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Lok Sabha Debates

The Motion For The Consideration Of The Special Protection Group (Amendment) ... on 27 November, 2019

Seventeenth Loksabha > Title: The motion for the consideration of the Special Protection Group (Amendment) Bill, 2019.

माननीय अध्यक्ष : आइटम नंबर16, विशेष संरक्षा ग्रुप (संशोधन) विधेयक, 2019.

          माननीय गृह मंत्री जी ।

 

गृह मंत्री (श्री अमितशाह): अध्यक्ष महोदय, मैं प्रस्ताव करता हूं :

“किविशेष संरक्षा ग्रुप अधिनियम, 1988 काऔर संशोधन करने वाले विधेयक पर विचार कियाजाए ।”           महोदय, मैं एक महत्वपूर्ण विधेयक पर संशोधन लेकरआज इस सदन के सामने उपस्थित हुआ हूं । स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप के कानून के अंदर एक बदलाव लेकरआज मैं इस सदन के सामने आया हूं । महोदय, एसपीजी का गठन, वर्ष 1985 में एक बीरबल नाथ कमेटी बनी थी, जिसे प्रधानमंत्री जी की सुरक्षा पर विचार करनेके लिए बनाया गया था । उसने कुछ अनुशंसाएं भी की थीं, जिसके आधार पर एसपीजी का गठन हुआ था । शुरुआत में वर्ष 1985 से1988 तकएसपीजी एक अधिशासी आदेश के तहत काम करती थी । वर्ष 1988 में यह कानून बना । इस कानून के तहत स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप काम करने लगा । वह प्रधान मंत्री और उनके परिजनों की सुरक्षा के लिए काम करने लगा ।
          मान्यवर, इसके बाद वर्ष 1991 औरवर्ष 1994 में इसमें संशोधन कियागया । वर्ष 1999 में इसमें संशोधन कियागया और वर्ष 2003 में भी इसमें संशोधन हुआ । आज फिर से मैं इसमें एक संशोधन लेकरआया हूं जो मूल एक्ट की भावना के अनुरूप है । इसके निष्कर्ष के बारेमें मैं सदन को बताना चाहता हूं ।यह बिल आपके माध्यम से सभी माननीय सदस्यों के पास पहुंच गया है । इस संशोधन के बाद यह एक्टसिर्फ प्रधान मंत्री और उनकेपरिवार के सदस्य, जोउनके साथ अधिकृत प्रधान मंत्री निवास पर रहतेहैं, उनके लिए ही उपलब्ध होगा । दूसरा, कोई पूर्व प्रधान मंत्री और उनका परिवार, जोसरकार द्वारा आबंटित किए गए आवासपर रहते हैं, उनको पांचसाल की अवधि तक यह एसपीजी प्रोटेक्शन उपलब्ध होगा । इस प्रकार का कानून में संशोधन लेकर आज मैं यहां आया हूं ।
          मान्यवर, हमारे देश ने मल्टी पार्टी डेमोक्रटिक सिस्टम में पार्लियामेंटरी डेमोक्रेटिक सिस्टम को स्वीकार किया है । हमारे संविधान के अनुरूप हेड ऑफ गवर्नमेंट प्रधान मंत्री होते हैं । प्रधान मंत्री जी के पद के अनुरूप, उनके काम के अनुरूप और उनकेकार्यालय को सुरक्षित करने के लिए एक स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप बनाया गया । वह इसलिए जरूरी है कि हमारे देश में प्रधान मंत्री और पूर्व प्रधान मंत्री जी की हत्या हुई । यह देश के लिए बहुत बड़ी क्षति थी और इसलिए एसपीजी प्रोटेक्शन ग्रुप बनाया गया । इसकी चुस्तता और योग्यता बनाए रखने के लिए भी यह कानून जब लाया गया, तबबनाया गया ।
          उसके बाद अलग-अलग समयों में इसको डाइलूट किया गया है और आज वह कानून इस संशोधन के साथ पूर्ववत हो रहा है कि एसपीजी का सुरक्षा कवच केवल और केवलप्रधान मंत्री और पूर्व प्रधान मंत्री का जो परिवार उनके साथ रहता है, उनको मिलेगा । मान्यवर, एसपीजी कवर इसलिए जरूरी है, क्योंकि प्रधान मंत्री जी के नेतृत्व में सरकार और सारीव्यवस्थाएं काम करती   हैं । देश को सुरक्षित करने का काम करती हैं । कई कठोरफैसले सामाजिक सुधार हेतु देश की आंतरिक सुरक्षा से जुड़ेहुए और कई देश की बाह्य सुरक्षा से जुड़ेहुए फैसले लेते हैं । उस वक्तउनकी सुरक्षा के खतरेको जीरो करने के लिए, उसको संपूर्ण रूप से निर्मूल करने के लिए स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप की जरूरत है । इसीलिए बीरबलनाथ कमेटी में इसकी अनुशंसा की थी, जिसको बाद में कानून का स्वरूप भी दिया गया था । इसकी जो भावना है, वहउसी के नाम में ही निहित है । इसकी नामावली में इसका मूल अर्थ समाहित किया गया है ।
          मान्यवर, मैं यह स्पष्ट कर देनाचाहता हूं कि इसकीपूरी व्यवस्था पद के अनुसार बनाई गई है । जनता के अंदरऔर अखबारों में जब से बिल की चर्चा है, तबसे यह भ्रांति है कि एसपीजी सिर्फ सुरक्षा का काम करता है । मैं उसके डिटेल में जाना चाहता हूं कि एसपीजी प्रधान मंत्री जी की, उनके आफिसकी, उनके कम्यूनिकेशन की और सबकी सुरक्षा का काम करता है ।
प्रो. सौगत राय (दमदम) : आपजवाब के समय यह बोलिएगा । अभी तो इस पर डिबेट           होगी ।…(व्यवधान)
श्री अमितशाह : आपमुझे सुने बगैर ही रिजेक्ट कर देंगे । मुझेइसका तात्पर्य तो बताने       दीजिए ।…(व्यवधान) अभी कुछ नहीं बताया है । मान्यवर, इसके लिए स्पेशल शब्द का उपयोग कियागया है । यह केवल और केवलप्रधान मंत्री जी की सुरक्षा के प्रति इंगित करताहै । श्रीमती इंदिरा गांधी जी की हत्या के बाद जो बीरबालनाथ समिति बनी थी, उसने कहा था कि एक अत्याधुनिक प्रशिक्षित विशेष बल का प्रधान मंत्री जी की सुरक्षा के गठन करना चाहिए । स्पेशल शब्द यह इंगित करताहै कि यह प्रधान मंत्री जी की सुरक्षा के लिए हैं । प्रोटेक्शन शब्द में केवल फिजिकल सिक्योरिटी की बात नहीं है । प्रधान मंत्री जी का पद, उसकी गरिमा, प्रधान मंत्री जी का कार्यालय, उनका आरोग्य और उनके कम्यूनिकेशन यह सभी चीजों की चिंता करताहै । प्रधान मंत्री कार्याध्यक्ष होते हैं, हेड ऑफ द गवर्नमेंट होते हैं । इसके लिए प्रोटेक्शन शब्द का प्रयोग कियागया है । ग्रुप से मतबलएक एलीट ग्रुप होना चाहिए । कॉम्पैक्ट, एलीट और विशेष प्रकार से प्रशिक्षित यूनिट होना चाहिए, जिसका कार्यकलाप इस तरह से किया जाएगा कि इनकीचुस्तता में कहीं पर भी डाइलूशन नहीं होगा । इस प्रकार से एसपीजी को बनाया गया है ।
          मान्यवर, जहां दुनिया भर की बात करें, तोदुनिया में कई देशों के अंदरउनके राष्ट्राध्यक्षों के लिए अलग-अलग प्रोटेक्शन ग्रुप बने हुए हैं । वे ग्रुप दुनिया में सभी जगहों पर केवलऔर केवल राष्ट्राध्यक्षों की सुरक्षा का ध्यान रखतेहैं । उनकी कम्यूनिकेशन, उनका ऑफिस, उनके काम करने की जगह उन सभी की सुरक्षा की व्यवस्था करते हैं । जैसे अमेरिका में यूएस सीक्रेट सर्विस है, इजराइल, फ्रांस, इंग्लैंड, इनसभी जगहों पर इस प्रकार की व्यवस्था है, जोकेवल और केवल जो राष्ट्राध्यक्ष हैं, उनके काम की चिंता करती है ।
          मान्यवर, मैं इसीलिए आज इस बिल को लेकरसदन में आया हूं । सौगत दा का कहना है कि मैं चर्चा के बाद में जवाब दूं ।…(व्यवधान) हां, मैं बाद में जवाब दूंगा । मगर इसके पीछे केवल इतना उद्देश्य है कि स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप और इफिशियंट बने । इसके साथ ही स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप के काम में कोई भी कोताही न हो । मैं आज इस प्रकार के उद्देश्य के साथ इस बिल को लेकरआया हूं । मेरा यह अनुरोध है कि सभी माननीय सदस्य अपने-अपने विचार इस पर रखें और उसकेबाद आप सभी लोग इसको स्वीकार करें ।
माननीय अध्यक्ष : प्रस्ताव प्रस्तुत हुआ:
“किविशेष संरक्षा ग्रुप अधिनियम, 1988 काऔर संशोधन करने वाले विधेयक पर विचार कियाजाए ।” श्री मनीषतिवारी (आनंदपुर साहिब): अध्यक्ष जी, आजहम बहुत ही संवेदनशील विधेयक, जोप्रधान मंत्री की सुरक्षा से जुड़ाहुआ है, उसके ऊपर विचार करने के लिए यहां एकत्रित हुए हैं । महोदय, मैं शुरूमें बहुत जिम्मेदारी से एक बात कहना चाहूंगा कि इतिहास इस बात का गवाहहै और तारीख इस बात की गवाह है कि जब-जब नकारात्मक कदम उठाए गए हैं, उसका बहुतबड़ा खामियाजा इस देश को भुगतना पड़ा है ।
          अध्यक्ष जी, आपकी अनुमति से मैं शुरू से शुरूकरना चाहता हॅूं । हम किसीव्यक्ति को या सरकार किसी व्यक्ति को सुरक्षा क्यों प्रदान करती है? आमनागरिक को पुलिस के माध्यम से सुरक्षा प्रदान की जातीहै । पूरे देश भर में पुलिस थानों का प्रबंधन किया गया है । वह जो आवाम है, उसको सुरक्षा प्रदान करता है । फिर सरकार यह इंगित करतीहै कि कुछ ऐसे लोग हैं, जिनको सरकार की तरफ से विशेष सुरक्षा देने की जरूरत है । वह जो इंगित करनेका काम है, वहथ्रेट प्रिसेप्शन के माध्यम से किया जाता है कि कुछ खुफिया तंत्र या पुलिस एक थ्रेट असेसमेंट करती है, हरव्यक्ति का, औरथ्रेट असेसमेंट के हिसाब से किसी को एक्स, किसी को एक्स-प्लस, किसी को वाई, किसी को वाई प्लस, किसी को ज़ेड, किसी को ज़ेड प्लस और किसीको एसपीजी की सुरक्षा प्रदान की जातीहै । मैं आज एक सवाल पूछना चाहता हॅूं कि यह जो थ्रेट असेसमेंट है, यहक्या एक परफेक्ट साइंस है? इसका जवाबनकारात्मक है । इसका जवाब न में है । मैं इसलिए यह बात कहता हॅूं कि अमरीका के पूर्व राष्ट्रपति – जॉन एफ. कैनेडी ने एक बहुत बुनियादी बात कही थी । मैं आपकी अनुमति से कोट करता हॅूं ।
“That if anyone wants to do it, no amount of protection is enough. All a man needs is his willingness to trade his life for mine.” यही कारण है कि अगर आप इतिहास की तारीख में जा कर देखें – अब्राहम लिंकन, महात्मा गांधी, जॉन एफ.कैनेडी, रॉबर्ट कैनेडी, मार्टिन लूथर किंग जूनियर, ओलॉफ पामे, श्रीमती इंदिरा गांधी, श्री राजीव गांधी, बेनज़ीर भुट्टो, शेख़ मुजीबुर रहमान, सरदार बेअंत सिंह, अनवर सदात, इतसैक रबीन, राष्ट्रपति राणासिंघे प्रेमदासा, औरअनेक ऐसे लोग जो सार्वजनिक जीवन में हैं, उनकी समय-समय पर हत्या की गई । क्योंकि उन्होंने जो निर्णय लिए थे, याजब वे दफ्तर में थे, याउनके दफ्तर में होते हुए, उससे कुछ लोग पीड़ित थे और उन्होंने यह फैसला कियाकि उनकी वे जान लेंगे, उनकी वे हत्या करेंगे । अध्यक्ष जी, यहजो थ्रेट असेसमेंट की सारीप्रक्रिया है, यहएक बहुत ही सब्जेक्टिव प्रक्रिया है । इस सदन में बहुत सारे ऐसे सदस्य हैं, जिनको सरकार की तरफ से सुरक्षा प्रदान की गई है ।
अध्यक्ष जी, मैं आपकोअपना व्यक्तिगत अनुभव बताता हॅूं । सन् 1984 में जब आतंकवादियों ने मेरेपिता की हत्या की तो हमको सुरक्षा प्रदान की गई । सन् 1984 सेले कर सन् 1990 तकवह सुरक्षा चली । चंडीगढ़ में हमारा जो घर था, वहऐसा लगता था कि जैसे सीआरपीएफ की छावनी हो । सन् 1990 में सरकार बदलीऔर रात में ही सारीसुरक्षा गायबहो गई । एक भी सुरक्षाकर्मी नहीं बचा । उसके बाद सन् 1991 में सरकार बदलीऔर हमारी फिर से शुरक्षा शुरू हो गई । इस सदन में कई ऐसे सदस्य होंगे, जिनका ऐसा ही अनुभव रहा होगा कि यह जो थ्रेट असेसमेंट है, यहएक साइंटिफिक और एक ऑब्जेक्टिव प्रक्रिया न हो कर एक पूरीतरह से राजनैतिक प्रक्रिया बन चुकीहै ।        
हमारे माननीय गृह मंत्री जी जिक्र कर रहे थे कि स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप का गठन कैसे हुआ और बहुतदर्दनाक और दुर्भाग्यपूर्ण परिस्थितियाँ थीं, जबपूर्व प्रधान मंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी जी की हत्या की गई और उसके बाद यह फैसला हुआ कि भारत के प्रधान मंत्री को, जोशीर्ष पदों पर लोग बैठे हैं, उनकी सुरक्षा का एक बहुत ही चुस्त-दुरुस्त इंतजाम करना चाहिए । गृह मंत्री जी ठीक कह रहे हैं कि बीरबल नाथ समिति बनी । बीरबल नाथ समिति ने सिफारिश की और उस सिफारिश के तहत एक स्पेशल प्रोटेक्शन यूनिट का गठन किया गया । एक एग्जिक्यूटिव ऑर्डर के द्वारा, एकअध्यादेश के द्वारा उसकागठन किया गया । उसके पीछे मंशा यह थी कि जब प्रधान मंत्री संवेदनशील निर्णय लेते हैं, जिनका एक दूरगामी राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय प्रभाव पड़ता है तो उनकी सुरक्षा इतनी चुस्त-दुरूस्त होनी चाहिए कि कोई व्यक्ति उनको किसी तरह की हानिन पहुँचा सके । यहाँ पर मैं एक सवाल पूछना चाहता हूँ और वह सवाल इसलिए महत्वपूर्ण है कि क्या एक प्रधान मंत्री को या उसके परिवार को जब वह पद से हट जाता है, तोजो उसने निर्णय लिए होते हैं क्या उनकी वजह से जिन लोगों को क्षति पहुँचती है या जिनको लगता है कि उनको क्षति पहुँचती है, क्या वह चुनौती खत्म हो जातीहै? अध्यक्ष जी, इसका जवाबहै कि वह चुनौती खत्मनहीं होती, क्योंकि जो लोग किसी को मारना चाहते हैं, वहउस समय की प्रतीक्षा करते हैं कि जब सुरक्षा उतनी चुस्त-दुरुस्त न हो और उनके जो इरादे हैं, उनको वह पूरा कर सके ।यह एक बहुत महत्वपूर्ण चीज है, जोइस सदन को अपनेसंज्ञान में लेनी चाहिए । 18 फरवरी, 1985 कोबीरबल नाथ समि‍तिकी रिपोर्ट आई । 8 अप्रैल, 1985 कोस्पेशल प्रोटेक्शन यूनिट का गठन किया गया । श्री सुब्रमण्यम जो जॉइंट डायरेक्टर थे, वीआईपी सिक्योरिटी के इंटेलिजेंस ब्यूरो में, उनको इसकापहला डायरेक्टर बनाया गया । वर्ष 1988 में एसपीजी का कानून बना । उसका वर्ष 1991 में संशोधन हुआ, वर्ष 1994 में संशोधन हुआ, वर्ष 1999 में संशोधन हुआ, फिर वर्ष2003 में संशोधन हुआ और अब वर्ष2019 में संशोधन होनेजा रहा है । वर्ष 1989 में जिस प्रधान मंत्री की सुरक्षा के लिए श्रीमती इंदिरा गांधी की हत्या के बाद यह कानून बनाया गया, स्व. श्री राजीव गांधी ने 29 नवम्बर, 1989 कोप्रधान मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया । 2दिसम्बर, 1989 तकवह केयरटेकर प्रधान मंत्री रहे और उसकेबाद इस देश में एक नए प्रधान मंत्री आ गए । यह घटनाक्रम बताना इसलिए जरूरी है, क्योंकि 4 दिसम्बर, 1989 कोकैबिनेट सेक्रेटरियट में एक बैठकहोती   है । मैं उसके कुछ अंश आपको पढ़कर सुनाना चाहता हूँ, क्योंकि इसी सदन में जब 13मई, 1993 कोइसी चीज के ऊपर चर्चा हुई थी तो उसकी जो प्रोसीडिंग है, उसमें दर्ज है । A meeting was held on 4th of December, 1989 when Shri Seshan was the Cabinet Secretary and Shri R. Vasudevan was the Special Secretary to PM. Shri V.K. Jain, Shri V.J. Vaid, Shri Vijay Karan, Shri Devender Singh and Shri Ashok Darbari participated in the meeting.
          What was decided? The subject was, ‘Security Arrangements for Former Prime Minister’. Kind reference is invited to the discussion held by the Cabinet Secretary on 4th December, 1989 at 12 noon regarding security arrangements for Prime Minister and for former Prime Minister.
          As directed, further discussions were held on 4th December, 1989 at 3.30 pm in the Office of Director SPG about the security arrangements for former Prime Minister. This discussion was attended by Director SPG,                              JD(IB), Additional Commissioner of Police(S&T)Delhi and Joint Secretary (Security) in the Cabinet Secretariat.
JS(IB) stated that the threat perception in respect of the former Prime Minister has changed. Since he is no longer the Head of the Government, he now faces danger arising out of personal vendetta. Speaker, Sir, this is important.
The security arrangements to be provided to him now will have to take this fact into account. IB will be sending a fresh threat assessment for the former Prime Minister very soon. The instruction of the Government is that the former Prime Minister should be provided the same level of protection. In the context of the above, the standard aspects of security relating to Prime Minister have been listed in the enclosed broad sheet and the commonly agreed views of IB, SPG and Delhi Police regarding security arrangements to be provided to former Prime Minister have been indicated against each item of security arrangement. The above indicates that while the arrangements for close protection and for guarding the residence will be the same as before,  that means the SPG will continue to guarding him, the arrangements for the Delhi functions and tours outside Delhi will have to be modified in view of the changed situation. It was agreed that the security for the family will be maintained at the same level.
सर, यह4 दिसम्बर, 1989 को, जबस्वर्गीय श्री टी.एन. शेषन कैबिनेट सेक्रेटरी थे, जोइस देश के चीफ इलेक्शन कमिश्नर भी रहे, उनकी अध्‍यक्षता में यह बैठकहुई थी और यह फैसला लिया गया था ।
          अध्यक्ष जी, दुर्भाग्यपूर्ण बात है कि सरकार नई थी । 30जनवरी, 1990को एक फैसला और लिया गया,पहले जो कैबिनेट सेक्रेटरी थे,वे तब तक बदल चुके थे । उन तत्कालीन कैबिनेट सेक्रेटरी ने नए प्रधान मंत्री को एक नोट लिखा ।        
On the instructions of Shri Seshan, then Cabinet Secretary the SPG was asked to continue providing security to Shri Rajiv Gandhi. This was a purely temporary and ad hoc arrangement. According to the SPG Act, this force is meant only for the security of the Prime Minister and his family members. Its charter cannot be extended to cover the former Prime Minister or anyone else even by an executive order.
          The security of SPG provided to Shri Rajiv Gandhi continues to be as in the past. Thus, as many as 2500 SPG personnel and 240 CRPF personnel are on duty with him at present. It is not possible to spare such a big manpower out of the existing strength of the SPG on a continuous basis.
अध्यक्ष जी, यहजो एक पंक्ति है, यहबहुत ज्यादा जरूरी है, क्योंकि यही लॉजिक दिया गया है । जब मैं इस बिल का ‘स्टेटमेंट ऑफ ऑब्जेक्ट्स एण्ड रीज़न्स’ पढूंगा, इसे संशोधित करने का यही लॉजिक दिया गया है कि एस.पी.जी. केपास कपैसिटी नहीं है ।
          मैं आगे पढ़ता हूं - The security arrangements of the Prime Minister are suffering adversely due to extra commitment on the part of the SPG. This has been adversely commented by the security agencies such a large deployment of SPG also gives a high-profile visibility and is attracting criticism even from State Governments. Shri Rajiv Gandhi has now started touring outside Delhi. Since it is not possible for SPG to spare personnel to cover his tours outside Delhi, I have approved that his security arrangement outside Delhi should be left to the State Governments.
          As regards Delhi, a Cabinet paper is under submission. The responsibility of providing protection to Shri Rajiv Gandhi and his family should vest in the State Governments and the Union Territory administration and MHA should isue proper instructions. Thus, PM may kindly see for approval.
          यह कैबिनेट सेक्रेटरी ने तब के प्रधान मंत्री स्वर्गीय श्री विश्वनाथ प्रताप सिंह जी को एक नोट लिखा था । 4 दिसम्बर, 1979 को यह बात कही गई थी कि उनकी जान को जो खतरा है, वह उतना ही है, जब वह प्रधान मंत्री थे, लेकिन उनका एसपीजी कवर विड्रा कर लियागया । मुझे अब भी याद है, जब स्वर्गीय श्री राजीव गांधी पहली बार पूर्व प्रधान मंत्री के रूप में दिल्ली के बाहरगए थे, तो एक अखबार की सुर्खियों में लिखा था,  only one PSO. पूर्व प्रधान मंत्री को सिर्फ एक पीएसओ प्रदान किया गया था । अध्यक्ष जी, इसका परिणाम क्या हुआ? मैं आपको इसका परिणाम बताना चाहता हूं । जैसा मैंने पहले आपको बताया कि यह फैसला हो गया कि स्वर्गीय प्रधान मंत्री की जो सुरक्षा है, वह राज्य सरकारों के हवाले कर दी गई । मुझे आज भी 20 मई, 1990 की वह रात याद है । आठ या सवा आठ बजे का समय था । उनका जहाज भुवनेश्वर उतरा । वहां दो पब्लिक मीटिंग्स थीं । उन पब्लिक मीटिंग्स को खत्मकरने के बाद हम भुवनेश्वर के सर्किट हाउसपहुंचे थे । यह बड़ी दुर्भाग्यपूर्ण बात है । वहां एक भी सुरक्षाकर्मी नहीं था । Not a single security person except his PSO. The former Prime Minister of India about whom the Intelligence Bureau and every other instrumentality of this Government was getting periodic inputs that his threat was increasing on a daily basis.
          21 मई, 1991 को हेलीपैड पर हमनेउनको अलविदा कहा और वह कभी लौट कर नहींआए । श्रीपेरंबदूर की जो घटना है, इस बात को वर्मा कमीशन प्रमाणित करता है, इस बात को जैन कमीशन प्रमाणित करता है कि अगर पूर्व प्रधान मंत्री को इस ब्यूरोक्रेटिक सिस्टम से ऊपर उठकर सुरक्षा दी जाती, जो उनके लिए जरूरी थी, तो आज वह हमारे बीच इस सदन में बैठे होते । मैं आपको पढ़कर सुनाना चाहता हूं कि वर्मा कमीशन ने क्या कहा, जिसको यह मैनडेट दियागया था कि पूर्व प्रधान मंत्री श्रीराजीव गांधी की हत्या क्यों हुई? उसकी जांच की जाए ।उस कमीशन ने क्याकहा, “Withdrawal of SPG cover to Rajiv Gandhi without provision of suitable alternative for his proximate security by the Central Government resulted in reducing the level of his protection without any reduction in the threat to him.”           अध्यक्ष जी, मैं आपको उसी वर्मा कमीशन का एक और अंश पढ़कर सुनाना चाहता हूं, जो उन्होंने सिफारिशें की थीं । “The stated reasons in the Cabinet Secretariat’s note dated 30th of January 1990 for the Central Government’s decision to withdraw the SPG cover to the former Prime Minister are tenuous.” यह वही नोट है, जो मैंने आपको पढ़कर सुनाया था । The reasons given were mainly the lack of power under the SPW Act and inadequacy of the strength of the SPG.

