Lok Sabha Debates
Regarding Situation Arising Out Of Continued Killing Of Hindi Speaking Migrant ... on 14 August, 2007
> Title: Regarding situation arising out of continued killing of Hindi speaking migrant workers by ULFA militants in Assam. श्री रामजीलाल सुमन (फ़िरोज़ाबाद) : अध्यक्ष जी, यह बहुत चिंता का विषय है कि जनवरी से लेकर अब तक 80 जो हिंदी-भाषी असम में काम करते थे उन्हें उल्फा के लोगों ने मार डाला। पहले भी सदन में चिंता व्यक्त की गयी थी और हम अपेक्षा करते थे कि सरकार इस पर गंभीरता से विचार करेगी और राज्य सरकार से बेहतर तालमेल करके यह जो कत्लेआम हो रहा है इसमें कमी आयेगी। निर्दोष बच्चे, महिलाएं सबका कत्लेआम हुआ और काफी लोग घायल भी हुए और यह मामला अभी भी जारी है। यह न केवल आसाम में बल्कि घाटी से भी मजदूरों को घाटी छोड़ने के लिए बाध्य किया जा रहा है और हजारों की संख्या में लोग वहां से पलायन कर रहे हैं। अध्यक्ष महोदय, अभी मई महीने में रेलवे बोर्ड की पूणे में परीक्षा थी और वहां भी उत्तर प्रदेश और बिहार के जो लोग परीक्षा देने गये थे उनके पर्चे फाड़ डाले गये और उनके साथ भी मारपीट की गयी। यह जो अलगाववादी प्रवृत्ति है यह देश के लिए खतरनाक है और सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि सेना का खुफिया तंत्र यह बात कह रहा है और उसकी रिपोर्ट है कि ... * MR. SPEAKER: That will not go on record.
(Interruptions) …** MR. SPEAKER: There is no notice for that.
… (Interruptions)
MR. SPEAKER: Please bring it to me.
श्री रामजीलाल सुमन : ….( व्यवधान) यह मेरा कहना नहीं है समाचार पत्रों में यह छपा है। यह एक गंभीर मामला है और माननीय गृह मंत्री जी यहां उपस्थित हैं वह इस पर अपनी बात कहें। SHRI HANNAN MOLLAH (ULUBERIA): Mr. Speaker, Sir, this is a very serious incident. About 30 people, mainly farmers and agricultural labourers from Bihar have been killed by KLNLF in Karbi Anglong district of Assam. Children and *Not recorded as ordered by the Chair.
** Not recorded women are not spared and people are terrorized there. The Government should take serious note of this and ensure the protection of those Hindi-speaking people from Bihar who are working in different parts of the country including Assam. I demand that the Government should make a statement about the action taken to protect the people from Bihar. श्री देवेन्द्र प्रसाद यादव (झंझारपुर) : अध्यक्ष जी, यह सिलसिला असम में खासकर बिहार, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के लोगों के साथ योजनाबद्ध तरीके से, टार्गेट बनाकर उल्फा उग्रवादियों के द्वारा चलाया जा रहा है। इस तरह की हत्या का सिलसिला जनवरी से और तेज हो गया है। यहां तक कि पिछले चार दिनों में, शनिवार की रात्रि से कारवी ओंगलोंग जिले के भोखाजान थाना के अंतर्गत रोंगबोंगहाट गांव में चार हिंदी भाषियों को जिनमें दो राजस्थानी और दो बिहारी लोगों की हत्या कर दी गयी। मरने वालों में एक महिला भी शामिल है। पिछले चार दिनों में लगभग 29 हिंदी भाषी-भाषी लोगों को कत्ल किया गया है। मैं अध्यक्ष महोदय यह इसलिए कह रहा हूं कि राष्ट्रीय एकता और अखंडता को महफूज रखने से जुड़ा यह सवाल है। आतंकवाद की इससे बड़ी मिसाल और नहीं हो सकती है। राज्य सरकार उग्रवादियों की गतिविधियों को देखते हुए भी मूकदर्शक बनी हुई है। मैं कहना चाहता हूं कि राज्य सरकार इस पर मूक बनी नहीं रह सकती है क्योंकि लॉ एंड आर्डर का सवाल उनसे भी जुड़ा है। MR. SPEAKER: The State Government is not here to reply to you.
