Tripura is also terrorist-infested.  But Tripura railway line was completed within the stipulated period.  So, why has this not happened in Assam? In this respect, I would request our hon. Railway Minister to complete this.  She is very active.  I hope she would see that, as decided or as declared by the Government that it would be completed in the year 2012, it is done and that it is not delayed further. This is the first request.  … (Interruptions)

            Second request is, I want that the Badarpur should be the railway division.  There has been the demand for several decades. People are agitating for this. So, Badarpur should be the centre of the Badarpur railway division, which will cater to the needs of the people of Tripura, Mizoram, Manipur and adjacent areas.  This also should be done. 

           Thirdly, in 1961, eleven persons have sacrificed their lives for the sake of their mother tongue, Bengali.  They all died of police firing in the Silchar railway station.  So, people of this area have been demanding that Silchar Station should be named as Basha Shahid station.  That was accepted  by the State Government also.  The State Government has also informed the Central Government that it has no objection if this is done.  The hon. Railway Minister is also of the opinion that it should be done.  She is ready to accept it.  But the Home Ministry is not giving “No Objection.” rather rejected the proposal.   So, I would request, through you, the hon. Railway Minister to take up the case and talk to the Home Ministry so that this is done. 

These are my demands. I hope the hon. Railway Minister will definitely look into these demands. 

 

SHRI KODIKUNNIL SURESH (MAVELIKKARA): Madam Chairman, I rise to support the Supplementary Demand for Grant (Railways) for 2009-10.  Our hon. Railway Minister has presented to the nation a pro-poor Budget under the able guidance of the UPA Chairperson, Madam Shrimati Sonia Gandhi, and under the laudable leadership of our beloved Prime Minister, Dr. Manmohan Singh.  It was greatly appreciated by all sections of our society.  The Government is providing better passenger amenities, tangible concessions to the common man, the students community and the women folk, and taking care of the priority areas, like cleanliness, quality of railway catering, safety and security and punctuality.  I sincerely believe that we have largely achieved whatever we had expected from her. She has set benchmark in her Budget as she has thought of an inclusive Budget, catering to the needs of all the sections of the society of our country.

            I also congratulate the hon. Minister of Railways for undertaking a special recruitment drive to fill up the vacancies of the Scheduled Castes and Scheduled Tribes and Physically Handicapped persons.  The hon. Minister has also given some focus on the Scheduled Castes and the Scheduled Tribes people in the Scheduled Caste and Scheduled Tribe areas in the country.  I welcome it.  At the same time, I would like to draw the attention of the hon. Minister of Railways that in railways for higher posts like DRMs, GMs, Executive Directors and Directors and members of the Railway Board, these posts are still untouchable for Scheduled Caste and Scheduled Tribe candidates.  It is a very serious matter.  So, whether it is the DRM’s post or the General Manager’s post, Scheduled Caste and Scheduled Tribe candidates are not getting any consideration. As far as Scheduled Caste and Scheduled Tribe candidates are concerned, they are being considered only for Group C and Group D posts and beyond that there is no other consideration for these communities.  So, I would like to request the hon. Minister of Railways to thoroughly examine as to why this is happening. 

            Madam, as you are aware, our President of India was from the Dalit community and our present Chief Justice of India also belongs to the Dalit community.  But as far as Railway Board is concerned, for the posts of Railway Board Chairman, members, Executive Directors, GM, Divisional Managers etc. Scheduled Caste and Scheduled Tribe candidates are there, but they are so far not considered. This is a great discrimination.  Therefore, I would strongly request the hon. Minister of Railways to consider this matter in a favourable way. 

            Madam, I would like to talk about a few of the issues concerning my State, Kerala.  My hon. Friend, Shri Mohammed E.T. Basheer, has mentioned about the Railway Zone. All States except Kerala got Railway Zones.  For example, in Tamil Nadu, there is a Zone; in Karnataka there is a zone; in Andhra Pradesh there is a Zone; in Gujarat there is a Zone and in Maharashtra, there is a Zone.  However, Kerala is still neglected so far as Railway Zone is concerned. 

            I would like to point out that income-wise, Kerala is the number one State and as far as the passenger amenities are concerned, Kerala is the number one State.  But as far as Railway Zone is concerned, Kerala is still neglected and it has been denied a Railway Zone.  Therefore, I would strongly request the hon. Minister of Railways that in her period, this Zone should be established in Kerala.  The Government of Kerala had several times requested the Ministry of Railways and the State Assembly had also passed a resolution to the Government of India to consider for this demand.  Therefore, I would request the hon. Minister of Railways to consider a Railway Zone in Kerala.… (Interruptions)

MADAM CHAIRMAN : You know that the time-limit was five minutes.  So, please conclude.

SHRI KODIKKUNNIL SURESH :  Madam, I have touched only one point. … (Interruptions)

         Regarding the Coach Factory, the previous UPA Government has announced about establishment of a Coach Factory.  We welcome it.  We are very committed to the Central Government. But, so far, it has not been established.  I would like to mention here that sufficient funds have not been allotted for it in the current Budget. Hon. Minister of State, Shri E. Ahamed is present here in the House.  He is always attending to our problems, MPs’ problems and Kerala State issues.   We are very happy to his presence in Kerala. … (Interruptions) Land issue has already been sorted out.  The State Government took the initiative and I think the land issue has already been solved.  So, as far as Coach Factory is concerned, sufficient fund has not been allotted.  That also needs to be considered. 

            Madam, there is another very important issue in respect of doubling work.   The Doubling Work from Shoranur-Mangalore has already been mentioned here. … (Interruptions)

MADAM CHAIRMAN: Shri Suresh, please be brief.  You should mention your last point.

SHRI KODIKKUNNIL SURESH :  I am coming to my constituency matter.  There are two or three points in my constituency. … (Interruptions)

MADAM CHAIRMAN: You came very late. You should have started with your own constituency problems.

SHRI KODIKKUNNIL SURESH :  Madam, I am a very senior MP. 

 

17.00 hrs. So, I am now coming to my constituency-related issues.… (Interruptions)

            I am now coming to the doubling work from Kayamkulam to Ernakulam via Chengannur-Kottayam and the doubling work from Kayamkulam to Ernakulam via Alappuzha. These two doubling works are very important. So, I would request the hon. Railway Minister to allocate sufficient funds and complete these doubling works at the earliest possible time.

            Regarding new railway lines, there was a very old proposal which is about Chengannur-Adoor-Kottarakara-Thiruvananthapuram and also Chengannur to Sabarimala. For these two railway lines,  survey work has been conducted years back but, so far, no sanction has been given. So, I would humbly request the hon. Minister to consider these  two lines also.… (Interruptions)

            Coming to the world-class railway station, I would like to bring to the kind notice of the hon. Minister that Chengannur was announced by the hon. Railway Minister as the gateway of Sabarimala. So, that railway station should be declared as a world-class railway station. Also, about the  stoppage of some trains, I have already mentioned to the hon. Minister. I hope the hon. Minister will kindly consider these points.

                                                                                                             

*SHRI A. GANESHAMURTHI (ERODE): Madam Chairperson, I rise to participate in the debate on the Supplementary Demands for Grants (Railways) for the year 2009-10.

 

17.03 hrs.                                                 ( Shri  P.C. Chacko  in the Chair)             I would like to point out to an announcement made in the Railway Budget prior to last year’s Budget about the introduction of a new train between Erode and Shencottah. This train, which would greatly benefit the traveling public, is yet to be introduced and continues to remain as a mere announcement. Hence, I urge upon the Railway Minister to take steps to introduce this new train at the earliest.

            A new railway line between Erode and Palani has to be taken up and completed fast with adequate allocation of funds for the same.

At this juncture, I would like to point out an important shrine of all the trimurtis, Lord Shiva, Lord Vishnu and Lord Brahma on the banks of River Cauvery in Kodumudi which is situated in my constituency. When I took part in the Railway Budget Discussion, I had already pointed out the need to go in for multifunctional complexes in pilgrim centres like Kodumudi. I would like to emphasize my request again to construct a MFC at Kodumudi Railway Station. I urge upon the Minister to look into this and issue suitable orders.

Kodumudi draws pilgrims from several parts of the country. Very few trains stop at Kodumudi Railway Station. Pilgrims from other places have to take the trouble of alighting either at Erode or Karur and are forced to travel by bus to reach Kodumudi. Hence, I urge upon the Railway Minister to issue suitable orders         * English translation of the speech originally delivered in Tamil to provide stoppage to all the trains passing by Kodumudi. As of now, the Southern Railway officials say that advance reservation to Kodumudi is less in number. Unless and otherwise there is a stoppage at Kodumudi, how can there be advance reservations to Kodumudi as a destination? Hence, I request the Railway Minister to issue suitable orders to Southern Railway officials to look into this.

The Janshatabti Train No. 2083/2084 between Coimbatore and Mayiladuthurai is very popular and mostly running full. In order to benefit the increasing number of passengers, few more coaches can be added to this train. Apart from that, simultaneously originating arrangement of operating a train both from Coimbatore and Mayiladuthurai will doubly benefit the traveling public and the disappointment of not able to get the reservation in advance can be reduced.

Amirtha Express (Train No. 6344/6345) running between Thiruvananthapuram and Palakkad may kindly be extended up to Erode.

Hon. Railway Minister made an announcement in the Budget that priority would be given to enhance the standard and quality of food supplied in the trains. Now, there are certain visible changes. Railway has taken up on itself the supply of food taking it over from the lessees. Indian Railway Catering and Tourism Corporation (IRCTC) will itself be running the catering services taking it over from the private parties. As a result of this, the Pantry Cars that were preparing food themselves have been made to depend on the Base Kitchens and only picked-up food is served to the traveling public. So passengers have to wait till they reach stations with Base Kitchens to get their foods. The quality and taste becomes a casualty in the picked-up food. When private lessees were operating the catering services, there was scope for rectification. Due to competition, they prefer to ensure quality. Now, the food that is served is insipid comparatively private lessees take care of the passengers needs much better than IRCTC. As of now, the revenue earned from this arm of the Railways is dwindling. It is reported that sales of food in Train No. 2625/2626 has fallen drastically. Shortage of Pantry Cars must also be addressed.

There is a railway line between Erode Sastri Nagar and Chennimalai Road and the level crossing there remains closed at least for 12 hours a day because everyday about 110 trains pass through that level crossing. So, LC No. 124, which links Chennimalai Road with Sastri Nagar must be provided with Road Over Bridge which may not cost much to the Railways, as the railway line, by itself, is running about 30 feet below ground level. Hence, I urge upon the Railways to go in for Road Over Bridge there which will greatly benefit about 30,000 people who live in and around Sastri Nagar. This will also become a new by-pass the already congested Erode Town. So I urge upon the Minister to look into this on an urgent basis.

The daily wage earners and others working in the knitting units of Tiruppur, the knitting town, who have to travel everyday from Erode are on the increase. They are all greatly benefited by the Izzat Scheme announced by the hon. Railway Minister in her Budget this year, as they are able to get the Season Tickets at an affordable price. At least about 5,000 daily commuters are there between Coimbatore and Tiruppur. Hence, I urge upon the Railways to run an EMU between these two industrial towns to overcome congestion and greatly benefit the public.

I would like to point out that the Railway Schools in Erode and other towns are following Anglo-Indian Certificate Syllabus which needs to be changed to adopt to the uniform educational pattern that is prevalent in the State and the country. Hence, I urge upon the Railways to switch over either to the State Board pattern or CBSE pattern of education.

I also urge upon the Railways to look into the needs of the ever increasing number of rail passengers at Erode Junction. Hence there is a need to go in for two more platforms. Expecting the Railways to attend to this need and meet the demands of the rail traveling public, let my conclude.

*SHRI RAMEN DEKA (MANGALDOI) : Sir, before seeking supplementary grant, Ministry of Railways should analyse, the progress of the projects announced earlier.  I come from Assam a backward state.  Assam has the oldest Rail Line in the country, which has been established during British Era.  But Railways net works covered 2,284 (Two thousand two hundred eighty four) kms only. The percentage of growth is minimum in comparison to other states.  The Bogeebeel Project announced a decade ago but the progress is in slow pace.  It needs urgent attention to complete the Project.  Gauge conversion is not taking place in all routes.  Assam stands geographically in a strategic point, with international Borders. Railways have to play an important role in communication system in general and in particular Defence point of view.  Rangia to Mokukcheleng is a strategic line.  Gauge conversion has been announced already. This project should be completed in a definite time from the defence point of view. Double line connections from rest of the country as well as double track in rail map of Assam should be done on priority for better communication in Assam and N.E.  The unmanned railway gates should be converted into manual gates immediately to avoid accidents and loss of human lives.

To avoid traffic congestion in the interest of the public over bridges near Changsari (Chaukigate), Rangia and Nalbari are most essential as rail lines passes through National Highways.  I demand foot bridges in Nalbari and Rangia station in the interest of the passengers.

The conditions of Railway station in Assam are not up to the mark.  Rail Ministry should take up immediate steps to renovate the unhygienic stations in the interest of the passengers.

Sir,  through you I urge upon the Hon’ble Railway Minister to give special attention to redress these problems.

*श्रीमती जयश्रीबेन पटेल (महेसाणा)ः महोदय, रेलवे की परियोजनाओं को केवल "आर्थिक व्यावहारिकता" के पैमाने पर ही तौला जाए या फिर इन्हें "सामाजिक दृ­िटकोण" के पैमाने से भी देखा जाए? क्या विकास के लाभ केवल कुछ सुविधा संपन्न लोगों तक ही सीमित रखे जाएं और हमारे देश की दूर-दराज और पिछड़े इलाकों में रहने वाली अधिकांश जनसंख्या को इससे वंचित रखा जाए? हो सकता है कि ये परियोजनाएं आर्थिक पैमाने पर खरी न उतरती हों, परन्तु फिर भी वे पिछड़ेपन और गरीबी की मार झेलते क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए आवश्यक है, उनको तो इन परियोजनाओं की और भी अधिक जरूरत है।

 

          उसी आधार पर मैं मेरे क्षेत्र में जो गरीब व पिछड़ेपन की मार झेलते हैं उनको विकास की पटरी पर लाने के लिए रेल की नई पटरियां बिछाई जाएं। जैसे कि मेहसाना-समीहारीज मेहसाना से बेचराजी विरमगाम।

 

          गेज कनवर्जन के लिए काटन सिटी कड़ी-कटोसाण -बेचराजी को लिया जाए।

          मेरे संसदीय निर्वाचन क्षेत्र में आने वाला ऊँझा जिला मेहसाना एशिया की सबसे बड़ी स्पाइस मंडी है। वहां उमिया माता जी का शक्तिपीठ है जो विश्व के समग्र पाटीदारों की कुलदेवी का बड़ा श्रद्धास्थल है।

 

          पास में इनाथा जो ऊँझा के नजदीक है वहां मुसलमानों का बड़ा श्रद्धास्थल मीरोंदातार के नाम से सुप्रसिद्ध है।

 

          उपरोक्त कारणों से यहां ऊìझा में बड़े-बड़े व्यापारियों, श्रद्धालुओं का आवागमन पूरे भारत भर में निरंतर होता रहता है, लेकिन दुर्भाग्य से रेल यातायात स्टॉपेज सुविधाएं अपर्याप्त है। सभी बड़ी रेलगाड़ियों का स्टॉपेज न होने की वजह से उन्हें बहुत कठिनाइयाँ झेलनी पड़ती है।

         

          वहां यू.टी.एस. और पी.आर.एस. वेटिंग रूम इत्यादि की भी सुविधा सेवा उपलब्ध की जानी जरूरी है और मेहसाना जो मिल्कसिटी, ऑयलसिटी, जनता को आने जाने में गरीबरथ और त्रिवेन्द्रमजैसी रेल गाड़ियों के स्टॉपेज नहीं होने की वजह से दिक्कतें झेलनी पड़ती है।

 

          मैं रेलमंत्री से अनुरोध विनती करती हूं कि इस ऊँझा और मेहसाना में रेलगाड़ियों के स्टॉपेज के बारे में उचित निर्णय लिये जाएं और पर्याप्त रेल सुविधा का इंतजाम करें।

 

MR. CHAIRMAN : Hon. Members, I want to make an announcement. There are 30 speakers more in the list. All the parties have exhausted the time allotted to them. The Minister will be replying to the debate at 6 o’clock. So, I request all the speakers to finish their speeches within 2 minutes. Those Members who want to lay their speeches on the Table of the House can do so now.

श्री ए.टी. नाना पाटील (जलगांव): सभापति महोदय, आपने मुझे रेल मंत्रालय की अनुपूरक मांगों पर बोलने का मौका दिया, उसके लिये आपका धन्यवाद।

          सभापति जी, मैं महाराष्ट्र के जलगांव संसदीय क्षेत्र से आता हूं। पिछले कई सालों से जलगांव शहर की जनता की रेल संबंधी कुछ मांगे हैं। जलगांव भारत में केला उत्पादन में पहले स्थान पर आता है। जलगांव दाल उत्पादन में भी बहुत आगे है और इसका एक्पोर्ट किया जाता है। इस जलगांव शहरसे बहुतसी गाड़ियों के स्टॉपेज नहीं मिल रहे हैं। मैं उन गाड़ियों के बारे में बताना चाहूंगा कि गाड़ी नं. 2880, 2859 मुम्बई हवड़ा एक्सप्रेस का भुसावल में स्टॉपेज है। दक्षिण भारत और उत्तर महाराष्ट्र के कई लोग अपने काम-काज के लिये जलगांव आते हैं लेकिन लोगों को भुसावल जाकर गाड़ी पकड़नी पड़ती है। मेरी मांग है कि इस गाड़ी का स्टापेज जलगांव और चालीसगांव में दिया जाये तो जनता को सुविधा मिलेगी। गाड़ी नं. 2533/2534 पुष्पक एक्सप्रेस जो मुम्बई और लखनऊ के बीच में चलती है, जनता की मांग है कि इस गाड़ी का स्टॉपेज भी जलगांव और चालीसगांव में दिया जाये ताकि लोगों को सुविधा मिल सकेगी। जलगांव और चालीसगांव से 15-20 हजार रोजाना पैसेंजर्स आते-जाते हैं। यदि इस गाड़ी का स्टॉपेज कर दिया जाये तो यात्रियों को राहत मिल सकती है। इसके लिए मैं आपको महत्वपूर्ण और अगली गाड़ी अमृतसर-नादेड़ एक्सप्रेस 2716और 2717 सच्चखंड एक्सप्रेस गाड़ी के लिए भी अगर जलगांव स्टापेज मिले तो इससे बहुत सारी सुविधाएं हो सकती हैं। वैसे ही जलगांव शहर के अंदर जो जलगांव-उदना रेलवे मार्ग है, इसके दोहरीकरण पर केवल 70 करोड़ रूपये का आज तक खर्चा हुआ है। यहां बहुत ढ़िलाई से काम चल रहा है। आज की तारीख में वह पूरा काम बंद है। इस मार्ग पर काम तेजी से शुरू होना चाहिए। उदना-जलगांव-शोलापुर मार्ग का जो सर्वेक्षण होने वाला था, इसका सर्वेक्षण पीछे शुरू हुआ था, बीच में कुछ समय से वह सर्वेक्षण बंद है। वह सर्वेक्षण अगर हुआ, जलगांव-शोलापुर सर्वेक्षण हुआ। जलगांव-सूरत का दोहरीकरण बहुत जरूरी है। वैसे ही अगर जलगांव शहर के अंदर, जलगांव बड़ा शहर है, आज उसकी जनसंख्या 7-8लाख के करीब है। जलगांव शहर के अंदर रेलवे का एक ब्रिज है और उस ब्रिज का हर एक घंटे के अंदर 15 से20मिनट तक गेट बंद रहता है। उसकी वजह से आने-जाने वाले सारे यात्रियों को असुविधा होती है। उसके लिए कारपोरेशन ने 20लाख रूपए सेंट्रल गवर्नमेंट, रेलवे को फंड भी जमा किया हुआ है, लेकिन आज तक उसके ऊपर कुछ कार्यवाही नहीं हुई है।

 

          महोदय, अगर वह ओवरब्रिज हो जाए तो इससे शहर के लिए बहुत सुविधा हो जाएगी। मैं आपके माध्यम से मंत्री महोदया से निवेदन करूंगा, मैंने पहले भी आपसे मिलकर उसके लिए खत दिए हुए हैं, लेकिन उसका अभी तक कुछ नहीं हुआ है। अगर आप इस समय मेरे निर्वाचन क्षेत्र में ये सुविधाएं देंगी तो इससे सारी जनता को अच्छी सुविधाएं मिल पाएंगी। यही मैं आपसे निवेदन करता हूं।

   

*योगी आदित्यनाथ (गोरखपुर): यू.पी.ए. के नेतृत्व में नई सरकार गठित होने के बाद जुलाई, 2009 में इस सरकार ने रेलवे का बजट इस सदन में प्रस्तुत किया था और उस पर इसी सदन में विस्तार से चर्चा हुई थी । आज हम इस सदन में रेलवे की अनुदान मांगों पर पुनः चर्चा कर रहे हैं और सम्भवतः किसी को भी इसमें आपत्ति नहीं होगी । जुलाई में रेल बजट पर चर्चा करते समय हम लोगों ने जो चिन्ता सुरक्षा और संरक्षा के सम्बन्ध में व्यक्त की थी आज वह लगभग प्रतिदिन देश के किसी न किसी कोने में हो रही छोटी-बड़ी रेल दुर्घटना के रूप में सामने आ रही है। जब तक भारतीय रेल जैसा विश्व का सबसे बड़ा रेल नेटवर्क राजनीतिक संकीर्णताओं एवं पूर्वाग्रहों से मुक्त नहीं होगा तब तक सुरक्षा और संरक्षा के महत्वपूर्ण प्रश्न पर देश की चिंता को कम नहीं किया जा सकता । रेल बजट में मा. रेल मंत्री ने भारतीय रेल को विश्वस्तरीय बनाने तथा इसकी सामाजिक प्रतिबद्धताओं की ओर सदन का और देश का ध्यान विशेष रूप से आकर्षित किया था लेकिन क्या सचमुच इन 6 महीनों के अन्दर यह कहीं परिलक्षित हुआ ? भारतीय रेल में सुरक्षा और संरक्षा के प्रश्न पर जहां आम भारतीय को सशंकित किया है तो वहीं अन्दर तक घुसपैठ कर चुके भ्रष्टाचार ने भारतीय रेल की प्रगति को बाधित- सा कर दिया है । आखिर कब तक राजनीतिक लाभ और हानि की दृष्टि से मंत्रालय भारतीय रेल को हांकता रहेगा? भारतीय रेलवे में व्याप्त भ्रष्टाचार के साथ-साथ सुरक्षा और संरक्षा के मुद्दे की अनदेखी करके हम भारतीय रेल को विश्वस्तरीय नहीं बना सकते । क्या रेल मंत्री इस सदन को यह बताएंगी कि जो घोषणाएं उन्होंने रेल बजट में की थी इन 6 महीनों में ये घोषणाएं कितनी क्रियान्वित हुई? सस्ती लोकप्रियता हासिल करने के लिए भारतीय रेल के साथ हो रहे खतरनाक खेल को हमे समाप्त करना होगा । एन.डी.ए. सरकार के समय विभिन्न रेलगाड़ियों में पड़ रही डकैतियों तथा हो रही दुर्घटनाओं को ध्यान में रखकर इस पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए एक निधि बनाई गई थी जिसका उपयोग रेलवे ट्रेक के आधुनिकीकरण, जर्जर पुलों की मरम्मत, सिग्नल सिस्टम के आधुनिकीकरण, रेलवे क्रासिंग को इन्टर लाकिंग सिस्टम से जोड़ने आदि में किया जाना था लेकिन एन.डी.ए सरकार जाने के बाद इसे उपेक्षित कर दिया गया । जो भी रेल मंत्री आता है वह अपने राजनीतिक लाभ और हानि की दृष्टि से योजनाएं स्वीकृत करता है । राष्ट्रीय सुरक्षा, क्षेत्रीय आर्थिक विषमता को दूर करने तथा क्षेत्र विशेष की आवश्यकता को ध्यान में रखकर योजनाएं बनती और राजनीतिक पूर्वाग्रहों के तहत उन्हें रोका न होता तो सम्भवतः रु.1.50 लाख करोड़ की योजनाएं आज रेलवे की लम्बित न होती ।

   

मा. रेल मंत्री ने बजट भाषण में लम्बी दूरी की गाड़ियों में चिकित्सक तथा आर.पी.एफ में महिला कमांडो तैनात करने की बात की थी । क्या ये घोषणाएं पूरी हुई? रेलवे की फालतू भूमि का वाणिज्य उपयोग करने के सम्बन्ध में क्या हुआ? भारतीय रेल में हो रहे माफिया तत्वों की घुसपैठ पर कितना शिकंजा कसा गया? रेलगाड़ी समय सारिणी के अनुसार चले, रेलवे प्लेटफार्म की साफ-सफाई आदि के संबंध में की गई घोषणाएं कितनी पूरी हुई हैं? अगर पूर्व की घोषणाएं पूरी नहीं हुई हैं और उनकी प्रगति भी नगण्य हैं तो हम सहज ही भारतीय रेल के भविष्य का अंदाजा लगा सकते हैं । अनुपूरक मांगों में बिना चौकीदार के समपार फाटकों पर पूरे देश के अन्दर चौकीदार तैनात करने की पहल स्वागत योग्य है । प्रतिवर्ष सैकड़ों मौतें बिना चौकीदार के समपार फाटकों में ही रेल दुर्घटनाओं से ही होती है । अगर यह कार्य समय पर और ईमानदारी से हुआ तो अनेक मानव जिन्दगियां बच पाएंगी । रेलवे में व्याप्त भ्रष्टाचार तथा निर्माण कार्यों में माफिया तथा अपराधी तत्वों की घुसपैठ भी रेल दुर्घटनाओं का कारण बनती जा रही है । इस पर रेल मंत्रालय को विशेष ध्यान देना पड़ेगा । भारतीय रेल आम जनता की सवारी है । जनता के प्रति जवाबदेह सरकार की यह जिम्मेदारी बनती है कि वह उन्हें सुरक्षित एवं सुविधाजनक रेल यात्रा कराने की व्यवस्था करे। राजनीतिक पूर्वाग्रह से अगर रेल मंत्रालय कार्य करेगा तो उससे न तो अपनी सामाजिक प्रतिबद्धताओं को पूरा कर पाएगा और न ही इसे विश्वस्तरीय सेवा ही बना पाएगा । इसलिए मेरा सुझाव है कि राजस्व की दृष्टि से लाभदायक तथा जनहित से जुड़ी हुई परियोजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने की व्यवस्था होनी चाहिए । रेल बजट के दौरान भी मैने पूर्वोत्तर रेलवे, गोरखपुर से जुड़ी हुई समस्याओं को सदन में रखा था । गोरखपुर पूर्वोत्तर रेलवे का मुख्यालय होने के साथ ही पूर्वी उ.प्र., पश्चिमोत्तर बिहार तथा नेपाल के एक बहुत बड़े भूभाग की लगभग 5 करोड़ की आबादी की शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार एवं रोजगार का केन्द्र भी है । विश्वविद्यालय, गोरखा रेजिमेन्ट का मुख्यालय तथा एयर फोर्स स्टेशन भी गोरखपुर में स्थित हैं । राष्ट्रीय सुरक्षा एवं राजस्व की दृष्टि से लाभदायक तथा जनहित से जुड़ी हुई पूर्वोत्तर रेलवे की कुछ महत्वपूर्ण समस्याओं की ओर मैं मा. रेल मंत्री का ध्यान दिलाना चाहूंगा और मुझे विश्वास है कि वह इस पर कार्यवाही करेंगी।

          गोरखपुर-लखनऊ रेल मार्ग के गोरखपुर-गोण्डा के बीच रेलवे लाइन के दोहरीकरण का कार्य वर्तमान में चल रहा है । इस रेल मार्ग के गोरखपुर-सहजनवां के बीच डोमिनगढ के पास रोहिन नदी पर तथा उसके बगल में एक अन्य सेतु का निर्माण हो रहा है इसी प्रकार राप्ती नदी पर गाहासाड में भी एक रेलवे सेतु का निर्माण हो रहा है । डोमिनगढ में पुराने दोनो रेलवे सेतुओं पर पैदल यात्रियों तथा हल्के वाहनों के लिए फुटपाथ ब्रिज बने थे लेकिन दोहरीकरण में निर्माणाधीन नए सेतु में यह व्यवस्था नहीं दी जा रही है। यही नहीं दोहरीकरण कार्य में डोमिनगढ से लेकर मोहम्दपुर माफी तक दर्जनो गांवो के आवागमन के मार्ग को रेलवे ने बन्द कर दिया है जिससे लोगों में भारी आक्रोश है । डोमिनगढ स्थित रेलवे के दोनो निर्माणाधीन सेतु पर तथा राप्ती नदी के गाहासाड में निर्माणाधीन सेतु पर फुटपाथ ब्रिज बनाया जाए साथ ही डोमिनगढ से जगतबेला तक तथा जगतबेला से मोहम्दपुर माफी तक सड़क का निर्माण करके आवागमन को व्यवस्थित किया जाए ।

