Lok Sabha Debates
Discussion Regarding Issue Of National Security And Rise Of Militancy In Various ... on 15 December, 1999
Title: Discussion regarding issue of National security and rise of militancy in various parts of the country especially in North-East and Jammu & Kashmir, raised by Shri Vilas Muttemwar on the 14th December, 1999. (Cont.- Concluded) MR. SPEAKER: Now, let us take up discussion under Rule 193. Shri L.K. Advani to reply.
ग्ृाह मंत्री ( श्री लाल कृष्ण आडवाणी): अध्यक्ष महोदय, मैं सबसे पहले श्री विलास मुत्तेमवार और श्री राजेश पायलट को इस बात के लिये धन्यवाद देना चाहता हूं कि उन्होंने इस महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा आरम्भ की है और सदन को यह अवसर दिया कि देश की आंतरिक सुरक्षा की स्िथति के लिये जो संकट देश के वभिन्न भागों में और विशेषकर जम्मू और कश्मीर तथा पूवर्ोत्तर राज्यों में पैदा हुआ है, उसके बारे में अपने विचार प्रकट करे सुझाव दे। मुझे इस बात की विशेष खुशी है कि इस बहस में २३ माननीय सदस्यों ने कुल मिलाकर भाग लिया। हालांकि बहस का समय दो घंटे निर्धारित हुआ था लेकिन यह साढ़े चार-पांच घंटे बहस चली। मैं पूरे तौर पर कह सकता हूं कि यह बहस रचनात्मक थी। उसमें किसी ने भी कोई प्वाइंट स्कोर करने का नहीं सोचा कि इस सरकार ने ऐसा किया, उस सरकार ने ऐसा किया या उस सरकार ने वैसा किया। सब माननीय सदस्यों के भाषणों में तीन चीजों लगभग समान थीं, पहली चीज कि संकट गंभीर है, उसे कम नहीं मानना चाहिए। दूसरी चीज उसमें एक सामूहिक संकल्प भी उभरता था कि हमें हर स्िथति में इस संकट का निवारण करना चाहिए, देश को इसके ऊपर उभरना चाहिए और तीसरी चीज यह भी बार-बार उभरती थी कि यह सवाल ऐसा नहीं है कि जिसे दलगत दृष्िट से सोचा जाए। हम मिलकर इस बारे में सोचें, मिलकर इसका निवारण करें। वैसे तो यह सारे देश की चर्चा है, लेकिन प्रस्ताव देने वालोंparticularly in Jammu and Kashmir and in the North-East इन दोनों हिस्सों से मैं अलग-अलग डील करूंगा। पहले मैं जम्मू-कश्मीर की चर्चा करूंगा उसके बाद मैं पूवर्ोत्तर क्षेत्र की चर्चा करूंगा। मैं मानता हूं कि इस शताब्दी के सातवे दशक तक आतंकवाद से हम परचित नहीं थे। देश में आतंकवाद नहीं था। कहीं-कहीं हिंसा थी। उत्तर-पूर्व के हिस्सों में कही-कहीं हमने इनसर्जेन्सी का मुकाबला किया है। लेकिन आतंकवाद जिसमें बेगुनाह लोगों की हत्या चाहे जब कर दो, बम विस्फोट कर दो, रास्ते चलते किसी की हत्या कर दो या चुन-चुन कर कुछ लोगों को मार दो। इस प्रकार की स्िथति सातवें दशक तक लगभग नहीं थी। मैं कभी-कभी अपने व्यकितगत अनुभव को याद करता हूं जब मैं पहली बार सरकार का हिस्सा बना, श्री मोरारजी भाई उस समय प्रधान मंत्री थे, मुझे पाकिस्तान जाने का अवसर मिला। मेरा जन्म-स्थान कराची है, मैं वहीं का निवासी रहा हूं। इसलिए जब मुझे उनका निमंत्रण मिला तो मैं वहां गया था। उस समय वहां सैनिक शासन था, जैसा कि आज है। कराची शहर में चारों ओर सेना की टुकड़ियां दिखाई देती थीं। जनरल जिया उस समय वहां के राष्ट्रपति थे। मैं वहां दो दिन था। स्वाभाविक रूप से मुझसे वहां के राजदूत पूछा कि आप कहां जाना चाहेंगे। मैंने कहा कि मैं अपने निवास-स्थान और अपने स्कूल जाना चाहूंगा। अपनी पुरानी स्म्ृातियां सजीव करने के लिए मैंने उनका उल्लेख कर दिया। मेरे साथ पाकिस्तान का अधिकारी था, जो मेरे साथ चलता था, जहां के लिए भी मैं कहता था वह साथ चलता था। जब मैं वहां सहज रूप से घूम रहा था तो कई लोगों ने उत्सुकतावश पूछा कि यह कौन हैं। उन्होंने बताया यह भारत सरकार के एक केन्द्रीय मंत्री हैं। उनको ताज्जुब होता था कि उनके यहां तो इतनी सेना, इतनी सुरक्षा होती है। यह १९७८ या अरली १९७९ की बात होगी। उन्हें आश्चर्य होता था कि भारत का केन्द्रीय मंत्री बिना सुरक्षा के यहां घूम रहा है और हमारे यहां जितने सांसद, विधायक और मंत्री हैं वे पूरा का पूरा पैराफर्नेलिया लेकर घूमते हैं। यह १९७७ की बात है और जब आज सोचता हूं तो अब कितना अंतर हो गया है। आज मेरे साथ ब्लैक कैट कमांडोज जाते हैं, सांसदों के साथ कई सुरक्षाकर्मी जाते हैं। कई-कई प्रदेशों में तो हर एक विधायक के साथ सुरक्षा लगाई गई है। ऐसी स्िथति है, जिसके कारण यह बात उभरकर आती है कि आंतरिक सुरक्षा के वातावरण मे पिछले दो दशकों में जमीन और आसमान का अंतर हो गया है। मैं समझता हूं कि वह शायद अजीत चौधरी थे, उनका अपने भाषण के आखिर में जो बयान था, वह मैं सुन रहा था। उन्होंने उल्लेख किया थाThe genesis of militancy in Jammu and Kashmir lies in the 1971 war ऐसा ही कुछ आपने कहा था। अध्यक्ष महोदय, उसमें मैं सचाई बताना चाहूंगा, जो कुछ उन्होंने कहा, वह एक प्रकार से सही विश्लेषण है। १९७१ में पाकिस्तान की जो भारी पराजय हुई, उसने पाकिस्तान को सोचने के लिए मजबूर किया कि रणभूमि में भारत की सेना के साथ मुकाबला करना सहज नहीं है और फिर उन्होंने अपने मलिट्री जनरलों के साथ बैठकर रणनीति बदली और रणनीति बदलते हुए, जो उनका विचार-विमर्ष हुआ, कहीं कुछ अखबारों में छपा है, जनरल जिला उल हक ने अपने