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Lok Sabha Debates

Situation Arising Out Of Exodus Of People From The North-East Region States From ... on 17 August, 2012

> Title: Situation arising out of exodus of people from the North-East Region States from Bangalore and some other cities due to alleged threat to their security.

 

MADAM SPEAKER: I have received notices of Adjournment Motion from Shri Shailendra Kumar, Shri Basu Deb Acharia and Shri Rewati Raman Singh.  I have disallowed them.

          Similarly, I have received notices for suspension of Question Hour from Yogi Aditya Nath, Shri Ananth Kumar, Shri Basu Deb Acharia, Shrimati Sushma Swaraj and Shri Sharad Yadav.  I have disallowed them also.  However, considering that it is a very sensitive matter, I am allowing brief submissions to be made by the leaders and other Members.

          Shrimati Sushma Swaraj. 

 

श्रीमती सुषमा स्वराज (विदिशा): अध्यक्ष जी, मैं सबसे पहले तो आपके प्रति आभार प्रकट करती हूं कि आपने नियमों में ढील देकर मुझे इतने गम्भीर विषय पर अपनी बात कहने की अनुमति प्रदान की। अध्यक्ष जी, कोकराझार की हिंसा अभी थमी ही नहीं थी, कल भी वहां घटना घटी है और छः लोग मारे गए। इसी बीच देश के अन्य भागों से पूर्वोत्तर के छात्रों पर हिंसक हमलों की और पूर्वोत्तर के लोगों के पलायन की खबरें आने लगीं। आज सुबह आपने भी अखबार देखे होंगे, हर अखबार की सुर्खी यही है। बैंगलोर, पुणे, हैदराबाद और अब चेन्नई से भी 13,000 से ज्यादा लोग घर छोड़ कर भाग गए। सुर्खियां हैं कि लोगों पर हिंसक हमले हो रहे हैं।

          अध्यक्ष जी, हिंसा की पहली घटना 8 अगस्त को पुणे में हुई थी, हडप्सर और कोंडवा के इलाके हिंसाग्रस्त हुए थे। दो मणिपुरी लोग उस हिंसा के शिकार हुए थे। एक मणिपुरी छात्र 18 बरस का, 12वीं में पढ़ने वाला, जिसका नाम है प्रेमानंद खोमग्राम, उस पर हमला हुआ। दूसरा व्यक्ति 29 साल का इन्फोसिस का कर्मचारी खोमदईपनीमई, उस पर हमला हुआ। मात्र तीन दिन के बाद, 11 अगस्त को प्रेमानंद पर फिर हमला हुआ और वह हमला इतना खतरनाक था कि उस बच्चे के सिर पर सात टांके आए और उसका शरीर घायल हो गया।

          अध्यक्ष जी, एक बोडो सिक्योरिटी गार्ड पर हैदराबाद में हमला हुआ। हिंसक घटनाएं अगर हम गिनें तो लगभग इतनी बनती हैं, लेकिन इसके बाद अफवाहों का बाज़ार गर्म हो गया। बैंगलोर में, पुणे में, हैदराबाद में, अब चेन्नई में, केरल भी अब जुड़ गया है। जगह-जगह यह कहना शुरू कर दिया गया कि आप यहां सुरक्षित नहीं हैं, अपना घर छोड़ कर भाग जाएं। हज़ारों-हज़ार लोग अपना घर छोड़ कर भाग रहे हैं। लगता है कि सारी रेलगाड़ियों का मुंह गुवाहाटी की तरफ मुड़ गया है। जिसे गुवाहाटी की ट्रेन मिल रही है, वह गुवाहाटी की ट्रेन पकड़ रहा है और जिसे कोलकाता की ट्रेन मिल रही है, वह कोलकाता की ट्रेन पकड़ रहा है।

          अध्यक्ष जी, कल 20 बच्चे मुझसे मिलने आए। उनमें पूर्वोत्तर के अरुणाचल प्रदेश से, मणिपुर से भी थे और बोडो स्टूडेंट्स यूनियन का जनरल सेक्रेटरी भी था। उन्होंने मुझे कहा कि हमें धमकियां मिल रही हैं कि  20 तारीख से पहले-पहले तुम अपना घर छोड़ कर चले जाओ, वरना तुम्हारे साथ बुरी बनेगी।

मैंने उन्हें कहा कि ऐसा मत करो, सरकार तुम्हारे साथ है, पुलिस तुम्हारे साथ है, हम तुम्हारे साथ हैं। उनमें से एक बच्चे ने कहा कि मुम्बई में आपकी सरकार पुलिस की सुरक्षा नहीं कर सकी और आप कहती हैं कि सरकार हमारी रक्षा करेगी। अध्यक्ष जी, उसकी इस बात ने मुझे निरुत्तर कर दिया क्योंकि वह एक ऐसा तथ्य बयान कर रहा था जो सच था। मैंने उन बच्चों को आश्वस्त करने के लिए उसी समय पुलिस कमिश्नर को फोन किया और कहा कि मैं इन्हें भेज रही हूं, तुम इन्हें संतुष्ट करके भेजो। मुझे खुशी है कि वे पुलिस कमिश्नर की बात से संतुष्ट होकर आये। लेकिन कई बार जो सुर सुनाई पड़ते हैं वे सुर बहुत चिंताजनक हैं। कई बार एक सुर आता है कि असम समझौते पर पुनर्विचार होना चाहिए। कई बार सुर आता है कि बोडो-ट्राइबल-कौंसिल की आरक्षित सीटों में कमी कर देनी चाहिए। अध्यक्ष जी, हम समय की नजाकत को पहचान नहीं पा रहे हैं। मैं आपके माध्यम से कहना चाहती हूं कि पूर्वोत्तर का क्षेत्र भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से बहुत अहम क्षेत्र है और वहां इंसरजेंसी है, इसलिए मैं सरकार से कहना चाहती हूं कि वे इस बात को भी न भूलें कि भूमिगत संगठनों से सरकार शांति वार्ता कर रही है और उनमें से कुछ संगठन ऐसे हैं जहां आपकी वार्ता पूर्ण होने वाली है। अगर हम इस राह पर चले जो सुर में सुन रही हूं तो सरकार की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिन्ह लग जाएगा। इसलिए मैं कहना चाहती हूं कि आज दलगत राजनीति से ऊपर उठकर इस सदन के माध्यम से  केवल दो मांगे, दो अपीलें करना चाहती हूं। पहला तो यह कि हम केवल मौखिक आश्वासन न दें। बैंगलोर में आपने देखा, वहां के उप-मुख्यमंत्री, गृह-मंत्री रेलवे स्टेशन पर स्वयं पहुंचे और पब्लिक एड्रेस सिस्टम से उन्होंने कहा कि आप मत जाओ, हम तुम्हारी सुरक्षा करेंगे, खाने तक का इंतजाम किया। दोनों तरफ के प्रतिनिधियों की बैंगलोर के मुख्यमंत्री ने मीटिंग बुलाई और सारे नॉर्थ-ईस्ट के लोगों को बुलाकर कहा कि हम तुम्हारी सुरक्षा करेंगे। मेरा कहना है कि आप केवल मौखिक आश्वासन न दें। जो भी राज्य सरकारें हैं, चाहे भाजपा की चाहे कांग्रेस की और केन्द्र सरकार भी वहां हैल्प लाइन्स बनाकर नम्बर दे, जहां वे रहते हैं उन इलाकों में पुलिस बल स्थापित करो, पुलिस की पेट्रोलिंग कराओ और उन्हें यह आश्वासन मिलना चाहिए कि ये लोग हमारी सुरक्षा के लिए खड़े हैं। यह मेरी पहली मांग है।

          माननीय गृह मंत्री जी यहां बैठे हैं, जब तक आप हैल्प-लाइन बनाकर बच्चों को नम्बर नहीं देंगे, तब तक वे आश्वस्त नहीं होंगे। उनके होस्टल्स जहां हैं, जहां मॉल्स में वे काम करते हैं खासकर उन मॉल्स में उन्हें धमकियां दी जाती हैं। उस जगह पर पुलिस बल तैनात करो। इस सदन से दूसरी मेरी मांग है कि यह सदन सुर में सुर मिलाकर कहे कि नार्थ-ईस्ट के लोगों, तुम हमारे भाई-बहन हो, यह देश तुम्हारा है, तुम इस देश के हो, तुम जहां चाहो पढ़ों, तुम जहां चाहो रहो, कोई तुम्हें असुरक्षित नहीं कर सकता, हम तुम्हारे साथ हैं, सरकार तुम्हारे साथ है, देशवासी तुम्हारे साथ हैं, हम सुरक्षा करेंगे, यह सदन सुरक्षा करेगा, सरकारें सुरक्षा करेंगी, इस देश का हर वासी तुम्हारी सुरक्षा करेगा, यह सुर आज इस सदन से जाना चाहिए, यह मेरी आपसे मांग है।

 

श्री निनोंग ईरींग (अरुणाचल पूर्व): आदरणीय अध्यक्ष महोदया जी, मैं आपका शुक्रगुजार हूं कि आपने मुझे भी इस मामले पर बोलने का मौका दिया। मैं सुषमा जी विपक्ष की नेता को धन्यवाद देना चाहता हूं  कि उन्होंने इस मसले को सदन में उठाया। एक हफ्ता पहले कोकराझार और असम में जब अप्रिय घटनाएं हुई थीं तो हम उनसे कुछ आशंकित थे और इसलिए अपने एमपीज साथियों के साथ माननीय गृह मंत्री सुशील कुमार जी के पास गये और अपनी बातें रखीं, प्रस्ताव रखा कि इसमें उत्तरी पूर्वी राज्यों के बच्चों को भय महसूस हो रहा है उसे दूर करने की कोशिश करें।  हम अपने कुछ एमपी साथियों के साथ गृह मंत्री श्री सुशील कुमार शिंदे के पास गए और हमने प्रस्ताव रखा कि हमारे जितने भी उत्तर-पूर्वी राज्यों के बच्चों को जो भय महसूस हो रहा है, उसे दूर करने की आप पूरी कोशिश करें। वैसे उन्होंने तीनों राज्यों महाराष्ट्र, कर्नाटक और आंध्रप्रदेश के लिए उन्होंने आश्वासन दिया कि उनकी आलरेडी इस बारे में उनसे बातचीत हुई है  और उन्हें सतर्क कर दिया है। लेकिन फिर भी यह जो गंभीर स्थिति आई है, जो मीडिया में देख रहे हैं, प्रिंट मीडिया में देख रहे हैं कि किस प्रकार से हमारे बच्चों को भय प्रतीत हो रहा है, इसके लिए हम बहुत ही दुखी थे। हम अपने लिए सोचते थे कि हम भारतीय हैं। पिछले कुछ सालों से ऐसी छोटी-मोटी बहुत-सी घटनाएं हुई हैं। कोकराझार एक बहुत छोटा-सा क्षेत्र असम में है, जैसे एक ब्लाक एरिया होता है। इस ब्लाक के कारण अरूणाचल के, नागालैंड के, मणिपुर के, त्रिपुरा के या पूर्वोत्तर राज्यों के लोग मंगोलियन शक्ल के हैं, उनके ऊपर वार करना बहुत गलत बात है। अभी हमने सुना कि तिब्बतियों के ऊपर भी हमला किया गया। यह बहुत गलत मैसेज देश में जा रहा है।

          महोदया, मैं आपके माध्यम से गृह मंत्री जी को अपने दिल से प्रार्थना करूंगा कि इस समस्या को एक गंभीर रूप में लें ताकि भविष्य में भी ऐसी अप्रिय घटना न हो। मैं जानता हूं कि आज की स्थिति को सामान्य लाने के लिए जितने भी सदन के सदस्य हैं, उनसे अनुरोध करूंगा कि सिर्फ इन तीन राज्यों में ही नहीं बल्कि देश के दूसरे राज्यों में भी चाहे राजस्थान हो, मध्य प्रदेश हो, तमिलनाडु हो सभी को एकजुट होने की जरूरत है। हम देख रहे हैं कि दक्षिण से जितने भी बच्चे आ रहे हैं, क्योंकि बीस हजार लोग आलरेडी वहां से निकल चुके हैं तथा और भी लोग वहां से निकलने के लिए तैयार हैं। हम सोचते हैं कि हम अगर दिल्ली में हूं तो ऐसा लगता है कि मैं अरूणाचल में ही हूं लेकिन अगर मैं बैंगलोर में हूं तो भी मैं भारत में ही हूं, क्योंकि हमारा एक ही देश है। अगर हम अपने आपको देशवासी नहीं समझते, तो चाहे मैं असम में ही क्यों न रहूं, मैं अपने को भारतवासी नहीं समझूंगा। जिस व्यक्ति ने हमला करना है, वह तो हमला करेगा ही। मेरा आपसे यही कहना है कि यह भय समाप्त होना चाहिए और कैसे हम शांति कायम कर सकेंगे, इसका निर्णय लेना होगा।