          गुवाहाटी-मुजफ्फरपुर-दिल्ली के बीच प्रस्तावित राजधानी एक्सप्रेस को वाया गोरखपुर करने के सम्बन्ध में । गोरखपुर-नई दिल्ली के बीच चलने वाली रेलगाड़ियों में भारी भीड़ को देखते हुए प्रस्तावित इस राजधानी एक्स. को वाया गोरखपुर चलाना आवश्यक है ।

          गोरखपुर से कोलकाता के बीच एक सुपरफास्ट ट्रेन चलाई जाए ।

          गोरखपुर-अयोध्या-इलाहाबादके बीच इन्टर सिटी ट्रेन प्रारभ्भ की जाए ।

          गोरखपुर-नौतनवां-गोण्डा रेल खण्ड का आमान परिवर्तनः- इस खण्ड पर गोरखपुर-नौतनवां के बीच आमान परिवर्तन का कार्य पूरा हो चुका है लेकिन आनन्द नगर-गोण्डा के बीच आमान परिवर्तन का कार्य पूर्ण न होने के कारण रेल यातायात बाधित है। सामरिक दृष्टि से यह अत्यन्त महत्वपूर्ण है इसलिए इसे अविलम्ब पूर्ण किया जाए।

          यातायात के निर्बाध संचालन के लिए तथा राष्ट्रीय राजस्व की बचत के लिए भी गोरखपुर में महत्वपूर्ण रेलवे क्रासिंग पर उपरिगामी सेतु बनाए जाए, इस सम्बन्ध में मेरे प्रस्ताव इस प्रकार हैं-

          एन.एच.28 के नंदानगर-कूड़ाघाट रेलवे क्रासिंग पर उपरिगामी सेतु बनाया जाए।

          नकहा रेलवे क्रासिंग पर उपरिगामी सेतु बनाया जाए।

          हड़हवा फाटक रेलवे क्रासिंग पर उपरिगामी सेतु बनाया जाए।

          पिपराइच रेलवे क्रासिंग पर उपरिगामी सेतु बनाया जाए।

          पीपीगंज रेलवे क्रासिंग पर उपरिगामी सेतु बनाया जाए।

          मानीराम रेलवे क्रासिंग पर उपरिगामी सेतु बनाया जाए।

          कैम्पीयरगंज रेलवे क्रासिंग पर उपरिगामी सेतु बनाया जाए।

          सहजनवां रेलवे क्रासिंग पर उपरिगामी सेतु बनाया जाए।

          गोरखपुर जनपद में नकहां, कैन्ट, डोमिनगढ, मानीराम, पीपीगंज, कैम्पीयरगंज, पिपराइच तथा सहजनवां का उच्चीकरण किया जाए तथा पैसेन्जर एवं एक्स. गाड़ियों का ठहराव इन स्टेशनों पर किया जाए ।

          गोरखपुर-बांसगांव-दोहरीघाट को रेल लाईन से जोड़ा जाए ।

          आनन्द नगर-दोहरीघाट-घुघली तक रेल लाईन बिछाई जाए ।

          गोरखपुर-देहरादून-हरिद्वार राप्ती गंगा एक्स. को प्रतिदिन किया जाए ।

          गोरखधाम एक्स. में पैन्ट्रीकार की सुविधा देने के साथ ही दिल्ली से गोरखपुर के लिए प्रस्थान का समय सांयकाल 6 बजे किया जाए ।

          सप्तक्रान्ति सुपरफास्ट एक्स. ट्रेन की समय सारिणी का संशोधन करके दिल्ली से गोरखपुर प्रस्थान सांयकाल5 बजे किया जाए और गोरखपुर से दिल्ली प्रस्थान का समय भी सांयकाल 5 बजे किया जाए ।

          ये सभी मांगे व्यापक जनहित से जुड़ी हुई है । कृपया इन पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जाए । इसके साथ ही मैं रेलवे 2009-10 अनुदान की पूरक मांगों का समर्थन भी करता हूं ।

 

*श्री हर्ष वर्धन (महाराजगंज, उ.प्र.): महोदय, मैं मंत्री जी द्वारा रखी गयी अनुदान मांगों का समर्थन करता हूं। पूर्वोत्तर रेलवे के अंतर्गत आनन्द नगर से घुघली स्टेशन तक नयी रेल लाइन का प्रारंभिक सर्वे वर्ष 1998में हो चुका है। आर ओ आर धनात्मक है और स्वयं रेलवे ने माना है कि यह रेल लाइन मुजफ्फरपुर से घुघली, आनन्दनगर होकर गोण्डा तक वैकल्पिक मार्ग प्रदान करेगी, जिससे मुजफ्फरपुर-गोरखपुर-गोण्डा मुख्य मार्ग पर कंजेशन समाप्त होगा। नेपाल से सटे तराई क्षेत्र का विकास होगा। जनपद महराजगंज का मुख्यालय रेल लाइन से जुड़ जाएगा तथा क्षेत्र का सर्वांगीण विकास होगा। ऐसी दशा में उपरोक्त रेल लाइन का बिछाया जाना जनहित एवं देशहित में अपरिहार्य है।

          महोदय, पूर्वोत्तर रेलवे के अधिकारियों ने दिसंबर 2008के अंतिम सप्ताह में तीन माह हेतु गोरखपुर-नौतनवां रेल मार्ग पर रेल यातायात आमान परिवर्तन के लिए स्थगित किया परंतु आमान परिवर्तन का कार्य लगभग 10माह में पूरा हुआ तथा 14 अक्टूबर2009को रेल संचालन प्रारंभ हुआ। तीन माह के स्थान पर 10 माह में आमान परिवर्तन उत्तरदायी अधिकारी की निष्क्रियता एवं गलत नियोजन का परिणाम है। जिसके चलते लाखों लोगों को असहनीय परेशानी उठानी पड़ी। ऐसी दशा में आमान परिवर्तन में असामान्य विलंब हेतु दोषियों को दंडित किया जाना न्याय के हित में आवश्यक है।

          महोदय, आजादी के 62 वर्ष पश्चात भी देश के रेल स्टेशनों का नाम अंग्रेज शासकों के नाम पर बने रहना, राष्ट्रीय शर्म का कारण है। मेरा मंत्री महोदया से अनुरोध है कि इस मामले में राज्य सरकारों से सम्पर्क कर इसमें तत्काल हस्तक्षेप करते हुए कार्यवाही करें। मेरे क्षेत्र अंतर्गत पूर्वोत्तर रेलवे के पीपीगंज जो कि पेपे के नाम पर है, कम्पियरगंज जो कि कम्पियर के नाम पर है तथा बृजमनगंज जो कि बृजमैन के नाम पर है, का नाम परिवर्तन सुनिश्चित किया जाए।

          महोदय, मैंने मंत्री जी का ध्यान सप्तक्रंति ट्रेन2555एवं 2556 के सिसवां एवं कप्तानगंज स्टेशनों पर ठहराव हेतु आकर्षित किया है। मुजफ्फरपुर से प्रारंभ होकर चलने वाली सप्तक्रंति ट्रेन उत्तर प्रदेश में प्रवेश के पूर्व बिहार में छह स्थानों पर रूकती है, जिसमें छोटे-छोटे स्टेशन हैं। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर स्टेशन पहुंचने के पूर्व सप्तक्रंति जनपद महराजगंज एवं कुशीनगर से होकर गुजरती है, जो उत्तर प्रदेश के सुदूर पूर्व के नेपाल से सटे जनपद हैं। ऐसी दशा में महराजगंज जनपद के सिसवां एवं कुशीनगर जनपद के कप्तानगंज स्टेशन पर सप्तक्रंति ट्रेन का ठहराव अविलंब प्रारंभ किया जाए।

   

* Spech was laid on the Table           महोदय, पूर्वोत्तर रेलवे में वर्ष 2006-07 एवं वर्ष 2008-09 में तत्कालीन महाप्रबंधक द्वारा डी कैटेगरी में की गयी हजारों नियुक्तियों के दोषी अधिकारियों को दंडित किया जाए। पूर्वोत्तर रेलवे का नौतनवां स्टेशन पड़ोसी देश नेपाल का प्रवेश द्वार है। गोरखपुर से नौतनवां के आमान परिवर्तन के बाद नौतनवां से दिल्ली, मुंबई एवं कलकत्ता हेतु ट्रेनों का संचालन प्रारंभ होना चाहिए। वर्तमान में गोरखपुर से प्रारंभ होने वाली गोरखधाम, कुशीनगर एवं मौर्या एक्सप्रेस ट्रेनों का संचालन नौतनवां से प्रारंभ कराये जाने से गोरखपुर स्टेशन पर कंजेशन समाप्त होगा तथा नेपाल से आने वाले लाखों पर्यटकों एवं यात्रियों को सुविधा मिलेगी।

   

चौधरी लाल सिंह (उधमपुर):  महोदय, मैं मैडम के एप्रोप्रिएशन बिल के समर्थन में बोलने के लिए खड़ा हुआ हूं। मैं कहना चाहता हूं कि समय की बहुत कमी है, मैंने देखा है, लेकिन मैं कुछ मांगे रखना चाहूंगा। मैं कहना चाहूंगा और मैडम भी जानती हैं कि हमारी स्टेट जम्मू-कश्मीर, हिमाचल और पंजाब का एरिया आता है। आपने देखा कि एक डीआरएम ऑफिस वर्ष 1926 में फिरोजपुर में बना था। अब हिसाब लगाइए कि अगर कभी जम्मू की तरफ से फिरोजपुर जाएं तो रास्ते में डीआरएम ऑफिस भी आएंगे और जोन भी आएंगे, लेकिन हमें वहां से निकलकर कार्नर की तरफ जाना पड़ेगा। उस समय हमारे पास रेलवे लाइन ही नहीं थी। उसके बाद हमारी सरकार ने और इससे पहले भी, बारामुला से डीआरएम ऑफिस की कम से कम दूरी एक हजार किलोमीटर है और हमारे जम्मू से 500 किलोमीटर है। यह क्या इंसाफ है? आपने जोन बनाते-बनाते ढेर लगा दिया, डीआरएम ऑफिस भी बन गये, लेकिन हमारे यहां एक छोटा सा डीआरएम ऑफिस नहीं बन रहा है। इतनी कंस्ट्रक्शन लगी हुई है, इतना काम चल रहा है और हजारों कर्मचारी वहां काम कर रहे हैं। छोटे से टेंडर के लिए हजारों किलोमीटर का डिस्टेंस हैं, एक कागज देने के लिए डिस्टेंस। मेरी जनाब से विनती है कि यह जम्मू-कश्मीर स्टेट के लिए बहुत इंसाफ होगा कि अगर आप इसे देने का काम करें। मैं कई बार कह चुका हूं, अगर मेरे कहने के बाद और चीजें बन जाती हैं तो हमारी बात यहां न मानी जाए, तो मुझे इस बात का दुख है। साथ में आप देखेंगे कि अभी तक कोई भी सुपर फास्ट ट्रेन जम्मू नहीं जाती है। यह क्या है? ट्रेनें पठानकोट में रूक जाती है। इसके साथ-साथ आप देखें कि घोषणाएं होती रहती हैं, यह ध्यान में रखा जाए कि कोई मंत्री रहें, कोई मंत्री आये या जाए, घोषणा कर दी जाए। जब माननीय भारत के प्रधानमंत्री उस फंक्शन में हों, उधमपुर में जब ट्रेन चलायी जाए और वहां घोषणा की जाए कि स्लीपर फैक्ट्री उधमपुर में बनायी जाएगी, तो वह क्यों नहीं बनी? उसके साथ ही कहा गया कि रेलवे कोच फैक्ट्री कठुआ में होगी, वह क्यों नहीं बनी? मुझे अफसोस है, बेइज्जती नहीं करनी चाहिए, अपनी भी होती है और सरकार की भी होती है। हिन्दुस्तान के प्रधानमंत्री आये हों, और उनके सामने घोषणा हो गयी, इसका क्या मकसद रहा? मैं यह कहना चाहूंगा कि कृपया इस पर पुनः विचार करें।  मैं यह भी कहना चाहूँगा कि जम्मू-कश्मीर में रेलवे के अस्पताल नहीं हैं। एक दो छोटे से हैं और सिर्फ दो डाक्टर्स हैं। आपके इतने इंप्लाइज़ हैं, उनकी कोई पूछ नहीं होती। पहले ही जम्मू कश्मीर के अस्पतालों में ओवरक्राउडिंग है। मेरी जनाब से विनती है कि आपके इंप्लाइज़ के लिए एजुकेशन और अस्पतालों की बड़ी दिक्कत है। एजुकेशन में टीन के पटरों के नीचे एक मिडिल स्कूल खोलकर रखा है। आप कम से कम वहाँ एक अच्छा स्कूल बनाएँ, एक अच्छा सिस्टम तय करें।

          पिछली बार हमारे माननीय लालू जी रेल मंत्री थे। उनके समय में एक सर्वे हमारे यहाँ सैंक्शन हुआ। मैं आज भी उनका थैंकफुल हूँ। सर्वे किया और सर्वे हुआ। अब सर्वे होकर बड़ौदा हाउस में पड़ा है। मैं जनाब से कहना चाहता हूँ कि हिन्दुस्तान में 17000 किलोमीटर लाइऩ बिछाई गई और मेरी स्टेट में सिर्फ70किलोमीटर?आप डिवाइड करो और हर स्टेट को उतनी लाइन बाँट दो। जो हिस्सा आता है, वह दीजिए। मैं कहना चाहता हूँ कि कठुआ से लेकर किश्तवाड़ तक एक बहुत बड़ा बसई एरिया है। कठुआ, बसौली, बिलावर, बनी, भदरवाह, डोडा और उसके आगे किश्तवाड़। मेरा टोटल एरिया डिसकनैक्ट किया गया। इन्होंने ऊधमपुर से ट्रेन उल्टी जब वैष्णोदेवी की तरफ से चली तो पीछे से जंगल से कश्मीर की तरफ...( व्यवधान) मैं समाप्त कर रहा हूँ। मैं कहना चाहता हूँ कि यह सर्वे नेशनल प्रोजैक्ट में आना चाहिए और जो पटरी कटरा से बनिहाल तक बन रही थी, उस पर 1100 करोड़ रुपये खर्च करने के बाद दस महीने काम बंद कर दिया गया without any cause. उसके लिए मैं लड़ता रहा तो अब काम शुरू किया। मैं जानना चाहता हूँ कि दस महीने किसकी वजह से काम बंद हुआ, क्यों काम बंद हुआ और उसका हर्जाना कौन देगा? वहाँ मेरा एरिया संगलदाम का, मोहार का, गुलनाश का एरिया, That was the den of militancy. वहाँ मिलिटैन्सी खत्म हुई रेलवे प्रोजैक्ट्स आने की वजह से। चंद ऑफिसर्स की वजह से वहाँ रेलवे प्रोजैक्ट रोक दिया गया। मेरी आपसे विनती है और मैं इसकी इनक्वायरी चाहता हूँ। मेरे लोग जिनकी मशीनें आइडल रहीं, जिनका रोज़गार छीना गया, उनका क्या होगा?लोगों ने लाखों कैनाल जमीन दी। अभी तक मेरे इलाके के लोग जिनकी 75प्रतिशत से ऊपर ज़मीन चली गई है, 100 प्रतिशत तक ज़मीन चली गई है उनको नौकरी नहीं दी गई है। लोगों को हक है कि 75 प्रतिशत से ऊपर जिसकी जमीन गई है उसको नौकरी मिलनी है। फिर क्यों नौकरी नहीं मिल रही? अगर400नौकरियां मिलीं तो 398 जम्मू कश्मीर के बाहर से और दो जम्मू कश्मीर से। मुझे किसी से कोई नफरत नहीं है। मैं कहना चाहता हूँ कि ये अधिकार जो हमारे हैं, हमें दिये जाएँ। मंत्री जी इतनी प्रोग्रैसिव सोच की हैं, इसलिए मैं इनको बता रहा हूँ। मैं निवेदन करता हूँ कि आप मेरे सारे काम करो और मुझे उम्मीद है कि आप मेरे सारे काम करेंगी।

                                                                                               

* DR. RATNA DE (HOOGHLY) :  At the very outset, I would like to express my thanks for allowing me to express my views on the Supplementary Demand for Grant (Railways) for 2009-10.

Railway is the lifeline of our country.  One can even say that travel in train is the cheapest mode of transport.  Not only that, it is also the most convenient of all transport.  Mostly poor and downtrodden, who travel in ‘sleeper class’, derive the maximum benefit out of Railways.

                        The Railway Budget presented by our leader.  Ms. Mamta Banerjee for 2009-10 has brought  in ‘inclusive grow’ and have paved way for expansion of rail network-which has been the demand of both the hon. Members of the House and also the general public.  Her path-breaking Railway Budget has been appreciated by all sections of the country.  In many ways than one, we can call it a pro-poor Railway Budget.

                        I would highlight the salient features of the Railway Budget 2009-10. Utmost priority has been given to the services to the passengers, in particular, extending passenger amenities, improving cleanliness, bringing in quality in the catering services of the Railways, ensuring safety and security and improving the punctuality.  This has been welcomed by people from all walks of life. 

                        Her endeavour to develop 50 stations to the level of world class is to be appreciated and her effort to upgrade 375 stations as ‘Adrash Stations’ with basic facilities like drinking water, adequate toilets, ladies dormitories, etc. too drew the attention from the public.

 

* Speech was laid on the Table.

 

                        Her efforts to build ‘Multi-fuctional complexes’ at 50 railway stations would serve the dire needs of the tourist and railway passengers. These complexes would also include shopping facilities; food stalls, budget hotels, etc.                         The expansion programme initiated by the Minister would bring in much needed development across the country.

                        She has appointed an Expert Committee to advise  on innoviate financing.

                        Her efforts to provide welfare measures to Railway staff drew wholehearted applause.  Scholarship for higher education of girl child of Group D staff would help them immensely.

                        Focus is on installing automated ticket vending machines at 200 large and medium sized stations.  Likewise, ‘on-board availability of doctors’ in long-distance trains is under active consideration of the Railway Minister.

                        Being a woman MP, I deem it a privilege to inform the House that our hon. Railway Minister, has kept in mind while drafting the Railway Budget by introducing Women RPF Swards for security of women passengers. Considering the atrocities and crimes against women in the society and sometimes in the trains, this is the step in the right direction.  I express my thanks to the hon. Minister for thinking of women in the hour of need.

                        Another women related benefit which has come out of this Budget is introduction of ‘only ladies’ EMU trains in Delhi, Chennai, Kolkata sub-urban during office hours.  This has come has a great relief to those working women who till now jostled in the jam packed trains to travel to and for.

                        ‘Duronto trains’ is one of its kind trains, with non-stop and point of train services.  This is certainly a first in the long history of Railways, which started in the year 1853.

                                    Before I conclude, I would like to extend full support for the passenger of the Supplementary Demand for Railways 2009-10 and congratulate our leader, Ms.Mamta Banerjee for presenting an innovative Railway Budget.

   

*श्री राम सिंह कस्वां (चुरू): महोदय, मैं आभारी हूं कि आपने मुझे अपनी बात कहने का अवसर प्रदान किया। बिना चौकीदार वाले समपार फाटकों पर यातायात वाहन इकाइयों में लगातार वृद्धि हो रही है, इसके लिए काफी प्रावधान किया गया है। यह प्रावधान मानव रहित समपारों को मानव सहित समपारों में बदलने के लिए किया जा रहा है। नये मानव सहित या मानव रहित समपार के लिए कोई वित्तीय प्रावधान नहीं किया गया है। इसके लिए वित्तीय प्रावधान करना अत्यंत आवश्यक है। उत्तर पश्चिम रेलवे जिसमें मेरा संसदीय क्षेत्र आता है में रेलवे समपार का काफी बड़ा संकट है। देश के अन्य क्षेत्रों की अपेक्षा मेरे क्षेत्र में लेवल क्रॉसिंग का प्रतिशत बहुत ही कम है। इस क्षेत्र में लगभग 450 कि.मी. रेल लाइन का अधिकांश शहरों के दोनों तरफ है, ग्रामीण क्षेत्र में तो नाम मात्र के रेलवे क्रासिंग है, कई स्थानों पर तो40 कि.मी. की परिधि में कोई रेलवे क्रासिंग नहीं है। कम से कम 15 कि.मी. की परिधि में तो एक भी लेवल क्रासिंग नहीं है। क्या किसान में अपने खेत में जाने के लिए 15 से40 कि.मी. तक का चक्कर लगाकर अपने खेत में जाएगा। रेलवे फाटकों के अभाव में सैकड़ों वष्­ााॉ के गांवों के रास्ते बन्द होने जा रहे हैं। आज प्रत्येक घर में ऊंट गाड़ी, ट्रैक्टर, जीप आदि है, अधिकांश गांव सड़कों से जुड़ गए हैं, लेकिन रेलवे क्रासिंग के अभाव में इन्हें काफी संकटों का सामना करना पड़ रहा है। किसान रेल लाईन पार कर अपने संसाधनों को लेकर खेत में नहीं जा सकता, ग्रामीण जनता को अनाधिकृत रूप से रेलवे लाइन पार करना पड़ रहा है, जिसे हमेशा खतरा बना रहता है। रेलवे क्रासिंग के अभाव में ग्राम पहाड़सर, डोकवा, हड़ीयाल, मोलीसर, पायली व मेलूसर आदि गांवों के लोग रेलवे क्रासिंग बनवाने के लिए काफी दिनों से धरने पर बैठे हुए हैं। प्रशासन के समक्ष कानून व्यवस्था बनाये रखना मुश्किल हो रहा है। इन फाटकों के निर्माण के लिए संबंधित ग्रामवासियों, जनप्रतिनिधियों ने काफी ज्ञापन दिये हैं लेकिन कोई परिणाम नहीं निकला है। पहाड़सर के लोगों ने माननीय रेल मंत्री जी से मिलकर अपनी समस्या से अवगत करवाया है। मैंने भी इस मुद्दे को काफी बार संसद में उठाया है, लेकिन राज्य सरकार का हवाला देकर रेलवे विभाग छुटकारा पा रही है। वर्तमान रेलवे नीति के अनुसार जितनी भी पुरानी रेल लाईनें हैं, उनके रास्ते एवं सड़कों पर बनने वाले समपारों का खर्च राज्य सरकार वहन करे। एक मानव सहित रेलवे क्रासिंग पर लगभग 1.25 करोड़ से 1.50 करोड़ रूपये तक की लागत आती है, जिसे वहन करना राज्य सरकार के लिए संभव नहीं है और न ही राज्य सरकारें वहन कर रही है।

        अतः इसके लिए रेलवे को अपनी नीति में संशोधन करना चाहिए व रेलवे क्रासिंग पर होने वाले व्यय को रेलवे विभाग द्वारा वहन करना चाहिए। जहां मार्ग पर लोड कम है वहां मानव रहित रेलवे क्रासिंग का निर्माण किया जा सकता है। रेलवे के व­ााॉ पुराने इस नियम में संशोधन करना अत्यन्त आवश्यक है। 19वीं शताब्दी की इस व्यवस्था को 21वीं शताब्दी में चलाया जा रहा है। यह कैसे संभव हो सकता है। इतने लंबे समय में ग्रामीण क्षेत्रों का सम्पूर्ण ढांचा बदल गया है। आज किसान के पास हर संसाधन है। प्रधानमंत्री सड़क योजना में अधिकांश गांव सड़कों से जुड़ गये हैं। ग्राम से ग्राम का रास्ता खेतों में जाने के रास्ते सब कुछ बदल गया है। रेलवे को अपनी नीति में संशोधन करना होगा। मेरे क्षेत्र में इन लेवल क्रासिंग को लेकर भयंकर तनाव है। राज्य सरकार पैसे दे नहीं रही है। रेलवे भी कुछ करने को तैयार नहीं है। गांव का आदमी जहां रेल लाइन है वहां कैसे अपने खेत व अन्य गांवों में जाएगा। उसके सामने जीवन मरण का प्रश्न है। लोग धरने पर बैठे हैं कोई सुनने को तैयार नहीं है। मेरे सम्पूर्ण संसदीय क्षेत्र में एक भी रेलवे लाइन उपरी पुल नहीं है। रतनगढ़ के नागरिक उपरी पुल के लिए काफी दिन से धरने पर बैठे हुए हैं। रेलवे व प्रशासनिक अधिकारियों ने इसके लिए उन्हें आश्वासन भी दिया है। मेरी मांग है कि रतनगढ़ जंक्शन स्टेशन पर पूर्व साईड में रेल समपार पर उपरी पुल का निर्माण कराया जावे। यह जनहित में अत्यन्त आवश्यक है।

        दिल्ली-सादुलपुर एक्सप्रेस गाड़ी वर्तमान में सप्ताह में तीन दिन चल रही है। इसे नियमित करते हुए प्रतिदिन चलाया जाये एवं जनहित में मंसूरी एक्सप्रेस को सादुलपुर तक, हिसार-लुधियाना गाड़ी को सादुलपुर तक बढ़ाया जावे। आपने बजट में गोरखधाम एक्सप्रेस गोरखपुर से भिवानी गाड़ी को हिसार तक बढ़ाने की घो­ाणा की थी। दूसरा बजट आने वाला है। इस गाड़ी को आज तक बढ़ाया नहीं गया है। गाड़ी तैयार है। इसे अविलंब हिसार तक चलाते हुए सादुलपुर तक बढ़ाया जावे।

        माननीय रेल मंत्री जी ने व­ाऩ 2007-2008 में श्री गंगानगर-सूरतपुरा जं0, लोहारू-सीकर-जयपुर, सीकर-चूरू का अमान परिवर्तन का कार्य बजट में शामिल करते हुए चालू करने की घो­ाणा की थी, लेकिन इस वित्तीय व­ाऩ में मामूली प्रावधान किया गया है, इस कार्य को अविलम्ब चालू किया जावे। रतनगढ़ से सरदारशहर आमान परिवर्तन की स्वीकृति की जावे काफी मांग है, इसके लिए जन आंदोलन हुए है। मेरे सम्पूर्ण जिले में रेल लाइन का आमान परिवर्तन होने जा रहा है। मात्र रतनगढ़-सरदारशहर खंड ही शे­ा रहा है। इसकी स्वीकृति जारी की जावे।

        चुरू-तारानगर-नोहर, सीकर-नोखा वाया सालासर-बीदासर, सरदारशहर-हनुमानगढ़, भिवानी-चुरू वाया लुहारू-पिलानी-मलसीसर एवं सूरतगढ़ से सादुलपुर वाया सरदारशहर-तारानगर तक नई रेल लाईन डाली जावे। उक्त लाईन सामरिक दृ­िट से अत्यन्त महत्वपूर्ण है। इसके लिए अविलम्ब सर्वे के आदेश किए जावे।

        सालासर बालाजी धाम पर कम्प्यूटराइज्ड आरक्षण केन्द्र खोला जावे, जहां प्रतिव­ाऩ लाखों दर्शनार्थी आते हैं। यह अत्यन्त आवश्यक है। इसके अतिरिक्त भादरा-नोहर रेलवे स्टेशनों पर कम्प्यूटरीकृत आरक्षण केन्द्र स्वीकृत करना जनहित में आवश्यक है। इस क्षेत्र के व्यापारियों व अन्य लोगों का देश के प्रत्येक हिस्से में आना-जाना बना रहता है। डेगाना-रतनगढ़-सादुलपुर खंड व बीकानेर-रतनगढ़-सादुलपरु खंड के आमान परिवर्तन का कार्य मार्च 2010 तक पूर्ण होने जा रहा है। आने वाले बजट में जोधपुर से दिल्ली वाया रतनगढ़-सादुलपुर जोधपुर मेल, दिल्ली से मुम्बई वाया चूरू, सूजानगढ़, जोधपुर होते हुए सुपरफास्ट गाड़ी, बीकानेर से दिल्ली वाया चूरू, बीकानेर मेल, बीकानेर से हावड़ा वाया चूरू-दिल्ली होते हुए सुपरफास्ट गाड़ी चलाने की घो­ाणा की जावे।