मलिट्री कमांडरों से बात कर के कहा कि अब हमें एक स्ट्रैटेजी अपनानी पड़ेगी और उसके तहत एक "टौपेक" नाम से कार्रवाई करना नश्िचत किया गया। यह भाषण १९७३-७४ का भाषण है, लेकिन उसकी तैयारी करते-करते और उसे क़ियान्िवत करते-करते उनको समय लग गया। ८०वें दशक मेंIn the eighties, it was implemented or executed और योजनाबद्ध रूप से उन्होंने पंजाब से शुरू किया। श्री श्यामाचरण शुकल (महासमुन्द) : अध्यक्ष महोदय, मैं आडवाणी जी का ध्यान एक बात की ओर आकर्िषत करना चाहता हूं। वे इस बात से सहमत होंगे कि पाकिस्तान ने १९८५, १९८६ और १९८७ के आसपास से बेधड़क, निडर होकर के मिलीटेंसी को बढ़ाया, चाहे पंजाब हो या जम्मू-कश्मीर। श्री लाल कृष्ण आडवाणी; मैं, इसमें इसलिए नहीं जाना चाहता कयोंकि मेरा अपना विश्लेषण है कि यह शिमला एग्रीमेंट के बाद, पाकिस्तान ने हमसे जो कुछ कहा, उसके विपरीत काम करते हुए, न्यूकलीयर बम की दिशा में कदम बढ़ाना शुरू किया।This was part of an overall strategy. शिमाल एग्रीमेंट के बाद कया हुआ-I do not want to score points today, I want to simply point out that. उसके बाद प्राकसी वार का जन्म हुआ। वह १९७१ के युद्ध में से हुआ और प्राकसी वार में जब पाकिस्तान को चोट लगनी शुरू हुई और उनको एक प्रकार से लगा कि पाकिस्तान प्रॉकसी वार में भी सफल नहीं हो रहा है, उसके ऊपर भी धीरे-धीरे भारत अपना अंकुश जमा रहा है। तब उसमें से कारगिल की उत्पत्ित हुई। कारगिल में से प्रॉकसी को वार तीव्र कर, आतंकवाद को आगे बढ़ा।So, all the steps of Pakistan result from failure and frustration, not from confidence and hope. जितनी प्रॉकसी वार पहले थी, १९७१ में जो पाकिस्तान को विफलता मिली, उसकी पराजय हुई और जब वे प्रॉकसी वार में भी सफल नहीं हुए, तो कारगिल का जन्म हुआ और जब कारगिल में विफल हुए, तो इन दिनों जो हिन्सा हम देख रहे हैं, वह उसमें जन्मी है। जो बादामी बाग और इधर-उधर घटनाएं हो रही हैं, ये उसी का परिणाम हैं। ये कभी बन्द नहीं हुई हैं। मैं आंकड़े भी देखता हूं, लेकिन मैं आंकड़ों के आधार पर कभी दावा नहीं करूंगा कि उनके आतंकवादियों की म्ृात्यु ज्यादा हो रही है और हमारे लोगों की कम, मैं यह नहीं कहूंगा। मैं मानता हूं कि युद्ध में भी हमारा इतना नुकसान नहीं हुआ जितना कि प्रॉकसी वार में हुआ। इसलिए मुत्तेमवार जी ने कहा कि हमारे जितने लोग प्रॉकसी वार में मारे गए उतने प्रत्यक्ष युद्ध में नहीं मरे। मेरे पास पिछले १० साल के आंकड़े हैं। उनके अनुसार निरीह नागरिक, सवलियन्स ७,९६० मरे हैं।I am simply counting the number of toll from 1988-89 onwards. मिलीटेंट को सिकयोरिटी वाले मारते रहे हैं।Ten thousand seven hundred and twenty seven militants had been killed during the same period though the cost that we have had to bear is the death of 2,039 securitymen. २०३९ सिकयोरिटी मैन हमारे मारे गये। उनका कोई सिकयोरिटी मैन नहीं मारा गया। अप्रत्यक्ष युद्ध, प्रॉकसी वार का जो सबसे बड़ा नुकसान है, वह यह है कIt is our securitymen, our Jawans, our Armymen, our paramilitary forces" men who are being killed and not one from the Pakistan side. On the other hand - युद्ध होता है तो उसमें हमारे ४०० लोग कारगिल में मारे गये तो उनके ६०० मारे गये और सब सिकयोरिटी मैन मारे गये। उनके भी सिकयोरिटी मैन मारे गये। उनके कोई मर्सीनरीज नहीं थे। ये सब प्रायः मर्सीनरीज थे। अच्छी बात अगर कोई है, राजेश जी ने उल्लेख किया कि एक बार राजीव जी ने कहीं कहा कि हम कहीं १९९० में वापिस तो नहीं पहुंच जायेंगे। मैं यह मानता हूं कि जम्मू कश्मीर में जो उग्रवाद हुआ है, उसमेंThe worst years were 1989, 1990 and 1991. These were the worst years. But that phase continued for a long time. यहां तक कि जम्मू कश्मीर और खासकर कश्मीर घाटी, उसमें आजीविका का प्रमुख आधार है, वह पर्यटन है, टूरिज्म है।Tourism has absolutely dried up. मेरे पास टूरिज्म के आंकड़े हैं, जो कि आश्चर्यकारक हैं। १९९५ में सारे भारतवर्ष से डोमेस्िटक टूरिस्ट ३२२ गये। १९९६ में ३७५, १९९७ में ७०२९, १९९८ में ९९,६३६ और १९९९ में १,९४,३२ टूरिस्ट गये हैं। मैंने १९९९ के जो आंकड़ें बताये उनमें मैं १,१०,३४५ अमरनाथ के यात्रियों को नहीं गिन रहा हूं। उनमें वैष्णो देवी जो ४ लाख यात्री गये हैं, उनको मैं नहीं गिन रहा हूं। मैं मानता हूं कि यह जो मापदंड है। वहां की स्िथति नार्मेसी की ओर बढ़ रही है या नहीं बढ़ रही है, इसको मापने काThis is a more correct barometre rather than the number of people killed. कितने लोग मारे गये, कितने लोग नहीं मारे गये, मैं उससे ज्यादा इसको पैरामीटर मानता हूं कयोंक सेंस ऑफ सिकयोरिटी जब होगा तभी लोग जायेंगे, नहीं तो नहीं जायेंगे। जैसे ३२२ लोग एक साल में गये हैं। ३७५ लोग एक साल में गये हैं , कोई जाने को तैयार नहीं है। यहां तक कि उन ईयर्स में मैंने देखा कि पहले विदेशी आते थे, देशी नहीं जाते थे। लेकिन जब से एक घटना हुई जिसमें अलग-अलग देशों से आये हुए पांच विदेशियों का अपहरण कर लिया गया और वे गायब हो गये, नहीं मिले। आज तक