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Lok Sabha Debates

Shri Atal Bihari Vajpayee Moved The Motion That This House Expresses Its ... on 27 March, 1998

Title: Shri Atal Bihari Vajpayee moved the motion that this House expresses its confidence in the Council of Ministers. The motion was under consideration.(Not Concluded) 11.06 1/2 hrs. प्रधान मंत्री (श्री अटल बिहारी वाजपेयी): अध्यक्ष महोदय, मैं प्रस्ताव करता हूं:- "कि यह सभा मंत्रि-परिषद में अपना विश्वास व्यकत करती है।"

  अध्यक्ष महोदय, यह प्रस्ताव पेश करते हुए मेरे हृदय में मिली-जुली भावनाएं हैं। बरबस मेरा ध्यान २८ मई, १९९६ की ओर जाता है। उस दिन, इसी सदन में, इसी स्थान से, मैंने उस समय की अपनी सरकार के लिए विश्वास मत की मांग की थी। तब से लेकर नदियों में बहुत सा पानी बह गया है। लोक तंत्र की सरिता अबाध गति से बहती रहे, यह आवश्यक है। लेकिन कभी-कभी ऐसा लगता है कि वह सरिता अविश्वास के भंवर में फंसकर अपना प्रवाह खो रही है। तब मैंने त्याग-पत्र दे दिया कयोंकि मैं अल्पमत में था और अम्पायर मुझे कहते कि आप मैदान से बाहर चले जाइए, उससे पहले ही मैंने मैदान छोड़ दिया। लेकिन उसके बाद जो घटनाचक़ चला, उस पर इस देश को गंभीरता से विचार करना होगा। १९८९ से विश्वास मत के भंवर में पड़े हुए लोक तंत्र का चित्र हमें चिंता पैदा करता है।
  २१ दिसम्बर १९८९ को फिर विश्वास मत हुआ था। सरकार केवल ग्यारह महीने चली। ७ नवम्बर १९९० को पुन: विश्वास मत हुआ। १९९० में नए प्रधान मंत्री ने विश्वास मत लिया किंतु पांच वर्ष सरकार चलने की बजाए पांच महीने सरकार चली। लोक सभा भंग हो गई। १९९१ के चुनाव में किसी को बहुमत नहीं मिला। कांग्रेस की अल्पमत की सरकार बनी। प्रारम्भ में हमने उसे सहयोग दिया।
  बाद में वह अल्पमत बहुमत में कैसे बदला, इस कहानी में मैं जाना नहीं चाहता। मामला अदालत में हैं। वह सरकार अस्िथरता के भंवर में तो नहीं थी, लेकिन इस सरकार की नाव को भ्रष्टाचार के मगरमच्छों ने क्षत-विक्षत कर दिया। इसीलिए कांग्रेस चुनाव में हारी। कांग्रेस की ऐसी पराजय पहले कभी नहीं हुई थी। १९७७ में इमरजेंसी के अपराधों के कारण कांग्रेस को सत्ता से हाथ धोना पड़ा था, फिर भी कांग्रेस सबसे बड़े दल के रूप में उभरी थी। लेकिन उस समय सबसे बड़ा दल होने का स्थान कांग्रेस ने खो दिया। भारतीय जनता पार्टी बढ़ते हुए जन-विश्वास के आधार पर सबसे बड़े दल का दर्जा प्राप्त करने में सफल हुई। लेकिन चुनाव में कांग्रेस की पराजय के बाद फिर एक अस्िथरता का दौर चला। संख्या कम होने के कारण हमने अपने आप को अगल कर लिया। लेकिन २८ मई को इस सदन में भाषण करते हुए मैंने कहा था कि जनता का विश्वास प्राप्त करके SHRI PUNNU LAL MOHALE (BILASPUR) हम पुन: आयेंगे और आज हम फिर यहां उपस्िथत हैं।
... (व्यवधान) उस समय की परस्िथति में और आज की परस्िथति में जमीन आसमान का अन्तर है। इस बीच अस्प्ृाश्यता की राजनीति विफल हो गई और अलग-थलग करने के प्रयासों पर पानी फिर गया। हम सबसे बड़े दल के रूप में उभरे हैं और अपने मित्र दलों के सहयोग से हम सबसे बड़े गठबंधन के रूप में उभरे हैं।
... (व्यवधान) बहुमत से थोड़ा कम हैं। हमने इस बात पर पर्दा नहीं डाला। हम राष्ट्रपति जी के पास दावा पेश करने के लिए नहीं गए। राष्ट्रपति महोदय ने हमें स्वयं विचार-विमर्श के लिए बुलाया और हमने उनसे कहा कि संख्या थोड़ी कम है। उन्होंने कहा - मैं और दलों से विचार-विमर्श करूंगा और उन्होंने विचार-विमर्श किया। हमारे साथ जो दल थे, जिन दलों के समर्थन का हम दावा कर रहे थे, उनके बारे में राष्ट्रपति महोदय ने दस्तावेज मांगे। अलग-अलग बातें कीं। तेलगू देशम के नेताओं से उनकी चर्चा हुई और वे इस परिणाम पर पहुंचे। कांग्रेस पार्टी ने सरकार बनाने का दावा नहीं किया। कांग्रेस की अध्यक्षा और कांग्रेस के संसदीय दल की नेत्री, श्रीमती सोनिया गांधी, भी राष्ट्रपति जी से मिलने गई थी और श्रीमती सोनिया गांधी ने उनसे कहा कि हम दावा नहीं कर रहे हैं। संयुकत मोर्चा दावा करता, इसका तो सवाल ही नहीं था। चुनाव में सबसे ज्यादा चोट उन्हें ही लगी है।
  कांग्रेस का भी एक सदस्य बढ़ा है। संयुकत मोर्चा की संख्या तो आधी रह गयी है। उन्होंने भी कहा है कि हम सरकार बनाने में रूचि नहीं रखते । तब राष्ट्रपति महोदय ने मुझे सरकार बनाने के लिए कहा। एक समय-सीमा निर्धारित की और वह समय-सीमा २९ तारीख को समाप्त हो रही है। मैं विश्वास का मत प्राप्त करने के लिए आपके सामने खड़ा हूं।
  मैं सदन के सामने इस बात को रखना चाहता हूं कि विश्वास मत प्राप्त करने का सिलसिला एक वर्ष के बाद दूसरे वर्ष, तीसरे वर्ष, ये कब तक चलेगा। विश्वास का मत मुझे प्राप्त करना है इसलिए में यह प्रश्न खड़ा कर रहा हूं ऐसी बात नहीं है। आज हर देशवासी के मन में, हर लोकतंत्र प्रेमी के मन में यह सवाल उठ रहा होगा और उठना भी चाहिए कि आखिर देश राजनीतिक अस्िथरता के भंवर में कयों फंस गया है? जैसा मैंने कहा, यह सिलसिला बंद होना चाहिए। हम आशा करते थे कि चुनाव के बाद दो-टूक फैसला होगा। यह ठीक है कि आज यदि जनादेश किसी के पक्ष में है तो वह भारतीय जनता पार्टी और उसके मित्र दलों के पक्ष में है। कांग्रेस और संयुकत मोर्चा के पक्ष में तो बिल्कुल नहीं है।
... (व्यवधान) हमारे विरोधी दल आपस में भी लड़कर आए थे। इसलिए मैंने राष्ट्रपति महोदय से कहा था कि आप और दलों को बुलाकर पूछ लीजिए। जिम्मेदारी लेने से पहले हम चाहते हैं कि और दलों को आप मौका दें। कोई सरकार बनाने के लिए तैयार नहीं था। आज मैं फिर उस बात को दोहराता हूं। अगर हमारे विरूद्ध सब दल इकट्ठे होते हैं, और स्िथर सरकार देने में सफल होते हैं तो आगे आएं। इकट्ठे तो पिछली बार भी हो गये थे। कांग्रेस पार्टी बाहर से समर्थन दे रही थी। कुछ महीने समर्थन दिया और फिर समर्थन वापिस ले लिया और देवगौड़ा जी मुश्िकल में फंस गये।
... (व्यवधान) उनके ऊपर यह आरोप लगाया गया कि वह कांग्रेस पार्टी को तोड़ना चाहते थे। मैं नहीं जानता कि इसमें सच्चाई कया है? फिर मेरे मित्र श्री इंद्र कुमार गुजराल प्रधान मंत्री बने और कांग्रेस पार्टी ने थोड़े महीने बाद फिर समर्थन वापिस ले लिया। अब कांग्रेस पर भरोसा कौन करेगा? लेकिन अब अगर नये विश्वास की स्ृाष्िट हुई है और कुछ नयी शुरूआत की आकांक्षा है तो मैं कहूंगा कि देश को स्िथर सरकार की आवश्यकता है, ईमानदार सरकार की आवश्यकता है और इस आवश्यकता को, इस सरकार की आवश्यकता को हम पूरा करेंगे।
... (व्यवधान)
  अध्यक्ष महोदय, राष्ट्रपति जी ने जब हमें बुलाया तो उनके सामने दो कसौटियां थीं।
  उन्होंने दो बातों पर गम्भीरता से विचार किया - एक भारतीय जनता पार्टी सबसे बड़े दल के रूप में उभरी थी और दूसरा भारतीय जनता पार्टी और मित्र दलों का गठबंधन सबसे शकितशाली गठबंधन था, लेकिन एक और विशेषता थी कि यह गठबंधन चुनाव के पूर्व हुआ था, चुनाव के बाद नहीं। हम इस गठबंधन को लेकर मतदाता के पास गए थे। चुनाव के पूर्व जो गठबंधन होते हैं, उनमें विचारों की समानता होती है। इसलिए राष्ट्रपति महोदय ने चुनाव के पूर्व गठबंधन के तथ्य को अधिमान दिया और हमें सरकार बनाने के लिए बुलाया। चुनाव में हम जनता के सामने दो प्रमुख लक्षय लेकर गए थे - एक देश को राजनैतिक स्िथरता देना और दूसरा देश को स्वच्छ शासन और प्रशासन देना। यह गठबंधन चुनाव के पूर्व था, इसलिए यह कहना गलत होगा कि यह गठबंधन केवल सत्ता के लिए था। लोकतंत्र में सत्ता में भागीदारी स्वाभाविक है, आवश्यक है, लेकिन चुनाव पूर्व गठबंधन में और चुनाव के बाद के गठबंधन में जो गुणात्मक परिवर्तन है, उसको समझा जाना चाहिए। राष्ट्रपति महोदय ने समझा और उन्होंने हमें सरकार बनाने के लिए बुलाया।
  अध्यक्ष महोदय, जिस तरह के चुनाव परिणाम आए हैं, उनका मैं संक्षेप में उल्लेख करना चाहता हूं। तमिलनाडु में सुश्री जयललिता के नेत्ृात्व में ए.आई.ए.डी.एम.के. की वापसी ने चुनाव दृश्य के पर्यवेक्षकों को आश्चर्य में डाल दिया। कर्नाटक में श्री हेगड़े के नेत्ृात्व में लोक शकित के साथ हमारा गठबंधन परिणाम लाया है। उड़ीसा में श्रद्धेय बीजू बाबू के सुपुत्र श्री नवीन पटनायक ने बीजू जनता दल का उदय करके राजनीति की तस्वीर ही बदल दी। पश्िचम बंगाल में ममता जी के नेत्ृात्व में त्ृाणमूल कांग्रेस ने कांग्रेस तथा मार्कसवादी दलों को मूल से हिला दिया।
... (व्यवधान)
  श्री सत्यपाल जैन (चंडीगढ़) अध्यक्ष महोदय, आप माननीय सदस्यों से कहिए कि वे टोका-टाकी न करें, नहीं तो हम भी इनके लीडर्स को बोलने नहीं देंगे। इसके बाद शरद पवार जी ने बोलना है ... (व्यवधान)
  अध्यक्ष महोदय : यह अच्छा नहीं है।
 
... (व्यवधान)
SHRI ATAL BIHARI VAJPAYEE (LUCKNOW) श्री अटल बिहारी वाजपेयी:गुजरात में सिद्धांहीन गठबंधन परास्त हुआ और जनता ने SHRI OMAR ABDULLAH (SRINAGAR) पुन: हमें अपना विश्वास दिया। कुछ प्रदेशों में हमें अपेक्षा के अनुसार सफलता नहीं मिली। हम असफलता के कारणों पर गहराई से विचार कर रहे हैं। कुछ दलों के साथ हमारा गठबंधन इस चुनाव को लेकर ही नहीं हुआ, इससे पहले भी हम उनके साथ मिल कर काम करते रहे हैं, सरकार चलाते रहे हैं। अकाली दल और भारतीय जनता पार्टी का गठबंधन   केवल सत्ता के बंटवारे के लिए नहीं है, पंजाब में सैकड़ों साल से हिन्दू और सिखों के बीच में जो भाईचारा चला आ रहा है, उसे मजबूत करने के लिए है।
  अब पंजाब में सरसों की पीली फसल के ऊपर रकत के लाल धब्बे नहीं दिखाई देंगे। पंजाब की शामों में गिद्धा सुनाई देता है। अभी बैसाखी का त्यौहार आ रहा है। पूरा पंजाब मस्ती में झूमेगा।
... (व्यवधान) पंजाब में आतंकवाद को परास्त करने का कांग्रेस श्रेय लेती है, लेकिन जनता इस दावे को स्वीकार नहीं करती। अगर स्वीकार करती तो पंजाब में कांग्रेस की पराजय कयों होती? हिमाचल प्रदेश में हिमाचल विकास कांग्रेस के साथ हम मिलकर काम कर रहे हैं।
... (व्यवधान) हरियाणा में भारतीय जनता पार्टी और हरियाणा विकास पार्टी की मिली-जुली सरकार चल रही है। अब हरियाणा और पंजाब के बीच में पारस्परिक सहयोग की चर्चा होती है, विवाद के मसले नहीं उलझाए जा रहे। जहां-जहां हमारी सरकारें हैं भारतीय जनता पार्टी की, वहां दारू बंद कर दी गई है। लेकिन जनता की मांग पर उस पर पुनर्िवचार किया जा रहा है, कयोंकि लोकतंत्रात्मक सरकार है। और प्रदेशों में भी यह दारूबंदी का प्रयोग कई रूपों में से निकला है। लोग एक प्रयोग करते हैं, फिर उससे सीखते हैं, फिर दूसरी नीति बनाते हैं। लेकिन जो कठिनाइयां उत्पन्न होती हैं उनका विचार करके सरकार अगर नीति में परिवर्तन करे तो फिर उसे उसके लिए श्रेय दिया जाना चाहिए। मुझे विश्वास है भजन लाल जी ज़रूर इसके लिए वाहवाही कर रहे होंगे।
  अध्यक्ष महोदय, जैसा मैं स्पष्ट कर चुका हूं कि बहुमत प्राप्त करने में कमी रहने के कारण हमने सरकार बनाने का दावा नहीं किया था, लेकिन आज हम सदन में बहुमत में हैं और अपना बहुमत सिद्ध करेंगे। लेकिन मैं फिर इस बात को दोहराना चाहता हूं कि बहुमत और अल्पमत, ये लोकतंत्र के लिए आवश्यक हैं लेकिन कया लोकतंत्रीय पद्धति बहुमत और अल्पमत के खेल में अटककर रह जाएगी? कया स्िथरता का कभी समाप्त न होने वाला दौर चलता रहेगा? पिछले १८ महीने की अनश्िचतता ने, अस्िथरता ने किस तरह से देश को कठिनाइयों में डाला है, विशेषकर आर्िथक मोर्चे पर, उसका उल्लेख मेरे सहयोगी वित्त मंत्री श्री यशवन्त सिन्हा कर चुके हैं। उन्होंने स्िथति का यथार्थ चित्रण किया है। स्िथति चिन्ताजनक है। १८ महीने की अनश्िचतता के कारण, अदूरदर्शी नीतियों के कारण अर्थव्यवस्था बुरी तरह से प्रभावित हुई है। खाद्यान्न का उत्पादन घटा है, निर्यात घटा है, सरकारी आमदनी घटी है, वित्तीय घाटा बढ़ा है। इसे रोकने के उपाय करने पड़ेंगे। उसके लिए केन्द्र में स्िथर, सक्षम और ईमानदार सरकार की ज़रूरत है। अगली शताब्दी की चुनौतियों का सबको सामना करना होगा।
  यह अकेले एक दल का या अनेक दलों के गठबंधन का सवाल नहीं है। आप जब इधर थे तब आपकी कठिनाइयां हम देख रहे थे और जब-जब उन कठिनाइयों से निकलने के लिए हमारी सहायता की आवश्यकता हुई, हमने कभी इंकार नहीं किया, हमने कभी अस्वीकार नहीं किया। आखिर दल देश के लिए हैं, राष्ट्र सवर्ोपरि है, भारत संसार का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, लेकिन राजनीतिक अस्िथरता न केवल हमारी अर्थव्यवस्था को आहत कर रही है बल्िक सबसे बड़े लोकतंत्र के नाते वह विश्व में हमारी छवि को भी धूमिल कर रही है।
  राष्ट्रपति महोदय के अभिभाषण के माध्यम से मैंने अपनी सरकार की प्राथमिकताओं और उसकी नीतियों पर प्रकाश डाला है। राष्ट्रपति महोदय के अभिभाषण से अगर किसी का मतभेद है तो वह मतभेद कहां है और कयों है, हम इस पर चर्चा करने के लिए तैयार है। हमारा कार्यक़म राष्ट्र के सर्वांगीण विकास का कार्यक़म है। यह सर्वस्पर्शी कार्यक़म है। यह देश के सभी भागों और समाज के सभी अंगों के उत्थान के लिए है। इसीलिए हमने इसे न्यूनतम कार्यक़म नहीं कहा। हमने इसे राष्ट्रीय एजेंडा का नाम दिया है। हम चाहेंगे कि वह गम्भीर चर्चा का विषय बने। इस एजेंडे में हम जनआकांक्षाओं और सरकार की करनी के बीच जो फासला बढ़ा है, उसे कम करना चाहते हैं। भारत एक बहुदलीय लोकतंत्र है, हमे इस पर गर्व है और हम लोकतंत्र की इस विशेषता को वर्धमान करने के लिए कटिबद्ध हैं। स्वाधीनता के बाद ऐतिहासिक कारणों से केन्द्र में और राज्यों में भी एक दल का वर्चस्व रहा, जिसके कारण अनेक विकृतियां आईं। कुछ लाभ भी हुए थे। लेकिन स्िथति यहां तक बिगड़ गई कि मुख्य मंत्री केन्द्र से नामजद होने लगे। प्रदेशों की स्वायत्तता व्यवहार में घटने लगी। क्षेत्रीय अपेक्षा और आवश्यकताओं के प्रकटीकरण का उचित माध्यम नहीं मिला। आज यह बड़ी प्रसन्नता की बात है कि अलग-अलग क्षेत्रों में क्षेत्रीय दल सत्ता की बागडोर संभाल रहे हैं और राष्ट्र के विकास में अखिल भारतीय दृष्िटकोण विकसित करते हुए योगदान दे रहे हैं। ये सब हमारी बधाई के अधिकारी है, हमारे अभिनंदन के अधिकारी है।
  शकितशाली केन्द्र और शकितशाली राज्य इनमें कोई अंतरविरोध नहीं है। हम चाहेंगे कि राज्यों को और अधिक स्वायत्तता मिले। हम चाहेंगे कि मुख्य मंत्री छोटी सी बात के लिए, थोड़ा सा अनुदान लेने के लिए, छोटी सी योजना पूरी कराने के लिए नई दिल्ली तक दौड़ लगाने का सिलसिला बंद कर दें। साधनों का बंटवारा इस तरह से होना चाहिए कि राज्य अपने पैरों पर खड़े हो सकें, विकास की जिम्मेदारियां निभा सकें। मित्रों इसके लिए राजनीति में जो नकारात्मकता आ गई है, जो एक छूआछूत की भावना आ गई है, उसे दूर करने की जरूरत है। पिछली बार केवल भारतीय जनता पार्टी को सत्ता से अलग रखने के लिए जो गठबंधन बना, वह गठबंधन टूट गया, बिखर गया।
  अध्यक्ष महोदय, देश के सामने नए चुनाव की चुनौती आ गई। अब कया फिर वही परिदृष्य दोहराया जाएगा? पुराने राजनीतिक दल पहले जहां खड़े थे, भले ही वे वहां खड़े हों, लेकिन जनता आगे बढ़ गई और हमारे साथ काम करने वालों की संख्या भी निरंतर आगे बढ़ रही है। आज सारे देश का प्रतनधित्व इधर है। हम समाज के सभी वगर्ों को साथ लेकर चलना चाहते हैं। देश में अनेक वभिन्नताएं हैं। बहुदलीय होने के साथ-साथ यह देश बहुभाषी और बहुधर्मी भी है। इस देश में अलग-अलग जनजातियों का निवास है। वे संख्या में कम हैं, इसलिए अपने अस्ितत्व के बारे में चन्ितत हैं। कभी-कभी उत्तर पूर्व में बसे हुए लोग न केवल भौगोलिक दूरी अनुभव करते हैं, बल्िक भावनात्मक दृष्िट से भी अपने को उपेक्षित पाते हैं। इस स्िथति को बदलना पड़ेगा और हम बदलने के लिए कटिबद्ध हैं। लेकिन यह काम आम सहमति के आधार पर ज्यादा अच्छी तरह हो सकता है, केवल सरकार के भरोसे नहीं। वविधता हमारी संस्कृति की सम्ृाद्धि का परिचायक है, हमारी दुर्बलता की देन नहीं। सभी भाषाओं के साहित्य का अध्ययन कीजिए, तो उनमें कहीं न कहीं एक स्वर की झनक सुनाई देती है, एक झलक दिखाई देती है। अनेक कारणों से जो संख्या में कम हैं भाषा के कारण, धर्म के कारण या अपनी नस्ल के कारण, वैसे तो हम सभी एक ही नस्ल के हैं, उनके मन में आशंकाएं पैदा होती हैं। हम उन आशंकाओं से परचित हैं और उन आशंकाओं के निराकरण के लिए पूरी कोशिश करेंगे।
  अध्यक्ष महोदय, इस अवसर पर मैं अधिक विस्तार से नहीं बोलना चाहता। अनेक मसले हैं जिन पर चर्चा होगी। मुझे उत्तर में अपनी बात कहने का मौका मिलेगा। कुछ प्रश्नों पर इस देश में हमेशा आम सहमति रही है और व्यापक आम सहमति रही है। मैं खासतौर से विदेश नीति के क्षेत्र का उल्लेख करना चाहूंगा। जब जेनेवा में मानवाधिकारों के सम्मेलन में कश्मीर के सवाल को हमारे पड़ौसी देश ने उठाने का फैसला किया, तो उस समय के प्रधान मंत्री श्री नरसिंहराव की नजर मेरे ऊपर गई कि मैं वहां जाकर भारत का प्रतनधित्व करूं। इस पर हमारे पड़ौसी देश के लोगों को बड़ा आश्चर्य हुआ, वहां के नेताओं को बड़ा ताज्जुब हुआ। किसी नेता ने कहा भी कि भारत का लोकतंत्र बड़ा वचित्र लोकतंत्र है कि प्रतिपक्ष का नेता अपनी सरकार के पक्ष को रखने के लिए जेनेवा जाता है और एक हमारा प्रतिपक्ष का नेता है जो देश के अंदर ही ऐसी कठिनाइयां पैदा करता है जिससे अन्तर्राष्ट्रीय बाधाएं उत्पन्न होती हैं।
  लोगों ने कहा कि नरसिंह राव जी सरल आदमी नहीं हैं, बड़े चतुर आदमी हैं। यह मत समझिए कि वे केवल देश की एकता का प्रदर्शन करने के लिए आपको भेज रहे हैं बल्िक उनके मन में यह भी हो सकता है कि अगर जेनेवा में बात नहीं बनी और हमारे खिलाफ प्रस्ताव पास हो गया तो दोष में हिस्सा बंटाने के लिए वाजपेयी जी को भी बलि का   बकरा बनाया जा सकता है। मैंने इस पर विश्वास नहीं किया। हम एक दूसरे की सदाशयता पर भरोसा करते हैं।
  मेरे मित्र श्री गुजराल यहां बैठे हैं। जब मैं थोड़ी देर के लिए विदेश मंत्री बना था तब वे मास्को में हमारे राजदूत थे--हमारे मायने मेरे नहीं, देश के राजदूत थे। उस समय से हम एक दूसरे को जानते हैं। १९७७ में भी एमरजेंसी के बाद, देश में एक परिवर्तन आया था, आमूल परिवर्तन आया था। बड़े-बड़े स्तम्भ ढह गये थे। तम्बू उखड़ गये थे। बरसों से सत्तारूढ़ दल लोगों का विश्वास खो चुका था। उस समय भी विदेश नीति आम सहमति के आधार पर चली थी।
  मुझसे एक विदेशी राजनीतिज्ञ ने पूछा था कि विदेश मंत्री महोदय, आप जहां बैठते हैं, वहां कया परिवर्तन हुआ है, साउथ ब्लाक में कया परिवर्तन होने वाला है? मैंने कहा कि मंत्री बदल गया है और कोई परिवर्तन होने वाला नहीं है। कांग्रेस के मित्र शायद भरोसा नहीं करेंगे। साउथ ब्लाक में नेहरू जी का एक चित्र लगा रहता था। मैं आते-जाते देखता था। नेहरू जी के साथ सदन में नोंक-झोंक भी हुआ करती थी। मैं नया था और पीछे बैठता था। कभी-कभी तो बोलने के लिए मुझे वाकआउट करना पड़ता था लेकिन धीरे-धीरे मैंने जगह बनाई। मैं आगे बढ़ा और जब मैं विदेश मंत्री बन गया, तो एक दिन मैंने देखा कि गलियारे में टंगा हुआ नेहरू जी का फोटो गायब है। मैंने कहा कि यह चित्र कहां गया? कोई उत्तर नहीं मिला। वह चित्र वहां फिर से लगा दिया गया। कया इस भावना की कद्र है? कया देश में यह भावना पनपे?
  ऐसा नहीं है कि नेहरू जी से मेरे मतभेद नहीं थे। मतभेद चर्चा में गंभीर रूप से उभर कर सामने आते थे। मैंने एक बार पंडित जी से कह दिया कि आपका एक मिला-जुला व्यकितत्व है और आप चर्िचल भी हैं, चेम्बरलिन भी हैं। वह नाराज नहीं हुए। शाम को किसी बैंकवेट में मुलाकात हो गयी। उन्होंने कहा कि आज तो बड़ा जोरदार भाषण दिया और हंसते हुए चले गये। आजकल ऐसी आलोचना करना दुश्मनी को दावत देना है। लोग बोलना बंद कर देंगे। कया एक राष्ट्र के नेता, हम आपस में मिलकर काम नहीं कर सकते? कया एक राष्ट्र के नेता, हम सब आने वाले संकटों का सामना नहीं कर सकते?
  एक शताब्दी खत्म हो रही है, दूसरी शताब्दी दरवाजे पर खड़ी है। अगर हमें छोड़कर आप कोई नया प्रयोग करना चाहते हैं तो मुझे कोई आपत्ित नहीं होगी लेकिन हम जो प्रयोग कर रहे हैं, उस प्रयोग को आप सफल होने दें, यह मैं आपसे अनुरोध जरूर करना चाहता हूं।
  अध्यक्ष महोदय, इन शब्दों के साथ मैं अपना प्रस्ताविक भाषण समाप्त करता हूं। चर्चा में जो मुद्दे उठाये जायेंगे, उनका मै उत्तर के रूप में जवाब दूंगा। धन्यवाद।
MR. SPEAKER: Motion moved:
"That this House expresses its confidence in the Council of Ministers."
">"> श्री शरद पवार (बारामती) : अध्यक्ष महोदय, सदन के सामने प्रधान मंत्री जी के नेत्ृात्व में जो प्रस्ताव लाया गया है, उस बारे में मैं सदन के सामने अपने विचार और भावना रखने के लिए खड़ा हुआ हूं। प्रधान मंत्री जी का वकतव्य मैंने बड़ी शान्ित से सुना। मुझे एक बात माननी होगी कि भाषा की सम्ृाद्धि है। जहां तक मुद्दों की सम्ृाद्धि है, उस बारे में मैं कुछ नहीं कह सकता। सदन के सामने प्रधान मंत्री जी ने पहले कहा कि हमारे पास शुरू में बहुमत नहीं था, कुछ नम्बर कम थे। आज विश्वास दिलाया कि आज हम बहुमत में पहुंचे हैं। कैसे पहुंचे, कयों पहुंचे, इस पर मैं अभी बोलना नहीं चाहता हूं। मगर हमें यह देखना होगा कि देश की जनता ने इस समय जनादेश नश्िचत रूप में कया दिया। कितने प्रतिशत लोगों ने अटल जी को यह सरकार चलाने का अधिकार दिया। कई पोलीटिकल पार्िटयों के गुटों को साथ लेकर उन्होंने चुनाव के पहले गठबंधन बनाया था, यह सब देशवासी जानते हैं। चुनाव के पहले गठबंधन और चुनाव के बाद के गठबंधन के बारे में उन्होंने अपनी भूमिका सदन के सामने रखी है। चुनाव के पहले जो गठबंधन होता है, उसे मैं जरूर महत्व देता हूं लेकिन चुनाव के पहले गठबंधन में लोगों के सामने जाते समय एक नश्िचत कार्यक़म लेकर जाना होता है, तो इस गठबंधन को महत्व देने की आवश्यकता है। भारतीय जनता पार्टी ने अपना घोषणा पत्र तय किया। जार्ज फर्नान्डीज साहब ने अपना घोषणा पत्र अलग से तैयार किया और उनके अन्य साथियों ने अपना घोषणा पत्र अलग तैयार किया। सभी घोषणा पत्रों को देखने के बाद आप इस राय पर आ गए कि जिस तरह से देश चलाना चाहते थे, उसमें आज सरकार में शामिल होने वाली पार्िटयों में भी अलग-अलग राय थी, अलग-अलग मुद्दे थे, अलग-अलग विचार और कार्यक़म थे।
  कांग्रेस ने अपना कार्यक़म लोगों के सामने रखा था। युनाइटेड फ्रंट ने अपना कार्यक़म लोगों के सामने रखा था। हमने मिलकर चुनाव नहीं लड़ा। लेकिन जब हमने युनाइटेड फ्रंट में शामिल होने वाली सभी पार्िटयों की नीतियां देखीं, जो मुद्दे उन्होंने देशवासियों के सामने रखे, वे देखे तो पता लगा कि कांग्रेस और युनाइटेड फ्रंट के घोषणा पत्र में कई ऐसे समान कार्यक़म हैं जिनके बारे में हम सदन में एकता से, एक विचार से बैठ सकते हैं, बोल सकते हैं, साथ काम कर सकते हैं। इसलिए हमें यह देखना होगा कि इस देश की जनता ने हुकुमत में बैठे हुए लोगों के लिए किस तरह मत दिया और इस तरफ मेरे साथ बैठने वाले हमारे साथियों के लिए किस तरह दिया। भारतीय जनता पार्टी और उनके मित्र पक्ष के जो आंकड़े मेरे सामने आए, वे यह हैं कि उनको ३७ प्रतिशत के आस-पास वोट पड़े और कांग्रेस और उनके साथी, युनाइटेड फ्रंट और उनके साथियों को मिलाकर ५५ प्रतिशत से ज्यादा वोट पड़े । इनमें से तेलगु देशम और नैशनल कॉन्फ्रैंस को जो वोट पड़े, वे आंकड़े दूर रखकर मैंने यह फिगर दी है। इसलिए मेरी और मेरे साथ बैठने वाले मेरे सभी साथियों की कुछ जिम्मेदारी है।
  वह जिम्मेदारी इस देश की जनता ने हमारे ऊपर रखी है। देश के बारे में उनके मन में एक मजबूत भारत बनाने के, एक सैकुलर भारत बनाने के कुछ सपने थे। इककीसवीं शताब्दी में पहुंचने वाले दुनिया का एक शकितशाली आर्िथक क्षेत्र में परिवर्तन करने वाला भारत बनाने का और यह काम हम यहां मजबूती से करेंगे।
... (व्यवधान)
MR. SPEAKER: No running commentary please.
SHRI SHARAD PAWAR (BARAMATI) श्री शरद पवार : १५ पार्िटयों और चार निर्दलीयों की मदद से यह सरकार यहां बनी। इनको एक जगह लाने के लिए, मुझे लगता है कि १२ दिन से ज्यादा दिन लगे थे और यह सब करने के बाद ही समर्थन देने वाले कुछ लोगों ने, एक घटक अभी तक सरकार में शामिल नहीं हुआ। उसने बाहर से समर्थन देने का रास्ता पसन्द किया। मुझे गुजराल जी का जो प्रस्ताव बहुमत पुरःस्थापित करने का आया था, तब का आज के प्रधान मंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी के भाषण की याद आती है। तब उन्होंने कहा था कि बाहर से समर्थन, इससे बड़ी परेशानी पैदा होती है, सरकार चलाना बड़ा मुश्िकल होता है। ... (व्यवधान) कुछ दिनों के बाद संघर्ष की परस्िथति भी पैदा होती है और जब तक ये हुकूमत में शामिल नहीं होंगे, तब तक यहां स्िथरता लाना या इस बारे में विश्वास देना, इसे स्वीकार करना बड़ा मुश्िकल है।
MAJOR GENERAL BHUVAN CHANDRA, KHANDURI (GARHWAL) मेजर जनरल भुवन चन्द्र खंडूडी एवीएसएम (गढ़वाल) : तब १४० थे।
SHRI SHARAD PAWAR (BARAMATI) श्री शरद पवार (बारामती) : यही परस्िथति आज हमें यहां दिखाई देती है। एक पार्टी ने बाहर से समर्थन दिया। इनमें एक अन्य घटक है, उन्होंने सरकार में शामिल होने से पहले दो दिन खुलेआम सरकार की वचनबद्धता और विश्वसनीयता के बारे में अपना अविश्वास जाहिर किया था। उन्होंने यह बात कही कि प्रादेशिक शकित मजबूत होनी चाहिए। एक हद तक मैं इससे सहमत हूं। राज्य मजबूत होने चाहिए, मगर भारत सरकार दुबली रहकर यह देश चला नहीं सकती। हमें केन्द्र भी मजबूत चाहिए और हमें राज्य भी मजबूत चाहिए। जब केन्द्र में सरकार बनाने के लिए पार्टी की नीति के बारे में या पार्टी के बारे में किसी एक स्टेट की लीडरशिप की तरफ से अविस्वास की भावना प्रैस कांफ्रेंस के माध्यम से पूरे देशवासियों के सामने जब आती है, तब मेरे मन में एक आशंका पैदा होती है कि स्िथरता का किया हुआ दावा कहां तक और कब तक चलेगा?
  जसवन्त सिंह जी को चेन्नई जाना पड़ा। ये दो दिन तक राह देखते रहे कि चिट्ठी आ रही है, चिट्ठी आ रही है। दो दिन के बाद चिट्ठी आई। ये जाकर वापस आये।
... (व्यवधान) इस सरकार को समर्थन देने वाले एक मान्यवर ऐसे हैं कि उनकी नीति सरकार के बारे में इश्यू बेस्ड शायद तय हो सकती है। इसलिए जो गठबन्धन पूरे देशवासियों को स्िथरता के बारे में विश्वास दिलाना चाहता है, इस विश्वास पर आज भरोसा करने की परस्िथति है, ऐसा मुझे नहीं लगता है। इस सरकार में सबसे बड़ी पार्टी भारतीय जनता पार्टी है।
  भारतीय जनता पार्टी ने अपना चुनाव घोषणा-पत्र देशवासियों के सामने रखा था। उनको जो समर्थन मिला, यह तो मानना होगा कि उनके चुनाव घोषणा-पत्र को यह समर्थन मिला है। लेकिन आज जो कार्यक़म हमारे सामने आ रहा है, जो नेशनल एजेंडा बना, आदरणीय राष्ट्रपति जी का अभिभाषण हमने सुना, मुझे मालूम नहीं कि अपने चुनाव घोषणा-पत्र में जो वादे भारत की जनता से भारतीय जनता पार्टी की तरफ से किए गए थे, उनमें से कई मुद्दे ठंडे बस्ते में डाल दिए या कोई सीक़ेट एजेंडा उन्होंने अपने सामने रखा है। सरकार के साथ बैठने वाले बाकी अन्य उनके सहयोगी हैं, उन पार्िटयों की भारतीय जनता पार्टी के चुनाव घोषणा-पत्र के बारे में कया भूमिका रहेगी, यह जानने का हमारा अधिकार है?
  भारतीय जनता पार्टी ने अपने चुनाव घोषणा-पत्र में शुरू में लिखा -भय मुकत-भ्रष्टाचार रहित शासन।
... (व्यवधान) हुकूमत में आ गए इसलिए मैं भूख के बारे में कुछ बोलना नहीं चाहता। जहां तक भय की बात है इस देश में सबसे बड़ा राज्य उत्तर प्रदेश है। उत्तर प्रदेश की सरकार की जो आज की स्िथति है और उस सरकार में शामिल होने वाले लोगों के बारे में अखबारों में यह आता है कि किसी का क़मिनल रिकार्ड है, किसी के खिलाफ कई केस अदालतों में चल रहे हैं।
KUMARI MAYAWATI (AKBARPUR) कुमारी मायावती (अकबरपुर): उत्तर प्रदेश सरकार में २८ मंत्री ऐसे हैं जिनका क़मिनल रिकार्ड है।
... (व्यवधान)
SHRI SHARAD PAWAR (BARAMATI) श्री शरद पवार : मैं मायावती जी का आभारी हूं कि उन्होंने सदन के सामने लेटेस्ट इंफार्मेशन रखकर पूरे देशवासियों को जानकारी देने का काम किया है।
  तीसरा मुद्दा था -भ्रष्टाचार मुकत समाज। कौन सा भ्रष्टाचार मुकत समाज! हम लोगों ने देखा, पूरे देश में एक नेशनल क़ाइसेज़ की परस्िथति पैदा हुई। १३ दिन सदन का कारोबार ठप हुआ था। हर दिन अखबारों में सुखराम, सुखराम, एक ही बात आती थी। वही सुखराम आज उप मुख्यमंत्री बनाये गए हैं।
... (व्यवधान) जिन सुखराम जी को कांग्रेस पार्टी ने अपने दल से बाहर निकाल दिया, वही सुखराम जी ... (व्यवधान)
SHRI SATYA PAL JAIN (CHANDIGARH) श्री सत्य पाल जैन : बोफोर्स के बारे में भी बोलिए।
SHRI SHARAD PAWAR (BARAMATI) श्री शरद पवार : आपके हाथ में हुकूमत है, आप जो चाहे करें, बोलने की कोई जरूरत नहीं है, आप दिखाएं पार्िलयामेंट को, कयोंकि आपके पास हुकूमत है।.(व्यवधान)
MR. SPEAKER: Sharad Pawarji, one minute. Hon. Members, please understand the position. The Doordarshan is telecasting the proceedings nationally and internationally. Please understand the position. When the hon. Leader of the Opposition is on his legs, please do not disturb him.
... (Interruptions)
SHRI SHARAD PAWAR (BARAMATI) श्री शरद पवार: जिस मुद्दे पर १३ दिन इस देश की लोक सभा बंद हुई थी, राज्य सभा बंद हुई थी, वही महानुभाव आज भारतीय जनता पार्टी के राज में मुख्य मंत्री के बाद नम्बर दो के मंत्री की हैसियत से बैठे हैं। जिनके लड़के के बारे में केस दायर किए थे, उनको आज भारतीय जनता पार्टी ने राज्य सभा में भेजने का प्रबंध किया है।
12.00 hrs.   ये लोग ही भ्रष्टाचार रहित समाज की स्थापना की बात करते हैं। इस बारे में मुझे ज्यादा बोलने की जरूरत नहीं है। मुझे याद है जब लोहिया जी ने ... (व्यवधान) मुझे याद है जब आडवाणी जी की यात्रा की शुरुआत हुई, तब उन्होंने कहा था कि हमारा श्री राम है और कांग्रेस का सुख राम है। वही कांग्रेस का सुखराम आज भारतीय जनता पार्टी का सुखराम बन गया।
... (व्यवधान) मुझे कुछ ज्यादा कहने की जरूरत नहीं है। जो यहां राजनैतिक स्िथरता की बात कही गई, मैं मानता हूं कि भारत जैसे देश में आज स्िथरता की आवश्यकता है। वह स्िथरता कब पैदा हो सकती है, कब मिल सकती है?
  समाज में एकता हो तो स्िथरता पैदा हो सकती है। सभी वगर्ों में विश्वास पैदा करने में हम कामयाब हों तो समाज में एकता पैदा हो सकती है। मंदिर मस्िजद जैसे मुद्दों से समाज में एकता कभी पैदा नहीं हो सकती।
  आज जो कमियां हैं, वे कमियां हैं कि इस देश के मूलभूत सिद्धांतों को छोड़कर जब हम आगे जाने के लिए कदम उठाते हैं, उसकी हमें कीमत देनी पड़ती है। ... (व्यवधान) भारतीय जनता पार्टी और उनके घोषणा-पत्र पर भी हमें ध्यान देना पड़ेगा। जहां तक एकता की बात है, इसमें सैकुलरिज्म को हम नज़रन्दाज नहीं कर सकते। अटल जी ने यहां कहा कि इस देश के समाज में, सभी धमर्ों को, सभी वगर्ों को, हम सभी लोगों को एक रहना पड़ेगा और इसके लिए उनको समझाना पड़ेगा। मैं इनसे सहमत हूं। लेकिन जो घोषणा-पत्र इन्होंने दिया, उसमें कया लिखा है:- "हमारी राष्ट्रवादी परिकल्पना भारत की केवल भौगोलिक या राजनैतिक पहचान से बंधी हुई नहीं है बल्िक यह हमारी चिरन्तक सांस्कृतिक विरासत की गरिमा है।" यह सांस्कृतिक विरासत धर्म और भाषा सभी तत्वों का केन्द्रबिन्दु है। यह सभ्यता की पहचान है और भारत के सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को निर्धारित करती है जो हिन्दुत्व का मूल है।
... (व्यवधान) सांस्कृतिक राष्ट्रवाद जिसका मूल हिन्दुत्व है।
... (व्यवधान) हिन्दू राष्ट्रवाद की संकल्पना मानना चाहते हैं?
... (व्यवधान) यहां सदन में हमारे रेल मंत्री जी हैं, आदरणीय हमारे दोस्त नीतीश कुमार जी हैं।
... (व्यवधान) मुझे याद है, दिसम्बर १९९० में इसी सदन में, आज सरकार में बैठने वाले हमारे एक मित्र ने एक वकतव्य दिया था। वह आज कैबिनेट मंत्री हैं। उनका जो वकतव्य था, उसे यहां मैं आपके सामने रखना चाहता हूं। भारतीय राष्ट्रवाद की जगह जो हिन्दू राष्ट्रवाद लाना चाहते हैं, उन्हें यह सोचना चाहिए कि तब देश को एक रखना कठिन हो जाएगा। यह हमारे साथी नीतीश कुमार जी ने इस सदन में कहा था।
... (व्यवधान) आज मैं उनसे पूछना चाहता हूं कि यहां पर हिन्दू राष्ट्रवाद की जो संकल्पना उन्होंने सदन के सामने रखी, घोषणा-पत्र में रखी और लोगों के सामने रखकर, उनसे समर्थन लेकर जो भारतीय जनता पार्टी आई, इनकी विचारधारा से आप सहमत हैं या नहीं, इसका जवाब उनको देना पड़ेगा।
  मंदिर के विषय को लेकर इस देश में संघर्ष हुए। मुझे बहुत खुशी है, प्रधान मंत्री जी ने ब्यान दिया कि अयोध्या मुद्दा पार्टी के लिए कोई महत्व नहीं रखता। बड़ी अच्छी बात है। उन्होंने कहा कि अयोध्या का मुद्दा भारतीय जनता पार्टी के लिए बहुत महत्व का नहीं है।
... (व्यवधान) मैं उनके चुनाव घोषणा पत्र के इस पैरा को यहां पढ़ना चाहता हूं। इसमें लिखा है - भारतीय जनता पार्टी को नश्िचत विश्वास है कि हिन्दुत्व में राष्ट्र के नवोदय और सुदृढ़ करने तथा राष्ट्र निर्माण के कठिन कार्य को सम्पन्न करने की अपार संभावनायें हैं। यह उच्च स्तर की राष्ट्र भकित पैदा कर सकता है और निश्चय ही सभी में चेतना पैदा करता है, जिससे देश में उच्च स्तर की निपुणता आ सकती है और बेहतर प्रदर्शन किया जा सकता है। ऐसे संगठनशील विचारों को ध्यान में रखकर भाजपा अयोध्या में श्री राम मंदिर निर्माण के रामजन्म भूमि आन्दोलन में शामिल हुई थी। इतिहास के इस सबसे बड़े जन आन्दोलन ने भारत की आत्मविस्म्ृात राजनीति को फिर से जाग्ृात कर दिया और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की नींव को सुदृढ़ किया। इसमें दो बातें हैं। एक तो अटल जी ने कहा कि अयोध्या का मुद्दा हमारे सामने नहीं है, लेकिन चुनाव घोषणा पत्र में उन्होंने यह मुद्दा रखा है। दूसरी एक और सबसे बड़ी गम्भीर बात उन्होंने लिखी है - इतिहास के सबसे बड़े जन-आन्दोलन में भारत की राजनीति आत्म-विश्वास की है। इस देश में महात्मा गांधी के नेत्ृात्व में आजादी की जंग हुई। कया यह इससे भी बड़ा जन-आन्दोलन है? कया आप नया इतिहास लिखना चाहते हैं? आगे आने वाले लोगों के लिए स्वतन्त्रता के आन्दोलन के महत्व को कम करने की कोशिश आप कर सकते हैं। आप इतिहास बदलना चाहते हैं। इससे यही बात साफ हो रही है। आपने भले ही अभिमत की बात कही है, मगर जो आपका छुपा हुआ एजेंडा है, सिक़ेट एजेंडा है, यह एजेंडा देशवासियों में एक तरह से भय की स्िथति पैदा करता है। आपकी पार्टी के अध्यक्ष और आज के ग्ृाह मंत्री का ब्यान मैं आपके सामने पढ़ना चाहता हूं। उन्होंने कहा है - अयोध्या में मंदिर बनने तक शान्त नहीं बैठेंगे। यह उनका ७ फरवरी, १९९८ का ब्यान है, कोई बहुत पुराना नहीं है। इसमें आगे लिखा है - भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष, श्री लाल कृष्ण आडवाणी, ने आज यहां आकर कहा कि वभिन्न दलों के गठबन्धन के बाद भी भारतीय जनता पार्टी ने अपने सिद्धान्तों से कोई समझौता नहीं किया। उन्होंने अयोध्या मुद्दे को भावनात्मक रूप देते हुए कहा कि अपने राजनीतिक जीवन में जो कुछ सीखा और मथा है, उसमें अध्योध्या का राम मंदिर सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा है। राम जन्म भूमि के आन्दोलन से भारतीय जनता पार्टी को यह लोकप्रियता मिली और वह देश की सबसे बड़ी पार्टी बनी है। ऐसे में जो लोग भाजपा को राम मंदिर से पीछे हटने की बात कहते हैं, उसमें सच्चाई नहीं थी। आडवाणी जी ने कहा - भारतीय जनता पार्टी के चुनाव घोषणा पत्र जारी होने से पहले, अन्य राजनीतिक दलों को यह आशा थी कि इस बार भारतीय जनता पार्टी राम मंदिर के मुद्दे को नहीं उठाएगी, परन्तु भाजपा ने अपने चुनाव घोषणा पत्र में इसको प्राथमिकता देकर यह साबित कर दिया कि वह जनभावना का आदर करती है। यह इस देश के ग्ृाह मंत्री का चुनाव में दिया ब्यान है। SHRI MOHAN SINGH (DEORIA)   श्री मोहन सिंह (देवरिया): अपने नेता के बारे में भी उनकी यही राय है।
SHRI SHARAD PAWAR (BARAMATI) श्री शरद पवार : उत्तर प्रदेश के मुख्य मंत्री का ११ फरवरी का बयान है। उसमें मुख्य मंत्री ने कहा कि लोकतन्त्र में श्री राम मंदिर जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर सब पार्िटयों का दृष्िटकोण जानने का हक जनता का है। इससे जनता को फैसला लेने की सुविधा होगी।
  भारतीय जनता पार्टी बता चुकी है कि वह अयोध्या में राम मंदिर बनाएगी। अब आपके दल भी स्पष्ट करें कि कया वे वहां मस्िजद बनाना चाहते हैं? उन्होंने कहा है कि राम जन्म-भूमि मंदिर मुद्दा अदालत में कभी हल नहीं हो सकता। इसमें हमें कुछ रास्ता निकालना होगा और हम रास्ता निकालेंगे। भारत सरकार की हुकूमत हमारे पास आने के बाद हम इसमें सफल होंगे।
... (व्यवधान)
  अब मैं अपने साथी जार्ज फर्नान्डीज साहब और बहन ममता जी से पूछना चाहता हूं कि जैसा अडवाणी जी ने कहा है, जो भारतीय जनता पार्टी ने अपने घोषणा-पत्र में दिया है तथा जो मुद्दा लेकर वे जनता के पास गये, कुछ हद तक उस मुद्दे पर उनको समर्थन भी मिला और जिसे पूरा करने की उनकी कोशिश रहेगी - उस पर आप लोगों की कया नीति रहेगी? मैं प्रधान मंत्री अटल जी से पूछना चाहता हूं कि जब आप कहते हैं कि अयोध्या का मुद्दा आज की परस्िथति में महत्व का मुद्दा नहीं है तो छ: साल पहले इस देश में जो कुछ हुआ, वह कयों हुआ? मैं मुम्बई शहर से आता हूं। वहां कितने बड़े पैमाने पर खून-खराबा हुआ, कितने लोगों की हत्याएं हुईं और करोड़ों रुपये की सम्पत्ित कैसे जल गयी? (व्यवधान)
  एक माननीय सदस्य: किसने किया?
SHRI SHARAD PAWAR (BARAMATI) श्री शरद पवार: किसने किया? (व्यवधान)
SHRI AJIT JOGI (RAIGARH) श्री अजीत जोगी (रायगढ़): अगर ये लोग हमारे नेता को नहीं बोलने देंगे तो हम भी इनके नेता को नहीं बोलने देंगे। (व्यवधान)
SHRI SATYA PAL JAIN (CHANDIGARH) श्री सत्य पाल जैन : अब कयों चिल्लाते हो। पहले कयों इन्ट्रप्ट कर रहे थे?
SHRI SHARAD PAWAR (BARAMATI) श्री शरद पवार: किसने किया? इसकी जांच करने के लिए मुम्बई के सटिंग हाई-कोर्ट जज श्री कुलकर्णी की नियुकित हुई थी। इस कमीशन का काम जब शुरू था तब महाराष्ट्र की भाजपा-शिवसेना सरकार ने इस कमीशन को समाप्त करने का निर्णय लिया। मैं अटल जी को धन्यवाद देता हूं कि जब उनकी तेरह दिन की सरकार थी तब उन्होंने महाराष्ट्र सरकार को संदेशा भेजा कि इस कमीशन को रिवाईव करिये। वह कमीशन रिवाईव हुआ। इस कमीशन की अंतिम रिपोर्ट महाराष्ट्र सरकार के पास आई है। पिछले कई हफते से वहां महाराष्ट्र की विधान सभा में और विधान परिषद में संघर्ष चला कि वह रिपोर्ट सदन में रखिये। वह रिपोर्ट आई नहीं है कयोंकि इस रिपोर्ट में वहां खून-खराबा किसने किया, लोगों की हत्याएं किसने कीं, वहां आग लगाने का काम किसने किया और कौनसी साम्प्रदायिक शकित इसके पीछे थीं - ये सब उसमें हैं।
... (व्यवधान) हाई-कोर्ट के सटिंग जज का यह निष्कर्ष है। अगर आज यह राम-मंदिर का मुद्दा महत्व का मुद्दा नहीं होता तो छ: साल पहले देश में खून-खराबे की आवश्यकता कया थी, मस्िजद तोड़ने की आवश्यकता कया थी, समाज में दरार पैदा करने और समाज की एकता पर हमला करने आवश्यकता कयों थी? इसको जब तक आप नहीं बताएंगे तब तक आपके ऊपर हमारे जैसे किसी भी व्यकित को भरोसा नहीं होगा।
... (व्यवधान) यह मुद्दा खासतौर से हम आपके सामने रखना चाहते हैं।
SHRI SHAKUNI CHOUDHARY (KHAGARIA) श्री शकुनी चौधरी (खगडिया): मेरा पाइंट ऑफ आर्डर है।
MR. SPEAKER : Please cooperate. ऐसे नहीं।
... (Interruptions)
MR. SPEAKER : Please be seated. Take your seats.
SHRI SHARAD PAWAR (BARAMATI) श्री शरद पवार : सैकुलरिज्म के इस देश में अनन्य असाधारण महत्व हैं। अगर उसकी संकल्पना किसी ने डाइल्यूट करने की कोशिश की तो यह समाज कभी एक नहीं रहेगा। जब तक समाज में एकता नहीं रहेगी, तब तक स्िथरता पैदा नहीं होगी इस बात को ध्यान में रखना होगा। मैं यह बात सदन के सामने कहना चाहता हूं। आपकी ये कमियां हैं। इन कमियों की तरफ आपका ध्यान पहुंच नहीं सकता। आपकी ये सबसे बड़ी कमियां हैं। आपको इनके बारे में सोचना होगा। आप जब तक अपनी नीति साफ नहीं करेंगे तब तक देश के सभी वगर्ों का विश्वास हासिल करने में कामयाब नहीं होंगे।
  इसमें एक बात और है। यहां स्वदेशी की बात कही गई। मेरे जैसा व्यकित जो देश की तरककी के बारे में सोचता है, वह बहुत कुछ बातें सोचने को मजबूर हो जाता है। दुनिया किस तरफ जा रही है? पड़ोसी देशों में आर्िथक क्षेत्र में जो परिवर्तन हो रहे हैं, मैं हमेशा उसका बड़े नजदीक से अभ्यास करने की कोशिश करता हूं। कई बार लगता है कि भारत जैसे देश में सब कुछ है, यहां टैलेंट हैं, मेहनत करने वाले समाज का बहुत बड़ा वर्ग है, यहां पर खेती अच्छी है, यहां पानी की उपलब्धी है, यहां भूगर्भ में सम्पत्ित है, यहां साल में बहुत महीनों तक और बहुत दिनों तक उपलब्ध रहने वाला सूरज का प्रकाश है। अगर हम इनफ्रास्ट्रकचर फील्ड पर मिल कर और ज्यादा ध्यान देकर कदम उठाएंगे तो कुछ दिनों में प्रगतिशील राष्ट्रों के बराबर पहुंच जाएंगे। हम जब परिवर्तन और विकास की बात करते हैं, अगर उस समय हमारा दृष्िटकोण कुछ राज्यों तक या देश तक सीमित रहेगा तो यहां परिवर्तन लाने की मर्यादा आड़े आ सकती है। इसलिए हम वैश्वीकरण पूरी तरह से नजरअंदाज नहीं कर सकते।
  स्वदेशी शब्द गांधी जी का था। महात्मा गांधी जी ने जब स्वदेशी के विचार पूरे देश के सामने रखे तो उनके मन में विदेशी वस्त्रों के बहिष्कार की भावना थी। जो चीजें दुनिया के अन्य देशों में पैदा होती थीं, अगर उन्हें यहां बेचने की कोशिश होती थी तो वह उनका विरोध करते थे। उन्होंने इसके खिलाफ आन्दोलन भी किया था। मैं यह मानता हूं कि भारत का निर्माण भारत के लोग करें, लेकिन उसके साथ-साथ गांधी जी के स्वदेशी के बारे में जो विचार थे, उन्हें हम नजरअन्दाज नहीं कर सकते। कांग्रेस ने ही स्वदेशी शब्द को लेकर इस देश में स्वतंत्रता का ज्वर पैदा किया था। स्वदेशी एक ऐसा मंत्र था जिस में आदर, स्वाभिमान और आत्मविश्वास की भावना थी। आज भारतीय जनता पार्टी और उनकी सरकार में शामिल होने वाले कई हमारे साथी जिस तरह से स्वदेशी की भावना देश के सामने रखते हैं, मुझे ऐसा लगता है कि वह इससे डर पैदा करने वाली मानसिकता का दर्शन पूरे देशवासियों को कराते हैं। कई ऐसे क्षेत्र हैं चाहे वे उसे बेसिक डेवलपमैंट कहें, इनफ्रास्ट्रकचर कहें, उनके लिए बहुत बड़े पैमाने पर राशि रखने की जिम्मेदारी हम सब की है। जब देश के बाकी कामों के लिए हमारे पास राशि की कमी होती है तो ऐसे क्षेत्र में बाहर से लोग आएं और एक हद तक सहयोग दें तो हमें उनसे डरने की कोई आवश्यकता नहीं है। कहा गया कि यहां ईस्ट इंडिया कम्पनी आएगी। मुझे याद है जब यहां एनरॉन का प्रोजैकट कलीयर हुआ था तो उसको लेकर भारतीय जनता पार्टी ने महाराष्ट्र में संघर्ष और आन्दोलन किया था। वे बार-बार कहते थे कि यहां ईस्ट इंडिया कम्पनी आएगी। जहां एनरॉन का प्रोजैकट लगना था. वहां बंदरगाह बनाने की बात थी। कहते थे कि वहां अमरीका का दसवां फलीट आएगा और हमारे देश पर आक़मण हो जाएगा।
  बहुत सी बातें की थीं पर मुझे खुशी है कि उन १३ दिनों में आपने वह प्रकल्प किलयर किया था। उसका कुछ फायदा हो ही गया। मगर आज जो भय की मानसिकता हम देश के सामने रखना चाहते हैं, मुझे लगता है कि इससे देश का नुकसान होगा। इस देश की नयी पीढ़ी को, विद्वानों को हमारे शासन पर भरोसा हो, ऐसी तैयारी हमारी होनी चाहिए और मुझे विश्वास है कि इस देश की नयी पीढ़ी हो, विद्वान हों या मजदूर हों, ये सभी लोग इस देश को मज़बूत करने में पीछे नहीं रहेंगे।
  पिछले कुछ सालों से इस देश में जो कुछ इनवॆस्टमेंट हुआ, इस देश में जी.डी.पी. का कुल दो प्रतिशत से ज्यादा बाहर का इनवॆस्टमेंट नहीं हुआ, इसके द्वारा हमारे मन में जो भय पैदा करने का काम किया जाता है, उससे कुछ लाभ नहीं होगा। आज जब आर्िथक क्षेत्र में महाशकित पैदा करने की बात की जाती है, तो मेरे मन मे इस बात की चिन्ता होती है कि स्वदेशी की गलत व्याख्या करके हम अपनी आर्िथक प्रगति को रोकने का काम करेंगे जिसकी कीमत आगे आने वाली पीढ़ियों को चुकानी पड़ेगी। यह भय मेरे मन में भारतीय जनता पार्टी और उनके साथियों की हुकूमत के बारे में है। आपने आर्िथक ऐजेण्डा बनाया। मैं बड़ा चन्ितत हूं कि हर दिन हमारे साथी जार्ज फर्नान्डीज़ एक आर्िथक ऐजेण्डा देते थे। यह सरकार भी अजीब थी। नेशनल ऐजेण्डा अलग आता था, जार्ज साहब का ऐजेण्डा अलग आता था और परराष्ट्र नीति के बारे में हेगड़े जी का ऐजेण्डा अलग आता था। अच्छा हुआ कि मनिस्टर बनने के बाद वे अलग-अलग ऐजेण्डा बंद हो गए मगर उनके मन में जो विचार है, वे बंद नहीं होंगे और इसकी कीमत हमें आने वाले सालों में चुकानी पड़ेगी।
  एक और शंका मेरे मन में इस सरकार के बारे में है। अटल जी ने जो कहा, मैं उनसे सहमत हूं, कि देश की राष्ट्रीय नीति पर कई सालों तक इस देश में विचार हुआ, चर्चा हुई और आम सहमति से एक राष्ट्रीय नीति बनी, जिसका समर्थन इस सदन में बैठने वाले सभी साथियों ने सालों-साल किया है। सरकार में बैठने वाले कुछ साथियों के बयान पढ़ने के बाद आज मेरे मन में चिन्ता पैदा होती है। देश के रक्षा मंत्री का बयान मैंने पढ़ा। अभी-अभी लोहिया जी के स्म्ृाति दिन के बारे में और चीन के पास भारत की जो जमीन है, उस पर एक वकतव्य मैंने पढ़ा। आपके नेशनल ऐजेण्डा में पड़ोसी देशों के साथ अच्छे रिश्ते रखने की बात कही गई है और जिस तरह स्टेटमेंट दिया गया है उसे आपको देखना होगा। मैं कहना चाहता हूं कि अटल जी को इस बारे में देश के सामने सफाई देनी चाहिए और बताना चाहिए कि स्िथति कया है। मुझे याद है कि साल डेढ़ साल पहले चीन के राष्ट्र प्रमुख जब भारत में आए थे तो एक बड़ा डिमौनस्ट्रेशन करने का काम इन्हीं रक्षा मंत्री जी के नेत्ृात्व में हुआ था। मुझे इस बारे में याद है, मैं इसे भूला नहीं हूं और इसका असर पड़ोसी देशों पर कया होगा, इसे हम नज़रंदाज़ नहीं कर सकते। इसकी कीमत हमें चुकानी पड़ेगी।
  मैंने सिर्फ दो-चार मुद्दे यहां पर रखे हैं। मुझे दिखाई देता है कि इस सरकार की नीतियों में और समझ में बहुत अंतर है। इनमें बहुत कंट्राडिकशन्स हैं और कंट्राडिकशन्स से भरा हुआ कार्यक़म लेकर, देश को आगे ले जाने का विचार देश के सामने इन्होंने रखा है, उसकी यात्रा ठीक होगी या नहीं, इस पर विश्वास करना मेरे जैसे व्यकित के लिए बड़ा मुश्िकल है। इसलिए आज के प्रस्ताव का विरोध करना मेरा फर्ज बनता है।
  मैं सदन का ज्यादा समय नहीं लेना चाहता हूं मगर एक बात साफ कहना चाहता हूं कि इस देश को आज स्िथरता की आवश्यकता है। रूलिंग पार्टी के पास, प्रधान मंत्री के पास अगर आवश्यक बहुमत का नंबर हो तो सरकार चलाने का उनका अधिकार हम ज़रूर मानेंगे। लेकिन अगर पार्िटयों को तोड़कर, जिसे लेकर कल सदन के कई घंटे बीत गए, इस रास्ते से जाकर अगर सदन में बहुमत बनाने की कोशिश कल होगी तो ऐसी परस्िथति कल होगी कि ऐसी परस्िथति बार-बार भी आ सकती है। मुझे विश्वास है कि ऐसी परस्िथति पैदा न होने देने के लिए कदम सामने की तरफ से उठेगा।
  डेढ़ साल पहले चीन के राष्ट्र प्रमुख जब भारत में आए थे तो एक बड़ा डिमौनस्ट्रेशन करने का काम इन्हीं रक्षा मंत्री जी के नेत्ृात्व में हुआ था। मुझे इस बारे में याद है, मैं इसे भूला नहीं हूं और इसका असर पड़ोसी देशों पर कया होगा, इसे हम नज़रंदाज़ नहीं कर सकते। इसकी कीमत हमें चुकानी पड़ेगी।
  मैंने सिर्फ दो-चार मुद्दे यहां पर रखे हैं। मुझे दिखाई देता है कि इस सरकार की नीतियों में और समझ में बहुत अंतर है। इनमें बहुत कंट्राडिकशन्स हैं और कंट्राडिकशन्स से भरा हुआ कार्यक़म लेकर, देश को आगे ले जाने का विचार देश के सामने इन्होंने रखा है, उसकी यात्रा ठीक होगी या नहीं, इस पर विश्वास करना मेरे जैसे व्यकित के लिए बड़ा मुश्िकल है। इसलिए आज के प्रस्ताव का विरोध करना मेरा फर्ज बनता है।
  मैं सदन का ज्यादा समय नहीं लेना चाहता हूं मगर एक बात साफ कहना चाहता हूं कि इस देश को आज स्िथरता की आवश्यकता है। रूलिंग पार्टी के पास, प्रधान मंत्री के पास अगर आवश्यक बहुमत का नंबर हो तो सरकार चलाने का उनका अधिकार हम ज़रूर मानेंगे। लेकिन अगर पार्िटयों को तोड़कर, जिसे लेकर कल सदन के कई घंटे बीत गए, इस रास्ते से जाकर अगर सदन में बहुमत बनाने की कोशिश कल होगी तो ऐसी परस्िथति कल होगी कि ऐसी परस्िथति बार-बार भी आ सकती है। मुझे विश्वास है कि ऐसी परस्िथति पैदा न होने देने के लिए कदम सामने की तरफ से उठेगा।
  और जो कंट्राडिकशंस आपमें हैं, इन कंट्राडिकशंस को लेकर अगर आप चलेंगे तो मुझे मालूम नहीं कि आप कामयाब होंगे या नहीं। आपने राज्यों के दलों और उनके नेताओं के साथ कुछ अंडरस्टैंडिंग की होगी, लेकिन वह कहां तक रहेगी, कब तक चलेगी, इस पर विश्वास करना मुश्िकल है। इसलिए यह स्िथरता कहां तक रहेगी इस पर देशवासियों को विश्वास नहीं है।
... (व्यवधान) इसी के साथ मैं इस प्रस्ताव का विरोध करता हूं।
MR. SPEAKER: He is not yielding.
SHRI MOHAN RAWALE (MUMBAI SOUTH CENTRAL) श्री मोहन रावले (मुम्बई - दक्षिण): मुम्बई शहर में जो दंगे हुए थे वे किसने कराये थे।
SHRI DATTA MEGHE (WARDHA) श्री दत्ता मेघे (वर्धा): वह तुमने कराये थे।
SHRI MOHAN RAWALE (MUMBAI SOUTH CENTRAL) श्री मोहन रावले : वह बिल्डर्स ने कराये थे।
SHRI DATTA MEGHE (WARDHA) श्री दत्ता मेघे : वह दंगे आपकी शिवसेना ने कराये थे।
MR. SPEAKER: Now, Shri Somnath Chatterjee will speak.
">SHRI SOMNATH CHATTERJEE (BOLPUR): Mr. Speaker, Sir, I rise to oppose this motion as I consider this to be my patriotic duty. I have heard our Prime Minister's speech with rapt attention and I never disturbed him. I was thinking of the slogan that was used this time `Abki Bari Atal Bihari', but what Atal Bihari, which Atal Bihari is this? Is it Atal Bihari with a guilty conscience, feeling the weight of the combination that he has formed? His speech clearly betrays the guilty conscience. He has talked of consensus, but that consensus is to surrender to his type of politics.
Sir, I do not think that the Indian political system has ever exhibited in the past a more opportunist, a more power hungry, a more brazen faced and a more dubious political combination than this which is today masquerading as alliance partners.
Mr. Speaker, Sir, our attachment or commitment to secularism and unity and integrity of the nation is not a mere slogan. Our Constitution provides for a secular, democratic Republic. Our Supreme Court has construed that secularism is one of the basic features of our Constitution to which we all swear. But this multi-religious, multi-ethnic and multi-linguistic character of our society is under severe attack today. In regard to Hindutva, about which Shri Sharad Pawar has spoken, I will not read out the manifesto of BJP again. It is based on the RSS slogan of `one nation, one people and one culture' and to them, the minorities like Christians, Muslims and Parsis are acceptable if they follow the Indian tradition or Hindutva as they understand. We have seen the intolerance of the BJP and its supporters to other religions, other view points and other thoughts. I know, they get upset when I refer to the demolition of Babri Masjid. ....(Interruptions)
But what is it apart from intolerance? Only a few days before the elections were held we read about the attack on a museum of modern art in Delhi. One of the leading luminaries of the B.J.P. staged an attack because he did not like two paintings of Shri M.F. Hussain and one of the most celebrated artists of this country was beaten up. This is their spirit of tolerance for others. One of the most celebrated literatuers of this country who is a member of the Sahitya Akademi has spoken of the fate of the Bharat Bhavan in Bhopal. (Interruptions)
SHRI PRAKASH VISHWANATH PARANJPE (THANE) श्री प्रकाश विश्वनाथ परांजपे(ठाणे): इनकी ये बात सुन-सुन कर तो हम थक गए। इन्हें सिर्फ यही बात कहनी है। (व्यवधान)
SHRI SOMNATH CHATTERJEE : Sir, this is the intolerance. They are not even prepared to hear others and now to talk of a consensus sounds very hollow. Let it be very clear; we shall never make any compromise on the question of democracy and secularism in this country. We can never allow the unity and integrity of this country to be destroyed. We have already had one division of this country. (Interruptions) You do not like bhasan. What are we here for? Fisticuffs?
Sir, our country has not been strengthened. Let not a situation be created when we have another attack on the unity and integrity of our country.
Sir, we are told ad nauseam - even today the Prime Minister had referred - that the people of this country had voted for a change, for a stable Government under an able Prime Minister, where different political parties entered into an alliance even before the elections. We know the figures, we have also heard the figures and I need not repeat them. But, I believe, the time has come when this myth of pre-poll alliance has to be exploded. I am sorry, Sir, with all my respect and unbounded veneration of our Rashtrapatiji, he seems to have also fallen into this error that there was a pre-poll alliance. Sir, after that 13 day, what I said, constitutional aberration ended, I had said in this House that I would like to see Shri Atal Bihari Vajpayee as the permanent Ex-Prime Minister of this country. But I have been proved wrong; I have been proved wrong because I wrongly assumed that Shri Atal Bihari Vajpayee had a conscience. I assumed that he was committed to certain basic values and that grievous mistake was made by me, a very humble political worker. My mistake was, I thought that the B.J.P. believed in political morality and we have been lectured on that from housetops.
 
