Lok Sabha Debates
Regarding International Women’S Day. on 7 March, 2003
ont> Title: Regarding International Women’s Day.
अध्यक्ष महोदय : कल इंटरनैशनल वुमेन डे है, इसलिये मैंऩे श्रीमती मार्ग्रेट अलवा को प्रायरिटी दी है।
… (Interruptions)
MR. SPEAKER: Whatever Shrimati Margaret Alva says, only that would go on record.
(Interruptions) …* अध्यक्ष महोदय : मैं महिलाओं के विषय में इजाजत देने वाला हूं क्योंकि महिलाओं को अधिकार दिये जाने का मामला है। यदि सदन में शान्ति रही तो अन्य विषय लिये जायेंगे।
...( व्यवधान)
SHRIMATI MARGARET ALVA (CANARA): Sir, on the eve of International Women’s Day, on behalf of the Members of the House, I greet the women of India and of the world… (Interruptions)
अध्यक्ष महोदय : मार्ग्रेट जी, आप कम्पलीट कीजिये। आपका रिकॉर्ड में जायेगा। पहले अंतर्राष्ट्रीय महिला वर्ष के विषय में, उसके बाद अन्य बातों पर आयेंगे।
...( व्यवधान)
MR. SPEAKER: You please continue. It would go on record.
… (Interruptions)
SHRIMATI MARGARET ALVA : Women face numerous challenges of violence and discrimination in their families, in society and at the work place.
अध्यक्ष महोदय : अखिलेश जी, मेरी आपसे विनती है कि आप अपनी जगह पर जाइये। मैं चर्चा के लिये तैयार हूं। यह विषय चर्चा में आ सकता है लेकिन नियम के अनुसार आयेगा, नियम तोड़कर नहीं और न दबाव में आकर यह विषय आयेगा।
...( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : अलवा जी, आप कम्पलीट करें।
… (Interruptions)
SHRIMATI MARGARET ALVA : Laws are not implemented and crimes against women are mounting.… (Interruptions) Gender bias in education, health care, and employment is growing. But women have emerged stronger and more determined to overcome these obstacles… (Interruptions)
* Not Recorded The Prime Minister’s meeting to work out a consensus on the Women’s Reservation Bill is scheduled for today.… (Interruptions)
12.48 hrs. (At this stage Shri Ashok Kumar Singh Chandel and some other hon. Members came and stood near the table) अध्यक्ष महोदय : आप अपनी जगहों पर वापस जाइये।
...( व्यवधान)
SHRIMATI MARGARET ALVA : I appeal to the Leaders to support our demand. I hope that a consensus will emerge. But even if this consensus does not emerge, we want the Bill which is pending in the House to be debated and voted upon. Let it be defeated like the Panchayati Raj Bill of 1989. Ultimately, we will overcome these obstacles… (Interruptions)
अध्यक्ष महोदय : टी.वी. रिले बंद किया जाये।
...( व्यवधान)
SHRIMATI MARGARET ALVA : Today, war clouds are hovering over the international horizon. Innocent women and children in the Middle East are dying due to violence, sanctions, and denial of basic rights to them. I share their agony and despair and appeal to the Government to let the voice of the Indian people for rejecting the war, be heard at the United Nations, and in other international fora so that we may live in peace… (Interruptions)
12.49 hrs. (At this stage Shri Ashok Kumar Singh Chandel and some other hon. Members went back to their seat) श्री सुरेश रामराव जाधव:अध्यक्ष महोदय, गन्ना किसानों की हालत बहुत खराब थी लेकिन…( व्यवधान)हमारे प्रधान मंत्री जी ने उन किसानों को राहत देने के लिये ज्यादा मूल्य प्रदान किया। इसके पहले गन्ना किसान लूटे जा रहे थे।…( व्यवधान)मैं प्रधामंत्री मंत्री जी को धन्यवाद देना चाहता हूं कि उन्होंने गन्ना किसानों की मदद की।
अध्यक्ष महोदय : श्रीमती रेनु कुमारी।
...( व्यवधान)
श्रीमती रेनु कुमारी (खगड़िया) : अध्यक्ष महोदय, कल अंतर्राष्ट्रीय महिला वर्ष है। महिलाओं के विकास के लिये, उनके कल्याण के लिये कितनी ही योजनायें बनाई गई लेकिन परिणाम वही हैं…… (Interruptions)
SHRIMATI KRISHNA BOSE (JADAVPUR): I wish to draw the attention of the House to the long and patient wait that women have gone through since 1996 for the Women’s Reservation Bill.
Our target is to have a fair representation of women in the Nation’s decision-making bodies. We had looked up to the Bill as a means of raising the number of women in Parliament and in the State Assemblies. Now it seems that this Bill in its present form can never be passed in the House. It is time we look to alternatives. I myself have been demanding for quite some time that political parties should nominate more women when they choose candidates for election. This can be made mandatory by a simple amendment in the Representation of People Act. We are aware that the former Election Commissioner was agreeable to such a proposal. But political parties did not agree to this.
So many elections have taken place in the past couple of years and so many more are due. We are losing precious time. Had we agreed to such an alternative earlier we would already have had a large number of women in the decision-making bodies of the nation. I would urge upon the Government to take up seriously the matter of women representation and to consider the alternative proposal which will do away the flaws like rotation in the previous Bill and also there will be no need for reservations within reservation.