उनके रिश्तेदार आकर मुझे मिलते हैं। उनके ऐम्बेसेडर आकर मिलते हैं। हम उन्हें नहीं खोज पाये और हो सकता है कि वे बचे भी न हों, खत्म हो गये हों। लेकिन यह जो एक पैरामीटर है, उस पैरामीटर के आधार पर विश्वास होता है कि चाहे संकटपूर्ण स्िथति है, चाहे हिंसा आज भी है। हम हिंसा को पूरी तरह समाप्त नहीं कर पाये हैं लेकिन हम इसके ऊपर विजय अवश्य पायेंगे, यह एक विश्वास मन में है और वह विश्वास उस विश्वास का एक आधार है हमारा अपना पंजाब का अनुभव। एक समय था जब पंजाब में, मैं कई बार जाता था और लगता था कि यहां तो कुछ बदलेगा नहीं। यहां कुछ परिवर्तन आयेगा नहीं। यहां तो सालों साल तक ऐसे ही चलेगा। शाम को सड़के सुनसान हो जाती थी और घर से कोई नहीं निकलता था। लेकिन परिवर्तन आया। परिवर्तन आने के लिए मैं हमेशा कहता हूं और आज भी कहता हूं कि मैरे उत्तर पूर्व के भाई यहां बैठे हैं, जो हमेशा मुझसे आकर आग्रह करते हैं कि पैरामलिटरी फोर्सेस भेजो, सेना भेजो, यह भेजो आदि। मैं सबको कहता हूं कि पंजाब का अनुभव इस बात को बताता है कि उग्रवाद के ऊपर अगर विजय पानी है, तो यह सहायक होंगे। आर्मी सेना सहायक होगी, अर्दध सैनिक बल सहायक होंगे। मुख्यत: वहां की जनता, उस प्रदेश की सरकार, उस प्रदेश की पुलिस यह जो तीन तत्व हैं, उन तत्वों के आधार पर विजय प्राप्त होगी और इसका जम्मू कश्मीर से भी संबंध है। जितनी मात्रा में हम वहां की जनता, वहां की सरकार, वहां की स्थानीय पुलिस उसको इस बात के लिए तैयार कर सकते हैं कि हम इसका मुकाबला करेंगे, इसको समाप्त करेंगे, उतनी मात्रा में सफलता मिलेगी। इस सफलता में केन्द्र सरकार की सेना और पैरा-मलिट्री पुलिस सहायक होगी। लेकिन केवल केन्द्र सरकार की सेना और पैरा-मलिट्री फोर्स के आधार पर इस संकट का निवारण संभव नहीं है। मैं जम्मू कश्मीर की बात कहूं चाहे उत्तर पूर्व की बात कहूं, मैं मानता हूं कि इन दिनों में सबसे अच्छी स्िथति जो हुई है, वह यह है कि १९८९-९०-९१ के प्रारंभिक वषर्ों में जितने उग्रवादी थे, वे प्राय: वे थे जिनको पाकिस्तान, आई.एस.आई. के लोग जम्मू कश्मीर से ले जाकर, वहां प्रशिक्षण देकर वापिस भेजते थे। धीरे-धीरे जो लोकल जम्मू कश्मीर के लोगों को ले जाने की बात है, वह खत्म होती गई। विगत वषर्ों में जितने लोग गिरफतार होते हैं, मारे जाते हैं, प्राय: वे जम्मू कश्मीर के नहीं हैं, बहुत कम परसैंटेज है, अधिकांश परसैंटेज पाकिस्तान, अफगानिस्तान का है, और भी कई देशों का है। कभी-कभी मैंने किसी सवाल के उत्तर में बताया होगा कि कितने-कितने लोग किस-किस देश के थे जिनको मारा गया।But all of them are mercenaries recruited by Pakistan to be sent here as cannon fodder. भेजो उनको, मरवाओ उनको। इसलिए हमारी सेना के लोग भी कहते हैं कि इस लड़ाई में हमारे सिकयुरिटीमैन मरते हैं, उनके नहीं मरते। लेकिन अच्छा लक्षण यह है कि हमारे यहां से लोग नहीं जाते, कम जाते हैं। धीरे-धीरे उनकी संख्या कम होती गई है। जितनी मात्रा में यह होगा उतनी मात्रा में हमको सफलता मिलेगी। यही चीज मैं उत्तर पूर्व के लिए भी कह सकता हूं। विगत वषर्ों में खासकर असम में ऐसी घटनाएं हुई हैं जहां पर नागरिकों ने उग्रवादियों का विरोध किया है और उग्रवादियों को पकड़कर लिंच किया है। सार्वजनिक रूप से विरोध तो किया ही है, हजारों की संख्या में इकट्ठे होकर उन्होंने प्रोटैस्ट किया है कि हम इसको बरदाश्त नहीं करेंगे। मेरे पास अनेक ऐसे उदाहरण आए हैं, सूचनाएं मिली हैं जिसमें कई जिलों में इस प्रकार की घटनाएं हुई हैं। ढुबरी डिस्टि्रकट में दो घटनाएं हुई, बरपेटा में दो घटनाएं हुईं, कामरुप में दो घटनाएं हुईं, नलबाड़ी में हुईं, उदयगिरी नाम के एक स्थान में हुईं। मेरे सामने इस प्रकार की आठ अलग-अलग घटनाएं आई हैं जहां पर आम जनता ने सार्वजनिक रूप से हिम्मत करके, साहस करके उल्फा के आतंकवादियों के प्रति अपना रोष प्रकट किया है, क्षोभ प्रकट किया है। हम यह स्िथति जितनी बढ़ा सकेंगे उतना इस मामले में सफल होंगे। राजेश जी ने एक बात कही, पता नहीं कयों कही। उन्होंने कहा कि हम पंजाब और जम्मू कश्मीर के बीच सिकयुरिटी रिलेटेड एकसपैंडीचर में अंतर कयों करते हैं। नहीं करते। हम सिकयुरिटी रिलेटेड एकसपैंडीचर जैसे पंजाब को देते थे वैसे आज जम्मू कश्मीर को भी देते हैं। कहीं-कहीं पर थोड़ा विवाद होता है कि सिकयुरिटी रिलेटेड एकसपैंडीचर किसको माना जा सकता है। वह विवाद हम तय कर लेते हैं। मैं कह सकता हूं कि हमने आज तक जम्मू कश्मीर राज्य को सिकयुरिटी रिलेटेड एकसपैंडीचर के नाम से लगभग १४९८ करोड़ रुपये दिए।... (व्यवधान)