Sir, we have heard from the B.J.P., from Shri Atal Bihari Vajpayee, his friends in his party and, maybe, his present cohorts also, about the danger to the country emanating from corruption. Shri Sharad Pawar has rightly reminded us how in the House we had also joined in our protest against the activities of Shri Sukh Ram. We remember how Shri Atal Bihari Vajpayee and his friends had criticised Shri Lalu Prasad Yadav. I had also, on the floor of this House, demanded his resignation. I admit that.
Sir, I remember how some of the events in Tamil Nadu had been crticised on the floor of the House. We admired the decision of Shri Lal Krishna Advani when he resigned from even the membership of this House and for his decision of not contesting the election because he was under some clout. Happily he is free from that. But that was we thought to be the morality of B.J.P. But as Shri Atal Bihari Vajpayee is only a mask, all your commitments to fight corruption are nothing but also masks. That is why, we see today another Constitutional distortion. We have found that all their commitments, all their so called moral stand, have been breached in every aspect of it, with only one object, to get power by hook or crook or on the basis of give and take as Lalooji said the other day.
Sir, alliance means coming together. For what purpose? There has to be a purpose even if you go by literal meaning. So, what was the objective? What was the common basis? It has been correctly pointed out. What was the purpose? Was there any unity of purpose on economic policy or was there unity of objectives between the B.J.P. and any of the parties? As has rightly been pointed out, then there would not have been separate manifestoes. The Samata Party, the AIADMK and the Trinamool Congress are all entitled to have their own separate manifestoes. They did. What is the foreign policy of the different parties? What is their attitude towards swadeshi? What is the attitude towards land reforms? We know nothing of it. They had no common policy at all. They had no common objective. What is the attitude of the respective parties on industry and on multinational corporations? There was no common programme, there was no common manifesto and there was no commitment to any principle or to unity of action. So, what was this alliance then? Today I am thinking of the day, Ist of September, 1997 in this House when the celebration of the Golden Jubilee Year ended with a Resolution which was passed unanimously during the Special Session. The Resolution was moved from the Chair by your distinguished predecessor, Shri P.A. Sangma. Sir, I quote a few lines:
"Having reflected upon the state of the nation with the Preamble to Constitution as the guide...
...That meaningful electoral reforms be carried out so that our Parliament and other Legislative bodies be balanced and effective instruments of democracy; and further that political life and processes be free of the adverse impact on governance of undesirable extraneous factors including criminalisation.
That continuous and pro-active efforts be launched for ensuring greater transparency, probity and accountability in public life so that the freedom, authority and dignity of the Parliament and other Legislative bodies are ensured and enhanced; that more especially, all political parties shall undertake all such steps as will attain the objective of ridding our polity of criminalisation or its influence."

One of the great leaders in this House said and I quote:

"The demon of criminalisation of politics is devouring the basic tenets of our democracy."

I am reading from the synopsis of the debate issued by the Lok Sabha.

"In order to identify and declare ineligible candidates from contesting elections, we shall have to consider every aspect of this malady and judge according to the law who is a criminal. Then, the whole house has to reach a consensus on the twin issues of criminalisation of politics and corruption in public life. Corruption is devastating our public life. The entire country is fed up because of this problem. People should not give bribes to get their work done. Ultimately, it is the duty of our leaders and administrators that such practices are dealt with a heavy hand and stringent steps should be taken to curb this menace."

Sir, thus spoke Shri Atal Bihari Vajpayee. Probably, every word has been breached today. That is why, I know that he has a guilty conscience.

Sir, the B.J.P's manifesto, if I read one sentence, says :

"B.J.P. will set an example of unimpeachable accountability and impeccable probity in public life. It will expeditiously deal with unresolved cases of corruption in which no action has been taken in the last 12 years."

Of course, they have not spoken of new cases of corruption or of their alliance partners.

Sir, shall we try to find out what is the commonality? We have to refer to this U.P. Government episode because this is a party of so-called principles and morality. Well, I do not know all the details. But who does not know of a Government consisting of deserters, those who defected from one party to several other parties? I remember the picture which came out on the T.V., and newspapers on the day Mayawatiji was ensconced in the centre with Shri Vajpayee on one side and Shri L.K. Advani on the other side in the Main Committee Room of the Parliament House Annexe announcing the great alliance and sharing of the Chief Ministership every six months -- what I had called a constitutional monstrosity. That was the first time ever when the high office of the Chief Ministership became a matter of sauda or a matter of sharing every six months. I am sure, Mayawatiji will be able to defend herself now, who is at the receiving end, because she is not supporting them.

We cannot forget Shri Sukh Ram, who was a very prominent Member of this House and a Minister. We remember, even in the room of the hon. Speaker, how he was trying to impress Shri Advani, Shri Jaswant Singh and others about his supposed innocence. But it was not acceptable to anybody.

Now, let us see what has happened in Tamil Nadu. What is the common basis? We cannot forget that Shri Vajpayee had to send a list of 240 Members. Where were these alliance Members -- 18 Members of the AIADMK, four Members of the PMK, three Members of the MDMK and one Member of the TRC? They were supposedly alliance partners, who fought together on a certain basis and it was supposedly a pre-poll alliance.

Now, the Prime Minister has not said to us as to why their names were not included in the list. He said: "Now, the ball is in the President's court. Rashtrapathiji called me, and I never staked the claim."

They could not stake the claim because they deserted you then for other saudas. How can we forget what had happened here when there were cases against the leader of that party there in Tamil Nadu?

What was their attitude towards the former Bihar Chief Minister? I am not going into the details. But how many cases are pending against the leader of the Party there in Tamil Nadu? We see in the newspapers and in the journals the list of cases. Now what is the approach? If Shri Laloo Prasad Yadav was wrong in sticking to his Chair, if a Sukh Ram was wrong then, not now, then how could this type of alliance be entered into? Today I find a host of cases. I need not read them and I do not wish to take up the time of the House. Today one of the leading national dailies says that one of the Ministers has been asked to appear in court on 6th of April or, the court will issue a non-bailable arrest warrant. I am not taking any name on the floor of the House. (Interruptions)

SHRI V. SATHIAMOORTHY (RAMANATHAPURAM): I am on a point of order.

MR. SPEAKER : What is your point of order?

SHRI V. SATHIAMOORTHY: There are cases, according to some news items in the newspapers. I am not denying it. But all cases are foisted on our Party leader and on other people. We cannot take newspaper reports as authentic. No court has proved it in any single case. All are foisted cases.

MR. SPEAKER : What is your point of order? Please sit down. Please take your seat.

SHRI V. SATHIAMOORTHY: Not one case has been proved in any court. All the cases are foisted ones.

SHRI SOMNATH CHATTERJEE: I have not even taken any name. I have only said that he is one of the colleagues of the hon. Prime Minister in his Cabinet now. Let us see the perfect understanding and relationship between these alliance partners. I do not know he may be somewhere, the leader of the Janata Party.

SHRI V. SATHIAMOORTHY: He is attributing motives for political decisions by the leaders.

MR. SPEAKER : Please cooperate.

SHRI SOMNATH CHATTERJEE: Let us see the perfect understanding and good relationship between the alliance partners.... (Interruptions)

MR. SPEAKER : You are not supposed to talk like that.

(Interruptions)

MR. SPEAKER :Please continue, Shri Somnath Chatterjee.

SHRI SOMNATH CHATTERJEE: The Janata Party President described himself like this. I am reading from "India Today" of 23rd March.

SHRI V. SATHIAMOORTHY: He is a senior and experienced Member. He is putting a false report.

SHRI SOMNATH CHATTERJEE: I am reading the report: -

"She is mentally unstable, charged her with colluding with LTTE to assassinate Rajiv Gandhi and initiated corruption cases that have dogged her since she lost power in May, 1996. On her part, she described him as a pathological liar."

What else have we seen in Tamil Nadu but a drama? We miss, particularly I miss my very good friend, Shri Jaswant Singhji in the House. He should have been here. I do not know if there is a sabotage in his election because they did not want him to be the Finance Minister.

You have got a substitute as close to him as possible. I know that Atalji is sorry. I am also very sorry. But he is very handy, useful, the Prince Charming. The articulate Prince Charming was sent there. Although he could not win over the hearts of the people of Chittorgarh, yet he could win over her heart...(Interruptions) It was a real, palace coup or a Garden Coup, Poes Garden or something, I do not know. She said for three or four days(Interruptions)

MR. SPEAKER : He is not yielding. Please take your seat.

SHRI SOMNATH CHATTERJEE : Sir, Shri Vajpayee and Shri Advani were accused of taking a negative attitude. Even Shri Advani was accused of mocking at her, making fun of her...(Interruptions) Although she did not want to indulge in a slanging match with Shri Hegde, she did retaliate. She said that she also had brought Shri Hegde's behaviour to the notice of Shri Vajpayee and Shri Advani. Perfect harmony! Perfect understanding!! Great personal respect for each other...(Interruptions)

She complained that the AIADMK and its allies were treated as inferior partners and second class citizens. She further said: "If this is their attitude before forming the Government, what would their attitude be after forming the Government?"

She then referred to very important issues concerning Tamil Nadu. I am not minimising the importance, the issues such as Cauvery...(Interruptions)
MR. SPEAKER : Please take your seat.
... (Interruptions)
MR. SPEAKER : This will not go on record. I have not allowed you. Please take your seat. This is not good. This will not go on record.
(Interruptions)* SHRI SOMNATH CHATTERJEE (BOLPUR): I agree that these are very important issues for Tamil Nadu which were raised by her.(Interruptions)
MR. SPEAKER : This is not good. Take your seat.
... (Interruptions)
SHRI SOMNATH CHATTERJEE : The question of Cauvery, the 69 per cent reservation, raising the height, the level of the Periyar dam and the question of making Tamil as an official language were all put as conditions for her support...(Interruptions)
MR. SPEAKER : Please understand that you will get the time to rebut this.
... (Interruptions)
SHRI SOMNATH CHATTERJEE : I say that these are important demands. I am telling them about this. I do not know what to do...(Interruptions) I am not objecting to them. I am supporting you. You please get those demands accepted by them...(Interruptions)
MR. SPEAKER : Please understand that you have got a chance to speak. At that time, you can rebut this.
SHRI SOMNATH CHATTERJEE : As I said, Shri Jaswant Singh went there and we were told of a happy resolution...(Interruptions)
SHRI KONIJETI ROSAIAH (NARASARAOPET): Sir, when a very senior Member is speaking, they must have some restraint. This type of interruptions from the ruling party are not good ... (Interruptions)
MR. SPEAKER: Shri Janardhanan, please take your seat.
... (Interruptions)
______________________________________________________________________________ * Not recorded.
SHRI SOMNATH CHATTERJEE : Mr. Speaker, Sir, I have never said that those demands are unjustified. Please listen. Do not be too touchy. I know why you are touchy. I am only saying that for three, four days, the second biggest alliance partner of the BJP, the AIDMK and its allies with 18 Members, refused to send a letter of support. As Shri Sharad Pawar said: " चिट्ठी आती है, आती है।"

Then I said, Shri Jaswant Singh did the trick. Of course, that was all inside the room. We do not know. We are humble mortals. We do not know what happened there. But then we were told, I remember, on the TV...(Interruptions)

SHRI VAIKO (SIVAKASI): I am very sorry about that observation(Interruptions)

MR. SPEAKER: That will not go on record.

(Interruptions) * SHRI K.P. MUNUSAMY (KRISHNAGIRI): He is misleading the House. He is unnecessarily talking.(Interruptions)

KUMARI MAMTA BANERJEE (CALCUTTA SOUTH): This is not proper to use such words against a woman.(Interruptions)

MR. SPEAKER: Nothing will go on record.

(Interruptions) * SHRI SOMNATH CHATTERJEE : Whatever I have said, I withdraw that...(Interruptions)

SHRI P. RAJARETHINAM (PERAMBALUR): We do not allow him to speak(Interruptions)

MR. SPEAKER: Hon. Members, if there is any objectionable sentence, I will go through the record.

... (Interruptions)

MR. SPEAKER: Please sit down. If there is anything objectionable, I will go through the record.

... (Interruptions)

___________________________________________________________________________ * Not recorded.

SHRI SOMNATH CHATTERJEE : It seems, I have been misunderstood. I withdraw that...(Interruptions)

SHRI AJIT KUMAR PANJA (CALCUTTA NORTH EAST): He must withdraw that...(Interruptions)

THE MINISTER OF HUMAN RESOURCE DEVELOPMENT (DR. MURLI MANOHAR JOSHI): He should apologise...(Interruptions)

MR. SPEAKER: Please cooperate with me.

... (Interruptions)

MR. SPEAKER: If there is anything objectionable, I will remove that from the record.

... (Interruptions)

SHRI AJIT KUMAR PANJA : Is it proper?...(Interruptions)

MR. SPEAKER: I will request the Members that if there is anything objectionable, I will remove that from the record.

... (Interruptions)

SHRI SATYA PAL JAIN : He should not use such cheap words. He should apologise...(Interruptions)

13.00 hrs. SHRI SOMNATH CHATTERJEE : Sir, this is very unfair... (Interruptions)

SHRI SATYA PAL JAIN : Sir, he should withdraw those words... (Interruptions)

13.02 hrs (At this stage, Shri K.P. Munusamy and some other hon. Members came and sat on the floor near the Table.) SHRI M. THIYAGARAJAN (POLLACHI): He is giving wrong information. He must apologise... (Interruptions)

SHRI P. RAJARETHINAM : Mr. Speaker, Sir, he is misleading the House. He must apologise... (Interruptions)

MR. SPEAKER: The House stands adjourned to meet again at 2.30 p.m. 13.03 hrs The Lok Sabha then adjourned till thirty minutes past Fourteen of the Clock.

14.30 hrs The Lok Sabha re-assembled at thirty minutes past Fourteen of the Clock.

(Mr. Speaker in the Chair) SHRI SOMNATH CHATTERJEE : Mr. Speaker Sir, ...(Interruptions)

SHRI SUDIP BANDYOPADHYAY (CALCUTTA NORTH WEST): Is he going to withdraw his words or not?

MR. SPEAKER: Please take your seat first.

SHRI SOMNATH CHATTERJEE : It seems many of my hon. friends on that side felt upset about what I might have said or might have meant. I wish to make it categorically clear that I never meant any disrespect to anybody, nor have I said, had in mind even, anything derogatory about anybody either within or outside the House.

It is very painful to me that after twenty-eight years I am being charged with some sort of an alleged impropriety. Without in any way admitting that I have committed any impropriety, since some of my hon. friends felt very upset, I regret if there was any misunderstanding about what I have said.

MR. SPEAKER: Please continue.

SHRI SOMNATH CHATTERJEE : What I was saying was that initially the AIADMK did not agree to join the Government for a few days. Thereafter they changed their mind and they expressed their intention to join the Government. What I wanted to say was that there must have been some terms and conditions on the basis of which some agreement was arrived at or there was this change of mind. That was what really I wanted to mean. We would not know this until it is disclosed. We know of the demands that were made.

I remember having seen on the television Shri Jaswant Singh, my very good friend, who, again I say unfortunately is not here, said that what has been agreed to will find a place in the National Agenda, if I am not mistaken. He also very categorically said; I believe I am quoting his words, "the past is behind us, the future is beckoning us". Therefore, we would have been very happy if the hon. Prime Minister had said what ultimately was arrived at, what was agreed to. Why I am mentioning this is because I am trying to show that this alliance is a fragile alliance and this so called pre-poll alliance is a myth. That is my contention. They would not agree. But allow me to say what I feel. Similarly, in my State, the BJP had a seat sharing arrangement with West Bengal TMC and I congratulate them for having won so many seats. It is the people's verdict. We accept it.

I am very unhappy that Shri Tapan Sikdar has won, but I respect the people's verdict. I have congratulated him. My understanding is that he is out of the Government because of some comments that he had made - "Didigiri Nahi Chalega". This came out in the papers, nobody denied it. Therefore, it has been repeated even after the formation of the Government, if I am not mistaken. She is here, she will speak about it. There was only a seat sharing arrangement. I was in my constituency, I did not know anything except what appeared in the papers.

I read that even in her meetings the leader of the Trinamool Congress did not allow BJP flags. She did not share the platform with any BJP leaders. That is what I saw. If I am wrong, please correct me. Therefore, where is that alliance? What is the commonality of the view points or the approach or the attitude or the policies and programmes?

As a matter of fact, they contested each other at least in one constituency in West Bengal. I was trying to find out the basis of the claim that there was a so-called `pre-poll alliance' and the distinction which is being sought to be made with the understanding between the U.F. Government and the Congress understanding after the 1996 elections. It was being said that that was a post-poll alliance or a post-poll understanding. Now, they take greater credit saying that this is a pre-poll alliance and therefore the people have voted for them.

The people have voted for which manifesto in West Bengal, in Andhra Pradesh, in Tamil Nadu and in Orissa? We do not know what the Biju Janata Dal's economic policy is, if there is any; we do not know what their education policy is, what their policy about MNCs is and what their policy about the nuclear option is. But they say that they are allies. Can seat sharing during an election be the basis of a durable alliance? This is an issue which is staring the country in the face.

Now, of course, the AIADMK has said that it will unconditionally support this Government. We saw that there was a denial that any particular Ministry was asked for. I accept it if they have denied it. I am not questioning it. There are many versions coming out in the Press but we do not find any denial.

What was said in the Press? I am referring to very responsible journals. I will not take long. Now, I quote: `Refusal by the AIADMK leader to forward a letter of support for the BJP has upset the party's plans to form a Government at the Centre'. I remember those two or three days when television was showing Shri Atal Bihari Vajpayee not in a very happy mood, all of them sitting very glum faced, waiting for a letter to come from Tamil Nadu. That is why he was forced to go to the hon. Rashtrapatiji with 240 names.

We have been told then of a Tamil Nadu package, we have been told now of a West Bengal package and we have also been told of the Orissa package! We have been told that they will find a due place in the National Agenda but where are they? We have not seen them in the National Agenda. This is what I wanted to mean. There must be some hidden agendas on which they are not taking the people of the country into confidence, about which they are not telling the people. Therefore, according to me, this National Agenda is nothing but a `national tamasha'. Where are those agreements? Mr. Prime Minister, where are those packages on the basis of which you have got their support?

14.39 hrs (Shri P.M. Sayeed in the Chair) In this National Agenda, one aspect is very clear. As we had seen in the President's Address of 1996, they have suddenly omitted their main issues, main demands like building of a Ram Mandir at Ayodhya, abrogation of Article 370 and bringing in a Uniform Civil Code. Earlier, Shri Sharad Pawar has read it out and I need not read it out again. These issues find primacy in their manifesto. They get primacy in the BJP manifesto. But today, the National Agenda does not mention about them. There is only a very fleeting reference to corruption. They have referred to it only in the case of electoral reforms. These are very difficult subjects for them now.

Although building of a Ram Mandir is not in the National Agenda, what has been said by many of our hon. friends?

Shri Vinay Katiyar was here. He had very categorically said, "Atalji will make the mandir possible". That was his statement on 21st March. Then, "Hindutva hawks want Ram revived." Under this it is said: "The BJP high command has incurred the wrath of some MPs, chiefly sants-turned-politicians - I find quite a few here - and Ayodhya-based sadhus, who resent the party's soft line on Ayodhya and the uniform civil code." I am not reading the entire report. Therefore, there are already protests in the BJP itself on the omission of the Ram mandir issue from the national agenda. Then what is cohesiveness? The BJP itself is not cohesive. How can the Government be united?..(interruptions)...We would like to know from the Prime Minister on this point. He should tell us and take the party people into confidence on this when he is asking for confidence vote. You cannot ask for confidence vote without disclosing your commitments to different so-called alliance partners.

I want to make it clear that I do not grudge on any special arrangements or any benefits given to any State in India. I am glad that the Prime Minister said that for a strong India, there have to be strong States. And that is our demand all along. We had quarrelled with Congress and we still quarrel with them because they feel that a strong Centre will be sufficient which does not help the development of this country. There are areas of disparities from place to place.

I cannot but comment in view of the AIADMK and its allies in Tamil Nadu being the major partners of this alliance. I am reminded of what Dr. Shyama Prasad Mukherjee had said. He said, "India, that is Bharat," that is, Tamil Nadu now. This Government's life depends on this. Sir, there are very disquieting reports that the hon. Minister of Law had already said that certain cases are falsely instituted. Within a day or two of his assumption of power, he passes judgement when the cases are pending in the courts....(interruptions) THE MINISTER OF LAW, JUSTICE AND COMPANY AFFAIRS (SHRI M. THAMBI DURAI): I had never passed any judgement. I had made only observations. When I went to Chennai, some people approached me to enquire regarding the false cases made against my leader and some workers. Then, I said, "I will go through and find out the facts." What was wrong in that? What was the judgement that I gave? I cannot understand it.

SHRI SOMNATH CHATTERJEE (BOLPUR): Very well. He did not pass any judgement but made only comments...(interruptions) SHRI M. THAMBI DURAI: I am not a jduge. I made only a comment. When you are making comments, I can also make a comment...(interruptions) MR. CHAIRMAN : Shri Thambi Durai, please sit down.

... (Interruptions)

SHRI M. THAMBI DURAI: I stand by my statement and what I said. It is a false case and I will prove it in the court. I have no doubt at all on this point....(interruptions)....I am not a judge to give a judgement.

SHRI SOMNATH CHATTERJEE : I agree and I stand corrected. The Law Minister cannot pass judgements but he has passed comments....(interruptions) SHRI M. THAMBI DURAI: I did not interfere with the judiciary. We cannot influence our judges on any account...(interruptions) SHRI SOMNATH CHATTERJEE : I have not implicated the judiciary....(interruptions)...You do not know what is in my mouth. Sir, I have only said that he has passed comments about the truth or the correctness or otherwise of certain cases....(interruptions)...Therefore, with a Government of such disparate and desperate forces, I wonder what will happen to this country.

As I said earlier, Shri Atal Bihari Vajpayee is a mask. It has been said by one of their leaders. ... (Interruptions)

MR. CHAIRMAN : No running commentary, please.

... (Interruptions)

MR. CHAIRMAN: Please do not do that.

... (Interruptions)

MR. CHAIRMAN: I am asking him to conclude now.

SHRI SOMNATH CHATTERJEE : `Sangh Parivar' has utilised Shri Vajpayee's charismatic leadership and stature. I feel that if unfortunately this Government continues and is saddled in power, apart from the common people and the country, the biggest victim will be Shri Atal Bihari Vajpayee. He does not know when the rug will be drawn from under his feet. ... (Interruptions) Then, it will be: अब की बारी लाल बिहारी और प्रमोद बिहारी।

श्री मुलायम सिंह यादव (सम्भल): सभापति महोदय, ... (व्यवधान)

  सभापति महोदय : मुलायम सिंह जी एक मिनट रुकिये।

THE MINISTER OF PARLIAMENTARY AFFAIRS AND MINISTER OF TOURISM (SHRI MADAN LAL KHURANA): I was told that Shri George Fernandes would now be given the opportunity to speak.

SHRI MULAYAM SINGH YADAV (SAMBHAL) श्री मुलायम सिंह यादव : अच्छा रहेगा जॉर्ज साहब मेरे बाद बोलें।

...(व्यवधान)(व्यवधान)

MR. CHAIRMAN: Now, I have already called him.

SHRI M. THAMBI DURAI: That will be all right.

MR. CHAIRMAN: I am sorry, it is written here.

  श्री मुलायम सिंह यादव आपने भी उनको धोखा दिया और उन्होंने भी आपको धोखा दिया, सबको धोखा दिया।

  सभापति महोदय : इस तरह से इंटरप्शंस होंगी तो दो-तीन आदमी भी कवर नहीं हो सकेंगे।

... (व्यवधान)

SHRI MULAYAM SINGH YADAV (SAMBHAL) श्री मुलायम सिंह यादव : उसे समझने में दिककत हो जायेगी कि कैसे धोखा दिया था।

  सभापति महोदय : मुलायम सिंह जी, आप इधर देखिये, उधर मत देखिये।

">SHRI MULAYAM SINGH YADAV (SAMBHAL) श्री मुलायम सिंह यादव : सभापति महोदय, कुछ ऐसी बातें हैं जिनको मैं दोहराना नहीं चाहता हूं, वे बातें माननीय नेता विरोधी दल और सोमनाथ चटर्जी साहब ने कह दी हैं। लेकिन मैं इतना जरूर कहना चाहता हूं कि भाजपा कितनी भी अफवाह फैलाइये और चाहे जितना असत्य बोलें, (व्यवधान)
SHRI MULAYAM SINGH YADAV (SAMBHAL) श्री मुलायम सिंह यादव : चाहे कितना भी असत्य कहिये,अफवाहों से चुनाव में तो जीता जा सकता है, लेकिन अफवाहों के माध्यम से सरकार नहीं चलाई जा सकती (व्यवधान) साथ में हमारा समय जोड़ते जाइये, मुझे कोई दिककत नहीं है।
  सभापति महोदय : उनके कमेन्ट पर आप कोई प्रतक़िया मत दीजिए। मैं उनसे भी कह रहा हूं।
SHRI MULAYAM SINGH YADAV (SAMBHAL) श्री मुलायम सिंह यादव : मैं भी वही बोल रहा हूं। मैं तो अपनी बात कह रहा हूं। जैसा अभी कहा गया कि भारतीय जनता पार्टी को जनादेश मिला ... (व्यवधान)
  कितना जनादेश मिला यह ऑन रिकार्ड है।१९९६ के चुनाव की तुलना में ज्यादा से ज्यादा कुल १५-१६ सीटें भारतीय जनता पार्टी की बढ़ गईं और कह रहे हैं जनादेश मिल गया है। जनादेश किस बात पर मिला वह आप सबने बता ही दिया है। यह कब बदलेंगे, कया बोलेंगे इस पर कभी कोई भरोसा नहीं कर सकते और देश की जनता अब बिलकुल समझ गई है। हम फिर दोहराना चाहते हैं कि धारा ३७०, राम मंदिर, समान आचार संहिता, अपराधीकरण, स्वच्छ प्रशासन और योग्य प्रधानमंत्री, आदि-आदि नारों पर चुनाव जीता । आप योग्य हैं बाकी कया सब नाकाबिल बैठे हैं।
  सभापति महोदय, यदि इन मुद्दों पर वोट नहीं मांगा गया होता, तो आपकी पार्टी के १७९ सांसदों की जगह मात्र ७९ सांसद रह जाते। माननीय आडवाणी जी मेरी इस बात से सहमत होंगे, लेकिन आप सबसे मैं कहना चाहता हूं, विशेष रूप से जार्ज साहब से तो बाद में कहूंगा कि अभी तक जितने भी इंटरव्यू आए हैं, उन सब में भाजपा नेताओं ने यही कहा है कि अभी हमारा बहुमत नहीं है। जिस दिन हमारा बहुमत हो जाएगा, यानी जिस दिन अकेली भारतीय जनता पार्टी का बहुमत होगा, उस दिन मंदिर भी बनेगा, धारा ३७० भी लागू होगी और समान आचार संहिता भी लागू हो जाएगी। जार्ज साहब मैं अब आपसे कहता हूं कि आप भी इस बात पर विचार करें। जिन जार्ज साहब को कभी हमने अपना नेता माना था, उन जार्ज साहब को अब हमें नेता मानने में कठिनाई हो रही है कयोंकि वे साम्प्रदायिकता का सहयोग कर रहे हैं।
  महोदय, चुनाव से पहले भी हमने कई जगह कहा था कि भारतीय जनता पार्टी के दो चेहरे हैं, दो चुनाव घोषणापत्र हैं, एक तो वह जो चुनाव से पहले जनता के बीच में प्रचारित किया जाता है और दूसरा वह जब सत्ता में आ जाते हैं, तब दूसरा कार्यक़म बना लेते हैं। दो सदस्यताएं हैं जिनके पीछे हमें लड़ना भी पड़ा। दो नेता हैं और दोहरा चरित्र है। माननीय प्रधान मंत्री जी, आप इस पार्टी के मुखड़ा या मुखौटा हैं। ऐसा हम नहीं कह रहे हैं बल्िक आपकी पार्टी के महत्वपूर्ण पदों पर बैठे हुए पदाधिकारी कह रहे हैं और एक विदेशी दूतावास में कह रहे हैं कि अटल जी हमारी पार्टी के मुखौटा हैं, असली नेता हमारे माननीय आडवाणी जी हैं, जो प्रधान मंत्री बहुत जल्दी बनने वाले हैं। आप मेरी इस बात को ध्यान रखिए, यदि आज आपको यहां बहुमत मिल गया, तो वाजपेयी जी, आप प्रधान मंत्री नहीं रहेंगे। असली प्रधान मंत्री जो तो आपके पास बैठे हैं, आडवाणी जी बनेंगे। (व्यवधान)
  महोदय, अभी हमारे मान्यवर कुछ साथियों ने पीछे से कहा कि धोखा दिया है। कैसे बदल गए, कौन मुख्य मंत्री कब आ जाता है, कैसे, कब, कौन प्रधान मंत्री आ जाता है, यह देखने की बात है। अटल जी से हमारे पहले बहुत गहरे रिश्ते थे, लेकिन अब वे हमसे नाराज हैं। हमारे नाम लेने में भी उनको परेशानी है। इसलिए हम आपको सावधान कर रहे हैं कि चुनाव तो ये आपके नाम पर जीत गए। हम जानते हैं कि किस तरह से आपके नाम पर वोट मिले हैं, और इससे हम कोई इंकार नहीं करते हैं। इस बात को हमने सब जगह स्वीकार किया है, न केवल टी.वी. पर बल्िक जहां भी हम गए हमने यह बात कही है कि आपको अटल जी के नाम पर वोट मिला है। यह दूसरी बात है कि अटल जी के नाम पर आपको ज्यादा वोट मिल गया और मेरे नाम पर कम वोट मिला। इसलिए हम आटल जी को सावधान करना चाहते हैं और आपसे कह रहे हैं कि आप भी सावधान रहिए। असली प्रधान मंत्री आपके बगल में बैठे हैं जिनका नाम बहुत जल्दी नागपुर से आ जाएगा।
  महोदय, अभी कया हुआ, इन्होंने मंत्रिमंडल बनाया। यह मंत्रिमंडल भी इन्होंने अपने मन से नहीं बनाया। गुजराल जी ने अपने मन से और हमारे मन से मंत्रिमंडल बनाया था। लेकिन प्रधान मंत्री जी ने यह मंत्रिमंडल अपने मन से नहीं बनाया। यह बात संघ के नेता ने स्वयं कही है कि हमारे संघ के ही सारे मनिस्टर होने चाहिए। इस समय मेरे पास वह अखबार नहीं है, नहीं तो मैं आपको पढ़कर सुनाता। माननीय जसवंत सिंह जी हमारे मित्र हैं। हम भी उनकी बहुत इज्जत करते हैं। उनको सबसे पहले वित्त मंत्री बनाए जाने की बात की गई, लेकिन संघ के लोग नहीं चाहते, इसलिए दोपहर को प्रधान मंत्री जी कहते हैं कि वित्त मंत्रालय वे अपने पास रखेंगे, लेकिन रात में वित्त मंत्री बन गए यशवंत सिन्हा।
  जिस सरकार का दिमाग ही स्िथर नहीं है, वह सरकार स्िथर कभी नहीं रह सकती। कैसा उनका दिमाग है। कितनी बार दिमाग बदला कि किसको वित्त मंत्रालय मिले, ए. आई.
  डी.एम.के. के साथियों को कैसे मनाया जाये ताकि आगे वे नाराज न हों। हमारे कामरेड सोमनाथ चटर्जी यहां बैठे हुए हैं। उनके कहने का सेंस दूसरा नहीं था लेकिन उन्होंने उसका दूसरा अर्थ लगा लिया। फिर भी उन्होंने अपनी बात को वापस ले लिया। ये हमारी सरकार को कया कह रहे थे। जब हम सरकार में थे और ये इधर बैठे हुए थे, उन्होंने उस समय हमारी सरकार को खिचड़ी सरकार कहा था। अब यह सरकार कया है--यह खिचड़ा है।
... (व्यवधान) वह बता देंगे। अगर हमारे दक्षिण के साथियों की समझ में न आ रहा हो तो उन्हें जरूर समझा दीजिए कि खिचड़ी तो पच जाती है लेकिन खिचड़ा नहीं पचता।
... (व्यवधान) वही तो मैं कह रहा हूं।
... (व्यवधान)
SHRI VIRENDRA SINGH (MIRZAPUR) श्री वीरेन्द्र सिंह (मिर्जापुर): मुलायम सिंह जी, आप कहते हैं कि खिचड़ी पचती नहीं है। जो खिचड़ी पकती नहीं है, वह पचती नहीं है। आपकी खिचड़ी पकी नहीं थी इसलिए वह पची नहीं।
... (व्यवधान)
SHRI MULAYAM SINGH YADAV (SAMBHAL) श्री मुलायम सिंह यादव : यही तो मैं कह रहा हूं कि खिचड़ी पच जाती है लेकिन खिचड़ा पचता नहीं है।
  सभापति महोदय, नैतिकता का आधार होता है। नैतिकता की बड़ी चर्चा होती है। हमेशा "नैतिकता" और "जी", यह दो बातें हमारे भाजपा मित्र बहुत करते हैं। कितनी नैतिकता आप में है? पूरे देश में आपने कया वायदे किये और उन वायदों के विपरीत आपने नैशनल एजेंड़ा में कया लिखा है । सोमनाथ चटर्जी ने ठीक ही कहा कि यह नेशनल एजेन्डा नहीं बल्िक एक तमाशा है और हमारे कई साथियों की भावना है, जिसमें सच्चाई है कि यह नेशनल एजेंडा देश विरोधी है, राष्ट्र विरोधी है। इसका उदाहरण मैं बताऊंगा कि ऐसा कयों है। आप अखंड भारत की बात करते हैं लेकिन आप देश को कहां ले जाना चाहते हैं? किस भावनाओं को भड़काना चाहते हैं। कितनी भावना को भड़कायेंगे। यह सबसे बड़ा अनैतिक काम है। किसी भी पार्टी का चुनाव घोषणा पत्र उसका सबसे पवित्र दस्तावेज होता है। आप जनता से जो वायदा करते आये, उसे बदलकर कहते कि यह अभी हमारे इस एजेंड़े में नहीं है।
  सभापति महोदय, कार्यक़म का सवाल नहीं है, सवाल मानसिकता का है। मानसिकता कहां है। मानसिकता यही है कि मंदिर भी बनायेंगे, धारा ३७० को भी खत्म करेंगे और आचार संहिता को भी लागू करेंगे। आचार संहिता पर हम ज्यादा नहीं बोलेंगे, नहीं तो परेशानी हो जायेगी। आचार संहिता की बात केवल मुसलमानों को बार-बार उकसाने के लिए होती है।
... (व्यवधान) समान आचार संहिता बहुतों की पता चल जायेगी। केवल मुसलमानों के लिए ही एक शादी करने की आचार संहिता लागू करने की भात कहते हैं, कया हिन्दुओं में एक से अधिक शादी लोग नहीं कर रहे हैं ।बल्िक वह कितनी-कितनी बार करते हैं।
... (व्यवधान) मजबूरी में कहिए, हम तो पब्िलक में भी बोलेंगे। (व्यवधान)  
SHRI ASHOK PRADHAN (KHURJA) श्री अशोक प्रधान (खुर्जा): २१ तारीख को यह खेल न हुआ होता तो आप भी यहां न आए होते (व्यवधान)
SHRI MULAYAM SINGH YADAV (SAMBHAL) श्री मुलायम सिंह यादव: सभापति महोदय, आप हमारा समय देखते जाइए। उधर से जितना समय कटेगा उतना समय हम और ले लेंगे। आप हम पर यह मेहरबानी करें। दूसरी तरफ राष्ट्रीय एकता परिषद में हम भी थे। राष्ट्रीय एकता परिषद, जो देश का सवर्ोच्च राजनैतिक मंच है, उसमें भी वायदा किया गया कि मस्िजद नहीं तोड़ी जायेगी। यही नहीं सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा भी दे दिया। हलफनामा देने के बाद भी मस्िजद गिराई गयी--कया यही नैतिकता है? इनकी कथनी और करनी में भेद है और जब कथनी और करनी में भेद होता है। जिसकी कथनी करनी में भेद होता है, वह देश की सच्ची सेवा नहीं कर सकता । (व्यवधान)

15.00 hrs.   नैतिकता की बात नहीं सुनना चाहते। इनकी कथनी और करनी में भेद है। दो जीभ से बात करने वाले बड़े खतरनाक होते हैं। बुरा मत मानिए, दो जीभ से बात मत करिए, एक जबान से बोलिए। हमने एक जबान से बोला है, साम्प्रदायिकता के खिलाफ जो संकल्प लिया है उसके लिए लड़ेंगे और साम्प्रदायिकता को खत्म करेंगे। इतिहास इस बात का गवाह है कि कट्टरवादी ताकतों को हिन्दुस्तान ने कभी स्वीकार नहीं किया। लोकिन अफसोस है कि हमारे कुछ नेता, जो हमारी विचारधारा के थे, इनका सहारा लेकर उधर बैठे हैं। जार्ज साहब, मुलायम सिंह से चाहे जो कीमत ले लेते लेकिन साम्प्रदायिक शकितयों को ताकत देने का काम आपको नहीं करना चाहिए। लालू प्रसाद के साथ आपका जो कुछ भी मतभेद था, हम तो आपके थे, हमारे साथ जुड़ जाते। जार्ज साहब, मैं सच्चाई कह रहा हूं कि आप देश में ऐतिहासिक व्यकित बन जाते। आप चाहे पार्िलयामैंट में पहुंचते या नहीं, डिफैंस मनिस्टर बनते या नहीं, चाहे सड़कों पर पजामा-कुर्ता पहनकर घूमते रहते लेकिन सड़कों पर हजारों-लाखों लोग आपका जिन्दाबाद बोलते।

... (व्यवधान) डिफैंस मनिस्ट्री को छोड़ दीजिए, डिफैंस मनिस्ट्री तो छोटी चीज है। यदि मैं जिद कर जाता तो प्रधानमंत्री भी बन जाता। लेकिन फिरकापरस्ती के खिलाफ मैंने अपने संयुकत मोर्चे को कमजोर नहीं किया (व्यवधान) पहले चुनाव में दोस्त बेचारी लक्षमी पार्वती को बनाया और अब आम सहमति का विरोध करके तेलगु देशम से बातचीत कर रहे हैं। यह धोखाधड़ी नहीं तो कया है।

... (व्यवधान) इसी तरह से हरियाणा में चौधरी बंसी लाल से समझौता करके चुनाव लड़ा और अब दूसरी पार्िटयों से समझौता कर रहे हैं कि हम बंसी लाल को हटा देंगे, चलो, मेरे साथ आ जाओ। यही है इनकी नौतिकता। इनकी नैतिकता यह है कि सत्ता में कैसे बने रहें। यह सत्ता का एजैंडा है, राष्ट्रीय एजैंडा नहीं है। इसलिए सोमनाथ चटर्जी ने ठीक कहा कि यह एक तमाशा है। इनमें कितनी नैतिकता है, हमारे पास उसके बहुत उदाहरण हैं।

  आपने भ्रष्टाचार के नाम पर १३-१३ दिन लोक सभा नहीं चलने दी और अब सब के सब एक जगह समा गए। इसमे आश्चर्य नहीं करना चाहिए। ये तो समुद्र और गंगा दोनों हो गए। यह सच्चाई है, आप गंभीरता से विचार कीजिए। ये समुद्र भी बन गए, चाहे जो आ जाए। कोई इनके यहां चला जाए तो वह पवित्र हो जाएगा, जब तक इधर रहे तब तक अपवित्र मुलायम सिंह अपवित्र, जार्ज साहब बड़े अपवित्र थे और कई बड़े-बड़े अपवित्र माने जाने वाले लोग इधर गंगा में चले गए तो पवित्र हो गये, चाहे कुछ भी करके आएं। ... (व्यवधान)कहां गया अपराधीकरण? मध्य प्रदेश इस बात का गवाह है। वहां दो ऐसे उम्मीदवार भाजपा ने खड़े किए जिनके अपराधिक इतिहास के कारण उनके पर्चे खारिज हुए थे।

... (व्यवधान) फिर वे डमी कैन्डीडेट के रूप में लड़े।

  किस अपराधीकरण की बात करते हो,किस राजनैतिक अपराधीकरण को रोकने की बात करते हो। (व्यवधान)

SHRI KANTILAL BHURIA (JHABUA) श्री कान्ितलाल भूरिया (झाबुआ) : धार और मुरैना में धारा ३०२ के दो अपराधी थे, उनके नोमिनेशन पेपर खारिज हो गये।

MR. CHAIRMAN : Shri Pradhani, this is not correct.