श्री देवेन्द्र प्रसाद यादव : माननीय गृह मंत्री जी यहां बैठे हैं वे एक वक्तव्य देकर स्थिति को स्पष्ट करें कि विशेष केन्दीय बल को भेजकर क्या-क्या अभियान ऐसे उग्रवादियों को ठिकाने लगाने के लिए और राष्ट्रीय एक्ता को महफूज रखने के लिए और हिंदी भाषियों की जान-माल की रक्षा करने के लिए क्या कार्रवाई की जा रही है। अपना बयान देकर वे अपनी वर्किंग को स्पष्ट करें।[r12] श्री राम कृपाल यादव (पटना) : माननीय अध्यक्ष महोदय, असम में जिस तरह से पिछले 3-4 दिनों में हिंदी भाषी लोगों की चुन-चुन कर 20 से 30 हत्याएं की गई हैं, उनके हाथ-पैर काट दिए गए हैं, यह बहुत ही गंभीर मामला है। वहां उल्फा उग्रवादियों ने चुन-चुन कर बिहारियों को मारने का काम किया है तथा वहां से भागने को मजबूर किया है। सौ सालों से बसे लोगों को मारा है तथा उनकी सम्पत्ति को लूटा है, यह अत्यंत निंदनीय कार्य है। अध्यक्ष महोदय : ठीक है, लेकिन आप थोड़ा धीरे बोलिए।
श्री राम कृपाल यादव : महोदय, राज्य सरकार बिलकुल चुप बैठी हुई है। हमें तो लगता है कि ...* MR. SPEAKER: Do not mention any other Sarkar.
श्री राम कृपाल यादव : महोदय, मैं प्रधानमंत्री जी से मांग करता हूं कि वे अविलम्ब हस्तक्षेप करें। बिहार के जो लोग लगातार मारे जा रहे हैं, उन्हें सुरक्षा मुहैया कराई जाए। प्रधानमंत्री जी हस्तक्षेप करें, गृह मंत्री जी को संज्ञान लेना चाहिए। चुपचाप हाथ पर हाथ रख कर नहीं बैठे रहना चाहिए। असम में इन लोगों की रक्षा, सुरक्षा की जानी चाहिए। सदन को इस विषय पर चिंता करनी चाहिए। आप इस बारे में निर्णय लें। सरकार को कुछ निर्देश दें। अध्यक्ष महोदय : ठीक है, आप बैठ जाइए।
...( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : आप सहयोग कीजिए।
...( व्यवधान)
MR. SPEAKER: Not one more word will be recorded.
(Interruptions) …** अध्यक्ष महोदय : आप चुप करेंगे, तभी तो दूसरे माननीय सदस्य बोलेंगे।
...( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : आप शांत हो कर बैठिए। हम तो हिंदी में ही बोलते हैं।
...( व्यवधान)
श्री देवेन्द्र प्रसाद यादव : महोदय, यह बहुत गंभीर मामला है।
अध्यक्ष महोदय : गंभीर मामला है, तभी तो इस विषय पर पहले बोलने का मौका दिया है।
...( व्यवधान)
MR. SPEAKER: Mr. Yadav, you are misusing this opportunity.
… (Interruptions)
MR. SPEAKER: Shri Shahnawaz Hussain.
… (Interruptions)
*Expunged as ordered by the Chair **Not recorded MR. SPEAKER: Do not record all these things.
श्री सैयद शाहनवाज़ हुसैन (भागलपुर): अध्यक्ष महोदय, मैं आपका आभार व्यक्त करता हूं कि आपने मुझे इस गंभीर विषय पर बोलने का मौका दिया है। अध्यक्ष महोदय : महत्वपूर्ण मुद्दा है, इसीलिए आप लोगों को चर्चा करने का मौका दिया है। आप लोग कृपया कोपरेट कीजिए। श्री सैयद शाहनवाज़ हुसैन : महोदय, असम में पिछले एक साल से यह घटना चल रही है और जब भी संसद का सत्र चलता है, हम इस विषय पर चर्चा करते हैं। सरकार एक लाइन का बयान दे देती है कि हम रक्षा कर रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई कार्यवाही नहीं की जाती है। हिंदी भाषी लोगों की हत्याएं हो रही हैं। पिछले चार दिनों में 30 से ज्यादा लोगों की हत्याएं हो गई हैं। वहां कांग्रेस की सरकार है और केंद्र में भी कांग्रेस की सरकार है। हम चाहते हैं कि वहां बिहार, उत्तर प्रदेश के लोग और जितने भी हिंदी भाषी लोग हैं, उनकी रक्षा होनी चाहिए। अध्यक्ष महोदय : सभी लोगों की रक्षा होनी चाहिए।
श्री सैयद शाहनवाज़ हुसैन : महोदय, जो लोग वहां रह रहे हैं, उनकी रक्षा होनी चाहिए।
