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Lok Sabha Debates

Combined Discussion On The Occupational Safety, Health And Working Conditions ... on 22 September, 2020

Seventeenth Loksabha an> Title: Combined discussion on the Occupational Safety, Health and Working Conditions Code, 2020; Industrial Relations Code, 2020 and Code on Social Security, 2020 (Discussion concluded and Bill Passed).

श्रम और रोजगार मंत्रालय के राज्य मंत्री (श्री संतोष कुमार गंगवार): अध्यक्ष महोदय, मैं प्रस्ताव करता हूं:

“कि किसी स्थापन में नियोजित व्यक्तियों की उपजीविकाजन्य सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्यदशाओं को विनियमित करने वाली विधियों को समेकित और संशोधित करने तथा उससे संबंधित या उसके आनुषंगिक विषयों वाले विधेयक पर विचार किया जाए ।” और “कि व्यवसाय संघ,औद्योगिक स्थापन या उपक्रम में नियोजन की शर्तें,औद्योगिक विवादों के अन्वेषण तथा परिनिर्धारण और उससे संबंधित या उसके आनुषंगिक विषयों से संबंधित विधियों का समेकन और संशोधन करने वाले विधेयक पर विचार किया जाए ।”                                                और “कि संगठित या असंगठित या किन्हीं अन्य सेक्टरों में सभी कर्मचारियों और कर्मकारों की सामाजिक सुरक्षा को बढ़ाने के उद्देश्य से सामाजिक सुरक्षा से संबंधित विधियों का संशोधन और समेकन करने के लिए और उससे संबंधित तथा उसके आनुषंगिक विषयों वाले विधेयक पर विचार किया जाए ।” माननीय अध्यक्ष : आपएक बार छोटा-सावक्तव्य दे दीजिए ।
…( व्यवधान)
श्री संतोष कुमार गंगवार : अध्यक्षजी, मैंतीन लेबर कोड्सको सदन के समक्षकन्सिडरेशन औरपासिंग के लिएरखते हुए यहकहना चाहूंगाकि यदि किसीभी व्यवस्थाको समय के साथ-साथपरिवर्तनशीलऔर गतिशील नहींरखा जाएगा, तोबदलते परिवेशमें उद्देश्योंको प्राप्त करनेमें वे निष्प्रभावीहो जाती है ।इसी मौलिक सिद्धांतके अनुरूप आज़ादीके 73 वर्षोंके बाद आदरणीयमोदी जी केनेतृत्व मेंवर्तमान के जटिलश्रम कानूनोंके स्थान परएक सरल, ज्यादाप्रभावी, पारदर्शी औरबदलते तकनीकके दौर के अनुरूपही श्रम कानूनोंकी बेहतर व्यवस्थाका सृजन कियागया है ।
         जब इन श्रमसुधारों की प्रक्रियाको प्रारंभ कियागया था, तो44श्रम कानूनोंमें से अधिकतमश्रम कानून ऐसेथे, जो 50से भी अधिकवर्षों से ज्यादापुराने हो गएथे तथा लंबेसमय से उनमेंबदलाव की आवश्यकताभी महसूस कीजा रही थी ।44 केन्द्रीयश्रम कानून अपनेआपमें इतनी बड़ीसंख्या है,जिससे इनकेक्रियान्वयनमें समस्याएंआती हैं । इनकानूनों मेंआ रही अनेकपरिभाषाएं, अथॉरिटीज़,अनेकों अनुपालनव्यवस्थाएं,जैसे कि रजिस्ट्रेशन,कल्याणकारीप्रावधान केलिए अलग-अलग थ्रेशहोल्डइत्यादि की वजहसे कठिनाई आरही थी ।
         अध्यक्ष महोदय, दूसरामहत्वपूर्ण तथ्ययह है कि आज़ादीके 73 वर्षोंकी यात्रा मेंआज के नए भारतका वातावरण,तकनीकी दौर,काम करने कातरीका, कार्यजगत की सुविधाएंतथा काम केस्वरूपों मेंभी अप्रत्याशितपरिवर्तन होगया है । आजसे 70 वर्षोंपहले किसी नेभी इस बात कीकल्पना भी नहींकी थी कि वर्कफ्रॉम होम यानीघर बैठकर भीकाम किया जासकता है, या एक ही समयपर कर्मचारीएक से अधिकएम्पलॉयर्स केलिए काम करसकते हैं । इसबदले हुए कार्यजगत के स्वरूपको अंतर्राष्ट्रीयकार्य जगत नेभी स्वीकार कियाहै तथा फ्यूचरऑफ वर्क केअनुसार उन्होंनेभी अपने श्रमकानूनों मेंकाफी बदलाव किएहैं ।
         इस संदर्भमें, यदिभारत अपने श्रमकानूनों मेंसमय के अनुरूपपरिवर्तन नहींकरता है, तोहम श्रमिकोंके कल्याण तथाउद्योगों केविकास दोनोंही उद्देश्योंमें पीछे रहजाएंगे । इसीउद्देश्य केसाथ वर्तमानश्रम कानूनोंको चार लेबरकोड्स में परिवर्तितकरने का ऐतिहासिककार्य शुरू कियागया था । हमचार लेबर कोड्समें 29 केन्द्रीयश्रम कानूनोंको समाहित कररहे हैं । इनचार लेबर कोड्समें श्रमिकोंके मूलभूत अधिकारोंको सुनिश्चितकिया गया है । पहला, वेजेज़कोड में वेतनकी सुरक्षा,ओएसएच कोडमें कार्य करनेके लिए सुरक्षितवातावरण, इंड्रस्ट्रियलरिलेशन्स कोडमें प्रभावीविवाद निस्तारणकी व्यवस्थाऔर कोड ऑन सोशलसिक्योरिटी मेंसामाजिक सुरक्षाप्रदान करनाहै । इन चारोंलेबर कोड्स मेंपहला कोड ऑनवेजेज़ दोनोंही सदनों द्वारापहले ही सहमतिसे पास कियाजा चुका है ।
         अध्यक्ष महोदय, मैंआपके माध्यमसे सदन को यहबताना चाहूंगाकि इन 4 लेबर कोड्सको बनाने कीप्रक्रिया मेंयह विशेष ध्यानरखा गया हैकि एक व्यापककंसल्टेशन प्रक्रियाका पालन हो ।हमने इस कंसल्टेशनप्रोसेस के अंतर्गतट्रेड यूनियन्स,एम्पलॉयर्सएसोसिएशन्स,राज्य सरकारें,इस क्षेत्रके एक्सपर्ट्स,श्रम के अंतर्राष्ट्रीयसंगठन और सबसेमहत्वपूर्ण औरबेहद जरूरी आमजनता के सुझावोंको भी ध्यानमें रखते हुएप्रावधानों कोबनाया गया है ।
   
16.39 hrs                       (Shri Rajendra Agrawal in the Chair)          महोदय, इसप्रक्रिया केअंतर्गत हमनेकरीब 9 ट्राइपार्टाइटकंसल्टेशन्सकिए हैं । चारसब कमेटी मीटिंग्सऔर दस रीज़नलकांफ्रेंसेज़भी किए हैं ।इनमें देश केविभिन्न स्थानोंपर लेबर कोड्सके प्रावधानोंपर विस्तृत चर्चाकी गई है । इनलेबर कोड्स परदस बार इंटरमिनिस्ट्रियलकंसल्टेशन भीहुआ है, जिनकेमाध्यम से दूसरेमंत्रालयों तथाविभागों के सुझावभी लिए गए हैं । मैं सदन कोयह भी बतानाचाहूंगा कि सभीलेबर कोड्स कोमंत्रालय कीवेबसाइट पर दोसे तीन महीनेके लिए पब्लिकडोमेन में भीरखा गया है । जिसके दौरान सभी हितधारकों से करीब छह हजार से ज्यादा कमेंट्स प्राप्त हुए हैं । इतनी विस्तृत कंसल्टेशन प्रक्रिया के बाद ही हमने लेबर कोड्स के प्रावधानों को उचित स्वरूप दिया है ।

         अध्यक्ष महोदय,इस सदन के मेरे सभी साथी अवगत हैं कि मंत्रालय की इस प्रक्रिया के बाद ही तीनों लेबर कोड्स को पार्लियामेंट्री स्टेंडिंग कमेटी को भी रेफर किया गया था तथा पार्लियामेंट्री स्टेंडिंग कमेटी ने सभी हितधारकों से विस्तृत चर्चा करने के उपरांत 233 रिक्मेंडेशंस दी थीं । इसमें मंत्रालय ने 74 प्रतिशत से अधिक रिक्मेंडेशंस को स्वीकर कर लिया है । इसी आधार पर लेबर कोड्स के प्रावधानों में सभी जरूरी परिवर्तन भी किए गए ।

अध्यक्ष महोदय, क्योंकि श्रमिक और उद्योग दोनों एक ही सिक्के के दो पहलू हैं,इसलिए बदलते परिवेश में हमारे श्रमिक के लिए उद्योगों की आवश्यकताओं में भी संतुलन होना चाहिए । इन लेबर कोड्स में जहां एक तरफ श्रमिकों के अधिकारों को सुदृढ़ करने का प्रयास किया गया है, वहीं दूसरी तरफ उद्योगों को सरलता से चलाने के लिए एक सरल अनुपालन की व्यवस्था की गई है । अब उद्योग लगाने के लिए विभिन्न श्रम कानूनों के अतंर्गत अलग-अलग रजिस्ट्रेशंस या कई लाइसेंस लेने की आवश्यकता नहीं होगी । जहां तक संभव है, अब हम सभी रजिस्ट्रेशंस और लाइसेंस इत्यादि को समयबद्ध सीमा में और ऑनलाइन प्रक्रिया के अंतर्गत प्रदान करने का कार्य करने जा रहे हैं । हमने श्रमिकों के हितों को ध्यान में रखते हुए, अनेकों ऐसे कदम उठाए हैं,जो वर्तमान के श्रम कानूनों में नहीं थे । जैसे सभी श्रमिकों को एपॉइंटमेंट लेटर का अधिकार प्रदान किया जा रहा है । इससे हम अपने कार्य जगत में फॉर्मल एंप्लायमेंट को बढ़ावा दे पाएंगे । यह एक बड़ी पहल है जो आजादी के 73 वर्षों के बाद और 44 कानून होने के बावजूद भी आज तक नहीं की गई हैं । श्रम कानूनों के इतिहास में कई प्रावधान तो पहली बार ही किए जा रहे हैं । इनमें से कुछ का उल्लेख मैं अभी करना चाहूंगा,जैसे प्रवासी श्रमिकों की परिभाषा को ज्यादा व्यापक बनाना । अब ऐसे श्रमिक, जो कि बिना कॉन्ट्रेक्टर के माध्यम से भी एक राज्य से दूसरे राज्य में काम के लिए जाते हैं,वे भी अब प्रवासी श्रमिक की परिभाषा में आ पाएंगे । साथ ही साथ वे अब प्रवासी श्रमिकों के लिए निर्धारित कल्याणकारी योजनाओं के लाभ के पात्र भी हो पाएंगे । इसी तरह से काम से हटाए जाने वाले श्रमिक के लिए भी रीस्किलिंग की व्यवस्था की गई है । सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों और प्लेटफॉर्म वर्कर्स जैसे नए तरह के श्रमिकों को भी सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाया गया है । विवाद निस्तारण के लिए ट्रेड यूनियन की महत्ता को समझते हुए और स्वीकार करते हुए, श्रम कानूनों में पहली बार उनके संस्थान के स्तर पर, राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर यानी तीनों स्तरों पर मान्यता देना ।

अध्यक्ष महोदय, श्रमिकों,उद्योग जगत तथा इससे संबंधित सभी हितधारकों के अधिकारों तथा आवश्यकताओं में एक सामंजस्य बनाने का प्रयास करते हुए इन तीनों लेबर कोड्स को लाया गया है ।

         मैं आशा करता हॅूं कि यह श्रम संहिता वास्तव में श्रमिक कल्याण की प्राप्ति के उद्देश्यों के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा । मेरा सदन के सभी साथियों से आग्रह है कि इन लेबर कोड्स पर आवश्यक चर्चा और अपनी बातें बताने का कष्ट करें ।

         

मैंने यह प्रारंभिक बात कही है । मैं विस्तार से और बातें बाद में भी आपसे करूंगा ।

         आप सबका बहुत-बहुत धन्यवाद ।

माननीय सभापति :  प्रस्ताव प्रस्तुत हुए:

“कि किसी स्थापन में नियोजित व्यक्तियों की उपजीविकाजन्य सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्यदशाओं को विनियमित करने वाली विधियों को समेकित और संशोधित करने तथा उससे संबंधित या उसके आनुषंगिक विषयों वाले विधेयक पर विचार किया जाए ।” और “कि व्यवसाय संघ,औद्योगिक स्थापन या उपक्रम में नियोजन की शर्तें,औद्योगिक विवादों के अन्वेषण तथा परिनिर्धारण और उससे संबंधित या उसके आनुषंगिक विषयों से संबंधित विधियों का समेकन और संशोधन करने वाले विधेयक पर विचार किया जाए ।” और “कि संगठित या असंगठित या किन्हीं अन्य सेक्टरों में सभी कर्मचारियों और कर्मकारों की सामाजिक सुरक्षा को बढ़ाने के उद्देश्य से सामाजिक सुरक्षा से संबंधित विधियों का संशोधन और समेकन करने के लिए और उससे संबंधित तथा उसके आनुषंगिक विषयों वाले विधेयक पर विचार किया जाए ।” …( व्यवधान)
माननीय सभापति: श्रीपल्लब लोचन दासजी ।
 
श्री पल्लब लोचन दास (तेजपुर): सभापतिमहोदय, आपनेमुझे इस ऐतिहासिकमहत्व के विषयपर बोलने कामौका दिया है, इसकेलिए आपका बहुत-बहुतधन्यवाद । मैंअपनी पार्टीका भी धन्यवादकरता हॅूं किइस बिल की चर्चामें भाग लेनेके लिए मुझेमौका दिया है ।
         सर, भारतके प्रधान मंत्रीश्री नरेंद्रमोदी जी काधन्यवाद, जिन्होंनेये ऐतिहासिककदम उठाए हैं ।   मैंमाननीय मंत्रीसंतोष गंगवारजी को भी धन्यवाददेना चाहूंगा । सर, यहइतिहास बननेजा रहा है ।आज का सत्रश्रमिकों केलिए सुनहरे अक्षरोंमें लिखा जाएगा, क्योंकिइतना बड़ा रिफॉर्मकभी भी कहींहुआ नहीं था । आज तक जितनेभी कानून थे, हमारे44कानून थे,उनमें से हमने12 को रिपीलकिया है । 44कानून रहनेके बाद भी श्रमिककी जो पोजिशनहै, स्टेंडर्डऑफ लिविंग है,डिग्निटी ऑफलेबर आज भारतमें क्या है?
इतने कानून रहने के बाद भी आज स्टैंडर्ड ऑफ लिविंग बढ़ी नहीं है । हमने इस तरीके से कानून बनाया है, इनमें इतने कॉम्प्लिेशन्स हैं, डेफिनेशन में कॉम्प्लिेशन है, थ्रेशहोल्ड में कॉम्प्लिेशन्स हैं  और ट्रेड यूनियन हो या कोई भी एम्प्लॉयर हो या वर्कर्स यूनियन हो, किसी को समझ में नहीं आता है । इसके कारण श्रमिकों को जितनी सुरक्षा देनी चाहिए थी,वह सुरक्षा नहीं मिली । यह जो रिफॉर्म अभी आया है, इस रिफॉर्म के द्वारा एक यूनिवर्सलाइजेशन किया गया है । पहले जो कोड ऑफ वेजेज आया था, कोड ऑफ वेजेज में हम सभी वर्कर्स को मिनिमम वेज के कवरेज में लाएं । पहले तो मिनिमम वेज भी वर्कर्स को नहीं मिलती थी, पहले खाली सिटी में जितने वर्कर्स हुआ करते थे, उनको ही‍मिलती थी । हमने यूनिवर्सलाइजेशन किया और उसके कारण आज वर्कर्स को उसका बेनिफिट मिल रहा है । हमने कवरेज बढ़ाया है ।
सर, मैं वेजेज कोड के बारे में बोलना चाहूंगा । हम लोगों ने 13 लॉ को समाहित करके एक कोड में डाला है । यहां पर हम लोग जितना सिम्प्लीफाई कर सकें, उसमें सिम्प्लीफाई किया गया है । यह जो लेबर कोड है, इसमें कैसे सिम्प्लीफाई तरीके से रजिस्ट्रेशन हो, कैसे एक लाइसेंस हो, कैसे यहां पर एक रिटर्न हो,इसका यहां पर प्रावधान किया गया है । थ्रेशहोल्ड भी मिनिमम, अगर दस श्रमिक रहेंगे, तो वेजेज कोड वहां पर इम्प्लिमेंट किया जाएगा । उसमें भी प्रावधान है कि अगर कहीं पर हेजाडर्स है या  कहीं लाइफ थ्रेटनिंग इस्टेब्लिशमेंट है तो वहां पर एक वर्कर रहने से भी इनको बेनिफिट दे सकते हैं ।
सर, यहां पर सबसे बड़ी बात है- माइग्रेंट वर्कर की । माइग्रेंट वर्कर के बारे में सब बोलते हैं । माइग्रेंट वर्कर की डेफिनेशन क्या थी? इंटरस्टेट माइग्रेंट वर्कर, 1979 का जो एक्ट है,उस एक्ट में कान्ट्रैक्ट के थ्रू खाली यह लिखा गया था कि जहाँ पर ऑरिजनल स्टेट है, वहां पर भी आपको लाइसेंस लेना पड़ेगा और जहां काम करने जाएंगे, वहां भी आपको लाइसेंस लेना पड़ेगा । अगर आप कान्ट्रैक्ट के थ्रू काम करेंगे,तभी आपको माइग्रेंट वर्कर बोला जाएगा । आज की डेट में सब माइग्रेंट वर्कर्स के बारे में बोलते हैं, पुरानी सरकार ने यह नहीं किया, उन्होंने कभी इनके बारे नहीं देखा । माइग्रेंट वर्कर की डेफिनेशन पहली बार मोडिफाई हुई है । आज कोई भी लोग खुद आकर काम करेंगे, तो उनको माइग्रेंट वर्कर का बेनिफिट मिलेगा । एम्प्लॉयर के थ्रू अगर वे काम करने आएंगे तो उनको माइग्रेंट वर्कर का बेनिफिट मिलेगा । वहां यह प्रोविजन भी डाला गया है कि जितनी भी स्टेट गवर्नमेंट्स हैं,स्टेट गवर्नमेंट में हेल्प लाइन बनाई जाए । वहां पर हम लोग एक पोर्टल बनाएं, जिस पोर्टल में रजिस्ट्रेशन हो और वह सेल्फ डिक्लेरेशन कर सके कि मैं माइग्रेंट वर्कर हूँ । माइग्रेंट वर्कर के जितने भी बेनिफिट्स हैं,वे बेनिफिट्स वर्कर्स को मिलेंगे । यह ऐतिहासिक कदम हमारी सरकार ने इस बिल में प्रावधान करके लाया है । यह बहुत ही बढ़िया है । एक डेटाबेस बनेगा, पूरी इंडिया में कितने माइग्रेंट वर्कर्स हैं? अगर हम सब का रजिस्ट्रेशन करेंगे, मैं यह आग्रह करूँगा कि सब को एक यूनिक नम्बर भी देना चाहिए । अगर हम सब को एक यूनिक नम्बर देंगे,तो हमको डेटाबेस मिलेगा कि पूरे इंडिया में कितने माइग्रेंट वर्कर्स हैं । उनको हम लोग बेनिफिट दे सकते हैं । यह ऐतिहासिक कदम है ।
इसमें एक और बड़ी बात है कि आज जितने भी इस्टेब्लिशमेंट हैं, अगर वहां पर इंक्वायरी की जाएगी, तो ज्यादातर लोगों के पास अपॉइंटमेंट लैटर नहीं है । अपॉइंटमेंट लैटर नहीं होने के कारण उनको बेनिफिट नहीं मिलता है । जो-जो बेनिफिट मिलना चाहिए, वह वर्कर भी साबित नहीं कर सकता है कि मैं यहां पर काम कर रहा हूं । उसी तरह से वहां पर एक्सप्लॉइटेशन भी बहुत ज्यादा होता है । यह पहली बार हुआ है, हम लोग मेनडेटरी प्रोविजन यहां पर लाए हैं, जिससे सब को अपॉइंटमेंट लैटर देना पड़ेगा । अपॉइंटमेंट लैटर देने से वर्कर्स की जो सोशल सिक्योरिटी है, उनकी वर्किंग कंडीशन है, जो भी राइट्स हैं, उनको हम प्रोटेक्ट कर पाएंगे । यह बहुत बड़ा ऐतिहासिक कदम है,लेकिन इतने सालों तक किसी ने इन चीजों के ऊपर ध्यान नहीं दिया ।
सर, वर्कर का हेल्थ चैक-अप कभी होता ही नहीं है । यहां पर पहली बार प्रोविजन लाया गया है, अब वर्कर का हैल्थ चैक-अप किया जाएगा । एन्युअली हेल्थ चैक-अप एम्प्लॉयर द्वारा किया जाएगा । मैं एक उदाहरण देना चाहूँगा । हमारे असम में बहुत ज्यादा टी गार्डन्स हैं । टी गार्डन में जो प्रेगनेंट लेडी हुआ करती है, उनका जो एन्टीनेटल चैक-अप होता है, वह एन्टीनेटल चैक-अप कराने नहीं जाती है । वे चेकअप के लिए इसलिए नहीं जाती हैं, क्योंकि उनकी वेज लॉस होती है । वे चेकअप कराने के लिए नहीं जाती हैं । पिछले इतने सालों तक उनका हेल्थ चेकअप नहीं होता था । असम में हम लोग देखते हैं तो वहाँ मैटर्निटी मॉर्टेलिटी रेट,इन्फेंट मॉर्टेलिटी रेट भी बहुत हाई था । वर्ष 2016 में जब हमारी सरकार आई, हमारे विजन डॉक्यूमेंट में वहाँ पर बोला गया था कि हम टी गार्डन वर्कर्स के प्रोटेक्शन के लिए काम करेंगे और आज हमारी गवर्नमेंट एक प्रावधान लाई है, वेज काम्पन्सेशन की एक पॉलिसी लाई है । अगर गर्भवती महिला अपने ऐन्टीनेटल चेकअप के लिए जाएगी तो उनको 12 हजार रुपये का एक पैकेज दिया जाएगा, पैसा दिया जाएगा । यह प्रावधान हम लाए हैं, लेकिन इतने सालों तक यह प्रावधान नहीं था । पहली बार यह प्रावधान आया है । अगर हेल्थ चेकअप होगा तो वर्कर्स की प्रोडक्टिविटी भी बढ़ेगी और वर्कर्स अच्छी तरह से काम कर पाएंगे । बहुत सारे वर्कर्स बहुत बीमार रहते हैं,लेकिन उनका हेल्थ चेकअप करने की कोई व्यवस्था नहीं है । अब यह हेल्थ चेकअप का जो प्रावधान आया है, यह बहुत ही बड़ा प्रावधान है और बहुत ही अच्छा है ।
         सर, जो फैमिली की परिभाषा थी,जो डिपेन्डेंट की परिभाषा थी,उस परिभाषा को भी हमने एक्सटेंड किया है । हमने उसमें विडो डॉटर को शामिल किया है, विडो सिस्टर को शामिल किया है और हमने उसमें ग्रैन्डपेरेन्ट्स को भी शामिल किया है । यह बहुत बड़ा प्रावधान यहाँ पर बदला गया है । सेफ्टी के लिए सेफ्टी ऑफिसर नियुक्त कर सकते हैं । उसके ऊपर भी स्टेट गवर्नमेंट के लिए एक प्रावधान बनाया गया है,स्टेट गवर्नमेंट चाहे तो सेफ्टी ऑफिसर नियुक्त कर सकती है । हमारे जितने भी लॉ थे,सबमें हमारी एडवाइजरी कमेटी थी, कमेटी के मेंबर्स अलग-अलग रहते थे तो हर कमेटी की मीटिंग नहीं होती थी,लेकिन हम सारे पॉचों एक्ट्स को बदलकर एक कमेटी बना रहे हैं । हम नेशनल और स्टेट लेवल पर occupational safety and health advisory board बना रहे हैं, जिसके थ्रू हम सबको बेनीफिट दे सकते हैं और उनको सारा कुछ दे सकते हैं ।
         यहाँ पर इंस्पेक्शन की जो व्यवस्था थी, इंस्पेक्शन को वेब बेस्ड करने का प्रावधान है कि वेब बेस्‍ड इंस्पेक्शन हो । मैं असम के कंसर्न में एक बात बोलना चाहूँगा कि असम में प्लांटेशन वर्कर्स हैं और वहाँ प्लांटेशन वर्कर्स की स्थिति बहुत खराब है । इतने युग हो गए हैं, 200 साल से वहाँ प्लांटेशन वर्कर्स  हैं,ब्रिटिश तो चले गए हैं, लेकिन ब्रिटिश समय के जो प्रोविजन्स हैं, रूल्स हैं, वे ऐसे ही रह गए हैं । स्टेट विद इन दी स्टेट टी एस्टेट बोला जाता है । स्टेट का जो भी कानून होता है, स्टेट के टी गार्डन में उस प्रोविजन को नहीं डाला जाता है, वहाँ पर काम नहीं होता है । इसे कभी भी किसी ने नहीं देखा । आज जो कांग्रेस की पार्टी बोल रही थी, कांग्रेस की सरकार बहुत साल तक असम में थी, स्टेट में उनकी सरकार थी और उनकी ही ट्रेड यूनियन भी थी,लेकिन आज भी टी गार्डन वर्कर्स की कंडीशन इतनी खराब है । आज भी आप टी गार्डन में जाएंगे तो देखेंगे कि वहाँ की पंचायत का जो भी प्रावधान है, उसके अनुसार डेवलपमेंट हम नहीं कर पाएंगे । प्रधान मंत्री ग्राम सड़क योजना गार्डन के अंदर नहीं होती है । राजीव गाँधी विद्युतीकरण योजना,यहाँ पर हमारे एमपी हैं, वे वहाँ पर पहले पावर मिनिस्टर भी थे,इंडस्ट्री मिनिस्टर भी थे, उनसे पूछिएगा, कभी भी वहाँ पर लाइट का कनेक्शन नहीं गया । क्यों नहीं गया? पंचायती राज में वोट तो उन्होंने डाले हैं, लेकिन उन्हें बेनीफिट क्यों नहीं मिला,क्योंकि हमने वह प्रोविजन देखा ही नहीं ।
         सर, प्लांटेशन लेबर एक्ट में मिनिमम वेज का ऐसा प्रोविजन था कि जितने भी टी गार्डन के वर्कर्स हैं, सब बोलते हैं कि प्लांटेशन लेबर एक्ट में अमेंडमेंट किया जाना चाहिए । मैं गर्व से बोलना चाहता हूँ कि आज हमारे लिए एक नया इतिहास है । आज प्लांटेशन लेबर एक्ट में अमेंडमेंट किया जा रहा है । मेरे लिए तो यह गर्व की बात है कि प्लांटेशन लेबर एक्ट में अमेंडमेंट हो रहा है और उसमें मुझे बोलने का मौका मिल रहा है । यह ऐतिहासिक है । असम के जितने भी हमारे प्लांटेशन वर्कर्स हैं,सभी की तरफ से मैं भारत के प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी और गंगवार जी को धन्यवाद देना चाहूँगा ।
         सर, मैं एक बात बोलना चाहूँगा कि टी गार्डन में अगर कोई एमएलए या एमपी भी चाहे तो वहाँ पर हम एमपी या एमएलए फंड नहीं दे सकते हैं क्योंकि गार्डन मैनेजमेंट का एनओसी चाहिए होता है । हमने क्या प्रावधान किया, पहले उनको मिनिमम वेज दिया जाता है,मिनिमम वेज के लिए प्लांटेशन लेबर एक्ट में लिखा गया है कि उनको बेनीफिट देना चाहिए, सारा कुछ बेनीफिट है,लेकिन जब वेज निगोसिएशन होता है, तो उसे छोड़ दिया जाता है । वहाँ पर हमने एजुकेशन की सुविधा दी है,उन्हें घर की सुविधा दी है,मिनिमम वेज में उसको काटकर हमने 50 परसेंट कैश और 50 परसेंट में उस प्रावधान को रखा है ।
 
