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Lok Sabha Debates

Further Discussion On Flood And Drought In Various Parts Of The Country Raised By ... on 26 July, 2002

14.10 hrs. लोक सभा १४१० बजे भोजनावकाश के उपरान्त पुन: समवेत् हुई।

(Dr. Raghuvansh Prasad singh in the Chair)   Title: Further discussion on flood and drought in various parts of the country raised by Shri Ajay Singh Chautala on the 25.7.2002. (Concluded) सभापति महोदय : अब सदन की कार्यवाही शुरू की जाती है। नियम १९३ के अधीन बहस में लास्ट वक्ता श्री रामदास आठवले हैं। …( व्यवधान)

श्री सईदुज्जमा (मुजफ्फ़रनगर):सभापति जी, मुझे सभापटल पर अपना लखित भाषण रखना है।…( व्यवधान)

श्री शंकर प्रसाद जायसवाल (वाराणसी):सभापति जी, मेरा भाषण तो हुआ ही नहीं। मैं सदन का ध्यान इस ओर आकर्षित करना चाहता हूं कि मैंने नियम १९३ के अन्तर्गत…( व्यवधान) मेरी बात तो सुन लें। मैंने नियम १९३ के अन्तर्गत सूखे के ऊपर प्रस्ताव दिया था। अध्यक्ष महोदय ने कहा कि इसके ऊपर जब आगे डिस्कशन होगा तो आपको अवसर दिया जायेगा। मैंने दो दिन जीरो ऑवर में उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों में सूखे केबारे में प्रश्न भी उठाया। माननीय अध्यक्ष जी ने मुझसे कहा कि नियम १९३ के अधीन चर्चा के समय आपको मौका दिया जायेगा। मैंने चेयर का ध्यान इस ओर आकर्षित करना चाहता हूं कि चेयर ने जो बातें कही हैं, चेयर को याद हैं कि नहीं?अगर याद हैं तो मेरा नाम पुकारा जाना चाहिए।

सभापति महोदय : आपने कहा कि मैंने दो बार सवाल उठाये, अब सरकार का जवाब आप सुनिये।

   

...( व्यवधान)

 

श्री शंकर प्रसाद जायसवाल: मेरा सवाल यह था कि चेयर ने हमें यह कह दिया कि नियम १९३ के अधीन डिस्कशन के समय आपको समय दिया जायेगा। मैं केवल यह जानना चाहता हूं कि क्या चेयर अपनी बात से पीछे हटेगी? ऐसा कभी नहीं हुआ और आगे भी नहीं होगा।…( व्यवधान)

श्री रामजीलाल सुमन (फिरोजाबाद):सभापति जी, कल अध्यक्ष जी के आदेशानुसार जो लोग बाढ़ और सूखे की बहस में भाग लेने से वंचित रह गये थे, उनके लिए यह कहा गया था कि वे अपना लखित भाषण दाखिल कर दें तो उसको वृतान्त में शामिल कर लिया जायेगा। तमाम लोगों ने भाषण दिये हैं, हमारा भी है। मेरी आपसे प्रार्थना है कि उसको कार्यवाही में शामिल किया जाये।

सभापति महोदय : आपका लखित भाषण है तो दे दीजिए। श्री रामजीलाल सुमन और श्रीमती कांति सिंह का लखित भाषण प्रोसीडिंग्स का हिस्सा बनेगा और आपका भी बनेगा।

*श्री रामजी लाल सुमन:महोदय, हम सदन में नियम १९३ के अधीन बाढ़ एवं सूखे पर चर्चा कर रहे हैं, प्रतिवर्ष इस सदन में मानसून सत्र के दौरान चर्चा होती है, लेकिन उसकी कितनी सार्थकता है, यह अहम सवाल है। जहां एक ओर देश के ११ प्रांतों में भयंकर सूखा है वहीं बिहार, असम एवं गुजरात का एक हिस्सा बाढ़ से बर्बाद है। अभी कृषि मंत्री ने राज्यों के कृषि मंत्रियों की बैठक बुलाकर उनसे त्वरित आपात योजना बनाने को कहा है, लेकिन कोई समयबद्ध कार्यक्रम की घोषणा नहीं की गयी है। देश की ६५ प्रतिशत भूमि वर्षा पर निर्भर है और वर्षा अनिश्चित है। उत्तर प्रदेश के २६ जिले सूखाग्रस्त घोषित किए गए हैं जबकि पूरा प्रदेश सूखे की चपेट में है। चारों तरफ त्राहि त्राहि मची है। जब तक हम कोइ ठोस नीति बाढ़ एवं सूखे के संबंध में नहीं बनायेंगे तब तक स्थिति यथावत बनी रहेगी और संसद में बहस मात्र रस्म अदायगी तक सिमट जायेगी।

सही मायनों में हम खेती के प्रति सदैव उदासीन रहे हैं। हमने कृषि के विकास की परिकल्पनायें तो कीं लेकिन उनको क्रियान्वित नहीं किया। सिंचाई की तमाम परियोजनाओं को पूरा करने में हमने अपेक्षित दिलचस्पी नहीं ली। प्रथम पंचवर्षीय योजना की ५ सिंचाई परियोजनाएं, दूसरी पंचवर्षीय योजना की ७ सिंचाई परियोजनाएं तथा तीसरी पंचवर्षीय योजना की १२ सिंचाई की १४६ परियोजनाएं ऐसी हैं जो लम्बित हैं, जिन्हें पूरा करने हेतु ९० हजार करोड़ रूपये की आवश्यकता है। पानी से सिंचाई की व्यवस्था भी दोषपूर्ण है। १९७०-७१ में नहरों से ४१ प्रतिशत सिंचाई होती थी जो अब ३१ प्रतिशत हो रही है। तालाबों से ३ दशक पूर्व १३ प्रतिशत सिंचाई होती थी, जो अब ५ प्रतिशत हो रही है और नलकूपों से १४ प्रतिशत सिंचाई होती थी जो अब ३३ प्रतिशत हो रही है। इसका मतलब यह है कि हमने भूमिगत जल का दोहन किया और भूमि के अंदर पानी पहुंचाने की कोई व्यवस्था नहीं की। इसका परिणाम यह हुआ कि जलस्तर नीचे गिरता चला गया। यदि स्थिति यही रही तो देश के अधिकांश हिस्से रेगिस्तान हो जायेंगे। सूखे को प्राकृतिक आपदा कहा जाता है। यह सच नहीं है। यह मानव निर्मित समस्या है। देश में २० नदियों के वेसिन हैं, जिनमें सालाना १८६९ वलियन क्यूवस्कि मीटर पानी बहता है। नदियों का ५५ प्रतिशत पानी बगैर प्रयोग के समुद्र में बह जाता है। मई, २००० की विश्व बैंक की रिपोर्ट के अनुसार जल के कुप्रबंधन के कारण ७४ हजार ७३० करोड़ रूपये प्रतिवर्ष की हानि देश को होती है। हमारे देश में अधिकतम वर्षा वाला क्षेत्र १५ प्रतिशत है और इसमें १५० क्यूवस्कि मीटर वार्षिक वर्षा होती है, जो सामान्य वर्षा वाला क्षेत्र है, उसमें ७५ क्यूवस्कि मीटर से कम वर्षा होती है। सबसे कम वर्षा वाला क्षेत्र २१ प्रतिशत है।

यदि १५ प्रतिशत अधिक वर्षा वाले क्षेत्र से २१ प्रतिशत, जो जल अभाव का क्षेत्र है, वही पानी पहुंचाने की व्यवस्था कर दें तो न सूखा रहेगा और न बाढ़, लेकिन यह काम हमने नहीं किया। इस वर्ष भारत सरकार और मौसम विभाग दोनों ने मौसम के संबंध में गलत सूचनायें दीं। उन्हें अंदेशा था कि सच्चाई सामने आने पर प्रतिकूल माहौल बनेगा। आज सबसे बड़ी आवश्यकता है कि कृषि एवं सिंचाई मंत्रालय को एक किया जाये। किसानों के ऋण माफ हों। उ०प्र० सहित सूखा प्रभावित राज्यों को अकालग्रस्त घोषित किया जाये। छोटे एवं मझौले किसानों के लिए ऋण की विशेष व्यवस्था की जाये। सिंचाई परियोजनाओं को अगले ५ वर्षो में पूरा किया जाये। बिजली की आपूर्ति नियमित हो तथा किसानों के लिए डीजल एवं बिजली की दरों में कमी की जाये तथा कृषि मंत्री सूखा से निपटने हेतु क्या प्रभावी पहल कर रहे हैं, उसका खुलासा अभी सदन में किया जाये।

__________________________________________________________________ * Speech was laid on the Table of the House.

                                                       

*श्री सईदुज्जमा(मुज्जफरनगर ): महोदय, आज देश बहुत तकलीफदेह हालात से गुजर रहा है और मुल्क को बड़े संकटों का सामना करना पड रहा है। १५ सालों में यह देश का सबसे बड़ा सूखा है। पूरा मुल्क सूखे की लपेट में हे और कुछ हिस्सा बाढ़ से प्रभावित है। यहां तक कि आंध्राा, कर्नाटक भी इससे प्रभावित हैं। राजस्थान, छत्तीसगढ़, उड़ीसा और नॉर्थ इंडिया तो पूरी तरह सूखे से प्रभावित है।

सरकार को इसका एहसास नहीं है। मौसम विभाग तो मुकम्मल तौर पर फेल हो चुका है। किसानों को गुमराह किया है। किसानों की फसलें तबाह व बरबाद हो चुकी हैं। बुरी तरह सूखे से प्रभावित हैं। जानवरों के लिए चारा भी नहीं है। खेतीहर मजदूर बड़े संकट में हैं, वह भुखमरी की कगार पर हैं। बिजली पानी का बहुत भारी संकट है। बिजली की स्थिति और भी कठिन हो गयी है। जब से १००० मेगावाट उत्तरांचल में चली गयी और करीब ९०० मेगा वाट के पावर स्टेशन उ०प्र० सरकार ने ऊंचाहार और टांडा एन.टी.पी.सी. को बेच दिये। दस सालों में करीब २००० मेगावाट नये उपभोक्ता बढ़े हैं। इस तरह ३९०० मेगावाट की कमी है।

कांग्रेस की सरकार जब से गयी है, कोई बिजली का उत्पादन नहीं बढ़ा है और जो उ०प्र० के पॉवर स्टेशन है, उनकी हालत भी ठीक नहीं है क्योंकि उन्हें सही तरह से मेंटेन नहीं किया जा रहा है। सिंचाई के लिए नहरों का कोई नया निर्माण नहीं हुआ हे जबकि इस संबंध में नयी नीति बननी चाहिए थी ताकि पानी का सही बंटवारा हो सके और किसानों को सिंचाई की अधिक सुविधा हो सकती। पूरा उ०प्र० सूखे से बरबाद हो चुका है और किसान जिंदगी और मौत की लड़ाई लड़ रहा है। भारत सरकार और उ०प्र० सरकार एक महीने से खामोश बैठी है, इस दशा में कोई भी प्रभावी कदम नहीं उठाया गया।

बिजली का प्रदेश में बहुत बड़ा संकट है और उ०प्र० सरकार बिजली देने में पूरी तरह असफल हो चुकी है। ऐसे समय में सरकार को पूरा सहयोग देना चाहिए ताकि मुल्क के किसानों को बचाया जा सके, उद्योग को बचाया जा सके, इस समय जानवरों के लिए चारे का प्रबंध और गरीब लोगों के लिए गेंहू, चावल की व्यवस्था होनी चाहिए, जो नहीं हो पायी। उ०प्र० सरकार ने कुछ जिलों में सूखे की घोषणा की जबकि पूरा प्रदेश इससे प्रभावित है। मेरठ तो इस सूखे से बहुत प्रभावित हुआ है। सिर्फ लगान की वसूली रोकी है। किसानों के बाकी कर्जे के खिलाफ वसूली की कार्यवाही हो रही है जबकि यह अत्यंत दुखदायी है। ऐसे समय में सरकार को किसानों के खिलाफ सभी वसूली की कार्यवाही रोक देनी चाहिए। इसको पूरी तरह से माफ कर देना चाहिए ताकि किसान इन मुश्किलात का सामना कर सके।

किसानों के गन्ने का बकाया भुगतान , जो सरकारी फैक्टरियों पर बाकी है, उसको तुरंत दिया जाना चाहिए। किसानों ने गन्ना डाला है, उनकी फसल का दाम तीन महीने से अब तक क्यों नहीं दिया गया जबकि सारी फसलें तबाह हो चुकी हैं। सरकारी चीनी मिलें क्षमता कम होने और अधिक खर्चा होने के कारण किसानों का भुगतान करने में असफल हो रहे हैं। शुगर मिलों ने जो बैंकों से कर्जा ले रखा है, इसमें चीनी को बंधक किया गया है। हर फैक्ट्री में दो-दो, तीन-तीन लाख बोरे बंद पड़े हैं और चीनी काश्तकारों के भुगतान के लिए रिलीज नहीं की जा रही है। सरकार की जिम्मेदारी है कि वह किसानों का भुगतान तुरंत कराये, जिससे किसानों को कुछ राहत मिल सके। किसान चीनी मिलों पर भूख हड़ताल और धरना कर रहे हैं, अगर सही समय पर भुगतान नहीं किया गया तो भयंकर स्थिति पैदा हो सकती है। सकौती शुगर मिल के किसान २० तारीख से धरने पर बैठा है।

मेरा उ०प्र० और केन्द्र की सरकार से अनुरोध है कि सरकार इसमें तुरंत ऐसे प्रभावी कदम उठाये, किसानों का भुगतान कराये, चारे का प्रबंध कराये, गरीब लोगों के लिए गेंहू, चावल का तुरंत प्रबंध करे, किसानों की देनदारी को स्थगित करके माफ किया जाये। सूखाग्रस्त क्षेत्रों में बिजली व पानी की प्रभावी व्यवस्था की जाये ताकि इन मुश्किलात का सामना किया जा सके। आने वाली रबी की फसल को देखते हुए सरकार को अभी से इस संबंध में योजना तैयार करना चाहिए ताकि रबी की फसल को बचाया जा सके और सभी राज्यों के साथ इन कठिनाइयों में समानता का व्यवहार होना चाहिए और जल नियंत्रण बिजली के संबंध में कोइ नयी योजना बननी चाहिए ताकि आने वाले समय में इन मुश्किलात का सामना करने सक्षम रहे।

_________________________________________________________________ * Speech was laid on the Table of the House.

                           

*श्रीमती कांति सिंह(बिक्रमगंज ): महोदय, बिहार में बाढ़ से १२ जिलों में तो भयावह स्थिति उत्पन्न हो गयी है। साथ ही साथ सूखे की भी त्रासदी से शेष जिला रोहताश, बक्सर, कैमुर, औरंगाबाद, गया पटना, शेखपुरा, भागलपुर में वर्षा के अभाव में वहां के किसानों की स्थिति भयावह हो गयी है। ऐसे हालात में वहां की स्थिति में सुधार लाने के लिये डी पी ए पी कार्य को लागू किया जाये। साथ ही जो किसानों ने ऋण लिये हैं उसको माफ किया जाये और नये तरीके से ऋण देने की सुविधा मुहैया करायी जाये, जिससे वहां के किसानों को सूखे से राहत मिल सके।