          Hon. Speaker, I will seek your indulgence.

माननीय अध्यक्ष: माननीय सदस्य, आप एक सेकेंड के लिए बैठिए । मुझे आपको समय देने में कोई दिक्कत नहीं है । बीएसी की मीटिंग में सभी दल के प्रतिनिधि होते हैं और सभी दलों को समय आबंटित होता है । आपके दल को 11 मिनट का समय आबंटित किया गया था । मैं आपको बोलने से मना नहीं कर रहा हूं । अभी आपको बोलते हुए 20 मिनट का समय हो गया तथा आपके माननीय सदस्य और भी बोलने वाले हैं ।

…(व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष:  अगर यह सेंसेटिव विषय है, तो आप बीएसी में आकर समय बढ़ा लेते । हमें कोई आपत्ति नहीं थी । आप बोलते कि दो घंटे की नहीं, बल्कि छह घंटेकी चर्चा कराइए । मैं बीएसी मीटिंग की अध्यक्षता करता हूं । यहां सभी माननीय सदस्य बैठे हैं । जब वे दो घंटे का समय मांगते हैं, तो मैं चार घंटे का समय देता हूं ।

…(व्यवधान)

SHRI KODIKUNNIL SURESH (MAVELIKKARA): It is a very sensitive matter.

माननीय अध्यक्ष: अधीर रंजन जी, जब आप दो घंटे का समय मांगते हैं, तो मैं आपको दो घंटेऔर बढ़ाकर देता हूं ।

श्री अधीर रंजन चौधरी (बहरामपुर): सर, इनको थोड़ा और समय दे दीजिए ।

माननीय अध्यक्ष: ठीक है, आप बोलिए ।

श्री मनीषतिवारी : अध्यक्ष जी, आपका बहुत-बहुत धन्यवाद, क्योंकि यह मामला बहुतसंगीन और संवेदनशील है, इसलिए मैं आपकी इंडल्जेंस चाहता हूं । मैं वर्मा कमीशन की सिफारिश पढ़ रहा था ।

“The stated reasons in the Cabinet Secretariat’s note dated 30.01.1990 for the Central Government’s decision to withdraw the SPG cover to the ex-Prime Minister are tenuous. The reasons given were mainly lack of power under the SPG Act and the inadequacy of the strength of SPG apart from a high-profile visibility inviting criticism. None of these reasons was considered as insurmountable hurdle to give SPG cover for providing proximate security to the former Prime Minister also from September 1991 after the assassination of Shri Rajiv Gandhi. There appears no reason why this could not have been done earlier for Shri Rajiv Gandhi as former Prime Minister when the assessment of threat to him was much higher, and therefore, the need was greater.  It appears that the Central Government’s decision on the 30.01.1990 was more by lack of proper perception or the requisite will rather than the stated difficulties.” अध्यक्ष जी, मैंने वर्मा कमीशन का यह अंश इसलिए पढ़ा है, क्योंकि आज भी वही कारण दिए जा रहे हैं कि कानून इजाजत नहींदेता, एसपीजी ओवर स्ट्रेच्ड है । यही कारण थे, जिनके कारणएक पूर्व प्रधान मंत्री की हत्या हुई ।मैं आगे इस कानून पर आता हूं, जिस कानून को हम अमेंड करने जा रहे हैं । इससे पहले मैं एक चीज का और जिक्र करनाचाहूंगा कि जब यह 30 जनवरी, 1990 काफैसला हुआ, 3 फरवरी,1990 को, 9 फरवरी, 1990 कोपूर्व गृह मंत्री चिदम्बरम साहब ने श्रीराजीव गांधी के पर्सनल सचिवविंसेंट जॉर्ज ने सरकार को खत लिख कर आगाहकिया, लेकिन सरकार का कोई जवाब नहीं आया, क्योंकि एसपीजी की सुरक्षा वापस लेना वी.पी. सिंह सरकार का एक राजनीतिक फैसला था । It was not a decision which was based on a perception of what was the threat which the former Prime Minister faced. That was the difficulty.

अब मैं ओरिजनल कानून के ऊपर आता हूं । गृह मंत्री जी की बात बिल्कुल ठीक है कि वर्ष 1988 में जब कानून बना, तोवह सिर्फ प्रधान मंत्री और उनकेपरिवार के लिए था । श्री राजीव गांधी जी की हत्या के बाद यह पाया गया कि एसपीजी की प्रोटेक्‍शनफॉर्मर प्राइम मिनिस्टर्स को भी एक्सटेंड करनी जरूरी है । वर्ष 1991 में संशोधन कियागया, उसके तहत धारा 4 में यह कहा गया, “There shall be an armed force of the Union called the Special Protection Group for providing proximate security to the Prime Minister and the members of his immediate family, any former Prime Minister or the members of his immediate family for a period of ten years from the date which the former Prime Minister ceases to hold the Office of Prime Minister and for any period beyond the period of ten years referred to in sub-clause (a) in case where the level of threat faced by the former Prime Minister or by any member of his immediate family is of such nature that such level of threat justifies the provision of proximate security to such former Prime Minister or such member of his immediate family, as the case may be, provided that while assessing the level of threat, the Central Government shall take into account the following factors, namely, that the threat emanates from a militant or a terrorist organisation, and the threat is of grave and continuing nature, provided that the Central Government shall assess the level of threat periodically in such a manner that not more than twelve months shall elapse between two consecutive assessments.” एसपीजी के कानून में वर्ष 1991 में यह प्रावधान किया गया । यह प्रक्रिया वर्ष 2003 तकचली । वर्ष 2003 में एक संशोधन और कियागया कि जो 10साल का पीरियड था, उसको घटाकर एक साल कर दिया, परइसके साथ-साथ यह प्रावधान वाजपेयी साहब की सरकार ने रहने दिया कि अगर थ्रेट असेसमेंट हो, तोकिसी भी पूर्व प्रधान मंत्री के परिवार को सरकार जब तक चाहे, जबतक थ्रेट असेसमेंट रहे, थ्रेट रहे, तबतक सुरक्षा प्रदान कर सकतीहै ।

माननीय मंत्री जी संशोधन लेकरआए हैं, मैं उसे संक्षेप में पढ़ कर सुनाना चाहता हूं । एसपीजी अमेंडमेंट बिल 2019 कहता है In section 4 of the Special Protection Group Act, 1988, for sub-section (1), the following sub-section shall be substituted, namely, there shall be an armed force of the Union called the Special Protection Group for providing proximate security to the Prime Minister and members of his immediate family residing with him at his official residence. मैं आपसेदस मिनट की मोहलत मांगता हूं ।

माननीय अध्यक्ष: अगर आप दस मिनट लेंगे तो आपकाकोई भी माननीय सदस्य नहीं बोल  पाएगा ।

श्री मनीषतिवारी: अध्यक्ष महोदय, इसबिल में जो संशोधन लायागया है, इसमें पूर्व प्रधान मंत्री या उनकेपरिवारों को थ्रेट असेसमेंट के आधारपर सिक्युरिटी प्रदान करनी थी, उसे हटा दिया गया । उसका क्या कारण दिया जाता है? That the number of individuals to be provided SPG cover can potentially become quite large.यह वही कारण था, जिसके तहत स्वर्गीय प्रधान मंत्री श्री राजीव गांधी की एसपीजी की सिक्युरिटी को विड्रा कियागया था । मैं एक बात पूछना चाहता हूं, जोएसपीजी प्रोटेक्टी हैं, उनको निरंतर एसपीजी की तरफ से कहा जा रहा था कि आपकी थ्रेट परसेप्शन बढ़ रही है । मेरे पास सारे पत्र मौजूद है लेकिन मैं सुरक्षा की वजह से उन पत्रों को सार्वजनिक नहीं कर रहा हूं । जून, 2019 तकलगातार यह बात कही गई कि थ्रेट असेसमेंट बढ़ रहा है, आपवहां मत जाइए, आपछत्तीसगढ़ मत जाइए, आपअपने क्षेत्र में उस जगह मत जाइए क्योंकि आपकी जान को खतराहै । वह एकदम खतरा समाप्त हो जाताहै । थ्रेट परसेप्शन बदल जाती है और एसपीजी वापस ले ली जाती है । हम पूछना चाहते हैं कि जून 2019 औरनवम्बर, 2019 केबीच ऐसा क्या बदला, थ्रेट परसेप्शन जून, 2019 में था, चाहे वह श्री राहुल गांधी जी की हो, चाहे श्रीमती सोनिया गांधी जी की हो, चाहे डॉक्टर मनमोहन सिंहजी की हो या उनके परिवार की हो, उसमें ऐसी क्या तब्दीली आ गई? नवम्बर, 2019 में एक्ट को संशोधित किए बगैर उनकी सुरक्षा वापस ले ली गई । मैं बहुत जिम्मेदारी से यह बात कहना चाहता हूं क्योंकि यह पूर्व प्रधान मंत्री की सुरक्षा से जुड़ाहुआ मामला है । जो थ्रेट परसेप्शन है, उसको सभा के पटल पर रखा जाना चाहिए क्योंकि सदन को यह जानने का हक है कि वैसीकौन सी तब्दीली थ्रेट परसेप्शन में आई जिसके कारणबगैर कानून में संशोधन किए एसपीजी की सिक्युरिटी वापस ले ली गई । जब सारी प्रक्रिया चल रही थी, अखबारों में इसकी चर्चा हो रही थी तब पूर्व प्रधान मंत्री जी  ने सरकार को खत लिखा । 4 नवम्बर, 2019 कोएक खत लिखा, 16 नवम्बर, 2019 कोश्री राहुल गांधी जी के कार्यालय ने खत लिखा कि क्याआप एसपीजी की सुरक्षा खत्म करने जा रहे हैं । पूर्व प्रधान मंत्री जी के खत का जवाबज्वाइंट सेक्रेटरी की तरफ से एक लाइनका जवाब आता है I am directed to acknowledge the receipt of your letter.

Is this the way we treat our former Prime Ministers? Mr. Speaker, Sir, I would like to ask, through you, is this the way we treat a letter which is written by the former Prime Minister of this country. यहदुर्भाग्यूपर्ण बात है ।

 

15.00 hrs दुर्भाग्यपूर्ण बात है कि इतिहास अपने आपको एक बार फिर दोहरा रहा है ।

अखबारों में यह चीज प्लांट की जातीहै कि कई लोग अपनी सुरक्षा को स्किप करतेहैं । इस सदन में ऐसे बहुत लोग मौजूद हैं, जिनके पास सुरक्षा है । मैं पूछना चाहता हूं कि क्यावे अपने दिल पर हाथ रखकर कह सकतेहैं कि उनको जो सुरक्षा कवच मिला हुआ है, उसमें कभी-कभी घुटन महसूस होती है? You feel like shedding your security cover; you feel like living as a normal human being. Is that a crime? इसतरह की बेबुनियाद चीजें अखबारों में प्लांट की जाएं, हमें यह लोकतंत्र में होने के नातेशोभा नहीं देता है ।

          हमारा लोकतंत्र बहुत बड़ा है, मल्टी पार्टी डेमोक्रेसी हैं । यह ऐसा मामला है जिसमें हम सबको दलगत राजनीति से ऊपर उठना चाहिए । मैं सरकार से मांगकरना चाहता हूं, जितने भारत के पूर्व प्रधानमंत्री और उनकेपरिवार, जबतक जीवित रहें, उन्हें सुरक्षा प्रदान की जानीचाहिए । जब तक माननीय अटल बिहारी वाजपेयी जी हमारे बीच में रहे, 16 मई, 2004 कोवे प्रधान मंत्री पद से हट गए थे, 2018 तकउनको एसपीजी सुरक्षा प्रदान की गई थी । यह सिर्फ भारत में ही नहींहै, अमरीका में भी जब कोई राष्ट्रपति पद से हट जाता है, पूर्व राष्ट्रपति को सीक्रेट सर्विस की सुरक्षा प्रदान की जातीहै । यही प्रावधान ग्रेट ब्रिटेन में है । यही प्रावधान कई और मुल्कों में है, मैं सब मुल्कों की सूचीसदन के पटल पर रखनाचाहता हूं ।

          मैं आपकेमाध्यम से माननीय गृह मंत्री जी और सरकार से आग्रह करनाचाहता हूं कि  दलगत राजनीति से ऊपर उठकर सुरक्षा के मामले को देखना चाहिए । महज़ इसलिए कि कोई व्यक्ति प्रधान मंत्री नहीं रहता तो इसकामतलब यह नहीं है कि जो उसने प्रधान मंत्री पद पर रहते हुए फैसले लिए हैं, उसके कारणउसकी थ्रैट कम हो जाती है । धन्यवाद ।

संसदीय कार्यमंत्री; कोयला मंत्रीतथा खान मंत्री(श्री प्रहलादजोशी): माननीय अध्यक्ष जी, इसके बाद भी एक बिल है । आपने बीएसी में सबसे सलाह मश्वरा करके दो घंटेका निर्णय लिया  था । कृपाकरके आगे के वक्ताओं के लिए बीएसी के निर्णय के अनुसार टाइम एलॉट कीजिए क्योंकि  माननीय गृह मंत्री जी का एक और बिल है और गवर्नमेंट के पास बिजनैस भी बहुतहै । मेरा निवेदन है, It should go as per BAC schedule.

 

डॉ. सत्यपाल सिंह(बागपत): माननीय अध्यक्ष जी, आपने मुझेबोलने का समय दिया, इसके लिए मैं आपका आभार व्यक्त करता हूं । मैं स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप (अमेंडमेंट) बिल, 2019 केसमर्थन में बोलने के लिए खड़ा हुआ हूं । मैं इसके लिए माननीय गृह मंत्री जी का अभिनंदन करता हूं, जिस प्रकार से एसपीजी कानून में 1988 केबाद से खिलवाड़ होता रहा है, अबइस संशोधन के बाद यह पूर्णत: बंद हो जाएगा । मैं इसके लिए पुन: माननीय गृह मंत्री जी का अभिनंदन करता हूं ।

          एसपीजी कानून की वर्ष1988 में पृष्ठभूमि आई थी । मुझे याद है 31अक्टूबर, 1984 कोदेश के तत्कालीन प्रधान मंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी जी की हत्या हुई थी, मैं उस समय युवा पुलिस अधीक्षक था, तबमहाराष्ट्र में पुलिस अधीक्षक, एसपीज़, वरिष्ठ अधिकारियों की पुणेमें वार्षिक कांफ्रेंस बुलाई गई थी । जैसे ही खबर मिली थी, लगगभ इससेएक घंटा पहले ही मीटिंग शुरूहुई थी, तबहमारे डीजीपी ने सब अधिकारियों को बोलाकि सब लोग तुरंत अपने जिले में वापिस   जाएं ।सभी लोगों को यह बात मालूम है कि श्रीमती इंदिरा गांधी जी की हत्या उन्हीं के सुरक्षाकर्मियों ने की थी ।

यह हमारी सुरक्षा एजेंसीज के ऊपर, खुफिया एजेंसीज के ऊपर एक बहुत बड़ा प्रश्नचिह्न था, यहपूरे देश का अपमान था । देश के प्रधान मंत्री की इस प्रकार से हत्या हो और हम उसकोरोक न पाएं, वास्तव में यह एक बहुत बड़ा प्रश्न-चिह्न हम सब लोगों के सामने था । हम लोग जब वापसजा रहे थे तो खबर आ रही थी कि दिल्ली में और आस-पास में जिस प्रकार से सिक्खों  के खिलाफ दंगा हुआ, जिस प्रकार उनकोबेरहमी से मारा गया, पूरे देश के अंदर न केवलदिल्ली बल्कि देश के लगभग 40 शहरों में सिखों को ढूंढ-ढूंढ कर मारा गया । मुझे नहीं लगता कि इतिहास में इस प्रकार का कत्लेआम कभी हुआ हो । हम सभी लोगों को यह बात मालूम है कि दिल्ली के अंदर, कहा जाताहै कि 3000 सेज्यादा लोगों को मारा गया । दिल्ली में और महाराष्ट्र के अंदरकई जगह सिखों को ढूंढ-ढूंढ कर मारा गया । मुझे याद है उस समय शिवसेना प्रमुख आदरणीय श्री बाल ठाकरे जी, जिनका मैं यहां अभिनन्दन करना चाहूंगा, उन्होंने यह घोषणा की थी कि जब तक मैं मुम्बई में हूं तब तक कोई भी सिख भाइयों को हाथ नहीं लगा पाएगा । फिर भी, महाराष्ट्र में कई जगह इस प्रकार की घटनाएं हुईं । आप लोगों को मालूम है कि दोपहर-शाम होते-होते पूरे देश के अंदरजो ऑफिशियल फिगर्स हैं कि 3350 लोग मारेगए, अन-ऑफिशिएल फिगर्स यह है कि 8 हजार से 17 हजार सिक्खों  की पूरे देश के अंदरहत्या की गई । …(व्यवधान) अधीर रंजन जी मुझेबोलने दीजिए । …(व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष: माननीय सदस्य प्लीज ।

…(व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष: माननीय सदस्य प्लीज एक मिनट ।

