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Lok Sabha Debates

Presentation Of The 6 Th Report Of The Business Advisory Committee. on 27 November, 2014

an> Title: Presentation of the 6th Report of the Business Advisory Committee.

THE MINISTER OF STATE OF THE MINISTRY OF SKILL DEVELOPMENT AND ENTREPRENEURSHIP AND MINISTER OF STATE IN THE MINISTRY OF PARLIAMENTARY AFFAIRS (SHRI RAJIV PRATAP RUDY): I beg to present the 6th Report of the Business Advisory Committee.

          The BAC, at its sitting held on Tuesday, the 25th November, recommended allocation of time to the following items of business as shown against each.

1.   Constitution (Scheduled Castes) Orders (Amendment) Bill, 2014 – one hour

          2.    The Delhi Special Police Establishment (Amendment) Bill, 2014 – two         hours.  ......(Interruptions)

 

I have to read it out. I understand it. It is over, but this was decided. … (Interruptions) They were passed. I understand it. … (Interruptions) Tomorrow, you will say otherwise. This was the decision of the BAC for allocation of time. This has to be brought to the knowledge of the House. I understand what you are saying. Today, the next BAC meeting was held. You will not decide it.

          Sir, what is his problem? Is he trying to educate the Ministers? … (Interruptions)The procedure has to be followed. They cannot come this side and so they should relax for a while. This was the time allocated and this is what has come from the Business Advisory Committee. … (Interruptions) This is completed but this was the time allotted. You can have objection to it… (Interruptions) These were the five business items for which time was allotted and all have been concluded. Time was allotted for the IATA Bill, The Central Universities Bill… (Interruptions)

HON. CHAIRPERSON : The hon. Minister is informing the House.

SHRI RAJIV PRATAP RUDY: The following business after this will be brought and this is the directive of the hon. Speaker to read it out, why do you have  objection to that?

HON. CHAIRPERSON: Mr. Minister, you please read it out.

SHRI RAJIV PRATAP RUDY: Sir, I have read it out. If the direction had not come from the hon. Speaker, I would not have done it. So, this is a procedure which has to be followed. If you are not ready to follow the procedure, then I cannot help it … (Interruptions) It does not indicate any big sign of intelligence. I have already read it out. It takes two minutes but then you have created so much noise as if we do not understand… (Interruptions) I have read it out. It is over. What is the anxiety about it? I have read it out already. Professor does not have  patience of one minute… (Interruptions)

SHRI BHARTRUHARI MAHTAB (CUTTACK): Hon. Members thought that you will be speaking on black money.

 

*m05 श्री तारिक अनवर (कटिहार): सभापति महोदय,मैं अपनी बात बहुत संक्षेप में कहने की कोशिश करूंगा,इससे पहले कि मेरा समय समाप्त हो जाए। अभी यहां लोक सभा में और राज्य सभा में कल ब्लैक मनी,काले धन पर बहस चल रही है और कल राज्य सभा में इस पर बहस समाप्त हुई और वहां वित्त मंत्री ने उस बहस का उत्तर दिया। लेकिन उनका उत्तर बहुत ही निराशाजनक रहा,ऐसा लगा कि हमारे वित्त मंत्री बहुत मजबूर हैं,असहाय हैं और उनके हाथ बंधे हुए हैं। उनका जो उत्तर अखबारों में आया है,उसे मैंने पढ़ा है,उससे ऐसा ही लगा कि वह कुछ भी करने में असक्षम हैं। यहां कल से बहस चल रही है,हमारे बहुत से माननीय सदस्यों ने सरकार को यह सलाह दी है कि सौ दिनों के अंदर तो नहीं,बल्कि छः महीने के अंदर भी कालेधन की वापसी की कोई उम्मीद दिखाई नहीं पड़ रही है। इसलिए बेहतर यह होगा कि सरकार देश से और देश की जनता से माफी मांग ले कि उन्होंने लोक सभा चुनाव में जो प्रचार किया,जो देश की जनता को भ्रमित और गुमराह किया,उस दिशा में अब कोई ठोस कदम नहीं उठ रहे हैं। इसलिए यह बेहतर यह होगा कि वह देश की जनता से माफी मांग लें। मैं भी यही सलाह दूंगा,क्योंकि कालेधन का जो मामला है,यह इस सरकार के लिए गले की हड्डी बनने वाला है। गले की हड्डी मैं इसलिए कह रहा हूं,क्योंकि इन्होंने देश की जनता को कुछ ऐसे सपने दिखाये और लोग उस सपने और धोखे में आ गये,लोगों ने इनकी बात पर विश्वास कर लिया। जैसा अभी कहा गया कि देश के हर नागरिक के खाते में लाखों रुपये जमा होंगे, 15 लाख रुपये तक की राशि जमा होगी। देश की जनता ने,देश के गरीब लोगों ने,किसानों ने उस 15 लाख को सामने रखकर कि अब तो मोदी जी प्रधान मंत्री बन गये हैं,अब 15 लाख रुपये हमारे खाते में आने ही वाले हैं। उन्होंने आगे की योजनाएं बना लीं,अपने बच्चों के भविष्य का फैसला कर लिया। उनको अच्छी शिक्षा देने की बात सोच ली और इस तरह से एक लोगों को एक गलतफहमी पैदा हुई। अब छह महीने बीत चुके हैं और अब हमारे वित्त मंत्री जी यह कह रहे हैं कि बहुत सारी पेचीदगियां हैं,बहुत सारी संधियां हैं,जिसके कारण हम लोगों के नाम नहीं बता सकते हैं। इस दिशा में हम कदम नहीं उठा सकते हैं। अब देश की जनता को एक भूल-भुलैया में डालने की कोशिश हो रही है। प्रधान मंत्री के प्रत्याशी के रूप में नरेंद्र मोदी जी ने क्या कहा?अभी नायडू साहब ने कहा कि हमने अपने मैनिफैस्टो में सौ दिन का कोई जिक्र नहीं किया है। हो सकता है कि उन्होंने अपने मैनिफैस्टो में यह बात नहीं रखी हो,लेकिन महोदय,ये दुनिया जानती है,सारी मीडिया में ये खबरें छपी थीं,यह दिखाया गया था,प्रधान मंत्री जी ने बहुत ज़ोर दे कर यह बात कही थी कि अगर उनको प्रधान मंत्री बनने का मौका मिला,अगर उनकी सरकार आई तो सौ दिनों के अंदर हम काले धन को ला कर दिखाएंगे। लोगों ने उनकी बातों पर विश्वास किया और उनको बहुमत दिया। लेकिन आज वही नरेंद्र मोदी जी कह रहे हैं कि हमें नहीं मालूम कि कितनी राशि बाहर है। उसका कोई लेखा-जोखा नहीं है। मोदी जी ने स्वयं कहा था कि 85 लाख करोड़ रूपये का काला धन विदेशों में जमा है। भाजपा के बाबा रामदेव ने तो यहां तक कहा कि 385 लाख करोड़ रूपया काले धन के रूप में विदेशों में है। उसको देश में वापस लाने का वचन भी उन लोगों ने दिया था। लेकिन सत्ता में आने के बाद मोदी जी का रूख बदल गया। अब काले धन की मात्रा के बारे में जानकारी नहीं होने की बात कही जा रही है। विपक्ष से सत्ता में आने के बाद भाषा बदल गई। मैं आज भारतीय जनता पार्टी के सांसद निशिकांत दूबे जी की बात याद दिलाना चाहता हूँ। पिछले बजट सत्र में उन्होंने अपने भाषण में कहा था कि मेरे जीवन में कालेधन की वापसी की मुझे कोई उम्मीद नहीं है,मुझे कोई आशा नहीं है। यह बात इन्होंने किस आधार पर कही थी?क्योंकि ये जानते थे,ये भारतीय जनता पार्टी के बहुत ही वरिष्ठ सदस्य हैं। भारतीय जनता पार्टी का क्या कार्य-कलाप है,क्या कार्यशैली है,क्या उनकी विचारधारा है,उससे ये वाकिफ हैं। इसी अधार पर इन्होंने ये बात कही थी। इन्होंने सच बात कही थी। इसकी कीमत भी इनको चुकानी पड़ी। अभी इस एक्सपेंशन में उनको नहीं लिया गया। लेकिन मैं समझता हूँ कि उन्होंने बहुत हिम्मत दिखाई। सही बात कहने का हौंसला बहुत कम लोगों में होता है।

          सभापति महोदय,जैसा कि मैंने कहा,सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा कालेधन का था। सारे देश में यह कहा गया था कि हम बहुत जल्दी इसको वापस लाएंगे। यह भी कहा गया था कि कालेधन के आने से देश की सारी समस्याओं का समाधान होगा। इतनी बड़ी रकम आएगी कि हमारे देश का विकास बहुत तेज़ी से बड़ेगा। हमारी गरीबी दूर हो जाएगी। हमारा इंफ्रास्ट्रक्चर बन जाएगा। हमारे नौजवानों को रोज़गार मिल जाएगा और बहुत सारी बातें कही गई थी। लोगों ने यही सपना देखा और भारतीय जनता पार्टी ने यह सपना देश की जनता को दिखाया भी। लोगों ने सौ दिन इंतज़ार किया और अब छह महीने हो चुके हैं। लेकिन अभी तक उम्मीद की कोई किरण दिखाई नहीं पड़ रही है। लोग बेचैन हैं कि आखिर हमारे प्रधान मंत्री को क्या हो गया है।

          अभी सलीम साहब ने कहा कि हमारे प्रधानमंत्री जी हमेशा अपने भाषण में कहते थे कि उनका 56 इंच का सीना है। मुलायम सिंह जी से उन्होंने कहा कि उनका 56 इंच का सीना है। आज देश की जनता देखना चाहती है कि वह 56 इंच का सीना कहाँ गया?काले धन को वापस लाने के लिए वे अपने उस 56 इंच के सीने का उपयोग क्यों नहीं कर रहे हैं?

          महोदय,सरकार के लिए इससे बड़ी शर्म की बात और क्या हो सकती है कि सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि विदेशों में जमा ब्लैक मनी की जाँच का मामला वह सरकार के भरोसे नहीं छोड़ सकती,क्योंकि,इस मामले में सरकार का रवैया विश्वसनीय नहीं है। अदालत ने कहा कि सरकार विदेशी खाताधारियों की जाँच कराने का कष्ट न करे। वह तो बस उनके नामों और खातों की लिस्ट अदालत को सौंप दे,बाकी काम अदालत खुद करेगी। औपचारिक रूप से यह कोई फैसला नहीं,सिर्फ एक टिप्पणी है,लेकिन जहाँ तक काले धन के प्रति सरकार के रवैये का प्रश्न है,इस सम्बन्ध में सुप्रीम कोर्ट के इस बयान को एक मुकम्मल फैसला ही समझा जाना चाहिए। एनडीए सरकार भले ही खुद को गंगा की तरह पवित्र बताने में जुटी हो,लेकिन अपनी मौजूदगी के सिर्फ पाँच महीने में वह न्यायालय की नजर में अपनी साख खो चुकी है।

          महोदय,अगर गवर्नमेंट को अपनी जवाबदेही का जरा भी अहसास है,तो ब्लैक मनी के बारे में उसे ईमानदारी बरतनी चाहिए और अपनी तरफ से इस बारे में जो कुछ भी वह कर सके,उसे वह करने में जुट जाना चाहिए। समय का अभाव है,अन्त में मैं बीजेपी के लोगों को उर्दू का एक शेर सुनाना चाहता हूँ-

"कि तुम आसमाँ की बुलन्दी से जल्द लौट आना।
हमें जमीं के मसाइल पर बात करनी है।"
 

*m06 श्री प्रेम सिंह चन्दूमाजरा (आनंदपुर साहिब) : महोदय, विदेशों में जमा काले धन को वापस लाने के लिए जो चर्चा सदन में हो रही है, मैं अपनी पार्टी शिरोमणि अकाली दल की ओर से इस चर्चा में शामिल हो रहा हूँ। यह चर्चा पिछले बहुत वर्षों से चल रही है और मैं समझता हूँ कि यह बहुत गम्भीर मामला है, क्योंकि, काला धन केवल देश की अर्थव्यवस्था को ही लाइन से नहीं गिराता है, बल्कि यह देश में और भी बहुत सारी प्रॉब्लम्स खड़ी करता है। इसके कारण बेरोजगारी की प्रॉब्लम होती है, अन्य कई तरह की सामाजिक प्रॉब्लम्स खड़ी होती हैं और इससे देश की सारी स्थिति लड़खड़ा रही है। सब कुछ होते हुए भी जो आज देश गरीब है, मैं समझता हूँ कि उसका एक बड़ा कारण यह काला धन भी है। जब देश आजाद हुआ था तो अमीर और गरीब का फासला बहुत कम था। आज अमीर और गरीब का जो फासला बढ़ा है, उसमें इस काले धन का भी बहुत बड़ा हाथ है। मैं समझता हूँ कि आज देश के सभी नेताओं को इस मामले को गम्भीरता से लेना चाहिए कि काला धन कैसे पैदा होता है और वे कौन लोग हैं? वे बहुत थोड़े लोग हैं, ऐसी बात नहीं है कि उनकी पहचान नहीं हुई है। आज जो इस हाउस में चर्चा हो रही है, मैं तो यह समझ रहा हूँ कि जैसे साँप तो निकल गया है और लकीर को पीटा जा रहा है। ऐसी बातें अखबारों में आयी हैं, आपको भी मालूम होगा कि जब इस देश में काले धन की बात शुरू हुई और बैंकों की शर्तें लागू की गयीं तो काला धन पैदा करने वाले लोगों ने अपना पैसा विदेशों में रख लिया। जब विदेशों में से पैसा निकालने की बात हुई तो उन्होंने अपना पैसा रिअल एस्टेट में लगा लिया। जब मोदी साहब की सरकार के मैनिफेस्टो की बात करते हैं, जब बीजेपी ने अपना मैनिफेस्टो पब्लिश किया, विपक्षी पार्टी के कई ऐसे वजीर हैं, मंत्री हैं, जिनका अखबारों में नाम आया, उनके बैंक अकाउन्ट्स की डिटेल्स आयीं, उन्होंने पैसा निकाल लिया और बाद में ऐफिडेविट दे दिया कि हमारा तो कोई अकाउन्ट ही नहीं है। इसीलिए मैं कह रहा हूँ कि साँप तो निकल गया और अब लकीर पीटी जा रही है। इस बात को गम्भीरता से लेना चाहिए।  इसलिए इस बात को गंभीरता से लेना चाहिए। पहली बात यह है कि विदेशों में जो काला धन पड़ा है,वह किसी रूल,उसूल और शर्तों के तहत ही आएगा,इसमें कोई शक ही नहीं है। जब हमारे मित्र खड़गे जी बोल रहे थे,तो मुझे बड़ा आश्चर्य हो रहा था कि वे सरकार को बोल रहे थे कि आप लोगों को गुमराह न करें। जो लोग अपनी सरकार के समय 24 घंटे में 24 बार देश के लोगों को गुमराह करते रहे,आज इनको कहते हैं कि गुमराह न करें। ये राजनीतिक बातें करने के बजाय इसको गंभीरता से लेना चाहिए कि यह धन कैसे वापस आ सकता है।

          दूसरी बात मैं कहना चाहता हूँ कि देश में जो काला धन पड़ा है,उसको भी सामने लाना चाहिए ताकि देश आगे बढ़ सके। हमारे नौजवानों को नौकरियों की ज़रूरत है और बैंक वाले पैसा नहीं देते,पैसा होता नहीं है। जो पैसा बाहर पड़ा है,जब वह आएगा तो देश की मदद होगी। यह केवल पैसा वापस लाने की बात नहीं है,मैं समझता हूँ कि जो देश का पैसा बाहर ले जाते हैं,काला धन बनाते हैं,वे देशद्रोही हैं,वे देश के दुश्मन हैं। इसको इकोनॉमिक ऑफैन्स तो माना ही जाए मगर उन पर क्रिमिनल ऑफैन्स भी होना चाहिए ताकि आगे से ये काला धन बनाने वाले लोग हौसला न कर पाएँ। मैं पूरी ज़िम्मेदारी से कह सकता हूँ कि मोदी साहब की सरकार ने जैसे सरकार बनते ही एसआईटी बनाई और आगे कदम बढ़ाए,सरकार की नीति और नीयत पर कोई शक नहीं किया जा सकता। मैं यही निवेदन करना चाहूँगा कि जैसे सरकार ने शुरूआत की है,इसको आगे बढ़ाया जाए और सख्ती से काम लिया जाए ताकि देश में यह जो काले धन की बीमारी है,इसको सदा के लिए खत्म कर दिया जाए।

                                                                                                 

*m07 श्री राजेश रंजन (मधेपुरा) : सभापति महोदय,हमारे मित्र अनुराग जी यहाँ नहीं हैं। मैं याद दिलाना चाहूँगा कि उन्होंने कल कुछ बातें कही थीं। अनुराग जी ने कल कहा था कि हमारी सरकार न्याय की कसौटी पर खड़ी है। पुनः मुझको वह 56 इंच का सीना याद आ गया। नौ साल गुजरात में लोकायुक्त की बहाली न होना 56 इंच के सीने का नमूना है। खोदा पहाड़ निकली चुहिया!फिर चुहिया की चुहिया!यदि आप देश को न्याय देने की बात करते हैं तो कम से कम इंसानियत और अपने घर को तो न्याय दे दीजिए जिसके बारे में अब मुझे कुछ नहीं कहना। पूरा देश जान रहा है कि किसको न्याय देना चाहिए और किसको नहीं देना चाहिए। मैं उस बात में नहीं जाना चाहता हूँ,लेकिन जो बात यहाँ पर हो रही है,उसके पहले हम कहना चाहेंगे कि हम सब लोग अपनी अंतरात्मा में देखें। जो इंटरनेट पर और पूरे मीडिया पर देते हैं कि 25 हज़ार करोड़ रुपये या हज़ारों करोड़ों रुपये आपके प्रचार-प्रसार यंत्र पर लगे,ये किनके पैसे लग रहे हैं?हमाम में सब नंगे हैं!हम लोग यहाँ एक दूसरे को गाली देने बैठे हैं और पूरी दुनिया देख रही है। हर डाल पर उल्लू बैठा है,अंजाम-ए-गुलिस्तां क्या होगा?

एक माननीय सदस्य :आप कहना क्या चाह रहे हैं?