आज टी-गार्डेन वर्कर्स की जो हालत है, यह ऑर्गेनाइज्ड एक्सप्लॉयटेशन है । कांग्रेस पार्टी के जितने भी लोग थे, उनकी सरकार, उनके ट्रेड यूनियन,सभी लोग इम्प्लॉयर के साथ मिल गए और टी-गार्डेन के वर्कर्स की ऑर्गेनाइज्ड एक्सप्लॉयटेशन हुई । यह पहली बार है कि इस एक्सप्लॉयटेशन को हमने रोका है । हमने यहां पर प्रावधान डाला है कि अभी हम टी-गार्डेन में,यदि केन्द्र सरकार, राज्य सरकार, म्युनिसिपैलिटी या पंचायती राज व्यवस्था में वहां पर डेवलपमेंट करना चाहें तो हम डेवलपमेंट कर सकते हैं । इसके लिए अब हमें एन.ओ.सी. की जरूरत नहीं पड़ेगी । इसका प्रावधान है । हमने वेजेज की परिभाषा को बदला है । यहां पर हम 15 प्रतिशत से ज्यादा काइन्ड नहीं दे सकते हैं । इसे 15 प्रतिशत पर ही प्रतिबंधित किया गया है । यह एक बहुत बड़ा प्रावधान है । इन दो प्रावधानों से हम टी-गार्डेन के वर्कर्स को सामाजिक सुरक्षा और बेनिफिट्स दे सकते हैं ।
         सर, मैं इंडस्ट्रियल कोड के ऊपर बोलना चाहूंगा । इंडस्ट्रियल कोड में भी हमने थ्रेशोल्ड बदला है । सुपरवाइजरी वर्कर्स को हम लोग पहले इंडस्ट्रियल कोड में नहीं लेते थे । लेकिन, यहां हमने उनके वेजेज को बढ़ाकर 18,000 रुपये प्रति महीने किया है,ताकि उनके भी ग्रीवांसेज ले सकें । हमने ग्रीवांसेज रिड्रेसल कमेटी बनाई है । इसके माध्यम से हम उनके ग्रीवांसेज को रिड्रेस कर पाएंगे । इसमें एक और बड़ी बात है कि वहां जितने भी वर्कर्स काम करते हैं,उनमें से महिलाएं भी उस ग्रीवांसेज रिड्रेसल कमेटी में होनी चाहिए ।
         हम लोग फिक्स्ड-टाइम इम्प्लॉयमेंट की बात करते हैं । इसे हम कॉन्ट्रैक्टर्स के माध्यम से करते हैं । वे लोग परमानेंट वर्कर्स के बराबर और सिमिलर नेचर के काम तो करते हैं, लेकिन उन्हें इसका कोई बेनिफिट नहीं दिया जाता । लेकिन,इस बिल में यह प्रावधान है कि सिमिलर वर्क के लिए परमानेंट वर्कर्स को जो बेनिफिट्स उपलब्ध हैं, वे सभी बेनिफिट्स उन्हें दिए जाएंगे । यहां तक कि उन्हें ग्रैच्यूटी बेनिफिट्स भी देने का प्रावधान हमने किया है । यह बहुत ही अच्छा रिफॉर्म है ।
         सर, जहां तक ट्रिब्यूनल की बात है तो अभी हम लोगों ने ट्रिब्यूनल में दो मेम्बर्स देने के लिए कहा है क्योंकि ट्रिब्यूनल में मेम्बर न होने से हम काम नहीं कर पाते । हमने यहां पर ट्रिब्यूनल के लिए भी काम किया है । अगर कंसीलिएशन फेल हो जाती है और वह आपके पक्ष में नहीं होती है तो आप डायरेक्ट ट्रिब्यूनल में जा सकते हैं, इसका प्रावधान भी हमने इसमें किया है ।
         हमने रिट्रेंचमेंट बेनिफिट के लिए भी इसमें प्रावधान किया है कि हम रिट्रेंचमेंट बेनिफिट दे सकते हैं या अगर राज्य सरकार चाहे तो उसे बढ़ा भी सकती है । यह नई व्यवस्था है ।
         सर, स्ट्राइक के लिए भी हमने नई व्यवस्था की है । 14 दिनों का नोटिस दिए बिना हम स्ट्राइक नहीं कर पाएंगे और लॉकआउट भी नहीं कर पाएंगे । यह एक बहुत ही अच्छा प्रावधान है ।
         सर, हम यह बोलना चाहेंगे कि इसमें रि-स्किलिंग फण्ड का प्रावधान भी नया प्रावधान है । अगर किसी वर्कर की छँटनी हो जाती है, उसके अंतिम पन्द्रह दिनों के जो वेजेज हैं,उसके बराबर राशि उसे 45 दिनों के अन्दर देने का प्रावधान किया गया है । मैं यही बोलना चाहूंगा कि हम लोग इसमें बहुत बड़ा परिवर्तन लेकर आए हैं ।
         सर, मैं सामाजिक सुरक्षा की बात करना चाहूंगा । सामाजिक सुरक्षा के लिए हमने बहुत बड़ा प्रावधान यह किया है । सभी को ई.एस.आई.सी. और ई.पी.एफ.ओ. का कवरेज देने का हमने प्रावधान किया है । यह बहुत ही अच्छा प्रावधान है । पहली बार ऐसा हुआ है कि ई.एस.आई. कॉरपोरेशन के माध्यम से हम सभी वर्कर्स को हेल्थ बेनिफिट्स दे सकते हैं और ई.पी.एफ.ओ. के माध्यम से उन्हें हम सामाजिक सुरक्षा दे सकते हैं । यह एक बहुत बड़ा प्रावधान हम लोग लेकर आए हैं । यह बहुत ही अच्छा है ।
         सर, अभी एग्रीकल्चरल वर्कर्स के बारे में बोला जा रहा था । एग्रीकल्चरल वर्कर को भी हम इस सामाजिक सुरक्षा के द्वारा, यदि कोई असंगठित क्षेत्र का वर्कर है, तो उसे भी हम किसी एक्ट या किसी पॉलिसी या किसी स्कीम के माध्यम से ई.पी.एफ.ओ. या ई.एस.आई.सी. के बेनिफिट्स दे सकते हैं । यह एक बहुत बड़ा प्रावधान हम यहां पर लेकर आए हैं ।
         सर, हम यह भी बोलना चाहेंगे कि हम ग्रैच्यूटी के ऊपर भी एक नया प्रावधान लेकर आए हैं । पहले केवल एल.आई.सी.में ही हम ग्रैच्यूटी फण्ड रख सकते थे,लेकिन आई.आर.डी.ए. एक्ट के थ्रू हम लोग ग्रैच्यूटी फण्ड को दूसरी जगह भी रख सकते हैं ।
17.00 hrs          सर, पहले जो फैमिली की परिभाषा थी, उसको भी हमने बदला है । उनके जितने भी डिपेन्डेन्ट्स हैं, उनको हम लोगों ने यहाँ पर शामिल किया है । चाहे अनमैरिड डॉटर्स हों, सिस्टर्स हों,उन सबको शामिल किया गया है । हमने जो फैमिली की परिभाषा चेंज की है, उसके माध्यम से बहुत बड़ा परिवर्तन होने वाला है ।

सर, अब मैं प्लैन्टेशन वर्कर्स के बारे में कुछ कहना चाहता हूँ । हमारे यहाँ के एक माननीय सांसद जॉन बाला साहब थे, वह हमेशा बोलते थे कि क्या हम ईएसआईसी के बेनिफिट्स प्लैन्टेशन के क्षेत्र में दे सकते हैं? आज एक बहुत बड़ा दिन है, जहाँ पर हम लोगों ने प्लैन्टेशन के क्षेत्र में भी इसका एक्स्टेंशन किया है । हमने नए शेड्यूल में वर्कर्स के लिए भी एक्स्टेंशन किया है । हमने टी वर्कर्स और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को भी सोशल सिक्योरिटी के माध्यम से बेनिफिट्स दिये हैं ।

सर, वहाँ डेढ़ करोड़ वर्कर्स हैं । उनको भी हमने कवरेज में लिया है । आज सोशल सिक्योरिटी को व्यापक बनाया गया है । वर्कर्स को सोशल सिक्योरिटी मिलनी चाहिए और इसके ऊपर हमने काम किया है । उनके लिए सोशल सिक्योरिटी फंड बनाया गया है । इस फंड के माध्यम से हम हर वर्कर्स को बेनिफिट दे सकते हैं । हमारे जितने भी वर्कर्स हैं, उन सभी को हम इसका बेनिफिट दे सकते हैं ।

सर, मैं कहना चाहता हूँ कि हमने जो सोशल सिक्योरिटी फंड बनाया है,इसके माध्यम से हर वर्कर्स को बेनिफिट मिलेंगे । हर वर्कर्स सामाजिक रूप से सुरक्षित महसूस करेगा । हर वर्कर्स का स्टैण्डर्ड ऑफ लिविंग बढ़ेगा । आज इंडिया में वर्कर्स का जो माहौल है, हम उसको बदल रहे हैं । सर, इतिहास में पहली बार ऐसा हो रहा है, वर्कर्स के बारे में हम लोगों ने इतनी व्यापक चर्चा करके उनके लिए बदलाव करने का काम किया है । इतने सालों में वर्कर्स के लिए किसी को काम करने के लिए टाइम नहीं मिला । आज उनकी छोटे-छोटे चीजों पर भी डिस्कशन हो रहा है । सारे ट्रेड यूनियन उनके थे, उनकी ही गवर्नमेंट थी,लेकिन कभी भी सिम्प्लिफाई तरीके से वर्कर्स को समझने के लिए एक्ट नहीं बनाया गया । हमने ऐसा एक्ट बनाया था, जो वर्कर्स को समझ में नहीं आता है । उस एक्ट में हमने ऐसा प्रावधान किया,जिसके बारे में वर्कर्स को मालूम नहीं कि कौन-से एक्ट में क्या प्रावधान है,कहाँ पर क्या राइट है । इतिहास में पहली बार ऐसा एक्ट बनने जा रहा है, जब हम चार कोर्ट्स के बारे में पढ़ेंगे । लेबर्स के जितने भी राइट्स हैं, उन सभी राइट्स को हम प्रोटेक्शन दे सकते हैं । हम सब को मिलकर एक नया इंडिया बनाना है । इसका जो कॉन्सेप्ट है, उसमें नया इंडिया बनाने के लिए वर्कर्स के लिए रिफॉर्म्स लाने बहुत ही जरूरी है । हमारे प्रधानमंत्री माननीय नरेन्द्र मोदी जी और संतोष गंगवार जी ने इसका पहल आज स्टार्ट कर दी है ।

सर, मैं आशा करता हूँ कि इस एक्ट के माध्यम से हम जो प्रोविजन ला रहे हैं, वह देश का पूरा माहौल बदल देगा । इससे वर्कर्स के मन में एक नई जागृति आएगी । वर्कर्स की जो स्टैण्डर्ड ऑफ लिविंग होती है, उसमें वर्कर्स भी डिग्निफाइड तरीके से जीना चाहते हैं । वर्कर्स की जो थिंकिंग है, उसको बढ़ाकर हम और आगे ले जाएंगे । वर्कर्स गर्व महसूस करेंगे कि उनके स्टैण्डर्ड ऑफ लिविंग को हर लेवल पर बढ़ाया गया है । जो महिला वर्कर्स हैं,उनको भी यहाँ इंक्लूड किया गया है । महिला वर्कर्स के लिए जो हर तरफ से प्रतिबंध था,उसको आज दूर किया गया है । हम लोग वर्कर्स को हर तरह के बेनिफिट्स देने के लिए यह प्रावधान लाए हैं । मैं उम्मीद करूँगा कि हमने जो परिवर्तन की बात की थी, उसके लिए हमने अपने विजन डॉक्यूमेन्ट में बात की थी । भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने इंडिया के वर्कर्स के बारे में एक कमिटमेन्ट की थी । हमारी पार्टी ने बोला था कि इस विजन डॉक्यूमेन्ट को हम लागू करने जा रहे हैं । इस नए रिफॉर्म्स के माध्यम से हम लोग वर्कर्स के स्टैण्डर्ड ऑफ लिविंग और डिग्निटी को बढ़ाने जा रहे हैं ।

सर, इस मौके पर मैं सभी वर्कर्स को बधाई देना चाहूँगा । हमारे असम में जो प्लैन्टेशन वर्कर्स हैं,उनकी तरफ से मैं बोलना चाहूँगा कि आज का दिन हमारे लिए इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जाएगा । आज प्लैन्टेशन वर्कर्स एक्ट में भी अमेंडमेंट हो रहा है और उसमें मुझे बोलने के लिए मौका मिल रहा है ।

बहुत-बहुत धन्यवाद ।

 

SHRI PINAKI MISRA (PURI): Hon. Chairperson, Sir, thank you for giving me this opportunity to participate in this discussion. 

These three Codes that have been brought by the Government today to Parliament consolidate 25 Central laws which is an extraordinary event, I believe. I do not believe that an exercise of this nature has been ever attempted in the past because together these Bills have 411 clauses, 13 Schedules and comprises of 350 pages. It is something extraordinary. I am not sure how many hon. Members have, in this short period of time, been able to read them. I am sure, the Minister has had a painstaking job in putting this together. The Standing Committee, under the Chairmanship of my distinguished colleague Shri Bhartruhari Mahtab, has, of course, laboured literally over many months on many of the key provisions of this Bill. The Government says that it has accepted almost 74 per cent of the recommendations of the Standing Committee.

          Sir, be that as it may, there are many novel features which I need to flag before this hon. House for discussion as well as for the hon. House to cogitate upon. There are three Codes that are being brought, the first Code, of course, was, in the entire compendium, the Wages Code which was brought in 2019 and we all welcomed it at that point in time. Now, of these three Codes, one is  the Occupational Safety, Health and Working Conditions Code, 2020. One of the criticisms that we have seen has been the excessive use of delegated legislation that unfortunately is running through most of these Codes. This is something that I have personally seen. Shri Ravi Shankar Prasad ji, the hon. Law Minister, will appreciate that sometimes delegated legislation can create all sorts of problems. For instance, the Code does not specify many of the provisions with regard to the earlier Acts, for example, guaranteed access to drinking water, canteen, washrooms etc. These all have been left out now for delegated legislation, to be done by rules. Some minimum corpus of health and safety standards, I think, ought to have been defined in the Code itself and could very easily have been done and I think, might have been salutary.

The other thing is about clause 127 which allows the Central and the State Governments both or either to exempt by notification any establishment from the provisions of this Code. Now, this growth in economic activity cannot obviously provide a carte blanche for suspension of basic health and safety standards. This is something that the House must consider carefully whether this should be permitted and allowed in a Code which is now being brought in.  

I must straightway tell the House that in the context of the State of Odisha, the Standing Committee, in fact, has commended the many novel initiatives which have been adopted by the Government of Odisha both inside and outside the State for the benefit of occupational safety, health, and working conditions of the inter-State migrant workers during this period. Many people say that there are a lot of migrant labourers going out of Odisha to work outside and there are not enough employment opportunities in the State of Odisha. That is entirely wrong. My friends who keep saying that must understand that there is an equally large number of people who come from neighbouring States to work in Odisha. India is one country where there is freedom of movement. Everybody, according to their skill set, works in particular conditions in particular industries. So, let us not say that people go out of Odisha because the State of Odisha has not developed enough. But the point is that many welcome initiatives like the Shramik Sahayata helpline, Migrant Labour help desk, Seasonal Hostels of Children for migrant workers, and the strengthening of anti-human trafficking unit are all important provisions that we have brought in which can be considered at some point of time because these Codes will, undoubtedly, see many amendments and changes over the years because these cannot be static and nothing is carved on stone. Therefore, I have no doubt about this.

The other thing that we have done in the State of Odisha, which I also need to flag, is that we have also given a couple of suggestions to the Central Government. The `appropriate government’ in clause 2 (i) (d) needs to be relooked by the Central Government because the Central Government seems to now want to appropriate everything to itself. You must understand that law and order is a State subject. Therefore, the State Government ought to be the `appropriate government’ for the purpose of occupational safety and health in Central Government factories and other major ports because these are now all being administered by the State Government. So, you cannot have the State Government administering them and the Central Government be the `appropriate government’. This is something that the hon. Minister will probably need to look into.

Sir, one salutary thing that we have done in Odisha, for instance, is about this whole concept of `Inspector Raj’. Clause 2(i)(k) of the Code still talks of `Chief Inspector/Facilitator’. In Odisha we have now called them `Director’.

          I think the word `Inspector’ has a certain connotation which harks back to some bad times of 60s, 70s or 80s when the people, who are missing here, used to run an Inspector Raj in this country.  Those days are now gone.  Therefore, perhaps the nomenclature needs to change with the times as well.

          Section 2(1)(zz) defines the term “worker”. You must re-look into this definition of a worker as one who is drawing Rs. 18,000.  I think it is too low a threshold. I think MSMEs etc. will really find a very large number of workers who will go out of the pale of the workers.  Workers, I think in today’s day and age and as per our level of inflation, should not get less than Rs. 30,000. I think Rs. 30,000 should be a basic benchmark for workers today.  Basically, it comes to Rs.1200 a day. So, I think this dihadi ought to be there. I think the definition of “worker” needs to be re-looked into.           This is such a large Code that one cannot talk of everything.  So, I am only talking about very basic things. 

The Second Code, of course, is the Code on Social Security.  Now, Clause 142 mandates Aadhar verification. This is something that we have all debated again and again. The Supreme Court has said that it can be done by legislation.  Now, this again does not do it by legislation necessarily because  you have left it to delegated legislation. So, you insist upon Aaadhar by delegated legislation. Please have a look at it because Odisha has set an example again.  During the COVID-19 pandemic, we exempted Aadhar verification for obtaining goods under the PDS system because many people did not have it.

The other thing that I need to show is that there is some delegated legislation again on some other issues, but I am not going into that as it is going to take too much time if I look into it.  What I would rather flag is that we have a serious problem with Section 100 (2) of this Social Security Code. These Sections 100(2) and 100(3) are something that the Odisha Government and all State Governments will have a serious problem with. One of the criticisms obviously of this legislation is going to be that there is a lot of encroachment upon the powers of the States.  The objective of the Building and Other Construction Workers’ Welfare Cess Act is to augment the resources of the State BoC Boards constituted under the Building and Other Construction Workers Act.  Here again, the Central Government has sought to move in and says, “as may be prescribed by the Central Government”.  Section 100(3) says, “or any other authority in such manner as may be prescribed by the Central Government”. I think this encroaches far too deep into the domain of the State Government. These are basic bulwarks of the State Government which the State Government uses for benefic social causes.  Therefore, I urge upon the Central Government to re-visit and re-look  into this at some point in time.   

The last bit is, of course, the Industrial Code.  Now, on the Industrial Code, I have a very serious concern.  Hon. Law Minister will again bear with me on this. Clause 55(4) on the dispute resolution mechanism allows the appropriate Government, State or Centre, to modify or reject an award issued by the Tribunals in the interest of `public grounds affecting national economy or social justice’. The hon. Minister will recall it since he is a senior counsel of great eminence. There was an identical provision of Section 17A in the Industrial Disputes Act.  This was struck down by the Andhra Pradesh High Court earlier.  A similar provision was also struck down by the Madras High Court.  This is bound to be challenged.  You cannot undo a quasi-judicial court’s order by legislation or by executive action. Therefore, I believe that something like Clause 55(4) is not going to stand and if it is challenged, then it is not going to stand the scrutiny of the courts. 

Apart from that, there are many other provisions in Industrial Relations Code which have diluted the provisions with regard to trade unions and strikes.  One particular thing which leaves me a little concerned is the fact that theoretically this Code leaves open the possibility of an employee who is working on a fixed term contract almost indefinitely.  Now, that is something that is not desirable at all and I think it is something that the Government will probably need to re-look into at some point of time.

          Clause 40 also allows the employer to change conditions of service related to suspension, misconduct and means of redress without giving any notice to the worker.  This again tilts the balance of power towards the employer leaving the employee in a very vulnerable situation.

          Clause 9 is for registration of trade unions. The notes on clauses included towards the end of the Bill require the Registrar to decide on the approval/refusal of registration within 45 days.  However, the actual text of the clause, Mr. Minister, does not specify this.  The notes require the Registrar to give reasons for refusing registration. This is again missing in the actual text.  The reasons are only required to be given in the case of cancellation of certificate or registration and not for refusal of registration.  That is not a happy situation.

          So, we see that many of the essential features of the law, which were there in 2019 - and now, of course, the Minster has withdrawn - are no longer specified in the Codes and have been delegated to be prescribed by the Government through rules. 

          My feeling and the feeling of a number of newspapers today is this. Even today morning, many of the editorials feel that many of these important questions should have been hard coded into the Act itself rather than being left to delegated registration.  All I can say is that it has been a painstaking exercise like I said in the beginning. It has creases. Something which runs into 350 pages and 411 Clauses is bound to have creases. I am not therefore shying away from the fact that while the Government’s intent is good, for going forward, the Government may need to iron out many of these creases.  Be that as it may, our Government is duty bound since it is in the interest of the nation. It is in the interest of furthering the business climate and ease of doing business in India.  Therefore, our State Government under Chief Minister, Shri Naveen Patnaik, is happy to support this piece of legislation brought today but many of these issues need to be ironed out.

          I would request the Government to kindly look into these matters and, over a period, try and iron out these issues. Thank you very much, hon. Chairman, for being patient.

                                                                                                 

SHRI MARGANI BHARAT (RAJAHMUNDRY):  Sir, I thank you for giving me this opportunity to speak on these three historic Codes. Myself and my Party, YSR Congress Party, strongly believe that these reforms will certainly transform the way the world looks at various labour issues in India.  We are confident that these reforms would further push us upwards in ease of doing business in our country, help in attracting more FDI, and attract companies who want to migrate especially from China.

          Sir, codifying 44 labour laws into just four Codes is a Herculean task and I compliment the hon. Labour Minster, Shri Gangwar, for this noteworthy contribution.  I also compliment him for accepting as many as 175 recommendations made by the Standing Committee on Labour.  The House must be aware that we had already passed one Code on wages and the remaining three are before the House for consideration and approval.

          It really pained me that as many as ten labour unions in the country have gone to the ILO complaining against the Government of India.  Their main contention is that, without consulting these labour unions, the Government has gone forward in framing these Codes but it is really unfortunate that we ourselves are taking our internal affairs to the international bodies without any rhyme or reason.  If I remember correctly, I am saying this since I have been following these Codes since their draft stage.  There were as many as nine tripartite consultations and ten inter-Ministerial consultations on these Codes.       Many suggestions came from the public, and others. I would like to express my views on each Code. I will start with the Code on Social Security, 2020.

          Sir, we have been waiting since a couple of decades to see this Bill come up. There are nine enactments on social security. A poor labourer does not know to which Act he has to refer. If there is any issue, he has to run from pillar to post to get justice. But now, with all these nine enactments amalgamating in one Code, it becomes easy for each and every worker to refer to one single legislation for all his problems relating to the social security. So, it is really welcome.

          Sir, the second point of this Code covers the gig workers and the platform workers. We have so far kept them outside as far as social security is concerned. Many of us are not aware of these gig workers and the platform workers. Clause 2 (35) defines who constitute gig workers. A gig worker is a person who performs work or participates in work arrangements, and earns some money which is outside the conventional employee-employer relationship. There are almost 1.5 million gig workers in the country, working in delivery start-ups or as a driver-partners in Ola, Uber, e-commerce companies, etc.           The other new category of the workforce is the ‘platform workers’ which is defined under Section 2(61). The platform workers are those who are on the online platform to access organisations or individuals to provide specific services. So, including these two categories, and providing them social security is also welcome.