…(व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष: माननीय सदस्यगण, मैं पुन: आपसे आग्रह करूंगा । जब माननीय सदस्य बोल रहे थे तो किसी माननीय सदस्य ने उनकोनहीं टोका । आप माननीय गृह मंत्री जी का पूरा जवाब सुनकर जाएं तथा माननीय सदस्यों का भी पूरा जवाब सुनें । कोई भी सदस्य चाहेइधर का हो, चाहे उधर का हो, मेरी सदन से, सबसे निवेदन है कि महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा हो रही है । न इधर के माननीय सदस्य, न उधर के माननीय सदस्य, जोबोलें, उसका जवाबन दें । जब आपका समय आएगा तब जवाबदीजिएगा, लेकिन किसी को टोकेनहीं ।

डॉ. सत्यपाल सिंह: आदरणीय अध्यक्ष महोदय, मैं सदन को याद दिलाना चाहता हूं कि तब के प्रधान मंत्री जी ने कहा था –‘जब एक बड़ा पेड़ गिरता है तो धरती हिलती है’ औरअप्रत्यक्ष रूप से सिक्खों के इस कत्लेआम का उन्होंने समर्थन किया था । …(व्यवधान) यह एसपीजी कानून को प्रधान मंत्री की सुरक्षा को फूलप्रूफ बनाने के लिए लाया गया  ।यह जो एसपीजी प्रोटेक्शन ग्रुप बना, हमारे देश के लिए, हमारी जो सेंटर आर्म्ड पुलिस फोर्सेज होती हैं, उसमें बीएसएफ से 33परसेंट, सीआरपीएफ से 33परसेंट, सीआईएसएफ से 17परसेंट, आईटीबीपी से 9परसेंट, एसएसबी से 6परसेंट और स्टेट पुसिल से लगभग एक परसेंट होतीहैं, इसप्रकार से लगभग 100 एसपीजी ग्रुप्स का गठन हुआ था । लगभग 3000 हजार के आस-पास उनकी संख्या रखी गयी थी । उन लोगों के लिए बहुत ही कठिनट्रेनिंग प्रेसक्राइब की गई, उनके लिए स्पेशल हथियार का इंतजाम कियागया । एसपीजी केवल प्रधान मंत्री की सुरक्षा के लिए था । किसी पूर्व प्रधान मंत्री के लिए नहीं था । उनको निकट सुरक्षा देने के लिए हुआ था क्योंकि जिस प्रकार की घटनाघटी थी, श्रीमती इंदिरा गांधी की हत्या के बाद, हमारा एसपीजी ग्रुप एडवांस सिक्योरिटी लाइजन कर सके, स्टेट पुलिस से कोआर्डिनेशन कर सके और हमारी जो इंटेलीजेंस एजेंसीज हैं, उनके साथ उनका इन्वॉलमेंट हो ताकिवे एक फूलप्रूफ सिक्योरिटी प्रधान मंत्री जी को दे सकें । 

आदरणीय अध्यक्ष महोदय, इसएसपीजी कानून में कई संशोधन हुए, जैसा मैंने कहा, कईबार इसके साथ खिलवाड़ हुआ है । पहला संशोधन 1991 में हुआ, जिस प्रकार से श्री राजीव गांधी जी की नृशंस हत्या हुई, आतंकवादी हत्या हुई, उसके बाद पहली बार सितम्बर, 1991 में एक संशोधन आया कि भूतपूर्व प्रधान मंत्री की …(व्यवधान)

श्री गौरवगोगोई (कलियाबोर): सर, मेरा एक प्वाइंट ऑफ ऑर्डर है । …(व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष: आपरूल बताएं ।

श्री गौरवगोगोई : सर, रूल-352, सेक्शन-7   ।…(व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष : हां, रूल-352 पढ़रखा है ।

श्री गौरवगोगोई : सर, मैं आपकेसंज्ञान में लाना चाहता हूं कि अभी-अभी आदरणीय सदस्य ने पूर्व प्रधान मंत्री के बारेमें जो टिप्पणी उठाई है, वहसरासर …*  सेडिशियस और डिफेमेटरी       है ।…(व्यवधान) मैं आपसे दरख्वास्त करूंगा कि ऐसे डिफेमेटरी शब्दों को पार्लिमेंटरी रिकॉर्ड से हटा देना चाहिए ।…(व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष: मैं इसकोदेखूंगा, लेकिन माननीय सदस्य ने घटनाका विवरण किया है, किसी पर आरोप नहीं लगाया है ।

…(व्यवधान)

श्री गौरवगोगोई : सर, उन्होंने आरोप लगाया है । हम आपकोमिसलीड नहींकरेंगे ।…(व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष : आपसभी लोगों को बोलने की आवश्यकता नहीं है ।

…(व्यवधान)

श्री गौरवगोगोई : सर, हमआपको मिसलीड नहीं करेंगे । हम पूरी गंभीरता से पूरीबात को सुन रहे हैं । …(व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष : मैं इस नियम के तहत जो भी उचितहोगा, निश्चित रूप से देखूंगा और अगर इस प्रक्रिया के तहत कोई विषय होगा तो मैं उसे देखूंगा ।

…(व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष : मैंने आपको इजाजत नहीं दी है, बैठ जाइए ।

…(व्यवधान)

डॉ. सत्यपाल सिंह: आदरणीय अध्यक्ष महोदय, गौरव गोगोई जी ने जो बात कही है, आजभी वह वीडियो अवेलेबल है और अगर आपकी परमीशन होगी तो मैं हाउस में उसे सब्मिट कर सकताहूं, जिस वीडियो में उन्होंने ऐसा बोला था ।

          अध्यक्ष महोदय, वर्ष 1991 में श्रीराजीव गांधी की हत्या के बाद इसमें पहला संशोधन आया कि भूतपूर्व प्रधान मंत्री और उनकेइमिडिएट पारिवारिक सदस्यों को पांचवर्ष के लिए एसपीजी की सुरक्षा दी जाए ।उसके साथ ही यह भी व्यवस्था आई कि यदि कोई मना करना चाहे तो मना करने का अधिकार भी उनको दिया गया । दूसरा संशोधन 1994 में आया, जबइसे पांच वर्ष से बढ़ाकर दस वर्ष कर दियागया । तीसरा संशोधन 1999 में आया कि पूर्व प्रधान मंत्री को दस वर्ष के बाद भी अगर वार्षिक थ्रेट परसेप्शन में लगता है कि उनको किसी मिलिटेंट या आतंकवादी संगठन से खतराहै, बहुत ही गंभीर खतरा है तो उनको एसपीजी कवर दिया जा सकताहै ।

          अध्यक्ष महोदय, मैं एक पुलिस अधिकारी रहा हूं । बहुत लोगों का यह अनुभव होगा, मैं अपनीएजेंसीज से भी कहूंगा, माननीय गृह मंत्री जी भी यहां बैठे हैं, मैं माननीय मनीषतिवारी जी की इस बात से भी सहमतहूं कि कई बार हमारी खुफिया एजेंसीज सब्जेक्टिव असेसमेंट करती हैं, ऑब्जेक्टिव असेसमेंट नहीं करती हैं । कोई बड़ा आदमी नाराज न हो, कोई पार्टी नाराज न हो, अपने ऊपर जिम्मेदारी न आए, बिना किसीथ्रेट परसेप्शन के भी, उनकी सुरक्षा को चालूरखा जाता है । एक नहीं, ऐसे बहुतउदाहरण हैं ।मैं पुणे का पुलिस कमिश्नर था । जब मैं पुणे का पुलिस कमिश्नर बना, मैंने पता किया तो वहांपर लगभग 22 लोगों के पास सुरक्षा कवर था, जिनमें कुछ भूतपूर्व मंत्री थे, कुछ बड़े बिजनेसमैन भी थे । मैंने पता कराया कि इनमें किस व्यक्ति को थ्रेट है, किसको खतरा है तो हमारी एजेंसीज के लोगों ने बताया कि साहब, खतरा तो नहीं है, लेकिन ऐसा चलता आ रहा है, इसलिए देते जा रहे हैं । परम्परा से चलताआ रहा है । मैंने उन लोगों चिट्ठी लिखी, मैंने उनको एक हफ्ते का समय दिया कि हमारे हिसाब से, सिक्योरिटी एजेंसीज के हिसाब से आपको कोई खतरा नहीं है और एक हफ्ते के अंदरआपकी सुरक्षा निकाल ली जाएगी । अगर आपको सुरक्षा चाहिए तो प्राइवेट सिक्योरिटी ले लीजिए । इस तरह से बहुतबार होता है, मैं कहताहूं कि सेंट्रल लेवल पर भी होता है, आईबी के लेवल पर भी होता है, इसको ठीक करने की जरूरत है । मैं अभी भी ऐसे कई लोगों को जानता हूं जिनको कोई खतरा नहीं है, बल्कि उनसे समाज को खतराहै, लेकिन उनको पुलिस का प्रोटेक्शन दिया जाता है । इसमें सुधार करने की जरूरत है कि किस प्रकार के थ्रेट परसेप्शन की हम बात करते हैं ।

          वर्ष 2003 में इस कानून में एक बदलाव कियागया कि पूर्व प्रधान मंत्री और उनकेपरिवार के लिए केवल एक वर्षके लिए ही यह एसपीजी कवर रहेगा ।

उनके ऊपर खतरे का आकलनकरने के बाद उन्हें सुरक्षा मिलेगी । एसपीजी से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण बातें हैं और मैं आपकी अनुमति से सदन के सामने ये बातें रखनाचाहता हूं । कोई भी फोर्स, कोई भी बल चाहे वह पुलिस हो, मिलिट्री हो, सैंट्रल आर्म्ड फोर्सेज हों, वहदेश के लिए काम करती हैं । हमारे प्रधान मंत्री देश को रिप्रेजेंट करते हैं । वे देश के लिए हैं, किसी व्यक्ति के लिए नहीं हैं । प्रधान मंत्री संस्था के लिए हो सकते हैं, लेकिन किसी व्यक्ति के लिए वे नहीं हो सकतेहैं । अमेरिका के अंदरभी ऐसा है कि यदि कोई पूर्व प्रेजिडेंट है, तोउन्हें पहलेकेवल दस साल के लिए सुविधा थी । श्री बराक ओबामा ने पूरेजीवन के लिए किया, लेकिन 16 साल से कम उम्र के बच्चों को ही सुरक्षा मिलेगी । किसी का बच्चा यदि 16 साल का हो जाएगा, तोकिसी को भी सीक्रेट सर्विस का प्रोटेक्शन नहीं मिलेगा । रशिया में भी ऐसा ही है । ब्रिटेन के अंदरभी ऐसा ही है और चाइना में तो जो भूतपूर्व हो जातेहैं, वेतो भूतपूर्व ही हो जाते हैं ।

माननीय अध्यक्ष : माननीय सदस्य इस सदन में चाइना, इंग्लैंड की चर्चा क्यों कर रहे हैं, हमें तो हिंदुस्तान के कानून की चर्चा करनी चाहिए । वहां क्या होता है, इसबात को छोड़िए और हिंदुस्तान के कानून की बात कीजिए । इधर से मनीषतिवारी जी भी विदेशों के कानून की बात कह रहे थे । हमें तो भारतके कानून से ही चलना है ।

डॉ. सत्यपाल सिंह : महोदय, आदरणीय मनीष जी ने बात कही थी, इसलिए मैंने जवाब दिया है ।

माननीय अध्यक्ष: मनीष जी ने गलत किया था, आपगलती मत कीजिए ।

डॉ. सत्यपाल सिंह: अध्यक्ष जी, मेरा निवेदन है कि जो विशेष पुलिस फोर्स होतीहैं, उनके कुछ नियम होते हैं । मैं इस बात को कह रहा हूं और कौटिल्य ने इस बात को लिखाहै । आप कौटिल्य का अर्थशास्त्र पढ़ सकतेहैं । उसमें लिखा है – … * माननीय अध्यक्ष : यह बात रिकार्ड में नहीं जाएगी । हमारे यहां ‘राजा’  ‘राजा’ नहीं होताहै, बल्कि ‘सेवक’ है ।

डॉ. सत्यपाल सिंह : ठीक है, सर । उनकीसुरक्षा के लिए जो भी बल है वह किसी दूसरे व्यक्ति के लिए नहीं लगाया जाएगा । यदि हम किसीदूसरे व्यक्ति के लिए उस सुरक्षा बल को लगाते हैं, तोवह सिक्योरिटी कम्प्रोमाइज होती है और कभी भी वह खतरा बन सकतीहै । कई बार एसपीजी प्रोटेक्शन का बहाना लेतेहैं और लुटियन जोन में बंगले ले लेतेहैं । वह एमपी नहीं होते हैं, कोई सरकारी पद नहीं होता है, लेकिन उन्हें बंगला मिलता है क्योंकि उन्हें एसपीजी सुरक्षा मिली होती  है । यहां जो एमपीबनते हैं, मंत्री बनते हैं, वेलम्बे समय तक बंगलों के लिए वेट करते हैं, क्या यह उन लोगों का अपमान नहींहै? जोसदन के सदस्य नहीं हैं, उनलोगों को बंगले दिए जाएं क्योंकि उन्हें एसपीजी सुरक्षा मिली हुई है ।

          अध्यक्ष महोदय, डाक्टर उनका ट्रीटमेंट करता है, जोडाक्टर की दवाई मानते हैं और डाक्टर जो परहेज बताता है, उननियमों पर चलते हैं, तभी मरीजको फायदा होता है । यदि डाक्टर के कहनेके बाद रोगी उसकी बात नहीं मानता है, तोउसका इलाज करने का कोई मतलब नहीं रह जाताहै । मैं सवाल पूछना चाहता हूं कि जिनको एसपीजी कवर दिया गया, क्या उन लोगों ने एसपीजी को रखा है? हमारे पूर्वजों ने बहुतअच्छी बात कही है । मैं किसी का नाम नहीं ले रहा   हूं । मैं केवल एक बात कहना चाहता हूं । एक परिवार के एक आदमी ने मई, 2015 सेजून 2019 तक1892 बार बुलेट प्रूफ व्हीकल का इस्तेमाल नहीं किया ।बाहर जब उन्होंने विदेशी ट्रिप किया, 156 बार बाहरगये लेकिन 143 बार मना करके चले गये ।

दूसरे सदस्य ने 50बार नहीं किया । 24 बार बाहरविदेश यात्रा में मना कर दिया । तीसरे सदस्य ने दिल्ली में 339 बार मना कर दिया । 64 बार बाहरजाने को मना कर दियाऔर जो 91विदेशी ट्रिप किये, उसमें 78 बार मना कर दिया और उसकेबाद एसपीजी के खिलाफ एलीगेशन भी लगाये कि आप हमारे कांफिडेंशियल और पर्सनल डिटेल्स निकालते हैं, इसलिए हमारे पीछे रहते  हैं । अगर उनको एसपीजी कवर से डर है तो क्याकोई व्यक्ति ऐसे हिम्मत कर सकताहै कि बिना एसपीजी सुरक्षा के बाहरकहीं चला जाए? इसलिए सुरक्षा उनको दी जानीचाहिए, जोउसके नियमों का पालनकरते हैं । ट्रैफिक नियम उन लोगों के लिए होते हैं जो ट्रैवर करतेहैं । मुझे याद आ गया, हमारे पूर्वजों ने एक बात कही थी । तीन काम अच्छे लोगों को नहींकरने चाहिए । कम से कम जो बड़े पदों पर लोग हैं, उनको तीन काम नहीं करने चाहिए । जिस काम को करनेमें डर लगता है, उसे नहींकरना चाहिए । छिपकर अगर कोई काम करना पड़े, कोई देख न ले, कोई सुरक्षा वाला न देख ले तो वह काम नहीं करना चाहिए ।

दूसरे, जिस काम को करने में शर्म महसूस होती हो, लज्जा आती हो, वहकाम नहीं करना चाहिए और जिस काम को करनेमें आत्मग्लानि होती हो कि मैंने गलत किया, मैं सुरक्षा वालों को छोड़कर आया था, कुछ गड़बड़ी हो गयी तो क्याहोगा? जिसको देश के पैसेसे सुरक्षा कवर दिया गया हो, एसपीजी जैसा कवर दिया गया हो, वेलोग ऐसा कौन सा काम बाहर जाकर करते थे कि उनको एसपीजी कवर की जरूरत नहींथी? क्या इस देश को यह जानने का अधिकार नहींहै? मुझे फिर कौटिल्य जी याद आ जाते हैं । मुझे नहीं लगता कि हमारे देश में कौटिल्य जितना कोई और इतनाबड़ा विचारक रहा होगा । कौटिल्य ने कहा था,   “राजानमुत्थितमनूत्तिष्ठन्ते भृत्या:

प्रमाद्यन्तमनुप्रमाद्यन्ति॥” ऐसा कौटिल्य ने कहा है । जिसको सुरक्षा दी गई है, अगर वह आराम करने लगे और गड़बड़करने लगे, तोसुरक्षा कर्मी भी ऐसे ही हो जाएंगे । उनके अंदर भी बीमारियां आनी शुरू हो जाएंगी । …(व्यवधान) आदत खराब हो जाएगी ।
“यथा च योग पुरुषैअन्याय राजाधितिष्ठाते, तथायमन्याबाधेभ्यो रक्षे दात्मानमात्मवान ।” ऐसा कौटिल्य ने लिखाहै । उन्होंने लिखा है कि जो बड़ा है, राजा है, जिसको सुरक्षा दी गयी है, वहखुद नियम और कानून का पालन करे । अगर वह खुद कानून और नियमों का पालन नहीं करता है तो उनको न राजाबने रहने का अधिकार है, न उसको प्रधान मंत्री बने रहने का अधिकार है और न बड़ा बनने का अधिकार है । इसलिए, जोलोग सैकड़ों हजारों बार एसपीजी प्रोटोकोल और सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करते हैं तो क्याउन्हें यह सुरक्षा देनी चाहिए? यहदेश जानना चाहता है । यह कोई राजनैतिक प्रश्न नहीं है । एसपीजी किसी की व्यक्तिगत प्रोपर्टी नहीं है । यह देश के पैसे से बना है । जो उसके नियमों का पालनकरते हैं, उन्हीं को यह सुरक्षा दी जानीचाहिए ।
अध्यक्ष महोदय, मैं इस बिल का समर्थन करताहूं लेकिन मैं इस बात के लिए भी निवेदन करूंगा कि यह एसपीजी प्रोटैक्शन केवल प्रधान मंत्री जी को ही मिलना चाहिए । किसी भूतपूर्व को नहींमिलना चाहिए । ऐसी हमारी परम्परा रही है । कौटिल्य ने भी ऐसा ही लिखाहै । जो बिल आया है, मैं उसकासमर्थन करताहूं कि उसके तहत वह पांचवर्ष तक सुरक्षा प्रदान करेगा ।   अगर कोई भूतपूर्व प्रधान मंत्री मना करे तो उनकेपरिवार से भी एसपीजी सुरक्षा हटा ली जाएगी ।           अध्यक्ष जी, मैं ज्यादा न बोलते हुए, इसबिल का समर्थन करता हूं । मैं अपनी बात को यहांविराम देता हूं । आपका बहुत-बहुत धन्यवाद ।                                                                             
माननीय अध्यक्ष : श्री ए. राजा । मैं सब का समय भी बताता जाऊं, ताकि आपकोघड़ी का भी ध्यान रहे ।
SHRI A. RAJA (NILGIRIS): Hon. Speaker, Sir, I would be very brief in my speech. Within three to four minutes, I would conclude my speech.
माननीय अध्यक्ष : ओके, आपके पास पांच मिनट हैं ।
SHRI A. RAJA : Thank you, Sir. Sir, a sensible and very important discussion is going on in this House.  The SPG has been rated as one of the topmost personal security forces for the Head of the State and the Head of the Government.  Many countries send their representatives and officers to study the working style of the SPG, and they want to follow the same in their respective countries.
          The SPG, to my knowledge, was initiated at that time with two components.   They were ‘proximate security’ and the ‘holistic support system with unfettered powers.’  It is because, even the Additional Director of the SPG can overrule the advice of the Chief Minister of the concerned State.  So, such a prime agency is being assailed today in this House with political colours.
          Sir, very briefly,  I would tell you as to what will be the political impact after this Amendment that has been discussed by Shri Manish Tewari and Satya Pal Singh is passed.  In the middle way, I want to submit a few things before this House. The moot question is this. What is vital difference between the erstwhile Act and the present Act?  The objective assessment of security threat of a person, who is availing the security coverage, is missing in this Bill. Why?  The hon. Minister wants to say that it is in order to maintain the efficiency in the functioning of the SPG. Looking at the words of the Home Minister, there is nothing wrong. But at the same time, what will be the consequence of those who are availing the facilities now?  What will be the assessment of the security threat?
          I want to recall two historical incidents in this House. One is in the negative and another is in the positive.   The positive is this.  In 1919, Jallianwala Bagh massacre took place.  In 1940, a small boy who witnessed the massacre in 1919, got patriotic, and in 1940 after 21 years, he went to London and fired and killed General Dyer, who was responsible for the Jallianwala Bagh massacre.  What was the modus operandi of Sardar Udham Singh? What was the mens rea  of Sardar Udham Singh?  So, the threat to Dyer whether it is right or wrong, whether it is in the  negative sense or in the  positive sense, in the name of patriotism, continued for 21 years. This is the positive side.  What is the negative side? Take the assassination of Mahatma Gandhi.  In the Mahatma Gandhi murder case, when the appeal  was filed before the appellate court, Godse made a statement.       Sir, I may be permitted to read a few sentences.  I would quote what he said.  He said: “The accumulating provocation of 32 years culminating in his last…” …(Interruptions)
साध्वी प्रज्ञासिंह ठाकुर (भोपाल) : आप… * (व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : माननीय सदस्यगण, आपप्लीज़ बैठ जाइए ।
…(व्यवधान)
श्री गौरवगोगोई  : आप … * (व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष: माननीय सदस्य, आपप्लीज़ बैठिए ।
…(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : क्या आपकोकोई प्रॉब्लम है?
…(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : माननीय सदस्यगण, आपसभी सदन के सदस्य, अध्यक्ष बन जातेहैं । मैंने उनको इजाज़त दी है?
श्री गौरवगोगोई  : सर, वेबोल रही हैं । …(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : माननीय सदस्य बोल रही थीं, लेकिन मैंने उन्हें बैठा दिया ।
…(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष: मैंने उनका कुछ भी रिकॉर्ड में नहीं आने दिया है ।
…(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष: मैंने उनकी कोई भी चीज़रिकॉर्ड में नहीं आने दी है ।
…(व्यवधान) …* माननीय अध्यक्ष : केवल ए. राजा साहबकी बात रिकॉर्ड में जाएगी ।
…(व्यवधान) …* SHRI A. RAJA: Sir, I would like to quote the affidavit filed before the court.  It says:
“The accumulating provocation of 32 years, culminating in his last pro-Muslim fast, at last goaded me to the conclusion that the existence of Gandhi should be brought to an end immediately.” Having said that, he made another statement in the same affidavit. It says:
“I bear no ill will towards anyone including Gandhi individually but I do say that I had no respect for the present Government owing to their policy which was unfairly favourable towards the Muslims. But, at the same time, I could clearly see that the policy was entirely due to the presence of Mr. Gandhi.”           What I am saying is this. Godse had a policy.  Whether it is right or wrong, that is not the subject matter before us today.  He had a policy.  He is having no ill will towards the country but he killed Gandhi for a philosophy. My only submission to the hon. Minister is this.  We are running different political parties.  We are having a different ideology; we are having a different philosophy; we are having a different policy.  Take, for example, Rajiv Gandhi.  As the Prime Minister and the President of the Party, he had a philosophy, a principle which may not be suitable to you.  When he was killed, the threat persists to the family also.  For example, Udham Singh had waited for 21 years to kill General Dyer.  It may go for another 40 years.  Threat has to be assessed.  My only question is this.  While bringing this amendment, what is the assessment that has been done?  That has to be disclosed to the House; otherwise, definitely, political colour will be there on your part. 
          Secondly, I would very precisely say that the threat will not vanish with the person.  The threat will go along with the policy for which the person was responsible and he was assassinated.  In that sense, if Rajiv Gandhi was assassinated for a policy or the Congress Party is running with a philosophy or a policy or a principle which is not suitable to anybody, still I think that threat will continue.  That should be assessed properly.  An objective test, a litmus test must be mooted and it should be resolved. Unless and until it is resolved, these types of amendments will definitely get a political colour. 
          Lastly, Article 14 of the Constitution says that the Parliament is empowered to legislate laws on the reasonable classification, not the class legislation.  My only doubt is this.  If you want to classify who are all the persons entitled for the security in the name of the Prime Minister or whatever be the nomenclature, I believe that these types of legislations are not based on the reasonable classification but are class legislations.   It should be avoided.  My humble prayer is that the Home Minister may revisit the Bill and reconsider the Bill. 
माननीय अध्यक्ष: श्री सुदीप बन्दोपाध्याय । आप बहुत शालीन माननीय सदस्य हैं, इसलिए शालीनता से आपकानाम लेना पड़ता है ।
श्री सुदीपबन्दोपाध्याय(कोलकाता उत्तर): अध्यक्ष महोदय, मैं सबसेपहले 12वीं लोक सभा से चुनकर आया था । यह 17वीं  लोक सभा चल रही है ।
माननीय अध्यक्ष: जी, आपबहुत वरिष्ठ सदस्य हैं ।
SHRI SUDIP BANDYOPADHYAY: Sir, I rise to speak on the Special Protection Group (Amendment) Bill, 2019.  Hon. Home Minister has spoken briefly at the initial stage but, more or less, he explained the purpose of the Bill.  Shri Manish Tewari also spoke nicely.  That is why this Bill has been introduced.
          I would not repeat those issues which have been actually discussed.  But it is clear that this proposed Bill actually provides the following.
The Bill reads as follows:-
1.                for sub-section (1), the following sub-section shall be substituted, namely:-
“(1) There shall be an armed force of the Union called the Special Protection Group for providing proximate security to, -
2.                the Prime Minister and members of his immediate family residing with him at his official residence; and
3.                 any former Prime Minister and such members of his immediate family as are residing with him at the residence allotted to him, for a period of five years from the date he ceases to hold the office of Prime Minister.”;
4.                in sub-section(1A), for clause (b), the following clause shall be substituted, namely:-
“(b) where the proximate security is withdrawn from a former Prime Minister, such proximate security shall also stand withdrawn from members of immediate family of such former Prime Minister.”.
          It is interesting to know that in our country, only five persons are allotted SPG protection. First is our hon. Prime Minister, second is our former Prime Minister Dr. Manmohan Singh and the other three are Sonia Gandhi Ji, Rahul Gandhi Ji and Priyanka Vadra Ji.  So, five persons are allotted this SPG protection.  SPG is a very prestigious institution of our country. The Act which we are going to change has been amended at different times – 1991, 1994, 1999 and in 2003 to extend SPG cover to former Prime Ministers and their immediate relatives. 
          Sir, actually, a system is going to be changed through the Parliament.  We should remain alert to see whether threat perception still exists. Such people are to be taken into care so that their lives are not taken either by terrorists or extremists or any other person. I am interested to know as to how many SPG people are employed now in this scheme.  Is it 1000 or 2000 or 3000 or 4000 or 5000 or above than that?  If only one person is allotted SPG protection, then how many SPG people will be allotted to the post of Prime Minister which is the most important position in the country? It is beyond doubt that, that position is to be given all sorts of protection at its extreme level.  There is no doubt about it. Sir, what type of protections are going to be given to these persons who were under SPG protection?  That has not yet been mentioned at any stage. But I came to know that Z plus CRPF protection will be allotted. How far Z plus CRPF protection is commendable in our country? 
          I personally feel that all the Chief Ministers of the States are allotted with Z plus security. It is not that West Bengal Chief Minister who moves in the State without any pilot car in front of her car.  But Sir, Z plus category security is allotted to the Chief Ministers of the States who are in very important position. Even hon. Home Minister’s position is equally important and also the Defence Minister’s position.   What type of security is allotted to them?  Upon whose instructions, these security guards are being withdrawn? Then, what alternative security guards are going to be allotted to them?  People are keen to know about it. The killing or death of any person whether it is Indira Gandhi or Rajiv Gandhi, those people’s death have pained all of us for the way they were killed. We shed our tears. We are all pained.  We all still remember those days that how such incidents happened so cruelly, so brutally.  As it was mentioned that Shri Atal Bihari Vajpayee Ji was given proper protection under SPG, it was a very good decision.  We appreciate that decision.   
          But I tell you that for the withdrawal of SPG cover, some reasons have been mentioned. I have gone through them. One of them is the cost or the expenditure. What is the monthly or yearly cost or expenditure? What is the budgetary provision? How much money, budgetary provision, is placed for this SPG? It is giving trouble to the Government to maintain it on such a huge expenditure and that is given as one of the reasons to withdraw the SPG cover. Along with that, it has been mentioned that threat perception is no more implied to these persons who are allotted with SPG facilities.
But I tell you, Sir, as what the Ruling Party Member, Dr. Satya Pal Singh was telling here, that to keep more security has now become a status symbol also. At the State level, it has become a status symbol for persons who are not eligible to be given so much protection. मैं जितने गार्ड्स लेकर गाड़ी से उतर सकता हूं, मैं उतनाही बड़ा लीडर हूं । I had won four times as MLA. 12वीं लोक सभा से शुरूआत हुई है । I have no security. In Delhi, nobody has asked me whether I am the Leader of the Parliamentary Party. Sir, 34 MPs were with us in 2014. Now also, we have 22 MPs. Neither has anybody ever asked me whether I require any PSO with me nor have I applied for any PSO here. I feel comfortable without the PSOs. But these people, who keep security as status symbol, have also to be demarcated.
 The Central Police is going to West Bengal. The Governor himself is taking the support of the Central Police, ignoring the State Government. I do not know what is the reason. I will request the hon. Home Minister, through you, Sir, to take note of these things that are going on. The Central Forces, the CRPF people, are giving security cover to the Governor and the Chief Minister is not even communicated. We are paying for that. Why do they not communicate it? We, the State Government, can give security cover to him. How many non-elected people are being offered CRPF protection? I would also request the hon. Home Minister to take a list of that from our State of West Bengal.
          Whoever quits our party and joins the Ruling Party at the Centre are being allotted and provided with at least four CRPF personnel with rifles and LMGs. Whatever may be the guns, I cannot mention the names properly. But they are moving in that way. It is not proper. It is improper.  …(Interruptions) What security? Has anybody been ever hurt? Has any elected Member been hurt?
DR. SUKANTA MAJUMDAR (BALURGHAT): You have forgotten that recently, one candidate has been killed by your Party members.
SHRI SUDIP BANDYOPADHYAY : Who said he is our party member? Where has it been mentioned that Trinamool Party has done it? …(Interruptions)
DR. SUKANTA MAJUMDAR : It happened only in West Bengal where a candidate has been killed. …(Interruptions)
SHRI SUDIP BANDYOPADHYAY : I would request the hon. Home Minister to withdraw these Central Forces given to Tom, Dick and Harry or to anybody whom people do not know. Even people do not recognise them. You should also withdraw it from them.
This system has already been introduced in the country.एसपीजी को किसके-किसके ऊपर से हटाया जानाहै । Now it is going to take one parliamentary stamp or support from the whole Parliament. I think there is nothing wrong if the hon. Home Minister assures that he is fully concerned about the people from whom you are withdrawing the SPG cover and for whom there is absolutely no threat perception. The Ruling Party MP, Dr. Satya Pal Singh himself was saying about this. He was the Commissioner of Mumbai Police. We are good friends.
          He also tells that threat perception report is not always objective. We table it in a subjective manner. It is not only at the Central level, but it is also at the State level. Whatever decision has been taken by the Government, they have brought it in the House in the form of a Bill. We support it.
          We will hear a detailed reply from the hon. Home Minister. We hope that all the leaders about whom there is a serious threat perception would be protected properly and they can involve in the political arena in a free and frank manner. Thank you, Sir.
SHRI KURUVA GORANTLA MADHAV (HINDUPUR): Hon. Speaker, I would like to thank you Sir, for giving me an opportunity to put forth my views on behalf of YSR Congress Party on the The motion for the consideration of the Special Protection Group (Amendment) Bill, 2019.
          Sir, the SPG was constituted or born in 1985. It received statutory status vide the SPG Act, 1988. It was set up to provide security to the Prime Minister in office, and his/her immediate family members, due to the high levels of threat that arise due to the power he/she wields and decisions taken as the face of the Government. The extension of protection was to be reviewed periodically based on the threat assessment by the Central Government.
          Sir, the parent Act thus provides no time period for continuation of protection to the former Prime Ministers and their families. Based on this, the number of people receiving SPG protection can become very large. The protection in the present scenario extends to immediate family members who do not even live in the same residence as former Prime Ministers.
          Spreading the ambit of SPG will definitely affect the specialized and concentrated nature of the SPG. The resources, training and infrastructure of the SPG is truly world class and one that has been lauded by many security experts. However, the increased burden as explained above, is bound to have an impact on the resources, training and infrastructure of the SPG that we take pride in. If the same quality is to be maintained, it would involve shelling out a whole lot of tax-payers' money which does not bode well for a country where farmers, youth and workers are looking to the Government to solve even existential problems.
          The problem with such constraints to the effectiveness of SPG may also percolate down to the level and quality of protection to be provided to the “principal protectee”- the Prime Minister in office. Thus, the amendment Bill, is important to safeguard the very intent of the parent Act and reduce the dilution of such a dedicated force.
          The protection of the Head of the Government is gaining more importance considering the current geo-political scenario, and the rise in threats, both conventional and unconventional. Such an amendment, at present, is timely for the future as well, where there will be many more former Prime Ministers and families to protect, if the time-limit of 5 years is not put in place.
          The clause for extending the SPG cover to only the immediate family residing in the official residence of the PM in office also upholds the specialised and dedicated nature of the SPG. Sir, we support this Bill because its intent is to safeguard the effectiveness of the SPG by maintaining its specialised focus on minimal high threat facing individuals. Also, considering the resource crunch that a huge protectee base will create for our country and our common people, the support for the Bill should be our answer to the conscience of the country.
          The SPG is one of the best protection forces in the entire world. It involves a lot of rigorous physical training, a huge amount of time and financial resources to train the protection forces.  It should be used very rarely for high threat perception people like the PM and their near relatives who are residing in the same premises.
Now-a-days, the SPG has become a social status. I hope, this Bill will prevent its misuse. However, we maintain that based on the threat perception, SPG protection may be provided to families or people who fit into the criteria.
          Thank you.
 
श्री राजीव रंजन सिंह 'ललन ' (मुंगेर): अध्यक्ष महोदय, मैं आपकाआभारी हूँ कि आपनेमुझे समय दिया । मैं एसपीजी अमेंडमेंट बिल के समर्थन में बोलने के लिए खड़ा हुआ हूँ । बहुत अच्छा होता कि वर्ष1988 में जब यह कानून बना था, माननीय गृह मंत्री जी उसी को मूल रूप में वापस लाए होते । लेकिन इन्होंने यहां उदारता दिखाई और उसमें पाँचवर्षों तक पूर्व प्रधान मंत्रियों को भी सुरक्षा दी । महोदय, एसपीजी एक्ट, 1998 केतहत सुरक्षा प्रधान मंत्री के लिए बनी थी, परसमय-समय पर अपनी सुविधा के अनुसार इसकाविस्तार कियाजाता रहा । हम समझते हैं कि यह उचित नहीं था, इसलिए कि एसपीजी का अपना एक स्टेटस है, उनकी एक परम्परा है । अब सुरक्षा की बात यहां हो रही है, सुरक्षा की बात तो होनी चाहिए, सुरक्षा के प्रति चिंता होनीचाहिए और इस पूरीचर्चा में ऐसा लग रहा है कि जैसेपूरी सुरक्षा व्यवस्था समाप्त कर दी गई हो । लेकिन ऐसा है  नहीं । सुरक्षा की चिंता करनाअलग है और हमकोइस विशेष सुरक्षा व्यवस्था की व्यवस्था हो, यहअलग विषय है । आज जो चर्चा हो रही है उससे यह लगताहै कि सुरक्षा की चिंता करनेके बजाय एसपीजी की सुरक्षा हमको प्राप्त हो, इसकी चिंता ज्यादा हो रही है । स्टेटस सिम्बल के बारेमें अभी सुदीप जी ने कहा और सुरक्षा आज कल स्टेटस सिम्बल हो गया है । वास्तव में सुरक्षा स्टेटस सिम्बल हो गया है । सुरक्षा का स्टेटस सिम्बल के रूप में इस्तेमाल नहीं होना चाहिए । सुरक्षा सुरक्षा के लिए होती है । हम समझते हैं कि जो अखबारों में हम लोगों ने पढ़ा, माननीय गृह मंत्री जी जब जवाब देंगे, तोजरूर इस पर चर्चा करेंगे लेकिन जो अखबारों में हम लोगों ने पढ़ा कि जो सुरक्षा व्यवस्था, एसपीजी हटा दी गई है वह सुरक्षा व्यवस्था कहीं से भी एसपीजी की सुरक्षा व्यवस्था से कम नहीं है । हम लोगों ने देखा कि एसपीजी की गाड़ी का इस्तेमाल सीआरपीएफ के लोग करेंगे, हमने देखाकि एसपीजी की सारीचीजों का इस्तेमाल करेंगे तो सुरक्षा की चिंता करनाअलग बात है । अभी मनीष तिवारी जी स्व. प्रधान मंत्री की चर्चा कर रहे थे ।…(व्यवधान) आप कह रहे थे कि प्रधान मंत्री स्व. इंदिरा गांधी जी की हत्या की चर्चा हुई ।…(व्यवधान) डॉ. सत्यपाल सिंह जी ने चर्चा की । उसके बाद इस देश में जो सिखों के ऊपर अत्याचार हुआ, उनका क्यादोष था? इसदेश की प्रधान मंत्री स्व. इंदिरा गांधी जी की सुरक्षा में जो सुरक्षाकर्मी तैनात थे, उन्होंने उनकी हत्या की । इस देश के पूरे सिखों का क्यादोष था, जोखोज-खोज के मारा गया । डॉ. सत्यपाल सिंह जी बोल रहे थे, तोइधर से आवाज आ रही थी ।
मैं गवाह हूं । श्री रामविलास पासवान जी उस समय 12, डॉ. राजेन्द्र प्रसाद रोड में रहते थे और मैं उस दिन उनके घर पर था । वहां स्वर्गीय कर्पूरी ठाकुर जी थे और उनके साथ एक बैठकचल रही थी । एक सिख ड्राइवर सड़क से भागता हुआ उनके घर में प्रवेश कर गया ।बाहर से लोग आ रहे थे । कर्पूरी ठाकुर जी बाहरनिकले और उन्होंने उनसे कहा कि यह क्या कर रहे हो, इसबेचारे को, इसगरीब आदमी को क्यों मार रहे हो? उनलोगों ने कहा कि मेरीमाँ मर गई है और आप ऐसी बातें कर रहे हैं, हमइसे मार देंगे । कर्पूरी ठाकुर जी ने दरवाजा बंद कर दिया । उस घर को बाहरसे आग लगा दी गई और कर्पूरी ठाकुर जी के साथ-साथ हम सब लोग उस घर के पीछे की दीवार को फाँद कर बाहरनिकले । आप क्या बात कर रहे हैं? इसदेश के उन सिखों ने क्या गुनाह किया था जिनकी हजारों की संख्या में हत्या हुई?
प्रो. सौगत राय : इसके साथ एस.पी.जी. काक्या कनेक्शन है?…(व्यवधान)
श्री राजीव रंजन सिंह 'ललन ' : आपकी चर्चा कर रहे थे ।…(व्यवधान) आपको क्यों खराब लग रहा है?…(व्यवधान) आप बंगाल की बात कर रहे हैं । दादा को बड़ा खराब लगा ।…(व्यवधान) लोक सभा चुनावों के दौरान हम लोगों ने अखबारों में पढ़ा कि भारतीय जनतापार्टी के अध्यक्ष पर वहांकातिलाना हमला हुआ ।…(व्यवधान) उस समय एस.पी.जी. कहां थी? राष्ट्रीय अध्यक्ष पर भी हमला हुआ था ।…(व्यवधान) मैं राष्ट्रीय अध्यक्ष की चर्चा कर रहा हूं । वे वहांएक रैली करने जा रहे थे और पैरामिलिट्री फोर्स ने उन्हें बचाया । आपकोभी तो सी.आर.पी.एफ. कीसुरक्षा मिलीहै । आप क्यों चिंता कर रहे हैं?…(व्यवधान) इसलिए सुरक्षा को स्टेटस सिम्बॉल के साथ जोड़ कर नहींदेखना चाहिए । सुरक्षा को सुरक्षा के साथ जोड़ कर देखना चाहिए ।
महोदय, मैं समझता हूं कि माननीय गृह मंत्री जी यह जो बिल लाये हैं, यहस्वागतयोग्य है । अगर इसे प्रधान मंत्री तक सीमित रखतेतो और अच्छा होता । इसका विस्तार इन्होंने किया, यहइनकी उदारता है । मैं इनके प्रति आभार व्यक्त करते हुए और अध्यक्ष महोदय, आपका आभारव्यक्त करतेहुए अपनी बात समाप्त करता हूं ।
SHRI P.R. NATARAJAN (COIMBATORE): Mr. Speaker, Sir, thank you. I fully agree with the points raised by hon. Member Shri A. Raja. I request you not to allow them to degrade the dignity of the nation by talking about expenditure and all that. We should not allow them to use the law-making body to settle personal scores. I request the hon. Home Minister, through you, to withdraw this Bill.
 