मैंने बताया कि अगर कोई विवाद है तो वह इस बात पर है कि इसको सिकयुरिटी रिलेटेड एकसपैंडीचर माना जाए या नहीं और उसे हम सॉट आउट कर लेते हैं। हमने इसी साल सिकयुरिटी रिलेटेड एकसपैंडीचर के नाते १८ करोड़ रुपये दिए हैं। वैद्य विष्णु बोले थे और उन्होंने कहा था, सही कहा था कि हमारी सेना, हमारे अर्धसैनिक बल के अलावा आज आतंकवादियों का मुकाबला करने के लिए जो विलेज डिफैंस कोर बनी है, वह बहुत इफैकिटव है। उनको और बढ़ाने की उन्होंने जरूरत महसूस की। मैं इस बात को स्वीकार करता हूं और उनको जानकारी देना चाहूंगा कि कयोंकि खर्च उस समय प्रदेश की सरकार करती है, सैण्ट्रल गवर्नमेंट उसको रीअम्बर्स करती है। जब इन वी.बी.सीज़. को बनाने का निर्णय हुआ था तो १२८८५ वी.बी.सीज़. की संख्या थी, लेकिन हमने उनको कनवे किया है कि हम १८,००० वी.बी.सीज़. का खर्च भी रीअम्बर्स करेंगे। मुझे बहुत खुशी है कि नोर्थ ईस्ट से अनेक सदस्यों ने अपनी-अपनी राय रखी है। नोर्थ ईस्ट ही नहीं, पश्िचम बंगाल के भी चार सदस्य बोले थे। कृष्णा जी जब बोली थीं कि हमारे यहां पर भी आई.एस.आई. का संकट है और उसकी चिन्ता करनी चाहिए। मैं उनको कह सकता हूं कि यह जो चिन्ता उन्होंने प्रकट की, वैसी ही चिन्ता उनके प्रदेश के ग्ृाह मंत्री ने आकर मुझसे प्रकट की। वे कुछ ही दिन पहले मेरे पास आये थे और कहा कि आप जब आई.एस.आई. की चर्चा कर रहे थे, आंतरिक सुरक्षा के लिए आई.एस.आई. ने जो संकट पैदा किये हैं, उनका जिक़ कहीं करते हैं तो आपके सार्वजनिक वकतव्यों में जम्मू-कश्मीर का उल्लेख होता है, पंजाब का उल्लेख होता है, नोर्थ ईस्ट का उल्लेख होता है, लेकिन पश्िचम बंगाल का उल्लेख नहीं होता है। मैं आपको यह कहने आया हूं कि पश्िचम बंगाल में भी यह समस्या गम्भीर है और उसमें केन्द्र की सरकार और पश्िचम बंगाल की सरकार दोनों सहकार करके, मिलकर उसका मुकाबला करें, यह बल देने आये थे। मैंने उनको कहा कि मैं तो आपके कथन का स्वागत करता हूं। मैं इतना जानता हूं कि आई.एस.आई. की गतवधियों के बारे में इस सरकार ने देश भर में और विदेश में भी एक वातावरण पैदा करने की एक प्रामाणिक कोशिश की है और यह कहा है कि यह समस्या केवल किसी राज्य की नहीं है। क़ास बोर्डर टैरेरिज्म का अगर हम सामूहिक रूप से विश्व भर के सभी देश मुकाबला करने के लिए मन नहीं बनाएंगे और सोचेंगे कि ठीक है, यह भारत की समस्या होगी, इसमें समस्या का कारण कश्मीर है, इसके कारण पाकिस्तान कुछ कर रहा है, उसकी ओर उदासीन होंगे तो उसका खमियाजा विश्व भर को भुगतना पड़ेगा, सारी दुनिया को भुगतना पड़ेंगा, यह हमने विश्व भर में बोलने की कोशिश की है। मैं कह सकता हूं कि देश में भी इसी प्रकार की जाग्ृाति पैदा करने की कोशिश होनी चाहिए। मैं तो देख रहा था कि इन पिछले दो सालों में इतने सवाल माननीय सदस्यों की ओर से आई.एस.आई. की गतवधियों के बारे में जानने के लिए आये हैं। उसके पहले की लिस्ट निकालो तो १९९१ से लेकर १९९७ तक मैंने देखा कि बहुत कम सवाल हैं और यह अच्छी बात है और इसी कारण जब एक बार ग्ृाह मंत्रालय की कन्सलटेटिव कमेटी की मीटिंग हुई थी तो उस कन्सलटेटिव कमेटी की मीटिंग में दो घंटे का पूरा प्रजेण्टेशन हमारे विभाग ने, ग्ृाह मंत्रालय ने किया था कि आई.एस.आई. ने किस प्रकार अपनी गतवधियां बढ़ाई हैं। उसको देखने के बाद सभी सदस्य जितने वहां पर उपस्िथत थे, सोमनाथ बाबू वहां पर उपस्िथत थे, बनातवाला जी उपस्िथत थे, सब ने उसी समय कहा, यह कल्पना आई कि इस प्रकार की चीज देश के सामने रखनी चाहिए और वहां पर मांग थी, शायद बनातवाला जी ने मांग की कि इस पर व्हाइट पेपर प्रकाशित होना चाहिए। वह व्हाइट पेपर प्रकाशित करने का विचार सरकार का है। उसमें कुछ कारणों से कुछ विलम्ब हुआ है, लेकिन वह शीघ्र प्रकाशित किया जायेगा और आपके सामने रखा जायेगा। इतना मैं कह सकता हूं। उत्तर पूर्व में वैसे तो सात राज्य माने जाते हैं... (व्यवधान) श्री श्यामाचरण शुकल : मैं एक बात आपसे पूछना चाहता हूं कि पाकिस्तान को हम टैरेरिस्ट स्टेट घोषित करने में अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर कयों सफल नहीं हो पा रहे हैं? श्री लाल कृष्ण आडवाणी : पाकिस्तान को टैरेरिस्ट स्टेट घोषित करें तो उसकी टैरेरिस्ट स्टेट की घोषणा का असर अमेरिका पर होगा, कयोंकि उनके अपने कानून हैं। इसकी मांग तो बहुत समय से होती रही है, लेकिन पाकिस्तान में क़ास बोर्डर टैरेरिज्म के बारे में पहली-पहली बार अमेरिका की तरफ से अगर कोई टिप्पणियां हुई हैं तो इसी १९९९ में हुई हैं। इससे पहले तो कोई उसको रिकगनाइज़ करने को तैयार नहीं था। उसको यह मानते थे कि ठीक है, यह तो चलता है, आपकी तरफ से भी होता होगा, उनकी तरफ से भी होता है,they never took notice of it. इस बार मुझे याद है कि कारगिल के बाद जो घटना हुई। उसमें पहली बार सार्वजनिक रूप से अमेरिका की ओर से भी उस पर टिप्पणी की गई। उसकी आलोजना की गई, निन्दा की गई। इस दिशा में हमारा प्रयत्न जारी है, लेकिन मैं मानता हूं, कुल मिलाकर अगर आतंकवाद को समाप्त करना है, तो अपने बलबूते पर करेंगे, जनता के समर्थन से करेंगे। विदेशी ताकतों और अन्तरराष्ट्रीय जनमत सहायक जरूर होगा और सहायक करने के लिए हमारी तरफ से कोई कसर हम उठाकर नहीं रखेंगे, लेकिन कोई दूसरा देश उस देश को टैरेरिस्ट स्टेट घोषित करता है या नहीं करता है, इसके ऊपर हमारी सफलता या विफलता निर्भर नहीं। इस बारे में मैं इतना ही कहना चाहता हूं। जहां तक पूवर्ोत्तर राज्यों का प्रश्न है, सात राज्यों की नार्थ-ईस्ट काउन्िसल बनी हुई है, लेकिन सरकार का विचार है कि सकिकम को भी इसमें जोड़े। कुल मिलाकर नार्थ-ईस्ट में आठ राज्य हैं। इन आठ राज्यों में चार राज्य ऐसे हैं, जहां पर अपेक्षाकृत शान्ित है। वहां पर उग्रवाद, आतंकवाद इस रूप में नहीं