          उत्तर-पूर्वी राज्यों के जो मुख्यमंत्री हैं, उन्होंने वहां की जो मेन तीन सीटीज हैं, उनसे सम्पर्क रखा है। अरूणाचल से हमारे साथी श्री तकाम संजय को हमारे मुख्यमंत्री जी ने भेजा है, जो वहां के स्थानीय लोगों से चाहे वहां के विधायक हैं या सांसद हों या स्टूडेंट्स यूनियन या एनजीओज हों, वहां सामान्य स्थिति बनाने के लिए भेंट वार्ता करेंगे। मैं यही कहूंगा कि अभी तक अफवाहों से या लेटैस्ट टैक्नोलॉजिस, एमएमएस से, आप देख सकते हैं कि जो गलती की है, Those who have been involved in this उनके खिलाफ सख्त से सख्त क़दम उठाने चाहिए, क्योंकि उन्हीं के कारण आज देश में इनस्टैबिलीटी उन्हीं के कारण आयी है। लेकिन मैं जानता हूं कि हमारे महाराष्ट्र और बैंगलोर के सभी सांसदों ने आश्वासन दिया है कि सब चीज सामान्य है। कल रात मेरी संजय निरूपम जी से भी मेरी बात हुई थी, वहां के पैरन्ट्स चिन्तित हैं, वह हमें एसएमएस कर रहे हैं, फेसबुक पर लिखा है कि इसका समाधान लाइएगा, क्योंकि यह उनके बच्चों की पढ़ाई का मामला है, उनके भविष्य का मामला है। हमें पार्टी लाइन पर नहीं बोलना है, हमें एक्रॉस पार्टी लाइन बोलना है। मैं हिन्दू हूं, मैं मुस्लिम हूं, मैं ईसाई हूं, मैं बौद्ध हूं, इस सबसे उभरकर हमको आना होगा, जैसा कि हमारी विपक्ष की नेता ने कहा We have to come across the party-line; we have to come above it.  अभी हमें सोचना होगा कि इस शिचुएशन को कैसे कन्टेन करे और इसके लिए हमें सभी का सहयोग और सहानुभूति चाहिए होगी। आपको पर्सनल इंटरैस्ट लेना होगा। खासकर उत्तर पूर्वी राज्यों के क्षेत्रों के जो बच्चे हैं, उनमें जो एक फियर साइकोसिस है, जो भय का वातावरण है, उसको दूर करने के लिए आप सबका सहयोग जरूरी है। मैं ज्यादा शब्द नहीं कहूंगा और इतना ही कहूंगा कि यह जो अभी रक्षा बंधन और ईद जैसे त्यौहारों का माहौल है, जो भाईचारा का माहौल है और इसमें जो एंटी-सोशल एलीमेंट्स बीच में सामान्य स्थिति को डिस्टर्ब करने में कार्यरत हैं, इसके लिए हम सबको एकत्रित होकर एक साथ, एक शब्द से साथ बोलना है कि हम सब हिन्दुस्तानी हैं, हम सब भारतीय हैं और हमें गर्व है कि हम भारतीय हैं चाहे वह चीन का हो या पाकिस्तान का हो, चाहे बंग्लादेश से हो और चाहे वह म्यंमार से हो, कोई भी हो, अगर वह ऐसी साजिश कर रहा होगा तो उसको भी हमें पक़ड़ना है। उसके खिलाफ हमें सख्त कार्रवाई करनी होगी।

          अंत में, इन्हीं शब्दों के साथ मैं आपको एक बार और धन्यवाद देना चाहता हूं कि आपने मुझे बोलने के लिए समय दिया।                

 

श्री रेवती रमण सिंह (इलाहाबाद): अध्यक्ष महोदया, अभी हमारे अरुणाचल प्रदेश के सांसद महोदय ने अपनी बात कही और मैं भी यही कहूंगा कि अभी पूरे नॉर्थ ईस्ट में एक भय का वातावरण व्याप्त हो गया है। वह भय का वातावरण ऐसे नहीं हुआ है बल्कि मैं कहना चाहूंगा कि यह इस देश के खिलाफ एक सुनियोजित षडयंत्र है और कुछ तत्वों ने जानबूझकर इसे फैलाने का काम किया है। मुझे आश्चर्य है कि भारत के जो गृह मंत्री हैं और अभी सुषमा जी ने कहा कि चीफ मिनिस्टर औऱ होम मिनिस्टर साहब वहां रेलवे स्टेशन पर गये लेकिन मैं पूछना चाहता हूं कि क्या कोई आज तक पकड़ा गया? हजारों की संख्या में मैंने देखा कि हर स्टेशन पर, हालांकि पुणे में कम हो रहा है लेकिन बैग्लोर और चेन्नई में तो ऐसा लग रहा है, जैसे कोई इतना बड़ा खतरा आ गया है कि लोग पलायन कर रहे हैं और वे एक मिनट रुकने के लिए तैयार नहीं हैं। मेरी इस सरकार से एक मांग है और हालांकि पूरा सदन इसका समर्थन कर ही रहा है लेकिन मैं कहना चाहता हूं कि पूरे सदन से एक प्रस्ताव होना चाहिए। लेकिन सबसे खतरनाक बात यह है कि देश में जो आत्मविश्वास खत्म हो गया है, जो भाईचारा खत्म हो गया है, हमें इसको कायम करने के लिए जो लोग अफवाह फैला रहे हैं, उनके खिलाफ तत्काल एनएसए के तहत कार्यवाही होनी चाहिए और उनको जेल में बंद करना चाहिए।

          अध्यक्ष महोदया, ऐसा नहीं है कि केवल बात करने से यह हो गया। मोबाइल फोन का इस्तेमाल उन लोगों ने किया होगा, कोई एसएमएस किया होगा, इसलिए ऐसे लोगों के खिलाफ सरकार को यहां भी और जिस भी राज्य में यह हुआ है, जो प्रभावित राज्य हैं, वहां के जो मुख्य मंत्री हैं, उनको तत्काल ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कार्यवाही करनी चाहिए तथा ऐसी भावना पैदा की जाए कि इस अफवाह को कोई नहीं सुने और यह तभी होगा जब उनके खिलाफ कार्रवाई होगी वर्ना हम कितना भी कहते रहेंगे, चूंकि भय का वातावरण पैदा कर दिया गया है, इसलिए इसकी भी जांच होनी चाहिए कि यह कौन कर रहा है और इसके पीछे कौन लोग जिम्मेवार हैं?                                                     

 

श्री दारा सिंह चौहान (घोसी): अध्यक्ष महोदया, आज नेता प्रतिपक्ष और हमारे दूसरे साथी भी जिस गंभीर विषय को ले आए हैं, मैं आपके माघ्यम से पूरे सदन को बधाई देना चाहता हूं कि हमेशा सदन ने हर महत्वपूर्ण और संवेदनशील विषय पर एकता का परिचय दिया है। मैं समझता हूं कि आज भी पूरा सदन इस संवेदनशील विषय पर एकता का परिचय दे रहा है।

          अध्यक्ष महोदया, जिस तरीके के समाचार पत्रों में, मीडिया में चाहे नॉर्थ-ईस्ट का हो, पुणे हो, बैंग्लोर हो या चेन्नई हो, पूरे देश में खासकर जो पूर्वोत्तर क्षेत्र के रहने वाले लोग हैं, चाहे कर्मचारी हों या व्यापारी हों या छात्र हों, जो पढ़ने वाले हैं या जो लोग रोजगार के लिए तमाम क्षेत्रों में जाते हैं, इस संविधान में उनका संवैधानिक अधिकार है। मैं समझता हूं कि जो साजिश हो रही है, यह साजिश उनको भगाने के लिए नहीं बल्कि संविधान में जो अधिकार दिया गया है, उसको तोड़ने की एक साजिश हो रही है।  मैं जानता हूं आज पूरे देश में, सूबे में मरकज़ी हकूमत है। मै समझता हूं और जहां तक मेरा और मेरी पार्टी का मानना है कि यह सरकार की कमी नहीं, लोगों की कमी नहीं, विश्वास की कमी है। हम समझते हैं कि जिस तरह से अफवाह फैलाई जा रही है या फैल रही है, इस अफवाह के पीछे कोई न कोई साजिश है। जब तक साजिश का पर्दाफाश नहीं होगा, मैं समझता हूं कि हम इसमें सफल नहीं हो पाएंगे।

          इन्हीं शब्दों के साथ मैं आपको धन्यवाद देता हूं।

 

श्री शरद यादव (मधेपुरा): माननीय अध्यक्ष महोदया, सुषमा जी के सहित सभी साथियों ने अपनी बात रखी है और अभी और सदस्य भी रखेंगे। यहां जिस बात की चर्चा हो रही है, होम मिनिस्टर साहब का बयान आया है। मैंने कर्नाटक के चीफ मिनिस्टर का बयान सुना है। मैंने असम के मुख्यमंत्री गोगई साहब का बयान देखा है। 15 अगस्त को माननीय प्रधानमंत्री जी बोल रहे थे। वे उन बीमारियों के बारे में भी बोल रहे थे, पूर्व प्रधानमंत्री माननीय जवाहर लाल नेहरू उन्हीं बातों को बोलते रहे थे। अजीब विडंबना है कि देश बन गया, 15 लाख लोगों के हालात ऐसे हैं। आजादी की उम्र सरक रही है और अब तो सभ्यता बढ़ गई है। सभ्यता बढ़ने से लोग सभ्य नहीं होते हैं। मुख्यमंत्री, होम मिनिस्टर या प्रधानमंत्री बोलते हैं कि हम कड़ी कार्रवाई करेंगे। इस देश में जो गरीबी और भूख है, मुझे इस देश में सबसे बड़ी समस्या के बारे में बोलना नहीं है। सभ्यता बढ़ी है, अब एसएमएस, ट्विटर, फेसबुक और जाने क्या-क्या है।  सुषमा जी बोल रही थी, रेवती रमण जी बोल रहे थे कि एनएसए में बंद कर दो। अब कोई मुझे बताए, किन्हें एनएसए में बंद करोगे? कितने लोगों को करोगे? इसलिए मैं कहना चाहता हूं कि सभ्यता के विस्तार से मुल्क नहीं बनते, समाज के उठने से मुल्क बनते हैं।

          महोदया, राम-रहीम वाले लोगों ने देश बांट लिया और आज भी इस देश में सब लोग यही कर रहे हैं। यही सवाल चला हुआ है। ...( व्यवधान) कोई इससे अलग नहीं है। आकंठ डूबे हुए हैं, आप हों चाहे हम हों। ...( व्यवधान) मैं आपको तो नमन करता हूं। आप तो चुप ही रहिए। ...( व्यवधान) मैं कोई राम रहीम वाला नहीं हूं। इस देश में इंसान पैदा नहीं होता है, जाति और राम-रहीम वाला पैदा होता है। इस देश में एक ही आदमी पैदा हुआ, जिसका नाम महात्मा कबीर है, जिसकी न जाति है और न धर्म है। मुझे बताओ कि इस सदी में कोई और ऐसा इंसान पैदा हुआ है? इंसान पैदा हुए बगैर दुनिया नहीं बनती है, समाज नहीं बनता, देश नहीं बनता है। होम मिनिस्टर साहब, आप कह रहे हैं कि सख्ती से कार्रवाईं करेंगे। मैं पूछना चाहता हूं कि किस पर करेंगे? आपका दोष नहीं है। मैं आपको दोष नहीं दे रहा हूं। मैं अपने सहित बोल रहा हूं कि किस पर कार्रवाई करोगे? अफवाहों का खेल है, कोई एक बीमारी नहीं है। ...( व्यवधान) मैं आपके हाथ जोड़ता हूं कि चुप रहो।...( व्यवधान)

अध्यक्ष महोदया :  आप इधर देख कर बोलिए। आप क्या कर रहे हैं?

श्री शरद यादव: आप बहुत बड़े विद्वान हैं। ...( व्यवधान)

अध्यक्ष महोदया : शरद जी, आप बोलिए।

श्री शरद यादव: अध्यक्ष जी, आपको कहना चाहिए। ...( व्यवधान)

अध्यक्ष महोदया : आप रहने दीजिए, टीका-टिप्पणी मत कीजिए। शरद जी, आप बोलिये।

श्री शरद यादव : इन्होंने भुला दिया, पता नहीं मैं क्या बोल रहा था। ...( व्यवधान) आप बताएं मैं क्या बोल रहा था।...( व्यवधान) वह बोल रहे हैं, मैं नहीं बोल रहा हूं, यह अच्छी बात नहीं है। ...( व्यवधान)

अध्यक्ष महोदया : देखिये इस समय जो चर्चा चल रही है, उसमें कभी भी हंसने की जरूरत नहीं पड़नी चाहिए, कृपया बहुत गम्भीरतापूर्वक सुनिये।

श्री शरद यादव: महात्मा कबीर जैसा हजारों-हजार बरस में एक इंसान बन पाया। आज भी मगहर में चले जाओ, रामवाला भी घंटी बजा रहा है और रहीमवाला औंधा लेटा हुआ है, पता नहीं लगा पा रहे हैं कि कबीर कौन था। सवाल यह है कि शासन करने वाले लोग जो बोल रहे हैं, हम क्या करते। साइकिल आने से इंसानियत नहीं बढ़ती, मशीन आने से इंसानियत नहीं बढ़ती। कार और जहाजों के आने से इंसानियत नहीं बढ़ती। इंसानियत ट्विटर, एसएमएस और फेस बुक आने से नहीं बढ़ती। महीने-डेढ़ महीने मेरे बच्चों ने इसके बारे में मुझे सिखाया, मैंने कहा छोड़ो, यहां से भागो, यह मेरे बस का नहीं है। इतने लोगों के साथ कौन माथा मारेगा। फिर इसे आप कैसे रोकोगे। आप सब अपील कर रहे हैं कि पूरा सदन एक हो जाए, एकमत से प्रस्ताव पास करो, आप किस प्रस्ताव को पास करोगे, क्या करोगे, अभी यहां से सब लोग निकलेंगे और दो-दो मिनट बाद एसएमएस करेंगे। कुछ दिन बाद ऐसी सभ्यता आये, जिसे आप नमन करते हो, सलाम करते हो। प्रधान मंत्री जी यहां नहीं है। जिसे सलाम करते हो, उस सभ्यता से इंसानियत कभी नहीं बढ़ी। इंसानियत यह है कि हमारी आजादी को दिलाने वाला सबसे बड़ा आदमी महात्मा गांधी जिस दिन आजादी का झंडा फहरा रहा था, उस दिन कोलकाता की गलियों में नौआखाली में इंसान बनकर घूम रहा था। उसने आजादी नहीं मनाई और आज भी जब आजादी का दिन आता है तो यदि देश, समाज और इंसान से प्रेम करने वाला आदमी हो तो आजादी तो आयेगी। यह आजादी इस तरह से दोनों तरफ थी, जिस तरह इस तरफ है, उस तरफ ज्यादा है।