          Here, one of the main problems is registration of workers. There are lakhs of workers who do not know what the benefits are, be it social security or otherwise, given by the Government of India. For example, under Clause 114 of this Bill, there are exclusive schemes for gig workers and platform workers. But unless and until, they get registered, they cannot avail these benefits. So, I suggest for consideration of the hon. Minister to take up the registration of gig workers and platform workers on a mission mode so that we can see all of them covered under the social security benefits.

          Sir, we have been talking about unemployment, and how our GDP is getting low. We need to address the problem of unemployment.  I would like to give you a fair example of how our Government in Andhra Pradesh is tackling the system of unemployment under the pragmatic leadership of the hon. Chief Minister, Shri Y.S. Jaganmohan Reddyji. We have created a formula of Village Secretariat and Volunteer System for every 50 households. We have set an all-time record, and generated 4 lakh jobs in a span of four months. This has all happened after his assuming the Chair.

          Sir, the next point I wish to make is relating to the constitution of the Board of Trustees of the EPFO. Here, under Clause 4(1)(c), it is said that 15 Members from the State Governments would be appointed by the Central Government. It means, it is up to the Government of India to appoint whoever it wishes. In such a case, if it happens to be the NDA in power, it will certainly deny representation on the Board for the Opposition Parties, and it will also happenvice-versa.…(Interruptions) Sir, please give me five more minutes. …(Interruptions)

HON. CHAIRPERSON: No, please conclude in two minutes.

SHRI MARGANI BHARAT: Sir, there are three Bills.…(Interruptions) Please give me five minutes. We have been allotted 15 minutes of time, and the Opposition is also not there. We are supporting the Bill, Sir. …(Interruptions)

HON. CHAIRPERSON: Please make it quick.

SHRI MARGANI BHARAT: Sir, I suggest for the consideration of the hon. Minister to appoint 15 Members from the State Governments on rotation basis so that all the States would be given the opportunity. Then, same is the case with Clause 5(1)(d) and Clause 6 (2)(vi). So, I would request the hon. Minister to appoint them on rotation basis.

          Sir, I would like to make one more point regarding the superannuated bank employees. If the hon. Minister of Finance is present here, she can understand the context. We have discussed about the retired bank employees earlier also. I would like to know why the updating of the records of bank pensioners has not been done. Why has the updating of their records not been done? Where will the poor retired bank employees go and how will they go? Have they not strived for the building of our nation? So, I request the Government to look into this matter of superannuated bank employees and quickly update their records.

          I now come to the Industrial Relations Code. As I said in my introductory remarks, implementation of labour reforms is the need of the hour in our country. There are as many as 100 labour laws in the country and most of the companies find it impossible to follow this myriad of laws. So, these four Codes would be handy and easy to interpret.

          The workers and the unions have been opposing Clause 28 (1) of this Bill which says that any establishment which employs less than 300 workers can hire and fire workers without any permission from the Government. I feel it is too harsh a provision and simply tripling the number from 100 to 300 is not justified. So, I suggest for the consideration of the hon. Minister to withdraw this Clause.

HON. CHAIRPERSON: Please conclude.

SHRI MARGANI BHARAT: Sir, there is one more Bill. Please give me two minutes more.

          I urge the Minister to withdraw this Clause because a company which employs 300 workers is not a small company. So, we also need to look after the job security of the workers. Earlier, the same provision was removed from the Bill of 2019. But I do not understand why it has been brought back in this particular Bill.

          My next point is about the fixed term contract. There is no doubt that the Code provides that the fixed term employee will get all the benefits like that of a permanent worker, such as gratuity and other social security benefits. But the Government is allowing the companies to hire workers for short term instead of appointing them permanently or even on contract basis. What the companies would is, they will hire people only during the season and fire them once the work is over. So, where will they go? The companies mostly prefer to hire majority of their workers on contract basis. Moreover, in a country like India which has a huge labour force, this will only add to the problems of the workers.

HON. CHAIRPERSON: Please conclude now.

SHRI MARGANI BHARAT: Sir, please give me some more time.

HON. CHAIRPERSON: No; please conclude now. It is enough. Please make your points very quickly.

   

SHRI MARGANI BHARAT: Sir, when we fall into the same vicious cycle of unemployment, it will certainly lead to lower GDP also.

          I would like to give one more example here. Even in Government undertakings like ONGC, employees like Field Operators, Executives, Medics and Paramedics are being appointed only on contract basis. So, I request the Government of India to absorb them permanently in their organisation.

HON. CHAIRPERSON: Please conclude now.

SHRI MARGANI BHARAT: Sir, kindly give me two minutes more. I will make my concluding remarks.

HON. CHAIRPERSON: Mr. Bharat, please conclude in two sentences now.

SHRI MARGANI BHARAT : Sir, with your permission, I would like to make few points relating to Andhra Pradesh and I would request the hon. Minister to consider all these points and take appropriate action for resolution.

          There are only 38 ESI empanelled private hospitals in Andhra Pradesh. More private hospitals are needed to be empanelled. A new ESI Hospital was sanctioned for Kakinada, Rajahmundry, Guntur, Nellore, Visakhapatnam and Vizianagaram. I would request the hon. Minister to kindly share the present status of these hospitals which are to be started.

 

HON. CHAIRPERSON: Okay. Thank you.

Shri Virendra Kumar will speak now.

डॉ. वीरेन्द्र कुमार (टीकमगढ़): सभापतिमहोदय, आपनेमुझे उपजीविकाजन्यसुरक्षा, स्वास्थ्यऔर कार्यदशासंहिता, 2020,औ़द्योगिकसंबंध संहिता,2020 और सामाजिकसुरक्षा सहिंता, 2020 विधेयकोंपर बोलने कामौका दिया है,उसके लिए मैंआपको धन्यवाददेता हूँ । जाहिरहै कि यह बहुतरोचक है, क्योंकि हिन्दुस्तानकी आजादी के73 सालों मेंकभी भी इस प्रकारका ठोस, रचनात्मकऔर व्यावहारिककदम उठाने कापूर्व की सरकारोंद्वारा कोई प्रयासनहीं किया गया,जो उनकी कार्यशैलीऔर संवेदनशीलताको परिलक्षितकरता है । वहींदूसरी ओर यहअत्यन्त क्रांतिकारीकदम है । यहभारत के असंख्यमजदूरों, कर्मकारों औरव्यावसायिक प्रतिष्ठानोंमें कार्य करनेवाले करोड़ोंलोगों के जीवनमें मूलभूत तथादूरगामी सुधारलाएगा । इस कदमको हिन्दुस्तानके यशस्वी प्रधानमंत्री आदरणीयश्री नरेन्द्रमोदी जी कीपरिकल्पना औरहमारे श्रम एवंरोजगार मंत्रीश्री संतोष गंगवारजी के साहसका मूर्त स्वरूपकहें तो कोईअतिशयोक्ति नहींहोगी ।

         सभापति महोदय, मैंअपनी बात इनपक्तियों केसाथ प्रारम्भकरना चाहता हूं । हमारे सामनेवाले मित्र चलेगए हैं । “पहलेवे आप पर ध्याननहीं देंगे, फिरवे आप पर हसेंगे, फिरवे आपसे लड़ेंगेऔर तब आप जीतजाएंगे” सभापतिमहोदय, यहपंक्तियां किसीऔर की नहींहैं, बल्किहमारे राष्ट्रपितामहात्मा गांधीजी की हैं ।आज के संदर्भमें महात्मागांधी जी कीपंक्तियां किसप्रकार सार्थकहैं और कितनीसार्थक हैं, उसकाविश्लेषण मैंअपने भाषण मेंकरूंगा ।

         सभापति महोदय, वर्तमानमें हिन्दुस्तानकी आबादी करीबन134करोड़ के आस-पास है । इतनीबड़ी आबादी मेंबहुत बड़ा प्रतिशतमजदूरों, कर्मकारों औरव्यवसायिक प्रतिष्ठानोंमें कार्य करनेवाले लोगों काहै । इन सभीकी वेतन सुरक्षा,सामाजिक सुरक्षाऔर बेहतर कार्यदशाइत्यादि को संचालितकरने के लिएदेश के आजादहोने के तत्कालबाद से प्रयासकिए गए । इसदिशा में कारखानाअधिनिमय एक सर्वोत्तमप्रयास था ।जिसे वर्ष 1948में इसी संसदद्वारा बनायागया । उसके पश्चातवर्ष 2013 तकयानी कि हिन्दुस्तानमें मोदी सरकारके बनने केठीक पहले तकदेश के पास29 केन्द्रीयश्रम अधिनियमथे । यह रोचकबात है कि इन29 केन्द्रीयश्रम अधिनियमोंमें से आधेसे अधिक 50 वर्ष से अधिकपुराने हैं औरकुछ तो 70 वर्ष पुरानेहैं । ऐसा नहींहै कि कांग्रेसकी सरकार नेइन्हें बदलनेका प्रयास नहींकिया, परन्तुवास्तविकता यहहै कि पूर्वकी कांग्रेससरकार ने समय-समय पर इनमेंपरिवर्तन तोकिए, लेकिनये परिवर्तनकिस प्रकार केथे, मैं बतानाचाहता हूं ।मैं एक सामान्यमजदूर परिवारसे आया हूँ ।मेरी साइकिलरिपेयरिंग कीदुकान थी तोमैं उसका उदाहरणदेना चाहता हूँ । इनके द्वाराजो प्रयास किएगए, वे ऐसेकिए गए कि कभीसाइकिल का पहियाबदल दिया, कभी उसका हैंडलबदल दिया, कभी उसका ब्रेकबदल दिया तोकभी उसका टायरबदल दिया । एकसमय ऐसा भीआया कि न तोवह साइकिल रहीऔर न ही मोटरसाइकिलबन पाई । ऐसीदशा हमारे सभीकेन्द्रीय श्रमअधिनियमों कीहुई । विगत वर्षोंमें इन केन्द्रीयश्रम अधिनियमोंमें इतनी ज्यादापाबंदियां लगाईगईं कि ये नतो कर्मकारोंको कोई अल्पकालिकया दूरगामी लाभपहुँचा सकेंऔर न ही नियोक्ताओंको कोई प्रेरणादे पाएँ । हमहिन्दुस्तानमें काम करनेसे अपने साथदेश की तरक्कीका मार्ग प्रशस्तकर सकेंगे ।इन श्रम अधिनियमोंसे देश मेंलिटिगेशन यानीविवादों की संख्यामें भी अभूतपूर्ववृद्धि देखनेको मिली, जिससे किसीको लाभ नहींहो पाया बल्किइससे सभी वर्गोंको हानि उठानीपड़ी ।

         सभापति महोदय, इनकेन्द्रीय श्रमअधिनियमों मेंसमय के साथमूलभूत परिवर्तनन करने की इच्छाशक्ति के अभावके कारण देशको अभूतपूर्वक्षति उठानीपड़ी, क्योंकिकई केन्द्रीयश्रम अधिनियमतो आपस मेंइतने विरोधाभासीहो गए थे किइन विरोधाभासोंके कारण जहांएक ओर कर्मकारोंमें काफी असंतोषथा, वहींनियोक्ताओं मेंभी काफी निराशाथी । ऐसी दशामें देश केयशस्वी प्रधानमंत्री श्रीनरेन्द्र मोदीजी के मार्गदर्शनमें हमारी सरकारने एक क्रांतिकारीकदम की नींवरखी और इस दिशामें कार्य करनाप्रारम्भ किया । इन परस्परविरोधाभासी 29केन्द्रीयश्रम अधिनियमोंपर समग्र रूपसे विस्तृत अध्ययनकिया जाए औरएक आसान तरीकेसे समन्वय स्थापितकरके केवल चारसंहिताओं मेंसमावेश कियाजाए, जो सर्वव्यापीहो ।

         सभापति महोदय, जबसरकार की यहमंशा मीडियाके माध्यम सेपरिलक्षित हुईतो ठीक उसीसमय से हमारेउस ओर सामनेबैठने वाले मित्रएक्टिव हो गएऔर उनके द्वाराहमारे ऊपर तरहतरह से उपहासकिए गए, हँसीउड़ाई गई, इसकेपश्चात हमारेमित्र लड़ने कीमुद्रा में आगए और कहनेलगे कि हमारीसरकार कर्मकारोंके हितों कोध्यान में नरखकर नियोक्ताओंके हितों कोसंरक्षित कररही है ।

         सभापति महोदय, इनसभी घटनाक्रमोंको एक क्रमवाररूप में देखकरही मैंने अपनेभाषण के प्रारम्भमें महात्मागांधी जी कीउन पंक्तियोंको उद्धृत कियाथा कि “वेपहले आप परध्यान नहीं देंगे, फिरवे आप पर हँसेंगे, फिरवे आपसे लड़ेंगेऔर जब ये संहिताएंमूर्त रूप लेनेजा रही हैंतो इस पंक्तिके तीन शब्दभी सत्य प्रतीतहोते हैं किआप जीत जाएंगे ।

         सभापति महोदय,मैं यहां स्पष्ट करना चाहता हूं कि इन संहिताओं से संबंधित कानून बनने से हम नहीं जीतेंगे, बल्कि हमारा देश जीतेगा,हमारे मजदूर भाई जीतेंगे और हमारा नियोक्ता वर्ग जीतेगा ।

         सभापति महोदय,समय के साथ हमारी यह उड़ान किसी भी दशा में नीचे गिरने के भय से ग्रसित नहीं थी । मुझे ये पंक्तियां याद आ रही हैं:

          “परिन्दों को नहीं दी जाती तालीम उड़ानों की,          वे खुद ही तय करते हैं मंज़िल आसमानों की  ।
         रखता है जो हौसला आसमां को छूने का,          नहीं होती है परवाह उसे गिर जाने की  ।” सभापति महोदय, मैं आपके माध्यम से,आज के विषय के तीनों श्रम कानूनों – उपजीविकाजन्य सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्यदशा संहिता,सामाजिक सुरक्षा संहिता और औद्योगिक संबंध संहिता की कुछ मूलभूत विशेषताओं पर सदन का ध्यान आकर्षित करना चाहता हूं । इस संहिता में 13 महत्वपूर्ण अधिनियमों, जिनमें कारखाने,खान, यार्ड,कर्मकार, भवनों एवं सन्निर्माण कर्मकार, बागान श्रम, ठेका श्रम, प्रवासी कर्मकार, श्रमजीवी पत्रकार और अन्य समाचार पत्र कर्मचारी,मोटर परिवहन कर्मकार, विक्रय संवर्धन कर्मचारी,बीड़ी तथा सिगार कर्मचारी, सिनेमा कर्मकार और सिनेमा थिएटर कर्मकारों से संबंधित 13 अधिनियमों की आवश्यक विशेषताओं को सम्मिलित किया गया है । अभी तक की व्यवस्था में एक प्रतिष्ठान को कई तरह का पंजीकरण कराना पड़ता था,जिससे कई व्यावहारिक समस्याएं उत्पन्न होती थीं और विदेशी निवेशकर्ता भी अपनी पूंजी हमारे देश में लगाने से पहले 100 बार सोचते थे । अब चूंकि केवल एक पंजीकरण से काम पूरा हो जाएगा, अत:देश में न केवल पूंजी निवेश को बढ़ावा मिलेगा,बल्कि हमारे प्रधान मंत्री जी और गृह मंत्री जी का भारत को पांच ट्रिलियन इकोनोमी बनाने का सपना भी जल्द पूरा होगा ।
इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में काम करने वाले पत्रकारों को भी इसमें शामिल करने के लिए श्रमजीवी पत्रकार की परिभाषा में संशोधन का जो प्रस्ताव लाया गया है, वह वास्तव में बहुत स्वागतयोग्य है और श्रमजीवी पत्रकार वर्ग के क्षेत्र में इसकी भूरि-भूरि सराहना हो रही है । जो परिवार की परिभाषा है,उसमें कामगार के आश्रित दादा-दादी को शामिल किया गया है । कई बार किसी कर्मकार के माता-पिता का निधन हो जाता है, लेकिन उसके दादा-दादी,नाना-नानी उसके ऊपर निर्भर होते हैं । इसलिए इसमें दादा-दादी और नाना-नानी को भी शामिल करने के लिए परिवार की परिभाषा में न्यायपूर्ण विस्तार किया गया है । विडो बहन और विडो पुत्री को भी इसमें शामिल किया गया है, जिससे बागान अधिनियम के अंतर्गत कामगारों की मृत्यु के मामले में प्रतिपूर्ति जैसे कल्याण लाभ प्राप्त होंगे । नियोक्ताओं के द्वारा नियत जांचों के ‍लिए जो निर्धारित आयु है, उस ‍निर्धारित आयु से अधिक आयु वाले कर्मचारियों की भी नि:शुल्क स्वास्थ्य जांच करायी जानी है,जिससे स्वास्थ्य लाभ लेने हेतु कर्मकारों में मनोबल बढ़ेगा । कम से कम दस कर्मचारियों वाली कंपनी, फैक्टरी या अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठान को अपने प्रत्येक कर्मचारी को नियुक्ति पत्र देना अनिवार्य किया गया है । बगैर नियुक्ति पत्र दिए, वे अपने कर्मचारी से काम नहीं ले सकेंगे । इससे कर्मचारी भविष्य निधि व राज्य जीवन बीमा निगम को बढ़ावा मिलेगा ।
सिने कामगारों की परिभाषा में संशोधन कर इसे और व्यापक बनाया गया है, जिससे टेलीफिल्म,दूरदर्शन इत्यादि पर दिखाई जाने वाली फिल्मों के कामगारों को भी इसमें शामिल किया गया है । यदि किसी उपक्रम में दुर्घटनावश कोई कर्मकार जख्मी हो जाए या फिर उसकी मृत्यु हो जाए तो न्यायालय द्वारा नियोक्ता पर जो दण्ड लगाया जाएगा,उसका 50 प्रतिशत भाग दुर्घटना के शिकार व्यक्ति या उसके आश्रितों को दिया जा सकेगा । महिला कर्मकारों को पहली बार शाम 7 बजे के बाद तथा प्रात: 6 बजे से पहले के अंतराल में किसी प्रतिष्ठान में काम करने की इजाजत दी गई । इससे अब सही मायने में महिलाओं और पुरुषों में बराबरी के सिद्धान्त को देखा जा सकेगा ।
मानव संसाधनों की आपूर्ति करने वाले ठेकेदारों के लिए केवल एक लाइसेंस होगा, जो अखिल भारतीय होगा, यानी पूरे देश में काम करने की सुविधा देगा । ऐसी व्यवस्था इसमें की जा रही है । इसका लाभ यह होगा कि प्रत्येक बात पर सरकारी मशीनरी का हस्तक्षेप कम होगा, साथ ही भ्रष्टाचार में कमी आएगी और कागजी काम भी कम होगा । जुर्माने की राशियों को भी प्रभावी रूप से बढ़ाया गया है,ताकि नियमों का पालन यथोचित प्रकार से सभी नियोक्ताओं द्वारा किया जाए । इनमें सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इंसपेक्टर राज को प्रभावी रूप से कम करने के लिए भी इस संहिता में स्पष्ट प्रावधान किए गए हैं । अब इंसपेक्टर के कार्यक्षेत्र का विस्तार किया गया है । संहिता में इंसपेक्टर-कम-फेसिलिटेटर का प्रावधान यह स्पष्ट करता है कि एनडीए की सरकार इंसपेक्टर राज को समाप्त कर फेसिलिटेटर की भूमिका बढ़ाना चाहती है, जो व्यापार और उद्योग की उन्नति के लिए आवश्यक है । मजदूर इंसपेक्टर के बारे में सोचता है कि यह नियोक्ता का व्यक्ति है और नियोक्ता यह सोचता है कि यह शासकीय व्यक्ति न जाने हमारे लिए कौन सी परेशानी खड़ी कर देगा । इस तरह से एनडीए सरकार ने जो इंसपेक्टर-कम-फेसिलिटेटर का प्रावधान किया है, वह बहुत ही स्वागत योग्य कदम है ।
सामाजिक सुरक्षा संहिता वास्तव में सामाजिक सुरक्षा संगठन, कर्मचारी भविष्य निधि, केन्द्रीय राज्य बीमा निगम,प्रसूति प्रसुविधा,कर्मचारियों के लिए प्रतिकार भवनों एवं अन्य निर्माण कर्मकारों के संबंध में सामाजिक सुरक्षा और उपकर,असंगठित कर्मकारों के लिए भी सामाजिक सुरक्षा आदि विषयों को इस प्रकार परिभाषित करती है, जो समय के अनुरूप है और आने वाले समय में भारत के निर्माण में एक सक्रिय भूमिका निभाएगी ।
इसी प्रकार औद्योगिक संबंध संहिता मूलत: विवादों की मध्यस्थता के लिए प्रावधान,औद्योगिक विवादों के समाधान के लिए सशक्त तंत्र,हड़ताल, छटनी और बंदी के कुशल प्रावधान, जिससे किसी भी पक्ष को कोई असुविधा न हो तथा अनुचित संप्रवाह जैसे नियमों को अपने में समाहित किए हुए है । देश में पहली बार दो दर्जन से अधिक श्रम संबंधित कानूनों को केवल चार कानूनों में समाहित करने का क्रांतिकारी और साहसपूर्ण निर्णय हमारे यशस्वी प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने लिया है । वर्तमान में 13 अधिनियमों में से सात अधिनियमों के अंतर्गत अलग-अलग विवरणी फाइल की जाती है, जिसके अंतर्गत एक विवरणी प्रस्तावित है, जिससे रजिस्टरों की संख्या न्यूनतम हो जाएगी और ई-गवर्नेंस को बढ़ावा मिलेगा । नि:संदेह इससे हमारे मित्रों को कुछ नज़र आ सकती हैं, लेकिन जब इन कानूनों को क्रियांवित किया जाएगा और इनका सतत रूप से मूल्यांकन किया जाएगा, तो मेरा विश्वास है कि जो भी कमियां होंगी,जो क्रियान्वित करते समय पाई जाएंगी,उन पर तत्काल कार्यवाही की जाएगी ताकि हमारे मजदूर और कामगार भाइयों और बहनों को किसी भी कठिनाई का सामना न करना पडे और किसी के द्वारा इनका शोषण न हो सके चाहे वे नियोक्ता वर्ग के हों या सरकारी विभाग के हों ।
         महोदय, मैंने देखा कि ठेका श्रमिकों के खाते में तो सीधे पैसा डाला जाता है, लेकिन बैंक के बाहर उस ठेकेदार का एक व्यक्ति खड़ा रहता है, जो बैंक से पैसा निकालते ही मजदूर से पैसा ले लेता है । इन प्रावधानों में ऐसी व्यवस्थाएं की गई हैं कि ठेकेदार इस प्रकार की कोई भी अनियमितता नहीं कर सकेंगे और समय पर पूरा पैसा कर्मकार को देना होगा । यदि किसी प्रकार की लापरवाही होती है, तो प्रिंसीपल एम्प्लायर की जिम्मेदारी होगी कि उस कर्मकार को पूरा पैसा मिले और ठेकेदार की निधियों में से वह पैसा काटा जाए । ऐसे स्थानों पर काम करने वाले हमारे जो कर्मकार हैं, उनकी सुरक्षा का भी प्रावधान किया गया है । खानों में काम करने वाले जो मजदूर हैं,जो जमीन के नीचे काम करते हैं,उनके काम करने के निर्धारित घंटों की जो पारी होती है, उससे ज्यादा उनसे काम न लिया जाए । जो विशेष अधिकारी हैं,वे किसी भी समय खान में जाकर निरीक्षण कर सकेगा और वहां के टेम्प्रेचर को भी माप सकेगा । फरीदाबाद का कांच उद्योग,मिर्जापुर का कालीन उद्योग,शिवाकाशी का पटाखा उद्योग,स्लेट और पैंसिल उद्योग, ये सारे ऐसे उद्योग हैं, जिनमें मजदूरों के संरक्षण के लिए विशेष प्रावधान किए जाने की आवश्यकता है और इन बिलों में ऐसे सभी क्षेत्रों को चिन्हित करके मजदूरों की सुरक्षा के सारे प्रबंध किए जा रहे हैं ।
         महोदय, मैं अंत में इस भावना के साथ कि हमारे प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी और हमारे श्रम मंत्री सम्माननीय संतोष गंगवार जी द्वारा यह जो बिल लाए गए हैं, ये बिल आने वाले समय में मजदूरों के कल्याण की दिशा में मील का पत्थर साबित होंगे । मैं माननीय प्रधान मंत्री जी को एक लाइन समर्पित करता हुआ अपनी वाणी को विराम देना चाहूंगा – ‘ये कौन आ रहा, उजाला छा रहा, ये कौन मजदूरों के हितों में नए-नए बिलों को ला रहा ।’ बहुत-बहुत आभार, बहुत-बहुत धन्यवाद ।
 
