Lok Sabha Debates
Introduction Of The Farmers'' Produce Trade And Commerce (Promotion And ... on 14 September, 2020
Seventeenth Loksabha > Title: Introduction of the Farmers' Produce Trade and Commerce (Promotion and Facilitation) Bill, 2020.
माननीय अध्यक्ष : आईटम नम्बर 14, श्री नरेन्द्र सिंह तोमर जी ।
कृषि और किसान कल्याण मंत्री; ग्रामीण विकास मंत्री तथा पंचायती राज मंत्री (श्री नरेन्द्र सिंह तोमर): माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं प्रस्ताव करता हूं कि ऐसे पारिस्थितिक तंत्र के सृजन का वहां, जहां कृषक और व्यापारी, ऐसी कृषक उपज के, विक्रय और क्रय संबंधी चयन की स्वतंत्रता का उपभोग करते हैं, जो प्रतिस्पर्धात्मक वैकल्पिक व्यापारिक चैनलों के माध्यम से लाभकारी कीमतों को सुकर बनाता है, का उपबंध करने के लिए; बाजारों के भौतिक परिसर या विभिन्न राज्य कृषि उपज बाजार संबंधी विधानों के अधीन अधिसूचित समझे गए बाजारों के बाहर कृषक उपज का दक्ष, पारदर्शी और निर्बाध अंतराज्यिक और अंत:राज्यिक व्यापार और वाणिज्य के संवर्धन के लिए; इलेक्ट्रॉनिक व्यापार के लिए सुसाध्य ढांचे का और उससे संबंधित या उसके आनुषंगिक विषयों का उपबंध करने वाले विधेयक को पुर:स्थापित करने की अनुमति प्रदान की जाए ।
माननीय अध्यक्ष : प्रस्ताव प्रस्तुत हुआ:
“कि ऐसे पारिस्थितिक तंत्र के सृजन का वहां, जहां कृषक और व्यापारी, ऐसी कृषक उपज के, विक्रय और क्रय संबंधी चयन की स्वतंत्रता का उपभोग करते हैं, जो प्रतिस्पर्धात्मक वैकल्पिक व्यापारिक चैनलों के माध्यम से लाभकारी कीमतों को सुकर बनाता है, का उपबंध करने के लिए; बाजारों के भौतिक परिसर या विभिन्न राज्य कृषि उपज बाजार संबंधी विधानों के अधीन अधिसूचित समझे गए बाजारों के बाहर कृषक उपज का दक्ष, पारदर्शी और निर्बाध अंतराज्यिक और अंत:राज्यिक व्यापार और वाणिज्य के संवर्धन के लिए; इलेक्ट्रॉनिक व्यापार के लिए सुसाध्य ढांचे का और उससे संबंधित या उसके आनुषंगिक विषयों का उपबंध करने वाले विधेयक को पुर:स्थापित करने की अनुमति प्रदान की जाए ।” …(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : श्री अधीर रंजन चौधरी जी ।
SHRI ADHIR RANJAN CHOWDHURY (BAHARAMPUR): I do vehemently oppose the introduction of this legislative document. The reasons are loud and clear. The Farmers’ Produce Trade and Commerce (Promotion and Facilitation) Bill, 2020 seeks to replace the Farmers’ Produce Trade and Commerce (Promotion and Facilitation) Ordinance, 2020. The Ordinance was promulgated on 5th June, 2020. My main objection is that Parliament lacks legislative competence to legislate on this subject because the subject Agriculture is a State subject and is in the Entry 14. Moreover, the subject ‘Markets and Fairs’ is also in the State list and is in the Entry 28 of the list 2.
The Constitutional provisions are very clear. Article 246(3) clearly states that the State legislature has exclusive powers to make laws on any matters enumerated in the State list. The Bill is regulating the sale and purchase of agricultural goods and according to the Constitution of India, such a law can only be brought only by the State Government as inter-State trade is covered under Entry 26 of the State list. Moreover, through this Bill, the Central Government is nullifying the APMC law enacted by the various State Governments. The Central Government is not competent to make such a law. So, the Government has introduced certain provision of interstate trade to make the Bill look legal. This is a clear case of legislative overreach. The Government may give example of APEDA Act. The APEDA Act is for agricultural export which is entirely a different issue.
