Lok Sabha Debates
Discussion On The Demand For Grant No. 81 Under The Control Of The Ministry Of Skill ... on 28 April, 2016
Sixteenth Loksabha an> Title: Discussion on the Demand for Grant No. 81 under the control of the Ministry of Skill Development and Entrepreneurship.
HON. CHAIRPERSON :The House will now take up discussion and voting on Demand No. 81 relating to the Ministry of Skill Development and Entrepreneurship.
Hon. Members Shri Jai Prakash Narayan Yadav and Shri Shailesh Kumar whose cut motions to the Demand for Grant in respect of the Ministry of Skill Development and Entrepreneurship for the year 2016-17 have been circulated may, if they desire to move their cut motions, send slips to the Table within 15 minutes indicating the serial number of the cut motion. Cut motions shall be treated as moved only if the slips are received at the Table within the stipulated time.
“That the respective sums not exceeding the amounts on Revenue Account and Capital Account shown in the fourth column of the Order Paper be granted to the President, out of the Consolidated Fund of India, to complete the sums necessary to defray the charges that will come in course of payment during the year ending the 31st day of March, 2017, in respect of the head of Demand entered in the second column thereof against Demand No. 81 relating to the Ministry of Skill Development and Entrepreneurship.” Demands for Grants (General), 2016-17 in respect of Ministry of Skill Development and Entrepreneurship submitted to the vote of Lok Sabha No. of Demand Name of Demand Amount of Demands for Grants on Account voted by the House on 28 March 2016 Amount of Demands for Grants submitted to the vote of the House Revenue (Rs.) Capital (Rs. ) Revenue (Rs.) Capital (Rs. ) 81 Ministry of Skilled Development and Entrepreneurship 295,09,00,000 5,62,00,000 1475,46,00,000 28,11,00,000 श्री राजीव सातव (हिंगोली) : सभापति जी, मुझे मिनिस्ट्री ऑफ स्किल डैवलपमेंट एण्ड एण्टरप्रिन्योरशिप की जो मांग है, उसके ऊपर चर्चा के लिए मुझे यहां पर समय दिया, उसके लिए मैं आपको धन्यवाद देना चाहता हूं।
मिनिस्ट्री ऑफ स्किल डैवलपमेंट के बारे में आदरणीय प्रधानमंत्री जी ने बहुत बार स्किल डैवलपमेंट के बारे में बात की और सत्ता पक्ष और यह सरकार इस मिनिस्ट्री के बारे में कितनी गम्भीर है, इसी बात से उसका परिचय है कि 2.05 बजे हाउस शुरू होना था, सभापति जी, पांच मिनट तक कोरम पूरा न होने की वजह से हम पांच मिनट...(व्यवधान) कोरम पूरा करने की जिम्मेदारी हम सब की है, लेकिन पहली जिम्मेदारी सत्ता पक्ष की है। इसलिए करीब 5-7 मिनट की देरी हुई। ...(व्यवधान) हमें अभी सिर्फ आगे देखना है, हम पीछे नहीं देखते हैं। ...(व्यवधान) यहां पर जब स्किल डैवलपमेंट मिनिस्ट्री की बात हो रही है, निशिकांत जी और जब हम यह बात कर रहे हैं तब आदरणीय प्रधानमंत्री जी ने जब प्रधानमंत्री नहीं थे, तब जो बात कही थी, 22 नवम्बर, 2013 को आगरा में उन्होंने कहा था: If BJP comes to power, it will provide one crore jobs which the UPA could not do.
प्रधानमंत्री जी ने हैदराबाद में कहा था कि 65 per cent of the population is below 35 years of age and they have the power, dreams, potential, but not employment. If we do not provide them with employment, then you can guess where will the country lead to?
प्रधानमंत्री जी ने दो मार्च, 2014 को कहा था, भारत के युवाओं की महत्वाकांक्षा को पूरा करने के लिए एक रोजगार क्रान्ति की आवश्यकता है। इतना ही नहीं, मैडीसिन स्क्वायर में जाकर प्रधानमंत्री जी ने कहा था कि स्किल डैवलपमेंट के लिए हम इतना महत्व दे रहे हैं कि उसके लिए हमने स्वतंत्र मंत्री और स्वतंत्र मंत्रालय बनाया और इसलिए मैं बड़ा खुश था कि विभाग की चर्चा पर मुझे बात करने का मौका मिल रहा है और इस बात से भी मुझे बड़ी खुशी हुई थी कि राजीव प्रताप रूडी जी जैसे डायमैनिक लीडर को, भले ही वे भाजपा के वरिष्ठ नेता हैं, लेकिन एक डायनैमिक मंत्री को इसकी जिम्मेदारी दी गई और इसके लिए हमें भी बड़ी खुशी थी कि राजीव प्रताप रूडी जी इसको बहुत आगे लेकर जाएंगे।
श्री अर्जुन राम मेघवाल (बीकानेर):खुशी है।
श्री राजीव सातव: खुशी थी। खुशी क्यों नहीं है, वह मैं बताता हूं। खुशी इसलिए नहीं है, क्योंकि राजीव प्रताप रूडी जी को स्किल डैवलपमेंट मिनिस्ट्री की आपने जिम्मेदारी दी और जब 2016-17 के बजट के पेपर्स हम देख रहे थे, मुझे लगा कि प्रधानमंत्री जी हर भाषण में स्किल डैवलपमेंट की बात करते हैं तो इस मिनिस्ट्री को इतना महत्व होगा कि यह मिनिस्ट्री पहले पांच में होगी। अगर पांच में नहीं होगी तो दस में होगी, दस में नहीं होगी तो 15 में होगी, 15 में नहीं होगी तो 20 में होगी। मिनिस्ट्री की 90 डिमांड्स फॉर ग्राण्ट्स रखी हैं। पहली 50 में भी मिनिस्ट्री ऑफ स्किल डैवलपमेंट एण्ड एण्टरप्रिन्योरशिप का नम्बर लगा नहीं। राजीव प्रताप रूडी जैसे डायनेमिक मंत्री को इसकी जिम्मेदारी आपने दी, लेकिन अगर हाथ-पैर बांधकर इसकी जिम्मेदीर राजीव प्रताप रूडी जी को देंगे तो इसमें बहुत कुछ काम होने वाला नहीं है। इसलिए सदन के माध्यम से सरकार से मैं कहना चाहूंगा कि आप 1800 दे रहे हो और कह रहे हो कि एक करोड़ युवाओं को आप रोजगार उपलब्ध कराओ। 1800 करोड़ रुपये में एक करोड़ युवाओं को रोजगार कहां से राजीव प्रताप रूडी जी उपलब्ध कराएंगे, यह मेरे सामने आज सवाल है।
दूसरी बात यह है कि पिछली बार आपने 1500 करोड़ रुपये दिये, अब उन 1500 करोड़ में से भी शायद 500 करोड़ रुपये वित्त मंत्री ने कट किये और 1000 करोड़ रुपये ही राजीव प्रताप रूडी जी के हाथ में लगा। इसका मतलब यह है कि इस बार आप 1800 करोड़ रुपये दे रहे हैं, यानि आखिर में 31 मार्च तक 1200 करोड़ रुपये तक ही राजीव प्रताप रूडी जी को कहेंगे कि 1200 करोड़ रुपये में मिनिस्ट्री चला लो, एक करोड़ युवाओं को रोजगार दे दो। 1200 करोड़ रुपये में एक करोड़ युवाओं को रोजगार देना किसी के वश की बात है नहीं...(व्यवधान) निशिकांत जी, आपका भी नम्बर जल्दी लगे, यह हमारी शुभकामना है। इसीलिए मैं जब यहां पर देख रहा था कि यह मिनिस्ट्री ऑफ स्किल डैवलपमेंट और एण्टरप्रिन्योरशिप तो बनी और इसमें क्या-क्या काम हुआ तो बाबुओं का खेल मैं जब वैबसाइट देख रहा था, इनकी वैबसाइट में इन्होंने कहा है: The important milestones in the formation and set up of the new Ministry are as below: यह जो मिनिस्ट्री बनी है, इसके माइलस्टोन्स क्या-क्या हैं। माइलस्टोन्स ये हैं कि 31st July, 2014: Notification of Allocation of Business Rules listing the business of the Ministry of Youth Affairs, Sports, Skill Development and Entrepreneurship. 2nd September, 2014: Secretary, Mr. Sunil Arora joins the Ministry as the first Secretary with independent charge. यह इसका माइलस्टोन है। तीसरा माइलस्टोन है, 18th September, 2014: Committee of Secretaries held for accommodation and creation of post for the new Department. यह मिनिस्ट्री की वैबसाइट है, यह मैं नहीं कह रहा हूं। 10 नवम्बर, 2014, यह चौथा माइलस्टोन है, Ministry of Skill Development and Entrepreneurship is Created and Shri Rajiv Pratap Rudy takes oath as new Minister of State. यहां तक तो ठीक है। पांचवां माइलस्टोन यह है, Office of the Ministry of Skill Development and Entrepreneurship shifted to 2nd Floor, Shivaji Stadium Annexe Building, Connaught Place. यह इसका पांचवां माइलस्टोन है। मैं यह इसलिए सामने रखना चाह रहा हूं कि राजीव प्रताप रूडी जी अच्छा काम करेंगे, इसमें हमें कोई शक नहीं, लेकिन अगर उनको आप साधन नहीं दोगे, उनकी आप सरकार द्वारा मदद नहीं करोगे तो राजीव प्रताप रूडी जी क्या जादू करेंगे, यह हमारे सामने आज सवाल है।
दूसरे, प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना की बहुत बात हुई और जैसे बीच में मनरेगा के बारे में भी चर्चा प्रधानमंत्री जी ने की थी कि हम लोगों को लेबर को स्किल्ड मैनपावर के रूप में डैवलप करना चाह रहे हैं। अगर स्किल्ड मैनपावर के लिए डैवलप करना चाह रहे हो, मनरेगा का बजट 38 हजार करोड़ रुपये का है, अनस्किल्ड मैनपावर के लिए 38 हजार करोड़ रुपये आपने रखे तो स्किल्ड मैनपावर के लिए तो एक लाख रुपये आपको रखने चाहिए, यानि राजीव प्रताप रूडी जी की मिनिस्ट्री को एक लाख करोड़ रुपये का बजट आपको देना चाहिए था, अगर सचमुच आप स्किल इंडिया बनाने की दिशा में जा रहे हो। इसका मतलब यह है कि आप सिर्फ कहना चाहते हो, लेकिन कथनी और करनी में, निशिकांत जी, यहां पर बड़ी फर्क नज़र आ रहा है। यहां पर प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना की भी बात हो रही है। प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना की बहुत बात हो रही है। मैं प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना की ऑब्जैक्टिव पढ़ रहा था तो प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना का ऑब्जैक्टिव और यू.पी.ए. के समय 2013 में नेशनल सिक्ल सर्टीफिकेशन और मोनेटरी रिवार्ड स्कीम थी, इसके ऑब्जैक्टिव्ज़ में एक वर्ड का भी फर्क नहीं है। सिर्फ नाम बदला गया है, not a single word has changed. दोनों ऑब्जेक्टिव मेरे पास हैं, सिर्फ कॉपी पेस्ट करके लगाया है। सिर्फ एक बात का फर्क है, वह नाम का फर्क है। दूसरी बात का फर्क है, वर्ष 2013 के नेशनल स्किल सर्टिफिकेशन एंड मानिटरी रिवार्ड स्कीम में लिखा था, reward candidates undergoing skill training by authorized institutions at an average monetary reward of Rs.10,000 per candidate. वर्ष 2013 के यूपीए के समय की स्कीम में 10 हजार रुपए देने का प्रावधान था। प्रधानमंत्री जी का नाम लग गया और यह रिवार्ड 8 हजार तक आ गया। यानी 2013 से 2016 में महंगाई बढ़ी, आपको इसे 10 हजार रुपए का 20 हजार रुपए करना चाहिए था, आपने उसे 10 हजार रुपए भी नहीं रखा, उसे आपने 8 हजार रुपए किया है। मैं एक सुझाव के रूप में कहना चाहूंगा न कि टीका-टिप्पणी के रूप में, आपने इसे 8 हजार रुपए रखा है, मेरी आपसे विनती रहेगी कि कम से कम 15 हजार रुपए आज मंत्री जी इसको डिक्लेयर करेंगे तो जो साथी स्किल डेवपलमेंट के लिए ट्रेनिंग ले रहे हैं, उनको फायदा होगा।
कल ही तारांकित प्रश्न के उत्तर में मंत्री जी ने जवाब दिया, उसमें मंत्री जी ने कल कहा कि 8 लाख 44 हजार स्टूडेंट्स सर्टिफाइड हुए हैं। कल का ही 60 नंबर क्वैश्चन का जवाब है। 8 लाख 44 हजार स्टूडेंट्स को आपने सर्टिफाइड किया और 8 लाख 44 हजार में से सिर्फ 2 लाख 18 हजार स्टूडेंट्स को आपने अभी तक 10 हजार रुपए दिए हैं। यानी 8 लाख लोगों को सर्टिफाई तो किया लेकिन सबको पैसा नहीं दिया है। 10 हजार रुपए भी आप पूरे के पूरे तुरन्त देना नहीं चाह रहे हैं, यह बहुत दुख की बात है। इसमें यह भी कहा गया है, यह कल का ही जवाब है। As per the data declared by the training partners of the SDMS Portal, a total of 70,927 candidates have so far been placed under PMKVY. 8 लाख 44 हजार लोगों को आपने ट्रेनिंग दी और सिर्फ 70 हजार लोगों को प्लेसमेंट दिया है। इसका मतलब यह है कि जितना ट्रेनिंग लेंगे, स्किल डेवलपमेंट का प्रोग्राम करेंगे, उनमें से सिर्फ सात या आठ प्रतिशत लोगों को आप यहां पर जॉब देने की दिशा में जा रहे हैं।
बड़े दुख के साथ यहां पर कहना पड़ता है कि जो बात प्रधानमंत्री जी कहते हैं, उसका इंप्लीमेंटेशन ठीक तरह से यहां नहीं हो रहा है। जो मिनिस्ट्री का ऑब्जेक्टिव था, उसमें मिनिस्ट्री ने कहा है, ensure youth emerging from formal education are employable with job or self-employment oriented skills. यह इंश्योर कैसे करेंगे? यह इंश्योर हो ही नहीं सकता, क्योंकि रूडी जी के हाथ में यहां कोई पॉवर्स नहीं रखी हैं। यह हमारे लिए बहुत दुख की बात है। रूडी जी जितने पॉवरफुल होंगे, उतनी ताकत से वे काम कर पाएंगे। रूडी जी को कोई पॉवर यहां पर नहीं है। ...(व्यवधान) पुरानी सरकार में, एनडीए में वे ज्यादा पॉवरफुल थे।
यहां पर नंबर ऑफ जॉब्स के बारे में जब हम बात करते हैं तो मोदी सरकार के पहले साल में 2014-15 में आपने सिर्फ 5.21 लाख जॉब्स आपने दी हैं। मैं आपके सामने यहां पर बात कर रहा था, ये आपकी ही फीगर्स हैं कि job creation in 8 sectors also includes handloom or powerloom, इसमें 5 लाख 21 हजार जॉब क्रिएट हुई हैं, ऐसी गवर्नमेंट की रिपोर्ट है। आप एक करोड़ लोगों को जॉब देने की बात कर रहे हैं और एक साल में पांच लाख के आसपास आप जॉब दे रहे हैं। इस स्पीड से तो बीस साल में भी आप एक करोड़ लोगों को जॉब नहीं दे सकते हैं।
महोदय, मेरा आपके माध्यम से सरकार से यह आग्रह रहेगा कि सबसे पहले नौकरियों की संख्या वैसे ही पारदर्शी और सार्वजनिक करनी चाहिए, जैसे जनगणना या जीडीपी का आंकड़ा सार्वजनिक होता है। वर्ष 2016 के भारत में नौकरियों के आंकड़े पूरी तरह से रिलायबल नहीं हैं। इसलिए मेरा आपके माध्यम से आग्रह रहेगा कि सरकार इसके बारे में कुछ विचार करे।
दो साल मोदी सरकार के होने जा रहे हैं और आपने 1 अप्रैल को एक सर्कुलर निकाला। आप यह कह रहे हैं कि जितने लोग सर्टिफिकेशन करेंगे, जितने लोग सर्टिफाइड ट्रेनी होंगे, उनमें से मिनिमम 70 प्रतिशत लोगों को आप जॉब देंगे। 8 लाख 44 हजार लोग आपके यहां से सर्टिफाई हुए हैं। यदि आपका ही सर्कुलर देखा जाए तो इनका 70 पकड़ेंगे तो करीब 6 लाख लोगों को आपको अब तक प्लेसमेंट देनी चाहिए थी और वह प्लेसमेंट अभी तक आपने दी नहीं है। इस का मतलब है कि आप एक करोड़ लोगों को स्किल डेवेलपमेंट की ट्रेनिंग देंगे, लेकिन पॉच लाख लोगों को जॉब मिलेंगे। पांच लाख या दस लाख लोगों को जॉब देने से इस देश का भला नहीं होने वाला है।
सभापति महोदय, इन्होंने वर्ष 2014-15 में यह प्लान किया था कि 10.5 मिलियन लोगों को ट्रेन्ड करेंगे लेकिन वर्ष 2014-15 में इन्होंने 76 लाख लोगों को ट्रेन्ड किया है। इसका मतलब है कि 72 प्रतिशत इनका टारगेट अचीव हुआ है। यह टारगेट और यूपीए के समय, वर्ष 2013-14 में हुआ काम लगभग सेम है, इसमें कोई फर्क नहीं है। यह स्किल इंडिया की बात करेंगे, बड़ी-बड़ी अच्छी बात करेंगे, लेकिन धरातल पर कोई फर्क दूर-दूर तक नजर नहीं आ रहा है। जो वर्ष 2013-14 में हुआ, वही वर्ष 2014-15 में भी हुआ है। मोदी सरकार द्वारा यहां पर कोई नया बदलावा नहीं हुआ है।
मैं यह इसलिए कह रहा था कि रूड़ी जी को ज्यादा पावरफुल करने की जरूरत है। जिन डिपार्टमेंट्स के साथ रूड़ी जी काम कर रहे हैं, कौन-कौन डिपार्टमेंट्स ने टारगेट पूरा नहीं किया - मिनिस्ट्री ऑफ हाउसिंग को 6,50,000 का टारगेट दिया गया, इसने 47,922 का टारगेट पूरा किया। श्री एम. वैंकैय्या नायडू के डिपार्टमेंट ने सिर्फ 7.37 प्रतिशत टारगेट पूरा किया। इनकी अचीवमेंट 47,922 रही। दूसरा, मिनिस्ट्री ऑफ होम को 8,000 का टारगेट दिया गया था, इन्होने सिर्फ 626 पूरा किया है। इन्होंने जो टारगेट तय किया था उसका 7.83 प्रतिशत अचीव किया है। डिपार्टमेंट ऑफ हायर एजुकेशन का टारगेट 1,21,800 का था, इन्होनें 20,055 पूरा किया है, यानी 24.67 प्रतिशत टारगेट अचीव हुआ है। ऐसे परफॉर्मैंस बड़े-बड़े मंत्री लोग देंगे, राजनाथ सिंह जी का डिपार्टमेंट इनको कॉपरेट नहीं करेगा, वैंकैय्या नायडू जी का डिपार्टमेंट इनको कॉपरेट नहीं करेगा, स्मृति इरानी जी का डिपार्टमेंट इनको कॉपरेट नहीं करेगा तो रूड़ी जी अकेले क्या करेंगे, यह भी हमारे सामने सवाल है। रूड़ी जी को यह जिम्मेदारी दी गयी तो उनको कैबिनेट मंत्री बना देते, इनके पास इंडिपेंडेंट चार्ज तो हैं लेकिन अगर इन्हें कैबिनेट मंत्री बनाते तो यह ज्यादा ताकत से काम कर सकते थे। ...(व्यवधान) हम भले ही विपक्ष से हैं लेकिन मांग तो कर ही सकते हैं।
जब यहां पर स्किल इंडिया मिशन के बारे में बात हो रही है तो वर्ष 2013-14 में जब हमारी सरकार थी तब 76,37,000 लोगों को ट्रेन्ड किया गया था। आपने वर्ष 2014-15 में 76,12,000 लोगों को ट्रेन्ड किया, यानी हमने जितने लोगों को ट्रेन्ड किया, आपने भी उतने लोगों को ही ट्रेन्ड किया है। सिर्फ फर्क इतना रहा कि मोदी जी ने ज्यादा बात की लेकिन मनमोहन सिंह जी ने ज्यादा बात नहीं की, इतना ही फर्क रहा, बाकी कोई फर्क नहीं रहा। वर्ष 2015-16 के दिसम्बर 15 तक के आंकड़े हैं, आपने उसमें 37,44,000 लोगों को ट्रेन्ड किया। आपने दो साल में एक करोड़ लोगों को स्किल बनाया लेकिन आपने आने वाले छः सालों में 40 करोड़ लोगों को ट्रेन्ड बनाने का लक्ष्य रखा है, वह आप कैसे पूरा करेंगे?...(व्यवधान) आपके पास तीन साल का समय बचा है, इसमें आप किस प्रकार का काम करेंगे, यह भी हमारे सामने सवाल है?
एक साल पहले आपकी मिनिस्ट्री ने आईटीआइज को मूव किया, आपने जो आईटीआइज मूव किये, उसमें आपने कहा था कि आईटीआइआज to be upgraded through Centre -State funding. एक साल के बाद की क्या सिचुएशन है? 300 करोड़ रुपये एलोकेट किये गये थे, पिछले साल भर में, आपके डिपार्टमेंट ने सिर्फ 18 आईटीआइज आईडैंटीफाई किये हैं। यह लोक सभा के 24 फरवरी के प्रश्न का जवाब है। अगर इस स्पीड से काम चलता रहा, ITTs are to be upgraded through World Bank Funding. Here, 400 ITIs were announced to be upgraded, but there is no progress reported so far यानी आपने जो टारगेट रखा है, उसमें आपकी तरफ से जो काम होना चाहिए, वह अभी तक नहीं हुआ है।...(व्यवधान) रूडी जी को जो कोऑपरेशन मिलना चाहिए, कोई कोऑपरेशन नहीं दे रहा है, यह सबसे बड़ा सवाल हम सबके सामने है। हम इस बात से बहुत दुखी हैं।...(व्यवधान)
श्री मल्लिकार्जुन खड़गे (गुलबर्गा) : उनके मंत्रालय को कौन्सटीटय़ूट करने में ही एक साल लग गया। आप उनसे पूछिए। एक साल इंतजार में गया।...(व्यवधान)
श्री राजीव सातव: आपने 2015 में 1131 आईटीआई खोले, इसके लिए आपको धन्यवाद। इसमें से 40 प्रतिशत आईटीआई मध्य प्रदेश, राजस्थान में खोले। यह बहुत अच्छी बात है। लेकिन मेरा आपसे आग्रह है कि देश के बाकी राज्यों में भी आपको थोड़ा ध्यान देना पड़ेगा। मैं महाराष्ट्र के सूखा प्रभावित क्षेत्र से आता हूं। अगर आप वहां आ जाएंगे, हमारे कमिश्नर साहब सत्यपाल जी को भी लेकर आइए। ...(व्यवधान) मेरा सभापति जी के माध्यम से आग्रह है कि सभी राज्यों में आईटीआई और यह काम बढ़ाने की जरूरत है।
सभापति जी, मैं आपके माध्यम से सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा रखना चाह रहा हूं कि आप स्किल और ट्रेंड करना चाह रहे हैं।...(व्यवधान)
माननीय सभापति: राजीव जी, आप कनक्लूड कीजिए।
…( व्यवधान)
श्री राजीव सातव: मैं दो-तीन मिनट में समाप्त करूंगा।
माननीय सभापति :ठीक है।
श्री राजीव सातव: रूडी जी को भी बहुत अच्छा लग रहा है। मुझे बोलने दीजिए। मैं आपके माध्यम से सबसे महत्वपूर्ण बात रखना चाहता हूं। आप कई लोगों को ट्रेंड करना चाह रहे हैं, लेकिन उन्हें ट्रेंड करने के लिए जो मास्टर ट्रेनर चाहिए, वे आपके पास नहीं हैं। एक लाख मास्टर ट्रेनर की शार्टेज है। उसके बारे में रूडी जी कहेंगे कि हम मिलिट्री के लोग लेंगे। आप जरूर लीजिए, लेकिन उसमें आपके दो-तीन साल लगेंगे। यह कोई अच्छी बात नहीं है। अरुण जेटली जी ने बजट स्पीच में कहा था कि हम 1500 मल्टी-स्किल ट्रेनिंग इंस्टीटय़ूट्स खड़े करेंगे और उसके लिए 1700 करोड़ रुपये रखे हैं। आपके पास ट्रेनर ही नहीं हैं तो इंस्टीटय़ूट कब खड़े होंगे और कब काम होगा।
आपने पैसे ऐलॉट किए हैं, लेकिन आपके सीईओ और नैशनल स्किल डैवलपमैंट फंड्स और कार्पोरेशन के बाकी ऐग्ज़ीक्यूटिव्ज ने बीच में रिज़ाइन किया। मेरा यह कहना नहीं है कि कोई कंट्रोवर्सी या कुछ और था। लेकिन जो इनवायरमैंट, सिचुएशन और हालात मोदी सरकार को उनके लिए तैयार करने चाहिए, वे तैयार नहीं कर पाए। इसलिए बीच में रैज़िगनेशन के चक्कर हुए।
यह बजट के बारे में भी बात है कि 1800 करोड़ रुपये का बजट दिया। यह बहुत कम बजट है। इस मिनिस्ट्री के लिए कम से कम बीस हजार करोड़ रुपये का बजट होना चाहिए ताकि आने वाले समय में ये इसमें और ताकत से काम कर सकें। बीजेपी ने वायदा किया था कि एक करोड़ नई नौकरियां देंगे। आप नौकरियों की बात नहीं कर रहे हैं, अब आप स्किल की बात कर रहे हैं। आप स्किल की बात करके यहां से निकल नहीं सकते। आप स्किल की बात कीजिए, लेकिन साथ ही नौकरियों की बात भी करनी पड़ेगी क्योंकि वही बात आपने इलैक्शन के वायदे में की थी।
इसमें चर्चा आती है कि हमने मुद्रा के लिए लोन दिया। आपने पचास हजार रुपये का मुद्रा लोन 25 लाख लोगों को दिया। 25 लाख लोगों को पचास हजार रुपये का लोन देने से कितनी नौकरियां एक्चुअली तैयार होने वाली हैं। इसलिए मेरा आपके माध्यम से आग्रह है कि लोन दिए या स्किल ट्रेनिंग दी, इसका मतलब जॉब क्रिएशन हुआ, ऐसा नहीं है।
मैं अपने भाषण का अंत करना चाहूंगा। आपने 16.03.2016 को लोक सभा में एक प्रश्न का उत्तर दिया था। प्रश्न था -Whether the Ministry has conducted any study of the best international practices followed for skill development globally. उस पर मिनिस्ट्री ने कहा - The Ministry of Skill Development and Entrepreneurship has not conducted the study as such. दूसरा सवाल था Whether there is any proposal to map the skill requirement and training gaps jointly with NITI Aayog? इसमें लिखा गया है NITI Aayog has formed three sub-groups. The sub-groups have several rounds of meetings regarding skill requirements in infrastructure sector. अगर दो साल मीटिंग और डिस्कशन में जाएंगे तो एक्चुअल काम कब शुरू होगा यह सवाल हमारे सामने है? एक सवाल एम.पीज से रिलेटेड है, एमपीलैड से स्किल डेवलपमेंट के लिए पैसा देने की बात मैंने एक साल पहले की थी। मैंने यूनिवर्सिटी को लेटर भी लिखा था, यूनिवर्सिटी ने एग्री भी किया था। कलेक्टर ने बाद में मुझे लिखा स्किल डेवलपमेंट हमारी प्राइररिटी नहीं है इसलिए हम पैसे नहीं देंगे। इसमें कम से आपकी तरफ से मोडिफिकेशन होना चाहिए। 10.5 का डिमांड है उसके मुकाबले 4.8 का ही सप्लाई हमारी तरफ से हो रहा है। महाराष्ट्र इस लिस्ट में सबसे आगे है इसलिए महाराष्ट्र में अपनी तरफ से ज्यादा काम करें, यह मेरी विनती है।
आखिर में कुछ सुझाव आपके सामने रखना चाहता हूं। दो साल में स्किल डेवलपमेंट के लिए हम स्टैन्डिंग कमेटी नहीं बना पाए हैं इस बारे में ध्यान देने की जरूरत है कि स्किल डेवलपमेंट के लिए स्टैन्डिंग कमेटी बने ताकि इस पर सभी सांसदों द्वारा डिस्कशन हो। इस विभाग का बजट भी बढ़ाया जाए, मंत्री साहब को और पॉवरफुल बनाकर ताकत देने की जरूरत है। प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना में 8000 करोड़ रुपये दे रहे हैं इसमें कम से कम 15,000 हजार करोड़ रुपये होना चाहिए। यह मेरी विनती है। आने वाले समय में रूडी साहब और रूड होकर बाकी मंत्रियों को भी काम पर लगाएं। सभापति जी आपने मुझे समय दिया, धन्यवाद।
CUT MOTIONS श्री ओम बिरला (कोटा) : सभापति महोदय, आज जिस विभाग पर चर्चा हो रही है वह बहुत ही महत्वपूर्ण विभाग है। आजादी के 67 सालों बाद भी देश बेरोजगारी की समस्या से जूझ रहा है। हमने 67 साल के अंदर लंबे समय तक बेरोजगारी को समाप्त करने के लिए कोई कारगर कदम नहीं उठाया। अगर हिन्दुस्तान को आर्थिक प्रगति करनी है तो बेरोजगार नौजवानों को रोजगार देना पड़ेगा, उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत करनी पड़ेगी और गांवों में रोजगार सृजन करना पड़ेगा तभी आर्थिक आय बढ़ेगी और देश आर्थिक रूप से मजबूत होगा।
बेरोजगारी का आंकड़ा सारा देश जानता है। मेरी चिंता इस बात को लेकर है, मेरे एक साथी बोल रहे थे कि 2008 से 2014 तक हमने स्किल डेवलपमेंट के नाम पर देश के बेरोजगारों को रोजगार देने का काम किया, लेकिन ये आंकड़े नहीं बता रहे थे स्किल डेवलपमेंट के आधार पर सीएजी की रिपोर्ट इंडिकेशन करती है कि इतना बड़ा बजट होने के बाद भी कोई एकाउन्टिबिलिटी नहीं रही कि कितने लोगों को रोजगार दिया गया, कितने लोग प्रशिक्षित हुए, अलग-अलग सिस्टम से छोटे-छोटे दुकानों पर वाईफाई बांटकर सारा का सारा पैसा देश के बेरोजगारों को रोजगार खड़ा करने का काम किया। पिछली सरकार ने करप्शन के अलावा एक पैसा काम भी नहीं किया।
हमारे प्रधानमंत्री जी का विजन है। प्रधानमंत्री मोदी जी जानते हैं कि जब तक गांव में बैठा किसान का बेटा और शहर में बैठे नौजवान को हम ट्रेंड नहीं करेंगे, प्रशिक्षित नहीं करेंगे तो हम विश्व के मानकों पर टिक नहीं पाएंगे। आजादी के बाद पहली बार प्रधानमंत्री जी ने एक युवा मंत्री को इसका दायित्व सौंपा, इसके लिए एक अलग से मंत्रालय बनाया। मंत्रालय के जरिए नए विजन बनाए। माननीय सदस्य बोल रहे थे कि 15 महीने में क्या हुआ? जब किसी का ढांचा बिगड़ जाता है चाहे वह एनएसडीसी हो या सेक्टर स्किल काऊंसिल हो, जिस तरह से बंदरबांट हुई थी उस ढांचे को सुधारने में समय लगता है।
अब आपको परिवर्तन नजर आएगा। इस देश के अंदर बढ़ती आबादी और रोजगार को के व्यापक अंतर को पाटना होगा इसके लिए प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना शुरू करना पड़ेगा। विश्व में भारत कौशल विकास में कहां खड़ा है, यह भी चिंता का विषय है। जापान का 80औ नौजवान स्किलड है, जर्मनी में 75औ है, ब्रिटेन में 68औ है और हम 4.69 स्किलड खड़े हैं। अगर दस साल में कांग्रेस की सरकार स्किल डेवलपमेंट पर काम करती तो आज विश्व के अंदर भारत के नौजवानों की स्थिति ऐसी नहीं होती। हमने कार्य योजना बनाई है। हमने कई देशों से एमओयू साइन करने का काम किया है। विश्व बाजार में हमारा नौजवान कैसे स्किल्ड हो, कैसे हम उनके समकक्ष आएं, इसके लिए कई देशों से एमओयू करने का काम किया गया है। देश में रोजगार सृजन करने के लिए प्रधानमंत्री जी का विजन धरातल पर खड़ा करने का काम किया है। हम स्टार्ट-अप योजना के तहत देश के नौजवानों के माध्यम से किस तरीके से उद्यमशीलता बढ़े, नए-नए आविष्कार हो, अनुचूचित जाति और पिछड़े वर्ग के लोग स्टार्ट-अप योजना से खड़े हों, स्टैंड-अप योजना, लघु छोटे उद्योगों के लिए प्रधानमंत्री की सोच है, आज चाहे मजदूर हो या मोची या ऐसे तमाम लोग जो देश में असंगठित रूप से मजदूरी का काम करते थे उसे रोजगार देने का काम किया। उसको मुद्रा बैंक के माध्यम से पैसा दिया जाएगा ताकि रोजगार सृजित हो सके और हिन्दुस्तान के इस इतिहास को परिवर्तन कर सकते हैं।
सभापति महोदय, प्रधानमंत्री जी ने पहली बार विचार किया कि अलग-अलग मंत्रालयों के अंदर अलग-अलग स्कीमें है, इसके लिए कोई नीति नीति है कि क्या प्रशिक्षण देंगे, इसकी कोई पॉलिसी नहीं। प्रधानमंत्री ने कहा कि 70 स्कीमों और 24 मंत्रालय को स्किल डेवलपमेंट योजना के तहत एक जगह लाने का काम किया जाए। नेशनल डिवजीन स्किल फ्रेम बनाया और प्रधानमंत्री जी ने 24 लाख लोगों को प्रशिक्षित करने की कार्ययोजना बनाई। आज क्या हालत है? हम हिन्दुस्तान के अंदर प्रशिक्षित नौजवान तैयार नहीं कर सके, आज अप्रैन्टिसशिप नौजवानों की क्या हालत है उनकी संख्या 2.5 है जबकि चीन में 2 करोड़ और जापान में 1 करोड़ जर्मनी में 80 लाख है। इसीलिए प्रधानमंत्री जी ने कहा है कि राज्य सरकारों से तालमेल करके अप्रैन्टिशिप करने वाला नौजवान जो 2.5 पर है उसके लिए नए-नए आईटीआई खोले जाएं। कांग्रेस ने यह भी आइडेन्टिफाई नहीं किया होगा कि देश के कितने ब्लॉकों में आईटीआई या कौशल विकास केन्द्र हैं, हमने उसे आइडेन्टिफाई किया है। हमारी योजना है कि 2500 ब्लॉक में जहां आईटीआई नहीं है वहां पांच सालों के अंदर सारे ब्लॉकों में आईटीआई खोले जाएं और कौशल विकास केन्द्र खोले जाएं। देश के तमाम हिस्सों के अंदर नौजवान को केवल स्किल करने का काम नहीं है बल्कि उन्हें अपने पैरों पर खड़ा कर सके। आज सबसे बड़ी चिंता का विषय यह है कि आज भी हिन्दुस्तान के अंदर 60औ नौजवान ट्रेन्ड वर्कर नहीं है।
सभापति महोदय, यदि आजादी के बाद हम ट्रेंड वर्कर नौजवान देते, तो शायद आज जो चीन इंडस्ट्री में प्रथम स्थान पर खड़ा है, वह नहीं होता और हमारा देश, यानी हिन्दुस्तान मानव सृजन का सबसे बड़ा केन्द्र होता। इसलिए प्रधान मंत्री जी ने कहा है कि हम इस देश को मानव सृजन का सबसे बड़ा केन्द्र बनाएंगे। आने वाले समय में हमारा हिन्दुस्तान दुनिया का सबसे नौजवान देश होगा और हिन्दुस्तान के लोग दुनिया में सबसे नौजवान लोगों में गिने जाएंगे।
महोदय, आंकड़े बताते हैं कि आने वाले समय में भारत नौजवान देश होगा और भारत का नौजवान, जो हिन्दुस्तान में ही नहीं, हिन्दुस्तान के बाहर भी यू.ए.ई. के अंदर छोटे-छोटे मजदूर के रूप में काम करता है, वह स्किल्ड इंडिया बनने के बाद ऐसा नहीं करेगा। अब हम हिन्दुस्तान के अंदर मजदूर पैदा नहीं करेंगे, बल्कि हम अब प्रशिक्षित नौजवान पैदा करेंगे। हम स्किल्ड नौजवान पैदा करेंगे, जो देश के अंदर आर्थिक आय बढ़ा सकें और जो रोजगार और बेरोजगारी की विषमताओं को पाट सकें। यदि हम सत्ता में रहे, तो यह काम हम 10 साल के अंदर करेंगे। हमारे प्रधान मंत्री जी का 10 साल में इस देश से बेरोजगारी समाप्त करने का लक्ष्य है।
सभापति महोदय, अभी कहा गया कि 8 हजार रुपए दिए जाएंगे, मैं बताना चाहता हूं कि 8 हजार रुपए नहीं दिए जाएंगे। इस बारे में उन्हें गलतफहमी है, बल्कि हमारे यहां 14 हजार रुपए से 15 हजार रुपए देने का लक्ष्य रखा गया है। हम घंटों के आधार पर लोगों को प्रशिक्षित करना चाहते हैं। कितने घंटे की एक नौजवान की ट्रेनिंग होगी, इस लक्ष्य को ध्यान में रख कर हम अपनी कार्य-योजना बना रहे हैं। हम पैसों की बंदरबांट नहीं करेंगे। हम सरकारी धन का दुरुपयोग नहीं होने देंगे। सरकार का एक-एक पैसा देश के नौजवान को प्रशिक्षित करेगा और ये प्रशिक्षित नौजवान आने वाले समय में हिन्दुस्तान से बेरोजगारी को समाप्त करेंगे और हम नए भारत, उदय भारत का जो लक्ष्य प्रधान मंत्री जी ने रखा है, उसे पूरा करेंगे।
महोदय, हमारे प्रधान मंत्री जी ने कहा है, हम स्किल्ड डैवलपमेंट के द्वारा इस देश के अंदर नए भारत का उदय करेंगे। हमारे युवा मंत्री आने वाले समय में, इस सदन में वर्ष 2019 के अंदर जाएंगे, जब देश के अंदर विदेशों के समकक्ष स्किल्ड डैपलपमेंट खड़ा कर के भारत से बेरोजगारी समाप्त करने का लक्ष्य पूरा करेंगे और नए भारत का उदय करेंगे। बहुत-बहुत धन्यवाद।
DR. MRIGANKA MAHATO (PURULIA): Thank your, Sir, for allowing me to express my views. In a country like India, where there is a large number of unemployed youth, The Ministry of Skill Development and Entrepreneurship can do a wonder and miracle if it is properly executed and implemented. Earlier, the responsibility of skill development was bestowed and distributed among various Ministries. But this time the responsibility is conglomerated and clubbed and given to the Ministry of Skill Development and Entrepreneurship.
The Ministry of Skill Development and Entrepreneurship is the principal Ministry and will do its job in coordination with other Ministries. I think it is a very good approach. We welcome this step. With the programmes of this Ministry, the youths of our country will be greatly benefited. Young people, who are jobless, school and college dropout students along with the educated ones from remote rural and urban areas, will all be given value addition training and with this skill training they will be enabled to get blue collar jobs.
I want to express a few suggestions so that the skill development programme can be more effective and efficient. While the Central Government is going to establish different centres in different parts of the country, they should consult with local representatives like MPs, MLAs and district authorities so that these centres could be need based and appropriate to the area.
In this context, I want to highlight that yesterday the Minister for Development of North-Eastern Region said that a Sports Authority would be developed in Darjeeling. It is appropriate because in Manipur, people are physically active and their environment is also good. So, it will be very good for the Manipuri people.
Similarly, the foreign tourists come to Darjeeling in West Bengal, in Rajasthan. If the local people, residing in places where foreign tourists come, are imparted training in foreign languages, then it will be very effective. As a result, the people will get jobs also through this programme. It should be a need based programme.
Secondly, due care should be given to the quality of training imparted so that the youths, who come out after training, are able to not only fulfil the requirements of our domestic demand but are also skilled enough to fulfil the demands at the international level.
Due care should be given to fix accountability as well. The centres, which are set up in different areas, should be held accountable for the quality of training provided by them. After training, they should be given proper jobs and provided orientation. Period evaluation should be done of how the training is going on. After the completion of training programme, at the time of giving them certificates, if possible, campus interviews should be held so that a large number of youths is able to get jobs immediately after completing their training.
In West Bengal, our leader, Kumari Mamata Banerjee, has taken an initiative to set up an ITI in every block. In every block, she is trying to develop an ITI so that the rural unemployed youth get their training at the block level. These should be the youths we should target, who are not getting covered. In the cities, there are many possibilities. In cities, many centres are coming up and there are many NGOs.
For the rural areas, it is my request to the Central Government and the Ministry that their focus should be on rural India because if we do not make the unemployed rural youth skilled, the programme will fail and their conditions will remain the same. So, our target should be to train the rural unemployed youth so that our aim to make India great becomes possible.
What shape the Skill India Programme will take and how it will be in the future, only future can tell, but there is no doubt that it seems to be a very good initiative. It will open up the avenues by which the youth will accept the responsibility and none will remain idle as idle youth is a burden on the economy and the country.
I conclude my speech by saying that the approach of the Government is very much holistic and we are eagerly waiting for the ground realities to change.
With these words, I conclude my speech. Thank you.
SHRI NAGENDRA KUMAR PRADHAN (SAMBALPUR): Mr. Chairman, Sir, I thank you for giving me time to participate in today’s discussion, that is, discussion and voting on Demands for Grants under the control of the Ministry of Skill Development and Entrepreneurship for 2016-17.
This Department came into existence in August, 2014 and fortunately, we have got an able and young Minister looking after this Department. Personally, I can comment like this because I am a Member in the Consultative Committee related to this Department. This Department is very important because in the first meeting of the NITI Aayog, which was held on 8th February, 2015, it was decided to form a Sub-Committee of Chief Ministers. There were 13 Chief Ministers and they are the members of this Committee headed by Chief Minister of Punjab, hon. Prakash Singh Badal.
Our Chief Minister is also a Member in it. The Chief Ministers of States like Assam, Chhattisgarh, Goa, Gujarat, Himachal Pradesh, Meghalaya, Odisha, Puducherry Tripura and Tamil Nadu are there; CEO, NITI Aayog is the Coordinator of the Sub-Group. It shows that the Government of India and the hon. Prime Minister are giving importance to this Department.
In that meeting, the Sub-Group of Chief Ministers gave its recommendations, which states that :
“The Sub-Group of Chief Ministers on Skill Development deliberated on various issues relating to improving quality, relevance, quantity, aspirations, mobility and financing of skill development at length in its meetings with the implementing Ministries, member and non-member States, and through State visits to study best practices. The major highlights of the recommendations made by the Sub-Group were as follows: Integrated Delivery Framework for Achieving Convergence. The State Skill Development Missions (SSDMs) should evolve into a coordinating body to harmonize the skilling efforts across line departments / private agencies / voluntary organizations etc. The common norms announced at the central level may be adopted by the SSDMs so as to have State-specific guidelines for skill development programmes. (ii) For decentralized implementation and to ensure effective coordination and monitoring of skill development initiatives a three-tier structure at State, district and block level for SSDMs was proposed. Pattern of DRDA to coordinate skill efforts at district level can be adopted for effective coordination and interaction with local self-Government, civil society, training provider, industry and other stakeholders.”.
These are the findings of the Committee of Chief Ministers. It further states in its conclusion that :
“With a renewed focus on the Capacity Building efforts from the Government, various initiatives in public as well as the private sector have already been taken up to harness the advantage of ‘Demographic dividend’ in India. However, skill development initiatives in the domain of agriculture can play lasting impact in retaining the rural youth in agriculture sector through making it technology oriented with less drudgery. Though several efforts are taken up proactively to facilitate income generation through employment of rural people and also for growth in agriculture, improvement in the operational strategies of the training institutions along with the involvement of industry players is the need of the hour. While the country is bracing itself, the mountainous task of building the skills of millions, it is time for making innovative and holistic efforts for focusing on the targeted employment generation and market efficiency building towards sustainable growth in agriculture production and employment.”.
I would like to ask the hon. Minister, Shri Rudy, to reply to this. What action has been taken by the Government to implement this Report of the Sub-Committee where most of the Chief Ministers are Members. They have also submitted the Report to the hon. Prime Minister of India.
14.59 hours (Shri Hukmdeo Narayan Yadav in the Chair) As per the Economic Survey Report of the Government of India 2015-16 regarding skill development, at present there are a huge number of unskilled workers in India who are mainly engaged in the less productive informal sector. According to the National Skill Development Corporation (NSDC), there is severe quality-gap and lack of availability of trainers in vocational education and training sector.
DGET/NCVT offices should be there in every State.
NCVT should not be diluted since it has international credibility of 60 years; but the Board should be formed to issue certificates for short term.
My suggestion to the Hon'ble Minister is to consider the following things for implementation.
SSC should not issue certificates. SSC should develop content, train the trainers and most importantly should act as an interlocutor for training providers for connecting to the industry. They should play the role of a mentor instead of that of money earner by printing certificates.
NSQF must be owned by universities and universities may be allowed after proper approval from MSDE to go pan India.
Third party evaluation of NSDC partners must be institutionalised and reward/punishment must be legalised. There are no punitive measures for bad apples. Hence, that becomes disincentive for good and competent skill providers. There should be upper limit for approval process and tracking in line with speed post must be there in NSDC system.
In difficult geographical areas like the Left Wing Extremist Areas, the number of ITI and ITDA blocks must get special treatment and providers in these areas must be categorised as champion providers.
Cloud based certification for short term programmes through NCVT should be promoted.
Convergence of skill training of various Ministries should be there. Having creating the Ministry, it must be empowered further. The provision of Budget must be sufficient to reap the demographic dividends, else it will be a democratic disaster.
15.00 hours By 2017, this skill gap within the vocational training sector including both teachers and non-teachers will reach a figure of 2,11,000. The workforce requirement is projected to increase to 3,20,000 by 2022. Government has to invest in bridging the skill gap in the vocational education and training sector to improve the employability of people. I wanted to place this information before the House. The practical position of this country, what we are telling is that India is the youngest nation in the world with more than 62 per cent of the population in the working age group of 15-59; 54 per cent of the population is below the age group of 0-25 years. In this context, it is estimated the average age of the population in India by 2020 will be 29 years as against 40 years in USA, 46 years in Europe, and 47 years in Japan. In fact, during the next 20 years, the labour force in the industrialised world is expected to decline by four per cent while in India it will increase by 32 per cent. This shows that there will be a formidable challenge and a huge opportunity for India. In this context, I want to draw the attention of the hon. Minister here, if this situation will be there after 20 years, what steps the Government is exactly going to take. This is a very important issue. Thirdly, according to me, convergence is necessary. This Department came into existence just 1.5 years back. We should not expect that they can just deliver everything. It is not possible. For any party which is in power for 1.5 years, it is not possible at all. However, the intention and the thrust that the hon. Minister is giving is very much positive; and the due guidance of the Prime Minister is also very much positive. However, within the Government, they should expect the deliveries that are going to be made within these three or four years.
Sir, there are some issues to which I just want to draw the attention of the House and also the hon. Minister. Firstly, what has been done to implement the best practices out of which Centurion University of Bhubaneswar is one? Secondly, why is there no policy level decision to converge skill with higher education? Thirdly, why is there no support to set up Centres of Excellence in Universities to integrate skill and provide inclusive and holistic education? Fourthly, why was community college funding available only for Government colleges? Why is it not available to private institutions? Should we think that any student studying in private colleges is an outsider of the country? Fifthly, what is the outcome and impact of Rs. 500 crore spent by UGC for community colleges and DDUKKs? Sixthly, why can approval up to diploma level be not vested with MOSDE? Why should AICTE be in the picture for diploma? The logical convergence is ITI and diploma which the majority workforce in the country like to possess. Seventhly, what are the support systems and flexibility available for Universities to become innovative and creative in skill development? Eighthly, what are the parameters for creating the aspiration among the youth to opt for skill as spiral learning, stand alone degree or dual learning? Ninthly, why can we not exact ‘Right to Skill’, that is, skill for all in line with RTE and Sarva Shiksha Abhiyan?