श्री जगदम्बिकापाल (डुमरियागंज): अध्यक्ष महोदय, मैं आपकाअत्यन्त आभारी हूं कि आपने मुझे माननीय गृह मंत्री जी द्वारा प्रस्तुत स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप (अमेंडमेंट) बिल, 2019 परबोलने का अवसर दिया ।
15.58 hrs                       (Shri P.V. Midhun Reddy in the Chair)           माननीय गृह मंत्री जी ने जब बिल प्रस्तुत किया, तबसे माननीय सदस्यों ने जो अपने-अपने विचार रखे हैं, मैंने उनकी सारी बातें सुनी हैं । आज मेरेसाथियों ने जो बातें कही हैं, मैं समझता हूं कि यह जो स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप (अमेंडमेंट) बिल, 2019 आया है, मुझे लगताहै कि वर्ष 1988 में इस बिल की जो मूल भावना थी, वही मूल भावना आज भी इस बिल में बरकरार है । यहां तक कि जैसा इस बिल में प्रधान मंत्री जी की सुरक्षा के लिए इसकी क्यों आवश्यकता पड़ी, किस उद्देश्य से यह हुआ, इसके बारेमें गृह मंत्री जी ने विस्तार से कहा है और मैं उसे दोहराना नहीं चाहता हूं । मैं केवल एक बात कहना चाहता हूं कि अगर प्रधान मंत्री की सुरक्षा के लिए स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप बना तो यह स्वाभाविक है कि यह केवल प्रधान मंत्री की सुरक्षा के लिए नहीं बना ।
16.00 hrs यह स्वाभाविक है कि यह केवल प्रधान मंत्री की सुरक्षा के लिए नहीं बना है । आज जिस प्रकार से तमामएसपीजी कवर की बात हो रही है कि एसपीजी कवर और लोगों को मिलना   चाहिए । एसपीजी कवर प्रधान मंत्री के वर्तमान दायित्व में न केवलउनकी सुरक्षा का दायित्व देखता है, बल्कि उनके ऑफिस तथा कम्युनिकेशन की सुरक्षा सहित सभी चीजों की सुरक्षा का प्रबंध करताहै, क्योंकि वह देश के सर्वोच्च एक प्रधान मंत्री के रूप में है । मुझे लगता है कि हमारी सरकार आज इस देश में स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप के संशोधन की बात करती है, वहीं देश के एक-एक व्यक्ति की सुरक्षा की भी गारंटी लेती है । मैं समझता हूं कि अगर देश की एक-एकव्यक्ति की सुरक्षा के गारंटी का सवाल नहीं होता, तोपिछले 70 वर्षों से जम्मू-कश्मीर में धारा 370 और35ए के लागूहोने के कारण जिस तरह से आतंकवाद की घटनाएं बढ़ रही थीं, जिस तरह से वहां पर पाकिस्तानी झंडे लहराए जा रहे थे, नमाज़ तथा जनाजे़ में आतंकवादी खुलेआम घूमते थे । आज धारा 370 तथा 35ए को समाप्त करके जम्मू-कश्मीर के एक-एकव्यक्ति की सुरक्षा को माननीय गृह मंत्री और प्रधान मंत्री जी ने एक जिम्मेदारी के साथ इस देश की सुरक्षा की है । आज 100 दिन हो गए हैं, लेकिन इन 100दिनों में जम्मू-कश्मीर के किसीएक व्यक्ति को भी पुलिस की गोलीका शिकार नहीं होना   पड़ा । हम सुरक्षा किसको कहते हैं? देश के एक आम नागरिक की सुरक्षा भी महत्वपूर्ण है, इसलिए यह स्वाभाविक है कि हमारे लिए हर व्यक्ति की सुरक्षा उतनी ही महत्वपूर्ण है ।

          महोदय, हमारे देश का प्रधान मंत्री एक सर्वोच्च व्यक्ति होता है । वह दुनिया के सारे मंचों पर भारतके प्रतिनिधि तथा एक चेहरे के रूप में जाता है । आज सौभाग्य से हमारे प्रधान मंत्री जी केवल भारत के प्रधान मंत्री नहींरह गए हैं, बल्कि एक ग्लोबल लीडरके रूप में अंतर्राष्ट्रीय स्टेट्समैन के रूप में स्थापित हुए हैं । जब धारा370 तथा 35ए की समाप्ति हुई, तोपाकिस्तान ने इस मामले को यूनाइटेड नेशंस तक ले जाने की कोशिश किया । दुनिया के तमाम इस्लामिक मुल्कों में ले कर गया और चीन के पास भी गया ।आज पूरी दुनिया में भारत के प्रधान मंत्री जी सफल रहे हैं । आज पूरीदुनिया के लोगों ने इस बात को स्वीकार किया कि जम्मू-कश्मीर भारत का अंदरूनी मामला है । चाहे चीन के राष्ट्रपति जी महाबलीपुरम में आए हों, चाहे इस्लामिक देश हों या चाहेयूनाइटेड नेशंस हो, सबने भारत की बात मानी है । आज पाकिस्तान अलग-थलग हो गया है । पाकिस्तान इतना डेस्परेट था कि आज भी वह लगातार कोशिश कर रहा है कि जम्मू-कश्मीर में कुछ न कुछ हो । हमारे साथी भी कहतेथे कि अगर धारा 370 और35ए को समाप्त कियाजाएगा, तोवहां रक्तपात तथा हिंसा होगी । वहां इस तरह स्थिति हो सकतीहै । इसके बावजूद भी धारा370 तथा 35ए समाप्त हुआ ।

          महोदय, आजहम यह बिल इस सदन में लेकर लाए हैं । माननीय गृह मंत्री जी ने धारा 370 तथा 35ए को इस सदन तथा उस सदन में प्रस्तुत किया । पूरे देश की जनताने कहा कि वह हमारे लौह पुरुष की तरह है । आज हम उनकेलिए एसपीजी कवर लेकर नहीं आए हैं ।मैं उन भूतपूर्व लोगों के एसपीजी कवर की बात कर रहा हूं, जिसको लगातार स्किप किया जा रहा है, चाहे देश में हो या विदेश में हो, इसबारे में सत्यपाल जी ने काफी विस्तार से कहा है । जब आप शाम को बिना एसपीजी कवर के चले जाएं, विदेश या देश के किसी भाग में चले जाएं, आपछुट्टियां मनाते रहें, आपया तो देश में छुट्टियां मना लें या देश में काम करने का प्रयास करें । आज तक हमारे प्रधान मंत्री जी ने एक भी छुट्टी नहींली है । मैं समझता हूं कि यह स्टेटस सिम्बल के लिए नहीं होना  चाहिए ।

          महोदय, मैं कहताहूं कि हमारी सरकार ने जो भी फैसले लिए हैं, वेफैसले देश के आम आदमी के हित में हैं । जिस दिन नरेन्द्र मोदी जी देश के प्रधान मंत्री बने, उन्होंने कहा कि जो पार्लियामेंट मेम्बर्स तथा मिनिस्टर्स के लिए जो लालबत्ती लगती है, उनके लिए वीआईपी कल्चर नहीं होनी चाहिए, क्योंकि हम इस देश में जनता द्वारा चुने हुए जन प्रतिनिधि हैं । एक सामान्य व्यक्ति और इस तरह के वीआईपी कल्चर वालेव्यक्ति में अंतर समाप्त होना चाहिए । मैं समझता हूं कि आजादी के बाद हमारी सरकार ने पहलीबार इस बारे में फैसला लिया और हमनेलालबत्ती और वीआईपी कल्चर को समाप्त करने की कोशिश की । इसमें चिंता की क्याबात है । आज हम एक सामान्य व्यक्ति की चिंता कर रहे हैं । उस सामान्य व्यक्ति की चिंता के साथ-साथ उनकी सुरक्षा की भी बात कर रहे हैं । मैं समझता हूं कि इस तरह से यहांसे प्रतिनिधित्व नहीं जाना चाहिए । आज जिस तरह विस्तार से हमारे कांग्रेस के साथीमनीष जी ने कहा है, उससे ऐसा लग रहा है कि उन्होंने उस समय की घटनाओं का उल्लेख किया । हमारे स्वर्गीय राजीव गांधी जी की जो घटना हुई, हमें ऐसा लगा कि एसपीजी के इस संशोधन बिल के बाद कहीं भी इस तरह की घटनाओं की पुनर्रावृत्ति नहीं होगी । मैं समझता हूं कि इस बारे में आरोप-प्रत्यारोप नहीं होने चाहिए । एसपीजी का यह एक्ट मूल रूप से देश के प्रधान मंत्री के लिए बना था । अगर इसमें बार-बार अमेंडमेंट हुआ, वर्ष 2003 में अमेंडमेंट हुआ, उसमें केवल एक वर्षकी बात थी । आज गृह मंत्री जी उसकोपांच फॉर्मर प्राइम मिनिस्टर के लिए कर रहे हैं ।

         मैं समझता हूं कि यह स्वागत योग्य कदम है । हमारे तमाम सदस्यों ने कहा कि फॉर्मर प्राइम मिनिस्टर को मिलनी चाहिए । पांचवर्ष थ्रेट परसेप्शन पर एसपीजी का कवर दिया जा रहा है । जिनके लिए आज एसपीजी कवर नहीं है, हमउनकी सुरक्षा की चिंता कर रहे हैं ।           इसदेश में 1 लाख नागरिकों पर केवल137 पुलिस वाले हैं । अगर एसपीजी हटा कर उनकोजेड प्लस में 55 सुरक्षा कर्मी दे रहे हैं, जिनमें 10 एनएसजी कमांडो दे रहे हैं । अगर आप यह कह रहे हैं तो आप एनएसजी को स्ट्रीमलाइन कर रहे हैं । मैं कहता हूं कि वही जेड कैटेगरी सुरक्षा जो मिलीहै, अगर वही गृह मंत्री जी को मिली है, तोहम यह कहें कि गृह मंत्री जी या हमारे अन्य मंत्रियों को क्यों नहींएसपीजी कवर मिले? आजएसपीजी कवर की बात आई है, तोआप देखिए कि प्रधान मंत्री की सुरक्षा, प्रधान मंत्री के कार्यालय, प्रधान मंत्री की राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए, जोएक स्पेशलाइज्ड हो, हाई टेक्नोलाजी से ट्रेंड हो, एफीशिएंट हो, रिगरस ट्रेनिंग करके आए हों, उसट्रेनिंग के बाद जब इस देश के प्रधान मंत्री की सुरक्षा का सवालहोता है, तोवह देश के 130करोड़ के एक सिंबल और प्रतीक के रूप में होता है । लोगों ने कहा कि सुरक्षा के लिए दुनिया भर में, हरदेश में दिया जाता है । यूनाइटेड सीक्रेट, जोयूएसए की सबसे हाई सिक्योरिटी कही जाती है, यहसच्चाई है कि वहां पर फार्मर प्रेसीडेंट को दी जाती है । उसे दस साल तक दिया जाता था और उनके परिवार में केवल जो माइनर होतेथे, उनको यह मिलती थी । जब आप मेजर हो गए, घरसे अलग रहने लगे, कोई व्यवसाय करने लगे, कोई काम करने लगे, सार्वजनिक जीवन में भी नहींहैं, पब्लिक लाइफ में भी नहींहैं, तबभी एसपीजी कवर दिया जाए, तोमैं समझता हूं कि यह सिक्योरिटी कंप्रोमाइज होगी और उनकीएफीशिएंसी पर क्वैश्चन लगेगा । कहीं न कहींइसकी संख्या भी तो परिभाषित होनी चाहिए । मैं इस बिल का स्वागत करता हूं कि प्रधान मंत्री जी हों या कोई फॉर्मर प्राइम मिनिस्टर हो, सुरक्षा उसी को मिलनी चाहिए, जोप्रधान मंत्री या फार्मर प्राइम मिनिस्टर के आफिशियल एलॉटेड बंगले में रहता हो, न कि अलग-अलग जगहों पर रहताहो और उसको एसपीजी कवर दिया जाए ।

          वर्ष 2003 केसंशोधन के बाद आज हम 2019 में संशोधन लेकरआ रहे हैं । प्रधान मंत्री की इमीडिएट सुरक्षा की जरूरत है, वहप्रोफेशनल हो, इफेक्टिव हो या एफीशिएंट हो । एक भौगोलिक राजनीतिक सरंचना इस संदर्भ में होती है कि हमारे पड़ोसियों के साथ किस तरह की स्थिति है, खतरों का कितना बहुस्तरीय आयाम है या तमाम ऐसी महत्वपूर्ण चीजें हैं, उनके कारणइस तरह की सुरक्षा की बात आती है । प्रधान मंत्री वर्तमान में रहता है और निश्चित तौर से कठोरफैसले लेता है ।

          आंतरिक सुरक्षा की बात होती है, बाह्य सुरक्षा की बात होती है और जिस तरीके से स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप की बात है, आजपूरे देश और दुनिया में जिस तरीके की परिस्थितियां निर्मित हुई हैं और गृह मंत्री जी आज जो बिल लेकर आए हैं, उसका इस सदन की ओर से सर्वसम्मति सेसमर्थन करनाचाहिए । इस बिल की जो मूल भावना थी, उसका इसलिए गठन हुआ था कि देश के सर्वोच्च प्रधान मंत्री की सुरक्षा, संरक्षा और उनकेकार्यालय, उनसारी चीजों को सुरक्षित रखेगा । उस बिल को आज ठीक ढंग से संशोधित करके लाया गया है । मैं इस बिल का समर्थन करता हूं, धन्यवाद ।                                                                                      

 

SHRI N. K. PREMACHANDRAN (KOLLAM): Sir, I rise to oppose this Bill. I do oppose the Bill because of two reasons. It is stated in the Statement of Objects and Reasons, the reasons for which this Bill is being introduced in this House by the hon. Minister. Two reasons are stated. Firstly, the number of individuals to be provided SPG cover can potentially become quite large. In such a scenario, there can be severe constraints on the resources. So, the resource constraint is the first reason by which this Bill is being introduced and this amendment is being brought before the House.

          The second reason is to bring effectiveness to the SPG in a better way. These are the two reasons for which this Amendment has been brought in. Sir, these two things can be achieved even with the existing Act. You may kindly see the existing Act. In 2003, we all know that after Shrimati Indira Gandhi’ assassination, Special Protection Group Act was enunciated by Parliament in the year 1988 and, subsequently, series of amendments took place in 1991, 1994, 1999 and 2003. If you see the last Amendment of 2003, it was very specific in the original Act that there shall be an armed force of the Union called the Special Protection Group providing proximate security to the Prime Minister and the Members of his immediate family, to any former Prime Minister or to the members of his immediate family for a period of one year. Sir, it is only for a period of one year that SPG coverage will be given to the former Prime Ministers and their immediate family members. If you want to extend the SPG coverage, then periodical assessment of the threat has to be taken into account and subsequent security or SPG coverage is given only if there is a threat perception as far as the former Prime Minister or the immediate relatives are concerned. So, what is the purpose of introducing such a Bill in the House?

          For example, Rahul ji has SPG coverage and Sonia ji also has SPG coverage. Suppose there is no threat perception or no threat assessment as far as these two individuals are concerned, the Government has the absolute power to withdraw the SPG coverage and the existing Act gives ample freedom to the Government. The Government can have the periodical assessment of the threat perception as far as the particular individuals are concerned and the Government can very well assess the threat. If there is no threat, the Government can very well withdraw the security SPG coverage. So, what is the necessity of this legislation? I do allege that this is only to wreck political vendetta against particular persons. What else could be the intent of the Bill?

Further, you may kindly take the cases of the two former Ministers of this country, Shrimati Indira Gandhi and Shri Rajiv Gandhi. Shrimati Indira Gandhi was the then Prime Minister, she was assassinated at the time when she was holding the Office of the Prime Minister. Subsequently, SPG Act has come into effect in the year 1998 on the experience of the security lapse. That is why the 1998 Act came into force. Subsequently, it was amended because the former Prime Minister had to come within the purview of the SPG Act as Rajiv Gandhi had been brutally killed in Sriperumbudur near Chennai. So, the former Prime Ministers were also covered under that SPG Act. That was the subsequent amendment.

          At the time of Atal Bihari Vajpayee ji, subsequent amendment took place in 2003 that the SPG coverage will be available only up to one year. From the death or demitting the Office of the Prime Minister, it will be applicable only up to one year. It is absolutely correct. But, subsequently, a provision is there that a periodical assessment has to be taken into account by which if there is a threat perception, definitely, the SPG coverage will continue, otherwise, it will be withdrawn. That is why I am again and again asking as to what is the necessity of this legislation.

          Sir, you may please see, regarding the assassinations of the two former Prime Ministers – one reason was the LTTE Movement, and another reason was the Khalistan Movement. These two former Prime Ministers sacrificed their lives not only for their personal sake but for the integrity and unity of the country.

HON. CHAIRPERSON : Please conclude.

SHRI N.K. PREMACHANDRAN: Sir, that will be taken into consideration. We are not seeking SPG coverage for any particular individual. If any particular former Prime Minister or his immediate family members are adversely affected, if they have a security threat, they should be protected and safeguarded. We had a bitter experience of Late Shri Rajiv Gandhi who had been killed and the special protection was not provided to him. I would like to urge upon the hon. Minister as well as the Government not to play politics in these issues. The amount which is being spent is very meagre. I urge upon the Government to please withdraw the Bill.                                                                          

SHRI P. RAVEENDRANATH KUMAR (THENI): Hon. Chairperson, Sir, thank you for giving me the opportunity to speak on this Bill. Sir, I take this opportunity to appreciate the hon. Home Minister Shri Amit Shah Ji, who has formulated this Bill, aiming to curtail the unnecessary financial burden on the Exchequer, which is increasing in nature, year by year, since the past three decades under the great governance of our hon. Prime Minister Shri Narendra Modi Ji.

          The Special Protection Group is an elite agency that is provided with the proximate security of the Prime Minister of India. This Bill intends to make amendments to the said Act, making two key changes. Firstly, the SPG will provide security only to hon. Prime Minister of the day and his immediate family members residing with him or her. Secondly, the former Prime Ministers will be guarded by SPG commandos only for a period of five years after demitting office.

          The move to revoke SPG cover from former Prime Minister and his family members has been widely criticized by Opposition leaders, calling the move as vindictive, but it is not true. The decision to amend this Bill is being taken duly after appropriate review meetings, involving the Cabinet Secretariat and inputs from various intelligence agencies. Hence, in my view, it would be wrong to say that the security cover to those VVIPs was just taken away by the Government without proper analysis.

          An annual review of the coverage is done based on the guidelines of the SPG Act. As of now, former Prime Minister, Shri Manmohan Singh as well as the family members of former Prime Minister, late Mr. Rajiv Gandhi are still now being protected under the Z+ security cover. It is a very strong category of security cover of the Central Reserve Police Force.

          Literally it is stated that the expenses for providing SPG have been ballooned over the last decade. It is also learnt that our Union Government has increased the Budget allocation on the elite SPG to Rs.535 crore in 2019-20 from Rs.411.68 crore in the previous fiscal year. By implementation of this Amendment Bill, the Union Government shall divert the available funds to some other public welfare schemes.

          So, keeping in mind the cost-conscious point of view, I support this Amendment Bill, declining proximity security, other than our hon. Prime Minister, Shri Narendra Modi Ji. Thank you very much.