        मेरे क्षेत्र के सादुलपुर, चूरू, रतनगढ़ जक्शनों का आधुनिकीकरण करना अत्यन्त आवश्यक है।   

श्री कमल किशोर ‘कमांडो’ (बहराइच): महोदय, आपने मुझे रेलवे की अनुपूरक मांगों पर बोलने का मौका दिया, इसके लिए मैं आपका धन्यवाद करता हूँ। सबसे पहले मैं दीदी जी को बधाई देता हूँ कि इनके रिज़ीम में इतना बढ़िया काम होने जा रहा है बहराइच में। मैं उत्तर प्रदेश के बहराइच से निर्वाचित हुआ हूँ जहाँ बहुत दिनों से रेल लाइऩ का इंतज़ार रहा है। वहाँ सैंक्शन होकर पड़ी रही ब्रॉडगेज लाइन। मैं दीदी को बहुत धन्यवाद देता हूँ कि वह काम शुरू हो गया। आज ही मैंने गोरखपुर से चिट्ठी पाई, मुझे बड़ी प्रसन्नता हुई। वह एक बहुत पिछड़ा इलाका है। यहाँ गरीबी तथा शिक्षा बहुत कम है। प्रतिवर्ष इस क्षेत्र में भयंकर बाढ़ आती रहती है। मेरा आपसे सादर अनुरोध है कि मेरे संसदीय क्षेत्र में रेल से संबंधित योजनाओं को सरकार द्वारा स्वीकृति दिलाइए। एक अर्ज़ और करना चाहता हूँ कि गोंडा से बहराइच तक तो हो गया है, अब रह गया है बहराइच से नानपारा का इलाका और नानपारा से रूपईडील, जिसको हम नेपालगंज रोड कहते हैं, जो नेपाल से जुड़ा हुआ इलाका है। नेपाल के लोग उसी रास्ते से आवागमन करते हैं। मैं कहता हूँ कि यदि नेपालगंज तक वह रेल लाइन मिल जाती है तो इससे रेलवे को बहुत फायदा मिलेगा। यह बाद में आप लोगों को पता लगेगा। गोण्डा-बहराइच रेल मार्ग की स्वीकृति दी गयी है, इसके बाद 65 किलोमीटर और बचता है, जिसको देने के लिए मैं रेल मंत्री जी से आग्रह करता हूं। रेलगाड़ियों में सुरक्षा-व्यवस्था बहुत कम है, जिसे दुरूस्त करने की आवश्यकता है। रेलगाड़ियों में भारी भीड़ को देखते हुए, अधिक ट्रेनें चलाने की आवश्यकता है। स्टेशनों पर खान-पान की व्यवस्था सही नहीं है, जिसे ठीक करने की आवश्यकता है। दिल्ली से गोरखपुर शताब्दी चलायी जाने की मैं मांग करता हूं। जिन रेलवे क्रासिंग्स पर फाटक नहीं हैं, वहां फाटक लगाने की आवश्यकता है। बहराइच मेरा निर्वाचन क्षेत्र है, इसलिए मेरी मंत्री जी से मांग है कि बहराइच को आदर्श स्टेशन बनाया जाए। पूर्वांचल में कप्तानगंज से थावे के बीच ब्राडगैज लाइन पर काम चल रहा है, जिसे जल्दी से जल्दी पूरा करने कृपा की जाए। मंतरापुर से उतरौला, श्रावस्ती, भीनका, नानपारा, नेपालगंज, रूपईडील और बुड़वाल रेल मार्ग का निर्माण तुरन्त करवाने की कोशिश की जाए। गोरखपुर-गौण्डा रेलवे लाइन का अमान परिवर्तन कराया जाए। मैं गोरखपुर से आनंदनगर को छोटी लाइन से बड़ी लाइन में बदलने के लिए धन्यवाद देता हूं। ऊंचाहार में बहुत पहले एक एक्सीडेंट हुआ था, पूर्व रेल मंत्री द्वारा एक लाख रूपये मृतकों के परिजनों को मुआवजे के रूप में दिया गया था तथा उनके परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने की बात भी कही गयी थी। यह इलाका सोनिया गांधी जी के निर्वाचन क्षेत्र में पड़ता है। मेरी मांग है कि पूर्व रेलवे मंत्री जी द्वारा मृतकों के परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने का जो वायदा किया गया है, उसे पूरा किया जाना चाहिए। इन्हीं शब्दों के साथ मैं अपनी बात समाप्त करता हूं।

 

*SHRI NAVEEN JINDAL (KURUKSHETRA) : I compliment the Hon’ble Minister of Railways, Sushree Mamta Banerjee for her supplementary Railway Budget for the year. Knowing Railways very well from her earlier charge of Railways, being a messiah of poor and common people, she has identified many appropriate priorities for attack in the first year of her tenure itself.

            Recognizing very well that people have very high expectations from Railways her budget provision of no increase in passenger fares and in freight tariff is the best music to the ears of common man and industry.

            The people and their public representatives, particularly of underdeveloped regions, await Railways strategy for funding unviable but socially needed projects for new lines and for additional Railway facilities; for which a high powered committee was to be constituted as per the  budget proposals.  Herein it is also worth considering whether money and human resources getting thinly distributed leading to long drawn and poorly monitored projects is a serious ill to be cured.  Railways are eco friendly, attract other developments, asset creation, improve reach of people, their produce to the right markets etc. My humble request is that the matter regarding construction of a new line from Yamuna Nagar to Patiala may also be referred to this High Powered Committee. Here it is pertinent to mention that Engineering-cum-Traffic Survey of this line was completed in December, 2005.

            The provisions in the interim budget for passenger amenities have been doubled in the full budget which certainly shows the seriousness attached by the Hon. Minister on this front.  There is however need to review the utilization of the doubled up funds provisions under this head during 2004-2009.  Some cosmetic visible things are wastages on floorings, wall claddings, toilets tiles, coaches paintings undergoing whimsical change of colors, materials but functionally remaining poor at   * Speech was laid on the Table.

 

most places.  The train punctuality continues to be reckoned on Divisional and Zonal basis and not on passenger requirement basis and train running information system not being right information etc. continues.  The public announcement system and train information system equipments continue to be renewed frequently scrapping the recent one very fast resulting in wastages. LHB coaches jerky movements continue even after their introduction for a decade.  For monitoring of Passengers Amenities an Addl. General Manager in each Railways was to be made responsible for periodic supervision and surprise inspection for better results.  I would like to know the no. of Zonal Railways in which Addl. General Manger has been made responsible to monitor the Passenger Amenities.

            World Class stations have not come about even at one place and their planned no. has gone up from 22 to 35 (listed) to 50.  The case of New Delhi dragging for 2 years after 2 bids has affected the image of the country.  I, therefore, suggest that concentrated efforts are to be made in this regard. Multifunctional complexes at chosen stations is a welcome step under RLDA-IRCON but results targets need to be fixed.  I would request the Hon. Railway Minister through you Madam that works in regard to world class station and multifunctional complex may be started at Kurukshetra on priority basis as lakhs of devotees visit this Holy Place every year.

            Railways approved 11th plan being about three times the 10th plan has assumption of resource mobilization for about 30-40% by PPP’s.  Its failure so far admitted in the budget document and an unknown future should be a serious worry particularly that Railways have done quite well over the last five years.

            In the last five years the most major money spinner was higher axle loads to the extent of 10-14% becoming the chargeable load of a wagon.  The system carried the loads as the infrastructure had started getting upgraded since the previous years.  However during the heavier loads carriage the defect rate in track, bridges and rolling stock is going to go up is accepted by all. There have  been serious arrears in inputs and my concern is that this arrear should not add to serious proportions.

            Dedicated Freight corridor was conceived long back but has not moved on ground much.  The additional infrastructure planned timely, has become overdue with forecasts of 8-10 years plus. The cost of freight movement in the country is one of the highest in the world and the DFC should achieve a drastic reduction in the same attracting more and more freight from road and rightly claim carbon credits for modal shift from road to rail.

            Progress of ROB’s continues to be dismal. New initiatives need to be activated to achieve 10 times progress. ROB everywhere a very expensive solution need not be adopted on lines with low rail traffic and instead technology should be used. Every year in winter in North and North East India, there are accidents galore at unmanned L.C’s.  A technological solution missing so far is rather strange.

            Railways should incorporate use of bio diesel too and earn carbon credits.

            Railways should certainly reduce costs of transportation passing on benefits to people and industry and raise additional resources by more appropriate utilization of assets, non conventional resources, reduced wastages keeping appropriate provisions to enhance safety.

 

ओ रेल मंत्रालय को Audit Paragraphs  पर की गई कार्रवाई वित्त मंत्रालय को चार महीने के अंदर देनी होती है। मुझे यह जानकार आश्चर्य हुआ कि रेलवे ने 15 सितंबर 2009 तक 362 Audit Paragraphs  का कोई उत्तर नहीं दिया। मेरा माननीय रेल मंत्री से अनुरोध है कि वे रेलवे अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दें कि इन Paragraphs पर कार्रवाई शीघ्रतापूर्वक करें।

 

ओ इसी प्रकार से मैं मंत्री महोदया का ध्यान इस ओर भी आकर्षित करना चाहता हूं कि भारतीय खाद्य निगम का 796.45 करोड़ रूपए का क्लेम मार्च 2005 तक रेलवे पर लंबित था, परन्तु रेलवे अधिकारियों ने इस मामले को सुलझाए बगैर अपना सारा रिकार्ड न­ट कर दिया। यह बात मेरी समझ से परे है कि रेलवे अधिकारियों ने ऐसा क्यों किया? अतः रेलवे अधिकारियों की जिम्मेदारी निर्धारित की जाए।

 

ओ रेल बजट में डीएमयू और मेमू गाड़ियों में,िजनका यात्रा समय 2 घंटे से अधिक है, वहां महिलाओं, बच्चों और वृद्धों की परेशानी को देखते हुए शौचालय सुविधाएं प्रदान करने का प्रस्ताव किया था। मैं जानना चाहता हूं कि अभी तक ऐसी कितनी गाड़ियों में ये सुविधा प्रदान की गई है।

 

ओ टक्कर रोधी उपकरण (Anti Collision Device)अगले दो व­ााॉ में 1700 रूट किलोमीटर में लगाया जाना था। इस वि­ाय में मैं अभी तक क्या प्रगति हुई है, जानना चाहता हूं क्योंकि ये उपकरण रेलवे में दुर्घटनाएं कम करने में अत्यंत सक्षम है।

ओ पश्चिमी तथा पूर्वी मार्गों पर समर्पित माल यातायात गलियारा एक अत्यंत महत्वपूर्ण परियोजना है। मुझे सुविज्ञ सूत्रों से पता चला है कि इस परियोजना में जमीन अधिग्रहण करने का काम अत्यंत धीमी गति से चल रहा है। मेरा माननीय रेलमंत्री जी से अनुरोध है कि ये दोनों गलियारे समयानुसार पूरे किए जाएं, जिससे रेलवे को समय पर आमदनी हो सके। इस सम्बन्ध में मैं मंत्री महोदया का ध्यान इस ओर भी आकर्­िात करना चाहूंगा कि सड़क परियोजनाओं की तुलना में रेल पटरी बनाने में भूमि का उपयोग बहुत कम है तथा रेल संचालन का खर्चा भी सड़क यातायात के खर्चे से लगभग पांच गुणा कम है।

ओ भारत में युवा लोगों की बहुत बड़ी जनसंख्या को देखते हुए उनके आर्थिक सशक्तिकरण और बेहतर भवि­य के लिए उनके कौशन का विकास करने के लिए माननीय रेलमंत्री जी ने दानकुनी में आवश्यक नई सुविधाएं देने का फैसला किया था। मैं जानना चाहता हूं कि अभी तक इस वि­ाय में क्या प्रगति हुई है।

        इसके अतिरिक्त कुछ रेलवे से सम्बंधित वि­ाय जो मैं कई व­ााॉ से उठा रहा हूं, उनके बारे में भी एक बार फिर मंत्री महोदया का ध्यान आकर्­िात करना चाहता हूं।

1. कुरूक्षेत्र रेलवे स्टेशन पर लिफ्ट और एक्सकालेटर की व्यवस्था की जाए।

2. कैथल और दिल्ली के बीच वाया कुरूक्षेत्र एक रेल सेवा शुरू की जाए।

3. कुरूक्षेत्र रेलवे लाईन को कुरूक्षेत्र शहर के बाहर से निकाला जाए।

4. कुरूक्षेत्र-नरवाना रेलवे लाईन का विद्युतीकरण किया जाए।

5. सभी कोचों में डिस्चार्ज फ्री ग्रीन टॉयलेट्स की व्यवस्था की जाए।

6. विदेशों की तरह सभी Manned  रेलवे क्रासिंग को ऑटोमेटिक किया जाए, ताकि इन क्रासिंग को पार करने के लिए लोगों को बेवजह लम्बे समय तक फाटक खुलने का इंतजार न करना पड़े।

7. कुरूक्षेत्र, कैथल और जगाधरी रेलवे स्टेशनों पर भी आधुनिक डिजाईन के वाटर बूथ व आधुनिक जलपान कक्षों का निर्माण किया जाए।

8. कुरूक्षेत्र, यमुनानगर व कैथल रेलवे स्टेशनों पर सैनेटरी व्यवस्था बहुत बुरी हालत में है। कुरूक्षेत्र और यमुनानगर में बैंचों की हालत भी खस्ता है। अतः इसे सुधारा जाए व इन स्टेशनों का नवीकरण भी किया जाए।

 

9. दैनिक यात्रियों की मांग को ध्यान में रखते हुए कुरूक्षेत्र से EMU Trains चंडीगढ़ के लिए सुबह 6 बजे और शाम को चंडीगढ़ से कुरूक्षेत्र के लिए शाम 6 बजे चलाई जाए। इसी प्रकार एक EMU Train दिल्ली के लिए शाम 5.30 बजे चलाई जाए।

10. क्योंकि कुरूक्षेत्र को Modern Station घो­िात किया हुआ है, तथा यहां पर लाखों की संख्या में पर्यटक आते रहते हैं, अतः निम्नलिखित गाड़ियों का ठहराव इस स्टेशन पर दिया जाएः क.

शान-ए-पंजाब एक्सप्रेस ख.

आम्रपाली एक्सप्रेस ग.

संपर्कक्रंति एक्सप्रेस घ.

गरीबरथ (अमृतसर से सहरसा) ण.

कोचुवली एक्सप्रेस (चंडीगढ़ से) च.

स्वराज एक्सप्रेस छ.

मालवा एक्सप्रेस ज.

सचखंड़ एक्सप्रेस           अंत में, मैं यूपीए अध्यक्षा श्रीमती सोनिया गांधी व प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह जी का भी धन्यवाद करना चाहूंगा, जिनके कुशल मार्ग निर्देशन में ये पूरक रेलवे बजट लाया गया है। मैं एक बार फिर इस पूरक रेलवे बजट का समर्थन करता हूं।

 

SHRI N.S.V. CHITTHAN (DINDIGUL): Mr. Chairman, Sir, in this Supplementary Demands for Grants for Railways, a sum of Rs. 731 crore is required for meeting all the additional requirements for execution of certain projects which have been identified.

            Sir, South Tamil Nadu is an economically backward area.  As there was insufficient rain and no permanent irrigation facilities, people have to depend upon the monsoon, which is a frequent failure all through the year.  So, we have to develop the infrastructure.  To develop the infrastructure, the existing railway lines have to be doubled. 

            From the Britishers, there is only one railway line between Chennai and Tuticorin, and between Chennai and Tirunelveli. Now, the doubling work of the railway line between Chennai and Villupuram is almost over.  A sum of Rs. 77 crore is needed for the Chennai-Chengalpattu route.  Umpteen numbers of times, I have been pressing in this House for the doubling of the Villupuram-Dindigul railway line, which is mostly needed.  This project costs over Rs. 850 crore at a stretch of 270 kilometres.  If this line is doubled, I am sure that one can travel from Madurai to Chennai within five hours, and ten more new trains can be introduced.  Moreover, goods traffic will be much, and you can allot more funds.  Now, I would request the hon. Railway Minister to pump in more funds for the doubling of the Villupuram to Dindigul stretch.

            Another thing is the gauge conversion project of the line between Palani and Dindigul.  My constituency, Dindigul, comes under this gauge conversion area. The gauge conversion work of this project has started.  It is a stretch of 60 kilometres with a total project cost of Rs.270 crore. The pity is that only a sum of Rs. 30 crore is allotted for this project and the project is sailing at a snail’s pace.

            So, I would request our hon. Railway Minister to allot more funds to this project.

Palani is embodied as the sixth abode of Lord Muruga, Lord Saravanan. So, devotees from all over India are pouring into this stretch. So, an early completion of this project will be highly helpful to the devotees from all over the country.

Also, I would like to stress that the survey from Dindigul to Kumuli, which is en-route to Sabarimala, is over and this stretch should be taken up for execution.

Mr. Chairman, the present LC No.32 is at 32.89 kilometres at Ottanchatram between Palani and Dindigul. At this stage, LC No.32 is the only access to Gandhinagar area where more than 25,000 people are residing. If all the vehicles have to cross the railway line through this only gate, the length of waiting time for the vehicles nearing closure of level crossing gate will be extending and infringing the main highway. So, I would request that a sub-way can be provided.

Mr. Chairman, I am rushing.

Regarding new Express Trains, between Madurai and Chennai, a day time Express Train should be introduced because the traffic potential is much. Also, from Madurai to Tirupati, a daily Express should be introduced for the benefit of the devotees. Mr. Chairman, I want two stoppages in my constituency, one at Ambathurai for the Mysore-Tuticorin Express, bearing No.6731 and 6732. I want a stoppage at Ambathurai, where a rural university is located in Gandhigram. Also, Chinnalapatti is a main handloom centre. The people from this area are often going to Karnataka State. So, I want a stoppage of Mysore Express at Ambathurai.

Regarding Thirumangalam, my home town, it is an enlarging municipal town. There is a Medical College. There are other institutions also. Guruvayoor Express is the only day time Express for those people. So, Train Nos.6127 and 6128, Guruvayoor Express should be stopped for a minute at Thirumangalam.

Mr. Chairman, regarding the freight charges, Tamil Nadu has to get pulses and grains from North Indian States. So, the present classification 130 will be a burden to those who are getting pulses from North India. So, the classification of pulses from class 130 to 110 will be highly beneficial to those people in Tamil Nadu and in other Southern States. They will be getting the pulses at cheaper rates, at least, less by Rs.30 per quintal.

Lastly, Mr. Chairman, I have to say one word about the Virudhunagar-Manamadurai dream project of our tall leader, late Mr. Kamaraj. Mananaadurai to Aruppukottai route is half way pending. I would request that more funds to be pumped in for the completion of the Manamadurai-Aruppukottai route. If it is completed, it will be another route between Virudhunagar and Madurai during important times.

                                                                                                                       

*श्री नारनभाई कछाड़िया (अमरेली): महोदय, मैं आपके माध्यम से माननीय रेल मंत्री महोदय जी से अपने चुनावी क्षेत्र के संदर्भ में मांग रख रहा हूं।  

          महोदय, मेरा चुनाव क्षेत्र अमरेली जो गुजरात के सौराष्ट्र-कच्छ क्षेत्र के दूरदराज क्षेत्र से संबंधित है, आजादी के बाद आज छः दशक से अधिक समय बीत जाने के बाद भी वह रेल सेवा से बिल्कुल ही उपेक्षित है। जिले का महत्व होने के बावजूद बड़ी लाइन अभी तक नहीं बिछायी गयी है। इसका देश और प्रदेश के सभी प्रमुख नगरों से कोई रेल संपर्क नहीं है। आज भी भुज से दिल्ली आने के लिए राजमार्ग से 300 किलोमीटर दूर तक अहमदाबाद आना पड़ रहा है। वहां से भुज रेल या हवाई यात्रा संभव हो पाती है।अहमदाबाद, बड़ोदरा और राजकोट से ही भुज या मेरे संसदीय क्षेत्र के लोगों को रेल या हवाई संपर्क संभव है। अमरेली-जूनागढ़ आज भी छोटी लाइन से जुड़ा है, जबकि मेरे क्षेत्र के गारियाछार सदर के लोगों ने रेलगाड़ी तो क्या, रेल की पटरी भी नहीं देखी है।रेल संपर्क के अभाव से यहां का औद्योगिक विकास भी नहीं हो पाया है। सही मायने में बच्चों का शैक्षिक विकास भी नहीं हो पाया है। देश में आज भी अमरेली सर्वाधिक उपेक्षित, शिक्षित न होने के कारण सभी दृष्टिकोण से पिछड़ा साबित हो रहा है।

          वर्तामान में महुवा-सूरत रेल संपर्क है, जो साप्ताहिक है।  इसे प्रतिदिन करना अति आवश्यक है, क्योंकि अमरेली-भावनगर के अधिकांश लोग सूरत शहर में स्थायी रूप से बसे हुए हैं।  सूरत शहर की कुल आबादी में 90 प्रतिशत लोग अमरेली-भावनगर से हैं। सूरत के कपड़े, हीरा और अन्य औद्योगिक घराने मेरे क्षेत्र के लोगों की देन हैं।

          अमरेली-भावनगर के लोगों को सूरत से अमरेली-भावनगर और सूरत जाने के लिए महुवा-सूरत सवारी गाड़ी आशीर्वाद समान है। इसे तत्काल रूप से प्रतिदिन किया जाए, ताकि इस सर्वाधिक उपेक्षित क्षेत्र के कुछेक अंशों का विकास हो सके।

          इसके साथ ही साथ गारियाछार-अमरेली-महुवा-अहमदाबाद-राजकोट को रेल लाइन से जोड़ने तथा अमान-परिवर्तन कराने का कार्य तत्काल रूप से करवाने का भी मेरा आपसे अनुरोध है।  इसके साथ ही साथ अमरेली-सूरत का सीधा संपर्क देश के हित में और आर्थिक रूप से फायदेमंद साबित हो सकता है।  इसके साथ ही साथ मेरा मंत्री महोदया से अनुरोध है कि गुजरात के नमक उद्योग के लिए पर्याप्त मात्रा में वैगनों का आबंटन करवाया जाए, ताकि इस उद्योग को मृतप्राय स्थिति से बचाया जा सके।

 

* Speech was laid on the Table *SHRI M.B. RAJESH (PALAKKAD): I rise to oppose the supplementary Demands for Grants for Railways. I am opposing this because the Government has utterly failed in fulfilling the promises in the last Railway Budget. Though a lot of populist announcements were made in the Railway Budget, nothing has been done in this regard. In fact under the cover of these populist announcements the Government has initiated a process of privatisation of Railways. Indian Railways is the single largest public sector entity in the world. And now a process of systematic dismantling of this public sector enterprise is underway.

            Many of the services in Railways have already been privatised. Parcel services, catering service etc. are some examples. Being a Public Sector institution, Railways was also seen as an important provider of jobs. However, due to the polices of privatisation, outsourcing contractualisation, downsizing etc. Railway has ceased to be an employment provider. Railway has virtually banned all recruitments. Not only that, even the existing employees are sent out of employment because of the aforesaid policies. As a result, there has been a drastic reduction in the number of employees in the Railways. There were 17 lakh employees a decade ago. According to the figures given in the last budget it has come down to 13 lakh.

            The Privatisation has caused the deterioration of the quality of services and the overall efficiency of Railways. Increasing number of raid accidents are vindictive of this fact.

            The catering services have been privatized by forming a Corporation called IRCTC. They have drastically increased the prices of food and the quality has come down. No South Indian foods are served in the trains operating in South Indian States. I demand that the Government should urgently intervene to bring down the increased prices of food and beverages served in the trains by IRCTC.

 

* Speech was laid on the Table             Some bervages items which have been prohibited even the Parliament are being served in trains. This is unfortunate and the Government should stop this.

            The Hon’ble Railway Minister is only looking towards East and I am constrained to say that she is neglecting States like Kerala. Many of the newly announced trains in the last Budget have not started services. Many of our long pending demands have not been met. Bangalore is a city where lakhs of Keralities are working to earn a livelihood. However there is only one daily train to Bangalore from Kerala. This is not at all sufficient to meet the requirement of the people. Private bus operators are benefited by this and they are making huge profits. So I demand that the Government should immediately introduce more services between Bangalore and Kerala. Likewise more trains need to be operated between Mumbai and Kerala.

            Pallakad and Kozhikode are the two major cities in the Malabar area of Kerala. The Government can operate at least one additional train in this route without any additional financial burden. The Asmitha Express which is operating service between Trivandurm and Pallakad is halted in Pallakad during entire day time. The rakes of this train could be utilized to introduce a new intercity service between Pallakad and Kozhikode. It will be highly useful for passengers and there will not be any financial burden for Railways.

            I request the Government to reinstate the timings of Nilambur- Pallakad passengers train. The changed timings are inconvenient for passengers.

            Another area where the Railway is neglecting is the completion of ROBs. I strongly demand that Paruthipura ROB in Shorarnur should be completed immediately.

            I also request the Government to initiate steps for the construction of Triongunar Station in Shorarnur which is an important Railway junction in South India.

            I also demand that more coaches should be allotted to Kerala and more facilities should be given to passengers travelling in trains. Safety of passengers, especially that of women and children needs to ensured.

            It is unfortunate that Railway has become a mere instrument for serving some narrow political targets under this Government. The great symbol of India’s integration and unity should not be merely reduced to a political instrument. In order to improve and modernize railway some major innovations are needed. At the same time, Public Sector character has to be strengthened.