... (Interruptions)

SHRI MULAYAM SINGH YADAV (SAMBHAL) श्री मुलायम सिंह यादव : अब सबसे बड़ा उदाहरण देता हूं, लेकिन एक ही उदाहरण दूंगा। उदाहरण तो सामने बहुत हैं। उत्तर प्रदेश में आज जो सरकार बनी है और जिस सरकार को बनाने का सबसे बड़ा योगदान माननीय प्रधान मंत्री जी का है, उसमें जो मंत्री बने हुए हैं, वे गम्भीर भ्रष्टाचार में लिप्त हैं और अपराधी भी हैं। ऐसे-ऐसे अपराधी हैं कि जिस दिन कैबिनेट के मंत्री की शपथ ले रहे थे, उस दिन उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट थे। उसके तीन या चार दिन बाद जब इलाहाबाद हाई कोर्ट से स्टे लिया गया, तब उनकी गिरफतारी पर रोक लगी। इसलिए अपराधीकरन पर भाजपा की बात करना निरर्थक है । (व्यवधान)

SHRI ASHOK PRADHAN (KHURJA) श्री अशोक प्रधान : संयुकत मोर्चा की सरकार बनी, उसमें कितने ऐसे मंत्री थे।

... (व्यवधान)

SHRI MULAYAM SINGH YADAV (SAMBHAL) श्री मुलायम सिंह यादव : अभी इसी मंत्रिमंडल में, जिनपर भ्रष्टाचार के आरोप हैं, वे मंत्रिमंडल में मंत्री बना दिये। आप कयों कहलवाना चाहते हैं, उनमें मेरे बहुत से दोस्त हैं। अब कया कहूं?

... (व्यवधान) कह तो रहे हैं, आप सुनिये। हम तो कहेंगे ही, सुनिये।

... (व्यवधान)

SHRI ASHOK PRADHAN (KHURJA) श्री अशोक प्रधान : आप अपनी स्टोरी भी खोलते जाइये।

SHRI MULAYAM SINGH YADAV (SAMBHAL) श्री मुलायम सिंह यादव : माननीय प्रधान मंत्री जी जब भी उत्तर दें, उस समय यह जरूर बतायें कि आपके मंत्रिमंडल में सारे के सारे लोग ऐसे हैं, जिनपर कोई भ्रष्टाचार का आरोप नहीं है तो फिर छह दिन का विशेष अधिवेशन बुलाकर लोक सभा कयों चलाई?

  फिर स्वच्छ प्रशासन की बात है, ईमानदार प्रधान मंत्री, जिस प्रधान मंत्री के मंत्रिमंडल में भ्रष्टाचार के आरोपी मंत्री बने होंगे तो देश की जनता आपपर अंगुली उठाएगी। प्रधान मंत्री अगर ईमानदार होगा तो प्रधान मंत्री के मंत्रिमंडल में भी सारे लोग ईमानदार होने चाहिए। आडवाणी जी ने ठीक उदाहरण दिया था, जब उनपर भ्रष्टाचार का आरोप लगा तो उन्होंने इस्तीफा दे दिया और इस्तीफा देकर कहा कि मैं तब तक कोई सरकारी या लोक सभा में पद नहीं लूंगा, जब तक कि हमें न्यायालय निदर्ोष मुकत नहीं कर देता।

SHRI VIRENDRA SINGH (MIRZAPUR) श्री वीरेन्द्र सिंह : उन्होंने कहा था कि पार्िलयामेंट के परिसर में कदम नहीं रखूंगा।

SHRI MULAYAM SINGH YADAV (SAMBHAL) श्री मुलायम सिंह यादव : हां, कहा था। उसकी मैं तारीफ ही कर रहा हूं। हम यहीं तारीफ करेंगे। लेकिन अब प्रधान मंत्री की तारीफ हम कैसे कर दें?

  सभापति महोदय : मुलायम सिंह जी, आप उनसे बात मत कीजिए, इधर देखिये।

SHRI MULAYAM SINGH YADAV (SAMBHAL) श्री मुलायम सिंह यादव : कया इसी आधार पर चलाएंगे, होम मनिस्ट्री। उनके ऊपर है। इनका पुलिन्दा बांध देंगे। वे कमजोर नहीं हैं, वे सब का पुलिन्दा बांधेंगे और सब की फाइल बन रही होगी। हम तो प्रधानमंत्री जी को सावधान कर रहे हैं, आपकी आलोचना नहीं कर रहे। आप बुरा मत मानिये, हम आपको आने वाले खतरों से सावधान कर रहे हैं। हमारे सामने जो खतरे हैं, उनसे लड़ने के लिए हम तैयार हो गये हैं। आपका कोई बड़ा बहुमत नहीं है। आप बार-बार कहते हैं कि आपकी सरकार किसने गिराई। हमारी सरकार कांग्रेस ने गिराई, जो बहुत बड़ा दल है और आपके यहां तो माननीय बूटा सिंह जी चाहें तो आज ही सरकार गिर जायेगी। फिर कया होगा?

... (व्यवधान) वह तो बड़ी पार्टी थी, लेकिन आज एक भी निर्दलीय अगर चाहे तो वह आपकी सरकार गिरा दे। इसलिए आप इन बातों में मत जाइये कि सरकार किसने गिराई। वह तो बड़ी पार्टी थी, उसने सरकार गिराई, लेकिन आपकी ताकत तो अभी ऐसी है आपकी सरकार गिराने के लिए म. बूटा सिंह ही काफी है ।

  कितने अफसोस की बात है, इनका संस्कृति भी एक नारा है। आज उत्तर प्रदेश के अन्दर भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने नकल विरोधी कानून बनाया है। हम नकल के पक्षधर नहीं हैं और आपको यह भी विश्वास होना चाहिए (व्यवधान)

SHRI ASHOK PRADHAN (KHURJA) श्री अशोक प्रधान : आपकी पार्टी के लोग धरने पर बैठे हैं, इससे ज्यादा और कया होगा।

SHRI MULAYAM SINGH YADAV (SAMBHAL) श्री मुलायम सिंह यादव : इसीलिए कह रहे हैं कि हम नकल के पक्षधर नहीं हैं, नकल के विरोधी हैं। जहां मैं टीचर रहा हूं, अभी तक होम एग्जामिनेशन में नकल नहीं हो रही है, हमारी ऐसी परम्पराएं डाली हुई हैं। (व्यवधान)

  लेकिन जिस तरह का काला कानून उत्तर प्रदेश के अंदर बना है उसका विरोध करेंगे (व्यवधान) हल्ला भी बोलेंगे, अभी कया हुआ है। विश्व के किसी भी सभ्य समाज और देश में शिक्षण संस्थाओं में ऐसा काला कानून लागू नहीं है, हिन्दुस्तान के भी अन्य किसी राज्य में है। १५-१६ साल के छात्र-छात्राओं को जेल भेज देंगे और वहीं उत्तर प्रदेश में अपराधी मंत्री बनेंगे।

  एक माननीय सदस्य: आप पर कितने मुकदमें दर्ज हैं?

SHRI MULAYAM SINGH YADAV (SAMBHAL) श्री मुलायम सिंह यादव : आपके ग्ृाह मंत्री सदन में बैठे हुए हैं, वे बता देंगे। फिर मैं आप लोगों के भी गिना दूंगा। मैंने कोई गलत बात नहीं कही है। सभापति महोदय, इनका जवाब भी साथ-साथ देता जाऊंगा।

  सभापति महोदय : यह सवाल-जवाब की बात नहीं है। आप उधर ध्यान मत दें।

SHRI MULAYAM SINGH YADAV (SAMBHAL) श्री मुलायम सिंह यादव : मैं तो आपको ही देख रहा हूं। उधर देख लिया तो और गड़बड़ हो जाएगी। ये लोग नैतिकता की, संस्कृति की बात करते हैं। भ्रष्टाचार दूर करने की बात करते हैं। लेकिन इन्होंने लोक सभा में अपराधियों को टिकट दिया, विधान सभा में अपराधियों को टिकट दिया। यहां तक कि इस बात का प्रमाण है कि १९९१ से लेकर अभी तक मेरे खिलाफ इन्होंने किसी भले आदमी को चुनाव नहीं लड़ाया।

SHRI ASHOK PRADHAN (KHURJA) श्री वीरेन्द्र सिंह : आपने मेरे खिलाफ किस भले आदमी को चुनाव लड़ाया था? ... (व्यवधान) आपने फूलन देवी को मेरे खिलाफ चुनाव लड़ाया।

MR. CHAIRMAN: Nothing will go on record.

(Interruptions)* MR. CHAIRMAN: Why don't you sit down? He is not yielding.

(Interruptions)

MR. CHAIRMAN: I am on my legs. You sit down. I am sorry, this is too bad.

... (व्यवधान)

  सभापति महोदय: आप एक वरिष्ठ सदस्य हैं, सदन की परम्पराओं को जानते हैं।

__________________________________________________________________________ * Not recorded.

SHRI ASHOK PRADHAN (KHURJA) श्री वीरेन्द्र सिंह : मेरा भी यहां उतना अधिकार है जितना इनका है। मेरे से सम्बन्िधत बात आई तो मैंने कह दिया।

  सभापति महोदय: जब एक सदस्य सदन में भाषण कर रहे हैं, जब वे ईल्ड करें, तभी आप अपनी बात उठा सकते हैं।

 

... (व्यवधान)

 

  मैं भारतीय भाषाओं की तरककी का पक्षधर हूं। देश में हर भाषा की तरककी हो, तमिल भाषा की तरककी है, गुरमुखी की तरककी हो, मलयालम भाषा की तरककी हो, कन्नड़ भाषा की तरककी हो और चाहे बंगला हो, पंजाबी हो, असमिया हो उर्दू हो - सारी भाषाओं की तरककी का मैं पक्षधर हूं। आप यह बतायें कि आपका हिन्दी प्रेम कहां चला गया? हिन्दी से प्रेम है, तो अंग्रेजी को हटाओ। अंग्रेजी को हटाने के बारे में एक शब्द भी कहा? आजादी के समय हम लोग जेलों में गए हैं, पिटे हैं। सारी क्षेत्रीय भाषाओं की तरककी होनी चाहिए। मैंने मुख्यमंत्री होकर आठ भाषाओं को पढ़ाने का काम किया, लेकिन अंग्रेजी का मोह बना हुआ है और आडवाणी जी आप भारतीयता की बात कहते हैं। आपका राष्ट्रीय कार्यक़म, राष्ट्रीय एजेंडा विदेशी भावना और विदेशी मानसिकता से भरा हुआ है।

  एक माननीय सदस्य: सोमनाथ जी का कया होगा?

SHRI MULAYAM SINGH YADAV (SAMBHAL) श्री मुलायम सिंह यादव (सम्भल): हम तैयार कर लेंगे।

  मैं किसानों की बात करता हूं। पूरे उत्तर प्रदेश का ही नहीं, बल्िक पूरे हिन्दुस्तान का किसान बरबाद है। कहीं पर तूफान है और कहीं पर समुद्री तूफान है। ओले हैं आपने कहा था कि पहले ही दिन आप कोई ऐसा काम करेंगे कि वह चमत्कारी काम होगा। छ: महीने के अन्दर ऐसा काम करेंगे, जिससे देश की जनता महसूस करेगी कि सरकार काम कर रही है। मैं पूछता हूं, कौन सा ऐसा काम हुआ है? इतने घन्टे हो गए हैं, लेकिन अभी तक कोई चमत्कारी काम नहीं हुआ है, कब करेंगें?कि अभी तक किसानों को पर्याप्त मदद भी नहीं मिली ... (व्यवधान)

SHRI MADHUKAR SIRPOTDAR (MUMBAI NORTH-WEST) श्री मधुकर सरपोतदार (मुम्बई उत्तर-पश्िचम) : छ: महीने की बात है।

... (व्यवधान)

SHRI MULAYAM SINGH YADAV (SAMBHAL) श्री मुलायम सिंह यादव (सम्भल): छ: महीने की तो अलग बात है।

  महोदय, हम जानना चाहते हैं .... ... (व्यवधान)

SHRI MADAN LAL KHURANA (DELHI SADAR) श्री मदन लाल खुराना: प्रधान मंत्री जी का भाषण ११.४० बजे खत्म हुआ। ११.४० बजे से लेकर अब १५.२५ बज रहे हैं। माननीय सदस्य वहीं से ही बोल रहे हैं। ढ़ाई घन्टे का समय उन्हीं को मिल रहा है।

... (व्यवधान)

SHRI MULAYAM SINGH YADAV (SAMBHAL) श्री मुलायम सिंह यादव : जहां तक रक्षा का सवाल है, प्रधान मंत्री जी आपने बयान दिए हैं कि हम एटम बम बनायेंगे। मुझे जॉर्ज साहब से कुछ नहीं कहना है, लेकिन आप पहले तेरह दिन प्रधान मंत्री रह चुके हैं। आपको सब पता है! हम भी रक्षा मंत्री रहे हैं और आप भी प्रधान मंत्री रह चुके थे, कया आपको इस बारे में पता नहीं था, लेकिन इसके बावजूद भी देश में अनावश्यक चर्चा कर रहे हैं तथा जनता को भ्रमित कर रहे हैं कि परमाणु शकित बनायेंगे, आश्चर्य कि आपको तेरह दिन में पता नहीं लगा। यह एक संवेदनशील मामला है। इसके बावजूद कहना कि परमाणु शकित बनायेंगे, कहां तक उचित है? हमारी सरकार ने कहा था कि परमाणु शकित के बारे में हमारे विकल्प खुले हुए हैं। इसलिए जो आपने कहा, उसमें कौन सी नई बात है?

  इस देश की रक्षा को मजबूत करने के लिए आधुनिक हथियारों का हम लोगों ने जो कार्यक़म चलाया, अगर उसी को आपने लागू कर दिया तो उससे ही देश की सैन्य शकित बहुत मजबूत हो जाएगी फिर ज्यादा बोलने की आवश्यकता नहीं रहेगी।

... (व्यवधान)

  सभापति महोदय, विश्वासमत के पक्ष में जो मतदान करेगा वह हमारे हिन्दुस्तान की आजादी की लड़ाई के महा सेनानियों के विरोध में वोट होगा, गरीबों के खिलाफ वोट होगा, भ्रष्टाचार के समर्थन में वोट होगा और यह वोट अल्पसंख्यकों के विरोध में होगा। छात्रों के विरोध में होगा तथा अनैतिकता और भ्रष्टाचार के पक्ष में वोट होगा । आज जिस शानदार हिन्दुस्तान के अंदर हम सभी को जोड़ना चाहते हैं, जोड़ने के बाद इस देश को मजबूत करना चाहते हैं और हिन्दु, मुस्िलस, सिख, ईसाई सब को एक रखना चाहते हैं। आप जो मुसलमानों के बारे में शक करते हैं, मुसलमान कौम इस देश की शानदार कौम है। इन्हें जब भी देश के समक्ष आजादी की लड़ाई से लेकर आजतक खतरा उठाने का अवसर आया है तो उन्होने मुकाबला किया है । मुझे मुस्लमान कौम पर फक र है । (व्यवधान) आप इन पर शक मत करो। अगर इन पर शक करोगे तो खतरा पैदा हो जाएगा और अगर प्यार, मोहब्बत से देखोगे तो देश मजबूत होगा तथा देश के लिए कुर्बानी करने हेतु मुसलमान सदैव तैयार रहेगा ।

  सभापति महोदय, इसी के साथ-साथ हम यह कहना चाहते हैं और आपको याद दिलाना चाहते हैं कि आप १९३० और १९३१ का इतिहास पढ़ें।

... (व्यवधान) राष्ट्रभकित की भावना पैदा करके हिटलर आया था। यही समाजवाद का नारा देकर आया था।

... (व्यवधान) आज हम जार्ज साहब और बरनाला साहब से साफ कहना चाहते हैं कि आपको आगे आने वाली पीढ़ी माफ नहीं करेगी। हिटलर ने जिस तरीके से सत्ता अपनाई थी। इसी तरह संसद का सहारा लेकर ... (व्यवधान) आज ये फिरकापरस्ती ताकतें हिन्दुस्तान की सत्ता पर काबिज़ होना चाहती हैं लेकिन इन नाजीवादी मंसूबों को कामयाब नहीं होने दिया जायेगा । इसलिए हम आपको इससे सावधान करना चाहते हैं। इसी के साथ मैं इस प्रस्तुत प्रस्ताव का विरोध करता हूं।

"> रक्षा मंत्री (श्री जार्ज फर्नांडीज): सभापति महोदय, इसी सदन में १९९६ में आए विश्वास प्रस्ताव के पक्ष में बोलने के लिए मैं खड़ा हुआ था और आज यहां फिर एक बार इस सदन में आए विश्वास प्रस्ताव के पक्ष में बोलने के लिए खड़ा हुआ हूं। आज यह मौका नहीं आता अगर कांग्रेस पार्टी संयुकत मोर्चे की सरकार को हटा कर देश को चुनाव के मैदान में न धकेलती।
  अभी हमने नेता विरोधी दल का भाषण सुना। उन्होंने इस नयी सरकार को किस परस्िथति में लाने में मदद की, इस पर कुछ नहीं कहा। लेकिन सोमनाथ बाबू ने अपनी बातें यहां पर रखीं और उन्होंने इस सरकार पर अपने गुस्से को काफी दिखाया। मेरे हाथ में यहां पर मार्कसवादी कम्युनिस्ट पार्टी का २२ फरवरी का, उनका जो अपना साप्ताहिक "पीपल्स डेमोक़ेसी" निकलता है, उसका अंक है। मार्कसवादी कम्युनिस्ट पार्टी के महामंत्री श्री हरकिशन सिंह सुरजीत का, उनकी अपनी पार्टी की ओर से और संयुकत मोर्चे की ओर से टेलीविजन पर दिया हुआ भाषण है। चुनाव के पहले हर दल को टेलीविजन पर बोलने का मौका मिला था, उसी अवसर पर दिया हुआ यह भाषण है। उसका दूसरा वाकय है-
"This unnecessary election has been thrust on the people of India by the Congress Party which brought down the United Front Government for no valid reason at all. The Congress cited the Jain Commission Report and its totally baseless charge against the D.M.K. and the people of Tamil Nadu."

  सोमनाथ बाबू और शरद पवार जी दोनों गौर से सुनें।

"The real game of the Congress whose leaders cannot exist without power, was to blackmail the United Front and join the Government. But all the constituents of the United Front stood firm."

  लगता है कि अब आपकी फर्मनेस खत्म हो गयी और फिर आप ढिलाई में आ गये हैं। बगल में बैठकर वही बातें आप भी कहने लगे जो बातें उन्होंने यहां पर कहीं। मैं मानता हूं कि संयुकत मोर्चे के जो भी लोग इस सदन में मौजूद हैं वे उनकी बातों को नहीं मानेंगे। लेकिन सबसे बढ़कर कांग्रेस पार्टी की उनकी इस टिप्पणी पर कया राय है, उसे हम चाहते हैं कि देश सुने। यह राय उनके अपने घोषणा-पत्र में लिखी है। भारतीय जनता पार्टी का घोषणा-पत्र आपने अपने हाथों में लिया था अब अपना घोषणा पत्र भी अपने हाथों में लीजिए - यह मेरी आपसे प्रार्थना है। उसके चार नम्बर के पन्ने से शुरू कीजिए। आप भारतीय जनता पार्टी का घोषणा-पत्र नहीं कांग्रेस का घोषणा-पत्र लीजिए। संयुकत मोर्चे की सरकार को गिराने के कांग्रेस पार्टी ने सात कारण दिये हैं। पहला कारण है -

"The United Front failed to live up to its own Common Minimum Programme."

  यानी आप वचन-भंग के दोषी हैं, आपने वचन-भंग किया है। आगे कहा है -

"What was worse was that the United Front spared no effort and lost no opportunity to damage the Congress even while continuing to enjoy with Congress support."

  यानी उनका इस्तेमाल आप लोगों ने किया। नम्बर तीन पर है -

"The United Front's commitment to secularism was put to test in Uttar Pradesh but the United Front failed to establish its secular credentials."

  कैसे? कांग्रेस ने वहां मांग की कि बी.एस.पी., कांग्रेस और संयुकत मोर्चा एक होकर उन ताकतों से लड़े जो कम्यूनल ताकते हैं लेकिन आप लोगों ने नहीं माना जिससे उत्तर प्रदेश मैं और पूरे देश में आपने कम्यूनल ताकतों को बढ़ा दिया है। यह संयुकत मोर्चा पर कांग्रेस का अपने घोषणा-पत्र में आरोप है। आगे जाकर वे बताते हैं कि -

"The United Front constituents had made common cause with the BJP in the past in their pursuit of anti-Congressism."

  यानी सीधे आपके ऊपर आरोप है कि आपमें और हममें कोई फर्क नहीं है। इसलिए बहुत परेशान होकर आप लोगों को बोलने की जरूरत नहीं है। वे आगे कहते हैं क "It wanted the Congress to fight communal forces alone while it continued to enjoy power with the support of Congress."

  यह आप लोगों की नीयत के ऊपर हमला है - सोमनाथ बाबू आपके ऊपर भी कयोंकि आप लोग उस सरकार को चला रहे थे और आप सभी लोग जो यहां पर बैठे हैं। यह आप सब लोगों की नीयत पर प्रश्न-चिन्ह है। फिर वे कहते हैं कि आप लोगों ने कांग्रेस को तोड़ने की कोशिश की -

"In April, 1996, the Congress asked the United Front to change its leadership, since it had built up firm evidence that the agencies of the Government were being used blatantly to subvert the Congress."

  यह सारा उनके कहने के अनुसार सच है।

SHRI SOMNATH CHATTERJEE : That is there view.

SHRI GEORGE FERNANDES (NALANDA) श्री जार्ज फर्नान्डीज : एक ही हो सकता है - या तो यह सच है या यह गलत है। यह व्यू नहीं है, यह सीधे आपके ऊपर आरोप है। (व्यवधान)

EEEEEEEEE ... (Interruptions)

SHRI AJIT JOGI (RAIGARH): Is it relevant to today's Vote of Confidence? ....(Interruptions)

MR. CHAIRMAN : Shri George Fernandes, are you yielding to him?

SHRI S. JAIPAL REDDY (MAHABUBNAGAR): Mr. Chairman, Sir, we do not necessarily agree with the Congress Party. Let Shri George Fernandes speak something about himself. ...(Interruptions)

SHRI SOMNATH CHATTERJEE : It is their manifesto and not mine. (Interruptions)

SHRI GEORGE FERNANDES (NALANDA) श्री जार्ज फर्नान्डीज : यह उनकी अपनी राय है। (व्यवधान)

MR. CHAIRMAN: Please be seated. Please resume your seat.

  एक माननीय सदस्य : आप सोशलिस्ट हैं या नहीं, हमें इस सवाल का   जवाब चाहिए।

... (व्यवधान)

MR. CHAIRMAN: Nothing is going on record.

(Interruptions) * SHRI GEORGE FERNANDES (NALANDA) श्री जार्ज फर्नान्डीज : सभापति महोदय, सच बहुत बुरा लगता है और हमेशा तीखा लगता है। सच को स्वीकर करने में बहुत परेशानी होती है। इसलिए मैं अपने लायक दोस्त जयपाल रेड्डी जी की परेशानी को समझ सकता हूं। बात यहां खत्म नहीं होती। इससे बढ़ कर डी.एम.के. के ऊपर आरोप है, जिन का बचाव करने के लिए मैं खड़ा हुआ हूं। वह कहते हैं कि आपने जैन कमीशन की रिपोर्ट को यहां पेश करने से रोका। वह आगे जाकर कहते   "This report has exhaustively dealt with the role of a section of the DMK party and of the then Tamil Nadu Government headed by Shri Karunanidhi in aiding and abetting the LTTE organisation. The LTTE could not have killed Rajiv Gandhi without the support and assistance it received from the DMK led Government and a section of the DMK leadership."

 

It further says : "How could the Congress continue to support the United Front Government, a constituent of which is held by a Commission of Inquiry to be the abetter of an agency that killed the Congress president, a former Congress Prime Minister and a future Congress Prime Minister?"

  डी.एम.के. के मित्र यहां बैठे हैं। आप लोगों की इनके बारे में यह राय है। आप उनका समर्थन लेकर चाहते हैं किसी भी रूप में हम सरकार   में पहुंच जाएं।. ( Interruptions) SHRI GEORGE FERNANDES: No, I am not. That is the point I am making. That is precisely the point I am making.
SHRI GEORGE FERNANDES: You are in a very bad and dangerous company. That is what I am saying ....(Interruptions)
  मैं इस बात को मानता हूं कि जयपाल रेड्डी जी ने जो बात कही, उसको यूनाइटेड फ्रंट की पार्िटयां नहीं मानेंगी कयोंकि वह उनकी अपनी राय है। उस राय पर जाने से पहले मैं शरद पवार जी की उस बात पर जाऊंगा कि वह जितने दलों को साथ लेकर चलने की बात मानते हैं, उनके बीच में कया वैचारिक एकमत है?
... (व्यवधान) बहुत है।
... (व्यवधान) इसलिए इन दोनों के बीच में कितना सामंजस्य है, कितना नजदीकीपन है, मैं उसको भी बताऊंगा। सोमनाथ बाबू, आपके दल के बारे में उनकी राय है ... (व्यवधान)
"As for the Left parties, even after seven decades, the CPI and the CPI(M) have not been able to integrate themselves into the national mainstream. They are still out of it. Their national importance has been dwindling."

SHRI SOMNATH CHATTERJEE : He is agreeing with all that which I am not agreeing to. So, what is the good of putting it on me?

SHRI GEORGE FERNANDES: No, I am not. I am trying to save you. I am trying to rescue you from them. ....(Interruptions)

SHRI SOMNATH CHATTERJEE : He should speak on the Confidence Motion.

....(Interruptions)

SHRI GEORGE FERNANDES: Shri Somnath Chatterjee, it is important because they are claiming your vote as their vote. That 55 per cent includes all of you.

SHRI SOMNATH CHATTERJEE : We are not saying this. ....(Interruptions)

SHRI GEORGE FERNANDES: They claim it. ....(Interruptions)

SHRI TARIQ ANWAR (KATIHAR): Shri Sharad Pawar was saying about the secular vote against the BJP. ....(Interruptions)

SHRI GEORGE FERNANDES: It further says:

"Their national importance has been dwindling and today their presence is confined to only three States, West Bengal, Kerala and Tripura. For the past 20 years, the Left Front continues to be in power in West Bengal even though the Congress has continued to enjoy 40 per cent of the popular vote."

  कहां है ममता जी?

The Trinamul Congress has now very successfully reduced it to 16 per cent. (Interruptions)

Sir, I quote again and it says:

"The Left Front has simply ruined West Bengal. That was one of the premier industrial States in the country prior to 1977. Most industries are sick and obsolete. New investment is a trickle."

  हमारे दोस्त मुलायम सिंह जी ने तो यहां पर दो ज़बान की बात कही।

This document further says:

"Double-speak is characteristic of the CPI(M) and the Marxists. It opposes all sensible economic policies in Parliament, but its State Governments try to attract new businesses from abroad and other parts of India...
Lack of infrastructure towards road connectivity, non-responsive administration and overwhelming influence of partisan interests is holding back investors from investing in these three States." (Interruptions)
  यह बहुत ज़रूरी है चूंकि आप लोगों को मालूम होना चाहिए कि कौन जमात के साथ आप वोट लेकर आते हो, एक दूसरे का सहारा ले रहे हो, एक दूसरे को सहारा दे रहे हो।
... (व्यवधान)
SHRI R.L. JALAPPA (CHIKBALLAPUR): Mr. Chairman, Sir, let him speak on the Motion of Confidence.
SHRI GEORGE FERNANDES (NALANDA) श्री जार्ज फर्नान्डीज़ : सभापति जी, जहां इनकी राय उनके बारे में यह है, वहां ज़रा उनकी राय भी सुनें।
SHRI BASU DEB ACHARIA (BANKURA) श्री वसुदेब आचार्य (बांकुरा) : अपनी राय बताइए.
... (व्यवधान)
SHRI GEORGE FERNANDES (NALANDA) श्री जार्ज फर्नान्डीज़ : यह मॆनिफॆस्टो है आपका और आप अपने मॆनिफॆस्टो में कह रहे हैं सॆकयूलरिज़म के बारे में ... (व्यवधान)
SHRI TARIQ ANWAR (KATIHAR) श्री तारिक अनवर : आपकी राय बीजेपी के बारे में कया रही है वह बताइए।
MR. CHAIRMAN : He is not yielding. Shri Tariq Anwar, he is not yielding. Please take your seat.
SHRI SATYA PAL JAIN (CHANDIGARH) श्री सत्यपाल जैन : वह भी बताएंगे, आप बैठिये।
... (व्यवधान)
SHRI GEORGE FERNANDES (NALANDA) श्री जार्ज फर्नान्डीज़ : बहुत तकलीफ होती है!   अध्यक्ष जी, अब मार्कसवादी कया बोलते हैं? ये बोलते हैं कांग्रेस के बारे में इतने ही तीखेपन से और इनका सॆकयूलरिज़म भी देख लीजिए कांग्रेस के बारे में। Their document says:
 
"The Congress Party has degenerated both politically and organisationally. It is a party in decline as it has pursued, when in power, economic policies which militate against the people. It betrayed the secular heritage by compromising with communal parties and it is a party riddled with corruption. It is this dismal record of the Congress which led to its resounding defeat in the 1996 election....
Its attitude since then shows no redemption. The Congress is no more a party which can govern at the Centre or provide the country with a national agenda." (Interruptions)
  मैं जानता हूं आपने राय बदली है। अब आप उनकी सरकार में जाने के लिए तैयार हैं।
  हम जानते हैं आपके नेताओं ने यह बात कही है। अब इन दोनों के बीच में बात हो गई। अब जो हमारे जनता दल के दोस्त हैं, संयुकत मोर्चा के दोस्त हैं, इनके बारे में इनकी कया राय है।
"The Janata Dal was born in a convulsive fit of anti-Congressism in 1989. It is a collection of desperate groups and embittered individuals driven by egos. It can hardly be called a serious political formation. Like an ameba it lives on splitting itself into smaller and smaller groups. Its platform of social justice is a hollow."

  रामविलास जी यह कहा गया है -

"It is just a misleading power for the practice of divisive caste politics. The leadership of the Janata Dal in the United Front under two Prime Ministers has been disastrous."

  दोनों इस समय दिखाई नहीं दे रहे हैं।

It further says:

"The economy had been ruined."

  वे कह रहे हैं हम नहीं कह रहे हैं।

That is what we have inherited and the hon. Finance Minister has to now repair it. It adds:

"There has been no real governance. All matters have been allowed to drift."

  यह आपके बारे में उनकी राय है। मगर इनकी कया राय है ... (व्यवधान)

SHRI MULAYAM SINGH YADAV (SAMBHAL) श्री मुलायम सिंह यादव : आप कुछ और बोलिये, यह तो अटल जी के लिए छोड़िये, आपका भाषण दूसरा होना चाहिए।

  सभापति महोदय : यह कया हो रहा है, आप दोनों आपस में बात कर रहे हैं।

SHRI GEORGE FERNANDES: What is their opinion about you. I quote:

"The Congress Party in its present state of decay and disarray is in no position to even claim to provide a stable Government. Its anti-people policies, its compromising attitude with communal forces and the corruption scandals involving many of its leaders."... (Interruptions)
  आप इतना बोलते रहे हैं, यह आपकी पार्टी और आपका मोर्चा इनके बारे में कह रहा है।
SHRI C.K. JAFFER SHARIEF (BANGALORE NORTH): Shri Fernandes, when you are speaking on the Vote of Confidence, it should be your endeavour to speak positive and not take the negative points of others... (Interruptions)
KUMARI MAMTA BANERJEE : They asked us to reply to this question.
SHRI GEORGE FERNANDES: Sir, we are very positive. Our programme is here with me. It is a very positive programme - the National Agenda. It was mentioned in the Address of the President. We will come to that. In fact, all of you should be happy with it.
  यह संयुकत मोर्चा के बारे में हो गया, जनता दल ने अपने घोषणा पत्र में कुछ अच्छी बातें लिखी हैं, वे भी सदन के रिकार्ड पर आना जरूरी हैं।
They say:
"Corruption in India has reached alarming levels. Among those who are on the mat today for corruption include some of those who held the highest positions in the country."

  नाम नहीं लिया है, अच्छा किया है।

"Some of them in their drive to become Indian Marcos"... (Interruptions)
  मारकोस कौन है, मारकोस वह है जिसने फिलीपीन्स का खजाना लूटा था।
It further adds:
"In their drive to become Indian Marcos they chose to enlist the collaboration of even foreign commission agents to defraud the Indian treasury from the highest seat of power."
"Though some political leaders vainly tried to explain away corruption as an international phenomenon and a personal matter, no civilised society can survive for as long as such a cancer is in its body politic, a parasitical approach pursued at all levels of administration and a new tendency to defraud the public exchequer even from the highest seat of power and pile up deposits at secret bank accounts abroad."

  अब सबके सामने साफ है।

MR. CHAIRMAN : Please be seated.

SHRI GEORGE FERNANDES (NALANDA) श्री जार्ज फर्नान्डीज: सही बात कही है। मैंने इन दो तीन दस्तावेजों को इसलिए पढ़ा कयोंकि यह जरूरी था। एक तो जब यह बहस चलती रहेगी, ... (व्यवधान)

SHRI TARIQ ANWAR (KATIHAR) श्री तारिक अनवर : जरा बी.जे.पी. का भी घोषणापत्र पढ़िए।

... (व्यवधान)

SHRI GEORGE FERNANDES (NALANDA) श्री जार्ज फर्नान्डीज: वह न केवल हम पढ़ चुके हैं बल्िक उसी के आधार पर हमने यह प्रोग्राम भी बनाया है।

... (व्यवधान)

SHRI KANTILAL BHURIA (JHABUA) श्री कांति लाल भूरिया : आप भारतीय जनता पार्टी का भी घोषणापत्र पढ़कर सुनाएं।

... (व्यवधान)

SHRI GEORGE FERNANDES (NALANDA) श्री जार्ज फर्नान्डीज: अगर किसी ने यह बात नहीं सुनी हो, तो अब सुन लें कयोंकि यह बहुत जरूरी होता है कि कुछ बातें सब लोग सुनें। मैं आपको बताना चाहता हूं कि कांग्रेस ने तेलुगू देशम के बारे में कया कहा, तेलुगू देशम को लेकर आपको बहुत गुस्सा है, उसके ऊपर आप बहुत नाराज हैं।

"The Telugu Desam Party in Andhra Pradesh, the Assom Gana Parishad in Assam and the Shiromani Akali Dal in Punjab cannot play any meaningful role in national politics."

  दूसरा वाकय, और यह बहुत खतरनाक वाकय है।

"In the event of a conflict between national and regional or local interests, regional parties will choose the latter to the detriment of India as we know it and as we cherish it.
  बहुत खतरनाक बातें हैं। इसलिए आप कह रहे हैं और अकाली दल, देलुगू देशम, असम गण परिषद की राष्ट्रभकित पर प्रश्नचिहन लगा रहे हैं। यही अर्थ है इसका, इसके अलावा इसका और कोई अर्थ नहीं है। हम तो राष्ट्रीय पार्टी हैं, रीजनल पार्टी नहीं हैं। इसलिए हमने यह सोचा कि आज इन बातों को आप सुन लें, समझ लें और जब भी निर्णय करने का वकत आए, तब हम सब मिलकर निर्णय लें।
  अध्यक्ष जी, इस बहस के दरम्यान कई बातें छिड़ गई हैँ विशेषकर नेता विरोधी दल ने अपनी स्वदेशी सोच के बारे बातें कही हैं। जब स्वदेशी की बात आती है, तो दुनियाभर के लोग घबड़ा जाते हैं और यहां बैठे लोग भी समझते हैं कि देश के विकास में रुकावट आ जाएगी। अभी नेता विरोधी दल ने गांधी जी का नाम लिया और गांधी जी के स्वदेशी अपनाओ का अर्थ उन्होंने यह बताया कि गांधी जी ने यह नहीं कहा कि विदेशी चीजों को रोकना चाहिए। मेरे विचार में शरद जी, आपको गांधी जी को फिर से पढ़ना चाहिए कयोंकि गांधी जी ने कहा था कि जब आप कोई काम करना चाहते हैं, तो आपको उस गरीब का चेहरा ध्यान में लाना चाहिए जिसको आपने देखा हो और यह सोचना चाहिए कि हमारे इस काम से उस गरीब को फायदा होगा या नुकसान। यदि आपके कार्य या निर्णय से उस गरीब व्यकित को नुकसान पहुंचता है, तो वह नीति देश के हित में नहीं होगी। आपको अपनी नीति या निर्णय उस गरीब से गरीब व्यकित के चेहरे को सामने रखकर बनानी होगी। हमारा वही प्रयास है। हमारा स्वदेशी का मतलब राष्ट्र भकित है, और कुछ नहीं। जिस व्यकित में राष्ट्र भकित नहीं है, समझो वह व्यकित इस देश में कुछ नहीं कर पाएगा।
  शरद पवार जी ५० साल हो गए हमारे देश की आजादी को और इस वर्ष तो हम अपनी आजादी की स्वर्ण जयंती मना रहे हैं। अगर गैर-कांग्रेसी सरकारें उन्हें कहें, तो दो ही रहीं और कुल मिलाकर सिर्फ तीन साल रहीं। वे सरकारें मोरारजी देसाई और विश्वनाथ प्रताप सिंह की थीं और तीन सरकारें ऐसी रहीं जिनको गैर-कांग्रेसी कहें, लेकिन वे आपके समर्थन से रहीं और यह कहकर रहीं कि वे आपकी नीतियों पर अमल करेंगी और आपने उनसे वह संकल्प करवा लिया था।
  ४५ साल आप ही का राज रहा। एक नहीं, दो नहीं, तीसरी पीढ़ी पर आप लोग जा रहे हो। आप लोगों ने ur इस देश को ४५ साल तक चलाया है। अगर आज देश यहां पर है, तो उसकी जिम्मेदारी किसकी है, यह आपको नहीं मालूम। आप जाकर देखिये, झुग्गी   में चलिये।
... (व्यवधान)
SHRI TARIQ ANWAR (KATIHAR) श्री तारिक अनवर(कटिहार): आज देश आगे बढ़ा है।
... (व्यवधान)
MR. CHAIRMAN : Please be seated. Shri Tariq Anawar, please be seated.
SHRI TARIQ ANWAR (KATIHAR) श्री तारिक अनवर : आप आंकड़े देखिये।
... (व्यवधान) जार्ज साहब आप तो आंकड़ों की बात करते हैं।
... (व्यवधान) आप आंकड़े बताइये।
... (व्यवधान)
SHRI GEORGE FERNANDES: I am not yielding.... (Interruptions)
  सभापति महोदय : इस तरह से नहीं हो सकता।
 
... (व्यवधान)
  सभापति महोदय : आप बैठिये।
 
... (व्यवधान)
SHRI GEORGE FERNANDES (NALANDA) श्री जार्ज फर्नान्डीज :सभापति जी, उन्हें मैं बताऊंगा कि देश कहां है। ... (व्यवधान) आजादी के ५० साल ... (व्यवधान)
DR. MAHANT CHARAN DAS (JANJGIR): I am on a point of order.
MR. CHAIRMAN : Under what rule have you the point of order? Where is the rule? There is no response.
SHRI GEORGE FERNANDES (NALANDA) SHRI SOMNATH CHATTERJEE : Does that make you secular? Does that make them secular?
 
SHRI GEORGE FERNANDES (NALANDA) श्री जार्ज फर्नान्डीज़ : हम सैकुलर करके सब लोग कह रहे हैं, लेकिन हम अपनी पार्टी के बारे में, हम अपने कार्यक़म के बारे में आपको बताना चाहते हैं कि हमारा सैकुलरिज्म कहां है और हम इस मुद्दे पर कहां हैं। हम चाहेंगे कि आप जरा हमारे कार्यक़म को पढ़कर ... (व्यवधान) इसको समझ लीजिए। इसके पढ़ना जरूरी है।
"We are committed to establishing a civilised, humane and just civil order that which does not discriminate on grounds of caste, religion, class, colour, race or sex. We will truly and genuinely uphold the practice to save secularism consistent with the Indian tradition of " सर्व पंथ समादर"

equal respect for all faiths and on the basis of equality for all. We are committed to the economic and educational development of the minorities and will take effective steps in this regard."

  जी हां, यह हम लोगों का, बी.जे.पी. का ... (व्यवधान) जरा सुनिये तो। यह बी.जे.पी. का, समता पार्टी का, ए.आई.ए.डी.एम.के. का, हम सब का कार्यक़म है और यह कार्यक़म ... (व्यवधान) इस साल का जो हम लोगों का कार्यक़म है, राष्ट्रपति के अभिभाषण में जो निकला है, वह भी सुनिये।

"Secularism is integral to India's traditions. My Government is committed to unequivocally committed to upholding our secular values."

  मैं नहीं समझ पा रहा हूं, इसलिए यह बात नहीं समझता हूं कि जिस दिन यह कार्यक़म प्रकाशित हुआ, SHRI PRAKASH YASHWANT AMBEDKAR (AKOLA): Shri George Fernandes, will you yield for a minute?

SHRI GEORGE FERNANDES: No, I would not.

  जिस दिन यह कार्यक़म प्रकाशित हुआ, उस दिन कांग्रेस के प्रवकता ने एक बात कही और आज मुझे आश्चर्य हुआ कि वही बातें विपक्ष के दोनों महान नेताओं ने यहां दोहराईं।

  कि बी.जे.पी. ने गद्दारी की, इन्होंने यह शब्द इस्तेमाल नहीं किया, लेकिन इनके प्रवकता ने किया। जब यह कहा जाता है कि हमारा न्यूनतम कार्यक़म है, जिसमें विवादास्पद मुद्दे नहीं हैं, तो उसका स्वागत करना चाहिए। अगर दिल साफ है तो धर्मनिरपेक्षता के बारे में आप स्वागत करते, जबकि यह कहा गया कि तुमने गद्दारी की। आज यहां भी मजाक हो गया। कोई भली चीज देश में हो जाती है आपकी सोच के अनुसार तो ठीक है, लेकिन हमारे द्वारा अगर कोई चीज देश के लिए ठीक हो जाती है तो उसका स्वागत करने के बजाए आप उसे टोकने लगते हैं, उसका मजाक उड़ाने लगते हैं और ताना मारा जाता है। यह भी कहा जाता है कि यह सेकयुळ्िाज्म है! यह शब्दों की लड़ाई नहीं है, इनकी तो सत्ता की लड़ाई है। इनका धर्मनिरपेक्षता से कोई लेना-देना नहीं है। ये सब जुड़ जाते हैं एक ही बात पर, और वह है सत्ता। मेरा कोई विरोध नहीं है, जुड़ जाएं।

  सभापति महोदय : अब आप समाप्त कीजिए।

SHRI GEORGE FERNANDES (NALANDA) श्री जार्ज फर्नांडीज: मैं समाप्त कर रहा हूं। लेकिन इस बहस को खत्म करें कि जहां पर शब्द को लेकर आप लड़ते हो, वह ठीक नहीं है। अब हिन्दुत्व शब्द आया, तो आपको तत्काल गुस्सा आ जाता है। मुझे डर लगता है कि किसी दिन आप यह भी कहेंगे कि हिन्दुस्तान शब्द भी खत्म होना चाहिए। इस देश का नाम हिन्दुस्तान है, भारतवर्ष भी है। गांधी जी ने जीवन भर हिन्दुस्तान कहा। आपको इससे शर्म आती है तो मैं इस पर कया कहूं। सारे जहॉं से अच्छा हिन्दुस्तॉं हमारा। अगर हिन्दुस्तान के वासी हिन्दुस्तान की बात कहें, हमारी सभ्यता की बात कहें तो आपको परेशानी हो जाती है, हम समझ नहीं पाते हैं।

SHRI R.S. GAVAI (AMRAVATI) श्री आर.एस. गवई (अमरावती): संविधान में कया लिखा है?