Thank you. … (Interruptions)
अध्यक्ष महोदय : श्रीमती रेणु कुमारी।
श्रीमती रेनु कुमारी:अध्यक्ष महोदय, कल अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस है। महिलाओं के विकास और कल्याण के लिए सरकार का अनगिनत पैसा खर्च होगा और हम उनके लिए अनेक भाषण देंगे। …( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : यहां अध्यक्ष पद का सम्मान रखने की ज़िम्मेदारी नज़र नहीं आती।I condemn the action of these people who are coming and sitting here. This is not the way in which the House can function. But I would continue with the functioning of the House in the given circumstances.
...( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : वे अपने स्थानों पर जाएंगे तभी मैं उनको बोलने की इजाज़त दूँगा।
श्रीमती रेनु कुमारी: अध्यक्ष महोदय, कवि जयशंकर प्रसाद ने कहा है :
" नारी तुम केवल श्रद्धा हो, विश्वास रजत नभ पद तल में पीयूष रुाोत सी बहा करो, जीवन के सुन्दर समतल में। "…( व्यवधान)
MR. SPEAKER: You are Members of the Ruling Party and you please co-operate with the Chair. इनको जो करना है वह करने दें।
...( व्यवधान)
12.51 hrs. (At this stage Kumar Akhilesh Singh and some other hon. Member went back to their seats) श्रीमती रेनु कुमारी:अध्यक्ष महोदय, जिस गांधी जी और लोहिया जी की दुहाई देकर यह देश चल रहा है, यह सदन चल रहा है उन गांधी जी ने महिलाओं के विकास के लिए दहेज प्रथा का विरोध किया था, पर्दा प्रथा का विरोध किया था। गांधी जी महिलाओं के विषय में कहा करते थे कि महिलाओं को रोटी की चिन्ता से मुक्त होना चाहिए। गांधी जी स्त्री-शिक्षा के पक्षधर थे। गांधी जी कहते थे कि नारियों को कानून की तरफ से समानता का अधिकार होना चाहिए। वे नारियों को राजनीति का अनिवार्य अंग मानते थे।…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : आप वचन नहीं निभाते। आपने प्रॉमिस किया था कि अपनी बात रखेंगे।
...( व्यवधान)
श्रीमती रेनु कुमारी: गांधी जी ने देखा कि स्वतंत्रता आंदोलन में किस तरह से हंसते-हंसते सैकड़ों नारियां जेल जाती थीं, लाठियों का प्रहार सहती थीं। …( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : महिला दिवस पर चर्चा हो रही है, महिलाओं को बोलने दें।
...( व्यवधान)
श्रीमती रेनु कुमारी: गांधी जी ने आहवान किया कि तुम स्वर्णाभूषण दान करो तो सारी महिलाओं ने स्वर्णाभूषणों का दान कर दिया।…( व्यवधान)अध्यक्ष महोदय, लोहिया जी भी कहते थे कि नारियों के सहभाग के बिना हर विकास अधूरा है। …( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : जो विषय चल रहा है, उसको पूरा होने दें।
श्रीमती रेनु कुमारी: इसलिए हम गांधी जी और लोहिया जी की दुहाई देते हैं। हम कहना चाहते हैं कि जो महिला आरक्षण बिल पास नहीं हो रहा है, उससे गांधी जी और लोहिया जी की आत्मा भी स्वर्ग में रोती होगी। इसलिए हम आपसे आग्रह करना चाहते हैं कि इसी सत्र में महिला आरक्षण बिल को पास कराकर महिलाओं को सम्मानित किया जाए। …( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : वे महिला दिवस के बारे में बोलना चाहती हैं। आप पूरे साल में एक दिन भी महिलाओं को नहीं देंगे? यह कैसे चल सकता है? कृपया उनका सम्मान करें।
...( व्यवधान)
श्रीमती संध्या बौरी (विष्णुपुर):अध्यक्ष महोदय, अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस इतना महत्व का दिन है मगर आज भी महिलाएं चाहे घर में हों या काम करती हैं, उन पर अत्याचार होता है। …( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : इस तरह से तो महिलाओं की तरक्की होना मुश्किल है। यदि पुरुष उनको बोलने की परमीशन नहीं देंगे तो उनकी तरक्की कैसे होगी?