श्री गणेश सिंह (सतना): सभापति महोदय, मैं सबसे पहले आपको धन्यवाद दूंगा, रेलवे की अनुदान मांगों की यहां जो चर्चा हो रही है, उसके कुछ बिन्दुओं पर मैं मांननीय मंत्री जी का ध्यान आकृष्ट कराना चाहूंगा। जब तीन जुलाई को रेल मंत्री जी यहां बजट प्रस्तुत कर रही थीं, तब वे बहुत आत्मविश्वास से भरी हुई थीं। लेकिन पांच महीने बीत गए, छठा महीना शुरु है, उन्होंने जो घोषणाएं पहले की थीं, उनमें बहुत सारी ऐसी घोषणाएं हैं, जिन्हें अभी तक प्रारम्भ ही नहीं किया गया। मुझे लगता है कि इनके आत्मविश्वास को तब ठेस पहुंची, जब लगातार कई रेल एक्सीडेंट्स हुए। इनकी जो प्राथमिकताएं थीं, उन प्राथमिकताओं को रेलवे प्रशासन ने किसी भी तरह से तवज्जो नहीं दी। इनकी जो प्राथमिकताएं थीं, उनमें यात्रियों की सुविधा, साफ-सफाई का विशेष महत्व, रेलवे खान-पान की गुणवत्ता, संरक्षा एवं सुरक्षा तथा गाड़ियों का सही समय पर चालन। मैं समझता हूं कि उनकी ये जो प्राथमिकताएं थीं, उनकी तरफ रेल प्रशासन का कहीं भी कोई ध्यान नहीं हुआ। इसलिए मैं कह रहा हूं कि उनका आत्मविश्वास कहीं न कहीं कमजोर हुआ है। निश्चित तौर पर ममता जी की राजनीतिक रेल बहुत तेज चल रही है। पश्चिम बंगाल में वामपंथी सरकार को उखाड़ फेंकने में अब वे पूरी तरह सक्षम दिखाई पड़ रही हैं।

 

          सभापति महोदय, यह सफलता तो उनकी हो सकती है, लेकिन भारतीय रेल को जिस मुकाम तक पहुंचाना चाहती थीं, उस मुकाम तक पहुंचाने में मुझे ऐसा लगता है कि रेल प्रशासन उनका सहयोग नहीं कर रहा है। उनसे देश को बड़ी अपेक्षाएं हैं। उनकी ईमानदारी और उनके काम करने के ढंग पर भी कहीं किसी को कोई शिकायत नहीं है, लेकिन मुझे पुराने रेल मंत्री जी का एक कथन याद आ रहा है, चूंकि आज वे इस सदन के सदस्य नहीं हैं, इसलिए यहां मैं उनका नाम नहीं लेना चाहता हूं, उन्होंने कहा था कि रेल प्रशासन एक ऐसा सिस्टम है, उस सिस्टम को सुधारने के लिए बहुत कठोरता की जरूरत है। वह ऐसा सिस्टम है, जिसे हथौड़े से मारो, तो थोड़ा सा खुलता है, जो मतलब की चीज हो, निकाल लो और फिर वह अपने आप बन्द हो जाता है। मुझे लगता है कि बार-बार हैमरिंग करनी पड़ेगी। आज रेल सिस्टम पूरी तरह से ऐसी व्यवस्था पर चल रहा है, जैसे आज उनका कोई कुछ बिगाड़ नहीं सकता है।

 

          महोदय, इस सदन में, लगातार सांसदों ने अपने क्षेत्र की समस्याओं को रखा। मैं समझता हूं कि माननीय सांसदों के क्षेत्रों की समस्याओं को यदि रेलवे ने कहीं सूचीबद्ध किया है और यदि उस आधार पर उन्होंने अपना पंचवर्षीय कार्यक्रम बनाया होता, तो हो सकता है कि बार-बार इतनी बड़ी संख्या में माननीय सांसदों को अपने क्षेत्र की समस्याओं के बारे में यहां बोलने की जरूरत नहीं पड़ती। आज दिक्कत इसी बात की है कि छोटी-छोटी बातों पर रेलवे का लिखा पत्र आता है कि यह फिजीबल नहीं है, यह उपयुक्त नहीं है। मैं पूछना चाहता हूं कि क्या इन शब्दों का कोई महत्व है? रेल मंत्री पूरी तरह से सदन को हर बार आश्वस्त करते हैं कि हम यह करना चाहते हैं और इन-इन सुविधाओं से आपको देना चाहते हैं, लेकिन कुछ होता नहीं है। आप विश्व स्तर की रेलवे बनाना चाहते हैं। माननीय सांसद, लगातार पांच-पांच और दस-दस साल से एक-एक बात को कहते रहते हैं, लेकिन पता नहीं, उनकी मांग को पूरा करने में क्या दिक्कत हो रही है। यदि बजट की समस्या है, तो बताइए। अगर वाकई में वह काम नहीं हो सकता है, तो लिखित में भेजिए, ताकि वे सांसद, दुबारा मांग करना बन्द कर दें, लेकिन न तो लिखित में आएगा और न आप काम करेंगे। इस प्रकार से देखा जाए, तो लगातार सांसदों की उपेक्षा हो रही है।

 

          माननीय सभापति महोदय, मैं कहना चाहता हूं कि जब हम लोग अपने क्षेत्र में जाते हैं, तो लोग हम से कहते हैं कि आप छोटे-छोटे काम नहीं करा पा रहे हैं। मैं ममता जी को धन्यवाद भी देना चाहूंगा, क्योंकि मेरा बहुत छोटा सा काम उनके द्वारा हुआ है। मैं रेल प्रशासन पर जो प्रहार करना चाहता हूं वह इसलिए कि वे रेल प्रशासन को सुधारें और उसमें आमूल-चूल परिवर्तन लाएं। एक छोटी सी गाड़ी थी। उस गाड़ी का समय परिवर्तित किया, जिसके बारे में हम पिछले पांच साल से मांग कर रहे थे। एक तरफ का समय, रीवा-नई दिल्ली का तो आपने परिवर्तित कर दिया। इसके लिए मैं उन्हें धन्यवाद देना चाहता हूं, लेकिन दूसरी तरफ का समय अगर परिवर्तित नहीं हुआ, तो मैं समझता हूं कि उसकी कोई उपयोगिता नहीं होगी। उस गाड़ी में जो डिब्बे लगे थे, वे हटा दिए गए थे, उन्हें रेस्टोर करने की बात भी इसी सदन में आपने कही  थी। मैं आपसे निवेदन करूंगा कि उस तरफ भी ध्यान दें।

 

          सभापति महोदय, मेरे लोक सभा क्षेत्र में एक मैहर रेलवे स्टेशन है। वह रेलवे स्टेशन, एन.एच.7 पर है, जो व्यस्ततम सड़क है। वह सड़क उस रेलवे लाइन को क्रॉस करती है, इलाहाबाद से मुम्बई तक का रूट है, वह बहुत ही व्यस्त रहता है और हर 15मिनट में रेलवे फाटक बन्द होता है। वहां पर रेलवे ओवरब्रिज बनाने की मांग लगातार होती रही है। पहले रेलवे प्रशासन ने कहा-हम बनाएंगे, फिर एन.एच.ए. ने कहा कि हम बनाएंगे, लेकिन वह आज तक नहीं बना। इसलिए मैं निवेदन करना चाहूंगा कि उसे तत्काल बनाया जाए। अतः ओवरब्रिज को बनाने के लिए मेरी राज्य सरकार अपना 50प्रतिशत अंशदान देने को तैयार है। उसने अपने हिस्से का पैसा रेलवे में जमा कर दिया है, लेकिन रेल प्रशासन अभी भी उस पर कोई कार्रवाई नहीं करना चाहता है। मैं चाहता हूं कि जहां तक ऐसे व्यस्ततम मार्ग हैं, जहां एन.एच. क्रॉसिंग हो रहा है और उस पर आप  अंडरब्रिज या ओवरब्रिज अवश्य बनायें, तो मैं पूछना चाहता हूं कि आपकी कैसी व्यवस्था है, क्या प्रॉब्लम है? आप लोग कैसे प्राथमिकता तय करते हैं। आप लोग किस तरह से रेल प्रशासन को चलाना चाहते हैं?  आप अगर इस तरह से काम करेगें, तो विश्व स्तर के रेलवे स्टेशन कैसे बनाएंगे?

MR. CHAIRMAN : Shri Ganesh Singh, please wind up. I am calling the next speaker.

श्री गणेश सिंह : सभापति महोदय, निश्चित तौर पर समय की कमी है, मैं समझ रहा हूं। मुझे बातें तो बहुत कहनी थीं, लेकिन मैं माननीया रेल मंत्री जी का ध्यान अपने लोक सभा क्षेत्र की ओर आकर्षित करना चाहूंगा कि मैंने अपने लोक सभा क्षेत्र के कई मामलों के बारे में लिखा है। सदन में भी बोला है, पत्र भी व्यक्तिगत रूप में लिखा है, माननीय रेल मंत्री जी से मैं खुद मिला और निवेदन किया कि हमें बुला लिया जाए और हमें बुलाकर प्राथमिकता तय कर ली जाए ...( व्यवधान) जो कार्य हो सकते हैं उन्हें कर दिया जाए।

MR. CHAIRMAN: Shri Ganesh Singh, this is not going on record.

(Interruptions) … * श्री गणेश सिंह : सभापति महोदय, मुझे अपने भाषण के शेष लिखे हुए भाग को सभा पटल पर रखने की अनुमति दी जाए।

MR. CHAIRMAN: Not allowed. You cannot place it on the Table after speaking in the House. I have told this earlier also.

श्री रामकिशुन (चन्दौली): सभापति महोदय, आपने मुझे रेलवे की अनुदान की अनुपूरक मांगों पर बोलने का अवसर प्रदान किया है, इसके लिए मैं आपको धन्यवाद देना चाहता हूं। मैं जिस क्षेत्र से आता हूं, वहां एशिया का सबसे बड़ा यार्ड मुगलसराय है और उस जनपद के साथ लगातार सौतेला व्यवहार हो रहा है। एक तरफ तो उस क्षेत्र के मुगलसराय और चन्दौली के विकास के लिए रेल विभाग द्वारा कोई कार्य नहीं किया जा रहा है और दूसरी तरफ एक रेलवे लाइन बिछाने के लिए फ्रेट कॉरीडोर योजना चल रही है, जिसमें किसानों की हजारों हैक्टेयर उपजाऊ जमीन ली जा रही है। रेलवे के पास जमीन है। मुगलसराय, गया, हावड़ा रेलवे लाइन के समानान्तर उसकी सटी हुई पर्याप्त जमीन रेलवे के पास है, लेकिन उस जमीन को न लेकर किसानों की कृषि की उपजाऊ जमीन पर एक तीसरी लाइन बनाने की रेलवे की योजना है। सिंगूर और नन्दीग्राम में किसानों की जमीन लेना अगर गलत था तो चन्दौली में किसानों की जमीन लेना क्या सही है?मैं आपके माध्यम से माननीया ममता दीदी से कहना चाहता हूं कि आप किसानों के हित की बात करती हैं तो आपको इस पर विचार करना चाहिए कि किसानों की जमीन लिए बगैर आपकी तीसरी लाइन बन सकती है।

          सौतेला व्यवहार इस मामले में है कि वहां रेलवे सैटिलमेंट एरिया था, जिसको समाप्त कर दिया गया। कई विकास के कार्य रेल कर्मचारियों के सामाजिक और धार्मिक उत्थान के लिए मुगलसराय में किये जा रहे थे। एक बहुत पवित्र स्थल मानसरोवर तालाब का निर्माण, जब उत्तर प्रदेश में हमारी पार्टी की सरकार थी और माननीय नेताजी मुख्यमंत्री थे तो वे एक करोड़ रुपया प्रतिवर्ष रेलवे के विकास के लिए देते थे। रेलवे सैटिलमेंट बोर्ड को रेल अधिकारियों ने समाप्त कर दिया, इसलिए बहुत से अधूरे कार्य उसके जो थे, वे समाप्त हो गये, उनको वे पूरा नहीं कर पा रहे। मैं आपके माध्यम से रेल मंत्री जी से मांग करता हूं कि उस क्षेत्र में विकास के लिए जहां कई हजार कर्मचारी हैं, उनके अधूरे काम पूरे कराने के लिए, उनके विकास के लिए धन देने का काम करें।       

          लालबहादुर शास्त्री जी की जन्मस्थली मुगलसराय है, वे कूड़ेगांव में पैदा हुए। उस स्टेशन को आदर्श स्टेशन के रूप में विकसित करने और वहां बहुत बड़ा यार्ड है, उसका विकास करना चाहिए। जिला मुख्यालय जनपद चन्दौली पर लाखों लोग रोज पहुंचते हैं, लेकिन ओवरब्रिज न होने से कई घंटे रेलवे का फाटक बन्द होने से वहां यातायात बाधित होता है, वादकारियों को कचहरी जाने में दिक्कत होती है, बच्चों को स्कूल जाने में दिक्कत होती है, मरीजों को अस्पताल जाने में दिक्कत होती है।...( व्यवधान) सिर्फ दो मिनट में मैं अपनी बात कहना चाहूंगा। मैं इसलिए कहना चाहता हूं कि वहां ओवरब्रिज बनाने की बहुत बड़ी आवश्यकता है।

          भूतपूर्व रेल मंत्री स्वर्गीय श्री कमलापति त्रिपाठी ने वहां एक रेल का कारखाना बनाने की बात की थी, इसलिए मैंने कहा कि सौतेला व्यवहार हो रहा है। एक तरफ जनपद जन्दौली के किसानों की जमीन ली जा रही है और रेल कारखाने के नाम पर जो कई एकड़ जमीन ली गई, उस पर रेल का कारखाना निर्माण नहीं किया गया और अब पुनः जमीन ली जा रही है तो हम चाहेंगे कि या तो किसानों की जमीन आप वापस करें या वहां रेलवे का कोई संयंत्र, कोई कारखाना लगायें, ताकि उस क्षेत्र के लोगों को रोजगार मिले और रेलवे को कुछ न कुछ सुविधाएं उपलब्ध हों। हमारे क्षेत्र में एक सर्किल रेलवे बनायी जाये। यह बहुत महत्वपूर्ण समस्या है। उसमें छीतमपुर धरना के किसानों की जमीन ली गई।...( व्यवधान)

कुमारी ममता बनर्जी: कब ली?

श्री रामकिशुन : यह पहले ली गई थी, लेकिन आप आज रेल मंत्री हैं, इसलिए आज आपकी जिम्मेदारी है। आज सबसे बड़ी जिम्मेदारी है कि जो गलतियां हुईं या जो अच्छाइयां हुईं...( व्यवधान)

सभापति महोदय : रामकिशुन जी, अब समाप्त कीजिए।

श्री रामकिशुन : उन जमीन देने वाले किसानों की जमीन चली गई, उनको नौकरी नहीं मिली और आज किसानों के परिवार भुखमरी के कगार पर हैं।

          मैं दूसरी बात कहना चाहता हूं कि जो मानव रहित रेलवे फाटक हैं, उन पर आये दिन दुर्घटनाएं होती हैं। हमारे कई दर्जन गांव रेलवे लाइनों से घिरे हुए हैं। अब माननीय मंत्री जी यह कहें कि हमारे जमाने में रेलवे नहीं बनी थी तो यह तो बड़े अफसोस की बात है। चाहे किसी के जमाने में रेलवे बनी, लेकिन एक दर्जन गांव मुगलसराय के आसपास चारों तरफ से रेलवे लाइन से घिरे हैं। वहां तक जाने-आने का कोई रास्ता नहीं है। वहां आने-जाने के लिए बड़ी दिक्कत होती है। वहां से स्कूल, कालेज में बच्चे जाते हैं तो दुर्घटनाएं होती है। इसलिए मैं कहना चाहता हूं कि जहां मानव रहित रेलवे क्रासिंग्स हैं, उन स्थानों पर जनपद चन्दौली और बनारस के मानव रहित रेलवे क्रासिंग्स पर फाटक बनाने का काम करें। राज्य सरकारें कहती हैं कि हमने भारत सरकार के रेल मंत्री को दे दिया।...( व्यवधान) हमें एक मिनट समय और दे दें।...( व्यवधान)

MR. CHAIRMAN : Shri Ramkishun, your speech is not going on record. Please take your seat.

(Interruptions) … * MR. CHAIRMAN : Dr. Vinay Kumar Pandey to speak now. यह रिकार्ड में नहीं जायेगा।

… (Interruptions)

MR. CHAIRMAN : What you are speaking is not going on record. Please take your seat.

(Interruptions) …*                                                                                                                         *श्री पन्ना लाल पुनिया (बाराबंकी): महोदय, रेल मंत्री जी द्वारा जिन अनुपूरक मांगों को प्रस्तुत किया गया है, उसका मैं समर्थन करता हूं, ताकि यह धनराशी जनहित से संबंधित योजनाओं को पूरा करने में इस्तेमाल हो सकेगी।  मैं उत्तर प्रदेश में अपने लोकसभा क्षेत्र बाराबंकी के लिए निम्नलिखित मांग करता हूं।

1.    बाराबंकी-देवा मार्ग पर रेलवे ओवरब्रिज पर शीघ्र कार्य शुरू किया जाए।

2.    बाराबंकी रेलवे स्टेशन पर मेरे प्रस्ताव अनुसार रेलगाड़ियों के ठहराव के आदेश दिए जाएं।

3.    रायबरेली जनपद में ऊंचाहार रेलवे फाटक पर हुयी रेल दुर्घटना में मरे 12 लोगों के परिवारजनों में एक-एक व्यक्ति को रेलमंत्री जी की घोषणा के अनुसार रेलवे में नौकरी दी जाए।

4.    सभी मानवरहित रेलवे फाटकों पर तत्काल फाटक लगाकर रेलवे द्वारा अपने कर्मचारियों से संचालित करायें।

5.    बाराबंकी रेलवे स्टेशन को ‘आदर्श स्टेशन’की सुविधा इसी वर्ष उपलब्ध करायी जाए।

6.    लखनऊ-दिल्ली के बीच चलने वाली‘लखनऊ मेल’ अत्यन्त महत्वपूर्ण रेलगाड़ी थी। इसके महत्व को कम कर दिया गया है और इस रेलगाड़ी को हमेशा गाजियाबाद-दिल्ली के बीच लेट कर दिया जाता है।इसे पूर्व अनुसार महत्व दिया जाए।    

 

* Speech was laid on the Table डॉ. विनय कुमार पाण्डेय(श्रावस्ती): महोदय, मुझे पता है कि समय का अभाव है, लेकिन समयाभाव के रहते हुए भी आपने मुझे बोलने का अवसर दिया, इसके लिए मैं आपका आभारी हूं। मैं थोड़े समय में ही अपनी बात समाप्त करना चाहूंगा।

            महोदय, आपके माध्यम से मैं माननीय रेल मंत्री जी का, भारत सरकार का, ममता दीदी का ध्यान आकृष्ट करना चाहूंगा, रेल बजट जुलाई में भी मैंने आग्रह किया था और फिर आग्रह करूंगा कि दीदी पूर्वोत्तर आपसे बहुत नजदीक है।  आज सदन के माध्यम से मैं पूर्वोत्तर रेलवे की तरफ आपका ध्यान आकृष्ट करते हुए कहना चाहूंगा कि गोरखपुर मुख्यालय से लेकर और नेपाल राष्ट्र की सीमा से लगे हुए, सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण, अति पिछड़े हुए इलाके में, जो गोरखपुर-गोंडा लूप-लाइन है, उसका आमान परिवर्तन सैंक्शन हो चुका था और उस आमान परिवर्तन पर गोरखपुर से आनंदनगर तक के परिवर्तन का कार्य भी लगभग पूरा हो चुका है।  परंतु आनंदनगर से लेकर गोंडा तक के कार्य का पैसा अभी आबंटित नहीं हुआ है जिसकी वजह से पूरी की पूरी रेलवे लाइन, लूप-लाइन की उपयोगिता बंद पड़ी हुयी है।  यह सामरिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है जो कि भारत और नेपाल की सीमा पर लगा हुआ।  सामरिक महत्व का यह सबसे बड़ा अति महत्व का विषय है, इस ओर मैं आपका ध्यान आकृष्ट करना चाहूंगा कि आनंदनगर से गोंडा तक की रेलवे लाइन का जो पैसा बचा हुआ है, शीघ्रातिशीघ्र उस धन का आबंटन करके, उसकी उपयोगिता को लिया जाए।

          महोदय, मैंने पिछले सत्र में भी आग्रह किया था, श्रावस्ती जो मेरा निर्वाचन क्षेत्र है, उसका श्रावस्ती जनपद, जहां एक सेंटीमीटर भी रेलवे लाइन नहीं है। वह बहुत ही पिछड़ा हुआ क्षेत्र है और उसके पिछड़ेपन को देखते हुए, उसकी महत्ता को देखते हुए, टूरिज्म और उर्वरा शक्ति को देखते हुए, माननीय राहुल गांधी जी वहां गए थे और सारे विश्व का ध्यान उस ओर आकृष्ट किया था।  मनकापुर से होते हुए, उतरौला होते हुए, श्रावस्ती, भिनगा और अभी कमांडो कमल किशोर साहब ने जो कहा, माननीय सदस्य ने कहा, उससे अपने आपको संबंद्ध करते हुए कहना चाहूंगा कि नानपारा-नेपालगंज तक की लाइन का निर्माण कराया जाए, जिससे उस पिछड़े हुए इलाके को विकास की मुख्य भूमिका में लाकर राष्ट्र निर्माण में, भारत निर्माण की जो यूपीए सरकार की मंशा है, उसमें उसका सहयोग और योगदान प्राप्त किया जा सके।

          महोदय, मैं आपके माध्यम से एक बार पुनः माननीय रेलमंत्री जी का और रेल महकमे का ध्यान आकृष्ट करते हुए कहना चाहूंगा कि गोरखपुर-गोंडा लूप लाइन का आमान परिवर्तन का कार्य शीघ्र कराने के लिए धन आबंटित किया जाए और आज वहां केवल एक ट्रेन चल रही है, जिससे यात्रियों को बहुत ही असुविधा का सामना करना पड़ा है, कम से कम एक ट्रेन उस लाइन पर और बढ़ा दी जाए, जिससे उस दुर्गम इलाके का आवागमन सुलभ हो सके। यह बहुत ही महत्वपूर्ण है, क्योंकि इस समय चाइना बार्डर को देखते हुए, नेपाल राष्ट्र में जो राजनैतिक अनिश्चितता बनी है, उसको देखते हुए, इस रेलवे लाइन का निर्माण कार्य कराया जाना बहुत ही महत्वपूर्ण है।

                                                                                                         

श्री अनुराग सिंह ठाकुर (हमीरपुर): हिमाचल प्रदेश पहाड़ी एवं सीमावर्ती प्रान्त है । हिमाचल प्रदेश के जिला लाहौल-स्पीति और किन्नौर का भाग (तिब्बत) चीन से तथा चम्बा जिले का पांगी-भरमौर जम्मू-कश्मीर से लगता है । हिमाचल प्रदेश का सामरिक दृष्टि से बहुत महत्व है ।

                  हिमाचल प्रदेश में रेलों का विकास देश की आजादी के 63 वर्षों के बाद भी नहीं हुआ है । हिमाचल प्रदेश में दो छोटी रेल लाइनें (1)कालका-शिमला एवं(2)जोगेन्द्र नगर-पठानकोट अंग्रेजों के समय बनाई गई थीं, वे ही अब तक चली आ रही है । हिमाचल प्रदेश में आजादी के बाद से अब तक मात्र 36 किलोमीटर रेल लाइन का निर्माण हुआ है । इस प्रकार देखें तो हिमाचल प्रदेश एवं वहां के शांतिप्रिय लोगों की रेलों के मामले में घोर उपेक्षा हुई है और हिमाचल निवासी अभी तक रेलों को देखने के लिए तरस रहे हैं ।

 

               देश के अनेक भागों में लोग रेलों के विकास एवं विस्तार हेतु मांग करते हैं और अपनी मोंगों को मनवाने के लिए आन्दोलन करते हैं और जब शांतिप्रिय आन्दोलन से उनकी बात नहीं मानी जाती, तो वे उग्र आन्दोलन और तोड़-फोड़ पर उतारू हो जाते हैं, जिससे जन-धन की अपार हानि होती है, लेकिन हिमाचल प्रदेश के लोग शांति पूर्ण तरीके से अपनी मांगें मनवाने के लिए विगत अनेक वर्षों से प्रार्थना करते रहे हैं, परन्तु अभी तक उनकी सुनवाई नहीं हुई है यही कारण हे कि हिमाचल प्रदेश में रेलों का विकास और विस्तार नगण्य हुआ है । मेरा इस सदन के माध्यम से रेल मंत्री महोदया से आग्रह पूर्वक निवेदन है कि आप हिमाचल प्रदेश के लोगों के धैर्य की और परीक्षा न लें । अब समय आ गया है कि हिमाचल प्रदेश के साथ विगत 63 वर्षों से रेलों के क्षेत्र में चले आ रहे अन्याय को दूर किया जाए और इन वर्षों के अन्तराल में देश में रेलों का जितना विकास हुआ है, उसके अनुपात में हिमाचल प्रदेश का जितना हिस्सा रेलों का बनता है, उतना वहां रेलों का विकास एवं विस्तार किया जाए ।

               शिमला-कालका रेल लाइन के वर्ष 2003 में 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में उसे हैरिटेज रेल लाइन का दर्जा दिया गया है । कालका से परवाणु बड़ी रेल लाइन, जो मात्र 2 किलोमीटर है, उसका निर्माण कार्य भी अभी तक पूरा नहीं किया गया है ।

   

ओSpeech was laid on the Table                  गत पन्द्रहवीं लोक सभा के बनने के बाद रेल मंत्री सुश्री ममता बैनर्जी ने भारत की रेलों का बजट पेश किया, लेकिन उसमें पहले की तरह ही पहाड़ी राज्यों की पूरी तरह से उपेक्षा की गई । खासतौर से हिमाचल प्रदेश, जो शिक्षा, स्वास्थ्य, इफ्रास्ट्रक्चर एवं महिला सशक्तीकरण आदि अनेक क्षेत्रों की अग्रणी पंक्ति में खड़ा होता नजर आ रहा है, उसकी पूरी तरह से उपेक्षा की गई है । केन्द्र सरकार के इस उपेक्षापूर्ण रवैये से ऐसा लगता है कि वह पहाड़ी क्षेत्र के राज्यों के साथ अन्याय कर रही है ।

 

               मंत्री महोदया ने बजट पेश करते समय हिमाचल प्रदेश के मनमोहक दृश्यों की तो बात कही, परन्तु उन नजारों का आनन्द भारत की रेल के माध्यम से देशी व अन्तर्राष्ट्रीय पर्यटक ले सकें, इस दिशा में कोई प्रयत्न नहीं किया है । देशी-विदेशी पर्यटक पहाड़ों के सौंदर्य का आनन्द लें और प्रदेश को भी उनके माध्यम से लाभ मिले, इस बारे में रेल मंत्रालय को सोचना चाहिए ।

 

               एन.डी.ए की सरकार के समय माननीय अटल बिहारी वाजपेयी के प्रधान मंत्रित्व-काल में हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर तथा उत्तरांचल को केन्द्र सरकार द्वारा वर्ष 2003 में दिए गए औद्योगिक पैकेज के बाद बद्दी-बरोटीवाला क्षेत्र एकमात्र ऐसा क्षेत्र है, जो इंडस्ट्रियल हब के रूप में विकसित हो रहा है, लेकिन रेल की सुविधा नहीं होने के कारण विकास की गति अत्यन्न धीमी है ।

 

               हिमाचल प्रदेश में अधिकांश ऊंची-नीची पहाड़ियां होने के कारण वहां आने-जाने का साधन केवल सड़कें हैं । यदि रेलों को विकास होता है, तो हिमाचल प्रदेश का आर्थिक एवं पर्यटन की दृष्टि से शीघ्र विकास होगा, जो प्रदेश के ही नहीं बल्कि देश-हित में भी है ।

 

               नवम्बर,2003 में कालका-शिमला रेल मार्ग के 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष में तत्कालीन रेल मंत्री श्री नीतीश कुमार ने शिमला में एक भव्य समारोह में उक्त रेल लाइन को हैरिटेज का दर्जा दिया व समारोह में ऐलान किया था कि कालका-शिमला रेल लाइन पर बन्द रेलवे स्टेशन कोटी, जाबली व सोलन ब्रूरी पुनः खोल दिए जाएंगे, लेकिन मुझे खेद के साथ कहना पड़ रहा है कि अभी तक इस दिशा में कोई प्रगति नहीं हुई है ।

 

               बंद स्टेशनों के बारे में जब उन्हें बताया गया कि इस मार्ग पर सनवारा जैसे कई स्टेशनों के लिए सड़क संपर्क मार्ग नहीं है, तो उनहोने रेल विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि इस रेल मार्ग के ऐसे सभी स्टेशनों के लिए संपर्क मार्ग बनाए जाने पर रेल विभाग प्रदेश सरकार से विचार-विमर्श करे, लेकिन इस दिशा में अभी तक कोई प्रगति नहीं हुई ।

 

               इसी प्रकार तत्कालीन रेल मंत्री महोदय ने कहा था कि कालका परवाणु ब्रॉडगेज रेल लाइन एक साल में बनकर तैयार हो जाएगी, लेकिन आज छः साल के बाद भी वह लाइन बनकर तैयार नहीं हुई है । मंत्री जी ने ऐलान किया था कि किन्नौर, लाहौल-स्पीति, कुल्लू, चम्बा, सिरमौर कांगड़ा जिलों में रेल टिकिट काउंटर खुलेंगे, लेकिन मात्र एक स्थान के अतिरिक्त अन्य स्थानों पर इस दिशा में प्रगति शून्य के बराबर है ।

 

               माननीय मंत्री जी ने कहा था कि रेल मंत्रालय रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉर्पोरेशन व हिमाचल सरकार के साथ मिलकर कालका-शिमला रेल मार्ग के लिए टूरिस्ट पैकेज तैयार करेगा, मुझे नहीं लगता कि इस प्रकार का कोई आकर्षक पैकेज तैयार किया गया है, जिससे इस मार्ग पर टूरिस्टों की आवाजाही बढ़े ।

 

               उस समय कहा गया था कि बाबा भलखू के सम्मान में शिमला में एक संग्रहालय बनाया जाएगा । मैं बताना चाहता हूं कि कालका-शिमला रेल लाइन को आगे बढ़ाने मे जब ब्रिटिश सर्वेयर असफल रहे, तब उन्होंने बाबा भलखू की सेवाएं लीं, हालांकि बाबा भलखू अनपढ़ थे, लेकिन उन्हें ऐसी दिव्य शाक्तियां प्राप्त थीं, जिनके कारण उन्होंने अंग्रेज सर्वेयर और इंजीजियरों को कठिन पहाड़ियों से होते हुए शिमला तक रेलवे लाइन बिछाने का मार्ग प्रशस्त किया । उस समय इस रेल लाइन के निर्माण में कार्यरत अंग्रेज प्रशासन ने बाबा भलखू की भूरि-भूरि प्रशंसा की और इस बात को स्वीकार किया कि उनकी मदद के बिना कालका से शिमला तक की रेल लाइन का निर्माण सम्भव नहीं था । उनकी अपरिहार्य सेवाओं को दृष्टिगत रखते हुए ही उनकी यादगार में एक संग्रहालय शिमला में स्थापित किया जाना था, किन्तु मुझे खेद के साथ कहना पड़ रहा है कि इस दिशा में अभी तक कोई प्रगति देखने को नहीं मिली है ।

