Lok Sabha Debates
Shri Prabhunath Singh Called The Attention Of The Minister Of The Rural ... on 28 July, 2005
> Title: Shri Prabhunath Singh called the attention of the Minister of the Rural Development to the need for effective implementation of various centrally sponsored schemes for rural development.
12.38 hrs. श्री प्रभुनाथ सिंह (महाराजगंज, बिहार) : अध्यक्ष महोदय, मैं माननीय ग्रामीण विकास मंत्री का ध्यान अविलम्बनीय लोक महत्व के निम्न विषय की ओर दिलाता हूं और प्रार्थना करता हूं कि वह इस संबंध में वक्तव्य दें :
“ वभिन्न केन्द्रीय प्रायोजित स्कीमों के प्रभावी कार्यान्वयन की आवश्यकता ” ग्रामीण विकास मंत्री (डॉ. रघुवंश प्रसाद सिंह) : अध्यक्ष महोदय, हम आपके प्रति आभार व्यक्त करते हैं इसलिए कि जो ग्रामीण विकास की योजनाओं के लागू होने में माननीय सदस्यों की महत्वपूर्ण भूमिका हो, जो गांव और गरीब के लिए चल रही योजनाएं हैं, उन पर स्टेट वजिलेंस की व्यवस्था हो, उस पर माननीय सदस्य के अनुरोध पर आपने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव स्वीकृत करने की अनुमति प्रदान की है। मैं माननीय सदस्य, श्री प्रभुनाथ सिंह जी को भी धन्यवाद देता हूं कि उन्होंने इस महत्वपूर्ण मुद्दे को सदन में उठाने और ध्यानाकर्षित करने का कष्ट किया है।
MR. SPEAKER: Please, please - No whisperings here. An important debate is being discussed.
डॉ. रघुवंश प्रसाद सिंह : महोदय, मंत्रालय को ग्रामीण विकास के अपने सभी कार्यक्रमों, जिनमें सम्पूर्ण ग्रामीण रोजगार योजना, जो वेज इम्पलीमेंटेशन प्रोग्राम cè[rpm8] , स्वर्णजयंती ग्राम स्वरोजगार योजना, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, इंदिरा आवास योजना आदि के प्रभावी कार्यान्वयन की आवश्यकता की पूर्ण जानकारी है। मंत्रालय फील्ड स्तर पर अपने वभिन्न कार्यक्रमों के क्रियान्वयन की स्थिति के बारे में नियमित रूप से जानकारी ले रहा है। मंत्रालय के कार्यक्रमों की निगरानी नियमित रूप से की जाती है और जिला ग्रामीण विकास एजेंसियों/राज्य सरकारों से नियमित आधार पर प्रगति रिपोर्टें मिलती हैं। ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा निष्पादित किए जा रहे कार्यक्रमों की वास्तविक और वित्तीय प्रगति का ब्यौरा नीचे दिए अनुसार है। …( व्यवधान)
सम्पूर्ण ग्रामीण रोजगार योजना सितम्बर, २००१ में शुरू हुई थी और इस योजना का उद्देश्य आवश्यकता आधारित स्थायी आर्थिक और सामाजिक आधारभूत संरचना का सृजन था। कार्यक्रम के आविर्भाव काल से मार्च, २००५ तक २९४.०५ करोड़ श्रमदिवस सृजित किए गए हैं। इस अवधि के दौरान ३१ मार्च, २००५ तक ५८.१७ लाख कार्य पूरे किए गए हैं और ४.३८ लाख कार्य चल रहे हैं। इस अवधि के दौरान २१,०५८.४८ करोड़ रुपये की राशि का उपयोग हुआ है और १२४.७२ लाख मीटि्रक टन अनाज वितरित किया गया है।
इस कार्यक्रम के प्रभावों का मूल्यांकन करने के उद्देश्य से मंत्रालय के वभिन्न कार्यक्रमों के आवधिक मूल्यांकन की प्रणाली है। तदनुसार, एस.जी.आर.वाई. के लिए ४३ स्वतंत्र प्रतिष्ठित अनुसंधान संस्थाओं के माध्यम से सहवर्ती मूल्यांकन अध्ययन कराया गया था। जिन प्रमुख बातों का पता लगा है, वे नीचे दिए अनुसार हैं :
-७७.६१ प्रतिशत कार्य इसी वर्ष पूरे किए गए।
-९८.०९ प्रतिशत मामलों में परिसम्पत्तियों की वास्तविक किस्म बहुत अच्छी, अच्छी और संतोषजनक बताई गई थी। केवल १.९१ प्रतिशत मामलों में ही इनकी किस्म खराब बताई गई थी।
-९८.२ प्रतिशत मामलों में लाभार्थियों ने कार्यों का उल्लेख बहुत उपयोगी और उपयोगी बताया था। केवल १.७२ प्रतिशत मामलों में ही यह बताया गया था कि कार्य उपयोगी नहीं है।
-८१ प्रतिशत मामलों में मजदूरी का भुगतान दिशा-निर्देशों के अनुसार एक पखवाड़े के भीतर किया गया था।
-लगभग ९८ प्रतिशत लाभार्थी कार्यक्रम को उसके वर्तमान रूप में ही जारी रखना चाहते हैं। काम के बदले अनाज का राष्ट्रीय कार्यक्रम नवम्बर, २००४ में १५० अत्यन्त पिछड़े जिलों में शुरू किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य एस.जी.आर.वाई. के अलावा अतरिक्त संसाधन उपलब्ध कराकर अतरिक्त अनुपूरक मजदूरी रोजगार सृजित करने और आवश्यकता आधारित आर्थिक, सामाजिक तथा सामुदायिक सम्पत्तियों के सृजन के माध्यम से भोजन सुरक्षा प्रदान करना है। यह कार्यक्रम स्वलक्षित प्रवृत्ति का है और सभी ग्रामीण गरीबों के लिए है। कार्यक्रम की शुरूआत से मई, २००५ तक कार्यक्रम के अन्तर्गत १२.९९ करोड़ श्रम दिवसों का सृजन किया गया। इस अवधि के दौरान ३६,६९० कार्य पूरे किए गए हैं और ३१,२३२ कार्य चल रहे हैं। अब तक ७६४.४५ करोड़ रुपये की राशि का उपयोग किया गया है और ६.०३ लाख मीटि्रक टन खाद्यान्न का वितरण किया गया है।
एस.जी.आर.वाई. और एन.एफ.एफ.डब्लू.पी. के निष्पादन की गुणवत्ता में और सुधार लाने के लिए प्रगति और गुणवत्ता की निगरानी करने के उद्देश्य से प्रत्येक कार्य के लिए सम्बन्धित गांव/स्थान के लाभार्थियों की सतर्कता और निगरानी समतियों का गठन करने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
स्वर्णजयंती ग्राम स्वरोजगार योजना-हाल ही के वर्षों में स्वयं सहायता समूह एप्रोच की भारत में गरीबी रेखा से नीचे रहने वालों को सामाजिक, आर्थिक अधिकारिता प्रदान करने की दिशा में एक कारगर एप्रोच के रूप में पहचन की गई है। ग्रामीण विकास मंत्रालय तदनुसार, उपेक्षित समूहों पर विशेष ध्यान देते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबी उन्मूलन के वृहत उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए स्वर्णजयंती ग्राम स्वरोजगार योजना नामक एक स्वरोजगार योजना का कार्यान्वयन कर रहा है।[i9] यह ऋण एवं सब्सिडी योजना है। ऋण प्रभावी भूमिका निभाता है और सब्सिडी एक सहायक घटक है। योजना में ग्रामीण गरीबों का स्वसहायता समूह में बदलने के लिए सामाजिक जागरण, उनकी क्षमता निर्माण, कौशल उन्नयन, प्रशिक्षण, वभिन्न प्रकार के आर्थिक क्रियाकलाप शुरू करने के लिए सहायता, ऋण सम्पर्क, आधारभूत सुविधाएं, प्रौद्योगिकी और विकास संबंधी कार्यनीति के एक महत्वपूर्ण घटक के रूप में विपणन सहायता पर विश्ष ध्यान देते विकास प्रक्रिया में एक प्रतिमानात्मक बदलाव लाने का प्रयास किया गया है। दसवीं योजना के वर्ष २००२-०३ से २००४-०५ के पहले तीन वर्षों के दौरान मंत्रालय ने इस योजना के अन्तर्गत २०४९.८८ करोड़ रूपये जारी किए और एससीएसवाई लाभार्थियों के लिए ४१२७.३७ करोड़ रूपये के ऋण जुटाए गए। इस अवधि के दौरान २८.१८ लाख स्वरोजगारियों को सहायता प्रदान की गई। अन्य उपलब्धिया हैं - ऋण जुटाव २००२-०३ के ४०-४५ प्रतिशत से वर्ष २००४-०५ में ६५ प्रतिशत तक बढ़ा है; सहायता किए गए समूह स्वरोजगारियों का प्रतिशत पहले तीन वर्षों में ३०-४० प्रतिशत से पिछले दो वर्षों में ७० प्रतिशत बढ़ा है; प्रारम्भिक तीन वर्षों में स्वसहायता समूहों को दिए जाने वाला ऋण-प्रवाह, जो २० से २५ प्रतिशत था, बढ़कर २००४-०५ में ६० प्रतिशत से अधिक हो गया है। इस कार्यक्रम के प्रभावों का मूल्यांकन करने के उद्देश्य से मंत्रालय में वभिन्न कार्यक्रमों के आवधिक मूल्यांकन की प्रणाली है। तदनुसार, एसजीआरवाई के लिए ४३ स्वतंत्र प्रतिष्ठित अनुसंधान संस्थाओं के माध्यम से सहवर्ती मूल्यांकन अध्ययन कराया गया था। जिन प्रमुख बातों का पता लगा है, वे हैं - ७७.६१ प्रतिशत कार्य इसी वर्ष पूरे किए गए; ९८.०९ प्रतिशत मामलों में परिसंपत्तियों की वास्तविक किस्म बहुत अच्छी, अच्छी और संतोषजनक बताई गई थीं। केवल १.९१ प्रतिशत मामलों में ही इनकी किस्म खराब बताई गई थी; ९८.२ प्रतिशत मामलों में लाभर्थियों ने कार्यों का उल्लेख बहुत उपयोगी और उपयोगी बताया था। केवल १.७२ प्रतिशत मामलों में ही यह बताया गया था कि कार्य उपयोगी नहीं है; ८१ प्रतिशत मामलों में मजदूरी का भुगतान दिशा-निर्देशों के अनुसार एक पखवाड़े के भीतर किया गया था; लगभग ९८ प्रतिशत लाभार्थी कार्यक्रम को उसके वर्तमान रूप में ही जारी रखना चाहते हैं।
एनएफएफडब्ल्यूपी (काम के बदले अनाज का राष्ट्रीय कार्यक्रम) - काम के बदले अनाज का राष्ट्रीय कार्यक्रम नवम्बर, २००४ में १५० अत्यंत पिछड़े जिलों में शुरू किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य एसजीआरवाई के अलावा अतरिक्त संसाधन उपलब्ध कराकर अतरिक्त अनुपूरक मजदूरी रोजगार सृजित करने और आवश्यकता आधारित आर्थिक, सामाजिक तथा सामुदायिक सम्पत्तियों के सृजन के माध्यम से भोजन सुरक्षा प्रदान करना है। यह कार्यक्रम स्वलक्षित प्रवृत्ति का है और सभी ग्रामीण गरीबों के लिए है। कार्यक्रम की शुरूआत से मई, २००५ तक कार्यक्रम के अन्तर्गत १२.९९ करोड़ श्रम दिवसों का सृजन किया गया। इस अवधि के दौरान ३६६९० कार्य पूरे किए गए हैं और ३१३२ कार्य चल रहे हैं। अब तक ७६४.४५ करोड़ रूपये की राशि का उपयोग किया गया है और ६.०३ लाख मी. टन खाद्यान्न का वितरण किया गया है।
इस प्रवृत्ति से कार्यान्वयन प्रक्रिया में सामूहिक द्ृष्टिकोण की मजबूती का पता चलता है१ स्वयं सहायता समूहों की तूलना में व्यक्तिगत स्वरोजगारियों पर निवेश का अनुपात १९९९-२००० में ०.२४ से बढ़कर २००४-०५ में १.८२ हो गया।
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) - जहां तक पीएमजीएसवाई का संबंध है, यह कार्यक्रम २५ दिसम्बर, २००० को शुरू हुआ था। अब तक (२००० से २००५ और २००६) सड़क कार्यों के लिए १८६४४.७५ करोड़ रूपये की राशि के प्रस्ताव मंजूर किए गए हैं और वभिन्न राज्यों को १२११८.६३ करोड़ रूपये रिलीज किए गए हैं। इस कार्यक्रम के अन्तर्गत १००९६.०९ करोड़ रुपए का व्यय हुआ है और ७१६०९.९५ किलोमीटर लम्बी सड़कें बनाई गई हैं।
इंदिरा आवास योजना (आई.ए.वाई.) - इंदिरा आवास योजना के अंतर्गत गरीब ग्रामीणों को मकानों के निर्माणों के लिए सहायता दी जाती है। इस कार्यक्रम के अंतर्गत समतल क्षेत्रों के लिए प्रति यूनिट २५००० रुपए की दर पर और पर्वतीय/दुर्गम क्षेत्रों के लिए २७५०० रुपए की दर पर सहायता दी जाती है। मरम्मत के अयोग्य कच्चे मकान के सुधार के लिए भी सहायता दी जाती है और सभी क्षेत्रों के लिए प्रति यूनिट १२५०० रुपए की दर से ऋण-सह-सब्सिडी योजना के अंतर्गत सब्सिडी दी जाती है। दसवीं योजना के पहले चार वर्षों के दौरान अर्थात २००२-०३ से २००५-०६ तक इस योजना के अंतर्गत जिलों को ७५६५.३७ करोड़ रुपये की राशि रिलीज की गई है और ८९१७.१० करोड़ रुपए की राशि का उपयोग किए जाने की रिपोर्ट मिली है। इस व्यय से कुल ४५७२७७७ मकान बनाए गए हैं।
११वें वित्त आयोग के अंतर्गत कार्यक्रम - ११वें वित्त आयोग निर्णय के अंतर्गत नधियां सीधे राज्यों को अंतरित की जाती हैं ताकि वित्त मंत्रालय द्वारा ग्राम पंचायतों को आगे आबंटन किया जा सके। राज्यों/पंचायतों को विकास के लिए इन नधियों के उपयोग के लिए लोचशीलता प्रदान की गई है।
ग्रामीण विकास कार्यक्रमों की निगरानी - यह सर्ववदित है कि कार्यक्रमों की सफलता वृहद रूप से प्रभावी सुपुर्दगी प्रणाली तथा निचले स्तर पर प्रभावी कार्यान्वयन पर निर्भर करती है ताकि ग्रामीण गरीबों को कार्यक्रम के लाभ पूरी तरह से मिल सके। इस बात को सुनिश्चित करने के लिए मंत्रालय ने अपने कार्यक्रमों के कार्यान्वयन की निगरानी तथा मूल्यांकन की व्यापक बहुस्तरीय तथा बहुआयामी प्रणाली बनाई है। निगरानी तंत्र के महत्वपूर्ण साधनों का संक्षिप्त विवरण इस प्रकार है - आवधिक प्रगति रिपोर्टें (वित्तीय एवं वास्तविक), क्षेत्र अधिकारी योजना, निष्पादन समीक्षा समति, केंद्रीय मंत्री द्वारा समीक्षा, जिला स्तरीय निगरानी, राष्ट्र स्तरीय निगरानीकर्त्ता, सतर्कता एवं निगरानी समतिय्ाां[MSOffice10] ।
सतर्कता एवं निगरानी समतियां - राज्य तथा जिला स्तरों पर सतर्कता एवं निगरानी समतियों के संबंध में संशोधित दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। इन दिशा-निर्देशों के अनुसार संसद सदस्यों (लोक सभा) को जिला स्तरीय समतियों के अध्यक्ष/ सह-अध्यक्ष के रूप में नामित किया गया है। अन्य सदस्यों में संबंधित राज्य के ऐसे राज्य सभा सदस्य जो जिला स्तरीय समति (सह-अध्यक्ष के रूप में) से जुड़ना चाहते हैं, जिले के सभी विधायक, राज्य सरकार तथा जिला स्तर पर पंचायती राज संस्थाओं के प्रतनधि, अनुसूचित जात/ अनुसूचित जनजात/अल्पसंख्यक समतियां आदि के प्रतनधि शामिल हैं। दिशा-निर्देशों के अनुसार, सतर्कता एवं निगरानी समतियों की बैठकें प्रत्येक तिमाही में एक बार आयोजित की जानी होती हैं। जिला स्तरीय सतर्कता एवं निगरानी समतियों के अध्यक्षों से यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया गया है कि इसकी बैठकें नियमित रूप से की जाएं। राज्य सरकारों ने बताया है कि अक्टूबर, २००४ में संशोधित दिशा-निर्देशों के जारी होने के बाद ११६ जिला स्तरीय सतर्कता एवं निगरानी समतियों ने पहले ही कम से कम एक बैठक कर ली है। करीब १३० जिला स्तरीय सतर्कता एवं निगरानी समतियों की बैठकों की सूचना मिली है।
इस प्रकार गांवों और गरीबों के लिए, देश के छ: लाख गांवों में जो ७०-७२ करोड़ लोग बसते हैं, जिनमें ज्यादातर गरीब लोग हैं, उनको रोजगार मिले, गांवों का सही विकास हो सके, ग्रामीण समृद्धि हो और अपने देश में जो बेरोजगारी और गरीबी का कलंक है, उससे मुक्ति के लिए राज्य सरकारों, पंचायती राज और माननीय सदस्यों के सहयोग से सारी योजना का लाभ गांवों के गरीबों को मिल सके, उसके लिए पर्याप्त व्यवस्था की गई है और सहयोग की अपेक्षा की गई है।…( व्यवधान)
(Placed in Library. See No. LT 2360/05) MR. SPEAKER: You will have another opportunity Mr. Minister.