I oppose the Bill because the Bill is directly violating the provisions of Article 246 and the Seventh Schedule of the Constitution. The Bill is a direct attack on the federal structure of Constitution. शांता कुमार जी की जो रिपोर्ट थी, उसको लागू करने के लिए और किसानों को बर्बाद करने के लिए यह बिल लाया जा रहा है । आप इसको रोकिए । पंजाब और हरियाणा में चारों तरफ इस बिल के खिलाफ़ लोग आंदोलन कर रहे हैं ।…(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : प्रो. सौगत राय जी ।
…(व्यवधान)
PROF. SOUGATA RAY (DUM DUM): Under Rule 72 (1) of the Rules of Procedure, I oppose the introduction of the Farmers’ Produce Trade and Commerce (Promotion and Facilitation) Bill, 2020. Through this Bill, the Central Government has over-written the State legislated Agriculture Produce Marketing Committee Act. The worst affected States are Punjab, Haryana, Madhya Pradesh and Chhattisgarh and any other State that has invested heavily in public procurement and assuring Minimum Support Price to farmers. The suspicion is that the Modi Government is attempting to implement the controversial recommendations of the Shanta Kumar Committee. That will have the effect of diluting public procurement, the Public Distribution System, the Minimum Support Price principle and food security.
Sir, farmers are seeing this as an effort to jettison the Minimum Support Price mechanism and Government procurement of foodgrains.
That is why, the farmers in Haryana are up in arms and they are agitating. The Punjab Assembly has passed a Resolution against this Bill. I shall request Mr. Narendra Singh Tomar, who is otherwise a very mild man, not to push through this Bill.
श्री गौरव गोगोई (कलियाबोर): माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपसे अनुरोध करता हूँ कि कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य अध्यादेश, 2020 के पुर:स्थापन में मेरा विरोध प्रस्ताव कृपया स्वीकार करें ।
विधेयक की विधायी सक्षमता के संबंध में भारतीय संविधान की सातवीं अनुसूची के तहत कृषि राज्य सूची में 14वीं प्रविष्टि है । यह विधेयक राज्य सरकारों को बाज़ार शुल्क, उपकर या किसानों, व्यापारियों पर लेवी के माध्यम से राजस्व एकत्र करने की शक्ति से वंचित करता है और इलैक्ट्रॉनिक व्यापार प्लेटफॉर्म्स को विनियमित करने के अपने अधिकार का भी अतिक्रमण करता है । इसके अतिरिक्त, यह विधेयक मौजूदा एपीएमसी कानून को और कृषि के विषय पर राज्यों को उनके अनेक अधिकारों से वंचित कर देता है । केन्द्र ने ये सभी प्रतिकूल बदलाव राज्यों के साथ बिना किसी परामर्श के किये हैं, यह एकपक्षीय किया गया है । राज्यों के साथ कोई भी परामर्श न होने के कारण यह विधेयक अधिकारातीत है ।
यह विधेयक कॉर्पोरेट जगत के संबंध में है, उनकी भागीदारी को बढ़ाने की यह साज़िश है । दो राज्यों के बीच मुक्त बाज़ार और व्यापार की अनुमति देने की इस कवायद में कॉर्पोरेट जगत द्वारा शोषण की गुंजाइश मौजूद है । इन दो कारणों से इस बिल के इंट्रोडक्शन का मैं विरोध करता हूँ ।