          महोदया, मैं जबलपुर के जिस इंजिनियरिंग कालेज में पढ़ता था, मैं वहां टापर था। मेरे साथ वहां नार्थ ईस्ट के 27 लोग थे। मैंने उनसे अच्छे इस मेन लैंड में रहने वाले लोग नहीं देखे। आज उन लोगों को इस तरह से अफवाह फैलाकर परेशान किया जा रहा है। ये अफवाह फैलाने वाले कौन लोग हैं, मुम्बई में ये कौन लोग हैं। ये रामवाला या रहीमवाला कौन है। यदि देश को बढ़ाना है तो इनकी टांग तोड़ देनी चाहिए। चाहे वह कोई हो, भले इस देश में सरकार गिर जाए, मुल्क बनना चाहिए वरना तब तक यह देश बनने वाला नहीं है। कौन थे मुम्बई में, कौन हैं एसएमएस करने वाले, कौन हैं ये ट्विटर करने वाले, आप उन्हें कैसे पकड़ोगे। रामवाले और रहीमवाले तुम लोग क्यों नहीं बोले। जब कोई चीज होती है तो इकट्ठे होकर प्राइम मिनिस्टर से मिलते हो, होम मिनिस्टर से मिलते हो, सब लोग मिलते हैं। लेकिन नार्थ ईस्ट में यह जो इतना बड़ा मामला हो गया, मैं उसे सैगरिगेट करता हूं। उस पर बोलना माथा मारना है। इस देश में किसी समस्या का समाधान नहीं हो सकता है। लेकिन क्या करें, देखते हैं तो तकलीफ होती है। जब मैंने देखा कि ट्रेन जा रही है, भाग रही है तो आपको उस स्टेट के मुख्य मंत्री को कहना चाहिए था। आपका सबसे बड़ा आदमी महात्मा गांधी आजादी के समय भी इंसानियत के लिए मर रहा था। वहां मुख्य मंत्री क्या कर रहे थे, रेल मंत्री क्या कर रहे थे। इन्होंने ट्रेन क्यों नहीं रोकी? किसी भी कीमत पर उन्हें घर में रखना चाहिए था। उनको यहां लाकर रखना चाहिए था। मैं दिल्ली में कहना चाहता हूं, मेरी पार्टी बड़ी नहीं है। कांग्रेस पार्टी और बीजेपी के लोग बड़े हैं। मगर मेरे पास अखाड़े बहुत हैं।

मैं नॉर्थ-ईस्ट के लोगों से यहां से कहता हूँ कि दिल्ली में मुझे फोन भर कर दें, मैं उनको वह सबक दूंगा, भले ही मुझे जेल जाना पड़े लेकिन उनको छोड़ूंगा नहीं। या वे जाएंगे ऊपर, या मैं जाऊंगा ऊपर। ये देश कैसे चलेगा? हम लोग यहां सिर्फ भाषण करेंगे। हम 120 करोड़ लोगों के एमपी हैं। हम खड़े हुए? मैं तो नॉर्थ-ईस्ट के लोगों के पास पांच जगह गया। हम में से कोई गया? वे लोग आपसे मिलने आए। अरे! हिंदुस्तान का मुकुट नॉर्थ-ईस्ट है। ये सिर नहीं है तो यह धड़ नहीं चल सकता है। धरती के कितने-कितने टुकड़े करोगे? ये नकली टुकड़े? ये नकली बनावट? हम लोगों में से कितने लोग गए? हम 540 एमपी संकल्प कर लें तो किसी की हिम्मत नहीं है। जो अफ़वाह फैलाने वाले हैं, उनको हम भी जानते हैं। जो दिन भर बकवास करते हैं। राम का और रहीम का भजन करते है, वे इंसान नहीं हैं, वे तो ऐसे लोग हैं, कि ये राम और रहीम इंसान बनाने के लिए थे, लेकिन हैवान बन गए हैं। ये काहे का धर्म है? जो धर्म इंसान को इंसान न बनाए। यरूशलम से ले कर के बंगाल की खाड़ी तक इसकी क्या हालत है? वे बाहर से आते हैं, हथियार बगैर आदमी के पटकते हैं, जीतते हैं, यूरोप और अमेरिका के लोग। यहां इतने देवी-देवता, इतने भगवान, इतने मजार हैं। ये हम लोगों को क्यों नहीं बचाते हैं? ये नहीं बचा सकते हैं, ये अच्छा रास्ता दिखा सकते हैं। लेकिन हम अच्छे रास्ते पर चलने के लिए ही तैयार नहीं हैं। ये एक बीमारी है?

अध्यक्ष महोदया :  शरद जी, अब आप अपनी बात समाप्त कीजिए।

श्री शरद यादव: नहीं मैं बैठ ही जाता हूँ।

अध्यक्ष महोदया : नहीं, ऐसे मत कीजिए। आप नाराज़ क्यों होते हैं।

श्री शरद यादव:  नहीं, मैं बैठ ही जाता हूँ।...( व्यवधान)

अध्यक्ष महोदया :  आप नाराज़ मत हो जाइए।

                                               …( व्यवधान)       

श्री शरद यादव: नहीं, नहीं मैं आपसे कहना चाहता हूँ ...( व्यवधान)

अध्यक्ष महोदया :  हाँ, ठीक है।

…( व्यवधान)

 

श्री शरद यादव:  नहीं, मेरी बात सुनिए। ...( व्यवधान)

अध्यक्ष महोदया : मगर आप अपनी बात समाप्त कीजिए।

…( व्यवधान)

श्री शरद यादव:  नहीं, मैं जाना चाहता हूँ। ...( व्यवधान)

अध्यक्ष महोदया : शरद जी, नाराज़गी की क्या बात है?

श्री शरद यादव:  नाराज़गी इसलिए है कि यहां पर सिर्फ बातें चलती हैं और आज सही बात को सुनने नहीं देना चाहते। मैं पांच मिनट से ज्यादा नहीं लेना चाहता हूँ।...( व्यवधान)

अध्यक्ष महोदया : आप बोलिए but You cannot challenge the direction of the Speaker.

… (Interruptions)

MADAM SPEAKER:  You cannot challenge the power of the Speaker.

… (Interruptions)

अध्यक्ष महोदया :  शरद यादव जी, बोलिए।

…( व्यवधान)

अध्यक्ष महोदया : शरद यादव जी, बोलिए। नाराज़ मत हुआ कीजिए और वह भी चेयर से।

श्री शरद यादव:  मैं आपको नमन करता हूँ।...( व्यवधान)

अध्यक्ष महोदया :  अनुशासन रखना चेयर का काम है। इसलिए चेयर से नाराज़ नहीं होते हैं। अब आप बोलिए।

श्री शरद यादव:  देखिए, देश बर्बाद हो रहा हो तो किसी से भी नाराज़ हो सकते हैं। आप क्या बात करती हैं, हम नियम में बंधे रहेंगे? ...( व्यवधान) यह देश बर्बाद हो रहा है। ...( व्यवधान)

अध्यक्ष महोदया :  आप ये क्या कह रहे हैं।

…( व्यवधान)

श्री शरद यादव: ये देश तबाह हो रहा है। ...( व्यवधान)

अध्यक्ष महोदया :   नहीं, यह गलत बात है।

…( व्यवधान)

श्री शरद यादव:  सदन, को नियम से चलाओ। ...( व्यवधान) ये लोग खूब नियम से चलाओ। ...( व्यवधान)

अध्यक्ष महोदया :  नाराज़ मत होइए।

…( व्यवधान)

श्री शरद यादव:   नियम से चलाओ। ...( व्यवधान)

अध्यक्ष महोदया :   चेयर से नाराज़ मत होइए।

…( व्यवधान)

श्री शरद यादव :  लेकिन ये नियम कभी-कभी ढीले किए जाते हैं।...( व्यवधान) आपसे मेरी माफी के साथ विनती है कि मैं आज बैठना चाहता हूँ। ...( व्यवधान)

अध्यक्ष महोदया :  नहीं, यह मेरा सवाल नहीं है।

...( व्यवधान)

अध्यक्ष महोदया :  यह मेरा व्यक्तिगत सवाल नहीं है। बैठ जाइए।

…( व्यवधान)

श्री शरद यादव :  आप कहेंगी तो मैं बोलूंगा। ...( व्यवधान)

अध्यक्ष महोदया :  आप बैठ जाइए। शांत हो जाइए। यह मेरा व्यक्तिगत सवाल नहीं है कि आप मुझ पर नाराज़ हो रहे हैं। यह स्पीकर का, स्पीकर के अधिकार का और स्पीकर के वर्चस्व का सवाल है। इसलिए मैं नहीं चाहती कि कभी भी कोई भी व्यक्ति नियम को तोड़े। सब को हमेशा नियम के अनुसार चलना है। अगर स्पीकर कुछ कहती हैं तो स्पीकर पर नाराज़ न हों।

श्री शरद यादव:  मैं आपको बहुत नमन करूंगा।...( व्यवधान)

अध्यक्ष महोदया : हाँ, ठीक है अब आप आगे बोलिए। अब इस प्रकरण को बंद कीजिए।

श्री शरद यादव: नहीं, आपने बहुत बातें कह दीं। मैं यही कहना चाहता हूँ कि हम पर नियम हैं। ये दस दिन से, पांच दिन से, चार दिन से या इतने दिन से ये टीवी वाले बोल रहे हैं। हमारे बारे में क्या-क्या बोल रहे हैं? हम उनका नाम नहीं ले सकते हैं। ये कैसा नियम है? आप प्रिवलेज़ मोशन लाते हैं। 540 लोग हैं, 400 लोगों पर केस नहीं हैं। लेकिन नियम जो कहता है, वह प्रिवलेज़ बनेगा।

          इसलिए मैं यह कह रहा हूँ ये जो समस्याएं हैं, इसमें हम यहां से एमपी, एमएलए, सरकारें, मिल कर के इसको घेर कर के ये जो अफ़वाहखोर हैं, ये जो देश को तबाह करने वाले लोग हैं, आज की तारीख में संकल्प लो कि जहां-जहां हम लोग खड़े रहते हैं, इसके खिलाफ संघर्ष करेंगे, संग्राम करेंगे और नया देश बनाएंगे। आज से संकल्प ले कर आगे बढ़ें तो बात बनेगी।

THE MINISTER OF STATE IN THE MINISTRY OF HEALTH AND FAMILY WELFARE (SHRI SUDIP BANDYOPADHYAY): Madam Speaker, a few days back, the Assam issue was debated on the floor of the House and our Party, Trinamool Congress very categorically explained the views of our party and the role of the Government also. I think that was appreciated by all.

          Whenever any incident occurs in the North Eastern part of the country, West Bengal is to share the load because West Bengal is the gateway of the North Eastern Region via North Bengal to Siliguri to North Eastern Region. We live in India and our philosophy is that India is a country which is believer in the principles of unity in diversity.  We are the firm believer in the principles of communal harmony, secularism and unity of the country.  But when we find that the people of North Eastern Region have become panic-stricken and are trying to flee from Bangalore, Chennai, Hyderabad and from a few other parts, we naturally become worried.  The Parliament should certainly rise to the occasion; vis-à-vis this panic-stricken situation is to be removed.  We firmly believe that the Government of India is well concerned with the whole situation. 

          It is also alarming that the people from North Eastern Region are not in a mood to stay any further over there.  So, if necessary, a Parliamentary Delegation can be referred by you to go there and meet the people who are becoming really panic-stricken over there.  That can be a very good gesture on behalf of all of us. 

          Madam, we firmly believe that if the decision which we are going to take is delayed, then the agent provocateurs, those who create provocations, will try to take the position in their own command which has to be resisted by all means. We want to give a message to the people of North Eastern Region that not only Parliament but the whole country stands behind them to give them the full security.  We are behind them.  They should live as Indians wherever they like to stay.  That is my submission, Madam.

 

SHRI T.K.S. ELANGOVAN (CHENNAI NORTH): Madam Speaker, this is an incident which, I think, is a shame for the people of the South because the South is known for its kind heart, is known for accepting the people from the North.  The people from the North have always felt safe in the hands of the people in the South.  There may be some differences in language but that has never stopped people from the North coming to the South and settling there.

          Now, when I see the newspapers that there is an exodus of the North East People going back to their homeland to Assam, to Meghalaya from Chennai or from Bangalore, I feel sorry that somewhere we have failed.  A small spark of fire has engulfed a huge area.  It is an isolated incident – maybe because the communication strength has created fears in the minds of these people living in the entire Southern States.  I am sorry, all political leaders of the South should take this as a personal ‘shame’ that somebody who had come to our place, we must host him properly and they should not feel afraid of us.  This feeling should be created by the political leaders.  I request the Government of India to hold discussions with all the four State Governments in this regard and see that the people from the North East still feel safe to live in the Southern part of India.

 

SHRI BASU DEB ACHARIA (BANKURA):  Madam Speaker, this is a matter of great concern that the people from North East Region are feeling insecure in other parts of our country.  It is a Fundamental Right of the citizens of our country to go to any place, any part of our country and to reside in any part of the country except Jammu & Kashmir.  He can work and study anywhere. This is the Fundamental Right. What is happening today is an attack on the Rights of the people of our country.  The attack is nothing but an attack on the Constitutional Right.  The Right given by the Constitution of India is being attacked           In the past we have seen that the people of North India were beaten up and assaulted in Maharashtra.  In this House we condemned such incident.  When we find that the people from one part, from one State are being attacked in other States, we condemn such incidents.  It is a matter a matter of great concern. It affects the unity and integrity of our country.

