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Lok Sabha Debates

Requests The Government To Reconsider And Cancel The Decision Of Granting Visa To ... on 24 February, 1999

Title: Requests the Government to reconsider and cancel the decision of granting Visa to Mr. Salman Rushdie.

SHRI E. AHAMED (MANJERI): Mr. Deputy-Speaker, Sir, I am raising here a serious matter which is the concern of a very large population of this country. I also avail of this opportunity to express deep sense of resentment of the Muslims community of India on the Government decision to grant visa to a foreign national Salman Rushdie to visit this country.

Sir, Salman Rushdie, in the eyes of the Muslim community of the world over, is blasphemour. He has committed a blasphemy by abusing the holy Prophet of Islam and his family. He has not regretted so far, and it has wounded the sentiments of Muslims all over the country and all over the world. He has really hurt the feelings and sentiments of a very large section of the people in this country. Such a man should not be welcomed in the soil of this country. Freedom of Expression does not mean freedom to wound other submits.

Sir, I would like to say that, Muslims have taken a principled stand on this matter. The feelings of the Muslims towards the Prophet cannot be expressed as it is quite in explicable. On such an occasion, Mr. Salman Rushdie by abusing the holy Prophet and his family has become a man of blasphemy. He has committed a blasphemy. He has not regretted his action. Such a man cannot be allowed to visit India. It is the duty of the Government to respect the sentiments of the people of this country. It is not the duty of the Government to bring anybody to wound the sentiments of the people of this country. It is a question of sentiments of millions and millions of the people of this country. But our Government feel that it is not a concern for them. Grant of visa to Rushdie is unwise and provocative. Therefore, I would request that the Government should reconsider it and cancel the decision of granting him the visa. श्री मोहन सिंह (देवरिया): उपाध्यक्ष महोदय, मैंने भी यही प्रश्न दिया है। उपाध्यक्ष महोदय : आपका मामला बाद में लिया जायेगा।> श्री अजीत जोगी (रायगढ़): उपाध्यक्ष महोदय, इन्होंने एक ऐसी बात उठाई है जो देश के करोड़ों लोगों के जज्बातों से संबंधित है और हम इसका समर्थन करते हैं। उपाध्यक्ष महोदय : आपने जिस मैटर का नोटिस दिया हुआ है वह यह है - ठ Organised attacks on Christian religious places in Gujarat.' ... (व्यवधान)

श्री मोहन सिंह : सर, जो विषय मैं उठाना चाहता हूं वह मेरे नोटिस में दिया गया है और यह वही विषय है जो अभी श्री ई.अहमद द्वारा उठाया गया है। मेरे नोटिस को आप देखने की कृपा करें उसमें वह दिया हुआ है।

... (व्यवधान) उपाध्यक्ष महोदय : श्री अहमद का विषय तो श्री सलमान रुश्दी को वीजा न देने के बारे में है। श्री मोहन सिंह : उपाध्यक्ष महोदय, मेरा भी वही विषय है। मैं भी उसी पर बोलना चाहता हूं। इसका उल्लेख भी मैंने अपने नोटिस में किया है। उपाध्यक्ष महोदय : ठीक है, मैं तो आपको बोलने के लिए समय दे रहा हूं। श्री मोहन सिंह : उपाध्यक्ष महोदय, श्री अहमद साहब ने जो विषय उठाया है, उससे मैं पूरी तरह सहमत हूं। मैं कहना चाहता हूं कि भारत सरकार की एक योजना है जिसके अनुसार यह सरकार चाहती है कि देश के पूरे समाज को साम्प्रदायिक आधार पर बांट दिया जाए और उसी योजना के तहत सलमान रुश्दी को सरकार ने वीजा दिया है और उसके बाद एक के बाद एक घटनाएं इस देश में सरकार की सांठगांठ से हो रही हैं और इस देश में साम्प्रदायिक दंगे कराने का प्रयास सरकार द्वारा किया जा रहा है जिससे वे इसका राजनीतिक लाभ उठा सकें। मैं सरकार की इस मंशा का विरोध करता हूं और आपके माध्यम से भारत सरकार से अपील करना चाहता हूं कि सलमान रुश्दी को जो वीजा दिया गया है वह किसी खास मकसद से दिया गया है, जो गलत है। उपाध्यक्ष महोदय, सलमान रुश्दी ने न केवल पैगम्बर मोहम्मद साहब के बारे में बातें कही हैं बल्िक जो हिन्दू देवी-देवता हैं उनके बारे में भी उनके द्वारा अनेक आपत्ितजनक टिप्पणियां की गई हैं, वे हमारे हिन्दू समाज को भी प्रभावित करती हैं। इसलिए केवल मुस्िलम समाज का ही सवाल नहीं है, हिन्दू समाज के बारे में भी रुश्दी की जो विचारधारा है, वह हमारे हिन्दू समाज के सैंटीमेंट को, हमारी भावनाओं को प्रभावित करती है। इसलिए ऐसे व्यकित को राष्ट्रीय मेहमान बनाकर भारत में बुलाकर भारत को साम्प्रदायिक दंगों की आग में झोंकने का प्रयास भारत सरकार की ओर से किया गया है। मैं उसकी निन्दा करता हूं और आपके माध्यम से इल्ितजा करता हूं कि उनके वीजा को तुरन्त खारिज किया जाए।