SHRI SANTOKH SINGH CHAUDHARY (JALANDHAR): Sir, I rise to oppose the introduction of this Bill under rule 72 of the Rules of Procedure and Conduct of Business in Lok Sabha. I oppose the introduction of this Bill on the following grounds:-
पहली बात यह है कि यह बिल पार्लियामेंट की लेजिस्लेटिव कांपिटेंस से बाहर है और संविधान के शेड्यूल 7 के तहत आइटम नम्बर 14 पर लिस्टेड यह एक स्टेट सब्जेक्ट है । सरकार ऐसा कोई बिल नहीं ला सकती है,जो संसद की लेजिस्लेटिव पॉवर के बाहर हो ।
एपीएमसी एक्ट के तहत स्टेट की जो पॉवर्स हैं,यह बिल उनको खत्म करता है । राज्यों की शक्तियों को खत्म करने के साथ-साथ यह वहाँ की मण्डी सिस्टम और एमएसपी सिस्टम को भी खत्म कर देगा, जिससे किसानों को उनकी फसलों का सही मूल्य नहीं मिल पाएगा ।
पंजाब जैसे कृषि प्रधान राज्य में बहुत-से रेवेन्यू एग्रीकल्चर मार्केट, मण्डी की फीस और सेस से आते हैं । इस बिल के तहत राज्य किसी भी तरह की फीस या सेस नहीं लगा सकते हैं । इस फीस और सेस से जो रेवेन्यू आते हैं, उनसे राज्य का विकास होता है । वर्ष 2019-20 में इस फीस से पंजाब को 3,600करोड़ रुपए मिले ।…(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष: माननीय सदस्य, जब बिल पर पूरी चर्चा होती है, तब सारे विषय उठाए जाते हैं ।
…(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष: श्री नरेन्द्र सिंह तोमर जी, क्या आप कुछ कहना चाहते हैं?
…(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष: श्री भगवंत मान जी, जब बिल पर डिटेल में चर्चा होगी, तो मेरा वायदा है, मैं आपको मौका दूँगा ।
…(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष: आपको दस बजे से पहले नोटिस देना चाहिए था ।
श्री भगवंत मान (संगरूर): सर, चर्चा होनी ही नहीं चाहिए । …(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष: चर्चा होगी । इस तरह से खड़े नहीं होते हैं, आप बैठ जाइए ।
…(व्यवधान)
श्री नरेन्द्र सिंह तोमर: माननीय अध्यक्ष महोदय, मुझे बहुत ही आश्चर्य है कि इस अध्यादेश के विरुद्ध भी चर्चा की स्थिति सदन में आ रही है । एक लम्बे कालखंड के बाद, मुझे लगता है कि इस अध्यादेश के माध्यम से कृषि के क्षेत्र में और किसानों की स्थिति में क्रांतिकारी बदलाव आने वाले हैं । जहाँ तक कानून बनाने की शक्ति की बात है,तो इस मामले में मैं सदन को अवगत कराना चाहता हूँ कि संघ सूची की प्रविष्टि संख्या 42 में अन्तर्राज्यीय वाणिज्य एवं व्यापार का उल्लेख है । इसका अर्थ यह है कि किसी भी वस्तु, सेवा के अन्तर्राज्यीय व्यापार के संबंध में कानून बनाने का अधिकार संघ शासन को है और इसमें कृषि उत्पाद भी सम्मिलित हैं ।
माननीय अध्यक्ष जी,मैं आपके माध्यम से सदन से यह भी आग्रह करना चाहता हूँ कि अभी जो वर्तमान व्यवस्था है,उसमें कृषक अपना उत्पाद पैदा करता है और वह मण्डी में उसे लाता है । जब वह अपने उत्पाद को मण्डी में लाता है,तब उसके ऊपर मण्डी फीस,परिवहन के खर्चे और दुनिया भर के कानून हैं । मण्डी में बीस-पच्चीस लोग बोली लगाकर उसके उत्पादन की कीमत को तय करते हैं ।