          Madam, while speaking on the Adjournment Motion on the very first day when the issues of Kokrajhar incident and the displacement of thousands and thousands rather lakhs and lakhs of people were taken up, I warned that this should not be communalised.  The reason behind such incident is localised reason and it should not be spread to other parts of the country.  The people belonging to any section, general people, common people, they are peace loving.  What happened in Assam and Kokrakhar is also the handy work of a section, the militant section of both sides Bodo as well as minority.  There are militant sections that are vitiating the peaceful atmosphere in the country. What is happening since yesterday is that thousands and thousands of the students, people, workers and the employees feeling unsafe. Why?  Any citizen of our country should feel secure because they are the citizens of our country.  Why the people from North East feel insecure in Karnataka, Bangalore, Chennai and in other parts of the country even after 65 years of Independence. आज अगर हमारे देश के किसी भी प्रान्त की आबादी के मन में यह शंका, यह डर या भय पैदा होता है तो हम सब लोगों को सोचना पड़ेगा कि आज़ादी के इतने सालों के बाद हम कहाँ पहुँचे हैं और इतने सालों के बाद भी हम क्यों इस समस्या का समाधान नहीं कर पाए । Our people should not be divided on communal basis.  We always find that there is an attempt to divide the people on communal basis.  That is the main reason behind such incidents.  We should be more cautious.  That is a great concern for us.

          Madam, I demand that both the State Government and the Central Government … (Interruptions)

MADAM SPEAKER: Please conclude now.

श्री बसुदेव आचार्य: राज्य सरकार और केन्द्र सरकार असम की समस्या का जैसा समाधान करेगी। आज भी करीब-करीब ढाई लाख आबादी रिलीफ कैम्प में है।

          I have seen the Report of the National Minority Commission on Kokrajhar incident. It said that in one camp, 6,665 people are staying in a very deplorable condition.  The Central Government should come forward and help the State Government of Assam in rehabilitating these people.  Displacement of the people tantamount to violation of the human rights, I feel.  … (Interruptions)

MADAM SPEAKER: Please conclude now.

SHRI BASU DEB ACHARIA:  There is displacement of lakhs and lakhs of people.  So, the Government should seriously think over it and try to rehabilitate all the people, although it is a difficult task. Indeed, it is a difficult task but भाईचारे का माहौल बनाना पड़ेगा ताकि भविष्य में ऐसी घटना न हो, जैसी की घटना घटी है, वह न घटे और आज इस तरह के रूमर फैला कर influx of the people, exodus … (Interruptions)

MADAM SPEAKER: Please conclude now.  Now, Shri Baijayant Panda.

SHRI BASU DEB ACHARIA:  There should not be such a feeling among any section of the people.  Madam, I appeal to all sections of the people of our country to foil this attempt to divide the people of our country. 

 

SHRI BAIJAYANT PANDA (KENDRAPARA):  Thank you, Madam Speaker, for giving me this opportunity to speak on this important subject.

       Madam, the troubles which started in Assam some weeks ago have now started radiating to various parts of the country like poisoned arrows which leave marks that we all ought to be ashamed of. 

       Madam, this is not an occasion for finger-pointing between Parties, between the States and the Centre.  There are so many Parties represented in Parliament.  Virtually all of us have had the experience of being in Government at some time or another either at the Centre or in the States and we have experienced similar difficulties, therefore we must consider this a national problem and find a national common solution.  But, Madam, we must face up to certain candid truths. What I am going to say is not with the intention of finger-pointing but to try and identify systemic weaknesses that we should all work towards unanimously.

        Madam, in the modern era, rumours and misinformation no longer spread by word of mouth; they spread at the speed of electrons to hundreds of millions of people simultaneously. The current situaiton requires a different approach to tackle problems one that is different from the approach adopted in the earlier years. 

       Madam, the hon. Chief Minister of Assam had said that he wished that the Central assistance had arrived in Assam earlier.  This is something that some other Members have also spoken.  I wish to share our experience. In Odisha, four years ago we experienced certain ethnic disturbances after a decade of no such problems and subsequently also there have been no such problems.  But we also experienced a similar problem.  When we asked for Central Forces, they did arrive but they came on the fifth day.  Most of the damage, most of the deaths that happened, had happened in the first four days. This is the problem which is not between the Centre and the State or between a Ruling Party and an Opposition Party.  This is the problem of changing and adapting to the new needs of the kind of problems that we face today.

          Madam, the hon. Home Minister may be new to his current assignment but he has long years of experience in Governments; and I would like to humbly give two suggestions that I think, can be implemented and would  make a very big difference in preventing and controlling in future such riots, ethnic disturbances or communal disturbances.

          Madam, on the issue of terrorism, this House and the other House, and as a country, we have worked together to now create a Rapid Action Force so that incidents like 26/11 in Mumbai do not happen and do not get protracted.  We need  to have  a similar approach, Madam, so that we have a Rapid Action Force of the Central Forces available for immediate deployment because the States are overwhelmed.  The States are sometimes overwhelmed and when very suddenly these tensions rise and before they can react, the trouble has spread beyond their capabilities.

We need to strengthen the linkages between the Intelligence Wings and these Rapid Action Forces so that they can move in very quickly and prevent the situation from getting worse from a bad start.

Another thing which I wish to say is about the Rapid Action Force. It cannot be only about Paramilitary Troops; it also has to have other assets because the rumours, which are being spread, the provocation, which is taking place is on the internet.  It requires technical competence; and it requires the kind of competence to track it down quickly so that you can take quick action against the perpetrators of these problems.

The final thing, Madam, that I wish to say is that not just a Rapid Action Force but we must commit ourselves to fast-track prosecution of whoever is identified.  We will make the problem worse, when we have identified the people in Mumbai and hopefully soon in Bangalore and may be in Kokrajhar and other parts of Assam but bringing them to justice, if it takes, years or months, it will cause a loss of confidence that cannot be repaired. So, whether it is through fast-track courts or through other means, I would urge the hon. Home Minister to initiate these steps urgently.

MADAM SPEAKER: Thank you.

Now, the hon. Prime Minister.

… (Interruptions)

अध्यक्ष महोदया : माननीय प्रधानमंत्री इंटरवीन कर रहे हैं। I  will call you later.  It is not over.

…( व्यवधान)

THE MINISTER OF PARLIAMENTARY AFFAIRS AND MINISTER OF WATER RESOURCES (SHRI PAWAN KUMAR BANSAL): He is intervening… (Interruptions)

MADAM SPEAKER: Hon. Members, he is intervening. Please sit down.

… (Interruptions)

अध्यक्ष महोदया : बैठ जाइए। हर समय खड़े नहीं होना चाहिए।

…( व्यवधान)

 

MADAM SPEAKER: No. Please sit down.  All the time, you stand up.  What is all this?  He is intervening.

… (Interruptions)

SHRI GURUDAS DASGUPTA (GHATAL): Let the Prime Minister listen to us and then respond… (Interruptions)

MADAM SPEAKER: Please sit down.

… (Interruptions)

THE PRIME MINISTER (DR. MANMOHAN SINGH): The Home Minister will respond. I just want to intervene… (Interruptions)

MADAM SPEAKER: The Home Minister is there to reply.

… (Interruptions)

MADAM SPEAKER: Nothing will go on record.

(Interruptions)* MADAM SPEAKER: Yes, the hon. Prime Minister.

… (Interruptions)

अध्यक्ष महोदया : बैठ जाइए।

…( व्यवधान)

MADAM SPEAKEAR: The Home Minister will reply in any case.

… (Interruptions)

MADAM SPEAKER: This is getting to be too much.  I have allowed this under my discretion; and please listen to me and please allow me to conduct it.

श्री लालू प्रसाद (सारण): आप ही अगर गुस्से में रहेंगी तो हाउस कैसे चलेगा?

अध्यक्ष महोदया : मैं गुस्से में नहीं हूं, लालू जी। आपको भी बोलने के लिए बुलाऊंगी।

…( व्यवधान)

MADAM SPEAKER: Yes, the hon. Prime Minister.

DR. MANMOHAN SINGH  : Madam Speaker, I rise not to reply to the various points that have been made in the debate but merely to add my voice to the feelings that I have heard being expressed in this august House.  That what has been happening in the last few days in some parts of our country, the growing sense of insecurity among people from the North-East living in different  parts of our country is something, which is most reprehensible, and that  all of us should work together to get this sort of situation brought under control without any further loss of time.

          I commit that the Government will work with all like-minded people to create a feeling of security among the people of the North-East residing in various parts of our country. They have as much right as anyone else to live, to earn and to study at wherever place they may go to.

          The unity and integrity of our country is being threatened by certain elements and, without apportioning blame, I would urge this House to send a message loud and clear to all the people of the North-East residing in different parts of our country that our people are one, that we will do everything to provide security to the people of the North-East residing in various parts of our country, and that this is an obligation, which we will discharge to the best of our ability, with all political parties joining hands to send out a clear message to the people of the North-East that we will work to restore peace and amity so that the this feeling of insecurity is brought under control. … (Interruptions)

MADAM SPEAKER: Now, Shri Anant Geete.

… (Interruptions)

MADAM SPEAKER: Nothing else will go on record.

(Interruptions) *     श्री अनंत गंगाराम गीते (रायगढ़): अध्यक्ष महोदया, कांग्रेस की तरफ से अरुणाचल के सांसद बोल रहे थे, हमने उनकी बात को गौर से सुना। उनके दर्द और दुख को भी हमने सुना है, लेकिन जब उन्होंने अपनी बात को समाप्त किया तो अंत में उन्होंने एक साजिश का जिक्र किया। मैं उस बात को सदन में इसलिए दोहराना चाहता हूं, क्योंकि प्रधान मंत्री जी और गृह मंत्री जी यहां पर उपस्थित हैं। अंत में उन्होंने ये कहा कि मुझे लगता है कि चीन, पाकिस्तान, बंग्लादेश और म्यांमार की शायद ये साजिश भी हो सकती है। अरुणाचल के जो सदस्य हैं, उन्होंने ये बात कही।...( व्यवधान) मैं जो कहना चाहता हूं, आप सुनिए।...( व्यवधान)

श्री निनोंग ईरींग : अध्यक्ष महोदया, शायद मेरी हिन्दी इतनी शुद्ध नहीं होगी, इसलिए मैंने शायद कुछ गलतफहमी में बोला होगा कि ये कुछ ऐसी अंदरूनी या बाहरी ताकतें भी हो सकती हैं। ...( व्यवधान)

अध्यक्ष महोदया: आप माननीय सदस्य की बात सुन लीजिए।

…( व्यवधान)

MADAM SPEAKER: You have taken his name. Let him say.

…( व्यवधान)

श्री निनोंग ईरींग:अध्यक्ष महोदया, मैं आपके माध्यम से सदन में कहना चाहता हूं कि कोई समुदाय या कोई देश, इस विषय में, हमारे अंदर भी हो सकता है। मैं मानता हूं कि बाहर की ताकतें भी हो सकती हैं, लेकिन अपने देश की एकता और अखंडता के लिए हम सबको मजबूत होना है।...( व्यवधान)

श्री अनंत गंगाराम गीते: अध्यक्ष महोदया, मैंने जो कहा, वही इन्होंने कहा। मैं यहां पर इनके खिलाफ कुछ नहीं कह रहा हूं। मुझे इनसे कुछ भी शिकायत नहीं है, पूरे सदन को आपके और नॉर्थ-ईस्ट के प्रति कोई शिकायत नहीं है। नॉर्थ-ईस्ट भारत का हिस्सा है और भारत का हिस्सा ही रहेगा।...( व्यवधान) आप न्यौता देंगे तब आ जाऊंगा।...( व्यवधान)

अध्यक्ष महोदया: ये क्या हो रहा है? आप इधर देख कर बोलिए।

श्री अनंत गंगाराम गीते: अध्यक्ष महोदया, मैं इस बात को इसलिए दोहरा रहा हूं कि जो डर इनके मन में है, इन्होंने आज जो बात यहां पर सदन के सामने रखी है, मेरे मन में भी वही डर है कि ये शायद विदेशी ताकतों की साजिश हो सकती है। कोकराझार में जो दंगा हुआ है, वहां की जो घटना है, वह भी उसी साजिश के तहत है। उसके बाद जो प्रतिक्रिया मुंबई में हुई और मुंबई में जो दंगा हुआ, वह भी उसी साजिश का एक हिस्सा है।

अध्यक्ष महोदया, मैं आपके माध्यम से सदन में कहना चाहता हूं, प्रधानमंत्री जी, मैं इस बात को इसलिए दोहरा रहा हूं कि यदि इस वास्तविकता को स्वीकार करके कोई कार्यवाही करते हैं, तो ही हम या सरकार, विदेशी साजिश हो या स्वदेशी साजिश हो, उनसे निपटने में सफल हो पाएगी।

 12.00 hrs यह देश के अन्दर की साजिश हो, उस साजिश के खिलाफ लड़ने में आप तब सफल हो पाएंगे, जब आप वास्तविकता को स्वीकार करेंगे। यह बात मैं इसलिए कह रहा हूं, जब शरद यादव जी यहां पर बोल रहे थे तो उन्होंने राम और रहीम का जिक्र किया। 120 करोड़ की आबादी वाला हमारा देश है। देश में अलग-अलग विचारधाराएं हैं, अलग-अलग जीवन-पद्धति हैं, अलग-अलग हमारी सभ्यता है। इस देश के हर प्रान्त के हर हिस्से में सभ्यता बदलती जाती है। हमारी अलग-अलग सभ्यता है, अलग-अलग विचारधारा है, जीने की पद्धति अलग-अलग है, जीने का स्टाइल अलग-अलग हो सकता है। राम को भी मानने वाले हैं, रहीम को भी मानने वाले हैं और दोनों को न मानने वाले भी हैं, लेकिन यह बात श्रद्धा की है, यह बात विश्वास की है और सभ्यता है, वह अपनी-अपनी सभ्यता को हर एक अपने-अपने ढंग से मानता है तो राम को मानने वाले हैं, रहीम को मानने वाले हैं और दोनों न मानने वाले भी हैं। यह अलग-अलग विचारधारा है, मुझे इसमें कोई आपत्ति नहीं है और आपत्ति होने का कोई कारण नहीं है, लेकिन जो कोकराझार की घटना हुई है, वह कोकराझार की घटना भी कोई हिन्दू-मुस्लिम दंगा नहीं है, पूरे सदन ने उस दिन इस बात को स्वीकार किया है। हर एक सदस्य ने यह कहा कि कोकराझार में जो कुछ हुआ, वह हिन्दु-मुस्लिम दंगा नहीं है, जो नोर्थ ईस्ट में रहने वाले हमारे ट्राइबल्स हैं, उन ट्राइबल्स के ऊपर यदि कोई अत्याचार होता है, उनको जो डर लगने लगा है, उनको भय लगने लगा है कि शायद अब हमारी भूमि से ही, हमारे देश से ही हमें यहां से हटाया न जाये, हम अपने ही देश में पराये न हो जायें, हम अपने ही देश में वहां पर रिफ्यूजी न हो जायें। आज उनकी वहां पर वही हालत है कि रिफ्यूजी बनने का समय आया है और इसीलिए कोकराझार में जो दंगा हुआ है, वह भी कोई जातीय दंगा नहीं है, हिन्दु-मुस्लिम दंगा नहीं है, लेकिन उसकी जो प्रतिक्रिया मुम्बई में हुई, यहां देश के गृह मंत्री जी बैठे हुए हैं ...( व्यवधान)