… (Interruptions)
MR. SPEAKER: At least one hon. Member has taken the trouble to give notice. I have given this opportunity because of the important subject. Many hon. Members have not thought fit to give any notice. Please do not interrupt the hon. Member who has taken the trouble.
… (Interruptions)
MR. SPEAKER: No. I am not going to permit the further additions. This is not according to the rules.
MAJ. GEN. (RETD.) B. C. KHANDURI (GARHWAL): Rules say that we have to give prior notices. We came to know only this morning that this notice has come.
MR. SPEAKER: I have not framed the rules myself. You can read the rules.
MAJ. GEN. (RETD.) B. C. KHANDURI : I know that.
MR. SPEAKER: There are some laxities allowed. This is the result of that. You have given the notice at 1243 hours.
… (Interruptions)
MR. SPEAKER: I know everybody is interested. I shall decide. Leave it to me please so long as I am here.
...( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : आप चुपचाप बैठ जाइए।
...( व्यवधान)
MR. SPEAKER: Only Shri Prabhunath Singh's statement will be recorded.
श्री प्रभुनाथ सिंह : अध्यक्ष महोदय, वभिन्न माध्यमों से ग्रामीण विकास सुधार के कार्यक्रमों की जानकारी मिलती रहती है। पत्राचार करने पर ग्रामीण विकास विभाग से उसके कुछ उत्तर आते रहते हैं। सदन में भी जब कभी ग्रामीण विकास मंत्री के भाषण होते हैं, खासकर एक किताब भी माननीय मंत्री जी के यहां से निकली है - ' ग्रामीण विकास - एक झलक'। थोड़े में ही सही, लेकिन उसमें हर बात का जिक्र बखूबी किया गया है। किस राज्य में, किस योजना में, कितने आबंटन दिए गए हैं, उसका भी जिक्र उसमें किया गया है। हम इन आंकड़ों के जाल में ज्यादा नहीं जाना चाहते।
मंत्री जी ने अभी जो उत्तर पढ़ा, वे अपना विवरण दे रहे थे, तो हमें थोड़ी परेशानी झलक रही थी। परेशानी इसलिए झलक रही थी कि हमने कभी भी सरकार के कार्यक्रमों के उद्देश्यों और माननीय मंत्री जी की नीयत पर कोई सवाल नहीं उठाया। हम मंत्री जी की इच्छा को भी जानते हैं कि वे चाहते हैं कि देश और राज्य में कुछ न कुछ जरूर हो। इनके विचार कभी-कभी अखबारों के माध्यम से भी पढ़ने को मिलते हैं। लेकिन जिस तरह मंत्री जी अखबारों में अपने विचारों और उद्गारों को खुलकर व्यक्त करते हैं, यहां कागजी आंकड़े पढ़कर सुना रहे थे। आप ग्रामीण विकास मंत्री की हैसियत से अपने विचार तो देते कि कहां त्रुटियां हैं, कहां कमियां हैं और उन कमियों को ठीक करने के लिए आप कौन-कौन से उपाय निकाल रहे cé[R11] । इस संबंध में आपने कोई चर्चा नहीं की। आप वभिन्न तरह की योजनाएं चलाते हैं। आपका उद्देश्य उन गांवों का विकास करना है जो अभी तक विकास से वंचित हैं। आपका उद्देश्य वहां के मजदूरों को लाभ पहुंचाना है ताकि उनको रोजगार मुहैया हो सके। गरीब अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति, हर वर्ग के लोगों को आप लाभ पहुंचाना चाहते हैं। इसके लिए आप वभिन्न तरह की योजनाएं चला रहे हैं लेकिन वे योजनाएं धरती पर कितने प्रतिशत उतरती हैं ? अखबार में आपका बयान पढ़कर हम संतुष्ट हुए थे। आपकी जानकारी के अनुसार वे योजनाएं धरती पर नहीं उतर पा रही हैं लेकिन आपने सरकारी आंकड़ा पढकर सुनाया कि वे योजनाएं धरती पर उतर रही हैं, तो इन दोनों में भारी भेद है।
हम लम्बा भाषण न देकर केवल दो-तीन योजनाओं के विषय में जिक्र करना चाहेंगे। आप काफी योजनाएं चलाते हैं जैसे सम्पूर्ण ग्रामीण रोजगार योजना, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, इंदिरा आवास योजना आदि। आपने अभी कुछ नयी योजनाएं चलाई हैं जैसे सम विकास योजना, कार्य के बदले अनाज योजना तथा अभी आप एक नया रोजगार गारंटी योजना का बिल भी लाने जा रहे हैं।
अध्यक्ष महोदय, इनकी नीयत ठीक है। हमको उस पर कोई शंका नहीं है लेकिन जब नधि का आवंटन हो रहा है तब क्या हो रहा है ? हम आंकड़ों में नहीं जाना चाहेंगे कि किस राज्य में इन्होंने कितना दिया। हम हकीकत की तरफ जाना चाहते हैं, व्यावहारिकता की तरफ जाना चाहते हैं। सम विकास योजना में इन्होंने हर राज्य में कुछ जिलों का चयन किया है। जहां तक हमें जानकारी है, १५०० करोड़ रुपये सालाना ये उन जिलों के विकास के लिए देने जा रहे हैं। उसमें वभिन्न तरह की योजनाएं हैं। यह बहुत ही अच्छा कार्यक्रम है। अगर योजना का कार्यान्वयन सही ढंग से हो जाये तो निश्चित तौर पर यह माना जायेगा कि देहाती इलाके, ग्रामीण इलाके खुशहाल हो जायेंगे। इसमें उच्च विद्यालय बनाने, जल निकासी, सिंचाई तथा गरीबों के लिए आवास बनाने आदि भरपूर योजनाएं दी हैं।
अध्यक्ष महोदय, हम इनसे जानना चाहते हैं कि बिहार के किन-किन जिलों में चूंकि बिहार से कमजोरी आपको भी होगी। इसलिए हम आपकी कमजोरी का सवाल जानना चाहते हैं कि बिहार के किन-किन जिलों में अब तक आपने नधि भेजी है और उसकी योजना स्वीकृत होकर काम शुरू हुआ है या नहीं ? उदाहरण के तौर पर हम बताना चाहते हैं कि छपरा के कलैक्टर से हमारी टेलीफोन पर बात हुई। हमने उनसे पूछा कि क्या आपके यहां सम विकास योजना की नधि आ चुकी है तो उन्होंने कहा कि १५ करोड़ रुपये आ चुके हैं और १५ करोड़ रुपये तुरंत आने वाले हैं। उसकी चिट्ठी आ गयी है और ३० करोड़ रुपये अभी इस जिले को मिले हैं। हमने फिर उनसे पूछा कि क्या योजना का चयन हो चुका है तो उन्होंने कहा कि योजना के लिए हम मीटिंग कर रहे हैं। हमने कहा कि आप कब तक योजना का चयन कर लेंगे तो उन्होंने कहा कि बहुत जल्दी हम उसका चयन कर लेंगे। अब चूंकि ध्यानाकर्षण आज आ चुका था इसलिए हमने कल रात कलैक्टर को टेलीफोन करके जानने का प्रयास किया कि योजना का चयन हुआ या नहीं तो उन्होंने कहा कि अभी तक मीटिंग नहीं हुई है।
श्री रघुनाथ झा (बेतिया) : किसकी मीटिंग होनी है ? …( व्यवधान)
श्री प्रभुनाथ सिंह : उस मीटिंग में उन्होंने किसको रखा हुआ है ? उसके अध्यक्ष इनके कलैक्टर ही होंगे। इनके जितने आफिसर्स हैं, पदाधिकारी हैं …( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : मंत्री जी बहुत नॉलेजेबल हैं। He can reply to all the questions.
श्री प्रभुनाथ सिंह : इनकीजितनी जमात है, पता नहीं लुटेरा शब्द कहने से अनपार्लियामैंट्री न हो जाये इसलिए हम वह शब्द नहीं कहेंगे। …( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : यह बात भी जायेगी। आपने कहा कि हम यह शब्द बोलें या नहीं, तो यह बात भी रिकार्ड में जायेगी।
...( व्यवधान)
श्री प्रभुनाथ सिंह : इसलिए हम सोच रहे हैं कि लुटेरा शब्द नहीं बोलें। …( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : यह बात भी रिकार्ड में जायेगी।
...( व्यवधान)
श्री प्रभुनाथ सिंह : इस तरह की जो जमात है, उन लोगों को वहां पर योजना के चयन में रखा जायेगा। जितने पदाधिकारी हैं, वे इसमें शामिल हैं। शायद जिला परिषद के अध्यक्ष को अलग से शामिल किया है। इसके अलावा वहां स्थानीय किसी प्रतनधि, विधायक और सांसद को नहीं लिया। आपके सरकारी आंकड़ों पर …( व्यवधान)
श्री रघुनाथ झा : जिसको चेयरमैन बनाया है, उसको भी निगरानी समति में नहीं लिया। …( व्यवधान)
श्री प्रभुनाथ सिंह : इस तरह से इनकी नीयत चाहे बहुत अच्छी हो लेकिन इनके कार्य करने का तरीका कहीं से भी अच्छा नहीं है। इसलिए हम आपके माध्यम से कहना चाहेंगे कि मंत्री जी जब उत्तर दें …( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : मंत्री जी आप प्रश्न सुनिये।
...( व्यवधान)
श्री प्रभुनाथ सिंह : हम आपके माध्यम से जानना चाहेंगे कि सम विकास योजना में जिन जिलों का आपने चयन किया है, वह नधि आप कितनी और कब तक देंगे तथा कितनी जल्दी आप उन योजनाओं पर कार्य करायेंगे और उन योजनाओं का चयन कर लेंगे[r12] ।
13.00 [R13] hrs. जो योजनाओं के लिए चयन समति बनाई है, क्या उसमें स्थानीय जनप्रतनधियों को शामिल करेंगे ? कृपया करके इसका आप हां और ना में उत्तर दीजिएगा। हम आपसे यह जानना चाहेंगे। हमें प्रधान मंत्री ग्राम सड़क योजना…( व्यवधान)
डॉ. रघुवंश प्रसाद सिंह : माननीय सदस्य जो श्रम विकास योजना पर भाषण कर रहे हैं, हम उन्हें सूचना देना चाहते हैं कि श्रम विकास योजना का काम योजना आयोग से लागू होता है। ग्रामीण विकास से श्रम विकास योजना का नहीं होता।…( व्यवधान) अब अनौपचारिक सवाल इ-न्होंने उठाया है तो हम सबका जवाब देंगे।
अध्यक्ष महोदय : ठीक है। आपकी सीमा में होगा तो देंगे, नहीं तो नहीं देंगे।
श्री प्रभुनाथ सिंह : माननीय मंत्री जी ने अपने उत्तर में प्रधान मंत्री ग्राम सड़क योजना की चर्चा की थी। बड़ी अच्छी योजना थी। समतल इलाकों में ५०० तक की आबादी और…( व्यवधान)
५०० या उससे अधिक आबादी वाला गांव तथा २५० और उससे अधिक की आबादी वाले पर्वतीय क्षेत्र के गांवों को मुख्य सड़क से जोड़ने का कोई प्रावधान था। ५०० हमने ठीक बोला था। योजना की किश्त इन्होंने हर राज्य को दी। बीच के दिनों में चर्चा चलती थी कि फलां राज्य से खर्च का हिसाब नहीं आया है, इसलिए उस राज्य में दुबारा किश्त नहीं भेजी जा रही है। खासकर बिहार की चर्चा हम करना चाहेंगे कि इन्होंने २००३-२००४ में १५० करोड़ रुपये की किश्त दी थी। लेकिन इधर २००४-२००५ का आंकड़ा शून्य है। जो राशि इन्होंने दी थी, क्या इन्होंने कोई समीक्षा कराई है क जो कार्य स्वीकृत थे या जिन योजनाओं को स्वीकृत किया गया था, उन योजनाओं का काम पूरा किया गया है या नहीं किया गया है। हम दावे के साथ एक बात कहना चाहते हैं कि किसी एक कमेटी में आपने मुझे चेयरमैन बनाया है। उसमें यह मामला था। हमने पदाधिकारियों को बुलाकर बात की थी। उन्होंने बताया कि कई जिलों में काम आधा भी अभी नहीं हो पाया है और जब बिहार के विषय में चर्चा चली कि बिहार में एजेंसी सही ढंग से काम नहीं कर रही है तो उसमें हम लोग भी शामिल थे, मंत्री जी भी उसमें शामिल थे। जब ये मंत्री बने तो इन्होंने बिहार के कार्य को केन्द्रीय एजेंसी के जिम्मे सौंपा। प्रधान मंत्री ग्राम सड़क योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण सड़कों को जोड़ना था। उससे हम बिहार के मामले में अलग हो गये। हम लोगों ने लम्बा सड़क-पुल लेना शुरु किया। जो राज्य सरकार के जिम्मे सड़क है, जो राज्य सरकार का पीडब्ल्यूडी विभाग निर्माण करता है, उसको हमने प्रधान मंत्री ग्राम सड़क योजना का रुपया देना शुरु किया और जो केन्द्रीय एजेंसी है, बिहार में केन्द्रीय एजेंसी द्वारा अभी तक काम शुरू भी नहीं किया गया है। इसलिए हम आपके माध्यम से निवेदन करना चाहते हैं और आपसे कहना चाहते हैं कि आप भाषण तो बहुत लम्बा देते हैं और जब आप यहां इधर बैठते थे तो हाथ बांधकर बोलते थे और नजदीक कोई बैठता था तो आप उसकी आंख खोल देते थे। अब आप अपने पदाधिकारियों की आंख क्यों नहीं खोल रहे हैं ? क्या हो गया है आपकी हिम्मत और आपकी ताकत को ? …( व्यवधान)
डॉ. रघुवंश प्रसाद सिंह : मैं सब ठीक कर दूंगा।
अध्यक्ष महोदय : मंत्री जी, आप बाद में बोलिएगा। प्रभुनाथ सिंह जी, अभी आप प्रश्न पूछिए।
श्री प्रभुनाथ सिंह : अध्यक्ष जी, हम भूमिका बनाकर सवाल पूछेंगे।
अध्यक्ष महोदय : आपकी भूमिका बहुत लम्बी हो गई है। भूमिका छोटी कीजिए।
श्री प्रभुनाथ सिंह : अध्यक्ष महोदय, इसलिए हम आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी से जानना चाहते हैं कि प्रधान मंत्री ग्राम सड़क योजना में जो आपने केन्द्रीय एजेंसी लगाई हुई है या जो पहले से कार्य शुरू हुआ है और जो अभी तक पूरा नहीं हुआ है, उस कार्य को आप कब तक पूरा कराएंगे और केन्द्रीय एजेंसी के माध्यम से बिहार में आप कब तक काम शुरू कराने जा रहे हैं ? इसका स्पष्ट ब्यौरा देने का कृपया कष्ट करें, यही हमारा आपसे निवेदन है।
MR. SPEAKER: Please conclude now. I have given you 17 minutes.