महोदय, माननीय राम कृपाल जी ने जो विषय उठाया कि जो उल्फा है और सरैंडर किए हुए उग्रवादी हैं, इन लोगों को प्रोटैक्शन मिला हुआ है। इस बारे में जांच होनी चाहिए कि उनके किससे संबंध हैं और वे किसके इशारे पर काम करते हैं। इसके साथ ही मैं यह भी कहना चाहता हूं कि कश्मीर के अंदर बीजेपी के तीन एमपीज़ का एक डेलिगेशन गया था। मैं स्वयं, श्री बृज भूषण सिंह और सुखदेव पासवान गए थे। हम वहां गवर्नर से मिले और मुख्य मंत्री श्री गुलाम नबी आजाद से मिले। उन्होंने भी माना कि सात हजार लोग गए हैं। लेकिन हमारी सूचना है कि करीब 40 हजार से ज्यादा मजदूर, जिसमें सोने का काम करने वाले बिहार के मजदूर हैं, बंगाल के मजदूर हैं, इनके बारे में अहमद शाह जिलनी ने बयान दिया कि इन्हें यहां से चले जाना चाहिए, [R13] इस कारण बड़ी तादाद में मजदूर आज घाटी छोड़ रहे हैं। यह पाकिस्तान की साजिश है कि किसी तरह से घाटी से मजदूरों को हटा दिया जाए। हमारा आपसे अनुरोध है कि कश्मीर और असम के विषय पर सरकार एक पंक्ति का बयान खाना पूर्ति करने के लिए न दे। सरकार ठोस कार्यक्रम के साथ आए कि वहां इन लोगों की रक्षा कैसे करना चाहती है, क्योंकि इस देश के हर नागरिक को अधिकार है कि वह कहीं भी अपना काम कर सकता है। अध्यक्ष महोदय : आपने बहुत अच्छा प्रश्न उठाया है। ठीक है, अब आप अपनी बात समाप्त कीजिए। श्री सैयद शाहनवाज़ हुसैन : इसमें किसी प्रकार का व्यवधान डालने की जरूरत नहीं है। इस बारे में लीपापोती करने की बजाए सरकार ठोस कार्यक्रम के साथ सामने आए। योगी आदित्यनाथ (गोरखपुर) : अध्यक्ष जी. असम में पिछले 7-8 महीने से जो घटित हो रहा है, वह हम सब के लिए और पूरे देश के लिए चिन्ता का विषय है। महोदय, पूरा देश जानता है कि असम में उल्फा को किस का संरक्षण प्राप्त है। साथ-साथ उल्फा का आईएसआई और नक्सलाइड ग्रुप के साथ भी आपस में गठजोड़ है। आखिर केन्द्र सरकार इतने दिनों से असम में हिन्दीभाषियों के साथ जो नरसंहार हो रहा है, उसे चुपचाप क्यों देख रही है, क्यों इसके खिलाफ कड़े कदम नहीं उठा रही है। हम लोग सरकार से मांग करना चाहते हैं कि जो राज्य सरकार वहां के नागरिकों की सुरक्षा नहीं कर सकती है, उस सरकार को रहने का कोई अधिकार नहीं होना चाहिए। कांग्रेस की असम की सरकार, उल्फा की जो राष्ट्रद्रोही गतिविधियां हैं और खास तौर से हिन्दीभाषी क्षेत्रों के जो मजदूर वहां गए हैं, जिन्होंने असम के निर्माण में और उसे विकसित करने में अपना योगदान दिया है, उन पर नरसंहार एक साजिश के तहत करवा कर आईएसआई के साथ मिल कर, वहां के जनसंख्यायिक संतुलन को बिगाड़ने का जो षड़यंत्र असम में किया जा रहा है और उसमें ... * अध्यक्ष महोदयः मैं इसे देखूंगा।
योगी आदित्यनाथ : उस सरकार को बर्खास्त करके, उल्फा की राष्ट्र विरोधी और हिन्दीभाषी विरोधी गतिविधियों पर पूर्ण लगाम लगाया जाए। ...( व्यवधान) अध्यक्ष महोदयः आपकी बात हो गई है। आपने केवल एसोसिएट करना था।
...( व्यवधान)
MR. SPEAKER: You should all associate.
… (Interruptions)
योगी आदित्यनाथ : ... * अध्यक्ष महोदयः आप उसे ले आएं, मैं उसे डिलिट कर दूंगा।
योगी आदित्यनाथ : वहां जो नरसंहार निरन्तर हिन्दीभाषियों पर हो रहा है, वह एक खतरनाक संकेत है। * Not recorded as ordered by the Chair.
** Not recorded इस पर सरकार अपना बयान दे और सरकार क्या कदम उठा रही है, स्थिति स्पष्ट करे।..( व्यवधान) … (Interruptions)
MR. SPEAKER: Nothing more will be recorded.
(Interruptions) …* MR. SPEAKER: Do not record one word.
(Interruptions) … * अध्यक्ष महोदयः आपको बोलने का मौका दिया गया। क्या किसी दूसरे को बोलने का मौका नहीं दिया जाए? आप बैठ जाइए। ...( व्यवधान)
MR. SPEAKER: No more interruptions; I have called him.
… (Interruptions)
MR. SPEAKER: Mr. Chowdhury, please take your seat.
Nothing will be recorded except Shri Prabhunath Singh.
(Interruptions) … * अध्यक्ष महोदयः किसी की बात रिकॉर्ड नहीं हो रही है।
...( व्यवधान) * MR. SPEAKER: Do not record anything.