अध्यक्ष महोदया: अब समाप्त करिये।  

श्री अनंत गंगाराम गीते: मैं समाप्त कर रहा हूं। जो दंगा मुम्बई में हुआ, वहां पर जो अमर जवान ज्योति, जिन शहीदों ने देश को आजादी दिलाई, उसकी अमर जवान ज्योति मुम्बई महानगरपालिका ने बनायी थी, उसे ध्वस्त किया गया और ध्वस्त कैसे किया, सरकार को मालूम नहीं, पुलिस को पता है कि नहीं, मालूम नहीं, लेकिन एक फोटो अखबार में आया है, मैं यह फोटो अखबार का गृह मंत्री जी को देना चाहूंगा...( व्यवधान)

अध्यक्ष महोदया: नहीं, नीचे रखिये। आप वरिष्ठ सदस्य हैं।

…( व्यवधान)

श्री अनंत गंगाराम गीते: यह कैसे लात मार रहा है, अमर जवान ज्योति को लात मारकर तोड़ रहा है। देश को आजादी दिलाने वाले जवानों के स्मारक को, ज्योति को लात मारकर तोड़ रहा है। इस राष्ट्रद्रोही को, इस देशद्रोही के खिलाफ हमारी सरकार को, चाहे राज्य की सरकार हो या केन्द्र की सरकार हो, इस देशद्रोही के खिलाफ कार्रवाई करने की आवश्यकता है, कड़ी से कड़ी और सख्त से सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।

          यह सबसे बड़ा खतरा है, आजकल जब हम दूरदर्शन पर देख रहे थे, झुंड के झुंड नोर्थ ईस्ट के स्टूडेंट्स के, विद्यार्थियों के पलायन कर रहे हैं, यह देश के सामने सबसे बड़ा खतरा है। इस खतरे को आप स्वीकार करिये, प्रधानमंत्री जी, यह हमारे देश के लिए चुनौती है, अपने देश की सुरक्षा के लिए। आज पूरे नोर्थ ईस्ट को अलग करने की एक साजिश रची जा रही है। जिस दिन ये सारे देश के, नोर्थ ईस्ट के हमारे जवान युवक मजबूर होकर देश से पलायन करके वहां पर जाएंगे तो शायद नोर्थ ईस्ट को बचाना हमारे लिए बहुत बड़ी समस्या बन सकती है और इसलिए हमें पूरे नोर्थ ईस्ट के ट्राइबल्स को आश्वस्त करना है कि सारे देश के अन्दर आपकी रक्षा हम करेंगे, आपको कोई खतरा नहीं होगा। हम उनको आश्वस्त कराना है ...( व्यवधान)

अध्यक्ष महोदया: धन्यवाद। आपका हो गया। डॉ. संजीव नाईक। 

श्री अनंत गंगाराम गीते: मैं मेरी ओर से और अपनी पार्टी की ओर से महाराष्ट्र में पूरी तरह नोर्थ ईस्ट के स्टूडेंट्स हों या वहां रहने वाले जितने भी ट्राइबल्स हैं, उनको आश्वस्त कर रहे हैं कि उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी हम पर है और हम उनकी पूरी सुरक्षा करेंगे। …( व्यवधान)

अध्यक्ष महोदया : डॉ.संजीव गणेश नाईक, आप अपनी बात कहिए। 

…( व्यवधान)

अध्यक्ष महोदया :  आप बैठ जाइये।

…( व्यवधान)

MADAM SPEAKER: Nothing will go on record.

(Interruptions) *   डॉ. संजीव गणेश नाईक (ठाणे): अध्यक्ष महोदया, धन्यवाद। ...( व्यवधान)

MADAM SPEAKER: Nothing will go on record.

(Interruptions) * डॉ. संजीव गणेश नाईक: महोदया, यहां सदन में सभी सदस्यगण एक साथ इस समस्या को हल करने की कोशिश कर रहे हैं। ...( व्यवधान) मैं आदरणीय प्रधानमंत्री जी, सदन के नेता और गृह मंत्री जी से विनती करूंगा कि जिस तरीके से देश में 65 साल के बाद यह जो समस्या आयी है, सदन के सभी नेताओं को और सभी सदस्यों को इस समस्या को हल करने की कोशिश करनी चाहिए। अभी 10 मिनट पहले मुंबई से एक बहुत गलत न्यूज आ रही है कि हजारों की संख्या में, पहले पूना थी, बैंगलुरू थी, अभी मुंबई से पलायन करने की कोशिश हो रही है। मुंबई में कम से कम साढ़े तीन से चार लाख लोग रहते हैं।

          महोदया, मैं विनती करना चाहूंगा कि यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण बात होगी और केंद्र सरकार को उसमें इन्टरवीन करना चाहिए। मेरे क्षेत्र में करीब 600 से लेकर 700 बड़ी-बड़ी फैक्ट्रीज हैं, बड़े-बड़े कांप्लेक्सेज हैं। पता चला है कि फैक्ट्रीज नहीं चल रही हैं, क्योंकि वहां आज कामगार नहीं आये हैं, काम करने वाले लोग नहीं आ रहे हैं। वे क्यूं नहीं आ रहे हैं, क्योंकि कल रात से वहां घरों में लॉक लग गये हैं। यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण बात है। मैं अपनी पार्टी की ओर से सदन के सभी सदस्यों को धन्यवाद करूंगा, क्योंकि इस पर हम एकता दिखा रहे हैं।

          मै एक दूसरी बात कहना चाहूंगा, जैसा हमारे पांडा जी ने भी कहा कि यूटय़ूब में एक बहुत गलत फिल्म दिखायी जा रही है, इसको तुंत बंद करना चाहिए, आज के आज और अभी के अभी बंद करना चाहिए। जो युवा लोग हैं, खासकर कुछ ऐसे संगठन हैं, जो उसको सेल कर रहे हैं, यूटय़ूब को ऑन करके वे उसे देख रहे हैं, इसलिए मैं जरूर चाहूंगा कि तुंत यूटय़ूब को बंद किया जाए। हमारे फेसबुक ऊपर, हमें भी पता नहीं है, जैसे ही फेसबुक ओपन कर रहे हैं, इसमें गलत-गलत, दोनों तरीके से वहां बातें बतायी जा रही हैं, उसको तुंत बंद किया जाए, वरना इस चीज को हम नहीं रोक पाएंगे। कल मुझे फेसबुक पर एक से डेढ़ हजार मैसेजेज आए, उसमें 90 परसेंट गलत मैसेजेज आए हैं। मैं समझता हूं कि जो हमारे बुजुर्ग हैं, वे समझदार हैं, लेकिन जो युवा हैं, उनको मालूम नहीं है कि 65 साल पहले देश को आजादी कैसे मिली है? मैं आपसे विनती करूंगा कि इसको तुंत रोका जाए, वरना जो आज महाराष्ट्र के मुंबई में हुआ, कल यह पूरे देश में होने की संभावना है। इसलिए मैं खासतौर से प्रधानमंत्री जी से विनती करूंगा कि सभी देशवासियों को इस बात के बारे में आश्वस्त करें। जो लोकल संगठन हैं, मैं माननीय सदस्यों को बताना चाहूंगा कि आप 30-35 लाख लोगों में से चुनकर आ रहे हैं। आपकी बात जनता जरूर सुनेगी। दो दिन की छुट्टी है। आप अपने क्षेत्र में वापस जा रहे हैं। चाहे कोई भी पार्टी के हों, वहां के एनजीओज को साथ ले लीजिए और सभी लोगों को शांत करने की कोशिश करिए।

   

DR. M. THAMBIDURAI (KARUR): Madam Speaker, just as the hon. Prime Minister has said, unity and integrity of the country are more important at this hour. This morning we have seen in the news that workers and students belonging to the northeastern area are indulging in exodus from the southern States of the country. They are all our brothers. We all have that kind of affinity towards people of all parts of our country.

          Tamil people are also working in all parts of the country. In the same way, our brothers from the northeastern part, Bihar, Uttar Pradesh and other parts of the country are working in Tamil Nadu. Recently, you would have heard a piece of news that when some construction workers from Bihar died in Tamil Nadu, immediately our hon. Chief Minister intervened and arrested the people who were responsible for that.  That is the way the Tamil Nadu Government is doing it. Therefore, law and order situation is very good in Tamil Nadu.

          At the same time, the news appeared that some students and workers belonging to North-Eastern parts of the country are leaving from the southern part of the nation. In this regard, I verified from my State, Tamil Nadu, that no such incident or attack has taken place in Tamil Nadu on the students and workers from the North-Eastern parts of the country. That is how we are treating them. As the news said, this is a rumour. We do not know who raised this rumour. The Central Government has to find who raised this rumour and why this kind of a rumour is being spread in this country and creating some kind of aversion among the people. That is what we have to address to.

THE MINISTER OF HEALTH AND FAMILY WELFARE (SHRI GHULAM NABI AZAD):  It is YouTube.

DR. M. THAMBIDURAI: That is YouTube. The men responsible for spreading this kind of a message must be taken into custody and severe action should be taken against them.

          On behalf of my party, I am assuring the House, and want to put it on record, that as a southern part of the country, in Tamil Nadu, we are treating persons from all other parts of the country in the State as our brothers and giving protection to them. Our hon. Chief Minister is always functioning in such a manner that we are treating them as our brothers. Whatever is the requirement, we are ready to give them protection as we are getting protection in other parts of the country.

   

श्री नामा नागेश्वर राव (खम्माम): धन्यवाद, स्पीकर मैडम। मैडम स्पीकर, असम का जो इश्यू है यह बहुत दिन से चल रहा है। यह आज का इश्यू नहीं है। अभी माननीय प्रधानमंत्री से बात करने के समय उन्होंने दो महत्वपूर्ण बातें बताईं। एक तो विथआउट फरदर लॉस ऑफ टाइम, इश्यू को इमीडिएटली टैकल करने के लिए, second point is unity and integrity of the country, इसे कुछ लोग डिस्टर्ब कर रहे हैं। ऑलरेडी काफी समय लॉस हो गया। आज के दिन हम लोग इस इश्यू पर चर्चा कर रहे हैं।        

          मैडम स्पीकर, इसके पहले भी जब आपके माध्यम से लीडर्स की मीटिंग हुई थी उसमें भी सभी लीडर्स असम के इश्यू को ले कर काफी कंसर्न थे। इसके बाद ही हाउस में चर्चा हुई है। इतना होने के बाद इस इश्यू को जितना सिरियसली लेना चाहिए उतना सिरियसली हैंडल नहीं कर पाए।

          सेकेण्ड प्वाइंट, यूनिटी एंड इंटीग्रीटी, जब कंट्री में है तो जिस तरह से बोल कर जो जो उसको डिस्टर्ब कर रहा है, वह कौन है? उसको आइडेन्टीफाई करने में स्टेट गवर्न्मेन्ट और सेन्ट्रल गवर्न्मेन्ट का मैकेनिज्म क्यों फेल हो रहा है? इसको तुंत आइडेन्टीफाई करना चाहिए। ऐसे लोगों को जल्दी से जल्दी काफी शिक्षा देनी चाहिए। यह मामूली इश्यू नहीं है। नार्थ ईस्ट से जो लड़के डिफरेंट स्थानों पर पढ़ने के लिए गए हैं, जो रोजगार के लिए गए हैं और आज के दिन में एसएमएस, यूटय़ूब, ईमेल्स, फेसबुक जैसे टेक्नोलॉजियों का जो मिसयुज कर रहे हैं, ऐसे लोगों को आइडेन्टीफाई करने में यह गवर्न्मेन्ट क्यों डिले कर रही है?