श्री आनंदराव अडसुल (अमरावती):सभापति जी, आपने मुझे डिमाण्ड फॉर ग्राण्ट्स अंडर दि स्किल डेवलपमेंट एंड इंटरप्रिन्योरशिप मिनिस्ट्री, 2016-17 के ऊपर बोलने का अवसर प्रदान किया।
सभापति जी, प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में एनडीए सरकार तीन बिन्दुओं को सामने रखकर अपना काम कर रही है, जिनका जिक्र महामहिम राष्ट्रपति जी ने अपने भाषण में आदरपूर्वक किया था। वे बिन्दु हैं- गरीबों की उन्नति, किसानों की समृद्धि और युवाओं को रोजगार। आज तक सरकारें आईं और गईं, युवाओं को रोजगार देने की बात हर चुनाव के एजेंडे में की गयी। अगर कोई समस्या है, वह समस्या क्यों पैदा हुई, उसका मूल कारण क्या है, जब तक इसकी जानकारी नहीं होती है, तब तक समस्या का निराकरण नहीं हो सकता है।
सभापति जी, आप भी थे, मैं भी था, जब श्रद्धेय अटल जी प्रधानमंत्री थे। जब हमने आजादी प्राप्त की थी तब महात्मा गांधी जी ने कहा था कि देहात की ओर चलो। इसका मतलब यह था कि गांवों का, देहातों का विकास करो। अगर वहां समृद्धि आती है तो देश समृद्ध होगा क्योंकि यह देश गावं का देश है, देहात का देश है। इस पर अमल सही मायने में आदरणीय अटल जी ने किया है। जब तक हम हर गांव, चाहे वह ढाई सौ जनसंख्या का हो या पांच हजार की जनसंख्या का हो, जब तक हर गांव मेन स्ट्रीम में नहीं आता है, तब तक गांव का विकास नहीं हो सकता है। इसीलिए वे प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना अपने कार्यकाल में लाए जो आज भी बहुत लोकप्रिय है। यह बताने का कारण यह है कि जो समस्या थी, उसका समाधान उन्होंने ढ़ूंढ़ने का प्रयास किया और एक मायने में इस समस्या का समाधान हो भी गया। ऐसी ही एक समस्या बेरोजगार युवाओं की हमारे देश के सामने है। देश की 125 करोड़ की आबादी में 65 प्रतिशत हमारी युवा पीढ़ी 35 साल से नीचे की उम्र की है और इसमें से 26 प्रतिशत युवा अशिक्षित हो, अर्द्धशिक्षित हो या शिक्षित हो, वह बेरोजगार है।
हमारा देश पूरी दुनिया में युवाओं का देश कहा जाता है क्योंकि 65 प्रतिशत आज युवा हमारे देश में हैं। सही मायने में यह हमारी सम्पत्ति है, सही मायने में एक शक्ति है। जब तक इस सम्पत्ति और शक्ति का हम सही उपयोग नहीं करेंगे तब तक देश का विकास नहीं हो सकता है। ऐसा कहा जाता है कि“NECESSITY IS THE MOTHER OF THE INVENTION” आवश्यकता अविष्कार की जननी है। यह समस्या हल करनी है तो क्या करना है, इसे हमारे आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने सही मायने में पहचाना है।
गरीबी के कारण, गांवों में जहां शिक्षा का अच्छा प्रबंध नहीं है, जहां गरीबी के कारण बच्चे स्कूलों में नहीं जाते हैं और अगर जाते भी हैं तो ज्यादा पढ़ नहीं सकते हैं, ऐसे युवा जिनकी अपनी जमीन नहीं है या अपना रोजगार करने की कोई सुविधा नहीं है, ऐसी हालत में आज का युवा है और अगर इसी युवा को केंद्र बिंदु मानकर उसकी शक्ति का इस्तेमाल करें तो स्किल डेवलपमेंट जैसी योजना देश में लाना जरूरी है, ऐसा आदरणीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने सोचा।
हम देखते हैं कि हमारे समाज में पांचवी, छठी, सातवीं, आठवीं तक शिक्षा प्राप्त किए हुए या दसवीं कक्षा तक पहुंचे लेकिन पास नहीं हो पाए, बारहवीं कक्षा तक पहुंचे लेकिन पास नहीं हो पाए, इसके पीछे एक कारण है कि न अच्छी शिक्षा का प्रबंध है, न पुस्तक का प्रबंध है और न नोटबुक का प्रबंध है। इसके पीछे एक ही कारण है और वह गरीबी है। अगर हम सही मायने में अपने देश की उन्नति करना चाहते हैं तो इन युवाओं को अपने पैरों पर खड़ा करने का साधन करना होगा, तभी देश की उन्नति होगी।
आज तक किसी ने यह नहीं सोचा था कि इस समस्या के लिए एक अलग मंत्रालय होना चाहिए और वही स्किल डेवलपमेंट मंत्रालय स्थापित किया गया। सभी ने हमेशा रूड़ी जी की प्रशंसा की है और वे प्रशंसा के पात्र भी हैं। हमारे सातव जी ने भी कहा कि उनको केबिनेट मिनिस्टर क्यों नहीं बनाया गया? शायद प्रधानमंत्री जी ने उन्हें अभी प्रोबेशन पर रखा है, उनका टैस्ट ले रहे हैं। वह आगे जाकर केबिनेट मिनिस्टर भी बन सकते हैं, क्योंकि वह काबिल भी हैं। इस समस्या को हल करने के लिए केवल घोषणाएं काम नहीं आती हैं। मेरे साथ सातव जी ने कुछ आंकड़े यहां दिए। प्लेसमेंट एक अलग तरीके से होती है। मान लीजिए एक कारपेंटर का बच्चा अपने पिता जी की शिक्षा के अनुसार पारम्परिक उद्योग कर रहा है। लेकिन स्किल डैवलपमैन्ट के माध्यम से अगर वही काम ठीक से करे। हम टीवी पर एक विज्ञापन देखते हैं, जिसे लोग क्रिकेट जगत का देवता मानते हैं- सचिनजी, एक कारपेंटर के बच्चे को बोल रहे हैं कि तेरी और मेरी बराबरी है। तेरी बनाई हुई बैट मैं हाथ में लेता हूं, इसलिए मैं क्रिकेट का एक देवता बन गया हूं, लेकिन तू भी मेरे बराबर का है, तू यह बना सकता है, यानी तेरी और मेरी बराबरी है। इससे एक बहुत अच्छी शिक्षा मिलती है कि यदि कारपेंटर का बच्चा है और वही काम कर रहा है तो उसे अच्छा और स्किल्ड बनाना चाहिए। लेकिन प्लेसमैन्ट के आंकड़े में जाना ठीक नहीं रहेगा, उसे कितना प्लेसमैन्ट मिला है।
वैसे हजारों कारपेंटर के बच्चे स्किल डैवलपमैन्ट के माध्यम से बने होंगे, जिनकी बनाई हुई चीजें मार्केट में आती होंगी, स्पर्धा में उतरती होंगी, कम दामों में आती होंगी। ऐसे बहुत से हमारे गांव-गांव में अलग-अलग धंधा करने वाले लोग हैं। चमार हैं, मिट्टी के बर्तन बनाने वाले कुम्हार हैं एवं अन्य ऐसे बहुत से लोग हैं। हम हमेशा माननीय मंत्री जी का ध्यान इस बात की ओर आकर्षित करने का प्रयास करते हैं कि चाइना का बहुत सा माल हमारे देश में आता है। जो हमारे कुम्हार मिट्टी की चीजें बनाते थे, वे मिट्टी की चीजें आने लगीं। मकर संक्रान्ति के समय हम जो पतंग उड़ाते थे, वे पतंगें आने लगीं। दीवाली की लाइट की मालाएं आने लगीं। वे दीखने में अच्छी और सस्ती होती हैं। यदि इनका मुकाबला करना है तो हमें अपने लोगों को भी वही शिक्षण और प्रशिक्षण देना जरूरी है। यह बात ध्यान देने योग्य है कि हर जिले में एक स्किल डैवलपमैन्ट सैंटर खोलने का ऐलान किया गया है और वह चालू भी किया गया है। यहां तक कि जो संस्थाएं, एनजीओज ट्रेनिंग सैंटर्स चलाती हैं, रजिस्ट्रेशन करके वे भी युवाओं को स्किल डैवलपमैन्ट का प्रशिक्षण दे सकती हैं।
मैं माननीय मंत्री जी के ध्यान में एक बात लाना चाहता हूं कि जिन एनजीओज को आपने स्किल डैवलपमैन्ट का काम दिया है और जो भी युवा उनके पास आते हैं, रजिस्ट्रेशन करते हैं तो आठ हजार में से हम 33 परसैन्ट रजिस्ट्रेशन के देते हैं। जो भी उसका पीरियड होगा, उसके खत्म होने के बाद और 33 परसैन्ट देते हैं। लेकिन अगर उसकी प्लेसमैन्ट होती है तो बाकी बचे हुए 34 परसैन्ट देते हैं। लेकिन जैसी मनरेगा की हालत हुई कि कागज के ऊपर नाम आते थे, काम नहीं होता था, यह सिलसिला इसमें भी चालू हो गया है। हमारे यहां स्किल डैवलपमैन्ट के जो सैंटर्स बनाये गये हैं, वहां भी कागजों में नाम आने लगे हैं, हमारी योजना का मिसएप्रोपरिशन होने लगा है और इसलिए उसके लिए मानिटरिंग कैसा हो, सुपरविजन कैसा हो, यह देखना बहुत जरूरी है, तभी हमारी यह योजना सफल हो पायेगी।
दूसरी बात यह है कि हम इंफ्रास्ट्रक्चर में बहुत आगे बढ़ रहे हैं। फोर लेन, सिक्स लेन नेशनल हाईवेज बन रहे हैं। स्टेट हाईवेज का रूपांतरण नेशनल हाईवे में हो रहा है। वहां स्किल्ड मजदूरों की जरूरत है। हमारी रेलवे अब पहले जैसी सिम्पल नहीं रही। मैट्रो रेल चलने लगी है, बुलेट ट्रेन आने वाली है, उसके लिए अलग स्किल होना जरूरी है, इसके ऊपर भी हमें ध्यान देना पड़ेगा। जहां ज्यादा काटन बनता है, जहां टैक्सटाइल इंडस्ट्रीज हैं, वहां टैक्सटाइल का ट्रेड निर्माण करने वाली आईटीआई का निर्माण करना जरूरी है। जहां फूड प्रोसेसिंग है, वहां फूड प्रोसेसिंग के लिए कौन सा स्किल चाहिए, आईटीआई के माध्यम से या किसी और ट्रेनिंग सैंटर्स के माध्यम से प्रशिक्षण देना जरूरी है। यानी जब तक हम प्रैक्टिकल में नहीं जायेंगे कि किसे क्या जरूरत है। इसलिए मैंने यहां बताया है कि अगर इस समस्या का समाधान करना है तो उसकी जड़ में जाना पड़ेगा। यह समस्या क्यों पैदा हुई? समस्या दूर करनी है तो हम क्या कर सकते हैं? जैसा अभी मैंने बताया कि पहले हमारी समस्या है कि हमारे गांव-गांव में लड़के हैं, बच्चे हैं, युवा हैं जो कम पढ़े-लिखे हैं, कोई रोज़गार नहीं है, इसलिए तो यह स्किल डेवल्पमेंट की संकल्पना आई है, तो उसको बढ़ावा देना जरूरी है। कितने जाब्स दिए, कितने प्लेसमेंट हुए इन आंकड़ों को मैं ज्यादा महत्वपूर्ण नहीं समझता हूँ। क्या ऐसी कोई इंडस्ट्री है? जैसे कंस्ट्रक्शन इंडस्ट्री है, कुछ बड़े शहरों में 30-40 मंजिल बनती थी, आज हर शहर में बनने लगी है। पुरानी बिल्डिंग तोड़ कर रीडेवल्पमेंट के नाम पर बड़ी-बड़ी बिल्डिंग्स बनने लगी हैं तो वहां भी जो वर्कर्स होंगे, जब तक उनका स्किल अच्छा नहीं होगा, तब तक इतनी बड़ी बिल्डिंग नहीं बना पाएंगे। हर चीज़, हर जगह यह संशोधन होना जरूरी है। जहां जरूरत है, वहां ट्रेनिंग सेंटर्स हम खुलवाएंगे और उसका सही इस्तेमाल हो इसलिए अच्छी मॉनिट्रिंग करें, यह बहुत ही जरूरी है। सभापति जी आउट ऑफ वे आपने मुझे ज्यादा समय दिया उसके लि आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।
डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक (हरिद्वार): सभापति महोदय, मैं कौशल विकास मंत्रालय की अनुपूरक अनुदान मांगों के पक्ष में बोलने के लिए खड़ा हुआ हूँ। सबसे पहले मैं माननीय मंत्री जी को बधाई देना चाहता हूँ कि जिस क्लेवर के साथ, जिस शालीनता के साथ, जिस प्रखरता के साथ आप नवयुवकों को और जिन हाथों में हुनर जाना चाहिए था, उनको पहचान कर के एक मिशनपूर्वक यह काम शुरू किया है। प्रधान मंत्री जी का जो विज़न मेक इन इंडिया, स्किल इंडिया, डिजिटल इंडिया है, इनका जो सेतू है, मुद्रा बैंक योजना और स्टार्ट-अप है, वहां उसकी मूल धारा में राजीव प्रताप रूढ़ी समन्वय के साथ उसको आगे बढ़ाएंगे, ऐसा हमारा पूरा विश्वास है। महोदय, यदि आप देखेंगे तो 67 वर्ष के बाद उद्योगों के बीच तारतम्यता का सर्वथा आभाव था और लाखों-करोड़ों की संख्या में शिक्षित बेरोज़गारों की फौज़ देश के अंदर खड़ी हुई थी। कभी किसी ने इस पर विचार नहीं किया। 29 राज्यों के 21 मंत्रालयों के 70 कार्यक्रम चल रहे थे। अभी मेरे मित्र बोल रहे थे, यदि उनको देखा जाए कि कितने कौशल विकास कर के कितने लोगों को रोज़गार मिला, मैं वहां नहीं जाना चाहता हूँ, क्योंकि मैं समझता हूँ कि देर से ही सही, हमने यह काम शुरू तो किया है। प्रधान मंत्री जी का जो विज़न था, जिस तरीके से उन्होंने सोचा, नौजवानों के बारे में सोचा, कौशल के बारे में सोचा और एक पृथक मंत्रालय बना कर अपने विज़न को प्रमाणिक तरीके से यह साबित कर दिया कि पूरी दुनिया में जहां 15 वर्ष से 50 वर्ष तक की आयु की सर्वश्रेष्ठ शक्ति सर्वाधिक पूरी दुनिया में हमारे पास है, उस शक्ति का उपयोग कर के हिंदुस्तान को उसके शिखर तक पहुंचा कर एक नए विजन को देने की कोशिश हुई है। विश्व परिदृश्य में यदि देखेंगे तो जहां इंग्लैण्ड में 68औ कुशल कारीगर हैं, जर्मनी में 75औ हैं, जापान में 80औ और दक्षिण कोरिया में 96औ कुशल कारीगर हैं, वहीं हमारे देश की स्थिति यह है कि केवल 4.69 प्रतिशत कुशल कारीगर हैं। ऐसी स्थिति में आज हम उस स्थान पर खड़े हैं जहां 4.69औ कुशल कारीगर हैं, तब हम बोलते हैं कि मेड इन चाइना क्यों हो गया, मेड इन जापान हिंदुस्तान में क्यों आ रहा है। यह हमने आमंत्रित किया है। मैं प्रधान मंत्री जी को धन्यवाद देना चाहता हूँ। राजीव प्रताप रूड़ी को उनकी क्षमताओं के अनुसार यह विभाग दिया गया है कि कैसे विभागों को ले कर वे समन्वय करेंगे और युवाओं के प्रेरणा के रूप में पूरी दुनिया में उदाहरण देंगे।...(व्यवधान)
श्री मल्लिकार्जुन खड़गे : आपको मालूम है कि यह कैसा डिपार्टमेंट उनको दिया है कि ऊपर शेरवानी और अंदर परेशानी। ...(व्यवधान)
डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक:महोदय, यह तो इन्हीं का करतब है कि इतने कम संसाधनों में भी असीम शक्ति का सृजन करके इन्होंने काम करना शुरू किया है। यही इनकी ताकत भी है। मैं अभी इसे देख रहा था कि प्रधान मंत्री जी ने जिस तरीके से उद्यमिता, विकास के रूप में, मेरा उत्तराखंड छोटा सा राज्य है, उसमें 54 हजार युवाओं को 180 करोड़ रूपए केवल प्रधान मंत्री मुद्रा योजना के तहत दिये गये। यह जो योजना है, स्किल डेवलपमेंट करने के लिए, कौशल और उनकी योग्यता के अनुरूप उनको आगे बढ़ाने का काम है, निश्चित रूप में जिस तरीके से पहली बार आपने राष्ट्रीय कौशल विकास उद्यमिता नीति को बनाया है, जिस तरीके से भारत में पहली बार राष्ट्रीय कौशल विकास मिशन का आपने गठन किया है, जिस तरीके से पहली बार देश के अन्दर राष्ट्रीय कौशल अहर्ता ढ़ाँचे को क्रियान्वित किया है और जिस तरीके से दिसम्बर 2016 तक आप सभी कौशल विकास कार्यक्रमों से सम्बद्ध हो जाएंगे, मेरा भरोसा है कि उस दिन देश की तस्वीर बदल जाएगी और एक नए युग का सूत्रपात निश्चित रूप में होगा। इसके लिए मैं आपको बधाई देना चाहता हूँ।
आपने जिस तरीके से इस भारत को पूरे विश्व के कौशल केन्द्र के रूप में विकसित करने का जो विजन और संकल्प लिया है, उसके लिए भी मैं आपको बधाई देना चाहता हूँ। उसके तहत हमारे मंत्री जी ने राष्ट्रीय स्तर पर वृहद जागरूकता अभियान शुरू कर दिया। सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के उद्योगों और सामाजिक दायित्व के ढ़ाँचे को बेहतर आपने समन्वय करने की दिशा में काम करना शुरू कर दिया। 7 हजार नए आईटीआई की स्थापना सुनिश्चित करना तय कर दिया और सितम्बर 2016 तक 25 लाख आईटीआई सीट्स का महत्वकांक्षी लक्ष्य रखा गया है। जिस बात की अभी चर्चा हो रही थी, आईटीआई थे, पॉलिटेक्निक थे, लेकिन वे पुराने ढ़ाँचे पर चल रहे थे, जो प्रशिक्षु वहाँ प्रशिक्षण लेते थे, उनको उद्योगों के अनुरूप प्रशिक्षण नहीं दिया जा रहा था। यह पहली बार हुआ है। वर्ष 2013-14 में 50 हजार की गति से आईटीआई की सीटें बढ़ी, वहीं वर्ष 2014 के पश्चात् इसमें तीन गुना से भी अधिक 1 लाख 70 हजार सीट्स की बढ़ोत्तरी आपने की है। इसके लिए भी मैं आपको बधाई देना चाहता हूँ। वर्ष 2013-14 में जहाँ 1,290 स्कूलों में स्कूलों में व्यावसायिक शिक्षा प्रदान की जा रही थी, आज तीन हजार से भी अधिक शिक्षण संस्थानों में व्यावसायिक शिक्षा आपने शुरू कर दी है। मैं इसके लिए भी आपको बहुत ज्यादा बधाई देना चाहता हूँ। महिलाओं के लिए पाँच केन्द्रीय प्रशिक्षण संस्थानों की स्थापना गत वर्ष में आपने की और अस्थायी कैम्पों के माध्यम से जो नया प्रशिक्षण आपने शुरू किया, यह भी एक नया चमत्कार होगा ताकि महिलाएं भी अपने आधार पर खड़े होकर स्वाभिमान से जी सकेंगी।
महोदय, जनवरी माह में राष्ट्रीय उद्योग कौशल विकास कान्क्लेव के माध्यम से देश में सार्वजनिक क्षेत्र और निजी क्षेत्रों को कौशल विकास के सेन्टर ऑफ एक्सिलेंसी स्थापित करने के लिए एक अलग सा प्रयास आपने किया है। इसके लिए भी मैं आपको धन्यवाद देना चाहता हूँ और जो विश्व बैंक से 1,672 करोड़ रूपया मिलेगा, जिसकी आपने एक अलग से परियोजना तैयार की है, मुझे लगता है कि जिस तरीके से आपने काम करना शुरू कर दिया, निश्चित रूप से उसमें बाधा नहीं आएगी। मैं कहना चाहूँगा कि मंत्री जी ने उद्योगों के साथ मिलकर जो यह काम शुरू किया है, जब वर्ष 2010 में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के रूप में मुझे काम करने का सौभाग्य मिला था तो हमने उद्योगों के साथ एक आशीर्वाद योजना चलाई थी। ग्रामीण क्षेत्र के जो बच्चे हाई स्कूल करने के बाद पढ़ नहीं पाते थे, लेकिन वे प्रतिभाशाली थे, उनको वहाँ से चयनित करके और उद्योगों के साथ संयुक्त रूप में अपने तरीके से उन्होंने उनका प्रशिक्षण प्राप्त किया और आज मुझे यह कहते हुए संतोष हो रहा है कि डेढ़ हजार से भी अधिक बच्चे आज अन्तर्राष्ट्रीय स्तर की शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं, जो हाई स्कूल से ऊपर पढ़ नहीं पाते थे। जो आपने उद्योगों के साथ मिलकर के उन्हीं के अनुरूप पाठय़क्रम सुनिश्चित किया है, यह निश्चित रूप में एक बहुत बड़ी सफलता हमारे लिए होगी। जिस तरीके से अभिनव सोच का आपने समयबद्ध क्रियान्वयन किया है, यह शायद इसकी ज्यादा ताकत बनेगी। जिस तरीके से आपने माँग आधारित परिवर्तनशील कोर्सों को सुनिश्चित किया है, यह बड़ी बात है। उद्योग और संस्थानों में जो समन्वय करने की बात आपने की है, वह बहुत महत्वपूर्ण है। पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप का जो नया इको-सिस्टम बनाने की आपने बात की है, यह बहुत जानदार बात है। सभी मंत्रालयों के लिए कौशल विकास के क्षेत्र में जो अलग दिशा-निर्देश देने की आपने बात की है, यह भी आपकी ताकत बनेगी। सॉफ्ट स्किल के लिए पृथक नीति आप बना रहे हैं। कम्प्यूटर, सूचना प्रोद्योगिकी में नई क्रान्ति की दिशा में आपने कदम उठाया है। आप कौशल विकास की अहर्ता के लिए जो मानक स्थापित कर रहे हैं, निश्चित ही यह इस मंत्रालय के लिए बहुत बड़ी बात होगी। जो नौजवान इस रास्ते पर आँख गड़ाए हुए हैं आशा की किरण के रूप में, निश्चित रूप में उनको एक नया अंदाज़ मिलेगा। भारत को विश्व की कौशल राजधानी बनाने की जो कवायद की जा रही है, यह भी अपने आप में यशस्वी प्रधान मंत्री जी की देन है जिन्होंने भारत की युवा क्षमता को पहचाना है और विश्व के प्रदेशों में भारत को एक नई आर्थिक शक्ति के रूप स्थापित करने हेतु कौशल विकास के माध्यम से समृद्ध भारत की आधारशिला रखने का जो संकल्प लिया है, वह राजीव प्रताप रूडी जी से होकर गुज़रता है। इसके लिए मैं उनको बधाई देना चाहता हूँ।
अध्यक्ष जी, जैसे कहा जा रहा था कि इस वर्ष में 18 लाख नौजवानों को रोज़गार मिलेगा, 10 लाख लोगों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। प्रशिक्षण लेकर वे कहीं न कहीं रोज़गार पा रहे हैं। इसलिए यह एक बड़ा अभियान है और आधुनिक तकनीकी युक्त पाठय़क्रमों में जिस तरीके से देश में पिछले साल आपने 1141 नए आई.टी.आईज़ की स्थापना की जिसमें 1.73 लाख सीटें जोड़ीं, 15 हज़ार प्रशिक्षकों को विशेष प्रशिक्षण दिया, ऐसे ही यदि देखा जाए तो जितने आई.टी.आई. के प्राचार्य हैं, उनके माध्यम से निगरानी तंत्र को आपने सुदृढ़ किया है, पोर्टल बनाया है। राष्ट्रीय लघु उद्योग और उद्यमिता विकास संस्थान के तहत दो लाख प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षण देने का जो अभियान है, निश्चित रूप में यह स्तुत्य है और मेरा भरोसा है कि आप इस दिशा में आगे बढ़ें और निश्चित रूप में यह मंत्रालय इस देश के लिए विश्व के आधार पर खड़ा होगा।
एक बार पुनः मैं मंत्री जी को कौशल विकास की विकासोन्मुखी योजनाओं के लिए हार्दिक बधाई देना चाहता हूँ और आशा प्रकट करता हूँ कि समृद्ध और सर्वश्रेष्ठ भारत का सपना साकार होगा, चाहे वह डिजिटल इंडिया योजना हो, मेक इन इंडिया हो, स्किल इंडिया हो या स्टार्टअप इंडिया हो, सभी की सफलता आपके मंत्रालय और आपकी कार्यकुशलता, आपकी उत्कृष्टता और रणनीति पर निर्भर करेगी। मुझे विश्वास और भरोसा है कि आप कौशल विकास एवं उद्यमिता विकास के रूप में समृद्ध भारत की आधारशिला रखने में सफल होंगे। आपको मेरी शुभकामनाएँ और बधाई।
SHRI JAYADEV GALLA (GUNTUR): Hon. Chairperson, Sir, thank you for giving me this opportunity to speak on this debate on the Ministry of Skill Development and Entrepreneurship.
Sir, I would like to congratulate the hon. Speaker for having chosen to discuss the demands of the Ministry of Skill Development because it paves the way for getting the ways from different quarters of this House so as to achieve the hon. Prime Minister’s dream of making India the skill capital of the world. But the challenges to cement the fractured skilled eco system are existing in the country over many decades. With a committed and dynamic Minister like Shri Rudy at the helm of affairs, I am confident that we would be able to face this challenge and convert it into an opportunity. I am saying opportunity because India is one of the youngest nations in the world, as many speakers have already mentioned, with more than 62 per cent of its population in the working age group of 15 to 59 and more than 54 per cent of our population is below 25 years. This is the demographic dividend we have. But at the same time, if you look at the workforce, in the form of vocational training it is shameful. It is 2.2 per cent of our population. If we compare this with countries around the world, we would find South Korea leads with 96 per cent, Japan at 80 per cent, Germany at 75 per cent, UK at 68 per cent, Australia at 60 per cent and even China is at 47 per cent. But only a meagre 2.2 per cent of our population is skilled. So, this is a big challenge. Even if we increase the skilled workforce from the existing 2.2 per cent to 22 per cent by 2022, it would be a great achievement.
The second challenge is that we have a very small capacity of vocational stream at the school level. There is less than 2 per cent in vocational stream in high school when compared to 50 per cent in China and nearly 60 per cent in Japan. It is because of this very low percentage of vocational capacity we have only 2.9 lakh apprentices when compared UK’s 8.6 lakhs, Germany’s 30 lakhs, Japan’s one crore and China’s two crore apprentices. So, the hon. Minister has to take steps to wipe out the mindset of the people who give preference to academics over technical skills.
Sir, I also wish to point out that academic knowledge can become outdated or obsolete but skills are more durable and should be emphasized and people will be employable for a much longer period with good skills compared to educational knowledge. So, the emphasis has to be given on skill development.
The third challenge is about resources. With a merger Rs. 1800 crore for the Ministry, I fail to understand how the Minister will be able to balance his priorities. I strongly feel that the Budget given is not enough and appeal to the House to request the Finance Minister for enhancing the same not at the RE stage but at the BE stage itself.
If you look at the skill requirements, there are 24 to 25 sectors where you need skilled people. But out of these sectors, there are ten important sectors which require the bulk of skilled work force. Building, construction and real estate has a demand of 330 lakh people, transport and logistics has a demand of 350 lakh people, infrastructure sector demands 10 crore people, health care sector has a demand of 127 lakh people and retail sector has a demand of 17 crore people.
To achieve this, the hon. Minister has undertaken some schemes like Prime Minister Kaushal Vikas Yojana with Budget allocation of Rs. 1700 crore, setting up of ITIs, Skill Loan Scheme, etc. but I only wish to touch Skill Loan Scheme.
Sir, under this, you are going to distribute 34 lakh skill loans in a span of five years by giving amounts ranging between Rs. 5000 and Rs. 1.5 lakh without any collateral requirement. But, so far this scheme has not been notified. I request that this should be rolled out immediately and increase the number of loans from 34 lakhs to one crore. It is only then that at least 50 per cent of them will succeed and they can provide skills to many people.
I remember the hon. Prime Minister asking the Ministry to prepare skill map of the world to find out the skill requirements of each country and the areas in which they need skilled workforce. The House would be happy to know as to what the Ministry has done in this regard. The hon. Prime Minister has rightly asked this because by 2020, India will have a labour surplus of 4.7 crore whereas many countries would face a total deficit of 5.65 crores. So, we have to take steps to translate the demographic dividend into developmental payoff.
The hon. Finance Minister announced in the Budget that 1500 Multi Skill Training Institutes will be set up under PPP mode. I hope that the hon. Minister will fully utilise this announcement and push this proposal to ensure that Skill Training Institutes are a new generation of ITIs. Secondly, the World Bank has also approved a project called the Skill Training for Employability leveraging PPP.
I would like to know the status of the project because merely skilling is not enough. We want that people should have enough skills for employability. Otherwise, what is happening with engineering graduates will happen with skilled work force as well.
I would like to make a very important point here on the dignity of labour. As a child growing up in America, I delivered newspapers, I worked in a tennis club, worked in men’s retail and did many odd jobs while I was growing up. I never felt ashamed about it and I never felt disrespected because of that. But today, if we look at the work force in India, if we look at our security guards or drivers or domestic workers or waiters or gardeners or construction labourers or even the workmen in factories, I do not think they feel respected in our society. I think we have the problem of dignity of labour. It is not that people who are doing the labour feel that they are not dignified but I do think that the society is not recognising the value that they are contributing towards the society and giving them the respect which they deserve. Because of this, many people are not willing to take up these jobs. If we look at the children of farmers, getting them to get trained is one challenge. But then getting them to be put into a job which they feel is below their dignity is another big challenge and therefore, even though we have people and we may skill them, they may not be willing to do these jobs unless we improve the dignity of labour.
Coming to Andhra Pradesh, we require nine lakh skilled workers in areas of smart cities, grids, industrial hubs, IT, etc. in the next four years to build the new State as per the State Skill Development Corporation but if you look at the targets and achievement under the Skill Development Initiative Scheme from 2011-12 to 2014-15, we have not achieved even one-third of it. It was targeted to provide 1.6 lakh skilled force but only 50,000 have been able to be provided with skills.
So, I request the hon. Minister to pay more attention to Andhra Pradesh since it is starting its journey from scratch and requires the support of your Ministry the most to reach its destination.
I suggest for the consideration of the hon. Minister for setting up of five to six multi-skilling institutions in each district with sector-wise Skill Councils in every State.
Secondly, there is a need to set up Skill University on the lines of Central University in every State.
Shri Rudy should discuss with the Minister for Corporate Affairs and convince him that some portion of CSR money should be permitted to be used for skill development.
I would like to draw the attention of the Minister again to this particular point. If, today, the CSR funds are not allowed to be utilised for skill development, I think that is a big anomaly and, I think, if you can speak with the Minister of Corporate Affairs to get this changed a lot more corporate money can come into skill development, which is the dire need.
The Minister also has to take steps to incorporate skill development courses in polytechnics and engineering colleges. Although I know some of this is happening, it can happen a lot more. The hon. Minister is very well aware that we have huge infrastructure in railways, road transport, PSUs, etc. which we have to fully utilise for skilling India.
We have not signed any MoU with Japan and Korea which are the pioneers in producing skilled workforce. We should utilize their expertise and take their help to achieve our goals as well.
With Start Up India and Stand Up India initiatives, I am sure that the Government would achieve its objective of creating 3,000 start ups in the coming five years. Stand Up India initiative will boost entrepreneurship among women, Scheduled Castes and Scheduled Tribes. But I suggest for the consideration of the hon. Minister to also include OBCs in this list. Under Stand Up India, I think, you are asking every branch of banks to sanction at least two projects, one for women and one for SCs and STs. Here also I request you to include OBCs under this and direct banks to sanction these projects under the last one for the OBCs as well.
With these observations I support the Demands for Grants of the Ministry. Thank you.
SHRI KONDA VISHWESHWAR REDDY (CHEVELLA): Mr. Chairman, Sir, thank you for this opportunity.
The country is facing many challenges like corruption, terrorism, extremism, communalism, alcoholism, juvenile crimes, farmers suicides, malnutrition, and, of course, rural unemployment. But, I think, the biggest challenge is the rural unemployment and youth unemployment. Not only it is a big problem, it is probably a solution to all these other problems. Once we solve this problem, all these other problems start diminishing. So, I think, the Ministry is playing an extremely important role. The present Government has made some significant and positive steps.
The Ministry had asked for Rs. 4,000 crore and the Finance Ministry has allocated just Rs. 1,800 crore despite skill development being a major challenge. The Government has made some policy changes and I must appreciate that. I recall that in 2014 we introduced the Apprenticeship System (Amendment) Bill. At that time I had the opportunity to speak and I pointed out that it is under the wrong Ministry. The apprenticeship system was under the Ministry of Labour. As the apprenticeship system is about taking unemployed youth and making them employable, that is actually should be under the Ministry of Human Resource Development and that was the suggestion we made to the Government. The Government was very pro-active. It went one step ahead and created a new Ministry and it is definitely applaudable and we see the Government’s commitment to this. But, however, this simple pro-active step is not enough, rhetoric is not enough and we need much more.
As per the UN World Population Prospectus of 2015, India is one of the youngest nations with a mean population age of 27 vis-à-vis 37 for China. We need well-informed and focussed strategy to skill this young nation. In the past many countries faced a similar situation and have failed. Spain is a glaring example. Spain had a similar problem and then actually the problem got compounded because of not addressing the issue properly. In fact, their unemployment rose to 42 per cent. Greece is another example. Greece mishandled the issue. Of course, there is an economic reason to it. But there was also a policy reason to it, where the number of Government jobs was increasing and that of the private sector was reducing. I think these are two glaring failures. I think we should study what went wrong there and should not repeat.
The 12th Plan projected that by 2017 the total labour force will be 502 million. But currently only 10 per cent of the work force is trained, which includes three per cent formally and seven per cent informally compared to 50 per cent of Australia, 96 per cent of Korea, 80 per cent of Japan, etc. A large portion of the work force in India does not get an opportunity for training. The focus of the Government on providing decent job opportunities on the one hand and skill man power on the other hand, to improve competitiveness in a highly globalised economy makes skill development very urgent.
Hon. Minister, Shri Rudi has once mentioned that 66 years have gone and we have not thought about skills. We appreciate his concern. I think, he is doing a good job. Nevertheless, it is just not sufficient because of the enormity of the problem. It is very huge. He asked for Rs.4,000 crore but the Finance Ministry has given only Rs.1,800 crore. I would like to know from the hon. Minister as to what was the reason for reducing the grant sought. I hope, Rudi ji would answer this; if not, the Finance Minister has to give the response.
Once again I would like to say that it is not just about money; it is about the policy. If you really want skill development to succeed in all vocations, then those vocations should be certified. A barber should be a certified barber; a plumber should be a certified plumber. Likewise a mason, an electrician, a carpenter, a construction labour, a gardener – they all should be certified. That is how it happens in all the developed countries where youth unemployment is low.
Actually, in many countries like the United States and European countries, even to be a farm labour, you need a certification; and training of one year to become a farm labour. We don’t have that. That is where the policy helps. Just money is not sufficient; policy change is required.
More importantly, not just certification is enough but certification by whom? This is where significantly the Government is going wrong. As Shri Satav has pointed out many of these things are recognised by the previous Government also; they tried to do something in right earnest but they had a limited success. While the present Government is continuing, I think, they are also bound by the same fate – a limited success. We don’t want limited success; we want huge success here. That can be done not just by spending huge money but by changing the policies a little bit. This is where a significant change is required. So, who should certify them? Who should certify a plumber? Definitely not by an IT company which has diversified into a skill development company; or not by an infrastructure and leasing company which has diversified into a skill development company. They should not be certifying. Only a plumber knows who is a better plumber, only an electrician knows who is a better electrician.
In India, there are many skills – skill development itself becomes an industry. Skill development is supposed to promote manufacturing and other industries. But in India, skill development itself has become an industry. Lot of companies are profiting out of skill development and some of these are unethical.
As per the CAG Report Tabled in Parliament, the appointment of ILFS Trust company like Micro Prudential Regulator in 2014 for the national skill development is a clear conflict of interest. Another subsidiary company of this received Rs.159 crore. There are some companies which have no particular competency. They are seen as yojana companies. They follow yojanas. If this yojanaor this scheme or that policy has more than Rs.1,000 crore, I will be in that business. So, the Minister has to be cautioned that we should not promote these companies following Government funds. You should focus `skill development’ of those companies which actually involved in that particular vocation.
One significant policy change required is concerning certification. In our country or most countries all over the world, doctors certify doctors. The MCI certify doctors; lawyers certify or qualify lawyers; similarly Chartered Accountants. But here, I think we are doing it totally in a wrong way. We are asking an IT company or any private entrepreneur to go and certify; and it has become a very big business. Maybe I should not use the word `scam’, but it was misused in the last Government, and it is being misused now.
Rose by any other name is still a rose. Similarly, if I call lily a rose, it won’t become a rose. The Government prepares various schemes, printed brochures and pamphlets and they call it `Apprenticeship Training Scheme’. This is not `Apprenticeship Training Scheme’; this is yet another skill development which they labelled it as `Apprenticeship Training Course’. In the Apprenticeship Training, it is the guilds, unions and associations involved in that vocation, they only certify. So, I think, this is the simple policy change which is required. It does not require huge amount of money and it can make a huge difference.
Sir, I would like to make just two more points. The Government is working with about 10 other Ministries. I would like to suggest to the Government to work with the Ministry of New and Renewable Resources and also to promote FDI because FDI is required. There are some investments worth Rs. 10,000 crore, but they produce only one or two jobs. For example, in the case of solar power, when we invest Rs. 100 crore and put up a 10 MW solar plant and it creates only about 10 jobs, whereas in the case of biogas plants, if we promote biogas in a big way, in every village we can create three jobs and that is about 14 lakh jobs in the country Lastly, more is not enough. Change is required; a change in policy is required. Thank you.
SHRI MD. BADARUDDOZA KHAN (MURSHIDABAD): Mr. Chairman, Sir, I thank you for giving me this opportunity to participate in the discussion on the Demands for Grants of the Ministry of Skill Development and Entrepreneurship for the year 2016-17.
Sir, it is an important subject for discussion today. There is no doubt that India needs to equip its own work force with employable skill and knowledge. It will help our country’s economic growth. It is seen that only 4.69 per cent of the total work force in India has formal skill training whereas in United Kingdom it is 68 per cent, in Germany it is 75 per cent, in USA it is 62 per cent, in Japan it is 80 per cent and in South Korea it is 96 per cent.
Today, the total work force in our country is nearly 487 million and out of that approximately 241 million are either skilled or they have some informal training. This is the actual position of our country. In this situation, what should we do? Realizing the situation, the National Skill Development Corporation was formed in 2009 and thereafter some other organizations have also been established to promote skill development and entrepreneurship rapidly. Due to this effort, Vocational Training Institutes, Industrial Training Institutes and Polytechnics have now grown in numbers.
But there are three major challenges which we are facing in our country now. The first major challenge is creation of jobs for the skilled youth. Secondly, women are almost half of the total population and so half of the total work force in the country. The key challenge here is to increase their participation in the country’s labour force which is directly linked with the economic growth of our country. But the Census data reveals that there is a continuous fall in women’s participation from 33.3 per cent to 26.5 in rural areas and from 17.8 per cent to 15.5 per cent in urban areas between 2004 and 2011. This is the situation today. The Government should take it very seriously as we are in 21st Century. At this juncture, I am thankful to the Minister that in the Budget of 2016-17, Rs. 500 crore has been allocated to support SC/ST women entrepreneurs. This is a good step.
Thirdly, according to NSDC, there is a severe quality gap and lack of availability of trainers in vocational education and training sector. Not only that, but some Polytechnics and some Professional Institutions also have no qualified teachers. It is a reality that one qualified teacher is enrolled in many institutions and some other local unqualified teachers are taking classes. In this situation, how can we develop the skill of the youth of our country? This is the prevailing situation in some areas and this is the situation in West Bengal also.
Then, there are some other problems. I got the name of a nodal agency from the hon. Minister Shri Rajiv Pratap Rudy. He is not present now. I got the name when I met him in a meeting in Parliament House Annexe. He supplied some papers and from that I got the name of a nodal agency to implement skill development training in my constituency. When I met with one such agency, I came to know that the agency has no training institute of its own in my constituency. He has given some franchise in my constituency area. Actually he has no good infrastructure for such quality training. It is the situation. They will give some certificate for skill development after a certain period. Actually, they will earn some money from this. I do not know how skill will be developed. We are in a hurry to do this. It is the present situation. So, I would urge upon the Government to allocate fund to set up at least two good working skill development centres in my constituency. There is no skill development centre in my constituency.
I would like to suggest the concerned Ministry that after the elementary education, there should be a mechanism of selection within the students who are fit for higher education and the rest will go for vocational training. देश में बच्चों की ऐसी स्थिति है कि जो बच्चा पढ़ता है और जिसके पास पैसा है वह बहुत बड़ी डिग्री ले लेता है। वह उस डिग्री को लेने के लायक नहीं है लेकिन उसे डिग्री मिल जाती है। जिसको रिसर्च करनी है वह डॉक्टर बन जाता है और दूसरा कुछ बन जाता है। जिन्हें टीचर बनना है वह कुछ और बन जाता है। यहां कोई सेलेक्शन का प्रोसिजर नहीं है। इससे वेस्टेज के सिवाय कुछ नहीं होता। एलेमिनेटरी एजुकेशन के लेवल से मैक्निजम होना चाहिए, वही से हम सेलेक्शन करे लें कि किसको रिसर्च करना है और किसे हायर एडुकेशन देना है और बाकी को वोकेशनल कोर्स देना है, ऐसा करने से वेस्टेज कम होगा और देश सही दिशा में आगे जाएगा। यही दिशा हमको देश को दिखानी चाहिए, यही काम हमें करना चाहिए। मैंने एक मीटिंग में सुना कि हमारे देश में जितने इंजीनियर बनते हैं वह इम्पलाएबल नहीं है, वह कॉलेज से डिग्री लेकर निकलते हैं। बीजेपी के फ्रेंडस ने कहा कि हम घंटों में ये काम कर देंगे, एक ने बताया कि इसी स्कीम के तहत 10 लाख नौकरी दे दी। मैं तो सोचता हूं कि क्या कोई मैजिसिएन है? क्या ऐसा होता है कि आप मास्टर डिग्री 2 घंटे में ले लेंगे? क्या स्कूल सर्टिफिकेट 3 महीने में ले लेंगे? स्किल डेवलपमेंट के लिए टाइम चाहिए, आप मास्टर डिग्री लेंगे तो ग्रेजुएशन के बाद 2 साल लगेंगे। क्या तीन महीने में ले सकते हैं, हां, आप ले सकते हैं। इस तरीके से अगर आप डिग्री लेंगे, इस तरीके से अगर स्किल डेवलपमेंट करेंगे तो आपको सर्टिफिकेट मिलेगा लेकिन आप कुछ नहीं सीखेंगे, फिर वही बात होगी कि हमारे यहां से इतने इंजीनियर निकलते हैं और इम्पलाएबल नहीं हैं। जितने हम स्किल डेवलपमेंट करेंगे वह इम्पलाएबल नहीं होगा, इस पर हमने जितना पैसा खर्च किया वह सब पानी में जाएगा। मिनिस्ट्री की तरफ से जो इनिशिएटिव लिया गया है वह अच्छा है, मिनिस्टर भी अच्छे हैं, वह अच्छा इनिशिएटिव लेते हैं और सभी को साथ लेकर चलने का कोशिश करते हैं लेकिन इसमें जल्दबाजी करने से कुछ नहीं होगा। मुझे मालूम है कि यह नई सरकार है, मिनिस्टर भी नए हैं, सरकार को मात्र दो साल टाइम मिला है, इतने कम समय में यह काम इतना जल्दी नहीं हो सकता। अगर जल्दबाजी करेंगे तो यह काम अच्छा नहीं होगा। हम सोचते हैं कि यह काम अच्छे से करेंगे।
SHRIMATI BUTTA RENUKA (KURNOOL): Thank you, Chairman, Sir, for giving me this opportunity. Since time immemorial, skill development, as a concept, has been prevalent in our country though in different forms. Different skills were identified with different caste structures. Skill and caste were interlinked. Each caste was assigned a particular skill. The skills used to be passed on from one generation to another. As the economy developed and education spread among the people, the traditional skills are giving way to modern technology leading to unemployment among the rural artisans.
16.00 hours This government has rightly envisaged and launched the skill development programme in a big way so as to arrest the trend of rural artisans becoming un-employed and to provide them alternate opportunities so as to become economically independent. For this purpose, I suggest that people from traditional skill-based communities like weavers, carpenters shall be trained and equipped with upgraded skills to enable them to become entrepreneurs. Special focus shall be given to the inclusion of Scheduled Castes & Scheduled Tribes, minorities, differently abled, etc., in the skill development programmes. Focus shall be placed on encouraging women entrepreneurs through appropriate incentives for women-owned businesses. Specialized courses on social entrepreneurship should be introduced in academic institutions.
A majority of India's vast population is of working age. Urgent and effective action is needed to capture the demographic potential of India's youth. Despite efforts to hasten and scale up the process through the creation of the National Skill Development Fund, progress has not been very encouraging. Based on data from the 68th round of NSSO, it is estimated that only 4.69 per cent of India's total workforce has undergone formal skill training compared with 52 per cent in USA, 68 per cent in UK, 75 per cent in Germany, 80 per cent in Japan and 96 per cent in South Korea.
This government has rightly created the Department of Skill Development and Entrepreneurship which later on became a full-fledged Ministry with NSDA, NSDC and NSDF under its purview.
Hon. Prime Minister has rightly said and I quote:
“Through a policy driven approach we have to wage a war against poverty and we have to win this war. India's youth is not happy, simply asking for things. He or she wants to live with pride and dignity. I believe Indian youth has immense talent, they just want opportunities.” The Prime Minister further said that each poor, underprivileged youth was a soldier in this war.
Though India has a large number of population in prime age, it currently faces a severe shortage of well-trained, skilled workers. Therefore, we must focus on skill training efforts to meet the demands of employers. In this connection my request is to accommodate the traditional skill-based communities like handloom weavers by giving them necessary training to upgrade their skills in their own professions and support them with financial inputs for modernising their equipment. Similarly the labour especially women who have been traditionally employed in beedi manufacturing can be provided necessary skill training in alternate areas so they can be relocated to other jobs.
Sir, lastly, I would like to suggest one thing. Ten Ministries are involved in this skill training. If the Environment and Forests Ministry is also included in this, it will really help. Thank you.
श्री जय प्रकाश नारायण यादव (बाँका) : सभापति महोदय, बड़ी खुशी की बात है कि कौशल विकास से संबंधित मंत्रालय की अनुदान मांगों पर चर्चा हो रही है। हमारी जो भारतीय सभ्यता और संस्कृति रही है, जो हाथ का हुनर रहा है और अंगुलियों का कमाल रहा है, उसका देश और दुनिया में कोई सानी नहीं है। दुनिया में हमारी सभ्यता, संस्कृति, हाथ के हुनर और अंगुलियों के काम की बहुत शान रही है। कौशल और श्रम की हम जितनी प्रतिष्ठा करेंगे, उतनी ही हमारी प्रतिष्ठा बढ़ेगी और हमें रोजगार के अवसर मिलेंगे।इसलिए हमें श्रम की प्रतिष्ठा करनी है और बेरोजगारी मिटानी है। आज जो हाथ खाली पड़े हैं, उन्हें रोजगार के अवसर मिलें, इसके लिए हमें बड़े पैमाने पर कौशल विकास के माध्यम से आगे बढ़ना है। यह सही बात है कि नयी हुकूमत आयी है, जिसमें माननीय मंत्री आदरणीय रूडी जी को कौशल विकास का दायित्व मिला है। इन्हें एक प्रयोगशाला मिली है, जिसमें वह बेहतरीन प्रयास कर रहे हैं कि कैसे इन चीजों को आगे बढ़ायें, कैसे रोजगार के अवसर लोगों तक पहुंचायें। इस सरकार ने यह सपना जरूर दिखाया कि हम पांच करोड़ नौजवानों को नौकरी देंगे, अच्छे दिन लायेंगे। अब रोजगार से अच्छे दिन आयेंगे, श्रम से अच्छे दिन आयेंगे और अच्छे दिन लाने के लिए कौशल विकास जरूरी है। जो सामाजिक न्याय की ताकतें हैं, वे कौशल विकास से जुड़ी हुई हैं। समाज में कई ऐसे लोग हैं जिनके पास हुनुर हैं। अब चाहे एससी, एसटी या ओबीसी का सवाल हो, उनमें ऐसे कई लोग हैं, जो कई परम्परागत रोजगार से जुड़े हुए हैं जैसे बुनकरी, शिल्पकारी उद्योग हैं। बिहार के भागलपुर को रेशम का शहर कहा जाता है। बांका में बुनकरों का बहुत बड़ा हब हैं। वहां बुनकर उद्योग पनपता है। देश और दुनिया में मधुबनी की पेंटिंग का डंका बजता है। चांदी की मछली जो बिहार, मुंगेर, खड़कपुर और बांका में बनती है, उसका कोई सानी, जोड़ नहीं है। लखनऊ में कपड़े पर जो चिकन का काम होता है, उसका भी दुनिया में कोई जोड़ नहीं है। बनारसी साड़ी का भी दुनिया में कोई जोड़ नहीं है। मुरादाबाद के बर्तन, फैजाबाद की चूड़ियां और अलीगढ़ के ताले का भी कोई जोड़ नहीं है। यह हाथ और अंगुलियां का कमाल है।
सभापति महोदय, स्मार्ट सिटी की बात की जाती है। मेरा बार-बार कहना है कि स्मार्ट सिटी से बेरोजगारी नहीं मिटेगी। स्मार्ट सिटी से रोजगार के अवसर नहीं मिलेंगे। स्मार्ट सिटी के नारों से देश नहीं बनेगा। जब कौशल का विकास होगा, तभी स्मार्ट गांव बनेगा। भारत गांवों का देश है। जब हाथ और अंगुलियों के कमाल से हुनुर मिलेगा,. तभी भारत का विकास होगा। हमारे अच्छे दिन तभी आयेंगे, वर्ना हमारे अच्छे दिन नहीं आने वाले हैं। बिहार में कालीन उद्योग, दरी उद्योग बहुत होता है। हमे व्यवसाय, कामकाजी लोगों, असंगठित मजदूरों को जोड़ना चाहिए और व्यावसायिक शिक्षा पर जोर देना चाहिए। हमें कुटीर उद्योगों जैसे बांस, मिट्टी, गिट्टी आदि कई उद्योगों पर भी जोर देना चाहिए। हैं। हमारा कहना है कि कौशल विकास की प्रतिस्पर्धा मशीन से नहीं होनी चाहिए। जो काम मशीन से होने वाला है, हम उसे मशीन से करेंगे। यदि मनरेगा का काम भी मशीन से होने लगेगा तो यह बहुत बड़ा खतरा है, चालाकी है, होशियारी है। इसे आप नहीं करते, हम नहीं करते। यदि मनरेगा का काम मशीन से होगा, तो हमारा हाथ गुलाम हो जायेगा। अगर हाथ गुलाम हो जायेगा तो हुनुर गुलाम हो जायेगा। यदि हुनुर गुलाम हो जायेगा, तो देश बेरोजगार हो जायेगा। ...(व्यवधान)
सभापति महोदय, मैं दो मिनट में अपनी बात समाप्त कर रहा हूं। हमारा यह सौभाग्य है कि जब आप चेयर पर होते हैं, तभी हमें बोलने का मौका मिलता है। हमें ऐसी चीजों पर ध्यान देना चाहिए। जो विकलांग लोग है, उन्हें विशेष सुविधा मिलनी चाहिए। उनके लिए हम कैसे रोजगार के अवसर प्रदान कर सकते हैं, कैसे स्किल्ड डेवलपमैंट के काम कर सकते हैं, यह भी हमें सोचना चाहिए। बैंकों से कर्ज मिलने की व्यवस्था बेहतर होनी चाहिए। कम ब्याज पर बैंकों से ऋण मिलना चाहिए। आईटीआई संस्थान को बेहतर बनाना चाहिए, प्रशिक्षण केंद्र को आगे बढ़ाना चाहिए। राष्ट्रीय कौशल विकास, प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना में गरीबी, गुरबत के इलाके, जहां आदिवासी हैं, कंदरा हैं, जंगल हैं, पहाड़ हैं, मिट्टी में काम करने वाले लोगों और वामपंथ के इलाके में काम करने वाले लोगों को रोजगार मिलना चाहिए। इसके लिए सारे संसाधनों को जोड़िए। बिहार में होनहार लड़के हैं, बेरोजगारों को रोजगार के अवसर दीजिए चाहे नार्थ-ईस्ट या देश के किसी कोने में दीजिए।
हमें विश्व कौशल स्पर्द्धा में आगे आना है। प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना, दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना, राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन, पर्यटन और सांस्कृतिक मंत्रालय की क्षमता को आगे बढ़ाना है। हुनर, रोजगार को आगे बढ़ाना है। स्कूल शिक्षा को महत्व देना है। पोलीटेक्नीक के माध्यम से समुदाय विकास को बढ़ाना चाहिए। इलैक्ट्रानिक सिस्टम, डिजाइन में काम करना है तभी डिजिटल इंडिया बनेगा। अगर स्टार्ट अप नहीं होगा तो स्टार्ट भी नहीं होगा। इसके लिए कौशल विकास की धारा को आगे बढ़ाना होगा। आदिवासी युवाओं को व्यवसायिक शिक्षा से जोड़ना पड़ेगा। राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग एवं विकास निगम को संसाधन देने होंगे। राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग को संसाधन देने होंगे। राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग को बेहतर बनाना होगा। कौशल विकास की धारा को आगे बढ़ाना हम सब का दायित्व है।
श्रीमती डिम्पल यादव (कन्नौज) : माननीय सभापति जी, आपने मुझे बोलने का मौका दिया, इसे लिए मैं आपकी आभारी हूं। विश्व में जो देश आज प्रगति के पथ पर है, उसकी अर्थव्यवस्था नॉलेज बेस्ड है। नॉलेज बेस्ड इकोनामी के लिए सबसे महत्वपूर्ण कम्पोनेंट स्किल्ड एवं रैडी टू वर्क मैन पावर है। वर्ष 2022 तक भारत में विश्व की सबसे अधिक युवा आबादी होगी। आज भी देश की जनसंख्या में करीब 80 करोड़ लोग वर्किंग एज़ ग्रुप के हैं। भारत विश्व की ह्युमेन रिसोर्स कैपिटल बन सकता है अगर हम सब इस आबादी हेतु स्किल डेवलपमेंट के अवसर सुनिश्चित कर सकें तथा उनकी एम्पलाएबिलिटी, प्रोडक्टिविटी में वृद्धि कर सकें। देश के पास मौजूद इस डेमोग्राफिक डिविडेंट को कैपेबल, फ्लैक्सिबल और क्वालीफाइड मैन पावर में बदलने से एक तरफ जहां युवाओं के सपने साकार होंगे वही देश की अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी।
आज की उभरती हुई अवस्था में रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं। इन अवसरों को लाभ युवाओं को मिले इसके लिए हमें स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम को स्केल, स्पीड और गुणवता के साथ चलाना होगा। आज भारत में स्किल लोगों का प्रतिशत अन्य देशों के मुकाबले बहुत कम है, पांच प्रतिशत से भी कम है। वर्तमान में भारत की विभिन्न संस्थाओं में 43 लाख युवाओं को ट्रेनिंग देने की क्षमता है जबकि इंडस्ट्री की आवश्यकता 2,20,00,000 है। इसके अलावा 1,30,00,000 व्यक्ति प्रत्येक वर्ष वर्क फोर्स में शामिल होते हैं। इस संख्या से हम अनुमान लगा सकते हैं कि स्किल डेवलपमेंट हमारे देश के लिए कितना क्रिटिकल और महत्वपूर्ण है।
उत्तर प्रदेश हुनरमंदों का प्रदेश है, हम सभी जानते हैं। यह प्रदेश हुनरमंदों का रहा है और आज भी है। इस प्रदेश में बनारस की सिल्क साड़ियां, आजमगढ़ की साड़ियां, लखनऊ की चिकनकारी, जरदोजी का काम, सहारनपुर का फर्नीचर, फिरोजाबाद की कांच की चूड़िया, आगरा और कानुपर का लैदर गुड्स, गोरखपुर की पौट्री, अलीगढ़ के ताले विश्वभर में मशहूर हैं। उत्तर प्रदेश के कारीगर हमारे देश और प्रदेश की धरोहर हैं। इन कारीगरों के लिए जरूरी है कि डिजाइन इंस्टीटयूट्स बनें ताकि हम विश्व की मार्किट की बराबरी कर सकें और अपने प्रोडक्ट्स को मेड इन इंडिया के रूप में बेच सकें। जिस तरह मेड इन इटली, मेड इन फ्रांस के प्रोड्क्टस बिकते हैं उसी तरह मेड इन इंडिया के प्रोड्क्ट्स का सपना तभी कारगर होगा जब हम डिजाइन इंस्टीटय़ूट्स की स्थापना कर पाएंगे। इसी के साथ-साथ मैं यह भी कहना चाहती हूं कि यह हुनर इन कामगारों को फार्मल ट्रेनिंग के तहत नहीं मिला है बल्कि उन्होंने अपने पूर्वजों से सीखा है। इसी प्रकार प्रदेश के हजारों श्रमिक पूरे देश में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी कार्य कर रहे हैं। विश्व की सबसे बड़ी इमारत बुर्ज खलीफा के निर्माण कार्य में भी सबसे ज्यादा हिंदुस्तान के श्रमिक थे और इनमें से भी सबसे अधिक उत्तर प्रदेश के श्रमिक थे लेकिन इन्होंने शायद ही किसी से फार्मल ट्रेनिंग प्राप्त की होगी या किसी के पास कोई प्रमाण-पत्र होगा। अतः हमने न सिर्फ अपनी युवा पीढ़ी को ट्रेनिंग देकर हुनरमंद बनाना है बल्कि जिन लोगों के पास हुनर हैं, उन्हें भी प्रमाण पत्र देना है ताकि वह विश्व के किसी भी कोने में जाकर सम्मानजनक रोजगार प्राप्त कर सकें और अगर वे अपना व्यवसाय विदेश में भी शुरू करना चाहते हैं तो उन्हें एक प्रोफेशनल के रूप में देखा जाए और वे अपना स्थान बना सकें।
महोदय, उत्तर प्रदेश की आबादी विश्व के पांचवे नम्बर पर आती है। ऐसे में इस चुनौती को एक अवसर के रूप में स्वीकार करके युवाओं की बेरोजगारी की समस्या को दूर करने का प्रयास प्रदेश सरकार कर रही है। उत्तर प्रदेश सम्पूर्ण भारत में प्रथम राज्य है जहां युवाओं हेतु कौशल विकास निश्चित करने के लिए वर्ष 2013 में कौशल विकास नीति लागू की गई थी। पहली बार केंद्र और राज्य के विभिन्न विभागों द्वारा चलाए जा रहे ट्रेनिंग प्रोग्राम्स को इंटिग्रेट किया गया, स्टैंडर्ड नार्म्स पर संचालित किया जा रहा है। इसके अलावा यह भी सुनिश्चित किया गया है कि स्टैंडर्ड नार्म्स के अनुसार जो धनराशि चाहिए यदि किसी योजना में वह धनराशि अनुमान्य नहीं है तो अंतर की जो भी धनराशि होगी, वह सरकार द्वारा स्थापित स्किल डेवलपमेंट फंड से दी जा सके। इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए प्रदेश ने 14 से 35 वर्ष के आयु वर्ग के युवाओं को नःशुल्क रोजगारपरक ट्रेनिंग देने हेतु वर्ष 2013 में राज्य सरकार ने उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन की स्थापना की है। व्यावसायिक शिक्षा द्वारा कौशल प्रशिक्षण की महत्ता को समझते हुए राज्य सरकार ने राजकीय आईटीआई की ट्रेनिंग क्षमता में ऐतिहासिक वृद्धि की है और पिछले चार वर्षों में 80 नई आईटीआई की स्थापना ऐसी तहसीलों तथा विकास खंडों में की है जहां पूर्व में कोई आईटीआई नहीं थी। इसके अतिरिक्त जो पूर्व की आईटीआई थीं, उनमें भी विस्तार किया गया है। जहां वर्ष 2013 में मात्र 46 सीटें पूरे प्रदेश में आजादी के 60 सालों के बाद उपलब्ध थीं, वहीं तीन वर्षों में इसमें 59 अतिरिक्त सीटें बढ़ाकर प्रदेश में अब कुल 1,50,000 एडमिशन दिए जा चुके हैं। यह अपने आप में कीर्तिमान है। इसमें सारा निवेश प्रदेश सरकार द्वारा किया जा रहा है। हम चाहते हैं कि प्रदेश सरकार द्वारा किए गए इस उल्लेखनीय प्रयास का संज्ञान भारत सरकार ले तथा ऐसी तहसीलों और विकास खंडों में नई ईकाइयां, नई आईटीआई स्थापित करे और अपना वित्तीय सहयोग दे जहां अभी कोई सरकारी या प्राइवेट आईटीआई नहीं है। प्रदेश में पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप योजना के अंतर्गत 115 गवर्नमेंट आईटीआई का उच्चीकरण किया गया है।
शार्ट टर्म स्किल डेवलपमेंट ट्रेनिंग प्रोग्राम के चलते राज्य सरकार द्वारा स्थापित उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन के जरिए लगभग 46 लाख युवाओं ने अपनी पसंद के ट्रेनिंग प्रोग्राम्स में अपना रजिस्ट्रेशन कराया है और इसके लिए निजी एवं सरकारी क्षेत्रों के 281 ट्रेनिंग पार्टनर को इम्पैनल किया गया है जिसके द्वारा पूरे प्रदेश में लगभग डेढ़ वर्ष की अवधि में 1935 सैंटर्स स्थापित किए गए हैं जो अपने आप में एक रिकार्ड है। "सबको हुनर, सबको काम" के उद्देश्य के साथ राज्य सरकार ने इस वर्ष लगभग पांच लाख युवाओं को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य रखा है। उत्तर प्रदेश ने अपने बजट में अब तक एक लाख से भी अधिक युवाओं को ट्रेनिंग दी है तथा अगले वर्ष भी इतनी संख्या में प्रदेश के बजट से कवर किया जाएगा, परंतु इस लक्ष्य को पूरा करना सिर्फ प्रदेश के बजट की बात नहीं है। भारत सरकार को इसमें सहयोग करना होगा। प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना में राज्यों की कोई हिस्सेदारी नहीं है इससे न केवल राज्यों का लक्ष्य प्रभावित हुआ है, बल्कि योजना की सफलता पर भी प्रश्नचिह्न लगा है। यह योजना तभी सार्थक रूप से चल सकती है, जब इसे इम्पलीमेंट करने में राज्यों को भी शामिल किया जाएगा। तत्कालीन श्रम मंत्रालय की स्किल डेवलपमेंट इनिशिएटिव योजना लगभग बन्द पड़ी है। नए स्थापित कौशल विकास मंत्रालय ने कोई नई योजना शुरू नहीं की है। ऐसी दशा में "कौशल भारत-कुशल भारत" का नारा सपने जैसा लगता है।...(व्यवधान)
HON. CHAIRPERSON : Please conclude.