               एक अनुमान के अनुसार शिमला में लगभग 50 लाख देशी व डेढ़ लाख विदेशी पर्यटक प्रति वर्ष आते हैं । यदि रेल मंत्रालय, प्रदेश सरकार के परिवहन एवं पर्यटन विभागों के साथ मिलकर पर्यटकों के लिए कुछ आकर्षक टूरिस्ट पैकेज तैयार करे, तो इससे जहां रेलवे की आमदनी बढ़ेगी वहीं प्रदेश में पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा ।

 

               मई, 2006 में तत्कालीन रेल मंत्री माननीय लालू प्रसाद जी ने भी हिमाचल प्रदेश का तीन दिवसीय प्रवास किया । उन्होंने भी शिमला एवं सोलन में समारोह एवं विशेष बातचीत में कई वायदे एवं घोषणाएं कीं, लेकिन मुझे खेद के साथ बताना पड़ रहा है कि हिमाचल प्रदेश के साथ रेलों के विस्तार एवं सुधार के जितने भी वायदे तत्कालीन रेल मंत्रियों ने किए वे सभी अभी तक अपूर्ण अथवा आधे-अधूरे हैं ।

 

               कालका-शिमला मार्ग पर बन्द किए गए जाबली रेलवे स्टेशन के नहीं खुलने से दुखी होकर सैकड़ों स्थानीय नागरिकों ने रेल रोको आंदोलन शुरू किया और तब जाबली रेलवे स्टेशन पर रेल रोकी, तो लगभग एक दर्जन ग्रामीणों के ऊपर रेल रोकने के आरोप में रेल प्रशासन ने मुकदमे दर्ज कर दिए । माननीय लालू प्रसाद जी ने अपने हिमाचल प्रवास के समय वायदा किया था और सार्वजनिक रूप से ऐलान किया था कि इस प्रकार के सभी मुकदमें वापस लिए जाएंगे, लेकिन अभी तक मुकदमें वापस नहीं लिए गए हैं ।

 

               जिला सोलन एवं सिरमौर में बद्दी, काला अम्ब में अनेक छोटी-बड़ी फैक्ट्रियां स्थापित हो चुकी हैं । नालागढ़ से लेकर पांवटा साहब तक इंडस्ट्रियल कॉरीडोर बन चुका है । इसमें लाखों मजदूर काम करते हैं । अरबों रुपए की इंडस्ट्रीज लगी हुई हैं । उन्हें अपना कच्चा माल लाने एवं उत्पादित माल बाजार में भेजने में रेल लिंक के अभाव में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है । इस कारण इस संपूर्ण क्षेत्र में सड़क पर बहुत प्रैशर है । सड़क द्वारा माल ढोए जाने से जहां एक ओर लागत, श्रम एवं समय अधिक लगता है वहीं दूसरी ओर प्रदूषण बढ़ता है । पांवटा साहब देश के ही नहीं बल्कि संपूर्ण विश्व के सिखों का अत्यन्त प्राचीन एवं पवित्र धार्मिक स्थल है, जिसके दर्शनों हेतु लाखों श्रद्धालु प्रति वर्ष आते हैं । इसलिए मेरी प्रार्थना है कि पंजाब के घनौली से उत्तराखंड के देहरादून तक वाया हिमाचल प्रदेश के नालागढ़-बद्दी-सूरजपुर(एच.एम.टी.)- काला अम्ब एवं पांवटा साहब को लिंक करते हुए एक बड़ी रेलवे लाइन का निर्माण किया जाए ।

               आप सीजंड, सीनियर एवं डायनैमिक लीडर हैं । आपसे हिमाचल प्रदेश के लोगों को बहुत आशाएं हैं । इस रेलवे लाइन से इस क्षेत्र में पर्यटन के विकास की जो अपार संभावनाएं हैं वे भी उभर कर आएंगी और इससे स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर भी उपलब्ध होंगे । सबसे अच्छी बात यह है कि इस रेल लाइन के निर्माण से रेलवे को बहुत लाभ होगा । अतः मेरा आग्रह है कि इस दिशा में तत्काल सकारात्मक कदम उठाएं ।

 

               हिमाचल प्रदेश में रेलों का विकास एवं विस्तार प्रदेश के आर्थिक एवं सामाजिक दृष्टि से त्वरित विकास, फलों एवं आफ सीजन सब्जियों, सामाजिक कल्याण, सामरिक दृष्टि से और पर्यटन को बढ़ावा देने हेतु नितान्त आवश्यक है । इसलिए मैं निम्नलिखित प्रमुख सुझाव देना चाहता हूं और आग्रह करना चाहता हूं कि इनके ऊपर गंभीरता से विचार किया जाए । इनके बारे में समयबद्ध कार्यक्रम बनाकर हिमाचल में रेलों के विकास को राष्ट्रीय परियोजना मानकर कार्य किया जाए ।

 

               भानुपल्ली-बिलासपुर-बैरी बड़ी रेल लाइन निर्माण -

 

               इस लाइन निर्माण की बात 1994-95 से चल रही है । इस रेल लाइन की घोषणा वर्ष 2008-09 में की गई थी । इसका प्राक्कलन रुपए 1046 करोड़ का बना था जिसमें से प्रथम खंड के रूप में 20 किलोमीटर के निर्माण कार्य हेतु रुपए 350.33 करोड़ स्वीकृत हुए, लेकिन अभी तक कार्य आगे नहीं बढ़ा है । इस लाइन पर सीमेंट बनाने वाली अनेक फैक्ट्रियां लग चुकी हैं । बहुत तेजी से कई औद्योगिक क्षेत्र विकसित हो रहे हैं । यदि यह रेल मार्ग शीघ्र बना दिया जाता है, तो इस क्षेत्र में रहने वाले कृषकों, बागवानों एवं सब्जी उत्पादकों को अपनी उपज रेल से मंडियों में ले जाने में सुविधा होगी । अभी तक इस क्षेत्र में यह सारा कार्य सड़क मार्ग से होता है जिसमें ज्यादा समय और धन लगता है । इस क्षेत्र में रेल सेवा उपलब्ध होने से रेल की आय तो बेतहाशा बढ़ेगी, साथ ही साथ क्षेत्र का आर्थिक एवं सामजिक विकास होगा । अतः मेरी प्रार्थना है कि इसका कार्य त्वरित गति से कराया जाए ।

 

घनौली- बद्दी रेल लाइन का निर्माण -

 

               चंडीगढ़-बद्दी बड़ी रेल लाइन निर्माण की वर्ष 2007-08 के रेल बजट में स्वीकृति प्रदान की गई थी । केन्द्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ द्वारा उक्त रेल लाइन के निर्माण कार्य हेतु आवश्यक भूमि उपलब्ध कराने में असमर्थता को देखते हुए रेलवे ने घनौली, जिला रोपड़-पंजाब से बद्दी को रेल लिंक देने का प्रस्ताव दिया है । मेरा आग्रह है कि इस हेतु पर्याप्त धनराशि आबंटित की जाए, ताकि हिमाचल प्रदेश के महत्वपूर्ण एवं विशाल औद्योगिक क्षेत्र रेल से शीघ्र जुड़ सके, लेकिन मुझे खेद के साथ कहना पड़ रहा है कि इस दिशा में कोई सकारात्मक कदम अभी तक रेल मंत्रालय द्वारा नहीं उठाया गया है ।

 

               नंगल-तलवाड़ा रेल लाइन -

 

               यह रेल लाइन लगभग30 वर्षों से निर्माणधीन है और अभी तक इसका कार्य पूर्ण नहीं हो सका है । यदि इसके निर्माण कार्य की यही गति रही, तो यह अगले 50 साल में भी पूर्ण नहीं हो पाएगी । अतः मेरा आग्रह है कि इसके निर्माण कार्य को समयबद्ध करते हुए, अगले दो वर्ष में पूर्ण करने का लक्ष्य निर्धारित किया जाए और तदनुसार वांछित धनराशि का प्रावधान किया जाए ।

 

               बिलासपुर-मंडी-मनाली-लेह/लद्दाख बड़ी रेल लाइन निर्माण -

 

               हिमाचल प्रदेश सरकार लगातार इस हेतु प्रयास करती रही है कि हिमाचल प्रदेश के भीतरी भागों को सीमावर्ती भाग लेह-लद्दाख से जोड़ा जाए, ताकि पूरे क्षेत्र का विकास हो सके । इस रेल लाइन का तकनीकी सर्वेक्षण रेल मंत्रालय द्वारा किया जा रहा है । इस रेल लाइन का निर्माण सामरिक दृष्टि से भी आवश्यक है । इसके माध्यम से सीमावर्ती भागों में सेना को रसद एवं अन्य आवश्यक साजोसामान की सप्लाई सुनिश्चित की जा सकती है । इसके माध्यम से लेह-लद्दाख एवं हिमाचल के भीतरी भागों का पर्यटन की दृष्टि से बहुत विकास होगा । यह एक मात्र ऐसी रेल लाइन है, जिसके सामरिक महत्व को ध्यान में रखते हुए भारतीय सेना भी इस रेल लाइन का निर्माण कराना चाहती है । मुझे विश्वास है कि ऐसे देश-हित के महत्वपूर्ण एवं सीमावर्ती प्रदेश की जीवनरेखा बनने वाली इन परियोजनाओं को प्राथमिकता देते हुए इसके लिए धन का प्रावधान करेंगी ।

 

               पठानकोट-जोगेन्द्र नगर नैरोगेज रेल खंड पर नन्दपुर भटोली में 68/3-2 कि.मी. पर रेलवे क्रॉसिंग (फाटक) की मांग बहुत पुराने समय से चली आ रही है । नन्दपुर भटोली कस्बे के लगभग बीच में से रेल लाइन जा रही है जिसके कारण एक तरफ के लोगों को रेल लाइन पार कर दूसरी तरफ जाने में लगभग चार किलोमीटर का लम्बा चक्कर काटना पड़ता है । नन्दपुर भटोली जिला कांगड़ा का एक महत्वपूर्ण कस्बा है । लोगों को कस्बे के एक हिस्से से दूसरे हिस्से में जाने के लिए बहुत लम्बा चक्कर काटना पड़ता है जिसके कारण समय, श्रम एवं धन की बर्बादी बहुत हो रही है । हिमाचल प्रदेश सरकार के वर्तमान मुख्य मंत्री, माननीय प्रो. प्रेम कुमार धूमल, जब नौवीं तथा दसवीं लोक सभा में सांसद थे, तब और उस के बाद जब वे प्रथम बार हिमाचल प्रदेश के मुख्य मंत्री बने तब और अब जब वे दूसरी बार हिमाचल प्रदेश के मुख्य मंत्री बने हैं, तब से बराबर इस रेलवे क्रॉसिंग को बनाने का आग्रह करते रहे हैं । जब मैं पिछली बार लोक सभा का सदस्य बना तब मैंने तत्कालीन रेल मंत्री, श्री लालू प्रसाद यादव से मिलकर प्रार्थना की थी कि इसे तत्काल बनाया जाए, किन्तु कतिपय कारणों से अभी तक यह संभव नहीं हो सका । श्री लालू प्रसाद यादव से पूर्व जो रेल मंत्री थे, उन्होंने भी घोषणा की थी कि नन्दपुर भटोली में शीघ्र रेलवे क्रॉसिंग बनाया जाएगा, लेकिन वह मात्र घोषणा बनकर रह गई । हिमाचल प्रदेश के अनेक सांसदों ने मुझसे पहले भी बार-बार रेल मंत्रालय से अनुरोध किया, किन्तु अभी तक कोई सकारात्मक परिणाम नहीं निकला और जनता की कठिनाई जैसी की तैसी बनी हुई है । रेल मंत्रालय हिमाचल प्रदेश सरकार अथवा स्थानीय निकायों पर रेलवे क्रॉसिंग के लिए धन जमा कराने की बात कहता है और स्थानीय प्रशासन हिमाचल प्रदेश सरकार से धन जमा कराने की बात कहते है । आप तो जानते ही हैं कि हिमाचल प्रदेश सरकार के वित्तीय संसाधन बहुत सीमित हैं । ऐसी स्थिति में रेलवे क्रॉसिंग का खर्च प्रदेश सरकार अथवा स्थानीय निकाय वहन करने की स्थिति में नहीं हैं ।

 

               ऊना-तलवाड़ा रेल लाइन को अम्ब से हिमाचल प्रदेश में मोड़ा जाए हिमाचल प्रदेश की एकमात्र ब्रॉडगेज रेल लाइन ऊना-तलवाड़ा वर्तमान में ऊना से चुरूडू तक बन चुकी है और अम्ब से तलवाड़ा तक का कार्य प्रगति पर है । मैं चाहता हूं कि इस रेल लाइन को अम्ब से हिमाचल प्रदेश के अंदर मोड़कर चिन्तपुर्णी, परागपुर(हैरिटेज विलेज), नादौन और ज्वालामुखी होते हुए रानीताल तक बनाया जाए । इससे हिमाचल की सरहद से निकलने वाली रेल लाइन हिमाचल के बीचों बीच से निकल सकेगी और जिला हमीरपुर का तहसील मुख्यालय नादौन, चिन्तपुर्णी, ज्वाला मां, बृजेश्वरी देवी तथा चामुंडा देवी आदि विश्व विख्यात धार्मिक स्थल रेल से जुड़ सकेंगे, जिससे न केवल रेलवे की आय बढ़ेगी, बल्कि जो दर्शनार्थी इन स्थलों के दर्शन रेल सेवा के अभाव में नहीं कर पाते हैं, वे रेल यात्रा कर प्राचीनतम देवी-देवताओं के दर्शन कर अपने जीवन को धन्य कर पाएंगे । इस हेतु वायुयान की सेवाएं सीमित तथा बहुत महंगी होने के कारण अनेक लोग जो हिमाचल के सौंदर्य के दर्शनार्थ आना चाहते हैं, वे नहीं आ पाते हैं । रेल सेवा उपलब्ध होने से आम तथा खास व्यक्तियों का आवागमन सरल एवं सुलभ हो सकेगा ।

 

               हिमाचल प्रदेश के बद्दी बरोटीवाला औद्योगिक क्षेत्रों को कालका-परवाणु से रेल लिंक दिया जाए - हिमाचल प्रदेश के जिला सोलन की तहसील नालागढ़ में बद्दी और बरोटीवाला में एक विस्तृत औद्योगिक क्षेत्र बहुत तेजी से विकसित हुआ है जिसमें देश के बड़े-बड़े एवं नामी-गिरामी उद्योगपतियों ने अपने-अपने कारखाने एवं कार्यालय स्थापित किए हैं । इसलिए बद्दी और बरोटीवाला को कालका से परवाणु होते हुए उस औद्योगिक क्षेत्र को जोड़ा जाए ।

 

               दिल्ली से ऊना-हिमाचल प्रदेश जाने वाली जनशताब्दी के समय में परिवर्तन                  हिमाचल प्रदेश की जनता की अपार मांग एवं प्रदेश के मुख्य मंत्री, प्रो. प्रेम कुमार धूमल के अथक प्रयासों से दिल्ली चंडीगढ़ जनशताब्दी को ऊना तक बढ़ाया गया, लेकिन उसके परिचालन का समय अनुकूल नहीं होने से हिमाचल प्रदेश के लोगो को पर्याप्त लाभ नहीं मिल पा रहा है । इसलिए क्षेत्र के लोगों की बराबर मांग आ रही है कि उसके जाने समय में परिवर्तन किया जाए । ट्रेन नं. 2057 जो वर्तमान में नई दिल्ली से 15.00 बजे चलकर, 1930 बजे चंडीगढ़ और रात्रि 22.10 बजे ऊना पहुंचती है, जो नई दिल्ली से 11.30 बजे रवाना किया जाए, ताकि यह चंडीगढ़ 1555 बजे और ऊना 1830 बजे पहंच सके । ट्रेन नं. 2056, ट्रेन नं. 2058 एवं ट्रेन नं. 2055 के वर्तमान समय में भी आंशिक परिवर्तन करते हुए चलाया जाए, तो इससे क्षेत्र के लोगों को बहुत सुविधा मिल सकती है ।

 

               ऊना से दिल्ली इंटर सिटी रेल सर्विस प्रारम्भ करने एवं हिमालयन क्वीन में छः कोचेज और जोड़ने के संबध में, मैं कहना चाहूंगा कि ।

 

ऊना के लिए हजरत निजामुद्दीन से एक इंटर सिटी रेल सर्विस प्रारम्भ करने एवं वर्तमान में चल रही हिमालयन क्वीन ट्रेन नं. 4059 (हजरत निजामुद्दीन से कालका तक) में छः अतिरिक्त कोच लगाने की प्रार्थना करता हूं । इन छः कोचों को चंडीगढ़ में उक्त हिमालयन क्वीन से अलग कर के रेल लिंक नं. 130 के द्वारा ऊना तक ले जाया जाए, तो इससे बहुत बड़े क्षेत्र में निवास करने वाले स्थानीय रेल यात्रियों एवं सेना में कार्यरत लाखों हिमाचली सैनिकां को बहुत सुविधा मिलेगी ।

 

               परवाणु से शिमला तक नैरोगेज रेल लाइन को ब्रॉडगेज किया जाए -

               परवाणु से शिमला तक की नैरोगेज रेल लाइन बने 100 वर्ष से भी अधिक हो गए हैं, लेकिन इसका आमान परिवर्तन अभी तक नहीं किया गया है । देशभर से पर्यटक हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला एवं उससे ऊपर के अन्य स्थानों का भ्रमण करते हैं । यदि ब्रॉडगेज लाइन कर दी जाती है, तो जहां एक ओर यात्रियों का आवागमन बढ़ेगा वहीं माल ढोने की क्षमता बढ़ेगी जो अन्ततः रेलवे को लाभदायी होगी।

               पठानकोट-जोगेन्द्र नगर रेल लाइन को ब्रॉडगेज किया जाए -

 

               पठानकोट से जोगेन्द्र नगर रेलवे लाइन लगभग 150 वर्ष पूर्व जलविद्युत परियोजनाओं के निर्माण के लिए भारी मशीनरी ने जाने हेतु अंग्रेजों के समय में बनी थी, लेकिन अब यह रेल लाइन हिमाचल प्रदेश की महत्वपूर्ण रेल लाइन है, जिससे यात्री आवागमन बहुत होता है । यदि इसे ब्रॉडगेज कर दिया जाएगा, तो इससे हिमाचल में पर्यटन को बढ़ावे के साथ-साथ रेलवे की आय में भी इजाफा होगा ।

 

               रानीताल से ज्वालामुखी होते हुए द्योटसिद्ध अथवा ऊना से द्योटसिद्ध रेलवे लाइन बिछाने का सर्वेक्षण कराएं-

 

               प्रसिद्ध सिख तीर्थ स्थान आनन्दपुर साहब के पास मेंरे लोक सभा क्षेत्र के ज्वालामुखी, चिन्तपूर्णी, बृजेश्वरी देवी एवं चामुंडा देवी जैसे अनेक प्रसिद्ध एवं प्राचीन धार्मिक स्थल हैं । आनन्दपुर साहब रेल से जुड़ा हुआ है । नंगल में नैशनल फर्टीलाइजर नामक बड़ा खाद का कारखाना है । भाखड़ा-नंगल जलविद्युत परियोजना है, जहां रोजाना हजारों की संख्या में लोग दिल्ली से जाते हैं ।

 

               आनन्दपुर साहब से श्री नैना देवी जी तक 20 किलोमीटर रेल लाइन का निर्माण -

 

               जिला बिलासपुर में श्री नैना देवी जी भी एक अत्यन्त प्राचीन देवी का स्थान है, जहां लाखों की संख्या में तीर्थयात्री प्रतिवर्ष दर्शनों हेतु आते हैं । मात्र 15-20 किलोमीटर रेल लाइन निर्माण से इस स्थान को सुगमता से आनन्दपुर साहब से जोड़ा जा सकता है । ज्वालामुखी एवं श्री नैना देवी जी में एक वर्ष में लगभग 8 लाख यात्री दर्शनों हेतु आते हैं । अत्यन्त कम खर्च में रेलवे को बहुत राजस्व की प्राप्ति हो सकती है और हिमाचल को रेल की सुविधा उपलब्ध हो सकती है ।

 

ऊना से हरिद्धार के लिए रेल लिंक                  इस बारे में मेरा सुझाव है कि ऊना से कुछ कोच हिमाचल एक्सप्रैस में जोड़कर अम्बाला तक लाए जाएं और अम्बाला से हरिद्वार जाने वाली रेल में उन्हें जोड़ दिया जाए, तो रेलवे के माध्यम से हिमाचल प्रदेश के लोगों को हरिद्वार तक जाने-आने की सुविधा सरलता से उपलब्ध कराई जा सकती है । हिमाचल प्रदेश के लोग अपने परिजनों की मृत्यु के उपरान्त उनके क्रियाकर्म एवं अस्थि विसर्जन हेतु बहुत बड़ी संख्या में हरिद्वार आते-जाते हैं, लेकिन रेल मार्ग के अभाव में भारी कठिनाई महसूस करते हैं । अतः इस प्रस्ताव को तत्काल स्वीकार किया जाए ।

 

               पांवटा साहब (जिला सिरमौर) हिमाचल प्रदेश में रेल आरक्षण केन्द्र की स्थापना- महोदय, पांवटा साहिब, जिला सिरमौर- हिमाचल प्रदेश अत्यन्त प्राचीन, प्रसिद्ध एवं पुण्य सिख तीर्थयात्री धाम है जहां देश भर से लाखों सिख पर्यटक दर्शानार्थ आते है । यह स्थान गुरू गोविन्द सिंह जी की तपःस्थली रहा है । यदि यहां रेलवे के आरक्षण की सुविधा उपलब्ध हो जाती है, तो वृद्ध तीर्थ यात्रियों को तीर्थस्थान में दर्शन करने में सुविधा एवं सहायता उपलब्ध होगी ।

 

               जम्मू-हरिद्वार रेल को दसुआ में ठहराव दिया जाना -

 

               स्थानीय नागरिकों की बहुत पुरानी मांग है कि उक्त ट्रेन का ठहराव दसुआ में किया जाए ।

 

               कांगड़ा वैली छोटी रेल लाइन पर ग्राम त्रिप्पल के निकट रेलवे क्रासिंग पर गेट बनाने बाबत -

 

               इस स्थान पर रेल लाइन के दोनों ओर ग्राम हैं जिनमें हजारों की संख्या में परिवार रहते हैं । रेलवे क्रॉसिंग पर गेट नहीं होने के कारण ग्रामवासियों को अपना भारी सामान लाने-ले जाने में बहुत कठिनाई होती है । इसलिए गेट बनाया जाना नितान्त आवश्यक है ।

 

               हिमाचल प्रदेश के भाखड़ा बांध विस्थापितों के कल्याण हेतु रेलों का विस्तार आवश्यकः-

 

               जैसा कि देश जानता है 1960 के दशक में पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली को बिजली उपलब्ध कराने की दृष्टि से भाखड़ा बांध बनाया गया जिसमें हिमाचल प्रदेश के हजारों गांव उजाड़े गए और लाखों लोग विस्थापित किए गए । हिमाचल प्रदेश के लोगों ने अपने हरे-भरे खेत खलिहान और घर इसलिए जलमग्न होने दिए जिससे कि दिल्ली, पंजाब और हरियाणा की विद्युत उपलब्ध हो सके और उद्योगों का विकास हो सके तथा राजस्थान के रेगिस्तान में फसलें लहलहा उठें, लेकिन उनके साथ केन्द्र सरकार ने सम्मानपूर्वक पुनर्वास करने का जो वायदा किया उसे पूरी तरह नहीं निभाया । परिणाम स्वरूप 47 साल के बाद आज भी बहुत सारे ऐसे भाखड़ा बांध विस्थापित हैं जिनका सम्मानपूर्वक पुनर्वास नहीं हुआ है । पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के जिन भागों में उन्हें बसाया गया है, वहां उनके साथ भेदभाव बरता जा रहा है। जहां उन्हें बसाया गया हे वहां न तो सड़कें हैं, न पेयजल है और न स्कूल व अन्य आधारभूत सुविधाएं हैं । यदि कांगड़ा और बिलासपुर जहां उन्हें अधिक संख्या में बसाया गया है वहां रेलों का विस्तार किया जाता है तो उन्हें सुविधा मिलेगी ।

 

               हिमाचल प्रदेश के सैनिकों हेतु कंप्यूटराइज्ड टिकिट बुकिंग केन्द्र ज्वाली में बनाया जाए -

 

               आप तो जानते ही हैं कि हिमाचल प्रदेश में उद्योग और खेती नहीं के बराबर है । वहां के लोग सेना में भर्ती होकर देश सेवा करने में गौरव महसूस करते हैं । यही कारण है कि चीन के साथ देश का 1962 का युद्ध, अथवा पाकिस्तान के साथ 1972 का युद्ध कोई भी हो, सभी में हिमाचल प्रदेश के अनेक सैनिकों ने अपनी शहादत देकर देश के सम्मान की रक्षा की और दुश्मनों के नापाक इरादे कुचल दिए । यद्यपि उनके परिवारों को सैनिकों की बहादुरी हेतु मरणोपरान्त अनेक पदकों से सम्मानित किया गया, तथापि आज सैनिकों को रेलों से आने-जाने हेतु अपना आरक्षण कराने कालका, पठानकोट अथवा चंडीगढ़ जाना पड़ता है । इसलिए मेरी आपके माध्यम से मांग है कि कांगड़ा जिले के तहसील मुख्यालय ज्वाली में एक कंप्यूटराइज्ड टिकिट बुकिंग केन्द्र की स्थापना की जाए ।

 

               हिमाचल प्रदेश को भेजे जाने वाला सामान जैसे अनाज, चीनी, मिट्टी का तेल, लकड़ी और कोयला आदि राये-महतपुर अथवा ऊना रेलवे स्टेशन पर उतारा जाए -

              हिमाचल प्रदेश को भेजे जाने वाला सामान जैसे अनाज, चीनी, मिट्टी का तेल, लकड़ी और कोयला आदि को पंजाब में कीरतपुर साहब स्टेशन पर न उतारा जाकर हिमाचल क्षेत्र के राये- महतपुर अथवा ऊना रेलवे स्टेशन पर उतारा जाए ।

 

               ऊना को होशियारपुर के साथ बड़ी लाइन से जोड़ा जाए ।

               ऊंचाहार गाड़ी जो वर्तमान में इलाहाबाद व अम्बाला छावनी के मध्य चलती है, उसे ऊना तक बढ़ाया जाए ।

               गाड़ी संख्या 1 एसयूएन/2 एसयूएन, जो वर्तमान में नंगलडैम व सहारनपुर के मध्य चलती है, उसे ऊना तक बढ़ाया जाए ।

              ऊना में बहुत स्थान उपलब्ध है । इसलिए वहां शताब्दी तथा जनशताब्दी एक्सप्रैस गाड़ियों की मरम्मत का कारखाना खोला जाए ताकि हिमाचल निवासियों को रोजगार के साधन उपलब्ध हो सकें ।

              पठानकोट से नूरपुर तक छोटी लाइन के स्थान पर बड़ी लाइन बनाई जाए ।

              वर्तमान में छोटी लाइन की गाड़ियों की मरम्मत आदि का जो काम पठानकोट में किया जाता है, उसे नूरपुर में स्थानांतरित किया जाए ।

 

              गाड़ी सं. 4645 शालीमार एक्सप्रैस का पठानकोट पहुंचने का समय प्रातः 4.10 बज है तथा पठानकोट से जोगेन्द्र नगर जाने वाली गाड़ी के चलने का समय प्रातः4.00 बजे है । इसलिए हिमाचलवासी शालीमार एक्सप्रैस गाड़ी से उतर कर जोगेन्द्र नगर वाली गाड़ी नहीं पकड़ पाते हैं तथा उन्हें वहां तीन घंटे प्रतीक्षा करनी पड़ती है, क्योंकि अगली गाड़ी सुबह 7.00 बजे चलती है । इसलिए शालीमार एक्सप्रैस का पठानकोट पहुंचने का समय प्रातः 3.30 बजे किया जाए, ताकि हिमाचलवासी जोगेन्द्र नगर वाली रेल पकड़ सकें ।