... (व्यवधान) श्री विजय गोयल (चांदनी चौक): उपाध्यक्ष महोदय, ये किस योजना की बात कर रहे हैं, जो कुछ माननीय सदस्य कह रहे हैं, यह बिलकुल ठीक नहीं है।

... (व्यवधान) श्री अजीत जोगी (रायगढ़): उपाध्यक्ष महोदय, जो विषय श्री ई.अहमद ने उठाया है, वह बहुत महत्वपूर्ण है और उनका हम समर्थन करते हैं।

... (व्यवधान) उपाध्यक्ष महोदय : लेकिन आपने तो नोटिस नहीं दिया है। आप नहीं बोल सकते हैं। कृपया बैठिए। श्री मुलायम सिंह यादव : उपाध्यक्ष महोदय, सरकार पूरे देश को दंगों की आग में झोंकना चाहती है। इसमें केवल मुस्िलम समाज का ही सवाल नहीं है बल्िक हिन्दू समाज का भी प्रश्न है।

... (व्यवधान) उपाध्यक्ष महोदय : मुलायम सिंह जी, आप इस प्रकार से बिना नोटिस के नहीं बोल सकते। श्री मुलायम सिंह यादव : उपाध्यक्ष महोदय, यदि हमारी बात आप नहीं सुनेंगे, तो कौन सुनेगा? कया ये हमारी बात सुनेंगे। ये सिर्फ हिन्दू विरोधी ही नहीं बल्िक मुसलमान विरोधी भी हैं।

... (व्यवधान) उपाध्यक्ष महोदय : मुलायम सिंह जी, आप बिना नोटिस के कैसे बोल सकते हैं। यह कैसे चलेगा। श्री मुलायम सिंह यादव : उपाध्यक्ष महोदय, सलमान रुश्दी की किताब पर प्रतिबन्ध लगा है और उनको यहां आने की अनुमति देकर इस देश में दंगे कराने की साजिश की जा रही है।

... (व्यवधान) श्री लालू प्रसाद (मधेपुरा) : उपाध्यक्ष महोदय, मुस्िलम कम्युनिटी को अपमानित करने के लिए इस सरकार ने सलमान रुश्दी को वीजा दिया है।

... (व्यवधान) उपाध्यक्ष महोदय : लालू जी, आप बैठिए।

Nothing will go on record.

(Interruptions)* उपाध्यक्ष महोदय : आप बैठिए। श्री रामदास अठावले : उपाध्यक्ष महोदय, सलमान रुश्दी को भारत आने के लिए दिया गया वीजा निरस्त करना चाहिए।

... (व्यवधान) श्री अजीत जोगी : उपाध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से सरकार से निवेदन करना चाहता हूं कि श्री सलमान रुश्दी को वीजा देने पर सरकार पुनर्िवचार करे कयोंकि उनकी विचारधारा देश के सभी वगर्ों के विचारों के विरुद्ध है।

... (व्यवधान)

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