SHRIMATI DIMPLE YADAV : Sir, please give me five minutes more. I am speaking for such a big State.
HON. CHAIRPERSON: You please complete your speech in one minute.
SHRIMATI DIMPLE YADAV: Sir, it is a big State.
मैं यह बताना चाहती हूं कि प्रदेश सरकार युवाओं के कौशल विकास के लिए, उनको सेल्फ सफिशिएंट बनाने के लिए तथा लगातार रोजगार देने के लिए पूर्ण रूप से संकल्पित है, परन्तु ऐसा करने में कई प्रकार की अड़चनें आ रही हैं। सबसे पहले जब युवाओं की ट्रेनिंग पूरी की जाती है, उनका एसेसमेंट करने में अत्यंत विलम्ब होता है, जिससे ट्रेनिंग पाने वाले तथा ट्रेनिंग देने वालों में निराशा होती है तथा रुचि खत्म हो जाती है। इससे युवाओं को रोजगार मिलने में भी बहुत अधिक देरी होती है। सेक्टर स्किल काउंसिल ने दो वर्ष बाद पहली बार अब सर्टिफिकेट्स इश्यू किए हैं, इसलिए यह जरूरी है कि भारत सरकार का कौशल विकास मंत्रालय इस पर ध्यान दे कि एसेसमेंट का सिस्टम ठीक हो, इस काम में लगी एजेंसीज की संख्या पर्याप्त हो ताकि एसेसमेंट समय पर हो सके और जो युवा ट्रेनिंग पा चुके हैं, उनको सर्टिफिकेट्स मिलें, जिससे वे जल्दी रोजगार पा सकें। एक महत्वपूर्ण विषय यह है कि भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालयों द्वारा अपनी गाइडलाइंस व मानकों के अनुसार कौशल विकास के कार्यक्रम चलाए जाते हैं, जिनमें एकरूपता लाने की आवश्यकता है। इस उद्देश्य के लिए भारत सरकार के कौशल विकास एवं उद्यमशीलता मंत्रालय के द्वारा 1 अप्रैल, 2016 से कॉमन नॉर्म्स लागू करने का निर्देश सभी मंत्रालयों एवं राज्य सरकारों को दिए गए हैं। उत्तर प्रदेश में 1 अप्रैल, 2016 से कॉमन नॉर्म्स लागू कर दिए गए हैं, परन्तु अभी भी भारत सरकार के कई मंत्रालयों में इन नॉर्म्स को स्वीकार नहीं किया गया है, जिसके वजह से कई प्रशिक्षण कार्यक्रम इस व्यवस्था के अनुरूप शुरू नहीं हो पा रहे हैं। ग्राम विकास मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा भी बार-बार दीनदयाल उपाध्याय ग्राम कौशल विकास योजना के नियमों एवं व्यवस्था में परिवर्तन किए जाने के कारण गत एक वर्ष में राज्य सरकारें धनराशि होने के बावजूद भी युवाओं की ट्रेनिंग शुरू नहीं कर पा रही हैं।...(व्यवधान)
माननीय सभापति : अब आप अपनी बात समाप्त करें।
SHRIMATI DIMPLE YADAV: Please give me two minutes. I am finishing.
महोदय, भारत सरकार के अन्य मंत्रालयों द्वारा भी स्किल डेवलपमेंट हेतु राज्य सरकारों को दी जाने वाली सहायता में कोई उल्लेखनीय कार्य नहीं हुआ है। केन्द्र सरकार द्वारा अगर कौशल विकास के लिए धनराशि नहीं दी जाएगी, तो स्किल इंडिया का सपना निश्चित रूप से अधूरा रह जाएगा और अन्य देशों की तुलना में स्किल डेवलपमेंट के क्षेत्र में हम पिछड़ जाएंगे।
अंत में, मैं यही कहना चाहूंगी कि जैसे उत्तर प्रदेश सरकार ने कौशल विकास की जरूरत को समझते हुए अनेक ऐतिहासिक कदम उठाए हैं तथा अपने द्वारा किए गए उत्कृष्ट कार्यों के बल पर न केवल देश, बल्कि विदेश में भी ख्याति अर्जित की है। उसी प्रकार केन्द्र सरकार उत्तर प्रदेश को सपोर्ट करे, हमें आर्थिक रूप से सपोर्ट करे, कौशल विकास के क्षेत्र में आने वाली कठिनाइयों को दूर करे, राज्यों को भौतिक एवं आर्थिक सहयोग भी करे ताकि देश एवं प्रदेश के युवाओं के कौशल विकास की मंशा पूरी तरह धरातल पर उतर सके। मैं यह भी कहना चाहूंगी कि हमारी मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट्स को भी एम्पावर किया जाए क्योंकि हमारे पास आईटीआई हैं, हमारे पास युवा तैयार हैं, लेकिन हम उनको इम्प्लायमेंट कैसे देंगे, जब हमारे प्रदेश में मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट्स नहीं होंगी। इन्हीं शब्दों के साथ मैं अपनी बात समाप्त करती हूं। धन्यवाद।
कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्रालय के राज्य मंत्री तथा संसदीय कार्य मंत्रालय में राज्य मंत्री (श्री राजीव प्रताप रूडी): सभापति जी, यह डिम्पल जी की मैडेन स्पीच थी, बहुत अच्छी स्पीच थी।...(व्यवधान) पहले बोल चुकी हैं। ठीक है, बजट पर हमने उनको पहली बार बोलते हुए सुना है। साथ ही, मैं मुलायम सिंह यादव जी को भी बधाई देता हूं कि उनकी बहू ने खूब तैयारी करके आज बहुत अच्छा बोला है।
HON. CHAIRPERSON: Hon. Members, those who want to lay their written speeches on the Table, they can do so. It will be treated as part of the proceedings.
Now, Shri Prem Singh Chandumajra.
श्री प्रेम सिंह चन्दूमाजरा (आनंदपुर साहिब) : सभापति महोदय, मैं स्किल डेवलपमेंट मंत्रालय की बजट अनुदानों की डिमांड पर बोलने के लिए खड़ा हुआ हूं।
महोदय, सबसे पहले मैं प्रधानमंत्री जी को धन्यवाद देना चाहता हूं जिन्होंने समय की मांग को देखकर और उसकी जरूरत को देखते हुए स्किल डिपार्टमेंट शुरू किया। प्रधानमंत्री जी की गम्भीरता और प्राथमिकता इस बात से भी दिखायी देती है कि उन्होंने एक अलग मंत्रालय पहली बार आजाद भारत में शुरू किया है। दूसरा, उनकी सीरियसनेस इस बात से भी दिखायी देती है कि इसके जो मंत्री बनाए गए वह भी एक एनर्जेटिक और डायनेमिक रूड़ी साहब को बनाया। तीसरा, मैं इस लिए भी उनका आभारी हूं कि देश में स्किल डेवलपमेंट को बढ़ावा देने के लिए चेयरमैन बनाए गए। अलग-अलग प्रदेशों के माननीय मुख्यमंत्रियों की कमेटी और सब-कमेटी बनायी और उसमें देश के सबसे तजुर्बेकार और डेवलपमेंट ओरियंटिड मुख्यमंत्री श्री प्रकाश सिंह बादल साहब को चेयरमैन बनाया।
महोदय, यह दुर्भाग्य की बात है कि इस देश का एजुकेशन सिस्टम अंग्रेजों के समय का है। देश भले ही आजाद हो गया, किंतु एजुकेशन सिस्टम वही रहा। इसके कारण बेरोजगार लोगों की संख्या बढ़ी। उन बेरोजगारों को रोजगार देने की कोई व्यवस्था नहीं की गयी। यहां जो भी उद्योग लगाए गए, वह विशेष दक्षता और स्किल वाले लगाए गए, जबकि वैसी स्किल यहां पैदा नहीं की गयी। दुर्भाग्य की बात यह भी है कि इस देश में यदि कोई स्किल पैदा भी हुई तो उसको संवारने और संभालने का काम नहीं किया गया, जिसके कारण वे बाहर चली गयीं। हमारे परम्परागत उद्योगों को खत्म कर दिया गया। जितने भी परम्परागत उद्योग हैं, उनमें विरासत में ही कुशलता मिलती थी। जैसे किसी कुम्हार का बेटा बर्तन बनाता था, खेती वाला खेती जानता था। हमारी खेती में भी नई टेक्नोलॉजी आयी, लेकिन उसके लिए भी हम लोगों को तैयार नहीं कर पाए। मेरा मानना है कि इस मंत्रालय से देश को काफी कुछ मिलेगा। प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना का 24 लाख का टारगेट रखा गया है, जिसमें से 12 लाख इनरोल भी हो गए हैं। इसमें तीन सौ करोड़ रुपये आईटीआईज़ को अपग्रेड करने के लिए रखा गया है। मैं समझता हूं कि इससे बहुत ज्यादा लोगों को ट्रेनिंग मिलेंगी। चार सौ आईटीआईज़ ऐसी हैं, जिनको अपग्रेड किया गया है और वहां काम शुरू हुआ है।
महोदय, मैं यह भी कहना चाहता हूं कि इस मंत्रालय में जो सिस्टम बनाया गया है, उसमें थोड़े सुधार की जरूरत है। एनएसडीसी और सेक्टर स्टेट काउंसिल से इसको शुरू किया गया है। बड़ी-बड़ी एजेंसियों ने अपने तरीके से काम शुरू किया है। मेरा माननीय मंत्री जी को यह सुझाव है कि इसको प्रदेशों की सरकारों पर छोड़ देना चाहिए। किसी सरकार में कृषि को प्राथमिकता दी जाती है, किसी में इंडस्ट्री को दी जाती है, किसी में माइंस को दी जाती है। कृषि में भी कहीं नारियल पैदा होता है, कहीं धान होता है और कहीं दालें होती हैं। माननीय प्रधानमंत्री जी ने कई बार आम सभाओं में यह बात कही है कि छोटे-छोटे कामों से लोगों को बड़े फायदे हो सकते हैं। जैसे हमारे देश में ज्यादातर लोग कम पढ़े-लिखे हैं और उनको माली के लिए ट्रेनिंग दी जाए, होर्टिकल्चर की ट्रेनिंग दी जाए, फ्लोरीकल्चर की ट्रेनिंग दी जाए।
महोदय, मैं आज एक किसान मेले में गया था। मैं यह बात माननीय मंत्री जी के ध्यान में लाना चाहता हूं कि मुझे वहां एक किसान मिला और उसके पास ढाई एकड़ जमीन थी। मैंने उससे पूछा कि तुम्हें कितनी आमदनी होती है। उसने कहा कि मुझे 30 लाख रुपये एक वर्ष में आमदनी होती है। मैंने पूछा कि कैसे होती है? उसने बताया कि वह ग्रीनहाउस तरीके से सब्जी उगाता है, मछली पालता है। मैं समझता हूं कि इस पर बहुत ध्यान देने की जरूरत है।
हमारे यहां होता यह है कि पहले इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च किया जाता है। इस संबंध में हमारी इंडस्ट्री के लोगों को कहा जा सकता है कि वे 3-6 महीने की ट्रेनिंग लोगों को दें। जिस तरह से हमारे एमबीबीएस डॉक्टर्स करते हैं। वह एक वर्ष के लिए हाउस जॉब करते हैं, अप्रेंटनशिप करते हैं। वे छः महीने की ट्रेनिंग करके सर्टिफिकेट लेते हैं, उन्हें कहा जाए कि तीन महीने बाद सर्टिफिकेट मिलेगा, तीन महीने आप ट्रेनिंग दीजिए। इस तरह से हमारे खर्चे कम हो सकते हैं, मैं समझता हूं कि हमें ऐसा सिस्टम बनाना होगा। हमने पंजाब में 400 स्किल सैंटर्स इस वर्ष शुरू करने की व्यवस्था की है। मैं समझता हूं कि हमें पैसा थोड़ा खर्च करना चाहिए। हम लोग इमारतों, इंफ्रास्ट्रक्चर्स पर बहुत पैसा खर्च कर देते हैं। हमारे देश में इंजिनियरिंग कालेज हैं, जैसे आईटीआईज को अपग्रेड किया गया है, ऐसे ही इंजिनियरिंग कालेजों और अन्य कालेजों को भी हम इस काम में लगा सकते हैं।
माननीय मंत्री जी आप जरा ध्यान दें, मैं बहुत जरूरी बचत की बात बोलना चाहता हूं। हमारे बीवीएमपी के नंगल में पांच लाख स्क्वायर फुट के शेड पिछले बीस वर्षो से ऐसे ही पड़े हैं। वहां यदि सरकार कोशिश करे तो ऐसी जगह हम स्किल सैंटर्स शुरू कर सकते हैं। बहुत सारी ऐसी जगहें हैं, जहां यह काम हो सकता है। मैं समझता हूं कि इससे खर्चा कम होगा और देश के लोगों का फायदा बहुत बढ़ेगा। हम इंडस्ट्रीज को कह सकते हैं कि जब तक आप इतने समय तक इतने लोगों को ट्रेन्ड नहीं करेंगे, उतने समय तक आपको कोई सुविधा नहीं दी जायेगी। यदि सरकार की नीति ठीक हो तो वे ये सब बातें मान सकते हैं। मैं समझता हूं कि जैसे माननीय मोदी साहब की सरकार ने सीरियसनैस दिखाई है, गंभीरता दिखाई है और स्किल डैवलपमैन्ट को प्राथमिकता दी है, इसके साथ ही जो मेक इन इंडिया का स्लोगन था, वह पूरा हो पायेगा। देश के लोगों को इस सरकार से जो अपेक्षा थी कि हम अपने देश को दुनिया का सबसे ज्यादा ताकतवर देश बना पायेंगे, जो स्किल डैवलपमैन्ट का डिपार्टमैन्ट है, इससे हमारी अपेक्षा बढ़ी है।
महोदय, इसके साथ ही माननीय मंत्री जी के द्वारा जो सप्लीमैन्ट्री डिमांड्स हाउस में पेश की गई है, मैं मंत्री जी को बधाई भी देना चाहता हूं और मैं इनका समर्थन करते हुए अपनी बात समाप्त करता हूं। धन्यवाद।
*SHRI ABHIJIT MUKHERJEE (JANGIPUR): 15.7.2015 : PM/NDA launches Skill India Campaign in New Delhi. Approximately 2.5% work forces are (2.3%) formally trained. It is better to be trained/skilled than untrained/un-skilled workers/persons.
Khadi village and Industry Centre : KVIC has failed to impart required training to unemployed young men and women, which will make trained peopledirectly employable in the market.
UPA-I, Dr. M.M. Singh, PM had planned to set up 1000 ITIs across the country which did not take off as it was expected to be. Therefore, Government must ensure that training schemes/courses must be the demand of the industries/Market.
Now a days some Banks have been given responsibilities to organize training. These Banks are chosen by local officials of MSME Departments.
*कुँवर पुपेन्द्र सिंह चन्देल (हमीरपुर): मैं वर्ष 2016‑17 के लिए कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय के नियंत्रणाधीन अनुदानों की मांगों पर अपने विचार रख ।
आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने सरकार गठन के उपरान्त देश के नौजवानों को स्वावलम्बी बनाने के लिए उनकी प्रतिभा को निखारने के लिए कौशल विकास मंत्रालय का गठन करके एक ऐतिहासिक कार्य किया जिससे लाखों लाख नौजवान प्रशिक्षण प्राप्त करके अपनी प्रतिभा के आधार पर रोजगार प्राप्त करेंगे एवं देश की प्रगति में सहायक सिद्ध होंगे । अनेकों विधान वक्ताओं ने अपने अपने विचार रखे । लगभग मंत्रालय से संबंधित समस्त विषयों पर चर्चा हो चुकी है । मैं अनावरश्यक शब्दों या कही गई बातों को दोहराकर सदन का बहुमूल्य समय व्यर्थ नहीं करूंगा । सीधे अपने बुंदेलखंड के निराश एवं हताश न्यूनाधिक नौजवानों एवं उनके चिन्तित अभिभावकों की रोजगार की चिन्ता को सदन में रखकर अपनी बात पूर्ण करने का प्रयास करूंगा । महोदय, मेरे बुंदेलखंड क्षेत्र के लिए विशेषकर हमीरपुर, महोबा एवं तिन्दवारी क्षेत्र के लिए जहां पानी की कमी के कारण अकाल जैसी स्थिति है । नौजवान पलायन को मजबूर है रोजगार के अवसर नहीं होने के कारण कौशल विकास मंत्रालय की योजनाओं का अधिकाधिक लाभ घर पर रहकर ही मिल सके । इस हेतु मेरे संसदीय क्षेत्र के महोबा जनपद के कबाई क्षेत्र में जहां 350 से अधिक स्टोन क्रशिंग यूनीटस हैं, पहाड़ों में खनन कार्य प्रचुर मात्रा में अकुशल श्रमिकों के द्वारा किये जाने के कारण दुर्घटनायें अधिक हो रही हैं । हजारों व्यक्ति अपने परिवार के परिश्रमी सदस्यों को खो चुके हैं । सैकड़ों बच्चे अनाथ हो चुके हैं इसके परिणामस्वरूप बच्चों की शिक्षा भी बाधित हो रही है ।
मेरा माननीय प्रताप रूढ़ी जी, कौशल विकास मंत्री से निवेदन है कि मेरे क्षेत्र में खनन कार्य हेतु कुशल नौजवान तैयार करने हेतु एक श्रेष्ठता केन्द्र अवश्य शीघ्रातिशीघ्र इस 16‑17 वित्तीय वर्ष में बनाया जाये जिससे खनन, ब्लास्टिंग, ड्रिलिंग, अर्थमूविंग मशीन एवं लोडर मशीन आपरेटर प्रशिक्षण केन्द्र बनाया जाये जिससे कि राष्ट्र के निर्माण में इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के क्षेत्र में अहम भूमिका निभाने वाले मेरे क्षेत्र के लोगों की अपने घर पर ही रोजगार के सुअवसर प्राप्त हो सकें । मैंने पूरा आकलन ककिया है यदि कबाई (महोबा) में एक सम्पूर्ण कौशल विकास केन्द्र का निर्माण करवाकर प्रशिक्षित किया जाये तो लगभग 50000 (पचास हजार) नौजवानों को पलायन नहीं करना पड़ेगा । अपने गांव घर पर ही उन्हें रोजगार प्राप्त हो जायेगा जिसससे उत्पादन में वृद्धि के साथ‑साथ कुशल कामगारों की एक प्रशिक्षित ठी खड़ी होगी जो स्वयं का कार्य प्रारंभ करके लगभग इतने ही लोगों को स्वयं ही क्षमता के आधार पर रोजगार देने में सक्षम होंगे ।
अन्त में पुनः मांग करता हूं कि एक स्किल डेवलपमेंट एक्सीलेंस सेंट्रर फार माननिंग बनाकर मेरे क्षेत्र के एक लाख लोगों का प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार देने का शुभ अवसर प्रदान करें । श्रीमान नरेन्द्र भाई मोदी जी के सपने को पूरा करने में सरकार संकल्पित है । अतः उक्त आवश्यक कार्य को शीघ्रातिशीघ्र पूर्ण करवाकर कौशल विकास का अपना लक्ष्य पूर्ण करने हेतु एक्सीलेंस सेंट्रर बनवाना सुनिश्चित करवाने का प्रबंध करने का कट करें ।
मैं अनुदानों की मांगों का समर्थन करता हूं एवं अपनी सरकार का आभार प्रकट करता हूं कि देश के नौजवानों के स्वप्नों को साकार करने हेतु भारत सरकार निरन्तर प्रयासरत है जिससे कि हमारे देश से कुशल कामगार देश की जीडीपी को बढ़ाने के साथ साथ दुनिया के सभी देशों में फैलकर अनुभव के आधार पर विश्व में भारत के गौरव को बढ़ाने का काम करे ।
*SHRI RAMESHWAR TELI (DIBRUGARH): I support the Demands for Grants under the Ministry of Skill-Development and Entrepreneurship. The Ministry was constituted to develop skilled manpower which in turn would generate employment in our Country. Through its various organizations like – National Skill Development Corporation (NSDC), National Skill Development Agency (NSDA), National Skill Development Fund (NSDF), the Government wants to promote skill development and entrepreneurial environment which is undoubtedly a welcome step. In fact, the Ministry aims at fulfilling the government’s policy on “Sabka Saath, Sabka Vikas”. As we all know, a country’s all round development is possible only when its youths are suitably employed and a sense of entrepreneurship is developed. To achieve this goal, proper training for skill based jobs and a conducive environment for entrepreneurial activities should be created. The Ministry of Skill Development and Entrepreneurship is doing its level best since its very inception. I congratulate the Hon’ble Minister Shri Rajeev Pratap Rudiji for his tireless effort to make the various schemes under his Ministry a great success. I am sure that the various schemes and the programmes lauched by his Ministry will bring about a positive change in the employment scenario of our Country.
My constituency Dibrugarh is having the largest number of tea gardens in Assam. I, therefore, request the Hon’ble Minister for setting up of an institute that would offer courses in tea husbandry and production, tea processing and soil sciences, manufacturing and packaging, pest management, genetics and breeding and disease management. I am confident that the Ministry under the stewardship of Shri Rudiji would succeed in its endeavour of achieving its vision of a “Skilled India”.
*श्रीमती जयश्रीबेन पटेल (मेहसाणा)ः मैं मंत्री जी द्वारा लाई गई अनुपूरक मांगों के प्रस्ताव का अनुमोदन करती हॅं। पहली बार कौशल विकास एवं उद्यमशीलता मंत्रालय नवंबर, 2014 में आदणीय प्रधानमंत्री श्री मोदी जी के नेतृत्व में एन.डी.ए. सरकार ने बनाया तथा माननीय श्री राजीव प्रताप रूडी को इस विभाग का मंत्री बनाया गया।
देश को दुनिया के शिखर पर काबिज होने का मंसूबा पाले हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र भाई मोदी जी द्वारा विश्व कौशल दिवस पर 15 जुलाई, 2015 को प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना नामक फ्लैगशिप का शुभारंभ किया गया। जिसका मूल उद्देश्य युवाओं को कौशल प्रशिक्षण लेने और अपनी आजीविका कमाने में समर्थ एवं प्रेरित किया जा सके। इससे उन्होंने लोगों का जीवन बेहतर बनाने के लिए प्रयास किए हैं तथा इसके द्वारा लोगों को उनके परिवारों के लिए एक बेहतर भविष्य की अपेक्षा करने एव उसे अर्जित करने का अवसर प्रदान किया गया है। हमारे प्रधानमंत्री जी की यह सोच वाकई सराहनीय है।
परमात्मा ने सभी मनुष्यों को कौशल-हुनर कला की भेंट दी है। चाहे वह शिक्षित हो या अशिक्षित, लेकिन कौशल-हुनर को उज़ागर करने के लिए अवसर प्रदान करने पड़ते हैं, जो हमारे विज़नरी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र भाई मोदी जी ने हम भारतीयों को प्रदान किए हैं।
भारत की आबादी का 54 फीसदी 25 वर्ष की उम्र से कम आयु का है और आबादी के 62 प्रतिशत से अधिक लोग कामकाजी आयु समूह के हैं, फिर भी भारत की आबादी के केवल 4.69 प्रतिशत लोगों ने औपचारिक कौशल विकास प्रशिक्षण प्राप्त किया है। भारत के 93 प्रतिशत मजदूर असंगठित क्षेत्र में काम करते हैं, अनौपचारिक माध्यमों से कुशलता प्राप्त करते हैं और उनके पास औपचारिक प्रमाण-पत्र का अभाव होता है।
देश में कौशल विकास एवं उद्यमिता की प्रणाली के लिए एक मजबूत बुनियाद डालने के लिए एम.एस.डी.ई. द्वारा पिछले 23 महीनों के दौरान उठाए गए प्रमुख कदम एक स्पष्ट नीति की संरचना की स्थापना करना, नीति, मिशन, सामान्य नियम हैं।
राष्ट्रीय कौशल विकास एवं उद्यमशीलता नीति, 2015 का जुलाई, 2015 में अनावरण किया गया। सभी केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों में कौशल विकास कार्यक्रमों के लिए सामान्य नियमों को अधिसूचित करके गतिशीलता लाई गई है, इसके लिए मैं श्री राजीव प्रताप रूडी जी की सक्रिय भूमिका की सराहना करती हॅं। अब भारत के पास देशभर में कौशल विकास कदमों को आगे बढ़ाने के लिए एक मजबूत नीतिगत संरचना है। नीति संरचना को निर्दिष्ट करने के लिए एम.एस.डी.ई. एक समन्वित कार्य योजना विकसित करने पर भी काम कर रहा है।
औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान जो पहले श्रम एवं रोज़गार मंत्रालय के अंतर्गत थे, इस वर्ष अप्रैल से एम.एस.डी.ई. को हस्तांतरित कर दिए गए हैं। इन संगठनों में नई जान फूंकने के लिए कई कदम उठाये जा रहे हैं।
वामपक्ष उग्रवाद द्वारा प्रभावित 34 जिलों में भी 34 आई.टी.आई. के लिए तथा एल.डब्ल्यू.ई. द्वारा प्रभावित क्षेत्रों में 68 कौशल विकास केंद्रों के लिए अवसंरचना का सृजन किया है, वह युवकों के भविष्य के लिए उत्तम है। मैं इसकी सराहना करती हॅं।
एक वर्ष के दौरान 1.73 लाख सीटों के साथ 1141 नए आई.टी.आई जोड़े गए। अब 126 ट्रेडों में 18.7 लाख सीटों के साथ कुल 13,105 आई.टी.आई. हैं। यह उपलब्धियां जो हासिल की गई हैं, यह सराहनीय हैं।
एम.एस.डी.ई. एवं केंद्र सरकार में अन्य मंत्रालयों/विभागों के बीच विशिष्ट क्षेत्रों में कौशल विकास गतिविधियों को आगे बढ़ाने के लिए गठबंधन करने के लिए रणनीतिक साझेदारियां भी की गई हैं। विदेशों में रोज़गार अवसरों के तहत योजना विकसित की जा रही है। प्रवासियों को विदाई-पूर्वसह अनुकूलन कार्यक्रम के लिए प्रवासी कौशल विकास योजना शुरू करने के लिए प्रवासी भारतीय मामले मंत्रालय के साथ एम.ओ.यू. को अंतिम रूप दिया जा रहा है। पिछले एक वर्ष के दौरान एन.एस.डी.सी. साझीदारी ने 24.93 लाख लोगों को प्रशिक्षित किया है। इससे कौशल मंत्रालय का फलक व्यापक हुआ है, इसके लिए मैं माननीय मंत्री श्री रूडी जी का अभिनंदन करती हॅं।
22 फरवरी, 2016 की स्थिति के अनुसार पूरे देश में 29 राज्यों और 6 संघ राज्य क्षेत्रों में फैले 9,314 प्रशिक्षण केंद्रों में 12.50 लाख उम्मीदवारों को नामांकित किया गया है।
जम्मू-कश्मीर के युवकों (स्नातक) के लिए विशेष उद्योग पहल में पांच वर्षों में 40,000 युवक शामिल किए जाएंगे। एन.एस.डी.सी. द्वारा क्रियांवित इस योजना का वित्त पोषण गृह मंत्रालय द्वारा किया जाएगा। इससे कार्यक्रम की उड़ान का पता चलता है।
एम.एस.डी.ई. ने जर्मनी, ब्रिटेन, चीन एवं ऑस्ट्रेलिया के साथ प्रशिक्षण, समर्थन, प्रशिक्षुओं के प्रशिक्षण, पाठय़क्रम विकास को आगे बढ़ाने के लिए तथा देशभर में कौशल प्रशिक्षण में उत्कृष्टता केंद्रों की स्थापना के लिए एम.ओ.यू. पर हस्ताक्षर कर अंतर्राष्ट्रीय गठबंधन किया है। वह भी मंत्रालय की दीर्घकालिक नीति का परिणाम है। लक्ष्यों की परिपूर्ति के लिए उठाए गए ठोस कदम हैं।
500 से अधिक जिलों में मॉडल स्किल सेंटर के संवर्धन के लिए और उनकी स्थापना के लिए 1800 से अधिक कंपनियों द्वारा आवेदन किया है, वह भी मंत्रालय की व्यापकता स्पष्ट करता है।
भारत में बहुत काबिल लोग हैं, लेकिन नौकरी के अच्छे अवसरों की कमी के चलते लोग विदेश का रूख कर रहे हैं।
बेरोज़गारी से निपटने के लिए प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना एक चुनौतीपूर्ण अध्याय और स्किल मिशन है। भारत में तो कहा जा रहा है कि एप्लाई-एप्लाई बट नो रिप्लाई।
श्रम मंत्रालय की इकाई श्रम ब्यूरो द्वारा ताजा सर्वेक्षण रिपोर्ट से उद्घटित हुआ है कि भारत में बेरोज़गारी दर 2013-14 में 4.9 फीसद तक पहुंच गई, 2012-13 में यह दर 4.7 फीसद थी। उनका एक उदाहरण 2015 में उत्तर प्रदेश राज्य सचिवालय में चपरासी के 368 पदों के लिए जब 23 लाख से अधिक आवेदन आए तो देशभर में खूब चर्चा हुई। इन आवेदकों में 255 पी.एच.डी. डिग्री धारकों की खबर ने तो और भी सोचने पर मजबूर कर दिया। देश के हर राज्य में रिव्तियों के सापेक्ष आवेदकों की संख्या भारी मात्रा में बढ़ रही है और इस अनुपात में रोज़गार उपलब्ध नहीं है।
आज देश में बेरोज़गारी और प्रच्छन बेरोज़गारी के आंकड़े काफी अधिक ह।़ ऐसी स्थिति में स्वरोज़गार और कौशल विकास के प्रति ध्यान देना हमारी पहली प्राथमिकता होनी चाहिए।
भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में वैसे रोज़गार और कौशल विकास के लिए तमाम प्रयास किए गए हैं किंतु कौशल विकास के राष्ट्रीय कार्यक्रम की आवश्यकता वर्तमान में इसलिए भी महसूस की जा रही है क्योंकि वैश्विक अर्थव्यवस्था, विशेषज्ञता व दक्षता आधारित होती जा रही है। एक आंकड़े के मुताबिक संपूर्ण विश्व में 5.5 करोड़ दक्ष लोगों की कमी है। इनमें नर्स, इलैक्ट्रिशियन, प्लंबर जैसे कार्य करने वाले शामिल हैं। दूसरी तरफ देखें तो भारत में 4.7 करोड़ लोग ऐसे हैं जिनके पास इन कार्यों की दक्षता तो है किंतु उनके पास संबंधित रोज़गार नहीं है।
आज देश कुशल व दक्ष लोगों की समस्या से जूझ रहा है। वैश्विक स्तर पर देखें तो भारत कार्यशील-काबिल लोगों की नर्सरी है, लेकिन कार्यशील आबादी का अनुपात काफी अधिक है। किंतु इसमें दक्षता का अभाव है। राष्ट्रीय सैम्पल सर्वेक्षण के 68वें चक्कर 2012 के अनुसार भारत में कुल श्रम बल करीब 472.9 मिलियन है। 15-59 आयु वर्ग के कार्यबल आबादी का हिस्सा संपूर्ण जनसंख्या का करीब 60 प्रतिशत है लेकिन इस श्रमबल का बेहतर तरीके से लाभ नहीं लिया जा पा रहा है, केवल इस वजह से कि वह दक्ष नहीं है। आज भी 53 प्रतिशत कार्यबल कृषि में लगा है लेकिन आधुनिक कृषि के लिए उसमें दक्षता की कमी है। इसकी वजह से कृषि में हम पिछड़े हुए हैं। इसी प्रकार करीब 93 प्रतिशत लोग अनौपचारिक क्षेत्रों में कार्यरत हैं जहां मोटे तौर पर दक्षता की जरूरत महसूस नहीं होती है, किंतु यदि इन क्षेत्रों के श्रमिक दक्षता प्राप्त कर लें तो उनकी स्थिति में अभूतपूर्व सुधार हो सकता है।
वर्तमान केंद्र सरकार की कौशल विकास योजना जो एक मिशन के रूप में प्रस्तावित हुई है इसमें प्रशिक्षण, दक्षता और रोज़गार तीनों की परिपूर्ति होती है, जिससे ग्रामीण और शहरी अंचलों में विकास की नई दिशा खुलने वाली है तथा हुनरमंद भारत का सपना सिद्ध होने वाला है।
हमारे भारत का युवा जगत ओवर एचीवमेंट और अंडर एचीवमेंट यानी कार्य क्षमता के मुताबिक नौकरी नहीं मिलती तथा कार्य क्षमता कम और अपेक्षा ज्यादा होने की वजह से पिसकर रह गया है। उनके लिए प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना ने बेरोज़गार युवाओं के दिलों में उम्मीद की किरण जगाई है।
यू.पी.ए. के शासनकाल में 2010 में तकनीकी शिक्षा में गुणवत्ता की नींव कमजोर होने लगी थी और देशभर में इंजीनियरिंग सहित कई तकनीकी कोर्सों में लाखों सीटें खाली रहने लगी थी जिसका आंकड़ा साल दर साल बढ़ता ही गया, लेकिन इतने संवेदनशील मुद्दे पर यू.पी.ए. सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं उठाए।
भारत में कुल कामकाजी आबादी का महज 2.3 फीसदी हिस्सा ही औपचारिक प्रशिक्षण से होकर गुजरा है जबकि ब्रिटेन में यह आंकड़ा 68 और अमेरिका में 52 फीसदी है।
हम उद्योग की मांग के मुताबिक उच्च गुणवत्ता और युवाओं को स्किल्ड बनाने वाली शिक्षा नहीं दे पाए जबकि दुनिया के कई छोटे देश उच्च गुणवत्ता वाली तकनीकी शिक्षा देने में हमसे बहुत आगे निकल गए हैं। स्किल डेवलपमेंट के मामले में पूरे एशिया क्षेत्र में दक्षिण कोरिया ने चमत्कार कर दिखाया है। आज की तारीख में 95 प्रतिशत से ज्यादा युवा स्किल्ड हैं और दक्षिण कोरिया ने पूरी दुनिया के सामने एक अनुकरणीय उदाहरण पेश किया है। हमें उनको आदर्श मानना चाहिए।
स्किल डेवलपमेंट के तहत व्यावसायिक कोर्स चलाने के लिए यू.जी.सी. की हरी झंडी मिल गई है। 59 संस्थानों के प्रस्ताव मंजूर किए गए जिन्हें 1.7 करोड़ रूपये की सहायता दी गई, यह सराहनीय है।
प्रधानमंत्री मोदी जी ने स्किल इंडिया अभियान गरीबी के खिलाफ लड़ाई के तहत शुरू किया है और अगले 5 सालों में 16 विभिन्न क्षेत्रों में 1 करोड़ लोगें को प्रशिक्षित करने का जो लक्ष्य रखा है, उसकी परिपूर्ति जरूर होने वाली है।
मेरा सुझाव है कि टूरिस्ट महिला गाईड, फोटोग्राफर, टैक्सी ड्राइवर, सुरक्षा कर्मी में महिलाओं को जोड़ा जाना चाहिए; गुजरात की तरह हर राज्य में स्किल डेवलपमेंट युनिवर्सिटी का निर्माण किया जाना चाहिए; गुजरात में आई.टी.आई. विद्यार्थियों को डिप्लोमा इंजीनियरिंग में दाखिला लेने के लिए रियायतें दी गई हैं, ऐसा पैटर्न देश में लाया जाए; भारत में भिन्न-भिन्न प्रांतों में अलग-अलग प्रकार की फसल व उद्योग-धंधे होते हैं वहां पर उन्हीं से रिलेटेड आई.टी.आई. और कौशल विकास ट्रेड सेंटर खोले जाने चाहिए। इससे मेनपावर मिलता है और रोज़गार पाने में सहुलियत होती है। जैसे गुजरात में श्वेत क्रांति (डेयरी डेवलपमेंट) नीली क्रांति (मछली पालन), जूट आदि; कामगारों को विदेशों में काम के लिए भेजना है तो उनके आवागमन और संबंधित देश में काम की स्थितियों के बारे में तालमेल बनाना जरूरी है अन्यथा छोटे हुनरमंद कामगार प्रायः दलालों के मार्फत ही विदेशों में रोज़गार पाते हैं। दलालों द्वारा यहां तो उन्हें सब्जबाग दिखाए जाते हैं लेकिन वहां से नारकीय स्थितियों में बंधुओं मजदूरों की तरह काम करने के लिए विवश होते हैं, उन श्रमिकों के हितार्थ पारदर्शी नीति बनाना जरूरी है तभी स्किल इंडिया अभियान सार्थक रूप ले पाएगा; देश की जनसंख्या को यदि दुनिया के पटल पर अपने मानव संसाधन के रूप में भुनाना है तो पहले मैकाले के जमाने से चली आ रही शिक्षा नीति में आमूलचूल परिवर्तन करना होगा। जिससे हर व्यव्ति स्कूल की औपचारिक शिक्षा और बाहर की अनौपचारिक शिक्षा में तालमेल बिठा सके; युवाओं में व्हाइट कॉलर जॉब के बदले, ब्ल्यू कॉलर जॉब के प्रति अभिरूचि बढे, इसके तहत शिक्षा नीति और मानसिक बदलाव के ठोस प्रयास किए जाएं, 9वीं कक्षा से आई.टी.आई. के कोर्स में दाखिला मिलता है तो 10वीं कक्षा के बाद आई.टी.आई. में होने वाले को उच्चतर माध्यमिक साइंस प्रवाह का दर्जा देने की नीति बनाई जाए; तथा आई.टी.आई. स्कूलों की डिग्री देने के लिए कोनवोकेशन प्रोग्राम रखे जाए।
*SHRI RABINDRA KUMAR JENA (BALASORE) : I would like to take this opportunity to undertake a critical examination of the more important than ever skill development and entrepreneurship landscape in India today. While it is commendable that our Hon'ble Prime Minister, Shri Narendra Modiji, has personally called for Indians to take to skill development at a massive scale, it needs to be understood that effective institutionalization and structured implementation is what is required for India to be skilled at the scale it needs to.
At the outset, I'd like to stress on the fact that skills and knowledge are driving forces of economic growth and social development for any country. Countries with higher levels and better standards of skills adjust more effectively to the challenges and opportunities in domestic and international job markets.
Before analyzing the present Government's approach to skilling India, it is imperative that we understand the genesis of skill-based training in India - The first National Policy on Skill Development was notified in 2009. In the aftermath of this policy, National Skill Development Corporation (NSDC) was established in 2009 to promote private sector participation via innovative funding models. NSDC has tied up with more than 211 training providers, many of whom have started scaling up their operations, to offer short term training programmes. They also supported and incubated 37 Sector Skills Councils (SSCs), which are intended to facilitate much needed participation and ownership of industry to ensure needs based training programmes. National Skills Development Agency (NSDA) which was created in June 2013 has been working with State Governments to rejuvenate and synergize skilling efforts in the States. National Skill Qualification Framework (NSQF) skilling and education outcomes with competency based NSQF levels. These efforts build on the legacy of vocational training infrastructure of Industrial Training Institutes and polytechnics, which have now grown in number of approximately 12,000 and 3,200 respectively. Why I specifically mention how skilling penetrated mainstream policymaking is for it to serve as a reminder to the present dispensation that the institutions and the vision behind "Skill India" has pervaded Indian policy mentality for years now, and we should now learn from our past failures in implementation, rectify faults in policy (if any), and evolve a targeted approach to final implementation and outcomes.
The Government, I strongly believe, should not look at Skill Development in isolation, and rather approach it as a crucial cog in the wheel -Skill Development is a necessary but not a sufficient condition for economic prosperity. "For a skills strategy to be successful, it should be complemented by a commensurate creation of jobs in the primary, secondary and tertiary sectors." (From the National Policy for Skill Development and Entrepreneurship 2015). Keeping this in mind, it is startling to know that (as per the Labour Bureau) no new jobs were created but there was actually a decline of 20,000 jobs across 8 labour intensive sectors in the December quarter of 2015. The September quarter of the same year had added 1.34 lakh new jobs across the same 8 sectors and was still the slowest quarter in the previous 6 years (barring 2012 where quarter-wise data is not available). The total number of new jobs created across the 8 sectors between January-December 2015 stood at just 1.35 lakh. This is the slowest pace of new jobs being created since 2009. (More fact in relation to the data: The number of jobs created in these eight select industries in the calendar year 2015 was 1,35,000. This was much worse than the 4,21,000 jobs created in 2014 and the 4,19,000 in 2013. It was even worse than the 3,21,000 in 2012, the year when the slowdown in job creation kicked in. For the record, in the "good years" of 2010 and 2011, the number of jobs created was over 8,50,000 per annum. From this, on can reasonably infer that we are not on the path that created 10 million non-farm jobs in 2010-11 and 2011-12, and are possibly quite short of it. The Government's statistics department reports that the economy is growing at 7.6%, much above the 5.6% of 2012-13. It is difficult to understand what this headline growth figure of GDP is telling us. Has GDP growth picked up by nearly 2 percentage points, even as one does not see the effect in other critical output data certainly not in the record of job creation? Jobless growth does not help anyone. Or only helps some. The National Policy for Skill Development and Entrepreneurship 2015 document highlights how, "during the five year period from 2004-05 to 2009-10, only 2.7 million net additional jobs were created in the country". Even that number seems huge when compared to the apparent present pace of job creation (a partial picture of which is brought out by the Labour Bureau report).
A huge opportunity is to be tapped: 62% of India's population is in the working age group (15-59 years), and more than 54% of the total population is below 25 years of age. It is further estimated that the average of the population in India by 2020 will be 29 years as against 40 years in USA, 46 years in Europe and 47 years in Japan. In fact, during the next 20 years, the labour force in the industrialized world is expected to decline by 4%, while in India it will increase by 32%. This poses a formidable challenge and a huge opportunity. To reap this demographic dividend, which is expected to last for the next 25 years, India needs to equip its workforce with employable skills and knowledge so that they can contribute substantively to the economic growth of the country. As regards the present situation (in relation to latest data available) of skill training, 75.8% of the workforce did not have any skill training during 2011-12, while the proportion of workforce with formal training was only 3.05%. The proportion of workforce that received training through informal modes was 12.46%. Has the Government defined targets in relation to the increase in these very important parameters?
I would like to take this opportunity to forward a recommendation in relation to Wage Incentives for MSME Job Creations with respect to Skill Development: MSME employers create 9 out of 10 jobs in the economy, but are unable to attract skilled talent because they are often not able to pay statutory benefits and skill premium. On the other hand, skilled students are demotivated because they do not get a skill premium. It is recommended that all MSME employers who hire new skill certified to be paid, say, Rs. 2,000 per month for one year by the MSME as a skill premium incentive to reimburse the additional costs. Assuming 20 lakh beneficiaries and Rs. 24,000 per annum incentive, the MSME Ministry should get an additional budget of Rs. 4,800 crore this year. This will really give a big fillip to the Make in India and the Skill India movements.
With regard to general administration in relation to Skill Development, the Ministry of Skill Development and Entrepreneurship was created as the aggregator in the sector, but the duplication of the roles and policy confusion has persisted. Tasks allocated to MSDE in the official gazette notification, such as "frame policies for soft skills", "computer education", and "work relating to Industrial Training Institutes" are ambiguously crafted, and have large overlaps with the work allocation of existing Central Ministries. It is imperative that MSDE performs the difficult role of "coordination relating to skill development" assigned to it. To begin with, the delivery of at least 70% of the total skill development targets should rest solely with the MSDE. Large scale training delivery systems, such as the Directorate General of Employment and Training (DGE&T) of MoLE should be integrated with MSDE, while ministries working on skills in specific sectors (such as Textiles and Tourism) should closely coordinate with it. In addition, overarching roles such as apprenticeship system, LMIS implementation, private sector coordination, etc. should be housed exclusively within one agency to reduce policy confusion. Finally, the MSDE must explicitly be made responsible for the coordination with the States and their Skill Development Missions.
While the Government itself is a large employer, the primary focus to skill development is essentially towards private sector employment and entrepreneurship. So far, the private sector itself has not geared up for the challenge. The World Bank Enterprise Surveys 2014 reveal that the percentage of firms offering formal training programmes for its permanent, full time employees in India is just 35.9, compared to China's 79.2. This is a "market failure" where employers are not investing to skill employees, and the employees do not have the ability and willingness to pay for skilling. It is necessary to catalyse investments from the industry and support candidates in raising resources for training. This would need a functioning credit market with collateral guarantees for students, as well as planned coordination with the private sector. For any skill development effort to succeed, markets and industry need to play a largest role in determining courses, curriculum and relevance. For this, employers need to be put in driving seat, with the Government acting as a regulator and not the implementer.
The questions to ask are: Are the Government's Skill Development programmes really working? Are they leading to better employment opportunities and wages? Are they increasing the productivity of firms? There are enough and more indications that current skilling programmes are ineffective and leading to wastage of trainees' time and Government's resources. There are lakhs of youth who complete government training schemes but cannot find employment commensurate with their new skills. The success of most government schemes is judged by whether input and output targets are met - numbers enrolled and numbers of trainees certified. The Government is yet to develop a central system for tracking outcomes.
There are no central checks to verify whether placements reported are accurate, no monitoring system to see what wages are earned or whether jobs are commensurate with training and aspirations. Most Ministries rely on retrospective evaluations that are often unable to isolate the real impact of programmes on outcomes, thereby making decisions on continuation and improvement difficult. There is a need for a more nuanced understanding of the impact of vocational (skill) programmes on labour market outcomes. However, there is a dearth of such rigorous evolution in India.
South Korea interpreted the issue of the lack of Skill development arrangements in as early as 1970s and hence, they imposed in-plant training obligations for large firms; under the Jobs Skill Development Program run in the country, employers provide training to insured employees assisted by funds from the Government.
Germany has in place an apt dual system of vocational education that integrates school-based and work-based learning' trainees spend a day or two in vocational school and three to four days at the employer's place, progress of trainees is evaluated by way of final analysis where they show theoretical as well practical knowledge gained, thus making Germany a place with employers and vocational schools having a joint educational and training responsibility. We must explore the possibility of rewarding Indian business houses who invest in designing and executing a formal system of training and thereby creating a cadre of skilled personnel through process of skill development.
With the 'Make in India' dream and acceptance of skill development as a national priority for the next one decade, reforms will come only when the Government integrates skill development, education system and Indian industry. Quality of training, trainers, standardization of training process and effective assessment should be paid attention to. Trainers for the skill development mission are to be wisely procured, based on laid down criterions, and the existing ones must be considered with respect to basic instructional skills and know-how of present trends. Again, training content should be updated regularly and made contemporary so that is pays heed to rapidly changing industrial needs and technology.
There is a need to start fostering an active partnership between schools, universities, business houses and the Government. All in all, the existing curriculum at the school and university level has to be aligned with existing upcoming needs of the Indian industry. Certification should be sensible in a way that is benchmarked against some of the well established and well known global standards so that the quality of workforce becomes comparable to global workforce.
There are reports of huge corruption in Skill Development Centers where data and reports on such activities are forged by supervisors. There is a need to build a transparent and competent reporting mechanism, where details of such centers, trainers, trainees, training modules and work assigned post the completion of training be accessible with ease.
Will the Government tap onto the huge opportunity India's demographic dividend has provided it with? Effective skill development is the way forward.