श्री प्रभुनाथ सिंह : हमें इधर मौका नहीं मिल रहा है।
अध्यक्ष महोदय : प्रभुनाथ सिंह जी को मौका नहीं मिलता है। ठीक है, बोलिए।
श्री प्रभुनाथ सिंह : अध्यक्ष महोदय, सम्पूर्ण ग्रामीण रोजगार योजना-- इसमें ग्रामीण क्षेत्रों में खासकर रोजगार मुहैया कराना, आर्थिक आधार का सृजन करना, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति, महिला तथा बाल मजदूरों के अभिभावकों को रोजगार देना है[R14] ।
अध्यक्ष महोदय, इस योजना में जो पैसा जा रहा है, उसे खर्च करने के बारे में प्रतिशत निर्धारित किये गए हैं कि कितने प्रतिशत पैसा पंचायत समतियों के माध्यम से, मुखिया के माध्यम से और जिला परिषद के माध्यम से खर्च किया जाएगा।
MR. SPEAKER: You have already mentioned that. Very effectively you have mentioned your points. I have noted that.
श्री प्रभुनाथ सिंह : इसके अलग-अलग प्रतिशत निर्धारित किए गए हैं, लेकिन मैं पूरे देश तो नहीं, बिहार के बारे में यह जानता हूँ कि मुखिया के माध्यम से जो पैसा खर्च होता है, अब पता नहीं गांधी जी का पंचायती राज का कैसा सपना था, उसमें १०० प्रतिशत की लूट होती है।
श्री इलियास आज़मी (शाहाबाद) : ९५ प्रतिशत पैसे की लूट होती है।
श्री प्रभुनाथ सिंह : माननीय सदस्य के यहां पांच प्रतिशत पैसे का काम हो जाता होगा, लेकिन हमारे यहां पूरे १०० प्रतिशत पैसे की लूट होती है। यही कारण है कि कोई भी ऐसा साल नहीं होता है जब १०-२० मुखिया लोगों को गोली न मारी जाती हो, इसीलिए लोग गुस्से में आकर उनका राम नाम सत्य भी कर रहे हैं। वभिन्न माध्यमों से जिन गरीबों के लिए पैसा जाता है, वह उनके यहां तक नहीं पहुंचता है। इसलिए लोग उस गरीब को उकसाते हैं जिसके कारण उग्रवाद का जन्म होता है। इसे बिचौलियों से बचाना होगा। मैं आपके माध्यम से मंत्री जी से कहना चाहता हूँ कि मंत्री जी आप बात-बात में कहते हैं कि यह राज्य का मामला है, अब तो बिहार का राज्य और केन्द्र - दोनों आपका ही मामला है। आप राज्यपाल के यहां पत्र भेजते हैं तो राज्यपाल कहते हैं कि रघुवंश बाबू यह न समझें कि हम शतरंज खेल रहे हैं। हम यह जानना चाहते हैं कि आप शतरंज खेल रहे हैं कि राज्यपाल शतरंज खेल रहे हैं? इसमें क्या सच है, इसे स्पष्ट कीजिए?
अध्यक्ष महोदय : ठीक है, अब आप महाराजगंज की बात कह कर बैठ जाइए।
श्री रघुनाथ झा : महाराजगंज में तो सब साफ हो गया है।
श्री प्रभुनाथ सिंह : अध्यक्ष महोदय, इन्दिरा आवास योजना गरीबों की योजना है।
अध्यक्ष महोदय : ठीक है, हम सभी लोग यहां गरीबों के लिए ही बैठे हैं।
श्री प्रभुनाथ सिंह : महोदय, इस योजना में अनुसूचित जातियों-जनजातियों और सैनिकों की विधवाओं के लिए आवास बनाने का प्रावधान है। मैं आपसे हकीकत बताना चाहता हूँ कि इसके लिए यह प्रावधान है कि पहले गांव में ग्रामसभा की बैठक होगी।
अध्यक्ष महोदय : प्रभुनाथ जी, आपको बोलते हुए २२ मिनट हो गए हैं।
श्री प्रभुनाथ सिंह : अध्यक्ष जी, ऐसा किया जाए कि इस विषय को यहीं पर छोड़ देते हैं। कल फिर इसके आगे शुरू किया जाए।
अध्यक्ष महोदय : आप अपना आखिरी प्रश्न पूछिए।
श्री प्रभुनाथ सिंह : अध्यक्ष जी, इसे कल फिर यहीं से शुरू किया जाए।
अध्यक्ष महोदय : आपने बहुत अच्छे प्रश्न उठाए हैं। आपने एक पूरा भाषण दे दिया है। हमें आपसे बहुत कुछ सीखने को मिला है। आप अपना आखिरी प्रश्न पूछिए।
श्री प्रभुनाथ सिंह : अध्यक्ष जी, हम इन्दिरा आवास योजना की चर्चा कर रहे थे, उसमें पहले ग्रामसभा की बैठक होती है, उसके बाद सूची प्रखण्ड में प्रखण्ड विकास अधिकारी के पास भेजी जाती है। प्रखण्ड विकास अधिकारी के यहां से उसका चयन किया जाता है। लेकिन हकीकत यह है कि कहीं भी ग्रामसभा की बैठक नहीं होती है और बीडीओ और मुखिया आपस में सहमत होकर काम करते हैं। इसके लिए मुखिया जाली दस्तखत बनाकर बीडीओ को दे देता है। यहां बीडीओ और मुखिया मिले रहते हैं।
MR. SPEAKER: You have to seek clarifications only, as you know.
श्री प्रभुनाथ सिंह : महोदय, जहां बीडीओ और मुखिया पर तनाव होता है, वहां पर भी आमसभा की बैठक नहीं होती है। वहां पर योजना की राशि पेंडिंग रह जाती है।
महोदय, इसमें लोग छ: हजार रूपए का कमीशन खाते हैं। यह भारत सरकार का रूपया है। आप गांव के गरीब लोगों के लिए भेज रहे हैं। इसलिए अगर आप मेरा बोलने का समय काटेंगे तो टीवी पर जो गरीब आदमी कार्यवाही देख रहे होंगे, वे कहेंगे कि उनकी बात को यहां उठाने का मौका नहीं दिया जा रहा है। इसलिए अध्यक्ष महोदय, मुझे बोल लेने दीजिए।
अध्यक्ष महोदय : क्या बोलने दीजिए, आप पिछले २५ मिनट से बोल रहे हैं। You need not advise me. You go to your seat.
श्री प्रभुनाथ सिंह : महोदय, मैं गरीबों की बात कह रहा हूँ, मुझे बोलने दीजिए। मैं माननीय मंत्री जी से जानना चाहता हूँ कि जिन योजनाओं में गड़बड़ी हो रही है, आपने इसके लिए प्राक्कलन बनाए हुए हैं, लेकिन प्राक्कलन के अनुरूप काम नहीं हो रहा है। इसको सही और सुचारू रूप से चलाने के लिए आप कौन से कदम उठाने जा रहे हैं?
MR. SPEAKER: Let us not violate all the rules all the time.
श्री प्रभुनाथ सिंह : महोदय, मैं केवल दो बातें कह कर समाप्त करता हूँ।
अध्यक्ष महोदय : ठीक है, लेकिन दो छोटी-छोटी बातें कहिए।
श्री प्रभुनाथ सिंह : महोदय, मैं स्वरोजगार योजना कि बारे में चर्चा करना चाहता हूँ और दूसरी बात मैं निगरानी समति के बारे में कहना चाहता हूँ, बाकी कागजों को मैं बंद कर रहा हूँ।[cmc15] MR. SPEAKER: Thank you for your co-operation.
श्री प्रभुनाथ सिंह : हम आपकी हर बात मानते हैं।
अध्यक्ष महोदय : हम उसके लिए आपके आभारी हैं। अब आप समाप्त कीजिए।
श्री प्रभुनाथ सिंह : मैं सिर्फ दो बिंदुओं पर चर्चा करके अपनी बात समाप्त करूंगा। इसीलिए मैंने अपने सारे कागज समेट लिए हैं। स्वरोजगार योजना के बारे में मैं कहना चाहता हूं कि गांव में शक्षित बेरोजगारों को रोजगार देने की बात, गरीब, मजदूर और किसान को रोजगार देने की बात इन्होंने कही है। लेकिन हकीकत में यह होता है कि ये लोग ब्लाक, बैंक और उद्योग कार्यालय के चक्कर लगाते रहते हैं और आखिर में जाकर सिर्फ ४० प्रतिशत पैसा ही मिल पाता है, बाकी का ६० प्रतिशत कमीशन में चला जाता है। वह ४० प्रतिशत भी जब उसे इतनी मेहनत करके मिलता है, तो उसके पास जो पूंजी होती है, वह समाप्त हो जाती है और वह कोई रोजगार नहीं कर पाता है। इसके बाद उस ऋण के सूद का बोझ उसके ऊपर डाल दिया जाता है।
MR. SPEAKER: In future I have to consider whether I shall allow Calling Attention or not. It should not take more than half an hour but it has gone for more than 40 minutes.
श्री प्रभुनाथ सिंह : अध्यक्ष महोदय, मैं अंतिम निगरानी वाले बिंदु पर अपनी बात कह रहा हूं।
अध्यक्ष महोदय : यह वास्तव में अंतिम बिंदु होना चाहिए।
श्री प्रभुनाथ सिंह : बैंकों में किस तरह से गड़बड़ी की जाती है और उन्हें रोजगार नहीं मिल पाता है, इसमें जो अनियमितता है, वह आप कैसे ठीक करेंगे? आपने सांसदों की निगरानी समति और सतर्कता समति बनाई है। आप कहते हैं कि उसकी बैठक तीन महीने में एक बार होनी चाहिए और इस बारे में आपने पत्र भी लिखा है। लेकिन आपके ही राज्य बिहार में इस तरह की कोई बैठक नहीं हुई है। बहुत से राज्य हैं, जहां इस तरह की कोई बैठक नहीं होती। जिन राज्यों में इन समतियों की बैठकें नहीं होती हैं, वहां नियमित बैठक कराने के लिए आप कौन सा समय निर्धारित करेंगे और कौन सी गाइडलाइंस बनाएंगे, यह हमें बताएं? अध्यक्ष महोदय, आपका आदेश मानते हुए मैं इसके साथ ही अपनी बात समाप्त करता हूं।
अध्यक्ष महोदय : आदेश १५ मिनट बाद माना है।
Hon. Members, I am very keen to allow. Calling Attention is expected to take half an hour only. I have allowed two Calling Attentions today. This is a matter on which a notice can come for discussion under Rule 193. This is a very important matter. I am not minimising its importance. If we take so much time for Calling Attention, then it will be very difficult.
Hon. Members, you are aware that rules allow only Members, up to five Members, who have given notice to take part in the discussion. But somehow or the other, we have relaxed the rules by a sort of convention or pressure if I may say so over the years. I am not blaming any hon. Presiding Officer or Member. Some Members have given their names. I have got 13 names. If I allow everyone, it will become more than a discussion under Rule 193. Therefore, I will allow another four Members. I request them to put only one question. Otherwise, I will not permit.
Now, Shri Shailendra Kumar, no भूमिका. Do not go by his standard.
श्री शैलेन्द्र कुमार (चायल) : माननीय अध्यक्ष जी, मैं आपका बहुत आभारी हूं कि आपने मुझे बोलने का अवसर दिया।
अध्यक्ष महोदय : आभार प्रकट करने की जरूरत नहीं है, आप सीधे प्रश्न पूछें।
श्री शैलेन्द्र कुमार : ग्रामीण विकास मंत्रालय एक महत्वपूर्ण मंत्रालय है और इसके ऊपर हम अभी चर्चा कर रहे हैं। मैं प्रभुनाथ सिंह जी की बातों से अपने को सम्बद्ध करते हुए मंत्री जी से यह पूछना चाहता हूं कि ग्रामीण विकास मंत्रालय की जितनी भी योजनाएं हैं, क्या उनमें पक्ष और विपक्ष के जो माननीय सदस्य हैं, उनकी विशेष भागीदारी और देखरेख में आप काम कराएंगे या नहीं, क्योंकि अगर संसद सदस्यों का सीधे इन्वाल्वमेंट होगा, तभी काम सही रूप से हो पाएगा ?
MR. SPEAKER: Now, Shri Varkala Radhakrishnan.
SHRI VARKALA RADHAKRISHNAN (CHIRAYINKIL): Sir, this is a very important matter. I have received a letter from the Minister as early in March 2005 regarding the formation of District and Vigilance Monitoring Committee in every district. I am a Member of Parliament. I have not received any communication. … (Interruptions)
MR. SPEAKER: This is not the occasion to get the information like this. You please put your question[lh16] .
SHRI VARKALA RADHAKRISHNAN : He was making all along his speech. There was no interruption. I have been keeping silent for the last so many days without doing anything.
MR. SPEAKER: That does not mean that you can go on speaking. I have allowed you to put one question. Please put that question.
SHRI VARKALA RADHAKRISHNAN : When you had called me, I stood up. I will put the question.
MR. SPEAKER: It is very kind of you. You put your question.
SHRI VARKALA RADHAKRISHNAN : I am doing it.
In The Hindu dated 3rd June, 2005, this year, they have raised some issues in the Food-for-Work Programme. There are many infirmities in the way the Food-for-Work Programme has been designed and is being implemented.
MR. SPEAKER: Is it coming under your Ministry?
SHRI VARKALA RADHAKRISHNAN : This should not be allowed to be done. This is another source of exploitation. Now, I put a question that there are inordinate delays in implementing all the rural schemes, especially, the Pradhan Mantri Sadak Yojana. So far, there are inordinate delays. So, all those rural programmes designed by the Ministry are not being implemented at the proper time with proper guidance. I want to know whether the Ministry will take immediate steps to issue guidelines to the concerned State Governments for implementing these programmes without fail. At the same time, the Central Government should go through the issues that are enunciated in The Hindu article which has given the details. So, I request the Government to go into those details and see that the delay is prevented. At the same time, the Central Government should direct the State Government to constitute the Vigilance Committee as directed by the Government. I request the Government to inform the Kerala Government.
So far they have not constituted any Committee. So, I request you to inform the Kerala Government to constitute the Committee as directed in your letter referred to earlier. I request the hon. Minister to take immediate steps for doing this.
मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) भुवन चन्द्र खंडूडी (गढ़वाल) : अध्यक्ष जी, मेरा सवाल प्रधान मंत्री ग्रामीण सड़क योजना के बारे में ही है। मैंने २२ फरवरी को इसके ऊपर एक कालिंग-अटेंशन मांगा था लेकिन माननीय मंत्री जी ने स्वीकार नहीं किया और फिर १७ मार्च को दुबारा बार-बार कहने पर भी आपने वह स्वीकार नहीं किया। आपका जो उत्तर है उसमें आपने कहा है कि प्रधान मंत्री ग्रामीण सड़क योजना स्टेट सब्जैक्ट है, इसलिए हम कुछ नहीं करेंगे। दूसरी बात आपने जो कही है कि प्रधान मंत्री ग्रामीण सड़क योजना क्योंकि प्रदेश से कार्यान्वित होती है इसलिए कार्यान्वयन में भी हम कुछ नहीं कर सकते हैं। यानी इम्प्लीमेंटेशन और मॉनटिरिंग दोनों में आप कुछ नहीं कर सकते हैं। माननीय मंत्री जी, आपका यह द्ृष्टिकोण ठीक नहीं है। इसलिए जितनी शिकायतें आ रही हैं उसका कारण यह है कि आपका मंत्रालय कहता है कि यह हमारा काम नहीं है जबकि यह १०० प्रतिशत केन्द्र से फंडित योजना है। आपने कमेटी भी बनाई है जिसमें इसकी निगरानी होती है। आज बहुत सारी बातें कही गयी हैं और यह भी कहा गया है कि फंड इस्तेमाल नहीं हो रहा है। हमारे उत्तरांचल में पिछले तीन साल से कोई पैसा इस्तेमाल नहीं हो रहा है। आपने वर्ष २००२-२००३ का पैसा अभी दिया है। मेरा पहला प्रश्न यह है कि आप क्या करने वाले हैं जिससे कि फंड का इस्तेमाल सही हो। दूसरा सवाल यह है कि कि जहां धीरे प्रोग्रेस हो रही है उसमें आप केन्द्र से क्या मॉनटिरिंग करने की व्यवस्था कर रहे हैं। तीसरा मेरा प्रश्न यह है कि जनसंख्या का आपने जो मानक बनाया है ५०० और २५० का वह सिर्फ आखिरी गांव का है, बीच में बहुत से गांव उसमें जुड़ते हैं। पिछली सरकार के समय में तय हुआ था कि आधा किलोमीटर दायें-बाएं जो गांव आते हैं उनको भी उसमें जोड़ा जाए। क्या इसके ऊपर आप अपना निर्णय लेंगे।
MR. SPEAKER: Thank you very much. This is the co-operation that is needed. Thank you.
… (Interruptions)
MR. SPEAKER: I will not allow you. Please do not stand. You never bothered to give a Calling Attention notice. You are only trying to take advantage of another Member's notice.
श्री रघुनाथ झा : सर, क्या सभी लोगों ने नोटिस दिया है जो बोले हैं।
अध्यक्ष महोदय : पूछना बहुत आसान है, नोटिस भी देना चाहिए। मीटिंग में सब लीडर्स लोग राजी हुए थे तब उनको समय दिया। यह सही बात नहीं cè[r17] ।
Do not get into an argument with the Chair. It does not look nice.
श्री देवेन्द्र प्रसाद यादव : अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी से यह जानना चाहता हूं कि पूरे देश में १५० पिछड़े जिलों का चयन किया गया है, उनके चयन का क्राइटेरिया क्या है और बिहार के कितने जिलों को फूड फार वर्क योजना में शामिल किया गया है? जो पिछड़े जिले फूड फार वर्क योजना में शामिल किए गए हैं, उनसे कितने श्रम दिवस पैदा किये गए। मेरी जानकारी यह है कि वहां ट्रैक्टरों से काम किया गया है। श्रम में श्रमिकों को न लगाकर ट्रैक्टर से काम हुआ है, ऐसी सूचना है और यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है। भारत सरकार की जो गाइडलाइसं हैं, उनका खुल्लमखुल्ला उल्लघंन हुआ है।
अध्यक्ष महोदय, पार्ट "बी " मैं यह जानना चाहता हूं कि क्या यह बात सही है कि केंद्रीय एजेंसी के बिहार में नहीं जाने से वहां के सड़क निर्माण का कार्य नहीं हो पा रहा है। क्या यह सच्चाई है? यह मैं जानना चाहता हूं।
MR. SPEAKER: Yes, hon. Minister. जवाब दीजिए।
… (Interruptions)
MR. SPEAKER: Mr. Rajaram Pal, I would not allow you. Please do not insist. I would not allow you to go on shouting. Some rule has to be followed.
श्री ब्रजेश पाठक (उन्नाव) : पार्टी के हिसाब से टाईम मिलना चाहिए।
अध्यक्ष महोदय : पार्टी की कोई बात नहीं है, उनका बहुत बार मौका दिया गया है। छोड़िए, उनकी वकालत आपको नहीं करनी चाहिए। He is a very good Member. अभी तो जवाब सुनना चाहिए।
डॉ. रघुवंश प्रसाद सिंह : अध्यक्ष महोदय, ग्रामीण विकास की योजनाओं के संबंध में माननीय सदस्यों ने और श्री प्रभुनाथ सिंह जी ने अपने गलत-सलत भाषण के साथ जो प्रश्न उठाए हैं, सरकार उन सभी माननीय सदस्यों की चिंताओं के साथ है। गांवों में जो समस्याएं ग्रामीण विकास और ग्रामीण समृद्धि की हैं, उसमें राज्य सरकारों का सहयोग, पंचायती राज के चुने हुए प्रतनधियों का सहयोग, सभी माननीय सदस्यों का सहयोग, जितने भी चुने हुए प्रतनधि हैं, उनके सहयोग के बिना ये योजनाएं सफल नहीं हो सकतीं।
श्री इलियास आज़मी : माननीय मंत्री जी, सहयोग नहीं हो रहा है, बंटवारा हो रहा है, योजनाओं का पैसा बंट रहा है।
डॉ. रघुवंश प्रसाद सिंह : हम आप सभी से सहयोग की अपेक्षा करते हैं और सहयोग की मांग करते हैं। हमारे देश में जितने चुने हुए प्रतनधि हैं, माननीय सदस्य हैं, राज्य सरकारें हैं, विधानसभा के प्रतनधि हैं, पंचायती राज के २९ लाख बीस हजार चुने हुए प्रतनधि हैं, इन सभी से हम सहयोग की अपेक्षा करते हैं जिससे इन योजनाओं के कार्यान्वयन और गरीब आदमी तक उसका लाभ सही ढंग से पहुंच सके, इसके लिए हम सभी से सहयोग की अपेक्षा करते हैं।
श्री रघुनाथ झा : उनसे कोई पूछता भी नहीं है।
अध्यक्ष महोदय : कोई बात नहीं, आप बैठ जाइए।
डॉ. रघुवंश प्रसाद सिंह : इसका भी हम उपाय या निदान कर रहे हैं। सभी पूछेंगे, बिना पूछे कुछ नहीं होगा।
SHRI A. KRISHNASWAMY (SRIPERUMBUDUR): The State Government has not been co-operating.
… (Interruptions)
MR. SPEAKER : Mr. Pathak, you please sit down. Please take your seat. You go to your constituency and assert your rights there. I do not know how many Members go and assert their rights in their constituencies. You take up the matter with the District Magistrate. Nobody does it.
… (Interruptions)
MR. SPEAKER : Nothing to be recorded. No more will be recorded.
(Interruptions) …* MR. SPEAKER : Mr. Pathak, I am sorry to say that you are violating the Chair. You are violating the direction of the Chair. Nothing is being recorded.
(Interruptions) … * अध्यक्ष महोदय : आत्मा की बात बोलने के लिए कोई cÉäMÉÉ[c18] ।
...( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय: अगर आप चाहें यहां कुश्तीगिरी करिए और हाउस को अखाड़ा बना दीजिए।
…( व्यवधान)
MR. SPEAKER: Would you sit down or not?
… (Interruptions)
अध्यक्ष महोदय: मैं इस विषय में पूरी बहस कराने के लिए तैयार हूं लेकिन कोई नोटिस देने का कष्ट नहीं करता है।
…( व्यवधान)
श्री ब्रजेश पाठक (उन्नाव) : हमने नोटिस दिया है। …( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय: आप बैठ जाइए।
…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय: यह बात सही नहीं है। एक माननीय सदस्य ने कोशिश की और बहुत दफा लिखा, लीडर्स मीटिंग में भी उठाया। मैं रूल्स के मुताबिक काम करूंगा।
…( व्यवधान)
* Not Recorded.
श्री ब्रजेश पाठक : हमने इस विषय में आपसे बहस कराने के लिए कहा था। …( व्यवधान)
MR. SPEAKER: Very well, I would adjourn the House.
… (Interruptions)
MR. SPEAKER: If you do not want to listen to the reply, I would adjourn the House.
… (Interruptions)
MR. SPEAKER: Unless you sit down, I would adjourn the House.
… (Interruptions)
अध्यक्ष महोदय: आप बोलते रहिए। Do [e19] not respond to them.
… (Interruptions)
डा, रघुवंश प्रसाद सिंह: अध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्यों ने बड़ा सवाल उठाया है। मैं सब का जवाब एकाएक देना चाहता हूं लेकिन सदस्यों के सहयोग के बिना यह काम नहीं होगा। दो कारणों से मीटिंग्स नहीं बुलायी जाती है। हमने मीटिंग की सूचना दी। १३० जिलों में बैठकें बुलायी गईं। एक जिले में चार-चार बैठकें बुलायी गईं, यह भी रिपोर्ट है …( व्यवधान)
श्री ब्रजेश पाठक : उत्तर प्रदेश के बारे में बताइए। …( व्यवधान)
MR. SPEAKER: Mr. Pathak, what are you doing? Do not disturb the House. You are disturbing this House.
… (Interruptions)
डा. रघुवंश प्रसाद सिंह: मैं आपकी पीड़ा और कठिनाई बता रहा हूं। …( व्यवधान)
MR. SPEAKER: You cannot address the Minister.
… (Interruptions)
डा, रघुवंश प्रसाद सिंह: मैं उत्तर प्रदेश का ही नहीं, आपके जिले और गांव का बताऊंगा। …( व्यवधान)
श्री ब्रजेश पाठक : यदि आप मीटिंग के बारे में बता देंगे तो मैं इस्तीफा दे दूंगा। …( व्यवधान)
डा. रघुवंश प्रसाद सिंह: आप कृपया मेरी बात सुनिए। …( व्यवधान)
MR. SPEAKER: I would name you, Mr. Pathak.
… (Interruptions)
अध्यक्ष महोदय: क्या बात है?
…( व्यवधान)
MR. SPEAKER: You are behaving in an unruly manner. You have no right to address the Minister.
… (Interruptions)
श्री ब्रजेश पाठक : आप हमारे गार्जियन हैं। …( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय: आप चुपचाप बैठिए। आप गार्जियन की बात भी नहीं सुनते हैं। आप गार्जियन की बात करते हो लेकिन क्या गार्जियन की बात सुनते हो?
श्री ब्रजेश पाठक : आप उचित बात कहेंगे तो सुनेंगे। …( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय: जो पसन्द होगा, वह सुनेंगे। आप बैठ जाइए। अब एक बात भी न करें।.
…( व्यवधान)
MR. SPEAKER: I would adjourn and go away.
श्री ब्रजेश पाठक : हमें दिक्कत नहीं है। …( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय: क्या आपने प्रश्न नहीं पूछा है? आपको उसके लिए दिक्कत नहीं है। जिन मैम्बर्स ने क्वैश्चन्स पूछे हैं, उन्हें उनका जवाब चाहिए।
…( व्यवधान)
MR. SPEAKER: Mr. Azmi, in future, I would not give a chance.
… (Interruptions)
MR. SPEAKER: You are behaving in a most irresponsible manner. I am not going to allow it. This is the Parliament of India.
… (Interruptions)
MR. SPEAKER: You cannot do anything.
…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय: अब जो कोई बोलेगा, मैं उसे नोटिस दे दूंगा।
…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय: आप चुप रहिए।
…( व्यवधान)
श्री रघुनाथ झा : अध्यक्ष महोदय, हम बैठ रहे हैं लेकिन आप कोई नियम कायदा चलाइए और दूसरों को भी कहिए। …( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय: क्या नियम हैं?
…( व्यवधान)
श्री रघुनाथ झा : आपने किस पार्टी और व्यक्ति को बोलने का चांस दिया? …( व्यवधान)
MR. SPEAKER: Very well, the House stands adjourned to meet at 2.30 p.m. 13.28 hrs. The Lok Sabha then adjourned till thirty minutes past Fourteen of the Clock.
_______ 14.32 hrs. The Lok Sabha re-assembled at thirty-two minutes past Fourteen of the Clock.
( Mr. Deputy-Speaker in the Chair) MR. DEPUTY-SPEAKER : Hon. Minister of Rural Development will continue his reply.
ग्रामीण विकास मंत्री (डॉ. रघुवंश प्रसाद सिंह) : उपाध्यक्ष महोदय, श्री प्रभुनाथ सिंह जी ने जो ध्यानाकर्षण किया और उन्होंने जो सवाल उठाए, उनके साथ श्री देवेन्द्र प्रसाद यादव, श्री वी. राधाकृष्णन, श्री खंडूरी और श्री रघुनाथ झा जी भी सवाल करना चाहते थे। वभिन्न माननीय सदस्य भी सवाल उठाना चाहते थे, मैं सभी प्रश्नों के हिसाब से उत्तर देकर उन्हें संतुष्ट करना चाहता हूं। उसके बाद भी कुछ पूछेंगे तो मैं तुरंत संतुष्ट करूंगा। जिन्होंने नहीं भी प्रश्न पूछा है, एक-एक मिनट में भी पूछेंगे तो मैं तुरंत उत्तर दूंगा। मैं संतुष्ट करना चाहता हूं…( व्यवधान) भ्रष्टाचार से बचाने के लिए आपके सहयोग की जरूरत है। अगर आप भी इसमें शामिल हो जाएंगे तो भगवान मालिक है, इसलिए कृपा करके सुन लीजिए…( व्यवधान)
MR. DEPUTY-SPEAKER : Mr. Minister, Please address the Chair and not the individual. अगर आप ही इसका खयाल नहीं रखेंगे तो और कौन चेयर का खयाल रखेगा?