  सभापति महोदय: मि. गवई आप बैठ जाएं।

SHRI GEORGE FERNANDES (NALANDA) श्री जार्ज फर्नांडीज: इसलिए शब्दों की लड़ाई मत लड़ें, मुद्दों की लड़ाई लड़ें। लोगों ने आपको वहां बैठने के लिए कहा है, मेरी प्रार्थना है कि आप वहां पर बैठे रहिए, विरोध करिए, राजनीतिक विरोध करिए। लेकिन जो प्रस्ताव अटल जी की ओर से इस सदन में आया है उसे पारित करके इस देश में एक मजबूत सरकार को अगले पांच साल तक चलाने के लिए या कार्यक़म के आधार पर आप सब अपना सहयोग दीजिए।

  इन शब्दों के साथ मैं अपनी बात समाप्त करता हूं।

">"> कुमारी ममता बनर्जी : सभापति जी, मैं आपकी आभारी हूं कि आपने मुझे विश्वास मत के प्रस्ताव पर बोलने का मौका दिया। हम लोग त्ृाण मूल कांग्रेस से आम जनता का प्रतनधित्व करते हैं। यहां पर विपक्ष की ओर से दो नेताओं ने और सी.पी.आई.(एम) के लीडर की ओर से चर्चा की गई। उनके द्वारा मेरे ऊपर और जार्ज जी के ऊपर अंगुली उठाई गई। मैं उस पर दो-चार बातें कहना चाहूंगी। लेकिन उनको कहने से पहले मैं अपना भाषण एक शेर से शुरू करना चाहती हूं।
  मुद्दई लाख बुरा चाहे तो कया होता है   वही होता है जो मंजूरे खुदा होता है।
  आज हम लोगों की आइडेंटिटी के बारे में प्रश्न किया गया। अगर किसी को हमारे बारे में जानकारी चाहिए तो हम लोग जानकारी देने के लिए तैयार हैं। हाल ही में हम लोगों ने चुनाव में भाग लिया। हम लोग बी.जे.पी. के साथ एलाइस नहीं थे, लेकिन हमारे साथ उनका सीटों का बंटवारा हुआ था। हम लोगों को कांग्रेस से निकाल दिया गया था, तो हम लोगों ने एक नया छोटा सा दल बनाया था।
  एक महीने के अंदर हम लोग जब चुनाव में गए तो हमें कहा गया कि यह लोक सभा का चुनाव हो रहा है, जांत-पांत का चुनाव हो रहा है-- दुख की बात है। जब बंगाल में गए तो वह स्टेट जहां कभी जांत-पांत नहीं होता था, दुख की बात है, शर्म की बात है। वहां जाकर कहा कि तुम लोग कम्युनल हो, तुम लोग बी.जे.पी. का एलाइज हो गए हो, जो हम लोग नहीं थे।
... हमारे बारे में कया-कया कहा गया था? ... (व्यवधान) उसका रिप्लाई भी देंगे। थोड़ा इन्तजार करिए।
... (व्यवधान)
  पेपर में लिखा था कि सी.पी.एम. पार्टी को बी.जे.पी. से नौ करोड़ रुपया मिला था। अगर एक पैसा भी हम लोगों ने लिया हो तो बी.जे.पी. को बोलना चाहिए। एक पैसा भी हम लोगों ने नहीं लिया।
... (व्यवधान) अगर लिया हो तो बी.जे.पी. को बोलना चाहिए.
... (व्यवधान) थोड़े दिन के बाद हम लोगों के खिलाफ एकता की थी। ... (व्यवधान) मैंने किसी की स्पीच में इंटरफियर नहीं किया था, कोई कमेंट नहीं किया है, मेरा बोलने का अधिकार है।
... (व्यवधान) हम लोगों ने देश में कया देखा? ... (व्यवधान) मैंने बहुत ध्यान से सुना है, किसने कया-कया कहा है, मैंने लिखा है। हम लोगों पर ऊंगली उठाई गई है, इसलिए जवाब देना मेरा कर्तव्य है।
  दुख की बात है कि लोक सभा के चुनाव में कोई रोजी-रोटी, स्टेबल गवर्नमेंट और इकॉनोमिक स्टेबलिटी जैसा कोई इश्यू नहीं रहा। केवल एक ही इश्यू रहा कि हिन्दू और मुसलमानों को विभाजित कर दो। हिन्दू और मुसलमान के टुकड़े कर दो। हम लोग टुकड़े करना नहीं चाहते थे, हम लोग जोड़ना चाहते हैं, इसीलिए हम लोग इधर आए हैं। अगर मैंने एक भी कोई गलत इल्जाम लगाया है और वह साबित हो जाए तो मैं मेम्बरशिप छोड़ दूंगी। मैं जो कुछ कह रही हूं, कांफीडेंस से कह रही हूं कयोंकि हमारे पास सबूत हैं। मैं पर्सनल अटैक नहीं कर रही हूं। जब "टाडा" के लिए लड़ाई हुई थी, अपोजीशन के लीडर नहीं हैं, मैं महाराष्ट्र सरकार की बड़ी आभारी हूं, जब सुनील दत्त जी मुझे मिले तो उन्होंने बताया कि मेरे लड़के का केस आर्मस एकट में होना चाहिए, लेकिन विंडकिटव होकर इन लोगों ने मेरे लड़के को "टाडा" में फंसा दिया। मैंने कहा कि आप रिपोर्ट दिखाइए। मैंने रिपोर्ट देखी। महाराष्ट्र सरकार ने रिपोर्ट भेजी है। संजय दत्त का केस आर्मस एकट का केस होना चाहिए लेकिन इन लोगों ने कंसीडर नहीं किया।
Sunil Dutt is a secular man of this country. It is a matter of shame that his son is being unnecessarily harassed. Why is it so? May I ask this question to all the leaders who were in State Government? I raised this issue so many times.
  अगर हम लोगों को कम्युनल कहते हैं।
... (व्यवधान) चुनाव क्षेत्र में जाकर कहा गया कि हम लोग कुरान जला देंगे। मैं कुरान पढ़ती हूं। जैसे कुरान पढ़ते हैं, वैसे हम लोग दुआ भी करते हैं। यह हमारा धर्म है। हमारा धर्म कम्युनलिज्म नहीं है। ... (व्यवधान)आप लोगों को यह जानकारी होनी चाहिए।
... (व्यवधान) इलेकशन में कया नहीं कहा गया। हम सबको हॉर्स-ट्रेडिंग करने वाला कहा गया है। चुनाव मीटिंग में कहा गया कि हम लोग ४२० हैं। कया मैं ४२० हूं? मैंने आम जनता को बोला था कि ठीक है, अगर मैं ४२० हूं, मैं तो मंत्री पद तक छोड़कर चली गई थी, लेकिन जो बीस वर्ष से चीफ मनिस्टर हैं, उनका कितना नम्बर बनता है?
  आप बैलेट में दे दीजिए, हमें नहीं चाहिए। दुख की बात है कि हम लोगों को काउन्िटंग बूथ में भी नहीं जाने दिया गया। कहा गया कि वह रजिस्टर्ड पार्टी है, घुसने नहीं देंगे। यह सही बात है कि हम लोगों की रीजनल पार्टी है। यह बात भी सच है कि कांग्रेस और सीपीएम ने मिल कर चुनाव लड़ा। मैं तारिक जी आपको नहीं बोल रही हूं, आपके स्टेट यूनिट को बोल रही हूं। आपको पता है कि सीताराम केसरी जी के साथ आप अकेले रह गये हैं। मैं इसीलिए बोल रही हूं कि कांग्रेस और सीपीएम ने एक साथ इलैकशन लड़ा है। ट्रायेंगुलर फाइट करके और भीख मांग कर हम लोगों ने जीतने की कोशिश की है। वहां पर बहुत गुंडागर्दी चली है। बंगाल में गुंडागर्दी चलती है। ... (व्यवधान)
  एक माननीय सदस्य: बंगाल के इलैकशन पर डिबेट हो रही है?
... (व्यवधान)
KUMARI MAMATA BANERJEE (CALCUTTA SOUTH) कुमारी ममता बनर्जी : आप यूपी के बारे में बात कह सकते हैं, बिहार के बारे में बात कह सकते हैं, तमिलनाडु के बारे में बात कह सकते हैं, तो मैं कया बंगाल के बारे में बात नहीं कह सकती हूं।
... (व्यवधान)
  महोदय, परसों ही प्रधान मंत्री महोदय ने नेचुरल कैलेमिटीज को देखने के लिए एक टीम भेजी। यह हमारा डयूटी नहीं है, स्टेट गवर्मेंट का डयुटी है It is the duty of the State Government to inform the hon. Prime Minister about what happened in the State. We are sorry for the disaster. The hon. Prime Minister has been kind enough. I rang up the hon. Prime Minister on receiving information about the disaster and asked him to send a team to the spot. He agreed to send a team to the spot. We went to the spot along with the Minister of State in the Ministry of Agriculture, Shri Som Pal. He is not here right now.
  वहां हम लोगों ने देखा कि पीने का पानी नहीं है। इन लोगों ने झगड़ा किया कि वहां मुझे कयों भेजा गया है। मैंने वाक-आउट भी किया, लेकिन ये लोग तो नेचुरल कैलेमिटीज पर भी पोलटिकस करते हैं। प्राइम मनिस्टर ने इन्द्रजीत गुप्त जी को भी कहा था, लेकिन उनकी प्रायर एपाइंटमेंट थी, वे नहीं जा सके और उसमें उड़ीसा के एमपी भी गए। मैंने कहा कि मैं जरूर जाऊंगी। हम लोग बंगाल में गए और उड़ीसा में गए, लेकिन वहां पर पीने का पानी तक भी नहीं था।
The Ramakrishna Mission went there for relief work. They did now allow them to provide relief to the poor people other this is about West Bengal. But what about Orissa? The Government of Orissa was present there. The Chief Minister of Orissa went to the spot. They have arranged everything. Now, what has the Chief Minister of West Bengal done? He has done nothing. Instead, even for a glass of water, they insulted the Minister and I request the hon. Prime Minister to take action against that District Magistrate in Orissa. When Shri Som Pal asked the District Magistrate of Midnapur Distt.to tell us the number of bodies that they had rescued the number of people they had admitted in the hospital and the number of people missing, they said that they did not have any information with them. This was the way in which the Government of West Bengal was functioning. (Interruptions)
Is it not the duty of the Chief Minister to visit the spot? It is the duty of the Chief Minister to visit the spot. But we are unfortunate enough that the Chief Minister of Orissa went there but the Chief Minister of West Bengal did not. The BJP have not asked for support from us but we are giving it ourselves.
  हम लोगों ने जनता की परेशानी को देखा है। यहां एक साल छ: महीने में तीन सरकारें बनीं हैं।
  जब देवगौड़ा की सरकार आई तो उसको गिरा दिया। मैंने अपोज किया था कि यह ठीक नहीं है,एक इनडविजुअल इशु पर सरकार गिराना ठीक नहीं है।
I raised this matter at that time also. You also must be remembering it now.
  जब गुजराल जी की सरकार थी तो उस समय भी किसी बात को लेकर यह हुआ कि जब तक   डीएमके वाले रहेंगे तब तक सरकार नहीं चलेगी। तब ढाई दिन तक हाऊस नहीं चला तो मैं नो-कांफिडेंस मोशन ले आई थी। मैं यह जानना चाहती थी कि राजीव गांधी जी का खूनी कौन है। लेकिन इन लोगों ने इस्तीफा देकर, हाऊस को साइनाडाइ करके सब एडजस्ट कर लिया। हम इसको जानना चाहते हैं, इसको जानने का मेरा अधिकार है। इंदिरा गांधी जी का मर्डर करने वाला कौन है? ठककर कमिशन रिपोर्ट सबमिट कीजिए, हम लोग जानना चाहते हैं। हम लोग जैन कमिशन के बारे में जानना चाहते हैं।
Who are responsible for that? हम लोग वोहरा कमिशन के बारे में जानना चाहते हैं।
The full Report of the Vohra Committee has not yet been submitted. We know that it was reported in the Press. There are many politicians who have got link with the underworld and underground elements. There are some politicians who have nexus with the anti-social elements. So, the people have got the right to know as to who are these people. Please submit the full Report of the Vohra Committee.
SHRI RAJESH PILOT (DAUSA): Sir, I would like to bring one fact to the notice of Kumari Mamta Banerjee that the Report of the Vohra Committee has been laid on the floor of the House in detail. Now, you are in the Government. You can go through it. Everything has been placed on the Table of the House and it is on record. Nothing has been hidden from the nation.
KUMARI MAMTA BANERJEE : I am asking for the record. ... (Interruptions) Shri Rajesh Pilot, I may be wrong. But this is for my information. What we have seen is a small Report. We have not seen the full Report. Their names were not mentioned in that Report. I am asking for the names. I would like to know the names of the culprits. I would like to know as to who are those politicians who have links with the underworld who are doing mischief in this country. We want to know that.
  आम जनता ने डेढ़ वर्ष तक देख लिया। प्याज का भाव २५ रुपए हो गया, आलू का भाव सात रुपए हो गया। ऐसी सरकार चल रही थी जिस सरकार को पता ही नहीं था। यह तो सरकार को पता होना चाहिए था, जो आम जनता के हित में काम करे। एक साल में दो बार डीजल का प्राइस बढ़ा, लेकिन कोई आदमी सुनने के लिए नहीं था, कोई भी इसको देखने के लिए नहीं था। इसलिए आज हमारे देश की आम जनता कया चाहती है, वह एक स्टेबल गवर्नमेंट चाहती है। अगर आप लोग इसको तमाशा कहते हैं तो हम आपको शान से कहते हैं कि यह तमाशा नहीं है, यह जनता का भरोसा है। इसलिए हम लोगों ने आम जनता से पूछा कि हमको कया करना चाहिए। यह आम जनता की राय है कि आप अटल बिहारी वाजपेयी जी को सपोर्ट दीजिए। यही स्टेबल गवर्नमेंट बना सकते हैं, और कोई नहीं बना सकता है। ये लोग बनाने के मूड में नहीं हैं। इसीलिए मैं कहना चाहती हूं-
  "रोशनी चांद से होती है, सितारों से नहीं।
 
जब चुनाव होता है तब बताते हैं कि कौन हिंदू है, कौन मुस्िलम है, लेकिन उनकी रोजगारी के लिए, पीने के पानी के लिए, उनकी नौकरी के लिए कभी आपने नहीं सोचा। कभी आपने नहीं देखा है कि उनका दिल कैसे धड़कता है? लीडर बनने के बाद आप मुस्िलम कम्युनिटी को भूल जाते हैं। लेकिन हम लोग कहते हैं कि "जब तक सूरज-चांद रहेगा, तब तक माइनोरिटीज की इज्जत बना रहेगा"। यही हमारी कामयाबी होगी।
This is our fundamental right and that is why, instead of secularism, we have put it as genuine secularism. You may kindly see paragraph 7 of page 2 of President's Address. It says: "Secularism is integral to India's traditions. My Government is unequivocally committed to upholding our secular values." What we need today is dynamic secularism. Dynamic secularism means we should not exploit Muslims only for vote politics but we should extend our full support to that community so that they will come out from the disaster. We want to build up the community and integrate them. We do not want to disturb them.
  इन लोगों ने हमारे खिलाफ जब इतना कहा, तब हम लोगों ने सोच लिया है कि गठबंधन में रहेंगे। आप लोगों को गठबंधन में भरोसा नहीं है लेकिन हम लोगों को भरोसा है। आप तो मिलीजुली बात करते हैं। यह ठीक है कि हम लोग छोटी पार्टी से हैं, लेकिन रीज़न-रीज़न करके ही तो सेंटर बनता है। स्टेट-स्टेट मिलाकर ही तो सेंटर बनता है। सरकारिया कमीशन ने भी कहा है कि -
If the State is strong, then the Centre is strong. Let us strengthen small parties also. The combination is with the national parties or the State parties. What is the harm in it? Why are you so jealous? Do not be jealous.
  आपको ईर्षयालू नहीं होना चाहिए। सोमनाथ जी, आपने एक बात कही है कि बी.जे.पी. के किसी मेम्बर ने कहा है कि दीदीगिरी नहीं चलेगी। हमको मालूम है कि दादागिरी चलती है, दीदीगिरी नहीं चलती है। हां, अगर आप लोग महिलाओं की इज्जत नहीं रख सकते हैं तो दीदीगिरी चलेगी।
... (व्यवधान)
SHRI SOMNATH CHATTERJEE (BOLPUR) श्री सोमनाथ चटर्जी : तपन सिकदर को मंत्री नहीं बनाया।
KUMARI MAMTA BANERJEE : Then, you are pleading for Shri Tapan Sikdar. You are pleading. You have taken the plead.
SHRI SOMNATH CHATTERJEE (BOLPUR) श्री सोमनाथ चटर्जी : तपन सिकदर तो मंत्री नहीं बना।
KUMARI MAMTA BANERJEE : Are you pleading for him?
SHRI SOMNATH CHATTERJEE : I have said that I am unhappy that he has won but I respect the verdict of the people.
KUMARI MAMATA BANERJEE (CALCUTTA SOUTH) कुमारी ममता बनर्जी : जब हम लोगों का दिल दुखाया।
... (व्यवधान) मैं कयों बी.जे.पी. में हुआ?
We have a separate manifesto but our commitment is to the people and we will continue to extend our support to this Government. We are not going to see that the Government is toppled. We want to see that this Government continues for full five years and that this Government should be stable economically, internationally, nationally and you can add all sorts of stability. That is why, we are extending our support to it.
  ज्योतिबसु के प्रधान मंत्री न बनने का इन्हें दुख हुआ। पहले सरकार का रिमोट कंट्रोल हरकिशन सिंह सुरजीत था। इसके बाद आप लोगों ने सोचा कि ज्योतिबसु आयेगा, लेकिन वह नहीं हुआ। हम लोगों ने भी दिखा दिया कि आप लोग जो हिंदू-मुस्िलम को दो भागों में बांटना चाहते थे, वह नहीं हुआ। मैंने पहले भी चुनाव लड़ा है और यह मेरी फोर्थ-टर्म है।
This is my fourth term here. Why I am saying this is because you are a senior Member, Sir.
You are a very senior Member from Lakshadweep. First, my margin was 20,000 votes. Then, I won by a margin of 95,000 votes. Thereafter, it was 1,03,000 votes. Now, the figure is about `2,25,000'.
  हमें ३५ परसैंट वोट मिले हैं। वे सीट एडजस्टमैंट के कारण नहीं मिले हैं। कम्युनिस्ट पार्टी आफ इंडिया जो कि एक नेशनल पार्टी है, उसके वोटों का परसैंटेज कम हो गया है। हमारी रजिस्टर्ड पार्टी है लेकिन इसका अभी रिकॉग्नीशन नहीं हुआ है, हम अपनी पार्टी का सिम्बल आपको दे सकते हैं, पूरे हिन्दुस्तान में दे सकते हैं।
... (व्यवधान) मैं दो-चार विनती करना चाहती हूं।
The so-called secularism or communalism have to be stopped in the interests of the nation. Please consider ourselves as human beings or a family of this nation.
It is a fact that the BJP is not the single largest party for absolute majority.
  कया यह बात सच नहीं है कि लोगों के वोट रिफलैकिटड होते हैं? जब रीगिंग होती है तो कया लोगों की ओपीनियन ठीक ढंग से रिफलैकट होती है? अगर हमारे यहां रीगिंग नहीं होती तो हम २२ सीटें जीत कर यहां पहुंच जाते।
My request is that you should strengthen the Election Commission. As and when the elections take place, they should be held without any misuse of power by the State Government. The Election Commission should handle the election process. Please bring forward the electoral reforms Bill as early as possible.
Regarding judicial reforms, today, the country is lagging behind. Thousands of cases are pending in the courts. The people are frustrated.
Regarding corruption, the Lokpal is all right. But what about corruption? You said that you would take all sorts of steps against corruption.
  जो चीफ मनिस्टर और पॉलटिकल लीडर्स बाहर जाते हैं, उनके बारे में गवर्नमैंट के पास कोई जानकारी नहीं है। यह एन.आर.आई. इनवैस्टमैंट के नाम पर धोखा देकर करोड़ों रुपए बनाते हैं और फॉरेन एकसचेंज का वॉयलेशन करते हैं। हमारे यहां के चीफ मनिस्टर पिछले २० सालों में ३० बार फॉरेन टूर पर गए। जब मिदनापुर में नेचुरल कैलेमटिज आती है तो उन्हें वहां जाने का समय नहीं मिलता। अगर हम लोग वहां जाते हैं तो ये कहते हैं कि बी.जे.पी. के साथ प्रेम करना बहुत अच्छा लगता है। कया वे उस समय अनटचेबल नहीं होते? जब लैफट फ्रंट के मेरे दोस्त फलाइट में मेरे और बी.जी.पी.के साथ जा रहे थे तो मैंने उनसे पूछा कि आप उनके साथ कैसे जा रहे हैं? इस पर कहने लगे कि यह डिफैंसिव है। जब हमने बी.जे.पी की सरकार को सपोर्ट किया तो वह ऑफेंसिव हो गया। यह डबल स्टैंडर्ड नहीं चलेगा। महिलाओं के लिए ३३ परसैंट रिजर्वेशन का बिल यहां पास होना चाहिए। इसके अलावा सीआर.पी.सी. अमैंडमैंट बिल, लोकपाल बिल पास होना चाहिए। वोहरा कमीशन की रिपोर्ट पर कार्यवाही होनी चाहिए. इलैकट्रोल रिफार्मस और जुडशियल रिफार्मस होने चाहिए। अनएम्पलायमैंट को दूर करने के लिए प्लान्स बनने चाहिएं।
There should be a comprehensive plan of action for the minorities. I request you to do something for the minorities and also for the unemployed youth, especially in the Bengal package.
There are 42 MPs from West Bengal. We supported that Government. They have not announced that Calcutta is a category `A-1' city. ... (Interruptions) We are not begging for it. Because of a lacuna on the part of the State Government, we are not able to announce that Calcutta is a category `A-1' city. Here is an order of the High court. We went to the High court. The court passed an order that an announcement has to be made within six weeks that Calcutta is a category `A-1' city.
I would like to bring it to the notice of the Prime Minister that whatever has been given in the Bengal package does not involve any money or any such thing. The Bengal package is especially for the development of West Bengal. It is a development-oriented project.
A rumour is doing the rounds that this Government is not willing to invite foreign investment in this country. Shri George Fernandes has already clarified the position in this regard. I would also like to request the Government that we, in this country need NRI investment generally for the development of the eastern region and more specially for the north-eastern region and for all the regions of this country as well.
Sir, I would also like to mention a point about the unemployed youth. I would like to request the Government to do something about the Postal Order fees. I know this is a Motion for Vote of Confidence and I should not mention all these points but the Postal Order fees is a big headache for the unemployed youth. These youths would largely be saved if the Government could do something about it.
  मैं कहना चाहती हूं कि जो हम लोगों के खिलाफ कहते हैं कि कयों बी.जे.पी. आ गई, तो हम लोग कहते हैं कि आप लोग जब तक अपने को सुधार नहीं लेंगे तब तक यह सरकार ही चलेगी। इस सरकार के जाने की बात ही नहीं है। आप लोग कंस्ट्रकिटव अपोज़ीशन का रोल प्ले करिये। हम लोग भी करेंगे, लेकिन साथ-साथ कहेंगे कि अगर आप लोगों को गलत इल्ज़ाम हम पर लगाना है तो हम लोग भी कहने के लिए तैयार हैं कि --
  "सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है।
  देखना है ज़ोर कितना बाजु-ए-कातिल में है।"

  आप बी.जे.पी. के साथ हमारे जाने पर इतना विरोध करते हैं तो मैं आपको कहना चाहती हूं कि आने वाले पंचायत इलॆकशन में हम सो काल्ड कम्यूनलिज़म और सो काल्ड सॆकयूलरिज़म का रिप्लाइ देने के लिए तैयार हैं। बी.जे.पी. के साथ सीट ऐडजस्टमेंट करके हम चुनाव लड़ेंगे और हम लोग दिखाएंगे कि हम पर ऐसे आरोप लगाने से कुछ नहीं होता है। आप ज़रा सोचिये कि आप कया कर रहे हैं। सी.पी.एम. और कांग्रेस एक ही दिन में एक हो गए। मुलायम जी आ गए, पर ज्योति बाबू ने एक भी सीट आपको अपने स्टेट में नहीं दी। आपने एक ही सीट तो मांगी थी, वह भी नहीं मिली। लालू प्रसाद कहते हैं कि उनका विरोध है लेकिन माफ़ कीजिए, अभी वे कुर्सी चाहते हैं।

  अपनी बात समाप्त करने से पहले मैं कहना चाहूंगी कि आप देश की तरफ देखिये कि लोग कया चाहते हैं।

Shri Atal Bihari Vajpayee is a sensible man. He is a very sensible person; he is a man of commitment. Therefore, I would like to request the Members of this House to support him. Before I conclude I would like to convey our gratitude to all the senior leaders of this House. I would like to appeal to each Member of this House that this Government should not be toppled for individual interests. This Government should continue for a full term of five years.

SHRI P. UPENDRA (VIJAYAWADA): Why should we support this Government?

KUMARI MAMTA BANERJEE : This is my appeal to you. You may not do it. An appeal is an appeal. Our appeal and our request to our colleagues is that they should support this Government so that this Government could pave the way for a greater development of this country. My request to the Government is that it should be assertive, effective and should deliver the goods keeping in view the interests of the country. This Government must be pro-people and truly a Government of the people, by the people, for the people.

  मैं सिर्फ एक ही बात कहना चाहती हूं कि आज ये सरकार एक अच्छे गठबंधन को लेकर बनी है। अपनी सरकार बनाने के लिए देश को जाति-पांति में मत बांटिये। आम जनता को एक रहने दीजिए, शांति से रहने दीजिए।

  बाबरी मस्िजद के बारे में सिर्फ एक बात मुझे कहनी है। सुप्रीम कोर्ट में जो केस रॆफर हुआ है --

It should be resolved according to the decision of the Supreme Court. I would like to request that the verdict of the Supreme Court should be accepted. We do not want to divide this country. We want unity of our country. That is why, my suggestion to the Government is -

  कि वाजपेयी जी, आप ऐसी सरकार चलाइए। आपकी सरकार को कौनफिडेन्स वोट तो मिलेगा ही, कोई कुछ नहीं कर सकता है। हम लोग इस विश्वास के हैं कि -- "जो हमसे टकराएगा, वह चूर-चूर हो जाएगा।"

  आप हम लोगों को कम्युनल बोलते है। इस पर मैं कहती हूं कि मैं उर्दू लैंग्वेज को बहुत पसंद करती हूं। जब एक भाषा की बात आई थी तो मैंने मराठी, पंजाबी, सिख, कन्नड़, तेलुगू आदि ऑफशियल भाषाओं को पूरा सम्मान दिया है।
Bengali is a very good language. Similarly, Urdu, Marathi and Punjabi are also good languages.
  आप श्री वाजपेयी जी और आडवाणी जी से पूछ सकते हैं। इसलिए कि इस देश के टुकड़े नहीं होने चाहिए, देश मजबूत होना चाहिए। यह आने वाले दिनों में साबित हो जायेगा।
  "खुद ही को कर बुलंद इतना कि हर तकदीर से पहले   खुदा बंदे से पूछे कि बता तेरी रज़ा कया है।
  इन्हीं शब्दों के साथ मैं सरकार को सपोर्ट करती हूं।
SHRI RUP CHAND PAL (HOOGHLY): Sir, certain derogatory remarks have been made about a very very elderly political leader and the Chief Minister of West Bengal and certain other political leaders. You should look into it and delete those remarks from the record.
MR. CHAIRMAN : If there is anything objectionable, I will go through it.
SHRI BASUDEB ACHARIA : You may go through the proceedings. If the hon. Member has made any derogatory remarks, you may delete those remarks from the proceedings.
MR. CHAIRMAN: Yes, that will be done.
SHRIMATI GEETA MUKHERJEE (PANSKURA): Sir, four ministers of the West Bengal Government went to the place of incident as soon as the news was received. Not one, but four of them had gone there.
SHRI SUDIP BANDYOPADHYAY : The Chief Minister of West Bengal had never gone there.
SHRI TARIT BARAN TOPDAR (BARRACKPORE) श्री तरित वरण तोपदार (बैरकपुर): सभापति महोदय, किस पार्टी के लिए कितना टाइम अलाट किया गया है। त्ृाणमूल के लिए कितना टाइम अलाट किया गया है और वह कितने समय बोली है।
  सभापति महोदय : अभी तो चलने दो, छ: बजे टाइम बतायेंगे। समय का बंटवारा यहां की स्ट्रैंथ के हिसाब से होता है।
For your Party, 26 minutes have been allotted which have already been exhausted.
"> श्री राजेश पायलट : सभापति जी, जब प्रधान मंत्री जी ने शुरूआत की तो मुझे उम्मीद थी कि प्रधान मंत्री जब विश्वास प्राप्त करने की बात करेंगे तो कुछ मुद्दों पर प्रकाश डालेंगे और माननीय अटल बिहारी वाजपेयी जी से बहुत ज्यादा उम्मीद थी। जब से सरकार बनी है, अखबारों में और सब जगह चर्चाएं चल रही हैं कि इस देश की दिशा कया होगी। लेकिन जब प्रधान मंत्री जी ने बात कही तो अपने अंदाज में सब बात कहने की कोशिश की लेकिन असली बात पर उन्होंने नजर नहीं डाली। प्रधान मंत्री जी इस बात को मानेंगे कि आज भी देश में असमंजस है। मैं भी आज पांचवी या छठी बार यहां पार्िलयामेंट में चुनकर पहुंचा हूं। मुझे भी असलियत पता नहीं कि सरकार का रुख कया है तो आम आदमी का अंदाजा लगाया जा सकता है कि आम आदमी को यह सरकार कया दिशा दे रही है। हमेशा विरोथ का एक पक्ष रहा है और उनका एक कहना रहा है कि कांग्रेस के पचास साल के राज में कुछ नहीं हुआ। पचास साल कांग्रेस का राज रहा। चाहे देश के दूसरे इंस्टीटयूशंस हों या अन्य क्षेत्र हों, सारे ब्लेम कांग्रेस पर आते रहे। लेकिन आज यह बात खासकर प्रधान मंत्री जी को साफ करनी चाहिए। स्वतंत्रता का पचासवां साल हम मना रहे हैं, आजादी के पचास साल पूरे हुए हैं इन वषर्ों में देश आगे बढ़ा है या नहीं बढ़ा है प्रधान मंत्री जी को यह देश को बताना चाहिए। कल हमारे वित्त मंत्री जी भाषण दे रहे थे और उससे पहले प्रधान मंत्री जी ने राष्ट्र के नाम संदेश दिया था तो इन्होंने कुछ बातें कही थीं और बहुत अच्छी बातें कही थीं।
  अध्यक्ष महोदय मैंने खुद इनका संदेश सुना और इन्होंने जो दो-तीन बातें कही थीं उनके बारे में ये यहां कुछ अवश्य कहेंगे, यह मैं सोच रहा था, लेकिन उन पर आज के भाषण में माननीय प्रधान मंत्री जी ने कोई प्रकाश नहीं डाला। मैं यह नहीं कहता कि कांग्रेस ने गलतियां नहीं कीं। कांग्रेस ने गलतियां की हैं, लेकिन कांग्रेस की एक देन है और वह यह है कि कांग्रेस के कारण ही देश में आज प्रजातंत्र कायम है। यह कांग्रेस की प्रजातंत्र की नीतियों और देश की जनता के कारण ही संभव हुआ है जिसके कारण आप आज यहां बैठे हुए हैं।
  अध्यक्ष महोदय, जब देश आजाद हुआ था तब देश की कुल आबादी ३६ करोड़ थी और देश का खाद्यान्न का उत्पादन पांच हजार करोड़ टन था। आज साढ़े १८ हजार करोड़ टन अनाज पर हम पहुंचे हैं। यह कांग्रेस की नीतियों और किसान तथा मजदूरों की मेहनत के कारण संभव हुआ है। एक ब्रटिश एग्रीकल्चरिस्ट वलियम पैडिक थे जिन्होंने भारत के बारे में एक भविष्यवाणी की थी कि १९७५ तक देश की आबादी इतनी बढ़ेगी और अनाज इतना कम पैदा होगा कि देश की दो-तिहाई आबादी भूखी मरने लगेगी, लेकिन कांग्रेस की नीतियों और इस देश के किसान और मजदूरों की मेहनत के कारण यह भविष्यवाणी सत्य साबित नहीं हुई। एक दूसरे लेसर ब्राउन जो वर्लड वाच इंस्टीटयूट के प्रेसीडेंट हैं जिन्होंने दो किताबें लिखी हैं एक "फुल हाउस" और दूसरी "हू विल फीड चायना-२०३०", उन्होंने इनमें लिखा है कि सन २०३० में चायना में अनाज की इतनी कमी पड़ेगी कि उसे अपनी आवश्यकता को पूरी करने के लिए अपने उत्पादन से २१ हजार टन अनाज ज्यादा खरीदना पड़ेगा। इसी प्रकार से भारत के बारे में उन्होंने लिखा है कि भारत की आबादी २०३० तक इतनी हो जाएगी कि उसे अपनी आवश्यकता पूरी करने के लिए अपने उत्पादन के अतरिकत साढ़े चार हजार टन अन्न बाहर से खरीदना पड़ेगा। इसलिए मेरा कहना है कि हमें देश के किसान और मजदूर की चिन्ता करनी चाहिए।
  अध्यक्ष महोदय, मुझे बहुत दुख के साथ कहना पड़ रहा है कि अभी हमारी बहिन ममता जी बोल रही थीं, लेकिन उन्होंने पिछले १० दिनों से इस सरकार में कया चल रहा है, इस बारे में एक भी शब्द नहीं कहा। पिछले १० दिनों से बराबर आप लोगों में यह बहस चल रही है कि वाणिज्य मंत्रालय किसे दिया जाए और वधि मंत्री कौन बनेगा। कृषि मंत्रालय और ग्रामीण विकास मंत्रालय को कोई लेने के लिए तैयार नहीं है। मुझे यह भी दुख के साथ कहना पड़ रहा है कि कृषि एवं ग्रामीण विकास के कैबीनेट स्तर तक के मंत्री भी आभी तक आपकी सरकार में नहीं हैं। इससे आपका ग्रामीण विकास एवं कृषि के प्रति कितना मोह है, यह सिद्ध हो जाता है। मैं बताना चाहता हूं कि कांग्रेस के समय में ऐसा कभी नहीं हुआ। कांग्रेस के समय में कृषि और ग्रामीण विकास का हमेशा कैबनीनेट स्तर का मंत्री रहा या प्रधान मंत्री ने स्वयं इन मंत्रालयों को अपने पास रखा। आप कम से कम सोम पाल जी को ही कैबीनेट स्तर का मंत्री बना देते। ... (व्यवधान)
SHRI SOMPAL (BAGHPAT) कृषि राज्य मंत्री (श्री सोम पाल): पहली बार प्रधान मंत्री ने कृषि मंत्रालय को अपने पास रखा है। आप किसकी बात कह रहे हैं?
... (व्यवधान)
SHRI RAJESH PILOT (DAUSA) श्री राजेश पायलट : मजबूरी में रखा है। सोम पाल जी, मांगा तो आपने भी था, लेकिन मिला नहीं।
... (व्यवधान)
SHRI SOMPAL (BAGHPAT) श्री सोम पाल: यह तो किसानों के प्रति प्रधान मंत्री जी की रुचि की बात है कि उन्होंने यह विभाग अपने पास रखा है और किसानों को भरोसा दिलाने के लिए उन्होंने ऐसा किया है।
... (व्यवधान)
SHRI KANTILAL BHURIA (JHABUA) श्री कांति लाल भूरिया : अगर प्रधान मंत्री को किसानों के ऊपर इतना भरोसा है, तो सोम पाल जी को कैबीनेट मनिस्टर बना देते।
... (व्यवधान)
SHRI RAJESH PILOT (DAUSA) श्री राजेश पायलट: सोम पाल जी, यह बात इस सदन के माध्यम से टेलीविजन के द्वारा सीधे देश के लोगों के सामने जा रही है।
... (व्यवधान)
SHRI SOMPAL (BAGHPAT) श्री सोम पाल: मैंने भी किसानों को सुनाने के उद्देश्य से ही यह कहा है। ... (व्यवधान)
SHRI RAJESH PILOT (DAUSA) श्री राजेश पायलट: आप जो कहते हैं, वह कर के दिखाएं, तभी २०३० तक पहुंचते-पहुंचते आप वैसी स्िथति से बच सकते हैं, लेकिन वास्तविक स्िथति देखिए आज कितने किसान गेहूं बो रहे हैं और कितने किसान गन्ना बो रहे हैं? अगर वे गेहूं और गन्ना नहीं बोएंगे, तो देश के सामने खाद्यान्न का संकट खड़ा हो जाएगा। ... (व्यवधान)
SQN. LDR. KAMAL CHAUDHRY (HOSHIARPUR) स्कवाडन लीडर कमल चौधरी : पिछले ५० सालों में यह १०० करोड़ की आबादी भी तो कांग्रेस की देन है।
... (व्यवधान)
SHRI TARIQ ANWAR (KATIHAR) श्री तारिक अनवर: आप भी तो कांग्रेस की देन हैं।
... (व्यवधान)
SHRI RAJESH PILOT (DAUSA) श्री राजेश पायलट : कमल जी, जहां तक जनसंख्या की बात है यह देश उससे चन्ितत है, लेकिन आप यदि गणना करके देखेंगे, तो कांग्रेस से भा.ज.पा. के परिवार ज्यादा पाएंगे।
... (व्यवधान)
SQN. LDR. KAMAL CHAUDHRY (HOSHIARPUR) स्कवार्डन लीडर कमल चौधरी: मेरे पिताजी चार बार कांग्रेस के प्रत्याशी को हराकर विधायक बने और एक बार कांग्रेस के प्रत्याशी को हराकर एम.पी. बने। कुल पांच बार उन्होंने कांग्रेस को हराया।
... (व्यवधान)
SHRI RAJESH PILOT (DAUSA) श्री राजेश पायलट: अब आप कहीं अटल जी की बात मत कीजिएगा।
... (व्यवधान)
SHRI RAJESH PILOT (DAUSA) श्री राजेश पायलट : मैं औरों का भी उदाहरण दे दूंगा।
... (व्यवधान)
MR. CHAIRMAN : Shri Kamal Chaudhary, please sit down. ... (Interruptions) There is a limit. ... (Interruptions)
SHRI RAJESH PILOT (DAUSA) श्री राजेश पायलट : मुझे दो-तीन बातें कहनी हैं। प्रधान मंत्री जी ने जब पहले दिन देश के नाम संदेश दिया तो उसमें तीन-चार बातों पर जोर दिया और सही बातों पर जोर दिया कि देश में सहमति से सरकार चलनी चाहिए। नीतियों पर सहमति होनी चाहिए। हम सब उसके हकदार रहे हैं, उसके पक्षधर हैं। पारदर्िशता होनी चाहिए, जवाबदेही आनी चाहिए और भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ना चाहिए। उन्होंने चारों चीजें कहीं। इन चारों चीजों को हम सब दिल से मानते हैं। मैं श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी से, जो कि बुजुर्ग हैं, बड़े हैं, ईमानदारी से पूछता हूं कि १९ तारीख से अब तक वह कितनी बातों पर जम पाये हैं। आज सवाल प्रधानमंत्री का नहीं है। आज सवाल पार्टी का नहीं है। आज सवाल देश के सिस्टम की क़ेडेबलिटी का है। आज सवाल देश की राजनीति की क़ेडेबलिटी का है। कया पारदर्िशता हम इन तीन-चार दिनों में दिखा पाये हैं?। कया करप्शन के खिलाफ आवाज उठाई है? कया हम सचमुच लड़ पाये हैं? आज सवाल एक व्यकित का नहीं है, जिनका नाम श्री शरद पवार जी ने लेकर कहा। आज देश में एक मैसेज जा रहा है। हम नेता लोग जो कहते हैं।
... (व्यवधान)
SHRI RAJVEER SINGH (AONLA) श्री राजवीर सिंह (आंवला): मैं राजेश पायलट जी से पूछना चाहता हूं कि वह बार-बार यह कह रहे हैं कि प्रधान मंत्री ने कया किया। वह उनसे ८ दिन की जवाबतलब कर रहे हैं। आपने ४५ साल तक देश का जो कबाड़ा किया है, उसके ारे में भी बताइये। ... (व्यवधान)
SHRI RAJESH PILOT (DAUSA) श्री राजेश पायलट : करप्शन की बात हुई। अभी कुछ बिगड़ा नहीं है। मैं यह नहीं कह रहा हूं कि आप चार दिन में बहुत लम्बे काम कर सकते थे। मैं तो एक प्रार्थना कर रहा हूं कि जो भी हम कहें, उसका देश में एक संदेश जाना चाहिए। जिन सरकारों की क़ेडेबलिटी है। मैं इसमें अपने आपको भी शामिल कर रहा हूं। आज क़ेडेबलिटी गिर रही है। आज गांवों में जाओ तो लोग हमसे सवाल पूछते हैं। कल परसों हिमाचल की सरकार बनी थी। कल मैं अपने क्षेत्र में दौरा करने गया था तो वहां आम आदमी भी सवाल पूछ रहा था। मैंने कहीं एक भाषण में कह दिया था कि हम वायदा करते हैं कि हम सरकार की अच्छी नीतियों का समर्थन करेंगे। हम सरकार की नीति और अगर उनकी नीयत साफ होगी तो जिस मुद्दे पर देश का भला होगा, उस पर हम सहायता देंगे। कल ही मुझे दो फैकस इनकी नीयत और नीति के बारे में आ गये। वह मैं आपके बीच में रखना चाहता हूं।
  सभापति महोदय, मैं जो रिकार्ड रख रहा हूं, वह मुझे आये हैं। मैं उन्हें हाउस की टेबल पर रखने को तैयार हूं। उनके सोर्स भी बताने तो तैयार हूं कि वह मुझे कहां से मिले हैं। जब मैंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनी है और अगर वह देश के भले में काम करेगी तो हम लोग हमेशा सहायता देंगे कयोंकि देश पार्िटयों से ऊपर है। इस बात के उत्तर में एक शरीफ आदमी ने मुझे चिट्ठी भेजी कि इनकी नीयत ठीक नहीं है। राजेश पायलट जी, तुमने तो कह दिया लेकिन कया यह देश को एक रख पायेंगे और कया देश को जोड़कर रख पायेंगे? उन्होंने एक उदाहरण दिया है। ४ फरवरी. १९९१ को आपका जयपुर में कैम्प लगा था। उस समय श्री मुरली मनोहर जोशी जी अध्यक्ष चुने गये थे। आडवाणी जी को याद होगा कि जयपुर में एक कैम्प हुआ था और उसमें सवाल उठाये गये। उन दिनों शायद आडवाणी जी की यात्रा खत्म हुई थी और मुलायम सिंह जी उत्तर प्रदेश के मुख्य मंत्री थे। श्री लालू प्रसाद यादव ने आपकी यात्रा रोकी थी। वह यात्रा रोककर पहुंचे। कैम्प में जो प्रश्नावली डेलीगेटस की दी गयी, वह उस दिन आब्जर्वर बिजनेस इन पालटिकल में ४ फरवरी, १९९१ को आई। श्री सुभांशु मिश्रा उसके एडीटर हैं जिन्होंने लिखा है। प्रश्नावली में कया पूछते हैं। आखिर चिन्ता की बात है और मैं बड़े दुख के साथ कहता हूं।
SHRI HARIN PATHAK (AHMEDABAD) श्री हरिन पाठक(अहमदाबाद): यह किस ईयर की बात है।
SHRI RAJESH PILOT (DAUSA) श्री राजेश पायलट : ४ फरवरी १९९१ की बात है।
SHRI HARIN PATHAK (AHMEDABAD) श्री हरिन पाठक : ६ साल के बाद कल यह लैटर आया है।
... (व्यवधान)
SHRI RAJESH PILOT (DAUSA) श्री राजेजश पायलट: नीयत बदला नहीं करती। ४ फरवरी १९९१ को जयपुर में कैम्प   था। प्रश्नावली के प्रश्न नं १ में उन्होंने अपना नाम लिखा है आचार्य जगदीश मुनि। यह बी.जे.पी. के हैं और हरिद्वार के प्रेजीडैंट हैं। मैं सब सवाल पर नहीं जाऊंगा। मैं केवल संबंधित सवालों का ही जिक़ करूंगा। सवाल नं. १३ ... (व्यवधान)
  मैं वर्ष १९९१ की बात कर रहा हूं। जो पढ़ा है, उसको दे रहा हूं। प्रश्न नं. १३ में यह है कि कया आपके क्षेत्र की जनता यह समझती है कि देश में पिछले दिनों हुए साम्प्रदायिक दंगे आडवाणी जी की यात्रा के कारण हुए? हां या न या पता नहीं आदि इन तीनों में जवाब दीजिए। चलो कोई बात नहीं, वह पता करना चाहते होंगे कि पार्टी का इससे कोई लिंक तो नहीं है।
17.00 hrs. प्रश्न नम्बर १४ - देश में चुनाव होने की स्िथति में साम्प्रदायिक दंगों का भारतीय जनता पार्टी पर कया प्रभाव पड़ेगा? पूछते कया हैं। बुरा असर पड़ेगा, कोई असर नहीं पड़ेगा, तीसरा ब्लैंक कर दिया है। उसमें एक व्यकित लिखता है कि अच्छा असर पड़ेगा।
  यह प्रश्नावली १९९१ में जयपुर में डैलीगेटस को पूछी जा रही थी।
  प्रश्न नम्बर १५ - अपने देश के चुनाव पर किन दो मुद्दों पर मतदाता का असर पड़ेगा? किन्हीं दो पर निशान लगाइए। राजनैतिक संगठन का, धार्िमक आधार का, प्रत्याशी के व्यकितत्व का और जातीय आधार का। चलो यह भी मान लेते हैं।
  सवाल नम्बर १६ - इससे दिल टूटता है। अटल जी, इससे दिल पर चोट लगती है, इससे शक होता है कि नीयत साफ नहीं है। पहला सवाल देश की एकता और अखंडता होता तो मैं भी खुश होता और आज आपके भाषण पर यकीन करता कि आपका मन बिल्कुल साफ है और आप देश की एकता, अखंडता के लिए खड़े हो जाएंगे। पहला सवाल राम जन्म भूमि का है। अगले लोक सभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के तीन मुख्य चुनावी मुद्दे कौन से होने चाहिए, उन पर निशान लगाइए। सबसे पहले राम जन्म भूमि, दूसरा बेरोजगारी, तीसरा मंहगाई, चौथा एकता और अखंडता। आपके लिए देश की एकता, अखंडता की यह प्रॉयरिटी है।
  यह प्रश्नावली बी.जे.पी. के उसमें बांटी गई है। किसी भाई ने मुझे फैकटस एंड फिगर्स दिए हैं। इसे मैं टेबल पर रख देता हूं, आप पता करवा लें कि इसमें कहां तक सच्चाई है और किसने बांटी है। ४ फरवरी, १९९१ के बिजनस स्टैंडर्ड में यह आया है।
... (व्यवधान)
17.02 hrs. (Shri K. Pradhani in the Chair)   आज देश की मजबूती का सवाल है। आज देश जिन चुनौतियों से गुजर रहा है, उसके बारे में मुझे दो बातें कहनी हैं।
... (व्यवधान) एक तरफ हमारे साथियों ने मैनीफैस्टो में हिन्दुत्व पर जोर दिया है और बी.जे.पी. ने अपने मैनीफैस्टो में हिन्दुत्व का मतलब justice for all दिया है।
Hindutva means justice for all. That is the definition which has been given in the Manifesto.
  जार्ज साहब, आपने भी आज बातें कहीं। मैं आपकी बहुत कद्र करता हूं, आप बुजुर्ग हैं, बहुत दिनों से पोलीटिकस में हैं। एक तरफ तो हिन्दुत्व का मतलब जसटिस फॉर ऑल और दूसरी तरफ आपके नैशनल एजैंडा में जैनविन सिटीज़न की भाषा को आप पढ़ लीजिए कि कया लिखा है।
"We are committed to establishing a civilised, humane and just civil order...
...We will truly and genuinely uphold and practice the concept of secularism consistent with the Indian tradition of equal respect for all faiths."

  हिन्दुत्व और इकिवल फेस बराबर नहीं चल सकते। इस देश में जमायते इस्लामी के इंस्टीटयूशन में जो शिक्षा दी जा रही है, शिशु मंदिर और विद्या मंदिर में जो शिक्षा दी जा रही है, वह देश के सिटीजन को एक नहीं रख सकती है, यह बात आपको माननी पड़ेगी। कश्मीर में जो जमायते इस्लामी की भाषाएं चलती रहीं, आज देश को उससे तकलीफ हुई है। मुझे बी.जे.पी. के भाइयों से दुख के साथ कहना पड़ रहा है कि आप भी उसी लाइन पर जगह-जगह जो शिशु मंदिर, विद्या मंदिर और भाषा बोल रहे हैं, वह भी देश के लिए ठीक नहीं है। मैं देश को यह बताना अपना फर्ज समझता हूं। मुझे पता है कि आपको यह बात पसंद नहीं आएगी। लेकिन आम आदमी की यह भाषा है कि ये दोनो चीजें देश को एक नहीं रख सकतीं। इसके लिए आपको कुछ करना पड़ेगा।

... (व्यवधान)

  जार्ज साहब, आप ७ नवम्बर, १९९० को इसी सदन में बोल रहे थे। मैं बड़ी मुश्िकल से पार्िलयामैंट से इसे ढूंढकर लाया हैं। यदि आपको याद हो, आप ७ नवम्बर, १९९० को कह रहे थे -

"It was with a great courage and forbearance that Shri Mulayam Singh Yadav and Shri Laloo Prasad Yadav tried to control the situation which otherwise would have taken an explosive turn."

You have mentioned that.

You had further mentioned the reasons. I quote:

"People of India are for secularism. There is an effort in this country today to judge people by their religion."

You know, where you were hinting at in your speech.

  आज आपने बहुत बढ़िया तरीके से वकालत की है। मुझे १९ जुलाई, १९७९ की याद आ रही है, जब आप बोल रहे थे। मैं तो एयर फोर्स में था, हम सब बड़े गौर से सुन रहे थे कि जार्ज साहब ने आज मोरारजी भाई को बचा लिया। अगले दिन कया हुआ, मुझे पता नहीं। कल कया होगा, अब यह अटल बिहारी वाजपेयी जी की किस्मत पर है कि १९ जुलाई, १९७९ रिपीट होगी या नहीं होगी। यह रात-रात को भगवान के ऊपर है कि कितने दिन घटाता है, कितने दिन आगे बढ़ाता है।

  मैं ये बातें कहने के लिए खड़ा हुआ हूं। मेरे कुछ पेपर्स लाइब्रेरी में रह गये हैं। मैं उनको ढूंढने में रह गया और एकदम आपने मेरा नाम ले दिया तो गलती से पेपर रह गये। मैं आखिर में दो बातें कहने उठा हूं, शरद जी ने बहुत विस्तार से बातें कह दी हैं। यह बात सही है कि देश में जनता से न आपको सरकार बनाने का आदेश मिला और न हमको मिला और हमने शुरूआत में कह दिया था कि जिसका बहुमत होगा, वह सरकार बनाये। प्रजातंत्र में यह जरूरी है, लेकिन आज अटल जी, आपने कहा कि हम तो बैठे थे, हम सरकार बनाने के लिए राष्ट्रपति जी के पास नहीं गये, हमें बुलवाया। आपके हर लीडर ने तीन दिन तक प्रैस और मीडिया में यह कहा कि हमारा हक है, हमको बुलाना चाहिए, हमारा सरकार बनाने का हक है। सुषमा स्वराज जी बैठी हुई थीं, डिबेट में मैं भी था, मैंने कहा कि हक तो देखो किसी का नहीं है, जिसकी मैजोरिटी होगी, राष्ट्रपति जी अपने आप बुला लेंगे तो वे मुझसे टेलीवीजन पर लड़ पड़ीं कि हमारा सरकार बनाने का हक है, आप लोग कैसे रोक सकते हैं, हम सरकार बनाकर रहेंगे। हो सकता है कि आपके मन में नहीं हो, लेकिन बी.जे.पी. ने तो मन बना लिया था कि हमें सरकार बनानी है, आपकी चाहे जो मर्जी हो, आपने सरकार बनाई, लेकिन एक बात मैं आपसे कहना चाहूंगा कि बहुत कण्ट्राडिकशन हैं।

  मैं कहना नहीं चाहता हूं, १९९३ में मैं होम मनिस्ट्री में मंत्री था और मनमोहन सिंह जी फाइनेंस मनिस्टर थे। हमारे रिवेन्यू सैक़ेटरी ने ए.आई.ए.डी.एम.के. के खिलाफ कार्रवाई की और यहां पर जो भाषा ए.आई.ए.डी.एम.के. के बारे में बोली गई थी, जब करप्शन की बात चली थी कि एक हजार साड़ियां, दो हजार चप्पल, पता नहीं कया-कया अखबार में छप गया था। हम डिफेंड कर रहे थे, हम यह कह रहे थे कि कोई बात नहीं होगी, हम देखेंगे, हम देखेंगे। उस वकत तो यह बात हम पर लगाई जा रही थी और हमने वहां पर जाते ही इन्कवायरी की बात की। मनमोहन सिंह जी और हम दोनों बैठे थे। हमने नरसिंहराव जी से कहा था कि चीफ मनिस्टर के बारे में ऐसी बातें हमको कही गईं, हमको देश को जवाब देना है, हमें कुछ कार्रवाई करनी पड़ेगी। हमारी एलायंस वाली बात चली। जब हमने अखबार की बात कही, तब यह बात लगी है। मुलायम सिंह जी ने यह बात ठीक कही कि जब तक यहां बैठे तो सब कसूरवार और जब वहां चले गये तो गंगाजल छिड़क दिया, वे ईमानदार हो गये। यह बर्ताव बदलना पड़ेगा। जो बेईमान है, वह सब के लिए बेईमान है। इस देश में छांट करनी पड़ेगी और यह छांट तब होगी, जब आप भी साफ मन से बात करना शुरू करेंगे। अभी साफ मन की बात नहीं चली है।

  मैं कहना नहीं चाहता, मैं भी कम्युनिकेशन मनिस्टर रहा हूं, जो हालात देश के हुए थे, मैं राज्य सभा में खड़ा-खड़ा जवाब दे रहा था, प्रमोद महाजन जी ने दो घंटे तक बोलने नहीं दिया था, सारे टेंडर्स के कागज पकड़ा दिये थे और हालत यह हो गई थी कि जब चार करोड़ रुपये घर में मिले तो हमें यहां से निकलने वाले बी.जे.पी. के भाई टोका करते थे कि तुम्हारे कितने हैं, जरा थोड़े से दे जाओ। आज वही भाई गले मिल रहे हैं, अब उसको ओथ दिला दी और उसको विभाग भी पी.डब्लू.डी. का दे दिया कि तू और जरा आराम कर, पी.डब्लू.डी. ले जा, ऐसे देते हैं।

  अटल जी, मुझे आपसे उम्मीद नहीं थी और कोई इस बात को कर देता तो कोई बात नहीं थी। आपकी तरफ से एक रेजिस्टेंस तो आ जाता, लेकिन एक रेजिस्टेंस नहीं आया। श्री प्रभुनाथ सिंह (महाराजगंज) : मेरा पाइंट ऑफ आर्डर है। सभापति जी, मेरा व्यवस्था का प्रश्न है।

MR. CHAIRMAN : He is not yielding. Please sit down.