इस साल मानसून के कमजोर रहने के कारण अब तक उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश , छत्तीसगढ़, पंजाब, महाराष्ट्र, आंध्रा प्रदेश, कर्नाटक और तमिलनाडु काफी प्रभावित हुए हैं लेकिन इसके अलावा बिहार राज्य भी बाढ़ एवं सूखे की विभीषिका से गुजर रहा है। एक ओर उत्तर बिहार के १२ जिले, जिसमें मुजफ्फरपुर, दरभंगा, मधुबनी, गोपालगंज, पूर्वी चम्पारण, पश्चिम चम्पारण, सीवान, सारण, वैशाली, समस्तीपुर, सहरसा, सीतामढ़ी आदि गंडक नदी के जल ग्रहण क्षेत्रों में हो रही भारी वर्षा और नेपाल से इन नदी में बड़े पैमाने पर पानी छोड़े जाने के मद्देनजर इस क्षेत्र में रेड एलर्ट घोषित किया गया है और बिहार सरकार ने सेना से मदद मांगी है। रेल सेवा भी इन जिलों में बाधित हो रही है। करीब ६५ प्रखंड प्रभावित हैं, २७४ गांव एवं ६.६५ लाख जनसंख्या बाढ़ से प्रभावित है। प्रभावित क्षेत्र २५ हजार हेक्टेयर फसल क्षतिग्रस्त है, जिसकी कीमत लगभग २६.०५ लाख है। मकान ७२४ क्षतिग्रस्त, मृत्यु की संख्या है। यह आंकड़े २३.७.२००२ के हैं। उसके बाद दो दिनों के अंदर और भी स्थिति भयावह हो गयी है।

बिहार के पास अपनी जीविका के लिए कृषि के अलावा कुछ नहीं है। बिहार के सोन नदी पर कदवन जलाशय के निर्माण हेतु नेशनल जल विद्युत कारपोरेशन(एनएचपीसी ) के ११११ करोड़ की योजना राज्य सरकार ने केन्द्र सरकार को भेजी है। इस जलाशय के निर्माण के लिए उत्तर प्रदेश सरकार बाधक बनी हुयी है। झारखंड और बिहार सरकार सहमत हैं। इस वर्ष भी बाण सागर और रिहन्द द्वारा बिहार के हिस्से का पूरा पानी नहीं देने के कारण राज्य के आठ जिलों रोहतास, भोजपुर, कैमूर, बक्सर, औरंगाबाद, गया, जहानाबाद और पटना जिलों के किसानों के मांग के अनुसार सोन नहरों में पानी नहीं दिया जा सका, जिससे इन जिलों में ३० से ४० प्रतिशत धान के बिचड़े खत्म हो गये और पानी के अभाव में लाखों एकड़ भूमि में बोआइ का काम नहीं हो सका है। इन्द्रपुरी बैराज से इन आठ जिलों के १,१०५ वर्ग मील में फैले लगभग १० लाख एकड़ भूमि में सोन नहर प्रणाली द्वारा सिंचाई हेतु पानी दिया जाता है।

   

इसके लिए इन जिलों में २०९ मील में मुख्य नहरों का जाल बिछा हुआ है। १४९ मील में शाखा नहरें और १२३५ मील में वितरणियों का निर्माण किया गया है।

केन्द्र सरकार बिहार के अलावा मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के सरकारों से तत्काल पहल कर रिहन्द और बाण सागर जलाशयों से बिहार के हिस्से के पानी को दिलाये और भविष्य के लिए भी सुनिश्चित किया जाये कि आगे इस तरह की नाइंसाफी बिहार के साथ न हो।

केन्द्र सरकार तत्काल उ०प्र० सरकार से कदवन जलाशय के निर्माण में आ रही बाधाओं को दूर कराये और कदवन जलाशय के निर्माण की मंजूरी दे।

सोन नहर प्रणाली का निर्माण अंग्रेजी सरकार ने डिहरी-ओन-सोन के एनीकट में बैराज बनाकर १८७० में किया था। उस समय १८६० बिहार में भयंकर सूखा पड़ा था और इस क्षेत्र में खून खराबा अपराध बढ़ गया था। यहां की भूमि उपजाऊ थी। लेकिन सिंचाई का साधन नहीं होने के कारण लोग अपराध करते थे। यानि आसुरी शक्तियों का बोलबाला हो गया था। १८७३ में अकाल पड़ने पर पश्चिमी सोन नहर के आरा कैनाल मुख्य नहर के जगह जगह किसानों ने काटकर खेतों में सिंचाई लिया था।

कदवन जलाशय के निर्माण नहीं होने से सोन नहरों के अस्तित्व पर प्रश्नचिन्ह लग जायेगा और लगभग डेढ़ शताब्दी बाद पुन: इस क्षेत्र में आसुरी शक्तियों के बोलबाला होने से खून खराबा बढने की आशंका बढ़ जायेगी।

अत: सूखे की स्थिति से निपटने के लिए सरकार पहल कर वहां के लोगों को राहत पहुंचाने की कार्रवाई करें।

* Speech was laid on the Table of the House.

                                           

श्री चन्द्रनाथ सिंह (मछलीशहर):मेरा भी लखित भाषण सूखे से ही सम्बन्धित है। नियम १९३ के तहत हमारा भी था, हम भी लिखकर दे रहे हैं। …( व्यवधान)

प्रो. एस.पी.सिंह बघेल (जलेसर) : शून्य काल में मुद्दा उठाने के लिए हम पांच दिन से नोटिस दे रहे हैं, वह कहां जायेगा। आज भी हमारा नम्बर दो पर नाम था।…( व्यवधान) जब शून्य काल में समय नहीं दे रहे हैं, इसलिए हमारा लखित भाषण मान लें। हमारा नाम पांच दिन से शून्य काल में एक नम्बर पर आ रहा है।…( व्यवधान)

सभापति महोदय : आपका भाषण लिखा हुआ है तो आप भी दे दें, आपका लिखा हुआ भी माना जायेगा। सभी पार्टियों का जो समय था, वह समाप्त हो गया। जिनका नाम आया, उन सभी माननीय सदस्यों को एकोमोडेट किया गया। अब केवल श्री रामदास आठवले का भाषण होगा और सरकार का जवाब होगा।

श्री चन्द्रनाथ सिंह : हमारा नियम १९३ के अन्तर्गत नोटिस था। मैं भी लिखकर दे रहा हूं।

सभापति महोदय : आपके भी लखित भाषण को प्रोसीडिंग्स का हिस्सा मान लिया जायेगा। आपने भाषण जमा कर दिया है न? आप लखित भाषण दे सकते हैं।

श्री शंकर प्रसाद जायसवाल: कार्यवाही के अन्तर्गत माननीय अध्यक्ष महोदय ने हमसे यह कहा कि नियम १९३ की चर्चा के समय आपको अवसर दिया जायेगा। अगर कार्यवाही के अन्तर्गत माननीय अध्यक्ष जी का यह आश्वासन नोटिड है तो मैं आपसे पूछना चाहता हूं कि क्या सभापति महोदय, आप माननीय अध्यक्ष जी के इस आश्वासन के खिलाफ रूलिंग देंगे?

सभापति महोदय : यहनियम और परिपाटी है कि किसी विषय के निर्धारण के पश्चात पार्टी की तरफ से व्हिप के द्वारा नाम आता है। जो माननीय सदस्य बोलने को उत्सुक हैं, रुचि लेते हैं, वे अपने व्हिप के मार्फत अपना नाम यहां भिजवाते हैं। ऐसे लगभग सभी लोगों को एकोमोडेट किया गया है।

श्री शंकर प्रसाद जायसवाल:माननीय सभापति जी, क्षमा करेंगे, नियम १९३ के अंदर, शून्य काल के अंदर भी हमें चेयर की तरफ से आश्वासन दिया गया था, फिर मैं वाया पार्टी क्यों जाऊं, सीधा चेयर से आश्वासन था।

सभापति महोदय : आपने कहा कि दो बार उठा चुका हूं, तब जवाब सुनिए।

श्री रामानन्द सिंह (सतना): इन्होंने नोटिस दिया था, इनको बोलने की अनुमति दी जाए।

सभापति महोदय : ऐसा नहीं है। नियम १९३ में बहुत सारे सदस्य नोटिस देते हैं, दे सकते हैं, लेकिन यह अनिवार्यता नहीं है कि उनको बुलाया ही जाए। पार्टी की तरफ से नाम आना जरूरी है।

श्री शंकर प्रसाद जायसवाल: आप बताएं कि चेयर के आश्वासन के बावजूद, अध्यक्ष महोदय के कहने के बावजूद भी आप हमें बोलने का मौका देंगे या नहीं। आप इस पर रूलिंग दे दें तो मैं बैठ जाता हूं या मुझे बोलने का समय दें।

सभापति महोदय : आप बैठ जाएं।

श्री रामदास आठवले (पंढरपुर):सभापति महदोय, नियम १९३ के अंतर्गत सदन में कल से बाढ़ और सूखे पर चर्चा हो रही है। देश आजाद होने के बाद जब से संसद का गठन हुआ है, हर साल मानसून सत्र में इस विषय पर चर्चा होती है। इस विषय पर चर्चा होना कोई गलत बात नहीं है। मगर यह अपने देश के लिए कोई गौरवपूर्ण भी नहीं है कि हर साल हम सूखे और बाढ़ पर चर्चा करते रहें। जब हम भूकम्प और तूफान का सामना कर सकते हैं तो फिर इसका क्यों नहीं कर सकते. इसलिए बाढ़ को रोकने के लिए कोई प्रावधान करने की आवश्यकता है। जहां-जहां हर साल बाढ़ आती है, वहां का पानी सूखाग्रस्त क्षेत्र में ले जाने के लिए हमें योजना बनानी चाहिए। अजित सिंह जी को मेरा इतना ही कहना है कि हमारे यहां महाराष्ट्र में कई जगह बाढ़ आई हुई है। वहां कम से कम ८६ लोग मर गए हैं। मुम्बई में बहुत बारिश होती है। मैंने राज्य सरकार को भी कहा है और आपसे भी कहना चाहता हूं कि जहां अधिक बारिश आती है, वहां से सूखाग्रस्त क्षेत्रों की तरफ पानी ले जाया जाए, जिससे इस समस्या का निदान हो सकता है। इस बारे में संसद को गम्भीरता से सोचना चाहिए। बिहार में बाढ़ आई हुई है और कई राज्यों में सूखा पड़ा हुआ है। इसका सामना करने के लिए हमें पानी को रोकना चाहिए। पानी रोक कर ही हम इस इश्यू को हल कर सकते हैं। जहां-जहां बाढ़ आती है, वहां के लिए भी सरकार को कदम उठाने की आवश्यकता है।

अभी स्थिति ऐसी है कि आतंकवादी चूस रहे हैं हमारा ब्लड जम्मू-कश्मीर हो या कहीं भी हो, जगह-जगह पर बर्बादी कर रहा है फ्लड।

अजित सिंह जी, आपका नाम है सिंह अजित, आपको करना होगा किसानों का हित।

   

गाना होगा आपको सूखे और बाढ़ नष्ट करने का गीत।

 

नहीं तो आने वाले चुनावों में आपकी नहीं होगी जीत।

इसलिए आपको इस बारे में गम्भीरता से सोचने की आवश्यकता है।

जब-जब आप लोगों को मिला है मौका तब-तब आपने किसानों को दे दिया है धोखा इसलिए देश में पड़ गया है सूखा।

अगर हमें सत्ता में आने का मिलेगा मौका, कभी नहीं रहेगा देश में सूखा।

सभापति महोदय, मैं ज्यादा न बोलकर केवल इतना ही कहूंगा।

जीवन दान देता है पानी, प्राण लेता भी है पानी, किसान का प्राण है पानी, प्राण की शान है पानी, मकान को तोड़ता है पानी, मकान को जोड़ता भी है पानी, सूखे को खत्म करता है पानी, इसलिए धान को अगर आपकी,     सरकार नहीं पिलाएगी पानी, तो उनके जीवन में हो जाएगा पानी ही पानी।

 

इसलिए मैं यह कहना चाहता हूं कि बाढ़ और सूखा खत्म करने के लिए आपका प्लान ऐसा होना चाहिए कि सूखा और बाढ़ का सामना हम लोग कर सकें।

       

______________ १४.२४ hrs. सभापति महोदय : शंकर प्रसाद जायसवाल जी, केवल एक-दो मिनट ही बोलें।

श्री शंकर प्रसाद जायसवाल (वाराणसी):सभापति महोदय, मैं आपको बहुत-बहुत धन्यवाद देता हूं कि उन्होंने अपनी परम्परा की रक्षा की है। सदन के इस सत्र के प्रथम दिन सबसे पहले सूखा के ऊपर मैंने ज़ीरो ऑवर में प्रस्ताव भेजा था।

श्री चन्द्रनाथ सिंह : हमने आपसे पहले प्रस्ताव दे रखा था। हमारा और सुमन जी का प्रस्ताव पहले है।…( व्यवधान)

श्री शंकर प्रसाद जायसवाल:आप तो पैदा भी हमसे पहले हो गये हैं।…( व्यवधान)सभापति जी, यू.पी. के साथ कई राज्यों में सूखे की स्थिति इसलिए बन गई कि बंगाल की खाड़ी पर जो दवाब था, वह कमजोर पड़ गया। मौसम विभाग ने जो सूचनाएं दी, उसकी जितनी भी आलोचना की जाए, वह कम है। सरकार को मौसम विभाग के बारे में गंभीरता से विचार करना चाहिए। उत्तर प्रदेश में स्थिति सूखा के मामले में और कई दूसरे मामले में बहुत ही खराब है। पूरे उत्तर प्रदेश के एकाध जिलों को छोड़ दिया जाये तो मंत्री जी, आप भी हमारी राय से समहत होंगे कि बाकी पूरा प्रदेश सूखे से ग्रस्त है। जिलाधिकारी ने जिले की संस्तुति भेजने में देर कर दी और उत्तर प्रदेश सरकार ने घोषणा नहीं की, ये सब बातें अलग बातें हैं। इसमें प्रशासनिक कमजोरियां हो सकती हैं लेकिन जब उत्तर प्रदेश के लोगों की राय इस प्रकार की होगी और पूरा यू.पी. सूखे की चपेट में आ गया तो पूरे यू.पी. को सूखाग्रस्त घोषित करना चाहिए। मैं केन्द्र सरकार से आग्रह करूंगा कि केन्द्र सरकार एक दल यू.पी. में भेजे जो सूखे का निरूपण करे और अपनी ओर से यू.पी. के सूखाग्रस्त इलाके के लिए जो भी सुविधाएं हैं या पैकेज है, वह भिजवाने का कष्ट करे।

मैं आपका ध्यान इस ओर भी आकृष्ट करना चाहता हूं कि यू.पी. में बिजली की भी बहुत समस्या है। अब बरसात नहीं हुई तो केवल नलकूप ही वहां किसानों की खेती का आधार बन जाते हैं। धान की फसल चली गई, मोटा अनाज की फसल भी जा रही है। अगर नलकूप ठीक होते और बिजली की सप्लाई ठीक होती तो नहरों से पानी मिलता और यू.पी. में किसानों के आंसू पुछ जाते लेकिन बिजली की सप्लाई की दिक्कत होने के कारण आज वहां यह स्थिति है कि नलकूप के द्वारा सिंचाई के लिए जो पानी दिया जाना चाहिए, वह भी हम नहीं दे पा रहे हैं।

मैं आपके माध्यम से केन्द्रीय सरकार से अनुरोध करूंगा कि विद्युत विभाग पर अगर कुछ बकाया है, तो आपात स्थिति को ध्यान में रखते हुए बकाया राशि की ओर केन्द्र को नहीं देखना चाहिए, बल्कि उदारतापूर्वक बिजली की सप्लाई करनी चाहिए, ताकि नहर से सिचाई और नलकूपों को बिजली की सप्लाई हो सके। इसके साथ मैं यह भी कहना चाहता हूं कि केन्द्रीय सरकार को अन्य छूटें जो दी जा सकती हैं, उनके बारे में भी विचार करना चाहिए, जैसे बैंकों से बकाया वसूली को स्थगित किया जा सकता है। यह समस्या केवल उत्तर प्रदेश की नहीं है, जिन राज्यों में सूखा पड़ा है, उन राज्यों में किसानों से बकाया वसूली को स्थगित करना चाहिए। इसके साथ ही अगर कर्ज को माफ किया जा सकता है, तो इस पर भी केन्द्रीय सरकार को विचार करना चाहिए।

महोदय, काम के बदले अनाज योजना को चलाए जाने के लिए मैं केन्द्रीय सरकार की प्रशंसा करता है। दक्षिण के कई राज्यों में काम के बदले अनाज योजना लागू है। उत्तर प्रदेश, बिहार और उत्तर भारत के अन्य प्रदेशों में अगर इस योजना की आवश्यकता पड़ती है, तो सरकार को पीछे नहीं रहना चाहिए और इस योजना को भारी मात्रा में लागू करना चाहिए।

इन शब्दों के साथ मैं, सभापति महोदय, आपको बार-बार धन्यवाद देता हूं और अपनी वाणी को विराम देता हूं।

   

* SHRI CHANDRA VIJAY SINGH (MORADABAD) : Sir, I share the anguish and concern of the nation regarding the prevalent conditions of drought. The Uttar Pradesh Government has been acting in a most insensitive manner on this issue.