डॉ. रघुवंश प्रसाद सिंह : उपाध्यक्ष महोदय, ठीक है। ग्रामीण विकास की योजनाओं के महत्व को देखते हुए और माननीय सदस्यों की मर्यादा को देखते हुए हर एक राज्य के माननीय सदस्यों के साथ एक दौर बैठक का कर चुके हैं। हमने उसे दोहराना भी शुरू किया है जिसमें नार्थ-ईस्ट के माननीय सदस्यों के साथ बैठक हो चुकी हैं, दोबारा माननीय सदस्यों के साथ बैठक करेंगे जिसमें सदस्यों की भावनाएं और राय, जो ग्रामीण विकास योजनाओं के बारे में हैं, पर विचार करेंगे। ऐसे गावों में जहां करोड़ों गरीबों की बेरोजगारी और गरीबी की समस्या है, यह देश के सामने कलंक है। कॉमन मनिमम प्रोग्राम बोल रहा है कि जब तक गांव का विकास नहीं होगा तब तक गांव से गरीबी और बेरोजगारी दूर नहीं होगी[p20] ।
[R21] देश का विकास हुआ, यह नहीं कहा जा सकता। गांधी जी भी कहा करते थे कि जब तक गांवों का विकास नहीं होगा, देश का विकास नहीं होगा। इसीलिए एक दौर मैं कर चुका हूं और दूसरा शुरू करने जा रहा हूं। हमने डिस्टि्रक्ट वजिलेन्स एंड मॉनिटरिंग कमेटी बनाईं, उनमें माननीय सदस्यों को पूर्ण अधिकार दिये गये। उनमें अध्यक्ष, सह-अध्यक्ष, चेयरमैन और को-चेयरमैन बनाये गये और व्यवस्था की गई कि उन्हें पूर्ण अधिकार होगा कि साल में कम से कम चार बैठकें और तीन महीने में कम से कम एक बैठक जरूर होनी चाहिए, यदि ज्यादा भी हों तो कोई हर्ज नहीं है। लेकिन चार बैठकें साल में और तीन महीने में एक बैठक अवश्य हो। लेकिन इसमें…( व्यवधान) बीच में न पूछें, बाद में पूछ लें। आप मेरी बात सुन लीजिए, उसके बाद अलग-अलग…( व्यवधान) उपाध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से माननीय सदस्यों से प्रार्थना करना चाहता हूं कि जिस क्लास से वह पास होकर आये हैं, उसी क्लास से मैं भी आया हूं। इसीलिए मैं कहना चाहता हूं कि सारी समस्याओं के समाधान के बाद यदि कोई असंतुष्ट रहेगा तो मेरे भाषण के बाद माननीय सदस्य चाहें तो अपने सवाल उठा सकते हैं, उन सबके मैं जवाब दूंगा। लेकिन बीच में डिस्टर्ब करने से विषयांतर की गुंजाइश रहती है। इसलिए डिस्टि्रक्ट वजिलेन्स एंड मानिटरिंग कमेटी की रिपोर्ट हम मानिटर करते हैं। हमें सूचनाएं हैं कि कई जिलों में बैठकें नहीं हुई हैं। उसमें हमें अभी तक दो कारणों का पता चला है। उनमें जो माननीय सदस्य अध्यक्ष हैं, उनकी भी कमियां हैं। उन्होंने कुछ कलक्टरों के साथ बैठकें नहीं बुलाई। कई जगहों पर कलक्टरों ने भी ढिलाई की है और सदस्यों के कहने के बाद भी बैठक बुलाने का कार्य नहीं किया, हमें यह भी जानकारी मिली है। जब हमें जानकारी मिलती है तो हम राज्य सरकारों का ध्यान उस पर दिलाते हैं। हमारी जितनी भी कमेटी हैं, उनमें माननीय सदस्यों का सहयोग, राज्य सरकारों का सहयोग, डिस्टि्रक्ट एडमनिस्ट्रेशन का सहयोग और पंचायत राज वगैरह का सहयोग चाहिए। इन सबके सहयोग के बिना कोई काम नहीं होगा। इसीलिए तमाम राज्यों के माननीय मुख्य मंत्रियों को हमने लिखा है। डिस्टि्रक्ट वजिलैन्स एंड मॉनिटरिगं कमेटी और वभिन्न माननीय मुख्य मंत्रीगणों से हमने लिखा-पढ़ी की। उन्होंने हमें रिस्पांस भी दिया है कि हम आपको कोऑपरेट करेंगे और अपने अधिकारियों को हम निर्देश देते हैं कि जो उसकी गाइडलाइंस हैं, उनके मुताबिक यह कार्यक्रम हो। हमें सब जगह से सहयोग मिल रहा है, फिर भी कुछ कठिनाइयां हैं। कमेटी के जो माननीय अध्यक्ष और माननीय सदस्य हैं, उन्हें मौका नहीं मिलता है, उनकी ढिलाई से बैठक नहीं होती है। हम उनका भी इंतजाम कर रहे हैं। मैं तुरंत सर्कुलर देने वाला हूं कि यदि अध्यक्ष को मौका नहीं मिले तो सह-अध्यक्ष भी बैठक बुला सकते हैं। कलक्टर्स को हम यह निर्देश देने जा रहे हैं कि यदि तीन महीने में बैठक नहीं होगी तो फिर वे जिम्मेदार होंगे। इसके बाद आगे के १५ दिन के अंदर जिले के को-चेयरमैन से राय करके, समय लेकर अनिवार्य रूप से बैठक हो। इसका प्रबंध मैं तुरंत करने जा रहा हूं। जहां कलक्टर की हेराफेरी है, ढिलाई है, ब्यूरोक्रेसी सहयोग नहीं कर रही है, उसके लिए राज्य सरकार कार्रवाई करे, अन्यथा आसन सक्षम है, यह विशेषाधिकार हनन का मामला भी बनता है। जब माननीय सदस्यों को हमने डिस्टि्रक्टं वजिलेंस एवं मॉनिटरिंग कमेटी की अध्यक्षता करने का अधिकार दिया है तो उनके निर्देश की अवहेलना सदन की कार्यवाही में बाधा डालने की डेलिबरेट इन्टैन्शन यदि पाई जाए और यह स्पष्ट हो कि कोई कलक्टर जानबूझकर माननीय सदस्यों की अवहेलना कर रहा है तो आसन के हाथ में हैं, विशेषाधिकार हनन का मामला उस अधिकारी के खिलाफ बन सकता है, लिखा-पढ़ी हो सकती है और उसके खिलाफ कार्रवाई हो सकती है। इसलिए दो कारणों से बैठकें नहीं होती हैं। इन दोनों कारणों का समाधान निकालने का रास्ता मैं ढूंढ रहा था, आज इनका समाधान हो गया। इसलिए श्री प्रभुनाथ सिंह को हमने धन्यवाद दिया कि उन्होंने यह सवाल उठाया और आसन को भी हमने धन्यवाद दिया है कि आसन ने बड़ी कृपा की है जो देश के इतने महत्वपूर्ण सवाल पर कॉलिंग अटैन्शन की स्वीकृति देने की कृपा की है[R22] । इसलिए हम बड़े आभारी हैं और देश के करोड़ों लोग आभारी होंगे जो करोड़ों गरीबों का सवाल और गांवों का सवाल है, उस पर सर्वोच्च सदन में ध्यानाकर्षण के माध्यम से सवाल जवाब हुए। मैं अपने को बड़ा सौभाग्यशाली मानता हूं कि आपने मुझे मौका दिया कि सदन को और देश को बताया जाए कि गांवों के विकास की दिशा क्या होगी, गरीबी और बेरोज़गारी की समाप्ति कैसे होगी और देश के माथे से यह कलंक कैसे हटेगा। इसलिए डिस्टि्रक्ट वजिलैंस मॉनीटरिंग कमेटी को इफैक्टिव बनाने के लिए उसका उपाय किया गया है।
फिर ट्रांसपेरेन्सी और पीपल्स पार्टसिपेशन की बात है। वभिन्न माननीय सदस्यों ने एसजेआरवाई और फूड फॉर वर्क कार्यक्रम के संबंध में सवाल उठाए हैं। देवेन्द्र प्रसाद यादव जी ने सवाल उठाया कि जिलों का चयन कैसे हुआ। उसका क्राइटीरिया है। तीन पैरामीटर्स तय हुए। सैलैक्शन हुआ और प्लानिंग कमीशन ने तय किया कि जिस जिले में अनुसूचित जाति और जनजाति की आबादी अधिक होगी, वहां पर वेज क्या मिल रही है, प्रोडक्टिविटी क्या है। राष्ट्रीय श्रम विकास योजना का जो मापदंड था, दोनों को मिला-जुलाकर देश के १५० पिछड़े जिलों का चयन किया गया जिसमें फूड फॉर वर्क कार्यक्रम लागू किया गया। यह वेज इंप्लायमैंट है और एसजेआरवाई भी वेज इंप्लायमैंट है जिसमें एसजेआरवाई की हरेक जिले में निर्धारित राशि है, गरीबी के आधार पर योजना आयोग से परामर्श करके सबको अप्रैल महीने में पैसा भेजते हैं और १५ दिनों के अंदर वहां जिले में जब पैसा जाएगा तो १५ दिनों के अंदर उस पैसे का २० प्रतिशत जिला पंचायत, ३० प्रतिशत पैसा ब्लाक पंचायत और ५० प्रतिशत पैसा ग्राम पंचायत में जाता है। माननीय सदस्य ने सवाल उठाया कि उसमें हेराफेरी होती है। उसमें हमने ट्रांसपेरेन्सी और पीपल्स पार्टसिपेशन का प्रावधान किया है। एक योजना पर वहां के लाभार्थियों की पांच से नौ व्यक्तियों की निगरानी समति बनेगी, जो परामर्शी हैं, लाभार्थी हैं, वहां के बसने वाले हैं लोग हैं। उसमें हमने कहा है कि गांवों में जो रिटारयर्ड पर्सनल हैं, सेना के जवान हैं, मास्टर, क्लर्क, अफसर आदि हैं, उनको भी रखेंगे। इसके अलावा अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के कम से कम एक सदस्य को रखना है, महिला को रखना है। उस स्थानीय निगरानी समति में पांच से नौ व्यक्ति होंगे। हमने कहा है कि ब्लाक स्तर पर उन समतियों के सदस्यों को बुलाकर ट्रेनिंग दिलवाने का काम, जानकारी दिलवाने का काम और ट्रांसपेरेन्सी दिलवाने का काम हो कि यह योजना क्या है, इसमें क्या खर्च होगा, क्या मज़दूरी मिलेगी, क्या काम होगा। यह समति चूंकि छ: लाख गांवों में अभी १८ लाख योजनाएं चल रही हैं। कुछ योजनाओं का काम पूरा हुआ है, कुछ का काम बाकी है। इसलिए सभी योजनाओं पर स्थानीय निगरानी समति का गठन करने के लिए सभी राज्य सरकारों को कहा है। सभी प्रादेशिक अखबारों में सभी प्रादेशिक भाषाओं में हमने कहा है और प्रकाशन भी शुरू हो गया है, विज्ञापन देने का काम भी शुरू हो गया है। आम आदमी, जो उत्कृष्ट समाज सेवी हैं, राजनीतिक कार्यकर्ता हैं, सामाजिक कार्यकर्ता हैं, पढ़े-लिखे इंटैलैक्चुअल लोग हैं, पत्रकार हैं, सभी लोग उन चीजों को जानें और देखें, चूंकि छ: लाख गांवों में देश भर में काम हो रहा है। यह गरीब का विषय है इसलिए इसमें ट्रांसपेरेन्सी और जनता की भागीदारी की जरूरत है। …( व्यवधान)
श्री खारबेल स्वाईं (बालासोर) : यह जो आपने कहा है कि हर गांव में निगरानी समति बनाएंगे, क्या इसके लिए एक चिट्ठी हम सबको देंगे? हम बनाने में आपकी मदद करेंगे। …( व्यवधान)
डॉ. रघुवंश प्रसाद सिंह : आपको भी हम चिट्ठी दे देंगे। सभी माननीय सदस्यों को उस संबंध में अलग से लखित जानकारी तुरंत एक सप्ताह के अंदर हम देंगे कि माननीय सदस्यों के सहयोग के बिना निगरानी समतियां नहीं बनेंगी और वे देखें कि कार्यवाही ठीक हो रही है या नहीं। यह सब जिलेवार जानकारी हम आपको देंगे कि कितना पैसा हमने दिया और उसमें क्या काम हुआ। कुछ राज्यों के माननीय सदस्यों को याद होगा कि हमने लिखा पढ़ी की है, पहले भी लिखा है कि उनके राज्यों की क्या स्थिति है। हम मुख्य मंत्रियों और माननीय सदस्यों को, जब राज्यों का पैसा कटने लगता है, जिलों का पैसा कटने लगता है तो मुख्य मंत्री को लिखने के साथ साथ हम माननीय सदस्यों को भी सूचना देते हैं कि आपके जिले का पैसा कट रहा है, उसमें मुस्तैदी बरती जाए[h23] ।
महोदय, चूंकि सबके सहयोग के बिना यह काम बहुत अच्छे ढंग से नहीं हो सकता है इसलिए हम सबके सहयोग की अपेक्षा करते हैं और सबका सहयोग हमें मिल भी रहा है। हमारा कॉमन मनिमम प्रोग्राम के लिए स्टेट वजिलेंस स्टि्रक्ट वजिलेंस कमिटमेंट है। स्टि्रक्ट वजिलेंस के लिए हमें जनता की भागीदारी, पारदर्शिता और माननीय सदस्यों का पूरा सहयोग मिले, उसके लिए उपाय किया गया है। माननीय सदस्य श्री प्रभुनाथ जी ने एसजीएसवाई के बारे में कहा है कि बैंकों में हेराफेरी होती है। स्वयं सेवा सहायता समूह आंदोलन का रूप लेगा। यह स्वरोजगार योजना है। चूंकि बेरोजगारी दूर करने के लिए एक वेज एम्प्लायमेंट कार्यक्रम, जिसमें एसजीआरवाई फूड फार वर्क कार्यक्रम है। दूसरा हमारा स्वरोजगार सेल्फ एम्प्लायमेंट प्रोग्राम है, केवल सेल्फ एम्प्लायमेंट प्रोग्राम नहीं, प्रोडक्टिव सेल्फ एम्प्लायमेंट प्रोग्राम। उत्पादक, स्वरोजगार योजनाओं को शुरू किया गया है जिसमें अभी तक २२ लाख सेल्फ हेल्प ग्रुप का निर्माण हुआ है। एक सेल्फ हेल्प ग्रुप में १० महिलाएं अनुसूचित जाति और गरीबी की रेखा से नीचे के लोग ज्यादा रहेंगे। ३० परसेंट एपीएल के लोग भी रह सकते हैं। इसमें इंडीविजुअल स्वरोजगार भी होते हैं। माननीय सदस्य ने कहा है कि बैंकों में हेराफेरी होती है। हमें भी शिकायत मिली है। सेल्फ हेल्फ ग्रुप से घूस लेन-देन की हिम्मत बैंक वाले नहीं कर सकते हैं। इंडीविजुअल स्वरोजगार में जहां कहीं भी हमें शिकायत मिली है हमने तुरंत कार्यवाही की है। बैंकों से हमारी तीन-चार शिकायतें हैं। पहली शिकायत हमने घूसखोरी के बारे में उठाया है। दूसरे नम्बर पर शिकायत है कि करीब १२०० बैंकों की शाखाएं जीरो लेंडिंग पर हैं तथा गरीब आदमी का खाता नहीं खोलते। गरीब आदमी को कर्जा नहीं देते हैं। हमने वित्त मंत्री जी को इस बारे में लिखा है और १२०० बैंकों की शाखाओं का नाम दिया है कि ये बैंक हमसे असहयोग कर रहे हैं। फिर हमने कहा कि गरीब लोगों से १२ से १४ परसेंट इंटरेस्ट लिया जा रहा है। यह जुल्म है। महल बनाने वाले को और कार खरीदने वाले को ८-९ परसेंट पर बैंक पैसा मुहैया करवाए जो गरीबी की रेखा से नीचे के लोग हैं, स्वरोजगार करना चाहते हैं और सेल्फ हेल्प ग्रुप मूवमेंट चल रहा है, उसमें वे भागीदार हैं उनसे १०-१२ परसेंट इंटरेस्ट लिया जा रहा है, यह अंधेर है। वित्त मंत्री जी ने इसे गंभीरता से लिया है। भारतीय रिजर्व बैंक से बातचीत करके कहा है कि ९ परसेंट से ज्यादा ब्याज नहीं होना चाहिए। यह बैंकों की आटोनोमी है, लेकिन हम ९ परसेंट से ज्यादा की इजाजत नहीं देंगे। कमर्शियल बैंक ९ परसेंट पर कर्ज देने के लिए तैयार हो गए हैं लेकिन कापरेटिव बैंकों और ग्रामीण बैंकों में १० परसेंट से ज्यादा है…( व्यवधान)
उपाध्यक्ष महोदय : माननीय मंत्री जी जो कह रहे हैं, पहले आप उसे सुन लीजिए।
डॉ. रघुवंश प्रसाद सिंह :हम आपकी जानकारी के लिए बोल रहे हैं कि इन समस्याओं का क्या समाधान हुआ है? जो कुछ होना अभी बाकी है उसे पूरा करने के लिए हमें आपका सहयोग चाहिए और हम सबसे सहयोग की अपेक्षा रखते हैं। कुछ एरियाज़ हैं, जहां बैंक ही नहीं हैं। तीन-चार तरह की समस्याएं और हैं। वित्त मंत्री जी ने हमें सहयोग दिया है। माननीय वित्त मंत्री जी ने राज्य लेवल की बैंक कमेटी और जिला लेवल की बैंक की कमेटी बनाई हैं और आफिसरों से बात करके कई तरह के सुधार किए हैं। जो जीरो लैंडिंग शाखाएं हैं उनमें कमी आ रही है और बैंक वाले मुस्तैदी से काम कर रहे हैं कि सेल्फ हेल्प ग्रुप मूवमेंट को सहयोग देना है।