श्री राजेश रंजन  : हम साफ कहना चाह रहे हैं कि आप और हम,यहाँ बैठे हुए जो लोग काले धन पर चर्चा कर रहे हैं,हम पहले बाहर नहीं जाएँ। सब लोगों ने कह दिया है और हम भी कहना चाहेंगे कि जिन बाबाओं के बारे में आपका ओपीनियन बहुत अच्छा है,उनका काला धन आप कब निकालेंगे,उसके बारे में भी आप बताने की कृपा करें। मंदिर के तहखाने में किनके-किनके हज़ारों-लाखों करोड़ों और अरबों रुपये इस देश के हैं,उनके बारे में भी आप चर्चा करें। देश के भीतर जो कालाधन है,चाहे वह पूँजीपतियों का हो,बड़े कॉर्पोरेट घरानों का हो या पदाधिकारियों का हो,उनके बारे में क्या ओपीनियन है,इस पर भी चर्चा होनी चाहिए।

          आपके पास सूची है। सूची के बारे में कुछ कहने की जरूरत नहीं है। आपका नेता क्या न्याय कर सकता है।...(व्यवधान)मैं कुछ नहीं कहना चाहता हूं। पार्टीसिपेटरी नोट के द्वारा स्टॉक एक्सचेंज और रीयल एस्टेट में निवेश होता है और यही से काला धन बनता है।...(व्यवधान)स्पेशल सर्किल आफ ब्लैक मनी के लिए सेबी और रिजर्व बैंक ने पार्टीसिपेटरी नोट को बंद करने के लिए कहा था लेकिन आज तक सरकार ने इसे बंद नहीं किया। काला धन जैसे मुद्दे पर काला धन वापिस लाने और काला धन भेजने जैसे कार्य लगातार जारी हैं। जब तक सेबी और रिजर्व बैंक की सलाह को सरकार मान नहीं लेती है,तब तक आप काला धन कैसे वापिस लाएंगे। दूसरी तरफ किसी दूसरी विदेशी संस्थागत निवेशक द्वारा जितना भी काला धन देश में आया है,उसकी जांच के बारे में भी आपसे कहा गया है।

          तीसरी बात यह है कि विदेशों से जो काला धन रीयल स्टेट में लगाया जा रहा है और दूसरी तरफ जो आप रीयल स्टेट में छूट देने की बात कह रहे हैं,क्या यह काला धन को बढ़ावा नहीं दिया जा रहा है। क्या आपकी सरकार काले धन को बढ़ावा नहीं दे रही है?संस्थागत निवेशक एफआईआई के माध्यम से भारत में जो पैसे आ रहे हैं और भारत से जो पैसे जा रहे हैं मैं इस बारे में आपसे पूछना चाहूंगा कि इनके बारे में आपकी क्या राय है। मुझे बहुत ज्यादा कहने की जरूरत नहीं है क्योंकि सलीम साहब ने जिन बातों को उद्धृत किया है,मैं उनकी बातों से और आदरणीय मुलायम सिंह यादव जी ने जो बातें कही हैं मैं उनकी बातों से सहमत हूं लेकिन मैं एक बात जरूर कहना चाहता हूं कि हमेशा कांग्रेस को गाली,यूपीए को गाली,आप गाली देने के लिए नहीं हैं। आप ब्लैक मनी बाहर से लाएं या कहीं से भी लाएं,आपने वायदा किया है कि हिंदुस्तान के एक गरीब को 15 लाख रुपए मिलेंगे। आप वह 15 लाख रुपया देंगे या नहीं देंगे,यह बहुत बड़ा सवाल है। आप पैसा कहां से लाएं या नहीं लाएं,इसे आप देखें। जो सरकार दलालों,बिचौलियों,मुझे आश्चर्य है कि मुंगेरी लाल का हसीन सपना आपने दुनिया को दिखाया है। इतना बड़ा सपना,नटवर लाल और चाल्स शोभराज भी आपके सामने फेल हो गया। मैं आपसे कहना चाहूंगा कि आपने जिन सपनों पर हिंदुस्तान के किसानों को,नौजवानों को,गरीबों को ठगा है,लूटा है,उसके बारे में मैं सिर्फ एक ही बात कहना चाहूंगा - "रामपाल ने लूटा कबीर के नाम पर,आशा राम ने लूटा हरिओम के नाम पर,बीजेपी ने लूटा राम मंदिर के नाम पर और मोदी जी ने लूटा छह दिन के नाम पर। "मुझे बहुत कुछ नहीं कहना है। मैं आपसे सिर्फ एक ही बात कहूंगा कि आपकी कथनी और करनी में बहुत फर्क है। आपकी नीयत और नीति दोनों में फर्क है। आप अपने प्रधानमंत्री जी से जरूर कहें कि यदि उनका 56 इंच का सीना है,तो निश्चित रूप से इस देश के भीतर जो काला धन है जो दलाल,बिचौलिया,भ्रष्ट नेता,कोरपोरेट घरानों की जो तालमेल और घालमेल है,उसे समाप्त करने का सबसे पहले प्रयास करें। देश के भीतर के काले धन को रोकने का प्रयास करें और जो रीयल स्टेट के नाम पर अलग-अलग,एफडीआई के नाम पर या एफआईआई के नाम पर जो देश में पैसा लाने की बात हो रही है और आप पैसे से देश में हरियाणा और महाराष्ट्र में सरकार बनाए जा रहे हैं,आपको कोई मैनडेट नहीं मिला है। आप शिवसेना के साथ होते,तो आपको पता चल जाता,महाराष्ट्र में आप सरकार नहीं बना पाते। आपने शिवसेना से अलग हो कर,बिहार और यूपी का वोट लेकर सरकार बनाई है। यहां आपने गैर जाटों का नारा देकर सरकार बनाई है। आपने अपने बल पर सरकार नहीं बनाई है,आपको कोई मैनडेट नहीं मिला है। मैं आपसे यह कहना चाहता हूं कि आप इस देश के सबसे बड़े देश के नौजवानों,गरीबों को ठगा है। आपको देश के 120 करोड़ लोगों से क्षमा मांगनी चाहिए। मैं आपसे कहना चाहता हूं कि नरेन्द्र मोदी जी इस जन्म में काला धन वापिस नहीं ला पाएंगे। जब अमरीका काला धन वापिस नहीं ला पाई,अमरीका जब समझौता कर सकती है तो नरेन्द्र मोदी जी,जिस अमरीका जाने के लिए आप परेशान हैं,तो आप कहां से काला धन लाएंगे। यही सही बात है और यही सबसे सही है।

   

*m08 श्री भगवंत मान (संगरूर): आपने मुझे बोलने का मौका दिया,इसके लिए मैं आपको धन्यवाद देता हूं। आज एक बहुत ही गंभीर वि­ाय पर बहस चल रही है। लोगों से जो वायदा किया गया था,इस मुद्दे पर पार्लियामेंट में चर्चा करने का वायदा नहीं किया गया था। सौ दिन के भीतर पैसे वापस लाने का वायदा किया गया था। अब कहा जा रहा है,हम चर्चा के लिए तैयार हैं। कहीं एक भी चुनावी भा­ाण में बी.जे.पी. के किसी एक भी नेता ने कहा था कि हमें वोट दीजिए,हम सौ दिन के भीतर-भीतर संसद में कालेधन पर चर्चा करवाएंगे। आपने कहा था कि कालाधन वापस लाएंगे। चर्चा तो आडवाणी जी ने दिसम्बर, 2011 में करवा ली थी। कांग्रेस पार्टी ने उस समय जो जवाब दिया था कि इंटरनेशनल एग्रीमेंट्स है,इसलिए कालेधन को वापस लाने में दिक्कतें आ रही हैं। वही जवाब आज सुप्रीम कोर्ट में बी.जे.पी. ने दिया है। सिर्फ कुर्सियों पर संसद में जो माननीय सदस्य बैठे हैं,वे बदल जाते हैं,लेफ्ट वाले राइट आ जाते हैं,राइट वाले लेफ्ट आ जाते हैं। लोगों की किस्मत नहीं बदलती। आप एक-दूसरे पर इल्जाम लगा रहे हैं, 2011 में यह कहा था, 2009 में यह कहा था,लेकिन आप लोगों ने तो आंकड़े दे दिए थे कि 15-15 लाख हर भारतीय के खाते में आ जाएगा। जब आपने जनधन स्कीम में लोगों के खाते खुलवाए तो लोगों को खुशी हुई कि शायद इन्हीं खातों में 15-15 लाख आएगा। अब आप कह रहे हैं कि नहीं-नहीं,यह तो बहुत मुश्किल है। पहले आपने आठ सौ नामों की बात की,फिर सात सौ की बात की,उसके बाद आपने 627 नाम दिए। वह 73 नाम कौन से हैं,जो आपने छिपा लिए?अब राधा टिम्बलू का नाम आ रहा है,जिसकी कम्पनी इल्लिगल माइनिंग में ब्लैक लिस्टेड है। उसका नाम उस लिस्ट में है। उसने एक करोड़ 18 लाख रुपए बी.जे.पी. को चन्दा दिया और 65 लाख रुपए कांग्रेस पार्टी को चन्दा दिया। इसका मतलब आप दोनों पार्टियों को पता है कि इंटरनेशनल एग्रीमेंट हैं। आप उनसे चन्दा लेते हैं। पहले अपना काला मन साफ करो,फिर आ पाएगा कालाधन। यूपीए थ्री की गवर्नमेंट मुझे लग रही है,वित्त मंत्री,श्री अरूण जेटली जी का जो कल बयान था,वह तो मुझे लग रहा है चिदम्बरम साहब बोल रहे हैं। आम जनता पूछ रही है कि हमारा पैसा,हमारी मेहनत का,हमारे खून-पसीने की कमाई का पैसा जो विदेशों में पड़ा है,वह कब आएगा?

16.56 hrs                                  (Hon. Speaker in the Chair)           मैं इसी बात पर एक छोटी सी कविता बोल कर बैठ जाऊंगा। “कालेधन के बारे में कहा गया बी.जे.पी. की ओर से,कालेधन का मुद्दा उठाया गया पूरे जोर से,कहते थे हमारा तो बहुत मजबूत इरादा है,सौ दिन के अंदर-अंदर कालाधन वापस लाने का वायदा है,सरकार जी,सौ दिन तो कब के निकल गए,क्या योग गुरु के साथ आपके इरादे भी पिघल गए,पूरे देश की जनता के मन में यह सवाल है,भगवंत मान का भी यही ख्याल है कि कब खुलने वाला स्विस बैंक का ताला है,चलो अच्छे दिन तो नहीं आए,यह बता दो कालाधन कब आने वाला है। ”                                                                      *m09 श्री निशिकान्त दुबे (गोड्डा) : अध्यक्ष महोदया,आपने मुझे बोलने का समय दिया,इसके लिए मैं आपको धन्यवाद देता हूं। “अजीब दास्तां हैं ये,कहां शुरू,कहां खत्म।” Koenraad Elst की एक बहुत अच्छी किताब है, Negationism in India. हिन्दुस्तान के आदमी को भूलने की बड़ी बीमारी है,बड़ी जल्दी-जल्दी भूल जाते हैं। तारीक भाई ने बड़ी अच्छी बात कही,हमने कहा कि नहीं आएगा। यह एक रिपोर्ट है,लिचेंसटाइन जो बैंक है,उस बैंक की एक रिपोर्ट है। उस बैंक की रिपोर्ट में एक बड़ा अच्छा जिक्र है कि हर्ष रघुवंशी जी पीआईएल किया है और पीआईएल में उन्होंने कोट किया है - He said: “Member of Parliament Nishikant Dubey had disclosed in the House how funds of Leelavati Hospital were being siphoned and used by these individuals to buy stakes in banking institutions.” उन्होंने और क्या-क्या कहा,मेरे भाषण को कोट करते हुए उन्होंने कौन सी बात कही। उन्होंने कहा -  “Some of the individuals are on the Board of Directors of the ING Vysya Bank and are co-promoters of IndusInd Bank, trustees in the State supported charitable trust, Leelavati Hospital and even own a Cricket Team in the Indian Premier League, the Kochi Team.”   17.00 hrs   कोच्चि टीम के मालिक कौन थे,मुझे यह बताने की आवश्यकता नहीं है। यूपीए सरकार के मंत्री थे और मेरा ही एडजर्नमेंट मोशन था,जिसके बाद उस समय की सरकार ने उनको मंत्री पद से हटा दिया। नीरा राडिया का केस हुआ। नीरा राडिया का मुद्दा इस पार्लियामेंट में वर्ष 2009 में मैंने उठाया था। इसके बाद टू जी का इतना बड़ा घोटाला हो गया। तारिक भाई,इस देश में भूलने की बड़ी बीमारी है। तीन साल में ही ये भूल गए। 7 अप्रैल, 2011 का सुप्रीम कोर्ट में हर्ष रघुवंशी का इंटरवेंशन था। उनकी तरफ से रामजेठमलानी,प्रशांत भूषण,शांति भूषण आदि लोग एपियर हुए थे। उसके बाद एसआईटी का इस देश में निर्माण हुआ था। एसआईटी के निर्माण में जो भूमिका है,उसमें 15वीं लोक सभा के एक मेंबर ऑफ पार्लियामेंट की भी भूमिका है,इसको भी आपको याद रखना चाहिए। 

          मैं मुलायम सिंह यादव जी को देख रहा हूं। यहां नारों की बात चल रही है,बड़े नारों की बात चली। चिकमगलूर का चुनाव हुआ। तब कहा गया -एक शेरनी,सौ लंगूर,चिकमगलूर,चिकमगलूर। कौन है लंगूर?मुलायम सिंह यादव जी,जब आप बगल में बैठते हैं तो मुझे आपके ऊपर बड़ी हंसी आती है। ...(व्यवधान)एक शेरनी,सौ लंगूर,चिकमगलूर,चिकमगलूर। लंगूर कौन था?       

          गरीबी हटाओ का इस देश में नारा आया। जब वर्ष 1969, 1970, 1971 में बैंक का नेशनलाइजेशन हो रहा था,कोल का नेशनलाइजेशन हो रहा था,कांग्रेस पार्टी की नेता ... * ...( व्यवधान) जो अब नहीं हैं,उनका इस देश के लिए बहुत कंट्रीब्यूशन है। मैं उनका बहुत आदर करता हूं। वह बोलती थीं कि जैसे ही बैंक का नेशनाइजेशन हो जाएगा,सारे गरीबों के यहां पांच-पांच हजार रूपए चला जाएगा। उस वक्त पांच-पांच हजार रूपए महत्वपूर्ण थे। यदि कोल का नेशनलाइजेशन हो जाएगा,इलेक्शन कैंपेन में उन्होंने कहा है,मैं सब कुछ उठाकर लाया हूं। ...(व्यवधान)इलेक्शन कैंपेन में उन्होंने कहा ...(व्यवधान)मेरे पास सारे डॉक्यूमेंट्स हैं। ...(व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष : आप नाम मत लीजिए।  

…( व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष : किसी का नाम नहीं जाएगा।

…( व्यवधान)

श्री निशिकान्त दुबे  : जब आपकी बात होगी,तब आप अपनी बात रखिएगा। ...(व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष : मैंने कह दिया है कि नाम नहीं जाएगा। 

…( व्यवधान)

श्री निशिकान्त दुबे : वर्ष 1971 में गरीबी हटाओ के नारे पर आए या नहीं,क्या इसमें भी कोई दो मत हैं?तेंदुलकर कमेटी की रिपोर्ट आयी है कि चालीस परसेंट लोग आज भी गरीब हैं। गरीबी हटाओ के नारे के बाद क्या कांग्रेस पार्टी ने यह जवाब दिया?क्या किसी पॉलिटिकल पार्टी ने उससे पूछा कि गरीबी हटी या नहीं? ...(व्यवधान)चालीस परसेंट लोग अभी भी गरीब हैं। ...(व्यवधान) 

माननीय अध्यक्ष : निशिकांत जी, आप बोलिए।

…( व्यवधान)

श्री निशिकान्त दुबे  : महोदया,आपने भी इस सदन में खड़े होकर कहा कि काली छतरी लेकर लोग आ रहे हैं। आज मैंने देखा कि काला शॉल लेकर आ रहे हैं। मेरे मन में आया कि इस डिबेट में काले धन पर ये सारे लोग एक्टिव क्यों हो गए हैं?कहीं का ईंट,कहीं का रोड़ा,भानुमती ने कुनबा जोड़ा,ये सारे कुनबे एक साथ एकत्रित क्यों हो गए हैं?मैंने इस पर बड़ा ध्यान दिया। यह बिना मौसम बरसात हो रही है। लंदन की तरह लोग छतरी लेकर यहां आ गया हैं। अभी गर्मी है,काला शॉल लेकर आ गए हैं।

          जन-धन योजना में छः हजार करोड़ रूपए आ गए। इसमें सभी गरीबों का खाता खुल रहा है। प्राइम मिनिस्टर मेक इन इंडिया की बात कर रहे हैं। वैंकैय्या जी ने अभी बहुत सारी बातें कहीं। प्रधानमंत्री जी अमेरिका जा रहे हैं, लंदन जा रहे हैं, ब्रिक्स में जा रहे हैं, आस्ट्रेलिया जा रहे हैं, सभी जगह उनका स्वागत हो रहा है। सभी पॉलिटिकल पार्टीज को अपना बेस कहीं न कहीं हिलता हुआ नजर आ रहा है।

          अभी जो रिजल्ट आए हैं, उसे आप अगर देखेंगे तो कांग्रेस हरियाणा लॉस कर गयी, महाराष्ट्र लॉस कर गयी। मुलायम सिंह जी को पता है कि जितनी सीटें आपने बाई-इलेक्शन में जीती हैं, बहुजन समाज पार्टी के नहीं खड़ा होने के बाद आपको उतनी सीटें मिल गयी हैं। आपकी भी जमीन हिली हुयी है। आरजेडी वाले यहां बैठे हुए हैं। ...(व्यवधान)

श्री मुलायम सिंह यादव  : आप खड़ा करके देख लीजिए। ...(व्यवधान)

श्री निशिकान्त दुबे  : आरजेडी का जेडीयू के साथ उन सीटों पर समझौता हो गया,जो सीटें भारतीय जनता पार्टी की थीं। जब जनरल इलेक्शन आएगा,तो आपको भी खबर आ जाएगी कि आपकी 121 सीटें हैं,उनमें से कितने का बंटवारा करेंगे?सभी आदमी अपना पॉलिटिकल वजूद बचाने के लिए,क्योंकि किसी के पास कोई मुद्दा नहीं है और प्रधानमंत्री की इमेज इतनी बड़ी हो रही है,तो इन सभी ने मिलकर सोचा कि तिनका-तिनका एक करके,डूबते को तिनके का सहारा होना चाहिए। सारी पॉलिटिकल पार्टीज ने कहा कि कोई मुद्दा नहीं है तो ब्लैक मनी के मुद्दे पर बातचीत कर ली जाए। ...(व्यवधान)

          महोदया,मुद्दा कितना डीरेल हुआ?डिबेट का लेवल आप देखिए,कौन चोर,कितना चोर?बड़ा अच्छा आपने लिखा है,खड़गे साहब कोट कर रहे थे कि बैंक का एनपीए हो रहा है। स्पीकर महोदया,छः महीने में इस सरकार ने तो एन.पी.ए. नहीं कर दिया,साढ़े छः लाख करोड़ रुपए का एन.पी.ए. है,इस सरकार ने पांच लाख करोड़ रुपए राइट-ऑफ कर दी। सुप्रीम कोर्ट के जजमेंट के बाद तीन लाख करोड़ रुपए माइन्स में एक्सपोजर,खत्म हो रहा है। चार लाख करोड़ रुपए के पावर प्लांट बने हुए हैं,जो खत्म होनेवाले हैं और तीन लाख करोड़ रुपए बेसील नॉर्म्स के आधार पर सरकार को बैक्स में इंफ्यूज करना है। इसका सत्तर लाख करोड़ रुपए टोटल एक्सपोजर है,...(व्यवधान)मेरे पास पूरे लिस्ट हैं। ...(व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष :  ऐसा बार-बार नहीं होना चाहिए। कृपया आप अपने स्थानों पर बैठ जाइए।

...( व्यवधान)

HON. SPEAKER: Nothing will go on record except what Shri Nishikant Dubeyji is saying.