Most sugar mills owe farmers’ crores of rupess; diesel prices are high; fertilizers are expensive. Yet no effort is being made to reduce diesel prices; increase subsidies on fertilizers or induce mill owners to pay farmers.

Selection of drought prone districts is being done, not on the basis of rainfall received, but on political considerations. For example, Moradabad has been left out and neighbouring Bijnor and Rampur included in that list.

Farmers are being jailed because of recovery of dues from them cannot be undertaken. The Government should intervene, stay all recovery of arrears; stop harassing farmers; subsidise diesel and fertilizers and declare my district, Moradabad as drought prone – if not, the whole of Uttar Pradesh.

                                                   

*Speech was laid on the Table of the House.

   

गृह मंत्रालय में राज्य मंत्री (श्री ईश्वर दयाल स्वामी) : सभापति महोदय, इस विषय पर कल सारा दिन और रात बड़ी महत्वपूर्ण चर्चा हुई है, जिसमें महत्वपूर्ण दूरगामी सुझाव भी आए हैं। आम तौर पर प्रदेश सरकारों की शिकायत रहती है कि इमीडिएट रिलीफ में सीआरएफ और एनसीसीएफ में जो पैसे दिए जाते हैं, वे रोक दिए जाते हैं। …( व्यवधान)बहस में ज्यादा चर्चा बाढ़ से ज्यादा सूखे की हुई है, क्योंकि देश में आठ प्रदेश फल्ड से प्रभावित हैं और सूखे से तकरीबन सारा देश प्रभावित है, इसलिए माननीय सदस्यों को ज्यादा चिन्ता है। …( व्यवधान)

श्री प्रभुनाथ सिंह (महाराजगंज, बिहार) : बाढ़ से लोग मर रहे हैं।

श्री ईश्वर दयाल स्वामी : बाढ़ से लोग मर भी रहे हैं, सड़कें भी टूट रही हैं, रेल लाइन भी टूट रही हैं और नेशनल हाईवेज़ को भी नुकसान हुआ है। इसमें ज्यादातर असम, बिहार, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों को ज्यादा नुकसान हुआ है। …( व्यवधान)बहस के दौरान एक बात की चर्चा ज्यादा है कि हमारे पास पैसा नहीं होता है, चाहे सूखा हो, फल्ड हो, हेलस्टार्म हो, इनको देखने के लिए एक हाई लेवल कमेटी बनाई गई है, जिसके चेयरमैन डिप्टी प्राइम मनिस्टर होंगे और एग्रीकल्चर मनिस्टर, फाइनेंस मनिस्टर, डिप्टी चेयरमैन प्लानिंग कमीशन सदस्य होंगे। इसके साथ जो सेन्ट्रल टीम्स जायेंगी, वे अपनी रिपोर्ट इनको देंगी। इसके अलावा इन्टर मनिस्टीरियल ग्रुप बनाया गया है, जिसमें होम सैक्रेटरी और दूसरे विभागों के सचिव होंगे। ये सब बैठकर स्थिति को देखेंगे । सैन्ट्रल टीम की रिकमैंडेशन्स, इन्टर मनिस्टीरियल ग्रुप की रिकमेंडेशन्स को हाई लेवल कमेटी देखेगी कि कहां-कहां कितनी-कितनी कन्टिनजेंसी फन्ड में पैसे की जरूरत है। आम तौर पर यह इम्प्रैशन होता है कि स्टेट्स के पास इम्मिजेट राहत के लिए पैसा नहीं होता है। पांच साल के बाद फाइनान्स कमीशन बैठता है और वह इस बारे में पूरी व्यवस्था करता है। १०वें फाइनान्स कमीशन ने जो व्यवस्था की थी. उसे ११वें फाइनान्स कमीशन ने बढ़ा दिया और छ: हजार की बजाय ११ हजार करोड़ रुपए के करीब उसमें व्यवस्था की गई है। तमाम कैलेमिटी रिलीफ फंड प्रदेशों को दिया जाता है। उसका पैसा भी उन्होंने हर प्रदेश के लिए निश्चित किया है। केन्द्र सरकार बगैर किसी रिपोर्ट और मांग के मई में यानी फ्लड आने से पहले का जो समय होता है, पहली किश्त सब प्रदेशों को भेजती है।

सभापति महोदय, आप बिहार की बात कर रहे थे और दूसरे माननीय सदस्यों ने भी बिहार के बारे में चर्चा करते हुए कहा कि पैसा रोक दिया गया। ऐसी बात नहीं है। पहली इनस्टॉलमैंट मई में दे दी जाती है लेकिन दिक्कत यह है कि कुछ प्रदेश एकाउंट्स नहीं भेजते हैं। उसके लिए अलग एकाउंट है और उस पैसे को अलग एकाउंट में क्रैडिट करना पड़ता है। उससे जितना पैसा इम्मिडिएट राहत के लिए देना होता है, खर्च किया जाता है । फ्लड आने से पहले प्रदेशों की जिम्मेदारी है कि वह नहरों की सफाई कर दे. चैनल्स् को ब्लॉक न होने दें, जहां फ्लड की संभावना है वहां वार्निंग दे दे। ये सब करने के बाद जो पहली इनस्टॉलमैंट उनके पास गई है, उससे राहत कार्यों, ग्रैच्यूअस रिलीफ और लोगों को शिफ्ट आदि की व्यवस्था की जाती है। यदि उन्होंने पैसा क्रैडिट कर दिया और जो पैसा उन्होंने कैलेमिटी रिलीफ फंड से खर्च किया है, किन-किन मदों में किया है, उन सब की रिपोर्ट आने के बाद अगली किस्त दी जाती है। यदि नवम्बर से पहले शदीद फ्लड आ जाए या नैचुरल कैलेमिटी का डाइमैंशन बहुत बड़ा हो तो एंटीसिपेशन में इसे दिया जाता है। मैं बिहार के बारे में यह जरूर कहना चाहूंगा कि वहां से अभी तक सर्टफिकेट नहीं आया है, कोई रिपोर्ट नहीं आई है। बिहार की मुख्यमंत्री प्रधान मंत्री से मिली। उनको अभी तक यही कहा जा रहा है अगर सर्टफिकेट आ जाए तो अच्छा होगा। ऐसा इम्प्रैशन है कि कुछ स्टेट्स के साथ भेदभाव किया जाता है। ऐसी बात नहीं है। ७-८ स्टेट्स ऐसी हैं …( व्यवधान)

श्री अमर राय प्रधान(कूचबिहार) : पश्चिम बंगाल और असम के बारे में बताएं वहां अभी तक क्या भेजा है?

SHRI PRIYA RANJAN DASMUNSI (RAIGANJ): In anticipation of the crisis, how much money have you advanced to West Bengal? That is the question. हमें इसके आंकड़े दे दीजिए जिससे जानकारी हो जाए।

श्री ईश्वर दयाल स्वामी: बिहार से सर्टफिकेट नहीं आया है । जुलाई में वहां की मुख्यमंत्री मिली थी। वहां पहले केन्द्र का पैसा इन एंटसिपेशन भेज दिया गया था। अभी इंतजार किया जा रहा है कि वह एकाउंट्स भेजकर उसमें क्रैडिट करके जितना पैसा खर्च हो चुका है उस सर्टफिकेट को वह भेज दें। इससे पिछले साल की दूसरी इनस्टॉलमैंट और इस साल की पहली इनस्टॉलमैंट तुरन्त् उसी वक्त रिलीज कर दी जाएगी। यह इम्प्रैशन गलत है कि केवल बिहार ही नहीं ६-७ राज्य ऐसे हैं जहां अभी तक सर्टफिकेट क्रैडिट करके एक्सपैंडिचर सीआरएफ का नहीं आया है। जैसे ही सर्टफिकेट आएगा उनको अगला पैसा, अगली किश्त तुरन्त भेज दी जाएगी। आपने पूछा कि कौन-कौन सी स्टेट्स में कितना पैसा दिया? फाइनान्स कमीशन ने २००१ से २००५ तक का रखा था …( व्यवधान)

श्री प्रभुनाथ सिंह: पहले पैसा भेजा, वह खर्च हुआ या नहीं उसका हिसाब लेते-देते रहेंगे। अभी तत्काल बिहार बाढ़ से डूब रहा है। राहत कार्यों के लिए तत्काल सरकार कुछ काम करना चाहती है या नहीं?

श्री ईश्वर दयाल स्वामी:आपने कल कहा था कि सैंट्रल टीम भेज दी जाए। मैंने कल कह दिया था कि मेमोरंडम आते ही सैंट्रल टीम वहां भेज दी जाएगी।

श्री प्रभुनाथ सिंह: क्या तत्काल रिलीफ के लिए व्यवस्था कर रहे हैं या सर्वेक्षण ही करते रहेंगे?

श्रम मंत्रालय में राज्य मंत्री (श्री अशोक प्रधान) : अभी प्रभुनाथ सिंह जी कह रहे थे कि आप बिहार को पहले खत्म कर दीजिए। बिहार तो पहले ही खत्म होता जा रहा है, वहां क्या बचा है।

डॉ. सुशील कुमार इन्दौरा (सिरसा) : माननीय मंत्री जी ने सूखे और बाढ़ को प्राकृतिक आपदा का नाम दिया है, जबकि मौसम विभाग की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष १९८८ से लेकर आज तक मौसम विभाग यह कहता है कि मानसून नॉर्मल है, वर्षा भी नॉर्मल रही है। जब देश में वर्षा नॉर्मल है, मानसून समय पर आया है। अब की बार मानसून थोड़ा लेट हुआ है, जब ये सारे बातें है तो आप प्रकृति को क्यों दोष दे रहे हैं। आप क्यों कह रहे हैं कि यह प्राकृतिक आपदा है। क्या हम यह नहीं कह सकते कि इसमें सरकार की कमी रही है। चाहे वह पिछली सरकारों की कमी रही हो या अब की सरकार की कमी रही हो, लेकिन इसमें सरकार की कमी रही है। जहां अधिक जल है, वहां वाटर मैनेजमैन्ट के बारे में आप बतायें। आप इसे प्राकृतिक आपदा का नाम क्यों दे रहे हैं।

श्री ईश्वर दयाल स्वामी :उसके बारे में लांर्ग टर्म और शॉर्ट टर्म क्या प्लानिंग है, उसके बारे में हमारे वाटर रिसोर्सेज के आदरणीय मंत्री श्री सेठी जी आपको पूरे डीटेल में बतायेंगे। कृषि मंत्री जी स्वयं उसमें पूरा जवाब देंगे। मैं सिर्फ इतना क्लियर करना चाहता हूं कि जो कोऑर्डीनेशन का काम है, जो डिसास्टर मैनेजमैन्ट का काम है, यह रीसेन्टली जून में ही होम मनिस्ट्री को ट्रांसफर किया गया है और इसीलिए अब उन्होंने एक हाई पावर कमेटी बना दी है। जैसा मैंने पहले बताया कि ये सारे डीटेल्स वह आपको बतायेंगे, लेकिन जो आपने पूछा है कि अभी तक कितना पैसा सैन्टर ने दिया है।…( व्यवधान)

श्री रामजीलाल सुमन (फिरोजाबाद):सभापति जी, बुनियादी सवाल यह है कि इस काम को गृह मंत्रालय भी देखता है, सिंचाई मंत्रालय भी देखता है और कृषि मंत्रालय भी देखता है। कृषि और पानी के सवाल को देखने के लिए अन्य मंत्रालय की आवश्यकता नहीं है। इसके लिए एक मंत्रालय काफी है। कृषि मंत्रालय से इन सब चीजों को सम्बद्ध कर दिया जाए तो वह ज्यादा सार्थक होगा।

श्री अमर राय प्रधान : आपने पश्चिम बंगाल में कितना पैसा दिया है।

श्री ईश्वर दयाल स्वामी: जो पैसा दिया गया था, इसमें जो सैन्टर का शेयर है, इसमें बिहार के लिए वर्ष २००२-२००३ में ५५३७ लाख रुपये, मध्य प्रदेश के लिए ५७८ लाख रुपये, उत्तर प्रदेश के लिए १२०९५ लाख रुपये, राजस्थान के लिए १७,११६ लाख रुपये दिये हैं। यह टोटल पैसा बांटकर…( व्यवधान)

श्री अमर राय प्रधान :आप वैस्ट बंगाल और आसाम के बारे में बतायें। वहां आपने कितना पैसा दिया।…( व्यवधान)

श्री प्रियरंजन दासमुंशी:आसाम और वैस्ट बंगाल में अभी जो फ्लड आ रही है, उसके लिए आपने कितना-कितना पैसा दिया है।

श्री ईश्वर दयाल स्वामी: वैस्ट बंगाल को ८१६१ लाख रुपया दिया गया है। लेकिन सी.आर.एफ. का पैसा है…( व्यवधान)आसाम को २००१-२००२ में ७९.९२ करोड़ रुपया सी. आर. एफ सेन्ट्रल शेयर दे दिया गया था। २००२-२००३ में ४१.९६ करोड़ रुपये सेन्ट्रल शेयर दिया गया था। लेकिन जो एन.सी.एफ. और सी.आर.एफ. का पैसा है, उसमें ७५ परसेन्ट सैन्टर का और २५ परसेन्ट राज्यों का शेयर होता है। उसमें अगर स्टेट अपना शेयर न डाले, वह सर्टीफिकेट न भेजे या ७५ परसेन्ट को क्रेडिट न करे , उसका एकाउंट न दे। उसके बाद उन्हें अगली किस्त में दिक्कत आती है। लेकिन जब भी ऐसी सिचुएशन अराइज होती है तो जो टीम जाती है, उस टीम को भेजते हुए हम उन्हें इंस्ट्रक्शन देंगे…( व्यवधान)

श्री प्रभुनाथ सिंह : इसमें बिहार को बहुत कम मिला है। यह किस आधार पर पैसे का आबंटन करते हैं।

श्री ईश्वर दयाल स्वामी: बिहार को २००१-२००२ की पहली किस्त मिली हुई है। उसे कैलामिटी रिलीफ फंड वर्ष २००२-२००३ की किस्त जानी चाहिए थी, वह ६-७ स्टेट्स को अभी तक नहीं दी गई है, क्योंकि वहां से सूचना नहीं आई कि प्रथम उन्होंने क्रैडिट किया या नहीं, उन्होंने एकाउंट खोला या नहीं। बिहार ने अभी तक एकाउंट नहीं खोला था। अब उन्होंने एकाउंट खोल लिया है, लेकिन अभी तक सर्टीफिकेट नहीं आया है कि उन्होंने कितना पैसा जमा करके कितना खर्च किया है।…( व्यवधान)

श्री अमर राय प्रधान :पश्चिम बंगाल को आपने एक पैसा नहीं दिया।

श्री ईश्वर दयाल स्वामी: पश्चिम बंगाल को वर्ष २००१-२००२ में ३९८१ लाख रुपये दिये थे। वर्ष २००२-२००३ में ८१.६१ करोड़ रुपये पहले ही दिये जा चुके हैं।

…( व्यवधान)