...( व्यवधान)
श्रीमती संध्या बौरी: महिलाएं जहां काम करती हैं, उनकी नौकरियां छीन ली जाती हैं। सरकार ने जो लिबरलाइजेशन और ग्लोबलाइजेशन की नीति अपनाई है, उसके कारण जब कल-कारखाने बंद हो जाते हैं तो उसमें भी सबसे पहले महिलाओं को नौकरियों से निकाला जाता है। जहां आदमियों की नौकरी चली जाती है, वहां भी सबसे पहला असर महिलाओं पर पड़ता है और उससे पूरे परिवार पर असर पड़ता है। …( व्यवधान)महिलाएं घर में जो छोटा-मोटा सामान बनाती थीं, अब बाहर का सामान आने से उनकी बिक्री भी बंद हो गई है।…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : कम से कम महिलाओं को सदन में बोलने की पावर तो दीजिए।
...( व्यवधान)
श्रीमती संध्या बौरी: अनेक महिलाएं इसका शिकार हो रही हैं। जब सारे सरकारी बिल पास हो जाते हैं तो हमारा महिला आरक्षण वाला बिल सदन में पास क्यों नहीं होता है? हम महिलाएं अपने अधिकार के लिए लड़ाई कर सकती हैं, यही कहते हुए मैं आपको धन्यवाद देती हूँ कि आपने मुझे बोलने का मौका दिया।…( व्यवधान)
श्रीमती जयश्री बैनर्जी (जबलपुर) :माननीय अध्यक्ष महोदय, महिला दिवस के उपलक्ष्य में आपने महिलाओं को अपनी बात कहने का जो अवसर दिया है, उसके लिए मैं आपका आभार मानती हूं। यहां सभी प्रकार की बातें कही जा रही हैं कि महिलाओं का विकास हो, उनको उनके अधिकार मिलें, यह बहुत अच्छी बात है। इस अवसर पर आज प्रधान मंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी संसद की सभी पार्टियों के नेताओं की एक सर्वदलीय बैठक कर रहे हैं ताकि महिलाओं को उनके प्रतिशत के अनुपात में आरक्षण देने हेतु विधेयक सदन में प्रस्तुत किया जा सके। …( व्यवधान)
डॉ. रघुवंश प्रसाद सिंह :आपके मंत्री तो महिला-विरोधी हैं। …( व्यवधान)
श्रीमती जयश्री बैनर्जी: महिला सदस्य जब बोल रही हैं, तब आपको बीच में नहीं बोलना चाहिए। आपका यह रवैया ठीक नहीं है। मुझे अपनी बात कहने दीजिए। आपके राज्य में तो श्रीमती राबड़ी देवी मुख्य मंत्री हैं, जो बहुत अच्छी हैं, फिर भी आप यहां महिलाओं का विरोध क्यों कर रहे हैं।
अध्यक्ष महोदय, महिलाओं के विकास की दिशा में जो बातें की जा रही है वे ठीक हैं, लेकिन मुझे बहुत दुख के साथ कहना पडता है कि बंगाल में धनकलां में महिलाओं के साथ सामूहिक बलात्कार हुआ। ऐसी घटनाओं पर सरकार को ध्यान देना चाहिए। बिहार में भी ऐसी अनेक घटनाएं घट चुकी हैं जिनमें महिलाओं पर अत्याचार और व्यभिचार किया गया है। …( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : श्रीमती बैनर्जी, मेरा आपसे निवेदन है कि इस विषय में किसी स्टेट गवर्नमेंट को बीच में न लाएं। यह विषय बिल्कुल अलग है। यह महिलाओं से संबंधित विषय है।
श्रीमती जयश्री बैनर्जी: अध्यक्ष महोदय, आपने मुझे बोलने का समय दिया, इसके लिए मैं आपका आभार व्यक्त करते हुए अपना स्थान ग्रहण करती हूं।
MR. SPEAKER: Tomorrow is the International Women’s Day. Therefore, I have decided to permit women to speak today. In the whole year, let them speak at least for one day.
डॉ. (श्रीमती) अनिता आर्य (करोल बाग) : अध्यक्ष महोदय, अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर मैं भारतीय संसद की तरफ से पूरे देश की महिलाओं को हार्दिक शुभकामनाएं देती हूं। महिलाओं का संसद और विधान परिषदों में ३३ प्रतिशत का आरक्षण हो, इसके लिए माननीय प्रधान मंत्री, श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी ने आज एक सर्वदलीय बैठक बुलाई है। मैं सभी महिला सांसदों से कहना चाहूंगी कि वे अपने दल के नेताओं से प्रार्थना करें ताकि महिला आरक्षण बिल सदन में पेश हो सके और सर्वसम्मति से पारित हो सके। महिलाएं भी संसद और विधान परिषदों में अपनी भागीदारी चाहती हैं क्योंकि देश की ५० प्रतिशत आबादी महिलाओं की है और ५० प्रतिशत महिलाएं वोट देती हैं। इसलिए संसद और विधान परिषदों में उनका होना आवश्यक है।
अध्यक्ष महोदय, एक तरफ तो हम संसद और विधान परिषदों में महिलाओं को आरक्षण देने की वकालत करते हैं, लेकिन… * अध्यक्ष महोदय : नहीं। वह विषय यहां नहीं आ सकता।
...( व्यवधान)
MR. SPEAKER: I have not allowed her to speak on that subject.