… (Interruptions)
MR. SPEAKER: We have one Prabhunath Singh. It is enough. I do not want many Prabhunath Singh. … (Interruptions)
MR. SPEAKER: क्या हो रहा है? आप लोग बाहर जाकर अपनी बात कहिए। I do not understand. आप क्या कह रहे हैं? Without my permission anybody can get up and say something! … (Interruptions)
SHRI RAM KRIPAL YADAV (PATNA): We want protection.
* Not recorded अध्यक्ष महोदयः आप मुझे प्रोटैक्शन दीजिए।
… (Interruptions)
श्री प्रभुनाथ सिंह : अध्यक्ष महोदय, उस प्रदेश की चर्चा चल रही है, ...( व्यवधान)
MR. SPEAKER: You see, very hard temper is going on. Do not provoke anybody.
… (Interruptions)
श्री प्रभुनाथ सिंह : अध्यक्ष महोदय, इस प्रदेश की चर्चा चल रही है जिस का प्रतिनिधित्व प्रधान मंत्री स्वयं करते हैं। उस प्रदेश में हिन्दीभाषियों के साथ और खास तौर पर बिहारियों के साथ लगातार घटना पर घटना घटित हो रही है। करीब जनवरी से एक सौ से ज्यादा लोग मारे गए हैं। जो लोग मारे गए हैं उनमें ऐसे मजदूर लोग हैं जो पान या चाय की दुकान चलाते हैं। उनके पूरे परिवार का अपहरण करके पांच, सात या पन्द्रह आदमी की एक साथ हत्या होती है इस तरह से यह सौ से ज्यादा हो चुकी हैं। सदन में इससे पहले भी इस विषय पर चर्चा हुई थी और माननीय गृह मंत्री जी ने इस का उत्तर दिया था और आश्वासन भी दिया था कि वहां बिहारियों और हिंदीभाषियों को सुरक्षा दी जाएगी। यह मामला सिर्फ विधि-व्यवस्था का नहीं है, उल्फा उग्रवाद या आतंकवाद को सिर्फ विधि-व्यवस्था से नहीं जोड़ा जा सकता है। इस मामले में केंद्र सरकार की भी जिम्मेदारी बनती है कि वहां हिंदीभाषी, खास तौर से जो बिहारी मजदूर मारे जा रहे हैं, उनको सुरक्षा कैसे दी जाए। ...( व्यवधान) * अध्यक्ष महोदय: ये क्या बात है? ये सब नहीं चलेगा।
…( व्यवधान)
MR. SPEAKER: This is not right.
… (Interruptions)
श्री प्रभुनाथ सिंह : इसलिए कि मंत्री जी आश्वासन देते हैं और आश्वासन के बाद भी हिदींभाषी बिहारी मारे जाते हैं। आप किसी ... * अध्यक्ष महोदय : प्रो. रासा सिंह रावत।
…( व्यवधान)
श्री प्रभुनाथ सिंह : नहीं तो रात दिन कत्लेआम होता रहेगा। सदन में इस्तीफा दिलवाकर और सरकार की तरफ से मुआवजे की घोषणा से यह काम चलने वाला नहीं है। ...( व्यवधान) * Not recorded as ordered by the Chair अध्यक्ष महोदय : आप बैठ जाइए।
…( व्यवधान)
श्री प्रभुनाथ सिंह : हम आपके माध्यम से सरकार और सोनिया गांधी जी निवेदन करते हैं कि इस गंभीर विषय पर चिंतन करें और शीघ्र उचित कदम उठाने की कृपा करें ताकि बिहारियों की जान-माल की रक्षा हो सके। MR. SPEAKER: She is an hon. Member of the House. She is not a Minister.
… (Interruptions)
SHRI KINJARAPU YERRANNAIDU (SRIKAKULAM): Please allow me to associate with this issue. … (Interruptions) MR. SPEAKER: You will also be associated with this issue.