              इलाहाबाद-अम्बाला के बीच परिचालित 4717/4518 ऊंचाहार एक्सप्रेस का विस्तार सरहिन्द के रास्ते ऊना तक किया जाए जिससे दिन में इस क्षेत्र की जनता को लम्बी दूरी की रेल सुविधा विद्युतीकरण के बाद प्राप्त हो सके । इस ट्रेन से वातानुकूलित कोच हटाकर साधारण श्रेणी जी एस कोच जोड़कर 24 कोच का रैक बनाकर ट्रेन को चलाया जाए तथा इलाहाबाद तक विस्तार किया जाए । इस नीति से छोटे स्टेशनों का भी विकास हो सकेगा ।

 

              ऊना-पठानकोट के बीच प्रस्तावित रेल मार्ग का शीघ्रता के साथ निर्माण किया जाए, जिससे शाखा लाइन का स्वरूप् समाप्त होकर प्रमुख महानगर से जोड़कर जम्मू के लिए सामरिक दृष्टि से वैकल्पिक रेल मार्ग सुलभ कराया जा सके तथा इस पिछड़े क्षेत्र का आर्थिक विकास हो सके तथा मालगाड़ियों की परस्पर मात्रा जम्मू के लिए बढ़ाई जा सके ।

 

              हिमाचल एक्सप्रैस 4553/4554 का विस्तार दिन में दिल्ली से आगे मथुरा बयाना-कोटा के रास्ते नीमच तक किया जाए, जिससे राज्य को मध्य प्रदेश के सीमेंट क्षेत्र से जोड़ कर दिल्ली का टर्मीनल भाग कम कर सकें तथा रैक को 24 कोच का रैक बनाकर परिचालित किया जा सके ।

 

              पठानकोट से जोगेन्दर नगर छोटी रेलवे लाइन की पुलिया नं.286 के नीचे से सभी प्रकार के वाहन गुजारने की स्वीकृति प्रदान की जाए और ग्राम नन्दपुर भटोली में कि.मी.68/2-3 पर रेलवे क्रासिंग का निर्माण किया जाए ।

 

              कांगड़ा वैली छोटी रेल लाइन पर ग्राम त्रिप्पल के निकट रेलवे क्रॉसिंग पर गेट बनाया जाए ।

              ऊना से मुम्बई और मुम्बई से ऊना सीधी रेल सेवा उपलब्ध कराई जाए ।

              मुम्बई में हिमाचल मित्र मंडल कार्यालय ने कंप्यूट्रीकृत रेल आरक्षण केन्द्र स्थापित किया जाए ।

              लखनऊ-चंडीगढ़ एक्सप्रैस नं.4231 को चंडीगढ़ से कालका और ऊना तक बढ़ाया जाए ।

          कालका-परवाणु ब्रॉड गेज रेल लाइन का निर्माण शीध्र पूरा किया जाए।

          चंडीगढ़-जगाधरी-पौंटा साहिब-देहरादून रेल लाइन का निर्माण किया जाए।

          घनौली-पिजौर वाया नालागढ़ बद्दी रेल लाइन का निर्माण किया जाए।

          कुमारहट्टी हिमाचल प्रदेश देहरादून रेल लाइन का निर्माण किया जाए।

          कालका से नालागढ़ के बीच 40 किलोमीटर रेल लाइन का निर्माण किया जाए।

 

          ऊना-तलवाड़ा-पठानकोट के बीच नवीन रेल मार्ग का निर्माण जिससे शाखा लाइन का स्वरूप समाप्त करके इसे मैन लाइन बनकर यातायात का विकेन्द्रीकरण किया जा सके। इस योजना के मुख्य अभियंता का दफ्तर चंडीगढ़ के स्थान पर ऊना में स्थापित किया जाए।

 

          जम्मू-हरिद्वार से बीच परिचालित एक्सप्रैस रेलगाड़ी का विस्तार देहरादून-ऋषिकेश तक किया जाए।

 

          मनाली( कुल्लू) को ब्रॉडगेज रेल लाइन से जोड़ा जाए।

 

          जिला किन्नौर मुख्यालय के रिकांगपिओ में कम्प्यूट्रीकृत रेल आरक्षण स्थापित किया जाए।

          311/312 मेरठ-अम्बाला शटल का विस्तार पुनः सरहिन्द के रास्ते ऊना तक किया जाए तथा मेरठ से आगे खुर्जा-हापुड के रास्ते हाथरस किला तक किया जाए।

 

          ऊना रेलवे स्टेशन पर यात्री सुविधओं का अभाव-ऊना रेलवे स्टेशन पर शैल्टर नहीं है। ग्रीष्मऋतु में शीतल पेयजल की व्यवस्था नहीं है। रेलवे स्टेशन को जाने वाला मार्ग भी बहुत खराब स्थिति में है जिसके कारण प्रति दिन दुर्घटनाएं होती हैं।

 

          पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम-ऊना रेलवे स्टेशन पर टिकटों के आरक्षण का समय प्रातः8.00 बजे से दोपहर 2.00 बजे तक है, जबकि सभी रेलवे स्टेशनों पर यह सुविधा प्रायः सुबह 8.00 से रात्रि 8.00 बजे तक, दो पारियों में होती है, लेकिन ऊना रेलवे स्टेशन पर केवल एक पारी में है, जिसके कारण दोपहर बाद यात्रियों को रेल आरक्षण कराने अथवा निरस्तीकरण में बहुत कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। अतः निवेदन है कि ऊना रेलवे स्टेशन पर पैसेंजर रिजर्वेशन अन्य स्टेशनों की भांति दो पारियों में प्रातः 8.00 से रात्रि 8.00 बजे तक होना चाहिए।

 

          ऊना रेलवे स्टेशन से नई रेलों को चलाने के संबंध में-मैं आपके ध्यान में लाना चाहता हूं कि हिमाचल प्रदेश के लोग बहुत बड़ी संख्या में मुम्बई एवं महाराष्ट्र के अन्य क्षेत्रों में रहते है। सच खंड एक्सप्रेस रेल नं. 2716 अमृतसर से नांदेड़ के लिए चलती है। यदि एस रेल के कुछ डिब्बे ऊना रेलवे स्टेशन से चला दिए जाएं, जो अमृतसर से नान्देड़ जाने वाली सच खंड एक्सप्रैस में अम्बाला रेलवे स्टेशन पर जोड़ दिए जाएं, तो ऊना-हिमाचल प्रदेश से रेल यात्री सीधे नान्देड़ तक की यात्रा सुविधाजनक रूप से कर सकते हैं। जिस प्रकार से पश्चिम एक्सप्रैस नं.2926-ए (कालका-बान्द्रा टर्मिनस) एवं नं. 2926(अमृतसर-बान्द्रा टर्मिनस) के डिब्बों को अम्बाला में जोड़ दिया जाता है, उसी प्रकार की व्यवस्था सच खंड एक्सप्रैस में प्रायोगिक रूप में की जा सकती है। इससे देशभर से पर्यटक, धार्मिक श्रद्धालु एवं आर्मी के अधिकारी एवं कर्मचारी सुविधाजनक रूप से हिमाचल प्रदेश आ-जा सकते हैं।

 

          मेरा निवेदन है कि ऊना रेलवे स्टेशन से एक अतिरिक्त ट्रेन चलाई जाए जो दिल्ली, आगरा छावनी, ग्वालियर, झांसी, भोपाल और मनमाड तक जाए। इससे नॉर्थ सेंट्रेल रेलवे, सेंट्रल रेलवे एवं साउथ सेंट्रेल रेलवे को हिमाचल प्रदेश से सीधे जोड़ा जा सकता है।

 

          ऐसा करने से हिन्दू धर्मार्थी मथुरा-वृन्दावन व शिर्डी सुविधाजनक रूप से जा सकते हैं।

 

          सिख तीर्थ यात्री आनन्दपुर साहब जहां खालसा पंथ की नींव रखी गई थी, वहां सुविधा जनक रूप से दर्शनार्थ आ सकते हैं।

 

          डिफेंस पर्सोनैल को आर्मी हैडक्वार्टर आने-जाने, दिल्ली,अम्बाला कैंट, मथुरा, आगरा कैंट, ग्वालियर, झांसी, भोपाल, और औरंगाबाद आने-जाने में बहुत सुविधा होगी।

 

          चुरूडू-टकारला-ऊना रेल में टॉयलेट की व्यवस्था करने के संबंध में-मैं आपके ध्यान में लाना चाहता हूं कि ट्रेन नं. 2 सीएनए, आईसीएनए, जो चुरुडू-टकारला-नंगल डैम-चंडीगढ़-अम्बाला छावनी के लिए चलती है । यह छः घंटे की यात्रा है, लेकिन इस ट्रेन में टॉयलेट्स की कोई व्यवस्था नहीं है । इस कारण रेल यात्रियों को मूत्र एवं शौच जाने में अत्यनत कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है । विशेषरूप से वृद्ध, महिला एवं बच्चों को तो बहुत भारी दिक्कत पेश आती है । अतः मेरा आग्रह है कि छः घंटे की यात्रा वाली इस रेलगाड़ी में टॉयलेट्स की व्यवस्था अवश्य की जाए ।

जगदानंद सिंह (बक्सर): सभापति जी, रेल विभाग द्वारा प्रेषित अनुपूरक मांग पर आपने मुझे बोलने के लिए  समय दिया, उसके लिए मैं आपको धन्यवाद देता हूं। डेडीकेटेड फ्रेट कोरीडोर बन रहा है, रेल मंत्री जी यहां बैठी हुयी हैं, रामकिशुन जी जिसकी चर्चा कर रहे थे, जब मुगलसराय से यह लाइन आगे बढ़ेगी, तो मेरा इलाका आता है। मेरा यही कहना है कि रेल विभाग एलाइनमेंट को ठीक से देखे। जितनी मौजूदा लाइन है, उससे तिगुनी जगह वहां पर मौजूद है, जहां से तीसरी और चौथी लाइन बन सकती है।  इसके बावजूद महत्वपूर्ण और अत्यधिक उपजाऊ जमीन, इरीगेटेड लैंड जो धान और गेहूं की अपार पैदावार देती है, उसे नये सिरे से एक्वायर किया जा रहा है। मैं समझता हूं कि इससे किसी का भला नहीं हो रहा है।

 

          महोदय, मैं बक्सर से आता हूं। बक्सर वह स्थान है जहां भगवान राम को भी विश्वामित्र के आश्रम में शिक्षा लेनी पड़ी थी। इस देश के इतने महत्वपूर्ण स्थान बक्सर को विश्वस्तरीय स्टेशन में नहीं लिया गया है। यह न केवल पर्यटन की दृष्टि से बल्कि बक्सर और चौसा में भारत की काफी बड़ी-बड़ी लड़ाइयां लड़ी गई हैं, इस कारण भी इसका महत्व है। लेकिन आज बक्सर स्टेशन बिल्कुल खंडहर है। सामान्य स्टेशन है, वह भी टूट गया है। उत्तर प्रदेश के बलिया के इलाके के लोग भी इसी स्टेशन पर आते हैं। यहां दो राज्यों से लोग आते-जाते हैं। यह सारा स्टेशन खंडहर बन चुका है। मैं मांग करता हूं कि इस स्टेशन का न केवल नवीनीकरण किया जाए बल्कि रेल मंत्री जी का विश्वस्तरीय स्टेशन का जो सपना है, उसमें इसे भी शामिल किया जाए।

 

          चौसा-डुमरांव-रघुनाथपुर हमारे महत्वपूर्ण स्टेशन हैं। इन्हें भी मॉडल स्टेशनों में लिया जाए। क्योंकि जो महत्वपूर्ण गाड़ियां हैं, वे ऐसे स्थानों से गुजरती हैं वहां आवागमन के लिए यात्रियों हेतु साधन होना चाहिए। हमारा इलाका कैमूर संयोग से इस सदन की अध्यक्ष महोदया का भी इलाका पड़ता है। मैं बताना चाहता हूं कि वह इलाका बिहार से पूरा कटा हुआ है। मोहनिया-भभुआ रोड, जो सासाराम-आरा लाइन बनी है, यदि उसे इसके माध्यम से पटना से नहीं जोड़ा गया तो समझ लीजिए कि वह इलाका आज भी बिहार से कटा ही रहेगा । इसलिए एक ऐसी ट्रेन चलाई जाए जो मोहनिया-सासाराम-आरा होते हुए पटना जाए।

 

          सम्पूर्ण क्रान्ति-विक्रमशीला महत्वपूर्ण ट्रेनों को बक्सर में निश्चित रूप से रोकना चाहिए। यह हर दृष्टिकोण से सही है।

 

          चौसा--बक्सर-डुमरांव-रघुनाथपुर के इलाकों में रेलवे हॉल्ट बने हुए हैं, लेकिन वहां टिकट नहीं मिलते, यात्री सुविधा नहीं मिलती। इसका नतीजा यह है कि इससे रेलवे को भी  लॉस हो रहा है और जो यात्री ट्रेन पकड़ने आते हैं, उन्हें भी कई तरह की कठिनाइयां हो रही हैं। इसलिए मैं माननीय रेल मंत्री जी से कहना चाहता हूं कि इन कार्यों को देखा जाए।

 

          मुण्डेश्वरी-मोहनिया-आरा, पटना-औरंगाबाद, सासाराम-बंजारी, ये तीन रेल लाइनें बननी हैं। इनमें तेजी लाई जाए। जमीन अधिग्रहण की जाए और लाइन बिछाने के काम में तेजी लाई जाए।

 

          डालमिया नगर का कारखाना - रेल विभाग को बहुत कम रुपयों में, बहुत बड़ी सम्पदा मिली है। ऐसा बड़ा कारखाना, सैंकड़ों एकड़ जमीन, जहां आपको कई तरह के रेल के कामों को करना था, यदि रेल विभाग ने उन जमीनों और वहां बने हुए सारे ढांचों का उपयोग नहीं किया, तो कल वह निश्चित रूप से अन्य लोगों के हाथ में चली जाएगी। ...( व्यवधान)

          चौसा और बक्सर स्टेट हाईवेज़ हैं। वहां से कम से कम हजारों गाड़ियां गुजरती हैं, लेकिन ओवर ब्रिज नहीं है। इसलिए चौसा स्टेट हाइवेज़ पर, जो बक्सर से सासाराम, बक्सर से भभुआ रोड जाता है, उस पर चौसा में आकर ब्रिजका निर्माण किया जाए ताकि यात्रियों को आवागमन की सुविधा मिले। बक्सर भारत का महत्वपूर्ण स्थान है, उसे ध्यान में रखते हुए रेल मंत्रालय द्वारा बक्सर को उचित स्थान दिलाने का प्रयास किया जाए।

                                                                                               

श्री सतपाल महाराज (गढ़वाल): सभापति महोदय, आपने मुझे रेलवे की सप्लीमैंट्री डिमांड्स फार ग्रांट्स पर बोलने का अवसर दिया, इसके लिए मैं आपका धन्यवाद करता हूं। मैं सबसे पहले मंत्री महोदया को धन्यवाद देना चाहूंगा कि उन्होंने अपने भाषण में सोशल फीज़ेबिलिटी की बात कही और कहा कि जो सुदूर इलाके हैं, उन्हें रेल से जोड़ा जाएगा। मैं उत्तराखंड से आता हूं।

                             अस्त्युत्तरस्यां दिशि देवतात्मा, हिमालयो नाम नगाधिराज:।

उत्तराखंड की जनता की यह इच्छा है कि ऋषिकेश से कर्णप्रयाग तक रेलवे लाइन का विस्तार हो। मैंने यह भी सुझाव दिया कि इसे चार भागों में बांटा जाए और चार फेज़ेज में पूरा किया जाए। ऋषिकेश से देवप्रयाग, देवप्रयाग से श्रीनगर, श्रीनगर से रुद्रप्रयाग, रूद्रप्रयाग से कर्णप्रयाग, इस तरह चार फेजेज में इसे पूरा किया जाए। पहाड़ के लोग चाहते हैं कि पहाड़ के अंदर रेलवे लाइन का विस्तार हो। आजादी के बाद पहाड़ के अंदर रेलवे का विस्तार नहीं हुआ। आज भी एक डेलीगेशन आया था। मैं मंत्री महोदय श्री मुनियप्पा जी को धन्यवाद देना चाहूंगा कि उन्होंने बड़े सौहार्दपूर्ण वातावरण के अंदर लोगों की बातों को सुना।  मैं मंत्री जी को कहना चाहूंगा कि उत्तराखंड की जनता चाहती है कि mixed coaches having Ist and 2 AC facilities may be introduced in the Train No. 3010 between Dehradun and Howrah which connects the Capital of Uttarakhand, UP and West Bengal. Another important train that needs to have mixed coach with Ist AC berth in Link Express Train Number 4114 from Dehradun to Allahabad via Kanpur. The introduction of mixed coaches with 1st AC berths in addition to 2nd AC in Train Number 5006 Dehradun-Gorakhpur Express. Introduction of mixed Ist and 2nd AC coaches in Train Number 9020 Dehradun-Bandra Express. To provide mixed Ist and 2nd AC coaches in addition to 3rd AC in Trains 5013 from New Delhi to Ramnagar. इसके साथ-साथ वहां के लोग यह भी चाहते हैं कि देहरादून से रामनगर हेतु थ्री टीयर की एक कोच चलायी जाये, जिससे लोगों को बहुत फायदा हो, सहूलियत हो। आपने मुझे बोलने का मौका दिया, इसके लिए बहुत-बहुत धन्यवाद।                 

                                                                                     

श्री रवीन्द्र कुमार पाण्डेय (गिरिडीह): सभापति महोदय, आपने मुझे वर्ष 2009-10 के लिए रेलवे की अऩुदानों की अनुपूरक मांगों पर बोलने का मौका दिया, इसके लिए मैं आपका आभारी हूं। वर्ष 1990-91 मे देखा जाये, तो रेल कर्मचारियों की संख्या 16 लाख थी, लेकिन आज यह घटकर 14 लाख पर आ गयी है। इसके साथ-साथअधिकारियों का रेलवे में कटौती करने का जो चिंतन है, उस पर विशेष रूप से ध्यान देने की आवश्यकता है।

          सभापति महोदय, हम झारखंड  क्षेत्र से आते हैं। धनबाद मंडल के अन्तर्गत तेलों एवं चन्द्रपुरा स्टेशन के बीच कोचागोडा हॉल्ट था, जो अंग्रेजों के जमाने से था, उसे बंद कर दिया गया है। हमारी मांग है कि उसे अविलंब चालू किया जाये। दूसरा, गोमिया एवं बोकारो थर्मल के बीच स्वांग में एक हॉल्ट का निर्माण हो। धनबाद मंडल के अन्तर्गत रामाकुण्डा में हॉल्ट स्टेशन का निर्माण कराने के लिए दस साल आंदोलन चला। इसके लिए डीआरएम से हमें बराबर आश्वासन मिला, लेकिन आज तक इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। हमारे यहां बरमों स्टेशन है, जो अंग्रेजों के जमाने का है। देखा जाये, तो वहां डेवलपमैंट के नाम पर 20 वर्ष में 20 हजार रुपये भी खर्च नहीं हुए, इसलिए वहां कम से कम डेवलपमैंट हो। इसके साथ-साथ पलामू एक्सप्रेस जो दो राज्यों को जोड़ती है, उसमें थ्री टीयर ए.सी. कोच लगवाने की व्यवस्था की जाये क्योंकि यह व्यवस्था पहले भी थी। आज गिरिडीह लोहे के मामले में सबसे बड़ा स्थल है। वहां पर रैक प्वाइंट बनाने की व्यवस्था हो। हावड़ा-गिरिडीह-हावड़ा के लिए रात्रि में एक ट्रेन गिरिडीह के लिए हो। धनबाद से बरकाकाना तक एक नयी ईएमयू ट्रेन चलाने की व्यवस्था हो। अमृतसर जालियावालां बाग एक्सप्रेस गाड़ी और रांची-अलीद्वारपुर एक्सप्रेस का ठहराव मेरे संसदीय क्षेत्र चन्द्रपुरा जंक्शन में दिया जाये।

          सभापति महोदय,  मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री महोदया से कहूंगा कि नयी दिल्ली-रांची गरीब रथ को सप्ताह को तीन दिन गोमो-बोकारो होकर चलवाने की व्यवस्था की जाये। शक्तिपूंज एक्सप्रेस गाड़ी तीन स्टेट्स को जोड़ती है--झारखंड, बंगाल और मध्य प्रदेश। इसमें पेंट्री कार की व्यवस्था नहीं है। गोमिया स्टेशन, जहां बारूद का कारखाना है, वहां पीआरएस की व्यवस्था आज तक नहीं हुई है। ...( व्यवधान) दामोदर रिवर डायवर्शन के कार्य को पूरा करने के लिए रेलवे का करोड़ों रुपया खर्च हुआ, लेकिन आज तक वह कार्य पूरा नहीं हुआ। हमारी मांग है कि कोल इंडिया से मिलकर उस कार्य को अविलंब पूर्ण कराने की व्यवस्था हो। हटिया-जयनगर एक्सप्रेस ट्रेन को रेगुलर किया जाये।      

          सभापति महोदय, अंत में, मैं कहना चाहूंगा कि हमारे यहां हटिया-पटना ट्रेन चलती है। उसका बक्सर तक विस्तार किया जाये। चूंकि कोलांचल और दो राज्य को जोड़ने वाली वह ट्रेन है जिसमें कोलांचल क्षेत्र के हजारों लोग काम करते हैं। वहां पर स्टील प्लांट है। उसे आगे बढ़ाने की व्यवस्था की जाये।  

          सभापति महोदय, आपने हमें बोलने का जो समय दिया, उसके लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।

 

*श्री संजय धोत्रे (अकोला): महोदय, मैं आपका आभारी हूं कि आपने मुझे आज रेलवे की अनुदानों की पूरक मांगों पर अपने विचार व्यक्त करने का मौका दिया।

          महोदय, मैं इस सदन का ज्यादा वक्त न लेते हुए माननीय मंत्री महोदया का ध्यान कुछ महत्वपूर्ण विषयों की ओर आकर्षित करना चाहता हूं।

          महोदय, मेरा निर्वाचन क्षेत्र महाराष्ट्र का अकोला क्षेत्र है। वर्ष 2008-09 के रेलवे बजट में अकोला-खंडवा-रतलाम के बीच गेज कनवर्जन के काम की शुरूआत करने का प्रस्ताव था, लेकिन यह काम शुरू नहीं हो पाया। यह एक महत्वपूर्ण रेलवे लाइन है। यह मीटर गेज लाइन अजमेर से काचीगुढ़ा तक थी और स्वतंत्रता से पूर्व यह एक महत्वपूर्ण रेलवे मार्ग था।

          महोदय, यह रेल मार्ग दक्षिण भारत को उत्तर भारत से जोड़ने वाला सबसे कम दूरी का मार्ग है। आज दक्षिण भारत को उत्तर भारत से जोड़ने के लिए एकमात्र मार्ग भुसावल एवं नागपुर से होकर जाता है। यदि इस मार्ग का गेज कनवर्जन किया जाए तो यह मार्ग सबसे कम दूरी वाला दक्षिण भारत को उत्तर भारत से जोड़ने वाला मार्ग होगा। इसके द्वारा उत्तर भारत से दक्षिण भारत के लिए एक नया कॉरीडोर खुल जाएगा।

          महोदय, इस गेज कनवर्जन को कैबिनेट कमेटी ऑन इकॉनामिक अफेयर्स में वर्ष 2007-08 में एप्रूव भी किया था और इस गेज कनवर्जन का प्रस्ताव वर्ष 2008-09 के रेल बजट में भी था। वर्ष 2009-10के बजट से यह एकदम आश्चर्यपूर्ण तरीके से लुप्त हो गया।

          महोदय, मेरा सरकार से अनुरोध है कि इस महत्वपूर्ण कार्य को जल्द से जल्द पूरा किया जाए।

अकोला से विजयवाड़ा और अकोला से तिरूपति के लिए गाड़ियां ग्रीष्मकाल के दौरान ट्रायल बेसिस पर चलाई गई थीं, जिससे यहां के लोगों में बड़ा उत्साह था। इन रेलगाड़ियों को अच्छा रिस्पांस भी मिला, लेकिन अचानक ही ये गाडियां बंद कर दी गयीं।

          महोदय, मेरा आपके माध्यम से सरकार से अनुरोध है कि इन गाड़ियों को जल्द से जल्द दोबारा शुरू करवाने का कष्ट करें।

          महोदय, बड़े जोर-शोर से यात्रियों की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए नांदेड़-श्रीगंगानगर के लिए एक रेलगाड़ी शुरू की गयी थी, लेकिन मुश्किल से चार चक्कर लगाने के बाद यह गाड़ी भी अचानक बंद कर दी गयी और वह नागपुर से शुरू की गयी।

 

* Speech was laid on the Table           महोदय, मेरा सरकार से अनुरोध है कि इस गाड़ी को दोबारा शुरू किया जाए ताकि जो यात्री इस सुविधा से वंचित हो गये हैं, उन्हें सुविधा प्रदान की जा सके।

          महोदय, मैं और बहुत से सुझाव देना चाहता था, लेकिन समय के अभाव की वजह से अपने विचार यहीं समाप्त करता हूं। आपने मुझे इस विषय पर बोलने का मौका दिया, उसके लिए धन्यवाद।

 

*SHRI RUDRAMADHAB RAY (KANDHAMAL) : Sir, I thank you for allowing me to put forth my problems before the House.

            Indian Railways plays a vital role in the country so far as communication is concerned.  It serves nearly 70% of the total population in the country.

            Since the Railway mostly serves the common people it is the duty of the Railway Ministry to give priority to the undeveloped states.  Orissa is a very under developed state so far as Railway communication is concerned.  Out of 30 districts nearly 7 are not connected by Railways.  The people of these districts being deprived of the railway facilities always put pressure on State Government and Central Government to have Railway connection.  The Government of Orissa has submitted various proposals to the Union Govt. from time and again.

            Khurda Road-Bolangir Rail line : This Railway line is one of the most important line which connects east to west of Orissa covering 5 districts such as Khurda, Nayagarh, Boudh, Sonepur and Bolangir.  The people of these districts have not seen rails.  This project was sanctioned in the year 1994-95 and till date no remarkable progress has been made.  The Project cost has reached from 300 crores to 700 crores.  This project should be given top priority as 2 Nos. of Thermal Power projects at Bhapur and Boudh are coming up which will make this project commercially viable.

 

            Hence, I urge this Govt. in increase the financial allocation in the budget.

KHURDA ROAD – PURI DOUBLING             This project was sanctioned in the year 2002-03 and the first phase of the work from Khurda Road to Delang has been completed in the year 2007-08 and the doubling work has been stopped and no budgetary allocation is made in the year 2009-10.  Puri, it is needless to mention that Puri is one of the biggest pilgrimage in the country.  It is one of our “Dhams” and every year lakhs of   * Speech was laid on the Table.

pilgrims visit Puri.  The Hon. Minister of Railways have declared in the budget speech to convert this Puri Station to a world class station.  Sir, without having a double line world class station seems to be unrealistic. Further more than 15 trains are terminated in Puri and due to want to unrealistic.  Further more than 15 trains are terminated in Puri and due to want of double line the trains are made running late.

            I, therefore, urge the Government to provide budgetary allocation to complete doubling of Khurda-Puri railway line.

            Sir, my friends from Orissa have touched all points in their speech.  I need not to consume the valuable time of the House.  With this I conclude.