... (Interruptions)

MR. CHAIRMAN: Please sit down. He is not yielding.

... (Interruptions)

  सभापति महोदय : आप जरा बैठ जाइये।

SHRI PRABHUNATH SINGH (MAHARAJGANJ) श्री प्रभुनाथ सिंह : आप एक मिनट सुन   तो लीजिए। (व्यवधान)

SHRI RAJESH PILOT (DAUSA) श्री राजेश पायलट : सभापति जी, जहां तक विचारधाराओं की बात है, विचारधाराओं की लड़ाई हो, हमें भी खुशी होगी। हमारी विचारधारओं में कमी है तो हम सुधारेंगे। अगर आपकी विचारधारओं में कमी है तो आप सुधारें। इससे देश में अच्छा संकेत जाएगा। अगर देश में विचारधारा की राजनीति भविष्य में होती है तो देश मजबूत होगा। ... (व्यवधान)

MR. CHAIRMAN : No running commentary please. SHRI RAJESH PILOT (DAUSA)   श्री राजेश पायलट : आज एक बात सच्ची है, कोई संसद की बात नहीं है, कोई टकराव की बात नहीं है, घोषणा पत्र में घोषणा करो। लेकिन उसको भूलकर राष्ट्रीय एजेंडा में नाम न लो, यह ठीक नहीं है। आज मुझे उम्मीद थी कि प्रधान मंत्री जी खड़े होकर कहेंगे कि हमने घोषणा पत्र के आधार पर चुनाव जीता, लेकिन जो हमारी बातें घोषणा पत्र में थीं या तो वे आज से खत्म हैं या हम उनको उठाएंगे और राष्ट्रीय एजेंडा में जोड़ेंगे। इससे कुछ तो देश में मैसेज जाएगा। कश्मीर में गड़बड़ी कयों हुई। १९९२-९३ के हमारे बी.जे.पी. भाइयों के भाषणों को मैंने देखा है। मुरली मनोहर जोशी जी श्रीनगर झंडा फहराने गए थे तो वहां धारा ३७० का मामला खड़ा कर दिया गया था। हर कश्मीरी भाई के दिमाग में एक बात आई थी, इस देश में आटोनोमी की बात छोड़िए, हमारी जो मंजूर बातें हैं, वे भी नहीं होंगी। इसस कश्मीर में नई आफत खड़ी हो गई थी। बड़ी मुश्िकल से कश्मीर को सम्भाला। आज उसके बारे में कोई बात तक नहीं है। वह भी गुम है। गांव में एक कहावत है कि जो बककड़ होता है वह दिल की बात कह देता है, लेकिन गुमसुम आदमी का पता नहीं कया कहेगा और कया करेगा। आज बी.जे.पी. बोल नहीं रही है, जो बोलती थी वह भी बंद हो गई है। पहले कुछ कह दिया करते थे, आज वह भी चुप हैं। मेरे पास पूरी डिटेल नहीं हैं। मैं दो उदाहरण देना चाहता हूं, मेरे पेपर्स कहीं रह गए हैं। अटल जी ने लखनऊ में जब सरकार बन रही थी तो किसी ने उनसे केबिनेट एकसपेंशन के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि बी.जे.पी. आर्ट आफ गवर्नेंस सीख रही है। यह मैंने कहीं नेशनल हैराल्ड या पायनीर में पढ़ा था। आज मैं कटिंग लेकर आया था, लेकिन शायद वह लाइब्रेरी में रह गई है। अगर आर्ट आफ गवर्नेंस यह होगा तो देश की सरकार कैसे चलेगी। मेरी आपसे प्रार्थना है कि खुली चोट पर पट्टी हो जाती है, लेकिन अटली जी, गुम चोट पर नहीं होती है, बड़ी देर लगती है। इस पर गुम चोट मत कर देना, हम उभर नहीं पाएंगे।

  मेरी आपसे प्रार्थना है कि संवेदनशील मुद्दों पर हमें खुलकर बात करनी चाहिए। हमें अपनी पालिसी खुलकर देश के सामने रखनी चाहिए। आज देश में अंधेरा है इसलिए कि खुलकर पालिसी नहीं दी जा रही है। आज तक भारतीय जनता पार्टी की तरफ से कश्मीर के बारे में कोई शब्द तक नहीं बोला गया है कि कया रुख होगा। ऐसे जलते मुद्दों पर चाहे नार्थ-ईस्ट की बात हो या कश्मीर की बात हो, अगर हमारे देश की सरकार का विजन साफ नहीं होगा तो वहां कभी भी तकलीफ उठ सकती है। ये सेंसेटिव इलाके हैं।

  आज आपने एक कल्चर की बात कही। वन नेशन वन कल्चर, दूर से सुनने में बड़ा अच्छा लगता है। माननीय प्रधान मंत्री जी यह देश रीति-रिवाजों का है। आप ग्ृाहस्थी में नहीं रहे, मैं रहा हूं। मैं बता सकता हूं कि हमारे यहां जब शादी होती है और फेरे होते हैं तो लड़की लड़के के साथ चली जाती है। आपके यहां भी ऐसा ही होता होगा। यहां हमारे किंडिया साहब जो मेघालय से आते हैं, वे बैठे हैं, उनके यहां शादी के बाद लड़का लड़की के घर चला जाता है। इनके रीति-रिवाज उल्टे हैं। इनको मत छेड़ो, ये चीजें उभरने दो। यह देश ऐसे ही एक रहेगा तो प्यार वैसा ही बना रहेगा। हमारे देश में अनेक परम्पराएं रही हैं। तरह-तरह के धर्म, तरह-तरह के रीति-रिवाज हैं। अगर ये रहेंगे तो हमारा देश मजबूत रहेगा। इन नारों से कहीं नुकसान हो जाएगा। इन नारों से मिसअंडरस्टैंडिंग हो जाएगी, फिर आप रोक नहीं पाओगे।

  आखिर में मैं एक सलाह बड़े भाई अटल बिहारी जी को देना चाहता हूं, एक भाई के नाते दे रहा हूं, सांसद के नाते नहीं। यहां जब-जब दो-दो बैठे हैं, चाहे १९५७ में बैठे हों, चाहे, १९७७ में बैठे हों, चाहे १९९१ या १९९६ में बैठे हों, गड़बड़ हुई है, स्टेबलिटी वहीं से खराब होती है। आप देख लें, मैं अपनी बात भी बता रहा हूं। १९५७ में नेहरू जी और सरदार पटेल बैठते थे, इतिहास बताता है। १९९१ में हमारे जमाने में भी यही हुआ और १९७७ में भी यही हुआ। उस समय तो तीन-तीन लोगों, मोरारजी भाई, चौधरी चरण सिंह और बाबू जगजीवन राम ने बैठने की कोशिश की। तब भी गड़बड़ हुई। १९९६ में भी यही हुआ। सी.पी.आई.(एम) के भाई यहां बैठे हैं, राम विलास जी नहीं हैं, वे तो बैठे रहे, लेकिन उधर के बदलते रहे। इसलिए दो वाली स्िथरता रहेगी, इसमें शक है। मैं मुलायम सिंह जी की तरफ से भी कहना चाहता हूं, बाकी आपके ऊपर है। मैं बैठे-बैठे पढ़ रहा था, किसी ने लिखकर भेजा है।

  आज के जो संदेश होंगे, वे सारे देश में जाएंगे और सरकार जो भी कदम उठाएगी, वह देश की नीति और भविष्य के लिए होगा। एक शायर ने कहा है:-

  "वह दौर भी देखा है तवारी के पन्नों ने,   लम्हों ने खता की थी सदियों ने सजा पाई।"

  इस देश के साथ ऐसा न हो जाए, हम यही भरोसा आप पर रखते हैं और मुझे पूर्ण उम्मीद है कि कल हम अपनी भाषा और भावना बटन दबाकर दिखाएंगे। इन्हीं शब्दों के साथ मैं आपको धन्यवाद करता हूं।"> रसायन एवं उर्वरक मंत्री (सरदार सुरजीत सिंह बरनाला): सभापति जी, मैं इस प्रस्ताव के हक में बोलने के लिए खड़ा हुआ हूं। इस बार जनादेश बहुत साफ नहीं हुआ। किसी को भी पूरी मैजोरिटी नहीं मिली। यह सरकार बनी है लेकिन काफी तादाद से नहीं बनी, इसलिए सदन में बहुमत साबित करने के लिए यह मौका दिया गया है। इसके लिए आज यह बहस चल रही है। ये हालात कयों पैदा हुए, यह आप सभी जानते हैं।

  १९९६ के इलेकशन के बाद बी.जे.पी. को सरकार बनाने का मौका दिया गया लेकिन वह सरकार थोड़े दिनों के बाद, तेरह दिनों के बाद ही तोड़ दी गई। फिर कोशिश हुई कि और कोई सरकार बनाई जाए। बहुत सी पार्टीज इकट्ठी हुई। यूनाईटेड फ्रंट का नाम दिया गया और उसको बाहर से सपोर्ट करने के लिए कुछ कांग्रेस ने, कुछ लेफट ने वादा किया कि हम सपोर्ट करेंगे। देवगौड़ा जी के नेत्ृात्व में एक मिलीजुली सरकार खड़ी हो गई, सरकार चली, लेकिन मुश्िकल में पड़ी रही। आहिस्ता-आहिस्ता यह मुश्िकल इतनी हो गई कि उस सरकार को चलना ही मुश्िकल हो गया। थोड़े समय के बाद कहा गया कि नहीं, यह हमें पसन्द नहीं है और उस सरकार को खत्म कर दिया गया। उस वकत बोलते हुए भी बहुत से लोगों ने कहा था, मैंने भी कहा था कि कांग्रेस अकसर ऐसा किया करती है। सपोर्ट करने का वादा करती है लेकिन मन में कुछ और होता है। एक दफा नहीं, कई दफा इतिहास में यह बात आ चुकी है। चौधरी चरण सिंह जी का मैंने जिक़ किया था, चन्द्र शेखर जी का भी मैंने जिक़ किया था। पहले लोगों को यह तजुर्बा हो चुका है, अब भी ये लोग साथ नहीं निभाएंगे। ऐसा ही हुआ। देवगौड़ा जी की सरकार गई, गुजराल जी की सरकार बनी। थोड़े समय के बाद उसमें भी उनको नुकस दिखाई देने लग गए। आहिस्ता-आहिस्ता मन बन गया कि इनकी सरकार को भी तोड़ा जाए। दरअसल मन में यह था कि कोई मौका मिले तो अपनी सरकार बनाई जाए। कांग्रेस की ऐसी कोशिश दिखाई दे रही थी। बाहर से हम लोग देखा करते थे कि इनकी कोशिश यह है कि किसी न किसी तरह अपनी सरकार बनाई जाए।

  उस वकत कांग्रेस के एक लीडर थे जो आज नहीं हैं। शायद कांग्रेस से बाहर हो गए हैं। उनकी कोशिश थी कि कुछ ऐसे हालात कर दिए जाएं और शायद उनको कुछ मौका मिल जाए। लेकिन अफसोस, लोक सभा भंग हो गई। फिर से देश के सामने इलेकशन आ गए। इस चुनाव में भी जनादेश बहुत साफ नहीं आया।

  लोगो ने किसी भी दल को बहुमत नहीं दिया। कुछ दल तो बिलुकल ही रह गए। युनाइटेड फ्रन्ट के कई कम्पोनेंट थे, जो बिलकुल ही रह गए। उनकी तादाद उंगलियों पर गिनने वाली रह गई है। देखा गया कि एन्टी इस्टैब्िलशमेंट वोट हुआ है। जहां-जहां पर भी जिस दल की सरकारें थीं, उसके खिलाफ वोट दिया गया। लेकिन पंजाब ही एक ऐसा राज्य है, जहां पर प्रो-इस्टैब्िलशमेंट वोट हुआ है। पिछली दफा कांग्रेस दो सीटस जीत कर आई थी और उससे पहले तो तेरह की तेरह सीटस कांग्रेस के पास थी, कयोंकि अकाली दल ने चुनाव का बायकाट किया था, लेकिन इस दफा तो पूर्ण सफाया हो गया। इसके पीछे भी कुछ ऐतिहासिक तथ्य थे कि कयों कांग्रेस पंजाब में साफ हो गई और इस दफा एक भी सीट नहीं आ सकी। कारण यह कि पंजाब के लोगों ने समझ लिया कि पिछले समय में पंजाब को जिस आतंकवाद को सामना करना पड़ा, वह आतंकवाद कांग्रेस का ही पैदा किया हुआ था। इस बात को पंजाब के लोगों ने समझ लिया। काफी लम्बा इतिहास हो जाता है, १२-१३ साल पंजाब ने काफी कष्ट उठाया है और बहुत नुकसान उठाया है। लोग समझ गए कि ये हालात कांग्रेस के ही पैदा किए हुए हैं। इस आतंकवादी प्रक़िया में तकरीबन एक लाख लोग पंजाब के मारे गए। बहुत से तो बेकसूर लोग, इनोसेंट लोग मारे गए। जिनका इससे कोई ताल्लुक नहीं था, ऐसे लोग मारे जाते रहे। बहुत से पुलिस के कर्मचारी भी मारे गए और साथ ही बहुत से आतंकवादी भी मारे गए। जैसा मैंने बताया कि एक लाख के करीब लोग मारे गए और पंजाब में जो नुकासान हुआ, उसमें बड़े-बड़े लोग, हरचरण सिंह लोगोंवाल जैसे लोग शहीद कर दिए गए। यह ऐसा घिनौना इतिहास था और पंजाब उस बोझे को उठाता रहा। यह सारा कुछ पंजाब को बरदाश्त करना पड़ता था। नतीजा यह हुआ कि ८००० करोड़ रुपए का कर्ज पंजाब के ऊपर हो गया। बहुत कोशिश की गई कि इस कर्ज को माफ कर दिया जाए। कई सरकारें आईं और कहा गया कि यह बोझा पंजाब के ऊपर नहीं होना चाहिए, कयोंकि पंजाब तो देश की लड़ाई कर रहा था, आतंकवाद का मुकाबला कर रहा था, लेकिन किसी ने भी इसको नहीं देखा। मुझे इस बात को कहने में खुशी है कि जब इन्द्रकुमार गुजाराल साहब प्रधान मंत्री बनें, वे पंजाब के हालात को जानते थे, उन्होंने फैसला लिया कि पंजाब का यह कर्जा माफ होना चाहिए। उन्होंने यह काम किया और हम उनके आभारी हैं। इसीलिए फिर शिरोमणि अकाली दल ने फैसला लिया कि आप पंजाब से इलैकश्न लड़िए और गुजराल साहब ने पंजाब से इलैकशन लड़ा और चुनाव जीता। भले ही उनकी पार्टी ग्रासरूट लैवल पर नहीं थी, चूंकि पंजाब के लोग समझते थे कि गुजराल साहब ने मदद की है, इसलिए वे वहां से जीत कर आए। मुझे इस बात की खुशी है कि हम अपने कर्तव्य को निभा सके।

  मैं अर्ज कर रहा था, पंजाब में कांग्रेस ने घिनौना काम किया, इसलिए पंजाब में कांग्रेस का यह हाल हुआ।

  ब्लू-स्टार आपरेशन को पंजाब के लोग भूला नहीं सकेंगे। ६ जून, १९८४ को दरबार साहब में हिन्दुस्तान की फौज को भेजा गया, टैंक और तोप लेकर हमला करवाया गया और सैंकड़ों लोग शहीद हो गए। देश की फौज देश के लोगों के खिलाफ काम नहीं करती है, देश के धर्म-स्थलों पर नहीं जाया करती है, लेकिन ऐसा हुआ।

  जिससे सिख समुदाय बहुत दुखी हो उठा। आज तक इस घिनौने काम की किसी ने माफी नहीं मांगी, किसी सरकार ने माफी नहीं मांगी। पार्टी के तौर पर भी माफी नहीं मांगी गई, मुझे इस बात का बहुत अफसोस है। इसलिए पंजाब के लोग कांग्रेस के खिलाफ हो गए। इतना ही नहीं, इसके बाद जो कुछ हुआ वह इससे भी भयानक था। देश में एक लहर सिख समुदाय को बदनाम करने की चला दी गई थी, पूरा मीडिया इस्तेमाल किया जा रहा था। सरकार पूरा मीडिया इस्तेमाल कर रही थी कि इनको बदनाम कर दिया जाए। सिखों को आतंकवादी का नाम देकर सारे देश में ही नहीं बल्िक सारे संसार में बदनाम कर दिया गया। नतीजा आपके सामने आया, नवम्बर १९८४ में जो कुछ देश में हुआ वह भी इतिहास का एक हिस्सा बन गया। कत्लेआम हुआ। देश की राजधानी दिल्ली में कत्लेआम हुआ। ऐसा कत्लेआम हुआ, जो नादिर शाह के बाद दिल्ली में कभी देखा नहीं था। सिख समुदाय के लोगों को ढूंढ-ढूंढ कर मारा गया और बहुत बुरी तरह से मारा गया। उनके घर जला दिये गए, सम्पति लूटी गई, जला दी गई और यह तीन दिन तक होता रहा।

  महोदय, देश में सरकार थी। होम मनिस्टर यहां पर थे, जोकि कोई आर्डर कर सकते थे। प्राइम मनिस्टर नये बने थे, उन्होंने काम शुरु कर दिया था। लेकिन तीन दिनों तक ये तमाशा देखते रहे। सिखों की हत्या हो रही थी। मोहल्ले-मोहल्ले में, जगह-जगह पर घर जलाये जा रहे थे, बस्ितयां जलाई जा रही थीं और तमाशाई बन कर कुछ लोग ये देख रहे थे तथा कुछ लोग लोगों को उकसा रहे थे। पुलिस नहीं बुलाई गई, शूट एट साइट का आर्डर नहीं दिया गया। फौज यहां मौजूद थी लेकिन फौज को कोई आदेश नहीं दिया गया कि कोई फलेग मार्च करके कम से कम लोगों के दिल में कोई दहशत तो डाली जाए कि यह काम ठीक नहीं हो रहा है। तीन दिन आंखे बंद करके उसको इजाजत दी गई कि चलता है तो चलता रहने दिया जाए। इस तरह तीन हजार आदमी दिल्ली में मार दिए गए। ऐसा देश के कई हिस्सों में हुआ। उनमें कुछ लोग अच्छे भी थे, जिन्होंने सिखों को पनाह भी दी। यहां भी बहुत से सांसद बैठे हैं, अगर मैं नाम लूंगा तो कोई रह जाएगा। लेकिन कुछ लोग ऐसे थे जिन्होंने हमदर्दी की वजह से अपने घरों में छिपा कर रखा। यह एक ऐसा इतिहास बन गया जो भूलने में नहीं आता।

  महोदय, इतने केस हो गए लेकिन उसके बाद भी कोई केस अदालत में नहीं भेजा गया। सालोंसाल गुजर गए।

... (व्यवधान) यह सदा चलता रहेगा, जब तक आप इसकी माफी नहीं मांगेगे। मैं अर्ज कर रहा हूं कि केस नहीं चलाए गए। इसको १०-१२ साल हो गए। जब केस नहीं चला तो हमने कुछ कोशिश की। मुझे १९९३ की बात याद है जब राजेश पायलट जी होम मनिस्ट्री में थे तो मैं उनको प्राइम मनिस्टर के पास अपने साथ लेकर गया कि केस नहीं चल रहे हैं आप मेरे साथ चलिए तब वह हमदर्दी करके मेरे साथ गए। उन्होंने भी कहा और मैंने भी कहा कि ये केस चलने चाहिए। भले ही इसमें कुछ कांग्रेस के बड़े लोग आते हैं, लीडर का नाम भी आता है, लेकिन यह अच्छा रहेगा। अगर इन पर केस चला दिए जाएं तो अच्छा होगा। इससे शायद पार्टी को भी फायदा होगा, लेकिन ऐसा नहीं किया, कई कोशिशों के बावजूद भी ऐसा नहीं किया गया। नतीजा कया हुआ, नतीजा यह हुआ कि महसूस होने लगा कि वाकई ये लोग जिम्मेदार थे। मुझे इस बात की खुशी है कि इस दफा इन लोगों को टिकट नहीं दिए गए, इससे पहले तो टिकट भी दिए जाते थे और न सिर्फ टिकट दिए जाते थे बल्िक वे कामयाब होकर मनिस्ट्री में भी आते थे। उनको मौका दिया जाता था कि सरकार में भी आइए, ऐसे लोग थे। लेकिन इस बार उनको बाहर निकाला गया। इससे यह जाहिर हुआ कि यह बात तो मानी गई है कि हां हमारी पार्टी के लोग थे।

  जिन्होंने इस काम में बहुत बुरी तरह से हिस्सा लिया था। मैं आपसे अर्ज कर रहा था कि बाबरी मस्िजद के लिए तो इस इलेकशन में माफी मांगी गयी थी कयोंकि वह समुदाय इतनी बड़ी तादाद में है कि इनका ख्याल था कि माफी मांगने के कारण वोट मिल जाएंगे। सिख समुदाय छोटा है, इसलिए अकाल तख्त गिराये जाने की, ऑपरेशन ब्ल्यू-स्टार की माफी नहीं मांगी गयी। यह सारा वोट का तमाशा है। हमें इस बात का अफसोस है कि यह सब वोट के लिए किया जा रहा है।

BHAJAN SHRI BHAJAN LAL (KARNAL) श्री भजन लाल (करनाल): बरनाला साहब, एक मिनट की माफी चाहूंगा। सोनिया गांधी जी जब चंडीगढ़ गयी थीं तो एक लाख लोगों की मीटिंग में उन्होंने यह कहा था कि जो हरमंदिर साहब में हुआ, उसका मुझे खेद है।

PROF. PREM SINGH CHANDUMAJRA (PATIALA) प्रो. प्रेम सिंह चन्दूमाजरा (पटियाला) : यही तो बात है कि वोट बटोरने के लिए ऐसा करते हैं। उस समय वे न तो प्रधान थीं और न पार्टी की मैम्बर ही थीं। अब इन्होंने उनको अध्यक्ष बनाया है।

SARDAR SURJIT SINGH BARNALA (SANGRUR) श्री सुरजीत सिंह बरनाला : अध्यक्ष जी, जैसा भजनलाल जी ने फरमाया है। जब चंडीगढ में इलेकशन कम्पेन के लिए सोनिया जी गयी तो उन्होंने कुछ शब्द कहे थे। उन शब्दों को कहने का कानून कया था। सोनिया जी तो बहुत समय से दिल्ली में मौजूद थीं। वह पहले भी कह सकती थीं, लेकिन उन्होंने पहले नहीं कहा। मैं पूछना चाहता हूं कयों नहीं कहा? महज एक इलेकशन मीटिंग में जाने के लिए उन्होंने कुछ शब्द बोले। वोट बटोरने के लिए ऐसी बातें कही गयीं। लेकिन उन शब्दों का फायदा नहीं हुआ। लोग समझ गये कि जो कुछ कहा गया है महज वोट बटोरने के लिए कहा है। यह वोट की राजनीति है और इसके अलावा कुछ नहीं है।

... (व्यवधान) MR. CHAIRMAN : Mr. Minister, there is an announcement. Please take your seat for a minute.

 

In pursuance of the decision taken in the Meeting with Leaders of Parties and Groups held on 18th November, 1997, 24 Members, under Rule 377, are being allowed to raise matters per day. As per that decision, Members are to read only the brief subject of their notice given by the Secretary and the text of the matter will be treated as laid on the Table.

SHRI S. JAIPAL REDDY : Sir, let Shri Surjit Singh Barnala complete his speech. We can take it up after his speech is over.

MR. CHAIRMAN: All right. We will take it up after Shri Surjit Singh Barnala completes his speech. SARDAR SURJIT SINGH BARNALA (SANGRUR)   सरदार सुरजीत सिंह बरनाला : मैं अर्ज कर रहा था कि पंजाब के हालात ऐसे बने और बी.जे.पी. और शिरोमणि अकाली दल न केवल पार्िलयामेंटरी इलेकशन में एक हुए वरन् इससे पहले असेम्बली के इलेकशन में भी उन्होंने इकट्ठे होकर चुनाव लड़ा। कॉमन मनिमम प्रोग्राम एसेम्बली से पहले इश्यू किया गया और उस बेसिज पर हम इलेकशन लड़े और बी.जे.पी. और शिरोमणि अकाली दल की साझा सरकार बनी। इस वकत भी ऐसा ही हुआ कि पंजाब में शिरोमणि अकाली दल एक साथ पार्िलयामेंटरी इलेकशन लड़े और एक कलीन स्वीप पंजाब में हुई। मैं यह कहना चाहूंगा कि पंजाब में हमारे इकट्ठा होने की वजह से ऐसा माहौल बना है। ममता जी कह रही थीं कि यहां कोशिश यह होती रहती है कि लोगों को एक दूसरे से दूर करो। वह हिंदू और मुस्िलम की बात कह रही थीं, लेकिन पंजाब में कोशिश हो रही थी कि हिंदुओं और सिखों को दूर कर दिया जाए, जो सदियों से इकट्ठे रहते चले आ रहे हैं। उनको अलग करने का प्रयत्न किया जा रहा था लेकिन उनको कामयाबी नहीं मिली। बी.जे.पी. और शिरोमणि अकाली दल के इकट्ठा होने से पंजाब में हिंदू और सिख इकट्ठा हुए हैं। वहां पर ऐसा माहौल और भाईचारा बना है जैसा संत हरचंद सिंह लोंगोवाल कल्पना किया करते थे।

... (व्यवधान)

SHRI BALRAM JAKHAR (BIKANER) श्री बलराम जाखड़(बीकानेर) : हिन्दू और सिख दोनों भाई हैं। एक बाप के दो बेटे हैं. उनको अलग करने की न कभी कोशिश हो सकती है, न की गई, इसको ध्यान में रख कर हम पर मेहरबानी करें।

SARDAR SURJIT SINGH BARNALA (SANGRUR) सरदार सुरजीत सिंह बरनाला : हो तो नहीं सकती लेकिन मैं कह रहा था कि कोशिश की गई। लेकिन उसमें कामयाबी नहीं मिली। अगर मैं यह कहूं कि पंजाब देश की सबसे पीसफुल स्टेट है तो यह कहना गलत नहीं होगा। वहां अभी लोक सभा का इलैकशन खत्म हुआ। पंजाब सूबे में एक भी खून-खराबे का केस नहीं हुआ जबकि हिन्दुस्तान में ६५ लोग इस दौरान मारे गए। आप देखते रहे हैं कि बहुत से सूबों में कया-कया होता रहा? लेकिन पंजाब में मोस्ट पीसफुल इलैकशन हुए। इसके लिए हम इलैकशन कमीशन को, पंजाब सरकार और पंजाब के लोगों को धन्यवाद देना चाहते हैं। वहां माहौल ऐसा बन गया कि पीसफुल इलैकशन हुए, कहीं रीगिंग नहीं हुई, कहीं कोई मार-पीट नहीं हुई, किसी किस्म की धकका-मुककी नहीं हुई। वहां बहुत आराम से इलैकशन हुए। इसका नतीजा आप देख रहे हैं कि दूसरी जगहों से भाग-भाग कर लोग वहां आ गए हैं।

... (व्यवधान) इलैकशन के रिजल्ट आने के बाद कोशिश हुई कि किसी ढंग से बी.जे.पी. और उसके सहयोगी दलों को बाहर रखा जाए। श्री जार्ज फर्नान्डीज इनके मैनिफैस्टो पढ़-पढ़ कर बता रहे थे कि सभी पार्िटयों का कैसा मैनिफैस्टो था, ये कैसे-कैसे एक दूसरे के खिलाफ लड़ कर आए थे और खास करके सभी कांग्रेस के खिलाफ लड़ कर आए थे लेकिन यत्न यह हो रहा था कि किसी तरह बी.जे.पी. को बाहर रखा जाए, भले ही कांग्रेस की सरकार बन जाए। सोमनाथ बाबू चले गए हैं। उनकी और उनकी पार्टी की बड़ी कोशिश रही, उनके लीडर मेरे हमनाथ हैं, उन्होंने बहुत कोशिश की कि कांग्रेस की सरकार बन जाए तो अच्छा है, हम फिर सपोर्ट कर देंगे। वह उनके खिलाफ बहुत जबर्दस्त लड़ाई लड़ कर आए थे। पता नहीं इनका सैकुलरिज्म कैसा है? मैं अभी इस सैकुलरिज्म की कहानी सुना कर हटा हूं। वह सैकुलरिज्म १९८४ में हिन्दुस्तान के लोगों ने देखा, जब गलियों और बाजारों में सिखों को मारा गया, यह इनका सैकुलरिज्म है, जब देश के बहुत पवित्र स्थान को इस्तेमाल करने के लिए फौज भेज दी गई, यह इनका सेकुरिज्म है। उस सैकुरिज्म के नाम पर यह इकट्ठे होना चाहते थे और कहते थे कि कांग्रेस की सरकार बन जाए। यूनाइटिड फ्रंट का सरकार बनाने का हाल नहीं था. वे टूट चुके थे। टी.डी.पी. ने कह दिया कि हम कांग्रेस के साथ नहीं जा सकेंगे। ए.जी.पी. ने कह दिया जबकि उनके सदस्य यहां तो नहीं आए लेकिन बतौर पार्टी उन्होंने कह दिया हम इनके साथ नहीं जाएंगे। उन्होंने इनका व्यवहार देख लिया। उन्होंने इनकी सीधे कारगुजारी देख ली है। ऐसा ही जम्मू-कश्मीर की नेशनल कान्फ्रेंस पार्टी ने कहा कि हम इनके साथ कोई ताल्लुक नहीं रखेंगे। ऐसे हालात में लोग चाहते हैं कि यह सरकार चलनी चाहिए और बार-बार इलैकशन नहीं होने चाहिए। मेरे ख्याल में कोई भी दुबारा से इलैकशन नहीं चाहेगा। मेरे ख्याल में ३०० के करीब नए मैम्बर यहां आए हैं। पिछली दफा भी जो नए मैम्बर चुन कर आए थे, वे राष्ट्रपति जी के पास इकट्ठे होकर गए थे। उन्होंने उनसे कहा कि कोई रास्ता निकालिए जिससे यह लोक सभा भंग न हो सके लेकिन कोई ढंग नहीं निकला और लोक सभा भंग हो गई। हिन्दुस्तान के लोग बार-बार ६ महीने के बाद, साल-डेढ़ साल के बाद इलैकशन नहीं चाहते हैं। यहां जो सदस्य बैठे हैं, कोई ऐसा नहीं होगा जो यह कहेगा कि इलैकशन दोबारा होने चाहिए। सभी लोग यहां बैठे हैं। यहां बहुत लायक लोग चुनकर आए हैं। हमें कोई ढंग निकालना चाहिए।

  जैसे राज्य सभा की मियाद छः साल के लिए होती है, उसी तरह लोक सभा में भी पांच साल की मियाद होनी चाहिए, भले ही कोई सरकार बने या न बने। इसके लिए कांस्टीटयूशन अमेंडमेंट हमको करना चाहिए और ऐसी सलाह सारे लोग बनाइए। कोई न कोई बात ऐसी ज़रूर करनी चाहिए जिसका फायदा सदस्यों को हो और जिसको देश के लोग चाहते हैं।

  मैं कुछ बातें रीजनल पार्टीज़ के बारे में कहना चाहूंगा कयोंकि मैं एक रीजनल पार्टी से आता हूं। रीजनल पार्टीज़ कया चाहती थीं? वे चाहती थीं कि स्टेटस को ज्यादा अधिकार दिये जाएं। उनको आटौनौमी होनी चाहिए कि वे अपना थोड़ा बहुत काम कर सकें। हम पहले यही कहते थे कि देश के संविधान का ऐसा ढांचा हो, फैडरल स्ट्रकचर हो, तो इसी बात पर हमको कहा जाता था कि ये अलगाववाद की बात कर रहे हैं, सॆपेरेशन की बात कर रहे हैं, देश से अलग होना चाहते हैं। ऐसा इल्ज़ाम बड़ी पार्िटयां हम पर लगाती रहीं। रीजनल पार्टीज़ के कनकलेव होते रहे। उनमें सभी पार्िटयों की यही धारणा थी कि स्टेटस के अधिकार कुछ न कुछ और बढ़ने चाहिए। आज वह धारणा सभी की बन गई है। रीजनल पार्टीज़ को कुछ इंपौर्टेन्स मिली है जिनको दूर रखा जा रहा था कि इनका कोई काम नहीं है। मेरे से पहले यहां पर पढ़कर सुनाया गया कि रीजनल पार्टीज़ देश को नुकसान पहुंचाएंगी। ये कहते हैं कि स्टेटस स्ट्रौंग होने चाहिए। आप सभी ने कहा कि जब स्टेटस स्ट्रौंग होंगी तभी सेन्टर स्ट्रौंग होगा। यही बात कहते हुए हमको २७ साल हो गए। वही बात आहिस्ता-आहिस्ता सारे देश ने स्वीकार की है। अभी वाजपेयी जी बोल रहे थे कि हम स्टेटस को ज्यादा अधिकार देंगे। उस तरफ बात चली है। अधिकारों की बात चली है, आटौनौमी की बात चली है और अब फैडरल स्ट्रकचर की सोच होगी। यह कहा गया है कि सरकारिया कमीशन रिपोर्ट को लागू किया जाएगा और बहुत साल हो गए। बहुत मुश्िकल से सरकारिया कमीशन बैठाया था। हम लोगों ने मांग की थी और कमीशन बैठाया गया। कमीशन ने मेहनत करके रिपोर्ट तैयार की। दो बड़े-बड़े वौल्यूम बन गए लेकिन उनको पता नहीं कहां छिपा दिया, कितना गर्दा उस पर चढ़ गया। दस साल किसी ने उसको नहीं देखा। अब आहिस्ता-आहिस्ता जो पिछली सरकार बनी थी, उसने कहना शुरू किया था कि सरकारिया कमीशन पर अमल किया जाएगा, फॆडरल स्ट्रकचर की तरफ हम कुछ काम करेंगे, स्टेटस को ज्यादा पावर देंगे। यूनाइटेड फ्रंट की सरकार ने यह कहना शुरू किया था और मुझे उम्मीद है कि वह जारी रहेगा।

  मैं अर्ज करना चाहता हूं कि बार-बार सरकारें तोड़ने का तजुर्बा बहुत हो गया, बहुत देख लिया। लोगों ने उसको पसन्द नहीं किया। कल इस बहस के बाद वोट होने वाला है। आप फैसला करिये कि ऐसा काम नहीं करेंगे जिससे लोगों को लगे कि ये अब भी सरकार तोड़ना चाहते थे। मैं आप सभी से विनती करूंगा कि कल पौज़टिव वोट होना चाहिए, सरकार को कायम रखने का वोट होना चाहिए। बहुत-बहुत धन्यवाद।

">17.51 hrs. कुमारी मायावती : माननीय अध्यक्ष जी, भा.ज.पा. सरकार द्वारा साम, दाम, दंड और भेद का रास्ता अपनाकर विश्वास मत हासिल करने की कोशिश की गई है और ऐसी सरकार द्वारा यहां रखे गए विश्वास मत प्रस्ताव के खिलाफ बोलने के लिए मैं खड़ी हुई हूं। माननीय राष्ट्रपति जी ने जब प्रधान मंत्री जी को मिलने के लिए बुलाया और यह कहा कि आपके समर्थन में जिन पार्िटयों की चट्ठियां आपको प्राप्त हुई हैं, उनको आप हमें दे दें ताकि हम आपको सरकार बनाने के लिए दावत दे सकें। जिस दिन माननीय राष्ट्रपति जी ने प्रधान मंत्री जी के सामने यह प्रस्ताव रखा, उसी के अगले दिन भारतीय जनता पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने जो माननीय प्रधान मंत्री जी के बहुत नजदीक हैं, मुझे प्रात: लगभग आठ बजे टेलीफोन कर के यह बात की कि आप यदि हमारी सरकार में शामिल हो जाएं, तो हम आपको ग्ृाह मंत्री बना सकते हैं और आपकी पार्टी के जो चार और सदस्य हैं उनमें से भी हम किसी को मनिस्टर बना सकते हैं। मैंने माननीय प्रधान मंत्री जी के करीबी माने जाने वाले जो भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं, उनसे यह कहा कि हमने भारतीय जनता पार्टी को दो बार आजमाया है।
  हमने भारतीय जनता पार्टी को दो बार आजमाया है। अब हम तीसरी बार नहीं आजमायेंगे। भारतीय जनता पार्टी मायावती को ग्ृाह मंत्री तो कया प्रधान मंत्री का भी ऑफर देगी तो भी हम भारतीय जनता पार्टी के साथ हाथ मिलाने वाले नहीं हैं। जब मैंने यह बात भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता को टेलीफोन में कहा तो वे बड़े दुखी हुए। दूसरे दिन मुझे फिर टेलीफोन आया। तीसरे दिन भारतीय जनता पार्टी के दूसरे वरिष्ठ नेता ने मुझे टेलीफोन करके फिर ऑफर दिया और इतना ही नहीं बल्िक हमारी पार्टी के जो दूसरे सांसद हैं, उनको भी मंत्री पद का लालच दिया। उनको रिश्वत देने की भी कोशिश की। लेकिन बहुजन समाज पार्टी के सांसद भारतीय जनता पार्टी के लालच में नहीं आये, उनके बहकावे में नहीं आये।
  मैं माननीय सदन को यह बताना चाहती हूं कि जिस दिन भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनी और माननीय श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी ने प्रधान मंत्री के पद की शपथ ली, उसी दिन मैंने दिल्ली दूरदर्शन पर यह खबर सुनी कि मायावती के खिलाफ फलोट पम्पों के घोटाले को लेकर सी.बी.आई. ने मामला दर्ज किया है। मैं यह बताना चाहती हूं कि भारतीय जनता पार्टी द्वारा साम, दाम, दंड, भेद आदि इस्तेमाल करने के बाद भी जब मैं उनके चककर में नहीं आई तो मेरे ऊपर भ्रष्टाचार का फर्जी मामला सी.बी.आई. द्वारा दर्ज कराकर, पूरे देश में मेरी इमेज को बिगाड़ने की कोशिश की गई। मेरे ऊपर पोलटिकल प्रैशर डालने की कोशिश की गई जिससे मायावती डर जाये, घबरा जाये और दबाव में आकर जब विश्वास मत का मौका आये तब उस मौके पर हमारे समर्थन में वोट दे दें।
  सभापति जी, मैं आपको बताना चाहती हूं कि मायावती घबराने वाली नहीं है, किसी लालच में आने वाली नहीं है। बहुजन समाज पार्टी ने यह फैसला लिया है। भारतीय जनता पार्टी ने पोलटिकल प्रैशर में सी.बी.आई. को मेरे खिलाफ इस्तेमाल किया है। यह गलत कार्य उनको बहुत महंगा पड़ेगा। यह बात मैं उनको बताना चाहती हूं। मैं उनको यह बताना चाहती हूं कि जिस मामले को लेकर, पोलटिकल प्रैशर बनाकर मेरे खिलाफ मामला दर्ज कराया गया, वह मामला मेरे शासन काल का नहीं है। यह मामला प्रेजीडैंट रूल का है। वर्ष १९९५ का है। इसमें मायावती किधर से आ गयी। इससे साफ जाहिर होता है कि पोलटिकल प्रैशर बनाकर विश्वास मत के मौके पर आपने हमारा वोट लेने की कोशिश की। हमें डराने, धमकाने की कोशिश की। इस कारण हम भारतीय जनता पार्टी सरकार द्वारा रखे गये विश्वास मत का विरोध करते हैं।
  दूसरा, हम इस प्रस्ताव का विरोध कयों करते हैं? बहुजन समाज पार्टी कयों करती है कयोंकि भारतीय जनता पार्टी विश्वास लायक पार्टी नहीं है। भारतीय जनता पार्टी भरोसे लायक पार्टी नहीं है। इसके बारे में मैं बताना चाहूंगी कि वर्ष १९९६ में जब उत्तर प्रदेश में विधान सभा के लिए इलेकशन हुए और रिजल्ट निकला तो किसी भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला। जिसके कारण किसी भी पार्टी की सरकार नहीं बन सकी और उत्तर प्रदेश में फिर से प्रेजीडैंटस रूल लगा। जब उत्तर प्रदेश में प्रेजीडैंटस रूल लगा तो भारतीय जनता पार्टी के लीडर माननीय कांशी राम जी से मिले और कहा कि बेहतर होगा कि हम मिलजुलकर सरकार बनाये। बहुजन समाज पार्टी और भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय नेताओं ने यह फैसला लिया।
... (व्यवधान)
18.00 hrs. SHRI MADAN LAL KHURANA (DELHI SADAR) संसदीय कार्य मंत्री तथा पर्यटन मंत्री श्री मदन लाल खुराना : सभापति महोदय, छ: बज गए हैं। सभी लीडर्स की मीटिंग में यह तय हुआ था कि यह डिबेट रात तक चलेगी। दोनों पक्षों से काफी लोगों ने बोलने के लिए नाम दिए हैं। इसलिए मेरा निवेदन है कि सदन की कार्यवाही तीन घंटे आगे बढ़ा दी जाए।
  हमने यहां रात्रि डिनर का इंतज़ाम किया है। इसलिए सभी मैम्बर्स, मीडिया पर्सन्स और सैक़ेटेरिएट के स्टाफ के लिए ७.३० बजे से खाने का प्रबन्ध है।
MR. CHAIRMAN : Is it the sense of the House to extend the time of the House?
... (Interruptions)
SHRI LALU PRASAD (MADHEPURA) श्री लालू प्रसाद (मधेपुरा) : मेरा प्वाइंट ऑफ आर्डर है। हमारे खुराना जी भोजन के लिए आमंत्रित कर रहे हैं। लेकिन भोजन में नमक भी मिला हुआ होगा। इसलिए हम उसे नहीं खाएंगे कयोंकि यदि नमक खा लेंगे तो गड़बड़ हो जाएगी।
SHRI MADAN LAL KHURANA (DELHI SADAR) श्री मदन लाल खुराना : यह नमक हमारा नहीं है, यह पार्िलयामैंट्री अफेयर्स मनिस्ट्री का नमक है और हम सब उसके परिवार के सदस्य हैं। इसलिए उसमें कोई ऐतराज नहीं होना चाहिए। (व्यवधान)
SHRI SHARAD PAWAR (BARAMATI) श्री शरद पवार : सभापति महोदय, हाउस को एकसटैंड करने में हमें कोई ऐतराज नहीं है लेकिन मेरा यह सुझाव है कि लालू जी के लिए बिना नमक का खाना रखा जाए। (व्यवधान)
MR. CHAIRMAN: All right. The time of the House is extended for another two hours, that is, up to 8.00 p.m. अभी आठ बजे तक बढ़ाया है, उसके बाद फिर देख लेंगे।
... (व्यवधान)
KUMARI MAYAWATI (AKBARPUR) कुमारी मायावती (अकबरपुर) : मैं बता रही थी कि जब उत्तर प्रदेश में किसी भी पार्टी को ऐब्सोल्यूट मेजौरिटी नहीं मिली तो फिर से प्रैज़ीडैंट रूल लगा। लेकिन उसके बाद भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता अपने कुछ साथियों के माध्यम से बहुजन समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मान्यवर काशी राम जी से मिले और यह कहा कि प्रैज़ीडैंट रूल से बेहतर होगा कि हम मिल-जुलकर सरकार बनाएं। उसमें यह तय हुआ था कि पहले छ: महीने बहुजन समाज पार्टी के नेत्ृात्व में सरकार चलेगी और अगले छ: महीने भारतीय जनता पार्टी के नेत्ृात्व में मिली-जुली सरकार चलेगी। जब पहले छ: महीने बहुजन समाज पार्टी के नेत्ृात्व में सरकार चली तो हमने छ: महीने के शासनकाल में उत्तर प्रदेश में समाज के हर वर्ग की ... (व्यवधान)
SHRI PRAKASH VISHWANATH PARANJPE (THANE) श्री प्रकाश विश्वनाथ परंजपे (ठाणे) : विषय कया है और बात कया हो रही है। ... (व्यवधान) ये सदन का समय बर्बाद कर रहे हैं।
... (व्यवधान)
SHRI ASHOK PRADHAN (KHURJA) श्री अशोक प्रधान : हम इनको उत्तर प्रदेश में भुगत चुके हैं।
MR. CHAIRMAN : Please sit down.
... (व्यवधान)
SHRI AKBAR AHMAD (AZAMGARH) श्री अकबर अहमद डम्पी (आजमगढ़) : मैं यह बात बी.जे.पी. के लोगों से पूछना चाहता हूं ... (व्यवधान) यह बहुत बड़ा अहम मसला है।
... (व्यवधान) यह बहुत बड़ी साजिश थी।
... (व्यवधान)
SHRI RAMDAS ATHAWALE (MUMBAI NORTH-CENTRAL) श्री रामदास आठवले (मुम्बई उत्तर मध्य) : अभी बंगाल की बात हुई, अभी जार्ज साहब ने मेनीफैस्टोज़ की बात की, अभी उधर से तमिलनाडू की बात हुई।
... (व्यवधान)
18.06 hrs. (Mr. Speaker in the Chair) SHRI MITRASEN YADAV (FAIZABAD) श्री मित्रसेन यादव (फैजाबाद) : माननीय अध्यक्ष जी, मेरा व्यवस्था का प्रश्न है, जरा सुन लें। अभी महामहिम राष्ट्रपति ने जो अपना अभिभाषण दिया है, उसकी पत्रिका को पेश करते हुए माननीय प्रधान मंत्री और उनके पक्ष के लोगों ने चरित्र के बारे में प्रस्तुत किया है। अब इनके चरित्र के बारे में मायावती जी कोट कर रही हैं तो उनको आपत्ित नहीं होनी चाहिए। वे भी तो उसी पाइंट पर हिट कर रही हैं, जिसके बारे में आप रोज कहते हैं। MR. SPEAKER: Please take your seat. This is not good. The Chair has not permitted you.
 
KUMARI MAYAWATI (AKBARPUR) कुमारी मायावती : माननीय अध्यक्ष जी, मैं आपके माध्यम से सत्ता पक्ष के लोगों को यह बताना चाहती हूं कि सच्चाई कड़वी लगती है, लेकिन आज मैं सच्चाई बताकर ही रहूंगी, चाहे आप कितना भी हल्ला-गुल्ला करने की कोशिश करें।
  माननीय अध्यक्ष जी, मैं भारतीय जनता पार्टी के करैकटर के बारे में बता रही थी कि भारतीय जनता पार्टी विश्वास करने लायक पार्टी नहीं है। इसी संदर्भ में मैं एग्जाम्पल दे रही थी कि जब ... (व्यवधान) यह तय हुआ कि पहले छह महीने बहुजन समाज पार्टी के नेत्ृात्व में सरकार चलेगी और अगले छह महीने भारतीय जनता पार्टी के नेत्ृात्व में चलेगी। लेकिन जब पहले छह महीने बहुजन समाज पार्टी के नेत्ृात्व में सरकार बनाने की बात आई तो उसमें यह भी तय हुआ था कि जब बहुजन समाज पार्टी के नेत्ृात्व में सरकार बनेगी तो मुख्य मंत्री बहुजन समाज पार्टी के कोटे से बनेगा। लेकिन विधान सभा का स्पीकर भारतीय जनता पार्टी के कोटे से बनेगा। हमने भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय नेताओं की बात मानकर छह महीने के शासन काल में भारतीय जनता पार्टी के स्पीकर को कबूल किया। उनके साथ मिल जुलकर सरकार बनाई, लेकिन जब छह महीने पूरे होने जा रहे थे तो हमने भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय नेताओं को यह कहा था कि आज छह महीने पूरे होने जा रहे हैं, हम अपने वायदे के मुताबिक आपको सत्ता सौंपेंगे, लेकिन हमारी भी एक शर्त है। जब अगले छह महीने आपके नेत्ृात्व में सरकार चलेगी तो मुख्यमंत्री आपका होगा, लेकिन अगले छह महीने के लिए विधान सभा का स्पीकर बहुजन समाज पार्टी के कोटे से बनना चाहिए। जब यह बात हमने भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय नेताओं के सामने रखी, तब भारतीय जनता पार्टी के ... (व्यवधान)
MR. SPEAKER: Please speak about the Confidence Motion, not about Uttar Pradesh. ... (Interruptions)
MR. SPEAKER: Please take your seats first.
...(Interruptions)
MR. SPEAKER: This is not good. Please take your seats first.
... (Interruptions)
MR. SPEAKER : Shri Arif Mohammad Khan, please take your seat. The hon. lady Member can continue to speak.
KUMARI MAYAWATI (AKBARPUR) कुमारी मायावती : माननीय अध्यक्ष जी, जब मैं भारतीय जनता पार्टी के करेकटर के बारे में बता रही हूं तो सत्ता पक्ष के लोगों को बड़ी तकलीफ हो रही है। लेकिन मैं अपनी बात रखकर ही रहूंगी, चाहे ये कितना भी हल्ला-गुल्ला करें। मैं बता रही थी कि जब हमने भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय नेताओं को यह कहा कि हम अपने वादे के मुताबिक छः महीने पूरा होने पर आपको सत्ता सौंप देंगे। लेकिन हमारी भी एक शर्त है कि अगले छः महीने के लिए तो उत्तर प्रदेश का मुख्य मंत्री आपके कोटे से बनेगा, लेकिन विधान सभा का स्पीकर बहुजन समाज पार्टी के कोटे से बनना चाहिए। जब यह बात हमने रखी तो भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय नेताओं ने हमारी इस शर्त को मानने के बजाए दिल्ली में पार्िलयामेंट एनेकसी में प्रेस कांफ्रेंस बुलाई। जिसमें श्री एल.के. आडवाणी और श्री अटल बिहारी वाजपेयी तथा इनके दूसरे साथी भी मौजूद थे। उसमें हमारी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मान्यवर कांशी राम जी और मैं भी मौजूद थी। उस प्रेस कांफ्रेंस में भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री एल.के. आडवाणी जी ने प्रेस मीडिया के माध्यम से पूरे देशवासियों को यह आश्वासन दिलाया था कि भारतीय जनता पार्टी किसी भी पार्टी के विधायक को नहीं तोड़ेगी। भारतीय जनता पार्टी स्पीकर की पावर का दुरूपयोग नहीं करेगी। भारतीय जनता पार्टी के कोटे से यदि स्पीकर एज इट इज रहता है तो हम विश्वास दिलाते हैं प्रेस मीडिया के माध्यम से पूरे देशवासियों को कि वे अपनी पावर का दुरूपयोग नहीं करेंगे और किसी भी पार्टी के विधायकों को नहीं तोड़ेंगे। हमने भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय नेताओं की इन बातों पर भरोसा करके छः महीने पूरे होने पर अपने वादे के मुताबिक इनको सत्ता सौंप दी। लेकिन दुख के साथ कहना पड़ता है कि सत्ता सौंपने के बाद भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने हमने जो छः महीने के शासनकाल में दलितों, पिछड़ों और अकिलयतों के हित में काम किए थे, यही नहीं उत्तर प्रदेश में सर्वसमाज के हित को ध्यान में रखते हुए जो भी हमने काम किए थे और महत्वपूर्ण फैसले लिए थे, उनको एक-एक करके बदलना शुरू कर दिया। इसके बाद हमने इनसे समर्थन वापस ले लिया और उसके बाद भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने ।
  उन्होंने बहुजन समाज पार्टी ही नहीं, कांग्रेस पार्टी और अन्य दलों के विधायकों को भी तोड़ा और अपनी पावर का दुरूपयोग किया। इतना ही नहीं, भारतीय जनता पार्टी कहती है कि हम भ्रष्टाचार के खिलाफ हैं। हमारे विधायकों को तोड़ा गया और खरीदा गया, तो वह पैसा कहां से आया।
SHRI SATYA PAL JAIN : I am on a point of order. The conduct of the Speaker of U.P. cannot be discussed in this House. (Interruptions)
MR. SPEAKER : Please conclude.
SHRI SATYA PAL JAIN : Sir, I am on a point of order.
MR. SPEAKER: What is your point of order?
... (Interruptions)
MR. SPEAKER : Please be seated.
Shri Satya Pal Jain, what is your point of order?
SHRI SATYA PAL JAIN : I am on a point of order under rule 352. We cannot discuss the conduct of the Speaker of the Uttar Pradesh Legislative Assembly in this House. She has used some derogatory remarks and those remarks should be expunged. (Interruptions)
___________________________________________________________________________ * Expunged as ordered by the Chair.
THE MINISTER OF HOME AFFAIRS (SHRI L. K. ADVANI): Mr. Speaker, Sir, no references can be made to the conduct of the Speaker of any Legislature in this House. It should be expunged.
KUMARI MAYAWATI (AKBARPUR) कुमारी मायावती : ये कहते हैं कि राजभवन को राजनीति से दूर रखेंगे। मैं पूछना चाहती हूं कि आप राजभवन को राजनीति से दूर रखने की बात करते हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश के स्पीकर महोदय ने स्पीकर के पद को राजनीति के लिए इस्तेमाल किया ।(व्यवधान)
SHRI L. K. ADVANI: Sir, what is your ruling?
MR. SPEAKER: I will go through the record and if there is anything objectionable, it will be expunged.
 