… (Interruptions)
प्रो. रासा सिंह रावत (अजमेर): माननीय अध्यक्ष महोदय, मुझे अत्यंत दुख और रोष के साथ निवेदन करना पड़ रहा है कि असम के कारदयांग जिले में राजस्थान के लोग भी उसमें सम्मिलित हैं जो सैकड़ों वर्षों से रोजी रोटी की तलाश में वहां गए थे और वहां छोटा-मोटा व्यापार कर रहे हैं। उन लोगों को मारकर वहां से भगाया जा रहा है और उनके परिवारों को आतंकित किया जा रहा है, अपहरण किया जा रहा है। ... * पिछले छः महीने से सैकड़ों लोगों को मौत के घाट उतारा जा चुका है। यहां पर भी आश्वासन दिया गया कि असम में जो उग्रवाद पनप रहा है उसे खत्म करने का प्रयास कर रहे हैं और सेना तैनात की जा रही है। लेकिन मुझे खेद के साथ कहना पड़ रहा है कि एक के बाद दूसरे जिले और दूसरे जिले के बाद तीसरे जिले में लगातार मौत की घटनाएं होती जा रही हैं। वहां जान और माल दोनों खतरे में हैं उनको कम्पेनसेट किया जाना चाहिए। मृतकों के परिवारों को लाखों रुपए मुआवजे का मिलना चाहिए लेकिन वह नहीं मिल पा रहा है और उनकी देखभाल भी नहीं की जा रही है। इसलिए आपके माध्यम से मैं सरकार से प्रार्थना करना चाहता हूं कि देश की अखंडता, एकता की रक्षा, सांप्रदायिक सौहार्दता और देश के सभी वर्गों में प्रेम की भावना स्थापित करने के लिए स्वाधीनता दिवस के पूर्व इस दिवस पर आज सरकार घोषणा करे। गृहमंत्री और माननीय प्रधानमंत्री जी केवल बयान देकर कहते हैं कि हम निंदा करते हैं। वहां आतंकवाद पनप रहा है, निर्दोषों के खून से होली खेली जा रही है, मौत के घाट उतारा जा रहा है। उन लोगों के जानमाल की रक्षा करने के लिए कम से कम सरकार को सामने आना चाहिए और ... * * Not recorded as ordered by the Chair अध्यक्ष महोदय : यह एसोसिएट करने की बात है। आपने बहुत अच्छा बोला है।
…( व्यवधान)
MR. SPEAKER: Prof. Vijay Kumar Malhotra, do you want to speak on this?
प्रो. विजय कुमार मल्होत्रा (दक्षिण दिल्ली): अध्यक्ष महोदय, मुझे आपसे अनुरोध करना है कि इस विषय पर जीरो ऑवर के बजाय पूरी बहस होनी चाहिए। अध्यक्ष महोदय : आप एसोसिएट करना चाहते हैं तो स्लिप भेज दीजिए। हम इसके लिए राजी हैं। आप नोटिस दीजिए। …( व्यवधान)
SHRI GURUDAS DASGUPTA (PANSKURA): Sir, I am only just suggesting that a Statement may be made by the Home Minister on this issue because it is a serious collapse of the law and order situation in regard to Hindi-speaking people in the country. … (Interruptions) अध्यक्ष महोदय : ठीक है, उनका नहीं मल्होत्रा जी का सुझाव रिकॉर्ड होगा।
SHRI GURUDAS DASGUPTA : I am only supplementing. … (Interruptions)
MR. SPEAKER: It is because you are speaking without my permission.
SHRI GURUDAS DASGUPTA (PANSKURA): Sir, I seek your permission. … (Interruptions)[R14] प्रो. विजय कुमार मल्होत्रा : अध्यक्ष जी, असम के अंदर जो भीषण नरसंहार हुआ है, अत्याचार हो रहे हैं, लोगों के हाथ-पैर काटे जा रहे हैं और वहां से हिन्दीभाषियों को निकाला जा रहा है, यह बहुत ही गम्भीर मामला है। हर आदमी जानता है कि उल्फा और आई.एस.आई. की वहां पर सांठगांठ है, मिलीभगत है। वे एक साजिश के तहत काम कर रहे हैं। यह बात भी हर आदमी जानता है और मैं श्री प्रभुनाथ सिंह जी से इस बात पर एग्री नहीं करता कि इसकी जांच कराई जाए। यह जगजाहिर है कि... * MR. SPEAKER: आप इसे छोड़िये, this will be deleted.
… (Interruptions)
MR. SPEAKER: You cannot do that, Malhotra Saheb! … (Interruptions)
प्रो. विजय कुमार मल्होत्रा : * * Not recorded as ordered by the Chair MR.SPEAKER: I will look into it.
… (Interruptions)
MR. SPEAKER: I am deleting it.
… (Interruptions)
MR. SPEAKER: Bring that to me. I will delete that. स्टेट गवर्नमैन्ट का नाम नहीं आयेगा। प्रो. विजय कुमार मल्होत्रा : ... * MR. SPEAKER: Very well. Shri Dasgupta wants to make a constructive suggestion.
SHRI GURUDAS DASGUPTA : Sir, I am only sorry that an issue of national importance is being made a matter of political corroboration.… (Interruptions) MR. SPEAKER: Mr. Dasgupta, you give your suggestion.
SHRI GURUDAS DASGUPTA : All right, Sir.… (Interruptions)
अध्यक्ष महोदय : आप छोड़िये ना, उससे क्या होगा। आपने बहुत अच्छा बोला है, आपका पूरा भाषण रिकार्ड पर चला गया है। SHRI GURUDAS DASGUPTA : Sir...
MR. SPEKAER: Please, only make a suggestion.