...( व्यवधान)
कुंवर अखिलेश सिंह: अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से माननीय सदस्या श्रीमती अनिता आर्या जी से कहना चाहता हूं कि मैं महिलाओं का बहुत सम्मान करता हूं और जितना सम्मान मैं महिलाओं का करता हूं, शायद ही कोई और उतना सम्मान करता होगा। …( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : अखिलेश जी, यह विषय सदन में नहीं उठाया जा सकता है। मैंने श्रीमती अनिता आर्य को उसी समय रोक दिया था। कृपया आप बैठ जाइए।
...( व्यवधान)
कुंवर अखिलेश सिंह: अध्यक्ष महोदय, फाइव स्टार होटलों में महिलाओं के साथ जो हो रहा है और तथा-कथित उच्च वर्ग के कहे जाने वाले लोग उनके साथ जैसा व्यवहार करते हैं, वह चिन्तनीय ही नहीं बल्कि निन्दनीय है।…( व्यवधान)
डॉ.(श्रीमती) अनिता आर्य : अध्यक्ष महोदय, मैं इतना ही निवेदन करती हूं कि महिला आरक्षण विधेयक संसद में प्रस्तुत हो और सर्वसम्मति से पारित हो।…( व्यवधान)
* Expunged as ordered by the Chair MR. SPEAKER: That I have said here already and I have deleted it from the records.
कुंवर अखिलेश सिंह:अध्यक्ष महोदय, चूंकि माननीय सदस्या ने मेरे नाम का उल्लेख किया है इसलिए मेरा आपसे हाथ जोड़कर विनम्र निवेदन है कि मुझे दो मिनट अपनी बात कहने हेतु अवसर दिया जाए। …( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : आपका नाम उन्होंने नहीं लिया है।
...( व्यवधान)
MR. SPEAKER: She said it in general.
...( व्यवधान)
13.00 hrs. अध्यक्ष महोदय : इन्होंने आपका नाम नहीं लिया है। I have seen the record.
…( व्यवधान)कुंवर अखिलेश सिंह:अध्यक्ष महोदय, मेरा आपसे आग्रह है कि आप मुझे दो मिनट बोलने का समय दीजिए।…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : इसमें आप क्या बोलेंगे?
कुंवर अखिलेश सिंह:अध्यक्ष महोदय, मेरा आपसे विनम्र आग्रह है, इन्होंने मेरा नाम लिया है।…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : उन्होंने आपका नाम नहीं लिया है, कृपया आप बैठ जाइए। आप महिलाओं को भी बोलने का मौका दें। हर रोज आप ही बोलेंगे, महिलाओं को बोलने का मौका नहीं देंगे। यह क्या तरीका है?
…( व्यवधान)कुंवर अखिलेश सिंह:अध्यक्ष महोदय, इन्होंने मेरा नाम लिया है, इसलिए मैं बोलना चाहता हूं।…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : I have removed that from record. इसलिए वह विषय पूरा हो गया है।
…( व्यवधान)कुंवर अखिलेश सिंह:महोदय, मेरा आपसे विनम्र आग्रह है…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : उन्होंने आपका नाम नहीं लिया है, कृपया आप बैठ जाइए।
…( व्यवधान)श्री रामजीलाल सुमन : अखिलेश जी का नाम लिया है, आप एक मिनट इनकी बात सुन लीजिए।…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : मैं इनकी बात सुनने के लिए तैयार हूं, वह बात दूसरी है, उन्होंने इनका नाम नहीं लिया है।
…( व्यवधान)श्री रामजीलाल सुमन : अध्यक्ष महोदय, इनका नाम नहीं लिया तब भी इनके कहने का मतलब यही था।…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : उन्होंनेजो कुछ कहा है वह भी रिकार्ड से निकाल दिया है।
…( व्यवधान)अध्यक्ष महोदय : अखिलेश जी, यह जो वूमेंस का इश्यु चल रहा है, यह पूरा होने के बाद मैं आपको बोलने की इजाजत दूंगा, अभी आप बैठ जाइए।
…( व्यवधान)अध्यक्ष महोदय : अखिलेश जी, अभी आप बैठ जाइए, मैं आपको परमीशन देने वाला हूं, आप दो मिनट रूकिए। Let me complete this subject.अभी मैं किसी को बोलने की इजाजत नहीं दे रहा हूं, कृपया आप बैठ जाइए।
SHRIMATI MINATI SEN (JALPAIGURI): Sir, I am sorry to say that due to lack of Government’s political will on women reservation, the Bill is not yet placed before Parliament.… (Interruptions) Since 1996, the Bill has been pending before us for approval of the Parliament. The whole nation looked forward in shame when the Government had introduced the Bill in the year 1999.… (Interruptions)
Both inside and outside Parliament, we, the lady Members of Parliament, and the different women organisations raised their voices to introduce the Bill for smooth passing. … (Interruptions) But the Government did not care for them and passed on the baby by saying that after consensus of all political parties the Bill may be introduced.
May I request the Government through you Sir, whether the Govt. was at consensus for passing all the Bills including the one regarding POTA.
The Government made many commitments for upliftment of women but they proved futile as women are victims of injustice socially, politically and economically.
I urge upon the Government to cut the Gordian knot and pass the Bill in this Session itself without any further delay.