(Interruptions) …* श्री निशिकान्त दुबे :   जिन सौ कंपनियों को आपने दस साल में लोन दिए हैं, जिनकी बुरी स्थिति है, जोकि घाटे में हैं और यदि इस सिचुएशन में बैंक्स कोलैप्स कर जाएंगे तो दोष किसको, कौन चोर तो "टेकना चोर’, यह एन.डी.ए. ने कर दिया। आपने दस सालों में देश का कबाड़ा कर दिया, इसको आपको समझना चाहिए। मल्लिकार्जुन खड़गे, साहब ने बड़ी अच्छी-अच्छी बातें कहा कि हमारे नेता ने यह कहा, हमारे नेता ने वह कहा। मैडम सोनिया जी बैठी हुई हैं तो मुझे बहुत सुविधा है। इन्होंने 27 अप्रैल, 2009 में, मैंगलोर में पार्टी वर्कर्स की मीटिंग एड्रेस की, उसमें उन्होंने कहा -

“If elected, would work to bring the black monies illegally stashed away by Indians abroad.”           पांच साल में कितना पैसा आया, इसके बारे में क्या आपने पूछा? ...(व्यवधान)इतना ही नहीं, कहा कि रामदेव बाबा के बगल में प्रधानमंत्री जी ने मूड़ी हिला दिया, इसलिए वह भी दोषी हैं। ...(व्यवधान)यह वर्ष 1991-92 का मनमोहन सिंह जी का बजट है। मैं सब चीजें ले कर आया हूं। उन्होंने बजट में कहा है -

 “Nobody can deny the existence of large scale tax evasion, both in terms of income and in terms of wealth. Unless I find substantial improvement in tax compliance in the next few months, Government will have no choice but to take strong measures to make the tax evader pay a sufficiently high price for such delinquency. Before coming down heavily on tax evaders, I would like to give them a last opportunity to come clean. The black money so mobilised will be utilised for the achievement of social objectives such as slum clearance and low cost housing for the rural poor. ”                     यह उन्होंने वर्ष 1991 में कहा है। वर्ष 1991 से लेकर 23 साल तक कितने स्लम्स क्लीयर हुए और कितने रूरल हाउसिंग हो गई, सरकार को यह बताना चाहिए। ...(व्यवधान)यह मनमोहन सिंह जी का बयान है। ...(व्यवधान)

          ए.पी.सिंह साहब के बारे में वैंकेय्या नायडू जी बोल चुके हैं। ...(व्यवधान)इसी में,मैं आपको यह बताना चाहता हूं कि जिस ग्लोबल ट्रांसपरैंसी का एल.के. आडावाणी जी के संबंध में जिक्र किया गया,प्रणव मुखर्जी साहब ने "व्हाइट पेपर’में लिखा है -

 “During the recent winter session of Parliament, Union Finance Minister Pranab Mukherjee had promised to bring out a white paper on black money. Quoting figures of Global Financial Integrity, he had said that from 1948 to 2008, about $213 billion was stashed away by Indians in foreign banks. “At the current value, this would amount to $462 billion,” Mukherjee had said.”             आप एल.के. आडवाणी साहब की बात करते हैं, यह प्रणव मुखर्जी साहब ने खुद कहा है। इसी तरह से मैं आपको बता रहा हूं कि आपने चीज को कैंसरस बना दिया है। मल्लिकार्जुन खड़गे साहब ने कहा है कि यह आजादी के पहले से है। यह सही है। वर्ष 1936 में "अय्यर कमेटी’ की रिपोर्ट बनी। मोहम्मद सलीम साहब ने "वांगचू कमेटी’ की रिपोर्ट का बड़ा अच्छा जिक्र किया है। "वांगचू कमेटी’ की रिपोर्ट में क्या कहा गया है? वर्ष 1970-1971 में, इस देश की वित्त मंत्री श्रीमती इंदिरा जी थीं। इंदिरा जी ने कहा कि "ब्लैक मनी’ एक बड़ा विषय है, इसलिए "वांगचू कमेटी’ बना देते हैं। "वांगचू कमेटी’ की फाइंडिंग में क्या आया? उसने सबसे पहले कहा -

“Thirteen years ago the Wanchoo Committee Report depicted the phenomenon as a cancerous growth in the country's economy which, if not checked in time, will surely lead to its ruination.” जब आपने इसे कैंसर बना दिया तो आप चाहते हैं कि कैंसर का इलाज सौ दिन में कर दीजिए। यह 1971 की वांचू कमेटी की रिपोर्ट है जो श्रीमती गांधी ने बनाई। स्पीकर महोदया,कांग्रेस की एक आदत है कि जब इनकी इच्छा होती है एक कमेटी बना देते हैं। उससे पहले एक सांतन कमेटी बनी।...(व्यवधान)सांतन कमेटी कहती है कि इसके बढ़ावे में शुगर इंडस्ट्री का बहुत बड़ा योगदान है। जब चीजें बढ़ती गईं,वांचू कमेटी बनी,चोपड़ा कमेटी बनी,काकोदकर कमेटी बनी,कालोदकर कमेटी बनी। जब हजार कमेटी बन गईं तो जिस तरह अभी एसआईटी के बाद तीन एजैंसियों को दे दिया,महताब साहब ने बताया कि एसआईटी क्यों नहीं बनी। इसके बाद इन्होंने शंकराचार्य,राजा चलैय्या इन सबके नेतृत्व में,जब 1980-81 में फिर से श्रीमती गांधी आईं तो एक कमेटी की रिपोर्ट आई जो 1985 में इस पार्लियामैंट में डाली गई। उसमें उन्होंने कहा कि किस कारण ब्लैक मनी जनरेट हो रही है । ब्लैक मनी जो स्ट्रक्चर ऑफ टैक्स इवेजन है,उसके बारे में सरकार कुछ नहीं कर रही है। सरकार की कमेटी की रिपोर्ट है। 1985 में जब माननीय राजीव गांधी जी इस देश के प्रधान मंत्री थे,उन्हें इस कमेटी की रिपोर्ट दी गई। 1983 में श्रीमती गांधी ने कमेटी बनाई थी। मैं सरकारी कमेटी की रिपोर्ट कोट कर रहा हूं। उन्होंने कहा कि इफैक्टिवनैस टैक्स एडमिनिस्ट्रेशन का नहीं हो रहा है,कंट्रोल ऑफ इकोनॉमिक एक्टीविटी नहीं हो रही है,जनरल लॉज़ एंड रैगुलेशन का पालन नहीं हो रहा है,पोलीटिकल फाइनैंस एक बहुत बड़ा मुद्दा है,गवर्नैंस स्पैंडिंग की स्केल और एकाउंटेबिलिटी पूरी नहीं हो रही है,स्टैन्डर्ड ऑफ पब्लिक मॉरैलिटी खत्म हो रही है और इनफ्लेशन खत्म हो रहा है। आपने इसके बारे में कोई एक्शन नहीं लिया। 1985 से आप कितनी बार सरकार में आए। 1985 में आए, 1991 में आए,उसके बाद 2004 में आए, 2009 में आए।...(व्यवधान)

          मेरे कुछ प्रश्न हैं कि एसआईटी क्यों बनी। एसआईटी में सुप्रीम कोर्ट का जजमैंट आया है। मैं उसे भी कोट करूंगा कि इस देश में इस तरह का माहौल क्यों बना। माहौल इसलिए बना कि ब्लैक मनी जनरेशन के लिए जो कानून है,उसे कांग्रेस सरकार ने लागू नहीं किया। ब्लैक मनी किस-किससे जनरेट हो रही है। व्हाइट पेपर कहता है कि आउट ऑफ बुक ट्रांजैक्शन हो रही है,पैरलल बुक्स ऑफ एकाउंटस मेनटेन हो रहे हैं,मैनिपुलेशन ऑफ बुक एकाउंट हो रहा है,मैनिपुलेशन ऑफ सेल्स रिसीट हो रही है,अंडर रिपोर्टिंग ऑफ प्रोडक्शन हो रहा है,मैनिपुलेशन ऑफ एक्सपैंसेज हो रही है,अदर मैनिपुलेशन ऑफ एकाउंटस हो रहा है,मैनिपुलेशन ऑफ कैपिटल हो रहा है। यह आपका ही व्हाइट पेपर कह रहा है यानी शिकारी आएगा,जाल बिछाएगा,इस जाल में कोई फंसना नहीं। लैंड एंड रियल एस्टेट में ट्रांजैक्शन हो रहा है,इसके बारे में कांग्रेस पार्टी ज्यादा अच्छा बताएगी। बुलियन एंड ज्वैलरी का ट्रांजैक्शन हो रहा है। फाइनैंशियल मार्किटिंग का ट्रांजैक्शन हो रहा है। पब्लिक प्रोक्योरमैंट जिसमें करप्शन हो रहा है,मैं कह रहा हूं कि आपने कोई एक्शन नहीं लिया। आप केवल बताते रहे कि ये-ये कॉज़ हैं। इन्हें रोकने के लिए आपने कौन से उपाय किए।...(व्यवधान)हमें अभी छ:महीने हुए हैं।...(व्यवधान)इन्फार्मल सैक्टर में क्या हो रहा है,एक्सटर्नल ट्रेड में क्या हो रहा है,ट्रस्ट में पैसे डाले जा रहे हैं। जब कोई एक्शन नहीं हुआ,सुप्रीम कोर्ट में जब यह डाला गया तो मेरे कांग्रेस पार्टी से कुछ प्रश्न हैं।...(व्यवधान)

          हसन अली का मामला ऐसा है कि इनकम टैक्स डिपार्टमैंट मानता है कि उसके पास 71 हजार करोड़ रुपये फंसे हुए हैं।...(व्यवधान)हसन अली कौन है?हसन अली को कांग्रेस पार्टी ने कैसे बचाया। इस सरकार ने हसन अली को तीन-तीन पासपोर्ट दिए। वह तीन पासपोर्ट रखने के जुर्म में जेल में जाता है। उसके बाद उसे इमीडिएटली अस्पताल में भर्ती किया जाता है। मेरा कहना है कि क्या उसे अस्पताल में भर्ती करने के लिए किसी सरकार ने इजाजत दी?क्या पुणे और मुम्बई की पुलिस उसे ट्रेस नहीं कर पाई?इंस्पैक्टर क्राइम भानुप्रताप जो पुणे में बेस्ड थे,उन्हें किस आधार पर ट्रांसफर किया गया?ईडी ने उन्हें दिसम्बर, 2007 में जो नोटिस दिया,उसके बारे में सरकार ने क्या किया?...(व्यवधान)मैं हसन अली की बात कर रहा हूं कि एसआईटी क्यों बनी।...(व्यवधान)उसका संबंध युसुफ लकड़वाला से था या नहीं?उसका संबंध अगना खाशोगी से था या नहीं?मैडम सोनिया जी,आपके लिए बहुत महत्वपूर्ण है कि लिट्टे के साथ उसके संबंध थे या नहीं?प्रभाकरण को उसने फंड दिया या नहीं?जब आप हसन अली जैसे लोगों को बचाने का प्रयास करेंगे तो सुप्रीम कोर्ट का एक जजमैंट आता है। उसने हसन अली को बड़ा अच्छा कोट किया है। हसन अली को कोट करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा,सुप्रीम कोर्ट का जजमैंट है जिसके लिए आप एसआईटी नहीं बनाने के लिए अड़ गए।...(व्यवधान)हम सब बतायेंगे। ...(व्यवधान)

          “The bank in which the money has been stashed by Hasan Ali Khan was UBS, Zurich. The needle of suspicion has to be inexorably turned to high level political interference and hindrance to the investigation.” यह मैं नहीं कह रहा,यह सुप्रीम कोर्ट का आर्डर है,जिसके आधार पर एसआईटी बनी है। वह कह रहा है कि पोलिटिकल इंटर्फिरन्स हो रहा है,हिन्ड्रन्स डाला जा रहा है।  “The said bank, it was submitted, is the biggest or one of the biggest wealth management companies in the world. The petitioner also narrated the mode and the manner in which the United States had dealt with UBS with respect to monies of American citizens secreted away with the said bank.”  यह सुप्रीम कोर्ट आपको कह रही है कि आप यूएस की तरह कोई काम करने का प्रयास करें। ...(व्यवधान)आप हसन अली को बंद करो,आप क्रेडिट स्क्वीज़ और यूबीएस जैसी जो संस्था है,उसे करो। ...(व्यवधान)मैं यह नही कहता मैंने कोट नहीं किया कि प्रतिभा पाटिल जी ने क्या कहा?मैंने यह नहीं कहा कि प्रधान मंत्री जी ने क्या कहा,इसी पार्लियामैंट में क्या कहा?  ...(व्यवधान)मेरा यह कहना है कि महात्मा गांधी जी ने कहा था कि पहले लोग आप पर हंसेंगे और हंसने के बाद आपको काम नहीं करने देंगे। जब आप काम करके जीत जायेंगे,तो कुछ बातें होंगी। ...(व्यवधान)यह सरकार कुछ काम करने का प्रयास कर रही है,ब्लैक मनी को लाने का प्रयास करती है। बंद मुट्ठी से कोई हाथ नहीं मिलाया जा सकता। कहीं न कहीं रास्ता निकालने की बात होती है। यह सरकार अपनी पूरी ताकत से,पूरे जोशो-खरोश से,जो भी ताकत है,जो भी बुद्धि है,डीटीए का सवाल है,उसके लिए सैक्रेट्री रेवन्यू स्विटजरलैंड गये थे। उन्होंने कहा है कि केवल वही नहीं,जो एचएसबीसी से नाम आये हैं या लिचेंस्टाइन बैंक से आये हैं,उतना ही नहीं,इसके अलावा हम जो इनकम टैक्स देते हैं। क्योंकि जिस ब्लैक मनी की बात पप्पू यादव जी,आप कर रहे थे,आपको पता है कि इस देश का सबसे बड़ा रेड अभी हुआ है। जितना बड़ा कैश अभी पकड़ा गया है,हिन्दुस्तान के इतिहास में इतना कैश किसी भी सरकार ने किसी भी रेड में नहीं पकड़ा है। चाहे ब्लैक मनी इंटरनल जनरेशन का सवाल हो,चाहे ब्लैक मनी आउट साइड जनरेशन का सवाल हो,यदि इनकम टैक्स के सर्च एंड सीजर में किसी आदमी को पकड़ेगी,तो उसका भी इन्फोर्मेशन देगी।

माननीय अध्यक्ष :   अब आप अपनी बात कनक्लूड कीजिए।

…( व्यवधान)

श्री निशिकान्त दुबे : आटोमेटिक टैक्स एक्सचेंज आ रहा है। आप विश्वास कीजिए कि इरादा करने वालों को शांति दीजिए,काम करने वालों को समय दीजिए और भानुमती के कुनबे की तरह अपने आपको जोड़ने का प्रयास न कीजिए।

                                                         

माननीय अध्यक्ष :  श्री बदरुद्दीन अजमल।

           आप थोड़े शब्दों में अपनी बात कहिए।

…( व्यवधान)

*m10 श्री बदरुद्दीन अजमल (धुबरी):   अध्यक्ष महोदया,  मैं एक मिनट मैं अपनी बात समाप्त कर रहा हूं। मैं यहां सबको खुश करने के लिए आता हूं। मैं सिर्फ इतना कह रहा हूं कि ‘उम्र-ए-दराज मांग कर लाये थे चार दिन,दो आरजू में कट गये,दो इंतजार में।’आजादी के जमाने से यह झगड़ा शुरू हुआ और आज तक चल रहा है। हकीकत क्या है?मैं इसमें डाउटफुल हूं कि कहीं ब्लैक भी कुछ है या नहीं और कहीं सफेदी भी कुछ है या नहीं। मैंने सफेद कपड़ा पहना हुआ है,यह मैं जानता हूं और ब्लैक भाई,मेरे अभी जो कह रहे थे,वे बहुत अच्छे लेक्चरार हैं। यहां बैठे हुए भी सभी अच्छे लेक्चरार हैं। ब्लैक कोट हर आदमी पहनता है। अभी सर्दी बहुत ज्यादा नहीं हुई है,इसलिए स्वेटर से ही काम चल रहा है। बहुत जल्दी जैकेट का भी जमाना आयेगा। लेकिन हकीकत यह है कि इस मामले को सीरियसली लिया जाये। हम दोनों पक्ष के लोगों से यही कहेंगे कि भाई,इसे सीरियसली लो,नहीं तो एक आदत हो गयी है,परम्परा है कि यहां वाले आपोजिशन में चलायेंगे और वहां वाले अपने आपको बचाने में चिल्लायेंगे और मसले का कोई हल नहीं निकलेगा। अगर मसले का हल निकालना है,तो सब मिलकर संजीदगी से बैठें और वाकई ही काले धन को,जो अंदर है या बाहर,जो काला हिस्सा हमारे अपने कपड़ों में छिपा हुआ है,उसे भी हम उजागर करने की कोशिश करें।

          इन्हीं बातों के साथ मैं अपनी बात समाप्त करता हूं।

                                                                                     

*m11 श्रीमती अनुप्रिया पटेल (मिर्ज़ापुर): माननीय अध्यक्ष जी,लगभग पूरा सदन इस बात पर सहमत है कि कालाधन राष्ट्रीय संपदा है और इसका उपयोग देश के विकास के लिए होना चाहिए। दुर्भाग्यवश कालेधन का उपयोग ड्रग ट्रैफिकिंग,आतंकवाद जैसे तमाम रा­ष्ट्र विरोधी कार्यों के लिए किया जा रहा है। हमारे सामने कालेधन के संबंध में दो बड़े सवाल और चुनौतियां हैं। पहला प्रश्न यह है कि हमारे देश में कालेधन की उत्पत्ति हो रही है,उस पर किस प्रकार रोक लगाई जाए। दूसरी चुनौती यह है कि विदेशी बैंकों में जो कालाधन जमा है उसे भारत में कैसे वापस लाया जाए।

          जहां तक पहली चुनौती का सवाल है,अर्थव्यवस्था के अंदर कुछ परिवर्तन करके कालेधन की उत्पत्ति पर रोक लगाना संभव होगा। हमारे देश में एक समय पर एक,दो और पांच रुपए जैसे छोटे नोटों का प्रचलन था लेकिन धीरे-धीरे यह समाप्त हो गया। यह जरूरी है कि छोटे नोटों के प्रचलन को फिर से शुरु किया जाए। 500, 1000 रुपए जैसे बड़े नोट,जो मुख्य रूप से कालेधन की उत्पत्ति के कारण हैं,इन पर अंकुश लगाने की आवश्यकता है। 500 रुपए के नोटों की संख्या को सीमित किया जाए। आज 1000 रुपए के नोट इसका बहुत बड़ा कारण बन चुके हैं,उसके चलन को रोकने पर सरकार को विचार करना चाहिए।

     दुनिया के तमाम देशों में ट्रांजेक्शन बेस्ड टैक्सेशन सिस्टम को लागू किया गया है और इसे सफल रूप से संचालित किया जा रहा है। इसी व्यवस्था को हमारे देश में लागू करने के लिए नीति निर्धारण के बारे में सरकार को विचार करना चाहिए। जब तक यह परिवर्तन नहीं किए जाएंगे तब तक संभव नहीं होगा कि देश की सीमा के अंदर कालेधन की उत्पत्ति पर रोक लगाई जा सके। देश की 95 प्रतिशत पूंजी 10 प्रतिशत लोगों के हाथों में केंद्रित है जिससे अमीर और गरीब के बीच की खाई बढ़ रही है,यदि ये परिवर्तन नहीं किए गए तो इसे हम कभी रोक नहीं पाएंगे और न ही देश में कालेधन की उत्पत्ति और कारोबार पर रोक लगा पाएंगे।