SHRI GURUDAS DASGUPTA : Sir, I am only demanding that the Minister of Home Affairs must make a statement with regard to such incidents which are happening not only in Assam… (Interruptions) MR. SPEAKER: Hon. Members, you may send your names to associate on this issue… (Interruptions) MR. SPEAKER: He has not given a notice.
… (Interruptions)
SHRI GURUDAS DASGUPTA : Sir, these incidents are happening not only in Assam, other people are also being thrown out. Even Bengalis are being thrown out from Maharashtra… (Interruptions) * Not recorded as ordered by the Chair MR. SPEAKER: Nothing more. Sorry, I cannot make it a debate here today.
SHRI GURUDAS DASGUPTA : It is not a debate. But we want a statement, Sir.
MR. SPEAKER: Very well. But how many times would you go on repeating this?
SHRI GURUDAS DASGUPTA : Why the agriculture labour and common labour are being targeted, is a matter of serious concern… (Interruptions) MR. SPEAKER: Every hon. Member wants to make a suggestion without giving a notice! No, it cannot be. … (Interruptions)
MR. SPEAKER: Now, the Calling Attention: Dr. Pandeya.
… (Interruptions)
SHRI GURUDAS DASGUPTA : Please understand that it is the agony of the situation. It is an agony that even after 60 years of Independence, the Government cannot protect the agricultural labour and the normal labour all over the country! This is my agony. I express it with deep regret. MR. SPEAKER: Please bring that to me. I would see as to how much is permissible.
Dr. Pandeya, please allow me two more minutes. Shri Krishnadas is very agitated. Let him make his submission. Mr. Krishnadas, you please be very brief and to the point. I am allowing only one hon. Member on this issue. SHRI N.N. KRISHNADAS (PALGHAT): Yes, Sir. I would be very brief and also to the point. … (Interruptions)
MR. SPEAKER: Those hon. Members, who wish to associate, may send their names and their names will be added as associated. … (Interruptions)
SHRI N.N. KRISHNADAS : Mr. Speaker, Sir...
… (Interruptions)
MR. SPEAKER: Hon. Member, I have already promised to you. If you give a proper notice, I will accommodate you. Hon. Members, Shri Anwar Hussain, Shrimati Ranjeet Ranjan, Shri Vijoy Krishna, Shri Sita Ram Singh, Shri Furkan Ansari, Shri Virendra Kumar, Shri Shailendra Kumar, Shri Harin Pathak, Shri Rajiv Ranjan Singh, Shri Srichand Kriplani, Shri Dushyant Singh, Prof. Mahadeorao Shiwankar, Shri Raghuranath Jha, Shri Ramesh Dubey, Prof. Prem Kumar Dhumal, Shri Girdharilal Bhargava, Shri Kiren Rijiju and Shri Bhanwar Singh Dangawas have been allowed to associate with this matter.
… (Interruptions)
श्री प्रभुनाथ सिंह : अध्यक्ष महोदय, गृह मंत्री जी यहां मौजूद हैं, यह इतना गम्भीर मामला है।...( व्यवधान) यह बिहार के लोगों का मामला है। श्री देवेन्द्र प्रसाद यादव : गृह मंत्री जी, यहां मौजूद हैं और वह बोलना चाहते हैं।
MR. SPEAKER: Very well, if the hon. Home Minister wants to speak. But this habit is wrong. However, the hon. Minister is kind enough to react. Let us hear him, now. गृह मंत्री (श्री शिवराज वि. पाटील) : श्रीमन्, इस सदन के सम्माननीय सदस्यों ने जो दुख व्यक्त किया है, वह हम समझ सकते हैं। मैं अपनी ओर से और सदन के सारे सदस्यों की ओर से जो नरसंहार हुआ है, उसकी निंदा करता हूं और जिनके घरवालों की जानें गई हैं, उन्हें हम अपनी तरफ से पूरी संवेदना भी देना चाहते हैं। MR. SPEAKER: I think, the House joins you in that.