महोदय, मैं सदन को सूचना देते हुए गौरवांवित महसूस कर रहा हूं कि देश में नॉन परफोरमिंग एसेस्ट्स डेढ़ लाख करोड़ हो चुके है, लेकिन हजारों गरीब आदमियों का उसमें हिस्सा नहीं है। हमारा गरीब आदमी ९८ परसेंट तक बैंक को रिकवरी दे रहा है। गरीब सेल्फ हेल्प समुदाय के लोगों से ९८ परसेंट की रिकवरी है। उसके बाद भी बैंकों से हेराफेरी हो, यह सहन नहीं किया जा सकता है। हमारा कामन मनिमम प्रोग्राम गरीबों के प्रति प्रतिबद्ध है। हमारा कमिटमेंट गरीबों की सहायता करने का है और उनकी माली हालत को सुधारने का और रोजगार देने का है। प्रधानमंत्री जी ने कहा है कि रोजगार बढ़ाओ, इसलिए बेरोजगारी को समाप्त करने के लिए सभी कार्यक्रम एम्प्लायमेंट प्रोग्राम, वेज एम्प्लायमेंट प्रोग्राम और सेल्फ एम्प्लायमेंट प्रोग्राम करने जा रहे हैं[i24] ।
उपाध्यक्ष महोदय, इंदिरा आवास योजना का सवाल उठाया गया और कहा गया कि गरीब आदमी का चयन इस योजना में नहीं होता है। मैं बताना चाहता हूं कि बैनीफीशियरी का चुनाव करने का अधिकार ग्राम सभा को दिया गया है, लेकिन उन्होंने यह सवाल भी खड़ा किया कि ग्राम सभा की बैठक ही नहीं होती है। मैं बताना चाहता हूं कि हमारे देश में इतनी वचित्रता और वविधता है कि हमारे यहां ग्राम सभा के सदस्यों की संख्या कहीं ११३ है, तो कहीं ५० हजार है। केरल में ५० हजार सदस्यों की ग्राम सभा है, तो अरुणाचल में ११३ व्यक्तियों की ग्राम सभा है। पश्चिम बंगाल में कहीं २ हजार, कहीं ३ हजार और कहीं ४ या ५ हजार सदस्यों की ग्राम सभा है। इस देश की वभिन्नता और वचित्रता यह भी है कि कहीं ग्राम सभा है, कहीं वॉर्ड सभा है और कहीं रैवेन्यू विलेज सभा है।
महोदय, राजीव गांधी जी ने पंचायतीराज की जो परिकल्पना की थी, उसको साकार करने के लिए उन्हीं के समय में संविधान में ७३वें संविधान संशोधन के जरिए एक नई धारा को जोड़ने का काम किया हुआ और वह पारित हुआ था। उसके अनुसार पंचीयतीराज के सशक्तीकरण, पांच वर्षों में चुनाव और एक तिहाई अनुसूचित जाति एवं जनजाति की महिलाओं का आरक्षण होगा, यह प्रावधान किया गया था। अब वे प्रावधान लागू हो रहे हैं और वे सब बातें चल रही हैं।
महोदय, माननीय सदस्य ने ग्राम सभा की बैठकें नहीं होने की शिकायत के बाद दूसरी शिकायत की कि संख्या बहुत ज्यादा है। अब आप कहेंगे कि उसे लागू करने में देर हो रही है। मैं बताना चाहता हूं कि उसे लागू करने में देर क्यों हो रही है। देर इसलिए हुई क्योंकि सुप्रीमकोर्ट में कुछ लोगों ने एक पी.आई.एल. दायर कर दी और सुप्रीम कोर्ट ने उसके ऊपर स्टे दे दिया और कहा कि एक्ट में कोई छेड़छाड़ न की जाए, जैसा है, वैसा ही रहने दिया जाए।
महोदय, हमने सरकारी वकील, सॉलिसीटर जनरल और एडीशनल सॉलिसीटर जनरल को बुलाया, पी.आई.एल. दायर करने वालों को भी बुलाया और उन्हें बताया कि इसमें लाखों गरीबों के नामों का चयन नहीं हो सका है इसलिए हम यह संशोधन लाए थे और अब उसे इम्पलीमेंट कर रहे हैं। गांव में जाएं तो लोग यही कहते हैं कि हम गरीब हैं, लेकिन हमारा गरीबी की रेखा के नीचे वालों की सूची में चयन नहीं हुआ और हमें कोई सरकारी सहायता अथवा सरकार की ओर से किसी प्रकार का आवास नहीं मिला है। गांवों से इस तरह की हेरा-फेरी करे और गरीबों के नामों के चयन नहीं होने की शिकायतें आई हैं। सुप्रीम कोर्ट ने हमारे वकील की बात सुनी। इस केस में जज साहब ने सुनवाई पूरी कर ली है, लेकिन पी.आई.एल. वालों ने कुछ समय ले लिया है। जैसे ही फैसला हो जाएगा, इस मामले में स्टे वैकेट होना चाहिए। उसके तुरन्त बाद गांवों में गरीबी रेखा के नीचे रहने वाले जिन लोगों के नाम सूची में शामिल होने से छूट गए होंगे, उनके नाम शामिल किए जाएंगे। १३ पाइंट्स हैं जिन पैरामीटर्स के ऊपर सर्वे हो चुका है। उसके अनुसार गांव के सबसे गरीब आदमी का नाम पहले नंबर पर होगा और उसके बाद दूसरे और तीसरे नंबर के आदमी का नाम होगा और इस प्रकार १५ सबसे गरीब लोगों के नामों की सूची को पंचायत भवन अथवा स्कूल की दीवार पर गांवों में पेंट कर के लिखवाया जाएगा। कम्प्यूटराइजेशन किया जाएगा, पुस्तक छापी जाएगी, जिसे प्रत्येक माननीय सदस्य को भेजा जाएगा ताकि उसे हर सदस्य देख सके और इस प्रकार किसी गरीब आदमी का नाम न छूट सके। …( व्यवधान)
उपाध्यक्ष महोदय : नहीं आप बैठिए। मैं आपको भी मौका दूंगा।
आप बैठिए। आपका बोला हुआ रिकॉर्ड नहीं हो रहा है।
(Interruptions) … * डॉ. रघुवंश प्रसाद सिंह : उपाध्यक्ष महोदय, इसलिए इंदिरा आवास योजना, जो रूरल एरिया की योजना है, उसमें १५ लाख मकान बनाने और २७ हजार करोड़ रुपए से अधिक खर्च करने की योजना है। इंदिरा * Not Recorded.
आवास योजना को ट्रांसपैरेंट किया जाएगा, उसमें नाम लिखे जाएंगे और १ से लेकर १५ तक नंबर के सबसे गरीब लोगों को उसका लाभ मिलेगा। उसमें भी सबसे पहले सबसे गरीब आदमी को लाभ मिलेगा, फिर दूसरे नंबर के आदमी को और फिर तीसरे नंबर के व्यक्ति को। इसी प्रकार से इंदिरा आवास योजना के मकानों का आबंटन होगा। माननीय सदस्य ने शिकायत की है कि २ हजार, ३ हजार और ४ हजार लोगों के नामों की हेरा-फेरी होती है। इसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है। इसे ट्रांसपेरेंट किया जाएगा, दीवार पर सबके नाम लिखवाए जाएंगे, कंप्यूटराइजेशन किया जाएगा। इतना ही नहीं उसमें अपील करने का भी अधिकार दिया गया है[rpm25] ।
गरीब आदमी बी.डी.ओ. के यहां, एस.डी.ओ. के यहां, कलैक्टर के यहां किसी का नाम छूटा रहेगा, माननीय सदस्य भी जो कहीं किसी का नाम छूट जाये, कलैक्टर को अन्तिम सुधार करने का अधिकार दिया है कि तीन स्टेज पर उसकी अपील होगी और अपील होने के बाद किसी गरीब का नाम नहीं छूटेगा और उसमें नीचे ऊपर, हेराफेरी नहीं होगी। इसीलिए इन्दिरा आवास योजना में ट्रांसपेरेण्ट करने का निर्णय लिया गया। …( व्यवधान) प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के सम्बन्ध में माननीय प्रभुनाथ सिंह जी ने सवाल उठाया है, यह तो देश का सवाल उठाया था तो हमने इनको अच्छा माना था। फिर बिहार पर चले आये। बिहार का भी हम जवाब देंगे, लेकिन प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना…( व्यवधान) जवाब देने दीजिए न।
उपाध्यक्ष महोदय : प्रभुनाथ सिंह जी, मैं आपको टाइम दूंगा।
श्री प्रभुनाथ सिंह (महाराजगंज, बिहार) : इसलिए हमने बिहार की चर्चा की कि जब ये बिहार को ठीक नहीं कर सकते हैं तो इस देश को क्या ठीक करेंगे।…( व्यवधान)
उपाध्यक्ष महोदय : इनके जवाब देने के बाद आपको टाइम दिया जायेगा, अभी नहीं। कृपया बैठ जायें। इसका तो कोई इलाज नहीं है।
डॉ. रघुवंश प्रसाद सिंह : बैठें क्या? आप क्या कहते हैं, छोड़ दें। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना सन् २००० में शुरू हुई। वह भी देश की ५०० तक की आबादी तक के गांवों को सड़क से जोड़ने का काम होना चाहिए। देश में कुल ४३ लाख किलोमीटर सड़क है। इसमें ५८ हजार किलोमीटर नेशनल हाईवेज़ हैं, १.२५ लाख किलोमीटर स्टेट हाईवेज़ हैं, ३.२५ लाख किलोमीटर मेजर डिस्टि्रक्ट रोड्स हैं और २७ लाख किलोमीटर ग्रामीण सड़क हैं। ग्रामीण सड़क का कहीं कोई चर्चा नहीं, हाईवे-हाईवे, गोल्डन क्वाड्रीलेटरल, खंडूरी जी बैठे हुए हैं, ईस्ट-वेस्ट कोरीडोर, नोर्थ ईस्ट कोरीडोर, इसी में ५८ हजार किलोमीटर में…( व्यवधान)
मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) भुवन चन्द्र खंडूडी (गढ़वाल) : आपको जानकर बहुत खुशी होगी, आपने वह सब काम बन्द किया हुआ है।…( व्यवधान)
डॉ. रघुवंश प्रसाद सिंह : बन्द नहीं किया है। सुन लीजिए। गांव की भी रूरल रोड जो २७ लाख किलोमीटर्स हैं, रूरल रोड्स की अहमियत अब आई है। अभी-अभी एक महीने में हम रूरल रोड्स विज़न २०२५ प्रकाशित करेंगे, जिसमें आगे नक्शा होगा कि गांव के लोगों को भी रूरल रोड, गांव की सड़क हो, गांव में सारा इन्फ्रास्ट्रक्चरल फैसलिटी मिले, उसकी वहां व्यवस्था होगी। सन् २००० में इन लोगों ने प्रावधान किया था कि २५०० करोड़ रुपया गांव के विकास में केवल प्रधानमंत्री ग्राम सड़क में आप खर्च कर रहे हैं, हम २०००, २२००, २३०० या २५०० करोड़ रुपया सैस वाला पैसा इन राज्यों में खर्च करेंगे और २०००, २२००, २५००, ३००० या ३५०० करोड़ रुपया नहीं, ४२०० करोड़ रुपया इस साल के बजट में आया है। यह पैसा गांव के विकास के ऊपर खर्च होगा, ताकि गांव के लोग भी सड़क पर चलें, गांवों को भी कभी सड़क का कनैक्शन मिले, रूरल कनेक्टिविटी मिले, इसीलिए प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना का हम लोगों ने विस्तार किया और इसमें पैसे की कमी नहीं होने दी जायेगी। राज्य सरकारों को हमने कहा है कि अपनी कंज्यूम करने की क्षमता बढ़ाओ, हम पैसे की कमी नहीं होने देंगे।…( व्यवधान)
MR. DEPUTY-SPEAKER: Hon. Members, no running commentary please. मैं आपको नहीं, उनको कह रहा हूं।
… (Interruptions)
MR. DEPUTY-SPEAKER: Nothing is recorded.
(Interruptions) … * MR. DEPUTY-SPEAKER: Nothing to be recorded except the speech of the hon. Minister.
… (Interruptions)
उपाध्यक्ष महोदय : खंडूडी साहब, आप बैठ जायें।
...( व्यवधान)
उपाध्यक्ष महोदय : लाल सिंह जी, कृपया बैठ जायें।
डॉ. रघुवंश प्रसाद सिंह : उपाध्यक्ष महोदय, उस समय का आकलन था कि ५०० की आबादी वाले गांवों को जोड़ने के लिए ६० हजार करोड़ रुपया लगेगा।[i26] * Not Recorded.
15.00 hrs. हिसाब हमने जोड़ा हुआ है। हिसाब सही नहीं था। अभी हमने फिर से हिसाब किया है। ६०-७० हजार करोड़ रूपये से कुछ नहीं होता है। यह देश बड़ा है। इस देश को चलाने के लिए बड़ा दिमाग और चौड़ी छाती चाहिए।…( व्यवधान)
डॉ. रघुवंश प्रसाद सिंह : अभी हमने हिसाब किया है कि एक लाख तैंतीस हजार करोड़ रूपये चाहिए। हजार-पांच सौ की आबादी तक के गांव को जोड़ने के लिए हिम्मत चाहिए कि कैसे सड़कें बनेंगी। महामहिम राष्ट्रपति जी कहते हैं कि पूरी योजना चलाओ। सारी शहरी सुविधा गांव में दी जाएं। राष्ट्रपति जी बराबर गांव के विकास के बारे में बोलते रहते हैं। इसीलिए हम कटिबद्ध हैं सारी शहरी सुविधाएं गांवों में देने के लिए। सड़कें, पीने का पानी, पढ़ाई-लिखाई, दवाई और बिजली की गांवों में आवश्यकता है। बिजली के लिए राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना हे, जिसमें कहा है।…( व्यवधान)
उपाध्यक्ष महोदय : स्वाईं जी, आप बैठ जाइए।
...( व्यवधान)
डॉ. रघुवंश प्रसाद सिंह : महोदय, सवा लाख गांवों में अभी तक बिजली नहीं पहुंची है। वहां के लोग कहते हैं हमारे यहां आजादी कब आएगी? जिस भारत निर्माण का हम लोगों ने सृजन किया है, उसके अंतर्गत २००९ तक सभी गांवों में, सभी टोलों में, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लोगों को मुफ्त में बिजली मिले। कोई हिम्मत वाला है जो गरीब गांव के दलित और आदिवासी लोगों को कैसे भी बिजली मिले। उसका बेटा भी रोशनी में पढ़े और आगे बढ़े। उसके लिए राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना में व्यवस्था की गई है। भारत निर्माण की योजना के तहत प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत हजार की आबादी भी जिस राज्य में है और वह सड़क से नहीं जुड़ी है। इसके अलावा जिन पहाड़ी इलाकों की आबादी पांच सौ है, उनको सड़क से जोड़ने का २००९ तक का लक्ष्य रखा है। वित्त मंत्रालय ने भी वचन दिया है कि पैसे की कमी नहीं होने दी जाएगी। गांवों को सड़क से जोड़ने का २००९ तक की योजना एकदम बन गई है। हमने राज्य सरकारों से प्रार्थना की है कि कंज्यूम करने की क्षमता बढ़ाएं। योजना का कार्यान्वयन और भारत की महत्वकांक्षा का कार्यान्वयन किया जाए।
महोदय, बिहार के बारे में श्री प्रभुनाथ सिंह जी सवाल उठाया था।…( व्यवधान)
उपाध्यक्ष महोदय : यदि आप फिर से राज्य सरकारों में जाएंगे तो हंगामा हो जाएगा।
डॉ. रघुवंश प्रसाद सिंह : महोदय, तीन सौ करोड़ रूपये दिए गए थे और ६० करोड़ रूपये बाद में दिए गए। बिहार में फस्र्ट और सैकेंड फेज़ के लिए कुल मिलाकर ३६० करोड़ रूपये दिए गए थे। जिसमें से ९०५ पथ में काम लिया गया था। ४१६ पथों का काम पूरा हो गया है। इसमें २७२ करोड़ रूपये खर्च हो चुके हैं और कुछ बाकी हैं। श्री प्रभुनाथ सिंह जी १३वीं लोक सभा में यहां बैठते थे और हम वहां बैठते थे। उस समय वे कहते थे कि केन्द्रीय एजेंसी से करवाना चाहिए। लेकिन उनकी सरकार ने कोई सुनवायी नहीं की। यूपीए की सरकार आने से उनकी भी सुनवाई हो गई है और उस पर कार्यान्वयन होने जा रहा है। पांच केन्द्रीय एजेंसियों को बहाल किया गया है, जिनमें एनएचपीसी, एनबीसीसी, एनपीसीसी, इरकॉन और सीपीडब्ल्यूडी इत्यादि हैं[MSOffice27] । … (Interruptions)
MR. DEPUTY-SPEAKER: No running commentary, please.