श्री दिलेश्वर कामैत (सुपौल): महोदय, आपनेमुझे उपजीविकाजन्यसुरक्षा स्वास्थ्यऔर कार्यदशासंहिता, 2020,औद्योगिक संबंधसंहिता, 2020 तथा सामाजिकसुरक्षा संहिता2020 पर बोलनेका मौका दिया,इसके लिए बहुत-बहुत धन्यवाददेता हूं । माननीयप्रधान मंत्रीश्री नरेन्द्रमोदी जी केनेतृत्व वालीएनडीए की सरकार ‘सबका साथ,सबका विकासऔर सबका विश्वास’की भावना केसाथ समाज केविभिन्न वर्गके लोगों केकल्याण के लिएलगातार प्रयासकर रही है ।सरकार आज जोतीन संहिता लाईहै, इनकेमाध्यम से श्रमिकोंकी सुरक्षा,स्वास्थ्यऔर कार्य स्थलकी स्थितियोंसे संबंधित व्यवस्थाओंको कई गुणाबेहतर बनानेका काम कियागया है । मैंइन तीनों संहिताओंका समर्थन करताहूं ।
         महोदय, इनसंहिताओं केमाध्यम से 13मत्वपूर्णकेंद्रीय श्रमकानूनों की व्यवस्थाओंको एक साथ मिलाकरसरल और युक्तिसंगतबनाया गया है । सुरक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओंऔर कार्यस्थलोंमें कामकाज कीबेहतर स्थितियांश्रमिकों केकल्याण के साथही देश के आर्थिकविकास के लिएभी महत्वपूर्णभूमिका निभाएगी । देश स्वस्थकार्यबल से ज्यादाउत्पादक होगाऔर कार्य स्थलोंमें सुरक्षाके बेहतर इंतजामहोने से दुर्घटनाओंमें कमी आएगी,जो कर्मचारियेांके साथ नियोक्ताओंके लिए भी फायदेमंदरहेगा ।
         महोदय, मैं इस संहिता के कुछ प्रावधानों की ओर आपका ध्यान आकृष्ट करना चाहता हूं । मजदूरों की सुविधा के लिए सप्ताहिक और अन्य अवकाश भी उन्हें मिलेंगे । इसमें अतिरिक्त काल के लिए अतिरिक्त मजदूरी,एक्स्ट्रा वर्क के लिए एक्स्ट्रा मजदूरी देने का प्रावधान है । कारखानों और खानों में दोहरे नियोजन का निबंधन होगा । मजदूरी सहित वार्षिक छुट्टियों का भी प्रावधान है । बचाव सेवाओं और व्यावसायिक परीक्षण की भी व्यवस्था की गई है । इस संहिता में श्रमिकों को स्थायी कर्मचारियों की तरह ही सामाजिक सुरक्षा का भी लाभ दिया जाएगा । दो सदस्यीय न्यायाधिकरण की स्थापना करने तथा आंशिक मामलों को सरकारी अधिकारियों के अधिकार में लाने से मामलों का तेजी से निपटारा किया जा सकेगा ।
         महोदय, इस संहिता से अद्भूत ऐसे विषयों पर राज्य सरकार को सलाह देने हेतु राज्यस्तर पर राज्य उपजीविकाजन्य सुरक्षा और स्वास्थ्य सलाहकार बोर्ड का गठन होगा । सुरक्षा समिति के गठन का भी इस संहिता में प्रावधान है । महिला कर्मचारियों की सुविधा का भी प्रावधान है । औद्योगिक संबंध संहिता के लागू होने से नियोजक और कामगार (एम्प्लॉयर और एम्प्लॉयी) के बीच सौहार्द्र और अच्छे संबंध सुनिश्चित करने के उपाय बढ़ाने और ऐसे मामले,जिनमें उनका सामान्य हित है,टीका-टिप्पणी करने और ऐसे मामले के बाबत किसी भी तात्विक मतभेद का समाधान करने का प्रयास होगा । इस संहिता की सबसे बड़ी विशेषता है ।
         शिकायत प्रतितोष (ग्रीवांस रेड्रेसल)समिति नियोजक और कर्मकारों का प्रतिनिधत्वि करने वाले सदस्यों की समान संख्या में चुने हुए सदस्यों से मिल कर बनेगी । किसी औद्योगिक संस्थान में जिसमें कोई रजिस्ट्रीकृत व्यवसाय संघ औद्योगिक स्थापन के नियोजन के साथ ऐसे विषयों को चिह्नित किए जाएं, उनसे बातचीत करने के लिए यथा स्थिति वार्ताकारी या वार्ताकारी परिषद होगी । इससे कर्मचारियों की शिकायतें जल्दी खत्म होगी और यह इस संहिता की सबसे बड़ी विशेषता है ।
         संगठित या असंगठित या किसी अन्य सेक्टर में सभी कर्मचारियों और कर्मकारों की सामाजिक सुरक्षा को बढ़ाने के उद्देश्य से सामाजिक सुरक्षा से संबंधित विधियों का संशोधन और समेकन करने के लिए उससे संबंधित विषयों के लिए सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 लाया गया है,जो सभी श्रमिकों के हित में है और इनसे श्रमिक खुशहाल होंगे । ये तीनों महत्वपूर्ण संहिताएं लागू हो जाने से श्रमिक खुशहाल रहेंगे, औद्योगिक संबंध मधुर रहेंगे तथा उत्पादन में वृद्धि होगी ।
इन्हीं शब्दों के साथ तीनों संहिताओं का समर्थन करते हुए मैं अपनी बात समाप्त करता हूँ ।
         बहुत-बहुत धन्यवाद ।
 
श्री दिलीप घोष (मेदिनीपुर): माननीय सभापति महोदय, आज हम लोग जिस महत्वपूर्ण बिल पर चर्चा करने के लिए एकत्रित हुए हैं, वह इंडस्ट्रीयल रिलेशन कोड, 2020 है, जिस पर मैं दो-चार बातें बोलने वाला हूं ।
         अंग्रेजों ने पहला श्रम कानून वर्ष 1926 में बनाया था । लगभग सौ वर्ष होने जा रहे हैं,दुनिया कहाँ से कहाँ पहुंच गई है, टेक्नोलॉजी,उद्योग उन्नत हुए हैं, आगे बढ़े हैं । हम भी आगे बढ़े हैं, लेकिन कानून वहीं का वहीं रह गया है । वर्ष 2002 में श्रम से संबंधित जो कमीशन था, उसने भी अपनी रिपोर्ट में आग्रह किया था कि बहुत-से श्रम कानून हैं,उनका सरलीकरण होना चाहिए, इनका संस्कार होना चाहिए । वह काम इतने वर्षों के बाद माननीय मोदी जी के नेतृत्व में एनडीए सरकार और हमारे माननीय मंत्री श्री गंगवार जी हिम्मत के साथ कर रहे हैं । इसलिए उनको साधुवाद है ।
         देश में जो उद्योग हैं, उनको सुरक्षित रखते हुए, उद्योगपतियों के हित को सुरक्षित रखते हुए श्रमिकों के हित को सुरक्षित रखते हुए, देश के विकास को आगे बढ़ाते हुए, इस कानून को सरकार ने आज के युगानुकूल करने का प्रयास किया है । सच में यह सराहनीय है ।
         हम बंगाल से आते हैं । आपको भी मालूम होगा कि बंगाल की भूमि हमेशा श्रमिक आन्दोलन की रही है । पिछले 50 साल से बंगाल में तरह-तरह के आन्दोलन देखने को मिले हैं और वहाँ के नेताओं ने देश भर में ट्रेड यूनियन भी चलाए हैं । लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि इसमें न श्रमिक को, न उद्योगपतियों को, न उद्योग को, न देश को,किसी को लाभ नहीं हुआ है, केवल नेताओं का लाभ हुआ है । इसलिए उसका यह परिणाम है कि जो बंगाल कभी देश के उद्योगों में 24 परसेंट अपना योगदान करता था,आज उसका आधा भी नहीं कर पाता है । उद्योगों की इतनी दयनीय हालत है । बंगाल के उत्तर में चाय उद्योग, दक्षिण में जूट उद्योग तथा नीचे यानी बॉर्डर के इलाके में कोयले की इंडस्ट्री है । इन तीनों उद्योगों में जो भी श्रमिक काम करते हैं,उनकी हालत बहुत खराब है । इन तीन उद्योगों की हालत भी खराब है और उनके कर्मचारियों की हालत उससे भी ज्यादा खराब है ।
         इन   तीनों उद्योगों की भी हालत खराब है और उनके कर्मचारियों की हालत उससे भी खराब है । चाय उद्योग के साथ जुड़े हुए लाखों कर्मचारी दयनीय स्थिति में हैं, लगभग 100चाय बागान बंद हैं और उनकी जो जमीन है, वह खाली पड़ी हुई है । ब्रिटिश, जो कभी मध्य प्रदेश और बिहार से इन श्रमिकों को चाय उद्योग में लगाने के लिए लाए थे,उन बेचारों के पास आज एक इंच भी जमीन नहीं है । न तो जमीन है, न तनख्वाह ठीक से मिलती है, न राशन मिलता है और न मिनिमम वेजेज़ मिलती हैं ।
         महोदय, दुर्भाग्य की बात है कि आज की राज्य सरकार इनको ये सब चीज़ें मुहैया कराने के बजाए इनके बागान की जो जमीन है,उसको 20 परसेंट रियल-इस्टेट डेवलपमेंट,पेट्रोल पंप आदि के रूप में लोगों को कमाने के लिए दे रहे हैं,लेकिन एक इंच जमीन भी श्रमिकों के लिए नहीं है । इसलिए, केन्द्र सरकार की योजनाओं की सुविधाएं उन्हें नहीं मिलती हैं,आवास योजना की सुविधा भी उनको नहीं मिलती है । यह बड़ी दुर्भाग्यजनक बात है ।
         महोदय, चटकल में जो श्रमिक हैं, उनके साथ भी यही होता है । उन्हें भी मिनिमम वेजेज़ नहीं मिलती हैं और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक परिस्थतियों में वे जीते हैं । यह भयंकर परिस्थिति है । पहले एक समय था, जब पूरे देश से लोग बंगाल में काम करने के लिए आते थे । आज लोग वहां नहीं आते हैं । आज हमारे बंगाल के नौजवान माइग्रेंट लेबर्स बनकर पश्चिम भारत में काम करने के लिए जाते हैं । इनके बारे में बहुत चर्चा होती है । इस कानून में भी माइग्रेंट लेबर्स का प्रावधान है । इनके स्किल डेवलपमेंट और भविष्य को सुधारने के लिए इस बिल में व्यवस्था की गई है ।
         माननीय प्रधान मंत्री जी के बार-बार आग्रह करने के बाद भी कई उद्योगों ने श्रमिकों की छंटनी की है । लॉकडाउन के समय में अगर किसी का काम चला जाए तो उसे दोबारा काम मिलना बहुत मुश्किल होता है । इसलिए, इस बिल में प्रावधान रखा गया है कि जिसको निकाला जाएगा,उसके स्किल डेवलपमेंट के लिए कम से कम पिछले 15 दिनों की तनख्वाह उसे दी जाए । 45 दिनों के अंदर उसका स्किल डेवलपमेंट हो,सरकार का इसमें योगदान रहेगा ।
         महोदय, हमारे यहां एक से एक ट्रेड-यूनियन्स चलती हैं । कोई भी ट्रेड-यूनियन रजिस्ट्री कर के किसी भी पार्टी के झंडे के नीचे खड़ी हो जाती है और आंदोलन कर के,मालिक के साथ तालमेल कर के श्रमिकों का शोषण करती है । ये बोलने में ट्रेड यूनियन्स हैं, लेकिन वहां यूनियन्स नहीं हैं, केवल ट्रेड ही बचा हुआ है । जो ओरिजनल ट्रेड है, उसकी हालत भी खराब है । मालिकों के पास भी एक रास्ता रहता था, वे चाहते थे तो यूनियन वालों को बुलाकर नेता के साथ एग्रीमेंट कर लेते थे और श्रमिकों के हितों की अनदेखी करते हुए अपना धंधा चलाते थे । इसमें भी जरूर बदलाव आएगा । यह ऐसा कानून है,जिसमें सबको डिसिप्लिन में रहकर अपना उद्योग चलाना होगा, श्रमिकों को भी डिसिप्लिन में रहकर उद्योग में अपना योगदान देना होगा । इससे सार्वजनिक रूप से देश का विकास हो, इसकी व्यवस्था रहेगी ।
         मैंने कई बार देखा है । सुबह श्रमिक जाकर देखता था कि फैक्ट्री का गेट बंद है,उस पर ताला लटका हुआ है, लॉक-आउट हो गया है । वह बेचारा रास्ते पर आ जाता था । इसी प्रकार ठीक उल्टा भी होता था । कोई अच्छी चलने वाली कंपनी,कोई बिज़ेनस या फैक्ट्री के श्रमिक किसी के बहकावे में आकर हड़ताल कर देते थे । इससे अच्छी चलने वाली फैक्ट्रीज़ बंद हो जाती थीं, कच्चा माल खराब हो जाता था । इससे मालिक को नुकसान का सामना करना पड़ता था ।
         आज सरकार के इस कानून सुधार के कारण कम से कम60 दिन पहले नोटिस देना पड़ेगा । चाहे श्रमिक हो या मालिक हो, बिना नोटिस के कोई फैक्ट्री बंद नहीं कर सकता,किसी श्रमिक की छंटनी भी नहीं कर सकता और कोई काम भी नहीं बंद कर सकता । मुझे लगता है कि यह जो ऐतिहासिक कानून है, ऐतिहासिक कदम है । इसके कारण आगे चलकर हमारा उद्योग सुधरेगा,मजबूत होगा,श्रमिकों का भविष्य सुरक्षित होगा और देश की जो तेजी से तरक्की हो रही है, विकास हो रहा है, वह भी बरकरार रहेगा ।
         महोदय, इस बिल में छोटे-बड़े,सब उद्योगों में श्रमिकों का ख्याल रखा गया है । इससे जब चाहे श्रमिकों को निकाल देना मालिक के लिए संभव नहीं होगा । आज हमारे यहां ज्यादातर कॉन्ट्रैक्ट लेबर्स का सिस्टम चलता है । कोई कंपनी कॉन्ट्रैक्ट लेकर काम करती है, लेकिन जो श्रमिक वहां काम करते हैं, उनको मालूम नहीं होता है कि वे किस कंपनी में काम करते हैं,कौन उस कंपनी का मालिक है, वे किसके पास जाएं । मुझे लगता है कि इन सब विषयों,इन सारी चीज़ों पर भी अंकुश लगेगा । एग्रीमेंट के समय एक-एक फैक्ट्री में, एक-एक पार्टी की दो-तीन यूनियन्स होती हैं । सब लोग श्रमिक हित की बात कर के, झंडा  उठाकर आंदोलन करते हैं, अपनी जेब भरते हैं । इस प्रकार के कामों पर भी अंकुश लगेगा । 51 परसेंट श्रमिक जिसके पास होंगे,उसके साथ बैठकर एग्रीमेंट करेगी ।
         अगर एक कंपनी का एक श्रमिक यूनियन में नहीं हो तो कम से कम 20 परसेंट श्रमिक हो, इस प्रकार यूनियन के साथ बैठकर अरेंजमेंट करेगी । इसलिए,यह समय उपयोगी कानून है, सबके हित, देश के हित के लिए कानून में सुधार है । मुझे लगता है कि इसलिए सरकार ने यह पटाक्षेप उठाया है । विशेषकर,इससे श्रमिक कानून में स्वच्छता आएगी और संपूर्ण देश, श्रमिक,उद्योग और उद्योगपतियों के हित सुरक्षित रहेंगे । जैसे श्रमिकों की बिना नोटिस दिए छंटाई होती है, वैसे उनकी छंटाई भी नहीं होगी, उनकी जिम्मेदारी कंपनी के ऊपर रहेगी । श्रमिक भी मनचाहा आंदोलन कर के उद्योग को नुकसान पहुंचाने की हिम्मत नहीं करेगा, क्योंकि उसके ऊपर भी अंकुश रहेगा ।
         श्रमिक यूनियन में जो भ्रष्टाचार होता था, नेता श्रमिकों को भड़काकर अपने हित मजबूत करते थे, इस प्रकार की परिस्थतियों की मनमानी नहीं चलेगी । श्रमिक यूनियन में स्वच्छता आएगी, उद्योगपति भी स्वच्छता के साथ काम करेंगे और श्रमिक का हित भी सुरक्षित रहेगा । इसलिए, यह जो संशोधन आया है, इसके लिए माननीय उद्योग मंत्री, माननीय प्रधान मंत्री और एनडीए सरकार को मेरी तरफ से साधुवाद ।
         सभापति जी,मुझे बोलने के लिए समय देने के लिए आपका धन्यवाद ।
           
SHRI JAYADEV GALLA (GUNTUR): Thank you, Sir. In addition to being a Member of this august House, I am also the Vice Chairman of the Amara Raja Group. We manufacture the Amaron brand of automotive and industrial batteries. We have been in the business for 30 years now. All our factories are in Chittoor district of Andhra Pradesh, where we employ more than 16,000 people, all in non-migratory jobs. Ninety percent are from the local district and eighty percent are in the first job in the history of their families. These are my credentials to be speaking on this subject.
HON. CHAIRPERSON: Your credentials are already very rich.
SHRI JAYADEV GALLA: Thank you, Sir.
          Since we are combining three Bills - which are all very important - together, I request that I may be provided some extra time so that I can get all the points across to the Minister.
          There is no doubt that this is a humongous exercise because it is not a child’s play to bring nearly 45 enactments together and guide more than a hundred other enactments being implemented by various States. So, without any hesitation, I compliment the hon. Labour Minister, Shri Santosh Gangwar for his stupendous work on these Codes. 
          Sir, I start with the Social Security Code relating to the methodology of computation of PF and insurance contribution under clause 78. I suggest that these should be calculated on basic wages and not include commission or performance-based bonus, business expenses, leave encashment, etc. So, they may be removed from the definition of ‘wages’. It will help employees in taking more salary home.
          In Clause 2 (88), definition of ‘wages’ is inconsistent compared to our present definition of ‘wages’ under labour laws. This may lead to further liability to employers when calculated under different benefits. For example, definition of ‘wages’ under gratuity has been widened and has increased the gratuity liability of employers. In Clause 45, which is about unorganized workers, the Bill allows schemes for unorganized workers to be additionally funded by the Corporate Social Responsibility Fund defined under the Companies Act, 2013. However, this does not include provision on overriding effect of more beneficial welfare schemes already passed by different States. So, this could kindly be looked into.
          Under Clause 142, which is in terms of the application of Aadhaar, the Code is making Aadhaar mandatory to receive benefits. My question is, is it not a violation to the prevailing Supreme Court judgement? The Code is also silent on international workers. There is no definition on ‘international workers’. The employers who engage international workers do not know how to calculate PF contributions etc. There is clarification needed on this also.
          Now, I come to the Industrial Relations Code. I welcome the proposal of a pre-defined fixed term employment under Clause 2 (O). The concept of this is based on the need for industry to hire for projects or seasonal requirements like road, infrastructure projects, and international orders. Presently, what the companies are doing in this, they hire a contractor and the contractor in turn engages the workers. But the point is whatever the company pays to the contractor in the name of a worker, is not reaching the worker due to which workers lose out on the money entitled to them. They are also denied social security benefits. So, the fixed-term employment would address this problem. While we welcome fixed-term employment, we also foresee a danger of companies avoiding permanent employment. So, it is good to add a minimum and maximum tenure for fixed-term employment.
          Sir, Clause 83 of the Bill deals with the re-skilling fund. It is a new provision in the Code and I welcome this. The Code says that the re-skilling fund needs to be created by the Government and the employer will pay 15 days of wages to the fund within 45 days of retrenchment. But I submit for consideration of the hon. Minister to exempt such establishments which are on the verge of lay off on closure. Otherwise, this would be an additional burden on them.
          Secondly, we have a huge Ministry of Skill Development. The Ministry should also make its contribution financially and otherwise to make this rescaling a success.
18.00 hrs           Clause 2(2f) says that concerted casual leave on a given day for 50 per cent or more workmen would be treated as strike. This is welcome and, in many ways, prevents unnecessary industrial unrest. We also need to be cautious that we do not infringe on the rights of the workers.

By way of clause 44(2), the Code introduces industrial tribunal consisting of two persons – one from judicial and the other from administration – instead of one person in the earlier Industrial Disputes Act, 1947. Though this is a good move, it would be prudent to make the number of members in the tribunal at an odd figure instead of an even one so as to settle the case if there was difference of opinion between the members.

          With clause 62(1), the Code introduces 14-day notice to be given for strike which is good as it gives time for discussion and dialogue. This should be uniformly applied for all sectors.

Clause 2(zc) of the Code drops the termination of the service of a workman on the ground of continued ill-health from inclusion of retrenchment. Retrenchment arises out of business continuity challenges and hence, should be applied evenly to all as required, with no exceptions as the prevailing Industrial Disputes Act.

          Clause 53(1) of the Code provides that the conciliation officer shall not hold any such proceedings relating to the industrial dispute after three years from the date on which the industrial dispute arose. We appeal that the time given is too long and should be reduced to six months. As part of ease of doing business, should we not have done away with this provision under the IR Code? This is my question. Under clause 30, the Bill proposes certification as necessary even if the standing orders of an establishment are in line with the model standing orders. If the establishment is pleased to conform with the model standing orders, there should be no certification process and the model should be made applicable automatically.

          Now, I come to the Occupational Safety, Health and Working Conditions Code. The first point I wish to make is relating to the provisions on welfare, such as canteen, rest rooms and appointing a welfare officer. The proposed Code reduces the manpower applicability when compared to the Factories Act. They have brought it down to 100 workers against 250 as per Factories Act for the canteen workers; 50 against 150 for rest rooms; and 250 against 500 for appointing a welfare officer. I would suggest for the consideration of the hon. Minister to retain the provisions as mentioned in the existing Factories Act. Otherwise, this would impact the MSMEs the most. This will be an additional burden when they are already suffering. This will be an additional burden on the MSMEs in the condition they are today. So, he could think of exempting the MSMEs.

          Clause 27 of the Code deals with extra wages for overtime, and calculation of overtime is mandated on a daily basis or weekly basis. My second point is about the written consent for overtime. It is very difficult to calculate overtime on a daily or weekly basis. There is a wastage of valuable time. So, I suggest that this could be made monthly and also paid out monthly. I would also submit that getting the written consent every time is also very difficult. The consent of the worker can be taken at the time of appointment itself. If he does not want to work overtime, he need not give his consent. Further, the workers can also be provided the right to exercise inability in any given time during the employment for genuine reasons.

          Clause 87, which talks about penalties, prosecution of employers should be removed from the Occupational Safety, Health and Working Conditions Code. Penal fines should be a sufficient deterrent. Prosecution, however, can be considered in the worst cases where there has been a fatal accident or if the employee is adversely hurt due to negligence of the employer.

          Sir, these are some of the submissions that I wish to make for the consideration of the hon. Minister. I expect him to please act on them positively.

          With these observations, I support the Codes. Thank you.

                                                                                                         

श्री विनोद कुमार सोनकर (कौशाम्बी) : सभापतिमहोदय, आपनेमुझे उपजीविकाजन्यसुरक्षा, स्वास्थ्यऔर कार्यदशासंहिता, 2020, औद्योगिक संबंधसंहिता, 2020 और सामाजिकसुरक्षा संहिता,2020 पर अपनीबात रखने काअवसर प्रदानकिया है, उसके लिए मैंआपका आभारी हूं । मैं अपनी पार्टीके लोगों केप्रति भी अपनाआभार व्यक्तकरता हूं किउन्होंने मुझेऐसे महत्वपूर्णविषय पर बोलनेका अवसर प्रदानकिया है ।

         सभापति महोदय, मैंसबसे पहले तोयह बताना चाहूंगाकि जब बाबासाहेबभीमराव अंबेडकरजी वर्ष 1942से 1946 केबीच श्रम मंत्रीके रूप मेंकार्यरत थे,तो उन्होंनेसबसे पहले इसदेश में श्रमकानून लाने काकाम किया था । उस कानून केअंतर्गत जो किअंग्रेजों केजमाने से चलाआ रहा था कि12 घंटे काकाम होगा, उसको घटाकर 8 घंटे करना,रोजगार कार्यालयकी स्थापना करना,कर्मचारी राज्यबीमा की स्थापनाकरना, कर्मचारीसंगठन को मान्यतादेना, भारतीयफैक्टरी अधिनियम,महंगाई भत्ता,अवकाश वेतन,स्वास्थ्यबीमा, कानूननहड़ताल का अधिकार,भविष्य निधि,श्रमिक कल्याणकोष, तकनीकीप्रशिक्षण योजना,महिलाओं कोप्रसूति अवकाश,भारतीय सांख्यिकीकानून और इसकेसाथ-साथ मातृत्वलाभ अधिनियम,महिला श्रमकल्याण कोष,महिला और बालश्रम सुरक्षाअधिनियम, महिला श्रमके लिए मातृत्वलाभ और कोयलाखानों में भूमिगतकामों में महिलाओंके रोजगार परप्रतिबंध केसाथ ही साथसमान कार्य केलिए समान वेतनकी सिफारिश औरकानून बनानेका काम अगरइस देश मेंसर्वप्रथम किसीने किया था,तो वह बाबासाहेबभीमराव अंबेडकरजी के नेतृत्वमें किया गयाथा ।

         सभापति महोदय, देशआज़ाद हुआ, देशकी आवश्यकताके अनुसार एवंरोजगार और औद्योगिकआवश्यकता केअनुसार नए-नएकानून बनते गएहैं । एक नहीं, इसदेश में ऐसे44केन्द्रीयकानून बने हैं । कानूनों कीसंख्या तो खूबबढ़ी, लेकिनइन कानूनों नेन तो उद्योगोंका विकास कियाहै और न हीश्रमिकों काविकास किया है । बल्कि औद्योगिकघरानों में व्यापारकरने वाले लोगोंऔर नियोक्तआोंमें भय पैदाकिया है । इतनेकानूनों के मकड़जालमें हमारा श्रमिक,केवल श्रमिकअदालतों के चक्करलगाने के लिएमजबूर हुआ है । मैं देश केयशस्वी प्रधानमंत्री जी कोबधाई देना चाहूंगाकि बाबासाहेबभीमराव अंबेडकरजी के बाद अगरइस देश के श्रमिकोंके लिए समग्रतासे और लंबेसमय के बादकिसी ने विचारहै, किसीने कानून बनानेका काम कियाहै, तो वहदेश के यशस्वीप्रधान मंत्रीआदरणीय नरेन्द्रभाई मोदी जीने किया है ।मैं उनको बधाईदेता हूं । मैंकेन्द्रीय श्रममंत्री आदरणीयसंतोष कुमारगंगवार जी कोभी बधाई देताहूं कि उनकेनेतृत्व मेंएक समग्र कानूनआया है । इससमग्र कानूनका जो आधारहै, सबकासाथ, सबकाविकास और सबकाविश्वास, क्योंकि विश्वासके अभाव मेंजब नियोक्ताऔर कर्मचारीमें अविश्वासपैदा होता है,तो न तो उसमेंनियोक्ता काभला होता हैऔर न ही कर्मचारीका भला होताहै । जब दोनोंका नुकसान हुआ,तो उसी कायह परिणाम हैकि आज हमाराकर्मचारी अदालतोंके चक्कर लगारहा है और हमारेयहां पर उत्पादनकी यूनिटें लगनेके बजाय विदेशोंमें चली गईहैं ।