     जहां तक दूसरी चुनाती की बात है जो विदेशी बैंकों में जमा कालाधन देश में लाने के संबंध में है। सरकार ने इस पर अपनी प्रतिबद्धता का परिचय दिया है। जी-20सम्मेलन में जिस तरह हमारे देश के प्रधानमंत्री आदरणीय मोदी जी ने पूरे अंतर्रा­ष्ट्रीय समूह को एकजुट करने का साहस दिखाया है,यह अपने आप में एक उदाहरण है। माननीय मोदी जी और उनकी सरकार जिस प्रकार 88 देशों के साथ डबल टैक्स एवाइडेंस एग्रीमेंट का निष्ठापूर्वक पालन करना चाह रही है,यह भी अपने आप में सरकार की संकल्पबद्धता को साबित करता है।

      जैसा कि माननीय मंत्री जी ने सदन में कुछ देर पहले बताया कि 26 मई को सरकार के शपथ ग्रहण के बाद 29 मई को होने वाली कैबिनेट की प्रथम बैठक में एसआईटी के गठन के संबंध में निर्णय लिया गया। इसके बाद एसआईटी का गठन भी हुआ। जून में 627 लोगों के नाम की सूची भी एसआईटी को सौंपी गई। अब एसआईटी द्वारा जांच की जो प्रक्रिया चल रही है,उसमें सरकार का किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप नहीं है। इतने प्रयासों के बावजूद जो कार्य पिछले साठ वर्षों में तमाम सरकारों ने नहीं किया और अब मोदी सरकार से उम्मीद की जा रही है कि छः माह के अंदर सरकार यह काम कर लेगी तो यह हास्यास्पद है। ऐसे कार्यों के लिए सरकार को निश्चित रूप से समय देना चाहिए। सरकार को समय मिलना चाहिए और विपक्ष में भी धैर्य होना चाहिए। कल और आज सदन में सरकार के ऊपर आरोप लगाया गया कि सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के उपरांत एसआईटी का गठन हुआ। सच यह है कि मोदी सरकार ने अंततः किन्हीं भी परिस्थितियों में एसआईटी का गठन किया लेकिन पिछली सरकार ने तीन साल तक उसी सुप्रीम कोर्ट के आदेश,हस्तक्षेप और दिशा निर्देशों के बावजूद एसआईटी के गठन में किसी प्रकार की प्रतिबद्धता नहीं दिखाई थी।

          जहां तक अंतर्रा­ष्ट्रीय समूह में एकजुटता बनाने की बात है,हो सकता है पूर्व की सरकारों ने तमाम प्रयास किए हों। लेकिन जहां तक देश और दुनिया में कालेधन के मुद्दे पर अंतर्रा­ष्ट्रीय समूह में एकजुटता के संदेश भेजने की बात है,यह उपलब्धि सिर्फ मोदी सरकार के खाते में जाती है। इससे पहले यह संदेश देश और दुनिया के बीच कभी नहीं गया था। आज देश के बहुत बड़े समूह को मोदी सरकार से बहुत अपेक्षा है। मैं सरकार से सदन में अपील करती हूं कि कालाधन अगर राष्ट्रीय संपदा है तो इसे राष्ट्रीय संपदा घोषित करने के लिए यदि आवश्यकता पड़े तो विधेयक लाएं,कानून बनाएं क्योंकि यह राष्ट्र की संपत्ति है। यह देश के उन मेहनतकश,गरीब,दलित,पिछड़े समूह के सर्वहारा वर्ग के लोगों की संपत्ति है,जिन्हें मोदी जी से विशेष उम्मीद है। इस उम्मीद की बहुत बड़ी वजह है क्योंकि मोदी जी ऐसे व्यक्ति हैं जिन्होंने एक सामान्य चाय बेचने वाले से देश के प्रधानमंत्री बनने का सफर तय किया इसलिए वह भी उस पिछड़े,गरीब सर्वहारा वर्ग का प्रतिनिधित्व करते हैं। जो यह उम्मीद लगाये बैठा है कि जब यह पैसा देश के अंदर वापस आएगा,तो उसे देश के विकास कार्यों में खर्च किया जाएगा। नेपाल के जनकपुर में बैठा एक साधारण-सा चाय वाला भी यह उम्मीद करता है कि यदि मोदी जी उसके जनकपुर में प्रवेश कर लेंगे,तो उनके जनकपुर का सुधार हो जाएगा,जो उनकी सरकार के रहते नहीं हो पाया है। माननीय मोदी जी से लोगों में उम्मीदों का  यह स्तर है। इसलिए आज मैं सदन से अपील करती हूँ कि हमारी सरकार कालेधन को राष्ट्रीय सम्पदा घोषित करने के सम्बन्ध में प्रयास करे और उसे देश में वापस लाए और साथ ही कालेधन की उत्पत्ति को देश के अंदर रोकने के लिए कारगर उपाय निकाले। हमारे देश का जो 90 प्रतिशत तबका शोषित,कमजोर,दलित-पीड़ित है,वे उस पैसे से देश के विकास की उम्मीद लगाये बैठे हैं और यह सरकार के प्रयास से ही संभव हो पाएगा। इन्हीं शब्दों के साथ मैं आपका बहुत-बहुत धन्यवाद करती हूँ।

 

*m12 SHRI E.T. MOHAMMAD BASHEER (PONNANI): Madam Speaker, I thank you very much for giving me this opportunity for making my small observation on this very important topic.

          We had a similar discussion in the past also. On December 14, 2011, there was a threadbare discussion on black money. There was a motion moved by Shri L.K. Advani on the same subject and the then Finance Minister, Shri Pranab Mukherjee replied to that. In that reply, he had narrated the steps taken by the UPA Government in unearthing unaccounted money, curbing ill-motivated action of tax evading and tax avoiding. Now, the BJP is criticising that the UPA Government did nothing and they have done a lot of things. Shri Pranab Mukherjee in his reply had proudly announced on the floor of this House that the UPA Government was able to unearth Rs. 66,000 crore of unaccounted money. Similarly, the then Prime Minister, Dr. Manmohan Singh in G-20  Summit had declared and appealed to the world that:

“G-20 countries should take the lead in agreeing to automatic exchange of tax-related information with each other, irrespective of artificial distinction such as present or past, tax evasion or tax fraud in the spirit of our London Summit that the era of bank secrecy is over.”   Similarly, he was inviting the attention of the world to this very vital issue. A lot of things were done during that period and I do not want to go into details of those things.
          The BJP leaders were saying that they have done a lot of things from their side. We can very well understand the dilemma of the BJP. They are having their own problem in swallowing the slogans they had raised during the last election. During the last election, on this subject, they made capital out of it. At that time, it was one-step forward and now, the BJP is following a two-step backward strategy in this regard. Shri Venkaiah Naidu is here now. He was explaining the calculation of 100 days according to them. It was a wonderful calculation. It was a new definition for 100 days. Maybe the BJP’s 100 days may be equal to our 1,000 days.
          Whatever it may be, Sir, we have to realise the fact that a huge amount of unaccounted money is there within India and also in the accounts of Indian individuals abroad. That is also a huge amount. The figure may be different. The BJP wants to claim that it is Rs. 25 lakh crore while Ramdev’s projection Rs. 45,000 crore. According to the Swiss Banks Association, it varies between US $ 1,500 billion and 1,900 billion. The BJP’s Task Force’s projection during the election was that it may range between US $ 500 billion and 1,500 billion. Whatever it may be, it is a big evil. So, what is to be done? Whatever is to be done, it needs to be done vehemently. Instead of mud-slinging, we have to put our heads together and find out exactly what legal, economical and practical action can be taken to curb these bad tendencies.
          It is very clear that all are talking about the evils of black money, but what exactly is the solution? We have to identify first who the real individuals are who have kept their money in foreign banks and then, find out the quantum of legal and illegal money. Thirdly, there has to be an assessment of criminality involved in it. India being a party to various international treaties, we must make a specific and clear-cut legal method to bring back black money from abroad.
          We have to understand about some realities. These kinds of tendencies cannot be curbed / stopped one fine morning. A country cannot be free from all kind of evils one fine morning. Somebody was mentioning about the American experience. America always takes a double standard. Of course, America might have brought back black money, but at the same time they are providing havens for  black money from other nation. They are having an island there, and they will not disclose the names of the depositors. That is their strategy.
HON. SPEAKER: Please conclude now.
SHRI E.T. MOHAMMAD BASHEER : Madam, I am going to conclude. As mentioned by my former speakers, there is a huge amount of black money within India also, which we have to take into consideration. We have to consider very seriously about the Indian situation also when we are talking about foreign money and deposit. For example, people were saying about smuggling. I do not want to enter into that issue.
HON. SPEAKER: Please conclude now.
SHRI E.T. MOHAMMAD BASHEER : Similarly, my friend was saying about election reforms.
HON. SPEAKER: Please conclude now.
SHRI E.T. MOHAMMAD BASHEER : Yes, Madam. How does the black money come, and how is it utilized in a ruthless manner? All these things will have to be taken into consideration. What I am saying in brief is that the Government should take very vehement action irrespective of all other claims.
I once again appeal to the Government to be serious on this issue. The Government should come forward to take very vehement action on this evil instead of doing only lip-exercise.
          With these few words, I conclude.
 
*m13 श्री कौशलेन्द्र कुमार (नालंदा) : माननीय अध्यक्ष महोदया,विदेश में जमा काला धन वापस लाने की चर्चा में मुझे भाग लेने का आपने अवसर दिया,उसके लिए आपको मैं धन्यवाद देता हूं।
          काले धन पर कल से सदन में चर्चा हो रही है। पंद्रहवीं लोक सभा में भी हम लोग थे और इस पर चर्चा हुई थी,लेकिन आज तक उसके बारे में लोग समझ नहीं पाए कि काला धन कैसे वापस आएगा। पहले जो साथी इधर थे,आज उधर हो गए हैं और पहले जो उधर थे,आज इधर आ गए हैं,लेकिन भाषा बदल गयी है। पहले इस साइड से जो जवाब आ रहा था,अब वह उस साइड से आ रहा है। खासकर प्रधान मंत्री मोदी जी ने चुनाव के समय पूरे देश में घूम-घूमकर जनता के बीच यह बात कही थी कि आप अगर हमें जनादेश देंगे तो निश्चित रूप से मैं काले धन को वापस लाऊंग और इस देश के हर परिवार के खाते में 15-15 लाख रुपये जमा किए जाएंगे। विदेशों में इतना काला धन जमा है कि उसके वापस आने से देश खुशहाल होगा,गरीबी दूर होगी,बेरोजगारी मिट जाएगी और अच्छे दिन आ जाएंगे। मैं कहना चाहता हूं कि आज माननीय प्रधान मंत्री जी यहां नहीं हैं,देश की जनता यह पूछ रही है। हम लोग भी क्षेत्र में जाते हैं,लोग सवाल करते हैं कि जन धन योजना के तहत जो खाते खुलवाए गए हैं,क्या उसमें पैसा आएगा। हम लोगों को ऐसे सवाल सुनने को मिलते हैं। माननीय प्रधान मंत्री जी नहीं हैं,लेकिन वरिष्ठ मंत्री यहां बैठे हैं,सरकार को यह जवाब देना चाहिए कि कब तक यह पैसा आएगा और उन गरीबों के खाते में कब तक जाएगा?यही सवाल मैं यहां रखना चाहता हूं और देश की जनता जवाब सुनना चाहती है। अगर प्रधान मंत्री जी यहां होते,उनका जवाब आता तो निश्चित रूप से अच्छा होता।
*m14 डॉ. किरीट सोमैया (मुम्बई उत्तर पूर्व) : महोदया,काफी अच्छा लगता है। वास्तव में अच्छे दिन आ गए हैं,क्योंकि,पूरा सदन एक आवाज में,एक ही सुर में काला धन वापस लाने की बात कर रहा है। कोई काला छाता लेकर आता है,कोई काला कम्बल लेकर आता है और अलग-अलग सुर में बात एक ही करते हैं।...(व्यवधान)  लेकिन एक बात का मुझे बहुत आनंद हुआ कि आज पूरा देश एक ही स्वर में बोल रहा है। कभी माननीय राष्ट्रपति तथा पूर्व वित्त मंत्री माननीय प्रणव मुखर्जी,चिदम्बरम जी,आडवाणी जी,मुलायम सिंह जी,अरुण जेटली जी,खड़गे जी,जितेन्द्र जी,सुदीप जी,सब एक ही भाषा में बात कर रहे हैं कि काला-धन वापस लाओ। इसमें माननीय मल्लिका अर्जुन जी का वह वाक्य उद्धृत करना चाहता हूं जिसे कुछ मात्रा में माननीय निशिकांत जी ने भी कहा। डिबेट को शुरु करते हुए जो माननीय मल्लिका अर्जुन जी ने कहा, जो संसद की रिपोर्ट में लिखा है,  ‘Since independence’. आप तो 1985 से आगे गये थे।  Since independence till now, discussion on black-money has taken place in some form or the other. Since independence,  सरकार किसकी थी?यह संसद की रिपोर्ट है,मेरी नहीं है। माननीय मल्लिका अर्जुन जी का वह वाक्य सुनकर और निशिकांत जी ने जो अनेक उदाहरण दिये,उसके संदर्भ में मार्क-ट्वैन का एक किस्सा याद आता है। उन्होंने एक बार कहा था कि  “सिगरेट पीना छोड़ना बहुत सहज काम है,मैंने अनेक बार छोड़ी है” । आप इसका मतलब समझ गये ना। काला-धन की बात कांग्रेस वाले करते हैं तब यह किस्सा उन्हें याद दिलाना पड़ता है।
          अध्यक्ष महोदया,आज मैं पॉलिटिकल कम थोड़ा आर्थिक इश्यूज को ज्यादा टच करना चाहूंगा। This is fact.  All of us have accepted that black money is the issue. जब हम काला-धन की बात करते हैं तो मेज़र इश्यू होता है, how is black money generated?  Let us concentrate on that.  How is black money parked?  How it is invested?  The third part must be an action to stop further generation and an action to recover whatever black money is available whether outside the country or inside the country.   आज पूरा देश हमें देख रहा है,हम सब मानते हैं कि काला-धन एक समस्या है तो why cannot we concentrate on this issue whether on this side or on that side?   हमने किया या आपने किया,सेवा तो देश की होगी। We must discuss how it is generated.  एक होता है करप्शन,दूसरा होता है क्रिमिनल,तीसरा होता है ड्रग्स कारटेज,चौथा होता है माफिया,पांचवा होता है हाईटेक रिज़ीम। जहां पर हाईटेक रिज़ीम होता है वहां पर लोग कर बचाने के लिए इस प्रकार से काला-धन जैनरेट करते हैं। छठा होता है to run a parallel economy which is one major issue.  मैंने पहले सेशन में इसका जिक्र किया था कि कुछ बोगस चिटफंड कंपनियां डूब गयीं,आठ महीने से मालिक जेल में है लेकिन एक भी छोटा निवेशक बाहर नहीं आता है तो पैसा है किसका? The last point is the fake money,  fake currency.   ये जो जैनरेशन वाली बात है,मोदी सरकार इसके ऊपर ध्यान केन्द्रित करना चाहती है। बताइये,कैसे कंसेंट्रेट करना है?पहला,करप्शन नहीं चलेगा। काम के बदले अब दाम नहीं होंगे। एक बार हमने करप्शन रोक दिया तो सब ठीक होगा। काला-धन जैनरेट केवल केन्द्र के कारण नहीं होता है काला-धन जो जैनरेट होता है वह लोकल-बॉडी से लेकर,विधान सभा से लेकर केन्द्र तक है। पहले हम सब मिलकर उसके ऊपर कांसेंट्रेट करे। बीजेपी की आज पूरे देश में सौ प्रतिशत सरकार नहीं है,लोकसभा में जरूर 282 सांसद हैं,लेकिन विधानसभाओं में अलग-अलग पार्टियों की सरकार है।...(व्यवधान) I am not saying that politicians generate black money. I am talking about what Government can concentrate on.
          महोदया,मैं एक और बिंदू पर कहना चाहता हूं कि करप्शन का मतलब पॉलीटिशियन नहीं है। कॉर्पोरेट्स और अन्य लोग अपना काम करवाने के लिए काले धन का उपयोग करता है। Next point is criminal activities. Third point is drugs. कभी हमने सोचा है कि पॉन्जी कम्पनियां क्या हैं?बोगस चिट फंड कम्पनियां क्या हैं?मैं आज सुदीप दा से प्रेम से और रिस्पेक्ट से बात कहना चाहता हूं। आपने ही मुझे समर्थन किया था कि why should a bogus chit fund company go out of the way and extend gestures to politicians? किरीट सोमैया जी आपकी संसदीय क्षेत्र में दो-पांच करोड़ रुपयों का कुछ काम करना है तो बताओ,दो-पांच करोड़ रुपये की चैरिटी,अगर आप कहेंगे तो उस प्रोजेक्ट में हम कर देंगे। मैं टोंट नहीं मारना चाहता हूं कि कब कोई आकर मेंरे चरित्र को दो करोड़ रुपयों में खरीदता है तो I have to apply my mind. मेरा कहना यह है कि एक काम हम करें कि यह जनरेशन रोकें। दूसरा बिंदू है कि पार्किग। We have done it. हम और आप मिलकर आप मुझे बताइए कि हम किससे झूठ बोलते हैं,किससे सच छुपाते हैं?आज रीयल एस्टेट में हिंदुस्तान का कोई भी गांव कोई भी शहर में कोई भी प्रापर्टी,कोई भी जमीन यहां बैठा हुआ लेता है तो वह ब्लैक में पैमेंट करता है या नहीं?यह वास्तविकता है। यदि हम वास्तविकता को छुपाएंगे और एक-दूसरे से लड़ेंगे तो फ़ायदा किसका होता है?ब्लैक मनी वाले का फ़ायदा होता है। वर्ष 2001-2002 से पहले मुम्बई में 60 परसेंट व्हाइट और 40 परसेंट ब्लैक में रियल एस्टेट में पैमेंट होती थी। वर्ष 1997 से 2005 तक यह सौ प्रतिशत व्हाइट पैमेंट हो गया था। हमें रियल एस्टेट पर कन्सनट्रेट करना चाहिए। इसके अलावा यहां जो जनरेट होता है,वह फोरन में जाता है। फोरन में जो जनरेट होता है,वह यहां के कारण होता है। यहां जो बड़े कांट्रैक्ट किए जाते हैं,उसका किकबैक फोरन में दिया जाता है। Generation of black money inside the country and abroad are one and the same thing. They are linked to each other. यहां पैसा जनरेट होकर वहां पार्क होता है। मैं आपको अनेक उदाहरण दे सकता हूं।  What can we do in the case of tax havens? We can unanimously decide … टैक्स हेवन्स का मीनिंग क्या है?यहां तीस परसेंट कॉर्पोरेट टैक्स है,इंडीविज़ुअल इनकम टैक्स है। वहां तीन प्रतिशत टैक्स है। हम सब मिलकर निर्णय करें कि तुम्हारे देश में तीन प्रतिशत होगा तो यहां वाली कम्पनियां भी शेल कम्पनियां खोलती हैं। ओईसीडी ने इस विषय को उठाया था। यही विषय अमेरिका को भी लागू करता है। मैं आपको अनेक रिपोर्ट इस तरह की दिखा सकता हूं, developed countries are also facing the same problem. टैक्स हेवन को हेण्डल करना।    दूसरा,स्विस बैंक कान्फिडेंशियलिटी के नाम पर हमारे यहां की बैंकिंग पद्धति और लोकशाही के साथ खिलवाड़ करती रहेगी तो हमें उनके लिए अपने देश में कानून बनाना होगा। What is required is nothing but intention, determination and action. मोदी सरकार ने तीनों चीजें पांच महीने के अंदर दिखा दी हैं। सौ दिन में इनटैन्शन भी क्लियर कर दी है,डिटरमिनेशन भी है और एक्शन भी है। सौ दिन में हमने काला धन वापस लाने का प्रोसैस प्रारम्भ किया है। अब जिसका भी काला धन होगा,वह हिन्दुस्तान में वापस आएगा और हिन्दुस्तान नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में आने वाले दस साल में विश्व का एक नंबर का देश बनेगा।
 