है, जैसा कि बाकी चार राज्यों में है। ये चार राज्य हैं - मिजोराम, अरुणाचल प्रदेश, सकिकम और मेघालय। इन चार राज्यों में, मैं मानता हूं, अपेक्षाकृत शान्ित है। लेकिन बाकी चार राज्यों अर्थात् असम, त्रिपुरा, मणिपुर और नागालैंड में स्िथति दूसरी है। नागालैंड में आज सीज-फायर नाम से समझौता हुआ है,NSCM(I.M.) और भारत सरकार के बीच। हम आए, उससे पहले हुआ था। वह सीज फायर जारी है और यह थोड़े-थोड़े काल के लिए होता है, लेकिन अब साल भर के लिए चला है। कल नागालैंड के माननीय सदस्य ने कुछ बातें कहीं, उनमें वजन है। मैं इतना ही कह सकता हूं कि सीज फायर के जो ग्राउन्ड रूल्स बने हैं, उन ग्राउन्ड रूल्स का उल्लंघन होता रहा है। उनका उल्लंघन न हो और इस बात की व्यवस्था हमारे सुरक्षा कर्मी करें, यह उनको निर्देश दिया गया है। उस दिशा में हम चन्ितत हैं और गम्भीर हैं। पिछले दिनों हमारे नागालैंड के मुख्यमंत्री को एम्बुश करके जिस प्रकार की घटना हुई, वह अत्यन्त गम्भीर घटना है, जिसका हमने नोटिस लिया है। स्वयं माननीय सदस्य ने अपनी सुरक्षा केबारे में कहा है। सुरक्षा की बात मैंने ग्ृाह मंत्रालय के बताई है और उसका उपयुकत प्रबन्ध हो जाएगा।SHRI K.A. SANGTAM (NAGALAND): Mr. Speaker, Sir, could I just seek a clarification from the hon. Home Minister? Since this is directly related to the State of Nagaland, which I represent, I would like to seek a clarification.
Sir, an attempt on the life of the hon. Chief Minister of Nagaland was made on the 29th. I would like to ask him about the findings of the investigations made on the case by the Ministry of the Home Affairs. What kind of action is being proposed against the culprits and what measures are being adopted to protect the lives of the leaders of Nagaland who have been targeted a number of times in the past?
Sir, again, this morning I was reading a reply ... (Interruptions)
MR. SPEAKER: Let the hon. Minister complete his reply and then you can ask clarifications on that.
SHRI L.K. ADVANI : I am not merely dealing with Nagaland here. I picked up the two points mentioned by you. I have noted that. If there is any separate question, then certainly I would answer that. हमारे असम के माननीय सदस्य, श्री बैसीमुथियारी, ने बहुत बार आग्रहपूर्वक एक अलग बोडोलैंड बनाने की बात कही है। वे इसका आग्रह करते आए हैं, लेकिन कल उन्होंने एक बात कही, जिसका मैं स्वागत करता हूं। वह बात यह है कि जो उग्रवादी भारत से अलग होने की बात करते हैं, वे उनका विरोध करते हैं और वे इस प्रकार की सिसैशन प्रव्ृात्ित के साथ कभी कोई समझौता नहीं करेंगे। इस बाते के लिए मैं उनका स्वागत करता हूं। अलग राज्य बोडोलैंड बनाने में अनके कठिनाइयां है और उन कठिनाइयों के वे स्वयं जानते हैं, कयोंकि उन्हीं कठिनाइयों के कारण १९९३ में एक समझौता हुआ, जिसको बोडो-एकार्ड कहते हैं। बोडो एकार्ड के इम्पलीमेंटेशन में कमियां हैं। इसकी चर्चा मुझे करते रहे हैं। उन कमियों को दूर करने का प्रयत्न करेंगे, लेकिन कुल मिलाकर बोडो की जनसंख्या जितनी है और जिस प्रकार से वह फैला हुआ और जिस भाग को वे बोडोलैंड बनाना चाहते हैं, वह अलग प्रदेश भी बन जाएगा, उसमें भी बोडो की संख्या शायद ३०-३५ प्रतिशत से ज्यादा नहीं बनती।SHRI SANSUMA KHUNGGUR BWISWMUTHIARY (KOKRAJHAR): Excuse me, Sir, but I strongly oppose this argument. This is not at all correct.
MR. SPEAKER: The Minister has not yielded. Please sit down. श्री लाल कृष्ण आडवाणी : मेरे किसी तर्क को न मानने का आपको पूरा अधिकार है। पहली बात यह है कि सिसैशन का विरोध सारे सदन ने किया। उसमें हमारे बोडो क्षेत्र के प्रतनधि भी सम्िमलित हैं, इसका मैं स्वागत करता हूं। दूसरी बात मैं मानता हूं कि उनकी समस्याओं का हल भी चर्चा से निकलेगा, आतंकवाद से नहीं निकलेगा। अगर कोई सरकार गोली और बंदूक की भाषा सुनती है तो वह देश का भला नहीं करेगी। इसलिए मैं वार्ता करने के हमेशा पक्ष में हूं, लेकिन वार्ता इस प्रकार से कभी नहीं करनी चाहिए कि ऐसा लगे कि वह वार्ता बम और गोली की संस्कृति का परिणाम है। वार्ता करनी चाहिए, इसके अलावा दूसरा कोई चारा नहीं है। आज अगर मिजोरम में शांति है तो उसका कारण यह है कि वार्ता उस सूरत में हुई, जब बहुत लोगों को लगा कि बम से, गोली और हिंसा से काम नहीं चलेगा। इसलिए जो भी सरकार केन्द्र में आए उसे इस बात का हमेशा ध्यान रखना चाहिए, वार्ता की सदैव तत्परता रखते हुए भी इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि वार्ता किन परस्िथतियों में की जाए, किन परस्िथतियों में न की जाए और किस के साथ की जाए। इस बात का हमेशा ध्यान रखें कि हमेशा यह संदेश जाए कि गोली और बम के कारण किसी को अपने राजनैतिक उद्देश्य प्राप्त हो जाएंगे, यह कम से कम सरकार स्वीकार नहीं करेगी।... (व्यवधान)
SHRI SANSUMA KHUNGGUR BWISWMUTHIARY : Sir, may I seek a clarification from the hon. Minister regarding what he said about Assam.