         सभापति महोदय, ऐसेकानून की मांगऔर आवश्यकतालंबे समय सेमहसूस की जारही थी । वर्ष2002में राष्ट्रीयश्रम आयोग केकार्यक्रम मेंएक प्रस्तावभी पारित कियागया था कि हमकोएक सामूहिक आचारसंहिता बनानीचाहिए, जिसमेंनियोक्ता काभी भला हो औरकर्मचारियोंका भी भला हो । माननीय मंत्रीजी ने लंबीचर्चा के बाद,चाहे औद्योगिकघराने हों,चाहे ट्रेडयूनियनें हों,चाहे श्रमिकहों, सभीसे चर्चा करनेके बाद एक संपूर्णकानून बनानेका काम और प्रयासकिया है । निश्चितरूप से इससेआने वाले समयमें जहां एकतरफ औद्योगिकविकास भी होगा,जो कर्मचारी/सरकारी कर्मचारीहैं और इस देशमें 50 करोड़से ज्यादा श्रमिकहैं, उनकेकल्याण के लिएभी अनेक योजनाओंके रास्ते खुलेंगे ।

महोदय, 44कानूनों में से 15 कानूनों को समाप्त कर 29 कानूनों को चार कोड में डिवाइड कर, चार संहिता बनाने का काम इस कानून के माध्यम से किया जा रहा है । हम पहले भी मिनिमम वेजिस का बिल पास कर चुके हैं । जिसका परिणाम है कि आज इस देश में न्यूनतम मजदूरी निर्धारित है और देश में यह लागू है और बाकी तीन बिल माननीय मंत्री जी द्वारा लाए गए हैं । चाहे औद्योगिक संबंध संहिता बिल हो, चाहे सामाजिक सुरक्षा हो । इन सभी का उद्देश्य इस देश के औद्योगिक विकास और श्रमिकों के बीच विश्वास पैदा करना है । सबका साथ ले कर,सबका विकास कर के, सबके विश्वास से काम को करना है ।

         सभापति महोदय, 23 जुलाई, 2019 को लोक सभा में इस बिल को लाया गया था और वहां पर विपक्ष की मांग पर और श्रमिक के हित को देखते हुए इसको श्रमिक विभाग की संसदीय समिति को सौंप दिया गया । उनके द्वारा 233 सुझाव दिए गए थे, उनमें से 174 सुझावों को स्वीकार कर इस कानून में समाहित करने का काम भी यह कानून करेगा । इस कानून की सबसे बड़ी खास बात है कि पहले श्रमिक अपने को यह साबित ही नहीं कर पाता था कि मैं किस नियोक्ता के यहां काम करता था, अब यह कानून इस बात के लिए श्रमिक को गारंटी देता है कि किसी भी नियोक्ता को, उसको नियुक्ति पत्र जारी करना पड़ेगा । उस नियुक्ति पत्र को पाने के बाद, वह सभी प्रकार के जो सामाजिक लाभ हैं, जो कानूनी लाभ हैं,उनको वह पा सकेगा ।

सभापति महोदय, इसी सदन में प्रवासी श्रमिकों को ले कर बहुत … * बहाए गए । प्रवासी श्रमिकों की परिभाषा के अभाव में यह कानून प्रवासी श्रमिकों की परिभाषा को परिवर्तित रहा है । अगर यह कानून पहले बन गया होता,प्रवासी श्रमिकों की परिभाषा को ठीक कर दिया गया होता, जो इस कानून में लागू है, अगर यह पहले लागू हुआ होता तो कोरोना महामारी जैसे संकट के समय हमारे श्रमिक सड़कों पर दिखाई नहीं पड़ते और नियोक्ता अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकता था । लोग … * बहाने का काम तो कर रहे हैं, लेकिन नियोक्ता के ऊपर किसी प्रकार का कानूनी बंधन नहीं था कि हम श्रमिकों को उसके लिए काम करा सकें ।

माननीय सभापति महोदय, यह कानून इस बात का भी अधिकार केन्द्र को देता है, प्रदेश को देता है कि श्रमिकों के हित में, उद्योग के हित में, व्यापार के हित में एक आयोग का गठन करेंगे । जो आयोग समय-समय पर केन्द्र सरकार को, श्रमिकों के हित के लिए और उद्योग के हित के लिए सलाह देंगे । साथ ही साथ यह कानून राज्य सरकार को सलाह देने के लिए, राज्य आजीविका सुरक्षा और स्वास्थ्य सलाहकार बोर्ड का गठन करता है । …(व्यवधान)

माननीय सभापति: प्लीज़ अब समाप्त कीजिए ।

…( व्यवधान)

श्री विनोद कुमार सोनकर: सभापतिमहोदय, इसकानून के माध्यमसे प्रदेश मेंभी श्रमिकोंके हित में, उद्योगोंके हित में, हमसलाह देने केलिए राज्य सलाहकारबोर्ड का गठनकरेंगे, जिसकेमाध्यम से समय-समयपर उनके हितकी रक्षा होसके ।

         सभापति महोदय, सबसेबड़ी बात यहहै कि इस देशमें बहुत बड़ीमात्रा में असंगठितमज़दूर हैं, जिनकेहितों की रक्षाकी चिंता इससेपहले कभी नहींहुई । यह कानूनलागू हो जानेके बाद हम देशमें बड़े पैमानेपर असंगठित मज़दूरोंकी सामाजिक योजनाओंऔर उनके हितोंकी रक्षा केलिए भी कामकर पाएंगे ।

         सभापति महोदय,जहां तक श्रमजीवीपत्रकार अधिनियमहै, उसकीपरिभाषा मेंभी संशोधन करनेका प्रस्तावहै । इसके संशोधनके बाद, जोइलैक्ट्रॉनिक्समीडिया में ई-पेपर है यासमय अनुकूल जोचल सकता है,उन श्रमिकोंके हक और हकूककी रक्षा करपाएंगे ।

         सभापति महोदय, सबसेबड़ी बात तोयह है कि इसकानून में किजहां हम एकनए भारत कानिर्माण करनेजा रहे हैं, उसनए भारत में  सपनादेखने का अधिकारभी यह कानूनश्रमिकों कोदेता है । सभापति महोदय, मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी को एक सुझाव देना चाहता हूँ । वर्ष 1992 में जब से इस देश में उदारीकरण का दौर शुरू हुआ है, तब से इस दौर में आउटसोर्सिंग के नाम पर बहुत सारी कम्पनियाँ ने जन्म लिया हैं । कम्पनियाँ आउटसोर्सिंग के माध्यम से देश के युवाओं का शोषण कर रही हैं । साथ ही साथ संविदा कर्मी, जिनका बड़े पैमाने पर शोषण हो रहा है,काम एक है, अलग-अलग प्रदेश में और प्रदेश में भी अलग-अलग मंत्रालय में, अलग-अलग आउटसोर्सिंग कम्पनियों से जो…(व्यवधान)

माननीय सभापति: आप समाप्त कीजिए ।

श्री विनोद कुमार सोनकर: सभापति महोदय,यह बहुत जरूरी विषय है । सबसे जुड़ा हुआ विषय है । देश के युवाओं से जुड़ा हुआ विषय है । आउटसोर्सिंग की वजह से लगातार युवाओं का शोषण हो रहा है, संविदा की वजह से शोषण हो रहा है । मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी से माँग करता हूं और निवेदन करता हूँ ।…(व्यवधान)

माननीय सभापति: श्री पी. रविन्द्रनाथ कुमार ।

श्री विनोद कुमार सोनकर: सभापति महोदय,मैं केवल एक मिनट में अपनी बात समाप्त कर रहा हूँ ।

माननीय सभापति: आप बैठ कर बात कीजिए ।

श्री विनोद कुमार सोनकर: मैं आपके माध्यम से मांग कर रहा हूँ कि संविदा कर्मी और आउटसोर्सिंग को लेकर भी देश में एक राष्ट्रीय नीति बननी चाहिए,जिससे देश के युवाओं का शोषण बंद हो । साथ ही साथ मैं आपसे निवेदन करना चाह रहा हूँ कि यह बहुत गम्भीर विषय है । आज प्रत्येक प्रदेश में अपना-अपना कानून बना कर आउटसोर्सिंग और संविदा के नाम पर लोगों का…(व्यवधान)

माननीय सभापति: ठीक है । आपकी बात आ गई है ।

श्री पी. रविन्द्रनाथ कुमार, आप प्रारम्भ कीजिए ।

 

SHRI P. RAVEENDRANATH KUMAR (THENI): Thank you, Chairman, Sir, for giving me an opportunity to speak on three revolutionary Bills being considered today in this august House.

HON. CHAIRPERSON: Kindly conclude in 3-4 minutes. So, please be brief.

… (Interruptions)

SHRI P. RAVEENDRANATH KUMAR: Firstly, I must compliment the steps taken to safeguard security of women at their workplace both in physical terms as well as with regard to the financial and self-developmental aspects. Through this Bill, making issuance of appointment letters mandatory by the employer can considerably aid in formalization of their employment.

As we can see for ourselves that through these reforming enactments our hon. Prime Minister is building a strong backbone for our country’s economy with labourers and workers being brought into the forefront of nation-building with a much confident and stable workforce. Considering the current economic turbulence, this Bill will exponentially help in the growth of our GDP.

          Through you, I would like to clarify a few general apprehensions about certain Clauses. Clause 55 (4) states that appropriate Government has the power to reject or modify the award given under this Code. It is my understanding that the Standing Committee on Labour had suggested that such power vested with the appropriate Government is against the principles of Separation of Power.

          Secondly, as regards Clause 92 (1), which states that : “Appropriate Government has the power to withdraw and transfer any pending proceedings under this Code to another Tribunal”. I feel that it is against the very purpose of the Bill. For example, the proceedings, when transferred from one State to another could hamper justice since the same may get affected due to regional politics.

          I would also like to give a few suggestions regarding this Bill. Firstly, with almost 75 per cent of the labour workforce employed in the construction industry being migrant labourers, it is required that the contractors have to register the workers under the ISM Act. My suggestion to the Government would be that the Government should make it mandatory, and routine audits and inspections should be conducted by the agencies concerned to enforce the same.

          Secondly, the contractors also should be given various enterprising incentives and support modules by the Government motivating the contractors to adhere and ensure mandatory registration for all labourers. …(Interruptions)

          Sir, I am the only speaker from my State. Thirdly, in the wake of COVID-19 pandemic, the migrant labourers who predominantly earn their livelihood through daily wages need to be inspired both financially and emotionally. There should be a scheme to support the migrant labourers by providing supply of dry ration from the Construction Welfare Fund. Similarly, medical check-up and assistance during the pandemic can also be supported from the Construction Welfare Fund.

          More than 50,000 families in my State are dependent on the Cine Industry for their livelihood. Now, the cine workers may get compensation in case they are met with an accident on the shooting spot. At this juncture, I would like to bring to the notice of the hon. Minister that necessary notification shall be placed to widen the definition of contract labours in Clause 2 (1) (m) of the Occupational Safety, Health and Working Conditions Code, 2020 by specifically mentioning cinema and entertainment industry.

          Finally, I would like to conclude with the quote of our Father of the Nation, Mahatma Gandhi ji: “Obedience to the law of bread labour will bring about a silent revolution in the structure of society”.

          Through this Bill, our hon. Prime Minister, Shri Narendra Modi ji is creating a revolution, strengthening and restructuring our Indian society for the creation of a new India.

          With these words, I conclude my speech.

     

श्री राजू बिष्ट (दार्जिलिंग): महोदय, आपनेमुझे इस महत्वपूर्णविषय पर बोलनेका मौका दिया,इसके लिए आपकाधन्यवाद ।

         महोदय, सबसेपहले मैं आदरणीयप्रधान मंत्रीश्री नरेन्द्रमोदी जी औरहमारे माननीयमंत्री श्रीसंतोष गंगवारजी को बहुतबधाई देता हूँ, क्योंकियह जो बिल है, यहखासकर हमारेदार्जिलिंग तराईडूवर्स के करीब400बड़े चाय बागानऔर 800 से एकहजार छोटे,जो स्मॉल ग्रोअर्सहैं, उनकेलिए बहुत बड़ीऔर खुशी कीबात है ।

         यह विधेयकमाननीय प्रधानमंत्री जी द्वारादिए गए रिफॉर्म, परफॉर्मऔर ट्रांसफॉर्मके विजन कोदर्शाता है ।भारत की आजादीके 72 वर्षांके बाद भी आजतक इस तरह केरिफॉर्म्स हमारेसामने नहीं आएथे । आज करीब50 करोड़ संगठितऔर असंगठित श्रमिकोंको वेतन कीसुरक्षा, सामाजिक सुरक्षा,स्वास्थ्यसुरक्षा देनेका काम हो रहाहै, जबकिपहले लगभग सिर्फ10 करोड़ श्रमिकोंकी ही बात होतीथी । अब ये चारलेबर कोड केमाध्यम से करीब29 श्रम कानूनइसमें समाहितहो रहे हैं ।वेज कोड पिछलेसाल ही पासहो चुका है,आई.आर.कोड, ओएसएचकोड और सोशलसिक्योरिटी कोडहै । यह बिलवर्ष 2019 मेंही हमारे सामनेआ गया था, लेकिन इसे संसदीयसमिति को भेजदिया गया था । स्थायी समितिने सभी स्टेकहोल्डर्स – श्रमिकोंऔर श्रमिकोंके जो संगठनहैं, इंडस्ट्रीके जो लीडरहैं, उनकेजो एक्सपर्टहैं, उन सबसेइनपुट भी लिएहैं । समितिद्वारा विभिन्नस्टेकहोल्डर्सद्वारा दिए गएकरीब 174 सुझावोंको भी अपनालिया गया है ।

         सर, अबमैं इस बिलके कुछ मेरिटबहुत ही सरलभाषा में सदनके सामने रखनाचाहूँगा । यहबिल पास होनेके बाद सभीमजदूरों को न्यूनतममजदूरी यानीमिनिमम वेज कीगारंटी देताहै । मैं आपकोउदाहरण के लिएबताना चाहूँगा, मैंचाय बागान क्षेत्रसे आता हूँ, वर्ष1951प्लांटेशनलेबर एक्ट केकारण आज तकपश्चिम बंगालमें लोगों कोमिनिमम वेज नहींमिल रही है ।आज पूरे पश्चिमबंगाल में करीब350 रुपये मिनिममवेज है, लेकिनचाय बागान केमजदूरों को मात्र176 रुपये प्रतिदिनमिलते हैं ।अब इस कानूनके पास होनेके बाद पीएलएएक्ट, 1951 अस्तित्वमें नहीं रहेगाऔर श्रमिकोंको पूरा वेतन,मिनिमम वेजमिलेगा । यहबिल सभी मजदूरोंको समान वेतनकी गारंटी देताहै । यह महिलाएवं पुरूष मजदूरोंको समान वेतनदेता है । हरमजदूर को अपॉइंटमेंटलैटर भी दियाजाएगा । हर मजदूरका साल मेंएक बार हेल्थचेकअप भी करायाजाएगा । मिनिममवेज की जो अलग-अलग समस्याएंथीं, मिनिममवेज में समानतानहीं थी, यूनिफोर्मिटीनहीं थी, उसको दूर करनेके लिए एक यूनिफार्मफ्लोर वेज काप्रावधान भीकिया गया है । जो हमारे प्रवासीभाई-बहन मजदूरहैं, उनकोहर साल एक बारघर जाने काकिराया भी मिलेगाऔर जो हमारेप्रवासी मजदूरहैं, वे जहाँभी काम करेंगे,उनको वहींपर राशन मिलनेकी व्यवस्थाभी इस बिल केमाध्यम से होरही है ।

         असंगठित क्षेत्रके लिए सामाजिकसुरक्षा निधिका प्रावधानहै । महिलाओंको रात्रि मेंकाम करने कीव्यवस्था भीइस बिल के माध्यमसे की गई है । यह बिल महिलाओंको सभी क्षेत्रोंमें काम करनेकी इजाजत देरहा है । जबमहिलाएं रात्रिमें काम करेंगीतो उनकी सुरक्षाकी व्यवस्थाकरना भी अनिवार्यहोगा । संगठितऔर असंगठित क्षेत्रके सभी मजदूरोंको पेंशन (ईपीएफओ) योजनाका लाभ मिलेगा । मजदूरों कोट्रिब्यूनल मेंजल्द से जल्दन्याय मिलनेकी सुविधा भीहै और ट्रिब्यूनलको एक साल केअंदर मजदूर केकेस का फैसलाकरना होगा ।इसके माध्यमसे लिटिगेशनबहुत कम होगाऔर लिटिगेशनजल्द से जल्दखत्म भी होगा । छोटी सी कान्ट्रिब्यूशनसे भी ईएसआईसीअस्पताल मेंइलाज की सुविधाहोगी । ईएसआईसीसभी क्षेत्रोंमें काम करनेवाले मजदूरोंके लिए खुलेगा । इस बिल केमाध्यम से ईएसआईसीअस्पताल, दवाखानाएवं शाखाओं काजिला स्तर तकविस्तार होगा । यह बहुत बड़ीबात है ।

 

         सर, मुझेदो-तीनमिनट का समयऔर दीजिए, बसमैं अपने क्षेत्रपर आ रहा हूँ ।

         10से कम मजदूरजिस संस्था मेंहैं, स्वेच्छासे ईएसआईसी केसाथ जुड़ने कामौका भी उन्हेंमिल रहा है ।          सर, जैसा मैंने आपको बताया, पश्चिम बंगाल राज्य में अभी तक चाय बागान में मिनिमम वेज लागू नहीं था, जो इस बिल के माध्यम से हो रहा है । इस बिल के पास होने के बाद चाय बागान और सिनकौना बागान में काम करने वाले श्रमिकों को उनका पूरा अधिकार मिलेगा ।

         प्लांटेशन लेबर एक्ट, जो अभी तक केवल कागजों तक ही सीमित था,इस बिल के पास होने के बाद उसका अस्तित्व समाप्त हो जाएगा । इससे चाय बागान और सिनकौना बागान में काम करने वाले मजदूरों को सबसे ज्यादा फायदा होगा ।

महोदय, इस बिल के पास होने के बाद कोई भी मालिक काइन्ड में 15 प्रतिशत से ज्यादा सुविधा नहीं दे पाएगा । उन्हें 85 प्रतिशत पैसे कैश में श्रमिकों के हाथ में देना होगा । इसका अर्थ यह हुआ कि जैसे आज पश्चिम बंगाल में न्यूनतम मजदूरी 350 रुपये है, जब उन्हें उसका 85 प्रतिशत देना होगा तो इसका मतलब यह हुआ कि करीब 300 रुपये न्यूनतम मजदूरी सभी श्रमिकों को कैश में मिलेगी ।

माननीय सभापति: अबआप अपना भाषणसमाप्त करें ।

श्री राजू बिष्ट : सर, मुझेबस दो मिनटका समय और देदीजिए ।

माननीय सभापति: नहीं, दोमिनट में नहीं, आपइसे जल्दी समाप्तकरें । एक मिनटमें अपनी बातपूरी कीजिए ।

 

श्री राजू बिष्ट: सर, बस सवामिनट और लगेगा ।

         सर, मैंअपने क्षेत्रकी एक बात कहनाचाह रहा हूंकि वहां श्रमिकोंको आज तक भूमिपर अधिकार नहींदिया गया है,क्योंकि भूमि,राज्य का विषयहै । अंग्रेजोंने जो कानूनबनाया था, वह कानून आजभी पश्चिम बंगालमें लागू है । अभी वर्ष 2019में ही पश्चिमबंगाल सरकारने 15 प्रतिशतचाय बागानोंकी जमीन कोउसके मालिकोंको पर्यटन केलिए दे दी ।मैं उसका स्वागतकरता हूं, लेकिन उस जमीनपर उसके मालिकोंसे ज्यादा अधिकारहमारे श्रमिकोंका है । मैंआपके माध्यमसे यह अनुरोधकरता हूं किजिस तरह सेएफ.आर.ए. एक्ट,2006, जो इसी पार्लियामेंटसे पास हुआऔर जिसके माध्यमसे हमारे वन-बस्ती में रहनेवाले लोगों कोजमीन का अधिकारदिया गया, उसी तरह सेकानून पास करकेहमारे जो श्रमिकचाय बागान औरसिनकौना बागानोंमें काम करतेहैं, उन्हेंप्रजा पट्टादिया जाए ।

         महोदय, अन्तमें, मैंएक ही बात कहनाचाहूंगा कि हमारेपश्चिम बंगालकी मुख्यमंत्रीहमेशा कहती थींकि ‘पहाड़हासचे’, लेकिनउन्होंने पहाड़को श्मशान घाटबनाकर रखा हुआहै । इस‍बिल के पासहोने के बादअपने लोगों सेइतना जरूर कहनाचाहूंगा कि इसबिल के पासहोने के बादपहाड़ जरूर मुस्कुराएगा । बहुत-बहुतधन्यवाद ।

श्रीमती नवनित रवि राणा (अमरावती): सभापति महोदय,हमारे माननीयमंत्री महोदयको यह पता हैकि ई.पी.एस., 1995, जोपेन्शनर्स सेसंबंधित है,इसके बारेमें बहुत सेपेन्शनधारक कोर्टमें लड़ाई कररहे हैं, वे आपसे मिलकर आपसे भीलड़ाई कर रहेहैं, और उन्होंनेबहुत से आंदोलनभी किए हैं ।वे मजदूर बहुतसारे विभागोंमें काम करचुके हैं, चाहे पी.एस.यूज़.हो, चाहेप्राइवेट कम्पनीजहों । इसमेंमंडियों मेंकाम करने वालेकामगार भी हैं,स्टेट ट्रांसपोर्टेशनमें काम करनेवाले कामगारहैं । ऐसे बहुतसारे कामगारहैं, जो अपनीपेन्शन के लिएश्रम मंत्रालयसे बहुत सालोंसे बातचीत कररहे हैं, वे अपने मुद्देरख रहे हैं,अपनी समस्याएंरख रहे हैं ।उनमें से कोई60 वर्ष काहो गया है,कोई 65 वर्षका हो गया हैऔर कई हजारलोग तो ऐसेहैं, जिनकानिधन भी होगया है । ऐसेबहुत-से लोगोंने अपनी-अपनी समस्याएंमाननीय मंत्रीजी के समक्षरखी हुई हैं । वे सिर्फ अपनाहक मांग रहेहैं । आज श्रममंत्रालय केद्वारा कामगारोंके लिए बहुतअच्छा बिल लायागया है । इसबिल का हम सपोर्टकरते हैं औरहमें इसे सपोर्टकरना भी चाहिएक्योंकि आज देशमें जो बड़ी-बड़ी कम्पनियांहैं, जो बड़े-बड़े उद्योगहैं, वे मजदूरोंके कारण हीमजबूत हो सकेहैं । इसलिएऐसा बिल लानाबहुत जरूरी है । इस बिल केमाध्यम से इनकेलिए सुविधाएंलाई जा रहीहैं, चाहेवह मेडिकल कीसुविधा हो,चाहे सुरक्षाकी बात हो ।इनके जो भीकेसेज कोर्टमें चलते हैंया डिस्ट्रिक्टलेवल पर चलतेहैं, उसकेलिए यह बिललाना बहुत जरूरीहै ।

सभापतिमहोदय, मैंआपके माध्यमसे इसके लिएविनती करूंगीकि जिन पेन्शनर्सको महीने में100रुपये से लेकर500 रुपये तककी पेन्शन मिलतीहै, मुझेआप बताइए कि100 रुपये,200 रुपये, 350रुपये या 500रुपये मेंउन दोनों बुजुर्गोंका क्या गुजाराहो सकता है?यह स्थितितब है जबकिसरकार के पासई.पी.एस., 1995 फण्डमें इनके हीदिए हुए 5 लाख करोड़ रुपयेआज तक जमा हैं । इसके बावजूदये पेन्शनर्सबस मिनिमम पेन्शनमांग रहे हैं,जो हम इन्हेंनहीं दे पारहे हैं । बहुतसारी मीटिंग्सहो गई हैं ।कई कोर्ट्स मेंउनके पक्ष मेंनिर्णय हुए हैं,एकाध जगहोंपर उनके विरुद्धनिर्णय हुए हैं,तो मैं माननीयमंत्री महोदयसे यह कहनाचाहूंगी कि ऐसेगरीब मजदूर,जो सिर्फ अपनाहक मांग रहेहैं, वे सिर्फसात से आठ हजाररुपये प्रतिमहीने पेन्शनकी मांग कररहे हैं, जबकि आपके पासउनके 5 लाखकरोड़ रुपये जमाहैं, उसमेंसे वे आपसेअपना अधिकारमांग रहे हैं । इसलिए मेरीआपसे विनती हैकि उन्हें उनकेअधिकार दिए जाएंऔर उनके जीवनके जो कुछ सालबाकी हैं, ऐसे सीनियरसिटीजेन्स केलिए कुछ दयाहमारी तरफ सेहोनी चाहिए,मैं आपसे यहविनती करूंगी ।

         सभापति महोदय,मेरे पास एक बहुत ही महत्वपूर्ण मुद्दा है । भारतीय एकजुट कामगार संगठन के जिन कामगारों ने जी.बी. कंपनी में काम किया, उन कर्मचारियों की बहुत सारी रकम इस कंपनी में बकाया है । ये ऐसे कामगार हैं, जिनके पास अपने बच्चों के स्कूल की फीस भरने के लिए पैसे नहीं हैं । उनके जीवनयापन के लिए भी पैसे नहीं हैं । ऐसे कामगारों के लिए मैं आपके माध्यम से माननीय प्रधानमंत्री से विनती करूँगी । जितने भी लेबर्स हमारे देश में रहते हैं, उनको भी प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत जोड़ना चाहिए और हर लेबर को घर प्रोवाइड करना चाहिए । मेरी इतनी ही आपसे विनती है । कंपनी में काम करने वाले कामगारों की जब ओनर्स से लड़ाई होती है, यूनियन कोई डिमांड करती है, लेबर्स कुछ डिमांड करते हैं और जब वे कोर्ट में जाते हैं तो वह कंपनी लेबर्स को सैलरी देना बंद कर देती है ।