 

*श्री दानवे रावसाहेब पाटील (जालना):  महोदय, सप्लीमेंट्री बजट के संबंध में अपने विचार व्यक्त करने का अवसर देने के लिए मैं आपका आभारी हूँ।

        महोदया, इस साल 2009-2010 का बजट सुश्री ममता जी ने रखा उस समय नई नई सरकार आई थी। इस देश के हर हिस्से से सांसद चुन के आते हैं।

        हर सांसद ने अपने अपने क्षेत्र की समस्या इस बजट के समय रखी थी। जो समस्या रखी उस पर ध्यान तो नहीं दिया।

        लेकिन जो घोषणा मंत्री जी ने अपने भाषण में की उसे पूरा नहीं किया।

        क्या आश्वासन दिया था। हम रेलवे में यात्रियों को सेवा और सुरक्षा देगें।

हम 78 नई रेल गाड़ियां चलाएंगे हम नई रेल लाईन डालेंगे।

हम नई रेल लाईन का सर्वे करेंगे।

        और कई आश्वासन मंत्री जी से संसद में दिये थे।

        मैं आपके माध्यम से मंत्री जी को कहना चाहता हूं कि सेवा और सुरक्षा की बात आपने कही है।

        क्या सुरक्षा और क्या सेवा दी है। आपने अध्यक्ष जी मेरा लोक सभा क्षेत्र औरंगाबाद-जालना दो जिलों को मिलाकर बना है। मनमाड से हैदराबाद की लाइन औरंगाबाद जालना से जाती है। मान्यवर औरंगाबाद से पूर्णा तक 25 रेलवे गेट है। जहां कोई गेट भी नहीं और चौकीदार भी नहीं है। हर साल यहां दुर्घटनायें होती हैं।

 

        औरंगाबाद से नजदीक शेंद्रा गांव है। गत वर्ष वहां गेट और चौकीदार नहीं होने के कारण एक गाड़ी रेल से टकरा गयी और हमारे दो उद्योगपति हीरालाल जी अग्रवाल और जिंदल अनिल और शेंद्रे (जलगांव)का एक आदमी और ड्राइवर की मौत हुई। मैंने उदाहरण के तौर पर यह बताया है ऐसी कितनी घटनाएँ हर साल इस रास्ते पर होती है, यह कैसी सुरक्षा है।

        सेवा के बारे में भी अपना अनुभव हमारे नेता लालजी टंडन ने तो बताया ही है। मेरी आपके माध्यम से मंत्री जी से अपील है। हम जो मांगते वह तो नहीं मिलता लेकिन आपने दिया वह भी नहीं मिला। 78 नई गाड़ियां शुरू करने की बात आपने ही कही। केवल 22 गाड़ी शुरू हो पाई यह क्या है।

        मंत्री जी ने 2009-2010 के बजट भाषण में जलगांव से सोलापुर अजंता-एलोरा होते हुए सर्वे करने के बारे में कहा था। लेकिन आज तक इस सर्वे के बारे में क्या हुआ। कहां तक सर्वे हुआ। इसके बारे में अभी तक जानकारी नहीं हैं मैं आपके माध्यम से मंत्री जी से कहना चाहता हूं कि अजंता-एलोरा यह वर्ल्ड फेमस पर्यटन क्षेत्र यहां है। देश विदेश से यात्री यहां आते हैं और हमारे क्षेत्र के अजंता-सिल्लोड-फूलब्री संभाजी नगर पैठण इस एरिया के लिए भी यह रेल मार्ग अवश्य है। आपके माध्यम से मैं मंत्री जी से कहना चाहता हूं कि इस मार्ग का सर्वे तुंत कराके काम शुरू किया जाए।

 

        कई साल पुरानी मांग हमारे क्षेत्र की रही है। जालना से खामगांव रेल रास्ता किया जाए ताकि मराठवाड़ा और विदर्भ की यातायात व्यवस्था ठीक हो सके । जालना से खामगांव दोनों व्यापार पेठ है। इस मार्ग के कारण दो व्यापार पेठ जोड़ने से व्यापार में वृद्धि होगी।

श्री अवतार सिंह भडाना (फरीदाबाद):  महोदय, मैं इस सदन में कुछ विशेष मुद्दों को लेकर आया हूं पिछले20 वर्ष से। मेरे क्षेत्र फरीदाबाद के लाखों लोग, डेली पैसेंजर्स दिल्ली काम करने आते हैं और फरीदाबाद वापस लौटते हैं। दसवीं लोक सभा में मैंने रेलमंत्री जी से आग्रह किया था। अनेक रेलमंत्री आए, आश्वासन दिए, लेकिन कुछ नहीं हुआ। सिर्फ इतना कहा गया था कि जो शटल है, वह पलवल से वापस लौटती है, दिल्ली की बजाए वह होडल से वापस लौटे। मैं चाहूंगा कि वहां जंक्शन न होने के नाते उसे या तो छाता से वापस दिल्ली किया जाए या एक नई शटल फरीदाबाद के लोगों के लिए चलाई जाए। लाखों पैसेंजर्स शटल न होने के कारण दिक्कतों का सामना कर रहे हैं, काफी लोग वहां मारे गए हैं। दूसरी बात यह है कि मेवात माइनारिटी का पिछड़ा हुआ एरिया है, जिसे दसवीं लोक सभा में रेल लाइन से जोड़ने के लिए मुझे आश्वासन इसी हाउस में रेलमंत्री जी द्वारा दिया गया था, लेकिन उस पर कुछ नहीं हुआ। पिछली बार लालू जी ने आश्वासन दिया था, लेकिन उस पर कुछ नहीं हुआ है। जहां इस सरकार ने इतना अच्छा बजट दिया है उसके प्रति देशवासियों से आशाएं हैं, उसी तरह से आज रेलमंत्री ममता जी से आशाएं हैं कि इन्होंने जो आश्वासन दिए है शायद उनको पूरा करेंगी। मेवात के माइनारिटी के एरिया को रेल लाइन से जोड़ने के लिए खुर्जा, पलवल और रिवाड़ी रेल लाइन के बारे में देश के दो प्रधानमंत्रियों ने घोषणाएं कीं, लेकिन आज तक उस पर कोई काम नहीं हुआ है। मैं चाहूंगा कि वहां पलवल को जंक्शन बनाया जाए, एक शटल दी जाए या उसी शटल को छाता से वापस दिल्ली किया जाए जिससे हमारे लाखों लोग जो परेशानी में हैं, उनकी सुविधा मिल सके। दिल्ली के नजदीक एक ऐसा एरिया है जो माइनारिटी और पिछड़ों का है। पलवल के साथ लगा हुआ यह एक ऐसा जिला है जिसमें 80 प्रतिशत ओबीसी के लोगों की आबादी है, लेकिन वहां के लोगों ने आज तक रेलवे लाइन देखी नहीं है, बैठना तो दूर की बात है। वहां आज भी ऐसे लोग हैं, इन्द्रजीत जी इस बात की ताईद करेंगे, ये मेरे साथी हैं, आज तक वहां की हमारी मां-बहनों ने रेल की शक्ल नहीं देखी है, उसमें बैठना तो बहुत दूर की बात है। इसलिए मैं चाहूंगा कि इन प्रोजेक्ट्स को जल्दी से चालू किया जाए। उम्मीद करूंगा कि रेल मंत्री जी मुझे जो आश्वासन दिया है, मुझे यहां सदन में बोलने से पहले रेलमंत्री जी ने आश्वस्त किया है, मुझे उम्मीद है कि मेरे क्षेत्रवासियों की समस्याएं जरूर दूर होंगी। मैं आपका आभारी रहूंगा।

डॉ. राजन सुशान्त (कांगड़ा): महोदय, आपको बहुत-बहुत धन्यवाद।

          मैं रेलवे की अनुदान की पूरक मांगों पर चर्चा के दौरान रेलमंत्री आदरणीय ममता बनर्जी जी से आग्रह करूंगा कि अरबों रूपए के रेलवे बजट एवं योजनाओं में मेहरबानी करके हमारे पहाड़, हिमाचल प्रदेश के ऊपर भी अपनी ममता बरसाएं और हमें भी महसूस कराएं कि हम भी हिन्दुस्तान की आजादी का कोई न कोई फल प्राप्त कर रहे हैं। देश की आजादी के बाद हिमाचल प्रदेश आज भी लगभग वहीं खड़ा है जहां अंग्रेज हमें छोड़कर गए हैं। हमारे यहां रेल का विस्तार न के बराबर हुआ है। मैं थोड़े क्षणों में अपने क्षेत्र के लिए, हिमाचल प्रदेश के लिए कुछ जरूरी मांगों को आदरणीय ममता जी के ध्यान में लाना चाहता हूं। हमारे क्षेत्र में बिना चौकीदार वाली जो क्रासिंग्स हैं, उन पर चौकीदार तैनात करने के लिए मैं तीन फाटकों का नामजोड़ना चाहता हूं - गुरियाल फाटक, लाड़त फाटक और तलाणा फाटक। इसके साथ-साथ राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से मेरा सुझाव है कि पठानकोट, नूरपुर, पालमपुर, जोगिन्दरनगर रेल लाइन को जल्दी से जल्दी ब्रॉडगेज किया जाए और इसके साथ ही राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से उधमपुर और श्रीनगर की लाइन की तरह ही एक नई लाइन पठानकोट, नूरपूर, पालमपुर, जोगिन्दरनगर, मंडी, कुल्लू, लाहौल से होते हुए, लेह-लद्दाख और तिब्बत की सीमा तक बनाई जाए।

18.00 hrs. इसी तरह से चंडीगढ़-उना जो रेल लाइन आ रही है, उसे तलवाड़ा तक बढ़ाकर तलवाड़ा से धमेटा -फतेहपुररहन-जसु रेल लाइन बनाई जाए। चंडीगढ़ से कालका-परवाणु तक जो रेल लाइन है, उसे सोलन-शिमला-किन्नौर, चीन की सरहद तक बढ़ाया जाए। एक रेल लाइन चंडीगढ़ से बिलासपुर-मंडी-कुल्लू से होकर लाहौल-स्पीति, लेह-लद्दाख तक बनाई जाए। मेरी प्रार्थना है कि राष्ट्र की सुरक्षा की दृष्टि से भी और हमारे राज्य के पिछड़ेपन को दूर करने की दृष्टि से भी ये रेल लाइनें बहुत महत्वपूर्ण हैं।

          सभापति महोदय, आपने मुझे धन्यवाद दिया, इसके लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।

MR. CHAIRMAN: Now, the time is 6 o’ clock.  I hope the House would agree for extension up to the business is over.

SEVERAL HON. MEMBERS: Yes, Sir.

MR. CHAIRMAN:  There are two more speakers and we are giving two minutes each.

*श्री हंसराज गं. अहीर (चन्द्रपुर):   महोदय, मैं रेलवे की अनुपूरक मांगों पर अपने विचार व्यक्त करता हूं।महोदय, मैं रेलवे को देश के प्रभावी विकास व आम आदमी की जरूरतों को पूरा करने का सबसे प्रभावी मंत्रालय तथा माध्यम मानता हूं।

          महोदय, मैं महाराष्ट्र के पिछड़े हिस्से विदर्भ के चंद्रपुर तथा यवतमाल जिले का प्रतिनिधित्व करता हूं। जहां की जनता के हित में, जनता की मांगों-जरूरतों को पूरा करने हेतु बजट में प्रावधान तथा नियोजन हेतु मेरी मांगों को स्वीकार करें।

          चंद्रपुर स्टेशन जो जिले का केंद्र है। इस स्टेशन से अनेक गाड़ियां गुजरती हैं। लेकिन जिले का केंद्र होते हुए भी सभी गाड़ियां रूकती नहीं हैं।  सभी गाड़ियों के रूकने और ठहराव हेतु नियोजन हो तथा इस महत्वपूर्ण मार्ग पर दिल्ली की ओर चलने वाली गाड़ियों में चेन्नई-दिल्ली चलने वाली जी.टी. एक्सप्रेस को अमृतसर तक आगे बढ़ाया जाए तथा यशवंतपुर से चलने वाली यशवंतपुर-बिलासपुर गाड़ी को कोलकाता (हावड़ा)तक बढ़ाने की मांग वहां रहने वाले पंजाबीभाषी सिख भाई तथा बंगालीभाषी करीब सवा लाख बंगालीभाषी भाइयों की जरूरत इस मांग से पूरी होगी।वैसे ही चंद्रपुर स्टेशन से चांदाफोर्ट स्टेशन दोनों को जोड़ने वाली नयी रेल लाइन अधिक से अधिक दो किलोमीटर उत्तर की लाइन बिछानी पड़ेगी, जिसे तुंत सर्वे कराकर जोड़ने की मांग मैं करता हूं।

          महोदय, रेल मंत्रालय द्वारा अनेक स्थानों पर आरओबी हेतु मान्यता दी जाती है, जिसमें आरओबी हेतु राज्य सरकारों से 50प्रतिशत हिस्सा मांगा जाता है। इसके चलते आरओबी पूरा होने में अति विलंब होता है। मैं मंत्री महोदया से मांग करता हूं कि आरओबी हेतु राज्य सरकारों से हिस्सा न मांगे। रेल मंत्रालय ही इसकी पूरी धनराशि दे। मेरे क्षेत्र में अति महत्वपूर्ण, जनता की जरूरत को देखते हुए, हमारी मांग पर बाबूपेठ ओवर ब्रिज (सेंट्रल रेल) मंजूर किया गया आरओबी पूरा करें तथा वणी-वरोरा रोड पर, चंद्रपुर-घुगुस रोड पर, माजरी रोड पर तथा वीसापुर गांव के नजदीक आरओबी मंजूर करें। नये रेलवे स्टेशन, मुकुटबन रेलवे स्टेशन (सेंट्रल रेलवे) तथा मारोड़ा रेलवे स्टेशन (एसईसी रेलवे) को मान्यता दें। यवतमाल जिले में रैक प्वाइंट नहीं है, इस जिले में नये रैक प्वाइंट वणी, कायर, मुकुटबन इन जगहों पर नये रैक प्वाइंट हेतु मान्यता दें।

          महोदय, शहरों की बढ़ती आबादी को देखते हुए कई स्टेशनों पर स्थित गुडस शेड हटाने की जरूरत है, जिनमें चंद्रपुर स्टेशन और वणी स्टेशन से गुड्स शेड हटाने की मांग जोरों से चल रही है। इन स्टेशनों पर स्थित इन गुड्स शेड पर कोयला, आयरन ओर, सीमेंट आदि जैसी सामग्री आने से शहर व स्टेशनों पर प्रदूषण व गंदगी बढ़ती है। भारी प्रदूषण बढ़ रहा है। यातायात की समस्या शहरों में भारी विकृति पैदा कर रही है। लोगों में रोष है, गुड्स शेड हटाने की मांग हो रही है। मैं इन गुड्स शेड को हटाने की मांग करता हूं और तुंत कार्यवाही होने की मांग करता हूं।

 

          महोदय, चंद्रपुर स्टेशन से 30वर्ष पूर्व बल्लारशाह, चंद्रपुर, घुगुस गाडियां चलती थीं। इस मार्ग पर पुनः गाड़ी आरम्भ करने की मांग तथा बल्लारशाह से राजुरा होते हुए गड़चांदूर शहर तक नयी गाड़ी चलाएं। इन दोनों जगहों पर रेल लाइन बिछी हुई है।

 

          महोदय, बल्लारशाह स्टेशन पर पिटलाइन का कार्य मंजूर किया हुआ है। इसका कार्य जल्द से जल्द पूरा कराने की जरूरत है। पिछले बजट में बल्लारशाह से सुरजागढ़ के लिए सर्वे हेतु मान्यता मिली थी, जो पूरा हो गया होगा। इस मार्ग पर जल्द से जल्द रेलवे लाइन बिछाने हेतु प्रभावी कार्यवाही करने का प्रावधान करें। हैदराबाद से चलने वाली गाड़ी तेलंगाना एक्सप्रेस को कागजनगर से आगे बल्लारशाह अथवा चंद्रपुर तक चलाया जाए तथा नागपुर से चलने वाली नन्दीग्राम-मुंबई गाड़ी को, लिंक एक्सप्रेस को बल्लारशाह से मुंबई तक चलाया जाए तथा इसी गाड़ी को आगे चलकर मनमाड से लिंक एक्सप्रेस के रूप में पुणे व मुंबई दो भागों में चलाया जाए। यह मांग इस अनुपूरक मांगों के भाषण में करते हुए उन सिकलसेल बीमारी से पीड़ित मरीजों को रेलवे में छूट देने की जरूरत है। यह बहुत ही गंभीर बीमारी है और मैं इन मरीजों को न्याय देने की मांग करता हूं।

RAO INDERJIT SINGH (GURGAON):  I rise to support the Supplementary Demands for Grants of the Railway Ministry.  As time is short, I request the Railway Minister to pay attention as I will not get a chance to repeat myself.

        What I  wish to speak first, Mr. Chairman, about two Rail Freight Corridors.  These are feathers in the cap of the earlier UPA Government; it is a feather in the cap in this UPA Government.  It was thought about and implemented by the last UPA Government and endorsed by the present Railway Minister. As luck would have it, as destiny would have it, both the Ministers, in the earlier Government as well as in this Government, represent States, which are covered by the Eastern Dedicated Rail Freight Corridor. Funding for this project as per the earlier decision was to be done by the Railway Ministry itself. Since both these Ministers are from the region represented by the Eastern Rail Freight Corridor, there would be not be problem with the funding from the Railways; there would be funding from within. 

 

18.02 hrs. (Shri Francisco Cosme Sardinha in the Chair)         However, it is the Western Rail Freight Corridor that I am most interested in as this covers the Central part of the country through the region of the West or towards the Arabian Sea.  Funding for this was left apparently to the mercy of foreign banks, and we have to go out with the begging bowl hoping that some country would support us, hoping that the Development Banks would support us, and hoping the international banks would support us.

         When last heard, Japan had promised Rs.12,500 crore for the building of the Western Rail Freight Corridor.  What I would like to hear from the Railway Minister when she replies is this. Has the Ministry accepted what Japan had offered? Would the Western Rail Freight Corridor be taken up on as fast the war footing as it would be done on the Eastern Rail Freight Corridor?

           There is also a link project between these two Rail Freight Corridors. It passes through Haryana, by-passing Delhi, and it goes around from Rewari, through Mewat, through Palwal, through Khurja and joins up with the Western and Eastern Corridors.  Is the Government’s thinking of proposal to implement this link between these two Corridors in the earliest possible time? I hope this is another issue on which the hon. Minister would answer.

           When we were growing up, we were told that contemplate before you take a step. Once you take a step, thereafter, you are committed and you have to go through with it.  Come hell or come high water. There is a project which I wish to bring to the notice of the Minister and the Government that in 1995-96, there was a survey conducted for the Rohtak-Rewari-Palwal-Khurja Passenger Railway  line.  The IIR at that time also was found to be positive.  During the last Government, from Rohtak to Rewari, the project was implemented and completed, but from Rewari through Mewat, through Pawal, to Khurja and UP, the project has been abandoned.

I would think that this is something that should not be done as it is not in keeping with the image of the Government as such. I would request the Minister that if there are plans to de-congest Delhi, if there are plans to make a railway corridor through Mewat, why cannot the people living in Mewat, the most backward area of Haryana, also be included in a passenger network, the IIR of which has been found to be positive  even as far back as 95-96.

            Finally, every morning, those who live in Delhi go to Chandigarh sometimes, go to Dehradun sometimes, go to Jaipur sometimes, go to Gwalior or Agra sometimes by the Shadabdi. The timing of the Shadabdi is early morning. Whenever any passenger goes by this train – whether he is a foreigner or whether he is an Indian – the first thing that greets him with the morning newspaper is people defecating on the sides of the railway tracks in Delhi. Can I make a request to this Government and can I make a request to the Minister in particular? Does it do any harm to try and make some public latrines on the sides of the stations? Anybody who travels,  even those coming from abroad see the first thing they see is the lines of w-shaped bodies, defecating on the sides on railway land.

MR. CHAIRMAN : Okay, you made your point.

RAO INDERJIT SINGH : So, there are two things – we can either make latrines over there or we should change the time of that train so that it does not function at a time when the people are doing their morning ablutions.

            With these words, I thank you for giving me the time.

   

MR. CHAIRMAN: Shri Rajaram Pal – kindly restrict it to at the most three minutes.

*SHRI M. KRISHNASSWAMY (ARANI) :  Sir, I support the Supplementary Demands for Grants (Railways) 2009-2010.  The Ministry wants more funds to execute certain new projects.  In this regard, I want to submit certain grievances of my place since all other MPs from my State have expressed the other grievances.

            Railways is lifeline of our country.  It plays a vital role to the benefit of common man.  I am from a backward district, Tiruvannamalai, where only farmers and workers are predominant.  A new line has been sanctioned in 2007-2008 Budget, namely, Tindivanam to Nagari via Vandavasi, Cheyyar, Arani, Arcot and Nagari.  A sum of Rs.583.83 crores was earmarked for this project. This new line is connecting Northern Tamil Nadu and Southern Andhra Pradesh.  The people from Tamil Nadu can easily go to the famous temple Lord Venkateshwara Tirupati.  This line passes through my Constituency.  In 2009-2010 Budget, only Rs.25 crores was allotted and foundation stone was also laid by the Ministry in two places crossing the river.  The State Government has promised to do all possible help to complete the project on its part.  The Collector of my district has been instructed to take necessary steps to acquire the land of 648 acres.  The line passes through 30 villages and five major commercial centres.  Earlier, I had requested the Ministry to allot more funds.  Unless sufficient fund is allotted, the project will come to a standstill.  I want to tell you in this august House, Sir, in my area, some people, have not seen the train.  My people in the district are very much interested to see this project is completed. It is the desire of the people. If the Ministry is not giving proper attention, the money already spent, will become waste.  Hence, I request Hon’ble Minister for Railways to allot necessary funds to complete the project and make our dream a reality.

   

* Speech was laid on the Table.

 

श्री राजाराम पाल (अकबरपुर): महोदय, आपने रेल बजट की अनुपूरक मांग के संबंध में बोलने का मौका दिया, इसके लिए मैं आपका आभारी हूं। मैं आपके माध्यम से माननीय रेल मंत्री जी का ध्यान अपने संसदीय क्षेत्र अकबरपुर-कानपुर देहात का हेडक्वार्टर है, उसका सबसे पास जो रेलवे स्टेशन है वह रूरा है। आपने375आदर्श स्टेशन पूरे देश में बनाने की प्लानिंग की है, हमारे संसदीय क्षेत्र जनपद के रूरा स्टेशन को आदर्श स्टेशन का दर्जा देने का काम करें। मैं रेल मंत्री जी का ध्यान उत्तर रेलवे के कानपुर इटावा खंड महिथा से रोशन मऊ एक हाल्ट था, जिसमें बहुत सी ट्रेनों का ठहराव होता था। वहां टिकट की बिक्री होती थी, लेकिन वह लगभग डेढ़ दो साल से बंद कर दिया गया है। वहां ट्रेनों का ठहराव रुक गया है। पन्द्रह किलोमीटर से दूर लगभग एक लाख की आबादी वाले क्षेत्र को रूरा स्टेशन पहुंचने के लिए दस किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है। ऐसी स्थिति में जनता में आक्रोश है। वहां ट्रेक जाम करने के लिए मुझे बाध्य किया जा रहा है। मैं माननीय रेल मंत्री जी से आग्रह करता हूं कि कल कोई ऐसी स्थिति पैदा हो कि रोशन-मऊ हाल्ट जो था, जिसमें ट्रेनों का ठहराव होता था, वहां ट्रेनें न रुकने के कारण क्षेत्रीय जनता अगर हमें बाध्य करेगी, तो वह दिल्ली जाने के लिए मेन रोड है। मैं प्राथमिकता से मांग करता हूं कि प्राथमिकता से रोशन मऊ स्टेशन को रेल गाड़ियों का ठहराव जो पहले से था, उसे सुनिश्चित किया जाए।

          आपके माध्यम से मैं कानपुर सेंटर से लखनऊ मेमो ट्रेनें चलती हैं, अगर वे ट्रेनें रूरा तक कर दी जाएं, तो कानपुर में डिग्री कालेज में आने वाले बच्चों, व्यापारियों और ओवर लोडिंग के लिए सुविधा हो जाएगी। मैं आपके माध्यम से ऐसे स्थल को ब्राडगेज करने के लिए, पिछली बार रेल मंत्री लालू जी ने उसका उद्घाटन किया। जो पूरे देश का सेंटर कहा जाता है, बिठूर, स्वतंत्रता संग्राम में उसका ऐतिहासिक महत्व है और सेंटर कहा जाता है, उसमें मंधना से बिठूर के लिए ब्राडगेज का प्रस्ताव आपके विभाग में लम्बित है।

          इसका उद्घाटन भी हो चुका है। हम चाहेंगे कि अविलम्ब उसका पैसा रिलीज करके उसे ब्रॉडगेज किया जाए और बिठूर जो पर्यटन स्थल है चूंकि आपने अपने बजट में कहा है कि तीर्थ स्थलों, पर्यटन स्थलों, औद्योगिक केन्द्र में स्थित 50 रेलवे स्टेशंस को बहुउद्देशीय परिसरों का निर्माण किया जाएगा। इसलिए मैं रेल मंत्री से मांग करता हूं कि बिठूर तीर्थ स्थल भी है, स्वतंत्रता संग्राम सैनानियों का एतिहासिक स्थल है, पर्यटन स्थल है, उस पर निश्चित तौर पर गाड़ियां चलाने का काम करेंगी। मैं आपके माध्यम से मेरे क्षेत्र में पूढ़ा जो मेन गाड़ियों का सेंटर है, वहां पर ओवर ब्रिज और मेरे क्षेत्र कल्याणपुर में जो कानपुर के नाम से जाना जाता है। अगर कानपुर को आपको जानना हो तो जाम के नाम से कानपुर जाना जाता है। ऐसी स्थिति में सीटीआई और कल्याणपुर स्टेशन की जो क्रॉसिंग है, उसमें ओवरब्रिज बनाया जाए और आपके माध्यम से रेल मंत्री जी से मैं चाहता हूं कि जो स्वर्ण चक्र प्राप्त, वीरता पुरस्कार प्राप्त जिनको ए.सी. सैकेंड का पास दिया गया है जबकि सेना के किसी भी स्वर्ण चक्र प्राप्त आदमी को ए.सी.प्रथम श्रेणी का टिकट दिया जाता है, इसलिए मैं आपके माध्यम से चाहता हूं कि स्वर्ण चक्र प्राप्त लोगों को भी ए.सी. प्रथम श्रेणी की सुविधा दी जाए। मैं आपके माध्यम से मेरे संसदीय क्षेत्र कानपुर सेन्ट्रल से फरुक्काबाद चलने वाले रेल फाटक पूड़ा स्टेशन से पहले भक्कूपुरा और काजीगंज, हसौली ग्राम पंचायत के सामने रेल पथ पर संपार गेट का निर्माण कराने का काम किया जाए तथा कानपुर-फरुक्काबाद चलने वाली गाड़ियों को बढ़ाया जाए।

*SHRI SURESH ANGADI (BELGAUM) : Sir, I draw the attention of the Hon’ble Railway Minister, Ms. Mamata Banerjee, towards Railway line in my constituency.  Britishers had laid the line Hubli-Londa-Belgaum.  This lane was laid to transport wood from the forest area during those days.  After independence, the same lane was continued for the passenger trains also till today.  The survey has been conducted from Dharwad to Belgaum in the previous Government.  Now, I request Hon’ble Minister to provide necessary funds and execute the work on a war-footing basis so as to enable people of that region to avail the facility at least during your period.

            Further, there is very much delay in Ranichennama arrival at Belgaum every day scheduled time for it is 8.30 am, but which is arriving at 10.30 am at Belgaum. Many times requested to you also as well as previous Ministers to change the timings of Ranichennama which should depart Belguam evening 8.00 pm and it should reach Bangalore at 7.00 am and should depart from Bangalore 9.30 pm and arrive at Belgaum at 6.00 am.  During meter gauge rail line it used to take 12 to 14 hours.  Now, after conversion of broad gauge also it is taking the same time of meter gauge.  Hence, after spending huge amount for conversion of broad gauge, the facilities have not been given to my constituency people.  Hence, I  request the Hon’ble Minister to change the timings as early as possible to avoid inconvenience to my constituency people.

            Rajdhani train is leaving Bangalore to Delhi via Kolar which should be changed to via Bangalore-Davanagere-Hubli-Belgaum because now it is passing only through two districts which is not convenient to people of Karnataka.  If this train passes through above mentioned cities, the entire Karnataka people will be benefited.  So, I earnestly request the  Hon’ble Minister, that as Ranichennamma was a lady who fought against the British for   * Speech was laid on the Table.

 

betterment of the people during 1857.  Likewise, you also being a lady Hon’ble Minister, kindly, for the betterment of the people of Karnataka, this Rajdhani Express should be changed via Bangalore-Davanaagere-Hubli-Belgaum-Mumbai-Delhi.

            The Belgaum and Ghataprabha stations should be modernized at the earliest.