डॉ. रघुवंश प्रसाद सिंह : सैंट्रल एजैंसी को बहाल किया गया और सभी जगह उसके इंतजाम किए गए। केन्द्रीय एजैंसियों को १५७ पथों की स्वीकृति दे दी गई, ४८० करोड़ रुपये से ३५ जिलों में कार्य आरंभ हुआ। उनकी लंबाई १६४५ किलोमीटर है। पांच जिलों के ४७ पथों पर काम शुरू हो गया है। इसके अलावा ३२० करोड़ रुपये लागत से १७७ पथों की स्वीकृति प्रक्रियाधीन है। उनकी लंबाई ८०० किलोमीटर है। हम तुरंत ७,००० किलोमीटर सड़क २,००० करोड़ रुपये लगाकर बनाने जा रहे हैं। लेकिन दुखद है कि कैसे सैबोटेज करने का काम होता है। एनएचपीसी के इंजीनियर वहां गए तो उनका अपहरण कर लिया गया। बिहार के माथे पर कलंक और काम में विघ्न-बाधा डाली जाती है ताकि इंजीनियर काम छोड़कर भाग जाएं। इंजीनियर्स ने वहां जाकर प्रैस कान्फ्रैंस की कि हम भागने वाले नहीं थे। अपहरण करने वाले उस पार्टी के लोग बैठे हुए हैं। उन्हीं की पार्टी के लोग साबित हुए। इस तरह से काम नहीं होने देंगे, काम रुकवा देंगे, अपहरण करवा देंगे और यहां आकर भाषण देंगे कि काम नहीं हो रहा है, काम नहीं हो रहा है। यह दोहरी राजनीति नहीं चलेगी। उसका पर्दाफाश किया जाएगा और देश, दुनिया को बताया जाएगा।
माननीय सदस्य श्री देवेन्द्र प्रसाद यादव ने चिन्ता व्यक्त की थी कि सैंट्रल एजैंसी कहती है कि वहां नहीं जाएगी। उन्होंने नहीं कहा कि वहीं नहीं जाएगी। वह वहां जाएगी। कहते हैं कि कश्मीर में उग्रवादियों के बीच, उल्फा के बीच काम करने वाले हैं, वहां के पाकेटमारों से डरने वाले नहीं हैं। काम होना है, तेजी से होगा और जनता की आकांक्षाएं पूरी की जाएंगी।
सभी माननीय सदस्यों ने जो अलग-अलग सवाल पूछे थे, सबके जवाब दे दिए गए हैं।…( व्यवधान)
बीच में जो सदस्य बारी-बारी से उठ रहे थे, मैं एक-एक करके उनको सवाल पूछने के लिए आमंत्रित करता हूं और सारी चुनौती को स्वीकार करता हूं। लेकिन अब वह समय गया और गांवों के विकास को कोई रोक नहीं सकता। बेकारी और गरीबी को खत्म करने से कोई रोक नहीं सकता। हम यूपीए और तमाम लोगों के सहयोग से गांवों के विकास, गांवों की समृद्धि, बेरोजगारी हटाने, गरीबी मिटाने और गांवों में सारी सुविधाएं देने के लिए प्रतिबद्ध हैं और उसे कोई नहीं रोक सकता।
यह दूर देख पूरी अंगार अनेक पूंजी सारी जल जाएगी मानवता की काली बिन्दी क्षार-क्षार हो जाएगी।
देखें इस भारत में कौन बड़ा वीर बलिदानी है।
किसकी धमनी में खून और किसकी धमनी में पानी है।
गांव का विकास जिन्दाबाद, ग्रामीण समृद्धि जिन्दाबाद।…( व्यवधान)
श्री रघुनाथ झा (बेतिया) : मंत्री जी को भी जिन्दाबाद।…( व्यवधान)
MR. DEPUTY-SPEAKER: Hon. Member, please sit down.
… (Interruptions)
मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) भुवन चन्द्र खंडूडी : उपाध्यक्ष महोदय, मंत्री जी ने बहुत बढि़या भाषण दिया. है, लेकिन किसी सवाल का जवाब नहीं दिया। …( व्यवधान) यह तो उनका चुनावी भाषण हो गया। हमने जो सवाल पूछे थे, उनमें से एक सवाल का भी जवाब नहीं आया।…( व्यवधान) सवाल पूछने से क्या फायदा हुआ।…( व्यवधान) मंत्री जी, आपके दफ्तर में जाकर चाय पीनी पड़ेगी, तब आप जवाब देंगे। यहां तो आपने कोई जवाब नहीं दिया।…( व्यवधान)
MR. DEPUTY-SPEAKER: Please listen to me.
श्री रघुनाथ झा : उपाध्यक्ष महोदय, आज माननीय अध्यक्ष महोदय ने सैक्रेटरी जनरल को उनकी सर्विसेज के लिए बधाई दी है। आप कम से कम मंत्री जी को उनके इतने बढि़या उत्तर के लिए बधाई दे दीजिए।…( व्यवधान)
उपाध्यक्ष महोदय : मैं यही कहने वाला था।
...( व्यवधान)
उपाध्यक्ष महोदय : मेरे ख्याल से मंत्री जी ने हर प्वाइंट का जवाब दे दिया है[R28] ।
इसलिए मेरा ख्याल है कि अगला प्वाइंट ले लेना चाहिए। अगर इस पर दोबारा प्रश्न पूछेंगे तो उसमें बहुत ज्यादा टाइम लगेगा। मेरे ख्याल से मंत्री जी ने अपना रिप्लाई बहुत इलेब्रोरेट किया है।
...( व्यवधान)
श्री प्रभुनाथ सिंह : उपाध्यक्ष महोदय, मंत्री जी से हम एक-दो प्रश्न पूछना चाहते हैं। …( व्यवधान)
उपाध्यक्ष महोदय : ठीक है, आप पूछ लीजिए।
…( व्यवधान)
DR. M. JAGANNATH (NAGAR KURNOOL): Sir, there are some clarifications. I may be given a chance. I would like to seek only a small clarification from the hon. Minister. So, I may be given a chance after him.
उपाध्यक्ष महोदय : मैंने पहले प्रभुनाथ सिंह जी को प्रश्न पूछने के लिए कहा है। आप उसके बाद पूछ लीजिए।
...( व्यवधान)
उपाध्यक्ष महोदय : आजमी जी, आप बैठ जाइये। मैंने प्रभुनाथ सिंह जी को प्रश्न पूछने के लिए कहा है।
...( व्यवधान)
श्री प्रभुनाथ सिंह : उपाध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी का उत्तर हम सुन रहे थे। उन्होंने एक भी सवाल का उत्तर नहीं दिया। …( व्यवधान) उन्होंने केवल भाषण ही दिया है। …( व्यवधान)
उपाध्यक्ष महोदय : मंत्री जी इतना बोले हैं, इतना भाषण दिया है। आप उनके साथ बेइंसाफी न करिये। एक घंटे तक उन्होंने आपकी बातों का जवाब दिया है।
...( व्यवधान)
श्री प्रभुनाथ सिंह : उपाध्यक्ष महोदय, हम स्पेसीफिक एक-दो बिन्दुओं पर उनसे स्पष्टीकरण चाहते हैं। उन्होंने कहा कि हमने उस जगह बैठकर केन्द्रीय एजेंसी की मांग करते थे। यह बात सही है कि हमारी सरकार ने यह काम नहीं किया। यह भी सही है कि जब यूपीए की सरकार आई तो उसने बिहार में केन्द्रीय एजेंसी से काम करने का काम किया। हम उनसे जानना चाहते हैं कि केन्द्रीय एजेंसी को जब से आपने काम दिया, जिस सड़क का आपने माननीय रेल मंत्री श्री लालू प्रसाद जी को ले जाकर एक साल पहले शिलान्यास कराया था, क्या उसका काम आपने शुरू कराया है तथा कितने किलोमीटर तक आपने सड़क का निर्माण कराया है ? दूसरा, आपने गड़बड़ी की चर्चा की। हम जानना चाहते हैं कि आपने उसके निराकरण के लिए कोई रास्ता नहीं बताया लेकिन आपने जो सुझाव दिया है कि लोकल समति पंचायत स्तर पर, प्रखंड स्तर पर बनेगी, तो उस समति को आप क्या अधिकार देना चाहते हैं और उसकी अनुशंसा का क्या महत्व होगा ? इसे भी आप विस्तार से बताइये।
तीसरा, मैं यह जानना चाहता हूं कि आपने बैठक की चर्चा की। श्री रघुनाथ झा ने भी आपसे मिलकर कहा था कि जो बैठक पंचायतों, ग्राम सभा या आम सभा में होती है, उसमें सांसद का कोई प्रतनधित्व नहीं होता। क्या आपने राज्य सरकार को पत्र लिखा है कि उसमें सांसद को प्रतनधि के रूप में शामिल किया जाये। सम विकास योजना के संबंध में आपने बताया कि यह प्लानिंग कमीशन की योजना है। ठीक है कि यह प्लानिंग कमीशन की योजना है लेकिन आपने वहां चेयरमैन कलैक्टर को बनाया है। योजना के चयन में सांसद की कोई भागीदारी नहीं होती। हम जानना चाहते हैं कि उस जिले के सांसद को …( व्यवधान)
श्री इलियास आज़मी (शाहाबाद) : विधायकों की भागीदारी होती है लेकिन सासंद की नहीं होती…( व्यवधान)
श्री प्रभुनाथ सिंह : विधायक की भी भागीदारी नहीं होती। क्या आप उस जिले के सांसद को कलैक्टर के बदले चेयरमैन बनाकर योजना का चयन करवायेंगे ? गांव के गरीबों के विषय में आपने कहा कि हम सारी योजनाएं उऩ तक पहुंचाने जा रहे हैं। हमारा कहना है कि आप खाली भाषण मत दीजिए क्योंकि अखबार में आप कुछ बोलते हैं और लोक सभा में कुछ और बोलते हैं। आपने जो पत्र बिहार के राज्यपाल को लिखा था, उसकी प्रतक्रिया अखबार में यह थी कि रघुवंश जी, हम शतरंज नहीं खेलते हैं। आप यह बताइये कि वे गवर्नर हाउस में बैठकर शतरंज खेलते हैं या आप लोक सभा के भाषण के माध्यम से शंतरज खेल रहे हैं। आप इन दोनों बातों का उत्तर बताइये।
SHRIMATI TEJASWINI SEERAMESH (KANAKAPURA): The speech made in the Lok Sabha Chamber will be the official speech. लोक सभा में जो बोला जाता है, वही सही होता है। …( व्यवधान)
DR. M. JAGANNATH : Sir, I should like to congratulate him for constituting vigilance and monitoring committees and vesting the Members of Parliament with some powers. Though on paper, it is called vigilance and monitoring committee and you have made the Collector as the Member Secretary. He has to convey meetings of the committee. I have conducted three such meetings in my Mahabubnagar District in a short span of six months after receiving your letter. We found some irregularities in the implementation of various programmes, like, National Food for Work Programme, drinking water scheme, SGRY, SGSY, etc. I, in the capacity of Chairman of that Committee, endorsed them to the Collector and asked him to enquire into them and take necessary action. Here the situation is like this. You say that you can call for any file and inspect it. But practically where is the power to take action? It is with the Collector. We do not have any power to punish anybody. What is the use of it? We can go to see files and recommend. In our Andhra Pradesh State, MLAs are exerting so much of pressure on the Collectors that they do not conduct the meetings of the Gram Sabhas[pkp29] .
They do not care for any guidelines; whether it is SGSY, SGRY or National Food for Work Programme, they are not following the guidelines. … (Interruptions)
MR. DEPUTY-SPEAKER: Thank you.
… (Interruptions)
DR. M. JAGANNATH : Hear me first. … (Interruptions)
MR. DEPUTY-SPEAKER: Nothing will be recorded except what Dr. Jagannath says.
(Interruptions) …* DR. M. JAGANNATH : Sir, it has been my experience as the Chairman of the Committee. He does not have any experience and so, he should not be allowed to speak and I should be given a chance. … (Interruptions)
MR. DEPUTY-SPEAKER: Okay, thank you. Please sit down now.
… (Interruptions)
उपाध्यक्ष महोदय : मैडम, आप बैठ जाइए।
…( व्यवधान)
DR. M. JAGANNATH : What are the criteria for those programmes? … (Interruptions)
उपाध्यक्ष महोदय : जगन्नाथ जी, क्या आपको कोई प्रश्न पूछना है ?
DR. M. JAGANNATH : Every programme has got its guidelines. … (Interruptions)
* Not Recorded.
MR. DEPUTY-SPEAKER: Have you got any questions to put?
… (Interruptions)
DR. M. JAGANNATH : I will now come to the 22.5 per cent of SGRY going to the individual beneficiaries of SC/ST. … (Interruptions)
MR. DEPUTY-SPEAKER: Please put the question.
… (Interruptions)
MR. DEPUTY-SPEAKER: Please sit down now.
… (Interruptions)
DR. M. JAGANNATH : It is my experience.
उपाध्यक्ष महोदय : जगन्नाथ जी, अब आप बैठ जाइए।
DR. M. JAGANNATH : Sir, I should congratulate and appreciate the lung power of the hon. Minister. I should congratulate him because he has given very clear-cut guidelines. Every word carries value. But what is happening at the ground level? Nothing is being implemented as per the guidelines. … (Interruptions) Shri Ramdas Athawale, please sit down. … (Interruptions)
डॉ. एम. जगन्नाथ : रामदास जी, आप बैठ जाइए।…( व्यवधान)
The local MLAs are giving the list which is endorsed by the Collector. … (Interruptions)
MR. DEPUTY-SPEAKER: Please sit down.
… (Interruptions)
DR. M. JAGANNATH : Coming to SGRY, the list is given by the MLAs. … (Interruptions)
उपाध्यक्ष महोदय : जगन्नाथ जी, अब आप बैठ जाइए।
DR. M. JAGANNATH : It is very relevant. The hon. Minister has done it with a good spirit. But it is being diverted and the benefits are not going to those who are to be benefited. The benefits are going to the benamis, proposed by the local MLAs. No consideration is being given to the MPs. … (Interruptions)
MR. DEPUTY-SPEAKER: Okay, thank you. Please sit down now.
… (Interruptions)
DR. M. JAGANNATH : Coming to SGSY, again the beneficiaries are selected on the recommendation of the local MLAs and are not selected by holding gram sabha meetings or the Joint Selection Committee meetings. The bankers are also not coming forward to help in this and so, action should be initiated against the bankers also. … (Interruptions) As the Chairman of the Committee, I am telling all this. Why are you scared? … (Interruptions) You can prove that it is not happening; otherwise, I can prove it. … (Interruptions)
MR. DEPUTY-SPEAKER: Now, please sit down. After this, nothing will be recorded. Now, please sit down. Nothing will be recorded. Dr. Jagannath, I have given you enough time. Now, you have to sit down.