         महोदय, मैं आपसे एक और विनती करूँगी कि इस एक्ट में लेबर्स की सैलरी के बारे में भी कुछ प्रावधान करना चाहिए । अगर किसी भी कंपनी का कोई मजदूर कोर्ट में जाता है तो उस मजदूर की पगार बंद नहीं करनी चाहिए । इसके बारे में हमें जरूर विचार करना चाहिए,क्योंकि आने वाले समय में उनके ऊपर बहुत सारी चीजें निर्भर हैं । जब कोई लेबर किसी कंपनी में 15 से 20 साल काम करता है तो वह अपना पूरा भविष्य,जवानी, मेहनत और खून उस कंपनी को बड़ा करने में लगा देता है । मेरी आपसे विनती रहेगी कि जो वहाँ मजदूरी कर रहा है, उनके बच्चों का भविष्य उसी पगार पर निर्भर है । ऐसे गरीब मजदूरों के बच्चों के लिए कंपनियों के माध्यम से स्कॉलरशिप दी जाए । ऐसा नहीं होना चाहिए कि लेबर का बच्चा सिर्फ लेबर ही बने,  मजदूर का बच्चा सिर्फ मजदूर ही बने,बल्कि उसको एक डॉक्टर भी बनना चाहिए ।

माननीय सभापति: अबआप अपनी बातसमाप्त कीजिए ।

श्रीमती नवनित रवि राणा:  सर, मुझे सिर्फ एक मिनट का समय दे दीजिए । हमें उन मजदूरों के बच्चों के भविष्य के बारे में भी कुछ बात करनी चाहिए ।

          सर, जब सब-कॉन्ट्रैक्ट होता है, मेरे ख्याल से शायद यह इस बिल में ऐड न हुआ हो । परंतु मैं आपसे एक रिक्वेस्ट करना चाहूँगी कि जब सब-कॉन्ट्रैक्टर मजदूरों को अपनी तरफ से कंपनियों में लगाता है या किसी भी गवर्नमेंट कंपनी में काम पर लगाता है, यदि ऑन रिकॉर्ड मजदूरी  500 या 350 रुपये प्रतिदिन है तो वह मजदूर से पहले ही लिखवा कर ले लेता है कि मैं आपको इतनी ही मजदूरी दूँगा । वह मजदूर से कहता है कि ऑन पेपर जो सैलरी लिखी हुई है, वही मैं आपको दे रहा हूँ । ऐसे सब-कॉन्ट्रैक्टर्स के जितने भी केस लोकल लेवल पर चलते हैं, कामगार कमिश्‍नर के यहाँ चलते हैं,उसमें चार-पाँच साल का समय लग जाता है । उसके लिए हमें कुछ प्रावधान लाना चाहिए । उसकी एक टाइम लिमिट भी होनी चाहिए ।

          सर, मैं आदिवासी क्षेत्र की एक बात कहना चाहती हूँ । यह विषय हमारे आदिवासी क्षेत्र से बिलाँग करता है । आज हम प्लांटिन्ग और गार्डेनिंग के लिए भी बिल लाए हैं । हमारे आदिवासी क्षेत्र में जो लोग रहते हैं,वहाँ पूरी तरह से फॉरेस्ट एरिया है । वहाँ पर आदिवासी फॉरेस्ट के अण्डर में काम करते हैं । उनकी सिक्योरिटी,मेडिकल और अन्य फैसिलिटी के लिए आप जो बिल लाये हैं, उसका हम सपोर्ट करते हैं ।

 श्री हनुमान बेनीवाल (नागौर):सभापति महोदय,मैं आपका धन्यवाद करता हूँ कि आपने मुझे आज के विषय पर अपनी बात रखने का मौका दिया ।

महोदय, आज श्रम और रोजगार मंत्री जी लोक सभा के अंदर तीन बिल्स लेकर आए हैं । ये तीनों ही मजदूरों से संबंधित बिल्स हैं । इन बिलों के माध्यम से हम मजदूरों के अधिकारों का और अच्छी तरह से रक्षा कर सकते हैं । इसके लिए मैं मंत्री जी को धन्यवाद दूँगा ।

महोदय, मजदूरों के लिए सरकार जो बिल लेकर आई है, मेरी आर.एल.पी.पार्टी उसका समर्थन करती है । मुझे अच्छी तरह याद है कि न्यूनतम मजदूरी बढ़ाने का बिल भी पिछले सत्र में यह सरकार लेकर आई थी । माननीय प्रधानमंत्री जी ने ‘जय जवान,जय किसान, जय विज्ञान’का जो नारा दिया,उसमें ‘जय मजदूर’ का भी नारा शामिल करना चाहिए । हमारे जवान, किसान,मजदूर ये सभी लोग मिलकर इस देश को प्रगति पर लेकर जाएंगे ।

सभापति महोदय, ये तीन बिल्स हैं । इनके अंदर एक औद्योगिक संबंध संहिता विधेयक, 2020 भी है । अब 300 से कम कर्मचारी वाली कंपनी सरकार से मंजूरी लिए बिना कार्मिकों की छंटनी नहीं कर सकेगी । इसके लिए हर जगह आंदोलन चलते रहते हैं । कंपनियों में मजदूरों की आए दिन की समस्याएँ होती रहती हैं । मजदूर हड़ताल पर भी चले जाते हैं । उनकी मजदूरी घटा दी जाती है । किसी न किसी बहाने से उनकी छंटनी कर दी जाती है । इस बिल के माध्यम से यह होगा कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति इस देश के अंदर नहीं होगी । यह बिल इस मामले के अंदर महत्वपूर्ण है ।

         सभापति महोदय,मेरा मंत्री जी से अनुरोध है कि कंपनियां बिना किसी ठोस कारण के अचानक किसी कर्मचारी की छंटनी कर दे, उसकी सुनिश्चितता कैसे होगी?  जब आप जवाब दें, तो जरूर उसके अंदर इसे बताएं ।

तीसरा, सामाजिक सुरक्षा संहिता बिल, 2020, यह संहिता सामाजिक सुरक्षा से जुड़े 9 कानूनों, जैसे कर्मचारी भविष्य निधि एक्ट, 1952, मातृत्व लाभ एक्ट, 1961 और असंगठित श्रमिक सामाजिक सुरक्षा एक्ट, 2008 का स्थान लेती है । सामाजिक सुरक्षा उन उपायों में कहा जाता है, जो कि श्रमिकों को स्वास्थ्य सेवा संबंधी सुविधा और आय सुरक्षा के प्रावधान को सुनिश्चित करते हैं ।

महोदय, एक मजदूर देश के निर्माण में बहुमूल्य भूमिका अदा करता है । मजदूर ही वह ताकत है,जो किसी भी उद्योग को आगे बढ़ाने के लिए अपनी पूरी जिंदगी, पूरी जवानी दांव पर लगाकर देश को आगे बढ़ाने का, उस काम को आगे बढ़ाने और उद्योग को आगे बढ़ाने का काम करता है । किसी भी समाज,देश, संस्था और उद्योग में काम करने वाले श्रमिकों की हमेशा अहम भूमिका रही है । मजदूरों के बिना किसी भी औद्योगिक ढांचे के खड़े होने की कल्पना नहीं की जा सकती । इसलिए श्रमिकों का समाज में अपना एक अलग ही स्थान है ।

महोदय, इन विधेयकों में कई कानूनों को बदला जा रहा है । जो फालतू के कानून थे, जब एनडीए की सरकार बनी, तब यह कहा गया था कि जितने भी फालतू के कानून पिछले 50 सालों के अंदर कांग्रेस पार्टी लेकर आई थी, उन फालतू के कानूनों को हम कम करेंगे । कई कानूनों को आपने कम भी किया है । …(व्यवधान)

सभापति महोदय, इन विधेयकों में कई कानूनों को बदला जा रहा है । आज इस माहौल में हमें आरोप-प्रत्यारोप से ऊपर उठकर देश के मजदूरों की स्थिति के बारे में गंभीर चिंतन करने की आवश्यकता है ।

मंत्री महोदय, हमारे राजस्थान सहित देश के भारी उद्योगों में काम कर रहे मजदूरों की पीड़ा की तरफ मैं ध्यान आकर्षित करना चाहूंगा । आज न्यूनतम वेतन को लेकर प्रावधान होने के बावजूद कई जगहों से शिकायतें आती हैं कि संबंधित कंपनियां मजदूरों को पूरा वेतन देने में आनाकानी करती हैं । देश में जहां भी केंद्रीय श्रम विभाग के कार्यालय हैं, उनको निर्देशित किया जाए कि उनके क्षेत्राधिकार में जो भी उद्योग हैं उनमें मजदूरों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु अभियान चलाए जाएं ।

एक रिपोर्ट के अनुसार भारतीय अर्थव्यवस्था में असंगठित क्षेत्र के लगभग 45 करोड़ श्रमबल में से करीब 30 प्रतिशत श्रमिक प्रवासी मजदूर हैं, जो गांवों, छोटे शहरों एवं पिछड़े इलाकों से रोजगार की तलाश में बड़े शहरों,औद्योगिक, कृषि एवं व्यावसायिक रूप से विकसित क्षेत्रों में जाते हैं ।

महोदय, नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार असंगठित क्षेत्र देश के 85 प्रतिशत मजदूरों को रोजगार  देता है । वर्ष 2018-19 के आर्थिक सर्वे के अनुसार 93 प्रतिशत श्रमिक अनौपचारिक क्षेत्र में हैं । देश की सकल आय में इस क्षेत्र का योगदान 49 प्रतिशत के करीब है ।

मंत्री जी, हमारे राजस्थान में बाड़मेर का मैं उदाहरण देना चाहूंगा, जहां तेल, गैस और कोयला निकला । वहां कार्य कर रही कंपनियां उस गांव के लोगों को भी रोजगार नहीं देती है, आनाकानी करती है । मंत्री जी, आप इसको नोट करें । जिस गांव की जमीन से तेल निकलता है,वह राज्य व देश को बड़ी राशि में रॉयल्टी देता है । रॉयल्टी प्राप्त होने के बाद भी केंद्र से संबंध‍ित विभाग शिकायतों के बावजूद इसकी मॉनीटरिंग नहीं करते हैं । मंत्री जी, मैं आपसे निवेदन करूंगा कि बाड़मेर के अंदर इस मामले को दिखवायें ।

मेरा सदन से अनुरोध है कि 80 प्रतिशत स्थानीय लोगों को रोजगार कैसे मिले इस नीति पर सदन को विचार करना चाहिए, ताकि बेरोजगारी के कारण उस क्षेत्र के लोगों का पलायन रुक सके ।

 

श्री सी.पी. जोशी (चित्तौड़गढ़): सभापति महोदय,आपका बहुत-बहुत आभार किआपने देश केअसंख्य कामगारों,मजदूरों औरअसंगठित क्षेत्रमें काम करनेवाले मजदूरोंके हितों केलिए एक महत्वपूर्णबिल पर मुझेबोलने का अवसरदिया । मैं देशके यशस्वी प्रधानमंत्री जी औरश्रम मंत्रीजी का आभारप्रकट करना चाहताहूं कि इस देशमें इतना बड़ारिफॉर्म, चाहे एग्रीकल्चरसैक्टर में होया लेबर सैक्टरमें हो, वहीव्यक्ति कर सकताहै, जो उनकेदु:ख औरदर्द को समझताहै ।

माननीयसभापति जी, वर्ष2014में जब सेदेश में यहसरकार आई, उस दिन से हमदेखें तो इसदेश का निर्माणकौन कर रहाहै, इस देशके विकास मेंमहत्पूर्ण भूमिकाकिसकी है? भारत का जोनिर्माण हो रहाहै, सही मायनेमें कौन उसकाकर्णधार है? 

कई बार उद्योग-धंधों की चर्चा होती है, इस विकास में अगर कोई मील का पत्थर है तो वह उद्योग-धंधे हैं । इन उद्योग-धंधों में काम करने वाला कौन है? इमारतें खड़ी करने वाला कौन है, सड़क बनाने वाला कौन है, रेल की पट्टरी बिछाने वाला कौन है, देश में अनेक ऐसे काम हैं जिनको करने वाला मजदूर है । इसके पीछे अगर कोई दिखाई देता है तो वह मजदूर दिखाई देता है । उन मजदूरों के हितों के लिए पहली बार जो कानून काफी पुराने हो गए थे,नेशनल लेबर कमीशन ने भी कहा था कि आउटडेटेड कानून की जटिलताओं को दूर करना चाहिए,पहली बार देश के यशस्वी प्रधानमंत्री ने इस दर्द को समझा । देश और दुनिया का यह पहला उदाहरण होगा जब इस देश के सफाई कर्मी का पांव धोकर उसका सम्मान करने का काम अगर किसी ने किया है तो नरेन्द्री मोदी जी ने किया है । ऐसे लोगों का आत्मसम्मान और प्रोत्साहन देने का काम माननीय प्रधानमंत्री जी ने किया है । ऐसे में सरकार ने एक महत्वपूर्ण बिल जबकि तीन पहले आ गए थे और अब माननीय मंत्री महोदय तीन बिल्स लेकर आए हैं । मैं कह सकता हूं कि इन कानूनों के माध्यम से भारत में अभी तक असंगठित क्षेत्र के मजदूरों के लिए किसी ने सोचा नहीं था । उनके लिए व्यवस्थाओं का अभाव था । ऐसे में संहिता देश के करोड़ों श्रमिकों के जीवन के सामाजिक और आर्थिक क्रांति का साधन बनेंगी । सबका साथ, सबका विकास और सबके विश्वास की परिकल्पना की । असंगठित क्षेत्र बहुत सारी विसंगतियों से भरा हुआ था, यशस्वी प्रधानमंत्री जी ने उसे दूर करने का काम किया है । यह प्रयास स्वागत योग्य है, यह सराहनीय और अभिनंदन योग्य कदम है । संगठित और असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों की आर्थिक और सामाजिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होगा ।

         मैं  इतना ही निवेदन करना चाहता हूं कि यह देश हमेशा से मेहनत मजदूरी करने वाले का रहा है । हमारे देश में जितना आत्मसम्मान श्रमिक भाइयों का है, उतना शायद ही किसी देश में होगा । जिस काम को कई वर्षों से यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले दक्ष डिग्री वाले लड़के नहीं कर पाते,उस काम को देश का अनुभवी मजदूर कर सकता है । मजदूरों के हितों के लिए लॉकडाउन में भी उनके भरण पोषण और पेट भरने का काम अगर किसी ने किया तो देश के यशस्वी प्रधानमंत्री ने किया ।

वन नेशन और वन राशन या उनके खातों में पैसा डालना हो, इस देश में पहली बार असंगठित क्षेत्र के मजदूरों को काम करने के लिए प्रधानमंत्री श्रमयोगी मानधन योजना  मोदी जी की सरकार लेकर आई । व्यापारियों और दुकानदरों के लिए राष्ट्रीय पेंशन योजना पहली बार हम लोगों ने इस सरकार में देखा है । श्रम सुविधा पोर्टल जिसके कारण कई लोगों को समस्या होती थी, उसका समाधान हुआ । ऑनलाइन यूएन नम्बर के माध्यम से जब कोई एक फैक्ट्री में काम करने वाला मजदूर कई बार दूसरी जगह चला जाता है तो उसकी समस्या का भी समाधान होगा,ईएसआई के माध्मय से पहले साढ़े छह प्रतिशत योगदान होता था, अब छह प्रतिशत कर दिया गया है । लॉकडाउन में नरेगा के माध्यम से घर बैठे लोगों के लिए एक जीवनदायिनी है, जिसकी मजदूरी दर 182 से 202 रुपये बढ़ाने का काम किया । अभी जो तीन बिल्स आये हैं, यदि इसके माध्यम से हम लोग देखें तो श्रमिकों का वर्गीकरण काम के घंटे, छुट्टी,वेतन आदि कई तकलीफों का निवारण इसके माध्यम से होगा ।

इसंपेक्टर राज्य के कारण कई नियोक्ताओं और कई अन्य लोगों को काफी परेशानी होती थी, वह राज खत्म होगा । अब दस हजार रुपये से बढ़ाकर अट्ठारह हजार रुपये मिनिमम मजदूरी की बात हो सकती है । ट्रेड यूनियन और सारी यूनियनें को स्टेट और सेन्ट्रल गवर्नमेंट की तरफ से मान्यता होगी । अभी उदयपुर में भारत सरकार ने सौ करोड़ रुपये का एक हॉस्पिटल दिया है, बीस करोड़ रुपये का चितौड़ में भी एक हॉस्पिटल दिया है । अब सोशल सिक्युरिटी 740 जिलों में से 567 जिलों में इन सुविधाओं का लाभ मिलेगा ।

मैं इतना जरूर कह सकता हूं कि चाहे फिक्सड सम रेग्युलर इम्पलाई या सामाजिक सुरक्षा का कोष हो, इन सभी सुविधाओं का लाभ श्रमिक भाइयों को मिलेगा । श्रमिकों को नि:शुल्क हैल्थ चेक-अप हो या नियुक्ति प्रमाणपत्र हो, इस बारे में पहली बार इस सरकार ने सोचा है । सरकार एक ऐतिहासिक बिल लेकर आई, इसमें चाय बागान में काम कर रहे मजदूरों के लिए सोचा गया है । मैं एक जनजाति एरिया से आता हूं । मेरा आग्रह रहेगा कि इसमें उस क्षेत्र के जंगल में तेंदु पत्ता इकट्ठा करने वाले हों, शहद,गोंद या लाख इकट्ठा करने वाले बहुत गरीब परिवार से आते हैं । उनको भी इसका लाभ मिले, ऐसा मेरा आग्रह है ।

         मेरे क्षेत्र में बहुत बड़ी सीमेंट इंडस्ट्री है । खान और पत्थर उद्योग में काम करने वाले मजदूरों को सिलिका से सिलिकोसिस रोग और कई गंभीर बीमारियां हो जाती हैं । ऐसे श्रमिकों के इलाज को इसके माध्यम से जोड़ा जाना चाहिए ताकि  श्रमिकों को इसका लाभ मिल सके । श्रमिक खतरनाक स्तर पर काम करता हैं । बॉयलर, चिमनी, जोखिम भरी मशीनों का काम करते हैं । गंभीर उद्योगों में काम करते हुए कई बार बॉयलर,चिमनी फट जाती है, इससे जन हानि होती है । ऐसे में उनकी सुरक्षा की चिंता करने की जरूरत है । ऐसी स्थिति में स्टेट कई बार एग्जम्पशन दे देती है, इसके कारण मजदूरों को इसका लाभ नहीं मिल पाता है ।

मैं मंत्री महोदय से कहना चाहता हूं कि राज्य सरकार को इस अधिकार से मुक्त कराएं, क्यों कि वह एग्जम्प्ट कर देंगे तो हजारों श्रमिकों को लाभ नहीं मिल पाएगा ।

मैं पुन: माननीय मंत्री जी और प्रधान मंत्री जी का आभार व्यक्त करना चाहता हूं कि आज के ऐतिहासिक दिन में बहुत बड़ा निर्णय हो रहा है ।

 

श्री रमेश बिधूड़ी (दक्षिण दिल्ली): माननीय सभापतिजी, आपनेमुझे माननीयमंत्री, श्रीसंतोष गंगवारद्वारा प्रस्तुतउपजीविकाजन्यसुरक्षा, स्वास्थ्य औरकार्यदशा संहिता,2020, औद्योगिकसंबंध संहिता, 2020 और सामाजिकसुरक्षा संहिता, 2020 विधेयक कीचर्चा में भागलेने और औरदेश की आबादीके सेंसटिव लोग,जो लंबे समयसे प्रताड़ितहो रहे थे,के बारे मेंबोलने का मौकादिया, इसकेलिए मैं धन्यवाददेता हूं ।

         माननीय सभापतिजी, अच्छाहोता अगर विपक्षके लोग यहांबैठे होते ।यह बिल एक सालपहले आ गयाहोता । मजदूरोंके अधिकार एकसाल छिन गएहैं तो इसकीजिम्मेदार कांग्रेसहै । वर्ष 2019में यह बिलआया था । उनकाकहना था किइसे और स्टडीकिया जाए, स्टैंडिंग कमेटीमें भेजा जाए । उनकी सिफारिशपर इसे स्टैंडिंगकमेटी में भेजदिया गया । स्टैंडिंगकमेटी द्वारासारी त्रुटियांनिकालकर जब यहबिल आया तोवे किसानों केनाम पर बाहरभाग गए । वेकिसानों को भ्रमितकरने का  प्रयासकर रहे हैं ।आज अगर कांग्रेसमजदूरों की हितैषीपार्टी होतीतो इस बिल कासमर्थन करती । वे नहीं चाहतेथे कि यह बिलआज आए, वेचाहते थे औरलटक जाए, इसलिए  बॉयकॉटकरके कांग्रेसीलोग … *          वर्ष 2020में लेबर श्रमकमीशन के माध्यमसे रिपोर्ट पांचप्वाइंट्स लेकरआई थी, जिसमेंसेफ्टी, हैल्थ,वर्किंग कंडीशनआदि थे । आजमाननीय मंत्रीगंगवार जी माननीयप्रधान मंत्रीके नेतृत्व मेंबिल लेकर आएहैं, मैंइस बिल के माध्यमसे उन्हें बधाईदेना चाहता हूं । हमारे देशमें वर्ष 2004से 2014 तककांग्रेस सरकाररही । दस सालतक कमीशन कीरिपोर्ट पर इनकेमुंह से एकशब्द भी नहींनिकला और येअपने को गरीबोंकी पार्टी औरहितैषी बतातेहैं । ये अभीभी किसानों कोबरगला रहे हैंकि गरीबों केअहित में निर्णयआ रहे हैं ।जो बिल आयाहै, अगर इसेकोई स्टडी करेगातो पाएगा कियह 100 परसेंटकिसानों के हकमें है ।

         महोदय, मैंआपके माध्यमसे कहना चाहताहूं कि 42करोड़ वर्करअनऑर्गेनाइजसैक्टर में रहतेहैं । 42 करोड़लेबर क्लास केलोग हैं । इसदेश में इनलोगों को हकऔर अधिकार 50सालों से नहींमिल पाए थे ।आज अगर किसीको काम पर अगररखना है तोउसे एपाइंटमेंटलैटर मिलेगा । एपाइंटमेंटलैटर मिलने केबाद अगर उसेनिकाला जाएगातो बंधुआ मजदूरसमझकर नहीं निकालाजाएगा, कंपनीको पहले 60 दिनका नोटिस देनापड़ेगा ।

         माननीय अध्यक्षजी, मैं पुन:माननीय गंगवारजी को धन्यवाददेते हुए आभारव्यक्त करताहूं । मैं पिछलीबार कन्सलटेटिवकमेटी का मैम्बरभी रहा था ।मैंने तब भीसुझाव दिया थाकि जैसे चाइल्डलेबर का लॉहै और हर कंपनी,हर प्रतिष्ठानके सामने बोर्डलगा होता हैकि 18 सालसे कम आयु केकर्मचारी कोनहीं रखा जाताहै, ऐसे हीमिनिमम वेजिससैलरी मिलनीचाहिए । इसमेंयह प्वाइंट जोड़ाजाना चाहिए ।हर कंपनी, हर संस्था केसामने लिखा होकि यहां मिनिममवेजिस दिया जाताहै । कांट्रेक्टबेसिस पर जिनलोगों को रखतेहैं, उनकोपूरी सैलरी नहींदी जाती है ।उन्हें 10,000, 12,000रुपये दिएजाते हैं । इसदेश में आजभी मजदूरों काशोषण हो रहाहै, इससेउनका बचाव होजाएगा ।

         मेरा निवेदनहै, डैथके बाद के बारेमें कहा गयाहै कि 50 परसेंट कम्पेनसेशनदिया जाएगा ।अगर किसी मजदूरकी डैथ हो जातीहै, उस गरीबकी सुनता कौनहै? हर राज्यमें कम से कमसरकारी पैनलपर दस वकीलरखे जाने चाहिए । साउथ दिल्लीकहने को तोसाउथ दिल्लीहै लेकिन 50परसेंट आबादीगरीबों की हैं । मैं उनकी पीड़ाजानता हूं ।इंडस्ट्री मेंकाम करने वालेमजदूर हमारेपास आते हैं,हर राज्य मेंउनके लिए पैनलाइजएडवोकेट फिक्सकिए जाएं । अगरराज्य सरकारेंगरीबों की हितैषीहै, अगर किसीमजदूर के साथमिसहैपनिंग होजाए तो इन वकीलोंके माध्यम सेलड़ाई लड़ सकेंऔर अपने अधिकारले सकें ।

         आपने एपाइंटमेंटलैटर की बातकह दी, दोमहीने पहले हैल्थचैकअप की बातकह दी । डेलीवेजेज और कांट्रेक्टबेसिस पर कामकरने वाले लोगोंके हित के बारेमें सारी बातेंकह दीं, लेकिनउन मजदूरों केहक और अधिकारदिलाने के लिएनिश्चित रूपसे एकाउंटेबिलिटीफिक्स होनी चाहिए । अगर किसी लेबरअफसर के खिलाफकिसी मजदूर नेदस कम्पलेंट्सकर दीं और कोईएक्शन नहीं लियागया तो एकाउंटेबिलिटीफिक्स होनी चाहिए, उसेसजा मिलनी चाहिए ।

         मैं यही बातकहकर अपनी वाणीको विराम दूंगा । आपने मुझेबोलने का मौकादिया, इसकेलिए बहुत धन्यवाद ।

                                                                                                              

श्री जगदम्बिका पाल (डुमरियागंज):माननीय सभापतिजी, मैंआपका बहुत आभारीहूं । माननीयसदस्यों ने जोमहत्वपूर्ण सुझावदिए हैं, मैंउनकी पुनरावृत्तिनहीं करना चाहूंगा ।