          हम आप के माध्यम से बोलना चाहते हैं। इस पूरा रिस्पॉन्सबिलीटी, जिस स्टेट में यह हो रहा है, उस स्टेट गवर्न्मेन्ट एण्ड सेन्ट्रल गवर्न्मेन्ट को इसे काफी सिरियसली लेना चाहिए। इतने सिरियस इश्यू को कम से कम एक महीना हुआ है। एक महीना से यह इश्यू देश भर में प्रेड हो रहा है। आज के दिन हम लोग इस पर बात कर रहे हैं मगर जो प्रेड हो रहा है उसको कंट्रोल करने के लिए गवर्न्मेन्ट को तुरन्त ऐक्शन लेना चाहिए। जिस स्टेट में हो रहा है उस स्टेट को भी तुंत ऐक्शन लेना चाहिए। कल तो मैंने प्राइम मिनिस्टर को टीवी में देखा है। उन्होंने कहा कि मैंने आंध्रप्रदेश के चीफ मिनिस्टर से बात की है। आज के दिन यूथ बहुत प्रभावित है। एसएमएस, यूटय़ूब , फेसबुक के द्वारा जो प्रेड किया जा रहा है पहले उसको कंट्रोल करें। ...( व्यवधान)

अध्यक्ष महोदया :  कृपया अब अपनी बात समाप्त करें।

श्री नामा नागेश्वर राव:गवर्न्मेन्ट की तरफ से यह एसएमएस भी रिवर्स एसएमएस भेज दे। हमारे तरफ से, मुख्य रूप से हमारी पार्टी तेलगुदेशम की तरफ से, हमारे नेता चन्द्र बाबू नायडू की तरफ से नार्थ-ईस्ट के लोगों को अपना भाई-बहन समझ कर, उन लोगों को प्रोटेक्ट करने के लिए पूरी कोशिश करेंगे।  

     

SHRI GURUDAS DASGUPTA (GHATAL): Madam, I join everybody in the House to give a clarion call to the entire nation to restore sanity which seems to have been disturbed. It is not in consonance with the tradition of India that racial riot and racial discrimination raises its head in India. We must say that India as a whole stands by the North-Eastern brothers, whether they are Bodos or whether they are Tribals. We are with them. India is united as it remained ever before. This clarion call has to go from the Parliament.

          But that is not enough, Madam. We know who the victims are, but we must know who the villains are. It is not enough to say that we appeal. It is important that punitive measures are taken urgently everywhere to arrest the people who are made responsible for this in India. If it is not known who the villains are, then this is a failure of the Intelligence Department. This is a fallout of Assam development. Therefore, it is known everywhere who these miscreants are and who these anti-socials are who had been doing this.

          May I ask the hon. Prime Minister what prevents him in telling the House as to how many people have been arrested, how many people have been booked and how many criminals have been sent to jail? Madam, sweet words do not bring sense to the villains. Sweet appeals do not bring sense to the senile people. Let us be heard once for all. Our rhetoric must match the deeds. Words must match the deeds. The Government must take action.

          Mr. Prime Minister, I appreciate your feelings. I appreciate the feelings of Madam Sonia Gandhi and the Congress Party. But excuse me for saying that the Government has not been so hard as it should have been in tackling the situation. This weakness further gives handle to the miscreants. There must be a circular to all States to make preventive arrests immediately. In Delhi, why should there not be preventive arrests? In Delhi, why should there not be police pickets in the hostels where the students are living?

          Madam, let me tell you that it is mainly the young girls and boys who are being attacked. It is the youth who is being attacked. Please remember it will have its impact on the terrorists’ movement in North-East India. It will rebound; it will not remain limited to rest of India. It will rebound and it will give further incitement to the terrorists who had been holding a seize of Manipur and other parts of North-East India.

          Therefore, the Government must act decisively. Not only rhetoric, not only speeches, not only appeals, not only parliamentary unity, we want to see that the law enforcement machinery all over the country rises to the occasion and give them the clear message that if you go on doing it, the State will come down heavily on you. That message must go from this Parliament.

          Our appeal to the nation for sanity and our direction to the Government ‘act hard’, put them into prison, ensure that Indian State machinery will never tolerate lawlessness or racial discrimination destabilizing the unity of the nation and the society.

 

श्री लालू प्रसाद: धन्यवाद मैडम। आज बहुत ही गंभीर सवाल पर बहस छिड़ी है और सबने इस ओर ध्यान आकृष्ट किया। हम यहां नेताओं का भाषण सुनते हैं। आज हंसने का दिन नहीं है, लेकिन बहुत लोगों के भाषण पर भीतर से हंसी आती है और तरस भी आता है। यह रयूमर नहीं है, यह साजिश, कौन्सपिरेसी, षडयंत्र है। नार्थ ईस्ट, बोडो, माइनॉरिटी के नाम पर देश के टुकड़े-टुकड़े करना, मैं बड़ा खतरनाक लक्षण देख रहा हूं। इसमें कोई बचने वाला नहीं है।   जो लोग ये खेल खेल रहे हैं, वह किसी से छुपा हुआ नहीं है। यह न समझिये कि ...( व्यवधान)   क्या आप नहीं जानते हैं? शरद जी ने राम और रहीम के बारे में बोला था। ...( व्यवधान) यहां पर बैठे हुए हैं। ...( व्यवधान) हम आपका भी भाषण सुन रहे थे।

           मैडम, कुछ दिन पहले देश भर में इसी तरह की अफवाह फैलायी गयी थी कि गणेश जी दूध पी रहे हैं। उस समय सभी देश वासी उन्हें दूध पिलाने लग गये। एक-दूसरे को टेलीफोन और एसएमएस करने लगे। एसएमएस फैलाने वाले लोग और वर्ष 2014 के चुनाव को ध्यान में रखने वाले लोग, असली बात समझिये। आप लोगों को मत डांटिये। यह राजनीतिक लाभ कौन उठाना चाहता है? यह कौन उठाना चाहता है? यह सरकार ...( व्यवधान) अब आपकी दाढ़ी में तिनका, हम किसी का नाम नहीं ले रहे, यह बता देते हैं। ...( व्यवधान) आप बैठकर शांति से सुनिये। ...( व्यवधान) यह षडयंत्र है। देश में ट्राइबल्स, नॉन-ट्राइबल्स, माइनॉरिटी और बंगलादेशी के नाम पर भाई-भाई को लड़ाना चाहते हैं। नार्थ ईस्ट हमारा पार्ट एंड पार्सल, अभिन्न अंग है। हम देशवासियों को नार्थ ईस्ट के लोगों को टॉप प्रॉयरिटी देकर हमेशा यह विश्वास दिलाना है कि आपके ऊपर कोई आंच नहीं आने देंगे। शरद जी गुस्से और तकलीफ में बोल रहे थे। आपको भी गुस्सा आ गया कि आसन के खिलाफ बोल रहे हैं। ऐसा नहीं है। वे ठीक बोल रहे थे। होम मिनिस्टर साहब जब सुबह हाउस अटैंड करने आ रहे थे तो मैंने उन्हें रास्ते में टोका कि आपने कल टीवी में स्टेटमैंट दी कि हमने बंगलुरू में तीन रेलगाड़ियां लगवा दी हैं। रेल राज्य मंत्री ने भी कहा, हमें मीडिया के लोगों ने घेरा। यह वहां से बड़े पैमाने पर प्लान हो रहा है। मैंने होम मिनिस्टर साहब को कहा कि आपने जो बयान दिया, यह ठीक बयान नहीं है, मैं इसे पसन्द नहीं करता। बंगलुरू, चेन्नई या कोई भी जगह हो,...( व्यवधान) मुम्बई, पुणे हो...( व्यवधान)

MADAM SPEAKER: Nothing  else will go in record.

(Interruptions) * श्री लालू प्रसाद: मैडम, चाहे बिहार हो। गीते जी यहां बोल रहे थे। बिहार के साथ भी इसी तरह  का व्यवहार हुआ था। यहां उपदेश की बात कर रहे थे, बता रहे थे। गीते जी, बिहार के साथ भी इसी तरह हुआ।...( व्यवधान) आप हमारी बात सुनिए।...( व्यवधान) जो जय महाराष्ट्र बोलेगा, वही रहेगा, यह बड़ा गलत संकेत है। इससे लोगों को बढ़ावा मिला। शरद जी ने कहा कि कार्रवाई क्यों नहीं हुई? आपने ट्रेन क्यों लगवा दी? वहां घेरकर, चाहे जो भी हो, क्या विभाग को मालूम नहीं है कि कहां से, कौन एसएमएस कर रहा था? फेसबुक, यूटय़ूब, आपने क्या-क्या बनाकर रखा है। इससे देश नहीं चलता, देश कड़ाई से चलेगा, भाषण से नहीं चलेगा। चाहे जो भी हो, एक्शन लीजिए। क्या दूध पिलाने वाले तत्वों को मालूम नहीं है कि कौन लोग हैं?  यह एक षडयंत्र है देश को टुकड़े-टुकड़े करने का। यह षडयंत्र है भाई को भाई से लड़ाने का। आप कार्रवाई कीजिए। ठीक कहा शरद यादव जी ने, बोलते हैं इनकी पार्टी छोटी है। नहीं, आप बड़ी जमात के साथ हैं, आपके दाहिनी ओर जमात है, जिसके कन्वीनर आप हैं। आपने कैसे बोल दिया कि हम अखाड़ा वाले लोग हैं? आपने कहा कि टांग तोड़ दो, टांग तो मरम्मत करा लेगा। इसलिए पूरी मजबूती के साथ ऐसा सबक सिखाना चाहिए लोगों को कि वे फिर ऐसी हिम्मत न करें। यह देश एक है, अटूट है और यह अटूट रहेगा। अगर कोई भी आदमी, कोई संगठन या पार्टी अगर चतुराई और बुद्धि से इसका राजनीतिक लाभ उठाना चाहती है, तो क्या हम लोग जानते नहीं हैं? क्या यह देश नहीं समझ रहा है? नाम लेने से लोगों को तकलीफ हो जाएगी। इसलिए कच्चा काम मत करिए। होम मिनिस्टर साहब, कड़ाई से कार्रवाई कीजिए, इसके पीछे जो भी ताकत है, उसको कुचलने की कार्रवाई कीजिए, पूरा सदन आपके साथ है, हम सभी लोग आपके साथ हैं। यही बात मुझे कहनी है।

अध्यक्ष महोदया : डॉ. मिर्ज़ा महबूब बेग।

…( व्यवधान)

MADAM SPEAKER:  Nothing else will go in record.

(Interruptions) *   डॉ. मिर्ज़ा महबूब बेग(अनंतनाग): मैडम, आज हाउस में ऑनरेबल मेंबर्स ने जो फीलींग्स एक्सप्रेस की हैं, मैं अपने आपको और अपनी पार्टी जम्मू-कश्मीर नेशनल कांफ्रेंस को उसके साथ शामिल करता हूं और एक समझता हूं।

          मैडम, इस वक्त जो इश्यू है, जो तकलीफ है, उसके बारे मैं दो बातें कहना चाहूंगा। एक बात यह है कि हम किसी इश्यू को उस वक्त डिबेट करते हैं, उस वक्त डिसकस करते हैं जब वह आउट ऑफ कंट्रोल हो जाता है। मुझे याद है इसी हाउस में न सिर्फ कंसर्न एक्सप्रेस किया गया, बल्कि बड़ी सीरियसली डिबेट हुई जब कश्मीर में आग लगी हुई थी। आग खामोश हो गयी और तमाम वे सोल्यूशन्स जो हमने सोचे थे, जो गवर्नमेंट ने सोचे थे, जो इंटरलोक्यूटर्स भेजे थे, जो कमेटीज नॉमिनेट हुई थीं, जो रिकॅमेंडेशन्स आई थीं, हम सब भूल गए और यह सोचने लगे कि वहां अमन हो गया, जो कि टेम्पोररी है और उसी को हम परमानेंट अमन समझने लगे। हमारा मानना है कि यह बहुत हो चुका है, असम हो, नॉर्थ-ईस्ट हो, कश्मीर हो, जो भी इश्यूज हैं, उनका एक लाँग टर्म सोल्यूशन ढूंढना पड़ेगा। अंडर-कारपेट रखकर मसलों को एड-हॉक बेसिस पर निभाने से इश्यूज एड्रेस नहीं होंगे। बहुत बदकिस्मती है कि जब तक नॉर्थ-ईस्ट में आग नहीं लगेगी और उस आग को जब तक हम पोलिटीसाइज नहीं करेंगे, तब तक हम चैन से नहीं बैठते हैं। मगर चैन से हम तब बैठ सकेंगे जब हम इश्यूज को परमानेंटली एड्रेस करेंगे। यह आग इंशाअल्लाह बुझ जाएगी, मगर जो इश्यू है असम को लेकर, जो असम के हमारे भाइयों को परेशान कर रहा है, जो कभी खामोश हो जाता है, जब आग थोड़ी से कम हो जाती है, तो हम इसको भूल जाते हैं। मुझे नहीं लगता है कि इससे ये मसले हल होंगे। इन मसलों को हेड-ऑन लेकर, उसके बाद कमेटीज भी भूल जाते हैं, इंटरलोक्यूटर्स भी भूल जाते हैं, इश्यू भी भूल जाते हैं और दुनिया एवं मुल्क को बताना चाहते हैं कि यह इश्यू रिजॉल्व हो गया, सॉल्व हो गया for all times to come. अगर आप 60 साल की हिस्ट्री ले लीजिए, हरवक्त और हर मौके पर नॉर्थ-ईस्ट में ऐसा होता रहा। असम एकॉर्ड हुआ, आज भी कहते हैं कि वह असम एकॉर्ड 100 प्रतिशत इंप्लीमेंट नहीं हुआ। राजीव गांधी जी ने एकॉर्ड किया और शायद उस एकॉर्ड की अब फाइन-टय़ूनिंग करके, उसको और रिलेवेंट बनाकर, ऑनेस्टली और सिंसियरली इंप्लीमेंट करना पड़ेगा। इन विक्टिम्स को रिलीफ देना, रिहैबिलिटेट करना इसके टेम्पोररी सोल्यूशन्स हो सकते हैं, मगर यह परमानेंट सोल्यूशन नहीं है। इसलिए मैं गुजारिश करूंगा कि ये जो इश्यूज हैं, जो समय-समय पर भड़कते रहते हैं, इनको पोलिटीसाइज न करें, इनको कम्यूनल लाइन्स पर डिवाइड न करें और इस वक्त हम अपने उन ग्रेट लीडर्स को सलाम करें जिन्होंने ऐसे मल्टी-एथनिक कंट्री को, मल्टी-लिंग्विस्ट कंट्री को एक सेकुलर और डेमोक्रेटिक कंट्री का कांसेप्ट देकर हमेशा के लिए एक बनाया है। इस वक्त हमें उनको सलाम करना चाहिए और वे लोग जो इसे थ्योक्रेटिक स्टेट बनाना चाहते थे, वह हमने देख लिया, पाकिस्तान ने वह ट्राई किया, वह फेल हो गया और डिसिंटिग्रेट हुआ। वह कांसेप्ट चला नहीं, यही कांसेप्ट चलेगा कि सेक्युलर डेमोक्रेटिक कंट्री को हमें मजबूत करना होगा।

 

SHRI PREM DAS RAI (SIKKIM): Madam Speaker, thank you very much for allowing me to participate in this very important debate. It is very rarely that we come across a situation of this kind where for one and a half hours we continue to debate this particular issue.