श्रीमती सुशीला सरोज (मिसरिख):अध्यक्ष महोदय, सन् १९७५ में प्रथम विश्व महिला अंतरराष्ट्रीय दिवस मास्को शहर में मनाया गया था। महिलाओं को रक्षा और अधिकार देने के लिए आज २८ वर्ष हो गए हैं।…( व्यवधान) महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के नाम पर उनकी जो समस्याएं थीं, उन्हें पूरे विश्व में दर्शाने के लिए १९७५ में प्रथम बैठक हुई थी। संयोगवश वह वर्ष भारतीय गणतन्त्र का रजत वर्ष था और वह वर्ष राष्ट्रीय महिला वर्ष भी था, महिलाओं का सम्मान अधिकार दिवस था।
अध्यक्ष महोदय, महिलाओं के अधिकारों के नाम पर जो सम्मेलन हुआ था, उसमें दुनिया ने देखा कि किस तरह महिला और पुरूष के बीच में भेदभाव है। आज जब आरक्षण की बात होने लगी है, मैं आपको बताना चाहती हूं कि हिन्दुस्तान की औरत नरक की जिन्दगी जी रही है और भोग रही है। इसकी पर्दे के पीछे बेशुमार दर्द और बेपनाह सिसकियां हैं।…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : केवल दो-दो मिनट सब को बोलना है।
श्रीमती सुशीला सरोज : अध्यक्ष महोदय, यह बहुत महत्वपूर्ण विषय है। कल महिला दिवस है, इसलिए मैं यहां एक बहुत महत्वपूर्ण बात उठाना चाहती हूं। …( व्यवधान)आज केन्द्रीय शासन और महिला संगठनों, विशेष तौर से उन स्वयंसेवी संगठनों के लिए लज्जा और शर्म की बात है। आज खाड़ी देशों में १५ साल से ४० साल तक की लड़कियों को हिन्दुस्तान से बाहर नौकरी के लालच में भेजा जा रहा है। …( व्यवधान)जहां उनका यौन शोषण हो रहा है । तमिलनाडु, महाराष्ट्र और आंध्रा प्रदेश से बहुत सी लड़कियां वहां भेजी जा रही हैं। …( व्यवधान)महोदय, विदेश मंत्रालय में गल्फ सेल भी खोला हुआ है।…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : कांति सिंह जी, अब आप बोलिए।
श्रीमती सुशीला सरोज : इन्होंने सिर्फ २० महिलाओं की खोज की है। आज राष्ट्रीय महिला आयोग की सराहना की जानी चाहिए। महिला आयोग ने उन लड़कियों की खोजबीन करने के लिए कमर कस ली है। मैं आज आपसे निवेदन करना चाहती हूं कि जो लड़कियां आज खाड़ी देशों में फंसी हुई हैं, उनके साथ न्याय करने के लिए एक समति बना दी जाये और जो महिलाओं के साथ अत्याचार हो रहा है, उसे दूर किया जाये और महिला आयोग की प्रशंसा की जाये और जो महिलाएं आज नर्क भोग रही हैं, पहले उनको देखा जाये। फिर आरक्षण की बात की जाये ।
श्रीमती कान्ति सिंह:अध्यक्ष महोदय, महिला दिवस के ऊपर आपने मुझे दो शब्द बोलने का अवसर दिया है, इसके लिए मैं आपको धन्यवाद देती हूं।
आज भी जब महिला दिवस पर यहां चर्चा करने के लिए आपने इजाजत दी है तो उस समय भी हमारी मार्ग्रेट आल्वा बहन बोल रही थीं तो दूसरी ओर सारे सदन में हंगामा हो रहा था। हम लोगों को बोलने नहीं दिया जा रहा है और महिलाओं के लिए कहा जा रहा है कि महिला दिवस मनाया जा रहा है, जबकि एक ओर महिलाओं का सशक्तीकरण वर्ष मनाया जा रहा है। मैं आपसे गुजारिश करूंगी कि जब महिला दिवस पर हम लोगों को बोलने का अवसर दिया गया तो हम लोगों को कुछ समय देने की कृपा की जाये। आज भी महिलाओं की वही स्थिति है कि ‘अबला जीवन, हाय तुम्हारी यही कहानी, आंचल में है दूध, और आंखों में पानी।’ इसलिए मैं कह रही हूं कि आज भी देहाती इलाकों में, ग्रामीण इलाकों में हम देखें तो महिला के साथ जिस तरह से ज्यादतियां हो रही हैं, चाहे वे खेतों में काम करने वाली महिलाएं हों या शहरों में सरकारी दफ्तरों में काम करने वाली महिलाएं हों, वे आज अपनी लज्जा को, अपनी इज्जत को बचाकर किसी तरह से अपने बच्चों का पेट पाल रही हैं या उनका निर्वहन कर रही हैं।
मैं एक बात कहना चाहूंगी, जैसा कि लोग अभी भी कहते हैं कि महिलाएं कमजोर हैं, लेकिन मैं कहना चाहूंगी:
कोमल है, कमजोर नहीं तू, शक्ति का नाम ही नारी है, सब को जीवन देने वाली, मौत भी तुझसे हारी है।
कहा जाता है कि जब भी महिला आरक्षण बिल यहां पर लाया जाता है तो आर.जे.डी. के लोग इसका विरोध करते हैं। जबकि हमारे आर.जे.डी. की साफ तौर से यही नीति है कि जब भी महिला आरक्षण बिल लाया जाये तो उसमें सामाजिक न्याय की महिला यानी कि ओ.बी.सी. महिलाएं, दलित महिलाएं और माइनोरिटी की महिलाओं को भी उसमें आरक्षण का प्रावधान करते हुए महिला बिल को लाने का काम किया जाये ताकि जिन महिलाओं की अभी तक उपेक्षा हो रही है, जो आज समानता के आधार पर आगे नहीं बढ़ सकी हैं, उन महिलाओं को आरक्षण मिलना चाहिए, न कि उन महिलाओं को मिलना चाहिए, जो कि पहले से ही हैं। मैं भी महिला हूं और जनरल कोटे से आई हूं।