*m15 श्री असादुद्दीन ओवैसी (हैदराबाद) : माननीय अध्यक्ष जी,आपका बहुत बहुत शुक्रिया। शायरे मशरख ने मरकज़ी हुकूमत के बारे में एक शेर कहा था:
          तुम्हारे वादे अपने खंजर से आप ही खुदकुशी करेंगे,           जो शाक-ए-नाजुक पे आशियाना बनेगा,वो नापायेदार होगा।
वज़ीर-ए-आज़म ने यह कहा था कि हम न खाएंगे,न खाने देंगे। मैं हुकूमत से आपके माध्यम से इस बात को कहना चाहूंगा कि क्या वह ऐसा कानून बनाएंगे या मौजूदा जो प्रीवेंशन ऑफ मनी लाँडरिंग कानून है,उसको तरमीम करके इस बात को उस कानून में शामिल करेंगे कि अगर किसी हिन्दुस्तान के फॉरेन मुल्क में एकाउंट्स होंगे तो वह उसको अपने इंकम टैक्स में दिखाएंगे और कंपनीज का नाम दिखाएंगे। अगर नहीं दिखाते हैं तो उसको प्रोसीड्स ऑफ क्राइम करार देंगे तथा उनकी प्रोपर्टीज को जब्त किया जाएगा। क्या आप इस तरह का एक कानून बनाएंगे?
          दूसरी बात यह है कि हमारे मुल्क में सरमायेदार जो हैं,हमारे सियासी निजाम पर कब्जा कर चुके हैं। वे हमको यरगमाल बना चुके हैं और खास तौर से दो बड़ी कौमी जमातों को। यहां जो बहस हुई,शायद ही कुछ लोगों ने इस बात पर मुतालवा किया होगा कि पार्टिसिपेटरी नोट्स पर मैं कह रहा हूं कि उस पर आप बैन लगाइए। सबसे बड़ा खतरा इस मुल्क की सालीनियत को इन पार्टिसिपेटरी नोट्स से है और मॉरीशियस से पैसा यहां पर आता है,कोई यह नहीं पूछता कि वह किसका पैसा है?उसका नाम क्या है और यहां पर आकर पार्क कर दिया जाता है। आज हम जानते हैं कि ईराक में बगदादी बैठा हुआ है जिसने 80 मिलियन डॉलर का पैसा कमाया है। अगर वह मॉरीशियस में कंपनी बनाएगा और पैसा स्टॉक एक्सचेंज में डालेगा तो हमारे स्टॉक एक्सचेंज को भी तबाह कर सकते हैं। मुल्क में दहशतगर्दी का भी पैसा आएगा तो फिर क्या आप पर जिम्मेदारी नहीं आती कि आप मुल्क की सालीनियत को और मुल्क जिसे इन दहशतगर्दों से खतरा है,उनको बचाने के लिए मुतालवा करता हूं कि पार्टिसिपेटरी नोट्स पर बैन लगाइए और जो कंपनीज और ट्रस्ट इंवेस्ट करते हैं,उनका नाम मालूम करवाइए।
          तीसरी बात मैं पूछना चाहूंगा कि एचएसबीसी से जो नाम आए हैं,वे फ्रांस के एक फ्रांसीसी नेशनल ने हमें दिये हैं। यहां पर मरकज़ी हुकूमत यह कहती है कि डबल टैक्सेशन एवॉइडेंस एग्रीमेंट है। हमारा एग्रीमेंट फ्रांस से हो सकता है मगर वहां से आये एकाउंट स्विटरजरलैंड के हैं। स्विटजरलैंड की हुकूमत ने या बैंक ने हमको नहीं दिया। इसलिए आपको इनके साथ करने से कौन रोक रहा है?लिस्टैंटाइन बैंक जर्मनी से अलग है। वह अलग इंडिपेंडेंट मुल्क है। लिस्टैंटाइन बैंक के नाम हम अवाम के सामने ला सकते हैं। हुकूमत कतरा रही है। 4 अक्तूबर 2011 को सुप्रीम कोर्ट के जजमेंट का हवाला दिया जा रहा है। मैं वित्त मंत्री जी से आपके माध्यम से पूछना चाहूंगा कि अक्तूबर 2014 में आप सुप्रीम कोर्ट में क्यों गये कि 2011 का जो सुप्रीम कोर्ट का फैसला है,उसको तरमीम किया जाए। क्या सुप्रीम कोर्ट ने पैरा ग्राफ नं. 56, 71 और 72 में नहीं कहा था कि ये तमाम चीजें गलत हैं और आप नाम दे सकते हैं।
          अभी हमारे मुम्बई से जो सांसद हैं,बड़ी अच्छी बात कह रहे थे। मैं आपके माध्यम से पूछना चाहूंगा कि सिंगापुर में बॉयोमैट्रिक्स नामक कंपनी ने सिर्फ 45 लाख का एकाउंट खोला। आईसीआईसीआई बैंक ने बगैर किसी कोलैटरल के 6500 करोड़ रुपये का लोन दिया औऱ 2011 में 6500 करोड़ रुपये यहां पर हिन्दुस्तान में आए। वे पैसे किस कंपनी में गये जो केजीडी-6में हमारी गैस तलाश कर रही है। वहां से सिंगापुर ने हाई कमीशन को 2011 में लैटर लिखा कि मालूम करिए कि इतना बड़ा पैसा आ रहा है। क्या यह हुकूमत जो वादा करती है कि हम न खाएंगे और न खाने देंगे। गोदावरी में केजीडी-6में जिन्होंने पैसा खाया,वह पैसा मुल्क का है,क्या उनके खिलाफ आप एक्शन लेंगे?अगर मैं गाड़ी के लिए लोन एप्लाई करता हूं तो आईसीआईसीआई बैंक मुझे लोन नहीं देता। लेकिन उस कंपनी को लोन दे दिया गया और उसके पास न कोई ऑफिस है,न कोई कोलैटरल,न कोई ईक्विटीज थी लेकिन फिर भी 6500 करोड़ रुपये का लोन दे दिया गया।
          आज हमारे प्रधान मंत्री जी और एक बहुत बड़ी जमात के लोग एक बहुत सरमायेदार के एयरक्राफ्ट में फिरते हैं। क्या यह बात गलत नहीं है कि एसआईटी ने कहा है कि इस सरमायेदार की जो पॉवर कंपनीज के ईक्विपमेंट्स थे,इसने गलत ओवरप्राइसिंग करके 9000 करोड़ रुपये का टैक्स दिखाया जबकि सिर्फ 3000 करोड़ रुपये के टैक्स थे। 5500 करोड़ रुपये कहां गये?क्या हमारे प्रधान मंत्री जी उस एयरक्राफ्ट में बैठना बंद कर देंगे?अगर आप ऐसा कर सकते हैं तो जरूर करिए। ...(व्यवधान)
          मैं आपके माध्यम से पूछना चाहता हूं ...(व्यवधान)निशिकांत दुबे जी,मैं अदब से कह रहा हूं कि मैं फ़कीर आदमी हूं। मैं अपनी बात खत्म कर रहा हूं। मैं ये दो अहम मिसालें आपके सामने दे रहा हूं -केजीडी-6और पावर कंपनी की,ये आपके लिए चैलेंज है। अक्वामे मुत्तहदा यूनाइटेड नेशंस का जो कंवैन्शन है -आर्टिकल 14, 23, 40, 46, 52 क्या आप इन्हें शामिल करेंगे। यह आप मुल्क को गलत बावर करा रहे हैं।
          आखिरी बात बोलना चाहता हूं कि हमारे हिमाचल प्रदेश के रुक्ने पार्लियामैन्ट ने कल करप्शन के बारे में कहा था,मैं उनसे पूछना चाह रहा हूं कि आईपीएल का क्या है,आईपीएल क्या है?क्या आईपीएल ब्लैक मनी का हिस्सा नहीं है। आईपीएल को क्यों नहीं बर्खास्त करते?सुप्रीम कोर्ट में मुद्गल रिपोर्ट आई,मरकजी हुकूमत ने क्या जवाब दिया,कुछ जवाब नहीं दिया।
          मैं अपनी बात को मुकम्मल करने से पहले हुकूमत से यह बात बता रहा हूं कि हिंदुस्तान की सौ करोड़ की आवाम आपसे पूछ रही है कि मेरे 15 लाख रुपये कहां है। वह गरीब,जो भूखा-प्यासा रहकर,वह खातून जिसने भूखे रहकर वोट डाली,वह नौजवान,जो हमारे मुल्क की साठ फीसदी आबादी का हिस्सा है,वह आपको याद दिला रहे हैं कि मेरे 15 लाख आयेंगे कि नहीं आयेंगे। अब की बार 15 लाख रुपये का नारा आवाम का होगा। आपको अभी नहीं, 2019 तक तो आप जीयेंगे,मगर आपको यह ऐसा जवाब मिलेगा। मुझे यह फर्क समझ में नहीं आ रहा है कि यहां से वहां तक एक ही जुबान सरमायेदारों की बोली जा रही है।
 
*m16 SHRI N.K. PREMACHANDRAN (KOLLAM): Hon. Speaker, Madam, thank you for giving me this opportunity to take part in this discussion. I may be given a little more time because two minutes is too little a time to put forth my views.
          Madam, this is the right time for discussing the issue of bringing back black money from abroad. This is not because of BJP’s coming back to power or NDA assuming power at the Centre but because the hon. Supreme Court has taken stock of the entire situation and vigorously monitoring the case of black money which has been stashed abroad. So, we are having little hope on the hon. Supreme Court and I hope this discussion will have its own impact in having further consequential actions.
          It is an undisputed fact on the part of both the Opposition benches and also the Treasure benches that everybody is admitting the fact that black money is a menace to Indian economy and it is also being admitted that it is a parallel economic system which is being run in our country and is destroying the Indian democratic system. We are talking a lot about the black money. But in action nothing is taking place. That is the main thing which has to be considered. The very interesting fact to be noted is that the US based Global Financial Integrity Statement estimates that India ranks fifth in the world in illicit outflow of capital and at the same time it is one of the poorest country and ranks in the first ten poor countries of the world in terms of per capita GDP. On the one hand, we are having the fifth position in terms of the outflow of capital from India, on the other hand, India ranks amongst the first ten poorest countries of the world in terms of the per capital GDP. What a contradiction this is?
          Madam, my first submission is that the entire Opposition as well as the Treasury benches have to join together to fight out the menace of black money. I would like to make two points. Firstly, Shri Kirit Sowmaiya has just stated that three issues have to be addressed. The first one is, how to bring back this black money? This is an assurance given by the hon. Prime Minister. In his election campaign it was very specifically mentioned that if he was voted to power, then definitely within 100 days the money stashed abroad will be brought back and each citizen will be getting Rs. 10 to 15 lakh. This was the assurance given by the hon. Prime Minister before the electorate. Now, the BJP is turning around and saying that it is an election campaign. If that be the case, then what about the other promises in the election manifesto? This is a Litmus Test as far as this NDA Government is concerned. It is because if one wants to test whether the rice has boiled or not, one need not take the entire rice from the pot, but only a sample has to be taken to find out if the rice has fully boiled or not. If that be the case, then the manifesto as well as the promises made and so many slogans made and also after assuming powers, all those promises made, they have to admit are hollow and are not going to be fulfilled.
          The other point on which I would like to seek an answer from the Government is that, the hon. Minister of Parliamentary Affairs, Shri Venkaiah Naidu ji was talking about the observation made by the then Finance Minister, Shri Pranab Mukherjee in this House itself.
          Madam, I would like to know the response of the present Finance Minister, Shri Arun Jaitley at that time. What were the observations made?   My simple question is, whether Shri Arun Jaitley, the legal luminary in this country, Shri Prakash Javadekar, Shri Ravi Shankar Prasad, the esteemed leader, Shri L.K. Advani  were not aware of the Tax Avoidance Agreement, the international treaties which were not applicable to them.  Then why was this observation made at the time of the UPA Government?  Why have they  made this observation? The answer is, at that time, we were in the Opposition.  Is it a genuine and justifiable answer?  That means, at the time of election campaign, they have made so many promises and the promises cannot be fulfilled.  What is the reason for it?  It is because many procedural formalities are required to be fulfilled.  Double Taxation Avoidance Agreement is there.  All these were the reasons which were enunciated at the time of the UPA Government in justification for the difficulties which had to be faced.  If that be the case, as the leader of the largest party, as the Congress Party yesterday had cited, the BJP and the Prime Minister owes an apology to the country first because he has made a promise which he is not able to fulfill due to procedural hurdles. He has to apologize to the Congress Party also because he has unnecessarily criticized the Congress Party at that time.  If you want to enjoy the credibility of this Government, definitely, admit the fact and take stringent action.
          Madam, what about the black money?  Will the Government  be able to bring back the black money or not?  Is the money there or not?  Is the illicit outflow of capital there in the Swiss Bank as well as in other Banks? How many years have lapsed?  Definitely, the money has already been siphoned out and it has gone to different routes.  By different routes, it has come back to India by way of foreign institutional investment. By FDI, it has come to India.
          If you go through the statistics, during the neo-liberal reforms in 1991, the illicit outflow  was 9.1 per cent.  Now it is 16.1 per cent because of the deregulation of the economy and deregulation will aggressively promote black money also.  All these points have to be taken into consideration and stringent action has to be taken  to bring back the black money.
          With these words, I conclude. 
                                                                                               
*m17 SHRI C.N. JAYADEVAN (THRISSUR):  Hon. Speaker, regarding the discussion on black money, I was hearing all the speeches for the last two days and I have only two  minutes to speak.
          I feel it a joke when these bourgeois parties – the BJP and the Congress – quarrel with each other on black money.  The Congress Party says that the Prime Minister, Shri Modi was campaigning in the elections that he will bring back black money.  The BJP says  that the Congress was ruling   for the last 50 years in India and who is responsible for black money and who will bring back black money?   They are quarrelling together.  ...* The cats will quarrel with each other.  Children will cry and people will think … *.  That is the relationship between the bourgeois parties.  I feel this as a Communist when I am hearing the speeches. 
          The people of India have every right to know the names of all those accounts in foreign banks.  After disclosure, full investigation is necessary to know how wealth was stashed away and for what purposes it is used.  Apart from the holders of foreign accounts, their benefactors including the political parties and other entities should be hauled up.  Black money should be confiscated and used for the alleviation of poverty in the country. 
          At the moment, Modi Government has given a list of just 627 persons which was given by the Government of France.  There are other lists in the possession of the Government received from other countries and foreign banks.  I hope that the Supreme Court will get all this information and not confine it to Special Investigation Team.

18.00 hrs They must be made public. The Press reported one of the three names -- which was disclosed on 28th October by the Government – that person is a big donor to the BJP and the Congress. It only exposes the political connections of such people. Earlier the BJP Government was repeating the argument of its predecessor, that is the Government led by the UPA II, that it cannot disclose the names of the black money holders as it will breach international agreements. After the Supreme Court punctured this argument, it is now crying about rights of privacy of individuals and companies. This is nothing but a crude attempt to shield the culprits who have stashed away our wealth and money and deposited it in foreign banks for ulterior motives.

          It is believed that the quantum of black money in India is worth three trillion dollars that is equal to the country’s GDP. There is no question of rights to privacy of individuals and companies about our internal issues. Our Government can take action against the black money holders in India. What action is the Government going to take against the black money holders in India, not in foreign countries? It is necessary that pressure must be built to force the Government to publish all available information on stashing away of money by Indians. … (Interruptions) It is stated that the total amount involved is more than three trillion dollars, that is equal to the country’s GDP. It is the public money that has been stashed away. … (Interruptions) Hence, merely identifying the culprits is not enough. Measures need to be initiated to confiscate the entire amount. … (Interruptions)

HON. SPEAKER: It is six o’clock. अभी हमारे पास तीन-चार लोग बोलने वाले हैं और मंत्री जी भी अभी रिप्लाई देंगे। ये तीन वक्ता और रिप्लाई होने तक आप सबकी अनुमति से हम सदन का समय बढ़ाते हैं।

अनेक माननीय सदस्य : महोदया, ठीक है।

श्री मल्लिकार्जुन खड़गे (गुलबर्गा) : महोदया,बहुत से मेंबर क्लेरिफिकेशन पूछते हैं तो रिप्लाई में समय लगता है।

माननीय अध्यक्ष : ये तीन लोग दो-दो मिनट बोलने वाले हैं। उनकी बात हो जायेगी और फिर मंत्री जी का रिप्लाई हो जायेगा। आज रिप्लाई करा देते हैं और तब तक सदन का समय बढ़ा देते हैं। ये तीन लोग थोड़ा-थोड़ा बोलेंगे और फिर मंत्री जी रिप्लाई करेंगे। तब तक सदन की कार्यवाही बढ़ायी जाती है। धन्यवाद। 

Shri Jayadevan, please conclude your speech.

SHRI C.N. JAYADEVAN : At the moment, the Government’s approach seems to be just to force the compliance of the tax laws. If the guilty persons pay the taxes and penalty, they will be let off. This is nothing but shielding the criminals and it should not be allowed.

          The Union Government has revealed to Supreme Court names in three cases. Among them is a mine baron of Goa. It is simultaneously revealed that this company has contributed huge amounts to the coffers of both the Congress and the BJP. Latter one is the bigger beneficiary. This company is charged with low invoicing of its exports and illegally mining iron ore. All has been done under the patronage of the ruling politicians. That is what I want to say. The ruling politicians quarrel amongst one another. You are asking the people as to who is responsible. The party which has ruled up to this time and the party which is now in power are responsible for this. That is all.

HON. SPEAKER: Thank you. Already we have discussed it for more than four and half hours. So, today we will complete it.

          Shri K.C. Venugopal.

     

*m18 SHRI K.C. VENUGOPAL (ALAPPUZHA):  Madam, at the very outset, I would like to say that the BJP had created an atmosphere by large-scale political campaigns only for winning the election, not for serious action. The misleading campaign was led by the present hon. Prime Minister himself saying: “We promise the people that black money will be brought back and distributed to the people.” The people believed it and they voted for the BJP.  They came to power. What did the people get? What are they giving to the people? There is no new initiative except the SIT formation under the insistence of the hon. Supreme Court. They are telling that the SIT is their baby but the SIT is actually the baby of the Supreme Court, not theirs.

          The hon. Finance Minister said this in the Rajya Sabha yesterday. We read it in the newspapers today. Yesterday,  while replying in the Rajya Sabha, the hon. Finance Minister was explaining to the people about the long procedures and technicalities  in bringing back black money and the Double Taxation Avoidance Agreement which prevents him from disclosing the names of black money holders. After the hon. Finance Minister’s reply in the other House, you are very clear that you are not serious about bringing back black money.

          Yesterday Shri Anurag Thakur in his speech said that already the Congress has demanded revealing the names of black money holders. Why? The Congress has the interest to protect the black money holders. But here we have the list.

          On 18th January, 2014 Shri Ravi Shankar Prasad said putting forth the Government’s argument that  it can reveal the names to the Supreme Court but not to the public due to the Double Taxation Avoidance Agreement. It is quite baseless. Shri Nitin Gadkari also said it. Shri Prakash Javadekar also told that. I would like to put a question to Shri Anurag Thakur. While asking the Congress party for revealing the names of the black money holders, did they not know about the Double Taxation Avoidance Agreement? They should tell the  people. They are now telling that the Double Taxation Avoidance Agreement is preventing them from revealing the names.