... (व्यवधान)
MR. SPEAKER: Kumari Mayawati, only four minutes have been allotted to your party. Please conclude.
... (Interruptions)
KUMARI MAYAWATI (AKBARPUR) कुमारी मायावती : यह दलित विरोधी पार्टी है और इतना ही नहीं, परम पूज्य बाबा साहब डा. अम्बेडकर, जिन्होंने देश का संविधान बनाया, ... (व्यवधान)
MR. SPEAKER: Please sit down.
... (Interruptions)
KUMARI MAYAWATI (AKBARPUR) कुमारी मायावती : उनकी याद में हमारी सरकार ने उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में बाबा साहब के नाम पर एक बहुत बड़ा पार्क बनवाया था। लेकिन यहाँ ... (व्यवधान)
MR.SPEAKER: This will not go on record.
(Interruptions) * KUMARI MAYAWATI (AKBARPUR) कुमारी मायावती (अकबरपुर): भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने निर्माण कार्य बंद कर दिया और बिजली कटवा दी।
... (व्यवधान)
MR. SPEAKER: This will not go on record.
(Interruptions) * ______________________________________________________________________________ * Not recorded.
** Expunged as ordered by the Chair.
MR. SPEAKER: Now, I call Shri Vaiko to speak.
(Interruptions) * MR. SPEAKER: Only Shri Vaiko's speech will go on record. Kumari Mayawati's speech will not go on record.
(Interruptions) * MR. SPEAKER: This will not go on record.
(Interruptions) * MR. SPEAKER: Kumari Mayawati, please take your seat.
_____________________________________________________________________________ * Not recorded.
">SHRI VAIKO (SIVAKASI): Mr. Speaker, Sir, I am thankful to you for the opportunity you have given to me to take part in the deliberations of this august Chamber. Today's debate in which I participate is going to be recorded in the annals of the political history of India as one of the very significant debates so as to decide the direction of its onward march. The country stands at the crossroads of the history. The political destiny of this great country has been decided by about 370 million people of this country, men and women, aged and the youth, haves and havenots. They exercised their franchise on the 16th, 22nd and 28th February. The outcome of the polls started coming in in the television since the evening of 2nd March. Of course, elections took place on 7th March also in Jammu & Kashmir. The people have given their mandate for the BJP and its allliance partners to form the Government.
I have been listening with rapt attention to the speeches made by Shri Sharad Pawar, Shri Somnath Chatterjee and Shri Rajesh Pilot. They were questioning the very verdict of the people as if the Bharatiya Janta Party does not have a majority. At times, in their speeches they used harsh epithets and strong vocabulary even though they know that they can never defeat this Confidence Motion, voting for which is going to take place tomorrow. This has drawn the attention of the people of India and also the political observers throughout the world. One thing is certain. Our friends from the other side could not find a sense of doubt or not even complacency in our camp. They could witness and understand the inflexible purpose and sure proof of well grounded confidence in the final outcome.
Sir, the national agenda of the BJP and its allied partners was criticised by our esteemed friends here. This country commands tremendous reputation and respect before the eyes of the world as a country committed to democracy, as a country which has withstood the trials and tribulations over time and as a country which carries the flag of Gettysberg ideal of `of the people, for the people and by the people'. Regarding the national agenda for governance, some people say that there is a hidden agenda. But we have put the agenda before the country after deep deliberations and dialogue and a considerable thinking from our side. We have participated in the dialogue, placed our own points of view and finally evolved this agenda. They say that the BJP and its allied partners did not get a majority. The hon. President who is the sheet-anchor of this democratic polity, with right earnestness, invited Shri Atal Bihari Vajpayee to form the Government.
Sir, we follow a system. We have followed the British parliamentary system. The cardinal principle of the British parliamentary system was followed by our forefathers and in their wisdom, when they evolved this Constitution, they have followed the principle of first past the post, whether he or she is the winner. That is the principle. I do not say that it is the only perfect system. But this is the system which we have adopted. There are other systems. In France, unless they get more than 50 per cent, there will be another reconsideration again. Even in the United States of America, although a political party, whether the Republican or the Democrat, gets more votes in the States, it cannot get the chair of the President because of the electoral college system. Here, in India, first past the post is the medal winner. We should take into account that in many other constituencies, out of 630 million total voters, only 62 per cent of them have exercised their franchise. In some constituencies, the candidates who have won irrespective of the political parties, have got 30 per cent or 35 per cent, 40 per cent and even 28 per cent out of this 62 per cent. If you take into account and calculate the total voters of the constituency, they will be having 20 or 25 per cent. In some of the constituencies, the candidates who have won have got lesser votes than what other candidates put together have got. That is the system. So many representatives who have come here do not have 50 per cent of the franchise of their constituencies. The system of who comes the first or first past the post is the medal winner. So, from India, taken as one constituency, Shri Atal Bihari Vajpayee is the winner who first comes the post.
Even in the first general elections of 1952, late Pandit Jawaharlal Nehru, at his pinnacle of glory and fame inherited the legacy and credit of freedom struggle and Independence, The Congress Party could not get 50 per cent of the total votes. Even in the year 1971, when the late Shrimati Indira Gandhi reached the height of political glory after the Bangladesh War, they could not get 50 per cent of the total votes. That is why I would say that she also had a minority Government in 1969. When Shri Narasimha Rao was invited to form the Government, first of all, they got 239 seats along with the allies.
Shri Atal Bihari Vajpayee was invited to form the Government. There is going to be a verdict of the House tomorrow. My humble wish is that the verdict of the people should be reflected by the verdict of the House. This House should reflect and respect the will of the people who have exercised their franchise in the polls. So, the House should reflect the verdict of the people.
They have levelled criticism about the formation of the Bharatiya Janata Party Front. More or less, many of them are pre-poll alliance partners. They have gone beyond their limits in their own way because they were defeated, in their own way because they could not form the Government, in their own way because they could not thrust their will and desire into the minds of the people. But they should not forget one thing. It is not only a multi-party system. We have now nurtured a multi-regional system in our Front which is one of the basic characteristics of the federal system. The question is about the ideology and the way of approach of the partners of the Bharatiya Janata Party Front.
I have the honour to belong to the Marumalarchi Dravida Munnetra Kazhagam. We cherish the ideals of the late lamented Anna. We do not compromise on our basic ideals. I would bring it to the attention of my esteemed hon. friend from that side. When we decided to join this Front after deep deliberation and thinking, we made this firm commitment in our minds: "Let us join this Front for the betterment of the country after witnessing what happened in this country for, more or less, five decades of the Congress rule."

I recall the historic conference of All-India Anna-DMK Silver Jubilee Conference which was held at the banks of river Tamiraparani. I was given a privilege to address more than a million people on 3rd January this year. Hon. Shri Lal Krishna Advani was also present on the dais at that time. The Conference was presided over by the supremo of All India Anna DMK, the then Chief Minister of Tamil Nadu, hon. Dr. Jayalalitha. I emphatically made one point that we are committed to the concept of secularism and have unshakeable confidence in the concept of secularism in its true letter and spirit.

I stated in my speech that let namaz be conducted in every Mosque, right from the Himalayas down to Kanyakumari, prayers may be conducted in every Church throughout the length and breath of this country, pujas may be performed in all the temples, prayers may be held in Gurudwaras, in Bodhvihars, Jain temples and the message of rationalism may also be spread by the torch-bearers of rationalism without any hinderance and without offending anybody. This is the nucleus of secularism.

Sir, I stated that this is a multi-religious, multi-lingual and a multi-ethnic State. This country consists of different religions, different languages, different ethnic groups, different customs, different traditions...

AN HON. MEMBER: ... different nationalities as well.

">SHRI P. CHIDAMBARAM (SIVAGANGA): Mr. Speaker, Sir, on behalf of my party, I rise to oppose the Motion moved by the hon. Prime Minister, Shri Atal Bihari Vajpayee.
Sir, we are a parliamentary democracy. The duty of an Opposition is to oppose and if possible to depose the Government of the day. That does not mean that as long as the Government remains in office, the Opposition will not be reasonable or constructive or helpful or cooperative. But this system of parliamentary democracy can work only if there is an Opposition which is vigilant, an Opposition which is willing to oppose; an Opposition which is ready and willing to bear the responsibility of forming an alternative Government if the need arises; and an Opposition that will not hesitate to depose the Government of the day. This is the role which I believe Shri Vajpayee played when he was the Leader of the Opposition and this is the role that I wish Shri Sharad Pawar will continue to play as long as he is the Leader of the Opposition.
We begin today a new Lok Sabha. Tomorrow, we will vote. Shri Vajpayee may yet win the Vote of Confidence, which he did not in 1996. But, I wish the Government to know that this is not the only test. This is not the last test. This Government will be tested every day on the floor of the House. Therefore, it is better for all of us to recognise the nature of the mandate, the nature of this House.
Sir, there are many Members of this House who have served here much longer than I have. I have been here for almost 13 years. Never, never in the last 13 years has this House been virtually divided right down the middle.
It has had been a party with a massive majority as it was in 1984. It has had been a Government with support which made for it a large majority as was in 1989. There had been a Government which had a tenuous majority but which had support from a large number of others. Never in the last thirteen years had there been a Lok Sabha which had a line dividing the ruling benches and the Opposition benches running right down this corridor which is facing you. That is why I submit most humbly to all distinguished Members of this House, that we should understand the nature of this mandate.
Sir, the National Agenda for Governance starts like this. It says "The electorate has given its verdict BJP and alliance partners have unitedly won, we have the mandate to govern." Sir, I question this. No Party in this country was given a mandate by the people. The largest Party, the BJP has won less than one-third of the strength of this House. The people are unwilling to give a mandate to any Party. Less than one-third is all that they have given to the largest Party which went to the people on a slogan of a stable Government and an able leadership. I have gone through the Manifesto of the BJP, there is not a word about regional parties. In fact please correct me if I am wrong in saying there is no reference to regional parties. There is no reference to a coalition. There is no reference to any alliance. The BJP went to the people in the hope that it would be elected with a majority. It came back to this House with less than one-third members. Even the National Agenda for Governance makes no reference to regional parties. It makes no reference to building an alliance between the national parties and the regional parties. It makes no reference to the phrase that we coined when we were in Government of "cooperative federalism". I think, therefore, we are falling into a grave error. We are not recognising this mandate. This mandate is a fractured mandate as it was in 1996.
 
Sir, there are in this country indigenous bone-setters. You come from the State of Andhra Pradesh. Puthoor, near Tirupati, is famous for indigenous bone-setters. How do they set bones? If you suffer a fracture, the indigenous bone-setters sometimes, not always, break a few more bones and then try to set them right.
SHRI HARIN PATHAK : You did it in 1991.
SHRI P. CHIDAMBARAM : My concern is this. Is hon. Shri Vajpayee trying to play the role of an indigenous bone-setter? I do not want to expatiate on this point.
THE MINISTER OF STATE IN THE MINISTRY OF RAILWAYS AND THE MINISTER OF STATE IN THE MINISTRY OF PARLIAMENTARY AFFAIRS (SHRI RAM NAIK): It is a plastic surgery.
SHRI P. CHIDAMBARAM : Thanks to television, thanks to the many many Channels, the last twenty days, have taken us virtually into the inner rooms of every Party.
Sir, a sober newspaperThe Hindu day before yesterday in a front page article referred to the deals that the BJP was making. I am not using that word myself. I assume that Shri Vajpayee will not make any deals. But why does a newspaper likeThe Hindu describe actions of the BJP in the last twenty days as deals? Were not deals made in many States in this country in the last twenty days, the most recent one being in Himachal Pradesh? I ask Shri Vajpayee who promised us a stable Government and an able leadership to search his conscience and tell us whether deals were made or not.
The word `deal' itself is not pejorative. A deal can be a transparent arrangement. A deal can be a common programme. A deal can even be a grand alliance like in Germany when the Christian Democrats and the Social Democrats came together. Were not deals made in the last twenty days in this country in order to win the majority? Has not the BJP sent out a message that it is willing to pay any price to anybody; it is willing to meet any enemy or any foe; it is willing to arrive at any compromise; it is willing to forget every chapter of the past as long as it can be assured that it will remain in power? That is why, I oppose this Motion of Confidence.
Sir, in this very House, in 1995-96, the House was paralysed for 13 days on a scandal involving the Telecommunication Ministry. Sir, the number `thirteen' has become a magic number. Shri Atal Bihari Vajpayee was the Prime Minister last time for 13 days. We formed a coalition initially of 13 parties. I find that the National Agenda also lists 13 parties. ...(Interruptions) This House was paralysed for 13 days. It was the height of cynicism that the gentleman involved was allotted the telephone symbol when he contested the elections. I thought, that was the height of cynicism. But we have scaled greater heights by inducting him into the Ministry, promising his son a Rajya Sabha seat, making all the members of his party Ministers in the Government.
I know, we cannot talk about the State Governments. We are the Parliament of India. If we cannot talk about governance in the States, what do we talk about? What is India? India is composed of States. The Union Government does not have any separate territory to govern. We have to talk about governance in the States. What about governance in UP of which Shri Mulayam Singh Yadav has eloquently spoken ? Is the Prime Minister happy that his Government there has 95 Ministers? When poor Shri Anjaiah inducted 60 or 65 Ministers in Andhra Pradesh many years ago it was described as an `Airbus Ministry'? What do we call this? ...(Interruptions) Mr. Prime Minister, the point that I am making is this. Is the BJP really concerned about good governance? Or, are we right in drawing this conclusion? I salute you for what you did in 1996 and I am disappointed for what is being done perhaps in your name, perhaps by others in your party, in 1998. The difference between 1996 and 1998 is too apparent to be ignored. Is the BJP today becoming a party willing to pay any price in order to remain in power? Is that the way you have understood this mandate? This mandate of the people of 1998 cannot be understood in that manner. It is a mandate for national parties and regional parties to work together. It is a mandate to reach across manifestoes, to reach across criticisms, to reach across the political dividing line and say "let us work together to build this country".

I am disappointed by the tone of Shri Geroge Fernandes. Did he win a single friend by his speech today? Was he able to make a single friend by the tone of his speech, contrast was the speech of Shri Barnala?

I think, this mandate is being misunderstood. And if you understand this mandate for a unitarian system, which, I believe, the BJP believes in, if you understand this mandate in that manner, you will use political parties and discard them as you like, like you did to Shrimati Lakshmi Parvathi in Andhra, like you will perhaps do to either Shri Chautala or to Shri Bansi Lal in Haryana. If the regional parties are being used and discarded in order to remain in power, I question your conclusion of this mandate and, therefore, as long as you understand this mandate in this manner, I have to oppose you and I oppose you.

19.00 hrs. The next question, Sir, that I wish to raise is: what will we measure them by? They ask us to vote on what? Obviously they are not asking us to vote for them on the strength of their manifesto because they have given up many parts of their manifesto, at least, temporarily. I do not know when they will be revived. I do not know when they will be directed to revive it.

Only a few days ago, the RSS held a conclave, I believe, in Bangalore and this is what many newspapers reported. I am reading from a digest of these reports put forward by the Press Information Bureau after your Government took over.

"The RSS has asserted it would play an influential role in the functioning of the BJP-led coalition Government while conceding that its hands were tied on the Kasi, Madura and Ayodhya issues."

Sir, I quote: "At an appropriate time, the three issues would be settled through an Act of Parliament, the RSS General Secretary Mr. H.V. Sheshadri said."

Whose agenda is this? Is this the hidden agenda?

"The RSS would have preferred the BJP to form a Government on its own. Such a Government would not have put many issues on the back burner as has been done now, Sarsangh Chalak Rajendra Singh said yesterday. Thanks to the newspapers.
Is this the hidden agenda? The RSS in the same conclave said and I quote: "Foreign direct investment is not welcome into India and foreign institutional investors must be turned away". Is that the hidden agenda? What is the agenda? What is the programme? What is the plank on which they ask us our support? Obviously it is not their manifesto. But I suspect that there is a hidden agenda. You have a national agenda. You have the President's Address. Between the national agenda and the President's Address, there was enough time to make a considerable advance. Unfortunately, as many papers have reported, the President's Address was simply a reprint of the national agenda. Word by word, sentences were picked out. What do they want us to measure them by? Their national agenda said that foreign direct investment will be welcome in core industries and it will not be allowed in non-priority sectors. The President's Address dropped the last part of that sentence and the Finance Minister's speech introducing the Interim Budget dropped the last part. Is the omission significant or is it inadvertent? I do not know.
When they ask us for our support, they must put forward a coherent programme. There is a difference. And I am not trying to score a debating point here. There is a difference between the national agenda and the Common Minimum Programme as every newspaper has commented. I do not have to go very far. Take India Today, a magazine which broadly supported them during the election campaign and it has every right to support them. They have every right to support them. They have every right to editorially support them, every right to editorially say that theirs is perhaps the most likely party which can give a stable Government. Even that magazine in its editorial after the national agenda described it as vacuous, described it as simply empty words. There was no programme.
Contrast it with the CMP. I am not saying everything that we wrote in the CMP is right. I am not saying that is the last word on what a programme should be. But there is a vast qualitative difference between an agenda which they have put forward and a programme that we had put forward.
Even today Mr. Prime Minister, you are un willing to come forward with a programme. The President's Address was an opportunity. The Finance Minister's speech introducing the Bill was an opportunity. But the Prime Minister did not take that opportunity. I suspect that he is unable or unwilling to put together a coherent programme.
Let me highlight one or two things. Again I am not trying to be critical. I am only trying to point out where we find them wanting.
There are many river disputes in this country. One such is the Cauvery dispute. There are two sides to it and every Member of Parliament will naturally speak up for the State he represents. There is a Tribunal. That Tribunal has given an Award. That Award has to be notified. For one reason or the other, - I include the Congress Government, I include the United Front Government, and, therefore, I am not scoring a point here. I am not trying to score a political point, - that Award has not been notified. That is the crux of the matter. There are rival positions. What is your programme? (Interruptions).
SHRI VAIKO : Shri Chidambaram, will you yield for a minute?
SHRI P. CHIDAMBARAM : I will yield to you in a minute. Let me just complete the thought. I include the Congress Government; I include the United Front Government. For one reason or the other, they were not been able to notify it.
What is your programme? The difference between an agenda and a programme is highlighted by this example. You do not say that the Award, under the law of today, has to be notified, nor do you say that the Award by virture of supervening circumstances cannot be notified. What you say is that you would have a National Water Policy which will evolve a system for settlement of disputes. But that is not a programme. That has not satisfied anyone; that has not taken you far and that simply puts the issue on the backburner. You could have come forward with a programme. But you are unwilling to come forward with a programme. I could multiply the examples, but I will not do so because there is a constraint of time. You are asking us to support you on no programme at all.
In fact, a number of editorials have been written in the last few days. Where is the programme of this Party? Where is the programme of the Prime Minister? Where is the programme of this alliance? When you ask us to support you without a programme, it will mean that there is a hidden agenda and at an appropriate time, after discarding some of your present friends and, perhaps winning some new friends who are hiding behind the corner, you are likely to reveal your true agenda and without knowing your agenda, we cannot support you. We have to oppose your Government where there is no agenda or no programme.
SHRI VAIKO : May I know from my hon. friend, Shri Chidambaram what steps did he take for implementation of the Award? As a constituent party of the United Front Government when steps were taken not to implement the Award under the guise of talks, when the Tamils were betrayed, what role did he play as a constituent part of the United Front Government?
SHRI P. CHIDAMBARAM : My learned friend should know that not once but twice I said that both Governments could not notify the Award. I thought that the Prime Minister understood it; the Home Minister understood it and I am sure he will understand it in course of time. (Interruptions).
Finally, I have to oppose you because you started on a wrong foot. In the last few days many statements were made which undermine the confidence of the people of India. (Interruptions). I will take just as long as the hon. Speaker will allow me and I am not going to take longer time than my distinguished predecessor did.
We heard so many voices for fifteen days on television. So many people were speaking in so many voices. One of the pitfalls is of taking too long to form a Government and the pitfall is of having too many television channels.
We have heard some extraordinary statements. One of their Ministers said that the only trade left in Thailand was the flesh trade. As External Affairs Minister, Shri Vajpayee will have to answer it when he visits South-East Asian countries. Ministers have said that Foreign Direct Investment is not welcome to this country, Ministers have said that the rupee must go back to Rs.17 a dollar, as it was in 1990-91, Ministers today have said that there should be a lock-in period for Foreign Institutional Investment. I agree, others have corrected it. That is why their alliance looks like a Tower of babel. If nobody had corrected it, at least that would have been the policy. If one present Minister says that the rupee must be Rs.17 to a dollar and nobody corrects him or her, that would be the policy, but when you correct that, it becomes a Tower of Babel.
You are undermining confidence. Please remember that at any given time, the country's economy will have strengths and weaknesses. I have been a Minister here, I have been in the Opposition also. I have never exaggerated India's strength, I have never under-estimated India's weaknesses. In fact, 1996-97 was a good year, following two good years. We have reported 7.5 per cent growth. But 1997-98 was not a good year. 1997-98 has been a year of slowing down. We will probably end up with a growth of five to six per cent. But Mr. Prime Minister, you know, a hundred countries in the world and a hundred Prime Ministers will give one arm and one leg to have five to six per cent growth. It is not enough for India. India needs seven per cent growth. I congratulate you for the statement that India needs and will attain seven to eight per cent growth. I warmly congratulate you for accepting high growth as an ideal. But you cannot achieve that growth by undermining confidence. Whichever Government begins in this Lok Sabha - and your Government has made a beginning today - starts with tremendous advantages and, at the same time, with many disadvantages. One is not blind to the disadvantages. Growth has slowed down. There is no recession. It has slowed down to five to six per cent. Industrial growth has slowed down.
Thanks to the previous year of record agricultural harvest, statistically, last year's agricultural harvest will show a decline. The services sector continues to be buoyant. There are problems. Yet, please remember, In 1991, Dr. Manmohan Singh inherited a billion dollars foreign exchange. On 1st of June, 1996, the United Front Government inherited 17 billion dollars foreign exchange and in 1998, we leave to the Government of the day 24 billion dollars foreign exchange. Is that not an advantage? I would urge hon. Members not to venture adventurous statements on foreign exchange without understanding the nature of foreign exchange. They will understand it in course of time.
The second thing is inflation. In 1991, Dr. Manmohan Singh inherited an average inflation of ten per cent. In 1996, the United Front Government inherited an average inflation of 7.5 per cent, and we have left to the Government of the day an average inflation of not more than five per cent. Is that not an advantage? India's debt service ratio has come down to 24 per cent from a high of 35 per cent and India's debt to GDP ratio has come down to 20 per cent the lowest ratios achieved in the last many many years. We will soon be rated not as a moderately indebted country but as a less indebted country. India's short term debt is less than seven per cent. Is that not an advantage? Instead of building confidence, instead of augmenting confidence, in the last fifteen days, the Ministers of your Government, the spokesmen of your Government have undermined confidence in India. Look at what happens to the institutional investment market.
Because of the elections, because of the high degree of political uncertainty, in November, December and January institutional investment was negative. In February, there was net institutional investment worth 200 million dollars. In March, the first week was positive, the second week was neutral and in the third week we are turning negative. ...(Interruptions)
MR. SPEAKER: Please wind up.
... (Interruptions)
SHRI P. CHIDAMBARAM : Please do not undermine their confidence. ....(Interruptions)
MR. SPEAKER: Please wind up.
SHRI P. CHIDAMBARAM : Please do not undermine their confidence. On political issues, on economic issues and on international issues, statements made in the last 15 days have shaken their confidence in this country. For that reason, we have to oppose their Motion of Confidence.
Sir, I believe that we are at a stage in history where the Indian people are carrying on a number of political experiments. The whole nation looks like a laboratory. Every time an experiment is made it is unmade. Nothing is certain. A high degree of political uncertainty characterises India today as it did over the last two years. Therefore, whoever is in Government, whoever occupies authority, whoever is in opposition has to behave with a great degree of responsibility. I do not believe that our opposition to you is irresponsible, nor do I believe that your asking for our support under the circumstances is undeserved. But let us remember that we find ourselves in the middle of an experiment. A great political churning is going on in this country. I do not know what the churning will throw up. I only want to draw your attention to some very thoughtful articles that have appeared recently in the Press - one by Prof. Kancha Yelliah of the Osmania University and one by Shri Pandian. The churning is throwing up a set of players and a set of parties which may go against the grain of democratisation in this country. I do not know where the BJP stands here, but I suspect that it stands for a unitarian system where plurality is crushed and plurality is ignored. That would be a great danger. I am not yet confident that you understand the plurality of India.
 
SHRI RAM NAGINA MISHRA (PADRAUNA) श्री राम नगीना मिश्र (पडरौना): आपने तो देश को विदेशियों के हाथ में बेच दिया।
... (व्यवधान)
SHRI P. CHIDAMBARAM : I am not confident that you understand that India, today, is throwing up, the Indian people are throwing up a number of political parties because they are satisfied with none. There were 29 political parties in the last Lok Sabha. Now, there are 41 political parties. ....(Interruptions)
MR. SPEAKER: Shri P. Chidambaram, please wind up.
SHRI P. CHIDAMBARAM : I have no evidence at all that your Government understands the plurality of India. Therefore, I have to oppose your Government.
With these words, I submit that this Motion of Confidence should be defeated and I oppose this Motion.
">"> सूचना और प्रसारण मंत्री (श्रीमती सुषमा स्वराज): अध्यक्ष जी, आज सुबह से इस सदन में हमारी सरकार के विश्वास मत पर चर्चा चल रही है। विश्वास मत की चर्चा में विपक्ष के तेवर आक़ामक होना बहुत स्वाभाविक है किंतु इस बार की चर्चा में आक़मण की बजाए सतर्क होने की बैचेनी ज्यादा दिखाई दे रही है। विपक्षी बैंचों से जो भाषण हुए हैं, उनमें से कुछ के स्वरों में सरकार न बना पाने की छटपटाहट थी तो कुछ की वाणी में सरकार चले जाने की हड़बड़ाहट थी। लेकिन मुझे खुशी है कि हमारी ओर से विश्वास मत रखते हुए प्रधान मंत्री जी ने आत्मविश्वास के साथ-साथ पूरे संयम और धीरज के साथ अपनी बात रखी।
  मुझे दु:ख हुआ, चिदम्बरम जी, आपने जॉर्ज साहब के भाषण का उल्लेख तो किया, किन्तु जिन्होंने विश्वास मत रखा था, उनके भाषण की ओर आपका ध्यान नहीं गया। प्रधान मंत्री जी के भाषण में, चिदम्बरम जी, आज के वर्तमान राजनीतिक हालत की चिन्ता भी थी, भारत की वर्तमान दुर्दशा की वेदना भी थी और सर्वानुमति से इन चीजों का निदान करने के लिए साथ-साथ चलने की अपील भी थी। अटल जी ने नेत्ृात्व में जो सरकार देश में बनी है, वह केवल मतदाताओं के जनादेश को लेकर नहीं बनी है, वह देश और विदेश में रहने वाले आम भारतीयों की शुभेच्छा को लेकर भी बनी है तथा उनकी शुभ-कामनायें और दुआयें लेकर भी बनी है। इसलिए मैं कहना चाहूंगी कि , यहां बैठे हुए कुछ लोगों को व्यकितगत रूप से यह सरकार पसन्द हो या न पसंद हो, लेकिन लोकतन्त्र का तकाजा है कि हम इस जनादेश का आदर करें, इस जन-भावना का आदर करें।
  महोदय, अटल जी को पूरे देश में प्रसिद्धी प्राप्त है। उससे सदन में बैठा हुआ कोई भी नेता अपरचित नहीं है। आज केवल लोग विश्वास मत के परिणाम की प्रतीक्षा नहीं कर रहे हैं, बल्िक यह विश्वास मत उन्हें मिले, इसकी दुआयें भी कर रहे हैं। आज शरद पवार जी ने अपने भाषण में कहा कि बीजेपी को केवल ३६ फीसदी वोट मिला है और यह जनादेश सरकार बनाने का नहीं है। मैं शरद जी को याद दिलाना चाहती हूं, वे सदन में उपस्िथत नहीं हैं, मैं आपके माध्यम से अपनी बात उन तक पहुंचाना चाहती हूं कि, यदि जनादेश का मतलब ५१ फीसदी मत प्राप्त करके सरकार चलाना   है, तो हिन्दुस्तान के लोगों ने कभी भी कांग्रेस को सरकार बनाने का अधिकार नहीं दिया था। ४० वषर्ों तक ३२ फीसदी मत प्राप्त करके आपने सरकार चलाई है और इस देश का ६८ प्रतिशत मतदाता आपके खिलाफ खड़ा रहा है, लेकिन...
PROF. P.J. KURIEN (MAVELIKARA): In the 1984 elections, the Congress Party had got 54 per cent vote. You check your record. Do not mislead the House.
SHRIMATI SUSHMA SWARAJ (SOUTH DELHI) श्रीमती सुषमा स्वराज : मैंने इसीलिए ४५ में से ४० साल कहा है। कितने वर्ष ३२ फीसदी मत प्राप्त करके सरकार चलाई है - यह बताइए? कया आपने ३२ फीसदी मत प्राप्त करके इस देश में वषर्ों तक सरकार नहीं चलाई ? इसीलिए मैं कहना चाहती हूं ... (व्यवधान) मैंने इसीलिए ४५ में से ४० वर्ष कहा है। १९८४ का चुनाव साधारण चुनाव नहीं था। मैंने वह पांच वर्ष निकालकर बात कही है। ३२ फीसदी मतों पर आपने इस देश में सरकार चलाई है। इसलिए ऐसा भ्रामक प्रचार करके आप जनभावना के साथ खिलवाड़ न करें और जनादेश का निरादर न करें।
  अध्यक्ष जी, आज सुबह से आरोपों की झड़ी लग रही है और तीन बातें कही जा रही हैं - उत्तर प्रदेश का उदाहरण दिया जा रहा है, सुखराम जी का नाम लिया जा रहा है और जयललिता जी का उल्लेख किया जा रहा है। जहां तक उत्तर प्रदेश का सवाल है, मैं पूछना चाहती हूं कि, सारी उम्र जिन चालों को चल कर आप सत्ता से चिपके रहे और हमारी एक बार की चाल से बोखला गए। जिन महानुभाव ने उत्तर प्रदेश के राजभवन से काम किया, कोई भी आदमी उसका जवाब शराफत से नहीं दे सकता था। जिस तरह की चालें, कुचालें वे वहां बैठ कर चल रहे थे। वे धांधली पर धांधली करते जायें और सामने खड़ा हुआ मार खाता रहे - यही नैतिकता है, यहीं आदर्श है, यही सिद्धान्त है?
...(व्यवधान)
SHRI AJIT JOGI (RAIGARH): Mr. Speaker, Sir, the conduct of the Governor cannot be discussed here. She is a responsible Minister. She should behave responsibly.
MR. SPEAKER: Please take your seat.
... (Interruptions)
MR. SPEAKER: This is not good. Please take your seat.
SHRI MADAN LAL KHURANA (DELHI SADAR) श्री मदल लाल खुराना: उन्होंने गवर्नर महोदय का नाम नहीं लिया है। ... (व्यवधान)
SHRI AJIT JOGI : Mr. Speaker, Sir, I am on a point of order. The conduct of the Governor cannot be discussed here in this House.
MR. SPEAKER: When your turn comes you can rebut it.
SHRI VIJAY GOEL (CHANDNI CHOWK) श्री विजय गोयल (चांदनी चौक) : अध्यक्ष जी, इसी सदन में रमेश भंडारी जी के कन्डकट पर चर्चा हुई है।
... (व्यवधान)
... (Interruptions)
MR. SPEAKER: Nothing will go on record.
(Interruptions) * MR. SPEAKER: Please take your seat.
 
... (व्यवधान)
SHRIMATI SUSHMA SWARAJ (SOUTH DELHI) श्रीमती सुषमा स्वराज : अध्यक्ष जी, जब वहां से मायावती जी स्पीकर के पूरे कंडकट की चर्चा करती हैं तब तो आप चुप रहते हैं। मैंने तो किसी का नाम नहीं लिया।
MR. SPEAKER: This is not good.
SHRI BHUBANESWAR KALITA (GUWAHATI): That has been expunged from the records. ... (Interruptions)
MR. SPEAKER: If there is anything objectionable, I will expunge it from the records.
 
... (व्यवधान)
SHRIMATI SUSHMA SWARAJ (SOUTH DELHI) श्रीमती सुषमा स्वराज : अध्यक्ष जी, जिस तरह से संस्कृति ने हमें आदशर्ों के लिए मरना सिखाया है उसी संस्कृति के नीतिकारों ने हमें यह भी बताया है कि हर बार मर कर आदशर्ों की रक्षा नहीं होती, बहुत बार दुष्टों को मार कर आदशर्ों की रक्षा की जाती है। इसीलिए पहली बार "शठे शाठयम समाचरेत," हमने यू.पी. में इन लोगों को मात दी है। इसीलिए ये बौखला रहे हैं, बार-बार खसिया रहे हैं और हर बार यू.पी. की बात करके हमारे ऊपर आरोपों की झड़ी लगा रहे हैं।
... (व्यवधान)
MR. SPEAKER: No running commentary please. You will also get an opportunity to make your points.
... (Interruptions)
MR. SPEAKER: It is not good.
 
... (व्यवधान)
  * Not recorded.
  SHRIMATI SUSHMA SWARAJ (SOUTH DELHI)   श्रीमती सुषमा स्वराज : अध्यक्ष जी, सुबह से बहुत बार ये सुख राम जी का का नाम ले चुके हैं। शरद पवार जी यहां बैठे होते तो मैं उन्हें बताती कि सुख राम जी सुख तो आप ही को देकर गए हैं, यहां तो सूखा हुआ राम आया है जिससे देश को किसी तरह का कोई खतरा, कोई नुकसान होने वाला नहीं है। उनका सुख आपने बहुत वषर्ों भोग लिया। ... (व्यवधान)
  अध्यक्ष जी, सुबह से बहुत बार इन्होंने जयललिता जी के संबंध में बात की और सोमनाथ जी ने तो अपने भाषण का एक-तिहाई जयललिता जी पर डिवोट कर दिया। सोमनाथ   दा यहां बैठे होते तो मैं उनसे पूछती कि सेकयूलरिजम के नाम पर, जिस पार्टी के साथ वह सरकार बनाने की बात कर रहे थे, कया उसी कांग्रेस के शरद पवार जी ने जयललिता जी से सहयोग करके सरकार बनाने की बात नहीं की थी? मैं चुनाव पूर्व गठबंधन की बात नहीं कर रही हूं। एक जरा सी नाराजगी की भनक मिलते ही झपट कर दांव मार लो, कया इसके लिए शरद पवार जी ने जयललिता जी से गुपचुप संपर्क नहीं साधा था? बकायदा टी.वी. पर ऐलान किया था कि हम जिन लोगों से संपर्क कर रहे हैं उसमें जयललिता जी भी शामिल हैं। आज वे यहां व्यंग्य कस कर कह रहे थे कि चिट्ठी आ रही है। मैं पूछना चाहती हूं कि कया उसी चिट्ठी के लिए पलक पांवड़े शरद पवार जी इंतजार नहीं कर रहे थे?
... (व्यवधान) इसलिए मीडिया ने लिखा था।
  कि एक चिट्ठी का दो जगह पर इंतजार हो रहा है, दो लोगों को इंतजार हो रहा है। लेकिन हमें मालूम था कि चिट्ठी हमको ही आएगी और आई भी। लेकिन बाद में, अंगूर खट्टे हैं यह सोचकर यदि शरद पवार आज खसियाएं और यहां खड़े होकर व्यंग से यह बात कहें, तो यह बाद उन्हें शोभा नहीं देती है।
  अध्यक्ष महोदय, सोमनाथ जी ने आधा भाषण जयललिता जी पर और आधा भाषण हिंदुत्व पर दिया। मैं चाहती थी कि मेरे भाषण के समय सोमनाथ जी और शरद पवार जी यहां बैठे होते तो मुझे बोलने में जरा ज्यादा आनंद आता। सोमनाथ जी एडवोकेट हैं। वे उस सुप्रीम-कोर्ट की जजमेंट का हवाला तो देते हैं जिसमें सेकयुलरिज्म को basic feature of the Constitution बताया गया है। लेकिन उसी सुप्रीम-कोर्ट ने जिस जजमेंट में हिंदुत्व की परिभाषा दी है शायद वह जजमेंट सोमनाथ जी की नजर से नहीं गुजरा।
... (व्यवधान) शायद उन्होंने पढ़ने की जहमत नहीं उठाई।
  अध्यक्ष जी, अगर सोमनाथ जी यहां होते तो मैं उनको पढ़कर सुनाती। लेकिन अब आपके माध्यम से इस सदन को सुनाना चाहती हूं। यह १९९४ का जजमेंट है और यह जजमेंट रिव्यू नहीं हुआ है।
... (व्यवधान) कौन पैटिशनर है, कौन जज है, इस बात का खुलासा देकर मैं बताना चाहती हूं। अध्यक्ष जी, एम.ईस्माइल फारूखी एंड अदर्स बनाम यूनियन ऑफ इंडिया एंड अदर्स। साइटेशन लिख लें, सोमनाथ जी को बताने के लिए। यह १९९४(६) एस.टी.सी. पेज ३६ पर है। यह भी बता दूं कि जजमेंट किनका है। जस्िटस भरूचा और जस्िटस अहमदी। वही जस्िटस अहमदी जो बाद में हिंदुस्तान के न्यायाधीश हुए। सुप्रीम कोर्ट और हिंदुस्तान के न्यायाधीश के सवर्ोच्च पद पर बैठे। मैं केवल दो पैराग्राफ पढ़कर बताती हूं।
... (व्यवधान)
  एक माननीय सदस्य : आप वकील हैं (व्यवधान)
SHRIMATI SUSHMA SWARAJ (SOUTH DELHI) श्रीमती सुषमा स्वराज : सोमनाथ जी भी वकील हैं, इसलिए वकील का जवाब तो वकील ही देगा। इसलिए मैं कहती हूं कि अदालत में यह ट्रेनिंग है कि अपने पक्ष का जजमेंट तो पढ़ो लेकिन विरोधी पक्ष का जजमेंट भी पढ़ो। पता नहीं इतने सीनियर एडवोकेट होकर भी वह इस जजमेंट को पढ़ना कैसे भूल गये?
  अध्यक्ष जी, जस्िटस अहमदी और जस्िटस भरूचा ने जो अलग से जजमेंट लिखी है उसमें कहा है कि -
"Hinduism is a tolerant faith. It is that tolerance that has enabled Islam, Christianity, Zoroastrianism, Judaism, Buddhism, Jainism and Sikhism to find shelter and support upon this land."

  मैं जो कहना चाहती हूं उस पर आप गौर करें।

"Ordinarily, Hindutva is understood as a way of life or as a state of mind and it is not to be equated, I repeat, it is not to be equated with or understood as a religious Hindu fundamentalism."

  हिंदुत्वा को रिलीजियस फंडामेंटलिज्म से इकवेट मत कीजिए। हिंदुत्वा एक जीवन जीने की पद्धति है और यह बात सुप्रीम कोर्ट ने कही है। अगर सुप्रीम कोर्ट की जजमेंट जिसमें सेकयुलरिज्म को बेसिक फीचर ऑफ द कांस्टीटयूशन माना है, तो भारतीय जनता पार्टी ने अपने नेशनल एजेंडा पर, गवर्नेंस में, और राष्ट्रपति के अभिभाषण में उस सेकयुलरिज्म के प्रति अपने कमिटमेंट में अन-इकिववोकल टर्मस में बताया है। लेकिन हिंदुत्व की जो परिभाषा सुप्रीम कोर्ट ने दी है, अच्छा हो अगर आप उसे भी अपने जहन में उतार लें, ताकि हमारे नेशनल एजेंडा पर, हमारे घोषणा पत्र का हिंदुत्व आपको कम्युनल न लगे। उसमें आपको साम्प्रदायिकता और फिरकापरस्ती की बू न आए। जहां तक आपके सेकयुलरिज्म की परिभाषा का सवाल है तो आपकी परिभारषा तो मौके के अनुसार बदलती रहती है। कभी आप जम्मू में हिंदू कार्ड चलाकर वोट मांगते हैं, कभी आप दिल्ली में सिख विरोधी कार्ड चलाकर वोट मांगते हैं तो कभी आप केरल में मुस्िलम लीग के साथ सरकार चलाते हैं, कभी आप मिजोरम में रूल अकोर्िडंग बाईबल का वायदा करके वोट मांगते हैं । केवल आप ही नहीं संयुकत मोर्चा के लोग भी सुबह और शाम अकाली-भाजपा गठबंधन को देश का सबसे बड़ा फिरकापरस्त गठबंधन कह करके गाली देते हैं। लेकिन जब उनका सेकयुलरिज्म उनके पूर्व प्रधान मंत्री को देश में एक भी सीट जीतने की क्षमता नहीं देता, तो उसी अकाली दल की बैशाखी पर चढ़कर उनके पूर्व प्रधान मंत्री लोक सभा में पहुंचते हैं। यह है आपका सेकयुलरिज्म। यहां बैठकर मुलायम सिंह यादव बहुत बातें कह रहे थे। मेरी दिककत यह है कि सब अपनी-अपनी बात बोलकर चले गये लेकिन जब जवाब सुनने की बारी आई तो कोई उपस्िथत नहीं है। आप परौकसी के जरिये उनको जवाब पहुंचा दीजिएगा। मुलायम सिंह यादव यहां बैठकर आरोप लगा रहे थे।

 

... (व्यवधान)

SHRI RAM NAIK (MUMBAI-NORTH) श्री राम नाईक : वह घर पर बैठ कर सुन रहे हैं।

... (व्यवधान)

SHRI SHYAM BIHARI MISHRA (BILHAUR) श्री श्याम बिहारी मिश्र (बिलहौर) : उन्होंने यहां बैठने का साहस नहीं किया, इसलिए चले गए।

... (व्यवधान)

SHRIMATI SUSHMA SWARAJ (SOUTH DELHI) श्रीमती सुषमा स्वराज : मुलायम सिंह जी यहां बैठ कर आरोप लगा रहे थे कि अटल जी को तो मंत्रिमंडल भी बनाने की स्वतंत्रता नहीं है। संघ की सलाह पर मंत्रिमंडल बनाया जा रहा है। अगर मैं मुलायम सिंह जी की बात को तर्क के लिए सच मान लूं तो संघ की सलाह पर देश की रक्षा का भार जार्ज फर्नान्डीज के कंधों पर डालने की सलाह दी जाती है तो हिन्दुस्तान को इस सरकार से किसी तरह का खतरा और भय नहीं होना चाहिए, लेकिन यहां तो आरोप लगाने के लिए आरोप लगाए जाते हैं। यहां आरोप लगाया जा रहा था कि बी.जे.पी. मेरे खिलाफ हमेशा अपराधियों को खड़ा करती है। कया मैं उन लोगों का रिकॉर्ड रख दूं जिन को बी.जे.पी. ने मुलायम सिंह जी के खिलाफ खड़ा किया? एक बार श्री उपदेश चौहान को खड़ा किया जो उनकी पार्टी के एम.एल.ए. थे। दूसरी बार श्री डी.पी. यादव को खड़ा किया जो उनकी कैबिनेट के मनिस्टर रह चुके हैं। तीसरी बार श्री अशोक यादव को खड़ा किया जो उन्हीं की पार्टी के सदस्य रह चुके थे। जब वे लोग उनकी पार्टी में होते हैं तो दूध के धुले होते हैं, तब वे सम्मानित विधायक, माननीय मंत्री होते हैं लेकिन जिस समय वे भारतीय जनता पार्टी में आ जाते हैं तो उनका घोर अपराधियों का चेहरा बन जाता है और क़मिनल हो जाते हैं।

19.36 hrs. (Dr. Laxmi Narayan Pandey in the Chair) SHRI TARIQ ANWAR (KATIHAR) श्री तारिक अनवर : इस तरह उधार लेकर कैसे काम चलेगा?

SHRIMATI SUSHMA SWARAJ (SOUTH DELHI) श्री जार्ज फर्नान्डीज ने कांग्रेस और यूनाइटिड फ्रंट के अन्तर्िवरोधों का यहां काफी जिक़ किया। मैं उसे दोहराना नहीं चाहूंगी लेकिन उनका जरूर जिक़ करूंगी जो सोमनाथ दा यहां हमारी और हमारे एल्लाइऐंस के ऐटिटयूड की बात कर रहे थे। वह बार-बार कह रहे थे कि हम ऐल्लाइऐंस पार्टनर्स से पूछना चाहते हैं What is your attitude towards BJP's economic policy and towards BJP's Hindutva? मैं उन्हीं की भाषा में उनसे पूछना चाहती हूं What is your attitude towards GATT, WTO and patent law?

  आपके मार्गदर्शक, स्वयं को कहने वाले राजनैतिक चाणकय कामरेड सुरजीत जिस कांग्रेस के साथ मिल कर सरकार बनाने की बात कर रहे थे, उनका एटिटयूड कया आपके एटिटयूड से मेल खाता है? इसलिए वे तमाम बातें जो अपने यहां घट रही हैं, उनको अनदेखी करते हुए वे जब दूसरों पर आरोप लगाते हैं तो उनका बाद में असर नहीं रहता। वह बात बेअसर हो जाती है। मैं कहना चाहती हूं कि यह तर्क-कुतर्क, कटाक्ष, प्रहार तो बहुत हो गए। इस वाक युद्ध से देश का कोई भला नहीं होने वाला। हम अच्छी बहस करके अच्छे डिबेटर तो कहला सकते हैं लेकिन देश को अच्छे एडमनिस्ट्रेटर और अच्छे रूलर की जरूरत है, अच्छे डिबेटर की जरूरत नहीं है।

  इस देश के सामने बहुत समस्याएं मुंह बाये खड़ी हैं। अभी चिदम्बरम् जी यहां नहीं हैं। वे कह रहे थे और मैं चाहती तो तुरन्त उनकी बात का जवाब देती। वे कह रहे थे कि हम कयों आपका समर्थन करें? आपके नेशनल ऐजेण्डा में कोई प्रोग्राम नहीं है, आपके राष्ट्रपति अभिभाषण में कोई प्रोग्राम नहीं है। आरोप की ध्वनि में उन्होंने कहा कि आपके नेशनल ऐजेण्डा से ही राष्ट्रपति अभिभाषण बना है, बिल्कुल वर्ड फौर वर्ड लिया है। उपेन्द्र जी से मैं कहना चाहूंगी कि अगर नेशनल ऐजेण्डा फौर गवर्नैन्स से राष्ट्रपति अभिभाषण न बनाते तो हम पर अनकनसिस्टेन्सी का आरोप आप लगाते और अगर हमने नेशनल ऐजेण्डा से वर्ड फौर वर्ड राष्ट्रपति अभिभाषण बनाया है तो आप आरोप लगा रहे हैं कि सब कुछ नेशनल ऐजेण्डा से उठा लिया है।

  सभापति महोदय, राष्ट्रपति का अभिभाषण किसी सरकार का नीतिगत दस्तावेज होता है और वह नीति हमने अपने नेशनल ऐजेण्डा फौर गवर्नैन्स से ली तो कया हुआ? वह आरोप लगाते हैं कि हमारे पास कोई प्रोग्राम नहीं हैं। वह पूछते हैं कि हम किसलिए आपका समर्थन करें? मैं कहती हूं कि पैरा दर पैदा पढ़ते जाओ नेशनल ऐजेण्डा फौर गवर्नैन्स को, पैरा दर पैरा पढ़ते जाओ राष्ट्रपति अभिभाषण को, आपको प्रोग्राम के सिवाय उसमें कुछ नहीं दिखाई देगा। मैं पूछना चाहती हूं उधर बैठे हुए साथियों से कि किसी भी बालक को भूखा न सोने देने का संकल्प कया प्रोग्राम नहीं है? बेघरों को २० लाख घर वार्िषक बनाकर देने का संकल्प कया प्रोग्राम नहीं है? ३३ फीसदी आरक्षण देकर महिलाओं को राजनैतिक अधिकार की भागीदारी में बढ़ोतरी करना कया प्रोग्राम नहीं है? पूरे देश की कन्याओं को ग्रेजुएशन तक निःशुल्क शिक्षा देकर शक्षित करना कया प्रोग्राम नहीं है? मेरे यहां से और लोगों को बोलना है, समय कम है वरना मैं सारे पैरा आपको पढ़कर सुनाती और चिदम्बरम् जी की बात का यहां जवाब देती कि किसी पैरा में आपको कार्यक़म दिखाई नहीं दिया? और आप हमसे पूछ रहे हैं कि हम किस प्रोग्राम पर आपका समर्थन करें, हम किस कार्यक़म पर आपका समर्थन करें? मैं पूरे अदब से कहना चाहती हूं कि अगर सर्वानुमति और आम सहमति से सरकार बनाने का समय कभी आएगा तो आज आया है। कयों? न तो हमारे पास इतना बड़ा बहुमत है कि हम विपक्षियों को धता बताकर हेकड़ी से राज चला सकें और न हमारे पास इतना कम बहुमत है कि हम बाहर बैठे हुए कुछ लोगों के दबाव में सरकार चला सकें। आज हम इस दबाव में नहीं कि दूर से कोई बटन दबाकर हमारी सरकार की गर्दन दबोच दे लेकिन इतना बड़ा बहुमत लेकर भी नहीं आए हैं कि आप लोगों के सहयोग के बिना समस्याओं का निदान कर सकें। इसलिए मैं कहना चाहती हूं कि आज वकत है आम सहमति से सरकार चलाने का। देश में सर्वानुमति का वातावरण पैदा करने का आज वकत है। ये समस्याएं वषर्ों से निदान खोज रही हैं लेकिन निदान नहीं मिला कयोंकि या तो राज हेकड़ी से चला या राज दबाव में चला।

  एक माननीय सदस्य : आप हेकड़ी मत बताइए।

SHRIMATI SUSHMA SWARAJ (SOUTH DELHI) श्रीमती सुषमा स्वराज : मैं हेकड़ी में नहीं बोल रही। आप जब थोड़ा भी शोर करते तो मैं चुप कर जाती थी। मुझे मालूम है, अपनी ज़िम्मेदारियों का अहसास है इसलिए मैंने उनको जवाब दिया। लेकिन मैं आपके माध्यम से एक अपील करना चाहती हूं इस सदन के तमाम विपक्षी बैंचों पर बैठे हुए लोगों से कि आइए, इस मुल्क का मुस्तकबिल साथ-साथ चलकर लिखें। आइए, इस देश का नवनिर्माण मिलकर करें, लेकिन निर्माण नफ़रत से नहीं होगा। पूर्वाग्रहों के चश्मे लगाकर अगर आप हमें देखेंगे तो निर्माण नहीं होगा। मेरी केवल एक अपील है। एक बार पूर्वाग्रहों को त्यागकर हमें परखिये।

... (व्यवधान) मैं अपील दोहराना चाहती हूं कयोंकि बीच में शोर हो गया। एक बार पूर्वाग्रहों को त्यागकर हमें परखिये और मुझे उम्मीद ही नहीं, बल्िक विश्वास है कि साथ-साथ हमसफ़र बनकर चलते हुए आपकी सारी मिथ्या धारणाएं समाप्त हो जाएंगी, सारे भ्रम का वातावरण समाप्त हो जाएगा। हिन्दुस्तान में राजनीति तो बहुत हो चुकी लेकिन राज नहीं हुआ। वषर्ों से अघाया हुआ देश स्वराज का इंतज़ार कर रहा है। वषर्ों से अघाया हुआ देश एक अच्छी सरकार का इंतज़ार कर रहा है। अगर नफ़रत को थोड़ी देर ढककर, पूर्वाग्रहों के चश्मे उतारकर ... (व्यवधान)

SHRI A.C. JOS: I want to know one thing from you, if you kindly yield. Shri Chidambaram, in his speech, quoted the decisions taken or statements made in a meeting of the RSS in Bangalore. They said that when time comes, they would take up the issue of building of the temples in Mathura, Varanasi etc. Is it also a method of conciliation?...(Interruptions)

SHRIMATI SUSHMA SWARAJ (SOUTH DELHI) श्रीमती सुषमा स्वराज : भारतीय जनता पार्टी का कोई ऐजेण्डा सीक़ेट ऐजेण्डा नहीं है मैं आपको बता दूं।

  मैं यहां भारतीय जनता पार्टी की सरकार के मंत्री के नाते बोल रही हूं, आर.एस.एस. के स्पोकसपर्सन के नाते नहीं बोल रही हूं।

... (व्यवधान)

SHRI A.C. JOS : I am talking of the RSS which controls the BJP.