SHRI SHIVRAJ V. PATIL: Yes, Sir. I can understand the agony expressed by the hon. Members on the floor of the House. आज हमारे राज्य मंत्री असम गये हैं और वहां इसका जायजा लेकर वह आज शाम को या कल वापस आ जायेंगे। कल ही हमने एक समिति स्पेशल सिक्युरिटी के साथ कुछ अधिकारियों को लेकर वहां भेजी है। वहां जाकर वे पूरे मालूमात लेकर यहां आ रहे हैं। हमारा संबंध वहां के मुख्य मंत्री, चीफ सैक्रेटरी और डी.जी. से रहा है और उनसे हमने वहां के पूरे मालूमात हासिल किये हैं । मैं बड़ी नम्रता से यह कहना चाहता हूं कि असम बहुत बड़ा प्रांत होने की वजह से और झाड़ी और पहाड़ी बहुत होने की वजह से वहां की सरकार और वहां के मुख्य मंत्री ने जो भी प्रयास किये हैं, उनके बावजूद भी ऐसी घटनाएं होती हैं, हो रही हैं । इसके लिए हम उनके साथ सहानुभूति भी रखते हैं, उनके साथ चर्चा भी करते हैं और जो कुछ हम सबको मिलकर करना है, किया है और उन्होंने जो किया है और जो मुझे बताया गया है, वह मैं आपको बताना चाहता हूं। यह सब देखने के बाद उनको पता चला है कि दो जिलों के अंदर ये घटनाएं हो रही हैं, उन्होंने इन दो जिलों में पुलिस स्टेशनों की संख्या बढ़ाने का निर्णय लिया है। इसके साथ-साथ यह भी निर्णय लिया है कि उनकी जो पुलिस है, उसकी भी संख्या इन दो जिलों के अंदर और जहां पर भी ये लोग रह रहे हैं, वहां बढ़ाने का निर्णय किया है। तीसरा निर्णय यह किया है कि इतनी पुलिस होने के बावजूद भी चूंकि सारी तरफ और हर गांव में पुलिस स्टेशन नहीं हो सकता, इसलिए वहां पैट्रोलिंग ज्यादा पैमाने पर करने का निर्णय उन्होंने लिया है। चौथा निर्णय उनका यह है कि चूंकि रात में ये घटनाएं हो रही हैं, इसलिए रात में ज्यादा पैट्रोलिंग करने का निर्णय लिया गया है। ये लोग कभी-कभी पुलिस और आर्मी की वर्दी में आते हैं, इसलिए वहां के डिस्ट्रिक्ट कलैक्टर और जो वहां के दूसरे बड़े अधिकारी हैं, जो डीएसपी हैं, जिले और गांव के दूसरे अधिकारियों को कहा गया है कि इस पर वे ध्यान रखें। पांचवी बात उन्होंने कही है कि अगर कहीं ऐसा पता चल जाए तो वहां के सारे लोग उनकी मदद करें। ये सारे कदम उन्होंने उठाये हैं। ...( व्यवधान) प्रो. विजय कुमार मल्होत्रा : पिछले एक साल से कदम उठाये जा रहे हैं।...( व्यवधान)
MR. SPEAKER: Let him complete.
… (Interruptions)
MR. SPEAKER: He has volunteered to reply to you. He is responding to you though he is not obliged. … (Interruptions)
MR. SPEAKER: No please. Do not record anything. Only the hon. Minister’s speech will go on record. (Interruptions) …* MR. SPEAKER: Only the hon. Minister’s observation will go on record.
(Interruptions) …* * Not recorded अध्यक्ष महोदय : हरिन जी. आप बैठ जाइए।
श्री शिवराज वि. पाटील : ये सारे कदम उन्होंने उठाये हैं और इसके बाद भी उन्होंने हमें बताया है कि इससे ज्यादा भी जो कुछ करने के लिए है, वह हमारे साथ चर्चा करके करेंगे तथा और कोई सुझाव हो तो वह भी करेंगे। अब तीसरा सवाल यहां जो पैदा हो जाता है कि हम लोगों ने उनके लिए यहां से क्या किया है, मैं बताना चाहता हूं कि वहां हम लोगों ने करीब-करीब सीआरपीएफ की 110 कंपनी पहले से ही इस काम के लिए देकर रखी हैं।...( व्यवधान) MR. SPEAKER: What is all this going on? Will you not allow the Minister to reply? He is suo motu responding. … (Interruptions)
MR. SPEAKER: Do not record even one word. Not one word will be recorded. Only the hon. Minister’s reply will go on record. (Interruptions) … * अध्यक्ष महोदय : आप लोग ही तो एनकरेज करते हैं।
...( व्यवधान)