 

*श्री शैलेन्द्र कुमार (कौशाम्बी):   महोदय, रेल सप्लीमेंट्री बजट में इलाहाबाद, उत्तर प्रदेश से नई दिल्ली हेतु तुरन्त दुरन्तों ट्रेन चलाई जाए। भरवारी (कौशाम्बी) उत्तर प्रदेश से मुम्बई के लिए ट्रेन चलाई जाए, प्रमुख ट्रेनों का स्टापेज दिया जाए। भरवारी या सिराथू, उत्तर प्रदेश स्टेशनों को कौशाम्बी जनपद का जंक्शन स्टेशन बनाया जाए। सिराथू स्टेशन में कंप्यूटर आरक्षण की भी व्यवस्था की जाए। प्रयागराज एक्सप्रेस ट्रेन का एक मिनट का स्टापेज भरवारी अप एंड डाउन, दोनों तरफ से किया जाए। भरवारी, तिराथू, कुंडा(प्रतापगढ़) स्टेशन के पास रेलवे क्रासिंग घंटों बंद रहता है, इस पर फ्लाई ओवर ब्रिज बनाया जाए। भरवारी एवं कुंडा में रैक बनाकर बफर गोदाम व्यवस्था करें ताकि आम, आंवला, अमरूद बाहर जा सकें।

       

* Speech was laid on the Table THE MINISTER OF RAILWAYS (KUMARI MAMATA BANERJEE): Sir, I am obliged. सभापति महोदय, मैं आपकी आभारी हूं तथा सभी माननीय सदस्यों की आभारी हूं जिन्होंने बहुत अच्छे सुझाव दिये हैं। पहले भी मैंने एक साल पांच महीने काम किया। जब सुनते हैं तो लगता है कि हर माननीय सदस्य को ज्यादा रुचि रेलवे में ही है। सरकार के और भी अन्य विभाग हैं लेकिन एम.पी. और विभागों में जाते भी नहीं हैं और न पूछते हैं। It is because railway is an important visible area इसी के लिए जो भी गांवों और शहरों से आते हैं, रेल के साथ उसका एक संबंध जुड़ा रहता है। इसीलिए ठीक है कि चाहे आलोचना भी होती है, पॉजीटिवली लेना चाहिए, उसके लिए मुझे कोई एतराज नहीं है। Sir, I have been fortunate in being a Member of this House seven times.  This is my seventh term.  I have seen how the Members speak about their demand for railway in their constituencies.  It is a desirable thing. My unfortunate part is that I cannot satisfy the demands of all the Members.  I would have been happy if I would have been able to meet the demands of all of them.  They are all my colleagues and I feel for them. जिसमें हम कर सकते हैं, वह तक तो हम आउट ऑफ दि वे भी जाकर कर सकते हैं अगर ये जेंविन है।I am trying my best to do whatever is within my limitation. When I help someone I do not see whether the Member belongs to this side or that side.  I always consider all Members as one family.  I always used to do that. मैं कभी ऐसे सोचती ही नहीं हूं। जब कभी भी माननीय सदस्य स्टॉपेज के लिए कहते हैं, उनको स्टॉपेज मांगने का हक है। लेकिन मेरे अपने राज्य में एक भी स्टॉपेज नहीं दिया है क्योंकि अगर हम सुपर फास्ट ट्रेन में स्टॉपेज देंगे तो हमारी ट्रेन ही रुक जाएगी, ऐसी आज परिस्थिति हो गई है। दूसरे ऐसे कई देश हैं जहां बुलेट ट्रेन चलती हैं, बहुत बढ़िया स्पीड 200 कि.मी. से ज्यादा स्पीड से ट्रेन्स चलती हैं लेकिन हमारे देश में अभी तक हम नहीं कर पाए हैं। अभी तो फ्रैट ट्रेन 75 कि.मी. में चलती हैं। तो कैसे होगा? इसी के लिए डेडीकेटेड फ्रैट कोरीडोर की बात हम लोग सोच रहे हैं लेकिन अगर हर जगह में रुकावट करेंगे तो रुकावट के लिए खेद हो जाएगा। यह तो पूरी की पूरी ट्रेन रुक जाएगी। we will submit a White Paper to the Parliament and also our Vision. छोटे छोटे हम करेंगे। This is my feeling. छोटे-छोटे जो अर्बन एरियाज हैं, सबर्बन एरियाज हैं, सब-डिविजनल एरियाज हैं, जिनको छोटे-छोटे शॉर्ट टर्म में हम कर सकते हैं लेकिन ज्यादा रूट वह है जो लाँग टर्म में होता है। अगर कोई आदमी दिल्ली से नॉर्थ-ईस्ट गुवाहाटी जाता है तो उसे कितना समय लगता है? वह थक जाता है। इसी तरह से देश में कई इंटीरियर जगह भी हैं जहां पहुंचते-पहुंचते आदमी थक जाता है, हमारे लिए तो ठीक है, हम कानपुर जाते हैं, हम लखनऊ जाते हैं। यह हमारा हक है। लेकिन जब कोई आदमी दिल्ली से गोवाहटी जाता है तो उसे तीन दिन लग जाते हैं। वही सोच सकता है जिसे सोचना आता है, जिसे देखना आता है, जिसे एक्सपीरियंस होता है। हम कभी नहीं सोचेंगे जो हम जिंदगी में कभी कर नहीं सकते हैं। हमें यह भी देखना चाहिए कि All the Members are like family members and we love them. मैं ज्यादा नहीं कहूंगी लेकिन हमारी बैंच के कई दोस्तों ने कहा, I am not interested in eastern corridor and that I am interested only in western corridor.  I cannot say like this.  My priority is, of course, western corridor because the Government started from western corridor.  So we have to fulfil the commitment for the western corridor and then simultaneously, we will go for the eastern corridor.  You cannot say that I belong to eastern corridor.  You cannot humiliate me because it is not my fault. We believe that we are Indian people. The eastern, the western, the southern and the central, all are our places.  We have to think of them.  Now-a-days, people are thinking about divide and rule but I am not.  We want a united India.  If there is a problem in Assam, that is our problem; if there is a problem in Nagaland, that is our problem; if there is a problem in Andhra Pradesh, that is our problem; and if there is a problem in Delhi, that is also our problem. It is our beautiful capital.  We love them all and we respect them because this is our commitment to the country. मैं ज्यादा नहीं बोलूंगी लेकिन डेडिकेटिड फ्रेट कोरीडोर हमारा ड्रीम है। We will do it within the time line.  Everything is in process and you should not worry for this. जापान के साथ माननीय प्रधानमंत्री जी की जो बात हुई है, नेगोसिएशन ऑन है, हमें जो टाइम लाइन तैयार करने की बात की है, हमने तैयार की है। You will be happy to know that from our Railway Land Bank, we are going to provide about 21,000 acres of land for the Dedicated Freight Corridor.  You should feel happy for that. हमने लैंड एक्वीजिशन को भी रिव्यू किया है। कोई कहता है 2007 में हुआ है तो इम्पलीमेंट क्यों नहीं हुआ? मैं किसी के अगेंस्ट नहीं हूं। लेकिन हमने रिव्यू किया है और हम फोर्सफुली लैंड नहीं लेंगे। हम नेगोशिएट करेंगे, हम एमिकेबल सैटलमेंट करेंगे, हमने रेलवे लैंड एक्वीजिशन को रिव्यू किया है। हम एक्वीजिशन को नेगोशिएट करेंगे, उनसे बात करेंगे। हमसे भी कभी-कभी गलती होती है क्योंकि हम जल्दी करने के लिए छोटा और कंजेस्टिड रूट से जाते हैं। क्यों?हमें तीन-चार ऑप्शन्स रखने चाहिए जिससे लोगों को प्रॉब्लम नहीं होगी, जिससे ज्यादा लोगों की जमीन नहीं जाएगी, जिससे लोगों को तकलीफ नहीं होगी, दिक्कत नहीं होगी, हमें ऐसा सोचना चाहिए। Why should we go only for one option?  Now-a-days, so many options are open.  If one option is wrong, I have to go for ‘b’; if ‘b’ option is wrong, I have to go for ‘c’; and if ‘c’ option is wrong, I have to go for ‘d’. Who has told you not to do it?  दो महीने, चार महीने के लिए क्या खून की जरूरत है? दो या चार महीने के लिए पीटने की जरूरत है?क्या दो, चार महीने में देश कहीं चला जाएगा? यह नहीं जाएगा। देश की जनता को कॉन्फिडेंस में लेकर इसे करना होगा। इसके लिए थोड़ी एसेंशियल लाइन है, इसे हमारे डिपार्टमेंट ने रिव्यू करके तैयार किया है। We will also provide one employment each to the affected families. We will acquire their land for this purpose, if they are agreeable but we will not acquire it forcefully. हम एमिकेबल सैटलमेंट करेंगे। इसमें क्या है?दो या छः महीने ऐसे ही बातों में निकल जाते हैं। दो या चार महीने रिव्यू करके देखने से क्या होगा?हमने तय किया है हम वह काम करेंगे जो हमें सौंपा गया है लेकिन हमारा काम करने का तरीका थोड़ा अलग है। हम किसी को पीट कर नहीं करेंगे, हम अच्छे तरीके से बातचीत करके करेंगे। जो हमें देना चाहता है, उसके साथ बात करेंगे। इसके लिए रेल डिपार्टमेंट करेगा, हमारे रेल परिवार ने एक साथ काम करने के लिए यह यह सोचा है।

          महोदय, लालजी टंडन ने सप्लीमेंटरी डिमांड्स फार ग्रांट्स की डिबेट का उद्घाटन किया तो कहा कि बजट का इम्पलीमेंटेशन कुछ भी नहीं हुआ है। मैं लालजी की आभारी हूं कि आपने इस डिबेट का उद्घाटन किया है लेकिन इम्पलीमेंटेशन हुआ है। अभी छः महीने हुए हैं, बजट इम्पलीमेंटेशन पूरे साल के लिए होता है। आपको पता है कि एक बार नहीं हुआ क्योंकि इलैक्शन आ गया था, फरवरी में हुआ था। इसके बाद नई गवर्नमेंट आ गई। दो बार हुए, अभी जून महीने में हुआ है। यह सप्लीमेंटरी टेक्नीकल है और यह परंपरा है और इसके लिए ही होता है कि नॉर्थ-ईस्टर्न रीजन के लिए 731.30करोड़ लेना पड़ेगा, हमने छोटे-छोटे प्रोजेक्ट लिए और छोटे प्रोजेक्ट के लिए 60 हजाररुपए रख दिए।

 

यह कहना कि हुआ नहीं, यह बात ठीक नहीं है। हम लोगों ने बजट में 120 ट्रेनों की बात की थी। Including introduction of new trains; extension and frequency of trains. जो भी किया था। ये सब करके भी अगर मैं आपको बताऊं तो 120 में से 45 ऑलरेडी हो गईं, 45 रेडी है। This is under process. I am waiting for the Winter Session to conclude because the hon. Members are busy with the Session now. It will be done within the next 15 to 20 days. इसके बाद 30 बचेंगी, उसमें 3 गेज कंवर्शन के लिए ; जब तक नहीं होगा, तब तक रखना पड़ेगा तो बाकी कितनी रहेंगी, लगभग 27रह जायेंगी। यह एक हाथ का काम है, रेक्स मिल जाएंगी तो यह भी हो जायेगा। यह मत कहो कि नहीं हुआ, यह ठीक नहीं है।

          सभापति महोदय, हमने बजट में कहा था कि हम लोग व्हाइट पेपर लायेंगे। It is not against any individual. रेल की हैल्थ की कंडीशन क्या है और आने वाले दिनों में क्या होनी चाहिए। यह बहुत सिम्पल है, आप जानते हैं कि इतना बड़ा काम इतनी जल्दी नहीं होता है। हम लोगों ने छोटा सा काम किया है, कैसे हम लोग और अच्छा कर सकते हैं, यह हम सैशन में ही करेंगे। हमारा मिशन 10-15साल के लिए होगा, हमने बजट में भी यह बोला था कि लांग टर्म होना चाहिए, शार्ट टर्म होना चाहिए। इंटीरियर एरियाज के बारे में हमारा मिशन बजट में ही करेंगे। हमने रेल बजट में कहा था कि हम दूंतो ट्रेन चलायेंगे। दूंतो ट्रेनों में पांच ट्रेन्स का अभी इंट्रोडक्शन हो गया है, यह बहुत सक्सैसफुल है। It is cheaper than Rajdhani and it is also faster than Rajdhani.  यह इतना अच्छा हुआ है। कल दो नई रेक्स मिली हैं। कपड़े की खरीद आप दुकान से कर सकते हैं। लेकिन कोचेज नहीं मिलती है। कोचेज और वैगन्स के लिए तीन-चार साल पहले से प्लानिंग करनी पड़ती है। इसी के लिए इस बार हमने ज्यादा वैगन्स का ऑर्डर दिया है और कोच के बारे में हम चाहते हैं कि अगले दस सालों में कितनी अच्छी कोच होनी चाहिए। जो हमारे फिजिकली चैलेंज्ड लोग हैं, जो सीनियर सिटीजन्स हैं, जो बच्चे हैं, जो महिलाएं हैं और जो हमारा प्लेटफार्म का सिस्टम है, इन सबको एडजस्ट करके यह सब कैसे अच्छा होना चाहिए, यह हमें करना पड़ेगा।

          जैसे पैसेंजर अमेनिटीज, क्लीनलीनैस का मामला है। मैं माननीय सदस्यों को एप्रिशियेट करना चाहूंगी, जिन्होंने कहा कि मॉडर्नाइजेशन होना चाहिए। क्लीन सिस्टम पर हमें जाना चाहिए। इसी के लिए हमने बजट में कहा था। We have already set up an Expert Committee under Shri Amit Mitra. That Expert Committee is working on the innovative ideas that can be introduced in the Railways. Then Mr. Sam Pitroda has been appointed as the Chairman of the I.C.T. group. He is taking care of the telecommunication system in the Railways. We also have set up a PPP Committee so that the programmes in the Railways could be expedited.

          हमारे लैफ्ट फ्रंट के दोस्तों ने सुबह कहा था कि पीपीपी से सब खत्म हो जायेगा। मैं कहना चाहती हूं कि यह कभी खत्म नहीं होगा। यदि हमारा दिल ठीक रहे तो कुछ नहीं होता है। हम रेल को प्राइवेटाइज करने नहीं जा रहे हैं। हम ऐसा कभी नहीं करेंगे। I am proud of our employees in the Railways and also in Government. I would like to submit that if we want to create infrastructure, उसके लिए मनी कहां से आयेगा, क्या आसमान से आयेगा? Does one not go for innovative ideas? How many things have they sold out? Let me be not asked about such details. I would not like to talk about that because this is not my political platform and also time is very precious. I do not want to waste the time of the House also. लेकिन पीपीपी कमेटी में जल्दी से जल्दी वर्ल्ड क्लास स्टेशन बनाने को प्राथमिकता दी जायेगी। उसमें ऐसे बहुत सारे प्रोग्राम्स हैं। ऑटोमोबाइल हब हमने शालीमार में शुरू कर दिया है और यह देश के नौ भागों में होगा। जैसे मुम्बई, चेन्नई, गुजरात, कर्नाटक, केरल आदि में होगा, ऐसे नौ हब्स हैं। चूंकि समय कम है, इसलिए मैं ज्यादा नहीं कहना चाहूंगी। It is the automobile hub; an automobile ancillary hub, logistics hub and everything. डेडिकेटिड फ्रेड कॉरीडोर के बारे में माननीय सदस्य कहते हैं कि यह हमारे पास क्यों नहीं है। क्या आपको पता है कि जब डेडिकेटिड फ्रेड कॉरीडोर हो जायेगा। इसमें तीन-चार साल का समय तो लगेगा। लेकिन जब यह हो जायेगा, तब राजस्थान, गुजरात, दिल्ली, महाराष्ट्र, पंजाब, बिहार, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, बंगाल प्रत्येक स्टेट में इतना बढ़िया हो जायेगा कि उनकी इंडस्ट्री कैपेसिटी, उनकी इम्पलायमैन्ट अपार्चुनिटीज और उनका इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ जायेगा। 50साल से जो रेल लाईन नहीं हो पायी, वह भी आपके घर में आ जायेगी। यह पांच साल में कवर कर ली जायेगी और आपके लिये यह इम्पार्टेंट काम होगा। यह एक अच्छी गिफ्ट होगी। जैसे गोल्डन क्वाड्रिलेटरेल हुआ था उसी तरह डायमंड कॉरिडोर भी होगा। यह आम जनता के लिये बहुत बड़ा काम हो जायेगा। मैंने बजट में कहा था कि हम पैरिशेबल फूड्स के लिये करेंगे, उसके लिये हम जस्ट प्लानिंग कर रहे हैं। इसे सिंगूर से शुरु किया है लेकिन दिल्ली में नया अजादपुर में भी होगा। इसी तरह और बहुत सारी स्टेट्स में होगा। हमारी कैटरिंग पौलिसी अभी अंडर कंसीड्रेशन है। मैंने बजट में चार-पांच बातों के बारे बताया था। एक आरआरबी के बारे में था जो रिव्यु हो गया है। हमने कहा  है कि एक ही दिन आरआरबी की परीक्षा होगी जो उस रीजन की रीजनल लैंग्वेज में होगी। इस परीक्षा में देश के कोने कोने के हर आदमी को बैठने का मौका मिलेगा। अगर असम में परीक्षा होगी तो अंग्रेजी, हिन्दी के अलावा असम की लैंग्वेज में भी होगी। अगर गुजरात में होगा तो गुजराती, अगर बंगाल में होगा तो बंगाली में,  अगर केरल में होगा तो मलयालम में होगी, अगर महाराष्ट्र में होगी तो मराठी में होगी। जो ऑफिशियल लैंग्वेज है, उसमें मौका मिलेगा। पंजाब, सिंध, गुजरात मराठा,द्रविड़, उत्कल, बंगा। पूरे देश की जो भी लैंग्वेजेज हैं, उनमें होगी।

          सभापति जी, हम लोगों ने बजट में कहा था कि  स्टूडैंट्स को कनसैशन दिया जायेगा, वह हम लोगों ने कर दिया है।  इज्जत स्कीम भी चालू हो गयी है। एमपी लोगों ने जो जो दिया था,वह हो गया है। जिन एमपीज़ ने नहीं दिया है, वह दे दें ताकि आपके ऐरिया में कुछ काम हो जाये। हमने बजट में जिन कामों को अनाऊंस किया था उनमें से एक-दो काम नहीं हुये हैं।  पोस्ट आफिस में टिकट बेचने के लिये जो काम होना था, हम उसके लिये अभी मूव कर रहे हैं। बाहर के टाउट के हाथों टिकट न खरीदी जाये, इसके लिये डिसैंट्रलाइजेशन का प्रोग्राम पड़ा हुआ है। उसके लिये हम को-आर्डिनेट कर रहे हैं। पैरिशेबल कोमोडीटीज के लिये कोल्ड स्टोरेज बनाना शुरु किया है लेकिन इसे स्पीड अप करना है। हमने मुम्बई में वाशिंग प्लांट चालू कर दिया है। हमने जैसा कहा है वैसे केरल, बंगलौर और कोलकाता में जल्दी से जल्दी स्पीड अप करना है।

          सभापति महोदय, मुश्किलासन के हम दो पॉयलट प्रोजैक्ट ले रहे हैं। इसमें 60 लाख रुपये से ज्यादा का बजट है जिसमें हम दो पॉयलट प्रोजैक्ट करेंगे। पहला कोलकाता, दिल्ली में और यदि यह हो जायेगा तो पूरे देश के लिये करेंगे। हमारे देश में सुपर फास्ट ट्रेन भी चली हैं लेकिन कैटरिंग पैलिसी बाकी है।  हमें आरडीएसओ की पोलिसी को रिव्यु करना है। जो जो हमने बजट में कहा था उसका 90परसेंट काम हम लोगों ने कर दिया है।  वर्ल्ड क्लास स्टेशन्स की बात कही गई है। आप जानते हैं कि टैंडर के लिये कितना वक्त लगता है। आडवाणी जी बैठे हुये हैं, वे बता सकते हैं कि कितना टाइम लगता है। कम से कम 3-4 महीना लगता है। आप लोग कहते हैं कि छ: महीने में क्यों नहीं हुआ? हमारा क्या है, हमने तो ऑर्डर कर दिया  लेकिन रेलवे का काम थोड़ा जल्दी से जल्दी होना चाहिये, इसके बारे में हम लोगों ने इंस्ट्रक्शन्स दी हैं। कभी कभी मैं सोचती हूं कि हमारे वहां भी नहीं हुआ है। आदर्श स्टेशन्स के लिए बजट में रुपया दे दिया लेकिन ये लोग काम जनवरी में शुरु करेंगे। जो लोग कंस्ट्रक्शन में काम करते हैं, उन्हें मालूम होता है कि जो इंजीनियरिंग वर्क्स होता है, वह बारिश में नहीं होता है। वह काम नवम्बर से मार्च तक होता है। जहां तक मल्टी फंक्शनल काम्पलैक्सेज और अदर स्टेशन्स का काम है , वह सब प्रोसैस में है। यह जल्दी से जल्दी हो जायेगा, इसके लिये घबराने की बात नहीं है।

          हमारे एक माननीय सदस्य ने कुम्भ मेले के बारे में पूछा था। हम ने बजट में60करोड़ रुपया दिया है। 14 जनवरी को मकर संक्रान्ति होगी और उसके लिये हरिद्वार के लिये स्पेशल ट्रेन्स चलेंगी। हरिद्वार में पैसेंजर्स एमैनिटीज को बढ़ाने के लिये 60 करोड़ रुपया रख दिया गया है। एक और बात है। गंगासागर मेला भी है। उसके लिए भी हमने दो स्पेशल ट्रेन बोलीं जो बनारस, लखनऊ से वाराणसी से दिल्ली होते हुए गंगासागर जाएगी। गंगासागर के सामने जो कागदीप नामखाना है, वहाँ जाएगी। हमने देखा है, बहुत सारे लोग बिहार से और यूपी से वहां जाते हैं। उनको बहुत तकलीफों का सामना करना पड़ता है। वे धर्मतल्ला जाते हैं, वहां रास्ते में पड़े रहते हैं, फिर तीन घंटे लगाकर गंगासागर जाते हैं। खाना-पीना भी नहीं मिलता है, उनको बहुत मुश्किल होती है। लेकिन हमारा जो वैलफेयर आर्गनाइज़ेशन है, यह बहुत अच्छा काम करता है। इसलिए हम लोगों ने डायरैक्ट बंदोबस्त भी किया है। कुंभ मेला में भी जितनी भी मदद चाहिए, इसके लिए कोई मुश्किल नहीं होगी - चाहे गंगासागर मेला हो, कुंभ मेला हो या क्रिसमस की छुट्टियों में बच्चों को घर जाना हो। अभी बहुत सारे स्टूडैन्ट्स कोई बैंगलोर में पढ़ते हैं तो मुम्बई आना चाहते हैं, कोई कोलकाता जाना चाहते हैं, कोई दिल्ली पढ़ते हैं तो गोहाटी जाना चाहते हैं। इसके लिए हमने बहुत सारी स्पेशल ट्रेन्स चलाने की बात की है ताकि Rush should be cleared. इस बार छः-सात महीने में लगभग 25000 ट्रेन हमने चलाईं, स्पेशल ट्रेन, एक्स्ट्रा ट्रेन और इस साल में भी 35000 से ज्यादा ट्रेन चलेंगी एक्स्ट्रा रश क्लियर करने के लिए। हमारे देश में कोई भी फैस्टिवल हो - चाहे गणपति फैस्टिवल हो, चाहे गंगासागर मेला हो, चाहे कुंभ मेला हो, उर्स हो, माघ मेला हो उसमें स्पेशल ट्रेन चलेंगी। यह आप लोगों का हक है। ऐसा नहीं है कि हम कुछ कर रहे हैं। आप लोगों की चीज़ आप लोग ही कर रहे हैं।

          अभी लालजी टंडन ने कहा कि रेवेन्यू अर्निंग थोड़ा कम हो गया। हाँ, यह थोड़ा हुआ। क्यों नहीं होगा?सिक्स्थ पे कमीशन कितना बर्डन है? मेरे लिए अनफॉर्चुनेट बात है कि वाजपेयी जी के साथ जब मैं एनडीए में थी, तब पांचवां वेतन आयोग था। आडवाणी जी बोलिए कितना था - 6000 करोड़ रुपये, और अभी 28000करोड़ रुपये। पैंशन और एरियर अभी भी एक साल में 23000करोड़ रुपये जाएँगे। और क्या होता है जिस पर हम सबको सोचने के लिए कहेंगे। क्यों हम 500 करोड़ रुपये का लॉस करेंगे सिर्फ रेल अवरोध के लिए?लोग रेल को बंद कर देते हैं। तेलंगाना इश्यू पर तीन दिन रेल बंद। फिर क्यों तेलंगाना दिया, इसके लिए और तीन दिन बंद। I appreciate the sentiments of the local people. मुझे कोई एतराज़ नहीं है। हमारे साथ मार्कसिस्ट्स का झगड़ा है, लेकिन ट्रेन को क्यों रोकते हैं, fight with me politically. आप देखिये कि बिहार में एक पुलिस का लोकल ऑफिसर चेन्ज हुआ तो ट्रेन का इंजन काटकर चले गए। 500 करोड़ रुपये हमने इन छः-सात महीनों में इस प्रकार लॉस किया है। This is the most unfortunate part. रेलवे का तो सोशल ऑब्लिगेशन होता है। हम क्या पैसेन्जर अर्निंग से इनकम कर सकते हैं? रेलवे क्या प्लेन की तरह है? रेलवे में तो गरीब जनता सफर करती है। यह तो आम आदमी की है। The railways is of the people, for the people and by the people.  You cannot compare railways with other business.  When there is flood, it is the railway which carries the food free of cost. जब बाढ़ आती है, अर्थक्वेक होता है, कोई और डिज़ास्टर होता है तो Railway carry all the food free of cost.  लेकिन रेल को अगर आप किसी मूवमैंट में रोक दें तो क्या होगा?एक आदमी बेचारा क्या करेगा? एक तो रेलवे ऐसे ही बेचारा है। उसके ऊपर नया कैसे बनेगा?हर रोज़ तीन घंटे बंद। अभी मैं असम के एक दोस्त को कह रही थी कि देखिये आपके वहाँ बदरपुर-लमडिंग में तीन घंटे से रेल बंद पड़ी है। Everyday it is going on.  So, I would appeal to all the hon. Members that if you want that rail should go to your house, then please take care that trains are not stopped.  Tell them to go ahead because this is people’s money. ...( व्यवधान)

          सर ऑस्टैरिटी के बारे में चर्चा हो रही है। We have decided this time that even from the austerity point of view, at least we will try to save this year Rs. 1,500 crore.  So, the message should go to other Departments also so that they will take care of that aspect.  I appreciate the concern of our hon. Finance Minister.  This is our railway family.  They have taken a decision.  We think we will overcome the situation.  इस समय हमारा पे कमीशन का बर्डन है ही। It is more than Rs. 28,000 crore for pay and pensions.  The annual impact of this enhanced payment is approximately Rs. 30,000 crore. But as far as loading is concerned, it is more. From April to November, 2009 loading achieved is 574.40 million tonnes which is higher by 12.35 million tonne than target of 562.05 million tonne. There is a growth of 10.08 per cent in freight earnings over the corresponding period of last year.  As far as passenger earnings are concerned, from April to November, 2009, passenger earnings have registered a growth of 6.03 per cent.  The other coaching and sundry earnings have shown a growth of 13.76 per cent and 19.52 per cent respectively over the same period. 

            I would like to mention here that as far as freight earnings are concerned, the higher freight earnings were achieved; for the month of September – it was 20.29 per cent, for the month of October – it was 19.74 per cent and for the month of November, it was 18.57 per cent.  It is against the budgeted target of 9.5 per cent.  The loading target of 882 metric tonne for the whole year will be surpassed.समस्या यह है कि हमारा खर्च बढ़ गया है क्योंकि छठे वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू किया गया। इसके अलावा प्राइज़ राइज़ की वजह से भी खर्च बढ़ा है, लेकिन हमने किराए में कोई बढ़ोतरी नहीं की, फ्रेट के भाड़े में बढ़ोतरी नहीं की, यदि हम भी किराए बढ़ाएंगे तो प्राइज़ राइज़ और ज्यादा हो जाएगा। इसीलिए हमने नहीं बढ़ाया। इसके कारण हमारा कुछ तो नुकसान होगा ही। इस नुकसान की भरपायी हम जमीन के कमर्शियल यूज़ और औस्टैरिटी से बैलेंस कर लेंगे। हम जनता के ऊपर इसका बोझ नहीं डालेंगे।

            So, I would just request all the hon. Members to pass the Supplementary Demands for Grant (Railways) for 2009-10.  I would request all the hon. Members to take care of the Railways and the Railway family will take care of all of you.

           

MR. CHAIRMAN : The question is:

“That the supplementary sums not exceeding the amounts shown in the third column of the Order Paper be granted to the President of India, out of the Consolidated Fund of India, to defray the charges that will come in course of payment during the year ending the 31st day of March, 2010, in respect of the head of Demand entered in the second column thereof against Demand No. 16.”   The motion was adopted.