SHRIMATI SUSHMA SWARAJ (SOUTH DELHI) श्रीमती सुषमा स्वराज : यह आपकी धारणा है। इसलिए मैं कह रही हूं कि यह जो आपकी धारणा है, मैं आपको यह बात कहती हूं कि साथ चलकर देखिये आपकी मिथ्या धारणाएं समाप्त हो जायेंगी। ऐसे भ्रमों के जाल में आप फंसे हुए हैं। एक समय आप हमें एंटी-दलित कहते थे, कभी आप हमें महिला विरोधी कहते थे, कभी आप हमें अल्पसंख्यक विरोधी कहते थे। अब धीरे-धीरे चीजें हटीं हैं। जिस हिंदू और सिख में आपने दरार डालकर रखी थी, आज पंजाब में वही हिंदू और सिख की इकट्ठी सरकार बन रही है। वे धारणाएं समाप्त हो गई। आज लोग हमारे साथ मिलकर सरकार चला रहे हैं। उनसे उनका अनुभव पूछिये। कितने अच्छे तरीके से वे शासन चला रहे हैं। इसीलिए कह रही हूं एक बार कुछ देर के लिए मौका देकर देखिये, हमसफर बनकर देखिये, अपने पूर्वाग्रहों को छोड़कर देखिये, जिन भ्रमजालों में आप फंसे हुए हैं, ये मिथ्या धारणाएं केवल कम नहीं होंगी, समाप्त हो जायेंगी। यह मैं आपको पूरे विश्वास के साथ कहना चाहती हूं और जैसा मैंने कहा कि एक राष्ट्र के नवनिर्माण का संकल्प हमारे सामने हैं ... (व्यवधान)

SHRI A.C. JOS : Do you mean to say that the RSS will not interfere?

SHRIMATI SUSHMA SWARAJ (SOUTH DELHI) श्रीमती सुषमा स्वराज : सभापति महोदय, मुझे नीरज की चार पंकितयां बहुत पसंद हैं जो इस मौके पर बहुत प्रासंगिक हैं, वे मैं यहां कहना चाहूंगी।

... (व्यवधान)

SHRI KANTILAL BHURIA (JHABUA) श्री कांति लाल भूरिया : चार पंकितयों के पहले धारा ३७० पर बोलिये, आपके उस पर कया विचार हैं।

... (व्यवधान)

SHRIMATI SUSHMA SWARAJ (SOUTH DELHI) श्रीमती सुषमा स्वराज : कभी आप नेशनल एजेंडा को देखिये, वे तमाम मुद्दे जो हिन्दुस्तान के सामने मुंह बाये खड़े हैं, वे उसमें हैं। चार पंकितयां कहकर मैं अपनी बात समाप्त करना चाहूंगी।

  नीरज ने कहा था -

  "निर्माण घ्ृाणा से नहीं प्यार से होता है,   सुख-शांति खड़ग पर नहीं प्रेम पर चलते हैं,   आदमी देह से नहीं नेह से जीता है,   बम्बों से नहीं बोल से वज्र पिघलते हैं।"

  इन्हीं शब्दों के साथ मैं अपील करना चाहूंगी कि इस विश्वास मत के पक्ष में मतदान कर इस सरकार को मजबूती बख्शें। बहुत-बहुत धन्यवाद।

DR. SHAKEEL AHMAD (MADHUBANI) डा. शकील अहमद (मधुबनी): हिन्दू महासभा, उसके बाद जनसंघ, जनसंघ से जनता पार्टी, जनता पार्टी से भारतीय जनता पार्टी, पिछले ७० सालों से यह भाषा कयों नहीं बोली। आज ७० साल के बाद इनकी भाषा बदली है।

... (व्यवधान)

  सभापति महोदय : आप बैठिये।

DR. SHAKEEL AHMAD (MADHUBANI) डा. शकील अहमद : यह धोखे की भाषा लग रही है।

... (व्यवधान)

"> श्री अजीत जोगी : सभापति महोदय, असत्य वादों की खोखली बुनियाद पर खड़ी यह सरकार १९९८ के लोक सभा चुनाव के जनादेश के प्रतिकूल बनी यह सरकार, माननीय अटली जी के नेत्ृात्व में बनी यह सरकार, जिसकी इब्तदा, जिसकी शुरूआत एक सक्षम आदिवासी के साथ धोखाधड़ी से हुई, उस सरकार के द्वारा प्रस्तुत विश्वास मत के प्रस्ताव का पुरजोर विरोध करने के लिए, अपनी पूरी शकित, अपने पूरे मन अपनी पूरी भावना से उसका विरोध करने के लिए मैं खड़ा हुआ हूं।
... (व्यवधान) १९८४ से १९९८ तक की १५ वषर्ों की सियासी यात्रा भारतीय जनता पार्टी ने तय की है। इस संसद में दो सदस्यों से बढ़कर आज ये १६० से ऊपर सदस्य हो गये हैं।
  सभापति महोदय, भारतीय जनता पार्टी की आठ हजार प्रतिशत से ज्यादा ताकत इस सदन में बढ़ी है। यह इसलिए बढ़ी है कि जनता के जजबातों को आपने उभारा है। यह इसलिए हुआ कयोंकि आपने यह कहा था कि हम सौगंध राम की खाते हैं, हम मंदिर वहीं बनाएंगे। आपने यह कहा था कि हम पावन नदी सरयू, गंगा और जमना की सौगंध उठाते हैं हम मंदिर वहीं बनाएंगे। आपने भारत के आराध्य देव भगवान राम की सौगंध खाई, ... (व्यवधान)
SHRI KANTILAL BHURIA (JHABUA) श्री कांति लाल भूरिया: सुनने का साहस रखिए। अब जब भगवान राम की बात आई है, तो आप शोर कयों मचाने लगे, ... (व्यवधान)
  सभापति महोदय : भूरिया जी, आप कृपया बैठिए।
SHRI AJIT JOGI (RAIGARH) श्री अजीत जोगी : एक जमाना था जब जय श्रीराम का उदघोष पूरे उत्तर भारत में गूंजता था। आज वह उदघोष कहां गया? मैं भारतीय जनता पार्टी का नैशनल एजेंडा पढ़ रहा था, लेकिन अब जय श्रीराम का उदघोष, "जय सुखराम" में बदल गया है। हमने कई बार अटल जी को सुना, हम बार-बार उनको सुनते थे और आज तो मैं उनके पुराने भाषणों को भी लाइब्रेरी से निकालकर लाया हूं। उन सभी भाषणों में वाजपेयी जी ने हमेशा कहा था कि कश्मीर हमारा मुकुट है, कश्मीर हमारी आन, बान और शान है, कश्मीर में दो विधान नहीं हो सकते और आर्टीकल ३७० संविधान में नहीं रहना चाहिए। माननीय अटल जी, हमने आपके नैशनल एजेंडे को बड़े ध्यान से पढ़ा, लेकिन उनमें अब कश्मीर आपके के लिए मुकुट नहीं रहा, देश की आन, बान और शान नहीं रहा, ... (व्यवधान)
  अब कश्मीर की अहमियत नहीं रही। अब तो आपके लिए नैशनल कान्फ्रेस के वहां से जीते दो सांसदों की अहमियत हो गई। आपने दिल्ली की गद्दी पाने के लिए, प्रधान मंत्री बनने के लिए, दिल्ली में सरकार बनाने के लिए इतना बड़ा समझौता किया कि आपने अपने पुराने सब सिद्धान्तों को भुला दिया। आपने भारत के मुकुट कश्मीर को भुला दिया, आपने भारत की पवित्र नदियों सरयू, गंगा, यमुना की कसम को भुला दिया, आपने भगवान राम की सौगंध को भुला दिया। आपने अपने सिद्धान्तों के साथ इतना बड़ा समझौता किया कि आपने सबको खत्म कर दिया और यह केवल दिल्ली की गद्दी पाने के लिए किया।
  सभापति महोदय, माननीय अटल बिहारी वाजपेयी जी, हमेशा कहते थे कि भारत समाज एक है, फिर इस समाज में सविल कोड अलग-अलग कैसे हो सकते हैं? सबके लिए एक सी आचार संहिता होनी चाहिए, यूनीफार्म सविल कोड होना चाहिए। आज आपने जो सरकार बनाई है उसमें आप न तो यूनिफार्िमटी की बात करते हैं, न सविल की बात करते हैं और न कोड की बात करते हैं, कहां गया आपका वह भाषण जिसमें हमेशा आप इनकी चिन्ता किया करते थे? मैंने आपका १९९६ का घोषणा पत्र भी पढ़ा और १९९८ का घोषणा पत्र भी पढ़ा। उनमें आपने लिखा है कि आप भय, भूख और भ्रष्टाचार से इस देश को मुकित दिलाएंगे। भ्रष्टाचार के बारे में आपने कया कहा, उस बारे में सब वकता यहां बोल चुके हैं। मैं उन बातों की पुनराव्ृात्ित नहीं करूंगा।
... (व्यवधान)
SHRI LARANG SAI (SARGUJA) श्री लरंग साय (सरगुजा): सभापति जी, मुझे शंका है, इसलिए मैं एक बात का स्पष्टीकरण करना चाहूंगा। मैं जानना चाहूंगा कि म.प्र. के मुख्य मंत्री श्री दग्िवजय सिंह ने इनके बारे में कहा था कि ये सतनामी है और ये आदिवासी है, कया ये वही अजित जोगी हैं?
SHRI AJIT JOGI (RAIGARH) और न प्रयाग संगम, ये चारों तीर्थ मिलकर भी उन दो पापों को क्षमा नहीं कर सकते, ऐसा हमारे शास्त्रों में लिखा है।
  आदरणीय अटल जी , मैं आपकी सरकार और आपकी पार्टी को शास्त्रों की दुहाई देकर कह रहा हूं।
... (व्यवधान)
SHRI VIJAY GOEL (CHANDNI CHOWK) श्री विजय गोयल : कया आप इस सदन का समय बढ़ाने जा रहे हैं? अगर बढ़ाने जा रहे हैं तो फैसला ले लीजिए कयोंकि ८ बज गये हैं।
... (व्यवधान) आप सदन का समय दुबारा नश्िचत कीजिए।
SHRI MADAN LAL KHURANA (DELHI SADAR) श्री मदन लाल खुराना: मेरा प्रस्ताव है कि दोनों तरफ से बोलने वाले वकता काफी हैं इसलिए दो घंटे सदन का समय और बढ़ाया जाये।
... (व्यवधान)

20.00 hrs. SHRI MADAN LAL KHURANA (DELHI SADAR) श्री मदन लाल खुराना : इसके साथ-साथ मैं दूसरी घोषणा कर रहा हूं कि एम.पीज और प्रैस के लिए फर्सट फलोर के कमरा नम्बर ७० में और स्टाफ के लिए कमरा नम्बर ७३ में डिनर की व्यवस्था है। आप बीच-बीच में जाकर डिनर कर सकते हैं।

  एक घंटे का समय और बढ़ा दिया जाए।

... (व्यवधान)

  सभापति महोदय अभी इस पर काफी सदस्य बोलने वाले हैं।

... (व्यवधान)

  सभापति महोदय : सभी माननीय सदस्य बोलना चाहते हैं। ऐसी दशा में दो घंटे का प्रस्ताव रखा था लेकिन माननीय खुराना जी ने स्वयं ही एक घंटे के लिए कहा है। इसलिए मैं सदन का मत जानना चाहूंगा कि कया एक घंटे का समय बढ़ा दिया जाए।

 

... (व्यवधान)

SHRI M. THAMBI DURAI: Mr. Chairman, Sir, I request you to give some preference to the small parties because they may not get a chance tomorrow. The major parties can be somehow accommodated but the smaller parties especially will have to be given time today.

  सभापति महोदय : अभी एक घंटा बढ़ा है।

... (व्यवधान)

  सभापति महोदय : आपका समय पूरा हो रहा है।

... (व्यवधान)

  श्री सान्छुमा खुंगुर बैसीमुथियारी (कोकराझाड) :सभापति महोदय, बात करते-करते इतना वैल्युएबल टाइम खत्म करते जा रहे हैं। लेकिन बोडोलैंड से आए हुए हम जो दुखी हो रहे हैं, उसे बोलने देंगे या नहीं। (व्यवधान)

  सभापति महोदय : आप बैठिए। आपको जब बुलाया जाएगा तब बोलिए।

... (व्यवधान)

SHRI VIJAY GOEL (CHANDNI CHOWK) श्री विजय गोयल : मेरा निवेदन है कि अगले स्पीकर्स के नाम बता दिए जाएं।

  सभापति महोदय : ठीक है।

 

... (व्यवधान)

SHRI AJIT JOGI (RAIGARH) श्री अजीत जोगी : मैं अपनी बात पर फिर से आता हूं। मैं शास्त्रों की दुहाई देकर कह रहा था कि भारतीय जनता पार्टी के दोस्त बात करते हैं। इसलिए मैंने कहा कि शास्त्रों में यह लिखा है -

  सेतुबन्ध रामेश्वरम गंगासागर संगमम मुच्यते सर्वपापघ्रम   न मुच्यते तु मित्रदोहम यति च राजस्य कृतघ्नता।"

 
... (व्यवधान)
  आपने पूरे देश में शास्त्रों की बात बताई है। आपने पूरे देश को शास्त्रों के आधार पर गुमराह किया है। इसलिए हम आपको बताना चाहते हैं कि वास्तव में हिन्दुत्व कया है, वास्तव में शास्त्र कया कहते हैं। दो पाप ऐसे हैं - मित्र के साथ दगा करना और राजा का प्रजा को वादा करके पूरा न करना। इन दो पापों को चारों तीर्थ मिलकर भी क्षमा नहीं कर सकते। आपने राजा बनकर प्रजा के साथ जो वादा किया , आपने कहा, हम राम का मंदिर बनाएंगे और उससे मुकर गए, आपने कहा, हम आर्िटकल ३७० को हटाएंगे और उससे मुकर गए, आपने कहा, हम यूनीफार्म सविल कोड लागू करेंगे और उससे मुकर गए, आपने कहा कि हम भ्रष्टाचार हटाएंगे और उससे मुकर गए।
... (व्यवधान)
  सभापति महोदय : अब आप समाप्त करिए।
SHRI AJIT JOGI (RAIGARH) श्री अजीत जोगी : मेरा समय को सब इन्होंने ले लिया है।
SHRI SATYA PAL JAIN (CHANDIGARH) श्री सत्यपाल जैन : आपकी पार्टी का स्टैंड कया है, आप अपनी बात बताइए।
 
... (व्यवधान)
SHRI AJIT JOGI (RAIGARH) श्री अजीत जोगी : हमने कई बार कहा है कि राम मंदिर के बारे में न्यायालय जो कह दे, उसे मानिए।
... (व्यवधान)
  मैं कह रहा था कि चारों तीर्थ मिलकर भी इस पाप को नहीं धो सकते। ... (व्यवधान) यह इतना जघन्य अपराध है।
... (व्यवधान)
  सभापति महोदय : आप अब समाप्त कीजिए।
SHRI AJIT JOGI (RAIGARH) श्री अजीत जोगी : मुझे बोलने का अवसर ही नहीं मिला।
... (व्यवधान)
  सभापति महोदय : आपका समय पूरा हो गया है।
 
हुआ है:
  "अयम् निज परोवेति, गणना लघुचेतषाम्,   उदार चरितानाम् तु, वसुधैव कुटुम्बकम्।"

  अयम् निज और परोवेति की बात करने वाले जो यह कहें कि मैं मैं और तू तू, जो यह कहें कि मैं बड़ा, तू छोटा, मैं अमीर, तू गरीब, मैं हिन्दू, तू मुसलमान, मैं सिख, तू ईसाई, ऐसा कहने वाले इस देश को नहीं चला सकते। जो इतने उदार चरित का होता है, जो यह कहे "उदार चरितानाम् तु, वसुधैव कुटुम्बकम्" जो यह कहे कि पूरी वसुधा मेरा कुटुम्ब है। ऐसा कहने वाली केवल कांग्रेस पार्टी है। ऐसा कहने वाले केवल हम लोग हैं।

  सभापति महोदय : समाप्त करिये।

SHRI AJIT JOGI (RAIGARH) श्री अजित जोगी : केवल कांग्रेस पार्टी के नेत्ृात्व में ... (व्यवधान)

  सभापति महोदय : जोगी जी, कृपया समाप्त करिये।

SHRI AJIT JOGI (RAIGARH) श्री अजित जोगी : आपने मुझे बोलने नहीं दिया।

... (व्यवधान)

  सभापति महोदय : जोगी जी, बिल्कुल नहीं। अब आप समाप्त करिये।

SHRI MADAN LAL KHURANA (DELHI SADAR) श्री मदन लाल खुराना : जब आपका राज आयेगा, तब बनेगा तो   बनाओ न। (व्यवधान)

SHRI AJIT JOGI (RAIGARH) श्री अजित जोगी : आदरणीय सभापति जी, मंत्री जी मुझे बोलने नहीं दे रहे हैं, व्यवधान डाल रहे हैं। खुद तो मुख्य मंत्री बने नहीं, मुझे टोक रहे हैं। आपको मुख्य मंत्री बनना था, अटल जी ने नहीं बनाया, लेकिन हमारे यहां अवश्य आदिवासी मुख्य मंत्री बनेगा।

  मैं केवल चार पंकितयां कहकर अपनी बात समाप्त करूंगा।

  शर्िमंदा कभी न रूहे मेहनत होगी   हिम्मत है तो हर गांव में नुसरत होगी   वकत चाहे कांग्रेस से गुरेजां हो तो हो   कल वकत को खुद कांग्रेस की जरूरत होगी।

  इन्हीं शब्दों के साथ मैं इस विश्वास मत का विरोध करता हूं और निवेदन करता हूं कि इसे निरस्त किया जाए।

">SHRI V. SATHIAMOORTHY (RAMANATHAPURAM): Before addressing this august House, I express my gratitude towards my eminent leader, AIADMK General Secretary, Dr. Puratchi Thalaivi and the people of my constituency, Ramanathapuram, who have voted for me.
Our hon. Prime Minister has moved the Motion of Confidence. I am of the opinion that the motion had already been placed before the public in the past election. The public has given their consent for the motion. They have voted for a stable and able Government of India. They do not want general elections every year. There was a triangular contest and in the triangular contest, the mandate given was very clear. There is no doubt that the public has called Shri Vajpayee to run the Government by the BJP and its allied parties. The other two fronts, the Congress and the so-called United Front --I will say, it is not a united front but a universally failure Front. The people have totally neglected it. Is anybody bold enough to say that the Congress is approved by the public to run the Government? No one can say it from the Congress side. In the same way, can anyone from the UF say that it is approved by the public or that it has got the mandate of the people in the past elections to run the Government? No one is bold enough to say it but you are opposing the confidence motion. Why are you opposing it? Are you standing together, in a united manner? Have you got any leader to lead the House on behalf of the United Front? There is no leader and there is no unity among you. Then, why are you opposing it? The Indians do not want any more elections in the next five years. Responsible leaders are coming to the House and opposing the verdict of the people. This is the House of the People. The people have decided to put the BJP in the chair of the Central Govt. No one can decide against the decision of the people. No one can take any decision in this House against the verdict of the public. If that verdict is negatived, then the people of India will never forgive the parties concerned.
At the time of the election, our eminent leader, Dr. Puratchi Thalaivi placed the demand before the public that they should vote for an able and stable Government at the Centre. In the meantime, she put forward some more demands.
In the morning, Shri Somnath Chatterjee levelled some charges against our eminent leader. He showed some newspaper. According to that newspaper, he said that there were so many cases against Puratchi Thalaivi Dr. Jayalalitha and her colleagues. I want to say that all those cases have been foisted against her. I want to make it clear and to attribute that the complaint out of all these cases are only the Chief Minister, Shri Karunanidhi. The investigation is by the Chief Minister, Shri Karunanidhi. The chargesheet has been filed by the Chief Minister, Shri Karunanidhi. The Special Court has been formed by the Chief Minister. The Judges of the Special Court are selected by the Chief Minister, Shri Karunanidhi.
At this juncture, I would like to make it clear to the House that Shri Karunanidhi cannot appeared and dispose as prosecution on witness in the witness box. He cannot be summoned to give evidence against our eminent leader. The original sighted witnesses will be called to give evidence. At that time, the truth will come to the light. The House would realise it. After knowing about the truth, Shri Somnath Chatterjee will realise it.
Our eminent leader asked the voters that they should vote to condemn the State Government* Hundreds of persons were killed in Coimbatore. In the past two years, there have been so many bomb blasts in Tamil Nadu. In those unwarranted incidents, hundreds of people were killed. I want to bring it to your notice that Shri L. K. Advani proposed to attend an election meeting at Coimbatore. His life was aimed at by the extremists. Fortunately, the flight was delayed by one hour. But the people of Tamil Nadu would not forget that unfortunate black day of Tamil Nadu. In those horrible bomb blasts, hundreds of persons were killed and more than two hundred persons were wounded seriously. There were ______________________________________________________________________________ * Expunged as ordered by the Chair.
27 bomb blasts on that day. I want to bring it to the notice of the hon. Chairman that this horrible occurrence is itself an evidence* All these incidents were placed before the voters in the recent elections.
The Government of Tamil Nadu had sown disparities amongst the different religious people and also amongst the various castes. There is no law and order in the State. After having realised all these things, the people of Tamil Nadu came to the conclusion that the Government headed by Shri Karunanidhi was unable to maintain law and order and was also unable to stop encouragement of the extremist forces; and also unable to stop the recurrence of the bomb blasts. That is why the people have voted in favour of the AIADMK and sent 30 Members of Parliament from the AIADMK and its allies to this august House. At this juncture I would like to submit that the Government headed by Shri Vajpayee would certainly continue for five years with our support and with the support of the people of India. There is no doubt about it.
In the meantime, I would like to ask our hon. Prime Minister to send a Central machinery for taking action against the Tamil Nadu Government and for taking steps to prevent the Government of Tamil Nadu from committing atrocities. I would also like to ask the Central Government to punish the Tamil Nadu Government for the crimes that have been committed by it so far.
I would like to make clear one more thing. Some doubts have been created by what Shri Somnath Chatterjee had said about the AIADMK and the BJP alliance. He has attributed certain motives for the delay in giving supporting letter to the President. I would like to say that our Party leader is a political fighter. She would fight out the cases foisted against her in the courts of law. She would not send any request or stand before any political leader or before any Government for personal help. She would fight for her rights and for the rights of the people of Tamil Nadu. I would like to make this point clear.
____________________________________________________________________________ * Expunged as ordered by the chair.
MR. CHAIRMAN : Please conclude.
SHRI V. SATHIAMOORTHY : The mandate of the 1996 General Elections suggested that the people wanted to put BJP in power. But it was prevented from being done by some selfish opportunist leaders. The Motion of Confidence was negatived. It should not have been done. The verdict of the 1996 General Elections suggested that the BJP ought to have been given a chance to rule this country.
Alterstep down of the Gujrat Govt. our hon. President would certainly have made Shri Vajpayee as Prime Minister and would allowed him to govern this country till the year 2001 unless otherwise prohibited by the Constitution. If the Constitution had not been the obstacle then the President would certainly have asked the BJP to continue in office and thus mid-term elections would not have been held. If the hon. President had done so, the people would certainly have welcomed it and would have accepted it with plea sure. So, I would again like to submit before the august House not to take any decision against the againt the willingness of the people. In the last two years the United Front Government has decreased the dignity and prestige of India in the international level. Our economy is in crisis. People all over the world are under an impression that the BJP Government headed by Shri Vajpayee can alone regain the prestige lost in the last Govt.and stregthen the economy. That is why our eminent leader has promised an un-conditional support to this Government. In that line, on behalf of my Party AIADMK and on behalf of the people of Tamil Nadu, I confirm my support and welcome the confidence motion moved by Hon. Prime Minister Shri Vajpayee.
 
has spoken just now, has made some reference ... (Interruptions)
SHRI C.P. RADHAKRISHNAN (COIMBATORE): Since the hon. Member has referred to my constituency, I must be given at least five minutes' time. This is my request.
SHRI SANSUMA KHUNGGUR BWISWMUTHIARY : I should at least be given five minutes to speak... (Interruptions)
MR. CHAIRMAN: I am calling your name.
hon. Member who has just spoken. He has made a referrence to a matter which is sub judice.
SHRI BHASKARRAO PATIL (NANDED): Under which Rule he is raising the point of order?
to behave.... (Interruptions)
MR. CHAIRMAN: What is your point of order?
SHRI SANSUMA KHUNGGUR BWISWMUTHIARY : Hon. Chairman and the learned Members of this House, I am thankful to you... (Interruptions) for giving me this opportunity to speak on our burning Bodoland Question.
MR. CHAIRMAN: I have not allowed you.
... (Interruptions)
MR. CHAIRMAN: What is the point of order? Please quote the Rule that has been violated.
... (Interruptions)
be enquired into.
MR. CHAIRMAN: There is no point of order. Please sit down.
... (Interruptions)
MR. CHAIRMAN: Nothing will go on record.
(Interruptions) * SHRI VAIKO: It is not sub judice. He has made his point. There is nothing wrong in it.
________________________________________________________________________ * Not recorded.
MR. CHAIRMAN: Nothing is going on record.
(Interruptions)* SHRI VAIKO : There was a bomb blast in Coimbatore.... (Interruptions)
MR. CHAIRMAN : Please sit down.
... (Interruptions)
MR. CHAIRMAN: Please sit down. I am on my legs.
... (Interruptions)
MR. CHAIRMAN: What is your point of order. Quote the rule.
">SHRI SANSUMA KHUNGGUR BWISWMUTHIARY : Sir, I come from Bodoland which is far away from Delhi. ...(Interruptions)... At least you should try to understand the genuine and aggrieved sentiments of the Bodos living in the North-Eastern India. ...(Interruptions)
MR. CHAIRMAN: You can speak when your name comes.
... (Interruptions)
MR. CHAIRMAN: Your name is in the list.
raised by the hon. Member who has just finished his speech is sub judice. I request you to please go through the record and expunge the relevant portion.
MR. CHAIRMAN: I will examine the record.
SHRI SANSUMA KHUNGGUR BWISWMUTHIARY : Hon. Chairman and the learned Members of the august House, today I rise before you all to table on the floor of the House our genuine demands relating to (1) creation of a separate State of Bodoland on the northern bank of the river Brahmaputra, (2) creation of two Autonomous Districts named Nilachal and Lalung under the Sixth Schedule of the __________________________________________________________________________ * Not recorded.
Indian Constitution on the southern bank of the river Brahmaputra and (3) inclusion of the Bodo-Kacharis living in Karbi Anglong Autonomous District in Assam in the Scheduled Tribes (Hills) List. These are the burning and genuine political demands of the indigenous Bodos.
I appeal to the present Government of India to bring a Constitutional Amendment Bill on the floor of this august House to create the long-awaited separate State of Bodoland on the northern bank of river Brahmaputra inorder to ensure survival and peaceful existence of the Bodos, their safety and security, their all-round growth and development, and to safeguard the distinct ethnic self-identity of the Bodos. Despite being the sons of the soil being the most aboriginal people and the aboriginal autochthones of Assam, we people have been neglected, discriminated, oppressed, suppressed and misruled ever since Independence. Until and unless this demand for creation of a separate State of Bodoland is considered by the Government, whether it is a Government led by BJP or any other party, any attempt to restore peace and to bring all-round development to Bodoland area in Assam or to the entire North-Eastern region will be an absurd idea. That is why, I would like to appeal to the Government of India, particularly to the hon. Prime Minister, to amend paragraph No.28 of the address made by the hon. President on 25th March, 1998 at the joint sitting of Parliament wherein only the three demands relating to creation of Vananchal in Jharkhand area in Bihar, Uttaranchal in Uttar Pradesh and Chattisgarh in Madhya Pradesh are agreed to and the genuine demand of the Bodos is excluded. I would like to appeal to the hon. Prime Minister to amend this paragraph and to include our genuine and most legitimate demand too for creation of a separate State of Bodoland.
I would like to appeal to the Government of India to include the Bodo language in the Eighth Schedule of the Constitution of India. I felt very sad when I was not allowed to take oath as a Member of Parliament on the 23rd March, 1998 on the floor of this august House in my mother tongue. I requested the hon. Speaker to allow me to take oath in my mother tongue, Bodo.
But, because of certain constitutional constraints, I was not allowed to take my oath in Bodo language. Therefore, I would humbly like to appeal to the present Government of India to include our Bodo language in the Eighth Schedule of the Constitution so as to give it and also to the indigenous Bodo people living in India a due impetus, importance, honour, equal status and dignity.
I could not find any precise language to ascribe about all sorts of manifold tragedies and sufferings that are being faced by the Bodo people ever since Independence. The total population of the Bodos in India will be around one crore. We have 45 tribal belts and blocks. But, interestingly, and also unfortunately, what has happened in Assam is that each and every tribal belt and block is now on the verge of being extinguished. So, under such a crucial situation, creation of a separate State of Bodoland has been a must and this is the only and lasting political solution.
All these tribal belts and blocks were created under special provisions, and protective measures were taken up for the protection of tribal lands and areas, but all these seem to have gone in vain now.
A few years ago, an assurance was given that our language would be given the status of associate State official language but that assurance was not implemented as yet. This status was given only for two areas, namely, Kokrajar district and Udalguri Sub-division. This also has not yet been implemented.
On 20th February, 1993, we had signed a Bodo Accord. That was also not yet implemented. All sorts of assurances and commitments given by the then Congress Government at the Centre headed by Shri P.V. Narasimha Rao were not at all implemented. They backed out of their own words.
I would like to appeal to the Government of India, particularly, the present Prime Minister of India and the learned Members of this august House to extend their helping hand and cooperation towards a political solution of the Bodo land problem through peaceful political negotiations without any further delay.
In this connection, I would also like to urge upon the Prime Minister and the Government of India to introduce a Constitution Amendment Bill on the floor of the House in this current Session itself. जब तक हम लोगों की प्रौबलम्स की तरफ ध्यान नहीं दिया जाएगा तब तक हम सोच नहीं पाएंगे कि आप हमारे साथ दिल से मोहब्बत और दया करते हैं। जब हमें अलग राज्य मिल जाएगा तो लाखों लोगों के दिलों में एक नई भावना पैदा होगी कि भारत के अन्य प्रान्तों के लोग भी बोड़ो लोगों से मोहब्बत करते हैं और उनका सम्मान करते हैं। केवल मुंह से मीठी-मीठी बातों के जरिए मोहब्बत करने से कुछ नहीं होगा। आप भी इंडियन हैं और हम भी इंडियन हैं। केवल मुंह से बोलने पर काम नहीं चलेगा।
We want to live in India as dignified Indian citizens, with equal status and justice.
I have requested the Prime Minister of India and the Government of India to consider our genuine demand for the creation of a separate State of Bodoland. By giving mere crores of rupees as economic package, you cannot bring permanent peace and stability in the Bodoland area in particular and the North-Eastern Region in general. That is why, I strongly urge upon the Union Government of India for immediate creation of a separate State of Bodoland which has been a must. This is my earnest appeal to the Union Government of India as well as to all the hon. Members of this august House. हमारी कोई परवाह नहीं करता। चाहे जिस पार्टी की गवर्नमैंट बने - चाहे वह बी.जे.पी. की गवर्नमैंट हो या दूसरी पार्टी की गवर्नमैंट हो, उसे हमारी मांग को पूरा करना पड़ेगा।"> श्री रामदास आठवले : सभापति जी,   "अंगुली कटवाने से शहीद नहीं हुआ करते।
  उसके लिए सिर कटवाने पड़ते हैं।
  राज को चलाने वाले अटल बिहारी वाजपेयी जी।
  राज को चलाना है तो चलाओ मगर सॆकयूलरिज़म को अपनाओ।
  भाषण कैसा करना है यह अटल जी से पूछो।
  राज कैसा चलाना है यह शरद पवार जी से पूछो।
  होली कैसी खेलनी है यह लालू से पूछो।
  बाबरी मस्िजद को कैसे बचाना है यह मुलायम सिंह से पूछो।
  भाजपा से नाता कैसे तोड़ना है यह मायावती से पूछो।
  भाजपा से नाता कैसे जोड़ना है यह चंद्रबाबू से पूछो।
  भाजपा का सपोर्ट कब निकालना है यह जयललिता जी से पूछो।
  सीपीएम का सामना कैसे करना है यह ममता जी से पूछो।"

  सभापति जी, इस सभाग्ृाह में अटल बिहारी वाजपेयी जी ने विश्वास का प्रस्ताव रखा है। लोकतंत्र में सबको सरकार स्थापित करने का अधिकार बाबासाहेब अंबेडकर ने दिया है। हमारे दिल में कोई जलजलाहट नहीं है, हमारे दिल में इसके बारे में कोई गड़बड़ाहट नहीं है। सवाल इतना ही है कि सरकार जो भी स्थापित हो रही है, इस सरकार ने कौन सी विचारधारा अपनाई है? भारत के संविधान ने जो सॆकयूलरिज़म का तत्व स्वीकारा है, सर्वधर्म समभाव का तत्व स्वीकारा है ये तत्व भारतीय जनता पार्टी को कया मंज़ूर है? अगर भारतीय जनता पार्टी को ये तत्व मंज़ूर है तो हमारा कहना इतना ही है कि हिन्दुत्व का नारा देने का प्रयत्न नहीं होना चाहिए।

  सभापति जी, हिन्दू धर्म से हमारा विरोध नहीं है। बाबा साहब भीमराव अंबेडकर भी हिन्दू थे और दलित समाज भी हिन्दू था मगर यहां के सभी दलितों को गांव के बाहर कुचलने का प्रयत्न हुआ और उनके ऊपर अन्याय करने का प्रयत्न हुआ और इसीलिए बाबासाहब अंबेडकर जी ने हिन्दू समाज को बहुत बार बताया था कि हम भी हिन्दू हैं, हम भी मानव हैं, हमें भी मानव का अधिकार दीजिए। मगर इस हिन्दू समाज ने बाबासाहब और उनके समाज को उनका अधिकार देने का प्रयत्न नहीं किया इसलिए बाबासाहब अंबेडकर जी को बौद्ध धर्म की दीक्षा लेनी पड़ी।

  हमारा कहना इतना ही है कि हमारा किसी धर्म से विरोध नहीं है।

  राजकाज की बात मैं नहीं कर रहा हूं, यह बात मान्यता की है। यहां के दलितों को मानवाधिकार देने का प्रयत्न नहीं हुआ इसलिए यहां के दलितों को हिन्दू धर्म छोड़कर दूसरे धमर्ों में जाना पड़ा। हमारा कहना इतना ही है कि आप हिन्दू धर्म की रक्षा करें। बाबासाहब अंबेडकर ने जब संविधान लिखा तो वह उन्होंने हिन्दू समाज पर अन्याय करने के लिए नहीं लिखा। बाबासाहब अंबेडकर जी ने संविधान लिखा और उन्होंने हिन्दू समाज को, मुस्िलम समाज को, बौद्ध समाज को, सिख समाज को, ईसाई समाज को समान अधिकार देने का प्रयत्न किया।

  सवाल इतना ही है कि भारत के संविधान में जो ईकवेलिटी की बात कही गई है कया वह ईकवेलिटी आज देश में आई है। इसके लिए कौन जिम्मेदार है। इसके लिए केवल सत्ता में आये हुए लोग जिम्मेदार हैं या हम सभी लोग जिम्मेदार है। समाज में एकता लाने के लिए भाजपा की सरकार कया करने वाली है? यह सरकार कितने दिन चलेगी, हमें मालूम नहीं हमने भी शुरू में अपनी सरकार बनाने का प्रयत्न किया था, लेकिन कुछ लोग उधर चले गये। अभी सरकार बन गई है। आप इधर आते हैं या हम उधर जाते हैं, यह बाद में देखेंगे। लोकतंत्र में इसका हमें अधिकार भी है। यहां मैं पोलिटीकल बात नहीं कर रहा हूं। मैं कह रहा हूं कि अगर अटल जी की सरकार मैजोरिटी में है तो उनकी सरकार जब तक मैजोरिटी में है तब तक चलेगी। उसे हम नहीं रोक सकते हैं। लेकिन जब मैजोरिटी कम हो जायेगी तो वह कैसेचलेगी और आप भी नहीं चलेंगे। तब हम चलेंगे। मेरा कहने का मतलब इतना ही है कि यह बारी-बारी से होता है।

  सभापति महोदय, चुनाव में नारा था -"अटल बिहारी, अटल बिहारी", मेरा कहना   है कि साहब, आपकी कितने दिन की है पारी। यहां आपके मैनडेट का कया परसेंटेज है। कांग्रेस ने कितने परसेंट मैनडेट पर राज किया है और संयुकत मोर्चा ने कितने परसेंट में राज किया है। मेरा सुझाव है कि बाबासाहेब अम्बेडकर भी टू-पार्टी सिस्टम चाहते थे, जिस तरह अमरीका में टू पार्टी सिस्टम है, इंग्लैंड में टू पार्टी सिस्टम है तथा कुछ देशों में दो-दो पार्िटयां हैं। उसी तरह से आप लोगों ने जो सपोर्ट किया है। मेरा कहना यह है कि ममता जी को बी.जे.पी. में नहीं जाना चाहिए और जॉर्ज फर्नांडीज को भी बी.जे.पी. में नहीं जाना चाहिए। बाकी जो बचते हैं हम उनको अपने साथ ले लेते हैं। मेरा कहने का मतलब है कि टू-पार्टी सिस्टम के संबंध में हमारे देश को सोचने की बहुत जरूरत हैं, वरना हर बार ऐसा ही होने वाला है।

  सभापति महोदय (श्री लक्षमी नारायण पांडेय): अठावले जी, आप समाप्त कीजिए।

SHRI RAMDAS ATHAWALE (MUMBAI NORTH-CENTRAL) श्री रामदास आठवले : सभापति महोदय, मैं पहली बार चुनकर आया हूं और यहां मेरा पहला भाषण हो रहा है। सभापति महोदय : आपका पहला भाषण है इसलिए इतना समय आपको दिया है।

SHRI RAMDAS ATHAWALE (MUMBAI NORTH-CENTRAL) श्री रामदास आठवले : सभापति महोदय, मुझे थोड़ा समय और दीजिए। मैं कह रहा था कि अभी तो आपकी मैजोरिटी है इसलिए अटल जी हम आपको अभी कुछ तकलीफ देने वाले नहीं हैं। अभी आपके पास मैजोरिटी है। लेकिन इस देश में टू-पार्टी सिस्टम के संबंध में हम सभी लोकतंत्र को मानने वाले लोगों को सोचने की बहुत जरूरत है। अगर सरकार चलानी है तो सेकयुलरिज्म को अलग रखकर आप सरकार नहीं चला सकते हैं। आपने जो भी वादे किये थे उसमें राम मंदिर बनाने संबंधी किए वादे के बारे में मेरा कहना यह है कि जिस जगह पहले बाबरी मस्िजद थी, उसी जगह पर बाबरी मस्िजद बननी चाहिए अगर राम मंदिर बनाना है तो राम मंदिर उसके बाजू में बनायें। उसके बाजू में बौद्ध विहार भी बना सकें तो नेशनल इंटग्रेशन का अच्छा नमूना इस देश में रहेगा। आपके मंदिर से हमारा कोई विरोध नहीं है। लेकिन भारत के संविधान ने किसी को मंदिर तोड़ने का अधिकार नहीं दिया है, किसी को मस्िजद तोड़ने का अधिकार नहीं है।

  इसलिए वाजपेयी साहब हमें आपसे इस हाउस में आश्वासन चाहिए कि जिस जगह पर बाबरी मस्िजद थी, वह वहीं बनेगी। हम आपका बहुत आदर करते हैं। आप अच्छे कवि है, आप एक अच्छे विद्वान है। लेकिन आप वहां कयों चले गये, हमारा इससे मतलब नहीं है। हम आपको एक अच्छे इंसान के रूप में देखते हैं। आर.एस.एस. वालों पर मैं टीका-टिप्पणी नहीं करना चाहता हूं। आर.एस.एस. वाले राष्ट्र के लिए अच्छा काम कर रहे हैं, आर.एस.एस. वाले हिंदू धर्म के लिए काम कर रहे हैं और इसीलिए ये लोग आपको कब धोखा दें इसका कोई पता नहीं है। यदि अटल जी जैसे आदमी हमारे साथ होते तो हम आपको प्रधान मंत्री बना देते और वह प्रधान मंत्री का पद पांच साल के लिए होता।

  सभापति जी, वह अटल जी पांच साल के थे, ये कितने दिन के हैं, हमें मालूम नहीं। इसलिए हम आपको इतना ही बताना चाहते हैं कि दलितों की रक्षा कीजिए। जब तक आपके हाथ में सत्ता है तब तक आपको दलितों के ऊपर होने वाली एट्रोसिटीज को सख्ती से रोकना चाहिए। इसलिए हमारी आपसे डिमांड है कि बाबा साहेब अम्बेडकर का राष्ट्रीय स्मारक २६, अलीपुर रोड पर बनाने के लिए अधिक से अधिक धन दिया जाना चाहिए। दलितों के हितों की रक्षा किए जाने की बहुत जरूरत है।

... (व्यवधान)

  सभापति महोदय : अठावले जी, समाप्त करिए।

SHRI RAMDAS ATHAWALE (MUMBAI NORTH-CENTRAL) श्री राम दास आठवले: सभापति महोदय, मुझे थोड़ा समय और दिया जाए। मैं कहना चाहता हूं कि मुम्बई में रमाबाई घाटकोपर में जिन ११ लोगों की हत्या करने का प्रयत्न किया गया था, उन लोगों को न्याय नहीं मिला। मैं चाहता हूं कि श्री कृष्ण आयोग की रिपोर्ट पर हाउस में चर्चा होनी चाहिए। श्री कृष्ण आयोग ने दंगे के लिए जिनको जिम्मेदार ठहराया है, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की जरूरत है। हमारे अधिकारों की रक्षा होनी चाहिए। इस बात का हमें आश्वासन मिलना चाहिए।

  सभापति महोदय : कृपया बैठ जाइए। MR. CHAIRMAN : Shri N.K. Premachandran.

 

SHRI N.K. PREMACHANDRAN (QUILON): Sir, the time may be extended. Otherwise, tomorrow I may be called.

MR. CHAIRMAN: Please conclude.

... (Interruptions)

MR. CHAIRMAN: Nothing will go on record then.

... (Interruptions)

SHRI RAMDAS ATHAWALE (MUMBAI NORTH-CENTRAL) श्री राम दास आठवले : सभापति महोदय, हम रिकार्ड के लिए ही तो बोल रहे हैं और आप कह रहे हैं कि रिकार्ड में नहीं जा रहा है। हमें थोड़ा टाइम और दीजिए। हम देश का बंटवारा नहीं होने देंगे। हम आपको इस देश के संविधान को बदलने नहीं देंगे।

  सभापति महोदय : अब आप समाप्त करिए।

  जब रिकार्ड में कुछ नहीं जा रहा है, फिर भी आप कयों बोले जा रहे हैं।

SHRI RAMDAS ATHAWALE (MUMBAI NORTH-CENTRAL) श्री राम दास आठवले :आप संविधान को बदलने की कोशिश न करे।

  (व्यवधान) ।

  सभापति महोदय : रिकार्ड में कुछ भी नहीं जा रहा है।

SHRI RAMDAS ATHAWALE (MUMBAI NORTH-CENTRAL) श्री राम दास आठवले : जय भीम जय भारत।

_________________________________________________________________________ * Expunged as ordered by the Chair.

">SHRI N.K. PREMACHANDRAN : Sir, only five minutes' time is left. I may be allowed to speak a few minutes more.
Mr. Chairman, Sir, I am on my legs on behalf of my party, the Revolutionary Socialist Party (RSP) to oppose the Motion of Confidence moved by hon. Prime Minister, Shri Atal Bihari Vajpayee. The reason for opposing the Motion of Confidence has already been submitted and substantiated by most of the leaders of this Front.
Sir, the election to the Twelfth Lok Sabha which was concluded recently, has again given us a fractured mandate, not giving majority to any single party or a political front. So, the first question to be considered is: Whether the BJP and its allies do they have the majority or do have the mandate of the people to form a Government at the Centre? Sir, according to me, the mandate of the people means the simple majority in the House of the People to form a Government. Whether the BJP and its allies have a simple majority to form a Government is the question to be considered as the first point.
Since the mandate of the people is not with the BJP, I would like to highlight the Constitutional provision also under Article 75(3) of the Constitution which envisages that the Council of Ministers which is appointed by the President of India shall have the collective responsibility to the House of the People. It indicates that the Council of Ministers should command a simple majority in the House of the People.
Sir, immediately after the election, the hon. Prime Minister and the BJP have been invited by hon. Rashtrapatiji.
They have been asked to give the number of Members who are supporting the B.J.P. They have been allowed to form a Government only on the receipt of the letter from the Telugu Desam Party that they will remain neutral during the Motion of Confidence. That itself goes to show that Rashtrapatiji has allowed the B.J.P. to form the Government only on the neutral stand taken by the Telugu Desam Party and not because of the majority which is attained in this House.
I would like to say that the mandate of the people is not in favour of the B.J.P. and its allies. Hence, it is lacking in majority. That is why, I oppose this Motion of Confidence.
The second point to be considered is: what was the main slogan of the B.J.P. in the last election? `You please vote for a Stable Government and an Able Prime Minister.' So, the second question to be considered is whether the B.J.P. and its allies are able to provide a stable Government at the Centre. I would like to submit that the answer is `no'. It is because that this is a combination of unnatural, unreal and unholy combination of various political parties.
What are the political philosophy and social views of the AIADMK? Are they similar or identical with that of the B.J.P? There is no political programme or policy. There is no unanimity. First of all, I would like to say that the AIADMK has joined hands with the BJP because the Congress has failed to join hands with the AIADMK. It is not based on any programme or policy. It is due to compulsion that they have joined hands with the BJP.
I am coming to the second constituent, namely, Trinamul Congress led by Kumari Mamata Banerjee. Even Kumari Mamata Banerjee had unequivocally spoken out in the Press conference that she waited for Shrimati Sonia Gandhi's call for seven days. However, no response had come from Shrimati Sonia Gandhi. Hence, she was joining with the B.J.P. Is it on the basis of a political programme? (Interruptions). It has come out in the Press. It is on record. (Interruptions). I am not yielding to you. (Interruptions).
The alliance of Trinamul Congress with the BJP is a revengeful reaction to the Congress Party and a revengeful reaction to the Left Front in West Bengal. That is also not on the basis of a programme or policy.
In Haryana, the Haryana Vikas Party and the Haryana Lok Dal are fighting each other. However, in Delhi they are supporting the B.J.P. The stability of this Government could be tested from the first instance itself because the AIADMK supremo had come to Delhi, had discussions with the B.J.P. leaders and even accused Shri Ramakrishna Hegde, who is the Minister in the Cabinet and who is an ally of the B.J.P. (Interruptions). What is the meaning of it? The B.J.P. is ready to surrender all the political values and whenever the AIADMK demands something, they are ready to surrender everything. (Interruptions). It is learnt from the Press that they have demanded the portfolio of the Ministry of Law. It is given to them. They have demanded the portfolio of the Ministry of Finance. They have been given again a fractured Finance portfolio. There are some other demands. They have demanded for reservation, etc. (Interruptions).
THE MINISTER OF SURFACE TRANSPORT (SHRI R. MUTHIAH): What is the proof for it? (Interruptions).
SHRI N.K. PREMCHANDRAN : It has come out in the Press. (Interruptions).
SHRI M. THAMBI DURAI: In the Press so many things might come. Is it necessary to bring everything here to say that we were bargaining? (Interruptions).
SHRI N.K. PREMCHANDRAN : There are two important issues which are concerned with Kerala also. The Government should disclose the assurances and commitments given to AIADMK regarding these two disputes, i.e., Mullaperiar Dam and Cauvery Water Dispute. (Interruptions).

21.00 hrs About Mullaperiyar Dam, it has come out in the newspapers that its height has to be increased. Like that, the Cauvery water dispute is also there. I would appeal to the hon. Prime Minister... (Interruptions) You are a Minister, please be seated... (Interruptions)

MR. CHAIRMAN : Please, Shri, Janarthanan.

SHRI N.K. PREMACHANDRAN : Sir, through you, I would appeal to the hon. Prime Minister... (Interruptions)

MR. CHAIRMAN: Shri Premachandran, your time is over now. Only four minutes were allotted to your party. Please conclude now.

SHRI N.K. PREMACHANDRAN : No, Sir, half of the time has been taken away by way of interruptions.... (Interruptions)

SHRI MADAN LAL KHURANA (DELHI SADAR) श्री मदन लाल खुराना : सभापति जी, मेरा प्रस्ताव है कि सदन का समय एक घंटा और बढ़ा दिया जाए।

  सभापति महोदय : सदन का समय ९.०० बजे तक था। माननीय संसदीय कार्य मंत्री प्रस्ताव कर रहे हैं कि सदन का समय एक घंटा बढ़ा दिया जाए। कया एक घंटा और बढ़ाने के लिए सदन की राय है?

  कुछ माननीय सदस्य : नहीं, नहीं।

  कई माननीय सदस्य : ठीक है।

AN HON. MEMBER: He can continue tomorrow, Sir.

SHRI N.K. PREMACHANDRAN : I shall continue tomorrow, Sir.

  सभापति महोदय : सदन का समय एक घंटा बढ़ा दिया जाता है।

Now please continue, Shri Premachandran, and finish within two-three minutes.

SHRI N.K. PREMACHANDRAN : Sir, through you, I would like to ask the hon. Prime Minister what are the commitments and assurances given regarding this Cauvery dispute and also about this Mullaperiyar Dam. To that extent, I am forced to say that AIADMK asked BJP to kneel but BJP has crawled before them.

Another ally of BJP is Shri Subramaniam Swamy. He has accused even Shri Ramkrishna Hegde for some commission in the HDW submarine case also. So, these things are being done by the allies of the BJP front.

SHRIMATI MALTI DEVI (NAWADA) श्रीमती मालती देवी (नवादा) : आप बार-बार एक-एक घंटे का समय बढ़ा रहे हैं, एक बार ही बोल दें कि सदन का समय चार घंटे के लिए बढ़ाया जाता है।

  सभापति महोदय : यह माननीय सदस्यों की राय पर हो रहा है। आप बैठिए।

SHRI N.K. PREMACHANDRAN : Sir, BJP has always been criticising the unnatural combination and intra-contradictions of the United Front Government. What type of alliance is going on now?

SHRI RAJO SINGH (BEGUSARAI) श्री राजो सिंह (बेगुसराय) : हाउस को चलाना है तो लोगों की राय से चलाएंगे या जैसा मन होगा, डिकटेटरशिप करेंगे।

... (व्यवधान) आपने ही पूछा था कि कया ९.०० बजे तक टाइम बढ़ा दें।

... (व्यवधान) ऐसा मत करिए। कल भी तो डिबेट होगी।

  सभापति महोदय : इस तरफ से भी समय बढ़ाने के लिए बोला गया था।

 

... (व्यवधान)

SHRI N.K. PREMACHANDRAN : Sir, the fourteen-party United Front is having a common cause. The common cause of the United Front was to keep the communal forces out of power. I would like to know what is the common cause in uniting BJP and all its allies which I have already enunciated.