 

श्री हनुमानबेनीवाल (नागौर): माननीय सभापति जी, आपने मुझेविशेष सुरक्षा समूह (संशोधन) विधेयक, 2019 परबोलने का मौका दिया । मैं इसके समर्थन में बोलने के लिए खड़ा हुआ हूं ।

          इससरकार के पिछले पांच-छ: महीने से लगातार एक से बढ़िया एक फैसले आ रहे हैं । एसपीजी सुरक्षा ही इस देश की चिंता नहींहै, देश की सबसे बड़ी चिंता है कि देश की सीमाएं कैसे सुरक्षित रहें, देश में आंतरिक सुरक्षा कैसे बनी रहे । इस सरकार ने नॉर्थ ईस्ट और कश्मीर से कन्याकुमारी तक सब भारतीयों को धारा370 हटाकर एक कर दिया । सुप्रीम कोर्ट में जल्दी सुनवाई करवाकर राम मंदिर का ऐतिहासिक फैसला भी यह सरकार लेकर आई है ।

          इसबिल में उपधारा का प्रस्ताव किया गया है । इसमें विशेष सुरक्षा समूह में प्रधान मंत्री और उनकेसाथ निवास करने वाले निकट परिवार के सदस्यों तथा किसी भूतपूर्व प्रधान मंत्री को आबंटित आवासपर निवास कर रहे निकट परिजनों को उस तारीख से जब वह प्रधान मंत्री नहीं रह जातेहैं पांच वर्ष की सुविधा दी जाएगी ।

कांग्रेस के लोग विचलित हो गए कि हमारी सुरक्षा हटा ली गई, हमारे नेताओं की सुरक्षा हटा ली गई, आपके नेताओं की सुरक्षा हटाई नहीं है बल्कि जेड प्लस दी है, जिसमें 50 सेज्यादा लोग हैं, उनमें 10 एनएसजी के कमांडो भी रहेंगे । मुझे तो आपकेनेताओं को अब सुरक्षा की आवश्यकता भी नहींलगती है क्योंकि जब देश ने नकार दिया तो किसीको सुरक्षा की जरूरत कहांहै  ।सुरक्षा की जरूरत तो उनकोहोती है, जिसको देश पसंद करता है । सेंट्रल हॉल के अंदरभी होते हैं तब भी लोग ध्यान नहीं देते हैं कि कौन कांग्रेस के नेताजा रहे हैं । इस विधेयक के उद्देश्य और कारणों में कहा गया है कि भूतपूर्व प्रधान मंत्री और उनकेकुटुम्ब के सदस्यों को सुरक्षा की व्यवस्था करने की अवधिनिश्चित नहींकी गई । अत: ऐसे व्यक्तियों की संख्या, जिन्हें एसपीजी सुरक्षा दी जानीहै, काफी अधिकहो सकती है । इस परिप्रेक्ष्य में इस बिल में गृह मंत्री जी ने विस्तार से इसकाउदाहरण दियाकि क्यों हमें एसपीजी के अंदरसंशोधन की आवश्यकता पड़ी । विशेष सुरक्षा समूह के गठन के लिए अधिनियम बनाया गया था, उसका एकमात्र उद्देश्य प्रधान मंत्री की सुरक्षा को लेकरथा । प्रधान मंत्री की सुरक्षा सबसे अलग होनी चाहिए । वे तो सब मंत्रियों के प्रधान मंत्री होतेहैं । अब आप प्रधान मंत्री की सुरक्षा हर किसीको देने लग जाएंगे, वैसे एक निवेदन मैं कांग्रेस के भाइयों से कर सकता हूं कि अगर …* …(व्यवधान) मत कीजिए, कीजिएगा भी नहीं । …(व्यवधान) मैं तो कहूंगा कि मत करना । कहीं आप मेराकहना मानकर चले मत जाना…(व्यवधान) एसपीजी प्रधान मंत्री की सुरक्षा के लिए ही ठीक है । लेकिन, गृह मंत्री जी ने उदारता दिखाई और पूर्व प्रधान मंत्री जी को इस श्रेणी के अंदर ले लिया । …(व्यवधान) आप धीरे-धीरे देखिए, आगे क्याहोगा, अभी शुरुआत हुई है । …(व्यवधान) इस बिल के आने से एक परिवार विशेष को एकाधिकार देने के लिए बनाए गए नियमों में परिवर्तन होने से देश में एक संदेश जाएगा, पूरे भारतमें एक संदेश जाएगा । आधी दिल्ली को इन लोगों ने घेर रखा है । तीन, चार, पांच जगहों पर एसपीजी लेकर अलग-अलग बैठ गए हैं ।ये लोग डिस्टर्ब करते हैं । जब ये लोग निकलते हैं तो ट्रैफिक जाम हो जाताहै । इससे आम आदमीपरेशान होताहै । अभी इन लोगों को एसपीजी की आवश्यकता नहीं है । ऐसे मामलों में आपको भी हंगामा नहींकरना चाहिए । कांग्रेस पार्टी इस चुनाव में कम संख्या में आने से बौखलाहट में है । लेकिन, इसबौखलाहट का इलाज एसपीजी से नहींहोने वाला । जब 2024 काचुनाव होगा, तबदेखा जाएगा  ।एसपीजी की सुरक्षा लेने से कोई बड़ा नहीं हो जाता । …(व्यवधान) महाराष्ट्र में आप चार-पांच लोग मिल गए हैं, एकनहीं है । …(व्यवधान) … * ज्यादा मत कीजिए, हमसे मत अड़िए ।…(व्यवधान)

माननीय सभापति: बेनीवाल जी आप इधर देखिए ।

…(व्यवधान)

श्री हनुमानबेनीवाल: आजकांग्रेस और उनकेएकाधिकार रखने वाले परिवार को देश की जनता नकार चुकी है । मैं एक उदाहरण देनाचाहूंगा । यहां मैं रोज देखता हूं कि बंगाल की छोटी सी बात होते ही तृणमूल के नेता खड़े हो जातेहैं । मैं यह कह रहा हूं कि राजस्थान के अंदरएक केंद्रीय मंत्री और हमारे ऊपर मुख्य मंत्री के इशारे पर जानलेवा अटैक हुआ । मैंने इस पार्लियामेंट में प्रिविलेज मोशन मूव किया था । …(व्यवधान) आप कौन-सीबातें कर रहे हैं कि हम सुरक्षित नहीं है, फिर भी आप सबको सुरक्षा दी जातीहै, एमपी को पीएसओ मिले होंगे । …(व्यवधान) मैं अभी थोड़ी देर में जाऊंगा । मैंने टाइम मांग रखा है । हमारे ऊपर अटैक हुआ, देश के एक कैबिनेट मंत्री के ऊपर राजस्थान में अटैक होता है, एकसांसद पर अटैक होता है, उसका प्रिविलेज मोशन पालिर्यामेंट के अंदरमूव होता है और वहां कांग्रेस की सरकार है । आप हर चीज पर जोर-जोर से चिल्ला रहे हैं । अखबार में छपने के लिए आगे आ जातेहैं, आपका यही मकसद है । आप लोगों ने 70 सालों में क्या कर लिया? सरकार से हम भी संरक्षण चाहते हैं । जहां हमारी सरकारें नहीं हैं, वहां केंद्र के नेताओं की, सांसदों की, मंत्रियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी केंद्र सरकार की है । इस दिशा में भी ध्यान देनाचाहिए । मैं एक मिनट में अपनी बात समाप्त करूंगा । यह एसपीजी के रिव्यू का सिस्टम है । जो जेड प्लस एवं अन्य सुरक्षा कवर दिए जाते हैं, उनका भी समय-समय पर रिव्यू हो । लोग बीस-तीस साल से सुरक्षा लेकर बैठे हैं, मरगए, अबउनके बेटे को मिल रही है, पोते को मिल रही है । यह देश कोई गोशाला तो नहींहै कि हर आदमीआए और चलकर दिल्ली के अन्दर चला जाए । सभापति महोदय, मेरे कहनेका मतलब यह है कि एसपीजी एवं जितनी भी तरह की सुरक्षा आप दे रहे हैं, इनका हर साल रिव्यू होना चाहिए कि जिसेआप सुरक्षा दे रहे हैं, उसे खतराहै या नहीं । …(व्यवधान)

HON. CHAIRPERSON: Shri Beniwal, please conclude.

… (Interruptions)

श्री हनुमानबेनीवाल: अबमैं एसपीजी पर वापसआ रहा हूं ।…(व्यवधान)

          सभापति महोदय, चाहे एसपीजी हो, एनएसजी हो या जेड प्लस सिक्योरिटी हो, इनका रिव्यू हर दो साल में होना चाहिए । यहां हमारे रक्षा मंत्री जी बैठेहैं, गृह मंत्री जी बैठे हैं, मेरा सुझाव है कि हर दो साल में इसका रिव्यू होना चाहिए कि आवश्यकता है या नहीं । मैं धन्यवाद दूंगा कि जब से आपने कश्मीर में अलगाववादी नेताओं की सुरक्षा हटाई, सबबिलों के अंदर छिप गए, सारी नेतागिरी भूल गए । …(व्यवधान)

HON. CHAIRPERSON: Shri Beniwal, please conclude now.

          Next, Shri Rajiv Pratap Rudy.

… (Interruptions)

श्री हनुमानबेनीवाल:  मैं आधा मिनट में अपनी बात खत्म करूंगा ।

माननीय सभापति: नहीं, इतना ज्यादा टाइमनहीं है ।

श्री राजीव प्रताप रूडी  ।

श्री हनुमानबेनीवाल: सर, प्रधान मंत्री जी की एसपीजी सुरक्षा की बात हुई है । पार्लियामेंट के अंदरप्रधान मंत्री जी भी बैठते हैं, सारे मंत्रिगण एवं हम सभी सांसद यहां बैठते हैं । पार्लियामेंट पर जब अटैक हुआ । …(व्यवधान)

HON. CHAIRPERSON: Nothing will go on record.

… (Interruptions)… *   HON. CHAIRPERSON: Shri Rudy, please start your speech.

Nothing will go on record except what Shri Rudy speaks.

… (Interruptions)… * श्री राजीवप्रतापरूडी (सारण): सर, मैं इस बिल के समर्थन में बोलने के लिए खड़ा हुआ हूं । मेरे मित्र श्री मनीष तिवारी यहां बैठे हैं । मुझे याद है कि अपने छात्र जीवन में जब तक मैं राजनीतिक हत्याओं के बारेमें और एसैसिनेशन्स के बारेमें नहीं समझता था, बहुत कम आयु में विश्वविद्यालय की राजनीति में यदि सबसे पहले किसी राजनीतिक व्यक्ति पर मुझेमाला चढ़ाने का मौकामिला तो वह मनीषतिवारी के पिता जी थे, जिन्हें आतंकवादियों ने पंजाब विश्वविद्यालय की राजनीति में मार गिराया था । उस समय इनकी उम्र मुश्किल से 20या 21 साल थी । जब उन्होंने यह पूराविषय उठाया है तो शायद वह ऐसे एक व्यक्ति हैं, जिसके पिताजी की हत्या कहींन कहीं राजनीतिक रूप से हुई थी और इस विषय को लेकरउन्होंने बहुत सारे विषयों का विश्लेषण किया । इनका विश्लेषण बहुत ही सामान्य था । इन्होंने एक उदाहरण दियाकि राजीव जी की सिक्योरिटी हटवाने के बाद, उनकी सिक्योरिटी व्यवस्था हटाई गई, जिसके कारण बाद में उनके निर्णयों के कारणउनकी हत्या कर दी गई ।  शायद इस विषय को लेकरउन्होंने यह स्पष्टीकरण करना चाहा कि वर्तमान में जितने प्रधान मंत्री या पूर्व प्रधान मंत्री हैं, उनके परिवार के लोगों को सुरक्षा मिल रही है । लेकिन तब उस विषय में एक फर्कथा कि उस समय एसपीजी में यह प्रॉविजन नहीं था कि उनके परिवार वालों को लायाजाए । आज अगर इनकी सिक्योरिटी हटी है, एसपीजी कवर हटा है तो मैं समझता हूं कि दूसरी बहुतही महत्वपूर्ण फोर्सेज उनके साथ लगाई गई हैं और वे पर्याप्त हैं । अगर आप भारतमें कहें कि चाहेसीआरपीएफ हो, एनएसजी हो, वेकैपेबल नहींहैं और सिर्फ एसपीजी ही कैपेबल है तो मैं समझता हूं कि यह उचित नहीं होगा । हो सकताहै उस समय कोई गलती हुई हो और जो गृह मंत्रालय के लोग हैं, जोसरकार का सिस्टम है, वेइसे इंस्टीट्यूशनल मेमोरी का पार्ट समझते हैं और जब-जब इस प्रकार की गतिविधियां होती हैं, उनमें कुछ न कुछ सुधार करके, देश को इंस्टीट्यूशनली आगे ले चलनेकी व्यवस्था की जातीहै । एक समय ऐसा भी था कि जब दिल्ली में देश के प्रधान मंत्री जातेथे तो जो पार्लियामेंट स्ट्रीट का डीसीपी होताथा, वहदेश के प्रधान मंत्री की सुरक्षा का इंचार्ज हुआ करता था । उसके बाद वह स्थिति बदलीऔर आईबी ने एक विशेष स्टडी की । उसके बाद दिल्ली में प्रधान मंत्री को एक एस्कॉर्ट दिया जाने लगा और उसकेसाथ देश के प्रधान मंत्री यहांचलते थे । वर्ष 1984 में श्रीमती गांधी की असैसिनेशन के बाद एक स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप बना और बीरबल नाथ कमेटी रिपोर्ट आई और 30 मार्च, 1985 कोयह निर्णय लिया गया कि हम एक एक स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप बनाएंगे । वह उस समय कार्यपालिका के एक आदेश से बना था । It was through an executive order.

देश की संसदका महत्व देखिए कि तब देश ने तय किया कि देश के प्रधान मंत्री का पद बहुत बड़ा है । उसके लिए कोई शासक या एग्जिक्यूटिव आफिसर या एडमिनिस्ट्रेटर निर्णय नहीं लेगा, बल्कि देश की पार्लियामेंट ने तय किया और तब हमारी सरकार नहीं थी । यहां बैठे सांसदों ने तय किया कि देश के प्रधान मंत्री को हम एक विशेष सुरक्षा देंगे और यह निर्णय देश के प्रधान मंत्री का नहीं था । यह निर्णय देश के सांसदों का था, जिन्होंने सदन में बैठकर तय कियाकि सबसे बड़े ओहदे पर बैठेहुए व्यक्ति के लिए हम एसपीजी प्रोटेक्शन देंगे । एसपीजी, सीआरपीएफ और दूसरी फोर्सेज की तरह फोर्स नहीं है । एसपीजी और नेशनल सिक्योरिटी गार्ड्स, जिसकी यूएस की नेवीसील्स से तुलना कर सकतेहैं और मुझे तो लगताहै कि नेशनल सिक्योरिटी गार्ड्स भारत की एक छिपी हुई फोर्स है, जिसके बारे में बहुत लोग नहीं जानते हैं । यूएस नेवी सील्स के बारेमें बात करते हैं, तोउससे भी ताकतवर संस्था हमारे भारत में है, जोएनएसजी है । इसी प्रकार एनएसजी का भी अपना कोई काडर नहीं है । इसमें देश भर के लोगों में से जो बेस्ट होते हैं, चाहे सीआरपीएफ के हों या स्टेट पुलिस के हों और सभी प्रकार की फोर्सेज के बेस्ट लोगों को लेकर फोर्स तैयार की जातीहै ।

     

16.33 hrs                       (Hon. Speaker in the Chair) एसपीजी का स्वरूप बड़ा है । एसपीजी जब से देश के प्रधान मंत्री की सुरक्षा में लगी है, एकभी घटना, न तो परिवार के सदस्यों के साथ और न ही किसी प्रधान मंत्री के साथ घटित हुई है । सदन को सबसेपहले इस एसपीजी फोर्स का अभिनंदन करना चाहिए कि वह देश की सुरक्षा की इतनीबड़ी जिम्मेदारी निभा रही है । एसपीजी के अधिकारियों को शौर्य चक्रमिला है, पुलिस मैडल, प्रेजिडेंट मैडल मिला है । यह क्लोज्ड प्रोटेक्शन ग्रुप है । यह कठिनाई थी कि कोई कट ऑफ डेट नहीं थी, जिसके कारण इसकी संख्या बढ़ती जा रही थी और स्वाभाविक तौर से निर्णय लिया । He is the Head of the Government and we have taken it upon ourselves that this Parliament will decide that we have to secure the Prime Minister. हमारे प्रधान मंत्री जी का तो स्वभाव ही नहींहै । हमारे प्रधान मंत्री जी को यदि कह दियाजाए, तोमुझे नहीं लगता कि वे एक सिपाही भी लेकरचलने के लिए तैयार होंगे । उनके तो स्वाभाव में ही नहींहै, लेकिन ये एसपीजी के लोग उनकी सुरक्षा के लिए हैं । हम राजनीतिक रूप से प्रधान मंत्री जी को जाते हुए देखते हैं, तोदेखते हैं कि एसपीजी सुरक्षा में लगे अधिकारी बहुत कठिन काम करते हैं । ये सुरक्षा के समय दिखाई नहीं देते हैं और देश के प्रधान मंत्री की क्लोज्ड प्रोटेक्शन ग्रुप में सुरक्षा करना कोई साधारण बात नहीं है । प्रधान मंत्री जी के पास नेता आते हैं, ब्यूरोक्रेट्स आते हैं, उनका व्यवहार अच्छा है, उनका प्रोफेशनलिज्म दुनिया में सबसे आगे है । यह सबसेएजाइल फोर्स है । ऐसा स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप, माननीय अध्यक्ष जी कह रहे थे कि दुनिया की चर्चा मत करो । मैं कहना चाहता हूं कि हमारा जो स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप है, वहदुनिया की सबसे बेहतरीन प्रोटेक्शन फोर्स है, जिसे हम लोगों ने देश में सदन में एक्ट द्वारा स्थापित किया है । Prime Minister is the symbol of democracy. Prime Minister is the symbol of 130 crore people of this country. हमप्रधान मंत्री की बात कर रहे हैं । देश के प्रधान मंत्री जब मुख्य मंत्री थे, हमने कभी सदन में यह नहींकहा कि हमारे मुख्य मंत्रियों को भी एसपीजी प्रोटेक्शन दो । वहां उनके पास एनएसजी प्रोटेक्शन था, लेकिन जब देश के लोगों ने उन्हें इस पद पर चुना, तोस्वाभाविक तौर पर संसदने तय किया कि हम अपने प्रधान मंत्री को प्रोटेक्ट करेंगे और यह मूल रूप से प्रधान मंत्री को प्रोटेक्ट करने का बिल था, जिसके बारे में हम लोग चर्चा कर रहे हैं ।

          महोदय, मैं जानता हूं कि आप मुझेबैठने का आग्रह करेंगे । इस बिल में बहुत ही सिग्निफिकेंट चीज है और वह केवल तीन ही सेंटेन्स हैं । प्रेमचन्द्रन जी ने उसे दूसरा रूप देना चाहा और कहा कि पॉलिटिकल वेनडेटा है, मैं उस पर नहीं जाऊंगा । इसमें तीन बहुत महत्वपूर्ण विषय हैं और ये वाक्य अपने आप में बहुत पावरफुल हैं और अध्यक्ष जी, मैं आपकेसामने कहना चाहूंगा कि मैं राज्य सभा से लोक सभा में आया हूं और इस सदन में जो लेवलऑफ डिबेट है और हमारे माननीय सांसदों का जो बयान और वक्तव्य है, वहअपने आप में सबसे बड़ी पहचान है कि सदन की गुणवत्ता में अप्रत्याक्षित वृद्धि है, जोदिखता भी है । This Bill is significant today because the geopolitical context of our nation is changing. यह कितना महत्वपूर्ण है, यहऊपर से पढ़कर समझ नहीं आएगा but the geopolitical context of India is changing.यह स्टेटमेंट आफ आब्जेक्ट्स एंड रीजन्स में दिया है । We have a hostile neighbourhood. हमपिछले 70 वर्षों से एक होस्टाइल नेबरहुड से लड़ रहे हैं और उसकानेतृत्व आज इस होस्टाइल नेबरहुड से लड़नेका नेतृत्व यदि किसी ने दियाहै, तोदेश के प्रधान मंत्री ने दियाहै और इसे हम सब मिलकर स्वीकारते हैं । तीसरी बात मल्टी डाइमेंशनल थ्रेट्स है । आजकल हम साइबर थ्रेट की बात कर रहे हैं, मिसाइल थ्रेट की बात कर रहे हैं । देश के प्रधान मंत्री जी तो यदि सड़क पर भी बाधा उत्पन्न होती है, तोउससे भी परहेज करते हैं कि दिल्ली के लोगों को दिक्कत होतीहै । यह कंनसैप्ट सिर्फ यहां तक सीमित नहींहै कि मेरे अगल-बगल में कौन चलता है । It is an international threat because India is emerging as a global power. If a country is emerging as a global power, certainly we have to protect our Prime Minister.

          मैं सिर्फ इतनाही कहना चाहूंगा कि कई लोगों ने स्टेटस और सिम्बल का जिक्र कियाहै, यहएक अलग विषय है । मैं समझता हूं कि देश के गृह मंत्री ने पर्याप्त रूप से उपलब्ध कराया है, जोसीआरपीएफ, जोएनएसई है, औरभी जरुरत होगी तो सरकार का दिल इतना बड़ा है, सरकार का दिल इतना उदार है कि अगर जो ऐसे लोग हैं, जिनके ऊपर खतरा है, आईबी और पुलिस का अगर थ्रैट परसैप्शन है, स्टेट इंटेलीजेंस का अगर थ्रैट परसैप्शन है, तोमैं समझता हूं कि सरकार का दिल इतना उदार है कि निश्चित रूप से इस प्रकार की सुरक्षा चाहे देश के पूर्व प्रधान मंत्री हों, याउनके पुत्र हों या हमारे जैसेलोग हों, किसी को भी जरूरत पड़े तो देश की सरकार उसको जरूर देखेगी । मैं इतना ही कहनाचाहता हूं कि इस विषय को तो सदन में आने की आवश्यकता भी नहींहोनी चाहिए थी, क्योंकि देश के प्रधान मंत्री की सुरक्षा की बात है । यह सर्वसहमति से निर्णय होनाचाहिए था कि जो देश की सरकार देश के प्रधान मंत्री के लिए तय करती है, वहइस संसद को पूरीतौर से स्वीकार्य है । मैं आपके माध्यम से कहनाचाहूंगा कि बहुत बड़ा कदम उठाया गया है और हमारे लिए प्रत्यक्ष रूप से अगर सबसे महत्वपूर्ण व्यक्ति कोई है तो वह देश का प्रधान मंत्री है और इस सदन की जिम्मेदारी है कि जो सवा सौ करोड़लोगों का प्रतिनिधित्व करता है कि देश के प्रधान मंत्री की सुरक्षा की जिम्मेदारी सदन ने ली है, बाकी जगह कुछ और लेतेहैं, इसलिए सदन की जिम्मेदारी है कि हम उस महत्व को बनाए रखें । मैं माननीय गृह मंत्री जी का आभार प्रकट करना चाहूंगा कि इस संशोधन को लाकरदेश के प्रधान मंत्री की सुरक्षा का ख्याल कियागया  है और हमें विश्वास है कि हम कामयाब रहेंगे ।                      

माननीय अध्यक्ष : श्री गौरव गोगोई जी,  मैं आपको दो मिनटका समय दूंगा । आपके सदस्य ने आपकासारा समय ले लिया । आप बोलिए ।

SHRI GAURAV GOGOI : Hon. Speaker, thank you for giving me the time. This Bill is nothing but a political vendetta, camouflaged in legislation. It is ironical that this Bill was born out of an assassination of a former Prime Minister and it was later amended by the assassination of another former Prime Minister. Now, this Bill is being brought to withdraw protection of the members of that same patriotic family, which has given so much to this nation.