MR. SPEAKER: Not now please. श्री लाल कृष्ण आडवाणी : मैं यह भी बताना चाहता हूं कि हमारे उस क्षेत्र के प्रतनधियों के साथ मंत्रालय की चर्चा लगातार चलती रही है। मुझे वहां के राज्यपाल ने सूचित किया कि उनकी भी चर्चा होती रही है। हम समझते हैं कि उनकी जो समस्याएं जायज हैं, उनका निराकरण हम कर लेंगे।... (व्यवधान)
SHRI SANSUMA KHUNGGUR BWISWMUTHIARY : What is the problem, Sir. Officials are not the decisive authorities to deal with the Bodoland issue. It is the political leadership which has to deal with this issue with positively for finding out means and ways to resolve the issue politically on a permanent footing.
SHRI L.K. ADVANI: I agree with you. त्रिपुरा के बारे में हमारे समर चौधरी जी ने चिन्ता प्रकट की, उसमें मैं भी भागीदार हूं। वहां बहुत सारे निरीह नागरिकों की हत्याएं हुईं और बहुत सारे अपहरण हुए हैं। यह समर जी को मालूम है। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के चार-पांच प्रमुख अधिकारी अगस्त से गायब हैं, उनका आज तक पता नहीं। केन्द्र सरकार और प्रदेश सरकार, इन दोनों ने मिल कर प्रयत्न किए हैं, लेकिन अभी तक सफलता नहीं मिली है। मुझे पिछले दिनों त्रिपुरा के मुख्य मंत्री मिले थे और प्रधानमंत्री जी से भी मिले थे। अगर कहीं यह धारणा है कि उसमें केन्द्र सरकार की फोर्सेस की कमी के कारण है, ऐसा मुझे नहीं लगता है। मैं देख रहा था, ... (व्यवधान)SHRI SOMNATH CHATTERJEE (BOLPUR): Sir, I had the opportunity to go there on a visit. After my visit, I submitted a report to the Prime Minister. I wrote to the Home Minister also. It is an open border of 895 kilometres which is not there even in Punjab. It is a very sparsely populated State because of its terrain. Near the border, they go to Bangladesh in no time and people are able to see it. People cannot go to Bangladesh, 30 camps are being run in Bangladesh. They are coming and going with great ease. There are plain areas also there and Bangladesh is just across the road.
I fully agree with the view that people should resist it. But this facility should also be provided. Security forces are necessary. It is a very small State with a population of three million people.
15.00 hrs. श्री लाल कृष्ण आडवाणी : माननीय सोमनाथ जी ने जो कुछ कहा है मैं उसे मानता हूं। यह भूगोल है, इस पर दो मत नहीं हो सकते हैं। मेरे पास आंकड़े हैं, त्रिपुरा में १९९५ में सीआरपीएफ की ३० कंपनियां थीं लेकिन आज १९९९ में वहां पर ७५ कंपनियां हैं। यह ठीक है कि कारगिल के समय में वहां से हमने कुछ कंपनियां हटायी थीं। लेकिन आज प्री-कारगिल से भी बेहतर स्िथति है। लेकिन उसके बावजूद भी कठिनाइयां हैं और कठिनाइयां इस कारण हैं कSHRI SONTOSH MOHAN DEV (SILCHAR): I was also dealing with Tripura. I request the hon. Minister to deploy Assam Rifles there because it is the most effective force for Tripura. श्री सोमनाथ चटर्जी : वहां सीआरपीएफ को कोई नहीं चाहता। SHRI L.K. ADVANI: Shri Sontosh Mohan Dev may be aware that Assam Rifles are under the overall control of the Army and I cannot deploy them there.
SHRI SONTOSH MOHAN DEV : You can request for it.
SHRI L.K. ADVANI: I have already requested, but they also have their own problems. Because of those problems, today they have been able to perhaps spare 18 companies of the Assam Rifles. Eighteen companies are still deployed there in Tripura.
SHRI SAMAR CHOUDHURY (TRIPURA WEST): But now, they are not there. Earlier, once that deployment was there. But Army has already been lifted and shifted from Tripura. One Army cantonment was there earlier but that is completely dry. Now, not a single battalion of army security force is there who can defend Tripura. Assam rifles were also reduced. This is the position there. श्री सोमनाथ चटर्जी : आप वहां जाकर एक दफा स्िथति देखिये। श्री लाल कृष्ण आडवाणी: ठीक है, मैं जाकर भी देखूंगा। अभी मेरी चीफ-मनिस्टर साहब से विस्तार से बातचीत हुई। हमारे जो ऑफिसर इस मामले को डील करते हैं वे वहां स्िथति देखकर आये हैं। हमारी फोर्सेज भी अगर किसी तरफ ध्यान दे रही हैं तो उसमें जम्मू-काश्मीर के बाद त्रिपुरा है, जहां पर पूरा ध्यान दिया जा रहा है। मैं जानता हूं वहां का भूगोल जैसा है, सीमाएं जैसी हैं। वहां पर बंगला देश, नेपाल और सीमावर्ती देशों में आईएसआई ने जिस प्रकार से अपनी गतवधियां बढ़ाने की कोशिशें की हैं। हमने सब ओर मल्टी-प्रोग्ड कोशिश की है। नेपाल, बंगलादेश, बर्मा और भूटान से भी हमारी इस विषय में वार्ता होती है कि किस प्रकार इस पर अंकुश लगाया जाए। श्री अमर राय प्रधान (कूचबिहार) : वे तो भूटान में ही ट्रेनिंग ले रहे हैं, उनके लिए आपने कया कदम उठाए हैं? श्री लाल कृष्ण आडवाणी: आज से ६ साल पहले वे सारी की सारी गतवधियां असम से ही चलाते थे। लेकिन वहां उनका समर्थन कम होता गया। इसलिए उनको असम छोड़कर और कहीं शरण लेनी पड़ी। भूटान से हमारी वार्ता चलती रहती है। अध्यक्ष जी, मैंने चाहे बल सुरक्षा बलों पर दिया होगा लेकिन इस बात से कोई इंकार नहीं कर सकता है कि आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए सुरक्षा की ओर ध्यान देना और साथ-साथ विकास की ओर ध्यान देना, ये दोनों बातें साथ-साथ चलती हैं। कभी किसी एक की उपेक्षा नहीं हो सकती है। उत्तर-पूर्वी क्षेत्र के संबंध में मैं घोषणा करना चाहूंगा। प्रधान मंत्री जी से बात हुई है कि जनवरी के मध्य में २० या २१ जनवरी को एक नार्थ-ईस्टर्न स्टेटस के सभी मुख्यमंत्रियों और सभी राज्यपालों की एक कांफ्रेस ईस्टर्न थीम को कंसीडर करने के लिए "सुरक्षा और विकास" नाम से हम करने वाले हैं।SHRI SANSUMA KHUNGGUR BWISWMUTHIARY : What about political solution, Sir?
SHRI L.K. ADVANI: Yes, there will be a political solution.
MR. SPEAKER: Shri Bwiswmuthiary, please take your seat.