Coming to the manifesto and the national agenda for governance, in the manifesto, it has already been illustrated here that there were three main planks of the election campaigning. Number one, scrapping of article 370; number two, construction of temple at Ramjanmabhoomi at Ayodhya; and number three, uniform civil code. What has happened to these three planks in the election campaigning immediately after the national agenda? So, that has become the hidden agenda. I am damn sure that these three agendas will come up. Now it is being kept under the carpet and it will come out after getting the Confidence Vote. So, I would like to enlighten the partners of the BJP allies that if the national agenda for governnance is silent in respect of all these three issues, these will emerge as the three main important issues in the coming days.

So, they will be forced to repel at that time. I would like to say something regarding Hindutva. The BJP always sails on Hindutva. What is meant by Hindutva? Sir, Hindutva is a glorious tradition which is an electric and cosmopolitan tradition of our country. Sir, I feel it is. Since the BJP is following that Hindutva tradition, I would say that " सर्वधर्म समभाव"

is the hallmark of the tradition. " वसुधैव कुटुम्बकम्"

which has already been mentioned means that the whole world is one family. The Hindutva is always identified with liberalism and tolerance. We are witness to December 6, 1992 incident.

MR. CHAIRMAN : Shri N.K. Premachandran, kindly conclude.

SHRI N.K. PREMACHANDRAN : Sir, I am concluding. Does BJP follow the principles of Hindutva? I would like to say, Sir, `No'. They are always misinterpreting the principles of Hindutva for political advantages. That is what is happening in the country. In their election campaign, all these measures have been used for getting votes. Immediately after getting the votes and getting the majority here, that is, getting more seats in Parliament, they have combined their front. A national agenda has been formed. It is a hidden agenda and it will again come up which is clear from the Sangh Parivar leader's statement about which it has already been said.

Sir, I conclude with the words of the hon. Prime Minister. We all respect him. There is no doubt about it. The disrespect is done by the senior General Secretary of the Bharatiya Janata Party by saying that he is a mask. We never say about him in such a way. So, I would like to conclude with the words of the Prime Minister, Shri Atal Bihari Vajpayee. Shri Vajpayee in his speech on the first Confidence Motion in the Eleventh Lok Sabha said and I quote "Democracy rests on moral ethics. Basically, that is a morality based system."

I oppose this Motion only because this BJP led front is lacking moral ethics and moral principles. It is lacking majority also. Hence, I once again strongly oppose the Motion of Confidence. It is being laid before this House by Shri Atal Bihari Vajpayee.

">"> श्री किशन सिंह सांगवान (सोनीपत) : सभापति जी, माननीय प्रधान मंत्री जी ने विश्वास मत हासिल करने के लिए जो प्रस्ताव पेश किया है, उसके समर्थन के लिए मैं खड़ा हुआ हूं।
  मैं न सिर्फ अपनी तरफ से, बल्िक अपनी पार्टी की तरफ से ... (व्यवधान)
COL. SONA RAM CHOUDHARY (BARMER) कर्नल सोनाराम चौधरी (बाड़मेर) : कौन सी पार्टी? आपकी शर्तें कया हैं?
SHRI KISHAN SINGH SANGWAN (SONEPAT) श्री किशन सिंह सांगवान : हरियाणा लोकदल राष्ट्रीय पार्टी, चौधरी देवी लाल की पार्टी माननीय वाजपेयी जी को बाहर से समर्थन दे रही है। हमारे माननीय नेता स्वतंत्रता सेनानी पूर्व उप प्रधान मंत्री चौधरी देवी लाल जी की तरफ से मैं उनका अभिनन्दन करता हूं, उनको हार्िदक बधाई भी देता हूं।
  आज जो राजनैतिक स्िथति है, जिस प्रकार का गठन लोकसभा का हुआ है, उससे जाहिर है कि आज देश की जनता ने क्षेत्रीय पार्िटयों को, रीजनल पार्िटयों को काफी महत्व दिया है। हमारी पार्टी हरियाणा लोकदल राष्ट्रीय पार्टी भी रीजनल पार्टी है। हमने हरियाणा के दोनों फ्रण्ट जो आज लोकसभा में हैं, दोनों के खिलाफ चुनाव लड़ा है। जिस भारतीय जनता पार्टी की सरकार को हम समर्थन दे रहे हैं, हरियाणा में भारतीय जनता पार्टी का हरियाणा विकास पार्टी के साथ गठबन्धन है। उनकी मिली जुली सरकार वहां चल रही है, वहां हमारा राजनैतिक तौर पर उनसे टकराव है, अनेक मतभेद हैं और हरियाणा की जनता ने उस सरकार के खिलाफ फतवा देकर चौधरी देवी लाल जी की पार्टी, चौटाला साहब की पार्टी के हक में मत दिया है।
  जिसकी वजह से आज हमारे चार साथी आपके बीच में विराजमान हैं। अनेक मतभेदों के बावजूद, अनेक टकरावों के बावजूद राष्ट्रीय हित में हमने भारतीय जनता पार्टी को बिना शर्त समर्थन दिया है।
COL. SONA RAM CHOUDHARY (BARMER) कर्नल सोना राम चौधरी (बाड़मेर): यह तो ऊपर की बात, अंदर की कया बात है?
SHRI KISHAN SINGH SANGWAN (SONEPAT) श्री किशन सिंह सांगवान : अंदर की बात आप जानते होंगे। मेरे साथी मुलायम सिंह जी ने और कांग्रेस के दूसरे नेताओं ने शक की नजर से देखा है, मैं कहना चाहता हूं कि यह समझौता बिना शर्त का है। यह पार्टी चौधरी देवीलाल जी की पार्टी है। देवीलाल जी ने जिंदगी में जो जुबान की, उसको निभाया है। उनकी हार्िदक इच्छा थी कि अटल बिहारी वाजपेयी जैसा नेता आज की स्िथति में कोई दूसरा नहीं है। वह प्रधानमंत्री बने ।
  सभापति महोदय, इनकी कथनी और सोच कांग्रेस के भाइयों की तरह नहीं है। हमारी पार्टी का कई बार भाजपा के साथ समझौता हुआ है और टूटा है। लेकिन हमने कभी कांग्रेस के साथ समझौता नहीं किया है और न ही करेंगे। हम हृदय से राष्ट्रीय हित में भारतीय जनता पार्टी का समर्थन कर रहे हैं और बिना किसी लोभ या लालच के कर रहे हैं।
  आज जिस स्िथति में देश गुजर रहा है, यह वाजपेयी जी के लिए बड़ी भारी चिंता है। हर क्षेत्र में गरीबी की वजह से, बेरोजगारी की वजह से और भ्रष्टाचार की वजह से तथा राजनीतिक अस्िथरता की वजह से देश अनेक चिंताओं से गुजर रहा है। मैं आपके माध्यम से प्रधान मंत्री जी से निवेदन करना चाहता हूं कि कुछ ऐसी समस्याएं हैं, जिनको भाईचारे से बैठकर, बातचीत के जरिए सुलझाया जा सकता है। हमारे हरियाणा प्रदेश की भी कुछ समस्याएं हैं। आज से ३२ साल पहले १९६६ में हरियाणा अलग प्रदेश बना था। चौधरी देवीलाल जी के संघर्ष की वजह से हरियाणा बना था। ३२ साल के बाद लगातार हरियाणा प्रदेश का टैरिटरी का मामला, पानी का मामला, राजधानी का मामला तथा सीमा का विवाद लम्िबत पड़ा है। मैं आपके माध्यम से कांग्रेस के भाइयों को और देश की जनता को बताना चाहता हूं कि यूं तो क्षेत्रीय समस्याएं पानी की और सीमा की अन्य राज्यों की भी हैं, लेकिन कांग्रेस का आज तक का इतिहास रहा है कि वह पहले समस्याओं को पैदा करती है, फिर उनको उलझाती है और फिर लटकाती है। आज जितनी भी ऐसी समस्याएं लटकी पड़ी हैं, वे कांग्रेस की देन हैं। जैसे जार्ज फर्नांडीज जी ने बताया कि आजादी के ५० सालों में से कम से कम ४५ साल तक देश में कांग्रेस का राज रहा है। इसलिए सारी समस्याएं कांग्रेस की देन हैं।
  हरियाणा की राजधानी का मामला, क्षेत्रीय विवाद और पानी का मामला उलझा पड़ा है। मुझे पूरा विश्वास है कि अटल बिहारी वाजपेयी जी, जिनमें पूरी काबलियत है, इनकी सूझबूझ से हरियाणा प्रदेश की ३२ साल से लटकी इन समस्याओं को सुलझा लिया जाएगा। हमारे प्रदेश की मुख्य समस्या पानी की है। आज यहां के लोग पानी की एक-एक बूंद के लिए तरस रहे हैं। सबसे दुख की बात तो यह है कि और प्रदेशों का तो आपस में झगड़ा हो सकता है, लेकिन हमारा जिस पानी का झगड़ा है, वह हमारे हिस्से का पानी पाकिस्तान जा रहा है लेकिन हरियाणा को उसका हिस्सा नहीं दिया जा रहा है ।
  हमारे हिस्से का पानी पाकिस्तान में जा रहा है। पंजाब सूबा हमारा बड़ा भाई है। हम उसको बड़ा भाई मानते हैं लेकिन अपने अधिकार के लिए हर आदमी लड़ता है। यदि वह पानी पाकिस्तान जाने की बजाए हरियाणा को दे दिया जाए तो हरियाणा की प्यासी धरती को पानी मिल सकता है, वहां का किसान खुशहाल हो सकता है। ये कुछ ज्वलंत प्रश्न हैं। हमारे प्रदेश की ये बहुत पुरानी समस्याएं पेंडिंग पड़ी हुई हैं। मुझे पूरा विश्वास है कि यह अटल बिहारी वाजपेयी जी की सरकार इन समस्याओं पर गौर करेगी और हरियाणा के किसानों को, वहां के गरीब आदमियों को पानी और बिजली अवश्य दिलाएगी। इसके अलावा आज देश की अस्सी प्रतिशत जनता ... (व्यवधान) COL. SONA RAM CHOUDHARY (BARMER)   कर्नल सोनाराम चौधरी (बाड़मेर): अभी आप कह रहे हैं बिना शर्त का समर्थन है। ... (व्यवधान)
SHRI KISHAN SINGH SANGWAN (SONEPAT) श्री किशन सिंह सांगवान : यह शर्त नहीं है।
... (व्यवधान) अपनी समस्याएं बताना कोई शर्त नहीं है।
... (व्यवधान) हरियाणा के लोगों की समस्याएं हमने बताई है।
... (व्यवधान)
  सभापति महोदय (डा. लक्षमी नारायण पांडेय): कृपया समाप्त करिए।
SHRI KISHAN SINGH SANGWAN (SONEPAT) श्री किशन सिंह सांगवान: आपने मुझे दो मिनट का समय दिया। समस्याएं तो बहुत हैं।
... (व्यवधान)
COL. SONA RAM CHOUDHARY (BARMER) कर्नल सोनाराम चौधरी (बाड़मेर): बंसीलाल जी की बात करिए कि उन्होंने कया किया है।
... (व्यवधान)
SHRI KISHAN SINGH SANGWAN (SONEPAT) श्री किशन सिंह सांगवान: बंसीलाल जी तो अपने बोझ से गिर जाएंगे।
... (व्यवधान)
  हमारी कोई शर्त नहीं है। बंसीलाल जी अपने कुकमर्ों की वजह से, अपनी गलतियों की वजह से और गलत नीतियों की वजह से खुद गिर जाएंगे। हमें किसी से कहने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।
... (व्यवधान)
  मैं आपके सामने अर्ज कर रहा था कि अस्सी फीसदी जनता खेती पर निर्भर करती है। आज किसान की हालत बहुत बुरी है। पंजाब की सरकार ने अच्छा उदाहरण पेश किया है। वहां के किसानों को बिजली और पानी मुफत मिलता है और हमने भी अपने घोषणा-पत्र में यह वादा किया था कि यदि हरियाणा में हमारी सरकार बनेगी तो किसानों को मुफत बिजली तथा पानी देंगे। मुझे वाजपेयी जी पर पूरा भरोसा है। उन्होंने जो राष्ट्रीय एजेंडा तैयार किया है, उसमें कृषि नीति के बारे में भी उल्लेख किया गया है। हालांकि उसमें कुछ विस्तार से नहीं है लेकिन मुझे पूरा भरोसा है कि कृषि के लिए, किसानों के लिए, योजनाएं अवश्य बनाई जाएंगी।
  आज अखबार में इस बात का जिक़ हुआ था कि गेहूं का भाव ४५५ किवंटल रुपए तय करने की चर्चा है। बड़े अफसोस की बात है कि हरियाणा एग्रीकल्चरल यूनिवर्िसटी के सर्वे के मुताबिक ६७५ किवंटल रुपए का भाव इस यूनिवर्िसटी के वैज्ञानिकों ने आंका है। अत: मैं वाजपेयी जी से अनुरोध करूंगा कि हरियाणा के किसानों की खुशहाली के लिए, देश के किसानों की खुशहाली के लिए आप कम से कम ७०० रुपए किवंटल के हिसाब से किसान को भाव दें कयोंकि खाद, डीजल और पेस्टीसाइडस के दाम काफी बढ़ गए हैं तथा पानी और बिजली की अत्यंत कमी है, इसलिए किसान को भी उचित मूल्य मिलना चाहिए। तथा गरीब लोगों को सस्ता दिया जावे ।
  जब तक किसान खुशहाल नहीं होगा, कोई भी वर्ग खुशहाल नहीं हो सकता, यह देश खुशहाल नहीं हो सकता। अत: किसान को बिजली, पानी और उसका उचित दाम दिया जाए। यह मैं आपसे अनुरोध करना चाहता हूं।
  समस्याएं तो बहुत सारी हैं। बाढ़ का मामला है, सेम का मामला है, और भी बहुत सी समस्याएं हैं। कल रेलवे का बजट आया था, समय कम होने की वजह से हमें बोलने का समय नहीं मिला। सारे हरियाणा प्रदेश की एक समस्या मैं आपके सामने जरूर रखना चाहता हूं   कि मुझे ऐसा महसूस हुआ कि रेलवे विभाग के पास हरियाणा का कोई मानचित्र नहीं है। रेलवे के पास जो मानचित्र है, उसमें हरियाणा का कहीं नाम नहीं है। आज़ादी के बाद रेलवे विभाग द्वारा हरियाणा में कोई काम नहीं किया गया, कोई नई रेलवे लाइनें नहीं बिछाई गईं। दिल्ली हमारी राजधानी है। दिल्ली के तीनों तरफ हरियाणा है। कम से कम दस लाख आदमी रोजाना हरियाणा से दिल्ली में आते हैं।
  नौकरी के लिए आते हैं, व्यापार के लिए आते हैं और कोई दूध व सब्जी लेकर आते हैं। मेरे कहने का मतलब है कि दस लाख आदमी रोजाना दिल्ली में आते हैं और जाते हैं। उनकी कितनी बुरी हालत है, यह आप स्वयं देख सकते हैं। भेड़-बकरियों की तरह से, जैसे मुर्िगयों को लाद कर ले जाया जाता है, इस प्रकार से लोग आते हैं। सारे पढ़-लिखे सभ्य आदमी हैं। इसलिए मैं आपसे मांग करता हूं कि उनकी समस्याओं का निदान कीजिए। यह कोई बहुत लम्बी-चौड़ी बात नहीं है, सिर्फ एडिश्नल बोगियां लगा दीजिए या एडिश्नल ट्रेन चला दीजिए, इतने से ही समस्या हल हो जाएगी और दस लाख आदमियों का भला हो जाएगा।
  अंत में, मैं आपका शुक़िया अदा करता हूं कि आपने मुझे बोलने के लिए समय दिया। मैं सदन में यह वायदा करता हूं और आपको आश्वासन दिलाता हूं, जिन भाइयों के दिमाग में इस बात का भ्रम है कि हमारा बाहर से समर्थन है, वे इसको दिमाग से निकाल दें। हमें विपक्ष में बैठना मंजूर हैं, लेकिन वाजपेयी जी का साथ छोड़ना मंजूर नहीं है।
MR. CHAIRMAN : Now, I call Shri R.K. Hegde. He is absent; then, Shri Banatwalla - absent; Dr. Jayanta Rongpi - absent; Shri Hannan Mollah - absent; Shri Sultan Owaisi - absent; Shri Anand Mohan absent. Shri M.A. Naqvi...
... (Interruptions)
SHRI SURESH KURUP (KOTTAYAM): Sir, thinking that the House will sit only up to nine o'clock and their turn will come tomorrow, they have all left.
">"> सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय में राज्य मंत्री (श्री मुख्तार नकवी): सभापति महोदय, में विश्वास मत के पक्ष में बोलने के लिए खड़ा हुआ हूं। इस बार के चुनाव नें हर मजहब, हर जाति और हर समुदाय के लोगों ने भारतीय जनता पार्टी को और उनके सहयोगी दलों को केन्द्र में सरकार बनाने के लिए जनादेश दिया है। पिछली बार जब अटल जी की सरकार के विश्वास मत पर बहस हो रही थी, मुझे याद है, उस समय धर्म-निरपेक्ष कहे जाने वाले लोगों ने एक चिन्ता व्यकत की थी कि इस सरकार के साथ नार्थ-ईस्ट के कितने लोग हैं, दक्षिण से कितने लोग हैं, मुसलमान कितने हैं और अल्पसंख्यक कितने हैं। मैं यह बहुस सुबह से सुन रहा हूं। धर्म-निरपेक्ष कहने जाने वाले वरिष्ठ नेताओं ने इस संबंध में बहस की है। आज भारतीय जनता पार्टी और सहयोगी दलों को नार्थ-ईस्ट में भी अच्छी सफलता मिली है और दक्षिण में भी भारतीय जनता पार्टी व सहयोगी दलों को अच्छी सफलता मिली है। मैं खुद एक मुसलमान हूं और भारतीय जनता पार्टी के टिकट से मुस्िलम बाहुल्य क्षेत्र रामपुर से चुनाव जीतकर आया हूं।
COL. SONA RAM CHOUDHARY (BARMER) कर्नल सोनाराम चौधरी : और कितने आए हैं?
... (व्यवधान)
  एक माननीय सदस्य: कांग्रेस में कितने हैं?
... (व्यवधान)
  सभापति महोदय : हर बार आप डिस्टर्ब कर रहे हैं। कोई सीमा होती है। ... (व्यवधान)
SHRIMATI SUKHDA MISRA (ETAWAH) श्रीमती सुखदा मिश्र (इटावा): उत्तर प्रदेश से तो कांग्रेस का एक भी जीत कर नहीं आया है।
... (व्यवधान)
  सभापति महोदय : माननीय सदस्य बैठे-बैठे इस तरह से बात न करें। यह ठीक नहीं है।
SHRI MUKHTAR NAQVI (RAMPUR) श्री मुख्तार नकवी: एक धर्म-निरपेक्ष कही जाने वाली पार्टी के नेता ने एक अखबार में ब्यान दिया है कि अगर भारतीय जनता पार्टी ने एक भी मुसलमान को संसद में चुनाव जीत कर बैठा दिया, तो उसका समर्थन केन्द्र में स्वीकार कर लेंगे। मुझे यह उम्मीद थी, मुझे यह आशा थी कि जिस तरह से दक्षिण में भारतीय जनता पार्टी को सफलता मिली है, जिस तरह से नार्थ-ईस्ट में भारतीय जनता पार्टी और उनके सहयोगी दलों को सफलता मिली है,   जिस तरह से पूरे देश में हर जाति, हर धर्म, सम्प्रदाय और हर क्षेत्र में भारतीय जनता पार्टी और उसके सहयोगी दलों को एक मजबूत सफलता मिली है, जिस तरह से अल्पसंख्यकों में भारतीय जनता पार्टी के लिए विश्वास बढ़ा है तो हमें लग रहा था कि विपक्ष के लोग, धर्मनिरपेक्ष कहे जाने वाले लोग इसका स्वागत करेंगे। पिछली बार इन्होंने चिन्ता व्यकत की थी और इस बार इतनी अच्छी सफलता के बाद पूरे देश में भारतीय जनता पार्टी हर जात, सम्प्रदाय के लोगों द्वारा स्वीकर कर लेने के बाद मुझे लगता था कि विपक्ष के लोग स्वागत करेंगे लेकिन अफसोस है कि वह स्वागत इन्होंने नहीं किया। वास्तविकता यह है कि विपक्ष के जो धर्मनिरपेक्ष कहे जाने वाले लोग हैं, जो आज विपक्ष में बैठे हैं, जो ५० सालों तक सत्ता में बैठे रहे हैं उन्होंने भारतीय जनता पार्टी का हौवा दिखा कर, साम्प्रदायिकता का हौवा दिखा कर, कयोंकि मेरी समझ से अगर किसी भी कौम, किसी भी व्यकित को डराना हो, उसका शोषण करना हो तो उसके अंदर डर पैदा करना होता है, भय पैदा करना होता है और इन लोगों ने आज तक मुसलमानों में अल्पसंख्यकों में भारतीय जनता पार्टी का भय एवं डर पैदा किया। कयोंकि जब आदमी डरता है तो कमजोर होता है और जब कमजोर होता है तो उसका आसानी से शोषण किया जा सकता है। उन्होंने देश के मुसलमानों के अंदर भय पैदा किया और उसके बाद उन्हें कमजोर किया और कमजोर करके उनका राजनैतिक शोषण आज तक किया। उनकी चिन्ता केवल यह है कि अब उस राजनैतिक शोषण की उनकी दुकानें बंद होने के कगार पर आ गई हैं। आज भारतीय जनता पार्टी की केन्द्र में सरकार बन गई है। आज भारतीय जनता पार्टी की केन्द्र में टिकाऊ सरकार बन गई है और अब इनके सामने कोई चारा ऐसा नहीं है कि ये कह सकें कि भारतीय जनता पार्टी की केन्द्र में सरकार बन जाएगी तो मुसलमानों का अहित होगा, नुकसान होगा।
  महोदय, मैं मुस्िलम समुदाय से आता हूं। मैं अपने मजहब पर विश्वास करता हूं लेकिन मैं उसके साथ ही अपने को गौरवान्िवत होकर कहता हूं कि मैं भारत मां की संतान हूं, मैं राष्ट्रवादी हूं। मैं आज इस बात को कहता हूं कि इस देश का हर मुसलमान, हर सिख, ईसाई फख़ के साथ अपने आपको भारत मां की संतान कहेगा तो वह सच्चा मुसलमान, हिन्दू, सिख, ईसाई होगा। मगर हमारे धर्मनिरपेक्ष कहे जाने वाले लोगों का यह दुर्भाग्य है कि जो लोग धर्मनिरपेक्षता के नाम पर आज तक देश में सरकार चलाते रहे हैं, जो राजनैतिक पार्िटयां आज तक धर्मनिरपेक्षता के नाम पर अपनी राजनैतिक दुकानें चलाती रही हैं उन्होंने लोगों को अपने आपको राष्ट्रवादी कहने में शर्म महसूस की। उन्होंने लोगों के अंदर ऐसी भावना पैदा कि कि वे अपने आपको भारत मां की संतान न कह सकें। आज जो मुसलमानों की समस्याएं रही हैं वे समस्याएं नहीं हैं, उनकी समस्या रोजगार की समस्या है, शिक्षा की, सम्मान की समस्या है, बराबरी की समस्या है। अटल बिहारी वाजपेयी जी और उनके सहयोगी दलों की सरकार मुसलमानों की इन समस्याओं का हल तत्परता और प्राथमिकता से करेगी, जिसे कि आपने ५० सालों में नहीं किया है। आपने उनका शोषण किया है। आपने वोटों की दुकानें चला करके, राजनैतिक दुकानें चला कर मुसलमान वोटों की नीलामी और खरीद-फरोख्त की है लेकिन भारतीय जनता पार्टी ने उस पर विश्वास नहीं किया है। हमारा मानना है कि आज पूरे देश में जो संकट का समय है, आज इस संकट की घड़ी में, जब कि यह बात आज सारे लोगों को स्पष्ट हो गई है कि जनादेश भारतीय जनता पार्टी और उनके सहयोगी दलों के लिए है। मेरी तो अपील है-
  "दे रहा है आदमी का दर्द जब आवाज दर-दर,   चुप रहे तुम तो, कहो सारा जमाना कया कहेगा,   जब बहारों को खड़ा नीलाम पतझड़ कर रहा,   तुम रहे खामोश तो यह आशियाना कया कहेगा।"

  महोदय, मेरा तो यह कहना है कि आज इस संकट की घड़ी में, जब कि इस देश को, इस देश की बहारों को धर्मनिरपेक्ष कही जाने वाली आपकी विचारधाराएं नीलाम कर रही हैं, ऐसे में आप खामोश मत रहिए, इस बहार को और मजबूत करिए। इस देश के राष्ट्रवाद को मजबूत कीजिए।

  इसी में मुसलमानों का भी भला है, इसी में हिंदुओं का भी और देश का भी भला है।

  मैं रामपुर संसदीय क्षेत्र से चुनकर आया हूं। वहां ५० प्रतिशत मुसलमान रहते हैं। वह भारतीय जनता पार्टी का पारंपरिक क्षेत्र नहीं है। भारतीय जनता पार्टी वहां बहुत कठिन परस्िथतियों में चुनाव लड़ती रही है। जब मैं चुनाव लड़ रहा था तो ये धर्म-निरपेक्ष कहे जाने वाले लोग, जो मुसलमानों का दोस्त बनने का ढोंग करते हैं, इन्हीं समाजवादी पार्टी के और बहुजन समाज पार्टी के लोगों ने अपने सदस्य को चुपचाप बैठा दिया और कांग्रेस के सदस्य को सुपोर्ट किया। मुझे याद नहीं आ रहा है कि रामपुर के अलावा भी कोई ऐसा संसदीय क्षेत्र है जहां बसपा और सपा दोनों की जमानतें जब्त हुई हैं। इनकी कोशिश रही कि भारतीय जनता पार्टी का मुस्िलम केंडिडेट न जीत पाए। कयोंकि अगर भारतीय जनता पार्टी की तरफ से मुसलमान केंडिडेट जीत गया तो उन्होंने जो पिछली बार शोर मचाया था कि तुम्हारे पास मुसलमान कहां हैं, तुम्हारे पास दक्षिण का कहां है, तुम्हारे पास पश्िचम का कहां है, तुम्हारे पास नोर्थ-ईस्ट का कहां है, वह शोर नहीं मचा पाएंगे, वह बोल नहीं पाएंगे। लेकिन उनकी योजना बुरी तरह असफल हुई और भारतीय जनता पार्टी ने मुस्िलम बहुल क्षेत्र से शुरूआत की है। आज एक सीट जीती है और मैं देश को विश्वास दिलाना चाहता हूं कि भारतीय जनता पार्टी और मित्र दलों के छ: महीने का काम देखने के बाद इस देश का मुसलमान भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ पैदा की गयी गलतफहमियों को दूर करेगा और मुसलमानों का प्रतनधित्व भारतीय जनता पार्टी की ओर से इस सदन में बहुत बड़ी संख्या में होगा।

... (व्यवधान)

KUMARI MAMATA BANERJEE : Sir, when the discussion on the Motion of Confidence is going on, they are questioning the credibility of the Government. They want the Government to prove its majority. But no opposition leader is there. Please see this side. We are all sitting. Please also see that side which is totally vacant...(Interruptions)

MR. CHAIRMAN : Prof. Kurien, he is not yielding. Please take your seat.

... (Interruptions)

SHRI MUKHTAR NAQVI (RAMPUR) "> श्री रामानंद सिंह (सतना) : जनता ने अपना जनादेश भारतीय जनता पार्टी के पक्ष में दिया है। चालीस में से तीस लोग मध्यप्रदेश से जीतकर आए हैं। मध्यप्रदेश की ओर से श्री अजीत जोगी ने अपने विचार रखे हैं। हम चाहते हैं कि जिस पार्टी को मध्य प्रदेश ने बहुमत दिया है उसके विचार भी सदन में आ जाएं। मैं रामानंद सिंह मध्य प्रदेश की ओर से अपने विचार रखना चाहता हूं। कृपया मुझे पांच मिनट का समय दिया जाए।

... (व्यवधान) सभापति महोदय, लोक सभा चुनाव में देश के मतदाताओं ने अपना जनादेश दे दिया। आज जनादेश मोटे तौर पर स्पष्टत: पंडित अटल बिहारी वाजपेयी जी के नेत्ृात्व में सरकार बनाने का रहा। यही कारण है कि भारतीय जनता पार्टी के सभी सहयोगी दलों ने भारतीय जनता पार्टी के नेता अटल बिहारी वाजपेयी को लखित समर्थन महामहिम राष्ट्रपति महोदय को दिया। यह बहुत खेद की बात है कि जब विश्वास प्रस्ताव पर चर्चा हो रही है तो सारा विपक्ष गायब है। वे कुछ सुनना ही नहीं चाहते। अभी कुछ सदस्यों का बोलना बाकी है। बड़े लोग बोल-बोल कर भागते जा रहे हैं।

... (व्यवधान) मेरा पहला भाषण है। आप उसे सुनें। देश की जनता का कुल मिला कर जनादेश यह है कि राष्ट्रीय राजनैतिक दल, क्षेत्रीय दल और राष्ट्रीय नेता, क्षेत्रीय नेता इस देश को चलाएं और पंडित अटल बिहारी वाजपेयी जी के नेत्ृात्व में जो एक योग्य सरकार का गठन हुआ है, उसे काम करने का मौका दें।

  महोदय, आज समूचे देश की निगाहें इस संसद की ओर लगी है। पिछले ५० वषर्ों में जो सरकारें चलीं, उनके क़ियाकलाप से पूरा देश अवगत है। इसलिए भारत के मतदाताओं ने पिछले दो चुनावों में कांग्रेस को कोई बहुमत नहीं दिया। तिकड़म जोड़-तोड़ करके भले ही वे कुछ संख्या में आए लेकिन इस दल की सत्ता में जो दुर्गति हुई है, समूचा देश उसका साक्षी रहा है। मैं कहना नहीं चाहता लेकिन आज जो लोग वोट आफ कॉनफिडेंस का विरोध कर रहे हैं, मैं उन्हें बताना चाहता हूं कि जनता पार्टी के शासनकाल में सवा दो रुपए किलो शककर थी और उनके राज में आज साढ़े पांच रुपए किलो नमक मिल रहा है, वे लोग इस विश्वास प्रस्ताव का किस मुंह से विरोध करना चाहते हैं?  

  महोदय, प्रधानमंत्री महोदय ने राष्ट्रीय एजेंडे और राष्ट्रपति महोदय के अभिभाषण के माध्यम से अपना इरादा राष्ट्र के सामने स्पष्ट कर दिया है कि वे आम सहमति से सब को लेकर इस देश और सरकार को चलाना चाहते हैं लेकिन प्रतिपक्ष पिछले दो-तीन दिन से जो भूमिका निभा रहा है, सारा राष्ट्र उनकी भूमिका को देख रहा है। आप किन बिन्दुओं पर आलोचना कर रहे हैं? कितनी विसंगति से भरे लोग वहां बैठे हैं? आज मैं मुलायम सिंह यादव जी का भाषण सुन कर चकित हो गया। लालू जी. यहां से उठ कर चले गए। आज ये लोग सरकार का विरोध कर रहे हैं। उन्हें यह स्पष्ट करना होगा कि कया वे कांग्रेस का खुला समर्थन करने के लिए तैयार हैं? भाजपा और सहयोगी दलों को जनादेश प्राप्त हुआ है। कया आपको सरकार बनाने का जनादेश है? कया आप आज फिर से मध्यावधि चुनाव चाहते हैं? कया आप इसके लिए तैयार हैं? आप कोई सरकार इस देश में चलने देना चाहते हैं या नहीं?

  महोदय, जो राष्ट्रीय एजेंडा राष्ट्र के सामने है, उन्हीं पर हमारी सरकार चलेगी। यह अलग बात है कि भारतीय जनता पार्टी ने घोषणा पत्र में कया कहा। जो राष्ट्रीय एजेंडा है, वही राष्ट्र के सामने एक दस्तावेज है। इस एजेंडे के किस बिन्दु का आप विरोध कर रहे हैं? मैं जानना चाहूंगा जब कोई प्रतिपक्ष का कोई नेता खड़ा होकर कहे,   इस राष्ट्रीय ऐजेण्डे में जो बातें कही गई हैं धर्मनिरपेक्षता के बारे में, उस पर आपको भाजपा पर कई शंकाएं हैं लेकिन धर्मनिरपेक्षता की घोषणा की प्रधान मंत्री ने इस दस्तावेज़ में तो आपको कयों इससे शिकायत है? धर्मनिरपेक्षता के बारे में प्रधान मंत्री ने कहा कि यह हमारी संस्कृति और सभ्यता का अटूट अंग रहा है। यह देश धर्मनिरपेक्ष रहा है और आगे भी रहेगा।

  इसमें अशकतों की सहायता की बात कही गई है। पिछली सरकारों में बड़े-बड़े लोग मौज मारते रहे और देश में अंतिम आदमी वहीं का वहीं है। उसके लिए कया किया गया? अशकतों की सहायता की बात जो राष्ट्रीय ऐजेण्डे में कही गई, राष्ट्रपति के अभिभाषण में कही गई, उससे आपको कया आपत्ित है? सार्वजनिक वितरण प्रणाली में बहुत भ्रष्टाचार व्याप्त है। अगर उसमें सुधार करने की बात कही गई तो कया आपत्ित है? रोज़गार के अवसरों में व्ृाद्धि के मामले पर आपको कया आपत्ित है? समाज के बुनियादी ढांचे में अधिक धन लगाने की बात कही गई है। अधिक से अधिक लोगों को आवास की बात कही गई है। शिक्षा पर अधिक व्यय और महिलाओं की ग्रेजुएशन तक निःशुल्क शिक्षा पर आपको कया आपत्ित है, ज़रा खड़े होकर बोलिये। पीने का पानी पहुंचाने की घोषणा की गई है। कांग्रेस ने तीसरी पंचवर्षीय योजना के दस्तावेज़ में कहा था कि भारत के हर गांव को पीने का पानी मुहैया कराया जाएगा। आठ योजनाओं में आपने वायदों को पूरा नहीं किया। अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार पांच साल रही तो पीने का पानी भारत के हर गांव को मिल जाएगा, राष्ट्र को इस बात का पूरा विश्वास है। अब वह व्यकित प्रधान मंत्री पद पर बैठा है जिस पर देश को विश्वास है।

  सभापति महोदय, राष्ट्रीय जनसंख्या नीति पर केवल आपने इमरजेन्सी में जो नीति अपनाई थी, उसका हश्र कया हुआ? लेकिन जनसंख्या नीति पर यदि सरकार कोई नीति तैयार करना चाहती है तो इस पर आपको कया आपत्ित है? आज़ादी के पचास साल बाद भी बच्चे लाटरी और मूंगफली बेच रहे हैं। इनके लिए पचास सालों में आपने कौन सी योजनाएं बनाईं? श्री अटल बिहारी वाजपेयी जैसे दूरदृष्टा ने देश के अनाथ गरीब बच्चों के लिए एक राष्ट्रीय नीति बनाने की बात कही। आपको उससे कया आपत्ित है? महिलाओं के लिए स्थानीय संस्थाओं से लेकर विधान सभा और लोक सभा में ३३ परसेंट आरक्षण की बात आप भी कहते रहे। इसको पारित कराने में आपको कया दिककत है? महिलाओं को ३३ परसेंट आरक्षण देने के लिए पहला प्रधान मंत्री हुआ है जिसने छाती ठोककर कहा है कि यह बिल सरकार पारित कराएगी। आप आइए और इसको पारित कराइए और महिलाओं को अधिकार दीजिए। बड़ी बातें की जा रही हैं कि भारत की बेटी और भारत की बहू। भारत की बेटी ममता बनर्जी जिसे कांग्रेस ने निकाल दिया, वह भारत की बेटी हमारे साथ है। जो झुग्गी-झोंपड़ियों में गरीबों के लिए संघर्ष करती रही, वह भारत की बेटी आज भारतीय जनता पार्टी की अलायंस की सरकार में है।

  सभापति महोदय, सकल घरेलू उत्पादन को आठ परसेंट बढ़ाने का और बेरोज़गारी हटाओ का नारा इस सरकार ने दिया है। आपको कया आपत्ित है इस पर? कृषि पर योजना का ६० परसेंट खर्च करने की बात कही गई है। आज देश भुखमरी के कगार पर खड़ा है। किसानों को छला गया, बेतूल में हक मांगने पर २९ किसानों की हत्या करने वाले किस मुंह से श्री अटल बिहारी वाजपेयी का विरोध करते हैं? गवर्नर के पद का जिस तरह से दुरुपयोग हुआ है, उसको रोकने के लिए सरकारिया आयोग बैठा था। उसको लागू करने की बात सरकार कह रही है और अभी भी प्रधान मंत्री ने कहा है कि किसी भी राज्य सरकार को दुर्भावनापूर्वक बर्खवास्त नहीं किया जाएगा। लेकिन कई सरकारें तो ऐसी हैं कि उनको तत्काल बर्खवास्त कर देना चाहिए लेकिन यह पहले प्रधान मंत्री हैं जो सत्ता में आने के बाद आपकी राज्य सरकारों को देश के सभी क्षेत्रीय दलों की सरकारों को बर्खवास्त करने की बात नहीं कर रहे हैं। पिछड़ा क्षेत्र आयोग बनाने की बात कही गई है। जितने रीजनल इंबैलेन्सेज़ हैं जिनके कारण उत्तरांचल की मांग, वनांचल की मांग और छत्तीसगढ़ की मांग हो रही है ... (व्यवधान)

  मैं प्रधान मंत्री जी को सुझाव दूंगा कि दूसरे राज्य पुनर्गठन आयोग का गठन करना चाहिए और राज्यों के पुनर्गठन पर पुनर्िवचार होना चाहिए। सभापति महोदय, आपने मुझे बोलने का समय दिया इसके लिए मैं आपका आभारी हूं।

">"> श्री अनंत गंगाराम गीते (रत्नागरि) : सभापति महोदय, बहुत-बहुत धन्यवाद। प्रधान मंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी ने जो विश्वास का मत सदन में पेश किया है मैं उसके समर्थन में खड़ा हुआ हूं। मैं अपनी ओर से और अपने पक्ष शिवसेना की ओर से इस प्रस्ताव का पूरी तरह से समर्थन करता हूं। ग्यारहवीं लोक सभा में १८ महीने इस सदन में रहने का मुझे मौका मिला। अब दोबारा इस सदन में उपस्िथत रहने का मुझे मौका मिला है। पिछली लोक सभा में विश्वास मत के प्रस्ताव पर जो चर्चा इस सदन में हुई थी, वह समय मुझे याद आ रहा है, जिसका जिक़ प्रधान मंत्री जी ने विश्वास मत के समय दिये गये अपने भाषण में किया। जब ग्यारहवीं लोक सभा के प्रधान मंत्री के रूप में उन्होंने अपना प्रस्ताव इस सदन में रखा था तो वर्तमान सूचना एवं प्रसारण मंत्री श्रीमती सुषमा स्वराज ने विश्वास मत पर सदन में होने वाली चर्चा को दूरदर्शन पर सारे देश के लोगों को दिखाने की एक अच्छी परम्परा डाली थी। विश्वास मत पर जब प्रधान मंत्री जी अपना उत्तर देने के लिए खड़े हुए तो मुझे वह क्षण याद है कि पूरे सदन में सन्नाटा छाया हुआ था और देश के करोड़ों लोग दूरदर्शन पर उस चर्चा को देख रहे थे। वे प्रधान मंत्री श्री वाजपेयी जी का भाषण ऐसे सुन रहे थे जैसे क़िकेट का वन डे मैच होता है। उस समय हर नागरिक टी.वी. के सामने अटल जी के विचार सुन रहा था। उस समय मैं सदन के सदस्य के रूप में यहां मौजूद था। मुझे ऐसा लगा था कि अटल जी अभी कहेंगे कि मैं अपना बहुमत यहां सिद्ध करता हूं। लेकिन जब उन्होंने यह कहा कि इस सदन का विश्वास मैं हासिल नहीं करा हूं, इसलिए मैं राष्ट्रपति जी को अपना इस्तीफा देने जा रहा हूं ये शब्द जब उन्होंने कहे तो देश के करोड़ों लोगों की आंखों में पानी आ गया जो टी.वी. पर अटल जी के विचार सुन रहे थे।
... (व्यवधान)
SHRI TARIQ ANWAR (KATIHAR) श्री तारिक अनवर : आंसू तो नहीं आये।
... (व्यवधान)
SHRI RAM NAIK (MUMBAI-NORTH) श्री राम नाईक: आप इस पर मजाक कर रहे हैं। जब कोई गैरहिंदी भाषी हिन्दी में बोलता है तो आपको उसका उत्साह बढ़ाना चाहिए। आप कयों मजाक उड़ा रहे हैं। थोड़ी बहुत सभ्यता तो होनी चाहिए। आप लोगों ने सभ्यता बिलकुल छोड़ दी लगती है।
SHRI ANANT GANGARAM GEETE (RATNAGIRI) श्री अनंत गंगाराम गीते : सभापति महोदय, उस दिन हिन्दुस्तान के करोड़ों लोगों को दुख हुआ। आप इस बात को हंसी-मजाक में यहां पर ले रहे हैं, लेकिन यह सत्य है कि करोड़ों लोगों को दुख हुआ। गरीब से गरीब आदमी, एक आटो रिकशा चलाने वाला भी चाहता था कि वाजपेयी जी देश के प्रधान मंत्री हों और आज वह समय आ गया है जब श्री अटल बिहारी वाजपेयी इस देश के प्रधान मंत्री हो गये हैं और वे पांच साल तक इस देश के प्रधान मंत्री रहेंगे।
  यह आपको पता चलेगा।
... (व्यवधान)
  सभापति महोदय : आप कृपया बैठिए। इस प्रकार से बीच में टोका-टाकी ठीक नहीं है। अगर आपको कोई बात कहनी है, तो ठीक ढंग से कहिए। इस प्रकार से किसी सदस्य के बीच में न बोलें।
 
... (व्यवधान)
SHRI ANANT GANGARAM GEETE (RATNAGIRI) श्री अनंत गंगाराम गीते : सभापति जी, कल विश्वास मत पर मतदान होगा, लेकिन आज ही ऐसा लग रहा है कि अटल बिहारी जी को विश्वास मत प्राप्त हो गया है कयोंकि जिन विपक्ष के नेता ने इस विश्वास मत के ऊपर अपने विचार आरंभ में प्रकट किए थे वे यहां मौजूद नहीं हैं। उन्हें मालूम है कि अटल जी विश्वास मत प्राप्त करने वाले हैं, उनकी जीत होने वाली है। हालांकि यह कल सिद्ध होना है, लेकिन उसकी छाया आज ही दिखाई पड़ रही है।
  सभापति जी जब विपक्ष के नेता शरद पवार जी बोल रहे थे तो उन्होंने महाराष्ट्र और विशेषकर मुम्बई में हुए दंगों का जिक़ किया, बाबरी मस्िजद का जिक़ किय, श्री कृष्ण कमीशन का जिक़ किया। जब वे बोल रहे थे, तो हमने उनको टोकने की कोशिश की थी और पूछा था कि जब मुम्बई में दंगे हुए थे, तो उस समय वहां किसकी सरकार थी, कौन मुख्य मंत्री थे? मैं बताना चाहता हूं उस समय महाराष्ट्र में कांग्रेस की सरकार थी और शरद पवार स्वायं मुख्य मंत्री थे। इनकी सरकार ने कया किया? उस वकत पूरी मुम्बई जल रही थी और मुख्य मंत्री और आपके लोग डरकर घर में छिपकर बैठे हुए थे, सरकार खामोश बैठी रही।
... (व्यवधान)
SHRI TARIQ ANWAR (KATIHAR) श्री तारिक अनवर: श्री कृष्ण आयोग की रिपोर्ट आने दें। दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।
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SHRI ANANT GANGARAM GEETE (RATNAGIRI) श्री अनंत गंगाराम गीते : श्री कृष्ण कमीशन की रिपोर्ट तो आएगी, लेकिन मुम्बई की जनता इस बात को मानती और जानती है कि यदि मुम्बई को किसी ने बचाया है तो वे हमारे शिव सेना प्रमुख बाला साहब ठाकरे हैं। जब मुम्बई जल रही थी और सरकार खामोश थी, तो मुम्बई को शिव सेना प्रमुख बाला साहब ठाकरे ने बचाया। शिव सेना के लोग जगह-जगह गए और स्िथति को बिगड़ने से रोका और काबू किया, यह संदेश पूरे मुम्बई वासियों को गया। ऐसी भयंकर स्िथति में जब मुम्बई जल रही थी, किसी में जाने का साहस नहीं था, एक दिन में १२ जगह विस्फोट हो गए, सैकड़ों लोग मर गए, हजारों घायल हो गए, करोड़ों की संपत्ित नष्ट हो गई, लेकिन उसके खिलाफ तब के मुख्य मंत्री और यहां के विपक्ष के नेता ने कुछ नहीं कहा। श्री कृष्ण आयोग की रिपोर्ट आएगी और उस पर विधान सभा में चर्चा होगी और जो सत्यता है वह देश और दुनिया के सामने प्रकट होगी। श्री कृष्ण आयोग की रिपोर्ट की चिन्ता हमें नहीं है।
  सभापति महोदय, हमें दुख इस बात का है कि जब १२वीं लोक सभा चुनी गई और वाजपेयी जी को विश्वास मत प्राप्त होने वाला है, तो ११वीं लोक सभा की बजाय १२वीं लोकसभा में महाराष्ट्र से हमारे सांसद कुछ कम आए हैं। इसका हमें ही नहीं पूरे महाराष्ट्र के १० करोड़ लोगों को दुख है कि हम आज वाजपेयी सरकार को उतनी ज्यादा संख्या में सांसद भेजकर समर्थन नहीं दे पाए जितनी संख्या में दिया जाना चाहिए। यहां पर विपक्ष के नेता बोल रहे थे कि उन्हें बड़ी भारी सफलता महाराष्ट्र में लोक सभा चुनावों मिली, मैं इस बात को तो स्वीकार करता हूं, लेकिन मैं उन्हें आगाह करना चाहता हूं कि अभी तो लोक सभा के ही चुनाव हुए हैं दो साल बाद वहां विधान सभा के चुनाव भी होने वाले हैं। तब आपको परिणाम देखने को मिलेगा कि महाराष्ट्र में कहीं भी कांग्रेस दिखाई नहीं देगी और आपकी बुरी तरह हार होगी। लोक सभा चुनाव में कैसे हुआ, कया हुआ, इस बारे में ज्यादा विस्तार में और कारणों में जाना नहीं चाहता हूं, लेकिन जनता दुखी है कि यह सब कैसे हो गया।
  हर आदमी परेशान था। हर मतदाता परेशान था। आज दुर्भाग्य से हम संख्या में कम आये हैं। महाराष्ट्र ने पूरा साथ नहीं दिया, हमें इस बात का दुख होता है। यदि महाराष्ट्र साथ देता तो आज सदन में विश्वास मत रखने का समय भी न आता। इस बात से सारा महाराष्ट्र दुखी है। इस बात से सारा महाराष्ट्र चन्ितत हुआ है।
  सभापति जी, यहां पर आरोप लगाये जाते हैं। हमारे विपक्ष के नेताओं से, विपक्ष के साथियों से, जो यहां पर विश्वास मत के खिलाफ बोल रहे हैं, उसका विरोध कर रहे हैं, मैं उनसे पूछना चाहता हूं कि यदि भाजपा और मित्र पक्षों की सरकार यहां पर नहीं आयेगी तो यहां कौन सरकार बनाने वाला है। यहां पर कांग्रेस की सरकार आयेगी या यहां पर फ्रंट की सरकार आयेगी? किसकी सरकार यहां पर आने वाली है? कौन सरकार बना पायेंगे? राष्ट्रपति जी ने सही निर्णय लिया है जो कि श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी को सरकार बनाने का आमंत्रण दिया। आज सरकार बनी है, कल विश्वास प्राप्त करने वाली है। यह सरकार चलेगी। आज यहां पर विरोध किया जाता है, आरोप लगाये जाते हैं। यूनाइटेड फ्रंट की सरकार १४ पार्िटयों की थी लेकिन हमारी १८ पार्िटयों की सरकार है। आज करीबन १८ पक्ष एक साथ हुए हैं। चार मित्र पक्ष हमें बाहर से मदद कर रहे हैं। यह १८ पार्िटयों की सरकार है। मैं अपने विपक्ष के नेताओं और विपक्ष के साथियों को यह कहना चाहता हूं कि १८ पार्िटयों की सरकार १८ जड़ी बूटियां का च्यवनप्राश बना हुआ है, जो कि ५ साल आसानी से हजम कर जायेगा। आप इसकी चिन्ता मत कीजिए। केवल ५ साल ही नहीं बल्िक उसके बाद में आने वाले चुनाव में भी भाजपा और मित्र पक्ष इस देश के अंदर जीत जायेंगे। यह विश्वास मैं यहां पर देना चाहता हूं।
  सभापति जी, कहने के लिए तो बहुत है लेकिन समय की पाबंदी यहां पर मौजूद है। अभी दो-तीन मिनट और बाकी है।
... (व्यवधान) मैं समर्थन इसलिए करता हूं।
  सभापति महोदय : आप कन्कलूड करिये। आपका समय हो रहा है।
SHRI ANANT GANGARAM GEETE (RATNAGIRI) श्री अनंत गंगाराम गीते : सभापति जी, अभी तीन मिनट और बाकी है।
  सभापति महोदय : आप जल्दी समाप्त करिये।
SHRI ANANT GANGARAM GEETE (RATNAGIRI) श्री अनंत गंगाराम गीते : यहां पर विपक्ष के नेता भाषण करके चले गये। सुश्री ममता बनर्जी ने उनको सही जवाब दिया। जार्ज साहब ने उनको सही जवाब दिया। वे आरोप लगाकर जाते हैं। केवल आरोप लगाने के सिवाय कुछ नहीं कर सकते। पिछले १८ महीने में तीन सरकारें आईं। माननीय श्री देवेगौड़ा जी की सरकार और माननीय श्री गुजराल साहब की सरकार कांग्रेस के समर्थन से यहां पर आई। वह दो सरकारें किसलिए गिराई गयीं, इसका जवाब उनको देना चाहिए। जनता इस बात को जानना चाहती थी कि देवोगौड़ा जी की सरकार से सपोर्ट कयों वापिस लिया गया। गुजराल साहब की सरकार कयों गिराई गयी, यह जनता जानना चाहती थी। जिस जैन कमीशन का यहां पर रैफरेंस दिया गया, जिस जैन कमीशन के नाम से लोक सभा भंग हो गयी, उसके बारे में विपक्ष के किसी नेता ने अपने भाषण में कहीं कुछ नहीं कहा।
  सभापति महोदय : कृपया कन्कलूड करिये।
SHRI ANANT GANGARAM GEETE (RATNAGIRI) श्री अनंत गंगाराम गीते : सभापति जी, मैं अपने आपको कंट्रोल कर रहा हूं। ... (व्यवधान) लेकिन मैं इसलिए कहने जा रहा हूं कि कांग्रेस के नेता जब प्रचार के लिए जाते हैं। चुनाव में जब हार गये थे।
  सभापति महोदय : आप कन्कलूड कीजिए, समय हो गया है।
SHRI ANANT GANGARAM GEETE (RATNAGIRI) श्री अनंत गंगाराम गीते: मैं आपके आदेश का पालन करने वाला हूं। आपकी आज्ञा का पालन करने वाला हूं लेकिन जिस तरह से जनता को गुमराह करने की कोशिश कांग्रेस के नेताओं ने कई सालों से की, वही काम वह आज भी करने जा रहे है। इसलिए मैं आपको धन्यवाद देना चाहता हूं कि आपने मुझे बोलने का मौका दिया। श्री वाजपेयी जी की सरकार का समर्थन करने का मौका आपने मुझे दिया। विश्वास मत के प्रस्ताव पर समर्थन देने का मौका दिया, इसके लिए मैं आपको धन्यवाद देना चाहता हूं।