13.08 hrs. ( Dr. Raghuvansh Prasad Singh in the Chair) मैं आरक्षण के बल पर नहीं आई हूं, इसलिए मैं आपके माध्यम से यह मांग करती हूं कि महिला आरक्षण बिल लाया जाये तो कम से कम ओ.बी.सी., माइनोरिटी और दलित महिलाओं को भी उसमें प्रावधान रखा जाये, तब जाकर मैं समझती हूं कि उसमें जो हम चाहते हैं, जो हमारी पार्टी की नीति है, तभी महिलाओं को आरक्षण देने की मंशा पूरी तरह साफ हो सकती है। कहा जाता है कि आर.जे.डी. महिला विरोधी है, जबकि आदरणीय लालू प्रसाद जी ने बिहार में वह करके दिखाया है कि एक महिला को उन्होंने मुख्यमंत्री बनाकर खुले आम ऐलान करके चुनाव लड़ा और कहा कि राबड़ी देवी जी को मुख्यमंत्री बनाया जायेगा। उस आधार पर पूरे बिहार में चुनाव लड़ा गया और उसके बाद पूरे बिहार की जनता ने समर्थन दिया, बहुमत दिया, तब लालू प्रसाद जी ने राबड़ी देवी जी को मुख्यमंत्री बनाने का काम किया है, इसलिए आर.जे.डी. महिला विरोधी नहीं है। आर.जे.डी. महिला आरक्षण चाहता है, लेकिन हमारी शर्त वही है।
श्री राजो सिंह (बेगूसराय): सभापति जी, इनका जो भाषण हुआ, उसमें इन्होंने कहा कि संसद के माननीय सदस्यों द्वारा हमारे साथ दुव्र्यवहार होता है। आप दुव्र्यवहार शब्द कार्यवाही से हटा दीजिए।
…( व्यवधान)
श्रीमती रीना चौधरी (मोहनलालगंज):सभापति महोदय, आज अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस के दिन मैं इस देश की सभी महिलाओं को बहुत-बहुत बधाई देना चाहती हूं और साथ ही मैं कल्पना चावला को याद करना चाहती हूं, जिन कल्पना चावला ने मानवता के लिए अपना बलिदान दिया है। हिन्दुस्तान की नारियों के लिए ही नहीं, पुरुषों के लिए भी एक आदर्श उन्होंने स्थापित किया है। आप मुझे रोकिये मत, मैं बहुत संक्षेप में अपनी २-३ बातें कहकर स्वयं बैठ जाऊंगी। जन्मसे लेकर १८ वर्ष तक की उम्र की लड़कियों के लिए शिक्षा एवं राजकीय संरक्षण दिया जाना चाहिए।
जिन आर्थिक कारणों से किसी महिला को विवश होकर जिंदगी का नरक न भुगतना पड़े। आज उदारीकरण के इस दौर में महिलाओं के प्रति समाज का द्ृष्टिकोण बदलता जा रहा है। बाजार की शक्तियां उसकी योग्यता, जिम्मेदारी, क्षमता. संकल्प और आत्म निर्धारण की इच्छा को नजरअंदाज करते हुए सिर्फ उसकी चमड़ी और देह को नारी की योग्यता के तौर पर स्थापित कर रहे हैं। यह अत्यंत शर्म की बात है। आज हम सब जानते हैं कि कई बार इस सदन में चर्चा हो चुकी है कि कई विज्ञापन बहुत अश्लील दिखाये जाते हैं। बहुत से विज्ञापन ऐसे हैं जिनमें नारियों की आवश्यकता नहीं होती फिर भी उनको जबरदस्ती उस विज्ञापन में दिखाया जाता है। हमें उस तरफ भी ध्यान देना चाहिए।
आज सांस्कृतिक विरासत की रक्षा करने की बात सरकार करती है लेकिन वह हमें बहुत विवश दिखाई पड़ रही है। एक महिला होने के नाते मैं कहना चाहती हूं कि सत्ता में जो महिला मंत्री हैं, मैं उनको बधाई देती हूं। उनको मेरी शुभकामनाए हैं।
सभापति महोदय, आपने सदन में देखा होगा कि हमारी जो संसदीय कार्य मंत्री हैं, वे एक महिला हैं। वे जब भी सदन में बैठती हैं तो उनके चेहरे पर मुस्कुराहट होती है। पहले जो संसदीय कार्य मंत्री थे, वे एक पुरुष थे। वे बहुत गुस्सा करते थे और सबको डांट लगाते थे। इसलिए अगर महिलाओं को ज्यादा से ज्यादा आगे बढ़ाया जायेगा तो इस सदन में भी हर तरफ मुस्कुराहट, खुशी नजर आयेगी। मुझे पूरा विश्वास है कि आप सब इस बात से सहमत होंगे।
अंत में मैं एक बात कहना चाहूंगी कि नारी और पुरुष हमेशा से एक दूसरे के अऩुपूरक तत्व रहे हैं। नारी सदैव अपने सहज स्वभाववश पुरुष का अनुगमन करती है। इसलिए आपको भी नारी को अपना सहयोगी समझकर सहयोग देना चाहिए और आरक्षण में दलित, पिछड़े और मुस्लिम वर्ग की महिलाओं को आरक्षण देना चाहिए। आप महिलाओं को बार-बार मना करते हैं, यह आपकी टालने की मंशा को व्यक्त करता है । इसलिए मैं समाजवादी पार्टी की ओर से पुरजोर मांग करती हूं कि सभी वर्गों का आरक्षण सुनिश्चित करके महिलाओं को वास्तविक केवल ऊपर से नहीं बल्कि दिल से सम्मान दिया जाये। बहुत-बहुत धन्यवाद।
DR. (SHRIMATI) BEATRIX D’SOUZA (NOMINATED): Mr. Chairman, Sir, it is now recognised that the hand that rocks the cradle can also rock the system. There are many patriarchal systems, male-entrenched systems that need to be rocked. They need to be completely overhauled. One of those systems is the political system. The word "politics" itself means conflict; and sexual politics means conflict between men and women. Nowhere is it seen so very clearly than in this august House itself.