... (Interruptions)
SHRI L.K. ADVANI: Even about their problems, there can be only political solutions and except that no other solution is there. But those political solutions should be brought about in a manner as not to put a premium on violence and the extremism. पिछले दिनों आई.एस.आई. की काफी चर्चा हुई। मैं साथ-साथ एकाउन्ट लेता गया कि एकचुअली कया होता है? मुझे यह कहते खुशी है कि पिछले डेढ़-दो वषर्ों में कुल मिला कर जिस को इंटैलजिएंस की भाषा में मॉडयूल्स कहते हैं, ऐसे ४५ आई.एस.आई बैकड मौडूयल्स डिटैकट किए और उनको स्मैश किया। इन्हें ४५ गिरोह कह सकते हैं। उन्हें अड्डा कहना ठीक नहीं होगा। अड्डे का संबंध स्थान से है। ४५ गिरोह जो आई.एस.आई. ने संगठित किए, उनकी खोज कर, समाप्त करने में हमें सफलता मिली है। इस सारे प्रोसैस में शायद ११६ लोग गिरफतार किए गए और ८ लोग ऑपरेशन में मारे गए। इसके आधार पर मन में विश्वास होता है जो राष्ट्रपति जी ने देश और संसद के सामने सार्वजनिक रूप से सरकार की नीति की घोषणा की। उन्होंने एक बहुत बड़ा एम्िबशियस डिकलरेशन किया।It is stated as follows in paragraph 34 of the Address of the President of India on October, 25th: -
"The Prime Minister has announced that Government will follow the principle of "Zero Tolerance" while dealing with terrorism. Simultaneously, Government will continue to focus international attention on the deadly impact of trans-border terrorism that has claimed countless lives all over the world. There is no dearth of evidence how state-sponsored terrorism has affected peace and stability in South Asia and beyond. India is actively working to initiate concerted international opinion and action against state-sponsored terrorism in any part of the world. The menace of illicit drug trafficking, money laundering, and narco-terrorism has also to be effectively countered through both national and international efforts." हमने इस वकतव्य में अपनी नीति की घोषणा की। इसके दो प्रौन्गस हैं। एक देश के भीतर जीरो टौलरेंस का एटिटयूड टूवर्डस टैरारिज्म है और दूसरा अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर सारी दुनिया के देशों को टेरारिज्म के खिलाफ मौबिलाइज करने का है। मुझे विश्वास है कि सरकार इसमें सफलता पाएगी।SHRI RAJESH PILOT (DAUSA): I would like to raise one point.
MR. SPEAKER: You may ask for one or two clarifications. I can allow only one or two clarifications. श्री राजेश पायलट (दौसा) मैंने कल बहुत प्वाइंटिड कवेश्चन्स पूछे थे। आज बहुत सही ढंग से ग्ृाह मंत्री ने कुछ बातें कहीं। हमारा कल यह पूछने का मन था कि मलिटैंसी जम्मू-कश्मीर में स्कवेयर हुई है या नहीं? आपने कहा कि वहां बाहर के लोग ज्यादा और अन्दर के कम आए हैं। घुसपैठिए पिछले तीन साल के मुकाबले इस साल ज्यादा आए हैं। आप रिकॉर्ड देख कर हमें बताएं। १९९९ में घुसपैठ ज्यादा से ज्यादा हुआ है। यहां ४० परसैंट विदेशी घुसपैठिए आए हैं।... (व्यवधान)
जब आडवाणी जी विरोधी दल में थे तो डोडा में कंटोनमैंट बनाने की बात चलती थी। उसमें पैसा एलाट हुआ लेकिन उसमें कया प्रगति हुई है? वहां कंटोनमैंट बन रहा है या नहीं? इसका यहां जिक़ नहीं किया गया। एन.एस.सी.एन. के साथ बातचीत पिछले तीन साल से चल रही है। कया संसद का यह पूछने का हक नहीं है कि उसमें कया प्रगति हुई है? नैगोसिएशन चल रही है। मेरा अन्दाजा यह है कि सरकार की तरफ से सिनसिएरिटी नहीं है। अब इस काम को खत्म करने का मौका मिला है। वह कहीं हाथ से न निकल जाए, इसका आप ध्यान रखें। मुझे लगता है कि इनका समाधान करने का मन है। जैसा आडवाणी जी ने मिजोराम का उदाहरण दिया। सरकार इनशिएटिव लें और इस नैगोसिएशन को जल्दी सही रास्ते पर लाएं।
SHRI SONTOSH MOHAN DEV : I could not participate yesterday in the debate as my aircraft was late by 4 1/2 hours.
MR. SPEAKER: Today also you are late.
SHRI SONTOSH MOHAN DEV : I would like to raise three pointed questions and nothing else. My first point is that whether the hon. Home Minister is aware that Barrak Valley which is known as the Island of Peace, is now under terrorist activities and our main victim is the tea industry. Every day there are incidents of kidnappings of Managers and Assistant Managers. The Police is now an ineffective lot. They do not have any army to counter it. Only Army and para-military can do it. I have written to you in this regard. What action are you taking?
I would like to draw your attention to the news item that the Governor of Assam and the Army have said that they would give safe passage to terrorists to go to their respective homes with the idea that there will be some change in their minds. We are now nearing the 31st December. I saw that a Mr. Pillai also gave a statement. I would like to know if it is a fact and if so, what is being done about it.
Thirdly, I understand that you are trying to start negotiations. Will there be some negotiations within the Constitutional framework? Earlier, there were some reservations from the Assam parties that negotiations should not be held in foreign countries. But now all parties are saying that if it is within the framework of the Constitution of India, they have no objection to negotiations even outside India. श्री सत्यव्रत चतुर्वेदी (खजुराहो) : माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं ग्ृाह मंत्री जी से एक सैंसेटिव सवाल पूछ रहा हूं... (व्यवधान)
MR. SPEAKER: You have already participated in the debate. You can only ask a specific question. Otherwise, it becomes a debate.
SHRI L.K. ADVANI: You can put your question. ... (Interruptions)
MR. SPEAKER: I understand, this is an important matter. If you have any questions, you can put them. श्री सत्यव्रत चतुर्वेदी : माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं एक ही बात, एक ही कवेश्चन पूछ रहा हूं कि जहां तक टैरेरिज्म का सवाल है, भारत ही अकेला ऐसा देश नहीं है जो इससे परेशान है। अमरीका में और इज्राइल में टैरेरिज्म है। मैं सवाल यह पूछना चाहता हूं कि जिस तरह से इज्राइल ने अपने आसपास के देशों में टैरेरिज्म कीkindergarten of terrorism डील करने की नीति अपनाई है, कया भारत सरकार इस बात पर विचार करेगी? हमारे बार्डर पर टैरेरिस्टस को तैयार किया गया है या जो प्रशिक्षण शविर तैयार किये गये हैं, उन शविरों को नष्ट किया जाये, उनको खत्म किया जाये, इस बारे में हमें सोचना होगा, कया सरकार इन बातों पर विचार करेगी?SHRI K.A. SANGTAM (NAGALAND): I put one question on the floor and the reply which I got was that the hon. Minister is not inclined to accept that question. This is very serious because after the attempt on the Chief Minister"s life, an intelligence report has been sent to all the important newspapers saying that 14 numbers of AK-47 ammunition empty cases, 11 numbers of 7.62 empty cases and a lot of other items were found found when the search of the spot and area was made. Today, why are they declining to give the reply to us? I want to have a reply because it is the privilege of this august House to know.