श्री अमर राय प्रधान :सर, ८ हजार करोड़ रुपए में से केवल ८१ करोड़ रुपए दिए गए हैं। अभी तक पश्चिम बंगाल और असम में बाढ़ का जायजा लेने के लिए सेंट्रल गवर्नमेंट ने अपनी टीम नहीं भेजी है।

श्री ईश्वर दयाल स्वामी: सेंट्रल शेयर के बारे में मैं बताना चाहता हूं कि गोवा, मणिपुर, मिजोरम की फस्र्ट इंस्टालमेंट रिलीज नहीं हुई है। बिहार, छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, उड़ीसा, पंजाब और त्रिपुरा की भी इंस्टालमेंट रिलीज नहीं हुई है। ये कहते हैं कि बिहार की नहीं हुई है, पश्चिम बंगाल की नहीं हुई है, ऐसा नहीं है, अन्य राज्य भी ऐसे हैं जिनकी इंस्टालमेंट रिलीज नहीं की गई हैं। केवल बिहार और पश्चिम बंगाल की तरफ से ही एकाउंट नहीं आए, ऐसी बात नहीं है अन्य राज्यों की तरफ से एकाउंट और सर्टफिकेट नहीं आए हैं।

श्री लक्ष्मण सिंह (राजगढ़): सभापति महोदय, मैं गृह मंत्री जी से निवेदन करूंगा कि वे मेरी बात एक मिनट सुनने के लिए बैठ जाएं।

मैं निवेदन करना चाहता हूं कि आज सुबह ही हमने " आज तक " में एक समाचार देखा कि बिहार के मधुबनी और अन्य जिलों में बाढ़ आई हुई है। लोग वहां चड़ियों की तरह पेड़ों पर बैठे हैं। वहां बाढ़ से २० लाख लोग प्रभावित हुए हैं और केन्द्र सरकार ने उनकी मदद के लिए आर्मी का केवल एक हैलीकॉप्टर भेजा है। इतनी संख्या में और इतने सारे क्षेत्र में प्रभावित लोगों को एक हैलीकॉप्टर कैसे राहत पहुंचा पाएगा, यह बात मैं उनसे कहना चाहता हूं और निवेदन करना चाहता हूं कि और हैलीकॉप्टर भेजे जाएं।

श्री ईश्वर दयाल स्वामी: सभापति महोदय, मैं माननीय सदस्य की सूचना के लिए बताना चाहता हूं कि वहां एक नहीं, बल्कि तीन हैलीकाप्टर भेजे गए हैं। दो स्टेंडबाई हैं। तीनों हैलाकॉप्टर अलग-अलग क्षेत्रों में राहत सामग्री पहुंचाने और जनता को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में मदद कर रहे हैं। दो कॉलम आर्मी के आज ही सरसावा एयरफील्ड से भेजे गए हैं।

श्री लक्ष्मण सिंह : महोदय, आज प्रात:काल के आज तक के समाचार में मैंने स्वयं देखा है कि आर्मी का केवल एक ही हैलीकॉप्टर उड़ रहा है, यह बताया गया है। कृपया इस बात की जांच करा लीजिए।

श्री ईश्वर दयाल स्वामी: मैं आपको बताना चाहता हूं कि कल यह बात हमारे ध्यान में श्री देवेन्द्र प्रसाद यादव जी ने लाई थी। मैंने आज सुबह ही जानकारी ली है और कन्फर्म किया है कि आज प्रात: से बिहार में तीन हैलीकॉप्टर उड़ रहे हैं और दो स्टैंडबाई रखे गए हैं.। सरसावा एयरफील्ड से आर्मी के कॉलम और भेज दिए गए हैं। दो कॉलम असम में काम कर रहे हैं और दो बिहार में काम कर रहे हैं। वे ४० टन सामान आलरेडी उठा चुके हैं और सारा काम किया जा रहा है।

आदरणीय सांसदों से मेरे कहने का मतलब यही है कि वे इस बात का जरूर ध्यान रखें कि वे अपनी-अपनी राज्य सरकारों को कहें कि उनका पैसा सेंटर में रुका हुआ है, इसलिए वे सर्टफिकेट जल्दी से जल्दी भेजें और जितना खर्च हुआ है उसको दिखा दें कि आपने क्रेडिट कर दिया कि नहीं। हम केवल सर्टफिकेट चाहते हैं और कोई चीज नहीं मांगते हैं। जैसे ही राज्य सरकारों की ओर से हमारे पास सर्टफिकेट आ जाएगा हम सी.आर.एफ. के तहत उनकी सैकिंड इंस्टालमेंट अगर रुकी हुई है, तो वह भी रिलीज कर देंगे। यदि इससे पहले की भी उनकी इंस्टालमेंट नहीं पहुंची है, तो वह भी हम रिलीज कर देंगे।

अगर स्टेट गवर्नमेंट में कोई ऐसी कैलेमिटी होती है, तो उनके पास साधन कम न हों, इस बात को ध्यान में रखते हुए ११वें वित्त आयोग ने जो पैसा बांटा है, उसकी पहली किस्त की रकम पहले ही राज्य सरकारों को भेज दी है, जो उनके पास होती है ताकि यदि कहीं राहत की जरूरत हो, तो तुरन्त राहत कार्य प्रारंभ करने हेतु, राशन देने के लिए, टैंट देने के लिए, जनता को वहां से शिफ्ट करने के लिए, ये सब काम करने के लिए उनके पास पर्याप्त पैसा रहे। इन कामों पर ज्यों ही वे खर्च करें और उसका सर्टफिकेट हमें भेजें, हम दूसरी किस्त तुरन्त रिलीज कर देंगे, लेकिन उनका सर्टफिकेट देना नितान्त आवश्यक होता है।

महोदय, दोनों मंत्री महोदय इस बारे में पूरा विस्तार से जवाब देंगे। मैंने सिर्फ संक्षेप में ही अपनी बात बताई है। मैं माननीय सदस्यों के ध्यान में यह बात भी लाना चाहता हूं कि एक हाई पॉवर कमेटी का भी गठन किया गया है। प्रदेशों में बाढ़ एवं अन्य कारणों से जो सड़कें इत्यादि टूट जाती हैं तो रिलीफ सामग्री पहुंचाने के लिए उनकी तुरन्त मरम्मत पर हुए व्यय को देने के लिए यदि वे केन्द्र की इस हाई पावर कमेटी के पास पैसा देने के लिए प्रस्ताव भेजेंगे, तो उस पर भी हाई पॉवर कमेटी विचार करेगी। मैं इतना स्पष्ट करना चाहता हूं कि इन्फ्रास्ट्रक्चर डवलप करने के लिए वह पैसा खर्च नहीं किया जा सकता है, लेकिन हमने यह प्रावधान किया है, यह व्यवस्था की है कि जो हाई पॉवर कमेटी है उसके पास ऐसे जितने भी प्रपोजल प्रदेशों की ओर से आएंगे उनके ऊपर विचार किया जाएगा और ऐसा करते समय पहले सेंट्रल टीम की रिपोर्ट देखी जाएगी फिर जो इंटर मनिस्टर ग्रुप बना हुआ है, उसकी रिक्मेंडेशन होगी, उसके बाद वह हाई पॉवर कमेटी के पास जाएगा। हाई पावर कमेटी उप प्रधान मंत्री महोदय की अध्यक्षता में होगी। उसमें दूसरे मंत्री भी होंगे, वे देखेंगे और उसमें जितना पैसा रिकमंड होगा, वह दे दिया जायेगा। यह इल्जाम गलत है, कई दफा यह कहा जाता है कि सी.आर.एफ. का पैसा हमारा खत्म हो गया है इसलिए एन.सी.सी.एफ. से पैसा दिया जाये। ऐसी व्यवस्था नहीं हो सकती, क्योंकि नैशनल कैलेमिटी कंटीजेंसी फंड सब लोगों पर जो इनकम टैक्स पेयी हैं, उन पर सेस लगाकर इकट्ठा किया जाता है। उसको जब परपस हो, तब इस्तेमाल किया जाता है। जब एक्सट्रीम कैलेमिटी आती है और सी.आर.एफ. के सारे पैसे खत्म होने के बाद ऐसी पोजीशन हो जाये, जहां उस प्रदेश को इस फंड से मदद करनी है, तब देते हैं। इसीलिए यह हाई पावर्ड कमेटी बनाई गई है। मैं इतना ही कहना चाहता हूं।

SHRI PRIYA RANJAN DASMUNSI : Sir, through you, I have a suggestion to make to the hon. Minister and he could refer it to the hon. Prime Minister in view of the gravity of the situation. Every now and then, there is a natural calamity. The Minister of Home Affairs is extremely preoccupied to safeguard the interests of the nation. They are concerned with the maintenance of internal security and fighting of cross-border terrorism. I would like to suggest that the relief measures and the natural disaster should be dealt with separately by an independent desk without clubbing it to the Ministry of Home Affairs. He could talk to the Prime Minister about this suggestion. The Ministry of Home Affairs is over-burdened. How could that Ministry deal with it? … (Interruptions)

*श्री चन्द्रनाथ सिंह (मछलीशहर ): सभापति महोदय, बहुत बहुत धन्यवाद कि नियम १९३ के अन्तर्गत बाढ़ एवं सूखा पर आपने मुझे अपने विचार रखने की अनुमति दी है। सदन में सूखा के विषय पर चर्चा हो रही है। मैं कहना चाहता हूं कि यह सूखा नहीं है भयंकर अकाल है। १०० वर्षो में इतना भयंकर सूखा मेरे क्षेत्र मछलीशहर में नहीं पड़ा। जनपद जौनपुर एवं प्रतापगढ़ की सभी फसल नष्ट हो गयीं। किसानों को आने वाले दिनों में भूखों मरना पड़ेगा। अकाल इसलिए है कि भारतीय खाद्य निगम के भंडारों से अनाज गायब हो गये है। गरीबी रेखा के नीचे लोगों में अनाज नहीं बांटा जा रहा है। काला बाजारियों, भ्रष्ट अधिकारियों के लूट के कारण गरीबों तक को अनाज नहीं पहुंच पा रहा है। यदि सूखा पीड़ित किसानों को अब तक कुछ सहायता मिल जाती तो इतनी बुरी हालत नहीं होती लेकिन सम्पूर्ण ग्रामीण रोजगार योजना मेरे जनपद जौनपुर तथा प्रतापगढ़ में कागज पर चल रहा है, अधिकारियों की तिजोरी भर रही है और अनाज मजदूरों को नहीं मिल रहा है। अधिकारियों के लूट, भ्रष्टाचार के चलते गरीब मजदूरों को कुछ नहीं मिल रहा है। इसलिए अकाल की स्थिति बन गयी है।

महोदय, आज २६ जुलाई हो गयी, १५ जून से मानसून आना चाहिए था, किंतु लगभग डेढ माह हो गया, मानसून नहीं आया। केन्द्र सरकार ने अब तक कुछ नहीं किया। उ०प्र० में बसपा भाजपा के गठबंधन सरकार भ्रष्टाचार में लिप्त हैं। ट्रांसफर-पोस्िंटग उद्योग चल रहा है। मुख्यमंत्री एवं कृषि मंत्री ने जौनपुर एवं प्रतापगढ़ को अब तक सूखाग्रस्त घोषित नहीं किया। एक कहावत है - राजा के दुष्कर्म का परिणाम प्रजा भोगेगी। जब से यह सरकार बनी है, भूकम्प, तूफान, सूखा, बाढ़ और अब अकाल की स्थिति आ गयी। यदि श्री वाजपेयी अपनी सरकार का इस्तीफा दे दें तो निश्चित रूप से उसी दिन मानसून आ जायेगा। यह सरकार लापरवाही, गजरात में भूकम्प तथा दंगा पीडितों को कुछ नहीं मिला। इसी तरह इस सरकार द्वारा अकाल पर राहत कार्य कागजों पर करेगी।

                   

*Speech was Laid on the Table of the House.

       

THE MINISTER OF WATER RESOURCES (SHRI ARJUN CHARAN SETHI): Mr. Chairman, Sir, I am thankful to you that you have given me this opportunity to intervene in this particular debate, which is very much important for all of us. More than 57 hon. Members of Parliament have participated in this debate till today. So, I am thankful to you as well as to all the hon. Members who have participated and given valuable suggestions.

I would try to deal with some of the many important points raised because it would be very difficult on my part to reply to each and every Member for whatever points he has raised. Of course, I consider it very important. Still I would try to deal with some of the important points.

We all know that ours is a vast country. Our population is above one billion. The total area of our country is also more than 329 million hectare. Roughly, it has also been seen that floods or drought affect every year our country. That is the problem. We all know about it. This has been highlighted by all the hon. Members here.

At the outset, I must admit and say that out of 40 million hectare of land that are prone to floods, only 32 million hectare of land could be protected with reasonable measures that can be taken by the Government. Since Independence till today, we have tried to protect about 16 million hectare of land. So, you could imagine that there is still enough left for protection against the floods.

As I have said earlier, it is also not possible to provide all flood prone areas necessary protection. Not only the Central Government has tried to protect the flood prone areas, but the Governments at the State level have also tried it. In response to the State Governments, the Central Government has provided funds so that a reasonable degree of protection could be provided to the people.

SHRI PRIYA RANJAN DASMUNSI : Are you ready with the Flood Management Policy during the Tenth Plan? If that information is not available today, you could provide it to the House later on.

SHRI ARJUN CHARAN SETHI: I have just now started. I would try to dwell on the point that you have raised.

We all know that management of floods is the primary responsibility of the State Governments. As I have stated here, the Central Government supplements the efforts made by the State Governments.

श्री चन्द्रनाथ सिंह : जो पैसा भारत सरकार की तरफ से राज्य सरकारों को दिया जाता हैं, क्या आप उसकी मौनीटरिंग करते हैं कि कहीं वह पैसा राज्य सरकार तन्ख्वाह में तो नहीं बांट रही या उस पैसे से तालाब खुदवाये जा रहे हैं? आप जितने भी आंकड़े पेश कर रहे हैं, वे केवल कागजों के ही आंकड़े हैं। उत्तर प्रदेश में कहीं भी किसी भी जिले में तालाब नहीं खुदवाये गये हैं।

SHRI ARJUN CHARAN SETHI: Sir, I have just started. Whatever points the hon. Member has raised, I will try to reply to them. But we all know that the funds being released from the Centre are left to the State Government to utilise it. Of course, there are particular category of programmes, like Accelerated Irrigation Benefit Programme, on which the Central Government has the power to monitor. But more than that the Central Government cannot interfere every now and then in the functioning of the State Government. We all admit it and it is the practice that whatever funds are being released from the Centre, it is up to the State Government to utilise and send the required utilisation certificate to the Central Government.

As has been mentioned by my colleague, who has just now spoken… (Interruptions)

श्री प्रभुनाथ सिंह : ये प्रबंधन की बात कर रहे हैं लेकिन बिहार और उत्तर प्रदेश में जो बाढ़ आती है, सब लोग जानते हैं, प्रतिवर्ष चर्चा चलती है कि जब नेपाल से पानी छूटता है तो बिहार और उत्तर प्रदेश प्रभावित होते हैं। ऐसी स्थिति में नेपाल से केन्द्र सरकार वार्ता करेगी, राज्य सरकार वार्ता नहीं करेगी। उस मामले में केन्द्र ने अभी तक क्या किया है, कोई प्रगति हुई है या नहीं, इस विषय में सरकार को बताना चाहिए।

श्री जोवाकिम बखला (अलीपुरद्वारस): भूटान से जो नदियां आती हैं, उनके बारे में भी बताइए।

SHRI ARJUN CHARAN SETHI: Hon. Member, Shri Prabhunath Singh has raised a very valid point and really every year the Governments of Bihar, UP and West Bengal are being affected due to floods in different rivers originating from Nepal as well as Bhutan.