*श्री राहुल कस्वां (चुरू)ःआज भारत में 125 करोड़ की जनसंख्या है, जिसका 65 प्रतिशत युवा है, युवा पढ़ रहा है, लिख रहा है, युवा आगे बढ़ने का भरसक प्रयास कर रहा है। पूरी एजुकेशन प्राप्त करने के पश्चात् वह नौकरी के लिए भटकता रहता है, लेकिन सरकारें इन नौज़वानों को नौकरी नहीं दे सकती हैं, केवल नाममात्र के नौज़वानों को ही नौकरी मिलती हैं। आखिर थक हारकर वह घर बैठ जाते हैं, क्योंकि उनके हाथ में हुनर नहीं हैं। अगर उनके हाथ में हुनर हों, तो वे कोई न कोई काम कर सकते हैं तथा अपने पैरों पर खड़े हो सकते हैं। लेकिन इस 65 प्रतिशत युवा जनसंख्या का मात्र 10 प्रतिशत ही हिस्सा है जो अपने सपनों को पंख दे पाता है और अपने भविष्य को सुरक्षित कर पाता है। हमारे देश के युवाओं के पास ज्ञान तो हैं लेकिन हुनर नहीं है, जिसकी वजह से देश के अधिकतर नौज़वान साथी रोज़गार पाने में सक्षम नहीं हैं। माननीय प्रधानमंत्री जी ने प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के रूप में जो योजना देश को दी है, ये सच में उन सभी युवाओं के लिए एक वरदान हैं। मैं माननीय मंत्री महोदय को धन्यवाद देता हॅं कि उन्होंने इस योजना के द्वारा प्रशिक्षित किए जाने वाले युवाओं की संख्या को 24 लाख से बढ़ाकर 1 करोड़ किया है और अगर यह योजना इसी प्रकार आगे बढ़ती रही तो वह दिन दूर नहीं जब भारत के पास प्रशिक्षित युवाओं की ऐसी फौज होगी जो अपने हुनर व मेहनत से देश का नाम पूरे विश्व में रोशन करेगी। आज दक्षिण कोरिया में 90 प्रतिशत, चीन में 80 प्रतिशत जनसंख्या हुनरमंद एवं प्रशिक्षित है जबकि भारत में यह आंकड़ा मात्र 4 प्रतिशत ही है। हालांकि ये पिछले वर्ष की तुलना में दोगुना हुआ है जोकि बहुत ही अच्छा संकेत है। मुझे पूरा यकीन है कि माननीय प्रधानमंत्री जी के सानिध्य में हम इस देश के सभी युवाओं को आने वाले 10 सालों में प्रशिक्षित कर लेंगे।
इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए हमें आज से ही कार्य शुरू करना होगा और इस बजट में जिस प्रकार माननीय मंत्री महोदय ने कौशल विकास हेतु 1804 करोड़ रूपए के बजट की घोषणा की है, जोकि पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 800 करोड़ रूपए अधिक है, इससे लगता है कि हम उस दिशा में पूरी तरह से अग्रसर है। मैं अपनी तरफ से कुछ सुझाव शामिल करवाने हेतु माननीय मंत्री महोदय से निवेदन करना चाहता हॅं-
जिस प्रकार जर्मनी एवं सिंगापुर में डय़ूल एजुकेशन सिस्टम के तहत शिक्षा दी जाती है, उसी प्रकार से भारतीय शिक्षा प्रणाली में भी वांछित परिवर्तन कर छात्रांॊ को सिर्फ शिक्षा नहीं फंक्शनल एजुकेशन दी जाये। चुरू लोकसभा क्षेत्र आज भी देश के अति पिछड़ा जिलों में से एक है। वहां न तो खेती के संसाधन है और न ही औद्योगिक संसाधन हैं, लेकिन फिर भी हमारे क्षेत्र के युवाओं में क्षमता बहुत है, परंतु संसाधनों के अभाव में उन्हें पूरा मौका नहीं मिल पाता और युवा भटक रहा है। मेरा माननीय मंत्री महोदय से निवेदन है कि चुरू लोकसभा क्षेत्र के लिए कम से कम 10 मल्टी स्किल सेंटर्स की अनुमति दें ताकि वहां के युवाओं को एक दिशा दी जा सके और उन्हें रोज़गार सृजन के काबिल बनाया जा सके। एन.ओ.एस (नेशनल ऑक्युपेशनल स्टैण्डर्डस) को पूरी तरह से लागू करते हुए उन्हें सामान्य शिक्षा के समान माना जाये, और उसे वही मान्यता हो जो विद्यालय या कॉलेज में शिक्षा प्राप्त करने वाले छात्र को होती है।
आज भारत सरकार ने विदेश में काम करने वालों के लिए न्यूनतम शिक्षा 10वीं कर दी है और मेरे लोकसभा क्षेत्र के अनेकों व्यव्ति विदेश में रहकर अपना व अपने परिवार का भरण पोषण कर रहे हैं। उसमें आज भी वह वर्ग है जो बिल्कुल भी पढ़ा लिखा नहीं है और अब हालात यह हो गए हैं कि ऐसे परिवारों को दर-दर भटकना पड़ रहा है। मेरा अनुरोध है कि पी.एम.के.वी.वाई. योजना के तहत प्रशिक्षित व्यव्ति को भी उतना ही शिक्षित माना जाये। भारत सरकार की एक और महत्वाकांक्षी योजना मुद्रा के तहत भी आपने काफी प्रावधान किया है। मेरा सुझाव है कि मुद्रा योजना में ऋण देने के लिए भी पी.एम.के.वी.वाई. योजना में प्रशिक्षित युवाओं को प्राथमिकता दी जाये। इसी प्रकार स्टार्ट अप इंडिया व स्टैण्ड अप इंडिया योजना के लिए पी.एम.के.वी.वाई. योजना को एक मानक मानते हुए ऋण व अन्य संसाधन उपलब्ध करवाये जाये। कौशल विकास शिविर व अन्य प्रचार-प्रसार के संसाधनों का भी प्रयोग किया जाये एक क्षेत्र के युवाओं को इकट्ठा कर उन्हें कौशल विकास के फायदे बताये जाये व उन्हें प्रेरित किया जाये कि वे आगे बढ़ कर इसका हिस्सा बनें। कौशल विकास के लिए जो संस्थाएंì खोली जा रही हैं, उनमें अधिकांश संस्थाओं द्वारा मात्र सर्टिफिकेट देने का कार्य किया जा रहा है। ये संस्थाएं सरकार से अनुदान प्राप्त कर संचालित हो रही हैं। प्रैक्टिकल रूप में प्रशिक्षु को तैयार नहीं किया जा रहा है, इनके लिए भ्रष्टाचार मुव्त सिस्टम तैयार कर नौज़वानों को हुनर के लिए तैयार किया जाना चाहिए। पी.एम.के.वी.वाई. योजना एक बहुत ही महत्वाकांक्षी योजना है एवं इसके सफल क्रियान्वयन हेतु इसकी मॉनिटरिंग की बहुत आवश्यकता है ताकि देश के युवाओं को सही में प्रशिक्षित किया जा सके।
डॉ. भोला सिंह (बेगूसराय) :सभापति महोदय, मैं भोला सिंह नहीं हूं, डा.भोला सिंह हूं। भोला सिंह कोई और हैं।
माननीय सभापति:आपकी डिग्री यहां लिखी नहीं थी, इसलिए मैंने आपको श्री कहा।
डॉ. भोला सिंह : मैं जानता हूं कि जब आप बैठे हैं तो मैं अपनी दशा को देख रहा हूं। नीति आयोग की बैठक से एक आदमी बड़ी तेजी से निकला, आंखों में आंसू थे और सामने एक नौजवान खड़ा था। उसने उस नौजवान को एक कागज का टुकड़ा दिखाते हुए कहा - ‘नाखुदा इसके हिस्से का गम मुझे अता कर दे, इन आंखों में नमी देखी नहीं जाती।’ वह व्यक्ति कोई दूसरा नहीं था, वह हिंदुस्तान का प्रधान मंत्री था और जिसके हाथों में कागज दिया, वह और कोई नहीं, हमारे प्रभारी मंत्री, रूडी साहब थे। रूडी साहब को उन्होंने इसलिए दिया कि इनको भारत की जमीन की खाई, टीले और उसके बहुतेरे रूपों का ज्ञान है और इन्हें तथा इनके डैने को नीले आकाश में चांद और तारों के तेज का और उनके प्रकाश का भी अनुभव प्राप्त है। इसलिए जब प्रधान मंत्री कौशल योजना पर सदन में बातें होती है तो हम उन्हीं पुरानी रटी-रटाई बातों को कह रहे हैं कि भारत में ये सारी चीजें हैं और उनका अध्ययन करके आप इस तरह का काम करें। परंतु यह प्रधान मंत्री कौशल विकास योजना एक दूसरी तरह की योजना है। प्रधान मंत्री ने ज्ञान की हथेली पर विज्ञान, तकनीक और टैक्नोलोजी का दीप जलाकर इस नौजवान मंत्री को दिया है। मैं इसलिए कहना चाहता हूं कि आज दुनिया में ए प्लेस अंडर दि सन, सूरज के अंदर मुझे भी जगह मिले, इसकी लड़ाई चल रही है। चाहे वह सागर हो, चाहे वह आकाश हो, चाहे वह पाताल हो, चाहे नदियां हों और चाहे तकनीक हो। इसके लिए प्रधान मंत्री जी ने कहा है कि दुनिया की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए, पहले हम उसका अध्ययन करें कि दुनिया के तमाम देशों में क्या आवश्यकताएं हैं, क्या संभावनाएं हैं। उन संभावनाओं को संकलित कर के उसका संभावित रूप दे कर हम भारत के युवा वर्ग के हाथ में तकनीक दें और जिस तरह से हम लोहा को इस्पात बनाते हैं, खाद बनाते हैं और दूसरी चीजें बनाते हैं और विश्व के बाजारों में पार्सल करते हैं, उसी तरह से अपने नौजवानों को तकनीक दे कर विश्व के बाजारों में हम पार्सल करेंगे और दुनिया में एक प्लेस अंडर द सन की जगह लेंगे। यह प्रधान मंत्री का विज़न है। इसी विज़न के साथ जय प्रकाश जी को कभी-कभी लगता है कि बहुत तेजी से दौड़ रहे हैं। नहीं, जितना तेज़ी से दौड़ना चाहिए था, दौड़ रहे हैं, उससे और ज्यादा तेज़ दौड़ने की जरूरत है क्योंकि समय हमारे पास कम है। ...(व्यवधान)
सभापति जी, यह योजना क्या है। हमारा पहला लक्ष्य है कि हम 24 लाख नौजवानों को हुनर दे कर तैयार करेंगे और उसके बाद हम 42 करोड़ नौजवानों को हुनर दे कर तैयार करेंगे। जहां हम फैक्ट्री खोलते हैं, उस फैक्ट्री में खोलने के समय ट्रेंड युवक नहीं है, तकनीकी युवक नहीं है। जब फैक्ट्री तैयार हो जाती है, तब लोग शिकायत करते हैं कि बाहर से लोगों को लाया जा रहा है। इधर फैक्ट्री खुलेगी, फैक्ट्री बढ़ेगी, फैक्ट्री तैयार होगी, फैक्ट्री उत्पादन देने की स्थिति में बनेगी और इधर हम तकनीक देंगे, हुनर देंगे, ट्रेनिंग देंगे और इसके माध्यम से लोकल फैक्ट्री बनेगी। लोकल युवा वर्ग जो है, तृतीय और चतुर्थ श्रेणी में वे कार्य कर सकेंगे। फिर हम इस तरह से स्थानीय, राष्ट्रीय और विश्वस्तरीय संभावनाओं को पैदा कर सकेंगे।
महोदय, प्रत्येक जिला में कौशल विकास योजना के केंद्र खुले हैं। हमारे प्रधान मंत्री जी ने और मंत्री जी ने प्रत्येक केंद्र का जिम्मेदार, उनके साथ सरोकार हमारे सदन के माननीय सदस्यों को बनाया है। वे उसके प्रति अकाउंटेबल है और हम भी जहां से आते हैं, बिहार के बेगूसराय से हमें भी देखने का अवसर प्राप्त हुआ है। हमने जा कर देखा है कि दर्जनों संस्थाएं कौशल विकास योजनाओं की खुली हुई है और उन गरीबों की झोंपड़ियों की बेटियां, मिट्टी के घरों की बेटियां, ईंट के घरों की बेटियां, टाबर में रहने वाली बेटियां, जिनके पेट में अनाज भी नहीं है, वे सभी वहां पर जा कर ट्रेनिंग ले रही हैं और उनके घर की माँ कहती है कि आज मेरी बेटी भी नर्स बनेगी, आज मेरी बेटी भी डॉक्टर बनेगी, आज हमारा बेटा भी यह काम करेगा और उनके अंदर भविष्य की खुशहाली छा रही है। इसलिए हमने जा कर देखा है। हमने उस अस्पताल को भी जा कर देखा है, जिसमें इस योजना के माध्यम से जो ट्रेनिंग हुई है, वे लड़कियां नर्स के रूप में काम कर रही हैं। दूसरी संस्थाओं में भी जा कर देखा है, जो अस्पताल हैं, जो आपके प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हैं, वहां जा कर वे ट्रेनिंग ले रही हैं, वहां जा कर काम कर रही हैं, इस तरह से रोज़गार के अवसर पैदा हो रहे हैं। जिहोंने इस यज्ञ में भाग नहीं लिया, जिन्होंने इसमें डुबकी नहीं लगाई, इसका अहसास उन्हें क्या होगा। वे क्या समझा पाएंगे कि प्रधान मंत्री ने क्या दे रखा है। प्रधान मंत्री परंपराओं से हट कर, देश का वर्तमान और देश का भविष्य इस तरह से संवार रहे हैं। ...(व्यवधान)
माननीय सभापति : डॉ. साहब, अब अपनी बात समाप्त करें।
…( व्यवधान)
डॉ. भोला सिंह: हाँ जी, समाप्त ही कर रहा हूँ। मैं दो मिनट का समय लेना चाहता हूँ। मैं आपको दुखाना नहीं चाहता हूँ। मैं भले ही दुखी हो जाऊँ, आपको दुखाना नहीं चाहता हूँ। महोदय, मैं आपके माध्यम से कहना चाहता हूँ कि दुनिया की जितनी चिड़ियाँ हैं, वे मौसम के अनुसार पूरे विश्व में जाकर रहती हैं। गर्मी में कहीं रहती हैं, जाड़े में कहीं रहती हैं, अंडा कहीं देती हैं, बच्चे कहीं पालती हैं, सम्पूर्ण विश्व उनका घर है। हमारे प्रधान मंत्री का भी केवल भारत ही घर नहीं है, सम्पूर्ण विश्व घर है, सम्पूर्ण विश्व की मानवता है और यही कारण है कि पूरे विश्व में दौड़-दौड़कर के, जा-जाकर के, वहाँ की विकास की गतिविधियों को देखकर के भारत में उन चिड़ियों की चोंच में तिनका लेकर हमारे नौजवानों के मुख में डाल रहे हैं ताकि दुनिया के विकास में भारत नम्बर वन हो सके।
मैं माननीय मंत्री रूडी जी को धन्यवाद देना चाहता हूँ कि आपको जानबूझकर प्रधान मंत्री ने देश के भविष्य को आपके हाथों में सौंपा है और मैं समझता हूँ कि आप उसमें कारगर सिद्ध हो रहे हैं। आने वाला इतिहास आपको एक नई दिशा और नए स्थान पर प्रतिष्ठित करेगा। इन्हीं बातों के साथ मैं इस बजट का समर्थन करता हूँ। धन्यवाद।
SHRI GAURAV GOGOI (KALIABOR): Hon. Chairperson, Sir, it is a very difficult act to follow after an experienced parliamentarian like Dr. Bhola Singh has delivered his speech, but I will try my best.
Hon. Minister Shri Rajiv Pratap Rudy is in a very difficult position. He has to balance the expectations of the entire demographic young population of India. Sixty-two per cent population of our country is in the working age of between 15 and 59 years, and 52 per cent of them are below 25 years. They are all looking towards you for guidance, training and to get experience in skill development. You have a very difficult challenge in front of you.
The biggest challenge is that the entire skill development landscape has multiple factors, multiple institutions, and multiple departments. There are some that you can control, and there are some that are outside your circle of influence. Right now, in today’s landscape, skill development is transacted through schools and colleges which are under MHRD, through ITIs which are under the Ministry of Labour and Employment, and now you are trying to integrate and synergize with these two key Ministries in addition to several others. This is the first challenge that you have. How do you do this?
The second challenge is the entire culture of skill development as mentioned by very senior parliamentarians. Today, in my own constituency, I see that young people are very confident about taking loans and becoming an entrepreneur, starting a firm or starting a food processing industry. But if you ask them to get a degree in welding or plumbing, they hold themselves back. They would rather be an entrepreneur and start something. There is a stigma which is attached to welding, plumbing carpentry and masonry. We have to focus on this mental attitude in our society and remove this stigma.
The third challenge that faces your Ministry is that skill development is looked as something which is urban. A person who is living in a small town, living in a village, if he goes to an ITI, after graduating, he has to migrate to a bigger town, migrate to a different city, adopt to a different culture, and this is not sustainable. This is not feasible over a long term. A person from Bihar or Assam, after getting training in driving, has to move to Bengaluru for getting a job but cannot live in Bengaluru for many years and will eventually like to come back. So, the fact that this is so urban centric is a challenge that you have to address.
The fourth challenge is that 90 per cent of working people are in the informal and unorganized sector. They are people who have learned from their parents the art of carpentry, the art of weaving, the art of making pottery or the art of food processing. Their knowledge has been transacted from generations to generations, but they are yet in the informal sector. There is no regulatory support, no financial support, no monetary support and no policy support. How do you move this large section of Indian working population from the unorganised sector to the organised sector? It is something that the Skill Development Ministry has to look at.
As I was listening to many of my senior BJP parliamentarians, I was very disappointed to see that there is absolutely no sense of introspection which exists in the BJP as of now. It is good to have faith in your leadership. It is good to be captivated by magic slogans like Skill India. But there must be accountability; there must be transparency. After all, we are living in a democracy. Just by chanting the name of our leader, a young person will not get a job. We have to evaluate ourselves. After all, this is the role of the Parliament. Where has this Government progressed? In terms of the NSDC, less than 15 per cent of the target has been achieved in respect of training.
In the Pradhan Mantri Kaushal Vikas Yojana, we have seen in the last one year, less than 30 per cent of the target being achieved in training and less than ten per cent of the target being achieved in certification. If 8.4 lakh people have been certified, only 70,000 have been placed. These are the hard facts that are present in front of you, hard facts which were presented by my Congress colleague Shri Rajiv Satav. But it was very disappointing to learn that instead of acknowledging these facts, instead of taking responsibility, all that I heard from the ruling party was blind faith and zero reasons.
You have a lot of expectations, as I said. You have to measure yourself. If you do not measure yourself, how will you know what target have you achieved? The ‘India Today’ magazine, has presented a very dismal scenario. What is the cover story? It is called a Job Famine. Today, we are facing drought; we are facing agricultural distress; we are facing sluggish industry; and now we have job famine as well. There is a lack of job. You might train all these people under skill development. But the industry which is supposed to hire them is in a very weak position.
HON. CHAIRPERSON: Please conclude.
SHRI GAURAV GOGOI: I am just concluding. The Labour Ministry has said that in eight key sectors which employ the maximum people like, textiles, handlooms, manufacturing, steel etc., around 43,000 jobs have been lost. In fact, job creation has become slower in these last two years compared to the previous year. Where is this vision of Skill India? How far have we achieved? In 2014-15, in the last two years, only eight lakh new jobs have been created. In the previous two years of 2012-13, the number was much higher. It was 12.5 lakhs. If you go back even further in 2010-11, the number of new jobs that were created was 20 lakhs. So, job creation has struggled in this current scenario. The economy is down; employment is down. All we are facing is just mere rhetoric. Skill India is a great slogan. But we must measure ourselves.
I heard this august House and was astounded to learn as if Skill India was a new concept which has emerged only in this Government. But that is far from the fact. Skill India was achieved under Prime Minister Dr. Manmohan Singh. In 2008, there was the Prime Minister’s National Council for Skill Development. Subsequently, there was a National Policy on Skill Development and there was the National Skill Development Corporation and the National Skill Development Authority. So, Prime Minister Dr. Manmohan Singh basically created the architecture of skill development in India. Unfortunately, it has become the norm in today’s politics not to give credit to the past but only to malign and to only throw mud.
Shri Rajiv Pratap Rudyji has a very long way to go. I hope that he gets the cooperation and the support of his Ministry and such other Ministries as the Ministry of Home, Law and Justice and Department of Higher Education. All of them have under-performed in the skill development target. We hope that you have this very big obstacle in front of you, a very big challenge in front of you. We wish you the best and we hope that you do more in the next three years than you have done in the last two years. Thank you very much.
*SHRI R. DHRUVANARAYANA (CHAMRAJANAGAR): The Skill Development Ministry has taken over key roles from the Labour Ministry and Finance Ministry, particularly The National Skill Development Corporation (NSDC) that was until now housed under the Department of Economic affairs and the Industrial Training Institutes that was under the Labour Ministry.
Rs. 1,543.46 crore was allocated to the Ministry in 2015-16, out of which only 58% was utilized. This shows that there isn't enough administrative capacity to dispense the mandate of Skill India by this Ministry. Despite this the Ministry has been allocated Rs. 261 crore more than last year in the current budget, that is, 17% rise in allocation. This is at a time when the country is suffering from an agrarian crisis and NREGA allocation has only been increased by around 10%, out of which 30% will go in just pending payments. A huge sum of Rs. 67 crore was spent last year on merely advertisements to promote Skill India, the Ministry has seen a 74% increase in allocation, from Rs. 1038 crore (Revised Estimates 2015-16) to Rs. 1804 crore (Budget Estimates 2016-17).
The number of people who were trained under Skill Development Programmes were much higher than the UPA Government in 2013-14 and 2014-15, which was around 8 million people. Since end of 2015, the number of people trained has only fallen. In the first six months of the financial year 2015-16, the National Skill Development Corporation (NSDC) achieved less than 15% of its 3.7 million skill-training target. Under Pradhan Kaushal Vikas Yojana, which was launched under this Ministry last year, NSDC has achieved less than 30% in terms of training and 10% in terms of certification as of February 2016, out of a target of 2.4 million. NSDC's claim of skilling 500 million by 2022 looks like a very distant dream with these figures. Not only that, it also seems numerically inaccurate as according to NSS data, the capacity for skill training need not exceed 250 million.
The Ministry needs to get its figures and estimates right and also work on laying out a definite and achievable objective of skilling India. It also needs to clarify its mandate as it started out as a Ministry that took over some departments and institutions of other ministries like MSME and labour, but now it has gone from monitoring skill development activity to managing over 12,000 industrial training institutes which were under the Labour Ministry.
*SHRI D. K. SURESH (BANGALORE RURAL) : India is lagging behind in imparting skill training to its youths as compared to other countries. According to some reports merely 10% of the total workforce in the country is getting skill training. Rest of the workforce do not have the opportunity to get appropriate training to perform their jobs.
On the one hand Indian economy is growing and simultaneously the demand for skilled manpower is also increasing. However, the country is facing the shortage of skilled manpower to meet the needs of the hour.
Under these circumstances, various governments in all these years have made several efforts to fulfill the demand for skilled manpower in the country. Our UPA Government had introduced various vocational training programs for the benefit of poor youth in the country. Now I welcome the step taken by the NDA Government to create a separate Ministry for Skill Development and Entrepreneurship.
As we are aware that globalization has brought the world much closer to each other. As a result, people desire to have services and amenities at par with global standards. Keeping this in view, the Government of India should take necessary measures to impart skill training to our youth at par with global standard. In this endeavor, the skill educators should be given the best education and training.
India is among the top countries in which employers are facing difficulties in filling up the jobs. Employees worldwide are facing a variety of problems to meet the growing demand due to lack of training and education.
For India, the difficulty to fill up the jobs is very high compared to the global standard. The lack of available applicants, shortage of hard skills and shortage of suitable employability, including soft skills, are some of the key reasons in finding a suitable candidate for available jobs in the country.
The Indian economy is widely expected to grow at sustained high rates over the next few decades and emerge as the second largest economy by 2050. The robust projections have much to do with the demographic profile of the country. India is slated to have one of the youngest populations in the world, with the bulk of the populations figuring in the working age. Low dependency ratio and a surplus workforce put India at strong comparative advantage vis-a-vis most major economies. However, in order to utilize this 'demographic dividend' effectively, India needs to impart adequate and appropriate skills to its workforce.
Institutional higher education capacities in India are unevenly distributed across the country. There is also a clear dominance of pure science, arts and commerce subjects. While 56% of the higher education institutes are devoted to arts, science and commerce, medical colleges, engineering and technology colleges and polytechnics comprise 10%, 7% and 6% respectively. The dominance of arts, science and commerce in higher education has prevented the bulk of the pass-out from the system from acquiring skills required by manufacturing and service industries.
The size of the current technical training infrastructure is much smaller than what is required. India currently has the capacity for training 3.1 million people per year. This is insufficient, given that every year, 12.8 million new people enter the workforce. The distribution of training capacities is unbalanced, with the industrially-advanced states of Maharashtra, Andhra Pradesh, Tamil Nadu and Karnataka, accounting for 48% of the recognized technical training institutions.
Industrial Training Institutes (ITIs) and polytechnics supply the largest volumes of technical training. The former have certificate course while the latter offer diploma programmes in both engineering and non-engineering disciplines. More than 60% of the institutes are privately owned while the rest belong to different State Governments. The polytechnics are administered by the Ministry of Human Resources Development. The institutes offer diploma programmes in 1,800 different disciplines with the majority of programmes being in engineering subjects. The technical training infrastructure also includes apprentice training in 254 industries and vocational education at the higher secondary level in schools.
Recognizing the importance of increasing and diversifying the skills-building capacity in the country, the National Skill Development Policy (NSDP) was announced earlier this year. The policy puts forth the target of achieving 500 million skilled people in the country by the year 2022. The emphasis is on institution based skilled development through polytechnics, ITIs, vocational training centres, apprenticeship training, training for self-employment and entrepreneurial ventures, addressing the training requirements or retired persons, and expanding the outreach of e-learning and distance learning.
The newly established National Skill Development Corporation (NSDC) comprising distinguished technical professionals will set up industry-specific skill councils. It will be instrumental in forging skills development initiatives by involving the private sector through public-private-partnerships (PPPs). The new policy is also expected to set standards for competency-based qualifications and certificates on national approved criteria. The NSDC, ITIs and polytechnics are expected to substantially increase their training capacities over the next decade so as to achieve the target of equipping/training 500 million people by 2022.
I would like to suggest that the Government should put in place a mechanism to provide skill training to our youth by increasing capacity and capability of the existing system to ensure equitable access for all. As far as training for youth in rural areas are concerned, the Government should make provision to provide appropriate infrastructure at all the block levels in the country.
In this regard, I would like to suggest that a Model Skill Training Centre should be set up in all the parliamentary constituencies in the country. All the Hon'ble Members of Parliament should be involved in the monitoring of such Model Skill Training Centres. At present, various NGOs and Private institutions are imparting skill training but the quality of the skill training is very poor and there is not proper mechanism to oversee the functioning of the skill development centres.
Hence the Government should prepare a comprehensive guideline to ensure proper functioning of the skill training centres and accountability should be fixed on the training providers. There is a need to increasing the duration of the training. It helps to bring more quality in vocational education which will open more avenues for employment across countries for the youth.
The Government should take steps to prepare course material, training modules, etc. to provide training for at least 3 months, 6 months and One year courses.
Another point I would like to make is that after the training is over the Government should create institutional mechanism for research development, quality assurance, examinations and certification, affiliations and accreditation.
More important fact is allocating adequate funds to investment for financing skill development. Since skill training is the need of the hour, the Government should come forward to allocate more funds for the success of the major initiatives of the Government i.e. "Make in India" and "Skill India" and to align to skill standards which are recognized globally.
I would request to the Government to consider the shortfall of skilled manpower/youth in the country, invest more funds in setting up of new skill training centres as well as new training institutes apart from the present scenario.
*श्री श्रीरंग आप्पा बारणे (मावल)ः किसी भी देश के आर्थिक और सामाजिक और सांस्कृतिक विकास के लिए कौशल और ज्ञान दो महत्वपूर्ण बल हैं। और वर्तमान विश्व में पैदा हुई अर्थव्यवस्थाओं की चुनौती से निपटने में वही देश आगे हैं जिन देशें ने इसमें उच्च स्तर प्राप्त कर लिया है।
किसी भी देश में कौशल विकास बढ़ाने के लिए मुख्य रूप से उस देश के युवाओं पर ही निर्भर होता है और यह खुशी की बात है कि इस मामले में हमारा देश अच्छी स्थिति में है। आज देश की कुल जनसंख्या का 80 प्रतिशत युवा है और देश का युवा इस क्षेत्र में कार्य करने के लिए मौजूद हैं। यह भारत को सुनहरा अवसर प्रदान करता है, परंतु यह एक बड़ी चुनौती भी पेश करता है। किंतु हमारी अर्थव्यवस्था को इसका लाभ तभी मिलेगा जब हमारे युवा स्वस्थ, शिक्षित और कुशल होगा।
हमारे पास एक कर्मठ, लगनशील, मेहनती युवा जनसंख्या है और आने वाले समय में इससे सामाजिक-आर्थिक विकास को ज़ोरदार बढ़ावा मिलना तय है। हमारे पास 60.5 करोड़ लोग 25 वर्ष से कम आयु के हैं। रोज़गार के लिए उपयुव्त कौशल प्राप्त करके ये युवा सक्षम हो सकते हैं। कौशल विकास से युवा न केवल अपने जीवन में परिवर्तन ला सकते हैं बल्कि समाज को एक नई प्रगति की ओर ले जा सकते हैं।
हमारे प्रधानमंत्री जी द्वारा हाल ही में मंजूर की गई प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (पी.एम.के.वी.वाई.) युवाओं के कौशल प्रशिक्षण के लिए प्रमुख योजना है और इस योजना के तहत पाठय़क्रमों में सुधार, बेहतर शिक्षण और शिक्षित शिक्षकों पर विशेष ज़ोर दिया गया है। प्रशिक्षण में अन्य पहलुओं के साथ व्यवहार कुशलता एवं व्यवहार में परिवर्तन भी शामिल है।
नवगठित कौशल विकास और उद्यम मंत्रालय राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (एन.एस.डी.सी.) के माध्यम से इन कार्यों और योजनाओं पर काम कर रहा है। इसके तहत देश के लगभग 24 लाख युवा शव्ति को प्रशिक्षण के दायरे में लाकर प्रशिक्षण दिया जायेगा। यह कौशल प्रशिक्षण नेशनल स्किल क्वालिफिकेशन प्रेमवर्क (एन.एस.क्यू.एफ.) और उद्योग द्वारा तय मानदंडों पर आधारित होगा।
केन्द्र और राज्य सरकारों, उद्योग और व्यावसायिक घरानों से विचार-विमर्श कर भविष्य की मांग का आंकलन किया जाएगा। इसके लिए एक मांग समूहक मंच भी शुरू किया जा रहा है। मैं इसके लिए सरकार को बधाई देता हॅं।
कौशल विकास के लक्ष्य निर्धारित करते समय हाल ही में लागू किए गए प्रमुख कार्यक्रम जैसे मेक इन इंडिया, डिजीटल इंडिया, राष्ट्रीय सौर ऊर्जा मिशन और स्वच्छ भारत अभियान की मांगों को भी ध्यान में रखा जायेगा।
प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के तहत मुख्य रूप से श्रम बाज़ार में पहली बार प्रवेश कर रहे लोगों पर ज़ोर होगा और विशेषकर कक्षा 10 और 12 के दौरान स्कूल छोड़े गए छात्रों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा और पहली बार सरकार ने इस तरह के युवाओं के लिए ऐसी सोच और नीति बनायी है, मैं इसके लिए माननीय प्रधानमंत्री जी का अभिनंदन करता हॅं।
वर्तमान में लगभग 2,300 केंद्रों में एन.एस.डी.सी. के 187 प्रशिक्षण शामिल हैं। इनके अलावा, केंद्र व राज्य सरकारों से संबंधित प्रशिक्षण देने वाली संस्थाओं को भी इस योजना के तहत प्रशिक्षण देने के लिए जोड़ने का कार्य सरकार द्वारा किया जा रहा है और मैं समझता हॅं कि निश्चित रूप से इस प्रकार का प्रशिक्षण देने से युवाओं की प्रतिभा को बल मिलेगा और देश का युवा अपने कौशल का विकास करते हुए देश की उन्नति में सहयोग देगा।
कौशल विकास योजना के तहत एक कौशल विकास प्रबंधन प्रणाली भी तैयार की जाएगी, जो सभी प्रशिक्षण केंद्रों के विवरणों और प्रशिक्षण व पाठय़क्रम की गुणवत्ता की जांच करेगी और उन्हें दर्ज भी करेगी। वर्तमान में लगभग 14 लाख युवाओं को प्रशिक्षित किये जाने का लक्ष्य हमारी सरकार द्वारा रखा गया है। इस प्रशिक्षण हेतु युवाओं को कौशल मेलों के जरिए जुटाया जाएगा और सरकार इसके लिए स्थानीय स्तर पर राज्य सरकारों, स्थानीय निकायों, पंचायती राज संस्थाओं और समुदाय आधारित संस्थाओं का सहयोग लेगी।
कौशल व उद्यम विकास हमारी सरकार की उच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। नवगठित कौशल विकास एवं उद्यम विकास मंत्रालय ""मेक इन इंडिया"" अभियान के लक्ष्यों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। हमारे प्रधानमंत्री जी द्वारा चलाया गया यह अभियान भारत को एक विनिर्माण केंद्र के रूप में परिवर्तित करने के लिए अहम पहल है। विकासशील अर्थव्यवस्था के विनिर्माण क्षेत्र समेत सभी क्षेत्रों की मांग के अनुसार प्रशिक्षित कार्यबल तैयार करने में इस अभियान तथा मंत्रालय की अहम भूमिका है।
इस दिशा में उठाये गये सभी उपायों को शामिल करने के लिए हमारी सरकार द्वारा एक नयी राष्ट्रीय कौशल व उद्यम विकास नीति भी तैयार की गयी है। इस नीति के जरिए अच्छे कार्यबल के साथ विकास को बढ़ावा देने की रूपरेखा तैयार की गई है और हमारी सरकार का लक्ष्य वर्ष 2020 तक 50 करोड़ लोगों को प्रशिक्षण देने का है।
हमारी सरकार द्वारा इस दिशा में प्रयास, मिशन के तौर पर किया जा रहा है और वर्तमान में राष्ट्रीय कौशल विकास मिशन के तहत तीन संस्थान कार्य कर रहे हैं। राष्ट्रीय कौशल विकास परिषद, प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में कौशल विकास के प्रयासों को नीतिगत दिशा दे रही है और इनकी समीक्षा भी कर रही है। नीति आयोग के उपाध्यक्ष की अध्यक्षता में राष्ट्रीय कौशल विकास समन्वय प्रधानमंत्री की परिषद के नियमों को लागू करने के लिए रणनीतियें पर कार्य कर रहा है।
भारत ने विश्व में सबसे तेजी से विकास कर रही अर्थव्यवस्था के रूप में अपनी पहचान बना ली है। उम्मीद है कि माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के द्वारा चलाई गई उच्च आर्थिक नीति से भारत शीघ्र ही विश्व की तीन सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हो जायेगा। वर्ष 2020 तक भारत विश्व का तीसरा सबसे बड़ा विनिर्माण केंद्र भी बन जायेगा। हमें यह आशा है कि युवाओं के कार्यबल की सतत उपलब्धता की मदद से हमारा देश विश्व अर्थव्यवस्था में विशेष छाप छोड़ सकता है।
आने वाले समय में कौशल विकास से लेकर मानव संसाधन विकसित करने से हमारी अर्थव्यवस्था को पूर्ण लाभ मिलेगा। नई नीति के तहत मिशन के तौर पर लागू की गई यह योजना मानव संसाधन और उद्योग के विकास में एक नए युग की शुरूआत होगी।
माननीय सभापति: श्री भगवन्त मान। मान साहब, आप पांच मिनट में अपना भाषण समाप्त करें।
श्री भगवंत मान (संगरूर): सर, मैं तीन मिनट में समाप्त करूंगा। दो मिनट मेरे एक्स्ट्रा रख लेना, कभी ज्यादा फिर दे देना। स्किल डैवलपमेंट तीन मिनट में बहुत हो जाता है, क्योंकि कुछ हुआ तो है नहीं। प्रधानमंत्री जी की यह योजना है, उनके दिमाग की उपज है, वे अपने इलैक्शन कैम्पेन के भाषणों में कौशल विकास योजना के बारे में बोलते रहे हैं। प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना है, जो उनका ड्रीम प्रोजैक्ट है।
जो भी एम.पीज़. हैं, वे विजिलेंस मोनेटरिंग कमेटी के चैयरमैन होते हैं, जब हम विजिलेंस मोनेटरिंग कमेटी की मीटिंग लेते हैं तो जो डाटा स्किल डैवलपमेंट में हमारे पास आता है, राजीव प्रताप रूडी जी, उसमें मैं आपको एक छोटा सा सजैशन देना चाहूंगा, उसमें यह कहा जाता है कि हमारे पास पैसा है, हमारे पास ऑफिस भी है, सब कुछ है, लेकिन क्योंकि यह योजना बी.पी.एल. बेस्ड है और बी.पी.एल. अपडेट नहीं हुई है, बहुत सालों से बी.पी.एल. अपडेट नही हुई तो या तो इकोनोमिक सेंसस के आधार पर आप स्किल डैवलपमेंट करें, यह मेरे पास डाटा आता है।
नम्बर दो पर ब्रेन ड्रेन हो रहा है। हमारे यहां क्या है कि गाइडों पर निशानियां लगवाने को पढ़ाई नहीं कहते। स्किल डैवलपमेंट की बहुत ज्यादा जरूरत है। हमारे जो लड़के हैं, अच्छे-अच्छे ब्रेन हैं, चाहे वे डॉक्टर हैं, इंजीनियर हैं, वे विदेशों का रुख कर रहे हैं तो इससे हमारा जो यूथ है, वह डिसएपाइंटेड हो रहा है। उसको सामने भविष्य में अंधेरा ही अंधेरा नज़र आ रहा है। इसी की वजह से क्राइम निकल रहा है। इसी की वजह से जो किसान है, किसान का बेटा अगर स्किल्ड होगा तो उसको खेती से थोड़ी राहत मिलेगी, वह 100 परसेंट खेती पर डिपेंडेंट है, आधे घण्टे की बेमौसम बरसात उसका घर खत्म कर देती है। अगर उसका बेटा कोई ऐसा काम करता हो, जिससे हर रोज़ कुछ पैसे घर पर आते हों या पर मंथ आते हों तो उसको थोड़ी राहत मिल सकती है।
चूंकि आपने मुझे पहले ही कहा है कि टाइम लिमिट है। जो स्वर्णकार हैं, मेक इन इंडिया का जो प्रचार हो रहा है, स्वर्णकार जो ज्वैलरी बनाते हैं, वे 100 परसेंट मेक इन इंडिया है, लेकिन वे भी आज प्रदर्शन कर रहे हैं, उन पर भी ऐसे टैक्स लगा दिये गये कि उनको दुकानें बन्द करनी पड़ीं। व्यापारी, छोटा व्यापारी, किसान का बेटा, स्वर्णकार, मैं इन सभी को एक कविता के जरिये समेटना चाहूंगा, मैं चाहूंगा कि सब लोग अच्छे तरीके से सुन लें, क्योंकि जहां न पहुंचे रवि, वहां पहुंचे कवि, हमारा जितना टाइम है, उसमें एक घण्टे का भाषण तो हम दे नहीं सकते, लेकिन एक कविता के जरिये मैं अपनी बात समेटना चाहूंगा।
देश में नफरत की राजनीति का बोलबाला है, आम लोगों का निकल चुका दिवाला है, सोने की दुकानों पर लोहे का ताला है।
अल्पसंख्यक हर रोज़ डर के माहौल में रहते हैं, सरकार जी बता दीजिए, क्या इन्हीं को अच्छे दिन कहते हैं?
छोटा व्यापारी और किसान हो चुका है दिवालिया, 9000 करोड़ लेकर देश में विजय मना रहा है कोई माल्या, दुश्मन हर रोज़ बोर्डर पार कर रहे हैं, हर रोज़ हमारे जांबाज़ जवान मर रहे हैं, दस सिर काट कर लाएंगे, अगर वे एक काटते हैं, लेकिन मोदी जी नवाज शरीफ के बर्थ डे का केक काटते हैं, एक तरफ हैप्पी बर्थ डे टू यू, दूसरी तरफ खून के दरिया बहते हैं, सरकार जी बता दीजिए, क्या इन्हीं को अच्छे दिन कहते हैं?
कालेधन के बारे में कुछ लिखता हूं तो कलम रुक जाती है, 15 लाख की रकम लिखने से पहले स्याही सूख जाती है, हर वादा जुमला निकला, अब तो शक है, क्या चाय बनानी आती है, करोड़ों लोगों के पास पानी नहीं है पीने को, क्या रेडियो पर ही सुनते रहें, 56 इंच के सीने को, प्रधानमंत्री तो विदेश की सैर पर रहते हैं, चलो प्रधानमंत्री जी किसी विदेशी रैली के जरिये बता दो, सरकार जी बता दीजिए, क्या इन्हीं को अच्छे दिन कहते हैं?
अब बारी पंजाब की है, पंजाब में सरेआम नशा बिकता है। एक बाप अपने नौजवान बेटे के कफन पर प्रधानमंत्री जी के लिए मेमोरेंडम लिखता है। क्या अभी भी कुछ भी आपको गलत नहीं दिखता है? पंजाब के पानी के साथ इंसाफ कीजिए। पंजाब के किसानों का कर्जा माफ कीजिए। जो हर रोज गले में फंदा डालकर पेड़ पर लटकते हैं, मैं पूछना चाहता हूं मोदी जी बता दीजिए, क्या इन्हीं को अच्छे दिन कहते हैं? बहुत-बहुत मेहरबानी। ...(व्यवधान)
माननीय सभापति:अब अरूण कुमार जी को मैंने बुला दिया है, उनको बोलने दीजिए।
…( व्यवधान)
माननीय सभापति : मान साहब बैठिए, प्लीज।
…( व्यवधान)
डॉ. अरुण कुमार (जहानाबाद) : सभापति जी, आपने कौशल विकास की डिमांड्स फॉर ग्रांट्स पर बोलने के लिए अवसर दिया, इसके लिए मैं आपके प्रति आभारी हूं। ...(व्यवधान)
माननीय सभापति : अब शांति बनाए रखें।
डॉ. अरुण कुमार: माननीय सदस्य खड़गे साहब रूडी जी को इंगित करके बोल रहे थे कि ऊपर से शेरवानी है, भीतर परेशानी है। पता नहीं उन्होंने तारीफ में कहा या व्यंग्य में कहा, लेकिन ठीक ही बात उन्होंने कही। यह सच्चाई है कि यह विभाग चुनौतियों से भरा पड़ा है। आजादी के 65 वर्षों में जो लंबे दिनों तक शासन किए, पुरखों ने जिन मन्दिरों का निर्माण किया, विकास के जिस रास्ते को प्रशस्त किया, इनके अराजक कर्मों की वजह से वह रास्ता निश्चित तौर से अवरोधित हुआ है। नतीजा यह हुआ कि जहां चीन में 47 प्रतिशत, कोरिया में 96 प्रतिशत और भारत में 2 प्रतिशत स्किल्ड हैंड्स हैं। सच्चाई कभी अपने आप बयां हो जाती है।
आज की ऐसी परिस्थिति में यह एक चुनौतीपूर्ण दायित्व इस विभाग के सामने है। जो इसका प्रबंधन था, 21 विभागों में बंटा हुआ, उसे समेटकर के इसको एक दिशा देने का संकल्प माननीय नरेन्द्र मोदी के मन में जो आया है, यह इसलिए नहीं आया है कि हम सिर्फ रोजगार दें। इस देश में चाहे वह टेररिज्म हो, चाहे अन्य सवाल हों, जिससे कानून व्यवस्था भी प्रभावित होती है, तो देश में जो अराजक स्थिति बनी है, उसमें बेरोजगारी भी एक बड़ा फैक्टर है। युवाओं का एक बड़ा सैक्शन बेरोजगारी की हालत में है। निश्चित तौर से जो राष्ट्र के सामने समस्यायें खड़ी हो रही हैं, इसके लिए आवश्यक है कि हम इसे संपूर्णता प्रदान करें।
बड़े संकल्प के साथ पूरी दुनिया में ह्यूमन रिसोर्सेज का मैक्सिमम यूटिलाइजेशन कैसे हो सकता है, इस संकल्प के साथ इस विभाग का गठन किया गया और इस दिशा में तेजी से ठोस पहल की जा रही है। मैं माननीय मंत्री महोदय से कहना चाहूंगा कि आज ट्रेनर्स की कमी है। हमारी जो पारम्परिक कौशल उद्यमिता थी, जैसे बिहार के ओबरा में कारपेट बनता था, औरंगाबाद में, यहां का कारपेट उद्योग दुनिया में जाना जाता है। जिस तरीके से कश्मीर का कारपेट है, उसी तरह से ओबरा का कारपेट दुनिया में जाना जाता है। जो पारम्परिक हुनरमंद लोग थे, उनका आर्थिक संरक्षण, मार्केट का संरक्षण, यह दुनिया जब एक गांव बन गया है, आज ग्लोबल विलेज है तो जो चुनौतियां सामने आई हैं, हमारा पारम्परिक जो हुनर था, उस पर कई तरह के काले बादल छाए हैं। जब हम कौशल संरक्षण की बात करेंगे तो एक तरफ पारम्परिक क्षेत्र है, जहां हमारी उद्यमिता दुनिया में सबसे विख्यात है।
17.00hours ...(व्यवधान) मैं आपके माध्यम से मंत्री जी से कहना चाहता हूं कि पारंपरिक उद्यमिता के लिए एक अलग प्रबंधन करना चाहिए क्योंकि आज स्किल्ड फोर्सेज संरक्षण के अभाव में अनस्किल्ड कामों में लगे हैं।
दूसरी तरफ, हमारे यहां बड़े पैमाने पर ट्रेनर्स की कमी है। चूंकि, लंबे दिनों से हमारे यहां जो एक स्लम्प आया है, उसका परिणाम देश भुगत रहा है। खास कर मिलिट्री का जो क्षेत्र है, वहां जो कॉम्पिटैंट एक्सपर्टीज हैं, उनको इन कामों में लगाना चाहिए। जो इंफ्रास्ट्रक्चर है, देश के हर एक जिले एक-एक यूनिट जरूर खड़ा करना चाहिए, जिससे संपूर्ण कौशल उद्यमिता संरक्षित हो सके और सेन्ट्रलाइज्ड सर्टिफिकैशन में भी गुणवत्ता और देश दुनिया के मानक के सवाल पर खरा उतरे। इन्हीं शब्दों के साथ, मैं अपनी बात समाप्त करता हूं। धन्यवाद।
*कुमारी शोभा कारान्दलाजे (उदुपी चिकमगलूर)ः21वीं शताब्दी भारत की शताब्दी है। यह बात पूरा विश्व कह रहा है। 21वीं शताब्दी नौज़वानों की शताब्दी है। पूरे विश्व में सबसे ज्यादा नौजवान भारत में रहेगा। भारत के नौज़वानों की शव्ति का पूरा का पूरा उपयोग करना हमारा फर्ज है। स्वतंत्रता के बाद हमारे नेताओं ने बड़े-बड़े औद्योगिक क्षेत्रों को बढ़ावा देने का निर्णय लिया जो गलत कदम उठाया था। भारत का युवा पिछले 6-7 दशकों से बेरोज़गार हो गया है। ये बेरोज़गार नौज़वान परेशान होकर कुछ गलत कदम उठाने के लिए मजबूर हो गया है। हम चाहे नक्सलिज्म की बात करें या अन्य असामाजिक गतिविधियों में शामिल होने की, इसके लिए हमारी केंद्र और राज्य सरकारों की गलत नीतियां जिम्मेदार हैं।
पहले गांव में रहने वाले नौज़वान अपने माता-पिता के कामों में हाथ बंटाते थे और उनके काम पीढ़ी दर पीढ़ी बढ़ते जाते थे। लेकिन सरकारों की गलत नीतियों के कारण नौज़वानों को अपने पारंपरिक काम को छोड़कर शहरों की तरफ भागना पड़ा और मजबूर होकर झुग्गियों में रहना पड़ रहा है जिससे शहरों में झुग्गियों भी बढ़ रही हैं। रोज़गार न मिलने के कारण हमारे युवा असामाजिक गतिविधियों में शामिल होने लगे। हमारे नौज़वानों में बहुत शव्ति है। भारत का नौज़वान बहुत शव्तिशाली है। हमारे नौज़वान गलत नहीं सोच सकते, क्योंकि हमारे संस्कार ऐसे होते हैं कि हम गलत काम नहीं सोच सकते, न गलत काम करते। सरकारों का कर्त्तव्य है कि नौज़वानों को सही रास्ता दिखायें और उनके मन का काम मिले, इसकी चिंता करनी चाहिए।
हम अपने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी पर गर्व करते हैं कि देश की स्वतंत्रता के 67 वर्षों बाद उनको सही काम देने के लिए सोचा। ट्रेनिंग के बाद सर्टिफिकेट देना एक ऐतिहासिक कदम है। अब यही नौज़वान विश्व के किसी भी देश में इस सर्टिफिकेट के साथ काम कर सकते हैं।
भारत, विश्व का बहुत बड़ा बाज़ार है। चीन जैसे देश हमारे देश के पूरे बाज़ार पर कब्जा कर रहा है। हमारे बच्चों के खिलौने तक चीन बेच रहा है। अपने देश के नौज़वानों के दम पर हम इस बाज़ार में अपना दबदबा बना सकते हैं। हमें इसी तरफ सोचना चाहिए। अभी भी महानगरों में स्किल्ड मज़दूरों की बहुत कमी है। इलैक्ट्रिशियन, प्लंबर, वॉटर रिपेयर जैसे अनेक काम करने वाले बहुत कम लोग हैं, ऐसे कामों को बढ़ावा देना है। एक साल से जो स्किल डेवलपमेंट का काम चल रहा है, उसमें फिशरीज, टैक्सटाइल, पशुपालन में नौज़वान लोग ट्रेनिंग के लिए आ रहे हैं। इसको बढ़ावा देना चाहिए, जिससे यदि कृषि के क्षेत्र में कोई प्राकृतिक आपदा आये तो ये नौज़वान इन क्षेत्रों में काम करें अपना जीवन-यापन कर सकें।
मैं मंत्री जी से आग्रह करूंगी कि महिलाओं को ज्यादा से ज्यादा ट्रेनिंग देने के लिए प्रोत्साहित करें।
*SHRIMATI SUPRIYA SULE : India is among the "young" countries in the world, with the proportion of the work force in the age group of 15-59 years, growing steadily. However, present status shows only 2% of the total employees in India have undergone skills development training; India can become the worldwide sourcing hub for the skilled employees. Skills and knowledge are the motivating force of the financial growth and community development of any country. They have become even more important given the increasing place of globalization and technological changes provide both challenges that are taking place in the world.
Skill building can be viewed as a device to improve the efficacy and contribution of labour to overall production. It is an important ingredient to push the production possibility front line outward and to take growth rate of the economy to a higher route. Skill building could also be seen as an instrument to empower the individual and improve their social acceptance.
As can be seen from the demands for grants 2016-17 for the Ministry of skill development and entrepreneurship, the revised estimate 2015-16 for skill development and entrepreneurship schemes i.e. Kaushal Vikas Yojana is 900 crore rupees as compared to the budget estimate 2015-16 which was 1350 crore rupees. Also, the funds set aside for the North eastern region have not been utilized fully as the revised estimate 2015-16 is Rs.100 crore as compared to Rs.150 crore, the budget estimate 2015-16.
There is sudden euphoria on skill development shown by the present Government and the figure of skilling 500 million Indians by 2022 is in itself a difficult endeavour. Let's take one real example: MES (Modular Employable Skills) under the SDI (Skill Development Initiative) scheme through DGET, Ministry of Labour and Employment, GOI. In this scheme, special emphasis is given to skill development in the North East, J&K and other disturbed areas. Here, thousands of students from North East are brought to Delhi NCR and their travel, boarding and lodging for 4-6 months, training, security, final assessment and final placement of at least 70% students is taken care of by different VTP (Vocational Training Providers).
This entails expenditure worth crores of rupees and the State Governments sign MOUs with VTPs whereby the training providers are to be paid as per the following norms (85% of the boarding and lodging expenses of each student every month, as per the recent guidelines of DGET and two third of the training cost is paid only after the student has completed the training, assessed and placed successfuly, one third of the training amount is forfeited if 70% placement not done. The cherry on the cake is that the VTP is supposed to track each and every student for at least one year after the training with his whereabouts and latest telephone number and salary and other perks, etc.).
There are many more strict compliances and guidelines which a VTP has to follow. Another big challenge that an Institution faces vis a vis the trainees who come for a fully sponsored skill training program of the Government for the following reasons: just for the certificate, a good 4-6 month fully paid vacation, chance to travel to a different land, will get trained and then go back and do nothing, will work but only in their home town or state, etc. Many of them join work after intensive counseling but run away or do not continue because of social, cultural, political and environmental reasons etc. The training provider or the Institution is penalized because of the mandatory provisions of minimum placement. The travesty is that many VTPs have not got their dues for over 6 months to a year and which means their receivables run into crores. How will they take in more batches when their money keeps getting stuck and therefore they will be left with no working capital.
How do you expect small and medium size VTPs to survive when the Government does not pay them in time and the skill model therefore becomes unviable and unsustainable. Many Institutions are in the process of shutting down the skill training centres for lack of funds by the Government. These fraudulent entities do skill development and trainings only on excel sheets and power point presentations.