          Yesterday, Shri Mahtab told  - He is not present now – that the Congress has some fear of taking action. We have no fear. We are not in power now. They are in power. They have freedom. We know what the BJP is doing. Without any majority, you  installed a Government in Maharashtra.  You are changing the name of Rajiv Gandhi in the Rajiv Gandhi Vidyutikaran Yojana and the name of the Airport of Hyderabad. You are doing a lot of things. Your attitude against Pandit Jawaharlal Nehru and Indira Gandhi is seen by the people for the last two or three weeks. It is such an attitude displayed by the BJP towards democracy  and  towards the Indian National Congress.  Therefore, you have the freedom. We do not want your mercy. At least, you reveal the names. Who is stopping you from revealing the names? That is what the country needs to know. Therefore, the hon. Finance Minister has a duty to tell the people why this baseless promise has been made  to the people that within 100 days they would bring back black money and it would be distributed to the people?  Actually it is a cheating towards the people. That is what my statement is.

Then you are asking about what our Government has done. That is a question put by them. Shri Nishikant Dubey told about the then Finance Minister Shri Pranab Mukherjee’s White Paper on Black Money. That White Paper reveals that. In the White paper laid before the House in 2012, it is said:

“ …Joining global crusade against black money” - “India's actions  through the G-20..
          India has been a strong proponent of transparency and exchange of information for tax purposes and has pushed the G-20 forum to exert pressure on countries that do not conform  to the international standards of transparency.”             At the London Summit of April, 2009, India played a major role in developing international consensus for taking action against tax havens. It was an Indian initiative of November 2010 at the Seoul Summit and the G-20 gave a call for concluding tax information exchange agreements. Prior to this, some countries were not willing to enter into Tax Information Exchange Agreement. Therefore, these things were done by the UPA Government only. You are doing an extension of things which the UPA Government had done. What new initiatives you have taken? That is what we would like to know.
          Hon. Supreme Court has made a statement. Why are you holding protective umbrella for these people? Is this a silly question? Hon. Supreme Court asked the Government as to why you are holding protective umbrella. The Supreme Court had observed that they have no belief in you. Actually, it is non-confident statement against the present Government. Now, you are not serious about the Supreme Court’s verdict. But when you were in the Opposition, when the UPA regime was there, when the Supreme Court’s observation was against the UPA, you celebrated. You celebrated for election propaganda. Now, you are keeping mum on the Supreme Court’s observation. Shri Arun Jaitley, hon. Finance Minister is not here. When 2G incident happened, I was sitting in the Treasury Benches. Before the report of the CAG was presented in Parliament, the Report was leaked to the Press. By using that press statement, you moved an Adjournment Motion in the House. The CAG called Press Conference against the then Government. At that time, you celebrated. Now, hon. Finance Minister is telling the CAG, don’t sensationalise the issues. It is actually double standards…… (Interruptions)
HON. SPEAKER: Yes, please conclude now.  Actually, you don’t have time. I have given only two minutes. Please conclude.  This is not correct.
… (Interruptions)
SHRI K.C. VENUGOPAL : Madam, I am concluding. This is the double standard of the present NDA and the BJP Government. Therefore, the country needs a strong apology from this Government for giving false promise to the people. Otherwise, definitely it would boomerang on you. With these words, I conclude.                                                                               
*m19 SHRI MEKAPATI RAJA MOHAN REDDY (NELLORE): Thank you very much, Madam, for giving me an opportunity to speak on this subject. I, on behalf of my Party, YSR Congress Party, would like to express my views.
       I would like to express my Party’s views and also my views on black money. Press says that Rs.80 lakh crore are deposited in the banks. Even if we take the minimum as Rs.30 lakh crore, that is equal to 1.5 times or more of this year’s Budget. What a great amount, Madam! If we can bring back all these amounts, all the social welfare schemes and developmental schemes can be implemented in this country. Poor man’s life would be definitely brightened. Swacch Bharat which requires Rs.2 lakh crore to provide toilets to 13 crore families; education to all, health to all; linking of rivers, etc. can be implemented. But unfortunately, still we are not able to do it.
           I would like to say with all sincerity that the countrymen have great faith in the present Prime Minister, hon. Narendra Modiji.  With the leadership of Shri Narendra Modi, as well as Finance Minister, people believe that the Government would bring back this black money and develop the country. With that faith only, the countrymen voted BJP to power. Excluding the alliance partners, BJP was given the absolute power.        Please act on that. With your power, determination, expertise, mechanism and the whole Government machinery at your command, please act and bring back black money so that the country can be developed well. If you fail, the countrymen will be very much disappointed with you. Please use all your powers and bring back this money and develop the country for which the people of this country have given power to you.
 
*m20 डॉ. अरुण कुमार (जहानाबाद) : अध्यक्ष महोदया, आपने इस महत्वपूर्ण विषय पर मुझे बोलने का मौका दिया, इसके लिए धन्यवाद। कल से इस विषय पर गंभीर चर्चा हो रही है। मैं इस पर कोई आंकड़ा पेश नहीं करने जा रहा हूं क्योंकि आपने इस पर मुझे मात्र दो मिनट का समय दिया है।
          मुझे एक बात समझ में नहीं आ रही है कि इस विषय पर जिस गंभीरता के साथ चर्चा होनी चाहिए थी, उस में सिर्फ़ आरोप-प्रत्यारोप चल रहा है। निश्चित तौर पर एनडीए की सरकार और भारतीय जनता पार्टी ने इस सवाल को गंभीरता से लिया और जनता ने इस पर विश्वास किया है। इससे पहले भी उधर बैठे हुए लोगों ने इस सवाल पर गंभीर चर्चा की, देश के लोगों को यह अहसास कराने की चर्चा की कि हम स्कैम को रोकेंगे, हम काले धन को वापस लाएंगे, हम इसके बारे में कानून बनाएंगे, लेकिन जनता ने इन पर विश्वास नहीं किया, भरोसा नहीं किया। इन्होंने उन्हें डायलेमा में रखा और फिर ये लोगों को डायलेमा में डालना चाहते हैं। मैं कहना चाहता हूं कि हर एक व्यक्ति को इसके लिए प्रयास करना होगा। नरेन्द्र मोदी जी की सरकार और माननीय प्रधान मंत्री ने लोगों में एक विश्वास पैदा किया है। एक राजनीतिक संकट, जो विश्वास का संकट पैदा हुआ था, उस संकट को इस सरकार ने दूर किया है। इसलिए आज इन लोगों को भी समझना चाहिए कि ऐसा नहीं है कि यह काला धन कहीं रखा हुआ है कि उसे कोई उठा कर ले आए। यह एक नीयत का सवाल है। राष्ट्रीय स्तर पर, अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर गुड गवर्नेंस देकर किन-किन स्तरों पर इन चीज़ों को रोका जा सकता है और पब्लिक मनी को हम कैसे बेस्ट यूटिलाइज कर सकते हैं, इसका प्रयास यह सरकार कर रही है। अभी इसमें जनता का विश्वास है। उधर के लोग आज भी उसी डायलेमा में पड़े हुए हैं।
          हम आपसे कहना चाहते हैं कि जैसे हम लोगों ने बिहार में सरकार बनाया था।...(व्यवधान)
श्री मुलायम सिंह यादव  : मैडम, छः बजे के बाद तो लंच पैकेट दिया जाता है। हम तो सुबह से भूखे हैं। हमें लंच पैकेट दीजिए।
माननीय अध्यक्ष : अभी इतना समय नहीं हुआ है।
डॉ. अरुण कुमार  :मैं कहना चाहता हूं कि यह काला धन एक दिन में पैदा नहीं हुआ है। चारा घोटाला हुआ...(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : आपको बोलते हुए दो मिनट हो गए।
डॉ. अरुण कुमार  :महोदया, एक मिनट और दीजिए।
          महोदया, बिहार में चारा घोटाला हुआ। चारा घोटाले के बाद जो वहां सरकार बनी, उस सरकार में भी घोटाला हुआ। अभी कौशलेन्द्र जी बोल रहे थे कि वहां मर्दों की बच्चेदानी निकाल ली गयी।...(व्यवधान)बिहार में इतनी बड़ी लूट हुई।...(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : आप क्या बोल रहे हैं?
डॉ. अरुण कुमार :मैडम, यह सारा रिकॉर्डेड है।...(व्यवधान)बिहार में इस पर भारी स्कैम हुआ है। अभी दवा घोटाला हुआ।...(व्यवधान)सारधा चिट फंड के लोग हैं।...(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : अरूण कुमार जी, आप कंक्लूड कीजिए।
…( व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : प्लीज़ अरूण कुमार जी, अब समाप्त कीजिए।
…( व्यवधान)
डॉ. अरुण कुमार  :माननीय सदस्य, आप थोड़ा धैर्य रखिए। ...(व्यवधान)एक मिनट सुनिए। आपकी संख्या इतनी है कि आपने यहां ड्रेस कोड के साथ अपना कोड मिला लिया है।
माननीय अध्यक्ष : अरूण कुमार जी,अब आपके पास कुछ प्वायंट नहीं है। अब आप समाप्त करें।
…( व्यवधान)
डॉ. अरुण कुमार  :मैडम,मेरे पास बहुत प्वायंट्स हैं। इसे ज़रा कंक्लूड तो करने दीजिए।...(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : ठीक है,जल्दी कंक्लूड करिए।
…( व्यवधान)
डॉ. अरुण कुमार  :मैं यह कह रहा हूं कि यदि ये आचरण इनका पहले रहता तो इतनी संख्या में नहीं आते। शारधा चिट फंड पहले खुला रहता तो इतनी संख्या में भी ये नहीं आते। इस तरीके से जो आचरण हो रहा है,निश्चित तौर से आज देश में भ्रष्टाचार एक मुद्दा है। एन.डी.ए. की सरकार ने मजबूती से जनता में विश्वास पैदा किया है। ये इस तरह का आचरण कर रहे हैं,एक्शन कर रहे हैं।
          हमें पूरा विश्वास है कि पूरी जनता इसमें भरोसा करते हुए इस एक्शन को देख रही है और आपके एक्शन को भी देख रही है,इसलिए इसमें सहयोग कीजिए,तभी भला है। निश्चित तौर से कालाधन आएगा और कालाबाजारियों पर रोक लगेगी।
                                                                                               
*m21 PROF. SAUGATA ROY (DUM DUM): Madam, thank you very much. I will take just two-three minutes.  Since Jaitley ji has not yet come, we have some time.… (Interruptions)
          Madam, we have had a long discussion on the issue of black money stashed abroad and Members have given very serious suggestions.  The main complaint was that today’s Prime Minister during election campaign had promised that he would bring back the black money.  He had assured the Indian people that they would get Rs. 15 to 20 lakh per family.  I shall not waste time of the House by asking the BJP to apologize for their false assurance to the people of the country.  I leave it to their conscience to decide whether to do it or not. I have only three concrete suggestions.  I will be very brief.
          The black money estimate is not there.  It is from 500 billion US dollars to 2 trillion US dollars.  One billion is thousand million or hundred crores.  So multiply it by sixty; we will know how much black money is there. 
          The biggest problem with black money is that the money goes out of India and it comes back through the Mauritius route by what is known as round tripping. I want to ask the Finance Minister whether he is prepared to ban global participatory notes through which people  enter the share market to prevent the round tripping of black money.  
          Secondly, Madam, much of the black money comes to India during elections.  It is alleged that the ruling BJP had spent – this is unconfirmed report – Rs. 25,000 crore in the Lok Sabha elections and subsequent Assembly elections.  It may be correct; it may not be correct.  … (Interruptions) We could see, … * in his latest book mentioned that… (Interruptions)
HON. SPEAKER: That name will not go on record.
… (Interruptions)
 
माननीय अध्यक्ष:किसी का भी नाम रिकार्ड में नहीं जाएगा।
… (Interruptions)
PROF. SAUGATA ROY : Okay, I will not mention.  Rs. 25,000 crore is the money you spent in the Lok Sabha elections.… (Interruptions) I will talk about Saradha.… (Interruptions)
          Now, my question simply is that whether the Government is prepared to bring forward electoral reforms so that there is a ceiling on the spending by political parties instead of just a ceiling on expenditure for individual candidates.
          Lastly, the plea the Attorney General took before the Supreme Court and the Finance Minister took is that the present Double Taxation Avoidance Agreement has a clause which is called the confidentiality clause.  I want the Finance Minister to declare in this House whether he is prepared to revisit the confidentiality clause and work out the Double Taxation Avoidance Agreement.  It is not necessary for all the countries. We have 92 such agreements.  Let us just tackle the tax havens. Just take away the confidentiality clauses from the Double Taxation Avoidance Agreement.  I will end by saying this that the question is not ‘whether’ but the question is ‘when’. 
          Yesterday, Anurag Thakurji has mentioned our Chief Minister’s name.  It was uncalled for.  We did not mention the name of the former Karnataka Chief Minister, who was arrested by the CBI.  We did not mention the name of the former BJP’s President, who was arrested.  We did not mention the name of BJP’s present President.… (Interruptions)
 
HON. SPEAKER: Saugata Royji, it is over. You do not have any point to raise.
… (Interruptions)
HON. SPEAKER: Now, Shri Tathagata Satpathy.
… (Interruptions)
 
*m22 SHRI TATHAGATA SATPATHY (DHENKANAL): Thank you, Madam Speaker.  Yesterday and today I heard the speeches and my impression is that it is  simply a blame game. 
Madam, you have been there in the Parliament for so long.  You know that in 2010-11, we also had a discussion about black money when the other party was in power.  That party is in the opposition now and this party is in power.  So governance and government do not change according to political parties is what I believe.
          But what I am worried about is that when our grand children or our great grand children 50 or 60 years hence sit back and peruse records of these two days of discussion, I am sure that somewhere we must also acknowledge the fact that there is a strong possibility that they will be amazed to know as to what were these people actually doing in the 16th Lok Sabha.  Is this the level of discussion they had about something so serious, about a parallel economy, a staggering amount, and these people were talking just about Congress, BJP, Trinamool and BJD? This is where we are.  This is what our level is.  This is very much worrying for all of us.  I am sure you would also be worried.  I am not excluding myself from this thing.  I am also very much part of this House and I am also worried.
          Black money, as you know, has very many different connotations in different parts of the world.  One of our colleagues earlier mentioned that in some countries the black money may not have the same connotations as it may have in other countries. Our tax laws are of a particular nature.  Some other countries like Cayman Islands or Fiji – a lot of people are visiting Fiji nowadays – or Mauritius have different tax laws.  Tax laws vary, countries vary, so what is legal or illegal also probably varies. Therefore, the time has come when we have to actually sincerely question our motives as to what we really intend to do. 
          There is one question that I would like to ask all the learned members including the hon. Minister.  Hundreds and thousands of students go abroad to study every year.  All the students barring none have to open a foreign bank account.  Their parents might be depositing money in their accounts.  Do we know or can we label all those students’ accounts as being illegal money, black money or undeclared money?  Who is going to differentiate as to which is the corrupt corporate’s money, which is the student’s money, which is the politician’s money or which is the businessman’s money?  Who is going to do that?  Do we have a mechanism for that? 
          Madam, before you ask me to finish I would like to actually break my own record because I am so humble.  A couple of questions should go on record. Should all foreign bank accounts be investigated?  How do we identify that money in a certain bank account is illegal or not?  Students who go abroad have bank accounts too.  Is the money in those bank accounts also unaccounted money?  How are our estimations being made?  Should we even be making estimations and promising or not promising?
          Madam, the Prime Minister had gone to a place in my constituency, Talcher.  He did promise that a sum of Rs.15 lakh  would be given to each individual Indian.  I have that on video.  I am not hitting out at the Prime Minister.  I respect him because the Prime Minister is not Mr. Narendera Damodardas Modi, he is the pride of India.  He is my country’s Prime Minister.  I am speaking for my country.  I am not speaking as a politician here on this floor. I am proud that he has at least given thought that this needs attention.  That itself is a great beginning and I will give kudos for that. But, how do we go about it?  Illegal money can be easily linked with terrorism and insurgency.
          Madam, like one of the speakers did mention, whenever Indians sell or buy flats or apartments or land or something, a huge portion of that transacted money is in cash.  That means, characteristically we are a corrupt nation.  Everybody is involved in that.  It hurts us but this is the truth.  How do we stop that? So, illegal money can easily be linked with terrorism.  Fifty years later, there would still be terrorism and there would still be insurgency.
          Madam, there are many other questions.  But all I would like to wind up with is this.  There was a rock album which I used to listen to when I was young.  The title of that is “How can Ted Nugent survive in a John Denver world?”  What it means, Madam, today is the world of Bitcoin.         Bitcoin is a currency which is electronic in nature.  It is a peer-to-peer dealing and there is no hard cash, no hard currency.  People are now starting to deal through Bitcoins. It has started to happen in India. The Reserve Bank of India has warned the Government, and has also warned the people of this country: “Take care.  You could be inviting trouble; you could be inviting legal action.”  Is the Government planning for the future or not?  It is not yesterday that we have to look to.  Yes, we have to get the black money back.  We should make all efforts.  But let us change our tax regime; let us change our tax laws; let us make tax paying an inviting factor so that I feel like paying tax, not that I want to run away from the Finance Minister, from all his IT sleuths and from all his people. Let me feel happy; let me feel proud to be an Indian that I pay tax.  This is what I would like to say. 
Let us think of the future.  We have innumerable challenges coming up for this country, for the generations that are to come ahead, beyond us. Let us prepare this country today so that tomorrow they have a better existence.
                                                                                     