SHRI PRIYA RANJAN DASMUNSI : Bangladesh also! SHRI ARJUN CHARAN SETHI: Yes, Bangladesh also, from all the neighbours situated in North. We are all here and we know that this is a very important issue. We are having interaction with these countries, like Nepal, Bhutan and Bangladesh, but we cannot directly hold discussions with them. We try to contact them and our efforts have been continuing since long. We have been trying our best and I would like to inform the House that at least with Nepal we have signed Mahakali Treaty for Pancheshwar Dam Project. We are holding discussions with them for Kosi Dam Project.

No doubt, this is a tricky issue because even inside our country we are unable to reach an understanding so smoothly to share surplus water. So it is very difficult to have an understanding with another country for a particular project and in a specific period of time. But our efforts are always on and we are trying our best, especially with Nepal and Bhutan. We are trying to achieve an understanding so that the projects, especially as I have just now mentioned, Kosi Dam Project and Pancheshwar Dam Project, are completed within a timeframe. We are also trying to have an understanding on the rivers originating from Bhutan and Bangladesh so that we can build a reservoirs to control the floods afflicting different states.

We all know that inside our country, whenever any multi-purpose project is undertaken or is being executed , many problems are associated with it. Submergence of areas is a problem and people get affected due to this. We have problems inside our country and that Nepal too has its own internal problems.

Recently, the Prime Minister of Nepal, Shri Deuba visited India. I have had meetings with him and at the Prime Ministerial level too we have had discussions.

Unfortunately, in Nepal, they have their internal problems now. The internal problem because of Maoist insurgency, etc. Law and order problem is there. Emergency has been declared there. Whatever efforts we have taken are being nullified. It is being stopped where we have left. So, we are trying to achieve some kind of an understanding and in fact, we have achieved in signing the treaty to implement Pancheswar Dam Project.

Similarly, with China, recently we have signed an MoU in respect of rivers originating from China so we can have advance warning regarding impending floods. It is flood forecasting system we have achieved.

Similarly with Bhutan, we are having … (Interruptions)

SHRI PRIYA RANJAN DASMUNSI : I agree with you. I sincerely appreciate your efforts. Do you not agree to a fact that technically many rivers in many parts of the country, especially in West Bengal, silt deposited year after year is so serious? Unless a proper dredging at the point where the river merges is not done, in spite of all your efforts, you cannot manage floods. I know that in my State, three rivers – Mahananda, Nagar and Bagirathi – are flooded because of silt deposits. No technical planning is done how to get at silt deposits. Why are you blaming others? … (Interruptions)

SHRI ARJUN CHARAN SETHI: It is a fact that the riverbeds have been desilted up. As a result, more and more floods are occurring in different parts with much intensity. For that reason, in my Ministry we have appointed an Expert Committee to study the problem of different rivers in the whole of India to report to us and take remedial measures. We have constituted this Committee just six months back. They have not yet submitted their report. When the report comes, we will certainly take decisions with the co-operation of the State Governments.

Sir, you will appreciate the efforts that we take at the Centre. Unless we get all kinds of co-operation from the State Governments, it becomes sometimes difficult to act in a very quick or a prompt way. So, we have been trying … (Interruptions)

SHRI AMAR ROY PRADHAN (COOCHBEHAR): Mr. Chairman, Sir, the Minister has referred to Indo-Bhutan Joint River Commission. I would like to know from the Minister the latest progress on this. … (Interruptions)

SHRI ARJUN CHARAN SETHI: Sir, as regards the progress, as I have stated earlier, inside the country, it is very difficult to achieve or to have an accord in regard to sharing of water. We are dealing with a neighbouring country. Certainly they are a sovereign country. And to begin a discussion with them, it requires time. We cannot achieve it in one discussion. We are certainly moving in that direction. … (Interruptions)

SHRI AMAR ROY PRADHAN : Are we having a talk with Bhutan? … (Interruptions)

SHRI ARJUN CHARAN SETHI: Yes, we are having a discussion with Bhutan at the official level. … (Interruptions)

श्री प्रकाश मणि त्रिपाठी (देवरिया) :सभापति महोदय, पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार का जो मसला है, उससे नेपाल की वजह से दो स्टेट प्रभावित होते हैं, इसलिए यह कहना कि यह स्टेट गवर्नमेंट के ऊपर छोड़ दिया जाये या मैं सोच रहा हूं। इसी बीच में पिछले पांच साल में चार दफा बाढ़ आ चुकी है, चार दफा वहां का जनमानस बहुत परेशान हो चुका है, इसलिए दो ट्रैक में साथ ही साथ, एक फौरन और दूरगामी इलाज करने पड़ेंगे। यह ठीक है कि आपने आफिसर्स को बताया है, लेकिन जहां पर दो स्टेट्स को एक नदी प्रभावित कर रही है और वह नेपाल से मतलब रखती है तो उसका कुछ न कुछ फौरी इलाज होना चाहिए, नहीं तो बहुत ज्यादा तबाही पिछले चार साल में तीन दफा बाढ़ आ चुकी है। जब बाढ़ नहीं आ रही है तो सूखा पड़ा हुआ है। इतनी बड़ा तबाही के लिए एक पैकेज पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार के लिए हम लोगों के साथ बैठकर, आफिसर्स को थोड़ा दूर रखकर इसका कुछ फौरन सोचा जाये। इसमें बहुत टाइम लग रहा है, क्योंकि इसमें प्रदेश का सवाल नहीं है, एक ही नदी दो स्टेट्स को प्रभावित करतीहै और वह नेपाल से आती है। इसमें आप लोगों को बहुत तेजी से पहल करनी पड़ेगी, इसमें अरजेंसी है।

15.00 hrs. SHRI ARJUN CHARAN SETHI: Sir, I appreciate the concern of not only Shri Prakash Mani Tripathi but also all the other Members who are present here.

श्रीमती जस कौर मीणा (सवाई माधोपुर):सूखे पर भी कुछ कहें।

सभापति महोदय : जल संसाधन मंत्री हैं इसलिए बाढ़ पर ही बोलेंगे।

श्रीमती जस कौर मीणा: जल के कारण बर्बादी हो रही है। जल के लिए बहुउद्देशीय योजना क्यों नहीं बनाई जाती, जिससे राजस्थान जैसे सूखे राज्य में जल पहुंचाया जाए। वहां सूखी नदियों को बाढ़ वाली नदियों से जोड़ने की व्यवस्था की जानी चाहिए। हम लोग दस साल से यह भुगत रहे हैं।

DR. SUSHIL KUMAR INDORA (SIRSA): She has rightly said. You are saying that this is a national disaster.

SHRI ARJUN CHARAN SETHI: Please allow me to speak. I can reply to them one after the other. If so many questions are asked at a time, how can I deal with them?

So far as Nepal is concerned, I have already pointed out here that we are having constant interaction with the Government of Nepal. We have certainly progressed a lot. But I have already stated about the Mahakali Treaty and the decision to prepare the Detail Project Report (DPR) to execute the Pancheshwar dam project. DPR is to be completed by June 2002.

श्री रवि प्रकाश वर्मा (खीरी) : क्या आपको मालूम है कि नेपाल ने अपनी नदियों के पानी का रुख बिहार की तरफ किया है ? ९ अगस्त को भी इस पर चर्चा हुई थी, लेकिन कोई उत्तर नहीं मिला।

SHRI ARJUN CHARAN SETHI: We are having constant interaction with the Government of Nepal. That is why, we could sign Mahakali Treaty to implement the Pancheshwar dam project. Similarly also, we are having constant interaction with the Government of Nepal how to achieve an understanding with the Nepal Government to protect, Sir, your State of Bihar, specially from Koshi, Samkoshi as well as Athuvara group of rivers. We are having interaction, but you will appreciate it takes a lot of time. We have also our own problems. They have also their own problems. They will certainly consider every aspect before signing or arriving at a decision. So we are trying to achieve break through in this kind of a dialogue.

Whatever hon. Member, Shri Prakash Mani Tripathi has stated here, inside the State, the project is to be executed or is to be considered by the Centre , the States have to send it. The concerned State Government has to send the project report to the Centre. Unless they send, the Centre cannot intervene and cannot say you send this. So we have a very delicate check and balance. Unless we follow that, there may be any number of conflicts and misunderstandings. He has mentioned why we are not bringing surplus water from the surplus basins to the deficit areas. But this is also a very ticklish problem. The river passes through many States.

SHRI LAKSHMAN SINGH (RAJGARH): Can I interrupt? आप जो बात कह रहे हैं सारा सदन चिंतित है। देवेगौड़ा जी, जो देश के प्रधान मंत्री रहे हैं, उन्होंने डा. के.एल. राव की रिपोर्ट पढ़ी थी कि गंगा-कावेरी लिंक प्रोजेक्ट पर the National Water Development Agency had already done the survey. उनकी रिपोर्ट क्यों नहीं अमल में लाते हैं। सारी रिपोर्ट धूल खा रही है।

SHRI ARJUN CHARAN SETHI: No. SHRI LAKSHMAN SINGH : There is no mention of that report. We would like to know whether it is possible or not. जो सरप्लस वाटर है, वह आ सकता है।… (Interruptions)

SHRI ARJUN CHARAN SETHI: No, I am coming to that. Please give me some time. He has now rightly mentioned and Madam Jas Kaur Meena also mentioned it. While speaking on the debate, the former Prime Minister, Shri Deve Gowdaji also mentioned it. I consider and admit that the only solution to the flood and drought in the country is to have the transfer of water from the surplus river basins to the deficit region. Unless that is done, inside the country, flood problem cannot be addressed.. Similarly also, drought problem in the country cannot be dealt with.

We have a problem and we have also the National Perspective Plan to address it. It was framed in the year 1980. Under the National Perspective Plan, the National Water Development Agency had been constituted, it is on the job. They are studying every link, proposal how to bring water from the River Brahmaputra. to Ganga and Mahanadi… (Interruptions)

श्री लक्ष्मण सिंह : रिपोर्ट बना ली है तो पटल पर रखिए, धूल खा रही है। Let him make it public. Let the House know; let the country know.

SHRI ARJUN CHARAN SETHI: Please let me complete. You are a senior Member of this House. … (Interruptions)

SHRI LAKSHMAN SINGH : I am a junior Member.

SHRI ARJUN CHARAN SETHI: The pre-feasibility studies of the link canals have already been completed by the NWDA. Similarly, we have completed the feasibility studies for six out of thirty links. The NWDA envisaged for the transfer of water from surplus basin to the deficit.

SHRI LAKSHMAN SINGH : Make it public.

SHRI ARJUN CHARAN SETHI: When I am stating here, I am making this public. This is the highest body.

SHRI LAKSHMAN SINGH : We want to see the report.

SHRI ARJUN CHARAN SETHI: It will certainly be placed on the Table of the House. The people at large would certainly know.

SHRI LAKSHMAN SINGH : When?

SHRI ARJUN CHARAN SETHI: Unless the DPR’s are completed, that cannot be placed on the Table of the House.

Under the National Perspective Plan, thirty links have been suggested. Pre-feasibility studies have been completed and feasibility studies are now going on. I should say and appeal to you and to all hon. Members present here that we who represent different States should at least for the nation’s sake agree that surplus water – whatever surplus we have in a particular river, say, Brahmaputra, Ganga or Mahanadi – should be transferred to the deficit region. Unless States are agreeable to this, it is very difficult on the part of the Central Government to direct anything. This is a very delicate balance we have to maintain. Under the Constitution, water is a State subject and certainly the States will raise an objection as to why the Centre is interfering. So, there are a number of difficulties. Fortunately, as has been mentioned by Shri Lakshman Singh as well as the former Prime Minister Shri H.D. Deve Gowda, we are on the job but unless all the States are agreeable it would become very difficult for us. Some States say, ‘There may be surplus water in a particular river today but thirty years later there many not be any surplus.’ So, there are many complexities. I am very much for this inter-basin transfer of water resources. Unless that is done, the flood and drought problem in the country cannot be solved.

Hon. Shri Ajay Singh Chautala, while initiating this debate, has made certain points. He has raised a point that many projects are lying incomplete for ten to twenty years. It is a fact but we are providing funds under the Accelerated Irrigation Benefit Programme to the State Governments to help completion of projects continuing since long. Under this Programme, I am happy to inform this House that since 1996 till today we have provided Rs.8,400 crore to different States. Similarly, under the direction of the hon. Prime Minister of India, this year also, we have selected some fast-track projects, which could be completed within one year or two working seasons. We will provide 100 per cent loans to these projects but unless projects are identified by the State Governments and sent to the Centre, how can we help the States ourselves? Under this Programme, we are trying to help State Governments complete all the projects that are lingering for several years.

सभापति महोदय : आप अपनी खत्म करिए।

डॉ. सुशील कुमार इन्दौरा:मंत्री जी, आपने कहा कि जल परियोजनाएं बहुत बढ़ाई हैं। महोदय, जल परियोजनायें बहुत बनाई गईं और उन पर ९० हजार करोड़ रुपया खर्च किया गया, लेकिन यह सब पैसा व्यर्थ हो गया है, क्योंकि परियोजनायें अधूरी पड़ी हुई हैं। मैं मंत्री महोदय से जानना चाहता हू कि ये परियोजनायें कब तक पूरी हो जायेंगी? …( व्यवधान)हरियाणा के बारे में तो माननीय सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि १५ जनवरी तक योजना पूरी हो जानी चाहिए।

सभापति महोदय : आप अपनी बात कह कर कन्कल्युड करिए।

SHRI ARJUN CHARAN SETHI: He has referred about SYL. … (Interruptions) On these issues, the Supreme Court has already given its judgment. We will certainly abide by it and we will honour it. So, I should not say anything further on this. … (Interruptions)

Sir, some of the hon. Members have raised the point about depletion of ground water. It is really a matter of concern for all of us. This has happened because of at-random exploitation and extraction of ground water. So, to regulate and or control the at random exploitation or extraction of ground water, we have circulated model Bills to the States. But, I am sorry to say that the response from the States is not at all encouraging. A few States have certainly enacted laws to regulate this extraction of ground water. But that is not enough. We are pursuing with them. Unless the legislation is brought forward to control the extraction of ground water, it will be very difficult not only today but also for future years to come.

Sir, I should not dwell more on this thing. However, whatever points are left, I will certainly write to the hon. Members.

Sir, with these few words, I think, I have done my job.

श्रीमती जसकौर मीणा:महोदय, गंगा-कावेरी परियोजना को जल्द से जल्द पूरा कराने का मंत्री जी सदन में आश्वासन देंगे?

श्री अर्जुन चरण सेठी : इस बारे में बोल दिया है। राज्यों के को-आपरेशन की जरूरत है।

श्री रामजीलाल सुमन : महोदय, प्रथम पंचवर्षीय योजना में पांच सिंचाई योजनायें शुरू की गई थीं और द्वितीय पंचवर्षीय योजना में सात सिंचाई परियोजनायें शुरु की गई थीं, जो अभी तक पूरी नहीं हुई हैं। उन योजनाओं को अब दसवीं पंचवर्षीय योजना में शामिल किया गया है। मैं माननीय मंत्रीजी से जानना चाहता हूं कि उन परियोजनाओं को पूरा करने में कितना समय लगेगा?