*श्रीमती अंजू बाला (मिश्रिख)ःइस समय देश में 65 प्रतिशत से अधिक आबादी 35 वर्ष से कम आयु वर्ग के युवाओं और बच्चों की है। अर्थात् हमारे देश में युवाओं की संख्या 50 करोड़ से अधिक है। लेकिन इनमें से कुछेक करोड़ लोगों को ही रोज़गार मिला है। शेष युवा या तो बेरोज़गार हैं या फिर उन्हें साल में कुछेक महीनों का ही काम मिलता है। बेरोज़गार युवाओं को रोज़गार न मिलने का एक बहुत बड़ा कारण है उनमें कौशल यानि स्किल का अभाव। पढ़े-लिखे होने के बावजूद उनमें ऐसा कोई ऐसा हुनर नहीं है जिससे वे अपनी रोज़ी-रोटी कमा सकें। रोज़ी-रोटी के लिए उन्हें मज़दूरी करनी पड़ती है और इसी में उनकी ज़िन्दगी खप जाती है। हमारे विज़नरी प्रधानमंत्री आदरणीय श्री नरेन्द्र मोदी जी का ध्यान पहली बाद देश में वेस्ट हो रहे इस ह्युमन रिसोर्स की ओर गया है। उनकी नज़र इस बात पर पड़ी कि हमारे देश में शिक्षित और अशिक्षित युवा बहुत बड़ी मानव संसाधन पूंजी बन सकते हैं यदि उन्हें देश-दुनिया की औद्योगिक ज़रूरतों के हिसाब से ट्रेनिंग दी जाए। अपनी इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए और इसे अमली जामा पहनाने के लिए प्रधानमंत्री ने कौशल विकास योजना बनाई। इसे मूर्त रूप देने के लिए एक कौशल विकास और उद्यम मंत्रालय का गठन किया गया। मैं सरकार के संज्ञान में लाना चाहूंगी कि यह एक बहुत बड़ी ही दूरगामी परिणाम वाली योजना है, जिससे भविष्य में न केवल गरीबी दूर होगी बल्कि भारत को एक समतामूलक समाज के रूप में विकसित किया जा सकेगा।
इस योजना के तहत कई तरह के फुल टाइम और पार्ट टाइम प्रशिक्षण पाठय़क्रम शुरू किए गए हैं। इस योजना के बारे में हर युवा के पास जानकारी पहुंच सके, इसके लिए आई.टी. कंपनियों की मदद ली गई है। युवा अपनी रूचि के अनुसार एक या एक से अधिक पाठय़क्रमों में प्रशिक्षण हेतु अपना नामांकन करा सकते हैं। उन्हें अपना नामांकन कैसे कराना है इसकी पूरी जानकारी इंटरनेट पर दी गई है। प्लम्बर और इलैक्ट्रिशियन से लेकर एयरोनॉटिक्स इंजीनियरिंग तक के पाठय़क्रम उपलब्ध हैं। इन पाठय़क्रमों का विधिवत अध्ययन करने और प्रशिक्षण लेने के बाद इस व्यवसाय से जुड़ी विशेषज्ञ समितियों से कंप्लीशन सर्टीफिकेट लेना होगा। कंप्लीशन सर्टीफिकेट मिलने के बाद इन युवाओं के लिए न केवल राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय कंपनियों में रोज़गार के अवसर उपलब्ध होंगे, अपितु भारत सरकार की ओर से उन्हें अपना कारोबार शुरू करने के लिए ऋण सुविधाएं भी प्राप्त होंगी। इसका एक सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि इससे किसी अन्य वर्ग या समुदाय के अधिकारों का हनन किए बिना गरीब युवाओं को समृद्ध बनाया जा सकेगा। इसमें "हुनर" सब के लिए है जो भी सीखना चाहे, इसे सीख सकता है और अपनी क़ाबिलियत में वैल्यू एडीशन कर सकता है। प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना एक बहुत ही अच्छी योजना है जिसके लिए हम सब अपने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के आभारी है।
SHRI RADHESHYAM BISWAS (KARIMGANJ): Thank you, Sir, for allowing me to speak on Demand for Grant under the control of the Ministry of Skill Development and Entrepreneurship for 2016-17.
Honorable Prime Minister, Narendra Modi Ji launched his pet project Skill India Campaign in New Delhi on the occasion of the first ever World Youth Skills Day on 15th July 2015. The launch of the mission assumes significance as India currently faces a severe shortage of well-trained, skilled workers. It is estimated that only 2.3 per cent of the workforce in India has undergone formal skill training as compared to 68 per cent in UK, 75 per cent in Germany, 52 per cent in USA, 80 per cent in Japan and 96 per cent in South Korea. According to the note of implementation, more than 54 percent of the country's population is below the age of 25 allowing it with an opportunity to provide a skilled workforce to fill the expected shortfall in the aging developed world.
The new programme aims at providing training and skill development to 500 million youth of our country by 2020, covering each and every village. Various schemes are also proposed to achieve this objective. The emphasis is to skill the youths in such a way so that they get employment and also improve entrepreneurship. The training programme must be on the lines of international level so that the youths of our country can not only meet the domestic demands but also demands of other countries like US, Japan, China, Germany, Russia and those in the West Asia.
To do all of these we need a huge fund and the latest monitoring system to achieve the target. Then only, all the efforts done till now will be fruitful or else it will be of no use.
As I have been elected from the Northeast, I would like to say that the skill development infrastructure in North-Eastern States is insufficient to meet the requirements of the region itself. Unutilized natural resources, primitive agriculture and virtual absence of industrial enterprises are the main responsible factors for the unemployment problem of Northeast. Only in Assam there are above 20 lakh registered unemployed youths out of which 85 per cent are unskilled unemployed youths, though there is a unique requirement in training depending on natural resources, industry and native trades. Till now no plan has been finalised to set up ITls through PPP mode due to less availability of private partners. There were a total of 80 ITls (Industrial Training Institutes) in the Northeast, out of these, 72 were government-run and the remaining eight were run by private players.
I would request the Government to take steps to establish new ITls in the region as well as in my constituency, Karimganj, which is very backward economically, industrially and in infrastructure development. Unemployment problem become tremendous headache for the youths and it creates problem like insurgency among the youths in southern part of my constituency like Ratabari, Patharkandi and Katlichera.
The Union Government announced to open a new scheme under the banner of "venture fund and startup centre" under North Eastern Development Finance Corporation Limited for those youths who have innovative business ideas to overcome the hurdle of loan problem under DoNER Ministry. I would request you to start this scheme immediately in north eastern zone on priority basis as well as in my constituency.
*डॉ. किरिट पी. सोलंकी (अहमदाबाद) : दुनिया का सबसे बड़े लोकतंत्र भारत की बहुत बड़ी जनसंख्या है । सदियों से हमारी जनसंख्या में एक बहुत बड़े वर्ग के पास अपना हुनर है, अपना कौशल है और उसी के जरिए करीब 70 करोड़ से ज्यादा जनसंख्या अपना जीवन-निर्वाह अपने कौशल के जरिए करती है ।
हमारे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी, जब तत्कालीन गुजरात के मुख्यमंत्री थे तब 2010 में स्किल डेवलेपमेंट यानी कि कौशल विकास की बात, देश में सर्वप्रथम उन्होंने दी थी । आज जब वे भारत के प्रधानमंत्री है तब उन्होंने एक नए अलग कौशल विकास मंत्रालय की रचना की है । मैं समझता हूं कि यह एक बहुत बड़ा कदम है । जिसकी वजह से आने वाले समय में एक महत्वपूर्ण रोजगार सृजन की बात होने वाली है । यह मंत्रालय अलग-अलग 21 मंत्रालयों के साथ तालमेल करके बहुत बड़ी संख्या में इस देश में रोजगार के अवसर प्रदान करने वाला हैं । इस मंत्रालय के युवा मंत्री राजीव प्रताप रूड़ी जी जिस तरह से तालमेल के साथ इस विाय को आगे ले जा रहे हैं मैं उनको बधाई देता हूं कि उनके मंत्रालय का भारत के विकास में एक बड़ा योगदान होने वाला है ।
हमारे यहां कई प्रकार के उद्यमी अपने हुनर के साथ व्यवसाय कर रहे हैं । यह सब असंगठित क्षेत्र के हुनर वाले लोग है । आज तक असंगठित क्षेत्र से जुड़े होने के कारण उनका जिस तरह विकास होना चाहिए, उस तरह विकास नहीं हुआ है । ये सब छोटे लोग कंस्ट्रक्शन क्षेत्र, प्लम्बर, कुम्हार, कारपेंटर, मैकेनिक एवं अन्य क्षेत्रों से जुड़े हुए लोग हैं ।
उन सब को छोटी अवधि यानि कि तीन महीनों से छ महीनों की तालिम देकर उनको प्रशिक्षित करने का कार्यक्रम है । इस प्रशिक्षण के साथ उनको स्टाईफंड भी मिलेगा और बाद में उनके अपने कौशल्य के हिसाब से रोजगार के अवसर प्राप्त होने वाले हैं । आईटीआई संस्थानों के छात्रों को उनकी क्षमता के हिसाब से प्रशिक्षित होने का अवसर मिलेगा और बाद में उनके हुनर के हिसाब से उनको रोजगार मिलेगा । आज तक इस क्षेत्र की उपेक्षा होने के कारण इसमें प्रगति नहीं हुई है । स्किल डेवलपमेंट की वजह से बड़ी मात्रा में युवाओं तथा महिलाओं को रोजगार के अवसर मिलने वाले है । मेरा स्पट मानना है कि स्किल डेवलपमेंट की वजह से "मेक इन इंडिया" कार्यक्रम को बहुत बड़ा बल मिलने वाला है । जब इस देश के युवा बेरोजगारी से जूझ रहे हैं तब विपुल मात्रा में उनको रोजगार उत्पन्न होंगे ।
मैं इस मंत्रालय की अनुदान मांगों का समर्थन करता हूं ।
श्री दुष्यंत चौटाला (हिसार) : सभापति महोदय, जहां स्किल डैवलपमैंट की बात की जाती है, मैं सरकार को बधाई दूंगा कि एक ऐसा विभाग बनाया गया है जहां असलियत में युवाओं की सोच के प्रति विचार-विमर्श किया जाएगा। सरकार स्किल डैवलपमैंट की बात करती है तो कहती है 15 से 60 वर्ष। मुझे लगता है कि हमें स्किल को 15 साल से भी नीचे लाना पड़ेगा। आज 12-13 साल के बच्चे के पास भी वह स्किल है जो वह अपने फैमिली मैम्बर्स से इनहैरिट करता है। अगर कुम्हार के घर में मटका बनता है तो 12 साल का बच्चा भी उसमें उसकी मदद करता है। स्किल डैवलपमैंट मंत्रालय को सोच-विचार करके स्किल को उस एज तक ले जाना पड़ेगा जहां कलाकार को अपनी कला को पूरी तरह निखारने का मौका मिले।
आज हमारे देश की आबादी का 65 प्रतिशत हिस्सा 35 साल से नीचे की आयु के लोगों का है। हमारे देश में बहुत बड़ा स्कोप है। अवसर है लेकिन हम उस अवसर को लैक कर रहे हैं और वह कमी हमारे सिस्टम के अंदर है।
आज यह सौभाग्य की बात है कि रूडी जी के साथ तीन और मंत्री यहां बैठे हैं। अगर कोई स्किल डैवलपमैंट की बात करता है तो सबसे पहले अनंत गीते जी के बारे में सोचते हैं क्योंकि हैवी इंडस्ट्री में सबसे ज्यादा इम्प्लॉयमैंट है। जब हैवी इंडस्ट्री की बात करते हैं तो जहां पहले टोयोटा की फैक्ट्री में पांच हजार लोग काम करते थे, आज वही टोयोटा सोचती है कि ऑटोमेशन लेकर आओ और पांच सौ लोगों को इम्प्लॉय करो। आज हम आईटीआई खोले जा रहे हैं, कौशल विकास केन्द्र खोले जा रहे हैं। क्या उन सैंटर्स में टोयोटा अपना सैट-अप कर पा रही है कि हम वहां अपने युवाओं को रोजगार दें? टोयोटा कहती है कि आप वहां से ट्रेनिंग लेकर आओ, फिर हमारी फैक्ट्री में आओ। छ: महीने की ट्रेनिंग करो, उसके बाद ऐप्रैंटिसशिप करवाकर हम आपको पक्का करने का काम करेंगे। अगर रूरल डैवलपमैंट की बात करें, यहां राम कृपाल जी बैठे हैं। रूरल डैवलपमैंट का बजट काफी ज्यादा है, मनरेगा इनके अंतर्गत है। मैं मंत्री जी से पूछना चाहूंगा कि क्या हम वुमैन सैल्फ हैल्प ग्रुप जैसी संस्थाओं में स्किल डैवलपमैंट सिखा पा रहे हैं?
मुझे अर्जुन मेघवाल जी के बीकानेर में जाने का मौका मिला। हम लिज्जत पापड़ खाते हैं। वहां आज भी औरतें उसे पौने का काम करती हैं क्योंकि उस पापड़ का जो स्वाद हाथ की पुवाई से है, वह मशीन की पुवाई में नहीं है। क्या हम स्किल डैवलपमैंट में उसे एक आर्ट के तौर पर आगे ले जाने का काम कर रहे हैं? हम मिस कर रहे हैं कि असलियत में हमारे जो ऐतिहासिक स्किल रहे हैं, जैसे पंजाब में औरतें चुन्नी के ऊपर फुलकारी निकालती थीं। वह भी एक स्किल थी। पहले मटके के ऊपर जो हाथ से पेंटिंग बना करती थी, वह भी एक स्किल थी। उन छोटी-छोटी वैल्यू ऐडेड चीजों से पचास रुपये का मटका डेढ़ सौ रुपये का बिकता था। अगर हम स्किल डैवलपमैंट की सोच रखते हैं तो हमारा विजन वहीं जाता है कि पेचकस चलाना आ जाएगा। प्लंबर का मतलब है कि अच्छी तरह पाइप के अंदर से पानी की लीकेज रोकी जाएगी। मुझे लगता है कि हमें इस विभाग में एक छोटी स्किल की एक्सपर्टाइज़ से ज्यादा मजदूर, किसान के बारे में सोचना पड़ेगा कि आज वह जहां है, उस स्कोप को बढ़ाने का काम करें। हमें उसकी प्रमोशन के लिए भी सोचना पड़ेगा। हम पूरी जिंदगी एक मजदूर को मजदूर बनाकर नहीं रख सकते, उसे मैनेजर बनाने की सोच भी हमें देनी पड़ेगी।तब जाकर प्रधानमंत्री का स्किल डेवलपमेंट का सपना पूरी तरह से सफल होगा। मेरे से पूर्व सभी वक्ताओं ने इस बात को रखा कि एजुकेशन के अंदर भी स्किल डेवलपमेंट की बहुत कमी है। हरियाणा में 494 सेंटर्स स्किल डेवलपमेंट और वोकेशनल के खुले हुए हैं। मुझे भी तीन-चार सेंटरों में जाने का मौका मिला। आज भी सेंटरों में केन्द्र सरकार से पैसा जाता है लेकिन सबसे बड़ी समस्या है कि कोई भी युवा वहां जाकर ट्रेंड नहीं होना चाहता। डिपार्टमेंट की तरफ से उसे खाना दिया जाता है, बस का टिकट भी दिया जाता है, उसको कपड़े देते हैं लेकिन युवा वहां नहीं जाना चाहता। मंत्रालय को विचार-विमर्श करके युवाओं को उन सेंटरों की तरफ प्रेरित करना पड़ेगा। मैं रूडी जी का धन्यवाद करता हूं कि उन्होने कमेटी की तरफ से भुवनेश्वर ले जाने का काम किया। हमने खुद यूनिवर्सिटी के अंदर देखा कि चार-पांच बड़ी-बड़ी मल्टीनेशनल कंपनी ने अपना सेट-अप किया था। मैं सेन्चुरियन यूनिवर्सिटी की बात कर रहा हूं लेकिन केवल एक यूनिवर्सिटी से ओडिसा के एक छोटे से इलाके का विकास कर सकते हैं। हमारा देश 29 राज्यों में और अलग-अलग हजारों यूनिवर्सिटीज और कॉलेजों में बंटा हुआ है। हमें वैसे सेंटर्स खोलने पड़ेंगे, जैसे एविशन हो गई, हैवी इंडस्ट्री हो गई, एमएसईएम हो गई, रूरल डेवलपमेंट हो गई इनके माध्यम से उनको डिपार्टमेंट के साथ जोड़ना पड़ेगा, अगर हम उसमें कामयाब हो गए, आज देश के अंदर लगभग 80 करोड़ की आबादी स्किल सीखना चाहती है, इम्पलायड होना चाहती है उसको इम्पलायड कर पाएंगे।
माननीय सभापति : छह मिनट हो गए, आप बहुत अच्छा बोल रहे हैं।
श्री दुष्यंत चौटाला: मैं आखिरी मुद्दा रखना चाहूंगा। वुमेन सेल्फ हेल्प ग्रुप्स हैं। आज गुजरात में कॉरपोरेटिव कल्चर के तहत दुध की प्रोडक्शन इन्क्रीज हुआ है क्यों नहीं देश के अंदर सेल्फ हेल्प ग्रुप्स को अलग-अलग स्किल के साथ जोड़ दिया जाए। सभी सांसद डिस्ट्रीक्ट विजिलेंस मोनिटरिंग कमेटी के सदस्य होते हैं और उस कमेटी के अंदर सेल्फ हेल्प ग्रुप आते हैं, क्यों नहीं सभी सांसद मिलकर यह प्रयास करें कि उस योजना के तहत एक गांव के अंदर एक स्किल एक्सपर्टिज की तरह देखने का काम करें। जिस दिन हम यह प्रयास करना शुरू करेंगे हमारा देश और प्रगति से आगे जाने का काम करेगा। हमारे देश में 10 करोड़ स्किल्ड लेबर की जरूरत है। इसे अकेले रूडी जी और स्किल डेवलपमेंट मिनिस्ट्री 10 करोड़ की आबादी को इम्पलाय नहीं कर पाऐंंगे। देश में 63-64 विभाग हैं क्योंकि हर चीज को स्टेट सब्जेक्ट बना कर छोड़ दिया जाता है। अगर स्किल डेवलपमेंट को सेंटर सब्जेक्ट बनाकर प्रगति की ओर ले जाएंगे तभी इस देश का युवा इम्पलायड और सक्षम होगा। आज आपने दो मिनट ज्यादा दिया इसके लिए मैं आपका बहुत आभार प्रकट करता हूं। धन्यवाद।
*श्री अजय मिश्रा टेनी (खीरी) : स्किल इंडिया मिशन का मूल उद्देश्य जहां लोगों को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के साथ आर्थिक रूप से समृद्ध बनाना है । इसका अप्रत्यक्ष उद्देश्य देश की बड़ी युवा आबादी को हुनरमंद व सक्षम बनाकर देश को भी मजबूत व समृद्ध बनाना है । राट्रीय कौशल विकास मिशन ने अपने शुरूआती दौर में 76 लाख युवाओं को प्रशिक्षण दिया है तथा प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के जरिए उद्यमिता को युवाओं के दरवाजे पर लाने का प्रयास किया है । सरकार ने पूरे देश में 1500 बहु-कौशल प्रशिक्षण संस्थानों की स्थापना का निर्णय लिया है तथा इन कार्यक्रमों के लिए सरकार ने 1700 करोड़ रूपये की व्यवस्था की है । उद्योग जगत व शिक्षाविदों की भागीदारी से राट्रीय कौशल विकास प्रमापन बोर्ड की स्थापना के निर्णय के साथ अगले तीन वााॉ में एक करोड़ युवाओं का कौशल विकास करने का लक्ष्य रखा है ।
उद्यमिता शिक्षा और प्रशिक्षण व्यापक ओपन ऑनलाइन पाठय़क्रमों के जरिए 2200 कॉलेजों, 300 विद्यालयों, 500 सरकारी आईआईटी तथा 50 व्यावसायिक प्रशिक्षण केन्द्रों में दिया जाएगा तथा स्कूलों और सार्वजनिक/निजी प्रशिक्षण संस्थानों/सिविल सोसायटी संगठनों/एनजीओ आदि सहित विभिन्न संस्थानों को असंगठित क्षेत्र के लिए कौशल विकास कार्यक्रमों का आयोजन करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा ।
असंगठित क्षेत्र के लिए कौशल विकास पहलों में साक्षरता, मूलभूत शिक्षा और सामान्य कौशल विकास जैसे कार्यक्रमों को प्रारंभ किया जाएगा । युवाओं और श्रमिकों का कौशल व ज्ञान प्राप्त करने के साथ रोजगारों और प्रशिक्षण अवसरों से संबंधित जानकारी प्रदान की जाएगी ।
निश्चित ही कौशल विकास कार्यक्रमों द्वारा देश की सामाजिक व आर्थिक स्थिति में सकारात्मक परिवर्तन आएगा ।
*श्री चंदूलाल साहू (महासमन्द)ःमैं कौशल विकास मंत्रालय की अनुदान मांगों का समर्थन करता हॅं तथा माननीय प्रधानमंत्री जी एवं विभागीय मंत्री जी को कौशल एवं उद्यम विकास मंत्रालय के तहत लोगों को कौशल विकास प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद देता हॅं।
कौशल विकास प्रशिक्षण युवा सशव्तिकरण के लिए आवश्यक है। किसी भी देश के आर्थिक और सामाजिक विकास के लिए कौशल और ज्ञान दो प्रेरक शव्ति हैं। आज के वैश्विक माहौल में उभरती अर्थव्यवस्थाओं की मुख्य चुनौती से निपटने के लिए भी कौशल विकास प्रशिक्षण आवश्यक है। किसी भी देश में कौशल विकास कार्यक्रम के लिए मुख्य रूप से युवाओं पर ही ज़ोर होता है। इस मामले में हमारा देश अच्छी स्थिति में है। हमारे देश के पास युवा जनसंख्या लगभग 80 करोड़ है। जो रोज़गार के लिए उपयुव्त कौशल प्राप्त करके ये युवा परिवर्तन के प्रतिनिधि हो सकते हैं और वे न केवल अपने जीवन को प्रभावित करेंगे बल्कि अपने परिवार, गांव, क्षेत्र, प्रदेश एवं देश में भी बदलाव ला सकेंगे। वर्तमान में प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना युवाओं के कौशल प्रशिक्षण के लिए प्रमुख योजना है। इसके तहत पाठय़क्रमों में सुधार, बेहतर शिक्षण और शिक्षित शिक्षकों पर विशेष ज़ोर दिया गया है। इसके साथ-साथ व्यवहार कुशलता एवं व्यवहार में परिवर्तन भी शामिल है।
कौशल विकास के लक्ष्य निर्धारित करते समय वर्तमान में प्रमुख कार्यक्रम जैसे मेक इन इंडिया, डिजीटल इंडिया, राष्ट्रीय सौर ऊर्जा मिशन और स्वच्छ भारत अभियान की आवश्यकताओं को ध्यान में रखा जायेगा। पहली बार श्रम बाज़ार में प्रवेश कर रहे लोगों पर ज़ोर दिया गया है। विशेषकर कक्षा 10वीं और 12वीं के दौरान स्कूल छोड़ते हुए छात्रों पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
नवगठित कौशल विकास और उद्यम मंत्रालय राष्ट्रीय कौशल विकास निगम के माध्यम से इस कार्यक्रम को क्रिन्यावित कर रहा है। इसके तहत 24 लाख युवाओं को प्रशिक्षण के दायरे में लाया जायेगा तथा प्रशिक्षुओं को नकद पारितोषिक भी दिया जायेगा।
भारत ने विश्व में सबसे तेजी से विकास कर रही अर्थव्यवस्था के रूप में अपनी पहचान बना ली है। उम्मीद है कि भारत शीघ्र ही विश्व की तीन सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हो जायेगा। वर्ष 2020 तक भारत विश्व का तीसरा सबसे बड़ा विनिर्माण केंद्र भी बन जायेगा। विश्व के बाज़ारों के लिए कौशल विकास से लेकर मानव संसाधन विकसित करने के लिए प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना से हमारी अर्थव्यवस्था को पूर्ण लाभ मिलेगा और इस योजना से मानव संसाधन और उद्योग के विकास में एक नये युग की शुरूआत होगी। इसलिए इस अनुपूरक बजट का हमें एक स्वर से समर्थन करना चाहिए।
*SHRI S.P. MUDDAHANUME GOWDA (TUMKUR): I would like to place the following few points participating in the discussions on the Demands for Grants under the control of the Ministry of Skill Development and Entrepreneurship for 2016-2017.
India is a developing country. Development of this country is depending upon the future of the youth who are to be settled in their carrier. Ministry of Skill Development has to play a vital and important role while building the carrier of the youth of this country, Government of India should also take into consideration economic empowerment of these youth.
One can see different skills in different youths. It is the Government’s responsibility to explore these various skills of the youth by rendering comfortable financial assistance. To carve out the skills which can be explored from the youths, the Government has to provide and arrange for their training to suit their skills. To achieve good performance in this area, the Government should also undertake awareness programmes. In spite of the best media services we have, the initiation of awareness programme becomes imminent when we look at the large number of youths who reside in rural areas and particularly in remote areas.
Economic empowerment of the youths will also give much strength to the financial position of the country. Hence to achieve good success in the skill development, the government should go in deep and identify the needy and beneficiary and find out his interest and encourage him from every angle and reach the goal.
MUDRA bank Scheme in envisaged by Government of India to empower the youth under skill development by rendering financial assistance. But unfortunately we are not able to see good response either from the government agencies or from the youth who are to be empowered under this Scheme. When we go in detail and deep, one can understand the real problem in this area. Day in and day out we have been seeing, the needy people who are moving from pillar to post to enter this arena and ultimately getting disappointed in an attempt to become entrepreneur. This is the area where the Government of India should focus much if it is really their concern and commitment.
Government of India has recently established this new department namely skill development and entrepreneurship. The Department of MSME has been doing the same work. But establishment of this new Department has not brought any considerable change. This is a serious concern. We have been seeing lack of co-ordination among various Departments which are to achieve the real target in this field.
The country really is in need of taking the youth of this country to confidence and economically empower them. But there is no clarity among the Government agencies who have to work to make the decision of the Government of India in establishing this new and visionary Department of skill development a success and meaningful.
*श्री विद्युत वरन महतो (जमशेदपुर)ः इस बार के बजट में युवाओं के रोज़गार हेतु स्किल इंडिया मिशन में 1700 करोड़ रूपये का आवंटन किया गया है। स्किल इंडिया मिशन का उद्देश्य हमारी मानव आबादी का लाभ उठाना है तथा राष्ट्रीय कौशल विकास परितंत्र तैयार करना है और इसके तहत 76 लाख युवाओं को प्रशिक्षण प्रदान करना है। मेरी सरकार प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के जरिए उद्यमिता को युवाओं के दरवाजे पर लाना चाहती है तथा देशभर में 1500 बहु-कौशल प्रशिक्षण संस्थाओं की स्थापना करने का निर्णय लिया है और उद्यमिता शिक्षा और प्रशिक्षण व्यापक ऑपन ऑनलाईन पाठय़क्रमों के जरिए 2200 कॉलेजों, 300 विद्यालयों, 500 सरकारी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों एवं 50 व्यावसायिक प्रशिक्षण केंद्रों में प्रदान किया जाएगा।
मैं माननीय मंत्री जी से मांग करता हॅं कि मेरे संसदीय क्षेत्र जमशेदपुर के हर प्रखण्ड में एक-एक औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान की स्थापना की जाए, जिससे वहां के आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र के युवा प्रशिक्षण पाकर रोज़गार प्राप्त कर सके तथा बेरोज़गारी से मुव्त हो सकें।
श्री कौशलेन्द्र कुमार (नालंदा) : सभापति महोदय, कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय के नियंत्रणाधीन अनुदान मांगों की चर्चा में भाग लेने का मौका दिया, धन्यवाद। आज पूरे देश में कौशल विकास की चर्चा हो रही है और इसका प्रचार-प्रसार पेपर के माध्यम से, रेडियो के माध्यम से और टीवी चैनलों के माध्यम से किया जा रहा है। मैं मंत्री जी को धन्यवाद देता हूं। वह बिहार से आते हैं। जब पहली बार उन्होंने बैठक बुलाया तब उन्होंने सभी सांसदों से बात किया और एक जिम्मेवारी दी कि हर सांसद से पूछकर अपने जिले में सेंटर खुलवाया। हम लोग के जिले में जो सेंटर खुले उसमें हम लोगों की उपस्थिति रही और उन्होंने जो कहा वही लागू हुआ। इनका प्रयास काफी है लेकिन भोला बाबू बहुत विस्तार से चर्चा में भाग लिए हैं कि भौगोलिक दृष्टि से जिला-स्तर पर एक सर्वे होना चाहिए कि हर जिला में अलग-अलग स्कीम है, जैसे "हुनर" है, कहीं पर पत्थर की मूर्ति बनाई जा रही है वैसे जिले को चिन्हित करना चाहिए। मेरे जिले में भी कई तरह की महिलाएं काम करती हैं, कुछ हलवाई का काम करते हैं, कुछ मिट्टी के बर्तन बनाने का काम करते हैं, कुछ पम्पिंग सेट का काम करते हैं, कुछ बोरिंग का काम करते हैं, इस तरह के जितने भी हुनर है उसकी पहचान होनी चाहिए।
महोदय, स्टेट वाइज और जिला वाइज, जितने भी हुनर हैं, उनकी भी पहचान होनी चाहिए कि किस जिले के लोगों को किस चीज की जरूरत है। इसलिए एक-एक सेंटर जिला वाइज खुले और उसकी पहचान हो। हर जिले के जो सांसद हों, वहां सेंटर खोलने से पहले उनकी सलाह ली जाए। हमारे जो बच्चे बेरोजगार हैं, जो बिना हुनर के घूम रहे हैं, यदि उन्हें हुनर दे देने से रोजगार मिलता है, तो निश्चितरूप से हर सांसद इस काम को करने में पहल करेगा। ऐसा कोई सांसद नहीं होगा, जो इस काम को अपने संसदीय क्षेत्र में नहीं होने देगा।
माननीय सभापति महोदय, इस प्रकार के सेंटरों को खोलने की जिम्मेदारी हर सांसद को मिलनी चाहिए और इसके साथ ही साथ जिस तरीके से रोजगार पैदा करने के लिए जो माननीय मंत्री जी और प्रधान मंत्री जी का प्रयास है, उसी प्रकार से हम लोगों का भी प्रयास है कि बेरोजगार लोगों को अधिक से अधिक रोजगार मिले। आप 16 दिन, 20 दिन, दो महीने या तीन महीने का जो हुनर सिखा रहे हैं, उससे आप उन्हें कोई बहुत बड़ी नौकरी नहीं दे सकते हैं।
महोदय, जब हमारे प्रदेश बिहार में डॉक्टर और इंजीनियर बेरोजगार हो रहे हैं, आई.टी.आई. और एप्रेंटिसशिप कर के भी लोग बेरोजगार हो रहे हैं, तो उन्हें भी हमें रोजगार देना है। वे भी हमारे देश के ही बच्चे हैं। देश में आज प्राइवेट इंजीनियरिंग कॉलेज और सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेजों से लाखों की संख्या में इंजीनियर की डिग्री लेकर बच्चे हर साल निकलते हैं, लेकिन उन्हें रोजगार नहीं मिलता है। वे बेरोजगार हैं। उन पर भी हमें विचार करना चाहिए कि उनके लिए कहां रोजगार पैदा हों। वैसे लोगों पर अगर हम ध्यान नहीं देंगे और छोटे-छोटे 15 दिन, 20 दिन, दो महीने या तीन महीने की ट्रेनिंग देकर हुनर सिखाकर उन्हें रोजगार से जोड़ते हैं, तो निश्चितरूप से उन्हें भी लगेगा कि अब हम उस काम में लगें।
महोदय, हमारे देश में आज बेरोजगारी की हालत यह है कि जो इंजीनियर की डिग्री लेकर निकलते हैं, वे जूनियर इंजीनियर का काम करते हैं और मैंने दिल्ली में कहीं-कहीं देखा है कि इंजीनियर, बिजली मिस्त्री का काम 5000/- या 8000/- प्रति माह में कर रहे हैं। इसलिए माननीय मंत्री जी, मेरा आपसे निवेदन है कि आप जो हुनर दे रहे हैं, उस पर भी ध्यान देना होगा। ऐसा नहीं हो कि हम सिर्फ सर्टीफिकेट बांट दें और उन्हें हुनर के नाम पर कुछ काम ही करना न आए।
महोदय, आपके मंत्रालय का हमारे प्रदेश के कई जिलों में काम हो रहा है। डॉ. भोला सिंह बता रहे थे, उनके जिले में भी काम हो रहा है, लेकिन कुछ ऐसी भी संस्थाएं हैं, जो खुल तो गई हैं, लेकिन वे फर्जी सर्टीफिकेट बांट रही हैं। हम आपसे निवेदन करते हैं कि उसका भी प्रबन्धन आप इस प्रकार से करें, फिर चाहे सांसद के माध्यम से या अपने माध्यम से करें, लेकिन उसका अच्छा प्रबन्धन हो, जिससे पढ़ाई न रुके, उसका हुनर न रुक जाए।
महोदय, मैं माननीय मंत्री जी से एक निवेदन और करूंगा कि वे बिहार से आते हैं और खासकर बिहार के बच्चे बाहर बहुत रहते हैं, इसलिए मेरा आग्रह है कि जो राष्ट्रीय विश्वविद्यालय खुलना है, वह बिहार में खुले, जिससे कि वहां के युवाओं को रोजगार मिले। मैं इतना कह कर ही अपनी बात समाप्त करता हूं।
* DR. KULMANI SAMAL (JAGATSINGHPUR): There is a huge gap between the capacity and the quality of training, insufficient focus on the Youth, unorganised sector in our Country. We have achieved very little in the field of skill development and entrepreneurship. The Ministry of Skill Development and Entrepreneurship that has been functioning since 9 November 2014 aims to take a lead in the challenging filed of skill India. There is a huge gap between the demand and supply of skilled manpower. The Ministry of Skill Development and Entrepreneurship in BE 2016-2017 has been proposed to get Rs. 1804.28 crore that had spent nearly 1/3rd of this amount during 2014-15. During 2015-16 also, the utilization of funds by the Ministry was not that satisfactory. In my Constituency Jagatsinghpur , there are not enough avenues even today. I have a small suggestion to make. The training Centres and the targets should be made to start at each Panchayat headquarters upward and not through the top down approach from Delhi as is being done now. Sufficient attention be paid for sizable enhancement in the capacity utilization of the Ministry by the end of the current financial.
माननीय सभापति : श्री राजेश रंजन जी। कृपया सहयोग करें और पांच मिनट में अपनी बात समाप्त करें।
श्री राजेश रंजन (मधेपुरा) : सभापति महोदय, इस देश में प्रारम्भ से ही इकनौमीकल फ्रीडम की बात उठी थी, क्योंकि पॉलीटिकल फ्रीडम इस कंट्री का सॉल्यूशन नहीं है। यह बात ज्यादातर बड़े नेताओं ने कही, फिर चाहे वे सुभाष चन्द्र बोस हों, चाहे लोहिया जी हों, चाहे महात्मा फुले हों, पेरियार हों या वीर सावरकर जी हों। इस देश के प्रत्येक नेता के इतिहास को यदि आप देखेंगे, तो आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक आजादी की बात शुरू से होती आई है। देश में आजादी के बाद, जब सत्ता मिल रही थी, तो नेताजी सुभाष चन्द्र बोस ने कहा था कि पॉलिटिकल आजादी से पहले इस देश के 41 करोड़ व्यक्तियों को इकनौमीकल फ्रीडम मिलनी चाहिए, क्योंकि बिना आर्थिक आजादी के आप राजनीतिक आजादी की कल्पना नहीं कर सकते।
महोदय, अब हम लोग यहां बैठे हैं, जिन लोगों ने आशियाना उज़ाड़ा है, वही लोग आज आशियाना बनाने की बात कर रहे हैं। मैं किसी की आलोचना नहीं करना चाहता हूं, लेकिन मैं कभी-कभी आश्चर्य करता हूं कि जिस देश की राजनीतिक व्यवस्था ध्यान चन्द को जूते नहीं दे सकी, फुटबॉल खेलने वाले को कपड़ा नहीं दे सकी, जो देश कबड्डी में सात बार जीतने वाली टीम को दूध की व्यवस्था नहीं कर सका और आज आप यहां बड़ी-बड़ी बातें कर रहे हैं।
महोदय, आपने क्या किया, कुम्हार, निषाद, लकड़िहारा, आदिवासी, सुनार, लोहार और चुड़िहार आदि द्वारा बनाई जाने वाली सभी चीजों पर पूंजीपतियों का कब्जा हो गया है। जिनके पास हुनर है, उनके पास कुछ नहीं है। निषाद, गरीब और कमजोर के बच्चे गंगा को तैर कर पार कर लें, तब भी उसकी कोई रिस्पैक्ट नहीं है लेकिन दिल्ली में आपका और मेरा बेटा तैरकर सौ मीटर पार कर जाता है, तो वह दुनिया का सबसे बड़ा तैराक बन जाता है। हमारा कहना है कि आप व्यावहारिक बात को समझें। अब कॉमन और कम्प्लसरी एजुकेशन की वकालत कोठारी आयोग, मुचकुंड दूबे कमेटी और महात्मा फुले जी ने की थी। स्वास्थ्य और एजुकेशन में पूंजी, व्यवसाय का प्रवेश न हो, इसके लिए प्रयास वे करते रहे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र भाई मोदी जी पेरियार मंदिर गये। अब चवारकर, पेरियार की बात आती है। दुनिया में लांग रेवोल्यूशन हुआ। आप लोगों ने कर्म को छोड़ दिया और पूरे समाज के गरीबों को भाग्य, भगवान और किस्मत के भरोसे डाल दिया। यदि आप कौशल विकास योजना को लागू करना चाहते हैं तो कम्प्लसरी और कॉमन एजुकेशन को क्यों नहीं लागू करते? आप पेरियार मंदिर जाते हैं और महात्मा फुले की बात करते हैं। बाबा साहेब अम्बेडकर जी ने हिन्दुस्तान में गरीब, कमजोर और दलित वंचितों के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण की वकालत की है। यदि आप 125 सालों तक दलितों के रिस्पैक्ट की बात करते हैं, तो बाबा साहेब अम्बेडकर की 50 प्रतिशत आरक्षण की वकालत क्यों नहीं करते? मैं आपसे ज्यादा नहीं कहना चाहता, क्योंकि आप घंटी बजा देंगे।
सभापति महोदय, चीन और बंगला देश में क्या हुआ? बंगला देश में बैंकिंग क्रांति हुई। मैं आपको बताना चाहता हूं कि आज एक भी बंगलादेशी भारत नहीं आना चाहता, क्योंकि वहां की आर्थिक और सामाजिक स्थिति में बदलाव आया है। सभी लोगों ने यह पेंटिंग, वह पेंटिंग, डाटा की बात की, 40 करोड़ हुनर देने की बात आयी। बहुत सारे देशों की यहां बात आयी। हम लोग यहां आकर अपनी बात कर लेते हैं। आप हमें एक बात बताइये कि 8 लाख करोड़ रुपया आपके 40 करोड़ पर लगेंगे, जबकि आप प्रत्येक साल 6 हजार करोड़ रुपये देंगे। इस तरह दस सालों में आप मात्र 60 हजार करोड़ रुपया ही खर्च कर पायेंगे। अब आप यह मिशन कैसे पूरा करेंगे? आप बगैर एजुकेशन के कैसे मिशन पूरा करेंगे?
आदरणीय राम कृपाल जी आप जानते हैं और दुनिया भी जानती है कि आईआईटी में दलितों के लिए बारह सौ सीटें हैं लेकिन वहां 800 छात्रों का भी एडमिशन नहीं होता। इसी तरह सात-आठ हजार दलित, एससी और एसटी का एडमिशन डीयू में नहीं होता है। जब आईआईटी में दो सौ-ढाई सौ दलित छात्रों का एडमिशन होता है तो उन्हें इतना परेशान किया जाता है कि वह दलित फर्स्ट और सैकिंड सेमेस्टर के बाद बैक हो जाता है। यहां बड़ी-बड़ी बातें की जाती हैं। उसके प्रति नीयत सही न रहने के कारण ...(व्यवधान)
माननीय सभापति: राजेश रंजन जी, आपका समय समाप्त हो गया है इसलिए आप अपनी बात समाप्त कीजिए।
श्री राजेश रंजन: सभापति महोदय, मैं एक बात कहना चाहूंगा कि आप कोआपरेटिव सिस्टम को लागू क्यों नहीं कर रहे? आप स्माल और बिग इंडस्ट्रीज को क्यों नहीं लागू कर रहे? आप किसी इंडस्ट्री में मजदूर का शेयर क्यों नहीं रख रहे, यानी जितनी मेहनत उतनी मजदूरी। इस कंट्री में जो भी रोजगार हैं, अब आप हुनुर की बात करते हैं तो मेरे यहां बांस, मकान, पान, फूड प्रोसेसिंग, मकई, डंठल आदि सब कुछ है। वहां किसी चीज की कमी नहीं है। लेकिन जिसका जो हुनुर है, उसे आप फ्री कीजिए। ...(व्यवधान)
माननीय सभापति : राजेश रंजन जी, आप अपनी बात समाप्त कीजिए।
श्री राजेश रंजन: आज पूंजीपतियों ने गरीबों के हाथ से हुनर छिन्न लिया है। आज सारे मॉल्स में सब्जी से लेकर दूध, मक्खन आदि सब कुछ बिकता है। आज आम आदमी का रोजगार चौपट हो गया है। ...(व्यवधान)
मैं एक मिनट में अपनी बात समाप्त कर रहा हूं। यदि सही में कौशल विकास की बात है, तो मेरा आपसे कहना है कि हिन्दुस्तान में सबसे ज्यादा बट्टेदार हैं जो गरीब और दलित हैं। मैं जानना चाहता हूं कि क्या आप हिन्दुस्तान में बट्टेदारी कानून लागू करेंगे, ताकि उनकी आय बढ़े। मेरा सिर्फ आग्रह है कि क्या आप खेती को उद्योग का दर्जा देंगे? क्या आप मार्केटिंग देंगे? मैं आपसे भौगोलिक, सामाजिक और सांस्कृतिक आधार पर कहना चाहता हूं कि जिसकी जैसी एजुकेशन है, उसे उस हिसाब से रोजगार देंगे? क्या आप भौगोलिक, सामाजिक और सांस्कृतिक आधार पर रोजगार को डैवलप करेंगे? हमारे यहां पान, मखान होता है जबकि बाजार दिल्ली में है तो मेरा क्या होगा? मेरे यहां बाजार नहीं है।
मेरा प्रश्न है कि कोआपरेटिव सिस्टम के बारे में आपकी क्या सोच है? बैंकिंग सुधार के बारे में क्या व्यवस्था है? जब तक मनी विल मस्ट, मनी विल फर्स्ट, मनी विल जस्ट की धारणा हिन्दुस्तान में रहेगी, पूंजीपतियों की दलाली रहेगी, चाहे जितना कौशल योजनाएं ले आइए, स्किल इंडिया ले आइए तब तक मेरा मानना है कि गरीबों को न्याय नहीं दे पाएंगे। इसके लिए रोजगार की व्यवस्था को लागू करना पड़ेगा।
* SHRI C.R. CHAUDHARY (NAGAUR): I would like to thank and welcome our Hon’ble Prime Minister for launching the wonderful scheme – “Skill India”. In fact India is a youngest country in the world. Young generation want some work to do. India has been facing the problem of “unemployment”. To provide the job to every Indian is major challenge before our Government. To address this problem, our Hon’ble Prime Minister launched the scheme “har hath ko hooner and har khet ko pani”. I would like to welcome the step taken by our Government and our Hon’ble Prime Minister for creating the new development i.e. Skill development.
In comparision to the other developed countries our youths are very poor in skill development. Around 5% youth are properly having the skill development.
Hon’ble Prime Minister lauched the “Pradhan Mantri Kaushal Vikash Yojana” in March, 2015. the Government has opened new centres for the skill development, ITI have been enthrused the job of providing skill development in youths.
The new skill development Ministry is looking after the work of skill development. The main object of our Hon’ble Prime Minister is that the young generation should be trained properly, so that they can start their own occupation. They should be in the position to provide employment to others rather than roaming here and there in search of employment.
Every Indian welcome the steps of our Hon’ble Prime Minister for his great visionary step to launch the “MUDRA Bank” scheme. The trained youths will be able to get the loan from ten thousand to ten lacs without any security and guarantee.
MUDRA will be very helpful to the artisians and newly trained youths to start their small and medium category establishment.
Our Hon’ble Prime Minister launched the scheme of “Make in India” to develop the industries in our country. Our skilled youth will get the jobs over there.
In fact young India need the programme like skill development for more and more employment. We have to take the youngsters in right direction by providing employment or hooner to all eligibles.
In the last, I would like to request the Government to provide more budget to this Skill Development for the betterment of youths. “Youths are the future of India” and we have to take care of our future.
I would like to welcome and thanks to our Hon’ble Prime Minister for brining the great revolution in the field of skill development.
* श्रीमती दर्शना विक्रम जरदोश (सूरत) : प्रधानमंत्री द्वारा शुरू किये गये नये विभाग कौशल विकास विभाग की अनुदानों की मांगों का मैं समर्थन करती हूं । भारत के इतिहास में पहली बार माननीय प्रधानमंत्री जी सोच से भारत के नवयुवक‑युवतियों को नया प्लेटफार्म मिलने वाला है । एक साल में 28 करोड़ बच्चों को कौशल देंगे । भारत के विकास में जोड़ने का लक्ष्य रखा है । यह विभाग भी लगभग 2000 करोड़ का बजट भी रखा है । जिसका राज्यों के साथ समन्वय करके मैक इन इंडिया, स्किल इंडिया के सपनों को साकार करने का लक्ष्य रखा है ।
प्रत्येक राज्य के पारंपरिक विशेषता को ध्यान में रखकर के सांसदों को अपने क्षेत्र में हर काम को 1000 लोगों को विशेा कौशल देने का जो आयोजन किया है इसके लिए मैं मंत्री जी राजीव प्रताप रूढ़ी को धन्यवाद देती हूं । गुजरात में इसकी शुरूआत माननीय नरेन्द्र भाइ मोदी जी ने कई सालों से मुख्यमंत्री रहते हुए की थी जिसे गतिशील गुजरात के मुख्यमंत्री आनंदीबेन ने आगे बढ़ाया है ।
गुजरात का पाटन का पटोला, कच्छ की रोजनगोदन कला या सूरत का जरदोजी का काम हो, अमदाबाद का ब्लॉक प्रिंट या सूरत का डॉयमंड उद्योगे हो सभी को इस विभाग से सपोर्ट मिला है । मेरा सुझाव है कि कौशल विभाग के अभ्यास क्रमों में एचआरडी मीनिस्ट्री से मिलकर सुधर होना चाहिए । लेटेस्ट टेक्नोलोजी और अभ्यास क्रमों के साथ संयुक्त प्रशिक्षण में दुनिया में आपका स्थान सुनिश्चित करके मानिटिंग की शुरू हो और अपनी ब्रांड बनाने का मौका मिलना चाहिए ।
सूरत में बहुत बड़ी डॉयमंड इंडस्ट्री है । जिस तरह से डॉयमंड की कटिंग मैन्यूअल होती थी, अब उनकी मशीनरी, कट, शेप में काफी विविधता आई है । कई निजी डॉयमंड कंपनी अपने कर्मचारी का प्रशिक्षण का काम करते है । सरकार ने भी कई प्रयास किये हैं लेकिन जिस तरह से कौशल विभाग विविध 18 मंत्रालयों से जोड़ दिया गया है विभाग तो बैंको की सुविधा के साथ मुद्रा योजना अंतर्गत इसमें गरीब लोगों को उसका लाभ मिलना चाहिए ।
यही हाल टेक्सटाइल इंडस्ट्रीज मे है । चाइना की मशीनरी डंपिंग भी इंडिया में होती है । चाइना के एब्रोडिंग , टाफी, स्टोन, डिफरेंट टाइप की लेस की मशीनरी कंप्यूटराइज्ड बेचने के लिए इंडिया में कस्टम में डयूटी लगा के हमारी भारतीय हुनर कारीगरों को बढ़ावा देने का काम करना चाहिए । बड़ी इन्डस्ट्रीज डाइंग हाउस वाले अपने हिसाब, सहुलियत के मुताबिक कर्मचारी को ट्रेनिंग देकर परमानेंट प्लेसमेंट का काम करते है । लेकिन ये बहुत कम मात्रा में है । युवाओं को प्रोत्साहित करके बड़ी इंडस्ट्रीज के सपोर्ट सिस्टम वाले कार्यों के लिए भी बैंक की सुविधा से फंड देकर उनको प्रोत्साहित करना चाहिए ।
अंत में मैं प्रधान मंत्री के स्वप्नों को साकार करने में कौशल विकास मंत्रालय सब का साथ सब का विकास करके भारत माता की सेवा करे । मैं ये अनुदानों की मांगों का समर्थन करती हूं ।
SHRI N.K. PREMACHANDRAN (KOLLAM): Thank you, Mr. Chairman, Sir, for giving me an opportunity to participate in the discussion on Demand No.81 – Ministry of Skill Development and Entrepreneurship. I will confine to the said Demand. The Government, both the Prime Minister and the Minister, and almost all the Ministers are vocal about skill development and entrepreneurship. They speak a lot about skill development also. But the Plan allocation in the Budget under Demand No.81 and also the programmes and schemes formulated by the Government is not in tune with the speeches and the vocal slogans being made by the Government as Skill India. That is the first submission I would like to make.
Why am I saying this? I am saying this because of the budgetary allocation for the Ministry for 2015-16? What was the budgetary allocation for the Ministry of Skill Development and Entrepreneurship? It was Rs.1,500 crore. In the Revised Budget, it has come down to Rs.1,000 crore. We are all speaking about the Skill India programme and that the youth of the country has to be skilled so as to make India as a Skill India. But unfortunately during the last financial year 2015-16, Rs.1,500 crore which was allocated in the original budget is revised and cut down to Rs.1,000 crore. Why is it so? That means, the Ministry is not able to perform or there are no such schemes and programmes so as to develop the skills in a better way. I would like to know the reason from the hon. Minister.
This year, the allocation is Rs.1,700 crore. You may kindly see that the Plan allocation was Rs.1,700 crore, out of this, Rs.1,350 crore has been allocated to the National Skill Development Corporation, which has been in existence since 2010 during the time of the UPA Government. As Shri Gaurav has already stated, this National Skill Development Corporation is getting Rs.1,350 crore out of the Plan allocation of Rs.1,700 crore. What is the role of the Ministry? What is the purpose of having a new and separate Ministry? We are all vocal about the Skill Development Ministry. We are also appreciating the Government that a new Ministry has been formulated and the Ministry is functioning in a proper way. What was the demand made by the Minister or Ministry to the Government regarding the financial allocation? It is more than Rs.8,000 crore, as per my information. That is why I am suggesting that the Government is not serious as far as the skill development is concerned because the budget allocation is very meager and that is not sufficient to meet the challenges as we have envisaged in forming such a separate Ministry of Skill Development and Entrepreneurship.
I also fully agree with almost all the hon. Members who have cited, even former President of our country, late A.P.J. Abdul Kalam, that if the country has to empower, if the country has to grow, definitely we have to concentrate on youth, and youth have to be empowered. That is why we are concentrating on Skill India Programme. But the point I would like to make is about the aging population; 52 per cent of the Indian population is below 25 years; and the working age population is 62 per cent. It is an admitted fact that only 4.69 per cent of the total population has been formally trained.
So, we have to impart skill and train most of the people in comparison to the developed countries. For this purpose, there is a flagship programme of the Government of India called the Prime Minister’s Kaushal Vikas Yojana. It is being implemented through the National Skill Development Corporation. I have one reservation here. The target which we have envisaged for this year is to impart formal training for 4 lakh youth. Now the training programme is going on throughout the country. Many agencies are approaching us also. I would urge upon the hon. Minister to kindly evaluate the performance of this training scheme. According to me, it is a wasteful expenditure. As per my information, Rs. 1,000 crore has been earmarked for giving formal training to our youth. How many days of training is given? The training is given only for 15 to 30 days. There is no infrastructure, there are no facilities, nothing is there and so many NGOs have come into this field for imparting training. Definitely, the Government has to be very cautious. Otherwise, Skill India will become a Scam India. I would like to caution the Government in this respect.
Sir, I would like to give two suggestions to the Minister. Instead of wasting money in giving such type of formal training for 15 to 30 days, it is better to have an organised and structured training throughout the country empowering the Industrial Training Institutes, Polytechnics and Vocational Higher Secondary Institutions. If we are able to empower those institutions, definitely it will give fruitful results instead of having this formal training by spending huge amount of money.
Regarding coordination, I would like to appreciate the hon. Minister for the endeavour he is taking in getting the ventures to be done. Definitely I appreciate him. But at the same time, I would like to suggest to the Minister that this Ministry should coordinate with all the Ministries and the Departments of the Government of India so as to have a better coordinated mechanism in skill development, especially when the Ministry of Medium, Small and Micro Enterprises and other Ministries are there. I would request the hon. Minister to look into this aspect.
With these words, I conclude. Thank you.