          I join the entire House in sending out a message from this august House to the people of India that the people of the Northeast are one with the people of India; are the citizens of this country and will continue to remain the citizens of this country. I join hands with all my fellow colleagues here in sending out a clear-cut message to those who are the perpetrators of this particular feeling of insecurity to the people of the Northeast, in telling them that the long hand of the law will ultimately catch up with them and that they will be booked.

          I would demand from the Government that they take immediate action. I am very happy to hear the Prime Minister say that without any further loss of time action would be taken. And I do hope that action indeed will take place.

          I only want to caution and say with a bit of feeling here that it is the young people of the Northeast who are getting affected. It is the young people who do not understand the politics that is behind all of this. It is the young people who are impressionable that are getting affected. It is, therefore, absolutely of utmost importance that we take corrective action, take collective action, and take action which will reach out to these people, and ensure that they all go back to what they were doing before this, whether they were studying or whether they were working.

          I would like again to thank the Chief Ministers of all the States that are affected, who have reached out to the young people of the Northeast for ensuring that the situation will be brought under control, and a very strong message has been sent to them.

          With these words, I thank this august House and thank the Speaker for this.

   

श्रीमती विजया चक्रवर्ती (गुवाहाटी): अध्यक्ष महोदया, मैं नार्थ-ईस्ट से आती हूं। मैंने यहां बैठकर सारी बातें सुनी हैं। मुझे लगा कि मैं क्यों ज़िंदा हूं। मैं 1986 से संसद में हूं। अभी असम की हालत ऐसी है, जब पार्टिशन हुआ था, उस समय असम में ग्रुपिंग हुई थी, तब नार्थ-ईस्ट असम एक ही था, तब असम को ईस्ट पाकिस्तान के साथ मिलाने की साज़िश हुई थी। महात्मा गांधी के कारण उस समय असम वहां जाने से बच गया। जब 1962 में जब चीन के साथ वार हुई, तब उस समय के प्रधान मंत्री जवाहर लाल नेहरू जी ने कहा था कि अभी यदि चीन ले लेगा, ते बाद में हम असम को मुक्त करा लेंगे।

          अभी कश्मीर का मसला माननीय बेग ने रखा था। कश्मीर में कश्मीरी पंडितों की हत्या हुई, तो सात लाख वहां से भागकर देश के अन्य भागों में चले गए। लेकिन असम में 27 जिलों में से 14 जिलों में बांग्लादेशियों की मेजोरिटी है। वहां के लोग कहां भागेंगे, मान लीजिए बांग्लादेशियों के कारण असम के लोगों को भागना पड़ा, तो ये लोग कहां जाएंगे?...( व्यवधान) 

SHRIMATI RANEE NARAH (LAKHIMPUR): Madam, this is highly objectionable. … (Interruptions)

MADAM SPEAKER: Please sit down. Nothing will go on record.

(Interruptions) * अध्यक्ष महोदया: आप बैठ जाएं, आप क्यों खड़े हैं, मैं कह रही हूं।

...( व्यवधान)

श्रीमती विजया चक्रवर्ती (गुवाहाटी):  मुम्बई में जो 50 हजार लोगों द्वारा हिंसात्मक प्रदर्शन हुआ था, वहां पर 30-35 बसें और प्राइवेट कारें जला दी गयीं लेकिन किसी भी व्यक्ति को अरेस्ट नहीं किया गया। इसके बाद चाहे हैदराबाद में हों, केरल में हों, बैंगलोर में हों, महाराष्ट्र में हों या कहीं और दूसरी जगह हों, उनके पास मैसेज गये कि रमजान महीना खत्म होने से पहले आप लोग भाग जाओ, नहीं भागोगे तो तुम लोगों की हत्या की जाएगी। होम मिनिस्टर बैठे हैं, असम का पुत्र कहलाने वाले  ...  *।

 MADAM SPEAKER: No. You cannot say that.

… (Interruptions)

THE MINISTER OF HOME AFFAIRS (SHRI SUSHILKUMAR SHINDE): No. Madam, I object to this.  … (Interruptions)  इस तरह से भाषण मत कीजिए। You withdraw your words.  … (Interruptions)

MADAM SPEAKER: Please do not say this.

… (Interruptions)

SHRIMATI BIJOYA CHAKRAVARTY: All right; I will withdraw that.  … (Interruptions)

MADAM SPEAKER: All right.

… (Interruptions)

श्रीमती विजया चक्रवर्ती :  अभी जिन्होंने रयूमर फैलाई, किसे अरैस्ट किया? मुम्बई की हिंसांत्मक घटना में जो बसें जलाई गयीं, लोगों की पिटाई की गयी, किसे अरैस्ट किया? पुणे में नार्थ-ईस्ट के दो लड़कों की जो हत्या हुई, किसे अरैस्ट किया? आंध्र प्रदेश से नार्थ-ईस्ट के 1500 लोग भागकर आ गये, किसे अरैस्ट किया? ...( व्यवधान) एक ही टाइम, एक ही दिन, सबके पास क्यों मैसेज गये और सभी को जाने के लिए स्पेशल ट्रेन क्यों लगाया गया? यह किसकी साजिश है? नार्थ-ईस्ट के सारे लोग भाग कर आ जाएं, उन लोगों के लिए ट्रेनें खड़ी की गयीं, इसका मतलब क्या है?

          मैडम, बहुत मुश्किल से नार्थ-ईस्ट अभी नार्मल हो रहा है, जो उग्रवादी थे वे मेनलाइन में आ रहे थे। नार्थ-ईस्ट के लोग जगह-जगह पढ़ने आते हैं, सर्विस के लिए आते हैं और मेन-स्ट्रीम में आने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन अगर दुबारा ऐसा हो जाएगा तो नार्थ-ईस्ट कहां जाएगा? नार्थ-ईस्ट भारत के साथ क्यों रहेगा, कैसे रहेगा? ...( व्यवधान) You must listen to me. … (Interruptions) You must listen to me. … (Interruptions)  भारत के साथ रहने के लिए ...( व्यवधान) आपने क्या किया, मुझे बताएं? भारत के साथ रहने के लिए आपको भी कोशिश करनी पड़ेगी...( व्यवधान) महाराष्ट्र के चीफ मिनिस्टर को. कर्नाटक के चीफ मिनिस्टर को, आंध्र के चीफ मिनिस्टर को, केरला के चीफ मिनिस्टर को इस तरह की बातों को रोकने की कोशिश करनी पड़ेगी। अगर हालात ऐसे हो जाएं कि नार्थ-ईस्ट के लोगों को भगाने के लिए ट्रेनें खड़ीं की जाएंगी तो नार्थ-ईस्ट के लोग कहां जाएंगे? ...( व्यवधान) मुझे दुख है कि नार्थ-ईस्ट के लोगों को भगाने के लिए ट्रेनें खड़ी हैं लेकिन उन लोगों को रखने के लिए, कर्नाटक के चीफ-मिनिस्टर को छोड़कर और कोई चीफ-मिनिस्टर्स खड़े नहीं हैं। यहां एक माननीय सदस्य ने बयान दिया था कि यहां के रेडिकल मुस्लिम कुछ रिएक्शन करने के लिए रेडी होगा, अगर कोई एमपी ऐसी बात करता है तो उसे एरैस्ट क्यों नहीं किया मैडम? मैं अपील करती हूं नार्थ-ईस्ट शांत रहे, संयमित रहे और नार्थ-ईस्ट के लोगों को वापस जाने के लिए कुछ कीजिए, हम लोग भारत में भारत माता की सेवा करने के लिए तैयार हैं। यही मुझे कहना है।

                                       

DR. THOKCHOM MEINYA (INNER MANIPUR): Thank you, Madam Speaker. I seek indulgence of this august House to participate in this particular discussion or debate. Actually, I had raised the same problem in the ‘Zero Hour’ last time. It is really a very serious matter. At that time, I spoke in my mother-tongue and perhaps some of the hon. Members in the House must have understood that.  The issue is not that simple.  It is a very complex issue.… (Interruptions) I would request the Members from the other side to listen to us.  If somebody keeps on talking, it distracts our mind.   Please do not do that.

MADAM SPEAKER: Hon. Member, please take your seat.

DR. THOKCHOM MEINYA  : I was listening to all the interventions with rapt attention.  I am very glad and rather very grateful to all of you for all the sympathy and cooperation that you have extended so far to the people of Northeastern region. As the hon. Leader of Opposition has mentioned, being one from that region, I would like to say that the boy who was attacked in Pune belongs to my own village.  It was a very serious incident.

          He was actually doing a part-time study in a Poona College and just to sustain his education he was working in a shoe factory in the night.   On Thursday when he was going to the college he was attacked and on the third day, that is on Saturday, when he was coming back from his work at about 10.00 p.m., he was chased and attacked again.  He was hurt badly.  He got stitches on his head and injury on other parts of his body was so grave that he had to be hospitalized.  That was the crux of the problem.  But we did not say that all this was the after effect of the Kokrajhar issue.  We did not want to say this because it is a very-very complex and a delicate issue.

          We know that our country is so vast,  full of diversities.We have to be very careful when we say something across the table to solve a problem.  I am very sorry to say that Madam Chakravarty has infused certain things which we do not like.

          As I was mentioning in the beginning, the Government of India and for that matter the State Governments of Maharashtra, Karnataka, Andhra Pradesh, Kerala and all the Northeastern States are working together. They have their own communication systems.  I think they are working very hard under the guidance of the Union Government and I hope the matter will be subsided.  As you know when a certain thing happens, we have to take immediate action.  For example, if I have a headache, I will have to immediately take a Crocin to subside the pain.  We can afterwards think over the remedial process taking into account various factors. 

          That is why I always insist that the people of this great country, India, have to know each other very well.  We do not know some of them well.  Fortunately or unfortunately, during my student days we used to have elaborate subjects like History, Geography and Moral Science. At the Secondary level, Class X, we used to learn the history of Kerala.  We knew the freedom fighters of our country.  We knew everything.  Now the Information Technology has come in and we want to infuse all the information in the syllabus which perhaps lacks in elaborate subjects like Geography, History or Moral Science.  The other day I was suggesting that we have to have elaborate compulsory subjects like Geography, History and Moral Science because every region has its folk tales and beliefs.  We have to make our younger generations know about them.  If they know all these things together that will make them understand the country well and will help us to develop the national character so that we can proudly say that we are Indians first than we are Manipuris, Punjabis and so on.  But that we have not been able to do and that is why we have to give important thrust on this in our education.  I always say that education is the only way to solve the problem of ignorance.  I am sorry to say that we won Independence 60 years ago but ignorance is still there throughout the country and we have yet to overcome it.

          Coming back to the immediate problem, I am very sorry to say that the modern technology has made the situation worse, in the sense that some SMS and some MMS or for that matter some cassettes are being distributed which are really doctored.  They are not correct.  Some of them have been taken from some other incidents.  They have been joined together, edited and sent out to mesmerize or to mislead the thinking of the people.  So, this is a very serious matter.  We have to take action in such a way that those who are responsible for this are booked immediately.  Action should be taken against them immediately so that they cannot do further damage to our people. 

          I would again request all of you to listen to me very carefully.  The other day also I said the same thing.  We are all hon. Members.  I would request you to try to propagate in all your constituencies that all this is not actually happening.  Rumours are working like anything.  We cannot take rumours as humours.  We cannot take cartoons as humours.  There are so many things which we have to take as humour also.  But we have to take rumours seriously as they can damage and can de-stabilize everything. 

          I have to mention very humbly that this country is facing the problem of poverty.  Poverty is one area, which affects everything.  Why do our people from North-East go out?  It is because they do not have any jobs there.  They go out to study.  They go out for jobs.  They are not doing very respectable jobs.  They are just in a ‘hand to mouth’ situation.  They work there but they do not get handsome wages.  They get only a small amount of money.  Five to six people live together in one room. They cook together.  Every person gets just about Rs.5000 per month.  They work in hotels, mall shops, etc. just for sustenance.  They do not come here to earn money.  That is why, I would say that poverty brings them out of their homes and they are facing problems there. 

Therefore, we have to see that the countryside is equally developed so that they could have jobs  and education there.  In that way, we can progress together.  This is one very big lacuna which is there. 

MADAM SPEAKER: Please conclude now.

DR. THOKCHOM MEINYA: Another most important area is that everybody thinks that North-Eastern India consists of eight States including Sikkim brother.  As all the hon. Members know, pre-Independence, there were only three States – one was a big Assam and other two were Tripura and Manipur. Tripura and Manipur were princely States.  They got merged into India in 1949 just after Independence.  Manipur State did have her own Constitution and an elected Government.  They were running their own Governments.   But in 1949, we joined India.  Therefore, we are part of India.  We do not say that we are not Indians.  We have joined India.  So, this history should be known to everyone. 

          Madam, I have taken much of your time and I thank you very much for your indulgence. But this has to be told to everyone. It has to be understood by everyone. Why are the people of Manipur angry today?  There is one simple reason. We got merged in 1949.  We were put as Part C States for many years. In 1972 when we got statehood.  During that time, a small hill district of Nagaland which was made an Autonomous Hill District got statehood in 1963-1964.  People became wild at that time.  You must be remembering the history.  At that time, when Madam Indira Gandhi came to Manipur, we were students and we were fighting for statehood.  You know our language, Manipuri, our culture, our sports persons, etc.  Our language was recognized in 1980 only and it was put in the Eighth Schedule.  It was too late.  So, these things have happened there.  This has created a sense of alienation in the minds of younger generations.  We have to inspire them by letting them know the history of the country.  We should be able to tell them that they are Indian first and then Manipuri, etc.  In this way, all of us have to work together and such types of ugly things which are happening time and again, these are the creations of some of the anti-social elements.  We always condemn them.  Such things should not happen.