*m23 वित्त मंत्री, कॉर्पोरेट कार्य मंत्री तथा सूचना और प्रसारण मंत्री (श्री अरुण जेटली) :  आदरणीय अध्यक्षा जी, दो दिन की इस बहस में सदन के बहुत-से माननीय सदस्यों ने अपने विचार रखे हैं। माननीय मल्लिकार्जुन खड़गे जी ने इस बहस की शुरुआत की थी। उनके बाद हमारे कई साथियों ने यहां कई सुझाव भी रखे हैं। मैं इस बात के लिए क्षमा चाहूंगा कि कल बहस दोनों सदनों में हो रही थी तो मैं कुछ समय इधर और कुछ समय दूसरे सदन में था। आज भी वहां बिल होने की वजह से, मैं अभी वहां से लौटा हूं। लेकिन, जो भी विषय उठाए गए हैं, मेरे सहयोगियों ने मुझे उनके संबंध में कुछ न कुछ जानकारी निश्चित रूप से दी है। हर वक्ता ने जो कहा है, उसके संबंध में मैं अपने-आपको सीमित नहीं रखूंगा। काले धन की समस्या देश के भीतर और देश के बाहर, दोनों स्थानों पर गंभीर है। अभी अंतिम वक्ता सत्पथी जी अपने विचार रख रहे थे, तो उन्होंने कहा कि देश का जो टैक्स कानून है, उसका प्रशासन इस प्रकार से कीजिए कि टैक्स देना सरल भी हो जाए, बहुत बोझ भी न लगे, टैक्स देते वक्त मुझे खुशी भी हो और अपनी घोषित आमदनी के अलावा कालाधन जैनरेट करने की कोई इच्छा भी न हो। मैं माननीय सदस्य के इस सुझाव से पूर्ण रूप से सहमत हूं। जब-जब किसी प्रकार का टैक्स,चाहे वह डायरैक्ट टैक्स हो या इनडायरैक्ट टैक्स हो,उसकी दर बहुत ज्यादा होती है तो उससे टैक्स की कलैक्शन कभी नहीं बढ़ती। वह इसलिए नहीं बढ़ती कि आपकी अर्थव्यवस्था कमजोर हो जाती है,आपका पैदा किया हुआ सामान महंगा हो जाता है,देश और दुनिया के बाजार में उसकी बिक्री कर पाना कठिन होता है। उपभोक्ताओं का एक नियम है कि उपभओक्ता उस सामान को खरीदते हैं जो अच्छे स्तर का हो और सस्ता हो। People want to buy goods. They do not want to buy taxes. उसी प्रकार से अगर आप आयकर बहुत ज्यादा कर दें,एक वह भी जमाना था कि इस देश में इनडिवीजुअल टैक्सेशन 70-80 प्रतिशत,कुछ मसलों में 90 प्रतिशत से ऊपर था,लेकिन हमारा टैक्स बेस बहुत सीमित था और सीमित होते-होते हमारी विकास दर भी डेढ़,दो,ढाई प्रतिशत तक होती थी। दुनिया के देशों के अर्थशास्त्री हमारा मजाक और मखौल उड़ाते थे और हमारी विकास दर को कहा करते थे - This is the Hindu rate of growth. This came to be accepted as an economic terminology at that time. चाहे कोई भी पार्टी सरकार में रही हो,हम डायरैक्ट और इनडायरैक्ट टैक्सेज को जब रीजनेबल लैवल की तरफ लाए हैं तो हमारी टैक्स बास्किट भी बढ़ी है। इसलिए मैंने पहले कहा है और आज भी कहना चाहूंगा कि टैक्सेशन रीजनेबल हों,जिससे सरकार का खर्चा चल सके,टैक्स की बेस बढ़े,जिसमें टैक्स चोरी करने वाले को कोई इंसैंटिव न हो। Those who have to pay taxes must pay taxes. We cannot allow either evasion or avoidance. Those who are not to pay taxes and who are not liable to pay taxes, against whom by merely raising demands we cannot generate more tax. Such taxes then get stuck up in courts. In the last few years as an economy we got a bad name from the world of investment that you are not a tax friendly regime. So, what you have said I entirely accept. Our tax system has to be friendly to the tax payer both procedurally and otherwise, and that is exactly what, step by step, we are trying to do.
          बहस के दौरान ब्लैक मनी कैसे वापिस आए और जो लोग यह अपराध करते हैं,उन्हें कैसे सजा मिले,जो विदेशी खाते रखते हैं...(व्यवधान)जगदम्बिका पाल जी कह रहे हैं कि कम चर्चा हुई,लेकिन कुछ चर्चा हुई।...(व्यवधान)इस प्रकार की चर्चा में एक राजनीतिक पक्ष भी रहता है। खड़गे जी ने कल जब बहस आरंभ की,मैंने उनका पूरा भाषण सुना। स्वाभाविक रूप से उन्होंने राजनीतिक पक्ष रखना था,रखा। मुझे उसकी बिल्कुल शिकायत नहीं है। शिकायत इसलिए नहीं है कि लोकसभा चुनाव छ:महीने पहले पूरा हुआ है और जनता ने जिन लोगों के भाषणों को पूरे गौर से सुनकर उनकी मदद नहीं की तो अधूरे भाषण को पूरा करना कई बार सदन में भी एक अवसर मिल जाता है। So, the unfinished speech of a general election can be delivered in the House also.  वह आपका अधिकार भी है और उस अधिकार का आपने बहुत खूबी से प्रयोग किया है। लेकिन मैं उससे प्रवोक हो जाऊं और उसी बहस की दिशा में चला जाऊं,यह मेरा उद्देश्य बिल्कुल नहीं है। मैं केवल कुछ विषय,जो मैं मानता हूं कि हर सदस्य की चिंता के हैं कि ये सारा पैसा कैसे जनरेट होकर वहां जाता है और जो लोग रखते हैं,उनके खिलाफ क्या कार्रवाई हो रही है?कानून या व्यवस्था में अगर बाधाएं हैं तो वे कौन सी हैं और किस प्रकार से सरकार अपना काम कर रही है?आपने कहा कि आप अपना वायदा निभाइये। मैं इसे बिल्कुल राजनीतिक रंग नहीं दूंगा। इसलिए मूल विषय के संदर्भ में सदस्यों की जो चिंता है,मैं केवल उसे संबोधित करूंगा। I will only address the meat of the matter. सुप्रीम कोर्ट ने विदेशों में जो काला धन जमा है,उसे लेकर और कई बार मुझे भी,मेरे साथियों को और हो सकता है कि हम में से कई लोगों को स्पष्टता नहीं होती,इसलिए इस प्रकार के विषय का हम अध्ययन करने के बाद,ऐसी चर्चा के बाद एक दूसरे से भी सीखते हैं और दुनिया किस दिशा में जा रही है,उससे भी सीखते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने 4 जुलाई, 2011 को,यानी साढ़े तीन वर्ष पहले अपना निर्णय दिया। उन्होंने उस निर्णय में कहा कि सुप्रीम कोर्ट के दो रिटायर्ड जजेज की अध्यक्षता और उपाध्यक्षता के तहत एक एसआईटी का गठन किया जाये। उसमें सरकारी अधिकारी भी होंगे। सरकार किस प्रकार से काम करेगी,यह उस एसआईटी की जिम्मेदारी है। उस निर्णय में उन्होंने कई बातें कहीं। एक विषय यह रखा,जिस पर मैं विशेष रूप से ध्यान दिलाना चाहता हूं और मैं माननीय सदस्यों से विनम्रता से विनती करूंगा कि इस विषय को केवल हम लोग एक ऐकेडेमिक अध्ययन की दृष्टि से समझें,इसे राजनीतिक दृष्टि से मत लें। जो अंतर्राष्ट्रीय ट्रीट्रीज या फैसले होते हैं,उनमें एक कांफिडेंशिएलिटी क्लॉज होता है। उस कांफिडेंशिएलिटी क्लॉज की भाषा उन्होंने कही और कहा कि भारतीय संविधान और कानून इसकी अनुमति नहीं देता कि भारतीय सरकारें और उस संदर्भ में यू.पी.ए. सरकार के बारे में कह रहे थे कि इन कांफिडेंशिएलिटी क्लॉजेज वाली ट्रीट्रीज को स्वीकार करें,यह सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा। यू.पी.ए. सरकार को लगता था कि ट्रीट्री करना तो सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है। अब कौन सी ट्रीट्री करो,जिसके माध्यम से जानकारी मिलेगी,दोषियों को सजा मिलेगी,यह सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है,इसमें न्यायपालिका कैसे कह सकती है। जुलाई, 2011 से लेकर मई, 2014 तक, इन तीन वर्षों तक एसआईटी नहीं बन पायी। सुप्रीम कोर्ट के सामने यह विवाद किसी न किसी रूप में चलता रहा। पहली मई, 2014 को जब चुनाव चल रहे थे तो सुप्रीम कोर्ट ने इसी संदर्भ में,सरकार की याचिका पर दूसरा निर्णय दिया और उन्होंने कह दिया कि जो लिचेंस्टाइन एक टैक्स हैवन है,वहां 28 लोगों के खाते थे। इसकी जानकारी जर्मनी ने भारत को दी। उसकी जो जानकारी आपको मिली है,वह याचिकाकर्ता को दे दीजिए। तब याचिकाकर्ता को सरकार ने जानकारी दी,जब यू.पी.ए. की सरकार थी तो याचिकाकर्ता के माध्यम से वह सार्वजनिक हो गयी। जर्मनी ने तुरंत भारत को लिखा कि जिस आधार पर आपने हमसे सबूत लिये थे,आपकी व्यवस्था ऐसी है कि आपने इसका उल्लंघन किया और आगे यह खतरा पैदा हो सकता है कि अगर हम उल्लंघन करेंगे तो दूसरा देश सहायता करता है या नहीं करता। इस समस्या के बारे में माननीय मुलायम जी ने खड़े होकर कहा था और मैंने आश्वासन भी दिया था कि मैं इसका उत्तर दूंगा। आप इसकी गंभीरता को इस दृष्टि से समझिए कि अपराध भारत में होता है,पैसा भारत का है,विदेश के खाते में जमा है,पैसा लाने के लिए,उसके खिलाफ असेसमेंट करने के लिए,उसके खिलाफ फौजदारी मुकदमा चलाने के लिए उस देश का सहयोग चाहिए। हम अपनी पुलिस,आर्मी या अधिकारियों को तो वहां भेज नहीं सकते हैं। कानूनी प्रक्रिया के मुताबिक उस देश को हम कहेंगे कि हमें यह जानकारी दीजिए। आज से 20-22 साल पहले एक वक्त था,जब सिद्धांत था,जिसे अंतर्राष्ट्रीय कानून की भाषा में प्रिंसिपल ऑफ डय़ुल क्रिमिनेलिटी कहते थे। इसका सिद्धांत यह था कि जो पैसा वहां जमा है,वह किसी अपराध से पैदा हुआ है, If it is a profit of crime, ड्रग्स में से निकला है,भ्रष्टाचार में से निकला है,आर्म्स रैकिट में से निकला है,टैरेरिज्म में से निकला है। अगर अपराध की यह कमाई है तो भारत दूसरे देश को कहे कि मुझे जानकारी दीजिए। दोनों देशों में यह अपराध अगर अपराध माना जाता है तो वे जानकारी देंगे। यह पहला दौर था। दूसरा दौर आया कि अगर वह पैसा टैक्स इवेजन का है और चोरी से रखा है तो देशों ने सहयोग करना आरंभ कर दिया लेकिन सहयोग के लिए आपका उनके साथ फैसला हो,समझौता हो या उनके देश में कानून हो। टेक्नोलॉजी बढ़ी और अब सारी बैंकिंग और कमर्शियल ट्रांजेक्शंस के बारे में कंप्यूटर के माध्यम से सरलता से इंटरनेट पर पता चल जाता है,अब हम इससे तीसरे दौर में जा रहे हैं। अगर पूरी दुनिया को तीसरे दौर में सफलता मिलती है तो लोगों के लिए फ्लाइट ऑफ कैपिटल,यहां का पैसा उड़कर वहां चला जाए,यह इतनी सरलता से संभव नहीं होगा। यह तीसरा दौर ऑटोमेटिक एक्सचेंज आफ इन्फार्मेशन है,यानी जितने भी ट्रांजेक्शन होते हैं,रियल टाइम में उनकी जानकारी दूसरे व्यक्ति को मिल जाती है। अगर कोई भारतीय अमेरिका में पांच मिलियन डॉलर का ट्रांजेक्शन करता है,एक देश से दूसरे में पहुंचाता है तो अमेरिका उसी वक्त भारत को इत्तिला कर देगा। अगर वह ट्रांजेक्शन ईमानदारी के पैसे का है तो उस पर कोई कार्रवाई नहीं होगी,लेकिन अगर वह पैसा अपराध या टैक्स इवेज़न का है तो हमारे पास अधिकार होगा कि उसे सबूत मानकर उस पर कार्रवाई करें।
          एक विडंबना है कि जितनी भी टैक्स ट्रीटीज़ भारत ने की हैं,जितने भी देशों के कानून बन रहे हैं,उनमें कान्फिडिएंशिएलिटी क्लॉज़ है। इस क्लॉज़ का सौगत राय जी जिक्र कर रहे थे,इसका यूनिफार्म पैटर्न बना है। देश जो अपना डोमेस्टिक कानून बना रहे हैं,जैसे अमेरिका ने एक कानून फटका बनाया है,उसके तहत उन्होंने कहा कि जो भी अमेरिका में कमर्शियल ट्रांजेक्शन होंगी,उसकी इत्तिला की जाएगी। इसमें कान्फिडिएंशलिटी क्लॉज़ होगी,ईमानदारी की ट्रांजेक्शन होगी तो बात सामने नहीं आएगी,लेकिन अगर पैसा चोरी किया हुआ है या टैक्स इवेज़न का है तो उसकी जांच होगी,उस व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई होगी। उन्होंने हर देश को कहा है कि इन्टर गवर्नमेंटल एग्रीमेंट कीजिए। जी-20ब्रिसबेन में हाल की मीटिंग में यही हुआ। इसके अतिरिक्त ओ.ई.सी.डी. में भी यह हो रहा है और इस दिशा में जब दुनिया चल रही है तो इन तमाम कानूनों में भी वह कांफिडेंशियलिटी क्लॉज़ है। उसका अर्थ यह नहीं है कि यह जानकारी कभी भी बाहर नहीं आएगी। उसकी रिस्ट्रिक्शन है कि वह कब और कैसे बाहर आ सकती है। जब हमें जानकारी मिलती है,तो उसे लेकर हम सबूत इकट्ठा करें,दोषियों के खिलाफ कोर्ट में मुकदमा करें और जैसे ही मुकदमा किया जाएगा,चूंकि वह खुली अदालत में होता है तो उसकी जानकारी सभी को वहाँ से सार्वजनिक की जा सकती है। लेकिन उससे पहले यदि आप जानकारी दे देते हैं तो फिर उस कानून का या उस ट्रीटी का उल्लंघन मानते हैं। अब तीन प्रकार के जो केसेज़ हमारे सामने आए,उसमें क्या हुआ,इसकी जानकारी मैं दे दूँ। ...(व्यवधान)
SHRI SUDIP BANDYOPADHYAY (KOLKATA UTTAR): You are repeating Shri Pranab Mukherjee’s speech, and saying the same thing. … (Interruptions) We want to know as to when the money is coming back.… (Interruptions) Do you have any concrete plan or do you have any idea about it? … (Interruptions) These are all repetitions of Shri Pranab Mukherjee’s speech. … (Interruptions)
SHRI ARUN JAITLEY : Sudipda, I am conscious of my lack of ability to explain anything to you. Therefore, if you do not have … (Interruptions)
          Madam, one of the reasons your Government failed was because they were not wanting to understand this. … (Interruptions) Since you are going to be a future Leader of your Party, at least for future benefit try and understand this. … (Interruptions)अब इसमें हम लोगों ने क्या किया,यदि आप इसे पार्टिशन बनाना चाहते हैं,तो मैं पार्टिशन उत्तर भी दे रहा हूँ,जो मैं नहीं देना चाह रहा था। वहाँ तो तीन वर्षों तक एस.आई.टी. कैसे न बने,यह दरख्वास्तें चल रही थीं। 26 मई को हमारी सरकार ने शपथ ली, 27 मई को कार्यकाल सम्भाला और 29 मई की पहली कैबिनेट मीटिंग में इसे एस.आई.टी. के समक्ष करने का पहला फैसला किया गया। ...(व्यवधान) The same instruction of the court applied to the UPA, but for three years you did not act. … (Interruptions)4 जुलाई, 2011 का फैसला आपने 26 मई, 2011 तक नहीं स्वीकार किया और एस.आई.टी. नहीं बनायी। ...(व्यवधान) आपकी नीयत एस.आई.टी. बनाने की ही नहीं थी। ...(व्यवधान) उस फैसले के सम्बन्ध में एक विषय पर मेरे मन में भी प्रश्न है,लेकिन हमने पहले एस.आई.टी. बनायी। एस.आई.टी. बनाने के बाद जून के महीने में जितनी भी डिटेल्स हमारे पास तब तक आयी थी,अकाउंट होल्डर्स के नाम,उसके साथ-साथ उनके डिटेल्स,जो भी जानकारी सरकार के पास उपलब्ध थी,सरकार बनने के तीन सप्ताह के भीतर हमने उसे एस.आई.टी. के हवाले कर दिया। ...(व्यवधान)
Dada, I will explain all the names. … (Interruptions)
माननीय अध्यक्ष  :  कृपया आपस में बातें न करें।
…( व्यवधान)
PROF. SAUGATA ROY : Actually, we are interested in knowing as to when we are going to get the money back. … (Interruptions)
SHRI K.C. VENUGOPAL : We want to know from the hon. Minister about the names. … (Interruptions) When will the black money come back? … (Interruptions)
HON. SPEAKER: Mr. Minister, you can continue. 
… (Interruptions)
1 8.56 hrs At this stage, Shri Sudip Bandyopadhyay, Md. Saleem and some other hon. Members left the House.

… (Interruptions)

HON. SPEAKER: What are you reading Kharge Ji?

… (Interruptions)

SHRI MALLIKARJUN KHARGE : Madam, I want a clarification in this context. … (Interruptions)

माननीय अध्यक्ष :  क्लैरिफिकेशन रिप्लाई पूरी होने के बाद होती है।

श्री मल्लिकार्जुन खड़गे  :जेटली साहब,आप डिटेल्स के साथ बोल रहे हैं,खासकर प्रोसीजर के बारे में। प्रोसीजरल मैटर पहले से ही व्हाइट पेपर में आया है और उसके बाद भाषणों में भी आपने कहा है,लेकिन हमारा कहना है कि हम आपसे यह तवक्को करते थे कि 100 दिन में जो 15 लाख रुपये हरेक आदमी की जेब में डालने की बात थी,वह कहां गयी। हम यही आपसे पूछ रहे हैं। आप यह भी जानते हैं कि कांफिडेंशियलिटी क्लॉज होने के बाद यह नहीं बता सकते। यह सब मालूम होते हुए भी आपने बाहर जनता को गुमराह किया। ...(व्यवधान)I am not telling about the Finance Minister.  But your President, your Prime Minister and all people told about this.  Except you, all people told about this thing.  I have heard your speech and also debate.  Except you, everybody told the same thing.  Somebody told that within hundred days, we will bring back the black money.  We will bring back and give Rs. 15 lakhs.  … SHRI ARUN JAITLEY: You worked hard to analyse all   the speeches.

SHRI MALLIKARJUN KHARGE : I have seen and observed. Naidu Ji is a senior man who has got experience, he told for Rs. 60 lakh.  I want to know that at least that Rs. 60 lakh information is there or not. You are not telling. Therefore, we are not satisfied with your answer.  We will walk out. … (Interruptions)

18.57 hrs At this stage, Shri Mallikarjun Kharge and some other hon. Members left the House.