There is a conflict about space also. It is the space that women occupy and the space that men have to occupy. We have been fighting for the last four years for political space in this House. The Government is asking for a consensus. For no other Bill is, consensus is asked for. We want a political debate. We want to see which male Member votes for the Bill.
The other thing that I would like to mention here is that we need the Budget to be engendered. We need women’s rights to be protected in the Budget. We further need women’s food rights to be protected.
One more point is that the justice system has become dysfunctional. When the rule of law breaks down, the first casualty is women. Whether it is a communal conflict or whether it is a war zone, women are the ones who suffer.
Finally, I would like to say that women want 50:50 partnership with men. We do not want a take over, particularly in this august House.
Thank you.
श्रीमती आभा महतो (जमशेदपुर) :सभापति महोदय, कल महिला दिवस है और इस मौके पर आज हमें लोक सभा में बोलने का मौका मिला, इसके लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद। आज मैं सदन के माध्यम से पूरे विश्व की महिलाओं को शुभकामनाएं देना चाहती हूं। इसके साथ मैं यह भी दुआएँ करती हूं कि वे जहां भी हैं, जिस पद पर भी हैं चाहे घर में भी हैं, वे अपनी जगह से निरंतर आगे बढ़े और यह साबित कर दें कि वे पुरुषों से कहीं से भी कम नहीं हैं। मुझे थोड़ा दुख भी होता है कि महिला आज उस जगह पर पहुंच गयी हैं जहां उसे आरक्षण मांगने का मौका आज मिल रहा है।
क्योंकि हमारा भारत हमेशा महिला शक्ति को मानता आ रहा है। वह चाहे दुर्गा के रूप में हो या सरस्वती के रूप में हो। मैं आपको एक उदाहरण देना चाहती हूं कि जब देवताओं का मंत्री मंडल था तो इंद्र देवता राजा हुआ करते थे। उस समय महिलाओं को अधिकार दिये गये थे और महिला के रूप में मां दुर्गा को शक्ति के रूप में माना गया था और प्रतिरक्षा मंत्री बनाया गया था। उसी तरह सरस्वती जी को शिक्षा मंत्री बनाया गया था और लक्ष्मी जी को वित्त मंत्री बनाया गया था। जब भगवान ने हमें अधिकार दिया है तो आज के युग में भी हमें अधिकार मिलना चाहिए और आज के दिन महिलाओं के लिए मैं यह कहना चाहती हूं कि हमारी बहनें हर चीज से जूझने की कोशिश करें। अगर सही ढंग से अधिकार को लेना चाहेंगी तो ले लेंगी।
DR. V. SAROJA (RASIPURAM): Mr. Chairman, Sir, I thank you very much for giving me this opportunity to speak today on the eve of International Women’s Day. At the outset, I would like to place on record and disagree with the wrong view that women are the weaker sex. The women are the proud owners of two ‘X’ chromosomes. Each chromosome is harbouring a tolerant gene. It means, we are harbouring more talented and tolerant genes, when compared to men. We possess 100 per cent, whereas the men possess only 50 per cent of what we possess. In this background, it is our right – it is not a charity – to have 50 per cent reservation in Parliament and State Assemblies, but it is unfortunate that we have to fight for 33.33 per cent of reservation even 55 years after Independence. Reservation for women in Parliament and State Assemblies should have already been done. Today, the entire world had witnessed as to how Shrimati Margaret Alva, who is the Chairperson of the Committee on Empowerment of Women and who is fighting for the rights of Indian women, who constitute 51.8 per cent of Indian population, was not allowed to speak. It is unfortunate. It is painful and it is a shame that some section of this august House behaved in such a fashion today. I really feel ashamed of the attitude of the Members here that she was not allowed to place her views on record.
Secondly, I urge upon the Government to pass the Women’s Reservation Bill without any discussion in Parliament because both the Ruling and Opposition parties have reached a consensus. So, where is the need for a discussion in this House? Here, I would like to congratulate the hon. Prime Minister on behalf of 51.8 per cent of women in India for convening an All-Party Meeting on this issue. We pray and hope that this Bill would be passed in the current Session of Parliament. If any amendments are required, they can be discussed and passed in due course.