(Interruptions) … * MR. DEPUTY-SPEAKER: No. Nothing will be recorded.
(Interruptions) … * MR. DEPUTY-SPEAKER: Please sit down.
… (Interruptions)
DR. M. JAGANNATH : It is very relevant. The guidelines are there and the intention of the Central Government is also good. But what is being done at the ground level or at the grass-root level? For any activity of the Government, there are guidelines. … (Interruptions)
MR. DEPUTY-SPEAKER: Please sit down. No. You have crossed all limits now. … (Interruptions)
MR. DEPUTY-SPEAKER: No. You have crossed the limits. Please sit down.
… (Interruptions)
MR. DEPUTY-SPEAKER: No. No. Please sit down.
… (Interruptions[R30] ) * Not Recorded.
DR. M. JAGANNATH : Even after the hon. Minister's reply, anybody can seek clarification. The hon. Minister is prepared to answer all the clarifications. That was his commitment and that is why I am seeking clarifications from him.
MR. DEPUTY-SPEAKER: You may sit down now. Nothing is going on record.
(Interruptions) …* उपाध्यक्ष महोदय : एक मिनट रूकिए, जरा श्री लिब्रा जी को बोल लेने दीजिए।
सरदार सुखदेव सिंह लिब्रा (रोपड़) : उपाध्यक्ष जी, मैं आपको बहुत-बहुत धन्यवाद देता हूँ।
श्री इलियास आज़मी : उपाध्यक्ष जी, क्या आपने बहुजन समाज पार्टी के सदस्यों को बोलने का अवसर न देने का निर्णय कर लिया है?
उपाध्यक्ष महोदय : आपने यह कैसे सोच लिया कि मैं आपको बोलने का अवसर नहीं दूंगा।
श्री इलियास आज़मी इससे पहले मैंने और श्री बृजेश पाठक जी ने बोलने के लिए समय मांगा लेकिन समय नहीं दिया गया। बहुजन समाज पार्टी के सदस्यों को बोलने का मौका नहीं मिलता है।
MR. DEPUTY-SPEAKER: I will give you time. Please sit down.
सरदार सुखदेव सिंह लिब्रा : उपाध्यक्ष जी, हमने यहां बहुत अच्छी स्पीच सुनी है, लेकिन मैं यह कहना चाहता हूँ कि इस स्पीच का गांवों की आबादी पर कोई असर नहीं होता है। मैं दो जिलों में चेयरमैन हूँ। मैंने वहां देखा है कि सेल्फ हेल्प ग्रुप्स बने हुए हैं। ये कहते हैं कि वे सब ठीक चल रहे हैं लेकिन मैंने देखा है कि गांव में कोई काम नहीं हो रहा है। यहां कहा जाता है कि लोग पैसे नहीं लेते हैं। लेकिन यह ठीक नहीं है। यहां कहा जाता है कि इतना पैसा दे दिया बनाने के लिए, इतना काम कर दिया। लेकिन जो अधिकारी हैं वे जांच-पड़ताल नहीं करते हैं, मैं समझता हूॅ कि उनका भी इसमें हिस्सा होता है।
कच्चे मकानों की हालत बहुत खराब है, उन लोगों को पैसा नहीं मिलता है लेकिन पैसा उनको मिलता है जो पक्के मकानों में रहते हैं, तनख्वाह लेते हैं, पेंशन लेते हैं या पटवारी आदि हैं। इसकी रिकवरी होती है लेकिन केस रजिस्टर नहीं होता है। इसके अतरिक्त एक बात मैंने यह भी देखी है कि जो पैसा दिल्ली से, सेन्ट्रल गवर्नमेंट की ओर से जाता है उसमें प्रदेश में जो सरकार को हिस्सा देना होता है, वह नहीं दिया जाता है। उसके लिए कोई प्रबन्ध किया जाना चाहिए ताकि गरीबों का काम ठीक से चलता रहे।
* Not Recorded.
उपाध्यक्ष महोदय : यह एक वैलिड प्वाइंट है। उसमें जो सरकार का शेयर होता है, वह नहीं आता है जिसकी वजह से कई काम नहीं हो पाते हैं। दूसरी बात यह है, जैसा कि हमने पंजाब में देखा है, कि एक ही आदमी को बार-बार पैसा मिल जाता है। उसे ५० प्रतिशत में से भी मिल जाता है, २० प्रतिशत में से और ३० प्रतिशत में से भी मिल जाता है अर्थात जिस व्यक्ति को पंचायत पैसा देती है, उसी व्यक्ति को ब्लॉक और जिला परिषद से भी पैसा दे दिया जाता है।
श्री इलियास आज़मी (शाहाबाद) : महोदय, हमारे पुराने दोस्त ग्रामीण विकास मंत्री श्री रघुवंश प्रसाद जी ने बहुत अच्छा मुशायरा पढ़ा जिसे पूरे देश में लोगों ने सुना होगा।
SHRI VARKALA RADHAKRISHNAN (CHIRAYINKIL): Sir, I am on a point of order.
उपाध्यक्ष महोदय : श्री आजमी जी, कृपया आप एक मिनट के लिए बैठ जाइए, श्री राधाकृष्णन जी एक प्वाइंट ऑफ आर्डर उठाना चाहते हैं।
SHRI VARKALA RADHAKRISHNAN : I am referring to Rule 197 relating to Calling Attention. I am extremely sorry to refer to this point of order. As per the rule, the Minister may make a brief statement. Here, the Minister had delivered a marathon speech as if he was answering a debate on rural development.[cmc31] MR. DEPUTY-SPEAKER: There is no point of order.
… (Interruptions)
SHRI VARKALA RADHAKRISHNAN : Secondly, it says that there shall be no debate. But here we are having an extensive debate. Everybody is asking a question… (Interruptions)
MR. DEPUTY-SPEAKER: They are asking only clarifications.
… (Interruptions)
MR. DEPUTY-SPEAKER: There is no point of order.
… (Interruptions)
SHRI VARKALA RADHAKRISHNAN : After the reply, there can be no questions. The questions can be asked before the reply. First, the Minister will have to make a brief statement… (Interruptions)
डॉ. रामकृष्ण कुसमरिया (खजुराहो) : उपाध्यक्ष महोदय, मेरा व्यवस्था का प्रश्न है।
MR. DEPUTY-SPEAKER: Mr. Varkala Radhakrishnan, please sit down.
डॉ. रामकृष्ण कुसमरिया : मेरा व्यवस्था का प्रश्न यह है कि पहली बार सदन में ग्रामीण विकास मंत्रालय पर चर्चा हो रही है और माननीय सदस्य को एतराज हो रहा है। हमारा यह कहना है कि यह चर्चा होने दें।
उपाध्यक्ष महोदय : यह को पाइंट आफ आर्डर नहीं है।
… (Interruptions)
MR. DEPUTY-SPEAKER: Nothing will be recorded without my permission.
(Interruptions) … * MR. DEPUTY-SPEAKER: You are wasting the time of the House. Nothing will be recorded which is being said by Shri Varkalaji.
(Interruptions) … * उपाध्यक्ष महोदय : वरकला जी की बातें रिकार्ड में नहीं जाएंगी।
...(व्यवधान)... * श्री इलियास आज़मी : उपाध्यक्ष महोदय, ग्रामीण विकास मंत्रालय पर एक सकारात्मक बहस हुई है।…( व्यवधान)
उपाध्यक्ष महोदय : वरकला जी, आप बैठ जाएं, क्योंकि आपकी कोई बात रिकार्ड में नहीं जा रही है।
… (Interruptions)
उपाध्यक्ष महोदय : वरकला जी, आप बैठ जाएं।
SHRI BIKRAM KESHARI DEO (KALAHANDI): Sir, I am on point of order. My contention is that the Calling Attention Notice was given by the hon. Member, Shri Prabhunath Singh. At that time, the hon. Speaker made a comment.… (Interruptions)
MR. DEPUTY-SPEAKER: There is no point of order.
… (Interruptions)
श्री बिक्रम केशरी देव : आप सुनिए तो सही। Sir, the hon. Speaker gave a ruling at that time.
* Not Recorded.
MR. DEPUTY-SPEAKER: There is no point of order.
… (Interruptions)
MR. DEPUTY-SPEAKER: Nothing will be recorded.
(Interruptions) …* श्री इलियास आज़मी : माननीय उपाध्यक्ष महोदय, ध्यानाकर्षण के माध्यम से, ग्रामीण विकास की योजनाओं पर, कुछ अच्छी बातें भी सामने आई हैं। माननीय रघुवंश प्रसाद सिंह जी ने मुशायरे की तरह पूरे मुशायरे को लूट लिया और उन्होंने बड़े अच्छे-अच्छे शेर सुनाए। उनका सारा भाषण योजनाओं पर या जो कुछ कागजों में लिखा हुआ है उस पर था या जो जिले से असत्य चाट्र्स आते हैं उनके ऊपर आधारित है। सारी ग्रामीण विकास योजनाएं भारत सरकार के पैसे से चल रही हैं। डीआरडीए के अधिकारी, कर्मचारी या कलैक्टर हों, सब राज्य सरकार के मातहत हैं। सच तो यह है कि वे लोक सभा के सदस्यों को कोई भाव नहीं देते हैं। आपने मॉनटिरिंग कमेटी बनाई और उसका अध्यक्ष भी बना दिया लेकिन उसको कोई अधिकार नहीं दिया।
SHRI PAWAN KUMAR BANSAL (CHANDIGARH): Sir, if we devote such a long time for one Calling Attention Motion, then rest of the business of the House would have to be laid on the Table… (Interruptions) This is not fair… (Interruptions)
उपाध्यक्ष महोदय : आपके सांसद सुनने नहीं दे रहे हैं।
श्री इलियास आज़मी : मैं सिर्फ एक सवाल माननीय ग्रामीण विकास मंत्री जी से करुंगा कि जो वित्त-पोषित योजनाएं हैं उनको जब कलैक्टर सैंक्शन करता है, निर्माण एजेंसियां तय करता है तो उसके अप्रूवल का अधिकार उसी मॉनटिरिंग कमेटी के चेयरमैन को देने के लिए क्या आप तैयार हैं। अगर उनको दे दें तो उनके हाथ बंध जाएंगे और दस-बीस प्रतिशत भ्रष्टाचार और सरकारी पैसे की लूट बंद हो जाएगी। आपने अपने भाषण में कहा है कि अपील होगी। जो इंदिरा आवास और दूसरी योजनाओं में गड़बड़ होती है उसकी अपील होगी। लेकिन वह अपील कहां होगी? अगर आप उसी मॉनटिरिंग कमेटी में कराएंगे तो इंदिरा आवास की लूट न रुके तो मुझसे जवाब-तलब कीजिएगा। वहां जो प्रधान सूची देते हैं और सीडीओ उसी सूची को अप्रूवल देकर पैसा भेजता है। तो उसको नियुक्त करने का अधिका उसको दे दीजिए। अगर ५० प्रतिशत भ्रष्टाचार न रुक जाए तो आप मुझसे जवाब-तलब कीजिए।
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* Not Recorded.
श्री खारबेल स्वाईं (बालासोर) : उपाध्यक्ष जी, जो इंदिरा आवास के अधिकारी हैं उनको पहले एडवांस दिया जाता था लेकिन आजकल उसको बंद कर दिया गया है। ऐसा इसलिए हुआ है कि कोई न कोई आदमी उसका दुरुपयोग कर रहा है। इससे समस्या यह होती है कि जिन गरीब लोगों के पास पैसा नहीं होता है वे घर को शुरु नहीं कर पाते हैं। इसलिए वे घर बनाने के लिए कंट्रेक्टर को दे देते हैं। कंट्रेक्टर मुनाफा बना लेता है लेकिन घर नहीं बनाता है। मेरा निवेदन यह है कि जो एडवांस पहले दिया जाता था उसको दुबारा शुरू किया जाए। दूसरा, सरपंच ग्राम सभा को बुलाता नहीं है तो क्या आप बीडीओ को इजाजत देंगे कि जहां जानबूझकर सरपंच ग्राम सभा को बुलाता नहीं है वहां बीडीओ एक समयबद्ध तरीके से ग्राम सभा को बुलाए। सवर्ण-जयंती ग्राम स्वरोजगार योजना में नयी पहल की समस्या आती है। अधिकांश: जगहों पर जो ट्रेनिंग दी जाती है वह पुरानी है, उसमें वही डेयरी आइटम होते हैं कोई नया आइडिया नहीं होता है। आप एक आदमी के लिए २३ रुपया ट्रेनिंग का खर्चा देते हैं। समय-समय पर उनको बाहर ट्रेनिंग दिलवाइये, जिससे उनके आइडिये में नयापन आये। ट्रेनिंग के लिए जो एक दिन का खर्चा दिया जाता है क्या आप उसके ब्ÉfÃÉAÆMÉä[r32] ।
चौधरी लाल सिंह (उधमपुर) : भाइयों, आप मेरी बात सुनिए। महोदय, मैं आप की इजाजत से एक बात कहना चाहता हूं और मुबारकबाद देना चाहता हूं क्योंकि इससे पहले किसी भी मनिस्टर ने मलिट्री वजिलेंस कमेटी नहीं बनाई। He is the first Minister in India to do it.… (Interruptions)
उपाध्यक्ष महोदय : लाल सिंह जी, आप बैठ जाइए।
...( व्यवधान)
MR. DEPUTY-SPEAKER: Shri Lal Singh, nothing is going to be recorded.
(Interruptions) … * डॉ. रघुवंश प्रसाद सिंह : उपाध्यक्ष महोदय, मैं बहुत प्रसन्न हूं और सभी माननीय सदस्य जिन्होंने सवाल उठाए हैं और सवाल उठाने के लिए उत्सुक हैं, सभी को हम दय से धन्यवाद देते हैं। मुझे पूरा विश्वास है कि ग्रामीण विकास नहीं रूकेगा, ग्रामीण विकास की गति तेज होती जाएगी। जब माननीय सदस्यगण इतनी रूचि ले रहे हैं और सवाल पूछने के लिए, जानने के लिए, सुनने के लिए इतनी मुस्तैदी बरत रहे हैं, तो ये योजनाएं जरूर सफल होंगी। जो माननीय सदस्य सवाल उठा पाए हैं, हम उनका उत्तर देंगे, लेकिन जो सदस्य सवाल नहीं उठा सके हैं, उन माननीय सदस्यों को हम राज्यवार आमंत्रित करेंगे, उसमें आप सभी लोग जरूर आइएगा।
* Not Recorded.
15.37 hrs. (Shri Varkala Radhakrishnan in the Chair) हमारे निमंत्रण को स्वीकार करें। वहां आप घंटों तक सवाल जवाब कर सकेंगे। वहां हमारे अफसर भी रहेंगे और माननीय सदस्यगण भी रहेंगे। सभी सवाल जवाब हल हो जाएंगे। …( व्यवधान)
श्री प्रभुनाथ सिंह : आप उनको उत्तर देने दीजिए।
डॉ. रघुवंश प्रसाद सिंह : जो सवाल माननीय सदस्यों के द्वारा उठाए गए हैं उनका हम लखित उत्तर आप के नाम से भेज देंगे।…( व्यवधान)
MR. CHAIRMAN : No. It is over. I will not allow you. The subject is over. Shri Subbarayan may go ahead now.
… (Interruptions)
MR. CHAIRMAN: I will not allow anything which is against the rules. We are functioning under the rules. Rules do not permit any question or a discussion or any debate here. It is a Calling Attention going on. Only a brief statement or a clarificatory question is allowed. Then the Minister replies and there ends the matter. No further questions are allowed.
Now, Shri K. Subbarayan may proceed.
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