श्री शिवराज वि. पाटील : मैं यह बताना चाह रहा हूं कि इसके बाद हमने कहा है कि वहां पर एक नोडल ऑफिसर सिर्फ इस काम के लिए उनकी तरफ से अगर अपाइंट हो गया और उन्होंने किया है, वह हमारे यहां के पैरा मिलिट्री फोर्सेज के लोगों के साथ बात करेंगे। तीसरे, वहां पर आर्मी बहुत संख्या में है और बॉर्डर की रक्षा करती है, हमारी सीआरपीएफ भी वहां है, वह बॉर्डर की रक्षा करती है, इस तरह से कुल मिलाकर काफी फोर्स वहां है लेकिन एरिया ऐसा है कि हर जगह पर लोग तैनात नहीं किये जा सकते। इसलिए हमने कहा है कि यूनिफाइड कमांड में चीफ मिनिस्टर्स स्वयं बैठें और आर्मी की तरफ से, सीआरपीएफ और उनकी पुलिस की तरफ से जो भी करना चाहिए, उसके अधिकार हमने दिये हैं। उनको हमने कहा है कि अगर इससे ज्यादा भी आपको किसी मदद की जरुरत है, जैसे कभी-कभी हेलीकॉप्टर देना पड़ता है, क्योंकि कभी घटनाएं हो जाती हैं तो वहां से लोगों को निकालने के लिए जरुरत पड़ती है। हमारे पास जो लगातार इंटेलीजेंस से खबरें आ रही हैं, वह हम उनको दे रहे हैं लेकिन यह बात समझनी बहुत जरूरी है कि असम एक ऐसा प्रांत है जिसके बॉर्डर की बाजू में दूसरे जो प्रांत हैं, उनको और देश के दूसरे हिस्से को भी ध्यान में रखना है। [r15] * Not recorded अध्यक्ष जी, आखिरी बात मैं बहुत ही विनम्रता से कहना चाहता हूं कि यह संघर्ष, जो हमें असम तथा दूसरे प्रातों में देखने को मिल रहा है या हमारे हिन्दी बोलने वाले भाइयों के वहां जाने पर हो रहा है या उत्तर या दक्षिण भारत के भाई दूसरे प्रान्तों में जा रहे हैं, वहां भी उनके बारे मं ऐसा विचार प्रकट किया जाता है, इन सब का कारण क्या है? इसका कारण हमारे सकीर्ण ऩवऩ विचार, छोटे विचार हैं। जैसा आपने कहा कि ये जो घटनायें हो रही हैं, इन्हें पौलिटिकली न लिया जाये। अगर इस मुद्दे पर खास चर्चा करनी हो तो हम उसके लिए पूरी तरह से तैयार हैं। इससे हम सब लोगों का फायदा है ...( व्यवधान) MR. SPEAKER : What are you doing? He was not obliged to reply. He has responded.
… (Interruptions)
श्री शिवराज वि. पाटील : अगर माननीय सदस्यों के मन में कोई विचार हो तो हमारा प्रयास है कि हम उसे जरूर अपनायेंगे और हमने जो किया है, वह हम आपको बता देते हैं। SHRI HARIN PATHAK (AHMEDABAD): Sir, please allow me for a minute. … (Interruptions) अध्यक्ष महोदय : यह क्या हो रहा है?
…( व्यवधान)
MR. SPEAKER : Nothing will be recorded. This type of unruly behaviour is not correct. (Interruptions) …* MR. SPEAKER : He was not obliged. He has very kindly responded on his own. He has given an elaborate reply. Nothing more. … (Interruptions)
MR. SPEAKER : Not one word will be recorded.
(Interruptions) … * MR. SPEAKER : Please tell me what do you want. आप क्या चाहते हैं, पहले आप बैठ जाइये। मेरी बात सुनिये। मैं आपका बहुत आभारी हूं। There is a procedure under which the Call Attention motion was to be taken up. I am obliged to the hon. Members whose * Not recorded names are in the Call Attention motion because of the importance of this matter. I have called at least ten hon. Members who had given notice. I have given opportunity to all of them. The hon. Minister was not obliged to reply. But suo motu he volunteered to reply. I believe he has given a fair reply. … (Interruptions)
MR. SPEAKER : Please listen. This is not the way to behave.
… (Interruptions)
अध्यक्ष महोदय : आप क्या बात करते हैं? क्या स्पीकर को नहीं बोलने देंगे?
…( व्यवधान)
MR. SPEAKER : So long as I am here, I will not allow you then to speak at all.
… (Interruptions)
अध्यक्ष महोदय : हम बराबर बोलेंगे, हमारा नाम ही स्पीकर है।
…( व्यवधान)
MR. SPEAKER : There should be a proper debate and discussion. आप लोग नोटिस दे दीजिये, उन्होंने भी सजेश्न दिया है, इन्होंने भी सजेश्न दिया है। श्री प्रभुनाथ सिंह : अध्यक्ष महोदय, इससे दो बातें समाने आती हैं। होम मिनिस्टर ने अपने वक्तव्य में उलफा का जिक्र नहीं किया है और दूसरा जब वहां सेना है, सीआरपीएफ और दूसरी एजेंसी है, तब वहां ऐसी घटनायें क्यों हो रही हैं?...( व्यवधान) अध्यक्ष महोदय : उन्हें उलफा के नाम से मिनिस्टर बना दीजिये ।
SHRI GURUDAS DASGUPTA : Sir, it is an extremely disappointing statement. … (Interruptions) MR. SPEAKER : Very well.
… (Interruptions)
श्री शिवराज वि. पाटील : अध्यक्ष जी, ऐसे मुझे बहुत काम करना पडेगा, बहुत जगह एक्शन लेना पड़ेगा। अध्यक्ष महोदय : इससे सब जगह उलफा आ जायेगा।
…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : जितने मैम्बर्स सैटिसफाईड नहीं हैं, वे लोग नोटिस दे दें। I will consider. Now only Mr. Krishnadas is allowed to speak. No more hands to be raised.