         मैं आपकेमाध्यम से सरकारऔर माननीय मंत्रीजी को इस बातके लिए बधाईदेता हूं किवे तीन कोडलेकर आए हैं । उन्होंने इंट्रोडक्टरीरिमार्क्स मेंकहा था कि किसतरह से श्रमकानूनों पर कामकिया है । वैश्विकचुनौती में मानसूनसत्र हो रहाहै, अगलेसौ वर्ष बादकभी इस सत्रके इतिहासकारइसका विश्लेषणकरेंगे तो शायदइतिहास में हमेशाइसी बात केलिए याद कियाजाएगा । भारतके सबसे महत्वपूर्णदो सैक्टर्सहैं – एक सैक्टरकिसानों का हैऔर दूसरा देशके संगठित औरअसंगठित श्रमिकोंका है । हमेशायाद किया जाएगाकि इन दोनोंबातों के लिएऐतिहासिक औरक्रांतिकारीकदम उठाए गएथे तो माननीयनरेन्द्र मोदीजी के नेतृत्वमें सरकार नेउठाए थे ।

         मजदूर तोलगातार संघर्षकर रहा है ।मैं आपका ध्यानआकृष्ट करनाचाहता हूं, पहलीबार मजदूरोंने क्रांति रोमनसरकार के खिलाफ1789में फ्रांसमें स्पार्टकसगुलाम ने कीथी और दासताकी जंजीरों सेमुक्ति दिलाईथी । यह पहलीक्रांति मानीजाती है । शिकागो,1 मई, 1886 दूसरीक्रांति मानीजाती है । ब्लादिमिरलेनिन की 1917में रूस कीक्रांति तीसरीमानी जाती है । आप यकीन कीजिएकि चौथी क्रांतिश्रमिकों केहित में मानीजाएगी जब हमयह तीनों विधेयकपारित करेंगे ।

         अभी तक मजदूरको क्या कहाजाता है?हम डिग्निटीऑफ लेबर कीबात करते हैं,श्रम के महत्वकी बात करतेहैं, लेकिनआज भी मजदूरको हम कहतेहैं कि यह श्रमबेचने वाला है । इस बिल केपहले लोग मजदूरको अपना श्रमबेचने वाला मानतेहों या कहतेहों, इस विधेयकके पारित होनेके बाद अब मजदूरके श्रम परअपना अधिकारहोगा, यहएक क्रांतिकारीपरिवर्तन होनेजा रहा है ।

         वर्ष 2020का बिधूड़ीजी ने उल्लेखकिया । वर्ष2002 में श्रमसुधारों के लिएलॉ कमीशन औरलेबर कमीशन ने  सुझावदिया था, लेकिन वर्ष2002 से अब तकशायद इस परकल्पना नहींहुई । माननीयअटल जी ने एकसपना देखा थाऔर उस पर कामशुरू हुआ था । मैं आज कहनाचाहता हूं किमाननीय अटल जीका सपना थाकि श्रम मेंसुधार हो, उनके सपने कोसाकार करने काकाम नरेन्द्रमोदी जी कीसरकार ने कियाहै । नि:संदेहयह एक ऐतिहासिकक्षण है किअभी तक शैड्यूलएम्पलायमेंटमें रहते थे,उनको ही न्यूनतमवेतन देने कीगारंटी रहतीथी । चाहे वे संगठित हों या असंगठित हों । मैं अपनी बात कह दूं । मैं ज्यादा समय नहीं लूंगा । मैं श्रम सगठनों से जुड़ा हुआ हूं, इसलिए मैंने आपसे आग्रह किया था ।

         मैं कहना चाहता हूं कि 28 अक्तूबर, 2003 को, जब साहिब सिंह वर्मा जी लेबर मिनिस्टर थे, अटल जी की सरकार थी, उस समय श्रम सुधारों के संबंध में एक बैठक हुई थी । मैं भी लगातार श्रम मंत्री गंगवार जी के साथ बैठक करता रहता हूं । उस समय भारतीय रेलवे मजदूर संघ माल गोदाम के जो श्रमिक थे, जो आज भी देश में चार लाख हैं, जिस समय पूरे भारत में लॉकडाउन था, आप कल्पना कीजिए, फैक्ट्रियां जहां थीं, वहीं ठप हो गईं, रेलगाडियां बंद हो गईं, जहाज बंद हो गया,ट्रांसपोर्ट बंद हो गया । सारा देश स्थिर हो गया था ।

माननीय सभापति: अबआप अपना भाषणसमाप्त कीजिए ।

श्री जगदम्बिका पाल: मैंएक बात कहकरअपनी बात खत्मकर रहा हूं ।मंत्री जी इसपर जवाब देंगे, उसकेबावजूद भी कन्याकुमारीसे कश्मीर तकलोगों के घरोंमें अनाज पहुंचायागया । जब सरकारने फैसला लियाकि लॉकडाउन मेंआबाध गति सेमाल गाड़ियांचलेंगी तो उसलॉकडाउन मेंउन श्रमिकोंने लोडिंग-अनलोडिंगका काम किया । कोरोना केडर के बावजूदभी कहीं एकदिन भी किसीपरिवार में खाद्यानकी कमी नहींहुई । आज मैंमंत्री जी सेचाहता हूं किजब वे उत्तरदें, आपनेइस बिल मेंसबके बारे मेंकहा है ।

 

माननीय सभापति: प्लीज पाइंट्समें बात कीजिए,बात का विस्तारमत कीजिए ।

श्री जगदम्बिका पाल: रेलवेके माल गोदामके जो श्रमिकहैं, माननीयमंत्री जी अपनेउत्तर में बतादेंगे कि आखिरइनका पीस रेटहोगा या इनकोवह सुविधा होगी, जोएक राज्य सेदूसरे राज्यमें माल गोदामपर काम करतेहैं, आपनेइस विषय परकई बैठकें कीहैं ।

 

श्री मनोज तिवारी (उत्तर पूर्व दिल्ली): माननीयसभापति जी, आपनेहमें इस ऐतिहासिकबिल पर बोलनेका मौका दिया, इसकेलिए मैं आपकाधन्यवाद करताहूं । चूंकिमैं फिल्म कामगारोंके एलाइड यूनियनका पदाधिकारीभी रहा हूं, इसलिए, मैंप्रसन्नतापूर्वकयशस्वी प्रधानमंत्री जी औरमाननीय मत्रीजी के प्रतिआभार व्यक्तकरता हूं । जबउन्होंने ‘वननेशन, वनराशन कार्ड’ योजनाकी शुरुआत कीथी, तभीपता लग गयाथा कि एक‍बड़ा विजनडॉक्यूमेंट आनेवाला है । जिनमजदूर भाईयोंको अपने अधिकारोंकी जानकारी नहींहै, पूरासदन इस बातको कह रहा था, मैंसभी एम्प्लॉयजसे, मजदूरोंसे, फिल्मकामगारों से, महिलाकर्मचारियोंसे कहना चाहताहूं कि आप इसबिल को गीता-कुरानकी तरह पढ़ें । आप इसको जितनाअध्ययन करेंगे, उतनाही आपके जीवनमें ऐतिहासिकबदलाव आएगा ।यह अच्छा हैकि मेरे बोलते-बोलतेआसन में परविर्तनहो रहा है ।

18.58 hrs                      (Shrimati Rama Devi in the Chair) यहबहुत सुखद है । जैसा कहा गयाहै कि इसमेंप्रदेश को बहुतअधिकार है किइसको कैसे लागूकरना है, कैसेनहीं । लेकिन, जबहम दिल्ली केसांसद के रूपमें यह देखतेहैं, मैंमाननीय सभापतिजी के माध्यमसे मंत्री जीको याद दिलानाचाहूंगा कि यहांकंस्ट्रक्शनलेबर्स हैं ।कंस्ट्रक्शनलेबर्स के लिएतमाम वेलफेयरकी योजनाएं हैं । लेकिन, प्रश्नउठता है किकंस्ट्रक्शनलेबर्स कौन है, उसकीपरिभाषा क्याहै? ऐसे-ऐसेलोगों को कंस्ट्रक्शनलेबर्स का प्रमाण-पत्रदे दिया जाताहै, जो वास्तवमें कंस्ट्रक्शनलेबर्स होतेही नहीं है ।

         माननीय सभापतिजी, मैं आपकेमाध्यम से मंत्रीजी को बतानाचाहूंगा कि प्रदेशोंको अधिकार है,लेकिन एक ऐसीव्यवस्था भीहोनी चाहिए,जिससे पताचल सके कि कुछलोग सिर्फ कल्याणकी राशियों काउपभोग करने केलिए ही मजदूरका प्रमाण-पत्र न प्राप्तकर लें । इसकाभी हमें ध्यानरखना है, क्योंकि हमारेदिल्ली में लगभगतीस हजार करोड़रुपये, जोकंस्ट्रक्शनसेस में आतेहैं, उसकेदुरुपयोग कीबात आई है,या तो उसकादुरुपयोग होताहै या उसकाउपयोग ही नहींहोता है । मैंमाननीय मंत्रीजी को धन्यवाददेता हूं, चूंकि हम लोगभी एक मजदूरही हैं । वैसेतो लोग हमेंजानते हैं किमैं सिनेमा सेआया हूं, मैं स्टार हूं । 

माननीय सभापति: सभाकी सहमति होतो हम सभा कीकार्यवाही नौबजे तक बढ़ासकते हैं?

अनेक माननीय सदस्य: हां ।

माननीय सभापति: ठीकहै ।

19.00 hrs श्री मनोज तिवारी : सभापति महोदया, धन्यवाद । मैं अपनी बात इस पंक्ति के साथ कहना चाहता हूं,क्योंकि यह मजदूरों के लिए और कर्मचारियों के लिए बहुत बड़ा दिन है । मैं एक अंतिम प्रार्थना करना चाहता हूँ कि बार-बार उत्तर प्रदेश,बिहार और झारखंड से जो मजदूर बाहर जाते हैं, उन्हें प्रवासी मजदूर क्यों कहा जाता है? हम प्रवासी कैसे हो गए? हमने प्रवासी सम्मेलन को देखा था, जिसमें दुनियाभर के लोग आए थे तो फिर मजदूर प्रवासी कैसे हो गए? हमें यह शब्द बहुत वेदना देता है । हम मजदूर हैं, हम कर्मचारी हैं, अपने प्रदेश से बाहर जाकर अन्य प्रदेशों में काम करते हैं तो मैं माननीय मंत्री जी से कहूँगा कि इस भावना को भी समझा जाए । हमें जब कई बार प्रवासी कहां जाता है तो अटैक का डर लगता है । जब कोरोना जैसा संकट होता है तो हमारे साथ बहुत भेदभाव होता है । हमें 1100-1100 किलोमीटर पैदल चलकर घर जाना पड़ता है । ऐसा उदाहरण भी मिला है कि प्रदेश हमारी जिम्मेदारी नहीं लेता है । इसलिए इस बिल पर बहुत खुशी व्यक्त करते हुए और यह भी चाहते हुए कि आप इन सब छोटे बिन्दुओं का ध्यान रखेंगे,मैं कहना चाहता हूँ कि यह बिल एतिहासिक है । यह बिल महिलाओं और सभी लोगों को बहुत बड़ी सुरक्षा देने वाला है । आपने मुझे बोलने के लिए समय दिया,उसके लिए बहुत-बहुत धन्यवाद ।

   

डॉ. निशिकांत दुबे (गोड्डा):सभापति महोदया, आपनेमुझे बोलने कामौका दिया, उसकेलिए बहुत-बहुतधन्यवाद । आजका दिन भारतके इतिहास मेंसचमुच एक एतिहासिकदिन है, क्योंकिहमारे नेता माननीयश्री नरेन्द्रमोदी जी कहतेकम है और करतेज्यादा हैं ।चूंकि सामनेकोई कांग्रेसके मित्र नहींहैं ।

सभापतिमहोदया, इनकाहमेशा से इतिहासरहा है कि बोलनाज्यादा है औरकरना कुछ भीनहीं है । आपकोध्यान होगा, इन्होंनेवर्ष 1971 मेंकहा था कि हमगरीबी हटा देंगे,गरीबी हटादेंगे, लेकिनइनके द्वारागरीबी तो हटीनहीं, बल्किइन्होंने गरीबको ही हटानेका पूरा प्लानबना लिया । हम50 साल केबाद आज भी गरीबऔर मजदूर कीही बात कर रहेहैं । संयोगसे मेरे बगलमें उदासी साहबआकर बैठ गएहैं । लेबर केनाम पर कांग्रेसने जो गलत कामकिया, आपउसका अंदाजानहीं लगा सकतेहैं । इस बिलको लाने कीआवश्यकता क्योंपड़ी अगर आपजानना चाहेंगेतो इसकी तहमें जाना पड़ेगा । हम पीएसी कमेटीमें साथ मेंथे और सीएजीकी एक रिपोर्टदेख रहे थे ।उस वक्त श्रमके जो मंत्रीथे, यहांपर लीडर ऑफद अपोजिशन भीरहे हैं औरअभी राज्य सभाके सदस्य भीहैं । मैं नामनहीं लेना चाहताहूँ । संयोगसे वही पीएसीके चैयरमेन थे । लेबर के नामपर जो पैसाईएसआईसी मेंजमा हुआ, उसके नाम परउन्होंने हॉस्पिटलऔर मेडिकल कॉलेजबनाना शुरू करदिया । आश्चर्यतो यह हुआ किहिमाचल में उसीहॉस्पिटल कीकीमत यदि 600करोड़ रुपयेथी तो उनकीकांस्टिटुएसीगुलबर्गा, कर्नाटक में1200 करोड़ रुपयेथी । 1 करोड़बत्तीस लाख रुपयेपर बेड के हिसाबसे हॉस्पिटलबन रहा था ।मजदूरों के साथइतना बड़ा अन्यायमैंने तो अपनीजिंदगी में नहींदेखा । यही कारणहै कि कांग्रेसके मित्र इतनेबड़े बिल परयहां भाषण देनेके लिए नहींहैं । यहां परपिनाकी जी बैठेहैं और उनकाहमने बहुत अच्छासंबोधन सुनाहै । इस देशमें हुआ क्याहै? आज आपदेखिए कि सारीमिल्स, मुम्बईके मिल्स, अहमदाबाद कीमिल्स, सभीमिल्स बिक रहीहैं । सारे टेक्सटाइलमिल्स यहां तककि जूट के मिल्सबिक रहे हैं । इसके पीछेकारण क्या था?यही ट्रेडयूनियन था,यही लेबर था,जो गांव गरीब,किसान को नौकरीदे रहा था ।आज आप समझिएकि पूरे केपूरे मुम्बईमें, पूरेके पूरे कलकत्तामें पूरे बिहारके लोग, उत्तरप्रदेश के लोगऔर झारखण्ड केलोग जाते थे,लेकिन … *जैसेलोग यदि पैदाहोते थे तोउनका एक मात्रउद्देश्य यहरहता था किकंपनी के मालिकको तंग कियाजाए, कंपनीको बंद कर दियाजाए । कंपनीके मालिक कोकोई भी परेशानीनहीं होती थी, क्योंकिपिनाकी भाई आजभी जमीन उन्हींलोगों के पासहै । वे लोगउस जमीन कोबेचेंगे और करोड़पतिहो जाएंगे, लेकिनउसमें काम करनेवाले लेबर कहांहै? आज मजदूरकहाँ चले गएहैं? क्याउसके लिए इसबिल की आवश्यकतानहीं थी? दूसरी बात मैंआपको बताता हूंकि यह एक अच्छाअधिकार है ।मैं सदन कोबताना चाहताहूँ कि मैंचार साल तकआरबीआई एम्पलॉइजएसोसिएशन काअध्यक्ष रहाथा । भारतीयमजदूर संघ कीसंस्था से चैयरमेनरहा था । आश्चर्यकी बात यह हैकि मेरे जैसासांसद होते हुएभी, मैं फाइनेंसकमेटी का मैम्बरथा, पीएसीका मैम्बर था,उसके बावजूदभी मैं अपनीयूनियन को आरबीआईमें मान्यतानहीं दिला पाया ।

वह मान्यता देने का अधिकार केवल आरबीआई यूनिट को था और आरबीआई के गवर्नर ने केवल सीपीएम की यूनियन को, जो भारतीय मजदूर संघ आज देश का सबसे बड़ा मजदूर यूनियन है,  उसका जो कोटा होना चाहिए, रजिस्ट्रेशन होना चाहिए, उसे आज तक आरबीआई ने मान्यता नहीं दी । क्या आप चाहते हैं कि डिसक्रिशन बना रहे? इन सारे कानूनों को यदि आप देखेंगे तो अंदाजा होगा कि भारतीय संस्कृति में, भारतीय सभ्यता में और भारतीय लोकतंत्र में माननीय मोदी जी का कितना बड़ा योगदान है और संतोष गंगवार साहब यहां कितना बड़ा विधेयक लेकर आए हैं ।

         अंत में, मैं जिस राज्य से आता हूं, जिस बात को मनोज तिवारी जी ने शुरू किया, मैं उसे पूरा करना चाहता हूं कि आज देश में माइग्रेंट लेबर की बात होती है । इसमें भी मैं जो परिभाषा देख रहा हूं, उससे मुझे थोड़ी पीड़ा हो रही है,क्योंकि बिहार,झारखण्ड और उत्तर प्रदेश का होने के कारण पीड़ा है कि आप यह समझिए कि गिरमिटिया मजदूर के तौर पर मॉरिशस,सूरीनाम, गायना में जो लोग गए, आज वे उस देश के राष्ट्रपति हैं, प्रधान मंत्री हैं । यदि आप देखेंगे, इसी दिल्ली में अरविंद केजरीवाल जी हरियाणा से आकर दिल्ली के मुख्य मंत्री बन गए । आपको मंत्री बनने में, मुख्य मंत्री बनने में,राष्ट्रपति बनने में, अभी अमेरिका में कमला हैरिस उप राष्ट्रपति पद की कैंडीडेट हैं । जब ऐसी सिचुएशन पूरे देश और दुनिया में है तो हम अपने ही देश में प्रवासी कैसे हो सकते हैं?यदि इतनी बड़ी पार्लियामेंट बिल्डिंग बनी तो इसमें मजदूरों का योगदान है । मैंने उस दिन बजट भाषण में बोलते हुए कहा था कि यदि कोई कंपनी चलती है, कोई बिल्डिंग बनती है तो उसमें लेबर की भी आवश्यकता होती है, कैपिटल की भी आवश्यकता होती है और मार्केट की भी आवश्यकता है । यदि कैपिटल आप उत्तर प्रदेश,बिहार या पूर्वोत्तर भारत से लेकर जाते हैं, यदि आप उसे प्रवासी कैपिटल नहीं कहते हैं तो मजदूरों को प्रवासी मजदूर कहना कहीं से अच्छा नहीं है । मेरा आपके माध्यम से सरकार से आग्रह है कि इस परिभाषा को बदलने का प्रयास करना चाहिए । आपने मुझे समय दिया,इसके लिए धन्यवाद देता हूं । जय हिन्द-जय भारत ।

माननीय सभापति: माननीयमंत्री जी ।

श्री संतोष कुमार गंगवार: धन्यवाद, आदरणीयसभापति जी ।…(व्यवधान)

श्री गिरीश भालचन्द्र बापट (पुणे): मैडम, मैं एक सुझाव देना चाहता हूं ।…(व्यवधान)

माननीय सभापति: मैंने मंत्री जी का नाम बोल दिया है ।

…( व्यवधान)

 

श्री संतोष कुमार गंगवार: आपबाद में मिलकर, मुझेलिखकर दे दीजिए ।  बाद मेंमिल लीजिए ।

         आदरणीय सभापतिजी, श्रीपल्लब लोचन दासजी से लेकरश्री निशिकांतदुबे जी तक17माननीय सदस्योंने अपनी महत्वपूर्णबातें कही हैं । चूंकि हम जानतेहैं कि श्रमसुधारों मेंपरिवर्तन होरहा है, कामहो रहा है ।जैसा अभी एकसाथी ने बतायाकि वर्ष 2003 से यह प्रक्रियाचल रही थी ।जो लोग आज वॉक-आउट कर गए हैं,वे लोग पूरेदस साल तक इसेअपने पास रखेरहे और इसकोआगे बढ़ाने काकाम नहीं किया । यह बात अभीएक साथी नेभी कही थी ।

         मैं श्रीपिनाकी मिश्राजी को धन्यवाददूंगा कि उन्होंनेकुछ महत्वपूर्णबातें बताई हैं । मैं उनको इतनाही बताना चाहताहूं कि परिभाषामें हम ऐसाकोई परिवर्तननहीं कर रहेहैं, जिसमेंराज्य के स्फेयरको हम दूर करदें । बाकी बातेंमैं उनको बतादूंगा । मैंएक अन्य बातयह बताना चाहताहूं । 18 हजाररुपये तक वर्करके वेतन कीपरिभाषा के बारेमें एक बातउन्होंने कहीथी, वह केवलवर्कर के लिएनहीं है, जो सुपरवाइजरकी श्रेणी मेंआ जाते हैं,उनकी बात है । बाकी, वर्करको चाहे जितनावेतन मिले,वह वर्कर कीही श्रेणी मेंआएगा, क्योंकिहम यह मानतेहैं कि जो हवाईजहाज चलाता है,वह भी वर्करमाना जाता है । इसलिए यह बातसमझ में आतीहै, यदि इसमेंकोई विशेष बातहोगी तो हमआपको बताने काकाम करेंगे ।

         जैसा मैंनेकहा, महत्वपूर्णसाथियों ने अपनेविचार रखे हैं, श्रमकानूनों का उद्देश्यअपने इन राष्ट्रनिर्माताओं कोहर प्रकार कीसुरक्षा, सुविधातथा कार्य करनेके लिए बेहतरवातावरण प्रदानकरना है । बाबासाहेब भीम रावअम्बेडकर जीने सर्वप्रथमश्रमिकों केजीवन को बेहतरबनाने के लिए, उन्हेंउचित जीविकादेने, कामकरने के लिएउन्हें सुरक्षितवातावरण देने, श्रमिकोंको व्यापक सुरक्षा, सामाजिकसुरक्षा देनेऔर महिलाओं कोसमान वेतन तथामातृत्व लाभदेने में पहलकी थी । आदरणीयमोदी जी जबआए, तब मातृत्वलाभ में महिलाओंको कैसे छूटमिले, इसपर काम हुआ ।मुझे खूब ध्यानहै कि जब माइन्सकी पढ़ाई करनेवाले बच्चे हमेंमिले, उन्होंनेबताया कि हममाइनिंग मेंइंजीनियरिंगकरते हैं, लेकिनलड़कियों को माइन्समें नौकरी करनेका मौका नहींमिलता है ।

जब प्रधान मंत्री जी को हमने कहा, तो उन्होंने सहर्ष स्वीकार किया और कहा कि अब लड़कियां भी सुरक्षा के साथ माइन्स में नौकरी कर सकती हैं । वास्तव में आदरणीय मोदी जी का यह विजन हम सबकी समझ में आता है । मुझे ध्यान है कि जब श्रम कानूनों में संशोधन की बात चल रही थी,तो हमने जो पहला कानून ‘कोड ऑन वेजेज’ पास किया था । वह इस लोक सभा का पहला कानून था । आदरणीय प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में हमारी सरकार ने बाबा साहब के सपनों को आगे बढ़ाते हुए 2014 में ‘श्रमेव जयते’को ‘सत्यमेव जयते’ के बराबर महत्व देते हुए श्रमिक भाई-बहनों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता स्पष्ट कर दी थी । पिछले छ: वर्षों में हमारी सरकार ने इसी दिशा में अनेकों सार्थक कदम उठाए - जैसे असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को प्रधान मंत्री श्रम योगी मान धन योजना के माध्यम से पेंशन देने का कार्य, महिलाओं के मातृत्व अवकाश को 12 सप्ताह से बढ़ाकर 26 सप्ताह करना, महिलाओं को खदान क्षेत्र में कार्य करने का अधिकार देना,छोटे व्यापरियों को पेंशन देने की सुविधा देने की योजना शुरू करना, देश में प्रधान मंत्री रोजगार प्रोत्साहन योजना के द्वारा फार्मल रोजगार को बढ़ावा देना,श्रमिकों को भविष्य निधि तथा कल्याणकारी योजनाओं की पोर्टेबिलटी सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाना और ईएसआई की सुविधाओं का विस्तार करना आदि । इसी प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए हमने श्रम सुधारों का काम आरम्भ किया ।

         महोदया, श्रमिकों को कार्य का सुरक्षित वातावरण देने के लिए ओएसएच कोड में प्रावधान लाए गए हैं । हमने आक्यूपेशनल सेफ्टी, हैल्थ तथा वेलफेयर के प्रावधानों की एप्लीकेबिलटी को बढ़ाया । ओएसएच कोड के प्रावधान,जो वर्तमान में केवल फैक्टरी,डॉक्स, माइन्स,कंस्ट्रक्शन,प्लांटेशन,बीड़ी, सीगार और मोटर ट्रांसपोर्ट में काम कर रहे श्रमिकों पर ही लागू होते हैं,अब वे आईटी तथा सर्विस सैक्टर सहित सभी सैक्टरों के संस्थानों पर समान रूप से लागू होंगे । ओएसएच कोड में परिभाषाओं को भी व्यापक बनाया गया है । मनोरंजन के क्षेत्र में सिने वर्कर्स की सीमित परिभाषा की तुलना में हमने श्रम कानूनों के दायरे में सभी प्रकार के मनोरंजन माध्यम के श्रमिकों को लाने के लिए आडियो-विजुअल वर्कर्स की परिभाषा का प्रावधान भी किया है । जैसा हमारे साथी तिवारी जी कह रहे थे, इसी प्रकार पत्रकारिता के क्षेत्र में भी डिजीटल मीडिया,इलेक्ट्रोनिक मीडिया इत्यादि में कार्य करने वाले पत्रकारों को भी वर्किंग जर्नलिस्ट की परिभाषा में शामिल किया है । हमारे कुछ माननीय सदस्यों ने प्रवासी श्रमिकों की परिभाषा को सीमित करने की बात कही है । इस विषय में मैं स्पष्ट करना चाहूंगा कि वर्तमान श्रम कानून में प्रवासी मजदूर की परिभाषा में केवल वे ही श्रमिक आते हैं, जो कि एक ठेकेदार के माध्यम से एक राज्य से दूसरे राज्य में लाए जाते हैं । ओएसएच कोड में प्रवासी मजदूर की इस परिभाषा को सुदृढ़ एवं व्यापक बनाया गया है,जिससे अब सभी प्रवासी मजदूर जो एक राज्य से दूसरे राज्य जाते हैं और उनका वेतन 18 हजार रुपये से कम हो, तो वे सभी प्रवासी श्रमिक की परिभाषा के दायरे में आएंगे । अब उन्हें सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ मिल पाएगा ।