दूसरी बात - महोदय, १५ प्रतिशत क्षेत्र में अधिक वर्षा होती है और २१ प्रतिशत क्षेत्र में कम वर्षा होती है। ज्यादा पानी वाले क्षेत्र से कम पानी वाले क्षेत्र में पानी पहुंचाने की बात पर विचार करने के लिए आप राज्यों के मंत्रियों का सम्मेलन बुलाइए।

श्री अर्जुन चरण सेठी : बुलायेंगे।

श्री रामजीलाल सुमन : महोदय, सिंचाई योजनाओं को पूरा करने के लिए सरकार समयबद्ध कार्यक्रम की घोषणा करे।

श्री मुलायम सिंह यादव (सम्भल): सभापति महोदय, माननीय कृषि मंत्री जी और जल संसाधन मंत्री जी, दोनों सदन में उपस्थित हैं। मैं कहना चाहता हूं कि बाढ़ और सूखाड़ की समस्या को केन्द्रीय सरकार अपने हाथ में ले। यह समस्या राज्य सरकार के हाथ में नहीं रहनी चाहिए, वरना कोई भी मदद नहीं हो सकेगी।

श्री सईदुज्जमा: महोदय, सरकारी चीनी मिलों में गन्ना काश्तकारों का काफी बकाया है। सुकौती शुगर मिल के काश्तकार २० तारीख से धरने पर हैं और ३ तारीख से भूख हड़ताल पर जा रहे हैं। मैं सरकार से जानना चाहता हूं कि काश्ताकारों को बकाया राशि कब तक दिलवायेंगे, जिससे उनकी समस्या का समाधान हो सके।

प्रो० एस०पी० सिंह बघेल ( जलेसर ): महोदय, इस समय पूरा देश या तो सूखाग्रस्त है अथवा बाढ़ की विभीषका से जूझ रहा है। देश को विशेष तौर से उ०प्र० को सूखाग्रस्त राज्य घोषित करने की अपेक्षा ज्यादा उपयुक्त होगा कि प्रदेश को और देश को अकालग्रस्त घोषित किया जाये।

महोदय, उ०प्र० के किसानों का कर्जा माफ किया जाना चाहिये तथा रिकवरी समाप्त कर दी जानी चाहिए। हर प्रकार का लगान माफ कर देना चाहिए। सभापति महोदय, उ०प्र० सरकार ने कुछ जिलों को सूखाग्रस्त घोषित किया है। हमारी मांग है कि सम्पूर्ण उ०प्र० को सूखाग्रस्त घोषित करना चाहिये। विशेषतौर से पूरा आगरा मण्डल के सभी जिले। आगरा एटा फिरोजाबाद, हाथरस एवं मथुरा, मैनपुरी एवं अलीगढ़ को सूखाग्रस्त घोषित करना चाहिये। महोदय, सूखे से पूरी धान की फसल चौपट हो गयी है। धान की पौध तक नहीं डल पायी है। बरसात नहीं हुयी। उ०प्र० में किसानों को बिजली नहीं मिल रही है। अत: नलकूप भी नहीं चल पा रहे हैं। डीजल के दाम इतने महंगे हैं कि उससे पम्िंपग सेट चलाकर खेती नहीं की जा सकती है। नहरों में पानी नहीं है। सरकार को चाहिये कि यह जुलाई विगत वर्षो की जुलाई से भिन्न है। बारिश तो होगी, लेट होगी लेकिन सिंचाई विभाग के अधिकारी और उ०प्र० सरकार उतना ही नहर पम्पों में पानी दे रही है जितना आम दिनों में देती थी। इस समय सूखा होने के कारण अतरिक्त पानी देना चाहिये। यह इंतजाम जून से लेकर अगस्त तक सरकार को करना चाहिये था। महोदय, मेरी लोक सभा जलेसर में एटा जनपद के त्रिपोली, जलेसर के रजवाहे माहचुआ, सीतापुर, जिनावली, पुन्हेरा, नूहखेड़ा तथा ओड़री माइनर पोड़री माइनर नरोरा रजवाहा, बरहन रजवाहा, सादावाद में गोविन्दपुर रजवाहा जुगसना रजवाहा सिकरारी रजवाहा में पानी नहीं दे रहा है। निघौली एटा के माहचुआ रजवाहा तथा सीतापुर रजवाहा तथा सादावाद एतलादपुर का सहपऊ एवं वरहन रजवाहे की स्थिति बहुत खराब है। महोदय यदि इन रजवहों में पानी आ जाते तो सूखे से निपटा जा सकता है। महोदय, मैं चाहता हूं कि शहर को सरकार चाहे तो २४ घंटे बिजली दे , मुझे कोइ दिक्कत नहीं, लेकिन एक माह के लिए उ०प्र० की सरकार को चाहे अपनी कितनी बड़ी योजना को ही क्यों न रोक देना पड़े एन.टी.पी.सी. पर अन्य किसी संस्थान से अतरिक्त बिजली लेकर देहात और किसानों को १६ घंटे बिजली अवश्य दी जानी चाहिये। डीजल के दाम कम कर देना चाहिये।

महोदय, दो दिन से जो सूखे पर चर्चा हो रही है, उसमें ऐसे नेताओं ने भाषण दिया, जो गेंहू और जौ के बारे में फर्क नहीं जानते। जिनके बाप-दादाओं ने कभी खेती नहीं की। मैं थोड़ा हटकर बोलना चाहता हूं । मैं पूछना चाहता हूं कि दो दिन की बहस से किसान को क्या मिला। सभापति महोदय जब तक बाढ़ और सूखे पर दीर्घकालीन योजना नहीं बनायी जायेगी काम नहीं चलेगा।

महोदय, क्या सरकार गारंटी ले सकती है कि अगले वर्ष सूखा नहीं पड़ेगा। यदि अगले साल सूखा पड़ा तो इस वर्ष हमने क्या इंतजाम किया। बहस से हल नहीं निकलेगा। विशेषज्ञों को बुलाकर ठोस इंतजाम करना पड़ेगा। मेरा सुझाव है कि पूरे देश में चैक डैम, छोटी छोटी नदियों में बनाये जायें। मेरी लोक सभा की निधौली(एटा ) में बहने वाली नदी इसन, करौं, सिरसा नदी तथा एतमादपुर जिला आगरा तथा सादावाद हाथरस जिले में बहने वाली करबन नदी पर चैक डैम बनाये जायें, जिससे इन नदियों के पानी को रोका जाये, जिससे सिंचाई के अतरिक्त पशुओं के पानी का भी इंतजाम किया जाये। पानी न होने के कारण पशु रिश्तेदारियों में भेजे जा रहे हैं। भूसे का भाव बढ़ गया है। पशुओं को चारा नहीं है। बिना पानी के जो चरी है, वह जहरीली हो गयी है। उसमें कीड़ा पड़ गया है, जिसे पशु खाकर मर रहे हैं।

महोदय, भविष्य में पड़ने वाले सूखे से बचाने के लिए नदियों पर चैक डेम सभी रजवाहें पम्पों की सफाई, नयी नहरों की योजना पूरे उ०प्र० के प्रत्येक गांव को या तो नहर अथवा नदी का पानी अथवा सरकारी टयूब वैल अथवा झील, तालाब में से किसी एक साधन से आपको जोड़ना पड़ेगा। गांवो के लोगों को सड़क, स्कूल, बिजली, पानी के अलावा ज्यादा उम्मीद नहीं होती है। गिरता हुआ भू-जलस्तर जीवन के लिये खतरा होता जायेगा। वृक्षारोपण पर भी ध्यान देना होगा। वाटर हार्वेस्िंटग करनी पड़ेगी। श्री राजेन्द्र सिंह मैगसेसे पुरस्कार विजेता जैसे लोगों को प्रोत्साहन देना होगा। सेमीनार करके लोगों को जागरूक करना होगा तथा मौसम में आये परिवर्तन में अपने आपको ढालना पड़ेगा। मैं जब किशोर था, हमारे गांव के कुओं से बिना रस्सी के पानी खींच लेते थे। आज ४० फुट पर पानी है। वहां की समस्या अतिवर्षा से मक्का न होना था लेकिन धान हो जाती है, किंतु आज कम वर्षा से न तो धान हो रहा है, न ही मक्का, धान की फसल।

महोदय, मक्का की फसल पूरी तरह चौपट हो गयी है। बाजरा के लिए किसान लेट हो गया है। महोदय, सरकार उ०प्र० में किसानों को अतरिक्त बिजली दे, अविलम्ब नहरों एवं पम्पों की पूरी तरह सफाई, जो १० साल से नहीं हुयी है, करवाये तथा पानी भिजवाये, डीजल के दाम कम करे तथा कर्जा माफ करे। लगान और रिकवरी माफ कर दें।

       

* Speech was Laid on the Table of the House.

   

कृषि मंत्री (श्री अजित सिंह) : महोदय, यह चिन्ता का विषय है। सभी माननीय सदस्यों को चिन्ता है और उनके द्वारा उनके क्षेत्र की जानकारी, प्रदेश की जानकारी और बाकी जानकारियां मिल रही हैं। ऐसा व्यापक सूखा देश में आज तक नहीं पड़ा है। इस विषय पर चर्चा कल १२ बजे शुरु हुई और आज भी बहुत से माननीय सदस्य बोलना चाहते हैं, विचार रखना चाहते हैं और अपनी चिन्ताओं से सदन को अवगत कराना चाहते हैं। इसकी जानकारी सब को है। १७ तारीख की सूखे की जो परिस्थिति थी वह अखबारों में भी आ चुकी है और सदस्यों ने भी इसका यहां जिक्र किया। मेरे पास जो जानकारी है और २४ तारीख तक जो वर्षा की स्थिति है तथा जो आंकड़े हैं उसमें सबसे ज्यादा जो प्रभावित राज्य हैं जहां नॉर्मल से ७३ परसैंट कम वर्षा पहली जून से २४ जुलाई तक हुई है और वह पश्चिमी यूपी और बुंदेलखंड का इलाका है। अगर सिर्फ १७ से २४ तारीख तक की स्थिति देखें तो पता लगेगा कि स्थिति और खराब हुई है। वहां नॉर्मल से ८५ परसैंट कम बारिश हुई है। इसके बाद दूसरी खराब स्थिति हरियाणा और दिल्ली की है। वहां करीब नॉर्मल से ७० परसैंट कम बारिश हुई है। पिछले हफ्ते नॉर्मल से ५१ परसैंट कम बारिश हुई। राजस्थान में पिछले सात हफ्तों की स्थिति देखें तो करीब ६६-६८ परसैंट बारिश कम हुई है। पिछले हफ्ते वहां हालत खराब हुई है। वहां नॉर्मल से ८४-८७ परसैंट कम बारिश हुई है। यह समस्या कर्नाटक में है, आन्ध्रा प्रदेश में है, तमिलनाडु में है, उड़ीसा में भी है। वहां बारिश कम हुई है। पिछले हफ्ते सौराष्ट्र और कुछ दूसरे इलाकों में यही स्थिति थी। यदि पिछले सात हफ्तों का देखें तो और राज्यों के मुकाबले स्थिति बेहतर है। हमने इसके बारे में दो दिन पहले १२ राज्यों के कृषि मंत्रियों और राजस्व मंत्रियों का सम्मेलन बुलाया था। इसका यह मतलब नहीं है केवल सूखा उन्हीं राज्यों में है। गुजरात, अरुणाचल प्रदेश, और नागालैंड में भी सूखा है। केरल में बारिश कम हुई है लेकिन उसका असर अभी खेती पर नहीं हुआ है। इसलिए १२ राज्यों की मीटिंग बुलायी गई थी। यह आकलन है। सूखे से सबसे ज्यादा खेती पर असर इन राज्यों में हो रहा है। आप जानते हैं कि बिहार में बहुत से जिले हैं जो सूखे से प्रभावित हैं और उससे नुकसान हुआ है। बारिश आगे कितनी होगी, कब होगी यह अलग सवाल है लेकिन ऑलरेडी इससे नुकसान हो चुका है। सबसे ज्यादा नुकसान कोर्स सीरियल, ऑयल सीडस में हुआ है। प्लसिज में थोड़ा बहुत नुकसान हुआ है।

श्री प्रभुनाथ सिंह: मौसम विभाग का क्या अनुमान है?

श्री अजित सिंह : प्रभुनारायण जी, मौसम विभाग का भी बताएंगे।

श्री प्रभुनाथ सिंह: प्रभुनारायण नहीं, प्रभुनाथ सिंह कहिए।…( व्यवधान)

श्री अजित सिंह: नारायण की कृपा हो जाती तो यह समस्या आने वाली नहीं थी। कोर्स सीरियल की अभी तक जितनी फसल बोई जाती थी, पिछले साल वह १५२ लाख हैक्टेयर थी। इस साल ९५ लाख हैक्टेयर फसल बोई जा सकी है। बाजारा एक ऐसी फसल है जिस की बुआई का समय निकल चुका है। अगर बाजरा अभी बोया जाएगा तो वह चारे के लिए इस्तेमाल हो सकता है। उसे खाद्यान्न के लिए इस्तेमाल करना संभव नहीं है। राजस्थान की मुख्य फसल बाजरा है। हरियाणा में भी काफी बाजरा होता है। लेकिन राजस्थान की मुख्य फसल बाजरा है। इस साल समस्या सबसे ज्यादा है। सोयाबीन पिछले साल इस समय करीब १०८ लाख हैक्टेयर में बोया गया था। इस समय ७१ लाख हैक्टेयर में बोया गया है। सोयाबीन पर काफी असर पिछले हफ्ते पड़ा है। यह हमारा आकलन है लेकिन पिछले हफ्ते कुछ बारिश हुई है और कुछ स्थिति में सुधार हुआ है। मैं बता चुका हं कि नुकसान हुआ है लेकिन मैं कहना चाह रहा था कि जितनी आशंका थी…( व्यवधान)

श्री लक्ष्मण सिंह: मध्य प्रदेश में पुन: बुआई करनी पड़ी जिससे बीज बेकार चला गया। यदि कुछ अनुदान दे दें तो किसानों की मदद हो जाएगी।

श्री अजित सिंह: समस्या पैडी में भी है। यह सही है कि अगले दो हफ्ते में बारिश होती है तो पैडी में काफी सुधार हो सकता है। बहुत सी पैडी अपलैंड में बोई जाती है जो छत्तीसगढ़ में है, उडीसा में है। वहां इसका बुरा असर पड़ चुका है। अगर बारिश होती तो प्रोडक्टिविटी पर असर पड़ेगा यह बात सब जानते हैं। यह आकलन करने के बाद पता लगा कि समस्या गभीर है। सवाल यह है कि इसके बारे में क्या किया जा सकता है?बहुत से माननीय सदस्यों ने लांग टर्म और शॉर्ट टर्म सुझाव दिये है। लेकिन इस समय हमारे सामने यह सवाल है कि जो आपदा आई है, इसमें हम क्या रिलीफ दे सकते हैं। मीटरियोलॉजिकल डिपार्टमैन्ट के बारे में कुछ सवाल उठाये गये हैं। मीटरियोलॉजिकल डिपार्टमैन्ट वर्षा की संभावना बताता है, प्रोबेबलिटी या पॉसबलिटी बता सकता है। हम लोगों ने दिमागों में कुछ ऐसी भावना बना ली है कि मीटरियोलॉजिकल डिपार्टमैन्ट जैसे वरुण देवता हो गया है। वह वर्षा नहीं कर सकता है।…( व्यवधान)

मैं यील्ड नहीं कर रहा हूं।

श्री लक्ष्मण सिंह : सी.एन.एन. और बी.बी.सी. सही बताते हैं, लेकिन हमारा मीटरियोलॉजिकल डिपार्टमैन्ट सही नहीं बताता है। उसकी भविष्यवाणी में थोड़ा बहुत फर्क नहीं, बहुत बड़ा फर्क होता है…( व्यवधान)

सभापति महोदय : माननीय मंत्री जी केवल उत्तर दें। ये सभी उत्तर का नोटिस नहीं ले रहे हैं।

   

…( व्यवधान)

 