Hi bाì. सत्यपाल सिंह (बागपत) : सभापति जी, मैं इस महत्वपूर्ण मंत्रालय की अनुदान की मांगों पर बोलने के लिए खड़ा हुआ हूं और सबसे पहले देश के आदरणीय प्रधानमंत्री के विज़न और मिशन तथा इस मंत्रालय के मंत्री के परिश्रम तथा ऊर्जा का मैं बहुत-बहुत अभिनंदन करता हूं। बातों को न दोहराते हुए मैं कुछ महत्वपूर्ण बातों की तरफ माननीय सदन का ध्यान आकृष्ट करना चाहता हूं।
महात्मा गांधी जी ने कहा था कि हमारे देश की शिक्षा ऐसी होनी चाहिए जिससे कि हमारे देश के गांव आत्मनिर्भर बनें। महात्मा जी की यह केवल कल्पना नहीं थी, क्योंकि उन्हें यह मालूम था कि इस देश के गांव पहले आत्मनिर्भर थे। गांव आत्मनिर्भर क्यों थे, क्योंकि वहां कला-शिल्प और हाथ का हर हुनर उनके पास था। मैं माननीय मंत्री जी का ध्यान इस बात की ओर भी दिलाना चाहूंगा कि हम प्रत्येक बात के लिए विदेशियों की तरफ न देखें, अपितु अपने देश की तरफ भी देखें। महात्मा गांधी जी कहते थे कि शिक्षा ऐसी होनी चाहिए जो हेड, हर्ट और हेण्ड्स यानी दिल, दिमाग और हाथ के लिए सहायक हो। हमारे देश की शिक्षा में यह कमी रही कि न तो हाथ का हुनर रहा और न ही दिल के संस्कार रहे और न ही जीवन मूल्य रहे। जिससे हमारे देश में गड़बड़ शुरू हो गयी। हमने दुर्भाग्य से एजुकेशन का जो मॉडल लिया उससे काफी गड़बड़ हो गयी।
मैं सदन का ध्यान इस तरफ आकर्षित करना चाहूंगा कि काफी लोग इस बात को मानते हैं कि अंग्रेजों ने इस देश को बहुत कुछ दिया है। वे इस देश में अंग्रेजी शिक्षा लाए, इस देश को यूनाइट किया और इस देश को बहुत कुछ सिखाया। अंग्रेजों के आने से पहले इस देश में दुनिया का सबसे ज्यादा सिरमोर अगर कोई था तो वह भारत था। दुनिया में सबसे ज्यादा एक्सपोर्ट करने वाला यह देश था। शिल्प कला के बारे में हमारे ऋषि कहते थे-
“संगीत, कला, शिल्प विहिनः साक्षात पशु तुल्य विषाण हीना।” जिस व्यक्ति के पास कोई कला नहीं, कोई संगीत या शिल्प का ज्ञान नहीं वह पशुओं के समान है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति के लिए उस समय यह कम्पलसरी था कि उसके पास हाथ का कोई न कोई हुनर उसके पास हो। शिल्प और क्राफ्ट के बारे में बड़े-बड़े ग्रन्थ इस देश में लिखे गए। मैं माननीय मंत्री जी का ध्यान विशेष रूप से कुछ पुस्तकों की ओर आकर्षित करना चाहूंगा - युक्तिकल्प, जिसमें राजा भोज ने लिखा है कि अलग-अलग शिल्प किस प्रकार के लोग सीख सकते हैं, मयमतंग, जो बहुत बड़े आर्कियोलॉजिस्ट हुए, अपराजित परीक्षा, मानुष उल्लास, संग्रहण एवं सूत्रधार आदि अलग-अलग शिल्प और अलग-अलग कला के ऊपर हमारे देश में बड़े-बड़े ग्रन्थ लिखे गए। शुक्र की शुक्रनीति कहती है कि लोगों को 14 विद्याएं और 16 कलाएं सीखनी चाहिए। इसलिए जैसा मैंने पहले कहा था, अंग्रेजों के आने से पहले भारत को सोने की चिड़िया कहा जाता था। मैं सम्मानित सदस्यों का ध्यान एक पुस्तक की ओर आकर्षित करना चाहूंगा जिसका नाम है - The Case for India. इस किताब को दुनिया के एक बहुत बड़े इतिहासकार विल डय़ूरेंट ने लिखा है। यह किताब 1932 में लिखी गयी थी। इसमें लेखक ने यह सिद्ध किया है कि अंग्रेजों के आने से पहले यह देश इतना ज्यादा धनवान था कि इसके गांव-गांव, शहर-शहर में कितने उद्योग-धंधे चलते थे। अंग्रेजों ने इसको किस प्रकार से नष्ट किया। मैं आपकी जानकारी के लिए इस किताब से कुछ लाइन्स पढ़ना चाहता हूं:
“Those who have seen the unspeakable poverty and physiological weakness of the Hindus today will hardly believe that it was the wealth of eighteenth century India which attracted the commercial pirates of England and France. This wealth was created by the Hindus’ vast and varied industries. Nearly every kind of manufacture or product known to the civilized world, nearly every kind of creation of man’s brain and hand, existing anywhere, and prized either for its utility or beauty, had long, long been produced in India. India was a far greater industrial and manufacturing nation than any in Europe or than any other in Asia. Her textile goods – the fine products of her looms, in cotton, wool, linen and silk – were famous over the civilized world; so were her exquisite jewellery and her precious stones cut in every lovely form; so were her pottery, porcelains, ceramics of every kind, quality, colour and beautiful shape; so were her fine works in metal – iron, steel, silver and gold. She had great architecture – equal in beauty to any in the world. She had great engineering works. She had great merchants, great businessmen, great bankers and financiers. Not only was she the greatest ship-building nation, but she had great commerce and trade by land and sea which extended to all known civilized countries. Such was the India which the British found when they came.” सभापति महोदय, अभी मेरे मित्र गौरव गोगोई जी बोल रहे थे, लेकिन इस देश के साथ क्या हुआ, वह भी मैं बताना चाहता हूं क्योंकि वह बोल रहे थे कि हमको पीछे देखना चाहिए कि पास्ट में क्या हुआ। जब देश आजाद हुआ, चूंकि हम लोगों ने शिल्प और स्किल की तरफ नहीं देखा, वर्ष 1950 में चार देशों की स्थिति की मैं तुलना कर रहा हूं। ...(व्यवधान)
माननीय सभापति : आप अब कन्क्लूड कीजिए।
डॉ. सत्यपाल सिंह: सभापति महोदय, मैं काम की बात कर रहा हूं। मैं जल्दी अपनी बात समाप्त कर रहा हूं। मैं जब भी बोलता हूं, मुझे कम समय मिलता है। न पार्टी समय देती है, न आप समय देते हैं।
माननीय सभापति : आप इतिहास में बहुत जाते हैं।
डॉ. सत्यपाल सिंह: सभापति जी, पार्टी मुझे बाद में नम्बर देती है।
मैं यह कह रहा था कि वर्ष 1950 से लेकर वर्ष 2010 तक देखिए। वर्ष 1950 में इंडिया, इज़रायल, जर्मनी और जापान, इन चारों देशों में इंडिया की पर कैपिटा इनकम सबसे ज्यादा थी। साठ वर्ष बाद 2010 में इज़रायल की पर कैपिटा इनकम हमसे 34 गुना ज्यादा, जर्मनी की 48 गुना ज्यादा और जापान की 72 गुना ज्यादा हो गयी। मैं इसके बारे में कुछ सजेशन्स देना चाहता हू।
माननीय सभापति : आप अपने सजेशन्स को लिखकर दे दीजिए, वे कार्यवाही का हिस्सा बन जाएंगे।
डॉ. सत्यपाल सिंह: अगर आप एलाऊ करेंगे तो मैं लिखकर भी दे दूंगा।
ठीक है, सर। धन्यवाद।
*SHRI CH. MALLA REDDY (MALKAJGIRI): Key Skill Development Highlights of 2016-17 Budget are as follows:
More than 50% of the Ministry's budget will be focused towards jobs related to rural area.
Significant focus of the budget on creation of jobs and entrepreneurship opportunities through initiatives like Start-up India and others, in order to deliver Entrepreneurship, Education and training in 2200 colleges, 300 schools, 500 government ITIs and 50 Vocational Training Centres.
Plan to create 1500 Multi Skill Training Institutes (MSTIs). These will set up in those 2500 blocks and districts of the country which are yet to focus on skill developments and do not have ITIs.
The formation of the National Skill Certification Board is another big step in further strengthening the skill ecosystem.
The major allocation has been to PMKVY( Rs.1771crore).
Commitment to achieve target of skilling 1 crore youth over the next 3 years under the Pradhan Mantri Kaushal Vikas Yojana (PMKVY).
In line with this, they are setting up model skill centres across more than 500 districts in the country.
As regards Highlights from 2015-16, 18 lakh youth have already enrolled in the Pradhan Mantri Kaushal Vikas Yojana ( PMKVY) over the last 8 months, which reflects the relevance for skills. 410 Kaushal melas have been conducted across 29 states reaching out to many of those who needed a direction with regard to employability and employment.
Skill Development is one of the flagship programmes for the State of Andhra Pradesh. As per NSDC's Skill Gap Analysis Report for Andhra Pradesh 2012, it was estimated that Andhra Pradesh would face a Human resources requirement of approximately 10 million skilled workers between 2012 till 2022, across the high-priority and emerging sectors.
Andhra Chief Minister has lauded the efforts the Honourable Prime Minister in the sector of skill development, especially those schemes aimed at digital skill development. Honourable CM, Chandra Babu Naidu aims to catch up with these ideas, and harness the concentration of human resources in the state of Andhara2.
The Andhra Pradesh government constituted the State Skill Development Corporation (APSSDC) on the lines of the National Skill Development Corporation to take the state on a "speedy path of development". The APSSDC, set up under the Public -Private Partnership model, is incorporated as a " not for profit " company under the Companies Act, 2013. The AP government holds 49% share in the company while the NSDC and the industry would hold 5%.
Andhra Pradesh is one of the states that has managed to successfully tap into CSR funds for undertaking Skill Development initiatives. Very recently, GAIL India Ltd contributed Rs.10crore towards skill development in Andhra Pradesh. The objective of the project is to enhance the employability of youth through provision of high quality, globally relevant vocational training for 2,000 candidates for training in various specialized jobs in the oil and gas sector. Other CSR driven Skill Development Initiatives are also happening across Andhra.
The states which reflect maximum enrollments under PMKVY are Andhra Pradesh, Tamil Nadu, Madhya Pradesh, Uttar Pradesh, and West Bengal.
Skill Development is one of the flagship programmes for the State of Andhra Pradesh. As per NSDC's Skill Gap Analysis Report for Andhra Pradesh 2012, it was estimated that out of a total of 72467 enrollments, 46266 have been successfully trained. The major sectors covered under the scheme in Andhra Pradesh are (i) Logistic SSC ( Consignment Tracking Executive, Inventory Clerk, Documentation Assistant (ii) Retail SSC: Sales Associate (iii) Apparel SSC: ( Sewing Machine Operator) (iv) Life Science : (Medical Sales Representative); (v) Agriculture SSC: (Micro). National Skill Development Corporation has a total of 77 (64 fixed and 13 mobile) Operational Training Centres in Andhra Pradesh.
Supporting and furthering the aims of both the state and the centre, the Andhra Pradesh Government has set a specific target to skill 20 million people in 15 years. Further, the Chief Minister set up 17 skill development centres last year at various educational institutions, aimed at imparting training and honing the skills of the youth. The state and the Chief Minister look forward to working to develop the potential of AP citizens and provide them with all facilities to get skilled.
*SHRI BHARTRUHARI MAHTAB (CUTTACK): Ministry of Skill Development and Entrepreneurship ( MSDE) is a unique Ministry in the entire Government of India, set up as it is mandated to monitor and co-ordinate more than 70 plus Skill Development Schemes and programmes being implemented by more than 20 Central Government Ministries and Departments. It is responsible for implementation of Common Norms which seek to rationalize the whole spectrum of skill development processes and systems; including inputs, outputs, funding norms, third party certification and assessment, monitoring/ tacking mechanisms and empanelment of training providers, etc. across all Ministries. The Primary purpose is to help create an appropriate ecosystem that would facilitate imparting employable skills to India's growing work force over the next few decades.
This is the first Demands for Grants of MSDE that is before us for consideration. The Ministry have been allocated Rs.1804 crore 28 lakhs out of which Rs. 1700 crore is for plan expenditure and Rs.104.28 crore for Non-Plan expenditure during this financial year. I am told that Ministry's budgetary proposal was of Rs. 8062 crore 32 lakh out of which Rs.7887 crore was projected towards Plan expenditure. But Ministry of Finance has pruned down the proposal. Can someone from the Government tell us why this has been done? What more is worrisome is the huge reduction made in the Ministry's flagship and ambitions programmes like the Pradhan Mantri Kaushal Vikas Yojna where instead of the proposal of Rs.4078 Crore only Rs. 1100 Crore have been allocated. It is interesting to note that the Plan Budget for 2015-16 BE was Rs.1000 crore but RE became Rs.900 crore and expenditure upto 19th February, 2016 was Rs.500crore. Another flagship programme of this Ministry is Skill Development and Entrepreneurship Programme for which in 2015-16 Rs. 500 crore was allocated as BE and the RE came down to Rs.100 crore, but not a single rupee been spent till 19th February, 2016. There are around 13 such programmes / projects that were undertaken by the Ministry last year where the Budget Estimates was Rs.1880 crore 41 lakh and the Revised Estimate came down to Rs.1252 crore but only Rs.614 crore 97 lakhs have been the expenditure till 19th February, 2016. If this be the case of the Ministry one should not take the plea that it is a new Ministry and therefore needs time to settle down. But as we all know, government is a continuous process.
There is huge reduction made in Ministry's flagship programmes for Technical Assistance Scheme. For NSDC, allocation of Rs.250 crore is made against the demand of Rs.2401 crore, for Multi Skill Training Institutes allocation of Rs.50 crore is made against the proposal of Rs.750 crore. Similarly, for Apprentice and Training Programmes, allocation of Rs.286 crore is made against the proposal of Rs.1450 crore. I do not know how the Ministry is going to meet the expectation of the thinking public in view of the large and ambitious mandate conferred on the Ministry to provide skill training to fresh entrants to the work force and up skilling and re-skilling of those already in the workforce through creation of various new institutional arrangements for skill developments and entrepreneurship.
I believe there is justifiable case for significant increase in the Plan Outlay for the Ministry. Therefore, the Minister should earnestly take up the matter with his counterpart in the Ministry of Finance. The Prime Minister Kaushal Vikas Yojna approved on 20th March, 2015 with the objective to enable and mobilize a large number of Indian youth to take up outcome based skill training and become employable, has a target of imparting training to 14 lakh youths throughout the country, besides 10 lakh persons through Recognition of Prior Learning. It is learnt that only 7.67 lakh youth have been certified and placement has been given to only 55 thousand 712 youth. A target to skill one crore youth under the scheme has been fixed for three years between 2016-17 till 2018-19. For this year, the target has been set at 28 lakh. As the objective of the scheme is to train as many youth as possible, there should not be any gap between the number of candidates enrolled and those who actually complete their training. I would urge that there should be assessment studies besides incentivizing candidates at various stages of training. When 14.27 lakh candidates across the country have completed their training, only 55712 have been placed which is around four percent of the trained candidates. Therefore, PMKVY Scheme guidelines should mandate placement.
There is a programme like Skill Development in 34 Districts affected by Left Wing Extremism which was approved in 2011 for a period of five years at a cost of Rs.241.65 crore. But out of the projected creation of 102 infrastructure in the affected districts, only 25 projects been completed. Similarly out of the 2987 persons trained in 9 States, not a single person been trained in Maharashtra. Now this scheme is being extended by another three years, up to March 2019. Are you not going to remove the impediments?
Before concluding, I must say that apart from fund constraints, this Ministry is facing acute shortage of manpower. It should be looked into. The Ministry is having offices at several scattered locations. There is a need to a centralized office building so that the Ministry functions in a cohesive manner.
*श्री शरद त्रिपाठी (संत कबीर नगर)ः किसी भी व्यक्ति की कुशलता ही उसके कुशल होने की परिचायक है । भारत अनादिकाल से हुनरमंद देश रहा है यहां के नौजवान पहले से ही शिक्षण के अलावा, प्रशिक्षण से युक्त रहे हैं, किंतु भारत में जबसे विदेशी अक्रांताओं का आधिपत्य बढ़ा तबसे भारत के हुनरमंदों का शोाण बढ़ा, आज भी भारत को हुनर की विशेाता का वर्णन यहां के प्राचीन भवनों तथा ग्रामीण क्षेत्रों में बनने वाले वर्तन कढ़ाई कारीगरों द्वारा बनाये जा रहे उत्पाद के प्रति आकाऩण विदेशों में भी अपनी साख बनाये हुए है। किंतु खेद है कि आजादी के बाद सबसे अधिक दिनों तक शासन करने वाली पार्टी ने कभी यहां के हुनर को तरासने का कार्य नहीं किया, आज जब वैश्विक आकड़ों के आधार पर भारत में कौशल की बात आती है तो मात्र 2.7 औ ही पर खड़ा होता है ये बेहद शर्मनाक स्थिति हमें विरासत में मिली किंतु मैं बधाई देना चाहूंगा कि हमारे प्रधानमंत्री ने इस पर विशेा ध्यान देकर इसके लिए एक अलग मंत्रालय बनाकर उसकी जिम्मेदारी श्री राजीव प्रताप रूड़ी जी को ही आज हमारी सरकार एक अभियान चलाकर भारत को युवाओं को पूरे विश्व में सर्वाधिक है उनके लिये कौशल विकास मंत्रालय के अंतर्गत प्रशिक्षित कर एक सक्षम भारत तथा सम्पन्न भारत की अवधारणा को पूरा करने का संकल्प लिया है और निश्चित ही हमारी वर्तमान सरकार इसे अवश्य साकार करेगी ।
PROF. SAUGATA ROY (DUM DUM): Thank you, Sir. I rise to speak on the Demands for Grant of the Ministry of Skill Development and Entrepreneurship.
I think, I support the setting up of the Ministry in November, 2014. I also welcome the announcement of the Pradhan Mantri Kaushal Vikas Yojana, the flagship scheme of the Ministry, which was launched in July, 2015. I support the mission statement, aims and objectives of this scheme. I also agree that the target set for producing 50 crore of skilled people by 2020 is a good target. Nobody can fight with its general objectives. India is certainly in need of skilled people. As compared to the developed countries where the skilled workforce is between 60 and 90 per cent of the total workforce, out of our total workforce only 10 per cent workforce is skilled. Out of this 10 per cent, only three per cent are skilled and seven per cent are informally trained. So, this is an urgent need of creating skilled people.
We had the informal training. We had the hereditary skills in various trades. Now, in today’s age, hereditary skill training is not good enough. We need to impart modern skills. Now, I would like to go into whether the effort being made so far by the Ministry is equal to the task. I do not think it is equal to the task. If we take the Ministry’s functioning. About Rs. 1,543 crore was allocated last year and out of which, only Rs. 1,043 crore could be spent. Now, a budget estimate of Rs. 1,800 crore has been placed. This, Rs. 1800 crore, is a paltry sum for such a huge job of skill development. The Ministry has actually requested for Rs. 4,078 crore for the Pradhan Mantri Kaushal Vikas Yojana. Out of that, only Rs. 1,770 crore has been allocated to them. I really do not know one thing. The Prime Minister speaks of Skill India but his Finance Minister deprives this Ministry of the money that they have demanded for the Pradhan Mantri Kaushal Vikas Yojana. I do not know whether it is on the ground of financial stringency or not but positively with such a paltry sum of money you cannot launch it in a big way into skill development.
Sir, I want to tell you that we need not only to invest money in skill development but we need a massive change of mindset as far as skilled work is concerned. I visited the USSR before it collapsed. I went to the Moscow University. They told me: “In our country, after class-8, nobody, who is not brilliant, goes to higher classes. Only 20 per cent of the students, who come into school, they pursue higher studies. Others go for vocational training.” If you try it immediately in our country, people will take it as an insult. If you tell a middle class person to learn carpentry, welding or turner or fitter to his son, he will take it as an insult.
What is needed is a massive educational campaign to change the mindset of the people, and to explain to them that mere reading of a few books and getting a degree is no solution.
HON. CHAIRPERSON: Please conclude now.
PROF. SAUGATA ROY: I have got 10 minutes. Our Party has 15 minutes’ time. I spoke only for three minutes now. Please allow me to speak.
HON. CHAIRPERSON: I know that but time constraint is there.
PROF. SAUGATA ROY: That is why, I will not make a long speech. Sir, I supported the Government.
So, on skill development, now I want to point out two things to the hon. Minister. One is the need – Shri Reddy has said this – about skill certification. We now have new sort of entrepreneurs who are skill training entrepreneurs. They are fly-by-night operators. They are setting up shops. They are issuing certificates. They are getting Rs.8,000 allotted per student. They are taking away Rs.4,000 from that amount. This must stop. Earlier it was Rs.10,000. Now, it has been reduced to Rs.8,000 only. This must stop. Certification should be given by industry associations. … (Interruptions)
HON. CHAIRPERSON: Now, I want to call the next speaker. Please conclude now.
PROF. SAUGATA ROY: Sir, please allow me some more time. Sir, you have extended everybody a little more time and that is why it has come to this pass. … (Interruptions)
HON. CHAIRPERSON: The time of your Party is up. The first speaker from your Party spoke for about seven minutes.
PROF. SAUGATA ROY: Sir, I am winding my speech now. Sir, you have been kind enough. I have not spoken for a long time. The earlier speaker from my Party took only five minutes.
So, this certification is very important as far as skill development is concerned.
The Government has already got an infrastructure with 13,000 ITIs; of which 2,293 ITIs are Government and the rest 10,000 ITIs are private. The National Skill Development Corporation has got 250 training partners and 4,000 training centres. There are 126 trades which are taught in these ITIs. But, ultimately as has been pointed by Shri Reddy, we need trained people not only for the manufacturing industry but also we need people to have soft skills. Gardening is a soft skill. Maybe, being a barber is a soft skill. All such skills should be developed. So, you have a big job at hand. Now, you have produced 40,000 apprentices in the last one year. There are 23,800 establishments for apprentice training. You have set a target of one lakh establishments for apprentice training so that one million people are trained. … (Interruptions)
HON. CHAIRPERSON: Prof. Saugata Roy ji, please conclude now.
PROF. SAUGATA ROY: Now, all I say is that I wish all the best for the Minister. He is young and energetic but he has to lay the roadmap as to how he wants to achieve the target of 50 crores of skilled people by 2022. From the Budget Estimates and from the efforts made so far, it seems inadequate.
Thank you.
SHRI PREM DAS RAI (SIKKIM): Hon. Chairperson, Sir, thank you for allowing me to participate in the discussion on the Demand for Grant of the Ministry of Skill Development and Entrepreneurship.
We are completely in agreement with all the speakers that skill development is one of the most vital needs of this country and the targets set by the Ministry are in accordance with the job at hand. It is well known – everybody says – that the 21st Century actually belongs to Asia. If India wants to participate in it, then our skills, skill development and also entrepreneurship are something that needs to be developed. We know that demographic dividend should not be turned into demographic disaster. This is well documented. It is well analysed.
Today, the urgency for skill is much more. Thanks to the robotics that has now been unleashed in the developed world as well as in some of the developing world like China. So, robotics is going on in a massive way. You might have already seen that in the area of automotive sector, robotics has actually taken over.
So, this is one of the reasons why we need to have a very balanced approach in the way in which skills will be developed in our country. It is in the right direction; and I congratulate the hon. Minister. But one of the things that we can see here is the utter lack of resources that have been put behind this. Mere Rs. 1,770 crore is not up to the mark. So, the amount needs to be moved up substantially.
There is the National Skill Development Corporation. I would like to ask the Minister, and in his reply, he should tell us. It is in the PPP mode. So, what is it that the private sector is bringing in terms of resources? Are they bringing in resources in terms of funds or are they bringing in resources in terms of the market or are they bringing in resources in terms of apprenticeship and training? In what way, are they bringing in resources? Therefore, this push is something that we need to look at. We need to see that much more funds are put in the hands of the young Minister, who is really doing something.
Sir, how do we figure out, how do we measure if we have had the necessary impact? Many speakers before me, have already asked this question on quality and as to how do we measure the quality of the product, specially in the Pradhan Mantri Kaushal Vikas Yojana. I think it is a red flat and we need to really address this.
Finally, Sir, in the State of Sikkim from where I come, we had the skill development as the State Capacity Building Mechanism, which we have already built. I think we have now moved it in the direction of which the Government of India wants, and I would request the hon. Minister to support our capacity building exercise and our skill building exercise, in full.
With these words, I conclude. Thank you very much.
*SHRI B. VINOD KUMAR (KARIMNAGAR): The total amount allocated to the Ministry of Skill Development and Entrepreneurship in Budget 2016-17 is Rs.1804.28 crore. The government should fully utilize this amount. It should urgently fill all vacancies, hire highest quality talent and modernize offices to boost execution capacity so the amount can be utilized and the targets met. The Ministry was allocated Rs.1,543.46 crore in Budget 2015-16 but could spend only Rs.435 crore for Pradhan Mantri Kaushal Vikas Yojana (PMKVY). This should not happen again. To ensure maximum effectiveness of this program, I have some recommendations.
Special attention should be given to women and low educated youth as they have higher demand for skills training. Research shows women particularly benefit more from skills training. Labour force participation is 30% higher for women who have completed skills training, as compared to only a 16% difference for men.
The five sectors where need for skilled workers is higher: infrastructure building; informal sector including jobs such as domestic help and security guards; automobile and auto components; building and construction; and textile and clothing. Agriculture sector, although it does not contribute much to national GDP, employs bulk of workforce so should receive maximum attention. The Government's main objective is welfare of people, not increase in GDP.
The curriculum for Industrial Training Institutes is outdated and still in 60's mode where focus is on industrial labour. Today's economy is a knowledge economy, so skills should be geared accordingly. The curriculum should be updated so it is relevant to what the job market needs. The Ministry of Skill Development and the Ministry of Labour and Employment should take the state governments on board and prepare a relevant curriculum at the earliest.
There are many agencies involved in skill India. To ensure maximum efficiency there should be coordinated policies and standardization of procedures and outcomes. A starting point would be a unified definition of " skill " by all implementing agencies.
A Labour Market Information System is urgently needed, so there is actionable information on demand and supply of labour.
A 'Skill Database' should be developed that identifies, catalogs and projects the range and depth of existing skills e.g. traditional, industrial -era and post -industrial era skills. This will present the vast array of skills that individuals can choose from . They can accordingly select skills which they wish to learn/ upgrade. It will also help planners and policymakers.
A database that assesses performance of training institutes according to indicators such as number of placements, etc. should also be developed such that sill seekers can make informed choices.
There should be compulsory industry consultation before designing courses so that skills imparted are relevant and demand-oriented. Worker's organizations should also be consulted to ensure maximum relevance of skills.
Equivalence between diploma and degree programmes should be established. Different forms of training can be combined such as linking vocational with entrepreneurial training and formal with non-formal.
A 'maker scan' of available jobs must be done before training agencies decide batch size so as to ensure optimized placements. Trainees should also undergo internships before course ends so they are prepared to transition into world of work. Post placement support be compulsory to ensure that they do not fall back into unemployment.
Life/Soft skills like persuasion, negotiation, effective communication, client management, stress management should be also part of skill training.
More vocational training institutes should be opened. China has over 500,000 senior higher secondary vocational schools while India has only about 5100 ITI's and 6000 VET schools. Certification offered through Massively Online Open Courses (MOOCs) should be given equivalence to other certification from conventional training. This will reduce burden on trainers. Teacher's training is a significant challenge and government must invest heavily in this to ensure quality trainers.
Employment exchange should be merged with Kaushal Vikas Kendras to optimise execution.
श्री रत्न लाल कटारिया (अम्बाला) : सभापति महोदय, मैं मिनिस्ट्री ऑफ स्किल डेवल्पमेंट एण्ड एंटरप्रिन्योरशिप की मांगों के समर्थन में बोलने के लिए खड़ा हुआ हूँ। जननायक नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में जिस प्रकार से प्रधान मंत्री कौशल विकास योजना, सन् 2015 में शुरू हुई है, जिसके अंतर्गत सारे हिस्सों का ध्यान रखते हुए कौशल विकास की योजनाएं शुरू की गईं। चाहे वह नॉर्थ ईस्ट हो, चाहे वह हमारे नक्सल प्रभावित क्षेत्र हों, चाहे 400 आईटीआई को वर्ल्ड बैंक की मदद से सहायता कर के उन्नत करने की बात हो, चाहे 300 करोड़ रूपये से वेरियस आइटीआइज़ को अपग्रेड करने की बात हो, अब जो कदम भारत सरकार ने इस विषय में उठाए हैं, उनके परिणाम अब आने शुरू हो गए हैं कि सन् 2016 में भारत वर्ष के अंदर दुनिया के मुकाबले हायरिंग ऑफ द जॉब 90औ बढ़ने वाली है। कौशल विकास के माध्यम से जो ई-कॉमर्स एण्ड स्टार्ट-अप की गतिविधियां शुरू हो रही हैं, they will provide big opportunity for the job seekers.
इसी तरह से टैक्नोलॉजी के क्षेत्र में भी हमारे नौजवानों की मदद होने जा रही है। मेक इन इंडिया एण्ड डिजिटल इंडिया नाम से जो कार्यक्रम आदरणीय प्रधान मंत्री जी ने चलाए हैं, जैसे-जैसे हमारे युवा कौशल विकास में निपुण होते जाएंगे, वैसे-वैसे हमारे देश के अंदर रोज़गार के अवसर बढ़ते जाएंगे। वैसे भी हमारे देश में प्रतिवर्ष 1.5 मिलियंस हर महीने रोज़गार की लाइन में खड़े होते हैं। यह एक बहुत बड़ा चैलेंज है। आज जब हम दुनिया के सिनैरियो की ओर देखते हैं तो सन् 2015 में चीन व भारत का हिस्सा दुनिया के अंदर रोज़गार पाने वालों में 62 प्रतिशत है।
हम देख रहे हैं कि आज चीन के अन्दर 100 करोड़ लोग रोजगार पाने की लाइन में लगे हैं, वहीं भारत की तस्वीर 86 करोड़ है, लेकिन यह तस्वीर आने वाले समय में बदलती जाएगी। आज जो नींव खड़ी की जा रही है, आज जो युद्ध स्तर के ऊपर स्किल डेवलपमेंट का कार्य हो रहा है, उसे देखते हुए वर्ष 2050 में भारत चीन को पीछे छोड़ देगा। आज यहाँ पर बहुत से सदस्य जब स्किल डेवलपमेंट की बात कह रहे थे तो यहाँ पर बात आ रही थी कि हिन्दुस्तान में 68 साल की आजादी के बाद भी मात्र 2.5 परसेंट लोगों को स्किल डेवलपमेंट की शिक्षा प्राप्त है। जबकि जो दुनिया के डेवलप कंट्रीज हैं, वहाँ पर यह आँकड़ा कहीं 90 परसेंट, कहीं 80 परसेंट, कहीं 56 परसेंट है। लेकिन देखिए यह क्या चमत्कार आदरणीय नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में होने वाला है कि जो वृक्ष ऑलरेडी ऊँचाई के ऊपर खड़ा है, वह तो सारी दुनिया को दिख रहा है। आज अमेरिका का विकास, आज चाइना का विकास, आज यूरोप का विकास सारी दुनिया को दिख रहा है। अब तक भारत की तो गरीबी की ही चर्चा होती थी और हम जमीन में नीचे, पहाड़ों की तलहटी पर, नीचे रहने वाले लोगों में जाने जाते थे, बहुत बैकवर्ड और गरीब लोगों में जाने जाते थे। आज जिस प्रकार की मेहनत हो रही है, यह वृक्ष जो है, जिसे नरेन्द्र मोदी जी सिंचित कर रहे हैं, यह वृक्ष अब तलहटी से उठकर एक दिन उन आसमान की ऊँचाइयों को छुएगा और पहाड़ के ऊपर जो ऑलरेडी वृक्ष खड़ा है, उससे भी ऊँचा अपना कद बनाते हुए वर्ष 2055 के अन्दर भारत दुनिया का सबसे बड़ा नौकरी पाने वाला देश बन जाएगा। ऐसा मैं यू.एन. के आँकड़ों के अनुसार कह रहा हूँ। इस प्रकार की नीतियाँ हमारे देश के अन्दर आने वाले समय में बनेंगी।
माननीय सभापति:कृपया, अब आप समाप्त कीजिए।
श्री रत्न लाल कटारिया: महोदय, मैं अपने स्टेट हरियाणा का एक छोटा सा जिक्र करके अपनी बात समाप्त करता हूँ। मैं अम्बाला लोक सभा से चुनकर आता हूँ। मेरे लोक सभा क्षेत्र में हिन्दुस्तान का सबसे ज्यादा साइन्टिफिक काम होता है। वहाँ पर माइक्रोस्कोप बनते हैं। किस प्रकार की कारीगरी वहाँ पर होती है, एक सुराख करना पड़ता है। मिक्सी का उद्योग हमारे लोक सभा क्षेत्र के अन्दर है। उसकी ओर भी हम ध्यान देने की कोशिश कर रहे हैं। इसी तरह से गुड़गाँव जो है, दुनिया के अन्दर आई.टी. हब के रूप में वह तीसरे स्थान पर आ गया है। हमारी कोशिश है कि आदरणीय नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में हम स्किल डेवलपमेंट के काम को बहुत आगे लेकर जाएंगे।
श्री दीपेन्द्र सिंह हुड्डा (रोहतक) : गुड़गाँव नहीं गुरूग्राम नाम हो गया है।
श्री रत्न लाल कटारिया: गुरूग्राम कह लो, गुड़गाँव कह लो, एक ही बात है।
माननीय सभापति : हुड्डा जी, आप बैठिए।
श्री रत्न लाल कटारिया: अंत में एक शेर के साथ मैं अपनी बात समाप्त करना चाहूँगा।
"यूँ ही नहीं गिरते फूल झोली में, मन की मुरादें पूरी करने के लिए टहनी को हिलाना पड़ता है।"
आज हम सब एनडीए के लोग दिन-रात मेहनत करके भारत को अमेरिका और चाइना से भी शक्तिशाली राष्ट्र बनाने के अन्दर लगे हुए हैं। सामने वालों ने तो हर एक क्षेत्र के अन्दर गलत काम कर दिया था। बहुत-बहुत धन्यवाद।
*SHRI B. N. CHANDRAPPA (CHITRADURGA): The National Policy for Skill Development and Entrepreneurship was formulated in 2015. The primary objective of this policy is to meet the challenge of skilling at scale with speed, standard (quality) and sustainability. It aims to provide an umbrella framework to all skilling activities being carried out within the country, to align them to common standards and link skilling with demand centres. In addition to laying down the objectives and expected outcomes, the policy also identifies the overall institutional framework which will act as a vehicle to reach the expected outcomes. Skill development is the shared responsibility of the key stakeholders viz. Government, the entire spectrum of corporate sector, community based organizations, those outstanding, highly qualified and dedicated individuals who have been working in the skilling and entrepreneurship space for many years, industry and trade organizations and other stakeholders. The policy links skills development to improved employability and productivity in paving the way forward for inclusive growth in the country. The skill strategy is complemented by specific efforts to promote entrepreneurship in order to create ample opportunities for the skilled workforce.
Even though this policy initiative is a novel idea. yet the work done on the ground is very minimal. This NDA Government has almost completed two years in office. But the ground reality is that it has just been talking, talking and talking. There has not been any perceptible change on the ground that is visible about any development in any area of activity.
Indian economy is growing and simultaneously the demand for skilled manpower is also increasing. However the country is facing the shortage of skilled manpower. As we are aware, globalization has brought the world much closer to one another. As a result, people desire to have services and amenities on par with global standards. Keeping this is view, the efforts must be made to ensure that necessary measures are taken to impart skill training to our youth on par with global standards. The need of the hour is to increase the capacity and capability of the existing system to ensure equitable access to all. As far as training for youth in rural areas is concerned, the Government should make provision to provide appropriate infrastructure to start with, at the district level in the country. For this, the Government should take steps to prepare uniform course material, training modules, etc. and provide skill training on all India basis. The course could be of varying periods.
Now the question would come as to who would impart training to the youth. In this connection, I would suggest that skill training and the training about the entrepreneurship should be imparted under the aegis of the Directorate General of Employment and Training. We should also involve all the universities in the country to impart such training. I would also suggest that normally in India, we find the dropout rate especially after the school level. If we introduce vocational level subject at the graduation level, this would encourage students to pursue their studies in the colleges. This would definitely provide them greater opportunities to choose their career in a better way.
I represent Chitradurga Parliamentary Constituency in Karnataka. The present state of affairs is such that students after passing out from schools move to Bengaluru in search of employment or livelihood. I think, the same may be the position in other States also. The first and foremost thing we must do in this regard is to start such skill development courses in each district of the country. This would stop the exodus of youths to the capital of the respective States. Secondly, we must also ensure to set up industries or factories of the multinational corporations at the district level. This would create not only employment opportunities but it would also help in evenly development of the country. In my constituency, land is available in plenty. But, it has not been developed as the other neighbouring districts. My district is having the maximum population of STs and SCs. As a first step, the Government should take up such districts in the first phase which are considered as the reserved constituencies. The Government should implement the skill development initiatives in such districts in the first place. I would sincerely urge upon the Government to consider my request for the overall development of my district.
श्री ए.पी. जितेन्द्र रेड्डी (महबूबनगर): महोदय, मैं यह बोलना चाह रहा हूँ कि आज हमारे देश में 15 वर्ष से लेकर 59 वर्ष की आयु तक के 62 परसेंट लोग हैं। आज इन सबके जीवन आधार की चर्चा हो रही है। मुझे यह समझ नहीं आ रहा है कि क्यों इसको इतनी जल्दी-जल्दी आगे करते जा रहे हैं, क्यों क्लोज करते जा रहे हैं। आप तो 6 बजे हाउस बन्द करने वाले नहीं हैं। आप हाउस का समय आगे बढ़ाने के लिए पूछेंगे। जब इतने लोगों के जीवन का सवाल है तो थोड़ा लोगों को बात करने का टाइम दीजिए। स्किल डेवलपमेंट के ऊपर हमें अपने व्यूज रखने देना चाहिए।
माननीय सभापति : टाइम मैंने अलॉट नहीं किया है, टाइम कहीं ओर से अलॉट होता है।
18.00 hours SHRI A.P. JITHENDER REDDY : Thank you for giving me the opportunity to speak on the Demands for Grants with respect to the Ministry of Skill Development & Entrepreneurship for the year 2016-17.
HON. CHAIRPERSON: Just a minute please.
The time of the House may be extended till the Demands for Grants are passed. I think everybody agrees.
SEVERAL HON. MEMBERS: Agreed.
SHRI A.P. JITHENDER REDDY: It is very good. सभापति जी, बहुत अच्छा कि आपने हाउस का समय बढ़ाया है। आप हमें मौका दीजिए अपनी बात अच्छी तरह से रखने का और बीच में आप मुझे मत रोकिएगा। ...(व्यवधान)
Skill development has been identified by the Government as a priority area with a training goal of one crore youth over the next three years.
I thank this Government for launching a flagship scheme, the Pradhan Mantri Kaushal Vikas Yojana on 15th July, 2015 and for taking steps to increase its allocation for this year to Rs.1,770.83 crore from the Revised Estimates for the year 2015-16 of Rs.916.56 crore.
The Pradhan Mantri Kaushal Vikas Yojana is a core part of ‘Skill India Mission’ to create an ecosystem of skilled youth, which includes vocational training.
However, I must add that while there has been a clear investment in skilling and training of our youth, the focus of the Government and this Ministry has been unfortunately short-sighted.
Our training institutes are quite dysfunctional and not modern enough to address the demands of the market. Industrial Training Institutes play a key role in transforming the performance of Skill India, and it needs to be upgraded and synchronised with modern times.
In response to a Starred Question in the Lok Sabha on 3rd March, 2016, it was stated that 14.69 lakh candidates have been enrolled for vocational training under different sectors in 10,666 training centres spread across the country with coverage of 606 districts as of February, 2016. However, such training does not guarantee employment.
It has been seen that those people who are trained and certified in one particular job role ultimately end up being placed in a totally different job. मैं आपको बताना चाहता हूँ कि स्किल डैवलपमैंट की जो ट्रेनिंग हो रही है, उसका आउटकम आना चाहिए और जिस ट्रेड में वह ट्रेन होता है, उस ट्रेड में उसे नौकरी मिलनी चाहिए।
It should be an outcome skill training. The quality and focus of training carries more significance than the number of centres opened.
We need to upgrade our curriculum and have some sort of pre-assessment before training to identify the suitability of candidates for specific jobs, improve industry linkages, and identify training partners with job linkages. This is essential.
The Ministry of Skill Development and the Ministry of Labour and Employment should cooperate and work alongside with the State Governments in preparing a relevant curriculum as soon as possible.
I would also request the Government to consider enhancing the monetary rewards disbursed to those candidates provided with skill development training and also require employers in public and private sector institutions to demand a skill development certificate from their employees.
In Singapore, their technical education provides a 2-3 year career and technical education, including modern skills such as engineering design and manufacturing, IT, multimedia, aerospace and marine technology, mechatronics, business and event management, accounting, human resources, etc. We must also be so ambitious.
I would like to make a final point. Even though it does not fall directly under this Ministry, it clearly affects the intended objectives and outcomes of Skill India.