Last but not least, it is fortunate that we are having a woman as the Minister of Parliamentary Affairs and Health and Family Welfare. I request, through you, that a Women Health Policy must be discussed in this august House and proportionate allocation should be made in the Budget. I would like to place this demand here on behalf of AIADMK and on behalf of my leader, Dr. Jayalalithaa.
SHRIMATI SHYAMA SINGH (AURANGABAD, BIHAR): Mr. Chairman, Sir, I congratulate the women across the world and wish them all the best in their endeavours in the years ahead.
To begin with, we cannot help but remember our beloved leader, Shri Rajiv Gandhi, who brought Panchayati Raj into cognisance and also pioneered the Women’s Empowerment Bill, but it is very unfortunate that he had to die at the hands of a woman. We do remember him and at the same time, I would like to submit that we have been debating about the Bill to empower women for the last 10 years in this august House. What is the political will now? What do the Members in this august House really want? Are they going to see to it that the Women’s Empowerment Bill sees the light of the day or are they thinking of putting it in the cold storage as they have been doing all these years?
So, I would like to give a suggestion to this august House. We have already discussed it. Let all the Members across the party lines decide to take a vote on the Bill. It can be a secret ballot or whatever means or format they want to adopt to see exactly who are the people who are opposing this Bill. Thank you.
कुमारी भावना पुंडलिकराव गवली (वाशिम):महोदय, विश्व में महिला दिवस मनाया जा रहा है। मैं सारी महिलाओं को शुभ-कामनायें देती हूं। मैं समझती हूं कि यह मुद्दा बहुत सालों से उठाया जा रहा है कि महिलाओं को कितना आरक्षण मिलना चाहिए। १९९२ से यह मामला चल रहा है कि महिलाओं को आरक्षण मिलना चाहिए, लेकिन कोई पहल नहीं होती है। यह बहुत दुख की बात है। महिलाओं को आरक्षण देने के बारे में अलग-अलग विचार हैं। लेकिन मैं समझती हूं कि इस पर सरकार आम सहमति द्वारा कोई-न-कोई रास्ता निकाले। सदन में महिलाओं को बोलने का आपने मौका दिया है और मैं समझती हूं कि जो मीटिंग चल रही है, उसमें सारी पार्टियों के नेता शामिल हैं, उस मीटिंग में महिलाओं को सम्मान मिलेगा। सदन महिलाओं के विषय पर गम्भीरता से विचार करे। मैं अपनी पार्टी की तरफ से ३३ प्रतिशत महिलाओं को आरक्षण देने की मांग करती हूं। …( व्यवधान)हम देख रहे हैं कि सदन में महिलाओं को सम्मान नहीं दिया जा रहा है। उधर से जब श्रीमती मार्ग्रेट आल्वा जी बोल रही थीं, तो उस समय उनको भी बोलने नहीं दिया जा रहा था। मैं तो कहती हूं कि महिलाओं का सम्मान करते हुए, महिलाओं को ३३ प्रतिशत से अधिक ५० प्रतिशत आरक्षण मिलना चाहिए। सारे पुरुष लोग महिलाओं पर अत्याचार कर रहे हैं। इसकी शुरुआत सदन से ही हो रही है। मैं चाहती हूं कि महिलाओं को ज्यादा से ज्यादा पावर मिलनी चाहिए। भारत देश में महिलाये अच्छे तरीके से काम कर सकती हैं। इस बात को महिलाओं ने साबित कर दिया है। हमारी सरकार को इस विषय पर गम्भीरता से विचार करना चाहिए और महिलाओं को ३३ प्रतिशत का आरक्षण देना चाहिए।
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SHRI BASU DEB ACHARIA (BANKURA): Sir, we had been to Iraq. … (Interruptions) Our delegation comprised of different party representatives.
… (Interruptions)
श्री विष्णु पद राय (अंडमान और निकोबार द्वीप समूह) :मैंने भी जीरो आवर में बोलने के लिए नोटिस दिया है।
सभापति महोदय : बारी-बारी से सबको बुलायेंगे। आप आसन ग्रहण कीजिए।
SHRI BASU DEB ACHARIA : We were there for four days.
श्री खारबेल स्वाइं (बालासोर):आपने जो रास्ता दिखाया है, हम उसी पर चल रहे हैं। …( व्यवधान)
सभापति महोदय : मैं यहां से भी रास्ता दिखाने वाला हूं। आप कृपा कर आसन ग्रहण कीजिए।
SHRI BASU DEB ACHARIA :We had a meeting with the Chairman of the National Council and the leaders of all the political parties. … (Interruptions)
Sir, the entire country is united. In the meeting, we found that the people of Iraq have high expectations from our country. Both Iraq and India are members of Non-aligned Movement. … (Interruptions)
श्री विष्णु पद राय : सभापति महोदय, यह ठीक नहीं हो रहा है। मैंने पहले नोटिस दिया है।…( व्यवधान)
सभापति महोदय : आपका २९वां नम्बर है। कृपया आसन ग्रहण करिए।
…( व्यवधान)