MR. SPEAKER: What is your question? श्री के.ए. सांगतम : इस सारे हमले में कौन डायरेकट इन्वाल्व्ड है और इस हमले में एकशन कया लिया गया, यह पूछना है? मेरा स्टेट कवश्चन है, इसमें पज़ल करने की कोई बात नहीं है। SHRIMATI KRISHNA BOSE (JADAVPUR): I want to make one proposal. This is very important for the whole nation. ... (Interruptions)
MR. SPEAKER: We have debated this subject for almost four hours and fifteen minutes.
... (Interruptions)
SHRIMATI KRISHNA BOSE : I asked the Home Minister yesterday, apart from strengthening security positions in Jammu and Kashmir, whether they are considering some political negotiations. In the process, we can try to isolate those groups who are openly pro-Pakistan. Are we thinking of being careful with some of the groups who are not blatantly pro-Pakistan so that we do not do anything that would push them into the arms of Pakistan. We should try to get them to the negotiating table. I did not get an answer to this. श्री प्रियरंजन दासमुंशी (रायगंज) : मैं ग्ृाह मंत्री जी को बता देना चाहता हूं कि उन्होंने बड़े ही स्पष्ट रूप से सरकार का रवैया बताया है। लेकिन मैं एक बात पर आपका ध्यान आकर्िषत करना चाहता हूं कि आपने खुद कहा कि त्रिपुरा की समस्या के हल के लिए हमारी बॉर्डर स्टेटस के साथ बात चल रही है। कया मैं आपसे आदर के साथ इतना कह सकता हूं कि त्रिपुरा की समस्या इतनी गंभीर है, आप जल्दी से जल्दी बंगला देश के प्रधान मंत्री के साथ बात करके इस समस्या को हल करने का प्रयास करेंगें तो आपको काफी सफलता मिलेगी।The exchange of talks between the officials of the paramilitary forces or the exchange of visits of the VIPs between two countries will not bring any solution unless diplomatic intervention is sought.
SHRI T.M. SELVAGANPATHI (SALEM): Sir, I have not got a reply from the Minister.
MR. SPEAKER: The procedure is, discussion under Rule 193 ends with the reply of the Minister. Seeing the importance of the matter, I have allowed some of the Members to seek clarifications. You have already participated in the discussion yesterday.
... (Interruptions)
MR. SPEAKER: Please take your seat. This should not become a debate.
... (Interruptions)
MR. SPEAKER: This is not good. Every time you stand up and seek clarifications.
... (Interruptions)
MR. SPEAKER: Please take your seat. श्री लाल कृष्ण आडवाणी: राजेश पायलट जी ने आज एक प्वाइंटेड सवाल पूछा, मैंने ध्यान नहीं दिया, कल आपने इसका जिक़ किया था, वह यह था कि बहुत सालों से यह डिमांड रही है कि डोडा में एक आर्मी कैन्टोनमैंट बनाया जाए। वषर्ों से वह मांग पूरी नहीं हुई। लेकिन इस पर तय हो गया है और इसे स्वीकार कर लिया है और उसके लिए अमाउंट भी एलोकेट किया गया था, लेकिन बीच में कारगिल आ गया, इसलिए उसकी प्रगति में शायद कुछ गति नहीं आई है। लेकिन मैं इसे परस्यू करूंगा। दूसरा सवाल आपने इनफिल्ट्रेशन के बारे में पूछा है। यह सही है कि इनफिल्ट्रेशन हुआ है और इनफिल्ट्रेशन को वहां की भौगोलिक स्िथति के कारण रोक पाना कठिन है। लेकिन यह कहना कि इस साल सबसे ज्यादा हुआ है, मुझे ऐसा नहीं लगता। जो अंदाजे आये हैं, वे अलग-अलग आये हैं। अलग-अलग इंटेलीजेंस एजेन्सीज हैं, अलग-अलग आर्मी और स्टेट एजेन्सीज का फर्क है। लेकिन इनफिल्ट्रेशन हुआ है इसमें कोई शक नहीं है। संतोष मोहन जी ने ध्यान दिलाया है कि भारत वैली में इस बार हिंसा हुई है। मैं स्टेट गवर्नमैंट से इस बारे में छानबीन करूंगा और उनसे जानकारी मांगूंगा। लेकिन कदम उन्हें ही उठाने पड़ेंगे। आपने एक सवाल और पूछा कि मलिटेंटस के साथ कोई डायलाग है या नहीं? उनके साथ कोई डॉयलाग नहीं है, चूंकि वे कांस्टीटयूशन से बंधने को तैयार नहीं रहते हैं। उल्फा के लोग हमेशा सैपरेट असम की बात करते रहते हैं। इस सरकार का मत यह है कि अगर चर्चा करनी है तो चर्चा कांस्टीटयूशन के भीतर होनी चाहिए। चतुर्वेदी जी ने हमें इजराइल की नकल करने की सलाह दी है। मुझे पता नहीं है कि इजराइल को लोग कया करते हैं, कैसे करते हैं। मैं इस बारे में जानकारी प्राप्त करूंगा... (व्यवधान) श्री सत्यव्रत चतुर्वेदी : हम जीरो टोलरेन्स की बात कर रहे हैं। नश्िचत रूप से जहां टैरेरिजम की जड़े हैं, वहां हमले होने चाहिए। श्री लाल कृष्ण आडवाणी: मैंने कहाIt is a suggestion for action. It is not a question. सचमुच में अध्यक्ष जी, अगर इस समय सवाल परमिट करते हैं तो वही सवाल परमिट करते हैं जो पहले बहस में उठाये गये हैं और जिनका उत्तर नहीं आया है। ऐसा नहीं है कि अचानक कोई खड़ा हो जाए। कृष्णा बोस जी ने सुझाव दिया है कि जम्मू-कश्मीर के ऊपर भी चर्चा की जाए, वार्ता की जाए। मैंने वार्ता के बारे में कहा कि सरकार इस बात को स्वीकार करती है कि अंत में कोई सोल्यूशन निकलता है तो वार्ता से ही निकलता है। लेकिन वार्ता कब की जाए और किससे की जाए, इसके लिए हमेशा विवेक का प्रयोग किया जाना चाहिए और वह करते हुए मैं आज कह सकता हूं कि आज की स्िथति में जब वहां पर स्थानीय समर्थन कम हो रहा है, खत्म हो रहा है, उस स्िथति में सब बातों के बारे में सोचना पड़ेगा। श्री सोमनाथ चटर्जी : बॉर्डर फैन्िसंग के बारे में कुछ करना पड़ेगा।SHRI L.K. ADVANI: Border fencing on the Eastern frontier has been done to a certain extent not in Tripura. But I will pursue it.
______ MR. SPEAKER: Now, the House will take up Item No.15. The time allotted for this Bill is two hours.
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