         महोदया, मैं आपके माध्यम से सदन को अवगत कराना चाहूंगा कि सरकार प्रवासी मजदूरों के प्रति बहुत ही संवेदनशील है तथा उनके कल्याण के लिए बहुत से प्रावधान ओएसएच कोड में किए जा रहे हैं । इसके अंतर्गत प्रवासी मजदूरों का एक डेटाबेस बनाने का प्रावधान पहली बार कानून में दिया जा रहा है । इन कानूनी प्रावधानों के बाद राज्य सरकारों को अनिवार्य रूप से प्रवासी मजदूरों के सम्पूर्ण डेटाबेस को तैयार करना होगा । प्रवासी मजदूरों को अपने मूल निवास पर जाने के लिए साल में एक बार उनके एम्प्लॉयर द्वारा यात्रा भत्ता दिए जाने का भी प्रावधान किया गया है । प्रवासी मजदूरों के लिए वेलफेयर स्कीम की पोर्टेबिलटी भी सुनिश्चित की जा रही है तथा प्रवासी मजदूरों की समस्याओं के निवारण के लिए कानून में ही हैल्प लाइन की व्यवस्था की गई है । ओएसएच कोड के दायरे में आ रहे श्रमिकों को एक निश्चित आयु के बाद नि:शुल्क हैल्थ चैकअप का अधिकार दिया जा रहा है,जिससे श्रमिकों के प्रिवेंटिव हैल्थ केयर को बढ़ावा मिलेगा ।

19.15 hrs                           (Hon. Speaker in the Chair) ओएसएच कोड में पहली बार श्रमिकों को नियुक्ति पत्र पाने का कानूनन अधिकार दिया गया है, जो अब तक नहीं था । आजादी के 70 वर्षों के बाद भी इनके लिए कोई नियुक्ति पत्र नहीं था ।

         अध्यक्ष महोदय,यदि हम चाहते हैं कि हमारी सुरक्षा के स्टैंडर्ड प्रभावी एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर के हों, तो यह आवश्यक है कि हम उनको समय के साथ गतिशील बनाएं । इसलिए सेफ्टी स्टैंडर्ड को एक त्रिपक्षीय बोर्ड, नेशनल ऑक्युपेशनल सेफ्टी एंड हेल्थ बोर्ड के द्वारा रेकमेंड किया जाए । यह एक नई व्यवस्था की गई है । वर्तमान के श्रम कानून के अनुसार दुघर्टना की स्थिति में जुर्माने की राशि पूरी तरह से सरकार के खाते में जाता है । यह हमें मंत्रालय में आने के बाद पता चला कि अगर कोई जुर्माना एक्सिडेंट के कारण होता है,तो वह पैसा उस व्यक्ति को नहीं मिलता है, वह सरकार के खाते में जाती है, जिसका श्रमिकों को कोई लाभ नहीं मिलता है । परंतु इस नए कानून से पीड़ित श्रमिकों को अन्य लाभों के अलावा जुर्माने की राशि का कम से कम 50 प्रतिशत मिल पाएगा, हम ऐसी व्यवस्था इस कानून में कर रहे हैं । ये सारे नए प्रावधान ओएसएच कोड में हमारे श्रमिकों को सुरक्षित कार्य का वातारण देने के लिए किए गए हैं ।

         अध्यक्ष महोदय,औद्योगिक शांति तथा विकास के लिए श्रमिक तथा एम्प्लॉयर्स के बीच एक सकारात्मक रिश्ता बहुत जरूरी होता है । इसी उद्देश्य से इंडस्ट्रीयल रिलेशंस कोड के प्रावधान हरेक औद्योगिक संस्थान के ऊपर लागू होगा,चाहे उनमें एक ही श्रमिक क्यों न कार्य कर रहा हो । हर औद्योगिक संस्थान के विवादों के शीघ्र निस्तारण के लिए भी कई प्रभावी कदम उठाए गए हैं । उदाहरण   के लिए हमारे ट्रिब्यूनल में अब एक मैम्बर के स्थान पर दो मैम्बर्स का प्रावधान किया गया है । जिससे विवादों के जल्द निस्तारण में और तेजी आए और एक मैम्बर की अनुपस्थिति में भी ट्रिब्यूनल का कार्य चलता रहे ।

मैं यहां माननीय सदस्यों को यह भी स्पष्ट करना चाहूंगा कि आईआर कोड में भी परिभाषाओं को वर्तमान की तुलना में और ज्यादा मजबूत किया गया है । उदाहरण के लिए वर्कर की परिभाषा में सुपरवाइजर की वेतन सीमा को 10हजार रुपये बढ़ा कर अब 18 हजार रुपये कर दिया गया है । इस बदलाव से आज के मुकाबले कहीं ज्यादा सुपरवाइजर्स आईआर कोड की परिधि में आएंगे ।

         अध्यक्ष महोदय, fixed term employment को आईआर कोड में लाने पर मैं यह स्पष्ट करना चाहूंगा कि वर्तमान में भी संस्थान अपनी आवश्यकता अनुसार श्रमिकों को कम समय के लिए कॉन्‍ट्रेक्ट लेबर के रूप में रखते हैं । लेकिन उन्हें नियमित कर्मचारी की भांति सेवा-शर्तें,छुट्टी, वेतन,सामाजिक सुरक्षा इत्यादि नहीं मिल पाते हैं । हमें यह स्वीकार करना होगा कि संस्थानों को अपनी आवश्यकता के अनुसार श्रमिकों को स्वतंत्रता देना आवश्यक है । एक संतुलन बनाते हुए हम ने यह भी सुनिश्चित किया है कि fixed term employees की सेवा शर्तें,वेतन, छुट्टी एवं सामाजिक सुरक्षा भी एक रेग्युलर एम्प्लाई के समान ही होगी ।

आईआर कोड में स्ट्राइक के प्रावधानों के बारे में मैं बताना चाहूंगा कि किसी भी श्रमिक को स्ट्राइक पर जाने का अधिकार आईआर कोड में छीना नहीं गया है । स्ट्राइक पर जाने से पहले 14दिन की नोटिस पीरियड की बाध्यता हर संस्थान पर इसलिए लागू की गई है, जिससे कि इस अवधि में सौहार्दपूर्ण बातचीत के माध्यम से विवाद को समाप्त करने का प्रयास किया जा सके । श्रमिकों को स्ट्राइक पर जाने से न तो श्रमिकों का और न ही इंडस्ट्री का कोई लाभ होता है ।

जहां तक आईआर कोड में रिट्रेंचमेंट क्लोजर या ले ऑफ में थ्रेशहोल्ड को बढ़ाने की बात है, तो मैं बताना चाहूंगा कि श्रम एक समवर्ती सूची का विषय है और संबंध‍ित राज्‍य सरकारों को भी अपनी परिस्थितियों के अनुसार श्रम कानूनों मे परिवर्तन करने का अध‍िकार है । इसी थ्रेशहोल्ड की सीमा को राजस्थान,महाराष्ट्र,आंध्र प्रदेश सहित 16 राज्य पहले ही अपने यहां बढ़ा चुके हैं । थ्रेशहोल्ड की सीमा इन राज्यों ने अपने-आप ही 300 की संख्या तक कर दी है । इस प्रावधान का एक पक्ष यह भी है कि ज्यादातर संस्थान 100 से ज्यादा श्रमिकों को अपने संस्थान में नहीं रखना चाहते, जिससे अनौपचारिक रोजगार को बढ़ावा मिलता है ।

अध्यक्ष महोदय, इस एक प्रावधान को बदलने से देश में बड़ी-बड़ी  फैक्ट्रियों को स्थापित करने के लिए निवेशक प्रेरित होंगे और ज्यादा संख्या में बड़ी फैक्ट्रियों के स्थापित होने से रोजगार के ज्यादा अवसर हमारे देश में श्रमिकों के लिए उत्पन्न होंगे ।

  माननीय अध्यक्ष जी, श्रमिकों को उनका अधिकार दिलाने के लिए ट्रेड यूनियंस के योगदान को हमने समझा और स्वीकार किया है । इसी वजह से पहली बार उनकी सहभागिता को व्यवस्थित करने के उद्देश्य से उनको संस्थान स्तर, राज्य स्तर और केन्द्र स्तर, यानी तीन स्तरों पर कानून में मान्यता दी गई है ।

         हमारी सरकार अपनी जिम्मेदारी समझती है । जिन्होंने अच्छे समय में देश के विकास में योगदान दिया है,उनके कठिन समय में बीमारी, बेरोज़गारी,दुर्घटना, वृद्धावस्था जैसी समस्याओं का सामना करने के लिए अकेला नहीं छोड़ा जाएगा । हमें अपने देश में धीरे-धीरे यूनिवर्सल सोशल सिक्योरिटी प्रणाली की व्यवस्था करनी है ।

         अध्यक्ष महोदय,वर्तमान में संगठित क्षेत्र के श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने के लिए ईएसआईसी और ईपीएफओ सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं । अब हमारा उद्देश्य है कि सामाजिक सुरक्षा के दायरे में सभी 50 करोड़ श्रमिकों को लाया जाए । इस उद्देश्य की प्राप्ति के लिए सामाजिक सुरक्षा कोड के अंतर्गत हमने प्रयास किया है कि ईएसआईसी के अंतर्गत मिलने वाली सामाजिक सुरक्षा को असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों तक भी पहुंचाया जाए । इसी अनुक्रम में ईएसआईसी के विस्तार के लिए निर्णय लिया गया है कि इसकी सुविधाएं देश की सभी 740 जिलों में दी जाएंगी । वर्तमान में ईएसआईसी की सुविधाएं केवल उन संस्थानों को मिल पाती हैं,जिनमें दस या उससे अधिक श्रमिक कार्य कर रहे हैं । सामाजिक सुरक्षा कोड में अब यह प्रावधान किया गया है कि हेज़ार्डस यानी जोखिम वाले क्षेत्रों में कार्य कर रहे संस्थानों को ईएसआईसी की सुविधाएं अपने श्रमिकों को अनिवार्य रूप से प्रदान करनी होगी, चाहे उनके संस्थान में केवल एक ही श्रमिक क्यों न काम कर रहा हो । बागानों में काम कर रहे श्रमिकों को ईएसआईसी की सुविधाओं का लाभ मिले, अब इसका विकल्प भी प्रदान किया जा रहा है । आज तक ईएसआईसी की सुविधाओं से बागान में काम कर रहे श्रमिक वंचित रहे । काफी समय से मांग रही है कि इन श्रमिकों को भी ईएसआईसी के दायरे में लाने का विकल्प दिया जाए । इसके अनुरूप ही यह निर्णय लिया गया है और मुझे लगता है कि बागान क्षेत्र के सांसद महोदय जो समस्याएं लेकर आते हैं,वे इससे कम संतुष्ट नजर आते हैं, पर हम उनकी बातों को समझते हैं,उनका ध्यान रखते हैं, उनको शिकायत का मौका न मिले,इसके लिए हम चिन्ता करते हैं ।

         असंगठित क्षेत्र,गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को भी ईएसआईसी के दायरे में लाने के लिए योजना बनाने का प्रावधान किया गया है । इसके अतिरिक्त ऐसे संस्थान,जहाँ दस से कम श्रमिक काम कर रहे हैं, उन संस्थानों को भी स्वेच्छा से ईएसआईसी का मेम्बर बनाने का विकल्प इस कोड में दिया जा रहा है, जिससे छोटे उद्योग भी ईएसआईसी से जुड़ सकें ।

         मैं आपके माध्यम से सदन को जानकारी देना चाहूंगा कि जहाँ एक ओर ईएसआईसी के कवरेज को बढ़ाने के लिए कई प्रयास किए गए हैं, वहीं साथ-साथ कर्मचारी भविष्य निधि यानी ईपीएफ  से संबंधित  सामाजिक सुरक्षा के दायरे को बढ़ाने के लिए भी इस कोड में प्रावधान किए गए हैं । वर्तमान में केवल शेड्यूल में आ रहे ऐसे संस्थान,जिनमें 20 या उससे अधिक श्रमिक कार्य कर रहे हैं, वे ही ईपीएफ के दायरे में आते थे । शेड्यूल को हटा देने के कारण अब वे सभी संस्थान, जिनमें 20 या उससे अधिक श्रमिक हैं, वे भी ईपीएफ के दायरे में आएंगे । साथ ही, वे संस्थान जिनमें 20 से कम श्रमिक हैं, उनके लिए ईपीएफ का सदस्य स्वेच्छा से बनने का विकल्प सामाजिक सुरक्षा कोड में रखा गया है । इसके अतिरिक्त स्वरोजगार वाले श्रमिकों के लिए भी ईपीएफ का कवरेज देने के लिए भी योजना बनाई जाएगी ।

         अध्यक्ष महोदय जी, असंगठित क्षेत्र में काम कर रहे 40 करोड़ श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा देने के लिए पहली बार एक सामाजिक सुरक्षा फंड का प्रावधान भी किया गया है । इस फंड के द्वारा असंगठित क्षेत्र में कार्य कर रहे श्रमिक जैसे गिग वर्कर्स तथा प्लेटफॉर्म वर्कर्स के लिए सामाजिक सुरक्षा की योजना बनाई जाएगी । इससे इन 40 करोड़ भाई-बहनों को सामाजिक सुरक्षा से संबंधित सभी प्रकार के लाभ, जैसे मृत्यु बीमा, दुर्घटना बीमा, पेंशन,मातृत्व लाभ आदि प्रदान की जाएंगी । इन सभी नये प्रावधानों के द्वारा हमने एक यूनिवर्सल सोशल सिक्योरिटी कवरेज के अंतर्गत अपने संकल्प को पूर्ण करने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं ।

         अध्यक्ष महोदय,माननीय सदस्यगण इस बात से सहमत होंगे कि श्रमिक और उद्योग एक-दूसरे के पूरक होते हैं । अनुपालन की व्यवस्था को ज्यादा पारदर्शी,जवाबदेह और सरल बनाने के लिए हमने चारों लेबर कोड्स में एक समान प्रावधान रखे हैं । पहली बार अब संस्थानों को श्रम कानूनों के अंतर्गत आठ रजिस्ट्रेशन लेने के स्थान पर चारों लेबर कोड्स में केवल एक ही रजिस्ट्रेशन लेना होगा ।

         इसी प्रकार अलग-अलग कानूनों के अंतर्गत तीन या चार लाइसेंसेज़ लेने के स्थान पर केवल एक ही लाइसेंस की व्यवस्था की जा रही है । अनुपालन की व्यवस्था की जटिलता का एक और उदाहरण यह है कि वर्तमान में श्रम कानून के अनुसार 75 से भी अधिक रजिस्टर्स रखने पड़ते थे और 50 से अधिक रिटर्न्स फाइल करनी पड़ती थीं और एक ही सूचना अलग-अलग अथॉरिटीज़ को बार-बार देनी पड़ती थी । अब चारों लेबर कोर्ट्स में रजिस्टर्स तथा रिर्टन्स की संख्या में अभूतपूर्व कमी आई है । जहां तक संभव है, इसे ऑनलाइन फाइल करने की सुविधा भी दी जाएगी ।

         अध्यक्ष महोदय,श्रमिक और एम्प्लायर्स को श्रम कानूनों की पर्याप्त जानकारी होगी तो इसका बेहतर अनुपालन संभव हो पाएगा । इसको ध्यान में रखते हुए अब हमने इन्सपैक्टर को इन्सपैक्टर-कम-फैसिलिटेटर के रूप में दोहरी जिम्मेदारी दी है, जिसके अंतर्गत वह नियोक्ता तथा श्रमिक – दोनों को कोर्ट के अंतर्गत,उनके अधिकारों और उनकी जिम्मेदारियों की जानकारी देते हुए उनके लिए एक सहयोगी की भूमिका निभाएंगे । निरीक्षण तंत्र को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने की सोच से एक रैन्डम वेब-बेस्ड इन्सपैक्शन सिस्टम लाने का प्रावधान भी सभी कोर्ट्स में किया जा रहा है, जिससे श्रमिकों को उनके कानूनी अधिकार वास्तव रूप से मिल सकें ।

         आदरणीय अध्यक्ष जी, सालों तक लंबित रहने वाले मामलों को जल्दी निपटाने के उद्देश्य से सभी लेबर कोर्ट्स में कंपाउंडिंग का प्रावधान किया गया है, जिससे ट्रिब्युनल और न्यायालयों में लंबित मामलों की संख्या में काफी कमी आई है । कंपाउंडिंग में प्राप्त धनराशि को असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए बनाए गए सोशल सिक्योरिटी फंड में जमा करने का प्रावधान किया गया है, जिससे असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान की जाएगी ।

सभी लेबर कोर्ट्स में पैनल्टी की राशि को कई गुना बढ़ाया गया है, जिससे सही अर्थों में यह एक डिटरेंट की तरह साबित हो । अनुपालन व्यवस्था को समयबद्ध करने हेतु भी कोर्ट में कई प्रावधान किए गए हैं । उदाहरण के लिए वर्तमान में ईपीएफ तथा ईएसआईसी एक्ट के अंतर्गत होने वाली कार्यवाही को पूर्ण करने के लिए कोई समय सीमा नहीं थी । अब इन इंक्वायरीज को पूर्ण करने के लिए दो वर्ष की समय सीमा निर्धारित की गई है, जिसे विशेष परिस्थितियों में अधिकतम एक वर्ष और बढ़ाया जा सकता है ।

आदरणीय अध्यक्ष जी, कुछ माननीय सदस्यों ने यह भी कहा कि हमने कई विस्तृत विषयों को कानून में न रखकर नियम बनाने का प्रावधान किया है । मैं इस विषय को स्पष्ट करना चाहूंगा कि बदले हुए समय के साथ-साथ सहजता से बदलाव करने के लिए आवश्यक है कि कानून में फ्लैक्सिबिलिटी रहे । उदाहरण के लिए आज फैक्ट्री एक्ट में सीढ़ी,लिफ्ट, गियर इत्यादि की स्पेसिफिकेशंस तक कानून का हिस्सा हैं । यानी अगर कहीं सीढ़ी या लिफ्ट बदलनी है तो कानून में परिवर्तन करना होगा । इसे नियमों में लाकर समय के साथ-साथ आसानी से परिवर्तित किया जा सकेगा ।

माननीय अध्यक्ष जी, इसी प्रकार कई परिभाषाओं में वेतन सीमा के कानून में होने के कारण कई वर्षों तक आर्थिक स्थिति बदलने के बावजूद भी आसानी से नहीं बदला जा सका है । इसलिए कानून में बदलते परिवेश के सापेक्ष फ्लेक्सिबिलेटी रखना उचित है । आज हम एक ऐसे ऐतिहासिक दिन के साक्षी बन रहे हैं, जब देश में काम कर रहे 50 करोड़ श्रमिकों को आजादी के 73 वर्षों के बाद वेतन सुरक्षा,सामाजिक सुरक्षा,कार्य स्थल पर उचित वातावरण तथा उत्तरदायी विवाद निष्पादन व्यवस्था देने का कार्य लेबर कोर्ट्स के माध्यम से किया जा रहा है । यह इसीलिए संभव हो पा रहा है, क्योंकि हमारे देश को एक जवाबदेह प्रधान मंत्री मिला है,जो हर बात को सोचता और समझता है और तुरंत फैसला लेता है ।

आदरणीय अध्यक्ष जी, मैं आप सभी साथियों का आभार भी व्यक्त करना चाहूंगा । आप सब माननीय सदस्यों से मेरा आग्रह है कि कामकाज के वर्तमान परिवेश में श्रमिकों के कल्याण की इस यात्रा में आप राजनीतिक हितों से ऊपर उठकर,सर्वसम्मति से इन तीनों बिलों - The Occupational Safety, Health And Working Conditions Code, 2020, The Industrial Relations Code, 2020 and The Code On Social Security, 2020 – को सर्वसम्मति से पास करने की कृपा करें ।

आप सबका बहुत-बहुत धन्यवाद ।

माननीय अध्यक्ष: प्रश्नयह है:

“किकिसी स्थापन में नियोजित व्यक्तियों की उपजीविकाजन्य सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्यदशाओं को विनियमित करने वाली विधियों को समेकित और संशोधित करने तथा उससे संबंधित या उसके आनुषंगिक विषयों वाले विधेयक पर विचार किया जाए ।” प्रस्ताव स्वीकृत हुआ ।
माननीय अध्यक्ष: माननीयसदस्यगण, मदसंख्या – 14, इस विधेयकपर अनेक सदस्योंके संशोधन परिचालितकिए गए हैं ।चूंकि इनमेंसे कोई भी सदस्यअपने संशोधनप्रस्तुत करनेके लिए सभामें उपस्थितनहीं है, इसलिए मैं विधेयकके खंड एक साथसभा के मतदानके लिए रखूंगा ।
अबसभा विधेयक परखण्डवार विचारकरेगी ।
   
खंड 2 से 143 माननीय अध्यक्ष: प्रश्न यह है:
“कि खंड 2 से 143 विधेयक का अंग बने ।” प्रस्ताव स्वीकृत हुआ खंड 2 से 143 विधेयक में जोड़ दिये गये ।
पहली से तीसरी अनुसूची विधेयक में जोड़ दी गयी ।             खण्ड 1, अधिनियमन सूत्र और विधेयक का पूरा नाम विधेयक में जोड़ दिए गए । माननीय अध्यक्ष: मंत्री जी, अब आप प्रस्ताव करें कि विधेयक पारित किया जाए । श्री संतोष कुमार गंगवार : महोदय, मैंप्रस्ताव करताहूं: “कि विधेयक पारित किया जाए ।” माननीय अध्यक्ष: प्रश्नयह है:
“कि विधेयक पारित किया जाए ।” प्रस्ताव स्वीकृत हुआ ।
माननीय अध्यक्ष: आइटम नं. 15      प्रश्नयह है:
“कि व्यवसाय संघ, औद्योगिक स्थापन या उपक्रम में नियोजन की शर्तें, औद्योगिक विवादों के अन्वेषण तथा परिनिर्धारण और उससे संबंधित या उसके आनुषंगिक विषयों से संबंधित विधियों का समेकन और संशोधन करने वाले विधेयक पर विचार किया जाए ।” प्रस्ताव स्वीकृत हुआ ।
माननीय अध्यक्ष: इस विधेयक पर अनेक सदस्यों के संशोधन परिचालित किए गए हैं । चूंकि इनमें से कोई भी सदस्य अपने संशोधन प्रस्तुत करने के लिए सभा में उपस्थित नहीं है । इसलिए मैं विधेयक के खण्ड एक साथ सभा के समक्ष मतदान के लिए रखता हूं ।          अब सभा विधेयकपर खण्डवार विचारकरेगी ।
खंड 2 से 104 माननीय अध्यक्ष: प्रश्न यह है:
“कि खंड 2 से 104 विधेयक का अंग बने ।” प्रस्ताव स्वीकृत हुआ खंड 2 से 104 विधेयक में जोड़ दिये गये ।
पहली से तीसरी अनुसूची विधेयक में जोड़ दी गयी ।             खण्ड 1, अधिनियमन सूत्र और विधेयक का पूरा नाम विधेयक में जोड़ दिए गए । माननीय अध्यक्ष: मंत्री जी, अब आप प्रस्ताव करें कि विधेयक पारित किया जाए । श्री संतोष कुमार गंगवार : महोदय, मैंप्रस्ताव करताहूं: “कि विधेयक पारित किया जाए ।” माननीय अध्यक्ष: प्रश्नयह है:
“कि विधेयक पारित किया जाए ।” प्रस्ताव स्वीकृत हुआ ।
माननीय अध्यक्ष: आइटम नं. 16  प्रश्न यहहै:
“कि संगठित या असंगठित या किन्हीं अन्य सेक्टरों में सभी कर्मचारियों और कर्मकारों की सामाजिक सुरक्षा को बढ़ाने के उद्देश्य से सामाजिक सुरक्षा से संबंधित विधियों का संशोधन और समेकन करने के लिए और उससे संबंधित तथा उसके आनुषंगिक विषयों वाले विधेयक पर विचार किया जाए ।” प्रस्ताव स्वीकृत हुआ ।
माननीय अध्यक्ष: इस विधेयक पर अनेक सदस्यों के संशोधन परिचालित किए गए हैं । चूंकि इनमें से कोई भी सदस्य अपने संशोधन प्रस्तुत करने के लिए सभा में उपस्थित नहीं है । इसलिए मैं विधेयक के खण्ड एक साथ सभा के समक्ष मतदान के लिए रखता हूं ।          अब सभा विधेयकपर खण्डवार विचारकरेगी ।
    खंड 2 से 164 माननीय अध्यक्ष: प्रश्न यह है:
“कि खंड 2 से 164 विधेयक का अंग बने ।” प्रस्ताव स्वीकृत हुआ खंड 2 से 164 विधेयक में जोड़ दिये गये ।
पहली से सातवीं अनुसूची विधेयक में जोड़ दी गयी ।             खण्ड 1, अधिनियमन सूत्र और विधेयक का पूरा नाम विधेयक में जोड़ दिए गए । माननीय अध्यक्ष: मंत्री जी, अब आप प्रस्ताव करें कि विधेयक पारित किया जाए । श्री संतोष कुमार गंगवार : महोदय, मैंप्रस्ताव करताहूं: “कि विधेयक पारित किया जाए ।” माननीय अध्यक्ष: प्रश्नयह है:
“कि विधेयक पारित किया जाए ।” प्रस्ताव स्वीकृत हुआ ।