We have designated skill development of our youth as a priority area. But we need to really reconcile with the fact that our youth in the productive range are losing their lives in road accidents every single year. In 2014 alone, the age group between 25 and 34 years was the most vulnerable to road accident deaths, as per information available with the Ministry of Road Transport and Highways. 53.8 per cent, that is, 75,048 people between 15 to 34 years of age were the victims of road accidents. While we continue this ambitious plan of skill India, the young people of our country are being killed. Premature death and life long disability of our youth causes a substantial loss of productivity in our economy. मैं एक ही चीज़ बताना चाहता हूं कि स्किल डैवलपमेंट जो प्रोग्राम है, it has become a passion for people. कहां-कहां से उठकर आज देश के अन्दर स्किल डैवलपमेंट इंस्टीटय़ूशंस बाहर आ रहे हैं, कौन क्या कर रहा है, कौन मेनटेन कर रहा है, मंत्री जी को मैं बोलना चाहता हूं कि इसके ऊपर थोड़ी श्रद्धा रखिये, क्योंकि यह पर जो इंस्टीटय़ूशंस के अन्दर रोंग मस्टर रोल्स बनाये जा रहे हैं और रौंग मस्टर रोल के अन्दर लोगों को खाली उसके अन्दर लगाकर आठ से दस हजार रुपये जो दे रहे हैं...(व्यवधान)
माननीय सभापति : अब आप समाप्त करिये।
श्री ए.पी. जितेन्द्र रेड्डी:वे इसके ऊपर मिलें तो मैं आपको यह बताना चाहता हूं कि जो प्रधानमंत्री जी विदेश गये थे, उन्होंने सात महत्वपूर्ण स्किल डैवलपमेंट के इंस्टीटय़ूशंस को उन्होंने आइडेंटीफाई किया था और उनके साथ एग्रीमेंट किया था। उनमें से एक आस्ट्रेलियन कम्पनी तेलंगाना के अन्दर आकर तेलंगाना गवर्नमेंट के साथ में, के.सी.आर. के साथ में उन लोगों ने एग्रीमेंट किया है और उस एग्रीमेंट के साथ में, फर्स्ट पार्टनरशिप के साथ में उनको किया है। आज परिस्थिति यह है कि कम्पनियां स्किल्ड लोग चाहती हैं, लेकिन ये जो सर्टीफिकेट्स दे रहे हैं, मैं मंत्री जी से बोलना चाहता हूं, क्योंकि मंत्री जी खुद एक स्किल्ड आदमी हैं, वे एक पायलट हैं तो उन्होंने भी स्किल लिया है। आज हर चीज़ के लिए स्किल चाहिए, मैं यह बता रहा हूं कि जिस तरीके से हमारे मित्र ने बताया था कि बारबर के लिए भी स्किल सर्टीफिकेट चाहिए, गार्डनर के लिए भी चाहिए, इस तरीके से इसको मेंडेटरी करिये कि कोई भी प्राइवेट इंस्टीटय़ूशन या पब्लिक इंस्टीटय़ूशन जब एक आदमी को एम्पलाय करती है तो वे यह देखें कि they should have a skill development certificate. खाली अपने पोलिटीशियन के लिए नहीं चाहिए, because our skill does not require a skill development training. इसको खाली बाहर रखते हुए, बाकी सब जगह, जहां-जहां स्किल चाहिए, उन लोगों को मेंडेटरी करके जब काम करते हैं तो इससे देश का विकास होगा और मेक इन इंडिया सामने आयेगा। धन्यवाद।
श्री अभिषेक सिंह (राजनंदगांव) : सभापति महोदय, आपने इस महत्वपूर्ण चर्चा पर मुझे भाग लेने का अवसर दिया। सदन में काफी देर से चर्चा चल रही थी और सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों के माननीय सदस्यों ने अपना अभिमत रखा है। मैं उन सभी विषयों पर न जाते हुए सिर्फ तीन उदाहरणों के माध्यम से आपके सामने, सदन के सामने रखना चाहूंगा।
कहते हैं कि भारत की कुल वर्क फोर्स का 93 प्रतिशत हिस्सा अनआर्गेनाइज्ड सैक्टर में काम करता है। ये कौन लोग हैं। ये वे लोग हैं, जिन्हें शायद परिवार की आर्थिक परिस्थितियों के चलते अपनी पढ़ाई बीच में छोड़कर अनआर्गेनाइज्ड सैक्टर में अपने परिवार की जिम्मेदारियों को संभालने के लिए काम करने के लिए जाना पड़ा है। ऐसा ही एक उदाहरण मैं आपके सामने रखना चाहता हूं। कक्षा दस की पढ़ाई के बाद जब एक गरीब परिवार में पिता की मृत्यु हो जाती है तो उस बच्चे को मकैनिक की एक छोटी-मोटी नौकरी असिस्टेंट के रूप में करनी पड़ती है, लेकिन लगातार पिछले दस सालों से अपनी लगन और मेहनत के बल पर काम करते-करते आज अनआर्गेनाइज्ड सैक्टर में वह काम करने वाला व्यक्ति इस स्तर पर पहुंच गया है कि उसकी स्किल न सिर्फ एक मकैनिक की है, बल्कि मकैनिक के ट्रेनर की है। मैं बधाई देना चाहता हूं और धन्यवाद देना चाहता हूं, भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी को और आदरणीय मंत्री श्री राजीव प्रताप रूडी जी का, जिन्होंने प्रोधानमंत्री कौशल विकास योजना के माध्यम से अनआर्गेनाइज्ड सैक्टर के काम करने वाले लोगों की स्किल को रीकग्नाइज़ करने का प्रयास किया है, जो शायद परम्परागत तरीके से या अपने अनुभव के आधार पर, अपने परिवार की परिस्थितियों को सपोर्ट कर रहे हैं और आने वाले समय में वह लड़का मुद्रा लोन के माध्यम से आगे बढ़कर एक मास्टर ट्रेनर के नाम पर अपने आपको स्थापित करना चाहता है और आने वाले समय सैंकड़ों ऐसे मकैनिकों को ट्रेनिंग देने की क्षमता रखता है। मैं सरकार को बधाई देना चाहता हूं, मंत्री जी को बधाई देना चाहता हूं और ऐसी सोच में हमारे प्रधानमंत्री जी को बधाई देना चाहता हूं।
एक दूसरी कहानी, जो ग्रामीण परिस्थिति से आती है। ग्रामीण परिस्थिति में रहने वाला किसान का बेटा, जो किसी कारणवश नौकरी की तलाश में शहर नहीं जा सकता, उसके माता-पिता का स्वास्थ्य ऐसा नहीं है, जो उसको अनुमति दे कि वह शहर में जाकर नौकरी कर सके। ऐसे नौजवानों को छांटकर दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना के माध्यम से जब हम उनको उनके ही परिदृश्य में, उनके ही कांटैक्स्ट में हम सिक्ल करने का प्रयास करते हैं और मैं दूर न जाकर अपने लोक सभा क्षेत्र से बताना चाहूंगा।
हमारे क्षेत्र में गन्ने की बहुत बड़ी खेती होती है। आज से ही नहीं, प्रारम्भ काल से वर्षों से गुड़ के क्षेत्र में वहां काफी काम होता है। ऐसा ही एक लड़का जो गुड़ में जैगरी निर्माण, गुड़ बनाने की एक ट्रेनिंग लेकर आज न सिर्फ खुद काम कर रहा है, अपने गांव में काम कर रहा है, बल्कि अपने साथ एक एसएचजी के माध्यम से दस युवाओं को जोड़कर उनको भी नौकरी दे रहा है, उनको भी आर्थिक रूप से संबल करने का प्रयास कर रहा है। मैं इसलिए भी आदरणीय मंत्री जी को बधाई देना चाहता हूं कि ग्रामीण परिदृश्य में, शहरी परिदृश्य में जो हम महत्वपूर्ण बदलाव देख रहे हैं, कहीं न कहीं यह स्किल डेवलपमेंट मिनिस्ट्री और प्रधानमंत्री जी की सोच का परिणाम है।
माननीय महोदय, जिस प्रदेश से मैं आता हूं उसके बारे में आपको जानकारी देना चाहता हूं। पूरे देश में यह पहला प्रदेश था छत्तीसगढ़ जिसने कौशल विकास को कानूनी अधिकार का नाम दिया है। छत्तीसगढ़ में हर वह युवा जो कौशल के क्षेत्र में अपना चुनिंदा कौशल प्राप्त करना चाहता है, उसको कानूनी अधिकार है कि नब्बे दिन के अंदर राज्य सरकार उसके चुने हुए क्षेत्र में कौशल की ट्रेनिंग देने का कार्य शुरू कराएगी।
महोदय, मुझे मालूम है कि समय की कमी है, इसलिए कुछ निश्चित सुझाव मैं आपके सामने रखना चाहता हूं। ऐसा नहीं है कि भारत में स्किल या हुनर की कमी रही है। आदिकाल से भारत में अजन्ता ऐलारा की गुफायें हों या फिर हमारे ढाका का मलमल, कटक की चांदी के जेवर का निर्माण या उत्तर-पूर्वी राज्यों में बांसों के ऊपर जो कलाकृतियां आती है, छत्तीसगढ़ का डोकरा आर्ट, कृषि बनाने की कला ऐसी महत्वपूर्ण कला, ऐसा महत्वपूर्ण हुनर हमारे साथ था, लेकिन दुर्भाग्य यह है कि स्वतंत्रता के बाद से हुनर को, कौशल को शिक्षा की मुख्य धारा से अलग कर दिया गया। कौशल या हुनर एक ऐसी शिक्षा बन गई जो दोयम दर्जे की शिक्षा के अंदर आने लगी। मुझे उम्मीद है कि आने वाले समय में न सिर्फ स्कूल शिक्षा के साथ, बल्कि उच्च शिक्षा के साथ भी हम वोकेशनल एजुकेशन को, स्किल एजुकेशन को इंटीग्रेट करके आने वाले समय में जो भारत के करोड़ों युवा हैं, जो हर साल नौकरी की चाहत में वर्क फोर्स में शामिल होते हैं उनके लिए एक अच्छे भविष्य का निर्माण करेंगे। इस देश का भविष्य जो इन करोड़ों युवाओं के कंधों पर टिका हुआ है, उनके हुनर को पहचानने की, हुनर को तराशने की और उस हुनर को अवसर प्रदान करने की जरूरत है। अंत में दो पंक्तियों के माध्यम से मैं अपनी बात खत्म करना चाहता हूं।
" अंधेरा घना था, जरूर छंटेगा, एक दीया जरा जलाकर तो देखो, बढ़ रहा है भारत, जरूर बढ़ेगा, हाथों का हुनर आजमाकर तो देखो। "
*श्री चन्द्र प्रकाश जोशी (चित्तौड़गढ़)ःदेश में स्किल डेवलपमेंट मिनिस्ट्री का गठन जब से हुआ है देश प्रगति के पथ पर अग्रसर है। इस समय देश में स्किल डेवलपमेंट की जरूरत है। स्किल मैनपावर की जरूरत है। इसको पूरा करने करने के लिए ही स्किल डेवलपमेंट मिनिस्ट्री का गठन किया गया है और मैं समझता हॅं कि मंत्री जी इस कार्य को बखूबी निभा रहे हैं। इस समय देश की 60 प्रतिशत जनता युवा है और युवाओं को कौशल प्रशिक्षित करने के लिए इस समय बहुत सी संस्थाएंì कार्यरत हैं जिसमें मुख्य भूमिका में नेशनल डेवलपमेंट कारपोरेशन (एन.सी.डी.सी.), नेशनल स्किल डेवलपमेंट फण्ड (एन.एस.डी.एफ.), नेशनल स्किल डेवलपमेंट एजेंसी (एन.एस.डी.ए.) तथा 33 सेक्टर स्किल कौंसिल (एस.एस.सी.) के द्वारा पूरे देश में युवाओं को कौशल विकास दिए जाने का जिम्मा दिया है, जिससे उन सभी संस्थाओं ने इस साल 2014-15 में लगभग 58,72,800 लोगों को प्रशिक्षण दिया गया है। इसी प्रकार सभी मंत्रालयों के द्वारा कौशल विकास के कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं, जिसमें वोकेशनल ट्रेनिंग सेंटर, प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के अंतर्गत प्रशिक्षित होने के उपरांत सफलतापूर्वक प्रशिक्षित होने का सर्टिफिकेट दिया जायेगा जो कि पूरे विश्व में मान्यता प्राप्त होगा। इसके लिए 1500 करोड़ रूपए स्वीकृत किये गये हैं। सरकार ने इसके द्वारा 24 लाख लोगों को प्रशिक्षण देने का लक्ष्य रखा है। एन.एस.डी.सी. बोर्ड ने इसके लिए 203 स्किल प्रोवाइड करने वाली कंपनियों का चयन किया है। इन एजेंसियों के द्वारा 2500 करोड़ रूपए इन्वेस्ट करने की संभावना है। इस समय एन.एस.डी.सी. लगभग 471 डिस्ट्रिक्ट में काम कर रही है और पिछले साल 24 लाख 12 हज़ार 862 लोगों को प्रशिक्षण दिया गया है। सभी मंत्रालय इसमें सहयोग कर रहे हैं। एच.आर.डी. मंत्रालय के द्वारा नेशनल वोकेशनल एजुकेशन क्वालिफिकेशन (एन.सी.वी.टी.), इसी प्रकार लेबर मंत्रालय के द्वारा एन.एस.क्यू.एफ., मल्टी स्किल इंस्टीटय़ूट पी.पी.पी. मोड के द्वारा किया जा रहा है। हमारी सरकार में हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री मोदी जी के सपनों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध सभी देशवासी कौशल प्रशिक्षित हो, इस परिकल्पना को पूरा करने के लिए स्किल युनिवर्सिटी का गठन किया है। इस युनिवर्सिटी के द्वारा स्किल से रिलेटेड प्रेमवर्क तैयार किए जाएंगे और नेशनल पॉलिसी फॉर स्किल डेवलपमेंट 2015 बन रही है। इतना ही नहीं, मंत्रालय द्वारा विश्व स्तरीय प्रशिक्षण के उपरांत देश में ही नहीं विदेशों में भी इसका महत्व रहेगा। इसके लिए भी अनेक देशों केसाथ बातचीत और सहयोग जारी है, सभी को कौशल प्रशिक्षित कर सभी को रोज़गार उपलब्ध कराना ही माननीय प्रधानमंत्री जी का सपना है, जिसे हम सब मिलकर पूरा करेंगे।
*श्री सुधीर गुप्ता (मंदसौर) ः भारत पुरातन काल में स्किल भारत ही था हमने सारे विश्व से व्यापार किया हमारे कारीगर विश्वस्तर की कौशलता का ज्ञान रखते थे गांव-गांव कुटी उद्योगों के विशाल केन्द्र थे भारत अपने स्वयं के निर्मित जहाजों से समुद्री व्यापार करते थे देश में व्यापार उद्योग, कृिा सभी उच्च स्तर की थी इसी सक्षमता व सम्पन्नता के कारण देश से शान्ति का संदेश सारे विश्व की ओर गया "बसुधैव कुटुम्बकम" का नारा हमने सारे विश्व को दिया देश में एक आत्मविश्वास यह थी कि नदियों जैसी सभ्यता कहावतों में थी " जहां डाल-डाल पर सोने की चिड़िया करती है बसेरा वो भारत देश है मेरा "जैसे भाव हमारे मनो में था व दुनिया की निगाहों में थे मगर गुलामी के लंबे दौर व आजादी के बाद के कांग्रेसीकरण ने देश को अनस्किल बना दिया आज प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना ने पुनः विश्वास जागृत किया है और लाखों लोग इस कौशल विकास योजना से जुड़े हैं मैं इसका समर्थन करता हूं व एक सुझाव देना चाहता हूं कि प्रशिक्षण के साथ जनता को, युवाओं को एक जानकारी देने की व्यवस्था बनाने की भारत की समस्त राज्यों सहित दुनिया के 200 से अधिक राष्ट्रों में कोने-कोने से कौशल की आवश्यकता है यह जानकारी देश में उपलब्ध करायें मंत्रालय की साईट पर जानकारी उपलब्ध करावें ताकि देश में व्यक्ति कोशल स्किल होते ही रोजगार के अवसरों के निकट अपने को खड़ा पायेगा व अगर कुटीर उद्योगों में भी गया तो चीन जेसे प्रतिस्पर्द्धा वाले देशों से संघर्ष करते हुए भारत के व्यापार व निर्माण क्षेत्र का विस्तार देगा।
श्री विनायक भाऊराव राऊत (रत्नागिरी-सिंधुदुर्ग) : सभापति महोदय, मैं आपको धन्यवाद देता हूं। जब मैं इस विषय पर बात करूंगा तो आंकड़ों मे नहीं जाऊंगा। इसके जो परिणाम हैं, परिणाम के बारे में इस सभागृह में बात होनी चाहिए और कई वक्ता इस बारे में बात कह चुके हैं। दुर्भाग्य से बेरोजगारी अपने देश की एक समस्या बन चुकी है। सौभाग्य से इस सरकार ने बेरोजगारी की समस्या से दूर न भागते हुए, इसके ऊपर असलियत से हल निकालना और सफलता प्राप्त करने की कोशिश प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के माध्यम से की है। इसीलिए इस देश के पंथ प्रधान नरेन्द्र मोदी जी और इस डिपार्टमेंट के मंत्री माननीय राजीव प्रताप रूडी जी का मैं अभिनन्दन करता हूं।
महोदय, इसके पहले भी वैसी कोशिश हो चुकी थी। इस देश की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा जी ने 20 प्वाइंट प्रोग्राम में गरीबी हटाओ का नारा दिया था और बेरोजगारी का कुछ इलाज ढूंढने की कोशिश की थी, लेकिन दुर्भाग्य से वे सफल नहीं हुईं। आज प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना की एक विशेषता है कि सिर्फ कुछ डिग्री देना, सर्टिफिकेट देना और बाजार में फेंक देना, इतना ही काम कौशल विकास योजना के अंतर्गत नहीं है। परिसर में जो उपलब्धियां हैं, उसके ऊपर पूरी जानकारी लेकर, उसके ऊपर युवा और युवती को जानकारी देना और उसको प्रशिक्षित करना और उसके माध्यम से उसके भविष्य के लिए एक अच्छा रास्ता उपलब्ध कराना, यह काम प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के माध्यम से हो रहा है।
महोदय, पिछले कई वर्षों में कालेजेज हुए, कई यूनिवर्सिटीज हुईं, कई लाखों की संख्या में ग्रेजुएट हुए, डबल ग्रेजुएट हुए, लेकिन भविष्य में उनके पास रोजगार के लिए कुछ दिशा नहीं थी।
ऐसे वक्त में प्रधानमंत्री जी की कल्पना से कौशल विकास योजना का जन्म हुआ, उसके माध्यम से लाखों बेरोजगार लोगों को एक सुनहरे भविष्य का निर्माण करने का मौका मिला हैं।
सभापति महोदय, सौभाग्य से मेरे मतदाता क्षेत्र में कौशल विकास योजना का अमल शुरू हुआ। ...(व्यवधान) मैं आपसे यही विनती करूंगा कि इस योजना के सफलता के लिए माननीय मंत्री महोदय को हर एक जिले में अच्छा कॉर्डिनेटर नियुक्त करने की कोशिश करें और हम सांसद उसकी सफलता में कैसे सहभागी हो सकते हैं, इस ओर भी ध्यान दें।
जो महिला ’बजत गट’ काम करते हैं, कई पुरुष भी ’बजत गट’ में काम करते हैं, जो इंटरेस्टेड महिला ’बजत गट’ में काम करने वाली हैं, उन्हें भी इस योजना के अंदर समाविष्ट करें और उन्हें अच्छा जीवन जीने में मदद करें। धन्यवाद।
माननीय सभापति : श्री गोपाल शेट्टी, कृपया आप अपनी बात दो मिनट में समाप्त करें।
श्री गोपाल शेट्टी (मुम्बई उत्तर) : सभापति महोदय, मैं प्रधानमंत्री जी को धन्यवाद देना चाहूंगा कि सही समय पर उन्होंने देश की परिस्थिति और युवाओं की समस्याओं को जाना। रूड़ी जी इसके लिए बहुत मेहनत कर रहे हैं, वे अभिनंदन के पात्र हैं।
मैं डायरैक्ट कौशल विकास की बात करना चाहता हूं। मैं तो कौशल विकास से यहां तक पहुंचा हूं। मैं बचपन से टर्नर, फीटर, वेल्डर, मिल्लर, सभी तरह के काम सिख कर, मैं अपना स्वयं का व्यवसाय करके यहां तक पहुंचा हूं। आप मुझे समय के अभाव के कारण ज्यादा बोलने की अनुमति नहीं देंगे, इसलिए मैं कहना चाहता हूं कि केन्द्र से जो पैसा जाता है, वह राज्य सरकार के कर्मचारियों को पगार देने में जाता है। रूड़ी साहब अपने भाषण में बतायेंगे क्योंकि उन्होंने पहले साल में ही उसकी खामियों को खोज कर निकाला है। जो ट्रेनिंग इंस्टिच्यूट वाले वह चलाते हैं, वह भी सरकार का पैसा लेते हैं और बच्चों से भी पैसा लेते हैं। वह सभी जिलों में एक नया कौशल विकास केन्द्र खोलने की योजना बनायी है और उसके चेयरमैन एमपी को बनाने वाले हैं, इस कार्य को जल्दी से गति दें, मैं यह मांग करना चाहूंगा। खासकर, मैं चाहूंगा कि इसे सारे शैक्षणिक संस्थानों से इसे जोड़ें ताकि सरकार कम पैसा खर्चा करके हुए, ज्यादा से ज्यादा बच्चों को स्किल सिखा पायेगी।
मैं आपके ध्यान में एक बहुत महत्वपूर्ण बात लाना चाहता हूं। इन दिनों जो परंपरागत स्किल है, वह कोई सिखना नहीं चाहता है, कारपेंटर्स के बच्चे कारेपेंटर्स नहीं बनते हैं, टेलर्स के बच्चे टेलर नहीं बनते हैं, पलम्बर्स के बच्चे पलम्बर्स नहीं बनते हैं, क्योंकि समाज उन्हें ताना देता है कि तुम भी यही काम करोगे और बच्चों को भी क्या यही काम सिखाओगे? सारे लोग शिक्षा की तरफ बढ़े हैं। भगवान करे! सबको नौकरी मिले, लेकिन मुझे नहीं लगता है कि इतने बड़े पैमाने पर लोगों को नौकरी मिलेगी। इसलिए सेकण्ड ऑप्शन के बारे में हमें बहुत ज्यादा ध्यान देना पड़ेगा। सरकार को इसमें बहुत तेजी से काम करना पड़ेगा। स्किल इंडिया के माध्यम से लोग मेक इंडिया की तरफ जायेंगे।
मैं एक अंतिम बात बताना चाहूंगा कि कल मैंने ... *की बात बताई, लोग काम करना चाहते हैं।...(व्यवधान) रूड़ी साहब आपने जो एविएशन डिपार्टमेंट के डायरैक्टर को फोन किया था, शायद उनका नाम ... * है। उन्होंने इस प्रकार का कमेंट ...* के पिता को किया कि आप मंत्री के पास से फोन करवाते हो, मंत्री कितने दिन रहेंगे?...(व्यवधान)
माननीय सभापति : आपने जो नाम लिया है, वह रिकॉर्ड में नहीं जायेगा।
…( व्यवधान)
श्री गोपाल शेट्टी: हम तो तीस-तीस साल से यहां पर बैठै हैं।...(व्यवधान) इस प्रकार की बात करेंगे तो ’मेक इन इंडिया’ के माध्यम से जो लोग काम करना चाहते हैं, उनको मौका नहीं मिलेगा।...(व्यवधान) मैं आपके माध्यम से मंत्री जी से कहना चाहता हूं कि इसमें बहुत मेहनत करना पड़ेगा।
माननीय सभापति : श्री भैरों प्रसाद मिश्र जी आप भी सुझाव देकर अपनी बात को दो मिनट में समाप्त करेंगे।...(व्यवधान)
श्री भैरों प्रसाद मिश्र (बांदा) : सभापति महोदय, मैं अपनी बात को पांच मिनट में समाप्त करूंगा। मैं सदन में प्रस्तुत कौशल विकास एवं उद्यमशीलता मंत्रालय द्वारा प्रस्तुत अनुदान की मांगों का समर्थन करता हूं। भारत की लगभग 55 प्रतिशत आबादी 25 वर्ष से कम आयु वर्ग की है। इसमें करीब 62 प्रतिशत काम-काजी समूह से है। इसमें केवल चार प्रतिशत ही कौशल विकास प्रशिक्षण प्राप्त हैं, जब कि ब्रिटेन में 68 प्रतिशत, अमेरिका में 52 लोग प्रशिक्षण प्राप्त हैं। दक्षिण कोरिया इस मामले में शीर्ष पर है, जहां 95 प्रतिशत लोग प्रशिक्षित हैं। इसी के बल पर वह विश्व में भारी उद्योग का हब बन चुका है। हमारी सरकार आते ही इस पर विशेष ध्यान देने का काम किया है। नवम्बर 2014 में कौशल विकास एवं उद्यमशीलता मंत्रालय का गठन किया गया। जुलाई, 2015 कौशल विकास नीत की घोषण की गयी, नयी राष्ट्रीय कौशल विकास की मंजूरी दी गयी। 24 लाख युवाओं को प्रशिक्षण देने का लक्ष्य निर्धारित किया गया, जिसमें 14 लाख नये लोगों को और 10 लाख आरपीएल के तहत प्रशिक्षित करने का संकल्प लिया गया है। एक वर्ष में साढ़े बारह लाख लोगों का पंजीकरण किया जा चुका है।
मैं माननीय मंत्री जी का ध्यान उत्तर प्रदेश की ओर दिलाना चाहता हूं। अभी एक माननीय सदस्य जो उत्तर प्रदेश के मुख्य मंत्री जी के परिवार से हैं, वे बोल रहे थे। उत्तर प्रदेश में बेरोजगारी की समस्या का एक उदाहरण ही काफी है कि वहां चपरासी के 268 पदों के लिए 23 लाख लोगों ने आवेदन किया था। उसमें से 255 लोग पोस्ट ग्रेजुएट डिग्री धारक थे। ये उत्तर प्रदेश के विकास की बात करते हैं।
मंत्री जी, मैं आपका ध्यान विशेष तौर से बुंदेलखंड की ओर दिलाना चाहता हूं। बुंदेलखंड में बेरोजगारी सबसे ज्यादा है। वहां विशेष तौर से ऐसे प्रशिक्षण केन्द्र खोलने की जरूरत है। भारत में हर वर्ष एक करोड़ 25 लाख लोग शिक्षित होते हैं जिनमें से केवल 37 प्रतिशत लोगों को ही रोजगार मिल पाता है। एक इंजीनियर 8-10 हजार रुपये में काम कर रहा है।...(व्यवधान) इसलिए माननीय प्रधान मंत्री जी ने आईआईटी की जगह आईटीआई को विशेष महत्व देने का ऐलान किया है। इसके लिए स्किल इंडिया अभियान व्यापक रूप से चलाने का निर्णय लिया गया है। मेरा मंत्री जी को सुझाव है कि जिन प्रशिक्षण देने वाली एजैंसियों को इस पर लगाया गया है, उनकी व्यापक निगरानी की जरूरत है जिससे वे फर्जी आंकड़े न दें। ...(व्यवधान) जिला स्तर पर ऐसा देखने में आ रहा है। ऐसे सेंटर तेजी से खुलें और उनमें जनप्रतिनिधियों विशेष तौर से सांसदों की भूमिका निश्चित की जाए। उनके प्रमाण पत्र के बाद ही प्रशिक्षण की संख्या सही मानी जाए। इसी के साथ मैं अनुदान की मांगों का समर्थन करता हूं। धन्यवाद।
श्री अश्विनी कुमार चौबे (बक्सर) : सभापति महोदय, मैं माननीय प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी को, जिन्होंने खासकर कौशल विकास के मामले में मंत्रालय का गठन करके युवा मंत्री के कंधों पर भार दिया है, बधाई देता हूं। देश में कौशल विकास का काम बढ़ रहा है। मेरे इस मुद्दे पर कुछ महत्वपूर्ण सुझाव हैं। आज बहुत मेहनत हो रही है, दो वर्षों में कौशल विकास के काम बढ़े हैं। यह बहुत अच्छा है। लेकिन मुझे क्षेत्र में भ्रमण के दौरान जो प्रैक्टिकल अनुभव हुआ है, मैं आपके साथ उस अनुभव को शेयर करना चाहता हूं।
आज प्रत्येक व्यक्ति से असिस्टैंस फीस ली जाती है। बच्चे एसएससी परीक्षा में पास होंगे या फेल होंगे, उनके लिए 1200 रुपये रजिस्ट्रेशन फीस ली जाती है। उसे किसी भी हालत में निशुल्क किया जाए। गांवों में गरीब लोग 1200 रुपये नहीं दे सकते। 1200 रुपये देकर बहुत कम लोग पढ़ने जाते हैं। यही कारण है कि आपकी उम्मीद से बहुत कम काम हो रहा है। मैं चाहूंगा कि चूंकि वे कम स्किल के लोग हैं, बहुत कम पढ़े-लिखे हैं, इसलिए उन्हें कौशल विकास की शिक्षा मुफ्त दी जानी चाहिए। अगर निशुल्क हो तो अच्छा है अन्यथा आप नॉमिनल फीस एक सौ रुपये रख दीजिए।
आपने विशेषकर नौकरी की बात कही है। आप लड़कों को रोजगार परक शिक्षा दे रहे हैं, कौशल विकास युक्त कर रहे हैं। मेरा आग्रह है कि सरकारी संस्थान या निजी संस्थानों में उनके रोजगार सृजन की जो व्यवस्था हो सकती है, उसके लिए उनके कौशल के आधार पर एक रजिस्ट्रेशन की सूची बनाई जाए। उसी आधार पर उन संस्थानों में उनकी नियुक्ति की जाए। इसके लिए जिला प्रशासन का सहयोग भी लें।
ट्रेनिंग पार्टनर और ट्रेनिंग सैंटर के बीच कोई सेतु नहीं है। आप किसी को भी दूसरे राज्यों में भेज देते हैं। उन्हें कोई अनुभव नहीं होता। जिस प्रकार स्किल होनी चाहिए, उसकी मौनीटरिंग ठीक से नहीं हो पाती। मेरा आग्रह है कि स्टेट के ही किसी एक व्यक्ति को, आप भले ही ट्रेनिंग पार्टनर को छूट दीजिए कि वह एक स्टेट कोआर्डिनेटर नियुक्त करे। आप भी स्टेट कोआर्डिनेटर को सुविधायुक्त बनाएं।
मेरा अंत में आग्रह है कि जो परीक्षा देने जाते हैं, वह टैब, कम्प्यूटर द्वारा होती है। आठवीं फेल बच्चा टैब कैसे चलाएगा। उससे कागज पर परीक्षा करवाएं ताकि वह परीक्षा देने में उत्सुक हो।
सभापति महोदय, मेरा एक आग्रह यह है कि बच्चे जो परीक्षा देने जाते हैं, वह टैब यानी छोटे कंप्यूटर के द्वारा परीक्षा देते हैं। अब आप स्वयं सोचिए कि वह आठवीं फेल विद्यार्थी टैब से कैसे परीक्षा देगा। उसे टैब चलाना ही नहीं आता है। इसलिए मेरा निवेदन है कि कागज पर परीक्षा लेने का काम किया जाए, ताकि वह परीक्षा देने के लिए उत्सुक हो और अन्त में मेरा कहना है कि बच्चों को आपने जो रिवॉर्ड देने की बात कही है, जिसके अन्तर्गत आप बच्चों को 8000 या 10,000 हजार रुपए रिवॉर्ड के रूप में देते हैं, वह बच्चों के एकाउंट में जाता है। इसके कारण गांवों में मार हो रही है और कई जगह लाठियां चल जाती हैं। मैं आपको प्रैक्टीकल अनुभव बता रहा हूं।
माननीय सभापति: ठीक है, चौबे जी। अब आप अपनी बात समाप्त कीजिए।
श्री अश्विनी कुमार चौबे : महोदय, वे बच्चों का एकाउंट नहीं खोलना चाहते हैं और कई जगह ट्रेनिंग सेंटर वाले मार खा रहे हैं। मैं आग्रह करूंगा कि आप उस एवॉर्ड को पूरी तरह से ट्रेनिंग पार्टनर को ही दे दीजिए और वह उसकी व्यवस्था समुचित रूप से करे। आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।
*PROF. RICHARD HAY (NOMINATED): Certified skilled and semi-skilled workers are the strength of the country and they belong to a group of large number of blue collar workers.
Skill development is the brain child of our Hon’ble Prime Minister which has been implemented by a vibrant Hon’ble Minister.
I have seen in the UAE, North America where Indian workers have been treated mainly because they are not skilled.
Knowledge skills and attitude through open doors to our own development and be independent and self-sufficient.
54% of our population is below 25 years and 62% of the population is working age group. But 4.69% of the population has undergone some training.
If Indian demographic divide has to be fully exploited, we need to provide all graduates, under-graduates an excellent skill development training programmes depending on the knowledge one possesses in a particular area and after considering one’s aptitude.
World over higher education is selective whereas we ask a large number of students to undergo a degree programme which is a waste of resources for many whereas if the student once he/she completes plus two course, he could be asked to undergo a skill development programme and obtain employment. Once he/she works in a certain field for some time he would realise the need to undergo a graduate programme to enhance his knowledge and skills.
Under the Right to Education, children up to 14 years have to attend school and are prohibited from taking employment. So every child after schooling can attend the skill development training programme and qualify for employment. This worthy scheme provides employment opportunities to the youths of the country. Skills gap assessment is carried out and appropriate skills are imparted.
I compliment the Hon’ble Minister for innovative initiatives taken for the development of the nation. I support this Bill.
*SHRI ARJUN RAM MEGHWAL (BIKANER): I want to lay the following on the Demand for Grant for Skill Development & Entrepreneurship:-
1. At the school level, skilling must be strengthened and infrastructure must be created.
2. A proper survey in this regard must be carried out, so that unemployed youth should know the exact vacancies in the field.
3. Co-ordination must be maintained between Industries and skilled person.
कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय के राज्य मंत्री (श्री राजीव प्रताप रूडी) : माननीय सभापति महोदय, सबसे पहले तो मैं सदन का आभार व्यक्त करना चाहूंगा कि एक ऐसे विषय पर आपने अपनी इतनी भागीदारी दिखाई है और नामों की सूची बहुत लम्बी है, लेकिन मैं बीच-बीच में आपके नाम का उल्लेख करूंगा और साथ-साथ आपके प्रश्नों का उत्तर देने का प्रयास करूंगा।
माननीय सभापति जी, एक बात प्रारम्भ में जरूर कहना चाहूंगा कि 67 वर्ष के बाद सदन में पहली बार, एक ऐसा निर्णय देश के प्रधान मंत्री ने लिया कि आज हम सब एक ऐसे विषय पर चर्चा कर रहे हैं, जिस मंत्रालय का गठन आज से डेढ़ साल पूर्व हुआ। एक विभाग के रूप में इसकी स्थापना हुई। छः माह के बाद जब मुझे सरकार आने का मौका मिला, तो यह जिम्मेदारी मुझे सौंपी गई और आज इस सदन में, सबसे पहले तो मैं आभार व्यक्त करना चाहूंगा देश के प्रधान मंत्री का, जिन्होंने इस मंत्रालय की स्थापना कर के, देश में स्किल का एक अलग इको-सिस्टम देने का प्रयास किया है।
महोदय, जब इतिहास लिखा जाएगा, तो उसमें तीम-चार विषय शुरूआती तौर पर आएंगे। एक तो सदन में पहली बार इस मंत्रालय पर चर्चा, उसके लिए देश के प्रधान मंत्री को आभार। दूसरा, इस मंत्रालय का इस देश का पहला मंत्री, जो डिमांड्स फॉर ग्रांट्स पर चर्चा का उत्तर दे रहा है, उसमें मेरा नाम आ जाएगा, लेकिन तीसरा विषय जो सबसे महत्वपूर्ण है, वह है 40 के आसपास जिन सांसदों ने, देश के इतिहास में, पहली बार, इस सदन में, इस विषय पर जो चर्चा हुई है, उसमें भाग लिया है। यह इतिहास के पन्नों में अवश्य आएगा और सभापति जी, आपका नाम भी उसमें छूट नहीं सकेगा। हमारे मंत्रालय के जो अधिकारी यहां आकर बैठे हैं, उन सबका नाम इतिहास में जरूर आएगा, क्योंकि यह एक ऐसा विषय है, जो बहुत महत्वपूर्ण है।
सभापति महोदय, महोदय, इस बात की मुझे खुशी है कि आखिर देश के प्रधान मंत्री ने इसकी कल्पना की। ऐसा नहीं है कि हमारे यहां आने से पहले स्किल का काम नहीं हो रहा था। लेकिन स्किल का काम किस प्रकार से हो रहा था और स्किल का काम किस प्रकार से किया जाना चाहिए, there was a need for creating an echo system, जो शायद प्रधान मंत्री जी को लगा, क्योंकि उन्होंने गुजरात में मुख्य मंत्री के रूप में बहुत काम किया था और उस अनुभव के साथ, भारत सरकार में आकर उन्होंने कहा कि इस काम को करना है। इस बारे में जिस बड़े लक्ष्य की बात की गई और इसे स्वरूप कैसे दिया गया, मैं उस बारे में चर्चा करके और उसके बाद, सदस्यों ने जो विषय उठाए हैं, उनके उत्तर देने का प्रयास करूंगा।
महोदय, माननीय सदस्यों ने जिस विषय को उठाया है, मुझे लगता है कि वह बहुत गहन अध्ययन के पश्चात् उठाया है और मोटेतौर से इस क्षेत्र में जो काम हो रहा है, उसकी जानकारी आप सभी को है। इस देश में पहली बार स्किल मिशन की स्थापना की गई और मैं सदन को बताना चाहूंगा कि इस देश में इससे पहले भी बहुत सारे मिशन बनाए गए हैं, लेकिन देश के प्रधान मंत्री, अगर पहली बार किसी मिशन की अध्यक्षता करें, तो यह बहुत महत्वपूर्ण है। इससे पहले रूरल मिशन हुआ, एग्रीकल्चर मिशन हुआ और कई मिशन बने, लेकिन अगर किसी देश का प्रधान मंत्री एक मिशन की अध्यक्षता कर रहा है, तो वह स्किल मिशन है और इसके लिए उन्हें विशेष तौर पर आभार व्यक्त करता हूं। यह पहली बार हुआ है। सर, यह सच्चाई है।
श्री मल्लिकार्जुन खड़गे: मंत्री जी, अन्याय मत कीजिए। यूथ डैवलपमेंट के लिए पहले भी कौंसिल थी और उसकी अध्यक्षता प्रधान मंत्री जी ही करते थे। पहले यह विषय प्लानिंग कमीशन के अधीन था और उसकी अध्यक्षता प्राइम मिनिस्टर ही करते थे। आप इतना क्रेडिट मत लो। जितना हज़म हो, उतना क्रेडिट लो। ज्यादा मत खाओ।
श्री राजीव प्रताप रूडी: सर, यही तो मैं कहना चाहता हूं कि मिशन का जो उल्लेख है, उसकी ऐसी परिभाषा दी है कि देश के कोने-कोने में, जिसमें राज्य सरकारें भी उसी रूप में जुड़ी हुई हैं, केन्द्र की सरकार है और सभी संस्थाओं मंत्रालयों को जोड़कर वह स्वरूप बनाया गया है और उस स्वरूप की अध्यक्षता देश के प्रधान मंत्री कर रहे हैं। इसलिए मैंने कहा कि यह पहली बार गठित हुआ है और आप भी सरकार में रहे हैं, इसलिए आप जानते हैं कि मिशन का स्वरूप क्या होता है। इसीलिए मैंने कहा कि यह मिशन है। दूसरी बात है कि देश में पहली बार नैशनल स्किल पॉलिसी भी आई है, जो आज तक कभी नहीं बनाई गई थी और आप इस बात को यदि स्वीकार न करना चाहें, तो आप इसका उल्लेख कर सकते हैं, लेकिन नैशनल स्किल पॉलिसी पहली बार देश में बनाई गई है, इसमें दो राय नहीं हो सकती हैं। मैं आपकी बात पर ही आ रहा हूं। आप कृपया दो मिनट इंतजार कर लें। यह सब सच्चाई है, जिसे स्वीकार करना होगा।
महोदय, पिछली सरकार के बारे में हमारे कई माननीय सदस्यों ने चर्चा की है। मैं उसे नकारता नहीं हूं कि पिछली सरकार ने भी इसे प्रारम्भ किया था, लेकिन प्रारम्भ करने के बाद भी कोई मंत्रालय नहीं था, कोई ऑर्गेनाइजेशन नहीं था, देश के प्रधान मंत्री ने एक एडवाइजर नियुक्त कर के इस काम की केवल शुरूआत की थी, लेकिन जिस मिशन के साथ हमारे देश के प्रधान मंत्री जी ने भारत सरकार में आने के बाद मंत्रालय गठित कर के जिस प्रकार से इस काम को शुरू किया, शायद यही अपने आप में एक बड़ा अनोखा प्रयास है, जो देश के इतिहास में हमेशा जाएगा।
महोदय, स्किल मिशन के माध्यम से एनएसडीसी की स्थापना हुई और स्किलिंग के लिए सबसे बड़ी कठिनाई यह थी कि भारत में 24 मंत्रालय और 50-60 योजनाएं थीं, राज्य सरकार अपने तरह से योजनाएं चला रही थी सभी लोग स्किलिंग का काम कर रहे थे और इसमें कुछ भी गलत नहीं हो रहा था क्योंकि किसी को पता नहीं था कि स्किलिंग का क्या स्वरूप होगा? देश की आजादी के बाद, आप इसे अन्यथा न लें एजुकेशन स्किल के प्रति बायस्ड रहा है क्योंकि इस देश में जो लोग बड़े बनते हैं या जिन्हें हम बड़ा समझते हैं जिसको शासक वर्ग समझते हैं वे सभी पढ़े-लिखे हैं। हमारे बीच में सभी बड़े लोग हैं, मंत्री हैं, हम में से किसी की भी क्षमता नहीं है कि ड्रिल मशीन लेकर दीवार में एक स्क्रू से एक पिक्चर सीधी तरह से टांग सकें। हमारे देश में इसकी परंपरा नहीं है, हम इसे मान्यता नहीं देते। आज भी हम टेलर को फैशन डिजाइनर नहीं कहते, एक नाई को नाई कहते हैं हेयर स्टाइलिश नहीं कहते। दुनिया में थाइलैंड जैसा देश हैं, हमारे यहां प्रोफेसर ऑफ वेल्डिंग नहीं हैं हमारे यहां प्रोफेसर ऑफ पलम्बिंग नहीं है। लार्ड मैकाले ने अंग्रेजी की स्थापना की और शासक वर्ग तैयार हुआ तो उसके बाद भी हम लोगों ने स्किल को प्रोटेक्ट अपनी इच्छा से नहीं किया बल्कि उसको रिजर्वेशन देकर प्रोटेक्ट किया कि वह हमारे साथ चल सके। इसका परिणाम यह हुआ कि बड़े लोग बड़े बने रह गए और बाकी को आरक्षण देकर उठाने की कोशिश की गई। इस दौरान हम लोग स्किल का इको सिस्टम भूल गए। बहुत सारे सदस्यों ने कहा कि 1800 करोड़ रुपये में क्या होगा, सचमुच में 1800 करोड़ रुपये में कुछ नहीं होगा, हम इस बात को स्वीकार करते हैं। पिछले 67 वर्षों में लाखों करोड़ रुपये शिक्षा में लगाया है और स्किल को शिक्षा का अंग बना कर रखा गया। शिक्षा के लिए स्किल, हमारे कुछ मित्र बिहार से हैं। मेरा संसदीय क्षेत्र छपरा है, लोग कार्यालय में आकर पिटीशन डालते हैं, एक माह कोइ पिटीशन नहीं आती है। हम कार्यालय में पूछते हैं कि इस बीच कोई पिटीशन क्यों नहीं आ रहा है? यह कहा जाता है कि अभी मैट्रिक की परीक्षा चल रही है तो मैंने कहा है कि तो इससे क्या दिक्कत है। जब मैट्रिक की परीक्षा बिहार में होती है तो भाई, चाचा, ताऊ, मामा बच्चे को परीक्षा दिलाने के लिए गांव का गांव और घर का घर निकल जाता है। हम लोगों ने हाजीपुर में देखा था कि लोग तीन मंजिले तक चढ़कर पर्ची खिड़की से डाल रहे ताकि बेटा पास हो जाए, वह उसकी तैयारी करता है। हमने कहा है कि बच्चों को पढ़ाना है, दामाद ढूंढना है तो सर्टिफिकेट बहुत जरूरी है, बिना सर्टिफिकेट के उसका जीवन नहीं चल सकता। बिहार के बारे में ऐसा कह रहा हूं यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है, यह कहना अच्छा नहीं है लेकिन सच्चाई है। आप जय प्रकाश जी इसको ...(व्यवधान) हमारे भी बच्चे हैं। हमें भी दुख है ...(व्यवधान)।
माननीय सभापति : जय प्रकाश जी, जब तक वह यील्ड नहीं करेंगे तब तक आप बोल नहीं पायेंगे।
…( व्यवधान)
श्री राजीव प्रताप रूडी : मैं आपको अपने बच्चों के बारे में बता रहा हूं। ...(व्यवधान)
माननीय सभापति : दूबे जी, कृपया आप बैठ जाइये। आप मंत्री जी को बोलने दीजिए।
…( व्यवधान)
श्री राजीव प्रताप रूडी : कई बार ऐसे निर्णय होते हैं ...(व्यवधान) कई बार राजनीतिक निर्णय होते हैं। मैं आपको सिर्फ समझने के लिए संदर्भ बता रहा हूं, क्योंकि हम सबको इन करोड़ों लोगों के बारे में चिंता करनी है। मैं आपको उदाहरण इसलिए दे रहा हूं। मैं दूसरा उदाहरण इसलिए कह रहा हूं, क्योंकि उसके लिए आप जिम्मेदार नहीं हैं। उसके लिए समय, परिस्थिति, राजनीति सब मिलकर जिम्मेदार होता है और इस चीज को हमें बदलना है।...(व्यवधान)
श्री कौशलेन्द्र कुमार (नालंदा) : ऐसा नहीं होता कि बाल-बच्चे लग गये। ...(व्यवधान) आप इस तरह का ... *मत कहें। ...(व्यवधान)
माननीय सभापति : आपका यह शब्द पार्लियामैंट्री नहीं है, इसलिए इसे कार्यवाही से निकाल दिया जाये।
…( व्यवधान)
श्री राजीव प्रताप रूडी: अगर आपको यह नहीं पता है तब आप बिहार में नहीं रहते। ...(व्यवधान)
माननीय सभापति : आप मंत्री जी को बोलने दीजिए।
…( व्यवधान)
माननीय सभापति : चौबे जी, कृपया आप मंत्री जी को बोलने दीजिए।
…( व्यवधान)
श्री राजीव प्रताप रूडी : महोदय, कुछ कटु सच हैं। किसी समय कुछ निर्णय होते हैं जो परिस्थितियां कराती हैं। उसके लिए इस समय बहुत इमोशनल नहीं होना चाहिए। ...(व्यवधान)
माननीय सभापति : आप डिस्टर्ब न करके मंत्री जी को बोलने दीजिए।
…( व्यवधान)
श्री राजीव प्रताप रूडी : लेकिन आखिर में इस देश में स्किल का इको सिस्टम क्या होगा? हम कैसे इसे लेकर चलेंगे, यह सभी सांसदों ने कहा। हमारे लिए सबसे बड़ी चुनौती थी कि भई, इसकी परिभाषा दीजिए क्योंकि सब लोग स्किलिंग का काम कर रहे हैं। इस देश में स्किल पारम्परिक ढंग से बड़ी शिक्षा जगत, इंजीनियरिंग कालेजेज, मेडिकल कालेजेज, पोलिटेक्नीक कालेजेज मे हो रहा है। जो फॉर्मेल स्ट्रक्चर में वर्ष 1950-52 से हो रहा है, वह आईटीआईज में था, जो एनसीबीटी का था। उसमें वैल्डिंग, प्लम्बिंग, फिटर वगैरह का काम करते थे, लेकिन यह अपने आप में पर्याप्त नहीं था। इसलिए हुआ कि देश में जब 50 करोड़ लोगों की बात हो रही है, तो ये 50 करोड़ लोग वर्षों से छूट गये हैं, जिन्हें सामान्य रूप से स्कूली शिक्षा के साथ जोड़कर शिक्षा में आठवीं, नौंवी, दसवीं, ग्यारहवीं और बारहवीं में मिलना चाहिए था, लेकिन वे किसी कारण से छूट गये। पालिसी मेकर्स ने इस बात पर ध्यान नहीं किया और आज भी देश के प्रधान मंत्री कहते हैं कि अगर उसे आज भी शिक्षा के साथ छोड़ देंगे तो हो सकता है कि दस-पन्द्रह साल और लेट हो जाये। हम सब आईटीआईज में जाते हैं। आईटीआईज में एनसीबीटी का सर्टीफिकेशन राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय है। लेकिन आज 67 साल हो गये हैं, आईटीआईज में जो बच्चा दसवीं पास नहीं है, उसे लेते हैं। आठवीं ड्राप आउट, नौंवी ड्रापआउट और दसवीं का है और बारहवीं के बाद जिसने आईटीआई किया हुआ है, जो वैल्डर, फिटर बनता है, वह उसके आगे कोई पढ़ाई नहीं कर सकता, क्योंकि उसके सर्टीफिकेट की कोई मान्यता नहीं है। हमने तय किया और स्मृति जी से बात की कि अब दसवीं या बारहवीं पास बच्चा, उसके इक्वलेंट अगर वह नैशनल ओपन यूनीवर्सिटी में ब्रिज कोर्स कर लेता है, कोई विज्ञान का कोर्स या कोई भाषा का कोर्स कर लेता है तो उसे हम बारहवीं और दसवीं का सर्टीफिकेट देंगे, ताकि वह आगे पढ़ाई करना चाहे, तो कर सके।
यह सब सुधार की प्रक्रिया हम कर रहे हैं, ताकि स्कूल एजुकेशन में उसके रास्ते खुल सकें। हम बार-बार कह रहे हैं कि आठवीं, नौवीं और दसवीं में सीबीएससी, सैंट्रल बोर्ड और स्टेट बोर्ड द्वारा ऐसे मानक लाये जायें, ताकि क्लास रूम में शिक्षा हो और कुछ टेक्नीकल पढ़ाई हो। दोनों की मान्यता केवल दसवीं का सर्टीफिकेट, बारहवीं का सर्टीफिकेट हो, ताकि वह कौशल विकास के माध्यम से बाहर निकल सके या हायर एजुकेशन के माध्यम से बाहर निकल सके। यह सब पालिसी लैवल डिसीजन था। अब आप जो 50 करोड़ का वर्कफोर्स कह रहे हैं, इसे हम दो-तीन वर्षों में पूरा नहीं कर सकते। लेकिन हम लोगों ने शुरूआत कर दी है। अब साधन की बात हुई। आप सचमुच कहते हैं कि 1800 करोड़ रुपये बहुत कम हैं। लाखों-करोड़ रुपये शिक्षा में चल गये। अगर आज हम जोड़ें तो दस लाख लोग, a million people join the work force every month. लगभग एक करोड़ लोगों की फौज हमारी खराब होगी। हम दुनिया भर में देख रहे हैं। अब एक करोड़ और पिछले 50 करोड़ कहें और कुछ क्षण के लिए कृषि क्षेत्र में काम करने वाले को हम अपने विमर्श के लिए बाहर रखें, फिर भी लगभग 25 करोड़ लोग ऐसे हैं, जिन्हें हमें प्रशिक्षित करना है। औसतन किसी को प्रशिक्षण देना हो, जो ड्रापआउट हो, स्कूल से बाहर छूटा हो तो 15 से 20 हजार रुपया प्रत्येक व्यक्ति पर खर्च है। मैं उस विषय पर भी आऊंगा कि शार्ट ट्रेनिंग का क्या मतलब है, उसका लाभ क्या है? उसके हिसाब से अगर हम 50 मिलियन, जो प्रत्येक वर्ष जुड़ते हैं और अगले पांच वर्ष में दस मिलियन और पचास मिलियन होंगे तो 300 मिलियन, लगभग हमें 6 लाख करोड़ रुपये चाहिए। यह सचमुच बहुत बड़ा पैसा है। यह पैसा वर्षों से खर्च होना चाहिए था, लेकिन फिर भी हम इसे अभियान के रूप में लेकर चल रहे हैं। देश के प्रधान मंत्री ने भी कहा। आपका यह कहना बिल्कुल सही है कि यह पैसा अपर्याप्त है। हमारे पास कैपेसिटी भी होनी चाहिए कि हम उस पैसे को खर्च कर सकें। हम पैसा ले लें और साल भर में उसे खर्च न कर पायें, इसके लिए भी कोई रास्ता नही है।
इसलिए देश के प्रधान मंत्री ने कहा है कि इस क्षेत्र में कौशल विकास के लिए आपको जितना पैसा चाहिए, हम देंगे। इसकी रूपरेखा तैयार करो, ताकि देश याद करे कि आखिर कौशल प्रशिक्षण के कार्य में हम कैसे काम करें? उसके लिए पूरा नोट तैयार है। पैसे का अभाव नहीं होगा, यह हम आश्वस्त करते हैं। हम माननीय सांसदों को भी आश्वस्त करते हैं। यह होगा कैसे? हमारा क्या सिस्टम है? बहुत सिम्पल काम है, बहुत बड़ी पढ़ाई का काम नहीं है, 50 करोड़ में सबसे पहला काम है, जैसा कि चौबे जी और अन्य सदस्य कह रहे थे कि ऐसे लोगों की पहचान करनी है जिसे प्रशिक्षण की जरूरत है और जो छूट गया है, पांचवीं, छठी क्लास में छूट गया, वह कहीं मजदूर है, गरीब है, किसान है, उसकी पहचान करनी है। इसे अंग्रेजी में मोबिलाइजेशन कहते हैं। उसकी पहचान हो जाए तो पहचान किए हुए व्यक्ति के लिए पैसे की व्यवस्था करना, सरकार का काम है। आप लोगों ने कहा है, दोबारा याद करा दीजिएगा, मैं बताऊंगा कि जो आरोप लग रहा है, उसका हमने रास्ता निकाल लिया है।
दूसरा काम है, उस व्यक्ति को प्रशिक्षण देना। प्रशिक्षण कैसा हो? उसे कैसे ट्रेनिंग दी जाए? इसका भी मानक नहीं बन पाया है। आईटीआईज़ में इसका मानक था। हमने कहा कि उद्योग तय करे कि किस प्रकार का प्रशिक्षण हो, 15 दिन, एक महीना या दो महीना हो और किस लैवल पर गरीब के बच्चे को ट्रेनिंग लेकर अपने दरवाजे पर ले जाएंगे, यह तय किया जाए। जो सैक्टर स्किल काउंसिल बने हैं, ये मूल रूप से इंडस्ट्री बॉडीज़ हैं। ये तय करेंगे कि हमें फलाने काम के लिए कितना प्रशिक्षण चाहिए। उन्हें एमए, बीए नहीं चाहिए, उन्हें एंट्री लैवल चाहिए। हमारी पहली चुनौती है कि किसी गांव में बैठा बच्चा या बच्ची, जिसकी आमदनी 1000-1200 रुपए है, अगर उसकी आमदनी छोटे से प्रशिक्षण के बाद 8000-10,000 रुपए पहुंचा दें तो उसके लिए बहुत बड़ी सहूलियत होगी। यह हमारा प्रारंभिक अभियान है। मैं बहुत बड़ी श्रेणी की बात नहीं कर रहा हूं।
तीसरा काम है, जब प्रशिक्षण का काम हो, एक मानक हो, सिलेबस हो, करिकुलम हो, एनएसक्यूएफ के तहत हमने तैयार किया है और उसके बाद असेसमेंट हो। एसेसमेंट में प्रक्रिया बदली गई है। सौगत राय जी भी कह रहे थे। स्टार स्कीम, रिवार्ड स्कीम का जो सिस्टम था, क्षमा कीजिए खड़गे साहब, आपने जो योजना चुनाव के पहले दी थी, देश का इससे बड़ा नुकसान हो रहा है। ऐसी व्यवस्था चली जा रही थी, किसी गली में, कोने में, किसी दुकान में, मकान में, 100, 200, 500 लोग थे। हमें इस व्यवस्था को पकड़ने में बहुत वक्त लगा क्योंकि पूरे देश में इस प्रकार का बहुत बड़ा जाल बिछ चुका है। आज मैं बहुत बड़ा अनपापुलर होऊंगा, सांसद घूम-घूमकर देख रहे हैं कि सर्टिफिकेट जारी हो रहा है। कुछ ठीक भी होंगे लेकिन गलत ईको सिस्टम स्थापित हो गया था। 10, 20, 50 लोगों की ट्रेनिंग में समझ ही नहीं आ रहा था। सांसद पूछ रहे थे कि कहां हो रहा है? मैं भी अपने अफसरों से पूछता था कि कहां हो रहा है? पता ही नहीं चलता था। मैं भी नेता हूं। मैंने कहा कि यह सिस्टम बदलना होगा, बड़ा सघर्ष हुआ, कहा गया - This is the ecosystem of training. हमें समझ ही नहीं आया कि ईको सिस्टम आफ ट्रेनिंग क्या है। हम संघर्ष करते रहे, अंग्रेजी बोलते रहे, विभाग में बात करते रहे और बाद में समझ आया, This is no ecosystem of training. हमने कहा जो भी कौशल विकास का काम होगा, सांसदों को दिखना चाहिए, देश की जनता को दिखना चाहिए, केंद्र होना चाहिए। हमने देश के पूरे सांसदों से कहा और इसकी योजना बन गई है। हम कुछ ज्यादा नहीं दे सकते हैं। हम आपको मानक दे सकते हैं, आप उस मानक को देखिए और अगर अच्छा हो तो आने वाले दिनों में और विस्तार कर देंगे, जो सांसदों की देखरेख और उनकी आंखों के सामने 5000-10000 स्कवेयर फीट में होगा। हम भवन का निर्माण नहीं कर सकते हैं, कहीं न कहीं किराए पर लेना होगा, आपकी सहमति से लेना होगा, वहां मॉडल ट्रेनिंग सैंटर्स की स्थापना होगी, जहां गांव, देहात, गरीब के बच्चे जाएंगे। उनका एक रुपया खर्च नहीं होगा। जो पहले उसके एकाउंट में जाता था फिर एकाउंट से ट्रेनिंग पार्टनर को जाता था, फिर यह बांटता था, वह बांटता था, फिर आटोमेटिड डेबिटिंग होती थी, सब खत्म। वह जाएगा, उसे वहां बताया जाएगा, उसकी काउंसलिंग की जाएगी, उसकी योग्यता के अनुसार बताया जाएगा कि आप क्या कर सकते हो, क्या सीख सकते हो, यह तुम्हारा प्रशिक्षण है।
आप इसकी परिभाषा में थोड़ा परिवर्तन कीजिए। 15 साल की पढ़ाई कर रहे हैं, मैट्रिकुलेट हो रहे हैं, बीए हो रहे हैं और नौकरी नहीं मिल रही है और आप कह रहे हैं कि 15 दिन या तीन महीने में नौकरी मिल जाए। आप थोड़ी व्यावहारिकता तो लाइए। हम उन्हें उस स्थान तक चलने के लिए रास्ता दिखाएंगे। हो सकता है अगर उसे मोबाइल फोन की ट्रेनिंग का रास्ता बताएं, तो उद्यमिता और मुद्रा से 50,000 रुपए लोन दिला सकते हैं जिससे वह गांव में मोबाइल का काम खोल सकता है। छोटी सी लड़की गांव से आती है, ब्युटीशियन का कोर्स करा देते हैं। एक महीने की ट्रेनिंग है। गांव में जाकर बहनों को पहले सजाती है, जब बहनों को सजाती है तो गांव के अगल-बगल के लोग कहते हैं कि हमें भी सजा दो। मजदूर की बेटी भी अपने आप में सुंदर दिखना चाहती है। उसके मन में भी यह लालसा होती है कि मैं भी सुंदर दिखूं। फिर गांव की वह बच्ची उसको सजाती है, उसकी महीने में 5,000 रुपये की आमदनी हो जाती है। जब उसके गांव में लगन होती है, शादी-ब्याह होता है तो वही लड़की उस छोटी सी 10,000 रुपये की किट के साथ गांव में 25,000 रुपये से 30,000 रुपये कमा लेती है। यह हमारा अभियान है और इन लोगों के लिए अभियान है। थोड़ा सा कन्फ्यूजन होता है लोगों को।
आज माननीय सदस्य इंजीनियरिंग की बात कह रहे थे। पहले इंजीनियरिंग के लिए मारा-मारी होती थी, आज देश में इंजीनियरिंग की अठ्ठारह लाख सीट्स हैं, जिनमें से साढ़े आठ लाख सीट्स खाली हैं और दूसरी तरफ आईटीआईज हैं। देश के प्रधानमंत्री ने कितना बड़ा काम किया, एक मंत्रालय की स्थापना की। फिर मिनिस्ट्री ऑफ लेबर, लेबर शब्द कोई खराब शब्द नहीं है, लेबर अच्छा शब्द है, लेकिन जो अभी लेबर बना ही नहीं, वह विद्यार्थी है, उसे लेबर की परिभाषा में डाल दिया गया, उसे 12वीं तक बन्द कर दिया। प्रधानमंत्री जी ने कहा कि आईटीआईज को वहां से निकालकर स्किल डेवलपमेंट और इंटरप्रिन्योरशिप मिनिस्ट्री में लाओ, इसीलिए उसे हमारे मंत्रालय में लाया गया। देश में लगभग 13,000 आईटीआईज हैं। अब आईटीआईज की भी कहानी सुनिए। ये बड़ी अच्छी संस्थाएं हैं। जो भारत सरकार के आईटीआईज हैं, कुछ 20 या 25 आईटीआईज महिलाओं के लिए हैं। खड़गे साहब भी इस विभाग में रहे हैं। मैं देश में भारत सरकार की तमाम आईटीआईज में गया हू, मैं मुंबई की आरवीटीआई में गया था, नेहरू जी के बाद साहब सिंह वर्मा जी उस संस्था में गए थे, उनके बादराजीव प्रताप रूडी गए थे, इस बीच वहां भारत सरकार का कोई भी नहीं गया। पता नहीं, क्या कोई रुचि ही नहीं थी?