          Sir, I would like to talk to you about the reports that were documented by the Government of India when Mahatma Gandhi Ji was assassinated. The former Union Home Minister, Sardar Vallabhbhai Patel said that an environment of hate and fear was present at that time which compelled this young man to take this horrific action. It is another thing completely that today in this House, we have an hon. Member who thinks that Nathuram Godse was a patriot and she is not the only one. She should apologise. The same environment of fear and hate which led to the assassination of Mahatma Gandhi, also exist today because there is a clash of values and civilisation.

          This Bill is completely laughable when it says that due to lack of resources, this Bill is being brought. Is the financial status of this Government so poor? The BJP takes examples of how current SPG protectees do not respect the protocols of the SPG. I want to cite a few examples of how the SPG’s protocols are being violated by this Government, by the hon. Prime Minister. Remember the Gujarat elections, the hon. Prime Minister took a tour on a sea plane with a foreign pilot and with no SPG. Where was the respect for SPG then? This is a very serious issue. We want to review the SPG protocols. We care about the protection of the hon. Prime Minister. That is why, we want to ask this question to the hon. Home Minister. How was the hon. Prime Minister allowed to fly on a sea plane? When Z-plus security fly on a double engine, our hon. Prime Minister flew on a sea plane. That was wrong.

Now, I give second example. It has been recorded in the Media that in Chitradurga during the Karnataka election, one big black box was taken out of the hon. Prime Minister’s chopper and was rushed to a private vehicle, Toyota Innova. …(Interruptions) What was there in the box? This is regarding the review of the SPG. …(Interruptions) We are reviewing the protocols of SPG. Now, I give last example of Odisha election. We care about the security of the hon. Prime Minister. When an official of the Election Commission went to inspect the chopper of the hon. Prime Minister, he was suspended. Why? He was doing his job. He was looking after the security.Therefore, this Bill is purely political, narrow and petty. We oppose it. You should withdraw it. Thank you.

 

श्री अमितशाह  : माननीय अध्यक्ष जी, इसमहत्वपूर्ण बिल पर पक्ष, विपक्ष – दोनों के कई माननीय सदस्यों ने इसमें हिस्सा लियाहै । श्री मनीष तिवारी जी, सत्यपाल सिंह जी, श्रीमान राजा जी, सुदीप बन्दोपाध्याय जी, वाईएसआरसीपी के श्रीमाधव जी, राजीव रंजन सिंह जी, जगदम्बिका पाल जी, प्रेमचन्द्रन जी, राजीव रूडी जी, हनुमान बेनीवाल जी और गौरव गोगोई जी – सभी ने अपने-अपने विचार इस बिल पर व्यक्त किए हैं ।

          कांग्रेस पार्टी और उनकेसाथी सदस्यों का भाषणमैंने बहुत डीटेल में, ध्यान से सुनाहै । उससे एक इस प्रकार का इम्प्रेशन देश में बनकर जाता है, देश की जनता के सामने जाताहै, जैसे यह एक्ट, जोबदला जा रहा है, वहगांधी परिवार की सुरक्षा हटाने के लिए बदला जा रहा है । मान्यवर, यहवास्तविकता नहीं है । जो इनकोचिंता है, चिंता कितनी वाजिब है या नहीं वाजिब है, यहमैं बाद में बताता हूं, परंतु जो इनकोचिंता है, वहसुरक्षा का बदलाव पुराने एक्ट के तहत ही ‘इयर्ली प्रोफेशनल थ्रेट असेसमेंट’ केआधार पर किया है । यह एक्टतो अब अस्तित्व में आएगा, जबयह सदन इसे पारित करेगा । जिस एक्ट की आप दुहाई दे रहो कि आप उस एक्ट को मत बदलो और हाय-तौबा मचा रहे हो, उसएक्ट के तहत ही यह सुरक्षा का बदलाव कियागया है ।

          देश में एक चित्र ऐसा भी खड़ा करने का प्रयास हुआ कि जैसे गांधी परिवार की सिक्योरिटी की सरकार को चिंता ही नहींहै । इनकी सुरक्षा हटाई गई –सुरक्षा हटाई नहीं गई है, सुरक्षा बदली गई है, थ्रेट असेसमेंट के आधारपर बदली गई है । थ्रेट असेसमेंट के आधारपर उनकी सुरक्षा जेड प्लस सीआरपीएफ कवर विद एएसएल (ASL) एंड विद एम्बुलेंस पूरे देश भर में की । श्रीमान मनीष तिवारी जी कहतेथे कि जब राजीव गांधी गए, तबवहां एक कॉन्सटेबल था । सोनिया जी कहींगई, तबवहां सिक्योरिटी नहीं थी । उन्होंने पास्ट के कुछ उदाहरण, वेशायद साथ में भी होंगे,    समझाए ।

          मैं माननीय सदस्य मनीषतिवारी जी से कहना चाहता हूं कि ऐसा कुछ होने की संभावना इसलिए नहीं है, क्योंकि इस बार जो निर्णय किया गया है, उसमें उनको जेड प्लस विद एएसएल दिया है । एएसएल का मतलबहै, पहले जाकरकोई स्पॉट का थ्रेट असेसमेंट करेगा, कार्यक्रम का थ्रेट असेसमेंट करेगा और राज्य सरकारों के साथ कोऑर्डिनेट करेगा और राज्य सरकार की सुरक्षा नहीं दी है । आपने उल्लेख किया कि राज्य सरकार के भरोसे छोड़ दिया । सीआरपीएफ सेंट्रल एजेंसी है, पूरे देश भर में विद्यमान है, हरराज्य में विद्यमान है, इसलिए उसका सुरक्षा कवर दिया गया है । वहां पर एम्बुलेंस भी होगी, डॉक्टर भी होंगे, सीआरपीएफ के कमांडो भी होंगे ।

          मान्यवर, मैं यह पूछना चाहता हूं कि एसपीजी कैसेबनती है? एसपीजी के जो सुरक्षाकर्मी हैं, वेकोई बाहर से नहींआते हैं, स्वर्ग से नहींआते हैं । वे सीआरपीएफ के ही कुछ जवान होते हैं, वेबीएसएफ के ही कुछ जवान होते हैं, वेअन्य एजेंसियों के ही कुछ जवान होते हैं । यह स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप बना है, जिसमें अनेक सुरक्षा बलों के जवानों को इकट्ठा कर के एक एजेंसी बनती है । मैंने पहले भी कहा कि स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप प्रधान मंत्री जी की न केवल व्यक्तिगत सुरक्षा, उनकी ऑफिस, उनके कम्युनिकेशन, उनके निवास पर, उनके काम करने की जगह, उनका आरोग्य, इनसारी चीज़ों की चिंता करनेके लिए बना है और इसीलिए इसका नाम स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप रखा   है ।

          येआगे बताते थे कि इसे अब बदला, तबबदला, चार बार बदल हुए । मुझे कहने में कोई झिझक नहीं है रिकॉर्ड पर कि चार बार बदल एक परिवार को ध्यान में रखकर किए गए हैं ।पहली बार बदल प्रधान मंत्री जी की सुरक्षा को ध्यान में रखकर किया गया, वर्ना मैं बताता हूं, अभी इतनाशोर-शराबा होता है, सुरक्षा खतरों की समीक्षा के बाद मान्यवर चन्द्रशेखर जी की सुरक्षा ले ली   गई । देश भर का कोई कांग्रेसी कार्यकर्ता कुछ नहीं बोला । श्री चन्द्रशेखर जी बहुतबड़े नेता थे । देश के पूर्व प्रधान मंत्री थे । उनका बहुत बड़ा योगदान था । किसी का भी निवेदन नहीं आया । बाद में नरसिम्हा राव जी की सुरक्षा चली गई । कोई नहीं बोला । किसी ने चिंता व्यक्त नहींकी, क्यों? वहभी तो पूर्व प्रधान मंत्री थे । उनके परिवार की भी सुरक्षा हटा ली गई । मैं पूरे डिटेल में बताता हूं । श्री आई.के. गुजराल साहब की सुरक्षा थ्रेट असेसमेंट के बाद ली गई, लेकिन कोई नहीं बोला । चिंता किसकी है? वीआईपी की है, देश के नेतृत्व की है या एक परिवार की है? यहबात स्पष्ट करें । …(व्यवधान)

          मान्यवर, उसके बाद डॉक्टर मनमोहन सिंह, जोपूर्व प्रधान मंत्री थे, इसी नियमके अंतर्गत उनकी सुरक्षा छीनी नहीं गई, बल्कि बदली गई । ये ‘छीन ली गई’ शब्द का प्रयोग कर रहे हैं । तब भी किसीने हो-हल्ला नहीं किया, क्यों? क्या डॉक्टर मनमोहन सिंहदेश के नेता नहीं हैं? पूर्व प्रधान मंत्री नहीं हैं? आपकी पार्टी के ही हैं । नरसिम्हा राव जी भी आपकी ही पार्टी के थे । डॉक्टर मनमोहन सिंह जी भी आपकी पार्टी के हैं ।आपने क्यों चिंता व्यक्त नहीं की? चिंता व्यक्त करने के दो मापदंड क्या हैं, यहदेश की जनता को समझना चाहिए । ये केवल और केवलएक परिवार की सुरक्षा की चिंता की बात कर रहे हैं । इन्होंने एसपीजी को एक स्टेटस सिम्बल बनाया है, ताकि दिखासकें कि हम जनतासे अलग हैं । जनता से अलग कोई भी नहींहोता, प्रधान मंत्री भी नहीं । चूंकि वह राष्ट्राध्यक्ष के रूप में काम करते हैं, इसलिए उनकी पूरी संचार व्यवस्था को सुरक्षित रखना जरूरी है, उनके कार्यालय को सुरक्षित रखना जरूरी है । उनके विदेश दौरों को सुरक्षित रखना जरूरी है । उनकी आरोग्यता की चिंता भी एक स्पेशल तरीके से करनेकी जरूरत है । वह जब तक प्रधान मंत्री हैं, उनकी सुरक्षा एसपीजी ग्रुप करता है । जैसा कि हमारे श्रीराजीव रंजन जी ने कहा कि पांचसाल बढ़ाने की भी जरूरत नहीं है । इतने में ही राजीव रंजनजी इतनी हाय-तौबा मचा रहे हैं, बाद में क्या करेंगे?

महोदय, मैं अभी भी सारे विपक्ष के मित्रों को कहनाचाहता हूं कि इससेअगर किसी की सुरक्षा कर्टेल हुई है तो वह श्री नरेन्द्र मोदी जी की हुई है, क्योंकि बाकी सभी लोगों की सुरक्षा तो यह एक्ट बनने से पहलेही हटा दी गई है । जब श्री नरेन्द्र मोदी जी प्रधान मंत्री नहींरहेंगे, तबछठवें साल उनकी सुरक्षा तुरन्त चली जाएगी । अगर किसी की सुरक्षा जाने वाली है तो वह श्री नरेन्द्र मोदी जी की जाने वाली है और किसी की नहींजाने वाली है । पुराने एक्ट के तहत ही बाकी की सुरक्षा हटाई गई है । चन्द्रशेखर जी के दोनों पुत्रों की सुरक्षा एसेसमेंट के बाद हटाई गई, नरसिम्हा राव जी के आठ पारिवारिक सदस्यों की सुरक्षा को थ्रेट असेसमेंट के बाद हटाया गया । आई.के. गुजराल साहब के परिवार के तीन सदस्यों की सुरक्षा को थ्रेट असेसमेंट के बाद हटाया गया । डॉक्टर मनमोहन सिंह जी के परिवार के भी तीन सदस्यों की सुरक्षा को थ्रेट असेसमेंट के बाद हटाया गया । इन सब में से किसीके लिए मैंने एक प्रेस-नोट भी नहींदेखा, किसी के लिए एक स्टेटमेंट भी नहींदेखा, किसी के लिए सदन में चर्चा की मांगभी नहीं की गई । मैं बिल लेकर आने वाला था, सदन में चर्चा भी होनेवाली थी, मगर यहांपर पूरा सदन बन्द कर दियागया - vindictive approach, vindictive approach, vindictive approach.

श्रीमान गौरव गोगोई को मैं अध्यक्ष जी के माध्यम से कहनाचाहता हूं कि ‘vindictive approach’ मेरी पार्टी का संस्कार नहीं है । कांग्रेस पार्टी ने कई बार ‘vindictive approach’ से पूरे देश को जेल में डाला । …(व्यवधान) । यह मेरी पार्टी का संस्कार नहीं है । …(व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष: माननीय सदस्य, जबआपके मनीष तिवारी जी 39मिनट तक बोले, तबकोई माननीय सदस्य नहीं बोला था । आप भी सुनने का माद्दा रखें । सदन में यह ठीक नहीं है । जब डिबेट होतीहै, वाद-विवाद होता है, अगर उस समय कोई सदस्य बोलता है, मैं उनकोभी टोकता  हूं । 

SHRI KODIKUNNIL SURESH : Sir, please allow me to make a submission.

HON. SPEAKER: No, please.

… (Interruptions)

SHRI KODIKUNNIL SURESH : Sir, after the Home Minister  concludes, please allow me to speak.

माननीय अध्यक्ष: आपने भी पॉलिटिकल बात बोली है । आपने भी आरोपलगाए हैं । जब भी किसीमाननीय सदस्य ने बोला, तोमैंने उनको चुप करा दिया । माननीय गृह मंत्री जी कृपया बोलें ।

…(व्यवधान)

HON. SPEAKER: Hon. Sureshji, no.

… (Interruptions)

श्री अमितशाह : मान्यवर, श्री मनीषतिवारी जी ने चिंता व्यक्त की । मैं इनको आश्वस्त करना चाहता हूं कि एक भी व्यक्ति, एकभी सुरक्षा कर्मी संख्या में वहां से कम नहीं किया गया है । और तो और आपको बता दूं कि संख्या बढ़ाईगई है । मगर, यदि स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप चाहिए, क्योंकि वह प्रधान मंत्री पद के लिए होता है । लोकतंत्र में जो फैसले जनताकरती है, उसे स्वीकार कीजिए । आपको जनता के फैसले स्वीकारने पड़ेंगे । जहां तक सुरक्षा का सवालहै, तोसिर्फ गांधी परिवार ही नहीं, बल्कि देश के एक-एकनागरिक की सुरक्षा की जिम्मेदारी भारत सरकार की है । संविधान के अंदरऔर संविधान के दायरे में पूरे देश के लोगों की जिम्मेदारी, मॉनीटरिंग रोल पर और सीधे तौर पर, जहां-जहां भी भारतसरकार की है, भारत सरकार की ओर से मैं आश्वस्त करना चाहता हूं कि देश के हर नागरिक की सुरक्षा भारत सरकार की है । देश के हर नागरिक की सुरक्षा की मांग  ही  नहीं,  एक परिवार  की  सुरक्षा की मांग,   लेकिन हर नागरिक में वे भी नागरिक हैं, इसलिए मैं आश्वस्त करना चाहता हूं कि उनकीसुरक्षा की पर्याप्त व्यवस्था कर दी गयी है । वर्मा कमीशन की रिपोर्ट को इन्होंने क्वोट किया कि वर्मा कमीशन ने कहा था कि और कोई व्यवस्था किए बगैर एसपीजी कवर उठा लिया, इसलिए यह दुर्घटना हुई । मान्यवर, यहठीक है और वर्मा कमीशन से हम भी सीखते हैं ।इसलिए हमने एडवांस में व्यवस्था कर दी है । उनको जेड प्लस सुरक्षा दे दी है । वर्मा कमीशन पढ़कर ही दी है कि एडवांस में सुरक्षा दे दो, बाद में एसपीजी विद्ड्रा कर लो । उन्होंने कहा कि मनमोहन सिंहजी के पत्र का जवाबनहीं दिया । मैं कहना नहीं चाहता था, सार्वजनिक नहीं करना चाहता था, लेकिन अब उन्होंने ही पोलिटिसाइज़ करने का निर्णय कियाहै तो मैं क्या कर सकताहूं, मुझे जवाबदेना पड़ेगा क्योंकि उन्होंने मुद्दा उठाया है । मनमोहन सिंह जी के पत्र के जवाबका सवाल ही नहींहै, जबमनमोहन सिंहजी की सुरक्षा बदल गयी, तबडायरेक्टर आईबी, जोखुफिया एजेंसी के सर्वोच्च पद पर होते हैं, वेव्यक्तिगत रूप से मनमोहन सिंहजी और उनके परिवार को मिलने गए थे । उन्होंने बताया कि थ्रेट असैसमेंट हुआ है और एसपीजी की अब आपको जरूरत नहीं है । आपको नयी सुरक्षा मिलेगी, जोइस-इसप्रकार से काम करेगी । उनके ऑफिस के साथ मीटिंग की गयी और उसके बाद हेण्डओवर और टेकओवर हुआ ।यही प्रक्रिया, जबगांधी परिवार का थ्रेट असैसमेंट हुआ, तबभी अपनायी गयी और डायरेक्टर आई बी ने कहा कि हम मिलने आना चाहते हैं । उन्होंने फोन किया, लेकिन उनको कहा गया कि आपनेजो तय किया है, वहकर दीजिए । आपको हमें मिलने की जरूरत नहींहै । अब डायरेक्टर आईबी क्या कर सकतेहैं, खुफिया एजेंसी का अध्यक्ष क्या कर सकताहै, जबआप उसको मिलने का टाइमही नहीं देंगे । उन्होंने कहा कि आप कर दीजिए । इसके बावजूद भी उन्होंने एसपीजी के अधिकारियों, सीआरपीएफ के अधिकारियों के साथ जॉइंट मीटिंग की, उनके स्टाफ के साथ मीटिंग की और उसके बाद हेण्डओवर और टेकओवर हुआ ।सभी कुछ क्लीयर रहना चाहिए । यह कहना कि कोई कम्यूनिकेशन नहीं है, कोई सिस्टम नहींहै, ऐसा हमारी सरकार में कभी नहीं होता है ।

          मान्यवर, राजा साहबने कहा कि सभी पार्टियों को संरक्षण मिलना चाहिए । सभी पार्टियों को सुरक्षा देने की इस सरकार की मंशाभी है और राजासाहब, देभी रहे हैं । लेकिन सभी पार्टियों को प्रधान मंत्री जी के स्तर की सुरक्षा नहीं दी जा सकती है । वह सिर्फ प्रधान मंत्री जी को दी जा सकती है । इसलिए इसमें किसी भी प्रकार की कोई प्रॉब्लम नहीं है । आपने कहा कि थ्रेट असैसमेंट किया गया या नहीं? मैं फिर से रिपीट करना चाहूंगा कि थ्रेट असैसमेंट बहुत अच्छे से कियागया   है । एक बार नहीं, दोबार किया गया है और थ्रेट असैसमेंट में पाया गया कि जेड प्लस, सीआरपीएफ और एएसएल सुरक्षा कवच पर्याप्त है, तभी यह निर्णय लिया गया है ।

          मान्यवर, सुदीप बन्दोपाध्याय जी ने कहा कि थ्रेट परसैप्शन अभी हो तो रखना चाहिए । मैं कहना चाहता हूं कि थ्रेट परसैप्शन एक डायनेमिक प्रोसेस है । वर्ष 1988 में थ्रेट परसैप्शन था तो वर्ष 2019 में भी थ्रेट परसैप्शन रहता है, यहजरूरी नहीं है । भाषण को क्वोट कियागया, जबभूतपूर्व प्रधान मंत्री इंदिरा जी की जिन सिख आतंकवादियों ने हत्या की, उसको क्वोट कियागया । लेकिन थ्रेट असैसमेंट की जो पद्धति है, उसपद्धति के तहत ही, डायनेमिक थ्रेट असैसमेंट के आधारपर ही इसे बदला गया है । आपने पूछा कि किस सिक्योरिटी एजेंसी ने टेकओवर कियाहै । मैंने पहले ही कहा है कि सीआरपीएफ, जेड प्लसविद एएसएल कर रहे हैं । आप कह रहे हैं कि सभी मुख्य मंत्रियों को जेड प्लस सुरक्षा मिल रही है । ऐसा नहीं है । मैं आपके माध्यम से सुदीप बन्दोपाध्याय जी को बताना चाहता हूं कि सभी मुख्य मंत्रियों को सीआरपीएफ की जेड प्लस सुरक्षा नहीं दी गयी है । वह थ्रेट असैसमेंट के आधारपर दी जाती है । आपने कहा कि हमारे गवर्नर को दी गयी है । गवर्नर को ही नहीं, मुख्य मंत्री को भी दी गयी है । आपके गवर्नर को दी गई, क्योंकि उनको देने की जरूरत लगी, इसलिए दी गई है । उत्तर प्रदेश के मुख्य मंत्री को यूपी पुलिस होने के बावजूद भी सेंट्रल प्रोटेक्शन लिस्ट में रखा गया है, क्योंकि इस प्रकार की थ्रेट है ।