सभापति महोदय : आप सुन लीजिए।

श्री अजित सिंह :मैं मानता हूं कि माननीय सदस्यगण काफी उद्वेलित हैं, चिंतित और परेशान है। वे किसानों की समस्याओं से चिंतित हैं। लेकिन यदि आपको इस बारे में और जानकारी चाहिए, आपको और बात करनी हो तो आप इस सभा के बाद कभी भी मुझसे बात कर सकते हैं। आप घंटे भर मीटरियोलॉजिकल डिपार्टमैन्ट पर या सोयाबीन पर बहस कर लीजिएगा। मीटरियोलॉजिकल डिपार्टमैन्ट ने जो संभावना बताई वह सही नहीं निकली, यह ठीक है। अमरीका और इंग्लैंड में भी ऐसा हुआ है। मैं उन्हें डिफैन्ड नहीं कर रहा हूं। मैं सिर्फ यह कह रहा हूं कि वह ऐक्जैक्ट साइंस नहीं है। अगर कहीं १५ हजार किलोमीटर दूर एटमॉस्फियर में कोई डिस्टर्बैन्स हो जाए तो उसका असर यहां पड़ता है। लेकिन इसमें बहुत वैरिएबल्स हैं। सब वैज्ञानिक उपकरण होने के बाद, इतना पैसा होने के बाद अमरीका और इंग्लैंड के मीटरियोलॉजिकल डिपार्टमैन्ट की भविष्वाणियां भी कई बात गलत निकली हैं। मैं यह नहीं कह रहा हूं कि इस बार उनकी भविष्यवाणी सही हुई है। इससे कठिनाई हुई है। लेकिन साथ ही हम यह भी समझ लें और इस गलतफहमी में न रहें कि हमारे किसान मीटरियोलॉजिकल डिपार्टमैन्ट की फोरकास्ट अंग्रेजी या हिन्दी के अखबारों में पढ़कर फसल बोने का काम करते हैं। मैं कई दिन से यह कह रहा था और मैंने मंत्रियों की बैठक में भी कहा कि ऑल्टरनेट क्रॉप के लिए हम बीज देख रहे हैं। इस बारे में क्या होना चाहिए। क्या वह सरकार के पास हैं या नहीं। ज्यादातर हमारा सोचना यही है कि इस बारे में हमारे किसान ज्यादा जागरूक हैं। जितने बीज की जरूरत है, वह अपने आप देखते, अपने पास रखते हैं और इंतजाम भी करते हैं। इसमें सवाल यह नहीं है कि मीटरियोलॉजिकल डिपार्टमैन्ट का आकलन ठीक था या नहीं, लेकिन हम क्या रिलीफ दे सकते हैं, आज यह सबसे बड़ी समस्या है।

सभापति महोदय, मैं एक बात और साफ कर दूं कि अभी रिलीफ शुरू कर दिया जाए, यह संभव नहीं है। रिलीफ जब दिया जायेगा, जब समस्या पूरी हो जायेगी। अभी क्या आप फोडर बैंक शुरू कर देंगे, क्या अभी आप पीने का पानी देना शुरू कर देंगे। अभी हमें तैयार रहना है, हमें तैयारी करनी है, हमें आकलन करना है, ताकि उस समय हम बैठकर प्लानिंग न करें। हम पहले से प्लानिंग और तैयारी कर लें और कहां कितनी जरूरत पड़ेगी, उसके लिए हम तैयारी करें।…( व्यवधान)

श्री चन्द्र विजय सिंह:मैं माननीय मंत्री जी से एक प्रश्न पूछना चाहूंगा। उत्तर प्रदेश में सूखाग्रस्त क्षेत्रों के चयन का क्या आधार है - वर्षा या राजनीति। मेरा जनपद रामपुर और बिजनौर के बीच में आता है। दोनों जनपद सूखाग्रस्त घोषित हो गये हैं, मेरे यहां वर्षा की एक बूंद भी नहीं गिरी है, लेकिन वह सूखाग्रस्त डिक्लेयर नहीं हुआ, इसका क्या आधार है।

श्री अजित सिंह : माननीय सदस्य अगर थोड़ा सा धैर्य रखें तो इन सब चीजों पर मैं आने वाला हूं। मेरे बोलने के बाद अगर आपको लगता है कि आपको कुछ और जानकारी चाहिए, भले ही यहां समय न हो, आप मेरे पास आकर फिर से बात कर सकते हैं। आप इसकी चिंता न करें। मैं आपको पूरी जानकारी दूंगा। अभी हम क्या कर सकते हैं, जो बातें उभर कर आई हैं, उसमें पहली यह है कि केन्द्र सरकार से यह डिमांड हो रही है, हमारे पुराने मित्र जो कभी-कभी हमारे ऊपर नाराज हो जाते हैं।…( व्यवधान)

श्री मुलायम सिंह यादव :आप नाराज होते हैं, हम नाराज नहीं होते हैं।

श्री अजित सिंह : उन्होंने अभी कहा कि केन्द्र को यह अधिकार ले लेने चाहिए और पूरे देश में सूखे की घोषणा कर देनी चाहिए। जिस दिन केन्द्र जरा सा कदम उठाती है, सभी माननीय सदस्य कहते हैं कि राज्यों को ज्यादा पावर्स देनी चाहिए। यह हमारे अधिकार क्षेत्र में नहीं है इसलिए इसे हम कैसे करेंगे?हमें यह खबर तो एस.डी.एम. से, पटवारी से. डी.एम. से आनी है कि कितनी फसल पैदा हुई है। यह अधिकार राज्यों का है और वह घोषणा करे कि यह सूखाग्रस्त क्षेत्र है। उसके बाद जैसा मैंने कहा कि हम मदद करना चाहते हैं।

अभी जो मंत्रियों की मीटिंग हुई, उसमें उन्होंने कहा कि अगले १५ दिन तक बॉय एंड लार्ज हम इतना आंकलन नहीं कर सकते कि कितना पैसा चाहिए, कितना फूड फार वर्क चाहिए या किस तरह की मदद चाहिए। अभी यह आंकलन संभव नहीं है। कुछ प्रमिलनरी फिगर्स उन्होंने दी है। यह अधिकार क्षेत्र राज्यों का है। उत्तर प्रदेश सरकार ने, आज मेरे पास जो जानकारी है, शायद ३९ डिस्टि्रक्ट्स की घोषणा की है। उसका मापदंड भी प्रदेश सरकारें ही बनाती हैं और वह ज्यादातर राज्यों में यही है कि अगर ५० प्रतिशत फसल नष्ट हो गई है तो वह सूखाग्रस्त क्षेत्र की घोषणा करते हैं। कर्नाटक ने कुछ ताल्लुकों की घोषणा की है। उत्तर प्रदेश ने काफी डिस्टि्रक्ट्स की घोषणा की है।

हम आशा करते हैं कि और राज्य भी, जैसे-जैसे वह आंकलन कर लेंगे, इसकी घोषणा करेंगे। इससे काम रुक नहीं रहा है जैसा मेरे हरियाणा के साथी श्री स्वामी जी ने बताया कि कैलेमिटी रिलीफ फंड स्टेट के पास है। ज्यादातर स्टेट्स ने वह पैसा ले लिया है। कुछ स्टेट्स बची हैं जिन्होंने पहली किश्त भी नहीं ली है।

श्री लक्ष्मण सिंह : यह बिल्कुल गलत है। पिछले साल …( व्यवधान)आपने कहा कि स्टेट के पास है। कृपया आप सदन को तो सही जानकारी दीजिए। …( व्यवधान)मैंने आंकड़े पढ़कर बताये हैं। …( व्यवधान)

सभापति महोदय : आप उनका भाषण सुनिये।

श्री अजित सिंह : मध्य प्रदेश अपनी पहली किश्त ले चुका है। लेकिन सवाल यह नहीं है। मैं कह रहा हूं कि ज्यादातर स्टेट्स ने ले लिये हैं और कुछ स्टेट्स ने नहीं लिया है। जैसी उन्होंने फार्मेलिटी बताई है, वह पूरी करें। मैंने फाइनेंस, मनिस्टर को आज सुबह ही लिखा है कि जो दूसरी किश्त अक्टूबर में दी जायेगी, स्टेट्स अगर उसे अभी मांगे तो हम उसे फौरन रिलीज करने के लिए तैयार हैं।

श्री लक्ष्मण सिंह : अगर छत्तीसगढ़ नहीं बनता तो हम आपके पास नहीं आते। छत्तीसगढ़ बनने के बाद हमारी मजबूरी है।

श्री अजित सिंह : आपकी मजबूरी मैं समझ रहा हूं। आपकी मजबूरी के बारे में अगर मैं कुछ निदान कर सकूं तो वह मैं करूंगा। मैं जोगी जी से बात करने की कोशिश करूंगा। शायद वह फिर आपके पास वापिस चले जायें तो आपकी समस्या हल हो जायेगी।

श्री लक्ष्मण सिंह : मेरा यह मतलब नहीं है। आप इसे थोड़ा गंभीरता से लें। …( व्यवधान)

श्री अजित सिंह : सभापति जी, मैं चाहता हूं कि माननीय सदस्य इस विषय को गंभीरता से लें। यह गंभीर विषय है इसलिए इसमें पार्टी पोलटिक्स कि छत्तीसगढ़ मध्य प्रदेश से अलग हुआ आदि नहीं होना चाहिए क्योंकि आलरेडी समस्या है।

अभी जैसा हमारे सेठी साहब ने बताया कि हरियाणा, पंजाब, कर्नाटक, तमिलनाडु आदि की समस्या है। इस समय हमको कम से कम इस तरह की बात करना कि छत्तीसगढ़ के अलग होने से मध्य प्रदेश में प्रौब्लम है या झारखंड अलग हुआ इसलिए बिहार में प्रौब्लम हुई, यह शोभा नहीं देता। मैं एक बात और कहना चाहूंगा, कल बिहार के माननीय सदस्य श्री रघुवंश प्रसाद सिंह जी ने एक सवाल उठाया था कि आप ५२४ डिस्टि्रक्ट्स ही क्यों कह रहे हैं जबकि डिस्टि्रक्ट्स तो इससे ज्यादा हैं। वह हम इसलिए कह रहे थे क्योंकि ५२४ डिस्टि्रक्ट्स के ही हमारे पास स्टैटिस्टिक्स हैं। आपने सही कहा कि डिस्टि्रक्ट्स ज्यादा हैं।

पहली बात तो यह है कि कैलेमिटी रलिफ फंड है, नैशनल कैलेमिटी कंटीजेंसी फंड है जिसके बारे में आपको जानकारी दी गई थी। इसके अलावा कुछ कदम ऐसे हैं जो प्रदेश सरकार भी उठा सकती है और केन्द्र सरकार भी उठा सकती है। पहली बात तो यह है कि कैलेमिटी रिलीफ फंड के अनुसार जहां फसल नष्ट हो गई है, वहां पैसा दिया जा सकता है। छोटे और सीमांत किसान को दो हैक्टेयर से कम वाले किसान को असींचित क्षेत्र के लिए एक हजार रुपये प्रति हैक्टेयर और जो सींचित क्षेत्र है, उसमें ढाई हजार रुपये प्रति हैक्टेयर और जो पेरेनीयल क्राप है, उसमें चार हजार रुपये प्रति हैक्टेयर कैलेमिटी रिलीफ फंड से दिया जा सकता है। मैं माननीय सदस्यों से कहना चाहूंगा कि वह अपने प्रदेश सरकारों को कहें कि यह काम वह फौरन शुरू कर दें ।अगर इसमें केलेमिटी रिलीफ फंड पूरा नहीं पड़ता तो नेशनल कंटींजैंसी फंड से इसमें हम पूरी मदद देने के लिए तैयार हैं। केलेमिटी रिलीफ फंड में यह भी प्रावधान है कि यह सहायता सिर्फ दो हैक्टेयर तक के किसानों को दी जा सकती है। हम इस सीमा को खत्म करना चाहते हैं, हम और किसानों को भी यह सुविधा देना चाहते हैं।

इसके अलावा ऐनीमल हसबैंड्री के लिए इसका बड़ा असर पड़ रहा है। उसके लिए भी इसमें केलेमिटी रिलीफ फंड से पैसा दिया जा सकता है। फॉडर के लिए बड़े जानवरों के लिए १२ रुपये प्रतदिन और छोटे जानवरों के लिए ६ रुपये प्रतदिन, फिशरमैन को भी इस प्रावधान के अंदर मदद दी जा सकती है। हैंडलूम वीवर्स को भी एक हजार पर लूम की मदद और यार्न वगैरह खरीदने के लिए एक हजार पर लूम दिए जा सकते हैं। मैं जानता हूं कि ओवरॉल यह काफी नहीं है लेकिन जिसकी फसल नष्ट हो गई, जिसने बीज और खाद पर खर्च किया, कम से कम उसे वह पैसा वापिस मिल जाएगा। इसलिए मैं चाहूंगा कि प्रदेश सरकारें इस पर फौरन कदम उठाने का काम करें। लेकिन उसके लिए उनको सूखाग्रस्त जिले की घोषणा करनी पड़ेगी। राजस्थान में बहुत से इलाके ऐसे हैं जहां सूखे के चौथे साल में भी किसी सूखाग्रस्त क्षेत्र की अभी तक कोई घोषणा नहीं हुई है।…( व्यवधान)

सभापति महोदय : आपको इसे पूरा करने में कितना समय लगेगा।

श्री अजित सिंह : अगर माननीय सदस्य बोलने दें तो मैं और दस मिनट में समाप्त कर दूंगा।

सभापति महोदय : आपका भाषण खत्म होने के बाद प्राइवेट मैम्बर्स बिजनस लिया जाएगा।

श्री अजित सिंह : फूड फार वर्क की योजना है। इसका जो असर खेतीहर मजदूरों पर पड़ रहा है, उनके लिए काम के बदले अनाज की योजना है जिसमें ५० प्रतिशत अनाज है, जो ५० प्रतिशत कैश कम्पोनैंट है, उसमें आधा केन्द्र सरकार देती है, प्रदेश सरकारों को उसमें सिर्फ २५ प्रतिशत पैसा देना है। हम उनको ऐलाऊ कर देंगे कि और जितनी योजनाएं हैं, वे अपने संसाधनों से करें या केन्द्र की और योजनाओं में जो पैसा मिलता है, उसको भी वे उसमें इस्तेमाल कर सकें। लेकिन इसका आकलन प्रदेश सरकारों को अभी से करना पड़ेगा कि वे क्या काम कराना चाहते हैं, किस इलाके में कराना चाहते हैं, कितने अनाज की जरूरत पड़ेगी। अभी मंत्री जी की मीटिंग में उन्होंने करीब ५० लाख टन की मांग की थी। हिमाचल प्रदेश को छोड़ कर एफ.सी.आई. के पास सूखाग्रस्त क्षेत्रों में अनाज पर्याप्त मात्रा में है और हिमाचल प्रदेश में भी उसे जल्दी पहुंचाने का काम करेंगे। लेकिन और जो राहत हम चाहते हैं, इस बार जो सूखा पड़ा है, पहले जो सूखा पड़ता रहा है, वह उससे फर्क है - एक तो अब रबी और खरीफ का योगदान हमारी कृषि में करीब-करीब बराबर है। एक बारिश या मानसून फेल होने से पूरे कृषि क्षेत्र के उत्पादन पर उतना असर अब पड़ने वाला नहीं है। दूसरा फर्क यह है कि हमारे पास पर्याप्त मात्रा में खाद्यान है, इसलिए भुखमरी की समस्या नहीं आने वाली है। अगर ऐडमनिस्ट्रेटिव मशीनरी ठीक काम करे, अगर प्रदेश सरकारें उचित समय पर ठीक जगह पहुंचा सकें, जिनको जरूरत है, तो भुखमरी की कोई आशंका इस बार नहीं है। मैंने कहा, ऑयल सीड्स में कुछ कमी हो सकती है लेकिन हमारे पास पर्याप्त मात्रा में विदेशी मुद्रा है। अभी भी काफी ऑयल सीड्स इम्पोर्ट कर रहे हैं। इस बार कन्ज्यूमर्स को कोई ज्यादा फर्क नहीं पड़ने वाला है, ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले किसानों और खेतीहर मजदूरों पर ज्यादा पड़ने वाला है। इसलिए किसानों ने जो लोन ले रखा है, हम उनको ऐडवाइज कर रहे हैं कि आप इसकी वसूली अभी रोक दें। जैसे-जैसे परिस्थितियां होती हैं, अगर कुछ समय का ऋण, एक फसल के लिए जो ब्याज वे देते हैं अगर उसे माफ कर सकें, यह भी हम कोशिश करेंगे क्योंकि यह मामला आर.बी.आई. में जाएगा, कोआपरेटिव बैंक का मामला है जो स्टेट के अधिकार में है और हम आपके माध्यम से यह भी कहना चाहेंगे कि कोआपरेटिव से जितना फर्टीलाइजर किसानों ने लिया है, उसमें भी वसूली पर प्रदेश सरकारें रोक लगाने का काम करें।