अब अगर यह अध्यादेश अधिनियमित हो जाएगा तो निश्चित रूप से किसान को इस बंधन से मुक्ति मिलेगी । किसान जब अपनी फसल मंडी में किसी व्यापारी को बेच देता है तो व्यापारी उस फसल का क्या करेगा, कहां बेचेगा, कितने भाव पर बेचेगा, किस राज्य में बेचेगा, इसकी व्यापारी को तो पूरी आज़ादी है, लेकिन किसान, जो देश का सबसे बड़ा उत्पादनकर्ता है, उसको अपने उत्पादन को बेचने का, मूल्य तय करने का, स्थान तय करने का और कैसे बेचेगा यह तय करने का आज तक अधिकार नहीं था । …(व्यवधान) मैं समझता हूं कि इस अध्यादेश के माध्यम से यह आज़ादी पूरे देश को मिलने वाली है । …(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से देश भर के किसानों, राजनीतिक दल के नेताओं और सभी से यह आग्रह करना चाहता हूं कि यह जो अध्यादेश है, जिसको आज संसद में प्रस्तुत किया जा रहा है, इससे एपीएमसी एक्ट पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा । अगर राज्य चाहेगा तो मंडियां चलेंगी । राज्य का अपना एक्ट है । मंडी की परिधि के बाहर जो ट्रेड होगा, वह इसके माध्यम से कवर होगा । दूसरा, जिस प्रकार की बात कही जा रही है, कि एमएसपी पर फर्क पड़ेगा और फलांना कमेटी की रिपोर्ट है, मैं सरकार की ओर से यह कहना चाहता हूं कि एमएसपी है, एमएसपी रहेगी और एमएसपी पर कोई फर्क नहीं आने वाला है ।
प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी जी के आने के बाद वर्षों से स्वामीनाथन कमेटी की जो अनुशंसाएं पड़ी हुई थीं, उन 201 अनुशंसाओं में से मोदी जी के नेतृत्व में भारत सरकार ने 200 अनुशंसाओं पर अमल किया और जो एमएसपी थी, उस पर भी 50 प्रतिशत मुनाफा छोड़कर रबी और खरीफ की एमएसपी घोषित की जा रही है । …(व्यवधान) इससे किसी भी प्रकार का फर्क नहीं आएगा । किसान को अपना उत्पाद बेचने की स्वतंत्रता मिलेगी, व्यापारी भी लाइसेंस राज्य से मुक्त होंगे, भ्रष्टाचार पर नियंत्रण होगा और सप्लाई चेन मज़बूत होगी । कृषि के क्षेत्र में निजी निवेश बढ़ेगा और जब यह निजी निवेश गांवों तक और खेतों तक पहुंचेगा तो इसी से किसान का उत्थान आने वाले कल में होने वाला है । आपका बहुत-बहुत धन्यवाद ।
माननीय अध्यक्ष: प्रश्न यह है:
‘‘कि ऐसे पारिस्थितिक तंत्र के सृजन का वहां, जहां कृषक और व्यापारी, ऐसी कृषक उपज के, विक्रय और क्रय संबंधी चयन की स्वतंत्रता का उपभोग करते हैं, जो प्रतिस्पर्धात्मक वैकल्पिक व्यापारिक चैनलों के माध्यम से लाभकारी कीमतों को सुकर बनाता है, का उपबंध करने के लिए बाजारों के भौतिक परिसर या विभिन्न राज्य कृषि उपज बाजार संबंधी विधानों के अधीन अधिसूचित समझे गए बाजारों के बाहर कृषक उपज का दक्ष, पारदर्शी और निर्बाध अंतराज्यिक और अंत:राज्यिक व्यापार और वाणिज्य के संवर्धन के लिए; इलेक्ट्रॉनिक व्यापार के लिए सुसाध्य ढांचे का और उससे संबंधित या उसके आनुषंगिक विषयों का उपबंध करने वाले विधेयक को पुर:स्थापित करने की अनुमति प्रदान की जाए’’ प्रस्ताव स्वीकृत हुआ ।
माननीय अध्यक्ष: अब माननीय मंत्री जी विधेयक को पुर:स्थापित करें ।
श्री नरेन्द्र सिंह तोमर :माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं विधेयक को पुर:स्थापित करता हूं ।
__________ माननीय अध्यक्ष: आइटम नंबर – 15, नरेन्द्र सिंह तोमर जी ।
12.17 hrs