… (Interruptions)

श्री एम. वैंकैय्या नायडू :  मैडम, खड़गे जी ने मेरा नाम लिया है, इसलिए मैं एक लाइन में रिएक्ट करना चाहता हूं। मेरे पास मिनिस्टर ऑफ पार्लियामेंटरी अफेयर्स  के नाते दूसरा दायित्व है, इसलिए मैं ज्यादा बहस में नहीं पड़ना चाहता हूं। मैंने दोपहर में उनसे उनके नेता के समक्ष पूछा था कि आपके सीबीआई डायरेक्टर ने कहा कि 25 लाख रुपये करोड़ की राशि है। यह अधिकृत रूप में सीबीआई डायरेक्टर ने कहा। मैंने वह बात याद दिलाई, उसको वह भूल गए। मैं फील कर रहा हूं। आपकी मीटिंग में जब यह इश्यू आया था तो मैंने कहा था कि अगर बहस चाहिए तो हम बहस के लिए तैयार हैं। दो घण्टे की बहस मांगी, अब पांच घण्टे बहस करने के बाद भाषण देकर चले गए। यह अन्याय है, यह दुर्भाग्यपूर्ण है। इतने साल की अनुभवी पार्टी को ऐसा नहीं करना चाहिए, जनता इसको स्वीकार नहीं करेगी। जनता ने उनको आलरेडी सही मार्ग दिखाया है। अगर ऐसा व्यवहार ज्यादा करेंगे तो उनको नुकसान होगा। मैं इतना ही कहना चाहता हूं।

19.00 hrs श्री अरुण जेटली : हम लोग जब नौजवान थे और नए-नए वकील बने तो हम लोगों को एक सुझाव दिया जाता था कि जिस मुकदमे में तथ्य मजबूत हैं,तथ्यों की बात करो,जहां कानून मजबूत है,कानून की बात करो और जहां दोनों कमजोर हों,तो फिर मेज़ पर थोड़ा सा दबाव डालते रहो। अब पूरी व्यवस्था को समझने के स्थान पर यही कहना कि सरकार ने क्या-क्या किया है,मैं इस बारे में आपको पूरे आंकड़े दूंगा।

          कई माननीय सदस्यों ने,चाहे खड़गे जी ने पूछा हो या मुल्याम सिंह जी ने पूछा हो कि यह स्थिति अब कहां खड़ी है,पैसा आएगा या नहीं आएगा,मुलायम सिंह जी ने कहा कि कहीं ऐसा तो नहीं कि लोगों ने पैसा निकाल लिया हो। मुलायम सिंह जी,सच्चाई यही है जो आपने कहा। मैं उसके भी तथ्य आपको देता हूं। यह केवल राजनैतिक अंतर्विरोध का विषय नहीं है।

          तीन प्रकार की स्थितियों से निकलकर हम अब एटोमैटिक एक्सचेंज ऑफ इंफार्मेशन में जाते हैं। तीन तरह के खाते हैं,जिनके सम्बन्ध में जानकारी है,या सम्भव है। पहले खाते हैं 28 लोगों के जो लिक्टनस्टाइन नाम का एक टैक्स हैवन है,जहां लोग इस प्रकार का पैसा रखते हैं,उन खातों की जानकारी जर्मनी को मिली। जर्मनी के साथ भारत का समझौता था और जर्मनी ने उसके तहत जानकारी हमें दी। हमें उसकी जांच करनी थी और सबूत इकट्ठे करने थे। उस सबूत में यह पता चला कि कुछ लोग एनआरआई हैं। अगर आप नॉन रेजिडेंट इंडियन हैं तो आपको अधिकार है खाता रखने का,हम उसमें कुछ नहीं कर सकते। एक व्यक्ति की उसमें मृत्यु हो गई। ऐसे 18 लोग थे उनमें से जिनके नाजायज खाते थे। लेकिन जब तक यह प्रक्रिया पूरी होती,तब यूपीए सरकार थी,वे लोग अपना पैसा वहां से निकालते रहे। हमने उन 18 के 18 के खिलाफ इनकम टैक्स की प्रोसीडिंग्स कंक्लूड कर दी हैं। उस नाजायज पैसे की जो भी उन पर सजा या पैनल्टी लगा सकते थे टैक्स वगैरह,वे सारे उन पर लगा दिए हैं। उसके बाद उन 18 के 18 पर फौजदारी का मुकदमा भारत के अंदर डाल दिया है।

          इसके अतिरिक्त एचएसबीसी का जिनेवा का जो बैंक था,यह पूरा मल्टी इंटरनेशनल बैंक है,उस बैंक का एक कर्मचारी व्हिसल ब्लोअर बन गया और उनका सॉफ्टवेयर वहां से उठाकर ले गया। उस सॉफ्टवेयर को ले जाने के बाद उसने वह सारा का सारा फ्रांस की सरकार को दे दिया। कुछ लोग कहते हैं कि उसने वह बेच दिया। अब फ्रांस के साथ चूकि हमारा समझौता था। दुनिया के अन्य देशों के साथ भी था। फ्रांस ने हर देश के खातों की जानकारी उन देशों को दे दी। भारत को जानकारी मिली कि 2005 और 2007 के बीच में स्विट्जरलैंड के एचएसबीसी के बैंक में इन 627 लोगों के ये एकाउंट्स थे। ये जानकारी 2007 के बाद 2008 और 2009 या 2010 में मिली होगी। हमारो स्विट्जरलैंड से समझौता था,उसमें यह प्रावधान ही नहीं था कि स्विट्जरलैंड हमें जानकारी दे। सन् 2011 में जाकर भारत सरकार ने स्विट्जरलैंड से यह समझौता किया। उन खाते वालों को 2007 से 2011 तक की मोहलत मिल गई। इसमें वे क्या करते,खाते में कितना पैसा छोड़ते। सन् 2011 के बाद जब यूपीए ने उनसे पूछा कि हमें जानकारी दो,सबूत दो,तो उन्होंने कहा कि यह जो सारी जानकारी आपको मिली है,इसमें केवल नाम हैं,थोड़ी सी जानकारी है,सबूत नहीं है। हम आपको सबूत नहीं देंगे,क्योंकि यह चोरी के आधार पर मिले हैं,स्टोलन डेटा है और स्विट्जरलैंड स्टोलन डेटा में आपके साथ सहयोग नहीं करेगा। जब हमारी सरकार बनी तो स्थिति यहां तक पहुंची थी।

 

The  Government of India is a continuing entity; I am therefore not referring to it on a partisan basis. हमने अपना एक प्रतिनिधि मंडल स्विटजरलैंड भेजा और उस प्रतिनिधि मंडल ने जाकर कहा कि आप हमसे समझौता और सहयोग कीजिए। उन्होंने कहा कि यह चोरी का डेटा है और चोरी के डेटा पर हम समझौता नहीं करते। अक्टूबर में हमने उनसे समझौता कर लिया कि पैसा ले भी गये,लेकिन ऐसे लोगों को सजा तो मिलनी चाहिए,जिन्होंने इस देश का पैसा चोरी करके वहां रखा। हमने स्विटजरलैंड से चार मुद्दों पर समझौता किया। उसका पहला अंश यह था कि आप केवल चोरी के दस्तावेजों के आधार पर हमारी मदद न करें,लेकिन अगर हम कोई सबूत इकट्ठा करते हैं तो उन सबूतों के आधार पर तो आप हमारी मदद करेंगे या नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि हम मदद करेंगे। हमने कहा कि फिर क्या टाइम-फ्रेम है जिसमें आप हमारी सहायता करेंगे। आप इन दस्तावेजों को कंफर्म या डिनाई करो कि ये सत्य हैं या असत्य हैं। चौथा,भविष्य के लिए हमारे साथ बातचीत शुरु कीजिए कि कोई भी भारतीय अगर स्विटजरलैंड में एकाउंट खोलता है या कोई ट्रांजेक्शन करता है तो there is an automatic transformation of information to us.  Now, this four-point agreement has been put in force; this is an arrangement and we are in regular touch with them.  इन 627 में कुछ के केवल नाम थे। अब व्यक्ति का नाम मिल जाए और पता न हो तो कहां ढूंढेंगे?हमने 427 नामों को चिन्हित कर लिया है और उन सब को नोटिस दे दिये हैं,उन सब की पेशी हो रही है। एक-एक करके कई लोगों पर फौजदारी के मुकदमें अदालतों में डाले गये हैं। जब मीडिया के मित्रों को जानकारी मिलेगी तो पता चलेगा कि उसमें बहुत प्रभावी लोग भी हैं। हम कोशिश कर रहे हैं कि 31 मार्च तक उनकी टैक्स असेसमेंट्स खत्म कर दें और जो-जो उसमें गैर-कानूनी माने जाएंगे,जिन्होंने अपराध किया है,उनके खिलाफ फौजदारी मुकदमें दायर होंगे। हर सप्ताह मुकदमें दायर हो रहे हैं। निचली अदालत में मुकदमें दायर होते हैं तो देश भर में जहां उनकी असेसमेंट थी वहीं दायर होते हैं। उन 427 में से 250 लोगों ने आकर कबूल कर लिया कि यह हमारा एकाउंट था। यह सारी की सारी कार्रवाई एसआईटी के तहत हो रही है। अब सवाल यह है कि कुछ लोग तो पैसा निकाल कर ले गये,बाकियों का क्या होगा?दुनिया में बीसियों ऐसे केन्द्र और हैं जहां टैक्स हैवन्स में लोग पैसा रखते हैं। आज हमने “डबल टैक्सेशन अवाएडेंस ट्रीटी”  के तहत 92 देशों के साथ समझौते कर लिये हैं,तिरानवें के साथ भी हस्ताक्षर हो गये हैं तथा सात अन्य के साथ बातचीत चल रही है। टैक्स इंफोर्मेशन का जो फैसला किया है, 15 के साथ पहले से है, 2 के साथ और किया है तथा 29 और ऐसे देश हैं जहां पैसा रखा जाता है उनके साथ हम यह समझौता कर रहे हैं। ये तो केवल दो बैंक लिचनस्टीन और एचएसबीसी स्विटजरलैंड के हुए,लेकिन जो लोग निकट भविष्य में पैसा रखेंगे,तो हम दुनिया के जितने ऐसे देश हैं,उन सब के साथ जो लार्जर कम्युनिटी ऑफ नेशन्स हैं,हम एटोमैटिक ट्रांसमिशन का समझौता कर रहे हैं। हम 48 बड़े देशों में अर्ली-एंट्रेंस हैं,जिन्होंने यह तय कर लिया है कि एक दूसरे के साथ जानकारी शेयर करेंगे। कोई भारतीय विदेश में और कोई विदेशी भारत में पैसा रखता है तो उसकी जानकारी शेयर करेंगे। जी-20ब्रिसबेन में माननीय प्रधान मंत्री ने इसी के लिए प्रयास किया। ओईसीडी में हुआ और सबसे महत्वपूर्ण जानकारी यह है कि जो अमरीका ने पटका नाम का कानून बनाया है,जो 2015 से लागू होना है,वह अनिवार्य करता है कि हर देश हमारे साथ फैसला करे कि एक दूसरे के ऐसे खातों की जानकारी शेयर होगी। जो देश ऐसा नहीं करेगा,उसमें जो रैमिटेंस जाएगा,केवल अमरीका से ही नहीं बल्कि उन देशों से भी जिन्होंने हस्ताक्षर किये हुए हैं।         उस देश के ऊपर हम तीस परसेंट लगा देंगे,जिसको विदहोल्डिंग टैक्स कहते हैं। कोई एक्सपोर्टर का पैसा आएगा या एफडीआई आएगी या कोई एनआरआई अपने परिवार को पैसा भेजेगा तो तीस परसेंट कट जाएगा,अगर आप ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन ऑफ इनफोर्मेशन के इस कानून पर हस्ताक्षर नहीं करेंगे। उसमें भी कॉनफिडेंशियलिटी क्लॉज़ है। वह कॉनफिडेंशियलिटी क्लॉज़ यह है और वह यह नहीं कहता है कि कभी जानकारी सार्वजनिक नहीं होगी। लेकिन मान लीजिए हम में से किसी का नाम सामने आ जाता है और जांच में पता चलता है कि यह पैसा जायज़ था। किसी एनआरआई ने रिज़र्व बैंक की अनुमति से बाहर रखा हुआ था तो उस व्यक्ति को बदनाम करने की ज़रूरत नहीं है। लेकिन नाजायज़ है और सुबूत है तो केस डालिए और नाम सार्वजनिक कर दीजिए। इसलिए विषय यह नहीं है कि जानकारी दी जाए या नहीं दी जाए,विषय यह है कि जानकारी कब दी जाए? The question is not whether to give information or not, but when and how to give information. कुछ लोग बहुत बहादुर बनते हैं और कहते हैं कि नाम तुरन्त दे दीजिए। ये जितने लोग बिना सुबूत और केस के नाम को सार्वजनिक करने का आग्रह करते हैं,वे अकाउंट होल्डर्स की मदद कर रहे हैं,इससे न स्वीट्ज़रलैंड दस्तावेज देगा क्योंकि आपने उल्लंघन किया है और वह अकाउंट होल्डर कहेगा कि देखिए मेरे खिलाफ तो कोई सुबूत ही नहीं है,मैं तो निर्दोष पाया गया हूं। इसलिए इस पर हमें सम्भल कर चलना है।

          अब विषय आया कि भविष्य में या पुराने लोगों को पकड़ते हैं तो टैक्स किस माध्यम से करेंगे?मैं यह ईमानदारी से स्वीकार करता हूं कि हमारे कानून में एक कमज़ोरी है और कमज़ोरी यह है कि जब पैसा पकड़ा जाएगा तो उसको वापस कैसे लाना है?उसको भी अब पूरा करने की जरूरत है। मैं जानता हूं कि एसआईटी भी इस विषय की चिंता कर रही है। इनकम टैक्स एक्ट में बाहर वाले का अधिकार नहीं है। मैंने मनी लॉड्रिंग एक्ट का अध्ययन किया है,उसमें भी शायद कमज़ोरी है,उसे भी बदलना पड़ेगा। अगर बाहर से नहीं ला सकते हैं तो देश में उतने ही पैसे की उसकी जो सम्पत्ति है उसको कुर्क करने का अधिकार होना चाहिए। इसे इनकम टैक्स में करें या मनी लॉन्ड्रिग में करें। यूएन कनवेंशन में प्रावधान है कि यहां फौजदारी मुकदमे डालकर सज़ा का डर पैदा करके उस व्यक्ति का धन वापस लाएंगे। राजनैतिक बहस से तो हम कर सकते हैं कि इतने दिनों में लाएंगे और इतना पैसा है,लेकिन इस व्यवस्था को हमारे लिए समझ लेना बहुत आवश्यक है। इसमें एक कठिनाई और भी है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने वर्ष 2011 के फैसले में कहा है कि यह कॉनफीडेंशियलटी क्लॉज़ गलत है। दुनिया कहती है कि बिना कॉनफिडेंशियलिटी क्लॉज़ के हम मदद नहीं करेंगे। इसलिए हम लोग यह प्रयास कर रहे हैं कि सुप्रीम कोर्ट से कहें कि इन ट्रीटीज़ का सम्मान हो। सुप्रीम कोर्ट ने यह विषय एसआईटी पर छोड़ दिया है और हम एसआईटी के सामने भी रख रहे हैं।

           मैं इस सदन को विश्वास दिलाना चाहता हूं कि यह सरकार पूरा प्रयास करेगी कि सौ दिन,पांच सौ दिन या हजार दिन,जितना भी समय लगे,जितने भी महीने और वर्ष लगें,जब तक इनमें से आखिरी खाते वाले को पकड़ कर नहीं लाया जाएगा,हम इस प्रयास को नहीं छोड़ने वाले हैं। यह स्वाभाविक है कि राजनैतिक जीवन में हम एक-दूसरे को ताना दे सकते हैं कि आपने ये कहा था,अब आप उसको निभाओ। उस पर हम राजनीति की दृष्टि से चलेंगे। लेकिन जो प्रक्रिया हम लोग निभा रहे हैं,उसको पूरा करेंगे और मुझे पूरा विश्वास है कि हम सही कानूनी रास्ते पर चल रहे हैं और शीघ्र ही ऐसे लोगों को सज़ा होगी और वे देश में पैसा लाने को मजबूर भी होंगे। मैं इतना ही इस सदन को आश्वासन दिलाना चाहता हूं।

श्री भर्तृहरि महताब (कटक) : महोदया,वित्त मंत्री जी ने काफी विस्तार से अपनी बात रखी। I think, many of us have been convinced. One thing is relating to the issue that I have raised during my deliberations is that whether the names would be revealed or not.

One was the confidentiality clause. Yet, I would say that I beg to differ to what is being said because there are other provisions on which the Supreme Court has been insisting.  I am not going into that issue now.  But it is relating to the names that are to be revealed. पूरा देश जानना चाहता है किन-किन के खाते बाहर रखे गये हैं और आपने अभी कहा कि जो सिस्टम इंकम टैक्स एक्ट में है कि यदि किसी ने टैक्स नहीं भरा है,अगर पकड़े जाने के बाद वह भर देता है तो जैसा आपने कहा कि  250 account holders have paid the tax.  There the confidentiality clause does not arise.  They have come to your net.  Why cannot you reveal those names that these were the account holders who had accounts outside and have come back to us?  As they are paying the tax, at least reveal those names so that the confidence of this country will be restored.  Are you going to do it or not?

          I have one more point to make and I expect this Government to do that.  DTC Bill is pending;  Goods and Services Tax Bill is also pending.  These two Bills will be  the major instruments in your hands, in the hands of the Government to tackle black money.  When are those Bills going to come?

SHRI ARUN JAITLEY: Madam Speaker, I will answer the second question first.

          The DTC Bill is under our consideration. The earlier Government had drafted it. As far as the GST Bill is concerned, we have arrived at a broad consensus.  There are some issues.  The next meeting of the Empowered Committee has been called very shortly. I am confident that we will try and arrive at a consensus and possibly introduce the Bill in this Session itself.  This is my endeavour and I hope that I will succeed in it.

          As far as your first question is concerned about other clauses, please remember that there are well meaning people who made this suggestion.  Our court has said this.  Let us bring a legislation in India and that legislation will get us everything. I am not doubting it.   They are very well meaning people but we are dealing with a case where the evidence is outside India. Whatever you do has to be consistent with international jurisprudence.  The word in all these laws is that ‘case is filed in a public court’. Now all commentaries, OECDs, interpretation of all other countries to this public court is whether charges are filed with evidence in a criminal court.  Our Supreme Court said, “No, telling us is also a public court.”  We said, “We can tell you. We can tell the SIT. But through you, we cannot tell the world at large.”  Therefore, this inconsistency does exist and that is why, we went  back to the court.  On day one, the court reacted but on day two, they said to please go to the SIT as SIT is considering this issue. Unless our domestic procedures harmonise with international practices and interpretations, you may flex your muscles in your own country.  As I said in the other House yesterday, we can get a one day thrill of making the names public but if those countries do not accept our interpretation of international jurisprudence, then we will probably have 30 per cent withholding tax on us with the world not cooperating with us.

          Therefore, what we have to look forward in this is not a bravado or adventurism but a thorough approach.

SHRI BHARTRUHARI MAHTAB :  But what about those who have settled the tax? 

SHRI ARUN JAITLEY:  Now as regards those who have settled the tax, if they are still guilty of a criminal offence, and with proof I move the court which is possible because the language is “in a public court”, I can make it public when I go to a public court.  I cannot make that phrase, “public court” disappear in the Tax Treaty.         So, I am looking at not only criminal jurisprudence but also how the international jurisprudence has accepted that. Therefore, my own jurisprudence may take a particular interpretation, but it has to harmonise with the global standards.

SHRI TATHAGATA SATPATHY (DHENKANAL):  If I commit a murder and admit it, I will be excused! SHRI ARUN JAITLEY: No, if you murder somebody, you will be arrested. But even there it is necessary that charges against you are filed in court. I will give you a simple example. The Reserve Bank permits you to repatriate 1.25 lakh dollars every year. Supposing you take the Reserve Bank’s permission, take the money outside and open an account in Switzerland, your name will be given to us. But you say that it is an honest and legitimate account and I have transferred it by cheque from India with RBI’s  permission. Should I make you a subject of debate on the 9 o’clock television in the evening? Obviously, I cannot do that. Therefore, the international jurisprudence on the subject is, when I find that it is unlawful and I file charges against you in court, then you will be a subject matter of that debate and you will have your right of defence in the court.

Mahtab ji, if I faulter in the procedure and make a hasty disclosure without evidence then I won’t get the evidence and the account holders will have the last laugh. I am not willing for that.

HON. SPEAKER: Thank you very much.

SHRIMATI SUPRIYA SULE (BARAMATI): Please permit me to seek a clarification.

HON. SPEAKER: This will go on like this. That is not the practice.

          The House stands adjourned to meet again tomorrow, the 28th November, 2014 at 11 a.m.   19.22 hrs The Lok Sabha then adjourned till Eleven of the Clock on Friday, November 28, 2014/Agrahayana 7, 1936 (Saka).  

   

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