MADAM SPEAKER:

   
Shri S.S. Ramasubbu is allowed to associate himself with the above issue.
   
श्री सुशीलकुमार शिंदे: माननीय अध्यक्ष महोदया, आज आपने सदन का क्वश्चन आवर सस्पेंड किया।
अध्यक्ष महोदया : मैंने क्वश्चन आवर सस्पेंड करने का प्रस्ताव रिजेक्ट कर दिया था।
श्री सुशीलकुमार शिंदे: सभी सदस्यों की विनती करने के बाद आपने परमिशन दी थी। एक ऐसे विषय पर सदन में चर्चा हो रही है कि आज पूरा सदन इस देश के साथ है, देश के विचारों के साथ है। दुखद घटनाएं घट रही हैं, चल रही हैं। आज जिस तरह से सदन में सभी सदस्यों ने एकता के रूप में नार्थ ईस्ट के बच्चों को और जनता को विश्वास दिलाया है, इसके लिए मैं विरोधी दल के नेता और आप सभी सदस्यों का आभारी हूं। आज पूरा सदन इकट्ठा होकर उनके दुखों के साथ समर्थन दे रहा है कि हम तुम्हारे साथ हैं, सदन में ऐसा बहुत कम देखने को मिलता है।
          महोदया, मैं बताना चाहता हूं कि 13 तारीख को यूपीए की चेयरपर्सन और मैं कोकराझार गए थे। हम देखने के लिए गए थे कि वहां जो दुखी लोग हैं उनका रिहेबिलिटेशन किस तरह हो रहा है। हमने एक ऐलान किया कि प्रथम शांति बहाल हो। कैंप्स में जो लोग बैठे हैं, उन्हें अच्छी तरह सिक्योरिटी मिले, यह हमारा पहला प्रयास था। यहां से वापिस आने के बाद दूसरी दुर्घटना घटी, सदन में विलासराव जी के बारे में दुखद सूचना मिली। हम 15 तारीख को उनके फ्यूनरल से वापिस आ रहे थे। मैं शार्ट में ही बताउंगा और ज्यादा वक्त नहीं लूंगा। हम 15 तारीख को वापिस आ रहे थे और प्रधानमंत्री जी ने एयरपोर्ट में ही मुझे बताया कि बंगलौर में बड़ी तादाद में विद्यार्थी इकट्ठा हो गए हैं, आप इसे देखिए। माननीय प्रधानमंत्री जी ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री से बात की। मैंने भी तुंत कर्नाटक मुख्यमंत्री से बात की और विनती की कि इमीडिएटली ऐलान कीजिए, विशेषतः विद्यार्थियों को ऐलान कीजिए कि वे न जाएं, हम पूरा प्रोटेक्शन देंगे लेकिन तब तक स्टेशन पर काफी भीड़ इकट्ठी हो गई थी। वहां कम से कम 5000-6000 लोग इकट्ठा हो गए थे। साढ़े दस बजे ट्रेन में जाने के लिए ज्यादा से ज्यादा 300 से 400 लोग जा सकते थे। मुझे यह बताने में खुशी होती है कि वहां के चीफ मिनिस्टर ने होम मिनिस्टर को वहां भेजा और तुंत कार्रवाई की। वहां चाहे किसी भी पार्टी की सरकार हो, जो एक्शन लिया मैं इसके लिए उन्हें धन्यवाद देता हूं। जब ऐसी घटनाएं होती हैं तो हमें पार्टी से ऊपर सोचना चाहिए। आज इस सदन में देश से कहा जा रहा है कि हम सब एमपीज़ आपके साथ हैं। मैंने उनसे बात की और दो हैल्पलाइन चलाने के लिए कहा, जहां भी कुछ हो वहां नोडल अफसर लगाकर एनाउंस कीजिए। ऐसा मैंने कहा और तुंत उन्होंने किया। मैंने होम सैक्रेट्री को कहा था कि मैं मणिपुर के चीफ मिनिस्टर से बात कर रहा हूं क्योंकि वहां भी एक इंसीडेंट हो गया था। इसके बाद मैं राजस्थान के चीफ मिनिस्टर से बात कर रहा था क्योंकि सिरोही के पास कुछ इंसीडेंट हो रहा था। जब मैं सबसे बात कर रहा था तब रात के 11 बज रहे थे और सवा 11 बजे मेरे घर नार्थ ईस्ट के दो एमपी, विशेषकर एजीपी के आ गए। उन्होंने कहा कि कन्याकुमारी से ट्रेन निकली है और उस पर अटैक हो रहा है। मैंने कहा कि कहां अटैक हो रहा है आप बताइए। इस पर उन्होंने कहा कि हमें पता नहीं है लेकिन हमें फोन आया है। मैंने इमीडिएटली आंध्र प्रदेश सरकार को एलर्ट कर दिया कि पूरी ट्रेन पर बंदोबस्त लगा दीजिए और गुवाहाटी तक स्कवाएड करते जाइए। इस तरह की बातें हो रही हैं और अफवाहें बहुत फैलाई जा रही हैं।
          महोदया, मैं कल तक देख रहा था कि मैसेजिस आ रहे हैं। कई लोगों ने कहा कि हमारे पास नहीं हैं लेकिन मैसेजिस आ रहे थे। अभी कहा गया कि इंटरनेट और फेसबुक पर मैसेजिस आ रहे हैं। हम इस पर भी कार्रवाई कर रहे हैं। मैंने कल ही डायरेक्टर इंटेलिजेंस को कहा है कि जो इंटरनेट पर मैसेजिस कर रहा है, उसे ट्रेस कीजिए। मिलना कठिन है लेकिन ट्रेस कीजिए। और जब वे ट्रेस हो जायेंगे तो उनका पूरा इंतजाम करेंगे, यह मैं सदन को बताना चाहता हूं। मैंने देखा है, क्योंकि बहुत बार ऐसा होता है कि जब कोई एक बोलता है कि यह हो रहा है तो दूसरे भी बोलने लगते हैं, मैं वह उदाहरण देना नहीं चाहूंगा। ...( व्यवधान)
श्री रेवती रमण सिंह (इलाहाबाद): क्या कोई अरैस्ट हुआ है?
श्री सुशीलकुमार शिंदे : देखिये, जरा मुझे बोलने दीजिए। मुझे पता है, आप बहुत सीनियर हो। लेकिन थोड़ा अभी मुझे बोलने दीजिए, क्योंकि इससे बीच में ब्रेक हो जाता है।
          मैं बताना चाह रहा था कि कई बार इस तरह से अफवाहें फैलाई जाती हैं कि उसका मूल पता नहीं चलता है। एक कहता है तो दूसरा भी कहे जाता है कि वैसा हो गया है। मैंने कल कई लोगों से बंगलौर में भी पूछा, आंध्र प्रदेश में भी पूछा, कल रात मैंने महाराष्ट्र के चीफ मिनिस्टर से बात की और उन्होंने इस तरह का ऐलान किया कि महाराष्ट्र में कोई हैल्पलाइन लगाई है, चाहे पुणे हो, नासिक हो या मुम्बई हो, वहां यदि इस तरह की बातें होती हैं तो इंफॉर्म करें। लेकिन अभी तक इस तरह की कोई इंफॉर्मेशन नहीं आ रही है। परंतु सरकार इसे इतनी आसानी से नहीं लेती है। जैसे मैंने कहा था कि जब पुणे में बॉम्ब विस्फोट हुआ था तो उसमें कोई बहुत ज्यादा इंजुरीज नहीं हुई थीं, केवल एक आदमी को इंजुरी हुई थी। लेकिन सरकार ने उसे इतना सिम्पल नहीं लिया, हम उसके डिटेल्स में जा रहे हैं। इतना ही नहीं हम यह भी देख रहे हैं कि उसके सूत्र देश के बाहर तो नहीं हैं।
          महोदया, कई चीजें ऐसी होती हैं कि कई बार उन्हें बताने का दिल नहीं होता है, क्योंकि इसमें सीक्रेसी न रखने से फर्दर इन्वेस्टिगेशन में क्या करना है, उसमें बाधा आती हैं, इसलिए मैं कई बार बताना नहीं चाहता हूं। लेकिन मैं यह जरूर बताना चाहूंगा कि क्या किसी को अरैस्ट किया गया है, ऐसा अभी आपने बोला, मैं बताऊंगा कि अभी तक आसाम में 170 लोग अरैस्ट हुए हैं, मुम्बई में 21 अरैस्ट हुए हैं और जिस पुणे की इंसिडैन्ट के बारे में आप बात कर रहे थे और हमारे साथी मणिपुर के सदस्य कह रहे थे कि जिस बच्चे को उन्होंने मारा है, वहां प्रथम एक को अरैस्ट किया था, लेकिन अभी मुझे इंफॉर्मेशन मिली है कि अब वहां 13 लोगों को अरैस्ट किया गया है और मुम्बई में 24 लोगों को अरैस्ट कर लिया गया है। हम ये सभी अरैस्ट तो जरूर करते हैं, लेकिन हम उनके डिटेल्स में भी जा रहे हैं। इसमें सबसे महत्वपूर्ण बात आसाम से शुरू हुई है, मैं उसके डिटेल्स में नहीं जाऊंगा। एडजर्नमैन्ट मोशन पर मैंने बताया है कि इसकी हिस्ट्री क्या है और यह तभी से चला आ रहा है। आज मैं इस सभाग्रह से ऐलान करना चाहता हूं कि जो भी लोग गये हैं, कृपया आप वापस लौट आइये, भारत तुम्हारा देश है, चाहे आप मणिपुर के हों, चाहे अरूणाचल प्रदेश के हों, चाहे बंगलौर हो, मुम्बई हो या हैदराबाद हो, यह हमारा देश है और हमारे देश में इस तरह की बातें नहीं हो रही हैं और आज का यह समय कितना अच्छा है कि हम सब एक साथ मिलकर उन्हें धैर्य दे रहे हैं। मैं समझता हूं कि यही धैर्य हमारे देश को आगे लेकर जायेगा और आने वाली पीढ़ी को एक नई प्रेरणा और चेतना देगा कि भारत का पार्लियामैन्ट हमारे साथ है, इसलिए हमें डरने की कोई जरूरत नहीं है। मैं आपके माध्यम से इस देश में एक विनती करूंगा और विशेषतः हमारे नार्थ-ईस्ट के जो बच्चे हैं और केवल बच्चे ही नहीं, बल्कि नार्थ-ईस्ट में गोहाटी का एक प्वाइंट है, गोहाटी के उस प्वाइंट से चाहे त्रिपुरा हो, सिक्कम हो, अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम हो या मणिपुर हो, वह एक सैंट्रल प्वाइंट है और वहां लोग जाते हैं...( व्यवधान)
श्री शरद यादव (मधेपुरा): मैं आपसे निवेदन करना चाहता हूं कि जो हो गया, वह ठीक है। लेकिन जैसे दिल्ली है, उत्तर प्रदेश है, राजस्थान है, बिहार आदि है, आपको वहां के मुख्य मंत्रियों, यहां की सरकारों से भी बात करनी चाहिए, ताकि वे पहले से ही बता दें कि अफवाह फैल रही है। उस पर आप प्रिवेन्टिव एक्शन लीजिए।
श्री सुशीलकुमार शिंदे : महोदया, तीन दिन पहले ही मेरे विभाग ने सबको एलर्ट मैसेज दे दिया है और जहां-जहां भी हो, मैं बातें कर रहा हूं। अभी आपने सजैस्ट किया है, यह हम सबके लिए बहुत चिंता का विषय है। आप बहुत अच्छा बोलते हैं, मुझे आपसे बहुत प्यार भी है। मैं यह सभी चीफ मिनिस्टर्स से जरूर बोलूंगा और इतना ही नहीं और भी जो चीफ मिनिस्टर्स हैं, उन्हें भी बोलूंगा कि सदन की इच्छा कुछ कम नहीं है।

  13.00 hrs मैं समझता हूँ कि ज्यादा भाषणबाजी करने में मैं आपका और सदन का वक्त नहीं लेना चाहूँगा। प्रधानमंत्री जी ने यहां जो आश्वासन दिया है, वह आश्वासन हम पूरा करेंगे। होम मिनिस्टर बनने के बाद यह पहला मौका है कि यहां इतना अच्छा वातावरण मिला है कि हम देश के साथ हैं।

   

अध्यक्ष महोदया : यहां पर जो चर्चा हुई, वह बहुत ही गंभीर और संवेदनशील वि­षय था। यह सभी की इच्छा थी और मेरी भी उत्कट इच्छा थी। हमारे सदन में 38 दल हैं और उनके अलावा निर्दलीय भी हैं। पूरे भारत की जितनी जनता है, उन सभी का प्रतिनिधित्व यहां है। मैं चाहती थी और जो कि हुआ है कि इस सदन से एक स्वर में सिंह गर्जना हो, हुंकार भरें और नॉर्थ-ईस्ट के जो हमारे भाई हैं, उनसे कहें कि हम तुम्हारे साथ हैं और यह देश तुम्हारा है। जो भी शरारत कर रहे हैं और नुकसान पहुंचा रहे हैं, हमारे नॉर्थ-ईस्ट के भाई-बहनों को, पूरे देश को और हमको तकलीफ पहुंचा रहे हैं, उनके दिल में इस सिंह गर्जना से खौफ़ पैदा करें। मुझे बहुत खुशी है और मैं धन्यवाद देती हूँ कि आप सभी ने बहुत ही सफलतापूर्वक इस चर्चा को पूरा किया।