देश के प्रधानमंत्री और भारतीय जनता पार्टी के नेताओं की यह खासियत है, हम दिन भर चलते रहते हैं, ऐसी संस्थाओं में पहुंचते रहते हैं, जाते रहते हैं, बैठकें करते रहते हैं, आइडियाज लेकर आते हैं।...(व्यवधान) आप देखें की बीएसएनएल का एक छोटा सा ऑफिस कितना वीरान पड़ा हुआ था, आज वहां खूबसूरत आईएलएफएस का सेंटर है, बच्चे आ रहे हैं, जा रहे हैं, उनकी नौकरी लग रही है, 10,000 रुपये से शुरूआत है, 15,000 रुपये से शुरूआत हो रही है। उनका पासपोर्ट बनवा देते हैं। उनको कहते हैं कि भाई, हम तुम्हारा पासपोर्ट बनवा दे रहे हैं, हो सकता है कि तुम्हारी किस्मत जग जाए। उसको लगता है कि मेरे पास पासपोर्ट है। उसकी ओवरसीज इम्प्लायमेंट की बात है, सुषमा जी से बात हुई। आज मिडिल ईस्ट में आप जाएंगे तो हर देश में कोई न कोई आपके गांव का बच्चा जेल में बन्द है, क्योंकि उसको प्रशिक्षण नहीं मिला। छोटी सी महिला झारखण्ड के गांव से निकलकर वहां जा रही है, उसे माइक्रोवेव चलाना नहीं आता, उसे टेलीफोन अटेंड करना नहीं आता, उसको वाशिंग मशीन चलाना नहीं आता। यहां पर एजेंट उसे रिक्रूटमेंट करके ले जा रहे हैं, वहां उस पर केस हो जाता है, उसे गाड़ी चलाना नहीं आता। वहां लोग जेल में बन्द हैं, कुछ लोगों को फांसी की सजा हो गयी है क्योंकि हम लोगों ने उन्हें ट्रेनिंग नहीं दी या फिर लोग अंग्रेजी से परहेज करते हैं। हमें किसी भी भाषा से परहेज नहीं करना चाहिए। हम अगर देश की सभी भाषाओं को जानें तो बहुत अच्छी बात है, हिन्दी जानें, संस्कृत जानें, अंग्रेजी जानें। हमें उससे परहेज करने की जरूरत नहीं है। हम इटालियन जानें, हम फ्रेंच जानें, स्पेनिश जानें। अगर हम बच्चों को केवल एक ही भाषा पढ़ा दें तो 30,000 रुपये की नौकरी कहीं नहीं जाती है।
महोदय, मैं राजस्थान में सी.पी. जोशी साहब की कांस्टीट्वेंसी में गया, वहां बच्चों को ट्रेनिंग दी जा रही थी। मैंने कहा कि इस सेंटर को कन्वर्ट कर दो, यहां आप जो लेफ्ट और राइट की ट्रेनिंग करा रहे हो, उससे 8,000 रुपये मिलेंगे। अब इनको ड्राइवर बना दो। मैंने अपने कौशल विकास केन्द्र से कहा कि इसको ड्राइवर बना दो। जब एक बार वह ड्राइवर बन जाएगा तो 8,000 रुपये से बढ़कर उसे 15,000 रुपये मिलने लगेंगे। फिर मैंने कहा कि इनको थोड़ा अंग्रेजी सिखाओ- गुड मॉर्निंग सर, गुड ऑफ्टरनून सर, वेलकम सर सिखाना शुरू करो, फिर वह एम्बेसी में जाकर 30,000 रुपये की नौकरी कर सकता है। आप इसे समझें कि हमें विद्यालयों में क्या सिखाना है। वर्षों से डिग्री, मैट्रिकुलेट, आईए, बीए पढ़ा रहे हैं, हमें इसकी जरूरत नहीं है। हमें इस वर्कफोर्स को तैयार करना है। हम सभी जानते हैं कि वेल्डर होता है, लेकिन मुझे भी पता नहीं था कि वेल्डर के कितने प्रकार होते हैं। एक वेल्डर वह होता है जो सामान्य रूप से अलमीरा वगैरह बनाता है, उसे रोज हम लोग देखते हैं। उसकी भी अलग क्वालीफिकेशन है। एक वेल्डर वह है जो टाटा मोटर्स के असेम्बलिंग सांचे पर वर्दी पहनकर बैठा है, उसका टॉर्च अलग है, वह एयरकंडीशन्ड वातावरण में काम करता है, वह भी वेल्डर है, लेकिन उसका वेल्डिंग का तरीका दूसरा है और वेतन दूसरा है। एक वेल्डर वह है जो गैस पाइपलाइन पर काम करता है, जैसे हजीरा-बीजापुर गैस पाइपलाइन जो धर्मेन्द्र प्रधान जी बना रहे हैं, उसमें काम करता है। उसका सिस्टम अलग है, उसकी वेल्डिंग दूसरी है, उसका प्रशिक्षण दूसरा है। एक वेल्डर है जिसका वेतन ढाई लाख रुपये है। गीते जी जानते हैं, समुद्र के भीतर गोताखोरी करने वाले उस वेल्डर को ढाई लाख रुपये वेतन मिलता है। मुझे जानकारी नहीं थी कि इस प्रकार से भी होता है। इनमें से कोई भी प्रोफेसर नहीं है, ये सभी सामान्य हैं, लेकिन इनको एस्पिरेशनल बनाने की जिम्मेदारी हमारी है। उसको ट्रेनिंग देना, एसेसमेंट करना और उसे कहीं रोजगार देना, यही हमारा मुख्य उद्देश्य है। इसके करने को तरीका नेशनल स्किल क्वालीफिकेशन फ्रेमवर्क है। अब संकट यह हो रहा है कि आईटीआई भी हमारे साथ हैं, एनएसक्यूएफ भी हमारे साथ है। देश के प्रधानमंत्री जी ने कहा कि अब दुनिया भर में स्किल का जो सर्टीफिकेशन हो उसका मानक एक हो और इसलिए नेशनल स्किल सर्टीफिकेशन बोर्ड के लिए सदन में हम एक कानून बना कर ला रहे हैं ताकि देश में चाहे आठवीं पास स्किलिंग हो या बारहवीं पास स्किलिंग हो, देश में एक स्किल सर्टीफिकेट हो जिसकी दुनियाभर में मान्यता हो और हम तथा आप उसकी मान्यता राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित कर सकें।
यह बात सही है कि प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना स्टार स्कीम था। हमने इसे चेंज किया। मैं नया-नया इस मंत्रालय में आया था। मेरा सिर घूमने लगा। मुझे उसकी व्यवस्था ऐसे लगी कि छह महीने से साल भर में मैं जेल चला जाऊंगा। मैंने आहिस्ता-आहिस्ता उसमें परिवर्तन किया और जो पीएनकेवीवाई-2 लेकर आ रहा हूं उसमें पूरा का पूरा यह ग्रांट मॉडल होगा और टीपीज़ जिम्मेदार होंगे कि आप बच्चों को प्रशिक्षण दो कि कुछ पैसा यहां जा रहा है, कुछ पैसा वहां जा रहा है, उसकी पूरी व्यवस्था बदल करके पूरे तौर पर ट्रेनिंग पार्टनर्स को जिम्मेदारी दे रहे हैं और मॉडल ट्रेनिंग सैंटर्स होंगे और उसमें आपकी भागीदारी होगी। जैसे मैंने पहले भी घोषणा की है कि प्रत्येक संसदीय क्षेत्र में एक मॉडल स्किल सैंटर होगा जिसकी हम स्थापना करेंगे।
महोदय, आईटीआईज़ की बात करते-करते मैं दूसरी दिशा में चला गया था। देश में 13 हजार आईटीआईज़ हैं और खड़गे जी आपको इसका उत्तर देना पड़ेगा कि 2500 ब्लॉक ऐसे हैं जहां आज तक किसी भी प्रकार की ट्रेनिंग नहीं है और आईटीआई की स्थापना नहीं हुई है। देश के प्रधानमंत्री ने कहा कि यह कैसे होगा। जयपुर के हमारे माननीय सांसद यहां हैं। जयपुर में 200 आईटीआईज़ और झारखंड पलामू में 1 आईटीआई है, यह कैसे हुआ? पता नहीं कि व्यवस्था में कहां गड़बड़ी थी। अब हमने कहा कि ज्योग्राफिकल बेसिस पर और जहां कोई जाने के लिए तैयार नहीं है, वहां हम सरकार से पीपीपी मॉडल में तीन से चार करोड़ रुपया ऐसी संस्थाओं को जो वहां जाकर इंडस्ट्री लगाए। निशिकांत दुबे जी के यहां हमने तय किया कि वहां इंडस्ट्री आकर लगाएं क्योंकि आज हमारे लिए यह संभव नहीं है कि कौशल विकास मंत्रालय हर जगह जा कर भवन बनाए। अगर हम भवन बनाने लगेंगे तो पांच साल निकल जाएंगे। इसी कारण हमने कई मंत्रालयों के साथ दोस्ती की है। मैं जा-जाकर, मिल-मिल कर, फोटो छपवा-छपवा कर, बैठ-बैठ कर, समझा-समझा कर कि सांसदों के क्षेत्र में बिल्डिंग दे दीजिए। इसके लिए कुछ सहमत हो गए हैं और कुछ सहमति के क्रम में हैं चाहे जयप्रकाश जी के क्षेत्र में हो, चाहे कौशलेन्द्र जी या गोगोई जी के क्षेत्र में हो जहां-जहां पब्लिक सैक्टर अंडरटेकिंग्स हैं, मैं कह रहा हूं कि आपके पास साधन है, जो भी आपके क्षेत्र में पब्लिक सैक्टर अंडरटेकिंग्स हैं, उसकी सूची बना कर उनके सीएमडी के साथ बातचीत हो। स्टील मिनिस्टरी के साथ समझौता हो गया, पावर मिनिस्टरी के साथ समझौता हो गया, कोल मिनिस्टरी के साथ समझौता हो गया, माइन्स मिनिस्टरी के साथ, रेलवे के साथ, डिफेंस के साथ समझौता हो गया है। महोदय, डिफेंस के लोग तो देश में सरकार को याद रखेंगे। हमने कल ही एक फंक्शन किया। एयरफोर्स के लोग, नेवी के लोग, आर्मी के लोग साठ हजार यंग फोर्स, क्योंकि फौज की नौकरी में 20-22 साल बाद अवकाश प्राप्त कर लेते हैं, सीआरपीएफ, बीएसएफ की तरह नहीं है। उनमें बहुत गुण होते हैं। हम समझते हैं कि हर फौजी जो रिटायर होता है या फौज से निकलता है तो क्या वह सिर्फ सिक्योरिटी गार्ड बन सकता है। उनकी जो पहचान है, उसके लिए सिर्फ एक महीने की उन्हें ट्रेनिंग दे रहे हैं और भारत में नहीं, कल हम लोगों ने एयरफोर्स के जेसीओ वारंट आफिसर्स को स्किल मैप किया है, 50 लोगों को हमने निकाला है और 50 के 50 लोगों को तीन-तीन, चार-चार जगह एक-एक व्यक्ति को ऑफर आया है, ऐसा भारत के इतिहास में कभी नहीं हुआ होगा। हमारे 60 हजार फौजी हैं और हमारे पास ट्रेनर्स नहीं हैं। हमारे पास इंस्टीटय़ूट्स में पढ़ाने वाले लोग नहीं हैं, ट्रेनिंग देने वाले नहीं है तो इन फौजियों को जो कि हमारे देश का गौरव हैं, जिनके पास जानकारी है चाहे मेडिकल की फील्ड में हो चाहे ओटोमोटिव में हो, गनर्स हों, तोपची हों, ऐसे बहुत सारे डेजिग्नेशंस हैं, उनके निकाल कर हम या तो ट्रेनर बना रहे हैं, ट्रेनर नहीं तो वे अपने गांव में जाकर उद्यमी बनें और अगर गुणवत्ता है तो हमारे पास जो एसैसर की बात कह रहे थे, फौजियों को इस देश में एसैसर बनाएं। ये जब अपने गांव में बैठ कर वैबसाइट पर जाकर फोन काल से महीने में 50 हजार से एक लाख रुपया कमा सकते हैं, उसकी व्यवस्था की जा रही है।
रेलवे की बात बताना चाहता हूं। रेलवे के पास जो सम्पत्ति है, वे अपनी ट्रेनिंग करते हैं। उन्होंने कहा कि हमें भी साथ ले लीजिए क्योंकि आपके पास बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर है। कोई भी सार्वजनिक क्षेत्र का लोक उपक्रम हो। मुझे नहीं पता कि किसके क्षेत्र में है। आप उसके सीएमडी से सम्पर्क कीजिए कि हम इस मंत्रालय से ट्रेनिंग का खर्चा ला देंगे। कम से कम आपके क्षेत्र में व्यवस्था दे दीजिए। अब मैं आईटीआई वाला पाइंट समाप्त करके दूसरे विषय पर आ रहा हूं। आज देश में प्रत्येक वर्ष लगभग छः लाख कमर्शियल व्हिकल्स मैन्यूफैक्चरर्स हैं। यानी कि दो शिफ्ट में हमें बड़ी गाड़ियों के लिए 12 लाख ड्राइवर्स चाहिए और किसी ड्राइवर का वेतन 10-15 हजार रुपये से कम नहीं होता है।
श्री मल्लिकार्जुन खड़गे : क्या आपके पीछे बिहार के बहुत लोग बैठे हैं?
श्री राजीव प्रताप रूडी : सर, पूरा देश पीछे बैठा है, प्रधान मंत्री, नरेन्द्र मोदी के साथ इस तरफ पूरा देश बैठा है, यह बड़ी बात है। इस देश में लगभग तीस लाख के आसपास छोटे वाहन बनते हैं, उनमें भी 75 परसैन्ट सैल्फ हैं, बाकी टैक्सी, यूबर है, फलां-फलां हैं और हमें प्रत्येक वर्ष 18 से 20 लाख ड्राइवर्स लाइट कमर्शियल व्हिकल्स, हैवी कमर्शियल व्हिकल्स के लिए चाहिए। इसके अलावा माननीय नितिन गडकरी के विभाग द्वारा दस लाख करोड़ का कंस्ट्रक्शन हो रहा है। ...(व्यवधान)
श्री जय प्रकाश नारायण यादव: हवाई जहाज के बारे में भी बोलिये।
श्री राजीव प्रताप रूडी : मैं जहाज का भी बताता हूं। दस लाख करोड़ रुपये का जब कंस्ट्रक्शन का काम हो रहा है, हमें वाहनों के लिए सुरक्षित ड्राइवरों की जरूरत है। हमारे पास टाटा मोटर्स, टाटानगर, जमशेदपुर, जमशेदजी टाटा, श्री विद्युत महतो वहां के हार्ड वर्किंग सांसद हैं। देश में अगर पहला आटोमोटिव प्लान्ट टाटा ट्रक्स का बना तो टेल्को में बना। यह पूरे देश को सुनना चाहिए कि पिछले 21 सालों में झारखंड और बिहार, 12 करोड़ आबादी हमारी और लगभग 4-5 करोड़ आबादी झारखंड की, करीब 15 करोड़ आबादी, दुनिया के डेढ़ सौ देशों से भी ज्यादा आबादी हमारी है। पिछले 55-60 सालों में न झारखंड में और न बिहार में, जहां टाटा ट्रक्स का निर्माण होता है, एक भी हैवी व्हिकल ड्राइवर का लाइसेंस पिछले 25 वर्षों में इश्यु नहीं हुआ। क्या आप विश्वास कर सकते हैं। ड्राइवर्स कहीं गुजरात जाते हैं, कहीं राजस्थान जाते हैं, कहीं महाराष्ट्र जाते हैं या असम जाते हैं, वहां से जाकर लाइसेंस बनवाकर नार्थ-ईस्ट में ट्रकें चलती हैं। चूंकि हमारे पास ट्रेनिंग तक की व्यवस्था नहीं है कि हम लोग ट्रैक बनाकर उन्हें ट्रेनिंग दे सकें। इसलिए प्रधान मंत्री ने कहा कि बहुत योजनाएं हैं। लेकिन सुरक्षित ड्राइवर, स्मार्ट ड्राइवर, पढ़ा-लिखा ड्राइवर हो। आज पूरी दुनिया में सिर्फ भारत को तैयार होना है। अगर केरल भारत के लिए है तो भारत पूरी दुनिया के लिए बन सकता है, हमारे पास इसका प्रमाण है। आज पूरी दुनिया में 80 मिलियन लोगों की वर्क फोर्स की शार्टेज है और सबसे बड़ी वर्क फोर्स हमारे देश में है।
महोदय, मैं कभी-कभी हवाई जहाज भी उड़ाता हूं, कभी इधर-उधर भी घूमता हूं। आपको विश्वास नहीं होगा, दुनिया में क्रूज लाइनर, टूरिज्म, आज नितिन गडकरी जी क्रूज लाइनर और टूरिज्म की बात कर रहे हैं। आप किसी भी क्रूज लाइनर पर जाइये, किसी भी डॉक पर जाइये, 100 में से 95 बच्चे मलेशिया, थाइलैंड, बैंकाक, सिंगापुर या इंडोनेशिया के होते हैं, बस दो-चार बच्चे हिंदुस्तान के होते हैं, ऐसा क्यों है? क्या हमारे लड़के उतने कामयाब नहीं हैं। पेरू, चिली यहां से 17 हजार किलोमीटर दूर हैं और यह अच्छा नहीं लगता कि किसी दूसरे देश के बारे में बोला जाए। वहां के एम्बैसडर हमें पत्र लिखते हैं कि हम प्रत्येक छः माह पर आपके यहां वीजा इश्यु करते हैं, लांगहोर्न ऑपरेटर्स, बैकहो ऑपरेटर्स, जम्बो ट्रक आपरेटर्स इस प्रकार के बहुत सारे नाम होते हैं। वे चिली से 17 हजार किलोमीटर दूर से जयपुर और दिल्ली में ट्रक चलाने आते हैं। आप सोचिये, 17 हजार किलोमीटर दूर से आते हैं और हम अपने यहां ट्रक ड्राइवर्स, बैकहो ऑपरेटर्स, जेसीबी ऑपटेर्स की ट्रेनिंग नहीं दे सकते। इसका मतलब कहीं न कहीं कुछ कमी थी। इसीलिए हमने तय किया है कि यह काम चरणबद्ध होगा, लेकिन देश के प्रधान मंत्री जी ने कहा है और हम लोगों ने तय किया है कि देश के पांच सौ जिलों में, शुरूआती तौर पर पचास जिलों में होगा, उसके बाद बढ़ते जायेंगे, स्टेट ऑफ आर्ट ड्राइवर, हैवी व्हिकल्स, हैवी इक्युपमैन्ट्स मैन्युफैक्चरर्स और लॉजिस्टिक्स और इसके लिए हम ट्रेनिंग सैंटर्स स्थापित करेंगे। जिन माननीय सांसदों के यहां हम जमीन नहीं खरीद सकते हैं, लेकिन जिनके यहां पांच एकड़ से सात एकड़ जमीन की व्यवस्था हो जाए, श्री निशिकान्त दुबे ने इसकी शुरूआत कर दी है और कई सारे लोगों ने सहमति दी है, अगर हो सका तो यह दीखेगा। वोल्वो का एक्सकवेटर जब आपके संसदीय क्षेत्र में घूमेगा और बच्चे युनिफार्म पहनकर दीखेंगे तो उस समय देश के प्रधान मंत्री की याद आयेगी कि कितना बड़ा अभियान देश के प्रधान मंत्री ने चलाया है।
मैं रेलवे के बारे में बताता हूं। रेलवेज के पास पब्लिक सैक्टर अंडरटेकिंग है, 46 हजार किलोमीटर आप्टिकल फाइबर नेटवर्क है और भारतीय रेल गांव-गांव से गुजरती है।
19.00 hours हम लोग उनसे बात कर रहे हैं कि आप वर्चुअल ट्रेनिंग के लिए अपना ऑप्टिकल फाइबर दीजिए, जो कि 12 प्रतिशत यूज़ होता है। हम हर विभाग के पास - स्टील के पास, कोल के पास, पॉवर के पास जा कर कह रहे हैं कि इसको कीजिए। एप्रेंटिसशिप के बारे में सुनिए। खड़गे साहब और राजीव जी और बाकी हमारे जो मित्र हैं, आप बुरा मत मानिएगा, सन् 1970 में श्रीमती इंदिरा गांधी जी ने कहा था कि 20 सूत्रीय कार्यक्रम बनाएंगे और 20वां सूत्र क्या था - To amend the Apprenticeship Act. सन् 1970 से 2014 तक 44 वर्ष लगे इस देश में उस कानून को संशोधित करने में। हम लोगों ने वह किया है। ऐसा नहीं था कि वह कोई बहुत बड़ा रॉकेट साइंस था। ...(व्यवधान) चलिए किसी ने अच्छा काम करना था, हमें आना था, यह काम करना था, नहीं तो हो सकता है कि 44 वर्ष और लग जाते, लेकिन हम आ गए, हमने तय किया। पहले एप्रेंटिसशिप का क्या कानून था?
दुनिया भर में ट्रेनिंग, यह सब एक व्यवस्था है, स्कूल व्यवस्था, स्किल सैंटर्स, हम लोग यह सब प्रयास ईमानदारी से करते रहेंगे, लेकिन दुनिया भर में यदि कहीं असल ट्रेनिंग होती है तो बच्चा पढ़ कर निकले तो वह उद्योग में होता है, चाहे वह सरकारी हो या गैर सरकारी हो। चीन में लगभग तीन करोड़ लोग एप्रेंटिसशिप के रूप इंडस्ट्री में काम करते हैं। जापान में एक करोड़ लोग काम करते हैं। जर्मनी और यूके में 40 लाख लोग काम करते हैं।
भारत में पिछले 66 वर्ष में जो ट्रेनिंग होती है चाहे कॉलेज से निकल कर जो लोग प्रशिक्षण के लिए जाएं या आईटीआई से निकल कर जाएं या इंजिनिंयरिंग से निकल कर जाए तो सिर्फ पौने तीन लाख लोग हैं। इसमें कोई तुलना ही नहीं है। इसलिए हमने पूरे कानून में बदलाव किया है। अब हमने कहा है कि ढाई पर्सेंट का कैप बढ़ा कर दस पर्सेंट हो जाए। हमने प्रधान मंत्री जी से बात की है कि बाकी लोग तो बाद में करेंगे, पहले सरकार के उपक्रम करें। आप सब लोगों की जानकारी में होना चाहिए, अपने यहां जितने लोक उपक्रम हैं, हमारे सिविल एविएशन के माननीय मंत्री जी बैठे हुए हैं, आपके यहां भी हैं, बैंक्स में भी है, पब्लिक सैक्टर्स में भी है। आज पचास लाख के आस-पास उनके पास एंप्लॉयमेंट है और मुश्किल से उनके पास सात से आठ हज़ार एप्रेंटिसशिप होते हैं। आज 42 हज़ार अतिरिक्त आपके और हमारे बच्चे एप्रेंटिसशिप के रूप में जा सकते हैं। इसकी शुरूआत अविलंब की जा रही है ताकि कम से कम पब्लिक सैक्टर्स अण्डरटेकिंग्स में पीएसयूज़ की जिम्मेवारी है कि एप्रेंटिसशिप करवाएं। नौकरी में रखें या न रखें, लेकिन दो वर्ष की एप्रेंटिसशिप करवाएं। लेकिन यह एक संकट आता था कि एप्रेंटिसशिप में पहले तीन महीने की क्लासरूम ट्रेनिंग होनी चाहिए। अब यह हुआ कि यह इंडिस्ट्री को तो हम पैसा देंगे। दुनिया भर में सरकारें एप्रेंटिसशिप के लिए पैसा देती हैं, तो हम लोगों ने यह एप्रेंटिसशिप प्रोत्साहन योजना शुरू की और उसमें सुधार कर रहे हैं। सबसे अच्छी बात है कि थोड़ा पढ़ लो उनकी कंपनी में काम करोगे तो थोड़ा वेजिस भी मिलेगा और वह लड़का तैयार हो जाएगा। एक्पीरिएंस हो जाता है तो एक बार हुनर होगा तो वह आगे चलता रहेगा। इसकी एक बड़ी योजना हम लोगों ने एप्रेंटिसशिप में की है।
हमारे माननीय सदस्य ने पूछा था कि एनएसडीसी का क्या रोल है। एनसडीसी एक बड़ी योजना पिछली सरकार ने बनायी और पहली बार भारत की सरकार में एक ऐसी संस्था का गठन हुआ जो पूरे तौर से निजी क्षेत्र में है और आज भी मैं जो हलचल मचाता हूँ, थोड़ा इसलिए भी कठिनाई होती है कि जिनको यह काम करना है, वह एनएसडीसी है, नैशनल स्किल डेवल्पमेंट कार्यक्रम है और वह पूरे तौर से निजी है, लेकिन उसमें सौ फीसदी पैसा सरकारी है। अब यह व्यवस्था आपने बनाई और हम चला रहे हैं। उसमें कमियां थी, उनको हम लोग दूर करने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि उस निजी व्यवस्था से आपके सांसदों तक, जिलाओं तक सीधे तौर से आसानी से उसकी अकाउंटेबिलिटी हो तो उसके कानून में भी परिवर्तन कर रहे हैं। उसमें भी हम परिवर्तन कर रहे हैं। एनएसडीसी को बनाया इसलिए गया था कि वह प्राइवेट सैक्टर से भी मिल कर उसमें भी साधन लाए और ट्रेनिंग का काम करे। कुछ कारणों से ऐसा प्रतीत होता है कि वह जो उद्देश्य था, वह पूरा नहीं हुआ, लेकिन फिर भी हम उसमें पीछे नहीं हट रहे हैं और एनएसडीसी के माध्यम से काम कराने का प्रयास कर रहे हैं। कई मंत्रालयों से हमारा संबंध जुड़ा हैं, हम उनके साथ मिल कर बढ़िया तरीके से काम कर रहे हैं। दिव्यांगों को हम बड़े पैमाने पर देश में खड़ा कर रहे हें। यह हमारी अपनी जिम्मेदारी और दिव्यांगों को हम हर क्षेत्र में मदद करना चाहते हैं। एस.सी. और एस.टी. की कॉन्सटिटय़ुएंसीज़ में ये सब जितनी योजनाएं हैं, एक तो मल्टी स्किल सैंटर होगा, मॉडल स्किल सैंटर होगा। इसके अलावा भी बहुत सारे ऐसे ट्रेड्स हैं, जिसमें अलग-अलग स्थापित किया जा सकता है। हम आहिस्ता-आहिस्ता कोशिश करेंगे कि हर जिला में अगर कुछ साधन की व्यवस्था और हो जाती है तो एक मॉडल मल्टी स्किल सैंटर्स हो। आज कंस्ट्रक्शन में तीन करोड़ लोगों की जरूरत है। ये वे नहीं हैं जो साहब हैं, ये वे मज़दूर हैं, जो आज चार हज़ार या तीन हज़ार रूपये अपना वेतन कमाते हैं। देश में अगर प्लंबर्स सबसे ज्यादा आते हैं वे ओडीशा से आते हैं। सभी क्षेत्रों में, ऑटोमोटिव में, रिटेल में, रिटेल में लगभग डेढ़ करोड़ लोगों की जरूरत है, लॉजिस्टिक्स में इस देश में लगभग डेढ़ से पौने दो करोड़ लोगों की जरूरत है। ये सामान्य पढ़े-लिखे बच्चे हैं। किसानों के बच्चे इस काम को कर सकते हैं।
आरपीएल के माध्यम से, आप कह रहे थे कि जो लोग पारम्परिक रूप से प्रशिक्षित हैं, उनके लिए भी हम तैयारी कर रहे हैं। जो लोग अपने पास हुनर रखते हैं, अभी हम लोगों ने दिल्ली में किया है, दिल्ली में 30 हजार वेंडर्स, जो ठेले पर गोल-गप्पे बेचते हैं, पान वाले और छोटी-छोटी दुकान वाले, उनकी ट्रेनिंग करके, कैसे ऐप्रन पहनना है, कैसे हाथ यूज करना है, कैसे ग्लब्स पहनना है, कैसे साफ-सफाई रखनी है, उनकी पहचान कर रहे हैं और देश के प्रधान मंत्री ने कहा है कि देश के कोने-कोने में जहाँ तीर्थस्थान हों या टय़ूरिस्ट स्थान हों, वहाँ वैसे लोगों को तैयार करो। मैं भाषा के बारे में कह रहा था, अगर कोई व्यक्ति सिर्फ अंग्रेजी बोल ले, अंग्रेजी या कोई भी और विदेशी भाषा, यहाँ तक कि अगर कोई संस्कृत भी बोल ले तो एक अतिरिक्त भाषा अगर आपकी स्कूली शिक्षा में हो तो आपकी एम्प्लॉयबिलिटी बाकी की तुलना में 35 से 40 प्रतिशत बढ़ जाती है। अपनी मातृभाषा के अलावा अगर आप थोड़ा ठीक-ठाक से पढ़ लें, अपने आपको ग्रूम कर लें तो बहुत अच्छा है।
यहाँ पर एयरलाइन्स इंडस्ट्री की बात किसी ने कही थी, मैं तो खुद ही एक स्किल्ड व्यक्ति हूँ, मैं पायलट हूँ, विमान उड़ाता हूँ, कोशिश करता हूँ कि अपना हुनर बनाकर रखूँ। मैं जहाज उड़ाता हूँ। आज हमारे यहाँ सबसे बड़ी रिक्वायरमेंट ग्राउंड सर्विसेज की है। आज सिविल ऐविएशन का बड़े पैमाने पर विस्तार हो रहा है। प्रत्येक दिन वैकेंसीज आती हैं। हमारे सांसद कहते हैं कि फलाने को लगा दो। दिक्कत क्या है कि यह पूरा शहरों में केन्द्रित हो गया है। अगर इस देश में 100 बच्चे एयर होस्टेस, सपोर्ट सर्विस या ग्राउंड सर्विस में आते हैं तो उनमें से 95 बड़े शहरों के हैं। बड़े शहरों के बच्चे आते हैं, उनके पास अच्छा हुनर है। अगर 100 बच्चे हमसे आकर बात करते हैं, अगर मैं जहाज में होता हूँ तो उनमें से 5 झारखंड के होंगे, राँची के होंगे, भुवनेश्वर के होंगे, रायपुर के होंगे, अलवर के होंगे, बीकानेर के होंगे, 95 शहरों के होंगे। हमें इन बच्चों के लिए भी ध्यान देना पड़ेगा कि ऐसे एस्पिरेशंस जो बाकी क्षेत्रों में नहीं हैं, वहाँ तक भी ऐसे कौशल को पहुँचाएं ताकि ऐसे बच्चे भी निकलकर देश की मेनस्ट्रीम में आएं। हमें विकास का हर रास्ता खोलना है।
यहाँ इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग इंस्टीटय़ूट्स के बारे में कहा गया। माननीय सदस्यों ने बहुत सारे विषय उठाए हैं। अभिषेक ने कहा है, मैं आपको बताना चाहूँगा कि केन्द्र सरकार के आने से पहले भी बहुत सारी राज्य सरकारें अच्छा काम कर रही हैं। यह कहना कि हमने आकर सब कुछ शुरू किया, गुजरात सरकार अच्छा काम कर रही है, राजस्थान सरकार बहुत अच्छा कर रही है, केरल की सरकार, ठीक है दूसरे की सरकार है, लेकिन वह बहुत अच्छा काम कर रही है, मध्य प्रदेश की सरकार, छत्तीसगढ़ की सरकार, महाराष्ट्र की सरकार, आपका स्टेट बँटने के बाद अच्छा काम हुआ है। कुछ राज्यों में शुरूआत हुई है, बिहार में भी हम शुरूआत करने की कोशिश कर रहे हैं, उत्तर प्रदेश भी अच्छा काम कर रहा है, लेकिन उसमें और विस्तार करने की जरूरत है, बहुत सारी राज्य सरकारें अच्छा काम कर रही हैं। लेकिन राज्य सरकारों का कहना है कि भाषण से काम नहीं चलेगा, कुछ पैसे दीजिए तो हमने वर्ल्ड बैंक से एक बड़ी योजना स्वीकृत कराई है और हमें उम्मीद है कि पाँच से छह या आठ महीने में ताकि हमारा साधन राज्यों में हमारे मानक के तहत इस तरह का काम कर सके, उन राज्य सरकारों के लिए भी बड़ी राशि लेकर आ रहे हैं। यह काम ऐसा है, जिसमें बड़ी मात्रा में पैसे की जरूरत है। हरियाणा में भी हो रहा है।
महोदय, स्किल्स को एक मान्यता देनी है और मान्यता देने के लिए एक स्किल एक्ट की जरूरत है ताकि देश भर में सब लोगों को हो। हम उसके लिए प्रयास कर रहे हैं। यहाँ यूनिवर्सिटीज के बारे में बोला गया है, अभी तक हम उसकी परिभाषा बनाने की कोशिश कर रहे हैं कि स्किल यूनिवर्सिटीज का स्वरूप क्या होगा। अभी हाल-फिलहाल सेन्टर्स ऑफ एक्सिलेंस, हमारे जो आईटीआईज हैं, कुछ पुराने आईटीआईज और सरकारी आईटीआईज बहुत अच्छे हैं, लेकिन उनकी मान्यता दिख नहीं रही है, क्योंकि बड़े-बड़े बहुत सारे जो खुल गए हैं और उसके कारण ये दिखाई नहीं दे रहे हैं, लेकिन हम इन्हें भी स्थापित करने का प्रयास कर रहे हैं। माननीय सांसदों का थोड़ा-थोड़ा विषय अगर झटके से दिख जाए तो मैं उसे एक बार पढ़ देना चाहता हूँ।
महोदय, अगर इस सदन में कोई सांसद हाथ के हुनर से पहुँचा है तो उसका नाम गोपाल शेट्टी है। टर्नर, फिटर, ट्रेनर का वह इतना अच्छा काम करते हैं, शायद इस सदन में कोई व्यक्ति उस काम को नहीं कर सकता है। हमारे एक और मंत्री सांपला जी हैं, वह करनी से मसाला तैयार करके दीवार भी बनाते थे, ऐसा लोगों ने बताया। हमारे पास भी स्किल्ड लोग हैं। ...(व्यवधान) यूके में, लंदन में एक आदमी आता है, जीन्स और शर्ट पहनकर एक घंटा रहता है और आपके तीन-चार काम करके जाता है और एक घंटे के लिए 100 डॉलर लेकर जाता है। वह आपके घर में कॉफी भी पीता है। हमें तो उस स्तर तक ले जाना है। हमारे यहाँ आता है तो पहले जूता खोलो, चप्पल खोलो, देखो कि यह कहाँ से आया है, इसका चेहरा कैसा दिख रहा है, इसके बारे में पता लगाओ कि ठीक आदमी है या नहीं, हम लोग उस ज़माने में हैं। लेकिन हमें भी उतनी मान्यता और गरिमा उसको देनी है।
मैं देश से अपील करूंगा कि इस तरह के जो लोग आएँ, जो प्लम्बर आएँ, जो घर में रिपेयर करने आएँ, अपने स्टाफ को कहिए कि पानी पिलाया कि नहीं, मिठाई खिलाई कि नहीं। उसको बैठाइए। अगर आप खाने की टेबल पर हैं तो खाने की टेबल पर बैठाइए। प्रधान मंत्री जी ने तय किया है कि आई.टी.आई. से पास आउट करने वाले बच्चों के लिए हम एक राष्ट्रीय कार्यक्रम करेंगे और जिस तरह से ग्रेजुएशन के लिए, पोस्ट ग्रेजुएशन के लिए, डॉक्टरेट के लिए गाउन पहनाकर कनवोकेशन होता है, हम अपने आईटीआई से पास होने वाले बच्चों के लिए उसी प्रकार का कनवोकेशन करेंगे। क्यों नहीं मान्यता देंगे? यदि प्लंबर यूरोप में एक घंटे की सेवा देता है तो 100 डॉलर या 8000 रुपये लेकर जाता है, हम 100 रुपये देने के लिए तैयार नहीं हैं। वह आता है, आपकी कद्र करता है, मेमसाहब से बात करता है, घर में आता है और आप उसको शक की निगाह से देखते हैं। यह वातावरण बदलना पड़ेगा, कई लोगों ने कहा कि माइंडसैट चेन्ज करना पड़ेगा। गोपाल शेट्टी जी ने कहा, विनायक राउत जी ने कहा। मैं आपको एश्योर करता हूँ कि मैं एक पोलिटीशियन हूँ और मुझे भी चुनाव लड़ना है। हम सबको चुनाव लड़ना है। हम सब सांसदों को अहम भूमिका निभानी है और उसके लिए हम सब सरकार में यह रास्ता ढूँढ़ रहे हैं कि सांसदों की अहमियत स्थापित होनी चाहिए, जो सबसे आवश्यक है, क्योंकि देश का प्रतिनिधित्व हम इस सदन में कर रहे हैं।
जितेन्द्र रेड्डी जी ने सर्टिफिकेशन के बारे में कहा। सर्टिफिकेशन का काम हमने शुरू कर दिया है। सर्टिफिकेशन ढंग से हो, एसैसर्स हों, उसके लिए हम लोगों ने काम शुरू कर दिया है। अभिषेक जी ने छत्तीसगढ़ की भूमिका और कई राज्यों के बारे में बताया। राजीव जी ने बहुत अच्छा भाषण दिया। फाइनैंशियल रिसोर्सेज़ के बारे में आपने कहा, जॉब ट्रेनिंग और कनवर्जैन्स के बारे में कहा। राज्यों को भी हमारे साथ चलना है, स्किल मिशन बनाकर चलना है। राज्यों को भी एक रूप में काम करना है। ऐसा नहीं है कि राज्य अपने मन से करें। केन्द्र और राज्य को एक तरह से चलना होगा और सर्टिफिकेशन की मान्यता होगी। राज्य को बोर्ड, शिक्षा बोर्ड, इन सबको इनकॉर्पोरेट करे। शॉर्टेज ऑफ ट्रेनर्स एक बड़ी समस्या है जिसको आपने उठाया। एनएसडीसी को हमने रीवैम्प किया। उसकी रीवैम्पिंग का प्रोसैस जारी है। कुछ अधिकारियों को बदलना पड़ता है। थोड़ा संकट था और आपके ज़माने के कुछ लोग ऐसे बैठे थे, तो इनको तो मुक्त करना ही था, हमने मुक्त कर दिया।
नीति आयोग के तहत मुख्य मंत्रियों की एक बैठक थी। प्रकाश सिंह बादल जी उसके अध्यक्ष हैं। उन्होंने बहुत अच्छी रिपोर्ट दी है और कई सारे विषय उसमें दिये हैं। हमारी सरकार और देश के प्रधान मंत्री ने उसके बारे में संज्ञान लिया है। थोड़ा सा ओवरलैपिंग बहुत सारे मंत्रालयों की होती है। क्योंकि एच.आर.डी. मिनिस्ट्री भी कई सारे स्किलिंग का काम करती है। वे पुराने मंत्रालय हैं। यूजीसी में 500 करोड़ और दिये हैं। आहिस्ता आहिस्ता आने वाले दिनों में मैं आग्रह कर रहा हूँ कि जो स्किलिंग का काम है, उसको एक जगह ही रहने दिया जाए। बहुत सारे स्थानों पर बहुत सा काम हो रहा है। जैसे अभी दीनदयाल उपाध्याय कौशल विकास केन्द्र दूसरे स्थान पर है, फुटवियर डिज़ाइन इंस्टीटय़ूट कहीं और है, गंगवार साहब के मंत्रालय का काम कहीं और है। आहिस्ता-आहिस्ता करते हुए चार-पाँच साल के भीतर हम चाहेंगे कि यह काम हो जाए। इसमें थोड़ा समय लगेगा। बहुत सारी योजनाएँ जिनकी आप चर्चा करते हैं, वह हमारे पास नहीं हैं। लेकिन देश के प्रधान मंत्री ने जो छोटी योजनाएँ हैं, उनके कनवर्जैन्स का एक मॉडल क्रियेट कर दिया है और स्टार वाली रिवार्ड स्कीम जो थी, उसको हम ग्रांट में कनवर्ट कर रहे हैं, उसको कैबिनेट में लेकर जाना है। डिग्निटी ऑफ लेबर के बारे में हमने चर्चा कर दी। स्किल यूनिवर्सिटी के बारे में भी चर्चा है, स्पष्टता के अभाव में हम उसको पूरा नहीं कर रहे हैं। पॉलिटैक्निक्स और इंजीनियरिंग कॉलेज अभी बंद हो रहे हैं। उन्होंने कहा है कि यहाँ पर हम अपना कौशल केन्द्र खोलना चाहेंगे। अगर ऐसा कोई स्ट्रक्चर मिलता है तो निश्चित रूप से हम उसके बारे में बात करेंगे।
अभी पोलिटैक्निक्स के बारे में बात हुई है कि इनमें आईटीआई सैन्टर्स खुल सकते हैं और जो 2500 ब्लाक्स में, 1500 ब्लाक्स में खोल रहे हैं, जो आईटीआईज़ खुलेंगे, उसमें हम ग्रांट के रूप में स्किलिंग के लिए पैसा देंगे। वह आईटीआई भी चलाए, स्किल भी चलाए और एप्रैन्टिसशिप से भी उसको जोड़े, इसका काम भी हम लोग कर रहे हैं। विश्वेश्वर रेड्डी साहब ने एप्रैन्टिसशिप के बारे में बात की। उसके बारे में हमने चर्चा की है। He mentioned about certification and said that even farm labourer should have a certificate. ये जो सैक्टर स्किल काउंसिल्स हैं, कृषि एग्रीकल्चर स्किल काउंसिल है, उसका काम है कि कृषि क्षेत्र में काम करने वाले लोगों को इस तरह का सर्टिफिकेट दें और इस सर्टिफिकेट की मान्यता हो, उसके लिए हम नेशनल स्किल्स क्वालिफिकेशन्स फ्रेमवर्क में काम कर रहे हैं। शंकर दत्ता साहब ने स्किल इन शॉर्ट टाइम, जयप्रकाश जी ने हैंडीक्राफ्तट्स के बारे में कहा था, कटौती प्रस्ताव था, वे शायद चले गए। शायद वे हमारी बातों से सहमत हो गए हैं, इसलिए चले गए हैं। हैंडीक्राफ्तट्स एक पारंपरिक कौशल है और हैंडीक्राफ्ट्स सैक्टर स्किल काउंसिल भी है। लेकिन यह सब काम बहुत सारे मंत्रालयों में चल रहा है। कई बार ऐसा लगता है कि यह सब हमारे ज़िम्मे है। डिम्पल जी ने बहुत सारे विषयों के बारे में चर्चा की और सब तथ्य हमने मैंशन कर दिये हैं। एस.डी.आई.एस. स्कीम के बारे में, उस योजना पर हम लोग पुनर्विचार कर रहे हैं और सैक्टर स्किल काउंसिल्स की भूमिका के बारे में और एन.एस.क्यू.एफ. के बारे में हम विचार कर रहे हैं।
चंदूमाजरा साहब ने कहा है, मैंने चर्चा कर दी है कि प्रकाश सिंह बादल जी के माध्यम से होगा। उन्होंने कहा कि अगर कोई भी सांसद देखता है कि बड़ा इनफ्रास्ट्रक्चर बेकार हो और सरकार का पैसा लाना है तो उनको लगता है कि इतना बड़ा इफ्रास्ट्रक्चर है, वह जगह मिल जाती तो हम उसमें ट्रेनिंग शुरू कर सकते थे। आहिस्ते-आहिस्ते करके अगर अच्छे स्थान ऐसे हैं, जो पब्लिक सैक्टर अंडरटेकिंग के पास या राज्य सरकार के पास हैं, अगर जगह मिलेगी तो केन्द्र की सरकार या राज्य सरकार पैसा ट्रेनिंग पार्टनर्स के माध्यम से खर्च करके वहां पर स्थापित करने की कोशिश करेगी, इसलिए आप भी ध्यान में रखिये कि हम भी उसको कर सकते हैं। इसके अलावा शॉर्टेज ऑफ ट्रेनर्स के बारे में अरुण जी ने कहा था, राधेश्याम बिस्वास जी ने नोर्थ ईस्ट के बारे में कहा था। नोर्थ ईस्ट में सचमुच आई.टी.आई. की कमी है, ट्रेनिंग की कमी है, उसके बारे में हम पूरा कर रहे हैं।
दुष्यन्त जी ने कहा था और कौशलेन्द्र जी ने कहा था कि स्किल सैण्टर आपके यहां हर जिले में आपके यहां बनेगा, अच्छा बनेगा, सुन्दर बनेगा, बिहार में कुछ प्रारम्भ हुए, कुछ जिलों में नहीं प्रारम्भ हुआ है, उसकी शुरूआत कर रहे हैं, लेकिन नये सिरे से हम लोग अच्छा काम करने का प्रयास कर रहे हैं। प्रेमचन्द्रन जी ने बजट के बारे में कहा है, We understand; we appreciate; that is a big concern. I would just like to tell you, I understand what you say. But we are not talking about high-end skills. A beautician course where a small girl can get trained for a beautician course can take place in 30 days also. She can get a kit of Rs. 25,000. You are from Kerala. It is because, they are general duty assistants. It is not in the Nursing Council. बहुत सारे काउंसिल्स के होते हैं, लेकिन जनरल डय़ूटी असिस्टेंट्स, हम वहां गये थे, अमृता इंस्टीटय़ूट है, अम्मा इंस्टीटय़ूट ऑफ मैडीकल साइंसेज़, आज डॉक्टर्स की ट्रेनिंग, नर्सिंग की ट्रेनिंग मैनीक्वींस पर होती है। एक मैनीक्वींस ऐसे पड़ा था, जिसकी कीमत एक करोड़ है और वह लेटा हुआ, प्लास्टिक का मैनीक्वीन था, उसने कहा कि आप इससे बात कीजिए। उसको हार्ट अटैक हुआ था, वह मैनीक्वीन था, मृत था, आर्टीफिशियल था, उसको मैंने दबाकर पूछा, उसको मैंने हिन्दी मोड में डाल दिया, मैंने छूकर पूछा कि तुम्हारी तबियत कैसी है, उसने कहा-मैं ठीक हूं। क्या हो गया, मेरी छाती में बहुत दर्द है। ट्रेनिंग का लेवल यहां तक चला गया है कि वह मरीज बात करता है, जो आर्टीफिशियल है और वह बताता है कि किसने पैसा दिया, अम्मा ने पैसा दिया, मेरा उपचार हो रहा है। हर चीज़ आज स्किल से जुड़ी हुई है, बड़ा मैडीकल स्किल भी जुड़ा हुआ है। पैसे के बारे में पप्पू यादव जी ने कहा था, हमने बताया कि पैसे की बड़ी जरूरत है। पी.डी.राय साहब ने एन.एस.टी.सी. के बारे में कहा, प्राइवेट पब्लिक पार्टनरशिप, मैंने उसको एक्सप्लेन कर दिया है। सौगत राय जी ने भी कई विषय कहे, यू.एस.एस.आर. के बारे में कहा, यह बहुत जरूरी था। शुरू से यह तय करना चाहिए कि आठवीं के बाद बच्चों को सीधे स्कूली शिक्षा में वहीं से ट्रेनिंग देकर के रास्ता ढूंढना चाहिए। पहले नहीं हुआ, अब हम कर रहे हैं, थोड़ा वक्त ज्यादा लगेगा, लेकिन हम लोगों ने शुरूआत कर दी है। आपको भी इसमें थोड़ी सहमति देनी होगी कि हमसे भी छूट गया है, लेकिन आप मानने के लिए तैयार नहीं हैं, इसमें कठिनाई होती है।
स्किल सर्टीफिकेशन, सौगत राय जी ने कहा, लेकिन इसके बाद मैं अन्तिम रूप से यह कहना चाहूंगा कि देखिये, दस वर्ष की स्कूली शिक्षा बहुत जरूरी है, 12 वर्ष की स्कूली शिक्षा बहुत जरूरी है, लेकिन दस वर्ष की स्कूली शिक्षा या 12 वर्ष की स्कूली शिक्षा आपको रोजगार के लायक नहीं बना सकती, लेकिन दस वर्ष की स्कूली शिक्षा और 10 हफ्ते की ट्रेनिंग आपको रोजगार दिला सकती है, प्रेमचन्द्रन जी, 12 वर्ष की स्कूली शिक्षा 12 हफ्ते की ट्रेनिंग के साथ शायद आपको रोजगार के दरवाजे तक पहुंचा सकती है, यह हमारा प्रयास है। When we are talking about Make in India, Make in India is absolutely going to happen. It has started happening. But Make in India will not happen unless and until we have makers in India and that is the mission of this Ministry to create makers in India और इसके लिए हम प्रयत्नशील हैं।
महोदय, विस्तार से मैंने बहुत से विषयों को छूने का प्रयास किया, लेकिन बहुत से विषय रह गये हैं। यह हमारी शुरूआत है, मैंने पहला कदम रखा है और मैं जितना कुछ कह रहा हूं, यह कुछ सोच-विचार का भाग है, पहला कदम है, इसलिए मैं जानता हूं, जिस तरह से सांसद मुझसे बार-बार पूछते हैं कि मेरे यहां क्या हो रहा है। कभी हेमा मालिनी जी पूछती हैं, कभी दुष्यन्त जी पूछते हैं, कभी चौधरी जी पूछते हैं, सब लोग पूछते हैं, आप पूछते हैं और जिस प्रकार से सभी पूछते हैं और खड़गे साहब तो उठकर अभी प्रश्न करेंगे, खड़गे साहब के यहां प्रेमचन्द्रन जी भी हैं, कौशलेन्द्र जी हैं, रेड्डी साहब हैं, अनुराग जी भी हैं, सब लोग हैं, चौबे जी हैं, हम कोशिश करेंगे कि बुन्देलखण्ड में, देश के कोने-कोने में देश के प्रधानमंत्री जी का निर्देश है कि देश के कोने-कोने में कौशल विकास का जाल बिछा दो, ताकि किसी गरीब का बेटा, किसी मजदूर का बेटा, कोई कमजोर इस देश में छूट न जाये।
आप सब लोगों ने इस बजट का समर्थन किया, आप सब लोगों ने इस विषय पर चर्चा की, आपका आधा विभाग मेरे पास आ गया है, मैं आप सब का आभार व्यक्त करते हुए मेरे विभाग के बजट को पारित कराने का आग्रह करता हूं।
श्री मल्लिकार्जुन खड़गे: सत्य से दूर बातें भी सदन में रखना ठीक नहीं है। जो सत्य है हम मान लेंगे। ...(व्यवधान) लेकिन असत्य बात को आपको भी नहीं मानना चाहिए, हमें भी नहीं मानना चाहिए। एक तो यह है कि देश में कुछ भी नहीं हुआ, सब अभी दो साल में ही हो रहा है। ...(व्यवधान) थोड़ा सुनिए। ...(व्यवधान)
माननीय सभापति : प्लीज शांति रखें।
…( व्यवधान)
माननीय सभापति : खड़गे जी बहुत वरिष्ठ नेता हैं। इनको शांति से सुन लें।
…( व्यवधान)
श्री मल्लिकार्जुन खड़गे : महोदय, इनको जरा पेसेंस का कोई इंजेक्शन है तो दे दीजिए। स्किल डेवलपमेंट, मेरा पहला निवेदन है कि चाहे कोई भी मंत्री हो स्किल डेवपलमेंट के, लेकिन इनको कैबिनेट मंत्री रहना जरूरी है। ...(व्यवधान) यह क्यों जरूरी है? ...(व्यवधान) आप सुनिए। मजाक नहीं। ...(व्यवधान) आज रूडी हो सकते हैं, कल दूसरा कोई भी हो सकता है। स्किल डेवलपमेंट को सेपरेट कैबिनेट मिनिस्टर की आवश्यकता इसलिए है कि 21 डिपार्टमेंट्स, 21 मिनिस्ट्रीज इसमें आती हैं। उन 21 में से 19 लोग कैबिनेट मिनिस्टर हैं। 19 कैबिनेट मिनिस्टर्स को क्या आप बुलाकर बात करेंगे? क्या आपके आफिसर को वे लोग बुलाकर बात करेंगे? इसीलिए अगर 21 डिपार्टमेंट में अगर कुछ कोआर्डिनेशन होना है, अगर एक दूसरे से मिलकर बात करनी है, क्योंकि हमेशा इनफीरिएटी कांप्लेक्स रहता है, आप इंडिपेंडेंट चार्ज भी रहने दो, आप अपने आफिस में मीटिंग में सबको नहीं बुला सकते। जो कैबिनेट मिनिस्टर है, वहां बुलाओ, मैं आता हूं बोलकर जाना पड़ेगा। आपको 21 मिनस्टर्स के पास जाना पड़ेगा। इसीलिए इस स्किल डेवलपमेंट को कैबिनेट दर्जे का मिनिस्टर होना चाहिए। चाहे आप हों, चाहे दूसरे हों, चाहे तीसरे हों, लेकिन यह जरूरी है।
दूसरी चीज, आप यह भी जानते हैं कि आईटीआई, पॉलिटेक्निक, इंजीनियरिंग, आईआईटीज, मल्टी परपज हाईस्कूल्स, ये सारी चीजें प्लानिंग डिपाटमेंट ने इसीलिए उस वक्त प्रारम्भ कीं, हो सकता है एकदम पचास लाख या एक करोड़ नहीं हुए होंगे, लेकिन प्रारम्भ में स्वतंत्रता मिलने के बाद, आजादी के बाद यह कल्पना स्किल डेवलपमेंट के लिए थी। आईटीआई की स्थापना, पॉलिटेक्निक की स्थापना, मल्टी परपज हाईस्कूल्स की स्थापना इसलिए ही की गई थी। इसलिए यह आपका कोई नया आइडिया नहीं है। ...(व्यवधान) अंग्रेजी भी अंग्रेज ही लाए।
स्माल स्केल इंडस्ट्रीज डेवलपमेंट कारपोरेशन में टूल्स एंड ट्रेनिंग, आप सुन रहे हैं? ...(व्यवधान) क्या सुन रहे हैं? ...(व्यवधान)
माननीय सभापति : मंत्री जी सुन रहे हैं।
…( व्यवधान)
श्री मल्लिकार्जुन खड़गे: आप तो उधर देख रहे हैं। ...(व्यवधान) यह अच्छी बात नहीं है। स्माल स्केल इंडस्ट्रीज डेवलपमेंट कारपोरेशन में टूल्स एंड ट्रेनिंग डिपार्टमेंट पहले से ही है। उस टूल्स एंड ट्रेनिंग डिपार्टमेंट में, जब मैं वहां पर इंडस्ट्री मिनिस्टर था, मैंने हर जिले में एक टूल्स एंड ट्रेनिंग बनाया, जब बीस डिस्ट्रिक्ट थे। यह क्यों बनाया? आप जैसा बोलते हैं कि स्किल वर्कर होता है, कम से कम या तो अपने पैरों पर खड़े होकर उसे काम मिलता है या कम से उसके पास टूल्स एंड ट्रेनिंग का सर्टिफिकेट रहा तो उसे कभी न कभी बाहर नौकरी मिलती है।
तीसरी चीज, कौशल विकास योजना आपको मालूम है कि यह पहले से ही है। कौशल विकास योजना में ही ये तीन सेक्टर बनाए थे, स्किल डेवलपमेंट काउंसिल, स्किल डेवलपमेंट अथारिटी, स्किल डेवलपमेंट कारपोरेशन, ये तीनों बनाने के बाद ही काम शुरू हो गया। लेकिन आप बोल रहे हैं कि कुछ भी नहीं था, हमारे प्राइम मिनिस्टर के आने के बाद ही सब शुरू हुआ है। ऐसा नहीं है। ...(व्यवधान) यह तो था। इसको आप तेजी के साथ चलाने के लिए एक मिनिस्ट्री किए होंगे। मैं एक ही उदाहरण आपके सामने रखता हूं, आप वेरीफाई कर लीजिए। पचास साल में इंक्लूडिंग एनडीए गवर्नमेंट सिर्फ 5 हजार आईटीआई मेरे लेबर मिनिस्टर बनने तक थे। मैंने चार साल में पांच हजार आईटीआई बनाकर दिया। आप उनसे पूछिए, पंजाब के चीफ मिनिस्टर खुद दो बार मेरे पास आकर दस-दस आईटीआई के लिए कोशिश करते थे। हमने बोला जितने आईटीआईज प्राइवेट देना है, रूल्स के मुताबिक उनको दीजिए। अगर कुछ कमियां हैं तो हमारे ऑफिसर्स वहां जाकर रेक्टिफाई करेंगे। मैं इसलिए बोल रहा हूं कि कोशिश करना जरूरी है। आपको दिक्कत इसलिए है कि सारे डिपार्टमेंट्स आपके कंट्रोल में नहीं हैं। दूसरी बात यह है कि ये डिपार्टमेंट्स, इनको डाउनग्रेड करने की वजह से आपकी बात, आपके ऑफिसर्स की बात या आपके सेक्रेट्री की बात भी कोई नहीं मानता है। इसलिए ये सारी चीजें करना जरूरी है। सबसे ज्यादा ट्रेनर्स ट्रेनिंग सेन्टर, हम कोशिश की चंद स्थापना करने की, इसलिए इसको करना भी जरूरी है। सिर्फ इतना ही नहीं कह सकते हैं कि हमारे प्रधानमंत्री जी बोले हैं, आप बहुत बोले हैं। उधर अम्मा, इधर अप्पा।...(व्यवधान) वे उठते ही उधर अम्मा बोलते हैं और आप उठते ही नरेन्द्र मोदी जी, बोलते हैं।...(व्यवधान) मोदी जी लीडर हैं, इस देश के प्रधानमंत्री हैं, कितने बार आप बोलेंगे, उधर अम्मा इधर अप्पा।...(व्यवधान) कम से कम इधर ध्यान दीजिए, आप काम कीजिए।...(व्यवधान) हम सभी कॉपरेट करते हैं।...(व्यवधान)
HON. CHAIRPERSON: I shall now put cut motion No.1 moved by Shri Jai Prakash Narayan Yadav to the vote of the House.
The cut motion was put and negatived.
HON. CHAIRPERSON: I shall now put cut motion No. 2 moved by Shri Shailesh Kumar to the vote of the House.
The cut motion was put and negatived.
HON. CHAIRPERSON: I shall now put the Demand for Grant relating to the Ministry of Skill Development and Entrepreneurship to the vote of the House.
“That the respective sums not exceeding the amounts on Revenue Account and Capital Account shown in the column of the Order Paper be granted to the President of India, out of the Consolidated Fund of India, to complete the sums necessary to defray the charges that will come in course of payment during the year ending the 31st day of March, 2017, in respect of the head of Demand entered in the Second column thereof against Demand No. 81 relating to the Ministry of Skill Development and Entrepreneurship.” The motion was adopted.
HON. CHAIRPERSON: The Demand for Grant relating to the Ministry of Skill Development and Entrepreneurship is passed.
The House stands adjourned to meet again tomorrow, Friday, 29th April, 2016 at 11 o’clock.
19.28 hours The Lok Sabha then adjourned till Eleven of the Clock on Friday, April 29, 2016/Vaisakha 9, 1938 (Saka).
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