एक्सपर्ट लोगों द्वारा उनको प्रोटेक्शन देना है । इसलिए, ऐसी किसीभी प्रकार की वेन्डेटा वाली भावना से यह नहीं किया गया है । मान्यवर, मैं फिर से यह स्पष्ट करनाचाहता हूं कि यह जो एसपीजी है, वहसीआरपीएफ, बीएसएफ, सीआईएसएफ, एनएसजी, इनसारी एजेंसियों से कुछ-कुछ प्रतिशत लेकर इसका एक प्रो-राटा है, जिससे एसपीजी बनती है । ये जो अति सेंसेटिव प्रोटेक्टी हैं, उनके लिए एसपीजी से उनकीमदर आर्गेनाइज़ेशन में जो लोग वापस आते हैं, उनको ही सेलेक्ट करके उनके घरों में रखा जाता है, जिन्होंने एसपीजी की ट्रेनिंग पाई है, ताकि उनकीसुरक्षा ठीक ढंग से हो सके । अगर मेरे आफिस में चार लोग चाय पीने के लिए आए होते, तोभी मैं वहीं बता देता, इतने जोर-जोर से बोलने की जरूरत भी नहीं पड़ती । आप आ जाते, इसमें क्या है, मैं आपकोबता देता ।

सुदीप जी ने वीवीआईपी कल्चर की बात की है । सुदीप जी, माफ करिएगा, मगर मैं साक्ष्यों, रिपोर्टों और रिकार्ड्स के आधारपर मानता हूं कि बंगाल के अंदर भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं को सुरक्षा की जरूरत है । इसीलिए, उनको सुरक्षा दी गई है और कोई कारण नहीं है । इसमें कोई पॉलिटिक्स नहीं है ।…(व्यवधान) गोगोई जी, उन्होंने भारतीय जनता पार्टी का जिक्र कियाथा, इसलिए मैंने बताया है । वहां कम्यूनिस्ट पार्टी के लोगों को भी है, आपके अधीररंजन चौधरी जी को भी है और कांग्रेस पार्टी के अन्यनेताओं को भी सुरक्षा दी गई है ।…(व्यवधान) एकदम खड़े नहीं होते हैं । आपको पहले उनको सुनना चाहिए था ।…(व्यवधान)

मान्यवर, एन. के. प्रेमचन्द्रन जी ने कहा है कि यह निर्णय वैन्डेटा के आधारपर ही लिया गया है । प्रेमचन्द्रन जी, मैं आपकोआश्वस्त करनाचाहता हूं कि नरेन्द्र मोदी सरकार सुरक्षा के निर्णय कभी-भीवैन्डेटा के आधारपर नहीं ले सकतीहै । यह निर्णय प्योरली प्रोफेशनल थ्रेट असेसमेंट के आधारपर लिया गया है । उनके लिए जो सुरक्षा उपयुक्त है, वहदे दी गई                 है ।…(व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष : माननीय सदस्य, प्लीज बैठ जाइए ।

…(व्यवधान)

श्री अमितशाह : मान्यवर, कुछ सदस्यों ने सवालउठाया है कि इससेएसपीजी कैसेकांप्रोमाइज़ होती है । मैं उसमें बहुत ज्यादा नहीं जाना चाहता हूं । लेकिन यहां पर जिन तीन प्रोटेक्टी की ज्यादातर चिंता की गई है, बाकी किसीकी भी चिंता नहीं की गई है, तीन प्रोटेक्टी की ही चिंता की गई है । वे कुल मिलाकर लगभग 600 बार बिनाकोई सूचना दिए अपने कार्यक्रमों में चले गए        हैं ।…(व्यवधान) अधीर रंजन जी, आपको सुनना पड़ेगा, ऐसे नहींचलेगा । अधीर रंजन जी, मैं नाम के साथ बोलूं । ठीक है, आपने कहा है, तोमैं नाम के साथ बोलता हूं । श्रीमती सोनिया गांधी वर्ष 2015 सेअभी तक 50 सेभी ज्यादा अवसरों में दिल्ली सरकार और देश की सुरक्षा व्यवस्था को जानकारी दिए बिना चली गई हैं ।उन्होंने ऐसी 13 अनिर्धारित यात्राएं की हैं, जिसमें एसपीजी बुलेट प्रतिरोधी कार का भी उपयोग नहीं किया है । वर्ष 2015 केबाद 24 विदेश यात्राओं में एसपीजी के अधिकारियों को न ही सूचना दी है और न ही अपने साथ में रखा है ।

          श्रीमती प्रियंका गांधी वाड्रा ने वर्ष2015 सेअब तक 339 अवसरों पर एसपीजी को सूचना दिए बगैर यात्रा की है ।…(व्यवधान) 64 अवसरों पर देश की अन्य जगहों पर…(व्यवधान) इन्होंने कहा है कि बताइए । मैं तो गार्डेडली बोल रहा हूं । मान्यवर, कांग्रेस पार्टी के नेताने पढ़ने के लिए कहा है, इसलिए मैं जोर से पढ़ रहा हूं । श्रीमती प्रियंका गांधी वाड्रा 64 अवसरों पर देश के अन्य स्थानों पर बिना एसपीजी के बी.आर. कार के की गई हैं । वह वर्ष 1991 केबाद 99 विदेश यात्रओं पर गई हैं । उन्होंने 21 अवसरों पर ही सुरक्षा कवच लिया है और 78 अवसरों पर कभी-भीसुरक्षा कवच नहीं लिया है ।        मान्यवर, श्रीमान् राहुल गांधी जी, वर्ष 2005 सेवर्ष 2014 तक18 अवसरों पर देश के विभिन्न हिस्सों में एसपीजी की बीपीप्रतिरोधी कार बगैर गए हैं ।वर्ष 2015 केबाद 1892 अवसरों पर दिल्ली में, मैं इस बात को फिर से रिपीट करता हूं कि 1892 अवसरों पर और 247 अवसरों पर बाहरकी यात्राएं एसपीजी की सुरक्षा कवच के बिनाही की हैं ।      

17.00 hrs मान्यवर, येकह रहे हैं, मैं तो बोलना नहीं चाह रहा था । …(व्यवधान) सुरक्षा के बारेमें नहीं बताना चाहता था । मुझे रॉन्ग बॉक्स में रख रहे हैं, जैसे मैं झूठ बोल रहा हॅूं तो मुझेसत्य सदन के पटल पर रखना पड़ा । …(व्यवधान) मान्यवर, येकह रहे हैं कि एसपीजी कैसेकॉम्प्रोमाइज हो जाएगी । …(व्यवधान) एसपीजी के प्रोटेक्टी को सुरक्षा के बगैरजाने की आदत नहीं डालनी  चाहिए । बाद में प्रधान मंत्री की सुरक्षा भी कॉम्प्रोमाइज़ होगी । अगर हमें सुरक्षा है, हमें दी गई है तो ऐसा क्या गोपनीय करना है कि सुरक्षा को घर पर ला कर रखना है । …(व्यवधान) हम तो कभी नहीं जाते हैं । हमेशा साथ में होते हैं । श्रीमान् राजनाथ सिंह जी यहांपर बैठे हैं । कई सालों से काले कपड़े वाले उनको टॉयलेट तक छोड़ कर आते हैं, मगर वे कभी कुछ नहीं बोलते हैं । …(व्यवधान) वे रहतेहैं । जब सुरक्षा मिली है तो उसको साथ में क्यों नहीं रखा जाए? सभी प्रोटैक्टी को मेरातो अनुरोध है और आज भी इन तीनों महानुभावों को अनुरोध है कि सीआरपीएफ को साथ में रखिए, आपके प्रोटैक्शन के लिए वह बहुत जरूरी है और सबको साथ में रखना चाहिए, पर्याप्त समय वाली सूचना भी देनीचाहिए । मान्यवर, कुछ प्रोटैक्टी ऐसे होते हैं, मैं नाम नहीं लेना चाहता हॅूं, फिर से मत दिलवाना, सौ-सौकिलोमीटर की स्पीड से दिल्ली लुटियन में महंगी मोटरसाइकल पर घूमते  हैं । वे सुरक्षा की गाड़ियां बेचारी पीछे की पीछेरह जाती हैं, धरी की धरी रह जातीहैं । अब ये सारीचीजें, मान्यवर मैं कहां अधिकृत रूप से कहूंगा, हमारा इसके पीछे आशय इतना ही है कि सरकार किसी विंडिक्टिव एप्रोच से कुछ करना नहीं चाहती है ।

 

मान्यवर, जबहम सार्वजनिक जीवन में आते हैं, तोसार्वजनिक जीवन की शुचिताओं को स्वीकार करना चाहिए । मैं हमारे प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी जी का उदाहरण देना चाहता हॅूं । 20 साल से ज्यादा समय से उनकेपास सुरक्षा कवच है । मगर आज भी एक भी बार सुरक्षा कवच का फाउलनहीं आया है । गौरव भाई, मैं आपकीबात का भी जवाबदेता हॅूं । मान्यवर, उन्होंने अपने जीवन में बड़े और कड़े मापदंड एस्टैब्लिश करने का काम किया है । वे आज प्रधान मंत्री जी हैं ।प्रधान मंत्री जी के लिए नियम बने हैं, एकप्रोटोकॉल बना है । विदेश में जाते हैं, 20 प्रतिशत से कम स्टाफ विदेश ले जानेकी शुरूआत हमारे प्रधान मंत्री जी ने की है । पहले प्रधान मंत्री जाते थे, तोकहीं पैट्रोल डलवाने के लिए जो टैक्नीकल हॉल्ट लेने पड़ते थे तो पूरी रात होटल बुक होता था । नरेन्द्र भाई अभी ब्राजील गए थे, तब टैक्नीकल हॉल्ट में देश के खर्चे से होटल किए बगैर, एयरपोर्ट पर रहे, वहीं स्नान करतेहैं और पैट्रोल डलवा कर आगे के लिए निकल जाते हैं । …(व्यवधान) इनके पास जो स्टाफ जाताहै, उनके सबकेलिए अलग-अलग गाड़ियों की व्यवस्था थी । मगर प्रधान मंत्री जी ने एक मापदंड खड़ा किया । किसी को पालनकरना न करना, वहउसके मुंसफी पर है । मगर उन्होंने कहा था कि जितना भी स्टाफ है, वहएक गाड़ी में चार-पांच लोग जाएंगे, याकोई बस में जाएंगे, हरेक के लिए अलग गाड़ी बंद करा दी ।

मान्यवर, इसप्रकार के कठोर सार्वजनिक जीवन के नॉर्म्स को प्रधान मंत्री बननेके बाद भी पालनकरने वाला नेतृत्व आज देश को मिला है । …(व्यवधान) दूसरी ओर सिक्योरिटी कवर को स्टेट्स सिंबल बना कर अगर हम आज भी प्रधान मंत्री जी की सिक्योरिटी इंजॉय कर रहे हैं, ऐसे रसास्वाद से आह्लादित रहना चाहते हैं, तोमुझे लगता है कि इसमें से सीखना चाहिए । गौरवभाई ने कहा कि एसपीजी के नियमों का उल्‍लंघन किया । वह जो प्लेन ले कर गए थे, उसकी पूरीचैकिंग एसपीजी ने कर ली थी । अंदर एसपीजी की सिक्योरिटी का एक व्यक्ति भी था । जो बोट वहां पर उतरीवहां पर भी सिक्योरिटी के ऑफिसर्स थे । उसमें नियमों का कोई उल्लंघन नहीं हुआ है । विशिष्ट परमिशन के आधारपर किया है । माननीय सदस्य गौरव गोगोई साहब को मैं कहना चाहता हॅूं कि प्रधान मंत्री जी ने देश के टूरिज्म को बढ़ावा देनेके लिए स्वयं रिस्क लिया था । रात को दो बजे मोटर साइकिल घुमा कर आनंदलेने के लिए एसपीजी के कवर को नहीं तोड़ा । मान्यवर इन दोनों में अंतर है । कितना बड़ा वहां रिवर फ्रंट बना है, उसको टूरिज्म की दृष्टि से वॉटर स्पोर्ट्स की दृष्टि से डेवल्प करने के लिए उन्हांने स्वयं यह रिस्क लियाथा ।  

कोई रात को ठंडीहवा का आनंद लेने के लिए 100-150 किलोमीटर की स्पीड से मोटर साइकिल चलाने के लिए नहीं लिया है । मैं इतना ही कहनाचाहता हूँ कि इस पूरे मसले को देश गम्भीरता से देख रहा है इसलिए मुझेये सारी स्पष्टता करनी पड़ी । वरना मुझे तो आशा थी कि इस बिल पर कोई चर्चा नहीं होगी । This is regarding security of the Prime Minister,तुरंत पारित हो जाएगा । पक्ष-विपक्ष का कोई भाषण नहीं होगा । मुझे भी नहींकरना चाहिए था । मगर सदन के अंदरजब भाषण हुए तो जवाबदेना मेरा कर्त्तव्य भी है, दायित्व भी है । जनता के अंदरएकतरफा बात नहीं जानी चाहिए । जनता के सामने सत्यजाना चाहिए, कोई पॉलिटिकल वेनडेटा नहीं है । इस एक्ट से गांधी परिवार के सदस्यों की एक भी सिक्योरिटी विदड्रॉ नहीं हुई है । पुराने एक्ट से उनकीसिक्योरिटी बदली गई है, यहभी भ्रांति है कि इनको सिक्योरिटी बगैर वैसे ही छोड़ दी गई है । देश में प्रधान मंत्री के अलावा जो सिक्योरिटी उपलब्ध है, वहहाइऐस्ट सिक्योरिटी तीनों जेड प्लस विद एएसएल एंड एम्बुलेंस, पूरी कंट्री में तीनों सदस्यों को दी गई है । मगर प्रधान मंत्री के लिए जो विशेष कार्य बल बना है, वही सिक्योरिटी मुझे चाहिए, तोमेरा स्पष्ट मानना है कि प्रधान मंत्री जी की सिक्योरिटी को कम्प्रोमाइज नहीं करना चाहिए । एक पद के लिए, एकऑफिस के लिए और उनकेकम्युनिकेशन, उनका आरोग्य और उनके निवास पर जो ऑफिस होता है, उसकी सुरक्षा के लिए है । वह देश के हित में है, क्योंकि वह हमारे कार्याध्यक्ष हैं, हमारे एडमिनिस्ट्रेशन के हैड हैं । मुझे लगता है कि इसमें अब शायदकांग्रेस समर्थन करे । सब लोग इसके समर्थन में अपना मत व्यक्त करकेइस बिल को पारित करें । यही निवेदन करके मैं अपनी बात को समाप्त करताहूँ ।

माननीय अध्यक्ष: श्री अधीररंजन चौधरी ।

श्री अधीररंजन चौधरी (बहरामपुर): सर, प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी जी की सुरक्षा के लिए जितने भी कदम लिए जाएं, हमसब उसका जरूर समर्थन करेंगे, इसमें कोई दो राय नहीं है । लेकिन आपका जो भाषणहै, उसभाषण में यह स्पष्ट हो गया है कि एक राजैतिक प्रतिशोध और बदलेका मंजर हम लोग देख रहे हैं ।…(व्यवधान) बता रहे हैं । देखिए, एकतरफ आप कह रहे                     हैं ।…(व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष : बिल के अंदर कोई विशेष हो तो बोलिए ।

श्री अधीररंजन चौधरी : सर, मुझे बोलने दीजिए ।

माननीय अध्यक्ष: बोलना नहीं है । बोलने का आपकानंबर सब सदस्यों ने ले लिया है ।

श्री अधीररंजन चौधरी : सर, प्लीज ।

श्री अमितशाह : मान्यवर, मेरा एक टेक्निकल ऑब्जेक्शन है । इसमें बिल की कोई धारा पर आपत्ति हो या स्पष्टता हो तो मांग सकते हैं । मेरे जवाब के बाद पॉलिटिकल आंसर नहीं हो सकता । वरनायह बाद में मुझे भी देनापड़ेगा । यह कब तक चलतारहेगा । मान्यवर, मैं सदन की परम्परा बता रहा हूँ ।…(व्यवधान)

श्री अधीररंजन चौधरी : परिवार के ऊपर हमला कर रहे हैं ।…(व्यवधान) उस परिवार ने हिन्दुस्तान के लिए दो-दो जानें गवाई हैं । आप उस परिवार पर लांछन कर रहे हैं ।…(व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष: प्रश्न यह है:

“किविशेष संरक्षा ग्रुप अधिनियम, 1988, काऔर संशोधन करने के लिए विधेयक पर विचार कियाजाए ।” प्रस्ताव स्वीकृत हुआ ।
…(व्यवधान)
17.08 hrs (At this stage, Shri Adhir Ranjan Chowdhury, Dr. Thamizhachi Thangapandian and some other hon. Members left the House.)   …(व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष : अबसभा विधेयक पर खंडवार विचार करेगी ।

…(व्यवधान)

Clause 2              Amendment of Section 4 माननीय अध्यक्ष: प्रो. सौगत राय, क्या आप संशोधन संख्या 1 और2 प्रस्तुत करना चाहते हैं?

प्रो. सौगत राय : सर, मैंने तो भाषणदिया नहीं । मुझे दो क्लॉज के बारे में क्लेरिफिकेशन चाहिए । आप मुझे समय दीजिए । यहाँ पर लिखाहै कि जो प्रधान मंत्री की फैमिली के लोग ऑफिशियल रेजिडेंस में रहेंगे ।…(व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष : आपको मूव करना है या नहीं करना है? यहबता दीजिए ।

प्रो. सौगत राय : सर, मुझे अमेंडमेंट्स मूव करने हैं ।

          Sir, I beg to move:

          Page 2, line 17, -
          after            “official residence”   

          insert                    “and his parents residing anywhere in the country”.      (1)   

             

Page 2, line 10, -   

          for               “period of five years”   

          substitute    “period of ten years or based on the level of threat as                               assessed by the Central Government from time to time”.        (2)   

माननीय अध्यक्ष: अबमैं प्रो. सौगत राय द्वारा खंड 2 में प्रस्तुत संशोधन संख्या 1 और2 कोसभा के समक्ष मतदान के लिए रखता हूँ ।
संशोधन मतदान के लिए रखे गए तथा अस्वीकृत हुए माननीय अध्यक्ष: श्री के. सुधाकरन– उपस्थित नहीं ।
श्री एन.के. प्रेमचन्द्रन, क्या आप संशोधन संख्या 4 प्रस्तुत करना चाहते हैं?
SHRI N. K. PREMACHANDRAN (KOLLAM): Sir, I am moving my Amendment no.4 to clause 2 of the Bill.
          Page 2, after line 7, –                    insert                    “(aa) the members of immediate family of former                                                 Prime Minister who was assassinated by militant                                                 organisation;”.      (4) माननीय अध्यक्ष: अबमैं श्री एन.के. प्रेमचन्द्रन द्वारा खंड 2 में प्रस्तुत संशोधन संख्या 4 कोसभा के समक्ष मतदान के लिए रखता हूँ ।
संशोधन मतदान के लिए रखा गया तथा अस्वीकृत हुआ ।
 
माननीय अध्यक्ष : श्री गौरवगोगोई – उपस्थित नहीं ।
श्री कोडिकुन्निल सुरेश – उपस्थित नहीं ।
माननीय अध्यक्ष: श्री जसबीर सिंहगिल जी, क्या आप संशोधन संख्या 11 प्रस्तुत करना चाहते हैं?
SHRI JASBIR SINGH  GILL (KHADOOR SAHIB): Sir, I beg to move:
          Page 2, line 16,--
                   after “former Prime Minister”                    insert “Provided that the family members of the former Prime Minister,  who dies in militant  or terrorist attack, shall be provided proximate security:
 
Provided also that the former Prime Ministers, who have been Prime Minister of India for two full terms shall be given proximate security cover.”.       (11) माननीय अध्यक्ष: अबमैं श्री जसबीर सिंह गिल द्वारा खंड 2 में प्रस्तुत संशोधन संख्या 11 कोसभा के समक्ष मतदान के लिए रखता हूं ।
संशोधन मतदान के लिए रखा गया और अस्वीकृत हुआ ।
माननीय अध्यक्ष: श्री बैन्नी बेहनन -उपस्थित नहीं ।
श्री एन.के. प्रेमचन्द्रन, क्या आप संशोधन संख्या 13 प्रस्तुत करना चाहते हैं?
SHRI N. K. PREMACHANDRAN : Sir, I beg to move:
Page 2, afterline 16,--
                   insert “(iii) clause (b)   sub-section (1A)   shall not   be                              applicable to the members of immediate family of                              former Prime Minister  who was  assassinated by                              militant organization.”.   (13) माननीय अध्यक्ष: अबमैं श्री एन.के. प्रेमचन्द्रन जी द्वारा खंड 2 में प्रस्तुत संशोधन संख्या 13 कोसभा के समक्ष मतदान के लिए रखता हूं ।
संशोधन मतदान के लिए रखा गया तथा अस्वीकृत हुआ ।
माननीय अध्यक्ष: प्रश्न यह है:
                   “कि खंड 2 विधेयक का अंग बने ।” प्रस्ताव स्वीकृत हुआ ।
खंड 2 विधेयक में जोड़ दिया गया ।
खंड 1, अधिनियमन सूत्र और विधेयक का पूरा नाम विधेयक में जोड़ दिए गए ।
माननीय अध्यक्ष: माननीय मंत्री जी प्रस्ताव करें कि विधेयक को पारित किया जाए ।
श्री अमितशाह: मैं प्रस्ताव करता हूं:
“कि विधेयक पारित किया जाए ।” माननीय अध्यक्ष: प्रश्न यह है:
“कि विधेयक पारित कियाजाए ।” प्रस्ताव स्वीकृत हुआ ।