यह आशंका जताई गई कि फूड फार वर्क का पैसा कहां जाएगा, कहां नहीं जाएगा। सबको मालूम है कि यह आशंका ही नहीं है, बहुत सी जगह सत्य भी है। लेकिन इसका निदान क्या है, क्योंकि हम प्रदेश सरकारों का अधिकार अपने हाथ में नहीं ले सकते हैं। हम वहां जाकर चैक नहीं कर सकते हैं कि क्या काम किया, क्या नहीं किया, लेकिन हम चाहेंगे कि अगर माननीय सदस्यों को किसी तरह हम इस काम में इन्वोल्व कर सकें, लोक सभा के सदस्य, राज्य सभा के सदस्य, एम.एल.एज., जिला परिषद के सदस्य और जितने इलैक्टिड लोग इसमें इन्वोल्व हों, जितना जनता को पता हो कि इतना पैसा आ रहा है, उसी में उसके दुरुपयोग की आशंका कम हो सकती है, इसलिए हम यह कोशिश करेंगे कि जितने भी राहत के काम के लिए यहां से पैदा दें, उसमें माननीय सदस्यों को इन्वोल्व करने का काम करे।

पानी की समस्या के बारे में आपने सुना। पानी की समस्या सूखे की नहीं है। यह आशंका है कि आगे जाकर पानी की समस्या होनी है, यह सब को मालूम है। इसके दो ही निदान हैं। एक तो हमारे देश में बहुत दिनों से एक भावना, पब्लिक ओपनियन बन रही है कि बांध बनाना खराब चीज है, इससे पर्यावरण खराब हो जाता है, इसलिए या तो कोर्ट में चले जाओ या धरना दो और बांध मत बनने दो, किसी तरीके से तीन महीने हमारे यहां मानसून है। सारी वर्षा तीन महीने में ही होनी है और वह बह जायेगी, अगर आप उसको रोकने का काम नहीं करोगे तो पानी की समस्या हल होने वाली नहीं है। ठीक है जो डिस्पेस्ड होते हैं, उनका ठीक से इन्तजाम करना चाहिए, उनके साथ सहानुभूति होनी चाहिए, उनका ठीक तरह से इन्तजाम होना चाहिए, लेकिन आप सारे देश की परिस्थिति अगर देखेंगे तो जब तक आप जो पानी बह रहा है, उसको रोकने का काम नहीं करेंगे, तब तक पानी की समस्या हल होने वाली नहीं है। दूसरी बात है कि जो हमारे ट्रैडीशनल मैथड्स रहे हैं, हमको फिर से उसमें जाना है, जो पानी के संचारण की, वाटर कंजर्वेशन के जो हमारे ट्रेडीशनल मैथड्स रहे हैं, हमारे कुंए, बावड़ी, जोहड़, तालाब और इस बारे में सरकार ने कंजर्वेशन ऑफ वाटर की बहुत सी योजनाएं बनाई हैं, लेकिन इसमें कम्युनिटी इन्वोल्वमेंट भी बहुत ज्यादा जरूरी है। ये योजनाएं वहीं सफल हुई हैं, जहां कम्युनिटी इन्वोल्वमेंट हुआ है। इसलिए हम चाहते हैं कि यह लाँग टर्म अगर पानी की समस्या को देखना है तो बाकी सेठी साहब ने कहा कि आपस के झगड़े तो निपटाने हैं, लेकिन जो एक भावना, पब्लिक ओपीनियन होनी चाहिए, क्योंकि हम लोग चुप हैं, अगर बड़े बांधों की भी जरूरत है और साथ ही कंजर्वेशन की स्कीम है। इसमें कई मनिस्ट्रीज ने बहुत सी स्कीम्स चला रखी हैं। समय नहीं है, मैं आप सब को डिटेल देने के लिए तैयार हूं और जब से ये योजनाएं चली हैं, करीब-करीब २८ मलियन हैक्टेयर में हमने कोशिश की है कि जो रेन फैड एरियाज हैं, उसमें पानी का वाटर लेवल कैसे ऊपर हो, किस तरह पानी का इस्तेमाल हो। २८ लाख हैक्टेयर जमीन को उसमें ट्रीट किया गया है।

एक बात और भी है कि सिंचाई का इन्तजाम नहीं किया गया, इसलिए यह सारी समस्या आई है। पंजाब तो सिंचित एरिया है, हरियाणा भी सिंचित एरिया है, पश्चिमी उत्तर प्रदेश भी सिंचित एरिया है। इर्रीगेशन मानसून को रिप्लेस नहीं कर सकता, मानसून को सप्लीमेंट कर सकता है। पानी तो वहीं से आना है, आज हमारे जो पानी के बड़े-बड़े ७० भण्डार हैं, रिजर्वायर्स हैं, उनमें पिछले साल के मुकाबले में ४७ परसेंट पानी इस समय है। जब तक पानी नहीं आयेगा, यह समस्या होगी।

हम रिलीफ के लिए तैयार हैं। मैं फिर कहना चाहूंगा कि इस समय इस रिलीफ में हम क्या कर सकते हैं, क्या नहीं कर सकते हैं, उसके लिए तैयारी कर रहे हैं, प्रदेशों से बात कर रहे हैं। रिपोर्ट तो वैसे भी आती रहती हैं। कैबिनेट सैक्रेटरी ने भी मीटिंग ली थी, एग्रीकल्चर सैक्रेटरी ने भी सब स्टेट्स से बात की थी, लेकिन मंत्री लोग और राजनैतिक लोगों को सिर्फ सरकारी रिपोर्ट ही नहीं मिलती, उनके कांस्टीट्वेंट्स भी उन्हें आकर बताते हैं कि क्या समस्या है। जो परेशानियां हो रही हैं, उस आधार पर ऐसी मीटिंग बुलाई थी, उसमें एक आकलन हुआ हह। यह मैं नहीं कह रहा हूं कि वर्षा होने वाली है, यह तो मैं क्या, मैट्रोलॉजिकल डिपार्टमेंट भी नहीं कह रहा है। लेकिन अगर ५-१० दिन में वर्षा आ जाती है तो स्थिति में फर्क होगा। अगर वर्षा नहीं होती है तो स्थिति बहुत भयंकर होगी। उसके लिए हमें तैयार रहना चाहिए और यह आशा करनी चाहिए कि अगर वर्षा हो जाये तो सभी का इसमें भला है। धन्यवाद।

श्री सईदुज्जमा: जो गन्ने के काश्तकारों का मिलों पर बकाया है, उसके जवाब आपने नहीं दिया।

श्री अजित सिंह : एक हजार करोड़ रुपये से ज्यादा गन्ना किसानों का पैसा अभी मिलों ने उनको नहीं दिया है। हमने कृषि मंत्रियों को भी कहा है और हम मुख्यमंत्रियों को भी लिख रहे हैं। जितनी जल्दी आप इस समय किसानों के ऊपर जो पैसा बकाया है, रोक लगनी चाहिए और किसानों को जो देना है, वह जल्दी से देने की कोशिश करें। इसमें आप सबके सहयोग की जरूरत है।

श्री शिवराज सिंह चौहान (वदिशा): फसल बीमा योजना के बारे में भी कुछ कहें।

श्री अजित सिंह : फसल बीमा योजना में बहुत कमी आई है। बहुत से सदस्यों ने इस पर अपने सुझाव दिए हैं। मैं मानता हूं कि इसमें कुछ कमी है, लेकिन जिन राज्यों ने इसे लागू किया है, वहां बहुत फायदा नहीं हुआ है। पंजाब, हरियाणा में यह लागू नहीं है। गुजरात में सन् १९९९ से अभी तक चार सीजन में ७७,५०० लाख रुपए बीमा योजना में केन्द्र सरकार ने दिए। इसी तरह से यहां से ११,८०० लाख रुपए आंध्रा प्रदेश को दिए गए हैं। करीब-करीब १२,००० लाख रुपए कर्नाटक को दिए हैं। १२,००० लाख रुपए से ज्यादा महाराष्ट्र को दिए हैं। १०,००० लाख रुपए के लगभग मध्य प्रदेश को दिए हैं। उत्तर प्रदेश में सिर्फ ८०० लाख रुपए का भुगतान हुआ है। इसलिए बीमा योजना के बारे में मैं फिर कहना चाहूंगा कि इसमें बहुत सुधार करने की जरूरत है। आप इंडविजुअली आंकड़े पूछ रहे थे, यह सब दिए जा सकते हैं। झारखंड में नहीं है, न ही वहां कोई क्लेम हुआ है। यह सब सूचना मैं आप लोगों को दे दूंगा। कृषि बीमा योजना एक अच्छी योजना है। कम से कम राजस्थान जैसे राज्य से मैं बहुत आशा करता था, लेकिन उतनी वह पूरी नहीं हुई। आंध्रा प्रदेश, उड़ीसा, गुजरात आदि राज्यों में जहां प्राकृतिक आपदाएं आई हैं, वहां किसानों ने आगे बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया है। उसका फायदा भी उन्हें हुआ है। हरियाणा, पंजाब और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी सिंचाई के साधन हैं, लेकिन वहां के किसानों को लग रहा था कि कोई रिस्क नहीं है इसलिए उन्होंने ज्यादा हिस्सा नहीं लिया। मैं चाहूंगा सब राज्य इसमें भागीदारी करें।

श्री मुलायम सिंह यादव : सभापति जी, मैं मंत्री जी से पूछना चाहता हूं कि आपने आंकड़े दिए कि इतनी फसल बोई जा चुकी है, लेकिन क्या आपके अधिकारियों ने यह भी रिपोर्ट दी है कि उसमें से कितनी फसल सूख गई हैं ? मेरी जानकारी के अनुसार फर्रुखाबाद, इटावा में जो मक्का बोया गया, उसमें से ९० प्रतिशत सूख गया है। जहां तक सोयाबीन की बात है, वह कई जगह दोबारा बोया गया। बुंदेलखंड में भी जो बोया था, वह भी बर्बाद हो गया है। क्या अधिकारियों ने यह रिपोर्ट दी कि इतना बोया गया और उसमें से इतना नष्ट हो गया?अगर यह जानकारी आपके पास है तो हमें बताएं। आप यह कहते हैं कि गल्ले की कोई कमी नहीं है, भंडार भरे पड़े हैं, हम पहुंचा देंगे। क्या इन मजदूरों के पास उसे खरीदने के लिए पैसा है, क्या छोटे किसानों के पास इसे खरीदने के लिए पैसा है ? मैंने कल कहा था कि हमने ऐसे अवसर भी देखे हैं कि भंडारों में अन्न भरा है, लेकिन उसके बाद भी हमने लोगों को सड़कों पर भूख से मरते देखा है। इसके बारे में आप क्या सोच रहे हैं ? किसानों पर कर्जा बढ़ता चला जा रहा है। चाहे वह कर्जा बैंकों का हो। आपने वसूली के बारे में कहा कि स्थगित करेंगे। इस तरह आप देखेंगे कि वह बढ़ता चला जाएगा। अगले साल पूरी वसूली करेंगे तो उनके पास पैसा कहां से आएगा। आपने कहा है कि थोड़ा बहुत ब्याज माफकरेंगे। क्या कर्जा भी माफ करने का विचार है ?

श्री अजित सिंह : हमें क्षेत्रफल की पूरी खबर है कि कितना बोया गया। जैसे मक्का है, बाजरा है, यह काफी कम बोया गया है। कुछ क्षेत्रों से खबर है कि वह नष्ट हुआ है। लेकिन राज्यों के राजस्व मंत्रियों और कृषि मंत्रियों का कहना है कि पूरा आंकलन करने में समय की जरूरत है। जो रिलीफ की बात है, किसानों को पैसा देने की बात, सी.आर.एफ. से शुरू कर सकते हैं। हम उसके लिए तैयार हैं। फूड फार वर्क भी लागू करेंगे। गरीब आदमी के पास खरीदने की क्षमता नहीं है इसलिए हम ५० प्रतिशत फ्री फूड फार वर्क के लिए पैसा दे रहे हैं। उसमें २५ प्रतिशत केन्द्र सरकार दे रही है, प्रदेश सरकारों से भी कह रहे हैं कि वह २५ प्रतिशत दें, कैश कम्पोनेंट वह और योजनाओं से ले सकती हैं। २५ प्रतिशत केन्द्र सरकार दे रही है। प्रदेश सरकार से हम कह रहे हैं कि वह कंपोनेंट के रूप में २५ प्रतिशत दे तथा अगर उसको जरूरत पड़े तो अन्य योजना भी वह ले सकती है। लेकिन बहुत सी प्रदेश सरकारें ऐसी हैं कि मैं मानता हूं कि उनके लिए यह पैसा भी देना मुश्किल हो जाएगा। उसके बारे में भी हम यहां वित्त मंत्री जी से और प्रधान मंत्री जी से बात कर रहे हैं कि जरूरत पड़ी तो प्रदेश सरकारों को वह पैसा दे जिससे वह फूड फॉर वर्क प्रोग्राम जैसा मैंने पहले कहा, खासकर खेतिहर मजदूरों और सीमान्त किसानों के लिए यह बहुत जरूरी योजना है। आपने यह सही कहा है और हम जानते हैं कि इस समय तुरंत रिलीफ देने की जरूरत है और उनसे वसूली न की जाए लेकिन अगर उनका ऋण बढ़ता रहेगा, ब्याज बढ़ता रहेगा तो इससे समस्या तो होगी। उस पर मैं फिर कहना चाहूंगा कि ये ऐसे सवाल हैं जो ब्रोडर सवाल हैं और वित्त मंत्री जी से और सबसे बात करके कुछ होगा और हम इसके लिए पूरी कोशिश कर रहे हैं। कुछ प्रदेश सरकार भी इसमें कर सकती है। को-आपरेटिव के लोन से भी वह कर सकती है।…( व्यवधान)

श्री श्रीप्रकाश जायसवाल (कानपुर) : कल मैंने कहा था कि एफसीआई का ६५ लाख टन गेहूं खुले में पड़ा है और अधिकारी लोग उस सड़े हुए गेहूं को सूखा राहत कार्यक्रम में लेने की योजना बना रहे हैं। क्या माननीय मंत्री जी इस संबंध में कुछ स्पष्टीकरण देंगे?…( व्यवधान)

सभापति महोदय : सब लिखा-पढ़ी करके बाद में मंत्री जी से मिल लेना।

श्री चन्द्र विजय सिंह: सभापति महोदय, मुरादाबाद को सूखा प्रभावित जिला घोषित नहीं किया गया है जबकि बिजनौर और रामपुर को किया गया है क्योंकमेरे जनपद में माननीय मुलायम सिंह जी का भी क्षेत्र आता है।…( व्यवधान)

श्री मुलायम सिंह यादव :न इटावा इंक्लूड हुआ है और न…( व्यवधान)

श्री अजित सिंह : देखिए, इटावा और मैनपुरी सबसे पहले किये गये हैं।…( व्यवधान)मेरे पास रिपोर्ट है।…( व्यवधान)हो सकता है कि पदाधिकारियों ने रिपोर्ट न भेजी हो। जब मेरठ हुआ तो मैनपुरी उसके साथ हुआ। …( व्यवधान)हम आपसे आशा करते हैं कि आप भी वहां जागरूक रहेंगे और उस सड़े हुए गेहूं का इस्तेमाल नहीं हो सके, उसके लिए कहेंगे।

श्री श्रीप्रकाश जायसवाल: हम तो कहेंगे।

श्री अजित सिंह : हम भी कहेंगे। मेरे पास ३९ की लिस्ट है। मुझे नहीं मालूम, देखिए, मैं फिर कह रहा हूं। यह प्रदेश सरकार का काम है।…( व्यवधान)

   

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